My Begger Husband epi 141 to 160 original voice | pocket FM kukufm #series #storytv — Transcript
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- 0:00तो हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मुझे
- 0:02आशा है कि आप लोग ठीक ही होंगे और इस चैनल
- 0:06पर जो भी सीरीज आ रही है उसको मजे से सुन
- 0:08रहे होंगे। तो माय फेगर हस्बैंड का नया
- 0:12वीडियो आ चुका है जिसमें एपिसोड 141 से
- 0:16160 तक है। तो जल्दी से जल्दी इस वीडियो
- 0:18को देखो और बताओ कि आपको कौन सा पार्ट
- 0:22सबसे अच्छा लगा।
- 0:24और आप आगे कौन-कौन सी सीरीज को देखना
- 0:28चाहते हो। यह भी कमेंट में बताएं और जैसे
- 0:30ही आप इस सीरीज को देख लेते हो, इस एपिसोड
- 0:33को देख लेते हो, तो मुझे नेक्स्ट पार्ट
- 0:36कमेंट कर देना जिससे कि मैं नेक्स्ट पार्ट
- 0:38को अपलोड कर सकूं। तो करते हैं लेट
- 0:40स्टार्ट दिस वीडियो माय वेगर हस्बैंड।
- 0:43बलवंत राय शिप्रा को इस पार्टी में देखकर
- 0:45हैरान थे। वह शिप्रा को मोहित रैना के साथ
- 0:48देखकर इतना तो समझ गए थे कि शिप्रा को
- 0:51मोहित रैना ने इनवाइट किया होगा। वैसे
- 0:54बलवंत राय मोहित रैना को पहले से नहीं
- 0:56जानते थे। हर्षल मेहता से उन्हें यह पता
- 0:59चला था कि मोहित रैना कौन है और यहां वह
- 1:02क्या हैसियत रखता है। क्योंकि बलवंत राय
- 1:04को पहले से पता था कि शिप्रा ने पहले ही
- 1:06अपनी कंपनी के लिए बिग बुल से पार्टनरशिप
- 1:09की थी। इसलिए यह स्वाभाविक था कि उसके
- 1:12संबंध मोहित रैना से अच्छे होंगे। पर फिर
- 1:16भी वह इस बात से हैरान थे कि मोहित रैना
- 1:19ने शिप्रा को यहां क्यों इनवाइट किया है।
- 1:21वैसे बलवंत राय आजकल शिप्रा से थोड़े से
- 1:24नाराज थे क्योंकि अभी जब से शिप्रा ने
- 1:27विहान से शादी करने से मना किया था तो इस
- 1:30बात ने उनके ईगो को हर्ट किया था और उसके
- 1:32बाद भी शिप्रा ने अपनी कंपनी को बेचकर
- 1:35उनके दिए पैसे को उन्हें वापस करके उन्हें
- 1:38और भी गुस्सा दिलाने वाला काम किया था।
- 1:41बलवंत राय कभी नहीं चाहते थे कि शिप्रा
- 1:43अपनी कंपनी को बेचे। वह तो बस शिप्रा पर
- 1:46प्रेशर बनाना चाहते थे। पर शिप्रा ने
- 1:49जल्दबाजी में फैसला लेकर अपनी कंपनी को ही
- 1:52बेच दिया। वैसे विहान की शादी युविका से
- 1:56फिक्स करने के बाद उनकी नाराजगी थोड़ी कम
- 2:00हुई थी। पर उसके बाद कभी भी शिप्रा ने फिर
- 2:04उनसे मिलने की कोशिश नहीं की। वैसे उन्हें
- 2:07यह भी पता चल गया था कि उस दिन के बाद से
- 2:10शिप्रा ने उस घर को भी तात्कालिक रूप से
- 2:13छोड़ दिया था। बलवंत राय इसका कारण खुद को
- 2:16ही समझ रहे थे क्योंकि उन्होंने ही शिप्रा
- 2:19को कहा था कि जब उसे श्रवण से तलाक नहीं
- 2:21लेना है तो वह अपने पति के साथ ही क्यों
- 2:24नहीं रहती है। अब जब उन्होंने शिप्रा को
- 2:26यहां देखा तो स्वाभाविक रूप से उनके मन
- 2:29में शिप्रा से बात करने की इच्छा जागृत
- 2:32हुई। शिप्रा की भी निगाह बलवंत राय से मिल
- 2:35गई थी। जब उसने बलवंत राय को अपनी तरफ आते
- 2:39देखा तो वह अपनी जगह पर खड़ी हो गई और
- 2:41बलवंत राय के पास आने पर उसने झुककर उनको
- 2:44प्रणाम किया। शिप्रा के खड़ी होने पर
- 2:46बलवंत राय ने कहा मुझे नहीं पता था कि तुम
- 2:50भी आने वाली हो। पर जो भी हो तुम्हें यहां
- 2:53देखकर अच्छा लगा। हां, मुझे मिस्टर मोहित
- 2:56रैना ने यहां इनवाइट किया था। शिप्रा
- 2:59मोहित रैना की तरफ इशारा करती हुई बोली।
- 3:01बलवंत राय ने मोहित रैना की तरफ देखा तो
- 3:04मोहित रैना ने भी बलवंत राय के अभिवादन
- 3:07में सर झुकाकर नमस्ते किया। जवाब में
- 3:11बलवंत राय ने कहा मैंने आपके बारे में
- 3:14बहुत सुना है। मैंने सुना है आपने ड्रीम्स
- 3:16इंडिया के भी 90 फर्द शेयर खरीद लिया है।
- 3:19बलवंत राय की बात सुनकर शिप्रा आश्चर्य से
- 3:22मोहित रैना की ओर देखने लगी। शिप्रा अभी
- 3:25तक इस बात से अनजान थी कि डीएम्स इंडिया
- 3:28के 90 अज शेर बिगबुल के पास चले गए हैं।
- 3:31अब उसे समझ में आ रहा था कि मोहित रैना ने
- 3:34उसे क्यों इनवाइट किया। अभी शिप्रा इसी
- 3:36उलझन में थी कि तभी मोहित रैना ने कहा आप
- 3:40गलत समझ रहे हैं। मैं तो बस एक काम करने
- 3:43वाला एम्प्लई हूं। हां, यह सच है कि मेरे
- 3:46बॉस ने ही डीएम्स इंडिया के 90 शेयर को
- 3:48खरीदा है। इसके अलावा मैंने सुना है कि
- 3:51आपके बॉस ने बिगर कलेक्शन को भी खरीद लिया
- 3:53है। बलवंत राय अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए
- 3:56बोले। इस बात ने शिप्रा को और भी हैरान कर
- 3:59दिया। वह इस बात से हैरान थी कि उसे यह
- 4:02बात क्यों नहीं पता था कि विगर कलेक्शन को
- 4:04भी बिगबूल ने खरीद लिया है। खैर इस समय
- 4:08उसका मोहित रैना से कुछ भी पूछना ठीक नहीं
- 4:11था। इसलिए वह चुपचाप उन दोनों की बात को
- 4:14सुनती रही। फिर कुछ सोचकर शिप्रा बलवंत
- 4:17राय से बोयली दादा जी मेरी कंपनी को भी
- 4:20इन्होंने ही खरीदा है। वह तो मैं तुम्हें
- 4:22इनके साथ देखते ही समझ गया था। बलवंत जी
- 4:25बोले इसी समय हर्षल मेहता बलवंत राय के
- 4:28पास आए और उनसे कहा आइए बलवंत जी मैं आपको
- 4:32नताशा कपूर से मिलवा देता हूं वह आ गई है
- 4:36थोड़ी देर बाद शायद वह बिजी हो जाए तो यह
- 4:39अच्छा रहेगा कि आप अब भी चलकर उनसे मिलने
- 4:42हर्षल मेहता की बात सुनकर बलवंत राय
- 4:45शिप्रा और मोहित से विदा लेकर वहां से चले
- 4:47गए। शिप्रा ने देखा था कि गेट के पास
- 4:50लोगों की भीड़ लग गई थी। उस भीड़ के बीच
- 4:53में ही उसे नताशा कपूर की एक झलक देखने को
- 4:56मिली। शिप्रा को उसकी तरफ देखते पाकर
- 4:58मेघना बोली, देख लो यही है नताशा कपूर।
- 5:02नताशा कपूर भीड़ के बीच से होकर हॉल के
- 5:04अंदर की तरफ बढ़ रही थी। उसके आगे-आगे
- 5:07रत्नाकर शेट्टी भी चल रहा था। रत्नाकर
- 5:10शेट्टी भीड़ को साइड करते हुए नताशा कपूर
- 5:13को हॉल के मेन स्टेज की तरफ ले जा रहा था।
- 5:15यह होता है एक स्टार का चार्म। तुम देख
- 5:18रही हो यहां पर जो भी है सभी अच्छे खासे
- 5:20परिवार से हैं। फिर भी लोग नताशा कपूर की
- 5:23झलक को पाने के लिए उसके पीछे लगे हुए
- 5:25हैं। मेघना नताशा कपूर की ओर देखती हुई
- 5:28बोली शिप्रा गौर कर रही थी कि मोहित रैना
- 5:31भी नताशा कपूर को ही गौर से देख रहा था।
- 5:35शिप्रा ने मोहित रैना से पूछा भी मिस्टर
- 5:37मोहित क्या आप भी नताशा कपूर के फैन हैं?
- 5:41मोहित रैना ने जब शिप्रा के सवाल को सुना
- 5:43तो वह हरबराकर शिप्रा की ओर देखने लगा और
- 5:46अपनी जेब मिटाते हुए बोला सच कहूं तो यही
- 5:48सच है कि सच में मैं भी नताशा कपूर का फैन
- 5:51हूं पर मैं पहले कभी उनसे मिला नहीं हूं।
- 5:55मैंने भी आज पहली बार ही उन्हें देखा है।
- 5:57इसलिए स्वाभाविक तौर पर मेरी आंखें भी
- 6:00नताशा कपूर पर ही अटक गई। तो आप यहां खड़े
- 6:04क्यों हैं? जाइए और आप भी जाकर उनसे मिल
- 6:07लीजिए। शिप्रा मोहित रैना का उत्साह
- 6:09बढ़ाती हुई बोली लगता है आप गौर नहीं कर
- 6:12रही हैं कि पहले ही उनसे मिलने वालों कि
- 6:15वहां पर भीड़ लगी हुई है तो मैं कहां अपना
- 6:17नंबर लगा पाऊंगा। मोहित रैना मुस्कुराते
- 6:20हुए बोला अभी मोहित रैना ने इतना कहा ही
- 6:23था कि उसने देखा नताशा कपूर अचानक भीड़ को
- 6:26चीरते हुए उसकी तरफ ही आ रही थी। मोहित
- 6:29रैना को समझ नहीं आ रहा था कि यह कैसे हो
- 6:32रहा है। शिप्रा ने भी इस बात को नोटिस
- 6:34किया तो वह बोली लगता है आपकी बात नताशा
- 6:37कपूर तक पहुंच गई है। तभी वह आपके ही तरफ
- 6:40आ रही है। मोहित रैना को भी शक होने लगा
- 6:43कि क्या सच में नताशा कपूर उसी से मिलने
- 6:46के लिए आ रही है। जैसे जैसे नताशा कपूर
- 6:49पास आ रही थी। मोहित रैना की धड़कन बढ़ती
- 6:51जा रही थी। जैसे ही नताशा कपूर मोहित रैना
- 6:54के पास आई। मोहित रैना अभी कुछ बोलने ही
- 6:57वाला था कि उसने देखा नताशा कपूर उसके पास
- 7:00से गुजर कर सीधा मेघना से जाकर गले मिल
- 7:03गई। अब मोहित रैना को समझ आया कि नताशा
- 7:06कपूर उससे नहीं बल्कि मेघना से मिलने के
- 7:10लिए आई थी। वो मेघना से अलग होते हुए बोली
- 7:13मुझे नहीं पता था कि तुम भी यहां आने वाली
- 7:15हो। अगर पता होता तो मैं तुमसे पहले ही
- 7:18बात करती और बताओ कैसी हो तुम? मैं बढ़िया
- 7:21हूं। तुम बताओ। मैंने तुम्हें देखा था आते
- 7:24हुए। यहां पर लोग तुम्हारे दीवाने हैं।
- 7:27इसलिए मैंने बीच में आकर तुम्हें डिस्टर्ब
- 7:29करना ठीक नहीं समझा। मेघना बोली यह तो ऐसे
- 7:33ही चलते रहता है। तुम इसकी चिंता मत करो।
- 7:36अभी तो तुम यहीं हो ना? मैं फ्री होकर
- 7:39तुमसे मिलती हूं। नताशा कपूर बोली, अब जब
- 7:42तुम यहां आ ही गई हो, तो मेरे इन दोस्तों
- 7:45से भी मिल लो। यह है मिस्टर मोहित रैना।
- 7:47यह तुम्हारे बहुत बड़े फैन हैं। मेघना की
- 7:50बात सुनकर नताशा कपूर ने मोहित रैना से
- 7:53हाथ मिलाया। मोहित रैना भी नताशा के इस
- 7:56गेस्चर से खुश हो गया। उसके बाद मेघना ने
- 7:59नताशा को शिप्रा से मिलवाया। यह मेरी कजिन
- 8:02है शिप्रा राय। नताशा ने शिप्रा से भी हाथ
- 8:06मिलाया। और फिर उसको एक टक देखते हुए
- 8:09बोली, तुम बहुत खूबसूरत हो। सच कहूं तो
- 8:12मुझे तुम्हारी खूबसूरती देखकर तुमसे जलन
- 8:14हो रही है। फिर तो मैं इसे मैं अपनी
- 8:16खुशनशी भी कहूंगी जो तुम जैसी स्टार मेरे
- 8:19लिए ऐसी बात कह रही है। शिप्रा मुस्कुराती
- 8:22हुई बोली अभी नताशा कपूर शिप्रा से कुछ और
- 8:25भी बात करती कि तभी पीछे से रत्नाकर
- 8:28शेट्टी ने कहा मिस नताशा हर्षल मेहता आपको
- 8:32बुला रही हैं। उन्हें शायद आपको किसी से
- 8:34मिलवाना है। नताशा रत्नाकर शेट्टी की बात
- 8:37सुनकर मेघना से बोली अभी मैं चलती हूं।
- 8:40फ्री होकर मैं तुमसे मिलूंगी। इतना कहकर
- 8:42नताशा रत्नाकर शेट्टी के साथ में स्टेज की
- 8:45तरफ बढ़ गई। मोहित रैना और शिप्रा नताशा
- 8:48को वापस जाते हुए देखते रहे। इसी समय
- 8:51शिप्रा ने गौर किया कि वहां उपस्थित भीड़
- 8:54का ध्यान उन तीनों पर भी केंद्रित हो गया
- 8:56था। भीड़ यह जानकर उनकी तरफ आकर्षित थी कि
- 8:59तीनों नताशा कपूर के करीबी हैं। क्योंकि
- 9:02वहां उपस्थित इतने सारे गेस्ट के बीच में
- 9:04नताशा कपूर सिर्फ उन तीनों से मिलने के
- 9:06लिए आई थी। मुझे नहीं पता था मिस मेघना कि
- 9:10आप नताशा कपूर से पहले से परिचित थी। मैं
- 9:13तो एक पल को इस भ्रम में आ गया कि क्या वो
- 9:16मुझसे मिलने के लिए ही यहां आ रही हैं।
- 9:18मोहित रैना ने ईमानदारी से इस बात को कबूल
- 9:21किया। इसी समय शिप्रा ने महसूस किया कि
- 9:23कोई है जो उसी को घूर रही है। उसने देखा
- 9:26तो उसे खुद से कुछ दूरी पर मानसी मेहता
- 9:29नजर आई थी। जो कि उसी की तरफ देख रही थी।
- 9:32मानसी मेहता ने मेघा शिप्रा और मोहित
- 9:35तीनों को नताशा कपूर से मिलते देखा था।
- 9:38उसने नताशा कपूर की वह बात भी सुनी जो
- 9:42उसने शिप्रा से कहा था। इस बात को सुनकर
- 9:44मानसी मेहता का चेहरा और भी बिगड़ गया था।
- 9:47भले इतना समय बीत गया था। पर अभी भी मानसी
- 9:50मेहता का जलन उसके लिए कम नहीं हुआ था।
- 9:53इसी समय शिप्रा ने नोटिस किया कि कोई शख्स
- 9:55था जो मानसी मेहता के साथ ही खड़ा था और
- 9:58वह भी शिप्रा को ही घूर रहा था। शिप्रा को
- 10:01यह शख्स जाना पहचाना सा लगा। पर उसे ध्यान
- 10:04नहीं आ रहा था कि वह अभी हाल फिलहाल में
- 10:07ही इस शख्स से कहां मिली थी। अभी वह उसे
- 10:10पहचानने की कोशिश कर रही थी कि उसने देखा
- 10:13वह शख्स मुस्कुराते हुए शिप्रा की ओर
- 10:15बढ़ा। शिप्रा के साथ खड़ी मेघना ने भी उस
- 10:18शख्स को देख लिया था और वह धीमे से
- 10:20बुदबुदाई। यह कमीना भी यहां है। अब फिर से
- 10:23यह तुम्हारे पीछे पड़ेगा। मेघना की बात
- 10:26सुनकर शिप्रा ने मेघना से पूछा, "कौन है
- 10:29यह शख्स? मुझे यह कुछ जाना पहचाना सा
- 10:32क्यों लग रहा है?" मेघना ने आश्चर्य से
- 10:35शिप्रा की ओर देखा। तुम इतनी जल्दी इस
- 10:38आदमी को कैसे भूल सकती हो? अभी कुछ दिन
- 10:40पहले ही तो यह तुमसे मिला था और तुम्हारे
- 10:42पीछे पड़ गया था। मेघना की बात सुनने के
- 10:46बाद भी शिप्रा याद करने की कोशिश करने
- 10:48लगी। पर अभी भी उसे कुछ सही से याद नहीं
- 10:51आया था। तब मेघना ने फिर से कहा, अरे अभी
- 10:55जब हम जूही के बर्थडे में गए थे तब यह
- 10:58वहां मिला था ना विजय दीवान इतनी जल्दी
- 11:00भूल गई शिप्रा का इतना सुनना था कि उसे सब
- 11:04याद आ गया जूही के बर्थडे में जो भी हुआ
- 11:07था अब उसे अच्छे से विजय दीवान याद आ गया
- 11:10था अब तक विजय दीवान शिप्रा के पास आ गया
- 11:13था वो खुश होते हुए शिप्रा की तरफ हाथ
- 11:16बढ़ाते हुए बोला हेलो मिस शिप्रा आप कैसी
- 11:20हैं मैं बता नहीं सकता कि आपको यहां देखकर
- 11:22मुझे कितनी खुशी हो रही
- 11:25काश मैं भी ऐसा कह सकती। शिप्रा धीरे से
- 11:28बुदबुदाई जो कि विजय दीवान को सही से
- 11:31सुनाई नहीं दिया। तो वह उत्सुकता से पूछने
- 11:34लगा। आपने कुछ कहा क्या? विजय दीवान की
- 11:38बात सुनकर शिप्रा खिसियानी हंसी-हंसते हुए
- 11:40बोली, नहीं ऐसा कुछ नहीं कहा जो आपके लिए
- 11:44हो। मैं एक बात कहूं आपको विश्वास नहीं
- 11:47होगा। विजय दीवान अपनी आंखें बड़ी करते
- 11:50हुए बोला। अच्छा ऐसी क्या बात है जो मुझे
- 11:53विश्वास नहीं होगा। शिप्रा हैरान स्वर में
- 11:56बोली उसे समझ नहीं आया कि विजय दीवान उससे
- 12:00ऐसा क्या बोलने वाला है। आप दिन पर दिन और
- 12:03भी खूबसूरत होती जा रही हैं। विजय दीवान
- 12:06हंसते हुए बोला विजय दीवान की बात सुनकर
- 12:09शिप्रा का मन किया कि वह अपना माथा पीट
- 12:12ले। फिर भी वह अपने चेहरे पर मुस्कान लाते
- 12:15हुए बोली मैं भला आपकी इस बात पर कैसे
- 12:18विश्वास नहीं करूंगी? वैसे आप इसके अलावा
- 12:20और क्या करते हैं? विजय दीवान को समझ नहीं
- 12:23आया कि शिप्रा किस बारे में पूछ रही है।
- 12:26इसलिए वह असमंजस भरे स्वर में बोला। मैं
- 12:29समझा नहीं कि आप किस बारे में बोल रही
- 12:31हैं। मैंने पूछा कि आप लड़कियों की तारीफ
- 12:34करने के अलावा और क्या करते हैं। शिप्रा
- 12:37अपनी बात स्पष्ट करती हुई बोली।
- 12:41आप अच्छा मजाक करती हैं। जूही के बर्थडे
- 12:44में मैंने बताया तो था आपको कि मेरा अपना
- 12:46दीवान टेक्सटाइल के नाम से फर्म है। आप
- 12:49इतनी जल्दी इस बात को भूल कैसे सकती हैं?
- 12:52विजय हंसने की कोशिश करते हुए बोला, "अरे
- 12:55हां, मैं तो सचमुच भूल गई थी। पर अब आपके
- 12:58बताने के बाद मुझे याद आ गया कि आप दीवान
- 13:01टेक्सटाइल के सीईओ हैं। शिप्रा खेद भरे
- 13:04स्वर में बोली मानसी मेहता जो कि विजय
- 13:08दीवान के साथ खड़ी थी वह इस बात को नोटिस
- 13:10कर रही थी कि विजय दीवान शिप्रा में कुछ
- 13:13ज्यादा ही इंटरेस्ट ले रहा है। यह बात उसे
- 13:16और भी परेशान कर रही थी क्योंकि उसकी
- 13:18निगाह में विजय दीवान इस शहर के अच्छे
- 13:21खासे प्रभावशाली लोगों में से एक था और वह
- 13:24मानसी को भी इंप्रेस करने की कोशिश करता
- 13:26रहता था। पर मानसी उसके स्वभाव से
- 13:29भली-भांति परिचित थी। इसलिए वह उसकी बातों
- 13:32में नहीं आती थी। पर जब उसने देखा कि उसके
- 13:35सामने ही विजय दीवान शिप्रा कोेंस दे रहा
- 13:38है तो यह बात उसे पसंद नहीं आ रही थी।
- 13:41मानसी विजय और शिप्रा के बीच में पड़ती
- 13:43हुई बोली विजय तुम्हें पापा से भी मिलना
- 13:47था ना? क्या हम चलें? मानसी की बात सुनकर
- 13:50विजय समझ गया कि उसका शिप्रा से चेप होना
- 13:53मानसी को पसंद नहीं आ रहा। इसलिए उसने बीच
- 13:56में अपने पापा से मिलने की बात छेड़ दी।
- 13:59ना चाहते हुए भी विजय को मानसी की बात
- 14:01माननी पड़ी। उससे सहमत होते हुए उसे वहां
- 14:04से जाना पड़ा। पर जाते-जाते भी वह शिप्रा
- 14:08से बोलता हुआ गया कि वह जल्दी ही फ्री
- 14:10होकर उससे दोबारा मिलेगा। यही वह समय था
- 14:13जब शौर्य विक्रम और मेनका के साथ उस हॉल
- 14:17में प्रवेश किया। शिप्रा के साथ खड़ा
- 14:19मोहित रैना शौर्य के इंतजार में ही था।
- 14:23उसने जब इन तीनों को यहां हॉल में प्रवेश
- 14:26करते देखा तो वह उन तीनों की तरफ चल दिया।
- 14:29मोहित रैना को हॉल के दरवाजे की तरफ जाते
- 14:32देखकर शिप्रा ने उधर देखा तो उसकी भी
- 14:34निगाह शौर्य पर पड़ी। उसे उम्मीद नहीं था
- 14:38कि शौर्य भी यहां आने वाला है। पर जब उसने
- 14:41शौर्य को देखा तो वह मेघना से बोली, "अगर
- 14:44इसको भी इस पार्टी में आना था, तो यह बता
- 14:46नहीं सकता था। अगर हमें पता होता, तो हम
- 14:49भी उसके साथ ही आते ना।"
- 14:51उसे सपना आने से तो रहा कि हम दोनों भी इस
- 14:54पार्टी में आने वाले हैं। तुम भी तो उससे
- 14:56पूछ सकती थी या बता सकती थी कि तुम आज इस
- 14:59पार्टी में आ रही हो तो शायद वह बता देता
- 15:01तुम्हें। मेघना उल्टा शिप्रा पर ही सवाल
- 15:04करती हुई बोली। शिप्रा को भी मेघना की बात
- 15:07सही प्रतीत हुई। इसलिए उसने आगे इस बारे
- 15:10में कुछ भी नहीं कहा। मोहित रैना तेजी से
- 15:13उन तीनों के पास पहुंचा। वो शौर्य के
- 15:16स्वागत के लिए शौर्य के पास जाने ही वाला
- 15:18था कि शौर्य धीरे से उसे चेतावनी देते हुए
- 15:21बोला, "यह तुम क्या कर रहे हो? तुम्हें
- 15:24पता है ना कि हम अभी कहां हैं?" तुरंत ही
- 15:27मोहित रैना को अपनी गलती का आभास हुआ। वो
- 15:30विक्रम की तरफ बढ़ा और उसका स्वागत करते
- 15:32हुए बोला, "आइए सर, मैं आपका ही इंतजार कर
- 15:36रहा था। और सब कैसा है यहां? सब ठीक तो चल
- 15:39रहा है। विक्रम बोला, हां सर, सब सही है।
- 15:43बस आपका ही इंतजार था। मोहित रैना ने जवाब
- 15:47दिया। इसी समय हर्षल मेहता भी अपनी बेटी
- 15:50मानसी मेहता के साथ विक्रम के पास पहुंचा।
- 15:53हर्षल मेहता भी मोहित रैना वाली ही गलती
- 15:56करने वाला था कि तभी आंखों के इशारे से ही
- 15:58शौर्य ने हर्षल मेहता को समझा दिया कि उसे
- 16:01यहां क्या शो करना है। शौर्य से नजर मिलते
- 16:05ही हर्षल मेहता को शौर्य की कही बात याद आ
- 16:07गई थी। इसलिए वह तुरंत ही विक्रम के सामने
- 16:10जाकर उसका स्वागत किया और उसे अपने साथ
- 16:13मंच की ओर आने का इशारा किया। विक्रम को
- 16:16भी ऐसा करते हुए बुरा लग रहा था। पर उसे
- 16:18पता था कि उसे क्या करना है। इसलिए वह
- 16:21चाहकर भी कुछ और नहीं कर सकता था। वह
- 16:23हर्षल मेहता के साथ मंच पर पहुंचा। मेनका
- 16:27भी विक्रम के साथ ही मंच पर पहुंची। उसे
- 16:29पता था कि उसे क्या दिखाना है। पर शौर्य
- 16:32पीछे ही ठहर गया। उसने शिप्रा और मेघना को
- 16:35देख लिया था। शौर्य ने ऐसा जताया जैसे
- 16:38अचानक से उसकी निगाह शिप्रा पर पड़ गई।
- 16:41इसलिए वह पीछे ही रुक गया। शिप्रा जो कि
- 16:44पहले से ही शौर्य को देख रही थी। उसकी भी
- 16:46निगाह शौर्य से मिली। शिप्रा को यहां
- 16:49देखकर शौर्य को आश्चर्य हुआ। शौर्य ने ऐसा
- 16:53ही जताया। वो शिप्रा की ओर बढ़ गया। मेघना
- 16:56और शिप्रा के पास पहुंचकर शौर्य बोला,
- 16:59"मुझे नहीं पता था कि तुम दोनों भी यहां
- 17:01आने वाली हो। अगर मुझे पता होता तो मैं भी
- 17:04तुम दोनों के साथ ही ना आता।" वही सवाल जो
- 17:07अभी कुछ देर पहले शिप्रा ने मेघना से किया
- 17:09था। शौर्य ने उसी सवाल को शिप्रा और मेघना
- 17:12से किया। शौर्य का सवाल सुनकर शिप्रा को
- 17:15एहसास हुआ कि उसे शौर्य से इस बारे में
- 17:18बात करनी चाहिए थी। उसने सोचा अगर आगे से
- 17:21अब कभी इस तरह की किसी पार्टी में जाना
- 17:23होगा तो वह शौर्य से इस बारे में जरूर बात
- 17:26करेगी। पर तुम यहां कैसे हो? शिप्रा ने
- 17:29शौर्य से सवाल किया। यह क्या बात हुई कि
- 17:32मैं यहां कैसे? मेघना को तो पता होना
- 17:34चाहिए या समझ जाना चाहिए कि मैं यहां
- 17:37क्यों हूं? शौर्य ने शिप्रा के सवाल का
- 17:40जवाब दिया। शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा
- 17:43मेघना की ओर देखने लगी। शिप्रा को अपनी ओर
- 17:46देखते पाकर मेघना बोली, तुम्हें भी तो
- 17:48समझना चाहिए कि आज यहां क्या होने वाला
- 17:51है। अब तो तुम जानती हो कि आज यहां
- 17:53स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की लॉन्चिंग इवेंट
- 17:56है और स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की ऐड में
- 17:58किसने काम किया है? शौर्य और नताशा ने। तो
- 18:01जब यह इस ऐड कैंपेन का मेन लीड एक्टर है
- 18:04तो इसका यहां होना तो स्वाभाविक है। मेघना
- 18:07की बात सुनकर शिप्रा को भी अपनी गलती का
- 18:10एहसास हुआ। उसने भी तो शौर्य के पोस्टर को
- 18:13देखा था जिसमें वो नताशा कपूर के साथ था।
- 18:16अभी शौर्य, मेघना और शिप्रा आपस में बातें
- 18:20कर ही रहे थे कि तभी कहीं से फिर से विजय
- 18:22दीवान वहां पर आ गया। वो शौर्य को देखकर
- 18:25बोला ओ तो मिस्टर श्रवण आप भी यहां आए हुए
- 18:29हैं मानना पड़ेगा। इन कुछ दिनों में मैंने
- 18:33आपको दोबारा किसी बड़ी पार्टी में देखा
- 18:35है। पर मैंने आपके बारे में पता किया है।
- 18:37आप तो अभी अपने करियर को लेकर स्ट्रगल कर
- 18:40रहे हैं। फिर आप ऐसा कैसे दिखा रहे हैं?
- 18:42जैसे आप किसी बड़ी फैमिली से बिलोंग करते
- 18:45हैं। क्या करें मिस्टर दीवान? आप जैसे
- 18:49बड़े लोगों के सामने खड़ा होना है तो
- 18:51दिखावा तो करना पड़ेगा ना। शौर्य
- 18:54मुस्कुराते हुए बोला, शौर्य की बात विजय
- 18:57दीवान को अच्छा नहीं लगा। उसे लग रहा था
- 19:00कि शौर्य शिप्रा को रिझाना चाहता है। इससे
- 19:04उसे अपना पलड़ा हल्का जान पड़ रहा था। उसे
- 19:07लगा अगर उसे शिप्रा की नजर में आना है तो
- 19:10उसे श्रवण को शिप्रा से दूर करना पड़ेगा।
- 19:13और उसका सबसे अच्छा तरीका यही है कि वह
- 19:15शिप्रा के सामने श्रवण को छोटा साबित
- 19:18करें। इसलिए वह श्रवण के बारे में ऐसी बात
- 19:20बोल रहा था। पर जब उसने देखा कि श्रवण
- 19:23उसके मुंह लगकर उसे जवाब दे रहा है तो वो
- 19:26शिप्रा से बोला मिस शिप्रा मुझे ऐसा क्यों
- 19:30लग रहा है यह श्रवण आप में कुछ ज्यादा ही
- 19:32इंटरेस्ट दिखा रहा है शिप्रा को विजय की
- 19:35बात सुनकर अच्छा ही लगा वो समझ रही थी कि
- 19:38विजय ऐसा क्यों बोल रहा है पर उसे यह
- 19:41अच्छा नहीं लगा कि विजय शौर्य को छोटा
- 19:43दिखाने की कोशिश कर रहा है। विजय का शौर्य
- 19:46का तिरस्कार करना शिप्रा को गुस्सा दिला
- 19:48रहा था। इसलिए वो विजय को जवाब देते हुए
- 19:51बोली माफ करना मिस्टर विजय पर मुझे तो आप
- 19:55भी यही करते हुए प्रतीत हो रहे हैं।
- 19:58आपने सही कहा मुझे आप बहुत अच्छी लगती
- 20:01हैं। मैं पहले भी आपसे यह कहना चाहता था
- 20:04पर मुझे मौका ही नहीं मिला। पर आपको यह भी
- 20:06तो समझना चाहिए कि मुझ में और श्रवण में
- 20:09बहुत अंतर है। मेरे और इसके बीच क्या
- 20:12तुलना हो सकती है। अभी विजय इतना बोला ही
- 20:15था कि शिप्रा ने देखा मानसी मेहता भी विजय
- 20:18के पीछे वहां पहुंच गई थी। शिप्रा को यह
- 20:21अच्छा मौका जान पड़ा। वो मानसी से बोली
- 20:24मानसी तुम्हारा यह दोस्त तो सरेआम मेरे
- 20:27साथ फ्लर्ट कर रहा है। विजय ने जैसे ही
- 20:30शिप्रा के मुंह से मानसी का नाम सुना उसने
- 20:33पलट कर अपने पीछे देखा। मानसी को अपने
- 20:36पीछे खड़ा देखकर उसके चेहरे पर हवाइयां
- 20:38उड़ने लगी। शिप्रा की बात सुनने के बाद
- 20:41मानसी विजय को घूरने लगी। शिप्रा ने जब
- 20:44विजय के चेहरे के बदलते रंग को देखा तो
- 20:46उसने विजय से कहा, "क्या हुआ मिस्टर विजय?
- 20:50अब आप नहीं कहेंगे कि मैं आपको अच्छी लगती
- 20:52हूं? क्या अभी जो आपने मुझसे कहा, वह सब
- 20:55बातें हवाहवाई ही थी। आप तो कमाल के हैं।
- 20:59मिस शिप्रा। मैं तो बस आपको इस श्रवण से
- 21:02बचाना चाहता था। मैं नहीं चाहता था कि आप
- 21:04उसके झांसे में फंसे इसलिए मैं आपसे ऐसा
- 21:07बोल रहा था। आप इससे संभल कर रहें। यह
- 21:10जैसा दिखता है वैसा है नहीं। विजय दीवान
- 21:13शौर्य को कोसता हुआ बोला। विजय दीवान की
- 21:17बात सुनकर मानसी ने शौर्य की तरफ देखा। वो
- 21:20शौर्य से पहली बार ही मिल रही थी। पर उसे
- 21:23शौर्य का चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लग रहा
- 21:25था। उसने शौर्य की ओर देखकर कहा। तुम कौन
- 21:29हो? मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मैंने
- 21:31पहले भी तुम्हें कहीं देखा है। वैसे जानता
- 21:34तुम्हें मैं भी नहीं हूं। तुम कौन हो? मैं
- 21:37पक्का यकीन के साथ कह सकता हूं कि मैंने
- 21:39तुम्हें पहले कभी नहीं देखा है। शौर्य भी
- 21:43मानसी के अंदाज में ही बोला। शिप्रा को
- 21:46शौर्य का इस तरह से मानसी को बोलना अच्छा
- 21:48लगा। वो इसी तरह का जवाब मानसी के लिए
- 21:51चाहती थी। शौर्य का इस तरह से मानसी को
- 21:54बोलना मानसी को अच्छा नहीं लगा। वो कुछ
- 21:57बोलती उससे पहले ही विजय दीवान बोला तुम
- 22:00मानसी मेहता को नहीं जानते तुम जिसकी
- 22:03पार्टी में आए हो उसी को नहीं जानते आखिर
- 22:06तुम्हें यहां बुलाया किसने है मेघना जो
- 22:09यहां खड़ी उन सबकी बातों को सुन रही थी
- 22:11उसे लगा कि यह बातें कोई अलग दिशा ना ले
- 22:14लें इसलिए वो बीच में आती हुई बोली मिस
- 22:17मानसी शायद आप जानती नहीं कि आपकी
- 22:20स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की जो ऐड बनी है
- 22:23उसमें नताशा कपूर के साथ जो मेन लीड
- 22:26कैरेक्टर है वो श्रवण ही है।
- 22:30मेघना की बात सुनकर मानसी को एहसास हुआ कि
- 22:33क्यों उसे शौर्य का चेहरा जाना पहचाना सा
- 22:36लगा। वो समझ गई थी कि उसके ऐड में काम
- 22:39करने वाला लड़का श्रवण ही था। पर श्रवण ने
- 22:42जिस तरह से उसको जवाब दिया था, यह उसे
- 22:45पसंद नहीं आ रहा था। मेघना की बात सुनकर
- 22:48मानसी कुछ पल शौर्य का चेहरा देखती रही।
- 22:51उसके चेहरे पर शौर्य के लिए नागवारी के
- 22:54भाव थे। वो संयमित स्वर में बोली यह अच्छी
- 22:58बात है कि तुमने हमारे ऐड में काम किया
- 23:00है। पर इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि
- 23:03तुम्हें यहां अपनी मनमानी करने की इजाजत
- 23:05मिल गई है। अच्छा ऐसा मैंने क्या कर दिया
- 23:09जो तुम्हें मैं मनमानी करता प्रतीत हुआ।
- 23:12अगर किसी पर लगाम ही लगानी है तो अपने इस
- 23:14दोस्त पर लगाओ जो पता नहीं खुद को क्या
- 23:17समझता है। शौर्य विजय दीवान की तरफ इशारा
- 23:20करता हुआ बोला मुझे किस पर लगाम लगाना है
- 23:23यह मुझे अच्छे से पता है। तुमने नताशा
- 23:25कपूर के साथ एक ऐड में काम क्या कर लिया
- 23:28है कि खुद को ज्यादा ही बड़ा स्टार समझने
- 23:30लगे हो। मानसी को शौर्य का इस तरह से उससे
- 23:34बात करना पसंद नहीं आ रहा था। कोई और समय
- 23:37होता तो शायद वह इस तरह से शौर्य से बात
- 23:39नहीं करती। पर क्योंकि यह सब शिप्रा के
- 23:42सामने हो रहा था और शौर्य एक तरह से
- 23:44शिप्रा के साइड में ही खड़ा था। इसीलिए
- 23:47शौर्य की बातें उसे पसंद नहीं आ रही थी।
- 23:50शौर्य का भाव ऐसा था जैसे वह किसी बच्चे
- 23:52को समझा रहा हो। शौर्य यह समझ रहा था कि
- 23:56मानसी जो जरूरत से ज्यादा घमंड भरी बातें
- 23:58कर रही है, उसका कारण कुछ और है। इसीलिए
- 24:01वह अपेक्षाकृत संयमित स्वर में बोला। ऐसा
- 24:04लग रहा है जैसे तुमने अभी अपनी सोचने
- 24:07समझने की शक्ति खो दी है। इसीलिए ऐसी
- 24:09बातें कर रही हो। नहीं तो जो लोग होस्ट
- 24:12होते हैं वे इस बात का खास ध्यान रखते हैं
- 24:14कि उनकी पार्टी में आए हुए गेस्ट को कोई
- 24:17असुविधा ना हो। पर तुम तो खुद ही किसी के
- 24:19बहकावे में आकर कुछ भी बोले जा रही हो। वह
- 24:22भी बिना कुछ जाने समझे। एक ऐसे आदमी की
- 24:25बात पर भरोसा करके जिसे किसी और की पार्टी
- 24:28में कैसे बिहेव किया जाए यह पता ही नहीं
- 24:30है। शौर्य की बातें सुनकर मानसी को भी
- 24:34अपनी गलती का एहसास हुआ। वो समझ गई कि
- 24:37यहां अगर कुछ भी ऊंचानीचा होता है तो इससे
- 24:40उसकी पार्टी ही खराब होगी। और अब तो इस
- 24:42पार्टी की मेन शेयरहल्डर भी वह नहीं है।
- 24:45दूसरी बात विक्रम भी मिस मेनका के साथ
- 24:48यहां आ गया था। इसीलिए वह यह नहीं चाहती
- 24:51थी कि उन लोगों के सामने कुछ नया बखेड़ा
- 24:53हो। इसीलिए वह बिना कुछ और शौर्य को बोले
- 24:57विजय को अपने साथ लेकर वहां से चली गई।
- 25:00विजय इतनी आसानी से वहां से जाना चाहता
- 25:02नहीं था। पर मजबूरन उसे वहां से जाना
- 25:04पड़ा। वो शौर्य को सबक सिखाना चाहता था।
- 25:08पर उसकी इच्छा अधूरी रह गई। विजय को भी यह
- 25:11बात बर्दाश्त नहीं हो रही थी कि शौर्य
- 25:13जैसा फटीचर उस पर हावी हो रहा है। वाह
- 25:17श्रवण तुम तो इस पार्टी के होस्ट से ही
- 25:19भिड़ गए। मानना पड़ेगा कुछ तो बात है तुम
- 25:22में। मेघना शौर्य की तारीफ करते हुए बोली
- 25:26मुझे पहले कहां पता था कि वो हर्षल मेहता
- 25:28की बेटी है। वो तो बाद में मुझे समझ में
- 25:31आया कि वो यहां की होस्ट की बेटी है। पर
- 25:33उससे क्या होता है? मुझे तो उस विजय को
- 25:36सबक सिखाना था। शौर्य बोला दूसरी तरफ जब
- 25:40मानसी विजय दीवान को शिप्रा और मेघना के
- 25:42पास से ले गई तो विजय दीवान मानसी से बोला
- 25:46तुम्हें उस लड़के को इतनी आसानी से नहीं
- 25:48छोड़ना चाहिए था तुमने देखा नहीं वो तुमसे
- 25:51कितनी बदतमीजी से बात कर रहा था वो सब
- 25:54तुम्हारे कारण ही हुआ है तुम्हें क्या
- 25:56जरूरत थी उससे बदतमीजी से बात करने की तुम
- 25:59भी तो उसे वहां नीचा दिखाने की कोशिश में
- 26:01उससे बदतमीजी किए जा रहे थे और फिर तुम यह
- 26:04मत भूलो कि मुझे यहां इस पार्टी को अच्छे
- 26:06से संचा संचालित करना है ना कि यहां कोई
- 26:09बखेड़ा खड़ा करना है। मानसी नाराजगी भरे
- 26:12स्वर में विजय दीवान से बोली तुम कुछ भी
- 26:15कहो पर तुमने उस लड़के को कुछ ज्यादा ही
- 26:18ढील दे दी। तुम इस पार्टी की होस्ट हो।
- 26:21उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए था। उसकी
- 26:24हिम्मत देखी तुमने। तुमसे भी वह किस तरह
- 26:26से बात कर रहा था। विजय दीवान की चिढ़न
- 26:29अभी भी शौर्य के लिए कम नहीं हुई थी।
- 26:32मानसी समझ रही थी कि विजय श्रवण से इतना
- 26:35क्यों चिढ़ा हुआ है? क्योंकि शिप्रा ने
- 26:38विजय को भाव ना देकर उस श्रवण को ज्यादा
- 26:40तरजीह दी थी जो विजय दीवान से बर्दाश्त
- 26:43नहीं हो रहा था। मानसी ने विजय से कहा अब
- 26:47मुझे ज्यादा भड़काने की कोशिश मत करो। मैं
- 26:50अच्छे से समझ रही हूं कि तुम उस शिप्रा के
- 26:52पीछे पड़े हुए थे। वहां तुम्हारी दाल नहीं
- 26:55गली तो तुम उस श्रवण से उलझ गए। आखिर ऐसा
- 26:58क्या है उस शिप्रा में जो तुम उसके पीछे
- 27:00ही पड़ गए?
- 27:02इस पार्टी में और भी कई खूबसूरत लड़कियां
- 27:05हैं। वहां जाकर ट्राई करो। उसके पीछे जाने
- 27:08की कोई जरूरत नहीं है। मानसी की यह स्पष्ट
- 27:11बातें सुनकर विजय समझ गया कि उसकी चोरी
- 27:14पकड़ी गई थी। वो खिसियानी हंसी-हंसते हुए
- 27:17बोला तुम गलत समझ रही हो। ऐसा कुछ भी नहीं
- 27:20है। मैं भला क्यों उस लड़की के पीछे
- 27:23पड़ूंगा। मानता हूं वो खूबसूरत है। पर
- 27:26तुमसे ज्यादा नहीं। जब तुम्हारी दाल वहां
- 27:28नहीं गली तो तुम ऐसी बातें तो करोगे ही पर
- 27:31मेरे सामने तुम्हारी यह चालाकी नहीं चलने
- 27:34वाली। मैं क्या तुम्हें जानती नहीं हूं?
- 27:36मानसी विजय को घूरते हुए बोली। तभी मानसी
- 27:39के साथ चलते हुए विजय की निगाह मंच पर
- 27:42मौजूद नताशा कपूर पर पड़ी। विजय नताशा
- 27:45कपूर की खूबसूरती का कायल था। वो मानसी से
- 27:48बोला देखो मंच पर नताशा कपूर मौजूद है।
- 27:52क्यों ना तुम मुझे नताशा कपूर से मिलवा
- 27:54दो। मुझे भी नताशा से थोड़ी जान पहचान
- 27:57करने का मौका मिल जाएगा। मेरी खुद उससे
- 28:00कोई ज्यादा जान पहचान नहीं है। तो मैं
- 28:02तुम्हारी मुलाकात उससे कैसे कराऊं? और
- 28:04वैसे भी अभी मंच पर मिस्टर विक्रम और
- 28:06मेनका मौजूद है। उनके सामने तो मैं वैसे
- 28:09भी तुम्हें उनसे नहीं मिलवा सकती। हां,
- 28:11अगर बाद में मौका मिला तो मैं जरूर
- 28:14तुम्हें नताशा कपूर से मिलवाने की कोशिश
- 28:16करूंगी। मानसी ने विजय से अपनी मजबूरी
- 28:19बताई। इसी समय विजय ने देखा नताशा कपूर
- 28:22मंच से नीचे की तरफ आ रही थी और एक दिशा
- 28:25में बढ़ गई। जब विजय ने नताशा को मंच से
- 28:28नीचे एक तरफ जाते देखा तो वह मानसी से
- 28:31बोला यह नताशा कपूर अकेले कहां जा रही है?
- 28:34विजय की बात सुनकर जब मानसी ने नताशा कपूर
- 28:37की तरफ देखा तो उसने भी पाया कि वह श्रवण
- 28:40को देखती हुई उसी की तरफ बढ़ रही है। उसने
- 28:43जब यह महसूस किया तो वह विजय से बोली कहीं
- 28:46नताशा कपूर श्रवण के पास तो नहीं जा रही
- 28:48है। आखिर वह उसकी को्टर है। विजय ने जब
- 28:52मानसी की बात को सुना तो उसने भी नताशा
- 28:55कपूर की नजर का पीछा किया। उसने पाया कि
- 28:58नताशा कपूर की निगाह श्रवण पर ही जमी हुई
- 29:00है। जबकि श्रवण मेघना और शिप्रा से बातें
- 29:03करने में मशगूल था। नताशा कपूर को श्रवण
- 29:06की तरफ जाते देखकर विजय के दिल में श्रवण
- 29:09के लिए और आग लग गई। पर वह अभी मूकदर्शक
- 29:12बनकर सिर्फ उन दोनों को देख सकता था। कुछ
- 29:15कर नहीं सकता था। जबकि दूसरी तरफ शौर्य
- 29:18मेघना से बातें किए जा रहा था। इसी समय
- 29:21नताशा कपूर शौर्य के पास पहुंची और उसका
- 29:24हाथ पकड़ कर बोली तो तुम यहां हो। मैं कब
- 29:28से तुम्हारा इंतजार कर रही थी और तुमसे यह
- 29:30नहीं हुआ कि तुम आकर मुझसे एक बार मिल लो।
- 29:33नताशा कपूर शिकायती लहजे में बोली। शिप्रा
- 29:36नताशा कपूर की हरकत देखती रह गई। जिस तरह
- 29:39से आकर नताशा कपूर ने शौर्य की बाह को
- 29:42इतने हक से पकड़ लिया था। इससे शौर्य भी
- 29:45हैरान रह गया। शिप्रा को भी उम्मीद नहीं
- 29:47था कि नताशा कपूर इस तरह से शौर्य के करीब
- 29:50चली जाएगी। कहां तो वह शौर्य को कभी अपने
- 29:53करीब भी भटकने नहीं दी थी और कहां नताशा
- 29:56कपूर जैसी खूबसूरत लड़की खुद ही शौर्य के
- 29:59इतने करीब चली गई थी। उन दोनों की नजदीकी
- 30:02देखकर शिप्रा के मन में भी नताशा कपूर के
- 30:04लिए जलन की भावना पैदा हो गई थी। अचानक से
- 30:08शिप्रा के मन में यह भाव आ गया कि कोई
- 30:10उसकी कीमती चीज को उससे दूर लेकर जा रहा
- 30:12है। वो तो यह भी नहीं कर सकती थी कि उसके
- 30:15पास जाकर शौर्य को नताशा से अलग कर दे।
- 30:19जबकि वहीं खड़ी मेघना शिप्रा के चेहरे के
- 30:22बदलते रंग को देख रही थी। उसे साफ महसूस
- 30:25हो रहा था कि शिप्रा के मन में अभी क्या
- 30:27चल रहा है। पर इन सब बातों से बेपरवाह
- 30:30नताशा कपूर मेघना से बोली सॉरी मेघना। मैं
- 30:34थोड़ी देर के लिए श्रवण को तुम्हारे पास
- 30:36से ले जा रही हूं। दरअसल मुझे श्रवण से
- 30:39थोड़ी बातें करनी है। उम्मीद करती हूं कि
- 30:41तुम इससे बैड फील नहीं करोगी। मेघना ने मन
- 30:45ही मन सोचा। मैं क्यों बुरा फील करूंगी?
