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My Begger Husband epi 141 to 160 original voice | pocket FM kukufm #series #storytv — Transcript

by SK Hindi Novel · 41,204 words · 4,827 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00तो हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मुझे
  2. 0:02आशा है कि आप लोग ठीक ही होंगे और इस चैनल
  3. 0:06पर जो भी सीरीज आ रही है उसको मजे से सुन
  4. 0:08रहे होंगे। तो माय फेगर हस्बैंड का नया
  5. 0:12वीडियो आ चुका है जिसमें एपिसोड 141 से
  6. 0:16160 तक है। तो जल्दी से जल्दी इस वीडियो
  7. 0:18को देखो और बताओ कि आपको कौन सा पार्ट
  8. 0:22सबसे अच्छा लगा।
  9. 0:24और आप आगे कौन-कौन सी सीरीज को देखना
  10. 0:28चाहते हो। यह भी कमेंट में बताएं और जैसे
  11. 0:30ही आप इस सीरीज को देख लेते हो, इस एपिसोड
  12. 0:33को देख लेते हो, तो मुझे नेक्स्ट पार्ट
  13. 0:36कमेंट कर देना जिससे कि मैं नेक्स्ट पार्ट
  14. 0:38को अपलोड कर सकूं। तो करते हैं लेट
  15. 0:40स्टार्ट दिस वीडियो माय वेगर हस्बैंड।
  16. 0:43बलवंत राय शिप्रा को इस पार्टी में देखकर
  17. 0:45हैरान थे। वह शिप्रा को मोहित रैना के साथ
  18. 0:48देखकर इतना तो समझ गए थे कि शिप्रा को
  19. 0:51मोहित रैना ने इनवाइट किया होगा। वैसे
  20. 0:54बलवंत राय मोहित रैना को पहले से नहीं
  21. 0:56जानते थे। हर्षल मेहता से उन्हें यह पता
  22. 0:59चला था कि मोहित रैना कौन है और यहां वह
  23. 1:02क्या हैसियत रखता है। क्योंकि बलवंत राय
  24. 1:04को पहले से पता था कि शिप्रा ने पहले ही
  25. 1:06अपनी कंपनी के लिए बिग बुल से पार्टनरशिप
  26. 1:09की थी। इसलिए यह स्वाभाविक था कि उसके
  27. 1:12संबंध मोहित रैना से अच्छे होंगे। पर फिर
  28. 1:16भी वह इस बात से हैरान थे कि मोहित रैना
  29. 1:19ने शिप्रा को यहां क्यों इनवाइट किया है।
  30. 1:21वैसे बलवंत राय आजकल शिप्रा से थोड़े से
  31. 1:24नाराज थे क्योंकि अभी जब से शिप्रा ने
  32. 1:27विहान से शादी करने से मना किया था तो इस
  33. 1:30बात ने उनके ईगो को हर्ट किया था और उसके
  34. 1:32बाद भी शिप्रा ने अपनी कंपनी को बेचकर
  35. 1:35उनके दिए पैसे को उन्हें वापस करके उन्हें
  36. 1:38और भी गुस्सा दिलाने वाला काम किया था।
  37. 1:41बलवंत राय कभी नहीं चाहते थे कि शिप्रा
  38. 1:43अपनी कंपनी को बेचे। वह तो बस शिप्रा पर
  39. 1:46प्रेशर बनाना चाहते थे। पर शिप्रा ने
  40. 1:49जल्दबाजी में फैसला लेकर अपनी कंपनी को ही
  41. 1:52बेच दिया। वैसे विहान की शादी युविका से
  42. 1:56फिक्स करने के बाद उनकी नाराजगी थोड़ी कम
  43. 2:00हुई थी। पर उसके बाद कभी भी शिप्रा ने फिर
  44. 2:04उनसे मिलने की कोशिश नहीं की। वैसे उन्हें
  45. 2:07यह भी पता चल गया था कि उस दिन के बाद से
  46. 2:10शिप्रा ने उस घर को भी तात्कालिक रूप से
  47. 2:13छोड़ दिया था। बलवंत राय इसका कारण खुद को
  48. 2:16ही समझ रहे थे क्योंकि उन्होंने ही शिप्रा
  49. 2:19को कहा था कि जब उसे श्रवण से तलाक नहीं
  50. 2:21लेना है तो वह अपने पति के साथ ही क्यों
  51. 2:24नहीं रहती है। अब जब उन्होंने शिप्रा को
  52. 2:26यहां देखा तो स्वाभाविक रूप से उनके मन
  53. 2:29में शिप्रा से बात करने की इच्छा जागृत
  54. 2:32हुई। शिप्रा की भी निगाह बलवंत राय से मिल
  55. 2:35गई थी। जब उसने बलवंत राय को अपनी तरफ आते
  56. 2:39देखा तो वह अपनी जगह पर खड़ी हो गई और
  57. 2:41बलवंत राय के पास आने पर उसने झुककर उनको
  58. 2:44प्रणाम किया। शिप्रा के खड़ी होने पर
  59. 2:46बलवंत राय ने कहा मुझे नहीं पता था कि तुम
  60. 2:50भी आने वाली हो। पर जो भी हो तुम्हें यहां
  61. 2:53देखकर अच्छा लगा। हां, मुझे मिस्टर मोहित
  62. 2:56रैना ने यहां इनवाइट किया था। शिप्रा
  63. 2:59मोहित रैना की तरफ इशारा करती हुई बोली।
  64. 3:01बलवंत राय ने मोहित रैना की तरफ देखा तो
  65. 3:04मोहित रैना ने भी बलवंत राय के अभिवादन
  66. 3:07में सर झुकाकर नमस्ते किया। जवाब में
  67. 3:11बलवंत राय ने कहा मैंने आपके बारे में
  68. 3:14बहुत सुना है। मैंने सुना है आपने ड्रीम्स
  69. 3:16इंडिया के भी 90 फर्द शेयर खरीद लिया है।
  70. 3:19बलवंत राय की बात सुनकर शिप्रा आश्चर्य से
  71. 3:22मोहित रैना की ओर देखने लगी। शिप्रा अभी
  72. 3:25तक इस बात से अनजान थी कि डीएम्स इंडिया
  73. 3:28के 90 अज शेर बिगबुल के पास चले गए हैं।
  74. 3:31अब उसे समझ में आ रहा था कि मोहित रैना ने
  75. 3:34उसे क्यों इनवाइट किया। अभी शिप्रा इसी
  76. 3:36उलझन में थी कि तभी मोहित रैना ने कहा आप
  77. 3:40गलत समझ रहे हैं। मैं तो बस एक काम करने
  78. 3:43वाला एम्प्लई हूं। हां, यह सच है कि मेरे
  79. 3:46बॉस ने ही डीएम्स इंडिया के 90 शेयर को
  80. 3:48खरीदा है। इसके अलावा मैंने सुना है कि
  81. 3:51आपके बॉस ने बिगर कलेक्शन को भी खरीद लिया
  82. 3:53है। बलवंत राय अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए
  83. 3:56बोले। इस बात ने शिप्रा को और भी हैरान कर
  84. 3:59दिया। वह इस बात से हैरान थी कि उसे यह
  85. 4:02बात क्यों नहीं पता था कि विगर कलेक्शन को
  86. 4:04भी बिगबूल ने खरीद लिया है। खैर इस समय
  87. 4:08उसका मोहित रैना से कुछ भी पूछना ठीक नहीं
  88. 4:11था। इसलिए वह चुपचाप उन दोनों की बात को
  89. 4:14सुनती रही। फिर कुछ सोचकर शिप्रा बलवंत
  90. 4:17राय से बोयली दादा जी मेरी कंपनी को भी
  91. 4:20इन्होंने ही खरीदा है। वह तो मैं तुम्हें
  92. 4:22इनके साथ देखते ही समझ गया था। बलवंत जी
  93. 4:25बोले इसी समय हर्षल मेहता बलवंत राय के
  94. 4:28पास आए और उनसे कहा आइए बलवंत जी मैं आपको
  95. 4:32नताशा कपूर से मिलवा देता हूं वह आ गई है
  96. 4:36थोड़ी देर बाद शायद वह बिजी हो जाए तो यह
  97. 4:39अच्छा रहेगा कि आप अब भी चलकर उनसे मिलने
  98. 4:42हर्षल मेहता की बात सुनकर बलवंत राय
  99. 4:45शिप्रा और मोहित से विदा लेकर वहां से चले
  100. 4:47गए। शिप्रा ने देखा था कि गेट के पास
  101. 4:50लोगों की भीड़ लग गई थी। उस भीड़ के बीच
  102. 4:53में ही उसे नताशा कपूर की एक झलक देखने को
  103. 4:56मिली। शिप्रा को उसकी तरफ देखते पाकर
  104. 4:58मेघना बोली, देख लो यही है नताशा कपूर।
  105. 5:02नताशा कपूर भीड़ के बीच से होकर हॉल के
  106. 5:04अंदर की तरफ बढ़ रही थी। उसके आगे-आगे
  107. 5:07रत्नाकर शेट्टी भी चल रहा था। रत्नाकर
  108. 5:10शेट्टी भीड़ को साइड करते हुए नताशा कपूर
  109. 5:13को हॉल के मेन स्टेज की तरफ ले जा रहा था।
  110. 5:15यह होता है एक स्टार का चार्म। तुम देख
  111. 5:18रही हो यहां पर जो भी है सभी अच्छे खासे
  112. 5:20परिवार से हैं। फिर भी लोग नताशा कपूर की
  113. 5:23झलक को पाने के लिए उसके पीछे लगे हुए
  114. 5:25हैं। मेघना नताशा कपूर की ओर देखती हुई
  115. 5:28बोली शिप्रा गौर कर रही थी कि मोहित रैना
  116. 5:31भी नताशा कपूर को ही गौर से देख रहा था।
  117. 5:35शिप्रा ने मोहित रैना से पूछा भी मिस्टर
  118. 5:37मोहित क्या आप भी नताशा कपूर के फैन हैं?
  119. 5:41मोहित रैना ने जब शिप्रा के सवाल को सुना
  120. 5:43तो वह हरबराकर शिप्रा की ओर देखने लगा और
  121. 5:46अपनी जेब मिटाते हुए बोला सच कहूं तो यही
  122. 5:48सच है कि सच में मैं भी नताशा कपूर का फैन
  123. 5:51हूं पर मैं पहले कभी उनसे मिला नहीं हूं।
  124. 5:55मैंने भी आज पहली बार ही उन्हें देखा है।
  125. 5:57इसलिए स्वाभाविक तौर पर मेरी आंखें भी
  126. 6:00नताशा कपूर पर ही अटक गई। तो आप यहां खड़े
  127. 6:04क्यों हैं? जाइए और आप भी जाकर उनसे मिल
  128. 6:07लीजिए। शिप्रा मोहित रैना का उत्साह
  129. 6:09बढ़ाती हुई बोली लगता है आप गौर नहीं कर
  130. 6:12रही हैं कि पहले ही उनसे मिलने वालों कि
  131. 6:15वहां पर भीड़ लगी हुई है तो मैं कहां अपना
  132. 6:17नंबर लगा पाऊंगा। मोहित रैना मुस्कुराते
  133. 6:20हुए बोला अभी मोहित रैना ने इतना कहा ही
  134. 6:23था कि उसने देखा नताशा कपूर अचानक भीड़ को
  135. 6:26चीरते हुए उसकी तरफ ही आ रही थी। मोहित
  136. 6:29रैना को समझ नहीं आ रहा था कि यह कैसे हो
  137. 6:32रहा है। शिप्रा ने भी इस बात को नोटिस
  138. 6:34किया तो वह बोली लगता है आपकी बात नताशा
  139. 6:37कपूर तक पहुंच गई है। तभी वह आपके ही तरफ
  140. 6:40आ रही है। मोहित रैना को भी शक होने लगा
  141. 6:43कि क्या सच में नताशा कपूर उसी से मिलने
  142. 6:46के लिए आ रही है। जैसे जैसे नताशा कपूर
  143. 6:49पास आ रही थी। मोहित रैना की धड़कन बढ़ती
  144. 6:51जा रही थी। जैसे ही नताशा कपूर मोहित रैना
  145. 6:54के पास आई। मोहित रैना अभी कुछ बोलने ही
  146. 6:57वाला था कि उसने देखा नताशा कपूर उसके पास
  147. 7:00से गुजर कर सीधा मेघना से जाकर गले मिल
  148. 7:03गई। अब मोहित रैना को समझ आया कि नताशा
  149. 7:06कपूर उससे नहीं बल्कि मेघना से मिलने के
  150. 7:10लिए आई थी। वो मेघना से अलग होते हुए बोली
  151. 7:13मुझे नहीं पता था कि तुम भी यहां आने वाली
  152. 7:15हो। अगर पता होता तो मैं तुमसे पहले ही
  153. 7:18बात करती और बताओ कैसी हो तुम? मैं बढ़िया
  154. 7:21हूं। तुम बताओ। मैंने तुम्हें देखा था आते
  155. 7:24हुए। यहां पर लोग तुम्हारे दीवाने हैं।
  156. 7:27इसलिए मैंने बीच में आकर तुम्हें डिस्टर्ब
  157. 7:29करना ठीक नहीं समझा। मेघना बोली यह तो ऐसे
  158. 7:33ही चलते रहता है। तुम इसकी चिंता मत करो।
  159. 7:36अभी तो तुम यहीं हो ना? मैं फ्री होकर
  160. 7:39तुमसे मिलती हूं। नताशा कपूर बोली, अब जब
  161. 7:42तुम यहां आ ही गई हो, तो मेरे इन दोस्तों
  162. 7:45से भी मिल लो। यह है मिस्टर मोहित रैना।
  163. 7:47यह तुम्हारे बहुत बड़े फैन हैं। मेघना की
  164. 7:50बात सुनकर नताशा कपूर ने मोहित रैना से
  165. 7:53हाथ मिलाया। मोहित रैना भी नताशा के इस
  166. 7:56गेस्चर से खुश हो गया। उसके बाद मेघना ने
  167. 7:59नताशा को शिप्रा से मिलवाया। यह मेरी कजिन
  168. 8:02है शिप्रा राय। नताशा ने शिप्रा से भी हाथ
  169. 8:06मिलाया। और फिर उसको एक टक देखते हुए
  170. 8:09बोली, तुम बहुत खूबसूरत हो। सच कहूं तो
  171. 8:12मुझे तुम्हारी खूबसूरती देखकर तुमसे जलन
  172. 8:14हो रही है। फिर तो मैं इसे मैं अपनी
  173. 8:16खुशनशी भी कहूंगी जो तुम जैसी स्टार मेरे
  174. 8:19लिए ऐसी बात कह रही है। शिप्रा मुस्कुराती
  175. 8:22हुई बोली अभी नताशा कपूर शिप्रा से कुछ और
  176. 8:25भी बात करती कि तभी पीछे से रत्नाकर
  177. 8:28शेट्टी ने कहा मिस नताशा हर्षल मेहता आपको
  178. 8:32बुला रही हैं। उन्हें शायद आपको किसी से
  179. 8:34मिलवाना है। नताशा रत्नाकर शेट्टी की बात
  180. 8:37सुनकर मेघना से बोली अभी मैं चलती हूं।
  181. 8:40फ्री होकर मैं तुमसे मिलूंगी। इतना कहकर
  182. 8:42नताशा रत्नाकर शेट्टी के साथ में स्टेज की
  183. 8:45तरफ बढ़ गई। मोहित रैना और शिप्रा नताशा
  184. 8:48को वापस जाते हुए देखते रहे। इसी समय
  185. 8:51शिप्रा ने गौर किया कि वहां उपस्थित भीड़
  186. 8:54का ध्यान उन तीनों पर भी केंद्रित हो गया
  187. 8:56था। भीड़ यह जानकर उनकी तरफ आकर्षित थी कि
  188. 8:59तीनों नताशा कपूर के करीबी हैं। क्योंकि
  189. 9:02वहां उपस्थित इतने सारे गेस्ट के बीच में
  190. 9:04नताशा कपूर सिर्फ उन तीनों से मिलने के
  191. 9:06लिए आई थी। मुझे नहीं पता था मिस मेघना कि
  192. 9:10आप नताशा कपूर से पहले से परिचित थी। मैं
  193. 9:13तो एक पल को इस भ्रम में आ गया कि क्या वो
  194. 9:16मुझसे मिलने के लिए ही यहां आ रही हैं।
  195. 9:18मोहित रैना ने ईमानदारी से इस बात को कबूल
  196. 9:21किया। इसी समय शिप्रा ने महसूस किया कि
  197. 9:23कोई है जो उसी को घूर रही है। उसने देखा
  198. 9:26तो उसे खुद से कुछ दूरी पर मानसी मेहता
  199. 9:29नजर आई थी। जो कि उसी की तरफ देख रही थी।
  200. 9:32मानसी मेहता ने मेघा शिप्रा और मोहित
  201. 9:35तीनों को नताशा कपूर से मिलते देखा था।
  202. 9:38उसने नताशा कपूर की वह बात भी सुनी जो
  203. 9:42उसने शिप्रा से कहा था। इस बात को सुनकर
  204. 9:44मानसी मेहता का चेहरा और भी बिगड़ गया था।
  205. 9:47भले इतना समय बीत गया था। पर अभी भी मानसी
  206. 9:50मेहता का जलन उसके लिए कम नहीं हुआ था।
  207. 9:53इसी समय शिप्रा ने नोटिस किया कि कोई शख्स
  208. 9:55था जो मानसी मेहता के साथ ही खड़ा था और
  209. 9:58वह भी शिप्रा को ही घूर रहा था। शिप्रा को
  210. 10:01यह शख्स जाना पहचाना सा लगा। पर उसे ध्यान
  211. 10:04नहीं आ रहा था कि वह अभी हाल फिलहाल में
  212. 10:07ही इस शख्स से कहां मिली थी। अभी वह उसे
  213. 10:10पहचानने की कोशिश कर रही थी कि उसने देखा
  214. 10:13वह शख्स मुस्कुराते हुए शिप्रा की ओर
  215. 10:15बढ़ा। शिप्रा के साथ खड़ी मेघना ने भी उस
  216. 10:18शख्स को देख लिया था और वह धीमे से
  217. 10:20बुदबुदाई। यह कमीना भी यहां है। अब फिर से
  218. 10:23यह तुम्हारे पीछे पड़ेगा। मेघना की बात
  219. 10:26सुनकर शिप्रा ने मेघना से पूछा, "कौन है
  220. 10:29यह शख्स? मुझे यह कुछ जाना पहचाना सा
  221. 10:32क्यों लग रहा है?" मेघना ने आश्चर्य से
  222. 10:35शिप्रा की ओर देखा। तुम इतनी जल्दी इस
  223. 10:38आदमी को कैसे भूल सकती हो? अभी कुछ दिन
  224. 10:40पहले ही तो यह तुमसे मिला था और तुम्हारे
  225. 10:42पीछे पड़ गया था। मेघना की बात सुनने के
  226. 10:46बाद भी शिप्रा याद करने की कोशिश करने
  227. 10:48लगी। पर अभी भी उसे कुछ सही से याद नहीं
  228. 10:51आया था। तब मेघना ने फिर से कहा, अरे अभी
  229. 10:55जब हम जूही के बर्थडे में गए थे तब यह
  230. 10:58वहां मिला था ना विजय दीवान इतनी जल्दी
  231. 11:00भूल गई शिप्रा का इतना सुनना था कि उसे सब
  232. 11:04याद आ गया जूही के बर्थडे में जो भी हुआ
  233. 11:07था अब उसे अच्छे से विजय दीवान याद आ गया
  234. 11:10था अब तक विजय दीवान शिप्रा के पास आ गया
  235. 11:13था वो खुश होते हुए शिप्रा की तरफ हाथ
  236. 11:16बढ़ाते हुए बोला हेलो मिस शिप्रा आप कैसी
  237. 11:20हैं मैं बता नहीं सकता कि आपको यहां देखकर
  238. 11:22मुझे कितनी खुशी हो रही
  239. 11:25काश मैं भी ऐसा कह सकती। शिप्रा धीरे से
  240. 11:28बुदबुदाई जो कि विजय दीवान को सही से
  241. 11:31सुनाई नहीं दिया। तो वह उत्सुकता से पूछने
  242. 11:34लगा। आपने कुछ कहा क्या? विजय दीवान की
  243. 11:38बात सुनकर शिप्रा खिसियानी हंसी-हंसते हुए
  244. 11:40बोली, नहीं ऐसा कुछ नहीं कहा जो आपके लिए
  245. 11:44हो। मैं एक बात कहूं आपको विश्वास नहीं
  246. 11:47होगा। विजय दीवान अपनी आंखें बड़ी करते
  247. 11:50हुए बोला। अच्छा ऐसी क्या बात है जो मुझे
  248. 11:53विश्वास नहीं होगा। शिप्रा हैरान स्वर में
  249. 11:56बोली उसे समझ नहीं आया कि विजय दीवान उससे
  250. 12:00ऐसा क्या बोलने वाला है। आप दिन पर दिन और
  251. 12:03भी खूबसूरत होती जा रही हैं। विजय दीवान
  252. 12:06हंसते हुए बोला विजय दीवान की बात सुनकर
  253. 12:09शिप्रा का मन किया कि वह अपना माथा पीट
  254. 12:12ले। फिर भी वह अपने चेहरे पर मुस्कान लाते
  255. 12:15हुए बोली मैं भला आपकी इस बात पर कैसे
  256. 12:18विश्वास नहीं करूंगी? वैसे आप इसके अलावा
  257. 12:20और क्या करते हैं? विजय दीवान को समझ नहीं
  258. 12:23आया कि शिप्रा किस बारे में पूछ रही है।
  259. 12:26इसलिए वह असमंजस भरे स्वर में बोला। मैं
  260. 12:29समझा नहीं कि आप किस बारे में बोल रही
  261. 12:31हैं। मैंने पूछा कि आप लड़कियों की तारीफ
  262. 12:34करने के अलावा और क्या करते हैं। शिप्रा
  263. 12:37अपनी बात स्पष्ट करती हुई बोली।
  264. 12:41आप अच्छा मजाक करती हैं। जूही के बर्थडे
  265. 12:44में मैंने बताया तो था आपको कि मेरा अपना
  266. 12:46दीवान टेक्सटाइल के नाम से फर्म है। आप
  267. 12:49इतनी जल्दी इस बात को भूल कैसे सकती हैं?
  268. 12:52विजय हंसने की कोशिश करते हुए बोला, "अरे
  269. 12:55हां, मैं तो सचमुच भूल गई थी। पर अब आपके
  270. 12:58बताने के बाद मुझे याद आ गया कि आप दीवान
  271. 13:01टेक्सटाइल के सीईओ हैं। शिप्रा खेद भरे
  272. 13:04स्वर में बोली मानसी मेहता जो कि विजय
  273. 13:08दीवान के साथ खड़ी थी वह इस बात को नोटिस
  274. 13:10कर रही थी कि विजय दीवान शिप्रा में कुछ
  275. 13:13ज्यादा ही इंटरेस्ट ले रहा है। यह बात उसे
  276. 13:16और भी परेशान कर रही थी क्योंकि उसकी
  277. 13:18निगाह में विजय दीवान इस शहर के अच्छे
  278. 13:21खासे प्रभावशाली लोगों में से एक था और वह
  279. 13:24मानसी को भी इंप्रेस करने की कोशिश करता
  280. 13:26रहता था। पर मानसी उसके स्वभाव से
  281. 13:29भली-भांति परिचित थी। इसलिए वह उसकी बातों
  282. 13:32में नहीं आती थी। पर जब उसने देखा कि उसके
  283. 13:35सामने ही विजय दीवान शिप्रा कोेंस दे रहा
  284. 13:38है तो यह बात उसे पसंद नहीं आ रही थी।
  285. 13:41मानसी विजय और शिप्रा के बीच में पड़ती
  286. 13:43हुई बोली विजय तुम्हें पापा से भी मिलना
  287. 13:47था ना? क्या हम चलें? मानसी की बात सुनकर
  288. 13:50विजय समझ गया कि उसका शिप्रा से चेप होना
  289. 13:53मानसी को पसंद नहीं आ रहा। इसलिए उसने बीच
  290. 13:56में अपने पापा से मिलने की बात छेड़ दी।
  291. 13:59ना चाहते हुए भी विजय को मानसी की बात
  292. 14:01माननी पड़ी। उससे सहमत होते हुए उसे वहां
  293. 14:04से जाना पड़ा। पर जाते-जाते भी वह शिप्रा
  294. 14:08से बोलता हुआ गया कि वह जल्दी ही फ्री
  295. 14:10होकर उससे दोबारा मिलेगा। यही वह समय था
  296. 14:13जब शौर्य विक्रम और मेनका के साथ उस हॉल
  297. 14:17में प्रवेश किया। शिप्रा के साथ खड़ा
  298. 14:19मोहित रैना शौर्य के इंतजार में ही था।
  299. 14:23उसने जब इन तीनों को यहां हॉल में प्रवेश
  300. 14:26करते देखा तो वह उन तीनों की तरफ चल दिया।
  301. 14:29मोहित रैना को हॉल के दरवाजे की तरफ जाते
  302. 14:32देखकर शिप्रा ने उधर देखा तो उसकी भी
  303. 14:34निगाह शौर्य पर पड़ी। उसे उम्मीद नहीं था
  304. 14:38कि शौर्य भी यहां आने वाला है। पर जब उसने
  305. 14:41शौर्य को देखा तो वह मेघना से बोली, "अगर
  306. 14:44इसको भी इस पार्टी में आना था, तो यह बता
  307. 14:46नहीं सकता था। अगर हमें पता होता, तो हम
  308. 14:49भी उसके साथ ही आते ना।"
  309. 14:51उसे सपना आने से तो रहा कि हम दोनों भी इस
  310. 14:54पार्टी में आने वाले हैं। तुम भी तो उससे
  311. 14:56पूछ सकती थी या बता सकती थी कि तुम आज इस
  312. 14:59पार्टी में आ रही हो तो शायद वह बता देता
  313. 15:01तुम्हें। मेघना उल्टा शिप्रा पर ही सवाल
  314. 15:04करती हुई बोली। शिप्रा को भी मेघना की बात
  315. 15:07सही प्रतीत हुई। इसलिए उसने आगे इस बारे
  316. 15:10में कुछ भी नहीं कहा। मोहित रैना तेजी से
  317. 15:13उन तीनों के पास पहुंचा। वो शौर्य के
  318. 15:16स्वागत के लिए शौर्य के पास जाने ही वाला
  319. 15:18था कि शौर्य धीरे से उसे चेतावनी देते हुए
  320. 15:21बोला, "यह तुम क्या कर रहे हो? तुम्हें
  321. 15:24पता है ना कि हम अभी कहां हैं?" तुरंत ही
  322. 15:27मोहित रैना को अपनी गलती का आभास हुआ। वो
  323. 15:30विक्रम की तरफ बढ़ा और उसका स्वागत करते
  324. 15:32हुए बोला, "आइए सर, मैं आपका ही इंतजार कर
  325. 15:36रहा था। और सब कैसा है यहां? सब ठीक तो चल
  326. 15:39रहा है। विक्रम बोला, हां सर, सब सही है।
  327. 15:43बस आपका ही इंतजार था। मोहित रैना ने जवाब
  328. 15:47दिया। इसी समय हर्षल मेहता भी अपनी बेटी
  329. 15:50मानसी मेहता के साथ विक्रम के पास पहुंचा।
  330. 15:53हर्षल मेहता भी मोहित रैना वाली ही गलती
  331. 15:56करने वाला था कि तभी आंखों के इशारे से ही
  332. 15:58शौर्य ने हर्षल मेहता को समझा दिया कि उसे
  333. 16:01यहां क्या शो करना है। शौर्य से नजर मिलते
  334. 16:05ही हर्षल मेहता को शौर्य की कही बात याद आ
  335. 16:07गई थी। इसलिए वह तुरंत ही विक्रम के सामने
  336. 16:10जाकर उसका स्वागत किया और उसे अपने साथ
  337. 16:13मंच की ओर आने का इशारा किया। विक्रम को
  338. 16:16भी ऐसा करते हुए बुरा लग रहा था। पर उसे
  339. 16:18पता था कि उसे क्या करना है। इसलिए वह
  340. 16:21चाहकर भी कुछ और नहीं कर सकता था। वह
  341. 16:23हर्षल मेहता के साथ मंच पर पहुंचा। मेनका
  342. 16:27भी विक्रम के साथ ही मंच पर पहुंची। उसे
  343. 16:29पता था कि उसे क्या दिखाना है। पर शौर्य
  344. 16:32पीछे ही ठहर गया। उसने शिप्रा और मेघना को
  345. 16:35देख लिया था। शौर्य ने ऐसा जताया जैसे
  346. 16:38अचानक से उसकी निगाह शिप्रा पर पड़ गई।
  347. 16:41इसलिए वह पीछे ही रुक गया। शिप्रा जो कि
  348. 16:44पहले से ही शौर्य को देख रही थी। उसकी भी
  349. 16:46निगाह शौर्य से मिली। शिप्रा को यहां
  350. 16:49देखकर शौर्य को आश्चर्य हुआ। शौर्य ने ऐसा
  351. 16:53ही जताया। वो शिप्रा की ओर बढ़ गया। मेघना
  352. 16:56और शिप्रा के पास पहुंचकर शौर्य बोला,
  353. 16:59"मुझे नहीं पता था कि तुम दोनों भी यहां
  354. 17:01आने वाली हो। अगर मुझे पता होता तो मैं भी
  355. 17:04तुम दोनों के साथ ही ना आता।" वही सवाल जो
  356. 17:07अभी कुछ देर पहले शिप्रा ने मेघना से किया
  357. 17:09था। शौर्य ने उसी सवाल को शिप्रा और मेघना
  358. 17:12से किया। शौर्य का सवाल सुनकर शिप्रा को
  359. 17:15एहसास हुआ कि उसे शौर्य से इस बारे में
  360. 17:18बात करनी चाहिए थी। उसने सोचा अगर आगे से
  361. 17:21अब कभी इस तरह की किसी पार्टी में जाना
  362. 17:23होगा तो वह शौर्य से इस बारे में जरूर बात
  363. 17:26करेगी। पर तुम यहां कैसे हो? शिप्रा ने
  364. 17:29शौर्य से सवाल किया। यह क्या बात हुई कि
  365. 17:32मैं यहां कैसे? मेघना को तो पता होना
  366. 17:34चाहिए या समझ जाना चाहिए कि मैं यहां
  367. 17:37क्यों हूं? शौर्य ने शिप्रा के सवाल का
  368. 17:40जवाब दिया। शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा
  369. 17:43मेघना की ओर देखने लगी। शिप्रा को अपनी ओर
  370. 17:46देखते पाकर मेघना बोली, तुम्हें भी तो
  371. 17:48समझना चाहिए कि आज यहां क्या होने वाला
  372. 17:51है। अब तो तुम जानती हो कि आज यहां
  373. 17:53स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की लॉन्चिंग इवेंट
  374. 17:56है और स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की ऐड में
  375. 17:58किसने काम किया है? शौर्य और नताशा ने। तो
  376. 18:01जब यह इस ऐड कैंपेन का मेन लीड एक्टर है
  377. 18:04तो इसका यहां होना तो स्वाभाविक है। मेघना
  378. 18:07की बात सुनकर शिप्रा को भी अपनी गलती का
  379. 18:10एहसास हुआ। उसने भी तो शौर्य के पोस्टर को
  380. 18:13देखा था जिसमें वो नताशा कपूर के साथ था।
  381. 18:16अभी शौर्य, मेघना और शिप्रा आपस में बातें
  382. 18:20कर ही रहे थे कि तभी कहीं से फिर से विजय
  383. 18:22दीवान वहां पर आ गया। वो शौर्य को देखकर
  384. 18:25बोला ओ तो मिस्टर श्रवण आप भी यहां आए हुए
  385. 18:29हैं मानना पड़ेगा। इन कुछ दिनों में मैंने
  386. 18:33आपको दोबारा किसी बड़ी पार्टी में देखा
  387. 18:35है। पर मैंने आपके बारे में पता किया है।
  388. 18:37आप तो अभी अपने करियर को लेकर स्ट्रगल कर
  389. 18:40रहे हैं। फिर आप ऐसा कैसे दिखा रहे हैं?
  390. 18:42जैसे आप किसी बड़ी फैमिली से बिलोंग करते
  391. 18:45हैं। क्या करें मिस्टर दीवान? आप जैसे
  392. 18:49बड़े लोगों के सामने खड़ा होना है तो
  393. 18:51दिखावा तो करना पड़ेगा ना। शौर्य
  394. 18:54मुस्कुराते हुए बोला, शौर्य की बात विजय
  395. 18:57दीवान को अच्छा नहीं लगा। उसे लग रहा था
  396. 19:00कि शौर्य शिप्रा को रिझाना चाहता है। इससे
  397. 19:04उसे अपना पलड़ा हल्का जान पड़ रहा था। उसे
  398. 19:07लगा अगर उसे शिप्रा की नजर में आना है तो
  399. 19:10उसे श्रवण को शिप्रा से दूर करना पड़ेगा।
  400. 19:13और उसका सबसे अच्छा तरीका यही है कि वह
  401. 19:15शिप्रा के सामने श्रवण को छोटा साबित
  402. 19:18करें। इसलिए वह श्रवण के बारे में ऐसी बात
  403. 19:20बोल रहा था। पर जब उसने देखा कि श्रवण
  404. 19:23उसके मुंह लगकर उसे जवाब दे रहा है तो वो
  405. 19:26शिप्रा से बोला मिस शिप्रा मुझे ऐसा क्यों
  406. 19:30लग रहा है यह श्रवण आप में कुछ ज्यादा ही
  407. 19:32इंटरेस्ट दिखा रहा है शिप्रा को विजय की
  408. 19:35बात सुनकर अच्छा ही लगा वो समझ रही थी कि
  409. 19:38विजय ऐसा क्यों बोल रहा है पर उसे यह
  410. 19:41अच्छा नहीं लगा कि विजय शौर्य को छोटा
  411. 19:43दिखाने की कोशिश कर रहा है। विजय का शौर्य
  412. 19:46का तिरस्कार करना शिप्रा को गुस्सा दिला
  413. 19:48रहा था। इसलिए वो विजय को जवाब देते हुए
  414. 19:51बोली माफ करना मिस्टर विजय पर मुझे तो आप
  415. 19:55भी यही करते हुए प्रतीत हो रहे हैं।
  416. 19:58आपने सही कहा मुझे आप बहुत अच्छी लगती
  417. 20:01हैं। मैं पहले भी आपसे यह कहना चाहता था
  418. 20:04पर मुझे मौका ही नहीं मिला। पर आपको यह भी
  419. 20:06तो समझना चाहिए कि मुझ में और श्रवण में
  420. 20:09बहुत अंतर है। मेरे और इसके बीच क्या
  421. 20:12तुलना हो सकती है। अभी विजय इतना बोला ही
  422. 20:15था कि शिप्रा ने देखा मानसी मेहता भी विजय
  423. 20:18के पीछे वहां पहुंच गई थी। शिप्रा को यह
  424. 20:21अच्छा मौका जान पड़ा। वो मानसी से बोली
  425. 20:24मानसी तुम्हारा यह दोस्त तो सरेआम मेरे
  426. 20:27साथ फ्लर्ट कर रहा है। विजय ने जैसे ही
  427. 20:30शिप्रा के मुंह से मानसी का नाम सुना उसने
  428. 20:33पलट कर अपने पीछे देखा। मानसी को अपने
  429. 20:36पीछे खड़ा देखकर उसके चेहरे पर हवाइयां
  430. 20:38उड़ने लगी। शिप्रा की बात सुनने के बाद
  431. 20:41मानसी विजय को घूरने लगी। शिप्रा ने जब
  432. 20:44विजय के चेहरे के बदलते रंग को देखा तो
  433. 20:46उसने विजय से कहा, "क्या हुआ मिस्टर विजय?
  434. 20:50अब आप नहीं कहेंगे कि मैं आपको अच्छी लगती
  435. 20:52हूं? क्या अभी जो आपने मुझसे कहा, वह सब
  436. 20:55बातें हवाहवाई ही थी। आप तो कमाल के हैं।
  437. 20:59मिस शिप्रा। मैं तो बस आपको इस श्रवण से
  438. 21:02बचाना चाहता था। मैं नहीं चाहता था कि आप
  439. 21:04उसके झांसे में फंसे इसलिए मैं आपसे ऐसा
  440. 21:07बोल रहा था। आप इससे संभल कर रहें। यह
  441. 21:10जैसा दिखता है वैसा है नहीं। विजय दीवान
  442. 21:13शौर्य को कोसता हुआ बोला। विजय दीवान की
  443. 21:17बात सुनकर मानसी ने शौर्य की तरफ देखा। वो
  444. 21:20शौर्य से पहली बार ही मिल रही थी। पर उसे
  445. 21:23शौर्य का चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लग रहा
  446. 21:25था। उसने शौर्य की ओर देखकर कहा। तुम कौन
  447. 21:29हो? मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मैंने
  448. 21:31पहले भी तुम्हें कहीं देखा है। वैसे जानता
  449. 21:34तुम्हें मैं भी नहीं हूं। तुम कौन हो? मैं
  450. 21:37पक्का यकीन के साथ कह सकता हूं कि मैंने
  451. 21:39तुम्हें पहले कभी नहीं देखा है। शौर्य भी
  452. 21:43मानसी के अंदाज में ही बोला। शिप्रा को
  453. 21:46शौर्य का इस तरह से मानसी को बोलना अच्छा
  454. 21:48लगा। वो इसी तरह का जवाब मानसी के लिए
  455. 21:51चाहती थी। शौर्य का इस तरह से मानसी को
  456. 21:54बोलना मानसी को अच्छा नहीं लगा। वो कुछ
  457. 21:57बोलती उससे पहले ही विजय दीवान बोला तुम
  458. 22:00मानसी मेहता को नहीं जानते तुम जिसकी
  459. 22:03पार्टी में आए हो उसी को नहीं जानते आखिर
  460. 22:06तुम्हें यहां बुलाया किसने है मेघना जो
  461. 22:09यहां खड़ी उन सबकी बातों को सुन रही थी
  462. 22:11उसे लगा कि यह बातें कोई अलग दिशा ना ले
  463. 22:14लें इसलिए वो बीच में आती हुई बोली मिस
  464. 22:17मानसी शायद आप जानती नहीं कि आपकी
  465. 22:20स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की जो ऐड बनी है
  466. 22:23उसमें नताशा कपूर के साथ जो मेन लीड
  467. 22:26कैरेक्टर है वो श्रवण ही है।
  468. 22:30मेघना की बात सुनकर मानसी को एहसास हुआ कि
  469. 22:33क्यों उसे शौर्य का चेहरा जाना पहचाना सा
  470. 22:36लगा। वो समझ गई थी कि उसके ऐड में काम
  471. 22:39करने वाला लड़का श्रवण ही था। पर श्रवण ने
  472. 22:42जिस तरह से उसको जवाब दिया था, यह उसे
  473. 22:45पसंद नहीं आ रहा था। मेघना की बात सुनकर
  474. 22:48मानसी कुछ पल शौर्य का चेहरा देखती रही।
  475. 22:51उसके चेहरे पर शौर्य के लिए नागवारी के
  476. 22:54भाव थे। वो संयमित स्वर में बोली यह अच्छी
  477. 22:58बात है कि तुमने हमारे ऐड में काम किया
  478. 23:00है। पर इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि
  479. 23:03तुम्हें यहां अपनी मनमानी करने की इजाजत
  480. 23:05मिल गई है। अच्छा ऐसा मैंने क्या कर दिया
  481. 23:09जो तुम्हें मैं मनमानी करता प्रतीत हुआ।
  482. 23:12अगर किसी पर लगाम ही लगानी है तो अपने इस
  483. 23:14दोस्त पर लगाओ जो पता नहीं खुद को क्या
  484. 23:17समझता है। शौर्य विजय दीवान की तरफ इशारा
  485. 23:20करता हुआ बोला मुझे किस पर लगाम लगाना है
  486. 23:23यह मुझे अच्छे से पता है। तुमने नताशा
  487. 23:25कपूर के साथ एक ऐड में काम क्या कर लिया
  488. 23:28है कि खुद को ज्यादा ही बड़ा स्टार समझने
  489. 23:30लगे हो। मानसी को शौर्य का इस तरह से उससे
  490. 23:34बात करना पसंद नहीं आ रहा था। कोई और समय
  491. 23:37होता तो शायद वह इस तरह से शौर्य से बात
  492. 23:39नहीं करती। पर क्योंकि यह सब शिप्रा के
  493. 23:42सामने हो रहा था और शौर्य एक तरह से
  494. 23:44शिप्रा के साइड में ही खड़ा था। इसीलिए
  495. 23:47शौर्य की बातें उसे पसंद नहीं आ रही थी।
  496. 23:50शौर्य का भाव ऐसा था जैसे वह किसी बच्चे
  497. 23:52को समझा रहा हो। शौर्य यह समझ रहा था कि
  498. 23:56मानसी जो जरूरत से ज्यादा घमंड भरी बातें
  499. 23:58कर रही है, उसका कारण कुछ और है। इसीलिए
  500. 24:01वह अपेक्षाकृत संयमित स्वर में बोला। ऐसा
  501. 24:04लग रहा है जैसे तुमने अभी अपनी सोचने
  502. 24:07समझने की शक्ति खो दी है। इसीलिए ऐसी
  503. 24:09बातें कर रही हो। नहीं तो जो लोग होस्ट
  504. 24:12होते हैं वे इस बात का खास ध्यान रखते हैं
  505. 24:14कि उनकी पार्टी में आए हुए गेस्ट को कोई
  506. 24:17असुविधा ना हो। पर तुम तो खुद ही किसी के
  507. 24:19बहकावे में आकर कुछ भी बोले जा रही हो। वह
  508. 24:22भी बिना कुछ जाने समझे। एक ऐसे आदमी की
  509. 24:25बात पर भरोसा करके जिसे किसी और की पार्टी
  510. 24:28में कैसे बिहेव किया जाए यह पता ही नहीं
  511. 24:30है। शौर्य की बातें सुनकर मानसी को भी
  512. 24:34अपनी गलती का एहसास हुआ। वो समझ गई कि
  513. 24:37यहां अगर कुछ भी ऊंचानीचा होता है तो इससे
  514. 24:40उसकी पार्टी ही खराब होगी। और अब तो इस
  515. 24:42पार्टी की मेन शेयरहल्डर भी वह नहीं है।
  516. 24:45दूसरी बात विक्रम भी मिस मेनका के साथ
  517. 24:48यहां आ गया था। इसीलिए वह यह नहीं चाहती
  518. 24:51थी कि उन लोगों के सामने कुछ नया बखेड़ा
  519. 24:53हो। इसीलिए वह बिना कुछ और शौर्य को बोले
  520. 24:57विजय को अपने साथ लेकर वहां से चली गई।
  521. 25:00विजय इतनी आसानी से वहां से जाना चाहता
  522. 25:02नहीं था। पर मजबूरन उसे वहां से जाना
  523. 25:04पड़ा। वो शौर्य को सबक सिखाना चाहता था।
  524. 25:08पर उसकी इच्छा अधूरी रह गई। विजय को भी यह
  525. 25:11बात बर्दाश्त नहीं हो रही थी कि शौर्य
  526. 25:13जैसा फटीचर उस पर हावी हो रहा है। वाह
  527. 25:17श्रवण तुम तो इस पार्टी के होस्ट से ही
  528. 25:19भिड़ गए। मानना पड़ेगा कुछ तो बात है तुम
  529. 25:22में। मेघना शौर्य की तारीफ करते हुए बोली
  530. 25:26मुझे पहले कहां पता था कि वो हर्षल मेहता
  531. 25:28की बेटी है। वो तो बाद में मुझे समझ में
  532. 25:31आया कि वो यहां की होस्ट की बेटी है। पर
  533. 25:33उससे क्या होता है? मुझे तो उस विजय को
  534. 25:36सबक सिखाना था। शौर्य बोला दूसरी तरफ जब
  535. 25:40मानसी विजय दीवान को शिप्रा और मेघना के
  536. 25:42पास से ले गई तो विजय दीवान मानसी से बोला
  537. 25:46तुम्हें उस लड़के को इतनी आसानी से नहीं
  538. 25:48छोड़ना चाहिए था तुमने देखा नहीं वो तुमसे
  539. 25:51कितनी बदतमीजी से बात कर रहा था वो सब
  540. 25:54तुम्हारे कारण ही हुआ है तुम्हें क्या
  541. 25:56जरूरत थी उससे बदतमीजी से बात करने की तुम
  542. 25:59भी तो उसे वहां नीचा दिखाने की कोशिश में
  543. 26:01उससे बदतमीजी किए जा रहे थे और फिर तुम यह
  544. 26:04मत भूलो कि मुझे यहां इस पार्टी को अच्छे
  545. 26:06से संचा संचालित करना है ना कि यहां कोई
  546. 26:09बखेड़ा खड़ा करना है। मानसी नाराजगी भरे
  547. 26:12स्वर में विजय दीवान से बोली तुम कुछ भी
  548. 26:15कहो पर तुमने उस लड़के को कुछ ज्यादा ही
  549. 26:18ढील दे दी। तुम इस पार्टी की होस्ट हो।
  550. 26:21उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए था। उसकी
  551. 26:24हिम्मत देखी तुमने। तुमसे भी वह किस तरह
  552. 26:26से बात कर रहा था। विजय दीवान की चिढ़न
  553. 26:29अभी भी शौर्य के लिए कम नहीं हुई थी।
  554. 26:32मानसी समझ रही थी कि विजय श्रवण से इतना
  555. 26:35क्यों चिढ़ा हुआ है? क्योंकि शिप्रा ने
  556. 26:38विजय को भाव ना देकर उस श्रवण को ज्यादा
  557. 26:40तरजीह दी थी जो विजय दीवान से बर्दाश्त
  558. 26:43नहीं हो रहा था। मानसी ने विजय से कहा अब
  559. 26:47मुझे ज्यादा भड़काने की कोशिश मत करो। मैं
  560. 26:50अच्छे से समझ रही हूं कि तुम उस शिप्रा के
  561. 26:52पीछे पड़े हुए थे। वहां तुम्हारी दाल नहीं
  562. 26:55गली तो तुम उस श्रवण से उलझ गए। आखिर ऐसा
  563. 26:58क्या है उस शिप्रा में जो तुम उसके पीछे
  564. 27:00ही पड़ गए?
  565. 27:02इस पार्टी में और भी कई खूबसूरत लड़कियां
  566. 27:05हैं। वहां जाकर ट्राई करो। उसके पीछे जाने
  567. 27:08की कोई जरूरत नहीं है। मानसी की यह स्पष्ट
  568. 27:11बातें सुनकर विजय समझ गया कि उसकी चोरी
  569. 27:14पकड़ी गई थी। वो खिसियानी हंसी-हंसते हुए
  570. 27:17बोला तुम गलत समझ रही हो। ऐसा कुछ भी नहीं
  571. 27:20है। मैं भला क्यों उस लड़की के पीछे
  572. 27:23पड़ूंगा। मानता हूं वो खूबसूरत है। पर
  573. 27:26तुमसे ज्यादा नहीं। जब तुम्हारी दाल वहां
  574. 27:28नहीं गली तो तुम ऐसी बातें तो करोगे ही पर
  575. 27:31मेरे सामने तुम्हारी यह चालाकी नहीं चलने
  576. 27:34वाली। मैं क्या तुम्हें जानती नहीं हूं?
  577. 27:36मानसी विजय को घूरते हुए बोली। तभी मानसी
  578. 27:39के साथ चलते हुए विजय की निगाह मंच पर
  579. 27:42मौजूद नताशा कपूर पर पड़ी। विजय नताशा
  580. 27:45कपूर की खूबसूरती का कायल था। वो मानसी से
  581. 27:48बोला देखो मंच पर नताशा कपूर मौजूद है।
  582. 27:52क्यों ना तुम मुझे नताशा कपूर से मिलवा
  583. 27:54दो। मुझे भी नताशा से थोड़ी जान पहचान
  584. 27:57करने का मौका मिल जाएगा। मेरी खुद उससे
  585. 28:00कोई ज्यादा जान पहचान नहीं है। तो मैं
  586. 28:02तुम्हारी मुलाकात उससे कैसे कराऊं? और
  587. 28:04वैसे भी अभी मंच पर मिस्टर विक्रम और
  588. 28:06मेनका मौजूद है। उनके सामने तो मैं वैसे
  589. 28:09भी तुम्हें उनसे नहीं मिलवा सकती। हां,
  590. 28:11अगर बाद में मौका मिला तो मैं जरूर
  591. 28:14तुम्हें नताशा कपूर से मिलवाने की कोशिश
  592. 28:16करूंगी। मानसी ने विजय से अपनी मजबूरी
  593. 28:19बताई। इसी समय विजय ने देखा नताशा कपूर
  594. 28:22मंच से नीचे की तरफ आ रही थी और एक दिशा
  595. 28:25में बढ़ गई। जब विजय ने नताशा को मंच से
  596. 28:28नीचे एक तरफ जाते देखा तो वह मानसी से
  597. 28:31बोला यह नताशा कपूर अकेले कहां जा रही है?
  598. 28:34विजय की बात सुनकर जब मानसी ने नताशा कपूर
  599. 28:37की तरफ देखा तो उसने भी पाया कि वह श्रवण
  600. 28:40को देखती हुई उसी की तरफ बढ़ रही है। उसने
  601. 28:43जब यह महसूस किया तो वह विजय से बोली कहीं
  602. 28:46नताशा कपूर श्रवण के पास तो नहीं जा रही
  603. 28:48है। आखिर वह उसकी को्टर है। विजय ने जब
  604. 28:52मानसी की बात को सुना तो उसने भी नताशा
  605. 28:55कपूर की नजर का पीछा किया। उसने पाया कि
  606. 28:58नताशा कपूर की निगाह श्रवण पर ही जमी हुई
  607. 29:00है। जबकि श्रवण मेघना और शिप्रा से बातें
  608. 29:03करने में मशगूल था। नताशा कपूर को श्रवण
  609. 29:06की तरफ जाते देखकर विजय के दिल में श्रवण
  610. 29:09के लिए और आग लग गई। पर वह अभी मूकदर्शक
  611. 29:12बनकर सिर्फ उन दोनों को देख सकता था। कुछ
  612. 29:15कर नहीं सकता था। जबकि दूसरी तरफ शौर्य
  613. 29:18मेघना से बातें किए जा रहा था। इसी समय
  614. 29:21नताशा कपूर शौर्य के पास पहुंची और उसका
  615. 29:24हाथ पकड़ कर बोली तो तुम यहां हो। मैं कब
  616. 29:28से तुम्हारा इंतजार कर रही थी और तुमसे यह
  617. 29:30नहीं हुआ कि तुम आकर मुझसे एक बार मिल लो।
  618. 29:33नताशा कपूर शिकायती लहजे में बोली। शिप्रा
  619. 29:36नताशा कपूर की हरकत देखती रह गई। जिस तरह
  620. 29:39से आकर नताशा कपूर ने शौर्य की बाह को
  621. 29:42इतने हक से पकड़ लिया था। इससे शौर्य भी
  622. 29:45हैरान रह गया। शिप्रा को भी उम्मीद नहीं
  623. 29:47था कि नताशा कपूर इस तरह से शौर्य के करीब
  624. 29:50चली जाएगी। कहां तो वह शौर्य को कभी अपने
  625. 29:53करीब भी भटकने नहीं दी थी और कहां नताशा
  626. 29:56कपूर जैसी खूबसूरत लड़की खुद ही शौर्य के
  627. 29:59इतने करीब चली गई थी। उन दोनों की नजदीकी
  628. 30:02देखकर शिप्रा के मन में भी नताशा कपूर के
  629. 30:04लिए जलन की भावना पैदा हो गई थी। अचानक से
  630. 30:08शिप्रा के मन में यह भाव आ गया कि कोई
  631. 30:10उसकी कीमती चीज को उससे दूर लेकर जा रहा
  632. 30:12है। वो तो यह भी नहीं कर सकती थी कि उसके
  633. 30:15पास जाकर शौर्य को नताशा से अलग कर दे।
  634. 30:19जबकि वहीं खड़ी मेघना शिप्रा के चेहरे के
  635. 30:22बदलते रंग को देख रही थी। उसे साफ महसूस
  636. 30:25हो रहा था कि शिप्रा के मन में अभी क्या
  637. 30:27चल रहा है। पर इन सब बातों से बेपरवाह
  638. 30:30नताशा कपूर मेघना से बोली सॉरी मेघना। मैं
  639. 30:34थोड़ी देर के लिए श्रवण को तुम्हारे पास
  640. 30:36से ले जा रही हूं। दरअसल मुझे श्रवण से
  641. 30:39थोड़ी बातें करनी है। उम्मीद करती हूं कि
  642. 30:41तुम इससे बैड फील नहीं करोगी। मेघना ने मन
  643. 30:45ही मन सोचा। मैं क्यों बुरा फील करूंगी?
  644. 30:48जो बुरा फील कर भी रही होगी वो तो कुछ बोल
  645. 30:50भी नहीं सकती। पर प्रत्यक्ष में वो नताशा
  646. 30:54से बोली। थोड़ी देर के लिए क्या? तुम्हारा
  647. 30:57जब तक मन करे तब तक तुम श्रवण को अपने पास
  648. 30:59रखो। और मैं क्यों बुरा फील करूंगी?
