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My Beggar Husband Episodes 11 - 30 | Hindi Audio Story |Secret Billionaire Husband |Sk hindi novel — Transcript

by SK Hindi Novel · 44,173 words · 5,361 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:04नमस्कार दोस्तों राम राम दोस्तों स्वागत
  2. 0:07है हमारे YouTube चैनल में और Facebook
  3. 0:11चैनल में आज हम लेकर आए हैं एक ऐसी कहानी
  4. 0:15जो आपकी सोच बदल देगी जो कि है वेगर
  5. 0:19हस्बैंड
  6. 0:20जिसमें एक भिखारी जिसके पास ना घर ना
  7. 0:23पहचान लेकिन किस्मत उसे वहां ले जाती है
  8. 0:27[नाक से की जाने वाली आवाज़] जहां करोड़ों
  9. 0:28की दौलत और बड़े-बड़े बड़े लोग भी उसके
  10. 0:31सामने झुकने को मजबूर हो जाते हैं। क्या
  11. 0:34यह सच में एक भिखारी है या अपनी असली
  12. 0:37पहचान जी
  13. 0:40रहा है?
  14. 0:42अगर ऐसी ही दमदार ऑडियो स्टोरीज पसंद है
  15. 0:47तो वीडियो को लाइक करें, चैनल को
  16. 0:49सब्सक्राइब करें और बेल आइकन जरूर दबाएं।
  17. 0:53अब बिना किसी देरी के शुरू करते हैं आज का
  18. 0:57रोमांचक एपिसोड जिसमें एपिसोड
  19. 1:0111 से 30 तक है। तो जल्दी से जल्दी इस
  20. 1:04वीडियो को देखो और डिस्क्लेमर है यह कहानी
  21. 1:08केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की
  22. 1:11गई है।
  23. 1:13यह कहानी के सभी पात्र घटनाएं, संवाद एवं
  24. 1:17परिस्थितियां काल्पनिक हैं। किसी भी
  25. 1:22वास्तविक व्यक्ति, संस्था, स्थान या घटना
  26. 1:26से किसी भी प्रकार की समानता मात्र संयोग
  27. 1:30मानी जाएगी। तो आइए शुरू करते हैं वेगर
  28. 1:34हस्बैंड की दिलचस्प और रहस्यमय कहानी
  29. 1:38का वीडियो जिसमें एपिसोड 11 से 30 तक है।
  30. 1:43तो लेट स्टार्ट दिस वीडियो।
  31. 1:44शिप्रा के भाई राहुल को गुंडों ने पकड़
  32. 1:46लिया था। यह देखकर [संगीत] शिप्रा तेज
  33. 1:49आवाज में चिल्लाई। छोड़ो उसे, छोड़ दो
  34. 1:52मेरे भाई को। लेकिन रजत पर इसका क्या ही
  35. 1:54असर होना था। वो राहुल का सिर फोड़ने का
  36. 1:56मन बना चुका था। वहीं जब शौर्य ने देखा कि
  37. 1:59उसे बचाने के चक्कर में राहुल फंस गया है
  38. 2:01तो वो बिना सोचे [संगीत] समझे तेजी से रजत
  39. 2:03और उसके आदमियों की तरफ भागा और उसने रजत
  40. 2:06को अपने शरीर से एक जोरदार टक्कर मारी।
  41. 2:09[संगीत] इस अनएक्सेक्टेड टक्कर से रजत का
  42. 2:11संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे सीढ़ियों पर
  43. 2:13गिरकर लुढ़कता हुआ नीचे जा पहुंचा। अचानक
  44. 2:16हुए [संगीत] इस हमले से रजब के गुरे भी
  45. 2:18हैरान थे। शायद किसी ने भी यह सोचा नहीं
  46. 2:21था कि यह भिखारी ऐसा करने की हिम्मत
  47. 2:23करेगा। इसी के साथ राहुल को दबोचे हुए
  48. 2:26दोनों गुंडों की पकड़ भी ढीली पड़ गई और
  49. 2:29राहुल उन दोनों को धक्का देकर दूर भाग
  50. 2:31निकला। वहीं रजत के बाकी सभी गुंडे अपने
  51. 2:34बॉस को संभालने के लिए दौड़ पड़े। इधर
  52. 2:36शिप्रा शौर्य की हिम्मत देखकर हैरान थी।
  53. 2:40उसने एक बार फिर से अपनी परवाह ना करते
  54. 2:42हुए पहले [संगीत] शिप्रा और फिर राहुल को
  55. 2:44भी बचा लिया था। इसके बाद जब शिप्रा ने
  56. 2:47रजत की तरफ देखा तो वह समझ गई कि जिस तरह
  57. 2:50से रजत गिरा था उससे यह तो पक्का था कि
  58. 2:52उसे गहरी चोट [संगीत] लगी होगी। बुरे काम
  59. 2:55का बुरा नतीजा उसकी एक दो हड्डियां भी टूट
  60. 2:58गई होंगी। यह देखकर अब [संगीत] शिप्रा की
  61. 3:00फैमिली वालों को भी राहत मिली। वहीं रजत
  62. 3:03दर्द के मारे कराता हुआ अपनी [संगीत] जगह
  63. 3:05से उठा। इस समय उसे घोर अपमान का एहसास हो
  64. 3:08रहा था। हो भी क्यों ना वो इस भीड़ के लिए
  65. 3:11उपहास का पात्र जो बन गया था। अगले ही पल
  66. 3:14वो झल्लाकर अपने गुर्गों पर चिल्लाया।
  67. 3:17कमबख्तों तुम लोग यहां तमाशा देखने के लिए
  68. 3:20आए हो क्या? जाओ उस लड़की को खींच कर अपने
  69. 3:22साथ ले चलो। अगर कोई बीच में आए तो उसकी
  70. 3:25हड्डियां तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ना।
  71. 3:27बॉस का आदेश पाते ही गुंडे शिप्रा की तरफ
  72. 3:30पलट गए। लेकिन वो अभी कुछ ही कदम आगे बढ़ा
  73. 3:32था कि तभी सायरन बजाती पुलिस की गाड़ी
  74. 3:35मंदिर की सीढ़ियों के पास आकर रुकी।
  75. 3:38इंस्पेक्टर को यह माजरा समझते देर नहीं
  76. 3:40लगी। वो रजत को पहले से जानता था। उसे यह
  77. 3:44भी पता था कि रजत अभी दो दिन पहले ही बेल
  78. 3:46पर छूटा है और उसे खास आदेश मिला था कि वो
  79. 3:49शिप्रा के आसपास नजर नहीं आना चाहिए। पर
  80. 3:52वो तो सीधे शिप्रा को किडनैप करने आ गया
  81. 3:55औरंगे हाथों पकड़ा भी गया। पुलिस को देखकर
  82. 3:58रजत समझ गया कि उसका प्लान फेल हो चुका है
  83. 4:00और सिर्फ प्लान ही फेल [संगीत] नहीं हुआ।
  84. 4:03अब उसका खेल भी खत्म समझो। यही नहीं भीड़
  85. 4:06में कुछ [संगीत] मंचले ऐसे भी थे जो अपना
  86. 4:08मोबाइल निकालकर वीडियो रिकॉर्डिंग करने
  87. 4:10लगे थे। कहां उसका इरादा था कि वो जल्दी
  88. 4:13से शिप्रा को उठाएगा और यहां से रफूचक्कर
  89. 4:16हो जाएगा। पर भिखारी ने उसका सारा खेल
  90. 4:18बिगाड़ दिया था और अब उसे यह भी डर था कि
  91. 4:21कहीं यह बात सोशल मीडिया पर वायरल ना हो
  92. 4:23जाए। उसके भाई मुख्तार ने उसे आगाह किया
  93. 4:26था कि अभी कुछ दिन उसे ऐसी वैसी हरकत नहीं
  94. 4:29करनी है। पर वो इतना ओवर कॉन्फिडेंट था कि
  95. 4:31उसने अपने भाई की बात को इग्नोर [संगीत]
  96. 4:33कर दिया। आखिर ये पुलिस इतनी जल्दी कैसे आ
  97. 4:36सकती है? यह तो तभी हो सकता है जब उन्हें
  98. 4:38पहले से खबर मिली हो। रजत ने मन ही मन
  99. 4:41विचार किया। [संगीत] क्या किसी ने पुलिस
  100. 4:43को पहले खबर कर दी थी? वो किसी भी हालत
  101. 4:45में पुलिस के हाथ नहीं लगना चाहता था।
  102. 4:47इसीलिए इस एक बात को सोचकर उसके शरीर में
  103. 4:50से हिहरण दौड़ गई। लेकिन जब उसने देखा कि
  104. 4:53ज्यादातर पुलिस वाले उसके गुर्गों को
  105. 4:54पकड़ने में व्यस्त थे तो रजत ने तेजी से
  106. 4:57अपना [संगीत] दिमाग चलाया और पुलिस की
  107. 4:59विपरीत दिशा में भागने लगा। पर ये क्या?
  108. 5:01वो कुछ ही कदम आगे भागा था कि भरभरा कर
  109. 5:04जमीन पर गिर पड़ा। अब जाकर उसे महसूस हुआ
  110. 5:07कि सीढ़ियों से गिरने के कारण उसकी कोई
  111. 5:09पसली टूट गई है। लेकिन फिर भी वो मौका
  112. 5:12पाकर पुलिस की पकड़ से छूट कर दौड़ लिया।
  113. 5:15लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जल्द ही
  114. 5:17इंस्पेक्टर ने उसे दोबारा पकड़ लिया और
  115. 5:19उसका कॉलर पकड़ कर सख्ती से बोला। भागने
  116. 5:22की सोचना भी मत। नहीं तो तेरी हड्डियां
  117. 5:25तोड़ने में कोई कसर नहीं छोडूंगा। अब
  118. 5:28सरेंडर करने के अलावा रजत के पास कोई चारा
  119. 5:31नहीं था। लेकिन वो कहते हैं ना रस्सी जल
  120. 5:34जाती है पर उसकी ऐंठ नहीं जाती। ठीक उसी
  121. 5:37तरह रजत का रब अभी तक उतरा नहीं था।
  122. 5:40[संगीत] इसीलिए वो इंस्पेक्टर पर रब
  123. 5:42झाड़ते हुए बोला चलो चलो मुझे हॉस्पिटल ले
  124. 5:46चलो। शायद मेरी पसली टूट गई है। इस पर
  125. 5:50इंस्पेक्टर हंस पड़ा और फिर बोला तुम जैसे
  126. 5:53लोगों के साथ ऐसा ही होना था। अब आराम से
  127. 5:56दर्द को सहो। मैं तुम्हारे बाप का नौकर
  128. 5:59नहीं हूं जो तुम्हारे हुक्म पर तुम्हारे
  129. 6:01पैर चाटने लगूंगा।
  130. 6:03इस पर रजत झल्ला उठा और इंस्पेक्टर को ही
  131. 6:05धमकाते हुए बोला इंस्पेक्टर तुम शायद भूल
  132. 6:08रहे हो कि मैं कौन हूं। रजत ने एक बार फिर
  133. 6:12से अपने भाई का रब जताने की कोशिश [संगीत]
  134. 6:14की। पर जवाब में इंस्पेक्टर ने एक जोर का
  135. 6:17थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया। इंस्पेक्टर
  136. 6:19से थप्पड़ खाकर रजत के होश ठिकाने आ गए।
  137. 6:23उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि यह जानने
  138. 6:25के बाद कि वो मुख्तार का भाई है। फिर भी
  139. 6:27इंस्पेक्टर ने उसको थप्पड़ मारा। तभी वह
  140. 6:30गुस्से में घूरता [संगीत] हुआ बोला,
  141. 6:32इंस्पेक्टर, मैं इस थप्पड़ को भूलूंगा
  142. 6:34नहीं। अगर मैंने यह थप्पड़ तुम्हें ब्याज
  143. 6:37के साथ वापस नहीं किया, तो मेरा नाम रजत
  144. 6:39नहीं। इस पर इंस्पेक्टर व्यंग भरे लहजे
  145. 6:42में बोला, "अरे तो फिर देर किस बात की?
  146. 6:45अभी से अपने लिए एक नया नाम ढूंढना शुरू
  147. 6:47कर दो। बाकी मैं खुद ही अशोर करूंगा कि
  148. 6:51तुम्हारी जल्दी से बेल ना हो। उधर बलवंत
  149. 6:54राय ने जब देखा कि [संगीत] इंस्पेक्टर ने
  150. 6:56सरेआम रजत को थप्पड़ मारा है तो उन्हें
  151. 6:58बहुत खुशी हुई। वो इंस्पेक्टर के पास आए
  152. 7:00और उनका आभार जताते हुए बोले आपका
  153. 7:04बहुत-बहुत धन्यवाद इंस्पेक्टर साहब जो आप
  154. 7:06एकदम सही समय पर आ गए। इस पर इंस्पेक्टर
  155. 7:10ने शांत लेकिन दृढ़ आवाज में कहा। इसमें
  156. 7:13धन्यवाद की कोई जरूरत नहीं है राय साहब।
  157. 7:15यह तो मेरा काम है। धन्यवाद तो उस शख्स का
  158. 7:18कीजिएगा जिसने सही समय पर हमें कॉल किया।
  159. 7:22यह जानकर बलवंत राय आश्चर्य में पड़ गए और
  160. 7:24बोले लेकिन इंस्पेक्टर साहब आपको कॉल
  161. 7:28किसने किया था और पुलिस मौके पर कैसे
  162. 7:30पहुंची? तभी इंस्पेक्टर ने पूरा माजरा
  163. 7:33समझाते हुए कहा। दरअसल किसी को पहले ही
  164. 7:36पता चल गया था कि ऐसा कुछ होने वाला है और
  165. 7:39उस भले व्यक्ति ने पहले ही पुलिस को खबर
  166. 7:41कर दी थी। इस पर बलवंत राय सोचने लगे कि
  167. 7:44आखिर वह शख्स कौन हो सकता है? इसी विचार
  168. 7:47के [संगीत] साथ उन्होंने वहां मौजूद लोगों
  169. 7:49पर एक नजर दौड़ाई। पर कहना मुश्किल था कि
  170. 7:52इतने लोगों में से किसने पुलिस को फोन
  171. 7:54किया होगा। शौर्य के सिर से अभी भी खून
  172. 7:57रिस रहा था। पर वो अपनी चोट से बेपरवाह
  173. 8:00रजत की तरफ ही देख रहा था। उसे तसल्ली थी
  174. 8:03कि पुलिस सही समय पर पहुंच गई और रजत और
  175. 8:06उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया। खैर
  176. 8:09रजत और उसके गुर्गों को जीप में डालने के
  177. 8:11बाद इंस्पेक्टर ने बलवंत राय से कहा
  178. 8:15राय साहब आपको और आपके परिवार को थोड़ी
  179. 8:18देर के लिए थाने चलना पड़ेगा और अपना बयान
  180. 8:21दर्ज करवाना पड़ेगा ताकि रजब के खिलाफ केस
  181. 8:24को और भी मजबूत किया जा सके। [संगीत] इस
  182. 8:27पर राय साहब ने शौर्य की तरफ देखते हुए
  183. 8:29कहा हम जरूर चलेंगे [संगीत] पर उससे पहले
  184. 8:32इस लड़के को हमें हॉस्पिटल ले जाना
  185. 8:34पड़ेगा। उसने बहुत ही बहादुरी से हमारी
  186. 8:36[संगीत] बच्ची को बचाया है। वो अगर नहीं
  187. 8:39होता तो यह हैवान अपने मकसद में कामयाब भी
  188. 8:42हो जाता। यह कहते हुए राय साहब की निगाहों
  189. 8:45में शौर्य के लिए चिंता और आभार दोनों की
  190. 8:48मिश्रित भावना उमड़ रही थी। तभी
  191. 8:50इंस्पेक्टर साहब उन्हें आश्वस्त करते हुए
  192. 8:52बोले आप उसकी चिंता मत कीजिए। उसे हम खुद
  193. 8:56हॉस्पिटल ले चलेंगे और उसका इलाज कराकर
  194. 8:58उसका भी बयान लेंगे। ठीक है तो फिर मैं भी
  195. 9:02आपके साथ हॉस्पिटल चलूंगा या ऐसा कीजिए आप
  196. 9:05मेरी [संगीत] गाड़ी में ही चलिए उस लड़के
  197. 9:07को मैं अपनी गाड़ी में ही ले चलता हूं।
  198. 9:09इतना बोलकर राय साहब शौर्य के पास पहुंच
  199. 9:11गए। [संगीत] वैसे भी उनका परिवार दो दिनों
  200. 9:14से शौर्य को ढूंढ रहा था। पर वो अब जाकर
  201. 9:17मिला और [संगीत] मिला भी तो किस हालत में।
  202. 9:20खैर, सारी बातों को दरकिनार करते हुए राय
  203. 9:23साहब [संगीत] ने शौर्य से कहा, तुम्हारा
  204. 9:25बहुत-बहुत धन्यवाद नौजवान। तुमने समय पर
  205. 9:28आकर हमारी बच्ची को बचा लिया। [संगीत] इस
  206. 9:31पर शौर्य कुछ नहीं बोला। बसराय साहब की ओर
  207. 9:33देखता रहा। वहीं कुछ दूरी [संगीत] पर
  208. 9:36राहुल भी खड़ा था और जब उसकी नजर शौर्य से
  209. 9:39मिली तो वो उसके हौसले को अप्रिशिएट करते
  210. 9:41हुए बोला अगर आपकी जितनी बहादुरी यहां
  211. 9:44मौजूद लोगों ने भी दिखाई होती तो इन
  212. 9:46बदमाशों की इतनी हिम्मत नहीं होती। पर इन
  213. 9:49सबसे अलग शिप्रा को केवल शौर्य के [संगीत]
  214. 9:52माथे से बहता हुआ खून ही दिख रहा था। और
  215. 9:55तभी वो जल्दीबाजी में बोली आप सभी किन
  216. 9:58बातों में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं?
  217. 10:00अभी इनको डॉक्टर की जरूरत है। इस पर राय
  218. 10:03साहब ने भी देर नहीं की और चिंतित स्वर
  219. 10:05में बोले हां शिप्रा बेटी सही कह रही है।
  220. 10:09हमें अभी के अभी पुलिस के साथ हॉस्पिटल
  221. 10:11चलना होगा। हमारे बयान भी वहीं ले लिए
  222. 10:13जाएंगे। चलो [संगीत] हमारी कार में चलते
  223. 10:16हैं। वहीं हॉस्पिटल का नाम सुनकर शौर्य
  224. 10:19थोड़ा असहज हो गया और तुरंत इंकार करते
  225. 10:22हुए बोला। नहीं नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं
  226. 10:25है। छोटी सी चोट है। अभी पानी से साफ करके
  227. 10:27हल्दी लगा लूंगा। ठीक हो जाएगी। अब तक रजत
  228. 10:30और उसके गुर्गों को ठिकाने लगाकर
  229. 10:32इंस्पेक्टर साहब भी वहां पहुंच चुके थे।
  230. 10:34और जब उन्होंने शौर्य की बात सुनी तो वे
  231. 10:37गंभीर और चेतावनी भरी आवाज में बोले।
  232. 10:39[संगीत]
  233. 10:40किसी भी चोट को इतने हल्के में नहीं लेना
  234. 10:42चाहिए। उसका प्रॉपर ट्रीटमेंट जरूरी है और
  235. 10:44उसके बाद मुझे तुम्हारा बयान भी लेना
  236. 10:46पड़ेगा। इसके बाद इंस्पेक्टर साहब ने कुछ
  237. 10:49सोचा और तुरंत बोले वैसे तुमने आज बहुत ही
  238. 10:52बहादुरी का काम किया है। नाम क्या है
  239. 10:54तुम्हारा? इस पर शौर्य सोच में पड़ गया पर
  240. 10:57जवाब तो देना ही था। इसीलिए वो हिचकिचाते
  241. 11:00हुए [संगीत] बोला मेरा नाम शब श्रवण है।
  242. 11:04असल में शौर्य को अपना असली नाम बताना ठीक
  243. 11:06नहीं लगा। इसीलिए लास्ट मोमेंट पर उसने
  244. 11:10अपना एक अलग नाम बता दिया। तुम रहते कहां
  245. 11:13हो श्रवण? इंस्पेक्टर ने जिज्ञासावश एक और
  246. 11:16सवाल पूछा। इस पर शौर्य ने एक बार वहां
  247. 11:19उपस्थित सभी लोगों पर नजर दौड़ाई और फिर
  248. 11:21शांत लेकिन स्पष्ट आवाज में बोला, "मैं
  249. 11:24यहीं इसी मंदिर में रहता हूं। क्या? मंदिर
  250. 11:28में? इंस्पेक्टर आश्चर्य से बोल उठे।
  251. 11:31शौर्य को उनके चेहरे पर स्पष्ट रूप
  252. 11:33[संगीत] से अनेक क्वेश्चन मार्क दिखाई दे
  253. 11:34रहे थे। आखिर पुलिस का काम ही शक करना
  254. 11:37होता है। खैर शौर्य ने जोड़तोड़ कर कुछ
  255. 11:40बात बनाई और अटकते हुए बोला हां इसी मंदिर
  256. 11:45में पुजारी बाबा ने अपने ही कमरे में मुझे
  257. 11:47थोड़ी सी जगह दे दी है। मैं उनके साथ ही
  258. 11:50रहता हूं। इंस्पेक्टर उसकी हालत से अंदाजा
  259. 11:53लगा सकता था। फिर उसने कुछ सोच कर पूछा।
  260. 11:56क्या पुलिस को फोन तुमने ही किया था?
  261. 11:58शौर्य सोचने लगा उसे क्या बोलना चाहिए?
  262. 12:01फिर उसे ध्यान [संगीत] आया कि पुलिस के
  263. 12:03पास पुजारी बाबा का नंबर होगा। अगर वह सच
  264. 12:05नहीं बताएगा तो फालतू में पुजारी बाबा से
  265. 12:08पूछताछ हो सकती थी। यही सब सोचते हुए उसने
  266. 12:11तुरंत कहा हां मैंने ही किया था। वहीं
  267. 12:14शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा हैरान रह गई।
  268. 12:17उसे समझ नहीं आया कि शौर्य ने यह कब किया
  269. 12:20होगा। लेकिन उसके [संगीत] दिल में शौर्य
  270. 12:22के लिए एक रिस्पेक्ट आ गई थी। इंस्पेक्टर
  271. 12:25के सवाल अभी खत्म कहां हुए थे? इसीलिए
  272. 12:27उन्होंने अपना अगला सवाल पूछ लिया। तो
  273. 12:30तुम्हें पहले से पता था कि ऐसा कुछ होने
  274. 12:32वाला था। इस पर शौर्य ने एक नजर बलवंत राय
  275. 12:36और शिप्रा की तरफ देखा और फिर साफ शब्दों
  276. 12:38में सारा माजरा समझाते हुए बोला मुझे ऐसा
  277. 12:42महसूस हुआ कि कुछ गड़बड़ है। क्योंकि जिस
  278. 12:44वक्त यह फैमिली यहां आई थी तो मैं नीचे
  279. 12:46सीढ़ियों के पास ही था और मैंने दो
  280. 12:48बदमाशों को इनका पीछा करते देखा। फोन पर
  281. 12:51[संगीत] किसी से उनकी बातचीत सुनकर मुझे
  282. 12:53उनके इरादों का पता चला। इस पर इंस्पेक्टर
  283. 12:56ने शौर्य की फटे हाल स्थिति का अंदाजा
  284. 12:58लगाया और एक बार फिर गहरी जिज्ञासा और
  285. 13:00संदेह के साथ बोल उठे तुमने फोन कहां से
  286. 13:03किया था? [संगीत] तुम्हें देखकर लगता तो
  287. 13:05नहीं कि तुम्हारे पास कोई फोन भी होगा।
  288. 13:07मैंने पुजारी बाबा के फोन से कॉल लगाया
  289. 13:09था। शौर्य ने सच्चाई से जवाब दिया। शिप्रा
  290. 13:13को यह अच्छा नहीं लग रहा था कि शौर्य के
  291. 13:15सिर से खून रिस रहा है और इंस्पेक्टर उससे
  292. 13:18सवाल जवाब ही किए जा रहे हैं। आखिरकार
  293. 13:21उसका सब्र जवाब दे गया और वो इंस्पेक्टर
  294. 13:23को विनम्रता के साथ टोकते हुए बोली
  295. 13:26इंस्पेक्टर साहब यह सवाल जवाब तो बाद में
  296. 13:28भी हो सकते हैं ना। अभी इनका इलाज ज्यादा
  297. 13:30जरूरी है। वहीं शिप्रा की आंखों में
  298. 13:32नाराजगी देखकर इंस्पेक्टर ने आगे कोई सवाल
  299. 13:35नहीं पूछा और राय साहब से कहा, ठीक है।
  300. 13:38राय साहब, चलिए हम [संगीत] साथ में चलते
  301. 13:40हैं। इस पर बलवंत राय ने हां में सर
  302. 13:43हिलाया और अपने परिवार के साथ कार की तरफ
  303. 13:46बढ़ गए। कुछ ही घंटों में बलवंत राय की
  304. 13:48फैमिली बैकुंठपुर थाने से बाहर निकल गई।
  305. 13:51हॉस्पिटल में शौर्य की मरम पट्टी के बाद
  306. 13:53सभी थाने आ गए थे। जहां सबके बयान दर्ज
  307. 13:55करने के बाद इंस्पेक्टर ने उन सभी को फ्री
  308. 13:57कर दिया।
  309. 13:58[संगीत]
  310. 13:58वहीं शौर्य अभी भी बलवंत राय की कार में
  311. 14:00मौजूद था। जहां बलवंत राय और राजदीप राय
  312. 14:03भी बैठे हुए थे और शिप्रा अपने भाई के साथ
  313. 14:05दूसरी गाड़ी में थी। [संगीत] इस वक्त
  314. 14:07माहौल में गहरी शांति पसरी हुई थी। कोई भी
  315. 14:10किसी से बात करने की स्थिति में नहीं था।
  316. 14:12[संगीत] लेकिन अभी पुलिस स्टेशन से निकले
  317. 14:14हुए 5 मिनट ही गुजरे थे कि शौर्य बोल उठा।
  318. 14:17प्लीज मुझे मंदिर के बाहर छोड़ दीजिएगा।
  319. 14:20वहीं बलवंत राय शौर्य की बात सुनकर कुछ पल
  320. 14:22उसको देखते रहे। [संगीत] फिर उनकी निगाह
  321. 14:24राजदीप से मिली और आंखों ही आंखों में
  322. 14:26दोनों के बीच किसी बात की सहमति होते ही
  323. 14:29राजदीप राय ने गहरी चिंता जताते हुए शौर्य
  324. 14:32से कहा तुम्हें पता है दो दिनों से हम
  325. 14:35तुम्हें ढूंढ रहे हैं। शौर्य को कुछ ऐसा
  326. 14:37ही अंदेशा था। उसने कुछ कहा नहीं पर अपनी
  327. 14:40आंखों से ऐसे जताया कि मानो उसे इसका कोई
  328. 14:42आभास ही ना हो। तभी राजदीप राय ने शौर्य
  329. 14:45पर थोड़ा दबाव बनाते हुए जिज्ञासा के साथ
  330. 14:47पूछा। तुम उस रात बिना किसी को कुछ बताए
  331. 14:51कहां चले गए थे? शौर्य को पहले से ही पता
  332. 14:54था कि ऐसा सवाल उसके सामने आ सकता है।
  333. 14:56इसीलिए उसने शांत लेकिन स्पष्ट लहजे में
  334. 14:59कहा। दरअसल वहां जो हुआ उसके बाद मेरा
  335. 15:02वहां रुकना ठीक नहीं था। सो मैं वहां से
  336. 15:04वापस मंदिर आ गया था। मंदिर से ही तो
  337. 15:06उठाकर वो लोग मुझे ले गए थे। इस पर राजदीप
  338. 15:09राय ने एक लंबी सांस ली और फिर समझाते हुए
  339. 15:11बोले मैं जानता हूं कि उस रात वहां जो कुछ
  340. 15:14भी हुआ था उसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं
  341. 15:16थी। पर वो सिचुएशन हमारे लिए भी
  342. 15:18अनएक्सेक्टेड थी। हमें खुद समझ नहीं आ रहा
  343. 15:21था कि उस स्थिति में हम क्या करें। फिर जब
  344. 15:23कुछ सोचने लायक हुए तब तक तुम वहां से जा
  345. 15:26चुके थे। यह कहते हुए राजदीप राय अतीत में
  346. 15:28कहीं खो से गए। उन्हें अब भी समझ नहीं आ
  347. 15:30रहा था कि आखिर उनकी बेटी के साथ ऐसा हुआ
  348. 15:33तो हुआ क्यों? वहीं राजदीप की बात सुनकर
  349. 15:36शौर्य को भी गहरी शर्मिंदगीगी महसूस होने
  350. 15:38लगी और वह सहानुभूति जताते हुए बोला उस
  351. 15:41वक्त मुझे भी नहीं समझ आ रहा था कि मैं आप
  352. 15:43लोगों का सामना कैसे करूंगा। मैं क्या
  353. 15:46जवाब देता आप लोगों को? आप जैसे बड़े
  354. 15:48लोगों के साथ यह नहीं होना चाहिए था। यह
  355. 15:50कहते हुए शौर्य का चेहरा शर्मिंदगीगी से
  356. 15:52झुक गया। अगर उसका अतीत रहस्यमई नहीं होता
  357. 15:55तो वह कभी शिप्रा के साथ वह सब नहीं होने
  358. 15:57देता जो उस रात [संगीत] उसने झेला। वहीं
  359. 15:59कुछ समय तक गाड़ी में सन्नाटा पसर गया।
  360. 16:02जिसे तोड़ते हुए राजदीप राय ने गंभीर लहजे
  361. 16:05में कहा। वहां जो भी हुआ था हम सबके सामने
  362. 16:08हुआ था। इसीलिए [संगीत] कोई भी तुम्हें
  363. 16:10दोष नहीं दे सकता था। पर अब एक सबसे बड़ा
  364. 16:13सच यह भी है कि ना चाहते हुए भी शिप्रा के
  365. 16:15साथ तुम्हारी शादी हो चुकी है। हमारे
  366. 16:18परिवार के लिए भी यह बड़ी ऑकवर्ड स्थिति
  367. 16:19है। शहर में सिर्फ हमारे परिवार की ही
  368. 16:22चर्चा हो रही है। और अब हमें खुद नहीं पता
  369. 16:24चल रहा कि स्थिति से हम बाहर कैसे निकलें।
  370. 16:28यह कहते हुए राजदीप के सामने रहकर शिप्रा
  371. 16:30का मासूम चेहरा आ रहा था। उस बच्ची पर तो
  372. 16:33मानो दुख का पहाड़ ही टूट पड़ा था। और तभी
  373. 16:36राजदीप ने भावुक स्वर में आगे कहा। इस
  374. 16:38वक्त सबसे विकट स्थिति तो शिप्रा के लिए
  375. 16:41है। क्योंकि उस अकेली को सबके ताने झेलने
  376. 16:43पड़ रहे हैं। पर फिर भी वो किसी से कोई
  377. 16:46शिकायत नहीं कर रही। इस पर शौर्य ने भी
  378. 16:48शिप्रा के लिए सिंपैथी दिखाई और गहरी आवाज
  379. 16:50में कहा। मुझे खुद भी उनके लिए बुरा फील
  380. 16:53हो रहा है। आप ही बताइए उनके लिए मैं क्या
  381. 16:56कर सकता हूं? वहीं अब तक बलवंत राय चुपचाप
  382. 16:59दोनों की बात को सुन रहे थे। उन्होंने
  383. 17:00शौर्य की तरफ पलट कर कहा। क्या नाम बताया
  384. 17:03था तुमने अपना? हां श्रवण। तो देखो श्रवण
  385. 17:07जब तक हमारे परिवार के लिए स्थिति सामान्य
  386. 17:09नहीं हो जाती। तुम हमारे साथ ही रहोगे। जब
  387. 17:12हमें लगेगा कि स्थिति अब अनुकूल है तो फिर
  388. 17:15तुम दोनों के रिश्ते का क्या किया जा सकता
  389. 17:17है? उसके बारे में हम सोच सकेंगे। लेकिन
  390. 17:20तभी शौर्य संकोच करते हुए तुरंत बोल उठा
  391. 17:22पर अगर मैं आपके साथ रहूं तो और भी
  392. 17:25तरह-तरह की बातें होंगी। तुम गलत सोच रहे
  393. 17:28हो। अभी ज्यादा बातें हो रही हैं। जब तुम
  394. 17:30हमारे साथ रहोगे तो इतनी बातें नहीं
  395. 17:33होंगी। तुम्हें जब लोग इस हाल में देखेंगे
  396. 17:35तो यही कहेंगे कि यह देखो। यही है राय
  397. 17:38फैमिली का दामाद शिप्रा का पति। पर जब तुम
  398. 17:40हमारे साथ रहोगे तो तुम्हारी स्थिति बेहतर
  399. 17:43हो जाएगी। जिससे लोगों की जुबान पर ताला
  400. 17:46लग जाएगा। इतना बोलकर बलवंत राय शौर्य की
  401. 17:49प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगे। आखिर अब
  402. 17:52उस पर ही उनकी पूरी आशा टिकी हुई थी। वहीं
  403. 17:55बलवंत राय जी की बात शौर्य को भी समझ में
  404. 17:57आ गई थी। वो समझ गया कि बलवंत राय ने
  405. 17:59खुलकर नहीं कहा। पर उनके कहने का मतलब यही
  406. 18:02था कि वह शौर्य की भिखारी वाली स्थिति से
  407. 18:04ज्यादा परेशान थे। एक दृष्टि से देखा जाए
  408. 18:07तो वह अपनी जगह सही भी थे क्योंकि कौन
  409. 18:10पिता अपनी बेटी के पति के रूप में एक
  410. 18:12भिखारी को देखना चाहेगा। लेकिन अब शौर्य
  411. 18:14को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे
  412. 18:17क्योंकि उसके अपने भी कुछ मसले हैं। उसे
  413. 18:19अभी तक पता नहीं चला था कि कौन उसकी हत्या
  414. 18:21करना चाहता था। ऐसा कौन दुश्मन था जो नहीं
  415. 18:24चाहता था कि वह भारत की धरती पर अपना पैर
  416. 18:27भी रख पाए। हालांकि फिलहाल उसका दुश्मन यह
  417. 18:30मान चुका था कि शौर्य मर चुका है। इसीलिए
  418. 18:32अब उसे यह चिंता तो नहीं थी कि फिलहाल कोई
  419. 18:34उसकी ताक में होगा। लेकिन वो किसी रिश्ते
  420. 18:37में बंधकर भी नहीं रह सकता था। इसीलिए वो
  421. 18:40बलवंत राय से इंकार करना चाहता था। इसीलिए
  422. 18:43उसने संकोच भरे शब्दों में पूरी ईमानदारी
  423. 18:45से जवाब दिया। देखिए राय साहब मुझे नहीं
  424. 18:48पता कि मेरी स्थिति से आप कितने वाकिफ
  425. 18:50हैं। लेकिन मेरे जैसे लोगों का आप जैसे
  426. 18:53रईस लोगों के साथ रहना ठीक नहीं रहेगा।
  427. 18:56लोगों के ताने सुनकर आप कुछ दिनों के बाद
  428. 18:58मुझे अपने घर से निकाल ही देंगे। इसीलिए
  429. 19:01इससे तो अच्छा यही है कि इसी वक्त आप मुझे
  430. 19:03अपने साथ ले जाने का ख्याल छोड़ दें।
  431. 19:06[संगीत]
  432. 19:07आखिर शौर्य के हालात, उसकी बातें और बात
  433. 19:10करने का तरीका कहीं से भी [संगीत] आपस में
  434. 19:11मेल खाती नजर नहीं आ रही थी। वैसे भी किसी
  435. 19:14भिखारी से उन्हें इस तरह की समझदारी भरी
  436. 19:17बातों की उम्मीद नहीं थी। शौर्य की जगह
  437. 19:20कोई और भिखारी होता तो वह ऐसे मौके को
  438. 19:22दोनों हाथों से लपक लेता। पर इसके उलट
  439. 19:24शौर्य अभी भी उनके साथ जाने से इंकार कर
  440. 19:27रहा है। शादी वाली रात को भी उसे मुख्तार
  441. 19:30के गुर्गों का कोई खौफ नहीं था। उसने शादी
  442. 19:32भी की थी तो राहुल को बचाने के लिए।
  443. 19:35उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि किसी
  444. 19:37भिखारी में इतनी हिम्मत हो सकती है। पर
  445. 19:40उन्होंने सोचा कि अपवाद हर जगह होते हैं।
  446. 19:43हो सकता है पहले इसके हालात इतने बुरे
  447. 19:45नहीं रहे होंगे। एक चीज तो वह समझ गए थे
  448. 19:48कि जो भी हो इसकी नियत साफ है। इसीलिए
  449. 19:50बलवंत राय इतनी आसानी से हार नहीं मान
  450. 19:53सकते थे। इसीलिए उन्होंने एक बार फिर जोर
  451. 19:55देकर कहा देखो श्रवण बेटा यह समय तुम्हारे
  452. 19:59अपने लिए भी एक मौके की तरह है। मुझे नहीं
  453. 20:02पता कि तुम्हारी ऐसी हालत क्यों है।
  454. 20:04तुम्हारी उम्र भी अभी ज्यादा नहीं लगती।
  455. 20:06[संगीत] तुम चाहो तो अपने हालात बेहतर कर
  456. 20:08सकते हो। तुम चाहो तो हमारे यहां कुछ काम
  457. 20:11कर सकते हो। अभी जो दर-दर की ठोकर खा रहे
  458. 20:14हो उससे तो बेहतर ही होगा ना। शौर्य कुछ
  459. 20:17पल सोचता रहा। फिर उसे लगा कि अब अगर उसने
  460. 20:19मना किया तो वह खुद पर शक करने का मौका
  461. 20:21देगा कि वो क्यों अपना जीवन स्तर सुधारना
  462. 20:24नहीं चाहता। इसी विचार के साथ उसने हल्का
  463. 20:27संकोच दिखाया और फिर सहमति में सिर हिलाते
  464. 20:29हुए कहा।
  465. 20:31अगर ऐसा है तो ठीक है। मैं चलने के लिए
  466. 20:34तैयार हूं। पर मुझे वहां क्या करना होगा?
  467. 20:38वहीं राजदीप राय ने शौर्य की हां सुनकर
  468. 20:40राहत की सांस ली और अगले ही पल वो सोचने
  469. 20:42लगे कि वह शौर्य से क्या काम ले सकते हैं।
  470. 20:45तभी उनके दिमाग में कुछ बात आई और
  471. 20:47उन्होंने तुरंत पूछा क्या तुम ड्राइविंग
  472. 20:51कर लेते हो? जब शौर्य ने ये सवाल सुना तो
  473. 20:54अनायास ही उसकी नजर गाड़ी ड्राइव कर रहे
  474. 20:56अधेड़ उम्र के शख्स पर ठहर गई। बलवंत राय
  475. 21:00शौर्य के भाव समझ गए और मुस्कुराते हुए
  476. 21:02बोले तुम उसकी चिंता [संगीत] मत करो।
  477. 21:04गिरधर की नौकरी पर कोई आंच नहीं आने वाली
  478. 21:07है। यह हमारा पुराना वफादार ड्राइवर है।
  479. 21:10यह भी हमारी फैमिली की ही तरह है। तुम
  480. 21:12सिर्फ यह बताओ कि तुम ड्राइविंग कर लेते
  481. 21:14हो? इस पर शौर्य ने केवल हां कहकर अपना
  482. 21:17सिर हिला दिया। तभी बलवंत राय ने अपनी
  483. 21:19भोएं चढ़ाई और निर्णायक लहजे में बोल उठे।
  484. 21:22तो फिर ठीक है। अभी तुम हमारे यहां
  485. 21:25ड्राइविंग कर सकते हो। बाद में देखेंगे
  486. 21:27अगर तुम्हारे लिए और कोई दूसरा काम हुआ तो
  487. 21:29उसके लिए भी मनाही नहीं होगी। जब राय साहब
  488. 21:32की गाड़ी उनके बंगले में जाकर रुकी तो कुछ
  489. 21:34ही समय में राजदीप राय और शौर्य भी गाड़ी
  490. 21:36से बाहर निकल आए और उनके पीछे ही शिप्रा
  491. 21:39की कार भी आ चुकी थी। गाड़ी से बाहर आने
  492. 21:42के बाद शौर्य पूरे बंगले का निरीक्षण करने
  493. 21:44लगा। बंगले के सामने एक बड़ा सा लॉन था
  494. 21:47जिसमें सरला और जगदाब की वाइफ बिंदु बैठी
  495. 21:50हुई थी। जब उन्होंने देखा कि बलवंत राय के
  496. 21:52साथ शौर्य भी वहां पहुंच चुका है तो सरला
  497. 21:54भी बिंदु जी को लेकर तुरंत उन सभी के पास
  498. 21:57आ गई। वैसे भी उन्हें मंदिर में घटी सारी
  499. 21:59घटना पता चल चुकी थी। तभी शौर्य को देखकर
  500. 22:02सरला अपना मुंह बनाते हुए बोली, आखिर आप
  501. 22:05लोग इस भिखारी को घर ले ही आए। अब तक
  502. 22:07बलवंत राय हवेली के अंदर जा चुके थे और
  503. 22:10वहां पर अभी राजदीप राय, शिप्रा, राहुल और
  504. 22:13गिरधर ही मौजूद थे। वहीं जब राजदीप राय ने
  505. 22:15सरला के मुंह से भिखारी शब्द सुना तो
  506. 22:18उन्हें टोकते हुए कहा भाभी इसका नाम श्रवण
  507. 22:21है। इसीलिए अगर आप इसे नाम से बुलाएंगी तो
  508. 22:23अच्छा लगेगा। लेकिन सरला ने राजदीप की बात
  509. 22:26को बिल्कुल ही अनसुना कर दिया और फिर तंज
  510. 22:28भरे लहजे में बोल उठी। तो क्या अब यह
  511. 22:30भिखारी यहीं रहेगा? सरला के इन बेवजह के
  512. 22:33तानों से अब राजदीप का मन भी खट्टा हो गया
  513. 22:36था। लेकिन उन्होंने सरला के मुंह लगना ठीक
  514. 22:39नहीं समझा और बात को खत्म करने के इरादे
  515. 22:41से ठंडे लहजे में कहा। लगता है आपने
  516. 22:44पिताजी की बात को सुना नहीं था। अगर आपको
  517. 22:47ऐतराज है तो आप उनसे बात कर सकती हैं।
  518. 22:50लेकिन सरला तो जैसे अपनी जुबान को धार
  519. 22:52करके बैठी थी। इसीलिए उसने जाते-जाते भी
  520. 22:55कटाक्ष करते हुए कहा, "मुझे क्या जरूरत
  521. 22:58है? जब आपको खुद ही कुएं में गिरना है, तो
  522. 23:01मैं कौन होती हूं रोकने वाली?" एक भिखारी
  523. 23:03को आप अपने दामाद के रूप में स्वीकार करने
  524. 23:05को तैयार हैं, तो अब कोई क्या ही कर सकता
  525. 23:07है? इतना बोलकर सरला मुंह बनाते हुए वहां
  526. 23:11से चली गई। साथ ही बिंदु भी सरला के पीछे
  527. 23:13हो ली। वहीं राजदीप राय ने भी उनको रोकने
  528. 23:16की कोशिश नहीं की। अब राजदीप के पीछे
  529. 23:19शिप्रा, राहुल, गिरधर और शौर्य ही बचे थे।
  530. 23:22लेकिन इस समय राजदीप के चेहरे पर गहरी
  531. 23:24शर्मिंदगीगी के भाव उमड़ आए थे। आखिर जो
  532. 23:27कुछ भी सरला ने शौर्य के सामने कहा था वो
  533. 23:29सभी अनकंफर्टेबल करने वाली बातें थी। तभी
  534. 23:32राजदीप राय ने एक लंबी सांस ली और शौर्य
  535. 23:35की तरफ मुड़कर धीमी आवाज में बोले यह
  536. 23:38हमारी भाभी हैं। इनकी बातों का बुरा मत
  537. 23:41मानना। यह ऐसी ही हैं। इन्हें बस किसी पर
  538. 23:44तंज कसने का मौका चाहिए होता है। इस पर
  539. 23:47शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ सहज भाव से
  540. 23:49जवाब दिया। मैं समझता हूं आप चिंता मत
  541. 23:52कीजिए। ऐसी बातें सुनने की मुझे आदत है।
  542. 23:55इसीलिए इस तरह की बातें मुझ पर कोई असर
  543. 23:57नहीं करती। वहीं शिप्रा गौर से शौर्य की
  544. 23:59तरफ ही देख रही थी। शौर्य की मुस्कुराहट
  545. 24:02इस वक्त उसकी घनी लंबी दाढ़ी के नीचे छुप
  546. 24:04गई थी। जिसे शिप्रा बखूबी देख पा रही थी।
  547. 24:08साथ ही जब शौर्य अपनी बात रखता है तो लगता
  548. 24:10नहीं कि वो किसी भिखारी की बात है। तभी
  549. 24:13शिप्रा के दिमाग में आया कि इसकी बेतरतीब
  550. 24:15दाढ़ी के पीछे इसका चेहरा कैसा होगा। इसकी
  551. 24:18बेतरतीब दाढ़ी के पीछे आखिर इसका चेहरा
  552. 24:21कैसा होगा? अपने भिखारी पति को देखकर
  553. 24:24शिप्रा के दिमाग में ख्याल आया। आखिर कुछ
  554. 24:26भिखारी जानबूझकर भी अपनी स्थिति खराब
  555. 24:29दिखाते हैं ताकि लोगों को उन पर दया आए और
  556. 24:32उन्हें ज्यादा से ज्यादा भीख मिल सके। अभी
  557. 24:35शिप्रा अपनी इसी उधेड़बन में थी कि तभी
  558. 24:37उसके कानों में राजदीप राय की आवाज पड़ी।
  559. 24:40गिरधर तुम श्रवण को अपने साथ ले जाओ और
  560. 24:43अपने साथ वाला कमरा इसे दिखा दो। आज से यह
  561. 24:46वहीं रहेगा। और हां काम वाली से बोलकर
  562. 24:49कमरा साफ करवा देना। जी साहब गिरधर ने
  563. 24:53सहमति में सिर हिलाते हुए कहा। फिर वो
  564. 24:55शौर्य की तरफ पलट कर बोला। चलो श्रवण
  565. 24:58तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखा देता हूं।
  566. 25:01गिरधर के साथ अभी शौर्य कुछ ही कदम आगे
  567. 25:03बढ़ा था कि तभी पीछे से राजदीप राय की
  568. 25:05आवाज गूंजी। सुनो श्रवण। क्या तुम्हारा
  569. 25:09सामान मंदिर में है?