- 30:48जो बुरा फील कर भी रही होगी वो तो कुछ बोल
- 30:50भी नहीं सकती। पर प्रत्यक्ष में वो नताशा
- 30:54से बोली। थोड़ी देर के लिए क्या? तुम्हारा
- 30:57जब तक मन करे तब तक तुम श्रवण को अपने पास
- 30:59रखो। और मैं क्यों बुरा फील करूंगी?
- 31:03ठीक है फिर मिलती हूं तुमसे बाद में। इतना
- 31:06कहकर नताशा कपूर शौर्य की बाह पकड़े हुए
- 31:09उसको खींचते हुए मंच की तरफ बढ़ गई।
- 31:12शिप्रा उन दोनों को जाते भावहीन आंखों से
- 31:15बस देखती रही। उस हॉल में मौजूद बहुत से
- 31:18जवान लड़कों की निगाह शौर्य पर ही जम गई
- 31:21थी। सब उसे जलन भरी आंखों से देख रहे थे।
- 31:25कितने तो ऐसे लड़के थे जो सोच रहे थे। काश
- 31:28शौर्य की जगह वह होता तो कितना अच्छा
- 31:31होता। पर शौर्य इन सब बातों से बेपरवाह
- 31:34नताशा कपूर के साथ खिंचा हुआ चला जा रहा
- 31:37था। वो थोड़ा ऑकवर्ड भी फील कर रहा था। वो
- 31:41समझ रहा था कि उस हॉल में मौजूद बहुत सारे
- 31:43लोगों की निगाह उसी पर जमी हुई है। पर वो
- 31:46नताशा कपूर को रोक नहीं सकता था। नताशा
- 31:49कपूर के साथ जाते हुए शौर्य ने चुपके से
- 31:52शिप्रा की ओर एक नजर देखा, तो उसे शिप्रा
- 31:55का भावहीन चेहरा दिखाई दिया, जिसकी निगाह
- 31:57उसी पर जमी हुई थी। मेघना की निगाह भी
- 32:00शिप्रा पर ही जमी हुई थी। वो शिप्रा के
- 32:03भावहीन चेहरे को देखकर बोली, अब इस तरह
- 32:06उसको देखने का क्या फायदा? इस सब का कारण
- 32:09तुम ही हो। तुम ही श्रवण को अपने लायक
- 32:11नहीं समझती। मुझे तो डर है कि अभी तुम
- 32:14श्रवण के पास होते हुए भी दूर हो। पर शायद
- 32:17एक समय आएगा कि तुम उसके पास भी नहीं रह
- 32:19पाओगी। और उस समय तुम्हारे पास अफसोस करने
- 32:22के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। मेघना की
- 32:25बात सुनकर शिप्रा ने महसूस किया कि शायद
- 32:27उसके चेहरे पर मेघना को कुछ अलग भाव दिख
- 32:30गया है। इसलिए वह ऐसी बात कर रही है। अगले
- 32:33ही पल शिप्रा खुद को नॉर्मल दिखाने की
- 32:35कोशिश करती हुई बोली तुम कुछ भी बोले जा
- 32:38रही हो। ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम समझ रही
- 32:40हो। श्रवण क्या चाहता है या क्या करता है?
- 32:44उसके लिए वह स्वतंत्र है। अपनी रिलेशन में
- 32:46ना मुझ पर कोई बंधन है और ना ही मैंने
- 32:49श्रवण को किसी बंधन में बांध रखा है। काश
- 32:52जैसा तुम बोल रही हो वैसा ही भाव तुम्हारे
- 32:55चेहरे पर भी नजर आता। मेघना अफसोस भरे
- 32:58स्वर में बोली। वो समझ रही थी कि शिप्रा
- 33:01बोल कुछ और रही थी। पर उसके चेहरे का भाव
- 33:03कुछ और कह रहा था। दूसरी तरफ विजय दीवान,
- 33:07नताशा कपूर और श्रवण की नजदीकी देखकर जलकर
- 33:10खाक हुआ जा रहा था। जबकि मानसी भी हैरानी
- 33:13से नताशा कपूर को देख रही थी। जिस बेबाकी
- 33:16से उसने श्रवण की बाह को पकड़ रखा था,
- 33:18उससे कोई भी यह अंदाजा लगा सकता था कि उन
- 33:21दोनों के बीच बहुत ही ज्यादा नजदीकी है।
- 33:24वहां मौजूद लोग उन दोनों को देखकर क्या
- 33:26सोच रहे होंगे। इस बात से उन दोनों को
- 33:29देखकर लग नहीं रहा था कि नताशा को कोई
- 33:31फर्क पड़ रहा है। शौर्य ने भी जब यह महसूस
- 33:34किया कि सब उसी को घूर रहे हैं तो वह धीरे
- 33:37से नताशा से बोला, "यह तुम क्या कर रही
- 33:40हो? मेरी बाह तो छोड़ो। यहां मौजूद सभी
- 33:43लोग हमें ही देख रहे हैं। मुझे इन सब से
- 33:46कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम भी इन सब की
- 33:49चिंता करना छोड़ दो। नताशा खूबसूरत थी। उस
- 33:52पर उसके शरीर की खुशबू शौर्य को मददोश कर
- 33:55रही थी। जबकि दूसरी तरफ शिप्रा की निगाह
- 33:59उन दोनों पर ही जमी हुई थी। उन दोनों की
- 34:02नजदीकियों को देखकर शिप्रा के दिल में
- 34:04बेचैनी बढ़ती जा रही थी। वैसे शौर्य खुद
- 34:07भी अनकंफर्टेबल फील कर रहा था। वहां
- 34:10उपस्थित लोगों की घूरती नजरों का सामना
- 34:12करना शौर्य को मुश्किल लगने लगा तो वह
- 34:15नताशा कपूर से बोला अगर तुमने मेरा हाथ
- 34:18नहीं छोड़ा तो यहां उपस्थित लोग फालतू में
- 34:20मेरा दुश्मन बन जाएंगे इसीलिए मुझ पर रहम
- 34:23करो शौर्य की बात सुनकर नताशा मुस्कुराई
- 34:26और बोली जानती हूं इसीलिए तो लोगों को
- 34:29जलाने के लिए ही तब से तुम्हारी बाह को
- 34:31पकड़ी हुई हूं तुम्हें तो खुश होना चाहिए
- 34:34यहां सभी तुम्हारे भाग्य पर जल रहे होंगे
- 34:37क्या कहा तुमने तुम ऐसा जानबूझकर कर रही
- 34:40हो। यंग लड़के मेरी भाग्य पर जल नहीं रहे
- 34:43हैं। वो मेरी जान के दुश्मन बन रहे होंगे।
- 34:46शौर्य नताशा की बात सुनकर बोला, तो क्या
- 34:49तुम मेरे लिए यह छोटी-मोटी दुश्मनी भी मूल
- 34:51नहीं ले सकते? तुम देख रहे हो जब से मैं
- 34:54यहां आई हूं, लोग मुझे ऐसे घूर रहे थे
- 34:56जैसे नजरों से ही मुझे खा जाएंगे। इसीलिए
- 34:59ऐसे लोगों को जलाने के लिए मुझे यह करना
- 35:01पड़ा। जब तक मैं अकेली थी, यहां के
- 35:04ज्यादातर लोग किसी ना किसी बहाने मेरे पास
- 35:07आकर बात करने की कोशिश कर रहे थे। अब जब
- 35:10से मुझे लोगों ने तुम्हारे करीब देखा है,
- 35:12अब देखो कोई ऐसी कोशिश नहीं कर रहा है।
- 35:15नताशा वहां उपस्थित भीड़ पर नजर घुमाती
- 35:18हुई बोली, बहुत खूब। इस तरह तुमने अपना
- 35:21काम तो कर लिया पर यहां उपस्थित लोगों को
- 35:24मेरा दुश्मन बना दिया। शौर्य मुस्कुराता
- 35:26हुआ बोला, "अब तक नताशा ने शौर्य की बाह
- 35:29को छोड़ दिया था। अब दोनों साथ में खड़े
- 35:32थे। नताशा शौर्य की बात सुनकर बोली, मेरे
- 35:36साथ होने के कारण इतनी तो मुश्किल तुम्हें
- 35:38झेलनी पड़ेगी। वहीं इन दोनों से थोड़ी दूर
- 35:41खड़े रत्नाकर शेट्टी भी नताशा को शौर्य के
- 35:44इतने करीब देखकर हैरान था। उसे नहीं समझ
- 35:47आया कि यह दोनों कब इतने करीब आ गए कि एक
- 35:50दूसरे की बाहों को थामे थे। जब दोनों अलग
- 35:53होकर बातें करने लगे तो रत्नाकर शेट्टी उन
- 35:56दोनों के करीब आया और शौर्य से बोला और
- 35:59मिस्टर श्रवण आप कैसे हैं? इस आधे दिन में
- 36:02क्या ही बदल जाएगा शेट्टी साहब आप बताइए
- 36:05आप तो ठीक हैं शौर्य मुस्कुराता हुआ बोला
- 36:08आपकी दया है। आप दोनों को साथ में देखकर
- 36:11अच्छा लगा। रत्नाकर शेट्टी शौर्य के साथ
- 36:14नताशा को देखता हुआ बोला। शौर्य ने जब
- 36:17रत्नाकर शेट्टी की बात को सुना तो तो वह
- 36:19समझ गया कि रत्नाकर शेट्टी के कहने का
- 36:22क्या मतलब है। वो रत्नाकर शेट्टी से बोला
- 36:25आपके ऐसा कहने का क्या मतलब हुआ शेट्टी
- 36:27साहब? शौर्य की बात सुनकर रत्नाकर शेट्टी
- 36:30हड़बड़ा कर दोनों की तरफ देखने लगा। उसे
- 36:33लगा वो कुछ गलत तो नहीं बोल गया। वो संदेह
- 36:36भरे स्वर में बोला। मुझे लगा आप दोनों एक
- 36:39दूसरे के करीब आ गए हैं। मैंने कुछ गलत
- 36:42सोच लिया क्या? रत्नाकर शेट्टी की बात
- 36:44सुनकर नताशा शौर्य की तरफ देखकर
- 36:46मुस्कुराने लगी। शौर्य समझ गया कि वह अपनी
- 36:50कामयाबी पर मुस्कुरा रही है। नताशा यही तो
- 36:53लोगों में भ्रम फैलाना चाहती थी जिसमें कि
- 36:56वह कामयाब थी। रत्नाकर शेट्टी जैसा आदमी
- 36:59जो मीडिया लाइन में डेली उड़ती इस तरह की
- 37:01अफवाहों से दोचार होता रहता है। वह भी
- 37:04नताशा के झांसे में आ गया। पर शौर्य जल्दी
- 37:07से रत्नाकर शेट्टी कुछ ज्यादा गलत सोच ले।
- 37:09उससे पहले रत्नाकर शेट्टी से अपनी बात
- 37:11स्पष्ट करते हुए बोला, "क्या शेट्टी साहब,
- 37:15आप तो इस लाइन में इतने समय से हैं। उसके
- 37:17बाद भी आप नताशा के झांसे में आ गए।"
- 37:20रत्नाकर शेट्टी शौर्य की बात सुनकर
- 37:22आश्चर्य से नताशा की ओर देखने लगा। नताशा
- 37:26के चेहरे पर तैर रही शैतानी मुस्कुराहट को
- 37:28देखकर रत्नाकर शेट्टी बोला, क्या मिस
- 37:31नताशा? क्या सच में आप दोनों के बीच में
- 37:34कुछ नहीं है? यह आप कैसी बात कर रहे हैं?
- 37:36शेट्टी साहब क्या आपको हम दोनों को साथ
- 37:39में देखकर भी समझ नहीं आ रहा है कि हम
- 37:41दोनों कितने करीब आ गए हैं? इतना बोलते
- 37:44हुए नताशा फिर से शौर्य के करीब आकर उसके
- 37:46हाथ को पकड़ ली। रत्नाकर शेट्टी कंफ्यूज
- 37:49आंखों से दोनों के चेहरे को देखने लगा। पर
- 37:52वो नताशा के चेहरे पर खेलती मुस्कान को
- 37:55देखकर समझ गया कि नताशा जानबूझकर ऐसा
- 37:58दिखाने की कोशिश कर रही है। पता नहीं इसके
- 38:00पीछे उसकी क्या मंशा है।
- 38:03दूसरी तरफ शौर्य जब फिर से नताशा को पहले
- 38:06जैसी हरकत करते देखा तो वो नताशा से दूर
- 38:09जाते हुए बोला तुम क्यों जानबूझकर मुझे
- 38:12फंसाने की कोशिश कर रही हो। जब रत्नाकर
- 38:14शेट्टी जैसा आदमी धोखा खा सकता है तो बाकी
- 38:17लोग तो पता नहीं क्या-क्या सोचने लगेंगे।
- 38:20क्यों तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा कि इतनी
- 38:22खूबसूरत लड़की जिसके पास जाने के लिए लोग
- 38:24तरसते हैं वो खुद तुम्हारे पास आ रही है।
- 38:27नताशा शौर्य की आंखों में झांकती हुई बोली
- 38:31कौन बेवकूफ होगा जो ऐसा नहीं चाहेगा कि
- 38:33तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की उसके करीब
- 38:36रहे। पर तुम जिस तरह से मेरे करीब आ रही
- 38:38हो उसका मकसद कुछ और है। इस तरह तो यही
- 38:41बात हो जाएगी कि खाया पिया कुछ नहीं।
- 38:44गिलास तोरा 12 आने। शौर्य ने जवाब दिया।
- 38:47अब रत्नाकर शेट्टी को सब समझ आ गया था कि
- 38:50यहां क्या चल रहा है। वो नताशा कपूर से
- 38:52बोला मिस नताशा आप तो सचमुच यहां सबको
- 38:56मिस्टर श्रवण का दुश्मन बना देगी। मेरे
- 38:58लिए तो इतना रिस्क लिया जा सकता है मिस्टर
- 39:00शेट्टी आप क्या कहते हैं? नताशा अभी भी
- 39:03मुस्कुराती हुई बोली। मैं आप दोनों के बीच
- 39:06में कुछ नहीं बोलूंगा। रत्नाकर शेट्टी
- 39:08अपने हाथ खड़े करता हुआ बोला। पर एक खबर
- 39:11है मिस्टर श्रवण के बारे में जो शायद आप
- 39:13जानना चाहेंगी। रत्नाकर शेट्टी की बात
- 39:16सुनकर नताशा ने एक बार श्रवण की ओर देखा।
- 39:18फिर रत्नाकर शेट्टी की ओर देखकर बोली, ऐसी
- 39:22क्या खबर है श्रवण के बारे में जो मुझे
- 39:24जानना चाहिए? आपको नहीं पता मिस्टर श्रवण
- 39:27को आज एक फिल्म में मेन लीड ऑफर हुआ है
- 39:29जिसमें मिस्टर श्रवण काम करने को भी तैयार
- 39:32हो गए हैं। मैं ही इस फिल्म को डायरेक्ट
- 39:34करने वाला हूं। बताइए यह जानकर आपको खुशी
- 39:37हुई कि नहीं? पर इस बात से नताशा के चेहरे
- 39:40पर कोई खुशी नजर नहीं आई। वो शौर्य की तरफ
- 39:43देखती हुई नाराजगी से बोली यह तो ठीक नहीं
- 39:46है श्रवण तुम पहली बार मेरे साथ काम करके
- 39:48इस इंडस्ट्रीज में आए और फिल्म की शुरुआत
- 39:51किसी और के साथ कर रहे हो शिप्रा की बात
- 39:54सुनकर रत्नाकर शेट्टी के चेहरे पर हवाइयां
- 39:56उड़ने लगी कहां तो वो सोच रहा था कि उसकी
- 39:58बात सुनकर नताशा खुश हो गई पर हो उसका
- 40:01उल्टा रहा था नताशा रत्नाकर शेट्टी की ओर
- 40:04देखकर बोली मिस्टर शेट्टी आप मेरे लिए एक
- 40:07अच्छी कहानी ढूंढिए और आप जो फिल्म शौर्य
- 40:10के साथ करने वाले हैं उससे पहले मेरी
- 40:12फिल्म को कंप्लीट कीजिए। जो भी बजट लगेगा
- 40:15मैं अरेंज करूंगी। पर शर्त यही है कि मेरी
- 40:17फिल्म पहले बनकर तैयार होनी चाहिए। नताशा
- 40:20ने रत्नाकर शेट्टी के लिए फरमान जारी कर
- 40:23दिया। रत्नाकर शेट्टी आश्चर्य से शौर्य की
- 40:25तरफ देखने लगा और सोचने लगा क्या किस्मत
- 40:28पाई है इस लड़के ने। अभी कुछ नहीं किया है
- 40:31तो यह हाल है कि लड़कियां उसके साथ काम
- 40:33करने को ललायित है। इसकी अगर कुछ फिल्में
- 40:35मार्केट में आ गई तो यह तो इंडस्ट्रीज में
- 40:38तूफान ला देगा। लेकिन साथ में रत्नाकर
- 40:41शेट्टी को एक डर भी सताने लगा कि इन दोनों
- 40:43लड़कियों के कारण कहीं वह मुसीबत में ना
- 40:45पड़ जाए। कमुंबेस शौर्य का भी यही हाल था।
- 40:49कहां तो वह इस एक फिल्म में ही काम करने
- 40:51को बड़ी मुश्किल से तैयार हुआ। अब नताशा
- 40:54उसके साथ एक और फिल्म करने की ठान ली है
- 40:56और कमाल तो यह है कि उसने तो उसकी मर्जी
- 40:59भी जानने की कोशिश नहीं की। शौर्य की
- 41:02निगाह रत्नाकर शेट्टी से मिली तो उसने
- 41:04अपने कंधे उचका कर अपनी बेबसी जाहिर की।
- 41:07दूसरी तरफ विजय दीवान जो मानसी के साथ ही
- 41:09शौर्य और शिप्रा से कुछ दूरी पर खड़ा था।
- 41:12विजय दीवान उस मौके की तलाश में था। जब वह
- 41:15मौका पाकर नताशा कपूर के पास जा सके और
- 41:18नताशा पर अपना प्रभाव जमा सके। उसे यह
- 41:20बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि नताशा कपूर
- 41:23श्रवण जैसे कचरे के इतने करीब जाए। उसे लग
- 41:26रहा था कि जरूर नताशा कपूर शौर्य को कोई
- 41:28रईस व्यक्ति समझ रही होगी। इसीलिए वह उसके
- 41:31इतने करीब है। विजय दीवान ने सोचा वो जाकर
- 41:35जैसे ही नताशा कपूर के सामने श्रवण की
- 41:37असलियत जाहिर करेगा, नताशा कपूर के सर से
- 41:40उसका भूत उतर जाएगा। उसने देख लिया कि
- 41:42नताशा कपूर रत्नाकर शेट्टी और शौर्य के
- 41:45साथ बातें कर रही है। तो वो तेजी से नताशा
- 41:48कपूर के सामने पहुंच गया और उसका ध्यान
- 41:50अपनी तरफ आकर्षित करता हुआ बोला। हेलो मिस
- 41:53नताशा। मैं विजय दीवान आपका बहुत बड़ा फैन
- 41:56हूं। आप मुझे नहीं जानती होंगी। पर
- 41:59विश्वास के साथ कह सकता हूं कि आपने मेरी
- 42:02कंपनी के नाम को जरूर सुना होगा। दीवान
- 42:05टेक्सटाइल। यह मेरी कंपनी का नाम है और
- 42:08मैं ही दीवान टेक्सटाइल का सीईओ हूं।
- 42:11नताशा ने अप्रत्याशित रूप से अपने बीच में
- 42:14आ गए विजय दीवान को गौर से देखा और बोली,
- 42:17वैसे आप कौन हैं और मुझे क्यों आपके बारे
- 42:20में जानना चाहिए? और आपको हम तीनों के बीच
- 42:22में आने की जरूरत क्यों आ पड़ी? विजय
- 42:25दीवान को नताशा से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि
- 42:28वो उससे इस तरह बातें करेगी। पर उसने सोचा
- 42:31शायद श्रवण ने नताशा पर अपना अच्छा प्रभाव
- 42:33जमा रखा है। इसलिए नताशा उसकी बात सुनने
- 42:36को तैयार नहीं है। इसीलिए उसने सोचा वो
- 42:39जल्दी से श्रवण की पोल नताशा के सामने खोल
- 42:41देता है तो शायद उसकी बात बन जाए। यही
- 42:44सोचकर वो जल्दी से बोला। मिस नताशा आप
- 42:48श्रवण को ठीक से जानती नहीं। पता नहीं
- 42:50इसने अपने आप को आपके सामने क्या जाहिर कर
- 42:53रखा है। पर मेरी बात मानिए यह एकदम फटीचर
- 42:56है। यह खुद ही अभी स्ट्रगल कर रहा है। तो
- 42:58आपका साथ क्या निभा पाएगा? मेरा कहा मानिए
- 43:02तो इस फर्टीचर से जितनी जल्दी दूर होना है
- 43:04हो जाइए। आप इससे अच्छा आदमी डिर्व करती
- 43:07हैं। नताशा का मन किया कि वह एक जोर का
- 43:10तमाचा विजय दीवान को लगा दे। पर उसने अपनी
- 43:13भावनाओं पर कंट्रोल किया और कहा। मुझे
- 43:16लगता है आपको दूसरों की फटी में टांग
- 43:18अड़ाने में बड़ा मजा आता है। पर मेरे आमने
- 43:20आकर ऐसी कोशिश करना बेवकूफी ही कही जाएगी।
- 43:24मैं क्या करती हूं और क्या नहीं। इट्स नन
- 43:26ऑफ फॉर बिजीनेस। इसीलिए आप अपने काम से
- 43:29मतलब रखें तो यह आपके लिए ज्यादा फायदेमंद
- 43:32होगा। अब आप मेरे सामने से जा सकते हैं।
- 43:35अब आगे क्या होगा? विजय दीवान को विश्वास
- 43:38नहीं हो रहा था कि नताशा ने उसे वहां से
- 43:41जाने को कहा। नताशा की बात सुनकर विजय का
- 43:45ईगो हर्ट हो गया। वो थोड़ा तैश में बोला,
- 43:48मिस नताशा, आप शायद मुझे जानती नहीं। मैं
- 43:52दीवान टेक्सटाइल का सीईओ विजय दीवान हूं।
- 43:56आपको कुछ भी मुझसे बोलने से पहले समझना
- 43:58चाहिए कि आप किससे बात कर रही हैं। मुझे
- 44:02फर्क नहीं पड़ता कि तुम कौन हो और क्या
- 44:04हो। मैंने तुम्हें यहां नहीं बुलाया है।
- 44:07इसीलिए जिसने तुम्हें यहां बुलाया है, उस
- 44:09पर जाकर अपना रोब दिखाओ। मेरे पास शो ऑफ
- 44:12करने की कोई जरूरत नहीं है। नताशा ने विजय
- 44:16के स्टेटस का थोड़ा भी लिहाज नहीं किया।
- 44:19इस बार यह बात उसने थोड़ा जोर से कहा
- 44:22जिससे वहां उपस्थित लोगों का ध्यान उनकी
- 44:24तरफ चला गया था। मानसी ने जब हालात को
- 44:27बिगड़ते देखा तो वह जल्दी से उनके पास
- 44:30पहुंची और हालात को संभालने की कोशिश करती
- 44:32हुई बोली मिस नताशा शायद कुछ गलतफहमी हो
- 44:37गई है। विजय का इरादा आपको हर्ट करने का
- 44:39नहीं था। शायद आपको समझने में फेर हो गया
- 44:42है। नताशा को भी लगा कि वह कहीं ओवर
- 44:45रिएक्ट तो नहीं कर रही है। वो मानसी की
- 44:48बात सुनकर थोड़ा शांत स्वर में बोली। अगर
- 44:51तुमको लगता है कि ऐसी बात है तो तुम अपने
- 44:54दोस्त को मेरे सामने से दूर ले जाओ। मैं
- 44:57उसकी बात सुनना भी नहीं चाहती। नताशा की
- 45:00यह बात विजय को और भी चुभ। वो एक बार फिर
- 45:03नताशा को समझाने की कोशिश करते हुए बोला।
- 45:06मिस नताशा मैं आपका बुरा नहीं चाहता। मैं
- 45:10तो सिर्फ आपके सामने इस शख्स की असलियत
- 45:13लाना चाहता था। पता नहीं आप इसको क्या
- 45:15समझती हैं। पर मैं आपको पक्का यकीन से कह
- 45:18सकता हूं कि जो इसने आपको अपने बारे में
- 45:20जो भी बताया होगा वह सब झूठ ही होगा।
- 45:23इसलिए आप एक बार इसकी हकीकत जानने की
- 45:26कोशिश कीजिए। नताशा विजय की बेशर्मी से और
- 45:29भी हैरान थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि
- 45:32विजय दीवान शौर्य के पीछे क्यों पड़ा हुआ
- 45:34है। विजय दीवान की बातें सुनने के बाद
- 45:37नताशा उसके सामने जाकर खड़ी हो गई और उसकी
- 45:40आंखों में देखती हुई बोली अच्छा तो फिर
- 45:43ठीक है। तुम ही बताओ क्या असलियत है इसकी?
- 45:46और यह कैसे मुझसे झूठ बोल रहा है? विजय
- 45:50दीवान को मौका मिल गया। वो हिम्मत करके
- 45:52बोला। जरूर इसने आपसे कहा होगा कि यह बहुत
- 45:55पैसे वाला है या कोई बहुत बड़ा बिजनेस है
- 45:58इसका। पर हकीकत में तो यह खुद अपनी करियर
- 46:01बनाने के लिए अभी स्ट्रगल कर रहा है। बड़ी
- 46:04मुश्किल से तो इसने बिगbul में ब्रांड
- 46:06प्रमोशन के लिए काम करना शुरू किया है।
- 46:08जिसके कारण इसका बड़े लोगों के बीच में
- 46:11आना जाना मुमकिन हो पाया है। इसके बाद भी
- 46:14यह आपके इतने करीब है तो इसका मतलब है
- 46:17इसने आपसे कोई बड़ा ही झूठ बोल रखा है।
- 46:20नताशा कपूर ने इत्मीनान से विजय दीवान की
- 46:23बात को सुनने के बाद उससे कहा, तुम्हें
- 46:26कैसे पता कि इसने मुझसे क्या कहा है? क्या
- 46:29मैंने तुम्हें कहा है कि मैं इसे कैसे
- 46:31जानती हूं या इसने मुझे क्या कहा है अपने
- 46:33बारे में? फिर तुम यह कैसे कह सकते हो कि
- 46:36इसने मुझसे झूठ बोला है या यह बड़ा होने
- 46:39का दिखावा करके मेरे करीब आया है। नताशा
- 46:42कपूर की बात सुनने के बाद विजय को समझ
- 46:44नहीं आया कि वो अब क्या कहे? उसने सोचा यह
- 46:48कैसे हो सकता है कि नताशा कपूर श्रवण की
- 46:51हकीकत जानने के बाद भी उसके इतने करीब आ
- 46:54जाए। क्या सच में वह श्रवण की हकीकत से
- 46:57वाकिफ है? उसने शंका भरे स्वर में नताशा
- 47:00कपूर से पूछा, "क्या आप श्रवण की हकीकत से
- 47:03वाकिफ हैं? अब तुम्हारा यह पूछने का क्या
- 47:06मतलब हुआ? जब तुम्हें यह पता ही नहीं कि
- 47:08मैं श्रवण को कैसे जानती हूं, तो फिर तुम
- 47:11कैसे हमारे बीच में आकर कुछ भी बोल सकते
- 47:13हो? या तुम्हें यह अथॉरिटी मिल गई है कि
- 47:16तुम किसी को कहीं भी छोटा साबित करने की
- 47:18कोशिश कर सकते हो। अब अगर तुम्हारा ड्रामा
- 47:21पूरा हो गया हो, तो तुम मेरे सामने से जा
- 47:24सकते हो। नताशा घृणा से विजय की ओर देखती
- 47:27हुई बोली। नताशा की बात सुनकर मानसी भी
- 47:30हैरानी से शौर्य की ओर देखने लगी और सोचने
- 47:33लगी कि आखिर ऐसा क्या है इस शख्स में जो
- 47:36नताशा कपूर जैसी टॉप की मॉडल इस शख्स की
- 47:39हकीकत जानने के बाद भी इसके इतने करीब है।
- 47:43क्या सिर्फ इसलिए कि उसने उसके ऐड में
- 47:45उसके साथ काम किया है। उसे यह बात समझ
- 47:48नहीं आ रहा था। पर उसे विजय के लिए बुरा
- 47:50लग रहा था जो श्रवण से नफरत के कारण उसको
- 47:53नीचा दिखाने के लिए नताशा कपूर के पास
- 47:56पहुंच गया। अब तक हंगामा होते देखकर हर्षल
- 48:00मेहता भी नताशा कपूर के पास आ गए थे।
- 48:03उन्होंने स्थिति को समझने के लिए नताशा से
- 48:06पूछा क्या हुआ मिस नताशा? आप इतनी गुस्से
- 48:10में क्यों हैं? नताशा ने हर्षल मेहता को
- 48:13अपने सामने देखकर कहा मिस्टर मेहता आप
- 48:16कैसे कैसे लोगों को अपनी पार्टी में
- 48:19इनवाइट कर लेते हैं जो पता नहीं खुद को
- 48:21क्या समझते हैं। यह जो सामने शख्स है इसने
- 48:25जानबूझकर मेरे दोस्त की इंसल्ट करने की
- 48:27कोशिश की है। नताशा का इशारा शौर्य की तरफ
- 48:31देखकर हर्षल मेहता का शरीर कांप गया। उसे
- 48:35समझते देर नहीं लगी कि विजय ने शायद शौर्य
- 48:38की बेइज्जती करने की कोशिश की। हर्षल
- 48:41मेहता चाहकर भी शौर्य की हकीकत यहां सबके
- 48:44सामने नहीं बता सकते थे। उन्होंने आंखों
- 48:47ही आंखों में शौर्य से खेद प्रकट किया।
- 48:50शौर्य हर्षल मेहता की मजबूरी को समझता था।
- 48:53इसलिए उसने उन्हें इशारों में ही तसल्ली
- 48:55दी। शौर्य को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़
- 48:58रहा था कि विजय दीवान क्या साबित करने की
- 49:01कोशिश कर रहा है। वो तो सिर्फ उस पल को
- 49:04एंजॉय कर रहा था। वो स्थिति का जायजा ले
- 49:07रहा था। वो देख रहा था कि नताशा कपूर ने
- 49:10अच्छे से विजय दीवान की अकल को ठिकाने लगा
- 49:12दिया था। विजय दीवान के चेहरे पर अब
- 49:15हवाइयां उड़ रही थी। उसके साथ खड़ी मानसी
- 49:18भी समझ नहीं पा रही थी कि वो अपने पापा के
- 49:21सामने कैसे विजय का बचाव करें। जबकि हर्षल
- 49:24मेहता ने थोड़े करे स्वर में विजय से कहा
- 49:27मिस्टर विजय मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी
- 49:30कि आप हमारी पार्टी में आकर इस तरह का
- 49:32बखेड़ा करेंगे। मुझे इसके लिए आपके पिता
- 49:35रायचंद जी से बात करनी पड़ेगी। विजय ने जब
- 49:38हर्षल मेहता के इस करे तेवर को देखा तो वह
- 49:41अफसोस भरे स्वर में बोला मुझे माफ कर
- 49:44दीजिए अंकल। शायद मुझे समझने में कोई गलती
- 49:47हो गई इसलिए मैं ऐसा कर गया। आप यकीन
- 49:51मानिए मेरा आपकी पार्टी खराब करने का या
- 49:54यहां किसी भी तरह का बखेड़ा करने का कोई
- 49:56इरादा नहीं था। हर्षल मेहता ने जब विजय के
- 49:59तेवर को ढीला पड़ते देखा तो उससे कहा विजय
- 50:03अगर सच में तुम्हें अपने किए पर अफसोस है
- 50:06तो तुम अभी सबके सामने मिस्टर श्रवण से
- 50:08माफी मांगोगे क्योंकि मिस्टर श्रवण भी
- 50:11यहां मेरे सम्मानित गेस्ट है और तुमने
- 50:13उनके साथ बदतमीजी करने की कोशिश की। विजय
- 50:17के पास अब कोई चारा नहीं था। वो श्रवण के
- 50:19पास गया और खेद भरे स्वर में बोला सॉरी
- 50:23श्रवण मुझे तुम्हारे बारे में मिस नताशा
- 50:25से इस तरह नहीं बोलना चाहिए था। उम्मीद
- 50:28करता हूं कि तुम मेरी इस नादानी को भूल
- 50:30जाओगे। शौर्य विजय की बात सुनकर
- 50:33मुस्कुराता रहा। वो मुस्कुराते हुए ही
- 50:35विजय से बोला, कोई बात नहीं, मैं तो इस
- 50:38बात को भूल भी गया। तुम्हें शायद कहीं भी
- 50:41कुछ बोलने से पहले उसके परिणाम के बारे
- 50:44में अच्छे से सोच लेना चाहिए। नहीं तो यह
- 50:46अच्छा थोड़ी लगता है कि इस तरह से भरी
- 50:49महफिल में माफी मांगनी पड़े। पर कोई बात
- 50:52नहीं। जाओ मैंने तुम्हें माफ किया। शौर्य
- 50:55ऐसे बोला जैसे उसने विजय पर कितना बड़ा
- 50:58एहसान किया है। उसने इतने हल्के में विजय
- 51:01को ट्रीट किया जैसे लग ही नहीं रहा था कि
- 51:03विजय कोई हैसियत भी रखता है। शौर्य की इस
- 51:06बात ने भी विजय को भारी बेइज्जती का एहसास
- 51:09कराया। वो वहां से हटा और तेज कदमों से
- 51:12वहां से निकल गया और अपने पीछे अपने बारे
- 51:15में हो रही बातों को सुनता रहा। अब तक की
- 51:18लाइफ में शायद ही कभी उसकी ऐसी बेइज्जती
- 51:21हुई होगी। जबकि इसी पार्टी में मौजूद
- 51:23मेघना और शिप्रा भी इस सारे प्रपंच को देख
- 51:26रही थी। शुरुआत में वह दोनों भी शौर्य के
- 51:29लिए बुरा फील कर रही थी। क्योंकि जिस तरह
- 51:32विजय दीवान शौर्य की बेइज्जती करने पर
- 51:35तुला हुआ था उससे साफ स्पष्ट हो रहा था कि
- 51:38वह जानबूझकर विजय को नीचा दिखाना चाहता
- 51:41है। पर अंत में जब सारा पासा ही पलट गया
- 51:44तो मेघना शिप्रा से बोली मानना पड़ेगा।
- 51:48तुम्हारे पति में कुछ तो ऐसी बात है जो
- 51:50उसे स्थिति को अपने अनुरूप कर लेने की
- 51:52क्षमता प्रदान करता है। अभी जब लग रहा था
- 51:56कि सब कुछ उसके अगेंस्ट है। फिर अचानक ही
- 51:58कैसे सब कुछ बदल गया और विजय दीवान जैसे
- 52:01आदमी को इस भरी महफिल में उससे माफी
- 52:04मांगनी पड़ी। कुछ तो है श्रवण में जो उसे
- 52:07खास बनाती है। मैं तो तुम्हें बेवकूफ ही
- 52:10कहूंगी जो तुम उसकी इस खूबी को पहचान नहीं
- 52:13पा रही हो। हकीकत में श्रवण की बेइज्जती
- 52:16होते देखकर तुम्हें उसका ढाल बनना चाहिए
- 52:18था। पर देखो नताशा कपूर कितनी स्ट्रांगली
- 52:21श्रवण का पक्ष ले रही थी। उसके साथ खड़ी
- 52:24थी। शिप्रा को मेघना की बात सुनकर बुरा भी
- 52:27लगा। वो प्रतिरोध करते हुए बोली क्या तुम
- 52:31कुछ भी बोले जा रही हो? मैं उस समय कैसे
- 52:33श्रवण के लिए खड़ी हो सकती थी। उस समय वो
- 52:36नताशा कपूर के साथ था और विजय नताशा कपूर
- 52:39से ही तो उसके लिए बोल रहा था। तो फिर भला
- 52:41मैं बीच में कैसे टपक जाती? तुम्हें क्या
- 52:44लगता है? मुझे अच्छा लग रहा था जब विजय
- 52:46श्रवण को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा था।
- 52:49शिप्रा की बात सुनकर मेघना को भी अपनी
- 52:51गलती का एहसास हुआ। वो समझ गई कि शिप्रा
- 52:54चाहकर भी उनके विवाद के बीच में नहीं जा
- 52:57सकती थी। इसलिए वो अपनी इस गलती को कबूल
- 52:59करते हुए बोली मैं समझ गई तुम सही कह रही
- 53:03हो। मैं भी भावावेश में कुछ ज्यादा ही बोल
- 53:05गई। मैं समझ सकती हूं यह स्थिति तुम्हारे
- 53:07लिए अनुकूल नहीं थी। पर कहीं ना कहीं इसके
- 53:10लिए तुम ही जिम्मेदार हो। मेघना की बात
- 53:13सुनकर शिप्रा निराशा भरे स्वर में बोली
- 53:16अच्छा मैं कैसे इस सबके लिए जिम्मेदार हो
- 53:18गई तुम कुछ ज्यादा ही श्रवण का पक्ष नहीं
- 53:21लेने लगी हो और मुझ पर कुछ भी इल्जाम लगाए
- 53:23जा रही हो इतना बोलने के बाद शिप्रा मेघना
- 53:26को घूरने लगी तुम इसलिए जिम्मेदार हो कि
- 53:28तुम अभी भी इस बात को स्वीकार नहीं कर रही
- 53:31हो कि तुम दोनों पतिपत्नी हो। अगर यह
- 53:33जानकारी आम हो जाए तो फिर किसी को कोई
- 53:35कंफ्यूजन ही ना रहे। तुम दोनों को भी यूं
- 53:38एक दूसरे से अनजान होने का ड्रामा नहीं
- 53:40करना पड़ेगा। तुम इस बात को जितना आसान
- 53:42सोच रही हो, यह उतना आसान नहीं है।
- 53:45ज्यादातर लोग जो मुझे जानते हैं, किसको
- 53:47नहीं पता है कि मेरी शादी जबरदस्ती कर दी
- 53:49गई है, किसके साथ कर दी गई है, यह भी सबको
- 53:52पता है। अगर किसी को कुछ नहीं पता है, तो
- 53:54सिर्फ यह नहीं पता है कि वह भिखारी जिससे
- 53:57मेरी शादी की गई है, वह श्रवण ही है। अगर
- 54:00यहां सबको पता चल जाए कि श्रवण ही मेरा वह
- 54:02भिखारी पति है, तो फिर लोग उसकी दूसरी तरह
- 54:05से मजाक बनाएंगे। सब यही समझेंगे कि श्रवण
- 54:08तो हकीकत में एक भिखारी था या है। बस उसकी
- 54:10किस्मत इसलिए बदल गई है क्योंकि उसकी शादी
- 54:13मेरे साथ हो गई। अब तुम बताओ कि यह बात आम
- 54:16ना होना श्रवण के हक में है या उसके
- 54:18खिलाफ। शिप्रा की बात सुनने के बाद मेघना
- 54:21का तो माथा घूम गया। वो अपनी आंखें बड़ी
- 54:24करते हुए बोली यार कितना पेंच है तुम्हारे
- 54:28इस रिश्ते में। यह बात आम हो जाए तो भी
- 54:30मुश्किल और छुपी रहे तो भी मुश्किल। पर कब
- 54:33तक यह बात छुपी रह पाएगी? आखिर एक ना एक
- 54:36दिन तो यह सबको पता चलना ही है। तुम यह
- 54:38गलत सोच रही हो मेरे बारे में कि मैं नहीं
- 54:41चाहती कि यह रिश्ता आम हो। बल्कि मैं तो
- 54:43चाहती हूं कि जितनी जल्दी लोगों को पता चल
- 54:46जाए हमारे रिश्ते के बारे में तो कम से कम
- 54:48लोग तब मेरे बारे में और बातें बनाना बंद
- 54:50कर देंगे और हमारा रिश्ता सार्वजनिक हो
- 54:53जाने के बाद फिर मेरे मम्मी पापा और मेरे
- 54:55दूसरे रिश्तेदार भी फिर मेरी शादी की बात
- 54:57दोबारा नहीं करेंगे। बाकी मैं अपने रिश्ते
- 55:00में कैसे रहती हूं यह हमारा पर्सनल मैटर
- 55:03है और इसके बारे में लोगों को जानने की
- 55:05कोई जरूरत भी नहीं है। शिप्रा मेघना के
- 55:08सामने अपनी सोच स्पष्ट करती हुई बोली
- 55:11शिप्रा ने अभी इतना बोला ही था कि उसकी
- 55:13निगाह इसी समय अपने दादाजी के ऊपर गई जो
- 55:16कि शौर्य को ही घूर रहे थे। उनकी भी
- 55:18मजबूरी थी कि वह इस बात को यहां सार्वजनिक
- 55:21नहीं कर सकते थे कि शौर्य उनका दामाद है।
- 55:24पर वह नताशा कपूर को शौर्य का पक्ष लेते
- 55:26देखकर हैरान थे। उन्हें नहीं पता था कि
- 55:29नताशा कपूर और शौर्य इतना करीब हैं। इस
- 55:32पार्टी में बलवंत राय के आने का बड़ा कारण
- 55:34यह भी था कि वह खुद नताशा कपूर से मिलकर
- 55:37अपनी कंपनी के लिए भी कुछ प्रमोशनल ऐड
- 55:40बनवाना चाहते थे। अगर उन्हें पहले से यह
- 55:42जानकारी होती कि शौर्य नताशा कपूर के इतना
- 55:45करीब है तो वह इसके लिए शौर्य की ही मदद
- 55:48लेते। पर इस समय इस पार्टी में शौर्य को
- 55:51लेकर इतनी बातें हो गई थी कि वह यहां पर
- 55:53शौर्य को पहचानने की जोखिम नहीं ले सकते
- 55:55थे। अगर वह ऐसा करते तो उन्हें यह भी
- 55:58जाहिर करना पड़ता कि उनका वह भी भिखारी
- 56:01दामाद शौर्य ही है जो शायद उनके लिए और भी
- 56:04बेइज्जती बड़ी बात होती। इसलिए वह चुपचाप
- 56:07यहां हो रहे तमाशा को देखते रहे। विजय
- 56:10दीवान के साथ मानसी भी हर्षल मेहता के
- 56:12सामने शर्मिंदा थी। मानसी को विजय के लिए
- 56:16बुरा भी लग रहा था। वैसे वह यह भी समझती
- 56:19थी कि विजय को भी यूं नताशा के सामने
- 56:22शौर्य को छोटा साबित करने की कोई जरूरत
- 56:24नहीं थी। लेकिन उसका यह परिणाम होगा। उसने
- 56:28यह सोचा नहीं था। इतना सब होने के बाद उसे
- 56:31एक बात अजीब लगी कि इस सबके बीच में उसके
- 56:35पापा शौर्य का पक्ष ले रहे थे। जबकि वह
- 56:38अच्छी तरह से विजय के फैमिली स्टेटस के
- 56:40बारे में जानते थे। वो एक पल को सोचने को
- 56:43मजबूर हो गई कि क्या यह सब इसलिए है कि
- 56:47शौर्य ने उनके एड में एज अ मॉडल काम किया
- 56:49है। मानसी यह महसूस कर रही थी कि उसके
- 56:53पापा विजय को लेकर कुछ ज्यादा ही हार्ड हो
- 56:55गए थे। यहां मंच पर इतना सब हो गया था। पर
- 56:59विक्रम और मेनका ने सामने आने की कोई
- 57:01कोशिश नहीं की। वे दोनों समझ रहे थे कि
- 57:04शौर्य खुद ही इस स्थिति को हैंडल कर सकता
- 57:07है। उन्हें यह भी डर था कि उन दोनों का
- 57:10शौर्य के लिए बोलना भी शौर्य को पसंद नहीं
- 57:12आता क्योंकि वह नहीं चाहता था कि किसी को
- 57:15उस पर शक करने का मौका मिले। वो अपने आप
- 57:18को अभी छुपा कर ही रखना चाहता था। जब
- 57:21हर्षल मेहता ने देखा कि स्थिति थोड़ा
- 57:23सामान्य हो गया तो वह मंच पर सामने आकर
- 57:26बोला लेडीज एंड जेंटलमैन मैं आज आप सबके
- 57:30सामने यह बताना चाहूंगा कि अब से हमारी
- 57:32कंपनी डीम्स इंडिया का 90% शेयर होल्डर
- 57:35मिस्टर विक्रम है। अब डीम्स इंडिया के
- 57:38सिर्फ 10% शेयर ही हमारे पास है। मैं आप
- 57:41सब से रिक्वेस्ट करूंगा कि आप लोग तालियों
- 57:43के साथ डीम्स इंडिया के नए मालिक मिस्टर
- 57:46विक्रम का स्वागत करें। हर्षल मेहता का
- 57:48इतना बोलना था कि वो हॉल तालियों की आवाज
- 57:51से गूंजने लगा। इस दरमियान विक्रम ने मंच
- 57:55पर सामने आकर सबका अभिवादन किया। मानसी यह
- 57:58पता चलने पर कि यह विक्रम है जिसने उसकी
- 58:01कंपनी के 90% शेयर को खरीदा है। वह आगे
- 58:04बढ़कर उसका स्वागत की। हर्षल मेहता ने
- 58:07मानसी का परिचय विक्रम से कराया। विक्रम
- 58:10मुस्कुराते हुए मानसी से मिला। मंच के
- 58:13सामने खड़ी शिप्रा और मेघना भी मंच पर हो
- 58:16रही इन घोषणाओं को सुन रही थी। उसे यह
- 58:19जानकर आश्चर्य हुआ कि विक्रम ने डीम्स
- 58:21इंडिया के 90% शेयर को खरीद लिया है
- 58:24क्योंकि डीम्स इंडिया खुद में ही एक बड़ी
- 58:26कंपनी थी और उसका 90% शेयर को खरीद लेना
- 58:30यह शो करने के लिए काफी था कि विक्रम
- 58:33कितना पैसे वाला था। यही वह समय था जब उस
- 58:37हाल में राजा साहब चंद्रभान राठौर का आगमन
- 58:39हुआ। कांता प्रसाद जी उनके आगे-आगे रास्ता
- 58:42क्लियर करते हुए चल रहे थे। जैसे ही मेनका
- 58:45की निगाह राजा साहब के ऊपर पड़ी, वह तेजी
- 58:48से उनके पास पहुंची और झुक कर उनको प्रणाम
- 58:50किया। राजा साहब ने जब मेनका को वहां देखा
- 58:53तो वह बोले अच्छा तो तुम भी यहां हो।
- 58:57क्यों अंकल? क्या मुझे यहां नहीं होना
- 58:59चाहिए था? मेनका अपनी आंखें बड़ी करती हुई
