My Beggar Husband Episodes 31 to 50 | Hindi Audio Story|Secret Billionaire Husband| sk hindi novel — Transcript
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- 0:00नमस्कार दोस्तों राम राम दोस्तों स्वागत
- 0:02है आपका हमारे YouTube चैनल में आज हम
- 0:06लेकर आए हैं वेगर हस्बैंड का नया वीडियो
- 0:08जिसमें एपिसोड 31 से 50 तक है तो जल्दी से
- 0:11जल्दी इस वीडियो को देखो और बताओ कि कोई
- 0:13मिस्टेक तो नहीं है अगर आपको ऐसी ही ऑडियो
- 0:16स्टोरीज पसंद है तो हां वीडियो को लाइक
- 0:19करें हमारे दूसरे चैनल को भी सब्सक्राइब
- 0:21करें जो कि इससे ज्यादा मोनेटाइज है और
- 0:26उस पे अच्छी-अच्छी सीरीज आती हैं और इससे
- 0:28भी चैनल को सब्सक्राइब कर लें। तो बिना
- 0:31किसी देरी के आइए शुरू करते हैं रोमांचक
- 0:33एपिसोड डिस्क्लेमर। यह कहानी केवल मनोरंजन
- 0:36के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। इस
- 0:38कहानी के सभी पात्र घटनाएं, संवाद एवं
- 0:41परिस्थिति काल्पनिक हैं। किसी भी वास्तविक
- 0:45व्यक्ति, संस्था, स्थान या घटना से किसी
- 0:48भी प्रकार की समानता मात्र संयोग मानी
- 0:51जाएगी। तो आइए शुरू करते हैं वेगर हस्बैंड
- 0:55की दिलचस्प और रहस्यमई कहानी जिसमें
- 0:58एपिसोड
- 1:0031 से 50 तक हैं और डिस्क्रिप्शन में
- 1:04हमारा दूसरा चैनल है जो कि कुछ दिन बाद उस
- 1:08पर स्टोरीज आना शुरू हो जाएंगी। तो उस
- 1:11चैनल को भी सब्सक्राइब कर लें। तो लेट्स
- 1:13स्टार्ट दिस वीडियो।
- 1:15कांता प्रसाद के साथ शौर्य होटल पहुंचा।
- 1:17होटल राजकमल विशालगढ़ के टॉप होटलों में
- 1:20शुमार है। उसकी भव्यता देखते ही बनती है।
- 1:23शौर्य होटल की लॉबी से गुजरते हुए उसकी
- 1:25भव्यता देखकर प्रभावित था। कांता प्रसाद
- 1:28जी को देखकर होटल का स्टाफ अदब से नमस्कार
- 1:31कर रहा था। कांता प्रसाद जी के साथ शौर्य
- 1:33मैनेजर के रूम में पहुंचा तो उसने देखा कि
- 1:36अंदर 25-26 साल की एक खूबसूरत लड़की
- 1:38मैनेजर की चेयर पर बैठी हुई थी। शौर्य उस
- 1:41लड़की की खूबसूरती देखकर प्रभावित हुए
- 1:43बिना रह ना सका।
- 1:45वो लड़की कांता प्रसाद को देखकर खड़ी हो
- 1:48गई और बोली नमस्ते अंकल आप यहां अचानक कोई
- 1:52खास बात है क्या? क्यों क्या मैं किसी खास
- 1:55काम के बिना यहां नहीं आ सकता? कांता
- 1:58प्रसाद जी मुस्कुराते हुए बोले। इस पर वो
- 2:00लड़की शौर्य और विक्रम को सरसरी तौर पर
- 2:03देखती हुई बोली। आ तो सकते हैं पर आते
- 2:06नहीं हैं। आज पहली बार देख रही हूं कि आप
- 2:09राजा साहब के बिना होटल आए हैं। खैर पहले
- 2:12बैठिए फिर बातें करते हैं। कांता प्रसाद
- 2:15जी उस लड़की के सामने वाली चेयर पर बैठ
- 2:17गए। विक्रम और शौर्य भी साथ की चेयर पर
- 2:20बैठ गए। होटल की मैनेजर उस लड़की ने टेबल
- 2:22पर रखी बेल बजाई तो झट से एक बेल बॉय कमरे
- 2:25में दाखिल हुआ। चार कॉफी भिजवाना। मैनेजर
- 2:29ने हुक्म दिया और बेल बॉय ओके मैम बोलकर
- 2:32तुरंत वापस चला गया। इसके बाद कांता
- 2:34प्रसाद शौर्य की तरफ देखकर बोले इनसे मिलो
- 2:38यह मेनका है इस होटल की मैनेजर और यह हैं
- 2:42शौर्य राठौड़। कांता प्रसाद ने दोनों का
- 2:45परिचय कराया। अपने नाम की ही तरह मेनका
- 2:48किसी अप्सरा से कम नहीं थी। उसने कांता
- 2:50प्रसाद के मुंह से राठौड़ शब्द सुनकर
- 2:53ध्यान से शौर्य की तरफ देखा। उसने पहले
- 2:56कभी इस नाम को नहीं सुना था। तभी शौर्य ने
- 2:58मेनका का अभिवादन करते हुए कहा आपसे मिलकर
- 3:02खुशी हुई। मिस मेनका
- 3:04मुझे भी। मेनका ने औपचारिक सा जवाब दिया।
- 3:08उसे अभी भी समझ नहीं आया था कि कांता
- 3:10प्रसाद जी शौर्य को यहां सिर्फ उससे
- 3:12मिलाने लाए हैं या कोई और बात है। तभी
- 3:15कांता प्रसाद ने कहा [संगीत]
- 3:17अब मुद्दे की बात यह है मिस मेनका कि
- 3:20शौर्य आज से इस होटल का मालिक है। अब से
- 3:23तुम्हें इसे ही रिपोर्ट करना है। यह सुनकर
- 3:26मेनका को झटका सा लगा।
- 3:29क्या हुआ? तुम्हें देखकर लगता नहीं कि
- 3:32तुम्हें इस खबर से कोई खुशी हुई है। कांता
- 3:35प्रसाद ने मेनका से पूछा तो उसने मुश्किल
- 3:37से जवाब दिया। नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं
- 3:40है। हां ऐसा कुछ होने की उम्मीद नहीं थी।
- 3:43शायद इसीलिए समझ नहीं आया कि कैसे रिएक्ट
- 3:46[संगीत] करूं। और वैसे भी चंद्रभान अंकल
- 3:49ने कभी बताया नहीं कि वो यह होटल किसी और
- 3:52को सौंपने का सोच रहे हैं। हां, सही बात
- 3:55है। पर यह कोई और नहीं राजा साहब के
- 3:58ग्रैंड सन हैं। कांता प्रसाद ने अब जाकर
- 4:01शौर्य का पूरा परिचय दिया। राठौड़ सरनेम
- 4:04सुनकर मेनका को शक तो हुआ था पर वह राजा
- 4:07साहब के परिवार में सबको पहले से ही जानती
- 4:09थी और उसने आज से पहले शौर्य के बारे में
- 4:12कभी नहीं सुना था।
- 4:15लेकिन उनके दोनों ग्रैंडसंस को तो मैं
- 4:16अच्छी तरह से जानती हूं। यह कौन से
- 4:19ग्रैंडसन हैं? मेनका की बात से लग रहा था
- 4:21कि उसे कांता प्रसाद की बात पर भरोसा नहीं
- 4:24हो रहा है। शौर्य को मेनका के बात करने के
- 4:28ढंग से लग रहा था कि वह जरूर दादा जी के
- 4:30करीब होगी जो इतनी फिक्र कर रही है। अरे
- 4:33तुम सूर्यभान जी के बारे में जानती हो ना?
- 4:36कांता प्रसाद ने मुस्कुरा कर कहा तो मेनका
- 4:39बोली वही ना उनके बेटे जिन्हें सालों
- 4:42[संगीत] पहले चंद्रभान अंकल ने घर से
- 4:44निकाल दिया था। हां वही शौर्य सूर्यभान
- 4:48राठौड़ का बेटा है। कांता प्रसाद ने सहजता
- 4:51से कहा, अब जाकर मेनका को समझ आया कि
- 4:54शौर्य उनका ग्रैंडसन कैसे हुआ। दरअसल
- 4:56मेनका को यह नहीं पता था कि सूर्यभान
- 4:58राठौड़ का कोई परिवार भी है। शौर्य के
- 5:01पहनावे को देखकर मेनका ने यही अंदाजा
- 5:04लगाया कि सूर्यभान राठौड़ की वित्तीय
- 5:06स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं होगी और सोचा कि
- 5:09शायद सूर्यभान राठौड़ की हिम्मत नहीं हुई
- 5:11होगी कि राजा साहब के पास आकर कुछ सहायता
- 5:14मांगे। इसीलिए उन्होंने अपने बेटे को भेज
- 5:17दिया होगा। राजा साहब को अपने पोते पर दया
- 5:20आ गई होगी। इसीलिए उन्होंने होटल इन्हें
- 5:22दे दिया। एक ही पल में मेनका ने अपने मन
- 5:25[संगीत] में अजीब सी कहानी बना ली। तभी
- 5:28वेटर कॉफी की ट्रे लिए रूम के अंदर आया।
- 5:31मेनका ने सबको कॉफी सर्व करते हुए विक्रम
- 5:33की तरफ देखकर पूछा। और इनकी तारीफ
- 5:38इसे मेरा दोस्त कह लो, पर्सनल असिस्टेंट
- 5:40या बॉडीगार्ड कह लो। [संगीत] यह मेरा सब
- 5:42कुछ है। कांता प्रसाद कुछ बोलते उससे पहले
- 5:46शौर्य ने खुद विक्रम का परिचय दिया और
- 5:49इसका नाम विक्रम है। शौर्य का अंदाज देखकर
- 5:52मेनका ने मन ही मन सोचा होटल का मालिक बना
- 5:55नहीं कि पहले ही पर्सनल असिस्टेंट भी रख
- 5:58लिया। कुछ ज्यादा ही तेज चल रहा है यह। पर
- 6:01अंकल मैंने तो सुना था कि यह होटल तो
- 6:03प्रतीक को मिलने वाला था। उसने कई बार
- 6:05मुझसे इस बारे में बात भी की थी। मेनका के
- 6:08मन में बहुत देर से बात चल रही थी। इसीलिए
- 6:11उसने कांता प्रसाद से पूछ ही लिया। मुझे
- 6:13नहीं पता तुमने किससे क्या सुन रखा है। पर
- 6:16मैं तुम्हें बता दूं कि आज से और अभी इसी
- 6:19वक्त से इस होटल का मालिकाना हक शौर्य को
- 6:22मिलता है। और जहां तक ट्रांसफर पेपर्स की
- 6:25बात है तो वो फॉर्मेलिटी भी एक-द दिन में
- 6:28पूरी हो जाएगी। इतना बोलकर कांता प्रसाद
- 6:31ने अपनी बात समाप्त की। तभी शौर्य बोला और
- 6:34हां मिसमैन का। मैं आपको बता दूं कि
- 6:36विक्रम इसी होटल के रूम नंबर 305 में ठहरा
- 6:39हुआ है। तो आप किसी वेटर से कह दीजिएगा कि
- 6:42इसका खास ख्याल रखें। वैसे शौर्य को यह
- 6:46बात कहने की जरूरत नहीं थी। पर वो मेनका
- 6:48को यह जताने के लिए बोला था कि उसे पता चल
- 6:51जाए कि अब वो इस होटल का मालिक है। जितनी
- 6:54जल्दी वो इस बात को स्वीकार कर ले उसके
- 6:57लिए उतना अच्छा है। मेनका चंद्रभान राठौड़
- 7:00जी के मित्र रत्नाकर शेट्टी की बेटी थी।
- 7:02रत्नाकर शेट्टी की अपनी लॉ फर्म थी।
- 7:05चंद्रभान जी का जो भी लीगल मामला होता था
- 7:08उसे शेट्टी लॉ फर्म ही देखती आई है। मेनका
- 7:11जब होटल मैनेजमेंट कंप्लीट करके आई थी तो
- 7:13चंद्रभान जी ने उसे अपने होटल में ही
- 7:16मैनेजर बना दिया था। मेनका खूबसूरत है।
- 7:19साथ ही उसका कस्टमर रिलेशन भी बढ़िया था।
- 7:22उसने जल्दी ही एक मैनेजर के रूप में अपनी
- 7:24पहचान बना ली। राठौड़ फैमिली की हर पार्टी
- 7:27फंक्शन में मेनका का आनाजाना होता रहता था
- 7:30और बचपन से ही वह चंद्रभान जी से मिलती आई
- 7:33थी। इसीलिए वह उन्हें अंकल कहकर बुलाती
- 7:36थी। इतना ही नहीं मेनका की चंद्रभान जी के
- 7:39परिवार के लोगों से भी अच्छी जान पहचान
- 7:41थी। वीरभद्र राठौड़ का बड़ा लड़का प्रतीक
- 7:44अक्सर मेनका को इंप्रेस करने की कोशिश
- 7:46करता रहता था। वो अक्सर अपनी हवा बनाने के
- 7:49लिए मेनका के सामने शेखी बगारता रहता था
- 7:51कि एक दिन वही इस होटल को कंट्रोल करने
- 7:54वाला है। मेनका भी इस बात को सच मान बैठी
- 7:57थी। इसीलिए उसने एक तरह से प्रतीक को ही
- 8:00होटल का भविष्य मालिक मान रखा था। पर आज
- 8:03उसका भ्रम टूट गया। मेनका प्रतीक के
- 8:05रहन-सहन और उसके शो ऑफ से प्रभावित थी। पर
- 8:09यहां तो उसने शौर्य के कपड़ों को देखकर ही
- 8:11उसके बारे में एक अलग धारणा बना ली थी।
- 8:14उसे शौर्य से ज्यादा तो उसका असिस्टेंट
- 8:16विक्रम स्टाइलिश लगा था। नो डाउट शौर्य
- 8:19देखने में किसी हीरो जैसा हैंडसम है। पर
- 8:22सिर्फ दिखने से ही तो बात नहीं बनती। हां,
- 8:25अब हो सकता है कि जब वो इस होटल का मालिक
- 8:27बन गया है तो उसका रहन-सहन बदल जाए। जब
- 8:30शौर्य ने हुक्म देते हुए कहा था कि वह
- 8:32किसी वेटर से कह दे कि विक्रम का खास
- 8:34ध्यान रखे तो मेनका को अच्छा नहीं लगा था।
- 8:37पर वह कांता प्रसाद के सामने कुछ बोल भी
- 8:39नहीं सकती थी। तभी कांता प्रसाद ने मेनका
- 8:42से कहा
- 8:44मेनका तुम शौर्य बाबा को भी उनका कमरा
- 8:46दिखा दो। इनका कमरा मेनका यह सोच कर हिल
- 8:51गई कि क्या अब यह यहीं रहेगा? फिर वो अपने
- 8:53आप को थोड़ा शांत करते हुए बोली आप ही
- 8:56बताइए कि इनके लिए कौन सा कमरा तैयार करवा
- 8:59दें? कौन सा का क्या मतलब? वही राजा साहब
- 9:02वाला प्रेसिडेंशियल रूम तैयार करवा दूं।
- 9:05कांता प्रसाद मेनका को लगभग हुक्म देते
- 9:07हुए बोले वो भी महसूस कर रहे थे कि मेनका
- 9:10को शौर्य का मालिक बनना कुछ खास पसंद नहीं
- 9:12आया है। तभी मेनका प्रतिरोध करती हुई बोली
- 9:16पर उसमें तो राजा साहब खुद रहते हैं जब वे
- 9:18यहां आते हैं। उनकी चिंता तुम मत करो। अब
- 9:22वे शायद ही यहां आएंगे। और अगर आएंगे भी
- 9:25तो वह शौर्य के साथ रह सकते हैं या फिर तब
- 9:28की तब देखेंगे कि क्या करना है। अभी के
- 9:30लिए तुम्हें शौर्य बाबा के ऑर्डर्स फॉलो
- 9:33करने हैं। इतना बोलकर कांता प्रसाद ने
- 9:35अपनी बात खत्म कर दी। एक तरह से मेनका के
- 9:38लिए अब यह साफ संदेश था कि इफ और बट का अब
- 9:41कोई मतलब नहीं है। फैसला हो चुका है कि
- 9:44शौर्य ही अब इस होटल का नया मालिक है। फिर
- 9:48तो कहने के लिए कुछ बचा ही नहीं। मेनका
- 9:50खड़ी होती हुई बोली। चलिए सर मैं आपको
- 9:53आपका रूम दिखा दूं। शौर्य को मेनका के
- 9:56मुंह से सर सुनकर थोड़ा अजीब लगा। इतनी
- 9:58देर की बातचीत से शौर्य को इतना तो समझ
- 10:00में आ गया था कि मेनका उसके दादाजी के
- 10:02किसी करीबी व्यक्ति के परिवार से होगी।
- 10:05तभी वह उसके दादाजी को अंकल कह रही थी।
- 10:08इतना ही नहीं वो कांता प्रसाद को भी अंकल
- 10:10बोल रही थी। शौर्य खड़ा होते हुए बोला।
- 10:14मिसमेन का मुझे नहीं लगता कि आपकी और
- 10:16हमारी उम्र में ज्यादा अंतर है। इसलिए आप
- 10:20मुझे शौर्य कह कर ही बुला सकती हैं। इस
- 10:22तरह सर बोलकर मुझे शर्मिंदा मत कीजिए।
- 10:25मेनका सोच रही थी कि शौर्य ज्यादा पोलाइट
- 10:28होकर उस पर अपना इंप्रेशन जमाना चाह रहा
- 10:30है। यही सोचते हुए वो [संगीत] मन ही मन
- 10:32बोली। हां पर ठीक भी है। मैं भी क्यों इसे
- 10:35सर बोलूं। उसे यह बात बर्दाश्त ही नहीं हो
- 10:39रही थी कि कल का एक छोकरा आकर उसका बॉस बन
- 10:41गया है। वो भी बिना किसी क्वालिटी के।
- 10:44मेनका के साथ कांता प्रसाद, शौर्य और
- 10:47विक्रम उस होटल के प्रेसिडेंशियल रूम में
- 10:49आ गए जिसमें आज से पहले चंद्रभान राठौड़
- 10:52खुद रहते थे। शौर्य खुद उस रूम को देखकर
- 10:55प्रभावित था। उस रूम में मौजूद एक-एक चीज
- 10:59बहुत ही कीमती थी। अब से यह जगह शौर्य का
- 11:02नया ठिकाना होने वाली है। कहां वो अभी तक
- 11:05उस मंदिर के छोटे से कमरे में जमीन पर सो
- 11:07रहा था और वहां से बाहर निकला भी तो राय
- 11:10साहब के बंगले के सर्वेंट क्वार्टर में
- 11:12ठहरा। शौर्य कमरे से होते हुए बालकनी में
- 11:15पहुंचा। वहां का नजारा देखकर वो
- 11:18मंत्रमुग्ध रह गया। यह कमरा होटल के टॉप
- 11:21फ्लोर पर मौजूद था। बालकनी से पूरे शहर का
- 11:24खूबसूरत नजारा दिखता था।
- 11:27पसंद आया कमरा। कांता प्रसाद ने शौर्य से
- 11:30पूछा तो वो मुस्कुराते हुए बोला कोई
- 11:33बेवकूफ ही होगा जिसे इतना शानदार सूट पसंद
- 11:36ना आए। मेनका को समझ नहीं आ रहा था कि
- 11:39अचानक राजा साहब ने होटल शौर्य को सौंपने
- 11:41का क्यों सोचा। शौर्य को लेकर जो धारणा
- 11:44उसके दिल में घर कर गई थी, वो [संगीत] अब
- 11:46जाने का नाम ही नहीं ले रही थी। होटल के
- 11:49कमरे को देखने के बाद शौर्य और विक्रम
- 11:51कांता प्रसाद के साथ नीचे आए। कांता
- 11:54प्रसाद शौर्य से विदा लेकर चले गए। शौर्य
- 11:57भी वापस जाने की सोच रहा था। वो मेनका की
- 11:59तरफ मुड़ा और बोला आपसे मिलकर अच्छा लगा
- 12:02मिस मेनका [संगीत]
- 12:04अभी के लिए मुझे भी जाना पड़ेगा।
- 12:07जाना पड़ेगा। इसका क्या मतलब? आप यहां
- 12:10ठहरेंगे नहीं। मेनका के मन में सवाल उठ
- 12:13खड़ा हुआ। नहीं अभी मेरा यहां रहने का कोई
- 12:16प्लान नहीं है। पर हो सकता है जल्दी ही
- 12:18यहां आकर रहने लगूं। शौर्य ने शांत स्वर
- 12:20में कहा। मिस मेनका आप जाकर अपना काम
- 12:23देखिए। मैं विक्रम से थोड़ी बात करके चला
- 12:25जाऊंगा। मेनका शौर्य का इशारा समझ गई कि
- 12:29वो उसे जाने को कह रहा है। वो खुद भी उसके
- 12:31साथ रुकना नहीं चाहती थी। इसीलिए वो वहां
- 12:34से चली गई। अब वहां सिर्फ शौर्य और विक्रम
- 12:36रह गए। इस समय दोनों होटल की लॉबी में
- 12:39खड़े थे। तभी विक्रम शौर्य से बोला,
- 12:41"चलिए, मैं आपको हिल टॉप हेवन छोड़ आता
- 12:43हूं। उसकी कोई जरूरत नहीं है। तुम्हें
- 12:46मुझे छोड़कर फिर यहीं वापस आना है। उससे
- 12:49तो अच्छा है कि मैं टैक्सी करके चला जाऊं।
- 12:52शौर्य ने विक्रम को मना करते हुए कहा,
- 12:54विक्रम समझ गया कि जिद करने का कोई फायदा
- 12:57नहीं है क्योंकि शौर्य उसकी बात नहीं
- 12:59मानेगा। उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
- 13:01तो ठीक है। चलिए बाहर तक तो छोड़ ही देता
- 13:04हूं। शौर्य विक्रम के साथ होटल से बाहर
- 13:06जाने के लिए गेट की तरफ बढ़ा ही था कि तभी
- 13:09उसकी नजर होटल के अंदर आते एक आदमी पर
- 13:11पड़ी। वो आदमी उसके सामने से उसे अनदेखा
- 13:14करते हुए सीधा भीतर की तरफ बढ़ गया। एक पल
- 13:17के लिए शौर्य के कदम ठिठक गए। उसके चेहरे
- 13:20पर सख्ती आ गई। क्या उसने उस व्यक्ति को
- 13:23पहचान लिया था या फिर यह सिर्फ उसका वहम
- 13:26है। शौर्य को उम्मीद नहीं थी कि बलवंत राय
- 13:29उसे यहां होटल में नजर आएंगे। बलवंत राय
- 13:32के पीछे-पीछे बृजभूषण भी चल रहे थे। एक पल
- 13:35के लिए बलवंत राय की नजर शौर्य पर पड़ी।
- 13:37लेकिन वो उसे पहचान नहीं सके। दाढ़ी साफ
- 13:40करवा लेने के कारण शौर्य को पहचानना बेहद
- 13:42मुश्किल था। शौर्य बलवंत राय और बृजभूषण
- 13:45को अंदर जाते हुए देखता रह गया। अभी-अभी
- 13:48वो होटल से बाहर निकलने के लिए मुड़ा था।
- 13:50लेकिन अब अचानक वो वापस पलट गया। विक्रम
- 13:53ने उसे फिर से अंदर आते देखा तो पूछ बैठा
- 13:56क्या हुआ? कुछ भूल गए क्या? नहीं कुछ नहीं
- 14:00भूला हूं। अभी-अभी बलवंत राय अपने बेटे
- 14:03बृजभूषण के साथ यहां आए हैं। उनके यहां
- 14:06आने का कोई ना कोई कारण तो जरूर होगा।
- 14:09जानना पड़ेगा। शौर्य ने धीमे स्वर में
- 14:12जवाब दिया तो विक्रम ने पूछा। यह बलवंत
- 14:15राय कौन है? शिप्रा के दादाजी [संगीत]
- 14:18शौर्य बोला अब जाकर बात विक्रम की समझ में
- 14:21आई। वो भी शौर्य के साथ वापस होटल की लॉबी
- 14:24में आ गया। शौर्य अभी बलवंत राय के पीछे
- 14:26जाने की सोच ही रहा था कि तभी उसने किसी
- 14:28और को देखा और उसकी आंखें सिकुड़ गई।
- 14:32मुख्तार अहमद यहां शौर्य ने मुख्तार को भी
- 14:35होटल की लॉबी में प्रवेश करते देखा।
- 14:37मुख्तार के साथ उसके दो गुगे भी थे।
- 14:41जरूर बलवंत राय और मुख्तार के बीच कोई
- 14:43मीटिंग फिक्स हुई है। अब शौर्य को सारा
- 14:46मामला समझ आ रहा था। शौर्य ने धैर्य से
- 14:48मुख्तार के अंदर जाने का इंतजार किया। फिर
- 14:51वो उसके पीछे चलता हुआ एक प्राइवेट कैबिन
- 14:53के बाहर तक पहुंच गया। जब उसने देखा कि
- 14:56मुख्तार उस कैबिन के अंदर चला गया है तो
- 14:58उसे बाहर ही रुकना पड़ा। अंदर क्या बात हो
- 15:01रही होगी वो कैसे पता करें। शौर्य भी सोच
- 15:05ही रहा था कि तभी उसे उस कैबिन से एक वेटर
- 15:07बाहर आता दिखाई दिया। शौर्य को अभी यह भी
- 15:10नहीं पता था कि बलवंत राय और बृजभूषण राय
- 15:12भी उसी कैबिन में है या किसी और में।
- 15:15शौर्य ने उस वेटर को रोका। सुनो वेटर रुक
- 15:19गया। वो हल्की असमंजस की स्थिति में शौर्य
- 15:21की तरफ देखने लगा। जी कहिए। इस कैबिन में
- 15:25अभी जो शख्स गया है, उसके अलावा भी कोई और
- 15:28मौजूद है क्या? शौर्य कैबिन की तरफ इशारा
- 15:31करते हुए बोला कि इस पर वेटर शक भरी नजरों
- 15:34से शौर्य की तरफ देखने लगा। उसके चेहरे पर
- 15:37नाखुशी के भाव थे। आप कौन हैं और आप यह
- 15:41क्यों जानना चाहते हैं कि इस कैबिन में
- 15:42कौन-कौन है? आप जो कोई भी हैं, आपके लिए
- 15:45मेरा यही सुझाव है कि आप अभी इस होटल से
- 15:47बाहर चले जाएं। नहीं तो मुझे आपकी शिकायत
- 15:49मैनेजर से करनी पड़ेगी। शौर्य समझ गया कि
- 15:53यह वेटर इतनी आसानी से उसके चंगुल में
- 15:55नहीं आने वाला। उसने अपने रुतबे का फायदा
- 15:57उठाने का सोचा। यह बात दिमाग में आते ही
- 16:00वह सीधा वेटर की आंखों में देखते हुए
- 16:02बोला, तो ठीक है, पहले मैनेजर के पास ही
- 16:05चलते हैं और देखते हैं कि मैनेजर क्या
- 16:07बोलती है। वेटर ने जब शौर्य को मैनेजर के
- 16:10पास जाने को तैयार देखा, तो उसके चेहरे पर
- 16:12असमंजस के भाव आ गए। उसने उम्मीद नहीं की
- 16:15थी कि शौर्य खुद मैनेजर के पास जाने को
- 16:17तैयार हो जाएगा। शौर्य मैनेजर के कैबिन की
- 16:20तरफ बढ़ गया तो वेटर भी ना चाहते हुए उसके
- 16:22पीछे हो लिया। पर शौर्य के एक्शन से उसे
- 16:25यह तो समझ आ ही गया कि हो ना हो यह बंदा
- 16:28मैनेजर को जानता होगा। शौर्य ज्यादा समय
- 16:31नहीं खराब कर सकता था। इसीलिए वह जल्दी से
- 16:33मेनका के ऑफिस में पहुंचा। वेटर भी शौर्य
- 16:35के पीछे-पीछे ऑफिस के अंदर आ गया। मेनका
- 16:38इस समय किसी से फोन पर बात कर रही थी।
- 16:41शौर्य को वापस आता देखकर उसने जल्दी से
- 16:43फोन काट दिया और शौर्य से पूछा। क्या बात
- 16:46है? आप बड़ी जल्दी वापस आ गए। हां, कुछ
- 16:50काम आ गया था इसलिए अभी गया ही नहीं। इतना
- 16:53बोलकर शौर्य वेटर की तरफ देखता हुआ बोला
- 16:56यह वेटर आपसे मेरे बारे में कुछ कहना
- 16:58चाहता है। आप एक बार इसे मेरा परिचय करवा
- 17:00दो ताकि आगे से किसी गलतफहमी का शिकार ना
- 17:03रहे। उस वेटर ने जब शौर्य को मेनका से इस
- 17:05तरह बात करते देखा तो उसे समझ नहीं आया कि
- 17:08आखिर शख्स कौन है जिससे मेनका मैम भी बहुत
- 17:11ही आदर के साथ बात कर रही हैं। मेनका उस
- 17:13वेटर की तरफ देखकर बोली क्या बात है राम
- 17:17सिंह यह साहब क्या कह रहे हैं? वेटर राम
- 17:20सिंह के चेहरे पर थोड़ी हैरानी के भाव थे।
- 17:22उसने आज से पहले मेनका को किसी शख्स को
- 17:25इतनी इज्जत देते नहीं देखा था। वो यह तो
- 17:27समझ गया कि सामने वाला जो भी है उसकी
- 17:30शख्सियत कुछ खास है। इसीलिए अब उसे शौर्य
- 17:32की शिकायत नहीं करनी चाहिए। नहीं तो उसके
- 17:35साथ कुछ गलत हो सकता है। ये सोचकर उसने
- 17:38कहा कुछ खास नहीं मैडम। मैं सर को जानता
- 17:41नहीं था इसीलिए मैंने सर की बात को कुछ
- 17:43खास तवज्जो नहीं दी थी। एक्चुअली मेरी ही
- 17:46गलती थी।
- 17:48इतना बोलकर राम सिंह शौर्य की तरफ पलटा और
- 17:50अदब से बोला सॉरी सर मैं आपको पहचान नहीं
- 17:53पाया इसलिए आपकी बात पर ध्यान नहीं दे
- 17:55पाया। शौर्य राम सिंह की समझदारी का कायल
- 17:58हो गया। उसने बड़ी जल्दी स्थिति को भांप
- 18:01लिया था। हालांकि वो अब भी शौर्य के बारे
- 18:03में कुछ नहीं जानता था। पर मेनका की बातों
- 18:06से उसने अंदाजा लगा लिया था कि शौर्य की
- 18:08हैसियत तो कुछ खास है। वहीं मेनका अभी तक
- 18:11स्थिति को समझ नहीं पाई थी। पर जब उसने
- 18:13राम सिंह को शौर्य से माफी मांगते देखा तो
- 18:16उसने कहा राम सिंह ये मिस्टर शौर्य राठौड़
- 18:20हैं। इस होटल के नए मालिक। मेनका ने दिल
- 18:23पर पत्थर रखकर शौर्य को होटल का मालिक
- 18:25बताया था। उसने अपनी खूबसूरत मुस्कान के
- 18:28साथ अपने जज्बातों को अच्छे से छुपा लिया।
- 18:30उधर जब राम सिंह को यह पता चला कि शौर्य
- 18:33इस होटल का नया मालिक है तो उसने ऊपर वाले
- 18:35का धन्यवाद किया कि उसने सही समय पर शौर्य
- 18:38से माफी मांग ली। इसी बीच मेनका के फोन की
- 18:41घंटी बजने लगी। मेनका ने अपने फोन की तरफ
- 18:44देखा और फिर वेटर से बोली, राम सिंह इन
- 18:47साहब का खास ख्याल रखना। इनको शिकायत का
- 18:50मौका मत देना। मैं कुछ काम से बाहर जा रही
- 18:52हूं लेकिन तुम इनका ध्यान रखना। ठीक है।
- 18:56इसके बाद मेनका वहां से बाहर निकल गई।
- 18:58शौर्य ने उस ऑफिस को ध्यान से देखा तो उसे
- 19:01सामने वॉल पर एक बड़ा टीवी स्क्रीन नजर
- 19:03आया। जिस पर होटल के सीसीटीवी की लाइव
- 19:06कवरेज आ रही थी। उसने गौर से टीवी स्क्रीन
- 19:08की तरफ देखा तो एक स्क्रीन पर उसे
- 19:10मुख्तार, बृजभूषण और बलवंत राय एक कैबिन
- 19:13में नजर आए। शौर्य उस स्क्रीन के द्वारा
- 19:16उन तीनों को देख तो सकता था पर उनकी आवाज
- 19:18नहीं सुन सकता था। उसने राम सिंह की तरफ
- 19:21देखा। राम सिंह जैसे शौर्य का उसकी तरफ
- 19:24देखने का इंतजार ही कर रहा था। वो जल्दी
- 19:26से बोला। मुझे माफ कीजिएगा साहब। मैं आपको
- 19:30पहचानता नहीं था इसीलिए आपसे गुस्ताखी कर
- 19:32बैठा। आप कहिए मेरे लिए क्या हुक्म है?
- 19:35शौर्य राम सिंह की समझदारी पर मुस्कुराते
- 19:37हुए बोला, राम सिंह मुझे तुमसे कोई शिकायत
- 19:40नहीं है। तुम अपनी जगह सही थे इसीलिए
- 19:42तुम्हें मुझसे माफी मांगने की जरूरत नहीं
- 19:44है। यह सुनकर राम सिंह के चेहरे पर राहत
- 19:47का भाव आया। राम सिंह मुझे तुमसे एक काम
- 19:50है। क्या तुम मेरे लिए वो कर पाओगे? शौर्य
- 19:53अब अपने मतलब की बात पर आता हुआ बोला। अब
- 19:56जबकि मुझे पता है कि आप इस होटल के मालिक
- 19:59हैं तो आपके लिए तो कुछ भी कर सकता हूं
- 20:01सर। राम सिंह अदब से बोला। इस पर शौर्य ने
- 20:04स्क्रीन की तरफ इशारा करते हुए कहा, राम
- 20:07सिंह मुझे उस कैबिन में जो लोग बैठे हैं
- 20:09उनके बीच हो रही बातचीत को सुनना है। क्या
- 20:12तुम उसका कोई तरीका ढूंढ सकते हो? राम
- 20:15सिंह कुछ पल सोचता रहा। फिर बोला [संगीत]
- 20:18सर, अभी मैं उनका आर्डर लेकर उस कैबिन में
- 20:20दोबारा जाऊंगा। आप मेरे फोन पर कॉल लगा
- 20:23लीजिए। मैं कैबिन में अपना फोन छोड़
- 20:25आऊंगा। इस तरह आप उनकी बात सुन सकते हैं।
- 20:29राम सिंह की समझदारी पर शौर्य मुस्कुराया
- 20:31और बोला, ठीक है राम सिंह तो फिर जल्दी से
- 20:34तुम उस कैबिन में जाओ। उससे पहले अपना
- 20:37मोबाइल नंबर बताओ। राम सिंह ने शौर्य को
- 20:39अपना मोबाइल नंबर बताया। शौर्य ने अपने
- 20:42मोबाइल को राम सिंह के मोबाइल से कनेक्ट
- 20:44किया। उसके बाद राम सिंह मुख्तार का आर्डर
- 20:46लेकर कैबिन की तरफ बढ़ गया। इधर कैबिन के
- 20:49अंदर बलवंत राय, बृजभूषण और मुख्तार
- 20:52[संगीत] तीनों आमने-सामने बैठे थे।
- 20:54मुख्तार के साथ आए हुए उसके दोनों आदमी
- 20:57उसके पीछे खड़े थे। थोड़ी देर की खामोशी
- 20:59के बाद बलवंत राय ने मुख्तार से पूछा।
- 21:03हां मुख्तार भाई बताइए आपने हमें यहां
- 21:06मिलने को किस लिए बुलाया?
- 21:09अरे बलवंत राय जी जब आए हैं तो बातें तो
- 21:14होती ही रहेंगी।
- 21:16पहले पानी वानी पीजिए। इतने बड़े होटल में
- 21:21आए हैं तो यहां के व्यंजन का आनंद लें और
- 21:24एक खुशनुमा माहौल बनाएं। मुख्तार पानी की
- 21:28बोतल खोलकर बलवंत राय और बृजभूषण राय के
- 21:31सामने के गिलास में पानी डालता हुआ बोला
- 21:34बिल्कुल आप सही कह रहे हैं। हम एक ही शहर
- 21:37में रहते हैं। फिर आपस में यूं कड़वाहट
- 21:39रखना हम दोनों परिवारों के लिए सही नहीं
- 21:41है। बृजभूषण राय हंसने की कोशिश करते हुए
- 21:44बोले इस पर मुख्तार भाई बृजभूषण राय की
- 21:47बात का समर्थन करते हुए बोला। आपने एकदम
- 21:51सही कहा बृजभूषण।
- 21:53हमें आपस के जो यह छोटे-मोटे गिले शिकवे
- 21:56हैं उन्हें खत्म कर लेना चाहिए।
- 22:00और यह होगा कैसे? बलवंत राय ने दांत पीसते
- 22:04हुए पूछा। मुख्तार ने एक पल बलवंत राय के
- 22:07गुस्से से तमतमाए चेहरे की तरफ देखा और
- 22:09अपने चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान लाते हुए
- 22:12बोला, जब हम आमने-सामने बैठे हैं तो कोई
- 22:17बीच का रास्ता निकाल ही लेंगे। बस सही
- 22:21नियत से बात करने की जरूरत है।
- 22:25तो फिर क्या रास्ता सोचा है आपने? बलवंत
- 22:29राय खुद पर कंट्रोल करने की कोशिश करते
- 22:31हुए बोले तो मुख्तार बलवंत राय को धैर्य
- 22:33बांधते हुए बोला
- 22:36मैं आपकी जल्दीबाजी को समझता हूं। बलवंत
- 22:39जी आप बस काम की बात करना चाहते हैं। आपको
- 22:45समय खराब करने में कोई इंटरेस्ट नहीं है।
- 22:49पर विश्वास कीजिए मुझे भी खाली पीली वक्त
- 22:53बर्बाद करने का कोई शौक नहीं है। पर हमारा
- 22:58जो यह मामला है यह इतना उलझा हुआ है कि
- 23:02इसे सुलझाने के लिए थोड़ा समय तो खर्च
- 23:05करना पड़ेगा। तभी बृजभूषण राय बातचीत की
- 23:09कमान अपने हाथ में लेते हुए बोले आप
- 23:12पिताजी की बात का बुरा मत मानना मुख्तार
- 23:14भाई। पिताजी को बस पॉइंट टू पॉइंट बात
- 23:17करना पसंद है और इस पर अभी जो हालात हैं
- 23:20उसके कारण यह जल्दी से मामला निपटाना
- 23:22चाहते हैं। बलवंत राय ने नाखुशी से
- 23:25बृजभूषण राय की तरफ देखा पर कुछ बोले
- 23:28नहीं। मुख्तार भी बलवंत राय के चेहरे के
- 23:30एक्सप्रेशन को अच्छे से समझ रहा था। कोई
- 23:33और समय होता तो मुख्तार बलवंत राय को कुछ
- 23:36अलग ही अंदाज में समझाता। पर इस समय वह
- 23:38बात को और बिगाड़ना नहीं चाहता था। इसीलिए
- 23:41वह खुद को संयमित दिखाने की कोशिश करते
- 23:43हुए बोला
- 23:45मैं समझता हूं इस समय आपके पारिवारिक
- 23:49रिश्तों का भी इम्तिहान चल रहा होगा और
- 23:53मैं यह भी मानता हूं कि मैंने शिप्रा पर
- 23:56कुछ ज्यादा ही ज्यादती कर दी है। मुझे
- 23:59उसकी शादी एक भिखारी से नहीं करवानी चाहिए
- 24:02थी। पर अब जो हो चुका है उसे बदल तो नहीं
- 24:07सकते। लेकिन हां, मैं इस सबको सुधारने की
- 24:11एक कोशिश जरूर करना चाहता हूं।
- 24:16अब जब आपने हालात इतने बिगाड़ दिए हैं तो
- 24:19उसे सुलझाएंगे कैसे? बोलते हुए बलवंत राय
- 24:23की भौए सिकुड़ गई। वो समझ गए थे कि
- 24:25मुख्तार भाई अभी फंसा हुआ है। रजत को जेल
- 24:28से बाहर लाने का कोई रास्ता नहीं नजर आ
- 24:30रहा होगा। इसीलिए वो आपसी समझौते की बात
- 24:33करने आया है।
- 24:36देखिए मुझे अच्छा नहीं लग रहा है जो मैंने
- 24:40शिप्रा के साथ कर दिया है। मैं नहीं चाहता
- 24:43उसकी जिंदगी खराब हो जाए। इसीलिए मैंने जो
- 24:48ज्यादती कर दी है उसे सुधारना चाहता हूं।
- 24:53मुख्तार भाई धीरे-धीरे अपने मतलब की बात
- 24:56पर आते हुए बोला। बलवंत राय यह जानने की
- 24:59कोशिश कर रहे थे कि आखिर मुख्तार के दिमाग
- 25:01में चल क्या रहा है। वो बोले क्या मैं जान
- 25:05सकता हूं कि आप कैसे शिप्रा के साथ हुई
- 25:07ज्यादती को सुधार सकते हैं। मुख्तार भाई
- 25:11अभी कुछ आगे बोलने ही जा रहे थे कि तभी
- 25:13कैबिन का दरवाजा खुला और राम सिंह अपने
- 25:15हाथ में एक बड़ा सा प्लेट लेकर अंदर आया।
- 25:18वो सबके सामने ऑर्डर की हुई डिश सर्व करने
- 25:21लगा। राम सिंह का मोबाइल उसके प्लेट के
- 25:25नीचे हाथ की तलहटी के बीच दबा हुआ था। डिश
- 25:28सर्व करने के बाद कैबिन से बाहर जाते हुए
- 25:31राम सिंह ने अपने हाथ में दबे मोबाइल को
- 25:33कैबिन के दरवाजे के पास मौजूद एक
- 25:35आर्टिफिशियल गुलदान में डाल दिया और कैबिन
- 25:38से बाहर चला गया। राम सिंह ने यह काम इतनी
- 25:41सफाई से किया कि किसी का भी ध्यान उसकी
- 25:44तरफ नहीं गया। इस वक्त मैनेजर के कमरे में
- 25:47शौर्य टकटकी लगाए स्क्रीन को ही देख रहा
- 25:49था। जिसमें मुख्तार बलवंत राय के साथ बैठा
- 25:52हुआ था। शौर्य ने देखा कि राम सिंह ने
- 25:54कितनी सफाई से अपना मोबाइल आर्टिफिशियल
- 25:57फूलों के गमले में डाल दिया था। शौर्य ने
- 26:00अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन किया। उसे उस
- 26:02कमरे की आवाज साफ-साफ सुनाई पड़ रही थी।
- 26:05हां, आवाज थोड़ी धीमी थी पर स्पष्ट थी।
- 26:09तभी मुख्तार की आवाज सुनाई दी। देखिए राय
- 26:12साहब जो बीत चुका है उसे तो मैं बदल नहीं
- 26:16सकता। पर अगर आप चाहेंगे तो मैं उस भिखारी
- 26:20से शिप्रा का तलाक करवाकर रजत से उसकी
- 26:24शादी करवा सकता हूं। इससे हमारे बीच की जो
- 26:29दुश्मनी है वो भी खत्म हो जाएगी।
- 26:34अरे वाह यह तो आपने बहुत अच्छा सोचा
- 26:36मुख्तार भाई। मुझे लगता है यही सबके लिए
- 26:39ठीक होगा। बृजभूषण राय उत्साहित होते हुए
- 26:42बोला मुख्तार भाई के प्रपोजल पर इतनी
- 26:45जल्दी प्रतिक्रिया देने के कारण बलवंत राय
- 26:48अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए बोले माफ करना
- 26:51मुख्तार यह बृजभूषण बड़ा तो हो गया है पर
- 26:54कब क्या बोलना चाहिए यह इसे अभी समझ नहीं
- 26:57आया। बलवंत राय की बात सुनकर बृजभूषण का
- 27:00चेहरा लटक गया। हैरानी मुख्तार भाई के
- 27:03चेहरे पर भी नजर आने लगी। पर कोई कुछ
- 27:05रिएक्ट करता उससे पहले ही बलवंत राय ने
- 27:07अपनी बात को कंटिन्यू किया।
- 27:10वैसे मैं जान सकता हूं कि आपके इस प्रपोजल
- 27:12का कारण क्या है? अचानक आपके इस हृदय
- 27:15परिवर्तन की क्या वजह है? यह बात मुख्तार
- 27:19भाई को किसी कांटे की तरह चुभी। पर वो
- 27:21अपने चेहरे पर खिसियानी हंसी लाते हुए
- 27:24बोला
- 27:25बच्चों की खुशी के लिए बहुत कुछ करना
- 27:29पड़ता है। राय साहब अगर आप कारण ही जानना
- 27:32चाहते हैं तो सबसे बड़ा कारण यह है कि
- 27:36हमारा रजत आपकी पोती से बेइंतहा मोहब्बत
- 27:40करता है। इसीलिए बच्चों की खुशी के लिए
- 27:44बड़े बुजुर्गों को कई बार अपने कदम पीछे
- 27:48लेने पड़ते हैं।
- 27:50या कहीं यह कारण तो नहीं है कि आपका भाई
- 27:52दोबारा जेल चला गया है और अब उसका इतनी
- 27:56जल्दी जेल से बाहर आना मुमकिन नहीं है।
- 27:58इसीलिए आप इस समझौते के लिए मजबूर हो गए
- 28:01हैं।
- 28:02बलवंत राय सरकास्टिक वे में बोले। बात
- 28:05कड़वी थी पर सच थी। मुख्तार भाई को उम्मीद
- 28:08नहीं थी कि बलवंत राय उसकी मंशा को इतनी
- 28:10जल्दी भांप जाएगा और सिर्फ भांपेगा ही
- 28:13नहीं बल्कि उसके मुंह पर बोल भी देगा। बात
- 28:16किसी नस्तर की तरह मुख्तार भाई को चुभ। पर
- 28:19उन्होंने इसे अपने चेहरे पर आने नहीं
- 28:22दिया।
- 28:23बल्कि वह दोबारा संयत स्वर में बोले।
- 28:26[संगीत]
- 28:27मैंने कहा ना हमें कई फैसले अपने बच्चों
- 28:32को ध्यान में रखकर लेने पड़ते हैं। अभी की
- 28:35जो स्थिति है उसमें आप ऐसा सोच सकते हैं।
- 28:40पर मैंने जो प्रपोजल आपके सामने रखा है वो
- 28:44मेरे ही नहीं आपकी फैमिली के भी हक में
- 28:47है।
- 28:49आपके तो हक में है। पर यह हमारी फैमिली के
- 28:52हक में कैसे हुआ? बलवंत राय मुख्तार की
- 28:55आंखों में झांकते हुए बोले, "मेरा भाई जेल
- 28:58में रहेगा तो क्या आपको लगता है कि आपकी
- 29:02फैमिली सेफ रह पाएगी?"
- 29:05बोलते हुए मुख्तार भाई का तेवर चेंज हो
- 29:07गया। उनके जबड़े की मसल्स कस गई थी।
- 29:10मुख्तार भाई के बदलते तेवर को देखकर
- 29:13बृजभूषण राय के शरीर में एक बार तो
- 29:15झुरझुरी दौड़ गई। पर बलवंत राय के चेहरे
- 29:18पर कोई परिवर्तन नहीं आया। शायद उन्हें
- 29:21पहले से उम्मीद थी कि मुख्तार भाई का यह
- 29:23रूप उन्हें यहां देखने को जरूर मिलेगा।
- 29:26बलवंत राय मुख्तार भाई की आंखों में देखते
- 29:29हुए बोले
- 29:31आखिर आपने अपनी असियत दिखा ही दी। आप
- 29:33शिप्रा का विवाह रजत से इसलिए नहीं कराना
- 29:36चाहते कि आपको शिप्रा से हमदर्दी है बल्कि
- 29:39इसीलिए ताकि रजत पर लगे सारे केस वापस हो
- 29:42जाएं और आपका भाई जेल से छूट जाए।
- 29:46बलवंत राय की बात सुनकर मुख्तार भाई
- 29:48मुस्कुराए और बोले मैं समझता हूं आपसे
- 29:52मेरा इरादा छिप नहीं सकता। आपने जो कहा वो
- 29:56बिल्कुल सच है। पर यह भी सच है कि इसमें
- 29:59सिर्फ मेरा ही फायदा नहीं आपका भी है। एक
- 30:04तो यह कि शिप्रा पर भिखारी से शादी का जो
- 30:07दाग लगा है वो धुल जाएगा। और दूसरा आप
- 30:13माने या ना माने हमारे साथ रिश्ता जोड़ने
- 30:16के बाद आपकी फैमिली का रुतबा और भी बढ़
- 30:20जाएगा और यह भी सच है कि मेरा भाई आपकी
- 30:24पोती को बहुत पसंद करता है। आप शायद
- 30:28विश्वास नहीं करेंगे लेकिन जब उसे पता चला
- 30:31कि मैंने शिप्रा की शादी एक भिखारी से
- 30:34करवा दी तो वो मुझ पर तक भड़क उठा था।
- 30:39भरोसा रखिए। वो आपकी पोती को कभी किसी चीज
- 30:43की तकलीफ नहीं होने देगा।
- 30:46इतना कहकर मुख्तार भाई थोड़ी देर रुके फिर
- 30:49बोले
- 30:51और अगर आप मेरे ऑफर को रिजेक्ट करते हैं
- 30:54तो मैं अपने भाई को आज नहीं तो कल किसी ना
- 30:58किसी तरह छुड़ा ही लूंगा। लेकिन तब आपके
- 31:01परिवार को हमारी दुश्मनी झेलनी पड़ेगी। अब
- 31:05मैं इतना शरीफ तो नहीं हूं कि अपने भाई को
- 31:08जेल भिजवाने वालों को यूं ही छोड़ दूं।
- 31:12अगर मैंने कुछ नहीं किया तो इतने सालों
- 31:15में जो मैंने अपना नाम बनाया है उसकी क्या
- 31:19वैल्यू रह जाएगी? सारा शहर मुझ पर हंसेगा।
- 31:24आप क्यों मुझसे दुश्मनी मोल लेना चाहते
- 31:27हैं? मेरी बात मानिए और मिलकर एक नए
- 31:31रिश्ते की शुरुआत कीजिए। इसमें आप भी खुश
- 31:35रहेंगे और मैं भी। बलवंत राय समझ रहे थे
- 31:39कि यह साफ धमकी है। या तो ऑफर स्वीकार करो
- 31:42या दुश्मनी के लिए तैयार रहो। लेकिन वो
- 31:45इतनी आसानी से झुकने वाले नहीं थे। दूसरी
- 31:48तरफ बृजभूषण राय ऑफर मानने को तैयार बैठे
- 31:51थे। पर बलवंत राय के सामने बोल नहीं पा
- 31:53रहे थे।
- 31:55तो आपने हमें यहां धमकाने के लिए बुलाया
- 31:57है और वैसे भी हमारा परिवार तो पहले से ही
- 32:00आपकी दुश्मनी झेल रहा है। अब क्या नया
- 32:03होगा? जितना बुरा करना था वो तो आप कर ही
- 32:06चुके। जब इतना झेल लिया तो आगे भी झेल
- 32:10लेंगे। कहते हुए बलवंत राय के चेहरे पर
- 32:12हल्की मुस्कान आ गई। बलवंत राय की बात
- 32:15सुनकर मुख्तार ने महसूस किया कि ये बूढ़ा
- 32:17कहीं उसके अच्छे खासे प्लान पर पानी ना
- 32:19फेर दे। इसीलिए वो बेहद विनम्रता के साथ
- 32:22बोला राय साहब आप मेरी बातों को गलत मत
- 32:28समझिए। मैं आपके परिवार से दुश्मनी करना
- 32:31नहीं चाहता। मैं दिल से चाहता हूं कि
- 32:34हमारे संबंध अच्छे हो जाए। आप बड़े हैं
- 32:38इसलिए आपसे समझदारी की उम्मीद करता हूं और
- 32:42चाहता हूं कि आप इस रिश्ते के लिए सहमत हो
- 32:45जाइए।
- 32:47मुख्तार का यह बदला हुआ रूप देखकर बलवंत
- 32:49राय को थोड़ी तसल्ली हुई। उनके अहम को भी
- 32:52कुछ सुकून मिला। बृजभूषण को भी आश्चर्य
- 32:55हुआ कि मुख्तार भाई बलवंत राय के सामने
- 32:58इतना कैसे झुक गया?