  570. 25:11इस पर शौर्य ने खुद को एक सामान्य भिखारी
  571. 25:13जताते हुए साफ शब्दों में कहा, "जी हां,
  572. 25:16मेरे कुछ कपड़े होंगे जो लोगों ने दिए थे।
  573. 25:19मैं गिरधर चाचा के साथ जाकर ले आऊंगा। जब
  574. 25:22राजदीप ने शौर्य की बातों पर गौर किया तो
  575. 25:24उन्हें काफी अच्छा लगा। उसने गिरधर
  576. 25:26[संगीत] से एक रिश्ता भी बना लिया था। वो
  577. 25:28खुश थे कि इस तरह श्रवण का मन यहां लग
  578. 25:30जाएगा। वहीं जब शिप्रा ने शौर्य की बात
  579. 25:32सुनी और उसके कपड़ों पर ध्यान दिया तो
  580. 25:34पाया कि इस वक्त शौर्य ने जो कपड़े पहने
  581. 25:36थे, वे उसकी फिटिंग के नहीं थे। इसीलिए
  582. 25:39शिप्रा ने सोचा कि इसके दूसरे कपड़े भी
  583. 25:41ऐसे ही होंगे। और यही सोचकर शिप्रा ने सहज
  584. 25:44भाव से कहा, उन कपड़ों को रहने दो। तुम
  585. 25:47राहुल के साथ जाकर अपने नाप के कुछ दूसरे
  586. 25:50कपड़े ले लेना।
  587. 25:52यह पहली बार था जब शिप्रा ने शौर्य से कुछ
  588. 25:54कहा था। उसके मीठे शब्दों को सुनते ही
  589. 25:57शौर्य के दिल की घंटी बज उठी। लेकिन जब
  590. 26:00शौर्य ने शिप्रा की तरफ देखा तो उसे
  591. 26:02शिप्रा के चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नजर
  592. 26:04नहीं आया। पर उसे यह तो महसूस हो ही गया
  593. 26:07कि शिप्रा उसे इन गंदे कपड़ों में नहीं
  594. 26:09देखना चाहती है। वहीं जब राहुल ने शिप्रा
  595. 26:11की बात सुनी तो वो फौरन बोल उठा मैं अभी
  596. 26:14तैयार होकर आता हूं श्रवण भैया आप भी तब
  597. 26:16तक अपना रूम देख लो। फिर हम आपके लिए
  598. 26:19शॉपिंग करने चलते हैं। राहुल के मुंह से
  599. 26:21अपने लिए भैया सुनकर शौर्य को काफी अच्छा
  600. 26:23लगा। गुमनामी के कई महीनों के बाद आखिरकार
  601. 26:26उसे कुछ नए रिश्ते मिले थे। वैसे भी राहुल
  602. 26:30के दिल में शौर्य के लिए इज्जत बढ़ गई थी।
  603. 26:32जिस तरह से आज शौर्य ने राहुल को गुंडों
  604. 26:34से बचाया उससे राहुल की नजर में शौर्य
  605. 26:36सुपरमैन बन चुका था। इससे पहले शादी वाली
  606. 26:39रात को भी शौर्य राहुल की जान बचाने की
  607. 26:41खातिर ही शिप्रा से शादी करने को तैयार
  608. 26:44हुआ था। कहीं ना कहीं यह राहुल के
  609. 26:46अनकॉन्शियस माइंड में काम कर रहा था।
  610. 26:48इसलिए राहुल के दिल में खुद ब खुद शौर्य
  611. 26:50के लिए रिस्पेक्ट आ गई थी। वहीं जब राजदीप
  612. 26:53राय ने भी राहुल के मुंह से श्रवण के लिए
  613. 26:55भैया सुना तो उन्हें भी लगा कि उनकी
  614. 26:57फैमिली में श्रवण को लेकर एक्सेप्टेंस बढ़
  615. 27:00रही है। इसके बाद शौर्य गिरधर के साथ अपने
  616. 27:02नए आशियाने को देखने के लिए बढ़ गया।
  617. 27:05बलवंत राय की हवेली एक बहुत बड़े कंपाउंड
  618. 27:07से घिरी थी जिसके बीच में [संगीत] एक बड़ी
  619. 27:09कोठी मौजूद थी और उसके इर्द-गिर्द तीन
  620. 27:11छोटी कोठियां बनी थी। वहीं कंपाउंड में
  621. 27:13मौजूद खूबसूरत फूलों की क्या हवेली की
  622. 27:16सुंदरता को और भी बढ़ा [संगीत] रही थी।
  623. 27:18चलते-चलते गिरधर ने शौर्य को राय परिवार
  624. 27:21के बारे में बताना शुरू किया। वो जो आप
  625. 27:24सबसे बड़ी वाली कोठी देख रहे हैं श्रवण
  626. 27:27उसमें बड़े साहब रहते हैं। बाई तरफ वाली
  627. 27:29कोठी राजदीप साहब की है और दाई तरफ वाली
  628. 27:32बृजभूषण भाई साहब की और यह जो तीसरी कोठी
  629. 27:35है उसमें जगताप भाई साहब रहते हैं। वो जो
  630. 27:38मैडम अभी आपके लिए बुरा बोल कर गई वो
  631. 27:40बृजभूषण भाई साहब की पत्नी सरला [संगीत]
  632. 27:42जी थी। और उनके साथ जो मैडम थी वो जगताप
  633. 27:45भाई साहब की पत्नी बिंदु जी थी।
  634. 27:48तभी शौर्य ने कुछ जानने की इच्छा से पूछा।
  635. 27:51अच्छा गिरिधर चाचा एक बात बताइए। मुझे
  636. 27:53लगता है कि सरला जी शिप्रा मैम को कुछ खास
  637. 27:56पसंद नहीं करती हैं। ऐसा है क्या? इस पर
  638. 28:00गिरधर ने पहले आसपास देखा और फिर धीमी
  639. 28:02आवाज में बोला हां सही पहचाना तुमने। पहले
  640. 28:06ऐसा नहीं था। लेकिन जब से शिप्रा बेबी का
  641. 28:09अपने दम पर खड़ा किया ब्रांड जिंग
  642. 28:11मर्चेंडाइज पॉपुलर हुआ है तब से बड़ी मेम
  643. 28:14साहब को शिप्रा बेबी खटकने लगी हैं।
  644. 28:17बड़े घरों में अक्सर देखा जाता है कि घर
  645. 28:19की आपसी कलह की जानकारी जितनी नौकरों को
  646. 28:22होती है उतनी किसी और को नहीं। छोटी-छोटी
  647. 28:25चीजों को नौकर जितना ऑब्जर्व करते हैं,
  648. 28:27उतना कोई और नहीं कर पाता। गिरधर इस घर का
  649. 28:29पुराना नौकर है। इसीलिए उसे घर के
  650. 28:32प्रत्येक सदस्य के बारे में अच्छी बुरी हर
  651. 28:34चीज पता थी। इसीलिए शौर्य ने एक और सवाल
  652. 28:37पूछ डाला। लेकिन अगर शिप्रा मैम का ब्रांड
  653. 28:41पॉपुलर हो रहा है तो इसमें सरला मैम को
  654. 28:43क्यों तकलीफ होने लगी?
  655. 28:45इस पर गिरधर ने उसे समझाते हुए कहा, दरअसल
  656. 28:48बात यह है कि इससे पहले फैमिली में सरला
  657. 28:51मैम के बेटे कुलवंत बाबू की बड़ी पूछ थी
  658. 28:54क्योंकि उन्होंने भी बिजनेस को बढ़ाने में
  659. 28:56बहुत योगदान दिया था। लेकिन एक लड़की होकर
  660. 28:59शिप्रा बेबी ने बिना किसी की मदद के अपने
  661. 29:02ब्रांड को पॉपुलर कर लिया तो हेड ऑफ
  662. 29:04फैमिली की निगाह में उनकी अहमियत बढ़ गई
  663. 29:07और कुलवंत बाबू की पूछ छोटी हो गई। बस यही
  664. 29:10बात सरला मैन को खटकती है। बातचीत करते
  665. 29:14हुए शौर्य गिरधर के साथ आगे बढ़ ही रहा था
  666. 29:16कि उसे सामने एक 24-25 साल की लड़की टाइट
  667. 29:19से आउटफिट में दौड़कर उनकी तरफ आती हुई
  668. 29:21दिखाई दी और ताजा हवा के झोंके की तरह वो
  669. 29:24लड़की इन दोनों की तरफ ध्यान दिए बिना
  670. 29:26वहां से गुजर गई। जब शौर्य ने उस लड़की को
  671. 29:29देखा तो वह फौरन समझ गया कि इस लड़की को
  672. 29:31अपने आसपास क्या हो रहा है इससे कोई फर्क
  673. 29:33नहीं पड़ता। वहीं जब गिरधर ने शौर्य की
  674. 29:36नजर उस गुजरती लड़की पर पड़ती देखी तो वो
  675. 29:38तुरंत बोला यह युविका बिटिया है। बृजभूषण
  676. 29:43साहब की बेटी। [संगीत] लगता है किसी ने
  677. 29:45फिर से इनको बोल दिया है कि यह मोटी दिख
  678. 29:47रही हैं। मतलब शौर्य को कुछ समझ नहीं आया।
  679. 29:52[संगीत]
  680. 29:52इस पर गिरधर हंसते हुए बोला, अरे मतलब यह
  681. 29:56है कि जब कोई इनको बोल देता है कि यह
  682. 29:58थोड़ी मोटी लग रही हैं तो बस इनका वर्कआउट
  683. 30:01शुरू हो जाता है। [संगीत] ओ अच्छा तो यह
  684. 30:04बात है। कहते हुए शौर्य के चेहरे पर भी
  685. 30:06मुस्कान आ गई। खैर, गिरधर के कमरे के पास
  686. 30:09पहुंचकर शौर्य ने देखा कि कंपाउंड को घेरे
  687. 30:12हुए जो दीवार थी, उसके साथ ही तीन कमरे
  688. 30:14बने हुए थे। गिरधर शौर्य को दूसरे नंबर के
  689. 30:17कमरे के पास ले गया। उस कमरे के दरवाजे पर
  690. 30:19बिना ताले के बस कुंडी लगी हुई थी। शौर्य
  691. 30:23गिरधर के साथ कमरे के अंदर चला गया। उस
  692. 30:26पूरे कमरे में धूल की परत चढ़ी हुई थी
  693. 30:29क्योंकि बहुत समय से कमरा खाली पड़ा था।
  694. 30:32कमरे के साथ ही एक छोटा सा किचन था और
  695. 30:35किचन के अपोजिट ही एक अटैच बाथरूम था।
  696. 30:37शौर्य ने एक सरसरी नजर के साथ पूरे कमरे
  697. 30:40[संगीत] का मुआयना किया। तभी खामोशी को
  698. 30:43तोड़ते हुए गिरधर की आवाज गूंजी। [संगीत]
  699. 30:46तो बताओ कैसा लगा कमरा?
  700. 30:48शौर्य पिछले 6 महीने से एक मंदिर के छोटे
  701. 30:51से कमरे में पुजारी बाबा के साथ रहकर जमीन
  702. 30:54पर सोता आया था। उसकी तुलना में तो यह
  703. 30:56कमरा उससे काफी बड़ा था और साथ में किचन
  704. 30:59और बाथरूम भी अटैच थे। लॉन के साइड एक
  705. 31:02खिड़की भी थी जिससे लॉन का नजारा दिखाई
  706. 31:05देता था। इसीलिए यह कहा जा सकता है कि
  707. 31:07शौर्य की पिछले कुछ महीनों की जिंदगी से
  708. 31:09तो यह काफी बेहतर है। शौर्य खुशी जाहिर
  709. 31:13करते हुए बोला यह तो बढ़िया है चाचा। बस
  710. 31:17इसे साफ करने में थोड़ी मेहनत लगेगी।
  711. 31:20उसकी [संगीत] चिंता मत करो। वैसे भी अभी
  712. 31:22तुम मार्केट जाने वाले हो। तब तक मैं इसे
  713. 31:25साफ करवा दूंगा। ऐसा करो अभी तुम मेरे
  714. 31:28कमरे में चलकर हाथ मुंह धो लो। तब तक
  715. 31:31राहुल बाबा भी आ जाएंगे। गिरधर ने एक
  716. 31:34हल्की मुस्कान के साथ कहा और शौर्य को भी
  717. 31:36यह सुझाव ठीक लगा। शौर्य के कमरे से ही
  718. 31:39सटा गिरधर चाचा का कमरा बहुत साफ सुथरा था
  719. 31:42और हर सामान करीने से अपनी जगह पर रखा हुआ
  720. 31:45था। इसके बाद शौर्य ने वक्त गवाए बिना हाथ
  721. 31:48मुंह धोया और कपड़ों पर जो खून लगा हुआ था
  722. 31:50उसको भी साफ कर लिया। दरअसल शौर्य के सर
  723. 31:53पर कट लगने के कारण उसके कपड़ों पर खून लग
  724. 31:56गया था। पर अब डॉक्टर ने दो स्टिचेस लगा
  725. 31:59दिए थे। जो उसके लंबे बालों के कारण दिखाई
  726. 32:01भी नहीं दे रहे थे। वहीं अब तक गिरधर ने
  727. 32:04टीवी चला लिया और वो न्यूज़ चैनल देखने
  728. 32:06लगा। शौर्य गिरधर के पास आकर बैठा ही था
  729. 32:09कि तभी बाहर किसी की आहट हुई। जब गिरधर और
  730. 32:12शौर्य ने बाहर देखा तो कमरे के बाहर राहुल
  731. 32:14था। राहुल मुस्कुराते हुए बोला चलिए भैया
  732. 32:18शॉपिंग टाइम।
  733. 32:20अगर शौर्य चाहता तो कब का अपना होलिया
  734. 32:22चेंज कर सकता था। पर उसने तो जानबूझकर यह
  735. 32:25वेश अपना रखा था ताकि अपने दुश्मनों का
  736. 32:27पता लगा सके। [संगीत] लेकिन अब उसके पास
  737. 32:30मना करने का कोई कारण नहीं था। इसीलिए वह
  738. 32:32हालात के बहाव में बहने के लिए तैयार हो
  739. 32:35गया। वैसे भी कहीं ना कहीं शिप्रा की
  740. 32:37मासूमियत उसके दिल में घर कर गई थी। शायद
  741. 32:40यह भी [संगीत] एक कारण था कि वो राहुल के
  742. 32:41साथ जाने को तैयार हो गया। कुछ ही देर में
  743. 32:44शौर्य राहुल के साथ एक मॉल में पहुंच गया।
  744. 32:48मॉल में प्रवेश करते वक्त वहां के गार्ड
  745. 32:50ने शौर्य का हुलिया देखकर उसे रोकना चाहा।
  746. 32:53पर राहुल के कारण उसने ऐसा करने की हिम्मत
  747. 32:55नहीं की। फिर जब वो दोनों एक स्टोर में गए
  748. 32:58तो स्टोर में मौजूद सेल्स गर्ल ने शौर्य
  749. 33:00को देखकर मुंह बना लिया। पर वो [संगीत] भी
  750. 33:03राहुल को देखकर कुछ बोल नहीं सकी। वहीं
  751. 33:06राहुल ने दो-तीन जोड़े शर्ट पैंट पसंद किए
  752. 33:08और शौर्य का हाथ पकड़ कर चेंजिंग रूम की
  753. 33:11तरफ बढ़ गया। जाहिर है एक भिखारी को मॉल
  754. 33:14के तौर-तरीकों का क्या ही पता होगा। यही
  755. 33:16सोच कर राहुल उसे अच्छे से असिस्ट करना
  756. 33:19चाह रहा था। शौर्य का हाथ पकड़े हुए जैसे
  757. 33:22ही राहुल ने चेंजिंग रूम के एक दरवाजे को
  758. 33:23पुश किया तो वहां पहले से एक लड़की कपड़े
  759. 33:26चेंज कर रही थी। राहुल ने जैसे ही उस
  760. 33:29लड़की को देखा उसका मुंह खुला का खुला रह
  761. 33:31गया और उसने [संगीत] जल्दी से ओह आई एम
  762. 33:34रियली सॉरी कहकर दरवाजा बंद कर दिया।
  763. 33:37राहुल का चेहरा शर्म से लाल हो गया। लेकिन
  764. 33:40उसने खुद को नॉर्मल किया और शौर्य को लेकर
  765. 33:43दूसरे चेंजिंग रूम में पहुंच गया। उसने
  766. 33:45पहले हल्के से चेंजिंग रूम के दरवाजे को
  767. 33:47पुश करके देखा कि कोई अंदर है [संगीत] तो
  768. 33:49नहीं। फिर उसने शौर्य को कपड़े थमाते हुए
  769. 33:52कहा, आप अंदर जाकर फिटिंग वगैरह देख लो
  770. 33:55भैया।
  771. 33:56राहुल शौर्य को ऐसे ट्रीट कर रहा था जैसे
  772. 33:58शौर्य पहली बार किसी स्टोर में आया हो।
  773. 34:01शौर्य को राहुल के इस व्यवहार पर अंदर ही
  774. 34:03अंदर हंसी आ रही थी। खैर, इसके बाद शौर्य
  775. 34:06ने चेंजिंग रूम को अंदर से बंद कर लिया और
  776. 34:09राहुल बाहर ही खड़ा रहा। समय बिताने के
  777. 34:11लिए राहुल चेंजिंग रूम के पास से हटकर
  778. 34:13स्टोर में इधर-उधर घूमने लगा। तभी सामने
  779. 34:16से एक लड़की एक हट्टे-कट्टे लड़के के साथ
  780. 34:18उसके सामने आकर खड़ी हो गई। जब राहुल ने
  781. 34:21देखा कि उसके सामने वही लड़की खड़ी है
  782. 34:23जिसके चेंजिंग रूम का दरवाजा उसने गलती से
  783. 34:25खोल दिया था तो एक पल के लिए घबरा गया। वो
  784. 34:28लड़की राहुल की तरफ इशारा करके गुस्से में
  785. 34:30बोली विनायक ये यही है वो लड़का। बदतमीज
  786. 34:35दिस गाय हैज़ जीरो सिविक सेंस। वैसे देखा
  787. 34:39जाए तो इसमें राहुल का कोई दोष नहीं था।
  788. 34:41उस लड़की ने ही अंदर से दरवाजा बंद नहीं
  789. 34:43किया था। पर अब वो अपना दोष राहुल के ऊपर
  790. 34:46मढ़ रही थी। वहीं जब राहुल ने उस लड़की के
  791. 34:49साथ आए पहलवान जैसे लड़के को देखा तो उसकी
  792. 34:51बॉडी देखकर वो कांप गया।
  793. 34:54लेकिन फिर उसने हिम्मत करके झुंझुलाते हुए
  794. 34:57कहा। अरे मैडम मैंने सॉरी बोला तो सही और
  795. 35:00वैसे इसमें मेरी क्या गलती थी? आपको
  796. 35:02चेंजिंग रूम का दरवाजा सही से बंद करना
  797. 35:04चाहिए था। इससे पहले कि वो लड़की कोई जवाब
  798. 35:06देती विनायक राहुल के सामने आकर गुर्राते
  799. 35:09हुए बोला तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम
  800. 35:12मेरी विद्या पर इल्जाम लगा रहे हो। इस पर
  801. 35:15राहुल ने एक बार फिर झुंझुलाते हुए कहा
  802. 35:17अरे यार तो मुझे क्या पता होगा कि दरवाजा
  803. 35:20खोलकर कपड़े चेंज कर रही हैं। देख रहे हो
  804. 35:22डार्लिंग? ये कैसे मुझे ही दोष दे रहा है?
  805. 35:25यह कहकर विद्या ने विनायक को और भी भड़का
  806. 35:27दिया। विनायक को अपनी गर्लफ्रेंड के सामने
  807. 35:29हीरो बनने का मौका मिल रहा था। तो ऐसे में
  808. 35:32वह पीछे कैसे हट सकता है? इसीलिए उसने
  809. 35:34राहुल का कॉलर पकड़ कर कहा तेरी इतनी
  810. 35:37हिम्मत मैं तेरा मुंह तोड़ दूंगा।
  811. 35:40इस हंगामे को देखकर एक सेल्स बॉय उनके बीच
  812. 35:43आ गया और विनती करते हुए बोला सर आप
  813. 35:46[संगीत] क्या कर रहे हैं? आप स्टोर में इस
  814. 35:48तरह मारपीट नहीं कर सकते।
  815. 35:50लेकिन विनायक ने उस सेल्स बॉय को एक ही
  816. 35:52हाथ से धक्का देकर दूर फेंक दिया और
  817. 35:54गुस्से में दहाड़ते हुए बोला
  818. 35:57तुम उस समय कहां थे जब इसने विद्या के
  819. 36:00चेंजिंग रूम का दरवाजा खोला था। और अब तुम
  820. 36:02इसको बचाने आए हो। जरूर इसमें तुम्हारी भी
  821. 36:05मिलीभगत होगी। विनायक कुछ सुनने को तैयार
  822. 36:08नहीं था। उसे बस अपनी गर्लफ्रेंड की नजर
  823. 36:10में बड़ा बनना था। वहीं चेंजिंग रूम के
  824. 36:13अंदर शौर्य ने कपड़े बदल लिए थे। सिर्फ इन
  825. 36:16कपड़ों को पहनने मात्र से शौर्य का गेटअप
  826. 36:19पूरी तरह चेंज हो गया था। ना जाने कितने
  827. 36:21दिनों बाद वो खुद को ढंग के कपड़ों में
  828. 36:23देख रहा था।
  829. 36:25हम एक बार राहुल को भी दिखाना चाहिए। यह
  830. 36:30सोचकर शौर्य चेंजिंग रूम से बाहर निकला और
  831. 36:32राहुल को ढूंढने के लिए इधर-उधर नजर
  832. 36:34दौड़ाने लगा। कुछ ही दूरी पर उसे भीड़
  833. 36:37दिखाई दी तो वो उस भीड़ की तरफ बढ़ गया।
  834. 36:39वहां चल रहे हंगामे को देखकर शौर्य को
  835. 36:42किसी अनहोनी की आशंका होने लगी। वो तेजी
  836. 36:45से चलकर भीड़ के पास पहुंचा तो विनायक
  837. 36:47राहुल का कॉलर पकड़े उसे पीछे की ओर धकेल
  838. 36:50रहा था। राहुल स्टोर की एक दीवार से सट
  839. 36:53गया। विनायक के सामने राहुल मेमने जैसा
  840. 36:56नजर आ रहा था।
  841. 36:58अरे तुम समझ क्यों नहीं रहे? मैंने कुछ भी
  842. 37:00जानबूझकर नहीं किया। राहुल ने विनायक को
  843. 37:02समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कोई असर
  844. 37:05नहीं हुआ। विनायक धौस देता हुआ बोला, हां,
  845. 37:09अब तो तू यही कहेगा पर जब मेरा एक हाथ
  846. 37:12पड़ेगा तो गिड़गिड़ाकर विद्या से माफी
  847. 37:13मांगेगा।
  848. 37:15अच्छा रुको रुको। राहुल हार मानता हुआ
  849. 37:18बोला। बताओ तुम क्या चाहते हो मुझसे?
  850. 37:21विनायक को उम्मीद नहीं थी कि राहुल इतनी
  851. 37:23आसानी से सरेंडर कर देगा। वहीं शौर्य जो
  852. 37:26राहुल की तरफ बढ़ रहा था राहुल की बात
  853. 37:28सुनकर विनायक का रिएक्शन देखने के लिए ठहर
  854. 37:30गया।
  855. 37:33इस समय विनायक विद्या की तरफ देख रहा था।
  856. 37:35मानो समझना चाह रहा हो कि वो क्या चाहती
  857. 37:37है। [संगीत] राहुल खामखा कोई लड़ाई नहीं
  858. 37:40चाहता था। इसीलिए वो तुरंत बोला। तुम यही
  859. 37:43चाहते हो ना कि मैं इनसे माफी मांगूं तो
  860. 37:45ठीक है। आई एम सॉरी मैम।
  861. 37:49क्या आई एम सॉरी? तुम्हारे एक सॉरी बोल
  862. 37:51देने से तुम्हारी गलती सही हो जाएगी क्या?
  863. 37:54विद्या बात का बतंगड़ बनाते हुए बोली
  864. 37:57विनायक ने जब देखा कि विद्या तो और भी
  865. 37:59भड़क गई तो उसने पूछा बताओ बेबी तुम क्या
  866. 38:02चाहती हो इसे क्या सजा दी जाए इस पर
  867. 38:06विद्या ऐंठ कर बोली इसे तो ऐसी सजा मिलनी
  868. 38:09चाहिए जो एक मिसाल बन जाए अगर इसे आसानी
  869. 38:12से जाने दिया तो यह फिर किसी के साथ ऐसी
  870. 38:14ही हरकत करेगा फिर वो राहुल को घूरती हुई
  871. 38:17बोली तुम्हारी सजा यह है कि तुम अभी यहां
  872. 38:20सबके सामने खुद के गाल पर जोर से थप्पड़
  873. 38:22मारोगे और मेरे पैरों में गिरकर दोनों कान
  874. 38:26पकड़ कर मुझसे माफी मांगोगे।
  875. 38:29विद्या की बात सुनकर विनायक मुस्कुराया और
  876. 38:31बोला, ठीक है तुम चिंता मत करो बेबी। अब
  877. 38:35ये बिल्कुल ऐसा ही करेगा। इतना बोलकर
  878. 38:38विनायक राहुल की आंखों में देखकर मजाक
  879. 38:40उड़ाते हुए बोला, "क्यों मुन्ना? जैसा
  880. 38:43बेबी ने कहा, वैसा करेगा ना।"
  881. 38:47राहुल समझ गया कि वो बुरा फंस चुका है।
  882. 38:50स्टोर में मौजूद स्टाफ के साथ वहां
  883. 38:51उपस्थित खरीदार भी राहुल को दया की दृष्टि
  884. 38:54से देख रहे थे। वो समझ रहे थे कि इसमें
  885. 38:56राहुल की कोई गलती नहीं है। पर यह लड़की
  886. 38:59सिर्फ अपने ईगो को सेटिस्फाई करने के लिए
  887. 39:01यह कर रही है। पर राहुल भी इतनी आसानी से
  888. 39:04झुकने वाला नहीं था। उसने निडरता से कहा
  889. 39:08देखो अब तुम ज्यादती कर रहे हो। तुम मुझसे
  890. 39:11ताकतवर हो तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम
  891. 39:13मुझसे कुछ भी करवा लोगे।
  892. 39:15अभी तुम मेरे साथ मारपीट कर सकते हो। पर
  893. 39:18यह समझ लेना कि मैं यह भूलूंगा नहीं। समय
  894. 39:21आने पर मैं अपनी बेइज्जती का बदला जरूर
  895. 39:23लूंगा। राहुल की बात सुनकर शौर्य को अच्छा
  896. 39:26लगा। उसे खुशी हुई कि पहले राहुल ने दिमाग
  897. 39:28से काम लिया। अगर एक सॉरी बोल देने से
  898. 39:31विवाद टल सकता है तो उसने सॉरी बोलने में
  899. 39:33देर नहीं लगाई। पर जब उसे लगा कि यह लोग
  900. 39:36जानबूझकर उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने
  901. 39:39की कोशिश कर रहे हैं तो उसने झुकने से
  902. 39:41इंकार कर दिया।
  903. 39:42[संगीत]
  904. 39:43राहुल ने जितनी आसानी से शुरुआत में माफी
  905. 39:45मांग ली थी उसके बाद विनायक को लगा नहीं
  906. 39:48था कि राहुल का ऐसा जवाब आएगा। पर बात अब
  907. 39:51उसके भी ईगो पर आ चुकी थी। विद्या के
  908. 39:53सामने उसे अपने आप को भी तो साबित करना
  909. 39:55था। इसीलिए विनायक राहुल के कॉलर पर अपनी
  910. 39:58पकड़ मजबूत करते हुए गरज कर बोला। तेरी
  911. 40:02इतनी हिम्मत कि तूने मुझे धमकाने की कोशिश
  912. 40:04की। विनायक राणा को धमकाने की कोशिश की।
  913. 40:08फिर वो राहुल को उसके कॉलर से खींचते हुए
  914. 40:10अपने करीब लाया और दांत भीते हुए बोला सुन
  915. 40:14बच्चे अब मेरी एक ही सलाह है कि जैसा बेबी
  916. 40:18ने कहा तू वैसा ही कर नहीं तो यहां से सही
  917. 40:21सलामत अपने पैरों पर चलकर नहीं जा पाएगा।
  918. 40:25लेकिन राहुल ने भी अब झुकने का इरादा बदल
  919. 40:28दिया था। वो तेज आवाज में बोला मैंने
  920. 40:31तुमसे कहा ना कि तुम अब कुछ भी कर लो पर
  921. 40:34मैं तुम्हारी कोई भी बात नहीं मानने वाला।
  922. 40:36[संगीत] जब मैंने कोई गलती की ही नहीं तो
  923. 40:39माफी किस बात की? जब शौर्य ने राहुल की यह
  924. 40:42बात सुनी तो उसका मन किया कि जाकर वो
  925. 40:44राहुल की पीठ थपथपाए। क्योंकि जिस विषम
  926. 40:47परिस्थिति में राहुल था उसके बाद भी उसने
  927. 40:49जो दृढ़ निश्चय किया कि वो विनायक के
  928. 40:51सामने नहीं झुकेगा यह सच में काबिले तारीफ
  929. 40:54है। वहीं राहुल की बात सुनकर विनायक का
  930. 40:56पारा हाई हो गया। वो राहुल के कॉलर को
  931. 40:59खींचते हुए बोला
  932. 41:01लगता है जब तक तुम्हारी एक दो हड्डी नहीं
  933. 41:03टूट जाती तुम अपनी जिद पर अड़े रहोगे।
  934. 41:06शौर्य देख रहा था कि विनायक राहुल पर हावी
  935. 41:09होता जा रहा है। इसीलिए उसे लगा कि अब उसे
  936. 41:12बीच में आना ही पड़ेगा। नहीं तो कहीं देर
  937. 41:14ना हो जाए। और अगले ही पल शौर्य तेजी से
  938. 41:17राहुल के पास पहुंचा और विनायक के कंधे को
  939. 41:19पकड़ते हुए बोला,
  940. 41:21"अरे रुको लाला। यह क्या बच्चे पर जोर
  941. 41:25आजमाइश कर रहे हो?"
  942. 41:26इधर विनायक को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी
  943. 41:28कि कोई उन दोनों के बीच में आएगा। इसीलिए
  944. 41:31उसकी पकड़ राहुल के कॉलर पर थोड़ी ढीली हो
  945. 41:33गई और वो शौर्य की तरफ देखकर गरजते हुए
  946. 41:36बोला अब तुम कौन हो और बीच में कहां से
  947. 41:40टपक पड़े? इस पर शौर्य ने मुस्कुराते हुए
  948. 41:43कहा
  949. 41:44भाई मैं वो हूं जिसकी वजह से इस लड़के ने
  950. 41:47वो चेंजिंग रूम खोला था।
  951. 41:50शौर्य की बात सुनकर विनायक ने राहुल का
  952. 41:52कॉलर छोड़ दिया और शौर्य की तरफ देखने
  953. 41:54लगा। शौर्य को यहां देखकर अब राहुल की भी
  954. 41:57हिम्मत बढ़ गई थी। उसे लगा कि अब वो शौर्य
  955. 42:01के साथ मिलकर कुछ हद तक तो इस पहलवान का
  956. 42:03मुकाबला कर ही लेगा। लेकिन तभी [संगीत]
  957. 42:06विनायक ने अपनी उस घमंडी लहजे में शौर्य
  958. 42:09की शर्ट को सहलाते हुए कहा तो तुम हो
  959. 42:12जिसके कारण विद्या के चेंजिंग रूम का
  960. 42:14दरवाजा खोला गया। यानी इसकी जगह तुम अपने
  961. 42:17गाल पर थप्पड़ लगाओगे और विद्या के पैरों
  962. 42:20में गिरकर माफी मांगोगे।
  963. 42:23इस पर शौर्य ने तिरछी मुस्कान के साथ
  964. 42:25चुनौती भरे अंदाज में कहा ना ना मैं नहीं
  965. 42:30अब तुम राहुल से अपने किए हुए व्यवहार के
  966. 42:33लिए माफी मांगोगे। [संगीत] राहुल देख रहा
  967. 42:36था कि शौर्य के कपड़े क्या चेंज हुए। उसका
  968. 42:39पूरा व्यक्तित्व ही बदल गया। उसे विश्वास
  969. 42:42नहीं हो रहा था कि वह अभी इसी शौर्य के
  970. 42:44साथ यहां मॉल में आया था जो यहां आने से
  971. 42:46पहले दया का पात्र नजर आ रहा था और जिसके
  972. 42:50चेहरे पर बेचारगी नजर आ रही थी।
  973. 42:53पर जो भी हो यह परिवर्तन उसे अच्छा लग रहा
  974. 42:56था। लेकिन तभी विनायक ने व्यंग भरे लहजे
  975. 42:58में हंसते हुए कहा, क्या कहा? तुम मुझसे
  976. 43:02माफी मंगवाओगे। विनायक राणा से लगता है
  977. 43:06तुमने दिन में ही भांग चढ़ा रखी है। मेरा
  978. 43:09एक हाथ पड़ जाएगा तो दोबारा धरती से उठकर
  979. 43:12पानी नहीं मांग पाओगे।
  980. 43:14इस पर शौर्य ने उसे और भी उकसाते हुए कहा,
  981. 43:18क्या तुम्हें सिर्फ बोलना ही आता है या
  982. 43:21कुछ करना भी जानते हो? कहीं तुम सिर्फ
  983. 43:24बातों के ही शेर तो नहीं हो? शौर्य को
  984. 43:27अपने पुराने फॉर्म में आने में अब अच्छा
  985. 43:29लग रहा था। पुराने दिनों में शौर्य को
  986. 43:32किसी की अकड़ तोड़ने में बड़ा मजा आता था।
  987. 43:34वहीं शौर्य की बात सुनकर विनायक का गुस्सा
  988. 43:37सातवें आसमान पर पहुंच गया। उधर राहुल भी
  989. 43:40सोच रहा था कि श्रवण क्यों विनायक को और
  990. 43:42भड़का रहा है। और तभी विनायक ने शौर्य का
  991. 43:45कॉलर पकड़ लिया और उसके करीब जाकर गुस्से
  992. 43:48भरी आवाज में बोला तुमने अपनी जिंदगी की
  993. 43:52सबसे बड़ी भूल की जो मुझसे पंगा ले लिया।
  994. 43:54अब [संगीत] देखो मैं तुम्हारा क्या हाल
  995. 43:56करता हूं और मैं तुम्हें कह रहा हूं कि
  996. 43:59मेरा कॉलर छोड़ो नहीं तो कम से कम एक
  997. 44:02महीने तक तुम इस हाथ से खाना नहीं खा
  998. 44:05पाओगे। शौर्य ने बड़े ही इत्मीनान से कहा
  999. 44:08मानो उसे विनायक की मजबूत दिखती बॉडी से
  1000. 44:10रत्ती भर डर ना हो। वहीं राहुल हैरान था
  1001. 44:13कि शौर्य इस वक्त भी इतना रिलैक्स कैसे हो
  1002. 44:16सकता है? लेकिन तभी विनायक ने शौर्य को
  1003. 44:19चुनौती देते हुए कहा, "अच्छा, तो अगर
  1004. 44:22तुम्हारे अंदर इतने ही गट्स हैं [संगीत]
  1005. 44:23तो अपना कॉलर छुड़ा के दिखाओ।"
  1006. 44:27विनायक का इतना कहना था कि शौर्य ने सेकंड
  1007. 44:29के 100वें हिस्से में विनायक की कलाई
  1008. 44:32पकड़ी और कोरियन मार्शल आर्ट्स हब कीड़ों
  1009. 44:34के मूव के साथ उसकी कलाई को मरोड़ दिया।
  1010. 44:37और तभी हड्डी टूटने की आवाज गूंज उठी।
  1011. 44:40वहां मौजूद लोग तो समझ भी नहीं पाए कि एक
  1012. 44:43पल में ऐसा क्या हो गया कि विनायक जो अभी
  1013. 44:46सीना ताने खड़ा था अब वो जमीन पर आ चुका
  1014. 44:48था। वहीं इस वक्त राहुल के आश्चर्य का तो
  1015. 44:52कोई ठिकाना ही नहीं था। वो आंखें फाड़े बस
  1016. 44:54शौर्य को घूरे जा रहा था। वो समझ ही नहीं
  1017. 44:57पाया कि शौर्य ने एक पल में ही ऐसा क्या
  1018. 45:00दांव चलाया कि विनायक चारों खाने चित हो
  1019. 45:02गया। विनायक दर्द से बेहाल होकर चिल्लाने
  1020. 45:05लगा। उसकी ऐसी हालत देखकर विद्या के चेहरे
  1021. 45:08पर भी हैरानी के भाव थे। वो सोच भी नहीं
  1022. 45:11सकती थी कि एक हट्टे-कट्टे व्यक्ति को
  1023. 45:13इतनी आसानी से घुटनों पर लाया जा सकता है।
  1024. 45:17सही मायनों में देखा जाए तो शौर्य ने तो
  1025. 45:19अभी अपना पूरा एफर्ट भी नहीं लगाया था और
  1026. 45:22विनायक घुटनों के बल फर्श पर पड़ा था और
  1027. 45:25उसके दाएं हाथ की हड्डी भी [संगीत] टूट
  1028. 45:27चुकी थी। बहुत घमंड था विनायक को अपनी
  1029. 45:30ताकत पर। लेकिन कहते हैं ना शेर को सवा
  1030. 45:34शेर मिल ही जाता है। विनायक का चेहरा दर्द
  1031. 45:37से लाल हो चुका था। उसे भी समझ नहीं आया
  1032. 45:40कि शौर्य ने ऐसा कौन सा दाम चला जो वह
  1033. 45:43उसके सामने एक पल भी नहीं टिक पाया। वहीं
  1034. 45:46विद्या को तो समझ ही नहीं आ रहा था कि वो
  1035. 45:48क्या करें। देखा जाए तो यहां जो कुछ भी
  1036. 45:51हुआ था वो सब विद्या के कारण ही हुआ था।
  1037. 45:54और अब वो बस यही सोच रही थी कि यहां से
  1038. 45:56बाहर कैसे निकला जाए।
  1039. 45:59खैर विनायक ने तुरंत राहुल से माफी मांगी।
  1040. 46:02फिर वहां से जाने के लिए पलटा कि तभी
  1041. 46:03शौर्य की कड़क आवाज गूंजी।
  1042. 46:06इतनी जल्दी कहां चल दिए? पहले उसको तो
  1043. 46:10माफी मांगने को बोलो जो इस फसाद की जड़
  1044. 46:14है। विनायक ने जब शौर्य की बात सुनी तो वो
  1045. 46:17विद्या की तरफ पलटा और जल्दीबाजी में
  1046. 46:19विद्या पर गरजते हुए बोला अब तुम
  1047. 46:21खड़े-खड़े मेरा मुंह क्या देख रही हो? चलो
  1048. 46:24माफी मांगो इनसे। मैं क्यों माफी
  1049. 46:26मांगूंगी? तुमने तो मांग ही ली है ना।
  1050. 46:29विद्या अकड़ कर बोली तो विनायक झुंझुला
  1051. 46:32उठा। अब ज्यादा ड्रामा मत करो। तुम्हारी
  1052. 46:36गलती के कारण मेरा हाथ टूट गया और तुम
  1053. 46:38नौटंकी कर रही हो। चेंजिंग रूम को अंदर से
  1054. 46:41बंद करने की जिम्मेदारी उसकी होती है जो
  1055. 46:43अंदर कपड़े चेंज कर रहा है। बाहर वाले को
  1056. 46:45क्या पता कि अंदर कोई है या रूम खाली है।
  1057. 46:48अब जल्दी से इनसे माफी मांगो। नहीं तो
  1058. 46:50मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। बोलते हुए
  1059. 46:53विनायक का चेहरा लाल हो गया था। विनायक की
  1060. 46:55धमकी सुनकर विद्या तुरंत राहुल के पास गई
  1061. 46:58और कान पकड़ कर सॉरी बोली।
  1062. 47:01लेकिन राहुल ने उसकी तरफ ध्यान भी नहीं
  1063. 47:02दिया और उसको इग्नोर करके शौर्य के पास
  1064. 47:05पहुंच गया। विद्या को बहुत बेइज्जती महसूस
  1065. 47:07हुई पर अभी वह कुछ कर भी नहीं सकती थी।
  1066. 47:11वहीं दूसरी तरफ मुख्तार के अड्डे पर सामने
  1067. 47:13दो बदमाश भीगी बिल्ली बनकर खड़े थे और
  1068. 47:16मुख्तार उन्हें गुस्से में घूर रहा था।
  1069. 47:20अचानक मुख्तार ने एक के चेहरे पर जोर का
  1070. 47:23थप्पड़ जड़ दिया जिससे उसके गाल के कोर से
  1071. 47:26खून रिसने लगा। तभी मुख्तार ने गरजते हुए
  1072. 47:29कहा
  1073. 47:30हरामजादों
  1074. 47:33मैंने कहा था कि रजत उस लड़की के आसपास भी
  1075. 47:37नहीं दिखना चाहिए। उसके बाद भी तुमने मुझे
  1076. 47:42खबर नहीं की। अरे खबर करना तो दूर तुम तो
  1077. 47:46खुद उसके साथ इस कांड में शामिल हो लिए।
  1078. 47:50इस पर उस आदमी ने आस्तीन से खून पोंछा और
  1079. 47:53कांपती आवाज में बोला बॉस मैंने रजत भाई
  1080. 47:57को रोकने की बहुत कोशिश की पर वो मेरी बात
  1081. 48:00सुनने को तैयार ही नहीं थे। उल्टा
  1082. 48:02उन्होंने मुझे ही धमका दिया। ऐसे में मैं
  1083. 48:04क्या ही करता? इस पर मुख्तार ने अपनी
  1084. 48:07मुट्ठियां भी ली और तमतमाते हुए बोला। इस
  1085. 48:11कमबख्त रजत को कितनी बार समझाया है मैंने।
  1086. 48:15अब अपने मन की करने का अंजाम भुगत रहा है
  1087. 48:17ना।
  1088. 48:19कहते हुए मुख्तार एक बार फिर झुंझुला उठा
  1089. 48:21और बड़बड़ाते हुए बोला साले सब खुद को
  1090. 48:24फन्ने खान समझने लगे हैं। खुद अपनी मनमानी
  1091. 48:28करते हैं और मेरे लिए मुसीबत छोड़ जाते
  1092. 48:31हैं।
  1093. 48:33अब फिर से छुड़ा कर लाओ नवाबजादे को।
  1094. 48:36बड़बड़ाते हुए मुख्तार अपनी जगह पर ही
  1095. 48:38चहलकदमी करने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे वो
  1096. 48:41किसी का इंतजार कर रहा हो। मुख्तार भाई
  1097. 48:44रजत की हरकतों से बेहद परेशान हो चुका था।
  1098. 48:46वो कुछ सोचते हुए तेजी से इधर-उधर चक्कर
  1099. 48:49लगाने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी का
  1100. 48:52इंतजार कर रहा है और अगले ही पल अपनी घड़ी
  1101. 48:54पर निगाह डालते हुए वो खुद में बड़बड़ाया।
  1102. 48:58ये साला चड्ढा कहां मर गया? अब तक तो उसे
  1103. 49:01आ जाना चाहिए था। तभी उसे कुछ कदमों की
  1104. 49:04आवाज सुनाई दी और जब वो आवाज वाली दिशा
  1105. 49:06में पलटा तो एक 50-5 की उम्र का आदमी काले
  1106. 49:09कोर्ट में उसे अपनी तरफ आता दिखाई दिया।
  1107. 49:12जगजीत चढा। यही है वो जिसका मुख्तार
  1108. 49:15इंतजार कर रहा था। जगजीत के पीछे-पीछे
  1109. 49:18उसका असिस्टेंट भी अपने हाथ में एक फाइल
  1110. 49:20दबाए चल रहा था। तभी जगजीत चड्ढा मुख्तार
  1111. 49:23के पास पहुंचा और गंभीर आवाज में बोला माफ
  1112. 49:26करना मुख्तार भाई अभी रजत को छुड़ाना इतना
  1113. 49:29आसान नहीं रह गया है। उसने खुद ही अपना
  1114. 49:31केस इतना खराब कर लिया है कि कोई भी वकील
  1115. 49:34शायद ही कुछ कर पाए। चड्ढा की बात सुनकर
  1116. 49:37मुख्तार की थ्योरियां [संगीत] चढ़ गई और
  1117. 49:39वो गुस्से में चिल्लाते हुए बोला क्या मैं
  1118. 49:41तुम लोगों से यही सुनने के लिए इतने पैसे
  1119. 49:44खर्च करता हूं? इस पर चड्ढा ने घबराते हुए
  1120. 49:47मुख्तार को समझाने की हिमाकत की। दरअसल
  1121. 49:50भाई हम लोग भी तभी कुछ कर सकते हैं जब कोई
  1122. 49:52लूपुल रहते हैं। रजत के लिए तो पहले ही
  1123. 49:54कोर्ट का आदेश था कि वो शिप्रा के आसपास
  1124. 49:57भी नजर नहीं आएगा। पर वो तो उसे किडनैप
  1125. 49:59करने ही पहुंच गया और अपने खिलाफ इतने
  1126. 50:02सारे गवाहों को खड़ा कर लिया। अच्छा चलो
  1127. 50:04गवाहों को तो तोड़ मरोड़ भी दें। पर वो जो
  1128. 50:07कुछ मंचलों ने उनका वीडियो बना लिया है
  1129. 50:09उसको कैसे झुठलाएंगे?
  1130. 50:12देख वकील किसको कैसे झुठलाना है और क्या
  1131. 50:15दिखाना है यह सब तुम जानो। मुझे तो बस
  1132. 50:19मेरा भाई जेल के बाहर चाहिए। अब यह तुम
  1133. 50:23बताओ यह कैसे मुमकिन हो सकता है। सख्त
  1134. 50:26लहजे में अपना फरमान सुनाने के बाद
  1135. 50:28मुख्तार चड्ढा की तरफ देखने लगा। वहीं
  1136. 50:30चड्ढा कुछ पल सोचता रहा। फिर उसके दिमाग
  1137. 50:33में एक आईडिया आया तो वो मुख्तार की तरफ
  1138. 50:35देखकर संकोच भरी आवाज में बोला भाई इस
  1139. 50:39हालत में तो एक ही रास्ता है पर वो शायद
  1140. 50:42ही मुमकिन हो पाएगा हो सकता है कि आप ही
  1141. 50:45उसके लिए तैयार ना हो इस पर मुख्तार तुरंत
  1142. 50:48बोल उठा तुम बस रास्ता बताओ वकील फिर मैं
  1143. 50:52तय करूंगा कि वो मुमकिन है या नहीं
  1144. 50:56ठीक है तो फिर सुनिए इतना कहकर वकील
  1145. 50:59मुख्तार को कुछ समझाने लगा चड्ढा का सुझाव
  1146. 51:02सुनकर मुख्तार के चेहरे पर नागवारी के भाव
  1147. 51:05झलक उठे और वो गुस्से में झल्ला उठा। तुम
  1148. 51:08सोच भी कैसे सकते हो वकील कि मैं उस घमंडी
  1149. 51:11लड़की के परिवार से समझौता कर लूं।
  1150. 51:15तुम्हें क्या लगता है कि मुख्तार उनके आगे
  1151. 51:18झुक जाएगा।
  1152. 51:20मुख्तार भाई यह जरूरी तो नहीं कि उसके लिए
  1153. 51:22झुकना ही पड़े। डराधमका कर भी तो कंप्लेंट
  1154. 51:25वापस करवाई जा सकती है। कहते हुए चड्ढा ने
  1155. 51:28मुख्तार की छड़ी की तरफ इशारा किया। वो भी
  1156. 51:31जानता है कि मुख्तार की इस छड़ी का शहर
  1157. 51:33में कितना खौफ है। लेकिन मुख्तार का सिर
  1158. 51:36अभी तक इंकार में हिल रहा था। वो गंभीर
  1159. 51:38आवाज में बोला नहीं वो लड़की इसके लिए
  1160. 51:42तैयार नहीं होगी। बहुत जिद्दी है वो। अगर
  1161. 51:45धमकी से काम चल जाता तो यह केस लड़ने की
  1162. 51:48नौबत ही नहीं आती। ऊपर से उसका दादा भी
  1163. 51:51अपने उसूलों का ढोल पीटता रहता है। इस पर
  1164. 51:54चड्ढा ने अपने हथियार डाल दिए और धीमी
  1165. 51:56आवाज में बोला, "देखो भाई, रजत बाबू को
  1166. 52:00जेल से निकालने का एक यही रास्ता है। अब
  1167. 52:02शिप्रा से समझौता करके ही उसको जल्दी बाहर
  1168. 52:04लाया जा सकता है।" अब तक मुख्तार बुरी तरह
  1169. 52:07चिढ़ चुका था। वो अपने दांत भेजते हुए
  1170. 52:09बोला, "अबे वकील, कहां तो मैं शिप्रा और
  1171. 52:12उसके परिवार को ऊपर पहुंचाने का इंतजार कर
  1172. 52:15रहा हूं और कहां तुम मुझे उससे ही समझौता
  1173. 52:18करने का सुझाव दे रहे हो।"
  1174. 52:22भाई मैंने तो वो बताया जिसकी मदद से आप
  1175. 52:24रजत को जेल से बाहर ला सकते हैं। नहीं तो
  1176. 52:26उस इंस्पेक्टर ने रजत पर ऐसी-ऐसी धाराएं
  1177. 52:28लगा दी हैं कि उसको अभी बेल दिलवाना
  1178. 52:31नामुमकिन है। मुझे तो लगता है कि वो
  1179. 52:33इंस्पेक्टर भी रजत से अपनी कोई दुश्मनी
  1180. 52:35निकाल रहा है। इतना बोलकर चड्ढा यह देखने
  1181. 52:38के लिए रुका कि मुख्तार पर उसकी बात का
  1182. 52:40कोई असर हो भी रहा है या नहीं। और जब उसने
  1183. 52:44मुख्तार को अपनी बात ध्यान से सुनते देखा
  1184. 52:46तो वह फिर से हिम्मत जुटाकर बोला
  1185. 52:49भाई मैं जानता हूं कि आप पहले शिप्रा से
  1186. 52:51अपने भाई की शादी कराना चाहते थे। लेकिन
  1187. 52:54अपनी इज्जत की दुहाई देकर उन्होंने शादी
  1188. 52:56से इंकार कर दिया। पर अब जिस स्थिति में
  1189. 52:58आप उसके परिवार को ले आए हैं, उससे पूरे
  1190. 53:01शहर में उसका परिवार चर्चा का विषय बना
  1191. 53:03हुआ है। एक भिखारी से उसकी शादी कराकर
  1192. 53:06आपने उसे कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं
  1193. 53:08छोड़ा है। आखिर लोक लज्जा भी तो कोई चीज
  1194. 53:11होती है। मुख्तार समझ नहीं पा रहा था कि
  1195. 53:14वकील इतनी लंबी चौड़ी भूमिका क्यों बना
  1196. 53:16रहा है। इसीलिए उसने रूखे लहजे में कहा।
  1197. 53:19अरे चड्ढा जो भी कहना है साफ-साफ कहो।
  1198. 53:22कचहरी वाले अपने यह जिराह और दलीलें मेरे
  1199. 53:26सामने मत चलाओ। यह सुनकर चड्ढा सीधे
  1200. 53:29शब्दों में बोला, देखो भाई, एक भिखारी से
  1201. 53:31शिप्रा की शादी करवाकर आपने उसकी इज्जत की
  1202. 53:34ऐसी तैसी कर दी है। अब एक भिखारी की
  1203. 53:36विहाता से कोई इज्जतदार फैमिली तो शादी
  1204. 53:39करने से रही। तो अगर आप अपने भाई के साथ
  1205. 53:42शिप्रा की शादी का प्रपोजल लेकर जाते हैं
  1206. 53:44तो शिप्रा के परिवार के लिए इंकार करना
  1207. 53:47मुश्किल हो जाएगा।
  1208. 53:49अब जाकर चड्ढा की बात मुख्तार की समझ में
  1209. 53:51आई और उसने कुछ सोचते हुए कहा तो तुम
  1210. 53:54चाहते हो कि मैं रजत से शिप्रा की शादी
  1211. 53:57करवा दूं और तुम्हें लगता है कि अब उसका
  1212. 53:59परिवार इसके लिए तैयार हो जाएगा।
  1213. 54:03हां मुख्तार भाई अगर रजत से उसकी शादी हो
  1214. 54:06जाती है तो शहर में कोई भी उनके परिवार की
  1215. 54:08हंसी उड़ाने की हिम्मत नहीं करेगा। और जिस
  1216. 54:11खतरे का एहसास उन्हें आपसे दुश्मनी मोल
  1217. 54:13लेकर हो रहा होगा वो भी उनके परिवार के
  1218. 54:15लिए टल जाएगा। अब आप ही सोच कर देखिए यह
  1219. 54:19उस परिवार के लिए बढ़िया सौदा है कि नहीं।
  1220. 54:22वकील ने जोर देकर अपनी बात कही और फिर कुछ
  1221. 54:24सोच कर चालाकी भरे लहजे में कहा और फिर
  1222. 54:26अगर एक बार शादी के समझौते के चलते केस
  1223. 54:29वापस ले लेते हैं और रजत बाबू जेल से बाहर
  1224. 54:32आ जाते हैं तो फिर आप शिप्रा के साथ जो
  1225. 54:34करना चाहे कर सकते हैं। इस तरह से सांप भी
  1226. 54:37मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी।
  1227. 54:41बात में तुम्हारी दम तो है चड्ढा। अब अगर
  1228. 54:44यही रास्ता बचा है तो यही सही। वैसे भी
  1229. 54:48रजत इस बात से खफा था कि मैंने उस लड़की
  1230. 54:50की शादी और किसी से क्यों करवा दी। कहते
  1231. 54:54हुए मुख्तार गहरी सोच में डूब गया। यहां
  1232. 54:56राय साहब की हवेली में राजदीप राय और बीना
  1233. 54:59जी एक सोफे पर बैठे थे। शिपरा एक चेयर पर
  1234. 55:02थी और उसके सामने ही उसकी बुआ नैना जी एक
  1235. 55:04सिंगल सोफे पर बैठी हुई थी। सबको देखकर लग
  1236. 55:08रहा था कि किसी गंभीर विषय पर चर्चा हो
  1237. 55:10रही है। तभी नैना शिकायती लहजे में बोली,
  1238. 55:14देखो मैं कह रही हूं उस भिखारी को घर लाकर
  1239. 55:16तुमने सही नहीं किया। वैसे ही पूरे शहर
  1240. 55:18में परिवार की चर्चा हो रही है। ऊपर से उस
  1241. 55:21भिखारी को घर लाकर तुमने उस पर और मोहर
  1242. 55:23लगा दी। इस पर राजदीप नैना को झिड़कते हुए
  1243. 55:26बोले। नैना अगर ऐसा ही था तो तुम पिताजी
  1244. 55:29के सामने बात क्यों नहीं बोली? इस पर नैना
  1245. 55:31ने एक बार फिर मीठी आवाज में तंज कसते हुए
  1246. 55:34कहा। आपको तो पता है भाई साहब पिताजी इन
  1247. 55:37बातों को कहां समझते हैं? उनके लिए तो हर
  1248. 55:39बात उनकी इज्जत पर आकर खत्म हो जाती है।
  1249. 55:42अगर मुख्तार के प्रपोजल को उन्होंने पहले
  1250. 55:44ही स्वीकार कर लिया होता तो राय फैमिली का
  1251. 55:47रुतबा इस शहर में और बढ़ जाता। पर नहीं
  1252. 55:50उनको तो अपनी इज्जत की पड़ी थी। अब देख लो
  1253. 55:53आज क्या इज्जत रह गई है परिवार की। तभी
  1254. 55:55राजदीप जी दृढ़ आवाज में बोले तुम कुछ भी
  1255. 55:59कहो मैं खुद भी उस मामले में पिताजी के
  1256. 56:01निर्णय से सहमत था और आज भी हूं। हां तो
  1257. 56:05देख लो उसका अंजाम। क्या हुआ आपकी बेटी के
  1258. 56:07साथ? अब इस शहर का कौन सा इज्जतदार परिवार
  1259. 56:09आपकी बेटी को अपने परिवार की बहू बनाने को
  1260. 56:11तैयार होगा? इतना कहकर नैना बुआ ने एक पल
  1261. 56:15शिप्रा की ओर देखा और फिर अपना मुंह फेर
  1262. 56:17लिया। लेकिन अब शिप्रा इन तानों से परेशान
  1263. 56:20हो चुकी थी और अगले ही पल वो बुआ से पूछ
  1264. 56:22बैठी। क्या एक लड़की के लिए शादी इतनी
  1265. 56:25जरूरी है बुआ कि वो बिना शादी के रह ही
  1266. 56:27नहीं सकती? और अगर जरूरी ही है तो मेरी
  1267. 56:30शादी तो पहले ही हो चुकी है। फिर अब इस
  1268. 56:32बारे में चर्चा क्यों?