- 59:02बोली। मैंने ऐसा तो नहीं कहा कि तुम्हें
- 59:05यहां नहीं होना चाहिए। मुझे पता नहीं था
- 59:08इसलिए मैंने तो बस पूछा। राजा साहब ने
- 59:10जवाब दिया। इस बीच राजा साहब की नजर पूरे
- 59:14हॉल में इधर-उधर घूमती रही। उनकी नजर
- 59:17शौर्य की तलाश में इधर-उधर घूम रही थी।
- 59:20अचानक उनकी निगाह शौर्य के ऊपर पड़ी।
- 59:23उन्होंने शौर्य को मंच के ऊपर ही देखा और
- 59:25उसके पास ही खड़ी नताशा कपूर को भी
- 59:27उन्होंने देखा। नताशा कपूर की खूबसूरती
- 59:30देखकर एक बार को उन्होंने यही सोचा कि
- 59:33शायद वही शौर्य की पत्नी है। उनको नताशा
- 59:36अच्छी भी लगी। पर वह अभी यहां सबके सामने
- 59:39ऐसा जाहिर नहीं कर सकते थे कि वह यहां पर
- 59:41खास करके अपनी बहू से मिलने आए हैं। वह तो
- 59:45बस ऐसा मौका क्रिएट करना चाहते थे जिससे
- 59:47उन्हें अपनी बहू से मिलने का मौका मिले।
- 59:50हर्षल मेहता ने जब चंद्रभान राठौर को
- 59:52पार्टी में आए हुए देखा तो वह भागकर उनके
- 59:55पास पहुंचा और उनको रिसीव करते हुए मंच पर
- 59:57लाया। उसने मंच पर जो खास गेस्ट थे उन सब
- 1:00:01से राजा साहब का परिचय करवाया। फिर हर्षल
- 1:00:04मेहता ने मंच पर उपस्थित नताशा कपूर और
- 1:00:07शौर्य से भी राजा साहब का परिचय करवाया।
- 1:00:10जैसे राजा साहब को यह पता चला कि जिसे वह
- 1:00:13अपनी बहू समझ रहे थे। दरअसल में वो एक टॉप
- 1:00:16की मॉडल है। यह जानकर कि नताशा कपूर एक
- 1:00:19मॉडल है। उन्होंने सख्त निगाहों से शौर्य
- 1:00:22की तरफ देखा। जैसे वह उससे पूछ रहे हो कि
- 1:00:25मेरी बहू कहां है? शौर्य उनका सख्त चेहरा
- 1:00:28देखकर उनके भाव को समझ गया। और शौर्य ने
- 1:00:32आंखों के इशारे से नीचे शिप्रा की तरफ
- 1:00:34इशारा किया। शौर्य की निगाह शिप्रा की तरफ
- 1:00:37देखकर राजा साहब ने शिप्रा की ओर देखा और
- 1:00:40उसके खूबसूरत चेहरे को देखकर उनकी निगाह
- 1:00:43भी एक पल को शिप्रा के ऊपर ही ठहर गई। इसी
- 1:00:46समय मेनका के साथ विक्रम राजा साहब के पास
- 1:00:48पहुंचा और उनको नमस्कार किया। मेनका ने
- 1:00:52इशारे से शौर्य को भी वहीं पर बुला लिया।
- 1:00:54शौर्य जब राजा साहब के पास पहुंचा तो राजा
- 1:00:57साहब ने धीमे स्वर में शौर्य से पूछा तुम
- 1:01:01सभी यहां मंच पर हो तो फिर हमारी बहू वहां
- 1:01:05सामने क्या कर रही है? वो भी यहां तुम
- 1:01:09सबके साथ क्यों नहीं है? शिप्रा यहां राजा
- 1:01:12साहब को देखकर रोमांचित थी। इस शहर में
- 1:01:15ऐसा कौन होगा जो राजा साहब को नहीं जानता
- 1:01:17होगा। शिप्रा की बड़ी इच्छा थी कि वो भी
- 1:01:20कभी राजा साहब से मिले। उसने जब शौर्य को
- 1:01:24भी विक्रम और मेनका के साथ राजा साहब के
- 1:01:26पास देखा तो उसके मन में यह इच्छा जागृत
- 1:01:29हुई कि अगर वह शौर्य के साथ होती तो वह भी
- 1:01:32राजा साहब से मिल पाती। जबकि दूसरी तरफ
- 1:01:35शौर्य राजा साहब की बात सुनकर धीरे से
- 1:01:38बोला क्या दादा जी अब आपकी डिमांड ज्यादा
- 1:01:41बढ़ती नहीं जा रही है। आपने सिर्फ अपनी
- 1:01:43बहू को देखने की बात की थी। वह आप यहां से
- 1:01:46भी देख सकते हैं। इस समय राजा साहब के पास
- 1:01:49कांता प्रसाद, विक्रम, मेनका और शौर्य ही
- 1:01:52थे। इसलिए कोई और उनकी बात को सुन नहीं
- 1:01:55सकता था। पर इसी समय हर्षल मेहता वहां
- 1:01:58चलकर आया और राजा साहब से रिक्वेस्ट करता
- 1:02:01हुआ बोला, "ाजा साहब, मुझे आपके हाथों से
- 1:02:04स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की कैंपेन की
- 1:02:06ओपनिंग करवानी है।" "प्लीज आप इस रिमोट का
- 1:02:09बटन दबाकर इसको लॉन्च कर दीजिए।"
- 1:02:11बोलते हुए हर्षल मेहता ने रिमोट राजा साहब
- 1:02:14की तरफ बढ़ा दिया और फिर वहां उपस्थित
- 1:02:17लोगों की तरफ देखकर बोला अब सबके इंतजार
- 1:02:20की घड़ियां समाप्त हुई और वो घड़ी आ गई जब
- 1:02:22हम ऑफिशियल ल्च करने वाले हैं स्ट्रांग
- 1:02:25एनर्जी ड्रिंक का। मैं राजा साहब से
- 1:02:27रिक्वेस्ट करूंगा कि वो रिमोट दबाकर हमारे
- 1:02:30एनर्जी ड्रिंक की ऑफिशियल लॉन्च को
- 1:02:32सुनिश्चित करें। इसके बाद राजा साहब ने
- 1:02:34रिमोट दबाया। अगले ही पल मंच पर जो एक
- 1:02:38बड़ी टीवी लगी थी उस पर नताशा कपूर और
- 1:02:40शौर्य का ऐड प्ले होने लगा। वहां उपस्थित
- 1:02:44लोगों ने उस ऐड को देखा और सब ने उसकी
- 1:02:46बहुत तारीफ की। वहां उपस्थित लोगों ने दिल
- 1:02:49खोलकर उस ऐड की तारीफ की। राजा साहब के
- 1:02:52लिए यह नया था कि उन्होंने शौर्य को उस ऐड
- 1:02:55में काम करते देखा। तो क्या तुम एक्टिंग
- 1:02:57भी करने लगे हो? पर जो हो तुम इस ऐड में
- 1:03:01बढ़िया लग रहे थे। राजा साहब ने शौर्य की
- 1:03:04तारीफ की। जब स्ट्रांग एनर्जी ड्रिंक की
- 1:03:07ऑफिशियल लॉन्चिंग हो गई उसके बाद राजा
- 1:03:09साहब ने शौर्य से कहा अब यह तुम्हें सोचना
- 1:03:12है कि तुम मुझे मेरी बहू से कैसे मिलवाते
- 1:03:15हो। राजा साहब की बात सुनकर शौर्य अपने
- 1:03:18चेहरे पर नाराजगी के भाव लाकर राजा साहब
- 1:03:21की ओर देखने लगा। जब विक्रम ने राजा साहब
- 1:03:24की बात सुनी तो उसने कहा ठीक है मैं कोई
- 1:03:28जुगाड़ करता हूं जिससे हो सकता है कि आपको
- 1:03:30अपनी बहू से मिलने का मौका मिल जाए।
- 1:03:33विक्रम की बात सुनकर राजा साहब ने कहा,
- 1:03:36"यह तुमने समझदारी की बात की। अब जल्दी से
- 1:03:39कुछ ऐसा करो कि मुझे अपनी बहू से मिलने का
- 1:03:41मौका मिले।" इसी समय विक्रम ने अपना
- 1:03:44मोबाइल निकाला और मोहित रैना को कॉल
- 1:03:46लगाया। मोहित रैना ने कॉल उठाया तो विक्रम
- 1:03:49ने कहा तुम शिप्रा मेम को ऊपर हम लोगों के
- 1:03:52पास ले आओ। मोहित रैना ने विक्रम के आर्डर
- 1:03:55को सुना तो वो शिप्रा के पास गया और बोला
- 1:03:58चलिए मैं आपको मिस्टर विक्रम से मिलवा
- 1:04:01देता हूं। शायद आपके काम को लेकर भी अभी
- 1:04:03बात हो जाए। शिप्रा ने मोहित रैना की बात
- 1:04:06को सुना तो वह खुश हो गई। वो मोहित रैना
- 1:04:09के साथ स्टेज की तरफ बढ़ गई। जब शिप्रा
- 1:04:12विक्रम के पास पहुंची तो विक्रम अभिवादन
- 1:04:14करते हुए बोला आप कैसी हैं शिप्रा? मैं
- 1:04:18एकदम ठीक हूं सर। आप बताइए आपने मुझे यहां
- 1:04:22क्यों बुलाया है? शिप्रा वहां उपस्थित
- 1:04:24लोगों की तरफ देखती हुई बोली। कुछ खास
- 1:04:27नहीं मिस शिप्रा। मैं आपको कुछ लोगों से
- 1:04:29मिलाना चाहता था इसलिए यहां बुलाया है।
- 1:04:32इसके बाद विक्रम ने मेनका से शिप्रा का
- 1:04:35परिचय कराते हुए कहा, "आप शायद मिस मेनका
- 1:04:38को जानती होंगी। यह होटल राजकमल की मैनेजर
- 1:04:41है।" विक्रम की बात सुनकर शिप्रा बोली,
- 1:04:44"मैं इन्हें जानती तो हूं, पर पहले कभी
- 1:04:47इनसे मिलना नहीं हुआ।" इसके बाद विक्रम ने
- 1:04:50शौर्य की तरफ इशारा करते हुए कहा, श्रवण
- 1:04:53से तो आप पहले मिल ही चुकी होंगी। इधर
- 1:04:55आइए। मैं आपको आज एक खास शख्स से मिलवाता
- 1:04:58हूं। यह चंद्रभान राठौर यानी राजा साहब
- 1:05:02इन्हें तो आप जानती ही होंगी। विक्रम का
- 1:05:04इतना बोलना था कि शिप्रा विक्रम की बात
- 1:05:07काटते हुए बोल पड़ी। इनको भला कौन नहीं
- 1:05:10जानता? यह हमारे शहर की शान है। हर किसी
- 1:05:13की इच्छा होती है इनसे एक बार मिलने की।
- 1:05:16शिप्रा की बात सुनकर राजा साहब मुस्कुराए
- 1:05:18और शिप्रा से बोले, तुम्हें दूसरों को खुश
- 1:05:21करना आता है। अपने बारे में भी बताओ कुछ।
- 1:05:24मेरे पास ऐसा कुछ नहीं है बताने लायक अंकल
- 1:05:27जो मैं आपको अपने बारे में कुछ बताऊं।
- 1:05:30वैसे मेरा नाम शिप्रा राय है। मैं राय
- 1:05:33फैमिली से संबंध रखती हूं। इससे ज्यादा
- 1:05:35मैं आपको क्या ही बताऊं। शिप्रा बोली अंकल
- 1:05:38नहीं तुम मुझे दादाजी बोलो। मैं तुम्हारे
- 1:05:42दादाजी की उम्र कहूंगा। चंद्रभान राठौर
- 1:05:45शिप्रा के मुंह से अंकल सुनकर बोले। वैसे
- 1:05:48शिप्रा उनको बोलना तो दादाजी ही चाहती थी।
- 1:05:51पर उसे लगा कहीं उनको बुरा ना लग जाए।
- 1:05:53इसलिए उसने अंकल कहा। पर जब चंद्रभान
- 1:05:56राठौर ने खुद ही उसे दादाजी कहने के लिए
- 1:05:58कहा तो शिप्रा खुश होती हुई बोली आपने सही
- 1:06:02कहा दादा जी यह हुई ना बात तुम्हारे मुंह
- 1:06:05से दादरी सुनकर अच्छा लग रहा है। चंद्रभान
- 1:06:08जी खुश होते हुए बोले वैसे मैं आपको इनके
- 1:06:11बारे में बताऊं दादा जी कि इतनी छोटी उम्र
- 1:06:14में ही इन्होंने जिंक कलेक्शन के नाम से
- 1:06:16अपनी एक कंपनी खड़ी कर ली थी और उसको
- 1:06:19अच्छा खासा एक्सपोज़र भी मिल गया था। पर
- 1:06:21किसी मजबूरी में इन्हें अपनी कंपनी को
- 1:06:23बेचना पड़ा और अभी यह जॉब सर्च कर रही थी
- 1:06:26तो मैंने अपनी कंपनी में ही काम करने के
- 1:06:29लिए इनको अपॉइंट कर लिया है। विक्रम बीच
- 1:06:31में अपनी बात रखते हुए बोला क्या कहा
- 1:06:34तुमने? इसने अपनी कंपनी बेच दी और अभी जॉब
- 1:06:38ढूंढ रही है। बताओ बेटी तुम्हें किस तरह
- 1:06:41का जॉब चाहिए? मैं देता हूं तुम्हें अपनी
- 1:06:43कंपनी में जॉब। चंद्रभान जी को लगा उन्हें
- 1:06:46शिप्रा को अपने पास रखने का बहाना मिल गया
- 1:06:49है। इसलिए वह शिप्रा को जॉब का ऑफर देते
- 1:06:51हुए बोले अरे दादा जी आपको चिंता करने की
- 1:06:55जरूरत नहीं है। मैंने ऑलरेडी उनके लिए
- 1:06:57अच्छा सा जॉब देख लिया है। विक्रम फिर से
- 1:07:00बोला पता नहीं तुमने कैसा जॉब देखा होगा
- 1:07:02इस बच्ची के लिए। मेरे पास भी इसके लिए
- 1:07:05जॉब ऑफर है। बताओ बेटी तुम किसके पास काम
- 1:07:08करना चाहोगी? चंद्रभान जी ने सीधा शिप्रा
- 1:07:11से ही पूछ लिया। मेरे लिए तो सारे ऑफर एक
- 1:07:14जैसे ही है दादा जी। मुझे तो बस जॉब करनी
- 1:07:17है। मुझे नहीं पता था कि मैं इतनी
- 1:07:19भाग्यशाली निकलूूंगी कि मुझे दो-दो जॉब के
- 1:07:21ऑफर एक साथ मिल जाएंगे। शिप्रा जल्दी से
- 1:07:24बोली। शिप्रा राय धर्म संकट में फंस गई
- 1:07:27थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो राजा
- 1:07:30साहब को क्या जवाब दें। ना तो उससे हां
- 1:07:33बोला जा रहा था और ना ही ना। तुम ज्यादा
- 1:07:36सोचो मत। जो मन में है वो साफ-साफ बताओ।
- 1:07:39यह मत सोचो कि तुम्हारे फैसले से किसी को
- 1:07:41बुरा लगेगा। राजा साहब शिप्रा को समझाते
- 1:07:44हुए बोले, राजा साहब की बात सुनकर शिप्रा
- 1:07:48पशोपेश में नजर आई। वो निश्चय नहीं कर पा
- 1:07:50रही कि उसे किस कंपनी के साथ जाना चाहिए।
- 1:07:53शिप्रा इस उलझन से निकल नहीं पा रही थी।
- 1:07:56उसने विक्रम की तरफ देखा जैसे वह उससे कह
- 1:07:58रही हो कि इस बारे में आप ही कोई फैसला
- 1:08:01कीजिए। चंद्रभान राठौर के प्रपोजल के कारण
- 1:08:05शिप्रा उलझन में थी कि वह इस प्रपोजल को
- 1:08:08कैसे ठुकराए। वह समझ रही थी कि मोहित रैना
- 1:08:11ने उसे जॉब का प्रपोजल पहले ही दे दिया
- 1:08:13था। इसीलिए कायदे से उसे विक्रम की कंपनी
- 1:08:17में ही जॉब के ऑफर को स्वीकार करना चाहिए।
- 1:08:19पर वो सीधे-सीधे राजा साहब को मना कैसे
- 1:08:22करें? वो यह बात समझ नहीं पा रही थी। राजा
- 1:08:25साहब भी शिप्रा की स्थिति को भली-भांति
- 1:08:28समझ रहे थे। जबकि शौर्य अपने दादाजी के
- 1:08:31इरादों को अच्छे से समझ रहा था। वह
- 1:08:33जानबूझकर शिप्रा को अपने पास काम करवाना
- 1:08:36चाहते थे। जिससे शौर्य को किसी ना किसी
- 1:08:38कारण उनके पास आते रहना पड़ेगा। राजा साहब
- 1:08:42को अभी शौर्य के बारे में यह भी नहीं पता
- 1:08:44था कि बिगbul जैसी बड़ी कंपनी शौर्य की
- 1:08:47है। इसीलिए उन्हें यह भी लग रहा था कि
- 1:08:50विक्रम जो जॉब का ऑफर शिप्रा को दे रहा
- 1:08:52है, वो क्या ही अच्छा होगा। जबकि वह
- 1:08:55शिप्रा को अपनी किसी कंपनी का सीईओ बनाने
- 1:08:58की सोच रहे थे। उनके दिमाग में यह भी चल
- 1:09:00रहा था कि इस तरह से वह अपनी संपत्ति का
- 1:09:03एक हिस्सा शौर्य को दे देंगे। क्योंकि जब
- 1:09:06सूर्यभान राठौर से उन्होंने संपत्ति में
- 1:09:08अपना हिस्सा लेने के लिए कहा था तो
- 1:09:10उन्होंने मना कर दिया था और उनसे साफ कहा
- 1:09:13था कि वह उनके हिस्से की संपत्ति भी उसके
- 1:09:16भाई और बहन को ही दे दे। उन्हें इसकी कोई
- 1:09:19जरूरत नहीं है। पर चंद्रभान जी को यह कबूल
- 1:09:22नहीं था। वह इस तरह शौर्य के साथ नाइंसाफी
- 1:09:25नहीं कर सकते थे। दूसरी तरफ यह भी था कि
- 1:09:28उनका दूसरा बेटा पहले से ही यह चाहता था
- 1:09:30कि चंद्रभान राठौर जितनी जल्दी हो संपत्ति
- 1:09:33उनके नाम कर दें। यह कारण भी था कि वह
- 1:09:36चाहते थे कि किसी तरह वह शौर्य को उनके
- 1:09:39कामों में उलझा लें तो मजबूरन उसे उनकी
- 1:09:42बात माननी पड़ेगी। अब शिप्रा एक माध्यम
- 1:09:44बनकर उनके सामने आ गई थी। शिप्रा के
- 1:09:47द्वारा यह कंपनी शौर्य के पास चली जाएगी।
- 1:09:50राजा साहब ने जब देखा कि शिप्रा कुछ बोल
- 1:09:52नहीं रही है तो वह कांता प्रसाद जी से
- 1:09:55बोले कांता प्रसाद तुम शिप्रा के नाम से
- 1:09:58जॉब प्रपोजल तैयार करवाकर कल इसको दे
- 1:10:00देना। इतना बोलकर राजा साहब ने शिप्रा की
- 1:10:03ओर देखकर उससे कहा और तुम कल से ही आकर
- 1:10:06अपनी पोजीशन संभाल लेना। मैं तुम्हें अपनी
- 1:10:08टेक्सटाइल कंपनी का सीईओ नियुक्त कर रहा
- 1:10:11हूं। राजा साहब की बात सुनकर शिप्रा का
- 1:10:14मुंह खुला का खुला रह गया। उसे अपने कानों
- 1:10:16पर विश्वास नहीं हो रहा था कि बिना किसी
- 1:10:19जॉब इंटरव्यू या किसी भी तरह की प्रोसेस
- 1:10:21के राजा साहब उसे अपनी कंपनी का सीईओ कैसे
- 1:10:25नियुक्त कर सकते हैं। क्या उसकी किस्मत
- 1:10:27इतनी अच्छी है कि उसके साथ सब कुछ अच्छा
- 1:10:29अच्छा ही हो रहा है? सबसे पहले मोहित रैना
- 1:10:32ने उसे अपनी कंपनी में जॉब का ऑफर दिया।
- 1:10:35इस ऑफर को पाकर ही उसे लग रहा था कि उसे
- 1:10:38उसकी हैसियत से ज्यादा मिल रहा है। पर
- 1:10:40राजा साहब तो उससे भी दो कदम आगे बढ़कर
- 1:10:42उसे अपनी कंपनी का सीईओ ही नियुक्त करने
- 1:10:45की बात कर रहे हैं। उसे अपनी किस्मत पर
- 1:10:47भरोसा नहीं हो रहा था। वहां उपस्थित बाकी
- 1:10:50लोगों का भी आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।
- 1:10:53जिन लोगों की नजर में शिप्रा की कोई
- 1:10:55हैसियत नहीं थी। अब उन लोगों की नजर में
- 1:10:57अचानक ही शिप्रा का कद काफी बड़ा हो गया।
- 1:11:00वहां उपस्थित बहुत से लोगों की निगाह में
- 1:11:03शिप्रा के लिए जलन साफ नजर आ रही थी। वहां
- 1:11:06उपस्थित लोगों में मानसी भी थी जो शिप्रा
- 1:11:08को जलन भरी नजरों से देखे जा रही थी। वो
- 1:11:11समझ नहीं पा रही थी कि चंद्रभान राठौर ने
- 1:11:14ऐसा क्या शिप्रा में देख लिया कि उसे अपनी
- 1:11:16कंपनी का सीईओ बना दिया। उसे खुद पर तरस आ
- 1:11:20रहा था कि वह हर लिहाज से शिप्रा से बेहतर
- 1:11:22है। इस तरह का ऑफर उसको मिलना चाहिए था।
- 1:11:25पर यहां भी शिप्रा ने उससे बाजी मार ली।
- 1:11:28वो भी उसी की पार्टी में आकर। दूसरी तरफ
- 1:11:31शौर्य भी चंद्रभान राठौर की इस चालाकी पर
- 1:11:34हैरान था। वो समझ गया उसके दादाजी ने
- 1:11:36अच्छा दांव खेला था। मोहित रैना जो वहीं
- 1:11:39खड़ा यह सब देख रहा था। उसे भी शिप्रा की
- 1:11:42किस्मत पर जलन हो रही थी। उसे राजा साहब
- 1:11:45और शौर्य के रिश्ते की हकीकत पता नहीं थी।
- 1:11:48उसके लिए भी यह हैरानी की बात थी कि राजा
- 1:11:50साहब ने शिप्रा में ऐसा क्या देखा कि उसको
- 1:11:53अपनी कंपनी में सीईओ बना दिया। इन कुछ ही
- 1:11:56पलों में शिप्रा की हैसियत मोहित रैना से
- 1:11:59बड़ा हो गया था। पर शिप्रा को अभी भी राजा
- 1:12:01साहब के ऑफर को स्वीकार करना सही नहीं लग
- 1:12:04रहा था। उसे लग रहा था कि अगर वह राजा
- 1:12:06साहब के ऑफर को स्वीकार करेगी तो यह बात
- 1:12:09उसे मौका परस्त साबित कर देगी क्योंकि
- 1:12:12उसने पहले ही मोहित रैना के ऑफर को
- 1:12:14स्वीकार कर लिया था। अब जब उसे एक उससे भी
- 1:12:17अच्छा ऑफर मिल रहा है तो उसको ठुकरा कर
- 1:12:19बढ़िया ऑफर को स्वीकार कर लेना यही साबित
- 1:12:22करता कि वह मौका परस्त है जो सिर्फ अपने
- 1:12:25बारे में सोचती है। इस बात के दिमाग में
- 1:12:28आते ही शिप्रा ने राजा साहब से बड़े अदब
- 1:12:31से कहा दादा जी मैं समझती हूं कि कोई
- 1:12:34बेवकूफ ही होगा जो आपके दिए हुए इतने
- 1:12:38अच्छे ऑफर को ठुकरा दे। पर मैं बड़े ही
- 1:12:41सम्मान के साथ आपको कहना चाहूंगी कि मैं
- 1:12:44आपके इस ऑफर को स्वीकार नहीं कर सकती।
- 1:12:47राजा साहब के साथ कांता प्रसाद ने भी
- 1:12:50शिप्रा की तरफ आश्चर्य से देखा। राजा साहब
- 1:12:53को शिप्रा के उनके प्रपोजल को ठुकराने का
- 1:12:56कारण समझ नहीं आया। वो यह सोचने को मजबूर
- 1:12:59हो गए कि आखिर शिप्रा इतने अच्छे ऑफर को
- 1:13:02कैसे ठुकरा सकती है? इसीलिए उन्होंने
- 1:13:04शिप्रा से पूछा क्या मैं तुम्हारा मेरे
- 1:13:08प्रपोजल को ठुकराने का कारण जान सकता हूं?
- 1:13:11जबकि इसी समय बलवंत राय जी वहीं मौजूद सब
- 1:13:14कुछ देख सुन रहे थे। जब उन्होंने शिप्रा
- 1:13:17को राजा साहब के प्रपोजल को ठुकराते देखा
- 1:13:20तो वह भी हैरान होकर शिप्रा को देखने लगे।
- 1:13:23उन्हें शिप्रा की बेवकूफी पर तरस भी आ रहा
- 1:13:25था कि वह इतनी बड़ी बेवकूफी कैसे कर सकती
- 1:13:28है? उनका तो मन किया कि वह अभी शिप्रा के
- 1:13:31पास जाएं और उसे राजा साहब के ऑफर को
- 1:13:34स्वीकार करने के लिए मजबूर करें। पर अगले
- 1:13:37ही पल उन्होंने अपना इरादा टाल दिया। इतने
- 1:13:40लोगों के बीच में जाकर शिप्रा को राजा
- 1:13:42साहब के ऑफर को स्वीकार करने के लिए कहना
- 1:13:45उनकी प्रतिष्ठा के लिए सही नहीं था।
- 1:13:47इसीलिए वह इस जवाब की प्रतीक्षा करने लगे
- 1:13:50कि देखें शिप्रा राजा साहब के सवाल के
- 1:13:52जवाब में क्या कहती है। शिप्रा राजा साहब
- 1:13:56के सवाल को सुनकर विनम्रता से बोली
- 1:13:59दादा जी दरअसल दो दिन पहले ही मोहित रैना
- 1:14:02के द्वारा मुझे मिस्टर विक्रम की तरफ से
- 1:14:04जॉब का प्रपोजल मिला था और मैंने उसे
- 1:14:06स्वीकार भी कर लिया था। पर अब अचानक ही
- 1:14:09मुझे उससे अच्छा प्रपोजल मिल रहा है। तो
- 1:14:12पहले स्वीकार किए प्रपोजल को सिर्फ इसलिए
- 1:14:14ठुकरा देना कि मुझे उससे बेहतर ऑफर मिल
- 1:14:17रहा है। यह मुझे स्वार्थी साबित कर देगा।
- 1:14:20मैं खुद की ही नजरों में गिर जाऊंगी कि
- 1:14:23मैं कितनी बड़ी मौका परस्त निकली कि जिसने
- 1:14:25मुसीबत में मेरा हाथ थामा मैंने मौका
- 1:14:28मिलते ही उसे पीठ दिखा दिया। बस इसी कारण
- 1:14:31मैं आपके इस ऑफर को स्वीकार नहीं कर
- 1:14:33सकूंगी। शिप्रा के जवाब को सुनकर राजा
- 1:14:36साहब मन ही मन बहुत खुश हुए। उन्होंने
- 1:14:39कांता प्रसाद की तरफ देखा। कांता प्रसाद
- 1:14:42के मन में भी राजा साहब वाला ही ख्याल था।
- 1:14:44इधर राजा साहब को अब शौर्य की पसंद पर और
- 1:14:47भी गर्व हो रहा था। उन्होंने तारीफ भरे
- 1:14:50भाव से शौर्य की तरफ देखा। जैसे उन्हें कह
- 1:14:53रहे हो कि मुझे तुम्हारी पसंद पर गर्व है।
- 1:14:56इतनी देर में कांता प्रसाद जी शिप्रा के
- 1:14:58सामने आए और उससे बोले शिप्रा बेटी मुझे
- 1:15:01अच्छा लगा कि तुमने ऐसा सोचकर कि तुम्हें
- 1:15:04कोई मौका परस्त ना समझे इसीलिए राजा साहब
- 1:15:06के ऑफर को ठुकरा रही हो। पर अगर तुम जिसके
- 1:15:09कारण राजा साहब के ऑफर को ठुकरा रही हो।
- 1:15:12वही तुम्हें तुम्हारे अपनी कंपनी में काम
- 1:15:14करने के ऑफर से आजाद कर दे तो तुम्हें
- 1:15:16राजा साहब के ऑफर को स्वीकार करने में कोई
- 1:15:18दिक्कत नहीं होगी ना। कांता प्रसाद की बात
- 1:15:22को सुनकर शिप्रा कंफ्यूज हो गई कि वे भला
- 1:15:24उसे क्यों अपनी बातों से आजाद करेंगे। वो
- 1:15:27शंका भरी नजरों से विक्रम की ओर देखने
- 1:15:29लगी। विक्रम जो कि सब कुछ देख सुन रहा था।
- 1:15:33उसे भी समझ नहीं आया कि वह इस बदली
- 1:15:35परिस्थिति में शिप्रा को क्या जवाब दे। जब
- 1:15:38विक्रम को कुछ समझ नहीं आया तो वह शौर्य
- 1:15:40की तरफ देखने लगा। शौर्य विक्रम की स्थिति
- 1:15:43को समझ रहा था। उसने भी बदली परिस्थिति पर
- 1:15:46गौर किया। उसे भी लगा कि शायद शिप्रा के
- 1:15:49लिए यह ज्यादा अच्छा रहेगा कि वह राजा
- 1:15:51साहब के ऑफर को स्वीकार कर ले। राजा साहब
- 1:15:54के ऑफर को स्वीकार करने के बाद शिप्रा का
- 1:15:56कद इतना ऊंचा हो जाएगा कि फिर कोई भी उसको
- 1:15:59हल्के में लेने की कोशिश नहीं करेगा।
- 1:16:02इसीलिए उसने विक्रम को इशारों में ही समझा
- 1:16:04दिया कि उसे क्या करना है। दूसरी तरफ जब
- 1:16:08कांता प्रसाद ने शिप्रा को विक्रम की तरफ
- 1:16:10देखते पाया तो उन्होंने विक्रम से कहा
- 1:16:12क्यों मिस्टर विक्रम क्या आप शिप्रा को
- 1:16:15उसे मिल रहे बेहतर प्रपोजल को ठुकराने की
- 1:16:17नसीहत देंगे। विक्रम समझ गया कि कांता
- 1:16:21प्रसाद उससे क्या कहलवाना चाहते हैं।
- 1:16:23इसीलिए वह शिप्रा के करीब गया और बोला
- 1:16:27शिप्रा जी मैं आपकी इन भावनाओं का कद्र
- 1:16:29करता हूं कि आपने सिर्फ यह सोचकर राजा
- 1:16:32साहब के ऑफर को ठुकरा दिया कि आपने पहले
- 1:16:34ही हमारे प्रपोजल को स्वीकार कर लिया था।
- 1:16:37पर यकीन मानिए हम आपके दुश्मन नहीं हैं।
- 1:16:40मैं नहीं चाहूंगा कि आप हमारे कारण राजा
- 1:16:43साहब से मिल रहे इतने अच्छे प्रपोजल को
- 1:16:45ठुकरा दें। इसीलिए आप हमारी तरफ से आजाद
- 1:16:48हैं। इसीलिए बेहतर यह होगा कि आप राजा
- 1:16:51साहब के प्रपोजल को स्वीकार कर लीजिए।
- 1:16:54शिप्रा को यकीन नहीं हुआ कि विक्रम ने उसे
- 1:16:57इतनी आसानी से उसके ऑफर से आजाद कर दिया।
- 1:17:00उसे एक बार को यह भी लगा कि कहीं विक्रम
- 1:17:03ने राजा साहब के डर से तो उसको आजाद नहीं
- 1:17:05कर दिया। इसीलिए उसने कंफर्म करने के
- 1:17:08इरादे से विक्रम से पूछा। यह आप क्या कह
- 1:17:11रहे हैं? मुझे ऐसी कोई चाह नहीं है कि मैं
- 1:17:14राजा साहब के ऑफर को आपको ना कहकर स्वीकार
- 1:17:17करूं। विक्रम शिप्रा की ईमानदारी पर
- 1:17:19मुस्कुराने लगा। वो समझ गया कि शिप्रा
- 1:17:22क्या महसूस कर उससे ऐसा बोली। इसीलिए उसने
- 1:17:25शिप्रा से कहा आप कुछ ज्यादा ही सोच रही
- 1:17:28हैं। मेरे आपको अपने ऑफर से आजाद करने का
- 1:17:31कारण वो नहीं है जो आपके दिमाग में चल रहा
- 1:17:34है। मैं दिल से चाहता हूं कि आप ऊंचाइयों
- 1:17:37को छुएं। इसीलिए आपके लिए राजा साहब के
- 1:17:39ऑफर को स्वीकार करना ज्यादा बेहतर होगा।
- 1:17:42कांता प्रसाद विक्रम की बात सुनने के बाद
- 1:17:45शिप्रा से बोले अब तो कोई भी तुम्हें मौका
- 1:17:48परस्त नहीं समझेगा शिप्रा बेटी। इसीलिए अब
- 1:17:50तुमको राजा साहब के ऑफर को स्वीकार करने
- 1:17:52में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए। तुमने यह
- 1:17:55भी साबित कर दिया कि राजा साहब ने तुम्हें
- 1:17:57सीईओ के पद का ऑफर देकर कितना सही फैसला
- 1:18:00किया। तुम्हारी जगह कोई और होता तो वह
- 1:18:03राजा साहब से इतना अच्छा प्रपोजल मिलने के
- 1:18:05बाद एक पल को कुछ बिना सोचे इनके ऑफर को
- 1:18:08स्वीकार कर लेता। पर तुमने ऐसा नहीं किया।
- 1:18:11इतने बड़े ऑफर को ठुकराने में तुमने एक पल
- 1:18:14नहीं लगाया। वो भी सिर्फ इसलिए कि तुमने
- 1:18:16किसी का ऑफर पहले ही स्वीकार कर लिया था।
- 1:18:19उसके बाद तुमने एक बार भी नहीं सोचा कि
- 1:18:22तुमने कितने बड़े ऑफर को ठुकराया है। यही
- 1:18:24बात साबित करती है कि तुम जिसके भी साथ
- 1:18:27काम करोगी उसके प्रति तुम कितनी लॉयल
- 1:18:29रहोगी। आपने सही कहांता प्रसाद जी मैं आशा
- 1:18:33करता हूं कि यह आपकी उम्मीदों पर एकदम
- 1:18:36खड़ा उतरे। विक्रम कांता प्रसाद जी की तरफ
- 1:18:39देखता हुआ बोला। कांता प्रसाद जी ने अपनी
- 1:18:42जेब से एक कार्ड निकालकर शिप्रा की तरफ
- 1:18:44बढ़ाते हुए कहा, "इसमें हमारे ऑफिस का
- 1:18:47एड्रेस है। तुम कल समय से आकर अपने ऑफिस
- 1:18:50को ज्वाइन कर लेना। मैं सुबह तुम्हारे लिए
- 1:18:52ऑफर लेटर तैयार करवा दूंगा।" शिप्रा ने
- 1:18:55कांता प्रसाद जी के हाथ से वो कार्ड लिया
- 1:18:57और अपने पर्स में रख लिया। और कांता
- 1:18:59प्रसाद जी से बोली ठीक है सर मैं समय से
- 1:19:02पहुंच जाऊंगी। शिप्रा के कांता प्रसाद के
- 1:19:05ऑफर स्वीकार करते ही कई लोगों के सीने पर
- 1:19:08सांप लौटने लगे। जिनमें मानसी और विजय
- 1:19:11दीवान मेन थे। विजय दीवान के दिमाग में तो
- 1:19:14यह बात चल रहा था कि वो कैसे शिप्रा के
- 1:19:16करीब जाए। जबकि मानसी तो सिर्फ शिप्रा को
- 1:19:19देखकर जल सकती थी। शिप्रा ने जैसे ही राजा
- 1:19:23साहब के ऑफर को स्वीकार किया। वहां
- 1:19:25उपस्थित कई लोगों ने आकर उसे बधाई देना
- 1:19:28शुरू कर दिया। ताता सा लग गया शिप्रा को
- 1:19:30बधाई देने वालों की। शिप्रा को समझ नहीं
- 1:19:33आया कि अचानक ही यह सारे लोग बिना किसी
- 1:19:36जान पहचान के उसको बधाई देने आगे कैसे आ
- 1:19:39गए। अभी तो उसने सिर्फ राजा साहब के ऑफर
- 1:19:42को स्वीकार किया था। ऑफिशियली जॉइ तो किया
- 1:19:45नहीं था। फिर भी लोग आगे से आकर उसे बधाई
- 1:19:49दे रहे थे। शायद इसका सबसे बड़ा कारण यह
- 1:19:52था कि आज के बाद शिप्रा का सोशल स्टेटस
- 1:19:55चेंज होने वाला था क्योंकि राजा साहब की
- 1:19:58कंपनी का सीईओ होना कोई छोटी बात नहीं थी।
- 1:20:01अभी से ही लोग उससे संपर्क बनाना चाह रहे
- 1:20:04थे। शिप्रा की नजरों में आना चाह रहे थे
- 1:20:07ताकि बाद में जब कभी मौका मिले तो शिप्रा
- 1:20:10आसानी से उन लोगों को पहचान सके। शिप्रा
- 1:20:13की मजबूरी थी कि वह बहुत से लोगों को ना
- 1:20:16पहचानते हुए भी उनकी बधाई को स्वीकार कर
- 1:20:18रही थी। वो मुस्कुराते हुए विनम्रता से
- 1:20:21सबका अभिवादन करती जा रही थी। जबकि उससे
- 1:20:24थोड़ी दूर पर खड़ी मानसी जलन भरी निगाहों
- 1:20:27से उसे घरे जा रही थी। मानसी को देखकर साफ
- 1:20:31पता चल रहा था कि शिप्रा को इतने अच्छे
- 1:20:33ऑफर मिलने के कारण वो कितनी दुखी थी और यह
- 1:20:36सब उसी की पार्टी में हो रहा था। दूसरी
- 1:20:40तरफ बलवंत राय का चेहरा खिला हुआ नजर आ
- 1:20:42रहा था। उन्हें उम्मीद नहीं था कि आज इस
- 1:20:45पार्टी में शिप्रा को इतना अच्छा ऑफर
- 1:20:47मिलने वाला है। वो बड़ी मुश्किल से खुद को
- 1:20:50रोके हुए थे। नहीं तो उनका मन कर रहा था
- 1:20:53कि वह यहां पर चिल्लाकर कहे कि शिप्रा
- 1:20:55उनकी पोती है जिसे आज खुद राजा साहब ने
- 1:20:59अपनी कंपनी का सीईओ नियुक्त कर दिया। यह
- 1:21:02राय फैमिली के लिए बहुत बड़ी बात थी।
- 1:21:04उन्हें अभी कुछ दिन पहले शिप्रा से किए गए
- 1:21:07व्यवहार के लिए पछतावा हो रहा था। पर यह
- 1:21:09समय इन बातों को याद करने का नहीं था।
- 1:21:12उन्होंने निश्चय किया कि घर जाकर वो सबसे
- 1:21:14पहले शिप्रा से मिलेंगे और उससे बात
- 1:21:17करेंगे। इधर शौर्य भी शिप्रा के अंदर की
- 1:21:20खुशी को महसूस कर पा रहा था। वो यह भी देख
- 1:21:23रहा था कि जब लोग शिप्रा के पास जाकर उसे
- 1:21:25बधाई दे रहे थे तो वह कितना अनकंफर्टेबल
- 1:21:28फील कर रही थी। शौर्य के पास खड़ी नताशा
- 1:21:31कपूर ने जब देखा कि लोग शिप्रा को उसको
- 1:21:33मिले प्रपोजल के लिए बधाई दे रहे हैं तो
- 1:21:36उसने शौर्य से कहा तुम्हें नहीं लगता कि
- 1:21:38हमें भी आगे बढ़कर शिप्रा को बधाई देनी
- 1:21:40चाहिए। शौर्य को समझ नहीं आया कि वो नताशा
- 1:21:43की बात का क्या जवाब दे। अभी शौर्य नताशा
- 1:21:46को कोई जवाब देता उससे पहले ही नताशा बोली
- 1:21:50चलो हम भी चलकर उसको बधाई देते हैं। इतना
- 1:21:53कहकर वो शौर्य का हाथ पकड़ कर उसको खींचती
- 1:21:56हुई शिप्रा की तरफ बढ़ गई। शौर्य बड़ी
- 1:21:58मुश्किल से उसको रोकते हुए बोला। अरे चल
- 1:22:01रहा हूं। तुम मेरा हाथ तो छोड़ो। तुम देख
- 1:22:04भी रही हो यहां लोग कैसे हम दोनों को घूर
- 1:22:06रहे हैं। शौर्य की बात सुनकर नताशा ठिटकी
- 1:22:09और शौर्य की तरफ देखती हुई बोली। ओह हेलो।
- 1:22:12इस बात से मुझे परेशान होना चाहिए ना कि
- 1:22:14तुम्हें। अगर कोई बात बनेगी तो उससे तुमसे
- 1:22:17ज्यादा नुकसान मेरा है। अरे मैं भी तो यही
- 1:22:20कह रहा हूं मेरा क्या है? मुझे यहां जानता
- 1:22:23ही कौन है? पर तुम्हें तो यहां सभी लोग
- 1:22:25जानते हैं। मेरे जैसे छोटे लोग के साथ
- 1:22:28देखकर तुम्हें लेकर लोगों ने अगर कोई
- 1:22:30कहानी बनानी शुरू कर दी तो फिर तुम्हें
- 1:22:32जवाब देते नहीं बनेगा। इसलिए मैं ऐसा कह
- 1:22:34रहा हूं। शौर्य ने तुरंत नताशा की बात को
- 1:22:38ही आधार बनाकर उसको जवाब दिया। जो नताशा
- 1:22:41अभी यह सोच रही थी कि शौर्य शायद खुद का
- 1:22:44नाम उससे जुड़ने के कारण परेशान हो रहा
- 1:22:46है। एक ही पल में उसका विचार बदल दिया और
- 1:22:49उसके दिमाग में यह बात आ गया कि शौर्य
- 1:22:51उसको लेकर परेशान है कि उसको लेकर कहीं
- 1:22:54कोई कहानी बननी शुरू ना हो जाए। यह बात
- 1:22:56दिमाग में आते ही कि शौर्य को उसकी कितनी
- 1:22:59परवाह है। नताशा के दिल में शौर्य का कद
- 1:23:02और भी बढ़ गया। उसका मन तो नहीं हो रहा था
- 1:23:05कि वह शौर्य का हाथ छोड़े। परिस्थिति
- 1:23:08एबनॉर्मल ना हो जाए। यह सोचकर उसने शौर्य
- 1:23:11का हाथ छोड़ दिया और उससे बोली, अब अगर
- 1:23:14ठीक है तो चलें। शौर्य ने मुस्कुरा कर
- 1:23:17उसकी ओर देखा और शिप्रा की ओर बढ़ गया।
- 1:23:20शिप्रा जो कई लोगों से घिरी थी, उसका
- 1:23:22ध्यान भी शौर्य की तरफ ही था। वो देख रही
- 1:23:25थी कि कैसे नताशा शौर्य का हाथ पकड़ कर
- 1:23:27उसकी तरफ बढ़ी आ रही थी कि तभी शौर्य ने
- 1:23:31उसे कुछ कहा था। जिसके बाद नताशा ने शौर्य
- 1:23:33का हाथ छोड़ दिया और अब दोनों साथ में
- 1:23:36उसकी ओर आ रहे थे। दोनों को अपनी तरफ आते
- 1:23:39देखकर नताशा ने उनसे अपनी नजर फेरा तो उसे
- 1:23:42अपने सामने विजय दीवान खड़ा नजर आया। विजय
- 1:23:45दीवान भरषक अपनी आवाज को मीठा बनाते हुए
- 1:23:48कहा बहुत-बहुत बधाई शिप्रा। मैं बता नहीं
- 1:23:51सकता कि मुझे यह जानकर कितनी खुशी हुई कि
- 1:23:54तुम राजा साहब की टेक्सटाइल कंपनी की सीईओ
- 1:23:57बनने वाली हो। मैं ऊपर वाले से प्रार्थना
- 1:23:59करूंगा कि तुम यूं ही दिन दुगनी रात
- 1:24:02चौगुनी तरक्की करती जाओ। तुम्हें अपने सफर
- 1:24:05में अगर कभी भी मेरी मदद की कोई जरूरत
- 1:24:07महसूस हो तो तुम निसंकोच मुझसे मदद ले
- 1:24:10सकती हो। शिप्रा ने विजय की बात को सुना
- 1:24:13और मुस्कुराते हुए उसको जवाब दिया। जरूर
- 1:24:16अगर मुझे कभी भी ऐसा लगा तो मैं जरूर
- 1:24:18तुमसे संपर्क करूंगी। मुझे इससे खुशी
- 1:24:20होगी। विजय ने भी तुरंत रिप्लाई किया। यही
- 1:24:24वो क्षण था जब नताशा शौर्य के साथ शिप्रा
- 1:24:26के सामने पहुंची और उससे बोली मुबारक हो
- 1:24:29शिप्रा तुम्हें इतना बड़ा अवसर मिलने के
- 1:24:31लिए मैं समझती हूं तुम इस अवसर को अच्छे
- 1:24:33से भुनाओगी और अपनी जिंदगी में और भी
- 1:24:35ऊंचाइयों को छुओगी इसलिए मेरे और श्रवण
- 1:24:38दोनों की तरफ से तुम्हें इस पद के लिए
- 1:24:40बहुत-बहुत बधाई। अगर यह बधाई नताशा अकेले
- 1:24:43जाकर शिप्रा को दे रही होती तो शिप्रा को
- 1:24:45बहुत खुशी होती। पर जब उसने नताशा के मुंह
- 1:24:48से यह सुना कि उसकी और श्रवण दोनों की ओर
- 1:24:50से उसको बहुत-बहुत बधाई। तो उसे यह
- 1:24:53बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। वो बोली तो
- 1:24:55कुछ नहीं पर कनखियों से वह शौर्य की ओर
- 1:24:57देखने लगी। शौर्य इस समय ऐसी स्थिति में
- 1:25:00था कि उससे कुछ बोलते नहीं बन रहा था। उसे
- 1:25:03ऐसा लग रहा था जैसे वह सिलबट्टे की दो
- 1:25:05पाटों के बीच में फंस गया है। जिससे वह
- 1:25:08चाहकर भी निकल नहीं पा रहा हो। वो शिप्रा
- 1:25:10से नजर मिलाने का ताव नहीं ला पा रहा था।
- 1:25:13इसलिए वह उससे अपनी नजर को चुरा रहा था।
- 1:25:15जबकि शिप्रा का मन कर रहा था कि वह नताशा
- 1:25:18से कहे कि जिसकी तरफ से वह उसको बधाई दे
- 1:25:20रही है, वह उसका पति है। पर हकीकत में वह
- 1:25:23ऐसा कुछ नहीं कह पाई। मजबूरन शिप्रा को
- 1:25:25मुस्कुराकर नताशा को जवाब देना पड़ा। आपकी
- 1:25:28बधाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। नताशा ने
- 1:25:31नोट किया कि शौर्य ने अपनी तरफ से शिप्रा
- 1:25:34को कुछ नहीं कहा। तो उसने शौर्य से कहा,
- 1:25:37क्या तुम अपनी तरफ से शिप्रा को कुछ नहीं
- 1:25:38कहोगे? शौर्य ने जब नताशा का यह सवाल सुना
- 1:25:42तो उसकी स्थिति और भी विचित्र हो गई। जिस
- 1:25:45चीज से वह बचना चाह रहा था, नताशा उसको
- 1:25:47उसी के सामने धकेल दे रही थी। मजबूरन
- 1:25:50शौर्य को नताशा से बोलना पड़ा। तुमने मेरे
- 1:25:52पास कुछ कहने के लिए छोड़ा कहां? तुमने तो
- 1:25:55मेरी तरफ से भी इसको बधाई दे दी। तो फिर
- 1:25:57मुझे अलग से बोलने की जरूरत क्या रह गई?