- 33:00ठीक है मुख्तार भाई जब आप इतना जोर देकर
- 33:03कह रहे हैं तो मैं इस बारे में अपने
- 33:05परिवार के बीच विचार करूंगा और आपको अवगत
- 33:08कराऊंगा।
- 33:09इतना बड़ा फैसला खड़े-खड़े नहीं लिया
- 33:11जाता। एक बार शिप्रा के सामने भी आपके दिए
- 33:14हुए प्रस्ताव को रखूंगा क्योंकि यह उसकी
- 33:18जिंदगी का फैसला है। इसीलिए उसके विचार
- 33:20जानना भी जरूरी है। बलवंत राय ने बात
- 33:23समाप्त करने की नियत से कहा। अब उन्हें भी
- 33:26इस प्रस्ताव में कोई बुराई नजर नहीं आ रही
- 33:28थी। उन्हें लगने लगा था कि अगर सच में रजत
- 33:31शिप्रा को इतना चाहता है तो शिप्रा के लिए
- 33:33एक भिखारी से बेहतर तो रजत ही रहेगा।
- 33:36बलवंत राय की बात सुनकर मुख्तार की उम्मीद
- 33:39बंधी। उसे लगता था कि इस रिश्ते में सबसे
- 33:42अडियल रवैया बलवंत राय का ही होगा। उसके
- 33:46बेटे तो मुख्तार के खौफ से ही मान जाएंगे।
- 33:49धन्यवाद राय साहब। आपने इतना आश्वासन
- 33:53दिया। यही हमारे लिए काफी है। आपके जवाब
- 33:58की प्रतीक्षा रहेगी। मुख्तार भाई ने पूरा
- 34:01सम्मान देते हुए कहा, वो समझ गया था कि इस
- 34:04बूढ़े पर उसकी धमकी का असर नहीं होगा।
- 34:06इसीलिए उसने दूसरा रास्ता चुना। दूसरी ओर
- 34:10शौर्य ध्यान से सारी बातें सुन रहा था और
- 34:12विक्रम भी तब तक वहां आ गया था। उससे रहा
- 34:15नहीं गया तो उसने पूछा ये क्या चक्कर है
- 34:18बॉस? शौर्य ने जवाब दिया कुछ नहीं बस ये
- 34:22हुंडा अपने भाई को जेल से छुड़ाना चाहता
- 34:24है। इसी वजह से ये सारी पतरेबाजी है। उसके
- 34:28भाई के खिलाफ बहुत ही मजबूत केस है। जब
- 34:30उसे कोई और रास्ता नहीं दिखा तो उसने यह
- 34:32तरीका अपनाया। लेकिन मेरे हिसाब से एक बार
- 34:35उसका भाई छूट गया तो फिर वो जो चाहेगा
- 34:38करेगा। स्क्रीन की ओर देखते हुए शौर्य ने
- 34:41बलवंत राय और बृजभूषण को कमरे से बाहर
- 34:43जाते देखा। उनके जाते ही मुख्तार के पीछे
- 34:46खड़े दोनों आदमियों में से कल्ला आगे आया
- 34:49और बोला क्या बॉस आपने उस बलवंत ताई को
- 34:53कुछ ज्यादा ही भाव नहीं दे दिया।
- 34:56तुम नहीं समझोगे कल्ला। बकरे को हलाल करने
- 35:00से पहले उसकी थोड़ी खातिरदारी की जाती है।
- 35:04बस वही किया है। एक बार रजत जेल से छूट
- 35:08जाए और इस बूढ़े की हेकड़ी नहीं निकाली तो
- 35:11मेरा नाम भी मुख्तार नहीं। मुख्तार ने कहा
- 35:15बोलते समय उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान
- 35:18फैल गई। स्क्रीन पर यह देखकर शौर्य ने
- 35:20विक्रम से कहा
- 35:23देखा सियार ने अपना असली रंग दिखा दिया
- 35:26ना? अब आप क्या करेंगे बॉस? विक्रम ने
- 35:29पूछा तो शौर्य स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए
- 35:31बोला करना क्या है? इसे इसके मकसद में
- 35:34कामयाब नहीं होने दूंगा। उसने देखा राम
- 35:38सिंह बिल लेकर कैबिन में दाखिल हुआ।
- 35:40मुख्तार भाई ने बिल चुकाया और कैबिन से
- 35:42बाहर चला गया। मुख्तार के जाते ही राम
- 35:44सिंह ने अपना मोबाइल उठाया, कॉल
- 35:46डिस्कनेक्ट की और फोन जेब में रख लिया।
- 35:49शौर्य विक्रम की ओर मुड़कर बोला, "चलो अब
- 35:51यहां से चलते हैं। अब यहां कुछ नहीं रखा।
- 35:54एक बात साफ हो गई है। जब तक बलवंत राय की
- 35:57तरफ से कोई जवाब नहीं आता तब तक मुख्तार
- 36:00शिप्रा को नुकसान पहुंचाने की नहीं
- 36:01सोचेगा। दोनों होटल राजकमल से बाहर निकले।
- 36:04शौर्य ने विक्रम को वहीं छोड़ा और टैक्सी
- 36:07लेकर शिप्रा के ऑफिस पहुंच गया। उसके मन
- 36:09में ख्याल आया कि कहीं शिप्रा घर ना चली
- 36:12गई हो। इसीलिए वो पहले पार्किंग में गया।
- 36:14वहां शिप्रा की कार खड़ी देख उसने राहत की
- 36:17सांस ली और कैंटीन की ओर बढ़ गया। शौर्य
- 36:20ने वहीं कैंटीन में शिप्रा का इंतजार करने
- 36:22का फैसला किया। उसने कॉफी ऑर्डर की और
- 36:25धीरे-धीरे घूंट भरने लगा। साथ ही उसकी
- 36:27आंखों में सामने दिन भर की घटनाएं घूम रही
- 36:30थी। शायद उसे डर सताने लगा था कि कहीं
- 36:33अपने परिवार के दबाव में आकर शिप्रा रजत
- 36:35से शादी के लिए तैयार ना हो जाए। शौर्य के
- 36:38दिल में शिप्रा के लिए गहरी जगह बन चुकी
- 36:41थी और हो भी क्यों ना। शिप्रा में वो सारी
- 36:44खूबियां थी जो वो अपनी जीवन संगिनी में
- 36:47चाहता था। अब वो शिप्रा से अलग होने की
- 36:49कल्पना भी नहीं करना चाहता था। खैर, शौर्य
- 36:53ने ख्यालों से निकलकर कैंटीन में इधर-उधर
- 36:55नजर दौड़ाई, लेकिन कोई जान पहचान का चेहरा
- 36:58दिखाई नहीं दिया। उसे पता था कि गिरिधर
- 37:00काका भी बलवंत राय के साथ ही होंगे। तभी
- 37:03उसे ख्याल आया। मुझे शिप्रा को बता देना
- 37:06चाहिए कि मैं लौट आया हूं और कैंटीन में
- 37:09उसका इंतजार कर रहा हूं। कहीं ऐसा ना हो
- 37:11कि मैं यहां इंतजार करता रह जाऊं और
- 37:13शिप्रा गाड़ी लेकर घर चली जाए। शौर्य ने
- 37:16मोबाइल निकाला और शिप्रा को कॉल लगाया। दो
- 37:19रिंग के बाद ही फोन उठा लिया गया। वो समझ
- 37:21नहीं पा रहा था कि शिप्रा को कैसे संबोधित
- 37:23करें। तभी दूसरी ओर से आवाज आई।
- 37:26हेलो हेलो श्रवण
- 37:30मैम मैं ऑफिस आ गया हूं। आप नीचे आइएगा तो
- 37:34बता दीजिएगा। मैं कैंटीन में ही बैठा हूं।
- 37:37शौर्य हकलाते हुए बोला
- 37:39अच्छा हुआ तुमने फोन कर लिया। मैं नीचे ही
- 37:41आ रही हूं। तुम पार्किंग में इंतजार करना।
- 37:44शौर्य की बात पर शिप्रा ने जल्दी से कहा,
- 37:47ओके मैम। इतना कहकर शौर्य ने फोन काट दिया
- 37:50और एक लंबी सांस ली। वो सोचने लगा कि आखिर
- 37:53उसे क्या हो गया है? शिप्रा से बात करते
- 37:55हुए वो इतना नर्वस क्यों हो गया? क्या यह
- 37:58उसके दिल में बदलती भावनाओं का असर है?
- 38:01इन्हीं ख्यालों में डूबा वो कैंटीन से
- 38:03बाहर निकला। बाहर निकलते समय उसकी नजर
- 38:06वहां लगे शीशे पर पड़ी। उसने खुद को गौर
- 38:09से देखा और मन ही मन सोचा। क्या शिपरा उसे
- 38:11बिना दाढ़ी के पहचान पाएगी? कैंटीन से
- 38:14निकलकर शौर्य पार्किंग में पहुंचा।
- 38:16[संगीत] वहां उसे गणेश मिल गया। उसने
- 38:18शौर्य को देखते ही खुशी से कहा, "अरे
- 38:21श्रवण भाई आप आ गए?" हां आ तो गया।" शौर्य
- 38:26ने संक्षिप्त सा जवाब दिया तो गणेश उसके
- 38:28पास आते हुए बोला, [संगीत] वो कैसे हैं
- 38:30जिनको आप देखने गए थे। कौन कैसे हैं?
- 38:34शौर्य को समझ नहीं आया कि गणेश किसके बारे
- 38:36में पूछ रहा है। इस पर गणेश ने याद
- 38:38दिलाया। अरे मैं उनकी बात कर रहा हूं
- 38:41जिनको देखने आप हॉस्पिटल गए थे। आपके कोई
- 38:44रिश्तेदार थे ना? शौर्य को यह समझ आया तो
- 38:47उसने जल्दी से कहा, "अच्छा हां हां वो ठीक
- 38:50है।" यह तो अच्छी बात है। गणेश ने सहमति
- 38:53में सिर हिलाया। तभी करीब 25-26 साल की एक
- 38:56खूबसूरत लड़की पार्किंग में आई और बोली,
- 39:00"क्या हुआ गणेश, गाड़ी निकालने में इतना
- 39:02टाइम क्यों लग रहा है? बस, अभी निकालता
- 39:05हूं मैडम। बोलकर गणेश शौर्य की ओर मुड़ा।
- 39:08चलता हूं श्रवण भाई कल मिलते हैं। इतने
- 39:11में वो लड़की भी उनके पास आ गई। वो नैना
- 39:13बुआ की बेटी राधिका है। उसका ऑफिस भी इसी
- 39:17बिल्डिंग में है। राधिका के लिए शौर्य का
- 39:19क्लीन शेवन चेहरा नया था। उसने गणेश से
- 39:22पूछा। यह कौन है? पहले तो कभी इसे यहां
- 39:26नहीं देखा। इस पर गणेश ने जवाब दिया। मैम
- 39:29यह शिप्रा मैम का ड्राइवर है। अच्छा
- 39:33शिप्रा ने भी ड्राइवर रख लिया और वो भी
- 39:35इतना स्मार्ट। हम राधिका ने तारीफ भरे
- 39:38अंदाज में शौर्य को देखते हुए कहा फिर
- 39:40मुस्कुरा कर बोली क्यों हीरो नाम क्या है
- 39:44तुम्हारा
- 39:45राधिका की अकड़ शौर्य को पसंद नहीं आई
- 39:48लेकिन उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया
- 39:50तारीफ के लिए शुक्रिया मेरा नाम श्रवण है
- 39:54नॉट बैड मानना पड़ेगा शिप्रा की चॉइस
- 39:57अच्छी है कब से कर रहे हो यह काम जी
- 40:01ज्यादा समय नहीं हुआ है अभी कुछ दिनों से
- 40:03ही शिप्रा मैम के साथ हूं शौर्य ने जवाब
- 40:06दिया। अब तक गणेश राधिका की कार निकालने
- 40:09जा चुका था और तभी शिप्रा भी पार्किंग में
- 40:11पहुंची। उसने शौर्य को ढूंढने के लिए
- 40:14इधर-उधर नजर दौड़ाई लेकिन वो कहीं दिखाई
- 40:17नहीं दिया। दूर से ही उसकी नजर राधिका पर
- 40:20पड़ चुकी थी। इसीलिए वो उसके पास नहीं गई।
- 40:23शिप्रा और राधिका के संबंध कुछ खास अच्छे
- 40:25नहीं थे। वहीं राधिका ने भी शिप्रा को देख
- 40:28लिया और वो खुद ही उसके पास पहुंच गई।
- 40:31कैसी हो माय डियर सिस्टर? कितनी अजीब बात
- 40:34है कि एक ही बिल्डिंग में ऑफिस है फिर भी
- 40:36मिलना नहीं हो पाता।
- 40:39मेरी तरह तुम्हारे पास काम की कमी तो है
- 40:41नहीं। फिर मिलना कैसे होगा? शिप्रा ने
- 40:44व्यंग भरे अंदाज में कहा। इस पर राधिका
- 40:47बोली लगता है मैं तुम्हारी शादी में नहीं
- 40:49आ पाई इसीलिए नाराज हो। क्या करूं? मैं
- 40:53शहर में थी ही नहीं। जब वापस आई तो पता
- 40:55चला तुम्हारे साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था।
- 40:58मुझे बहुत बुरा लगा। राधिका के शब्द
- 41:00सहानुभूति से भरे थे। लेकिन उसके हावभाव
- 41:03उन शब्दों के साथ मेल नहीं खा रहे थे।
- 41:05शिप्रा ने भावहीन चेहरे के साथ कहा,
- 41:08थैंक्स फॉर योर काइंड वर्ड्स। लेकिन मुझे
- 41:10इसकी जरूरत नहीं है। इस बीच शिप्रा की नजर
- 41:13शौर्य पर भी पड़ी। मगर वो उसे पहचान नहीं
- 41:16पाई। वो अब भी उसे ढूंढती हुई इधर-उधर देख
- 41:19रही थी। शौर्य ने भी शिप्रा को देख लिया
- 41:21था। पर वो पास नहीं आया क्योंकि वो राधिका
- 41:24से बात कर रही थी। राधिका ने कटाक्ष किया।
- 41:28सुना है तुम्हारा पति अब तुम्हारे साथ ही
- 41:30रहता है। कभी मिलवाओ भी तो अपने पति से।
- 41:33आखिर एक बार मिलना तो बनता है। जरूर क्यों
- 41:36नहीं? लेकिन उसके लिए तुम्हारे पास समय भी
- 41:39तो होना चाहिए। शिप्रा ने उसी अंदाज में
- 41:42जवाब दिया जिस अंदाज में राधिका ने सवाल
- 41:44किया था। राधिका की बात शिप्रा को अच्छी
- 41:47तो नहीं लगी, लेकिन वो यह सोचकर हैरान हुई
- 41:49कि वह श्रवण से कम मिली और वह उसे स्मार्ट
- 41:52कैसे लगा। जब उसने राधिका को शौर्य की तरफ
- 41:55देखते पाया तो उसके मन में ख्याल आया क्या
- 41:59राधिका सामने खड़े शख्स को मेरा ड्राइवर
- 42:01समझ रही है? वो समझ ही नहीं पाई कि ऐसा
- 42:04कैसे हो सकता है? कहां श्रवण और कहां यह
- 42:07शख्स दोनों में तो कोई मेल ही नहीं। उसने
- 42:10तो आज से पहले इस आदमी को देखा भी नहीं
- 42:12था। फिर राधिका उसे उसका ड्राइवर क्यों
- 42:15समझ रही है?
- 42:17देखो तो सच में बिल्कुल हीरो लग रहा है।
- 42:20मुझे तो तुमसे जलन हो रही है। कहते हुए
- 42:22राधिका शौर्य को ही देख रही थी। शिप्रा के
- 42:25मन में संशय गहराने लगा। कहीं श्रवण ने
- 42:28अपनी जगह किसी और को तो नहीं भेज दिया।
- 42:30उधर शौर्य ने जब राधिका को अपनी ओर देखते
- 42:33पाया और शिप्रा के चेहरे पर उलझन देखी तो
- 42:35उसे लगा कि शायद शिप्रा उसे पहचान नहीं
- 42:38पाई। वो दोनों से इतनी दूरी पर था कि उनकी
- 42:40बातें सुन नहीं सकता था। इसीलिए वो आगे
- 42:43बढ़ा और हाथ बढ़ाते हुए बोला मैम गाड़ी की
- 42:46चाबी [संगीत] दे दीजिए मैं निकाल लाता
- 42:48हूं। जैसे ही शिप्रा ने उसकी आवाज सुनी,
- 42:51एक पल में उसके सारे संशय दूर हो गए। वो
- 42:54हक्की बक्की सी उसे देखती रह गई। उसने कभी
- 42:57नहीं सोचा था कि शौर्य बिना दाढ़ी के ऐसा
- 42:59लगेगा। शुक्र था कि उस समय राधिका की नजर
- 43:02शौर्य पर थी। इसीलिए वो शिप्रा के चेहरे
- 43:05के भाव नहीं देख पाई। शिप्रा ने खुद को
- 43:08संभालते हुए पर्स से कार की चाबी निकाली
- 43:10और शौर्य की ओर बढ़ा दी। शौर्य चाबी लेकर
- 43:13वहां से चला गया। शिप्रा अब भी उसे जाते
- 43:15हुए देखती रही। कहां से ढूंढ कर लाई ऐसे
- 43:18ड्राइवर को? कमबख्त से नजर ही नहीं हटती।
- 43:22राधिका की आवाज से शिप्रा की तंद्रा टूटी।
- 43:24शायद पहली बार उसे राधिका की आवाज सुनकर
- 43:27थोड़ा सुकून मिला। तो बताओ अपने पति से कब
- 43:31मिलवा रही हो? राधिका ने फिर पूछा। उसी
- 43:33वक्त गाड़ी का हॉर्न बजा। गणेश राधिका की
- 43:37कार उसके सामने लेकर खड़ी कर चुका था और
- 43:39ध्यान खींचने के लिए हॉर्न दे रहा था।
- 43:41तुम्हारे ड्राइवर को जल्दी है शायद। नहीं
- 43:44तो तुम जब चाहो तब मैं तुम्हें अपने पति
- 43:46से मिलवा सकती हूं। शिप्रा तंज भरे स्वर
- 43:49में बोली। शौर्य का यह रूप देखकर अब उसे
- 43:51भी थोड़ा कॉन्फिडेंस आ गया था। जब भी उसके
- 43:54पति की बात होती [संगीत] थी तो एक भिखारी
- 43:56के रूप को लेकर ही सब उस पर तंज कसते थे।
- 43:58पर अब कोई एक बार शौर्य को देख लेगा तो
- 44:00भिखारी तो नहीं ही बोलेगा। तभी उसने देखा
- 44:04शौर्य ने उसके सामने लाकर कार खड़ी कर दी
- 44:06थी। शिप्रा बिना कुछ बोले पीछे जाकर बैठ
- 44:09गई। रह-रह कर उसकी नजर शौर्य के चेहरे की
- 44:12तरफ चली जा रही थी। शौर्य ने गाड़ी आगे
- 44:14बढ़ा दी। कुछ देर बाद शिप्रा ने ही उस
- 44:17खामोशी को भंग किया।
- 44:20जिसको तुम हॉस्पिटल देखने गए थे वो अब
- 44:22कैसे हैं? चिंता की कोई बात नहीं है। वो
- 44:25ठीक है। शौर्य ने जवाब दिया। तभी शिप्रा
- 44:29ने उत्सुकता वश पूछ लिया। वैसे तुमने
- 44:31बताया नहीं कि वो कौन है तुम्हारे।
- 44:34शौर्य कुछ पल सोचता रहा कि उसे क्या बताना
- 44:37चाहिए। फिर कुछ निश्चय करके वह बोला वो
- 44:40मेरे दादाजी हैं। शिप्रा को सुखद आश्चर्य
- 44:43हुआ कि शौर्य के दादाजी जीवित हैं। उसने
- 44:46चिंता व्यक्त करते हुए कहा तुमने पहले
- 44:48क्यों नहीं बताया कि तुम्हारे दादाजी
- 44:50हॉस्पिटल में भर्ती हैं। तुम्हें उनके लिए
- 44:52कुछ लेकर जाना चाहिए था ना? नहीं नहीं सब
- 44:56ठीक है। आप बताइए आपका दिन कैसा रहा?
- 44:59शौर्य सुनिश्चित करना चाहता था कि शिप्रा
- 45:01को कोई परेशानी तो नहीं हो रही है। कुछ
- 45:04खास नहीं शायद यह समय ही थोड़ा खराब चल
- 45:07रहा है। अब देखते हैं हवा कब बदलती है।
- 45:10शिप्रा खिड़की से बाहर देखते हुए बोली
- 45:12क्या रौनित जनेजा या बलराज खन्ना ने कुछ
- 45:15किया है। शौर्य को शक था कि दोनों चुप
- 45:18बैठने वाले नहीं है। वो शिप्रा को नुकसान
- 45:20पहुंचाने के लिए कुछ ना कुछ तो जरूर
- 45:22करेंगे। हां, दोनों कोशिश कर रहे हैं कि
- 45:25किसी तरह बाकी के दूसरे बड़े स्टोर्स को
- 45:27भी कन्विंस कर लें कि वो हमारे प्रोडक्ट
- 45:29का बॉयकॉट कर दें। शिप्रा की बातों में
- 45:32उसकी परेशानी झलक रही थी। तो शौर्य मुद्दे
- 45:35पर आते हुए बोला अगर आप बुरा ना माने तो
- 45:38क्यों ना आप एक बार बिग बॉल के यहां के
- 45:40मैनेजर से मिल लें? पर क्या तुम्हें लगता
- 45:43है कि वो मुझसे मिलना पसंद करेंगे? वो तो
- 45:45ज्यादातर इंटरनेशनल ब्रांड को ही प्रमोट
- 45:47करते हैं। शिप्रा ने अपनी शंका जाहिर की
- 45:50तो शौर्य तपाक से बोला नहीं ऐसा नहीं है।
- 45:54वो नए ब्रांड को भी चांस देते हैं। बस
- 45:56उन्हें संभावना दिखनी चाहिए। मैंने अपने
- 45:59दोस्त से बात की थी। उसने अपने मैनेजर से
- 46:02पूछा तो वह आपसे मिलने को तैयार हैं। मैं
- 46:05कहता हूं एक बार मिल लीजिए। शायद कुछ बात
- 46:07बन जाए। वैसे भी इसमें कोई नुकसान तो है
- 46:10नहीं। शिप्रा को सुखद आश्चर्य हुआ कि
- 46:13श्रवण उसके लिए इतना सोच रहा है। तुमने
- 46:16बिग बुल के मैनेजर से हमारी मीटिंग भी
- 46:18फिक्स कर दी। शिप्रा हैरान होकर बोली उसके
- 46:21लिए बिग बुल के मैनेजर से मीटिंग कर पाना
- 46:23कम बड़ी बात नहीं थी। ज्यादा मुश्किल नहीं
- 46:26था। मैंने बस अपने दोस्त से बात की थी।
- 46:29उसने आसानी से मीटिंग फिक्स कर दी। शौर्य
- 46:32ने ऐसे कहा जैसे बहुत छोटी बात हो। शिप्रा
- 46:34को यकीन नहीं हो रहा था। वो बोली क्या
- 46:37इतनी आसानी से बिग बुल के मैनेजर से
- 46:39मीटिंग फिक्स हो सकती है? क्या यह इतना
- 46:41आसान होता है? तुम्हारा दोस्त बिग बुल में
- 46:44क्या करता है? शौर्य फंस गया। उसे समझ
- 46:47नहीं आया कि क्या जवाब दे? वो कुछ सोच कर
- 46:50बोला। वो बिग बुल में सेल्समैन है। शिप्रा
- 46:53के लिए शौर्य एक पहेली बन चुका था। कहां
- 46:56तो उसकी स्थिति एक भिखारी जैसी थी। लेकिन
- 46:58उसके अंदर हिम्मत कूट-कूट कर भरी थी। जब
- 47:01वो उसके यहां रहने आया था तब उसने देखा कि
- 47:03वो टेनिस खेलने में मास्टर है। वहीं उसे
- 47:06पता चला कि वो कॉलेज गया हुआ है। यानी वह
- 47:08पढ़ा लिखा भी है। जब रौनित जनेजा के स्टोर
- 47:11में वो फंसी थी तो उसके पीछे एक चट्टान की
- 47:13तरह खड़ा रहा। अब जब उसका नया रूप उसके
- 47:15सामने आया है तो देखकर कोई कह नहीं सकता
- 47:18कि यह कोई भिखारी हो सकता है। भिखारी तो
- 47:21छोड़ो। अगर जवान लड़कियां उसे देख लें तो
- 47:23उसकी तरफ खुद को आकर्षित होने से रोक नहीं
- 47:26पाएंगी। और अब तो उसके प्रयास से बिगbul
- 47:29जैसी बड़ी कंपनी के मैनेजर से उसकी मीटिंग
- 47:31फिक्स होने जा रही है। क्या यह संभव है?
- 47:35शिप्रा को विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसा
- 47:37संभव हो सकता है। लेकिन शौर्य का दिल रखने
- 47:40के लिए उसने उससे कहा क्या तुम अपने दोस्त
- 47:43से बात करके यह पता लगा सकते हो कि मीटिंग
- 47:45कब हो सकती है? इस पर शौर्य बड़े आराम से
- 47:48बोला। मैं अभी बिग बॉल के मैनेजर का नंबर
- 47:51आपको फॉरवर्ड करता हूं। आप खुद बात करके
- 47:53टाइम फिक्स कर लीजिए। उसे शिप्रा की
- 47:56स्थिति का आभास हो रहा था कि उसके लिए यह
- 47:58विश्वास करना मुश्किल है कि शौर्य के पास
- 48:00बिग बुल के मैनेजर का नंबर हो सकता है।
- 48:03क्या तुम्हारे पास बिगबुल के मैनेजर का
- 48:06नंबर भी है? शिप्रा ने आश्चर्य से पूछा।
- 48:09हां, मेरे दोस्त ने ही दिया था। जब आपसे
- 48:12मीटिंग की बात फिक्स हो गई थी, तो उसने
- 48:13कहा था कि मैनेजर से बात करके मिलने का
- 48:16टाइम निर्धारित कर लेना। इतना बोलकर शौर्य
- 48:19ने अपने मोबाइल से एक कांटेक्ट इंफॉर्मेशन
- 48:22शिप्रा के मोबाइल पर भेज दी। शिप्रा ने जब
- 48:25नंबर देखा तो वह चौंक गई। वो सचमुच मोहित
- 48:28रैना का ही नंबर था। शिप्रा जानती थी कि
- 48:30इंडिया में बिग बुल का सारा काम मोहित
- 48:33रैना ही देखते हैं। शिप्रा ने सोचा एक बार
- 48:36कॉल लगाने में क्या ही हर्ज है और उसने
- 48:38कॉल लगा दिया।
- 48:40हेलो कौन बोल रहा है? दूसरी तरफ से एक
- 48:43प्रभावशाली आवाज सुनाई दी। मैं मैं शिप्रा
- 48:47सक्सेना बोल रही हूं। जिंक कलेक्शन से।
- 48:49क्या आप मोहित रैना बोल रहे हैं? शिप्रा
- 48:52अटकते हुए बोली तो मोहित रैना ने पोलाइटली
- 48:55कहा ओ हां मिस शिप्रा मैं मोहित ही बोल
- 48:58रहा हूं। आपके बारे में मेरे एक स्टाफ से
- 49:00बात हुई थी। अगर आपके पास समय है तो आप कल
- 49:03आकर एक बार मुझसे मिल लीजिए। शिप्रा को
- 49:06विश्वास नहीं हो रहा था कि मोहित रैना खुद
- 49:08सामने से उसे मिलने के लिए कह रहे हैं। वो
- 49:11खुद को नियंत्रित करते हुए बोली हां
- 49:13मिस्टर मोहित आप मिलने का समय बता दीजिए।
- 49:16मैं वक्त पर पहुंच जाऊंगी। मोहित ने कुछ
- 49:19सोच कर कहा, "ऐसा करते हैं आप 12:00 बजे
- 49:21बिग बुल के स्टोर में ही आ जाइए। जो भी
- 49:23बातें होनी होंगी, यहीं हो जाएंगी। यस
- 49:26मिस्टर मोहित, मैं कल 12:00 बजे आपसे
- 49:28मिलती हूं। इतना बोलकर शिप्रा ने फोन काट
- 49:31दिया। फिर वो शौर्य से बोली, "यह तो सच
- 49:35में मोहित रैना का ही नंबर था।" तूने तो
- 49:37कमाल कर दिया श्रवण। शौर्य सामने रोड की
- 49:40तरफ देखते हुए बोला, "इसमें कमाल करने
- 49:43जैसा कुछ भी नहीं था।" यह तो संयोग है कि
- 49:45मेरा दोस्त वहां काम करता है जिसके सहयोग
- 49:48से यह पॉसिबल हो पाया। तुम अपने उस दोस्त
- 49:51को मेरी तरफ से थैंक्स जरूर बोलना। उसने
- 49:53मेरी बहुत बड़ी मदद की है। अगर यह डील हो
- 49:56जाती है तो मेरी कंपनी की वैल्यू रातोंरात
- 49:58बढ़ जाएगी। शिप्रा खुश होते हुए बोली,
- 50:02जरूर। शौर्य के चेहरे पर एक मंद सी
- 50:04मुस्कान उभर आई। इस समय शौर्य की कार
- 50:07[संगीत] सिटी हॉस्पिटल के सामने से गुजर
- 50:09रही थी। तभी शिप्रा को आइसक्रीम पार्लर
- 50:11दिखाई दिया। वो शौर्य से गाड़ी खड़ी करने
- 50:14को बोली। शौर्य ने सवालिया नजर से उसकी
- 50:16तरफ देखा तो शिप्रा ने दोबारा कहा, पहले
- 50:19गाड़ी तो खड़ी करो। शौर्य ने साइड में
- 50:22गाड़ी खड़ी कर दी। फिर शिप्रा कार का
- 50:24दरवाजा खोलते हुए बोली, चलो आइसक्रीम खाते
- 50:26हैं। तुमने मेरा काम इतना आसान कर दिया है
- 50:29तो मुंह मीठा करना तो बनता है। [संगीत]
- 50:32शौर्य ने उसे स्थिति से अवगत कराते हुए
- 50:34कहा। पर यहां अगर किसी ने आपको मेरे साथ
- 50:36देख लिया तो फालतू बातें बनाएंगे।
- 50:40तुम उसकी चिंता मत करो। पिछले कुछ दिनों
- 50:42में मेरे बारे में इतनी बातें बन चुकी हैं
- 50:44कि अब किसी भी बात का मुझ पर असर होना बंद
- 50:46हो गया है। वैसे भी मेरा नाम पहले से ही
- 50:49तुमसे जुड़ा हुआ है। तो अब इससे ज्यादा
- 50:51क्या ही बातें [संगीत] बनेंगी। शिप्रा की
- 50:54इस बात से ही शौर्य समझ गया कि वो कितना
- 50:56दर्द अपने अंदर समेटे हुए है। [संगीत] वो
- 50:58जानता था कि इन कुछ दिनों में शिप्रा के
- 51:00साथ जो कुछ भी हुआ उसमें उसकी कोई गलती ना
- 51:03होने के बावजूद सबकी उंगलियां उसी की तरफ
- 51:06उठी थी। आसमानी सूट की सादगी [संगीत] में
- 51:09भी शिप्रा बहुत प्यारी लग रही थी। शौर्य
- 51:11उसके पीछे-पीछे आइसक्रीम पार्लर तक
- 51:13पहुंचा। हॉस्पिटल के सामने होने के कारण
- 51:17वहां कई यंग ट्रेनी डॉक्टर [संगीत] भी
- 51:18आइसक्रीम खाने आए हुए थे। शौर्य को डर था
- 51:22कि कहीं हॉस्पिटल से निकल कर अगर कांता
- 51:24प्रसाद जी उनसे टकरा गए तो स्थिति को
- 51:26संभालना मुश्किल हो जाएगा। शिप्रा [संगीत]
- 51:29ने अपनी पसंद की दो आइसक्रीम ली और एक
- 51:31शौर्य की तरफ बढ़ा दी। शौर्य ने उसके हाथ
- 51:34से आइसक्रीम ली और चुपचाप खाने लगा।
- 51:36[संगीत]
- 51:37शिप्रा उसे देखते हुए बोली इतने अच्छे भले
- 51:41चेहरे को [संगीत] तुमने दाढ़ी के पीछे
- 51:42क्यों छुपा रखा था? इस पर शौर्य अपने गाल
- 51:45पर हाथ फेरते हुए बोला बस हालात ही ऐसे बन
- 51:49गए थे कि दुनिया की नजरों में छुपा रहना
- 51:51ही बेहतर था। आज भी इसीलिए दाढ़ी साफ कर
- 51:54ली क्योंकि आज पहली बार मैं अपने [संगीत]
- 51:56दादाजी से मिलने जा रहा था। अगर उनसे
- 51:59देवदास जैसी शक्ल बनाकर मिलता तो अच्छा
- 52:02नहीं लगता। इसीलिए [संगीत] आज शेव कर ली।
- 52:05क्या बात करते हो? आज तुम पहली बार अपने
- 52:08दादाजी से मिले। यह कैसे संभव है? [संगीत]
- 52:11शिप्रा को समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हो
- 52:13सकता है। बात ही कुछ ऐसी है। जब मेरे
- 52:17पिताजी ने अपनी पसंद की लड़की से शादी कर
- 52:20ली थी तो मेरे दादाजी ने उन्हें घर से
- 52:22निकाल दिया था। बरसों बाद जब उन्हें पता
- 52:24चला कि उनके घर से निकाले गए बेटे का भी
- 52:27एक जवान बेटा है तो शायद अपने पोते के लिए
- 52:30उनका सोया हुआ प्यार जाग गया। इसीलिए उनकी
- 52:33इच्छा पूरी करने के लिए [संगीत] मैं उनसे
- 52:35मिलने चला गया था। शौर्य ने सच तो बताया
- 52:38लेकिन वो अपनी पूरी [संगीत] हकीकत नहीं
- 52:40बता सकता था। शिप्रा के मन में शौर्य के
- 52:43लिए सहानुभूति जाग उठी। [संगीत]
- 52:45दुनिया में सबके अपने-अपने दुख होते हैं।
- 52:48यह कहना मुश्किल है कि किसका दुख ज्यादा
- 52:50बड़ा है। शौर्य और शिप्रा दोनों किसी
- 52:53कॉलेज के जोड़े की तरह प्रतीत हो रहे थे।
- 52:56दोनों ने अपनी-अपनी आइसक्रीम खत्म की।
- 52:58शौर्य शिप्रा के साथ अपनी गाड़ी की तरफ
- 53:01बढ़ने ही वाला था कि तभी एक लड़की का शरीर
- 53:04शौर्य से टकरा गया। टक्कर इतनी अचानक थी
- 53:07कि शौर्य आगे की ओर लड़खड़ा गया और जो
- 53:10लड़की उससे टकराई थी वो जमीन पर गिर पड़ी
- 53:13और साथ ही उसके मुंह से एक तेज चीख भी
- 53:16निकल गई। शौर्य ने स्थिति का जायजा लेने
- 53:19के लिए आसपास नजर दौड़ाई तो उसे [संगीत]
- 53:21दो लड़के उस लड़की के सामने खड़े दिखाई
- 53:24दिए। शौर्य तुरंत समझ गया कि उन्हीं दोनों
- 53:26में से किसी ने उसे धक्का दिया है। इस
- 53:29घटना से शिप्रा भी घबरा गई। वो शौर्य के
- 53:32पास आकर बोली, तुम्हें चोट तो नहीं आई?
- 53:37मैं तो ठीक हूं पर लगता है उस लड़की को
- 53:39[संगीत] जरूर चोट आई होगी। शौर्य ने उस
- 53:41लड़की की तरफ देखते हुए बोला तो शिप्रा ने
- 53:44वहां के बिगड़ते माहौल को देखकर कहा,
- 53:47चलो यहां से चलते हैं। हां, चलते हैं पर
- 53:51पहले मामला तो समझ लें कि आखिर हो क्या
- 53:53रहा है यहां। शौर्य अब भी उस लड़की की तरफ
- 53:56देख रहा था। लड़की की पीठ उसकी तरफ
- 53:59[संगीत] थी इसलिए वो उसका चेहरा नहीं देख
- 54:01पाया था। वो लड़की उठने की कोशिश में जैसे
- 54:04ही शौर्य की तरफ पलटी शौर्य ने उसका चेहरा
- 54:07देखा और हैरानी से उसकी आंखें खुली की
- 54:09खुली रह गई। उसके होठों पर अपने आप उस
- 54:12लड़की का नाम आ गया। मेघा तुम
- 54:17शिप्रा ने भी शौर्य [संगीत] के मुंह से
- 54:18निकला नाम सुन लिया। वो उसकी तरफ देखने
- 54:21लगी। उसके मन में सवाल उठा। क्या श्रवण ने
- 54:24इस लड़की को जानता है? जब शौर्य ने मेघा
- 54:27को इस हालत में देखा तो वो तुरंत उसके पास
- 54:29गया और सहारा देकर उसे जमीन से खड़ा किया।
- 54:32तभी सामने खड़े दो लड़कों में से एक ने
- 54:35कहा, ओ भाई कौन हो तुम? क्यों हमारे पचड़े
- 54:38में पड़ रहे हो? इसे इसके हाल पर छोड़ो और
- 54:41अपना रास्ता नापो। शौर्य ने उसकी बात को
- 54:44अनसुना कर दिया और मेघा को ऊपर से नीचे
- 54:46[संगीत] तक देखने लगा कि कहीं उसे ज्यादा
- 54:48चोट तो नहीं आई। इतनी भीड़ में एक अनजान
- 54:52आदमी को अपनी मदद करते देख मेघा विनती
- 54:54करते हुए बोली भैया इन बदमाशों से मुझे
- 54:58बचा लो। तुम घबराओ मत यह बताओ कौन है ये?
- 55:02शौर्य गंभीर स्वर में बोला। मेघा ने जैसे
- 55:05ही ये आवाज सुनी वो हैरानी से शौर्य के
- 55:07चेहरे की तरफ [संगीत] देखने लगी। यह चेहरा
- 55:10उसके लिए अनजान था पर आवाज जानी पहचानी।
- 55:13वो दिमाग पर जोर डालने लगी कि आखिर यह कौन
- 55:16है? ऐसा क्यों लग रहा है कि यह आवाज उसने
- 55:19पहले भी सुनी है लेकिन फिर पहचान क्यों
- 55:21नहीं पा रही? कौन है आप? मेघा असमंजस में
- 55:25बोली तो शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा अरे
- 55:28पगली पहचाना नहीं। मैं तुम्हारा श्रवण
- 55:31भैया हूं। जैसे ही मेघा ने श्रवण का नाम
- 55:34सुना वो उससे लिपट कर रोने लगी और बोली
- 55:37श्रवण भैया आप बचा लीजिए मुझे इन बदमाशों
- 55:40से। उधर शिप्रा ने जब शौर्य के मुंह से
- 55:43मेघा का नाम सुना तो वह भी सोच में पड़
- 55:45गई।
- 55:46आखिर कौन है यह लड़की? श्रवण इसे कैसे
- 55:49जानता है और यह उसकी क्या लगती [संगीत]
- 55:51है? जब उसने मेघा के मुंह से भैया शब्द
- 55:54सुना तो उसके मन में सवाल उठा क्या यह
- 55:56श्रवण की बहन है? ओ भाई अगर ये भाई-बहन का
- 56:00प्रेम मिलन हो गया हो तो अब क्या तुम अपना
- 56:02रास्ता लोगे? पहला बदमाश फिर से बोला
- 56:05शौर्य ने उसकी बात को एक बार फिर अनसुना
- 56:08कर दिया और मेघा से पूछा। कौन है यह जो
- 56:11तुम्हारे पीछे पड़े हैं? इस पर मेघा डरते
- 56:14हुए उन बदमाशों की तरफ देखते हुए बोली,
- 56:17"मैं इन दोनों को नहीं जानती, पर मुझे
- 56:19लगता है कि विक्की ने ही इन्हें मेरे पीछे
- 56:21भेजा होगा।" यह [संगीत] विक्की कौन है और
- 56:24उसने तुम्हारे पीछे गुंडे क्यों भेजे हैं?
- 56:27शौर्य जानना चाहता था कि आखिर यह सब क्यों
- 56:29हो रहा है। विक्की भी हमारी तरह इसी
- 56:32हॉस्पिटल में इंटर्न है। वो काफी समय से
- 56:35मेरे साथ बदतमीजी कर रहा था। कल मैंने डीन
- 56:38के पास जाकर उसकी शिकायत कर दी थी और आज
- 56:40ये गुंडे मेरे पीछे पड़ गए। मेघा ने सारा
- 56:44हाल शौर्य के सामने बयां कर दिया। अबे यार
- 56:47अब तो बहुत हो गया। पहला बदमाश अपने साथी
- 56:50से बोला फिर शौर्य की तरफ मुखातिब होकर
- 56:52गरजा। ए हीरो अगर तुम्हारी राम कहानी पूरी
- 56:56हो गई हो तो यहां से चलते बनो। नहीं तो इस
- 56:59छमिया के साथ तुम्हारे साथ वाली छमिया को
- 57:01भी उठाकर ले जाना पड़ेगा। अब तक वहां भीड़
- 57:04लग चुकी थी। हॉस्पिटल के कई इंटर्न जो शाम
- 57:07के समय घूमने फिरने बाहर आए थे तमाशा
- 57:10देखने के लिए जमा हो गए थे। उनमें से बहुत
- 57:12से मेघा को जानते थे लेकिन उसकी मदद के
- 57:15लिए कोई नहीं आया। उसी भीड़ में से किसी
- 57:18की आवाज आई।
- 57:20अरे यह तो इस इलाके के सबसे बदमाश गुंडे
- 57:23छगन मगन है। शिप्रा भी भीड़ की बातें सुन
- 57:27रही थी। उसने जब छगन मगन का नाम सुना तो
- 57:30उसके मन में शौर्य के लिए चिंता बढ़ गई।
- 57:32लेकिन अब वो यह भी तो नहीं कह सकती थी कि
- 57:34मेघा को छोड़कर यहां से निकलते हैं। तभी
- 57:37शौर्य [संगीत] मेघा को लेकर शिप्रा के पास
- 57:39आया और बोला
- 57:42अब थोड़ी देर इसे संभालेंगी। मैं अभी इन
- 57:44दोनों को समझाकर आपके पास आता हूं। शिप्रा
- 57:47को समझ नहीं आया कि वो क्या कहे। लेकिन
- 57:50उसने चुपचाप मेघा का हाथ थाम लिया। शौर्य
- 57:53पलटा और छगनगन के सामने जाकर खड़ा हो गया
- 57:56और उनकी आंखों में आंखें डालकर बोला हां
- 57:59तुम कुछ कह रहे थे। अब बोलो क्या कहना है?
- 58:03शौर्य को पूरे साहस के साथ अपने सामने
- 58:06खड़ा देखकर छगन ने एक बार मगन की तरफ देखा
- 58:09और फिर शौर्य को घूरते हुए बोला लगता है
- 58:12इस एरिया में नए-नए आए हो। इसीलिए मेरे
- 58:15सामने खड़े [संगीत] होकर इतना बोलने की
- 58:17हिम्मत कर पा रहे हो। शौर्य शांत लेकिन
- 58:20सख्त स्वर में बोला। सही कहा। मैं इस
- 58:23एरिया में नया ही हूं। और मैं जानना भी
- 58:25नहीं चाहता कि तुम कौन हो। तुमने सुना
- 58:28होगा उस लड़की ने मुझे भैया कहा। इसका
- 58:31मतलब समझते हो ना? शौर्य की आंखें अब भी
- 58:35छगन पर ही टिकी हुई थी। वो आंखें सिकोड़
- 58:37कर गुस्से में बोला अगर एक भाई की सटक गई
- 58:41तो अंजाम [संगीत] बहुत बुरा होगा। इसीलिए
- 58:43अब तुम यहां से चले जाओ। नहीं तो फिर इस
- 58:46एरिया में किसी को मुंह दिखाने [संगीत]
- 58:48लायक नहीं रहोगे। छगन ने शौर्य की आंखों
- 58:50के बदलते रंग को देखा तो एक पल के लिए
- 58:53उसके भीतर भी खौफ उतर गया। जिस
- 58:55आत्मविश्वास के साथ शौर्य ने बिना किसी भय
- 58:58के उससे बात की थी। उसने शगन के विश्वास
- 59:01को हिला दिया। [संगीत] लेकिन अगर वह यूं
- 59:03ही खाली हाथ लौट जाता तो उसकी इज्जत
- 59:05मिट्टी में मिल जाती। वो अभी मौके की
- 59:08नजाकत भांपने की कोशिश कर ही रहा था कि
- 59:10उसके साथ खड़ा मगन शौर्य की बात से ताव खा
- 59:13गया और बिना किसी चेतावनी के उस पर छलांग
- 59:16लगा दी। शौर्य ने तुरंत कदम पीछे लिया और
- 59:19जैसे ही मगन उसके करीब पहुंचा, शौर्य ने
- 59:22पूरी ताकत के साथ खुले हाथ से मगन के गाल
- 59:25पर एक थप्पड़ [संगीत] रसीद कर दिया। और
- 59:28अगले ही क्षण मगन हवा में उछलता हुआ पीछे
- 59:31की ओर हवा में उछल गया। उसका शरीर पलटा
- 59:34खाकर जमीन से जा टकराया। वो इस तरह धराशाई
- 59:37हुआ कि दोबारा उठ ही नहीं पाया। छगन समझ
- 59:40ही नहीं पाया कि एक पल में क्या हो गया।
- 59:42शौर्य के एक ही वार से उसे एहसास हो गया
- 59:45कि उसका पाला किसी गीदड़ से नहीं बल्कि
- 59:48बब्बर शेर से पड़ा है। वो मन ही मन शुक्र
- 59:51मना रहा था कि उसने खुद जल्दीबाजी में
- 59:53हमला नहीं किया। नहीं [संगीत] तो मगन की
- 59:55जगह वो जमीन पर पड़ा होता। अचानक भीड़ में
- 59:59सन्नाटा छा गया। शिप्रा आंखें फाड़े शौर्य
- 1:00:02को देख रही थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा
- 1:00:04था कि सचमुच एक ही थप्पड़ में उसने
- 1:00:07[संगीत] उस गुंडे को जमीन पर ला दिया। अभी
- 1:00:09तक जो मेघा डरी सहमी खड़ी थी, उस गुंडे की
- 1:00:13हालत देखकर उसके भीतर भी हिम्मत लौट आई।
- 1:00:16धीरे-धीरे भीड़ में खुसुरफुसुर शुरू हो
- 1:00:18गई। वहां मौजूद लोगों की आंखों में अब
- 1:00:21शौर्य के लिए सम्मान झलकने लगा था। तभी
- 1:00:24शौर्य फिर से छगन के सामने आकर खड़ा हो
- 1:00:26गया और शांत स्वर में बोला तुम्हारा साथी
- 1:00:30जरा ज्यादा ही जल्दी में था लेकिन मुझे
- 1:00:33[संगीत] लगता है कि बात अब तुम्हारी समझ
- 1:00:35में आ गई होगी अगर कोई डाउट हो तो मैं उसे
- 1:00:38भी दूर कर सकता हूं। नहीं नहीं उस्ताद
- 1:00:41मुझे कोई डाउट नहीं है। मैं अभी जाता हूं
- 1:00:43यहां से। छगन झट से बोला। उसे डर था कि
- 1:00:47अगर वो एक पल और रुका तो उसका हाल भी मगन
- 1:00:50जैसा हो सकता है। तभी शौर्य ने उसे रोकते
- 1:00:52हुए कहा अरे हां जाने से पहले यह तो बता
- 1:00:56दो क्या तुम्हें [संगीत] सच में विक्की ने
- 1:00:58ही भेजा था या तुम किसी और के कहने पर
- 1:01:00मेघा के पीछे आए थे। शौर्य छगन मगन के
- 1:01:04जाने से पहले सच्चाई जान लेना चाहता था।
- 1:01:06इस पर छगन बोला [संगीत] क्या उस्ताद आप तो
- 1:01:09समझदार हैं। अब हर बात आपको पूछनी जरूरी
- 1:01:12थोड़ी ही है। उसने साफ हां या ना में जवाब
- 1:01:15तो नहीं दिया लेकिन उसकी बातों से इतना
- 1:01:17समझ आ गया कि इसके पीछे विक्की का ही हाथ
- 1:01:20है।
- 1:01:22ठीक है तुम जा सकते हो। शौर्य ने कहा
- 1:01:25उस्ताद आपकी इजाजत हो तो मगन को ले जा
- 1:01:28सकता हूं। छगन से हमें स्वर में बोला तो
- 1:01:31शौर्य ने सर्द आवाज में कहा ले जाओ इसे
- 1:01:34यहां से। और हां दोबारा अगर मैंने सुन भी
- 1:01:37लिया कि तुम मेघा के आसपास भी नजर आए तो
- 1:01:40तुम किसी भी बिल में क्यों ना छुपे हो।
- 1:01:43मैं तुम्हें वहां से भी निकाल लाऊंगा और
- 1:01:45उसके बाद जो तुम्हारा हाल होगा वो तुम सोच
- 1:01:47भी नहीं सकते। शौर्य के बदलते भाव देखकर
- 1:01:51छगन के शरीर में सिहरन दौड़ गई। वो
- 1:01:53गंभीरता से बोला नहीं उस्ताद मैंने आपको
- 1:01:56उस्ताद बोल दिया तो समझो आज से वो मेरी भी
- 1:01:58बहन हो गई। अगर मैंने कभी किसी और को गलत
- 1:02:02इरादे से उसके आसपास देखा तो मैं खुद अपनी
- 1:02:04इस बहन को बचाने आ जाऊंगा। अब गुंडों की
- 1:02:08बातों का क्या भरोसा? लेकिन जब शौर्य ने
- 1:02:10गौर से उसकी आंखों में [संगीत] देखा तो
- 1:02:12उसकी आंखों में कहीं ना कहीं सच्चाई झलक
- 1:02:14रही थी। शौर्य ने शांत स्वर में कहा। अगर
- 1:02:18ऐसा हुआ तो मैं तुम्हारा एहसानमंद रहूंगा।
- 1:02:21शिप्रा बड़े गौर से शौर्य की हर गतिविधि
- 1:02:24को देख रही थी। जिस प्रभावशाली ढंग से वो
- 1:02:27अपनी बात रख रहा था वो किसी का भी विश्वास
- 1:02:29हिला देने के लिए काफी था। शिप्रा सोचने
- 1:02:32को मजबूर थी कि इसकी शख्सियत में ऐसी क्या
- 1:02:34बात है जो इसे इतना खास बनाती है। शिप्रा
- 1:02:38को विश्वास नहीं हो रहा था कि क्या यह वही
- 1:02:41दीनहीन भिखारी है जो कुछ दिनों पहले तक
- 1:02:43दूसरों के दिए टुकड़ों पर जीवन बिता रहा
- 1:02:46था और आज उसकी बातों में अचानक ऐसा ओझ है
- 1:02:49कि कुछ ही पलों में एक गुंडा उसे अपना
- 1:02:52उस्ताद मानने लगा। शिप्रा सोचने को मजबूर
- 1:02:55थी कि इसकी शख्सियत में कुछ तो ऐसी बात है
- 1:02:58जो इसे खास बनाती है। जब शौर्य पलटा तो
- 1:03:01उसने शिप्रा को अपनी तरफ देखते पाया। वो
- 1:03:04उसकी नजरों का सामना नहीं कर सका और मेघा
- 1:03:06की ओर देखने लगा। वो समझ गया कि आज उससे
- 1:03:09बहुत सारे सवाल जवाब होने वाले हैं। वो
- 1:03:12खुद को तैयार करने लगा। लेकिन उससे पहले
- 1:03:14उसे मेघा का मामला निपटाना था। छगन अपने
- 1:03:17साथी मगन को लेकर वहां से चला गया। मगन की
- 1:03:20हालत काफी खराब थी। लेकिन छगन के थोड़े से
- 1:03:23प्रयास से वो होश में आ गया। हालत भाप कर
- 1:03:26उसने ज्यादा चू चपड़ नहीं की और चुपचाप
- 1:03:28वहां से निकल गया। शौर्य मेघा के पास
- 1:03:31पहुंचा। [संगीत] छगन मगन के जाते ही एक
- 1:03:34लड़की भी भागती हुई मेघा के पास आई। वो
- 1:03:36मेघा की रूम पार्टनर है। उसका नाम जीनत
- 1:03:40है। मेघा उसी के साथ हॉस्टल से बाहर आई
- 1:03:42थी। जब छगन और मगन उसके पीछे पड़ गए थे।
- 1:03:45शौर्य के पास पहुंचते ही मेघा बोली थैंक्स
- 1:03:48भैया। आज आपने सही समय पर बचा लिया। भैया
- 1:03:52भी कहती हो और थैंक्स भी बोलती हो। शौर्य
- 1:03:55ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए
- 1:03:57कहा। फिर वो सीधे मुद्दे पर आया। कौन है
- 1:04:00यह विक्की जिसने तुम्हें परेशान कर रखा
- 1:04:03है? लेकिन मेघा ने कोई जवाब नहीं दिया।
- 1:04:06उसे डर था क्या शौर्य का विक्की से उलझना
- 1:04:08ठीक होगा? पहले ही वो उसके लिए इतना कर
- 1:04:11चुका है। कहीं उसके कारण शौर्य की विक्की
- 1:04:13से दुश्मनी ना हो जाए। विक्की बड़े घर का
- 1:04:16बिगड़ा हुआ लड़का है। उसका कुछ हो ना हो
- 1:04:18पर कहीं शौर्य ही मुश्किल में ना पड़ जाए।
- 1:04:21उसने सिर्फ शिकायत की थी और विक्की ने
- 1:04:23उसके पीछे गुंडे लगा दिए। अगर उसे पता चला
- 1:04:26कि कोई उसके समर्थन में खड़ा हो गया है तो
- 1:04:28वो कहीं श्रवण के लिए और बड़ी मुसीबत ना
- 1:04:31खड़ी कर दे। यह सोचकर मेघा चुप रही। शौर्य
- 1:04:35मेघा के हावभाव से ही उसकी मनस्थिति समझ
- 1:04:38गया। जब मेघा ने कुछ नहीं कहा तो जीनत की
- 1:04:40तरफ मुड़ा और पूछा।
- 1:04:43तुम मेघा के रूम पार्टनर हो ना? जीनत ने
- 1:04:46सहमति में सिर हिला दिया। तुम्हें पता है
- 1:04:49यह विक्की कौन है? शौर्य का सवाल सुनकर
- 1:04:51जीनत असमंजस में पड़ गई। क्या उसे विक्की
- 1:04:54के बारे में बताना चाहिए या नहीं? लेकिन
- 1:04:56अभी-अभी उसने शौर्य का साहस और ताकत देखी
- 1:04:59थी। उसे लगा अगर विक्की को कोई सबक सिखा
- 1:05:02सकता है तो वह सिर्फ शौर्य ही है।
- 1:05:05विशालगढ़ के रसूखदार परिवार से होने के
- 1:05:07कारण कॉलेज के डीन ने भी उसके खिलाफ कोई
- 1:05:10कार्यवाही नहीं की थी। अब जीनत को उम्मीद
- 1:05:13थी शायद शौर्य ही उसकी अकड़ ढीली कर सके।
- 1:05:16इसीलिए उसने बोलना शुरू किया। वो विशालगढ़
- 1:05:19के बहुत ही रसूखदार परिवार से संबंध रखता
- 1:05:21है। इसीलिए कॉलेज प्रशासन भी उसके ऊपर कोई
- 1:05:24कार्यवाही करने से बचता है। शौर्य ने सोचा
- 1:05:27विशालगढ़ में उसके दादाजी से ज्यादा
- 1:05:29रसूखदार कौन हो सकता है। उसने मन ही मन इस
- 1:05:33विक्की को सबक सिखाने का निश्चय किया।
- 1:05:35लेकिन अभी वो शिप्रा के सामने ज्यादा कुछ
- 1:05:37बोल नहीं सकता था। वो सोच ही रहा था कि अब
- 1:05:40उसे क्या करना चाहिए कि तभी जीनत शौर्य से
- 1:05:43पूछ बैठी आप मेघा के वही श्रवण भैया हैं
- 1:05:47ना जिन्होंने कुछ दिन पहले उसकी कॉलेज फीस
- 1:05:49के ₹ लाख भरे थे। मेघा आपके बारे में बहुत
- 1:05:53बात करती है। जीनत शौर्य से इतनी ज्यादा
- 1:05:56इंप्रेस थी कि वो चुप नहीं रह पाई और वो
- 1:05:58सवाल पूछ बैठी जिसका जवाब शौर्य किसी भी
- 1:06:01हाल में शिप्रा के सामने नहीं देना चाहता
- 1:06:03था। लेकिन तीर [संगीत] कमान से छूट चुका
- 1:06:06था। शिप्रा ने यह सुना तो वो बड़ी-बड़ी
- 1:06:09आंखों से शौर्य को देखने लगी। उसे समझ
- 1:06:12नहीं आया कि शौर्य की असलियत क्या है। जो
- 1:06:14खुद भीख से अपना गुजारा कर रहा था वो ₹
- 1:06:17लाख किसी को कहां से दे सकता है। शौर्य को
- 1:06:21तो समझ ही नहीं आ रहा था कि उसे अपनी
- 1:06:22किस्मत पर खुश होना चाहिए या कोसना चाहिए।
- 1:06:26जिन सवालों से वह बचना चाहता था वही सवाल
- 1:06:29उसके सामने आ रहे थे। उसने शिप्रा को अपनी
- 1:06:31तरफ देखते पाया तो उसने जल्दी से कहा।
- 1:06:35क्या कहा? ₹6 लाख और मैं तो सपने में भी
- 1:06:3910-50 से ऊपर नहीं देखता। तुम्हें कोई
- 1:06:42गलतफहमी हुई है। वो मैं नहीं हूं। इस बारे
- 1:06:46में तुम्हें मेघा ही बता सकती है। मेघा
- 1:06:49शौर्य की स्थिति समझ रही थी। उसे याद था
- 1:06:52जब शौर्य ने उसकी फीस के लिए पैसे दिए थे,
- 1:06:54तब वह अपनी असली पहचान दुनिया से छुपाना
- 1:06:56चाहता था। अगर वह जीनत के सामने मान लेती
- 1:06:59कि यही उसके श्रवण भैया हैं तो शायद उनकी
- 1:07:02हकीकत उजागर हो जाती और हो सकता है श्रवण
- 1:07:05भैया अभी नहीं चाहते कि सच्चाई सामने आए।
- 1:07:08तभी तो जीनत की बात से इंकार कर रहे हैं।
- 1:07:11यह विचार आते ही मेघा तुरंत बोली क्या यार
- 1:07:14तुम कुछ भी बोलने लगती हो। यह वो नहीं है।
- 1:07:19पर तुमने ही तो कहा था कि तुम्हारे श्रवण
- 1:07:21भैया ने मदद की थी। जीनत अपनी बात पर अड़ी
- 1:07:24रही। तो मेघा ने जोर देकर कहा अरे बाबा
- 1:07:27मैंने यह कहा था कि मेरे एक भाई ने मदद की
- 1:07:30थी पर यह वो नहीं है। जीनत को समझ नहीं
- 1:07:33आया कि मेघा अपनी ही बात से क्यों मुकर
- 1:07:35रही है। लेकिन उसने अभी इस पर बहस करना
- 1:07:38ठीक नहीं समझा। उसने मन ही मन तय किया कि
- 1:07:41वो इस बारे में मेघा से अकेले में बात
- 1:07:43करेगी। उधर शौर्य सोच रहा था इस समय
- 1:07:46शिप्रा को घर कैसे भेजें। वो मेघा के
- 1:07:48हॉस्पिटल जाकर उसके डीन से बात करना चाहता
- 1:07:50था और विक्की को भी सबक सिखाने का इरादा
- 1:07:53रखता था। वो शिप्रा के पास गया और बोला
- 1:07:57मैम क्या आप खुद घर चली जाएंगी? मैं सोच
- 1:07:59रहा हूं एक बार मेघा के हॉस्पिटल जाकर
- 1:08:02उसके डीन से मिलूं। तुम अकेले क्यों
- 1:08:04जाओगे? चलो मैं भी साथ चलती हूं। मेरे
- 1:08:08जानने वाले भी इस हॉस्पिटल में हैं। कहो
- 1:08:10तो उनसे भी बात कर सकती हूं। शिप्रा ने
- 1:08:13दृढ़ स्वर में कहा। वो इस मुश्किल घड़ी
- 1:08:15में शौर्य को अकेला छोड़ने के लिए तैयार
- 1:08:17नहीं थी। लेकिन यही तो शौर्य नहीं चाहता
- 1:08:20था। शिप्रा उसके साथ रहती तो वह खुलकर कुछ
- 1:08:23भी नहीं कर पाता। ऊपर से सबसे बड़ी चिंता
- 1:08:26यह थी कि उसके दादाजी भी उसी हॉस्पिटल में
- 1:08:28थे। अगर कांता प्रसाद जी ने उसे वहां देख
- 1:08:31लिया तो शिप्रा के सामने उसका राज खुलना
- 1:08:33तय था। वो भी यह सोच ही रहा था कि मेघा
- 1:08:36बोल पड़ी। अरे नहीं भैया आप रहने दीजिए।
- 1:08:39मैं जीनत के साथ चली जाऊंगी। सामने ही तो
- 1:08:42हॉस्पिटल है और डीन से मिलना होगा तो आप
- 1:08:44किसी और दिन आ जाइएगा। अभी वो आपसे
- 1:08:47मिलेंगे भी नहीं।
- 1:08:49शौर्य को उसकी बात ठीक लगी। टकराव टालना
- 1:08:51ही समझदारी होगी। वो बोला ठीक है तुम जाओ
- 1:08:56मैं फिर कभी मिल लूंगा। फिर वो शिप्रा की
- 1:08:59तरफ मुड़ा और बोला चलिए मैम हम भी घर चलते
- 1:09:02हैं। दोनों कार में जाकर बैठ गए। तभी पीछे
- 1:09:05से एक दूसरी कार आकर रुकी। उसके अंदर बैठा
- 1:09:08कोई व्यक्ति बड़े गौर से शौर्य को देख रहा
- 1:09:11था। कार के शीशे के पीछे छिपी वो निगाहें
- 1:09:14जैसे उसे पहचानती हो। जैसे वो इंतजार कर
- 1:09:17रही हो सही वक्त का। शौर्य को भी हल्की सी
- 1:09:20बेचैनी महसूस हुई। पर जब तक वो पलट कर
- 1:09:23देखता कार आगे बढ़ चुकी थी। खैर शौर्य और
- 1:09:27शिप्रा गाड़ी में बैठे और चले गए। उनके
- 1:09:30जाने के बाद जीनत मेघा से शिकायती लहजे
- 1:09:32में बोली। तुमने मुझसे झूठ क्यों बोला था
- 1:09:35कि तुम्हारे श्रवण भैया ने ही तुम्हारी
- 1:09:37फीस भरी थी। हां, मैंने तुम्हें बताया। पर
- 1:09:40तुम्हें उनसे पूछने की क्या जरूरत थी?