  1269. 56:34शिप्रा की बात सुनकर नैना अब झिल्ला उठी
  1270. 56:36और उसे झिड़कते हुए बोली बेवकूफ लड़की यह
  1271. 56:39शादी नहीं खिलवाड़ था तुम्हारे साथ। अब
  1272. 56:41अगर तुम उस भिखारी से तलाक ले भी लोगी तो
  1273. 56:44भी कोई लड़का तुमसे शादी करने को तैयार
  1274. 56:46नहीं होगा।
  1275. 56:48बुआ मुझे नहीं पता कि मैं उस भिखारी को
  1276. 56:50जिससे मेरी शादी हुई है अपने पति के रूप
  1277. 56:52में स्वीकार कर पाऊंगी या नहीं। पर यह भी
  1278. 56:55सच है कि मैं किसी दूसरे से शादी करने के
  1279. 56:57लिए उससे तलाक भी नहीं लूंगी। इतना कहकर
  1280. 57:00शिप्रा ने बाकी लोगों की तरफ देखा और फिर
  1281. 57:03पूरे आत्मविश्वास के साथ बोली और हां मैं
  1282. 57:05आपको बता दूं कि मुझे अपनी जिंदगी जीने के
  1283. 57:07लिए किसी लड़के की जरूरत नहीं है। मैं
  1284. 57:10अकेले रहकर भी खुश रह सकती हूं। वहीं
  1285. 57:13शिप्रा की बात सुनकर सबके बीच खड़ी बीना
  1286. 57:15जी भी हैरान रह गई और तभी वो गुस्से से
  1287. 57:18झल्लाते हुए बोली तुम क्या बकवास कर रही
  1288. 57:21हो? हम उस भिखारी को इस घर में सिर्फ
  1289. 57:23इसीलिए लाए हैं ताकि लोगों की जुबान बंद
  1290. 57:25हो जाए। लोग उसे भीख मांगते देखकर यह ना
  1291. 57:28कहें कि इसी भिखारी से राय खानदान की बेटी
  1292. 57:30ब्याही है। इसीलिए जैसे ही हालात सुधरने
  1293. 57:33लगेंगे तुम्हारा तलाक करवाकर किसी अच्छे
  1294. 57:35लड़के से तुम्हारी शादी कर दी जाएगी।
  1295. 57:37[संगीत] समझी तुम? और इस बात की क्या
  1296. 57:40गारंटी होगी कि वो लड़का भी विहान की तरह
  1297. 57:42नहीं निकलेगा। इन जैसे तथाकथित इज्जतदार
  1298. 57:46लोगों से तो अच्छा यह भिखारी है जो किसी
  1299. 57:48मुसीबत के वक्त धोखा तो नहीं देगा। इतना
  1300. 57:51बोलकर शिप्रा रुकी और अपना फाइनल फैसला
  1301. 57:54सुनाते हुए बोली मां अब आप यह बात गांठ
  1302. 57:57बांध लो कि भविष्य में मैं कोई दूसरी शादी
  1303. 58:00नहीं करने वाली। अगर शादी एक लड़की के लिए
  1304. 58:03इतनी ही जरूरी है तो यह समझ लो कि वो
  1305. 58:05भिखारी ही आपका दामाद है। मैं खुद में
  1306. 58:08इतनी आत्मनिर्भर हूं कि मुझे किसी सहारे
  1307. 58:10की जरूरत नहीं है। आपने मुझे इतना काबिल
  1308. 58:14बना दिया है कि मैं अपने साथ औरों का भी
  1309. 58:16ध्यान रख सकती हूं।
  1310. 58:18इतना कहते हुए शिप्रा की आंखों में नमी
  1311. 58:20उभर आई जिसे छुपाते हुए उसने एक पल अपने
  1312. 58:22तंज कसते परिवार को देखा और फिर दृढ़ आवाज
  1313. 58:25में बोली आज तक आप लोग मेरी जिंदगी का
  1314. 58:28फैसला लेते रहे पर अब मैं किसी और को अपनी
  1315. 58:31जिंदगी का फैसला लेने का अधिकार नहीं
  1316. 58:32दूंगी वैसे भी कहा जाता है कि शादी के बाद
  1317. 58:36बेटी पराई हो जाती है तो समझ लो जिस वक्त
  1318. 58:39मेरी शादी उस भिखारी से हो गई उसी वक्त
  1319. 58:41मैं आप सबके लिए पराई हो गई शिप्रा की
  1320. 58:45बातें बीना जी के लिए किसी हार्ट अटैक से
  1321. 58:47कम नहीं थी। वीना जी शिप्रा [संगीत] की
  1322. 58:49बातें सुनकर राजदीप का चेहरा देखने लगी।
  1323. 58:51लेकिन राजदीप भी शिप्रा की बातें सुनकर
  1324. 58:54अचंभित थे। आज [संगीत] तक शिप्रा ने कभी
  1325. 58:57भी राजदीप के सामने इस तरह से बात नहीं की
  1326. 59:00थी। पर आज शायद उन्हें महसूस हुआ कि
  1327. 59:02शिप्रा कितना दर्द अपने अंदर समेटे
  1328. 59:04[संगीत] घुट-घुट कर जी रही है। उन्हें इस
  1329. 59:08बात का मलाल होने लगा कि उन्होंने कभी यह
  1330. 59:10जानने की कोशिश नहीं की थी कि उनकी बेटी
  1331. 59:12के दिल में क्या चल रहा है। और ना ही कभी
  1332. 59:15यह जान पाए कि उस भिखारी श्रवण से शादी को
  1333. 59:18लेकर शिप्रा की अपनी राय क्या थी। राजदीप
  1334. 59:21श्रवण को अपने घर भी इसीलिए लाए थे ताकि
  1335. 59:23उनके [संगीत] परिवार की और बदनामी ना हो।
  1336. 59:25साथ ही वह श्रवण को अपने कंट्रोल में रखकर
  1337. 59:28अपने मन मुताबिक जब चाहे तब शिप्रा से
  1338. 59:31उसका तलाक करवा सकते थे। पर अब शिप्रा का
  1339. 59:34फैसला सुनकर वो यह नहीं समझ पा रहे थे कि
  1340. 59:36आगे वो क्या कदम उठाएंगे। लेकिन जब वो
  1341. 59:39किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाए तो
  1342. 59:40उन्होंने यह सोच लिया कि ज्यादा सोचने से
  1343. 59:42अच्छा है कि सब कुछ समय पर छोड़ दिया जाए।
  1344. 59:45अब समय ही फैसला करेगा कि क्या सही है और
  1345. 59:48क्या गलत। उधर दूसरी तरफ जब मुख्तार ने
  1346. 59:51फैसला कर लिया कि आखिर उसे क्या करना है
  1347. 59:54तो उसने अपना फोन निकाला और एक नंबर डायल
  1348. 59:56किया। शिप्रा का फैसला सुनकर परिवार के
  1349. 59:59सभी सदस्य असहज हो गए। नैना बुआ से शिप्रा
  1350. 1:00:03का फैसला बर्दाश्त नहीं हुआ तो चिंतित
  1351. 1:00:05होकर राजदीप से बोली भाई साहब इसे तो
  1352. 1:00:08अच्छे बुरे की समझ नहीं है। पर आप इसकी
  1353. 1:00:10बातों में मत आइएगा। अभी इसे समझ नहीं
  1354. 1:00:13आएगा कि हम लोग जो करने की सोच रहे हैं वो
  1355. 1:00:15इसके भले के लिए ही है। इस पर शिप्रा एक
  1356. 1:00:18बार फिर बोल उठी
  1357. 1:00:20बुआ मैं अपना अच्छा बुरा समझ सकती हूं।
  1358. 1:00:23इसीलिए आपसे रिक्वेस्ट है कि दोबारा मेरी
  1359. 1:00:25शादी को लेकर बात मत कीजिएगा। उसके अलावा
  1360. 1:00:28आपको जो भी बात करनी हो उसे मैं ध्यान से
  1361. 1:00:31सुनूंगी। फिर शिप्रा अपनी मां की ओर देखती
  1362. 1:00:34हुई बोली।
  1363. 1:00:35और हां मम्मी पापा आपसे भी मैं यही कहना
  1364. 1:00:38चाहूंगी कि आप भी दोबारा मेरी शादी को
  1365. 1:00:40लेकर बात मत कीजिएगा। मैं बार-बार इस
  1366. 1:00:43मुद्दे पर किसी से कोई बात नहीं करना
  1367. 1:00:45चाहती हूं और ना ही यह सुनना चाहती हूं कि
  1368. 1:00:47कोई मेरी शादी को लेकर चिंतित है। यह
  1369. 1:00:51सुनकर बीना जी राजदीप राय की ओर देखने
  1370. 1:00:53लगी। राजदीप ने आंखों ही आंखों में उन्हें
  1371. 1:00:55शांत रहने का इशारा किया। पर नैना बुआ वो
  1372. 1:00:59कहां चुप रहने वाली थी। उन्हें शिप्रा की
  1373. 1:01:02बात अच्छी नहीं लगी और वो अपनी जगह पर
  1374. 1:01:03खड़ी होकर नाराजगी भरे लहजे में बोली हम
  1375. 1:01:07तो बस अच्छा बुरा समझा ही सकते हैं। बाकी
  1376. 1:01:09मानना ना मानना वो तुम जानो। फिर नैना
  1377. 1:01:13राजदीप की ओर मुड़ी और मुंह बनाते हुए
  1378. 1:01:15बोली ठीक है भैया अभी मैं चलती हूं। इतना
  1379. 1:01:18बोलकर नैना बुआ दरवाजे की ओर बढ़ गई।
  1380. 1:01:21लेकिन अभी वो दरवाजे के पास पहुंची ही थी
  1381. 1:01:23कि तभी दरवाजा खोलकर राहुल अंदर आया और
  1382. 1:01:26नैना को देखकर हल्की मुस्कान के साथ बोला
  1383. 1:01:29प्रणाम बुआ ये क्या मैं आया और आप जा रही
  1384. 1:01:32हैं?
  1385. 1:01:34यह तो तुम्हारी गलती है कि तुम इतनी देर
  1386. 1:01:36से आए। नैना हल्की मुस्कान के साथ बोली और
  1387. 1:01:39बाहर चली गई। राहुल अंदर पहुंचा तो उसने
  1388. 1:01:42देखा राजदीप और बीना जी सोफे पर बैठे थे
  1389. 1:01:45और शिप्रा एक तरफ चेयर पर बैठी हुई थी। उन
  1390. 1:01:47सबके चेहरे का एक्सप्रेशन देखकर वो समझ
  1391. 1:01:50गया कि किसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा हो रही
  1392. 1:01:52थी। इसीलिए सबके चेहरे गंभीर नजर आ रहे
  1393. 1:01:55थे। खैर जब राजदीप ने राहुल को देखा तो वो
  1394. 1:01:58सामान्य लहजे में बोला आ गए तुम हो गई
  1395. 1:02:01खरीदारी। हां पापा शॉपिंग हो गई। पर आप
  1396. 1:02:05लोग इतने सीरियस क्यों नजर आ रहे हैं?
  1397. 1:02:07राहुल ने चिंतित होकर पूछा और सबकी तरफ
  1398. 1:02:09देखने लगा। इस पर राजदीप तुरंत बोल उठे।
  1399. 1:02:13अरे कुछ खास नहीं। तुम तो समझ ही रहे हो
  1400. 1:02:16कि जिस तरह के हालात हैं चिंता तो हो ही
  1401. 1:02:18जाती है। अब रजत फिर जेल चला गया है तो
  1402. 1:02:21मुख्तार शांत नहीं बैठेगा और शायद फिर से
  1403. 1:02:24कोई हरकत करने वाला होगा। इस पर राहुल ने
  1404. 1:02:26पूछा तो आपने कुछ सोचा है उसके लिए? हां
  1405. 1:02:30बाबूजी ने घर और ऑफिस दोनों जगह की
  1406. 1:02:32सिक्योरिटी तो बढ़वा दी है लेकिन बदमाश
  1407. 1:02:35लोगों का क्या भरोसा? वो कब घात लगाकर
  1408. 1:02:37हमला कर दें? इतना कहकर राजदीप ने एक नजर
  1409. 1:02:41[संगीत] शिप्रा को देखा और फिर चिंतित
  1410. 1:02:42स्वर में बोले शिप्रा बेटे तुम कुछ दिन
  1411. 1:02:45ऑफिस जाना बंद कर दो। इस पर शिप्रा जिद
  1412. 1:02:48भरे लहजे में बोली नहीं पापा मैं किसी के
  1413. 1:02:51डर से घर में नहीं बैठ सकती। वो भी एक
  1414. 1:02:54बदमाश के डर से तो हरगिज़ नहीं। इस पर
  1415. 1:02:57राजदीप ने हल्की आवाज में उसे डांटते हुए
  1416. 1:02:59कहा बेटा तुम समझती क्यों नहीं? अकेले
  1417. 1:03:02ऑफिस जाना रिस्की होगा। राजदीप की बातों
  1418. 1:03:04में चिंता साफ झलक रही थी। तभी राहुल ने
  1419. 1:03:07सुझाव देते हुए कहा, पापा यह भी तो कर
  1420. 1:03:10सकते हैं कि कल से दीदी के लिए भी एक
  1421. 1:03:12ड्राइवर रख देते हैं। कम से कम कोई तो
  1422. 1:03:15इनके साथ होगा। इस पर शिप्रा तुरंत बोल
  1423. 1:03:17उठी। मुझे किसी ड्राइवर की जरूरत नहीं है।
  1424. 1:03:20मैं खुद ड्राइव कर सकती हूं।
  1425. 1:03:23लेकिन अब राजदीप राय शिप्रा की हर बात
  1426. 1:03:25मानने को तैयार नहीं थे। इसीलिए उन्होंने
  1427. 1:03:27सख्त लहजे में कहा तुम समझ क्यों नहीं
  1428. 1:03:30रही? अभी हमें सिक्योरिटी की जरूरत है।
  1429. 1:03:33मैं किसी ऐसे आदमी को देखता हूं जो
  1430. 1:03:35ड्राइविंग के साथ तुम्हारा बॉडीगार्ड भी
  1431. 1:03:36बन जाए। नहीं पापा सिक्योरिटी के नाम पे
  1432. 1:03:39मैं हर वक्त किसी को अपने सिर पर बर्दाश्त
  1433. 1:03:41नहीं कर सकती।
  1434. 1:03:43शिप्रा ने नाराजगी के साथ जिद करते हुए
  1435. 1:03:45कहा और अपना मुंह फुला लिया। वो किसी भी
  1436. 1:03:48कीमत पर मारने को तैयार नहीं थी। तभी
  1437. 1:03:50राहुल ने एक और आईडिया देते हुए कहा। पापा
  1438. 1:03:53श्रवण भी तो ड्राइविंग कर सकता है और जहां
  1439. 1:03:55तक सिक्योरिटी की बात है तो वह मुसीबत में
  1440. 1:03:58पीठ दिखाने वालों में से नहीं है।
  1441. 1:04:00राहुल ने जानबूझकर श्रवण का नाम लिया था
  1442. 1:04:03क्योंकि आज जो कुछ मॉल में हुआ उससे राहुल
  1443. 1:04:05शौर्य से बहुत इंप्रेस था। अगर शौर्य यानी
  1444. 1:04:08श्रवण शिप्रा के साथ रहता तो सिक्योरिटी
  1445. 1:04:11की प्रॉब्लम सॉल्व हो सकती है। राहुल
  1446. 1:04:14चाहता तो आज मॉल वाली घटना फैमिली को बता
  1447. 1:04:16सकता था। पर उसे पता था कि अगर वो उस घटना
  1448. 1:04:19का जिक्र करता तो उसके मम्मी पापा और भी
  1449. 1:04:21परेशान हो जाते। इसीलिए उसने उस बारे में
  1450. 1:04:24कोई चर्चा नहीं [संगीत] की। वहीं राजदीप
  1451. 1:04:26जी ने कुछ पल इस बारे में सोचा। फिर बोले
  1452. 1:04:30अगर शिप्रा इसके लिए तैयार है तो यह भी
  1453. 1:04:32सही है। इस पर शिप्रा ने भी कुछ पल सोचा
  1454. 1:04:36और फिर तुरंत बोली ठीक है अगर आपकी यही
  1455. 1:04:40जिद है तो फिर मैं श्रवण को कुछ समय के
  1456. 1:04:42लिए अपने साथ रख सकती हूं। शिप्रा इसीलिए
  1457. 1:04:46श्रवण के लिए तैयार हो गई क्योंकि [संगीत]
  1458. 1:04:47आज ही उसने अपनी जान पर खेलकर उसकी रक्षा
  1459. 1:04:50की थी। फिर उसे यह भी लगा कि इसमें कोई
  1460. 1:04:53हर्ज नहीं है। जब वो यहां रहने आया ही है
  1461. 1:04:56तो उसे कोई काम तो चाहिए ही होगा। पर बीना
  1462. 1:04:59जी को यह प्लान अच्छा नहीं लगा। इसीलिए
  1463. 1:05:01उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा, क्या
  1464. 1:05:04श्रवण का शिपरा के साथ रहना सही रहेगा?
  1465. 1:05:06क्योंकि इससे तो लोग और भी बातें बनाएंगे।
  1466. 1:05:09अरे भाई लोग क्या अभी भी कम बात बना रहे
  1467. 1:05:12हैं जो हम दूसरों की चिंता करें। राजदीप
  1468. 1:05:15ने फौरन जवाब दिया और बीना जी की ओर देखने
  1469. 1:05:17लगे। इस पर बीना जी ने झिझकते हुए कहा।
  1470. 1:05:21लेकिन फिर लोग यह भी तो समझेंगे कि शायद
  1471. 1:05:23हमने इनकी शादी को एक्सेप्ट कर लिया है।
  1472. 1:05:26इस पर शिप्रा ने तेजी से रिएक्ट किया। फिर
  1473. 1:05:29तो मैं जरूर श्रवण को ही साथ ले जाऊंगी।
  1474. 1:05:31फिर शायद उसके बाद आपके दिमाग में मेरी
  1475. 1:05:34शादी का ख्याल आना बंद हो जाए। जब राजदीप
  1476. 1:05:37ने देखा कि बात फिर से गलत दिशा में जा
  1477. 1:05:39रही है तो उन्होंने शांत लेकिन दृढ़ आवाज
  1478. 1:05:41में कहा।
  1479. 1:05:43अभी जो बात हो चुकी है उसको दोहराने का
  1480. 1:05:45कोई मतलब नहीं है। सुन लो सब और वैसे भी
  1481. 1:05:49हमारी प्रायोरिटी यह नहीं है। वहीं राहुल
  1482. 1:05:52को समझ नहीं आया कि पापा किस बारे में बात
  1483. 1:05:55कर रहे हैं और माहौल फिर से भारी क्यों हो
  1484. 1:05:58गया। उसने इस बारे में पूछना भी उचित नहीं
  1485. 1:06:00समझा और झल्लाई सी मुस्कान के साथ वहां से
  1486. 1:06:03निकल गया। इधर मुख्तार के अड्डे पर जब
  1487. 1:06:06मुख्तार ने डिसाइड कर लिया कि उसे क्या
  1488. 1:06:08करना है तो उसने अपना मोबाइल निकाला और
  1489. 1:06:10बलवंत राय को फोन करने लगा। लेकिन जब पूरी
  1490. 1:06:14रिंग जाने के बाद भी दूसरी तरफ से फोन
  1491. 1:06:16नहीं उठाया गया तो मुख्तार ने जगजीत चड्ढा
  1492. 1:06:18की ओर गुस्से में देखते हुए कहा यह तो फोन
  1493. 1:06:22ही नहीं उठा रहा। हम एक बार और ट्राई करता
  1494. 1:06:27हूं। इसके बाद मुख्तार ने दोबारा कॉल
  1495. 1:06:29किया। पर इस बार दो रिंग के बाद ही फोन
  1496. 1:06:32काट दिया गया। अब मुख्तार गुस्से से
  1497. 1:06:34तिलमिला उठा। इसकी इतनी हिम्मत कि ये मेरा
  1498. 1:06:39फोन काट रहा है। इतना कहकर उसका चेहरा
  1499. 1:06:42गुस्से से लाल हो गया था। लेकिन तभी चड्ढा
  1500. 1:06:46ने कुछ सोचने के बाद एक सुझाव दिया। भाई
  1501. 1:06:49मुझे लगता है कि आपको एक-द दिन इंतजार
  1502. 1:06:51करके फोन करना चाहिए। यह सुनकर मुख्तार के
  1503. 1:06:54चेहरे पर एक प्रश्न चिन्ह नजर आने लगा।
  1504. 1:06:57जैसे वो जानना चाहता हो कि चड्ढा ऐसा
  1505. 1:06:59क्यों बोल रहा है। इसीलिए चड्ढा ने समझाते
  1506. 1:07:02हुए कहा भाई यह अभी आज ही की घटना है। तो
  1507. 1:07:06अभी वो लोग भी थोड़ा गुस्से में होंगे।
  1508. 1:07:08एक-द दिन के बाद उनका गुस्सा भी थोड़ा
  1509. 1:07:11शांत होगा तो फिर अपने मतलब की बात करना
  1510. 1:07:13ज्यादा आसान होगा। मुख्तार को वकील की बात
  1511. 1:07:17समझ में आई और उसने सहमति में सिर हिलाते
  1512. 1:07:19हुए कहा।
  1513. 1:07:21तो ठीक है चड्ढा। तुम कहते [संगीत] हो तो
  1514. 1:07:25मैं अब दो दिन के बाद ही इसको फोन करूंगा।
  1515. 1:07:29पर हां तब तक तुम भी ट्राई करते रहो कि
  1516. 1:07:32रजत को छुड़ाने के लिए और कुछ भी किया जा
  1517. 1:07:35सकता है या नहीं। हां हां वो तो मैं
  1518. 1:07:39करूंगा ही भाई। चड्ढा ने जवाब दिया। इधर
  1519. 1:07:42रजत को जेल भेज दिया गया था और इस समय वो
  1520. 1:07:45मुलाकात कक्ष में किसी से मुलाकात कर रहा
  1521. 1:07:47था। तभी रजत ने झल्लाते हुए कहा।
  1522. 1:07:51यह चड्ढा किसी काम का नहीं है जगबीर। पता
  1523. 1:07:54नहीं किस लिए भैया इसको सिर पर चढ़ाए हुए
  1524. 1:07:57हैं। इस वक्त रजत की टांग पर पट्टी बंधी
  1525. 1:08:00थी। सीढ़ियों से गिरने के कारण उसके टकने
  1526. 1:08:03पर मोच आ गई थी। वो तो शुक्र है कि हड्डी
  1527. 1:08:06नहीं टूटी। खैर रजत की बात सुनकर जगबीर ने
  1528. 1:08:09उसे समझाते हुए कहा, इसमें चड्ढा की कोई
  1529. 1:08:13गलती नहीं है भाई। आपको शिप्रा को किडनैप
  1530. 1:08:15करते हुए पुलिस के हाथ नहीं आना चाहिए था।
  1531. 1:08:18आपको नहीं पता आपका केस कितना कमजोर हो
  1532. 1:08:20गया है। अबे तुम छोड़ो इन बातों को। इसका
  1533. 1:08:24जो भी होगा वो भैया देख लेंगे। पर मैं उस
  1534. 1:08:26तीखी छुरी को इतनी आसानी से नहीं छोड़ने
  1535. 1:08:28वाला। तुमने पता लगाया कि वो दाढ़ी वाला
  1536. 1:08:31कौन था जो शिप्रा को बचाने आ गया था। कहते
  1537. 1:08:35हुए रजत के चेहरे पर शौर्य के लिए गुस्सा
  1538. 1:08:37साफ झलक रहा था। जवाब में जगबीर ने बताया।
  1539. 1:08:42यह वही भिखारी है भाई जिसके साथ मुख्तार
  1540. 1:08:44भाई ने शिप्रा की शादी करवाई थी।
  1541. 1:08:47जगवीर की बात सुनकर रजत की आंखें गोल हो
  1542. 1:08:49गई। अब जाकर उसे समझ आया कि आखिर वो
  1543. 1:08:52भिखारी शिप्रा के सिर पड़ने वाले डंडों को
  1544. 1:08:55अपने ऊपर क्यों ले रहा था। यह सोचते ही
  1545. 1:08:58रजत ने अपनी मुट्ठियां भीते हुए कहा। अरे
  1546. 1:09:01यार यह भाई ने भी ना जाने क्या कर दिया।
  1547. 1:09:04खैर इस भिखारी को तो मैं बाहर निकल कर
  1548. 1:09:06देखूंगा। पर अभी तुम्हें क्या करना है यह
  1549. 1:09:09सुनो। रजत ने जग को नजदीक आने का इशारा
  1550. 1:09:13किया और फिर जगबीर के कान में आगे की
  1551. 1:09:15योजना बताने लगा। खैर राय परिवार के
  1552. 1:09:18लफड़ों से निपटने के बाद जैसे ही शौर्य ने
  1553. 1:09:21अपने कमरे में कदम रखा तो वो यह देखकर
  1554. 1:09:23हैरान रह गया कि उसका कमरा साफ हो चुका
  1555. 1:09:25था। अब कमरे की हालत अच्छी लग रही थी।
  1556. 1:09:28शौर्य ने कपड़ों का थैला बेड पर रखा और
  1557. 1:09:31पूरे कमरे का मुआयना करने लगा। [संगीत]
  1558. 1:09:33वहीं आहट सुनकर गिरधर भी शौर्य के कमरे
  1559. 1:09:35में आ गया और मुस्कुराते हुए बोला, "अब
  1560. 1:09:39बताऊं? कैसा लगा तुम्हें तुम्हारा कमरा?
  1561. 1:09:42[संगीत] आपने सही कहा था चाचा। यह तो अब
  1562. 1:09:45चकाचक लग रहा है।
  1563. 1:09:47शौर्य ने इतना कहा ही था कि तभी [संगीत]
  1564. 1:09:49उसे बाथरूम से कुछ खटपट की आवाज सुनाई दी
  1565. 1:09:51और वो आश्चर्य से बोला यह बाथरूम से कैसी
  1566. 1:09:55आवाज आ रही है? इस पर गिरधर ने हल्के से
  1567. 1:09:57मंदमंद मुस्कुराते हुए कहा। पता नहीं कोई
  1568. 1:10:00बिल्लीविल्ली तो नहीं आ गई है। कहते हुए
  1569. 1:10:03गिरधर का ध्यान शौर्य के कपड़ों पर गया जो
  1570. 1:10:06उसने [संगीत] पहन रखे थे। शौर्य अपने गंदे
  1571. 1:10:08पुराने कपड़े स्टोर में ही छोड़ आया था और
  1572. 1:10:10नए कपड़े पहन लिए थे जो उसके [संगीत] शरीर
  1573. 1:10:12पर पूरी तरह फिट आ रहे थे। इसीलिए गिरिधर
  1574. 1:10:16ने उसकी तारीफ करते हुए कहा बहुत बढ़िया
  1575. 1:10:19है। भाई [संगीत] तुम्हारा तो पूरा लुक ही
  1576. 1:10:21चेंज हो गया श्रवण बाबू। अब तुम बिल्कुल
  1577. 1:10:24फिट एंड फाइन लग रहे हो। धन्यवाद चाचा।
  1578. 1:10:28इतना कहकर जैसे ही शौर्य ने बाथरूम का
  1579. 1:10:30दरवाजा खोला तो कुछ देखकर उसने झटके के
  1580. 1:10:33साथ फिर से दरवाजा बंद कर दिया और पीछे
  1581. 1:10:35आकर गिरधर के पास खड़ा हो गया। इस पर
  1582. 1:10:38गिरधर ने उत्सुकता से पूछा क्या हुआ? कौन
  1583. 1:10:41है बाथरूम में? इस पर शौर्य लड़खड़ाते
  1584. 1:10:45स्वर में बोला, लड़की है बाथरूम में। अभी
  1585. 1:10:49गिरधर कुछ कहने ही वाला था कि तभी बाथरूम
  1586. 1:10:51का दरवाजा खुला और एक लड़की बाथरूम से
  1587. 1:10:53बाहर आ गई। शौर्य अपने कमरे में आया और
  1588. 1:10:56जैसे ही उसने बाथरूम का दरवाजा खोला तो
  1589. 1:10:59अचानक एक लड़की को बाथरूम में देख के वो
  1590. 1:11:02ठिटक के रह गया। उसने हैरानी से गिरिधर को
  1591. 1:11:05पूछा लेकिन इससे पहले कि वो कुछ जवाब दे
  1592. 1:11:07पाता कि तभी बाथरूम का दरवाजा खोला और वो
  1593. 1:11:10लड़की हाथ में बाल्टी लिए बाथरूम से बाहर
  1594. 1:11:13निकल गई। उस लड़की को देखकर गिरधर
  1595. 1:11:15मुस्कुराते हुए बोला ओो अरे संतो तुम हो।
  1596. 1:11:20मुझे तो लगा श्रवण ने कोई भूत देख लिया
  1597. 1:11:22है। वैसे तुम अभी तक कमरे को साफ कर रही
  1598. 1:11:25हो। इस पर संतोष शिकायती लहजे में बोली,
  1599. 1:11:28वाह गिरधर काका मैं कोई मशीन हूं क्या या
  1600. 1:11:32कोई जादूगरनी जो छू मंतर किया और घर साफ
  1601. 1:11:34हो जाए। संतो की उम्र लगभग 202 साल के
  1602. 1:11:38करीब होगी। उसका रंग गेहूं और नए नक्श
  1603. 1:11:41तीखे थे। उसकी अदाएं देखकर ही समझ आता है
  1604. 1:11:44कि उसके आसपास के लड़के उस पर लट्टू हुए
  1605. 1:11:46रहते होंगे। संतो ने शौर्य को ऊपर से नीचे
  1606. 1:11:49तक घूरा और बोली हम तो यही रहेंगे इस कमरे
  1607. 1:11:54में दिखने में तो स्मार्ट हैं पर ये दाढ़ी
  1608. 1:11:57क्यों बढ़ा रखी है अरे तुमको क्या करना है
  1609. 1:12:00इसकी दाढ़ी से तुमने अपना काम कर लिया हो
  1610. 1:12:03तो जाओ यहां से गिरधर ने उससे पीछा
  1611. 1:12:06छुड़ाने के लिए कहा लेकिन जवाब मिशन तो
  1612. 1:12:08मजाकिया अंदाज में बोली मैं तो जा ही रही
  1613. 1:12:11हूं काका पर मैं जो बोल रही हूं वो इसके
  1614. 1:12:14भले की बात है अगर ये अपनी दाढ़ी को साफ
  1615. 1:12:16कर लेगा ना तो और भी ज्यादा स्मार्ट
  1616. 1:12:18लगेगा। मैं कहती हूं लड़कियां तो इसकी
  1617. 1:12:21दीवानी हो जाएंगी। इस पर गिरधर को भी कुछ
  1618. 1:12:24शरारत सूझी और वो हंसते हुए बोला अच्छा
  1619. 1:12:27दूसरों की बात छोड़ो अगर यह दाढ़ी साफ
  1620. 1:12:30करवा लेगा तो क्या तू भी इसकी दीवानी हो
  1621. 1:12:33जाएगी? अरे इसको एक बार शेव करने को तो
  1622. 1:12:36कहो क्या पता तब मैं भी इस पर फिदा हो
  1623. 1:12:39जाऊं। [हंसी]
  1624. 1:12:41बोलकर संतो हंसती हुई कमरे से बाहर चली गई
  1625. 1:12:43और गिरधर काका मुस्कुराते हुए शौर्य से
  1626. 1:12:46बोले बहुत बोलती है यह लड़की।
  1627. 1:12:50अगर कोई इसको रोके नहीं तो लगातार बोलती
  1628. 1:12:53जाएगी। [संगीत] पर दिल की साफ है। शौर्य
  1629. 1:12:56तो बस उस लड़की को देखता ही रह गया। उसका
  1630. 1:12:58बेबाक अंदाज कुछ अलग ही था। उसके दिल में
  1631. 1:13:01जो कुछ भी आ रहा था उसे बोलने से पहले वो
  1632. 1:13:04कुछ सोच नहीं रही थी। उसकी बातों में कोई
  1633. 1:13:07फिल्टर [संगीत] नहीं था। शौर्य ने
  1634. 1:13:09जिज्ञासा के साथ पूछा। यह यहां काम करती
  1635. 1:13:12है। हां भाई, काम करती है। तभी तो सफाई
  1636. 1:13:15करने के लिए यहां आई थी। मुझे लगा था कि
  1637. 1:13:18यह सफाई करके चली गई होगी। अच्छा वो सब
  1638. 1:13:21छोड़ो। तुम तो यह बताओ कितना चूना लगाया
  1639. 1:13:24मालिक को? क्या-क्या खरीदा तुमने? गिरिधर
  1640. 1:13:27ने बेड पर पड़े थैले की ओर देखते हुए
  1641. 1:13:29पूछा। इस पर शौर्य ने गिरधर के सामने बैग
  1642. 1:13:32खोलते हुए कहा, बस ज्यादातर तो कपड़े ही
  1643. 1:13:35लिए और कुछ डेली यूज़ की चीजें हैं। बहुत
  1644. 1:13:38बढ़िया है। तुम्हारी तो भाई काया पलट ही
  1645. 1:13:41हो गई है। बस अब अगर दाढ़ी कटवा लोगे तो
  1646. 1:13:44शतो तो राजी हो ही गई है। [हंसी]
  1647. 1:13:48गिरिधर ने हंसते हुए ताली बजाई। मानो इतने
  1648. 1:13:50कमाल का जोक मारने पर खुद ही सराहना कर
  1649. 1:13:52रहा हो। वहीं शौर्य को समझ नहीं आ रहा था
  1650. 1:13:55कि वो अपने इस नए हाल पर हंसे या रोए।
  1651. 1:13:58वहीं दूसरी तरफ नैना बुआ राजदीप राय के
  1652. 1:14:01यहां से निकलकर बड़ी भाभी सरला राय के पास
  1653. 1:14:03पहुंची। सरला के साथ छोटी भाभी बिंदु भी
  1654. 1:14:06बैठी थी। नैना ने जब अपनी दोनों भाबियों
  1655. 1:14:09को एक साथ देखा तो वो खुश होकर बोली अजी
  1656. 1:14:12प्रणाम है मेरी दोनों भाबियों को। आप
  1657. 1:14:14दोनों एक साथ लगता है जरूर कोई खास बात हो
  1658. 1:14:17रही है।
  1659. 1:14:19आओ आओ नैना बैठो। कहते हुए सरला ने नैना
  1660. 1:14:23को सोफे पर बैठने का इशारा किया। सोफे पर
  1661. 1:14:25बैठते ही नैना ने उलहना देते हुए कहा
  1662. 1:14:30तो बताओ क्या बातें हो रही थी आप दोनों
  1663. 1:14:32में जो मुझे देखते ही एकदम से चुप हो गई
  1664. 1:14:35इस पर सरला ने बड़ी ही सफाई से जवाब दिया
  1665. 1:14:38अरे भला तुमको देखकर क्यों चुप हो जाएंगे
  1666. 1:14:41आजकल तो घर में एक ही टॉपिक चल रहा है
  1667. 1:14:43शिप्रा और उसका भिखारी पति अरे हां अब तो
  1668. 1:14:48सुना है वो भिखारी घर में भी आ गया है
  1669. 1:14:50क्या आपने देखा उसे सवाल पूछकर नैना सर
  1670. 1:14:54सरला और बिंदु के चेहरे के भाव समझने की
  1671. 1:14:56कोशिश करने लगी। उसे इतना तो समझ आ गया था
  1672. 1:14:59कि वो यहां दिल खोलकर शिप्रा और उसके
  1673. 1:15:01भिखारी पति का मजाक बना सकती है। तभी
  1674. 1:15:04बिंदु ने जवाब दिया ये भी क्या पूछने वाली
  1675. 1:15:07बात है? हमारे सामने ही तो बाबूजी की
  1676. 1:15:10गाड़ी से उतरा था।
  1677. 1:15:13अच्छा और कैसा लग रहा था वो? पूछते हुए
  1678. 1:15:15नैना की उत्सुकता तीव्र हो गई। इस पर सरला
  1679. 1:15:19भाभी ने आंखें बड़ी करते हुए नाटकीय ढंग
  1680. 1:15:21से कहा। अब यह भी क्या पूछने वाली बात है?
  1681. 1:15:25भिखारी है। भिखारी की तरह ही लग रहा था।
  1682. 1:15:28और कैसा लगेगा? उसके चेहरे के बाल। हे राम
  1683. 1:15:32क्या बताऊं? किसी जंगली भालू की तरह लग
  1684. 1:15:35रहा था वो। और कपड़े तो ऐसे जैसे बोरा
  1685. 1:15:38टांग लिया हो शरीर पर। अब क्या ही बोलूं?
  1686. 1:15:41मेरा मुंह मत खुलवाओ।
  1687. 1:15:43तभी बिंदु शिप्रा पर दया दिखाते हुए बोली।
  1688. 1:15:46शिप्रा का तो जीवन ही बर्बाद हो गया दीदी।
  1689. 1:15:49बेचारी बेचारी किस बात की? उसे तो अपने
  1690. 1:15:53कर्मों का फल मिला है बस। बहुत घमंड था ना
  1691. 1:15:56उसे अपनी खूबसूरती पर। अरे घमंड तो रावण
  1692. 1:15:59तक का टूट गया। तो फिर ये क्या चीज है?
  1693. 1:16:02ऐसा बोलकर सरला ने बिंदु को चुप करवा
  1694. 1:16:05दिया। इस पर नैना बुआ ने भी कड़वाहट भरे
  1695. 1:16:08लहजे में कहा। अब क्या कहूं भाभी? [संगीत]
  1696. 1:16:11अभी भी उसका घमंड कम नहीं हो रहा है। अभी
  1697. 1:16:13मैं उसके ही भले की बात बोल रही थी। पर वो
  1698. 1:16:16सुनने वाली कहां है? उल्टा मुझे ही उपदेश
  1699. 1:16:18देने लगी। मुझे ही क्या उसने तो राजदीप
  1700. 1:16:21भाई साहब और बीना भाभी को भी नहीं छोड़ा।
  1701. 1:16:24नैना की बात सुनकर सरला और बिंदु दोनों की
  1702. 1:16:26नजरें मिली। उन्हें लगा उनके मन मुताबिक
  1703. 1:16:29सब्जेक्ट मिल गया है। इसीलिए सरला ने भोली
  1704. 1:16:31बनने का नाटक करते हुए पूछा। अच्छा
  1705. 1:16:34[संगीत] ऐसा क्या उपदेश दे दिया शिप्रा
  1706. 1:16:36ने?