  649. 31:03ठीक है फिर मिलती हूं तुमसे बाद में। इतना
  650. 31:06कहकर नताशा कपूर शौर्य की बाह पकड़े हुए
  651. 31:09उसको खींचते हुए मंच की तरफ बढ़ गई।
  652. 31:12शिप्रा उन दोनों को जाते भावहीन आंखों से
  653. 31:15बस देखती रही। उस हॉल में मौजूद बहुत से
  654. 31:18जवान लड़कों की निगाह शौर्य पर ही जम गई
  655. 31:21थी। सब उसे जलन भरी आंखों से देख रहे थे।
  656. 31:25कितने तो ऐसे लड़के थे जो सोच रहे थे। काश
  657. 31:28शौर्य की जगह वह होता तो कितना अच्छा
  658. 31:31होता। पर शौर्य इन सब बातों से बेपरवाह
  659. 31:34नताशा कपूर के साथ खिंचा हुआ चला जा रहा
  660. 31:37था। वो थोड़ा ऑकवर्ड भी फील कर रहा था। वो
  661. 31:41समझ रहा था कि उस हॉल में मौजूद बहुत सारे
  662. 31:43लोगों की निगाह उसी पर जमी हुई है। पर वो
  663. 31:46नताशा कपूर को रोक नहीं सकता था। नताशा
  664. 31:49कपूर के साथ जाते हुए शौर्य ने चुपके से
  665. 31:52शिप्रा की ओर एक नजर देखा, तो उसे शिप्रा
  666. 31:55का भावहीन चेहरा दिखाई दिया, जिसकी निगाह
  667. 31:57उसी पर जमी हुई थी। मेघना की निगाह भी
  668. 32:00शिप्रा पर ही जमी हुई थी। वो शिप्रा के
  669. 32:03भावहीन चेहरे को देखकर बोली, अब इस तरह
  670. 32:06उसको देखने का क्या फायदा? इस सब का कारण
  671. 32:09तुम ही हो। तुम ही श्रवण को अपने लायक
  672. 32:11नहीं समझती। मुझे तो डर है कि अभी तुम
  673. 32:14श्रवण के पास होते हुए भी दूर हो। पर शायद
  674. 32:17एक समय आएगा कि तुम उसके पास भी नहीं रह
  675. 32:19पाओगी। और उस समय तुम्हारे पास अफसोस करने
  676. 32:22के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। मेघना की
  677. 32:25बात सुनकर शिप्रा ने महसूस किया कि शायद
  678. 32:27उसके चेहरे पर मेघना को कुछ अलग भाव दिख
  679. 32:30गया है। इसलिए वह ऐसी बात कर रही है। अगले
  680. 32:33ही पल शिप्रा खुद को नॉर्मल दिखाने की
  681. 32:35कोशिश करती हुई बोली तुम कुछ भी बोले जा
  682. 32:38रही हो। ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम समझ रही
  683. 32:40हो। श्रवण क्या चाहता है या क्या करता है?
  684. 32:44उसके लिए वह स्वतंत्र है। अपनी रिलेशन में
  685. 32:46ना मुझ पर कोई बंधन है और ना ही मैंने
  686. 32:49श्रवण को किसी बंधन में बांध रखा है। काश
  687. 32:52जैसा तुम बोल रही हो वैसा ही भाव तुम्हारे
  688. 32:55चेहरे पर भी नजर आता। मेघना अफसोस भरे
  689. 32:58स्वर में बोली। वो समझ रही थी कि शिप्रा
  690. 33:01बोल कुछ और रही थी। पर उसके चेहरे का भाव
  691. 33:03कुछ और कह रहा था। दूसरी तरफ विजय दीवान,
  692. 33:07नताशा कपूर और श्रवण की नजदीकी देखकर जलकर
  693. 33:10खाक हुआ जा रहा था। जबकि मानसी भी हैरानी
  694. 33:13से नताशा कपूर को देख रही थी। जिस बेबाकी
  695. 33:16से उसने श्रवण की बाह को पकड़ रखा था,
  696. 33:18उससे कोई भी यह अंदाजा लगा सकता था कि उन
  697. 33:21दोनों के बीच बहुत ही ज्यादा नजदीकी है।
  698. 33:24वहां मौजूद लोग उन दोनों को देखकर क्या
  699. 33:26सोच रहे होंगे। इस बात से उन दोनों को
  700. 33:29देखकर लग नहीं रहा था कि नताशा को कोई
  701. 33:31फर्क पड़ रहा है। शौर्य ने भी जब यह महसूस
  702. 33:34किया कि सब उसी को घूर रहे हैं तो वह धीरे
  703. 33:37से नताशा से बोला, "यह तुम क्या कर रही
  704. 33:40हो? मेरी बाह तो छोड़ो। यहां मौजूद सभी
  705. 33:43लोग हमें ही देख रहे हैं। मुझे इन सब से
  706. 33:46कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम भी इन सब की
  707. 33:49चिंता करना छोड़ दो। नताशा खूबसूरत थी। उस
  708. 33:52पर उसके शरीर की खुशबू शौर्य को मददोश कर
  709. 33:55रही थी। जबकि दूसरी तरफ शिप्रा की निगाह
  710. 33:59उन दोनों पर ही जमी हुई थी। उन दोनों की
  711. 34:02नजदीकियों को देखकर शिप्रा के दिल में
  712. 34:04बेचैनी बढ़ती जा रही थी। वैसे शौर्य खुद
  713. 34:07भी अनकंफर्टेबल फील कर रहा था। वहां
  714. 34:10उपस्थित लोगों की घूरती नजरों का सामना
  715. 34:12करना शौर्य को मुश्किल लगने लगा तो वह
  716. 34:15नताशा कपूर से बोला अगर तुमने मेरा हाथ
  717. 34:18नहीं छोड़ा तो यहां उपस्थित लोग फालतू में
  718. 34:20मेरा दुश्मन बन जाएंगे इसीलिए मुझ पर रहम
  719. 34:23करो शौर्य की बात सुनकर नताशा मुस्कुराई
  720. 34:26और बोली जानती हूं इसीलिए तो लोगों को
  721. 34:29जलाने के लिए ही तब से तुम्हारी बाह को
  722. 34:31पकड़ी हुई हूं तुम्हें तो खुश होना चाहिए
  723. 34:34यहां सभी तुम्हारे भाग्य पर जल रहे होंगे
  724. 34:37क्या कहा तुमने तुम ऐसा जानबूझकर कर रही
  725. 34:40हो। यंग लड़के मेरी भाग्य पर जल नहीं रहे
  726. 34:43हैं। वो मेरी जान के दुश्मन बन रहे होंगे।
  727. 34:46शौर्य नताशा की बात सुनकर बोला, तो क्या
  728. 34:49तुम मेरे लिए यह छोटी-मोटी दुश्मनी भी मूल
  729. 34:51नहीं ले सकते? तुम देख रहे हो जब से मैं
  730. 34:54यहां आई हूं, लोग मुझे ऐसे घूर रहे थे
  731. 34:56जैसे नजरों से ही मुझे खा जाएंगे। इसीलिए
  732. 34:59ऐसे लोगों को जलाने के लिए मुझे यह करना
  733. 35:01पड़ा। जब तक मैं अकेली थी, यहां के
  734. 35:04ज्यादातर लोग किसी ना किसी बहाने मेरे पास
  735. 35:07आकर बात करने की कोशिश कर रहे थे। अब जब
  736. 35:10से मुझे लोगों ने तुम्हारे करीब देखा है,
  737. 35:12अब देखो कोई ऐसी कोशिश नहीं कर रहा है।
  738. 35:15नताशा वहां उपस्थित भीड़ पर नजर घुमाती
  739. 35:18हुई बोली, बहुत खूब। इस तरह तुमने अपना
  740. 35:21काम तो कर लिया पर यहां उपस्थित लोगों को
  741. 35:24मेरा दुश्मन बना दिया। शौर्य मुस्कुराता
  742. 35:26हुआ बोला, "अब तक नताशा ने शौर्य की बाह
  743. 35:29को छोड़ दिया था। अब दोनों साथ में खड़े
  744. 35:32थे। नताशा शौर्य की बात सुनकर बोली, मेरे
  745. 35:36साथ होने के कारण इतनी तो मुश्किल तुम्हें
  746. 35:38झेलनी पड़ेगी। वहीं इन दोनों से थोड़ी दूर
  747. 35:41खड़े रत्नाकर शेट्टी भी नताशा को शौर्य के
  748. 35:44इतने करीब देखकर हैरान था। उसे नहीं समझ
  749. 35:47आया कि यह दोनों कब इतने करीब आ गए कि एक
  750. 35:50दूसरे की बाहों को थामे थे। जब दोनों अलग
  751. 35:53होकर बातें करने लगे तो रत्नाकर शेट्टी उन
  752. 35:56दोनों के करीब आया और शौर्य से बोला और
  753. 35:59मिस्टर श्रवण आप कैसे हैं? इस आधे दिन में
  754. 36:02क्या ही बदल जाएगा शेट्टी साहब आप बताइए
  755. 36:05आप तो ठीक हैं शौर्य मुस्कुराता हुआ बोला
  756. 36:08आपकी दया है। आप दोनों को साथ में देखकर
  757. 36:11अच्छा लगा। रत्नाकर शेट्टी शौर्य के साथ
  758. 36:14नताशा को देखता हुआ बोला। शौर्य ने जब
  759. 36:17रत्नाकर शेट्टी की बात को सुना तो तो वह
  760. 36:19समझ गया कि रत्नाकर शेट्टी के कहने का
  761. 36:22क्या मतलब है। वो रत्नाकर शेट्टी से बोला
  762. 36:25आपके ऐसा कहने का क्या मतलब हुआ शेट्टी
  763. 36:27साहब? शौर्य की बात सुनकर रत्नाकर शेट्टी
  764. 36:30हड़बड़ा कर दोनों की तरफ देखने लगा। उसे
  765. 36:33लगा वो कुछ गलत तो नहीं बोल गया। वो संदेह
  766. 36:36भरे स्वर में बोला। मुझे लगा आप दोनों एक
  767. 36:39दूसरे के करीब आ गए हैं। मैंने कुछ गलत
  768. 36:42सोच लिया क्या? रत्नाकर शेट्टी की बात
  769. 36:44सुनकर नताशा शौर्य की तरफ देखकर
  770. 36:46मुस्कुराने लगी। शौर्य समझ गया कि वह अपनी
  771. 36:50कामयाबी पर मुस्कुरा रही है। नताशा यही तो
  772. 36:53लोगों में भ्रम फैलाना चाहती थी जिसमें कि
  773. 36:56वह कामयाब थी। रत्नाकर शेट्टी जैसा आदमी
  774. 36:59जो मीडिया लाइन में डेली उड़ती इस तरह की
  775. 37:01अफवाहों से दोचार होता रहता है। वह भी
  776. 37:04नताशा के झांसे में आ गया। पर शौर्य जल्दी
  777. 37:07से रत्नाकर शेट्टी कुछ ज्यादा गलत सोच ले।
  778. 37:09उससे पहले रत्नाकर शेट्टी से अपनी बात
  779. 37:11स्पष्ट करते हुए बोला, "क्या शेट्टी साहब,
  780. 37:15आप तो इस लाइन में इतने समय से हैं। उसके
  781. 37:17बाद भी आप नताशा के झांसे में आ गए।"
  782. 37:20रत्नाकर शेट्टी शौर्य की बात सुनकर
  783. 37:22आश्चर्य से नताशा की ओर देखने लगा। नताशा
  784. 37:26के चेहरे पर तैर रही शैतानी मुस्कुराहट को
  785. 37:28देखकर रत्नाकर शेट्टी बोला, क्या मिस
  786. 37:31नताशा? क्या सच में आप दोनों के बीच में
  787. 37:34कुछ नहीं है? यह आप कैसी बात कर रहे हैं?
  788. 37:36शेट्टी साहब क्या आपको हम दोनों को साथ
  789. 37:39में देखकर भी समझ नहीं आ रहा है कि हम
  790. 37:41दोनों कितने करीब आ गए हैं? इतना बोलते
  791. 37:44हुए नताशा फिर से शौर्य के करीब आकर उसके
  792. 37:46हाथ को पकड़ ली। रत्नाकर शेट्टी कंफ्यूज
  793. 37:49आंखों से दोनों के चेहरे को देखने लगा। पर
  794. 37:52वो नताशा के चेहरे पर खेलती मुस्कान को
  795. 37:55देखकर समझ गया कि नताशा जानबूझकर ऐसा
  796. 37:58दिखाने की कोशिश कर रही है। पता नहीं इसके
  797. 38:00पीछे उसकी क्या मंशा है।
  798. 38:03दूसरी तरफ शौर्य जब फिर से नताशा को पहले
  799. 38:06जैसी हरकत करते देखा तो वो नताशा से दूर
  800. 38:09जाते हुए बोला तुम क्यों जानबूझकर मुझे
  801. 38:12फंसाने की कोशिश कर रही हो। जब रत्नाकर
  802. 38:14शेट्टी जैसा आदमी धोखा खा सकता है तो बाकी
  803. 38:17लोग तो पता नहीं क्या-क्या सोचने लगेंगे।
  804. 38:20क्यों तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा कि इतनी
  805. 38:22खूबसूरत लड़की जिसके पास जाने के लिए लोग
  806. 38:24तरसते हैं वो खुद तुम्हारे पास आ रही है।
  807. 38:27नताशा शौर्य की आंखों में झांकती हुई बोली
  808. 38:31कौन बेवकूफ होगा जो ऐसा नहीं चाहेगा कि
  809. 38:33तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की उसके करीब
  810. 38:36रहे। पर तुम जिस तरह से मेरे करीब आ रही
  811. 38:38हो उसका मकसद कुछ और है। इस तरह तो यही
  812. 38:41बात हो जाएगी कि खाया पिया कुछ नहीं।
  813. 38:44गिलास तोरा 12 आने। शौर्य ने जवाब दिया।
  814. 38:47अब रत्नाकर शेट्टी को सब समझ आ गया था कि
  815. 38:50यहां क्या चल रहा है। वो नताशा कपूर से
  816. 38:52बोला मिस नताशा आप तो सचमुच यहां सबको
  817. 38:56मिस्टर श्रवण का दुश्मन बना देगी। मेरे
  818. 38:58लिए तो इतना रिस्क लिया जा सकता है मिस्टर
  819. 39:00शेट्टी आप क्या कहते हैं? नताशा अभी भी
  820. 39:03मुस्कुराती हुई बोली। मैं आप दोनों के बीच
  821. 39:06में कुछ नहीं बोलूंगा। रत्नाकर शेट्टी
  822. 39:08अपने हाथ खड़े करता हुआ बोला। पर एक खबर
  823. 39:11है मिस्टर श्रवण के बारे में जो शायद आप
  824. 39:13जानना चाहेंगी। रत्नाकर शेट्टी की बात
  825. 39:16सुनकर नताशा ने एक बार श्रवण की ओर देखा।
  826. 39:18फिर रत्नाकर शेट्टी की ओर देखकर बोली, ऐसी
  827. 39:22क्या खबर है श्रवण के बारे में जो मुझे
  828. 39:24जानना चाहिए? आपको नहीं पता मिस्टर श्रवण
  829. 39:27को आज एक फिल्म में मेन लीड ऑफर हुआ है
  830. 39:29जिसमें मिस्टर श्रवण काम करने को भी तैयार
  831. 39:32हो गए हैं। मैं ही इस फिल्म को डायरेक्ट
  832. 39:34करने वाला हूं। बताइए यह जानकर आपको खुशी
  833. 39:37हुई कि नहीं? पर इस बात से नताशा के चेहरे
  834. 39:40पर कोई खुशी नजर नहीं आई। वो शौर्य की तरफ
  835. 39:43देखती हुई नाराजगी से बोली यह तो ठीक नहीं
  836. 39:46है श्रवण तुम पहली बार मेरे साथ काम करके
  837. 39:48इस इंडस्ट्रीज में आए और फिल्म की शुरुआत
  838. 39:51किसी और के साथ कर रहे हो शिप्रा की बात
  839. 39:54सुनकर रत्नाकर शेट्टी के चेहरे पर हवाइयां
  840. 39:56उड़ने लगी कहां तो वो सोच रहा था कि उसकी
  841. 39:58बात सुनकर नताशा खुश हो गई पर हो उसका
  842. 40:01उल्टा रहा था नताशा रत्नाकर शेट्टी की ओर
  843. 40:04देखकर बोली मिस्टर शेट्टी आप मेरे लिए एक
  844. 40:07अच्छी कहानी ढूंढिए और आप जो फिल्म शौर्य
  845. 40:10के साथ करने वाले हैं उससे पहले मेरी
  846. 40:12फिल्म को कंप्लीट कीजिए। जो भी बजट लगेगा
  847. 40:15मैं अरेंज करूंगी। पर शर्त यही है कि मेरी
  848. 40:17फिल्म पहले बनकर तैयार होनी चाहिए। नताशा
  849. 40:20ने रत्नाकर शेट्टी के लिए फरमान जारी कर
  850. 40:23दिया। रत्नाकर शेट्टी आश्चर्य से शौर्य की
  851. 40:25तरफ देखने लगा और सोचने लगा क्या किस्मत
  852. 40:28पाई है इस लड़के ने। अभी कुछ नहीं किया है
  853. 40:31तो यह हाल है कि लड़कियां उसके साथ काम
  854. 40:33करने को ललायित है। इसकी अगर कुछ फिल्में
  855. 40:35मार्केट में आ गई तो यह तो इंडस्ट्रीज में
  856. 40:38तूफान ला देगा। लेकिन साथ में रत्नाकर
  857. 40:41शेट्टी को एक डर भी सताने लगा कि इन दोनों
  858. 40:43लड़कियों के कारण कहीं वह मुसीबत में ना
  859. 40:45पड़ जाए। कमुंबेस शौर्य का भी यही हाल था।
  860. 40:49कहां तो वह इस एक फिल्म में ही काम करने
  861. 40:51को बड़ी मुश्किल से तैयार हुआ। अब नताशा
  862. 40:54उसके साथ एक और फिल्म करने की ठान ली है
  863. 40:56और कमाल तो यह है कि उसने तो उसकी मर्जी
  864. 40:59भी जानने की कोशिश नहीं की। शौर्य की
  865. 41:02निगाह रत्नाकर शेट्टी से मिली तो उसने
  866. 41:04अपने कंधे उचका कर अपनी बेबसी जाहिर की।
  867. 41:07दूसरी तरफ विजय दीवान जो मानसी के साथ ही
  868. 41:09शौर्य और शिप्रा से कुछ दूरी पर खड़ा था।
  869. 41:12विजय दीवान उस मौके की तलाश में था। जब वह
  870. 41:15मौका पाकर नताशा कपूर के पास जा सके और
  871. 41:18नताशा पर अपना प्रभाव जमा सके। उसे यह
  872. 41:20बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि नताशा कपूर
  873. 41:23श्रवण जैसे कचरे के इतने करीब जाए। उसे लग
  874. 41:26रहा था कि जरूर नताशा कपूर शौर्य को कोई
  875. 41:28रईस व्यक्ति समझ रही होगी। इसीलिए वह उसके
  876. 41:31इतने करीब है। विजय दीवान ने सोचा वो जाकर
  877. 41:35जैसे ही नताशा कपूर के सामने श्रवण की
  878. 41:37असलियत जाहिर करेगा, नताशा कपूर के सर से
  879. 41:40उसका भूत उतर जाएगा। उसने देख लिया कि
  880. 41:42नताशा कपूर रत्नाकर शेट्टी और शौर्य के
  881. 41:45साथ बातें कर रही है। तो वो तेजी से नताशा
  882. 41:48कपूर के सामने पहुंच गया और उसका ध्यान
  883. 41:50अपनी तरफ आकर्षित करता हुआ बोला। हेलो मिस
  884. 41:53नताशा। मैं विजय दीवान आपका बहुत बड़ा फैन
  885. 41:56हूं। आप मुझे नहीं जानती होंगी। पर
  886. 41:59विश्वास के साथ कह सकता हूं कि आपने मेरी
  887. 42:02कंपनी के नाम को जरूर सुना होगा। दीवान
  888. 42:05टेक्सटाइल। यह मेरी कंपनी का नाम है और
  889. 42:08मैं ही दीवान टेक्सटाइल का सीईओ हूं।
  890. 42:11नताशा ने अप्रत्याशित रूप से अपने बीच में
  891. 42:14आ गए विजय दीवान को गौर से देखा और बोली,
  892. 42:17वैसे आप कौन हैं और मुझे क्यों आपके बारे
  893. 42:20में जानना चाहिए? और आपको हम तीनों के बीच
  894. 42:22में आने की जरूरत क्यों आ पड़ी? विजय
  895. 42:25दीवान को नताशा से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि
  896. 42:28वो उससे इस तरह बातें करेगी। पर उसने सोचा
  897. 42:31शायद श्रवण ने नताशा पर अपना अच्छा प्रभाव
  898. 42:33जमा रखा है। इसलिए नताशा उसकी बात सुनने
  899. 42:36को तैयार नहीं है। इसीलिए उसने सोचा वो
  900. 42:39जल्दी से श्रवण की पोल नताशा के सामने खोल
  901. 42:41देता है तो शायद उसकी बात बन जाए। यही
  902. 42:44सोचकर वो जल्दी से बोला। मिस नताशा आप
  903. 42:48श्रवण को ठीक से जानती नहीं। पता नहीं
  904. 42:50इसने अपने आप को आपके सामने क्या जाहिर कर
  905. 42:53रखा है। पर मेरी बात मानिए यह एकदम फटीचर
  906. 42:56है। यह खुद ही अभी स्ट्रगल कर रहा है। तो
  907. 42:58आपका साथ क्या निभा पाएगा? मेरा कहा मानिए
  908. 43:02तो इस फर्टीचर से जितनी जल्दी दूर होना है
  909. 43:04हो जाइए। आप इससे अच्छा आदमी डिर्व करती
  910. 43:07हैं। नताशा का मन किया कि वह एक जोर का
  911. 43:10तमाचा विजय दीवान को लगा दे। पर उसने अपनी
  912. 43:13भावनाओं पर कंट्रोल किया और कहा। मुझे
  913. 43:16लगता है आपको दूसरों की फटी में टांग
  914. 43:18अड़ाने में बड़ा मजा आता है। पर मेरे आमने
  915. 43:20आकर ऐसी कोशिश करना बेवकूफी ही कही जाएगी।
  916. 43:24मैं क्या करती हूं और क्या नहीं। इट्स नन
  917. 43:26ऑफ फॉर बिजीनेस। इसीलिए आप अपने काम से
  918. 43:29मतलब रखें तो यह आपके लिए ज्यादा फायदेमंद
  919. 43:32होगा। अब आप मेरे सामने से जा सकते हैं।
  920. 43:35अब आगे क्या होगा? विजय दीवान को विश्वास
  921. 43:38नहीं हो रहा था कि नताशा ने उसे वहां से
  922. 43:41जाने को कहा। नताशा की बात सुनकर विजय का
  923. 43:45ईगो हर्ट हो गया। वो थोड़ा तैश में बोला,
  924. 43:48मिस नताशा, आप शायद मुझे जानती नहीं। मैं
  925. 43:52दीवान टेक्सटाइल का सीईओ विजय दीवान हूं।
  926. 43:56आपको कुछ भी मुझसे बोलने से पहले समझना
  927. 43:58चाहिए कि आप किससे बात कर रही हैं। मुझे
  928. 44:02फर्क नहीं पड़ता कि तुम कौन हो और क्या
  929. 44:04हो। मैंने तुम्हें यहां नहीं बुलाया है।
  930. 44:07इसीलिए जिसने तुम्हें यहां बुलाया है, उस
  931. 44:09पर जाकर अपना रोब दिखाओ। मेरे पास शो ऑफ
  932. 44:12करने की कोई जरूरत नहीं है। नताशा ने विजय
  933. 44:16के स्टेटस का थोड़ा भी लिहाज नहीं किया।
  934. 44:19इस बार यह बात उसने थोड़ा जोर से कहा
  935. 44:22जिससे वहां उपस्थित लोगों का ध्यान उनकी
  936. 44:24तरफ चला गया था। मानसी ने जब हालात को
  937. 44:27बिगड़ते देखा तो वह जल्दी से उनके पास
  938. 44:30पहुंची और हालात को संभालने की कोशिश करती
  939. 44:32हुई बोली मिस नताशा शायद कुछ गलतफहमी हो
  940. 44:37गई है। विजय का इरादा आपको हर्ट करने का
  941. 44:39नहीं था। शायद आपको समझने में फेर हो गया
  942. 44:42है। नताशा को भी लगा कि वह कहीं ओवर
  943. 44:45रिएक्ट तो नहीं कर रही है। वो मानसी की
  944. 44:48बात सुनकर थोड़ा शांत स्वर में बोली। अगर
  945. 44:51तुमको लगता है कि ऐसी बात है तो तुम अपने
  946. 44:54दोस्त को मेरे सामने से दूर ले जाओ। मैं
  947. 44:57उसकी बात सुनना भी नहीं चाहती। नताशा की
  948. 45:00यह बात विजय को और भी चुभ। वो एक बार फिर
  949. 45:03नताशा को समझाने की कोशिश करते हुए बोला।
  950. 45:06मिस नताशा मैं आपका बुरा नहीं चाहता। मैं
  951. 45:10तो सिर्फ आपके सामने इस शख्स की असलियत
  952. 45:13लाना चाहता था। पता नहीं आप इसको क्या
  953. 45:15समझती हैं। पर मैं आपको पक्का यकीन से कह
  954. 45:18सकता हूं कि जो इसने आपको अपने बारे में
  955. 45:20जो भी बताया होगा वह सब झूठ ही होगा।
  956. 45:23इसलिए आप एक बार इसकी हकीकत जानने की
  957. 45:26कोशिश कीजिए। नताशा विजय की बेशर्मी से और
  958. 45:29भी हैरान थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि
  959. 45:32विजय दीवान शौर्य के पीछे क्यों पड़ा हुआ
  960. 45:34है। विजय दीवान की बातें सुनने के बाद
  961. 45:37नताशा उसके सामने जाकर खड़ी हो गई और उसकी
  962. 45:40आंखों में देखती हुई बोली अच्छा तो फिर
  963. 45:43ठीक है। तुम ही बताओ क्या असलियत है इसकी?
  964. 45:46और यह कैसे मुझसे झूठ बोल रहा है? विजय
  965. 45:50दीवान को मौका मिल गया। वो हिम्मत करके
  966. 45:52बोला। जरूर इसने आपसे कहा होगा कि यह बहुत
  967. 45:55पैसे वाला है या कोई बहुत बड़ा बिजनेस है
  968. 45:58इसका। पर हकीकत में तो यह खुद अपनी करियर
  969. 46:01बनाने के लिए अभी स्ट्रगल कर रहा है। बड़ी
  970. 46:04मुश्किल से तो इसने बिगbul में ब्रांड
  971. 46:06प्रमोशन के लिए काम करना शुरू किया है।
  972. 46:08जिसके कारण इसका बड़े लोगों के बीच में
  973. 46:11आना जाना मुमकिन हो पाया है। इसके बाद भी
  974. 46:14यह आपके इतने करीब है तो इसका मतलब है
  975. 46:17इसने आपसे कोई बड़ा ही झूठ बोल रखा है।
  976. 46:20नताशा कपूर ने इत्मीनान से विजय दीवान की
  977. 46:23बात को सुनने के बाद उससे कहा, तुम्हें
  978. 46:26कैसे पता कि इसने मुझसे क्या कहा है? क्या
  979. 46:29मैंने तुम्हें कहा है कि मैं इसे कैसे
  980. 46:31जानती हूं या इसने मुझे क्या कहा है अपने
  981. 46:33बारे में? फिर तुम यह कैसे कह सकते हो कि
  982. 46:36इसने मुझसे झूठ बोला है या यह बड़ा होने
  983. 46:39का दिखावा करके मेरे करीब आया है। नताशा
  984. 46:42कपूर की बात सुनने के बाद विजय को समझ
  985. 46:44नहीं आया कि वो अब क्या कहे? उसने सोचा यह
  986. 46:48कैसे हो सकता है कि नताशा कपूर श्रवण की
  987. 46:51हकीकत जानने के बाद भी उसके इतने करीब आ
  988. 46:54जाए। क्या सच में वह श्रवण की हकीकत से
  989. 46:57वाकिफ है? उसने शंका भरे स्वर में नताशा
  990. 47:00कपूर से पूछा, "क्या आप श्रवण की हकीकत से
  991. 47:03वाकिफ हैं? अब तुम्हारा यह पूछने का क्या
  992. 47:06मतलब हुआ? जब तुम्हें यह पता ही नहीं कि
  993. 47:08मैं श्रवण को कैसे जानती हूं, तो फिर तुम
  994. 47:11कैसे हमारे बीच में आकर कुछ भी बोल सकते
  995. 47:13हो? या तुम्हें यह अथॉरिटी मिल गई है कि
  996. 47:16तुम किसी को कहीं भी छोटा साबित करने की
  997. 47:18कोशिश कर सकते हो। अब अगर तुम्हारा ड्रामा
  998. 47:21पूरा हो गया हो, तो तुम मेरे सामने से जा
  999. 47:24सकते हो। नताशा घृणा से विजय की ओर देखती
  1000. 47:27हुई बोली। नताशा की बात सुनकर मानसी भी
  1001. 47:30हैरानी से शौर्य की ओर देखने लगी और सोचने
  1002. 47:33लगी कि आखिर ऐसा क्या है इस शख्स में जो
  1003. 47:36नताशा कपूर जैसी टॉप की मॉडल इस शख्स की
  1004. 47:39हकीकत जानने के बाद भी इसके इतने करीब है।
  1005. 47:43क्या सिर्फ इसलिए कि उसने उसके ऐड में
  1006. 47:45उसके साथ काम किया है। उसे यह बात समझ
  1007. 47:48नहीं आ रहा था। पर उसे विजय के लिए बुरा
  1008. 47:50लग रहा था जो श्रवण से नफरत के कारण उसको
  1009. 47:53नीचा दिखाने के लिए नताशा कपूर के पास
  1010. 47:56पहुंच गया। अब तक हंगामा होते देखकर हर्षल
  1011. 48:00मेहता भी नताशा कपूर के पास आ गए थे।
  1012. 48:03उन्होंने स्थिति को समझने के लिए नताशा से
  1013. 48:06पूछा क्या हुआ मिस नताशा? आप इतनी गुस्से
  1014. 48:10में क्यों हैं? नताशा ने हर्षल मेहता को
  1015. 48:13अपने सामने देखकर कहा मिस्टर मेहता आप
  1016. 48:16कैसे कैसे लोगों को अपनी पार्टी में
  1017. 48:19इनवाइट कर लेते हैं जो पता नहीं खुद को
  1018. 48:21क्या समझते हैं। यह जो सामने शख्स है इसने
  1019. 48:25जानबूझकर मेरे दोस्त की इंसल्ट करने की
  1020. 48:27कोशिश की है। नताशा का इशारा शौर्य की तरफ
  1021. 48:31देखकर हर्षल मेहता का शरीर कांप गया। उसे
  1022. 48:35समझते देर नहीं लगी कि विजय ने शायद शौर्य
  1023. 48:38की बेइज्जती करने की कोशिश की। हर्षल
  1024. 48:41मेहता चाहकर भी शौर्य की हकीकत यहां सबके
  1025. 48:44सामने नहीं बता सकते थे। उन्होंने आंखों
  1026. 48:47ही आंखों में शौर्य से खेद प्रकट किया।
  1027. 48:50शौर्य हर्षल मेहता की मजबूरी को समझता था।
  1028. 48:53इसलिए उसने उन्हें इशारों में ही तसल्ली
  1029. 48:55दी। शौर्य को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़
  1030. 48:58रहा था कि विजय दीवान क्या साबित करने की
  1031. 49:01कोशिश कर रहा है। वो तो सिर्फ उस पल को
  1032. 49:04एंजॉय कर रहा था। वो स्थिति का जायजा ले
  1033. 49:07रहा था। वो देख रहा था कि नताशा कपूर ने
  1034. 49:10अच्छे से विजय दीवान की अकल को ठिकाने लगा
  1035. 49:12दिया था। विजय दीवान के चेहरे पर अब
  1036. 49:15हवाइयां उड़ रही थी। उसके साथ खड़ी मानसी
  1037. 49:18भी समझ नहीं पा रही थी कि वो अपने पापा के
  1038. 49:21सामने कैसे विजय का बचाव करें। जबकि हर्षल
  1039. 49:24मेहता ने थोड़े करे स्वर में विजय से कहा
  1040. 49:27मिस्टर विजय मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी
  1041. 49:30कि आप हमारी पार्टी में आकर इस तरह का
  1042. 49:32बखेड़ा करेंगे। मुझे इसके लिए आपके पिता
  1043. 49:35रायचंद जी से बात करनी पड़ेगी। विजय ने जब
  1044. 49:38हर्षल मेहता के इस करे तेवर को देखा तो वह
  1045. 49:41अफसोस भरे स्वर में बोला मुझे माफ कर
  1046. 49:44दीजिए अंकल। शायद मुझे समझने में कोई गलती
  1047. 49:47हो गई इसलिए मैं ऐसा कर गया। आप यकीन
  1048. 49:51मानिए मेरा आपकी पार्टी खराब करने का या
  1049. 49:54यहां किसी भी तरह का बखेड़ा करने का कोई
  1050. 49:56इरादा नहीं था। हर्षल मेहता ने जब विजय के
  1051. 49:59तेवर को ढीला पड़ते देखा तो उससे कहा विजय
  1052. 50:03अगर सच में तुम्हें अपने किए पर अफसोस है
  1053. 50:06तो तुम अभी सबके सामने मिस्टर श्रवण से
  1054. 50:08माफी मांगोगे क्योंकि मिस्टर श्रवण भी
  1055. 50:11यहां मेरे सम्मानित गेस्ट है और तुमने
  1056. 50:13उनके साथ बदतमीजी करने की कोशिश की। विजय
  1057. 50:17के पास अब कोई चारा नहीं था। वो श्रवण के
  1058. 50:19पास गया और खेद भरे स्वर में बोला सॉरी
  1059. 50:23श्रवण मुझे तुम्हारे बारे में मिस नताशा
  1060. 50:25से इस तरह नहीं बोलना चाहिए था। उम्मीद
  1061. 50:28करता हूं कि तुम मेरी इस नादानी को भूल
  1062. 50:30जाओगे। शौर्य विजय की बात सुनकर
  1063. 50:33मुस्कुराता रहा। वो मुस्कुराते हुए ही
  1064. 50:35विजय से बोला, कोई बात नहीं, मैं तो इस
  1065. 50:38बात को भूल भी गया। तुम्हें शायद कहीं भी
  1066. 50:41कुछ बोलने से पहले उसके परिणाम के बारे
  1067. 50:44में अच्छे से सोच लेना चाहिए। नहीं तो यह
  1068. 50:46अच्छा थोड़ी लगता है कि इस तरह से भरी
  1069. 50:49महफिल में माफी मांगनी पड़े। पर कोई बात
  1070. 50:52नहीं। जाओ मैंने तुम्हें माफ किया। शौर्य
  1071. 50:55ऐसे बोला जैसे उसने विजय पर कितना बड़ा
  1072. 50:58एहसान किया है। उसने इतने हल्के में विजय
  1073. 51:01को ट्रीट किया जैसे लग ही नहीं रहा था कि
  1074. 51:03विजय कोई हैसियत भी रखता है। शौर्य की इस
  1075. 51:06बात ने भी विजय को भारी बेइज्जती का एहसास
  1076. 51:09कराया। वो वहां से हटा और तेज कदमों से
  1077. 51:12वहां से निकल गया और अपने पीछे अपने बारे
  1078. 51:15में हो रही बातों को सुनता रहा। अब तक की
  1079. 51:18लाइफ में शायद ही कभी उसकी ऐसी बेइज्जती
  1080. 51:21हुई होगी। जबकि इसी पार्टी में मौजूद
  1081. 51:23मेघना और शिप्रा भी इस सारे प्रपंच को देख
  1082. 51:26रही थी। शुरुआत में वह दोनों भी शौर्य के
  1083. 51:29लिए बुरा फील कर रही थी। क्योंकि जिस तरह
  1084. 51:32विजय दीवान शौर्य की बेइज्जती करने पर
  1085. 51:35तुला हुआ था उससे साफ स्पष्ट हो रहा था कि
  1086. 51:38वह जानबूझकर विजय को नीचा दिखाना चाहता
  1087. 51:41है। पर अंत में जब सारा पासा ही पलट गया
  1088. 51:44तो मेघना शिप्रा से बोली मानना पड़ेगा।
  1089. 51:48तुम्हारे पति में कुछ तो ऐसी बात है जो
  1090. 51:50उसे स्थिति को अपने अनुरूप कर लेने की
  1091. 51:52क्षमता प्रदान करता है। अभी जब लग रहा था
  1092. 51:56कि सब कुछ उसके अगेंस्ट है। फिर अचानक ही
  1093. 51:58कैसे सब कुछ बदल गया और विजय दीवान जैसे
  1094. 52:01आदमी को इस भरी महफिल में उससे माफी
  1095. 52:04मांगनी पड़ी। कुछ तो है श्रवण में जो उसे
  1096. 52:07खास बनाती है। मैं तो तुम्हें बेवकूफ ही
  1097. 52:10कहूंगी जो तुम उसकी इस खूबी को पहचान नहीं
  1098. 52:13पा रही हो। हकीकत में श्रवण की बेइज्जती
  1099. 52:16होते देखकर तुम्हें उसका ढाल बनना चाहिए
  1100. 52:18था। पर देखो नताशा कपूर कितनी स्ट्रांगली
  1101. 52:21श्रवण का पक्ष ले रही थी। उसके साथ खड़ी
  1102. 52:24थी। शिप्रा को मेघना की बात सुनकर बुरा भी
  1103. 52:27लगा। वो प्रतिरोध करते हुए बोली क्या तुम
  1104. 52:31कुछ भी बोले जा रही हो? मैं उस समय कैसे
  1105. 52:33श्रवण के लिए खड़ी हो सकती थी। उस समय वो
  1106. 52:36नताशा कपूर के साथ था और विजय नताशा कपूर
  1107. 52:39से ही तो उसके लिए बोल रहा था। तो फिर भला
  1108. 52:41मैं बीच में कैसे टपक जाती? तुम्हें क्या
  1109. 52:44लगता है? मुझे अच्छा लग रहा था जब विजय
  1110. 52:46श्रवण को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा था।
  1111. 52:49शिप्रा की बात सुनकर मेघना को भी अपनी
  1112. 52:51गलती का एहसास हुआ। वो समझ गई कि शिप्रा
  1113. 52:54चाहकर भी उनके विवाद के बीच में नहीं जा
  1114. 52:57सकती थी। इसलिए वो अपनी इस गलती को कबूल
  1115. 52:59करते हुए बोली मैं समझ गई तुम सही कह रही
  1116. 53:03हो। मैं भी भावावेश में कुछ ज्यादा ही बोल
  1117. 53:05गई। मैं समझ सकती हूं यह स्थिति तुम्हारे
  1118. 53:07लिए अनुकूल नहीं थी। पर कहीं ना कहीं इसके
  1119. 53:10लिए तुम ही जिम्मेदार हो। मेघना की बात
  1120. 53:13सुनकर शिप्रा निराशा भरे स्वर में बोली
  1121. 53:16अच्छा मैं कैसे इस सबके लिए जिम्मेदार हो
  1122. 53:18गई तुम कुछ ज्यादा ही श्रवण का पक्ष नहीं
  1123. 53:21लेने लगी हो और मुझ पर कुछ भी इल्जाम लगाए
  1124. 53:23जा रही हो इतना बोलने के बाद शिप्रा मेघना
  1125. 53:26को घूरने लगी तुम इसलिए जिम्मेदार हो कि
  1126. 53:28तुम अभी भी इस बात को स्वीकार नहीं कर रही
  1127. 53:31हो कि तुम दोनों पतिपत्नी हो। अगर यह
  1128. 53:33जानकारी आम हो जाए तो फिर किसी को कोई
  1129. 53:35कंफ्यूजन ही ना रहे। तुम दोनों को भी यूं
  1130. 53:38एक दूसरे से अनजान होने का ड्रामा नहीं
  1131. 53:40करना पड़ेगा। तुम इस बात को जितना आसान
  1132. 53:42सोच रही हो, यह उतना आसान नहीं है।
  1133. 53:45ज्यादातर लोग जो मुझे जानते हैं, किसको
  1134. 53:47नहीं पता है कि मेरी शादी जबरदस्ती कर दी
  1135. 53:49गई है, किसके साथ कर दी गई है, यह भी सबको
  1136. 53:52पता है। अगर किसी को कुछ नहीं पता है, तो
  1137. 53:54सिर्फ यह नहीं पता है कि वह भिखारी जिससे
  1138. 53:57मेरी शादी की गई है, वह श्रवण ही है। अगर
  1139. 54:00यहां सबको पता चल जाए कि श्रवण ही मेरा वह
  1140. 54:02भिखारी पति है, तो फिर लोग उसकी दूसरी तरह
  1141. 54:05से मजाक बनाएंगे। सब यही समझेंगे कि श्रवण
  1142. 54:08तो हकीकत में एक भिखारी था या है। बस उसकी
  1143. 54:10किस्मत इसलिए बदल गई है क्योंकि उसकी शादी
  1144. 54:13मेरे साथ हो गई। अब तुम बताओ कि यह बात आम
  1145. 54:16ना होना श्रवण के हक में है या उसके
  1146. 54:18खिलाफ। शिप्रा की बात सुनने के बाद मेघना
  1147. 54:21का तो माथा घूम गया। वो अपनी आंखें बड़ी
  1148. 54:24करते हुए बोली यार कितना पेंच है तुम्हारे
  1149. 54:28इस रिश्ते में। यह बात आम हो जाए तो भी
  1150. 54:30मुश्किल और छुपी रहे तो भी मुश्किल। पर कब
  1151. 54:33तक यह बात छुपी रह पाएगी? आखिर एक ना एक
  1152. 54:36दिन तो यह सबको पता चलना ही है। तुम यह
  1153. 54:38गलत सोच रही हो मेरे बारे में कि मैं नहीं
  1154. 54:41चाहती कि यह रिश्ता आम हो। बल्कि मैं तो
  1155. 54:43चाहती हूं कि जितनी जल्दी लोगों को पता चल
  1156. 54:46जाए हमारे रिश्ते के बारे में तो कम से कम
  1157. 54:48लोग तब मेरे बारे में और बातें बनाना बंद
  1158. 54:50कर देंगे और हमारा रिश्ता सार्वजनिक हो
  1159. 54:53जाने के बाद फिर मेरे मम्मी पापा और मेरे
  1160. 54:55दूसरे रिश्तेदार भी फिर मेरी शादी की बात
  1161. 54:57दोबारा नहीं करेंगे। बाकी मैं अपने रिश्ते
  1162. 55:00में कैसे रहती हूं यह हमारा पर्सनल मैटर
  1163. 55:03है और इसके बारे में लोगों को जानने की
  1164. 55:05कोई जरूरत भी नहीं है। शिप्रा मेघना के
  1165. 55:08सामने अपनी सोच स्पष्ट करती हुई बोली
  1166. 55:11शिप्रा ने अभी इतना बोला ही था कि उसकी
  1167. 55:13निगाह इसी समय अपने दादाजी के ऊपर गई जो
  1168. 55:16कि शौर्य को ही घूर रहे थे। उनकी भी
  1169. 55:18मजबूरी थी कि वह इस बात को यहां सार्वजनिक
  1170. 55:21नहीं कर सकते थे कि शौर्य उनका दामाद है।
  1171. 55:24पर वह नताशा कपूर को शौर्य का पक्ष लेते
  1172. 55:26देखकर हैरान थे। उन्हें नहीं पता था कि
  1173. 55:29नताशा कपूर और शौर्य इतना करीब हैं। इस
  1174. 55:32पार्टी में बलवंत राय के आने का बड़ा कारण
  1175. 55:34यह भी था कि वह खुद नताशा कपूर से मिलकर
  1176. 55:37अपनी कंपनी के लिए भी कुछ प्रमोशनल ऐड
  1177. 55:40बनवाना चाहते थे। अगर उन्हें पहले से यह
  1178. 55:42जानकारी होती कि शौर्य नताशा कपूर के इतना
  1179. 55:45करीब है तो वह इसके लिए शौर्य की ही मदद
  1180. 55:48लेते। पर इस समय इस पार्टी में शौर्य को
  1181. 55:51लेकर इतनी बातें हो गई थी कि वह यहां पर
  1182. 55:53शौर्य को पहचानने की जोखिम नहीं ले सकते
  1183. 55:55थे। अगर वह ऐसा करते तो उन्हें यह भी
  1184. 55:58जाहिर करना पड़ता कि उनका वह भी भिखारी
  1185. 56:01दामाद शौर्य ही है जो शायद उनके लिए और भी
  1186. 56:04बेइज्जती बड़ी बात होती। इसलिए वह चुपचाप
  1187. 56:07यहां हो रहे तमाशा को देखते रहे। विजय
  1188. 56:10दीवान के साथ मानसी भी हर्षल मेहता के
  1189. 56:12सामने शर्मिंदा थी। मानसी को विजय के लिए
  1190. 56:16बुरा भी लग रहा था। वैसे वह यह भी समझती
  1191. 56:19थी कि विजय को भी यूं नताशा के सामने
  1192. 56:22शौर्य को छोटा साबित करने की कोई जरूरत
  1193. 56:24नहीं थी। लेकिन उसका यह परिणाम होगा। उसने
  1194. 56:28यह सोचा नहीं था। इतना सब होने के बाद उसे
  1195. 56:31एक बात अजीब लगी कि इस सबके बीच में उसके
  1196. 56:35पापा शौर्य का पक्ष ले रहे थे। जबकि वह
  1197. 56:38अच्छी तरह से विजय के फैमिली स्टेटस के
  1198. 56:40बारे में जानते थे। वो एक पल को सोचने को
  1199. 56:43मजबूर हो गई कि क्या यह सब इसलिए है कि
  1200. 56:47शौर्य ने उनके एड में एज अ मॉडल काम किया
  1201. 56:49है। मानसी यह महसूस कर रही थी कि उसके
  1202. 56:53पापा विजय को लेकर कुछ ज्यादा ही हार्ड हो
  1203. 56:55गए थे। यहां मंच पर इतना सब हो गया था। पर
  1204. 56:59विक्रम और मेनका ने सामने आने की कोई
  1205. 57:01कोशिश नहीं की। वे दोनों समझ रहे थे कि
  1206. 57:04शौर्य खुद ही इस स्थिति को हैंडल कर सकता
  1207. 57:07है। उन्हें यह भी डर था कि उन दोनों का
  1208. 57:10शौर्य के लिए बोलना भी शौर्य को पसंद नहीं
  1209. 57:12आता क्योंकि वह नहीं चाहता था कि किसी को
  1210. 57:15उस पर शक करने का मौका मिले। वो अपने आप
  1211. 57:18को अभी छुपा कर ही रखना चाहता था। जब
  1212. 57:21हर्षल मेहता ने देखा कि स्थिति थोड़ा
  1213. 57:23सामान्य हो गया तो वह मंच पर सामने आकर
  1214. 57:26बोला लेडीज एंड जेंटलमैन मैं आज आप सबके
  1215. 57:30सामने यह बताना चाहूंगा कि अब से हमारी
  1216. 57:32कंपनी डीम्स इंडिया का 90% शेयर होल्डर
  1217. 57:35मिस्टर विक्रम है। अब डीम्स इंडिया के
  1218. 57:38सिर्फ 10% शेयर ही हमारे पास है। मैं आप
  1219. 57:41सब से रिक्वेस्ट करूंगा कि आप लोग तालियों
  1220. 57:43के साथ डीम्स इंडिया के नए मालिक मिस्टर
  1221. 57:46विक्रम का स्वागत करें। हर्षल मेहता का
  1222. 57:48इतना बोलना था कि वो हॉल तालियों की आवाज
  1223. 57:51से गूंजने लगा। इस दरमियान विक्रम ने मंच
  1224. 57:55पर सामने आकर सबका अभिवादन किया। मानसी यह
  1225. 57:58पता चलने पर कि यह विक्रम है जिसने उसकी
  1226. 58:01कंपनी के 90% शेयर को खरीदा है। वह आगे
  1227. 58:04बढ़कर उसका स्वागत की। हर्षल मेहता ने
  1228. 58:07मानसी का परिचय विक्रम से कराया। विक्रम
  1229. 58:10मुस्कुराते हुए मानसी से मिला। मंच के
  1230. 58:13सामने खड़ी शिप्रा और मेघना भी मंच पर हो
  1231. 58:16रही इन घोषणाओं को सुन रही थी। उसे यह
  1232. 58:19जानकर आश्चर्य हुआ कि विक्रम ने डीम्स
  1233. 58:21इंडिया के 90% शेयर को खरीद लिया है
  1234. 58:24क्योंकि डीम्स इंडिया खुद में ही एक बड़ी
  1235. 58:26कंपनी थी और उसका 90% शेयर को खरीद लेना
  1236. 58:30यह शो करने के लिए काफी था कि विक्रम
  1237. 58:33कितना पैसे वाला था। यही वह समय था जब उस
  1238. 58:37हाल में राजा साहब चंद्रभान राठौर का आगमन
  1239. 58:39हुआ। कांता प्रसाद जी उनके आगे-आगे रास्ता
  1240. 58:42क्लियर करते हुए चल रहे थे। जैसे ही मेनका
  1241. 58:45की निगाह राजा साहब के ऊपर पड़ी, वह तेजी
  1242. 58:48से उनके पास पहुंची और झुक कर उनको प्रणाम
  1243. 58:50किया। राजा साहब ने जब मेनका को वहां देखा
  1244. 58:53तो वह बोले अच्छा तो तुम भी यहां हो।
  1245. 58:57क्यों अंकल? क्या मुझे यहां नहीं होना
  1246. 58:59चाहिए था? मेनका अपनी आंखें बड़ी करती हुई
  1247. 59:02बोली। मैंने ऐसा तो नहीं कहा कि तुम्हें
  1248. 59:05यहां नहीं होना चाहिए। मुझे पता नहीं था
  1249. 59:08इसलिए मैंने तो बस पूछा। राजा साहब ने
  1250. 59:10जवाब दिया। इस बीच राजा साहब की नजर पूरे
  1251. 59:14हॉल में इधर-उधर घूमती रही। उनकी नजर