- 1:09:43मेघा ने उल्टा जीनत से ही प्रश्न कर दिया।
- 1:09:45अरे पूछ लिया तो इतनी बड़ी क्या बात हो
- 1:09:47गई? जीनत उलझन भरे स्वर में बोली तो मेघा
- 1:09:50ने जीनत को समझाने की कोशिश की।
- 1:09:54उनके लिए यह बड़ी बात है। वो नहीं चाहते
- 1:09:56कि उनकी असलियत बाहर आए और तुमने सबके
- 1:09:58सामने उनसे पूछ लिया तो उन्हें इंकार करना
- 1:10:00ही पड़ा। अरे यार पर इसमें छुपाने की क्या
- 1:10:04बात है? यह तो गर्व की बात है कि उन्होंने
- 1:10:06तुम्हारी इतनी बड़ी मदद की। इसमें छुपाने
- 1:10:09जैसा तो कुछ है ही नहीं। अभी भी जीनत अपनी
- 1:10:11बात पर अड़ी हुई थी। तो मेघा ने जीनत को
- 1:10:14समझाने की कोशिश की। देखो हमारे श्रवण
- 1:10:17भैया इस तरह के आदमी नहीं है कि किसी की
- 1:10:20मदद करके ढिंढोरा पीटते रहे कि देखो हमने
- 1:10:22कितना बड़ा काम कर दिया। उनकी जिंदगी में
- 1:10:25कुछ बातें ऐसी हैं जो [संगीत] मुझे भी समझ
- 1:10:27नहीं आती। उन्हें पैसों की कोई दिक्कत
- 1:10:30नहीं थी। फिर भी मंदिर में अगर कोई खाने
- 1:10:32को दे देता था तो [संगीत] वो उसी से
- 1:10:34गुजारा करते थे। कुछ दिनों पहले तक तो वो
- 1:10:36बोलते भी नहीं थे। सभी उन्हें गूंगा समझते
- 1:10:39थे। मैंने खुद जब उन्हें बोलते सुना तो
- 1:10:41हैरान रह गई थी। शायद उनकी जिंदगी से
- 1:10:44जुड़ा कोई ऐसा राज है जिसे वो लोगों के
- 1:10:46सामने नहीं लाना चाहते। जीनत ने शिप्रा के
- 1:10:49बारे में पूछा। और वो लड़की कौन थी जो
- 1:10:53उनके साथ थी? इस पर मेघा कुछ सोचते हुए
- 1:10:56बोली निश्चित रूप से तो नहीं कह सकती पर
- 1:10:59शायद वही लड़की है जिससे उनकी शादी हुई
- 1:11:01है। जीनत ने अपना जासूसी दिमाग लगाया और
- 1:11:04बोली तुम तो कह रही थी कि वो भिखारी की
- 1:11:07जिंदगी जी रहे थे। फिर किस लड़की ने उनसे
- 1:11:10शादी कर ली? वही तो मैं खुद उन्हें पहचान
- 1:11:13नहीं पाई। पहले उनकी दाढ़ी इतनी बड़ी और
- 1:11:16बेतरतीब थी कि मैं कल्पना भी नहीं कर सकती
- 1:11:18थी कि दाढ़ी हटने के बाद वो इतने हैंडसम
- 1:11:20नजर आएंगे। मेघा अभी भी शौर्य के इस
- 1:11:23कायापलट से हैरान थी। फिर उसने आगे कहा और
- 1:11:27जहां तक शादी की बात है उस लड़की ने उनसे
- 1:11:29शादी अपनी मर्जी से नहीं की थी। बल्कि एक
- 1:11:32बदमाश ने जबरदस्ती शादी करवाई थी।
- 1:11:35जीना जैसे ही यह सुनती है, हैरानी से बोल
- 1:11:38उठती है। तो इसका मतलब यह वही भिखारी है
- 1:11:41जिसकी शादी की चर्चा पूरे विशालगढ़ में
- 1:11:44वायरल है। यानी वो [संगीत] लड़की शिप्रा
- 1:11:46राय थी। उसकी खूबसूरती की चर्चा भी तो खूब
- 1:11:49वायरल हो रही है। यह मेघा के लिए नई बात
- 1:11:53थी। क्योंकि उसे शौर्य से जुड़ी किसी खबर
- 1:11:55की जानकारी नहीं थी। उसने उत्सुकता से
- 1:11:58पूछा।
- 1:11:59ये तुम किस शादी की बात कर रही हो जो पूरे
- 1:12:02विशालगढ़ में वायरल है? अरे यार तुम तो हो
- 1:12:05ही कुएं की मेंढक। बाहरी दुनिया में क्या
- 1:12:08चल रहा है तुम्हें कुछ पता ही नहीं। पूरे
- 1:12:10विशालगढ़ में खबर वायरल है कि एक बेहद
- 1:12:13खूबसूरत लड़की की शादी एक भिखारी से हुई
- 1:12:15है। जीनत की बात सुनकर मेघा हैरान रह गई।
- 1:12:19लेकिन इस वक्त सिर्फ मेघा ही नहीं दो और
- 1:12:21आंखें भी हैरान थी जो पास खड़ी कार के
- 1:12:24अंदर से उनकी हर बात ध्यान से सुन रही थी।
- 1:12:27कार का एक शीशा थोड़ा सा नीचे था। वो शख्स
- 1:12:30कोई और नहीं [संगीत] कांता प्रसाद थे।
- 1:12:33कांता प्रसाद भी शौर्य के साथ शिप्रा को
- 1:12:36देखकर चौंक गए थे। इस वायरल खबर के बारे
- 1:12:38में उन्हें भी पता था जिसकी चर्चा यह
- 1:12:41दोनों लड़कियां कर रही थी। लेकिन उन्हें
- 1:12:43यह नहीं मालूम था कि उस खबर में जिस लड़के
- 1:12:46का जिक्र हुआ है वो शौर्य ही है। जैसे ही
- 1:12:49उन्हें यह सच्चाई समझ आई, उनके मन में
- 1:12:51हलचल मच गई। उन्होंने मन ही मन सोचा। यह
- 1:12:55बात राजा साहब तक पहुंचानी ही चाहिए। इधर
- 1:12:58अब तक मेघा के साथ कुछ और इंटर्न डॉक्टर
- 1:13:00भी वहां आ चुके थे। मेघा उनके साथ हॉस्टल
- 1:13:03की ओर जाने ही वाली थी कि तभी पीछे से
- 1:13:06आवाज आई। सुनो लड़की मेघा ने पलट कर देखा।
- 1:13:10कार के अंदर से कांता प्रसाद उसे इशारे से
- 1:13:13बुला रहे थे। जी मेघा ने हल्के सहमे स्वर
- 1:13:17में कहा। जरा एक मिनट इधर आना। कांता
- 1:13:20प्रसाद की आवाज में एक अजीब सी गंभीरता
- 1:13:23थी। मेघा कांता प्रसाद के बारे में जानती
- 1:13:26थी। इसीलिए वह मना नहीं कर सकी। वो
- 1:13:28डरते-डरते उनके पास गई। उसके मन में डर था
- 1:13:31कहीं विक्की ने अपने सोर्स का फायदा उठाकर
- 1:13:34उसकी शिकायत तो नहीं कर दी। वो भी तो
- 1:13:36विशालगढ़ के रईस परिवार से आता है। उसके
- 1:13:39लिए क्या ही मुश्किल होगा। मेघा के बाकी
- 1:13:42दोस्त थोड़ी दूरी पर ही खड़े रहे क्योंकि
- 1:13:44उनमें से ज्यादातर लोग कांता प्रसाद के
- 1:13:46स्वभाव के बारे में जानते थे। मेघा उनके
- 1:13:49पास पहुंचकर सहमे स्वर में बोली। जी सर
- 1:13:52कहिए। कांता प्रसाद ने उसके डरे हुए चेहरे
- 1:13:55को गौर से देखा और शांत स्वर में बोले।
- 1:13:59डरो मत बेटी। मुझे बस यह बताओ कि तुम
- 1:14:02शौर्य को कैसे जानती हो? मेघा को कुछ समझ
- 1:14:05नहीं आया। वो बोली आप किसके बारे में पूछ
- 1:14:08रहे हैं? मैं किसी शौर्य को नहीं जानती।
- 1:14:12अरे वही लड़का जो अभी थोड़ी देर पहले यहां
- 1:14:14से गया है। जिसके साथ एक खूबसूरत लड़की भी
- 1:14:17थी। कांता प्रसाद ने स्पष्ट किया। तो मेघा
- 1:14:20ने तुरंत जवाब दिया।
- 1:14:23उनका नाम श्रवण है। अच्छा तो उनका नाम
- 1:14:27श्रवण है। कांता प्रसाद [संगीत] ने धीमे
- 1:14:29स्वर में दोहराया जैसे मन ही मन कोई बात
- 1:14:32जोड़ रहे हो। श्रवण को तुम कैसे जानती हो?
- 1:14:35अब मेघा सचमुच घबरा गई कि कहीं यह अंकल
- 1:14:38श्रवण भैया को कोई नुकसान तो नहीं
- 1:14:39पहुंचाना चाहते। वो लगभग विनती करते हुए
- 1:14:42बोली देखिए [संगीत] सर आप श्रवण भैया को
- 1:14:45कुछ मत कीजिएगा। उनकी कोई गलती नहीं है।
- 1:14:48उन्होंने जो भी किया सिर्फ मुझे बचाने के
- 1:14:51लिए किया। नहीं नहीं मैं उसे कोई नुकसान
- 1:14:54नहीं पहुंचाने वाला। उन्होंने गहरी नजर से
- 1:14:57मेघा को देखते हुए कहा, "मैं तो उसके बारे
- 1:15:00में सिर्फ जानना चाहता हूं।" कांता प्रसाद
- 1:15:03की आवाज शांत थी, पर उस शांति के पीछे
- 1:15:06छिपी गंभीरता मेघा के डर को बढ़ा रही थी।
- 1:15:09मेघा ने कांता प्रसाद जी को श्रवण के बारे
- 1:15:11में सब कुछ बताया। उन्हें यह जानकर बेहद
- 1:15:14हैरानी हुई कि शौर्य इतने समय से एक
- 1:15:16भिखारी की जिंदगी जी रहा था। इसके बाद
- 1:15:19उन्होंने मेघा से पूछा,
- 1:15:22"क्या हुआ था अभी यहां?"
- 1:15:24दरअसल कांता प्रसाद बिल्कुल आखिर में यहां
- 1:15:26आए थे। इसीलिए उन्हें पता नहीं था कि यहां
- 1:15:29क्या हुआ था। मेघा ने उन्हें पूरी घटना के
- 1:15:32बारे में विस्तार से बताया। सब कुछ सुनने
- 1:15:34के बाद कांता प्रसाद ने कहा तुम यह कह रही
- 1:15:38हो कि इस सबके पीछे विक्की का हाथ है।
- 1:15:41हां। मेघा ने सहमति में सिर हिलाया। इस पर
- 1:15:45कांता प्रसाद बोले तुमने डीन से शिकायत की
- 1:15:48है? हां की थी। उसके बाद ही तो उसने मेरे
- 1:15:52पीछे गुंडे भेज दिए। मेघा दबी आवाज में
- 1:15:55बोली। कांता प्रसाद ने मेघा के सहमे हुए
- 1:15:58चेहरे को देखकर कहा, "अगर आज के बाद कोई
- 1:16:01भी तुम्हें परेशान करे, तो तुम मुझे इस
- 1:16:03नंबर पर कॉल करना।" कहते हुए कांता प्रसाद
- 1:16:06ने अपना कार्ड निकालकर मेघा की तरफ बढ़ा
- 1:16:08दिया। मेघा को हैरानी हुई कि कांता प्रसाद
- 1:16:11को उसकी चिंता है। अचानक ही उसके दिल में
- 1:16:14श्रवण को लेकर जो जिज्ञासा थी, वह और भी
- 1:16:17ज्यादा बढ़ गई। वहीं दूसरी तरफ गाड़ी के
- 1:16:19[संगीत] अंदर शौर्य और शिप्रा के बीच गहरा
- 1:16:22सन्नाटा पसरा हुआ था। शिप्रा गाड़ी में
- 1:16:24बैठी तो थी लेकिन उसका दिमाग अभी भी थोड़ी
- 1:16:27देर पहले हुई घटना में ही उलझा हुआ था। वो
- 1:16:30बार-बार मेघा के बारे में सोच रही थी।
- 1:16:33उसने शौर्य को भैया कहा था। तो क्या वो सच
- 1:16:37में उसकी सगी बहन है? आखिरकार अपने मन में
- 1:16:40उठ रहे सवालों का जवाब पाने के लिए शिप्रा
- 1:16:42ने शौर्य से पूछ ही लिया। वो लड़की कौन
- 1:16:46थी? कौन लड़की? शौर्य समझ तो गया था कि
- 1:16:50शिप्रा क्या पूछ रही है, लेकिन वो अनजान
- 1:16:52बना। इस पर शिप्रा ने बात साफ करते हुए
- 1:16:55कहा, "मैं उसी लड़की की बात कर रही हूं
- 1:16:58जिसे बचाने के लिए तुम उन गुंडों से लड़
- 1:17:00पड़े जो तुम्हें भैया कह रही थी। अच्छा
- 1:17:04वो। शौर्य ऐसे बोला जैसे अब जाकर उसे समझ
- 1:17:07आया हो कि शिप्रा क्या पूछ रही है। शिप्रा
- 1:17:10को शक हुआ कि कहीं शौर्य जानबूझकर उसके
- 1:17:13सामने अनजान तो नहीं बन रहा है। यह ख्याल
- 1:17:16आते ही उसने सीधे पूछ लिया। क्या तुम वाकई
- 1:17:19इतने भोले हो या मेरे सामने ऐसा जताने की
- 1:17:22कोशिश कर रहे हो कि तुम्हें मेरी बात का
- 1:17:24मतलब समझ नहीं आ रहा है। शौर्य थोड़ा
- 1:17:27हड़बड़ा गया। उसे उम्मीद नहीं थी कि
- 1:17:29शिप्रा उससे इतनी सीधी बात कर देगी। वो
- 1:17:32समझ गया कि शिप्रा के सामने ज्यादा
- 1:17:35होशियारी दिखाना उसे ही भारी पड़ सकता है।
- 1:17:38इसीलिए वह खुद को संभालते हुए बोला नहीं
- 1:17:40ऐसा कुछ नहीं है। वो लड़की पुजारी बाबा की
- 1:17:43पोती है। जब भी वो उनसे मिलने आती थी तो
- 1:17:46मुझसे भी उसकी मुलाकात हो जाती थी। तुमने
- 1:17:50पैसों से भी उसकी मदद की है। शिप्रा ने
- 1:17:52शौर्य के चेहरे को गौर से देखते हुए पूछा।
- 1:17:56शौर्य इस बात को टालना चाहता था। वो हंसते
- 1:17:59हुए बोला क्या मैंने पैसों से उसकी मदद
- 1:18:03अगर मेरे पास पैसे होते तो क्या मैं ऐसी
- 1:18:05जिंदगी जी रहा होता? तुम कुछ भी कहो लेकिन
- 1:18:09मुझे उस लड़की जीनत की बात सही लग रही थी।
- 1:18:12शिप्रा ने कहा उसे अभी भी शौर्य की बात पर
- 1:18:15पूरा भरोसा नहीं हो रहा था। पर तुमने खुद
- 1:18:18सुना था। मेघा ने जीनत को साफ बताया था कि
- 1:18:21उसकी फीस किसी और ने भरी थी। शौर्य अब भी
- 1:18:25यह मानने को तैयार नहीं था कि उसने मेघा
- 1:18:27की पैसों से कोई मदद की थी। हां, मैंने
- 1:18:30सुना था, लेकिन मेघा मुझे झूठ बोलती हुई
- 1:18:32लगी। मुझे लगा वो सिर्फ तुम्हारी इज्जत
- 1:18:35रखने के लिए जीनत के सामने झूठ बोल रही
- 1:18:37थी। शिप्रा ने दिल की बात साफ-साफ कह दी।
- 1:18:40इस पर शौर्य ने शिप्रा के सवालों से बचने
- 1:18:43के इरादे से कहा। पता नहीं आप ऐसा क्यों
- 1:18:46सोच रही हैं और सबसे बड़ी बात आप इन सबके
- 1:18:48पीछे क्यों पड़ी हैं? ऐसा कुछ भी नहीं है।
- 1:18:51मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं किसी
- 1:18:53की मदद कर सकूं।
- 1:18:56शिप्रा ने आगे कोई सवाल तो नहीं किया
- 1:18:58लेकिन उसे अब भी शौर्य की बात पर पूरा
- 1:19:01भरोसा नहीं था। जो शौर्य उसे एक दिन पहले
- 1:19:04तक दीनहीन लग रहा था वो अचानक उसे
- 1:19:07स्ट्रांग और अलग सा नजर आने लगा था। वहीं
- 1:19:11दूसरी तरफ हॉस्पिटल में कांता प्रसाद
- 1:19:13चंद्रभान राठौड़ के पास बैठा हुआ था। तुम
- 1:19:17यह कह रहे हो कि तुमने शौर्य के साथ एक
- 1:19:20लड़की को देखा जो उसकी पत्नी है। चंद्रभान
- 1:19:24राठौड़ ने गंभीर स्वर में पूछा। जी राजा
- 1:19:28साहब यह सच है। कांता प्रसाद ने उतनी ही
- 1:19:31गंभीरता से जवाब दिया। फिर अपनी बात आगे
- 1:19:34बढ़ाते हुए बोला।
- 1:19:36और दूसरी बात यह है कि उनकी पहचान एक
- 1:19:38भिखारी के रूप में है। मैंने कुछ दिन पहले
- 1:19:42यह खबर सुनी थी कि विशालगढ़ की एक लड़की
- 1:19:44की शादी जबरदस्ती एक भिखारी से कर दी गई
- 1:19:48थी। लेकिन उस वक्त हमें यह नहीं पता था कि
- 1:19:51वह भिखारी [संगीत] कोई और नहीं हमारे
- 1:19:53शौर्य बाबा ही हैं। कांता प्रसाद आखिर तुम
- 1:19:58कहना क्या चाहते हो? अपनी बात साफ-साफ
- 1:20:01बताओ। हमारा शौर्य भिखारी कैसे हो सकता
- 1:20:04है? चंद्रभान जी को कुछ समझ नहीं आ रहा
- 1:20:08था।
- 1:20:09तो ठीक है। पूरी बात शुरू से सुनिए। कांता
- 1:20:13प्रसाद ने कहा हुआ यूं कि शौर्य बाबा के
- 1:20:16एक्सीडेंट के बाद वो एक मंदिर में रह रहे
- 1:20:19थे। उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि कोई पहचान
- 1:20:22ही नहीं सकता था। बढ़ी हुई दाढ़ी बिल्कुल
- 1:20:25भिखारी जैसा रूप। कांता प्रसाद जी थोड़ा
- 1:20:29रुक कर बोले।
- 1:20:31इसी बीच कुछ दिन पहले बलवंत राय की पोती
- 1:20:34की शादी विहान रायजादा से तय हुई थी।
- 1:20:37लेकिन मुख्तार ने उनकी पोती की शादी
- 1:20:39जबरदस्ती भिखारी से करवा दी। और वह भिखारी
- 1:20:42कोई और नहीं हमारे शौर्य बाबा ही थे।
- 1:20:46कांता प्रसाद ने एक सांस में पूरी बात
- 1:20:48बताते हुए आगे कहा। दरअसल शौर्य बाबा
- 1:20:52मंदिर में भिखारी जैसी हालत में रह रहे थे
- 1:20:54और मुख्तार ने उन्हें सच में भिखारी समझ
- 1:20:57लिया। उसी गलतफहमी में उसने उनकी शादी
- 1:21:00शिप्रा से करवा दी और आजकल शौर्य बाबा
- 1:21:03शिप्रा राय के ड्राइवर बने हुए हैं। अब
- 1:21:06जाकर चंद्रभान राठौड़ को बात समझ में आई।
- 1:21:10लेकिन उनके मन में एक सवाल अभी भी था।
- 1:21:13शौर्य आखिर अपनी सच्चाई सबसे छुपा क्यों
- 1:21:15रहा है? वो सबके सामने सच क्यों नहीं बता
- 1:21:18रहा? अपनी उत्सुकता जाहिर करते हुए
- 1:21:21चंद्रभान राठौड़ बोले लेकिन शौर्य ऐसा
- 1:21:25क्यों कर रहा है?
- 1:21:27यह तो शौर्य बाबा ही बेहतर बता सकते हैं।
- 1:21:30कांता प्रसाद ने जवाब दिया हम
- 1:21:33चंद्रभान राठौड़ सोच में डूबते हुए बोले
- 1:21:37इस मुख्तार को तो सबक सिखाना पड़ेगा लेकिन
- 1:21:41उससे पहले शौर्य से मिलकर यह जानना जरूरी
- 1:21:44है कि वो अपनी सच्चाई क्यों छुपा रहा है।
- 1:21:48इस पर कांता प्रसाद ने कहा एक बात और है
- 1:21:52मेघा नाम की एक लड़की है जो इसी हॉस्पिटल
- 1:21:55में इंटर्न है। [संगीत] शौर्य बाबा उसे
- 1:21:58अपनी बहन मानते हैं। आज हॉस्पिटल के बाहर
- 1:22:01कुछ गुंडे उसके पीछे पड़ गए थे लेकिन
- 1:22:03शौर्य ने उन्हें पीट कर भगा दिया। उन
- 1:22:06गुंडों को उस लड़की के पीछे भेजने वाला
- 1:22:09विक्की नारंग था। इसके बाद कांता प्रसाद
- 1:22:12ने हॉस्पिटल के बाहर जो कुछ भी हुआ था, वह
- 1:22:15पूरा किस्सा चंद्रभान राठौड़ को विस्तार
- 1:22:17से बता दिया।
- 1:22:19क्या करें इस नारंग का? जैसा बाप वैसा
- 1:22:24बेटा। अपनी बेटी के कारण मैं इनके खिलाफ
- 1:22:27कुछ कर भी नहीं पाता। चंद्रभान राठौर ने
- 1:22:30बेबसी जताते हुए कहा इस पर कांता प्रसाद
- 1:22:34बोले आप कुछ करें या ना करें लेकिन मुझे
- 1:22:37लगता है कि शौर्य बाबा विक्की के खिलाफ
- 1:22:40कुछ ना कुछ जरूर करेंगे।
- 1:22:43पर क्या वो अकेला विक्की का सामना कर
- 1:22:45पाएगा? चंद्रभान जी ने शौर्य के लिए चिंता
- 1:22:48जाहिर की तो कांता प्रसाद ने कहा राजा
- 1:22:52साहब आप अपने पोते को अंडरएस्टिमेट कर रहे
- 1:22:55हैं। जैसा मैंने आज लोगों से उनके बारे
- 1:22:58में सुना है उससे तो कुछ और ही कहानी समझ
- 1:23:01आती है। ऐसा क्या सुन लिया तुमने?
- 1:23:04चंद्रभान जी अपनी जिज्ञासा रोक नहीं पाए।
- 1:23:07वो जानते थे कि कांता प्रसाद को जरा बातें
- 1:23:09गोल-गोल घुमाने की आदत है। इस इलाके में
- 1:23:12दो गुंडों की जोड़ी है। छगन और मगन। यह
- 1:23:16दोनों मेघा को उठाने आए थे। लेकिन शौर्य
- 1:23:18बाबा ने एक ही थप्पड़ में मगन को जमीन पर
- 1:23:21गिरा दिया और वह फिर उठ ही नहीं पाया।
- 1:23:24कांता प्रसाद ने तारीफ भरे अंदाज में
- 1:23:26बताया।
- 1:23:28अच्छा चंद्रभान जी की आंखें फैल गई। उनके
- 1:23:31चेहरे पर अपने पोते के लिए गर्व साफ झलक
- 1:23:34रहा था। उन्होंने लगभग आदेश देते हुए
- 1:23:37कांता प्रसाद से कहा। ऐसा करो कल एक बार
- 1:23:41फिर शौर्य को यहां बुलाओ। मैं उससे मिलना
- 1:23:45चाहता हूं। [संगीत] जी साहब कांता प्रसाद
- 1:23:48ने आदरपूक कहा। वहीं दूसरी तरफ बलवंत राय
- 1:23:52जी की हवेली में आज पूरे परिवार की मीटिंग
- 1:23:55थी। दरअसल मुख्तार के प्रपोजल पर बलवंत
- 1:23:58राय पूरे परिवार का मत जानना चाहते थे। तो
- 1:24:02सब कुछ तुम सबके सामने है। अब बताओ तुम
- 1:24:05लोगों की क्या राय है? बलवंत राय ने पूरे
- 1:24:08कमरे पर नजर दौड़ाते हुए पूछा। इस पर
- 1:24:10बृजभूषण राय तुरंत बोले इसमें सोचने वाली
- 1:24:14क्या बात है पापा? मुख्तार से दुश्मनी
- 1:24:16खत्म करने का यह एक अच्छा मौका है। देखा
- 1:24:18जाए तो शिप्रा के लिए भी यह सही फैसला है।
- 1:24:21हम लोग तो पहले ही इस चिंता में थे कि
- 1:24:23उसका भविष्य क्या होगा। लेकिन अब तो
- 1:24:25किस्मत खुद उसके दरवाजे पर दस्तक दे रही
- 1:24:28है। एक भिखारी से तो रजत लाख गुना अच्छा
- 1:24:31है। इसीलिए मेरी राय में हमें शिप्रा की
- 1:24:34शादी रजत के साथ कर देनी चाहिए। और नहीं
- 1:24:38तो क्या? बड़ी बहू सरला भी कहां पीछे रहने
- 1:24:41वाली थी? वो बोली अगर हम लाख कोशिश भी
- 1:24:45करते तब भी शिप्रा के लिए इससे अच्छा
- 1:24:47लड़का नहीं मिल पाता। एक भिखारी की
- 1:24:49ब्याहता से भला कौन शादी करने को तैयार
- 1:24:52होता। सरला की बात सुनकर राजदीप राय चिढ़े
- 1:24:55हुए स्वर में बोले। आप सब समझ रहे हैं कि
- 1:24:58मुख्तार भाई अपने भाई की शादी शिप्रा से
- 1:25:00क्यों कराना चाहता है। वो शिप्रा को अपनी
- 1:25:03बहू नहीं बनाना चाहता। वो सिर्फ अपने भाई
- 1:25:05को बचाना चाहता है। इसीलिए उसने यह
- 1:25:08प्रस्ताव रखा है। तभी कुलवंत बीच में बोल
- 1:25:11पड़ा। मैं मानता हूं अंकल कि मुख्तार भाई
- 1:25:15का इरादा सिर्फ अपने भाई को बचाने का है।
- 1:25:18लेकिन यह भी तो सोचिए कि यह फैसला शिप्रा
- 1:25:20के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। अब क्या
- 1:25:23चाहते हैं? वो भिखारी हमेशा इस घर का
- 1:25:25दामाद बना रहे। कुलवंत की बात सुनकर एक पल
- 1:25:28के लिए राजदीप राय भी चुप हो गए। दामाद के
- 1:25:31रूप में वह भी शौर्य को अपना नहीं पा रहे
- 1:25:33थे। शिप्रा चुपचाप बैठी सबकी बातें सुन
- 1:25:36रही थी। अपने पिता को यूं खामोश देखकर उसे
- 1:25:39बुरा तो लगा लेकिन उसने कुछ कहा नहीं। वो
- 1:25:42बस यह देखना चाहती थी कि बाकी लोगों की
- 1:25:45उसके मामले पर क्या सोच है। वैसे भाई साहब
- 1:25:48देखा जाए तो कुलवंत गलत भी नहीं कह रहा।
- 1:25:51जगताप राय ने उसका समर्थन करते हुए कहा।
- 1:25:54हमें शिप्रा के बारे में भी तो सोचना
- 1:25:56चाहिए। हम उसकी जिंदगी एक भिखारी के साथ
- 1:25:59तो नहीं जोड़ सकते। मेरी राय भी यही है कि
- 1:26:02हमें मुख्तार भाई का प्रस्ताव मान लेना
- 1:26:04चाहिए।
- 1:26:06इस पर दामाद राजकुमार टंडन ने अपना विचार
- 1:26:09रखा। मैं भी जगताप भैया से सहमत हूं।
- 1:26:11[संगीत]
- 1:26:12आप माने या ना माने मुख्तार भाई के परिवार
- 1:26:15से रिश्ता होने से विशालगढ़ में आपके
- 1:26:17परिवार का रुतबा भी बढ़ जाएगा।
- 1:26:20शिप्रा ने मुंह बिचकाते हुए सोचा कैसी सोच
- 1:26:23है इनकी? आखिर एक गुंडे बदमाश के घर
- 1:26:26रिश्ता जोड़कर कौन सा रुतबा बढ़ेगा? लेकिन
- 1:26:29वो फिर भी चुप रही।
- 1:26:31हां पिताजी हमें शिप्रा के बारे में भी
- 1:26:33सोचना चाहिए। हमें उस भिखारी से पीछा
- 1:26:35छुड़ाने का मौका मिल रहा है। नहीं तो तलाक
- 1:26:38के बाद भी कौन सा अच्छा परिवार शिप्रा से
- 1:26:40शादी करने को तैयार होता। नैना राय ने
- 1:26:44अपने पति की बात का समर्थन करते हुए कहा।
- 1:26:46वहीं सरला राय फिर से तंज कसने से खुद को
- 1:26:49रोक नहीं पाई। और नहीं तो क्या उस भिखारी
- 1:26:52की वजह से वैसे ही पूरे विशालगढ़ में
- 1:26:55हमारे परिवार की बदनामी हो रही है। सरला
- 1:26:58राय की बात सुनकर बीना जी के तन मन में आग
- 1:27:01सी लग गई लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। वो
- 1:27:04भी शौर्य से शिप्रा का पीछा छुड़ाना चाहती
- 1:27:06थी। इसके लिए वो शिप्रा की शादी रजत से
- 1:27:10करवाने को तैयार थी। यहां तक कि रजत की
- 1:27:12पुरानी गलतियों को भी नजरअंदाज करने को
- 1:27:14तैयार हो गई थी। बलवंत राय ने महसूस किया
- 1:27:18कि लगभग सभी घर वाले शिप्रा की शादी रजत
- 1:27:21से करवाने के पक्ष में थे। आखिर में
- 1:27:23उन्होंने शिप्रा की तरफ देखा। उन्हें खुद
- 1:27:26भी लग रहा था कि शिप्रा के भविष्य के लिए
- 1:27:28रजत से शादी करना ही बेहतर होगा। इससे
- 1:27:31उनके परिवार पर लगे भिखारी दामाद का दाग
- 1:27:34भी मिट जाएगा। उन्होंने शिप्रा की राय
- 1:27:37जानने के लिए कहा।
- 1:27:39शिप्रा बेटी मुख्तार के प्रपोजल पर सब
- 1:27:42क्या सोचते हैं? [संगीत] यह तो तुमने सुन
- 1:27:44लिया है। मुझे भी यही लगता है कि तुम्हारे
- 1:27:47भविष्य के लिए [संगीत] यही सही रहेगा।
- 1:27:50लेकिन आखिर में तुम्हारी राय जानना भी
- 1:27:52जरूरी है। तो [संगीत] बोलो। क्या चाहती हो
- 1:27:56तुम? चलिए शुक्र है कि आपको मेरा ख्याल तो
- 1:27:58आया कि मेरी राय भी जान लेनी चाहिए।
- 1:28:01शिप्रा ने कड़वे स्वर में कहा। नहीं तो
- 1:28:03मुझे लगा था कि सबके विचार सुनकर आप सीधे
- 1:28:06मुझे उस घटिया आदमी के गले बांधने का
- 1:28:08फैसला सुना देंगे। शिप्रा ने एक बार सबकी
- 1:28:11तरफ देखा और साफ शब्दों में कहा। आप सब
- 1:28:14अपने उस मुख्तार भाई के साथ जैसे भी संबंध
- 1:28:16रखना चाहते हैं रखिए। लेकिन मैं साफ बता
- 1:28:19देती हूं। मैं किसी भी हालत में उस रजत से
- 1:28:22शादी नहीं करूंगी। शिप्रा की यह बात सुनकर
- 1:28:24कमरे में मौजूद किसी को भी उम्मीद नहीं थी
- 1:28:27कि वो बलवंत राय के सामने इतनी बेबाकी से
- 1:28:29अपना फैसला सुना देगी। तभी सरला ने तंज
- 1:28:33कसते हुए कहा देखो तो कैसे बाबूजी के
- 1:28:36सामने जुबान चला रही है। इस लंबी जुबान की
- 1:28:38वजह से ही तो इसकी शादी जबरदस्ती भिखारी
- 1:28:41से करनी पड़ी। और देखिए अकड़ अभी भी कम
- 1:28:44नहीं हुई। तभी बलवंत राय शांत स्वर में
- 1:28:47बोले शिप्रा बेटा हम जो भी करेंगे
- 1:28:50तुम्हारी भलाई को ध्यान में रखकर ही
- 1:28:51[संगीत] करेंगे। मेरा मानना है कि तुम इस
- 1:28:54रिश्ते के लिए तैयार हो जाओ। इसी में
- 1:28:56तुम्हारी और इस परिवार की भलाई है। उनकी
- 1:28:59बातों से साफ था कि उन्होंने शिप्रा की
- 1:29:01बात का बुरा नहीं माना था। शिप्रा ने
- 1:29:04विनती भरे स्वर में कहा दादा जी आपको ऐसा
- 1:29:07क्यों लगता है कि रजत से शादी करके मेरी
- 1:29:10जिंदगी ठीक हो जाएगी? जबकि आप खुद समझते
- 1:29:12हैं कि मुख्तार अपने भाई की शादी मुझसे
- 1:29:14क्यों कराना चाहता है? क्या आपको लगता है
- 1:29:17कि अगर उसका भाई जेल में नहीं होता, क्या
- 1:29:20वह तब भी यह रिश्ता लाता? शिप्रा की बात
- 1:29:22सुनकर बलवंत राय भी सोच में पड़ गए।
- 1:29:26ठीक है अगर तुम रजत से शादी नहीं करना
- 1:29:28चाहती तो मैं मुख्तार को इस शादी के लिए
- 1:29:31मना कर दूंगा। बलवंत राय ने अपना फैसला
- 1:29:34सुना दिया कि सुनकर परिवार के बाकी लोग
- 1:29:36हैरान रह गए। उन्हें इतनी जल्दी इस तरह के
- 1:29:39निर्णय की उम्मीद नहीं थी। तभी बृजभूषण
- 1:29:42खुद को रोक नहीं पाए और बोले पिताजी क्या
- 1:29:45यह सही होगा? हमें मुख्तार [संगीत] से
- 1:29:47दुश्मनी खत्म करने का एक मौका मिला था।
- 1:29:50लेकिन इस फैसले के बाद तो वो और बढ़
- 1:29:52जाएगी।
- 1:29:54पिताजी शिप्रा भी नादान है। उसे अपने भले
- 1:29:56बुरे की समझ नहीं है। तभी तो वो एक भिखारी
- 1:29:59और एक रुतबे वाले इंसान में फर्क नहीं कर
- 1:30:01पा रही। आप इस बारे में एक बार फिर से
- 1:30:04सोचिए। नैना बुआ ने भी शिप्रा की बात से
- 1:30:07असहमति जताते हुए कहा। इस पर शिप्रा ने
- 1:30:10दृढ़ता से जवाब दिया। बुआ वही भिखारी था
- 1:30:13जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर मुझे
- 1:30:16बचाया। उसी की वजह से मैं आज सुरक्षित
- 1:30:18हूं। नहीं तो रजत ने मुझे बर्बाद करने में
- 1:30:21कोई कसर नहीं छोड़ी थी। शिप्रा की बात
- 1:30:24सुनकर नैना राय चुप हो गई। शिप्रा ने किसी
- 1:30:27को कुछ कहने लायक ही नहीं छोड़ा था। तो
- 1:30:30क्या फिर मुख्तार से हमारी दुश्मनी ऐसे ही
- 1:30:32चलती रहेगी। बृजभूषण राय ने चिंतित स्वर
- 1:30:35में कहा। तभी राजकुमार टंडन बीच में बोल
- 1:30:38पड़े। एक काम हो सकता है जिससे मुख्तार से
- 1:30:41इस परिवार की दुश्मनी खत्म हो सकती है। यह
- 1:30:44सुनकर बृजभूषण की आंखों में उम्मीद की एक
- 1:30:47किरण चमकी। वो उत्साहित होकर बोले शादी के
- 1:30:50अलावा ऐसा क्या हो सकता है जिससे मुख्तार
- 1:30:53भाई से दुश्मनी खत्म हो जाए। यह सुनकर
- 1:30:55वहां मौजूद सभी लोगों के कान खड़े हो गए।
- 1:30:58सबकी निगाहें नैना बुआ के पति राजकुमार
- 1:31:01टंडन की तरफ ही टिकी हुई थी। हर कोई
- 1:31:03बेसब्री से सुनना चाहता था कि आखिर उनके
- 1:31:05पास ऐसा कौन सा उपाय है जिससे पुरानी
- 1:31:08दुश्मनी खत्म हो सकती है। राजकुमार टंडन
- 1:31:11के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान उभर आई।
- 1:31:14उन्होंने गर्व से सीना चौड़ा करते हुए
- 1:31:16कहा। देखिए मुख्तार भाई का असली मकसद क्या
- 1:31:19है? अपने भाई को जेल से छुड़ाना। अगर हम
- 1:31:23उन्हें भरोसा दिला दें कि हम केस वापस
- 1:31:25लेने को तैयार हैं तो उनका मकसद अपने आप
- 1:31:28पूरा हो जाएगा। ऐसे में हो सकता है कि वे
- 1:31:31हमारे परिवार के साथ चली आ रही दुश्मनी को
- 1:31:33भी भुला दें। बृजभूषण राय ने सिर हिलाते
- 1:31:36हुए हामी भरी और बोले। मुझे भी यही सही
- 1:31:39लगता है। अगर इस कदम से मामला शांत हो
- 1:31:42सकता है और रिश्तों में कड़वाहट खत्म हो
- 1:31:44सकती है तो हमें आगे बढ़कर यह कोशिश करनी
- 1:31:47चाहिए। आखिर हमारा मकसद भी तो यही है कि
- 1:31:49मुख्तार भाई से दुश्मनी हमेशा के लिए खत्म
- 1:31:52हो जाए। धीरे-धीरे घर के लगभग सभी सदस्य
- 1:31:55इस विचार के पक्ष में हो गए। यहां तक कि
- 1:31:58राजदीप राय ने भी इस बात का खुलकर विरोध
- 1:32:00नहीं किया। शायद उन्हें अपनी बेटी की
- 1:32:02चिंता सताने लगी थी। इसीलिए वह भी हालात
- 1:32:05के आगे झुकते हुए दिखाई दे रहे थे। यह सब
- 1:32:08देखकर शिप्रा के चेहरे पर हल्की सी
- 1:32:10मुस्कान उभरी। वो अपनी जगह से खड़ी हुई और
- 1:32:12सबकी ओर देखते हुए बोली, "आज आप लोग एक
- 1:32:16गुंडे के डर से उसके खिलाफ दर्ज केस वापस
- 1:32:19लेने की बात कर रहे हैं। लेकिन क्या कोई
- 1:32:21[संगीत] यह यकीन दिला सकता है कि जेल से
- 1:32:23बाहर आने के बाद वो दोबारा कोई गलत हरकत
- 1:32:25नहीं करेगा?" शिप्रा को इस तरह सबके सामने
- 1:32:28बोलते देख राजदीप राय उठ खड़े हुए।
- 1:32:31उन्होंने थोड़े शांत लेकिन दबे हुए स्वर
- 1:32:33में कहा। बेटी हम लोग सभ्य समाज से आते
- 1:32:37हैं। उन गुंडों और मवालियों से हमारा क्या
- 1:32:39मुकाबला? कभी-कभी हालात को समझकर फैसले
- 1:32:43लेने पड़ते हैं। अपने पिता को इस तरह
- 1:32:46लाचार देख शिप्रा कुछ पल के लिए चुप रह
- 1:32:48गई। उसे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उसके
- 1:32:50पिता भी एक अपराधी के सामने यूं हार मान
- 1:32:52लेंगे। तभी बृजभूषण ने तंज कसते हुए कहा
- 1:32:56तुम्हारी इसी जिद का नतीजा है कि आज तुम
- 1:32:58एक भिखारी की पत्नी बनकर रह गई हो। अभी भी
- 1:33:01वक्त है। उससे अपना रिश्ता खत्म कर लो।
- 1:33:04अगर रजत से शादी कर लोगी तो जिंदगी ऐशो
- 1:33:06आराम से कटेगी। किसी चीज की कमी नहीं
- 1:33:09रहेगी। शिप्रा ने उनकी बात सुनकर सीधे
- 1:33:11उनकी आंखों में देखा और ठंडे लेकिन दृढ़
- 1:33:13स्वर में जवाब दिया। माफ कीजिएगा बड़े
- 1:33:16पापा। मुझे ऐशो आराम या राज करने का कोई
- 1:33:19शौक नहीं है। मैं जिस हालात में हूं उसी
- 1:33:21में खुश हूं। और जहां तक शादी का सवाल है
- 1:33:24तो रजत जैसे इंसान के साथ नाम और दौलत
- 1:33:27वाली जिंदगी से कहीं बेहतर मैं अपनी पूरी
- 1:33:29उम्र उस इंसान के साथ सुकून से बिताना
- 1:33:31पसंद करूंगी जिसे आप भिखारी कह रहे हैं।
- 1:33:33सुन रहे हैं ना पिताजी? इस लड़की का तो
- 1:33:35दिमाग ही खराब हो गया है। इसे अब अच्छे
- 1:33:37बुरे की समझ भी नहीं रही। हम सब यहां इसकी
- 1:33:40भलाई के लिए इतना कुछ सोच रहे हैं लेकिन
- 1:33:42इसे तो हमारी कोशिशों की कोई कदर ही नहीं
- 1:33:44है। नैना गुस्से में बोली लेकिन शिप्रा भी
- 1:33:47पीछे हटने वाली नहीं थी। उसने तुरंत जवाब
- 1:33:50दिया, एक गुंडे से मेरी शादी करवाकर आप
- 1:33:53लोग मेरी कौन सी भलाई कर रहे हैं? बस करो।
- 1:33:56अब और बहस की कोई जरूरत नहीं है। बलवंत
- 1:33:59राय ने माहौल बिगड़ते देख बीच में ही
- 1:34:01सख्ती से कहकर दोनों को चुप करवाने की
- 1:34:03कोशिश करी। कमरे में थोड़ी देर के लिए
- 1:34:06सन्नाटा छा गया। जब सब शांत हो गए तो
- 1:34:09बलवंत राय ने फिर से समझाने के अंदाज में
- 1:34:11बात शुरू की। देखो शिप्रा बेटा हम
- 1:34:14तुम्हारे दुश्मन नहीं हैं। तुम्हें क्या
- 1:34:16लगता है? जब पूरे इलाके में हमारे परिवार
- 1:34:19को लेकर इस तरह की चर्चा होती है तो हमें
- 1:34:22अच्छा लगता है? सोचो उस बाप पर क्या
- 1:34:24गुजरती होगी जब लोग कहते हैं देखो इसी की
- 1:34:26बेटी की शादी एक भिखारी से हुई है। हम सब
- 1:34:30यही कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह
- 1:34:31तुम्हारी जिंदगी फिर से सही रास्ते पर आ
- 1:34:33जाए। मैं मानता हूं कि रजत थोड़ा बिगड़ा
- 1:34:36हुआ लड़का है। लेकिन यह जरूरी तो नहीं कि
- 1:34:38वह हमेशा ऐसा ही रहे। अगर तुम उससे शादी
- 1:34:41कर लेती हो तो यह जो भिखारी वाली बात हर
- 1:34:43जगह हो रही है वो भी धीरे-धीरे खत्म हो
- 1:34:46जाएगी। थोड़ा चुप रहकर बलवंत राय जी ने
- 1:34:48शिप्रा की आंखों में झांकते हुए फिर से
- 1:34:50कहा इसीलिए मेरी बात मानो बेटा। एक बार
- 1:34:53ठंडे दिमाग से इस बारे में सोचो। क्या
- 1:34:56तुम्हें सच में लगता है कि तुम उस लड़के
- 1:34:58को कभी अपना पति मान पाओगी? जिसके परिवार
- 1:35:00का ना कोई ठिकाना है और जो खुद का भी ठीक
- 1:35:03से ख्याल नहीं रख पाता। और सिर्फ अपने
- 1:35:05बारे में ही नहीं अपने परिवार के बारे में
- 1:35:07भी सोचो। हम कोई गुंडे मवाली नहीं है कि
- 1:35:10हथियार उठाकर सड़क पर उतर जाएं या मुख्तार
- 1:35:12जैसे लोगों के स्तर पर जाकर लड़ाई करें।
- 1:35:15हम तो बस इतना चाहते हैं कि कोई ऐसा
- 1:35:17रास्ता निकल आए जिससे रोज-रोज़ का तनाव
- 1:35:19खत्म हो और हम सब चैन से जी सकें। बलवंत
- 1:35:23राय की बात सुनकर शिप्रा कुछ पल के लिए
- 1:35:25खामोश हो गई। उसके चेहरे पर गहरी सोच झलक
- 1:35:28रही थी। अब वह समझ चुकी थी कि यह फैसला
- 1:35:30जिद के कारण नहीं बल्कि डर के कारण लिया
- 1:35:33जा रहा है और डरे हुए लोगों के सामने कोई
- 1:35:36तर्क काम नहीं करता। उनकी बेबसी ही उनकी
- 1:35:39तकदीर लिखती है। कुछ क्षण बाद उसने जैसे
- 1:35:42मन ही मन कोई ठोस फैसला लिया और धीमे
- 1:35:44लेकिन दृढ़ स्वर में बोली
- 1:35:47दादा जी आप जो भी फैसला लेंगे मैं उस पर
- 1:35:51कोई सवाल नहीं उठाऊंगी। लेकिन प्लीज मुझ
- 1:35:54पर रजत से शादी करने का दबाव मत डालिए। सच
- 1:35:57कहूं तो अभी मुझे खुद नहीं पता कि मैं
- 1:35:59श्रवण को पूरी तरह अपने पति के रूप में
- 1:36:01स्वीकार कर पाऊंगी या नहीं। लेकिन सच यही
- 1:36:04है कि इस समय वही मेरा पति है। शिप्रा ने
- 1:36:07गहरी सांस लेते हुए एक बार फिर से सबकी ओर
- 1:36:10देखा। उसकी नजर अपने पिता और दादाजी पर
- 1:36:13टिक गई। उसने आगे फिर कहना शुरू किया और
- 1:36:16हां अगर कल को मैं उससे अलग भी हो गई तब
- 1:36:19भी मैं दोबारा शादी नहीं करूंगी। मैं अपने
- 1:36:22दम पर जी सकती हूं। मुझे किसी सहारे की
- 1:36:24जरूरत नहीं है। और इसके लिए मैं अपने
- 1:36:26परिवार को भी दोष नहीं दूंगी। शायद मेरी
- 1:36:29किस्मत में यही लिखा था।
- 1:36:31शिप्रा दादा जी के पास गई और उनके हाथों
- 1:36:34पर अपना हाथ रखते हुए बोली और एक बात
- 1:36:37श्रवण इतना भी बेकार इंसान नहीं है जितना
- 1:36:40आप सब उसे समझ रहे हैं। उसके हालात चाहे
- 1:36:42जैसे भी हो लेकिन उसकी नियत साफ है। हो
- 1:36:46सकता है वो मुझे महल या गाड़ी ना दे सके
- 1:36:48लेकिन मेरी सुरक्षा के लिए वो किसी भी
- 1:36:50खतरे से भिड़ने में पीछे नहीं हटेगा। इस
- 1:36:53बात का मुझे पूरा भरोसा है। और यह भी
- 1:36:56जरूरी तो नहीं कि हर बार पति ही पत्नी को
- 1:36:59सहारा दे। अगर जरूरत पड़ी तो एक पत्नी भी
- 1:37:02अपने पति का साथ निभा सकती है। उसे संभाल
- 1:37:05सकती है। अगर आपकी नजर में शादीशुदा होना
- 1:37:08ही सबसे जरूरी है तो मेरे लिए श्रवण ही
- 1:37:11मेरा पति है और मैं उसे स्वीकार करती हूं।
- 1:37:16शिप्रा की बात सुनकर बलवंत राय हैरान रह
- 1:37:18गए। वो यह सोच कर हैरान थे कि शिप्रा ने
- 1:37:20अपनी जिंदगी का फैसला ले लिया है। उसे वह
- 1:37:23भिखारी कबूल है पर वो रजत से शादी नहीं कर
- 1:37:25सकती। वो मन ही मन उस पल को याद करने लगे
- 1:37:28जब मंदिर में रजत जबरदस्ती शिप्रा को ले
- 1:37:31जाने आया था और श्रवण ने अकेले ही उसका
- 1:37:33सामना किया था। जिस साहस के साथ उसने खड़े
- 1:37:36होकर मुकाबला किया था वैसी हिम्मत तो उनके
- 1:37:38अपने घर के लोग भी नहीं दिखा पाए थे।
- 1:37:41बलवंत राय के मन में एक बात साफ होने लगी।
- 1:37:44एक लड़की को अपने पति में आखिर क्या चाहिए
- 1:37:46होता है? दौलत, नाम, रुतबा या फिर वो
- 1:37:50भरोसा जो मुश्किल वक्त में उसके साथ
- 1:37:52चट्टान की तरह खड़ा रहे। शायद शिप्रा के
- 1:37:55लिए जवाब साफ था। उसके लिए पैसे से ज्यादा
- 1:37:58मायने उस इंसान का साथ है जो हर हाल में
- 1:38:01उसका हाथ थामे रखे। बलवंत राय ने गहरी
- 1:38:05सांस ली। फिर कमरे में मौजूद सभी लोगों पर
- 1:38:07एक नजर डाली और आखिर में शिप्रा की तरफ
- 1:38:10देखते हुए बोले अगर तुमने अपने लिए यह
- 1:38:13फैसला कर लिया है तो मैं तुम्हारे साथ
- 1:38:15हूं। लेकिन याद रखना आगे चलकर इस फैसले के
- 1:38:19लिए कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए।
- 1:38:22दादाजी के मुंह से ये शब्द सुनकर शिप्रा
- 1:38:24को कुछ पल के लिए यकीन नहीं हुआ। उसने
- 1:38:26सोचा था कि लंबी बहस होगी, समझाया जाएगा,
- 1:38:29परिवार की इज्जत का हवाला दिया जाएगा।
- 1:38:32लेकिन यहां तो सब कुछ इतनी सहजता से खत्म
- 1:38:34हो गया। उसी वक्त बृजभूषण राय बेचैन होकर
- 1:38:37बीच में बोल पड़े। लेकिन पिताजी आप समझ
- 1:38:40रहे हैं इसका हमारे परिवार पर क्या असर
- 1:38:42पड़ेगा? लोगों के बीच हमारी क्या इज्जत रह
- 1:38:44जाएगी? कौन-कौन सी बातें नहीं होंगी हमारे
- 1:38:46बारे में। कमरे का माहौल एक बार फिर बदलने
- 1:38:49लगा था। अब सवाल सिर्फ शिप्रा के फैसले का
- 1:38:52नहीं पूरे परिवार की प्रतिष्ठा का बन चुका
- 1:38:54था। अरे भाई अब मैं अपने परिवार की चिंता
- 1:38:57करूं या लोगों की? बलवंत राय ने बृजभूषण
- 1:39:00राय को चुप कराते हुए कड़े स्वर में कहा।
- 1:39:02फिर आवाज में थोड़ी नरमी लाते हुए आगे
- 1:39:04बोले। और ये क्यों भूल रहे हो कि सच्चाई
- 1:39:08बदल नहीं सकती। शिप्रा की शादी श्रवण से
- 1:39:10हो चुकी है। अब अगर हम इसकी शादी किसी और
- 1:39:13से कराने की सोचेंगे भी तो पहले तलाक
- 1:39:15करवाना पड़ेगा। उससे हमारी इज्जत बढ़ने
- 1:39:18वाली नहीं है। बल्कि उल्टा लोग और बातें
- 1:39:20बनाएंगे। इसके बजाय अगर यह संदेश जाए कि
- 1:39:23जबरदस्ती हुई शादी के बाद भी हमारे परिवार
- 1:39:26की बेटी ने अपने पति को स्वीकार किया तो
- 1:39:28बात कुछ और ही होगी। क्योंकि अगर यह चाहती
- 1:39:31तो तलाक लेकर अलग रास्ता चुन सकती थी।
- 1:39:34शिप्रा ने जब अपने दादाजी की ये बातें
- 1:39:36सुनी तो उसे पहली बार लगा कि किसी ने सच
- 1:39:38में उसकी स्थिति को समझा है। इतने समय में
- 1:39:41उसके दिल पर जो बोझ था अब वो हल्का होता
- 1:39:44महसूस हो रहा था। अब शिप्रा खुद को आजाद
- 1:39:46महसूस करने लगी थी। शिप्रा ने जब अपने
- 1:39:49दादाजी की बात सुनी तो उसके मन में उनके
- 1:39:51लिए सम्मान और भी बढ़ गया। उसे लगा कि
- 1:39:54किसी ने सच में उसकी स्थिति को समझा है।
- 1:39:56इतने समय से उसके दिल पर जो बोझ था वो पल
- 1:40:00भर में हल्का हो गया। अब वो खुद को आजाद
- 1:40:02महसूस करने लगी थी। तभी बलवंत राय ने
- 1:40:05शिप्रा से कहा। मैंने तुम्हारी बात मान
- 1:40:08ली। अब तुम्हें भी हमारी एक बात माननी
- 1:40:10पड़ेगी। शिप्रा ने सिर हिलाया और बोली
- 1:40:13आपने मेरा साथ दिया है तो अब आप जो भी
- 1:40:16कहेंगे मैं इंकार नहीं करूंगी। बलवंत राय
- 1:40:19परिवार के सभी लोगों की तरफ इशारा करते
- 1:40:21हुए गंभीरता [संगीत]
- 1:40:22से बोले देखो इन सबका डर भी अपनी जगह सही
- 1:40:26है। इसीलिए रजत के खिलाफ हम अपनी कंप्लेंट
- 1:40:29वापस ले लेंगे और साथ ही हम यह भी
- 1:40:31सुनिश्चित करेंगे कि आगे से मुख्तार या
- 1:40:33उसका भाई हमारे खिलाफ कोई गलत कदम ना उठा
- 1:40:36पाए। शिप्रा कुछ पल सोच में डूब गई। फिर
- 1:40:39शांत स्वर में बोली ठीक है अगर आप सबको
- 1:40:43यही सही लगता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं
- 1:40:45है। इसके बाद बलवंत राय ने [संगीत] परिवार
- 1:40:48के बाकी लोगों की तरफ नजर घुमाई और पूछा
- 1:40:51किसी को इस फैसले पर कुछ और कहना है
- 1:40:54बृजभूषण ने राहत की सांस लेते हुए कहा
- 1:40:57नहीं पिताजी अब ठीक है जब शिप्रा खुद ही
- 1:41:00उस आदमी के साथ रहना चाहती है तो हम क्या
- 1:41:03कर सकते हैं हम तो बस इसके भले के [संगीत]
- 1:41:05लिए ही सोच रहे थे इस पर बलवंत राय ने सिर
- 1:41:08हिलाया और बोले
- 1:41:10ठीक है तो फिर मैं मुख्तार को फोन करता
- 1:41:12हूं इतना कहकर उन्होंने मुख्तार को कॉल
- 1:41:15लगाया
- 1:41:16और तुरंत ही कॉल रिसीव कर लिया गया। जिससे
- 1:41:18राय साहब को मुख्तार की बेसब्री समझ आ रही
- 1:41:22थी। नमस्कार राय साहब। मैं आपके कॉल का ही
- 1:41:27इंतजार कर रहा था। मुख्तार धीमी लेकिन सदी
- 1:41:30हुई आवाज में बोला तो बलवंत राय ने भी
- 1:41:33औपचारिक लहजे में हेलो कहा। मुख्तार सीधे
- 1:41:36मुद्दे पर आते हुए बोला।
- 1:41:38तो बताइए आपने मेरे प्रपोजल पर क्या सोचा?