  1707. 1:16:38अब क्या बताऊं भाभी? शिप्रा ने क्या-क्या
  1708. 1:16:40नहीं बोला। उसके बाद नैना ने दोनों
  1709. 1:16:43भाबियों को हर एक बात बता दी। नैना की
  1710. 1:16:45बातें सुनकर सरला भौचक्की रह गई और एक
  1711. 1:16:48कुटिल मुस्कान के साथ बोली तो [संगीत]
  1712. 1:16:50इसका मतलब कि अब वो उस भिखारी की ही बीवी
  1713. 1:16:52बनकर रहेगी। कहते हुए सरला के चेहरे की
  1714. 1:16:55धूर्तता साफ नजर आ रही थी और शिप्रा के
  1715. 1:16:57लिए जो ईर्ष्या उसके दिल में थी वो
  1716. 1:16:59[संगीत] अब चेहरे पर भी नजर आने लगी थी।
  1717. 1:17:02यहां शिप्रा अपने कमरे में गहन सोच विचार
  1718. 1:17:04में उलझी हुई थी। जीवन के जिस दोराहे पर
  1719. 1:17:06वो खड़ी थी उसमें वह समझ नहीं पा रही थी
  1720. 1:17:09कि उसे आखिर क्या करना चाहिए। जीवन को
  1721. 1:17:12लेकर उसके जो भी सपने थे वो सब धराशाई हो
  1722. 1:17:15चुके थे। उसे विहान से बहुत उम्मीदें थी।
  1723. 1:17:18पर [संगीत] शादी वाली रात को जब से वह
  1724. 1:17:20गायब हुआ था उसके बाद उसने एक बार भी यह
  1725. 1:17:23जानने की कोशिश नहीं की कि शिप्रा अब किस
  1726. 1:17:25हाल में है। एक बार को यह मान भी लिया जाए
  1727. 1:17:28कि वो मुख्तार के डर से भाग निकला था। पर
  1728. 1:17:31बाद में तो जानकारी ले सकता था कि शिप्रा
  1729. 1:17:33ठीक है या नहीं। पर उसने तो कोई कोशिश ही
  1730. 1:17:37नहीं की। वैसे तो शिप्रा सोचकर संतोष करती
  1731. 1:17:40आई है कि अच्छा ही हुआ जो विहान से उसकी
  1732. 1:17:42शादी नहीं हुई। क्योंकि जो शादी से पहले
  1733. 1:17:45मुसीबत में छोड़कर भाग सकता है वो बाद में
  1734. 1:17:47भी क्या ही साथ देगा। लेकिन शिप्रा की
  1735. 1:17:50दुविधा यह है कि अब किसी पर भी भरोसा कर
  1736. 1:17:52पाना उसे मुश्किल लग रहा था। उसकी सबसे
  1737. 1:17:55बड़ी दिक्कत यह थी कि वह शौर्य को लेकर
  1738. 1:17:58फैसला नहीं कर पा रही थी। उसने यह भी ठान
  1739. 1:18:01लिया था कि इसके बाद वह दोबारा किसी से
  1740. 1:18:03शादी नहीं करेगी। भले सारी जिंदगी अकेले
  1741. 1:18:06रहना पड़े। उसने मन ही मन फैसला कर लिया
  1742. 1:18:09था कि अगर घरवाले दूसरी शादी के लिए जिद
  1743. 1:18:11करेंगे तो फिर वह श्रवण से तलाक ही नहीं
  1744. 1:18:13लेगी। उसे श्रवण की बीवी बनकर रहना मंजूर
  1745. 1:18:16था। पर दोबारा शादी के पचड़े में पड़ना
  1746. 1:18:19कबूल नहीं था। वो यह सोच कर दिल को तसल्ली
  1747. 1:18:22दे रही थी कि उसके लिए श्रवण को हैंडल
  1748. 1:18:24करना आसान होगा। उसे अब दुनियादारी से भी
  1749. 1:18:26कुछ खास फर्क नहीं पड़ने वाला था क्योंकि
  1750. 1:18:29उसकी जितनी छीछा लेदर होनी थी वो हो गई।
  1751. 1:18:32अब इससे ज्यादा क्या ही होगा। इतना सब कुछ
  1752. 1:18:35सोचने के बाद उसे लगा कि यह सब बातें अब
  1753. 1:18:38एक बार श्रवण से भी कर लेनी चाहिए ताकि
  1754. 1:18:40बाद में कोई कंफ्यूजन ना रहे। इसीलिए वो
  1755. 1:18:43अपने बेड से उठी और हवेली से बाहर आ गई।
  1756. 1:18:46अब तक शाम के झुरमुट चारों ओर छाने लगी
  1757. 1:18:49थी। शिप्रा ने उस तरफ देखा जहां शौर्य
  1758. 1:18:52ठहरा था और धीरे से उस ओर बढ़ गई। जब
  1759. 1:18:55शिप्रा गिरिधर के क्वार्टर के पास पहुंची
  1760. 1:18:57तो उसने [संगीत] देखा गिरधर किचन में खाना
  1761. 1:18:59बना रहा था और शौर्य बेड पर बैठकर प्याज
  1762. 1:19:02काट रहा था। शौर्य को देखकर उसे कुछ अलग
  1763. 1:19:05एहसास हुआ। उसे वह कुछ बदला बदला सा लग
  1764. 1:19:07रहा था। फिर उसे ख्याल आया कि उसके कपड़े
  1765. 1:19:10आज कुछ अलग थे। कमाल है। कपड़ों से आदमी
  1766. 1:19:14की पर्सनालिटी में कितना चेंज आ जाता है।
  1767. 1:19:17इसी विचार के साथ शिप्रा ने मन ही मन कुछ
  1768. 1:19:20निश्चय किया और क्वार्टर का दरवाजा खटखटा
  1769. 1:19:22दिया। इस पर अंदर से गिरधर की आवाज आई। इस
  1770. 1:19:26समय कौन आया होगा। श्रवण जरा देखना बाहर
  1771. 1:19:29कौन है। यह सुनकर प्यास काटते शौर्य ने
  1772. 1:19:32भीगी आंखों के साथ जब दरवाजा खोला तो उसके
  1773. 1:19:35सामने शिप्रा खड़ी थी। उसे उम्मीद नहीं थी
  1774. 1:19:38कि इस समय शिप्रा उसके सामने आ जाएगी। न
  1775. 1:19:41जाने क्यों वो फपला गया और आंसू पोंछ कर
  1776. 1:19:44अपनी शक्ल ठीक करने लगा और मुंह से अचानक
  1777. 1:19:46ही निकला। आप यहां तभी कमरे के अंदर से
  1778. 1:19:50गिरधर की आवाज आई। क्या हुआ? दरवाजे पर
  1779. 1:19:53कौन है श्रवण? श्रवण कुछ बोलता उससे पहले
  1780. 1:19:56शिप्रा बोल उठी मैं हूं गिरिधर काका
  1781. 1:19:59शिप्रा शिप्रा का नाम सुनकर गिरिधर गैस की
  1782. 1:20:02आंच कम करके अपने हाथ पोंछते हुए दरवाजे
  1783. 1:20:04पर पहुंचा और सम्मानपूक बोला अरे शिप्रा
  1784. 1:20:08बेबी आप इस समय कुछ काम था क्या इस पर
  1785. 1:20:12शिप्रा ने विनम्रता के साथ कहा नहीं ऐसा
  1786. 1:20:15कुछ खास नहीं है काका मुझे श्रवण से कुछ
  1787. 1:20:17बात करनी थी क्या मैं कुछ देर के लिए
  1788. 1:20:20श्रवण को यहां से ले जा सकती हूं अरे आप
  1789. 1:20:23भी क्या बात कर रही को यह कोई पूछने वाली
  1790. 1:20:26बात है? आप ले जाइए श्रवण को। कहते हुए
  1791. 1:20:29गिरधर ने श्रवण को साथ ले जाने का इशारा
  1792. 1:20:31कर दिया। तभी शिप्रा गिरधर काका का
  1793. 1:20:34धन्यवाद करते हुए पलट गई और शौर्य भी उसके
  1794. 1:20:36पीछे हो लिया। लेकिन वो समझ नहीं पा रहा
  1795. 1:20:39था कि आखिर शिप्रा क्या बात करना चाहती
  1796. 1:20:41है। रह-रह कर शौर्य की नजर शिप्रा की ओर
  1797. 1:20:44चली जा रही थी। सिंपल से सूट में भी
  1798. 1:20:47शिप्रा की सादगी शायद शौर्य को अपनी ओर
  1799. 1:20:49आकर्षित कर रही थी। खैर क्वार्टर से
  1800. 1:20:52निकलने के बाद 6- सात फीट का रास्ता था
  1801. 1:20:54जिस पर सीमेंट की ईंटें बिछी हुई थी। उसके
  1802. 1:20:56बाद लॉन शुरू हो जाता था। लॉन में जगह-जगह
  1803. 1:21:00बेंच लगी हुई थी। शिप्रा ने एक बेंच की
  1804. 1:21:02तरफ इशारा करते हुए कहा। चलो वहां चलकर
  1805. 1:21:06बैठते हैं। शिप्रा बेंच पर जाकर बैठ गई।
  1806. 1:21:09पर शौर्य खड़ा ही रहा। उसे समझ नहीं आ रहा
  1807. 1:21:12था कि वो शिप्रा के साथ किस तरह पेश आए।
  1808. 1:21:15वैसे भी शिप्रा की नजर में उसकी हैसियत एक
  1809. 1:21:17भिखारी से ज्यादा कुछ नहीं थी। अभी शौर्य
  1810. 1:21:20इसी उधेड़बन में था कि तभी [संगीत] फिर से
  1811. 1:21:22शिप्रा की नरम आवाज उसके कान में पड़ी।
  1812. 1:21:25क्या हुआ? बैठ जाओ ना। मैं समझती हूं कि
  1813. 1:21:29तुम्हारे मन में क्या चल रहा होगा। कुछ
  1814. 1:21:32ऐसी ही मनस्थिति मेरी भी है और इसी के
  1815. 1:21:34बारे में मुझे तुमसे बात करनी है।
  1816. 1:21:38इस पर शौर्य बेंच के दूसरे छोर पर बैठ
  1817. 1:21:40गया। शिप्रा सोच रही थी उसे कहां से शुरू
  1818. 1:21:43करना चाहिए और इसी सोच में कुछ पल बीत गए।
  1819. 1:21:46तभी शौर्य ने बड़े ही शालीनता से पूछा,
  1820. 1:21:49"क्या हुआ? आप कुछ बोलने वाली थी?" शौर्य
  1821. 1:21:53की बात सुनकर शिप्रा ने उसकी ओर देखा और
  1822. 1:21:56गंभीरता से पूछा,
  1823. 1:21:58"अभी जो कुछ भी दो-तीन दिनों के दरमियान
  1824. 1:22:00हमारे साथ हुआ है, उसके बारे में तुम क्या
  1825. 1:22:04सोचते हो।" शिप्रा की बात सुनकर एक पल को
  1826. 1:22:07तो शौर्य को समझ नहीं आया कि वो क्या
  1827. 1:22:09बोले। पर बोलना तो था। वो भी शौर्य बनकर
  1828. 1:22:12नहीं बल्कि एक ऐसा व्यक्ति जिसकी अपनी कोई
  1829. 1:22:15हैसियत नहीं है। खैर शौर्य ने कुछ सोचा और
  1830. 1:22:19फिर सहानुभूति जाहिर करते हुए ईमानदारी से
  1831. 1:22:22जवाब दिया। मुझे खुद का तो पता नहीं पर
  1832. 1:22:24मैं समझता हूं कि आपके साथ अच्छा नहीं
  1833. 1:22:26हुआ। आपके साथ यह नहीं होना चाहिए था।
  1834. 1:22:30शिप्रा ने शौर्य की बात सुनी और फिर से
  1835. 1:22:33अगला सवाल किया।
  1836. 1:22:35अब जबकि तुम्हें पता है कि जो नहीं होना
  1837. 1:22:37था वो हो गया तो इस स्थिति में मुझे क्या
  1838. 1:22:41करना चाहिए? शौर्य को समझ नहीं आया कि वो
  1839. 1:22:44क्या जवाब दे। लेकिन इस सवाल से शौर्य को
  1840. 1:22:47यह समझ में आया कि शिप्रा अभी किस मानसिक
  1841. 1:22:50स्थिति से गुजर रही होगी। शिप्रा की
  1842. 1:22:52स्थिति के बारे में सोचकर शौर्य को शिप्रा
  1843. 1:22:54पर दया आने लगी। इसीलिए वो शिप्रा को
  1844. 1:22:57दिलासा देते हुए स्पष्ट शब्दों में बोला।
  1845. 1:22:59इस स्थिति में मैं आपको यही कहूंगा कि जो
  1846. 1:23:02भी आपके साथ हुआ है आप उसे मानने [संगीत]
  1847. 1:23:04के लिए बाध्य नहीं हैं। बंदूक की नोक पर
  1848. 1:23:06रखकर किसी से अगर आपकी शादी कर दी जाती है
  1849. 1:23:09तो जरूरी नहीं है कि आप उसको जबरदस्ती
  1850. 1:23:11निभाएंगी ही। मेरी तरफ से आप पूरी तरह से
  1851. 1:23:13आजाद हैं। उस दिन भी जब [संगीत] वो बदमाश
  1852. 1:23:15जबरदस्ती कर रहा था तो मैं उसके सामने
  1853. 1:23:18झुकने वाला नहीं था। मैं भी उसकी बात
  1854. 1:23:20मानने को इसीलिए मजबूर हो गया था क्योंकि
  1855. 1:23:22उसने आपके [संगीत] भाई के गले पर तलवार रख
  1856. 1:23:24दी थी। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा को
  1857. 1:23:26अच्छा लगा। उसे लगा बंदा अपनी सोच को लेकर
  1858. 1:23:29कितना क्लियर है। इसीलिए शिप्रा राहत की
  1859. 1:23:32सांस लेते हुए बोली तुम्हारी बात सुनकर
  1860. 1:23:34मुझे अच्छा लगा कि तुम इस तरह से सोचते हो
  1861. 1:23:37[संगीत] लेकिन मेरे साथ कुछ और भी
  1862. 1:23:38प्रॉब्लम है। इतना बोलकर शिप्रा एक पल
  1863. 1:23:41ठहरी। फिर कुछ सोच कर बोली मैं अपनी बात
  1864. 1:23:44बताऊं उससे पहले मुझे तुम्हारे बारे में
  1865. 1:23:46जानना है। यह सुनते ही शौर्य की धड़कन तेज
  1866. 1:23:49हो गई। अपने आप को संभालते हुए उसने
  1867. 1:23:51स्पष्ट शब्दों में पूछा। क्या जानना चाहती
  1868. 1:23:54हैं आप मेरे बारे में? शौर्य की दुविधा यह
  1869. 1:23:56थी कि वो शिप्रा से झूठ बोलना नहीं चाहता
  1870. 1:23:58था। पर [संगीत] इस समय वो उसे अपने बारे
  1871. 1:24:00में बता भी नहीं सकता था। तभी शिप्रा ने
  1872. 1:24:03सहानुभूति भरे लहजे में पूछा। यही कि तुम
  1873. 1:24:06स्वस्थ हो फिर भी तुम कुछ कामधाम ना करके
  1874. 1:24:08यूं बेसहारे की जिंदगी क्यों जी रहे थे।
  1875. 1:24:11शिप्रा को सीधा यह पूछना ठीक नहीं लगा कि
  1876. 1:24:13वो भीख मांगकर क्यों खा रहा था। इसीलिए
  1877. 1:24:15उसने मर्यादित ढंग से अपना सवाल किया।
  1878. 1:24:18वहीं शौर्य ने अब कुछ भी छुपाना ठीक नहीं
  1879. 1:24:20समझा। उसने एक लंबी सांस लेने के बाद शांत
  1880. 1:24:23स्वर में कहा। दरअसल आज से 6 महीने पहले
  1881. 1:24:26मेरी स्थिति ऐसी नहीं थी। 6 महीने पहले
  1882. 1:24:29मेरा एक एक्सीडेंट हुआ था। या यूं समझिए
  1883. 1:24:31कि मेरे परिवार में से ही कुछ लोगों ने
  1884. 1:24:33मुझे जान से मारने की कोशिश की थी। उस
  1885. 1:24:35एक्सीडेंट में तो मैं बच गया लेकिन मेरे
  1886. 1:24:38परिवार की नजर में मेरी मौत हो चुकी थी।
  1887. 1:24:40अब क्योंकि मुझे मारने के षड्यंत्र में
  1888. 1:24:42मेरे परिवार के ही किसी का हाथ था। इसीलिए
  1889. 1:24:45मैं अपने घर भी वापस नहीं जा सकता था। यह
  1890. 1:24:48सुनकर शिप्रा को शौर्य के लिए सिंपैथी का
  1891. 1:24:50अभाव महसूस हुआ और वह गौर से उसे सुनने
  1892. 1:24:52लगी। शौर्य ने एक नजर शिप्रा को देखा और
  1893. 1:24:55फिर से बोलने लगा जब मेरा एक्सीडेंट हुआ
  1894. 1:24:58तो मुझे उसी मंदिर में शरण मिली थी। उस
  1895. 1:25:00समय मैं कुछ कर पाने की स्थिति में भी
  1896. 1:25:03नहीं [संगीत] था। इसीलिए मंदिर आते-जाते
  1897. 1:25:05लोग जो कुछ दे देते मैं उसी से अपना
  1898. 1:25:07गुजारा कर लेता था। फिर धीरे-धीरे ऐसा हुआ
  1899. 1:25:10कि मेरी इच्छाएं ही [संगीत] खत्म हो गई।
  1900. 1:25:12मुझे किसी चीज की कोई चाह ही नहीं रही। और
  1901. 1:25:14मैं मंदिर में ही अपनी सेवा देने लगा।
  1902. 1:25:17मैंने इसी को अपनी नियति मानकर जीना सीख
  1903. 1:25:20लिया। शौर्य ने अपनी कहानी बता दी जो कि
  1904. 1:25:22लगभग सत्य ही है। वहीं शौर्य की कहानी
  1905. 1:25:25सुनकर शिप्रा को आभास हुआ कि सिर्फ उसका
  1906. 1:25:27दुख [संगीत] ही दुख नहीं है। दुनिया में
  1907. 1:25:29ऐसे कई लोग होंगे जिनका दुख उससे भी बड़ा
  1908. 1:25:32है। खैर अब वो मुद्दे की बात करना चाहती
  1909. 1:25:35[संगीत]
  1910. 1:25:35थी। लेकिन वो सोच रही थी कि कैसे वह अपने
  1911. 1:25:38मन की बात श्रवण से कहे और क्या श्रवण
  1912. 1:25:40उसकी स्थिति को समझेगा? इसी उधेड़बुन में
  1913. 1:25:43उसने एक लंबी सांस ली और आखिरकार कहना
  1914. 1:25:46शुरू किया। देखो श्रवण नियति ने हम दोनों
  1915. 1:25:49को जिस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है उसकी
  1916. 1:25:51कल्पना ना तुमने की होगी और ना ही मैंने।
  1917. 1:25:54दो-तीन दिन पहले तक देखा जाए तो मैं एक
  1918. 1:25:57अलग ही लड़की थी जिसके कुछ सपने थे
  1919. 1:25:59जिन्हें मैं जीना चाहती थी। पर उस रात जो
  1920. 1:26:02कुछ भी घटित हुआ उसने जिंदगी के प्रति
  1921. 1:26:04मेरा नजरिया ही चेंज कर दिया। इतना कहने
  1922. 1:26:07के बाद शिपरा रुक गई। वो देखना चाहती थी
  1923. 1:26:09कि श्रवण का रिएक्शन कैसा है। और जब उसने
  1924. 1:26:12देखा कि श्रवण धैर्य पूर्वक उसकी बातों को
  1925. 1:26:14सुन रहा है तो उसने आगे कहा अब मुझे किसी
  1926. 1:26:17खास रिश्ते की चाह नहीं है और अब दोबारा
  1927. 1:26:20मैं किसी नए रिश्ते में बंधूं ऐसी भी कोई
  1928. 1:26:22इच्छा नहीं रही है। लेकिन अब जो हालात हैं
  1929. 1:26:25उनमें मैं मानूं या ना मानूं। पर दुनिया
  1930. 1:26:27की नजर में हम दोनों पति-पत्नी हैं। मेरे
  1931. 1:26:30घर वालों ने तुम्हें यहां लाया भी इसीलिए
  1932. 1:26:32है कि जब परिस्थिति सामान्य होगी तो हम
  1933. 1:26:34दोनों का तलाक हो जाए ताकि फिर कहीं और
  1934. 1:26:36मेरा रिश्ता करने में कोई अड़चन ना आए।
  1935. 1:26:39इतना कहकर शिप्रा ने अपने शब्दों को विराम
  1936. 1:26:42दिया और अंधेरे में डूबी हुई फूलों की
  1937. 1:26:43क्या [संगीत] देखने लगी। वहीं जब शौर्य ने
  1938. 1:26:46देखा कि शिप्रा चुप हो गई है तो उसने शांत
  1939. 1:26:48और समझदारी भरे लहजे में कहा तो इसमें गलत
  1940. 1:26:51क्या है? कोई भी मां-बाप अपने बच्चे के
  1941. 1:26:53लिए यही करेंगे। श्रवण की बात सुनकर
  1942. 1:26:56शिप्रा के चेहरे पर एक फीकी [संगीत]
  1943. 1:26:57मुस्कान आ गई और वो सामने अंधेरे में
  1944. 1:26:59देखती हुई फिर से बोली हां तुम सही कह रहे
  1945. 1:27:02हो। इसमें गलत कुछ भी नहीं है। पर इस
  1946. 1:27:06मर्दों के वर्चस्व वाली दुनिया [संगीत]
  1947. 1:27:07में जो यह भ्रम है कि औरत सिर्फ एक मर्द
  1948. 1:27:10के स्वामित्व में ही सेफ रह सकती है।
  1949. 1:27:13उसमें अब मेरा विश्वास नहीं रहा है। जब
  1950. 1:27:15मैं अकेले अपनी जिंदगी अपने ढंग से बिना
  1951. 1:27:17किसी सहारे के जी सकती हूं तो क्यों
  1952. 1:27:20परिवार वाले शादी के रिश्ते में बांधने के
  1953. 1:27:22लिए मजबूर करते हैं। इतना कहकर शिप्रा ने
  1954. 1:27:25अपनी भावनाओं को नियंत्रित किया और एक बार
  1955. 1:27:27फिर कुछ सोचते हुए बोली तुम्हें पता है
  1956. 1:27:30विहान से जो मेरी शादी होने जा रही थी वो
  1957. 1:27:33शादी [संगीत] कम और दो परिवार के बीच
  1958. 1:27:35बिजनेस रिलेशन ज्यादा था। इसीलिए इस शादी
  1959. 1:27:37के टूटने का भी मुझे ज्यादा दुख नहीं हुआ।
  1960. 1:27:40एक तरह से अच्छा ही हुआ जो उसकी असलियत
  1961. 1:27:43पता चल गई। ऐसा व्यक्ति जो मुसीबत में पीठ
  1962. 1:27:46दिखा दे उससे तो अच्छा उसका ना होना है।
  1963. 1:27:49शौर्य को समझ नहीं आ रहा था कि शिप्रा उसे
  1964. 1:27:51इतना कुछ क्यों सुना रही है। इसीलिए उसने
  1965. 1:27:54उलझन भरी आवाज में पूछ ही लिया। आप जो भी
  1966. 1:27:57कह रही हैं वह सही है पर आप यह सब मुझे
  1967. 1:27:59क्यों बता रही हैं। यह मुझे समझ में नहीं
  1968. 1:28:02आ रहा। यह सुनकर शिप्रा ने अब बातों को और
  1969. 1:28:05घुमाने की कोशिश नहीं की और मुद्दे पर आते
  1970. 1:28:07हुए बोली, दरअसल तुम्हें यह सब बताने के
  1971. 1:28:10पीछे मेरा एक मकसद है। मैं चाहती हूं कि
  1972. 1:28:12तुम मेरी स्थिति समझकर मेरी मदद कर सको।
  1973. 1:28:16यह बोलकर शिप्रा श्रवण की ओर देखने लगी।
  1974. 1:28:18लेकिन मेरे जैसा गरीब भला आपकी क्या मदद
  1975. 1:28:21कर सकता है। शौर्य ने विवशता भरी आवाज में
  1976. 1:28:24कहा। तभी शिप्रा ने ईमानदारी से जवाब
  1977. 1:28:27दिया। देखो श्रवण [संगीत]
  1978. 1:28:29मैं जानती हूं कि मैं तुम्हें पति के रूप
  1979. 1:28:30में शायद ही कभी स्वीकार कर पाऊंगी। पर
  1980. 1:28:33मैं यह भी नहीं चाहती कि मैं तुमसे तलाक
  1981. 1:28:35लूं क्योंकि एक बार मैंने तुमसे तलाक ले
  1982. 1:28:38लिया तो फिर मेरे घर वाले मेरी दूसरी शादी
  1983. 1:28:40करवाना चाहेंगे और मैं दोबारा शादी करना
  1984. 1:28:43नहीं [संगीत] चाहती। इतना सुनते ही शौर्य
  1985. 1:28:46को कुछ बातें समझ आने लगी। पर क्लेरिटी के
  1986. 1:28:49लिए उसने फिर से पूछा तो इसमें मेरी मदद
  1987. 1:28:52की जरूरत कहां है? इस पर शिप्रा थोड़ी
  1988. 1:28:54निराशा के साथ बोली, लगता है तुम समझे
  1989. 1:28:57नहीं मेरी बात को। अगर मैं तुमसे तलाक
  1990. 1:29:00नहीं लूंगी तो तुम भी तो शादीशुदा ही
  1991. 1:29:02रहोगे और शादीशुदा होने के बाद भी तुम्हें
  1992. 1:29:05पत्नी का सुख नहीं मिलेगा। तो क्या
  1993. 1:29:07तुम्हें इस तरह के रिश्ते में रहना कबूल
  1994. 1:29:09होगा? शिप्रा की बात का मतलब अब जाकर
  1995. 1:29:12शौर्य की समझ में आया और अगले ही पल वो
  1996. 1:29:14शांत और विश्वास से भरी आवाज में बोला
  1997. 1:29:17मुझे इसमें कोई दिक्कत [संगीत] नहीं है।
  1998. 1:29:19आप जब तक खुद नहीं चाहेंगी तब तक मैं अपनी
  1999. 1:29:21तरफ से आपको तलाक के लिए कभी मजबूर
  2000. 1:29:23[संगीत] नहीं करूंगा। इस पर शिप्रा ने एक
  2001. 1:29:25बार फिर कंफर्म करने के लिए पूछा। एक बार
  2002. 1:29:28अच्छे से सोच लो। मेरे कारण तुम भी शादी
  2003. 1:29:30नहीं कर पाओगे। [संगीत] तभी शौर्य हल्की
  2004. 1:29:32मुस्कान के साथ बोला आप मेरी तरफ से
  2005. 1:29:35निश्चिंत रहें। वैसे भी कौन [संगीत] ही
  2006. 1:29:38शहजादी मुझसे शादी करना चाहेगी। श्रवण की
  2007. 1:29:41बात सुनकर शिप्रा को तसल्ली हुई और उसने
  2008. 1:29:43जाने से पहले कहा, वैसे मेरी तरफ से तुम
  2009. 1:29:46आजाद हो। तुम कहां क्या करते हो या किसी
  2010. 1:29:48के साथ रिलेशन भी रखते हो तो मुझे कोई
  2011. 1:29:50फर्क नहीं पड़ेगा। बस मैं यह चाहूंगी कि
  2012. 1:29:53मेरे परिवार वालों को ना पता चले तो अच्छा
  2013. 1:29:55होगा। यह सुनकर श्रवण ने वादा करते हुए
  2014. 1:29:58कहा, हां, मैं इस बात का ध्यान रखूंगा।
  2015. 1:30:01ठीक है तो फिर मैं चलती हूं। इतना बोलकर
  2016. 1:30:04शिप्रा अपनी जगह से खड़ी हो गई। लेकिन
  2017. 1:30:05जाते-जाते रुकी और भावुक शब्दों में बोली
  2018. 1:30:08तुम एक अच्छे व्यक्ति हो श्रवण तुमने जो
  2019. 1:30:11कुछ भी मेरे लिए किया है वो शायद ही कोई
  2020. 1:30:14कर पाए। इतना बोलकर शिप्रा वहां से चली गई
  2021. 1:30:17और शौर्य उसे देखता रहा। रात की ठंडी हवा
  2022. 1:30:20शौर्य के बालों को सहला रही थी। तभी उसने
  2023. 1:30:22एक प्यार भरी मुस्कान के साथ कहा। तुम आ
  2024. 1:30:24गई मेरी जिंदगी में तो मुझे और किसी की
  2025. 1:30:27जरूरत नहीं है। आज से तुम्हारी सारी
  2026. 1:30:29तकलीफें मेरी। मेरा वादा है कि आज के बाद
  2027. 1:30:32किसी मुसीबत को तुम्हारे पास भी नहीं
  2028. 1:30:34भटकने दूंगा। शिप्रा से बात होने के बाद
  2029. 1:30:37शौर्य खुश था। उसे पता था कि यहां लाने के
  2030. 1:30:40पीछे इस परिवार का मकसद यही था कि सही समय
  2031. 1:30:42पर दोनों का तलाक हो जाए। जिससे सोसाइटी
  2032. 1:30:45में तरह-तरह की बातें ना हो। पर जब शिप्रा
  2033. 1:30:48ही तलाक के लिए तैयार नहीं है तो फिर
  2034. 1:30:50दोनों का तलाक होने से रहा। खैर, कुछ देर
  2035. 1:30:52बाद शौर्य वहां से गिरधर के क्वार्टर में
  2036. 1:30:54पहुंचा। अब तक गिरधर ने खाना बना लिया था।
  2037. 1:30:57शौर्य के आने के बाद गिरधर ने अपने साथ
  2038. 1:30:59उसका भी खाना लगा दिया था। गिरधर को शिप
  2039. 1:31:02और श्रवण के रिश्ते के बारे में पता था।
  2040. 1:31:04इसीलिए उसने श्रवण से इस बारे में कुछ
  2041. 1:31:06पूछा नहीं। अगली सुबह 10:00 बजे का समय
  2042. 1:31:09था। बलवंत राय डाइनिंग हॉल में अपने तीनों
  2043. 1:31:12बेटों बृजभूषण, राजदीप और जगताप राय के
  2044. 1:31:15साथ बैठे हुए थे और अभी-अभी संतोष चाय की
  2045. 1:31:17ट्रे डाइनिंग टेबल पर रखकर गई थी। तभी
  2046. 1:31:20जगताप राय ने चार कप में चाय निकाली और एक
  2047. 1:31:23कप अपने पिता के सामने कर दिया। बाकी
  2048. 1:31:26भाइयों ने अपना कप स्वयं लिया। अभी किसी
  2049. 1:31:28ने कोई बात शुरू नहीं की थी। [संगीत] उसी
  2050. 1:31:30समय बृजभूषण राय ने चाय की चुस्की लेते
  2051. 1:31:33हुए कहा, क्या बात है पिताजी? कुछ जरूरी
  2052. 1:31:36है क्या जो आपने हम तीनों को एक साथ
  2053. 1:31:38बुलाया है? हां है तो कुछ जरूरी बात।
  2054. 1:31:41बलवंत राय गंभीर स्वर में बोले। इस पर
  2055. 1:31:44जगताप उत्सुकता से बोल उठा। [संगीत]
  2056. 1:31:46क्या बात है पिताजी बताइए? तभी बलवंत जी
  2057. 1:31:49तीनों के चेहरे की तरफ ध्यान से देखते हुए
  2058. 1:31:51बोले। अभी थोड़ी देर पहले मुख्तार का फोन
  2059. 1:31:54आया था। यह सुनकर राजदीप [संगीत] तुरंत
  2060. 1:31:57बोल उठा मुख्तार का पर उसने आपको क्यों
  2061. 1:32:00कॉल किया था? तभी बलवंत जी ने बात को
  2062. 1:32:03स्पष्ट करते हुए बताया वो हमसे मिलना
  2063. 1:32:06चाहता है। पर उसने मिलने का कारण नहीं
  2064. 1:32:08बताया। तो फिर आपने क्या कहा उससे? जगताप
  2065. 1:32:12ने हैरानी से पूछा। तो बलवंत राय ने
  2066. 1:32:14सामान्य स्वर में जवाब दिया। [संगीत] हम
  2067. 1:32:17उससे जरूर मिलेंगे लेकिन आज नहीं। कल इतना
  2068. 1:32:21कहकर बलवंत राय ने एक नजर अपने बेटों को
  2069. 1:32:23देखा और फिर तुरंत बोले मैंने सोचा एक बार
  2070. 1:32:26तुम लोगों से [संगीत] भी बात कर लूं कि
  2071. 1:32:28तुम सबका क्या विचार है इस बारे में। इस
  2072. 1:32:31पर राजदीप ने कुछ सोचते हुए कहा क्या उससे
  2073. 1:32:34मिलना
  2074. 1:32:35[संगीत]
  2075. 1:32:35ठीक रहेगा पिताजी? क्या पता वो रजत को
  2076. 1:32:38लेकर बात करना चाहता हो क्योंकि कल की
  2077. 1:32:40उसकी हरकत के कारण उसका बेल कैंसिल हो गया
  2078. 1:32:43है। इसीलिए शायद वह समझौता करना चाहता हो
  2079. 1:32:45ताकि वो अपने भाई को बचा सके। इस पर बलवंत
  2080. 1:32:48राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा, बात चाहे
  2081. 1:32:51जो भी हो वो तो हमें मिलने पर ही पता
  2082. 1:32:54चलेगा। वैसे मैंने अभी मीटिंग के लिए हां
  2083. 1:32:56नहीं कहा है। मैंने सिर्फ यह कहा है कि कल
  2084. 1:32:59देखते हैं। तो बताओ क्या राय है तुम सभी
  2085. 1:33:02की? वैसे मिलके देखने में कोई हर्ज नहीं
  2086. 1:33:06है। कम से कम यह तो पता चलेगा कि वह चाहता
  2087. 1:33:09क्या है। बड़े भाई बृजभूषण ने शांति से
  2088. 1:33:12अपना विचार व्यक्त किया। इसके बाद जगताप
  2089. 1:33:15ने भी सहमति में सिर हिलाते हुए कहा, हां
  2090. 1:33:18पिताजी हमें मिल लेना चाहिए। वैसे भी यह
  2091. 1:33:20बदमाश लोग हैं। अगर इनसे मिलकर कोई बीच का
  2092. 1:33:23रास्ता निकल सकता है तो इसमें बुराई ही
  2093. 1:33:25क्या होगी? हम इन जैसे लोगों से दुश्मनी
  2094. 1:33:28मोल लेकर चैन से नहीं रह पाएंगे। पर इस
  2095. 1:33:31सबके बीच में राजदीप खामोश रहा। उन्होंने
  2096. 1:33:34अपना कोई भी विचार व्यक्त नहीं किया। और
  2097. 1:33:36तभी राजदीप को खामोश देखकर बलवंत जी ने
  2098. 1:33:39पूछ [संगीत] ही लिया। तुम क्या सोचते हो
  2099. 1:33:42राजदीप? तुम क्या चाहते हो? तुम भी तो
  2100. 1:33:45अपना विचार दो। इस पर राजदीप ने शांत स्वर
  2101. 1:33:48में कहा, आप ही देख [संगीत] लीजिए पिताजी।
  2102. 1:33:51आपको जो सही लगता है वो कीजिए। मुझे कोई
  2103. 1:33:54आपत्ति नहीं है। तो ठीक है। मैं उसे कल का
  2104. 1:33:57समय दे देता हूं। तुम [संगीत] लोगों में
  2105. 1:33:59से कोई चलेगा मेरे साथ। इतना कहकर बलवंत
  2106. 1:34:02जी ने तीनों की तरफ देखा तो बृजभूषण ने
  2107. 1:34:04सहमति जताते हुए कहा, "अगर आप कहें तो मैं
  2108. 1:34:08चलता हूं।" तो फिर यह तय रहा। कल तुम मेरे
  2109. 1:34:11साथ रहना। मैं मिलने की कोई जगह फिक्स कर
  2110. 1:34:14लेता हूं क्योंकि यहां घर या ऑफिस बुलाना
  2111. 1:34:16ठीक नहीं है। यह कहते हुए बलवंत जी वहां
  2112. 1:34:19से चल दिए। शौर्य अपने क्वार्टर में था।
  2113. 1:34:22यहां पर उसकी पहली रात ठीक-ठाक बीती थी।
  2114. 1:34:24तभी अचानक उसे पुजारी बाबा का ख्याल आया।
  2115. 1:34:28असल में शौर्य ने उनको बताया भी नहीं कि
  2116. 1:34:30वो अब राय साहब की हवेली में ही रहने वाला
  2117. 1:34:32है। यह सोचकर उसने गिरधर से मोबाइल मांगा
  2118. 1:34:35और पुजारी बाबा का नंबर मिलाया। दो-तीन
  2119. 1:34:38रिंग के बाद ही दूसरी तरफ से फोन उठाया
  2120. 1:34:40गया।
  2121. 1:34:41हेलो इस पर शौर्य ने शांत आवाज में कहा,
  2122. 1:34:45"हेलो पुजारी बाबा, मैं श्रवण बोल रहा
  2123. 1:34:47हूं।" शौर्य अपना असली नाम बोलते बोलते
  2124. 1:34:50संभल गया। तभी सामने से पुजारी बाबा की
  2125. 1:34:52खुशी से भरी आवाज आई।
  2126. 1:34:54अरे बेटा कहां हो तुम?
  2127. 1:34:56इस पर शौर्य ने क्षमा मांगते हुए कहा।
  2128. 1:34:59क्या कहूं बाबा? आपको बताने का समय ही
  2129. 1:35:01[संगीत] नहीं मिला। मुझे लगा कि आप चिंता
  2130. 1:35:04कर रहे होंगे। इसीलिए मैंने गिरधर काका के
  2131. 1:35:06मोबाइल से आपको फोन लगा दिया।
  2132. 1:35:09मुझे तुम्हारी चिंता हो रही थी। तुम ठीक
  2133. 1:35:11तो हो ना बेटे।
  2134. 1:35:13पुजारी बाबा ने पूछा तो शौर्य ने उन्हें
  2135. 1:35:15आश्वस्त करते हुए जवाब दिया। आप मेरी
  2136. 1:35:18चिंता मत करो। मैं [संगीत] बिल्कुल ठीक
  2137. 1:35:20हूं। उसी पल पुजारी बाबा तुरंत बोल पड़े।
  2138. 1:35:23अरे हां मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता
  2139. 1:35:25था। बेटे कल तुम्हारे लिए किसी विक्रम का
  2140. 1:35:28फोन आया था। तुम यहां थे नहीं तो उसने
  2141. 1:35:31मुझसे हमारे मंदिर का पता ले लिया। वो कह
  2142. 1:35:34रहा था कि वो तुम्हें ढूंढने के लिए यहां
  2143. 1:35:36आएगा।
  2144. 1:35:37यह सुनते ही शौर्य परेशान हो गया। वो नहीं
  2145. 1:35:39चाहता था कि विक्रम फिलहाल इंडिया आए। पर
  2146. 1:35:42जब उसने विक्रम से दोबारा बात नहीं की तो
  2147. 1:35:44जाहिर है वह अपने बॉस को ढूंढना चाहेगा।
  2148. 1:35:47शौर्य विक्रम से राय मेंशन में नहीं मिल
  2149. 1:35:49सकता था। इसलिए कुछ सोच कर उसने पुजारी से
  2150. 1:35:51कहा बाबा मैं आता हूं आपके पास। अगर
  2151. 1:35:54विक्रम मुझसे पहले वहां आ गया तो आप उसे
  2152. 1:35:57बैठा कर रखिएगा।
  2153. 1:35:59ठीक है बेटे तुम जल्दी से आ जाओ।
  2154. 1:36:02इतना कहकर पुजारी ने फोन काट दिया। और
  2155. 1:36:05यहां शौर्य ने गिरधर काका से विनती करते
  2156. 1:36:07हुए पूछा। काका आप मुझे ₹1 ₹200 दे सकते
  2157. 1:36:11हैं क्या? मुझे मंदिर तक जाना है और मेरे
  2158. 1:36:13पास पैसे नहीं है। यह सुनते ही गिरधर ने
  2159. 1:36:16जेब से 200 का नोट निकालकर शौर्य को दिया।
  2160. 1:36:18नोट लेते हुए शौर्य ने वादा किया
  2161. 1:36:22मैं जल्दी ही आपके पैसे लौटा दूंगा। अरे
  2162. 1:36:25यह तुम कैसी बात कर रहे हो? गिरधर ने
  2163. 1:36:27अपनेपन के साथ कहा। हड़बड़ी [संगीत] में
  2164. 1:36:29वहां से निकलते हुए शौर्य बोला। बाबा मैं
  2165. 1:36:32बैकुंठपुर के मंदिर तक जाकर आता हूं। अगर
  2166. 1:36:35कोई पूछे तो बता दीजिएगा कि मैं जल्दी ही
  2167. 1:36:37वापस आ जाऊंगा। शौर्य सोच रहा था कि वह
  2168. 1:36:40विक्रम को फोन करके उसे यहां आने के लिए
  2169. 1:36:42मना कर देगा। इसी नियत के साथ वो तुरंत ही
  2170. 1:36:44पुजारी बाबा के कमरे में पहुंच गया। लेकिन
  2171. 1:36:47इससे पहले कि वहां पुजारी बाबा से फोन
  2172. 1:36:49मांगता पुजारी बाबा बोल उठे। अरे वाह इन
  2173. 1:36:53कपड़ों में तो तुम बहुत अच्छे लग रहे हो
  2174. 1:36:55श्रवण। इस पर शौर्य मुस्कुराते हुए बोला,
  2175. 1:36:59हां, यह राय साहब के लड़के ने खरीद कर दिए
  2176. 1:37:01हैं। लेकिन आप यह सब छोड़िए पहले बताइए कि
  2177. 1:37:04क्या फिर इसे विक्रम का कॉल आया था?
  2178. 1:37:07नहीं, अभी तो नहीं आया। कहते हुए पुजारी
  2179. 1:37:10बाबा ने सिर हिला दिया। तभी शौर्य ने
  2180. 1:37:12अनुरोध किया। बाबा क्या आप मुझे अपना फोन
  2181. 1:37:15दे सकते हैं? इस पर पुजारी बाबा ने तुरंत
  2182. 1:37:18अपना फोन आगे कर दिया और शौर्य ने भी बिना
  2183. 1:37:20देरी किए विक्रम का नंबर डायल कर दिया।
  2184. 1:37:24हेलो। विक्रम की आवाज आई तो शौर्य ने बिना
  2185. 1:37:27कोई हालचाल पूछे तुरंत कहा हेलो कहां हो
  2186. 1:37:30तुम?
  2187. 1:37:31मैं बस पहुंचने ही वाला हूं बॉस।
  2188. 1:37:33विक्रम ने उत्सुकता से कहा तो शौर्य
  2189. 1:37:35नाराजगी के साथ बोला अरे यार आने से पहले
  2190. 1:37:37एक बार कॉल तो कर लिया होता। यह सुनकर
  2191. 1:37:40विक्रम ने धीमी आवाज में स्पष्टीकरण देते
  2192. 1:37:42हुए कहा, "फोन तो किया था बॉस।" पुजारी जी
  2193. 1:37:46से बात भी हुई थी। उन्होंने बताया कि आपको
  2194. 1:37:48पुलिस ले गई है तो मुझे कुछ समझ ही नहीं
  2195. 1:37:50आया। और जब आपके डैड को यह पता चला तो
  2196. 1:37:52उन्होंने मुझे जल्दी से यहां भेज दिया।
  2197. 1:37:55यह सुनते ही शौर्य की आंखें चौड़ी हो गई
  2198. 1:37:57और वो आश्चर्य से बोला यानी डैड को तुमने
  2199. 1:38:00मेरे बारे में बता दिया।
  2200. 1:38:01बॉस मैं यहां मंदिर पहुंच चुका हूं। मैं
  2201. 1:38:04आपको सारी बातें सामने आकर ही बताता हूं।
  2202. 1:38:07ठीक है। इतना बोलकर शौर्य ने फोन कट कर
  2203. 1:38:10दिया और फिर पुजारी से बोला बाबा क्या
  2204. 1:38:13प्लीज विक्रम को यहां ले आएंगे?
  2205. 1:38:16ठीक है। मैं अभी उन्हें लेकर आता हूं।
  2206. 1:38:19बोलकर पुजारी बाबा वहां से निकल गए। फिर
  2207. 1:38:21मंदिर की सीढ़ियों के पास पुजारी ने देखा
  2208. 1:38:23कि सूट बूट में एक आदमी खड़ा है। उसे
  2209. 1:38:26देखकर ही वह समझ गए कि यही विक्रम होगा।
  2210. 1:38:28उन्होंने उसके पास जाकर तुरंत पूछा। बेटा
  2211. 1:38:31क्या आप ही विक्रम हो? जी हां क्या आप?
  2212. 1:38:34इससे पहले कि विक्रम कुछ कहता। पुजारी ने
  2213. 1:38:37सादगी के साथ कहा। आप चलिए मेरे साथ। यह
  2214. 1:38:40सुनकर विक्रम उनके पीछे हो लिया। फिर जब
  2215. 1:38:43वह कमरे में पहुंचा तो अपने बॉस शौर्य को
  2216. 1:38:45पहचान ही नहीं पाया। और इधर-उधर नजर
  2217. 1:38:47दौड़ाते हुए बोला, "बॉस कहां है?" पुजारी
  2218. 1:38:51बाबा को समझ नहीं आया कि विक्रम उनसे क्या
  2219. 1:38:53पूछ रहा है। जबकि शौर्य के चेहरे पर
  2220. 1:38:56मुस्कान तैर रही थी। उलझन भरी निगाह के
  2221. 1:38:58साथ पुजारी शौर्य की तरफ देखने लगा।
  2222. 1:39:02और जब विक्रम ने उनकी निगाहों का पीछा
  2223. 1:39:04करते हुए बेतरतीब ढंग से बढ़ी दाढ़ी वाले
  2224. 1:39:06शख्स को गौर से देखा, तो वो दाढ़ी के पीछे
  2225. 1:39:09छिपे चेहरे को पहचान गया, और उत्सुकता से
  2226. 1:39:12बोल उठा। यह आप हो बॉस। क्या हाल बना रखा
  2227. 1:39:16है आपने अपना?
  2228. 1:39:18क्या हुआ? पहचान में नहीं आ रहा हूं ना।
  2229. 1:39:21शौर्य ने मुस्कुराते हुए पूछा। इस पर
  2230. 1:39:23विक्रम मुंह बनाते हुए बोला, "क्या बात कर
  2231. 1:39:26रहे हो बॉस? मैं तो सोच भी नहीं सकता था
  2232. 1:39:28कि आपको कभी इस हाल में भी देखूंगा।" क्या
  2233. 1:39:31बॉस अगर आपको दाढ़ी बढ़ानी ही थी, तो कम
  2234. 1:39:33से कम इसे सही से ट्रिम तो करवा लेते।
  2235. 1:39:36विक्रम की यह बात सुनकर पुजारी बाबा सोचने
  2236. 1:39:38लगे कि अभी तो यह फिर भी ठीक हालत में है।
  2237. 1:39:41अगर विक्रम इसको पहले के फटे हाल में देख
  2238. 1:39:43लेता तो पता नहीं शायद बेहोश ही हो जाता।
  2239. 1:39:46इस विचार के साथ आखिर पुजारी बाबा से रहा
  2240. 1:39:48नहीं गया और वह तुरंत बोल उठे विक्रम बेटे
  2241. 1:39:52तुमने आने में थोड़ी देर कर दी। कुछ दिन
  2242. 1:39:55पहले तो इसका हाल और भी बुरा था। यह सुनकर
  2243. 1:39:58विक्रम दोबारा शौर्य की ओर देखने लगा और
  2244. 1:40:00चिंता जाहिर करते हुए बोला, "क्यों बॉस,
  2245. 1:40:03आपने ऐसा हाल क्यों बना रखा है? मैं ऐसी
  2246. 1:40:06हालत में रहा इसीलिए जिंदा हूं। किसी की
  2247. 1:40:09नजर मेरी तरफ नहीं पड़ी। अगर मैं बन ठन के
  2248. 1:40:11रहता तो छुपना मुश्किल हो जाता। कहते हुए
  2249. 1:40:14शौर्य ने एक गहरी सांस ली। अच्छा छोड़ो इन
  2250. 1:40:17बातों को। मैंने तुम्हें मना किया था डैड
  2251. 1:40:20से बताने को फिर भी तुमने उनको बता दिया।
  2252. 1:40:23शौर्य ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा।
  2253. 1:40:26इस पर वो दुखी स्वर में बोला। सॉरी बॉस
  2254. 1:40:29लेकिन आप तो यहां अज्ञात वास काट रहे थे।
  2255. 1:40:31पर आपको कुछ पता भी है कि अंकल और आंटी का
  2256. 1:40:33क्या हाल है। जब से उनको पता चला है कि आप
  2257. 1:40:36नहीं रहे उनकी जीने की इच्छा ही खत्म हो
  2258. 1:40:38गई। आपके डैड ने बिजनेस पर ध्यान देना तो
  2259. 1:40:41छोड़ ही दिया था। इतना कहकर उसने एक नजर
  2260. 1:40:44शौर्य को देखा और फिर एक गहरी सांस लेकर
  2261. 1:40:46बोला यही नहीं इसके बाद एक और परेशानी
  2262. 1:40:48खड़ी हो गई। दो दिन पहले आपके दादाजी का
  2263. 1:40:51फोन आया था। उनकी तबीयत भी ठीक नहीं रहती।
  2264. 1:40:54आपकी मौत की वजह वो खुद को ही मान रहे
  2265. 1:40:56हैं। उनको लगता है कि उन्हीं की जिद के
  2266. 1:40:59कारण आप इंडिया आए थे और एक्सीडेंट में
  2267. 1:41:01आपकी मौत हो गई। उन्हें लगता है कि अगर
  2268. 1:41:03उन्होंने आपको इंडिया आने के लिए नहीं कहा
  2269. 1:41:05होता तो शायद आप जिंदा होते। अब वो लास्ट
  2270. 1:41:08समय में यह चाहते हैं कि आपके पिता यहां
  2271. 1:41:10आकर अपने हक की संपत्ति अपने नाम कर लें।
  2272. 1:41:13नहीं तो आपके दादाजी के बाद उनके भाई-बहन
  2273. 1:41:16कुछ भी उनके लिए नहीं छोड़ने वाले।
  2274. 1:41:19इतना बोलकर विक्रम चुप हो गया। फिर एक पल
  2275. 1:41:21की खामोशी के बाद आखिरकार शौर्य ने फिर से
  2276. 1:41:24सवाल किया।
  2277. 1:41:26तो फिर पापा ने दादाजी को क्या जवाब दिया?