  1252. 59:17शौर्य की तलाश में इधर-उधर घूम रही थी।
  1253. 59:20अचानक उनकी निगाह शौर्य के ऊपर पड़ी।
  1254. 59:23उन्होंने शौर्य को मंच के ऊपर ही देखा और
  1255. 59:25उसके पास ही खड़ी नताशा कपूर को भी
  1256. 59:27उन्होंने देखा। नताशा कपूर की खूबसूरती
  1257. 59:30देखकर एक बार को उन्होंने यही सोचा कि
  1258. 59:33शायद वही शौर्य की पत्नी है। उनको नताशा
  1259. 59:36अच्छी भी लगी। पर वह अभी यहां सबके सामने
  1260. 59:39ऐसा जाहिर नहीं कर सकते थे कि वह यहां पर
  1261. 59:41खास करके अपनी बहू से मिलने आए हैं। वह तो
  1262. 59:45बस ऐसा मौका क्रिएट करना चाहते थे जिससे
  1263. 59:47उन्हें अपनी बहू से मिलने का मौका मिले।
  1264. 59:50हर्षल मेहता ने जब चंद्रभान राठौर को
  1265. 59:52पार्टी में आए हुए देखा तो वह भागकर उनके
  1266. 59:55पास पहुंचा और उनको रिसीव करते हुए मंच पर
  1267. 59:57लाया। उसने मंच पर जो खास गेस्ट थे उन सब
  1268. 1:00:01से राजा साहब का परिचय करवाया। फिर हर्षल
  1269. 1:00:04मेहता ने मंच पर उपस्थित नताशा कपूर और
  1270. 1:00:07शौर्य से भी राजा साहब का परिचय करवाया।
  1271. 1:00:10जैसे राजा साहब को यह पता चला कि जिसे वह
  1272. 1:00:13अपनी बहू समझ रहे थे। दरअसल में वो एक टॉप
  1273. 1:00:16की मॉडल है। यह जानकर कि नताशा कपूर एक
  1274. 1:00:19मॉडल है। उन्होंने सख्त निगाहों से शौर्य
  1275. 1:00:22की तरफ देखा। जैसे वह उससे पूछ रहे हो कि
  1276. 1:00:25मेरी बहू कहां है? शौर्य उनका सख्त चेहरा
  1277. 1:00:28देखकर उनके भाव को समझ गया। और शौर्य ने
  1278. 1:00:32आंखों के इशारे से नीचे शिप्रा की तरफ
  1279. 1:00:34इशारा किया। शौर्य की निगाह शिप्रा की तरफ
  1280. 1:00:37देखकर राजा साहब ने शिप्रा की ओर देखा और
  1281. 1:00:40उसके खूबसूरत चेहरे को देखकर उनकी निगाह
  1282. 1:00:43भी एक पल को शिप्रा के ऊपर ही ठहर गई। इसी
  1283. 1:00:46समय मेनका के साथ विक्रम राजा साहब के पास
  1284. 1:00:48पहुंचा और उनको नमस्कार किया। मेनका ने
  1285. 1:00:52इशारे से शौर्य को भी वहीं पर बुला लिया।
  1286. 1:00:54शौर्य जब राजा साहब के पास पहुंचा तो राजा
  1287. 1:00:57साहब ने धीमे स्वर में शौर्य से पूछा तुम
  1288. 1:01:01सभी यहां मंच पर हो तो फिर हमारी बहू वहां
  1289. 1:01:05सामने क्या कर रही है? वो भी यहां तुम
  1290. 1:01:09सबके साथ क्यों नहीं है? शिप्रा यहां राजा
  1291. 1:01:12साहब को देखकर रोमांचित थी। इस शहर में
  1292. 1:01:15ऐसा कौन होगा जो राजा साहब को नहीं जानता
  1293. 1:01:17होगा। शिप्रा की बड़ी इच्छा थी कि वो भी
  1294. 1:01:20कभी राजा साहब से मिले। उसने जब शौर्य को
  1295. 1:01:24भी विक्रम और मेनका के साथ राजा साहब के
  1296. 1:01:26पास देखा तो उसके मन में यह इच्छा जागृत
  1297. 1:01:29हुई कि अगर वह शौर्य के साथ होती तो वह भी
  1298. 1:01:32राजा साहब से मिल पाती। जबकि दूसरी तरफ
  1299. 1:01:35शौर्य राजा साहब की बात सुनकर धीरे से
  1300. 1:01:38बोला क्या दादा जी अब आपकी डिमांड ज्यादा
  1301. 1:01:41बढ़ती नहीं जा रही है। आपने सिर्फ अपनी
  1302. 1:01:43बहू को देखने की बात की थी। वह आप यहां से
  1303. 1:01:46भी देख सकते हैं। इस समय राजा साहब के पास
  1304. 1:01:49कांता प्रसाद, विक्रम, मेनका और शौर्य ही
  1305. 1:01:52थे। इसलिए कोई और उनकी बात को सुन नहीं
  1306. 1:01:55सकता था। पर इसी समय हर्षल मेहता वहां
  1307. 1:01:58चलकर आया और राजा साहब से रिक्वेस्ट करता
  1308. 1:02:01हुआ बोला, "ाजा साहब, मुझे आपके हाथों से
  1309. 1:02:04स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की कैंपेन की
  1310. 1:02:06ओपनिंग करवानी है।" "प्लीज आप इस रिमोट का
  1311. 1:02:09बटन दबाकर इसको लॉन्च कर दीजिए।"
  1312. 1:02:11बोलते हुए हर्षल मेहता ने रिमोट राजा साहब
  1313. 1:02:14की तरफ बढ़ा दिया और फिर वहां उपस्थित
  1314. 1:02:17लोगों की तरफ देखकर बोला अब सबके इंतजार
  1315. 1:02:20की घड़ियां समाप्त हुई और वो घड़ी आ गई जब
  1316. 1:02:22हम ऑफिशियल ल्च करने वाले हैं स्ट्रांग
  1317. 1:02:25एनर्जी ड्रिंक का। मैं राजा साहब से
  1318. 1:02:27रिक्वेस्ट करूंगा कि वो रिमोट दबाकर हमारे
  1319. 1:02:30एनर्जी ड्रिंक की ऑफिशियल लॉन्च को
  1320. 1:02:32सुनिश्चित करें। इसके बाद राजा साहब ने
  1321. 1:02:34रिमोट दबाया। अगले ही पल मंच पर जो एक
  1322. 1:02:38बड़ी टीवी लगी थी उस पर नताशा कपूर और
  1323. 1:02:40शौर्य का ऐड प्ले होने लगा। वहां उपस्थित
  1324. 1:02:44लोगों ने उस ऐड को देखा और सब ने उसकी
  1325. 1:02:46बहुत तारीफ की। वहां उपस्थित लोगों ने दिल
  1326. 1:02:49खोलकर उस ऐड की तारीफ की। राजा साहब के
  1327. 1:02:52लिए यह नया था कि उन्होंने शौर्य को उस ऐड
  1328. 1:02:55में काम करते देखा। तो क्या तुम एक्टिंग
  1329. 1:02:57भी करने लगे हो? पर जो हो तुम इस ऐड में
  1330. 1:03:01बढ़िया लग रहे थे। राजा साहब ने शौर्य की
  1331. 1:03:04तारीफ की। जब स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की
  1332. 1:03:07ऑफिशियल लॉन्चिंग हो गई उसके बाद राजा
  1333. 1:03:09साहब ने शौर्य से कहा अब यह तुम्हें सोचना
  1334. 1:03:12है कि तुम मुझे मेरी बहू से कैसे मिलवाते
  1335. 1:03:15हो। राजा साहब की बात सुनकर शौर्य अपने
  1336. 1:03:18चेहरे पर नाराजगी के भाव लाकर राजा साहब
  1337. 1:03:21की ओर देखने लगा। जब विक्रम ने राजा साहब
  1338. 1:03:24की बात सुनी तो उसने कहा ठीक है मैं कोई
  1339. 1:03:28जुगाड़ करता हूं जिससे हो सकता है कि आपको
  1340. 1:03:30अपनी बहू से मिलने का मौका मिल जाए।
  1341. 1:03:33विक्रम की बात सुनकर राजा साहब ने कहा,
  1342. 1:03:36"यह तुमने समझदारी की बात की। अब जल्दी से
  1343. 1:03:39कुछ ऐसा करो कि मुझे अपनी बहू से मिलने का
  1344. 1:03:41मौका मिले।" इसी समय विक्रम ने अपना
  1345. 1:03:44मोबाइल निकाला और मोहित रैना को कॉल
  1346. 1:03:46लगाया। मोहित रैना ने कॉल उठाया तो विक्रम
  1347. 1:03:49ने कहा तुम शिप्रा मेम को ऊपर हम लोगों के
  1348. 1:03:52पास ले आओ। मोहित रैना ने विक्रम के आर्डर
  1349. 1:03:55को सुना तो वो शिप्रा के पास गया और बोला
  1350. 1:03:58चलिए मैं आपको मिस्टर विक्रम से मिलवा
  1351. 1:04:01देता हूं। शायद आपके काम को लेकर भी अभी
  1352. 1:04:03बात हो जाए। शिप्रा ने मोहित रैना की बात
  1353. 1:04:06को सुना तो वह खुश हो गई। वो मोहित रैना
  1354. 1:04:09के साथ स्टेज की तरफ बढ़ गई। जब शिप्रा
  1355. 1:04:12विक्रम के पास पहुंची तो विक्रम अभिवादन
  1356. 1:04:14करते हुए बोला आप कैसी हैं शिप्रा? मैं
  1357. 1:04:18एकदम ठीक हूं सर। आप बताइए आपने मुझे यहां
  1358. 1:04:22क्यों बुलाया है? शिप्रा वहां उपस्थित
  1359. 1:04:24लोगों की तरफ देखती हुई बोली। कुछ खास
  1360. 1:04:27नहीं मिस शिप्रा। मैं आपको कुछ लोगों से
  1361. 1:04:29मिलाना चाहता था इसलिए यहां बुलाया है।
  1362. 1:04:32इसके बाद विक्रम ने मेनका से शिप्रा का
  1363. 1:04:35परिचय कराते हुए कहा, "आप शायद मिस मेनका
  1364. 1:04:38को जानती होंगी। यह होटल राजकमल की मैनेजर
  1365. 1:04:41है।" विक्रम की बात सुनकर शिप्रा बोली,
  1366. 1:04:44"मैं इन्हें जानती तो हूं, पर पहले कभी
  1367. 1:04:47इनसे मिलना नहीं हुआ।" इसके बाद विक्रम ने
  1368. 1:04:50शौर्य की तरफ इशारा करते हुए कहा, श्रवण
  1369. 1:04:53से तो आप पहले मिल ही चुकी होंगी। इधर
  1370. 1:04:55आइए। मैं आपको आज एक खास शख्स से मिलवाता
  1371. 1:04:58हूं। यह चंद्रभान राठौर यानी राजा साहब
  1372. 1:05:02इन्हें तो आप जानती ही होंगी। विक्रम का
  1373. 1:05:04इतना बोलना था कि शिप्रा विक्रम की बात
  1374. 1:05:07काटते हुए बोल पड़ी। इनको भला कौन नहीं
  1375. 1:05:10जानता? यह हमारे शहर की शान है। हर किसी
  1376. 1:05:13की इच्छा होती है इनसे एक बार मिलने की।
  1377. 1:05:16शिप्रा की बात सुनकर राजा साहब मुस्कुराए
  1378. 1:05:18और शिप्रा से बोले, तुम्हें दूसरों को खुश
  1379. 1:05:21करना आता है। अपने बारे में भी बताओ कुछ।
  1380. 1:05:24मेरे पास ऐसा कुछ नहीं है बताने लायक अंकल
  1381. 1:05:27जो मैं आपको अपने बारे में कुछ बताऊं।
  1382. 1:05:30वैसे मेरा नाम शिप्रा राय है। मैं राय
  1383. 1:05:33फैमिली से संबंध रखती हूं। इससे ज्यादा
  1384. 1:05:35मैं आपको क्या ही बताऊं। शिप्रा बोली अंकल
  1385. 1:05:38नहीं तुम मुझे दादाजी बोलो। मैं तुम्हारे
  1386. 1:05:42दादाजी की उम्र कहूंगा। चंद्रभान राठौर
  1387. 1:05:45शिप्रा के मुंह से अंकल सुनकर बोले। वैसे
  1388. 1:05:48शिप्रा उनको बोलना तो दादाजी ही चाहती थी।
  1389. 1:05:51पर उसे लगा कहीं उनको बुरा ना लग जाए।
  1390. 1:05:53इसलिए उसने अंकल कहा। पर जब चंद्रभान
  1391. 1:05:56राठौर ने खुद ही उसे दादाजी कहने के लिए
  1392. 1:05:58कहा तो शिप्रा खुश होती हुई बोली आपने सही
  1393. 1:06:02कहा दादा जी यह हुई ना बात तुम्हारे मुंह
  1394. 1:06:05से दादरी सुनकर अच्छा लग रहा है। चंद्रभान
  1395. 1:06:08जी खुश होते हुए बोले वैसे मैं आपको इनके
  1396. 1:06:11बारे में बताऊं दादा जी कि इतनी छोटी उम्र
  1397. 1:06:14में ही इन्होंने जिंक कलेक्शन के नाम से
  1398. 1:06:16अपनी एक कंपनी खड़ी कर ली थी और उसको
  1399. 1:06:19अच्छा खासा एक्सपोज़र भी मिल गया था। पर
  1400. 1:06:21किसी मजबूरी में इन्हें अपनी कंपनी को
  1401. 1:06:23बेचना पड़ा और अभी यह जॉब सर्च कर रही थी
  1402. 1:06:26तो मैंने अपनी कंपनी में ही काम करने के
  1403. 1:06:29लिए इनको अपॉइंट कर लिया है। विक्रम बीच
  1404. 1:06:31में अपनी बात रखते हुए बोला क्या कहा
  1405. 1:06:34तुमने? इसने अपनी कंपनी बेच दी और अभी जॉब
  1406. 1:06:38ढूंढ रही है। बताओ बेटी तुम्हें किस तरह
  1407. 1:06:41का जॉब चाहिए? मैं देता हूं तुम्हें अपनी
  1408. 1:06:43कंपनी में जॉब। चंद्रभान जी को लगा उन्हें
  1409. 1:06:46शिप्रा को अपने पास रखने का बहाना मिल गया
  1410. 1:06:49है। इसलिए वह शिप्रा को जॉब का ऑफर देते
  1411. 1:06:51हुए बोले अरे दादा जी आपको चिंता करने की
  1412. 1:06:55जरूरत नहीं है। मैंने ऑलरेडी उनके लिए
  1413. 1:06:57अच्छा सा जॉब देख लिया है। विक्रम फिर से
  1414. 1:07:00बोला पता नहीं तुमने कैसा जॉब देखा होगा
  1415. 1:07:02इस बच्ची के लिए। मेरे पास भी इसके लिए
  1416. 1:07:05जॉब ऑफर है। बताओ बेटी तुम किसके पास काम
  1417. 1:07:08करना चाहोगी? चंद्रभान जी ने सीधा शिप्रा
  1418. 1:07:11से ही पूछ लिया। मेरे लिए तो सारे ऑफर एक
  1419. 1:07:14जैसे ही है दादा जी। मुझे तो बस जॉब करनी
  1420. 1:07:17है। मुझे नहीं पता था कि मैं इतनी
  1421. 1:07:19भाग्यशाली निकलूूंगी कि मुझे दो-दो जॉब के
  1422. 1:07:21ऑफर एक साथ मिल जाएंगे। शिप्रा जल्दी से
  1423. 1:07:24बोली। शिप्रा राय धर्म संकट में फंस गई
  1424. 1:07:27थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो राजा
  1425. 1:07:30साहब को क्या जवाब दें। ना तो उससे हां
  1426. 1:07:33बोला जा रहा था और ना ही ना। तुम ज्यादा
  1427. 1:07:36सोचो मत। जो मन में है वो साफ-साफ बताओ।
  1428. 1:07:39यह मत सोचो कि तुम्हारे फैसले से किसी को
  1429. 1:07:41बुरा लगेगा। राजा साहब शिप्रा को समझाते
  1430. 1:07:44हुए बोले, राजा साहब की बात सुनकर शिप्रा
  1431. 1:07:48पशोपेश में नजर आई। वो निश्चय नहीं कर पा
  1432. 1:07:50रही कि उसे किस कंपनी के साथ जाना चाहिए।
  1433. 1:07:53शिप्रा इस उलझन से निकल नहीं पा रही थी।
  1434. 1:07:56उसने विक्रम की तरफ देखा जैसे वह उससे कह
  1435. 1:07:58रही हो कि इस बारे में आप ही कोई फैसला
  1436. 1:08:01कीजिए। चंद्रभान राठौर के प्रपोजल के कारण
  1437. 1:08:05शिप्रा उलझन में थी कि वह इस प्रपोजल को
  1438. 1:08:08कैसे ठुकराए। वह समझ रही थी कि मोहित रैना
  1439. 1:08:11ने उसे जॉब का प्रपोजल पहले ही दे दिया
  1440. 1:08:13था। इसीलिए कायदे से उसे विक्रम की कंपनी
  1441. 1:08:17में ही जॉब के ऑफर को स्वीकार करना चाहिए।
  1442. 1:08:19पर वो सीधे-सीधे राजा साहब को मना कैसे
  1443. 1:08:22करें? वो यह बात समझ नहीं पा रही थी। राजा
  1444. 1:08:25साहब भी शिप्रा की स्थिति को भली-भांति
  1445. 1:08:28समझ रहे थे। जबकि शौर्य अपने दादाजी के
  1446. 1:08:31इरादों को अच्छे से समझ रहा था। वह
  1447. 1:08:33जानबूझकर शिप्रा को अपने पास काम करवाना
  1448. 1:08:36चाहते थे। जिससे शौर्य को किसी ना किसी
  1449. 1:08:38कारण उनके पास आते रहना पड़ेगा। राजा साहब
  1450. 1:08:42को अभी शौर्य के बारे में यह भी नहीं पता
  1451. 1:08:44था कि बिगbul जैसी बड़ी कंपनी शौर्य की
  1452. 1:08:47है। इसीलिए उन्हें यह भी लग रहा था कि
  1453. 1:08:50विक्रम जो जॉब का ऑफर शिप्रा को दे रहा
  1454. 1:08:52है, वो क्या ही अच्छा होगा। जबकि वह
  1455. 1:08:55शिप्रा को अपनी किसी कंपनी का सीईओ बनाने
  1456. 1:08:58की सोच रहे थे। उनके दिमाग में यह भी चल
  1457. 1:09:00रहा था कि इस तरह से वह अपनी संपत्ति का
  1458. 1:09:03एक हिस्सा शौर्य को दे देंगे। क्योंकि जब
  1459. 1:09:06सूर्यभान राठौर से उन्होंने संपत्ति में
  1460. 1:09:08अपना हिस्सा लेने के लिए कहा था तो
  1461. 1:09:10उन्होंने मना कर दिया था और उनसे साफ कहा
  1462. 1:09:13था कि वह उनके हिस्से की संपत्ति भी उसके
  1463. 1:09:16भाई और बहन को ही दे दे। उन्हें इसकी कोई
  1464. 1:09:19जरूरत नहीं है। पर चंद्रभान जी को यह कबूल
  1465. 1:09:22नहीं था। वह इस तरह शौर्य के साथ नाइंसाफी
  1466. 1:09:25नहीं कर सकते थे। दूसरी तरफ यह भी था कि
  1467. 1:09:28उनका दूसरा बेटा पहले से ही यह चाहता था
  1468. 1:09:30कि चंद्रभान राठौर जितनी जल्दी हो संपत्ति
  1469. 1:09:33उनके नाम कर दें। यह कारण भी था कि वह
  1470. 1:09:36चाहते थे कि किसी तरह वह शौर्य को उनके
  1471. 1:09:39कामों में उलझा लें तो मजबूरन उसे उनकी
  1472. 1:09:42बात माननी पड़ेगी। अब शिप्रा एक माध्यम
  1473. 1:09:44बनकर उनके सामने आ गई थी। शिप्रा के
  1474. 1:09:47द्वारा यह कंपनी शौर्य के पास चली जाएगी।
  1475. 1:09:50राजा साहब ने जब देखा कि शिप्रा कुछ बोल
  1476. 1:09:52नहीं रही है तो वह कांता प्रसाद जी से
  1477. 1:09:55बोले कांता प्रसाद तुम शिप्रा के नाम से
  1478. 1:09:58जॉब प्रपोजल तैयार करवाकर कल इसको दे
  1479. 1:10:00देना। इतना बोलकर राजा साहब ने शिप्रा की
  1480. 1:10:03ओर देखकर उससे कहा और तुम कल से ही आकर
  1481. 1:10:06अपनी पोजीशन संभाल लेना। मैं तुम्हें अपनी
  1482. 1:10:08टेक्सटाइल कंपनी का सीईओ नियुक्त कर रहा
  1483. 1:10:11हूं। राजा साहब की बात सुनकर शिप्रा का
  1484. 1:10:14मुंह खुला का खुला रह गया। उसे अपने कानों
  1485. 1:10:16पर विश्वास नहीं हो रहा था कि बिना किसी
  1486. 1:10:19जॉब इंटरव्यू या किसी भी तरह की प्रोसेस
  1487. 1:10:21के राजा साहब उसे अपनी कंपनी का सीईओ कैसे
  1488. 1:10:25नियुक्त कर सकते हैं। क्या उसकी किस्मत
  1489. 1:10:27इतनी अच्छी है कि उसके साथ सब कुछ अच्छा
  1490. 1:10:29अच्छा ही हो रहा है? सबसे पहले मोहित रैना
  1491. 1:10:32ने उसे अपनी कंपनी में जॉब का ऑफर दिया।
  1492. 1:10:35इस ऑफर को पाकर ही उसे लग रहा था कि उसे
  1493. 1:10:38उसकी हैसियत से ज्यादा मिल रहा है। पर
  1494. 1:10:40राजा साहब तो उससे भी दो कदम आगे बढ़कर
  1495. 1:10:42उसे अपनी कंपनी का सीईओ ही नियुक्त करने
  1496. 1:10:45की बात कर रहे हैं। उसे अपनी किस्मत पर
  1497. 1:10:47भरोसा नहीं हो रहा था। वहां उपस्थित बाकी
  1498. 1:10:50लोगों का भी आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।
  1499. 1:10:53जिन लोगों की नजर में शिप्रा की कोई
  1500. 1:10:55हैसियत नहीं थी। अब उन लोगों की नजर में
  1501. 1:10:57अचानक ही शिप्रा का कद काफी बड़ा हो गया।
  1502. 1:11:00वहां उपस्थित बहुत से लोगों की निगाह में
  1503. 1:11:03शिप्रा के लिए जलन साफ नजर आ रही थी। वहां
  1504. 1:11:06उपस्थित लोगों में मानसी भी थी जो शिप्रा
  1505. 1:11:08को जलन भरी नजरों से देखे जा रही थी। वो
  1506. 1:11:11समझ नहीं पा रही थी कि चंद्रभान राठौर ने
  1507. 1:11:14ऐसा क्या शिप्रा में देख लिया कि उसे अपनी
  1508. 1:11:16कंपनी का सीईओ बना दिया। उसे खुद पर तरस आ
  1509. 1:11:20रहा था कि वह हर लिहाज से शिप्रा से बेहतर
  1510. 1:11:22है। इस तरह का ऑफर उसको मिलना चाहिए था।
  1511. 1:11:25पर यहां भी शिप्रा ने उससे बाजी मार ली।
  1512. 1:11:28वो भी उसी की पार्टी में आकर। दूसरी तरफ
  1513. 1:11:31शौर्य भी चंद्रभान राठौर की इस चालाकी पर
  1514. 1:11:34हैरान था। वो समझ गया उसके दादाजी ने
  1515. 1:11:36अच्छा दांव खेला था। मोहित रैना जो वहीं
  1516. 1:11:39खड़ा यह सब देख रहा था। उसे भी शिप्रा की
  1517. 1:11:42किस्मत पर जलन हो रही थी। उसे राजा साहब
  1518. 1:11:45और शौर्य के रिश्ते की हकीकत पता नहीं थी।
  1519. 1:11:48उसके लिए भी यह हैरानी की बात थी कि राजा
  1520. 1:11:50साहब ने शिप्रा में ऐसा क्या देखा कि उसको
  1521. 1:11:53अपनी कंपनी में सीईओ बना दिया। इन कुछ ही
  1522. 1:11:56पलों में शिप्रा की हैसियत मोहित रैना से
  1523. 1:11:59बड़ा हो गया था। पर शिप्रा को अभी भी राजा
  1524. 1:12:01साहब के ऑफर को स्वीकार करना सही नहीं लग
  1525. 1:12:04रहा था। उसे लग रहा था कि अगर वह राजा
  1526. 1:12:06साहब के ऑफर को स्वीकार करेगी तो यह बात
  1527. 1:12:09उसे मौका परस्त साबित कर देगी क्योंकि
  1528. 1:12:12उसने पहले ही मोहित रैना के ऑफर को
  1529. 1:12:14स्वीकार कर लिया था। अब जब उसे एक उससे भी
  1530. 1:12:17अच्छा ऑफर मिल रहा है तो उसको ठुकरा कर
  1531. 1:12:19बढ़िया ऑफर को स्वीकार कर लेना यही साबित
  1532. 1:12:22करता कि वह मौका परस्त है जो सिर्फ अपने
  1533. 1:12:25बारे में सोचती है। इस बात के दिमाग में
  1534. 1:12:28आते ही शिप्रा ने राजा साहब से बड़े अदब
  1535. 1:12:31से कहा दादा जी मैं समझती हूं कि कोई
  1536. 1:12:34बेवकूफ ही होगा जो आपके दिए हुए इतने
  1537. 1:12:38अच्छे ऑफर को ठुकरा दे। पर मैं बड़े ही
  1538. 1:12:41सम्मान के साथ आपको कहना चाहूंगी कि मैं
  1539. 1:12:44आपके इस ऑफर को स्वीकार नहीं कर सकती।
  1540. 1:12:47राजा साहब के साथ कांता प्रसाद ने भी
  1541. 1:12:50शिप्रा की तरफ आश्चर्य से देखा। राजा साहब
  1542. 1:12:53को शिप्रा के उनके प्रपोजल को ठुकराने का
  1543. 1:12:56कारण समझ नहीं आया। वो यह सोचने को मजबूर
  1544. 1:12:59हो गए कि आखिर शिप्रा इतने अच्छे ऑफर को
  1545. 1:13:02कैसे ठुकरा सकती है? इसीलिए उन्होंने
  1546. 1:13:04शिप्रा से पूछा क्या मैं तुम्हारा मेरे
  1547. 1:13:08प्रपोजल को ठुकराने का कारण जान सकता हूं?
  1548. 1:13:11जबकि इसी समय बलवंत राय जी वहीं मौजूद सब
  1549. 1:13:14कुछ देख सुन रहे थे। जब उन्होंने शिप्रा
  1550. 1:13:17को राजा साहब के प्रपोजल को ठुकराते देखा
  1551. 1:13:20तो वह भी हैरान होकर शिप्रा को देखने लगे।
  1552. 1:13:23उन्हें शिप्रा की बेवकूफी पर तरस भी आ रहा
  1553. 1:13:25था कि वह इतनी बड़ी बेवकूफी कैसे कर सकती
  1554. 1:13:28है? उनका तो मन किया कि वह अभी शिप्रा के
  1555. 1:13:31पास जाएं और उसे राजा साहब के ऑफर को
  1556. 1:13:34स्वीकार करने के लिए मजबूर करें। पर अगले
  1557. 1:13:37ही पल उन्होंने अपना इरादा टाल दिया। इतने
  1558. 1:13:40लोगों के बीच में जाकर शिप्रा को राजा
  1559. 1:13:42साहब के ऑफर को स्वीकार करने के लिए कहना
  1560. 1:13:45उनकी प्रतिष्ठा के लिए सही नहीं था।
  1561. 1:13:47इसीलिए वह इस जवाब की प्रतीक्षा करने लगे
  1562. 1:13:50कि देखें शिप्रा राजा साहब के सवाल के
  1563. 1:13:52जवाब में क्या कहती है। शिप्रा राजा साहब
  1564. 1:13:56के सवाल को सुनकर विनम्रता से बोली
  1565. 1:13:59दादा जी दरअसल दो दिन पहले ही मोहित रैना
  1566. 1:14:02के द्वारा मुझे मिस्टर विक्रम की तरफ से
  1567. 1:14:04जॉब का प्रपोजल मिला था और मैंने उसे
  1568. 1:14:06स्वीकार भी कर लिया था। पर अब अचानक ही
  1569. 1:14:09मुझे उससे अच्छा प्रपोजल मिल रहा है। तो
  1570. 1:14:12पहले स्वीकार किए प्रपोजल को सिर्फ इसलिए
  1571. 1:14:14ठुकरा देना कि मुझे उससे बेहतर ऑफर मिल
  1572. 1:14:17रहा है। यह मुझे स्वार्थी साबित कर देगा।
  1573. 1:14:20मैं खुद की ही नजरों में गिर जाऊंगी कि
  1574. 1:14:23मैं कितनी बड़ी मौका परस्त निकली कि जिसने
  1575. 1:14:25मुसीबत में मेरा हाथ थामा मैंने मौका
  1576. 1:14:28मिलते ही उसे पीठ दिखा दिया। बस इसी कारण
  1577. 1:14:31मैं आपके इस ऑफर को स्वीकार नहीं कर
  1578. 1:14:33सकूंगी। शिप्रा के जवाब को सुनकर राजा
  1579. 1:14:36साहब मन ही मन बहुत खुश हुए। उन्होंने
  1580. 1:14:39कांता प्रसाद की तरफ देखा। कांता प्रसाद
  1581. 1:14:42के मन में भी राजा साहब वाला ही ख्याल था।
  1582. 1:14:44इधर राजा साहब को अब शौर्य की पसंद पर और
  1583. 1:14:47भी गर्व हो रहा था। उन्होंने तारीफ भरे
  1584. 1:14:50भाव से शौर्य की तरफ देखा। जैसे उन्हें कह
  1585. 1:14:53रहे हो कि मुझे तुम्हारी पसंद पर गर्व है।
  1586. 1:14:56इतनी देर में कांता प्रसाद जी शिप्रा के
  1587. 1:14:58सामने आए और उससे बोले शिप्रा बेटी मुझे
  1588. 1:15:01अच्छा लगा कि तुमने ऐसा सोचकर कि तुम्हें
  1589. 1:15:04कोई मौका परस्त ना समझे इसीलिए राजा साहब
  1590. 1:15:06के ऑफर को ठुकरा रही हो। पर अगर तुम जिसके
  1591. 1:15:09कारण राजा साहब के ऑफर को ठुकरा रही हो।
  1592. 1:15:12वही तुम्हें तुम्हारे अपनी कंपनी में काम
  1593. 1:15:14करने के ऑफर से आजाद कर दे तो तुम्हें
  1594. 1:15:16राजा साहब के ऑफर को स्वीकार करने में कोई
  1595. 1:15:18दिक्कत नहीं होगी ना। कांता प्रसाद की बात
  1596. 1:15:22को सुनकर शिप्रा कंफ्यूज हो गई कि वे भला
  1597. 1:15:24उसे क्यों अपनी बातों से आजाद करेंगे। वो
  1598. 1:15:27शंका भरी नजरों से विक्रम की ओर देखने
  1599. 1:15:29लगी। विक्रम जो कि सब कुछ देख सुन रहा था।
  1600. 1:15:33उसे भी समझ नहीं आया कि वह इस बदली
  1601. 1:15:35परिस्थिति में शिप्रा को क्या जवाब दे। जब
  1602. 1:15:38विक्रम को कुछ समझ नहीं आया तो वह शौर्य
  1603. 1:15:40की तरफ देखने लगा। शौर्य विक्रम की स्थिति
  1604. 1:15:43को समझ रहा था। उसने भी बदली परिस्थिति पर
  1605. 1:15:46गौर किया। उसे भी लगा कि शायद शिप्रा के
  1606. 1:15:49लिए यह ज्यादा अच्छा रहेगा कि वह राजा
  1607. 1:15:51साहब के ऑफर को स्वीकार कर ले। राजा साहब
  1608. 1:15:54के ऑफर को स्वीकार करने के बाद शिप्रा का
  1609. 1:15:56कद इतना ऊंचा हो जाएगा कि फिर कोई भी उसको
  1610. 1:15:59हल्के में लेने की कोशिश नहीं करेगा।
  1611. 1:16:02इसीलिए उसने विक्रम को इशारों में ही समझा
  1612. 1:16:04दिया कि उसे क्या करना है। दूसरी तरफ जब
  1613. 1:16:08कांता प्रसाद ने शिप्रा को विक्रम की तरफ
  1614. 1:16:10देखते पाया तो उन्होंने विक्रम से कहा
  1615. 1:16:12क्यों मिस्टर विक्रम क्या आप शिप्रा को
  1616. 1:16:15उसे मिल रहे बेहतर प्रपोजल को ठुकराने की
  1617. 1:16:17नसीहत देंगे। विक्रम समझ गया कि कांता
  1618. 1:16:21प्रसाद उससे क्या कहलवाना चाहते हैं।
  1619. 1:16:23इसीलिए वह शिप्रा के करीब गया और बोला
  1620. 1:16:27शिप्रा जी मैं आपकी इन भावनाओं का कद्र
  1621. 1:16:29करता हूं कि आपने सिर्फ यह सोचकर राजा
  1622. 1:16:32साहब के ऑफर को ठुकरा दिया कि आपने पहले
  1623. 1:16:34ही हमारे प्रपोजल को स्वीकार कर लिया था।
  1624. 1:16:37पर यकीन मानिए हम आपके दुश्मन नहीं हैं।
  1625. 1:16:40मैं नहीं चाहूंगा कि आप हमारे कारण राजा
  1626. 1:16:43साहब से मिल रहे इतने अच्छे प्रपोजल को
  1627. 1:16:45ठुकरा दें। इसीलिए आप हमारी तरफ से आजाद
  1628. 1:16:48हैं। इसीलिए बेहतर यह होगा कि आप राजा
  1629. 1:16:51साहब के प्रपोजल को स्वीकार कर लीजिए।
  1630. 1:16:54शिप्रा को यकीन नहीं हुआ कि विक्रम ने उसे
  1631. 1:16:57इतनी आसानी से उसके ऑफर से आजाद कर दिया।
  1632. 1:17:00उसे एक बार को यह भी लगा कि कहीं विक्रम
  1633. 1:17:03ने राजा साहब के डर से तो उसको आजाद नहीं
  1634. 1:17:05कर दिया। इसीलिए उसने कंफर्म करने के
  1635. 1:17:08इरादे से विक्रम से पूछा। यह आप क्या कह
  1636. 1:17:11रहे हैं? मुझे ऐसी कोई चाह नहीं है कि मैं
  1637. 1:17:14राजा साहब के ऑफर को आपको ना कहकर स्वीकार
  1638. 1:17:17करूं। विक्रम शिप्रा की ईमानदारी पर
  1639. 1:17:19मुस्कुराने लगा। वो समझ गया कि शिप्रा
  1640. 1:17:22क्या महसूस कर उससे ऐसा बोली। इसीलिए उसने
  1641. 1:17:25शिप्रा से कहा आप कुछ ज्यादा ही सोच रही
  1642. 1:17:28हैं। मेरे आपको अपने ऑफर से आजाद करने का
  1643. 1:17:31कारण वो नहीं है जो आपके दिमाग में चल रहा
  1644. 1:17:34है। मैं दिल से चाहता हूं कि आप ऊंचाइयों
  1645. 1:17:37को छुएं। इसीलिए आपके लिए राजा साहब के
  1646. 1:17:39ऑफर को स्वीकार करना ज्यादा बेहतर होगा।
  1647. 1:17:42कांता प्रसाद विक्रम की बात सुनने के बाद
  1648. 1:17:45शिप्रा से बोले अब तो कोई भी तुम्हें मौका
  1649. 1:17:48परस्त नहीं समझेगा शिप्रा बेटी। इसीलिए अब
  1650. 1:17:50तुमको राजा साहब के ऑफर को स्वीकार करने
  1651. 1:17:52में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए। तुमने यह
  1652. 1:17:55भी साबित कर दिया कि राजा साहब ने तुम्हें
  1653. 1:17:57सीईओ के पद का ऑफर देकर कितना सही फैसला
  1654. 1:18:00किया। तुम्हारी जगह कोई और होता तो वह
  1655. 1:18:03राजा साहब से इतना अच्छा प्रपोजल मिलने के
  1656. 1:18:05बाद एक पल को कुछ बिना सोचे इनके ऑफर को
  1657. 1:18:08स्वीकार कर लेता। पर तुमने ऐसा नहीं किया।
  1658. 1:18:11इतने बड़े ऑफर को ठुकराने में तुमने एक पल
  1659. 1:18:14नहीं लगाया। वो भी सिर्फ इसलिए कि तुमने
  1660. 1:18:16किसी का ऑफर पहले ही स्वीकार कर लिया था।
  1661. 1:18:19उसके बाद तुमने एक बार भी नहीं सोचा कि
  1662. 1:18:22तुमने कितने बड़े ऑफर को ठुकराया है। यही
  1663. 1:18:24बात साबित करती है कि तुम जिसके भी साथ
  1664. 1:18:27काम करोगी उसके प्रति तुम कितनी लॉयल
  1665. 1:18:29रहोगी। आपने सही कहांता प्रसाद जी मैं आशा
  1666. 1:18:33करता हूं कि यह आपकी उम्मीदों पर एकदम
  1667. 1:18:36खड़ा उतरे। विक्रम कांता प्रसाद जी की तरफ
  1668. 1:18:39देखता हुआ बोला। कांता प्रसाद जी ने अपनी
  1669. 1:18:42जेब से एक कार्ड निकालकर शिप्रा की तरफ
  1670. 1:18:44बढ़ाते हुए कहा, "इसमें हमारे ऑफिस का
  1671. 1:18:47एड्रेस है। तुम कल समय से आकर अपने ऑफिस
  1672. 1:18:50को ज्वाइन कर लेना। मैं सुबह तुम्हारे लिए
  1673. 1:18:52ऑफर लेटर तैयार करवा दूंगा।" शिप्रा ने
  1674. 1:18:55कांता प्रसाद जी के हाथ से वो कार्ड लिया
  1675. 1:18:57और अपने पर्स में रख लिया। और कांता
  1676. 1:18:59प्रसाद जी से बोली ठीक है सर मैं समय से
  1677. 1:19:02पहुंच जाऊंगी। शिप्रा के कांता प्रसाद के
  1678. 1:19:05ऑफर स्वीकार करते ही कई लोगों के सीने पर
  1679. 1:19:08सांप लौटने लगे। जिनमें मानसी और विजय
  1680. 1:19:11दीवान मेन थे। विजय दीवान के दिमाग में तो
  1681. 1:19:14यह बात चल रहा था कि वो कैसे शिप्रा के
  1682. 1:19:16करीब जाए। जबकि मानसी तो सिर्फ शिप्रा को
  1683. 1:19:19देखकर जल सकती थी। शिप्रा ने जैसे ही राजा
  1684. 1:19:23साहब के ऑफर को स्वीकार किया। वहां
  1685. 1:19:25उपस्थित कई लोगों ने आकर उसे बधाई देना
  1686. 1:19:28शुरू कर दिया। ताता सा लग गया शिप्रा को
  1687. 1:19:30बधाई देने वालों की। शिप्रा को समझ नहीं
  1688. 1:19:33आया कि अचानक ही यह सारे लोग बिना किसी
  1689. 1:19:36जान पहचान के उसको बधाई देने आगे कैसे आ
  1690. 1:19:39गए। अभी तो उसने सिर्फ राजा साहब के ऑफर
  1691. 1:19:42को स्वीकार किया था। ऑफिशियली जॉइ तो किया
  1692. 1:19:45नहीं था। फिर भी लोग आगे से आकर उसे बधाई
  1693. 1:19:49दे रहे थे। शायद इसका सबसे बड़ा कारण यह
  1694. 1:19:52था कि आज के बाद शिप्रा का सोशल स्टेटस
  1695. 1:19:55चेंज होने वाला था क्योंकि राजा साहब की
  1696. 1:19:58कंपनी का सीईओ होना कोई छोटी बात नहीं थी।
  1697. 1:20:01अभी से ही लोग उससे संपर्क बनाना चाह रहे
  1698. 1:20:04थे। शिप्रा की नजरों में आना चाह रहे थे
  1699. 1:20:07ताकि बाद में जब कभी मौका मिले तो शिप्रा
  1700. 1:20:10आसानी से उन लोगों को पहचान सके। शिप्रा
  1701. 1:20:13की मजबूरी थी कि वह बहुत से लोगों को ना
  1702. 1:20:16पहचानते हुए भी उनकी बधाई को स्वीकार कर
  1703. 1:20:18रही थी। वो मुस्कुराते हुए विनम्रता से
  1704. 1:20:21सबका अभिवादन करती जा रही थी। जबकि उससे
  1705. 1:20:24थोड़ी दूर पर खड़ी मानसी जलन भरी निगाहों
  1706. 1:20:27से उसे घरे जा रही थी। मानसी को देखकर साफ
  1707. 1:20:31पता चल रहा था कि शिप्रा को इतने अच्छे
  1708. 1:20:33ऑफर मिलने के कारण वो कितनी दुखी थी और यह
  1709. 1:20:36सब उसी की पार्टी में हो रहा था। दूसरी
  1710. 1:20:40तरफ बलवंत राय का चेहरा खिला हुआ नजर आ
  1711. 1:20:42रहा था। उन्हें उम्मीद नहीं था कि आज इस
  1712. 1:20:45पार्टी में शिप्रा को इतना अच्छा ऑफर
  1713. 1:20:47मिलने वाला है। वो बड़ी मुश्किल से खुद को
  1714. 1:20:50रोके हुए थे। नहीं तो उनका मन कर रहा था
  1715. 1:20:53कि वह यहां पर चिल्लाकर कहे कि शिप्रा
  1716. 1:20:55उनकी पोती है जिसे आज खुद राजा साहब ने
  1717. 1:20:59अपनी कंपनी का सीईओ नियुक्त कर दिया। यह
  1718. 1:21:02राय फैमिली के लिए बहुत बड़ी बात थी।
  1719. 1:21:04उन्हें अभी कुछ दिन पहले शिप्रा से किए गए
  1720. 1:21:07व्यवहार के लिए पछतावा हो रहा था। पर यह
  1721. 1:21:09समय इन बातों को याद करने का नहीं था।
  1722. 1:21:12उन्होंने निश्चय किया कि घर जाकर वो सबसे
  1723. 1:21:14पहले शिप्रा से मिलेंगे और उससे बात
  1724. 1:21:17करेंगे। इधर शौर्य भी शिप्रा के अंदर की
  1725. 1:21:20खुशी को महसूस कर पा रहा था। वो यह भी देख
  1726. 1:21:23रहा था कि जब लोग शिप्रा के पास जाकर उसे
  1727. 1:21:25बधाई दे रहे थे तो वह कितना अनकंफर्टेबल
  1728. 1:21:28फील कर रही थी। शौर्य के पास खड़ी नताशा
  1729. 1:21:31कपूर ने जब देखा कि लोग शिप्रा को उसको
  1730. 1:21:33मिले प्रपोजल के लिए बधाई दे रहे हैं तो
  1731. 1:21:36उसने शौर्य से कहा तुम्हें नहीं लगता कि
  1732. 1:21:38हमें भी आगे बढ़कर शिप्रा को बधाई देनी
  1733. 1:21:40चाहिए। शौर्य को समझ नहीं आया कि वो नताशा
  1734. 1:21:43की बात का क्या जवाब दे। अभी शौर्य नताशा
  1735. 1:21:46को कोई जवाब देता उससे पहले ही नताशा बोली
  1736. 1:21:50चलो हम भी चलकर उसको बधाई देते हैं। इतना
  1737. 1:21:53कहकर वो शौर्य का हाथ पकड़ कर उसको खींचती
  1738. 1:21:56हुई शिप्रा की तरफ बढ़ गई। शौर्य बड़ी
  1739. 1:21:58मुश्किल से उसको रोकते हुए बोला। अरे चल
  1740. 1:22:01रहा हूं। तुम मेरा हाथ तो छोड़ो। तुम देख
  1741. 1:22:04भी रही हो यहां लोग कैसे हम दोनों को घूर
  1742. 1:22:06रहे हैं। शौर्य की बात सुनकर नताशा ठिटकी
  1743. 1:22:09और शौर्य की तरफ देखती हुई बोली। ओह हेलो।
  1744. 1:22:12इस बात से मुझे परेशान होना चाहिए ना कि
  1745. 1:22:14तुम्हें। अगर कोई बात बनेगी तो उससे तुमसे
  1746. 1:22:17ज्यादा नुकसान मेरा है। अरे मैं भी तो यही
  1747. 1:22:20कह रहा हूं मेरा क्या है? मुझे यहां जानता
  1748. 1:22:23ही कौन है? पर तुम्हें तो यहां सभी लोग
  1749. 1:22:25जानते हैं। मेरे जैसे छोटे लोग के साथ
  1750. 1:22:28देखकर तुम्हें लेकर लोगों ने अगर कोई
  1751. 1:22:30कहानी बनानी शुरू कर दी तो फिर तुम्हें
  1752. 1:22:32जवाब देते नहीं बनेगा। इसलिए मैं ऐसा कह
  1753. 1:22:34रहा हूं। शौर्य ने तुरंत नताशा की बात को
  1754. 1:22:38ही आधार बनाकर उसको जवाब दिया। जो नताशा
  1755. 1:22:41अभी यह सोच रही थी कि शौर्य शायद खुद का
  1756. 1:22:44नाम उससे जुड़ने के कारण परेशान हो रहा
  1757. 1:22:46है। एक ही पल में उसका विचार बदल दिया और
  1758. 1:22:49उसके दिमाग में यह बात आ गया कि शौर्य
  1759. 1:22:51उसको लेकर परेशान है कि उसको लेकर कहीं
  1760. 1:22:54कोई कहानी बननी शुरू ना हो जाए। यह बात
  1761. 1:22:56दिमाग में आते ही कि शौर्य को उसकी कितनी
  1762. 1:22:59परवाह है। नताशा के दिल में शौर्य का कद
  1763. 1:23:02और भी बढ़ गया। उसका मन तो नहीं हो रहा था
  1764. 1:23:05कि वह शौर्य का हाथ छोड़े। परिस्थिति
  1765. 1:23:08एबनॉर्मल ना हो जाए। यह सोचकर उसने शौर्य
  1766. 1:23:11का हाथ छोड़ दिया और उससे बोली, अब अगर
  1767. 1:23:14ठीक है तो चलें। शौर्य ने मुस्कुरा कर
  1768. 1:23:17उसकी ओर देखा और शिप्रा की ओर बढ़ गया।
  1769. 1:23:20शिप्रा जो कई लोगों से घिरी थी, उसका
  1770. 1:23:22ध्यान भी शौर्य की तरफ ही था। वो देख रही
  1771. 1:23:25थी कि कैसे नताशा शौर्य का हाथ पकड़ कर
  1772. 1:23:27उसकी तरफ बढ़ी आ रही थी कि तभी शौर्य ने
  1773. 1:23:31उसे कुछ कहा था। जिसके बाद नताशा ने शौर्य
  1774. 1:23:33का हाथ छोड़ दिया और अब दोनों साथ में
  1775. 1:23:36उसकी ओर आ रहे थे। दोनों को अपनी तरफ आते
  1776. 1:23:39देखकर नताशा ने उनसे अपनी नजर फेरा तो उसे
  1777. 1:23:42अपने सामने विजय दीवान खड़ा नजर आया। विजय
  1778. 1:23:45दीवान भरषक अपनी आवाज को मीठा बनाते हुए
  1779. 1:23:48कहा बहुत-बहुत बधाई शिप्रा। मैं बता नहीं
  1780. 1:23:51सकता कि मुझे यह जानकर कितनी खुशी हुई कि
  1781. 1:23:54तुम राजा साहब की टेक्सटाइल कंपनी की सीईओ
  1782. 1:23:57बनने वाली हो। मैं ऊपर वाले से प्रार्थना
  1783. 1:23:59करूंगा कि तुम यूं ही दिन दुगनी रात
  1784. 1:24:02चौगुनी तरक्की करती जाओ। तुम्हें अपने सफर
  1785. 1:24:05में अगर कभी भी मेरी मदद की कोई जरूरत
  1786. 1:24:07महसूस हो तो तुम निसंकोच मुझसे मदद ले
  1787. 1:24:10सकती हो। शिप्रा ने विजय की बात को सुना
  1788. 1:24:13और मुस्कुराते हुए उसको जवाब दिया। जरूर
  1789. 1:24:16अगर मुझे कभी भी ऐसा लगा तो मैं जरूर
  1790. 1:24:18तुमसे संपर्क करूंगी। मुझे इससे खुशी
  1791. 1:24:20होगी। विजय ने भी तुरंत रिप्लाई किया। यही
  1792. 1:24:24वो क्षण था जब नताशा शौर्य के साथ शिप्रा
  1793. 1:24:26के सामने पहुंची और उससे बोली मुबारक हो
  1794. 1:24:29शिप्रा तुम्हें इतना बड़ा अवसर मिलने के
  1795. 1:24:31लिए मैं समझती हूं तुम इस अवसर को अच्छे
  1796. 1:24:33से भुनाओगी और अपनी जिंदगी में और भी
  1797. 1:24:35ऊंचाइयों को छुओगी इसलिए मेरे और श्रवण
  1798. 1:24:38दोनों की तरफ से तुम्हें इस पद के लिए
  1799. 1:24:40बहुत-बहुत बधाई। अगर यह बधाई नताशा अकेले
  1800. 1:24:43जाकर शिप्रा को दे रही होती तो शिप्रा को
  1801. 1:24:45बहुत खुशी होती। पर जब उसने नताशा के मुंह
  1802. 1:24:48से यह सुना कि उसकी और श्रवण दोनों की ओर
  1803. 1:24:50से उसको बहुत-बहुत बधाई। तो उसे यह
  1804. 1:24:53बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। वो बोली तो
  1805. 1:24:55कुछ नहीं पर कनखियों से वह शौर्य की ओर
  1806. 1:24:57देखने लगी। शौर्य इस समय ऐसी स्थिति में
  1807. 1:25:00था कि उससे कुछ बोलते नहीं बन रहा था। उसे
  1808. 1:25:03ऐसा लग रहा था जैसे वह सिलबट्टे की दो
  1809. 1:25:05पाटों के बीच में फंस गया है। जिससे वह
  1810. 1:25:08चाहकर भी निकल नहीं पा रहा हो। वो शिप्रा
  1811. 1:25:10से नजर मिलाने का ताव नहीं ला पा रहा था।
  1812. 1:25:13इसलिए वह उससे अपनी नजर को चुरा रहा था।
  1813. 1:25:15जबकि शिप्रा का मन कर रहा था कि वह नताशा
  1814. 1:25:18से कहे कि जिसकी तरफ से वह उसको बधाई दे
  1815. 1:25:20रही है, वह उसका पति है। पर हकीकत में वह
  1816. 1:25:23ऐसा कुछ नहीं कह पाई। मजबूरन शिप्रा को
  1817. 1:25:25मुस्कुराकर नताशा को जवाब देना पड़ा। आपकी
  1818. 1:25:28बधाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। नताशा ने
  1819. 1:25:31नोट किया कि शौर्य ने अपनी तरफ से शिप्रा
  1820. 1:25:34को कुछ नहीं कहा। तो उसने शौर्य से कहा,
  1821. 1:25:37क्या तुम अपनी तरफ से शिप्रा को कुछ नहीं
  1822. 1:25:38कहोगे? शौर्य ने जब नताशा का यह सवाल सुना
  1823. 1:25:42तो उसकी स्थिति और भी विचित्र हो गई। जिस
  1824. 1:25:45चीज से वह बचना चाह रहा था, नताशा उसको
  1825. 1:25:47उसी के सामने धकेल दे रही थी। मजबूरन
  1826. 1:25:50शौर्य को नताशा से बोलना पड़ा। तुमने मेरे
  1827. 1:25:52पास कुछ कहने के लिए छोड़ा कहां? तुमने तो
  1828. 1:25:55मेरी तरफ से भी इसको बधाई दे दी। तो फिर
  1829. 1:25:57मुझे अलग से बोलने की जरूरत क्या रह गई?