- 1:41:43उम्मीद है अब तक आपने कोई ठोस फैसला ले
- 1:41:47लिया होगा। उसकी आवाज में ऐसा भरोसा झलक
- 1:41:50रहा था जैसे उसे पहले से यकीन हो कि जवाब
- 1:41:53उसके पक्ष में ही आएगा। बलवंत राय ने एक
- 1:41:56पल के लिए ठहर कर अपने शब्दों को संयत
- 1:41:59किया। फिर बोले हां हमने आपके प्रस्ताव पर
- 1:42:02गंभीरता से विचार किया है और एक निर्णय तक
- 1:42:05भी पहुंचे हैं। वो मन ही मन सोच रहे थे कि
- 1:42:08अपनी बात किस तरह साफ और संतुलित तरीके से
- 1:42:11सामने रखें
- 1:42:12[संगीत]
- 1:42:12ताकि टकराव की गुंजाइश ना हो और मुख्तार
- 1:42:15उनकी बात मान भी जाए। उधर मुख़्तार ने कुछ
- 1:42:18सोचते हुए पूछा। अच्छा।
- 1:42:21तो क्या तय किया आपने? इस बार उसकी आवाज
- 1:42:25में हल्का सा संदेह भी घुल गया था। मानो
- 1:42:28वो अगले जवाब को लेकर पूरी तरह आश्वस्त
- 1:42:30नहीं रहा हो। मुख्तार भाई, मैं आपसे एक
- 1:42:34बात साफ-साफ जानना चाहता हूं। क्या आप यह
- 1:42:36सब सिर्फ अपने भाई को जेल से छुड़ाने के
- 1:42:39लिए कर रहे हैं? बलवंत राय ने हल्की झिझक
- 1:42:41के साथ अपनी बात रखी, तो कुछ पल के लिए
- 1:42:44दूसरी तरफ खामोशी छा गई। मुख्तार सोच में
- 1:42:47पड़ गया कि इस सवाल का जवाब किस तरह दिया
- 1:42:50जाए। वो अच्छी तरह समझता था कि बलवंत राय
- 1:42:53कोई साधारण इंसान नहीं है जो उसकी बातों
- 1:42:55में आसानी से आ जाए। अगर वह सीधे-सीधे यह
- 1:42:58कह देता कि उसे शिप्रा से हमदर्दी है और
- 1:43:01वो दिल से उसे अपनी बहू बनाना चाहता है तो
- 1:43:03शायद बात उतनी असरदार नहीं रहती। उसने सच
- 1:43:06को झूठ की चाशनी में लपेट कर अपनी बात
- 1:43:09कहने का निश्चय किया और आवाज में गंभीरता
- 1:43:12लाते हुए कहा राय साहब अगर मैं ऐसा कहूं
- 1:43:16कि मुझे शिप्रा पर दया आ गई। इसीलिए मैं
- 1:43:20उन दोनों की शादी करवाना चाहता हूं तो यह
- 1:43:24झूठ होगा। यह सच है कि मैं अपने भाई को
- 1:43:28जेल से छुड़ाना चाहता हूं। पर इसके साथ यह
- 1:43:32भी सच है कि मेरा भाई आपकी पोती को बहुत
- 1:43:36पसंद करता है और मेरे कारण उसकी शादी एक
- 1:43:40भिखारी से हो गई। इसका मुझे अफसोस है। उस
- 1:43:44लड़की की जिंदगी खराब ना हो इसीलिए मैं
- 1:43:48उसे अपने घर की बहू बनाना चाहता हूं।
- 1:43:52मुख्तार भाई की बात सुनकर बलवंत राय कुछ
- 1:43:54पल के लिए गहरी सोच में पड़ गए। जिस ठहराव
- 1:43:57और विश्वास के साथ मुख्तार ने अपनी बात
- 1:43:59रखी थी। [संगीत] उसने उन्हें भी एक पल के
- 1:44:01लिए असमंजस में डाल दिया। क्योंकि फोन
- 1:44:04स्पीकर पर था इसीलिए वहां मौजूद हर
- 1:44:06व्यक्ति ने उसकी बात सुनी और ज्यादातर
- 1:44:09लोगों को उसकी बातें सच्ची ही लगी। फिर
- 1:44:12थोड़ा संभलकर बलवंत राय ने कहा मुख्तार
- 1:44:15भाई बात यह है कि शिपरा अभी तुरंत किसी और
- 1:44:18रिश्ते में बंधने के लिए तैयार नहीं है।
- 1:44:21यह सुनते ही मुख्तार को जैसे हल्का सा
- 1:44:23झटका लगा। उसे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि
- 1:44:26बात इस मोड़ पर आकर रुक जाएगी। खासकर तब
- 1:44:29जब उसे पूरा भरोसा था कि फैसला उसके पक्ष
- 1:44:32में ही होगा। अभी वह अपना असली रूप दिखाने
- 1:44:34की सोच ही रहा था कि तभी बलवंत राय की
- 1:44:37आवाज फिर से सुनाई दी।
- 1:44:40लेकिन एक और रास्ता है जिससे मामला सुलझ
- 1:44:43सकता है। मुख्तार भाई कुछ कड़वा बोलते
- 1:44:46बोलते रुक गया। उसने खुद को संभाला और
- 1:44:49सैयद स्वर में कहा आप आखिर कहना क्या
- 1:44:53चाहते हैं राय साहब? [संगीत]
- 1:44:55बलवंत राय ने सीधे मुद्दे पर आते हुए जवाब
- 1:44:58दिया। देखिए भले ही शिप्रा अभी दोबारा
- 1:45:02शादी के लिए तैयार नहीं है लेकिन हम रजत
- 1:45:04के खिलाफ चल रहा केस वापस लेने को तैयार
- 1:45:07हैं। इससे रजत को जेल से बाहर आने का
- 1:45:09रास्ता मिल जाएगा। यह सुनकर मुख्तार भाई
- 1:45:13को जैसे मनचाही मुराद मिल गई। लेकिन उसने
- 1:45:15अपनी खुशी छुपाते हुए गंभीर लहजे में कहा।
- 1:45:19आपकी बात ठीक है राय साहब। तो इस तरह रजत
- 1:45:23तो बाहर आ जाएगा लेकिन शिप्रा बिटिया की
- 1:45:26जिंदगी फिर भी वहीं की वहीं रह जाएगी।
- 1:45:30मेरा तो मकसद यह था कि उसे उस भिखारी से
- 1:45:34छुटकारा मिले। एक तरह से मैं अपनी गलती का
- 1:45:38प्रायश्चित करना चाहता था। उसकी जिंदगी
- 1:45:42सवार कर। बलवंत राय ने शांत लेकिन स्पष्ट
- 1:45:45स्वर में जवाब दिया। मैं आपकी भावना समझता
- 1:45:48हूं मुख्तार भाई। लेकिन इस समय शिप्रा उस
- 1:45:51स्थिति में नहीं है कि कोई बड़ा फैसला ले
- 1:45:53सके। इसीलिए बेहतर यही होगा कि हम यहीं पर
- 1:45:56इस दुश्मनी को खत्म करें और आगे बढ़े।
- 1:45:59मुख्तार भाई ने बड़ी शालीनता से अपनी बात
- 1:46:02रखी। राय साहब दुश्मनी की बात तो मैं कब
- 1:46:06का भूल चुका हूं। मेरा इरादा तो बस एक नए
- 1:46:09रिश्ते की शुरुआत करने का था। खैर कोई बात
- 1:46:14नहीं। अगर कभी शिपरा बिटिया का मन बदल जाए
- 1:46:18तो आप मुझे जरूर बताइएगा। शायद तब हम आगे
- 1:46:22की बात फिर से शुरू कर सकें। मुख्तार की
- 1:46:25यह बात सुनकर बलवंत राय के मन में उसके
- 1:46:27प्रति धारणा काफी बदल गई। उन्हें अब वो
- 1:46:30पहले जैसा आदमी नहीं लग रहा था। उन्होंने
- 1:46:33गंभीर स्वर में कहा मुख्तार
- 1:46:35[संगीत]
- 1:46:35भाई मैं कल ही सबसे पहले रजत के खिलाफ चल
- 1:46:38रहा केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करवा
- 1:46:40दूंगा। और आपसे भी यही उम्मीद है कि अब
- 1:46:42हमारे बीच किसी तरह की कड़वाहट नहीं
- 1:46:45रहेगी। मुख्तार भाई ने बड़प्पन दिखाते हुए
- 1:46:48कहा, अरे राय साहब आप कैसी बातें कर रहे
- 1:46:52हैं। सच कहें तो गलती मेरे भाई की ही थी।
- 1:46:56आपने उसे माफ करके बड़ा दिल दिखाया है। अब
- 1:47:00ऐसे में दुश्मनी रखने का कोई सवाल ही नहीं
- 1:47:03उठता। मेरी तरफ से तो यह मामला यहीं खत्म
- 1:47:06समझिए।
- 1:47:08तो ठीक है मुख्तार भाई। अभी के लिए फोन
- 1:47:11रखता हूं। इतना कहकर बलवंत राय ने कॉल काट
- 1:47:14दिया। फोन रखते ही उन्होंने वहां मौजूद
- 1:47:17सभी लोगों के चेहरों पर नजर दौड़ाई। लगभग
- 1:47:20हर चेहरे पर राहत झलक रही थी। [संगीत]
- 1:47:22राजकुमार टंडन के चेहरे पर तो खासतौर पर
- 1:47:24एक बड़ी स्माइल थी। वो थोड़ा आगे बढ़ते
- 1:47:27हुए क्रेडिट लेता हुआ बोला। देखा आपने?
- 1:47:30आखिर मेरा तरीका काम आ ही गया। बृजभूषण
- 1:47:34राय ने भी राहत की सांस लेते हुए हामी
- 1:47:36भरी। सच में टंडन जी आपने सही वक्त पर
- 1:47:39दिमाग लगाया। ऐसा लग रहा है जैसे सिर से
- 1:47:42बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो। हालांकि शिप्रा
- 1:47:45के मन में ये सब देखकर हल्की सी कसक जरूर
- 1:47:48थी। उसे अच्छा नहीं लगा कि उसके परिवार को
- 1:47:50एक बदमाश के आगे झुकना पड़ा। लेकिन साथ ही
- 1:47:54उसे इस बात की राहत भी थी कि अब घर वाले
- 1:47:57उसकी दूसरी शादी के लिए दबाव नहीं
- 1:47:59बनाएंगे। तभी उसके दादाजी की आवाज फिर से
- 1:48:03उसके कानों में पड़ी। शिप्रा बेटी मैं एक
- 1:48:06बार फिर कहूंगा अपने फैसले पर दोबारा सोच
- 1:48:10लो। जिंदगी हर किसी को दूसरा मौका नहीं
- 1:48:13देती लेकिन तुम्हें मिल रहा है। इसीलिए
- 1:48:16मेरी सलाह है कि इसे हल्के में मत लो।
- 1:48:19शिप्रा ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में जवाब
- 1:48:22दिया। [संगीत] दादा जी मैंने बहुत सोच समझ
- 1:48:25कर ही यह फैसला लिया है। आप ऐसा कहकर मेरी
- 1:48:28सोच बदलने की कोशिश मत कीजिए प्लीज।
- 1:48:31ठीक है। अगर यही तुम्हारा अंतिम फैसला है
- 1:48:34तो मैं आगे से इस बारे में तुम्हें कुछ
- 1:48:36नहीं कहूंगा। [संगीत]
- 1:48:38बलवंत राय ने शांत स्वर में कहा। वे समझ
- 1:48:40चुके थे कि अब शिप्रा को ज्यादा समझाने का
- 1:48:43कोई फायदा नहीं है। कुछ पल सोचने के बाद
- 1:48:45उन्होंने आगे कहा। लेकिन अगर तुम श्रवण को
- 1:48:49अपना पति मान ही चुकी हो तो एक काम करना
- 1:48:52उसे एक बार मुझसे मिलवाना। मैं भी देखूं
- 1:48:55कि उसके लिए क्या किया जा सकता [संगीत]
- 1:48:57है। इस पर शिप ने सिर हिलाया। ठीक है दादा
- 1:49:01जी। उधर दूसरी तरफ मुख्तार भाई एक कमरे
- 1:49:04में कल्ला और अपने वकील के साथ बैठा था।
- 1:49:06उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान खेल रही
- 1:49:09थी। वकील ने उत्साहित होकर कहा। वाह
- 1:49:12मुख्तार भाई क्या चाल चली है आपने। सांप
- 1:49:15भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी। मुख्तार
- 1:49:18हल्का सा हंसते हुए बोला। जिसे खत्म होना
- 1:49:22था उसका अंत तो तय था। बस थोड़ा वक्त लग
- 1:49:27गया। लेकिन कहते हैं ना देर से ही सही काम
- 1:49:32सही होना चाहिए। कल्ला ने उत्सुकता से
- 1:49:35पूछा तो बॉस अब शिप्रा का क्या होगा? क्या
- 1:49:38उसे ऐसे ही छोड़ देंगे? इस पर मुख्तार ने
- 1:49:41धीमे स्वर में जवाब दिया। उसके साथ क्या
- 1:49:45होना है यह वक्त तय करेगा। फिलहाल हमारा
- 1:49:49असली मकसद रजत को जेल से बाहर निकालना है।
- 1:49:53तभी वकील मुस्कुराते हुए बोला तो फिर
- 1:49:56समझिए वो काम तो हो ही गया। अब तो बस
- 1:49:59मिठाई खिलाने की तैयारी कीजिए।
- 1:50:02यह सुनकर मुख्तार के चेहरे पर विजय
- 1:50:04मुस्कान उभर आई। अगले दिन सुबह के 7:00
- 1:50:07बजे थे। हल्की धूप खिड़की से छनकर कमरे
- 1:50:10में फैल रही थी। शौर्य नींद से उठा
- 1:50:13जल्दी-जल्दी फ्रेश हुआ और गिरधर काका के
- 1:50:15पास जाने की सोचने लगा। उसने आदत के
- 1:50:17अनुसार अपने कमरे को सलीके से ठीक किया।
- 1:50:20वो दरवाजे की ओर बढ़ा ही था कि अचानक
- 1:50:22दरवाजा बिना दस्तक के खुला और अगले ही पल
- 1:50:25सब कुछ जैसे थम [संगीत] सा गया। संतो हाथ
- 1:50:28में झाड़ू लिए तेजी से अंदर दाखिल हुई।
- 1:50:31लेकिन सामने खड़े शौर्य को देख नहीं पाई।
- 1:50:33दोनों की टक्कर इतनी अचानक और जोरदार थी
- 1:50:36कि संतो का संतुलन बिगड़ गया। उसका पांव
- 1:50:38फिसला, [संगीत] झाड़ू हवा में लहराई और
- 1:50:40अगले ही क्षण वो शौर्य पर आ गिरी। धीमी सी
- 1:50:43एक धब की आवाज हुई। शौर्य नीचे [संगीत]
- 1:50:45जमीन पर था और शंतो उसके ऊपर। एक पल के
- 1:50:49लिए दोनों जैसे जड़ हो गए। शंतों के खुले
- 1:50:51बाल हल्के से शौर्य के चेहरे पर बिखर गए।
- 1:50:54[संगीत] उसकी सांसे तेज थी और उसकी आंखों
- 1:50:56में अचानक हुई इस घटना की हैरानी साफ झलक
- 1:50:59रही थी। फिर जैसे ही उसे होश आया, वो झटके
- 1:51:02से उठ खड़ी हुई।
- 1:51:04चेहरे पर झेप और गुस्से का मिलाजुला भाव
- 1:51:07लिए उसने अपने कपड़े संभाले, झाड़ू को
- 1:51:09कसकर पकड़ा और शौर्य की तरफ घूरते हुए
- 1:51:12बोली,
- 1:51:13"कौन हो तुम? और यहां क्या कर रहे हो?
- 1:51:16शौर्य हल्की मुस्कान के साथ जमीन से उठा।
- 1:51:19कपड़ों पर लगी धूल झाड़ी और संतो की ओर
- 1:51:21देखते हुए शरारती अंदाज में बोला। अरे कल
- 1:51:25ही तो मिली थी तुम और आज पहचान भी नहीं
- 1:51:27रही हो। एक ही दिन में भूल गई क्या? संतो
- 1:51:30ने जैसे ही उसकी आवाज [संगीत] सुनी, उसने
- 1:51:32गौर से शौर्य को देखा और फिर होठों पर
- 1:51:34हल्की सी मुस्कान आ गई। ओह, तो यह तुम हो?
- 1:51:39वो उसे सिर से पांव तक देखने लगी जिसे
- 1:51:42पहली बार सच में उसे नोटिस कर रही हो। फिर
- 1:51:44ठु हल्की ऊपर उठाकर अपने खास अंदाज
- 1:51:47[संगीत] में चहकती हुई बोली देखा मैंने
- 1:51:50कहा था ना अपने चेहरे का ये जंगल [संगीत]
- 1:51:52साफ कर लो तो अच्छे लगोगे अब देखो क्या लग
- 1:51:56रहे हो? शौर्य उसकी बात सुनकर हल्का सा
- 1:51:58हंसा। वो थोड़ा उसकी तरफ झुका जैसे उसकी
- 1:52:01बात को खास अहमियत दे रहा हो और नरम आवाज
- 1:52:04में बोला। हां यह तो मानना पड़ेगा। इसीलिए
- 1:52:07तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद जो तुमने इतनी
- 1:52:09कीमती सलाह दी। संतो की नजरें अब भी शौर्य
- 1:52:13के चेहरे पर टिकी थी जैसे कुछ और जानने की
- 1:52:16कोशिश कर रही हो। फिर उसने अचानक [संगीत]
- 1:52:18सीधे उसकी आंखों में देखते हुए पूछा।
- 1:52:21तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या? संतो का
- 1:52:24सीधा सवाल सुनकर शौर्य एक पल के लिए सचमुच
- 1:52:26चौंक गया। उसे उम्मीद नहीं थी कि वो इतनी
- 1:52:29बेबाकी से बिना किसी झिझक के ऐसा कुछ पूछ
- 1:52:32लेगी। [संगीत] संतो का सवाल सुनकर वो
- 1:52:34थोड़ा नर्वस भी हो गया था। शौर्य जानता था
- 1:52:36कि संतो उसकी असली पहचान से अनजान है।
- 1:52:39शायद यही वजह थी कि वो इतनी सहजता से उससे
- 1:52:42ऐसे सवाल कर पा रही थी। शंतो की यही सादगी
- 1:52:45भी उसे अच्छी भी लगी। उसके दिल में जो आता
- 1:52:48है बिना घुमाए फिराए सीधे कह देती है। यह
- 1:52:51बात उसे बाकी सबसे अलग बनाती है। शौर्य
- 1:52:54कुछ क्षण चुप रहा जैसे शब्द तलाश रहा हो।
- 1:52:57उसकी चुप्पी देखकर संतों ने भौए हल्की सी
- 1:53:00चढ़ाई और फिर उसी बेपरवाह अंदाज में बोली।
- 1:53:03क्या हुआ? किस सोच में पड़ गए? मैंने ऐसा
- 1:53:06कोई मुश्किल सवाल तो नहीं पूछ लिया जो तुम
- 1:53:08इतना सोचने लगे? उसकी बात में हल्की शरारत
- 1:53:11भी थी और एक मासूम जिज्ञासा भी। शौर्य ने
- 1:53:14एक गहरी सांस ली। खुद को संभाला और हल्की
- 1:53:17मुस्कान के साथ बोला। नहीं अभी तो कोई
- 1:53:20गर्लफ्रेंड नहीं है। इस पर संतो ने बिना
- 1:53:22किसी लाग लपेट के सीधे शौर्य की आंखों में
- 1:53:24देखते हुए कहा। देखो मैं तुम्हें साफ-साफ
- 1:53:27बता देती हूं। मुझ पर बहुत लड़कों ने
- 1:53:30ट्राई किया है। मुझे पटाने की कोशिश की
- 1:53:32है। लेकिन मैंने कभी किसी को घास नहीं
- 1:53:34डाली पर कहते हुए वो एक पल को रुकी फिर
- 1:53:38हल्की सी मुस्कान के साथ बोली पर तुम मुझे
- 1:53:41अच्छे लगे हो। तो मैं तुम्हारे बारे में
- 1:53:44सोच सकती हूं। उसके इस बेबाक इजहार ने
- 1:53:47माहौल को अचानक ही बदल दिया। यह किसी
- 1:53:49फिल्मी सीन की तरह था। सीधा सच्चा और
- 1:53:53बिल्कुल अनएक्सेक्टेड लव प्रपोजल। शौर्य
- 1:53:55हक्का-बक्का रह गया। लेकिन अगले ही पल
- 1:53:58उसकी आंखों में शरारत चमकी। उसने अपने
- 1:54:00चेहरे पर हल्की सी घबराहट ओढ़ ली। जैसे सच
- 1:54:03में किसी मुश्किल में फंस गया हो। देखो
- 1:54:06तुम अच्छी हो। उसने थोड़ा हिचकिचाते हुए
- 1:54:09कहा। पर मुझे अपनी नौकरी की भी फिक्र है।
- 1:54:12अगर शिप्रा मैम को पता चल गया तो कहीं वो
- 1:54:14मुझे नौकरी से ही ना निकाल दें। संतो ने
- 1:54:18तुरंत भौहें चढ़ाई और तुनक कर बोली। वो
- 1:54:21तुम्हें क्यों नौकरी से निकालेंगी भला?
- 1:54:23शौर्य ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कंधे
- 1:54:25उचकाए। अरे अभी मुझे जुम्मा जुम्मा कुछ ही
- 1:54:28दिन हुए हैं नौकरी पकड़े हुए और मैं यहां
- 1:54:30आते ही आशिकी शुरू कर दूं तो क्या पता वो
- 1:54:32नाराज हो जाए। शौर्य भोलेपन से बोला
- 1:54:35[संगीत] संतो ने तुरंत फैसला सुना दिया।
- 1:54:38अगर ऐसी बात है ना तो मैं पहले ही शिप्रा
- 1:54:40दीदी से बात कर लूंगी। वो मुझे कभी मना
- 1:54:42नहीं करेंगी। बहुत अच्छी हैं वो। नहीं तो
- 1:54:45यहां बाकी जो दीदियां हैं पता नहीं किस
- 1:54:47दुनिया में रहती हैं। शौर्य ने भी धीमे से
- 1:54:50मुस्कुराते हुए हामी भरी। हां वो तो है।
- 1:54:53संतो के चेहरे का भाव अचानक बदल गया। उसकी
- 1:54:56आवाज में अब पहली वाली चंचलता की जगह एक
- 1:54:59हल्का सा अफसोस उतर आया। पर बेचारी के साथ
- 1:55:02बहुत गलत हुआ है। शौर्य ने अनजान बनने का
- 1:55:06नाटक करते हुए भय हल्की उठाई। अच्छा ऐसा
- 1:55:09क्या हुआ? शंतू थोड़ा और पास आई जैसे कोई
- 1:55:12राज बताने वाली हो। उसने इधर-उधर देखा और
- 1:55:16फिर धीमी आवाज में फुसफुसाई।
- 1:55:18तुम्हें नहीं पता एक बदमाश ने जबरदस्ती
- 1:55:21उनकी शादी एक भिखारी से करवा दी। शौर्य ने
- 1:55:25भी उसी अंदाज में जवाब दिया। हां ये तो
- 1:55:27पता है मुझे। [संगीत] फिर उसने संतो के
- 1:55:30चेहरे के भाव पढ़ने की कोशिश करते हुए
- 1:55:32थोड़ा ठहर कर कहा। पर इसमें जबरदस्ती
- 1:55:34कैसी? वो चाहे तो उस भिखारी से तलाक भी ले
- 1:55:37सकती हैं ना। संतो ने तुरंत सर हिलाया
- 1:55:40जैसे उसे पहले से ही सवाल का जवाब मालूम
- 1:55:42हो। हां ले तो सकती हैं लेकिन वो तलाक
- 1:55:45लेना ही नहीं चाहती।
- 1:55:47और वो क्यों भला? शौर्य ने थोड़ा और
- 1:55:49कुरेदते हुए पूछा, वो उस भिखारी से तलाक
- 1:55:52क्यों नहीं लेना चाहती? इस पर संतो ने
- 1:55:55समझदारी से जवाब दिया क्योंकि उन्हें पता
- 1:55:58है एक बार अगर उन्होंने तलाक ले लिया तो
- 1:56:00उनके घर वाले तुरंत उनकी दूसरी शादी के
- 1:56:02पीछे पड़ जाएंगे और शिप्रा दी अब दूसरी
- 1:56:05शादी करना ही नहीं चाहती। शौर्य ने हल्का
- 1:56:08सा आश्चर्य जताते हुए बोहें उठाएंगी। तो
- 1:56:11इसका मतलब वो पूरी जिंदगी उसी भिखारी की
- 1:56:13पत्नी बनकर रहेंगी। संतो ने गहरी सांस ली।
- 1:56:17हां, वो इसके लिए भी तैयार हैं। तुम्हें
- 1:56:20पता है कल शाम पूरे परिवार की मीटिंग हुई
- 1:56:22थी। वो थोड़ा और करीब आई। उसकी आवाज फिर
- 1:56:26धीमी हो गई जैसे कोई अहम बात बताने जा रही
- 1:56:28हो। सब लोग चाहते थे कि शिप्रा दी उस
- 1:56:31बदमाश के भाई से शादी कर लें। उसी से
- 1:56:34जिसने उनकी जबरदस्ती शादी करवाई थी। लेकिन
- 1:56:37उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने सबके
- 1:56:40सामने कह दिया कि वह पूरी जिंदगी उस
- 1:56:43भिखारी की पत्नी बनकर रहना कबूल करेंगी
- 1:56:45लेकिन उस बदमाश के भाई से कभी शादी नहीं
- 1:56:48करेंगी।
- 1:56:50शौर्य के चेहरे पर भले ही संयम था लेकिन
- 1:56:52अंदर ही अंदर वो वो बात जान चुका था जिसका
- 1:56:55उसे इंतजार था। बलवंत राय और मुख्तार भाई
- 1:56:58की मीटिंग के बाद से ही उसके मन में यही
- 1:57:00सवाल घूम रहा था। आखिर फैसला क्या हुआ? और
- 1:57:03अब जवाब उसके सामने था। फिर भी उसने अपनी
- 1:57:07उत्सुकता छिपाते हुए पूछा। तो क्या शिप्रा
- 1:57:10मैम के घर वाले उनकी बात मान गए? सब तो
- 1:57:13नहीं माने। [संगीत] संतो ने कहा लेकिन
- 1:57:16उनके दादाजी मान गए और उनके आगे फिर कोई
- 1:57:19कुछ नहीं बोल पाया। हां, यह जरूर तय हुआ
- 1:57:22कि उस बदमाश के भाई के खिलाफ जो केस है
- 1:57:24उसे वापस ले लेंगे ताकि दुश्मनी खत्म हो
- 1:57:27जाए। शौर्य ने मन ही मन सोचा।
- 1:57:30अच्छा तो यह फैसला हुआ है। अब तक उसके मन
- 1:57:34में जो उथल-पुथल चल रही थी, वह शांत हो
- 1:57:36गई। शिप्रा के फैसले से उसे संतोष हुआ।
- 1:57:39कहीं ना कहीं उसे खुशी हुई कि उसने अपने
- 1:57:41आत्मसम्मान के साथ समझौता नहीं किया। साथ
- 1:57:44ही मुख्तार को लेकर भी वह थोड़ा निश्चिंत
- 1:57:47हुआ। कम से कम अभी के लिए तो ऐसा नहीं लग
- 1:57:49रहा था कि वो शिप्रा के खिलाफ कोई कदम
- 1:57:52उठाएगा। जिस बात के लिए वो गिरधर के पास
- 1:57:54जाने वाला था, उसका जवाब उसे संतो की
- 1:57:57मासूमियत के कारण यहीं मिल चुका था। शौर्य
- 1:58:00को अचानक ध्यान आया तो उसने मुस्कुरा कर
- 1:58:02पूछा। अरे बातों में तो मैं यह भूल ही
- 1:58:05गया। तुम यहां आई क्यों थी? संतों ने
- 1:58:08झाड़ू संभालते हुए कमरे पर नजर दौड़ाई।
- 1:58:11[संगीत] तुम्हारा कमरा साफ करने आई हूं।
- 1:58:13गिरधर काका ने कहा है जब तक तुम ठीक से
- 1:58:15सेटल नहीं हो जाते, मैं सफाई कर दिया
- 1:58:18करूं। ठीक है। शौर्य ने सिर हिलाया। तुम
- 1:58:21सफाई देख लो। मैं तब तक गिरधर काका से
- 1:58:24मिलकर आता हूं। यह कहकर वो कमरे से बाहर
- 1:58:26निकल गया। चलते-चलते उसके दिमाग में दिन
- 1:58:29भर की भागदौड़ [संगीत] घूमने लगी।
- 1:58:32मेघा के हॉस्पिटल जाना है। शिप्रा के साथ
- 1:58:34बिग बुल ऑफिस में मीटिंग अरेंज करवानी है।
- 1:58:37सब कुछ कैसे मैनेज होगा? यही सोचते हुए वो
- 1:58:40गिरधर काका के कमरे तक पहुंचा। अंदर
- 1:58:42पहुंचते ही उसने देखा गिरिधर काका नाश्ता
- 1:58:45तैयार कर चुके थे। उसे देखते ही उन्होंने
- 1:58:47एक और प्लेट लगा दी। [संगीत] अरे काका
- 1:58:49क्यों तकलीफ कर रहे हो? मैं कैंटीन में
- 1:58:52नाश्ता कर लूंगा। शौर्य ने कहा तो गिरधर
- 1:58:54काका मुस्कुराए। कैसी बात करते हो? अपने
- 1:58:58लिए बनाता ही हूं। दो रोटी और सही। तुम
- 1:59:00ज्यादा मत सोचो। शौर्य समझ गया उन्हें
- 1:59:03रोकना बेकार है। वो चुपचाप बैठ गया। तभी
- 1:59:06उसके दिमाग में एक आईडिया आया। उसने सोचा
- 1:59:09अगर मोहित रैना से मीटिंग शाम 4:00 बजे के
- 1:59:12बाद फिक्स करवा दें तो वो मेघा का मैटर
- 1:59:14आराम से निपटा सकता है। यह सोचकर वो फोन
- 1:59:17लगाते हुए बाहर आया।
- 1:59:19गुड मॉर्निंग सर।
- 1:59:21दूसरी तरफ से आवाज आई। गुड मॉर्निंग।
- 1:59:24शौर्य ने संक्षेप में जवाब दिया। मोहित
- 1:59:27तुम शिप्रा को फोन करके 4:00 बजे के बाद
- 1:59:29का टाइम मीटिंग के लिए फिक्स कर लो।
- 1:59:31[संगीत] इतना कहकर उसने बिना जवाब सुने ही
- 1:59:33कॉल काट दिया क्योंकि उसी वक्त उसकी नजर
- 1:59:35सामने से आती शिप्रा पर पड़ी। शिप्रा उसके
- 1:59:38पास आकर रुकी ही थी कि तभी [संगीत] उसका
- 1:59:40फोन बज उठा। उसने स्क्रीन पर नजर डाली और
- 1:59:43हल्के आश्चर्य से बोली।
- 1:59:45मोहित रैना
- 1:59:47शिप्रा ने फोन उठाया और उलझन भरे स्वर में
- 1:59:50बोली। हां मिस्टर मोहित कहिए। कैसे कॉल
- 1:59:53किया? उसे इतने सवेरे मोहित रैना के कॉल
- 1:59:56की अपेक्षा नहीं थी।
- 1:59:57दरअसल शिप्रा जी मैं दोपहर में थोड़ा बिजी
- 2:00:00हूं। इसीलिए आप 4:00 बजे के बाद मीटिंग के
- 2:00:02लिए आइएगा। [संगीत]
- 2:00:03मोहित रैना ने पोलाइटली कहा। जवाब में
- 2:00:05शिप्रा बोली ठीक है जैसा आप कहें। आपका
- 2:00:08धन्यवाद जो आपने समय रहते इन्फॉर्म कर
- 2:00:11दिया। वो उम्मीद नहीं कर रही थी कि मोहित
- 2:00:13रैना उसके साथ इतना जेरसली बिहेव करेगा।
- 2:00:16अगर वो शिप्रा को फोन नहीं भी करता तो उसे
- 2:00:19कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था क्योंकि उसे
- 2:00:21बिग बॉल की जरूरत थी ना कि बिग बॉल को
- 2:00:23उसकी। उसने फोन कट किया और शौर्य से बोली
- 2:00:27यह मोहित रैना तो बड़ा अच्छा बंदा है। उसे
- 2:00:30खुद मीटिंग शिफ्ट होने की बात बताई। इस पर
- 2:00:33शौर्य ने सम्मान पूर्वक कहा। बड़े लोगों
- 2:00:36की यही तो खासियत होती है कि वह समय की
- 2:00:38बहुत कदर करते हैं। ना सिर्फ अपनी बल्कि
- 2:00:40दूसरों के समय की भी। वो सोच रहा था कि
- 2:00:43शिप्रा इतनी जल्दी उसके पास क्या करने आई
- 2:00:46है? अभी तो उसके ऑफिस के लिए निकलने में
- 2:00:48काफी समय है। वहीं शिप्रा ने शौर्य को
- 2:00:51तैयार देखा तो पूछ लिया कहीं जाने वाले हो
- 2:00:54क्या? नहीं तो बस जल्दी उठ गया था इसलिए
- 2:00:58तैयार हो गया। [संगीत] कुछ काम तो था
- 2:01:00नहीं। वैसे आपको कुछ काम है क्या जो आप
- 2:01:03सवेरे-सवेरे यहां पर हैं? शौर्य ने सीधा
- 2:01:05सा जवाब दिया। इस पर शिप्रा शौर्य को
- 2:01:08देखते हुए बोली, एक्चुअली दादाजी तुमसे
- 2:01:11मिलना चाहते हैं मुझसे। [संगीत]
- 2:01:13क्या कुछ खास वजह है? शौर्य के चेहरे पर
- 2:01:16हैरानी थी। लेकिन शिप्रा ने गोलमोल सा
- 2:01:19जवाब दिया। हो सकता है। इस पर शौर्य संकेत
- 2:01:23भरे स्वर में बोला। [संगीत] आपको तो पता
- 2:01:25होगा कि वो मुझसे क्यों मिलना चाहते हैं।
- 2:01:27मिलोगे तो तुम्हें खुद पता चल जाएगा।
- 2:01:30शिप्रा ने अभी भी स्पष्ट नहीं किया।
- 2:01:32[संगीत] वैसे शौर्य को आभास तो था ही कि
- 2:01:34बलवंत राय उससे क्यों मिलना चाहते हैं।
- 2:01:36शौर्य शिप्रा के साथ बलवंत राय के कमरे
- 2:01:39में पहुंचा। बलवंत राय और उनके साथ बैठे
- 2:01:42राजदीप राय समझ नहीं पाए कि शिप्रा के साथ
- 2:01:44यह कौन है? बलवंत राय ने शिप्रा से पूछ ही
- 2:01:48लिया। यह कौन है? शिप्रा को अपनी गलती का
- 2:01:51एहसास हुआ। उसे ध्यान आया कि उसके पिताजी
- 2:01:54और दादाजी तो श्रवण के नए चेहरे से वाकिफ
- 2:01:56ही नहीं है। पिछली रात श्रवण के साथ घर
- 2:01:59आते वो लेट हो गई थी। इसलिए गिरिधर के
- 2:02:02अलावा किसी ने भी श्रवण का नया रूप नहीं
- 2:02:04देखा था। शिप्रा को थोड़ी खुशी हुई कि
- 2:02:06श्रवण के इस नए अवतार का उन दोनों पर
- 2:02:09थोड़ा पॉजिटिव असर होगा। वो शौर्य की तरफ
- 2:02:11इशारा करते हुए बोली यही तो श्रवण है।
- 2:02:15क्या बलवंत राय के साथ-साथ राजदीप राय को
- 2:02:19भी जैसे 440 वोल्ट का झटका लगा। कहां वो
- 2:02:22घनी लंबी दाढ़ी से भरा भिखारी वाला चेहरा
- 2:02:25और कहां यह चिकना सा हीरो जैसा
- 2:02:26व्यक्तित्व। दोनों चेहरों में कोई मेल ही
- 2:02:29नहीं था। इस बार राजदीप राय थोड़े गुस्से
- 2:02:32में बोले, बेटी तुम [संगीत] क्या मजाक कर
- 2:02:34रही हो? क्या पापा यह कोई मजाक का समय है
- 2:02:37जो मैं आपसे मजाक करूंगी। यह श्रवण ही है।
- 2:02:40शिप्रा भी रूखे स्वर में बोली। बलवंत राय
- 2:02:43की पैनी नजरें शौर्य के चेहरे का मुआयना
- 2:02:45करने लगी। उन दोनों के पास शिप्रा की बात
- 2:02:48ना मानने का कोई कारण नहीं था। तुम तो
- 2:02:51अच्छे भले दिखते हो। फिर वो भिखारियों
- 2:02:53जैसी स्थिति क्यों बना रखी थी? बलवंत राय
- 2:02:56ने शौर्य से सवाल किया तो उसने शांत स्वर
- 2:02:58में जवाब दिया।
- 2:03:00बस हालात कुछ ठीक नहीं थे इसलिए वह स्थिति
- 2:03:02थी। राजदीप राय को जब यकीन हो गया [संगीत]
- 2:03:05कि यही श्रवण है तो उन्हें भी थोड़ी
- 2:03:07तसल्ली हुई कि लुक के मामले में श्रवण से
- 2:03:10किसी का मुकाबला नहीं हो सकता। अगर कोई
- 2:03:12उसे देख ले तो वह राजदीप राय का मजाक नहीं
- 2:03:14उड़ा पाएगा कि उनका दामाद कैसा लग रहा है।
- 2:03:17तभी बलवंत राय शिप्रा से बोले अच्छा बेटा
- 2:03:21तुम जाओ मुझे श्रवण से कुछ बात करनी है।
- 2:03:23शिप्रा जाना नहीं चाहती थी लेकिन मजबूरी
- 2:03:26[संगीत] में बाहर आ गई। वो दरवाजे के पास
- 2:03:28ही खड़ी होकर उनकी बातें सुनने लगी।
- 2:03:31शिप्रा के जाते ही बलवंत राय ने पूछा
- 2:03:34तुम्हें पता है हमने तुम्हें यहां क्यों
- 2:03:36बुलाया है? नहीं। शौर्य ने संक्षेप में
- 2:03:40कहा इस पर बलवंत राय बोले [संगीत]
- 2:03:43तुम समझते हो कि यह शादी सामान्य हालात
- 2:03:45में नहीं हुई। शिप्रा भी मानसिक रूप से
- 2:03:48कमजोर है। लेकिन देर सवेेर तुम्हें तलाक
- 2:03:51लेना ही होगा। जवाब में शौर्य शांत स्वर
- 2:03:54में बोला। मुझे कोई गलतफहमी नहीं है। मैं
- 2:03:57जानता हूं कि मेरी जगह यहां नहीं है। आप
- 2:03:59जब कहें जहां कहें मैं साइन कर दूंगा। अभी
- 2:04:02भी कर सकता हूं। बलवंत राय ने सिर हिलाया।
- 2:04:07तुम्हारी साफ गोई अच्छी लगी। तुमने अब तक
- 2:04:09हमारे परिवार की मदद की है। उम्मीद है आगे
- 2:04:12भी करोगे।
- 2:04:14जहां तक होगा मैं मदद करूंगा। मेरे कारण
- 2:04:17कोई परेशानी नहीं आएगी। शौर्य ने जवाब
- 2:04:20दिया। बाहर खड़ी शिप्रा यह सब सुनकर उलझ
- 2:04:23गई। उसे समझ नहीं आया कि दादाजी अब भी ऐसी
- 2:04:26बातें क्यों कर रहे हैं। उसे गुस्सा आया
- 2:04:28पर उसने तय किया कि वो अपने फैसले पर अडिग
- 2:04:31रहेगी। बलवंत राय ने आगे कहा अब तुम हमारे
- 2:04:35दामाद हो इसलिए तुम्हें अब अपने रहन-सहन
- 2:04:38का ध्यान रखना होगा। मैं कोशिश करूंगा।
- 2:04:42शौर्य बोला तभी राजदीप राय बोले
- 2:04:46ड्राइवर का काम तुम्हारे लिए ठीक नहीं है।
- 2:04:48[संगीत] लोगों को सच पता चला तो शिप्रा की
- 2:04:51इज्जत पर असर पड़ेगा। शौर्य ने सीधा पूछा
- 2:04:54तो आप चाहते क्या हैं? बलवंत राय बोले अगर
- 2:04:58हम तुम्हें ऑफिस का काम दें तो कर लोगे।
- 2:05:02शौर्य ने हल्का सा तंज किया इससे भी तो
- 2:05:05वही खतरा रहेगा कि लोग पहचान जाएंगे।
- 2:05:08बलवंत राय चढ़कर बोले और तुम कर भी क्या
- 2:05:12सकते हो? अब शौर्य का धैर्य टूटने लगा।
- 2:05:16मैंने आपसे कुछ नहीं मांगा। अगर परेशानी
- 2:05:18है तो शिप्रा से कहिए तलाक दे दे। सब खत्म
- 2:05:21हो जाएगा। राजदीप राय गुस्से में बोले,
- 2:05:25तुम्हारे मुंह से ऐसी बातें शोभा नहीं
- 2:05:27देती। क्यों? मैंने किसका क्या बिगाड़
- 2:05:30लिया जो इस तरह की बातें नहीं कर सकता।
- 2:05:32मैंने आपका एक पैसा लिया तो है नहीं जो
- 2:05:34आपकी सुनूंगा। मंदिर में जो लोग मुझे दो
- 2:05:37वक्त का खाना देते हैं, वह भी श्रद्धा से
- 2:05:39देते थे। तिरस्कार भरी नजरों से नहीं
- 2:05:41देखते थे। और आप आप तो काम में भी छोटा
- 2:05:44बड़ा देखने लगे। शौर्य ने आज पहली बार राय
- 2:05:47परिवार को आईना दिखाया। उसकी बातें सुनकर
- 2:05:49बलवंत राय और राजदीप के मुंह खुले रह गए।
- 2:05:52शिप्रा जो बाहर खड़ी होकर सब कुछ सुन रही
- 2:05:55थी, उसे शौर्य की बात सुनकर अच्छा लग रहा
- 2:05:57था। जिस तरह शौर्य ने महसूस किया कि बलवंत
- 2:06:00राय और राजदीप राय उसे नीचा दिखाने की
- 2:06:03कोशिश कर रहे हैं। उसने उन्हें [संगीत]
- 2:06:05उन्हीं की भाषा में जवाब दिया।
- 2:06:08क्या काम करोगे तुम? बलवंत राय जानना
- 2:06:11चाहते थे कि श्रवण किस काम की बात कर रहा
- 2:06:13है? चिंता मत कीजिए। जब आपके यहां से अलग
- 2:06:17कोई भी काम करूंगा तो उससे आपकी प्रतिष्ठा
- 2:06:19पर [संगीत] कोई आंच नहीं आएगी। इतना कहने
- 2:06:22के बाद शौर्य ने जब महसूस किया कि अब उसके
- 2:06:25पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा तो वह बोला
- 2:06:27[संगीत]
- 2:06:28अगर आपके सवाल खत्म हो गए हो तो क्या मैं
- 2:06:31जा सकता हूं?