  2278. 1:41:29वो क्या ही कहते वो तो कुछ भी लेने से मना
  2279. 1:41:32करने वाले थे। उनका कहना था जिसके लिए
  2280. 1:41:34उन्होंने इतना बड़ा एंपायर खड़ा किया जब
  2281. 1:41:36उसको भोगने वाला ही नहीं रहा तो अब वो
  2282. 1:41:38अपनी पुश्तैनी संपत्ति लेकर क्या ही
  2283. 1:41:40करेंगे। वो सब कुछ छोड़ना चाहते थे। वो
  2284. 1:41:43कहने वाले थे कि उनके हिस्से की संपत्ति
  2285. 1:41:45भी उनके भाई बहनों को ही दे दें। तब मुझे
  2286. 1:41:48उनको आपकी सच्चाई बतानी पड़ी।
  2287. 1:41:51इतना कहकर आखिरकार विक्रम ने शौर्य को
  2288. 1:41:53पूरा माजरा समझा दिया। इसके बाद अचानक
  2289. 1:41:56विक्रम को कुछ याद आया और वो आगे बोला
  2290. 1:42:00आपकी मां तो उसी समय आपसे बात करना चाहती
  2291. 1:42:03थी। पर पुजारी बाबा से बात करने पर पता
  2292. 1:42:05चला कि आपको पुलिस लेके गई है। जैसे ही
  2293. 1:42:08अंकल को पता चला कि आपको पुलिस ले गई है
  2294. 1:42:10तो उन्होंने उसी समय मुझे यहां भेज दिया।
  2295. 1:42:13तभी शौर्य ने धीमी आवाज में पूछा। अब पापा
  2296. 1:42:17मम्मी कैसे हैं? इस पर विक्रम शौर्य की
  2297. 1:42:19आंखों में देखते हुए भावुक होकर बोला, आप
  2298. 1:42:22एक बार उनसे बात कर लीजिए। जब तक आप बात
  2299. 1:42:25नहीं करेंगे, उनको चैन नहीं मिलेगा। खासकर
  2300. 1:42:28आपकी मॉम को मेरे यहां लैंड करने के बाद
  2301. 1:42:31भी कई बार उनका फोन आ चुका है। मां के
  2302. 1:42:34बारे में जानकर शौर्य को थोड़ा बुरा लगा
  2303. 1:42:36और उसने फौरन कहा, "फोन लगाओ मॉम को।"
  2304. 1:42:40विक्रम ने तुरंत फोन लगा दिया और तुरंत ही
  2305. 1:42:42फोन उठा लिया गया। मानो शौर्य की मां इसी
  2306. 1:42:45कॉल का इंतजार कर रही थी। शौर्य को अपनी
  2307. 1:42:48मां की घबराई हुई आवाज सुनाई दी।
  2308. 1:42:50शौर्य बेटा
  2309. 1:42:52मां की आवाज सुनकर शौर्य की आंखें नम हो
  2310. 1:42:55आई। हां मॉम। कहते हुए शौर्य की आवाज भररा
  2311. 1:42:59गई। कुछ देर के लिए खामोशी छा गई। ऐसा लग
  2312. 1:43:02रहा था जैसे मां का गला भी भर आया है।
  2313. 1:43:05उन्होंने खुद को कंट्रोल किया और वात्सल्य
  2314. 1:43:07से भरी आवाज में बोली।
  2315. 1:43:09बेटा तुझे एक बार भी अपनी मां पर तरस नहीं
  2316. 1:43:12आया। इस पर शौर्य ने अपने आंसुओं को पोछा
  2317. 1:43:15और मां को समझाते हुए बोला,
  2318. 1:43:18"ऐसी बात नहीं है मॉम। जब तक मैं इस लायक
  2319. 1:43:21हुआ कि किसी को अपने बारे में बता पाऊं,
  2320. 1:43:24तब तक बहुत लेट हो चुका था। ऑलरेडी सब जगह
  2321. 1:43:27यह बात कंफर्म हो गई थी कि मैं मर चुका
  2322. 1:43:30हूं। सब ने मुझे मरा हुआ मान लिया तो
  2323. 1:43:32मैंने भी सोचा कि यह समय मेरी हीलिंग के
  2324. 1:43:35लिए ठीक है। मैं जानता हूं इससे आपको बहुत
  2325. 1:43:38दुख पहुंचा होगा मॉम। लेकिन मैं सही समय
  2326. 1:43:40पर दुनिया के सामने आना चाहता था।
  2327. 1:43:43तभी मां ने उसे बीच में ही टोकते हुए कहा,
  2328. 1:43:45हां तो तुम दुनिया से छुपते रहते ना बच्चा
  2329. 1:43:48पर मुझे तो बता सकते थे। अरे मैं मां हूं
  2330. 1:43:51तुम्हारी। [संगीत] बच्चे की मौत की खबर
  2331. 1:43:54सुनकर मां पर क्या बीतती है शायद इसका
  2332. 1:43:55अंदाजा नहीं है तुम्हें। कहते हुए शौर्य
  2333. 1:43:58की मां कल्पना राठौड़ अपने आंसुओं को
  2334. 1:44:00रोकने की भरपूर कोशिश कर रही थी। मैं
  2335. 1:44:03समझता हूं मॉम मैं आप दोनों का गुनहगार
  2336. 1:44:06हूं। मैं आपके सामने आकर ही आपको वो खुशी
  2337. 1:44:08देना चाहता था। लेकिन अब मुझे लग रहा है
  2338. 1:44:11कि मुझे आपको पहले ही बता देना चाहिए था।
  2339. 1:44:15शौर्य को ऐसा लग रहा था कि जैसे सच में वो
  2340. 1:44:17अपनी मां के इमोशन को समझ नहीं पाया। और
  2341. 1:44:20तभी वो रुआसा होकर बोला कि प्लीज मुझे माफ
  2342. 1:44:23कर दो मॉम।
  2343. 1:44:25बस कर अब ऐसे मत बोल। तुमसे बात कर ली ना
  2344. 1:44:29तो अब मुझे तसल्ली है। ले अपने डैड से भी
  2345. 1:44:33बात कर ले। इतना बोलकर कल्पना जी ने शौर्य
  2346. 1:44:36के पापा सूर्यभान राठौड़ को फोन थमा दिया
  2347. 1:44:38और तभी सूर्यभान जी ने अपनी आवाज को थोड़ा
  2348. 1:44:41कड़क करने की कोशिश करते हुए पूछा
  2349. 1:44:44कैसा है तू नालायक
  2350. 1:44:46इस पर शौर्य ने इमोशनल होकर कहा आई एम
  2351. 1:44:50सॉरी डैड [संगीत] मुझे आपको पहले ही खबर
  2352. 1:44:52कर देनी चाहिए थी यह सुनते ही सूर्यभान
  2353. 1:44:55पिघल गए और नरम लहजे में बोले
  2354. 1:44:57कोई बात नहीं मेरे बच्चे [संगीत] तुम ठीक
  2355. 1:45:00हो यही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी की बात है
  2356. 1:45:03इसके बाद उन्होंने खुद को संभाला और गंभीर
  2357. 1:45:05लहजे में बोले
  2358. 1:45:07वैसे विक्रम [संगीत] से तुम्हें तुम्हारे
  2359. 1:45:09दादाजी के बारे में पता चल ही गया होगा।
  2360. 1:45:12तुम्हारे साथ जो हुआ उसके लिए वो खुद को
  2361. 1:45:14ही जिम्मेदार मान रहे हैं। उनको जब पता
  2362. 1:45:17चलेगा कि तुम ठीक हो तो शायद वो भी अपने
  2363. 1:45:19[संगीत] गिल्ट से बाहर आ पाएंगे।
  2364. 1:45:21इस पर शौर्य ने आश्वासन देते हुए कहा मैं
  2365. 1:45:24समझ गया डैड मैं जल्द ही उनसे मिलूंगा।
  2366. 1:45:28ठीक है। जैसा तुम्हें ठीक लगे तुम करना पर
  2367. 1:45:31अपना ध्यान रखना बेटा।
  2368. 1:45:33सूर्यभान जी की बातों में शौर्य के लिए
  2369. 1:45:35चिंता साफ झलक रही थी और [संगीत] तभी
  2370. 1:45:36शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ कहा जरूर
  2371. 1:45:39डैड आप भी अपना और मॉम का ख्याल रखना।
  2372. 1:45:43आंखों से आंसू पोछते हुए शौर्य ने फोन काट
  2373. 1:45:46दिया और [संगीत] विक्रम को वापस कर दिया।
  2374. 1:45:48इसके बाद विक्रम ने गंभीरता से पूछा।
  2375. 1:45:50[संगीत]
  2376. 1:45:51अब बताइए बॉस आपको क्यों लगता है कि आपको
  2377. 1:45:54मारने की कोशिश हुई थी? अब बताइए बॉस आपको
  2378. 1:45:57क्यों लगता है कि आपको मारने की कोशिश हुई
  2379. 1:45:59थी? विक्रम की बात सुनकर शौर्य ने उसे
  2380. 1:46:02ध्यान से देखा। फिर गंभीर लहजे में बोला,
  2381. 1:46:06"तुम्हें क्या लगता है कि मैं गलत बोल रहा
  2382. 1:46:08हूं?" इस पर विक्रम एक पल के लिए सकपका
  2383. 1:46:10गया और फिर संकोच भरी आवाज में बोला, "अरे
  2384. 1:46:13नहीं, मैंने यह नहीं कहा बॉस।" मैं तो बस
  2385. 1:46:16यह जानना चाहता हूं कि आपका ऐसा कहने के
  2386. 1:46:18पीछे वजह क्या है?" यह सुनकर शौर्य के
  2387. 1:46:21चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई और उसने सब
  2388. 1:46:23कुछ विस्तार से बताना शुरू किया। ठीक है।
  2389. 1:46:26तुम जानना चाहते हो तो सुनो। जब मैं यूके
  2390. 1:46:29से मुंबई लैंड किया तो मुझे लेने के लिए
  2391. 1:46:31दादाजी ने अपना प्राइवेट प्लेन भेजा था।
  2392. 1:46:33फिर जैसे ही हमने मुंबई से उड़ान भरी तो
  2393. 1:46:36थकावट और जेट लैग के कारण मुझे नींद आ गई।
  2394. 1:46:39पर कुछ देर बाद अचानक किसी आहट से मेरी
  2395. 1:46:41नींद खुली और मैंने देखा कि कोई चाकू लेकर
  2396. 1:46:44मुझ पर हमला करने वाला है। मुझे नहीं पता
  2397. 1:46:46वो कौन था और मेरे प्लेन में कैसे आया।
  2398. 1:46:49[संगीत] मैंने जैसे तैसे करके खुद को उसके
  2399. 1:46:51वार से बचाया। हमारे बीच अच्छी खासी
  2400. 1:46:54हाथापाई हुई और जब वो मुझे काबू नहीं कर
  2401. 1:46:56पाया तो उसने मुझ पर पिस्तल तान दी और फिर
  2402. 1:46:59गोली चला दी। मैं बचने के लिए झट से हटा
  2403. 1:47:01लेकिन गोली मेरी कमर को चीरती हुई पीछे
  2404. 1:47:03प्लेन में जा लगी। कहते हुए शौर्य की
  2405. 1:47:06आंखों के सामने वो मंजर आ गया। उसने एक
  2406. 1:47:09गहरी सांस ली और अपनी बात जारी रखते हुए
  2407. 1:47:11बोला। शायद प्लेन का कोई जरूरी हिस्सा
  2408. 1:47:14डैमेज हो गया था। इसीलिए उसने अपना बैलेंस
  2409. 1:47:17खो दिया जिससे हत्यारा भी कुछ पल के लिए
  2410. 1:47:19डगमगा गया और मुझे मौका मिल गया। मैं समझ
  2411. 1:47:22गया था कि प्लेन क्रैश होने वाला है।
  2412. 1:47:24इसीलिए मैंने पैराशूट निकाल लिया और इससे
  2413. 1:47:26पहले कि वो हत्यारा फिर से मुझ पर गोली
  2414. 1:47:28चलाता मैं बिना देरी किए इमरजेंसी गेट
  2415. 1:47:31खोलकर बाहर कूद गया। अब इसे अच्छा नसीब
  2416. 1:47:35[संगीत] कहेंगे या बुरा मैं सीधे नदी में
  2417. 1:47:37गिरा और मेरे सामने ही प्लेन जमीन से टकरा
  2418. 1:47:39कर ब्लास्ट हो गया।
  2419. 1:47:42इतना कहकर शौर्य ने एक नजर पुजारी बाबा को
  2420. 1:47:44देखा जो शौर्य की बात को बेहद ध्यान से
  2421. 1:47:46सुन रहे थे। उनके चेहरे पर हैरानी के भाव
  2422. 1:47:49देखे जा सकते थे। तभी शौर्य ने आगे कहा
  2423. 1:47:53मेरे शरीर से बहुत ज्यादा खून बहने के
  2424. 1:47:55कारण मुझ पर बेहोशी छाने लगी थी। मुझे बस
  2425. 1:47:58इतना याद है कि बेहोश होने से पहले दो
  2426. 1:48:00हाथों ने मुझे थाम लिया। और जब मुझे होश
  2427. 1:48:03आया तो मैं एक मछुआरे की झोपड़ी में था।
  2428. 1:48:06शौर्य ने पूरा वाक्य सुना दिया जिसे सुनकर
  2429. 1:48:09विक्रम तो हैरान था ही लेकिन पुजारी बाबा
  2430. 1:48:12को देखकर ऐसा लग रहा था मानो उनके प्राण
  2431. 1:48:14पखेरू उड़ चुके हैं।
  2432. 1:48:18तो मतलब तुम वही शौर्य शौर्य राठौड़ हो
  2433. 1:48:23जिसकी मौत प्लेन दुर्घटना में हुई थी।
  2434. 1:48:26यानी तुम राजा साहब के पोते हो। पुजारी ने
  2435. 1:48:29हैरानी में लगभग हकलाते हुए पूछा। इस पर
  2436. 1:48:32शौर्य कुछ नहीं बोला। बस उसने सहमति में
  2437. 1:48:34अपना सिर हिला दिया। तभी पुजारी बाबा ने
  2438. 1:48:38हमदर्दी और चिंता जाहिर करते हुए कहा, "हे
  2439. 1:48:41भगवान, इतने बड़े घर का वारिस होने के बाद
  2440. 1:48:44भी तुम यहां इस मंदिर में एक भिखारी सी
  2441. 1:48:47जिंदगी जीते रहे।" तभी विक्रम के दिमाग
  2442. 1:48:50में कुछ आया और उसने उत्सुकता से पूछा।
  2443. 1:48:53लेकिन बॉस जब आप मछुआरे के यहां थे तो फिर
  2444. 1:48:56इस मंदिर में कैसे आए? इस पर शौर्य ने
  2445. 1:48:58हल्के से मुस्कुराते हुए कहा। इसकी भी एक
  2446. 1:49:01कहानी है विक्रम। असल में उस वक्त मेरी
  2447. 1:49:03स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन मुझे पता चला
  2448. 1:49:06कि कुछ लोग मेरे बारे में पूछताछ कर रहे
  2449. 1:49:08हैं। मुझे समझ आ गया कि यह वही लोग होंगे
  2450. 1:49:10जो मुझे मारना चाहते हैं। वो मेरी मौत की
  2451. 1:49:13खबर को कंफर्म करना चाह रहे थे क्योंकि
  2452. 1:49:16प्लेन के साथ जो लाश के टुकड़े मिले थे वो
  2453. 1:49:18बुरी तरह जल चुके थे। इसीलिए पहचान करना
  2454. 1:49:21मुश्किल था औरकि उस प्लेन में मैं ही सफर
  2455. 1:49:24कर रहा था। इसीलिए यह मान लिया गया कि
  2456. 1:49:26मरने वाला व्यक्ति मैं ही था।
  2457. 1:49:29लेकिन जो मुझे मरवाना चाहता था उसके लिए
  2458. 1:49:31यह जानना जरूरी था कि मरने वाला मैं ही
  2459. 1:49:34हूं या उसका आदमी जिसे उसने मुझे मारने के
  2460. 1:49:37लिए भेजा था। इस तरह शौर्य की कहानी के
  2461. 1:49:40सभी पहलुओं को समझने के बाद विक्रम ने एक
  2462. 1:49:42राहत भरी सांस ली और बोला
  2463. 1:49:45जो भी हो बॉस आप बहुत लकी थे जो बच गए।
  2464. 1:49:49लेकिन अब आपका क्या प्लान है? आप दादा जी
  2465. 1:49:51के यहां जाने वाले हैं या नहीं। इस पर
  2466. 1:49:54शौर्य ने दृढ़ स्वर में कहा।
  2467. 1:49:57जब यहां तक आ गया हूं तो दादा जी से तो
  2468. 1:49:59मिलूंगा ही और उस आदमी का पता भी लगा के
  2469. 1:50:02रहूंगा जिसने मुझे मारने की कोशिश की थी।
  2470. 1:50:05तो फिर अभी चलें। विक्रम तो जैसे मिशन पर
  2471. 1:50:08जाने के लिए तैयार होकर ही आया था। लेकिन
  2472. 1:50:11शौर्य ने उसे रोकते हुए कहा अरे नहीं अभी
  2473. 1:50:14नहीं। अभी तो पहले मुझे कुछ और काम
  2474. 1:50:17निपटाने हैं। इतने दिनों में यहां बहुत
  2475. 1:50:20कुछ चेंज हो गया है। क्यों? ऐसा भी क्या
  2476. 1:50:23हो गया बॉस? पूछते हुए विक्रम के चेहरे पर
  2477. 1:50:26जानने की उत्कंठा प्रबल हो गई। तभी शौर्य
  2478. 1:50:30ने विक्रम को शिप्रा और उसकी शादी से
  2479. 1:50:32रिलेटेड सारी कहानी बताना शुरू की। यहां
  2480. 1:50:35दूसरी तरफ राय साहब की हवेली में शिप्रा
  2481. 1:50:37तैयार होकर डाइनिंग टेबल पर आकर बैठी।
  2482. 1:50:40राहुल भी सामने बैठा नाश्ता कर रहा था।
  2483. 1:50:43शिप्रा कई दिनों से ऑफिस नहीं गई थी।
  2484. 1:50:45इसीलिए आज उसे हर हाल में ऑफिस जाना है।
  2485. 1:50:48वो सिर्फ स्टाफ के भरोसे काम नहीं छोड़
  2486. 1:50:50सकती। राजदीप राय को वहां ना पाकर शिप्रा
  2487. 1:50:52ने बीना जी से पूछा
  2488. 1:50:54मां पापा दिखाई नहीं दे रहे हैं। वो ऑफिस
  2489. 1:50:57चले गए क्या? बीना जी ने शांत स्वर में
  2490. 1:50:59कहा। नहीं अभी नहीं वो बाबू जी से मिलने
  2491. 1:51:03गए हैं। पता नहीं क्यों उन्होंने
  2492. 1:51:05सुबह-सुबह बुला लिया। दादा जी ने बुलाया
  2493. 1:51:08है। शिप्रा ने हल्के संशय से पूछा। उसे
  2494. 1:51:11लगा कि हो ना हो जरूर उसी के बारे में कोई
  2495. 1:51:13बात करनी होगी। अभी शिप्रा के दिमाग में
  2496. 1:51:16यह ख्याल आया ही था कि उसी समय राजदीप
  2497. 1:51:18अंदर आते दिखाई दिए। शिप्रा कुछ कहती उससे
  2498. 1:51:21पहले ही राहुल ने पूछ लिया। पापा दादा जी
  2499. 1:51:24ने आपको सुबह-सुबह क्यों बुलाया था?
  2500. 1:51:26राजदीप अभी भी बलवंत राय की कही बातों में
  2501. 1:51:28उलझे हुए थे। वो ख्यालों में इस तरह डूबे
  2502. 1:51:31हुए थे कि उन्होंने राहुल का सवाल सुना ही
  2503. 1:51:33नहीं। जब शिप्रा ने देखा कि वो खोए हुए से
  2504. 1:51:36हैं तो उसने धीरे से पूछा क्या बात है
  2505. 1:51:39पापा? आप किस सोच में डूबे हैं? हां। क्या
  2506. 1:51:43कहा तुमने? कुछ पूछ रही थी। उनकी तंद्रा
  2507. 1:51:46टूटी तो शिप्रा ने दोबारा पूछा। पापा आपको
  2508. 1:51:49दादा जी ने बुलाया था। कोई खास बात है
  2509. 1:51:51क्या? राजदीप सोचने लगे कि शिप्रा को यह
  2510. 1:51:54बात बताना ठीक होगा या नहीं। फिर उन्हें
  2511. 1:51:57लगा कि छिपाने का भी कोई मतलब नहीं है।
  2512. 1:51:59इसीलिए वह बोले दरअसल पिताजी को मुख्तार
  2513. 1:52:02का फोन आया था। वो उनसे मिलना चाहता है।
  2514. 1:52:06मुख्तार दादाजी से मिलना चाहता है। पर
  2515. 1:52:09क्यों? शिप्रा को कुछ समझ नहीं आया। इस पर
  2516. 1:52:12राजदीप ने जवाब दिया। यह तो मिलने के बाद
  2517. 1:52:15ही पता चलेगा।
  2518. 1:52:17तो क्या दादाजी सच में मुख्तार से मिलने
  2519. 1:52:19वाले हैं? शिप्रा ने तपाक से पूछा तो
  2520. 1:52:22राजदीप ने शांत स्वर में कहा
  2521. 1:52:25वैसे एक बार मिलने में कोई बुराई नहीं है।
  2522. 1:52:28कम से कम यह तो पता चलेगा कि वो चाहता
  2523. 1:52:30क्या है? शिप्रा के मन में यही उत्कंठा थी
  2524. 1:52:33कि आखिर मुख्तार जैसा गुंडा दादाजी से
  2525. 1:52:35क्यों मिलना चाहता है? उसने पूछा दादाजी
  2526. 1:52:39मुख्तार से कब मिलने वाले हैं? कल
  2527. 1:52:41मिलेंगे। होटल राजकमल में मिलने का तय हुआ
  2528. 1:52:44है। राजदीप ने बताया। हालांकि उनके स्वर
  2529. 1:52:48में साफ झलक रहा था कि वो इस मुलाकात को
  2530. 1:52:50लेकर पूरी तरह सहज नहीं है। शिप्रा के मन
  2531. 1:52:52में आशंका उठी कहीं मुख्तार कोई गलत कदम
  2532. 1:52:56ना उठा ले। उसने पूछा क्या दादाजी अकेले
  2533. 1:52:59ही जाएंगे? अरे नहीं नहीं बड़े भाई साहब
  2534. 1:53:02भी उनके साथ जाएंगे और कुछ बॉडीगार्ड भी
  2535. 1:53:05रहेंगे। राजदीप ने स्पष्ट किया तो शिप्रा
  2536. 1:53:07ने हल्की राहत की सांस ली। अच्छा फिर ठीक
  2537. 1:53:10है। वैसे तुम कहां जाने के लिए तैयार बैठी
  2538. 1:53:14हो? राजदीप ने उसे सजी समरी देखकर पूछा तो
  2539. 1:53:17शिप्रा ने संयत स्वर में जवाब दिया ऑफिस
  2540. 1:53:20जाऊंगी पापा कई दिनों से नहीं गई हूं बहुत
  2541. 1:53:23सारे काम पेंडिंग पड़े हैं। इस पर राजदीप
  2542. 1:53:26जी ने हल्की नाराजगी के साथ कहा कुछ दिन
  2543. 1:53:29और नहीं जाओगी तो कोई आफत नहीं आ जाएगी।
  2544. 1:53:32आफत तो नहीं आएगी पापा लेकिन बहुत से काम
  2545. 1:53:34बिगड़ जाएंगे। मेरी कंपनी अभी शुरुआती दौर
  2546. 1:53:37में है। इस समय [संगीत] अगर मैंने ठीक से
  2547. 1:53:39ध्यान नहीं दिया तो जितनी जल्दी उसने नाम
  2548. 1:53:41कमाया है उतनी ही जल्दी नाम खराब भी हो
  2549. 1:53:43सकता है।
  2550. 1:53:44शिप्रा ने साफ शब्दों में अपनी चिंता
  2551. 1:53:46जाहिर की तो राजदीप ने भी अपनी चिंता
  2552. 1:53:49जाहिर करते हुए कहा
  2553. 1:53:51तुम समझती क्यों नहीं कल ही एक बड़ी घटना
  2554. 1:53:54होते-होते बची है। अगर फिर वैसा कुछ हुआ
  2555. 1:53:56तो पापा अगर मैं डर कर घर पर बैठ जाऊं तो
  2556. 1:54:00फिर कंपनी चलाने का क्या मतलब? मैं ऐसा
  2557. 1:54:02नहीं कर सकती। प्लीज किसी के डर से मैं घर
  2558. 1:54:05में नहीं बैठूंगी। चाहे उसके लिए मुझे
  2559. 1:54:07अपनी जान की बाजी ही क्यों ना लगानी पड़े।
  2560. 1:54:10शिप्रा ने दृढ़ स्वर में कहा क्योंकि अब
  2561. 1:54:12वह पीछे हटने वाली नहीं है। जब राजदीप ने
  2562. 1:54:15देखा कि शिप्रा को समझाने का कोई फायदा
  2563. 1:54:17नहीं है तो कुछ सोचकर उन्होंने कहा
  2564. 1:54:21ठीक है ठीक है करोगी तो तुम अपने मन की ही
  2565. 1:54:24लेकिन मेरी बस एक बात मान लो श्रवण को
  2566. 1:54:27अपने साथ ले जाओ यह सुनकर शिप्रा ने सहमति
  2567. 1:54:30में सिर हिलाया ठीक है पापा आपकी तसल्ली
  2568. 1:54:34के लिए मैं उसे अपने साथ ले जाऊंगी इतना
  2569. 1:54:36कहकर शिप्रा अपनी जगह से उठी और बाहर जाते
  2570. 1:54:39हुए बोली आपको भी तो ऑफिस जाना चाहिए बड़े
  2571. 1:54:42चाचा भी आपके काम पर अपनी नजर गड़ाए बैठे
  2572. 1:54:45हैं। मुझे पता है तुम मेरी चिंता मत करो।
  2573. 1:54:48मैं सब संभाल लूंगा। मैं भी थोड़ी देर में
  2574. 1:54:51ऑफिस जाने वाला हूं। राजदीप जी ने जवाब
  2575. 1:54:54दिया। शिप्रा वहां से निकल कर सीधे गिरधर
  2576. 1:54:56के क्वार्टर पहुंच गई। वहां गिरिधर तो था
  2577. 1:54:59लेकिन श्रवण नहीं था। उसने पूछा श्रवण
  2578. 1:55:02कहां है? दिखाई नहीं दे रहा। वो तो मंदिर
  2579. 1:55:06गया है। पुजारी बाबा से मिलने। गिरधर ने
  2580. 1:55:09बताया मंदिर गया है तो वापस कब तक आएगा?
  2581. 1:55:13कुछ कह कर तो गया होगा। शिप्रा ने फिर
  2582. 1:55:16पूछा। इस पर गिरधर बोला अब तक तो आ जाना
  2583. 1:55:20चाहिए था। कह कर गया था कि जल्दी ही लौट
  2584. 1:55:22आएगा। यहां मंदिर में शौर्य और शिप्रा की
  2585. 1:55:25पूरी कहानी जानने के बाद विक्रम को एक और
  2586. 1:55:27धक्का लगा और वह हैरानी से बोला।
  2587. 1:55:31यानी आपकी शादी हो गई है। इस पर शौर्य ने
  2588. 1:55:34सहमति में सिर हिला दिया। विक्रम को आज एक
  2589. 1:55:37के बाद एक इतने सदमे लग रहे थे कि मानो वो
  2590. 1:55:40किसी सपने में हो। लेकिन तभी विक्रम ने
  2591. 1:55:42कुछ सोचकर नाराजगी भरे शब्दों में कहा।
  2592. 1:55:46पर जबरदस्ती की शादी का क्या ही मतलब होगा
  2593. 1:55:48बॉस। वैसे तो कोई मतलब नहीं है पर अगर
  2594. 1:55:51लड़की आपकी पसंद की हो तो कुछ भी किया जा
  2595. 1:55:54सकता है।
  2596. 1:55:56शौर्य ने धीमी आवाज में कहा और उसके चेहरे
  2597. 1:55:59पर एक मध्यम मुस्कान उभर आई। इस पर विक्रम
  2598. 1:56:02लगभग उछल पड़ा और तुरंत बोला यानी जिससे
  2599. 1:56:05आपकी शादी हुई है वो आपको पसंद है।
  2600. 1:56:08पसंद तो है ही पर अगर ना भी होती तो भी
  2601. 1:56:11मैं उसके इस मुश्किल वक्त में उसके साथ
  2602. 1:56:13जरूर खड़ा होता। इतना कहते हुए शौर्य के
  2603. 1:56:17चेहरे पर निश्चय के भाव स्पष्ट रूप से नजर
  2604. 1:56:19आ रहे थे। तभी विक्रम ने उत्साहित होकर
  2605. 1:56:22सलाह दी। जब आपको वो लड़की इतनी पसंद है
  2606. 1:56:25तो फिर इंतजार किस बात का कर रहे हैं बॉस?
  2607. 1:56:27उसको अपने बारे में सब सच-सच बता क्यों
  2608. 1:56:30नहीं देते? विक्रम के हिसाब से अगर लड़की
  2609. 1:56:33को शौर्य की सच्चाई पता चल जाए तो फिर उसे
  2610. 1:56:35मनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। पर शौर्य
  2611. 1:56:38यही तो नहीं चाहता था। वो चाहता है कि
  2612. 1:56:40शिप्रा उसे बिना यह जाने प्यार करे कि वो
  2613. 1:56:42किसी बड़े खानदान का वारिस है। अभी वह जिस
  2614. 1:56:45रूप में शौर्य को जानती है उसी रूप में
  2615. 1:56:47उसे प्यार करे। तब जाकर शौर्य को तसल्ली
  2616. 1:56:50होती। वहीं शौर्य ने विक्रम के सवाल का
  2617. 1:56:52कोई जवाब नहीं दिया तो वह थोड़े व्यंग और
  2618. 1:56:55निराशा भरी आवाज में बोला
  2619. 1:56:57पता नहीं आपको इस तरह की चीजों में क्या
  2620. 1:56:59मजा आता है कि आप हमेशा कुछ नया करने की
  2621. 1:57:02कोशिश करते हैं। असल में विक्रम नहीं
  2622. 1:57:04चाहता था कि शौर्य अपने और शिप्रा के
  2623. 1:57:06रिलेशन को ज्यादा लंबा खींचे। लेकिन तभी
  2624. 1:57:10शौर्य ने अपना मुद्दा बदलते हुए स्पष्ट
  2625. 1:57:12रूप से कहा तुम छोड़ो इन बातों को। कुछ और
  2626. 1:57:15काम है जिसे तुम्हें करना है। इस पर
  2627. 1:57:18विक्रम फिर से अपने आज्ञाकारी फॉर्म में आ
  2628. 1:57:20गया और तुरंत बोला हां बॉस बताइए। तभी
  2629. 1:57:24शौर्य ने गंभीर आवाज में निर्देश देते हुए
  2630. 1:57:26कहा, तुम्हें यहां के अंडरवर्ड डॉन
  2631. 1:57:29मुख्तार के बारे में पता लगाना है। वो हाथ
  2632. 1:57:32धोकर शिप्रा के पीछे पड़ा हुआ है। इस पर
  2633. 1:57:35विक्रम एक कमांडो की तरह बोला आप चिंता मत
  2634. 1:57:38कीजिए बॉस। मैं देखता हूं उस मुख्तार को।
  2635. 1:57:40शौर्य यानी श्रवण को वहां ना पाकर शिप्रा
  2636. 1:57:43थोड़ी निराश हुई। वो अकेली भी जा सकती थी।
  2637. 1:57:45लेकिन राजदीप जी की खास हिदायत थी कि वो
  2638. 1:57:48श्रवण के साथ ही जाए। इसीलिए उसने थोड़ी
  2639. 1:57:50देर इंतजार करना ठीक समझा। फिर कुछ सोचकर
  2640. 1:57:53उसने गिरधर से कहा गिरधर काका आप श्रवण को
  2641. 1:57:57फोन लगाकर पूछ तो सकते हैं कि वो कितनी
  2642. 1:57:59देर में आएगा।
  2643. 1:58:01लेकिन उसके पास फोन कहां है? कहते हुए
  2644. 1:58:04गिरधर की नजर शिप्रा के पीछे पड़ी [संगीत]
  2645. 1:58:06जहां उसे श्रवण आता दिखाई दिया। हेलो अब
  2646. 1:58:10फोन करने की जरूरत नहीं है। वो आ गया
  2647. 1:58:12श्रवण। शिप्रा पीछे मुड़ी और श्रवण को
  2648. 1:58:15देखकर बोली कहां चले गए थे? आज तो मेरे
  2649. 1:58:18साथ ऑफिस चल रहे हो। हां तो चलिए मैं
  2650. 1:58:21तैयार हूं। शौर्य ने शांत स्वर में कहा।
  2651. 1:58:24शौर्य शिप्रा के पीछे पार्किंग एरिया में
  2652. 1:58:26पहुंचा। वहां कई कारें खड़ी थी। शिप्रा ने
  2653. 1:58:29शौर्य को कार की चाबी देते हुए पूछा, "तुम
  2654. 1:58:32गाड़ी तो चला लेते हो ना? इस पर शौर्य
  2655. 1:58:35मुस्कुराया और बोला, "हम जी हां, चला लेता
  2656. 1:58:38हूं।" शौर्य को पता नहीं था कि शिप्रा की
  2657. 1:58:40कार कौन सी है। इसीलिए उसने चाबी पर अनलॉक
  2658. 1:58:43बटन दबाया। और दरवाजे के अनलॉक होने की
  2659. 1:58:45आवाज से उसे समझ में आ गया कि कौन सी कार
  2660. 1:58:48है। शौर्य अभी उस कार की ओर बढ़ता उससे
  2661. 1:58:51पहले ही पास में एक और कार के अनलॉक होने
  2662. 1:58:53की आवाज आई। आवाज सुनकर वो मुड़ा तो उसने
  2663. 1:58:56देखा कि शिप्रा के बराबर में एक और
  2664. 1:58:58खूबसूरत लड़की खड़ी है। शिप्रा की कजिन
  2665. 1:59:00युविका है। बड़े बाबा बृजभूषण राय की
  2666. 1:59:03बेटी। युविका सुंदर है। लेकिन शिप्रा के
  2667. 1:59:06सामने उसकी खूबसूरती फीकी पड़ जाती है।
  2668. 1:59:09यही कारण है कि वो शिप्रा के प्रति
  2669. 1:59:11ईर्ष्या महसूस करती थी। जब युविका ने
  2670. 1:59:14शौर्य को वहां देखा तो खुद को रोक नहीं
  2671. 1:59:16पाई और उसने शिप्रा से पूछा
  2672. 1:59:19यही है वो भिखारी जिससे तुम्हारी शादी हुई
  2673. 1:59:21है। युविका का सवाल चुभने वाला था लेकिन
  2674. 1:59:24शिप्रा पर उसका कोई असर नहीं हुआ। हां यही
  2675. 1:59:27है। युविका को उम्मीद नहीं थी कि शिप्रा
  2676. 1:59:30इतनी सहजता से जवाब देगी। जब उसने देखा कि
  2677. 1:59:32उसकी बातों का कोई खास असर नहीं हुआ तो
  2678. 1:59:35उसने सामने खड़े शौर्य की ओर देखा। शौर्य
  2679. 1:59:37को भी अपनी ओर देखते हुए पाकर उसने एक पल
  2680. 1:59:40के लिए कुछ सोचा और शौर्य से कहा
  2681. 1:59:43माफ करना मुझे तुम्हारा नाम पता नहीं है
  2682. 1:59:45इसीलिए एकदम से भिखारी बोल दिया। शौर्य
  2683. 1:59:49युविका के तंज को भली-भांति समझा था पर वो
  2684. 1:59:51शांत भाव से बोला नाना इसमें बुरा मानने
  2685. 1:59:54जैसी कोई बात ही नहीं है। आपने तो वही कहा
  2686. 1:59:57जो मैं हूं। यह सुनकर एक बार फिर युविका
  2687. 1:59:59को झटका लगा कि शौर्य ने उसकी बात को
  2688. 2:00:02कितनी सहजता से लिया। ऐसा लगा ही नहीं कि
  2689. 2:00:04उसकी बातों से उसे जरा भी ठेस पहुंची हो।
  2690. 2:00:07शिप्रा को भी हैरानी हुई क्योंकि शौर्य के
  2691. 2:00:09चेहरे पर एक शिकन भी नहीं थी।
  2692. 2:00:12क्या नाम है तुम्हारा? युविका ने
  2693. 2:00:14मुस्कुराते हुए पूछा तो शौर्य ने एक पल
  2694. 2:00:17सोचा फिर जवाब दिया, नाम में क्या रखा है?
  2695. 2:00:20आपको जो अच्छा लगे आप उसी नाम से पुकार
  2696. 2:00:22सकती हैं। युविका को ऐसे जवाब की बिल्कुल
  2697. 2:00:25उम्मीद नहीं थी। शिप्रा को भी शौर्य का एक
  2698. 2:00:28कटाक्ष अच्छा लगा। उसे विश्वास नहीं हो
  2699. 2:00:31रहा था कि यह वही युवक है जो दो दिन पहले
  2700. 2:00:33कितना मजबूर दिखाई दे रहा था। वो मन ही मन
  2701. 2:00:36बोली।
  2702. 2:00:37सिर्फ कपड़े बदलने से इसके व्यक्तित्व में
  2703. 2:00:40कितना आत्मविश्वास आ गया है। वहीं शौर्य
  2704. 2:00:43का जवाब सुनकर युविका के पास कहने को कुछ
  2705. 2:00:45नहीं बचा। उसे गुस्सा तो बहुत आया लेकिन
  2706. 2:00:48वो यहां कुछ और बोलकर खुद को हंसी का
  2707. 2:00:50पात्र नहीं बनाना चाहती थी। वो बस फीकी सी
  2708. 2:00:53मुस्कान के साथ अपनी कार की ओर बढ़ गई।
  2709. 2:00:56शौर्य भी शिप्रा की कार की तरफ बढ़ गया।
  2710. 2:00:58उसने गाड़ी बैक करके शिप्रा के सामने लाकर
  2711. 2:01:01खड़ी कर दी। तभी तेजी से युविका की कार
  2712. 2:01:03वहां से गुजरी। उसकी रफ्तार देखकर शिप्रा
  2713. 2:01:06समझ गई कि शौर्य की बात उसे कितनी ज्यादा
  2714. 2:01:08चुभी है। शिप्रा जाकर कार में बैठ गई और
  2715. 2:01:11शौर्य ने गाड़ी आगे बढ़ाते हुए कहा, "मुझे
  2716. 2:01:14ऑफिस का पता नहीं है तो आप रास्ता बताते
  2717. 2:01:16रहिएगा।
  2718. 2:01:18ठीक है, अभी तो सीधे चलते रहो।" शिप्रा ने
  2719. 2:01:22जवाब दिया, शिप्रा के निर्देशानुसार शौर्य
  2720. 2:01:25गाड़ी चलाता रहा। अंत में उनकी कार इंदिरा
  2721. 2:01:27नगर की चर्चित बिल्डिंग हिल टॉप हेवन में
  2722. 2:01:29पहुंची। पार्किंग एरिया में एक कार को
  2723. 2:01:32पहचानकर शौर्य बोला,
  2724. 2:01:34अरे तो वही कार है जिसमें वो लड़की आपके
  2725. 2:01:36घर से निकली थी। शिप्रा ने गाड़ी से
  2726. 2:01:39निकलते हुए जवाब दिया। उसका नाम युविका
  2727. 2:01:42है। वो मेरे बड़े पापा की बेटी है। लगता
  2728. 2:01:45है वो आपको कुछ खास पसंद नहीं करती। शौर्य
  2729. 2:01:48ने सहजता से वो कहा जो उसने महसूस किया
  2730. 2:01:51था।
  2731. 2:01:52हां, है तो कुछ ऐसा ही पर क्या कर सकते
  2732. 2:01:55हैं? सबका अपना मिजाज होता है। लेकिन
  2733. 2:01:58तुमने उसे अच्छे से हैंडल किया? शिप्रा ने
  2734. 2:02:01शौर्य की तारीफ करते हुए कहा, तो इसी
  2735. 2:02:04बिल्डिंग में आपका ऑफिस है। शौर्य ने एक
  2736. 2:02:06और सवाल किया तो शिप्रा ने उसे विस्तार से
  2737. 2:02:08बताया। हमारी फैमिली का जितना भी बिजनेस
  2738. 2:02:11है, सबके ऑफिस इसी बिल्डिंग में है। सभी
  2739. 2:02:14गोदाम और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट अलग-अलग
  2740. 2:02:16जगहों पर हैं। यूं समझ लो कि जो भी
  2741. 2:02:18ऑफिशियल काम होता है, वो यहीं से ऑपरेट
  2742. 2:02:20होता है और मेरा ऑफिस पांचवें फ्लोर पे
  2743. 2:02:23है। लगता है यहां की ज्यादातर बिल्डिंग्स
  2744. 2:02:26कॉर्पोरेट ऑफिस के लिए ही इस्तेमाल होती
  2745. 2:02:27हैं। शौर्य ने आसपास नजर दौड़ाते हुए कहा,
  2746. 2:02:31अब तक दोनों कार से बाहर आ चुके थे। शिपरा
  2747. 2:02:33ने शौर्य की बात पर सहमति जताई और फिर
  2748. 2:02:36बोली अच्छा सुनो मैं तो अपने काम में बिजी
  2749. 2:02:38हो जाऊंगी तब तक तुम क्या करोगे
  2750. 2:02:41मुझे क्या करना है मैं यहीं कहीं बैठकर
  2751. 2:02:44आपका इंतजार कर लूंगा शौर्य ने सहजता से
  2752. 2:02:47जवाब दिया अच्छा देखो मुझे काम खत्म करते
  2753. 2:02:49शायद 4 5:00 बज जाएंगे तब तक नीचे एक कॉमन
  2754. 2:02:52एरिया है जहां बाकी ड्राइवर समय बिताते
  2755. 2:02:55हैं। तुम वहां टाइम पास कर सकते हो। वहां
  2756. 2:02:57कैंटीन भी है जहां खानेपीने का सामान मिल
  2757. 2:03:00जाता है। इसके अलावा अगर चाहो तो इस बीच
  2758. 2:03:03तुम कहीं घूम फिर के भी आ सकते हो। शिप्रा
  2759. 2:03:06ने समय बिताने के सारे विकल्प बताए तो
  2760. 2:03:08शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ कहा। आप
  2761. 2:03:11मेरी चिंता ना करें। मैं यहीं इंतजार कर
  2762. 2:03:13लूंगा। आप बेफिक्र होकर अपना काम कीजिए।
  2763. 2:03:16ठीक है तो मैं ऑफिस जाती हूं। यह कहकर
  2764. 2:03:19शिप्रा आगे बढ़ गई। फिर अचानक उसे कुछ याद
  2765. 2:03:21आया तो वह रुकी और मुड़कर बोली तुम्हारे
  2766. 2:03:24पास पैसे हैं क्या? शौर्य एक पल के लिए
  2767. 2:03:28असमंजस में पड़ गया। उसे समझ नहीं आया कि
  2768. 2:03:30वो क्या जवाब दे। नहीं लेकिन मुझे जरूरत
  2769. 2:03:33भी नहीं है। शिप्रा ने अपने पर्स से 500
  2770. 2:03:36के दो नोट निकाल कर शौर्य की ओर बढ़ा दिए।
  2771. 2:03:39इस पर शौर्य बोला अरे इसकी कोई जरूरत नहीं
  2772. 2:03:42है। आप मेरी चिंता मत कीजिए। तुम्हारा कुछ
  2773. 2:03:45खाने पीने का मन करेगा तो क्या करोगे?
  2774. 2:03:47यहां किससे मांगोगे? चलो अब रख भी लो। इस
  2775. 2:03:51बार शौर्य मना नहीं कर पाया। उसने चुपचाप
  2776. 2:03:53नोट ले लिए और शिप्रा वहां से चली गई।
  2777. 2:03:56शौर्य ने इधर-उधर नजर दौड़ाई और फिर
  2778. 2:03:58कैंटीन की ओर बढ़ गया। कुछ देर बाद शौर्य
  2779. 2:04:01कैंटीन में सैंडविच खा रहा था कि तभी उसने
  2780. 2:04:03अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस किया।
  2781. 2:04:06उसने पलट कर देखा तो सामने गिरधर काका
  2782. 2:04:08खड़े थे। अरे काका आप यहां शौर्य चौंक कर
  2783. 2:04:12बोला तो गिरधर ने कहा, "इतना हैरान होने
  2784. 2:04:15की क्या बात है? मुझे भी बड़े साहब को
  2785. 2:04:18ऑफिस लाना होता है। अरे वाह, यह तो बढ़िया
  2786. 2:04:21हो गया। मैं तो सोच रहा था कि यहां अकेले
  2787. 2:04:23बोर हो जाऊंगा। लेकिन आप आ गए? बढ़िया है।
  2788. 2:04:26शौर्य ने खुशी जताते हुए कहा। गिरधर शौर्य
  2789. 2:04:29के सामने बैठते हुए बोला,
  2790. 2:04:32यहां हम जैसे बहुत से ड्राइवर हैं जो
  2791. 2:04:34तुम्हें बोर नहीं होने देंगे। सबके
  2792. 2:04:36अपने-अपने किस्से होते हैं। सभी गप्पे
  2793. 2:04:38मारकर अच्छे से समय बिताते हैं। चलो तुम
  2794. 2:04:41सैंडविच खा लो। फिर तुम्हें सबसे मिलवाता
  2795. 2:04:43हूं। कहते हुए गिरधर के चेहरे पर बड़ी सी
  2796. 2:04:46मुस्कान थी। शौर्य का ऐसा कोई इरादा नहीं
  2797. 2:04:49था कि वह जाकर सबसे मिले। लेकिन अब गिरधर
  2798. 2:04:51ने इतना जोश दिखाया था तो शौर्य उसे निराश
  2799. 2:04:53नहीं करना चाहता था। कॉमन एरिया जहां बहुत
  2800. 2:04:57से लोग बैठे थे। [संगीत] काम के सिलसिले
  2801. 2:04:59में जो भी लोग इस बिल्डिंग में आते हैं वो
  2802. 2:05:01सब भी यही इंतजार करते हैं। वहां बहुत सी
  2803. 2:05:04कुर्सियां और बेंच लगी हुई थी। जब शौर्य
  2804. 2:05:06गिरधर के साथ उस हॉल में दाखिल हुआ तो
  2805. 2:05:09उसने देखा कि कुछ लोग एक कोने में समूह
  2806. 2:05:11बनाकर बैठे हैं। गिरधर उसे लेकर वहां
  2807. 2:05:14पहुंचा तो शौर्य ने देखा कि वहां बैठे सभी
  2808. 2:05:16लोगों की नजरें एक ही व्यक्ति पर केंद्रित
  2809. 2:05:18थी। गिरधर ने जब उस आदमी को देखा तो वह
  2810. 2:05:22तेजी से उसके पास गया और बोला अरे
  2811. 2:05:25वाल्मीकि तुम यहां हो बेटी की शादी की
  2812. 2:05:28सारी खरीदारी हो गई क्या? इस पर वाल्मीकि
  2813. 2:05:31के साथ बैठा एक व्यक्ति बोला [संगीत]
  2814. 2:05:33गिरधर काका इनके साथ गड़बड़ हो गई है।
  2815. 2:05:36लड़के वाले ने मोटरसाइकिल की डिमांड की थी
  2816. 2:05:38और इन्होंने एक बाइक देख भी ली थी। लेकिन
  2817. 2:05:41आज अचानक लड़के ने महंगी वाली बाइक की
  2818. 2:05:43डिमांड कर दी। अब दोनों के दाम में जमीन
  2819. 2:05:46आसमान का अंतर है और तुरंत पैसों का
  2820. 2:05:48इंतजाम नहीं हो रहा है। इसीलिए ऑफिस से
  2821. 2:05:50कुछ एडवांस चाहते हैं। लेकिन आज अकाउंटेंट
  2822. 2:05:53छुट्टी पर है। इसीलिए आज पैसे मिलने से
  2823. 2:05:55रहे। इसी बात पर वाल्मीकि चाचा परेशान है
  2824. 2:05:58कि अब पैसों का इंतजाम कहां से करें? अगर
  2825. 2:06:01अकाउंटेंट छुट्टी पर है तो क्या हुआ? हम
  2826. 2:06:03लोग तो हैं ना। ऐसा करो जिसके पास अभी
  2827. 2:06:05जितने भी पैसे हैं वो सब वाल्मीकि को दे
  2828. 2:06:08देते हैं। बाद में हिसाब कर लेंगे। गिरधर
  2829. 2:06:11के कहने पर सबने जो बन पड़ा वो कर दिया।
  2830. 2:06:13लेकिन सबकी मदद के बाद भी केवल ₹35,000 ही
  2831. 2:06:16इकट्ठे हो पाए। शौर्य यह देखकर हैरान था
  2832. 2:06:18कि कहने को तो यह सब गरीब हैं। लेकिन किसी
  2833. 2:06:21जान पहचान वाले को मुसीबत में देखकर जिससे
  2834. 2:06:24जो बन पड़ रहा था मदद करने में कोई हिचक
  2835. 2:06:26नहीं रहा था। और वहीं पैसे वालों की भी एक
  2836. 2:06:28दुनिया होती है। जहां लोग एक दूसरे के पैर
  2837. 2:06:31खींचने में लगे रहते हैं। कैश के नाम पर
  2838. 2:06:33शौर्य के पास वही पैसे थे जो शिप्रा ने
  2839. 2:06:36उसे दिए थे। इसलिए वह चाहकर भी इस समय
  2840. 2:06:38उनकी कोई मदद नहीं कर सकता था। मैं तुम
  2841. 2:06:41सबका बहुत आभारी हूं कि तुमने मेरी मदद
  2842. 2:06:43करने की कोशिश की। लेकिन इस समय मुझे
  2843. 2:06:46₹65,000 की जरूरत है क्योंकि [संगीत] वह
  2844. 2:06:48मोटरसाइकिल ₹1,65,000 की है। 1 लाख तो मैं
  2845. 2:06:52जमा कर चुका हूं। बाकी पैसों के लिए ही
  2846. 2:06:54ऑफिस आया था। अब समझ नहीं आ रहा है कि
  2847. 2:06:56क्या करूं। अगर मैं वो बाइक लेकर नहीं गया
  2848. 2:06:59तो लड़के वाले क्या सोचेंगे। वाल्मीकि की
  2849. 2:07:01मजबूरी ने शौर्य के दिल को भारी कर दिया
  2850. 2:07:03था। तभी गिरधर ने वाल्मीकि को सांत्वना
  2851. 2:07:06देते हुए कहा। ऐसे ही हाथ पर हाथ धरे
  2852. 2:07:08बैठने से कुछ नहीं होगा बाबा। एजेंसी के
  2853. 2:07:11डीलर के पास चलकर उससे बात करते हैं। वो
  2854. 2:07:14कुछ ना कुछ तो जरूर करेंगे। बाकी के पैसे
  2855. 2:07:16चुकाने के लिए थोड़ा समय तो दे ही सकते
  2856. 2:07:19हैं। और आजकल फाइनेंस की सुविधा भी तो
  2857. 2:07:21मिलती है। हां, गिरधर काका सही कह रहे
  2858. 2:07:24हैं। आप जाकर एक बार बात करके देखिए। शायद
  2859. 2:07:27वह मान जाए। अन्य लोगों ने भी सुझाव दिया।
  2860. 2:07:30तभी अचानक शौर्य को कुछ ध्यान आया। उसने
  2861. 2:07:33अपनी अंगूठी उतारी और वाल्मीकि को देते
  2862. 2:07:36हुए कहा, "काका, यह अंगूठी किसी दुकान में
  2863. 2:07:39गिरवी रख दीजिए। इसके अच्छे खासे पैसे मिल
  2864. 2:07:41जाएंगे और आपकी समस्या हल हो जाएगी।"
  2865. 2:07:44शौर्य की बात सुनकर सबकी निगाहें उसकी ओर
  2866. 2:07:46घूम गई। वहां कोई भी शौर्य को पहचानता
  2867. 2:07:49नहीं था। सबके चेहरों पर हैरानी के भाव थे
  2868. 2:07:52कि यह कौन है जो वाल्मीकि की मदद करने आगे
  2869. 2:07:54आ गया। सबकी आंखों में आश्चर्य देखकर
  2870. 2:07:57गिरधर बोला यह श्रवण है। आज इसका पहला दिन
  2871. 2:08:01है। यह शिप्रा मेम साहब की गाड़ी लेकर आया
  2872. 2:08:03है। पर यह तो वाल्मीकि काका को जानता भी
  2873. 2:08:06नहीं। फिर भी मदद कर रहा है। [संगीत] एक
  2874. 2:08:08व्यक्ति ने कहा इस पर शौर्य बोला मदद
  2875. 2:08:12चेहरा देखकर नहीं जरूरत देखकर की जाती है।
  2876. 2:08:14मैं समझ सकता हूं कि यह अभी किस स्थिति से
  2877. 2:08:16गुजर रहे होंगे। मेरे पास पैसे तो नहीं है
  2878. 2:08:19पर यह अंगूठी है जो इनके काम आ सकती है।
  2879. 2:08:22पर क्या इस अंगूठी से इतने पैसे मिल
  2880. 2:08:24जाएंगे कि इनका काम हो जाए? किसी दूसरे ने
  2881. 2:08:27सवाल उठाया तो जवाब में शौर्य ने हल्की
  2882. 2:08:29मुस्कान के साथ कहा इस अंगूठी से इतने
  2883. 2:08:31पैसे मिल जाएंगे कि आपको किसी और से मदद
  2884. 2:08:34लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्या सच में
  2885. 2:08:36यह अंगूठी इतनी कीमती है? एक ने सवाल
  2886. 2:08:38किया। तभी दूसरा ड्राइवर आगे आकर बोला।
  2887. 2:08:41अरे इसमें इतना सोचने की क्या बात है? इस
  2888. 2:08:44बिल्डिंग के बाहर कोने पर ही गोल्ड
  2889. 2:08:45फाइनेंसिंग कंपनी का ऑफिस है। वहां चलकर
  2890. 2:08:48पता कर लेते हैं कि कितने पैसे मिलेंगे।
  2891. 2:08:50गिरधर शौर्य की ओर देखकर सोच रहा था कि
  2892. 2:08:52क्या सच में यह ओरिजिनल गोल्ड है। उसने भी
  2893. 2:08:55शौर्य के हाथ में अंगूठी देखी थी। लेकिन
  2894. 2:08:58उसकी यही धारणा थी कि यह तांबे की होगी
  2895. 2:09:00क्योंकि शौर्य की स्थिति देखकर गिरिधर यह
  2896. 2:09:02सोच भी नहीं सकता था कि उसके पास असली
  2897. 2:09:04सोने की अंगूठी होगी। वाल्मीकि को भी
  2898. 2:09:07विश्वास नहीं था कि यह अंगूठी इतनी महंगी
  2899. 2:09:09हो सकती है। खैर, इन सबके बीच एक व्यक्ति
  2900. 2:09:12ने अपना विचार रखा। गिरिधर काका आप भी
  2901. 2:09:15वाल्मीकि काका के साथ चले जाइए। गिरधर को
  2902. 2:09:18यह बात ठीक लगी। उन्हें लगा कि अगर ज्यादा
  2903. 2:09:20पैसे भी नहीं मिले तो वो स्थिति संभाल
  2904. 2:09:22लेंगे। हां चलो वाल्मीकि मैं चलता हूं
  2905. 2:09:25तुम्हारे साथ। जब शौर्य वाल्मीकि और
  2906. 2:09:27गिरिधर को लेकर गोल्ड फाइनेंसिंग कंपनी के
  2907. 2:09:29ऑफिस गया तो उनको पता चला कि इस अंगूठी के
  2908. 2:09:31बदले उन्हें ₹1,75,000
  2909. 2:09:33मिल सकते हैं। क्या ₹1,75,000?
  2910. 2:09:37यह तो बहुत ज्यादा है। मुझे तो बस 65,000
  2911. 2:09:40ही चाहिए। वाल्मीकि को संकोच करते देख
  2912. 2:09:43शौर्य खुद आगे बढ़कर बोला, "का ऐसा कीजिए
  2913. 2:09:461 लाख ले लीजिए। बाकी सबके पैसे वापस कर
  2914. 2:09:49दीजिएगा। आपके पास कुछ बैलेंस भी रह
  2915. 2:09:52जाएगा। हां, यह ठीक रहेगा। गिरधर ने भी
  2916. 2:09:55शौर्य की बात का समर्थन किया। इसके बाद
  2917. 2:09:57गिरधर ने अपनी ही आईडी पर गोल्ड लोन लिया
  2918. 2:10:00और पैसे वाल्मीकि को दे दिए। पैसे लेते
  2919. 2:10:02हुए वाल्मीकि कृतज्ञता से बोला, [संगीत]
  2920. 2:10:04"मैं तुम्हारा एहसान कैसे चुकाऊंगा?"