  1830. 1:26:00नताशा ने शौर्य की इस बात पर ध्यान दिया
  1831. 1:26:02तो वो मुस्कुराती हुई बोली। अरे हां,
  1832. 1:26:05मैंने तो इस बात की और ध्यान ही नहीं
  1833. 1:26:07दिया। पर शौर्य ने अब तक खुद को तैयार कर
  1834. 1:26:09लिया था शिप्रा को फेस करने के लिए। इसलिए
  1835. 1:26:12उसने मुस्कुराते हुए शिप्रा की ओर देखते
  1836. 1:26:14हुए कहा, मैं समझता हूं कि तुम्हें आज के
  1837. 1:26:17दिन बहुत बड़ी जिम्मेदारी मिली है और मुझे
  1838. 1:26:20पूरा विश्वास है कि तुम इसको बहुत ही
  1839. 1:26:22अच्छी तरह से निभाओगी। इस बार सीधा शौर्य
  1840. 1:26:25से यह बात सुनकर शिप्रा को अच्छा लगा। वो
  1841. 1:26:28शौर्य से बोली तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद
  1842. 1:26:31जो तुम ऐसा सोचते हो। अभी शिप्रा ने अपनी
  1843. 1:26:34बात को समाप्त ही किया था कि तभी बीच में
  1844. 1:26:37आते हुए विजय ने कहा अब यह करेगा भी तो
  1845. 1:26:40क्या करेगा? बेचारे की मजबूरी है जो इसे
  1846. 1:26:42तुम्हें बधाई देना पड़ रहा है। नहीं तो
  1847. 1:26:45मुझे तो ऐसा लग तो नहीं रहा है कि इसे
  1848. 1:26:47तुम्हें इतना बड़ा पद मिलने से कोई खुशी
  1849. 1:26:49हो रही है। इसके सीने पर तो सांप लौट रहे
  1850. 1:26:52होंगे तुम्हें इतना बड़ा पद मिलते देखकर।
  1851. 1:26:55नताशा ने जैसे ही विजय को बीच में अपनी
  1852. 1:26:57बात करते देखा तो वह फिर से विजय पर
  1853. 1:26:59भड़कती हुई बोली। तुम पूरे कुत्ते की दुम
  1854. 1:27:02ही हो जो सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा
  1855. 1:27:04है। जरूरी है कि तुम किसी दूसरे के बीच
  1856. 1:27:07में आकर उनके फटे में अपनी टांग राऊ ही।
  1857. 1:27:10मैं कुछ देर पहले की अपने व्यवहार के लिए
  1858. 1:27:12क्षमा चाहता हूं। मिस नताशा। पर मैं इस
  1859. 1:27:14शख्स की रगरग से वाकिफ हूं। पता नहीं कुछ
  1860. 1:27:17तो जादू किया है इसने आप पर जो आप इसकी
  1861. 1:27:19असलियत को देखना नहीं चाह रही। आपको नहीं
  1862. 1:27:22पता आपके आने से पहले यह मिस शिप्रा पर भी
  1863. 1:27:25अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था। पर
  1864. 1:27:28वहां तो उसकी दाल गली नहीं। पर आपको देखकर
  1865. 1:27:30लगता है इसने आप पर कोई तो जादू कर दिया
  1866. 1:27:33है। मिस्टर विजय शायद अभी थोड़ी देर पहले
  1867. 1:27:37आपको मिस्टर हर्षल मेहता की कही गई बात
  1868. 1:27:40ठीक से समझ में नहीं आई। आप क्यों मुझे
  1869. 1:27:42मजबूर कर रहे हैं कि मैं कोई सख्त कदम
  1870. 1:27:45आपके खिलाफ उठाऊं। नताशा कपूर की यह हार्ड
  1871. 1:27:48लाइन सुनकर विजय एकदम खामोश हो गया। अब
  1872. 1:27:52आगे क्या होगा? क्या नताशा को पता चलेगा
  1873. 1:27:55कि शौर्य शिप्रा का पति है? शिप्रा महसूस
  1874. 1:27:58कर रही थी कि अचानक ही इस पार्टी में
  1875. 1:28:01उसकीेंस बढ़ गई है। मेघना भी शिप्रा के
  1876. 1:28:05पास आ गई थी। वो भी इस बात को फील कर रही
  1877. 1:28:08थी कि आजकल किस्मत शिप्रा पर कुछ ज्यादा
  1878. 1:28:10ही मेहरबान हो गई थी। मेघना के लिए भी यह
  1879. 1:28:13बात हैरान कर देने वाली थी कि अचानक ही
  1880. 1:28:16राजा साहब ने बिना कोई पहले के पहचान के
  1881. 1:28:19शिप्रा को अपनी कंपनी में इतनी अहम
  1882. 1:28:21जिम्मेदारी कैसे दे दी। कारण उसे समझ नहीं
  1883. 1:28:24आया पर वह इसे शिप्रा की किस्मत ही कह
  1884. 1:28:26सकती थी। यही वह समय था जब हर्षल मेहता ने
  1885. 1:28:29भी आकर शिप्रा को बधाई दिया। दरअसल हर्षल
  1886. 1:28:32मेहता शौर्य का अनुसरण कर रहा था। वो यहां
  1887. 1:28:35इस पार्टी में शौर्य की पहचान तो उजागर कर
  1888. 1:28:37नहीं सकता था पर उसकी एक-एक एक्टिविटी पर
  1889. 1:28:40वह ध्यान गराए हुए था। हर्षल मेहता को पता
  1890. 1:28:42नहीं था कि शौर्य की शादी हो चुकी थी।
  1891. 1:28:44कहीं ना कहीं उसके दिल में यह बात घर कर
  1892. 1:28:46गई थी कि शौर्य जवान और हैंडसम है। अगर वह
  1893. 1:28:50उनकी बेटी को पसंद कर ले तो मानसी की
  1894. 1:28:52जिंदगी सवर जाएगी। क्योंकि हर्षल मेहता को
  1895. 1:28:55अपनी बेटी की खूबसूरती पर बड़ा गर्व था।
  1896. 1:28:57इसीलिए उनके दिल में कहीं ना कहीं यह
  1897. 1:28:59उम्मीद बंध गई थी कि अगर शौर्य उनकी बेटी
  1898. 1:29:02से मिल लेता है तो हो सकता है कि वह खुद
  1899. 1:29:04ही उसे पसंद करने लगे। पर वह देख रहे थे
  1900. 1:29:07कि पार्टी में आते ही नताशा कपूर शौर्य के
  1901. 1:29:10कुछ ज्यादा ही करीब आ गई थी। हर्षल मेहता
  1902. 1:29:12जानते थे कि जिस तरह शौर्य ने नताशा कपूर
  1903. 1:29:15की जान बचाई थी, उससे नताशा कपूर के दिल
  1904. 1:29:17में कहीं ना कहीं शौर्य के लिए एक लगाव
  1905. 1:29:19उत्पन्न हो गया था। पर उस समय तक हर्षल
  1906. 1:29:21मेहता को यह नहीं पता था कि शौर्य कितना
  1907. 1:29:24पैसे वाला है। पर अब जबकि वह शौर्य की
  1908. 1:29:27हकीकत से वाकिफ थे, तो अब उनको नताशा कपूर
  1909. 1:29:29का शौर्य के इतना करीब होना पसंद नहीं आ
  1910. 1:29:32रहा था। उनकी मजबूरी यह थी कि ना ही वह
  1911. 1:29:35नताशा कपूर से इस बारे में बोल सकते थे और
  1912. 1:29:37ना ही अपनी बेटी से यह कह सकते थे कि वह
  1913. 1:29:40शौर्य पर ध्यान दें। क्योंकि शौर्य ने
  1914. 1:29:42उन्हें खास करके यह हिदायत दी थी कि वह
  1915. 1:29:44उनकी हकीकत किसी को भी ना बताएं। चाहे वह
  1916. 1:29:47उनकी बेटी ही क्यों ना हो। हर्षल मेहता को
  1917. 1:29:50जो एक उम्मीद थी कि शौर्य शायद उनकी बेटी
  1918. 1:29:52की खूबसूरती देखकर खुद ही उसे पसंद करने
  1919. 1:29:55लगे। अब इसकी पॉसिबिलिटी भी कम ही दिख रही
  1920. 1:29:57थी क्योंकि नताशा कपूर पहले से ही उसके
  1921. 1:30:00करीब थी और वह भी बहुत खूबसूरत थी। इसीलिए
  1922. 1:30:03इसकी संभावना कम ही थी कि नताशा कपूर के
  1923. 1:30:06होते हुए शौर्य का ध्यान मानसी की तरफ
  1924. 1:30:08जाए। हर्षल मेहता को अभी तक शौर्य और राजा
  1925. 1:30:11साहब के बीच के संबंध के बारे में भी पता
  1926. 1:30:13नहीं था। पर वो इतना तो समझ गया था कि
  1927. 1:30:15किसी ना किसी तरह शौर्य राजा साहब के भी
  1928. 1:30:18करीब है। तभी तो शौर्य को पहले से ही पता
  1929. 1:30:20था कि आज की पार्टी में राजा साहब भी
  1930. 1:30:22आएंगे। क्योंकि जब हर्षल मेहता ने राजा
  1931. 1:30:24साहब को इस पार्टी में इनवाइट किया था तो
  1932. 1:30:26उन्हें राजा साहब के इस पार्टी में आने की
  1933. 1:30:28संभावना कम ही थी। पर राजा साहब आए। इसका
  1934. 1:30:31मतलब राजा साहब उनके कारण नहीं शौर्य के
  1935. 1:30:34कारण इस पार्टी में आए थे। पार्टी अब अपने
  1936. 1:30:37पूरे शबाव पर था। शिप्रा मेघना के साथ ही
  1937. 1:30:40पार्टी को एंजॉय कर रही थी। उसे राहुल का
  1938. 1:30:42ध्यान आया। अगर वह आता तो वह नताशा कपूर
  1939. 1:30:45से मिल सकता था। पर अब सही मायने में
  1940. 1:30:47शिप्रा के दिल में नताशा कपूर को लेकर कोई
  1941. 1:30:49उल्लास नहीं था और इसका कारण यह था कि वह
  1942. 1:30:52जब से आई थी तब से शौर्य के आसपास ही
  1943. 1:30:54मर्डरा रही थी। यह बात शिप्रा के दिल में
  1944. 1:30:57कहीं ना कहीं नताशा कपूर के लिए नापसंद
  1945. 1:30:59भरती जा रही थी। मेघना ने इस बात को नोटिस
  1946. 1:31:02किया तो वो शिप्रा से बोली क्या हुआ? कहीं
  1947. 1:31:05तुम्हें नताशा कपूर से जलन तो नहीं हो
  1948. 1:31:07रही? तुम्हें तो बड़ा मजा आ रहा है ना यह
  1949. 1:31:09सब देखकर। शिप्रा मेघना की बात से चिढ़कर
  1950. 1:31:12बोली तुम भी हद करती हो। मुझे भला मजा
  1951. 1:31:15क्यों आएगा? मैं तो तुम्हारे चेहरे पर
  1952. 1:31:17स्पष्ट जलन के भाव को देख सकती हूं। पर
  1953. 1:31:19मुझे यह भी पता है कि तुम इस बात को
  1954. 1:31:22मानोगी नहीं। मेघना गौर से शिप्रा के
  1955. 1:31:24चेहरे को देखती हुई बोली। तुम खुद को कुछ
  1956. 1:31:27ज्यादा ही होशियार नहीं समझ रही। तुम यह
  1957. 1:31:29कैसे कह सकती हो कि मुझे जलन हो रही है?
  1958. 1:31:31शिप्रा शौर्य और नताशा की तरफ देखती हुई
  1959. 1:31:34बोली। इस समय नताशा शौर्य के साथ खाने के
  1960. 1:31:37स्टॉल के पास थी और इसी समय नताशा ने अपने
  1961. 1:31:39हाथ से एक प्लेट उठाकर शौर्य की तरफ
  1962. 1:31:41बढ़ाया था। मैं ऐसा इसलिए कह सकती हूं
  1963. 1:31:44क्योंकि इस समय भी तुम बात मुझसे कर रही
  1964. 1:31:46हो और तुम्हारा ध्यान अभी भी नताशा और
  1965. 1:31:49शौर्य की तरफ ही है। यहां पार्टी में इतने
  1966. 1:31:51लोग हैं फिर भी तुम्हारा ध्यान उन दोनों
  1967. 1:31:54की तरफ ही क्यों है? मेघना भी उन दोनों की
  1968. 1:31:56तरफ देखती हुई बोली। मेघना की बात सुनकर
  1969. 1:32:00शिप्रा मेघना की ओर देखने लगी। बहुत सही
  1970. 1:32:03कहा था मेघना ने। शिप्रा को अपनी गलती का
  1971. 1:32:06एहसास हुआ। वो जितना ध्यान शौर्य और नताशा
  1972. 1:32:10से हटाना चाह रही थी उतना ही उसकी तरफ और
  1973. 1:32:13आकर्षित हो रही थी। उसके मन में बार-बार
  1974. 1:32:16वो दृश्य कौद रही थी जब नताशा ने शौर्य का
  1975. 1:32:19हाथ पकड़ कर उसको खींचती हुई अपने साथ ले
  1976. 1:32:22गई थी। मेघना ने जब देखा कि शिप्रा उसी की
  1977. 1:32:26घुर रही है तो वह मुस्कुराती हुई फिर से
  1978. 1:32:28बोली अब तुम ऐसे देखकर मुझे डरा क्यों रही
  1979. 1:32:31हो? अगर ऐसे लुक से कभी श्रवण की ओर देख
  1980. 1:32:34लोगी तो शायद वह किसी दूसरी लड़की के पास
  1981. 1:32:37जाने की हिम्मत भी नहीं करेगा। तुम्हें
  1982. 1:32:40क्या लगता है कि उन दोनों के बीच में कुछ
  1983. 1:32:42चल रहा है? इस बार शिप्रा की आवाज में एक
  1984. 1:32:46डर झलक रहा था। जैसे उसका कोई कीमती चीज
  1985. 1:32:49उससे दूर जा रहा है। मेघना ने शिप्रा की
  1986. 1:32:52चिंता को साफ महसूस किया। वो शिप्रा से
  1987. 1:32:55ईमानदारी से बोली। देखो मैं श्रवण के बारे
  1988. 1:32:58में पक्का यकीन से तो नहीं कह सकती कि
  1989. 1:33:01उसके दिल में नताशा के लिए कुछ है या
  1990. 1:33:03नहीं। पर यह पक्का यकीन से कह सकती हूं कि
  1991. 1:33:05नताशा के दिल में श्रवण के लिए जरूर कुछ
  1992. 1:33:08फीलिंग है। और सबसे बड़ी बात यह है कि
  1993. 1:33:11मुझे नहीं लगता कि वह इस बात को छुपाने की
  1994. 1:33:13कोई कोशिश भी करती है। सच कहूं तो मुझे भी
  1995. 1:33:16ऐसा ही लग रहा है। पर तुम्हें नहीं लगता
  1996. 1:33:19कि श्रवण ज्यादा समय उससे दूर नहीं रह
  1997. 1:33:21पाएगा। शिप्रा किसी आशंका के अधीन होकर
  1998. 1:33:24बोली। मेघना ने शिप्रा के चिंतित चेहरे की
  1999. 1:33:27तरफ देखा और बोली, तुम्हें ऐसा क्यों लगा
  2000. 1:33:30कि वह ज्यादा समय उससे दूर नहीं रह सकेगा।
  2001. 1:33:33आखिर वो है तो एक मर्द ही और नताशा है भी
  2002. 1:33:36तो खूबसूरत। तो फिर कितना समय वो उससे दूर
  2003. 1:33:39रह पाएगा? शिप्रा की बेबसी उसकी आवाज में
  2004. 1:33:42साफ झलक रही थी। क्या पता शायद तुम अगर
  2005. 1:33:46चाहो तो ऐसा ना भी हो। मेघना रहस्यमई स्वर
  2006. 1:33:49में बोली। शिप्रा ने मेघना की बात को सुना
  2007. 1:33:52तो वह उसकी आंखों में देखती हुई बोली क्या
  2008. 1:33:55मतलब हुआ तुम्हारी इस बात का मेरे चाहने
  2009. 1:33:58से ऐसा कैसे हो जाएगा अगर तुम श्रवण के
  2010. 1:34:01साथ अपनी दूरियों को खत्म कर दो तो मुझे
  2011. 1:34:03नहीं लगता कि फिर श्रवण को नताशा के करीब
  2012. 1:34:06जाने की कोई जरूरत होगी बोलते वक्त मेघना
  2013. 1:34:09के चेहरे पर एक मिस्टीरियस स्माइल आ गई थी
  2014. 1:34:12कुछ भी तुम्हें पता है यह इतना आसान नहीं
  2015. 1:34:16है फिर तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो हम
  2016. 1:34:19दोनों के बीच बीच की कंडीशन पहले ही
  2017. 1:34:21डिसाइड हो गई है। शिप्रा इनकार में सर
  2018. 1:34:23हिलाती हुई बोली। शिप्रा को इनकार में सर
  2019. 1:34:26हिलाते देखकर मेघना बोली जब तुम्हें उसके
  2020. 1:34:30करीब जाना ही नहीं है तो फिर तुम्हें
  2021. 1:34:31नताशा के श्रवण के करीब जाने से जलन क्यों
  2022. 1:34:34हो रही है? मैंने कब कहा कि मुझे नताशा से
  2023. 1:34:37जलन हो रही है। यह तुम ही हो जो यह साबित
  2024. 1:34:41करने पर तुली हो कि मुझे नताशा को श्रवण
  2025. 1:34:43के पास देखकर जलन हो रही है। शिप्रा उल्टा
  2026. 1:34:46मेघना पर ही दोषारोपण करती हुई बोली
  2027. 1:34:49तुम्हें समझना इंपॉसिबल है। तुम्हारा घर
  2028. 1:34:52उजाड़ने के लिए तुम्हें किसी दुश्मन की
  2029. 1:34:54जरूरत नहीं है। उसके लिए तुम खुद ही काफी
  2030. 1:34:57हो। मेघना तंज भरे स्वर में बोली, क्या
  2031. 1:35:01तुम मुझे श्राप दे रही हो? मेघना के चेहरे
  2032. 1:35:04पर नाराजगी देखकर शिप्रा मासूमियत से
  2033. 1:35:06बोली, मेघना ने जब इस तरह से शिप्रा को
  2034. 1:35:09खुद से सवाल करते देखा तो वो तुरंत
  2035. 1:35:11मुस्कुराती हुई बोली, "क्या करूं मैं
  2036. 1:35:14तुम्हारा?" काश इसी मासूमियत से कभी श्रवण
  2037. 1:35:17से बात करोगी तो वह तुम पर लट्टू हो
  2038. 1:35:19जाएगा। फिर तुम्हारा यह डर भी खत्म हो
  2039. 1:35:22जाएगा कि वो किसी और लड़की के करीब जा
  2040. 1:35:24पाएगा। उसी समय दोनों को एक आवाज सुनाई
  2041. 1:35:28दिया। क्या तुम दोनों को खाना नहीं खाना
  2042. 1:35:30है? मेघना ने पलट कर आवाज की दिशा में
  2043. 1:35:33देखा तो उसने सामने श्रवण को देखा जिसके
  2044. 1:35:36हाथ में खाने की प्लेट थी जिसमें से वह खा
  2045. 1:35:38रहा था। श्रवण को अपने सामने देखकर मेघना
  2046. 1:35:41बोली क्यों नहीं खाना है पर हमें कोई हाथ
  2047. 1:35:45में सजाकर प्लेट नहीं देने वाला है ना
  2048. 1:35:48शौर्य मेघना की कटाक्ष को समझ गया फिर भी
  2049. 1:35:51वो उसी के अंदाज में बोला तो क्या तुम
  2050. 1:35:54चाहती हो कि तुम्हें भी कोई प्लेट सजा कर
  2051. 1:35:56दे
  2052. 1:35:57ऐसा भी नहीं है मेरा काम तो इस प्लेट से
  2053. 1:36:00भी चल सकता है यह कहते हुए मेघना ने देखा
  2054. 1:36:03कि शौर्य के प्लेट में एक बाउल में दो
  2055. 1:36:06गुलाब जामुन थे उसने बिना किसी अनुमति के
  2056. 1:36:09उसके प्लेट से वह बाउल उठा लिया। गुलाब
  2057. 1:36:12जामुन की उस बाउल के अंदर ही चम्मच भी रखा
  2058. 1:36:14हुआ था। मेघना ने उस बाउल से एक गुलाब
  2059. 1:36:17जामुन का एक टुकड़ा शिप्रा हैरानी से
  2060. 1:36:20मेघना की इस हरकत को देखती रह गई। शौर्य
  2061. 1:36:24भी आश्चर्य से मेघना को देखता हुआ बोला।
  2062. 1:36:28मुझे नहीं पता था कि तुम्हें गुलाब जामुन
  2063. 1:36:30इतना पसंद है। सिर्फ मुझे ही नहीं शिप्रा
  2064. 1:36:34को भी गुलाब जामुन बहुत पसंद है। मेघना
  2065. 1:36:37शिप्रा की ओर देखती हुई बोली। जबकि अब
  2066. 1:36:40मेघना की इस हरकत को देखकर शिप्रा को
  2067. 1:36:42मेघना से भी जलन होने लगी। उसे ऐसा लगा
  2068. 1:36:46जैसे मेघना ने खुलेआम उसकी प्रॉपर्टी पर
  2069. 1:36:48अपना हक जमा लिया। जब तुम दोनों को यह
  2070. 1:36:51इतना ही पसंद है तो फिर यहां एक साइड में
  2071. 1:36:54क्या कर रही हो? जाओ और जाकर खाना खा लो।
  2072. 1:36:58शौर्य मुस्कुराते हुए बोला, शौर्य की बात
  2073. 1:37:01सुनकर शिप्रा और मेघना भी खाने की टेबल की
  2074. 1:37:03तरफ बढ़ गई। अभी गुलाब जामुन की बाउल
  2075. 1:37:06मेघना के हाथ में ही था। जैसे ही दोनों
  2076. 1:37:08दो-चार कदम आगे बढ़ी, शिप्रा ने आगे बढ़कर
  2077. 1:37:11मेघना के हाथ के बाउल से दूसरा गुलाब
  2078. 1:37:13जामुन का पीस निकालकर अपने मुंह में रख
  2079. 1:37:16लिया। मेघना ने अपना हाथ झटकने की कोशिश
  2080. 1:37:19की थी। पर शिप्रा उससे तेज निकली और मेघना
  2081. 1:37:22के कोई हरकत करने से पहले ही गुलाब जामुन
  2082. 1:37:24को खा चुकी थी। तुमसे थोड़ा और सब्र नहीं
  2083. 1:37:28हुआ। खाने की मेज की ओर तो जा ही रही थी
  2084. 1:37:31तो यह झपटा झपटी करने की क्या जरूरत थी?
  2085. 1:37:34मेघना शिप्रा से बोली यह तो तुम्हें सोचना
  2086. 1:37:37चाहिए था। तुम्हें क्या जरूरत थी श्रवण की
  2087. 1:37:40प्लेट से उसकी मिठाई की बाउल लेने की?
  2088. 1:37:42शिप्रा शिकायती लहजे में बोली। ओह हेलो।
  2089. 1:37:46मैंने उसकी प्लेट से मिठाई की बाउल लिया
  2090. 1:37:48तो फिर इससे तुम्हें क्या फर्क पड़ता है?
  2091. 1:37:51मेघना बोली तुम्हें शर्म नहीं आती? वो
  2092. 1:37:54तुम्हारा जीजा है। शिप्रा शिकायत करती हुई
  2093. 1:37:57बोली अरे जीजा है इसीलिए तो उनके प्लेट से
  2094. 1:38:00वो बाउल लिया और फिर मेरा तो रिश्ता श्रवण
  2095. 1:38:03के साथ ऐसा है कि मेरा उसके साथ ठिठोली
  2096. 1:38:06करना तो बनता है। पर तुम्हें क्या फर्क
  2097. 1:38:08पड़ता है? नताशा जब उसके करीब जाती है तब
  2098. 1:38:11तो तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई और
  2099. 1:38:14लड़की भी उसके पास जाए तुम्हें कोई फर्क
  2100. 1:38:16नहीं पड़ता। तो फिर मेरा उसके साथ थोड़ी
  2101. 1:38:19ठिठोली करने से तुम्हें क्यों तकलीफ हो
  2102. 1:38:20रही है? अभी तो तुमने कहा था कि श्रवण
  2103. 1:38:23पूरी तरह स्वतंत्र है। वो किसके साथ होता
  2104. 1:38:26है या क्या करता है इससे तुम्हें कोई फर्क
  2105. 1:38:29नहीं पड़ता। मेघना शिप्रा को ताना मारती
  2106. 1:38:32हुई बोली। मुझे बाहर वालों से फर्क नहीं
  2107. 1:38:35पड़ता। पर जब मेरी अपनी बहन मेरे पति के
  2108. 1:38:38साथ ठिठोली करेगी तो मुझे फर्क पड़ता है।
  2109. 1:38:41शिप्रा मेघना पर तंज कसती हुई बोली यह
  2110. 1:38:44क्या बात हुई? तुम्हें तो उससे कोई मतलब
  2111. 1:38:46है नहीं। अगर तुम्हारी बहन अपने जीजा से
  2112. 1:38:49थोड़ी ठिठोली करती है तो तुम्हें वो भी
  2113. 1:38:51पसंद नहीं है। मेघना चिढ़ती हुई बोली।
  2114. 1:38:55शिप्रा मेघना की बात से थोड़ी असहज हुई।
  2115. 1:38:59बात तो मेघना ने सही कहा था। जब उसे दूसरी
  2116. 1:39:02किसी लड़की के शौर्य के साथ होने से फर्क
  2117. 1:39:06नहीं पड़ रहा था तो नताशा के शौर्य से
  2118. 1:39:08थोड़ी ठिठोली करने से क्यों फर्क पड़ रहा
  2119. 1:39:11था। शिप्रा ने इस बारे में सोचा तो उसने
  2120. 1:39:14महसूस किया कि उसे फर्क तो किसी भी लड़की
  2121. 1:39:17के शौर्य के पास होने से पड़ रहा था। पर
  2122. 1:39:20वो दूसरी किसी लड़की से अपनी नाराजगी जता
  2123. 1:39:22नहीं सकती थी। पर मेघना से तो वह अपनी बात
  2124. 1:39:25कह सकती थी। बस यही कारण था। शिप्रा ने भी
  2125. 1:39:29मेघना के साथ खाना खा लिया। अब जब वहां से
  2126. 1:39:32जाने की बात हुई तो उसने मेघना से कहा
  2127. 1:39:35श्रवण से भी बात कर लो। अगर उसे घर वापस
  2128. 1:39:37ही जाना है तो साथ में चल लेते हैं। उसने
  2129. 1:39:40देखा इस समय श्रवण मेनका और विक्रम के साथ
  2130. 1:39:43राजा साहब के पास एक साइड में बातें कर
  2131. 1:39:46रहा था। मेघना ने शौर्य की तरफ देखते हुए
  2132. 1:39:49कहा, तुम्हें कहीं से श्रवण की बॉडी
  2133. 1:39:52लैंग्वेज देखकर यह लगता है कि वो विक्रम
  2134. 1:39:54के लिए काम करता होगा। उल्टा मुझे तो
  2135. 1:39:57कभी-कभी यह लगता है कि शायद विक्रम ही
  2136. 1:40:00उसके लिए काम करता हो। कुछ भी कहां मिस्टर
  2137. 1:40:04विक्रम और कहां श्रवण तुम ऐसा सोच भी कैसे
  2138. 1:40:07सकती हो? शिप्रा प्रतिरोध में बोली मैं
  2139. 1:40:10ऐसा सोचना भी नहीं चाहती। पर तुमने यह
  2140. 1:40:13महसूस किया कि मिस्टर विक्रम ने डायरेक्ट
  2141. 1:40:16श्रवण से कोई भी काम करने के लिए कहा हो?
  2142. 1:40:18या तुमने ऐसा कोई अंतर देखा है श्रवण के
  2143. 1:40:21एटीट्यूड में कि वह विक्रम के सामने कभी
  2144. 1:40:24सावधान की मुद्रा में खड़ा भी हुआ हो।
  2145. 1:40:26जबकि यह स्वाभाविक होता है कि कोई भी
  2146. 1:40:29एंप्लॉय अपने बॉस के सामने स्वाभाविक रूप
  2147. 1:40:32से एक अदब की मुद्रा में खड़ा हो ही जाता
  2148. 1:40:35है। पर मैंने यह अंतर कभी भी श्रवण के
  2149. 1:40:37अंदर नहीं देखा है। अभी भी देखो राजा साहब
  2150. 1:40:41का जितना ध्यान श्रवण की तरफ है, उतना
  2151. 1:40:43किसी और की तरफ नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं
  2152. 1:40:46है कि राजा साहब ने जो तुम्हें जॉब का ऑफर
  2153. 1:40:49दिया है, वह श्रवण के कारण ही दिया है।
  2154. 1:40:52मेघना की बात सुनकर शिप्रा भी गौर से उन
  2155. 1:40:55सब की तरफ देखने लगी। उसे भी यह बात अजीब
  2156. 1:40:58लग रहा था। उसने भी नोटिस किया कि राजा
  2157. 1:41:01साहब का श्रवण को देखने का अंदाज बाकी
  2158. 1:41:03सबको देखने के अंदाज से अलग था। वह जहां
  2159. 1:41:06खड़ी थी वहां से राजा साहब की बातें सुन
  2160. 1:41:09तो नहीं सकती थी कि उनके और श्रवण के बीच
  2161. 1:41:12में क्या बातें हो रही है। पर यहां से
  2162. 1:41:14देखकर वह इतना तो अनुमान लगा सकती थी कि
  2163. 1:41:17राजा साहब और शौर्य के बीच की बातचीत में
  2164. 1:41:19वहां मौजूद बाकी लोग मात्र दर्शक ही नजर आ
  2165. 1:41:23रहे थे। वो मेघना की ओर देखकर बोली वैसे
  2166. 1:41:26क्या बातें हो रही होगी उन सबके बीच?
  2167. 1:41:29मेघना ने शिप्रा की बात सुनकर कहा, अब यह
  2168. 1:41:32मुझे कैसे पता होगा कि उनके बीच क्या बात
  2169. 1:41:35हो रही होंगी? चलो उनके पास चलते हैं।
  2170. 1:41:38इतना कहकर शिप्रा उनकी ओर बढ़ गई। अब
  2171. 1:41:41शिप्रा के मन में यह जानने की प्रबल इच्छा
  2172. 1:41:43हो रही थी कि राजा साहब और श्रवण के बीच
  2173. 1:41:46में क्या संबंध था? क्या ऐसे ही उनके बीच
  2174. 1:41:49में जाना ठीक होगा? मेघना ने शिप्रा से
  2175. 1:41:51पूछा। हम बोल देंगे कि अब हम यहां से जा
  2176. 1:41:54रहे थे। इसीलिए जाने से पहले एक बार उनसे
  2177. 1:41:57मिलने आ गए। शिप्रा ने जवाब दिया। जबकि
  2178. 1:42:01शौर्य राजा साहब को उनके शिप्रा को जॉब की
  2179. 1:42:03ऑफर देने के लिए सुना रहा था कि वह
  2180. 1:42:05जानबूझकर शिप्रा और उनके बीच में आ रहे
  2181. 1:42:08थे। जबकि वह अभी नहीं चाहता था कि शिप्रा
  2182. 1:42:11उसकी हकीकत से वाकिफ हो। पर राजा साहब की
  2183. 1:42:14जल्दबाजी से इस राज से पर्दा उठ सकता था।
  2184. 1:42:17इस बात पर राजा साहब ने भी शौर्य को
  2185. 1:42:19आश्वस्त किया कि उनके कारण शिप्रा को
  2186. 1:42:22शौर्य की हकीकत पता नहीं चलेगी। इसी समय
  2187. 1:42:25मेनका की निगाह वहां आती हुई शिप्रा पर
  2188. 1:42:28गई। उसने शौर्य को अलर्ट किया कि शिप्रा
  2189. 1:42:31इसी ओर आ रही है। राजा साहब भी शिप्रा की
  2190. 1:42:34ओर देखने लगे। शिप्रा उनके पास पहुंची।
  2191. 1:42:37शिप्रा ने नोट किया कि उसके वहां पहुंचते
  2192. 1:42:39ही उनके बीच हो रही बातें बंद हो गई।
  2193. 1:42:42शिप्रा को थोड़ा अजीब भी लगा। पर जब वो
  2194. 1:42:45वहां पहुंच गई थी तो उसको वहां आने का कुछ
  2195. 1:42:47तो रीजन देना था। इसीलिए उसने राजा साहब
  2196. 1:42:50से कहा। दरअसल मैं यहां से जा रही थी तो
  2197. 1:42:53सोचा आपसे एक बार मिलते हुए जाऊं। तो राजा
  2198. 1:42:56साहब ने उसकी ओर देखते हुए कहा अच्छा किया
  2199. 1:43:00मैं भी अब निकल ही रहा हूं। पर ध्यान रखना
  2200. 1:43:03तुम कल समय से हमारे ऑफिस आ जाना। वहां
  2201. 1:43:06कांता प्रसाद तुम्हें सब कुछ अच्छे से
  2202. 1:43:08समझा देगा। जी मैं पहुंच जाऊंगी। शिप्रा
  2203. 1:43:12ने जवाब दिया। जब शिप्रा की बात पूरी हो
  2204. 1:43:15गई तो उसे लगा अब तो उसे यहां से जाना
  2205. 1:43:18होगा। पर वो यहां शौर्य को अकेले छोड़कर
  2206. 1:43:21जाना नहीं चाहती थी। उसने मेघना की ओर
  2207. 1:43:23देखा कि वह शौर्य से साथ चलने के लिए
  2208. 1:43:26पूछे। पर मेघना ने शौर्य से इस बारे में
  2209. 1:43:28कुछ नहीं पूछा। तो मजबूरन शिप्रा को ही
  2210. 1:43:31पूछना पड़ा।
  2211. 1:43:33शौर्य को उम्मीद नहीं था कि शिप्रा उससे
  2212. 1:43:36अपने साथ चलने के लिए पूछेंगी। इसलिए उसे
  2213. 1:43:40हैरानी भी हुई। वैसे तो शौर्य को भी वापस
  2214. 1:43:43घर ही जाना था। पर उसे मेनका के साथ पहले
  2215. 1:43:46राजकमल होटल जाना था। फिर वहां से वह अपनी
  2216. 1:43:50कार लेकर अपने घर पहुंचता। लेकिन जब उसने
  2217. 1:43:53शिप्रा को उससे यह पूछते देखा कि क्या वो
  2218. 1:43:56उसके साथ चल रहा है? तो उसे थोड़ी खुशी भी
  2219. 1:43:59हुई। वो भी तुरंत तैयार हो गया और बोला
  2220. 1:44:03ठीक है। जब तुम चल ही रही हो तो मैं भी
  2221. 1:44:06साथ हो लेता हूं। वैसे भी मेरी कार होटल
  2222. 1:44:08राजकमल में खड़ी है। जब राजा जी ने शिप्रा
  2223. 1:44:12को शौर्य से यह पूछते देखा कि क्या वो
  2224. 1:44:15उसके साथ चल रहा है? तो वो अपने चेहरे पर
  2225. 1:44:18थोड़ा आश्चर्य लाते हुए बोले शौर्य
  2226. 1:44:22तुम्हारे साथ कहां जाएगा? राजा साहब यह
  2227. 1:44:25जताना चाहते थे कि उन्हें शिप्रा और शौर्य
  2228. 1:44:28के रिश्ते के बारे में कुछ नहीं पता।
  2229. 1:44:30इसलिए उन्होंने यह सवाल किया। पर शिप्रा
  2230. 1:44:33राजा साहब की दूसरी बात से हैरान थी। राजा
  2231. 1:44:36साहब ने श्रवण को शौर्य कहकर पुकारा था।
  2232. 1:44:39जबकि शिप्रा शौर्य को श्रवण के नाम से
  2233. 1:44:42जानती थी। एक पल को शिप्रा को यह भ्रम भी
  2234. 1:44:45हुआ कि राजा साहब किसी और के बारे में तो
  2235. 1:44:47नहीं पूछ रहे हैं। पर जिस तरह से उन्होंने
  2236. 1:44:49शौर्य की ओर देखकर ही पूछा था। इससे यह
  2237. 1:44:52बात तो पक्की हो गई थी कि राजा साहब ने
  2238. 1:44:54श्रवण को ही शौर्य कहकर पुकारा था। शिप्रा
  2239. 1:44:58ने राजा साहब की ओर देखते हुए कहा आप
  2240. 1:45:00शौर्य किसको कह रहे हैं? इसका तो नाम
  2241. 1:45:03श्रवण है। राजा साहब इस बात से अनजान थे
  2242. 1:45:06कि यहां पर सभी शौर्य को श्रवण के नाम से
  2243. 1:45:09जानते हैं। पर अब जबकि उन्होंने यह बात
  2244. 1:45:12बोल दिया था तो इसको पलटा तो जा नहीं सकता
  2245. 1:45:15था। इसलिए उन्हें समझ नहीं आया कि वो इस
  2246. 1:45:18बात का क्या जवाब दें? तो शौर्य ही बीच
  2247. 1:45:20में आते हुए बोला। दरअसल मेरा सर्टिफिकेट
  2248. 1:45:23का नाम शौर्य ही है। इसीलिए ऑफिस में सभी
  2249. 1:45:26मुझे शौर्य के नाम से ही बुलाते हैं।
  2250. 1:45:28इसलिए राजा साहब को मेरा यही नाम पता है।
  2251. 1:45:31लेकिन जो लोग मेरे आसपास या करीब हैं, वह
  2252. 1:45:34सब मुझे सरवन के नाम से ही जानते हैं।
  2253. 1:45:37अच्छा मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा एक
  2254. 1:45:39दूसरा नाम श्रवण भी है। पर बात तो वही है
  2255. 1:45:42कि शिप्रा तुम्हें अपने साथ चलने के लिए
  2256. 1:45:44क्यों कह रही है। दरअसल राजा साहब शिप्रा
  2257. 1:45:48और शौर्य के मुंह से उनके सामने यह हकीकत
  2258. 1:45:50कबूल करवाना चाहते थे कि वह दोनों
  2259. 1:45:52पति-पत्नी हैं। राजा साहब के सवाल पर
  2260. 1:45:55शौर्य चुप ही रहा। वो देखना चाहता था कि
  2261. 1:45:58शिप्रा इस बात का क्या जवाब देती है।
  2262. 1:46:01शिप्रा को भी यह मौका सही जान पड़ा कि वह
  2263. 1:46:03कम से कम इन लोगों के सामने तो अपनी हकीकत
  2264. 1:46:06बता ही दे ताकि बाद में कोई कंफ्यूजन ना
  2265. 1:46:08रहे। क्योंकि वह अगले दिन से ही राजा साहब
  2266. 1:46:11के यहां काम करने वाली थी। तो वह चाहती थी
  2267. 1:46:14कि राजा साहब को भी पता चल जाए कि वह पहले
  2268. 1:46:16से शादीशुदा है और शौर्य ही उसका पति है।
  2269. 1:46:20यही सोचकर उसने राजा साहब से कहा दरअसल हम
  2270. 1:46:23दोनों पति-पत्नी हैं। इसलिए श्रवण को भी
  2271. 1:46:25तो घर ही जाना है। इसलिए मैंने इससे घर
  2272. 1:46:28जाने के बारे में पूछा। राजा साहब यह
  2273. 1:46:31जानकर कि वह दोनों पति-पत्नी हैं। अपने
  2274. 1:46:33चेहरे पर आश्चर्य का भाव लाकर शौर्य से
  2275. 1:46:36बोले, शौर्य, तुमने अभी तक बताया क्यों
  2276. 1:46:39नहीं था कि शिप्रा तुम्हारी पत्नी है।
  2277. 1:46:41चलो, यह भी अच्छी बात है कि तुम्हारी
  2278. 1:46:44पत्नी अब से मेरे यहां काम करेंगी। शिप्रा
  2279. 1:46:47को भी लगा कि उसके सर से एक बहुत बड़ा बोझ
  2280. 1:46:49हट गया। वो पहले से चाहती थी कि जितने
  2281. 1:46:52ज्यादा लोगों को पता चल जाए कि शौर्य उसका
  2282. 1:46:55पति है, यह उसके लिए अच्छा ही होगा।
  2283. 1:46:58क्योंकि फिर लड़कियां उसके करीब जाने की
  2284. 1:47:00कोशिश नहीं करेगी। एक्चुअली वह यह बात
  2285. 1:47:02इसलिए भी अभी यहां बताना चाह रही थी
  2286. 1:47:05क्योंकि उसे लग रहा था कि कहीं मेनका भी
  2287. 1:47:07शौर्य के करीब ना हो। इसलिए वह मेनका के
  2288. 1:47:10दिमाग में भी यह बात डाल देना चाहती थी कि
  2289. 1:47:13वह जान ले कि शौर्य और शिप्रा दोनों
  2290. 1:47:15पति-पत्नी हैं। शौर्य को खुशी हो रही थी
  2291. 1:47:18कि शिप्रा ने खुलेआम सबके सामने उसको अपने
  2292. 1:47:21पति के रूप में स्वीकार किया था। वो यही
  2293. 1:47:24तो चाहता था कि शिप्रा खुद सबके सामने इस
  2294. 1:47:27बात को स्वीकार करे। पर अभी भी उसे इस बात
  2295. 1:47:30का इंतजार था कि कब शिप्रा उससे अपने
  2296. 1:47:32प्यार का इजहार करती है। सच कहूं तो तुम
  2297. 1:47:36दोनों साथ में बहुत अच्छे लगोगे। कांता
  2298. 1:47:39प्रसाद ने भी शौर्य और शिप्रा की तारीफ
  2299. 1:47:41करते हुए कहा पर एक बात है जो मुझे समझ
  2300. 1:47:44नहीं आ रहा है कि जब तुम दोनों पति-पत्नी
  2301. 1:47:46हो तो फिर एक साथ क्यों नहीं थे? मैं
  2302. 1:47:49क्या? कोई भी यहां तुम दोनों को देखकर यह
  2303. 1:47:52नहीं समझ सकता था कि तुम दोनों पतिपत्नी
  2304. 1:47:54हो सकते हो। शौर्य समझ गया कि कांता
  2305. 1:47:57प्रसाद जानबूझकर इस बात को ज्यादा तुल दे
  2306. 1:48:00रहे हैं ताकि वे दोनों इस बारे में ज्यादा
  2307. 1:48:02बात करें और जो उन दोनों के रिश्ते के बीच
  2308. 1:48:05में थोड़ी सी दूरी है वो खत्म हो सके।
  2309. 1:48:08कांता प्रसाद जी हम दोनों की शादी जो है
  2310. 1:48:11वह कोई आम शादी नहीं है। इसमें बहुत सारे
  2311. 1:48:14पेंच हैं। अभी मैं अगर आपको समझाना भी
  2312. 1:48:16चाहूं तो यह इतनी आसानी से समझ में आने
  2313. 1:48:19वाला नहीं है। इसलिए अभी इस बात को छोड़ते
  2314. 1:48:22हैं। आप भी शायद लेट हो रहे हैं। इसलिए
  2315. 1:48:24अभी हम यहां से निकलते हैं। शौर्य एक तरह
  2316. 1:48:28से कांता प्रसाद को वार्निंग देते हुए
  2317. 1:48:30बोला कि अब आप इस बात को यहीं विराम दे
  2318. 1:48:33दीजिए। शौर्य की बात सुनकर कांता प्रसाद
  2319. 1:48:36जी मुस्कुराते हुए बोले कोई बात नहीं मैं
  2320. 1:48:39इस बारे में तसल्ली से शिप्रा से बाद में
  2321. 1:48:42बात कर लूंगा। इसके बाद कांता प्रसाद जी
  2322. 1:48:45राजा साहब के साथ पार्टी से चले गए। शौर्य
  2323. 1:48:48भी शिप्रा के पास आया और बोला तो अब चलें।
  2324. 1:48:52शौर्य अब इसलिए भी जल्दी करना चाहता था
  2325. 1:48:54क्योंकि वह समझ रहा था कि अगर एक बार फिर
  2326. 1:48:57से नताशा ने उसे पकड़ लिया तो फिर वह इतनी
  2327. 1:49:00जल्दी जा नहीं पाएगा। या हो सकता है कि
  2328. 1:49:03नताशा के साथ उसे उसके होटल जाना पड़े।
  2329. 1:49:06उसने देखा था कि नताशा अभी रत्नाकर
  2330. 1:49:08शेट्टी, हर्षल मेहता और बलवंत राय के साथ
  2331. 1:49:11मीटिंग कर रही थी। इसलिए यह समय उसे यहां
  2332. 1:49:14से जाने के लिए उचित जान पड़ा। यहां से
  2333. 1:49:17जाने के बाद वो नताशा से बात कर लेगा। ऐसा
  2334. 1:49:19उसने सोचा। शौर्य विक्रम की और मुरा और
  2335. 1:49:22विक्रम से बोला। ठीक है सर मैं अभी निकलता
  2336. 1:49:25हूं। कल आपसे मिलूंगा। शौर्य की बात सुनकर
  2337. 1:49:29विक्रम के चेहरे पर हल्का सा आश्चर्य का
  2338. 1:49:31भाव भी प्रकट हुआ। पर जल्दी ही उसने खुद
  2339. 1:49:34को नॉर्मल कर लिया और बोला, ठीक है कल
  2340. 1:49:37मिलते हैं। विक्रम से बात होने के बाद
  2341. 1:49:40शौर्य ने मेनका से कहा, "मेरी कार
  2342. 1:49:42तुम्हारे होटल में ही खड़ी है। कल आकर
  2343. 1:49:44वहां से ले लूंगा।" मेनका ने मुस्कुरा कर
  2344. 1:49:47कहा, "तुम कार की चिंता मत करो। वह कहीं
  2345. 1:49:50जाने वाला नहीं है। तुम आराम से कल आ
  2346. 1:49:52जाना।"
  2347. 1:49:53शिप्रा शौर्य को विक्रम और मेनका से विदा
  2348. 1:49:56लेते हुए देख रही थी। उसे उनके बीच हो रही
  2349. 1:49:58बातों में कुछ अजीब सा लग रहा था। पर वह
  2350. 1:50:01समझ नहीं पा रही थी कि उनके बीच में ऐसा
  2351. 1:50:03क्या है जो उसे अजीब तो लग रहा है पर समझ
  2352. 1:50:06नहीं आ रहा है। जब शौर्य उसके साथ होटल से
  2353. 1:50:09बाहर की तरफ बढ़ गया तो उसने भी अपने
  2354. 1:50:11दिमाग से इस बात को झटक दिया। होटल से
  2355. 1:50:14बाहर आने के बाद शौर्य ने शिप्रा से कहा।
  2356. 1:50:17तुम अपने कार की चाबी मुझे दे दो। मैं उसे
  2357. 1:50:20पार्किंग से बाहर निकाल लाता हूं। शिप्रा
  2358. 1:50:22ने अपनी कार की चाबी शौर्य की तरफ बढ़ा
  2359. 1:50:25दिया। शौर्य गया और जल्दी से शिप्रा की
  2360. 1:50:27कार लेकर वापस आ गया। शिप्रा और मेघना
  2361. 1:50:30दोनों कार के पीछे वाली सीट पर आकर बैठ
  2362. 1:50:33गए। शौर्य ने कार आगे बढ़ा दिया। पर कोई
  2363. 1:50:36था जो बाहर नजरें गराए शौर्य की एक-एक
  2364. 1:50:40एक्टिविटी को देख रहा था। मोबाइल उसके कान
  2365. 1:50:42पर लगा हुआ था। उसने किसी से कहा वो होटल
  2366. 1:50:46से निकल गया है। मैं उसकी कार का नंबर
  2367. 1:50:48तुम्हें मैसेज कर देता हूं। देख लेना आज
  2368. 1:50:51वह बचना नहीं चाहिए। इतना कहकर उस शख्स ने
  2369. 1:50:54किसी को मैसेज किया और अपनी कार को आगे
  2370. 1:50:57बढ़ा दिया। शौर्य ने कार आगे बढ़ा दिया।
  2371. 1:51:00अभी वह कुछ ही आगे गया था कि उसका फोन
  2372. 1:51:02बजने लगा। उसने नंबर की तरफ ध्यान दिया तो
  2373. 1:51:05यह नताशा कपूर का नंबर था। शौर्य को जिस
  2374. 1:51:08बात का डर था वही हुआ। वो नताशा से बिना
  2375. 1:51:11कहे ही होटल से निकल गया था। इसीलिए उसे
  2376. 1:51:14यह उम्मीद तो थी कि जल्दी ही नताशा उसको
  2377. 1:51:16नहीं देखेगी तो जरूर फोन करेगी। पर इतनी
  2378. 1:51:20जल्दी उसका फोन आ जाएगा इसकी उम्मीद शौर्य
  2379. 1:51:22को नहीं था। शौर्य हिचकिचाते हुए फोन
  2380. 1:51:25उठाया और अपने कान से लगाया तो दूसरी तरफ
  2381. 1:51:28से नताशा की आवाज आई। कहां हो तुम? मामू
  2382. 1:51:33मुझे कुछ काम आ गया था। इसीलिए अचानक
  2383. 1:51:35निकलना पड़ा। क्या हुआ? कुछ काम था क्या?
  2384. 1:51:39शौर्य अटकते हुए बोला। कमाल है। कुछ काम
  2385. 1:51:43होगा तभी फोन करूंगी। तुमको जाना ही था तो
  2386. 1:51:46कम से कम बोल कर तो जाते। नताशा शिकायती
  2387. 1:51:49लहजे में बोली, अचानक ही निकलना पड़ा। कल
  2388. 1:51:52मिलता हूं तुमसे। इतना बोलकर शौर्य ने फोन
  2389. 1:51:55रख दिया। शौर्य ने बैक मिरर में शिप्रा की
  2390. 1:51:58तरफ देखा तो उसे अपनी तरफ ही देखते पाया।
  2391. 1:52:01शिप्रा का ध्यान भी शौर्य की तरफ था।
  2392. 1:52:03शौर्य के बात करने के अंदाज से शिप्रा समझ
  2393. 1:52:06गई थी कि जरूर यह फोन नताशा का ही होगा।
  2394. 1:52:09अभी शिप्रा यह सोच ही रही थी कि मेघना ने
  2395. 1:52:12शौर्य से पूछ लिया। किसका फोन था? कहीं
  2396. 1:52:14नताशा का तो नहीं था। शौर्य को मेघना पर
  2397. 1:52:17गुस्सा भी आया कि वह सब कुछ समझते-बूझते
  2398. 1:52:20भी जानबूझकर उससे यह सवाल कर रही है।
  2399. 1:52:23मजबूरन उसे बोलना पड़ा। हां, उसी का फोन
  2400. 1:52:26था। अच्छा क्या कह रही थी? मेघना को
  2401. 1:52:31शिप्रा के सामने शौर्य से यह सवाल करने
  2402. 1:52:33में मजा आ रहा था। जबकि शौर्य मेघना से
  2403. 1:52:36चिढ़कर बोला, तुम्हें यह जानने में इतना
  2404. 1:52:38इंटरेस्ट क्यों आ रहा है कि वो मुझसे क्या
  2405. 1:52:40कह रही थी? मैंने तो बस उत्सुकता बस पूछ
  2406. 1:52:43लिया। तुम्हें नहीं बताना है तो मत बताओ।
  2407. 1:52:46मेघना मुस्कुराती हुई बोली उसे उम्मीद था
  2408. 1:52:49कि शौर्य का कुछ ऐसा ही रिएक्शन होगा।
  2409. 1:52:51जबकि शिप्रा का चेहरा यह जानकर मुरझा गया
  2410. 1:52:54कि जैसा वह सोच रही थी वही बात थी। फोन
  2411. 1:52:57नताशा का ही था। शिप्रा सोचने लगी कितना
  2412. 1:53:01अच्छा होता अगर नताशा भी उस वक्त वहीं
  2413. 1:53:03होती जब उसने राजा साहब के सामने शौर्य के
  2414. 1:53:06साथ शादीशुदा होने के बारे में बताया था।
  2415. 1:53:08उसने सोच लिया अगली बार वह जब भी नताशा से
  2416. 1:53:11मिलेगी तो वह जरूर उसके सामने यह बात
  2417. 1:53:14जाहिर कर देगी कि वह शौर्य की पत्नी है।
  2418. 1:53:17शिप्रा इस बात से भी हैरान थी कि राजा
  2419. 1:53:19साहब शौर्य को कैसे जानते थे और उसे यह
  2420. 1:53:22बात पहले से क्यों पता नहीं था। शौर्य
  2421. 1:53:24जैसे मामूली इंसान का राजा साहब से जान
  2422. 1:53:27पहचान होना कोई छोटी बात तो नहीं थी। उसने
  2423. 1:53:30शौर्य से पूछ लिया। तुम राजा साहब को कैसे
  2424. 1:53:33जानते हो? शौर्य समझ रहा था कि इस तरह की
  2425. 1:53:36बात शिप्रा के मन में जरूर चल रही होगी।
  2426. 1:53:39इसीलिए देर सवेेर वो उससे इस बारे में
  2427. 1:53:41जरूर पूछेगी। इसीलिए शौर्य ने पहले ही सोच
  2428. 1:53:45लिया था कि वो शिप्रा को इस बात का क्या
  2429. 1:53:47जवाब देगा। मैं मेघा के कारण राजा साहब से
  2430. 1:53:50मिल पाया था जिसके कारण वो मुझे पहले से
  2431. 1:53:53जानते थे और फिर मेनका के कारण भी उनसे
  2432. 1:53:56एकद बार मिलना हो गया था। मेघा के कारण पर
  2433. 1:54:00मेघा राजा साहब को कैसे जान सकती है?