- 1:26:00नताशा ने शौर्य की इस बात पर ध्यान दिया
- 1:26:02तो वो मुस्कुराती हुई बोली। अरे हां,
- 1:26:05मैंने तो इस बात की और ध्यान ही नहीं
- 1:26:07दिया। पर शौर्य ने अब तक खुद को तैयार कर
- 1:26:09लिया था शिप्रा को फेस करने के लिए। इसलिए
- 1:26:12उसने मुस्कुराते हुए शिप्रा की ओर देखते
- 1:26:14हुए कहा, मैं समझता हूं कि तुम्हें आज के
- 1:26:17दिन बहुत बड़ी जिम्मेदारी मिली है और मुझे
- 1:26:20पूरा विश्वास है कि तुम इसको बहुत ही
- 1:26:22अच्छी तरह से निभाओगी। इस बार सीधा शौर्य
- 1:26:25से यह बात सुनकर शिप्रा को अच्छा लगा। वो
- 1:26:28शौर्य से बोली तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद
- 1:26:31जो तुम ऐसा सोचते हो। अभी शिप्रा ने अपनी
- 1:26:34बात को समाप्त ही किया था कि तभी बीच में
- 1:26:37आते हुए विजय ने कहा अब यह करेगा भी तो
- 1:26:40क्या करेगा? बेचारे की मजबूरी है जो इसे
- 1:26:42तुम्हें बधाई देना पड़ रहा है। नहीं तो
- 1:26:45मुझे तो ऐसा लग तो नहीं रहा है कि इसे
- 1:26:47तुम्हें इतना बड़ा पद मिलने से कोई खुशी
- 1:26:49हो रही है। इसके सीने पर तो सांप लौट रहे
- 1:26:52होंगे तुम्हें इतना बड़ा पद मिलते देखकर।
- 1:26:55नताशा ने जैसे ही विजय को बीच में अपनी
- 1:26:57बात करते देखा तो वह फिर से विजय पर
- 1:26:59भड़कती हुई बोली। तुम पूरे कुत्ते की दुम
- 1:27:02ही हो जो सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा
- 1:27:04है। जरूरी है कि तुम किसी दूसरे के बीच
- 1:27:07में आकर उनके फटे में अपनी टांग राऊ ही।
- 1:27:10मैं कुछ देर पहले की अपने व्यवहार के लिए
- 1:27:12क्षमा चाहता हूं। मिस नताशा। पर मैं इस
- 1:27:14शख्स की रगरग से वाकिफ हूं। पता नहीं कुछ
- 1:27:17तो जादू किया है इसने आप पर जो आप इसकी
- 1:27:19असलियत को देखना नहीं चाह रही। आपको नहीं
- 1:27:22पता आपके आने से पहले यह मिस शिप्रा पर भी
- 1:27:25अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था। पर
- 1:27:28वहां तो उसकी दाल गली नहीं। पर आपको देखकर
- 1:27:30लगता है इसने आप पर कोई तो जादू कर दिया
- 1:27:33है। मिस्टर विजय शायद अभी थोड़ी देर पहले
- 1:27:37आपको मिस्टर हर्षल मेहता की कही गई बात
- 1:27:40ठीक से समझ में नहीं आई। आप क्यों मुझे
- 1:27:42मजबूर कर रहे हैं कि मैं कोई सख्त कदम
- 1:27:45आपके खिलाफ उठाऊं। नताशा कपूर की यह हार्ड
- 1:27:48लाइन सुनकर विजय एकदम खामोश हो गया। अब
- 1:27:52आगे क्या होगा? क्या नताशा को पता चलेगा
- 1:27:55कि शौर्य शिप्रा का पति है? शिप्रा महसूस
- 1:27:58कर रही थी कि अचानक ही इस पार्टी में
- 1:28:01उसकीेंस बढ़ गई है। मेघना भी शिप्रा के
- 1:28:05पास आ गई थी। वो भी इस बात को फील कर रही
- 1:28:08थी कि आजकल किस्मत शिप्रा पर कुछ ज्यादा
- 1:28:10ही मेहरबान हो गई थी। मेघना के लिए भी यह
- 1:28:13बात हैरान कर देने वाली थी कि अचानक ही
- 1:28:16राजा साहब ने बिना कोई पहले के पहचान के
- 1:28:19शिप्रा को अपनी कंपनी में इतनी अहम
- 1:28:21जिम्मेदारी कैसे दे दी। कारण उसे समझ नहीं
- 1:28:24आया पर वह इसे शिप्रा की किस्मत ही कह
- 1:28:26सकती थी। यही वह समय था जब हर्षल मेहता ने
- 1:28:29भी आकर शिप्रा को बधाई दिया। दरअसल हर्षल
- 1:28:32मेहता शौर्य का अनुसरण कर रहा था। वो यहां
- 1:28:35इस पार्टी में शौर्य की पहचान तो उजागर कर
- 1:28:37नहीं सकता था पर उसकी एक-एक एक्टिविटी पर
- 1:28:40वह ध्यान गराए हुए था। हर्षल मेहता को पता
- 1:28:42नहीं था कि शौर्य की शादी हो चुकी थी।
- 1:28:44कहीं ना कहीं उसके दिल में यह बात घर कर
- 1:28:46गई थी कि शौर्य जवान और हैंडसम है। अगर वह
- 1:28:50उनकी बेटी को पसंद कर ले तो मानसी की
- 1:28:52जिंदगी सवर जाएगी। क्योंकि हर्षल मेहता को
- 1:28:55अपनी बेटी की खूबसूरती पर बड़ा गर्व था।
- 1:28:57इसीलिए उनके दिल में कहीं ना कहीं यह
- 1:28:59उम्मीद बंध गई थी कि अगर शौर्य उनकी बेटी
- 1:29:02से मिल लेता है तो हो सकता है कि वह खुद
- 1:29:04ही उसे पसंद करने लगे। पर वह देख रहे थे
- 1:29:07कि पार्टी में आते ही नताशा कपूर शौर्य के
- 1:29:10कुछ ज्यादा ही करीब आ गई थी। हर्षल मेहता
- 1:29:12जानते थे कि जिस तरह शौर्य ने नताशा कपूर
- 1:29:15की जान बचाई थी, उससे नताशा कपूर के दिल
- 1:29:17में कहीं ना कहीं शौर्य के लिए एक लगाव
- 1:29:19उत्पन्न हो गया था। पर उस समय तक हर्षल
- 1:29:21मेहता को यह नहीं पता था कि शौर्य कितना
- 1:29:24पैसे वाला है। पर अब जबकि वह शौर्य की
- 1:29:27हकीकत से वाकिफ थे, तो अब उनको नताशा कपूर
- 1:29:29का शौर्य के इतना करीब होना पसंद नहीं आ
- 1:29:32रहा था। उनकी मजबूरी यह थी कि ना ही वह
- 1:29:35नताशा कपूर से इस बारे में बोल सकते थे और
- 1:29:37ना ही अपनी बेटी से यह कह सकते थे कि वह
- 1:29:40शौर्य पर ध्यान दें। क्योंकि शौर्य ने
- 1:29:42उन्हें खास करके यह हिदायत दी थी कि वह
- 1:29:44उनकी हकीकत किसी को भी ना बताएं। चाहे वह
- 1:29:47उनकी बेटी ही क्यों ना हो। हर्षल मेहता को
- 1:29:50जो एक उम्मीद थी कि शौर्य शायद उनकी बेटी
- 1:29:52की खूबसूरती देखकर खुद ही उसे पसंद करने
- 1:29:55लगे। अब इसकी पॉसिबिलिटी भी कम ही दिख रही
- 1:29:57थी क्योंकि नताशा कपूर पहले से ही उसके
- 1:30:00करीब थी और वह भी बहुत खूबसूरत थी। इसीलिए
- 1:30:03इसकी संभावना कम ही थी कि नताशा कपूर के
- 1:30:06होते हुए शौर्य का ध्यान मानसी की तरफ
- 1:30:08जाए। हर्षल मेहता को अभी तक शौर्य और राजा
- 1:30:11साहब के बीच के संबंध के बारे में भी पता
- 1:30:13नहीं था। पर वो इतना तो समझ गया था कि
- 1:30:15किसी ना किसी तरह शौर्य राजा साहब के भी
- 1:30:18करीब है। तभी तो शौर्य को पहले से ही पता
- 1:30:20था कि आज की पार्टी में राजा साहब भी
- 1:30:22आएंगे। क्योंकि जब हर्षल मेहता ने राजा
- 1:30:24साहब को इस पार्टी में इनवाइट किया था तो
- 1:30:26उन्हें राजा साहब के इस पार्टी में आने की
- 1:30:28संभावना कम ही थी। पर राजा साहब आए। इसका
- 1:30:31मतलब राजा साहब उनके कारण नहीं शौर्य के
- 1:30:34कारण इस पार्टी में आए थे। पार्टी अब अपने
- 1:30:37पूरे शबाव पर था। शिप्रा मेघना के साथ ही
- 1:30:40पार्टी को एंजॉय कर रही थी। उसे राहुल का
- 1:30:42ध्यान आया। अगर वह आता तो वह नताशा कपूर
- 1:30:45से मिल सकता था। पर अब सही मायने में
- 1:30:47शिप्रा के दिल में नताशा कपूर को लेकर कोई
- 1:30:49उल्लास नहीं था और इसका कारण यह था कि वह
- 1:30:52जब से आई थी तब से शौर्य के आसपास ही
- 1:30:54मर्डरा रही थी। यह बात शिप्रा के दिल में
- 1:30:57कहीं ना कहीं नताशा कपूर के लिए नापसंद
- 1:30:59भरती जा रही थी। मेघना ने इस बात को नोटिस
- 1:31:02किया तो वो शिप्रा से बोली क्या हुआ? कहीं
- 1:31:05तुम्हें नताशा कपूर से जलन तो नहीं हो
- 1:31:07रही? तुम्हें तो बड़ा मजा आ रहा है ना यह
- 1:31:09सब देखकर। शिप्रा मेघना की बात से चिढ़कर
- 1:31:12बोली तुम भी हद करती हो। मुझे भला मजा
- 1:31:15क्यों आएगा? मैं तो तुम्हारे चेहरे पर
- 1:31:17स्पष्ट जलन के भाव को देख सकती हूं। पर
- 1:31:19मुझे यह भी पता है कि तुम इस बात को
- 1:31:22मानोगी नहीं। मेघना गौर से शिप्रा के
- 1:31:24चेहरे को देखती हुई बोली। तुम खुद को कुछ
- 1:31:27ज्यादा ही होशियार नहीं समझ रही। तुम यह
- 1:31:29कैसे कह सकती हो कि मुझे जलन हो रही है?
- 1:31:31शिप्रा शौर्य और नताशा की तरफ देखती हुई
- 1:31:34बोली। इस समय नताशा शौर्य के साथ खाने के
- 1:31:37स्टॉल के पास थी और इसी समय नताशा ने अपने
- 1:31:39हाथ से एक प्लेट उठाकर शौर्य की तरफ
- 1:31:41बढ़ाया था। मैं ऐसा इसलिए कह सकती हूं
- 1:31:44क्योंकि इस समय भी तुम बात मुझसे कर रही
- 1:31:46हो और तुम्हारा ध्यान अभी भी नताशा और
- 1:31:49शौर्य की तरफ ही है। यहां पार्टी में इतने
- 1:31:51लोग हैं फिर भी तुम्हारा ध्यान उन दोनों
- 1:31:54की तरफ ही क्यों है? मेघना भी उन दोनों की
- 1:31:56तरफ देखती हुई बोली। मेघना की बात सुनकर
- 1:32:00शिप्रा मेघना की ओर देखने लगी। बहुत सही
- 1:32:03कहा था मेघना ने। शिप्रा को अपनी गलती का
- 1:32:06एहसास हुआ। वो जितना ध्यान शौर्य और नताशा
- 1:32:10से हटाना चाह रही थी उतना ही उसकी तरफ और
- 1:32:13आकर्षित हो रही थी। उसके मन में बार-बार
- 1:32:16वो दृश्य कौद रही थी जब नताशा ने शौर्य का
- 1:32:19हाथ पकड़ कर उसको खींचती हुई अपने साथ ले
- 1:32:22गई थी। मेघना ने जब देखा कि शिप्रा उसी की
- 1:32:26घुर रही है तो वह मुस्कुराती हुई फिर से
- 1:32:28बोली अब तुम ऐसे देखकर मुझे डरा क्यों रही
- 1:32:31हो? अगर ऐसे लुक से कभी श्रवण की ओर देख
- 1:32:34लोगी तो शायद वह किसी दूसरी लड़की के पास
- 1:32:37जाने की हिम्मत भी नहीं करेगा। तुम्हें
- 1:32:40क्या लगता है कि उन दोनों के बीच में कुछ
- 1:32:42चल रहा है? इस बार शिप्रा की आवाज में एक
- 1:32:46डर झलक रहा था। जैसे उसका कोई कीमती चीज
- 1:32:49उससे दूर जा रहा है। मेघना ने शिप्रा की
- 1:32:52चिंता को साफ महसूस किया। वो शिप्रा से
- 1:32:55ईमानदारी से बोली। देखो मैं श्रवण के बारे
- 1:32:58में पक्का यकीन से तो नहीं कह सकती कि
- 1:33:01उसके दिल में नताशा के लिए कुछ है या
- 1:33:03नहीं। पर यह पक्का यकीन से कह सकती हूं कि
- 1:33:05नताशा के दिल में श्रवण के लिए जरूर कुछ
- 1:33:08फीलिंग है। और सबसे बड़ी बात यह है कि
- 1:33:11मुझे नहीं लगता कि वह इस बात को छुपाने की
- 1:33:13कोई कोशिश भी करती है। सच कहूं तो मुझे भी
- 1:33:16ऐसा ही लग रहा है। पर तुम्हें नहीं लगता
- 1:33:19कि श्रवण ज्यादा समय उससे दूर नहीं रह
- 1:33:21पाएगा। शिप्रा किसी आशंका के अधीन होकर
- 1:33:24बोली। मेघना ने शिप्रा के चिंतित चेहरे की
- 1:33:27तरफ देखा और बोली, तुम्हें ऐसा क्यों लगा
- 1:33:30कि वह ज्यादा समय उससे दूर नहीं रह सकेगा।
- 1:33:33आखिर वो है तो एक मर्द ही और नताशा है भी
- 1:33:36तो खूबसूरत। तो फिर कितना समय वो उससे दूर
- 1:33:39रह पाएगा? शिप्रा की बेबसी उसकी आवाज में
- 1:33:42साफ झलक रही थी। क्या पता शायद तुम अगर
- 1:33:46चाहो तो ऐसा ना भी हो। मेघना रहस्यमई स्वर
- 1:33:49में बोली। शिप्रा ने मेघना की बात को सुना
- 1:33:52तो वह उसकी आंखों में देखती हुई बोली क्या
- 1:33:55मतलब हुआ तुम्हारी इस बात का मेरे चाहने
- 1:33:58से ऐसा कैसे हो जाएगा अगर तुम श्रवण के
- 1:34:01साथ अपनी दूरियों को खत्म कर दो तो मुझे
- 1:34:03नहीं लगता कि फिर श्रवण को नताशा के करीब
- 1:34:06जाने की कोई जरूरत होगी बोलते वक्त मेघना
- 1:34:09के चेहरे पर एक मिस्टीरियस स्माइल आ गई थी
- 1:34:12कुछ भी तुम्हें पता है यह इतना आसान नहीं
- 1:34:16है फिर तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो हम
- 1:34:19दोनों के बीच बीच की कंडीशन पहले ही
- 1:34:21डिसाइड हो गई है। शिप्रा इनकार में सर
- 1:34:23हिलाती हुई बोली। शिप्रा को इनकार में सर
- 1:34:26हिलाते देखकर मेघना बोली जब तुम्हें उसके
- 1:34:30करीब जाना ही नहीं है तो फिर तुम्हें
- 1:34:31नताशा के श्रवण के करीब जाने से जलन क्यों
- 1:34:34हो रही है? मैंने कब कहा कि मुझे नताशा से
- 1:34:37जलन हो रही है। यह तुम ही हो जो यह साबित
- 1:34:41करने पर तुली हो कि मुझे नताशा को श्रवण
- 1:34:43के पास देखकर जलन हो रही है। शिप्रा उल्टा
- 1:34:46मेघना पर ही दोषारोपण करती हुई बोली
- 1:34:49तुम्हें समझना इंपॉसिबल है। तुम्हारा घर
- 1:34:52उजाड़ने के लिए तुम्हें किसी दुश्मन की
- 1:34:54जरूरत नहीं है। उसके लिए तुम खुद ही काफी
- 1:34:57हो। मेघना तंज भरे स्वर में बोली, क्या
- 1:35:01तुम मुझे श्राप दे रही हो? मेघना के चेहरे
- 1:35:04पर नाराजगी देखकर शिप्रा मासूमियत से
- 1:35:06बोली, मेघना ने जब इस तरह से शिप्रा को
- 1:35:09खुद से सवाल करते देखा तो वो तुरंत
- 1:35:11मुस्कुराती हुई बोली, "क्या करूं मैं
- 1:35:14तुम्हारा?" काश इसी मासूमियत से कभी श्रवण
- 1:35:17से बात करोगी तो वह तुम पर लट्टू हो
- 1:35:19जाएगा। फिर तुम्हारा यह डर भी खत्म हो
- 1:35:22जाएगा कि वो किसी और लड़की के करीब जा
- 1:35:24पाएगा। उसी समय दोनों को एक आवाज सुनाई
- 1:35:28दिया। क्या तुम दोनों को खाना नहीं खाना
- 1:35:30है? मेघना ने पलट कर आवाज की दिशा में
- 1:35:33देखा तो उसने सामने श्रवण को देखा जिसके
- 1:35:36हाथ में खाने की प्लेट थी जिसमें से वह खा
- 1:35:38रहा था। श्रवण को अपने सामने देखकर मेघना
- 1:35:41बोली क्यों नहीं खाना है पर हमें कोई हाथ
- 1:35:45में सजाकर प्लेट नहीं देने वाला है ना
- 1:35:48शौर्य मेघना की कटाक्ष को समझ गया फिर भी
- 1:35:51वो उसी के अंदाज में बोला तो क्या तुम
- 1:35:54चाहती हो कि तुम्हें भी कोई प्लेट सजा कर
- 1:35:56दे
- 1:35:57ऐसा भी नहीं है मेरा काम तो इस प्लेट से
- 1:36:00भी चल सकता है यह कहते हुए मेघना ने देखा
- 1:36:03कि शौर्य के प्लेट में एक बाउल में दो
- 1:36:06गुलाब जामुन थे उसने बिना किसी अनुमति के
- 1:36:09उसके प्लेट से वह बाउल उठा लिया। गुलाब
- 1:36:12जामुन की उस बाउल के अंदर ही चम्मच भी रखा
- 1:36:14हुआ था। मेघना ने उस बाउल से एक गुलाब
- 1:36:17जामुन का एक टुकड़ा शिप्रा हैरानी से
- 1:36:20मेघना की इस हरकत को देखती रह गई। शौर्य
- 1:36:24भी आश्चर्य से मेघना को देखता हुआ बोला।
- 1:36:28मुझे नहीं पता था कि तुम्हें गुलाब जामुन
- 1:36:30इतना पसंद है। सिर्फ मुझे ही नहीं शिप्रा
- 1:36:34को भी गुलाब जामुन बहुत पसंद है। मेघना
- 1:36:37शिप्रा की ओर देखती हुई बोली। जबकि अब
- 1:36:40मेघना की इस हरकत को देखकर शिप्रा को
- 1:36:42मेघना से भी जलन होने लगी। उसे ऐसा लगा
- 1:36:46जैसे मेघना ने खुलेआम उसकी प्रॉपर्टी पर
- 1:36:48अपना हक जमा लिया। जब तुम दोनों को यह
- 1:36:51इतना ही पसंद है तो फिर यहां एक साइड में
- 1:36:54क्या कर रही हो? जाओ और जाकर खाना खा लो।
- 1:36:58शौर्य मुस्कुराते हुए बोला, शौर्य की बात
- 1:37:01सुनकर शिप्रा और मेघना भी खाने की टेबल की
- 1:37:03तरफ बढ़ गई। अभी गुलाब जामुन की बाउल
- 1:37:06मेघना के हाथ में ही था। जैसे ही दोनों
- 1:37:08दो-चार कदम आगे बढ़ी, शिप्रा ने आगे बढ़कर
- 1:37:11मेघना के हाथ के बाउल से दूसरा गुलाब
- 1:37:13जामुन का पीस निकालकर अपने मुंह में रख
- 1:37:16लिया। मेघना ने अपना हाथ झटकने की कोशिश
- 1:37:19की थी। पर शिप्रा उससे तेज निकली और मेघना
- 1:37:22के कोई हरकत करने से पहले ही गुलाब जामुन
- 1:37:24को खा चुकी थी। तुमसे थोड़ा और सब्र नहीं
- 1:37:28हुआ। खाने की मेज की ओर तो जा ही रही थी
- 1:37:31तो यह झपटा झपटी करने की क्या जरूरत थी?
- 1:37:34मेघना शिप्रा से बोली यह तो तुम्हें सोचना
- 1:37:37चाहिए था। तुम्हें क्या जरूरत थी श्रवण की
- 1:37:40प्लेट से उसकी मिठाई की बाउल लेने की?
- 1:37:42शिप्रा शिकायती लहजे में बोली। ओह हेलो।
- 1:37:46मैंने उसकी प्लेट से मिठाई की बाउल लिया
- 1:37:48तो फिर इससे तुम्हें क्या फर्क पड़ता है?
- 1:37:51मेघना बोली तुम्हें शर्म नहीं आती? वो
- 1:37:54तुम्हारा जीजा है। शिप्रा शिकायत करती हुई
- 1:37:57बोली अरे जीजा है इसीलिए तो उनके प्लेट से
- 1:38:00वो बाउल लिया और फिर मेरा तो रिश्ता श्रवण
- 1:38:03के साथ ऐसा है कि मेरा उसके साथ ठिठोली
- 1:38:06करना तो बनता है। पर तुम्हें क्या फर्क
- 1:38:08पड़ता है? नताशा जब उसके करीब जाती है तब
- 1:38:11तो तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई और
- 1:38:14लड़की भी उसके पास जाए तुम्हें कोई फर्क
- 1:38:16नहीं पड़ता। तो फिर मेरा उसके साथ थोड़ी
- 1:38:19ठिठोली करने से तुम्हें क्यों तकलीफ हो
- 1:38:20रही है? अभी तो तुमने कहा था कि श्रवण
- 1:38:23पूरी तरह स्वतंत्र है। वो किसके साथ होता
- 1:38:26है या क्या करता है इससे तुम्हें कोई फर्क
- 1:38:29नहीं पड़ता। मेघना शिप्रा को ताना मारती
- 1:38:32हुई बोली। मुझे बाहर वालों से फर्क नहीं
- 1:38:35पड़ता। पर जब मेरी अपनी बहन मेरे पति के
- 1:38:38साथ ठिठोली करेगी तो मुझे फर्क पड़ता है।
- 1:38:41शिप्रा मेघना पर तंज कसती हुई बोली यह
- 1:38:44क्या बात हुई? तुम्हें तो उससे कोई मतलब
- 1:38:46है नहीं। अगर तुम्हारी बहन अपने जीजा से
- 1:38:49थोड़ी ठिठोली करती है तो तुम्हें वो भी
- 1:38:51पसंद नहीं है। मेघना चिढ़ती हुई बोली।
- 1:38:55शिप्रा मेघना की बात से थोड़ी असहज हुई।
- 1:38:59बात तो मेघना ने सही कहा था। जब उसे दूसरी
- 1:39:02किसी लड़की के शौर्य के साथ होने से फर्क
- 1:39:06नहीं पड़ रहा था तो नताशा के शौर्य से
- 1:39:08थोड़ी ठिठोली करने से क्यों फर्क पड़ रहा
- 1:39:11था। शिप्रा ने इस बारे में सोचा तो उसने
- 1:39:14महसूस किया कि उसे फर्क तो किसी भी लड़की
- 1:39:17के शौर्य के पास होने से पड़ रहा था। पर
- 1:39:20वो दूसरी किसी लड़की से अपनी नाराजगी जता
- 1:39:22नहीं सकती थी। पर मेघना से तो वह अपनी बात
- 1:39:25कह सकती थी। बस यही कारण था। शिप्रा ने भी
- 1:39:29मेघना के साथ खाना खा लिया। अब जब वहां से
- 1:39:32जाने की बात हुई तो उसने मेघना से कहा
- 1:39:35श्रवण से भी बात कर लो। अगर उसे घर वापस
- 1:39:37ही जाना है तो साथ में चल लेते हैं। उसने
- 1:39:40देखा इस समय श्रवण मेनका और विक्रम के साथ
- 1:39:43राजा साहब के पास एक साइड में बातें कर
- 1:39:46रहा था। मेघना ने शौर्य की तरफ देखते हुए
- 1:39:49कहा, तुम्हें कहीं से श्रवण की बॉडी
- 1:39:52लैंग्वेज देखकर यह लगता है कि वो विक्रम
- 1:39:54के लिए काम करता होगा। उल्टा मुझे तो
- 1:39:57कभी-कभी यह लगता है कि शायद विक्रम ही
- 1:40:00उसके लिए काम करता हो। कुछ भी कहां मिस्टर
- 1:40:04विक्रम और कहां श्रवण तुम ऐसा सोच भी कैसे
- 1:40:07सकती हो? शिप्रा प्रतिरोध में बोली मैं
- 1:40:10ऐसा सोचना भी नहीं चाहती। पर तुमने यह
- 1:40:13महसूस किया कि मिस्टर विक्रम ने डायरेक्ट
- 1:40:16श्रवण से कोई भी काम करने के लिए कहा हो?
- 1:40:18या तुमने ऐसा कोई अंतर देखा है श्रवण के
- 1:40:21एटीट्यूड में कि वह विक्रम के सामने कभी
- 1:40:24सावधान की मुद्रा में खड़ा भी हुआ हो।
- 1:40:26जबकि यह स्वाभाविक होता है कि कोई भी
- 1:40:29एंप्लॉय अपने बॉस के सामने स्वाभाविक रूप
- 1:40:32से एक अदब की मुद्रा में खड़ा हो ही जाता
- 1:40:35है। पर मैंने यह अंतर कभी भी श्रवण के
- 1:40:37अंदर नहीं देखा है। अभी भी देखो राजा साहब
- 1:40:41का जितना ध्यान श्रवण की तरफ है, उतना
- 1:40:43किसी और की तरफ नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं
- 1:40:46है कि राजा साहब ने जो तुम्हें जॉब का ऑफर
- 1:40:49दिया है, वह श्रवण के कारण ही दिया है।
- 1:40:52मेघना की बात सुनकर शिप्रा भी गौर से उन
- 1:40:55सब की तरफ देखने लगी। उसे भी यह बात अजीब
- 1:40:58लग रहा था। उसने भी नोटिस किया कि राजा
- 1:41:01साहब का श्रवण को देखने का अंदाज बाकी
- 1:41:03सबको देखने के अंदाज से अलग था। वह जहां
- 1:41:06खड़ी थी वहां से राजा साहब की बातें सुन
- 1:41:09तो नहीं सकती थी कि उनके और श्रवण के बीच
- 1:41:12में क्या बातें हो रही है। पर यहां से
- 1:41:14देखकर वह इतना तो अनुमान लगा सकती थी कि
- 1:41:17राजा साहब और शौर्य के बीच की बातचीत में
- 1:41:19वहां मौजूद बाकी लोग मात्र दर्शक ही नजर आ
- 1:41:23रहे थे। वो मेघना की ओर देखकर बोली वैसे
- 1:41:26क्या बातें हो रही होगी उन सबके बीच?
- 1:41:29मेघना ने शिप्रा की बात सुनकर कहा, अब यह
- 1:41:32मुझे कैसे पता होगा कि उनके बीच क्या बात
- 1:41:35हो रही होंगी? चलो उनके पास चलते हैं।
- 1:41:38इतना कहकर शिप्रा उनकी ओर बढ़ गई। अब
- 1:41:41शिप्रा के मन में यह जानने की प्रबल इच्छा
- 1:41:43हो रही थी कि राजा साहब और श्रवण के बीच
- 1:41:46में क्या संबंध था? क्या ऐसे ही उनके बीच
- 1:41:49में जाना ठीक होगा? मेघना ने शिप्रा से
- 1:41:51पूछा। हम बोल देंगे कि अब हम यहां से जा
- 1:41:54रहे थे। इसीलिए जाने से पहले एक बार उनसे
- 1:41:57मिलने आ गए। शिप्रा ने जवाब दिया। जबकि
- 1:42:01शौर्य राजा साहब को उनके शिप्रा को जॉब की
- 1:42:03ऑफर देने के लिए सुना रहा था कि वह
- 1:42:05जानबूझकर शिप्रा और उनके बीच में आ रहे
- 1:42:08थे। जबकि वह अभी नहीं चाहता था कि शिप्रा
- 1:42:11उसकी हकीकत से वाकिफ हो। पर राजा साहब की
- 1:42:14जल्दबाजी से इस राज से पर्दा उठ सकता था।
- 1:42:17इस बात पर राजा साहब ने भी शौर्य को
- 1:42:19आश्वस्त किया कि उनके कारण शिप्रा को
- 1:42:22शौर्य की हकीकत पता नहीं चलेगी। इसी समय
- 1:42:25मेनका की निगाह वहां आती हुई शिप्रा पर
- 1:42:28गई। उसने शौर्य को अलर्ट किया कि शिप्रा
- 1:42:31इसी ओर आ रही है। राजा साहब भी शिप्रा की
- 1:42:34ओर देखने लगे। शिप्रा उनके पास पहुंची।
- 1:42:37शिप्रा ने नोट किया कि उसके वहां पहुंचते
- 1:42:39ही उनके बीच हो रही बातें बंद हो गई।
- 1:42:42शिप्रा को थोड़ा अजीब भी लगा। पर जब वो
- 1:42:45वहां पहुंच गई थी तो उसको वहां आने का कुछ
- 1:42:47तो रीजन देना था। इसीलिए उसने राजा साहब
- 1:42:50से कहा। दरअसल मैं यहां से जा रही थी तो
- 1:42:53सोचा आपसे एक बार मिलते हुए जाऊं। तो राजा
- 1:42:56साहब ने उसकी ओर देखते हुए कहा अच्छा किया
- 1:43:00मैं भी अब निकल ही रहा हूं। पर ध्यान रखना
- 1:43:03तुम कल समय से हमारे ऑफिस आ जाना। वहां
- 1:43:06कांता प्रसाद तुम्हें सब कुछ अच्छे से
- 1:43:08समझा देगा। जी मैं पहुंच जाऊंगी। शिप्रा
- 1:43:12ने जवाब दिया। जब शिप्रा की बात पूरी हो
- 1:43:15गई तो उसे लगा अब तो उसे यहां से जाना
- 1:43:18होगा। पर वो यहां शौर्य को अकेले छोड़कर
- 1:43:21जाना नहीं चाहती थी। उसने मेघना की ओर
- 1:43:23देखा कि वह शौर्य से साथ चलने के लिए
- 1:43:26पूछे। पर मेघना ने शौर्य से इस बारे में
- 1:43:28कुछ नहीं पूछा। तो मजबूरन शिप्रा को ही
- 1:43:31पूछना पड़ा।
- 1:43:33शौर्य को उम्मीद नहीं था कि शिप्रा उससे
- 1:43:36अपने साथ चलने के लिए पूछेंगी। इसलिए उसे
- 1:43:40हैरानी भी हुई। वैसे तो शौर्य को भी वापस
- 1:43:43घर ही जाना था। पर उसे मेनका के साथ पहले
- 1:43:46राजकमल होटल जाना था। फिर वहां से वह अपनी
- 1:43:50कार लेकर अपने घर पहुंचता। लेकिन जब उसने
- 1:43:53शिप्रा को उससे यह पूछते देखा कि क्या वो
- 1:43:56उसके साथ चल रहा है? तो उसे थोड़ी खुशी भी
- 1:43:59हुई। वो भी तुरंत तैयार हो गया और बोला
- 1:44:03ठीक है। जब तुम चल ही रही हो तो मैं भी
- 1:44:06साथ हो लेता हूं। वैसे भी मेरी कार होटल
- 1:44:08राजकमल में खड़ी है। जब राजा जी ने शिप्रा
- 1:44:12को शौर्य से यह पूछते देखा कि क्या वो
- 1:44:15उसके साथ चल रहा है? तो वो अपने चेहरे पर
- 1:44:18थोड़ा आश्चर्य लाते हुए बोले शौर्य
- 1:44:22तुम्हारे साथ कहां जाएगा? राजा साहब यह
- 1:44:25जताना चाहते थे कि उन्हें शिप्रा और शौर्य
- 1:44:28के रिश्ते के बारे में कुछ नहीं पता।
- 1:44:30इसलिए उन्होंने यह सवाल किया। पर शिप्रा
- 1:44:33राजा साहब की दूसरी बात से हैरान थी। राजा
- 1:44:36साहब ने श्रवण को शौर्य कहकर पुकारा था।
- 1:44:39जबकि शिप्रा शौर्य को श्रवण के नाम से
- 1:44:42जानती थी। एक पल को शिप्रा को यह भ्रम भी
- 1:44:45हुआ कि राजा साहब किसी और के बारे में तो
- 1:44:47नहीं पूछ रहे हैं। पर जिस तरह से उन्होंने
- 1:44:49शौर्य की ओर देखकर ही पूछा था। इससे यह
- 1:44:52बात तो पक्की हो गई थी कि राजा साहब ने
- 1:44:54श्रवण को ही शौर्य कहकर पुकारा था। शिप्रा
- 1:44:58ने राजा साहब की ओर देखते हुए कहा आप
- 1:45:00शौर्य किसको कह रहे हैं? इसका तो नाम
- 1:45:03श्रवण है। राजा साहब इस बात से अनजान थे
- 1:45:06कि यहां पर सभी शौर्य को श्रवण के नाम से
- 1:45:09जानते हैं। पर अब जबकि उन्होंने यह बात
- 1:45:12बोल दिया था तो इसको पलटा तो जा नहीं सकता
- 1:45:15था। इसलिए उन्हें समझ नहीं आया कि वो इस
- 1:45:18बात का क्या जवाब दें? तो शौर्य ही बीच
- 1:45:20में आते हुए बोला। दरअसल मेरा सर्टिफिकेट
- 1:45:23का नाम शौर्य ही है। इसीलिए ऑफिस में सभी
- 1:45:26मुझे शौर्य के नाम से ही बुलाते हैं।
- 1:45:28इसलिए राजा साहब को मेरा यही नाम पता है।
- 1:45:31लेकिन जो लोग मेरे आसपास या करीब हैं, वह
- 1:45:34सब मुझे सरवन के नाम से ही जानते हैं।
- 1:45:37अच्छा मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा एक
- 1:45:39दूसरा नाम श्रवण भी है। पर बात तो वही है
- 1:45:42कि शिप्रा तुम्हें अपने साथ चलने के लिए
- 1:45:44क्यों कह रही है। दरअसल राजा साहब शिप्रा
- 1:45:48और शौर्य के मुंह से उनके सामने यह हकीकत
- 1:45:50कबूल करवाना चाहते थे कि वह दोनों
- 1:45:52पति-पत्नी हैं। राजा साहब के सवाल पर
- 1:45:55शौर्य चुप ही रहा। वो देखना चाहता था कि
- 1:45:58शिप्रा इस बात का क्या जवाब देती है।
- 1:46:01शिप्रा को भी यह मौका सही जान पड़ा कि वह
- 1:46:03कम से कम इन लोगों के सामने तो अपनी हकीकत
- 1:46:06बता ही दे ताकि बाद में कोई कंफ्यूजन ना
- 1:46:08रहे। क्योंकि वह अगले दिन से ही राजा साहब
- 1:46:11के यहां काम करने वाली थी। तो वह चाहती थी
- 1:46:14कि राजा साहब को भी पता चल जाए कि वह पहले
- 1:46:16से शादीशुदा है और शौर्य ही उसका पति है।
- 1:46:20यही सोचकर उसने राजा साहब से कहा दरअसल हम
- 1:46:23दोनों पति-पत्नी हैं। इसलिए श्रवण को भी
- 1:46:25तो घर ही जाना है। इसलिए मैंने इससे घर
- 1:46:28जाने के बारे में पूछा। राजा साहब यह
- 1:46:31जानकर कि वह दोनों पति-पत्नी हैं। अपने
- 1:46:33चेहरे पर आश्चर्य का भाव लाकर शौर्य से
- 1:46:36बोले, शौर्य, तुमने अभी तक बताया क्यों
- 1:46:39नहीं था कि शिप्रा तुम्हारी पत्नी है।
- 1:46:41चलो, यह भी अच्छी बात है कि तुम्हारी
- 1:46:44पत्नी अब से मेरे यहां काम करेंगी। शिप्रा
- 1:46:47को भी लगा कि उसके सर से एक बहुत बड़ा बोझ
- 1:46:49हट गया। वो पहले से चाहती थी कि जितने
- 1:46:52ज्यादा लोगों को पता चल जाए कि शौर्य उसका
- 1:46:55पति है, यह उसके लिए अच्छा ही होगा।
- 1:46:58क्योंकि फिर लड़कियां उसके करीब जाने की
- 1:47:00कोशिश नहीं करेगी। एक्चुअली वह यह बात
- 1:47:02इसलिए भी अभी यहां बताना चाह रही थी
- 1:47:05क्योंकि उसे लग रहा था कि कहीं मेनका भी
- 1:47:07शौर्य के करीब ना हो। इसलिए वह मेनका के
- 1:47:10दिमाग में भी यह बात डाल देना चाहती थी कि
- 1:47:13वह जान ले कि शौर्य और शिप्रा दोनों
- 1:47:15पति-पत्नी हैं। शौर्य को खुशी हो रही थी
- 1:47:18कि शिप्रा ने खुलेआम सबके सामने उसको अपने
- 1:47:21पति के रूप में स्वीकार किया था। वो यही
- 1:47:24तो चाहता था कि शिप्रा खुद सबके सामने इस
- 1:47:27बात को स्वीकार करे। पर अभी भी उसे इस बात
- 1:47:30का इंतजार था कि कब शिप्रा उससे अपने
- 1:47:32प्यार का इजहार करती है। सच कहूं तो तुम
- 1:47:36दोनों साथ में बहुत अच्छे लगोगे। कांता
- 1:47:39प्रसाद ने भी शौर्य और शिप्रा की तारीफ
- 1:47:41करते हुए कहा पर एक बात है जो मुझे समझ
- 1:47:44नहीं आ रहा है कि जब तुम दोनों पति-पत्नी
- 1:47:46हो तो फिर एक साथ क्यों नहीं थे? मैं
- 1:47:49क्या? कोई भी यहां तुम दोनों को देखकर यह
- 1:47:52नहीं समझ सकता था कि तुम दोनों पतिपत्नी
- 1:47:54हो सकते हो। शौर्य समझ गया कि कांता
- 1:47:57प्रसाद जानबूझकर इस बात को ज्यादा तुल दे
- 1:48:00रहे हैं ताकि वे दोनों इस बारे में ज्यादा
- 1:48:02बात करें और जो उन दोनों के रिश्ते के बीच
- 1:48:05में थोड़ी सी दूरी है वो खत्म हो सके।
- 1:48:08कांता प्रसाद जी हम दोनों की शादी जो है
- 1:48:11वह कोई आम शादी नहीं है। इसमें बहुत सारे
- 1:48:14पेंच हैं। अभी मैं अगर आपको समझाना भी
- 1:48:16चाहूं तो यह इतनी आसानी से समझ में आने
- 1:48:19वाला नहीं है। इसलिए अभी इस बात को छोड़ते
- 1:48:22हैं। आप भी शायद लेट हो रहे हैं। इसलिए
- 1:48:24अभी हम यहां से निकलते हैं। शौर्य एक तरह
- 1:48:28से कांता प्रसाद को वार्निंग देते हुए
- 1:48:30बोला कि अब आप इस बात को यहीं विराम दे
- 1:48:33दीजिए। शौर्य की बात सुनकर कांता प्रसाद
- 1:48:36जी मुस्कुराते हुए बोले कोई बात नहीं मैं
- 1:48:39इस बारे में तसल्ली से शिप्रा से बाद में
- 1:48:42बात कर लूंगा। इसके बाद कांता प्रसाद जी
- 1:48:45राजा साहब के साथ पार्टी से चले गए। शौर्य
- 1:48:48भी शिप्रा के पास आया और बोला तो अब चलें।
- 1:48:52शौर्य अब इसलिए भी जल्दी करना चाहता था
- 1:48:54क्योंकि वह समझ रहा था कि अगर एक बार फिर
- 1:48:57से नताशा ने उसे पकड़ लिया तो फिर वह इतनी
- 1:49:00जल्दी जा नहीं पाएगा। या हो सकता है कि
- 1:49:03नताशा के साथ उसे उसके होटल जाना पड़े।
- 1:49:06उसने देखा था कि नताशा अभी रत्नाकर
- 1:49:08शेट्टी, हर्षल मेहता और बलवंत राय के साथ
- 1:49:11मीटिंग कर रही थी। इसलिए यह समय उसे यहां
- 1:49:14से जाने के लिए उचित जान पड़ा। यहां से
- 1:49:17जाने के बाद वो नताशा से बात कर लेगा। ऐसा
- 1:49:19उसने सोचा। शौर्य विक्रम की और मुरा और
- 1:49:22विक्रम से बोला। ठीक है सर मैं अभी निकलता
- 1:49:25हूं। कल आपसे मिलूंगा। शौर्य की बात सुनकर
- 1:49:29विक्रम के चेहरे पर हल्का सा आश्चर्य का
- 1:49:31भाव भी प्रकट हुआ। पर जल्दी ही उसने खुद
- 1:49:34को नॉर्मल कर लिया और बोला, ठीक है कल
- 1:49:37मिलते हैं। विक्रम से बात होने के बाद
- 1:49:40शौर्य ने मेनका से कहा, "मेरी कार
- 1:49:42तुम्हारे होटल में ही खड़ी है। कल आकर
- 1:49:44वहां से ले लूंगा।" मेनका ने मुस्कुरा कर
- 1:49:47कहा, "तुम कार की चिंता मत करो। वह कहीं
- 1:49:50जाने वाला नहीं है। तुम आराम से कल आ
- 1:49:52जाना।"
- 1:49:53शिप्रा शौर्य को विक्रम और मेनका से विदा
- 1:49:56लेते हुए देख रही थी। उसे उनके बीच हो रही
- 1:49:58बातों में कुछ अजीब सा लग रहा था। पर वह
- 1:50:01समझ नहीं पा रही थी कि उनके बीच में ऐसा
- 1:50:03क्या है जो उसे अजीब तो लग रहा है पर समझ
- 1:50:06नहीं आ रहा है। जब शौर्य उसके साथ होटल से
- 1:50:09बाहर की तरफ बढ़ गया तो उसने भी अपने
- 1:50:11दिमाग से इस बात को झटक दिया। होटल से
- 1:50:14बाहर आने के बाद शौर्य ने शिप्रा से कहा।
- 1:50:17तुम अपने कार की चाबी मुझे दे दो। मैं उसे
- 1:50:20पार्किंग से बाहर निकाल लाता हूं। शिप्रा
- 1:50:22ने अपनी कार की चाबी शौर्य की तरफ बढ़ा
- 1:50:25दिया। शौर्य गया और जल्दी से शिप्रा की
- 1:50:27कार लेकर वापस आ गया। शिप्रा और मेघना
- 1:50:30दोनों कार के पीछे वाली सीट पर आकर बैठ
- 1:50:33गए। शौर्य ने कार आगे बढ़ा दिया। पर कोई
- 1:50:36था जो बाहर नजरें गराए शौर्य की एक-एक
- 1:50:40एक्टिविटी को देख रहा था। मोबाइल उसके कान
- 1:50:42पर लगा हुआ था। उसने किसी से कहा वो होटल
- 1:50:46से निकल गया है। मैं उसकी कार का नंबर
- 1:50:48तुम्हें मैसेज कर देता हूं। देख लेना आज
- 1:50:51वह बचना नहीं चाहिए। इतना कहकर उस शख्स ने
- 1:50:54किसी को मैसेज किया और अपनी कार को आगे
- 1:50:57बढ़ा दिया। शौर्य ने कार आगे बढ़ा दिया।
- 1:51:00अभी वह कुछ ही आगे गया था कि उसका फोन
- 1:51:02बजने लगा। उसने नंबर की तरफ ध्यान दिया तो
- 1:51:05यह नताशा कपूर का नंबर था। शौर्य को जिस
- 1:51:08बात का डर था वही हुआ। वो नताशा से बिना
- 1:51:11कहे ही होटल से निकल गया था। इसीलिए उसे
- 1:51:14यह उम्मीद तो थी कि जल्दी ही नताशा उसको
- 1:51:16नहीं देखेगी तो जरूर फोन करेगी। पर इतनी
- 1:51:20जल्दी उसका फोन आ जाएगा इसकी उम्मीद शौर्य
- 1:51:22को नहीं था। शौर्य हिचकिचाते हुए फोन
- 1:51:25उठाया और अपने कान से लगाया तो दूसरी तरफ
- 1:51:28से नताशा की आवाज आई। कहां हो तुम? मामू
- 1:51:33मुझे कुछ काम आ गया था। इसीलिए अचानक
- 1:51:35निकलना पड़ा। क्या हुआ? कुछ काम था क्या?
- 1:51:39शौर्य अटकते हुए बोला। कमाल है। कुछ काम
- 1:51:43होगा तभी फोन करूंगी। तुमको जाना ही था तो
- 1:51:46कम से कम बोल कर तो जाते। नताशा शिकायती
- 1:51:49लहजे में बोली, अचानक ही निकलना पड़ा। कल
- 1:51:52मिलता हूं तुमसे। इतना बोलकर शौर्य ने फोन
- 1:51:55रख दिया। शौर्य ने बैक मिरर में शिप्रा की
- 1:51:58तरफ देखा तो उसे अपनी तरफ ही देखते पाया।
- 1:52:01शिप्रा का ध्यान भी शौर्य की तरफ था।
- 1:52:03शौर्य के बात करने के अंदाज से शिप्रा समझ
- 1:52:06गई थी कि जरूर यह फोन नताशा का ही होगा।
- 1:52:09अभी शिप्रा यह सोच ही रही थी कि मेघना ने
- 1:52:12शौर्य से पूछ लिया। किसका फोन था? कहीं
- 1:52:14नताशा का तो नहीं था। शौर्य को मेघना पर
- 1:52:17गुस्सा भी आया कि वह सब कुछ समझते-बूझते
- 1:52:20भी जानबूझकर उससे यह सवाल कर रही है।
- 1:52:23मजबूरन उसे बोलना पड़ा। हां, उसी का फोन
- 1:52:26था। अच्छा क्या कह रही थी? मेघना को
- 1:52:31शिप्रा के सामने शौर्य से यह सवाल करने
- 1:52:33में मजा आ रहा था। जबकि शौर्य मेघना से
- 1:52:36चिढ़कर बोला, तुम्हें यह जानने में इतना
- 1:52:38इंटरेस्ट क्यों आ रहा है कि वो मुझसे क्या
- 1:52:40कह रही थी? मैंने तो बस उत्सुकता बस पूछ
- 1:52:43लिया। तुम्हें नहीं बताना है तो मत बताओ।
- 1:52:46मेघना मुस्कुराती हुई बोली उसे उम्मीद था
- 1:52:49कि शौर्य का कुछ ऐसा ही रिएक्शन होगा।
- 1:52:51जबकि शिप्रा का चेहरा यह जानकर मुरझा गया
- 1:52:54कि जैसा वह सोच रही थी वही बात थी। फोन
- 1:52:57नताशा का ही था। शिप्रा सोचने लगी कितना
- 1:53:01अच्छा होता अगर नताशा भी उस वक्त वहीं
- 1:53:03होती जब उसने राजा साहब के सामने शौर्य के
- 1:53:06साथ शादीशुदा होने के बारे में बताया था।
- 1:53:08उसने सोच लिया अगली बार वह जब भी नताशा से
- 1:53:11मिलेगी तो वह जरूर उसके सामने यह बात
- 1:53:14जाहिर कर देगी कि वह शौर्य की पत्नी है।
- 1:53:17शिप्रा इस बात से भी हैरान थी कि राजा
- 1:53:19साहब शौर्य को कैसे जानते थे और उसे यह
- 1:53:22बात पहले से क्यों पता नहीं था। शौर्य
- 1:53:24जैसे मामूली इंसान का राजा साहब से जान
- 1:53:27पहचान होना कोई छोटी बात तो नहीं थी। उसने
- 1:53:30शौर्य से पूछ लिया। तुम राजा साहब को कैसे
- 1:53:33जानते हो? शौर्य समझ रहा था कि इस तरह की
- 1:53:36बात शिप्रा के मन में जरूर चल रही होगी।
- 1:53:39इसीलिए देर सवेेर वो उससे इस बारे में
- 1:53:41जरूर पूछेगी। इसीलिए शौर्य ने पहले ही सोच
- 1:53:45लिया था कि वो शिप्रा को इस बात का क्या
- 1:53:47जवाब देगा। मैं मेघा के कारण राजा साहब से
- 1:53:50मिल पाया था जिसके कारण वो मुझे पहले से
- 1:53:53जानते थे और फिर मेनका के कारण भी उनसे
- 1:53:56एकद बार मिलना हो गया था। मेघा के कारण पर
- 1:54:00मेघा राजा साहब को कैसे जान सकती है?