  2921. 2:10:06"तुमने ऐसे समय मेरी मदद की है जब मुझे
  2922. 2:10:09कहीं से कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।"
  2923. 2:10:11तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद बेटा। मैं
  2924. 2:10:14जल्दी ही पैसों का इंतजाम करके यह अंगूठी
  2925. 2:10:16छुड़ाकर तुम्हें वापस कर दूंगा। अरे नहीं
  2926. 2:10:19काका, आप इसकी चिंता मत कीजिए। पहले आप
  2927. 2:10:22अपनी बेटी की शादी करवाइए। वो ज्यादा
  2928. 2:10:24जरूरी [संगीत] है। शौर्य ने अभी इतना ही
  2929. 2:10:26कहा था कि तभी गिरधर का मोबाइल बज उठा।
  2930. 2:10:29उन्होंने स्क्रीन पर नजर डाली तो देखा कि
  2931. 2:10:30शिप्रा का कॉल था। उसने शौर्य के लिए ही
  2932. 2:10:33फोन किया था क्योंकि शौर्य के पास अपना
  2933. 2:10:35मोबाइल तो था नहीं। शिप्रा को वहां मौजूद
  2934. 2:10:37एक ड्राइवर से पता चल गया था कि शौर्य
  2935. 2:10:39गिरधर और वाल्मीकि के साथ पास की बिल्डिंग
  2936. 2:10:41में गया है। इसीलिए उसने गिरधर को फोन लगा
  2937. 2:10:44डाला। जब गिरधर और शौर्य वापस हिल टॉप
  2938. 2:10:47हेवन पहुंचे तो नीचे वेटिंग एरिया में ही
  2939. 2:10:49शिप्रा शौर्य का इंतजार कर रही थी। शौर्य
  2940. 2:10:51जल्दी से शिप्रा के पास पहुंचा और सफाई
  2941. 2:10:54देते हुए बोला सॉरी मुझे पता नहीं था कि
  2942. 2:10:56आप इतनी जल्दी फ्री हो जाएंगी। कहीं चलना
  2943. 2:10:59है क्या? हां एक क्लाइंट के पास जाना था।
  2944. 2:11:02उसने हमारा प्रोडक्ट अपने स्टोर में रखने
  2945. 2:11:04से मना कर दिया है। इसलिए एक बार खुद जाकर
  2946. 2:11:06उससे मिलना पड़ेगा। शिप्रा ने जवाब दिया।
  2947. 2:11:10ठीक है मैं गाड़ी निकाल कर लाता हूं। इतना
  2948. 2:11:12बोलकर शौर्य पार्किंग की तरफ बढ़ गया।
  2949. 2:11:14शौर्य पार्किंग से गाड़ी निकालकर गेट पर
  2950. 2:11:16पहुंचा तो शिप्रा दरवाजा खोलकर अंदर आई और
  2951. 2:11:19शौर्य ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। कहां जाना
  2952. 2:11:21है? शौर्य ने पूछा तो जवाब में शिप्रा
  2953. 2:11:24बोली [संगीत] चार मीनार की तरफ चलो। लगभग
  2954. 2:11:2715 मिनट के बाद शौर्य की कार बिग कलेक्शन
  2955. 2:11:29की पार्किंग में जाकर रुकी। शिप्रा के साथ
  2956. 2:11:32शौर्य भी बाहर आया। शौर्य समझ गया कि
  2957. 2:11:34शिप्रा को बिग कलेक्शन के ऑफिस में ही
  2958. 2:11:36जाना होगा। इसीलिए वह भी उसके पीछे हो
  2959. 2:11:39लिया। पर अचानक शिप्रा की निगाह एक मोबाइल
  2960. 2:11:41स्टोर पर पड़ी और वो स्टोर की तरफ बढ़ गई।
  2961. 2:11:44शौर्य को समझ नहीं आया कि शिप्रा बगैर
  2962. 2:11:46कलेक्शन की जगह मोबाइल स्टोर में क्यों जा
  2963. 2:11:48रही थी। पर उसने कुछ कहा नहीं बस उसके
  2964. 2:11:50पीछे चलता रहा। शिप्रा के पीछे वो भी
  2965. 2:11:53स्टोर के अंदर चला गया। [संगीत] स्टोर के
  2966. 2:11:55अंदर पहुंचने के बाद शिप्रा ने शौर्य से
  2967. 2:11:57कहा तुम अपने लिए एक मोबाइल पसंद कर लो।
  2968. 2:12:00यह सुनकर शौर्य चौंक कर बोला [संगीत]
  2969. 2:12:03मोबाइल मैं क्या करूंगा मोबाइल का। दरअसल
  2970. 2:12:06शौर्य को समझ नहीं आया कि वो क्या जवाब
  2971. 2:12:08दे। उसे उम्मीद नहीं थी कि शिप्रा उसके
  2972. 2:12:10लिए मोबाइल लेने की सोचेगी। मोबाइल का जो
  2973. 2:12:13काम होता है वही करोगे। कांटेक्ट में रहने
  2974. 2:12:16के लिए कुछ तो चाहिए होता है। शिप्रा ऐसे
  2975. 2:12:19बोल रही थी जैसे किसी बच्चे को समझा रही
  2976. 2:12:21है। वो तो ठीक है पर इतने महंगे स्टोर में
  2977. 2:12:23आने की क्या जरूरत थी। मेरा काम तो किसी
  2978. 2:12:26सस्ते मोबाइल से भी चल जाता। शौर्य की
  2979. 2:12:29बातें सुनकर स्टोर में खड़ी सेल्स गर्ल को
  2980. 2:12:31हंसी आ रही थी। वो समझ रही थी कि इस बंदे
  2981. 2:12:33को मोबाइल की ज्यादा समझ नहीं है। शिप्रा
  2982. 2:12:36ने यह नोटिस किया तो उसने कहा तुम रहने दो
  2983. 2:12:39मैं ही देख लेती हूं। इसके बाद शिप्रा ने
  2984. 2:12:41खुद एक मोबाइल पसंद किया और उसका पेमेंट
  2985. 2:12:43किया। [संगीत] वैसे कहने को तो शौर्य
  2986. 2:12:45शिप्रा को मोबाइल लेने के लिए मना कर रहा
  2987. 2:12:47था पर उसे शिप्रा का उसके लिए मोबाइल पसंद
  2988. 2:12:50करना अच्छा लग रहा था। मोबाइल लेने के बाद
  2989. 2:12:53शिप्रा ने उसी दुकान से एक नया सिम भी
  2990. 2:12:55अपने नाम पर लेकर उस मोबाइल में लगाया।
  2991. 2:12:58शिप्रा ने मोबाइल ऑपरेटर से विशेष आग्रह
  2992. 2:13:00करके उसी समय सिम को एक्टिवेट भी कराया।
  2993. 2:13:03इसके बाद उसने उस मोबाइल से अपने नंबर पर
  2994. 2:13:06फोन किया। नंबर डिस्प्ले होने के बाद उसने
  2995. 2:13:08उस नंबर को अपने मोबाइल में सेव किया और
  2996. 2:13:11मोबाइल शौर्य की तरफ बढ़ा दिया। शौर्य ने
  2997. 2:13:14सकुचाते हुए शिप्रा के हाथ से मोबाइल लिया
  2998. 2:13:16और पूछा। क्या आप ऑफिस से इतनी दूर यह
  2999. 2:13:19मोबाइल लेने के लिए ही आई हैं? नहीं, मुझे
  3000. 2:13:21यहां बिग कलेक्शन के मैनेजर से मिलना है।
  3001. 2:13:23पर तुम्हारे लिए मोबाइल भी लेना था। यह
  3002. 2:13:25दुकान नजर आ गई तो ले लिया। शिप्रा शॉप से
  3003. 2:13:28बाहर आती हुई बोली और तभी शौर्य ने बड़े
  3004. 2:13:31भोलेपन से कहा पर इतना महंगा मोबाइल लेने
  3005. 2:13:33की क्या जरूरत थी? राहुल ने भी मेरे कपड़े
  3006. 2:13:36खरीदने में अच्छा खासा पैसा खर्च किया है।
  3007. 2:13:39इतना पैसा मैं कैसे चुका पाऊंगा? यह सुनकर
  3008. 2:13:42शिप्रा ने शौर्य के चेहरे की तरफ देखा। अब
  3009. 2:13:44शौर्य की दाढ़ी उसे बुरी नहीं लग रही थी।
  3010. 2:13:47पर उसे लग रहा था कि इसे कम से कम अपनी
  3011. 2:13:49दाढ़ी को सेट करवा लेना चाहिए। उसने सोचा
  3012. 2:13:52इतनी बड़ी दाढ़ी भला कौन रखता है? पूरा
  3013. 2:13:55चेहरा तो उसकी दाढ़ी में ही छुपा हुआ है।
  3014. 2:13:57पर उसने कुछ कहा नहीं। उसे कुछ ध्यान आया
  3015. 2:13:59तो वह बोली, मैंने सुना कि तुम वाल्मीकि
  3016. 2:14:02की मदद करने के लिए अपनी अंगूठी गिरवी
  3017. 2:14:04रखने गए थे। शौर्य को उम्मीद नहीं थी कि
  3018. 2:14:07यह बात शिप्रा को पता होगी। पर जब शिप्रा
  3019. 2:14:09ने पूछ लिया तो वो इससे मुकर नहीं सकता
  3020. 2:14:11था। हां, उनकी लड़की की शादी होने वाली
  3021. 2:14:14है। उन्हें [संगीत] अर्जेंट में पैसों की
  3022. 2:14:15जरूरत आ पड़ी है। सबने कुछ ना कुछ मदद की।
  3023. 2:14:18मेरे पास पैसे तो थे नहीं लेकिन एक अंगूठी
  3024. 2:14:21थी। सोचा इसको गिरवी रखकर जो पैसे मिलेंगे
  3025. 2:14:24उससे उनकी कुछ मदद हो जाएगी। तो कितने
  3026. 2:14:26पैसे मिले उस अंगूठी के बदले? शिप्रा ने
  3027. 2:14:29उत्सुकता वश पूछ लिया। मिल तो पौने दो लाख
  3028. 2:14:32रहे थे पर उनका काम 1 लाख से ही होने वाला
  3029. 2:14:34था। इसलिए 1 लाख ही लिया। शौर्य ने सिंपली
  3030. 2:14:37जवाब दिया। क्या कहा? 1 लाख? शिप्रा को
  3031. 2:14:41विश्वास नहीं हो रहा था। उसने शौर्य से
  3032. 2:14:43कहा, "तुम यह कह रहे हो कि तुम्हारे पास
  3033. 2:14:46इतनी महंगी अंगूठी थी जिसको गिरवी रखकर
  3034. 2:14:48तुमने ₹1 लाख वाल्मीकि को दे दिया।" हां,
  3035. 2:14:52शौर्य ऐसे बोला, जैसे यह रकम उसके लिए
  3036. 2:14:55मायने ही नहीं रखती। पर तुम्हारे पास इतनी
  3037. 2:14:57महंगी अंगूठी आई कहां से? शिप्रा को शौर्य
  3038. 2:15:00पर शक सा होने लगा। दरअसल वो मेरी
  3039. 2:15:03पुश्तैनी अंगूठी [संगीत] थी। मुझे खुद भी
  3040. 2:15:05नहीं पता था कि वो अंगूठी इतनी महंगी
  3041. 2:15:07होगी। शौर्य सफाई से झूठ बोल रहा था। वो
  3042. 2:15:10शिप्रा को शक करने का कोई कारण नहीं देना
  3043. 2:15:12चाहता था। लेकिन जब तुम्हारे पास इतनी
  3044. 2:15:15महंगी अंगूठी थी तो फिर तुम यूं लाचारी
  3045. 2:15:17भरी जिंदगी क्यों जी रहे थे? शिप्रा के
  3046. 2:15:20प्रश्न खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे
  3047. 2:15:22थे। शौर्य ने सफाई दी। कहा तो मुझे खुद
  3048. 2:15:25अंदाजा नहीं था कि उस अंगूठी के बदले इतने
  3049. 2:15:28पैसे मिल जाएंगे। वो तो मेरे पास कुछ था
  3050. 2:15:30नहीं। ले दे के एक अंगूठी थी। तो मैंने
  3051. 2:15:32यही सोचा कि इससे जो मिल जाएगा उससे उनकी
  3052. 2:15:35जितनी मदद हो सके। तुमने एक बार भी नहीं
  3053. 2:15:38सोचा कि फिर कभी तुम उस अंगूठी को वापस पा
  3054. 2:15:40सकोगे या नहीं। शिप्रा ने यह टोन लेने की
  3055. 2:15:44कोशिश की कि कहीं शौर्य को अब इसका अफसोस
  3056. 2:15:46तो नहीं है। इस पर शौर्य ने पूरी सादगी से
  3057. 2:15:50जवाब दिया। कैसी बात कर रही हो? मुझे तो
  3058. 2:15:53खुशी है कि मैं उनके कुछ काम आ सका।
  3059. 2:15:55अंगूठी का क्या है? यह नहीं तो कल कोई
  3060. 2:15:58दूसरी आ जाएगी। और ना भी आए तो मुझे उसकी
  3061. 2:16:00कोई जरूरत भी नहीं है। देखा जाए तो सही
  3062. 2:16:03मायने में उस अंगूठी का सबसे सही उपयोग
  3063. 2:16:06हुआ।
  3064. 2:16:07शिप्रा के दिमाग में चल रहा था कि आदमी
  3065. 2:16:09जितना गरीब होता है उसका दिल उतना ही बड़ा
  3066. 2:16:12होता है। उसे शौर्य की ईमानदारी बहुत
  3067. 2:16:15अच्छी लगी। शादी वाली रात को भी उसने जो
  3068. 2:16:18जज्बा दिखाया था और मंदिर में भी उसने जिस
  3069. 2:16:20हिम्मत के साथ रजत के गुंडों का सामना
  3070. 2:16:22किया उन एहसानों के सामने आज जो उसने
  3071. 2:16:24शौर्य को मोबाइल खरीद कर दिया उसकी क्या
  3072. 2:16:27ही वैल्यू है।
  3073. 2:16:29अब तक शिप्रा और शौर्य रोड पार करके बिगर
  3074. 2:16:32कलेक्शन के सामने पहुंच चुके थे। शिप्रा
  3075. 2:16:35बिगर कलेक्शन के ऑफिस में पहुंची। उसने
  3076. 2:16:37शौर्य को कोई इंस्ट्रक्शन नहीं दी थी।
  3077. 2:16:39इसीलिए शौर्य भी उसके पीछे-पीछे ऑफिस
  3078. 2:16:42पहुंच गया। बिगर कलेक्शन एक बड़ा आउटलेट
  3079. 2:16:45था जिसका अपना कोई प्रोडक्ट नहीं था। वो
  3080. 2:16:47अलग-अलग ब्रांड के प्रोडक्ट के साथ ही डील
  3081. 2:16:50करता था। पब्लिक के [संगीत] लिए मीडियम
  3082. 2:16:51रेंज के प्रोडक्ट के लिए यह आउटलेट एक
  3083. 2:16:53अच्छी चॉइस थी। अब तक शिप्रा के जिंक
  3084. 2:16:56कलेक्शन के प्रोडक्ट को भी यह आउटलेट अपने
  3085. 2:16:58स्टोर में डिस्प्ले करता था। पर अचानक दो
  3086. 2:17:01दिन पहले ही उसने शिप्रा के साथ हुई डील
  3087. 2:17:03को कैंसिल कर दिया था और उसके प्रोडक्ट को
  3088. 2:17:06डिस्प्ले करना बंद कर दिया था। शिप्रा कुछ
  3089. 2:17:09दिनों से ऑफिस नहीं आ रही थी। इसीलिए उसे
  3090. 2:17:11खबर नहीं लगी। वो [संगीत] आज यहां इसलिए
  3091. 2:17:13आई है कि वह जानना चाहती थी कि ऐसा क्या
  3092. 2:17:16हुआ कि अचानक ही बिगर कलेक्शन ने उसके
  3093. 2:17:18प्रोडक्ट को डिस्प्ले करना बंद कर दिया।
  3094. 2:17:21यह एक ऐसा स्टोर था जहां से लार्ज अमाउंट
  3095. 2:17:23में उसका प्रोडक्ट सेल होता था। यह शिप्रा
  3096. 2:17:26के लिए किसी झटके से कम नहीं था। मैनेजर
  3097. 2:17:29शुक्ला कहां मिलेंगे? शिप्रा ने एक ऑफिस
  3098. 2:17:32बॉय से पूछा तो वो बोला शुक्ला जी को रनित
  3099. 2:17:36सर ने कहीं भेजा है। शिप्रा को आश्चर्य
  3100. 2:17:38हुआ कि बिगर कलेक्शन के मालिक आउटलेट में
  3101. 2:17:40ही है। क्या मिस्टर रनित जनेजा ऑफिस में
  3102. 2:17:44है? ऑफिस बॉय ने हां में जवाब दिया। अभी
  3103. 2:17:47शिप्रा उनके ऑफिस में जाकर मिलने के बारे
  3104. 2:17:49में सोच ही रही थी कि तभी रौनित जनेजा
  3105. 2:17:51बलराज खन्ना के साथ अपने ऑफिस से निकलता
  3106. 2:17:54दिखाई दिया। बलराज खन्ना को देखकर शिप्रा
  3107. 2:17:56की आंखें बड़ी हो गई। दरअसल बलराज खन्ना
  3108. 2:18:00वो व्यक्ति है जो शिप्रा का सीधा कंपिटिट
  3109. 2:18:02है। अब तक रौनित जनेजा की नजर भी शिप्रा
  3110. 2:18:06पर पड़ गई थी। रौनित जनेजा शिप्रा के पास
  3111. 2:18:08आया और बोला अरे मिस शिप्रा आप यहां इनसे
  3112. 2:18:12मिलिए। इनको तो आप जानती ही होंगी। बलराज
  3113. 2:18:15खन्ना
  3114. 2:18:16ये [संगीत] आप क्या कह रहे हैं मिस्टर
  3115. 2:18:18रौनित? ये अब मिस शिप्रा नहीं मिज शिप्रा
  3116. 2:18:21हो गई हैं। आजकल पूरे शहर में इन्हीं के
  3117. 2:18:24तो चर्चे हैं। बलराज खन्ना ने मुस्कुराते
  3118. 2:18:27हुए कहा। इस पर शिप्रा नाखुशी से बोली
  3119. 2:18:30लगता है आजकल आप ज्यादा ही फ्री हैं
  3120. 2:18:32मिस्टर [संगीत] खन्ना। इसीलिए लोगों की
  3121. 2:18:34कुछ ज्यादा ही खबर रखने लगे हैं। अरे नहीं
  3122. 2:18:37नहीं हम कहां ऐसा कर पाते हैं? वो तो आपसे
  3123. 2:18:40कुछ ज्यादा ही प्यार है। इसीलिए आपकी खबर
  3124. 2:18:42रखनी पड़ती है। सच कहूं तो मुझे आपसे बहुत
  3125. 2:18:45ही हमदर्दी है। बहुत गलत हुआ आपके साथ।
  3126. 2:18:48बलराज खन्ना झूठी हमदर्दी जताते हुए बोला
  3127. 2:18:51तो शिप्रा ने बलराज खन्ना पर सीधा तंज
  3128. 2:18:53कसा। मेरी छोड़कर अगर आप अपनी चिंता करें
  3129. 2:18:56तो ज्यादा अच्छा होगा। वैसे भी मुझे बेकार
  3130. 2:18:59लोगों के मुंह लगने का कोई शौक नहीं है।
  3131. 2:19:02शिप्रा की बात सुनकर बलराज का चेहरा लाल
  3132. 2:19:05हो गया। वो गुस्से में बोला
  3133. 2:19:08रस्सी जल गई पर बल नहीं गया। लगता है कि
  3134. 2:19:10वो भिखारी तुम्हें कुछ ज्यादा ही रास आ
  3135. 2:19:12गया है जिससे तुम्हारी शादी हुई है। मानना
  3136. 2:19:15पड़ेगा। पूरे कुत्ते [संगीत] की तुम ही
  3137. 2:19:18हो। कितना भी नाली में रह लो पर टेढ़े के
  3138. 2:19:21टेढ़े ही रहोगे। शिप्रा भी जवाब देने में
  3139. 2:19:23पीछे नहीं रही। बलराज खन्ना गुस्से में
  3140. 2:19:26शिप्रा की तरफ बढ़ा। तुम्हारी इतनी हिम्मत
  3141. 2:19:29वो शिप्रा के और करीब जा पाता उससे पहले
  3142. 2:19:31शौर्य शिप्रा और बलराज खन्ना के बीच आ
  3143. 2:19:33गया। अगले ही पल शौर्य तीखी नजर से बलराज
  3144. 2:19:36खन्ना को घूरते हुए बोला आगे आने की सोचना
  3145. 2:19:40भी मत नहीं तो अपने पैरों पर चलकर वापस
  3146. 2:19:43नहीं जा पाओगे। बलराज खन्ना को उम्मीद
  3147. 2:19:46नहीं थी कि शिप्रा के साथ कोई और भी होगा।
  3148. 2:19:48वो शौर्य को देखकर अपनी जगह पर ही थम गया।
  3149. 2:19:51घनी दाढ़ी के बीच [संगीत] घूरती हुई शौर्य
  3150. 2:19:53की दो आंखें उसे डराने के लिए काफी थी।
  3151. 2:19:56शिप्रा भी उम्मीद नहीं कर रही थी कि शौर्य
  3152. 2:19:58उसके बीच आकर उसकी ढाल बन जाएगा। और वहीं
  3153. 2:20:02बलराज खन्ना से भी शिप्रा ही उम्मीद नहीं
  3154. 2:20:04कर रही थी कि वो यूं उस पर चढ़ाएगा। उसे
  3155. 2:20:07शौर्य को अपने साथ लाने का फैसला अब सही
  3156. 2:20:09लग रहा था क्योंकि अब वो सुरक्षित महसूस
  3157. 2:20:12करने लगी थी।
  3158. 2:20:14मिस शिप्रा मेरे स्टोर में हरकत आपको शोभा
  3159. 2:20:16नहीं देती। रौनित जनेजा कमान अपने हाथ में
  3160. 2:20:19लेते हुए बोला और बलराज खन्ना जो करने की
  3161. 2:20:22कोशिश कर रहा था वो सही था। शिप्रा भी
  3162. 2:20:25रौनित जनेजा को जवाब देती हुई बोली
  3163. 2:20:28ऐसा क्या कर दिया बलराज खन्ना ने उन्होंने
  3164. 2:20:30ऐसा कुछ गलत तो नहीं बोला जो आप कुत्ते की
  3165. 2:20:33पूंछ से उनकी तुलना करने लगी रौनित जनेजा
  3166. 2:20:36बेशर्मी से बोला इस पर शिप्रा रौनित जनेजा
  3167. 2:20:40पर इल्जाम लगाते हुए बोली कमाल है जवाब
  3168. 2:20:43नहीं आपका भी तो आप भी उसी थाली के चट्टे
  3169. 2:20:46बट्टे हैं अब मैं समझी [संगीत] बलराज
  3170. 2:20:49खन्ना के कारण ही आपने हमारे प्रोडक्ट को
  3171. 2:20:51अपने आउटलेट में जगह देने से मना कर
  3172. 2:20:54शिप्रा की इस बात पर रौनित जनेजा शिप्रा
  3173. 2:20:56को ऊपर से नीचे तक घूरता हुआ बोला
  3174. 2:21:00जब इतना समझ [संगीत] आ ही गया है तो फिर
  3175. 2:21:02यहां समय बर्बाद करने क्यों आ गई जाओ अब
  3176. 2:21:05किसी फुटपाथ वाले शॉप पर अपने प्रोडक्ट को
  3177. 2:21:07डिस्प्ले करो वैसे अब एक भिखारी वो क्या
  3178. 2:21:11ही खुश कर पाएगा तुम्हें कभी मेरे लिए समय
  3179. 2:21:14निकालना क्या पता तब मैं तुम्हारे
  3180. 2:21:15प्रोडक्ट को अपने आउटलेट में जगह दे दूं
  3181. 2:21:18यह शब्द शिपरा की बर्दाश्त का चरम था उसने
  3182. 2:21:21एक कदम आगे बढ़ाया और एक जोर का थप्पड़
  3183. 2:21:23रौनने जुनेजा के गाल पर जड़ दिया। रौनने
  3184. 2:21:26जनेजा हैरानी से शिप्रा को देखने लगा। वो
  3185. 2:21:28[संगीत] विश्वास नहीं कर पा रहा था कि
  3186. 2:21:30शिप्रा ने उसे भरे आउटलेट में थप्पड़ रसीद
  3187. 2:21:33कर दिया था। शिप्रा के थप्पड़ की आवाज के
  3188. 2:21:36साथ सबकी निगाहें रौनित जनेजा की तरफ घूम
  3189. 2:21:38गई थी। रौनित जनेजा का हाथ अपने गाल पर
  3190. 2:21:41था। वो कभी शिप्रा को तो कभी आउटलेट में
  3191. 2:21:44मौजूद लोगों को देख रहा था। शायद ऐसी
  3192. 2:21:46बेइज्जती उसने आज तक कभी नहीं झेली थी। वो
  3193. 2:21:49शिप्रा को घूरते हुए बोला शिप्रा राय
  3194. 2:21:53तुमने आज अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल की
  3195. 2:21:55है। मैं खुद अब यह अशोर करूंगा कि तुम
  3196. 2:21:58अपने प्रोडक्ट को इस शहर में कैसे बेच
  3197. 2:22:00पाती हो। अगर मैंने तुम्हें रोड पर ना ला
  3198. 2:22:03दिया तो मेरा नाम रौनित जनेजा नहीं। चलो
  3199. 2:22:07निकल जाओ मेरे आउटलेट से। शिप्रा ने रौनने
  3200. 2:22:10जनेजा को थप्पड़ तो जड़ दिया था पर अब उसे
  3201. 2:22:12खुद महसूस हो रहा था कि उसने गुस्से में
  3202. 2:22:14कुछ ज्यादा ही बड़ा पंगा ले लिया है।
  3203. 2:22:16लेकिन कहते हैं ना कि कमान से निकला तीर
  3204. 2:22:19और मुंह से निकली वाणी वापस नहीं आ सकती।
  3205. 2:22:22उसी तरह शिप्रा ने जो रौनित जनेजा को
  3206. 2:22:24थप्पड़ जड़ा था वो भी अब वापस नहीं हो
  3207. 2:22:26सकता था। इस थप्पड़ की गूंज जाने कब तक
  3208. 2:22:29रौनित जनेजा को सताती रहेगी। बलराज खन्ना
  3209. 2:22:32इस इंसिडेंट से मन ही मन बहुत खुश था। उसे
  3210. 2:22:35लग रहा था कि बिना कुछ किए ही उसने
  3211. 2:22:37मार्केट से अपने सबसे बड़े कंपिटिट को
  3212. 2:22:40बाहर कर दिया है। बिगर कलेक्शन विशालगढ़
  3213. 2:22:43का सबसे बड़ा आउटलेट चेन था। इसका इतना
  3214. 2:22:45प्रभाव था कि छोटे-मोटे आउटलेट को अगर वो
  3215. 2:22:48कह दे कि वे अपने स्टोर में जिंक कलेक्शन
  3216. 2:22:50को जगह ना दें तो कोई उसे मना नहीं करेगा।
  3217. 2:22:53बलराज खन्ना रौनने जनेजा की नजर में उसका
  3218. 2:22:56सबसे बड़ा हितषी बनने का मौका चूकना नहीं
  3219. 2:22:58चाहता था। उसने शिप्रा की तरफ देखते हुए
  3220. 2:23:02गुस्से में कहा। शिप्रा राय आज के दिन को
  3221. 2:23:06तुम कभी भूल नहीं पाओगी। तुमने मिस्टर
  3222. 2:23:08रौनित जनेजा को नहीं अपनी किस्मत को
  3223. 2:23:10थप्पड़ मारा है। अब मैं देखता हूं तुम्हें
  3224. 2:23:13मेरे कहर से कौन बचाता है। शिप्रा को समझ
  3225. 2:23:16नहीं आया कि वो अब क्या करें। वो क्या
  3226. 2:23:18करने आई थी और क्या हो गया। पर उसे अपने
  3227. 2:23:21किए पर कोई अफसोस नहीं था। वो जाते-जाते
  3228. 2:23:24बोली, "भले ही मुझे अपने प्रोडक्ट को
  3229. 2:23:27फुटपाथ पर ही क्यों ना बेचना पड़े, पर मैं
  3230. 2:23:29खुद नहीं चाहूंगी [संगीत] कि मैं अपने
  3231. 2:23:30प्रोडक्ट को कभी तुम जैसे घटिया आदमी के
  3232. 2:23:33आउटलेट में डिस्प्ले करूं। इतना कहने के
  3233. 2:23:35बाद शिप्रा उस आउटलेट से बाहर आ गई। वो
  3234. 2:23:38जानती थी कि वो चुप नहीं बैठेगा। वो जरूर
  3235. 2:23:40उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।
  3236. 2:23:43शौर्य जाकर गाड़ी ले आया तो शिप्रा कार
  3237. 2:23:45में बैठ गई। शिप्रा ने जो आज किया था उससे
  3238. 2:23:49शौर्य के दिल में शिप्रा के लिए रिस्पेक्ट
  3239. 2:23:51और बढ़ गई थी। उसे पता था कि उसके इस कदम
  3240. 2:23:54से उसे फाइनेंशियली नुकसान होने वाला है।
  3241. 2:23:57फिर भी वो रौनित जनेजा को थप्पड़ मारने
  3242. 2:23:59में हिचकी नहीं। [संगीत]
  3243. 2:24:00शौर्य ने कार को भीड़ से बाहर लाकर शिप्रा
  3244. 2:24:03से पूछा।
  3245. 2:24:05अब कहां चलना है? कार में बैठते ही शिप्रा
  3246. 2:24:08सीट से अपना सिर टिका कर आंखें बंद करके
  3247. 2:24:10बैठ गई थी। उसने उसी अवस्था में कहा।
  3248. 2:24:14घर ही ले चलो। शौर्य ने गाड़ी घर की तरफ
  3249. 2:24:17मोड़ दी। उसने बैक मिरर में शिप्रा को
  3250. 2:24:19देखा तो उसकी नजर उसके चेहरे पर ही जम गई।
  3251. 2:24:22कितना सुकून था उसके चेहरे में। ऐसी सादगी
  3252. 2:24:25कि किसी को अपनी ओर आकर्षित कर ले। इतने
  3253. 2:24:28सुकून से शौर्य ने कभी शिप्रा की तरफ नहीं
  3254. 2:24:30देखा था। अब भी वो इसीलिए बिना झिझके देख
  3255. 2:24:33रहा था क्योंकि शिप्रा ने अपनी आंखें बंद
  3256. 2:24:36की हुई थी। शौर्य समझ रहा था कि भले ही
  3257. 2:24:38शिप्रा के चेहरे पर शांति नजर आ रही थी,
  3258. 2:24:41पर [संगीत] उसके अंदर बहुत उथल-पुथल हो
  3259. 2:24:43रही होगी। और उसी पल शौर्य ने सोच लिया कि
  3260. 2:24:46वो उसकी मदद करेगा। उसने शिप्रा का दिल
  3261. 2:24:49टटोलने के इरादे से पूछा। आज जो घटना हुई
  3262. 2:24:53आपने सोचा उसके बाद आप क्या करेंगी?
  3263. 2:24:56पता नहीं अभी तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।
  3264. 2:25:00शिप्रा की आंखें अभी भी बंद थी।
  3265. 2:25:03आपने कभी बिग बुल के साथ काम करने की
  3266. 2:25:06कोशिश नहीं की। शौर्य ने बात को एक नई
  3267. 2:25:09दिशा देने की कोशिश की। बिग बबुल का नाम
  3268. 2:25:11सुनकर शिप्रा अपनी आंखें खोलते हुए
  3269. 2:25:13आश्चर्य से बोली
  3270. 2:25:16तुम्हें पता भी है कि बिग बबुल कितने बड़े
  3271. 2:25:18ब्रांड के साथ काम करती है? शिप्रा ने फिर
  3272. 2:25:21कुछ मिनट रुक कर कहा अभी कुछ महीने पहले
  3273. 2:25:24ही तो इस स्टोर की ओपनिंग भारत में हुई है
  3274. 2:25:26और यह सिर्फ टॉप के ब्रांड के साथ ही काम
  3275. 2:25:28करती है। फिर भी कोशिश करने में क्या जाता
  3276. 2:25:31है? शौर्य ने जोर देकर अपनी बात कही। इस
  3277. 2:25:34पर शिप्रा ने निराशा भरे स्वर में कहा,
  3278. 2:25:37तुम्हें क्या लगता है [संगीत] कि मैंने
  3279. 2:25:38कोशिश नहीं की? बिग बुल के साथ अपने
  3280. 2:25:40प्रोडक्ट को लिस्ट करना बड़ी बात है।
  3281. 2:25:42मैंने कोशिश की थी पर बात नहीं बनी।
  3282. 2:25:46दरअसल मेरा एक जानने वाला वहां काम करता
  3283. 2:25:49है। अगर आप कहें तो मैं एक बार उससे बात
  3284. 2:25:51करके उस कंपनी के किसी सीनियर से आपकी
  3285. 2:25:53मीटिंग कराऊं क्या? शौर्य ने बैक मिरर में
  3286. 2:25:56शिप्रा को देखते हुए पूछा।
  3287. 2:25:59तुम्हें लगता है कि किसी सेल्समैन की बात
  3288. 2:26:01सुनकर कोई एग्जीक्यूटिव रैंक का पर्सन
  3289. 2:26:03मुझसे मीटिंग करेगा? अरे मैंने तो यह भी
  3290. 2:26:05सुना है कि बिग बुल का ओनर यूनाइटेड
  3291. 2:26:08किंगडम में रहता है। यही नहीं वो वहां के
  3292. 2:26:10राज परिवार से भी संबंध रखता है। शिप्रा
  3293. 2:26:14ने सोचा कि शौर्य का जानने वाला अगर वहां
  3294. 2:26:16काम करता होगा तो कोई सेल्समैन ही होगा।
  3295. 2:26:18कोई मैनेजर किसी सेल्समैन की बात को कितनी
  3296. 2:26:21तरजीह देगा। शौर्य को समझ नहीं आया कि अब
  3297. 2:26:24वो शिप्रा को कैसे मोटिवेट करें। [संगीत]
  3298. 2:26:26कुछ सोचकर उसने कहा कोशिश करने में क्या
  3299. 2:26:29हर्ज है। मेरा मतलब है अगर आप कहें तो मैं
  3300. 2:26:32ट्राई करके देख सकता हूं। ज्यादा से
  3301. 2:26:34ज्यादा क्या होगा? ना सुनने को मिलेगी।
  3302. 2:26:37इसमें नुकसान ही क्या है? कम से कम यह पता
  3303. 2:26:39चल जाएगा कि मेरा दोस्त कुछ कर पाने के
  3304. 2:26:41लायक है भी या नहीं। तुमने मेरे बारे में
  3305. 2:26:44इतना सोचा यह काफी है मेरे लिए। इसके बाद
  3306. 2:26:47भी अगर तुम कोशिश करना चाहते हो तो मैं
  3307. 2:26:49तुम्हें रोकूंगी नहीं। और मैं तुम्हें यह
  3308. 2:26:52भी बता दूं कि अगर तुम इसमें सफल नहीं भी
  3309. 2:26:54हो पाते हो तो भी इसमें कोई बुरा लगने
  3310. 2:26:56वाली बात नहीं होगी।
  3311. 2:26:58शिप्रा ने इसलिए कहा कि कल को शौर्य का
  3312. 2:27:01दोस्त बिग बुल के साथ कोई मीटिंग अरेंज
  3313. 2:27:03नहीं भी कर पाता है तो उसको लेकर शौर्य को
  3314. 2:27:05बुरा फील ना हो। ठीक है मैं ध्यान रखूंगा।
  3315. 2:27:08बोलते हुए शौर्य को कुछ अजीब सा एहसास
  3316. 2:27:10हुआ। वो गौर से अपनी गाड़ी के साइड मिरर
  3317. 2:27:13को देखने लगा। अचानक एक मोड़ पर उसने कार
  3318. 2:27:16को एक अलग रास्ते पर मोड़ लिया। उसने देखा
  3319. 2:27:18कि एक लाल रंग की वैन भी उसके साथ ही उस
  3320. 2:27:21रास्ते पर मुड़ गई। अब शौर्य को पक्का
  3321. 2:27:23यकीन हो गया कि एक गाड़ी उसी का पीछा कर
  3322. 2:27:26रही है। शौर्य अब चौकन्ना हो गया था।
  3323. 2:27:29शिप्रा ने जब देखा कि शौर्य ने गाड़ी गलत
  3324. 2:27:32रास्ते पर ले ली है तो उसने कहा तुम ये
  3325. 2:27:35कहां चल दिए? यह किस रास्ते पर गाड़ी ले
  3326. 2:27:38आए? कोई हमारा पीछा कर रहा है। शौर्य अपनी
  3327. 2:27:41पीछे वाली गाड़ी पर नजर गड़ाए हुए ही
  3328. 2:27:43बोला।
  3329. 2:27:46भला कौन हमारा पीछा करेगा? शिप्रा पीछे
  3330. 2:27:49देखते हुए बोली हमारे पीछे जो लाल रंग की
  3331. 2:27:52वैन देख रही हैं आप वही हमारा पीछा कर रही
  3332. 2:27:54है। शौर्य ने जवाब दिया इस पर शिप्रा ने
  3333. 2:27:57अपना शक जाहिर किया। कहीं ये रौनक जनेजा
  3334. 2:28:00का काम तो नहीं है? वो अपनी बेइज्जती का
  3335. 2:28:02बदला लेना चाहता हो? नहीं यह उसका काम
  3336. 2:28:07नहीं हो सकता। शौर्य इंकार में गर्दन
  3337. 2:28:09हिलाता हुआ बोला। तुम इतने यकीन से कैसे
  3338. 2:28:12कह सकते हो? शिप्रा की आवाज में थोड़ी
  3339. 2:28:15घबराहट थी। [संगीत] मैं ऐसा इसलिए कह रहा
  3340. 2:28:17हूं कि हमारे चार मीनार पहुंचने से पहले
  3341. 2:28:19से यह कार हमारा पीछा कर रही है। हिल टॉप
  3342. 2:28:22से निकलने के कुछ देर बाद से ही मैं इस
  3343. 2:28:24कार को देख रहा था। पर उस समय मुझे शक
  3344. 2:28:26नहीं हुआ था। लेकिन एक बार फिर से चार
  3345. 2:28:29मीनार से निकलने के बाद जब दोबारा इस कार
  3346. 2:28:31को अपने पीछे देखा तो मुझे शक हुआ। इसीलिए
  3347. 2:28:34मैंने गलत रास्ते पर अपनी गाड़ी ले ली।
  3348. 2:28:36फिर भी उसने हमारा पीछा नहीं छोड़ा।
  3349. 2:28:39शौर्य ने शिप्रा को यकीन दिलाया। यह सुनकर
  3350. 2:28:42शिप्रा के चेहरे पर चिंता की लकीर खींच
  3351. 2:28:44गई। वो परेशान होकर बोली अब हम क्या
  3352. 2:28:47करेंगे?
  3353. 2:28:49आप चिंता मत कीजिए मैं देखता हूं इसे। मैं
  3354. 2:28:52भी तो देखूं चाहता क्या है ये? इतना कहकर
  3355. 2:28:55शौर्य ने अपनी गाड़ी की स्पीड भी बढ़ा दी।
  3356. 2:28:57जैसे ही शौर्य की गाड़ी की स्पीड बढ़ी वैन
  3357. 2:28:59की स्पीड भी बढ़ गई। वो शिप्रा की कार का
  3358. 2:29:02पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।
  3359. 2:29:05आगे सड़क थोड़ी पतली हो गई थी। जिसके एक
  3360. 2:29:07तरफ डिवाइडर और दूसरी तरफ खाई थी। शौर्य
  3361. 2:29:10ने शिप्रा से कहा, आप अपने पैर आगे जमाकर
  3362. 2:29:13पीछे की तरफ पुश करके रहिएगा। शिप्रा ने
  3363. 2:29:16वैसे ही किया। शौर्य गाड़ी की स्पीड
  3364. 2:29:18बढ़ाता गया। पीछे वाली कार उसी रफ्तार से
  3365. 2:29:21आगे बढ़ती रही। जब दोनों गाड़ियों का
  3366. 2:29:23डिस्टेंस कम रह गया तो शौर्य ने अचानक
  3367. 2:29:26अपनी गाड़ी का ब्रेक लगा दिया। अचानक
  3368. 2:29:28सामने वाली गाड़ी का ब्रेक लगते देख वैन
  3369. 2:29:30का ड्राइवर अपनी गाड़ी पर नियंत्रण नहीं
  3370. 2:29:32रख पाया। टक्कर से बचने के लिए उसने अपनी
  3371. 2:29:35वैन [संगीत] को बाएं मोड़ दिया और वो सीधा
  3372. 2:29:37गड्ढे में जा गिरी। शौर्य ने देखा कि वैन
  3373. 2:29:40बुरी तरह पिचक चुकी थी। उसने शिप्रा को
  3374. 2:29:42गाड़ी में ही रुकने का इशारा किया और खुद
  3375. 2:29:45बाहर आ गया। वैन में तीन लोग थे। आगे
  3376. 2:29:48ड्राइवर और दो पीछे। पलटने से दरवाजा जाम
  3377. 2:29:51हो गया था। ड्राइवर बेहोश था। जबकि पीछे
  3378. 2:29:54वाले दोनों होश में थे लेकिन घायल। उनमें
  3379. 2:29:57से एक बदमाश अपना हाथ पकड़ कर चिल्ला रहा
  3380. 2:29:59था। शौर्य ने देखा उसका हाथ बुरी तरह जला
  3381. 2:30:02हुआ था। चमड़ी तक पिघली हुई। पहले समझ
  3382. 2:30:05नहीं आया क्योंकि आग तो लगी नहीं थी लेकिन
  3383. 2:30:08फिर ध्यान से देखने पर साफ हुआ कि यह
  3384. 2:30:10तेजाब का असर था। शायद उसके हाथ में तेजाब
  3385. 2:30:13का जार था जो पलटते ही उस पर गिर गया।
  3386. 2:30:16दूसरा बदमाश जो पहले बदमाश से कम घायल था
  3387. 2:30:19वो शौर्य से उसे वैन से बाहर निकालने की
  3388. 2:30:21विनती करने लगा। कौन हो तुम? और यह बताओ
  3389. 2:30:24कि तुम हमारा पीछा क्यों कर रहे थे? शौर्य
  3390. 2:30:27ने सीधा सवाल किया। मैं तुम्हारे सभी
  3391. 2:30:30सवालों का जवाब दूंगा। पर पहले हमें इस
  3392. 2:30:33गाड़ी से निकालो। दूसरा बदमाश दरवाजे को
  3393. 2:30:36खोलने की कोशिश करते हुए बोला, "मुझे लगता
  3394. 2:30:39है तुम्हें मेरी मदद नहीं चाहिए। तो फिर
  3395. 2:30:42ऐसे ही पड़े रहो। इतना बोलकर शौर्य पलटने
  3396. 2:30:46ही वाला था कि पहला बदमाश बोला, रुको
  3397. 2:30:48रुको। मैं बताता हूं। रुको। हमें रजत ने
  3398. 2:30:52भेजा था। रजत ने। शौर्य तुरंत सारा मामला
  3399. 2:30:55समझ गया।
  3400. 2:30:57इसका मतलब तुम लोग शिप्रा के ऊपर तेजाब
  3401. 2:30:59डालने वाले थे। यह सुनकर पहले बदमाश ने
  3402. 2:31:02अपनी नजर फेर ली। शौर्य उसको नफरत भरी नजर
  3403. 2:31:05से देखता हुआ बोला,
  3404. 2:31:07तुम शिप्रा के ऊपर तेजाब डालने वाले थे और
  3405. 2:31:10तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें यहां से बाहर
  3406. 2:31:12निकालूं। तुम इसी लायक हो कि तुम यहां
  3407. 2:31:14फंसे रहो। प्लीज हमें ऐसे छोड़ कर मत जाओ।
  3408. 2:31:19वैसे भी सुनसान इलाका है। जल्दी किसी की
  3409. 2:31:21नजर भी नहीं पड़ेगी। मैं तो इसके चक्कर
  3410. 2:31:23में यहां फंस गया। दूसरा बदमाश
  3411. 2:31:26गिड़गिड़ाते हुए बोला। उसकी उम्र भी
  3412. 2:31:28ज्यादा नहीं लग रही थी। शौर्य ने फिर एक
  3413. 2:31:31पल सोचा और बोला,
  3414. 2:31:33मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकता। बस
  3415. 2:31:36कॉल करके एंबुलेंस को खबर कर देता हूं।
  3416. 2:31:39इसके बाद शौर्य ने पुलिस का नंबर डायल
  3417. 2:31:41किया और यहां हुआ एक्सीडेंट की खबर कर दी।
  3418. 2:31:43उसे पता था कि जब पुलिस इन बदमाशों से
  3419. 2:31:45तेजाब से हाथ जलने के बारे में पूछेगी तो
  3420. 2:31:48इनके लिए जवाब देना भारी पड़ने वाला है।
  3421. 2:31:50[संगीत] शौर्य उन बदमाशों को ऐसे ही
  3422. 2:31:52छोड़कर शिप्रा के पास पहुंच गया। उसने
  3423. 2:31:54अपनी सीट संभाली और गाड़ी को वापस मोड़
  3424. 2:31:57लिया। [संगीत]
  3425. 2:31:58कुछ पता चला कौन है ये लोग? शिप्रा ने
  3426. 2:32:01शौर्य की तरफ झुक कर पूछा।
  3427. 2:32:04इन्हें रजत ने भेजा था।
  3428. 2:32:08शौर्य ने जवाब दिया।
  3429. 2:32:11मुझे पहले ही समझ जाना चाहिए था कि यह उसी
  3430. 2:32:13का काम हो सकता है। बोलते हुए शिप्रा के
  3431. 2:32:16माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई। आप टेंशन
  3432. 2:32:19मत लीजिए। उन्हें उनके किए की सजा हाथों
  3433. 2:32:22हाथ मिल गई है। शौर्य ने शिप्रा को दिलासा
  3434. 2:32:24दिया। इस पर शिप्रा ने पूछा क्या हुआ उनके
  3435. 2:32:28साथ? वो बुरी तरह घायल हो चुके हैं। मैंने
  3436. 2:32:31पुलिस को फोन कर दिया है। बाकी खातिरदारी
  3437. 2:32:33पुलिस कर देगी।
  3438. 2:32:35शौर्य ने जानबूझकर तेजाब वाली बात शिप्रा
  3439. 2:32:38को नहीं बताई क्योंकि [संगीत] यह सुनकर वह
  3440. 2:32:40पैनिकिक कर सकती थी। थोड़ी ही देर में
  3441. 2:32:43शौर्य शिप्रा को लेकर उसके घर पहुंच गया।
  3442. 2:32:46शिप्रा कार से उतर कर अपने घर चली गई और
  3443. 2:32:48शौर्य अपने क्वार्टर में पहुंच गया। उसने
  3444. 2:32:51फोन निकाला और विक्रम को कॉल किया। लंबी
  3445. 2:32:54रिंग जाने के बाद विक्रम ने फोन उठाया और
  3446. 2:32:56विक्रम की आवाज आई।
  3447. 2:32:58हेलो कौन बोल रहा है?
  3448. 2:33:01इस पर शौर्य गंभीर आवाज में बोला। मैं बोल
  3449. 2:33:05रहा हूं शौर्य
  3450. 2:33:07बॉस अच्छा हुआ आपने फोन कर लिया मेरे पास
  3451. 2:33:09आपसे कनेक्ट करने का कोई साधन नहीं था
  3452. 2:33:12विक्रम की आवाज में राहत झलक रही थी उसकी
  3453. 2:33:14बातों से लगा कि वो खुद शौर्य से कांटेक्ट
  3454. 2:33:17करना चाहता था पर उसके पास कोई नंबर नहीं
  3455. 2:33:19होने के कारण वो हेल्पलेस था शौर्य विक्रम
  3456. 2:33:22की लाचारी को बिना कहे समझ गया और हल्की
  3457. 2:33:24मुस्कान के साथ बोला इस नंबर को सेव कर लो
  3458. 2:33:27अब यह फोन मेरे पास ही रहेगा
  3459. 2:33:29फाइनली आपने मोबाइल ले ही लिया
  3460. 2:33:32विक्रम चैन की सांस लेते हुए बोला
  3461. 2:33:35अच्छा बताइए मेरे लिए क्या आदेश है?
  3462. 2:33:37शौर्य की आंखें हल्की सुकुड़ी वो सीधे
  3463. 2:33:39मुद्दे पर आते हुए बोला यह बताओ अभी
  3464. 2:33:42इंडिया में बिग बुल का इंचार्ज कौन है?
  3465. 2:33:45मोहित रैना क्यों बॉस कोई प्रॉब्लम?