  2434. 1:54:03शिप्रा को विश्वास नहीं हो रहा था कि मेघा
  2435. 1:54:05के कारण शौर्य राजा साहब से मिला होगा।
  2436. 1:54:08दरअसल कुछ समय पहले राजा साहब को हार्ट
  2437. 1:54:11अटैक आया था। तब वह सिटी हॉस्पिटल में ही
  2438. 1:54:13भर्ती थे। जहां मेघा ने उनकी खूब सेवा की
  2439. 1:54:17थी। इसीलिए वह मेघा को बहुत स्नेह करने
  2440. 1:54:19लगे। यहां तक कि एक बार राजा साहब का ही
  2441. 1:54:22एक रिश्तेदार ने मेघा के साथ बदतमीजी करने
  2442. 1:54:25की कोशिश की तो राजा साहब ने उसे पनिशमेंट
  2443. 1:54:27के तौर पर मेडिकल कॉलेज से ही निकाल दिया।
  2444. 1:54:30शौर्य ने अपनी कहानी को थोड़ा चाशनी में
  2445. 1:54:33लपेटकर शिप्रा को सुना दिया। यह कहानी ऐसी
  2446. 1:54:36थी कि इस पर शिप्रा के अविश्वास करने का
  2447. 1:54:38कोई कारण नहीं था। मानना पड़ेगा तुम हो
  2448. 1:54:42बहुत नसीब वाले। नहीं तो कहां कोई आम आदमी
  2449. 1:54:45राजा साहब से अपनी पहचान बना पाता है और
  2450. 1:54:48तुम तो उन्हें दादाजी बोलकर बुला रहे थे।
  2451. 1:54:51मेघना गहरी आंखों से शौर्य को घूरती हुई
  2452. 1:54:53बोली। मेनका के कारण वह भी राजा साहब को
  2453. 1:54:57दादाजी बोलती है। इसीलिए मैंने भी उन्हें
  2454. 1:54:59दादाजी बोलना शुरू कर दिया और उन्हें यह
  2455. 1:55:01बात पसंद भी आती है। जो भी कोई उन्हें
  2456. 1:55:04पसंद आता है, वह उनसे कोई रिश्ता बना लेते
  2457. 1:55:06हैं। शौर्य सफाई देते हुए बोला, शिप्रा का
  2458. 1:55:10मन भी शौर्य से बातें करने का कर रहा था।
  2459. 1:55:13पर वह समझ नहीं पा रही थी कि वो उससे क्या
  2460. 1:55:15बात करें। उसे लग रहा था कि शौर्य के साथ
  2461. 1:55:18अपने रिश्ते को नॉर्मल करना है तो उसे कम
  2462. 1:55:21से कम आपस में बातें तो करनी पड़ेगी। नहीं
  2463. 1:55:24तो दोनों के बीच गैप बढ़ता चला जाएगा।
  2464. 1:55:27तुम्हारे और नताशा कपूर के बीच में कुछ चल
  2465. 1:55:30रहा है क्या? अचानक ही मेघना ने शौर्य से
  2466. 1:55:33नताशा के बारे में पूछ लिया। मेघना की बात
  2467. 1:55:36सुनकर शिप्रा मेघना की ओर देखने लगी थी।
  2468. 1:55:39उसे मेघना का सवाल सुनकर थोड़ा अजीब लगा।
  2469. 1:55:41पर इस बात पर वह भी शौर्य की तरफ देखने
  2470. 1:55:44लगी। जबकि शौर्य यह उम्मीद नहीं कर रहा था
  2471. 1:55:47कि मेघना उससे ऐसे सवाल भी कर सकती है वह
  2472. 1:55:50भी शिप्रा के सामने। शौर्य को मेघना पर
  2473. 1:55:53गुस्सा भी आया पर वो इस समय ज्यादा कुछ
  2474. 1:55:56शिप्रा के सामने बोल नहीं सकता था। फिर भी
  2475. 1:55:58शौर्य को मेघना के सवाल का जवाब तो देना
  2476. 1:56:01ही था। सो उसने बेरुखी से मेघना से कहा।
  2477. 1:56:04तुम कुछ ज्यादा ही बेसिर पैर का सवाल नहीं
  2478. 1:56:07कर रही हो। इसमें बेसिर पैर का क्या सवाल
  2479. 1:56:10है? तुम सिंपली जवाब भी दे सकते हो। मेघना
  2480. 1:56:13लापरवाही से शिप्रा की ओर देखती हुई बोली
  2481. 1:56:16तुम्हें दूसरों के फटे में उंगली डालने
  2482. 1:56:18में ज्यादा ही मजा आता है। यह ज्यादा
  2483. 1:56:20अच्छा होगा कि तुम यह सवाल नताशा से पूछ
  2484. 1:56:23लेती। शौर्य चिढ़कर बोला, तुम अगर जवाब
  2485. 1:56:26नहीं देते हो तो उससे भी पूछ सकती हूं।
  2486. 1:56:29मेघना समझ रही थी कि यह सवाल शौर्य को
  2487. 1:56:32अनकंफर्टेबल फील करा रहा था। पर वह
  2488. 1:56:35जानबूझकर इस सवाल पर जोर दे रही थी। आगे
  2489. 1:56:38शौर्य कुछ बोला नहीं। वो सामने देखने लगा।
  2490. 1:56:41तभी उसने अचानक तेज ब्रेक लिया। पहिए की
  2491. 1:56:44घिसटने की आवाज आई। पीछे बैठी शिप्रा और
  2492. 1:56:47मेघना आगे की सीट से टकराते टकराते बची।
  2493. 1:56:50क्या हुआ? ऐसे ब्रेक क्यों लगाए? शिप्रा
  2494. 1:56:53ने शौर्य से पूछा। तभी मेघना ने अपनी कार
  2495. 1:56:56के आगे खड़ी कार को देखा तो बोली, "यह
  2496. 1:56:59हमारी गाड़ी के सामने किसने अपनी गाड़ी
  2497. 1:57:01खड़ी कर दी?" शिप्रा ने जब मेघना की बात
  2498. 1:57:04को सुना, तो उसने भी अपनी कार के आगे खड़ी
  2499. 1:57:06कार की तरफ देखा। उसकी गाड़ी के आगे एक
  2500. 1:57:09थार खड़ी थी। शौर्य चुपचाप सामने खड़ी
  2501. 1:57:12गाड़ी वाले की प्रतिक्रिया देखना चाह रहा
  2502. 1:57:14था। तुम चुप क्यों हो? कुछ तो बोलो। मेघना
  2503. 1:57:18अधीर होकर बोली। उसे कुछ बुरा होने की
  2504. 1:57:21आशंका हो रही थी। तुम चुपचाप बैठी रहो। जो
  2505. 1:57:24भी होगा अभी सामने आ जाएगा। शौर्य शांति
  2506. 1:57:28से आगे वाली गाड़ी की ओर देखता हुआ बोला।
  2507. 1:57:31तुम गाड़ी को पीछे लेकर आगे क्यों नहीं
  2508. 1:57:33निकाल लेते? मेघना ने अभी इतना कहा ही था
  2509. 1:57:36कि उसने देखा आगे खड़ी थार से दो
  2510. 1:57:38हट्टे-कट्टे जवान बाहर आए और उसकी कार की
  2511. 1:57:41तरफ बढ़े। मेघना उन दोनों हट्टे-कट्टे
  2512. 1:57:44बदमाशों को देखकर घबराती स्वर में बोली
  2513. 1:57:47तुम इंतजार किस बात का कर रहे हो? गाड़ी
  2514. 1:57:49पीछे लो। शौर्य मेघना की घबराई आवाज सुनकर
  2515. 1:57:53बोला एक बार अपने पीछे देख लो। शौर्य की
  2516. 1:57:56बात सुनकर मेघना ने अपने पीछे देखा तो उसे
  2517. 1:57:59अपनी कार से सट कर खड़ी एक दूसरी कार नजर
  2518. 1:58:02आई। पीछे वाली कार शिप्रा की कार के इतने
  2519. 1:58:05सटकर खड़ी थी कि शौर्य चाहकर भी अपनी कार
  2520. 1:58:08को पीछे नहीं कर सकता था। क्या हम लोग
  2521. 1:58:11किसी बदमाश के द्वारा घेर लिए गए हैं?
  2522. 1:58:13बोलते हुए मेघना के चेहरे पर डर नजर आने
  2523. 1:58:16लगा था। पर पता नहीं क्यों शिप्रा शौर्य
  2524. 1:58:19को शांत देखकर खुद भी शांत थी। क्योंकि
  2525. 1:58:22उसने ऐसी विषम परिस्थिति से निपटते हुए
  2526. 1:58:25शौर्य को कई बार देख लिया था। इसीलिए उसे
  2527. 1:58:28विश्वास था कि शौर्य इस स्थिति को भी
  2528. 1:58:30संभाल लेगा। मेघना ने जब शिप्रा के चेहरे
  2529. 1:58:33पर कोई घबराहट नहीं देखा तो वह आश्चर्य से
  2530. 1:58:36बोली क्या तुम्हें इस सब से घबराहट नहीं
  2531. 1:58:39हो रही है? तुम फालतू में इतना घबरा रही
  2532. 1:58:41हो श्रवण सब संभाल लेगा। शिप्रा इत्मीनान
  2533. 1:58:45से बोली मेघना को समझ नहीं आया कि जो
  2534. 1:58:48शिप्रा श्रवण के इतने करीब भी नहीं है,
  2535. 1:58:51उसे श्रवण पर इतना यकीन कैसे है कि वह
  2536. 1:58:53संभाल लेगा। इसी समय उन दोनों बदमाशों में
  2537. 1:58:57से एक ने शौर्य के साइड वाले दरवाजे के
  2538. 1:59:00शीशे पर अपनी उंगली से ठक-ठक किया। शौर्य
  2539. 1:59:03ने बिना किसी एक्सप्रेशन के अपनी तरफ का
  2540. 1:59:06शीशा नीचे किया और बोला, "कौन हो तुम? और
  2541. 1:59:09हमारा रास्ता क्यों रोका है?" पहले तुम
  2542. 1:59:12गाड़ी से बाहर आ जाओ। फिर हम तुम्हारे
  2543. 1:59:14सवाल का जवाब देते हैं। बाहर खड़े
  2544. 1:59:17मुस्टंडे ने जवाब दिया, पर मैं बाहर क्यों
  2545. 1:59:20आऊं? तुम अपनी गाड़ी को मेरे सामने से
  2546. 1:59:22हटाओ। हम लेट हो रहे हैं। शौर्य तल्ख लहजे
  2547. 1:59:25में बोला, "तुम आराम से गाड़ी से बाहर आते
  2548. 1:59:28हो या फिर हम अपनी तरह से तुम्हें गाड़ी
  2549. 1:59:31वो मुस्टंडा रूखे स्वर में बोला। शौर्य एक
  2550. 1:59:35पल उस बदमाश की आंखों में देखता रहा। फिर
  2551. 1:59:38वो कार का दरवाजा खोलकर बाहर आ गया। पर
  2552. 1:59:42बाहर आने से पहले उसने शिप्रा और मेघना से
  2553. 1:59:45कहा, बाहर कुछ भी हो जाए पर तुम दोनों कार
  2554. 1:59:48से बाहर मत आना।
  2555. 1:59:50बाहर आकर शौर्य उस बदमाश से बोला, लो मैं
  2556. 1:59:54आ गया बाहर। अब बताओ क्या चाहते हो? चलो
  2557. 1:59:58मेरे साथ। तुम्हें मेरे उस्ताद ने बुलाया
  2558. 2:00:00है। वो बदमाश शौर्य की कलाई पकड़ते हुए
  2559. 2:00:04बोला। शौर्य ने अपने हाथ को झटका देकर उस
  2560. 2:00:08बदमाश से अपनी कलाई चुराई और शांत स्वर
  2561. 2:00:10में बोला। तुम्हारे उस्ताद का मुझसे मिलना
  2562. 2:00:13है तो उनसे कहो वो यहां आकर मुझसे मिलने।
  2563. 2:00:17उस बदमाश को विश्वास नहीं हुआ कि शौर्य ने
  2564. 2:00:19इतनी आसानी से उससे अपनी कलाई चुरा ली। वो
  2565. 2:00:22गुस्से में आकर शौर्य का कालर पकड़ लिया
  2566. 2:00:25और बोला तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुमने
  2567. 2:00:28मेरे हाथ को झटका दिया। पर अगले ही पल
  2568. 2:00:31उसकी कलाई पर शौर्य की हाथ का तेज पंच
  2569. 2:00:34लगा। एक पल को तो उस बदमाश को लगा कि किसी
  2570. 2:00:37ने उसकी कलाई पर लोहे का रावण मारा हो।
  2571. 2:00:40उसके हाथ के साथ पूरा शरीर झनझना गया। वह
  2572. 2:00:44अविश्वास भरी नजरों के साथ शौर्य को देखने
  2573. 2:00:47लगा। तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुमने मुझ
  2574. 2:00:50पर हाथ उठाया। अब देखो मैं तुम्हारा क्या
  2575. 2:00:52हाल करता हूं। इतना कहकर वो बदमाश गुस्से
  2576. 2:00:56में शौर्य पर झपटा। पर शौर्य ने उसे कोई
  2577. 2:00:59मौका नहीं दिया और अपनी जगह पर खड़े-खड़े
  2578. 2:01:01अपनी पैर का तेज किक उसकी छाती पर दिया।
  2579. 2:01:05वो बदमाश उड़ता हुआ अपने पीछे खड़े अपने
  2580. 2:01:08साथी से टकराया और उसको लिए हुए जमीन पर
  2581. 2:01:11गिर गया। लुढ़कते हुए वह दोनों अपनी थार
  2582. 2:01:14के पास जाकर रुके। तभी थार के पीछे का
  2583. 2:01:17दरवाजा खुला और उसमें से एक आदमी बाहर आया
  2584. 2:01:20और अपने सामने जमीन पर पड़े अपने साथी की
  2585. 2:01:23तरफ देखा और झुक कर उसे उठाया और बोला
  2586. 2:01:26इतने मुटंडे हो गए हो फिर भी एक कमजोर
  2587. 2:01:29आदमी से पीट गए उस्ताद वो कमजोर तो
  2588. 2:01:32बिल्कुल नहीं है आपने उसे कमजोर आंख लिया
  2589. 2:01:35है वो बदमाश अपने सामने खड़े उस्ताद के
  2590. 2:01:38पीछे शौर्य की तरफ देखता हुआ बोला अच्छा
  2591. 2:01:42ऐसी बात है तो फिर मैं भी तो देखूं उस
  2592. 2:01:44पहलवान को इतना कहकर उस्ताद शौर्य की तरफ
  2593. 2:01:47पलटा और जैसे ही उसकी निगाह शौर्य के
  2594. 2:01:50चेहरे पर पड़ी उसकी टांगे कांपने लगी। यह
  2595. 2:01:54उस्ताद कोई और नहीं छगन था। छगन के पीछे
  2596. 2:01:57खड़ा बदमाश जब अपने उस्ताद की टांगे
  2597. 2:02:00कांपती देखी तो वो हैरानी से बोला। क्या
  2598. 2:02:03हुआ उस्ताद? आपकी टांगे क्यों कांप रही
  2599. 2:02:05हैं? पर छगन के मुंह से कोई आवाज नहीं
  2600. 2:02:08निकली। इसी समय थार की दूसरी साइड का
  2601. 2:02:11दरवाजा खुला और उससे मगन बाहर निकला। उसकी
  2602. 2:02:14भी निगाह जैसे ही शौर्य पर पड़ा उसके भी
  2603. 2:02:17चेहरे का रंग उड़ गया। वो छगन के पास आकर
  2604. 2:02:20खड़ा हो गया। छगन ने खुद को संयत किया और
  2605. 2:02:23शौर्य से बोला उस्ताद आप यहां आप यहां
  2606. 2:02:27कैसे क्यों मेरे ऊपर घर से निकलने पर
  2607. 2:02:30प्रतिबंध लगा हुआ है जो मैं यहां नहीं हो
  2608. 2:02:33सकता। शौर्य शांति से बोला। उसे मन ही मन
  2609. 2:02:36छगन मगन पर तरस आ रहा था जो बार-बार उसके
  2610. 2:02:39रास्ते में आ रहा था। उस्ताद मुझसे गलती
  2611. 2:02:42हो गई जो मैंने बिना जाने यह काम ले लिया
  2612. 2:02:45कि मुझे किसको सबक सिखाना है। छगन सफाई
  2613. 2:02:48देता हुआ बोला। चलो मान ली तुम्हारी बात
  2614. 2:02:52पर तुम्हें यह तो पता है ना कि तुमको हमें
  2615. 2:02:54सबक सिखाने का काम किसने दिया। छगन के पास
  2616. 2:02:58अब यह बताने के अलावा कोई चारा रह नहीं
  2617. 2:03:00गया। शौर्य के पीछे खड़ा बदमाश अपने
  2618. 2:03:04उस्ताद को शौर्य को उस्ताद कहते सुनकर
  2619. 2:03:06हैरान था। जबकि छगन ने मन ही मन शौर्य को
  2620. 2:03:10सुपारी देने वाले का नाम बताने का इरादा
  2621. 2:03:12कर लिया था। छगन के पास दूसरा कोई रास्ता
  2622. 2:03:15नहीं था। उसकी किस्मत खराब थी कि बार-बार
  2623. 2:03:19उसका सामना शौर्य से हो जा रहा था। शौर्य
  2624. 2:03:22के पूछने पर कि उसे किसने उसकी सुपारी दी
  2625. 2:03:25है? इसके जवाब में छगन बोला। विजय दीवान
  2626. 2:03:29वो विजय दीवान है उस्ताद जिसने आपका चेहरा
  2627. 2:03:32बिगाड़ने की सुपारी दी थी। शौर्य को यही
  2628. 2:03:35उम्मीद था। जैसे ही छगन ने उसे कहा था कि
  2629. 2:03:38किसी ने उसे उसका चेहरा बिगाड़ने की
  2630. 2:03:40सुपारी दी है। शौर्य का सीधा ध्यान विजय
  2631. 2:03:43दीवान के ऊपर ही गया था कि वही इस सबके
  2632. 2:03:46पीछे हो सकता है। शौर्य ने छगन से पूछा तो
  2633. 2:03:50फिर अब क्या इरादा है तुम्हारा? आप कैसी
  2634. 2:03:53बात करते हैं उस्ताद मेरी क्या हिम्मत हो
  2635. 2:03:55सकती है कि मैं आपसे पंगे लूं। छगन
  2636. 2:03:58खुशामदी स्वर में बोला। कितने पैसे में
  2637. 2:04:00उसने तुम्हें मेरी सुपारी दी थी? शौर्य
  2638. 2:04:03छगन से पूछा। 5 लाख में छगन सकुचाते हुए
  2639. 2:04:08बोला ठीक है मैं तुम्हें 6 लाख दूंगा
  2640. 2:04:11तुम्हें यही काम विजय दीवान के साथ करना
  2641. 2:04:14है कर लोगे शौर्य छगन की आंखों में देखते
  2642. 2:04:17हुए बोला आपके लिए तो मैं यह काम फ्री में
  2643. 2:04:20ही कर दूंगा उस्ताद छगन को यह जानकर
  2644. 2:04:23तसल्ली हुई कि शौर्य उससे नाराज नहीं हुआ
  2645. 2:04:26नहीं तुम्हें फ्री में यह करने की कोई
  2646. 2:04:28जरूरत नहीं है पर हां उसका चेहरा नहीं
  2647. 2:04:31बिगाड़ना उसका कोई एक अंग हाथ हाथ या पैर
  2648. 2:04:35जरूर तोड़ देना। शौर्य ने समझाया। शिप्रा
  2649. 2:04:39जो गाड़ी के अंदर ही बैठी बाहर क्या हो
  2650. 2:04:41रहा है यह जानने की कोशिश कर रही थी। जब
  2651. 2:04:44उसने शौर्य के सामने छगन को देखा तो वो
  2652. 2:04:46कार से बाहर आ गई। वो छगन को देखकर उसके
  2653. 2:04:49पास आते हुए बोली तो तुमने हमारा रास्ता
  2654. 2:04:52रोका है। जब छगन ने शिप्रा को अपने सामने
  2655. 2:04:55देखा तो वह बोला अरे भाभी जी आप हमारी
  2656. 2:04:59हिम्मत हो सकती है कि हम आपका रास्ता
  2657. 2:05:01रोके। कुछ गलतफहमी हो गई थी। अब सब ठीक
  2658. 2:05:04है। जब शौर्य ने देखा कि शिप्रा कार से
  2659. 2:05:07बाहर आ गई है तो वह अब ज्यादा कुछ उसके
  2660. 2:05:09सामने बोल नहीं सकता था। इसीलिए उसने बात
  2661. 2:05:12को समाप्त करते हुए कहा, "अल् गाड़ी को
  2662. 2:05:15सामने से हटाओ।" शौर्य के कहने भर की देर
  2663. 2:05:19थी कि तुरंत छगन मगन जाकर अपनी गाड़ी में
  2664. 2:05:21बैठ गए। शौर्य ने शिप्रा की ओर पलट कर
  2665. 2:05:24कहा, चलो चलते हैं। दोनों कार में आकर बैठ
  2666. 2:05:28गए। शौर्य ने कार आगे बढ़ा दी। छगन मगन ने
  2667. 2:05:32हमारा रास्ता क्यों रोका था? शिप्रा ने
  2668. 2:05:34उत्सुकता वश पूछा। बोला तो था उसने कुछ
  2669. 2:05:38गलतफहमी हो गई थी। इसीलिए उसने रास्ता रोक
  2670. 2:05:40लिया था। शौर्य ने जवाब दिया। तुम सही बात
  2671. 2:05:44बताओगे? मैं बच्ची नहीं हूं जो उसने ऐसा
  2672. 2:05:47कह दिया और मैं उसकी बात पर विश्वास कर
  2673. 2:05:49लूंगी। शिप्रा रूखे स्वर में बोली। शौर्य
  2674. 2:05:53को कुछ कहते नहीं बना। शिप्रा पहली बार
  2675. 2:05:55उससे इतने हक से बात कर रही थी। जब अभी भी
  2676. 2:05:58उसने शौर्य को चुप देखा तो वह दोबारा बोली
  2677. 2:06:01अरे तुम क्यों इस बात के पीछे पड़ी हो?
  2678. 2:06:04मामला निपट तो गया। शौर्य टालने की नियत
  2679. 2:06:07से बोला पर जितना शौर्य शिप्रा को असली
  2680. 2:06:10बात बताने से मना कर रहा था, उतना ही
  2681. 2:06:12ज्यादा शिप्रा की उत्सुकता उस बात को
  2682. 2:06:14जानने के लिए बढ़ती जा रही थी। मुझे जानना
  2683. 2:06:18है कि छगन ने हमारा रास्ता क्यों रोका था।
  2684. 2:06:21शिप्रा पहले की तुलना में थोड़ा शांत स्वर
  2685. 2:06:24में बोली। मेघना उन दोनों के बीच हो रही
  2686. 2:06:27बातों को धैर्य से सुन रही थी। उसे भी समझ
  2687. 2:06:30नहीं आ रहा था कि उन बदमाशों ने शौर्य का
  2688. 2:06:32रास्ता क्यों रोका था और अगर किसी कारण से
  2689. 2:06:35रोका था तो फिर इतनी आसानी से उनका रास्ता
  2690. 2:06:37छोड़ क्यों दिया। उसे नहीं पता था कि
  2691. 2:06:40शौर्य और छगन मगन के बीच पहले ही क्या
  2692. 2:06:43कहानी घट रखी थी। इसीलिए उसके भी मन में
  2693. 2:06:46यह जानने की जिज्ञासा थी कि उन बदमाशों ने
  2694. 2:06:49इतनी आसानी से उनका रास्ता कैसे छोड़ दिया
  2695. 2:06:52था। शिप्रा के सवाल के जवाब में शौर्य ने
  2696. 2:06:55कहा, विजय दीवान ने इसको हमें सबक सिखाने
  2697. 2:06:58के लिए भेजा था। क्या शिप्रा का मुंह
  2698. 2:07:02आश्चर्य से खुला रह गया। उसने यह उम्मीद
  2699. 2:07:05नहीं की थी कि विजय दीवान इस स्तर तक जा
  2700. 2:07:08सकता था। मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि
  2701. 2:07:11विजय दीवान ऐसी हरकत कर सकता है। मेघना को
  2702. 2:07:14भी यह जानकर बहुत गुस्सा आया था कि विजय
  2703. 2:07:17दीवान ने ऐसी हरकत की थी। वो गुस्से में
  2704. 2:07:19बोली तो फिर हम उसके खिलाफ क्या करने जा
  2705. 2:07:22रहे हैं? शौर्य ने जब मेघना को गुस्से में
  2706. 2:07:25देखा तो उसने उससे कहा अब तुम्हें क्या हो
  2707. 2:07:28गया? तुम क्यों इतना गुस्सा हो रही हो?
  2708. 2:07:32यह क्या बात हुई? विजय दीवान ने हमें
  2709. 2:07:34मारने के लिए गुंडे को भेजा और हम चुपचाप
  2710. 2:07:37घर जा रहे हैं। उसके खिलाफ एक कंप्लेन तो
  2711. 2:07:39कर ही सकते हैं। मेघना अभी भी गुस्से में
  2712. 2:07:42थी। वो सिर्फ मुझे सबक सिखाना चाहता था।
  2713. 2:07:45तुम दोनों से उसको कोई मतलब नहीं था।
  2714. 2:07:47शौर्य मेघना को शांत करना चाहता था। इसका
  2715. 2:07:50क्या मतलब हुआ? यह क्या छोटी बात है कि
  2716. 2:07:52उसने तुम्हारे लिए बदमाश को भेजा। अगर
  2717. 2:07:55उसने यह बदमाश हमारे लिए भेजा हुआ होता तो
  2718. 2:07:57क्या तुम ऐसे ही इस बात को छोड़ देते?
  2719. 2:08:00मेघना को यह बात और गुस्सा दिला रहा था कि
  2720. 2:08:03शौर्य इस बात की अहमियत को नहीं समझ रहा
  2721. 2:08:05था। शौर्य को भी मेघना का कंसर्न अपने लिए
  2722. 2:08:08देखकर अच्छा लगा। वो मेघना को तसल्ली देता
  2723. 2:08:11हुआ बोला, "तुमने यह कैसे समझ लिया कि मैं
  2724. 2:08:14इस बात को इतनी आसानी से जाने दूंगा? जो
  2725. 2:08:16हरकत उसने की है उसकी सजा तो उसको मिलकर
  2726. 2:08:19रहेगी। अच्छा ऐसा क्या करोगे उसके साथ?
  2727. 2:08:22मेघना अब तक थोड़ा शांत हो गई थी। जल्दी
  2728. 2:08:25ही तुम्हें पता चल जाएगा। बस थोड़ा इंतजार
  2729. 2:08:28करो। शौर्य मेघना को तसल्ली देता हुआ
  2730. 2:08:30बोला। तुम हर बात को मिस्ट्री क्यों बना
  2731. 2:08:33देते हो? सीधे से जवाब नहीं दे सकते। इस
  2732. 2:08:36बार शिप्रा थोड़ा चिढ़कर बोली। उसे भी
  2733. 2:08:39शौर्य की यह बात पसंद नहीं आई कि वो सीधा
  2734. 2:08:41जवाब ना देकर बस बोल दिया कि जल्दी ही पता
  2735. 2:08:43चल जाएगा। क्या तब तक वह इसी सोच में उलझी
  2736. 2:08:46रहेगी? शिप्रा की बेचैनी देखकर शौर्य के
  2737. 2:08:49चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। वो समझ गया
  2738. 2:08:52कि जब तक उन दोनों को पता नहीं चल जाएगा
  2739. 2:08:54कि शौर्य विजय दीवान को कैसे सबक सिखाने
  2740. 2:08:57वाला है तब तक उनको चैन नहीं आएगा। यही
  2741. 2:09:00सोचकर उसने कहा बस यह समझ लो जिस काम के
  2742. 2:09:03लिए उसने छगन मगन को मेरे पास भेजा था। अब
  2743. 2:09:06वही काम उसके साथ होगा। पर वो ऐसा क्यों
  2744. 2:09:09करेगा? मेघना ने सवाल किया। तुम इस चक्कर
  2745. 2:09:12में मत पड़ो कि वह ऐसा क्यों करेगा। बस यह
  2746. 2:09:14जान लो कि जैसा मैंने कहा है वैसा ही
  2747. 2:09:17होगा। शौर्य विश्वास के साथ बोला, शिप्रा
  2748. 2:09:21तो पहले से जानती थी कि छगन मगन पर शौर्य
  2749. 2:09:23का कैसा प्रभाव है। इसीलिए उसे शौर्य की
  2750. 2:09:26बात पर कोई शक नहीं था। शौर्य की बात
  2751. 2:09:28सुनकर मेघना ने शिप्रा की तरफ देखा। पर
  2752. 2:09:30शिप्रा के चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे।
  2753. 2:09:33इसके बाद मेघना ने कुछ और नहीं कहा। थोड़ी
  2754. 2:09:36देर बाद शौर्य अपने मॉडल टाउन वाले घर पर
  2755. 2:09:39था। दूसरे दिन राय हाउस में बलवंत राय के
  2756. 2:09:42कमरे में बलवंत राय के सामने राजदीप राय,
  2757. 2:09:44बृजभूषण राय और कुलवंत बैठे हुए थे। तभी
  2758. 2:09:48वहां मौजूद सन्नाटे को तोड़ते हुए बलवंत
  2759. 2:09:50राय की आवाज गूंजी। तो तुम यह कह रहे हो
  2760. 2:09:53कि शिप्रा को यहां से गए हुए तीन-चार दिन
  2761. 2:09:56हो गए और तुमने हमें बताना भी जरूरी नहीं
  2762. 2:09:58समझा। बलवंत राय ने यह बात राजदीप जी को
  2763. 2:10:01कहा था। राजदीप जी को बलवंत राय की बात पर
  2764. 2:10:04गुस्सा भी आया। पर वह खुद को संयत करके
  2765. 2:10:06बोले। उसने तो आपकी बात को सुनकर ही घर को
  2766. 2:10:09छोड़ा था। पिताजी आपने ही तो कहा था अगर
  2767. 2:10:12तुम्हें श्रवण से अलग नहीं होना है तो फिर
  2768. 2:10:14उसके साथ ही क्यों नहीं रहती? उसके बाद ही
  2769. 2:10:17शिप्रा यहां से चली गई थी। राजदीप जी की
  2770. 2:10:20बात को सुनकर बलवंत राय थोड़े उखड़े स्वर
  2771. 2:10:22में बोले। अरे यह बात तो मैंने उस समय
  2772. 2:10:25गुस्से में कह दिया था। इसका यह मतलब
  2773. 2:10:27थोड़े ही था कि मैं सचमुच चाहता था कि वह
  2774. 2:10:29घर छोड़कर चली जाए। मैं तो बस उसके भले के
  2775. 2:10:32लिए यह चाहता था कि वह श्रवण से तलाक लेने
  2776. 2:10:35को तैयार हो जाए। पर आपकी उसी बात से वह
  2777. 2:10:38श्रवण के साथ रहने चली गई। राजदीप जी जवाब
  2778. 2:10:42देते हुए बोले, पर दादा जी देखा जाए तो यह
  2779. 2:10:45एक तरह से ठीक भी है। कुछ ही दिनों में
  2780. 2:10:47शिप्रा को पता चल जाएगा कि सपने और हकीकत
  2781. 2:10:50में क्या फर्क होता है। जब उसे एक आम जीवन
  2782. 2:10:53जीना पड़ेगा तो समझ आ जाएगा कि महल और
  2783. 2:10:56झोपड़ी में रहने में क्या फर्क होता है।
  2784. 2:10:58कुलवंत बीच में अपनी बात रखते हुए बोला,
  2785. 2:11:01"तुम ऐसा क्यों समझ रहे हो कि शिप्रा को
  2786. 2:11:03आम जीवन जीना पड़ेगा? भले श्रवण किसी
  2787. 2:11:06काबिल ना हो पर शिप्रा खुद में इतनी
  2788. 2:11:08काबिलियत रखती है कि वह अपने दम पर अपनी
  2789. 2:11:11जिंदगी अच्छे से जी सकती है। तुम्हें पता
  2790. 2:11:13है राजा साहब चंद्रभान राठौर ने शिप्रा को
  2791. 2:11:16अपनी टेक्सटाइल कंपनी का सीईओ बना दिया
  2792. 2:11:18है। क्या वहां उपस्थित सभी का मुंह यह
  2793. 2:11:22सुनकर खुला का खुला रह गया। कुलवंत को तो
  2794. 2:11:25यकीन नहीं हुआ कि जो उसने सुना है वह सही
  2795. 2:11:28हो सकता है। राजदीप जी भी अविश्वास भरे
  2796. 2:11:32स्वर में बोले यह आप क्या कह रहे हैं
  2797. 2:11:34पिताजी? आपको कैसे पता कि राजा साहब ने
  2798. 2:11:37शिप्रा को अपनी कंपनी का सीईओ बना दिया
  2799. 2:11:40है। क्योंकि जिस समय उन्होंने यह बात कही
  2800. 2:11:43थी, उस समय मैं वहीं मौजूद था। इसीलिए
  2801. 2:11:46मुझे यह पता है। बलवंत राय ने राजदीप जी
  2802. 2:11:49को आश्वस्त करते हुए कहा। बलवंत राय की
  2803. 2:11:52बात सुनकर राजदीप जी को अपनी बेटी के लिए
  2804. 2:11:54खुशी भी हुई। तुम शिप्रा को वापस घर बुला
  2805. 2:11:57लो। बलवंत राय राजदीप जी से बोले पर
  2806. 2:12:01पिताजी वो इस बात के लिए तैयार नहीं होगी।
  2807. 2:12:04वो परसों घर आई थी तो मैंने उसे वापस आने
  2808. 2:12:07के लिए कहा भी था पर वो तैयार नहीं हुई।
  2809. 2:12:10मुझे नहीं लगता कि वो अभी घर वापस आएगी।
  2810. 2:12:13राजदीप जी इंकार करते हुए बोले क्या
  2811. 2:12:16तुम्हें अपनी बेटी की चिंता बिल्कुल नहीं
  2812. 2:12:18है? तुम्हें पता है वह कितना बड़ा पोजीशन
  2813. 2:12:20हासिल करने वाली है। क्या तुम्हें अच्छा
  2814. 2:12:22लगेगा कि लोग यह कहें कि इतनी बड़ी सीईओ
  2815. 2:12:26का पति एक भिखारी है? हमें कुछ भी करके
  2816. 2:12:30उसको श्रवण से अलग करना पड़ेगा। बलवंत राय
  2817. 2:12:33राजदीप जी को समझाते हुए बोले आप सही कह
  2818. 2:12:37रहे हैं दादा जी। नहीं तो कहीं बाद में
  2819. 2:12:39ऐसा ना हो जाए कि श्रवण के कारण शिप्रा की
  2820. 2:12:42सीईओ की पोजीशन चली जाए। कलवंत बीच में
  2821. 2:12:45अपनी बात रखते हुए बोला, राजदीप जी समझ
  2822. 2:12:48नहीं पा रहे थे कि यह क्या हो रहा है।
  2823. 2:12:50उसके पापा को अभी तक शिप्रा की फिक्र नहीं
  2824. 2:12:52थी। जैसे ही उन्हें पता चला कि शिप्रा को
  2825. 2:12:55राजा साहब ने अपनी कंपनी का सीईओ बना दिया
  2826. 2:12:57है। उसके बाद ही बलवंत राय को शिप्रा की
  2827. 2:13:00चिंता सताने लगी। पर उन्हें भी कहीं ना
  2828. 2:13:02कहीं यह लगने लगा कि बलवंत राय शायद सही
  2829. 2:13:05कह रहे हैं। शायद श्रवण कहीं शिप्रा की
  2830. 2:13:07सफलता में बाधक ना बन जाए। यही सोचकर
  2831. 2:13:10उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि शिप्रा
  2832. 2:13:13इस बात के लिए तैयार होगी। उसने इसी कारण
  2833. 2:13:15तो घर छोड़ दिया। तो क्या आपको लगता है कि
  2834. 2:13:18वह श्रवण से तलाक लेने के लिए तैयार होगी?
  2835. 2:13:21अगर वह सीधी तरह तैयार नहीं होती तो क्यों
  2836. 2:13:24ना हम कोई ऐसी परिस्थिति तैयार करें जिसके
  2837. 2:13:26कारण वह श्रवण से तलाक लेने को तैयार हो
  2838. 2:13:28जाए। इस बार काफी देर से चुप बैठे बृजभूषण
  2839. 2:13:32राय ने यह बात कही। तुम्हारे कहने का मतलब
  2840. 2:13:35क्या हुआ? बलवंत राय बृजभूषण राय को देखते
  2841. 2:13:38हुए बोले, पिताजी यह समझिए कि यह तुरंत
  2842. 2:13:42होने वाला काम नहीं है। इसके लिए हमें
  2843. 2:13:44धीरे-धीरे शिप्रा के मन में श्रवण के लिए
  2844. 2:13:46ऐसी बात डालनी पड़ेगी कि श्रवण ना ही उसके
  2845. 2:13:49लिए ठीक है और ना ही अपने परिवार के लिए।
  2846. 2:13:52दूसरी तरफ हम श्रवण के दिमाग में भी यह
  2847. 2:13:54बात डालने की कोशिश करेंगे कि उसके कारण
  2848. 2:13:56शिप्रा की जिंदगी बर्बाद होने वाली है।
  2849. 2:13:59गाहे बगाहे हम उसको उसकी औकात भी दिखाते
  2850. 2:14:02रहेंगे। जिसके कारण वो खुद ही शिप्रा से
  2851. 2:14:04अलग होने का डिसीजन ले ले। बृजभूषण जी ने
  2852. 2:14:07अपनी योजना समझाई। बृजभूषण जी की बात
  2853. 2:14:10सुनकर बलवंत राय भी बोले, तुम सही कह रहे
  2854. 2:14:13हो। श्रवण के बारे में एक बात हम भी पक्के
  2855. 2:14:16तौर पर कह सकते हैं कि भले ही वह भिखारी
  2856. 2:14:18रहा है, पर उसे अपनी गैरत बड़ी प्यारी है।
  2857. 2:14:21वो भी छोटी बातों को अपने दिल पर ले लेता
  2858. 2:14:23है। अगर वह यहां अपनी बेइज्जती होते
  2859. 2:14:25देखेगा तो हो सकता है कि गुस्से में वह
  2860. 2:14:28जल्दी ही खुद ही शिप्रा से अलग हो जाएगा।
  2861. 2:14:31पर क्या आपको लगता है कि यह सब इतना आसान
  2862. 2:14:33है? राजदीप जी चिंतित स्वर में बोले, अभी
  2863. 2:14:37यहां जो भी कुछ बातें हो रही थी, उन्हें
  2864. 2:14:39यह पसंद तो नहीं आ रहा था, पर वह खामोशी
  2865. 2:14:42से सुन रहे थे। उन्हें भी लगने लगा कि
  2866. 2:14:44शायद बलवंत राय शिप्रा के लिए जो भी सोच
  2867. 2:14:46रहे हैं, वही सही है। पर यह होगा कैसे
  2868. 2:14:50पिताजी? इस बारे में भी तो प्लानिंग करनी
  2869. 2:14:52पड़ेगी। बृजभूषण राय बोले परसों विहान और
  2870. 2:14:56युविका की इंगेजमेंट पार्टी में दोनों को
  2871. 2:14:58बुलाते हैं। फिर देखते हैं कि हम इसकी
  2872. 2:15:00शुरुआत कैसे कर सकते हैं। बलवंत राय बोले
  2873. 2:15:03दूसरे दिन शिप्रा जल्दी उठ गई थी। आज उसे
  2874. 2:15:06राजा साहब की कंपनी में जाकर ज्वाइन करना
  2875. 2:15:09था। उसके मन में बहुत सारे विचार चल रहे
  2876. 2:15:12थे। उसने साथ में लेटी मेघना से पूछा। सुन
  2877. 2:15:15ना तुम्हें कुछ समझ आया था कि राजा साहब
  2878. 2:15:18ने अचानक मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने
  2879. 2:15:20की कैसे सोच ली? मेघना अध खुली आंखों से
  2880. 2:15:23उसे देखते हुए बोली, तुम्हारे दिमाग में
  2881. 2:15:26सुबह-सुबह यही चल रहा है। अरे कैसे भी
  2882. 2:15:28सोची क्या फर्क पड़ता है। तुम्हारे लिए तो
  2883. 2:15:31अच्छा ही है। फिर भी कुछ तो तुम्हें समझ
  2884. 2:15:34आया होगा कि उन्होंने कैसे यह फैसला कर
  2885. 2:15:36लिया कि मैं उनकी कंपनी में सीईओ बनने के
  2886. 2:15:39लिए उपयुक्त हूं। शिप्रा मेघना को उठाकर
  2887. 2:15:42बैठाती हुई बोली। मेघना शिप्रा के चेहरे
  2888. 2:15:45को घूरते हुए बोली। सच कहूं तो मुझे लगता
  2889. 2:15:49है कि उन्हें तुम्हारी खूबसूरती पसंद आ गई
  2890. 2:15:51होगी। उनका कोई पोता कुंवारा होगा। शायद
  2891. 2:15:54वो तुम्हारा रिश्ता उससे करवाना चाहते
  2892. 2:15:56होंगे। मेघना की बात सुनकर शिप्रा गुस्सा
  2893. 2:16:00जाहिर करती हुई बोली। मैं तुमसे सीरियसली
  2894. 2:16:02कुछ पूछ रही हूं और तुम्हें मजाक सूझ रहा
  2895. 2:16:05है। मजाक शुरू किसने किया? क्या ऐसा हो
  2896. 2:16:08नहीं सकता कि वो तुमको अपनी बहू बनाने की
  2897. 2:16:10सोच रहे होंगे? नहीं तो कौन भला ऐसे किसी
  2898. 2:16:13को अपनी कंपनी का सीईओ बना देता है? मेघना
  2899. 2:16:16ने भी शराफत से जवाब दिया। अच्छा जब उनको
  2900. 2:16:19पहले से ही पता है कि मैं शादीशुदा हूं तो
  2901. 2:16:22वह भला ऐसा क्यों सोचेंगे? शिप्रा चिढ़कर
  2902. 2:16:25बोली यह बात तो उनको बाद में पता चला ना।
  2903. 2:16:28क्या पता पहले अगर उनको पता होता तो शायद
  2904. 2:16:31ऐसा कोई प्रपोजल वो तुमको देते भी नहीं।
  2905. 2:16:34मेघना शिप्रा को और भी छेड़ते हुए बोली।
  2906. 2:16:37अभी शिप्रा कुछ और भी जवाब देती। उससे
  2907. 2:16:39पहले ही दरवाजे पर नॉक करने की आवाज आई।
  2908. 2:16:42शिप्रा और मेघना ने एक दूसरे की तरफ देखा।
  2909. 2:16:44फिर मेघना बोली दरवाजा खुला है अंदर आ
  2910. 2:16:48जाओ। तभी दरवाजा खुला और गिरजा हाथ में
  2911. 2:16:51चाय की ट्रे लिए हुए अंदर आई। चाय देखकर
  2912. 2:16:54शिप्रा खुश होती हुई बोली वाह दीदी। एकदम
  2913. 2:16:57सही समय पर चाय ले आई। मैं अभी चाय के लिए
  2914. 2:17:00नीचे आने ही वाली थी। शिप्रा की बात सुनकर
  2915. 2:17:03गिरजा मुस्कुराई और ट्रे को टेबल पर रखकर
  2916. 2:17:05चली गई। चाय देखकर मेघना भी बिस्तर से उठी
  2917. 2:17:08और चाय का कप उठाकर बालकनी का दरवाजा
  2918. 2:17:11खोलकर बालकनी में चली गई। शिप्रा भी बेड
  2919. 2:17:14से उतर कर चाय का कप लेकर एक शिप लिया।
  2920. 2:17:17अभी मेघना को गैलरी में गए हुए ज्यादा समय
  2921. 2:17:19नहीं हुआ। वो अगले ही पल जल्दी से अंदर आई
  2922. 2:17:22और शिप्रा का हाथ पकड़ कर खींचती हुई
  2923. 2:17:24बालकनी में लेकर चली गई। शिप्रा पूछती रह
  2924. 2:17:27गई कि क्या हुआ? तुम इस तरह से मुझे खींच
  2925. 2:17:29क्यों रही हो? आओ तो सही मैं तुम्हें कुछ
  2926. 2:17:32दिखाती हूं। मेघना धीरे से बोली। शिप्रा
  2927. 2:17:36को समझ नहीं आया कि मेघना उसे क्या दिखाना
  2928. 2:17:38चाहती है। पर गैलरी में पहुंचकर मेघना ने
  2929. 2:17:41एक तरफ इशारा किया। उधर देखो। शिप्रा ने
  2930. 2:17:45उस दिशा में देखा जिधर मेघना ने इशारा
  2931. 2:17:47किया था। उसने देखा पीछे ग्राउंड में
  2932. 2:17:50शौर्य लोअर और बनियान में एक्सरसाइज कर
  2933. 2:17:52रहा था। इस समय वो सर के बल खड़ा था और
  2934. 2:17:55उसका सर शिप्रा से विपरीत दिशा में था।
  2935. 2:17:58इसलिए वह देख नहीं सकता था कि शिप्रा और
  2936. 2:18:00मेघना बालकनी में खड़ी होकर उसे ही देख
  2937. 2:18:03रही है। शिप्रा की निगाह शौर्य की मजबूत
  2938. 2:18:06कद काठी पर चिपक कर रह गई थी। उसने घुर कर
  2939. 2:18:09मेघना की ओर देखा और कहा तुम मुझे यही
  2940. 2:18:12दिखाने के लिए खींचते हुए अंदर से बाहर
  2941. 2:18:13लाई तो और क्या तुम क्या समझी कि मैं
  2942. 2:18:17तुम्हें हवा खिलाने के लिए बालकनी में लाई
  2943. 2:18:18हूं। अगर तुम्हें नहीं देखना है तो तुम
  2944. 2:18:21अंदर जा सकती हो। वैसे कुछ भी कहो शौर्य
  2945. 2:18:24का फिजिक वाकई लाजवाब है। मेघना शौर्य पर
  2946. 2:18:27नजरें कराए हुए बोली जिस तरह से मेघना
  2947. 2:18:30शौर्य को देख रही थी शिप्रा को यह अच्छा
  2948. 2:18:32नहीं लगा। वो मेघना का हाथ पकड़ कर
  2949. 2:18:35जबरदस्ती खींचती हुई कमरे के अंदर लेकर
  2950. 2:18:38चली गई। मेघना प्रतिरोध करती रही पर
  2951. 2:18:40शिप्रा रुकी नहीं। कमरे के अंदर आने के
  2952. 2:18:43बाद उसने गैलरी वाला दरवाजा अंदर से बंद
  2953. 2:18:45कर दिया। मेघना को शिप्रा की इस हरकत पर
  2954. 2:18:48हंसी भी आई। पर वो अपनी हंसी को छुपाती
  2955. 2:18:51हुई बोली यह क्या बात हुई? तुम्हें अगर
  2956. 2:18:54गैलरी में नहीं रुकना था तो तुम अंदर आ
  2957. 2:18:56जाती। मुझे क्यों जबरदस्ती अंदर ले आई?
  2958. 2:18:59चलो दरवाजा खोलो। मुझे तो अभी गैलरी में
  2959. 2:19:01ही रहना है। मेघना की बात सुनकर शिप्रा
  2960. 2:19:04उसको छेड़ते हुए बोली। खबरदार जो दोबारा
  2961. 2:19:07अभी गैलरी में गई। तुम्हें शर्म नहीं आती
  2962. 2:19:09अपनी बहन के पति को इस हाल में देखते हुए।
  2963. 2:19:12ओह हेलो। वो तुम्हारा सिर्फ नाम का ही पति
  2964. 2:19:15है। तुम उसे अपना पति मानती कहां हो?
  2965. 2:19:17इसलिए तुम्हें क्या फर्क पड़ता है कि कोई
  2966. 2:19:20उसको कैसे भी देखे? मेघना शिप्रा पर तंज
  2967. 2:19:22कसती हुई बोली कितनी बेशर्म हो गई हो तुम
  2968. 2:19:26ऐसा बोलते हुए तुम्हें थोड़ी भी शर्म नहीं
  2969. 2:19:28आती शिप्रा मेघना पर आंखें तरेरती हुई
  2970. 2:19:31बोली अच्छा तुम्हें इतना बुरा लग रहा है
  2971. 2:19:35मेघना मुस्कुराती हुई बोली मेघना को यूं
  2972. 2:19:38मुस्कुराती देखकर शिप्रा समझ गई कि मेघना
  2973. 2:19:41उसे जानबूझकर छेड़ रही है। वैसे मुझे समझ
  2974. 2:19:44नहीं आ रहा कि तुम इतनी नर्वस क्यों हो
  2975. 2:19:46रही थी। वो नंगा नहीं था। अच्छा भला लोअर
  2976. 2:19:48बनियान में है तो फिर तुम इतनी शर्मिंदा
  2977. 2:19:51होकर क्यों अंदर भाग आई? मेघना ने आराम से
  2978. 2:19:53अपनी बात कही तो शिप्रा ने उस बारे में
  2979. 2:19:56सोचा तो उसे अपनी बेसब्री पर शर्मिंदा
  2980. 2:19:58होना पड़ा। उसने महसूस किया कि शौर्य को
  2981. 2:20:01लेकर वो कुछ ज्यादा ही पोजेसिव होती जा
  2982. 2:20:03रही है। उसे अपने व्यवहार पर आश्चर्य हुआ।
  2983. 2:20:06उसने दोबारा गैलरी का दरवाजा खोला और
  2984. 2:20:08दरवाजे से हल्का सा बाहर निकल कर उसने उस
  2985. 2:20:11दिशा में देखा जहां शौर्य एक्सरसाइज कर
  2986. 2:20:13रहा था। शौर्य अभी सीधा खड़ा हो गया था और
  2987. 2:20:16इस समय वह तौलिए से अपने शरीर पर आ गए
  2988. 2:20:19पसीने को पछ रहा था। उसने महसूस किया
  2989. 2:20:22शौर्य ऐसी भी कोई ऑकवर्ड स्थिति में नहीं
  2990. 2:20:24था जो उसे देखने से किसी को रोकना पड़े।
  2991. 2:20:27अब उसे थोड़ी देर पहले की अपनी स्थिति पर
  2992. 2:20:29हंसी आ रही थी। मेघना शिप्रा के चेहरे के
  2993. 2:20:31बदलते रंग को देख रही थी और उसके अंदर चल
  2994. 2:20:34रही विचार को समझने की कोशिश कर रही थी।
  2995. 2:20:37मेघना ने शिप्रा के पीछे से उसके गले में
  2996. 2:20:39हाथ डालकर उसको अपनी बाहों में भरते हुए
  2997. 2:20:41कहा। अब कहीं मेरी बहन के दिल में कोई
  2998. 2:20:44धीरे से दस्तक तो नहीं देने लगा। शिप्रा
  2999. 2:20:46ने मेघना की बात को सुना तो उसको डांटते
  3000. 2:20:48हुए बोली, "तुम फिर से बाहर आ गई?" अच्छा
  3001. 2:20:52तो क्या मुझे बाहर नहीं आना था? तुमने कुछ
  3002. 2:20:54बोला नहीं तो मैं बाहर आ गई। मेघना
  3003. 2:20:56मासूमियत से बोली। ज्यादा नौटंकी मत करो।
  3004. 2:21:00अब वो हमें देख ले कि हम उसी को देख रहे
  3005. 2:21:02हैं। उससे पहले कमरे के अंदर चल लो। इतना
  3006. 2:21:05कहकर शिप्रा मेघना को खींचती हुई फिर से
  3007. 2:21:07कमरे के अंदर आ गई। अगर श्रवण देख ही लेगा
  3008. 2:21:10तो क्या फर्क पड़ जाएगा? तुम कुछ गलत तो
  3009. 2:21:12कर नहीं रही हो जो तुम्हें डर लग रहा है।
  3010. 2:21:15मेघना शिप्रा को छेरती हुई बोली अपनी
  3011. 2:21:18बकवास बंद करो। आज मुझे जल्दी जाकर ज्वाइन
  3012. 2:21:20भी करना है। इसीलिए मैं तो तैयार होने
  3013. 2:21:22जाती हूं। इतना बोलकर शिप्रा बाथरूम में
  3014. 2:21:25चली गई। लगभग 10:00 बजे शिप्रा फैब्रिक्स
  3015. 2:21:28ट्रेंड क्लोथिंग हाउस के ऑफिस में पहुंची।
  3016. 2:21:30राजा साहब की टेक्सटाइल कंपनी का नाम
  3017. 2:21:32फैब्रिक्स ट्रेंड क्लोथिंग हाउस था।
  3018. 2:21:35शिप्रा रिसेप्शन पर पहुंची। उसने वहां
  3019. 2:21:37कांता प्रसाद जी के बारे में पूछा तो
  3020. 2:21:39रिसेप्शनिस्ट ने शिप्रा को देखते ही पूछा
  3021. 2:21:42आप शिप्रा हैं। शिप्रा ने रिसेप्निशनिस्ट
  3022. 2:21:44के मुंह से अपना नाम सुना तो उसे आश्चर्य
  3023. 2:21:47हुआ। उसने सर हिलाकर हां कहा। कांता
  3024. 2:21:50प्रसाद जी राजा साहब के साथ आपका ही
  3025. 2:21:52इंतजार कर रहे हैं। रिसेप्निशनिस्ट ने अदब
  3026. 2:21:54से कहा। उसने एक दरवाजे की तरफ इशारा
  3027. 2:21:57किया। शिप्रा दरवाजे पर पहुंची और नॉक
  3028. 2:22:00किया। अंदर से आवाज आई, कम इन। शिप्रा ने
  3029. 2:22:04दरवाजे को धक्का दिया और अंदर चली गई।
  3030. 2:22:07राजा साहब ने शिप्रा को अंदर आते देखा तो
  3031. 2:22:09वह खुश होते हुए बोले आ गई तुम। शिप्रा ने
  3032. 2:22:13राजा साहब का सवाल सुना तो बोली क्या
  3033. 2:22:16मैंने आप लोगों को ज्यादा इंतजार करवाया?
  3034. 2:22:19अरे नहीं बिल्कुल नहीं। तुम्हें एकदम सही
  3035. 2:22:22समय पर आई हो। अब जब तुम आ गई हो तो फिर
  3036. 2:22:24बोर्ड ऑफ मेंबर की मीटिंग में चलते हैं।
  3037. 2:22:27इतना कहकर राजा साहब अपनी जगह पर खड़े हो
  3038. 2:22:30गए। राजा साहब के साथ कांता प्रसाद जी भी
  3039. 2:22:32खड़े हो गए। जब शिप्रा ने दोनों को खड़े
  3040. 2:22:35होते देखा तो उसने भी बैठने का कोई उपक्रम
  3041. 2:22:37नहीं किया। कांता प्रसाद जी शिप्रा से
  3042. 2:22:40बोले आज तुम इस कंपनी की सीईओ बनने वाली
  3043. 2:22:43हो। इसीलिए राजा साहब ने आज बोर्ड ऑफ
  3044. 2:22:46मेंबर की मीटिंग भी रखी है। जहां तुम्हारी
  3045. 2:22:48मुलाकात बोर्ड के मेंबर से होगी। चलो चलते
  3046. 2:22:51हैं। इतना कहकर राजा साहब दरवाजे की तरफ
  3047. 2:22:54बड़ गए। राजा साहब के पीछे पीछे कांता
  3048. 2:22:56प्रसाद जी और शिप्रा भी बढ़ गई। अपने कमरे
  3049. 2:22:59से निकलकर राजा साहब एक दूसरे केबिन में
  3050. 2:23:02पहुंचे। जहां पहले से ही छह सात लोग राजा
  3051. 2:23:05साहब के इंतजार में बैठे हुए थे। राजा
  3052. 2:23:08साहब केबिन में आते ही सभी उठकर खड़े हो
  3053. 2:23:10गए। छह सात लोगों के बीच में राजा साहब की
  3054. 2:23:14बेटी स्वर्णलता के अलावे प्रतीक भी मौजूद
  3055. 2:23:16था। उसने राजा साहब को आया देखा और उनके
  3056. 2:23:20पीछे कांता प्रसाद और शिप्रा को भी देखा।
  3057. 2:23:23शिप्रा को देखकर प्रतीक की आंखें उसी पर
  3058. 2:23:25जमकर रह गई। उसने इस समय यहां ऐसी सुंदरता
  3059. 2:23:28की कल्पना नहीं की थी। उसे समझ नहीं आया
  3060. 2:23:31कि यह लड़की उसके दादाजी के साथ यहां क्या
  3061. 2:23:33कर रही। प्रतीक से जब इंतजार नहीं हुआ तो
  3062. 2:23:36उसने राजा साहब से पूछा यूं अचानक मीटिंग
  3063. 2:23:39बुलाने का कोई खास कारण है क्या दादा जी?