- 2:06:33हां जा तो सकते हो पर यह तो बता दो कि तुम
- 2:06:35काम क्या करोगे? बलवंत राय ने फिर से अपना
- 2:06:38सवाल दोहरा दिया। तो शौर्य ने गंभीर स्वर
- 2:06:41में कहा मेरी जरूरतें बहुत कम है। उन्हें
- 2:06:45पूरा [संगीत] करने के लिए मुझे बहुत
- 2:06:46ज्यादा हाथ पैर मारने की जरूरत नहीं है।
- 2:06:49यह सुनकर राजदीप राय से रहा नहीं गया और
- 2:06:52वह बोले लेकिन काम ऐसा हो जो तुम्हारी
- 2:06:55प्रतिष्ठा पर चार चांद लगा दे ना कि उसे
- 2:06:58और धूमिल कर दे। मेरे लिए तो काम बस काम
- 2:07:01होता है। प्रतिष्ठा का विषय तो आप जैसे
- 2:07:04बड़े लोगों के लिए है। शौर्य भी अब जवाब
- 2:07:07देने से चूक नहीं रहा था। बलवंत राय
- 2:07:10स्थिति को संभालते हुए बोले देखो तुम्हें
- 2:07:13काम के लिए भटकने की कोई जरूरत नहीं है।
- 2:07:15मैं देखता हूं अपने ऑफिस में ही तुम्हें
- 2:07:17कोई ढंग का काम दे दूंगा। इस पर शौर्य ने
- 2:07:20हाथ जोड़ लिए और बोला [संगीत]
- 2:07:22लगता है आप मेरी बात को समझे नहीं। मुझे
- 2:07:25आपके ऑफिस में काम करने में कोई दिलचस्पी
- 2:07:27नहीं है। मैं अपने लिए बाहर [संगीत] काम
- 2:07:29तलाश कर लूंगा। इतना कहकर शौर्य कमरे से
- 2:07:33बाहर निकल गया। शिप्रा ने जैसे ही शौर्य
- 2:07:36को कमरे से बाहर आते देखा, वो जल्दी से
- 2:07:38दरवाजे के पास से हटकर बीच में खड़ी हो गई
- 2:07:41ताकि शौर्य को यह ना लगे कि वह छुपकर उसकी
- 2:07:44बातें सुन रही थी। शौर्य ने जब शिप्रा को
- 2:07:46वहां खड़े देखा तो वह रुका और बोला
- 2:07:49[संगीत]
- 2:07:50उन्हें जो बात करनी थी उन्होंने कर ली। अब
- 2:07:53मैं जा सकता हूं। शौर्य ने अपनी बात को
- 2:07:56पोलाइटली रखने की कोशिश की। वो नहीं चाहता
- 2:07:58था कि शिप्रा को पता चले कि उसके और बलवंत
- 2:08:01राय के बीच क्या बात हुई थी। लेकिन उसे
- 2:08:04क्या पता था कि शिप्रा पहले ही उन सबकी
- 2:08:06बातें सुन चुकी थी। अंदर क्या बात हुई?
- 2:08:10शिप्रा ने पूछा वो शौर्य के मुंह से सुनना
- 2:08:13चाहती थी। इस पर शौर्य बोला कुछ खास नहीं।
- 2:08:17आपके दादाजी चाहते हैं कि मैं उनकी कंपनी
- 2:08:19में ही जॉब करूं। पर मैंने इंकार कर दिया।
- 2:08:24पर क्यों? [संगीत] उनकी कंपनी में काम
- 2:08:26करने में तुम्हें क्या दिक्कत है? शिप्रा
- 2:08:29शौर्य के मन की बात जानना चाहती थी। शौर्य
- 2:08:32ने शांत स्वर में कहा कोई दिक्कत नहीं है
- 2:08:35पर मुझे लगता है कि बाहर काम करना मेरे
- 2:08:38लिए ज्यादा बेहतर होगा। इस पर शिप्रा बोली
- 2:08:42ठीक है फिर जैसी तुम्हारी मर्जी अगर
- 2:08:44तुम्हें लगता है कि बाहर काम करना
- 2:08:46तुम्हारे लिए ज्यादा फायदेमंद है तो
- 2:08:48तुम्हें रोकना गलत होगा। मैं थोड़ी देर
- 2:08:50में तैयार होकर आती हूं। तब तक तुम अपने
- 2:08:52रूम में रेस्ट करो। शौर्य ने सहमति में सर
- 2:08:56हिलाया और वहां से निकल गया। शिप्रा वापस
- 2:08:58मुड़ी और दादाजी के कमरे में जाकर बोली
- 2:09:02क्या हुआ? आपकी बात श्रवण से हो गई? इस पर
- 2:09:05बलवंत राय बोले, हां हो तो गई। तुम बताओ
- 2:09:08तुम यहां दोबारा क्या करने आई हो? मैं बस
- 2:09:11जानने आई थी कि श्रवण से आपकी बात कैसी
- 2:09:13रही। शिप्रा ने सच्चाई छुपाते हुए कहा। इस
- 2:09:16पर बलवंत राय बोले, कैसा रहा? क्या मतलब?
- 2:09:20ठीक रहा। मुझे लगता है वह बेहद खुददार
- 2:09:22आदमी है। उसने कहा कि वह खुद अपने लिए काम
- 2:09:25ढूंढ लेगा। आपने उसे अपने पास काम करने के
- 2:09:28लिए मनाने की कोशिश नहीं की क्या? शिप्रा
- 2:09:31जानना चाहती थी कि उसके दादाजी ने ऐसा
- 2:09:33क्यों नहीं किया। बलवंत राय ने जवाब दिया,
- 2:09:37नहीं बेटी क्योंकि मैं देखना चाहता हूं कि
- 2:09:39क्या सच में वो अपने लिए एक ढंग की नौकरी
- 2:09:41तलाश सकता है या [संगीत] नहीं। कहते हुए
- 2:09:44दादा बलवंत राय गहरी सोच में डूब गए। वहीं
- 2:09:48दूसरी तरफ शौर्य गिरधर के कमरे में
- 2:09:50पहुंचा। वह बीच में ही खाना छोड़कर गया
- 2:09:52था। गिरधर ने जैसे ही शौर्य को वापस आते
- 2:09:55देखा, उसने दोबारा उसकी प्लेट सामने रख
- 2:09:57दी। शौर्य ने खाना खाया और शिप्रा का
- 2:10:00इंतजार करने लगा। 15 मिनट बाद शिप्रा भी
- 2:10:03तैयार होकर आ गई। शौर्य गाड़ी ले आया और
- 2:10:06शिप्रा को उसके ऑफिस पहुंचाया। इस दौरान
- 2:10:08शौर्य ने शिप्रा से ज्यादा बातें नहीं की।
- 2:10:11शिप्रा को उसके ऑफिस छोड़कर शौर्य टैक्सी
- 2:10:14लेकर सिटी हॉस्पिटल पहुंचा। वो सीधे
- 2:10:16हॉस्पिटल के अंदर गया और मेघा को कॉल
- 2:10:18लगाया। उसने मेघा को हॉस्पिटल की लॉबी में
- 2:10:21बुलाया। मेघा जीनत के साथ उसके पास
- 2:10:24पहुंची। मेघा को उम्मीद नहीं थी कि शौर्य
- 2:10:27सच में हॉस्पिटल आ जाएगा। वहीं ज़ीनत शौर्य
- 2:10:30के आने से खुश थी। विक्की ने उसके साथ भी
- 2:10:33कई बार बदतमीजी की थी। इसीलिए वो भी
- 2:10:36विक्की को सबक सिखाना चाहती थी। लेकिन
- 2:10:38यहां तो [संगीत] सभी उससे खौफ खाते थे।
- 2:10:41हॉस्पिटल का डीन भी उस पर हाथ डालने से
- 2:10:43घबराता था। जहां जीनज शौर्य के आने से खुश
- 2:10:46थी, वहीं मेघा थोड़ी घबराई हुई थी।
- 2:10:51डीन का ऑफिस कहां है? शौर्य ने मेघा से
- 2:10:54सवाल किया तो मेघा के चेहरे पर थोड़ी
- 2:10:56घबराहट आ गई। हॉस्पिटल के डीन का नाम
- 2:10:58विपिन बत्रा है। मेघा डरते-डरते शौर्य को
- 2:11:02लेकर डीन के ऑफिस पहुंची। तुम बाहर खड़ी
- 2:11:05रहो। मैं थोड़ी देर में आता हूं। ऐसा
- 2:11:07बोलकर शौर्य अंदर ऑफिस में चला गया। विपिन
- 2:11:11बत्रा ने शौर्य को ऊपर से नीचे तक देखा और
- 2:11:14पूछा।
- 2:11:15कहिए कैसे आना हुआ? अभी आपने ऑफिस के बाहर
- 2:11:19मेरे साथ एक लड़की मेघा को देखा होगा। वो
- 2:11:22मेरी बहन है। कुछ दिन पहले उसने आपके पास
- 2:11:25एक कंप्लेंट की थी। मैं जानना चाहता हूं
- 2:11:27कि आपने उस कंप्लेंट के अगेंस्ट क्या
- 2:11:29एक्शन लिया। शौर्य ने अदब के साथ सवाल
- 2:11:32किया। विपिन बत्रा कुछ पल सोचता रहा। फिर
- 2:11:35बोला देखिए हमने उस घटना के बारे में जांच
- 2:11:38की थी पर हमें कोई खास गड़बड़ नजर नहीं
- 2:11:41आई। मतलब आपने विक्की के खिलाफ कुछ नहीं
- 2:11:44किया। शौर्य ने सपाट स्वर में पूछा। जवाब
- 2:11:48में विपिन बत्रा गंदी सी शक्ल बनाकर बोला
- 2:11:50अरे भाई बोला ना हमने उसके खिलाफ जांच की
- 2:11:53थी। अब अगर कुछ मिलता तभी तो हम उसके
- 2:11:56खिलाफ कोई कदम उठाते ना। ऐसा लगा मानो
- 2:11:59शौर्य एक नजर में सारा मामला समझ चुका था।
- 2:12:01उसने सर्द आवाज में कहा क्या एक बार मैं
- 2:12:04विक्की से मिल सकता हूं? आप उससे मिलकर
- 2:12:08क्या करोगे? विपिन बत्रा ने हैरानी से
- 2:12:11पूछा। तो शौर्य ने उसकी आंखों में देखते
- 2:12:13हुए कहा, मैं उससे पूछूंगा कि उसने मेरी
- 2:12:16बहन के साथ बदतमीजी क्यों की? नहीं, तुम
- 2:12:20ऐसा कुछ भी नहीं कर सकते। कोई बाहर का
- 2:12:22आदमी आकर हमारे हॉस्पिटल में उधम नहीं मचा
- 2:12:24सकता। विपिन मामले को रफादफा करना चाहता
- 2:12:27था। शौर्य समझ गया कि डीन विक्की के खिलाफ
- 2:12:30कोई एक्शन नहीं लेने वाला। इसीलिए वो उसे
- 2:12:33चेतावनी देते हुए बोला। अगर आप विक्की को
- 2:12:36यहां नहीं बुलाओगे तो मजबूर होकर मुझे
- 2:12:38पुलिस को बुलाना पड़ेगा।
- 2:12:41क्या कहा? पुलिस को। आपको पता है कि यह
- 2:12:44हॉस्पिटल किसका है? विपिन बत्रा ने शौर्य
- 2:12:46को घूरते हुए पूछा। शौर्य ने भी उसे घूरते
- 2:12:49हुए जवाब दिया। क्या यह पता होने से कि यह
- 2:12:52हॉस्पिटल किसका है? विक्की का गुनाह कम हो
- 2:12:55जाएगा।
- 2:12:56यह हॉस्पिटल राजा साहब का है। उनके खिलाफ
- 2:12:59जाने का मतलब समझते हो? विपिन बत्रा ने
- 2:13:02राजा साहब का नाम लेकर उसे डराने की कोशिश
- 2:13:05की। लेकिन शौर्य अपनी बात पर अड़ा रहा।
- 2:13:07राजा साहब का हॉस्पिटल होने से यहां पढ़ने
- 2:13:10वाली बच्चियां उनकी दासी बन जाती हैं क्या
- 2:13:13कि किसी भी मनचले को उन्हें छेड़ने की
- 2:13:15इजाजत मिल जाए। डीन लाजवाब हो चुका था तो
- 2:13:19शौर्य ने जोर देकर कहा मैंने आपको कहा आप
- 2:13:22यहीं पर मुझे विक्की से मिलवाइए नहीं तो
- 2:13:24मैं इस हॉस्पिटल में पुलिस बुलवाऊंगा।
- 2:13:26[संगीत]
- 2:13:28शौर्य की इस बात पर विपिन बत्रा उपहास
- 2:13:30करते हुए बोला अगर विक्की यहां पर आ भी
- 2:13:33गया तो तुम क्या करोगे? मैं तो बस इतना
- 2:13:36चाहता हूं कि वो यहां आकर मेरी बहन से
- 2:13:38माफी मांगे। शौर्य ने शांत स्वर में कहा।
- 2:13:42तभी विपिन बत्रा के दिमाग में कुछ चलने
- 2:13:44लगा। उसने सोचा एक बार विक्की को बुलाकर
- 2:13:48इस बहन के भाई की हेकड़ी निकालता हूं। यही
- 2:13:52सोचकर उसने विक्की को कॉल लगाया और फोन
- 2:13:54उठते ही विपिन बत्रा बोला।
- 2:13:58विक्की, क्या तुम इस समय मेरे ऑफिस में आ
- 2:14:00सकते हो?
- 2:14:02क्या बात है सर? कोई काम है क्या?
- 2:14:04दूसरी तरफ से विक्की की आवाज आई तो विपिन
- 2:14:07बत्रा ने कहा, हां कोई है जो तुमसे मिलना
- 2:14:10चाहता है?
- 2:14:11ठीक है सर मैं भी आता हूं।
- 2:14:13विक्की ने इतना बोलकर फोन काट दिया। वो
- 2:14:16अभी 5 मिनट में यहां आ जाएगा। ऐसा करना
- 2:14:19तुम उससे अपनी बहन से यहीं पर माफी मंगवा
- 2:14:22लेना। डीन की बात सुनते ही शौर्य ने मेघा
- 2:14:26और जीनत को भी अंदर डीन के कमरे में ही
- 2:14:28बुला लिया और विक्की का इंतजार करने लगा।
- 2:14:31लगभग आधे घंटे बाद विक्की अपने एक दोस्त
- 2:14:34के साथ डीन के कमरे में आया और बोला हां
- 2:14:37सर बताइए आपने हमें क्यों याद किया? विपिन
- 2:14:40बत्रा शौर्य की तरफ इशारा करते हुए बोला
- 2:14:44यह मेघा के भैया हैं। इनका कहना है कि
- 2:14:46तुमने मेघा के साथ बदतमीजी की है। इसीलिए
- 2:14:49यह चाहते हैं कि तुम सबके सामने मेघा से
- 2:14:52माफी मांगो। विक्की ने शौर्य को ऊपर से
- 2:14:54नीचे तक देखा। फिर मेघा के पास गया और
- 2:14:57उसके कान के पास अपना मुंह लाकर बोला क्या
- 2:15:01मेघा रानी तुम तो खामखा अपने आशिक को
- 2:15:03बदनाम करने पर तुली हो तभी शौर्य विपिन
- 2:15:07बत्रा की तरफ देखते हुए बोला क्यों मिस्टर
- 2:15:10बत्रा आपको अभी भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा
- 2:15:14देख तो रहा हूं बढ़िया है ना दोनों आपस
- 2:15:17में मामले को निपटाने की कोशिश कर रहे
- 2:15:18हैं। विपिन बत्रा वही देख रहा था जो वह
- 2:15:22देखना चाहता था या यूं कहें कि वह जानकर
- 2:15:24भी अनजान बन रहा था। विक्की ने जब शौर्य
- 2:15:27को डीन से शिकायत करते देखा तो वो दोबारा
- 2:15:29मेघा के करीब जाकर बोला मेघा रानी [संगीत]
- 2:15:33यह तुम्हारा भाई कब पैदा हो गया जो मुझसे
- 2:15:36माफी मंगवाने यहां तक आ गया। मेघा के
- 2:15:39चेहरे का रंग उड़ चुका था। उसे लग रहा था
- 2:15:42कि शौर्य ने यहां आकर गलती की है। पता
- 2:15:45नहीं यह विक्की अब और क्या हरकत करेगा।
- 2:15:47विपिन बत्रा भी विक्की के सामने कुछ बोल
- 2:15:50नहीं पा रहा था। इसका मतलब साफ था कि
- 2:15:53विक्की किसी बड़े परिवार से ताल्लुक रखता
- 2:15:55है। तभी शौर्य ने रूखे स्वर में कहा,
- 2:15:59"मिस्टर बत्रा, मुझे आपको देखकर कहना
- 2:16:01पड़ेगा कि आप इस हॉस्पिटल के डीन होने
- 2:16:04लायक नहीं है। यह विक्की आपके सामने ही
- 2:16:06बदतमीजी किए जा रहा है और आप इसकी गलतियों
- 2:16:09को नजरअंदाज कर रहे हैं। विपिन बत्रा फिर
- 2:16:12से विक्की का बचाव करते हुए बोला, "मिस्टर
- 2:16:15जो भी आपका नाम है। आप जानते भी हैं
- 2:16:18विक्की किस परिवार से संबंध रखता है। किसी
- 2:16:21भी परिवार से संबंध रखता हो, उससे इसे
- 2:16:24किसी को छेड़ने का अधिकार नहीं मिल जाता।
- 2:16:26शौर्य का गुस्सा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा
- 2:16:29था। तभी विक्की मेघा से दूर हुआ और शौर्य
- 2:16:32के सामने आकर खड़ा हो गया और बोला,
- 2:16:36"तुम कुछ ज्यादा ही नहीं बोल रहे हो। अगर
- 2:16:39मेरे बारे में नहीं जानते थे, तो थोड़ी सी
- 2:16:41रिसर्च ही कर लेते। फिर तुम्हें समझ आ
- 2:16:44जाता कि कहां बोलना चाहिए और कहां नहीं।
- 2:16:48तो ठीक है। फिर तुम ही बता दो कि तुम किस
- 2:16:51बम के पलीते हो। शौर्य ने विक्की का मजाक
- 2:16:54उड़ाते हुए कहा, "तुम्हारी जुबान कुछ
- 2:16:57ज्यादा ही चल रही है।" कहते हुए विक्की ने
- 2:16:59शौर्य का कॉलर पकड़ लिया और यही विक्की की
- 2:17:02सबसे बड़ी गलती थी। जैसे ही विक्की ने
- 2:17:05शौर्य के कॉलर को हाथ लगाया, शौर्य ने एक
- 2:17:07जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया।
- 2:17:10विक्की लड़खड़ा कर चार कदम पीछे चला गया।
- 2:17:13शौर्य का एक थप्पड़ विक्की के लिए बिल्कुल
- 2:17:15अनएक्सेक्टेड था। पहले तो उसे समझ ही नहीं
- 2:17:18आया कि अचानक से क्या हो गया। जब उसे समझ
- 2:17:21आया तो विक्की के साथ आया लड़का शौर्य पर
- 2:17:23झपटा। शौर्य ने अपने पैर से उसे एक जोरदार
- 2:17:26किक मारी जो सीधा उसके पेट पर लगी। वो उछल
- 2:17:29कर दरवाजे के पास जा गिरा। [संगीत] अब तक
- 2:17:31विक्की भी खुद को संभालकर शौर्य पर झपटा।
- 2:17:34लेकिन उसका भी हाल उसके दोस्त जैसा ही
- 2:17:36हुआ। शौर्य की किक उसके सीने पर लगी और वो
- 2:17:39अपने दोस्त के ऊपर जाकर गिर पड़ा। मेघ और
- 2:17:42जीनत आंखें फाड़े यह सब [संगीत] देख रही
- 2:17:44थी। उन्होंने उम्मीद नहीं की थी कि शौर्य
- 2:17:46एक मिनट में ही बाजी पलट देगा। विपिन
- 2:17:49बत्रा भी हैरानी से कभी शौर्य को तो कभी
- 2:17:52विक्की को देख रहा था। विक्की का ऐसा कोई
- 2:17:55हश्र करेगा यह उसने कभी सोचा भी नहीं था।
- 2:17:57अब उसकी आंखों में खौफ नजर आ रहा था। वो
- 2:18:00शौर्य से बोला यह क्या किया तुमने?
- 2:18:03तुम्हें पता है तुमने किस पर हाथ उठाया
- 2:18:06है? मुझे नहीं पता पर आपको तो पता है ना?
- 2:18:09अभी तो मैंने कुछ खास किया ही नहीं है।
- 2:18:11अगर इसने मेघा के सामने झुककर माफी नहीं
- 2:18:14मांगी तो आज अपने पैरों पर यहां से बाहर
- 2:18:16नहीं जा पाएगा। शौर्य ने विपिन बत्रा को
- 2:18:19चेतावनी देते हुए कहा। तभी विक्की
- 2:18:22धीरे-धीरे शौर्य की तरफ बढ़ता हुआ बोला तू
- 2:18:25तूने मुझ पर हाथ उठाया है। विक्की नारंग
- 2:18:28पर हाथ उठाया है। अब तुझे कोई नहीं बचा
- 2:18:31सकता। तभी विपिन बत्रा ने जल्दी से किसी
- 2:18:34को फोन लगाया और बोला सर आप मेरे कमरे में
- 2:18:38जल्दी से आ जाइए। कोई है जो मेरे कमरे में
- 2:18:40आकर गुंडागर्दी कर रहा है? जिसको बुलाना
- 2:18:43है बुला लो। इसका मैं जो करूंगा वो तो
- 2:18:46करूंगा ही। पर तुम्हें भी इस हॉस्पिटल के
- 2:18:49बाहर नहीं किया तो मैं मेघा का भाई कहलाने
- 2:18:52के लायक नहीं। कहते हुए शौर्य विपिन बत्रा
- 2:18:55के करीब पहुंचा और उसका कॉलर पकड़ते हुए
- 2:18:57बोला, "अभी से इस जगह से अपना बोरिया
- 2:19:01बिस्तर समेटना शुरू कर दो।" इतने में
- 2:19:04विक्की फिर से शौर्य पर हमला करने ही वाला
- 2:19:06था कि दरवाजे से तेज आवाज सुनाई दी। ठहर
- 2:19:10जाओ। [संगीत]
- 2:19:11यह आवाज सुनते ही विक्की जहां का तहां
- 2:19:13ठिटक गया और हैरानी से दरवाजे की तरफ
- 2:19:15देखने लगा। दरवाजे पर खड़े शख्स को देखकर
- 2:19:18[संगीत] विपिन बत्रा के चेहरे पर भी राहत
- 2:19:20दिखाई दी। विपिन बत्रा उस अंदर आए शख्स के
- 2:19:24पास पहुंचा और शिकायती लहजे में बोला सर
- 2:19:27जी आप एकदम सही समय पर आए हैं। देखिए इस
- 2:19:30शख्स ने यहां उत्पात मचा रखा है। यह सर जी
- 2:19:34कोई और नहीं कांता प्रसाद हैं। मेघा और
- 2:19:36जीनत भी कांता प्रसाद को जानती थी।
- 2:19:38उन्होंने बीते कल ही तो मेघा को अपना
- 2:19:40विजिटिंग कार्ड दिया था और यह भी कहा था
- 2:19:42कि अगर उसे विक्की [संगीत] दोबारा परेशान
- 2:19:45करें तो वह उन्हें फोन करें। लेकिन क्या
- 2:19:47हॉस्पिटल के डीन के सामने कांता [संगीत]
- 2:19:49प्रसाद उसकी बात मानेंगे?
- 2:19:52मेघा कांता प्रसाद के रुतबे से भली-भांति
- 2:19:55परिचित थी। हॉस्पिटल की बागडोर एक तरह से
- 2:19:58कांता प्रसाद जी के हाथों में ही थी। राजा
- 2:20:01साहब चंद्रभान राठौड़ पूरी तरह से उन्हीं
- 2:20:03पर निर्भर रहते थे। शौर्य भी हैरान था कि
- 2:20:06कांता प्रसाद अचानक यहां कैसे आ गए। कांता
- 2:20:09प्रसाद ने शौर्य को एक नजर देखा। उसके बाद
- 2:20:12वो विपिन बत्रा से बोले।
- 2:20:14एग्जैक्टली [संगीत] क्या हुआ है यहां पर?
- 2:20:17विपिन बत्रा कुछ बोलते उससे पहले विक्की
- 2:20:20आगे आया और बोला सर जी इस बदमाश ने मुझ पर
- 2:20:24हाथ उठाया और मुझे जान से मारने की धमकी
- 2:20:26भी दी। सिर्फ मुझे ही नहीं इसने डॉक्टर
- 2:20:29बत्रा को भी हॉस्पिटल से निकलवाने की धमकी
- 2:20:32दी है। अब इस गुंडे का इलाज आप ही कीजिए।
- 2:20:36मैंने आपसे नहीं पूछा। जिससे पूछा है उसके
- 2:20:39मुंह में भी जुबान है। कांता प्रसाद
- 2:20:42बेरुखी से बोले। विक्की को कांता प्रसाद
- 2:20:44से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी। वो हैरानी
- 2:20:47से उनकी ओर देखने लगा। हैरानी तो डॉक्टर
- 2:20:50बत्रा के चेहरे पर भी थी। बत्रा ने विक्की
- 2:20:52की बात का समर्थन करते हुए कहा विक्की
- 2:20:56एकदम सही कह रहा है सर जी। इस गुंडे को
- 2:20:58सबक सिखाना पड़ेगा। नहीं तो लोग आकर डीन
- 2:21:00के सामने भी ऐसी हरकत करेंगे। मेघा ने जब
- 2:21:03बत्रा को शौर्य पर इल्जाम लगाते देखा तो
- 2:21:06वह आगे आकर बोली यह दोनों झूठ बोल रहे
- 2:21:09हैं। उल्टा इस विक्की ने ही पहले श्रवण
- 2:21:11भैया पर हमला किया था। भैया ने तो बस उसके
- 2:21:14हमले का जवाब दिया। कांता प्रसाद ने मेघा
- 2:21:17की बात को ध्यान से सुना। फिर उससे पूछा,
- 2:21:21तुम्हारे साथ ही विक्की ने बदतमीजी की थी?
- 2:21:24जी सर, इसने तो कल मुझे उठाने के लिए
- 2:21:27गुंडे भी भेजे थे। मेघा जल्दी से बोली तो
- 2:21:30कांता प्रसाद ने तुरंत अगला सवाल किया।
- 2:21:33तुमने डॉक्टर बत्रा से इसकी शिकायत की थी?
- 2:21:36की थी सर। लेकिन इन्होंने उल्टा मुझे ही
- 2:21:38दोषी ठहरा दिया। अब मेघा की भी हिम्मत बढ़
- 2:21:42चुकी थी। इसीलिए वो खुलकर बोल रही थी।
- 2:21:45विपिन बत्रा ने जब देखा कि कांता प्रसाद
- 2:21:47मेघा की बातों पर भरोसा कर रहे हैं तो
- 2:21:49उनके चेहरे की रंगत उड़ गई। वो जल्दी से
- 2:21:52बीच में आते हुए बोले यह लड़की झूठ बोल
- 2:21:55रही है। इसकी बातों पर भरोसा मत कीजिए।
- 2:21:58कांता प्रसाद ने सीधा सवाल दागा। क्या
- 2:22:01इसने आपसे विक्की की शिकायत की थी? जी की
- 2:22:05थी लेकिन वो झूठी शिकायत थी। विपिन हकलाते
- 2:22:08हुए बोला। कांता प्रसाद की नजरें अब और
- 2:22:10सख्त हो गई।
- 2:22:13आपको कैसे पता चला कि मिस मेघा की शिकायत
- 2:22:15झूठी थी? तभी विपिन सकपकाते हुए बोला जी
- 2:22:20मैंने पता लगवाया था उसमें कोई सच्चाई
- 2:22:22नहीं मिली। तभी विक्की तुरंत बोला विपिन
- 2:22:26सही कह रहे हैं सर जी। यह लड़की मुझ पर
- 2:22:28झूठा इल्जाम लगा रही है। आपको मुझ पर
- 2:22:30भरोसा नहीं है। कांता प्रसाद की आवाज ठंडी
- 2:22:34लेकिन खतरनाक हो गई। मुझे पता है कौन सच
- 2:22:37बोल रहा है और कौन झूठ।
- 2:22:38[संगीत]
- 2:22:39और उम्मीद करता हूं कि आप छगन मगन को भूले
- 2:22:41नहीं होंगे। अगर उन्होंने गवाही दे दी तो
- 2:22:44आप किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं
- 2:22:46रहेंगे। यह सुनते ही कमरे में सन्नाटा छा
- 2:22:49गया। कांता प्रसाद ने फिर डीन की ओर
- 2:22:52मुड़कर कहा,
- 2:22:54क्या अब भी आपका जवाब वही है कि विक्की ने
- 2:22:57मिस मेघा के साथ कोई बदतमीजी नहीं की? डीन
- 2:23:01के चेहरे का रंग उतर गया। छगन मगन का नाम
- 2:23:03सुनते ही उनकी हालत खराब हो चुकी थी। तभी
- 2:23:06विक्की ने माहौल संभालने की कोशिश करते
- 2:23:09हुए कहा, सर जी आप मुझ पर इल्जाम लगा रहे
- 2:23:11हैं। यह आप ठीक नहीं कर रहे। आंटी को पता
- 2:23:14चलेगा तो आप समझते हैं ना क्या हो सकता
- 2:23:16है। दरअसल विक्की का पूरा नाम विक्की
- 2:23:19नारंग है। उसके पिता बलदेव नारंग विशालगढ़
- 2:23:22के बड़े बिजनेसमैन हैं। और सबसे बड़ी बात
- 2:23:25उसके चाचा पशुपति नारंग की शादी स्वर्णलता
- 2:23:28नारंग से हुई थी। जो चंद्रभान राठौड़ की
- 2:23:30बेटी है। यही वजह थी कि विक्की इस
- 2:23:33हॉस्पिटल को अपनी जागीर समझता था। लेकिन
- 2:23:36आज उसकी धमकियों का कात कांता प्रसाद पर
- 2:23:38जरा भी असर नहीं पड़ रहा था। वो बोले आप
- 2:23:42मुझे धमकाने की कोशिश ना करें तो बेहतर
- 2:23:44होगा। कांता प्रसाद की आवाज सख्त हो गई।
- 2:23:47आप सब अभी राजा साहब के पास चलिए। वो यहीं
- 2:23:50हॉस्पिटल में हैं। अब वही फैसला करेंगे कि
- 2:23:52क्या करना है। इतना कहकर उन्होंने गेंद
- 2:23:55सीधा चंद्रभन राठौड़ के पाले में डाल दी।
- 2:23:58विक्की ने झुंझुलाकर अपना मोबाइल निकाला
- 2:24:01तो कांता प्रसाद उसे बीच में ही रोकते हुए
- 2:24:03बोले। अभी आप किसी को कॉल नहीं लगाएंगे।
- 2:24:06पहले आप सब राजा साहब के पास चलेंगे। उसके
- 2:24:09बाद वही तय करेंगे कि क्या करना है।
- 2:24:12विक्की मन में सोचस कर रह गया। लेकिन अब
- 2:24:14डॉक्टर बत्रा के चेहरे पर डर दिखाई देने
- 2:24:17लगा था। उसे लगा था कि विक्की उसे बचा
- 2:24:19लेगा पर यहां तो वह खुद ही बेबस खड़ा था।
- 2:24:22अचानक उसे शौर्य की वो बात याद आ गई।
- 2:24:25तुम्हें इस हॉस्पिटल से बाहर कर दूंगा।
- 2:24:28उसने धीरे से नजर उठाकर शौर्य को देखा पर
- 2:24:31उसके चेहरे पर डर नहीं बल्कि एक अजीब सा
- 2:24:34सुकून था। जैसे उसे पहले से पता हो कि आगे
- 2:24:37क्या होने वाला है। कुछ ही देर में सब लोग
- 2:24:39उस कमरे से निकल कर राजा साहब के कक्ष में
- 2:24:42पहुंच गए। मेघा और जीनक की धड़कनें तेज
- 2:24:45थी। उन्होंने राजा साहब को हमेशा दूर से
- 2:24:47ही देखा था और आज पहली बार वो उनके सामने
- 2:24:50खड़ी थी। वहीं कांता प्रसाद अब तक शौर्य
- 2:24:53से कुछ नहीं बोले थे। वह सोच रहे थे कि
- 2:24:55क्या सबके सामने शौर्य की असली पहचान
- 2:24:58उजागर करना सही होगा। आखिर उन्होंने यह
- 2:25:01फैसला राजा साहब पर ही छोड़ दिया। कमरे
- 2:25:04में सन्नाटा छाया हुआ था। राजा साहब
- 2:25:07चंद्रभान राठौड़ ने एक-एक कर सब पर नजर
- 2:25:10डाली और आखिर में उनकी नजर आकर शौर्य पर
- 2:25:13ठहर गई। शौर्य ने भी बिना कुछ कहे सिर्फ
- 2:25:16नजरों से ही उनका अभिवादन किया। कमरे में
- 2:25:19मौजूद हर शख्स बस राजा साहब के शब्दों का
- 2:25:21इंतजार कर रहा था। मामला तो उन्हें पहले
- 2:25:24से ही पता था। राजा साहब ने मेघा की ओर
- 2:25:26देखा। फिर कांता प्रसाद से धीमे लेकिन
- 2:25:29भारी स्वर में पूछा।
- 2:25:31यही मेघा है। इसी के साथ विक्की ने
- 2:25:36बदतमीजी की थी। चंद्रभान जी के सवाल से
- 2:25:39कमरे की हवा जैसे थम सी गई। उसी पल विक्की
- 2:25:43समझ गया। उसकी पोल पहले ही खुल चुकी है।
- 2:25:46डॉक्टर बत्रा के चेहरे पर जो हवाइयां पहले
- 2:25:48से ही उड़ रही थी। अब वो डर में बदल चुकी
- 2:25:51थी। उन्हें समझ ही नहीं आया राजा साहब को
- 2:25:53पहले से सब कैसे पता है। विक्की भी समझ
- 2:25:56चुका था अब उसका झूठ ज्यादा देर तक नहीं
- 2:25:59टिकने वाला। राजा साहब ने उसकी ओर देखते
- 2:26:02हुए ठंडे स्वर में पूछा।
- 2:26:04तुम्हें अपनी सफाई में कुछ कहना है? उस एक
- 2:26:09सवाल में ही इतना दबाव था कि विक्की की
- 2:26:11हिम्मत जवाब दे गई। वो समझ गया सच अब
- 2:26:14छुपने वाला नहीं है। शायद छगन मगन ने सब
- 2:26:17उगल दिया था। अब और झूठ बोलकर खुद को
- 2:26:20फंसाने से बेहतर उसने अपनी गलती मान लेना
- 2:26:23सही समझा। अगले ही पल वो सीधे राजा साहब
- 2:26:26के पैरों के पास जा गिरा।
- 2:26:29मुझे माफ कर दीजिए नाना जी। मुझसे गलती हो
- 2:26:32गई। मैं बहक गया था। आइंदा कभी ऐसी गलती
- 2:26:35नहीं होगी।
- 2:26:36नाना जी यह शब्द सुनकर शौर्य सन्न्य रह
- 2:26:40गया। उसे समझ ही नहीं आया कि विक्की राजा
- 2:26:42साहब को नाना जी क्यों कह रहा है। आखिर
- 2:26:45उसका इस परिवार से क्या रिश्ता है। मेघा
- 2:26:48और जीनत भी उतनी ही हैरान थी। लेकिन
- 2:26:50हैरानी से ज्यादा उनके दिल में राजा साहब
- 2:26:53के लिए इज्जत बढ़ गई थी। क्योंकि रिशेदारी
- 2:26:56होने के बावजूद उन्होंने विक्की को कोई
- 2:26:58रियायत नहीं दी। चंद्रभान राठौड़ ने
- 2:27:01विक्की को झड़कते हुए कहा।
- 2:27:04तुम्हें माफ करने वाला मैं कौन होता हूं।
- 2:27:07कमरे में सन्नाटा और गहरा हो गया।
- 2:27:10उन्होंने आगे कहा, तुम्हें इस लड़की से
- 2:27:14माफी मांगनी पड़ेगी। अगर इसने तुम्हें माफ
- 2:27:17कर दिया तो ठीक है। वरना जो सजा यह लड़की
- 2:27:22तय करेगी वही तुम्हें भुगतनी होगी।
- 2:27:26अब विक्की के पास कोई रास्ता नहीं बचा था।
- 2:27:28ना चाहते हुए भी उसे झुकना पड़ा। वो
- 2:27:31धीरे-धीरे मेघा के सामने गया। उसकी नजरें
- 2:27:34झुकी हुई थी और आवाज कांप रही थी। मुझे
- 2:27:38माफ कर दो मेघा। मुझसे गलती हो गई। आइंदा
- 2:27:41कभी भी मैं तुम्हारे सामने सिर उठाने की
- 2:27:43हिम्मत नहीं करूंगा। मेघा ने जब विक्की का
- 2:27:46झुका हुआ सिर देखा तो उसके दिल को एक अजीब
- 2:27:48सी तसल्ली मिली। यही तो वह चाहती थी।
- 2:27:51विक्की का घमंड आज उसके पैरों में था।
- 2:27:54लेकिन अब वो खुद दुविधा में थी कि वो क्या
- 2:27:56कहे। क्या फैसला ले। उसकी नजरें अनायास ही
- 2:28:00शौर्य की तरफ उठ गई। जैसे खामोशी से उससे
- 2:28:03रास्ता पूछ रही हो। शौर्य उसकी इस दुविधा
- 2:28:06को समझ गया। वो आगे बढ़ा और शांत लेकिन
- 2:28:09मजबूत आवाज में बोला, "इसने तुम्हारे साथ
- 2:28:12बदतमीजी की है। इसीलिए तुम इसे जो भी सजा
- 2:28:15दोगी, वो इसे जरूर मिलेगी।" मेघा अपनी
- 2:28:18भावनाओं के सैलाब को रोकते हुए बोली, "बस
- 2:28:22हो गया भैया। मुझे किसी से बदला नहीं
- 2:28:24लेना।" कमरे में सबकी नजरें उस पर टिक गई।
- 2:28:28वो बोली मैं तो बस यह चाहती हूं कि जिस
- 2:28:30तरह यह अपने घर में अपनी मां बहन की इज्जत
- 2:28:33करता है वैसे ही यहां पढ़ने वाली हर लड़की
- 2:28:36की भी इज्जत करे। उसकी आवाज में दर्द भी
- 2:28:39था और एक साफ सच्चाई भी। वो बोली इससे
- 2:28:43ज्यादा मुझे इससे कुछ नहीं चाहिए।
- 2:28:46चंद्रभान राठौड़ ने गहरी नजरों से विक्की
- 2:28:48को देखा और बोले
- 2:28:51देखा तुमने। जिसके साथ तुमने बदतमीजी
- 2:28:54[संगीत]
- 2:28:54की, उसने तुम्हें यूं ही माफ कर दिया। यह
- 2:28:59है इस लड़की की दरियादिली।
- 2:29:01एक पल का ठहराव और फिर उनकी आवाज कठोर हो
- 2:29:04गई। लेकिन मैं तुम्हें ऐसे ही नहीं छोड़
- 2:29:08सकता। कमरे का माहौल एकदम भारी हो गया।
- 2:29:11फिर चंद्रभान राठौड़ बोले तुम्हें इस
- 2:29:15हॉस्पिटल से निकाला जाता है। वो फिर बोले
- 2:29:20कांता यह सुनिश्चित करना तुम्हारी
- 2:29:24जिम्मेदारी है कि आज के बाद यह यहां नजर
- 2:29:27नहीं आना चाहिए। इसके बाद उनकी नजर डीन पर
- 2:29:31गई और तुम्हारे साथ क्या किया जाए। बत्रा
- 2:29:36के पैरों तले जमीन खिसक गई। वो तुरंत हाथ
- 2:29:39जोड़कर गिड़गिड़ाने लगा। मुझे माफ कर
- 2:29:43दीजिए राजा साहब। मैं विक्की को आपका
- 2:29:45रिश्तेदार जानकर कोई कार्यवाही नहीं कर
- 2:29:47सका। लेकिन मैं मानता हूं यह मेरी गलती
- 2:29:50है। चंद्रभान जी की आवाज और ठंडी हो गई।
- 2:29:53वो बोले एक जिम्मेदार पद पर होते हुए
- 2:29:58तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। तुम इस
- 2:30:02पद के लायक नहीं हो। मुझे माफ कर दीजिए।
- 2:30:06आगे से मैं कभी आपको शिकायत का मौका नहीं
- 2:30:08दूंगा। बोलते हुए बत्रा लगभग रो पड़ा।
- 2:30:11चंद्रभान जी की नजरों में अब घृणा साफ
- 2:30:14दिखाई दे रही थी। अब तुम इस लायक ही नहीं
- 2:30:17रहोगे कि किसी के साथ कुछ गलत कर सको। यह
- 2:30:22सुनते ही बत्रा सीधे उनके पैरों में गिर
- 2:30:24पड़ा। [संगीत] रहम कीजिए राजा साहब। मैं
- 2:30:26बर्बाद हो जाऊंगा। मैं विक्की का दबाव
- 2:30:28नहीं सह पाया इसलिए गलती कर बैठा।
- 2:30:31चंद्रभान जी की आवाज गूंज उठी। तुम्हारे
- 2:30:34कारण यह लड़की किस मेंटल प्रेशर से गुजरी
- 2:30:37होगी। इसका जरा भी एहसास है तुम्हें?
- 2:30:41यह सुनते ही डॉक्टर बत्रा तुरंत मेघा के
- 2:30:44पास पहुंचे और हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने
- 2:30:46लगे।
- 2:30:48मेघा बेटी मैं तुम्हारे बाप की उम्र का
- 2:30:50हूं। मुझे माफ कर दो। तुम कहोगी तो राजा
- 2:30:52साहब मुझे माफ कर देंगे। मेघा घबरा गई। एक
- 2:30:55कदम पीछे हटते हुए बोली ये आप क्या कर रहे
- 2:30:59हैं? प्लीज मेरे सामने आप हाथ मत जोड़िए।
- 2:31:01इसमें मैं क्या कर सकती हूं? डॉक्टर बत्रा
- 2:31:04लगभग टूट चुका था। तुम चाहोगी तो सब हो
- 2:31:07सकता है। बस एक बार राजा साहब से कह दो।
- 2:31:10बत्रा को पता [संगीत] नहीं यह क्यों यकीन
- 2:31:12हो गया कि अगर मेघा उसे माफ कर देगी तो
- 2:31:14राजा साहब शायद उसे कम से कम हॉस्पिटल से
- 2:31:17बाहर नहीं निकालेंगे। मेघा की नजरें फिर
- 2:31:20शौर्य को खोजने लगी। उसे अब भी उसी का
- 2:31:22सहारा चाहिए था। शौर्य उसकी उलझन समझ गया।
- 2:31:25वो धीरे-धीरे बत्रा के पास गया और शांत
- 2:31:28लेकिन मजबूत स्वर में बोला।
- 2:31:31डॉक्टर साहब मैं नहीं चाहता कि आपकी एक
- 2:31:33गलती के कारण यह हॉस्पिटल एक अच्छा डॉक्टर
- 2:31:36खो दे। कमरे में हलचल सी हुई और अगले ही
- 2:31:40पल शौर्य फिर बोला लेकिन गलती तो आपने की
- 2:31:44है। इसीलिए मैं राजा साहब से विनती करूंगा
- 2:31:47कि आपको हॉस्पिटल से ना निकाला जाए।
- 2:31:50डॉक्टर बत्रा की आंखों में उम्मीद चमक
- 2:31:52उठी। लेकिन शौर्य फिर से बोला पर आप इस
- 2:31:56हॉस्पिटल के डीन बनने के लायक नहीं है।
- 2:31:58आपको इस पद से हटाकर सिर्फ एक डॉक्टर के
- 2:32:01रूप में काम करने का मौका दिया जाए।
- 2:32:03चंद्रभान राठौड़ हल्की मुस्कान के साथ
- 2:32:06शौर्य की ओर देखने लगे। उन्हें शौर्य का
- 2:32:08इंसाफ पसंद आया। यह फैसला सजा भी है और
- 2:32:12सुधार का मौका भी। उन्होंने गंभीर स्वर
- 2:32:15में कहा
- 2:32:17बात सही है डॉक्टर बत्रा। तुम आज ही अपने
- 2:32:20डीन पद से इस्तीफा दोगे। अगर यहां रहना है
- 2:32:24तो सिर्फ एक डॉक्टर बनकर रह सकते हो। अब
- 2:32:28फैसला तुम्हारा है। डॉक्टर बत्रा को तो
- 2:32:32जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल गया था।
- 2:32:35वो झट से बोल पड़ा। मंजूर है राजा साहब।
- 2:32:38मुझे मंजूर है। राजा साहब के इशारे के साथ
- 2:32:41ही वो तुरंत वहां से निकल गया। जैसे डर हो
- 2:32:44कि कहीं फैसला बदल ना जाए। अब कमरे में
- 2:32:47सिर्फ एक झुका हुआ सिर बाकी था और वो है
- 2:32:49विक्की का। उसने हिम्मत जुटाई और बोला
- 2:32:53नाना जी प्लीज मुझे हॉस्पिटल से मत
- 2:32:55निकालिए। नाना जी प्लीज आप मुझे हॉस्पिटल
- 2:32:58से मत निकालिए। विक्की गिड़गिड़ा के बोला
- 2:33:01लेकिन राजा साहब की आवाज पत्थर जैसी सख्त
- 2:33:04रही। मैं यह बिल्कुल नहीं कर सकता। जो
- 2:33:09लड़कियों की इज्जत नहीं करता उसे मैं
- 2:33:12हरगिज़ माफ नहीं कर सकता। मेरे हॉस्पिटल
- 2:33:15में ऐसे डॉक्टर के लिए कोई जगह नहीं है।
- 2:33:19अब तुम जा सकते हो।
- 2:33:23बस एक फैसला और विक्की की दुनिया खत्म हो
- 2:33:26गई। वो समझ गया अब यहां कुछ नहीं हो सकता।
- 2:33:29वो हार का कड़वा घंट लेकर रह गया। लेकिन
- 2:33:32साथ ही उसकी आंखों में बदले की चिंगारी जल
- 2:33:34उठी। उसने घूर कर शौर्य को देखा और वहां
- 2:33:38से निकल गया। कमरे में अब भी सन्नाटा था
- 2:33:41जिसे तोड़ते हुए शौर्य ने कहा,
- 2:33:44ठीक है तो फिर अब मैं भी चलता हूं और
- 2:33:47मुड़कर वहां से जाने को हुआ। खबरदार अगर
- 2:33:51यहां से हिले भी तो पैर तोड़ दूंगा।
- 2:33:54चंद्रभान जी की गूंजती हुई आवाज ने सबको
- 2:33:57चौंका दिया। मेघा भी घबरा गई। वो तुरंत
- 2:34:00आगे आई और बोली सर इन सब में मेरे श्रवण
- 2:34:03भैया की कोई गलती नहीं है। इन्होंने तो बस
- 2:34:06मुझे बचाने के लिए मेघा की बात पूरी भी
- 2:34:09नहीं हुई थी कि अचानक चंद्रभान जी ने
- 2:34:11हल्की मुस्कान दबाते हुए कहा
- 2:34:14अच्छा अब तुम मुझे सिखाओगी।
- 2:34:18यह सुनते ही मेघा का चेहरा उतर गया। तभी
- 2:34:20शौर्य मुस्कुराते हुए बोला, "क्या दादा जी
- 2:34:24आप मेरी बहन को डरा रहे हैं।" यह सुनकर
- 2:34:27मेघा जैसे जम सी गई। उसकी नजर शौर्य और
- 2:34:30राजा साहब के बीच घूमने लगी। राजा साहब के
- 2:34:33चेहरे पर मुस्कान थी और शौर्य के चेहरे पर
- 2:34:36भी।
- 2:34:37क्या मुझे अपने पोते को डांटने के लिए
- 2:34:40तुमसे इजाजत लेनी पड़ेगी?
- 2:34:43चंद्रभान जी हंसते हुए बोले मेघा के लिए
- 2:34:46यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। तभी शौर्य
- 2:34:49ने मुस्कुराते हुए कहा इतना हैरान मत हो
- 2:34:53यह मेरे दादाजी हैं। मेघा बात को समझते
- 2:34:55हुए बोली [संगीत]
- 2:34:58तो आपका नाम शौर्य है। श्रवण नहीं। इस पर
- 2:35:01शौर्य ने हैरानी से पूछा। अरे तुम्हें
- 2:35:04कैसे पता?
- 2:35:06अगले ही पल मेघा ने कांता प्रसाद जी की ओर
- 2:35:08इशारा किया और बोली कल इन्होंने आपका नाम
- 2:35:11शौर्य लेकर पूछा था। यह सुनकर कांता
- 2:35:14प्रसाद ने मुस्कुराते हुए कहा अच्छा तो
- 2:35:18तुम्हें वो बात याद है मेघा हैरान थी कि
- 2:35:21शौर्य इतने बड़े परिवार से होने के बावजूद
- 2:35:23भिखारियों वाली जिंदगी क्यों जी रहा था।
- 2:35:26वो सब कुछ जानना चाहती थी। पर इस वक्त
- 2:35:29यहां सबके सामने वो कुछ नहीं पूछ सकती थी।
- 2:35:31इसीलिए उसे लगा कि अभी चुप रहना ही बेहतर
- 2:35:34होगा। इधर चंद्रभान जी भी शौर्य से बहुत
- 2:35:37कुछ पूछना चाहते थे। पर वह सब मेघा के
- 2:35:40सामने नहीं पूछ सकते थे। इसीलिए उन्होंने
- 2:35:42मेघा से कहा तुम्हें आगे से कोई परेशानी
- 2:35:46हो या कोई भी जरूरत हो तो सीधा कांता
- 2:35:50प्रसाद को फोन करना। तुम्हें शौर्य ने
- 2:35:54अपनी बहन माना है तो आज से तुम मेरी भी
- 2:35:57पोती हुई।
- 2:36:00राजा साहब की बात सुनकर मेघा की आंखों में
- 2:36:02आंसू आ गए। यह खुशी के आंसू [संगीत] थे।
- 2:36:05कहां तो उसका एक पुजारी बाबा के अलावा कोई
- 2:36:08रिश्तेदार नहीं था और आज उसे एक भाई के
- 2:36:10साथ-साथ दादा भी मिल गए थे। शौर्य ने जब
- 2:36:14उसकी आंखों में आंसू देखे तो वो उसके पास
- 2:36:16जाकर बोला यह मोती किस खुशी में बहा रही
- 2:36:19हो मेघा? इस पर मेघा अपने आंसू पोछते हुए
- 2:36:22बोली। कुछ नहीं भैया। मैंने कभी सपने में
- 2:36:26भी नहीं सोचा था कि ऊपर वाला मुझ पर इतना
- 2:36:29मेहरबान हो जाएगा कि एक साथ मुझे इतनी
- 2:36:31खुशियां दे देगा। इस पर शौर्य मेघा के सिर
- 2:36:34को थपथपाते हुए बोला बस कर अब मुझे भी
- 2:36:38रुलाएगी क्या अब कोई रोना धोना नहीं मेघा
- 2:36:41मुस्कुराते हुए बोली जी भैया चंद्रभान जी
- 2:36:45भी मेघा का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते
- 2:36:48हुए बोले और हां अभी मैं दो-चार दिन इसी
- 2:36:53हॉस्पिटल में हूं इसीलिए [संगीत] मुझसे
- 2:36:55मिलने आते रहना
- 2:36:58जी सर मेघा भी आदरपूक उनसे बोली
- 2:37:02सर नहीं दादा जी इतनी जल्दी भूल गई अभी
- 2:37:07मैंने क्या कहा था अब से तुम भी मेरी पोती
- 2:37:11हो चंद्रभान जी की बात सुनकर मेघा के
- 2:37:14चेहरे पर बड़ी सी स्माइल आ गई जी दादा जी
- 2:37:19चलो अब तुम जाओ मुझे इसकी कुछ खबर लेनी है
- 2:37:24इसीलिए यह थोड़ी देर बाद यहां से जाएगा
- 2:37:27कहते हुए चंद्रभान जी शौर्य को घूरने लगे
- 2:37:30वो शौर्य से जो बात करना चाहते थे वो मेघा
- 2:37:33के सामने नहीं हो सकती थी। मेघा राजा साहब
- 2:37:36का इशारा समझ गई इसीलिए वो उन्हें प्रणाम
- 2:37:38करके जीनत के साथ वार्ड से बाहर चली गई।
- 2:37:41जब शौर्य वहां अकेला रह गया तो कांता
- 2:37:44प्रसाद ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया।
- 2:37:46शौर्य समझ गया कि उसके दादाजी जरूर कोई
- 2:37:48सीरियस बात करने वाले हैं।
- 2:37:51तुमने शादी कर ली और मुझे बताया भी नहीं।
- 2:37:56चंद्रभान जी ने बिना किसी भूमिका के शौर्य
- 2:37:58से सीधा सवाल किया। इस पर शौर्य अचानक
- 2:38:01हैरान होकर बोला, यह आपको कैसे पता चला?