- 1:54:03शिप्रा को विश्वास नहीं हो रहा था कि मेघा
- 1:54:05के कारण शौर्य राजा साहब से मिला होगा।
- 1:54:08दरअसल कुछ समय पहले राजा साहब को हार्ट
- 1:54:11अटैक आया था। तब वह सिटी हॉस्पिटल में ही
- 1:54:13भर्ती थे। जहां मेघा ने उनकी खूब सेवा की
- 1:54:17थी। इसीलिए वह मेघा को बहुत स्नेह करने
- 1:54:19लगे। यहां तक कि एक बार राजा साहब का ही
- 1:54:22एक रिश्तेदार ने मेघा के साथ बदतमीजी करने
- 1:54:25की कोशिश की तो राजा साहब ने उसे पनिशमेंट
- 1:54:27के तौर पर मेडिकल कॉलेज से ही निकाल दिया।
- 1:54:30शौर्य ने अपनी कहानी को थोड़ा चाशनी में
- 1:54:33लपेटकर शिप्रा को सुना दिया। यह कहानी ऐसी
- 1:54:36थी कि इस पर शिप्रा के अविश्वास करने का
- 1:54:38कोई कारण नहीं था। मानना पड़ेगा तुम हो
- 1:54:42बहुत नसीब वाले। नहीं तो कहां कोई आम आदमी
- 1:54:45राजा साहब से अपनी पहचान बना पाता है और
- 1:54:48तुम तो उन्हें दादाजी बोलकर बुला रहे थे।
- 1:54:51मेघना गहरी आंखों से शौर्य को घूरती हुई
- 1:54:53बोली। मेनका के कारण वह भी राजा साहब को
- 1:54:57दादाजी बोलती है। इसीलिए मैंने भी उन्हें
- 1:54:59दादाजी बोलना शुरू कर दिया और उन्हें यह
- 1:55:01बात पसंद भी आती है। जो भी कोई उन्हें
- 1:55:04पसंद आता है, वह उनसे कोई रिश्ता बना लेते
- 1:55:06हैं। शौर्य सफाई देते हुए बोला, शिप्रा का
- 1:55:10मन भी शौर्य से बातें करने का कर रहा था।
- 1:55:13पर वह समझ नहीं पा रही थी कि वो उससे क्या
- 1:55:15बात करें। उसे लग रहा था कि शौर्य के साथ
- 1:55:18अपने रिश्ते को नॉर्मल करना है तो उसे कम
- 1:55:21से कम आपस में बातें तो करनी पड़ेगी। नहीं
- 1:55:24तो दोनों के बीच गैप बढ़ता चला जाएगा।
- 1:55:27तुम्हारे और नताशा कपूर के बीच में कुछ चल
- 1:55:30रहा है क्या? अचानक ही मेघना ने शौर्य से
- 1:55:33नताशा के बारे में पूछ लिया। मेघना की बात
- 1:55:36सुनकर शिप्रा मेघना की ओर देखने लगी थी।
- 1:55:39उसे मेघना का सवाल सुनकर थोड़ा अजीब लगा।
- 1:55:41पर इस बात पर वह भी शौर्य की तरफ देखने
- 1:55:44लगी। जबकि शौर्य यह उम्मीद नहीं कर रहा था
- 1:55:47कि मेघना उससे ऐसे सवाल भी कर सकती है वह
- 1:55:50भी शिप्रा के सामने। शौर्य को मेघना पर
- 1:55:53गुस्सा भी आया पर वो इस समय ज्यादा कुछ
- 1:55:56शिप्रा के सामने बोल नहीं सकता था। फिर भी
- 1:55:58शौर्य को मेघना के सवाल का जवाब तो देना
- 1:56:01ही था। सो उसने बेरुखी से मेघना से कहा।
- 1:56:04तुम कुछ ज्यादा ही बेसिर पैर का सवाल नहीं
- 1:56:07कर रही हो। इसमें बेसिर पैर का क्या सवाल
- 1:56:10है? तुम सिंपली जवाब भी दे सकते हो। मेघना
- 1:56:13लापरवाही से शिप्रा की ओर देखती हुई बोली
- 1:56:16तुम्हें दूसरों के फटे में उंगली डालने
- 1:56:18में ज्यादा ही मजा आता है। यह ज्यादा
- 1:56:20अच्छा होगा कि तुम यह सवाल नताशा से पूछ
- 1:56:23लेती। शौर्य चिढ़कर बोला, तुम अगर जवाब
- 1:56:26नहीं देते हो तो उससे भी पूछ सकती हूं।
- 1:56:29मेघना समझ रही थी कि यह सवाल शौर्य को
- 1:56:32अनकंफर्टेबल फील करा रहा था। पर वह
- 1:56:35जानबूझकर इस सवाल पर जोर दे रही थी। आगे
- 1:56:38शौर्य कुछ बोला नहीं। वो सामने देखने लगा।
- 1:56:41तभी उसने अचानक तेज ब्रेक लिया। पहिए की
- 1:56:44घिसटने की आवाज आई। पीछे बैठी शिप्रा और
- 1:56:47मेघना आगे की सीट से टकराते टकराते बची।
- 1:56:50क्या हुआ? ऐसे ब्रेक क्यों लगाए? शिप्रा
- 1:56:53ने शौर्य से पूछा। तभी मेघना ने अपनी कार
- 1:56:56के आगे खड़ी कार को देखा तो बोली, "यह
- 1:56:59हमारी गाड़ी के सामने किसने अपनी गाड़ी
- 1:57:01खड़ी कर दी?" शिप्रा ने जब मेघना की बात
- 1:57:04को सुना, तो उसने भी अपनी कार के आगे खड़ी
- 1:57:06कार की तरफ देखा। उसकी गाड़ी के आगे एक
- 1:57:09थार खड़ी थी। शौर्य चुपचाप सामने खड़ी
- 1:57:12गाड़ी वाले की प्रतिक्रिया देखना चाह रहा
- 1:57:14था। तुम चुप क्यों हो? कुछ तो बोलो। मेघना
- 1:57:18अधीर होकर बोली। उसे कुछ बुरा होने की
- 1:57:21आशंका हो रही थी। तुम चुपचाप बैठी रहो। जो
- 1:57:24भी होगा अभी सामने आ जाएगा। शौर्य शांति
- 1:57:28से आगे वाली गाड़ी की ओर देखता हुआ बोला।
- 1:57:31तुम गाड़ी को पीछे लेकर आगे क्यों नहीं
- 1:57:33निकाल लेते? मेघना ने अभी इतना कहा ही था
- 1:57:36कि उसने देखा आगे खड़ी थार से दो
- 1:57:38हट्टे-कट्टे जवान बाहर आए और उसकी कार की
- 1:57:41तरफ बढ़े। मेघना उन दोनों हट्टे-कट्टे
- 1:57:44बदमाशों को देखकर घबराती स्वर में बोली
- 1:57:47तुम इंतजार किस बात का कर रहे हो? गाड़ी
- 1:57:49पीछे लो। शौर्य मेघना की घबराई आवाज सुनकर
- 1:57:53बोला एक बार अपने पीछे देख लो। शौर्य की
- 1:57:56बात सुनकर मेघना ने अपने पीछे देखा तो उसे
- 1:57:59अपनी कार से सट कर खड़ी एक दूसरी कार नजर
- 1:58:02आई। पीछे वाली कार शिप्रा की कार के इतने
- 1:58:05सटकर खड़ी थी कि शौर्य चाहकर भी अपनी कार
- 1:58:08को पीछे नहीं कर सकता था। क्या हम लोग
- 1:58:11किसी बदमाश के द्वारा घेर लिए गए हैं?
- 1:58:13बोलते हुए मेघना के चेहरे पर डर नजर आने
- 1:58:16लगा था। पर पता नहीं क्यों शिप्रा शौर्य
- 1:58:19को शांत देखकर खुद भी शांत थी। क्योंकि
- 1:58:22उसने ऐसी विषम परिस्थिति से निपटते हुए
- 1:58:25शौर्य को कई बार देख लिया था। इसीलिए उसे
- 1:58:28विश्वास था कि शौर्य इस स्थिति को भी
- 1:58:30संभाल लेगा। मेघना ने जब शिप्रा के चेहरे
- 1:58:33पर कोई घबराहट नहीं देखा तो वह आश्चर्य से
- 1:58:36बोली क्या तुम्हें इस सब से घबराहट नहीं
- 1:58:39हो रही है? तुम फालतू में इतना घबरा रही
- 1:58:41हो श्रवण सब संभाल लेगा। शिप्रा इत्मीनान
- 1:58:45से बोली मेघना को समझ नहीं आया कि जो
- 1:58:48शिप्रा श्रवण के इतने करीब भी नहीं है,
- 1:58:51उसे श्रवण पर इतना यकीन कैसे है कि वह
- 1:58:53संभाल लेगा। इसी समय उन दोनों बदमाशों में
- 1:58:57से एक ने शौर्य के साइड वाले दरवाजे के
- 1:59:00शीशे पर अपनी उंगली से ठक-ठक किया। शौर्य
- 1:59:03ने बिना किसी एक्सप्रेशन के अपनी तरफ का
- 1:59:06शीशा नीचे किया और बोला, "कौन हो तुम? और
- 1:59:09हमारा रास्ता क्यों रोका है?" पहले तुम
- 1:59:12गाड़ी से बाहर आ जाओ। फिर हम तुम्हारे
- 1:59:14सवाल का जवाब देते हैं। बाहर खड़े
- 1:59:17मुस्टंडे ने जवाब दिया, पर मैं बाहर क्यों
- 1:59:20आऊं? तुम अपनी गाड़ी को मेरे सामने से
- 1:59:22हटाओ। हम लेट हो रहे हैं। शौर्य तल्ख लहजे
- 1:59:25में बोला, "तुम आराम से गाड़ी से बाहर आते
- 1:59:28हो या फिर हम अपनी तरह से तुम्हें गाड़ी
- 1:59:31वो मुस्टंडा रूखे स्वर में बोला। शौर्य एक
- 1:59:35पल उस बदमाश की आंखों में देखता रहा। फिर
- 1:59:38वो कार का दरवाजा खोलकर बाहर आ गया। पर
- 1:59:42बाहर आने से पहले उसने शिप्रा और मेघना से
- 1:59:45कहा, बाहर कुछ भी हो जाए पर तुम दोनों कार
- 1:59:48से बाहर मत आना।
- 1:59:50बाहर आकर शौर्य उस बदमाश से बोला, लो मैं
- 1:59:54आ गया बाहर। अब बताओ क्या चाहते हो? चलो
- 1:59:58मेरे साथ। तुम्हें मेरे उस्ताद ने बुलाया
- 2:00:00है। वो बदमाश शौर्य की कलाई पकड़ते हुए
- 2:00:04बोला। शौर्य ने अपने हाथ को झटका देकर उस
- 2:00:08बदमाश से अपनी कलाई चुराई और शांत स्वर
- 2:00:10में बोला। तुम्हारे उस्ताद का मुझसे मिलना
- 2:00:13है तो उनसे कहो वो यहां आकर मुझसे मिलने।
- 2:00:17उस बदमाश को विश्वास नहीं हुआ कि शौर्य ने
- 2:00:19इतनी आसानी से उससे अपनी कलाई चुरा ली। वो
- 2:00:22गुस्से में आकर शौर्य का कालर पकड़ लिया
- 2:00:25और बोला तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुमने
- 2:00:28मेरे हाथ को झटका दिया। पर अगले ही पल
- 2:00:31उसकी कलाई पर शौर्य की हाथ का तेज पंच
- 2:00:34लगा। एक पल को तो उस बदमाश को लगा कि किसी
- 2:00:37ने उसकी कलाई पर लोहे का रावण मारा हो।
- 2:00:40उसके हाथ के साथ पूरा शरीर झनझना गया। वह
- 2:00:44अविश्वास भरी नजरों के साथ शौर्य को देखने
- 2:00:47लगा। तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुमने मुझ
- 2:00:50पर हाथ उठाया। अब देखो मैं तुम्हारा क्या
- 2:00:52हाल करता हूं। इतना कहकर वो बदमाश गुस्से
- 2:00:56में शौर्य पर झपटा। पर शौर्य ने उसे कोई
- 2:00:59मौका नहीं दिया और अपनी जगह पर खड़े-खड़े
- 2:01:01अपनी पैर का तेज किक उसकी छाती पर दिया।
- 2:01:05वो बदमाश उड़ता हुआ अपने पीछे खड़े अपने
- 2:01:08साथी से टकराया और उसको लिए हुए जमीन पर
- 2:01:11गिर गया। लुढ़कते हुए वह दोनों अपनी थार
- 2:01:14के पास जाकर रुके। तभी थार के पीछे का
- 2:01:17दरवाजा खुला और उसमें से एक आदमी बाहर आया
- 2:01:20और अपने सामने जमीन पर पड़े अपने साथी की
- 2:01:23तरफ देखा और झुक कर उसे उठाया और बोला
- 2:01:26इतने मुटंडे हो गए हो फिर भी एक कमजोर
- 2:01:29आदमी से पीट गए उस्ताद वो कमजोर तो
- 2:01:32बिल्कुल नहीं है आपने उसे कमजोर आंख लिया
- 2:01:35है वो बदमाश अपने सामने खड़े उस्ताद के
- 2:01:38पीछे शौर्य की तरफ देखता हुआ बोला अच्छा
- 2:01:42ऐसी बात है तो फिर मैं भी तो देखूं उस
- 2:01:44पहलवान को इतना कहकर उस्ताद शौर्य की तरफ
- 2:01:47पलटा और जैसे ही उसकी निगाह शौर्य के
- 2:01:50चेहरे पर पड़ी उसकी टांगे कांपने लगी। यह
- 2:01:54उस्ताद कोई और नहीं छगन था। छगन के पीछे
- 2:01:57खड़ा बदमाश जब अपने उस्ताद की टांगे
- 2:02:00कांपती देखी तो वो हैरानी से बोला। क्या
- 2:02:03हुआ उस्ताद? आपकी टांगे क्यों कांप रही
- 2:02:05हैं? पर छगन के मुंह से कोई आवाज नहीं
- 2:02:08निकली। इसी समय थार की दूसरी साइड का
- 2:02:11दरवाजा खुला और उससे मगन बाहर निकला। उसकी
- 2:02:14भी निगाह जैसे ही शौर्य पर पड़ा उसके भी
- 2:02:17चेहरे का रंग उड़ गया। वो छगन के पास आकर
- 2:02:20खड़ा हो गया। छगन ने खुद को संयत किया और
- 2:02:23शौर्य से बोला उस्ताद आप यहां आप यहां
- 2:02:27कैसे क्यों मेरे ऊपर घर से निकलने पर
- 2:02:30प्रतिबंध लगा हुआ है जो मैं यहां नहीं हो
- 2:02:33सकता। शौर्य शांति से बोला। उसे मन ही मन
- 2:02:36छगन मगन पर तरस आ रहा था जो बार-बार उसके
- 2:02:39रास्ते में आ रहा था। उस्ताद मुझसे गलती
- 2:02:42हो गई जो मैंने बिना जाने यह काम ले लिया
- 2:02:45कि मुझे किसको सबक सिखाना है। छगन सफाई
- 2:02:48देता हुआ बोला। चलो मान ली तुम्हारी बात
- 2:02:52पर तुम्हें यह तो पता है ना कि तुमको हमें
- 2:02:54सबक सिखाने का काम किसने दिया। छगन के पास
- 2:02:58अब यह बताने के अलावा कोई चारा रह नहीं
- 2:03:00गया। शौर्य के पीछे खड़ा बदमाश अपने
- 2:03:04उस्ताद को शौर्य को उस्ताद कहते सुनकर
- 2:03:06हैरान था। जबकि छगन ने मन ही मन शौर्य को
- 2:03:10सुपारी देने वाले का नाम बताने का इरादा
- 2:03:12कर लिया था। छगन के पास दूसरा कोई रास्ता
- 2:03:15नहीं था। उसकी किस्मत खराब थी कि बार-बार
- 2:03:19उसका सामना शौर्य से हो जा रहा था। शौर्य
- 2:03:22के पूछने पर कि उसे किसने उसकी सुपारी दी
- 2:03:25है? इसके जवाब में छगन बोला। विजय दीवान
- 2:03:29वो विजय दीवान है उस्ताद जिसने आपका चेहरा
- 2:03:32बिगाड़ने की सुपारी दी थी। शौर्य को यही
- 2:03:35उम्मीद था। जैसे ही छगन ने उसे कहा था कि
- 2:03:38किसी ने उसे उसका चेहरा बिगाड़ने की
- 2:03:40सुपारी दी है। शौर्य का सीधा ध्यान विजय
- 2:03:43दीवान के ऊपर ही गया था कि वही इस सबके
- 2:03:46पीछे हो सकता है। शौर्य ने छगन से पूछा तो
- 2:03:50फिर अब क्या इरादा है तुम्हारा? आप कैसी
- 2:03:53बात करते हैं उस्ताद मेरी क्या हिम्मत हो
- 2:03:55सकती है कि मैं आपसे पंगे लूं। छगन
- 2:03:58खुशामदी स्वर में बोला। कितने पैसे में
- 2:04:00उसने तुम्हें मेरी सुपारी दी थी? शौर्य
- 2:04:03छगन से पूछा। 5 लाख में छगन सकुचाते हुए
- 2:04:08बोला ठीक है मैं तुम्हें 6 लाख दूंगा
- 2:04:11तुम्हें यही काम विजय दीवान के साथ करना
- 2:04:14है कर लोगे शौर्य छगन की आंखों में देखते
- 2:04:17हुए बोला आपके लिए तो मैं यह काम फ्री में
- 2:04:20ही कर दूंगा उस्ताद छगन को यह जानकर
- 2:04:23तसल्ली हुई कि शौर्य उससे नाराज नहीं हुआ
- 2:04:26नहीं तुम्हें फ्री में यह करने की कोई
- 2:04:28जरूरत नहीं है पर हां उसका चेहरा नहीं
- 2:04:31बिगाड़ना उसका कोई एक अंग हाथ हाथ या पैर
- 2:04:35जरूर तोड़ देना। शौर्य ने समझाया। शिप्रा
- 2:04:39जो गाड़ी के अंदर ही बैठी बाहर क्या हो
- 2:04:41रहा है यह जानने की कोशिश कर रही थी। जब
- 2:04:44उसने शौर्य के सामने छगन को देखा तो वो
- 2:04:46कार से बाहर आ गई। वो छगन को देखकर उसके
- 2:04:49पास आते हुए बोली तो तुमने हमारा रास्ता
- 2:04:52रोका है। जब छगन ने शिप्रा को अपने सामने
- 2:04:55देखा तो वह बोला अरे भाभी जी आप हमारी
- 2:04:59हिम्मत हो सकती है कि हम आपका रास्ता
- 2:05:01रोके। कुछ गलतफहमी हो गई थी। अब सब ठीक
- 2:05:04है। जब शौर्य ने देखा कि शिप्रा कार से
- 2:05:07बाहर आ गई है तो वह अब ज्यादा कुछ उसके
- 2:05:09सामने बोल नहीं सकता था। इसीलिए उसने बात
- 2:05:12को समाप्त करते हुए कहा, "अल् गाड़ी को
- 2:05:15सामने से हटाओ।" शौर्य के कहने भर की देर
- 2:05:19थी कि तुरंत छगन मगन जाकर अपनी गाड़ी में
- 2:05:21बैठ गए। शौर्य ने शिप्रा की ओर पलट कर
- 2:05:24कहा, चलो चलते हैं। दोनों कार में आकर बैठ
- 2:05:28गए। शौर्य ने कार आगे बढ़ा दी। छगन मगन ने
- 2:05:32हमारा रास्ता क्यों रोका था? शिप्रा ने
- 2:05:34उत्सुकता वश पूछा। बोला तो था उसने कुछ
- 2:05:38गलतफहमी हो गई थी। इसीलिए उसने रास्ता रोक
- 2:05:40लिया था। शौर्य ने जवाब दिया। तुम सही बात
- 2:05:44बताओगे? मैं बच्ची नहीं हूं जो उसने ऐसा
- 2:05:47कह दिया और मैं उसकी बात पर विश्वास कर
- 2:05:49लूंगी। शिप्रा रूखे स्वर में बोली। शौर्य
- 2:05:53को कुछ कहते नहीं बना। शिप्रा पहली बार
- 2:05:55उससे इतने हक से बात कर रही थी। जब अभी भी
- 2:05:58उसने शौर्य को चुप देखा तो वह दोबारा बोली
- 2:06:01अरे तुम क्यों इस बात के पीछे पड़ी हो?
- 2:06:04मामला निपट तो गया। शौर्य टालने की नियत
- 2:06:07से बोला पर जितना शौर्य शिप्रा को असली
- 2:06:10बात बताने से मना कर रहा था, उतना ही
- 2:06:12ज्यादा शिप्रा की उत्सुकता उस बात को
- 2:06:14जानने के लिए बढ़ती जा रही थी। मुझे जानना
- 2:06:18है कि छगन ने हमारा रास्ता क्यों रोका था।
- 2:06:21शिप्रा पहले की तुलना में थोड़ा शांत स्वर
- 2:06:24में बोली। मेघना उन दोनों के बीच हो रही
- 2:06:27बातों को धैर्य से सुन रही थी। उसे भी समझ
- 2:06:30नहीं आ रहा था कि उन बदमाशों ने शौर्य का
- 2:06:32रास्ता क्यों रोका था और अगर किसी कारण से
- 2:06:35रोका था तो फिर इतनी आसानी से उनका रास्ता
- 2:06:37छोड़ क्यों दिया। उसे नहीं पता था कि
- 2:06:40शौर्य और छगन मगन के बीच पहले ही क्या
- 2:06:43कहानी घट रखी थी। इसीलिए उसके भी मन में
- 2:06:46यह जानने की जिज्ञासा थी कि उन बदमाशों ने
- 2:06:49इतनी आसानी से उनका रास्ता कैसे छोड़ दिया
- 2:06:52था। शिप्रा के सवाल के जवाब में शौर्य ने
- 2:06:55कहा, विजय दीवान ने इसको हमें सबक सिखाने
- 2:06:58के लिए भेजा था। क्या शिप्रा का मुंह
- 2:07:02आश्चर्य से खुला रह गया। उसने यह उम्मीद
- 2:07:05नहीं की थी कि विजय दीवान इस स्तर तक जा
- 2:07:08सकता था। मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि
- 2:07:11विजय दीवान ऐसी हरकत कर सकता है। मेघना को
- 2:07:14भी यह जानकर बहुत गुस्सा आया था कि विजय
- 2:07:17दीवान ने ऐसी हरकत की थी। वो गुस्से में
- 2:07:19बोली तो फिर हम उसके खिलाफ क्या करने जा
- 2:07:22रहे हैं? शौर्य ने जब मेघना को गुस्से में
- 2:07:25देखा तो उसने उससे कहा अब तुम्हें क्या हो
- 2:07:28गया? तुम क्यों इतना गुस्सा हो रही हो?
- 2:07:32यह क्या बात हुई? विजय दीवान ने हमें
- 2:07:34मारने के लिए गुंडे को भेजा और हम चुपचाप
- 2:07:37घर जा रहे हैं। उसके खिलाफ एक कंप्लेन तो
- 2:07:39कर ही सकते हैं। मेघना अभी भी गुस्से में
- 2:07:42थी। वो सिर्फ मुझे सबक सिखाना चाहता था।
- 2:07:45तुम दोनों से उसको कोई मतलब नहीं था।
- 2:07:47शौर्य मेघना को शांत करना चाहता था। इसका
- 2:07:50क्या मतलब हुआ? यह क्या छोटी बात है कि
- 2:07:52उसने तुम्हारे लिए बदमाश को भेजा। अगर
- 2:07:55उसने यह बदमाश हमारे लिए भेजा हुआ होता तो
- 2:07:57क्या तुम ऐसे ही इस बात को छोड़ देते?
- 2:08:00मेघना को यह बात और गुस्सा दिला रहा था कि
- 2:08:03शौर्य इस बात की अहमियत को नहीं समझ रहा
- 2:08:05था। शौर्य को भी मेघना का कंसर्न अपने लिए
- 2:08:08देखकर अच्छा लगा। वो मेघना को तसल्ली देता
- 2:08:11हुआ बोला, "तुमने यह कैसे समझ लिया कि मैं
- 2:08:14इस बात को इतनी आसानी से जाने दूंगा? जो
- 2:08:16हरकत उसने की है उसकी सजा तो उसको मिलकर
- 2:08:19रहेगी। अच्छा ऐसा क्या करोगे उसके साथ?
- 2:08:22मेघना अब तक थोड़ा शांत हो गई थी। जल्दी
- 2:08:25ही तुम्हें पता चल जाएगा। बस थोड़ा इंतजार
- 2:08:28करो। शौर्य मेघना को तसल्ली देता हुआ
- 2:08:30बोला। तुम हर बात को मिस्ट्री क्यों बना
- 2:08:33देते हो? सीधे से जवाब नहीं दे सकते। इस
- 2:08:36बार शिप्रा थोड़ा चिढ़कर बोली। उसे भी
- 2:08:39शौर्य की यह बात पसंद नहीं आई कि वो सीधा
- 2:08:41जवाब ना देकर बस बोल दिया कि जल्दी ही पता
- 2:08:43चल जाएगा। क्या तब तक वह इसी सोच में उलझी
- 2:08:46रहेगी? शिप्रा की बेचैनी देखकर शौर्य के
- 2:08:49चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। वो समझ गया
- 2:08:52कि जब तक उन दोनों को पता नहीं चल जाएगा
- 2:08:54कि शौर्य विजय दीवान को कैसे सबक सिखाने
- 2:08:57वाला है तब तक उनको चैन नहीं आएगा। यही
- 2:09:00सोचकर उसने कहा बस यह समझ लो जिस काम के
- 2:09:03लिए उसने छगन मगन को मेरे पास भेजा था। अब
- 2:09:06वही काम उसके साथ होगा। पर वो ऐसा क्यों
- 2:09:09करेगा? मेघना ने सवाल किया। तुम इस चक्कर
- 2:09:12में मत पड़ो कि वह ऐसा क्यों करेगा। बस यह
- 2:09:14जान लो कि जैसा मैंने कहा है वैसा ही
- 2:09:17होगा। शौर्य विश्वास के साथ बोला, शिप्रा
- 2:09:21तो पहले से जानती थी कि छगन मगन पर शौर्य
- 2:09:23का कैसा प्रभाव है। इसीलिए उसे शौर्य की
- 2:09:26बात पर कोई शक नहीं था। शौर्य की बात
- 2:09:28सुनकर मेघना ने शिप्रा की तरफ देखा। पर
- 2:09:30शिप्रा के चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे।
- 2:09:33इसके बाद मेघना ने कुछ और नहीं कहा। थोड़ी
- 2:09:36देर बाद शौर्य अपने मॉडल टाउन वाले घर पर
- 2:09:39था। दूसरे दिन राय हाउस में बलवंत राय के
- 2:09:42कमरे में बलवंत राय के सामने राजदीप राय,
- 2:09:44बृजभूषण राय और कुलवंत बैठे हुए थे। तभी
- 2:09:48वहां मौजूद सन्नाटे को तोड़ते हुए बलवंत
- 2:09:50राय की आवाज गूंजी। तो तुम यह कह रहे हो
- 2:09:53कि शिप्रा को यहां से गए हुए तीन-चार दिन
- 2:09:56हो गए और तुमने हमें बताना भी जरूरी नहीं
- 2:09:58समझा। बलवंत राय ने यह बात राजदीप जी को
- 2:10:01कहा था। राजदीप जी को बलवंत राय की बात पर
- 2:10:04गुस्सा भी आया। पर वह खुद को संयत करके
- 2:10:06बोले। उसने तो आपकी बात को सुनकर ही घर को
- 2:10:09छोड़ा था। पिताजी आपने ही तो कहा था अगर
- 2:10:12तुम्हें श्रवण से अलग नहीं होना है तो फिर
- 2:10:14उसके साथ ही क्यों नहीं रहती? उसके बाद ही
- 2:10:17शिप्रा यहां से चली गई थी। राजदीप जी की
- 2:10:20बात को सुनकर बलवंत राय थोड़े उखड़े स्वर
- 2:10:22में बोले। अरे यह बात तो मैंने उस समय
- 2:10:25गुस्से में कह दिया था। इसका यह मतलब
- 2:10:27थोड़े ही था कि मैं सचमुच चाहता था कि वह
- 2:10:29घर छोड़कर चली जाए। मैं तो बस उसके भले के
- 2:10:32लिए यह चाहता था कि वह श्रवण से तलाक लेने
- 2:10:35को तैयार हो जाए। पर आपकी उसी बात से वह
- 2:10:38श्रवण के साथ रहने चली गई। राजदीप जी जवाब
- 2:10:42देते हुए बोले, पर दादा जी देखा जाए तो यह
- 2:10:45एक तरह से ठीक भी है। कुछ ही दिनों में
- 2:10:47शिप्रा को पता चल जाएगा कि सपने और हकीकत
- 2:10:50में क्या फर्क होता है। जब उसे एक आम जीवन
- 2:10:53जीना पड़ेगा तो समझ आ जाएगा कि महल और
- 2:10:56झोपड़ी में रहने में क्या फर्क होता है।
- 2:10:58कुलवंत बीच में अपनी बात रखते हुए बोला,
- 2:11:01"तुम ऐसा क्यों समझ रहे हो कि शिप्रा को
- 2:11:03आम जीवन जीना पड़ेगा? भले श्रवण किसी
- 2:11:06काबिल ना हो पर शिप्रा खुद में इतनी
- 2:11:08काबिलियत रखती है कि वह अपने दम पर अपनी
- 2:11:11जिंदगी अच्छे से जी सकती है। तुम्हें पता
- 2:11:13है राजा साहब चंद्रभान राठौर ने शिप्रा को
- 2:11:16अपनी टेक्सटाइल कंपनी का सीईओ बना दिया
- 2:11:18है। क्या वहां उपस्थित सभी का मुंह यह
- 2:11:22सुनकर खुला का खुला रह गया। कुलवंत को तो
- 2:11:25यकीन नहीं हुआ कि जो उसने सुना है वह सही
- 2:11:28हो सकता है। राजदीप जी भी अविश्वास भरे
- 2:11:32स्वर में बोले यह आप क्या कह रहे हैं
- 2:11:34पिताजी? आपको कैसे पता कि राजा साहब ने
- 2:11:37शिप्रा को अपनी कंपनी का सीईओ बना दिया
- 2:11:40है। क्योंकि जिस समय उन्होंने यह बात कही
- 2:11:43थी, उस समय मैं वहीं मौजूद था। इसीलिए
- 2:11:46मुझे यह पता है। बलवंत राय ने राजदीप जी
- 2:11:49को आश्वस्त करते हुए कहा। बलवंत राय की
- 2:11:52बात सुनकर राजदीप जी को अपनी बेटी के लिए
- 2:11:54खुशी भी हुई। तुम शिप्रा को वापस घर बुला
- 2:11:57लो। बलवंत राय राजदीप जी से बोले पर
- 2:12:01पिताजी वो इस बात के लिए तैयार नहीं होगी।
- 2:12:04वो परसों घर आई थी तो मैंने उसे वापस आने
- 2:12:07के लिए कहा भी था पर वो तैयार नहीं हुई।
- 2:12:10मुझे नहीं लगता कि वो अभी घर वापस आएगी।
- 2:12:13राजदीप जी इंकार करते हुए बोले क्या
- 2:12:16तुम्हें अपनी बेटी की चिंता बिल्कुल नहीं
- 2:12:18है? तुम्हें पता है वह कितना बड़ा पोजीशन
- 2:12:20हासिल करने वाली है। क्या तुम्हें अच्छा
- 2:12:22लगेगा कि लोग यह कहें कि इतनी बड़ी सीईओ
- 2:12:26का पति एक भिखारी है? हमें कुछ भी करके
- 2:12:30उसको श्रवण से अलग करना पड़ेगा। बलवंत राय
- 2:12:33राजदीप जी को समझाते हुए बोले आप सही कह
- 2:12:37रहे हैं दादा जी। नहीं तो कहीं बाद में
- 2:12:39ऐसा ना हो जाए कि श्रवण के कारण शिप्रा की
- 2:12:42सीईओ की पोजीशन चली जाए। कलवंत बीच में
- 2:12:45अपनी बात रखते हुए बोला, राजदीप जी समझ
- 2:12:48नहीं पा रहे थे कि यह क्या हो रहा है।
- 2:12:50उसके पापा को अभी तक शिप्रा की फिक्र नहीं
- 2:12:52थी। जैसे ही उन्हें पता चला कि शिप्रा को
- 2:12:55राजा साहब ने अपनी कंपनी का सीईओ बना दिया
- 2:12:57है। उसके बाद ही बलवंत राय को शिप्रा की
- 2:13:00चिंता सताने लगी। पर उन्हें भी कहीं ना
- 2:13:02कहीं यह लगने लगा कि बलवंत राय शायद सही
- 2:13:05कह रहे हैं। शायद श्रवण कहीं शिप्रा की
- 2:13:07सफलता में बाधक ना बन जाए। यही सोचकर
- 2:13:10उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि शिप्रा
- 2:13:13इस बात के लिए तैयार होगी। उसने इसी कारण
- 2:13:15तो घर छोड़ दिया। तो क्या आपको लगता है कि
- 2:13:18वह श्रवण से तलाक लेने के लिए तैयार होगी?
- 2:13:21अगर वह सीधी तरह तैयार नहीं होती तो क्यों
- 2:13:24ना हम कोई ऐसी परिस्थिति तैयार करें जिसके
- 2:13:26कारण वह श्रवण से तलाक लेने को तैयार हो
- 2:13:28जाए। इस बार काफी देर से चुप बैठे बृजभूषण
- 2:13:32राय ने यह बात कही। तुम्हारे कहने का मतलब
- 2:13:35क्या हुआ? बलवंत राय बृजभूषण राय को देखते
- 2:13:38हुए बोले, पिताजी यह समझिए कि यह तुरंत
- 2:13:42होने वाला काम नहीं है। इसके लिए हमें
- 2:13:44धीरे-धीरे शिप्रा के मन में श्रवण के लिए
- 2:13:46ऐसी बात डालनी पड़ेगी कि श्रवण ना ही उसके
- 2:13:49लिए ठीक है और ना ही अपने परिवार के लिए।
- 2:13:52दूसरी तरफ हम श्रवण के दिमाग में भी यह
- 2:13:54बात डालने की कोशिश करेंगे कि उसके कारण
- 2:13:56शिप्रा की जिंदगी बर्बाद होने वाली है।
- 2:13:59गाहे बगाहे हम उसको उसकी औकात भी दिखाते
- 2:14:02रहेंगे। जिसके कारण वो खुद ही शिप्रा से
- 2:14:04अलग होने का डिसीजन ले ले। बृजभूषण जी ने
- 2:14:07अपनी योजना समझाई। बृजभूषण जी की बात
- 2:14:10सुनकर बलवंत राय भी बोले, तुम सही कह रहे
- 2:14:13हो। श्रवण के बारे में एक बात हम भी पक्के
- 2:14:16तौर पर कह सकते हैं कि भले ही वह भिखारी
- 2:14:18रहा है, पर उसे अपनी गैरत बड़ी प्यारी है।
- 2:14:21वो भी छोटी बातों को अपने दिल पर ले लेता
- 2:14:23है। अगर वह यहां अपनी बेइज्जती होते
- 2:14:25देखेगा तो हो सकता है कि गुस्से में वह
- 2:14:28जल्दी ही खुद ही शिप्रा से अलग हो जाएगा।
- 2:14:31पर क्या आपको लगता है कि यह सब इतना आसान
- 2:14:33है? राजदीप जी चिंतित स्वर में बोले, अभी
- 2:14:37यहां जो भी कुछ बातें हो रही थी, उन्हें
- 2:14:39यह पसंद तो नहीं आ रहा था, पर वह खामोशी
- 2:14:42से सुन रहे थे। उन्हें भी लगने लगा कि
- 2:14:44शायद बलवंत राय शिप्रा के लिए जो भी सोच
- 2:14:46रहे हैं, वही सही है। पर यह होगा कैसे
- 2:14:50पिताजी? इस बारे में भी तो प्लानिंग करनी
- 2:14:52पड़ेगी। बृजभूषण राय बोले परसों विहान और
- 2:14:56युविका की इंगेजमेंट पार्टी में दोनों को
- 2:14:58बुलाते हैं। फिर देखते हैं कि हम इसकी
- 2:15:00शुरुआत कैसे कर सकते हैं। बलवंत राय बोले
- 2:15:03दूसरे दिन शिप्रा जल्दी उठ गई थी। आज उसे
- 2:15:06राजा साहब की कंपनी में जाकर ज्वाइन करना
- 2:15:09था। उसके मन में बहुत सारे विचार चल रहे
- 2:15:12थे। उसने साथ में लेटी मेघना से पूछा। सुन
- 2:15:15ना तुम्हें कुछ समझ आया था कि राजा साहब
- 2:15:18ने अचानक मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने
- 2:15:20की कैसे सोच ली? मेघना अध खुली आंखों से
- 2:15:23उसे देखते हुए बोली, तुम्हारे दिमाग में
- 2:15:26सुबह-सुबह यही चल रहा है। अरे कैसे भी
- 2:15:28सोची क्या फर्क पड़ता है। तुम्हारे लिए तो
- 2:15:31अच्छा ही है। फिर भी कुछ तो तुम्हें समझ
- 2:15:34आया होगा कि उन्होंने कैसे यह फैसला कर
- 2:15:36लिया कि मैं उनकी कंपनी में सीईओ बनने के
- 2:15:39लिए उपयुक्त हूं। शिप्रा मेघना को उठाकर
- 2:15:42बैठाती हुई बोली। मेघना शिप्रा के चेहरे
- 2:15:45को घूरते हुए बोली। सच कहूं तो मुझे लगता
- 2:15:49है कि उन्हें तुम्हारी खूबसूरती पसंद आ गई
- 2:15:51होगी। उनका कोई पोता कुंवारा होगा। शायद
- 2:15:54वो तुम्हारा रिश्ता उससे करवाना चाहते
- 2:15:56होंगे। मेघना की बात सुनकर शिप्रा गुस्सा
- 2:16:00जाहिर करती हुई बोली। मैं तुमसे सीरियसली
- 2:16:02कुछ पूछ रही हूं और तुम्हें मजाक सूझ रहा
- 2:16:05है। मजाक शुरू किसने किया? क्या ऐसा हो
- 2:16:08नहीं सकता कि वो तुमको अपनी बहू बनाने की
- 2:16:10सोच रहे होंगे? नहीं तो कौन भला ऐसे किसी
- 2:16:13को अपनी कंपनी का सीईओ बना देता है? मेघना
- 2:16:16ने भी शराफत से जवाब दिया। अच्छा जब उनको
- 2:16:19पहले से ही पता है कि मैं शादीशुदा हूं तो
- 2:16:22वह भला ऐसा क्यों सोचेंगे? शिप्रा चिढ़कर
- 2:16:25बोली यह बात तो उनको बाद में पता चला ना।
- 2:16:28क्या पता पहले अगर उनको पता होता तो शायद
- 2:16:31ऐसा कोई प्रपोजल वो तुमको देते भी नहीं।
- 2:16:34मेघना शिप्रा को और भी छेड़ते हुए बोली।
- 2:16:37अभी शिप्रा कुछ और भी जवाब देती। उससे
- 2:16:39पहले ही दरवाजे पर नॉक करने की आवाज आई।
- 2:16:42शिप्रा और मेघना ने एक दूसरे की तरफ देखा।
- 2:16:44फिर मेघना बोली दरवाजा खुला है अंदर आ
- 2:16:48जाओ। तभी दरवाजा खुला और गिरजा हाथ में
- 2:16:51चाय की ट्रे लिए हुए अंदर आई। चाय देखकर
- 2:16:54शिप्रा खुश होती हुई बोली वाह दीदी। एकदम
- 2:16:57सही समय पर चाय ले आई। मैं अभी चाय के लिए
- 2:17:00नीचे आने ही वाली थी। शिप्रा की बात सुनकर
- 2:17:03गिरजा मुस्कुराई और ट्रे को टेबल पर रखकर
- 2:17:05चली गई। चाय देखकर मेघना भी बिस्तर से उठी
- 2:17:08और चाय का कप उठाकर बालकनी का दरवाजा
- 2:17:11खोलकर बालकनी में चली गई। शिप्रा भी बेड
- 2:17:14से उतर कर चाय का कप लेकर एक शिप लिया।
- 2:17:17अभी मेघना को गैलरी में गए हुए ज्यादा समय
- 2:17:19नहीं हुआ। वो अगले ही पल जल्दी से अंदर आई
- 2:17:22और शिप्रा का हाथ पकड़ कर खींचती हुई
- 2:17:24बालकनी में लेकर चली गई। शिप्रा पूछती रह
- 2:17:27गई कि क्या हुआ? तुम इस तरह से मुझे खींच
- 2:17:29क्यों रही हो? आओ तो सही मैं तुम्हें कुछ
- 2:17:32दिखाती हूं। मेघना धीरे से बोली। शिप्रा
- 2:17:36को समझ नहीं आया कि मेघना उसे क्या दिखाना
- 2:17:38चाहती है। पर गैलरी में पहुंचकर मेघना ने
- 2:17:41एक तरफ इशारा किया। उधर देखो। शिप्रा ने
- 2:17:45उस दिशा में देखा जिधर मेघना ने इशारा
- 2:17:47किया था। उसने देखा पीछे ग्राउंड में
- 2:17:50शौर्य लोअर और बनियान में एक्सरसाइज कर
- 2:17:52रहा था। इस समय वो सर के बल खड़ा था और
- 2:17:55उसका सर शिप्रा से विपरीत दिशा में था।
- 2:17:58इसलिए वह देख नहीं सकता था कि शिप्रा और
- 2:18:00मेघना बालकनी में खड़ी होकर उसे ही देख
- 2:18:03रही है। शिप्रा की निगाह शौर्य की मजबूत
- 2:18:06कद काठी पर चिपक कर रह गई थी। उसने घुर कर
- 2:18:09मेघना की ओर देखा और कहा तुम मुझे यही
- 2:18:12दिखाने के लिए खींचते हुए अंदर से बाहर
- 2:18:13लाई तो और क्या तुम क्या समझी कि मैं
- 2:18:17तुम्हें हवा खिलाने के लिए बालकनी में लाई
- 2:18:18हूं। अगर तुम्हें नहीं देखना है तो तुम
- 2:18:21अंदर जा सकती हो। वैसे कुछ भी कहो शौर्य
- 2:18:24का फिजिक वाकई लाजवाब है। मेघना शौर्य पर
- 2:18:27नजरें कराए हुए बोली जिस तरह से मेघना
- 2:18:30शौर्य को देख रही थी शिप्रा को यह अच्छा
- 2:18:32नहीं लगा। वो मेघना का हाथ पकड़ कर
- 2:18:35जबरदस्ती खींचती हुई कमरे के अंदर लेकर
- 2:18:38चली गई। मेघना प्रतिरोध करती रही पर
- 2:18:40शिप्रा रुकी नहीं। कमरे के अंदर आने के
- 2:18:43बाद उसने गैलरी वाला दरवाजा अंदर से बंद
- 2:18:45कर दिया। मेघना को शिप्रा की इस हरकत पर
- 2:18:48हंसी भी आई। पर वो अपनी हंसी को छुपाती
- 2:18:51हुई बोली यह क्या बात हुई? तुम्हें अगर
- 2:18:54गैलरी में नहीं रुकना था तो तुम अंदर आ
- 2:18:56जाती। मुझे क्यों जबरदस्ती अंदर ले आई?
- 2:18:59चलो दरवाजा खोलो। मुझे तो अभी गैलरी में
- 2:19:01ही रहना है। मेघना की बात सुनकर शिप्रा
- 2:19:04उसको छेड़ते हुए बोली। खबरदार जो दोबारा
- 2:19:07अभी गैलरी में गई। तुम्हें शर्म नहीं आती
- 2:19:09अपनी बहन के पति को इस हाल में देखते हुए।
- 2:19:12ओह हेलो। वो तुम्हारा सिर्फ नाम का ही पति
- 2:19:15है। तुम उसे अपना पति मानती कहां हो?
- 2:19:17इसलिए तुम्हें क्या फर्क पड़ता है कि कोई
- 2:19:20उसको कैसे भी देखे? मेघना शिप्रा पर तंज
- 2:19:22कसती हुई बोली कितनी बेशर्म हो गई हो तुम
- 2:19:26ऐसा बोलते हुए तुम्हें थोड़ी भी शर्म नहीं
- 2:19:28आती शिप्रा मेघना पर आंखें तरेरती हुई
- 2:19:31बोली अच्छा तुम्हें इतना बुरा लग रहा है
- 2:19:35मेघना मुस्कुराती हुई बोली मेघना को यूं
- 2:19:38मुस्कुराती देखकर शिप्रा समझ गई कि मेघना
- 2:19:41उसे जानबूझकर छेड़ रही है। वैसे मुझे समझ
- 2:19:44नहीं आ रहा कि तुम इतनी नर्वस क्यों हो
- 2:19:46रही थी। वो नंगा नहीं था। अच्छा भला लोअर
- 2:19:48बनियान में है तो फिर तुम इतनी शर्मिंदा
- 2:19:51होकर क्यों अंदर भाग आई? मेघना ने आराम से
- 2:19:53अपनी बात कही तो शिप्रा ने उस बारे में
- 2:19:56सोचा तो उसे अपनी बेसब्री पर शर्मिंदा
- 2:19:58होना पड़ा। उसने महसूस किया कि शौर्य को
- 2:20:01लेकर वो कुछ ज्यादा ही पोजेसिव होती जा
- 2:20:03रही है। उसे अपने व्यवहार पर आश्चर्य हुआ।
- 2:20:06उसने दोबारा गैलरी का दरवाजा खोला और
- 2:20:08दरवाजे से हल्का सा बाहर निकल कर उसने उस
- 2:20:11दिशा में देखा जहां शौर्य एक्सरसाइज कर
- 2:20:13रहा था। शौर्य अभी सीधा खड़ा हो गया था और
- 2:20:16इस समय वह तौलिए से अपने शरीर पर आ गए
- 2:20:19पसीने को पछ रहा था। उसने महसूस किया
- 2:20:22शौर्य ऐसी भी कोई ऑकवर्ड स्थिति में नहीं
- 2:20:24था जो उसे देखने से किसी को रोकना पड़े।
- 2:20:27अब उसे थोड़ी देर पहले की अपनी स्थिति पर
- 2:20:29हंसी आ रही थी। मेघना शिप्रा के चेहरे के
- 2:20:31बदलते रंग को देख रही थी और उसके अंदर चल
- 2:20:34रही विचार को समझने की कोशिश कर रही थी।
- 2:20:37मेघना ने शिप्रा के पीछे से उसके गले में
- 2:20:39हाथ डालकर उसको अपनी बाहों में भरते हुए
- 2:20:41कहा। अब कहीं मेरी बहन के दिल में कोई
- 2:20:44धीरे से दस्तक तो नहीं देने लगा। शिप्रा
- 2:20:46ने मेघना की बात को सुना तो उसको डांटते
- 2:20:48हुए बोली, "तुम फिर से बाहर आ गई?" अच्छा
- 2:20:52तो क्या मुझे बाहर नहीं आना था? तुमने कुछ
- 2:20:54बोला नहीं तो मैं बाहर आ गई। मेघना
- 2:20:56मासूमियत से बोली। ज्यादा नौटंकी मत करो।
- 2:21:00अब वो हमें देख ले कि हम उसी को देख रहे
- 2:21:02हैं। उससे पहले कमरे के अंदर चल लो। इतना
- 2:21:05कहकर शिप्रा मेघना को खींचती हुई फिर से
- 2:21:07कमरे के अंदर आ गई। अगर श्रवण देख ही लेगा
- 2:21:10तो क्या फर्क पड़ जाएगा? तुम कुछ गलत तो
- 2:21:12कर नहीं रही हो जो तुम्हें डर लग रहा है।
- 2:21:15मेघना शिप्रा को छेरती हुई बोली अपनी
- 2:21:18बकवास बंद करो। आज मुझे जल्दी जाकर ज्वाइन
- 2:21:20भी करना है। इसीलिए मैं तो तैयार होने
- 2:21:22जाती हूं। इतना बोलकर शिप्रा बाथरूम में
- 2:21:25चली गई। लगभग 10:00 बजे शिप्रा फैब्रिक्स
- 2:21:28ट्रेंड क्लोथिंग हाउस के ऑफिस में पहुंची।
- 2:21:30राजा साहब की टेक्सटाइल कंपनी का नाम
- 2:21:32फैब्रिक्स ट्रेंड क्लोथिंग हाउस था।
- 2:21:35शिप्रा रिसेप्शन पर पहुंची। उसने वहां
- 2:21:37कांता प्रसाद जी के बारे में पूछा तो
- 2:21:39रिसेप्शनिस्ट ने शिप्रा को देखते ही पूछा
- 2:21:42आप शिप्रा हैं। शिप्रा ने रिसेप्निशनिस्ट
- 2:21:44के मुंह से अपना नाम सुना तो उसे आश्चर्य
- 2:21:47हुआ। उसने सर हिलाकर हां कहा। कांता
- 2:21:50प्रसाद जी राजा साहब के साथ आपका ही
- 2:21:52इंतजार कर रहे हैं। रिसेप्निशनिस्ट ने अदब
- 2:21:54से कहा। उसने एक दरवाजे की तरफ इशारा
- 2:21:57किया। शिप्रा दरवाजे पर पहुंची और नॉक
- 2:22:00किया। अंदर से आवाज आई, कम इन। शिप्रा ने
- 2:22:04दरवाजे को धक्का दिया और अंदर चली गई।
- 2:22:07राजा साहब ने शिप्रा को अंदर आते देखा तो
- 2:22:09वह खुश होते हुए बोले आ गई तुम। शिप्रा ने
- 2:22:13राजा साहब का सवाल सुना तो बोली क्या
- 2:22:16मैंने आप लोगों को ज्यादा इंतजार करवाया?