  3064. 2:23:42हां, बहुत ही खास। आज हमने अपनी कंपनी में
  3065. 2:23:45एक नए सीईओ की नियुक्ति किया है। जैसे ही
  3066. 2:23:48राजा साहब ने यह बात कही, सबकी निगाह
  3067. 2:23:50शिप्रा की ओर मुड़ गई। उस हॉल में मौजूद
  3068. 2:23:53सभी लोगों के चेहरे पर आश्चर्य नजर आया कि
  3069. 2:23:56राजा साहब को अचानक इस नई लड़की को सीईओ
  3070. 2:24:00बनाने की क्या सूझी। प्रतीक को समझ नहीं
  3071. 2:24:03आया कि वो कैसे रिएक्ट करें। वैसे उसके
  3072. 2:24:05सामने जो लड़की मौजूद थी उसमें वो सारी
  3073. 2:24:08खूबी थी जो उसको पसंद थी। उसके लिए तो
  3074. 2:24:11लड़की की खूबसूरती ही मायने रखती थी।
  3075. 2:24:13जिसमें शिप्रा की खूबसूरती का तो कोई
  3076. 2:24:15मुकाबला ही नहीं हो सकता था। वह विरोध
  3077. 2:24:17करके शिप्रा की नजर में बुरा नहीं बनना
  3078. 2:24:20चाहता था। पर वह जानता था कि वह अकेला
  3079. 2:24:22नहीं है जिसे राजा साहब के फैसले पर ऐतराज
  3080. 2:24:25होगा। वहां पर स्वर्णलता भी थी। उसे भी
  3081. 2:24:28राजा साहब का यह फैसला उचित नहीं लगा।
  3082. 2:24:30इसीलिए वह विरोध करती हुई बोली। पर पिताजी
  3083. 2:24:33आपको अचानक यह क्या सूझी कि आपने यह फैसला
  3084. 2:24:36किया। आपने इस बारे में पहले कभी बताया भी
  3085. 2:24:38नहीं। और फिर जब हमारे पास पहले से ही
  3086. 2:24:40इतने सारे लोग यहां पर मौजूद हैं। सभी
  3087. 2:24:43काबिल हैं। आप इनमें से किसी को यह
  3088. 2:24:45जिम्मेदारी दे सकते थे। फिर आपने इस नई
  3089. 2:24:47लड़की को यह जिम्मेदारी देने की क्यों
  3090. 2:24:49सोची? प्रतीक को भी किसी नई लड़की का सीईओ
  3091. 2:24:52बन जाना उसके विचार से सही नहीं था। पर
  3092. 2:24:55खुलेआम शिप्रा का विरोध करके उसकी नजर में
  3093. 2:24:57आना वह अफोर्ड नहीं कर सकता था। वैसे
  3094. 2:25:00प्रतीक खुद स्वर्णलता को पसंद नहीं करता
  3095. 2:25:02था। पर इस मामले में वह चाहता था कि
  3096. 2:25:04स्वर्णलता जितना विरोध शिप्रा के सीईओ
  3097. 2:25:07बनने का करें उतना अच्छा होगा। अगर उसके
  3098. 2:25:09दादाजी स्वर्णलता की बात में आ जाते हैं
  3099. 2:25:11तो कोई बात ही नहीं। पर अगर वह इस लड़की
  3100. 2:25:14को सीईओ बनाने के अपने फैसले पर अडिग रहते
  3101. 2:25:17हैं तो वह इस लड़की का सपोर्ट दिखाकर उसके
  3102. 2:25:19करीब जाने की कोशिश कर सकता है। दूसरी तरफ
  3103. 2:25:22राजा साहब ने स्वर्णलता की बात को सुना और
  3104. 2:25:25उसे घूरते हुए बोले अच्छा क्या तुम मुझे
  3105. 2:25:28बताओगी कि यहां कौन इतना काबिल है कि इस
  3106. 2:25:30कंपनी के सीईओ का पद अच्छे से संभाल लेगा
  3107. 2:25:33या लेगी यहां सभी काबिल है और फिर मैं
  3108. 2:25:36किसी और की ही बात क्यों करूं? मैं खुद इस
  3109. 2:25:38कंपनी को अच्छे से संभाल सकती हूं।
  3110. 2:25:40स्वर्णलता खड़ी होती हुई बोली क्या कहा?
  3111. 2:25:43तुम इस कंपनी का सीईओ का पद संभाल सकती
  3112. 2:25:46हो? मुझे पता नहीं है या यहां मौजूद किसको
  3113. 2:25:49पता नहीं है कि तुमने अपनी टाइल्स कंपनी
  3114. 2:25:51का क्या हाल किया है। तुम क्या चाहती हो
  3115. 2:25:53कि मैं अपनी इस कंपनी का भी वही हाल करूं।
  3116. 2:25:56राजा साहब उपहास भरे स्वर में बोले। राजा
  3117. 2:25:59साहब की बात सुनकर स्वर्णलता का चेहरा लाल
  3118. 2:26:01हो गया। वो खुद पर कंट्रोल करती हुई बोली।
  3119. 2:26:04यह आप कैसी बात कर रहे हैं पिताजी? एक बार
  3120. 2:26:07ऐसा हो गया तो क्या आपको लगता है कि हमेशा
  3121. 2:26:09ऐसा ही होगा? शायद ना हो पर मैं यह रिस्क
  3122. 2:26:13नहीं ले सकता। वैसे भी अब जो मेरे पास इस
  3123. 2:26:16कंपनी के साथ हॉस्पिटल बचा हुआ है, यह
  3124. 2:26:18दोनों एक तरह से सूर्यभान की अमानत के तौर
  3125. 2:26:21पर है। तुम दोनों भाई-बहन को ऑलरेडी मैंने
  3126. 2:26:23तुम्हारा हिस्सा दे दिया है। इसीलिए अब इस
  3127. 2:26:26कंपनी पर अपनी गिद्ध नजर मत डालो। जितना
  3128. 2:26:28शेयर तुम दोनों का इस कंपनी में है, उससे
  3129. 2:26:30ही संतोष करो। राजा साहब ने एक तरह से
  3130. 2:26:33अपना इरादा स्पष्ट कर दिया। राजा साहब की
  3131. 2:26:36बात सुनकर स्वर्णलता ने प्रतीक की तरफ
  3132. 2:26:38देखा। जैसे उसे कह रही हो कि देख लो इनका
  3133. 2:26:41क्या इरादा है। यह अभी भी इस कंपनी को
  3134. 2:26:43सूर्यभान के नाम करने की सोच रहे हैं।
  3135. 2:26:46प्रतीक स्वर्णलता को अपनी तरफ देखने का
  3136. 2:26:48मतलब तो समझ गया पर इस समय उसने खुद को
  3137. 2:26:50खामोश रखना ही बेहतर समझा। उसे लगा यह समय
  3138. 2:26:54इस बात के लिए सही नहीं था। उसे भी यह बात
  3139. 2:26:56पसंद नहीं था कि यह कंपनी उसके चाचा के
  3140. 2:26:59नाम हो। उसने सोच लिया था कि घर जाकर वह
  3141. 2:27:01इस बारे में अपने पापा से बात करेगा
  3142. 2:27:03क्योंकि इतनी आसानी से वह इस कंपनी को
  3143. 2:27:05सूर्यभान के नाम नहीं होने दे सकता था।
  3144. 2:27:08दूसरी तरफ राजा साहब ने स्वर्णलता को
  3145. 2:27:10इग्नोर करते हुए कहा, किसी और को भी कुछ
  3146. 2:27:13कहना है? वहां उपस्थित लोगों ने एक दूसरे
  3147. 2:27:16की तरफ देखा पर किसी ने भी अब अपनी राय
  3148. 2:27:18देने की कोशिश नहीं की। सब अब राजा साहब
  3149. 2:27:21की अगली घोषणा की प्रतीक्षा करने लगे। जब
  3150. 2:27:24राजा साहब ने सभी का ध्यान अपनी तरफ देखा
  3151. 2:27:26तो उन्होंने कहना शुरू किया। जैसा कि आप
  3152. 2:27:30सभी जानते हैं कि पिछले कुछ समय से अपनी
  3153. 2:27:33बीमारी के कारण मैं कंपनी की कामों पर
  3154. 2:27:35ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहा था। इसीलिए
  3155. 2:27:38मैंने कंपनी में एक नए सीईओ को नियुक्त
  3156. 2:27:42करने का निश्चय किया है। जिस लड़की को आप
  3157. 2:27:45मेरे पीछे देख रहे हैं, इसका नाम शिप्रा
  3158. 2:27:47है और आज से यह इस कंपनी की नई सीईओ होगी।
  3159. 2:27:52मैं उम्मीद करता हूं कि जैसे आप सब मेरे
  3160. 2:27:54साथ सहयोग कर रहे थे वैसे ही शिप्रा से भी
  3161. 2:27:57सहयोग करेंगे। किसी ने भी राजा साहब की
  3162. 2:28:00बात सुनने के बाद भी अपना कोई रिएक्शन
  3163. 2:28:03नहीं दिया। स्वर्णलता के चेहरे पर असहमति
  3164. 2:28:05के भाव तो आए पर वो अब कुछ बोली नहीं।
  3165. 2:28:08राजा साहब अपनी चेयर से उठे और साइड होकर
  3166. 2:28:11शिप्रा को अपने पास बुलाया और अपनी चेयर
  3167. 2:28:13की तरफ इशारा करके बोले आज से यह चेयर
  3168. 2:28:16तुम्हारी है। मैं उम्मीद करता हूं कि तुम
  3169. 2:28:19अपनी काबिलियत से इस कंपनी को और भी
  3170. 2:28:21ऊंचाइयों पर पहुंचाओगी।
  3171. 2:28:23शिप्रा सामने आई और वहां उपस्थित लोगों के
  3172. 2:28:26चेहरे पर एक निगाह डालने के बाद बोली,
  3173. 2:28:29"मैं समझती हूं कि मैं आप सबके लिए यहां
  3174. 2:28:31नहीं हूं और बिना किसी बैक हिस्ट्री के आप
  3175. 2:28:34सबके लिए मुझ पर विश्वास करना मुश्किल
  3176. 2:28:36होगा। पर मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि
  3177. 2:28:39मैं इस कंपनी को और भी ऊंचाइयों तक
  3178. 2:28:41पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोडूंगी।
  3179. 2:28:45यहां सामने खड़े होकर इस तरह की बातें
  3180. 2:28:47करना बहुत ही आसान है। पर वैसा कर पाना
  3181. 2:28:49बहुत मुश्किल। पता नहीं राजा साहब ने तुम
  3182. 2:28:52में क्या देख लिया जो यह तुमको इस कंपनी
  3183. 2:28:54का सीईओ बना दिए हैं। पर मैं अभी कह सकता
  3184. 2:28:57हूं कि इस कंपनी की उल्टी गिनती शुरू हो
  3185. 2:29:00गई है। जो शख्स अभी यह बात बोला था उसका
  3186. 2:29:03नाम वैभव सिंह था। वैभव 27 28 साल का युवक
  3187. 2:29:07था। वह राजा साहब के चचेरे भाई का बेटा
  3188. 2:29:10था। वैभव के पिता की मृत्यु हो गई थी। उसे
  3189. 2:29:13अपने पिता से विरासत में इस कंपनी का 10%
  3190. 2:29:16शेयर मिला था। इसीलिए इस कंपनी की डिसीजन
  3191. 2:29:19मेकिंग में वह कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता
  3192. 2:29:21था। वैभव की ही तरह प्रतीक और स्वर्णलता
  3193. 2:29:24के पास भी इस कंपनी का 10-10% शेयर था।
  3194. 2:29:28वहां पर इनके अलावा तीन और लोग भी थे।
  3195. 2:29:31जिनमें से एक के हिस्से में 9% शेयर और दो
  3196. 2:29:34और लोगों के पास 5-प शेयर थे। यह तीनों भी
  3197. 2:29:38राजा साहब के नजदीकी रिश्तेदारों में से
  3198. 2:29:40एक थे। इन सबके शेयरों के अलावा बाकी के
  3199. 2:29:4351% शेयर राजा साहब के पास था जो कि
  3200. 2:29:46उन्होंने सूर्यभान के लिए बचाया हुआ था।
  3201. 2:29:4951% शेयर राजा साहब के पास होने के कारण
  3202. 2:29:52ही वहां किसी का चल नहीं पाता था। जब राजा
  3203. 2:29:55साहब ने सूर्यभान से कहा था कि वह आकर
  3204. 2:29:57संपत्ति में से अपना हिस्सा अपने नाम करवा
  3205. 2:30:00ले तो सूर्यभान ने इस संपत्ति को लेने में
  3206. 2:30:02कोई उत्साह नहीं दिखाया था। दरअसल उस समय
  3207. 2:30:05सूर्यभान राठौर यह समझ रहे थे कि शौर्य की
  3208. 2:30:08प्लेन दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इसीलिए
  3209. 2:30:10भी उनकी कोई चाहत इस संपत्ति के लिए रह
  3210. 2:30:13नहीं गई थी। पर जब राजा साहब को यह पता चल
  3211. 2:30:16गया कि शौर्य सही सलामत है तो सूर्यभान
  3212. 2:30:18राठौर के मना करने के बाद भी उन्होंने
  3213. 2:30:21सूर्यभान के हिस्से का शेयर अपने पास ही
  3214. 2:30:23रखा। राजा साहब के बेटे और बेटी ने राजा
  3215. 2:30:26साहब के इस निर्णय का विरोध भी किया था कि
  3216. 2:30:29जब उन्होंने सूर्यभान को घर से ही निकाल
  3217. 2:30:31दिया था तो अब वह उसको संपत्ति का हिस्सा
  3218. 2:30:33क्यों देने वाले हैं। पर राजा साहब ने
  3219. 2:30:36उनकी एक ना सुनी और अपने फैसले पर अडिग
  3220. 2:30:38रहे। इस बात को लेकर प्रतीक और स्वर्णलता
  3221. 2:30:41राजा साहब से नाराज भी हुए। पर उनके हाथ
  3222. 2:30:44में कुछ था नहीं करने को। इसीलिए वह समय
  3223. 2:30:47का इंतजार करने लगे कि किसी सही समय पर वे
  3224. 2:30:50इन कंपनियों पर कब्जा करने की कोशिश
  3225. 2:30:52करेंगे। जब राजा साहब को हार्ट अटैक आया
  3226. 2:30:55था तो उसका भी कारण उनके बेटे बेटी का
  3227. 2:30:58संपत्ति के लिए उन पर जोर देना ही था। वे
  3228. 2:31:01नहीं चाहते थे कि राजा साहब की संपत्ति
  3229. 2:31:03में सूर्यभान को किसी भी तरह का हिस्सा
  3230. 2:31:05मिले। इसी कहासनी में राजा साहब को ऐसा
  3231. 2:31:08सदमा लगा था कि उन्हें अटैक आ गया था। इधर
  3232. 2:31:12राजा साहब वैभव की बात सुनकर कुछ पल सोचते
  3233. 2:31:14रहे और फिर से एक बार सामने आकर उन्होंने
  3234. 2:31:17कहा ठीक है मैं तुम लोगों का कंसर्न समझता
  3235. 2:31:21हूं। इसीलिए मैं sh के लिए एक कंडीशन रख
  3236. 2:31:23देता हूं। शिप्रा अभी सिर्फ 3 महीने के
  3237. 2:31:26लिए इस कंपनी की सीईओ नियुक्त की जाती है।
  3238. 2:31:29अगर इन तीन महीनों के दरमियान कंपनी में
  3239. 2:31:31किसी प्रकार का ग्रोथ नजर नहीं आता तो फिर
  3240. 2:31:34आगे मैं शिप्रा को इस कंपनी के सीईओ के
  3241. 2:31:37रूप में कंटिन्यू करूं या ना करूं इस पर
  3242. 2:31:40विचार करूंगा। राज साहब की इस बात को
  3243. 2:31:42सुनकर स्वर्णलता की आंखों में चमक आ गई।
  3244. 2:31:45जैसे उसे पहले से ही विश्वास था कि शिप्रा
  3245. 2:31:48के बस का नहीं। कमुस यही बात वैभव सिंह की
  3246. 2:31:51आंखों में भी नजर आ रहा था। वैभव ने जब
  3247. 2:31:54देखा कि राजा साहब ने उसकी आपत्ति के बाद
  3248. 2:31:57ही शिप्रा के लिए यह कंडीशन निर्धारित
  3249. 2:32:00किया है तो वह भी संतुष्टि पूर्वक बोला
  3250. 2:32:04आपकी इस कंडीशन से मैं सहमत हूं। यह
  3251. 2:32:06बढ़िया रहेगा। इस तरह शिप्रा को भी अपनी
  3252. 2:32:09काबिलियत साबित करने का मौका मिलेगा।
  3253. 2:32:12शिप्रा ने भी जब राजा साहब की इस बात को
  3254. 2:32:14सुना तो उसे भी लगा कि यह राजा साहब का
  3255. 2:32:17सही फैसला है। क्योंकि शिप्रा को भी अपने
  3256. 2:32:20ऊपर इतना विश्वास नहीं था कि वो अपनी इस
  3257. 2:32:22जिम्मेदारी को सही से हैंडल कर पाएगी कि
  3258. 2:32:24नहीं। पर इस कंडीशन के बाद उसे भी यह
  3259. 2:32:27तसल्ली हो गई कि अगर उसे यह लगा कि वो इस
  3260. 2:32:30जिम्मेवारी को उठाने लायक नहीं है तो वह
  3261. 2:32:32खुद ही इस कंपनी से इस्तीफा दे देगी। वह
  3262. 2:32:35भी राजा साहब की बात से सहमति जताते हुए
  3263. 2:32:38बोली, "मैं समझती हूं राजा साहब ने मुझे
  3264. 2:32:40ज्यादा समय दे दिया। अगर मुझे लगा कि मैं
  3265. 2:32:43इस कंपनी के साथ न्याय नहीं कर पा रही
  3266. 2:32:45हूं, तो विश्वास कीजिए। मैं 3 महीने
  3267. 2:32:47इंतजार नहीं करूंगी। मैं 2 महीने बाद ही
  3268. 2:32:50इस कंपनी को अपना इस्तीफा भेज दूंगी।"
  3269. 2:32:53शायद अब मैं उम्मीद कर सकती हूं कि मुझे
  3270. 2:32:55आप सबका भरपूर सहयोग मिलेगा। शिप्रा की
  3271. 2:32:58बात सुनकर वैभव सिंह मुस्कुराता हुआ बोला,
  3272. 2:33:01"मुझे अच्छा लगा कि तुमने खुद इस चैलेंज
  3273. 2:33:03को स्वीकार कर लिया।" शिप्रा ने खुद सामने
  3274. 2:33:06से इसे एक चैलेंज के रूप में ले लिया।
  3275. 2:33:09राजा साहब शिप्रा की बात सुनकर परेशान हो
  3276. 2:33:11गए। उन्होंने सोचा कि शिप्रा ने यह ठीक
  3277. 2:33:14नहीं किया। वह भी इस बात को अच्छे से
  3278. 2:33:16समझते थे कि इस तरह की कंपनी को चलाना
  3279. 2:33:19छोटी बात नहीं होती। वो शिप्रा को समय
  3280. 2:33:21देना चाहते थे। पर शिप्रा ने खुद अपने लिए
  3281. 2:33:24एक समय निर्धारित कर लिया था। शिप्रा के
  3282. 2:33:27चैलेंज स्वीकार करने के बाद अब राजा साहब
  3283. 2:33:30के पास कुछ बोलने के लिए रह नहीं गया था।
  3284. 2:33:32वो वहां से बाहर जाने के लिए मुड़ते हुए
  3285. 2:33:34बोले तो फिर ठीक है आज की मीटिंग यहीं
  3286. 2:33:38बर्खास्त की जाती है। अब तुम सब जा सकते
  3287. 2:33:40हो। इसके बाद राजा साहब ने शिप्रा को अपने
  3288. 2:33:43पीछे आने का इशारा किया और उस हॉल से निकल
  3289. 2:33:45गए। उनके पीछे कांता प्रसाद और शिप्रा भी
  3290. 2:33:48वहां से निकल गए। प्रतीक अंत तक शिप्रा को
  3291. 2:33:51घूरता रहा। जबकि राजा साहब एक बार फिर से
  3292. 2:33:54अपनी कैबिन में वापस आ गए। कांता प्रसाद
  3293. 2:33:57और शिप्रा भी आकर राजा साहब के सामने वाली
  3294. 2:33:59कुर्सी पर बैठ गई। शिप्रा के बैठते ही
  3295. 2:34:02राजा साहब थोड़े नाराजगी भरे स्वर में
  3296. 2:34:04बोले, तुम्हें क्या जरूरत थी इस तरह के
  3297. 2:34:07चैलेंज को लेने की? तुम्हें क्या लगता है
  3298. 2:34:10कि किसी भी कंपनी का सीईओ बनना इतना आसान
  3299. 2:34:12है? तुम जैसे नए खून वाले पता नहीं खुद को
  3300. 2:34:15क्या समझते हैं। शिप्रा को समझ नहीं आया
  3301. 2:34:19कि उसने ऐसा क्या किया जो राजा साहब उससे
  3302. 2:34:22नाराज हो रहे हैं। वो मासूमियत से बोली
  3303. 2:34:26मैंने कुछ गलत बोल दिया क्या? अरे जब
  3304. 2:34:29मैंने तुम्हें 3 महीने का समय दिया तो तुम
  3305. 2:34:32खुद क्यों आगे बढ़कर अपने आप को 2 महीने
  3306. 2:34:34में ही साबित करने पर तूल गई। मैंने तुम
  3307. 2:34:37पर कोई प्रेशर बनाया कि तुम्हें खुद को
  3308. 2:34:39इतनी जल्दी साबित करना है। राजा साहब
  3309. 2:34:42शिप्रा को डांटते हुए बोले। शिप्रा को समझ
  3310. 2:34:45नहीं आया कि यह कैसा बॉस है जो अपने
  3311. 2:34:48एंप्लई को इसलिए डांट रहा है क्योंकि उसने
  3312. 2:34:51खुद को साबित करने के लिए उनके दिए हुए
  3313. 2:34:54समय से भी कम समय में अपने आप को एफिशिएंट
  3314. 2:34:57साबित करने के चैलेंज को स्वीकार किया।
  3315. 2:35:00शिप्रा कुछ बोली नहीं। बस राजा साहब के
  3316. 2:35:03आगे कुछ और बोलने की प्रतीक्षा करने लगी।
  3317. 2:35:06तुम कितने समय से अपनी कंपनी को संभाल रही
  3318. 2:35:08थी? तुमने कभी सोचा कि तुम्हें अपनी कंपनी
  3319. 2:35:11क्यों बेचनी पड़ी? देखो, यहां सभी एक
  3320. 2:35:14दूसरे के पैर खींचने में लगे हुए हैं।
  3321. 2:35:16यहां कोई नहीं चाहता कि उसके साथ काम करने
  3322. 2:35:18वाला उससे आगे बढ़े। अगर साथ वाले को मौका
  3323. 2:35:21मिले, तो वह अपने कलीग का पैर खींचने में
  3324. 2:35:24भी पीछे नहीं हटते। इसीलिए कभी किसी के
  3325. 2:35:26उकसावे में आकर इस तरह का चैलेंज स्वीकार
  3326. 2:35:29मत किया करो। तुम्हें क्या लगता है? जिसके
  3327. 2:35:32उकसावे में आकर तुमने उसके सामने 2 महीने
  3328. 2:35:34की शर्त रखी है। वो क्या खुश होगा
  3329. 2:35:37तुम्हारी कामयाबी देखकर? उल्टा अब यह होगा
  3330. 2:35:40कि वो अब हर वो कोशिश करेगा कि तुम अपनी
  3331. 2:35:42चैलेंज को पूरा ना कर पाओ। वो हर वो कोशिश
  3332. 2:35:45करेगा जिससे तुम्हारी राह और मुश्किल हो
  3333. 2:35:48जाए। राजा साहब शिप्रा को समझाते हुए बोले
  3334. 2:35:52अब उनकी आवाज अपेक्षाकृत नरम हो गया था।
  3335. 2:35:55शिप्रा को राजा साहब का मकसद समझ नहीं आया
  3336. 2:35:57कि वह उससे क्या चाहते हैं। कोई भी बॉस
  3337. 2:36:00यही चाहता है कि उसका एंप्लई अपने आप को
  3338. 2:36:03बेहतर साबित करें। पर राजा साहब की बात
  3339. 2:36:06सुनकर शिप्रा को यह लगा ही नहीं कि
  3340. 2:36:08उन्होंने शिप्रा से कोई ज्यादा उम्मीद रखी
  3341. 2:36:10हो। उसे समझ नहीं आया कि अगर राजा साहब को
  3342. 2:36:13उससे कोई उम्मीद ही नहीं है तो उन्होंने
  3343. 2:36:16उसे अपनी कंपनी का सीईओ क्यों बनाया। उसने
  3344. 2:36:19राजा साहब से पूछ लिया आपने मुझे अपनी
  3345. 2:36:22कंपनी का सीईओ क्यों बनाया है? क्या मतलब
  3346. 2:36:25हुआ इस सवाल का? मुझे तुम ईमानदार लगी और
  3347. 2:36:28मुझे यह भरोसा भी है कि तुम जल्दी ही
  3348. 2:36:30हमारी कंपनी को अपनी मेहनत और ईमानदारी से
  3349. 2:36:33नई बुलंदियों तक ले जाओगी। राजा साहब
  3350. 2:36:36मुस्कुराते हुए बोले पर अभी मैंने जब खुद
  3351. 2:36:39को 2 महीने में ही साबित करने की बात की
  3352. 2:36:42तो आप इस बात से नाराज दिखे। शिप्रा अपने
  3353. 2:36:45मन में उमड़ रहे विचार को राजा साहब से
  3354. 2:36:47कहने से खुद को रोक नहीं सकी। यही तो मैं
  3355. 2:36:51कह रहा हूं। तुम्हें किसी के सामने खुद को
  3356. 2:36:53साबित करने की कोई जरूरत नहीं है। बस तुम
  3357. 2:36:56ईमानदारी से अपना काम करती रहो। तुम्हारा
  3358. 2:36:58काम खुद ही सबको नजर आने लगेगा। जिस समय
  3359. 2:37:01तुम खुद को साबित करने के लिए यह काम
  3360. 2:37:03करोगी तो उसके लिए फिर तुम एक्स्ट्रा
  3361. 2:37:05एफर्ट करने की कोशिश करोगी। इससे होगा यह
  3362. 2:37:08कि तुम अपने ऊपर काम के अलावे एक अलग
  3363. 2:37:11प्रेशर ले लोगी जो तुम्हारी डेली लाइफ को
  3364. 2:37:13भी प्रभावित करेगी। और मैं नहीं चाहता कि
  3365. 2:37:16मेरे साथ काम करने वाली एंप्लई खुद के साथ
  3366. 2:37:19यह अन्याय करें।
  3367. 2:37:21राजा साहब शिप्रा को समझाते हुए बोले कि
  3368. 2:37:24वो उससे क्या चाहते हैं। शिप्रा को यकीन
  3369. 2:37:27नहीं हो रहा था कि उसको कोई इतना अच्छा
  3370. 2:37:29एंप्लयर भी मिल सकता है जो उससे बहुत
  3371. 2:37:31ज्यादा उम्मीद नहीं कर रहा था। बस उससे यह
  3372. 2:37:34चाहता है कि वो ईमानदारी से अपना काम करे।
  3373. 2:37:37पर अगले ही पल उसके दिमाग में आया कि अगर
  3374. 2:37:40उसने अपने काम से सबको सेटिस्फाई नहीं
  3375. 2:37:42किया तो फिर वही लोग राजा साहब के फैसले
  3376. 2:37:45पर अंगुली भी तो उठाएंगे। इसीलिए उसने
  3377. 2:37:48राजा साहब से पूछा आपको नहीं लगता कि अगर
  3378. 2:37:51मैं बोर्ड ऑफ मेंबर के सदस्यों को
  3379. 2:37:53सेटिस्फाई नहीं कर पाई तो उन्हें आपके
  3380. 2:37:55फैसले पर उंगली उठाने का मौका मिल जाएगा?
  3381. 2:37:58शिप्रा की बात सुनकर राजा साहब जोर से
  3382. 2:38:01हंसे। तुम्हें लगता है तुम उन्हें कभी भी
  3383. 2:38:04सेटिस्फाई कर पाओगी। तुम कितना भी अच्छा
  3384. 2:38:07काम कर लो वे कभी भी तुम्हारी काम
  3385. 2:38:09सेटिस्फाई नहीं होंगे। वे कुछ ना कुछ कमी
  3386. 2:38:12जरूर निकाल देंगे। इसीलिए तुम यह बात भूल
  3387. 2:38:15जाओ कि तुम्हें किसी के सामने खुद को
  3388. 2:38:18साबित करना है। राजा साहब की स्पष्ट
  3389. 2:38:21हिदायत सुनकर शिप्रा समझ गई कि उसे यहां
  3390. 2:38:23कैसे काम करना है। अब उसके चेहरे पर एक
  3391. 2:38:26संतुष्टि नजर आ रही थी। उसने राजा साहब से
  3392. 2:38:29कहा ठीक है सर मैं ध्यान रखूंगी कि आपकी
  3393. 2:38:33उम्मीदों पर खड़ा उतरूं। राजा साहब शिप्रा
  3394. 2:38:36के मुंह से सर सुनकर उसकी आंखों में देखते
  3395. 2:38:39हुए बोले सर नहीं तुम मुझे दादाजी ही बोला
  3396. 2:38:43करो। मुझे तुम्हारे मुंह से दादाजी सुनकर
  3397. 2:38:46ही अच्छा लगता है। शिप्रा को राजा साहब के
  3398. 2:38:49बिहेवियर से यह कभी भी नहीं लगा कि वो
  3399. 2:38:51उसके बॉस हैं। उसे यह थोड़ा अजीब भी लगा।
  3400. 2:38:55पर देखा जाए तो उसके लिए यह बात एक तरह से
  3401. 2:38:58अच्छा भी था। सारी बातें होने के बाद राजा
  3402. 2:39:01साहब ने कांता प्रसाद से कहा कांता प्रसाद
  3403. 2:39:05तुम जाकर शिप्रा को उसका कैबिन और इस पूरे
  3404. 2:39:08ऑफिस का एक भ्रमण करवा दो जिससे यह यहां
  3405. 2:39:11के बारे में जान ले। कांता प्रसाद ने
  3406. 2:39:13शिप्रा को पूरा ऑफिस घुमाया और वहां काम
  3407. 2:39:16करने वाले सारे स्टाफ से भी उसका परिचय
  3408. 2:39:18कराया। अंत में कांता प्रसाद ने शिप्रा से
  3409. 2:39:21कहा अब तुम कल से अपने काम को शुरू कर
  3410. 2:39:24सकती हो। आज के बाद इस ऑफिस की बॉस तुम
  3411. 2:39:27हो। शिप्रा वहां से फ्री होकर निकली। वो
  3412. 2:39:30अपनी गाड़ी के पास पहुंची। अभी वह अपनी
  3413. 2:39:33गाड़ी में बैठने ही वाली थी कि तभी उसे
  3414. 2:39:35अपनी तरफ आता एक शख्स दिखाई दिया। शिप्रा
  3415. 2:39:38ने उसे ध्यान से देखा तो वह उसे पहचान गई।
  3416. 2:39:42यह कोई और नहीं प्रतीक था। प्रतीक उसके
  3417. 2:39:45पास आता हुआ बोला। तो मिस शिप्रा आपने
  3418. 2:39:48पूरा ऑफिस देख लिया। प्रतीक को खुद से बात
  3419. 2:39:51करते देखकर शिप्रा बोली हां देख ही लिया।
  3420. 2:39:55बाकी तो अब देखते ही रहना है। बहुत
  3421. 2:39:57बढ़िया। मुझे भरोसा है आप जल्दी ही यहां
  3422. 2:40:01के काम को समझ जाओगी और आपकी दिशा निर्देश
  3423. 2:40:03में कंपनी जरूर तरक्की करेगी। प्रतीक
  3424. 2:40:06शिप्रा की तारीफ करते हुए बोला यह मेरी
  3425. 2:40:09खुशनसीबी है कि आप ऐसा समझते हैं। शिप्रा
  3426. 2:40:12थोड़ा हंबल दिखने की कोशिश करती हुई बोली
  3427. 2:40:15शायद आप मुझे नहीं जानती होंगी। मेरा नाम
  3428. 2:40:18प्रतीक राठौर है। ऊपर हॉल में तो एक दूसरे
  3429. 2:40:20से परिचय करने का समय ही नहीं मिला।
  3430. 2:40:23शिप्रा ने प्रतीक राठौर सुना तो वह समझ गई
  3431. 2:40:26कि प्रतीक राजा साहब का कोई नजदीकी
  3432. 2:40:28रिश्तेदार होगा। पर अभी भी उसे यह नहीं
  3433. 2:40:30पता था कि प्रतीक का राजा साहब से रिश्ता
  3434. 2:40:33क्या है। उसकी आंखों में यह सवाल पढ़ा जा
  3435. 2:40:35सकता था। यह देखकर प्रतीक बोला चंद्रभान
  3436. 2:40:39राठौर जी मेरे दादाजी हुए। प्रतीक की बात
  3437. 2:40:42सुनकर शिप्रा को आश्चर्य हुआ। वो बोली
  3438. 2:40:45अच्छा तो आप उनके पोते हैं। इसका मतलब ऊपर
  3439. 2:40:48ऑफिस में जो एक मैडम थी वो आपकी बुआ
  3440. 2:40:51होंगी। शिप्रा की बात सुनकर प्रतीक बोला
  3441. 2:40:55हां वो मेरी बुआ थी। उनका नाम स्वर्ण
  3442. 2:40:57लत्ता है। उनकी बात का आप बुरा मत
  3443. 2:40:59मानिएगा। वो ऐसी ही हैं। नहीं ऐसा कुछ
  3444. 2:41:03नहीं है। मुझे उनकी कोई बात बुरी नहीं
  3445. 2:41:05लगी। उनका सवाल अपनी जगह जायज ही था।
  3446. 2:41:09शिप्रा सफाई देती हुई बोली। यह अच्छी बात
  3447. 2:41:12है कि आपको उनकी बात बुरी नहीं लगी। वैसे
  3448. 2:41:15इस ऑफिस में आपको किसी भी तरह की कोई
  3449. 2:41:17हेल्प की जरूरत हो तो आप कभी भी मुझसे
  3450. 2:41:19संपर्क कर सकती हैं। आप मुझे अपना नंबर दे
  3451. 2:41:22दीजिए। बोलते हुए प्रतीक ने अपना मोबाइल
  3452. 2:41:25अपने हाथ में ले लिया। शिप्रा ने प्रतीक
  3453. 2:41:27को अपना नंबर बताया। प्रतीक ने नंबर को
  3454. 2:41:30डायल किया। एक रिंग जाने के बाद उसने कॉल
  3455. 2:41:33डिस्कनेक्ट किया और शिप्रा से बोला, "यह
  3456. 2:41:36मेरा नंबर है। आप इसे सेव कर लीजिए।"
  3457. 2:41:39शिप्रा ने प्रतीक का नंबर सेव कर लिया।
  3458. 2:41:41फिर अपनी कार का दरवाजा खोलते हुए कहा,
  3459. 2:41:44आपसे बात करके अच्छा लगा मिस्टर प्रतीक
  3460. 2:41:47आगे भविष्य में मैं जरूर आपकी मदद लूंगी।
  3461. 2:41:50एनी टाइम जब भी आपको जरूरत हो आप निसंकोच
  3462. 2:41:54मुझे याद कर सकती हैं। प्रतीक स्माइल करता
  3463. 2:41:57हुआ बोला। इसके बाद शिप्रा अपनी कार में
  3464. 2:42:00बैठी और वहां से निकल गई। रास्ते में चलते
  3465. 2:42:03हुए उसे मेघना की वह बात याद आ रही थी जब
  3466. 2:42:06उसने कहा था कि शायद राजा साहब तुम्हें
  3467. 2:42:08अपनी बहू बनाना चाहते हो। उसे प्रतीक को
  3468. 2:42:11देखने के बाद यह बात याद आई। क्या सच में
  3469. 2:42:14ऐसी ही बात है क्या? पर उसने तो राजा साहब
  3470. 2:42:17को पहले ही बता दिया है कि वह शादीशुदा
  3471. 2:42:19है। और अब राजा साहब को तो यह भी पता है
  3472. 2:42:22कि शौर्य ही उसका पति है। तो कम से कम यह
  3473. 2:42:25बात तो नहीं हो सकती कि राजा साहब के
  3474. 2:42:27दिमाग में उसे अपनी बहू बनाने का ख्याल
  3475. 2:42:29हो। पर उसे यह बात भी अजीब लग रही थी कि
  3476. 2:42:32आखिर राजा साहब उस पर इतने मेहरबान क्यों
  3477. 2:42:35है। जब उसे इसका कोई जवाब नहीं मिला तो
  3478. 2:42:38उसने इस तरफ से अपना विचार डायवर्ट करने
  3479. 2:42:40के लिए मेघना को फोन करने की सोची। तभी
  3480. 2:42:43उसके फोन पर रिंग होने लगा। उसने नंबर पर
  3481. 2:42:46ध्यान दिया तो उसके पापा का फोन आ रहा था।
  3482. 2:42:49उसने कॉल उठाया तो दूसरी तरफ से उसके पापा
  3483. 2:42:52ने पूछा कहां हो तुम? शिप्रा ने बताया कि
  3484. 2:42:56वो रास्ते में है और अभी वापस मॉडल टाउन
  3485. 2:42:59जा रही है। शिप्रा की बात सुनने के बाद
  3486. 2:43:02राजदीप जी ने कहा क्या तुम अभी घर आ सकती
  3487. 2:43:05हो? मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। शिप्रा
  3488. 2:43:09को समझ नहीं आया कि ऐसी क्या बात हो गई जो
  3489. 2:43:12उसके पापा उसे घर आने को कह रहे हैं। उसने
  3490. 2:43:15कहा भी क्या बात है पापा आप फोन पर भी तो
  3491. 2:43:18बात कर सकते हैं। नहीं तुम थोड़ी देर के
  3492. 2:43:22लिए घर आ जाओ फिर चली जाना। राजदीप जी ने
  3493. 2:43:26फोन पर बात करना ठीक नहीं समझा। शिप्रा को
  3494. 2:43:29कुछ समझ नहीं आया कि उसके पापा को उससे
  3495. 2:43:31क्या बात करनी है। पर उसे ध्यान आया कि
  3496. 2:43:34उसने अपनी जॉब के बारे में अपने पापा को
  3497. 2:43:36भी अभी तक कुछ नहीं बताया है। उसे भी यह
  3498. 2:43:39सही लगा कि घर जाकर ही वो अपने पापा को यह
  3499. 2:43:41खुशखबरी देगी। उसने अपनी कार को अपने घर
  3500. 2:43:45की तरफ मोड़ दिया। थोड़ी देर बाद वो अपने
  3501. 2:43:47घर में अपने पापा के पास बैठी हुई थी।
  3502. 2:43:50कहिए पापा क्या बात करनी है आपको? राजदीप
  3503. 2:43:54जी समझने की कोशिश कर रहे थे कि वह अपनी
  3504. 2:43:57बात कैसे शुरू करें। इसीलिए उन्होंने सबसे
  3505. 2:44:00पहले शिप्रा से उसके जॉब के बारे में ही
  3506. 2:44:02पूछा। तुम्हारे जॉब का क्या रहा? आज मैंने
  3507. 2:44:06अपनी जॉब को ज्वाइन कर लिया है पापा। आप
  3508. 2:44:08अगर कंपनी का नाम जानेंगे तो आपके आश्चर्य
  3509. 2:44:11का ठिकाना नहीं रहेगा। शिप्रा खुश होते
  3510. 2:44:14हुए बोली। वो उम्मीद कर रही थी जब उसके
  3511. 2:44:17पापा को पता चलेगा कि उसने फैब्रिक ट्रेंड
  3512. 2:44:19कंपनी को सीईओ के रूप में ज्वाइन किया है
  3513. 2:44:22तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। मैंने
  3514. 2:44:25सुना है तुम्हें राजा साहब ने अपनी कंपनी
  3515. 2:44:28को ज्वाइन करने का ऑफर दिया है। राजदीप जी
  3516. 2:44:31शिप्रा के चेहरे को देखते हुए बोले शिप्रा
  3517. 2:44:34को आश्चर्य हुआ कि उसके पापा को पहले से
  3518. 2:44:36ही यह कैसे पता है? उसने आश्चर्य से कहा
  3519. 2:44:40हां आपने सही कहा। मैं फैब्रिक ट्रेंड
  3520. 2:44:43क्लोथिंग हाउस की सीईओ बन गई हूं। पर आपको
  3521. 2:44:46पहले से ही यह कैसे पता है? तुम भूल रही
  3522. 2:44:49हो कि कल जिस पार्टी में तुमको राजा साहब
  3523. 2:44:51ने यह जॉब प्रपोजल दिया था, उस पार्टी में
  3524. 2:44:53पिताजी भी थे। राजदीप जी बोले, शिप्रा को
  3525. 2:44:57ध्यान आया कि कल दादाजी भी तो उस पार्टी
  3526. 2:45:00में थे। पर उसे यह पता नहीं था कि राजा
  3527. 2:45:02साहब के प्रपोजल के बारे में उसके दादाजी
  3528. 2:45:05को भी पता होगा। फिर उसे ध्यान आया कि
  3529. 2:45:07उन्हें कैसे पता नहीं होगा। क्योंकि बहुत
  3530. 2:45:10से लोगों ने तो उसे उस पार्टी में ही बधाई
  3531. 2:45:12देना शुरू कर दिया था। उसने सोचा कहीं इसी
  3532. 2:45:15के बारे में तो उसके पापा को उससे बात
  3533. 2:45:17नहीं करनी है। यह सोचकर उसने अपने पापा से
  3534. 2:45:20कहा आप बताइए पापा आप मुझसे क्या बात कहना
  3535. 2:45:24चाहते हैं? कुछ पल राजदीप जी सोचते रहे कि
  3536. 2:45:28क्या उन्हें अपने पिताजी की बात में आकर
  3537. 2:45:30शिप्रा से शौर्य से अलग होने के बारे में
  3538. 2:45:32बात करनी चाहिए या नहीं। फिर उन्होंने मन
  3539. 2:45:35ही मन निश्चय किया और शिप्रा से कहा देखो
  3540. 2:45:39तुम्हारी किस्मत तुम पर मेहरबान है जो
  3541. 2:45:42तुम्हें इतनी बड़ी कंपनी का सीईओ बना दिया
  3542. 2:45:44है तो तुम्हें अब अपने बारे में भी सोचना
  3543. 2:45:47चाहिए शिप्रा को समझ नहीं आया कि उसके
  3544. 2:45:50पापा उससे क्या कहना चाहते हैं वो ना
  3545. 2:45:53समझते हुए अपने पापा से बोली मैं आपके
  3546. 2:45:56कहने का मतलब नहीं समझी पापा आप क्या कहना
  3547. 2:45:59चाहते हैं तुम समझी नहीं या समझना नहीं
  3548. 2:46:02चाहती देखो तो मैं यह नहीं कहता कि श्रवण
  3549. 2:46:06अच्छा लड़का नहीं है। पर हमें लगता है कि
  3550. 2:46:08तुम्हें अब इससे आगे का सोचना चाहिए।
  3551. 2:46:11राजदीप जी थोड़ा अटकते हुए बोले वो निश्चय
  3552. 2:46:15नहीं कर पा रहे थे कि जो वह शिप्रा से
  3553. 2:46:17करने को कह रहे हैं क्या वो ठीक है? आप जो
  3554. 2:46:20भी कहना चाहते हैं पिताजी वो बात आप
  3555. 2:46:23साफ-साफ कहें। शिप्रा थोड़े खड़े स्वर में
  3556. 2:46:26बोली। देखो अब तुम जितने अच्छे पोस्ट पर
  3557. 2:46:29काम कर रही हो तो हमें लगता है कि तुम्हें
  3558. 2:46:32अब श्रवण से अलग हो जाना चाहिए क्योंकि
  3559. 2:46:34कुछ ही समय में तुम्हारी पॉपुलैरिटी बढ़ने
  3560. 2:46:37वाली है तो यह अच्छा नहीं लगेगा कि लोग
  3561. 2:46:39तुम्हें एक भिखारी की पत्नी कहें इसीलिए
  3562. 2:46:43तुम जितनी जल्दी इस रिश्ते से बाहर निकल
  3563. 2:46:45जाओ तुम्हारे भविष्य के लिए यह उतना ही
  3564. 2:46:48अच्छा है। राजदीप जी शिप्रा को समझाने की
  3565. 2:46:51कोशिश करने लगे। आप क्यों बार-बार एक ही
  3566. 2:46:54रट लगाए हुए हैं? मैंने पहले ही आपको कह
  3567. 2:46:56रखा है कि मैं श्रवण से तलाक नहीं लूंगी।
  3568. 2:46:59फिर भी आपकी सुई वहीं पर अटकी हुई है।
  3569. 2:47:01शिप्रा नाराजगी से बोली, देखो अगर तुम यह
  3570. 2:47:04चाहती हो कि मैं तुम्हें आगे से दूसरी
  3571. 2:47:06शादी के लिए फोर्स ना करूं तो नहीं
  3572. 2:47:08करूंगा। पर मुझे लगता है कि तुम्हारी
  3573. 2:47:11भविष्य के लिए यही अच्छा होगा कि तुम
  3574. 2:47:13श्रवण से अलग हो जाओ। राजदीप जी ने लास्ट
  3575. 2:47:16टाइम एक कोशिश करने की सोची। शिप्रा ने
  3576. 2:47:19ध्यान से अपने पिताजी की बात को सुना।
  3577. 2:47:21उसके बाद उसने कहा अगर आप यह सोच रहे हैं
  3578. 2:47:24कि राजा जी को हमारी शादी के बारे में
  3579. 2:47:26नहीं पता तो आप गलत सोच रहे हैं। उन्हें
  3580. 2:47:29हमारी शादी के बारे में पता है और उन्हें
  3581. 2:47:31यह भी पता है कि श्रवण ही मेरा पति है।
  3582. 2:47:34क्या अब भी आप कहेंगे कि मैं श्रवण से
  3583. 2:47:36तलाक ले लूं। राजदीप जी इस हकीकत से वाकिफ
  3584. 2:47:39नहीं थे कि राजा साहब को शिप्रा और श्रवण
  3585. 2:47:41की शादी के बारे में पता है। जब शिप्रा ने
  3586. 2:47:44उन्हें बता दिया कि राजा जी को उसकी शादी
  3587. 2:47:46की हकीकत पता है तो फिर उनके पास कहने को
  3588. 2:47:49कुछ रह नहीं गया। अब उन्हें लगने लगा कि
  3589. 2:47:51शिप्रा को तलाक के लिए कहना निरर्थक बात
  3590. 2:47:54थी। अभी राजदीप जी शिप्रा से और कुछ कहते
  3591. 2:47:57कि तभी उसे एक वीडियो मैसेज आया जिसको
  3592. 2:48:00देखकर शिप्रा की भौहें चढ़ गई। उसे
  3593. 2:48:02विश्वास नहीं हो रहा था कि जो वह देख रही
  3594. 2:48:04है वह सही हो सकता है। पर उस वीडियो क्लिप
  3595. 2:48:07को देखने के बाद शिप्रा के चेहरे पर
  3596. 2:48:09परेशानी नजर आने लगी। वीडियो क्लिप देखने
  3597. 2:48:12के बाद शिप्रा थोड़ा परेशान नजर आने लगी।
  3598. 2:48:15वह अब जल्दी से यहां से निकलना चाहती थी।
  3599. 2:48:18वह अपनी जगह पर खड़ी हुई और अपने पापा से
  3600. 2:48:20बोली, "मुझे कुछ काम आ गया है इसीलिए मैं
  3601. 2:48:23अभी निकलती हूं।" राजदीप जी ने शिप्रा को
  3602. 2:48:26खड़े होते देखा तो वह जल्दी से बोले, कल
  3603. 2:48:29युविका और विहान की इंगेजमेंट पार्टी है
  3604. 2:48:31तो तुम समय से उस पार्टी में आ जाना और
  3605. 2:48:33श्रवण को भी अपने साथ लेते आना। शिप्रा को
  3606. 2:48:36यह तो पता था कि उसके दादाजी युविका से
  3607. 2:48:39विहान की शादी के लिए तैयार हो गए हैं। पर
  3608. 2:48:41उसे यह नहीं पता था कि उन दोनों की
  3609. 2:48:43इंगेजमेंट डेट भी फाइनल हो रखी है। उसे
  3610. 2:48:46आश्चर्य हुआ। पर उसने यह भी सोचा चलो
  3611. 2:48:48अच्छा है कि कम से कम इस बला से पीछा तो
  3612. 2:48:51छूटा। उसने राजदीप जी से कहा ठीक है मैं
  3613. 2:48:54कल समय से आ जाऊंगा। इतना कहकर वह वहां से
  3614. 2:48:57निकल गई। वो जाकर अपनी कार में बैठी और
  3615. 2:49:00दोबारा मोबाइल निकालकर उसमें उस वीडियो
  3616. 2:49:03क्लिप को देखने लगी जिसे मेघना ने भेजा
  3617. 2:49:05था। उस वीडियो में शौर्य और नताशा दोनों
  3618. 2:49:08एक दूसरे के साथ डांस कर रहे थे। उस
  3619. 2:49:10वीडियो को देखकर लग रहा था कि नताशा थोड़ी
  3620. 2:49:13नशे की हालत में थी। पर शौर्य ठीक लग रहा
  3621. 2:49:16था। शिप्रा समझ गई कि यह किसी क्लब का
  3622. 2:49:19वीडियो है। उसने मेघना को फोन किया। दूसरी
  3623. 2:49:22तरफ शिप्रा के ऑफिस जाने के बाद शौर्य
  3624. 2:49:25मेघना के साथ नाश्ते की टेबल पर बैठा हुआ
  3625. 2:49:28था। तभी उसके पास नताशा का फोन आया और
  3626. 2:49:31उसने पूछा कहां हो तुम? शौर्य ने बताया वह
  3627. 2:49:34अभी घर पर ही है। तो नताशा ने उसे बताया
  3628. 2:49:37कि वह अभी फन फ्लोक होटल कम रेस्टोरेंट आ
  3629. 2:49:40जाए जहां रत्नाकर शेट्टी उन दोनों का
  3630. 2:49:42इंतजार कर रहा है। शौर्य के पास दूसरा कोई
  3631. 2:49:44चारा नहीं था। वो उठा और तैयार होकर बाहर
  3632. 2:49:48आ गया। मेघना ने शौर्य को तैयार होकर जाते
  3633. 2:49:50देखा तो उसने पूछा कहां जा रहे हो? तो
  3634. 2:49:54शौर्य ने बताया तो मेघना बोली मैं अकेली
  3635. 2:49:57यहां बोर हंगी। क्या मैं भी तुम्हारे साथ
  3636. 2:49:59चल सकती हूं? शौर्य मेघना को साथ ले जाने
  3637. 2:50:02को तैयार हो गया। मेघना भी जल्दी ही तैयार
  3638. 2:50:05होकर आ गई। दोनों फन फ्लोक रेस्टोरेंट
  3639. 2:50:07पहुंचे जहां रत्नाकर शेट्टी पहले से ही
  3640. 2:50:09बैठा उनका इंतजार कर रहा था। उसके सामने
  3641. 2:50:12टेबल पर एक फाइल पड़ी हुई थी। जैसे ही
  3642. 2:50:15उसने शौर्य को मेघना के साथ वहां आते
  3643. 2:50:17देखा। उसने खड़ा होकर उससे हाथ मिलाया।
  3644. 2:50:20शौर्य ने नताशा को वहां नहीं देखा तो उसने
  3645. 2:50:22रत्नाकर शेट्टी से पूछा, नताशा कहां है?