  3466. 2:33:48विक्रम चौकन्ना हो गया। लेकिन शौर्य ने
  3467. 2:33:50शांत स्वर में कहा। नहीं कोई प्रॉब्लम
  3468. 2:33:53नहीं है। बस शिप्रा से उसकी एक मीटिंग
  3469. 2:33:55करानी है। एक पल की चुप्पी के बाद विक्रम
  3470. 2:33:58तुरंत बोला।
  3471. 2:33:59ठीक है। आप बताइए कब करनी है मीटिंग? वो
  3472. 2:34:02खुद जाकर शिप्रा मेरा मतलब है भाभी से
  3473. 2:34:04मिलने का।
  3474. 2:34:05कहते हुए विक्रम को समझ ही नहीं आ रहा था
  3475. 2:34:07कि वो शिप्रा को क्या कहकर पुकारे। अरे
  3476. 2:34:10नहीं ऐसा कुछ नहीं करना है। इस तरह से
  3477. 2:34:12नहीं मिलाना है। शौर्य ने तुरंत उसकी बात
  3478. 2:34:16काट दी। उसकी आवाज धीमी थी लेकिन उसमें
  3479. 2:34:18आदेश स्पष्ट था। फिर वो कुछ सोच कर बोला।
  3480. 2:34:23एक काम करो पहले मुझसे मोहित की मीटिंग
  3481. 2:34:25कराओ। मैं उसे समझा दूंगा। विक्रम समझ गया
  3482. 2:34:28कि कोई साधारण मीटिंग नहीं होने वाली। फिर
  3483. 2:34:31भी वह तपाक से बोला,
  3484. 2:34:32कोई टेंशन नहीं है बॉस। आप जगह बताइए। मैं
  3485. 2:34:35उसे अभी लेकर हाजिर हो जाता हूं।
  3486. 2:34:37तुम मुझे बताओ वो कहां मिलेगा? मैं खुद
  3487. 2:34:40वहां चला जाऊंगा। शौर्य ने जल्दी से कहा।
  3488. 2:34:42उसे लगा अगर उसने और टाइम लगाया तो कहीं
  3489. 2:34:45विक्रम खुद ही वहां प्रकट ना हो जाए।
  3490. 2:34:48ठीक है। ऐसा कीजिए बॉस। अगर आप खुद ही आना
  3491. 2:34:50चाहते हैं तो बिग बुल के चार मीनार वाले
  3492. 2:34:52स्टोर पर आ जाइए। मोहित राज जहां भी होगा
  3493. 2:34:55उसको मैं वहीं बुला लूंगा और मैं खुद भी आ
  3494. 2:34:57जाता हूं।
  3495. 2:34:59विक्रम किसी कमांडो की तरह जोश में बोला।
  3496. 2:35:02इस पर शौर्य ने मोबाइल में टाइम देखते हुए
  3497. 2:35:04कहा, ठीक है मैं आधे घंटे में चार मीनार
  3498. 2:35:07पहुंचता हूं। तो मोहित रैना को लेकर वहीं
  3499. 2:35:09पहुंचो।
  3500. 2:35:10ठीक है बॉस जो हुकुम।
  3501. 2:35:12शौर्य ने फोन काटा और राय साहब की हवेली
  3502. 2:35:14से पैदल निकल गया। कुछ दूर जाकर उसने
  3503. 2:35:17टैक्सी पकड़ी और आधे घंटे में वो चार
  3504. 2:35:19मीनार मार्केट में बिग बबुल के स्टोर के
  3505. 2:35:21बाहर था। अंदर जाकर उसने पूरे स्टोर का
  3506. 2:35:24जायजा लिया। जहां सभी इंटरनेशनल ब्रांड्स
  3507. 2:35:27उपलब्ध थे। बिग बुल शौर्य का ही कांसेप्ट
  3508. 2:35:30था जिसे उसने खुद अपने दम पर एस्टैब्लिश
  3509. 2:35:32किया था। यूके में तो यह ब्रांड पहले से
  3510. 2:35:35ही बेहद पॉपुलर था। करीब 10 महीने पहले
  3511. 2:35:37शौर्य ने इसे भारत में ल्च किया था।
  3512. 2:35:40शुरुआती सफलता के बाद अब इसका विस्तार कई
  3513. 2:35:42शहरों में किया जा रहा था। खैर, शौर्य
  3514. 2:35:45स्टोर के अंदर गया जो चमकती रोशनी से
  3515. 2:35:47झिलमिला रहा था। कस्टमर्स अपने पसंदीदा
  3516. 2:35:50इंटरनेशनल ब्रांड्स को खरीद रहे थे। लेकिन
  3517. 2:35:52शौर्य की नजर किसी और चीज को स्कैन कर रही
  3518. 2:35:55थी। वहां का सिस्टम वेल ट्रेंड एम्प्लाइज
  3519. 2:35:58और उनका व्यवहार। घूमते हुए शौर्य ज्वेलरी
  3520. 2:36:01सेक्शन में पहुंचा तो उसकी नजर शोकेस में
  3521. 2:36:03रखी एंटीक रिंग्स पर गई। उन्हें देखकर
  3522. 2:36:07शौर्य की आंखों में हल्की चमक आ गई। उसे
  3523. 2:36:10अंगूठियों का बहुत शौक था। लेकिन वाल्मीकि
  3524. 2:36:12के लिए उसने अपनी अंगूठी गिरवी रख दी थी।
  3525. 2:36:15वो शोकेस में रखी एंटीक अंगूठियों को
  3526. 2:36:17देखने लगा। शौर्य को शोकेस के पास देखकर
  3527. 2:36:21एक सेल्स गर्ल की मीठी आवाज आई। सर कैन आई
  3528. 2:36:24हेल्प यू? अगर आप कुछ सर्च कर रहे हैं तो
  3529. 2:36:26मैं आपकी मदद कर सकती हूं। शौर्य ने
  3530. 2:36:29अंगूठियों से नजर हटाए बिना ही जवाब दिया।
  3531. 2:36:31अभी मैं बस देख रहा हूं। कुछ पसंद आया तो
  3532. 2:36:34मैं जरूर आपकी मदद लूंगा। पास खड़ी दूसरी
  3533. 2:36:37सेल्स गर्ल श्वेता धीरे से हंसते हुए
  3534. 2:36:39बोली। क्या प्रिया इसका हुलिया तो देख।
  3535. 2:36:42क्यों टाइम वेस्ट कर रही है? ऐसे लोग बस
  3536. 2:36:45देखने ही आते हैं। शौर्य ने सब सुन लिया
  3537. 2:36:48था। लेकिन वो तुरंत कुछ नहीं बोला। कुछ पल
  3538. 2:36:51के लिए वो उन एंटीक रिंग्स को निहारता
  3539. 2:36:52रहा। फिर धीरे से मुड़ा और सीधे श्वेता के
  3540. 2:36:55सामने जाकर खड़ा हो गया और उसकी आंखों में
  3541. 2:36:57देखता रहा। उसकी नजर ऐसी थी कि एक सेकंड
  3542. 2:37:00में ही श्वेता असहज हो गई। शौर्य ने शांत
  3543. 2:37:03स्वर में कहा। एक सवाल पूछूं? श्वेता
  3544. 2:37:06हड़बड़ा गई। कि क्या मतलब? शौर्य ने उसकी
  3545. 2:37:09आंखों में झांकते हुए कहा। दिन भर में
  3546. 2:37:12कितने लोगों को अटेंड करती हो तुम? श्वेता
  3547. 2:37:15की तो सिट्टी पिट्टी गुल हो चुकी थी। उसकी
  3548. 2:37:17हलक से आवाज ही नहीं निकल रही थी। यह
  3549. 2:37:20देखकर उसकी फ्रेंड प्रिया बीच में बोल
  3550. 2:37:22पड़ी। सॉरी सर वो एक्चुअली मैंने आपसे
  3551. 2:37:25नहीं पूछा। शौर्य ने उसकी तरफ देखे बिना
  3552. 2:37:28ही कहा। उसका पूरा ध्यान श्वेता पर ही था।
  3553. 2:37:32तुमसे कुछ पूछ रहा हूं मैं। जवाब दो।
  3554. 2:37:35शौर्य की आवाज धीमी थी। मगर दबाव साफ था।
  3555. 2:37:38श्वेता को उम्मीद नहीं थी कि शौर्य उसके
  3556. 2:37:40पास आकर अचानक क्यों क्वेश्चन करेगा? वो
  3557. 2:37:43हड़बड़ा कर बोली, क्या मतलब हुआ इस सवाल
  3558. 2:37:46का? मैंने सिंपल सा सवाल किया है कि आप
  3559. 2:37:49दिन भर में कितने लोगों को यहां अटेंड
  3560. 2:37:51करती हो? शौर्य ने फिर से वही सवाल
  3561. 2:37:53दोहराया। प्रिया को लगा कि श्वेता की बात
  3562. 2:37:56शौर्य को बुरी लग गई है। इसीलिए वो उससे
  3563. 2:37:58सवाल कर रहा है। वो बात को ना बढ़ाते हुए
  3564. 2:38:01बोली। सॉरी सर अगर आपको मेरी फ्रेंड की
  3565. 2:38:04बात बुरी लगी हो तो वी आर रियली सॉरी।
  3566. 2:38:07इसका मकसद आपको हर्ट करना नहीं था। डोंट
  3567. 2:38:10बी सॉरी। मैं इनकी बात का बुरा नहीं मान
  3568. 2:38:13रहा हूं। मैंने इनसे एक सिंपल सा सवाल
  3569. 2:38:15किया है। मैं बस उसका जवाब चाहता हूं।
  3570. 2:38:18शौर्य सहज भाव से बोला। श्वेता को लगा कि
  3571. 2:38:20प्रिया के सॉरी बोलने के बाद इस आदमी को
  3572. 2:38:23बात खत्म कर देनी चाहिए। लेकिन फिर भी वह
  3573. 2:38:25सवाल किए जा रहा है। श्वेता इरिटेट होकर
  3574. 2:38:28शौर्य से बोली। दिखने में तो तुम फटीचर ही
  3575. 2:38:31लग रहे हो। पता नहीं तुम्हारे अंदर किस
  3576. 2:38:33बात का घमंड है जो मुझसे सवाल कर रहे हो।
  3577. 2:38:36श्वेता कैसी बात कर रही हो तुम? कुछ बोलने
  3578. 2:38:38से पहले सोच तो लिया करो। प्रिया ने
  3579. 2:38:42श्वेता को झड़कते हुए कहा। पर शौर्य
  3580. 2:38:44प्रिया को नजरअंदाज करता हुआ श्वेता से
  3581. 2:38:46बोला। तुम सही कह रही हो। मैं फटीचर ही
  3582. 2:38:49हूं। पर फिर भी मेरा सवाल वही है कि तुम
  3583. 2:38:52एक दिन में कितने कस्टमर को अटेंड करती
  3584. 2:38:54हो? अब तक श्वेता बुरी तरह चिढ़ चुकी थी।
  3585. 2:38:57उसने दांत पीसकर कहा 25-30 कस्टमर। तो अब
  3586. 2:39:01क्या करोगे इस इंफॉर्मेशन का? और उनमें से
  3587. 2:39:05कितने लोग प्रोडक्ट खरीदते हैं? शौर्य ने
  3588. 2:39:08मुस्कुराते हुए पूछा तो श्वेता ने
  3589. 2:39:10झुंझुलाकर जवाब दिया, सात या आठ? यह सुनकर
  3590. 2:39:14शौर्य हल्का सा मुस्कुराया और बोला,
  3591. 2:39:17इंटरेस्टिंग। मतलब तुम चेहरा देखकर पहचान
  3592. 2:39:20लेती हो कि कौन खरीदेगा और कौन नहीं।"
  3593. 2:39:23श्वेता कुछ बोल पाती उससे पहले ही शौर्य
  3594. 2:39:26आगे बोल पड़ा। अच्छा फिर भी 30 में से
  3595. 2:39:29[संगीत] 22 लोग बिना खरीदे चले जाते हैं।
  3596. 2:39:32अब उसकी आवाज में हल्की धार आ गई थी। तो
  3597. 2:39:35इसका मतलब यह हुआ कि तुम्हारी पहचान गलत
  3598. 2:39:38है या फिर शायद तुम्हारी सेलिंग स्किल्स।
  3599. 2:39:41स्टोर में एकदम सन्नाटा छा चुका था।
  3600. 2:39:44प्रिया भी चुप थी और आसपास खड़े लोग अब
  3601. 2:39:46ध्यान से शौर्य को सुन रहे थे। सबके सामने
  3602. 2:39:49इस तरह एंबरेस होकर श्वेता का चेहरा लाल
  3603. 2:39:52हो गया। देखो मिस्टर बहुत हो गया।
  3604. 2:39:57रिलैक्स।
  3605. 2:39:59शौर्य ने हाथ उठाकर उसे बीच में ही रोक
  3606. 2:40:01दिया। मैं बस तुम्हें और तुम्हारी
  3607. 2:40:04कैपेबिलिटीज को समझना चाह रहा था। कहते
  3608. 2:40:07हुए उसकी आंखों में अब हल्की सख्ती थी।
  3609. 2:40:09कस्टमर कभी टाइम पास नहीं होता या तो वह
  3610. 2:40:12बाय करता है या तुम उसे कन्विंस नहीं कर
  3611. 2:40:14पाती। शौर्य अपनी बात को क्लेरिफाई करते
  3612. 2:40:17हुए बोला। अब जाकर सबको समझ आया कि शौर्य
  3613. 2:40:20क्या कहना चाहता है। प्रिया भी शौर्य की
  3614. 2:40:23बात का मतलब समझकर मुस्कुरा दी। पर श्वेता
  3615. 2:40:26बुरी तरह चिढ़ चुकी थी और वो झल्ला कर
  3616. 2:40:28बोली ए मिस्टर बहुत हो गया ओके कुछ लेना
  3617. 2:40:31है तो लो नहीं तो निकलो यहां से और ये
  3618. 2:40:34भाषण बाजी का इतना ही शौक है तो इलेक्शन
  3619. 2:40:36में खड़े हो जाओ समझे
  3620. 2:40:38श्वेता ने इतना कहा ही था कि तभी शौर्य का
  3621. 2:40:40फोन बज उठा ये विक्रम का फोन था शौर्य ने
  3622. 2:40:44फोन उठाया दूसरी तरफ से विक्रम की आवाज आई
  3623. 2:40:48क्या हुआ बॉस आप आए नहीं अभी तक
  3624. 2:40:51मैं यहीं पर हूं स्टोर में ज्वेलरी
  3625. 2:40:54डिपार्टमेंट
  3626. 2:40:55शौर्य का जवाब सुनकर विक्रम तपाक से बोला,
  3627. 2:40:58अरे बॉस आपको बताना चाहिए था ना? मैं तो
  3628. 2:41:01कब से बाहर ही आपका इंतजार कर रहा था। ठीक
  3629. 2:41:03है मैं अभी आपके पास पहुंचता हूं।
  3630. 2:41:07श्वेता ने सिर्फ शौर्य की बात सुनी। दूसरी
  3631. 2:41:09तरफ की बात तो उसे सुनाई नहीं दी। पर
  3632. 2:41:11शौर्य की बात सुनकर उसने यह निष्कर्ष
  3633. 2:41:13निकाला कि यह स्टोर शौर्य के लिए एक
  3634. 2:41:16मीटिंग पॉइंट से ज्यादा कुछ नहीं है। सुना
  3635. 2:41:19तुम सबने? इसने तो इस स्टोर को भी मिलने
  3636. 2:41:21की जगह बना रखा है। श्वेता की कड़वाहट कम
  3637. 2:41:25होने का नाम ही नहीं ले रही थी। अब तक कई
  3638. 2:41:27सेल्समैन वहां पर इकट्ठा हो चुके थे। तभी
  3639. 2:41:30एक सेल्समैन आगे आकर बोला,
  3640. 2:41:33"क्यों भाई? क्यों हमारा टाइम खराब कर रहे
  3641. 2:41:36हो? कुछ लेना है तो लो, नहीं तो निकलो
  3642. 2:41:37यहां से।" सेल्समैन के रवैया को देखकर
  3643. 2:41:40शौर्य उसकी तरफ मुड़कर बोला, "अरे क्या
  3644. 2:41:43बात हुई? तुम लोग ऐसे ट्रीट करते हो अपने
  3645. 2:41:46कस्टमर को?"
  3646. 2:41:47ओ भाई अब क्या तुमसे सीखना पड़ेगा कि
  3647. 2:41:49कस्टमर से कैसे ट्रीट किया जाता है? वो
  3648. 2:41:52सेल्समैन शायद श्वेता पर अपना इंप्रेशन
  3649. 2:41:54जमाने के चक्कर में कुछ ज्यादा ही बोल रहा
  3650. 2:41:56था। शौर्य खुद को कंट्रोल में रखकर बोला
  3651. 2:41:59यार तुम नाराज क्यों होते हो? मैंने तो
  3652. 2:42:02बहुत नाम सुना था बिग बुल का। इसकी कस्टमर
  3653. 2:42:05सर्विस की भी बहुत तारीफ सुनी थी। पर
  3654. 2:42:07तुमने तो मेरा सारा भ्रम ही तोड़ दिया। आज
  3655. 2:42:10शौर्य शायद पहली बार भारत के किसी आउटलेट
  3656. 2:42:12में आया था और ऐसी कस्टमर सर्विस उसने
  3657. 2:42:15एक्सपेक्ट नहीं की थी। शौर्य की बात सुनकर
  3658. 2:42:18सेल्समैन के चेहरे पर हल्की असहजता झलक
  3659. 2:42:20उठी। वो कुछ कहना चाहता था पर परिस्थिति
  3660. 2:42:23को भांपते हुए उसने चुप रहना ही बेहतर
  3661. 2:42:25समझा। लेकिन श्वेता चुप रहने वालों में से
  3662. 2:42:28नहीं थी। उसने भौ चढ़ाते हुए सीधे सवाल
  3663. 2:42:31दाग दिया। तुम यह बोलकर क्या जताना चाहते
  3664. 2:42:34हो कि हम अपना काम ठीक से नहीं कर रहे।
  3665. 2:42:36शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ उसकी तरफ
  3666. 2:42:38देखा जैसे उसे इसी सवाल का इंतजार हो। यह
  3667. 2:42:42तो तुम ही बताओ क्या ऐसे ही जॉब की जाती
  3668. 2:42:45है? ऐसे एटीट्यूड के साथ वो आराम से बोला
  3669. 2:42:48पर उसके लहजे में चुभन साफ थी। श्वेता
  3670. 2:42:51तिलमिला गई। उसने हाथ बांध लिए और तंज
  3671. 2:42:54कसते हुए कहा। बातें तो तुम ऐसे कर रहे हो
  3672. 2:42:57जैसे यह पूरा आउटलेट ही खरीदने वाले हो।
  3673. 2:43:00इस बार शौर्य के चेहरे पर मुस्कान थोड़ी
  3674. 2:43:02और गहरी हो गई। तो तुम्हारा मतलब यह हुआ
  3675. 2:43:05कि अगर मैं इस आउटलेट को खरीदने की सोचता
  3676. 2:43:08तो तुम मुझे अच्छे से ट्रीट करती। उसने
  3677. 2:43:11हल्के मजाके अंदाज में पूछा जैसे कोई खेल
  3678. 2:43:13चल रहा हो और वो हर चाल सोच समझ कर चल रहा
  3679. 2:43:16हो। श्वेता ने मुंह बनाते हुए कंधे उचकाए।
  3680. 2:43:20क्या पता शायद ऐसा ही होता। तभी माहौल
  3681. 2:43:23अचानक बदल गया। एक सेल्समैन हड़बड़ाते हुए
  3682. 2:43:26वहां पहुंचा और सबको आगाह करते हुए बोला।
  3683. 2:43:29अरे सब अपनी-अपनी जगह चले जाओ। मोहित सर
  3684. 2:43:32इसी तरफ आ रहे हैं। ऐसा लगा जैसे किसी ने
  3685. 2:43:35अलार्म बजा दिया हो। जो जहां खड़ा था वहीं
  3686. 2:43:38से फुर्र हो गया। कुछ सेकंड पहले तक जो
  3687. 2:43:41भीड़ थी वो अब गायब होकर प्रोफेशनल
  3688. 2:43:44एक्टिंग में बदल चुकी थी। प्रिया तुरंत
  3689. 2:43:46शौर्य की तरफ मुड़ी। उसके चेहरे पर झिझक
  3690. 2:43:49और प्रोफेशनल स्माइल का अजीब सा
  3691. 2:43:51कॉम्बिनेशन था। आई एम सॉरी सर। मैं श्वेता
  3692. 2:43:54की तरफ से आपसे फिर से माफी मांगती हूं।
  3693. 2:43:56इसे आपसे इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी।
  3694. 2:43:59लेकिन श्वेता को यह डैमेज कंट्रोल बिल्कुल
  3695. 2:44:02पसंद नहीं आया। वो तुरंत भड़क उठी। तुम
  3696. 2:44:04मेरे लिए सॉरी क्यों बोल रही हो? बोलना है
  3697. 2:44:07तो खुद के लिए बोलो। मैंने कुछ गलत नहीं
  3698. 2:44:09किया। ऐसे लोग बस टाइम पास करने के लिए
  3699. 2:44:12शॉप में आ जाते हैं और मैं तो अभी मोहित
  3700. 2:44:14सर के पास जाकर इसकी भी शिकायत करने वाली
  3701. 2:44:16हूं।
  3702. 2:44:18अच्छा, क्या शिकायत करोगी मेरी? मैंने ऐसा
  3703. 2:44:21क्या कर दिया? शौर्य ने हल्के-फुल्के
  3704. 2:44:24अंदाज में पूछा। अब वो मजा लेने के मूड
  3705. 2:44:26में था। श्वेता ने बिना रुके जवाब दिया।
  3706. 2:44:29तुम जैसे लोग जो इतने बड़े स्टोर में
  3707. 2:44:31सिर्फ तफरी करने आते हैं, शायद हम जैसी
  3708. 2:44:34लड़कियों को घूरने के लिए ही आते हो। क्या
  3709. 2:44:36मैं गलत कह रही हूं? उसके चेहरे पर पूरा
  3710. 2:44:39कॉन्फिडेंस था। उसे लगता था कि वो लड़कों
  3711. 2:44:42की नियत अच्छे से समझती है। श्वेता बस भी
  3712. 2:44:45करो अब। तुम कुछ ज्यादा ही बोल रही हो।
  3713. 2:44:47प्रिया ने झुंझुलाते हुए कहा। लेकिन अब
  3714. 2:44:49बात हाथ से निकल चुकी थी। इसी बीच पीछे से
  3715. 2:44:52एक भारी सदी हुई आवाज गूंजी। यहां क्या हो
  3716. 2:44:56रहा है?
  3717. 2:44:57तीनों एक साथ उस दिशा में मुड़े। मोहित सर
  3718. 2:45:00आ चुके थे और उनकी नजर सीधे शौर्य पर टिक
  3719. 2:45:03गई थी। अगले ही पल उनके चेहरे के भाव
  3720. 2:45:05अचानक बदल गए। सर मोहित ने ऐसे कहा जैसे
  3721. 2:45:09खुद से ही सवाल कर रहा हो। प्रिया और
  3722. 2:45:12श्वेता के साथ ही स्टोर का स्टाफ और
  3723. 2:45:14कस्टमर जो इस नोकझोंक को सुन रहे थे सभी
  3724. 2:45:17हक्के बक्के रह गए। जब मोहित और विक्रम
  3725. 2:45:20प्रिया और श्वेता के पास पहुंचे तो श्वेता
  3726. 2:45:22आगे बढ़कर मोहित रैना को ग्रीट करती हुई
  3727. 2:45:24बोली। नमस्कार सर। मोहित ने एक नजर श्वेता
  3728. 2:45:28के साथ खड़े शौर्य पर भी डाली। फिर तुरंत
  3729. 2:45:30ही इधर-उधर देखने लगा। मोहित रैना की यह
  3730. 2:45:33हरकत देखकर श्वेता पूछ बैठी। आप किसी को
  3731. 2:45:37ढूंढ रहे हैं क्या सर? पर मोहित ने श्वेता
  3732. 2:45:39की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। वो विक्रम
  3733. 2:45:42की ओर देखने लगा। जैसे वो जानना चाहता हो
  3734. 2:45:44कि शौर्य कहां है। वहीं विक्रम शौर्य की
  3735. 2:45:47तरफ ही देख रहा था। विक्रम को शौर्य की
  3736. 2:45:50तरफ देखते हुए पाकर मोहित रहना समझ गया कि
  3737. 2:45:52यही शौर्य राठौड़ है। उसे शौर्य का हुलिया
  3738. 2:45:55देखकर थोड़ा अजीब तो लगा पर उसने इस पर
  3739. 2:45:58ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसने सोचा बड़े
  3740. 2:46:01लोग बड़ी बातें यह कैसे भी रह सकते हैं।
  3741. 2:46:04श्वेता मोहित रैना से शौर्य की शिकायत
  3742. 2:46:06करने के लिए कुछ बोलने का सोच ही रही थी
  3743. 2:46:08कि तभी उसने मोहित को शौर्य से कहते सुना।
  3744. 2:46:12आपसे मिलने की बड़ी इच्छा थी सर। फाइनली
  3745. 2:46:15आज आपसे मुलाकात हो ही गई। श्वेता हैरानी
  3746. 2:46:17से मोहित रैना को देख रही थी और सोच रही
  3747. 2:46:20थी कि यह सर को क्या हो गया जो इस फटीचर
  3748. 2:46:22से दिखने वाले शख्स को सर कह रहे हैं और
  3749. 2:46:25इतनी रिस्पेक्ट दे रहे हैं। प्रिया के
  3750. 2:46:27चेहरे पर भी करीब-करीब यही एक्सप्रेशन था।
  3751. 2:46:31मोहित शौर्य की ओर देखते हुए बोला विश्वास
  3752. 2:46:33कीजिए सर जैसे ही विक्रम सर ने बताया कि
  3753. 2:46:36आप मुझसे मिलना चाहते हैं मेरी खुशी का
  3754. 2:46:38ठिकाना नहीं रहा। मोहित रैना को देखकर ऐसा
  3755. 2:46:41लग रहा था कि वो शौर्य के सामने बिछ
  3756. 2:46:43जाएगा। मोहित रैना को ऐसा करते देखकर
  3757. 2:46:46श्वेता के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी।
  3758. 2:46:49उसे समझ नहीं आ रहा था कि कौन है यह आदमी
  3759. 2:46:51जिसके सामने उसके सर भी कालीन की तरह बिछे
  3760. 2:46:55जा रहे हैं। हां, मुझे बताया विक्रम ने कि
  3761. 2:46:58आप मुझसे मिलने को बहुत बेकरार हैं।
  3762. 2:47:01फाइनली मुझे भी आपसे मिलने का मौका मिल
  3763. 2:47:04गया। शौर्य मोहित रैना से हाथ मिलाते हुए
  3764. 2:47:07बोला। इस पर शौर्य ने सीधा जवाब देते हुए
  3765. 2:47:10कहा, नहीं वो हम फिर कभी देख लेंगे। अभी
  3766. 2:47:12चलकर कुछ काम की बात कर लेते हैं। प्रिया
  3767. 2:47:15से रहा नहीं गया कि यह कौन है जिन्हें
  3768. 2:47:17मोहित रैना भी सर कहकर संबोधित कर रहे
  3769. 2:47:20हैं। सो उसने मोहित रैना से पूछ ही लिया।
  3770. 2:47:23सर अगर आप बुरा ना माने क्या हम स्टाफ के
  3771. 2:47:25लोगों से भी सर का परिचय करवा देंगे?
  3772. 2:47:29मोहित रैना को अपनी गलती का एहसास हुआ। सो
  3773. 2:47:31वो जोर से बोला ओके एवरीबॉडी कम हियर।
  3774. 2:47:35मोहित रैना की आवाज सुनकर आसपास जितना भी
  3775. 2:47:38स्टाफ था सब इकट्ठा हो गया। सबको अपने
  3776. 2:47:40आसपास देखकर मोहित रैना बोले आज का दिन
  3777. 2:47:44हमारे लिए बहुत खुशी का दिन है कि हमारे
  3778. 2:47:46बीच बिग बुल के मालिक मिस्टर शौर्य राठौड़
  3779. 2:47:49उपस्थित हैं। श्वेता ने जैसे ही यह सुना
  3780. 2:47:52उसे तो लगा कि आसमान उसके सिर पर गिर गया
  3781. 2:47:55है। उसका तो हाल ऐसा था जैसे कांटो तो खून
  3782. 2:47:58नहीं। करीब-करीब यही हाल उस सेल्समैन का
  3783. 2:48:01भी था जो श्वेता के समर्थन में बड़ी-बड़ी
  3784. 2:48:03बातें कर रहा था। शौर्य ने कनखियों से
  3785. 2:48:06उनकी तरफ देखा पर कुछ बोला नहीं। कोई भी
  3786. 2:48:08स्टाफ कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था
  3787. 2:48:10कि यह साधारण सा दिखने वाला शख्स बिग बुल
  3788. 2:48:13का मालिक हो सकता है। वहां मौजूद सभी
  3789. 2:48:15कर्मचारियों में से श्वेता और उस सेल्समैन
  3790. 2:48:17लड़के के चेहरे पर साफ हवाइयां उड़ रही
  3791. 2:48:20थी। सबके सामने परिचय देने के बाद मोहित
  3792. 2:48:22रैना ने आदर के साथ कहा। सर क्या आप स्टाफ
  3793. 2:48:26को कोई संदेश देना चाहेंगे? शौर्य ने एक
  3794. 2:48:29नजर पूरे स्टाफ पर डाली और आखिरकार उसकी
  3795. 2:48:31नजर श्वेता पर ठहरी। फिर वह शांत लेकिन
  3796. 2:48:34प्रभावशाली अंदाज में बोला।
  3797. 2:48:37मेरा आप सबके लिए बस इतना ही संदेश है कि
  3798. 2:48:39याद रखिए बिग बुल अपनी क्वालिटी और कस्टमर
  3799. 2:48:42सर्विस के लिए जाना जाता है। किसी को भी
  3800. 2:48:45यह मौका मत दीजिए कि वो हमारी सेवा पर
  3801. 2:48:47उंगली उठा सके। कभी किसी के कपड़ों या
  3802. 2:48:50पहनावे को देखकर व्यवहार मत बदलिए। जो भी
  3803. 2:48:53इस स्टोर में दाखिल हो समझ लीजिए कि आपके
  3804. 2:48:55लिए भगवान पधारे हैं। किसी भी ग्राहक के
  3805. 2:48:58साथ भेदभाव ना हो और ऐसी कोई बात ना कही
  3806. 2:49:00जाए जिससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचे।
  3807. 2:49:04शौर्य का छोटा सा भाषण खत्म हुआ तो माहौल
  3808. 2:49:06बदल चुका था। श्वेता समझ रही थी कि यह
  3809. 2:49:09बातें उसी के लिए कही गई हैं। वो हैरान
  3810. 2:49:12थी। अगर शौर्य चाहता तो सबके सामने उसकी
  3811. 2:49:14क्लास भी लगा सकता था। उसकी नौकरी तक जा
  3812. 2:49:17सकती थी। मगर शौर्य ने ऐसा कुछ नहीं किया।
  3813. 2:49:20प्रिया के मन में भी शौर्य के लिए सम्मान
  3814. 2:49:22और बढ़ गया। उसने आगे बढ़कर कहा, "सर, हम
  3815. 2:49:27आपकी कही हर बात को जरूर अमल में लाएंगे।
  3816. 2:49:30शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ फिर कहा
  3817. 2:49:33हां एक बात और हम इंसान हैं तो गलतियां
  3818. 2:49:36होना स्वाभाविक है। मगर असली बात यह है कि
  3819. 2:49:38हम अपनी गलती से क्या सीखते हैं। अगर हम
  3820. 2:49:41उसे दोहराते नहीं तो इसका मतलब है कि हम
  3821. 2:49:43आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन अगर वह गलती हम
  3822. 2:49:46बार-बार दोहराएं तो समझिए हम [संगीत] ठहर
  3823. 2:49:48गए हैं। आपने सुना होगा ठहरा हुआ पानी
  3824. 2:49:51सड़ने लगता है और बहता हुआ पानी हमेशा
  3825. 2:49:55ताजा रहता है। उम्मीद है मेरी बात आप सब
  3826. 2:49:58तक पहुंची होगी। पूरा स्टाफ अब खामोशी से
  3827. 2:50:01खड़ा था। पर इस बार उस खामोशी में घबराहट
  3828. 2:50:03नहीं सीख छिपी हुई थी। जी सर हम जरूर आपकी
  3829. 2:50:07उम्मीद पर खरे उतरने की कोशिश करेंगे।
  3830. 2:50:10प्रिया ने ही इस बार भी जवाब दिया। ठीक है
  3831. 2:50:14अभी मैं आप सबसे विदा लेता हूं। दोबारा
  3832. 2:50:16फिर मुलाकात होगी। [संगीत] इतना बोलकर
  3833. 2:50:18शौर्य मोहित के साथ उसके केबिन में
  3834. 2:50:20पहुंचा। मोहित ने शौर्य को अपनी चेयर पर
  3835. 2:50:22बैठाया और खुद विक्रम के साथ शौर्य के
  3836. 2:50:25सामने आकर बोला, हां सर बताइए मेरे लिए
  3837. 2:50:27क्या आदेश है? शौर्य ने बात की शुरुआत की।
  3838. 2:50:31देखो एक-द दिन में तुम्हें शिप्रा राय से
  3839. 2:50:34मीटिंग करनी है। उनका जिंक कलेक्शन के नाम
  3840. 2:50:36से फैशन ब्रांड है। उसे अपने स्टोर में
  3841. 2:50:38स्पेस देनी है। पर सर जिंक कलेक्शन कोई
  3842. 2:50:42बड़ा ब्रांड तो नहीं है। मोहित बीच में ही
  3843. 2:50:45बोल पड़ा। मोहित की बात पर शौर्य विक्रम
  3844. 2:50:47की ओर देखते हुए बोला। मुझे पता है। अब
  3845. 2:50:50यूं समझो बड़ा ब्रांड नहीं है तो उसे बड़ा
  3846. 2:50:52बनाना है। [संगीत] उसके लिए तुम शिप्रा
  3847. 2:50:54राय को एक पार्टनरशिप प्रपोजल भी दोगे। वो
  3848. 2:50:57प्रपोजल क्या होगा यह तुम्हें विक्रम समझा
  3849. 2:50:59देगा। ठीक है सर जैसा आप कहें मोहित रैना
  3850. 2:51:03ने सहमति में अपना सिर हिलाया और एक बात
  3851. 2:51:06[संगीत] हो सकता है कि तुम्हारी मीटिंग के
  3852. 2:51:08दौरान मैं भी तुम्हें शिपरा राय के साथ
  3853. 2:51:10दिख जाऊं उस समय तुम मुझे पहचानोगे
  3854. 2:51:11[संगीत] नहीं। शिपरा राय को जरा सा भी शक
  3855. 2:51:14नहीं होना चाहिए कि तुम मुझे जानते हो।
  3856. 2:51:17कहते हुए शौर्य ने मोहित के लिए गाइडलाइन
  3857. 2:51:19निर्धारित कर दी। ठीक है सर मैं आपकी बात
  3858. 2:51:22समझ गया। [संगीत] मोहित बोला जबकि उसे कुछ
  3859. 2:51:25समझ नहीं आया था कि शौर्य क्यों चाहता है
  3860. 2:51:27कि वो शिपरा राय के सामने शौर्य को नहीं
  3861. 2:51:30पहचाने। तभी शौर्य को कुछ याद आया तो उसने
  3862. 2:51:33मोहित से पूछा
  3863. 2:51:35क्या तुम बीगर कलेक्शन के बारे में जानते
  3864. 2:51:37हो? हां सर राजगढ़ में इसके कई आउटलेट
  3865. 2:51:40हैं। मिडिल क्लास लोगों के लिए यह बढ़िया
  3866. 2:51:42चॉइस है। मोहित ने बताया। और क्या जानते
  3867. 2:51:45हो उसके बारे में? शौर्य बीगर कलेक्शन के
  3868. 2:51:48बारे में उससे कुछ और जानकारी की उम्मीद
  3869. 2:51:50कर रहा था। सर यह रत्नाकर बजाज की कंपनी
  3870. 2:51:53है। इसको अभी रौनने जनेजा जो कि उनका
  3871. 2:51:55दामाद है वही ऑपरेट करता है। अगर स्टेक्स
  3872. 2:51:58की बात करूं तो इस कंपनी के शेयर रत्नाकर
  3873. 2:52:00बजाज के तीन बच्चों को बराबर मिले हैं।
  3874. 2:52:02रत्नाकर बजाज के शेयर्स मिलने के कारण
  3875. 2:52:05उनका दामाद अभी बीगर कलेक्शन का डायरेक्टर
  3876. 2:52:07बना हुआ है। बीगर कलेक्शन का 30-30% शेयर
  3877. 2:52:10उनके तीनों बच्चों के पास है और 10% शेयर
  3878. 2:52:13खुद रत्नाकर बजाज के पास है। मोहित ने
  3879. 2:52:16डिटेल में बताया। मोहित की बात सुनकर
  3880. 2:52:18शौर्य के दिमाग में कुछ खिचड़ी पकने लगी।
  3881. 2:52:21वो बोला रत्नाकर बजाज के तीन बच्चों का
  3882. 2:52:24आपस में कैसा रिश्ता है? मोहित ने बताया
  3883. 2:52:28उनमें जरा भी नहीं बनती। उनके दोनों बेटे
  3884. 2:52:30अपने बहनोई को जरा भी पसंद नहीं करते।
  3885. 2:52:33मोहित को उनकी अंदरूनी बातें भी पता थी।
  3886. 2:52:35यह देखकर शौर्य मोहित के चेहरे को गौर से
  3887. 2:52:38देखते हुए बोला, "तुम इतना सब कैसे जानते
  3888. 2:52:41हो?"
  3889. 2:52:41रत्नाकर बजाज का छोटा बेटा राघव बजाज मेरा
  3890. 2:52:44दोस्त है। मोहित ने जवाब दिया। यह सुनकर
  3891. 2:52:47शौर्य खुश हुआ और बोला, "बढ़िया। अच्छा
  3892. 2:52:51क्या तुम राघव को उसका शहर बेचने के लिए
  3893. 2:52:54तैयार कर सकते हो?"
  3894. 2:52:55वो तो पहले से ही इसके लिए तैयार है। वो
  3895. 2:52:57खुद कई बार मेरे सामने बोल चुका है कि वो
  3896. 2:52:59अपना शहर निकालना चाहता है। मोहित को समझ
  3897. 2:53:03नहीं आ रहा था कि शौर्य उससे क्या चाहता
  3898. 2:53:05है। तभी शौर्य उत्साहित होकर बोला सुनो
  3899. 2:53:09सिर्फ राघव का नहीं उसके भाई का भी शेयर
  3900. 2:53:11हमें चाहिए। तुम्हें उसके भाई को भी उसका
  3901. 2:53:13शेयर बेचने के लिए तैयार करना पड़ेगा।
  3902. 2:53:15[संगीत]
  3903. 2:53:16क्या तुम ये कर पाओगे? मोहित को लगा कि
  3904. 2:53:18शौर्य उसे चैलेंज कर रहा है। इसीलिए वो
  3905. 2:53:20जोश में बोला बिल्कुल सर मैं कर लूंगा।
  3906. 2:53:24ठीक है तो तुम्हें साथ में यह काम भी करना
  3907. 2:53:27है और हां जब तक कि डील फाइनल ना हो जाए
  3908. 2:53:30तब तक किसी को इस बात की भनक नहीं लगनी
  3909. 2:53:32चाहिए। शौर्य को रौनित जनेजा को बगैर
  3910. 2:53:35कलेक्शन से बाहर करने का रास्ता मिल गया
  3911. 2:53:37था। अगर 60% शेयर पर शौर्य का कब्जा हो
  3912. 2:53:40जाता है तो वो सबसे पहले रौनित जनेजा को
  3913. 2:53:43ही डायरेक्टर के पद से हटा देगा। शौर्य
  3914. 2:53:46मोहित की आंखों में देखते हुए बोला मैं
  3915. 2:53:49देखता हूं कि तुम इस काम को कितनी जल्दी
  3916. 2:53:51कर पाते हो। फिर जब शौर्य को लगा कि मोहित
  3917. 2:53:54से उसे जो बात करनी थी वह हो चुकी है तो
  3918. 2:53:56उसने कहा मुझे कुछ देर विक्रम से अकेले
  3919. 2:53:59में बात करनी है। मोहित शौर्य का इशारा
  3920. 2:54:02समझ गया और अपनी जगह से उठते हुए बोला मैं
  3921. 2:54:04जरा बाहर एक चक्कर लगाकर आता हूं सर।
  3922. 2:54:07मोहित कैबिन से बाहर चला गया। जैसे ही
  3923. 2:54:10मोहित बाहर गया, शौर्य ने विक्रम की ओर
  3924. 2:54:12मुड़कर पूछा। अब बताओ तुम मुझसे कुछ कहना
  3925. 2:54:15चाहते हो? इस पर विक्रम ने जवाब दिया।
  3926. 2:54:18आपके पापा का फोन आया था। वो चाहते हैं कि
  3927. 2:54:21जितनी जल्दी हो सके आप अपने दादाजी से एक
  3928. 2:54:24बार मिल लें। क्या कोई बात हुई है? शौर्य
  3929. 2:54:27को आशंका हुई कि जरूर कोई गंभीर बात है।
  3930. 2:54:29इस पर विक्रम ने आगे बताया। दरअसल आपके
  3931. 2:54:33दादाजी हॉस्पिटल में हैं। कांता प्रसाद जी
  3932. 2:54:35का फोन आया था। वो जानना चाह रहे थे कि
  3933. 2:54:37क्या आप उनसे मिलने आ रहे हैं?