- 2:22:19अरे नहीं बिल्कुल नहीं। तुम्हें एकदम सही
- 2:22:22समय पर आई हो। अब जब तुम आ गई हो तो फिर
- 2:22:24बोर्ड ऑफ मेंबर की मीटिंग में चलते हैं।
- 2:22:27इतना कहकर राजा साहब अपनी जगह पर खड़े हो
- 2:22:30गए। राजा साहब के साथ कांता प्रसाद जी भी
- 2:22:32खड़े हो गए। जब शिप्रा ने दोनों को खड़े
- 2:22:35होते देखा तो उसने भी बैठने का कोई उपक्रम
- 2:22:37नहीं किया। कांता प्रसाद जी शिप्रा से
- 2:22:40बोले आज तुम इस कंपनी की सीईओ बनने वाली
- 2:22:43हो। इसीलिए राजा साहब ने आज बोर्ड ऑफ
- 2:22:46मेंबर की मीटिंग भी रखी है। जहां तुम्हारी
- 2:22:48मुलाकात बोर्ड के मेंबर से होगी। चलो चलते
- 2:22:51हैं। इतना कहकर राजा साहब दरवाजे की तरफ
- 2:22:54बड़ गए। राजा साहब के पीछे पीछे कांता
- 2:22:56प्रसाद जी और शिप्रा भी बढ़ गई। अपने कमरे
- 2:22:59से निकलकर राजा साहब एक दूसरे केबिन में
- 2:23:02पहुंचे। जहां पहले से ही छह सात लोग राजा
- 2:23:05साहब के इंतजार में बैठे हुए थे। राजा
- 2:23:08साहब केबिन में आते ही सभी उठकर खड़े हो
- 2:23:10गए। छह सात लोगों के बीच में राजा साहब की
- 2:23:14बेटी स्वर्णलता के अलावे प्रतीक भी मौजूद
- 2:23:16था। उसने राजा साहब को आया देखा और उनके
- 2:23:20पीछे कांता प्रसाद और शिप्रा को भी देखा।
- 2:23:23शिप्रा को देखकर प्रतीक की आंखें उसी पर
- 2:23:25जमकर रह गई। उसने इस समय यहां ऐसी सुंदरता
- 2:23:28की कल्पना नहीं की थी। उसे समझ नहीं आया
- 2:23:31कि यह लड़की उसके दादाजी के साथ यहां क्या
- 2:23:33कर रही। प्रतीक से जब इंतजार नहीं हुआ तो
- 2:23:36उसने राजा साहब से पूछा यूं अचानक मीटिंग
- 2:23:39बुलाने का कोई खास कारण है क्या दादा जी?
- 2:23:42हां, बहुत ही खास। आज हमने अपनी कंपनी में
- 2:23:45एक नए सीईओ की नियुक्ति किया है। जैसे ही
- 2:23:48राजा साहब ने यह बात कही, सबकी निगाह
- 2:23:50शिप्रा की ओर मुड़ गई। उस हॉल में मौजूद
- 2:23:53सभी लोगों के चेहरे पर आश्चर्य नजर आया कि
- 2:23:56राजा साहब को अचानक इस नई लड़की को सीईओ
- 2:24:00बनाने की क्या सूझी। प्रतीक को समझ नहीं
- 2:24:03आया कि वो कैसे रिएक्ट करें। वैसे उसके
- 2:24:05सामने जो लड़की मौजूद थी उसमें वो सारी
- 2:24:08खूबी थी जो उसको पसंद थी। उसके लिए तो
- 2:24:11लड़की की खूबसूरती ही मायने रखती थी।
- 2:24:13जिसमें शिप्रा की खूबसूरती का तो कोई
- 2:24:15मुकाबला ही नहीं हो सकता था। वह विरोध
- 2:24:17करके शिप्रा की नजर में बुरा नहीं बनना
- 2:24:20चाहता था। पर वह जानता था कि वह अकेला
- 2:24:22नहीं है जिसे राजा साहब के फैसले पर ऐतराज
- 2:24:25होगा। वहां पर स्वर्णलता भी थी। उसे भी
- 2:24:28राजा साहब का यह फैसला उचित नहीं लगा।
- 2:24:30इसीलिए वह विरोध करती हुई बोली। पर पिताजी
- 2:24:33आपको अचानक यह क्या सूझी कि आपने यह फैसला
- 2:24:36किया। आपने इस बारे में पहले कभी बताया भी
- 2:24:38नहीं। और फिर जब हमारे पास पहले से ही
- 2:24:40इतने सारे लोग यहां पर मौजूद हैं। सभी
- 2:24:43काबिल हैं। आप इनमें से किसी को यह
- 2:24:45जिम्मेदारी दे सकते थे। फिर आपने इस नई
- 2:24:47लड़की को यह जिम्मेदारी देने की क्यों
- 2:24:49सोची? प्रतीक को भी किसी नई लड़की का सीईओ
- 2:24:52बन जाना उसके विचार से सही नहीं था। पर
- 2:24:55खुलेआम शिप्रा का विरोध करके उसकी नजर में
- 2:24:57आना वह अफोर्ड नहीं कर सकता था। वैसे
- 2:25:00प्रतीक खुद स्वर्णलता को पसंद नहीं करता
- 2:25:02था। पर इस मामले में वह चाहता था कि
- 2:25:04स्वर्णलता जितना विरोध शिप्रा के सीईओ
- 2:25:07बनने का करें उतना अच्छा होगा। अगर उसके
- 2:25:09दादाजी स्वर्णलता की बात में आ जाते हैं
- 2:25:11तो कोई बात ही नहीं। पर अगर वह इस लड़की
- 2:25:14को सीईओ बनाने के अपने फैसले पर अडिग रहते
- 2:25:17हैं तो वह इस लड़की का सपोर्ट दिखाकर उसके
- 2:25:19करीब जाने की कोशिश कर सकता है। दूसरी तरफ
- 2:25:22राजा साहब ने स्वर्णलता की बात को सुना और
- 2:25:25उसे घूरते हुए बोले अच्छा क्या तुम मुझे
- 2:25:28बताओगी कि यहां कौन इतना काबिल है कि इस
- 2:25:30कंपनी के सीईओ का पद अच्छे से संभाल लेगा
- 2:25:33या लेगी यहां सभी काबिल है और फिर मैं
- 2:25:36किसी और की ही बात क्यों करूं? मैं खुद इस
- 2:25:38कंपनी को अच्छे से संभाल सकती हूं।
- 2:25:40स्वर्णलता खड़ी होती हुई बोली क्या कहा?
- 2:25:43तुम इस कंपनी का सीईओ का पद संभाल सकती
- 2:25:46हो? मुझे पता नहीं है या यहां मौजूद किसको
- 2:25:49पता नहीं है कि तुमने अपनी टाइल्स कंपनी
- 2:25:51का क्या हाल किया है। तुम क्या चाहती हो
- 2:25:53कि मैं अपनी इस कंपनी का भी वही हाल करूं।
- 2:25:56राजा साहब उपहास भरे स्वर में बोले। राजा
- 2:25:59साहब की बात सुनकर स्वर्णलता का चेहरा लाल
- 2:26:01हो गया। वो खुद पर कंट्रोल करती हुई बोली।
- 2:26:04यह आप कैसी बात कर रहे हैं पिताजी? एक बार
- 2:26:07ऐसा हो गया तो क्या आपको लगता है कि हमेशा
- 2:26:09ऐसा ही होगा? शायद ना हो पर मैं यह रिस्क
- 2:26:13नहीं ले सकता। वैसे भी अब जो मेरे पास इस
- 2:26:16कंपनी के साथ हॉस्पिटल बचा हुआ है, यह
- 2:26:18दोनों एक तरह से सूर्यभान की अमानत के तौर
- 2:26:21पर है। तुम दोनों भाई-बहन को ऑलरेडी मैंने
- 2:26:23तुम्हारा हिस्सा दे दिया है। इसीलिए अब इस
- 2:26:26कंपनी पर अपनी गिद्ध नजर मत डालो। जितना
- 2:26:28शेयर तुम दोनों का इस कंपनी में है, उससे
- 2:26:30ही संतोष करो। राजा साहब ने एक तरह से
- 2:26:33अपना इरादा स्पष्ट कर दिया। राजा साहब की
- 2:26:36बात सुनकर स्वर्णलता ने प्रतीक की तरफ
- 2:26:38देखा। जैसे उसे कह रही हो कि देख लो इनका
- 2:26:41क्या इरादा है। यह अभी भी इस कंपनी को
- 2:26:43सूर्यभान के नाम करने की सोच रहे हैं।
- 2:26:46प्रतीक स्वर्णलता को अपनी तरफ देखने का
- 2:26:48मतलब तो समझ गया पर इस समय उसने खुद को
- 2:26:50खामोश रखना ही बेहतर समझा। उसे लगा यह समय
- 2:26:54इस बात के लिए सही नहीं था। उसे भी यह बात
- 2:26:56पसंद नहीं था कि यह कंपनी उसके चाचा के
- 2:26:59नाम हो। उसने सोच लिया था कि घर जाकर वह
- 2:27:01इस बारे में अपने पापा से बात करेगा
- 2:27:03क्योंकि इतनी आसानी से वह इस कंपनी को
- 2:27:05सूर्यभान के नाम नहीं होने दे सकता था।
- 2:27:08दूसरी तरफ राजा साहब ने स्वर्णलता को
- 2:27:10इग्नोर करते हुए कहा, किसी और को भी कुछ
- 2:27:13कहना है? वहां उपस्थित लोगों ने एक दूसरे
- 2:27:16की तरफ देखा पर किसी ने भी अब अपनी राय
- 2:27:18देने की कोशिश नहीं की। सब अब राजा साहब
- 2:27:21की अगली घोषणा की प्रतीक्षा करने लगे। जब
- 2:27:24राजा साहब ने सभी का ध्यान अपनी तरफ देखा
- 2:27:26तो उन्होंने कहना शुरू किया। जैसा कि आप
- 2:27:30सभी जानते हैं कि पिछले कुछ समय से अपनी
- 2:27:33बीमारी के कारण मैं कंपनी की कामों पर
- 2:27:35ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहा था। इसीलिए
- 2:27:38मैंने कंपनी में एक नए सीईओ को नियुक्त
- 2:27:42करने का निश्चय किया है। जिस लड़की को आप
- 2:27:45मेरे पीछे देख रहे हैं, इसका नाम शिप्रा
- 2:27:47है और आज से यह इस कंपनी की नई सीईओ होगी।
- 2:27:52मैं उम्मीद करता हूं कि जैसे आप सब मेरे
- 2:27:54साथ सहयोग कर रहे थे वैसे ही शिप्रा से भी
- 2:27:57सहयोग करेंगे। किसी ने भी राजा साहब की
- 2:28:00बात सुनने के बाद भी अपना कोई रिएक्शन
- 2:28:03नहीं दिया। स्वर्णलता के चेहरे पर असहमति
- 2:28:05के भाव तो आए पर वो अब कुछ बोली नहीं।
- 2:28:08राजा साहब अपनी चेयर से उठे और साइड होकर
- 2:28:11शिप्रा को अपने पास बुलाया और अपनी चेयर
- 2:28:13की तरफ इशारा करके बोले आज से यह चेयर
- 2:28:16तुम्हारी है। मैं उम्मीद करता हूं कि तुम
- 2:28:19अपनी काबिलियत से इस कंपनी को और भी
- 2:28:21ऊंचाइयों पर पहुंचाओगी।
- 2:28:23शिप्रा सामने आई और वहां उपस्थित लोगों के
- 2:28:26चेहरे पर एक निगाह डालने के बाद बोली,
- 2:28:29"मैं समझती हूं कि मैं आप सबके लिए यहां
- 2:28:31नहीं हूं और बिना किसी बैक हिस्ट्री के आप
- 2:28:34सबके लिए मुझ पर विश्वास करना मुश्किल
- 2:28:36होगा। पर मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि
- 2:28:39मैं इस कंपनी को और भी ऊंचाइयों तक
- 2:28:41पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोडूंगी।
- 2:28:45यहां सामने खड़े होकर इस तरह की बातें
- 2:28:47करना बहुत ही आसान है। पर वैसा कर पाना
- 2:28:49बहुत मुश्किल। पता नहीं राजा साहब ने तुम
- 2:28:52में क्या देख लिया जो यह तुमको इस कंपनी
- 2:28:54का सीईओ बना दिए हैं। पर मैं अभी कह सकता
- 2:28:57हूं कि इस कंपनी की उल्टी गिनती शुरू हो
- 2:29:00गई है। जो शख्स अभी यह बात बोला था उसका
- 2:29:03नाम वैभव सिंह था। वैभव 27 28 साल का युवक
- 2:29:07था। वह राजा साहब के चचेरे भाई का बेटा
- 2:29:10था। वैभव के पिता की मृत्यु हो गई थी। उसे
- 2:29:13अपने पिता से विरासत में इस कंपनी का 10%
- 2:29:16शेयर मिला था। इसीलिए इस कंपनी की डिसीजन
- 2:29:19मेकिंग में वह कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता
- 2:29:21था। वैभव की ही तरह प्रतीक और स्वर्णलता
- 2:29:24के पास भी इस कंपनी का 10-10% शेयर था।
- 2:29:28वहां पर इनके अलावा तीन और लोग भी थे।
- 2:29:31जिनमें से एक के हिस्से में 9% शेयर और दो
- 2:29:34और लोगों के पास 5-प शेयर थे। यह तीनों भी
- 2:29:38राजा साहब के नजदीकी रिश्तेदारों में से
- 2:29:40एक थे। इन सबके शेयरों के अलावा बाकी के
- 2:29:4351% शेयर राजा साहब के पास था जो कि
- 2:29:46उन्होंने सूर्यभान के लिए बचाया हुआ था।
- 2:29:4951% शेयर राजा साहब के पास होने के कारण
- 2:29:52ही वहां किसी का चल नहीं पाता था। जब राजा
- 2:29:55साहब ने सूर्यभान से कहा था कि वह आकर
- 2:29:57संपत्ति में से अपना हिस्सा अपने नाम करवा
- 2:30:00ले तो सूर्यभान ने इस संपत्ति को लेने में
- 2:30:02कोई उत्साह नहीं दिखाया था। दरअसल उस समय
- 2:30:05सूर्यभान राठौर यह समझ रहे थे कि शौर्य की
- 2:30:08प्लेन दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इसीलिए
- 2:30:10भी उनकी कोई चाहत इस संपत्ति के लिए रह
- 2:30:13नहीं गई थी। पर जब राजा साहब को यह पता चल
- 2:30:16गया कि शौर्य सही सलामत है तो सूर्यभान
- 2:30:18राठौर के मना करने के बाद भी उन्होंने
- 2:30:21सूर्यभान के हिस्से का शेयर अपने पास ही
- 2:30:23रखा। राजा साहब के बेटे और बेटी ने राजा
- 2:30:26साहब के इस निर्णय का विरोध भी किया था कि
- 2:30:29जब उन्होंने सूर्यभान को घर से ही निकाल
- 2:30:31दिया था तो अब वह उसको संपत्ति का हिस्सा
- 2:30:33क्यों देने वाले हैं। पर राजा साहब ने
- 2:30:36उनकी एक ना सुनी और अपने फैसले पर अडिग
- 2:30:38रहे। इस बात को लेकर प्रतीक और स्वर्णलता
- 2:30:41राजा साहब से नाराज भी हुए। पर उनके हाथ
- 2:30:44में कुछ था नहीं करने को। इसीलिए वह समय
- 2:30:47का इंतजार करने लगे कि किसी सही समय पर वे
- 2:30:50इन कंपनियों पर कब्जा करने की कोशिश
- 2:30:52करेंगे। जब राजा साहब को हार्ट अटैक आया
- 2:30:55था तो उसका भी कारण उनके बेटे बेटी का
- 2:30:58संपत्ति के लिए उन पर जोर देना ही था। वे
- 2:31:01नहीं चाहते थे कि राजा साहब की संपत्ति
- 2:31:03में सूर्यभान को किसी भी तरह का हिस्सा
- 2:31:05मिले। इसी कहासनी में राजा साहब को ऐसा
- 2:31:08सदमा लगा था कि उन्हें अटैक आ गया था। इधर
- 2:31:12राजा साहब वैभव की बात सुनकर कुछ पल सोचते
- 2:31:14रहे और फिर से एक बार सामने आकर उन्होंने
- 2:31:17कहा ठीक है मैं तुम लोगों का कंसर्न समझता
- 2:31:21हूं। इसीलिए मैं sh के लिए एक कंडीशन रख
- 2:31:23देता हूं। शिप्रा अभी सिर्फ 3 महीने के
- 2:31:26लिए इस कंपनी की सीईओ नियुक्त की जाती है।
- 2:31:29अगर इन तीन महीनों के दरमियान कंपनी में
- 2:31:31किसी प्रकार का ग्रोथ नजर नहीं आता तो फिर
- 2:31:34आगे मैं शिप्रा को इस कंपनी के सीईओ के
- 2:31:37रूप में कंटिन्यू करूं या ना करूं इस पर
- 2:31:40विचार करूंगा। राज साहब की इस बात को
- 2:31:42सुनकर स्वर्णलता की आंखों में चमक आ गई।
- 2:31:45जैसे उसे पहले से ही विश्वास था कि शिप्रा
- 2:31:48के बस का नहीं। कमुस यही बात वैभव सिंह की
- 2:31:51आंखों में भी नजर आ रहा था। वैभव ने जब
- 2:31:54देखा कि राजा साहब ने उसकी आपत्ति के बाद
- 2:31:57ही शिप्रा के लिए यह कंडीशन निर्धारित
- 2:32:00किया है तो वह भी संतुष्टि पूर्वक बोला
- 2:32:04आपकी इस कंडीशन से मैं सहमत हूं। यह
- 2:32:06बढ़िया रहेगा। इस तरह शिप्रा को भी अपनी
- 2:32:09काबिलियत साबित करने का मौका मिलेगा।
- 2:32:12शिप्रा ने भी जब राजा साहब की इस बात को
- 2:32:14सुना तो उसे भी लगा कि यह राजा साहब का
- 2:32:17सही फैसला है। क्योंकि शिप्रा को भी अपने
- 2:32:20ऊपर इतना विश्वास नहीं था कि वो अपनी इस
- 2:32:22जिम्मेदारी को सही से हैंडल कर पाएगी कि
- 2:32:24नहीं। पर इस कंडीशन के बाद उसे भी यह
- 2:32:27तसल्ली हो गई कि अगर उसे यह लगा कि वो इस
- 2:32:30जिम्मेवारी को उठाने लायक नहीं है तो वह
- 2:32:32खुद ही इस कंपनी से इस्तीफा दे देगी। वह
- 2:32:35भी राजा साहब की बात से सहमति जताते हुए
- 2:32:38बोली, "मैं समझती हूं राजा साहब ने मुझे
- 2:32:40ज्यादा समय दे दिया। अगर मुझे लगा कि मैं
- 2:32:43इस कंपनी के साथ न्याय नहीं कर पा रही
- 2:32:45हूं, तो विश्वास कीजिए। मैं 3 महीने
- 2:32:47इंतजार नहीं करूंगी। मैं 2 महीने बाद ही
- 2:32:50इस कंपनी को अपना इस्तीफा भेज दूंगी।"
- 2:32:53शायद अब मैं उम्मीद कर सकती हूं कि मुझे
- 2:32:55आप सबका भरपूर सहयोग मिलेगा। शिप्रा की
- 2:32:58बात सुनकर वैभव सिंह मुस्कुराता हुआ बोला,
- 2:33:01"मुझे अच्छा लगा कि तुमने खुद इस चैलेंज
- 2:33:03को स्वीकार कर लिया।" शिप्रा ने खुद सामने
- 2:33:06से इसे एक चैलेंज के रूप में ले लिया।
- 2:33:09राजा साहब शिप्रा की बात सुनकर परेशान हो
- 2:33:11गए। उन्होंने सोचा कि शिप्रा ने यह ठीक
- 2:33:14नहीं किया। वह भी इस बात को अच्छे से
- 2:33:16समझते थे कि इस तरह की कंपनी को चलाना
- 2:33:19छोटी बात नहीं होती। वो शिप्रा को समय
- 2:33:21देना चाहते थे। पर शिप्रा ने खुद अपने लिए
- 2:33:24एक समय निर्धारित कर लिया था। शिप्रा के
- 2:33:27चैलेंज स्वीकार करने के बाद अब राजा साहब
- 2:33:30के पास कुछ बोलने के लिए रह नहीं गया था।
- 2:33:32वो वहां से बाहर जाने के लिए मुड़ते हुए
- 2:33:34बोले तो फिर ठीक है आज की मीटिंग यहीं
- 2:33:38बर्खास्त की जाती है। अब तुम सब जा सकते
- 2:33:40हो। इसके बाद राजा साहब ने शिप्रा को अपने
- 2:33:43पीछे आने का इशारा किया और उस हॉल से निकल
- 2:33:45गए। उनके पीछे कांता प्रसाद और शिप्रा भी
- 2:33:48वहां से निकल गए। प्रतीक अंत तक शिप्रा को
- 2:33:51घूरता रहा। जबकि राजा साहब एक बार फिर से
- 2:33:54अपनी कैबिन में वापस आ गए। कांता प्रसाद
- 2:33:57और शिप्रा भी आकर राजा साहब के सामने वाली
- 2:33:59कुर्सी पर बैठ गई। शिप्रा के बैठते ही
- 2:34:02राजा साहब थोड़े नाराजगी भरे स्वर में
- 2:34:04बोले, तुम्हें क्या जरूरत थी इस तरह के
- 2:34:07चैलेंज को लेने की? तुम्हें क्या लगता है
- 2:34:10कि किसी भी कंपनी का सीईओ बनना इतना आसान
- 2:34:12है? तुम जैसे नए खून वाले पता नहीं खुद को
- 2:34:15क्या समझते हैं। शिप्रा को समझ नहीं आया
- 2:34:19कि उसने ऐसा क्या किया जो राजा साहब उससे
- 2:34:22नाराज हो रहे हैं। वो मासूमियत से बोली
- 2:34:26मैंने कुछ गलत बोल दिया क्या? अरे जब
- 2:34:29मैंने तुम्हें 3 महीने का समय दिया तो तुम
- 2:34:32खुद क्यों आगे बढ़कर अपने आप को 2 महीने
- 2:34:34में ही साबित करने पर तूल गई। मैंने तुम
- 2:34:37पर कोई प्रेशर बनाया कि तुम्हें खुद को
- 2:34:39इतनी जल्दी साबित करना है। राजा साहब
- 2:34:42शिप्रा को डांटते हुए बोले। शिप्रा को समझ
- 2:34:45नहीं आया कि यह कैसा बॉस है जो अपने
- 2:34:48एंप्लई को इसलिए डांट रहा है क्योंकि उसने
- 2:34:51खुद को साबित करने के लिए उनके दिए हुए
- 2:34:54समय से भी कम समय में अपने आप को एफिशिएंट
- 2:34:57साबित करने के चैलेंज को स्वीकार किया।
- 2:35:00शिप्रा कुछ बोली नहीं। बस राजा साहब के
- 2:35:03आगे कुछ और बोलने की प्रतीक्षा करने लगी।
- 2:35:06तुम कितने समय से अपनी कंपनी को संभाल रही
- 2:35:08थी? तुमने कभी सोचा कि तुम्हें अपनी कंपनी
- 2:35:11क्यों बेचनी पड़ी? देखो, यहां सभी एक
- 2:35:14दूसरे के पैर खींचने में लगे हुए हैं।
- 2:35:16यहां कोई नहीं चाहता कि उसके साथ काम करने
- 2:35:18वाला उससे आगे बढ़े। अगर साथ वाले को मौका
- 2:35:21मिले, तो वह अपने कलीग का पैर खींचने में
- 2:35:24भी पीछे नहीं हटते। इसीलिए कभी किसी के
- 2:35:26उकसावे में आकर इस तरह का चैलेंज स्वीकार
- 2:35:29मत किया करो। तुम्हें क्या लगता है? जिसके
- 2:35:32उकसावे में आकर तुमने उसके सामने 2 महीने
- 2:35:34की शर्त रखी है। वो क्या खुश होगा
- 2:35:37तुम्हारी कामयाबी देखकर? उल्टा अब यह होगा
- 2:35:40कि वो अब हर वो कोशिश करेगा कि तुम अपनी
- 2:35:42चैलेंज को पूरा ना कर पाओ। वो हर वो कोशिश
- 2:35:45करेगा जिससे तुम्हारी राह और मुश्किल हो
- 2:35:48जाए। राजा साहब शिप्रा को समझाते हुए बोले
- 2:35:52अब उनकी आवाज अपेक्षाकृत नरम हो गया था।
- 2:35:55शिप्रा को राजा साहब का मकसद समझ नहीं आया
- 2:35:57कि वह उससे क्या चाहते हैं। कोई भी बॉस
- 2:36:00यही चाहता है कि उसका एंप्लई अपने आप को
- 2:36:03बेहतर साबित करें। पर राजा साहब की बात
- 2:36:06सुनकर शिप्रा को यह लगा ही नहीं कि
- 2:36:08उन्होंने शिप्रा से कोई ज्यादा उम्मीद रखी
- 2:36:10हो। उसे समझ नहीं आया कि अगर राजा साहब को
- 2:36:13उससे कोई उम्मीद ही नहीं है तो उन्होंने
- 2:36:16उसे अपनी कंपनी का सीईओ क्यों बनाया। उसने
- 2:36:19राजा साहब से पूछ लिया आपने मुझे अपनी
- 2:36:22कंपनी का सीईओ क्यों बनाया है? क्या मतलब
- 2:36:25हुआ इस सवाल का? मुझे तुम ईमानदार लगी और
- 2:36:28मुझे यह भरोसा भी है कि तुम जल्दी ही
- 2:36:30हमारी कंपनी को अपनी मेहनत और ईमानदारी से
- 2:36:33नई बुलंदियों तक ले जाओगी। राजा साहब
- 2:36:36मुस्कुराते हुए बोले पर अभी मैंने जब खुद
- 2:36:39को 2 महीने में ही साबित करने की बात की
- 2:36:42तो आप इस बात से नाराज दिखे। शिप्रा अपने
- 2:36:45मन में उमड़ रहे विचार को राजा साहब से
- 2:36:47कहने से खुद को रोक नहीं सकी। यही तो मैं
- 2:36:51कह रहा हूं। तुम्हें किसी के सामने खुद को
- 2:36:53साबित करने की कोई जरूरत नहीं है। बस तुम
- 2:36:56ईमानदारी से अपना काम करती रहो। तुम्हारा
- 2:36:58काम खुद ही सबको नजर आने लगेगा। जिस समय
- 2:37:01तुम खुद को साबित करने के लिए यह काम
- 2:37:03करोगी तो उसके लिए फिर तुम एक्स्ट्रा
- 2:37:05एफर्ट करने की कोशिश करोगी। इससे होगा यह
- 2:37:08कि तुम अपने ऊपर काम के अलावे एक अलग
- 2:37:11प्रेशर ले लोगी जो तुम्हारी डेली लाइफ को
- 2:37:13भी प्रभावित करेगी। और मैं नहीं चाहता कि
- 2:37:16मेरे साथ काम करने वाली एंप्लई खुद के साथ
- 2:37:19यह अन्याय करें।
- 2:37:21राजा साहब शिप्रा को समझाते हुए बोले कि
- 2:37:24वो उससे क्या चाहते हैं। शिप्रा को यकीन
- 2:37:27नहीं हो रहा था कि उसको कोई इतना अच्छा
- 2:37:29एंप्लयर भी मिल सकता है जो उससे बहुत
- 2:37:31ज्यादा उम्मीद नहीं कर रहा था। बस उससे यह
- 2:37:34चाहता है कि वो ईमानदारी से अपना काम करे।
- 2:37:37पर अगले ही पल उसके दिमाग में आया कि अगर
- 2:37:40उसने अपने काम से सबको सेटिस्फाई नहीं
- 2:37:42किया तो फिर वही लोग राजा साहब के फैसले
- 2:37:45पर अंगुली भी तो उठाएंगे। इसीलिए उसने
- 2:37:48राजा साहब से पूछा आपको नहीं लगता कि अगर
- 2:37:51मैं बोर्ड ऑफ मेंबर के सदस्यों को
- 2:37:53सेटिस्फाई नहीं कर पाई तो उन्हें आपके
- 2:37:55फैसले पर उंगली उठाने का मौका मिल जाएगा?
- 2:37:58शिप्रा की बात सुनकर राजा साहब जोर से
- 2:38:01हंसे। तुम्हें लगता है तुम उन्हें कभी भी
- 2:38:04सेटिस्फाई कर पाओगी। तुम कितना भी अच्छा
- 2:38:07काम कर लो वे कभी भी तुम्हारी काम
- 2:38:09सेटिस्फाई नहीं होंगे। वे कुछ ना कुछ कमी
- 2:38:12जरूर निकाल देंगे। इसीलिए तुम यह बात भूल
- 2:38:15जाओ कि तुम्हें किसी के सामने खुद को
- 2:38:18साबित करना है। राजा साहब की स्पष्ट
- 2:38:21हिदायत सुनकर शिप्रा समझ गई कि उसे यहां
- 2:38:23कैसे काम करना है। अब उसके चेहरे पर एक
- 2:38:26संतुष्टि नजर आ रही थी। उसने राजा साहब से
- 2:38:29कहा ठीक है सर मैं ध्यान रखूंगी कि आपकी
- 2:38:33उम्मीदों पर खड़ा उतरूं। राजा साहब शिप्रा
- 2:38:36के मुंह से सर सुनकर उसकी आंखों में देखते
- 2:38:39हुए बोले सर नहीं तुम मुझे दादाजी ही बोला
- 2:38:43करो। मुझे तुम्हारे मुंह से दादाजी सुनकर
- 2:38:46ही अच्छा लगता है। शिप्रा को राजा साहब के
- 2:38:49बिहेवियर से यह कभी भी नहीं लगा कि वो
- 2:38:51उसके बॉस हैं। उसे यह थोड़ा अजीब भी लगा।
- 2:38:55पर देखा जाए तो उसके लिए यह बात एक तरह से
- 2:38:58अच्छा भी था। सारी बातें होने के बाद राजा
- 2:39:01साहब ने कांता प्रसाद से कहा कांता प्रसाद
- 2:39:05तुम जाकर शिप्रा को उसका कैबिन और इस पूरे
- 2:39:08ऑफिस का एक भ्रमण करवा दो जिससे यह यहां
- 2:39:11के बारे में जान ले। कांता प्रसाद ने
- 2:39:13शिप्रा को पूरा ऑफिस घुमाया और वहां काम
- 2:39:16करने वाले सारे स्टाफ से भी उसका परिचय
- 2:39:18कराया। अंत में कांता प्रसाद ने शिप्रा से
- 2:39:21कहा अब तुम कल से अपने काम को शुरू कर
- 2:39:24सकती हो। आज के बाद इस ऑफिस की बॉस तुम
- 2:39:27हो। शिप्रा वहां से फ्री होकर निकली। वो
- 2:39:30अपनी गाड़ी के पास पहुंची। अभी वह अपनी
- 2:39:33गाड़ी में बैठने ही वाली थी कि तभी उसे
- 2:39:35अपनी तरफ आता एक शख्स दिखाई दिया। शिप्रा
- 2:39:38ने उसे ध्यान से देखा तो वह उसे पहचान गई।
- 2:39:42यह कोई और नहीं प्रतीक था। प्रतीक उसके
- 2:39:45पास आता हुआ बोला। तो मिस शिप्रा आपने
- 2:39:48पूरा ऑफिस देख लिया। प्रतीक को खुद से बात
- 2:39:51करते देखकर शिप्रा बोली हां देख ही लिया।
- 2:39:55बाकी तो अब देखते ही रहना है। बहुत
- 2:39:57बढ़िया। मुझे भरोसा है आप जल्दी ही यहां
- 2:40:01के काम को समझ जाओगी और आपकी दिशा निर्देश
- 2:40:03में कंपनी जरूर तरक्की करेगी। प्रतीक
- 2:40:06शिप्रा की तारीफ करते हुए बोला यह मेरी
- 2:40:09खुशनसीबी है कि आप ऐसा समझते हैं। शिप्रा
- 2:40:12थोड़ा हंबल दिखने की कोशिश करती हुई बोली
- 2:40:15शायद आप मुझे नहीं जानती होंगी। मेरा नाम
- 2:40:18प्रतीक राठौर है। ऊपर हॉल में तो एक दूसरे
- 2:40:20से परिचय करने का समय ही नहीं मिला।
- 2:40:23शिप्रा ने प्रतीक राठौर सुना तो वह समझ गई
- 2:40:26कि प्रतीक राजा साहब का कोई नजदीकी
- 2:40:28रिश्तेदार होगा। पर अभी भी उसे यह नहीं
- 2:40:30पता था कि प्रतीक का राजा साहब से रिश्ता
- 2:40:33क्या है। उसकी आंखों में यह सवाल पढ़ा जा
- 2:40:35सकता था। यह देखकर प्रतीक बोला चंद्रभान
- 2:40:39राठौर जी मेरे दादाजी हुए। प्रतीक की बात
- 2:40:42सुनकर शिप्रा को आश्चर्य हुआ। वो बोली
- 2:40:45अच्छा तो आप उनके पोते हैं। इसका मतलब ऊपर
- 2:40:48ऑफिस में जो एक मैडम थी वो आपकी बुआ
- 2:40:51होंगी। शिप्रा की बात सुनकर प्रतीक बोला
- 2:40:55हां वो मेरी बुआ थी। उनका नाम स्वर्ण
- 2:40:57लत्ता है। उनकी बात का आप बुरा मत
- 2:40:59मानिएगा। वो ऐसी ही हैं। नहीं ऐसा कुछ
- 2:41:03नहीं है। मुझे उनकी कोई बात बुरी नहीं
- 2:41:05लगी। उनका सवाल अपनी जगह जायज ही था।
- 2:41:09शिप्रा सफाई देती हुई बोली। यह अच्छी बात
- 2:41:12है कि आपको उनकी बात बुरी नहीं लगी। वैसे
- 2:41:15इस ऑफिस में आपको किसी भी तरह की कोई
- 2:41:17हेल्प की जरूरत हो तो आप कभी भी मुझसे
- 2:41:19संपर्क कर सकती हैं। आप मुझे अपना नंबर दे
- 2:41:22दीजिए। बोलते हुए प्रतीक ने अपना मोबाइल
- 2:41:25अपने हाथ में ले लिया। शिप्रा ने प्रतीक
- 2:41:27को अपना नंबर बताया। प्रतीक ने नंबर को
- 2:41:30डायल किया। एक रिंग जाने के बाद उसने कॉल
- 2:41:33डिस्कनेक्ट किया और शिप्रा से बोला, "यह
- 2:41:36मेरा नंबर है। आप इसे सेव कर लीजिए।"
- 2:41:39शिप्रा ने प्रतीक का नंबर सेव कर लिया।
- 2:41:41फिर अपनी कार का दरवाजा खोलते हुए कहा,
- 2:41:44आपसे बात करके अच्छा लगा मिस्टर प्रतीक
- 2:41:47आगे भविष्य में मैं जरूर आपकी मदद लूंगी।
- 2:41:50एनी टाइम जब भी आपको जरूरत हो आप निसंकोच
- 2:41:54मुझे याद कर सकती हैं। प्रतीक स्माइल करता
- 2:41:57हुआ बोला। इसके बाद शिप्रा अपनी कार में
- 2:42:00बैठी और वहां से निकल गई। रास्ते में चलते
- 2:42:03हुए उसे मेघना की वह बात याद आ रही थी जब
- 2:42:06उसने कहा था कि शायद राजा साहब तुम्हें
- 2:42:08अपनी बहू बनाना चाहते हो। उसे प्रतीक को
- 2:42:11देखने के बाद यह बात याद आई। क्या सच में
- 2:42:14ऐसी ही बात है क्या? पर उसने तो राजा साहब
- 2:42:17को पहले ही बता दिया है कि वह शादीशुदा
- 2:42:19है। और अब राजा साहब को तो यह भी पता है
- 2:42:22कि शौर्य ही उसका पति है। तो कम से कम यह
- 2:42:25बात तो नहीं हो सकती कि राजा साहब के
- 2:42:27दिमाग में उसे अपनी बहू बनाने का ख्याल
- 2:42:29हो। पर उसे यह बात भी अजीब लग रही थी कि
- 2:42:32आखिर राजा साहब उस पर इतने मेहरबान क्यों
- 2:42:35है। जब उसे इसका कोई जवाब नहीं मिला तो
- 2:42:38उसने इस तरफ से अपना विचार डायवर्ट करने
- 2:42:40के लिए मेघना को फोन करने की सोची। तभी
- 2:42:43उसके फोन पर रिंग होने लगा। उसने नंबर पर
- 2:42:46ध्यान दिया तो उसके पापा का फोन आ रहा था।
- 2:42:49उसने कॉल उठाया तो दूसरी तरफ से उसके पापा
- 2:42:52ने पूछा कहां हो तुम? शिप्रा ने बताया कि
- 2:42:56वो रास्ते में है और अभी वापस मॉडल टाउन
- 2:42:59जा रही है। शिप्रा की बात सुनने के बाद
- 2:43:02राजदीप जी ने कहा क्या तुम अभी घर आ सकती
- 2:43:05हो? मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। शिप्रा
- 2:43:09को समझ नहीं आया कि ऐसी क्या बात हो गई जो
- 2:43:12उसके पापा उसे घर आने को कह रहे हैं। उसने
- 2:43:15कहा भी क्या बात है पापा आप फोन पर भी तो
- 2:43:18बात कर सकते हैं। नहीं तुम थोड़ी देर के
- 2:43:22लिए घर आ जाओ फिर चली जाना। राजदीप जी ने
- 2:43:26फोन पर बात करना ठीक नहीं समझा। शिप्रा को
- 2:43:29कुछ समझ नहीं आया कि उसके पापा को उससे
- 2:43:31क्या बात करनी है। पर उसे ध्यान आया कि
- 2:43:34उसने अपनी जॉब के बारे में अपने पापा को
- 2:43:36भी अभी तक कुछ नहीं बताया है। उसे भी यह
- 2:43:39सही लगा कि घर जाकर ही वो अपने पापा को यह
- 2:43:41खुशखबरी देगी। उसने अपनी कार को अपने घर
- 2:43:45की तरफ मोड़ दिया। थोड़ी देर बाद वो अपने
- 2:43:47घर में अपने पापा के पास बैठी हुई थी।
- 2:43:50कहिए पापा क्या बात करनी है आपको? राजदीप
- 2:43:54जी समझने की कोशिश कर रहे थे कि वह अपनी
- 2:43:57बात कैसे शुरू करें। इसीलिए उन्होंने सबसे
- 2:44:00पहले शिप्रा से उसके जॉब के बारे में ही
- 2:44:02पूछा। तुम्हारे जॉब का क्या रहा? आज मैंने
- 2:44:06अपनी जॉब को ज्वाइन कर लिया है पापा। आप
- 2:44:08अगर कंपनी का नाम जानेंगे तो आपके आश्चर्य
- 2:44:11का ठिकाना नहीं रहेगा। शिप्रा खुश होते
- 2:44:14हुए बोली। वो उम्मीद कर रही थी जब उसके
- 2:44:17पापा को पता चलेगा कि उसने फैब्रिक ट्रेंड
- 2:44:19कंपनी को सीईओ के रूप में ज्वाइन किया है
- 2:44:22तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। मैंने
- 2:44:25सुना है तुम्हें राजा साहब ने अपनी कंपनी
- 2:44:28को ज्वाइन करने का ऑफर दिया है। राजदीप जी
- 2:44:31शिप्रा के चेहरे को देखते हुए बोले शिप्रा
- 2:44:34को आश्चर्य हुआ कि उसके पापा को पहले से
- 2:44:36ही यह कैसे पता है? उसने आश्चर्य से कहा
- 2:44:40हां आपने सही कहा। मैं फैब्रिक ट्रेंड
- 2:44:43क्लोथिंग हाउस की सीईओ बन गई हूं। पर आपको
- 2:44:46पहले से ही यह कैसे पता है? तुम भूल रही
- 2:44:49हो कि कल जिस पार्टी में तुमको राजा साहब
- 2:44:51ने यह जॉब प्रपोजल दिया था, उस पार्टी में
- 2:44:53पिताजी भी थे। राजदीप जी बोले, शिप्रा को
- 2:44:57ध्यान आया कि कल दादाजी भी तो उस पार्टी
- 2:45:00में थे। पर उसे यह पता नहीं था कि राजा
- 2:45:02साहब के प्रपोजल के बारे में उसके दादाजी
- 2:45:05को भी पता होगा। फिर उसे ध्यान आया कि
- 2:45:07उन्हें कैसे पता नहीं होगा। क्योंकि बहुत
- 2:45:10से लोगों ने तो उसे उस पार्टी में ही बधाई
- 2:45:12देना शुरू कर दिया था। उसने सोचा कहीं इसी
- 2:45:15के बारे में तो उसके पापा को उससे बात
- 2:45:17नहीं करनी है। यह सोचकर उसने अपने पापा से
- 2:45:20कहा आप बताइए पापा आप मुझसे क्या बात कहना
- 2:45:24चाहते हैं? कुछ पल राजदीप जी सोचते रहे कि
- 2:45:28क्या उन्हें अपने पिताजी की बात में आकर
- 2:45:30शिप्रा से शौर्य से अलग होने के बारे में
- 2:45:32बात करनी चाहिए या नहीं। फिर उन्होंने मन
- 2:45:35ही मन निश्चय किया और शिप्रा से कहा देखो
- 2:45:39तुम्हारी किस्मत तुम पर मेहरबान है जो
- 2:45:42तुम्हें इतनी बड़ी कंपनी का सीईओ बना दिया
- 2:45:44है तो तुम्हें अब अपने बारे में भी सोचना
- 2:45:47चाहिए शिप्रा को समझ नहीं आया कि उसके
- 2:45:50पापा उससे क्या कहना चाहते हैं वो ना
- 2:45:53समझते हुए अपने पापा से बोली मैं आपके
- 2:45:56कहने का मतलब नहीं समझी पापा आप क्या कहना
- 2:45:59चाहते हैं तुम समझी नहीं या समझना नहीं
- 2:46:02चाहती देखो तो मैं यह नहीं कहता कि श्रवण
- 2:46:06अच्छा लड़का नहीं है। पर हमें लगता है कि
- 2:46:08तुम्हें अब इससे आगे का सोचना चाहिए।
- 2:46:11राजदीप जी थोड़ा अटकते हुए बोले वो निश्चय
- 2:46:15नहीं कर पा रहे थे कि जो वह शिप्रा से
- 2:46:17करने को कह रहे हैं क्या वो ठीक है? आप जो
- 2:46:20भी कहना चाहते हैं पिताजी वो बात आप
- 2:46:23साफ-साफ कहें। शिप्रा थोड़े खड़े स्वर में
- 2:46:26बोली। देखो अब तुम जितने अच्छे पोस्ट पर
- 2:46:29काम कर रही हो तो हमें लगता है कि तुम्हें
- 2:46:32अब श्रवण से अलग हो जाना चाहिए क्योंकि
- 2:46:34कुछ ही समय में तुम्हारी पॉपुलैरिटी बढ़ने
- 2:46:37वाली है तो यह अच्छा नहीं लगेगा कि लोग
- 2:46:39तुम्हें एक भिखारी की पत्नी कहें इसीलिए
- 2:46:43तुम जितनी जल्दी इस रिश्ते से बाहर निकल
- 2:46:45जाओ तुम्हारे भविष्य के लिए यह उतना ही
- 2:46:48अच्छा है। राजदीप जी शिप्रा को समझाने की
- 2:46:51कोशिश करने लगे। आप क्यों बार-बार एक ही
- 2:46:54रट लगाए हुए हैं? मैंने पहले ही आपको कह
- 2:46:56रखा है कि मैं श्रवण से तलाक नहीं लूंगी।
- 2:46:59फिर भी आपकी सुई वहीं पर अटकी हुई है।
- 2:47:01शिप्रा नाराजगी से बोली, देखो अगर तुम यह
- 2:47:04चाहती हो कि मैं तुम्हें आगे से दूसरी
- 2:47:06शादी के लिए फोर्स ना करूं तो नहीं
- 2:47:08करूंगा। पर मुझे लगता है कि तुम्हारी
- 2:47:11भविष्य के लिए यही अच्छा होगा कि तुम
- 2:47:13श्रवण से अलग हो जाओ। राजदीप जी ने लास्ट
- 2:47:16टाइम एक कोशिश करने की सोची। शिप्रा ने
- 2:47:19ध्यान से अपने पिताजी की बात को सुना।
- 2:47:21उसके बाद उसने कहा अगर आप यह सोच रहे हैं
- 2:47:24कि राजा जी को हमारी शादी के बारे में
- 2:47:26नहीं पता तो आप गलत सोच रहे हैं। उन्हें
- 2:47:29हमारी शादी के बारे में पता है और उन्हें
- 2:47:31यह भी पता है कि श्रवण ही मेरा पति है।
- 2:47:34क्या अब भी आप कहेंगे कि मैं श्रवण से
- 2:47:36तलाक ले लूं। राजदीप जी इस हकीकत से वाकिफ
- 2:47:39नहीं थे कि राजा साहब को शिप्रा और श्रवण
- 2:47:41की शादी के बारे में पता है। जब शिप्रा ने
- 2:47:44उन्हें बता दिया कि राजा जी को उसकी शादी
- 2:47:46की हकीकत पता है तो फिर उनके पास कहने को
- 2:47:49कुछ रह नहीं गया। अब उन्हें लगने लगा कि
- 2:47:51शिप्रा को तलाक के लिए कहना निरर्थक बात
- 2:47:54थी। अभी राजदीप जी शिप्रा से और कुछ कहते
- 2:47:57कि तभी उसे एक वीडियो मैसेज आया जिसको
- 2:48:00देखकर शिप्रा की भौहें चढ़ गई। उसे
- 2:48:02विश्वास नहीं हो रहा था कि जो वह देख रही
- 2:48:04है वह सही हो सकता है। पर उस वीडियो क्लिप
- 2:48:07को देखने के बाद शिप्रा के चेहरे पर
- 2:48:09परेशानी नजर आने लगी। वीडियो क्लिप देखने
- 2:48:12के बाद शिप्रा थोड़ा परेशान नजर आने लगी।
- 2:48:15वह अब जल्दी से यहां से निकलना चाहती थी।
- 2:48:18वह अपनी जगह पर खड़ी हुई और अपने पापा से
- 2:48:20बोली, "मुझे कुछ काम आ गया है इसीलिए मैं
- 2:48:23अभी निकलती हूं।" राजदीप जी ने शिप्रा को
- 2:48:26खड़े होते देखा तो वह जल्दी से बोले, कल
- 2:48:29युविका और विहान की इंगेजमेंट पार्टी है
- 2:48:31तो तुम समय से उस पार्टी में आ जाना और
- 2:48:33श्रवण को भी अपने साथ लेते आना। शिप्रा को
- 2:48:36यह तो पता था कि उसके दादाजी युविका से
- 2:48:39विहान की शादी के लिए तैयार हो गए हैं। पर
- 2:48:41उसे यह नहीं पता था कि उन दोनों की
- 2:48:43इंगेजमेंट डेट भी फाइनल हो रखी है। उसे
- 2:48:46आश्चर्य हुआ। पर उसने यह भी सोचा चलो
- 2:48:48अच्छा है कि कम से कम इस बला से पीछा तो
- 2:48:51छूटा। उसने राजदीप जी से कहा ठीक है मैं
- 2:48:54कल समय से आ जाऊंगा। इतना कहकर वह वहां से
- 2:48:57निकल गई। वो जाकर अपनी कार में बैठी और
- 2:49:00दोबारा मोबाइल निकालकर उसमें उस वीडियो
- 2:49:03क्लिप को देखने लगी जिसे मेघना ने भेजा
- 2:49:05था। उस वीडियो में शौर्य और नताशा दोनों
- 2:49:08एक दूसरे के साथ डांस कर रहे थे। उस
- 2:49:10वीडियो को देखकर लग रहा था कि नताशा थोड़ी
- 2:49:13नशे की हालत में थी। पर शौर्य ठीक लग रहा
- 2:49:16था। शिप्रा समझ गई कि यह किसी क्लब का
- 2:49:19वीडियो है। उसने मेघना को फोन किया। दूसरी
- 2:49:22तरफ शिप्रा के ऑफिस जाने के बाद शौर्य
- 2:49:25मेघना के साथ नाश्ते की टेबल पर बैठा हुआ
- 2:49:28था। तभी उसके पास नताशा का फोन आया और
- 2:49:31उसने पूछा कहां हो तुम? शौर्य ने बताया वह
- 2:49:34अभी घर पर ही है। तो नताशा ने उसे बताया
- 2:49:37कि वह अभी फन फ्लोक होटल कम रेस्टोरेंट आ
- 2:49:40जाए जहां रत्नाकर शेट्टी उन दोनों का
- 2:49:42इंतजार कर रहा है। शौर्य के पास दूसरा कोई
- 2:49:44चारा नहीं था। वो उठा और तैयार होकर बाहर
- 2:49:48आ गया। मेघना ने शौर्य को तैयार होकर जाते
- 2:49:50देखा तो उसने पूछा कहां जा रहे हो? तो
- 2:49:54शौर्य ने बताया तो मेघना बोली मैं अकेली
- 2:49:57यहां बोर हंगी। क्या मैं भी तुम्हारे साथ
- 2:49:59चल सकती हूं? शौर्य मेघना को साथ ले जाने
- 2:50:02को तैयार हो गया। मेघना भी जल्दी ही तैयार
- 2:50:05होकर आ गई। दोनों फन फ्लोक रेस्टोरेंट
- 2:50:07पहुंचे जहां रत्नाकर शेट्टी पहले से ही
- 2:50:09बैठा उनका इंतजार कर रहा था। उसके सामने
- 2:50:12टेबल पर एक फाइल पड़ी हुई थी। जैसे ही
- 2:50:15उसने शौर्य को मेघना के साथ वहां आते
- 2:50:17देखा। उसने खड़ा होकर उससे हाथ मिलाया।
- 2:50:20शौर्य ने नताशा को वहां नहीं देखा तो उसने
- 2:50:22रत्नाकर शेट्टी से पूछा, नताशा कहां है?