- 2:38:05विशालगढ़ के लोग मुझे राजा [संगीत] साहब
- 2:38:08कहते हैं तो मुझसे यह बात कैसे छुप सकती
- 2:38:12है? राजा साहब सीना तान के बोले तो शौर्य
- 2:38:15ने भी चुटकी लेते हुए कहा, "अच्छा, फिर तो
- 2:38:18आपको यह भी पता होगा कि मेरी शादी [संगीत]
- 2:38:20कैसे हुई है।" हां। चंद्रभान जी ने सहमति
- 2:38:24में सिर हिलाया।
- 2:38:26अब आप बताइए कि आप कैसे राजा हैं जिसके
- 2:38:28पोते की शादी जबरदस्ती हो गई और राजा साहब
- 2:38:31कुछ कर नहीं पाए। शौर्य भी अब मजाक के मूड
- 2:38:35में आ गया था। चंद्रभान [संगीत] जी
- 2:38:37बड़प्पन के साथ बोले
- 2:38:39तुमने बताया नहीं होगा कि तुम मेरे पोते
- 2:38:43हो। एक बार उनके [संगीत] सामने बता देते
- 2:38:46कि तुम कौन हो तो किसी की मजाल नहीं होती
- 2:38:50तुमसे जबरदस्ती करने की।
- 2:38:54पता नहीं दादा जी आप कौन से युग में जी
- 2:38:56रहे हैं। राजशाही चली गई है आपकी और आप
- 2:38:59अभी भी खुद को राजा समझ बैठे हैं। शौर्य
- 2:39:02विनोद भरे स्वर में बोला तो चंद्रभान जी
- 2:39:05हंस पड़े। कांता प्रसाद दोनों बाबा पोते
- 2:39:07की बात सुन रहे थे और उनकी बातों को एंजॉय
- 2:39:10कर रहे थे। उन्होंने बहुत दिनों बाद राजा
- 2:39:12साहब को इतना खुश देखा था। राजा साहब बात
- 2:39:16को बदलते हुए बोले। अच्छा छोड़ो इन बातों
- 2:39:20को। उसे मुझसे मिलाने कब ला रहे हो? क्या
- 2:39:25क्या कहा आपने? आपसे मिलवाने। वो मुझे
- 2:39:28भिखारी समझती है। मैं क्या बोलकर आपसे
- 2:39:31मिलवाने लाऊंगा? शौर्य हैरानी से बोला। तो
- 2:39:35तुमने उसे बताया क्यों नहीं कि तुम कौन
- 2:39:38हो। चंद्रभान सिंह संशय में थे कि शौर्य
- 2:39:42ने अपनी पत्नी को अपनी हकीकत क्यों नहीं
- 2:39:44बताई? इस पर शौर्य गंभीर स्वर में बोला।
- 2:39:48नहीं बता सकता दादा जी। मैं चाहता हूं कि
- 2:39:50वह मुझे पसंद करें बिना यह जाने कि मैं
- 2:39:53कौन हूं और क्या हूं। अगर उसे या उसके
- 2:39:56परिवार को मेरी हकीकत पता चल जाएगी तो फिर
- 2:39:58तो वो मुझे मेरी हैसियत देखकर अपना ही
- 2:40:01लेंगे पर वो मेरे पैसों के कारण होगा ना
- 2:40:04कि मेरे खुद के व्यक्तित्व को देखकर और
- 2:40:07मैं ऐसा नहीं चाहता। शौर्य ने दादा जी को
- 2:40:10पूरी बात समझाई। चंद्रभान जी को शौर्य की
- 2:40:13सोच पर गर्व हुआ। उन्हें एहसास हुआ कि
- 2:40:16शौर्य उस लड़की को पसंद करने लगा है। वो
- 2:40:19बोले अच्छा तो तुम्हें वह लड़की इतनी पसंद
- 2:40:23है कि तुम्हें उसके लिए भिखारी बने रहना
- 2:40:26कुबूल है।
- 2:40:28इस पर शौर्य ने अपने दिल की बात अपने
- 2:40:31दादाजी को बता दी। सच कहूं दादाजी तो
- 2:40:34शिप्रा में वो सारी खूबियां हैं जो मुझे
- 2:40:36अपनी पत्नी में चाहिए [संगीत] थी। इसीलिए
- 2:40:38मैं उसे खोना नहीं चाहता। पर मैं यह भी
- 2:40:40चाहता हूं कि वो मुझे पसंद करें। बिना यह
- 2:40:43जाने कि मेरी हैसियत क्या है। तभी
- 2:40:47चंद्रभान जी शौर्य को वर्न करते हुए बोले।
- 2:40:50हां हां वो सब तो ठीक है। पर मैं अपनी बहू
- 2:40:54से मिले बिना नहीं रह सकता। अब ये तुम्हें
- 2:40:58सोचना है कि तुम मेरी बहू को मुझसे कैसे
- 2:41:01मिलवाते हो। शौर्य चंद्रभान जी के जिद भरे
- 2:41:05स्वर को सुनकर बोला। आप क्यों मेरा घर
- 2:41:08बसने से पहले ही उजाड़ देना चाहते हैं?
- 2:41:11अगर तुम खुद मुझे मेरी बहू से नहीं
- 2:41:13मिलवाते हो तो मैं खुद ही उससे मिलाऊंगा।
- 2:41:17चंद्रभान जी ने शौर्य को एक बार फिर वर्न
- 2:41:19किया तो शौर्य ने तुरंत उन्हें समझाने की
- 2:41:22कोशिश की। आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे। मैं
- 2:41:25कोशिश करूंगा कि किसी तरह आपको उससे मिलवा
- 2:41:28दूं। पर थोड़े समय के लिए आप धैर्य रखिए।
- 2:41:31शौर्य की बात सुनकर चंद्रभान जी बोले ठीक
- 2:41:34है अगर तुम कहते हो तो मैं कुछ समय के लिए
- 2:41:38तुम्हारी बात मान जाता हूं पर सोच लेना
- 2:41:42ज्यादा समय तक मैं तुम्हारे झांसे में
- 2:41:45नहीं रहूंगा इस पर शौर्य थोड़ा रुका और
- 2:41:48फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला ठीक
- 2:41:51है मैं कोई जुगाड़ करूंगा पर कह रहा हूं
- 2:41:54यह ठीक बात नहीं है आप अपने पोते को
- 2:41:56ब्लैकमेल कर रहे हैं शौर्य कसमसाते हुए
- 2:41:59बोला तो राजा साहब साहब ने मुस्कुराते हुए
- 2:42:01अपना फरमान सुना दिया। अब तुम्हें जो
- 2:42:05समझना है समझो। पर मैंने तुम्हें जो कह
- 2:42:08दिया सो कह दिया। शौर्य चंद्रभान जी से
- 2:42:12विदा लेकर मेघा के हॉस्पिटल पहुंचा और उसे
- 2:42:14समझाया कि फिलहाल वो शौर्य की हकीकत किसी
- 2:42:17को नहीं बताएगी। मेघा उसकी स्थिति समझ गई
- 2:42:20और शौर्य की बात मान गई। मेघा से विदा
- 2:42:23लेकर शौर्य शिप्रा के ऑफिस के लिए निकल
- 2:42:25गया। आज उसे शिप्रा के साथ बिग बुल के
- 2:42:27ऑफिस उसकी मीटिंग के लिए भी जाना था।
- 2:42:30शौर्य शिप्रा के ऑफिस पहुंचा। अभी 3:00
- 2:42:32बजे थे इसीलिए उसके पास काफी समय था। वो
- 2:42:35अभी शिप्रा को फोन करके बताने वाला था कि
- 2:42:37वो ऑफिस पहुंच गया है। पर उससे पहले ही
- 2:42:40उसके पास शिप्रा का कॉल आ गया। शौर्य ने
- 2:42:43कॉल उठाया। दूसरी तरफ से शिप्रा ने पूछा।
- 2:42:46हेलो श्रवण। तुम कब तक आओगे? पता है ना आज
- 2:42:50बिग बुल के ऑफिस मीटिंग के लिए भी जाना
- 2:42:52है।
- 2:42:53मैं आ गया हूं। यहीं ऑफिस की कैंटीन में
- 2:42:55हूं। शौर्य ने जवाब दिया,
- 2:42:57अच्छा तो फिर ठीक है। हम आधे घंटे में बिग
- 2:43:00बुल के लिए निकलेंगे।
- 2:43:02इतना बोलकर शिप्रा ने कॉल काट दिया। शौर्य
- 2:43:04कैंटीन के काउंटर पर पहुंचा और अपने लिए
- 2:43:06एक प्लेट पास्ता ऑर्डर कर दिया और अपनी
- 2:43:08प्लेट लेकर वो खिड़की के पास वाले टेबल पर
- 2:43:11बैठकर खाने लगा। तभी उसने देखा एक चमचमाती
- 2:43:15हुई कार ऑफिस के गेट से अंदर आई। गेट खुला
- 2:43:18और जो शख्स बाहर निकला उसे देखकर शौर्य
- 2:43:20हैरान रह गया। यह कोई और नहीं मुख्तार भाई
- 2:43:24था। उसके पीछे ही रजत भी कार से बाहर आ
- 2:43:27गया था। दोनों भाइयों को साथ देखकर शौर्य
- 2:43:30के कान खड़े हो गए। रजत के पीछे कार से
- 2:43:33कल्ला भी बाहर आया। शौर्य ने जल्दी से
- 2:43:35अपना खाना समाप्त किया और कैंटीन से बाहर
- 2:43:38आ गया। जैसे ही वह बाहर आया उसे गिरधर
- 2:43:41काका वहीं नजर आ गए। शौर्य उनके पास
- 2:43:43पहुंचा और उसने पूछा
- 2:43:46यह मुख्तार यहां क्या करने आया है? साहब
- 2:43:49ने इसके खिलाफ जो केस किया था वो वापस ले
- 2:43:52लिया है जिसके कारण इसका भाई जेल से छूट
- 2:43:55गया है। हो सकता है धन्यवाद करने आया हो।
- 2:43:58साहब का मेरे पास फोन आया था कि उनको लेकर
- 2:44:01उनके ऑफिस में पहुंचूं। गिरधर ने कारण
- 2:44:04बताया। जैसे ही शौर्य ने यह सुना उसने कहा
- 2:44:08काका मैं आपके मोबाइल पर कॉल लगाता हूं।
- 2:44:10अब कॉल उठाकर मोबाइल अपनी जेब में रख
- 2:44:12लीजिएगा। मैं इनकी बात सुनना चाहता हूं कि
- 2:44:14यह राय साहब से क्या बात करते हैं। इन
- 2:44:17बदमाशों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
- 2:44:20गिरधर समझता था कि मुख्तार के कारण ही आज
- 2:44:22शौर्य यहां है। ना वो जबरदस्ती शिप्रा से
- 2:44:25शौर्य की शादी कराता ना ही शौर्य यहां
- 2:44:27होता। शौर्य ने जल्दी से गिरधर के फोन पर
- 2:44:30कॉल लगाया। गिरधर ने कॉल उठाकर मोबाइल
- 2:44:33अपनी शर्ट की जेब में रख लिया। अब तक
- 2:44:35मुख्तार भाई भी गिरधर के पास आ गया था।
- 2:44:38गिरधर ने मुख्तार को सलाम किया और बोला
- 2:44:41राय साहब अपने ऑफिस में आपका इंतजार कर
- 2:44:44रहे हैं। आप मेरे साथ चलिए। मुख्तार अपने
- 2:44:47भाई रजब के साथ गिरधर के पीछे हो लिया।
- 2:44:49गिरधर उन दोनों को लेकर बलवंत राय के ऑफिस
- 2:44:52में पहुंचा। बलवंत राय का ऑफिस बहुत बड़ा
- 2:44:55था। जिसमें एक साइड में सोफे के साथ टेबल
- 2:44:57भी लगा हुआ था। बलवंत राय पहले से ही
- 2:45:00सिंगल सीट वाले सोफे पर बैठे हुए थे।
- 2:45:03जब कोई कमीना शरीफ बनने का ढोंग करे तो
- 2:45:06उसके हावभाव देखने लायक होते हैं। मुख्तार
- 2:45:09भाई नकली सी हंसी-हंसते हुए बलवंत राय के
- 2:45:12सामने वाले सोफे पर जाकर बैठ गया। रजत ने
- 2:45:15भी भला मानस बनने के चलते बलवंत राय के
- 2:45:18पैर छूकर प्रणाम किया। बलवंत राय मना करते
- 2:45:21रहे पर वो माना नहीं। प्रणाम करने के बाद
- 2:45:24रजत जाकर मुख्तार भाई के पास बैठ गया। रजत
- 2:45:27के खिलाफ केस वापस करवाकर मुख्तार ने जीत
- 2:45:30हासिल तो कर ली थी। लेकिन यह एक अधूरी जीत
- 2:45:33थी क्योंकि सिर्फ उनकी साजिश कामयाब हुई
- 2:45:35थी लेकिन ख्वाहिश अभी भी हार रही थी।
- 2:45:38शिप्रा को हासिल करने की ख्वाहिश जिसने एक
- 2:45:41खतरनाक डॉन और उसके लफंगे भाई को बलवंत
- 2:45:44राय के पैर छूने पर मजबूर कर दिया था।
- 2:45:46चाशनी में डुबोए मुस्कुराते चेहरे लिए
- 2:45:49मुख्तार और रजत बलवंत राय के सामने उनके
- 2:45:51ऑफिस में बैठे हुए थे। मुख्तार भाई का
- 2:45:54बदला रूप देखकर कड़क बलवंत राय का रुख भी
- 2:45:57उसके लिए थोड़ा नरम हो गया। राय साहब ने
- 2:46:00गिरधर को इशारा किया तो गिरधर ने किसी को
- 2:46:02चाय नाश्ता ऑफिस में भेजने को कहा और तभी
- 2:46:05मुख्तार भाई ने बात की शुरुआत की।
- 2:46:08आपका बहुत धन्यवाद राय साहब जो आपने हमारी
- 2:46:13बात मान ली रजत भी अपने किए पर बहुत
- 2:46:17शर्मिंदा है। वो आपसे माफी मांगना चाहता
- 2:46:21है। इसीलिए मैं इसे अपने साथ ले आया। रजत
- 2:46:26जेल से छूट गया था लेकिन वह अभी भी शिप्रा
- 2:46:28की दीवानगी में कैद था। इसीलिए मुख्तार को
- 2:46:31यह फिक्र लगातार सताई जा रही थी कि कहीं
- 2:46:33रजत फिर से कोई ऐसी हरकत ना कर बैठे जिससे
- 2:46:36उसे कानून के शिकंजे से बाहर निकालना
- 2:46:39नामुमकिन हो जाए। इसीलिए वह बलवंत राय से
- 2:46:42शिप्रा और रजत के रिश्ते की बात करके रजत
- 2:46:45के दिल में एक उम्मीद जगाए रखना चाहता था।
- 2:46:48हां अंकल आप मुझे माफ कर दीजिए। मैंने जो
- 2:46:52भी किया मैं उसके लिए दिल से सॉरी बोलता
- 2:46:54हूं। हाथ जोड़कर रजत बहुत हमंब्ल बनने की
- 2:46:58कोशिश कर रहा था। हां राय साहब यह सच में
- 2:47:02बहुत शर्मिंदा है। मैं तो चाहता था कि
- 2:47:05शिप्रा बिटिया को अपने घर की बहू बनाकर
- 2:47:09अपने किए को ठीक कर पाऊं। पर शायद किस्मत
- 2:47:13को यह मंजूर नहीं था। इसीलिए शिप्रा इस
- 2:47:16रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुई।
- 2:47:20मुख्तार अफसोस जाहिर करते हुए बोला तो
- 2:47:22बलवंत राय ने मुख्तार को तसल्ली देने के
- 2:47:25भाव से कहा आजकल के बच्चों के दिमाग का
- 2:47:28पता नहीं क्या चलता रहता है। मैं फिर से
- 2:47:30शिप्रा को समझाने की कोशिश करूंगा। मैं भी
- 2:47:33समझता हूं कि उस भिखारी के साथ उसकी कोई
- 2:47:35जिंदगी नहीं है। सही बात है राय साहब।
- 2:47:39आजकल के बच्चों के दिमाग में अलग ही फितूर
- 2:47:43रहता है। और फिर रजत ने उसके साथ गलत भी
- 2:47:46तो किया था। देखा जाए तो उसका गुस्सा होना
- 2:47:50लाजमी है। इसीलिए हम शिप्रा बिटिया को भी
- 2:47:54दोष नहीं दे सकते। बस हम अब यही कोशिश कर
- 2:47:58सकते हैं कि चीजें थोड़ी बेहतर हो जाए।
- 2:48:01मुख्तार अपने भाई की गलती बताकर कहीं ना
- 2:48:04कहीं यह दिखाना चाहता था कि जो भी हुआ है,
- 2:48:06उसके लिए उसका भाई जिम्मेदार है। पर अब
- 2:48:09उसे अपनी गलती का एहसास है। राय साहब को
- 2:48:12भी मुख्तार भाई सच बोलता प्रतीत हो रहा
- 2:48:15था। अब कहीं ना कहीं राय साहब की नजर में
- 2:48:18मुख्तार उतना गलत नहीं लग रहा था।
- 2:48:21अरे वाह, यह मुख्तार भाई डॉन कैसे बन गए?
- 2:48:25इन्हें तो संत महात्मा होना चाहिए था।
- 2:48:27क्या प्रवचन दे रहे हैं? बुड्ढा तो एकदम
- 2:48:30सेट हो गया है। काश अब मेरी बुलबुल भी सेट
- 2:48:33हो जाए तो मजा आ जाएगा। रजत अपने भाई के
- 2:48:36ढोंग को देखकर मन ही मन बुदबुदा रहा था।
- 2:48:39उसी समय कमरे का दरवाजा खुला और राधिका ने
- 2:48:41धड़ाते हुए कमरे में प्रवेश किया। राधिका
- 2:48:44को पता नहीं था कि कमरे में उसके नाना जी
- 2:48:47के अलावा भी कोई और मौजूद है। जब उसने
- 2:48:50मुख्तार भाई को वहां बैठे देखा तो सकपका
- 2:48:52गई। वो जल्दी में कमरे में आ तो गई पर
- 2:48:55मुख्तार को देखकर वहीं ठिठक गई। बलवंत राय
- 2:48:58ने जब राधिका को देखा तो बोले अब जब आ ही
- 2:49:02गई हो तो रुक क्यों गई? आ जाओ और बताओ
- 2:49:04क्या बात है? राधिका आकर बलवंत राय के पास
- 2:49:07बैठ गई। बलवंत राय ने मुख्तार से उसका
- 2:49:10परिचय कराया। यह राधिका है मेरी नातिन।
- 2:49:14फिर राधिका से बोले,
- 2:49:16बेटे इन्हें नमस्ते करो। यह मुख्तार भाई
- 2:49:18हैं और यह इनके भाई रजत। राधिका ने
- 2:49:22मुख्तार को नमस्ते किया। अब बताओ कैसे आना
- 2:49:25हुआ? बलवंत राय ने राधिका को देखते हुए
- 2:49:27पूछा। नाना जी कल शाम के लिए मम्मी ने कहा
- 2:49:31था कि राजकमल होटल के मेन स्वीट को बुक कर
- 2:49:34देंगी। पर उन्होंने अभी तक किया नहीं है।
- 2:49:36मैंने अपने सभी दोस्तों को वहां इनवाइट कर
- 2:49:38दिया है। अब अगर वो स्वीट बुक नहीं हुआ तो
- 2:49:41सब गड़बड़ हो जाएगी। राधिका शिकायती लहजे
- 2:49:44में बोली अच्छा तो इसीलिए नाराज हो। चिंता
- 2:49:47मत करो मैं देख लेता हूं। बलवंत राय
- 2:49:50मुस्कुराते हुए बोले। फिर कुछ ध्यान में
- 2:49:52आते ही उन्होंने मुख्तार भाई से कहा।
- 2:49:55मुख्तार भाई आप कल शाम को मेरी नातिन के
- 2:49:57बर्थडे में आमंत्रित हैं। आप आएंगे तो
- 2:49:59मुझे खुशी होगी। अरे क्यों नहीं राय साहब
- 2:50:03मैं जरूर आऊंगा। मुख्तार भाई मुस्कुराते
- 2:50:06हुए बोला
- 2:50:08और हां आपको भी आना है। राधिका रजत को
- 2:50:11देखते हुए बोली। इस पर रजत ने राधिका को
- 2:50:13गौर से देखते हुए कहा। जरूर जब आप कह रही
- 2:50:17हैं तो मैं जरूर आऊंगा। इसके बाद राधिका
- 2:50:19कमरे से बाहर चली गई। मुख्तार भाई भी अपनी
- 2:50:22जगह से उठे और राय साहब से इजाजत मांगते
- 2:50:24हुए कहा। आपसे मिलकर अच्छा लगा राय साहब।
- 2:50:29अब मैं चलता हूं। आपसे रिक्वेस्ट है कि
- 2:50:32अगर आपके दिल में अभी भी कोई गिला शिकवा
- 2:50:35हो तो मुझे माफ कीजिएगा।
- 2:50:38क्या बात करते हैं? अब बिसारिए पुरानी
- 2:50:41बातों को और हां कल शाम को होटल राजकमल
- 2:50:43में आना मत भूलिएगा। बलवंत राय फिर से
- 2:50:46मुख्तार को याद दिलाते हुए बोले। इसके बाद
- 2:50:48मुख्तार अपने भाई रजत के साथ कमरे से बाहर
- 2:50:51आ गया। मुख्तार रजत के साथ लिफ्ट के पास
- 2:50:54आया और लिफ्ट में सवार हुआ। जैसे ही रजत
- 2:50:57की आंखें लिफ्ट में पहले से मौजूद शख्स पर
- 2:50:59पड़ी तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
- 2:51:03शिप्रा अपने सामने रजत को देखकर हैरान रह
- 2:51:05गई थी। उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि
- 2:51:08वो रजत को यहां अपने ऑफिस में देखेगी। रजत
- 2:51:11ने लिफ्ट में जिसे देखा था वो कोई और नहीं
- 2:51:14शिप्रा ही थी।
- 2:51:16और कैसी हो शिप्रा बेटी? मुख्तार
- 2:51:20मुस्कुराने की कोशिश करता हुआ बोला।
- 2:51:22शिप्रा ने मुख्तार को कोई रिप्लाई नहीं
- 2:51:24किया बल्कि उसने अपनी नजर फेर ली। यह
- 2:51:27देखकर रजत ने कहा, मैं जानता हूं तुम
- 2:51:30मुझसे नाराज हो। पर वो बात अब बीत गई। अब
- 2:51:33हम एक नई शुरुआत करते हैं। मैं तुमसे अपने
- 2:51:35किए की माफी मांगता हूं। रजत शिप्रा के
- 2:51:38सामने शरीफ बनने की कोशिश करता हुआ बोला।
- 2:51:42ठीक है। अब इसकी कोई जरूरत नहीं है। बस यह
- 2:51:45उम्मीद करती हूं कि आगे से तुम मुझसे कोई
- 2:51:47वास्ता रखने की कोशिश नहीं करोगे। शिप्रा
- 2:51:50एक टूक जवाब देते हुए बोली, "जत को उम्मीद
- 2:51:53नहीं थी कि अभी भी शिप्रा की अकड़ गई नहीं
- 2:51:55होगी। एक भिखारी से शादी होने के बावजूद
- 2:51:58उसकी अकड़ में कोई कमी नहीं आई थी। उसने
- 2:52:01तो ऐसे बिहेव किया जैसे उसके साथ कोई बड़ी
- 2:52:03घटना हुई ही नहीं है। रजत मुख्तार की तरफ
- 2:52:06देखने लगा। जैसे उससे कह रहा हो कि क्या
- 2:52:08फायदा हुआ शिप्रा की शादी एक भिखारी से
- 2:52:11कराने का। इसकी अकड़ तो अभी भी पहले जैसी
- 2:52:14ही है। अभी रजत शिप्रा से कुछ और भी कहने
- 2:52:17वाला था कि तभी ग्राउंड फ्लोर आ गया और
- 2:52:19लिफ्ट का दरवाजा खुल गया। शिप्रा जल्दी से
- 2:52:22लिफ्ट से बाहर आ गई। वो रजत के सामने और
- 2:52:25नहीं रहना चाहती थी। रजत भी लिफ्ट से बाहर
- 2:52:28आया और पीछे से पुकारते हुए बोला अरे
- 2:52:30शिप्रा सुनो तो। मैं समझता हूं कि मैंने
- 2:52:33तुम्हारे साथ बहुत गलत किया है। लेकिन
- 2:52:35उसका कारण है कि मैं तुम्हें बहुत पसंद
- 2:52:38करता हूं। इतना बोलते हुए रजत शिप्रा के
- 2:52:40सामने आकर खड़ा हो गया और बोला देखो मैं
- 2:52:44जानता हूं कि मेरे ही कारण भैया ने
- 2:52:45जबरदस्ती तुम्हारी शादी भिखारी से करवा
- 2:52:48दी। उसके बावजूद मैं तुमसे शादी करने को
- 2:52:50तैयार हूं।
- 2:52:52रजत की बात खत्म होते ही शिप्रा ने रजत के
- 2:52:55सामने अपना व्यू स्पष्ट कर दिया। रजत मेरा
- 2:52:59रास्ता छोड़ो। मैंने पहले ही क्लियर कर
- 2:53:01दिया था कि मैं तुम्हारे खिलाफ केस वापस
- 2:53:03ले सकती हूं। पर तुमसे शादी नहीं कर सकती।
- 2:53:06और दूसरी बात अब मुझे कोई और शादी करनी ही
- 2:53:09नहीं है। तभी मुख्तार ने भी शिप्रा को
- 2:53:12समझाने की कोशिश करते हुए कहा देखो शिप्रा
- 2:53:16तुम्हारी शादी में सबसे बड़ी गलती मेरी थी
- 2:53:20और मैं अपनी उस गलती का प्रायश्चित करना
- 2:53:22चाहता हूं।
- 2:53:24देखिए आपको शायद कोई गलतफहमी हो गई है।
- 2:53:27मेरी लाइफ जैसी भी है मैं उससे खुश हूं और
- 2:53:30मैं अपने पति से भी खुश हूं। इसीलिए दूसरी
- 2:53:33शादी नहीं करना चाहती। शिप्रा मुख्तार भाई
- 2:53:36को जवाब देती हुई बोली मुख्तार भाई को
- 2:53:38विश्वास नहीं हो रहा था कि शिप्रा जो कह
- 2:53:40रही थी उसके कोई मायने भी हैं। कोई कैसे
- 2:53:43किसी भिखारी से शादी होने के बाद खुश रह
- 2:53:46सकता है। देखो अभी भी रजत तुमसे शादी करने
- 2:53:50को तैयार है। अपनी जिद छोड़ो और रजत के
- 2:53:54साथ अपना घर बसा लो। मुख्तार भाई अभी भी
- 2:53:57हार मानने को तैयार नहीं थे। उसे भी समझ
- 2:54:00नहीं आ रहा था कि आखिर शिप्रा की अकड़ अभी
- 2:54:02भी जस की तस कैसे है। शिप्रा की जगह कोई
- 2:54:05और लड़की होती तो अब तक चकनाचूर हो चुकी
- 2:54:08होती। पर एक भिखारी से शादी होने के बाद
- 2:54:10भी शिप्रा के स्वभाव में कोई परिवर्तन
- 2:54:13नहीं आया था। शौर्य भी उसी राहदारी में
- 2:54:16खड़ा था जिस लिफ्ट से शिप्रा बाहर आई थी।
- 2:54:19वो उसके पास यह सोच कर आ गया था कि शायद
- 2:54:21उसकी जरूरत पड़े। शिप्रा की निगाह भी
- 2:54:24शौर्य पर पड़ गई थी। मुख्तार भाई और रजत
- 2:54:27पर उसे गुस्सा भी आ रहा था जो उसके पीछे
- 2:54:29ही पड़े थे। उसने सोचा आज अगर वह चुप रह
- 2:54:32गई तो आगे भी यह दोनों भाई उसके पीछे पड़े
- 2:54:35रहेंगे। इसीलिए जवाब तो उसे देना पड़ेगा।
- 2:54:37जिससे आगे से वो उससे शादी की बात करना
- 2:54:40भूल ही जाएं। यह सोचकर उसने कहा आपसे
- 2:54:44किसने कहा कि मुझे दोबारा शादी करनी है जो
- 2:54:46आप मेरे पीछे पड़े हैं। मैं आपको बता दूं
- 2:54:49मैं अपनी जिंदगी में बहुत खुश हूं और आपको
- 2:54:52यह भी बता दूं कि मैं अपने पति से भी बहुत
- 2:54:54खुश हूं। इसीलिए भी मुझे किसी और शादी की
- 2:54:56जरूरत नहीं है। मुख्तार भाई का दिमाग चकरा
- 2:54:59गया। उसे विश्वास नहीं हुआ तो वो
- 2:55:01मुस्कुराते हुए बोला
- 2:55:04तुम मजाक अच्छा कर लेती हो। कोई अपने
- 2:55:08भिखारी पति से कैसे खुश हो सकता है।
- 2:55:12दूसरों का पता नहीं पर मैं अपने पति से
- 2:55:14खुश हूं। अगर आपको विश्वास नहीं है तो मैं
- 2:55:17अभी आपको उससे मिलवा भी सकती हूं। शिप्रा
- 2:55:20मुख्तार को जलाने की नियत से बोली तो जवाब
- 2:55:22में मुख्तार भी तंज कसते हुए बोला हां अब
- 2:55:26तो मुझे उससे मिलना ही पड़ेगा। मैं भी तो
- 2:55:30मिलूं तुम्हारे उस भोलेभाले पति से। देखूं
- 2:55:33तो सही इतने दिनों में ऐसा क्या बदल गया
- 2:55:37उस भिखारी में जो तुम्हें वह पसंद आ गया
- 2:55:40है। ठीक है। जब आप उससे मिलना चाहते हैं
- 2:55:43तो मैं अभी आपको अपने पति से मिलवा देती
- 2:55:46हूं। शिप्रा की बात सुनकर मुख्तार चारों
- 2:55:48ओर देखने लगा। पर उसे वो भिखारी नजर नहीं
- 2:55:51आया। वो दोबारा शिप्रा की तरफ घूमा और
- 2:55:54बोला कहां है तुम्हारा पति सामने तो लाओ।
- 2:55:59यह तो शुक्र था कि अभी राहदारी में ज्यादा
- 2:56:01लोग नहीं थे। शिप्रा मुख्तार भाई के साइड
- 2:56:04से निकल कर शौर्य के पास पहुंची और उसकी
- 2:56:06बाह पकड़ कर उसे मुख्तार भाई के सामने
- 2:56:08लाकर खड़ा करते हुए बोली
- 2:56:12आपको बहुत शौक है ना मेरे पति से मिलने
- 2:56:14का? तो मिलिए मेरे पति से। यह रहा आपके
- 2:56:17सामने। मुख्तार भाई का तो दिमाग हिल गया।
- 2:56:21उसने तो शिप्रा की शादी एक भिखारी से कराई
- 2:56:24थी। पर यह तो किसी फिल्मी हीरो की तरह
- 2:56:27स्मार्ट है। यह कैसे संभव हो सकता है?
- 2:56:31सिर्फ मुख्तार ही नहीं रजत भी शौर्य को
- 2:56:33देखकर आश्चर्यचकित था। दूसरी तरफ शौर्य
- 2:56:36बड़ा खुश था। शिप्रा का उसे अपने पति के
- 2:56:39रूप में मुख्तार के सामने खड़ा करना उसे
- 2:56:41बहुत ही रोमांचित कर रहा था। शौर्य एक कदम
- 2:56:44और आगे बढ़कर बोला,
- 2:56:47"आप नाहक की शिप्रा का रास्ता रोक कर उसे
- 2:56:49परेशान कर रहे हैं। आपसे विनती है कि आप
- 2:56:51शिप्रा का रास्ता छोड़ दें। इस पर मुख्तार
- 2:56:54शौर्य को झड़कता हुआ बोला ए हीरो ये जो
- 2:56:58तुम शिप्रा का पति बनकर खुश हो यह सब मेरे
- 2:57:01कारण ही संभव हुआ है।
- 2:57:04आप मेरी बात ना ही करें तो अच्छा है। आपने
- 2:57:06मेरी शादी शिप्रा से कराकर हम पर कोई
- 2:57:09एहसान नहीं किया है। उल्टा आपने तो यह सब
- 2:57:11शिप्रा से बदला लेने के लिए किया था। है
- 2:57:14ना? शौर्य मुख्तार भाई को देखते हुए बोला।
- 2:57:17इस पर मुख्तार ने शक भरी नजरों से शौर्य
- 2:57:20की तरफ देखते हुए कहा। पर मैंने जिससे
- 2:57:22शिप्रा की शादी करवाई थी वो तुम नहीं थे।
- 2:57:26उसकी तो बड़ी-बड़ी दाढ़ी थी। अरे अब दाढ़ी
- 2:57:29ऐसी चीज तो है नहीं जिसे हम साफ भी ना कर
- 2:57:32सकें। और अब जब हम अपने स्वरूप में आपके
- 2:57:34सामने खड़े हैं तो मानना ना मानना आपका
- 2:57:37काम है। और प्लीज आप मेरी वाइफ का रास्ता
- 2:57:40मत रोकिए। उसे अभी बहुत काम है। इसीलिए अब
- 2:57:43अगर आपकी इजाजत हो तो हम यहां से [संगीत]
- 2:57:45जाएं। इतना बोलकर शौर्य शिप्रा के साथ
- 2:57:48वहां से बाहर की तरफ निकल गया। मुख्तार
- 2:57:51भाई किसी स्टैचू की तरह अपनी जगह खड़े ही
- 2:57:53रह गया। रजत को अपने भाई पर गुस्सा आ रहा
- 2:57:56था कि उसने तो कहा था कि शिप्रा की शादी
- 2:57:58एक भिखारी से करवाई है। पर शिप्रा का जो
- 2:58:01पति है वो तो किसी भी एंगल से भिखारी नहीं
- 2:58:03लग रहा। इतने हैंडसम लड़के से शादी होने
- 2:58:06के बाद शिप्रा क्यों उससे तलाक लेना
- 2:58:08चाहेगी? उसके अंदर जो एक उम्मीद थी
- 2:58:11[संगीत] कि देर सवेर शिप्रा उससे शादी के
- 2:58:13लिए तैयार हो जाएगी। अब वो टूटने लगी थी।
- 2:58:16शिप्रा की शादी एक भिखारी से करवाने की
- 2:58:19चाल अब बनती जा रही थी मुख्तार के जी का
- 2:58:21जंजाल। शौर्य के रियल अवतार को देखकर
- 2:58:24मुख्तार पगला सा गया था। रजत यह वो भिखारी
- 2:58:29नहीं हो सकता। लगता है बुड्ढा बलवंत डबल
- 2:58:32गेम खेल रहा है। खानदान की इज्जत बचाने के
- 2:58:36लिए भिखारी को गायब करवा दिया। और एक नए
- 2:58:40चिकने को शिप्रा का खसम बना दिया। और शायद
- 2:58:44इसीलिए उस लड़की ने इतनी आसानी से केस
- 2:58:48वापस ले लिया।
- 2:58:50मुख्तार रजत को बार-बार यकीन दिलाने की
- 2:58:52कोशिश कर रहा था क्योंकि शिप्रा के तेवर
- 2:58:54देखकर अंदर ही अंदर मुख्तार का खून खौल
- 2:58:57रहा था। उसे खुद यकीन नहीं हो रहा था कि
- 2:59:00यह जो अभी शिप्रा के साथ यहां से निकला है
- 2:59:03वो शिप्रा का पति है। कहां वो भिखारी और
- 2:59:05कहां यह?
- 2:59:07मुख्तार दूर तक दोनों को जाते हुए देख रहा
- 2:59:10था।
- 2:59:11जबकि रजत की गुसैल नजर मुख्तार पर ही थी।
- 2:59:14उसके अंदर एक वैक्यूम सा बन रहा था।
- 2:59:18शिप्रा के जाने के बाद मुख्तार भी
- 2:59:20बिल्डिंग से बाहर चल दिया और रजत भी अपने
- 2:59:22पैर पटकता हुआ मुख्तार के पीछे हो लिया।
- 2:59:25बिल्डिंग से बाहर आते ही कल्ला मुख्तार की
- 2:59:28कार ले आया। मुख्तार के बाद रजत भी कार
- 2:59:30में बैठा और गुस्से में जोर से दरवाजा बंद
- 2:59:33किया। तभी कल्ला ने कार को आगे बढ़ा दिया।
- 2:59:36जैसे ही कार मेन रोड पर आई, रजत फट पड़ा।
- 2:59:39क्या भैया आप मेरी साइड हो या शिप्रा की
- 2:59:43जिससे आपने शिप्रा की शादी करवाई है। किस
- 2:59:45एंगल से वो आपको भिखारी नजर आ रहा था?
- 2:59:48आपने सोचा एक भिखारी से शादी के बाद
- 2:59:50शिप्रा टूट जाएगी। लेकिन यह तो उल्टा हो
- 2:59:53गया। आप ही बताइए ऐसा हैंडसम पति पाने के
- 2:59:55बाद क्या शिप्रा किसी और से शादी करेगी?
- 2:59:58नहीं करेगी।
- 3:00:00इतना हाइपर होने की जरूरत नहीं है। उसे
- 3:00:04देखकर मैं खुद हैरान हूं। मेरी मानो वो
- 3:00:07भिखारी नहीं कोई और है। अरे इतने कम दिनों
- 3:00:12में एक भिखारी में इतना चेंज कैसे आ सकता
- 3:00:15है? मुख्तार को अब खुद पर डाउट होने लगा
- 3:00:18था। क्या सच में उसने उस दिन उस भिखारी पर
- 3:00:21ध्यान नहीं दिया था या शाम का समय होने के
- 3:00:23कारण उसे कुछ समझ ही नहीं आया था। मुख्तार
- 3:00:26ने अपनी बात की पुष्टि करने के लिए कल्ला
- 3:00:28से पूछा। क्यों कल्ला? तुम भी तो उस दिन
- 3:00:32हमारे साथ थे। तुमने उस भिखारी को बड़े
- 3:00:35करीब से देखा था। तो बताओ क्या उस दिन
- 3:00:38वाले भिखारी में और आज वाले लड़के में कोई
- 3:00:41मेल है? भाई मैं खुद हैरान हूं। कहां उस
- 3:00:45दिन वाला भिखारी और कहां आज का है चिकना।
- 3:00:48या तो वो जानबूझकर उस दिन भिखारी बना हुआ
- 3:00:50था या फिर शिप्रा ने उसे पूरी तरह बदल
- 3:00:53दिया है। कल्ला के शक जताने पर मुख्तार
- 3:00:56तुरंत बोल पड़ा। शिप्रा ने उसका रूप बदल
- 3:00:59दिया है या अपना कसम ही बदल दिया है। अरे
- 3:01:03कोई कितना चेंज हो गया भैया? शकल सूरत
- 3:01:06पहनावा इन चीजों में चेंज लाया जा सकता
- 3:01:08है। पर बातचीत और व्यवहार को बदलना इतना
- 3:01:10आसान नहीं होता। रजत मानने को तैयार नहीं
- 3:01:14था कि मुख्तार से गलती नहीं हुई है। वो तो
- 3:01:16अब सारी ही गलती मुख्तार पर डाल रहा था।
- 3:01:19तभी मुख्तार को कुछ ध्यान आया और वह बोला
- 3:01:22जब तुम शिप्रा को उठाने मंदिर गए थे तब
- 3:01:26तुम भी तो मिले थे उस भिखारी से। उसी ने
- 3:01:29तो तुम्हें पुलिस के हवाले किया था ना।
- 3:01:32तो अब तुम खुद बताओ क्या उस भिखारी की
- 3:01:35तुलना तुम आज वाले लड़के से कर सकते हो?
- 3:01:39रजत एकदम से जैसे फ्लैशबैक में चला गया।
- 3:01:41वो उस दिन का वाक्या याद करने लगा जब वो
- 3:01:44मंदिर में शौर्य से उलझा था। जब उसने
- 3:01:47मंदिर वाले भिखारी के हुलिए को याद किया
- 3:01:49तो उसे मुख्तार भाई की बात सही लगने लगी।
- 3:01:52उस दिन कहीं से भी वो उसे पढ़ा लिखा और
- 3:01:55शालीन नजर नहीं आया था। तभी कल्ला को कुछ
- 3:01:57याद आया वो बोला भाई आपने एक और बात पर
- 3:02:01गौर नहीं की। क्या मुख्तार और रजत दोनों
- 3:02:06ने एक साथ पूछा तो कल्ला बोला जब हम
- 3:02:09भिखारी को उठाकर शादी के लिए ले जा रहे थे
- 3:02:11तो उसके बारे में यह पता चला था कि वो बोल
- 3:02:14नहीं सकता। यहां तक कि हमने उसकी धुलाई भी
- 3:02:17की थी। फिर भी उसके मुंह से उफ तक नहीं
- 3:02:20निकली थी। कल्ला ने मुख्तार को उस रात की
- 3:02:23बात याद दिलाई और आगे कहा। पर आज आपने
- 3:02:26देखा वो कितनी अच्छी तरह से बात कर रहा
- 3:02:28था।
- 3:02:30मुख्तार सोचने को मजबूर हो गया। कुछ तो
- 3:02:33गड़बड़ है जो एक गूंगे भिखारी ने आज हमारी
- 3:02:37जुबान पर ताला लगा दिया। इस काया पलट के
- 3:02:42पीछे जरूर कोई राज है।
- 3:02:44चाहे कुछ भी हो भैया अब शिप्रा का पति
- 3:02:47ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रहेगा। शिप्रा
- 3:02:50को मुझसे ही शादी करनी पड़ेगी। पति से
- 3:02:52तलाक लेने के बाद या मेरे हाथों खलास होने
- 3:02:55के बाद। रजत अपने दांत पीसते हुए बोला। इस
- 3:02:59पर मुख्तार ने रजत को चेताते हुए कहा। अब
- 3:03:03जो कुछ भी करना बहुत सोच समझ करना। ध्यान
- 3:03:07रखो अब अगर तुम अपने खिलाफ सरेआम सबूत
- 3:03:11छोड़कर फिर से जेल गए तो मैं तुम्हें
- 3:03:14छुड़ाने की कोशिश नहीं करूंगा।
- 3:03:17इतने में रजत गुस्से में भड़क उठा। मुझे
- 3:03:20तो लगता है भैया आप इस राय फैमिली से डर
- 3:03:22गए हो। इसीलिए तो जो काम आज तक नहीं किए
- 3:03:25वो सब किए जा रहे हो। यहां तक कि आज आपने
- 3:03:28मुझसे भी माफी मंगवा दी। बेवकूफ यह सब
- 3:03:32तुम्हारे कारण ही करना पड़ रहा है। नहीं
- 3:03:34तो मुझे क्या जरूरत थी उससे माफी मांगने
- 3:03:37की? पड़े रहते तुम जेल में। ऊपर से यह जिद
- 3:03:41अलग किए बैठे हो कि तुम्हें उस शिप्रा से
- 3:03:43शादी भी करनी है। अगर तुम्हारी यह जिद ना
- 3:03:46होती तो आज क्या जरूरत थी हमें यहां आने
- 3:03:49की। तुम तो जेल से छूट ही गए थे। मौका देख
- 3:03:52कर उस शिप्रा को भी ठिकाने लगा देता। पर
- 3:03:56नहीं। सिर्फ तुम्हारे कारण मुझे यह सब
- 3:03:58ड्रामा करना पड़ रहा है। मुख्तार भाई ने
- 3:04:02भी अपने दिल की भड़ास निकाल दी। मुख्तार
- 3:04:04की बात सुनकर रजत एक पल के लिए ठिठक गया।
- 3:04:07फिर कसमसाते हुए उसने भी अपने दिल का
- 3:04:09गुबार बाहर किया। तो आप क्या चाहते हैं कि
- 3:04:12मैं ऐसे ही शिप्रा को जाने दूं? मैंने ऐसा
- 3:04:14तो नहीं कहा। पर हर चीज का एक तरीका होता
- 3:04:17है। खुद को फंसाकर अगर तुमने उसका नुकसान
- 3:04:21कर भी दिया तो क्या फायदा? मजा तो तब है
- 3:04:24जब तुम्हारा बाल भी बांका ना हो और सामने
- 3:04:27वाला बर्बाद हो जाए।
- 3:04:30मुख्तार ने रजत को समझाया लेकिन उसकी बात
- 3:04:33रजत के पल्ले पड़ी या नहीं यह कोई नहीं
- 3:04:35जानता।
- 3:04:37दूसरी तरफ शिप्रा गुस्से में वहां से निकल
- 3:04:39गई थी। शौर्य उसके पीछे-पीछे ही था।
- 3:04:42शिप्रा को यह सोचकर गुस्सा आ रहा था कि
- 3:04:44दादाजी ने रजत के खिलाफ केस वापस लिया तो
- 3:04:46लिया पर उसे यहां ऑफिस बुलाने की क्या
- 3:04:48जरूरत थी? शिप्रा पार्किंग एरिया में आकर
- 3:04:51रुक गई। शौर्य ने उसे गुस्से में देखा तो
- 3:04:54उसे नॉर्मल करने के लिए बोला।
- 3:04:57आप क्यों डिस्टर्ब हो रही हैं? तुम्हें
- 3:04:59नहीं पता मैं क्यों डिस्टर्ब हूं? देखा
- 3:05:01नहीं तुमने उस गुंडे की हिम्मत। यह सब
- 3:05:04मेरे परिवार वालों के कारण ही है। उन्हें
- 3:05:06क्या जरूरत थी एक गुंडे के साथ समझौता
- 3:05:08करने की? शिप्रा ने यह बोल तो दिया पर फिर
- 3:05:12उसे ध्यान आया कि इस बारे में श्रवण को
- 3:05:14क्या पता होगा। इसीलिए वो उसे हकीकत से
- 3:05:16वाकिफ कराने के लिए बोली। शायद तुम्हें
- 3:05:19नहीं पता। मेरे परिवार वाले चाहते थे कि
- 3:05:21मैं उस रजत से शादी कर लूं। वे सभी इस
- 3:05:24गुंडे से डरे हुए थे। मैंने शादी के लिए
- 3:05:26मना किया तो सिर्फ इस शर्त पर उन्होंने
- 3:05:28मेरी बात मानी कि मैं रजत के खिलाफ अपना
- 3:05:30केस वापस ले लूं। और देखो आज ही केस वापस
- 3:05:34लिया और दोनों भाई फिर से हमारे ऑफिस तक
- 3:05:36पहुंच गए। अब तुम ही बताओ कैसे डिस्टर्ब
- 3:05:38ना हूं।
- 3:05:40आपका परिवार एक बिजनेस करने वाला परिवार
- 3:05:43है। ये लोग फालतू के पंगों में नहीं पड़ना
- 3:05:45चाहते। इसीलिए वो चाहते हैं कि कोई बीच का
- 3:05:47रास्ता निकल आए। जिसमें ना काहू से दोस्ती
- 3:05:51ना काू से वैर वाली सिचुएशन हो। वो गुंडों
- 3:05:54पर भरोसा करने की भूल कर रहे हैं और समझ
- 3:05:56नहीं रहे कि यह स्थिति उनके खुद के लिए
- 3:05:59आफत बन सकती है। शौर्य शिप्रा को समझाने
- 3:06:02की कोशिश करता हुआ बोला। शिप्रा अपने
- 3:06:05परिवार की स्थिति समझ रही थी कि वे लोग भी
- 3:06:07मजबूर हैं। पर उसे यह भी लग रहा था कि भला
- 3:06:09इतना डर कर भी क्या जीना। उसने हिम्मत की
- 3:06:12थी। इसीलिए तो रजत को जेल जाना पड़ा था।
- 3:06:14और आज जब उसने समझौता किया तो वही रजत फिर
- 3:06:18से उसके सिर पर आकर नाचने लगा था। शौर्य
- 3:06:21शिप्रा के चेहरे के बदलते हुए भाव को देख
- 3:06:23रहा था। अचानक उसके दिमाग में कुछ आया तो
- 3:06:25उसने सोचा ट्राई करने में क्या जाता है?
- 3:06:28यही सोचकर उसने शिप्रा से पूछा।
- 3:06:31वैसे एक बात पूछ सकता हूं। शिप्रा ने घूर
- 3:06:34कर शौर्य को देखा पर कुछ बोली नहीं। शौर्य
- 3:06:37कुछ पल इंतजार करता रहा। पर जब शिप्रा ने
- 3:06:39कुछ नहीं कहा तो उसने पूछ ही लिया। जहां
- 3:06:43तक मैं समझता हूं रजत अच्छे खासे परिवार
- 3:06:45से आता है। मेरे ख्याल से वो लोग विशालगढ़
- 3:06:48के कुछ एक रईस परिवारों में से हैं और वो
- 3:06:51आपको पसंद भी करता है। तो फिर उससे शादी
- 3:06:54करने में क्या दिक्कत है? शिप्रा उम्मीद
- 3:06:57नहीं कर रही थी कि शौर्य उससे इस तरह का
- 3:06:59सवाल कर सकता है। वो महसूस कर रही थी कि
- 3:07:01शौर्य उससे अब कुछ ज्यादा ही निजी सवाल
- 3:07:04करने लगा है। उसने जवाब दिया।
- 3:07:07मेरे लिए यह मायने नहीं रखता कि कौन कितना
- 3:07:10पैसे वाला या पावरफुल है। मेरे लिए इंसान
- 3:07:13मायने रखता है। रजत का जिस तरह का
- 3:07:15कैरेक्टर है वो कभी भी मेरी पसंद नहीं बन
- 3:07:18सकता। उसने या उसके परिवार ने जो पैसे और
- 3:07:21पावर सोसाइटी में बना रखी है वो गलत काम
- 3:07:24से बनाई है।
- 3:07:26शिप्रा की इस बात पर शौर्य एक फीकी
- 3:07:28हंसी-हंसते हुए बोला।
- 3:07:30दूध का धुला कौन है इस दुनिया में? जिसको
- 3:07:33जहां मौका मिलता है, हर कोई सिस्टम का
- 3:07:35फायदा उठाने की कोशिश करता है। आज के समय
- 3:07:38में जो कामयाब है, वही इज्जतदार है। यह
- 3:07:41बात आपके परिवार वाले भी समझते हैं और
- 3:07:43इसीलिए आज वो लोग आपके ऑफिस तक आ पहुंचे।
- 3:07:47शौर्य ने जो कहा वो बात तो कड़वी थी, पर
- 3:07:50सच थी। लेकिन शिप्रा ने इस बात का जवाब
- 3:07:52देते हुए कहा, "मेरे परिवार के लोग या
- 3:07:55दुनिया कैसे सोचती है, मुझे इससे कोई फर्क
- 3:07:57नहीं पड़ता।" मेरे लिए सबसे पहले आदमी का
- 3:08:00कैरेक्टर मायने रखता है। उसके बाद उसके
- 3:08:02पास कितना पैसा है या वो कितना पावरफुल है
- 3:08:05यह नहीं। यह बातें सिर्फ कहने में ही
- 3:08:08अच्छी लगती हैं। पर हकीकत से इसका दूर-दूर
- 3:08:11तक कोई रिश्ता नहीं होता। शौर्य ने यह बात
- 3:08:14शिप्रा को उकसाने की नियत से ही कही थी।
- 3:08:16जिसका रिप्लाई भी उसे तुरंत मिला। तुम
- 3:08:20कहना क्या चाहते हो? मैं जो बातें कह रही
- 3:08:22हूं हकीकत में उस पर अमल नहीं करती।
- 3:08:25शिप्रा थोड़ी नाखुशी से बोली। इस पर शौर्य
- 3:08:28ने जवाब दिया, मैं यह बातें आपके लिए नहीं
- 3:08:31कह रहा हूं। आमतौर पर जो होता है, मैं वही
- 3:08:34बयां कर रहा हूं कि हो सकता है कि कोई
- 3:08:36शख्स ही पसंद ना हो तो दूसरी बात है। नहीं
- 3:08:38तो स्टेटस तो सभी देखते हैं कि जिससे
- 3:08:41[संगीत] उसकी शादी होने वाली है, उसका
- 3:08:42स्टेटस कैसा है? सभी चाहते हैं कि जिससे
- 3:08:45उसकी शादी हो, उसका परिवार उसके खुद के
- 3:08:47परिवार से बेहतर स्थिति में ही हो। शिप्रा
- 3:08:51हैरान थी कि शौर्य आज उससे इस तरह की
- 3:08:53बातें आखिर क्यों कर रहा है? उसे शौर्य की
- 3:08:55बातें पसंद तो नहीं आ रही थी पर वो जवाब
- 3:08:57देते हुए [संगीत] बोली शायद तुम सही कह
- 3:09:00रहे होंगे पर मैं उन लड़कियों की तरह नहीं
- 3:09:02सोचती तो इसका मतलब अगर मैं आपसे पूछूं कि
- 3:09:06क्या आप मेरे साथ अपनी पूरी जिंदगी
- 3:09:07बिताएंगी तो आपका जवाब क्या होगा? बातों
- 3:09:11ही बातों में शौर्य ने हिम्मत करके वो बात
- 3:09:14कह दी जिसकी शायद शिप्रा को उम्मीद ही
- 3:09:16नहीं थी। शिप्रा की आंखें फैल गई। वो
- 3:09:19हैरान होकर शौर्य की ओर देख रही थी। उसने
- 3:09:22तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि श्रवण
- 3:09:24उससे ऐसी बात कर सकता है। जिसे वह भिखारी
- 3:09:27समझ रही थी। वही उसके साथ अपनी जिंदगी
- 3:09:30बिताने की सोच रहा था। उसने उसे अपनी एक
- 3:09:33उंगली क्या पकड़ाई? वो तो उसका पूरा हाथ
- 3:09:35ही थामना चाहता था। वो गुस्से में बोली
- 3:09:38तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यह बात कहने की?