  3646. 2:50:25शौर्य की बात सुनकर रत्नाकर शेट्टी बोला,
  3647. 2:50:28वह भी अभी पहुंचने वाली ही है। शौर्य
  3648. 2:50:31मेघना के साथ उसी टेबल पर बैठ गया।
  3649. 2:50:33रत्नाकर शेट्टी अपने सामने परी फाइल शौर्य
  3650. 2:50:36की तरफ बढ़ाता हुआ बोला, "मिस्टर श्रवण,
  3651. 2:50:39यह स्क्रिप्ट है जो मैं नताशा कपूर की
  3652. 2:50:41मूवी के लिए लाया हूं। कौन सी मूवी के
  3653. 2:50:44लिए? शौर्य हैरानी से बोला, "अरे, कल आपके
  3654. 2:50:48सामने ही तो नताशा जी ने कहा था कि उन्हें
  3655. 2:50:50आपके साथ एक फिल्म करनी है। जितनी जल्दी
  3656. 2:50:52हो सके।" इसीलिए तो मैंने बड़ी मुश्किल से
  3657. 2:50:55यह स्क्रिप्ट पसंद की है। आप भी एक बार
  3658. 2:50:57देख लीजिए। अगर थोड़ी बहुत कुछ चेंजेस
  3659. 2:51:00करवानी हो तो उस बारे में बात कर सकते
  3660. 2:51:02हैं। रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर शौर्य
  3661. 2:51:04का मन किया कि वो अपना सर पीट ले। वो
  3662. 2:51:07रत्नाकर शेट्टी से बोला मिस्टर शेट्टी आप
  3663. 2:51:10जानते हैं अभी हमारे लिए सबसे जरूरी कौन
  3664. 2:51:13सा काम है? आप ऐड शूट की बात कर रहे हैं।
  3665. 2:51:16आप उसकी चिंता मत कीजिए। उसकी सारी तैयारी
  3666. 2:51:19हो रखी है। परसों से उस ऐड की शूट शुरू हो
  3667. 2:51:21जाएगी। मैंने नताशा जी को भी इसके बारे
  3668. 2:51:24में बता रखा है। रत्नाकर शेट्टी शौर्य को
  3669. 2:51:27आश्वस्त करता हुआ बोला। यह जानकर कि ऐड की
  3670. 2:51:30शूट ऑलरेडी शेड्यूल हो रखी है। शौर्य को
  3671. 2:51:32तसल्ली हुई। इसलिए वह थोड़ा टेंशन फ्री
  3672. 2:51:35होता हुआ बोला। आप मुझ पर कुछ ज्यादा ही
  3673. 2:51:37प्रेशर नहीं बना रहे हैं। मिस्टर शेट्टी
  3674. 2:51:40आपके कारण मैंने पहले ही एक फिल्म साइन कर
  3675. 2:51:42लिया है और अभी वह पहली शुरू भी नहीं हुई
  3676. 2:51:45और आपने दूसरी फिल्म भी करने का सोच लिया।
  3677. 2:51:47इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। आपने मिस
  3678. 2:51:50नताशा की बात को नहीं सुना था। मैं खुद भी
  3679. 2:51:53अभी कहां यह दूसरी फिल्म करने की सोच रहा
  3680. 2:51:55था। पर अगर मैं मिस नताशा की बात नहीं
  3681. 2:51:57मानता तो वो मुझे मेरी पहली फिल्म भी नहीं
  3682. 2:52:00करने देगी। रत्नाकर शेट्टी बेबसी से बोला।
  3683. 2:52:03जबकि मेघना इस बात से हैरान थी कि अभी
  3684. 2:52:06एक-द दिन पहले ही तो मालिनी ने उसे अपनी
  3685. 2:52:08फिल्म में काम करने के लिए अप्रोच किया था
  3686. 2:52:10और अब नताशा भी उसके साथ फिल्म करने वाली
  3687. 2:52:13है। जब शिप्रा जानेगी कि शौर्य को दूसरी
  3688. 2:52:16फिल्म भी मिल गई है तो उसका क्या रिएक्शन
  3689. 2:52:18होगा। अभी मेघना इन्हीं ख्यालों में थी कि
  3690. 2:52:21उसी समय नताशा आ गई। पिंक शूट में वह कहर
  3691. 2:52:24ढा रही थी। वो सबसे मिली और मेघना को
  3692. 2:52:27देखकर खुश होती हुई बोली मुझे उम्मीद नहीं
  3693. 2:52:31थी कि तुम भी मुझे यहां मिलोगी। तुम्हारी
  3694. 2:52:34ही मेहरबानी है। जब तक तुम मेरा काम नहीं
  3695. 2:52:37कर दोगी तब तक मैं इसी शहर में रहूंगी।
  3696. 2:52:41इसीलिए अगर मुझसे छुटकारा चाहती हो तो
  3697. 2:52:44जल्दी से मेरा शूट कंप्लीट कर दो। फिर मैं
  3698. 2:52:47यहां से 921
  3699. 2:52:50मेघना अपनी हाथ को हवा में प्लेन की तरह
  3700. 2:52:53लहराती हुई बोली अगर ऐसी बात है तो फिर तो
  3701. 2:52:56मैं और लेट करूंगी ताकि मुझे तुम्हारे साथ
  3702. 2:52:59रहने का और भी मौका मिले। नताशा हंसती हुई
  3703. 2:53:03बोली। इसके बाद वो रत्नाकर शेट्टी की ओर
  3704. 2:53:06देखकर बोली हां मिस्टर शेट्टी आप बताइए
  3705. 2:53:10यूं अचानक यहां बुलाने का कारण। रत्नाकर
  3706. 2:53:13शेट्टी ने अपने सामने की फाइल नताशा की
  3707. 2:53:16तरफ बढ़ाते हुए कहा, "आपने जिस काम के लिए
  3708. 2:53:19कहा था, वह मैंने कर दिया है। यह
  3709. 2:53:21स्क्रिप्ट है जो मुझे बहुत पसंद आया है।
  3710. 2:53:24आप एक बार देख लीजिए। अगर आप ओके करती
  3711. 2:53:27हैं, तो हम इस कहानी पर आगे बढ़ सकते हैं।
  3712. 2:53:30रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर नताशा की
  3713. 2:53:33आंखों में चमक आ गई। वेरी गुड मिस्टर
  3714. 2:53:36शेट्टी। आप तो बहुत फास्ट निकले। कल मैंने
  3715. 2:53:39कहा और आपने आज स्क्रिप्ट भी ढूंढ लिया।
  3716. 2:53:42आप मुझे कल तक का समय दीजिए। मैं एक बार
  3717. 2:53:45इसको रीड कर लेती हूं। फिर आपको बताती
  3718. 2:53:47हूं। इसी समय वेटर उस टेबल पर कुछ स्नेक्स
  3719. 2:53:51की प्लेट लगा गया। रत्नाकर शेट्टी पहले ही
  3720. 2:53:54वेटर को आर्डर कर रखा था। वहां से फ्री
  3721. 2:53:57होने के बाद नताशा ने शौर्य से कहा। श्रवण
  3722. 2:54:00अगर तुम फ्री हो तो क्या तुम मेरे साथ एक
  3723. 2:54:03पार्टी में चल सकते हो? नताशा की बात
  3724. 2:54:06सुनकर शौर्य मेघना की ओर देखा। नताशा ने
  3725. 2:54:09जब शौर्य को मेघना की ओर देखते हुए देखा
  3726. 2:54:12तो उसने शौर्य से कहा मेघना भी हमारे साथ
  3727. 2:54:15चल सकती है। नताशा की बात सुनकर अब शौर्य
  3728. 2:54:19के पास नताशा को मना करने का कोई कारण
  3729. 2:54:21नहीं था। वे तीनों फन फ्लॉक से निकले और
  3730. 2:54:25होटल पैराडाइज पहुंचे। अब होटल पैराडाइज
  3731. 2:54:28को मेनका ही कंट्रोल कर रही थी। शौर्य तो
  3732. 2:54:31अभी तक होटल पैराडाइज को ऑक्शन में खरीदने
  3733. 2:54:34के बाद एक बार देखने भी नहीं आया था। उसने
  3734. 2:54:37तो इस होटल को मेनका की जिद के कारण ही
  3735. 2:54:39खरीदा था। होटल पैराडाइज का मेन हॉल आज
  3736. 2:54:42रणधीर शेखावत ने बुक कर रखा था। आज
  3737. 2:54:46उन्होंने यहां अपनी फिल्म का मुहूर्त रखा
  3738. 2:54:47हुआ था। जो कि वह अपने बेटे कबीर शेखावत
  3739. 2:54:50को लेकर बनाने वाले थे। आज इस पार्टी में
  3740. 2:54:53उन्होंने बड़ी-बड़ी फिल्मी हस्तियों को
  3741. 2:54:55बुलाया हुआ था। नताशा कपूर भी इस पार्टी
  3742. 2:54:58में इनवाइटेड थी। नताशा कपूर की अभी तक एक
  3743. 2:55:01ही फिल्म रिलीज हुई थी। जानम जो
  3744. 2:55:04ब्लॉकबस्टर रही थी। उसके बाद उसको कोई
  3745. 2:55:07स्क्रिप्ट ही पसंद नहीं आई थी। इसीलिए
  3746. 2:55:10उसने कोई दूसरी फिल्म साइन नहीं की थी।
  3747. 2:55:12रणधीर शेखावत भी अपनी फिल्म में अपने बेटे
  3748. 2:55:15के साथ नताशा को ही लेना चाहते थे। पर
  3749. 2:55:18नताशा जानती थी कि रणधीर शेखावत जो फिल्म
  3750. 2:55:21बनाने जा रहे हैं वो अपने बेटे को प्रमोट
  3751. 2:55:24करने के लिए। इसीलिए उनकी फिल्म में
  3752. 2:55:26हीरोइन के लिए कोई खास स्कोप नहीं होगा।
  3753. 2:55:29इसीलिए भी नताशा उनकी फिल्म में काम करने
  3754. 2:55:32को तैयार नहीं हुई थी। नताशा के उस पार्टी
  3755. 2:55:35में पहुंचने पर रणधीर शेखावत ने जबरदस्त
  3756. 2:55:38स्वागत किया। उसे किसी स्टार की तरह ट्रीट
  3757. 2:55:41किया। मिस नताशा तुमने मेरी पार्टी में
  3758. 2:55:44आकर यहां की शोभा बढ़ा दी। क्यों मुझे झार
  3759. 2:55:47पर चढ़ा रहे हैं शेखावत सर? यह मेरी
  3760. 2:55:50खुशनसीबी है कि आपने मुझे अपनी पार्टी में
  3761. 2:55:52इनवाइट किया है। नताशा मुस्कुराती हुई
  3762. 2:55:55बोली। अगर तुम मेरी फिल्म में काम करने को
  3763. 2:55:58तैयार हो जाओ तो हमारा दिन और भी अच्छा बन
  3764. 2:56:01जाए। रणधीर शेखावत एक तरह से दोबारा नताशा
  3765. 2:56:05को अपनी फिल्म का प्रपोजल देते हुए बोले
  3766. 2:56:08शेखावत साहब इस बार तो रहने दीजिए। हां
  3767. 2:56:12आपकी अगली फिल्म में अगर मेरे लिए कोई रोल
  3768. 2:56:15होगा तो मैं जरूर करूंगी। अभी वैसे भी मैं
  3769. 2:56:18कुछ दूसरे प्रोजेक्ट में बिजी हूं। नताशा
  3770. 2:56:21ने अपनी मजबूरी जताई। रणधीर शेखावत ने
  3771. 2:56:25नताशा के साथ खड़े शौर्य और मेघना की ओर
  3772. 2:56:28देखा। तो मेघना ने बताया यह दोनों मेरे
  3773. 2:56:31दोस्त हैं। हम साथ में थे तो मैं इन्हें
  3774. 2:56:34साथ ले आई। आपको कोई ऐतराज तो नहीं? कैसी
  3775. 2:56:38बात करती हो? यह भी कोई कहने की बात है?
  3776. 2:56:41रणधीर शेखावत हंसते हुए बोला। तभी कुछ और
  3777. 2:56:45गेस्ट अंदर आए तो रणधीर शेखावत ने नताशा
  3778. 2:56:48से कहा। तुम अंदर चलकर पार्टी एंजॉय करो।
  3779. 2:56:51तब तक मैं कुछ और गेस्टों को देख लेता
  3780. 2:56:54हूं। नताशा शौर्य और मेघना के साथ अंदर
  3781. 2:56:57आकर एक खाली टेबल देखकर उस पर बैठ गई।
  3782. 2:57:01मेघना इस पार्टी में कई जाने पहचाने चेहरे
  3783. 2:57:04को देख रही थी जिसे अभी तक वो फिल्मों में
  3784. 2:57:07ही देखती थी। शौर्य को पता नहीं था कि यह
  3785. 2:57:10पार्टी किस लिए है? तो उसने नताशा से पूछा
  3786. 2:57:13यह पार्टी किस खुशी में है? नताशा शौर्य
  3787. 2:57:17की तरफ देखकर एक तरफ इशारा करती हुई बोली
  3788. 2:57:20उस पोस्टर की तरफ देखो समझ आ जाएगा। जिधर
  3789. 2:57:24नताशा इशारा कर रही थी शौर्य ने उस तरफ
  3790. 2:57:26देखा तो वहां पर एक बड़ा सा पोस्टर लगा
  3791. 2:57:29हुआ था जो कि किसी फिल्म की पोस्टर की तरह
  3792. 2:57:32लग रहा था जिस पर बलवान लिखा हुआ था। उस
  3793. 2:57:36पोस्टर में जो हीरो था वो भी किसी पहलवान
  3794. 2:57:38की तरह ही लग रहा था। तो आज इस फिल्म की
  3795. 2:57:41मुहूर्त है। हां, रणधीर शेखावत इस फिल्म
  3796. 2:57:45से अपने बेटे को इस इंडस्ट्रीज में ल्च कर
  3797. 2:57:47रहा है। नताशा शौर्य से बोली, "तुमने इस
  3798. 2:57:51फिल्म में काम करने से मना क्यों कर
  3799. 2:57:53दिया?" शौर्य ने सवाल किया, "तुम इस फिल्म
  3800. 2:57:56का नाम नहीं देख रहे?" बलवान, तुम्हें
  3801. 2:57:59लगता है कि इस फिल्म में हीरोइन के लिए
  3802. 2:58:01कोई स्कोप होगा? नताशा बुरा सा मुंह बनाती
  3803. 2:58:04हुई बोली, तो इसी कारण तुमने इस फिल्म में
  3804. 2:58:07काम करने से मना कर दिया। वैसे यह रणधीर
  3805. 2:58:10शेखावत का मेन काम क्या है? शौर्य दूर
  3806. 2:58:13खड़े रणधीर शेखावत की ओर देखता हुआ बोला,
  3807. 2:58:16"यह इंडस्ट्रीज का एक बड़ा डिस्ट्रीब्यूटर
  3808. 2:58:18है। इन ऑर्बिट सिनेमा का जो चैन है वो
  3809. 2:58:21रणधीर शेखावत का ही है। इसीलिए इंडस्ट्रीज
  3810. 2:58:24के लोग इससे पंगे लेने की कोशिश नहीं करते
  3811. 2:58:26हैं। नताशा ने बताया। पर तुमने तो उसके
  3812. 2:58:29बेटे के साथ फिल्म करने से मना कर दिया
  3813. 2:58:31है। तो एक तरह से तो तुम भी उससे पंगा ही
  3814. 2:58:34ले रही हो। अब तक उन दोनों की बात को सुन
  3815. 2:58:37रही मेघना बीच में बोली मैंने डायरेक्ट
  3816. 2:58:41मना नहीं किया है। साथ में मैंने उन्हें
  3817. 2:58:43आश्वासन दिया है कि उनकी अगली फिल्म में
  3818. 2:58:46मैं जरूर काम करूंगी। और फिर रणधीर सर के
  3819. 2:58:49दिमाग में यह बात भी है कि वो इस फिल्म
  3820. 2:58:51में इंडस्ट्रीज की टॉप की हीरोइन को लें।
  3821. 2:58:54जिसका फायदा उसके बेटे को मिले। नताशा
  3822. 2:58:57डांस फ्लोर की तरफ देखती हुई बोली। जहां
  3823. 2:59:00कबीर शेखावत किसी लड़की के साथ डांस कर
  3824. 2:59:02रहा था। अगर ऐसी बात है तो फिर रणधीर
  3825. 2:59:05शेखावत तुम्हें यह प्रपोजल क्यों दे रहा
  3826. 2:59:07है? शौर्य नताशा की बात को समझने की कोशिश
  3827. 2:59:11करता हुआ बोला, दरअसल मैं उनके बेटे की
  3828. 2:59:14पसंद हूं। कबीर शेखावत इस फिल्म में मेरे
  3829. 2:59:16साथ काम करना चाहता है। जबकि रणधीर शेखावत
  3830. 2:59:20की पसंद अभी की टॉप हीरोइन प्रिया शर्मा
  3831. 2:59:22है। अपने बेटे की इच्छा का सम्मान करते
  3832. 2:59:25हुए उन्होंने पहले मुझे अप्रोच किया। जब
  3833. 2:59:28मैंने अपनी मजबूरी बताई तो उन्हें अपनी
  3834. 2:59:30पसंद को सामने लाने का कारण मिल गया।
  3835. 2:59:33इसीलिए उन्होंने मेरी बात का बुरा नहीं
  3836. 2:59:35माना और साथ में मैंने उनसे यह भी तो कह
  3837. 2:59:38दिया कि मैं उनकी अगली फिल्म में जरूर काम
  3838. 2:59:40करूंगी। नताशा ने शौर्य को समझाया। तो
  3839. 2:59:44क्या तुम उनकी अगली फिल्म में काम करोगी?
  3840. 2:59:47शौर्य नताशा की आंखों में देखता हुआ बोला।
  3841. 2:59:51पहले कबीर की पहली फिल्म तो अच्छा बिजनेस
  3842. 2:59:53करें। उसके बाद ही तो वह अगली फिल्म के
  3843. 2:59:55लिए सोचेगा। नताशा हंसते हुए बोली। इसी
  3844. 2:59:59समय एक वेटर उनके पास आया और उन तीनों के
  3845. 3:00:02सामने ड्रिंक की ग्लास सर्व कर दिया।
  3846. 3:00:05तीनों हल्का-हल्का शीप लेने लगे। इसी समय
  3847. 3:00:08कबीर शेखावत नताशा के सामने आकर खड़ा हो
  3848. 3:00:11गया और उससे बोला नताशा कपूर तुम आ गई।
  3849. 3:00:15मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा था।
  3850. 3:00:18मुबारक हो कबीर आखिर आज तुम्हारी फिल्म का
  3851. 3:00:21मुहूर्त हो ही गया। नताशा ने कबीर को बधाई
  3852. 3:00:24दी। बस एक अफसोस रहेगा कि तुम मेरी इस
  3853. 3:00:28फिल्म में काम नहीं कर रही हो। कबीर अफसोस
  3854. 3:00:31भरे स्वर में बोला, कोई अफसोस की जरूरत
  3855. 3:00:34नहीं है। तुम्हारी अगली फिल्म में मैं
  3856. 3:00:37जरूर काम करूंगी। नताशा ने कबीर को
  3857. 3:00:40आश्वासन दिया। चलो कोई बात नहीं। भले ही
  3858. 3:00:43तुम मेरी अगली फिल्म में काम करना, तुम
  3859. 3:00:45अभी चलकर मेरे साथ एक डांस तो कर ही सकती
  3860. 3:00:48हो। कबीर अपने हाथ का ग्लास टेबल पर रखता
  3861. 3:00:51हुआ बोला। सॉरी कबीर। दरअसल अभी थोड़ी देर
  3862. 3:00:55पहले श्रवण ने भी मुझे डांस करने को
  3863. 3:00:57इनवाइट किया था और मैंने उसका प्रपोजल
  3864. 3:00:59एक्सेप्ट कर लिया था। नताशा शौर्य की ओर
  3865. 3:01:02देखती हुई बोली। नताशा का इंकार सुनकर
  3866. 3:01:06कबीर भाव शून्य नजरों से शौर्य की तरफ
  3867. 3:01:08देखने लगा। इसी समय एक लड़की कबीर के पास
  3868. 3:01:12आई और बोली, "यह क्या बात हुई कबीर? तुम
  3869. 3:01:15मुझे डांस फ्लोर पर बुलाकर खुद गायब हो
  3870. 3:01:17गए?" इधर शौर्य नाराजगी से नताशा की तरफ
  3871. 3:01:21देखने लगा। पर नताशा आंखों में ही शौर्य
  3872. 3:01:24से रिक्वेस्ट करने लगी कि वह इस स्थिति को
  3873. 3:01:26संभाल ले। मजबूरन शौर्य अपनी जगह से उठा
  3874. 3:01:30और डांस फ्लोर की तरफ बढ़ गया। मेघना अपनी
  3875. 3:01:33जगह पर बैठी उन दोनों को देखती रही। डांस
  3876. 3:01:36फ्लोर पर जाकर नताशा और शौर्य कबीर को
  3877. 3:01:39दिखाने के लिए साथ में डांस करने लगी।
  3878. 3:01:42शौर्य और नताशा को साथ में डांस करते
  3879. 3:01:44देखकर मेघना को शरारत सूझी और उसने अपनी
  3880. 3:01:47जगह से ही अपने मोबाइल में दोनों का
  3881. 3:01:50वीडियो बनाने लगी और अगले ही पल उसने वो
  3882. 3:01:53वीडियो क्लिप शिप्रा को भेज भी दिया जबकि
  3883. 3:01:57डांस फ्लोर पर शौर्य नताशा को अपने करीब
  3884. 3:02:00पाकर थोड़ा रोमांचित भी था। नताशा की शरीर
  3885. 3:02:03की खुशबू कहीं ना कहीं शौर्य को अपनी तरफ
  3886. 3:02:06एक खुला आमंत्रण भी दे रहा था। पहले तो
  3887. 3:02:09शौर्य उसके पास होने पर अनकंफर्टेबल फील
  3888. 3:02:12कर रहा था। पर धीरे-धीरे वो अपने अंदर
  3889. 3:02:15थोड़ा रोमांच महसूस करने लगा। शायद यह
  3890. 3:02:18एक-दो पैग वाइन पीने का असर था। कामोम बेस
  3891. 3:02:21यही हाल नताशा का भी था। उसने वाइन की
  3892. 3:02:24दो-तीन गिलास पी ली थी। जिसका असर उस पर
  3893. 3:02:26कुछ ज्यादा ही होने लगा था। इसीलिए उसको
  3894. 3:02:29अपना कुछ ज्यादा होश नहीं था। जबकि उससे
  3895. 3:02:32कुछ दूरी पर खड़ा कबीर अब डांस नहीं कर
  3896. 3:02:34रहा था। बल्कि वह जलती आंखों से नताशा और
  3897. 3:02:37शौर्य को देख रहा था। अगर उसका बस चलता तो
  3898. 3:02:40वह अपनी आंखों से ही उन दोनों को भस्म कर
  3899. 3:02:42देता। मेघना अपनी जगह पर बैठी शौर्य और
  3900. 3:02:46नताशा की ओर ही देख रही थी। तभी उसका फोन
  3901. 3:02:50रिंग करने लगा। उसने देखा यह शिप्रा का ही
  3902. 3:02:53कॉल था। उसने कॉल उठाया तो दूसरी तरफ से
  3903. 3:02:57शिप्रा की आवाज आई। कहां हो तुम? शिप्रा
  3904. 3:03:01को लग ही रहा था कि जो वीडियो क्लिप उसने
  3905. 3:03:03शिप्रा को भेजा है उसको देखते ही उसके पास
  3906. 3:03:07उसका कॉल आएगा। इतना तो वह समझ गई थी कि
  3907. 3:03:10भले ही शिप्रा बोलती कुछ भी हो पर जब वो
  3908. 3:03:13शौर्य को किसी लड़की के करीब देखती है तो
  3909. 3:03:15उसे यह बात बर्दाश्त नहीं होता। शिप्रा ने
  3910. 3:03:18हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया। मैं
  3911. 3:03:21श्रवण के साथ एक पार्टी में आई हुई हूं।
  3912. 3:03:24तुम दोनों किसकी पार्टी में चली गई? और जब
  3913. 3:03:26तुम दोनों गई थी तो यह नताशा वहां कैसे
  3914. 3:03:29पहुंच गई? शिप्रा की आवाज में उसकी चिंता
  3915. 3:03:32साफ छलक रही थी। दरअसल श्रवण और मैं नताशा
  3916. 3:03:36के ही किसी जानने वाले की पार्टी में आए
  3917. 3:03:39हुए हैं। मेघना ने जवाब दिया हद है तुम
  3918. 3:03:43लोग ऐसे ही किसी की भी पार्टी में चली
  3919. 3:03:45जाती हो। शिप्रा चिरकर बोली नताशा अकेली
  3920. 3:03:50थी तो उसने रिक्वेस्ट किया कि हम उसके साथ
  3921. 3:03:52चल ले। इसलिए हम दोनों उसके साथ आ गए।
  3922. 3:03:55मेघना शिप्रा की चिंता को समझती हुई बोली
  3923. 3:03:59पर तुम दोनों नताशा के पास कैसे पहुंचे?
  3924. 3:04:01तुम दोनों तो घर पर ही थे। शिप्रा को
  3925. 3:04:04गुस्सा आ रहा था कि मेघना एक बार में सारी
  3926. 3:04:07कहानी नहीं बता सकती जो वो उसके पूछने पर
  3927. 3:04:10टुकड़ों में उसे बता रही है। उसके पूछने
  3928. 3:04:13पर मेघना ने फिर से कहा। एक्चुअली एक
  3929. 3:04:16फिल्म को लेकर श्रवण की मीटिंग नताशा से
  3930. 3:04:18थी। उस मीटिंग के समाप्त होने पर वहीं से
  3931. 3:04:20इस पार्टी में आ गए। मूवी को लेकर मीटिंग।
  3932. 3:04:24कौन सी मूवी? शिप्रा को समझ नहीं आया कि
  3933. 3:04:27किस मूवी की मीटिंग थी। शौर्य और नताशा
  3934. 3:04:30साथ में एक फिल्म करने जा रहे हैं। उसी को
  3935. 3:04:33लेकर यह मीटिंग थी। श्रवण ने तो ऑलरेडी
  3936. 3:04:35इसके अलावे भी एक और मूवी साइन कर रखी है
  3937. 3:04:38मालिनी के साथ। उसके बारे में तो तुम्हें
  3938. 3:04:40पता ही है। उसकी भी शूटिंग जल्दी ही शुरू
  3939. 3:04:43होने वाली है। मेघना की यह बात शिप्रा के
  3940. 3:04:46लिए और सरप्राइजिंग थी कि शौर्य को इतनी
  3941. 3:04:49जल्दी दूसरी मूवी भी मिल गई। वह सोचने लगी
  3942. 3:04:52क्या सच में शौर्य मूवी करने वाला है?
  3943. 3:04:55उसके मन में यह चिंता होने लगी कि अगर
  3944. 3:04:57शौर्य मूवी में कामयाब हो गया तो वह कहीं
  3945. 3:05:00उससे दूर ना हो जाए। इसे कहते हैं कि किसी
  3946. 3:05:03का वक्त कब बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता
  3947. 3:05:06है। एक समय था कि यह बात उसके लिए परेशानी
  3948. 3:05:09वाली थी कि शौर्य एक भिखारी है। पर बाद
  3949. 3:05:12में शिप्रा को शौर्य की यह हालात अपने लिए
  3950. 3:05:15मुफिद लगा। उसे लगा उसको जो एक डमी
  3951. 3:05:17हस्बैंड चाहिए उसके लिए शौर्य से बेहतर तो
  3952. 3:05:20कोई हो ही नहीं सकता। पर धीरे-धीरे शौर्य
  3953. 3:05:24तरक्की करने लगा। जैसे-जैसे वह आगे बढ़ता
  3954. 3:05:27जा रहा था, उसको लेकर शिप्रा की चिंता भी
  3955. 3:05:30बढ़ती जा रही थी। और अब जब उसने यह सुना
  3956. 3:05:33कि शौर्य को दो-दो फिल्में में हीरो बनने
  3957. 3:05:36का मौका मिल रहा है। अगर ऐसे ही चलता रहा
  3958. 3:05:39और उसे कामयाबी मिलने लगी तो उसके चारों
  3959. 3:05:41तरफ वैसे ही खूबसूरत लड़कियों की भीड़ लग
  3960. 3:05:44जाएगी। क्या तब वह उसके साथ अपनी शादीशुदा
  3961. 3:05:47जिंदगी को आगे बढ़ा पाएगा? यह सोचकर ही
  3962. 3:05:50उसकी शरीर ने झुरझुरी ली। वो अपने ख्यालों
  3963. 3:05:53से वापस आई। उसने पूछा, "इस समय तुम लोग
  3964. 3:05:57कहां हो? होटल पैराडाइज जहां रणधीर शेखावत
  3965. 3:06:01के बेटे की फिल्म की मुहूर्त की पार्टी चल
  3966. 3:06:03रही है। कहीं तुम यहां आने की तो नहीं सोच
  3967. 3:06:06रही? अचानक ही मेघना के दिमाग में यह
  3968. 3:06:09ख्याल आया। इसीलिए उसने पूछा। पता नहीं
  3969. 3:06:13मुझे नहीं समझ आ रहा कि मैं क्या करूं।
  3970. 3:06:16शिप्रा असमंजस की स्थिति में बोली। इसके
  3971. 3:06:19बाद उसने फोन रख दिया। मेघना को समझ नहीं
  3972. 3:06:22आया कि वो शिप्रा की इस बात का क्या मतलब
  3973. 3:06:25निकाले। क्या वो होटल आएगी या सीधा घर
  3974. 3:06:28जाएगी। दूसरी तरफ शौर्य इन सब बातों से
  3975. 3:06:32बेपरवाह नताशा के साथ डांस फ्लोर पर था।
  3976. 3:06:35वो देख रहा था कि नताशा पर वाइन का शरूर
  3977. 3:06:38चढ़ता जा रहा था। उससे कुछ दूरी पर खड़े
  3978. 3:06:40कबीर शेखावत की आंखों में कुछ जलता हुआ सा
  3979. 3:06:43महसूस हुआ। उसने अपने साथ वाली लड़की को
  3980. 3:06:46कुछ इशारा किया। जिस लड़की को कबीर ने कुछ
  3981. 3:06:49इशारा किया था। वो लड़की अपने एक हाथ में
  3982. 3:06:52वाइन की ग्लास लिए हल्का-हल्का डांस करती
  3983. 3:06:55हुई डांस फ्लोर पर पहुंच गई। वो जैसे किसी
  3984. 3:06:58मौके की तलाश में थी। वो शौर्य के पीछे
  3985. 3:07:02उसके एकदम करीब पहुंच गई। अचानक ही वह
  3986. 3:07:05पीछे से शौर्य से टकराई और वो लड़खराई और
  3987. 3:07:08उसका वाइन का ग्लास उसके पीछे उछल गया और
  3988. 3:07:11गिर गया।
  3989. 3:07:12ग्लास तो नीचे गिर गया पर ग्लास का वाइन
  3990. 3:07:15कुछ उसके ऊपर और कुछ हिस्सा छलक कर नताशा
  3991. 3:07:19के ऊपर भी जाकर गिरा। वो लड़की भी
  3992. 3:07:22जानबूझकर वहां गिरी थी। पर वो जल्दी से
  3993. 3:07:24अपनी जगह से उठी और शौर्य पर चढ़ दो। एक
  3994. 3:07:28पल को तो शौर्य को समझ नहीं आया कि वहां
  3995. 3:07:30पर क्या हुआ है। तभी ग्लास टूटने की आवाज
  3996. 3:07:32सुनकर कबीर वहां आ गया। वो लड़की जिसे
  3997. 3:07:36कबीर ने अभी थोड़ी देर पहले कुछ कहा था वो
  3998. 3:07:38शौर्य पर इल्जाम लगाती हुई बोली कि उसने
  3999. 3:07:40उसे छेड़ने की कोशिश की। उसने जानबूझकर
  4000. 3:07:43उसके पैर में अपना पैर अड़ा दिया जिसके
  4001. 3:07:45कारण वो गिर गई और उसका वाइन का ग्लास टूट
  4002. 3:07:48गया और उसका कपड़ा भी गंदा हो गया। जबकि
  4003. 3:07:51शौर्य अभी समझने की कोशिश कर रहा था कि
  4004. 3:07:53आखिर वहां हो क्या रहा है। जब उसने उस
  4005. 3:07:56लड़की को अपने ऊपर इल्जाम लगाते देखा तो
  4006. 3:07:58वह भी गुस्से में बोला क्या बकवास कर रही
  4007. 3:08:01हो तुम? मुझे तो पता भी नहीं था कि तुम
  4008. 3:08:04मेरे पीछे थी और भला डांस फ्लोर पर वाइन
  4009. 3:08:06का ग्लास लेकर कौन आता है। नताशा भी समझने
  4010. 3:08:09की कोशिश कर रही थी कि यह अचानक क्या हो
  4011. 3:08:11गया। वो खुद भी अनकंफर्टेबल फील करने लगी
  4012. 3:08:14क्योंकि वाइन की कुछ बूंदे उसके ऊपर भी
  4013. 3:08:16गिरी थी। जबकि उसी समय वहां पर आया हुआ
  4014. 3:08:18कबीर उस लड़की से बोला क्या हुआ सरोज? तुम
  4015. 3:08:22यह हंगामा क्यों कर रही हो? वो लड़की
  4016. 3:08:24जिसका नाम सरोज था वो कबीर पर भड़कती हुई
  4017. 3:08:27बोली कैसे-कैसे गवार को अपनी पार्टी बुला
  4018. 3:08:30लिया है? देखो इसने मेरा क्या हाल किया
  4019. 3:08:32है। आखिर हुआ क्या? कुछ बताओगी भी। जब तक
  4020. 3:08:36कुछ बताओगी नहीं तब तक हमें समझ में कैसे
  4021. 3:08:38आएगा कि क्या बात हुई है। कबीर सरोज को
  4022. 3:08:41झिरकता हुआ बोला। इस लड़के ने मुझे पीछे
  4023. 3:08:44से टक्कर मारी और जिसके कारण वाइन का
  4024. 3:08:46गिलास मेरे ऊपर ही गिर गया। सरोज उंगली
  4025. 3:08:49उठाकर शौर्य की तरफ इशारा करती हुई बोली
  4026. 3:08:52नताशा ने जब देखा कि वो लड़की सरेआम शौर्य
  4027. 3:08:55पर इल्जाम लगा रही है तो वो बीच में आती
  4028. 3:08:58हुई बोली तुम ऐसी गलत बात कैसे कर सकती
  4029. 3:09:01हो? श्रवण और मैं तो यहां डांस कर रहे थे
  4030. 3:09:03तो फिर यह तुम्हें टक्कर कैसे मार सकता
  4031. 3:09:05था? तुम बहुत भोली हो मिस नताशा। तुम ऐसे
  4032. 3:09:09छोटे लोगों की मंशा को नहीं समझ सकती। यह
  4033. 3:09:11दिखाई कुछ और देते हैं और होते कुछ और
  4034. 3:09:14हैं। कबीर भी सरोज की बात से सहमति जताते
  4035. 3:09:17हुए बोला, "कबीर, किसी पर इल्जाम लगाने से
  4036. 3:09:21पहले यह देख लो कि तुम यह इल्जाम किस पर
  4037. 3:09:23लगा रहे हो।" श्रवण मेरे साथ यहां आया है
  4038. 3:09:26और यह ऐसा बिल्कुल नहीं है जैसा यह लड़की
  4039. 3:09:28इसे बोल रही है। और तुम भी इस लड़की की
  4040. 3:09:31बात में उसका साथ दे रहे हो। यह ठीक नहीं
  4041. 3:09:33है। नताशा भड़कती हुई बोली, मिस नताशा,
  4042. 3:09:37मैं समझती हूं कि आप एक बड़ी मॉडल हैं।
  4043. 3:09:40इसका मतलब यह नहीं है कि आप मुझ पर यह
  4044. 3:09:42इल्जाम लगाएंगी कि मैं गलत बोल रही हूं।
  4045. 3:09:44मैं वही बोल रही हूं जो इसने अभी मेरे साथ
  4046. 3:09:46किया है। आपको शायद एहसास नहीं हुआ होगा।
  4047. 3:09:49पर सच यही है जो मैंने कहा है। सरोज नताशा
  4048. 3:09:53के सामने सफाई देते हुए बोली। नताशा मैं
  4049. 3:09:56समझता हूं कि इसे तुम अपने साथ लाई हो। पर
  4050. 3:09:59इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ तुम्हारे
  4051. 3:10:00साथ आने से यह सही हो जाएगा। इसने जो हरकत
  4052. 3:10:03सरोज के साथ की है वह बिल्कुल भी माफी के
  4053. 3:10:06लायक नहीं है। इसलिए इसे अभी सबके सामने
  4054. 3:10:09सरोज से माफी मांगनी पड़ेगी। कबीर शौर्य
  4055. 3:10:12को घूरता हुआ बोला। क्या तुम मुझे बताओगे
  4056. 3:10:15कि यह सरोज अचानक डांस फ्लोर पर कहां से आ
  4057. 3:10:17गई? और अगर यह डांस फ्लोर पर आई भी तो इसे
  4058. 3:10:20वाइन की गिलास अपने हाथ में लेकर आने की
  4059. 3:10:22क्या जरूरत थी? नताशा सरोज की गलती की तरफ
  4060. 3:10:25इशारा करती हुई बोली, "यह कोई बड़ी बात
  4061. 3:10:28नहीं है। तुम समझती हो अक्सर लड़कियां
  4062. 3:10:30वाइन पीती हुई एंजॉय करती हैं और इसके
  4063. 3:10:33जैसे छोटे लोग ऐसे ही मौके का फायदा उठाते
  4064. 3:10:35हैं। इसलिए तुम इसे समझा दो कि यह अभी
  4065. 3:10:38सबके सामने इससे माफी मांग ले। नहीं तो यह
  4066. 3:10:40काम मुझे भी करवाना आता है। कबीर शौर्य को
  4067. 3:10:44घूरता हुआ बोला। शौर्य को समझ नहीं आ रहा
  4068. 3:10:47था कि यह हो क्या रहा है। अब तो शौर्य को
  4069. 3:10:50भी कबीर शेखावत पर गुस्सा आने लगा था।
  4070. 3:10:52क्योंकि जिस प्रकार कबीर शेखावत शौर्य का
  4071. 3:10:54पक्ष जाने बिना उस पर इल्जाम लगा रहा था
  4072. 3:10:57वो सही नहीं था। वो सपाट स्वर में बोला
  4073. 3:11:01मिस्टर कबीर आप जो मुझ पर इल्जाम लगा रहे
  4074. 3:11:04हैं उसका आधार क्या है या ऐसा सिर्फ इसलिए
  4075. 3:11:06है कि मैं आपका दोस्त नहीं हूं तो आप मुझ
  4076. 3:11:09पर कुछ भी इल्जाम लगा सकते हैं। ऐसी झूठी
  4077. 3:11:12सफाई देने से कुछ नहीं होने वाला मिस्टर।
  4078. 3:11:14इसलिए मेरा कहा मानो और अभी के अभी सरोज
  4079. 3:11:17से माफी मांगो। नहीं तो तुम उम्मीद भी
  4080. 3:11:20नहीं कर सकते कि मैं तुम्हारे साथ क्या
  4081. 3:11:22करवा सकता हूं। कबीर घमंड भरे स्वर में
  4082. 3:11:25बोला कबीर तुम मेरे दोस्त की बेइज्जती कर
  4083. 3:11:28रहे हो। ऐसे अपनी पार्टी में बुलाकर किसी
  4084. 3:11:31पर यूं झूठा इल्जाम लगाना सही है क्या?
  4085. 3:11:34नताशा को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि
  4086. 3:11:36कबीर इस तरह से सरवन पर इल्जाम लगा रहा
  4087. 3:11:39था। वहां हो रहे शोर को सुनकर रणधीर
  4088. 3:11:42शेखावत भी वहां पर आ गया था। वहां पर हो
  4089. 3:11:45रहे शोर को सुनकर वह बोले क्या हो रहा है
  4090. 3:11:48यहां पर इतना शोर क्यों हो रहा है नताशा
  4091. 3:11:51ने जब रणधीर शेखावत को वहां पर आया हुआ
  4092. 3:11:54देखा तो वह रणधीर शेखावत के पास जाकर बोली
  4093. 3:11:57यह देखिए मिस्टर शेखावत आपका बेटा कबीर एक
  4094. 3:12:00लड़की की बात में आकर मेरे दोस्त पर झूठा
  4095. 3:12:03इल्जाम लगा रहा है यह सही नहीं है नताशा
  4096. 3:12:06की बात सुनकर रणधीर शेखावत ने कबीर की ओर
  4097. 3:12:09देखा तो कबीर सामने आकर बोला मैं ऐसा कुछ
  4098. 3:12:12नहीं कर रहा पिताजी
  4099. 3:12:14एक्चुअली सरोज का कहना है कि इस लड़के ने
  4100. 3:12:16जानबूझकर उसको धक्का दिया जिसके कारण वो
  4101. 3:12:19गिर पड़ी और उसके हाथ में जो वाइन की
  4102. 3:12:21गिलास थी वो भी टूट कर गिर गया और वाइन से
  4103. 3:12:25उसका पूरा कपड़ा खराब हो गया। मैंने तो
  4104. 3:12:28सिर्फ इस लड़के को उससे माफी मांगने के
  4105. 3:12:30लिए कहा है। क्या नताशा जी? क्यों आप इस
  4106. 3:12:33छोटी सी बात को बड़ी कर रही हैं? बोल
  4107. 3:12:36लीजिए अपने दोस्त को कि सरोज से माफी
  4108. 3:12:38मांगकर इस बात को खत्म करें। हो जाती है
  4109. 3:12:41छोटी-मोटी गलती। इसके लिए इस तरह की जिद
  4110. 3:12:44करने की क्या जरूरत है? रणधीर शेखावत
  4111. 3:12:46लापरवाही से यह बात नताशा से बोला। रणधीर
  4112. 3:12:50शेखावत की बात सुनकर नताशा तो हतप्रब रह
  4113. 3:12:52गई कि वो कितनी बेशर्मी से अपने बेटे को
  4114. 3:12:55सपोर्ट कर रहा है। शौर्य वहां पर घट रही
  4115. 3:12:58घटनाओं को सिर्फ सुन रहा था। वो देख रहा
  4116. 3:13:01था कि रणधीर शेखावत किस स्तर तक जाता है।
  4117. 3:13:04जबकि नताशा को बुरा लग रहा था कि उसके
  4118. 3:13:07कारण शौर्य को यह सब सुनना पड़ रहा है। वो
  4119. 3:13:10अगर शौर्य को यहां नहीं लाती तो उसे यह सब
  4120. 3:13:12देखना सुनना नहीं पड़ता। वो अपने गुस्से
  4121. 3:13:15को दबाती हुई फिर से रणधीर शेखावत से बोली
  4122. 3:13:19मिस्टर शेखावत आपका यूं अपने बेटे को
  4123. 3:13:21सपोर्ट करना सही नहीं है। आप अपनी पार्टी
  4124. 3:13:24में बुलाकर यूं किसी को बेइज्जत नहीं कर
  4125. 3:13:26सकते। मिस नताशा मैंने कहा ना क्यों आप
  4126. 3:13:30दिल का तार बना रही हैं? छोटी सी बात है।
  4127. 3:13:33आप अपने इस दोस्त को बोलिए एक सॉरी बोलकर
  4128. 3:13:36बात को खत्म करें। क्या आप भी जिद पकड़ कर
  4129. 3:13:39बैठी हैं? और फिर मैंने आपको इस पार्टी
  4130. 3:13:41में बुलाया था। आपके इस दोस्त को थोड़े ही
  4131. 3:13:44बुलाया था? रणधीर शेखावत बेशर्मी से बोला।
  4132. 3:13:48रणधीर शेखावत की बात सुनकर नताशा बेबसी से
  4133. 3:13:51शौर्य की ओर देखने लगी। उसकी आंखों में
  4134. 3:13:54शौर्य से माफी मांगने वाला भाव था। शौर्य
  4135. 3:13:57ने जब नताशा की बेबसी को महसूस किया तो वह
  4136. 3:14:00समझ गया कि अब उसे इस मामले को खुद ही
  4137. 3:14:03हैंडल करना पड़ेगा। इसलिए वह रणधीर शेखावत
  4138. 3:14:06के सामने आया और उनसे शांत स्वर में बोला
  4139. 3:14:09मिस्टर शेखावत जब मैं इस पार्टी में आया
  4140. 3:14:12तो नताशा ने आपको ऑलरेडी बता दिया कि वह
  4141. 3:14:15अपने दोस्तों के साथ आई है। आपको कोई
  4142. 3:14:17ऐतराज तो नहीं है तो आपने उस समय कोई
  4143. 3:14:20ऐतराज नहीं जताया। फिर आप यह नहीं कह सकते
  4144. 3:14:23कि आपने उनको बुलाया और मुझे नहीं क्योंकि
  4145. 3:14:25आपकी सहमति के बाद ही मैं इस पार्टी में
  4146. 3:14:28ठहरा था। भाई तुम्हारी बात ठीक है। पर तुम
  4147. 3:14:31कहना क्या चाहते हो? मुद्दे पर आओ। रणधीर
  4148. 3:14:34शेखावत शौर्य की बात को बीच में ही काटता
  4149. 3:14:36हुआ बोला। मिस्टर शेखावत मैं कहना यह
  4150. 3:14:40चाहता हूं कि आप अपने बेटे से कहिए कि
  4151. 3:14:42उसने जो मुझ पर घटिया इल्जाम लगाया है,
  4152. 3:14:45उसके लिए अभी मुझसे माफी मांगे। शौर्य ने
  4153. 3:14:48यह बात इतने शांत लहजे में बोला कि रणधीर
  4154. 3:14:51शेखावत शौर्य का चेहरा देखता ही रह गया।
  4155. 3:14:54शौर्य की बात सुनकर रणधीर शेखावत जोर से
  4156. 3:14:57ठहाका लगाया। उसे शौर्य से ऐसी उम्मीद
  4157. 3:14:59नहीं था कि वो उसके सामने उसके बेटे से
  4158. 3:15:02उसे माफी मांगने के लिए कहेगा। वो अपनी
  4159. 3:15:05हंसी को कंट्रोल करता हुआ बोला।
  4160. 3:15:09मानना पड़ेगा। तुम में हिम्मत तो है। तभी
  4161. 3:15:13तुम मेरी ही पार्टी में मेरे सामने मुझे
  4162. 3:15:16बोल रहे हो कि मैं अपने बेटे से बोलूं कि
  4163. 3:15:18वो तुमसे माफी मांगे। हां, आप सही समझे।
  4164. 3:15:21मैं आपसे ही बोल रहा हूं क्योंकि एक अच्छे
  4165. 3:15:24होस्ट यही निशानी है कि वो अपनी पार्टी
  4166. 3:15:26में आए हुए गेस्ट की बेइज्जती ना होने दे।
  4167. 3:15:29इसीलिए आपको भी यह ध्यान रखना चाहिए।
  4168. 3:15:32शौर्य बिना किसी उत्तेजना के बोला, "तुम
  4169. 3:15:35बिल्कुल सही कह रहे हो। और मैं मानता हूं
  4170. 3:15:37कि मैं एक अच्छा होस्ट हूं। पर किसी लड़की
  4171. 3:15:40के साथ छेड़खानी करने वाले शख्स के साथ
  4172. 3:15:43मैं कोई रियायत नहीं करता। तुम्हारे साथ
  4173. 3:15:46कुछ ज्यादती ना हो। इसीलिए मैंने तुम्हें
  4174. 3:15:48कहा कि इस लड़की से माफी मांगकर बात को
  4175. 3:15:51यहीं खत्म करो। रणधीर शेखावत शौर्य के
  4176. 3:15:54करीब जाकर उसके कंधे को सहलाते हुए बोला।
  4177. 3:15:57पर आपने यह फैसला कैसे कर लिया कि मैंने
  4178. 3:16:00ऐसा कुछ किया भी है या नहीं? पहले आपको
  4179. 3:16:02कायदे से इसकी जांच तो करनी चाहिए कि जो
  4180. 3:16:05यह लड़की बोल रही है वो सच है भी या नहीं?
  4181. 3:16:08या यह लड़की जानबूझकर मुझे टारगेट कर रही
  4182. 3:16:11है। शौर्य रणधीर शेखावत की आंखों में
  4183. 3:16:14देखते हुए बोला, "यह फैसला करने के लिए
  4184. 3:16:17मुझे ज्यादा कुछ सोचना नहीं है। मेरे बेटे
  4185. 3:16:19ने कह दिया कि तुमने ऐसा किया है तो किया
  4186. 3:16:21है। इसलिए अब तुम्हारे लिए यही सही है कि
  4187. 3:16:24तुम इस लड़की से माफी मांगो और मामले को
  4188. 3:16:27खत्म करो। यह बोलते हुए रणधीर शेखावत अब
  4189. 3:16:30इरिटेट होने लगा था। यानी आपके लिए यह बात
  4190. 3:16:34मायने नहीं रखता कि मैं सही बोल रहा हूं
  4191. 3:16:36या नहीं। पुत्र मुंह में आप इतने अंधे भी
  4192. 3:16:39मत हो जाइए कि बाद में आपको अफसोस करने का
  4193. 3:16:42भी मौका ना मिले। इसलिए मैं अब आपसे कह
  4194. 3:16:44रहा हूं कि आप अपने बेटे और इस लड़की
  4195. 3:16:47दोनों को बोलिए कि उसने जो मुझ पर गलत
  4196. 3:16:49इल्जाम लगाया है उसके लिए यह दोनों अभी
  4197. 3:16:52मुझसे माफी मांगे। शौर्य की बातों में अब
  4198. 3:16:55तल्खी नजर आने लगी थी। कमाल है। कहां से
  4199. 3:16:59इतनी हिम्मत लाते हो? मैंने अभी शायद कल
  4200. 3:17:01ही तुम्हारी एक ऐड देखी थी जिसमें तुम
  4201. 3:17:04नताशा के साथ थे। मुझे लगता है यह
  4202. 3:17:06तुम्हारा पहला ही काम होगा। क्यों तुम इस
  4203. 3:17:09इंडस्ट्री में आने से पहले ही अपनी भविष्य
  4204. 3:17:11पर फुल स्टॉप लगाना चाहते हो? इतना बोलकर
  4205. 3:17:14रणधीर शेखावत नताशा की ओर मुड़ा और उससे
  4206. 3:17:17बोला, नताशा समझाओ इसे। जो मैं कह रहा हूं
  4207. 3:17:21उसे यह बिना किसी होल हुज्जत के मान ले।
  4208. 3:17:24नहीं तो दोबारा आगे कभी यह इस इंडस्ट्री
  4209. 3:17:27में नजर भी नहीं आएगा। नताशा नहीं सोच रही
  4210. 3:17:30थी कि बात इतनी आगे बढ़ जाएगी। पर वह
  4211. 3:17:33शौर्य को इस बात के लिए भी नहीं बोल सकती
  4212. 3:17:35थी कि वह सरोज से माफी मांगे। पर वह यह भी
  4213. 3:17:38नहीं चाहती थी कि रणधीर शेखावत शौर्य से
  4214. 3:17:41गुस्सा हो। क्योंकि वह जानती थी कि रणधीर
  4215. 3:17:44शेखावत फिल्म इंडस्ट्री का एक बहुत बड़ा
  4216. 3:17:46डिस्ट्रीब्यूटर था। उसके इशारे पर बहुत
  4217. 3:17:49सारी फिल्मों का भविष्य तय होता था। उससे
  4218. 3:17:52पंगा लेकर वह अपने लिए भी कोई रिस्क लेना
  4219. 3:17:54नहीं चाहती थी। क्योंकि भले ही उसको आगे
  4220. 3:17:57ऐड फिल्में मिलती रहेगी पर अगर वह चाह
  4221. 3:18:00लेगा तो उसको आगे फिल्म इंडस्ट्री में काम
  4222. 3:18:02मिलना मुश्किल हो जाएगा। वो कोई बीच का
  4223. 3:18:04रास्ता निकालना चाह रही थी। इसीलिए वो
  4224. 3:18:07रणधीर शेखावत से रिक्वेस्ट करती हुई बोली
  4225. 3:18:10मिस्टर शेखावत हम बात को यहीं खत्म करते
  4226. 3:18:13हैं ना। किसी को किसी से माफी मांगने की
  4227. 3:18:15कोई जरूरत नहीं है। बाकी मैं श्रवण को
  4228. 3:18:18लेकर यहां से चली जाती हूं।
  4229. 3:18:21तुम बहुत भूली हो मिस नताशा। इतना भी नहीं
  4230. 3:18:24समझ रही कि यहां क्या चल रहा है। आज इसी
  4231. 3:18:27पार्टी में अभी मेरी प्रदुमन सेठ से बात
  4232. 3:18:30हो रही थी। वो शायद तुम्हें लेकर कोई
  4233. 3:18:32फिल्म बनाने वाले हैं। क्या तुम चाहती हो
  4234. 3:18:35कि वह फिल्म बनने से पहले ही बंद हो जाए?