- 2:50:25शौर्य की बात सुनकर रत्नाकर शेट्टी बोला,
- 2:50:28वह भी अभी पहुंचने वाली ही है। शौर्य
- 2:50:31मेघना के साथ उसी टेबल पर बैठ गया।
- 2:50:33रत्नाकर शेट्टी अपने सामने परी फाइल शौर्य
- 2:50:36की तरफ बढ़ाता हुआ बोला, "मिस्टर श्रवण,
- 2:50:39यह स्क्रिप्ट है जो मैं नताशा कपूर की
- 2:50:41मूवी के लिए लाया हूं। कौन सी मूवी के
- 2:50:44लिए? शौर्य हैरानी से बोला, "अरे, कल आपके
- 2:50:48सामने ही तो नताशा जी ने कहा था कि उन्हें
- 2:50:50आपके साथ एक फिल्म करनी है। जितनी जल्दी
- 2:50:52हो सके।" इसीलिए तो मैंने बड़ी मुश्किल से
- 2:50:55यह स्क्रिप्ट पसंद की है। आप भी एक बार
- 2:50:57देख लीजिए। अगर थोड़ी बहुत कुछ चेंजेस
- 2:51:00करवानी हो तो उस बारे में बात कर सकते
- 2:51:02हैं। रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर शौर्य
- 2:51:04का मन किया कि वो अपना सर पीट ले। वो
- 2:51:07रत्नाकर शेट्टी से बोला मिस्टर शेट्टी आप
- 2:51:10जानते हैं अभी हमारे लिए सबसे जरूरी कौन
- 2:51:13सा काम है? आप ऐड शूट की बात कर रहे हैं।
- 2:51:16आप उसकी चिंता मत कीजिए। उसकी सारी तैयारी
- 2:51:19हो रखी है। परसों से उस ऐड की शूट शुरू हो
- 2:51:21जाएगी। मैंने नताशा जी को भी इसके बारे
- 2:51:24में बता रखा है। रत्नाकर शेट्टी शौर्य को
- 2:51:27आश्वस्त करता हुआ बोला। यह जानकर कि ऐड की
- 2:51:30शूट ऑलरेडी शेड्यूल हो रखी है। शौर्य को
- 2:51:32तसल्ली हुई। इसलिए वह थोड़ा टेंशन फ्री
- 2:51:35होता हुआ बोला। आप मुझ पर कुछ ज्यादा ही
- 2:51:37प्रेशर नहीं बना रहे हैं। मिस्टर शेट्टी
- 2:51:40आपके कारण मैंने पहले ही एक फिल्म साइन कर
- 2:51:42लिया है और अभी वह पहली शुरू भी नहीं हुई
- 2:51:45और आपने दूसरी फिल्म भी करने का सोच लिया।
- 2:51:47इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। आपने मिस
- 2:51:50नताशा की बात को नहीं सुना था। मैं खुद भी
- 2:51:53अभी कहां यह दूसरी फिल्म करने की सोच रहा
- 2:51:55था। पर अगर मैं मिस नताशा की बात नहीं
- 2:51:57मानता तो वो मुझे मेरी पहली फिल्म भी नहीं
- 2:52:00करने देगी। रत्नाकर शेट्टी बेबसी से बोला।
- 2:52:03जबकि मेघना इस बात से हैरान थी कि अभी
- 2:52:06एक-द दिन पहले ही तो मालिनी ने उसे अपनी
- 2:52:08फिल्म में काम करने के लिए अप्रोच किया था
- 2:52:10और अब नताशा भी उसके साथ फिल्म करने वाली
- 2:52:13है। जब शिप्रा जानेगी कि शौर्य को दूसरी
- 2:52:16फिल्म भी मिल गई है तो उसका क्या रिएक्शन
- 2:52:18होगा। अभी मेघना इन्हीं ख्यालों में थी कि
- 2:52:21उसी समय नताशा आ गई। पिंक शूट में वह कहर
- 2:52:24ढा रही थी। वो सबसे मिली और मेघना को
- 2:52:27देखकर खुश होती हुई बोली मुझे उम्मीद नहीं
- 2:52:31थी कि तुम भी मुझे यहां मिलोगी। तुम्हारी
- 2:52:34ही मेहरबानी है। जब तक तुम मेरा काम नहीं
- 2:52:37कर दोगी तब तक मैं इसी शहर में रहूंगी।
- 2:52:41इसीलिए अगर मुझसे छुटकारा चाहती हो तो
- 2:52:44जल्दी से मेरा शूट कंप्लीट कर दो। फिर मैं
- 2:52:47यहां से 921
- 2:52:50मेघना अपनी हाथ को हवा में प्लेन की तरह
- 2:52:53लहराती हुई बोली अगर ऐसी बात है तो फिर तो
- 2:52:56मैं और लेट करूंगी ताकि मुझे तुम्हारे साथ
- 2:52:59रहने का और भी मौका मिले। नताशा हंसती हुई
- 2:53:03बोली। इसके बाद वो रत्नाकर शेट्टी की ओर
- 2:53:06देखकर बोली हां मिस्टर शेट्टी आप बताइए
- 2:53:10यूं अचानक यहां बुलाने का कारण। रत्नाकर
- 2:53:13शेट्टी ने अपने सामने की फाइल नताशा की
- 2:53:16तरफ बढ़ाते हुए कहा, "आपने जिस काम के लिए
- 2:53:19कहा था, वह मैंने कर दिया है। यह
- 2:53:21स्क्रिप्ट है जो मुझे बहुत पसंद आया है।
- 2:53:24आप एक बार देख लीजिए। अगर आप ओके करती
- 2:53:27हैं, तो हम इस कहानी पर आगे बढ़ सकते हैं।
- 2:53:30रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर नताशा की
- 2:53:33आंखों में चमक आ गई। वेरी गुड मिस्टर
- 2:53:36शेट्टी। आप तो बहुत फास्ट निकले। कल मैंने
- 2:53:39कहा और आपने आज स्क्रिप्ट भी ढूंढ लिया।
- 2:53:42आप मुझे कल तक का समय दीजिए। मैं एक बार
- 2:53:45इसको रीड कर लेती हूं। फिर आपको बताती
- 2:53:47हूं। इसी समय वेटर उस टेबल पर कुछ स्नेक्स
- 2:53:51की प्लेट लगा गया। रत्नाकर शेट्टी पहले ही
- 2:53:54वेटर को आर्डर कर रखा था। वहां से फ्री
- 2:53:57होने के बाद नताशा ने शौर्य से कहा। श्रवण
- 2:54:00अगर तुम फ्री हो तो क्या तुम मेरे साथ एक
- 2:54:03पार्टी में चल सकते हो? नताशा की बात
- 2:54:06सुनकर शौर्य मेघना की ओर देखा। नताशा ने
- 2:54:09जब शौर्य को मेघना की ओर देखते हुए देखा
- 2:54:12तो उसने शौर्य से कहा मेघना भी हमारे साथ
- 2:54:15चल सकती है। नताशा की बात सुनकर अब शौर्य
- 2:54:19के पास नताशा को मना करने का कोई कारण
- 2:54:21नहीं था। वे तीनों फन फ्लॉक से निकले और
- 2:54:25होटल पैराडाइज पहुंचे। अब होटल पैराडाइज
- 2:54:28को मेनका ही कंट्रोल कर रही थी। शौर्य तो
- 2:54:31अभी तक होटल पैराडाइज को ऑक्शन में खरीदने
- 2:54:34के बाद एक बार देखने भी नहीं आया था। उसने
- 2:54:37तो इस होटल को मेनका की जिद के कारण ही
- 2:54:39खरीदा था। होटल पैराडाइज का मेन हॉल आज
- 2:54:42रणधीर शेखावत ने बुक कर रखा था। आज
- 2:54:46उन्होंने यहां अपनी फिल्म का मुहूर्त रखा
- 2:54:47हुआ था। जो कि वह अपने बेटे कबीर शेखावत
- 2:54:50को लेकर बनाने वाले थे। आज इस पार्टी में
- 2:54:53उन्होंने बड़ी-बड़ी फिल्मी हस्तियों को
- 2:54:55बुलाया हुआ था। नताशा कपूर भी इस पार्टी
- 2:54:58में इनवाइटेड थी। नताशा कपूर की अभी तक एक
- 2:55:01ही फिल्म रिलीज हुई थी। जानम जो
- 2:55:04ब्लॉकबस्टर रही थी। उसके बाद उसको कोई
- 2:55:07स्क्रिप्ट ही पसंद नहीं आई थी। इसीलिए
- 2:55:10उसने कोई दूसरी फिल्म साइन नहीं की थी।
- 2:55:12रणधीर शेखावत भी अपनी फिल्म में अपने बेटे
- 2:55:15के साथ नताशा को ही लेना चाहते थे। पर
- 2:55:18नताशा जानती थी कि रणधीर शेखावत जो फिल्म
- 2:55:21बनाने जा रहे हैं वो अपने बेटे को प्रमोट
- 2:55:24करने के लिए। इसीलिए उनकी फिल्म में
- 2:55:26हीरोइन के लिए कोई खास स्कोप नहीं होगा।
- 2:55:29इसीलिए भी नताशा उनकी फिल्म में काम करने
- 2:55:32को तैयार नहीं हुई थी। नताशा के उस पार्टी
- 2:55:35में पहुंचने पर रणधीर शेखावत ने जबरदस्त
- 2:55:38स्वागत किया। उसे किसी स्टार की तरह ट्रीट
- 2:55:41किया। मिस नताशा तुमने मेरी पार्टी में
- 2:55:44आकर यहां की शोभा बढ़ा दी। क्यों मुझे झार
- 2:55:47पर चढ़ा रहे हैं शेखावत सर? यह मेरी
- 2:55:50खुशनसीबी है कि आपने मुझे अपनी पार्टी में
- 2:55:52इनवाइट किया है। नताशा मुस्कुराती हुई
- 2:55:55बोली। अगर तुम मेरी फिल्म में काम करने को
- 2:55:58तैयार हो जाओ तो हमारा दिन और भी अच्छा बन
- 2:56:01जाए। रणधीर शेखावत एक तरह से दोबारा नताशा
- 2:56:05को अपनी फिल्म का प्रपोजल देते हुए बोले
- 2:56:08शेखावत साहब इस बार तो रहने दीजिए। हां
- 2:56:12आपकी अगली फिल्म में अगर मेरे लिए कोई रोल
- 2:56:15होगा तो मैं जरूर करूंगी। अभी वैसे भी मैं
- 2:56:18कुछ दूसरे प्रोजेक्ट में बिजी हूं। नताशा
- 2:56:21ने अपनी मजबूरी जताई। रणधीर शेखावत ने
- 2:56:25नताशा के साथ खड़े शौर्य और मेघना की ओर
- 2:56:28देखा। तो मेघना ने बताया यह दोनों मेरे
- 2:56:31दोस्त हैं। हम साथ में थे तो मैं इन्हें
- 2:56:34साथ ले आई। आपको कोई ऐतराज तो नहीं? कैसी
- 2:56:38बात करती हो? यह भी कोई कहने की बात है?
- 2:56:41रणधीर शेखावत हंसते हुए बोला। तभी कुछ और
- 2:56:45गेस्ट अंदर आए तो रणधीर शेखावत ने नताशा
- 2:56:48से कहा। तुम अंदर चलकर पार्टी एंजॉय करो।
- 2:56:51तब तक मैं कुछ और गेस्टों को देख लेता
- 2:56:54हूं। नताशा शौर्य और मेघना के साथ अंदर
- 2:56:57आकर एक खाली टेबल देखकर उस पर बैठ गई।
- 2:57:01मेघना इस पार्टी में कई जाने पहचाने चेहरे
- 2:57:04को देख रही थी जिसे अभी तक वो फिल्मों में
- 2:57:07ही देखती थी। शौर्य को पता नहीं था कि यह
- 2:57:10पार्टी किस लिए है? तो उसने नताशा से पूछा
- 2:57:13यह पार्टी किस खुशी में है? नताशा शौर्य
- 2:57:17की तरफ देखकर एक तरफ इशारा करती हुई बोली
- 2:57:20उस पोस्टर की तरफ देखो समझ आ जाएगा। जिधर
- 2:57:24नताशा इशारा कर रही थी शौर्य ने उस तरफ
- 2:57:26देखा तो वहां पर एक बड़ा सा पोस्टर लगा
- 2:57:29हुआ था जो कि किसी फिल्म की पोस्टर की तरह
- 2:57:32लग रहा था जिस पर बलवान लिखा हुआ था। उस
- 2:57:36पोस्टर में जो हीरो था वो भी किसी पहलवान
- 2:57:38की तरह ही लग रहा था। तो आज इस फिल्म की
- 2:57:41मुहूर्त है। हां, रणधीर शेखावत इस फिल्म
- 2:57:45से अपने बेटे को इस इंडस्ट्रीज में ल्च कर
- 2:57:47रहा है। नताशा शौर्य से बोली, "तुमने इस
- 2:57:51फिल्म में काम करने से मना क्यों कर
- 2:57:53दिया?" शौर्य ने सवाल किया, "तुम इस फिल्म
- 2:57:56का नाम नहीं देख रहे?" बलवान, तुम्हें
- 2:57:59लगता है कि इस फिल्म में हीरोइन के लिए
- 2:58:01कोई स्कोप होगा? नताशा बुरा सा मुंह बनाती
- 2:58:04हुई बोली, तो इसी कारण तुमने इस फिल्म में
- 2:58:07काम करने से मना कर दिया। वैसे यह रणधीर
- 2:58:10शेखावत का मेन काम क्या है? शौर्य दूर
- 2:58:13खड़े रणधीर शेखावत की ओर देखता हुआ बोला,
- 2:58:16"यह इंडस्ट्रीज का एक बड़ा डिस्ट्रीब्यूटर
- 2:58:18है। इन ऑर्बिट सिनेमा का जो चैन है वो
- 2:58:21रणधीर शेखावत का ही है। इसीलिए इंडस्ट्रीज
- 2:58:24के लोग इससे पंगे लेने की कोशिश नहीं करते
- 2:58:26हैं। नताशा ने बताया। पर तुमने तो उसके
- 2:58:29बेटे के साथ फिल्म करने से मना कर दिया
- 2:58:31है। तो एक तरह से तो तुम भी उससे पंगा ही
- 2:58:34ले रही हो। अब तक उन दोनों की बात को सुन
- 2:58:37रही मेघना बीच में बोली मैंने डायरेक्ट
- 2:58:41मना नहीं किया है। साथ में मैंने उन्हें
- 2:58:43आश्वासन दिया है कि उनकी अगली फिल्म में
- 2:58:46मैं जरूर काम करूंगी। और फिर रणधीर सर के
- 2:58:49दिमाग में यह बात भी है कि वो इस फिल्म
- 2:58:51में इंडस्ट्रीज की टॉप की हीरोइन को लें।
- 2:58:54जिसका फायदा उसके बेटे को मिले। नताशा
- 2:58:57डांस फ्लोर की तरफ देखती हुई बोली। जहां
- 2:59:00कबीर शेखावत किसी लड़की के साथ डांस कर
- 2:59:02रहा था। अगर ऐसी बात है तो फिर रणधीर
- 2:59:05शेखावत तुम्हें यह प्रपोजल क्यों दे रहा
- 2:59:07है? शौर्य नताशा की बात को समझने की कोशिश
- 2:59:11करता हुआ बोला, दरअसल मैं उनके बेटे की
- 2:59:14पसंद हूं। कबीर शेखावत इस फिल्म में मेरे
- 2:59:16साथ काम करना चाहता है। जबकि रणधीर शेखावत
- 2:59:20की पसंद अभी की टॉप हीरोइन प्रिया शर्मा
- 2:59:22है। अपने बेटे की इच्छा का सम्मान करते
- 2:59:25हुए उन्होंने पहले मुझे अप्रोच किया। जब
- 2:59:28मैंने अपनी मजबूरी बताई तो उन्हें अपनी
- 2:59:30पसंद को सामने लाने का कारण मिल गया।
- 2:59:33इसीलिए उन्होंने मेरी बात का बुरा नहीं
- 2:59:35माना और साथ में मैंने उनसे यह भी तो कह
- 2:59:38दिया कि मैं उनकी अगली फिल्म में जरूर काम
- 2:59:40करूंगी। नताशा ने शौर्य को समझाया। तो
- 2:59:44क्या तुम उनकी अगली फिल्म में काम करोगी?
- 2:59:47शौर्य नताशा की आंखों में देखता हुआ बोला।
- 2:59:51पहले कबीर की पहली फिल्म तो अच्छा बिजनेस
- 2:59:53करें। उसके बाद ही तो वह अगली फिल्म के
- 2:59:55लिए सोचेगा। नताशा हंसते हुए बोली। इसी
- 2:59:59समय एक वेटर उनके पास आया और उन तीनों के
- 3:00:02सामने ड्रिंक की ग्लास सर्व कर दिया।
- 3:00:05तीनों हल्का-हल्का शीप लेने लगे। इसी समय
- 3:00:08कबीर शेखावत नताशा के सामने आकर खड़ा हो
- 3:00:11गया और उससे बोला नताशा कपूर तुम आ गई।
- 3:00:15मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा था।
- 3:00:18मुबारक हो कबीर आखिर आज तुम्हारी फिल्म का
- 3:00:21मुहूर्त हो ही गया। नताशा ने कबीर को बधाई
- 3:00:24दी। बस एक अफसोस रहेगा कि तुम मेरी इस
- 3:00:28फिल्म में काम नहीं कर रही हो। कबीर अफसोस
- 3:00:31भरे स्वर में बोला, कोई अफसोस की जरूरत
- 3:00:34नहीं है। तुम्हारी अगली फिल्म में मैं
- 3:00:37जरूर काम करूंगी। नताशा ने कबीर को
- 3:00:40आश्वासन दिया। चलो कोई बात नहीं। भले ही
- 3:00:43तुम मेरी अगली फिल्म में काम करना, तुम
- 3:00:45अभी चलकर मेरे साथ एक डांस तो कर ही सकती
- 3:00:48हो। कबीर अपने हाथ का ग्लास टेबल पर रखता
- 3:00:51हुआ बोला। सॉरी कबीर। दरअसल अभी थोड़ी देर
- 3:00:55पहले श्रवण ने भी मुझे डांस करने को
- 3:00:57इनवाइट किया था और मैंने उसका प्रपोजल
- 3:00:59एक्सेप्ट कर लिया था। नताशा शौर्य की ओर
- 3:01:02देखती हुई बोली। नताशा का इंकार सुनकर
- 3:01:06कबीर भाव शून्य नजरों से शौर्य की तरफ
- 3:01:08देखने लगा। इसी समय एक लड़की कबीर के पास
- 3:01:12आई और बोली, "यह क्या बात हुई कबीर? तुम
- 3:01:15मुझे डांस फ्लोर पर बुलाकर खुद गायब हो
- 3:01:17गए?" इधर शौर्य नाराजगी से नताशा की तरफ
- 3:01:21देखने लगा। पर नताशा आंखों में ही शौर्य
- 3:01:24से रिक्वेस्ट करने लगी कि वह इस स्थिति को
- 3:01:26संभाल ले। मजबूरन शौर्य अपनी जगह से उठा
- 3:01:30और डांस फ्लोर की तरफ बढ़ गया। मेघना अपनी
- 3:01:33जगह पर बैठी उन दोनों को देखती रही। डांस
- 3:01:36फ्लोर पर जाकर नताशा और शौर्य कबीर को
- 3:01:39दिखाने के लिए साथ में डांस करने लगी।
- 3:01:42शौर्य और नताशा को साथ में डांस करते
- 3:01:44देखकर मेघना को शरारत सूझी और उसने अपनी
- 3:01:47जगह से ही अपने मोबाइल में दोनों का
- 3:01:50वीडियो बनाने लगी और अगले ही पल उसने वो
- 3:01:53वीडियो क्लिप शिप्रा को भेज भी दिया जबकि
- 3:01:57डांस फ्लोर पर शौर्य नताशा को अपने करीब
- 3:02:00पाकर थोड़ा रोमांचित भी था। नताशा की शरीर
- 3:02:03की खुशबू कहीं ना कहीं शौर्य को अपनी तरफ
- 3:02:06एक खुला आमंत्रण भी दे रहा था। पहले तो
- 3:02:09शौर्य उसके पास होने पर अनकंफर्टेबल फील
- 3:02:12कर रहा था। पर धीरे-धीरे वो अपने अंदर
- 3:02:15थोड़ा रोमांच महसूस करने लगा। शायद यह
- 3:02:18एक-दो पैग वाइन पीने का असर था। कामोम बेस
- 3:02:21यही हाल नताशा का भी था। उसने वाइन की
- 3:02:24दो-तीन गिलास पी ली थी। जिसका असर उस पर
- 3:02:26कुछ ज्यादा ही होने लगा था। इसीलिए उसको
- 3:02:29अपना कुछ ज्यादा होश नहीं था। जबकि उससे
- 3:02:32कुछ दूरी पर खड़ा कबीर अब डांस नहीं कर
- 3:02:34रहा था। बल्कि वह जलती आंखों से नताशा और
- 3:02:37शौर्य को देख रहा था। अगर उसका बस चलता तो
- 3:02:40वह अपनी आंखों से ही उन दोनों को भस्म कर
- 3:02:42देता। मेघना अपनी जगह पर बैठी शौर्य और
- 3:02:46नताशा की ओर ही देख रही थी। तभी उसका फोन
- 3:02:50रिंग करने लगा। उसने देखा यह शिप्रा का ही
- 3:02:53कॉल था। उसने कॉल उठाया तो दूसरी तरफ से
- 3:02:57शिप्रा की आवाज आई। कहां हो तुम? शिप्रा
- 3:03:01को लग ही रहा था कि जो वीडियो क्लिप उसने
- 3:03:03शिप्रा को भेजा है उसको देखते ही उसके पास
- 3:03:07उसका कॉल आएगा। इतना तो वह समझ गई थी कि
- 3:03:10भले ही शिप्रा बोलती कुछ भी हो पर जब वो
- 3:03:13शौर्य को किसी लड़की के करीब देखती है तो
- 3:03:15उसे यह बात बर्दाश्त नहीं होता। शिप्रा ने
- 3:03:18हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया। मैं
- 3:03:21श्रवण के साथ एक पार्टी में आई हुई हूं।
- 3:03:24तुम दोनों किसकी पार्टी में चली गई? और जब
- 3:03:26तुम दोनों गई थी तो यह नताशा वहां कैसे
- 3:03:29पहुंच गई? शिप्रा की आवाज में उसकी चिंता
- 3:03:32साफ छलक रही थी। दरअसल श्रवण और मैं नताशा
- 3:03:36के ही किसी जानने वाले की पार्टी में आए
- 3:03:39हुए हैं। मेघना ने जवाब दिया हद है तुम
- 3:03:43लोग ऐसे ही किसी की भी पार्टी में चली
- 3:03:45जाती हो। शिप्रा चिरकर बोली नताशा अकेली
- 3:03:50थी तो उसने रिक्वेस्ट किया कि हम उसके साथ
- 3:03:52चल ले। इसलिए हम दोनों उसके साथ आ गए।
- 3:03:55मेघना शिप्रा की चिंता को समझती हुई बोली
- 3:03:59पर तुम दोनों नताशा के पास कैसे पहुंचे?
- 3:04:01तुम दोनों तो घर पर ही थे। शिप्रा को
- 3:04:04गुस्सा आ रहा था कि मेघना एक बार में सारी
- 3:04:07कहानी नहीं बता सकती जो वो उसके पूछने पर
- 3:04:10टुकड़ों में उसे बता रही है। उसके पूछने
- 3:04:13पर मेघना ने फिर से कहा। एक्चुअली एक
- 3:04:16फिल्म को लेकर श्रवण की मीटिंग नताशा से
- 3:04:18थी। उस मीटिंग के समाप्त होने पर वहीं से
- 3:04:20इस पार्टी में आ गए। मूवी को लेकर मीटिंग।
- 3:04:24कौन सी मूवी? शिप्रा को समझ नहीं आया कि
- 3:04:27किस मूवी की मीटिंग थी। शौर्य और नताशा
- 3:04:30साथ में एक फिल्म करने जा रहे हैं। उसी को
- 3:04:33लेकर यह मीटिंग थी। श्रवण ने तो ऑलरेडी
- 3:04:35इसके अलावे भी एक और मूवी साइन कर रखी है
- 3:04:38मालिनी के साथ। उसके बारे में तो तुम्हें
- 3:04:40पता ही है। उसकी भी शूटिंग जल्दी ही शुरू
- 3:04:43होने वाली है। मेघना की यह बात शिप्रा के
- 3:04:46लिए और सरप्राइजिंग थी कि शौर्य को इतनी
- 3:04:49जल्दी दूसरी मूवी भी मिल गई। वह सोचने लगी
- 3:04:52क्या सच में शौर्य मूवी करने वाला है?
- 3:04:55उसके मन में यह चिंता होने लगी कि अगर
- 3:04:57शौर्य मूवी में कामयाब हो गया तो वह कहीं
- 3:05:00उससे दूर ना हो जाए। इसे कहते हैं कि किसी
- 3:05:03का वक्त कब बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता
- 3:05:06है। एक समय था कि यह बात उसके लिए परेशानी
- 3:05:09वाली थी कि शौर्य एक भिखारी है। पर बाद
- 3:05:12में शिप्रा को शौर्य की यह हालात अपने लिए
- 3:05:15मुफिद लगा। उसे लगा उसको जो एक डमी
- 3:05:17हस्बैंड चाहिए उसके लिए शौर्य से बेहतर तो
- 3:05:20कोई हो ही नहीं सकता। पर धीरे-धीरे शौर्य
- 3:05:24तरक्की करने लगा। जैसे-जैसे वह आगे बढ़ता
- 3:05:27जा रहा था, उसको लेकर शिप्रा की चिंता भी
- 3:05:30बढ़ती जा रही थी। और अब जब उसने यह सुना
- 3:05:33कि शौर्य को दो-दो फिल्में में हीरो बनने
- 3:05:36का मौका मिल रहा है। अगर ऐसे ही चलता रहा
- 3:05:39और उसे कामयाबी मिलने लगी तो उसके चारों
- 3:05:41तरफ वैसे ही खूबसूरत लड़कियों की भीड़ लग
- 3:05:44जाएगी। क्या तब वह उसके साथ अपनी शादीशुदा
- 3:05:47जिंदगी को आगे बढ़ा पाएगा? यह सोचकर ही
- 3:05:50उसकी शरीर ने झुरझुरी ली। वो अपने ख्यालों
- 3:05:53से वापस आई। उसने पूछा, "इस समय तुम लोग
- 3:05:57कहां हो? होटल पैराडाइज जहां रणधीर शेखावत
- 3:06:01के बेटे की फिल्म की मुहूर्त की पार्टी चल
- 3:06:03रही है। कहीं तुम यहां आने की तो नहीं सोच
- 3:06:06रही? अचानक ही मेघना के दिमाग में यह
- 3:06:09ख्याल आया। इसीलिए उसने पूछा। पता नहीं
- 3:06:13मुझे नहीं समझ आ रहा कि मैं क्या करूं।
- 3:06:16शिप्रा असमंजस की स्थिति में बोली। इसके
- 3:06:19बाद उसने फोन रख दिया। मेघना को समझ नहीं
- 3:06:22आया कि वो शिप्रा की इस बात का क्या मतलब
- 3:06:25निकाले। क्या वो होटल आएगी या सीधा घर
- 3:06:28जाएगी। दूसरी तरफ शौर्य इन सब बातों से
- 3:06:32बेपरवाह नताशा के साथ डांस फ्लोर पर था।
- 3:06:35वो देख रहा था कि नताशा पर वाइन का शरूर
- 3:06:38चढ़ता जा रहा था। उससे कुछ दूरी पर खड़े
- 3:06:40कबीर शेखावत की आंखों में कुछ जलता हुआ सा
- 3:06:43महसूस हुआ। उसने अपने साथ वाली लड़की को
- 3:06:46कुछ इशारा किया। जिस लड़की को कबीर ने कुछ
- 3:06:49इशारा किया था। वो लड़की अपने एक हाथ में
- 3:06:52वाइन की ग्लास लिए हल्का-हल्का डांस करती
- 3:06:55हुई डांस फ्लोर पर पहुंच गई। वो जैसे किसी
- 3:06:58मौके की तलाश में थी। वो शौर्य के पीछे
- 3:07:02उसके एकदम करीब पहुंच गई। अचानक ही वह
- 3:07:05पीछे से शौर्य से टकराई और वो लड़खराई और
- 3:07:08उसका वाइन का ग्लास उसके पीछे उछल गया और
- 3:07:11गिर गया।
- 3:07:12ग्लास तो नीचे गिर गया पर ग्लास का वाइन
- 3:07:15कुछ उसके ऊपर और कुछ हिस्सा छलक कर नताशा
- 3:07:19के ऊपर भी जाकर गिरा। वो लड़की भी
- 3:07:22जानबूझकर वहां गिरी थी। पर वो जल्दी से
- 3:07:24अपनी जगह से उठी और शौर्य पर चढ़ दो। एक
- 3:07:28पल को तो शौर्य को समझ नहीं आया कि वहां
- 3:07:30पर क्या हुआ है। तभी ग्लास टूटने की आवाज
- 3:07:32सुनकर कबीर वहां आ गया। वो लड़की जिसे
- 3:07:36कबीर ने अभी थोड़ी देर पहले कुछ कहा था वो
- 3:07:38शौर्य पर इल्जाम लगाती हुई बोली कि उसने
- 3:07:40उसे छेड़ने की कोशिश की। उसने जानबूझकर
- 3:07:43उसके पैर में अपना पैर अड़ा दिया जिसके
- 3:07:45कारण वो गिर गई और उसका वाइन का ग्लास टूट
- 3:07:48गया और उसका कपड़ा भी गंदा हो गया। जबकि
- 3:07:51शौर्य अभी समझने की कोशिश कर रहा था कि
- 3:07:53आखिर वहां हो क्या रहा है। जब उसने उस
- 3:07:56लड़की को अपने ऊपर इल्जाम लगाते देखा तो
- 3:07:58वह भी गुस्से में बोला क्या बकवास कर रही
- 3:08:01हो तुम? मुझे तो पता भी नहीं था कि तुम
- 3:08:04मेरे पीछे थी और भला डांस फ्लोर पर वाइन
- 3:08:06का ग्लास लेकर कौन आता है। नताशा भी समझने
- 3:08:09की कोशिश कर रही थी कि यह अचानक क्या हो
- 3:08:11गया। वो खुद भी अनकंफर्टेबल फील करने लगी
- 3:08:14क्योंकि वाइन की कुछ बूंदे उसके ऊपर भी
- 3:08:16गिरी थी। जबकि उसी समय वहां पर आया हुआ
- 3:08:18कबीर उस लड़की से बोला क्या हुआ सरोज? तुम
- 3:08:22यह हंगामा क्यों कर रही हो? वो लड़की
- 3:08:24जिसका नाम सरोज था वो कबीर पर भड़कती हुई
- 3:08:27बोली कैसे-कैसे गवार को अपनी पार्टी बुला
- 3:08:30लिया है? देखो इसने मेरा क्या हाल किया
- 3:08:32है। आखिर हुआ क्या? कुछ बताओगी भी। जब तक
- 3:08:36कुछ बताओगी नहीं तब तक हमें समझ में कैसे
- 3:08:38आएगा कि क्या बात हुई है। कबीर सरोज को
- 3:08:41झिरकता हुआ बोला। इस लड़के ने मुझे पीछे
- 3:08:44से टक्कर मारी और जिसके कारण वाइन का
- 3:08:46गिलास मेरे ऊपर ही गिर गया। सरोज उंगली
- 3:08:49उठाकर शौर्य की तरफ इशारा करती हुई बोली
- 3:08:52नताशा ने जब देखा कि वो लड़की सरेआम शौर्य
- 3:08:55पर इल्जाम लगा रही है तो वो बीच में आती
- 3:08:58हुई बोली तुम ऐसी गलत बात कैसे कर सकती
- 3:09:01हो? श्रवण और मैं तो यहां डांस कर रहे थे
- 3:09:03तो फिर यह तुम्हें टक्कर कैसे मार सकता
- 3:09:05था? तुम बहुत भोली हो मिस नताशा। तुम ऐसे
- 3:09:09छोटे लोगों की मंशा को नहीं समझ सकती। यह
- 3:09:11दिखाई कुछ और देते हैं और होते कुछ और
- 3:09:14हैं। कबीर भी सरोज की बात से सहमति जताते
- 3:09:17हुए बोला, "कबीर, किसी पर इल्जाम लगाने से
- 3:09:21पहले यह देख लो कि तुम यह इल्जाम किस पर
- 3:09:23लगा रहे हो।" श्रवण मेरे साथ यहां आया है
- 3:09:26और यह ऐसा बिल्कुल नहीं है जैसा यह लड़की
- 3:09:28इसे बोल रही है। और तुम भी इस लड़की की
- 3:09:31बात में उसका साथ दे रहे हो। यह ठीक नहीं
- 3:09:33है। नताशा भड़कती हुई बोली, मिस नताशा,
- 3:09:37मैं समझती हूं कि आप एक बड़ी मॉडल हैं।
- 3:09:40इसका मतलब यह नहीं है कि आप मुझ पर यह
- 3:09:42इल्जाम लगाएंगी कि मैं गलत बोल रही हूं।
- 3:09:44मैं वही बोल रही हूं जो इसने अभी मेरे साथ
- 3:09:46किया है। आपको शायद एहसास नहीं हुआ होगा।
- 3:09:49पर सच यही है जो मैंने कहा है। सरोज नताशा
- 3:09:53के सामने सफाई देते हुए बोली। नताशा मैं
- 3:09:56समझता हूं कि इसे तुम अपने साथ लाई हो। पर
- 3:09:59इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ तुम्हारे
- 3:10:00साथ आने से यह सही हो जाएगा। इसने जो हरकत
- 3:10:03सरोज के साथ की है वह बिल्कुल भी माफी के
- 3:10:06लायक नहीं है। इसलिए इसे अभी सबके सामने
- 3:10:09सरोज से माफी मांगनी पड़ेगी। कबीर शौर्य
- 3:10:12को घूरता हुआ बोला। क्या तुम मुझे बताओगे
- 3:10:15कि यह सरोज अचानक डांस फ्लोर पर कहां से आ
- 3:10:17गई? और अगर यह डांस फ्लोर पर आई भी तो इसे
- 3:10:20वाइन की गिलास अपने हाथ में लेकर आने की
- 3:10:22क्या जरूरत थी? नताशा सरोज की गलती की तरफ
- 3:10:25इशारा करती हुई बोली, "यह कोई बड़ी बात
- 3:10:28नहीं है। तुम समझती हो अक्सर लड़कियां
- 3:10:30वाइन पीती हुई एंजॉय करती हैं और इसके
- 3:10:33जैसे छोटे लोग ऐसे ही मौके का फायदा उठाते
- 3:10:35हैं। इसलिए तुम इसे समझा दो कि यह अभी
- 3:10:38सबके सामने इससे माफी मांग ले। नहीं तो यह
- 3:10:40काम मुझे भी करवाना आता है। कबीर शौर्य को
- 3:10:44घूरता हुआ बोला। शौर्य को समझ नहीं आ रहा
- 3:10:47था कि यह हो क्या रहा है। अब तो शौर्य को
- 3:10:50भी कबीर शेखावत पर गुस्सा आने लगा था।
- 3:10:52क्योंकि जिस प्रकार कबीर शेखावत शौर्य का
- 3:10:54पक्ष जाने बिना उस पर इल्जाम लगा रहा था
- 3:10:57वो सही नहीं था। वो सपाट स्वर में बोला
- 3:11:01मिस्टर कबीर आप जो मुझ पर इल्जाम लगा रहे
- 3:11:04हैं उसका आधार क्या है या ऐसा सिर्फ इसलिए
- 3:11:06है कि मैं आपका दोस्त नहीं हूं तो आप मुझ
- 3:11:09पर कुछ भी इल्जाम लगा सकते हैं। ऐसी झूठी
- 3:11:12सफाई देने से कुछ नहीं होने वाला मिस्टर।
- 3:11:14इसलिए मेरा कहा मानो और अभी के अभी सरोज
- 3:11:17से माफी मांगो। नहीं तो तुम उम्मीद भी
- 3:11:20नहीं कर सकते कि मैं तुम्हारे साथ क्या
- 3:11:22करवा सकता हूं। कबीर घमंड भरे स्वर में
- 3:11:25बोला कबीर तुम मेरे दोस्त की बेइज्जती कर
- 3:11:28रहे हो। ऐसे अपनी पार्टी में बुलाकर किसी
- 3:11:31पर यूं झूठा इल्जाम लगाना सही है क्या?
- 3:11:34नताशा को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि
- 3:11:36कबीर इस तरह से सरवन पर इल्जाम लगा रहा
- 3:11:39था। वहां हो रहे शोर को सुनकर रणधीर
- 3:11:42शेखावत भी वहां पर आ गया था। वहां पर हो
- 3:11:45रहे शोर को सुनकर वह बोले क्या हो रहा है
- 3:11:48यहां पर इतना शोर क्यों हो रहा है नताशा
- 3:11:51ने जब रणधीर शेखावत को वहां पर आया हुआ
- 3:11:54देखा तो वह रणधीर शेखावत के पास जाकर बोली
- 3:11:57यह देखिए मिस्टर शेखावत आपका बेटा कबीर एक
- 3:12:00लड़की की बात में आकर मेरे दोस्त पर झूठा
- 3:12:03इल्जाम लगा रहा है यह सही नहीं है नताशा
- 3:12:06की बात सुनकर रणधीर शेखावत ने कबीर की ओर
- 3:12:09देखा तो कबीर सामने आकर बोला मैं ऐसा कुछ
- 3:12:12नहीं कर रहा पिताजी
- 3:12:14एक्चुअली सरोज का कहना है कि इस लड़के ने
- 3:12:16जानबूझकर उसको धक्का दिया जिसके कारण वो
- 3:12:19गिर पड़ी और उसके हाथ में जो वाइन की
- 3:12:21गिलास थी वो भी टूट कर गिर गया और वाइन से
- 3:12:25उसका पूरा कपड़ा खराब हो गया। मैंने तो
- 3:12:28सिर्फ इस लड़के को उससे माफी मांगने के
- 3:12:30लिए कहा है। क्या नताशा जी? क्यों आप इस
- 3:12:33छोटी सी बात को बड़ी कर रही हैं? बोल
- 3:12:36लीजिए अपने दोस्त को कि सरोज से माफी
- 3:12:38मांगकर इस बात को खत्म करें। हो जाती है
- 3:12:41छोटी-मोटी गलती। इसके लिए इस तरह की जिद
- 3:12:44करने की क्या जरूरत है? रणधीर शेखावत
- 3:12:46लापरवाही से यह बात नताशा से बोला। रणधीर
- 3:12:50शेखावत की बात सुनकर नताशा तो हतप्रब रह
- 3:12:52गई कि वो कितनी बेशर्मी से अपने बेटे को
- 3:12:55सपोर्ट कर रहा है। शौर्य वहां पर घट रही
- 3:12:58घटनाओं को सिर्फ सुन रहा था। वो देख रहा
- 3:13:01था कि रणधीर शेखावत किस स्तर तक जाता है।
- 3:13:04जबकि नताशा को बुरा लग रहा था कि उसके
- 3:13:07कारण शौर्य को यह सब सुनना पड़ रहा है। वो
- 3:13:10अगर शौर्य को यहां नहीं लाती तो उसे यह सब
- 3:13:12देखना सुनना नहीं पड़ता। वो अपने गुस्से
- 3:13:15को दबाती हुई फिर से रणधीर शेखावत से बोली
- 3:13:19मिस्टर शेखावत आपका यूं अपने बेटे को
- 3:13:21सपोर्ट करना सही नहीं है। आप अपनी पार्टी
- 3:13:24में बुलाकर यूं किसी को बेइज्जत नहीं कर
- 3:13:26सकते। मिस नताशा मैंने कहा ना क्यों आप
- 3:13:30दिल का तार बना रही हैं? छोटी सी बात है।
- 3:13:33आप अपने इस दोस्त को बोलिए एक सॉरी बोलकर
- 3:13:36बात को खत्म करें। क्या आप भी जिद पकड़ कर
- 3:13:39बैठी हैं? और फिर मैंने आपको इस पार्टी
- 3:13:41में बुलाया था। आपके इस दोस्त को थोड़े ही
- 3:13:44बुलाया था? रणधीर शेखावत बेशर्मी से बोला।
- 3:13:48रणधीर शेखावत की बात सुनकर नताशा बेबसी से
- 3:13:51शौर्य की ओर देखने लगी। उसकी आंखों में
- 3:13:54शौर्य से माफी मांगने वाला भाव था। शौर्य
- 3:13:57ने जब नताशा की बेबसी को महसूस किया तो वह
- 3:14:00समझ गया कि अब उसे इस मामले को खुद ही
- 3:14:03हैंडल करना पड़ेगा। इसलिए वह रणधीर शेखावत
- 3:14:06के सामने आया और उनसे शांत स्वर में बोला
- 3:14:09मिस्टर शेखावत जब मैं इस पार्टी में आया
- 3:14:12तो नताशा ने आपको ऑलरेडी बता दिया कि वह
- 3:14:15अपने दोस्तों के साथ आई है। आपको कोई
- 3:14:17ऐतराज तो नहीं है तो आपने उस समय कोई
- 3:14:20ऐतराज नहीं जताया। फिर आप यह नहीं कह सकते
- 3:14:23कि आपने उनको बुलाया और मुझे नहीं क्योंकि
- 3:14:25आपकी सहमति के बाद ही मैं इस पार्टी में
- 3:14:28ठहरा था। भाई तुम्हारी बात ठीक है। पर तुम
- 3:14:31कहना क्या चाहते हो? मुद्दे पर आओ। रणधीर
- 3:14:34शेखावत शौर्य की बात को बीच में ही काटता
- 3:14:36हुआ बोला। मिस्टर शेखावत मैं कहना यह
- 3:14:40चाहता हूं कि आप अपने बेटे से कहिए कि
- 3:14:42उसने जो मुझ पर घटिया इल्जाम लगाया है,
- 3:14:45उसके लिए अभी मुझसे माफी मांगे। शौर्य ने
- 3:14:48यह बात इतने शांत लहजे में बोला कि रणधीर
- 3:14:51शेखावत शौर्य का चेहरा देखता ही रह गया।
- 3:14:54शौर्य की बात सुनकर रणधीर शेखावत जोर से
- 3:14:57ठहाका लगाया। उसे शौर्य से ऐसी उम्मीद
- 3:14:59नहीं था कि वो उसके सामने उसके बेटे से
- 3:15:02उसे माफी मांगने के लिए कहेगा। वो अपनी
- 3:15:05हंसी को कंट्रोल करता हुआ बोला।
- 3:15:09मानना पड़ेगा। तुम में हिम्मत तो है। तभी
- 3:15:13तुम मेरी ही पार्टी में मेरे सामने मुझे
- 3:15:16बोल रहे हो कि मैं अपने बेटे से बोलूं कि
- 3:15:18वो तुमसे माफी मांगे। हां, आप सही समझे।
- 3:15:21मैं आपसे ही बोल रहा हूं क्योंकि एक अच्छे
- 3:15:24होस्ट यही निशानी है कि वो अपनी पार्टी
- 3:15:26में आए हुए गेस्ट की बेइज्जती ना होने दे।
- 3:15:29इसीलिए आपको भी यह ध्यान रखना चाहिए।
- 3:15:32शौर्य बिना किसी उत्तेजना के बोला, "तुम
- 3:15:35बिल्कुल सही कह रहे हो। और मैं मानता हूं
- 3:15:37कि मैं एक अच्छा होस्ट हूं। पर किसी लड़की
- 3:15:40के साथ छेड़खानी करने वाले शख्स के साथ
- 3:15:43मैं कोई रियायत नहीं करता। तुम्हारे साथ
- 3:15:46कुछ ज्यादती ना हो। इसीलिए मैंने तुम्हें
- 3:15:48कहा कि इस लड़की से माफी मांगकर बात को
- 3:15:51यहीं खत्म करो। रणधीर शेखावत शौर्य के
- 3:15:54करीब जाकर उसके कंधे को सहलाते हुए बोला।
- 3:15:57पर आपने यह फैसला कैसे कर लिया कि मैंने
- 3:16:00ऐसा कुछ किया भी है या नहीं? पहले आपको
- 3:16:02कायदे से इसकी जांच तो करनी चाहिए कि जो
- 3:16:05यह लड़की बोल रही है वो सच है भी या नहीं?
- 3:16:08या यह लड़की जानबूझकर मुझे टारगेट कर रही
- 3:16:11है। शौर्य रणधीर शेखावत की आंखों में
- 3:16:14देखते हुए बोला, "यह फैसला करने के लिए
- 3:16:17मुझे ज्यादा कुछ सोचना नहीं है। मेरे बेटे
- 3:16:19ने कह दिया कि तुमने ऐसा किया है तो किया
- 3:16:21है। इसलिए अब तुम्हारे लिए यही सही है कि
- 3:16:24तुम इस लड़की से माफी मांगो और मामले को
- 3:16:27खत्म करो। यह बोलते हुए रणधीर शेखावत अब
- 3:16:30इरिटेट होने लगा था। यानी आपके लिए यह बात
- 3:16:34मायने नहीं रखता कि मैं सही बोल रहा हूं
- 3:16:36या नहीं। पुत्र मुंह में आप इतने अंधे भी
- 3:16:39मत हो जाइए कि बाद में आपको अफसोस करने का
- 3:16:42भी मौका ना मिले। इसलिए मैं अब आपसे कह
- 3:16:44रहा हूं कि आप अपने बेटे और इस लड़की
- 3:16:47दोनों को बोलिए कि उसने जो मुझ पर गलत
- 3:16:49इल्जाम लगाया है उसके लिए यह दोनों अभी
- 3:16:52मुझसे माफी मांगे। शौर्य की बातों में अब
- 3:16:55तल्खी नजर आने लगी थी। कमाल है। कहां से
- 3:16:59इतनी हिम्मत लाते हो? मैंने अभी शायद कल
- 3:17:01ही तुम्हारी एक ऐड देखी थी जिसमें तुम
- 3:17:04नताशा के साथ थे। मुझे लगता है यह
- 3:17:06तुम्हारा पहला ही काम होगा। क्यों तुम इस
- 3:17:09इंडस्ट्री में आने से पहले ही अपनी भविष्य
- 3:17:11पर फुल स्टॉप लगाना चाहते हो? इतना बोलकर
- 3:17:14रणधीर शेखावत नताशा की ओर मुड़ा और उससे
- 3:17:17बोला, नताशा समझाओ इसे। जो मैं कह रहा हूं
- 3:17:21उसे यह बिना किसी होल हुज्जत के मान ले।
- 3:17:24नहीं तो दोबारा आगे कभी यह इस इंडस्ट्री
- 3:17:27में नजर भी नहीं आएगा। नताशा नहीं सोच रही
- 3:17:30थी कि बात इतनी आगे बढ़ जाएगी। पर वह
- 3:17:33शौर्य को इस बात के लिए भी नहीं बोल सकती
- 3:17:35थी कि वह सरोज से माफी मांगे। पर वह यह भी
- 3:17:38नहीं चाहती थी कि रणधीर शेखावत शौर्य से
- 3:17:41गुस्सा हो। क्योंकि वह जानती थी कि रणधीर
- 3:17:44शेखावत फिल्म इंडस्ट्री का एक बहुत बड़ा
- 3:17:46डिस्ट्रीब्यूटर था। उसके इशारे पर बहुत
- 3:17:49सारी फिल्मों का भविष्य तय होता था। उससे
- 3:17:52पंगा लेकर वह अपने लिए भी कोई रिस्क लेना
- 3:17:54नहीं चाहती थी। क्योंकि भले ही उसको आगे
- 3:17:57ऐड फिल्में मिलती रहेगी पर अगर वह चाह
- 3:18:00लेगा तो उसको आगे फिल्म इंडस्ट्री में काम
- 3:18:02मिलना मुश्किल हो जाएगा। वो कोई बीच का
- 3:18:04रास्ता निकालना चाह रही थी। इसीलिए वो
- 3:18:07रणधीर शेखावत से रिक्वेस्ट करती हुई बोली
- 3:18:10मिस्टर शेखावत हम बात को यहीं खत्म करते
- 3:18:13हैं ना। किसी को किसी से माफी मांगने की
- 3:18:15कोई जरूरत नहीं है। बाकी मैं श्रवण को
- 3:18:18लेकर यहां से चली जाती हूं।
- 3:18:21तुम बहुत भूली हो मिस नताशा। इतना भी नहीं
- 3:18:24समझ रही कि यहां क्या चल रहा है। आज इसी
- 3:18:27पार्टी में अभी मेरी प्रदुमन सेठ से बात
- 3:18:30हो रही थी। वो शायद तुम्हें लेकर कोई
- 3:18:32फिल्म बनाने वाले हैं। क्या तुम चाहती हो
- 3:18:35कि वह फिल्म बनने से पहले ही बंद हो जाए?