- 3:09:41क्यों क्या हुआ? मैंने ऐसा क्या बोल दिया
- 3:09:43जो आप बुरा मान गई? आप खुद भी तो मुझसे
- 3:09:46तलाक नहीं चाहती। जब इस बंधन में रहना
- 3:09:48आपको पसंद है तो मेरे साथ जिंदगी बिताने
- 3:09:51में क्या दिक्कत है? शौर्य भी थोड़े तीखे
- 3:09:53स्वर में बोला। शिप्रा को यकीन नहीं हो
- 3:09:56रहा था कि यह वही श्रवण है जिसे वो अपने
- 3:09:58लिए डमी हस्बैंड के रूप में इस्तेमाल करना
- 3:10:00चाहती थी। क्योंकि वो शादी तो करना नहीं
- 3:10:03चाहती थी। आज इसने भी इतनी हिम्मत कर दी
- 3:10:06कि सीधा-सीधा उसे अपने साथ जिंदगी बिताने
- 3:10:08के लिए कह दिया। उसे गुस्सा तो बहुत आ रहा
- 3:10:11था पर उसने अपने गुस्से को दबाकर कहा।
- 3:10:14आखिर तुमने भी अपनी औकात दिखा ही दी। मैं
- 3:10:17तुम्हें शरीफ आदमी समझती थी पर तुम्हें भी
- 3:10:20पहचानने में धोखा खा गई। शिप्रा की जिंदगी
- 3:10:23ने जो उसके साथ खिलवाड़ किया था, उससे
- 3:10:25शिप्रा की सोच ऊपरी तौर पर तो जरूर बदली
- 3:10:28थी, लेकिन गहराई में शायद अभी भी कहीं
- 3:10:30[संगीत] ना कहीं अमीरी के तेवर एक्टिव थे।
- 3:10:32इसीलिए उसे शौर्य की औकात तक पहुंचने में
- 3:10:35चंद सेकंड भी नहीं लगे और उसने पल भर में
- 3:10:38ही शौर्य की शराफत पर तमाचा भी जड़ दिया।
- 3:10:41भला मैंने ऐसा क्या कह दिया जो अचानक मैं
- 3:10:44शरीफ आदमी से बदमाश बन गया? सिर्फ अपने
- 3:10:47दिल के जज्बात ही तो बयान किए थे और आपने
- 3:10:50मेरी औकात पर ही सवाल दाग दिया। शौर्य
- 3:10:53सफाई देते हुए बोला तभी शिप्रा ने अपने मन
- 3:10:56के भाव शौर्य के सामने उड़ेल दिए। मेरे
- 3:10:59साथ जिंदगी बिताने का सपना देखने से पहले
- 3:11:01मेरे और अपने बीच का अंतर तो देख लेते।
- 3:11:04याद करो पहली बातचीत में ही मैंने तुम्हें
- 3:11:07बता दिया था कि तुम दुनिया की नजर में
- 3:11:09मेरे पति रहोगे। पर हमारे बीच वैसा कोई
- 3:11:12संबंध नहीं रहेगा। तुम अपनी जिंदगी अपने
- 3:11:14हिसाब से जी सकते हो। पर मुझसे कोई उम्मीद
- 3:11:17मत रखना। कहा था ना मैंने? पर जब तुमने
- 3:11:20देखा कि कोई मेरी कमजोरी का फायदा उठाकर
- 3:11:22मुझ पर अपने साथ शादी करने का दबाव डाल
- 3:11:25रहा है तो लगे हाथ तुमने भी अपने लिए वही
- 3:11:27कोशिश शुरू कर दी।
- 3:11:30शिप्रा की टर्म्स एंड कंडीशंस और मौके का
- 3:11:32फायदा उठाने का आरोप सुनकर शौर्य के चेहरे
- 3:11:35पर थोड़ी उलझन के भाव आए। पर अगले ही पल
- 3:11:38एक हल्की मुस्कान के साथ उसने कहा, "मैं
- 3:11:40शब्दों के लिए माफी चाहता हूं। पर आप अभी
- 3:11:43थोड़ी देर पहले बड़ी-बड़ी बातें कर रही
- 3:11:45थी। मैं सिर्फ उसे गलत साबित करना चाहता
- 3:11:48था। शिप्रा उलझन भरे स्वर में बोली, "तुम
- 3:11:51कहना क्या चाहते हो?" इस पर शौर्य तुरंत
- 3:11:54बोल पड़ा। आपने कहा कि [संगीत] आपके लिए
- 3:11:56इंसान का कैरेक्टर मायने रखता है। ना कि
- 3:11:59उसका रुतबा, हैसियत और अमीरी। पर जैसे ही
- 3:12:02मैंने आपसे अपने साथ पूरी जिंदगी बिताने
- 3:12:04की बात की, आपने सबसे पहले मुझे मेरी औकात
- 3:12:07से ही जज किया। मैंने तो आपसे कहा भी था
- 3:12:10कि पसंद नापसंद अपनी जगह हो सकती है। पर
- 3:12:13हर कोई चाहता है कि उसकी शादी [संगीत]
- 3:12:15उसके परिवार से बेहतर परिवार में ही हो।
- 3:12:17और आपने कहा कि दूसरों का पता नहीं पर आप
- 3:12:20वैसी नहीं हैं। पर जैसे ही मैंने आपको
- 3:12:23प्रपोज किया, आपने सिर्फ मेरा स्टेटस
- 3:12:25देखा। क्योंकि मैं आपके स्टेटस को मैच
- 3:12:28नहीं करता इसीलिए मैं शरीफ भी नहीं रहा।
- 3:12:30आपने तो यह भी कह दिया कि आप मुझे पहचानने
- 3:12:33में धोखा खा गई। शौर्य की बात सुनकर
- 3:12:36शिप्रा को ऐसा महसूस हुआ जैसे एक ही पल
- 3:12:39में उसकी सोच की सारी परतें हट गई हो और
- 3:12:42उसकी असलियत सामने आ गई हो। उसके चेहरे का
- 3:12:45नकाब जैसे किसी ने नोच दिया हो। उसे एक-एक
- 3:12:48करके अपनी कही हुई बातें याद आने लगी।
- 3:12:52कितना सही कहा शौर्य ने। वो खुद को सोच की
- 3:12:54धनी और सामाजिक [संगीत] कुरीतियों से ऊपर
- 3:12:56समझती थी। पर जब खुद पर बात आई तो वह भी
- 3:12:59बाकी लोगों की तरह ही निकली। झुकी सी नजर
- 3:13:02के साथ शिप्रा खुद को ही कोसने लगी।
- 3:13:05सच है कितना आसान है बड़ी-बड़ी बातें
- 3:13:08करना। पर जब खुद उस पर अमल करने की बात
- 3:13:10आती है तो सारी बातें पीछे रह [संगीत]
- 3:13:12जाती हैं। शिप्रा के लिए अब शौर्य से नजर
- 3:13:15मिलाना मुश्किल हो गया था। एक ही पल में
- 3:13:17शौर्य ने उसे आईना दिखा दिया था। वो सोचने
- 3:13:20लगी क्या अंतर है उसमें और रजत में? रजत
- 3:13:23जैसा है वैसा ही दिखता भी है। पर वो खुद
- 3:13:26डबल कैरेक्टर है। रियल शिप्रा और फेक
- 3:13:29शिप्रा। शौर्य समझ गया कि शिप्रा अब खुद
- 3:13:32के अंतर्द्वंद में उलझ गई है। इसीलिए वो
- 3:13:34खुद को नॉर्मल दिखाने की कोशिश करता हुआ
- 3:13:36बोला। आप किस सोच में गुम हो गई? माफी
- 3:13:40चाहता [संगीत] हूं। मेरी ऐसी कोई मंशा
- 3:13:42नहीं थी कि आपकी भावनाओं को चोट पहुंचाऊं।
- 3:13:45हम दोनों के बीच का अंतर पता है मुझे। मैं
- 3:13:47कभी उसे लांघने की कोशिश नहीं करूंगा। मैं
- 3:13:50जानता हूं कि मखमल में टाट का पैबंद नहीं
- 3:13:53लगता और अपनी औकात की लिमिट [संगीत] भी
- 3:13:55मालूम है मुझे। उससे बाहर जाने की सोच भी
- 3:13:58नहीं सकता। इसीलिए प्लीज [संगीत] मेरी
- 3:14:01बातों को अपने दिल पर ना लें। शिप्रा को
- 3:14:04लग रहा था मानो उसने अपनी सोचने समझने की
- 3:14:07शक्ति ही खो दी है। उसे खुद पर और अपनी
- 3:14:09सोच पर बड़ा गर्व था। पर आज शौर्य ने एक
- 3:14:12पल में ही उसे छोटा कर दिया। अभी वह इस
- 3:14:15उलझन से निकल भी नहीं पाई थी कि तभी उसका
- 3:14:17[संगीत] फोन रिंग करने लगा। फोन लगातार बज
- 3:14:20रहा था। पर वो अपनी ही उलझन में खोई हुई
- 3:14:22थी। आखिर शौर्य को कहना ही पड़ा। मैम आपके
- 3:14:26मोबाइल पर कॉल आ रहा है। शिप्रा जैसे होश
- 3:14:29में आई। उसने मोबाइल देखा तो मोहित रैना
- 3:14:32का कॉल आ रहा था। फोन उठाते ही बातचीत
- 3:14:34शुरू हो गई।
- 3:14:35हेलो मिस शिप्रा मोहित दिस साइड। आप कब तक
- 3:14:38आ रही हैं?
- 3:14:39मैं आधे घंटे में आपके पास पहुंच जाऊंगी।
- 3:14:42ठीक है। मैं आपका इंतजार करता हूं।
- 3:14:44फ़ कट हो गया। शिप्रा उलझन में थी कि क्या
- 3:14:47उसे शौर्य को अपने साथ ले जाना चाहिए। अभी
- 3:14:50जो कुछ हुआ था उसके कारण वह शौर्य के साथ
- 3:14:52अनइजी महसूस कर रही थी। शौर्य समझ गया कि
- 3:14:56शिप्रा खुद के अपराध बोध में उलझी हुई है।
- 3:14:58उसे स्थिति से निकालने के लिए शौर्य बोला
- 3:15:01रिलैक्स हो जाइए। अभी मैंने आपसे जो कुछ
- 3:15:04भी पूछा था आपकी जगह कोई और भी होता तो
- 3:15:06उसका भी यही जवाब होता। [संगीत] इसमें
- 3:15:09बुरा फील करने वाली कोई बात नहीं है।
- 3:15:11शिप्रा को शौर्य से इतनी समझदारी भरी बात
- 3:15:13की उम्मीद नहीं थी। उसे खुद पर गुस्सा आ
- 3:15:16रहा था कि अगर शौर्य ने उससे ऐसा सवाल पूछ
- 3:15:18भी लिया था तो वह इतना रूढ़ जवाब कैसे दे
- 3:15:20सकती है? अगर उसे मना ही करना था तो
- 3:15:23[संगीत] उसे उसकी औकात दिखाने की क्या
- 3:15:25जरूरत थी। ना जाने उसने उसे क्या-क्या कह
- 3:15:28दिया। शिप्रा के बारे में शौर्य की धारणा
- 3:15:31सही साबित हो चुकी थी। इसलिए शिप्रा को
- 3:15:33कपकपी सी होने लगी थी। [संगीत] वो मन ही
- 3:15:35मन बुदबुदा रही थी। कहीं श्रवण मुझसे
- 3:15:38नाराज होकर चला गया तो मेरी धड़कन बढ़
- 3:15:41क्यों रही है? डर सा क्यों लग रहा है? कुछ
- 3:15:44बोलो श्रवण बोलो। तभी शौर्य चुटकी बजाकर
- 3:15:48बोला, अरे मैम किस सोच में खो गई हैं आप?
- 3:15:51आपको बिग बुल के ऑफिस नहीं जाना है क्या?
- 3:15:54शौर्य की आवाज सुनते ही शिप्रा ने खुद को
- 3:15:56कंट्रोल किया और खुद को नॉर्मल दिखाने की
- 3:15:58कोशिश करते हुए बोली, गाड़ी ले आओ, चलते
- 3:16:01हैं। शिप्रा ने बोल तो दिया पर वो अपने
- 3:16:04अंदर ही कॉन्फिडेंस की कमी महसूस कर रही
- 3:16:06थी। शौर्य जल्दी से गाड़ी ले आया और वो चल
- 3:16:09दिए। गाड़ी में छाई खामोशी [संगीत] शिप्रा
- 3:16:11को परेशान कर रही थी। जब उससे बर्दाश्त
- 3:16:14नहीं हुआ तो उसने मासूमियत से बोला सॉरी
- 3:16:18शौर्य ने यह सुना तो हैरानी से मुड़कर
- 3:16:20शिप्रा की आंखों में देखा यह किस लिए अब
- 3:16:25ऐसे अनजान बनने की कोशिश मत करो मुझे पता
- 3:16:27है कि तुम समझ सकते हो कि मैंने सॉरी
- 3:16:30क्यों कहा शिप्रा नाराजगी प्रदर्शित करते
- 3:16:32हुए बोली तो जवाब देते हुए शौर्य बोला
- 3:16:36समझता हूं इसीलिए तो पूछा यह किस लिए आप
- 3:16:39अपनी जगह गलत कहां थी जो आप सॉरी कह रही
- 3:16:42हैं उल्टा उल्टा अगर आप ऐसा नहीं कहती तो
- 3:16:44मुझे जरूर आश्चर्य होता क्योंकि दुनिया
- 3:16:46ऐसे ही चलती है। सबके लिए एक सामाजिक
- 3:16:49दायरा बना हुआ है।
- 3:16:52शौर्य के इतना कहते ही शिप्रा उसे आंखें
- 3:16:53फाड़े देख रही थी। वहीं शौर्य ने अपनी बात
- 3:16:56को आगे बढ़ाते हुए कहा राजा और रंक दोनों
- 3:17:00समाज की व्यवस्था का हिस्सा हैं। जब भी दो
- 3:17:02परिवारों में संबंध बनता है तो वह सामाजिक
- 3:17:05दायरे के हिसाब से ही होता है। कभी आपने
- 3:17:07देखा है कि एक राजा की लड़की की शादी किसी
- 3:17:10गरीब घर के लड़के से हुई हो? इसीलिए जब
- 3:17:12ऐसी कोई कोशिश होती है तो वह सामाजिक
- 3:17:15ताने-बाने को तोड़ती है और ऐसी बातें
- 3:17:17सिर्फ अपवादों में ही मिलती हैं। और
- 3:17:20क्या शिप्रा ने तपाक से पूछा शौर्य ने एक
- 3:17:24पल शिप्रा की ओर देखा और बोला और इसका
- 3:17:27अंजाम भी अक्सर सुखद नहीं होता। आपने लैला
- 3:17:30मजनू श्री फरहाद इन सब की कहानियां तो
- 3:17:33सुनी ही होंगी और [संगीत] इन सबका अंत भी
- 3:17:35आपको पता होगा। उन्होंने इस सामाजिक
- 3:17:38ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश की थी।
- 3:17:40शौर्य ने सहजता से तर्क के साथ अपनी बात
- 3:17:42रख दी। तभी इसका जवाब देते हुए शिप्रा
- 3:17:45बोली, "मैं समझ सकती हूं अपनी बात को
- 3:17:48साबित करने में तुम्हारा कोई मुकाबला नहीं
- 3:17:50है। तुम्हारे पास बहुत तर्क होते हैं। पर
- 3:17:53मैं तुम्हें यह बता दूं कि तुमने जो
- 3:17:55सामाजिक ताने-बाने का स्वरूप दिखाया है,
- 3:17:57मैं उस पर विश्वास नहीं करती। शौर्य आगे
- 3:18:00कुछ बोलता। उससे पहले ही शिप्रा अपनी बात
- 3:18:03को आगे बढ़ाते हुए बोली, "इसके बावजूद
- 3:18:05मैंने तुम्हें जो जवाब दिया, उसे मैं किसी
- 3:18:08भी तरह सही नहीं ठहरा सकती।" बिलीव मी,
- 3:18:11मैं ऐसी नहीं हूं। पर जैसा तुमने मेरे
- 3:18:13बारे में सोचा था, मैंने खुद अपने जवाब से
- 3:18:16उसे सही साबित कर दिया। शिप्रा समझ चुकी
- 3:18:19थी कि उसने अपनी बात जिस तरह से रखी थी,
- 3:18:21वह तरीका गलत था। इसीलिए वो फिर बोली,
- 3:18:24"मुझे खुद पर अफसोस हो रहा है कि मैंने
- 3:18:26तुमसे तुम्हारी औकात की बात कैसे कह दी।
- 3:18:28अब मैं चाहकर भी खुद को सही साबित नहीं कर
- 3:18:31सकती। पर मेरा बोला हुआ सॉरी शायद मुझे
- 3:18:33थोड़ा सुकून दे देगा। इसीलिए अब बिना किसी
- 3:18:36ना नुकुर के मेरी सॉरी एक्सेप्ट कर लो
- 3:18:38ताकि मेरे दिल को थोड़ी राहत मिले। शिप्रा
- 3:18:41ने इस बार पूरी स्पष्टता के साथ अपनी बात
- 3:18:43रखी।
- 3:18:45अगर ऐसी बात है तो फिर आपका दिल रखने के
- 3:18:48लिए मैं आपकी सॉरी स्वीकार करता हूं। यह
- 3:18:50कहते हुए शौर्य के चेहरे पर एक मुस्कान आ
- 3:18:52गई। लेकिन शिप्रा का चेहरा अभी भी गंभीर
- 3:18:55था। वो बोली अब मैं तुम्हें एक बात और
- 3:18:58क्लियर कर दूं कि अभी जो मेरी लाइफ है और
- 3:19:00सोच है उसमें मैं तुम्हारे साथ जिंदगी
- 3:19:03बिताने की सोच भी नहीं सकती थी। ऑनेस्टली
- 3:19:06तुम मेरी पसंद नहीं हो। मैं तुम्हें एक
- 3:19:08ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही हूं। वो
- 3:19:10भी तब तक जब तक मेरे घर वाले मेरी दूसरी
- 3:19:12शादी करने की जिद नहीं छोड़ देते। और मेरे
- 3:19:15ना कहने के पीछे जो दूसरी बात है वह यह कि
- 3:19:18अब मैं अपनी पूरी जिंदगी अकेले ही बिताने
- 3:19:20का निर्णय कर चुकी हूं। इसीलिए मुझे किसी
- 3:19:23के साथ की जरूरत नहीं है।
- 3:19:25शिप्रा शौर्य के सामने अपनी सोच को जाहिर
- 3:19:28करने के बाद अब संतुष्ट नजर आ रही थी। उसे
- 3:19:30अब लग रहा था कि उसके सिर पर जो एक बोझ
- 3:19:32पड़ा था, अपनी बात को शौर्य के सामने
- 3:19:35स्पष्ट करने के बाद वो उतर गया था। शौर्य
- 3:19:38ने भी यह बात नोटिस की थी। इसीलिए उसने
- 3:19:40कहा, शुक्र है अब आप सही नजर आ रही हैं।
- 3:19:44यह क्या बात हुई? क्या पहले मैं सही नजर
- 3:19:46नहीं आ रही थी? शिप्रा ने भोएं चढ़ाते हुए
- 3:19:49बोला, नहीं, पहले तो ऐसे लग रहा था कि आप
- 3:19:51अपने मन पर मानो बोझ लिए हुए बैठी हैं। पर
- 3:19:54अब आप रिलैक्स नजर आ रही हैं। शौर्य ने जो
- 3:19:57महसूस किया वो बोल दिया। शिप्रा को भी
- 3:20:00महसूस हुआ कि शौर्य सही कह रहा है। जब वो
- 3:20:02कार के अंदर बैठी थी तो वह अपराध बोध से
- 3:20:05दबी हुई थी। पर अब शौर्य से बात होने के
- 3:20:07बाद वह उससे मुक्त हो गई थी। उसे इस लड़के
- 3:20:10की किसी को ऑब्जर्व करने की क्षमता पर
- 3:20:13आश्चर्य हुआ। वो शौर्य की तरफ देखते हुए
- 3:20:16बोली
- 3:20:17क्या हम दोस्त हो सकते हैं? शिप्रा को लगा
- 3:20:21कि इससे शौर्य को थोड़ी तसल्ली होगी
- 3:20:23क्योंकि जिस तरह से उसने उसके प्रपोजल को
- 3:20:25ठुकराया था उससे उसके दिल में कहीं ना
- 3:20:27कहीं एक गांठ बन गई होगी। तो अगर वो उसकी
- 3:20:30दोस्त बन जाएगी तो शायद वो गांठ खत्म हो
- 3:20:32जाए। जी नहीं बिल्कुल नहीं। शौर्य एक फीकी
- 3:20:36मुस्कान के साथ बोला। यह सुनकर शिप्रा को
- 3:20:39जोर का धक्का लगा। शौर्य ने उसकी दोस्ती
- 3:20:42के लिए सीधा इंकार कर दिया। वो हड़बड़ा गई
- 3:20:45और उसकी जुबान लड़खड़ाने लगी। तो पर
- 3:20:47क्यों? मैं मैं कारण जान सकती हूं। अब
- 3:20:51शिप्रा के मन में फिर से खलबली सी होने
- 3:20:53लगी और तभी शौर्य ने गाड़ी रोक दी। शिप्रा
- 3:20:56ने पूछा गाड़ी क्यों रोक दी? अरे आप गाड़ी
- 3:21:00से बाहर तो देखिए। शौर्य मुस्कुराते हुए
- 3:21:02बोला, शिप्रा ने बाहर की तरफ देखा तो उसने
- 3:21:06पाया कि उसकी कार बिग बुल के ऑफिस के बाहर
- 3:21:08ही खड़ी थी। ओह, हम पहुंच गए। शिप्रा बाहर
- 3:21:12देखते हुए बोली। तभी अचानक उसकी निगाह बिग
- 3:21:15बुल के गेट के अंदर जाते हुए एक शख्स पर
- 3:21:17पड़ी। उसकी आंखें फैल गई और उसके मुंह से
- 3:21:20निकल पड़ा। ये यहां क्या कर रहा है? आज का
- 3:21:23दिन शिप्रा के लिए हैरानी से भरा था। जो
- 3:21:26कुछ भी उसके साथ हो रहा था उसे हैरान कर
- 3:21:28रहा था। ऑफिस में रजत से सामना, शौर्य का
- 3:21:31जिंदगी साथ बिताने के लिए प्रपोज करना,
- 3:21:34शौर्य का सिर्फ दोस्त बनने से साफ इंकार
- 3:21:36करना और अब बिग बुल में मीटिंग से पहले उस
- 3:21:39शख्स का वहां दिखना जिसे वो दुश्मन
- 3:21:41कंपिटिट कहती थी। वो शख्स कोई और नहीं
- 3:21:44बल्कि बलराज खन्ना था। लेवेस ब्लू का
- 3:21:47मालिक। विशालगढ़ में बलराज खन्ना शिप्रा
- 3:21:50का मेन कंपिटिट था। शिप्रा के चेहरे में
- 3:21:52कुछ परेशानी सी झलकने लगी। उसके मुंह से
- 3:21:55निकला। यह कहां से टपक पड़ा यहां? कहीं
- 3:21:59इसे पता तो नहीं चल गया कि आज हमारी
- 3:22:00मीटिंग मोहित रैना के साथ है। नहीं नहीं
- 3:22:04उसे कैसे पता चलेगा? यह महज संयोग होगा कि
- 3:22:07वो भी आज यहां आया है। शौर्य ने शिप्रा की
- 3:22:10परेशानी दूर करने की कोशिश की। वैसे भी आप
- 3:22:13तो मीटिंग के लिए आई हैं। उसके यहां होने
- 3:22:16या ना होने से क्या फर्क पड़ेगा?
- 3:22:19शिप्रा को यह डर सता रहा था कि कहीं बलराज
- 3:22:21खन्ना की वजह से मोहित [संगीत] रैना के
- 3:22:23साथ उसकी मीटिंग खराब ना हो जाए। फिर भी
- 3:22:26क्यों ना हम थोड़ा इंतजार कर लें। शायद
- 3:22:28510 मिनट में वो यहां से चला जाए। तभी
- 3:22:31शौर्य ने शिप्रा को हिम्मत देते हुए कहा,
- 3:22:34"ऐसे डर कर बिजनेस नहीं होता। उसे आपको
- 3:22:37देखकर डरना चाहिए ना कि आपको उससे।" शौर्य
- 3:22:41की बात सुनकर शिप्रा को थोड़ा बुरा लगा कि
- 3:22:43वो उसे बिजनेस करना सिखा रहा है। जिसने
- 3:22:46अपने दम पर जिंक कलेक्शन को एक पहचान दी
- 3:22:48थी। पर वो कुछ नहीं बोली। फिर अचानक
- 3:22:51शिप्रा को कुछ याद आया और उसने शौर्य से
- 3:22:53कहा तुम्हारा कोई दोस्त यहां जॉब करता है
- 3:22:56ना? उससे पता कर सकते हो कि यह बलराज
- 3:22:59खन्ना यहां क्यों आया है? शिप्रा की बात
- 3:23:01सुनकर शौर्य के मन में सवाल उठने लगे।
- 3:23:04अंदर जाकर शिप्रा ने अगर उससे उसके उस
- 3:23:07दोस्त से मिलवाने की जिद की जिसके कारण
- 3:23:09बिग बबु में उसकी मीटिंग फिक्स हो सकी है
- 3:23:11तो वो क्या जवाब देगा? ऐसी सिचुएशन में वो
- 3:23:14शिप्रा को किससे मिलवाएगा? अचानक उसके
- 3:23:17दिमाग में प्रिया का ख्याल आया। उसने सोचा
- 3:23:19कि वह प्रिया को अपना दोस्त बताकर शिप्रा
- 3:23:22से मिलवा सकता है। फिर उसे ख्याल आया कि
- 3:23:25प्रिया उसे पहचानेगी कैसे? क्योंकि उसने
- 3:23:27तो शौर्य को इस रूप में देखा ही नहीं है।
- 3:23:30कुछ सोचकर शौर्य ने शिप्रा से कहा आप 5
- 3:23:33मिनट गाड़ी में ही इंतजार करें। मैं अपने
- 3:23:35दोस्त से अभी पता लगा कर आता हूं कि यह
- 3:23:37बलराज खन्ना यहां आया क्यों है। शिप्रा ने
- 3:23:41शौर्य की बात मान ली और कहा ठीक है जाओ पर
- 3:23:44जल्दी आना। शौर्य गाड़ी से बाहर आया और
- 3:23:47बिग बुल के अंदर चला गया। वो सीधे ज्वेलरी
- 3:23:50डिपार्टमेंट में पहुंचा। चलते-चलते उसने
- 3:23:52मोहित रैना को कॉल लगाया। फोन उठाते ही
- 3:23:55उसने पूछा यह बलराज खन्ना यहां क्यों आया
- 3:23:58है? मोहित रैना को आश्चर्य हुआ कि शौर्य
- 3:24:00को बलराज खन्ना के आने की खबर है। उसने
- 3:24:03कहा, बिग कलेक्शन के शहर से रिलेटेड जब
- 3:24:06मैं राघव बजाज से मिला था तो यह बलराज
- 3:24:08खन्ना भी वहीं मिल गया था। उसके बाद से वो
- 3:24:11मेरे पीछे पड़ा है कि उसकी ब्रांड लेविस
- 3:24:13ब्लू को भी अपने स्टोर में डिस्प्ले करूं।
- 3:24:15तो तुमने क्या कहा उससे? शौर्य ने सीधा
- 3:24:18सवाल किया।
- 3:24:20मैंने तो मना कर दिया। पर जब भी मौका
- 3:24:22मिलता है वो स्टोर में मिलने चला आता है
- 3:24:24इस उम्मीद में कि शायद कभी मेरा दिल पिघल
- 3:24:26जाए और मैं उसके ब्रांड को अपने आउटलेट
- 3:24:28में जगह दे दूं। मोहित रैना ने सच्चाई
- 3:24:31बताई। तभी [संगीत] शौर्य ने मोहित रैना को
- 3:24:34जरूरी निर्देश दिए।
- 3:24:36ठीक है। अभी फिलहाल तो उसे यहां से चलता
- 3:24:38करो। [संगीत] शिप्रा यहां पहुंच गई है।
- 3:24:40उससे उसका सामना ना हो वही अच्छा है। और
- 3:24:43हां हो सकता है कि मैं उसके साथ नजर आऊं
- 3:24:46तो मुझे पहचानने की जरूरत नहीं है। उसकी
- 3:24:48नजर में मैं एक मामूली इंसान हूं। इसीलिए
- 3:24:51अगर मुझे उसके साथ देखो भी तो [संगीत] ऐसे
- 3:24:53ट्रीट करना जैसे मैं कोई हूं ही नहीं।
- 3:24:55जी बॉस ऐसा ही होगा।
- 3:24:57मोहित रैना ने शौर्य को आश्वस्त किया। बात
- 3:25:00खत्म होते ही शौर्य की नजर प्रिया पर पड़ी
- 3:25:02जो एक कस्टमर से डील कर रही थी। शौर्य
- 3:25:05उसके पास पहुंचा और उसके पीछे खड़ा हो
- 3:25:07गया। अभी-अभी प्रिया ने एक डायमंड सेट की
- 3:25:10डील क्लोज की थी। कस्टमर को विदा करने के
- 3:25:12बाद जैसे ही वह पीछे मुड़ी, उसकी नजर
- 3:25:15शौर्य पर पड़ी। शौर्य को अपने इतने पास
- 3:25:17देखकर वो हड़बड़ा गई और दो कदम पीछे हट
- 3:25:20गई। शौर्य ने तुरंत ही खेद प्रकट करते हुए
- 3:25:23कहा, "सॉरी, लगता है मैंने आपको डरा
- 3:25:25दिया।" प्रिया ने जब ये आवाज सुनी, तो उसे
- 3:25:27आवाज जानी पहचानी लगी। लेकिन चेहरा
- 3:25:30बिल्कुल अनजान था। उसे समझ नहीं आया कि
- 3:25:32उसने यह आवाज कब और कहां सुनी थी। वो
- 3:25:35असमंजस में खुद को संभालते हुए बोली।
- 3:25:38कोई बात नहीं, आपने जानबूझकर तो नहीं ही
- 3:25:41किया होगा। बोलते हुए उसके चेहरे पर एक
- 3:25:43व्यवहार कुशल मुस्कान आ गई। पहचाना मुझे?
- 3:25:47शौर्य ने मुस्कुराते हुए पूछा। प्रिया को
- 3:25:50फिर से वही एहसास हुआ कि इस आवाज को तो
- 3:25:52उसने पहले कहीं सुना है। पर जब उसे कुछ
- 3:25:54याद नहीं आया तो वो खेद प्रकट करते हुए
- 3:25:56बोली सॉरी सर मुझे याद नहीं आ रहा कि मैं
- 3:25:59आपसे कब और कहां मिली। आपकी आवाज तो जानी
- 3:26:02पहचानी लग रही है लेकिन आपका चेहरा लगता
- 3:26:04है आज पहली बार ही देखा है। प्रिया के
- 3:26:08इतना कहते ही शौर्य तपाक से बोला कमाल है।
- 3:26:11आपकी याददाश्त तो बहुत कमजोर है। अभी कुछ
- 3:26:14दिन पहले ही तो यहीं मिला था जब आपकी
- 3:26:16फ्रेंड क्या नाम था उसका? हां, श्वेता ने
- 3:26:19मेरे साथ गलत बिहेव किया था और तभी मोहित
- 3:26:22यहां आ गया था। इतना सुनते ही प्रिया को
- 3:26:25सब याद आ गया। उस दिन उसने शौर्य को दाढ़ी
- 3:26:28में देखा था। लेकिन आवाज वही थी। अब जब वो
- 3:26:31शौर्य को पहचान गई तो वो तन कर खड़ी हो गई
- 3:26:33और बोली
- 3:26:35सर आप सॉरी सर मैं आपको पहचान नहीं पाई।
- 3:26:38अरे ऐसा मत करो आराम से मेरे साथ नॉर्मल
- 3:26:41बिहेव करो। ऐसा समझो कि मैं तुम्हारा
- 3:26:43दोस्त हूं। शौर्य ने प्रिया को नॉर्मल
- 3:26:46करने की कोशिश की। तभी प्रिया सफाई देते
- 3:26:48हुए बोली, "सर, यह कैसे हो सकता है? मैं
- 3:26:51भला आपकी दोस्त कैसे हो सकती हूं?" शौर्य
- 3:26:54इधर-उधर देखते हुए बोला,
- 3:26:57"क्या कैसे हो सकता है इसमें मत पड़ो। बस
- 3:26:59जैसा कहा है, वैसा ही बिहेव करो। मैं
- 3:27:02तुम्हारा दोस्त हूं तो समझो दोस्त हूं।
- 3:27:04अभी तुम्हें सब कुछ समझाने का समय नहीं है
- 3:27:06मेरे पास। यहां के बाकी स्टाफ को भी मेरे
- 3:27:09बारे में कुछ नहीं पता है। अगर कोई सवाल
- 3:27:12जवाब करे तो उसके सामने मुझे अपना दोस्त
- 3:27:14बनाकर ही प्रेजेंट करना।
- 3:27:17प्रिया को तो यह समझ नहीं आया कि उसका बॉस
- 3:27:19उससे ऐसा क्यों चाहता है। पर अब उसने भी
- 3:27:21सोच लिया था कि शौर्य उसे जैसा करने को कह
- 3:27:24रहा है वो उसी तरह बिहेव करेगी। फिर कुछ
- 3:27:27दिमाग में आते ही वह बोली पर मैं आपको किस
- 3:27:30नाम से बुलाऊंगी?
- 3:27:32श्रवण शौर्य ने उसे अपना दूसरा नाम बताया।
- 3:27:36उसी समय श्वेता ने दूर से उसे शौर्य से
- 3:27:38बात करते देखा तो वो उनके पास आ गई और
- 3:27:41बोली क्या बात है? कौन है यह जिससे इतना
- 3:27:44घुल मिलकर बात कर रही हो?
- 3:27:47दोस्त है मेरा। प्रिया अचानक से बोल पड़ी।
- 3:27:50श्वेता शौर्य को ऊपर से नीचे तक देखते हुए
- 3:27:52बोली, दोस्त है या उससे कुछ ज्यादा? पहले
- 3:27:55तो नहीं देखा कभी। वैसे मानना पड़ेगा।
- 3:27:58बड़ा स्मार्ट दोस्त है तुम्हारा। बस भी
- 3:28:01करो कुछ भी बोलती हो। प्रिया श्वेता को
- 3:28:03झड़कते हुए बोली। प्रिया को लग रहा था कि
- 3:28:06शौर्य उसे कुछ और समझाना चाहता था। लेकिन
- 3:28:09बीच में ही श्वेता आ गई। इसीलिए वह श्वेता
- 3:28:12से बोली। तुम थोड़ी देर के लिए हमें अकेला
- 3:28:14छोड़ोगी। श्वेता शक भरी नजरों से प्रिया
- 3:28:17को घूर रही थी। शौर्य समझ गया कि श्वेता
- 3:28:20थोड़ी ढीठ टाइप की लड़की है। वो खुद को
- 3:28:22नॉर्मल दिखाने की कोशिश करता हुआ बोला,
- 3:28:25रहने दो। ऐसी भी कोई खास बात नहीं करनी
- 3:28:27हमें। अभी मैं चलता हूं। मेरी बॉस आने
- 3:28:30वाली हैं। हो सकता है यहां भी आए। देख
- 3:28:32लेना अगर आती है तो ठीक से बात कर लेना।
- 3:28:36शौर्य ने एक तरह से प्रिया को इशारा कर
- 3:28:37दिया था कि उसके साथ कोई लड़की आ सकती है।
- 3:28:40तो उससे अच्छे से पेश आए। शौर्य भी बिग
- 3:28:43बुल के आउटलेट से बाहर जाने की सोच ही रहा
- 3:28:45था कि तभी उसकी नजर गेट से अंदर आते चेहरे
- 3:28:48पर पड़ी। शौर्य जहां का तहां ठिठक गया।
- 3:28:52वहीं अब क्योंकि शिप्रा को इंतजार
- 3:28:54करते-करते लगभग 5 मिनट हो गए थे इसीलिए
- 3:28:57शौर्य को समय लगते देखकर वो कार से बाहर आ
- 3:29:00गई और स्टोर की तरफ बढ़ गई। बिग बुल की
- 3:29:02भव्यता देखकर उसे समझ आया कि क्यों यह
- 3:29:05इंटरनेशनलली इतना फेमस है। स्टोर के अंदर
- 3:29:08उसने चारों ओर नजर दौड़ाई। तभी उसकी नजर
- 3:29:10शौर्य पर पड़ी जो एक लड़की से बात कर रहा
- 3:29:13था। यह देखते ही शिप्रा मन ही मन
- 3:29:15बुदबुदाने लगी। क्या श्रवण की वो दोस्त जो
- 3:29:19यहां काम करती है एक लड़की है? तभी शौर्य
- 3:29:23से उसकी नजरें मिली और शिप्रा उसकी तरफ
- 3:29:25बढ़ गई। शौर्य के पास पहुंचकर उसने प्रिया
- 3:29:28की तरफ देखा। प्रिया खूबसूरत थी जिसे
- 3:29:30देखकर शिप्रा के दिल में हल्की सी जलन भी
- 3:29:33उठी। तभी शिप्रा ने शौर्य से पूछा,
- 3:29:36[संगीत]
- 3:29:37क्या यही तुम्हारी वो दोस्त है जो यहां
- 3:29:39काम करती है? इस पर शौर्य ने हां में सिर
- 3:29:42हिला दिया। प्रिया को समझ नहीं आया कि
- 3:29:44दोनों किस बारे में बात कर रहे हैं। लेकिन
- 3:29:46शौर्य ने उसे पहले ही कह दिया था कि वो
- 3:29:49उसका दोस्त है इसलिए वह भी इस खेल का
- 3:29:51हिस्सा बन गई थी। क्या इसी ने हमारी
- 3:29:54मीटिंग मोहित सर के साथ फिक्स कराई थी?
- 3:29:56शिप्रा ने अगला सवाल किया। [संगीत]
- 3:29:59हां। शौर्य ने संक्षिप्त में जवाब दिया।
- 3:30:02प्रिया को समझ नहीं आया कि उसने कब इनकी
- 3:30:05मीटिंग मोहित सर के साथ फिक्स की और फिर
- 3:30:07जब शौर्य खुद ही बिग बुल का मालिक है तो
- 3:30:10किसी और की औकात ही क्या है उसके सामने।
- 3:30:13प्रिया समझ गई कि इन दोनों के बीच कुछ अलग
- 3:30:15ही खेल चल रहा है। शौर्य ने प्रिया से
- 3:30:18शिप्रा का परिचय कराते हुए कहा प्रिया ये
- 3:30:21है शिप्रा राय जिन कलेक्शन की ओनर जिनकी
- 3:30:24मीटिंग [संगीत] तुमने मोहित सर के साथ
- 3:30:25फिक्स कराई थी।
- 3:30:28ओ तो यही है वो प्रिया व्यवहार कुशल
- 3:30:31मुस्कान के साथ हाथ जोड़कर बोली आपसे
- 3:30:34मिलकर बहुत खुशी हुई। शौर्य को लगा था कि
- 3:30:37अचानक परिचय कराने पर प्रिया थोड़ी नर्वस
- 3:30:39होगी। लेकिन उसने जिस तरह से शिप्रा का
- 3:30:42स्वागत किया वो यह साबित करने के लिए काफी
- 3:30:44था कि प्रिया एक समझदार लड़की है। उसने
- 3:30:47स्थिति को तुरंत भांप लिया और उसी के
- 3:30:49अनुरूप खुद को शिप्रा के सामने प्रस्तुत
- 3:30:51किया। शिप्रा ने प्रिया को आभार प्रकट
- 3:30:54करते हुए कहा,
- 3:30:56"आका बहुत धन्यवाद जो आपने मेरे काम को
- 3:30:58आसान बना दिया।" [संगीत] आप कैसी बातें
- 3:31:01करती हैं? श्रवण ने कहा था तो मैं मना कर
- 3:31:03ही नहीं सकती थी। प्रिया शौर्य की तरफ
- 3:31:06देखते हुए बोली। उसे डर था कि कहीं वो कुछ
- 3:31:08गलत ना बोल दे। अगर ऐसा कुछ होता तो शौर्य
- 3:31:11आंखों के इशारे [संगीत] से उसे समझा देता
- 3:31:13कि क्या और कितना बोलना है। जब प्रिया ने
- 3:31:16कहा कि श्रवण ने कहा था तो मैं मना नहीं
- 3:31:19कर सकती थी। यह शब्द सुनकर शिप्रा को
- 3:31:21थोड़ा अजीब लगा और उसके दिमाग में कुछ
- 3:31:24सवाल गूंजने लगे। क्या श्रवण प्रिया के
- 3:31:27लिए इतना खास है? क्या ये दोनों सच में
- 3:31:29सिर्फ दोस्त हैं या उससे भी बढ़कर कुछ?
- 3:31:32शिप्रा ने अपनी घड़ी पर नजर डाली और पूछा
- 3:31:34क्या मिस्टर मोहित अभी ऑफिस में ही है? जी
- 3:31:38हां, चलिए मैं आपको उनके ऑफिस तक ले चलती
- 3:31:40हूं। प्रिया शिप्रा को लेकर लिफ्ट की ओर
- 3:31:42बढ़ गई। मोहित रैना का ऑफिस तीसरे फ्लोर
- 3:31:45पर था। शिप्रा, शौर्य और प्रिया तीनों
- 3:31:48लिफ्ट के सामने खड़े होकर इंतजार कर रहे
- 3:31:50थे। तभी लिफ्ट का दरवाजा खुला और उसमें से
- 3:31:53जो शख्स बाहर निकला वो था बलराज खन्ना।
- 3:31:56सफलता या तरक्की का रास्ता डर के डगमगाते
- 3:31:59पुल से गुजरता है और इस पुल को वही पार कर
- 3:32:01पाता है जो साहस और दृढ़ निश्चय को साथ
- 3:32:04लेकर इस पर चलता है। दौड़ती सफलता के साथ
- 3:32:07छेड़छाड़ करने में डर को बड़ा मजा आता है
- 3:32:10और इसी मकसद से डर आज बिग बुल के शोरूम
- 3:32:13में भी पहुंच चुका है। शिप्रा के दिमाग
- 3:32:15में चल रहा है कि आज की मीटिंग अगर सफल हो
- 3:32:18जाती है तो वह बिग बुल स्टोर के साथ अपनी
- 3:32:20जिंक कलेक्शन की पार्टनरशिप की एक और सफल
- 3:32:23कहानी लिखेगी। लेकिन उसे नहीं मालूम कि
- 3:32:25विलेन [संगीत] का रोल प्ले करने के लिए डर
- 3:32:27बिग बुल ऑफिस में पहले ही मौजूद है और उस
- 3:32:30डर का नाम है बलराज खन्ना जो अब लिफ्ट से
- 3:32:33निकल कर लिफ्ट का इंतजार कर रही शिप्रा के
- 3:32:36ठीक सामने खड़ा है। जैसे ही उसकी नजर
- 3:32:38शिप्रा पर पड़ती है उसकी आंखें सिकुड़
- 3:32:41जाती हैं। शिप्रा को जिसका डर था वही हो
- 3:32:44गया। बलराज खन्ना को सामने देखकर गुस्से
- 3:32:47से उसकी धड़कन तेज होने लगी। अरे मिस
- 3:32:51शिप्रा ओ सॉरी। मिसेज शिप्रा आप यहां सब
- 3:32:56खैरियत तो है बलराज खन्ना ने उपहास करते
- 3:33:00हुए कहा शिप्रा भी उसी अंदाज में बोली
- 3:33:03मिस्टर खन्ना मेरी खैरियत को छोड़िए आप
- 3:33:06अपनी फिक्र कीजिए तभी बलराज खन्ना कुटिल
- 3:33:10मुस्कान के साथ बोला मैंने सुना है वीगर
- 3:33:14कलेक्शन के बाद कई स्टोर्स ने आपके
- 3:33:16प्रोडक्ट डिस्प्ले करना बंद कर दिया है।
- 3:33:19शिप्रा भी मानो जैसे तैयार ही बैठी थी और
- 3:33:22उसने तुरंत ही तंज कस दिया। लगता है आजकल
- 3:33:25आपका काम सही नहीं चल रहा। इसीलिए आपने
- 3:33:28दूसरों के घरों में झांकने का काम शुरू कर
- 3:33:31दिया है। शिप्रा की बात सुनकर बलराज खन्ना
- 3:33:34तिलमिला गया और बोला लगता है हर जगह से
- 3:33:37ठोकर खाने के बाद आप यहां आई हैं। आपको
- 3:33:40क्या लगता है? यहां आपका काम बन जाएगा।
- 3:33:43सपने देखने से सपने पूरे नहीं होते। मिस
- 3:33:46सॉरी मिसेज शिप्रा।
- 3:33:50एकदम कुत्ते की दुम हो तुम। कितना भी समय
- 3:33:52नली में बिता लो पर रहोगे टेढ़े के टेढ़े।
- 3:33:56शिप्रा गुस्से में बोली और बलराज खन्ना के
- 3:33:59बगल से निकल कर लिफ्ट के अंदर चली गई।
- 3:34:01बलराज खन्ना भी आगे बढ़ा। लेकिन तभी शौर्य
- 3:34:05को शरारत सूझी। जैसे ही बलराज उसके पास से
- 3:34:07गुजरा, शौर्य ने चुपके से अपना पैर उसके
- 3:34:10पैरों के बीच फंसा दिया। अगले ही पल
- 3:34:13धड़ाम। बलराज खन्ना जमीन पर गिर पड़ा। यही
- 3:34:17वो पल था जब लिफ्ट के अंदर जाते ही शिप्रा
- 3:34:19पीछे मुड़ी और उसने शौर्य की हरकत देख ली।
- 3:34:22बलराज खन्ना को जमीन पर गिरा देखकर शिप्रा
- 3:34:25के दिल को एक अजीब सा सुकून मिला। प्रिया
- 3:34:27ने भी शौर्य की इस हरकत को नोटिस कर लिया
- 3:34:29था। अब उसे पूरा यकीन हो गया था कि शिप्रा
- 3:34:32और बलराज खन्ना के बीच पुरानी [संगीत]
- 3:34:34दुश्मनी है। तभी शौर्य तुरंत बलराज खन्ना
- 3:34:37के पास गया और हाथ बढ़ाते हुए बोला। लगता
- 3:34:40है खन्ना साहब उम्र के साथ आपकी आंखें भी
- 3:34:43कमजोर पड़ गई हैं। शौर्य ने यह सब इतनी
- 3:34:46तेजी से किया था कि बलराज खन्ना समझ ही
- 3:34:48नहीं पाया कि वह [संगीत] गिरा कैसे लेकिन
- 3:34:50उसे इतना जरूर समझ आ गया था कि इस सबके
- 3:34:52पीछे कहीं ना कहीं शौर्य का ही हाथ है।
- 3:34:56बलराज खन्ना ने शौर्य का हाथ झटकते हुए
- 3:34:58कहा, रहने दीजिए। इस पर शौर्य ने तुरंत
- 3:35:02हाथ पीछे खींचते हुए कहा, "मैं तो आपकी
- 3:35:04मदद करना चाहता था। पर जब आपकी मदद लेने
- 3:35:07की इच्छा ही नहीं है, तो कोई क्या कर सकता
- 3:35:09है?"
- 3:35:10शौर्य तुरंत मुड़ा और दौड़कर प्रिया के
- 3:35:12साथ लिफ्ट में घुस गया। एक तरफ बलराज
- 3:35:15खन्ना जमीन पर गिर चुका था। दूसरी ओर
- 3:35:17शिप्रा [संगीत] एक नई डील करने के लिए
- 3:35:19लिफ्ट से ऊपर की ओर जा रही थी। शौर्य,
- 3:35:22शिप्रा और प्रिया
- 3:35:23[संगीत]
- 3:35:23तीनों की ही नजरें बार-बार एक दूसरे से
- 3:35:25टकरा रही थी। शिप्रा, शौर्य और प्रिया के
- 3:35:28साथ तीसरे फ्लोर पर पहुंची। प्रिया शिप्रा
- 3:35:31को लेकर मोहित रैना के ऑफिस के पास
- 3:35:33पहुंची। मोहित के ऑफिस के बाहर ऑफिस बॉय
- 3:35:35बैठा हुआ था। प्रिया ने उससे कहा, बॉस के
- 3:35:39साथ मैडम का अपॉइंटमेंट है। बॉस को
- 3:35:41इन्फॉर्म कर दो। मिस शिप्रा आई हुई है।
- 3:35:44अरे मैं तो मैडम का ही इंतजार कर रहा हूं।
- 3:35:46बॉस ने कहा था जब आप आएंगी तो आपको अंदर
- 3:35:48भेज [संगीत] देना। जैसे ही ऑफिस बॉय ने
- 3:35:51जवाब दिया, शौर्य ने शिप्रा से कहा,
- 3:35:54मीटिंग खत्म होने तक मैं नीचे रिसेप्शन पर
- 3:35:56आपका इंतजार करता हूं। शिप्रा मोहित रैना
- 3:36:00के ऑफिस के अंदर चली गई। शौर्य प्रिया के
- 3:36:02साथ बाहर ही रुक गया। उसने तुरंत मोहित
- 3:36:04रैना को कॉल लगाया। मोहित ने कॉल उठाया।
- 3:36:07वो कुछ बोलता उससे पहले ही शौर्य बोला
- 3:36:10तुम्हें कुछ बोलने की जरूरत नहीं है।
- 3:36:12मोबाइल को ऐसे ही टेबल पर रख दो जिससे
- 3:36:15उसकी आवाज मुझे सुनाई देती रहे। तब तक
- 3:36:18शिप्रा मोहित रैना के पास पहुंच चुकी थी।
- 3:36:20जैसे ही शिप्रा सामने पहुंची मोहित रैना
- 3:36:22ने बिना कॉल काटे अपना मोबाइल टेबल पर रख
- 3:36:25दिया और उसे बैठने का इशारा किया। शिप्रा
- 3:36:28सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई। मोहित ने
- 3:36:30बेल बजाई तो ऑफिस बॉय अंदर आया। मोहित ने
- 3:36:33आर्डर दिया दो कॉफी ले आओ। ऑफिस बॉय के
- 3:36:37बाहर जाते ही मोहित रैना ने शिप्रा से
- 3:36:39पूछा, बताइए आप मुझसे क्या चाहती हैं?
- 3:36:43शिप्रा मोहित के सीधे मुद्दे पर आने से
- 3:36:46थोड़ी इंप्रेस होते हुए बोली,
- 3:36:48जिंक कलेक्शन नाम से मेरा एक क्लोथिंग
- 3:36:50ब्रांड है। मैं चाहती हूं कि उसे बिग बुल
- 3:36:53के साथ काम करने का मौका मिले। शिप्रा ने
- 3:36:56साफ शब्दों में अपना मकसद बता दिया। इस पर
- 3:36:58मोहित रैना ने शिप्रा की आंखों में देखते
- 3:37:00हुए कहा, "आपको पता है बिगbul किस तरह के
- 3:37:03ब्रांड्स के साथ काम करता है?" है। मुझे
- 3:37:06पता है आपकी कंपनी हमेशा उस ब्रांड के साथ
- 3:37:09काम करती है जो इंटरनेशनलली फेमस हो।
- 3:37:12शिप्रा ने हिचकिचाते हुए जवाब दिया। इस पर
- 3:37:14मोहित रैना ने शिप्रा के सामने अगला सवाल
- 3:37:17दाग दिया। तो क्या आपको लगता है कि आपका
- 3:37:20ब्रांड इस लायक है कि बिगबुल आपके ब्रांड
- 3:37:22को अपने यहां [संगीत] डिस्प्ले कर सके?