  4235. 3:18:37कहीं उस फिल्म में यही लड़का हीरो तो नहीं
  4236. 3:18:40है? अगर ऐसा है तो समझो तुम्हारी वह फिल्म
  4237. 3:18:43बंद हो गई। इतना बोलकर रणधीर शेखावत उस
  4238. 3:18:46हॉल में ही एक तरफ देखता हुआ जोर से बोला।
  4239. 3:18:50क्यों प्रदुमन सेठ? क्या मैं सही बोल रहा
  4240. 3:18:52हूं? रणधीर शेखावत की बात सुनकर एक 50 55
  4241. 3:18:56के बीच का आदमी सामने आकर बोला, "आका इतना
  4242. 3:19:00कहना ही काफी है शेखावत जी? अगर आप कह रहे
  4243. 3:19:02हैं तो समझिए। मैं वो फिल्म अब नहीं बनाने
  4244. 3:19:05जा रहा। देखा तुमने? एक पल में ही
  4245. 3:19:08तुम्हारी फिल्म बंद हो गई। पर मैं अभी भी
  4246. 3:19:11तुम्हें एक मौका दे रहा हूं। अगर अभी सबके
  4247. 3:19:14सामने यह लड़का माफी मांग लेता है, तो
  4248. 3:19:16शायद तुम्हारी यह फिल्म बन भी जाए। इसलिए
  4249. 3:19:19अगर तुम चाहती हो कि तुम्हारी फिल्म बन
  4250. 3:19:21जाए तो इसे बोलो। यह अपने घुटनों पर बैठकर
  4251. 3:19:25यहां मेरे बेटे और इस लड़की से माफी
  4252. 3:19:27मांगे। नताशा अब बहुत मजबूर नजर आने लगी
  4253. 3:19:31थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या
  4254. 3:19:33करें। वो शौर्य से बोलना तो चाह रही थी पर
  4255. 3:19:36उसका दिल खुद इस बात को गवारा नहीं कर रहा
  4256. 3:19:39था कि जो गलती शौर्य ने किया भी नहीं उसके
  4257. 3:19:42लिए वो उसे माफी मांगने को बोले। पर वह
  4258. 3:19:45खुद रणधीर शेखावत के सामने गई और बोली अगर
  4259. 3:19:48आप माफी ही मंगवाना चाहते हैं तो मैं आपसे
  4260. 3:19:51आपके बेटे से और इस लड़की से माफी मांगने
  4261. 3:19:54को तैयार हूं। बस चाहती हूं कि आप इस बात
  4262. 3:19:57को यही भूल जाइए। लगता है तुमने मेरी बात
  4263. 3:20:00को ठीक से सुना नहीं। माफी तुमको नहीं इस
  4264. 3:20:03लड़के को मांगनी है और वह भी अब घुटने के
  4265. 3:20:05बल बैठकर। मेरे पास ज्यादा समय नहीं है।
  4266. 3:20:08इसलिए जितनी जल्दी यह माफी मांग लेगा यह
  4267. 3:20:11इसके लिए और तुम्हारे लिए दोनों के लिए
  4268. 3:20:14अच्छा होगा। रणधीर शेखावत जहरीली मुस्कान
  4269. 3:20:17के साथ बोला। मेघना जो इतनी देर से वहां
  4270. 3:20:20हो रही बकवास को सुन रही थी, उसे भी रणधीर
  4271. 3:20:23शेखावत पर गुस्सा आ रहा था। उसे लगा जब तक
  4272. 3:20:26वह सब वहां पर रहेंगे यह ड्रामा ऐसे ही
  4273. 3:20:28चलता रौरे के सामने गई और उससे बोली चलो
  4274. 3:20:31हम यहां से चलते हैं। हमें नहीं रहना इस
  4275. 3:20:33बकवास पार्टी में जहां सही को सही और गलत
  4276. 3:20:36को गलत बोलने की कोई हिम्मत ही नहीं कर
  4277. 3:20:38सकता। मेघना का उन सबके बीच में आना
  4278. 3:20:41अनपेक्षित था। वह शौर्य का हाथ पकड़ कर
  4279. 3:20:44उसे खींचती हुई वहां से जाना चाहती थी कि
  4280. 3:20:46तभी कबीर शेखावत उसके सामने आकर खड़ा हो
  4281. 3:20:49गया और बोला ओ मिस यह तेरे घर का गार्डन
  4282. 3:20:53नहीं है जो आए और घूम कर चल दिए तुमने
  4283. 3:20:56सुना नहीं अगर इसको जाना है तो पहले अपने
  4284. 3:20:58घुटने पर बैठकर माफी मांगेगा तभी यह यहां
  4285. 3:21:01से जा पाएगा किस बात की माफी मैंने क्या
  4286. 3:21:04देखा नहीं कि यह तुम दोनों की साजिश थी
  4287. 3:21:07श्रवण को फंसाने की ऐसी गिरी हुई हरकत
  4288. 3:21:10करने के लिए तुम्हें माफी मांगनी चाहिए
  4289. 3:21:12मेघना तैश में बोली क्या सबूत है तुम्हारे
  4290. 3:21:15पास तुम अपने साथी को बचाने के लिए कुछ भी
  4291. 3:21:18बोलोगी और मैं मान लूंगा कबीर उसके एकदम
  4292. 3:21:21सामने आकर खड़ा हो गया सबूत देखना है
  4293. 3:21:24तुमको तो मैं अभी दिखाती हूं इतना कहकर
  4294. 3:21:27मेघना ने अपना मोबाइल निकाला और उसमें एक
  4295. 3:21:30वीडियो प्ले कर दिया जिसमें दिख रहा था कि
  4296. 3:21:32शौर्य और नताशा डांस कर रही थी। तभी पीछे
  4297. 3:21:35से सरोज एक हाथ में वाइन की ग्लास लिए हुए
  4298. 3:21:38डांस करती हुई शौर्य के पीछे पहुंची और
  4299. 3:21:40वीडियो में साफ दिख रहा था कि वह जानबूझकर
  4300. 3:21:43शौर्य से जाकर टकराई थी। मेघना ने मोबाइल
  4301. 3:21:47कबीर के सामने कर रखा था। इसीलिए ज्यादा
  4302. 3:21:49लोगों को मोबाइल पर क्या चल रहा है यह
  4303. 3:21:51दिखाई नहीं दिया। जब कबीर ने देखा कि इस
  4304. 3:21:54वीडियो से तो सरोज की पोल खुल जाएगी तो
  4305. 3:21:56उसने एक झटके से मेघना के हाथ से उसका
  4306. 3:21:59मोबाइल खींच लिया। कबीर ने इतनी तेजी से
  4307. 3:22:02उसके हाथ से मोबाइल खींचा था कि मेघना को
  4308. 3:22:04झटका सा लगा। वह आगे गिरने वाली थी कि
  4309. 3:22:07शौर्य ने तेजी से उसकी कलाई पकड़ कर उसे
  4310. 3:22:09गिरने से बचा लिया। कबीर की इस हरकत ने
  4311. 3:22:12शौर्य का गुस्सा आसमान पर पहुंचा दिया।
  4312. 3:22:15उसने मेघना को अपने पीछे किया और कबीर के
  4313. 3:22:18सामने खड़ा हो गया। पर कबीर मेघना की ओर
  4314. 3:22:20देखता हुआ बोला। तुम कुछ भी दिखाओगी और
  4315. 3:22:23मैं तुम्हारी बात मान लूंगा। पर उसके
  4316. 3:22:26सामने खड़ा शौर्य उसकी बात को अनसुनाकर
  4317. 3:22:28कबीर की तरफ अपना हाथ बढ़ाकर बोला मेघना
  4318. 3:22:32का मोबाइल दो। कबीर से इतना बोलकर अपना
  4319. 3:22:34सिर रणधीर शेखावत की ओर घुमाकर बोला तो
  4320. 3:22:38मिस्टर शेखावत यही संस्कार दिया है अपने
  4321. 3:22:41बेटे को कि किसी लड़की से कैसे बिहेव किया
  4322. 3:22:43जाता है? अब बताइए माफी किसे मांगनी
  4323. 3:22:46चाहिए? रणधीर शेखावत से इतना बोलकर शौर्य
  4324. 3:22:50फिर से कबीर की ओर देखने लगा। उसका हाथ
  4325. 3:22:52अभी भी कबीर के सामने फैला हुआ था। कबीर
  4326. 3:22:56ने उसके फैले हाथ की ओर देखा और
  4327. 3:22:58मुस्कुराते हुए बोला, "तुम्हें इसका
  4328. 3:23:00मोबाइल चाहिए? ये लो, ये लो, ये लो।"
  4329. 3:23:04बोलते हुए कबीर मेघना का मोबाइल शौर्य की
  4330. 3:23:08तरफ बढ़ाता। जैसे ही शौर्य मोबाइल पकड़ने
  4331. 3:23:11के लिए हाथ बढ़ाता, कबीर हाथ पीछे खींच
  4332. 3:23:15लेता। उसने बार-बार ऐसा किया और अंत में
  4333. 3:23:18उसने मोबाइल को जोर से फर्श पर पटक दिया।
  4334. 3:23:22यही वह पल था जब शौर्य का पेशेंस जवाब दे
  4335. 3:23:26दिया। उसका तेज धप्पड़ कबीर के गाल पर
  4336. 3:23:28पड़ा और कबीर सीधा जमीन पर गिरा। कबीर के
  4337. 3:23:32कान में तो सिटी सा बजने लगा। वहां
  4338. 3:23:35उपस्थित किसी को भी समझ नहीं आया कि यह एक
  4339. 3:23:38ही पल में क्या हो गया। कोई चाहकर भी इस
  4340. 3:23:40बात पर विश्वास नहीं कर पा रहा था कि एक
  4341. 3:23:43अदने से लड़के ने कबीर शेखावत को एक
  4342. 3:23:46थप्पड़ में जमीन पर ला दिया। खुद रणधीर
  4343. 3:23:49शेखावत को विश्वास करना मुश्किल हो रहा था
  4344. 3:23:51कि शौर्य ने कबीर शेखावत पर हाथ उठा दिया।
  4345. 3:23:54वो तो अब तक यही समझ रहा था कि फिल्म
  4346. 3:23:56इंडस्ट्री में जिस तरह का उसका रुतबा है,
  4347. 3:23:59उसको देखकर शौर्य तुरंत ही घुटने पर आ
  4348. 3:24:01जाएगा। पर घुटने पर आने की बात तो दूर
  4349. 3:24:04उसने उल्टा कबीर शेखावत को ही जमीन पर ला
  4350. 3:24:07दिया था। दूसरी तरफ मेघना भी फटीफटी आंखों
  4351. 3:24:10से शौर्य को देख रही थी। उसे भी यकीन नहीं
  4352. 3:24:13हो रहा था कि शौर्य इस स्तर तक जा सकता है
  4353. 3:24:16क्योंकि आज से पहले उसने कभी शौर्य का ऐसा
  4354. 3:24:18रूप नहीं देखा था। वो तो उसको हमेशा
  4355. 3:24:20शिप्रा के सामने दबा सहमा सा ही देखती थी।
  4356. 3:24:24नताशा का भी कमोबेश यही हाल था। वो भी
  4357. 3:24:27आश्चर्य से शौर्य की तरफ देख रही थी। उसे
  4358. 3:24:29भी अब समझ नहीं आ रहा था कि अब वह स्थिति
  4359. 3:24:32को कैसे संभाले। कुछ पल बाद जब रणधीर
  4360. 3:24:35शेखावत को होश आया कि वहां पर क्या हो गया
  4361. 3:24:38है तो वह तेजी से कबीर के पास पहुंचा और
  4362. 3:24:40उसको सहारा देकर खड़ा किया। अभी भी कबीर
  4363. 3:24:44का सिर चकरा रहा था। इस भरी पार्टी में
  4364. 3:24:46अपने बेटे का ऐसा अपमान देखकर रणधीर
  4365. 3:24:49शेखावत का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। वो
  4366. 3:24:52शौर्य के पास पहुंचा और बोला तुम्हारी
  4367. 3:24:54इतनी हिम्मत कि तुमने मेरे बेटे के ऊपर
  4368. 3:24:57हाथ उठाया। अब देख मैं तुम्हारा क्या हाल
  4369. 3:25:00करता हूं। मेरा हाल तो क्या ही आप कुछ
  4370. 3:25:02बिगाड़ पाओगे। पहले अपने बेटे का हाल तो
  4371. 3:25:05देख लो। शौर्य उपहास उड़ाने वाले भाव में
  4372. 3:25:08बोला सिक्योरिटी रणधीर शेखावत जोर से
  4373. 3:25:12चिल्लाया। तभी होटल की सिक्योरिटी का चार
  4374. 3:25:14स्टाफ दौड़ता हुआ वहां पर आया और उसने
  4375. 3:25:17चारों तरफ से शौर्य को घेर लिया। जैसे उसे
  4376. 3:25:20पहले से ही पता था कि उसे क्या करना है।
  4377. 3:25:22सिक्योरिटी के स्टाफ को अपने चारों ओर
  4378. 3:25:24देखकर मेघना घबरा गई थी। पर शौर्य ने उनकी
  4379. 3:25:27तरफ देखकर बोला, "तुम लोग होटल के स्टाफ
  4380. 3:25:30हो या इसके गुंडे जो मुझे ऐसे घेर लिया
  4381. 3:25:32है।" शौर्य की बात सुनकर सिक्योरिटी स्टाफ
  4382. 3:25:35को समझ नहीं आया कि उसे क्या करना चाहिए।
  4383. 3:25:38वे चारों एक दूसरे की तरफ देखने लगे। जब
  4384. 3:25:41रणधीर शेखावत ने उन सबको ऐसे खड़ा एक
  4385. 3:25:43दूसरे का मुंह देखते देखा तो गुस्से में
  4386. 3:25:46बोला, "तुम सब एक दूसरे का मुंह क्या देख
  4387. 3:25:48रहे हो? इस बदमाश ने मेरे बेटे पर हाथ
  4388. 3:25:51उठाया है। और तुम सब खड़े-खड़े तमाशा देख
  4389. 3:25:53रहे हो। तुम सबका इस मामले से कोई लेना
  4390. 3:25:56देना नहीं है। अगर तुम्हें कुछ करना ही है
  4391. 3:25:59तो अपने मैनेजर को यहां बुला लो। शौर्य उन
  4392. 3:26:02सिक्योरिटी के लोगों को वर्न करता हुआ
  4393. 3:26:04बोला। अब तक कबीर भी खुद को संभाल चुका
  4394. 3:26:06था। यह याद करके कि शौर्य ने उसे एक
  4395. 3:26:09थप्पड़ में ही जमीन पर ला दिया। उसका
  4396. 3:26:11चेहरा भी गुस्से से लाल हो गया। वो गुस्से
  4397. 3:26:14में शौर्य के पास गया और गुर्राते हुए
  4398. 3:26:16बोला। तुम्हारी इतनी हिम्मत तुमने मुझ पर
  4399. 3:26:19हाथ उठाया। अब देख मैं तेरा क्या हाल करता
  4400. 3:26:22हूं। इतना बोलकर कबीर तेजी से शौर्य पर
  4401. 3:26:25झपटा। पर शौर्य पहले से ही तैयार था। जैसे
  4402. 3:26:28ही कबीर उसके करीब पहुंचा, शौर्य ने फिर
  4403. 3:26:31से एक थप्पड़ उसके गाल पर जमा दिया। कबीर
  4404. 3:26:34दोबारा जमीन पर पड़ा था। यह देखकर तो
  4405. 3:26:36रणधीर शेखावत पागल सा हो गया। कमीने तुमने
  4406. 3:26:39मेरे बेटे का क्या हाल कर दिया। तुम्हें
  4407. 3:26:42नहीं पता तुमने किससे पंगा लिया है। तेरी
  4408. 3:26:44लाइफ को जहन्नुम नहीं बना दिया तो मेरा
  4409. 3:26:46नाम रणधीर शेखावत नहीं। अभी रणधीर शेखावत
  4410. 3:26:50की बात समाप्त ही हुई थी कि तभी वहां पर
  4411. 3:26:52एक रौपदार आवाज गूंजी। उस रौबदार आवाज को
  4412. 3:26:56सुनकर सभी का ध्यान उसकी तरफ चला गया।
  4413. 3:27:00जब रणधीर शेखावत ने उस शख्स को देखा तो वो
  4414. 3:27:04उसके पास जाते हुए बोला अच्छा हुआ वालिया
  4415. 3:27:07साहब आप यहां आ गए। यह बदमाश यहां अपनी
  4416. 3:27:09मनमानी कर रहा है। आप जल्दी से यहां पुलिस
  4417. 3:27:11को बुलाएं या अपने सिक्योरिटी के लोगों से
  4418. 3:27:14इसको सबक सिखाइए। अभी जो शख्स यहां आया था
  4419. 3:27:18उसका पूरा नाम अशोक वालिया था जो कि
  4420. 3:27:21पैराडाइज होटल का मैनेजर था। अशोक वालिया
  4421. 3:27:24शौर्य के सामने जाकर खड़ा हो गया और उससे
  4422. 3:27:27बोला यह तुम क्या मारपीट कर रहे हो यहां?
  4423. 3:27:30तुम्हें पता भी है इसका क्या अंजाम
  4424. 3:27:31तुम्हें भुगतना पड़ सकता है। शौर्य अशोक
  4425. 3:27:34वालिया को नहीं जानता था। उसे नहीं पता था
  4426. 3:27:37कि इस होटल की देखरेख कौन कर रहा है। पर
  4427. 3:27:39वह इतना समझ गया था कि यह शख्स जो भी हो
  4428. 3:27:43इस होटल में कोई खास पद ही रखता होगा।
  4429. 3:27:46इसलिए वो थोड़ा सभ्य होकर बोला आपको पहले
  4430. 3:27:49यह देखना चाहिए कि इसे शुरू किसने किया।
  4431. 3:27:52अगर यह मेरी दोस्त के साथ बदतमीजी नहीं
  4432. 3:27:54करता। उसका मोबाइल नहीं तोड़ता तो शायद
  4433. 3:27:57मैं इसके साथ सभ्य बनकर रहता। पर इसने
  4434. 3:27:59अपनी लिमिट पार कर ली तो उसकी सजा तो इसको
  4435. 3:28:02मिलनी ही थी। आप देख रहे हैं वालिया साहब
  4436. 3:28:05एक तो यह हमारी पार्टी में घुसाया है।
  4437. 3:28:07दूसरा यह लड़कियों को छेड़ रहा था। और जब
  4438. 3:28:10मेरे बेटे ने इसे माफी मांगने के लिए कहा
  4439. 3:28:12तो यह उसी को मारने लगा। मैं कहता हूं अभी
  4440. 3:28:16आप पुलिस को बुलाकर इसे उसके हवाले कीजिए।
  4441. 3:28:19रणधीर शेखावत गुस्से में बोला। उसको देखकर
  4442. 3:28:22ऐसा लग रहा था कि अगर उसका बस चले तो वह
  4443. 3:28:25उसे आंखों से ही भस्म कर देगा। पर उसने
  4444. 3:28:28देख लिया था कि शौर्य बहुत ताकतवर था।
  4445. 3:28:31उसके एक थप्पड़ ने ही कबीर को फर्श पर
  4446. 3:28:33गिरा दिया था। रणधीर शेखावत की बात सुनकर
  4447. 3:28:37अशोक वालिया शौर्य के चारों तरफ खड़े
  4448. 3:28:39चारों सिक्योरिटी गार्ड से बोला, "तुम लोग
  4449. 3:28:42खड़े-खड़े तमाशा क्या देख रहे हो? इसको
  4450. 3:28:44चारों मिलकर पकड़ो और इसके हाथ पैर बांध
  4451. 3:28:46दो। मैं अभी पुलिस को बुलाकर इसको पुलिस
  4452. 3:28:48के हवाले करूंगा। अशोक वालिया का आदेश
  4453. 3:28:51पाकर चारों सिक्योरिटी गार्ड शौर्य की तरफ
  4454. 3:28:54बढ़े। तभी शौर्य उन चारों को देखते हुए
  4455. 3:28:57गुर्रा कर बोला। खबरदार जो मेरे पास भी आए
  4456. 3:29:00इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। और मिस्टर
  4457. 3:29:04वालिया अगर आपको पुलिस ही बुलाना है तो आप
  4458. 3:29:06बुला लीजिए। मैं कहीं भाग नहीं रहा हूं।
  4459. 3:29:09पर आप मुझे पुलिस के हवाले किस बेस पर
  4460. 3:29:11करेंगे? आपके पास मेरे खिलाफ है क्या जो
  4461. 3:29:14आप मुझे पुलिस के हवाले करेंगे? सबसे पहले
  4462. 3:29:17तो शौर्य की धमकी सुनकर चारों सिक्योरिटी
  4463. 3:29:20गार्ड अपनी जगह पर ही खड़े रह गए। और
  4464. 3:29:22मिस्टर अशोक वालिया शौर्य की बात सुनकर
  4465. 3:29:25रणधीर शेखावत की ओर देखने लगा। क्योंकि
  4466. 3:29:28उसे भी समझ नहीं आया कि जो बात रणधीर
  4467. 3:29:30शेखावत ने कही है उस बात में कोई दम भी है
  4468. 3:29:33या नहीं। जब रणधीर शेखावत ने अशोक वालिया
  4469. 3:29:36को अपनी तरफ देखते पाया तो वह बोला यहां
  4470. 3:29:40सबको पता है कि इसने मिस सरोज को छेड़ा
  4471. 3:29:42था। उनके ऊपर वाइन भी गिरा दिया और दूसरी
  4472. 3:29:45बात इसने सबके सामने मेरे बेटे पर हाथ
  4473. 3:29:47उठाया है। इस बात की गवाही यहां मौजूद सभी
  4474. 3:29:50लोग देंगे। सबसे पहली बात मैंने इस लड़की
  4475. 3:29:54को छेड़ा या नहीं छेड़ा या इसके ऊपर वाइन
  4476. 3:29:56गिराया। उसका पूरा वीडियो मेघना की मोबाइल
  4477. 3:29:59में कैप्चर था। जिसको देखने के बाद ही
  4478. 3:30:02आपके इस लाडले ने मेघना का मोबाइल तोड़
  4479. 3:30:04दिया और उसके साथ बदतमीजी की। उसके बाद
  4480. 3:30:07मैंने इस पर हाथ उठाया है। और सच कहूं तो
  4481. 3:30:10यह है ही इसी लायक। सिर्फ आपके कह देने से
  4482. 3:30:13मैं गुनहगार नहीं हो जाऊंगा। बल्कि सबके
  4483. 3:30:16सामने इसने मेघना का मोबाइल छीना और उसके
  4484. 3:30:18साथ बदतमीजी की तो जेल मैं नहीं आपका यह
  4485. 3:30:21बेटा जाएगा। शौर्य अपनी बात स्पष्ट करते
  4486. 3:30:25हुए बोला ऐसा कोई वीडियो तुम्हारी दोस्त
  4487. 3:30:28के मोबाइल में नहीं था जैसा तुम बोल रहे
  4488. 3:30:30हो। तुम सब मिले हुए हो। इसने कुछ गलत
  4489. 3:30:33वीडियो सरोज का कैप्चर कर रखा था जिसके
  4490. 3:30:35कारण मैंने उसका मोबाइल तोड़ दिया।
  4491. 3:30:38तुम्हारे कह देने से तुम शरीफ नहीं बन
  4492. 3:30:40जाओगे। यहां मौजूद बाकी लोग भी यह गवाही
  4493. 3:30:42देंगे कि तुमने सरोज के साथ जानबूझकर
  4494. 3:30:45बदतमीजी की। इसलिए तुम्हारे यह बहाना
  4495. 3:30:48बनाने से कुछ नहीं होगा कि तुम्हारी दोस्त
  4496. 3:30:50के पास ऐसा कोई वीडियो था। कबीर सामने आकर
  4497. 3:30:54हिम्मत करते हुए बोला, कितने बेवकूफ हो
  4498. 3:30:57तुम। तुम्हारे मोबाइल तोड़ देने से
  4499. 3:30:59तात्कालिक रूप से तुम अपनी बात से बच सकते
  4500. 3:31:02हो। पर जब यह मोबाइल रिपेयर करके इसका
  4501. 3:31:05डाटा रिकवर किया जाएगा, तो फिर तुम्हारी
  4502. 3:31:07यह सारी दलील धरी की धरी रह जाएगी। फिर
  4503. 3:31:10देखूंगा तुम्हें कौन बचाता है। शौर्य कबीर
  4504. 3:31:13का उपहास उड़ाते हुए बोला। शौर्य की इस
  4505. 3:31:16बात को सुनकर कबीर के चेहरे पर परेशानी
  4506. 3:31:18नजर आने लगी। जिसको देखकर अशोक वालिया भी
  4507. 3:31:21समझ गया कि शौर्य जो कह रहा है वह सही है।
  4508. 3:31:24पर वह रणधीर शेखावत के सामने शौर्य का
  4509. 3:31:27पक्ष नहीं ले सकता था। इसलिए वह रणधीर
  4510. 3:31:29शेखावत की ओर देखने लगा कि वह क्या जवाब
  4511. 3:31:31देता है। रणधीर शेखावत भी समझ गया था कि
  4512. 3:31:35शौर्य सही बोल रहा है। पर उसे इस बात की
  4513. 3:31:38कोई परवाह नहीं थी। वह तो किसी भी हाल में
  4514. 3:31:40शौर्य को सबक सिखाना चाहता था। इसलिए वह
  4515. 3:31:43अशोक वालिया से बोला, वालिया साहब, आप
  4516. 3:31:46इसकी बात पर ध्यान मत दीजिए। बस आप इसको
  4517. 3:31:48सबक सिखाइए। बाकी जो भी होगा मैं देख
  4518. 3:31:51लूंगा। यह लड़का इतनी आसानी से यहां से
  4519. 3:31:54बचकर नहीं जाना चाहिए। एक तो यह मेरी
  4520. 3:31:56पार्टी में घुस आया है और यहां आकर इसने
  4521. 3:31:59मेरी पार्टी को भी खराब कर दिया। तो इसे
  4522. 3:32:01इसकी सजा तो मिलनी ही चाहिए। रणधीर शेखावत
  4523. 3:32:05की बात सुनकर अशोक वालिया बेबस नजर आने
  4524. 3:32:07लगा। वो एक कोशिश करते हुए बोला, सुनो
  4525. 3:32:11लड़के तुम क्यों जानबूझकर आफत मोल लेना
  4526. 3:32:14चाह रहे हो? तुम उनसे माफी मांगकर क्यों
  4527. 3:32:16नहीं मामले को यहीं समाप्त कर रहे हो? अगर
  4528. 3:32:18मैं तुम्हारी बात को मान भी लूं कि तुमने
  4529. 3:32:21किसी लड़की से कोई बदतमीजी नहीं की। पर
  4530. 3:32:23तुम उनकी पार्टी में घुस आए हो और उनकी
  4531. 3:32:25पार्टी को खराब करने में कोई कसर नहीं
  4532. 3:32:27छोड़ी। यह गुनाह भी कोई कम नहीं है। इसलिए
  4533. 3:32:30मेरी बात मानो और उनसे माफी मांगकर मामले
  4534. 3:32:33को रफादफा करो। मिस्टर वालिया यह तो आपके
  4535. 3:32:37यहां का सीसीटीवी देखकर पता चल जाएगा कि
  4536. 3:32:39मैं यहां जबरदस्ती घुसा हूं या मेरे आने
  4537. 3:32:42पर इन्होंने हमारा वेलकम भी किया था और
  4538. 3:32:44अभी यह भले ही मेघना का मोबाइल तोड़कर सोच
  4539. 3:32:47रहा होगा कि इसने वह सबूत मिटा दिया
  4540. 3:32:49जिसमें यह नजर आ रहा था कि मैंने मेघना के
  4541. 3:32:51साथ बदतमीजी की या सरोज ने जानबूझकर मुझे
  4542. 3:32:54फंसाने की कोशिश की। इतना बोलकर शौर्य
  4543. 3:32:58रुका और उस हॉल में मौजूद सीसीटीवी की ओर
  4544. 3:33:00देखने लगा। उसने देखा कि डांस फ्लोर के
  4545. 3:33:03पास भी एक सीसीटीवी नजर आ रहा था। जिसको
  4546. 3:33:05देखकर उसके चेहरे पर एक स्माइल आ गई और वह
  4547. 3:33:08अशोक वालिया से फिर से बोला आप ऐसा क्यों
  4548. 3:33:11नहीं करते मिस्टर वालिया कि आप ही चलकर एक
  4549. 3:33:14बार यहां का सीसीटीवी देख लीजिए। अभी पता
  4550. 3:33:16चल जाएगा कि मैंने इस लड़की के साथ
  4551. 3:33:18बदतमीजी की। इस पर वाइन गिराया या इसने
  4552. 3:33:21मुझे जानबूझकर फंसाने की कोशिश की है।
  4553. 3:33:24शौर्य की इस बात को सुनकर वहां मौजूद सभी
  4554. 3:33:27लोगों की नजर उस सीसीटीवी की तरफ चली गई
  4555. 3:33:30जो डांस फ्लोर के ऊपर नजर आ रहा था। उस
  4556. 3:33:32सीसीटीवी को देखकर कबीर का चेहरा और भी
  4557. 3:33:35सफेद पड़ गया। सिर्फ कबीर का ही क्या?
  4558. 3:33:37सरोज के चेहरे का भी रंग बदल गया। उसके
  4559. 3:33:40चेहरे के उड़े हुए रंग को देखकर शौर्य
  4560. 3:33:42सरोज से बोला, "क्यों मिस सरोज? क्या अभी
  4561. 3:33:45भी आप इस बात पर कायम हैं कि मैंने आपके
  4562. 3:33:48साथ कोई बदतमीजी करने की कोशिश की या आपके
  4563. 3:33:51ऊपर कोई वाइन गिराया है? तुमने ऐसा किया
  4564. 3:33:54ही होगा। नहीं तो क्या मैं अपने आप ही
  4565. 3:33:56वहां गिर गई और क्या खुद ही मैं अपने ऊपर
  4566. 3:33:59वाइन गिरा लेती? कुछ ना कुछ तो तुमने किया
  4567. 3:34:01ही होगा। सरोज अटकते हुए बोली क्या हुआ?
  4568. 3:34:05तुम्हारा वो कॉन्फिडेंस कहां चला गया? जो
  4569. 3:34:08अभी तुम थोड़ी देर पहले चीख-चीख कर कह रही
  4570. 3:34:10थी कि मैंने तुम्हारे साथ बदतमीजी की। अभी
  4571. 3:34:13भी तो वही कॉन्फिडेंस दिखाओ। शौर्य सरोज
  4572. 3:34:16पर चढ़ता हुआ बोला। सरोज की स्थिति तो
  4573. 3:34:19काटो तो खून नहीं जैसी हो गई। वो कभी कबीर
  4574. 3:34:22की तरफ तो कभी रणधीर शेखावत की ओर देखने
  4575. 3:34:24लगी। अब उसे उन्हीं से उम्मीद थी कि वह
  4576. 3:34:27बीच में आकर शौर्य की बातों का जवाब दे।
  4577. 3:34:30अशोक वालिया ने जब स्थिति को बदलते देखा
  4578. 3:34:33तो उन्होंने रणधीर शेखावत से पूछा। आप
  4579. 3:34:36क्या कहते हैं शेखावत साहब? क्या मैं
  4580. 3:34:38पुलिस को बुलाऊं? अगर आप कहेंगे तो मैं
  4581. 3:34:40अभी यहां पुलिस को बुला दूंगा। उसके बाद
  4582. 3:34:43जो भी होगा उस सबके लिए आप स्वयं ही
  4583. 3:34:45जिम्मेदार होंगे। फिर मैं उसके बीच में
  4584. 3:34:47कुछ भी नहीं कर पाऊंगा। रणधीर शेखावत भी
  4585. 3:34:51समझ गया कि पुलिस के आने से उनका मामला ही
  4586. 3:34:55कमजोर पड़ेगा क्योंकि अभी तक उन्हें भी यह
  4587. 3:34:57ध्यान नहीं था कि यहां जो कुछ भी हुआ होगा
  4588. 3:35:01वो सब कुछ सीसीटीवी में कैद होगा। और
  4589. 3:35:04सीसीटीवी को देखते ही सरोज की पोल खुल
  4590. 3:35:07जाएगी। तो यह बात उनके लिए और भी
  4591. 3:35:11शर्मिंदगीगी वाली होगी। अब तक जो रणधीर
  4592. 3:35:14शेखावत की बातों में शौर्य को सबक सिखाने
  4593. 3:35:16का घमंड नजर आ रहा था अचानक ही वह खत्म हो
  4594. 3:35:19गया। वो थोड़े संयत स्वर में अशोक वालिया
  4595. 3:35:23से बोले मिस्टर वालिया जो हुआ वो वापस तो
  4596. 3:35:27नहीं आ सकता। पहले ही मेरी पार्टी बहुत
  4597. 3:35:29खराब हो चुकी है। इसलिए मैं और नहीं चाहता
  4598. 3:35:32कि मेरी पार्टी और खराब हो। इसलिए आप अभी
  4599. 3:35:35के अभी इस लड़के को इस होटल से बाहर
  4600. 3:35:38निकालिए। अशोक वालिया ने जब रणधीर शेखावत
  4601. 3:35:41की बात सुनी तो उन्होंने थोड़ी राहत महसूस
  4602. 3:35:43की और वो शौर्य के पास आकर बोले सुन लिया
  4603. 3:35:47तुमने अब जितनी जल्दी हो सके तुम यहां से
  4604. 3:35:509 2 11 हो जाओ। इसी में तुम्हारी भलाई है।
  4605. 3:35:55मेरी भलाई। आप जरा स्पष्ट करेंगे मिस्टर
  4606. 3:35:57वालिया कि इसमें मेरी क्या भलाई है? अगर
  4607. 3:36:00आप चाहते हैं कि मैं यहां से जाऊं तो सबसे
  4608. 3:36:02पहले इस कबीर और इस सरोज को मुझसे माफी
  4609. 3:36:05मांगनी पड़ेगी जो इन्होंने मुझ पर झूठा
  4610. 3:36:07इल्जाम लगाया और साथ में इन्हें मेघना के
  4611. 3:36:10मोबाइल की कीमत भी देनी पड़ेगी जो इस कबीर
  4612. 3:36:14के बच्चे ने पटक कर तोड़ दिया है। शौर्य
  4613. 3:36:16उपहास भरे स्वर में बोला नताशा जो वहां
  4614. 3:36:19खड़ी इतनी देर से हो रहे तमाशे को देख रही
  4615. 3:36:22थी। जब उसने देखा कि बात अब लगभग समाप्त
  4616. 3:36:24हो गई है, तभी शौर्य ने एक अलग जिद ठान ली
  4617. 3:36:28कि कबीर और सरोज को उससे माफी मांगनी
  4618. 3:36:30पड़ेगी। इस बात को लेकर उसे फिर से चिंता
  4619. 3:36:33होने लगी कि शौर्य फिर से बात को बढ़ा रहा
  4620. 3:36:35है। वो शौर्य के पास गई और बोली रहने देते
  4621. 3:36:39हैं ना श्रवण हम चलते हैं यहां से। बाकी
  4622. 3:36:42मेघना की मोबाइल की कीमत मैं दे दूंगी।
  4623. 3:36:45क्यों तुम क्यों दोगी? जब इसने तोड़ा है
  4624. 3:36:48तो यही देगा और इसको मुझसे माफी तो मांगनी
  4625. 3:36:51पड़ेगी। क्योंकि मैं अपनी इस बेइज्जती को
  4626. 3:36:53इतनी आसानी से नहीं भूल सकता। शौर्य कबीर
  4627. 3:36:56को घूरता हुआ बोला। अशोक वालिया को भी
  4628. 3:36:59शौर्य थोड़ा अजीब जान पड़ा। उसे लग रहा था
  4629. 3:37:02कि जब इतनी आसानी से वो यहां से जा सकता
  4630. 3:37:04था तो फिर क्यों वो जानबूझकर रणधीर शेखावत
  4631. 3:37:08से पंगे ले रहा है। अशोक वालिया रणधीर
  4632. 3:37:10शेखावत की हैसियत से अच्छी तरह वाकिफ था।
  4633. 3:37:13वो यह समझ रहा था कि इस समय रणधीर शेखावत
  4634. 3:37:16की स्थिति भले ही कमजोर है पर वह शौर्य को
  4635. 3:37:19इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। वो
  4636. 3:37:22बाद में उससे इस बेइज्जती का बदला तो जरूर
  4637. 3:37:24लेगा। पर इस समय अशोक वालिया का मकसद
  4638. 3:37:27सिर्फ इतना था कि उसके होटल में कोई
  4639. 3:37:29हंगामा ना हो। इसलिए वह चाहता था कि शौर्य
  4640. 3:37:32वहां से चला जाए। यही सोचकर वो बोला
  4641. 3:37:35मिस्टर सरवन जो बात खत्म हो रही है आप
  4642. 3:37:38क्यों उसको हवा दे रहे हैं? एक बार को मैं
  4643. 3:37:41आपकी बात समझ भी लेता हूं। लेकिन आप
  4644. 3:37:43स्थिति को समझिए और मेरा कहा मानिए यहां
  4645. 3:37:46से चले जाइए। शौर्य अशोक वालिया की मजबूरी
  4646. 3:37:50को समझ रहा था पर वो ठान चुका था कि रणधीर
  4647. 3:37:53शेखावत को उसकी औकात तो दिखाकर रहेगा और
  4648. 3:37:56उसकी शुरुआत तो सबसे पहले यहीं से होनी थी
  4649. 3:38:00कि उसके बेटे को सबके सामने उससे माफी
  4650. 3:38:02मांगनी पड़ेगी। इसलिए वह पूरी विनम्रता से
  4651. 3:38:05अशोक वालिया से बोला, मिस्टर वालिया, मैं
  4652. 3:38:09आपकी मजबूरी समझता हूं। पर मैं यहां से
  4653. 3:38:11ऐसे ही नहीं जाऊंगा। अगर आप चाहते हैं कि
  4654. 3:38:14मैं यहां से ऐसे चला जाऊं, तो समझाइए
  4655. 3:38:16मिस्टर शेखावत को कि अपने बेटे से कहें कि
  4656. 3:38:19वो अभी सबके सामने मुझसे माफी मांगे और
  4657. 3:38:22मेघना के मोबाइल के पैसे भरे। नहीं तो आप
  4658. 3:38:25भले पुलिस को नहीं बुलाएंगे। लेकिन मैं तो
  4659. 3:38:27जरूर बुलाऊंगा और आपके सीसीटीवी को भी
  4660. 3:38:30पब्लिक करना पड़ेगा ताकि सारी सच्चाई यहां
  4661. 3:38:33बाहर आए। अशोक वालिया समझ गया कि यह लड़का
  4662. 3:38:36भी जिद्दी है। वो कितना भी समझाए पर वो
  4663. 3:38:39उसकी बात को नहीं मानेगा। इसलिए वो अब
  4664. 3:38:42रणधीर शेखावत की ओर देखने लगे कि वह अब
  4665. 3:38:44क्या कहते हैं। रणधीर शेखावत का खून तो
  4666. 3:38:48वैसे ही खौल रहा था शौर्य की बात सुनकर।
  4667. 3:38:51यह तो कौड़ी का लड़का आज इस भारी पार्टी
  4668. 3:38:53में उनकी ऐसी तैसी किए हुए था। रणधीर
  4669. 3:38:56शेखावत की सारी अकड़ ढीली हो गई थी। उसे
  4670. 3:38:59अब अपने बेटे पर गुस्सा आ रहा था कि उसे
  4671. 3:39:02ऐसी बेवकूफी करने की क्या जरूरत थी? पर वह
  4672. 3:39:05चाहकर भी अपने बेटे से माफी मांगने के लिए
  4673. 3:39:08नहीं बोल पा रहे थे। ऐसी बेइज्जती रणधीर
  4674. 3:39:11शेखावत ने आज तक नहीं झेली थी। तो क्या
  4675. 3:39:14रणधीर शेखावत अपने बेटे से माफी मांगने को
  4676. 3:39:16कहेंगे? या उठाएंगे कुछ ऐसा कदम जिसकी
  4677. 3:39:19किसी को उम्मीद भी नहीं होगी। शौर्य की यह
  4678. 3:39:22जिद देखकर मेघना भी हैरान थी कि जो बात
  4679. 3:39:26खत्म ही हो रही है उसको शौर्य क्यों तूल
  4680. 3:39:30दे रहा है। अभी मौका है तो उसे यहां से
  4681. 3:39:33चले जाना चाहिए। पर वह कबीर और सरोज से
  4682. 3:39:37माफी मंगवाने पर तुला हुआ है। लड़के तुमने
  4683. 3:39:41हमसे उलझकर पहले ही अपना आगे बढ़ने का
  4684. 3:39:43रास्ता बंद कर लिया है। अभी भी तुम्हारे
  4685. 3:39:46पास मौका है। तुम अपनी फालतू की जिद छोड़ो
  4686. 3:39:49और यहां से चले जाओ। तो हो सकता है कि तुम
  4687. 3:39:52अपने भविष्य में आगे कुछ कर पाओगे। नहीं
  4688. 3:39:55तो मैं यह खुद पक्का करूंगा कि तुम्हें
  4689. 3:39:58आगे से कभी फिल्म इंडस्ट्री में कोई काम
  4690. 3:40:01नहीं देगा।
  4691. 3:40:02अभी भी रणधीर शेखावत शौर्य को धमकाने से
  4692. 3:40:06बाज नहीं आ रहा था। मुझे धमकाने से अच्छा
  4693. 3:40:09है कि आप उस बात पर ध्यान दें जो मैंने
  4694. 3:40:12अभी कहा। नहीं तो मुझे दूसरा रास्ता भी
  4695. 3:40:16पता है कि मुझे क्या करना है। शौर्य पर
  4696. 3:40:19रणधीर शेखावत की धमकी का कोई असर नहीं
  4697. 3:40:22हुआ। जब शौर्य पर रणधीर शेखावत का कोई जोर
  4698. 3:40:25नहीं चला तो वह नताशा कपूर की तरफ मुड़ा
  4699. 3:40:28और उससे बोला मिस नताशा आप अपने दोस्त को
  4700. 3:40:32समझाइए और यहां से ले जाइए नहीं तो आपकी
  4701. 3:40:36स्थिति भी गेहूं की घूम की तरह हो जाएगी।
  4702. 3:40:39यह तो पिसेगा ही। इसके साथ आपको भी पिसना
  4703. 3:40:42पड़ेगा। रणधीर शेखावत की बात नताशा कपूर
  4704. 3:40:46को डराने के लिए काफी थी। वो शौर्य के पास
  4705. 3:40:49गई और धीरे से बोली श्रवण चलते हैं ना
  4706. 3:40:53यहां से। मुझे भी यहां रुकने का कोई शौक
  4707. 3:40:56नहीं है। पर अभी तक इस कबीर शेखावत ने
  4708. 3:40:58मुझसे माफी नहीं मांगी। शौर्य अभी भी इस
  4709. 3:41:02जिद को पकड़े हुए था। रणधीर शेखावत को
  4710. 3:41:05शौर्य पर बहुत गुस्सा आ रहा था। पर वह
  4711. 3:41:08बहुत मुश्किल से खुद को कंट्रोल किए हुए
  4712. 3:41:10था। उसे शौर्य की धमकी गैर वाजिब लगी।
  4713. 3:41:14उन्हें समझ नहीं आया कि अगर पुलिस यहां
  4714. 3:41:16आएगी तो वह उनके बेटे को किस आधार पर
  4715. 3:41:18गिरफ्तार करेगी। अगर कबीर ने सरोज के साथ
  4716. 3:41:22मिलकर शौर्य को फंसाने की कोशिश की भी तो
  4717. 3:41:25यह कोई ऐसा गुनाह नहीं है जिसके लिए पुलिस
  4718. 3:41:28कबीर को गिरफ्तार करेगी। यही सोचकर रणधीर
  4719. 3:41:32शेखावत अशोक वालिया से बोला। मिस्टर
  4720. 3:41:35वालिया आपके इतने बड़े होटल में कोई
  4721. 3:41:38व्यक्ति मेरी पार्टी को खराब कर रहा है और
  4722. 3:41:40आप उसको मेरी पार्टी से निकाल भी नहीं पा
  4723. 3:41:42रहे हैं। क्या यही है आपके होटल की
  4724. 3:41:45सुरक्षा? रणधीर शेखावत की बात सुनकर अशोक
  4725. 3:41:49वालिया थोड़ा गंभीर हो गया। वो शौर्य से
  4726. 3:41:52बोला मिस्टर श्रवण आपके कारण मेरे होटल के
  4727. 3:41:56गेस्ट को परेशानी हो रही है। इसलिए मैं
  4728. 3:41:58चाहूंगा कि आप यहां से चले जाएं। सबसे
  4729. 3:42:01पहली बात मैं यहां इस होटल में जबरदस्ती
  4730. 3:42:04नहीं घुसा। आप अपने सीसीटीवी पर देख सकते
  4731. 3:42:07हैं कि जब मैं यहां आया था तो खुद रणधीर
  4732. 3:42:10शेखावत ने हम लोगों का स्वागत किया था।
  4733. 3:42:12इसीलिए इसकी जिम्मेदारी आपकी नहीं होती कि
  4734. 3:42:15मैं यहां क्यों हूं। मेरे यहां होने के
  4735. 3:42:18लिए पूरी तरह से रणधीर शेखावत खुद ही
  4736. 3:42:21जिम्मेदार हैं। इसीलिए आप इस जिम्मेदारी
  4737. 3:42:24से मुक्त हैं। अगर आपको मेरी बात का
  4738. 3:42:27विश्वास नहीं है तो आप यहां का सीसीटीवी
  4739. 3:42:29फुटेज चेक कर सकते हैं। जहां तक रही बात
  4740. 3:42:32कि मैं यहां से जा क्यों नहीं रहा तो उसके
  4741. 3:42:35लिए मुझे पहले पुलिस को यहां बुलाना
  4742. 3:42:37पड़ेगा और इस कबीर के बच्चे को उनके हवाले
  4743. 3:42:40करवाना पड़ेगा। इसने मेरी दोस्त की
  4744. 3:42:43बेइज्जती की है। उसका मोबाइल भी तोड़ दिया
  4745. 3:42:46है। हां, पुलिस के आने पर आपको होटल का
  4746. 3:42:49सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हवाले करना
  4747. 3:42:52पड़ेगा। शौर्य की बात सुनकर रणधीर शेखावत
  4748. 3:42:56को समझ आ गया कि क्यों शौर्य इतने
  4749. 3:42:58कॉन्फिडेंस में है कि वह उनके बेटे को जेल
  4750. 3:43:01भिजवा देगा। रणधीर शेखावत का ध्यान
  4751. 3:43:04सीसीटीवी की तरफ था ही नहीं। वह समझ गए कि
  4752. 3:43:08शौर्य उस फुटेज की बात कर रहा है जब कबीर
  4753. 3:43:11ने मेघना के हाथ से मोबाइल छीनते हुए
  4754. 3:43:14बदतमीजी की थी। मिस्टर वालिया मैं पुलिस
  4755. 3:43:18को कॉल कर रहा हूं। आपके इस होटल में
  4756. 3:43:20पुलिस के आने का सबसे बड़ा कारण यह बाप
  4757. 3:43:23बेटे ही हैं। इतना कहते हुए शौर्य ने अपना
  4758. 3:43:26मोबाइल निकाल लिया। शौर्य को ऐसा करते
  4759. 3:43:30देखकर अशोक वालिया घबरा गया। वो जल्दी से
  4760. 3:43:33बोला रुकिए मिस्टर श्रवण आप यूं जल्दबाजी
  4761. 3:43:37ना करें। शौर्य को रोक कर अशोक वालिया
  4762. 3:43:40रणधीर शेखावत के पास गया और बोला मिस्टर
  4763. 3:43:44शेखावत जैसा कि आप देख रहे हैं मिस्टर
  4764. 3:43:47श्रवण के यहां होने पर आप दोनों खुश थे।
  4765. 3:43:50आपने तो आगे बढ़कर खुद मिस्टर श्रवण का
  4766. 3:43:53स्वागत किया था। इसीलिए उनके यहां होने के
  4767. 3:43:56लिए मैं रिस्पांसिबल नहीं हूं। आज पहली
  4768. 3:43:59बार रणधीर शेखावत खुद को बड़ा मजबूर फील
  4769. 3:44:02कर रहा था। जिस लड़के को वह सिर्फ एक चूजा
  4770. 3:44:05समझ रहे थे, उसने उनकी नाक में दम कर दिया
  4771. 3:44:08था। रणधीर शेखावत अपने बेटे की तरफ पलटे
  4772. 3:44:12और उसे गुस्से से घूरते हुए बोले, तुम
  4773. 3:44:15दोनों अभी के अभी मिस्टर श्रवण से माफी
  4774. 3:44:19मांगो और बात खत्म करो। कुछ भी बिना सोचे
  4775. 3:44:22समझे करने का यही दुष्परिणाम होता है।
  4776. 3:44:25रणधीर शेखावत कबीर और सरोज पर गुस्सा करते
  4777. 3:44:28हुए बोले कबीर को समझ नहीं आ रहा था कि वो
  4778. 3:44:31कैसे इस मुसीबत से बच सकता है पर उसे कोई
  4779. 3:44:34चारा नजर नहीं आ रहा था। थक हार कर वो
  4780. 3:44:37शौर्य के सामने गया और धीरे से बोला सॉरी।
  4781. 3:44:41कबीर की धीमी आवाज सुनकर शौर्य फिर से
  4782. 3:44:44बोला। क्या कहा तुमने? कुछ सुनाई नहीं
  4783. 3:44:46दिया। जरा जोर से बोलोगे? शौर्य की बात
  4784. 3:44:50सुनकर कबीर अपने पापा की ओर देखने लगा। पर
  4785. 3:44:53इस समय उसके पापा कुछ भी देखने के मूड में
  4786. 3:44:55नहीं थे। वो तो चाहते थे कि किसी तरह
  4787. 3:44:58शौर्य यहां से चला जाता तो उनकी परेशानी
  4788. 3:45:00थोड़ी कम होती। पहले ही इस पार्टी में आए
  4789. 3:45:03हुए मेहमानों के सामने उनकी काफी बेइज्जती
  4790. 3:45:05हो गई थी। दूसरी तरफ कबीर ने खुद को शांत
  4791. 3:45:09करके दोबारा शौर्य से माफी मांगी। कबीर को
  4792. 3:45:12देखकर लग रहा था जैसे उसको किसी ने चारप
  4793. 3:45:14थप्पड़ जमा दिए होंगे। इसीलिए उसका चेहरा
  4794. 3:45:17शर्म से लाल हो गया था। ठीक है तुम्हारी
  4795. 3:45:20माफी कबूल हुई। अब इसके मोबाइल का पैसा
  4796. 3:45:23कौन देगा? शौर्य मेघना की ओर देखकर बोला।
  4797. 3:45:27मेघना और नताशा इस बात से हैरान थे कि
  4798. 3:45:30शौर्य ने आखिर अपनी जिद पूरी कर ही ली।
  4799. 3:45:33दूसरी तरफ रणधीर शेखावत ने जब शौर्य को
  4800. 3:45:35पैसे की बात करते देखा तो वह उसके पास गया
  4801. 3:45:39और अपनी जेब से ₹500 का एक बंडल निकालकर
  4802. 3:45:42शौर्य की तरफ बढ़ा दिया। रणधीर शेखावत से
  4803. 3:45:45पैसे निकलवा देना कोई छोटी बात नहीं था।
  4804. 3:45:48शौर्य ने मेघना और नताशा को वहां से चलने
  4805. 3:45:50का इशारा किया। वो दोनों भी मौके की नजाकत
  4806. 3:45:53को समझकर जल्दी से शौर्य के पीछे हो ली।
  4807. 3:45:57तुम दोनों ध्यान रखना तुम दोनों को मैंने
  4808. 3:45:59इस इंडस्ट्री से बाहर का रास्ता ना दिखा
  4809. 3:46:01दिया तो मेरा नाम रणधीर शेखावत नहीं।
  4810. 3:46:04रणधीर शेखावत तीनों को बाहर जाते देखकर
  4811. 3:46:07भकते स्वर में बोला।
  4812. 3:46:09तीनों होटल से बाहर निकलने ही वाले थे कि
  4813. 3:46:12शौर्य अपनी जगह पर रुका और बोला आप देख
  4814. 3:46:16लेना आप मेरा कितना नुकसान कर पाते हो। पर
  4815. 3:46:19अगर मैं अपनी पर आ गया तो आप सोच भी नहीं
  4816. 3:46:22सकते कि मैं आपके साथ क्या करूंगा। इतना
  4817. 3:46:24बोलकर वो पार्किंग की तरफ बढ़ गया। अब जब
  4818. 3:46:28तीनों उस भीड़भाड़ वाली जगह से बाहर आ गए
  4819. 3:46:30तो रणधीर शेखावत सरोज के पास पहुंचा और
  4820. 3:46:33बोला जो काम तुम्हारी बस की नहीं था उसे
  4821. 3:46:36तुमने करने की कोशिश क्यों की? तुम्हारे
  4822. 3:46:39कारण इतने लोगों के सामने हमारी इतनी
  4823. 3:46:41बेइज्जती हो गई। क्या रणधीर शेखावत शौर्य
  4824. 3:46:44से अपनी बेइज्जती का बदला ले पाएगा? या
  4825. 3:46:47उल्टा शौर्य ही उसको हकीकत से वाबस्ता
  4826. 3:46:49करवा देगा? जानने के लिए सुनिए कहानी का
  4827. 3:46:52अगला एपिसोड।

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