- 3:18:37कहीं उस फिल्म में यही लड़का हीरो तो नहीं
- 3:18:40है? अगर ऐसा है तो समझो तुम्हारी वह फिल्म
- 3:18:43बंद हो गई। इतना बोलकर रणधीर शेखावत उस
- 3:18:46हॉल में ही एक तरफ देखता हुआ जोर से बोला।
- 3:18:50क्यों प्रदुमन सेठ? क्या मैं सही बोल रहा
- 3:18:52हूं? रणधीर शेखावत की बात सुनकर एक 50 55
- 3:18:56के बीच का आदमी सामने आकर बोला, "आका इतना
- 3:19:00कहना ही काफी है शेखावत जी? अगर आप कह रहे
- 3:19:02हैं तो समझिए। मैं वो फिल्म अब नहीं बनाने
- 3:19:05जा रहा। देखा तुमने? एक पल में ही
- 3:19:08तुम्हारी फिल्म बंद हो गई। पर मैं अभी भी
- 3:19:11तुम्हें एक मौका दे रहा हूं। अगर अभी सबके
- 3:19:14सामने यह लड़का माफी मांग लेता है, तो
- 3:19:16शायद तुम्हारी यह फिल्म बन भी जाए। इसलिए
- 3:19:19अगर तुम चाहती हो कि तुम्हारी फिल्म बन
- 3:19:21जाए तो इसे बोलो। यह अपने घुटनों पर बैठकर
- 3:19:25यहां मेरे बेटे और इस लड़की से माफी
- 3:19:27मांगे। नताशा अब बहुत मजबूर नजर आने लगी
- 3:19:31थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या
- 3:19:33करें। वो शौर्य से बोलना तो चाह रही थी पर
- 3:19:36उसका दिल खुद इस बात को गवारा नहीं कर रहा
- 3:19:39था कि जो गलती शौर्य ने किया भी नहीं उसके
- 3:19:42लिए वो उसे माफी मांगने को बोले। पर वह
- 3:19:45खुद रणधीर शेखावत के सामने गई और बोली अगर
- 3:19:48आप माफी ही मंगवाना चाहते हैं तो मैं आपसे
- 3:19:51आपके बेटे से और इस लड़की से माफी मांगने
- 3:19:54को तैयार हूं। बस चाहती हूं कि आप इस बात
- 3:19:57को यही भूल जाइए। लगता है तुमने मेरी बात
- 3:20:00को ठीक से सुना नहीं। माफी तुमको नहीं इस
- 3:20:03लड़के को मांगनी है और वह भी अब घुटने के
- 3:20:05बल बैठकर। मेरे पास ज्यादा समय नहीं है।
- 3:20:08इसलिए जितनी जल्दी यह माफी मांग लेगा यह
- 3:20:11इसके लिए और तुम्हारे लिए दोनों के लिए
- 3:20:14अच्छा होगा। रणधीर शेखावत जहरीली मुस्कान
- 3:20:17के साथ बोला। मेघना जो इतनी देर से वहां
- 3:20:20हो रही बकवास को सुन रही थी, उसे भी रणधीर
- 3:20:23शेखावत पर गुस्सा आ रहा था। उसे लगा जब तक
- 3:20:26वह सब वहां पर रहेंगे यह ड्रामा ऐसे ही
- 3:20:28चलता रौरे के सामने गई और उससे बोली चलो
- 3:20:31हम यहां से चलते हैं। हमें नहीं रहना इस
- 3:20:33बकवास पार्टी में जहां सही को सही और गलत
- 3:20:36को गलत बोलने की कोई हिम्मत ही नहीं कर
- 3:20:38सकता। मेघना का उन सबके बीच में आना
- 3:20:41अनपेक्षित था। वह शौर्य का हाथ पकड़ कर
- 3:20:44उसे खींचती हुई वहां से जाना चाहती थी कि
- 3:20:46तभी कबीर शेखावत उसके सामने आकर खड़ा हो
- 3:20:49गया और बोला ओ मिस यह तेरे घर का गार्डन
- 3:20:53नहीं है जो आए और घूम कर चल दिए तुमने
- 3:20:56सुना नहीं अगर इसको जाना है तो पहले अपने
- 3:20:58घुटने पर बैठकर माफी मांगेगा तभी यह यहां
- 3:21:01से जा पाएगा किस बात की माफी मैंने क्या
- 3:21:04देखा नहीं कि यह तुम दोनों की साजिश थी
- 3:21:07श्रवण को फंसाने की ऐसी गिरी हुई हरकत
- 3:21:10करने के लिए तुम्हें माफी मांगनी चाहिए
- 3:21:12मेघना तैश में बोली क्या सबूत है तुम्हारे
- 3:21:15पास तुम अपने साथी को बचाने के लिए कुछ भी
- 3:21:18बोलोगी और मैं मान लूंगा कबीर उसके एकदम
- 3:21:21सामने आकर खड़ा हो गया सबूत देखना है
- 3:21:24तुमको तो मैं अभी दिखाती हूं इतना कहकर
- 3:21:27मेघना ने अपना मोबाइल निकाला और उसमें एक
- 3:21:30वीडियो प्ले कर दिया जिसमें दिख रहा था कि
- 3:21:32शौर्य और नताशा डांस कर रही थी। तभी पीछे
- 3:21:35से सरोज एक हाथ में वाइन की ग्लास लिए हुए
- 3:21:38डांस करती हुई शौर्य के पीछे पहुंची और
- 3:21:40वीडियो में साफ दिख रहा था कि वह जानबूझकर
- 3:21:43शौर्य से जाकर टकराई थी। मेघना ने मोबाइल
- 3:21:47कबीर के सामने कर रखा था। इसीलिए ज्यादा
- 3:21:49लोगों को मोबाइल पर क्या चल रहा है यह
- 3:21:51दिखाई नहीं दिया। जब कबीर ने देखा कि इस
- 3:21:54वीडियो से तो सरोज की पोल खुल जाएगी तो
- 3:21:56उसने एक झटके से मेघना के हाथ से उसका
- 3:21:59मोबाइल खींच लिया। कबीर ने इतनी तेजी से
- 3:22:02उसके हाथ से मोबाइल खींचा था कि मेघना को
- 3:22:04झटका सा लगा। वह आगे गिरने वाली थी कि
- 3:22:07शौर्य ने तेजी से उसकी कलाई पकड़ कर उसे
- 3:22:09गिरने से बचा लिया। कबीर की इस हरकत ने
- 3:22:12शौर्य का गुस्सा आसमान पर पहुंचा दिया।
- 3:22:15उसने मेघना को अपने पीछे किया और कबीर के
- 3:22:18सामने खड़ा हो गया। पर कबीर मेघना की ओर
- 3:22:20देखता हुआ बोला। तुम कुछ भी दिखाओगी और
- 3:22:23मैं तुम्हारी बात मान लूंगा। पर उसके
- 3:22:26सामने खड़ा शौर्य उसकी बात को अनसुनाकर
- 3:22:28कबीर की तरफ अपना हाथ बढ़ाकर बोला मेघना
- 3:22:32का मोबाइल दो। कबीर से इतना बोलकर अपना
- 3:22:34सिर रणधीर शेखावत की ओर घुमाकर बोला तो
- 3:22:38मिस्टर शेखावत यही संस्कार दिया है अपने
- 3:22:41बेटे को कि किसी लड़की से कैसे बिहेव किया
- 3:22:43जाता है? अब बताइए माफी किसे मांगनी
- 3:22:46चाहिए? रणधीर शेखावत से इतना बोलकर शौर्य
- 3:22:50फिर से कबीर की ओर देखने लगा। उसका हाथ
- 3:22:52अभी भी कबीर के सामने फैला हुआ था। कबीर
- 3:22:56ने उसके फैले हाथ की ओर देखा और
- 3:22:58मुस्कुराते हुए बोला, "तुम्हें इसका
- 3:23:00मोबाइल चाहिए? ये लो, ये लो, ये लो।"
- 3:23:04बोलते हुए कबीर मेघना का मोबाइल शौर्य की
- 3:23:08तरफ बढ़ाता। जैसे ही शौर्य मोबाइल पकड़ने
- 3:23:11के लिए हाथ बढ़ाता, कबीर हाथ पीछे खींच
- 3:23:15लेता। उसने बार-बार ऐसा किया और अंत में
- 3:23:18उसने मोबाइल को जोर से फर्श पर पटक दिया।
- 3:23:22यही वह पल था जब शौर्य का पेशेंस जवाब दे
- 3:23:26दिया। उसका तेज धप्पड़ कबीर के गाल पर
- 3:23:28पड़ा और कबीर सीधा जमीन पर गिरा। कबीर के
- 3:23:32कान में तो सिटी सा बजने लगा। वहां
- 3:23:35उपस्थित किसी को भी समझ नहीं आया कि यह एक
- 3:23:38ही पल में क्या हो गया। कोई चाहकर भी इस
- 3:23:40बात पर विश्वास नहीं कर पा रहा था कि एक
- 3:23:43अदने से लड़के ने कबीर शेखावत को एक
- 3:23:46थप्पड़ में जमीन पर ला दिया। खुद रणधीर
- 3:23:49शेखावत को विश्वास करना मुश्किल हो रहा था
- 3:23:51कि शौर्य ने कबीर शेखावत पर हाथ उठा दिया।
- 3:23:54वो तो अब तक यही समझ रहा था कि फिल्म
- 3:23:56इंडस्ट्री में जिस तरह का उसका रुतबा है,
- 3:23:59उसको देखकर शौर्य तुरंत ही घुटने पर आ
- 3:24:01जाएगा। पर घुटने पर आने की बात तो दूर
- 3:24:04उसने उल्टा कबीर शेखावत को ही जमीन पर ला
- 3:24:07दिया था। दूसरी तरफ मेघना भी फटीफटी आंखों
- 3:24:10से शौर्य को देख रही थी। उसे भी यकीन नहीं
- 3:24:13हो रहा था कि शौर्य इस स्तर तक जा सकता है
- 3:24:16क्योंकि आज से पहले उसने कभी शौर्य का ऐसा
- 3:24:18रूप नहीं देखा था। वो तो उसको हमेशा
- 3:24:20शिप्रा के सामने दबा सहमा सा ही देखती थी।
- 3:24:24नताशा का भी कमोबेश यही हाल था। वो भी
- 3:24:27आश्चर्य से शौर्य की तरफ देख रही थी। उसे
- 3:24:29भी अब समझ नहीं आ रहा था कि अब वह स्थिति
- 3:24:32को कैसे संभाले। कुछ पल बाद जब रणधीर
- 3:24:35शेखावत को होश आया कि वहां पर क्या हो गया
- 3:24:38है तो वह तेजी से कबीर के पास पहुंचा और
- 3:24:40उसको सहारा देकर खड़ा किया। अभी भी कबीर
- 3:24:44का सिर चकरा रहा था। इस भरी पार्टी में
- 3:24:46अपने बेटे का ऐसा अपमान देखकर रणधीर
- 3:24:49शेखावत का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। वो
- 3:24:52शौर्य के पास पहुंचा और बोला तुम्हारी
- 3:24:54इतनी हिम्मत कि तुमने मेरे बेटे के ऊपर
- 3:24:57हाथ उठाया। अब देख मैं तुम्हारा क्या हाल
- 3:25:00करता हूं। मेरा हाल तो क्या ही आप कुछ
- 3:25:02बिगाड़ पाओगे। पहले अपने बेटे का हाल तो
- 3:25:05देख लो। शौर्य उपहास उड़ाने वाले भाव में
- 3:25:08बोला सिक्योरिटी रणधीर शेखावत जोर से
- 3:25:12चिल्लाया। तभी होटल की सिक्योरिटी का चार
- 3:25:14स्टाफ दौड़ता हुआ वहां पर आया और उसने
- 3:25:17चारों तरफ से शौर्य को घेर लिया। जैसे उसे
- 3:25:20पहले से ही पता था कि उसे क्या करना है।
- 3:25:22सिक्योरिटी के स्टाफ को अपने चारों ओर
- 3:25:24देखकर मेघना घबरा गई थी। पर शौर्य ने उनकी
- 3:25:27तरफ देखकर बोला, "तुम लोग होटल के स्टाफ
- 3:25:30हो या इसके गुंडे जो मुझे ऐसे घेर लिया
- 3:25:32है।" शौर्य की बात सुनकर सिक्योरिटी स्टाफ
- 3:25:35को समझ नहीं आया कि उसे क्या करना चाहिए।
- 3:25:38वे चारों एक दूसरे की तरफ देखने लगे। जब
- 3:25:41रणधीर शेखावत ने उन सबको ऐसे खड़ा एक
- 3:25:43दूसरे का मुंह देखते देखा तो गुस्से में
- 3:25:46बोला, "तुम सब एक दूसरे का मुंह क्या देख
- 3:25:48रहे हो? इस बदमाश ने मेरे बेटे पर हाथ
- 3:25:51उठाया है। और तुम सब खड़े-खड़े तमाशा देख
- 3:25:53रहे हो। तुम सबका इस मामले से कोई लेना
- 3:25:56देना नहीं है। अगर तुम्हें कुछ करना ही है
- 3:25:59तो अपने मैनेजर को यहां बुला लो। शौर्य उन
- 3:26:02सिक्योरिटी के लोगों को वर्न करता हुआ
- 3:26:04बोला। अब तक कबीर भी खुद को संभाल चुका
- 3:26:06था। यह याद करके कि शौर्य ने उसे एक
- 3:26:09थप्पड़ में ही जमीन पर ला दिया। उसका
- 3:26:11चेहरा भी गुस्से से लाल हो गया। वो गुस्से
- 3:26:14में शौर्य के पास गया और गुर्राते हुए
- 3:26:16बोला। तुम्हारी इतनी हिम्मत तुमने मुझ पर
- 3:26:19हाथ उठाया। अब देख मैं तेरा क्या हाल करता
- 3:26:22हूं। इतना बोलकर कबीर तेजी से शौर्य पर
- 3:26:25झपटा। पर शौर्य पहले से ही तैयार था। जैसे
- 3:26:28ही कबीर उसके करीब पहुंचा, शौर्य ने फिर
- 3:26:31से एक थप्पड़ उसके गाल पर जमा दिया। कबीर
- 3:26:34दोबारा जमीन पर पड़ा था। यह देखकर तो
- 3:26:36रणधीर शेखावत पागल सा हो गया। कमीने तुमने
- 3:26:39मेरे बेटे का क्या हाल कर दिया। तुम्हें
- 3:26:42नहीं पता तुमने किससे पंगा लिया है। तेरी
- 3:26:44लाइफ को जहन्नुम नहीं बना दिया तो मेरा
- 3:26:46नाम रणधीर शेखावत नहीं। अभी रणधीर शेखावत
- 3:26:50की बात समाप्त ही हुई थी कि तभी वहां पर
- 3:26:52एक रौपदार आवाज गूंजी। उस रौबदार आवाज को
- 3:26:56सुनकर सभी का ध्यान उसकी तरफ चला गया।
- 3:27:00जब रणधीर शेखावत ने उस शख्स को देखा तो वो
- 3:27:04उसके पास जाते हुए बोला अच्छा हुआ वालिया
- 3:27:07साहब आप यहां आ गए। यह बदमाश यहां अपनी
- 3:27:09मनमानी कर रहा है। आप जल्दी से यहां पुलिस
- 3:27:11को बुलाएं या अपने सिक्योरिटी के लोगों से
- 3:27:14इसको सबक सिखाइए। अभी जो शख्स यहां आया था
- 3:27:18उसका पूरा नाम अशोक वालिया था जो कि
- 3:27:21पैराडाइज होटल का मैनेजर था। अशोक वालिया
- 3:27:24शौर्य के सामने जाकर खड़ा हो गया और उससे
- 3:27:27बोला यह तुम क्या मारपीट कर रहे हो यहां?
- 3:27:30तुम्हें पता भी है इसका क्या अंजाम
- 3:27:31तुम्हें भुगतना पड़ सकता है। शौर्य अशोक
- 3:27:34वालिया को नहीं जानता था। उसे नहीं पता था
- 3:27:37कि इस होटल की देखरेख कौन कर रहा है। पर
- 3:27:39वह इतना समझ गया था कि यह शख्स जो भी हो
- 3:27:43इस होटल में कोई खास पद ही रखता होगा।
- 3:27:46इसलिए वो थोड़ा सभ्य होकर बोला आपको पहले
- 3:27:49यह देखना चाहिए कि इसे शुरू किसने किया।
- 3:27:52अगर यह मेरी दोस्त के साथ बदतमीजी नहीं
- 3:27:54करता। उसका मोबाइल नहीं तोड़ता तो शायद
- 3:27:57मैं इसके साथ सभ्य बनकर रहता। पर इसने
- 3:27:59अपनी लिमिट पार कर ली तो उसकी सजा तो इसको
- 3:28:02मिलनी ही थी। आप देख रहे हैं वालिया साहब
- 3:28:05एक तो यह हमारी पार्टी में घुसाया है।
- 3:28:07दूसरा यह लड़कियों को छेड़ रहा था। और जब
- 3:28:10मेरे बेटे ने इसे माफी मांगने के लिए कहा
- 3:28:12तो यह उसी को मारने लगा। मैं कहता हूं अभी
- 3:28:16आप पुलिस को बुलाकर इसे उसके हवाले कीजिए।
- 3:28:19रणधीर शेखावत गुस्से में बोला। उसको देखकर
- 3:28:22ऐसा लग रहा था कि अगर उसका बस चले तो वह
- 3:28:25उसे आंखों से ही भस्म कर देगा। पर उसने
- 3:28:28देख लिया था कि शौर्य बहुत ताकतवर था।
- 3:28:31उसके एक थप्पड़ ने ही कबीर को फर्श पर
- 3:28:33गिरा दिया था। रणधीर शेखावत की बात सुनकर
- 3:28:37अशोक वालिया शौर्य के चारों तरफ खड़े
- 3:28:39चारों सिक्योरिटी गार्ड से बोला, "तुम लोग
- 3:28:42खड़े-खड़े तमाशा क्या देख रहे हो? इसको
- 3:28:44चारों मिलकर पकड़ो और इसके हाथ पैर बांध
- 3:28:46दो। मैं अभी पुलिस को बुलाकर इसको पुलिस
- 3:28:48के हवाले करूंगा। अशोक वालिया का आदेश
- 3:28:51पाकर चारों सिक्योरिटी गार्ड शौर्य की तरफ
- 3:28:54बढ़े। तभी शौर्य उन चारों को देखते हुए
- 3:28:57गुर्रा कर बोला। खबरदार जो मेरे पास भी आए
- 3:29:00इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। और मिस्टर
- 3:29:04वालिया अगर आपको पुलिस ही बुलाना है तो आप
- 3:29:06बुला लीजिए। मैं कहीं भाग नहीं रहा हूं।
- 3:29:09पर आप मुझे पुलिस के हवाले किस बेस पर
- 3:29:11करेंगे? आपके पास मेरे खिलाफ है क्या जो
- 3:29:14आप मुझे पुलिस के हवाले करेंगे? सबसे पहले
- 3:29:17तो शौर्य की धमकी सुनकर चारों सिक्योरिटी
- 3:29:20गार्ड अपनी जगह पर ही खड़े रह गए। और
- 3:29:22मिस्टर अशोक वालिया शौर्य की बात सुनकर
- 3:29:25रणधीर शेखावत की ओर देखने लगा। क्योंकि
- 3:29:28उसे भी समझ नहीं आया कि जो बात रणधीर
- 3:29:30शेखावत ने कही है उस बात में कोई दम भी है
- 3:29:33या नहीं। जब रणधीर शेखावत ने अशोक वालिया
- 3:29:36को अपनी तरफ देखते पाया तो वह बोला यहां
- 3:29:40सबको पता है कि इसने मिस सरोज को छेड़ा
- 3:29:42था। उनके ऊपर वाइन भी गिरा दिया और दूसरी
- 3:29:45बात इसने सबके सामने मेरे बेटे पर हाथ
- 3:29:47उठाया है। इस बात की गवाही यहां मौजूद सभी
- 3:29:50लोग देंगे। सबसे पहली बात मैंने इस लड़की
- 3:29:54को छेड़ा या नहीं छेड़ा या इसके ऊपर वाइन
- 3:29:56गिराया। उसका पूरा वीडियो मेघना की मोबाइल
- 3:29:59में कैप्चर था। जिसको देखने के बाद ही
- 3:30:02आपके इस लाडले ने मेघना का मोबाइल तोड़
- 3:30:04दिया और उसके साथ बदतमीजी की। उसके बाद
- 3:30:07मैंने इस पर हाथ उठाया है। और सच कहूं तो
- 3:30:10यह है ही इसी लायक। सिर्फ आपके कह देने से
- 3:30:13मैं गुनहगार नहीं हो जाऊंगा। बल्कि सबके
- 3:30:16सामने इसने मेघना का मोबाइल छीना और उसके
- 3:30:18साथ बदतमीजी की तो जेल मैं नहीं आपका यह
- 3:30:21बेटा जाएगा। शौर्य अपनी बात स्पष्ट करते
- 3:30:25हुए बोला ऐसा कोई वीडियो तुम्हारी दोस्त
- 3:30:28के मोबाइल में नहीं था जैसा तुम बोल रहे
- 3:30:30हो। तुम सब मिले हुए हो। इसने कुछ गलत
- 3:30:33वीडियो सरोज का कैप्चर कर रखा था जिसके
- 3:30:35कारण मैंने उसका मोबाइल तोड़ दिया।
- 3:30:38तुम्हारे कह देने से तुम शरीफ नहीं बन
- 3:30:40जाओगे। यहां मौजूद बाकी लोग भी यह गवाही
- 3:30:42देंगे कि तुमने सरोज के साथ जानबूझकर
- 3:30:45बदतमीजी की। इसलिए तुम्हारे यह बहाना
- 3:30:48बनाने से कुछ नहीं होगा कि तुम्हारी दोस्त
- 3:30:50के पास ऐसा कोई वीडियो था। कबीर सामने आकर
- 3:30:54हिम्मत करते हुए बोला, कितने बेवकूफ हो
- 3:30:57तुम। तुम्हारे मोबाइल तोड़ देने से
- 3:30:59तात्कालिक रूप से तुम अपनी बात से बच सकते
- 3:31:02हो। पर जब यह मोबाइल रिपेयर करके इसका
- 3:31:05डाटा रिकवर किया जाएगा, तो फिर तुम्हारी
- 3:31:07यह सारी दलील धरी की धरी रह जाएगी। फिर
- 3:31:10देखूंगा तुम्हें कौन बचाता है। शौर्य कबीर
- 3:31:13का उपहास उड़ाते हुए बोला। शौर्य की इस
- 3:31:16बात को सुनकर कबीर के चेहरे पर परेशानी
- 3:31:18नजर आने लगी। जिसको देखकर अशोक वालिया भी
- 3:31:21समझ गया कि शौर्य जो कह रहा है वह सही है।
- 3:31:24पर वह रणधीर शेखावत के सामने शौर्य का
- 3:31:27पक्ष नहीं ले सकता था। इसलिए वह रणधीर
- 3:31:29शेखावत की ओर देखने लगा कि वह क्या जवाब
- 3:31:31देता है। रणधीर शेखावत भी समझ गया था कि
- 3:31:35शौर्य सही बोल रहा है। पर उसे इस बात की
- 3:31:38कोई परवाह नहीं थी। वह तो किसी भी हाल में
- 3:31:40शौर्य को सबक सिखाना चाहता था। इसलिए वह
- 3:31:43अशोक वालिया से बोला, वालिया साहब, आप
- 3:31:46इसकी बात पर ध्यान मत दीजिए। बस आप इसको
- 3:31:48सबक सिखाइए। बाकी जो भी होगा मैं देख
- 3:31:51लूंगा। यह लड़का इतनी आसानी से यहां से
- 3:31:54बचकर नहीं जाना चाहिए। एक तो यह मेरी
- 3:31:56पार्टी में घुस आया है और यहां आकर इसने
- 3:31:59मेरी पार्टी को भी खराब कर दिया। तो इसे
- 3:32:01इसकी सजा तो मिलनी ही चाहिए। रणधीर शेखावत
- 3:32:05की बात सुनकर अशोक वालिया बेबस नजर आने
- 3:32:07लगा। वो एक कोशिश करते हुए बोला, सुनो
- 3:32:11लड़के तुम क्यों जानबूझकर आफत मोल लेना
- 3:32:14चाह रहे हो? तुम उनसे माफी मांगकर क्यों
- 3:32:16नहीं मामले को यहीं समाप्त कर रहे हो? अगर
- 3:32:18मैं तुम्हारी बात को मान भी लूं कि तुमने
- 3:32:21किसी लड़की से कोई बदतमीजी नहीं की। पर
- 3:32:23तुम उनकी पार्टी में घुस आए हो और उनकी
- 3:32:25पार्टी को खराब करने में कोई कसर नहीं
- 3:32:27छोड़ी। यह गुनाह भी कोई कम नहीं है। इसलिए
- 3:32:30मेरी बात मानो और उनसे माफी मांगकर मामले
- 3:32:33को रफादफा करो। मिस्टर वालिया यह तो आपके
- 3:32:37यहां का सीसीटीवी देखकर पता चल जाएगा कि
- 3:32:39मैं यहां जबरदस्ती घुसा हूं या मेरे आने
- 3:32:42पर इन्होंने हमारा वेलकम भी किया था और
- 3:32:44अभी यह भले ही मेघना का मोबाइल तोड़कर सोच
- 3:32:47रहा होगा कि इसने वह सबूत मिटा दिया
- 3:32:49जिसमें यह नजर आ रहा था कि मैंने मेघना के
- 3:32:51साथ बदतमीजी की या सरोज ने जानबूझकर मुझे
- 3:32:54फंसाने की कोशिश की। इतना बोलकर शौर्य
- 3:32:58रुका और उस हॉल में मौजूद सीसीटीवी की ओर
- 3:33:00देखने लगा। उसने देखा कि डांस फ्लोर के
- 3:33:03पास भी एक सीसीटीवी नजर आ रहा था। जिसको
- 3:33:05देखकर उसके चेहरे पर एक स्माइल आ गई और वह
- 3:33:08अशोक वालिया से फिर से बोला आप ऐसा क्यों
- 3:33:11नहीं करते मिस्टर वालिया कि आप ही चलकर एक
- 3:33:14बार यहां का सीसीटीवी देख लीजिए। अभी पता
- 3:33:16चल जाएगा कि मैंने इस लड़की के साथ
- 3:33:18बदतमीजी की। इस पर वाइन गिराया या इसने
- 3:33:21मुझे जानबूझकर फंसाने की कोशिश की है।
- 3:33:24शौर्य की इस बात को सुनकर वहां मौजूद सभी
- 3:33:27लोगों की नजर उस सीसीटीवी की तरफ चली गई
- 3:33:30जो डांस फ्लोर के ऊपर नजर आ रहा था। उस
- 3:33:32सीसीटीवी को देखकर कबीर का चेहरा और भी
- 3:33:35सफेद पड़ गया। सिर्फ कबीर का ही क्या?
- 3:33:37सरोज के चेहरे का भी रंग बदल गया। उसके
- 3:33:40चेहरे के उड़े हुए रंग को देखकर शौर्य
- 3:33:42सरोज से बोला, "क्यों मिस सरोज? क्या अभी
- 3:33:45भी आप इस बात पर कायम हैं कि मैंने आपके
- 3:33:48साथ कोई बदतमीजी करने की कोशिश की या आपके
- 3:33:51ऊपर कोई वाइन गिराया है? तुमने ऐसा किया
- 3:33:54ही होगा। नहीं तो क्या मैं अपने आप ही
- 3:33:56वहां गिर गई और क्या खुद ही मैं अपने ऊपर
- 3:33:59वाइन गिरा लेती? कुछ ना कुछ तो तुमने किया
- 3:34:01ही होगा। सरोज अटकते हुए बोली क्या हुआ?
- 3:34:05तुम्हारा वो कॉन्फिडेंस कहां चला गया? जो
- 3:34:08अभी तुम थोड़ी देर पहले चीख-चीख कर कह रही
- 3:34:10थी कि मैंने तुम्हारे साथ बदतमीजी की। अभी
- 3:34:13भी तो वही कॉन्फिडेंस दिखाओ। शौर्य सरोज
- 3:34:16पर चढ़ता हुआ बोला। सरोज की स्थिति तो
- 3:34:19काटो तो खून नहीं जैसी हो गई। वो कभी कबीर
- 3:34:22की तरफ तो कभी रणधीर शेखावत की ओर देखने
- 3:34:24लगी। अब उसे उन्हीं से उम्मीद थी कि वह
- 3:34:27बीच में आकर शौर्य की बातों का जवाब दे।
- 3:34:30अशोक वालिया ने जब स्थिति को बदलते देखा
- 3:34:33तो उन्होंने रणधीर शेखावत से पूछा। आप
- 3:34:36क्या कहते हैं शेखावत साहब? क्या मैं
- 3:34:38पुलिस को बुलाऊं? अगर आप कहेंगे तो मैं
- 3:34:40अभी यहां पुलिस को बुला दूंगा। उसके बाद
- 3:34:43जो भी होगा उस सबके लिए आप स्वयं ही
- 3:34:45जिम्मेदार होंगे। फिर मैं उसके बीच में
- 3:34:47कुछ भी नहीं कर पाऊंगा। रणधीर शेखावत भी
- 3:34:51समझ गया कि पुलिस के आने से उनका मामला ही
- 3:34:55कमजोर पड़ेगा क्योंकि अभी तक उन्हें भी यह
- 3:34:57ध्यान नहीं था कि यहां जो कुछ भी हुआ होगा
- 3:35:01वो सब कुछ सीसीटीवी में कैद होगा। और
- 3:35:04सीसीटीवी को देखते ही सरोज की पोल खुल
- 3:35:07जाएगी। तो यह बात उनके लिए और भी
- 3:35:11शर्मिंदगीगी वाली होगी। अब तक जो रणधीर
- 3:35:14शेखावत की बातों में शौर्य को सबक सिखाने
- 3:35:16का घमंड नजर आ रहा था अचानक ही वह खत्म हो
- 3:35:19गया। वो थोड़े संयत स्वर में अशोक वालिया
- 3:35:23से बोले मिस्टर वालिया जो हुआ वो वापस तो
- 3:35:27नहीं आ सकता। पहले ही मेरी पार्टी बहुत
- 3:35:29खराब हो चुकी है। इसलिए मैं और नहीं चाहता
- 3:35:32कि मेरी पार्टी और खराब हो। इसलिए आप अभी
- 3:35:35के अभी इस लड़के को इस होटल से बाहर
- 3:35:38निकालिए। अशोक वालिया ने जब रणधीर शेखावत
- 3:35:41की बात सुनी तो उन्होंने थोड़ी राहत महसूस
- 3:35:43की और वो शौर्य के पास आकर बोले सुन लिया
- 3:35:47तुमने अब जितनी जल्दी हो सके तुम यहां से
- 3:35:509 2 11 हो जाओ। इसी में तुम्हारी भलाई है।
- 3:35:55मेरी भलाई। आप जरा स्पष्ट करेंगे मिस्टर
- 3:35:57वालिया कि इसमें मेरी क्या भलाई है? अगर
- 3:36:00आप चाहते हैं कि मैं यहां से जाऊं तो सबसे
- 3:36:02पहले इस कबीर और इस सरोज को मुझसे माफी
- 3:36:05मांगनी पड़ेगी जो इन्होंने मुझ पर झूठा
- 3:36:07इल्जाम लगाया और साथ में इन्हें मेघना के
- 3:36:10मोबाइल की कीमत भी देनी पड़ेगी जो इस कबीर
- 3:36:14के बच्चे ने पटक कर तोड़ दिया है। शौर्य
- 3:36:16उपहास भरे स्वर में बोला नताशा जो वहां
- 3:36:19खड़ी इतनी देर से हो रहे तमाशे को देख रही
- 3:36:22थी। जब उसने देखा कि बात अब लगभग समाप्त
- 3:36:24हो गई है, तभी शौर्य ने एक अलग जिद ठान ली
- 3:36:28कि कबीर और सरोज को उससे माफी मांगनी
- 3:36:30पड़ेगी। इस बात को लेकर उसे फिर से चिंता
- 3:36:33होने लगी कि शौर्य फिर से बात को बढ़ा रहा
- 3:36:35है। वो शौर्य के पास गई और बोली रहने देते
- 3:36:39हैं ना श्रवण हम चलते हैं यहां से। बाकी
- 3:36:42मेघना की मोबाइल की कीमत मैं दे दूंगी।
- 3:36:45क्यों तुम क्यों दोगी? जब इसने तोड़ा है
- 3:36:48तो यही देगा और इसको मुझसे माफी तो मांगनी
- 3:36:51पड़ेगी। क्योंकि मैं अपनी इस बेइज्जती को
- 3:36:53इतनी आसानी से नहीं भूल सकता। शौर्य कबीर
- 3:36:56को घूरता हुआ बोला। अशोक वालिया को भी
- 3:36:59शौर्य थोड़ा अजीब जान पड़ा। उसे लग रहा था
- 3:37:02कि जब इतनी आसानी से वो यहां से जा सकता
- 3:37:04था तो फिर क्यों वो जानबूझकर रणधीर शेखावत
- 3:37:08से पंगे ले रहा है। अशोक वालिया रणधीर
- 3:37:10शेखावत की हैसियत से अच्छी तरह वाकिफ था।
- 3:37:13वो यह समझ रहा था कि इस समय रणधीर शेखावत
- 3:37:16की स्थिति भले ही कमजोर है पर वह शौर्य को
- 3:37:19इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। वो
- 3:37:22बाद में उससे इस बेइज्जती का बदला तो जरूर
- 3:37:24लेगा। पर इस समय अशोक वालिया का मकसद
- 3:37:27सिर्फ इतना था कि उसके होटल में कोई
- 3:37:29हंगामा ना हो। इसलिए वह चाहता था कि शौर्य
- 3:37:32वहां से चला जाए। यही सोचकर वो बोला
- 3:37:35मिस्टर सरवन जो बात खत्म हो रही है आप
- 3:37:38क्यों उसको हवा दे रहे हैं? एक बार को मैं
- 3:37:41आपकी बात समझ भी लेता हूं। लेकिन आप
- 3:37:43स्थिति को समझिए और मेरा कहा मानिए यहां
- 3:37:46से चले जाइए। शौर्य अशोक वालिया की मजबूरी
- 3:37:50को समझ रहा था पर वो ठान चुका था कि रणधीर
- 3:37:53शेखावत को उसकी औकात तो दिखाकर रहेगा और
- 3:37:56उसकी शुरुआत तो सबसे पहले यहीं से होनी थी
- 3:38:00कि उसके बेटे को सबके सामने उससे माफी
- 3:38:02मांगनी पड़ेगी। इसलिए वह पूरी विनम्रता से
- 3:38:05अशोक वालिया से बोला, मिस्टर वालिया, मैं
- 3:38:09आपकी मजबूरी समझता हूं। पर मैं यहां से
- 3:38:11ऐसे ही नहीं जाऊंगा। अगर आप चाहते हैं कि
- 3:38:14मैं यहां से ऐसे चला जाऊं, तो समझाइए
- 3:38:16मिस्टर शेखावत को कि अपने बेटे से कहें कि
- 3:38:19वो अभी सबके सामने मुझसे माफी मांगे और
- 3:38:22मेघना के मोबाइल के पैसे भरे। नहीं तो आप
- 3:38:25भले पुलिस को नहीं बुलाएंगे। लेकिन मैं तो
- 3:38:27जरूर बुलाऊंगा और आपके सीसीटीवी को भी
- 3:38:30पब्लिक करना पड़ेगा ताकि सारी सच्चाई यहां
- 3:38:33बाहर आए। अशोक वालिया समझ गया कि यह लड़का
- 3:38:36भी जिद्दी है। वो कितना भी समझाए पर वो
- 3:38:39उसकी बात को नहीं मानेगा। इसलिए वो अब
- 3:38:42रणधीर शेखावत की ओर देखने लगे कि वह अब
- 3:38:44क्या कहते हैं। रणधीर शेखावत का खून तो
- 3:38:48वैसे ही खौल रहा था शौर्य की बात सुनकर।
- 3:38:51यह तो कौड़ी का लड़का आज इस भारी पार्टी
- 3:38:53में उनकी ऐसी तैसी किए हुए था। रणधीर
- 3:38:56शेखावत की सारी अकड़ ढीली हो गई थी। उसे
- 3:38:59अब अपने बेटे पर गुस्सा आ रहा था कि उसे
- 3:39:02ऐसी बेवकूफी करने की क्या जरूरत थी? पर वह
- 3:39:05चाहकर भी अपने बेटे से माफी मांगने के लिए
- 3:39:08नहीं बोल पा रहे थे। ऐसी बेइज्जती रणधीर
- 3:39:11शेखावत ने आज तक नहीं झेली थी। तो क्या
- 3:39:14रणधीर शेखावत अपने बेटे से माफी मांगने को
- 3:39:16कहेंगे? या उठाएंगे कुछ ऐसा कदम जिसकी
- 3:39:19किसी को उम्मीद भी नहीं होगी। शौर्य की यह
- 3:39:22जिद देखकर मेघना भी हैरान थी कि जो बात
- 3:39:26खत्म ही हो रही है उसको शौर्य क्यों तूल
- 3:39:30दे रहा है। अभी मौका है तो उसे यहां से
- 3:39:33चले जाना चाहिए। पर वह कबीर और सरोज से
- 3:39:37माफी मंगवाने पर तुला हुआ है। लड़के तुमने
- 3:39:41हमसे उलझकर पहले ही अपना आगे बढ़ने का
- 3:39:43रास्ता बंद कर लिया है। अभी भी तुम्हारे
- 3:39:46पास मौका है। तुम अपनी फालतू की जिद छोड़ो
- 3:39:49और यहां से चले जाओ। तो हो सकता है कि तुम
- 3:39:52अपने भविष्य में आगे कुछ कर पाओगे। नहीं
- 3:39:55तो मैं यह खुद पक्का करूंगा कि तुम्हें
- 3:39:58आगे से कभी फिल्म इंडस्ट्री में कोई काम
- 3:40:01नहीं देगा।
- 3:40:02अभी भी रणधीर शेखावत शौर्य को धमकाने से
- 3:40:06बाज नहीं आ रहा था। मुझे धमकाने से अच्छा
- 3:40:09है कि आप उस बात पर ध्यान दें जो मैंने
- 3:40:12अभी कहा। नहीं तो मुझे दूसरा रास्ता भी
- 3:40:16पता है कि मुझे क्या करना है। शौर्य पर
- 3:40:19रणधीर शेखावत की धमकी का कोई असर नहीं
- 3:40:22हुआ। जब शौर्य पर रणधीर शेखावत का कोई जोर
- 3:40:25नहीं चला तो वह नताशा कपूर की तरफ मुड़ा
- 3:40:28और उससे बोला मिस नताशा आप अपने दोस्त को
- 3:40:32समझाइए और यहां से ले जाइए नहीं तो आपकी
- 3:40:36स्थिति भी गेहूं की घूम की तरह हो जाएगी।
- 3:40:39यह तो पिसेगा ही। इसके साथ आपको भी पिसना
- 3:40:42पड़ेगा। रणधीर शेखावत की बात नताशा कपूर
- 3:40:46को डराने के लिए काफी थी। वो शौर्य के पास
- 3:40:49गई और धीरे से बोली श्रवण चलते हैं ना
- 3:40:53यहां से। मुझे भी यहां रुकने का कोई शौक
- 3:40:56नहीं है। पर अभी तक इस कबीर शेखावत ने
- 3:40:58मुझसे माफी नहीं मांगी। शौर्य अभी भी इस
- 3:41:02जिद को पकड़े हुए था। रणधीर शेखावत को
- 3:41:05शौर्य पर बहुत गुस्सा आ रहा था। पर वह
- 3:41:08बहुत मुश्किल से खुद को कंट्रोल किए हुए
- 3:41:10था। उसे शौर्य की धमकी गैर वाजिब लगी।
- 3:41:14उन्हें समझ नहीं आया कि अगर पुलिस यहां
- 3:41:16आएगी तो वह उनके बेटे को किस आधार पर
- 3:41:18गिरफ्तार करेगी। अगर कबीर ने सरोज के साथ
- 3:41:22मिलकर शौर्य को फंसाने की कोशिश की भी तो
- 3:41:25यह कोई ऐसा गुनाह नहीं है जिसके लिए पुलिस
- 3:41:28कबीर को गिरफ्तार करेगी। यही सोचकर रणधीर
- 3:41:32शेखावत अशोक वालिया से बोला। मिस्टर
- 3:41:35वालिया आपके इतने बड़े होटल में कोई
- 3:41:38व्यक्ति मेरी पार्टी को खराब कर रहा है और
- 3:41:40आप उसको मेरी पार्टी से निकाल भी नहीं पा
- 3:41:42रहे हैं। क्या यही है आपके होटल की
- 3:41:45सुरक्षा? रणधीर शेखावत की बात सुनकर अशोक
- 3:41:49वालिया थोड़ा गंभीर हो गया। वो शौर्य से
- 3:41:52बोला मिस्टर श्रवण आपके कारण मेरे होटल के
- 3:41:56गेस्ट को परेशानी हो रही है। इसलिए मैं
- 3:41:58चाहूंगा कि आप यहां से चले जाएं। सबसे
- 3:42:01पहली बात मैं यहां इस होटल में जबरदस्ती
- 3:42:04नहीं घुसा। आप अपने सीसीटीवी पर देख सकते
- 3:42:07हैं कि जब मैं यहां आया था तो खुद रणधीर
- 3:42:10शेखावत ने हम लोगों का स्वागत किया था।
- 3:42:12इसीलिए इसकी जिम्मेदारी आपकी नहीं होती कि
- 3:42:15मैं यहां क्यों हूं। मेरे यहां होने के
- 3:42:18लिए पूरी तरह से रणधीर शेखावत खुद ही
- 3:42:21जिम्मेदार हैं। इसीलिए आप इस जिम्मेदारी
- 3:42:24से मुक्त हैं। अगर आपको मेरी बात का
- 3:42:27विश्वास नहीं है तो आप यहां का सीसीटीवी
- 3:42:29फुटेज चेक कर सकते हैं। जहां तक रही बात
- 3:42:32कि मैं यहां से जा क्यों नहीं रहा तो उसके
- 3:42:35लिए मुझे पहले पुलिस को यहां बुलाना
- 3:42:37पड़ेगा और इस कबीर के बच्चे को उनके हवाले
- 3:42:40करवाना पड़ेगा। इसने मेरी दोस्त की
- 3:42:43बेइज्जती की है। उसका मोबाइल भी तोड़ दिया
- 3:42:46है। हां, पुलिस के आने पर आपको होटल का
- 3:42:49सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हवाले करना
- 3:42:52पड़ेगा। शौर्य की बात सुनकर रणधीर शेखावत
- 3:42:56को समझ आ गया कि क्यों शौर्य इतने
- 3:42:58कॉन्फिडेंस में है कि वह उनके बेटे को जेल
- 3:43:01भिजवा देगा। रणधीर शेखावत का ध्यान
- 3:43:04सीसीटीवी की तरफ था ही नहीं। वह समझ गए कि
- 3:43:08शौर्य उस फुटेज की बात कर रहा है जब कबीर
- 3:43:11ने मेघना के हाथ से मोबाइल छीनते हुए
- 3:43:14बदतमीजी की थी। मिस्टर वालिया मैं पुलिस
- 3:43:18को कॉल कर रहा हूं। आपके इस होटल में
- 3:43:20पुलिस के आने का सबसे बड़ा कारण यह बाप
- 3:43:23बेटे ही हैं। इतना कहते हुए शौर्य ने अपना
- 3:43:26मोबाइल निकाल लिया। शौर्य को ऐसा करते
- 3:43:30देखकर अशोक वालिया घबरा गया। वो जल्दी से
- 3:43:33बोला रुकिए मिस्टर श्रवण आप यूं जल्दबाजी
- 3:43:37ना करें। शौर्य को रोक कर अशोक वालिया
- 3:43:40रणधीर शेखावत के पास गया और बोला मिस्टर
- 3:43:44शेखावत जैसा कि आप देख रहे हैं मिस्टर
- 3:43:47श्रवण के यहां होने पर आप दोनों खुश थे।
- 3:43:50आपने तो आगे बढ़कर खुद मिस्टर श्रवण का
- 3:43:53स्वागत किया था। इसीलिए उनके यहां होने के
- 3:43:56लिए मैं रिस्पांसिबल नहीं हूं। आज पहली
- 3:43:59बार रणधीर शेखावत खुद को बड़ा मजबूर फील
- 3:44:02कर रहा था। जिस लड़के को वह सिर्फ एक चूजा
- 3:44:05समझ रहे थे, उसने उनकी नाक में दम कर दिया
- 3:44:08था। रणधीर शेखावत अपने बेटे की तरफ पलटे
- 3:44:12और उसे गुस्से से घूरते हुए बोले, तुम
- 3:44:15दोनों अभी के अभी मिस्टर श्रवण से माफी
- 3:44:19मांगो और बात खत्म करो। कुछ भी बिना सोचे
- 3:44:22समझे करने का यही दुष्परिणाम होता है।
- 3:44:25रणधीर शेखावत कबीर और सरोज पर गुस्सा करते
- 3:44:28हुए बोले कबीर को समझ नहीं आ रहा था कि वो
- 3:44:31कैसे इस मुसीबत से बच सकता है पर उसे कोई
- 3:44:34चारा नजर नहीं आ रहा था। थक हार कर वो
- 3:44:37शौर्य के सामने गया और धीरे से बोला सॉरी।
- 3:44:41कबीर की धीमी आवाज सुनकर शौर्य फिर से
- 3:44:44बोला। क्या कहा तुमने? कुछ सुनाई नहीं
- 3:44:46दिया। जरा जोर से बोलोगे? शौर्य की बात
- 3:44:50सुनकर कबीर अपने पापा की ओर देखने लगा। पर
- 3:44:53इस समय उसके पापा कुछ भी देखने के मूड में
- 3:44:55नहीं थे। वो तो चाहते थे कि किसी तरह
- 3:44:58शौर्य यहां से चला जाता तो उनकी परेशानी
- 3:45:00थोड़ी कम होती। पहले ही इस पार्टी में आए
- 3:45:03हुए मेहमानों के सामने उनकी काफी बेइज्जती
- 3:45:05हो गई थी। दूसरी तरफ कबीर ने खुद को शांत
- 3:45:09करके दोबारा शौर्य से माफी मांगी। कबीर को
- 3:45:12देखकर लग रहा था जैसे उसको किसी ने चारप
- 3:45:14थप्पड़ जमा दिए होंगे। इसीलिए उसका चेहरा
- 3:45:17शर्म से लाल हो गया था। ठीक है तुम्हारी
- 3:45:20माफी कबूल हुई। अब इसके मोबाइल का पैसा
- 3:45:23कौन देगा? शौर्य मेघना की ओर देखकर बोला।
- 3:45:27मेघना और नताशा इस बात से हैरान थे कि
- 3:45:30शौर्य ने आखिर अपनी जिद पूरी कर ही ली।
- 3:45:33दूसरी तरफ रणधीर शेखावत ने जब शौर्य को
- 3:45:35पैसे की बात करते देखा तो वह उसके पास गया
- 3:45:39और अपनी जेब से ₹500 का एक बंडल निकालकर
- 3:45:42शौर्य की तरफ बढ़ा दिया। रणधीर शेखावत से
- 3:45:45पैसे निकलवा देना कोई छोटी बात नहीं था।
- 3:45:48शौर्य ने मेघना और नताशा को वहां से चलने
- 3:45:50का इशारा किया। वो दोनों भी मौके की नजाकत
- 3:45:53को समझकर जल्दी से शौर्य के पीछे हो ली।
- 3:45:57तुम दोनों ध्यान रखना तुम दोनों को मैंने
- 3:45:59इस इंडस्ट्री से बाहर का रास्ता ना दिखा
- 3:46:01दिया तो मेरा नाम रणधीर शेखावत नहीं।
- 3:46:04रणधीर शेखावत तीनों को बाहर जाते देखकर
- 3:46:07भकते स्वर में बोला।
- 3:46:09तीनों होटल से बाहर निकलने ही वाले थे कि
- 3:46:12शौर्य अपनी जगह पर रुका और बोला आप देख
- 3:46:16लेना आप मेरा कितना नुकसान कर पाते हो। पर
- 3:46:19अगर मैं अपनी पर आ गया तो आप सोच भी नहीं
- 3:46:22सकते कि मैं आपके साथ क्या करूंगा। इतना
- 3:46:24बोलकर वो पार्किंग की तरफ बढ़ गया। अब जब
- 3:46:28तीनों उस भीड़भाड़ वाली जगह से बाहर आ गए
- 3:46:30तो रणधीर शेखावत सरोज के पास पहुंचा और
- 3:46:33बोला जो काम तुम्हारी बस की नहीं था उसे
- 3:46:36तुमने करने की कोशिश क्यों की? तुम्हारे
- 3:46:39कारण इतने लोगों के सामने हमारी इतनी
- 3:46:41बेइज्जती हो गई। क्या रणधीर शेखावत शौर्य
- 3:46:44से अपनी बेइज्जती का बदला ले पाएगा? या
- 3:46:47उल्टा शौर्य ही उसको हकीकत से वाबस्ता
- 3:46:49करवा देगा? जानने के लिए सुनिए कहानी का
- 3:46:52अगला एपिसोड।
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