- 3:37:25इसी समय दो कॉफी लेकर ऑफिस बॉय रूम में
- 3:37:27आया। उसने एक कप शिप्रा के सामने और एक कप
- 3:37:30मोहित रैना के सामने रख दिया। उसके बाद वो
- 3:37:33बाहर चला गया। ऑफिस बॉय के जाते ही शिप्रा
- 3:37:36ने आत्मविश्वास से कहा, "मैं जानती हूं कि
- 3:37:39अभी मेरा ब्रांड इंटरनेशनलली फेमस नहीं
- 3:37:41है। लेकिन मुझे लगता है इंटरनेशनलली फेमस
- 3:37:43होने के लिए बिग बुल से जुड़ना ही सबसे
- 3:37:45इफेक्टिव स्ट्रेटजी हो सकती है। इसीलिए
- 3:37:48अगर आपके साथ जुड़ने का मौका मिला तो जिंक
- 3:37:50कलेक्शन को इंटरनेशनलली फेमस होने में
- 3:37:53ज्यादा टाइम नहीं लगेगा। शिप्रा की बात
- 3:37:56सुनकर मोहित रैना के होठों पर मुस्कान आ
- 3:37:58गई। यानी आप हमारे भरोसे अपनी नैया पार
- 3:38:01करना चाहती हैं। ऐसी बात नहीं है मिस्टर
- 3:38:04मोहित। अभी आप कह सकते हैं कि जिंक
- 3:38:06कलेक्शन इंटरनेशनल ब्रांड नहीं है। बट
- 3:38:08इतना श्योर है कि एक दिन यह ब्रांड
- 3:38:10इंटरनेशनलली पॉपुलर होगा क्योंकि मैं इसे
- 3:38:13आधे रास्ते ऐसे ही तो नहीं छोड़ने वाली।
- 3:38:16शिप्रा ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ जवाब
- 3:38:18दिया।
- 3:38:18[संगीत]
- 3:38:18इस पर मोहित बोला देखिए मिस शिप्रा मैं
- 3:38:22जानता हूं कि बहुत कम समय में आपने
- 3:38:24मार्केट में अपने ब्रांड को एक पहचान दिला
- 3:38:26दी है जो काबिले तारीफ है। लेकिन आप जिस
- 3:38:29रिसोर्स पर काम कर रही हैं उसमें मुझे
- 3:38:31संभव नहीं लगता। इसके लिए जिस बड़े स्केल
- 3:38:34पर रिसोर्स [संगीत] और पैसे चाहिए वो आपके
- 3:38:37पास नहीं है। और जिस स्तर पर आप काम कर
- 3:38:39रही हैं उस स्तर से टॉप तक पहुंचने में
- 3:38:41आपको वर्षों लग जाएंगे। चाहे आप कितनी भी
- 3:38:44मेहनत क्यों ना कर लें। मोहित रैना ने
- 3:38:46शिप्रा के सामने सारी सच्चाई साफ-साफ रख
- 3:38:49दी। शिप्रा समझ गई कि मोहित रैना ने उसकी
- 3:38:52कंपनी के बारे में पूरी जानकारी जुटा रखी
- 3:38:55है। अब उसे उम्मीद कम ही लग रही थी कि बिग
- 3:38:57बुल के साथ उसकी डील हो पाएगी। उसके चेहरे
- 3:39:00पर मायूसी साफ झलकने लगी। उसी समय मोहित
- 3:39:04ने कहा, "असेट मत होइए। आपके लिए मेरे पास
- 3:39:07एक गुड न्यूज़ भी है।" मोहित की बात सुनकर
- 3:39:10शिप्रा के मायूस मूड ने तुरंत ही करवट
- 3:39:12[संगीत] ली और उसके मुंह से निकल पड़ा।
- 3:39:14गुड न्यूज़। मोहित हल्के से मुस्कुराया और
- 3:39:17शिप्रा की ओर देखते हुए बोला, एक्चुअली
- 3:39:20हमारी कंपनी किसी क्लोथिंग ब्रांड में
- 3:39:22इन्वेस्ट करना चाहती है और हमारी नजर में
- 3:39:24ऐसी दो कंपनियां आई हैं जो इन्वेस्टमेंट
- 3:39:27के लिए परफेक्ट लगती हैं। एक लेविस ब्लू
- 3:39:29और दूसरी आपकी कंपनी जिंक कलेक्शन। अब
- 3:39:33हमें इनमें से किसी एक के साथ काम करना
- 3:39:35है। मोहित रैना की बात सुनकर शिप्रा की
- 3:39:38आंखों में उम्मीद की किरण चमकने लगी।
- 3:39:40मोहित आगे बोला, आप यह समझ सकती हैं कि
- 3:39:44जिस भी कंपनी में हम इन्वेस्ट करेंगे,
- 3:39:46उसके साथ एक पार्टनरशिप डीड साइन होगी।
- 3:39:48किसका कितना शेयर रहेगा, इस पर हम बाद में
- 3:39:51डिस्कशन कर सकते हैं। लेकिन पहले यह देखना
- 3:39:53होगा कि क्या आप इस शर्त के लिए तैयार
- 3:39:55हैं? मोहित रैना ने उसके सामने साफ-साफ
- 3:39:59प्रस्ताव रख दिया। शिप्रा के तो जैसे
- 3:40:02दोनों हाथों में लड्डू आ गए। पहला फायदा
- 3:40:04तो उसे यह होगा कि अगर वह बिगbull के साथ
- 3:40:06पार्टनरशिप कर लेती है तो उसके ब्रांड को
- 3:40:09इंटरनेशनलली हिट होने से कोई नहीं रोक
- 3:40:11सकता और दूसरा उसको इंटरनेशनल लेवल तक
- 3:40:14अपने ब्रांड और कंपनी को एक्सपेंड करने के
- 3:40:17लिए इतना बड़ा फाइनेंशियल सपोर्ट मिल
- 3:40:19जाएगा जो उसके लिए अपने स्तर पर मैनेज
- 3:40:21करना नामुमकिन था। वो समझ गई कि शायद इसी
- 3:40:24वजह से बलराज खन्ना भी यहां आया होगा। वो
- 3:40:27अपने सबसे बड़े कंपिटिटर से हारना नहीं
- 3:40:30चाहती थी। शिप्रा ने मोहित रैना के ऑफर को
- 3:40:32लगभग स्वीकार करते हुए पूछा इसके लिए हमें
- 3:40:36क्या करना पड़ेगा? बस कुछ खास नहीं। आपको
- 3:40:39सबसे पहले तो अपना मन बनाना पड़ेगा कि आप
- 3:40:41हमारे साथ काम करने के लिए तैयार हैं या
- 3:40:44नहीं। बाकी बातें उसके बाद होंगी। मोहित
- 3:40:47रैना ने कॉफी का एक घूंट लेते हुए कहा।
- 3:40:50फिर शिप्रा की तरफ इशारा करते हुए बोला।
- 3:40:53आप भी कॉफी पीजिए नहीं तो ठंडी हो जाएगी।
- 3:40:56लेकिन शिप्रा के मन में तो उथल-पुथल मची
- 3:40:58हुई थी। उसने शक भरी नजरों से मोहित रैना
- 3:41:01को देखते हुए कहा अभी तो आपने कहा था कि
- 3:41:04आप इसके लिए दो कंपनियों के बारे में सोच
- 3:41:07रहे थे। मेरे अलावा लेविस ब्लू भी तो फिर
- 3:41:10मेरे हां कहते ही आप कैसे तैयार हो जाते?
- 3:41:13शिप्रा ने अपनी शंका साफ-साफ जाहिर कर दी।
- 3:41:16इस पर मोहित रैना ने अपना पक्ष स्पष्ट
- 3:41:19किया। मैंने कहा ना मैंने रिसर्च में भी
- 3:41:22थोड़ा समय लगाया है। मार्केट में बलराज
- 3:41:25खन्ना की रेपुटेशन कुछ खास अच्छी नहीं है।
- 3:41:27इसलिए हम ऐसे लोगों से डायरेक्ट
- 3:41:29पार्टनरशिप नहीं कर सकते। उसकी तुलना में
- 3:41:32आपकी कंपनी ने बुरे दौर जरूर देखे हैं,
- 3:41:34लेकिन आपने अपने उसूलों से समझौता नहीं
- 3:41:37किया। यह बात मुझे आपकी अच्छी लगी। इसीलिए
- 3:41:40हमने पहली प्राथमिकता आपकी कंपनी को दी
- 3:41:43है। अगर आप तैयार नहीं होती तो फिर हम
- 3:41:45सोचेंगे कि आगे क्या करना है। अब शिप्रा
- 3:41:49के पास इस डील को ठुकराने का कोई कारण
- 3:41:51नहीं था। बिग बुल के साथ जुड़कर [संगीत]
- 3:41:53उसकी कंपनी को एक बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट
- 3:41:55मिल सकता है। तभी मोहित रैना आगे बोला। और
- 3:41:59हां, मैं आपको एक बात और स्पष्ट कर दूं।
- 3:42:01आपकी कंपनी के साथ जो नई डील होगी, उसका
- 3:42:04बिग बुल से सीधा कोई कनेक्शन नहीं होगा।
- 3:42:07यह हमारा बिल्कुल नया वेंचर होगा। इसके
- 3:42:10लिए हमने एक नई ब्रांच स्थापित की है और
- 3:42:12उसके लिए स्टाफ की हायरिंग भी शुरू हो
- 3:42:14चुकी है। इतना कहने के बाद मोहित रैना दो
- 3:42:18पल रुका और फिर बोला अगर आपकी कंपनी के
- 3:42:20साथ डील होती है तो उसे वही टीम संभालेगी।
- 3:42:243 महीने के अंदर आपकी कंपनी को कैसे ग्रो
- 3:42:26करना है यह भी वही तय करेंगे। और मैं आपको
- 3:42:29विश्वास दिलाता हूं अगर आप हमारे साथ काम
- 3:42:31करती हैं तो 6 महीने के अंदर जिंक कलेक्शन
- 3:42:34एक इंटरनेशनल ब्रांड बन जाएगा। उसके बाद
- 3:42:37अगर आप चाहें तो हम इसे शेयर मार्केट में
- 3:42:39भी लिस्ट करवा सकते हैं। तो अब आप बताइए
- 3:42:42आपका क्या फैसला है? शिप्रा तो पहले ही
- 3:42:45अपना मन बना चुकी थी इसलिए उसने बिना देर
- 3:42:48किए कहा। मैं आपके साथ मिलकर काम करने के
- 3:42:51लिए तैयार हूं। इस पर मोहित रैना
- 3:42:53मुस्कुराते हुए बोला, बधाई हो। [संगीत]
- 3:42:56मुझे आपसे यही उम्मीद थी। आपका यह डिसीजन
- 3:42:58आपके ब्रांड के लिए एक बड़ा मास्टर
- 3:43:00स्ट्रोक साबित होगा। अब देखिएगा कुछ ही
- 3:43:03दिनों में जिस पौधे को आपने सींचा है वो
- 3:43:05एक बड़ा विशाल पेड़ बन जाएगा। यह सुनकर
- 3:43:09शिप्रा भी मुस्कुरा दी। दूसरी तरफ शौर्य
- 3:43:12ये सारी बातें फोन पर सुन रहा था और
- 3:43:14प्रिया उसे अचंभे से देख रही थी। उसे समझ
- 3:43:18नहीं आ रहा था कि श्रवण शिप्रा से अपनी
- 3:43:20असली पहचान क्यों छुपा रहा है।
- 3:43:23तो क्या होगा आगे? क्या शिप्रा का जिंक
- 3:43:26कलेक्शन को इंटरनेशनल ब्रांड बनाने का
- 3:43:28सपना पूरा हो पाएगा? शौर्य और शिप्रा के
- 3:43:31बीच यह आंख मिचोली का खेल आखिर कब तक
- 3:43:33चलेगा? कहते हैं किस्मत जब मेहरबान होती
- 3:43:36है तो आप मिट्टी में हाथ रख दो तो वह भी
- 3:43:38सोना बन जाती है। सड़क पर पड़ा एक भिखारी
- 3:43:41भी आपके सपनों को सच करने वाला देवदूत बन
- 3:43:44जाता है। जैसे ही शिप्रा की लाइफ में
- 3:43:46शौर्य आया उसका बिग बुल से जुड़ने का सपना
- 3:43:49हकीकत बन गया। देवदूत की कृपा से शिप्रा
- 3:43:52मोहित के साथ मीटिंग के अनएक्सेक्टेड
- 3:43:54रिजल्ट से अंदर ही अंदर बहुत खुश थी। सारी
- 3:43:57बातें तय हो जाने के बाद मोहित रैना बोला
- 3:44:00तो ठीक है मिस शिप्रा जैसे ही सारा पेपर
- 3:44:02वर्क पूरा हो जाएगा मैं उसकी एक कॉपी आपको
- 3:44:04भिजवा दूंगा। आप उसे ध्यान से पढ़ लीजिएगा
- 3:44:07और उसके बाद साइन कर दीजिएगा। फिर मैं
- 3:44:10आपको अपनी उस टीम से मिलवाऊंगा जो आपके
- 3:44:12साथ मिलकर आपके इस ब्रांड को नई ऊंचाइयों
- 3:44:14तक ले जाएगी और पूरी दुनिया घुमाएगी।
- 3:44:18शिपरम मोहित रैना की बातों से संतुष्ट नजर
- 3:44:20आ रही थी। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि
- 3:44:23कोई उसकी कंपनी में इतना बड़ा निवेश करने
- 3:44:25को तैयार होगा जो महज 6 महीने में उसे एक
- 3:44:28इंटरनेशनल ब्रांड बना दे। यह सब उसे किसी
- 3:44:31सपने जैसा लग रहा था। उसे मोहित रैना से
- 3:44:35इतनी बड़ी उम्मीद नहीं थी। वो तो सिर्फ इस
- 3:44:37इरादे से बिग बॉल आई थी कि उसके प्रोडक्ट
- 3:44:39को वहां डिस्प्ले करने का मौका मिल जाए।
- 3:44:41लेकिन यहां तो उसे अच्छा खासा निवेश मिलने
- 3:44:44वाला है। उसने मोहित रैना से पूछा यह पेपर
- 3:44:47वर्क कब तक पूरा हो जाएगा? इस सप्ताह के
- 3:44:50अंत तक एग्रीमेंट की कॉपी आपके हाथों में
- 3:44:52होगी। मोहित रैना ने जवाब दिया। जब शिप्रा
- 3:44:56को लगा कि पूछने के लिए कुछ बाकी नहीं है
- 3:44:58तो उसने कहा तो ठीक है मिस्टर मोहित अब
- 3:45:01मैं चलती हूं। एग्रीमेंट पेपर तैयार हो
- 3:45:03जाए तो प्लीज मुझे इन्फॉर्म कर दीजिएगा।
- 3:45:06ठीक है। मोहित रैना ने जवाब दिया। दूसरी
- 3:45:09तरफ शौर्य को अंदाजा हो गया था कि शिप्रा
- 3:45:11अब किसी भी पल मोहित रैना के ऑफिस से बाहर
- 3:45:14आने वाली है। वो चाहता था कि शिप्रा के
- 3:45:16बाहर आने से पहले ही वो प्रिया के [संगीत]
- 3:45:18साथ नीचे पहुंच जाए। इसीलिए बिना समय गवाए
- 3:45:21वो प्रिया के साथ तेजी से लिफ्ट की ओर बढ़
- 3:45:24गया। लिफ्ट में खड़ी प्रिया के दिमाग में
- 3:45:26सवालों का तूफान चल रहा था। शौर्य हर
- 3:45:29[संगीत] कदम शिप्रा के लिए आसान बना रहा
- 3:45:31था और सारा क्रेडिट प्रिया को दे रहा था।
- 3:45:34प्रिया के मन में बार-बार यही सवाल गूंज
- 3:45:36रहा था। आखिर ये इंसान अपनी असलियत क्यों
- 3:45:39छुपा रहा है? आखिरकार प्रिया ने हिम्मत
- 3:45:42जुटाकर शौर्य से पूछ ही लिया। सर आपने
- 3:45:45मुझे अपना दोस्त कहा है तो उस हग से क्या
- 3:45:48मैं आपसे कुछ पूछ सकती हूं? शौर्य ने
- 3:45:51प्रिया के चेहरे को पढ़ लिया था। कुछ पल
- 3:45:53के [संगीत] लिए वो चुप रहा। उसे एहसास था
- 3:45:56कि आगे आने वाले समय में उसे प्रिया की
- 3:45:58जरूरत पड़ सकती है। अगर उसे सच्चाई का पता
- 3:46:01नहीं होगा तो अनजाने में ही उसका राज खुल
- 3:46:04सकता है। यही सोचकर शौर्य ने एक हल्की
- 3:46:06सांस ली और शांत स्वर में कहा। ठीक है
- 3:46:10पूछो क्या जानना चाहती हो? सर मुझे कुछ
- 3:46:12समझ नहीं आ रहा है। आप इतने बड़े आदमी
- 3:46:14होकर शिप्रा मैम के सामने खुद को इतना
- 3:46:17छोटा क्यों दिखा रहे हैं? आप उनकी मदद
- 3:46:19करके भी जता नहीं रहे। आखिर इसके पीछे की
- 3:46:22कहानी क्या है? एक ही सांस में प्रिया ने
- 3:46:25अपनी सारी उलझन शौर्य के सामने रख दी। इस
- 3:46:27पर शौर्य कुछ पल के लिए खामोश हो गया। वो
- 3:46:30सोच रहा था कि अपनी कहानी कहां [संगीत] से
- 3:46:32शुरू करें और कितना बताएं। उसकी आंखों में
- 3:46:35एक अजीब सी गंभीरता उतर आई। फिर उसने धीमे
- 3:46:38स्वर में कहना शुरू किया। [संगीत]
- 3:46:40तुम यूं समझो एक हादसे की वजह से शिप्रा
- 3:46:42को मुझसे शादी करनी पड़ी। उसकी नजर में
- 3:46:45उसके परिवार और पूरी दुनिया की नजर में
- 3:46:47मैं बस एक भिखारी हूं। यानी कि एक अमीर
- 3:46:50लड़की की शादी एक भिखारी [संगीत] से।
- 3:46:53जैसे ही प्रिया ने यह सुना तो उसे एक झटका
- 3:46:56सा लगा। उसकी आंखें हैरानी से फैल गई और
- 3:46:59वो लगभग हकलाते हुए बोली ये ये शिप्रा राय
- 3:47:03है। बलवंत राय की पोती। अरे इनके किस्से
- 3:47:06तो पूरे विशालगढ़ में वायरल है और उनके
- 3:47:08भिखारी पति आप हैं। ओह माय गॉड। उसने अपने
- 3:47:12सिर पर हाथ मारा और कुछ पल तक शौर्य को
- 3:47:14अविश्वास भरी नजर से देखती रही। जैसे उसकी
- 3:47:17बातों पर यकीन करना मुश्किल हो रहा हो।
- 3:47:19फिर थोड़ा संभलते हुए उसने फिर सवाल किया।
- 3:47:22लेकिन मुझे यह समझ नहीं आ रहा शिप्रा मैम
- 3:47:25और उनका परिवार आपको भिखारी क्यों समझता
- 3:47:28है। क्योंकि जब मेरी शादी शिप्रा से हुई
- 3:47:30थी तब मैं सच में एक भिखारी की जिंदगी जी
- 3:47:32रहा था। इसीलिए सब मुझे वही समझते हैं।
- 3:47:36शौर्य ने शांत स्वर में प्रिया [संगीत] को
- 3:47:38समझाया। लेकिन ये कैसे मुमकिन है कि आप
- 3:47:40भिखारियों जैसी जिंदगी जी रहे थे? प्रिया
- 3:47:43के सवाल जैसे खत्म होने का नाम ही नहीं ले
- 3:47:45रहे थे। शौर्य ने एक गहरी सांस ली और फिर
- 3:47:48धीरे-धीरे अपने साथ बीती हर बात उसे बताने
- 3:47:51लगा। कैसे जिंदगी ने करवट ली, हालात बदले
- 3:47:54और कैसे वो उस मुकाम पर पहुंचा जहां से सब
- 3:47:57कुछ बदल गया। जैसे ही प्रिया ने प्लेन
- 3:47:59क्रैश के बारे में सुना उसके दिमाग में
- 3:48:02मानो एक और धमाका हुआ। वो हैरान होकर
- 3:48:04शौर्य को देखने लगी। इसका मतलब आप शौर्य
- 3:48:08राठौड़ हैं। चंद्रभान राठौड़ के पोते। फिर
- 3:48:11थोड़ा रुक कर उसने पूछा मान लिया कि आपकी
- 3:48:14शादी जबरदस्ती करवाई गई थी पर उसके बाद तो
- 3:48:17आप उन्हें अपने बारे में सच बता सकते थे।
- 3:48:19है ना? शौर्य ने गहरी सांस ली और फिर शांत
- 3:48:22होकर बोला बताने को तो मैं सब कुछ बता
- 3:48:25सकता था। लेकिन मैं चाहता हूं कि वो मुझे
- 3:48:27उसी रूप में पसंद करें जैसा मैं हूं। ना
- 3:48:30कि इस वजह से कि मैं [संगीत] कितना अमीर
- 3:48:32हूं या किस परिवार से ताल्लुक रखता हूं।
- 3:48:34प्रिया ने शौर्य की आंखों में झांकते हुए
- 3:48:36हल्की मुस्कान के साथ [संगीत] पूछा। तो
- 3:48:39इसका क्या मतलब? आप शिपरा मैम को पसंद
- 3:48:41करने लगे हैं। इस पर शौर्य ने मुस्कुराते
- 3:48:44हुए हल्के से सिर हिलाया। हां तुम ऐसा कह
- 3:48:47सकती हो। तभी प्रिया ने बिना देर किए अगला
- 3:48:51सवाल दाग [संगीत] दिया। और शिप्रा मैम
- 3:48:53क्या वो भी आपको पसंद करने लगी हैं? नहीं
- 3:48:56अभी नहीं। अभी उसे मुझसे बस सहानुभूति है।
- 3:48:59वो मुझे एक डमी पति की तरह इस्तेमाल करना
- 3:49:01चाहती है ताकि उसके परिवार वाले उस पर
- 3:49:04दूसरी शादी का दबाव ना डालें।
- 3:49:07उसने साफ-साफ प्रिया के सामने अपनी और
- 3:49:09शिप्रा के रिश्ते की सच्चाई रख दी। लेकिन
- 3:49:12वो ऐसा क्यों कर रही हैं? प्रिया ने भए
- 3:49:15सिकोड़ते हुए पूछा तो शौर्य ने हल्की सांस
- 3:49:18लेकर जवाब दिया।
- 3:49:20दरअसल अब वो दोबारा शादी के झंझट में
- 3:49:22[संगीत] पड़ना ही नहीं चाहती। उसका मानना
- 3:49:24है कि उसे किसी की जरूरत नहीं है। वो पूरी
- 3:49:27जिंदगी अकेले ही जी सकती है।
- 3:49:30प्रिया हल्की मुस्कान के साथ [संगीत]
- 3:49:31मजाकिया अंदाज में बोली। तो आपको शिप्रा
- 3:49:34मैम का डमी पति बनकर आखिर कब तक रहना है?
- 3:49:37शौर्य ने भी एक फीकी सी मुस्कान दी। लेकिन
- 3:49:40उसकी आंखों में छिपी चाहत साफ झलक रही थी।
- 3:49:42[संगीत] मैं तो पूरी जिंदगी उसका पति बनकर
- 3:49:44रहना चाहता हूं। बस तू मुझे एक मौका तो
- 3:49:47दे। अब प्रिया पहले से काफी सहज हो चुकी
- 3:49:50थी। शौर्य भी यही चाहता था क्योंकि उसे एक
- 3:49:53ऐसे साथी की [संगीत] जरूरत थी जिस पर वह
- 3:49:55भरोसा कर सके और बेझिझक जिम्मेदारियां
- 3:49:57सौंप सके। ग्राहकों के साथ प्रिय का
- 3:50:00व्यवहार बेहद अच्छा था और उसने आज की
- 3:50:02सिचुएशन को भी सही तरीके से संभाला था।
- 3:50:05इसीलिए शौर्य मन ही मन सोच रहा था कि आगे
- 3:50:07चलकर वो उसे इससे भी बड़ी जिम्मेदारी दे
- 3:50:10सकता है। बातोंबातों में शौर्य की नजर
- 3:50:12सामने पड़ी। उसने देखा शिप्रा उनकी तरफ ही
- 3:50:15आ रही थी। शौर्य और प्रिया को साथ देखकर
- 3:50:18शिप्रा के दिल में हल्की सी चुभन जरूर
- 3:50:20हुई। पर क्यों? इसका जवाब वो खुद भी नहीं
- 3:50:23जानती थी। शौर्य ने उसे पास आते देखा तो
- 3:50:25मुस्कुराते हुए [संगीत] पूछा। कैसी रही
- 3:50:28मीटिंग? शिप्रा के चेहरे पर खुशी साफ झलक
- 3:50:31रही थी। वो बोली, बहुत बढ़िया उम्मीद से
- 3:50:34भी कहीं बेहतर। फिर वो प्रिया की ओर मुड़ी
- 3:50:37और बोली, थैंक यू प्रिया। तुम्हारी वजह से
- 3:50:40ही यह मीटिंग संभव हो पाई। प्रिया ने
- 3:50:42विनम्रता से मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
- 3:50:45अरे आप कैसी बातें कर रही हैं? मैं तो बस
- 3:50:47एक जरिया बनी हूं। अगर आपके बीच कोई
- 3:50:49बिजनेस रिलेशन बनता है तो वो आपके अपने
- 3:50:52प्रयासों की वजह से ही होगा। और फिर मैं
- 3:50:54और श्रवण अच्छे दोस्त हैं और आप उनकी बॉस
- 3:50:57तो आपके लिए इतना तो कर ही सकती हूं। इससे
- 3:51:00पहले कि शिप्रा प्रिया से कुछ कहती उसे
- 3:51:02महसूस हुआ जैसे कोई उसे छिप कर देख रहा
- 3:51:05है। उसने तुरंत नजर घुमाई लेकिन वो शख्स
- 3:51:08अचानक गायब हो गया। उसने इधर-उधर घूम कर
- 3:51:10देखा लेकिन वो शख्स दोबारा कहीं नजर नहीं
- 3:51:13आया। हारकर उसने शौर्य की तरफ देखा और
- 3:51:16बोली
- 3:51:18अब चलें।
- 3:51:20ठीक है चलते हैं। शौर्य ने सहजता से कहा।
- 3:51:23फिर वो प्रिया की ओर मुड़ा और हल्की
- 3:51:25मुस्कान के साथ बोला, बाय प्रिया। फिर
- 3:51:28मिलते हैं। कुछ ही पलों में शौर्य ने कार
- 3:51:30बिगबु के गेट पर लाकर खड़ी कर दी। शिप्रा
- 3:51:33चुपचाप कार में बैठ गई। उसका ध्यान अब भी
- 3:51:35उसी अनजाने चेहरे पर अटका था। कार आगे बढ़
- 3:51:38रही थी। मीटिंग की सक्सेस की खुशी अब
- 3:51:40प्रिया के लिए छुपाना मुश्किल हो रहा था।
- 3:51:43अचानक ही वह बोल पड़ी। अगर सब कुछ सही रहा
- 3:51:46तो मुझे लगता है कि यह मीटिंग हमारी कंपनी
- 3:51:48के लिए सफलता का एक नया दरवाजा खोल देगी।
- 3:51:52उसकी आवाज में उत्साह साफ झलक रहा था।
- 3:51:54शौर्य ने उसकी बात सुनी तो उसके चेहरे पर
- 3:51:56हल्की सी मुस्कान आ गई। वो चुपचाप गाड़ी
- 3:51:59चलाता रहा लेकिन उसकी नजर बार-बार रेयर
- 3:52:01व्यू मिरर पर जा रही थी। कुछ पल बाद उसकी
- 3:52:04भौए हल्की सिकुड़ गई। मुझे लग रहा है
- 3:52:07हमारा पीछा किया जा रहा है। शिप्रा ने
- 3:52:10शौर्य की बात सुनी तो हल्की गंभीरता के
- 3:52:12साथ बोली बिगबुल में मुझे भी ऐसा लगा था
- 3:52:15जैसे कोई मुझ पर नजर रख रहा हो लेकिन फिर
- 3:52:17वो शख्स अचानक गायब हो गया और मुझे यह भी
- 3:52:20याद नहीं आ रहा था कि मैंने उसे पहले कहां
- 3:52:22देखा है। इतना कहकर वो पलट कर पीछे देखने
- 3:52:25लगी। जैसे ही उसकी नजर पीछे आ रही लाल रंग
- 3:52:28की गाड़ी पर पड़ी, उसके चेहरे का रंग बदल
- 3:52:31गया। यह यह तो बलराज खन्ना की कार है।
- 3:52:35शौर्य ने यह सुना तो उसके मन में जैसे सब
- 3:52:37कुछ साफ हो गया और वह थोड़ा गंभीर होकर
- 3:52:40बोला तो बात यहां तक पहुंच चुकी है। शौर्य
- 3:52:44बिना घबराए उसी स्पीड में गाड़ी चलाता
- 3:52:46रहा। कुछ ही देर में उनकी कार भीड़भाड़
- 3:52:48वाले इलाके से निकल कर एक सुनसान रास्ते
- 3:52:50पर आ गई। अचानक पीछे से आती वो लाल गाड़ी
- 3:52:54तेजी से आगे बढ़ी और उनकी कार के सामने
- 3:52:56आकर तिरछी खड़ी हो गई। शौर्य चाहता तो
- 3:52:59आसानी से कार मोड़कर वहां से निकल सकता
- 3:53:01था। लेकिन उसने जानबूझकर ब्रेक लगा दी। वो
- 3:53:04जानना चाहता था कि बलराज खन्ना के मन में
- 3:53:06आखिर क्या है। तभी उसे एहसास हुआ कि पीछे
- 3:53:09से भी एक और कार आकर रुक चुकी है। अब उनकी
- 3:53:12कार पूरी तरह से गिर चुकी थी। तभी बलराज
- 3:53:15खन्ना अपनी कार से बाहर निकला। वो सीधे
- 3:53:17शिप्रा की तरफ आया और खिड़की के शीशे पर
- 3:53:20अपनी उंगलियों से हल्की सी ठक-ठक की। तुम
- 3:53:23कार में ही रहो। मैं देखती हूं इसे।
- 3:53:26शिप्रा ने शांत आवाज में शौर्य से कहा।
- 3:53:28उसे लगा कि शायद बलराज खन्ना सिर्फ बात
- 3:53:30करना चाहता है। वो उसे कोई खतरनाक इंसान
- 3:53:33नहीं मानती थी। उसके मन में साफ था कि अगर
- 3:53:35बात बढ़ी तो एक सॉरी कहकर मामला खत्म कर
- 3:53:38देगी। बेवजह दुश्मनी मोल लेने का कोई
- 3:53:40फायदा नहीं। वहीं शौर्य भी चुप ही रहा। वो
- 3:53:43जानना चाहता था कि बलराज खन्ना आखिर किस
- 3:53:46हद तक जा सकता है। शिप्रा कार से बाहर
- 3:53:48निकली और बलराज खन्ना के सामने खड़ी हो
- 3:53:51गई। उसकी नजरों में झिझक नहीं सीधा सवाल
- 3:53:54था। खन्ना साहब आपकी इस हरकत को मैं क्या
- 3:53:57समझूं? बीच सड़क पर इस तरह मेरी कार के
- 3:53:59सामने अपनी कार खड़ी करने का क्या मतलब
- 3:54:02है? बलराज खन्ना का चेहरा गुस्से में
- 3:54:04तमतमा उठा। वो एक कदम आगे बढ़ा और तीखे
- 3:54:07स्वर में बोला। खन्ना सब कुछ भूल सकता है
- 3:54:11लेकिन अपनी बेइज्जती नहीं। अब तक तुमने दो
- 3:54:13बार मुझे बेइज्जत किया है। पहले उस दिन
- 3:54:16बिग कलेक्शन में और आज बिग बुल के ऑफिस
- 3:54:19में। उसकी आवाज में बदले की आग की तपन साफ
- 3:54:22दिख रही थी। इसीलिए शिपरा का लहजा भी तीखा
- 3:54:25हो उठा। मिस्टर खन्ना आप खुद मेरे रास्ते
- 3:54:28में रुकावटें डालते आए हैं और मुझसे शराफत
- 3:54:31की उम्मीद कर रहे हैं। यह तो बेवकूफी हुई
- 3:54:33ना? शिप्रा के शब्द सुनकर बलराज के होठों
- 3:54:36पर एक खतरनाक सी मुस्कान उभरी।
- 3:54:39तो फिर मेरी एक और बेवकूफी के लिए तैयार
- 3:54:42हो जाओ। खन्ना जहरीले स्वर में बोला। सुना
- 3:54:45है तुम्हें अपनी खूबसूरती पर बड़ा नाज है।
- 3:54:48आज के बाद तुम अपना यही चेहरा दुनिया से
- 3:54:50छुपाती फिरोगी। उसी क्षण शिपरा को अपने
- 3:54:54पीछे हलचल महसूस हुई। वो तुरंत पलटी। उसके
- 3:54:57पीछे दो आदमी खड़े थे और उनमें से एक
- 3:54:59चेहरा वही था जो उसे बिग बुल के ऑफिस में
- 3:55:02नजर आया था। वो चाहकर भी याद नहीं कर पा
- 3:55:05रही थी कि उसने उसे पहले कहां देखा था।
- 3:55:07लगभग वैसा ही भाव उस आदमी के साथ खड़े
- 3:55:10दूसरे शख्स के चेहरे पर भी उभर आया था।
- 3:55:13जैसे वो भी अपने दिमाग पर जोर डाल रहा हो।
- 3:55:16आखिर शिप्रा को उसने पहले कहां देखा है?
- 3:55:18तभी बलराज खन्ना ने शिप्रा की तरफ इशारा
- 3:55:21करते हुए दोनों से कहा,
- 3:55:23यही लड़की है। मैं नहीं जानता तुम इसके
- 3:55:26साथ क्या करोगे। लेकिन कुछ ऐसा करो कि आज
- 3:55:28के बाद ये किसी को मुंह दिखाने लायक ना
- 3:55:31रहे। खन्ना के इतना कहते ही एक धमकी भरी
- 3:55:34आवाज वहां गूंजी। ए लड़की कार के शीशे में
- 3:55:38आखिरी बार अपना यह चेहरा देख ले। [हंसी]
- 3:55:44इतना बोलकर वो दोनों गुंडे हंसने लगे।
- 3:55:46इंसान को पढ़ना बहुत मुश्किल होता है।
- 3:55:49कभी-कभी जिसे हम बुरा समझते हैं, वह सोच
- 3:55:51से बिल्कुल परे निकलता है। और जिसे हम भला
- 3:55:53मान बैठते हैं, वह उम्मीद से भी ज्यादा
- 3:55:56घटिया निकलता है। जैसे बलराज खन्ना जो
- 3:55:58दिखने में तो एक इज्जतदार बिजनेसमैन नजर
- 3:56:00आता है, लेकिन वो इस हद तक गिर चुका था कि
- 3:56:03वो दो खौफनाक दरिंदों को बोलकर एक लड़की
- 3:56:05की जिंदगी बर्बाद करने का घिनौना खेल खेल
- 3:56:08रहा था। उन गुंडों को निर्देश देते हुए
- 3:56:10ऐसा लगा जैसे खन्ना की जुबान से जहर टपक
- 3:56:13रहा हो। जैसे ही खन्ना का इशारा मिला उसके
- 3:56:16बुलाए गुंडों में से एक हल्की मुस्कान के
- 3:56:17साथ आगे बढ़ा और बोला
- 3:56:20आपकी इच्छा जरूर पूरी होगी खन्ना साहब
- 3:56:23वैसे एक बात माननी पड़ेगी मैंने अपनी
- 3:56:26जिंदगी में इतनी खूबसूरत लड़की शायद ही
- 3:56:28देखी होगी उसकी नजरें शिप्रा पर इस तरह
- 3:56:31टिकी थी जैसे कोई शिकारी अपने शिकार पर
- 3:56:33नजर गड़ाए हो
- 3:56:36मन तो कर रहा है इसे अपने घर की मालकिन
- 3:56:38बना लूं उसके शब्दों में छिपी गंदगी साफ
- 3:56:41महसूस हो रही थी वहीं कार में बैठा शौर्य
- 3:56:44यह सब देख रहा था। वो होठों को टेढ़ा करते
- 3:56:47हुए हल्के से मुस्कुराया और खुद से
- 3:56:49बुदबुदाया।
- 3:56:51इसीलिए कहते हैं दुनिया गोल है। घूम फिर
- 3:56:54कर आखिर वहीं आ जाती है। दरअसल ये दोनों
- 3:56:57गुंडे और कोई नहीं छगन मगन है। यार मगन
- 3:57:01मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि इस लड़की को
- 3:57:04हमने कहीं हाल ही में देखा है। छगन ने
- 3:57:07आंखें सिकोड़ते हुए कहा तो मगन भी सिर
- 3:57:09हिलाते हुए बोला। हां भाई लग तो रहा है।
- 3:57:13तभी छगन आगे बढ़ा और शिप्रा के बेहद करीब
- 3:57:16आकर खड़ा हो गया और फिर बनावटी मुस्कान के
- 3:57:19साथ बोला कहिए मेम साहब आप बता सकती हैं
- 3:57:22कि हम पहले कब और कहां मिले थे। आपका
- 3:57:26चेहरा बड़ा जाना पहचाना सा लग रहा है।
- 3:57:28शिप्रा का दिमाग तेजी से दौड़ने लगा। वो
- 3:57:31उस चेहरे को याद करने की कोशिश कर ही रही
- 3:57:33थी कि अचानक सब कुछ साफ हो गया। कुछ दिन
- 3:57:36पहले यह दोनों मेघा को उठाने आए थे और उसी
- 3:57:39दिन शौर्य ने इनमें से एक को एक ही थप्पड़
- 3:57:42में जमीन पर गिरा दिया था। यह याद आते ही
- 3:57:45शिप्रा के भीतर जैसे हिम्मत की एक लहर
- 3:57:47दौड़ गई। वो जानती थी कि शौर्य कार में
- 3:57:50बैठा सब देख रहा होगा। लेकिन अगले ही पल
- 3:57:53उसके मन में एक और ख्याल कौन था। जब वो सब
- 3:57:56कुछ देख रहा है तो कार से बाहर क्यों नहीं
- 3:57:59आ रहा है? मुझे गुंडों के बीच फंसा देख अब
- 3:58:02तक तो उसे बाहर आ जाना चाहिए था।
- 3:58:05फिर अचानक एक चुबता हुआ शक उसके मन में
- 3:58:08उठा। कहीं ऐसा तो नहीं आज मैंने उसका
- 3:58:10प्रपोजल ठुकरा दिया। इसलिए वो मेरे लिए
- 3:58:13किसी खतरे में पड़ना नहीं चाहता। इस ख्याल
- 3:58:16से ही शिप्रा का शरीर सिहर उठा। लेकिन
- 3:58:18उसने तुरंत खुद को संभाला। नहीं नहीं।
- 3:58:21श्रवण इतना निर्दय नहीं हो सकता कि मुसीबत
- 3:58:23में देखकर मुंह मोड़ ले। फिर भी सवाल वही
- 3:58:26था। तो वो अब तक बाहर क्यों नहीं आया?
- 3:58:29कहीं वो यह तो नहीं सोच रहा कि मैं उसे
- 3:58:31मदद के लिए बुलाऊं। तभी वो आए। शिप्रा के
- 3:58:34होठ हल्के से भच गए। घमंडी इंसान इधर
- 3:58:38शिप्रा श्रवण की सोच में डूबी थी और उधर
- 3:58:40बलराज खन्ना उतावला हो चुका था। तुम दोनों
- 3:58:43वक्त क्यों बर्बाद कर रहे हो? जो करना है
- 3:58:46जल्दी करो। मगन ने हल्की हंसी के साथ छगन
- 3:58:50की ओर देखा। यार छगन निकाल अपनी शीशी।
- 3:58:54खन्ना साहब को बहुत जल्दी है। इनकी मुराद
- 3:58:57पूरी कर दो। उसके शब्द सुनते ही शिप्रा के
- 3:59:00पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। शीशी उसका
- 3:59:03दिल तेजी से धड़कने लगा। क्या यह तेजाब की
- 3:59:07बात कर रहे हैं? क्या खन्ना सच में उसका
- 3:59:09चेहरा जलाना चाहता है? एक पल के लिए उसके
- 3:59:11कदम डगमगा गए। लेकिन अगले ही क्षण उसे वो
- 3:59:14दिन याद आया जब शौर्य ने इसी मगन को एक
- 3:59:17थप्पड़ में बेहोश कर दिया था। उस याद में
- 3:59:19उसके भीतर फिर से हिम्मत भर दी। उसने एक
- 3:59:22नजर अपनी कार की तरफ डाली। अब भी कोई हरकत
- 3:59:25नहीं थी। अपने डर को दबाते हुए उसने सीधे
- 3:59:28मगन की आंखों में देखा और कहा। लगता है उस
- 3:59:31दिन की मार भूल गए हो जो फिर से मेरे
- 3:59:33रास्ते में आ खड़े हुए हो। उसकी आवाज में
- 3:59:36अब डर के बावजूद चुनौती थी। यह सुनकर मगन
- 3:59:39सिर खुजाते हुए छगन की ओर मुड़ा और धीमे
- 3:59:41स्वर में बोला यार छगन ये किस दिन की बात
- 3:59:46कर रही है? क्या हम इसे पहले से जानते
- 3:59:49हैं?
- 3:59:51मोहतरमा जरा आप सीधे-सीधे कहेंगे कि आप
- 3:59:53किस दिन की बात कर रही हैं? छगन मगन के
- 3:59:56मुकाबले ज्यादा समझदार था। वहीं मगन बिना
- 3:59:59सोचे समझे काम कर बैठता था और उसकी कीमत
- 4:00:03भी चुकाताता था। शिप्रा एक कदम आगे बढ़ी
- 4:00:05और सीधे छगन की ओर देखकर बोली लगता है तुम
- 4:00:08दोनों सिटी हॉस्पिटल के बाहर वाली घटना
- 4:00:10भूल गए हो जब तुम मेरे पति के हाथों पिटे
- 4:00:13थे। फिर वो मगन की ओर देखते हुए बोली
- 4:00:17और ये क्या नाम था इसका? ये तो मेरे पति
- 4:00:19का एक थप्पड़ भी नहीं सह पाया था। उसकी
- 4:00:22आवाज अब और सख्त हो गई थी। उस दिन तो तुम
- 4:00:25लोग माफी मांग रहे थे और आज फिर मेरे
- 4:00:27सामने आने की हिम्मत कर ली। शिप्रा अब
- 4:00:29सीधे चेतावनी देते हुए बोली उस दिन तुमने
- 4:00:32उनकी मुंह बोली बहन को उठाने की कोशिश की
- 4:00:34थी और आज उनकी पत्नी पर हाथ डालने की
- 4:00:37हिम्मत कर रहे हो। शिप्रा की बात सुनते ही
- 4:00:40छगन की आंखों के सामने वो घटना किसी फिल्म
- 4:00:42की तरह घूमने लगी। सब कुछ उसे साफ-साफ याद
- 4:00:45आने लगा और उसी के साथ शिप्रा का चेहरा
- 4:00:48भी। तभी बलराज खन्ना झुंझलाते हुए
- 4:00:50चिल्लाया। तुम लोग इसकी बातों में क्यों आ
- 4:00:53रहे हो? वैसे भी इसका पति एक भिखारी है।
- 4:00:55उससे डरने की कोई जरूरत नहीं। लेकिन इस
- 4:00:59बार बात अलग थी। मगन के कानों में जैसे ही
- 4:01:02सिटी हॉस्पिटल और थप्पड़ वाली बात गूंजी,
- 4:01:04उसके अंदर दबी हुई बेइज्जती अचानक भड़क
- 4:01:07उठी। उसकी आंखों में गुस्सा उतर आया और वो
- 4:01:10तिलमिला कर बोला। अच्छा हुआ तुमने खुद ही
- 4:01:13बता दिया कि तुम उसी की पत्नी हो। तो उस
- 4:01:17दिन का हिसाब आज बराबर करना तो बनता है।
- 4:01:19उसके लहजे में अब बदले की आग साफ झलक रही
- 4:01:22थी। लेकिन छगन ने तुरंत मगन के कंधे पर
- 4:01:24हाथ रखते हुए कहा नहीं मगन यह सही नहीं
- 4:01:27है। वो आगे बढ़ा सीधे शिप्रा के सामने आकर
- 4:01:31खड़ा हो गया और सम्मान से बोला हमसे गलती
- 4:01:34हो गई जो हम आपको पहचान नहीं पाए। उस दिन
- 4:01:37मैंने उन्हें उस्ताद मान लिया था और अगर
- 4:01:40आज उनकी पत्नी के साथ हमने कुछ गलत किया
- 4:01:42तो हमारी अपनी जुबान की कोई वैल्यू नहीं
- 4:01:44रहेगी। उसके शब्दों में सच्चाई थी और डर
- 4:01:48भी। हमें माफ कर दीजिए। हमने आपका रास्ता
- 4:01:51रोक कर गलती करी। यह सुनकर बलराज खन्ना की
- 4:01:54बौखलाहट और बढ़ गई। वो गुस्से से तमतमाता
- 4:01:57हुआ चिल्लाया। छगन ये तुम क्या कर रहे हो?
- 4:02:01तुमने इस काम के पैसे लिए हैं। तुम्हें
- 4:02:03इसे सबक सिखाना ही होगा।
- 4:02:06पैसे लिए हैं लेकिन मैंने खुद को बेचा
- 4:02:08नहीं है। छगन ने खन्ना की आंखों में आंखें
- 4:02:10डालते हुए कहा, जरूरत पड़ी तो पैसे वापस
- 4:02:13कर दूंगा। ज्यादा बकवास मत करो। उसके तेवर
- 4:02:16बदल चुके थे। मगन को यह सब बिल्कुल पसंद
- 4:02:19नहीं आया। वो झुंझुला कर बोला छगन ये क्या
- 4:02:23कर रहे हो? आई हुई लक्ष्मी भी कोई वापस
- 4:02:26करता है क्या? और तुम किसे अपना उस्ताद
- 4:02:28बोल रहे हो? उसी को जिसने मुझे थप्पड़ मार
- 4:02:31कर बेहोश कर दिया था। उसकी आंखों में अब
- 4:02:34जलन और बदले की आग साफ दिख रही थी। आज
- 4:02:37मौका मिला है तो मैं उससे अपना हिसाब
- 4:02:40बराबर करके ही रहूंगा।
- 4:02:42तभी छगन ने गहरी सांस ली और खुद को शांत
- 4:02:44रखते हुए बोला मगन कैसी बातें कर रहे हो
- 4:02:48तुम्हें अपने भाई की जुबान की भी कोई कदर
- 4:02:50नहीं है मगन ने तुरंत पलट कर कहा किसके
- 4:02:55लिए जुबान दे दी तुमने सुना नहीं खन्ना
- 4:02:57साहब ने क्या कहा इसका पति भिखारी है वो
- 4:03:00छगन को मनाने की कोशिश कर रहा था लेकिन
- 4:03:02छगन अब अपनी जगह अडिग था
- 4:03:05खन्ना कुछ भी कहे लेकिन मैं यह मानने को
- 4:03:07तैयार नहीं हूं कि वह आदमी सिर्फ एक
- 4:03:09भिखारी हो सकता है
- 4:03:13जिस बाग को पूरा विशालगढ़ जानता है, तुम
- 4:03:16उसे मानने को तैयार नहीं हो। बलराज खन्ना
- 4:03:19ने चिढ़ते हुए कहा, देखा नहीं? कुछ दिन
- 4:03:22पहले सोशल मीडिया पर हर जगह इसकी शादी की
- 4:03:24खबरें वायरल थी। एक भिखारी की शादी एक
- 4:03:27खूबसूरत लड़की से जबरदस्ती कर दी गई। मगन
- 4:03:30ने भी मौका देखकर छगन को भड़काने की कोशिश
- 4:03:33करी। यार, तू बहुत भोला है। उस दिन मैं
- 4:03:36गलती से बेहोश क्या हो गया। पता नहीं तूने
- 4:03:38उसे क्या समझ लिया। उसने मेरे बेहोश होने
- 4:03:41का फायदा उठाया और तुझ पर अपना असर जमा
- 4:03:44लिया और तूने उसे अपना उस्ताद मान लिया।
- 4:03:47लेकिन छगन को अभी भी यकीन नहीं था कि
- 4:03:49खन्ना शौर्य के बारे में जो कह रहा है
- 4:03:51उसमें थोड़ी भी सच्चाई हो सकती है। उसने
- 4:03:54धीरे से सर हिलाया और कहा
- 4:03:57मुझे अब फर्क नहीं पड़ता। वो भिखारी है या
- 4:04:00कुछ और। लेकिन उस दिन मैंने उन्हें अपना
- 4:04:02उस्ताद मान लिया था और अपनी जुबान की कीमत
- 4:04:05मुझे अच्छी तरह पता है। छगन ने तुरंत ही
- 4:04:07अपना फैसला सुना दिया। माफ करो खन्ना साहब
- 4:04:11आज आपको खाली हाथ ही जाना पड़ेगा। मुझे
- 4:04:13अफसोस है मैं आपका यह काम नहीं कर सकता।
- 4:04:17यह तुम गलत कर रहे हो छगन। तुम क्या समझते
- 4:04:20हो कि तुम ही अकेले हो जो मेरा काम कर
- 4:04:22सकते हो? तुम नहीं तो कोई और करेगा। खन्ना
- 4:04:25ने उसे उकसाते हुए कहा, इस पर छगन ने
- 4:04:28हल्की सी फीकी मुस्कान के साथ जवाब दिया।
- 4:04:31जरूर करेगा खन्ना साहब। लेकिन वो आज का
- 4:04:33दिन नहीं होगा। आपको जिससे भी काम कराना
- 4:04:36हो करा लो। तभी मगन बेचैन होकर बीच में
- 4:04:39बोला यार छगन ये तुम क्या कर रहे हो?
- 4:04:42क्यों आई हुई लक्ष्मी को लात मार रहे हो?
- 4:04:45छगन ने मगन को समझाते हुए कहा यार रहने दो
- 4:04:48हर समय पैसा नहीं देखा जाता। हम गुंडे सही
- 4:04:51पर अपनी भी जुबान की एक कीमत होती है। मगन
- 4:04:54ने दांत भेजते हुए गहरी सांस ली। फिर
- 4:04:56बोला, ठीक है। सिर्फ तुम्हारी जिद की वजह
- 4:04:59से आज मैं इसे छोड़ रहा हूं। लेकिन याद
- 4:05:01रखना आज के बाद तुम मुझे नहीं रोकोगे।
- 4:05:04इतना कहकर वो शिप्रा की तरफ मुड़ा। उसकी
- 4:05:06आंखों में अब भी गुस्से की चिंगारी थी। आज
- 4:05:10तुम्हारा दिन अच्छा है। तुम छगन मगन के
- 4:05:12हाथों से सही सलामत बचकर जा रही हो। लेकिन
- 4:05:15मुझसे बचकर रहना। यह दिन तुम्हें दोबारा
- 4:05:18नसीब नहीं होगा। मगन ने डराने वाले लहजे
- 4:05:21में अपनी बात खत्म की। इस वक्त शाम का
- 4:05:24धुंधलका छाया हुआ था। इसीलिए छगन और मगन
- 4:05:27को ड्राइविंग सीट पर बैठा शौर्य नजर ही
- 4:05:29नहीं आया। शौर्य चुपचाप गाड़ी के अंदर
- 4:05:31बैठा बाहर हो रही गतिविधि को ध्यान से देख
- 4:05:34रहा था। स्थिति फिलहाल काबू में लग रही
- 4:05:37थी। इसीलिए उसने बाहर निकलना जरूरी नहीं
- 4:05:39समझा। उसने गाड़ी का शीशा हल्का सा खोल
- 4:05:42रखा था। जिससे बाहर की हर आवाज साफ सुनाई
- 4:05:44दे रही थी। इसीलिए जब उसने शिप्रा के मुंह
- 4:05:47से अपने लिए पति शब्द सुना उसके चेहरे पर
- 4:05:50एक हल्की सी मुस्कान आ गई। मजबूरी में ही
- 4:05:53सही पर शिप्रा ने उसका नाम लेकर खुद को
- 4:05:56सुरक्षित किया था। और यह बात उसे भीतर
- 4:05:58[संगीत] तक छू गई। उधर शिप्रा भी मन ही मन
- 4:06:01शुक्र मना रही थी कि हालात बिगड़े नहीं।
- 4:06:03मगन [संगीत] के तेवर देखकर उसे डर था कि
- 4:06:05कहीं छगन भी उसके दबाव में ना आ जाए।
- 4:06:08लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिप्रा का गुस्सा अब
- 4:06:10बाहर निकलने को बेताब था। उसने मुड़ते हुए
- 4:06:13मगन की ओर देखा और वो तीखे स्वर में बोली
- 4:06:15एक बात तुम्हें समझ गई कि तुम बेवकूफ हो
- 4:06:18और तुम्हारा भाई समझदार है। शुक्र मनाओ कि
- 4:06:21आज तुम बच गए। आगे से मेरे रास्ते में मत
- 4:06:24आना। अगर मेरे पति को पता चल गया कि तुमने
- 4:06:27मेरे साथ क्या करने की जुर्रत की थी तो
- 4:06:29फिर तुम्हारा भगवान ही मालिक होगा। मगन
- 4:06:32तिल मिलाकर पैर पटकते हुए बोला भौक लो
- 4:06:35जितना भौकना है। आज तुम्हें अभयदान मिला
- 4:06:38हुआ है। फिर उसने छगन की ओर देखा और
- 4:06:41झुंझुलाकर कहा
- 4:06:44देख रहे हो तुम्हारी वजह से यह मुझे ही
- 4:06:46धमका रही है। इस पर छगन ने थके हुए अंदाज
- 4:06:50में सिर हिलाया। यार रहने दे चल यहां से
- 4:06:53चलते हैं। वो मुड़कर आगे बढ़ गया और मगन
- 4:06:56को भी इशारा किया। जाते-जाते मगन ने बलराज
- 4:06:58खन्ना की तरफ देखा और कहा खन्ना साहब आज
- 4:07:02के लिए माफ करना। काम छोड़ा नहीं है
- 4:07:05मैंने। बस आज भाई की बात मानकर इसे छोड़
- 4:07:08रहा हूं। लेकिन अगली बार किसी की नहीं
- 4:07:10सुनूंगा। इसके बाद छगन मगन को लगभग खींचते
- 4:07:14हुए वहां से ले गया। अब सड़क पर सिर्फ दो
- 4:07:17लोग बचे थे। शिप्रा और बलराज खन्ना।
- 4:07:20शिप्रा बिना डरे उसके पास गई और बोली,
- 4:07:23तुम्हें अपनी बेइज्जती करवाने का बहुत शौक
- 4:07:25है। तभी बार-बार मेरे आसपास नजर आते रहते
- 4:07:28हो और आज तो तुमने हद ही कर दी। मेरे लिए
- 4:07:31गुंडे तक हायर कर लिए। खन्ना के चेहरे पर
- 4:07:34एक अजीब सी कड़वी मुस्कान उभरी। वो धीमे
- 4:07:36जहरीले लहजे में बोला। शुक्र मनाओ
- 4:07:40तुम्हारा नसीब बहुत अच्छा है।
- 4:07:42वरना आज के बाद तुम अपना चेहरा दुनिया से
- 4:07:45छुपाती फिरती। खन्ना ने एक पल रुक कर
- 4:07:48शिप्रा की आंखों में देखा और बोला ज्यादा
- 4:07:51खुश मत हो मैं अपनी बेइज्जती इतनी आसानी
- 4:07:54से भूलने वाला नहीं हूं। इतना कहकर वो
- 4:07:58तेजी से मुड़ा और अपनी कार में जाकर बैठ
- 4:08:00गया। कुछ ही सेकंड में उसकी कार वहां से
- 4:08:03निकल गई। शिप्रा वहीं खड़ी उसे जाते हुए
- 4:08:06देखती रही। उसकी आंखों में अब भी गुस्सा
- 4:08:08था। फिर वो धीरे-धीरे अपनी कार की तरफ
- 4:08:11बढ़ी। उधर शौर्य ने जैसे ही उसे वापस आते
- 4:08:14देखा उसने तुरंत खिड़की का शीशा जो अब तक
- 4:08:17थोड़ा खुला था पूरी तरह बंद कर लिया जैसे
- 4:08:20कुछ हुआ ही ना हो। शिप्रा ने पीछे का
- 4:08:22दरवाजा खोला और कार में बैठ गई। एक पल के
- 4:08:26लिए उसने शौर्य की तरफ देखा और अपनी आंखें
- 4:08:29बंद कर ली। तो क्या होगा आगे? क्या बलराज
- 4:08:32खन्ना अपनी बेइज्जती का बदला फिर लेगा?
- 4:08:35आखिर शौर्य क्यों कार से बाहर नहीं निकला
- 4:08:37था? क्या शिपरा शौर्य से अपनी नाराजगी
- 4:08:40जाहिर करेगी? जानने के लिए सुनते रहिए
- 4:08:42बेगर हस्बैंड
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This page contains the full transcript of My Beggar Husband Episodes 31 to 50 | Hindi Audio Story|Secret Billionaire Husband| sk hindi novel by SK Hindi Novel, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 44,221 words across 5,355 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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