  3934. 2:54:40कांता प्रसाद शौर्य के दादाजी चंद्रभान
  3935. 2:54:42राठौड़ के पीए थे। यूं कहें तो वह उनके
  3936. 2:54:45लिए सब कुछ थे। चंद्रभान राठौड़ की पूरी
  3937. 2:54:48देखभाल की जिम्मेदारी कांता प्रसाद के ही
  3938. 2:54:50कंधों पर थी। चंद्रभान जी पूरी तरह उन्हीं
  3939. 2:54:53पर निर्भर थे। उन्हें मेरे बारे में कैसे
  3940. 2:54:56पता चला? शौर्य को शक हुआ कि उसके जीवित
  3941. 2:54:59होने की खबर कहीं लीक तो नहीं हो गई।
  3942. 2:55:02उन्हें आपके पापा से पता चला। जब आपके
  3943. 2:55:04दादाजी हॉस्पिटल में भर्ती हुए और वो इस
  3944. 2:55:06गिल्ट में थे कि उनके कारण ही आपकी मृत्यु
  3945. 2:55:09हुई तो आपके पिताजी को सच बताना पड़ा। किस
  3946. 2:55:12हॉस्पिटल में है वो? और अब उनकी तबीयत
  3947. 2:55:14कैसी है? शौर्य की आवाज में अपने दादाजी
  3948. 2:55:17के लिए चिंता साफ झलक [संगीत] रही थी।
  3949. 2:55:20सिटी हॉस्पिटल में है। जहां तक तबीयत की
  3950. 2:55:22बात है अभी स्थिर है। पर मैं कांता प्रसाद
  3951. 2:55:26जी को क्या जवाब दूं? [संगीत] विक्रम ने
  3952. 2:55:28पूछा। इस पर शौर्य बोला ठीक है कल चलेंगे।
  3953. 2:55:31एक बार दादा जी से मिलना जरूरी है। मैं भी
  3954. 2:55:33कल पहली बार अपने दादा जी से मिलूंगा।
  3955. 2:55:36शौर्य की बातों में उसके जज्बात साफ दिखाई
  3956. 2:55:39दे रहे थे। विक्रम शौर्य के हालात समझता
  3957. 2:55:41था। इसीलिए उसके लिए हर बात स्पष्ट जानना
  3958. 2:55:44जरूरी था। किस समय चलना है और कैसे चलना
  3959. 2:55:47है यह बता दीजिए ताकि मैं समय पर आपको पिक
  3960. 2:55:49कर लूं। शौर्य को भी अपनी स्थिति का आभास
  3961. 2:55:52था। वो कुछ सोच कर [संगीत] बोला समय मैं
  3962. 2:55:54बता दूंगा। तुम तैयार रहना। जब मैं कहूं
  3963. 2:55:57तब मेरे बताए हुए जगह पर आ जाना। ठीक है
  3964. 2:56:00मैं आपकी कॉल का इंतजार करूंगा। विक्रम
  3965. 2:56:02बोला अच्छा अब सबसे बड़ी बात। तुमने
  3966. 2:56:05मुख्तार के बारे में कुछ पता किया। शौर्य
  3967. 2:56:08सीधे मुद्दे पर आ गया। बहुत ज्यादा तो
  3968. 2:56:11नहीं पता चला बॉस लेकिन इतना मालूम हुआ है
  3969. 2:56:13कि अंडरवर में वो एक बड़ा नाम है। राजगढ़
  3970. 2:56:16में उसके नाम का खौफ है। विक्रम ने जितनी
  3971. 2:56:19जानकारी जुटाई थी वो सब बता दी। उसका कोई
  3972. 2:56:22वीक पॉइंट? शौर्य ने कुछ सोच कर पूछा। आज
  3973. 2:56:25जो उसका सबसे बड़ा दुश्मन है वही कभी उसका
  3974. 2:56:28खास दोस्त हुआ करता था। उसका नाम लवकेश
  3975. 2:56:31राणा है। मुख्तार के ताकत पर होने का
  3976. 2:56:33दूसरा बड़ा कारण है रूलिंग पार्टी का हाथ
  3977. 2:56:36उसके सिर पर होना। विक्रम की बात से शौर्य
  3978. 2:56:38को मुख्तार की ताकत का अंदाजा हो गया। वो
  3979. 2:56:41कुछ सोच कर बोला एक काम करो लवकेश राणा से
  3980. 2:56:45मेरी एक मीटिंग फिक्स करो। शायद शौर्य ने
  3981. 2:56:48मुख्तार से निपटने का कोई तरीका सोच लिया
  3982. 2:56:50था। एक काम करो लवकेश राणा से मेरी एक
  3983. 2:56:54मीटिंग फिक्स करो। शौर्य को मुख्तार से
  3984. 2:56:56निपटने का रास्ता नजर आ चुका था। ठीक है।
  3985. 2:57:00मैं लवकेश राणा से मीटिंग फिक्स करता हूं।
  3986. 2:57:02लेकिन अगर आप मुख्तार से निपटने के लिए
  3987. 2:57:04उससे मिलना चाहते हैं तो उससे बेहतर यह
  3988. 2:57:06होगा कि हम अपनी ताकत खुद इतनी बना लें कि
  3989. 2:57:09हमें किसी लवश राणा की जरूरत ही ना पड़े।
  3990. 2:57:12विक्रम ने अपना विचार सामने रखा। विक्रम
  3991. 2:57:15की बात सुनकर शौर्य हल्का सा मुस्कुराया
  3992. 2:57:17और बोला तुम समझ नहीं रहे हो। अपनी ताकत
  3993. 2:57:20बनाने के लिए हमें जीरो से शुरुआत करनी
  3994. 2:57:23पड़ेगी। लेकिन अगर हम लवकेश राणा को अपने
  3995. 2:57:25पक्ष में ले आते हैं तो हमें पहले से
  3996. 2:57:27तैयार एक स्थापित आर्मी मिल जाएगी। इससे
  3997. 2:57:30हमें वह कीमती समय नहीं गवाना पड़ेगा जो
  3998. 2:57:33यहां अपनी ताकत खड़ी करने में लग सकता है।
  3999. 2:57:35शौर्य की बात अब विक्रम की समझ में आ गई।
  4000. 2:57:38तभी शौर्य ने कहा ठीक है तो अब यहीं बात
  4001. 2:57:41खत्म करते हैं। कोई खास बात हो तो मुझे
  4002. 2:57:44फोन कर देना। अभी मैं निकलता हूं। इतना
  4003. 2:57:47कहकर शौर्य अपनी जगह से खड़ा हुआ और बाहर
  4004. 2:57:50की ओर बढ़ गया। विक्रम भी उसके साथ स्टोर
  4005. 2:57:52के बाहर तक आया और उससे पूछा। मैं आपको
  4006. 2:57:56राय हाउस तक छोड़ दूं? नहीं रहने दो। मैं
  4007. 2:57:58कैब कर लूंगा। इतना कहकर शौर्य अपने
  4008. 2:58:01मोबाइल में कैब बुक करने लगा। विक्रम से
  4009. 2:58:04शौर्य की हालत देखी नहीं जा रही थी। वो
  4010. 2:58:06बोला, "कल दादा जी से मिलने इसी हालत में
  4011. 2:58:09जाएंगे। पहली बार उनसे मिलने जा रहे हैं।
  4012. 2:58:12कम से कम [संगीत] अपनी हालत तो सुधार
  4013. 2:58:14लीजिए।" विक्रम की बात सुनकर शौर्य
  4014. 2:58:16मुस्कुरा दिया। ठीक है, देखता हूं क्या
  4015. 2:58:18किया जा सकता है। इतने में शौर्य की कैब
  4016. 2:58:21भी आ गई। वो वहां से सीधा राय हाउस पहुंचा
  4017. 2:58:24और अपने क्वार्टर में चला गया। उसने देखा
  4018. 2:58:26कि गिरधर भी आ चुका था। वो सीधे गिरिधर के
  4019. 2:58:28कमरे में पहुंच गया। आ गए तुम? कहीं गए थे
  4020. 2:58:33[संगीत] क्या? गिरधर ने शौर्य को देखते ही
  4021. 2:58:35पूछा। हां काका एक परीक्षित से मिलने गया
  4022. 2:58:38था। और बताइए वाल्मीकि काका का काम हो गया
  4023. 2:58:41ना? शौर्य ने चिंता व्यक्त करते हुए पूछा।
  4024. 2:58:44तो गिरधर ने जवाब दिया। वो तुम्हें बहुत
  4025. 2:58:47दुआएं दे रहा था। कह रहा था कि जल्दी ही
  4026. 2:58:50पैसों का इंतजाम करके तुम्हारी अंगूठी
  4027. 2:58:52छुड़ा देगा। अरे काका उनसे कह देना मेरी
  4028. 2:58:55अंगूठी की चिंता ना करें। पहले [संगीत]
  4029. 2:58:57अपनी बेटी की शादी करें। अंगूठी मैं खुद
  4030. 2:58:59छुड़ा लूंगा। शौर्य बेफिक्री से बोला। तभी
  4031. 2:59:02गिरधर ने खिड़की से बाहर झांकते हुए कहा,
  4032. 2:59:05"अरे मैं बताना भूल गया। अभी थोड़ी देर
  4033. 2:59:08पहले राहुल बाबा तुम्हें ढूंढ रहे थे।
  4034. 2:59:10अच्छा, अभी कहां होंगे वो? शौर्य को समझ
  4035. 2:59:14नहीं आया कि राहुल उसे किस लिए ढूंढ रहा
  4036. 2:59:16था। तभी गिरधर ने बताया, वो सब लॉन में ही
  4037. 2:59:20टेनिस खेल रहे होंगे। टेनिस। शौर्य को
  4038. 2:59:23आश्चर्य हुआ। हां, यहां टेनिस कोर्ट बना
  4039. 2:59:26हुआ है। शाम को रोज परिवार के लोग इकट्ठा
  4040. 2:59:29होकर खेलते हैं। गिरधर की बात सुनकर शौर्य
  4041. 2:59:31के मन में एक सुखद अनुभूति हुई। उसने सोचा
  4042. 2:59:35एक बार चलकर देखना चाहिए। शायद वहां
  4043. 2:59:37परिवार के और भी लोगों से मुलाकात हो जाए
  4044. 2:59:39और उसे इस परिवार को समझने में आसानी
  4045. 2:59:42मिले।
  4046. 2:59:44यही सोचकर शौर्य गिरधर के क्वार्टर से
  4047. 2:59:45बाहर निकला और टेनिस कोर्ट की ओर बढ़ गया।
  4048. 2:59:48दूर से ही उसे कोर्ट नजर आ गया। वहां
  4049. 2:59:50पहुंचकर उसने देखा राहुल टेनिस खेल रहा
  4050. 2:59:52था। उसके साथ रागिनी भी थी और सामने की ओर
  4051. 2:59:55कुलवंत और मयूर खड़े थे। परिवार के बाकी
  4052. 2:59:58सदस्य भी आसपास खड़े होकर खेल का आनंद ले
  4053. 3:00:01रहे थे। शिप्रा भी एक ओर बेंच पर बैठी
  4054. 3:00:04मुस्कुराते हुए मैच देख रही थी। सब खेल
  4055. 3:00:06में इतने मग्न थे कि किसी ने शौर्य के आने
  4056. 3:00:09पर ध्यान ही नहीं दिया। मैच अपने चरम पर
  4057. 3:00:11था। शौर्य भी चुपचाप खड़ा होकर खेल का
  4058. 3:00:14आनंद लेने लगा। [संगीत] आखिरकार खेल खत्म
  4059. 3:00:17हुआ और राहुल और रागिनी हार गए। जैसे ही
  4060. 3:00:19मैच समाप्त हुआ, युविका की नजर शौर्य पर
  4061. 3:00:22पड़ी।
  4062. 3:00:23वो सबका ध्यान आकर्षित करते हुए बोली, अरे
  4063. 3:00:27अरे देखो तो कौन आया है। उसकी आवाज सुनते
  4064. 3:00:30ही सबकी निगाहें शौर्य की ओर मुड़ गई। जब
  4065. 3:00:33शौर्य ने देखा कि सब लोग उसे ही देख रहे
  4066. 3:00:35हैं तो वो थोड़ा असहज हो गया। उसने सिर
  4067. 3:00:37हिलाकर सबका अभिवादन किया। राहुल ने शौर्य
  4068. 3:00:40को देखा तो बोला आप आ गए? भैया मैं आपको
  4069. 3:00:43ही देखने गया था। भैया युविका [संगीत]
  4070. 3:00:46आश्चर्य से बोली जीजा जी बोलो। जीजाजी को
  4071. 3:00:50कोई भैया बोलता है क्या? उसने राहुल पर
  4072. 3:00:53तंज कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर वो
  4073. 3:00:55[संगीत] शिप्रा की तरफ मुड़कर बोली, मैंने
  4074. 3:00:57कुछ गलत तो नहीं कहा ना शिप्रा? सिर्फ
  4075. 3:01:00राहुल ही नहीं तुम्हें भी इन्हें जीजाजी
  4076. 3:01:02ही बोलना चाहिए। शिप्रा ने युविका का
  4077. 3:01:05समर्थन करते हुए जवाब दिया जिससे युविका
  4078. 3:01:07की चाल उसी पर उल्टी पड़ गई। वो खिसियानी
  4079. 3:01:10हंसी हंसते हुए बोली। पता नहीं कैसे-कैसे
  4080. 3:01:13लोगों को अब जीजाजी बोलना पड़ेगा।
  4081. 3:01:16और श्रवण कैसे हो? कुलवंत शौर्य के पास
  4082. 3:01:19जाकर उससे हाथ मिलाते हुए बोला, तुम्हारी
  4083. 3:01:22तो जिंदगी ही पूरी तरह बदल गई। कैसा लग
  4084. 3:01:25रहा है यह नया जीवन? राहुल को शौर्य के
  4085. 3:01:27प्रति सबका बर्ताव पसंद तो नहीं आ रहा था,
  4086. 3:01:30पर वो कुछ बोल नहीं सकता था। शौर्य को भी
  4087. 3:01:32कुलवंत [संगीत] का कटाक्ष समझ में आ रहा
  4088. 3:01:34था। वो मुस्कुराते हुए बोला, सही कहा
  4089. 3:01:37आपने। किसे ऐसा जीवन पसंद नहीं आएगा। मयूर
  4090. 3:01:41भी क्यों पीछे रहता? उसने भी बहती गंगा
  4091. 3:01:43में हाथ धो लिए। वाह जीजा जी। जीजाजी तो
  4092. 3:01:47एंजॉय कर रहे हैं अपनी जिंदगी को। आखिर
  4093. 3:01:49क्यों ना हो एक भिखारी से सीधे बड़े घर के
  4094. 3:01:52दामाद जो बन गए एंजॉय करना तो बनता है।
  4095. 3:01:54क्यों है ना जीजा जी? शौर्य वहां उपस्थित
  4096. 3:01:58सबके कमेंट्स सुन तो रहा था पर उन कमेंट्स
  4097. 3:02:00का उस पर कोई असर नहीं हो रहा था क्योंकि
  4098. 3:02:02वो सबके मकसद को अच्छी तरह समझ रहा था।
  4099. 3:02:05उसने शिप्रा की तरफ देखा। उसके चेहरे पर
  4100. 3:02:08नापसंद का भाव वो स्पष्ट रूप से नोटिस कर
  4101. 3:02:11पा रहा था।
  4102. 3:02:12[संगीत]
  4103. 3:02:12शायद उसे डर था कि शौर्य इन सबके कमेंट्स
  4104. 3:02:14को किस तरह लेगा।
  4105. 3:02:17वाह जीजाजी तो बड़े कूल है। रागिनी खुश
  4106. 3:02:20होते हुए बोली उसके रिएक्शन से समझ नहीं आ
  4107. 3:02:23रहा था कि यह उसका असली इमोशन है या वो भी
  4108. 3:02:25शौर्य के मजे ले रही थी। फिर वो कुलवंत की
  4109. 3:02:28ओर मुड़कर बोली कुलवंत भैया आपने मुझे तो
  4110. 3:02:31टेनिस में हरा दिया। क्यों ना एक गेम
  4111. 3:02:33हमारे जीजा जी के साथ भी हो जाए। [संगीत]
  4112. 3:02:35इनका गेम भी तो देखें। क्या पता आपको कोई
  4113. 3:02:38सही टक्कर देने वाला मिल जाए।
  4114. 3:02:41पहले इनसे पूछ तो लो कि इन्हें रैकेट
  4115. 3:02:43पकड़ना आता भी है या नहीं। युविका बुरा सा
  4116. 3:02:46मुंह बनाती हुई बोली। तो मयूर शौर्य के
  4117. 3:02:48मजे लेते हुए बोला, "यह गलत बात है
  4118. 3:02:51युविका। तुम अंडरएस्टिमेट कर रही हो हमारे
  4119. 3:02:53जीजा जी को।" ऐसा थोड़ी हो सकता है कि
  4120. 3:02:56इन्हें रैकेट पकड़ना ना आता हो। हां, यह
  4121. 3:02:58हो सकता है कि यह हम दोनों भाइयों के
  4122. 3:03:00सामने ज्यादा देर टिक ना पाए। पर खेल तो
  4123. 3:03:03लेते ही होंगे। क्यों जीजा जी? मैं सही कह
  4124. 3:03:05रहा हूं ना। शिप्रा से रहा नहीं गया। तो
  4125. 3:03:08वो चिढ़कर बोली बस करो अब तुम लोग कुछ
  4126. 3:03:11ज्यादा ही ह्यूमिलिएट करने की कोशिश नहीं
  4127. 3:03:13कर रहे श्रवण को इस पर मयूर तपाक से बोला
  4128. 3:03:17कैसी बात कर रही हो शिप्रा दी मैं भला
  4129. 3:03:19जीजा जी को ह्यूमिलिएट करने की कोशिश
  4130. 3:03:21क्यों करूंगा ऐसा भी कहीं हो सकता है कि
  4131. 3:03:24जीजा जी को रैकेट पकड़ना ना आता हो हां यह
  4132. 3:03:27हो सकता है कि खेलना ज्यादा अच्छे से ना
  4133. 3:03:29आता हो पर खेल तो सकते ही होंगे वैसे भी
  4134. 3:03:32कौन सा कोई टूर्नामेंट खेलना है यह एक
  4135. 3:03:34फ्रेंडली मैच ही तो होगा क्यों जीजा जी हो
  4136. 3:03:37जाए एक मैच राहुल भी यह सब सुन रहा था। पर
  4137. 3:03:40शौर्य के लिए यह सब सुनना उसे अच्छा नहीं
  4138. 3:03:42लग रहा था। सबका मुंह बंद करने के लिए वो
  4139. 3:03:45बोला
  4140. 3:03:47ठीक है फिर मैं और श्रवण भैया एक टीम में
  4141. 3:03:49रहेंगे। आइए खेलते हैं। युविका फिर से
  4142. 3:03:52राहुल को टोकते हुए बोली फिर से भैया
  4143. 3:03:55जीजाजी बोलो राहुल। क्यों शिप्रा? राहुल
  4144. 3:03:58को समझाया नहीं तुमने? दरअसल राहुल को लग
  4145. 3:04:01रहा था कि वो भी अगर शौर्य को जीजाजी
  4146. 3:04:03बोलेगा तो हो सकता है शिप्रा को बुरा लगे
  4147. 3:04:06क्योंकि वो यही समझ रहा था कि यह मजबूरी
  4148. 3:04:08की शादी है। जैसे ही हालात ठीक होंगे
  4149. 3:04:10दोनों का तलाक हो जाएगा। यही सोचकर वो
  4150. 3:04:13शिप्रा की ओर देख रहा था। तभी शिप्रा बोली
  4151. 3:04:16ठीक तो कह रही है युविका। राहुल अब से तुम
  4152. 3:04:19श्रवण को जीजाजी ही बोलोगे। शौर्य ने
  4153. 3:04:22शिप्रा की बात सुनी तो उसे अपने कानों पर
  4154. 3:04:24विश्वास नहीं हुआ। पर उसे अच्छा लगा कि
  4155. 3:04:26इससे बाकी सबकी जुबान बंद हो जाएगी। एक
  4156. 3:04:30कहावत है कि लोग आपको [संगीत] जिसका भय
  4157. 3:04:32दिखाएं आप उसे ही अपना हथियार बना लें। तो
  4158. 3:04:34भय अपने आप दूर हो जाता है। वहां मौजूद
  4159. 3:04:38सभी लोग शिप्रा को नीचा दिखाने के लिए ही
  4160. 3:04:40बार-बार शौर्य को जीजाजी कह रहे थे।
  4161. 3:04:43उन्हें लग रहा था कि इससे शिप्रा को बुरा
  4162. 3:04:45लगेगा। पर शिप्रा ने जितनी आसानी से इस
  4163. 3:04:48बात को स्वीकार कर लिया उसकी उम्मीद किसी
  4164. 3:04:50को नहीं थी। शिप्रा ने जिस तरह से राहुल
  4165. 3:04:53से शौर्य को जीजाजी बुलवाया उससे युविका
  4166. 3:04:55और चिढ़ गई। क्योंकि जैसा रिएक्शन वो
  4167. 3:04:57शिप्रा से चाह रही थी वैसा उसे मिला नहीं।
  4168. 3:05:01तो फिर तुम तैयार हो श्रवण मैच के लिए? इस
  4169. 3:05:05बार कुलवंत ने शौर्य से पूछा तो शौर्य
  4170. 3:05:07अपने चेहरे पर घबराहट दिखाते हुए बोला पर
  4171. 3:05:10मुझे खेलना नहीं आता। वैसे यहां जो भी हो
  4172. 3:05:14रहा था शौर्य उसे एंजॉय कर रहा था। वो
  4173. 3:05:16अनजान बनने का दिखावा कर रहा था। मानो उसे
  4174. 3:05:19टेनिस के बारे में कुछ पता ही ना हो। तभी
  4175. 3:05:21मयूर तंज कसते हुए बोला, नहीं नहीं आप तो
  4176. 3:05:24पहले ही हार मान बैठे जीजा जी कम से कम
  4177. 3:05:27मुकाबला करने की हिम्मत तो दिखाइए।
  4178. 3:05:30राहुल जानता था उसके कजिंस शौर्य को ऐसे
  4179. 3:05:32ही छोड़ने वाले नहीं है। इसीलिए उसने
  4180. 3:05:34शौर्य को हिम्मत देते हुए बोला। आइए जीजा
  4181. 3:05:37जी घबराने की जरूरत नहीं है। आप बस थोड़ा
  4182. 3:05:40साथ दीजिएगा। बाकी मैं देख लूंगा। शौर्य
  4183. 3:05:43को राहुल के मुंह से जीजाजी सुनकर अपनेपन
  4184. 3:05:45की फीलिंग आई। बाकी सब जो उसे जीजाजी बोल
  4185. 3:05:48रहे थे उसमें एक सरकाज्म था। पर राहुल के
  4186. 3:05:51कहने में अपनापन था। तभी मयूर राहुल पर
  4187. 3:05:54हंसते हुए बोला, "क्या बात है राहुल?
  4188. 3:05:57तुम्हें लगता है कि तुम मेरा और कुलवंत
  4189. 3:05:58भैया का मुकाबला कर पाओगे।"
  4190. 3:06:01भले मैं आपको हरा ना पाऊं पर इतनी आसानी
  4191. 3:06:04से आपको जीतने भी नहीं दूंगा। राहुल ने
  4192. 3:06:06रैकेट उठाकर जोश में कहा। तभी युविका
  4193. 3:06:08बोली, "मुझे तो लगता है कि मैच में मयूर
  4194. 3:06:11की जरूरत भी नहीं है।" कुलवंत भैया अकेले
  4195. 3:06:14ही काफी हैं तुम दोनों को हराने के लिए।
  4196. 3:06:16युविका कुछ ज्यादा ही उत्साह में बोल रही
  4197. 3:06:18थी। इस पर कुलवंत भी उत्साहित होकर बोला,
  4198. 3:06:22कह तो तुम ठीक रही हो। क्यों राहुल? क्यों
  4199. 3:06:25ना मैं अकेले ही तुम दोनों का मुकाबला
  4200. 3:06:26करूं? नहीं भैया, अगर आप हार जाएंगे तो
  4201. 3:06:29कहेंगे कि अकेले थे इसीलिए हार गए। राहुल
  4202. 3:06:32ने साफ इंकार कर दिया। लेकिन कुलवंत की
  4203. 3:06:34बातों में उसका घमंड साफ झलक रहा था।
  4204. 3:06:37तुम्हारे कॉन्फिडेंस की दाद देनी पड़ेगी।
  4205. 3:06:39तुम्हें लगता है कि तुम मुझे हरा पाओगे।
  4206. 3:06:42खैर चलो कोई बात नहीं। जब तुम चाहते हो तो
  4207. 3:06:45मयूर भी हमारी तरफ से खेलेगा। आखिरकार
  4208. 3:06:48शौर्य को गेम के लिए तैयार होना ही पड़ा।
  4209. 3:06:51शिप्रा को शौर्य पर तरस आ रहा था। आज उसके
  4210. 3:06:53भाई-बहन जानबूझकर उसे नीचा दिखाने के लिए
  4211. 3:06:56यह सब कर रहे थे। स्थिति ऐसी थी कि वो भी
  4212. 3:06:59इसमें ज्यादा कुछ कर नहीं सकती थी। लेकिन
  4213. 3:07:01वो देख रही थी कि शौर्य बड़े अच्छे से
  4214. 3:07:03सबको हैंडल कर रहा था। थोड़ा ध्यान से
  4215. 3:07:06कुलवंत भैया थोड़ा इन्हें भी खेलने का
  4216. 3:07:08मौका देना। इतनी जल्दी मत हराना कि बेचारे
  4217. 3:07:10जीजा जी फिर दोबारा खेलने की हिम्मत ही ना
  4218. 3:07:13कर सकें। रागिनी शौर्य के लिए नकली
  4219. 3:07:15सहानुभूति दिखाते हुए कुलवंत से बोली इस
  4220. 3:07:19पर कुलवंत कुछ बोलता उससे पहले मयूर बोल
  4221. 3:07:21पड़ा तुम चिंता मत करो हमारे भी जीजा जी
  4222. 3:07:25हैं। इतना ध्यान तो हम रखेंगे ही। तभी
  4223. 3:07:28शौर्य राहुल से रैकेट लेते हुए बोला मैं
  4224. 3:07:31समझता हूं कि आप सब मुझे हराने के लिए
  4225. 3:07:32बेकरार हैं। पर मैं कोशिश करूंगा कि
  4226. 3:07:35ज्यादा से ज्यादा समय तक आपका सामना कर
  4227. 3:07:37पाऊं। इस पर राहुल ने शौर्य को समझाते हुए
  4228. 3:07:40कहा,
  4229. 3:07:41गेम के नियम तो पता है ना आपको? अगर नहीं
  4230. 3:07:43भी पता है तो टेंशन नहीं है। मैं जैसा
  4231. 3:07:46कहता हूं आप बस फॉलो करना। तुम चिंता मत
  4232. 3:07:49करो राहुल। मुझे गेम का ज्यादा पता तो
  4233. 3:07:51नहीं है पर मैं सीखता बड़ी जल्दी हूं।
  4234. 3:07:55शौर्य धीरे लेकिन दृढ़ स्वर में बोला। तभी
  4235. 3:07:58कुलवंत की आवाज आई। तो ठीक है। फिर बेस्ट
  4236. 3:08:01ऑफ थ्री खेलते हैं। जो दो मैच जीत जाएगा
  4237. 3:08:03वही विनर।
  4238. 3:08:05ठीक है भैया गेम शुरू कीजिए। राहुल ने
  4239. 3:08:08पोजीशन लेते हुए कहा। इसके बाद युविका ने
  4240. 3:08:10बीच में आकर टॉस किया और टॉस कुलवंत ने
  4241. 3:08:12जीता। लो जीजा जी टॉस ने भी आपका साथ नहीं
  4242. 3:08:16दिया। युविका शौर्य का मजाक उड़ाते हुए
  4243. 3:08:18बोली तो शौर्य ने युविका को देखते हुए
  4244. 3:08:20फीकी सी हंसी-हंस कर कहा। लगता है आपका ये
  4245. 3:08:23सिक्का भी दल बदलू निकला।
  4246. 3:08:27नॉट बैड जीजा जी। आपको तो जवाब देना भी
  4247. 3:08:29आता है। रागिनी शौर्य की प्रशंसा करते हुए
  4248. 3:08:32बोली शिप्रा ने भी शौर्य का वन लाइनर सुना
  4249. 3:08:35तो उसे भी अच्छा लगा। उसे पता था उसके भाई
  4250. 3:08:38बहनों के सामने टिकना है तो जवाब देते
  4251. 3:08:40रहना पड़ेगा। नहीं तो वो सामने वाले पर
  4252. 3:08:42हावी हो जाते हैं। सभी खिलाड़ी टेनिस
  4253. 3:08:45कोर्ट में पहुंच चुके थे। सभी कजिंस में
  4254. 3:08:47सबसे बड़ा बड़े पापा का लड़का कुलवंत पूरे
  4255. 3:08:50कॉन्फिडेंस के साथ सर्विस करने के लिए
  4256. 3:08:52तैयार था। राहुल ने शौर्य को थोड़ा आगे
  4257. 3:08:55खड़े होने का इशारा किया और खुद सर्विस
  4258. 3:08:57लेने के लिए पीछे खड़ा हो गया। कुलवंत
  4259. 3:09:00टेरेस बॉल को लिए सर्विस लाइन पर पहुंचा।
  4260. 3:09:03बॉल टॉस करने से पहले उसने मयूर की तरफ
  4261. 3:09:05देखकर कहा तुम सिर्फ दर्शक बनकर मैच देखो।
  4262. 3:09:08मैं अकेले ही दोनों को निपटा दूंगा। ठीक
  4263. 3:09:11है भैया। मयूर मुस्कुराते हुए बोला। उसे
  4264. 3:09:14भी कुलवंत पर बहुत भरोसा था। तैयार हो
  4265. 3:09:17तुम? कुलवंत ने राहुल से पूछा तो राहुल
  4266. 3:09:20पोजीशन लेता हुआ बोला, "हां भैया अब शुरू
  4267. 3:09:22कीजिए।" कुलवंत ने बॉल टॉस की और एक तेज
  4268. 3:09:25सर्व की। बॉल बिल्कुल सही पॉकेट में टप्पा
  4269. 3:09:27खाकर गिरी और उतनी ही अच्छी तरह राहुल ने
  4270. 3:09:30उसे रिटर्न भी किया। जवाब में कुलवंत ने
  4271. 3:09:32बॉल शौर्य की तरफ मारी। जैसे ही बॉल शौर्य
  4272. 3:09:36की तरफ आई, उसने आव देखा ना ताव, बॉल के
  4273. 3:09:39टप्पे खाने से पहले ही उसने उसे हिट करके
  4274. 3:09:41कुलवंत की साइड भेज [संगीत] दिया। इस पर
  4275. 3:09:44कुलवंत ने बॉल को हाथ से पकड़ लिया और
  4276. 3:09:46मुस्कुराया।
  4277. 3:09:4815 लव। युविका ने स्कोरिंग का जिम्मा
  4278. 3:09:51संभालते हुए अनाउंस किया। शौर्य अनजान
  4279. 3:09:54बनते हुए राहुल की तरफ देखने लगा। तो
  4280. 3:09:55राहुल उसकी नादानी पर मुस्कुराया और बोला
  4281. 3:09:59जीजाजी बॉल को पहले टप्पा खाने देना था।
  4282. 3:10:02उसके बाद हिट करना था। ओह अच्छा ठीक है अब
  4283. 3:10:05ध्यान रखूंगा। शौर्य भोलेपन से बोला। वहीं
  4284. 3:10:08शिप्रा को लगा कि बेचारे शौर्य को तो
  4285. 3:10:10टेनिस का बेसिक रूल भी नहीं पता तो वो
  4286. 3:10:12कुलवंत के सामने कितनी ही देर टिक पाएगा।
  4287. 3:10:15कुलवंत ने फिर से अपनी पोजीशन ली और
  4288. 3:10:17सर्विस के लिए तैयार हुआ। अब [संगीत]
  4289. 3:10:19सर्विस शौर्य को लेनी थी। राहुल ने शौर्य
  4290. 3:10:22को कोर्ट के बाहर खड़ा होने को कहा ताकि
  4291. 3:10:24वह आसानी से सर्विस उठा पाए। कुलवंत ने
  4292. 3:10:27बॉल टॉस की और हल्के हाथ से उसे हिट किया।
  4293. 3:10:30बॉल नेट के पास ही टप्पा खाकर गिरी। जब तक
  4294. 3:10:33बॉल शौर्य के पास पहुंचती वो दो टप्पे खा
  4295. 3:10:35चुकी थी। [संगीत] शौर्य ने फिर भी बॉल को
  4296. 3:10:37हिट किया और इसी के साथ युविका ने फिर से
  4297. 3:10:40घोषणा की 30 लव।
  4298. 3:10:43अब क्या हुआ? मैंने तो बॉल को टप्पा खाने
  4299. 3:10:46के बाद मारा था ना। शौर्य ने राहुल से
  4300. 3:10:48पूछा तो राहुल अब थोड़ा खींचते हुए बोला
  4301. 3:10:51अरे जीजा जी बॉल को एक टप्पे के बाद ही
  4302. 3:10:53मारना था। जब आपने बॉल को हिट किया तब तक
  4303. 3:10:56दो टप्पे पड़ चुके थे। ओ अच्छा अच्छा यह
  4304. 3:10:59भी रूल होता है। सॉरी अब मैं ध्यान
  4305. 3:11:00रखूंगा। शौर्य [संगीत] धीरे से बोला, "यह
  4306. 3:11:03अमीरों का खेल है। इस बेचारे ने पहले कभी
  4307. 3:11:06खेला होता, तब तो नियम पता होता। युविका
  4308. 3:11:09की बातों में झलक रहे तंज को सुनकर शिप्रा
  4309. 3:11:11शर्मिंदा सी हो रही थी। खैर, एक बार फिर
  4310. 3:11:14कुलवंत ने सर्विस की। बॉल टप्पा खाकर गोली
  4311. 3:11:17की तरह राहुल के पास से निकल गई। 40 लव।
  4312. 3:11:21युविका ने घोषणा की। राहुल कुछ बोला नहीं।
  4313. 3:11:24अब उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था। उसने फिर
  4314. 3:11:26से पोजीशन ली। सर्विस हुई और टप्पा खाने
  4315. 3:11:29के बाद शौर्य ने बॉल को हिट किया पर बॉल
  4316. 3:11:32दूसरी साइड के बॉक्स के बाहर जा गिरी।
  4317. 3:11:35देखो जीजा जी इस बार आपने बॉल तो सही हिट
  4318. 3:11:37किया पर उसे दूसरी साइड के बॉक्स के अंदर
  4319. 3:11:39टप्पा खाना चाहिए। राहुल ने शौर्य को
  4320. 3:11:42समझाया तो शौर्य भोलेपन से बोला तो अब
  4321. 3:11:46क्या गेम खत्म हो गया? नहीं नहीं गेम खत्म
  4322. 3:11:49नहीं हुआ है। हम बस सेट में एक शून्य से
  4323. 3:11:51पीछे हो गए हैं। राहुल की बातों में
  4324. 3:11:53निराशा साफ झलक रही थी। तो शौर्य ने राहुल
  4325. 3:11:56से पूछा क्या तुम्हें मुझे अपना पार्टनर
  4326. 3:11:58बनाने पर अफसोस हो रहा है? नहीं, बिल्कुल
  4327. 3:12:01नहीं। अफसोस बस इस बात का है कि हम एक भी
  4328. 3:12:04पॉइंट नहीं बना पाए। राहुल की आवाज में
  4329. 3:12:06निराशा साफ थी। चिंता मत करो अब मैं गेम
  4330. 3:12:10समझ चुका हूं। कहते हुए शौर्य ने राहुल को
  4331. 3:12:12आंख मारी। राहुल शौर्य की इस हरकत का मतलब
  4332. 3:12:15नहीं समझ पाया। तभी युविका जले पर नमक
  4333. 3:12:18लगाते हुए बोली, "क्या जीजा जी, ऐसे तो आप
  4334. 3:12:20अपने साथ राहुल का भी नाम खराब करोगे।"
  4335. 3:12:22शिप्रा को अब वहां बैठना भारी लगने लगा
  4336. 3:12:25था। वो चाह रही थी कि उठकर वहां से चली
  4337. 3:12:27जाए। पर वो ऐसा कर नहीं सकती थी। नहीं तो
  4338. 3:12:30सब और भी बातें बनाते। क्या श्रवण कुछ तो
  4339. 3:12:33एफर्ट दिखाओ यार। दोनों मिलकर एक भी पॉइंट
  4340. 3:12:35नहीं बना पाए। अब थोड़ा ध्यान से खेलना।
  4341. 3:12:38ओके। कुलवंत विजय मुस्कान के साथ बोला।
  4342. 3:12:41खैर एक बार फिर से सबने अपनी पोजीशन ली और
  4343. 3:12:43कुलवंत ने सर्विस की। इस बार शौर्य ने बॉल
  4344. 3:12:46को ऐसा जबरदस्त स्मैश मारा कि बॉल कुलवंत
  4345. 3:12:49के कान में सीटी बजाते हुए पीछे निकल गई।
  4346. 3:12:51यह देखकर राहुल खुशी में उछल पड़ा। क्या
  4347. 3:12:54बात है जीजा जी। वाह क्या शॉट मारा आपने।
  4348. 3:12:58कहते हुए राहुल ने शौर्य की पीठ थपथपाई।
  4349. 3:13:01युविका को भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं
  4350. 3:13:03हो रहा था। उसने झिझकते हुए स्कोर अनाउंस
  4351. 3:13:05किया। 15 लव। अगली कुछ सर्विसेज का सामना
  4352. 3:13:09करते हुए ऐसा लगा मानो शौर्य अब पूरी तरह
  4353. 3:13:12बदल चुका था। फुर्ती के साथ लगातार तीन
  4354. 3:13:15सर्विस का मुंह तोड़ जवाब देने के बाद इस
  4355. 3:13:17सेट की समाप्ति हुई। और ये सेट राहुल और
  4356. 3:13:20शौर्य के नाम रहा। वन ऑल के साथ सेट बराबर
  4357. 3:13:23है। युविका ने घोषणा की। अब शर्मिंदा होने
  4358. 3:13:27की बारी कुलवंत की थी। [संगीत] उसे
  4359. 3:13:29विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वो ये सेट
  4360. 3:13:31हार चुका है। शिप्रा भी हैरानी से मैच को
  4361. 3:13:33पलटते हुए देख रही थी। किसी ने भी नहीं
  4362. 3:13:36सोचा था कि यूं पासा पलट जाएगा। कुलवंत को
  4363. 3:13:39अब अपनी गलती का एहसास हो रहा था। उसे
  4364. 3:13:42अपने ओवर कॉन्फिडेंस का शिकार होना पड़ा।
  4365. 3:13:44क्या जरूरत थी उसे मयूर को सिर्फ दर्शक
  4366. 3:13:46बनाकर रखने की? उसने मयूर को इशारा किया
  4367. 3:13:49कि वो अपनी पोजीशन ले ले और [संगीत] अचानक
  4368. 3:13:51वहां का माहौल एकदम शांत हो गया। क्या बात
  4369. 3:13:54है जीजा जी आपने तो कमाल कर दिया। आपने जब
  4370. 3:13:57कहा था कि आप बहुत जल्दी सीखते हैं तो
  4371. 3:13:59मुझे विश्वास नहीं हुआ था। राहुल शौर्य से
  4372. 3:14:02बोला खेल एक बार फिर शुरू हुआ और चीते की
  4373. 3:14:05रफ्तार के साथ एक बार फिर शौर्य ने विरोधी
  4374. 3:14:07टीम को कोई मौका नहीं दिया। यह सेट भी
  4375. 3:14:10शौर्य और राहुल ने जीत लिया था। जिसमें
  4376. 3:14:12लगभग सारा योगदान शौर्य का ही रहा। अब
  4377. 3:14:16राहुल और शौर्य दो एक से आगे थे। यहां
  4378. 3:14:19राहुल खुश था और वहां युविका और रागिनी की
  4379. 3:14:21आवाज तक नहीं निकल रही थी। कुलवंत का
  4380. 3:14:23चेहरा भी देखने लायक था। टमाटर सा एकदम
  4381. 3:14:26लाल। उसे समझ नहीं आ रहा था कि राहुल की
  4382. 3:14:29टीम का कमजोर खिलाड़ी अचानक इतना स्ट्रांग
  4383. 3:14:31कैसे हो गया। उसने मयूर को अपने पास
  4384. 3:14:34बुलाया और बोला सुनो हमें अपनी स्ट्रेटजी
  4385. 3:14:37चेंज करनी होगी। हां बताओ भैया क्या करना
  4386. 3:14:40है? मयूर ने धीमे स्वर में कहा। इस पर
  4387. 3:14:43कुलवंत मयूर के कान के पास आकर धीरे से
  4388. 3:14:45बोला, अब हम जो भी शॉट्स करेंगे वो सब
  4389. 3:14:48राहुल की तरफ होंगे। लगता है इस भिखारी को
  4390. 3:14:51हमने कुछ ज्यादा ही अंडरएस्टीमेट कर लिया
  4391. 3:14:53था। इसके बाद अगला सेट शुरू हुआ और इस बार
  4392. 3:14:56कुलवंत की स्ट्रेटजी काम कर गई। उसने यह
  4393. 3:14:58सेट 40-15 से जीत लिया और तभी युविका की
  4394. 3:15:02आवाज फिर से गूंजी। क्या हुआ? इतनी जल्दी
  4395. 3:15:05हवा निकल गई। मैं तो समझी थी कि कुछ जादू
  4396. 3:15:08करोगे। लेकिन सेट दोस्त से बराबर हो गए
  4397. 3:15:11हैं। अरे युविका दी आप तो हमें पहले इस
  4398. 3:15:14लायक भी नहीं समझ रही थी कि हम एक पॉइंट
  4399. 3:15:16भी ले सकेंगे और अभी भी [संगीत] हम बराबरी
  4400. 3:15:19पर हैं। मैच हारे नहीं है। राहुल ने
  4401. 3:15:22मुंहतोड़ जवाब दिया। शौर्य कुलवंत की
  4402. 3:15:24स्ट्रेटजी समझ गया था। वो जान गया था कि
  4403. 3:15:27कुलवंत और मयूर जानबूझकर राहुल को टारगेट
  4404. 3:15:29कर रहे हैं। वो राहुल के नजदीक गया और
  4405. 3:15:31बोला एक बात कहूं मानोगे? हां बोलिए ना
  4406. 3:15:35क्या बात है? राहुल धीमे स्वर में बोला।
  4407. 3:15:39इस पर शौर्य ने कहा तुम नेट के पास ही
  4408. 3:15:42रहना और जिन्हें तुम आराम से हिट कर सको
  4409. 3:15:44वही बॉल खेलना बाकी सब छोड़ देना उन्हें
  4410. 3:15:47मैं देख लूंगा। यह समझ लो तुम्हें भी अब
  4411. 3:15:50वही करना है जो शुरुआत में मयूर कर रहा
  4412. 3:15:52था। शौर्य की बात सुनकर राहुल को थोड़ा
  4413. 3:15:55बुरा लगा कि जिसे अभी गेम खेलना तक नहीं आ
  4414. 3:15:57रहा था वो अब उसे ही गेम सिखा रहा है।
  4415. 3:16:00लेकिन उसे लगा कि शायद शौर्य अब ओवर
  4416. 3:16:02कॉन्फिडेंट हो रहा है। लेकिन फिर उसने
  4417. 3:16:05सोचा एक गेम में यह बात मानकर देखता हूं।
  4418. 3:16:07इनकी भी गलतफहमी दूर हो जाएगी। वो बोला
  4419. 3:16:11अगर आपको लगता है कि आप हैंडल कर लोगे तो
  4420. 3:16:13ठीक है। एक गेम में मैं आपके हिसाब से
  4421. 3:16:15चलता हूं। [संगीत] नेक्स्ट राउंड स्टार्ट
  4422. 3:16:18हुआ और बिल्कुल वैसा ही हुआ जैसा शौर्य ने
  4423. 3:16:20प्लान किया था। कुलवंत की टीम को एक भी
  4424. 3:16:23पॉइंट बनाने का मौका नहीं मिला। कुलवंत की
  4425. 3:16:25सारी स्ट्रेटजी फेल हो गई। राहुल कुलवंत
  4426. 3:16:29के सारे शॉट्स छोड़ता रहा। वो ऐसे हिट को
  4427. 3:16:31भी छोड़ रहा था जिसे वो आसानी से पिक कर
  4428. 3:16:33सकता था। वो चाहता था कि शौर्य को एहसास
  4429. 3:16:36हो कि उसने राहुल को बॉल छोड़ने के लिए
  4430. 3:16:38कहकर गलत निर्णय लिया था। पर जब कुलवंत
  4431. 3:16:41गेम हार गया तो राहुल को शौर्य के
  4432. 3:16:43कॉन्फिडेंस पर गर्व हुआ। उसके दिल में
  4433. 3:16:45शौर्य के लिए जो गलत भावना जागृत हुई थी
  4434. 3:16:48वो भी दूर हो गई। अब शौर्य में उसे अपना
  4435. 3:16:50हीरो नजर आने लगा था। वैसे भी उसके
  4436. 3:16:53[संगीत] दिल में शौर्य के लिए रिस्पेक्ट
  4437. 3:16:54शॉपिंग सेंटर वाले दिन से ही थी। युविका
  4438. 3:16:57और रागिनी की बोलती बंद हो [संगीत] चुकी
  4439. 3:16:59थी और शिप्रा उसे तो विश्वास ही नहीं हो
  4440. 3:17:02रहा था कि कुलवंत शौर्य से गेम में पीछे
  4441. 3:17:04चल रहा है। आखिरकार कुलवंत परिवार का सबसे
  4442. 3:17:07अच्छा खिलाड़ी था। कुलवंत का चेहरा गुस्से
  4443. 3:17:10में लाल हो रहा था। वो बहुत कोशिश कर रहा
  4444. 3:17:12था पर कुछ हो नहीं पा रहा था। युविका और
  4445. 3:17:14रागिनी दोनों उसका हौसला बढ़ा रही थी। ऐसा
  4446. 3:17:18हुआ कि कुलवंत अगला गेम भी हार गया। इस
  4447. 3:17:20तरह चार दो से यह सेट शौर्य और राहुल जीत
  4448. 3:17:23गए और उन्होंने पहला मैच अपने नाम कर
  4449. 3:17:25लिया। राहुल खुश होकर बोला क्या हुआ भैया?
  4450. 3:17:29आज आपका जादू चल नहीं रहा है। कहां तो आप
  4451. 3:17:31मुझे एक गेम नहीं जीतने देने वाले थे और
  4452. 3:17:33यहां पूरा सेट हार गए।
  4453. 3:17:36किस्मत के धनी हो इसलिए सेट जीत गए। पर हर
  4454. 3:17:39बार काट की हांडी नहीं चढ़ती। अगले सेट
  4455. 3:17:41में तुम्हें पता चल जाएगा। अभी भी कुलवंत
  4456. 3:17:44की हेकड़ी कम होने का नाम नहीं ले रही थी।
  4457. 3:17:46शिप्रा को शौर्य और राहुल से कुछ खास
  4458. 3:17:48उम्मीद नहीं थी। लेकिन गेम पलटते देखकर अब
  4459. 3:17:51उसका भी गेम में इंटरेस्ट जाग गया। वो
  4460. 3:17:53शौर्य का खेल देखकर इंप्रेस थी। शौर्य की
  4461. 3:17:56फुर्ती तो देखते ही बनती थी और सबसे बड़ी
  4462. 3:17:58बात वो जिस भी शॉट को मार रहा था वो दूसरे
  4463. 3:18:01पाले में बेहद एक्यूरेट टप्पा खा रहा था।
  4464. 3:18:03उसके खेल को देखकर लग ही नहीं रहा था कि
  4465. 3:18:06वो कोई अनाड़ी खिलाड़ी होगा। पर ये कैसे
  4466. 3:18:08मुमकिन हो सकता है। टेनिस वैसे भी खर्चीला
  4467. 3:18:11गेम होता है और श्रवण जैसे गरीब के बस का
  4468. 3:18:13तो नहीं लगता कि उसने कभी यह खेल खेला भी
  4469. 3:18:16होगा। फिर वो इस खेल में इतना अच्छा कैसे
  4470. 3:18:18हो सकता है? जब शिप्रा को कुछ समझ नहीं
  4471. 3:18:21आया तो उसने ज्यादा सोचना बंद कर दिया और
  4472. 3:18:23गेम को एंजॉय करने लगी। दूसरा मैच भी शुरू
  4473. 3:18:26हो गया। शौर्य ने गेम की शुरुआत में ही
  4474. 3:18:29अपना दबदबा बना लिया था। कुलवंत और मयूर
  4475. 3:18:32अब ज्यादा एफर्ट लगा रहे थे। जिसकी वजह से
  4476. 3:18:34वे और भी गलतियां करने लगे थे। वहां पूरी
  4477. 3:18:37तरह शांति छाई हुई थी। आखिरकार शौर्य ने
  4478. 3:18:41फाइनल शॉट मारा और कुलवंत [संगीत] उसे मिस
  4479. 3:18:43कर गया। इसके साथ ही यह सेट शौर्य और
  4480. 3:18:46राहुल के नाम हो गया। इस तरह यह [संगीत]
  4481. 3:18:49मैच दो शून्य से शौर्य और राहुल जीत गए।
  4482. 3:18:52मैच जीतते ही राहुल ने हुंकार भरी। विनर
  4483. 3:18:55विनर चिकन डिनर। कुलवंत और मयूर का चेहरा
  4484. 3:18:59उतर गया था। कुलवंत को यह हजम ही नहीं हो
  4485. 3:19:02रहा था कि वो हार गया था। क्या हुआ युविका
  4486. 3:19:05दी? अब कुछ बोलोगी नहीं। राहुल युविका को
  4487. 3:19:08छेड़ता हुआ बोला। हां हां जानती हूं तुम
  4488. 3:19:11जीत गए हो। लेकिन ज्यादा खुश मत हो। आज
  4489. 3:19:13तुम्हारा दिन बहुत अच्छा था या यह कहूं कि
  4490. 3:19:16हमारे प्यारे जीजाजी की किस्मत अच्छी थी
  4491. 3:19:18जो वो जीत गए। मना लो खुशी। [संगीत]
  4492. 3:19:21युविका मुंह बिगाड़ते हुए बोली। तभी
  4493. 3:19:23कुलवंत ने खुद को शांत किया और शौर्य के
  4494. 3:19:25पास आकर बोला [संगीत] हमने तुम्हें
  4495. 3:19:28अंडरएस्टिमेट किया श्रवण। तुमने अच्छा खेल
  4496. 3:19:30दिखाया। मुझे लगता है कि तुम इस खेल के
  4497. 3:19:32माहिर हो। तुम सिर्फ हमारे सामने यह
  4498. 3:19:34दिखावा कर रहे थे कि तुम्हें यह खेल नहीं
  4499. 3:19:36आता।
  4500. 3:19:38ऐसी कोई [संगीत] बात नहीं है। मुझ में एक
  4501. 3:19:40खूबी है कि कोई भी चीज मैं बड़ी जल्दी सीख
  4502. 3:19:42जाता हूं। शौर्य नम्र बनने की कोशिश करता
  4503. 3:19:45हुआ बोला, वैसे मुझे ऐसा लगता तो नहीं पर
  4504. 3:19:48तुम कहते हो तो मैं मान लेता हूं। [संगीत]
  4505. 3:19:50तुम्हें जीत की बधाई। उम्मीद करता हूं कि
  4506. 3:19:53फिर कभी हमारा वन टू वन मुकाबला होगा। फिर
  4507. 3:19:55देखेंगे कि कौन किसको हराता है। कुलवंत की
  4508. 3:19:58बातों से लग रहा था कि उसे अपनी हार हजम
  4509. 3:20:00करना कितना मुश्किल हो रहा है। अब शायद
  4510. 3:20:03[संगीत] किसी दिन वन टू वन मुकाबले में वह
  4511. 3:20:05अपनी हसरत पूरी कर पाए। मुझे इंतजार रहेगा
  4512. 3:20:08उस दिन का। शौर्य मुस्कुराते हुए बोला।
  4513. 3:20:10इसके बाद कुलवंत शौर्य से [संगीत] हाथ
  4514. 3:20:12मिलाकर वहां से चला गया। रागिनी कुछ बोल
  4515. 3:20:15नहीं रही थी पर वो शौर्य के खेल से बहुत
  4516. 3:20:17इंप्रेस नजर आ रही थी। टेनिस रागिनी का
  4517. 3:20:20फेवरेट गेम था। वो स्टेट सिलेक्शन के कैंप
  4518. 3:20:22में भाग लेने वाली थी। जो शौर्य अभी थोड़ी
  4519. 3:20:25देर पहले तक उसके लिए मजाक का पात्र था।
  4520. 3:20:27अचानक ही रागिनी के दिल में उसके लिए
  4521. 3:20:29रिस्पेक्ट आ गई। वो शौर्य के पास गई और
  4522. 3:20:32बोली बधाई हो जीजा जी। आपने हमें गलत
  4523. 3:20:35साबित कर दिया।
  4524. 3:20:37[संगीत]
  4525. 3:20:37मानना पड़ेगा आपने जबरदस्त खेल दिखाया। आज
  4526. 3:20:40तक कुलवंत भैया ही हमारे लिए इस खेल के
  4527. 3:20:42हीरो थे। लेकिन आज आपने भी हमारे दिल में
  4528. 3:20:44एक स्पेशल जगह बना ली। [संगीत]
  4529. 3:20:46शौर्य महसूस कर रहा था कि रागिनी जो भी कह
  4530. 3:20:49रही है वो दिल से कह रही है। रागिनी की
  4531. 3:20:51बात सुनकर युविका के दिल में तो आग ही लग
  4532. 3:20:53गई। उसे रागिनी का यूं शौर्य की तारीफ
  4533. 3:20:56करना अच्छा नहीं लगा। वो भी पैर पटकती हुई
  4534. 3:20:58वहां से [संगीत] चली गई। कोई और भी था
  4535. 3:21:01जिसके दिल में शौर्य के लिए धीरे-धीरे
  4536. 3:21:03अपनेपन की फीलिंग जन्म ले [संगीत] रही थी।
  4537. 3:21:06शौर्य के खेल ने सबको चौंका कर रख दिया
  4538. 3:21:08था। लेकिन सबसे ज्यादा हैरान अगर कोई था
  4539. 3:21:11तो वह था राहुल। उसे विश्वास ही नहीं हो
  4540. 3:21:13रहा था कि शौर्य ने पहले कभी टेनिस नहीं
  4541. 3:21:15खेला होगा। ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई
  4542. 3:21:18पहली बार रैकेट पकड़े और इतना अच्छा खेल
  4543. 3:21:20दिखाए। राहुल से रहा नहीं गया तो उसने
  4544. 3:21:23शौर्य से पूछ ही लिया। सच बताओ जीजा जी
  4545. 3:21:26आपने सच में पहले कभी टेनिस नहीं खेला था।
  4546. 3:21:28शौर्य राहुल की बात को टालने की कोशिश
  4547. 3:21:30करते हुए बोला तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो?
  4548. 3:21:33और वैसे भी इससे क्या ही फर्क पड़ता है?
  4549. 3:21:35आज का मैच तो हम जीत गए ना तो उसका जश्न
  4550. 3:21:38मनाओ। वो तो ठीक है पर मुझे विश्वास ही
  4551. 3:21:40नहीं हो रहा है कि कोई पहली बार कोर्ट पर
  4552. 3:21:42उतरे और ऐसा खेल दिखाए। यह तो वैसा ही है
  4553. 3:21:45जैसे कोई पहली बार गाड़ी चलाए और सीधे एफ1
  4554. 3:21:48रेस जीत जाए। सच-सच बताओ आपने पहले टेनिस
  4555. 3:21:51खेला है या नहीं? [संगीत]
  4556. 3:21:53राहुल ने जिद करते हुए पूछा। अब तक
  4557. 3:21:55युविका, कुलवंत और मयूर वहां से जा चुके
  4558. 3:21:57थे। लेकिन रागिनी वहीं रुकी थी। वो भी
  4559. 3:22:00शौर्य के खेल का सच जानना चाहती थी
  4560. 3:22:02क्योंकि अब वो शौर्य से काफी प्रभावित हो
  4561. 3:22:04चुकी थी। शिप्रा बेंच पर बैठे मोबाइल में
  4562. 3:22:07बिजी [संगीत] होने का दिखावा कर रही थी
  4563. 3:22:09जबकि उसका भी ध्यान राहुल के सवाल की तरफ
  4564. 3:22:11ही था। शौर्य को जब लगा कि राहुल इतनी
  4565. 3:22:14आसानी से उसका पीछा नहीं छोड़ने वाला है
  4566. 3:22:16तो उसने कहा हां बाबा खेला है। मैं अपने
  4567. 3:22:20कॉलेज [संगीत] की टेनिस टीम में था। कॉलेज
  4568. 3:22:23राहुल को आश्चर्य हुआ। आप पढ़े लिखे हो।
  4569. 3:22:27कहते हुए राहुल ने सिर पकड़ लिया। तभी
  4570. 3:22:29रागिनी बोल पड़ी अगर आप पढ़े लिखे हैं तो
  4571. 3:22:32जिस स्थिति में आप थे वो कैसे हो गया? आई
  4572. 3:22:34मीन आप ऐसा जीवन क्यों जी रहे थे? अरे भाई
  4573. 3:22:37पढ़ा लिखा होने का यह मतलब तो नहीं कि
  4574. 3:22:39आदमी अमीर ही होगा। 6 महीने पहले मेरी जान
  4575. 3:22:42पर बनाई थी। यह तो गनीमत [संगीत] है कि
  4576. 3:22:45मैं जिंदा बच गया। वरना हालत तो ऐसी थी कि
  4577. 3:22:47मैं कुछ भी करने की स्थिति में नहीं था।
  4578. 3:22:49संपत्ति के चक्कर में जब रिश्तेदार दुश्मन
  4579. 3:22:51[संगीत] बन जाते हैं तो जीवन में प्रलय आ
  4580. 3:22:54जाती है। उस समय मंदिर ही मेरा सहारा बना।
  4581. 3:22:57वहां रहते हुए जिंदगी के कुछ ऐसे तजुर्ब
  4582. 3:22:59हासिल हुए कि बाकी इच्छाएं [संगीत]
  4583. 3:23:01समाप्त हो गई। शौर्य ने आधी सच्चाई बताई
  4584. 3:23:04पर सबको चुप कराने के लिए वह काफी थी।
  4585. 3:23:07शिप्रा को यह जानकर खुशी हुई कि शौर्य
  4586. 3:23:09पढ़ा लिखा है। राहुल को भी यह जानकर सुखद
  4587. 3:23:11आश्चर्य हुआ कि शौर्य के बारे में उसकी जो
  4588. 3:23:14धारणा बनी थी वो गलत निकली। तो फिर आपने
  4589. 3:23:17पहले क्यों नहीं बताया कि आप पढ़े लिखे
  4590. 3:23:18हैं? राहुल के सवाल से शौर्य चौंक गया और
  4591. 3:23:21[संगीत] बोला अरे यह क्या बात हुई कि
  4592. 3:23:23मैंने पहले क्यों नहीं बताया? किसी ने
  4593. 3:23:25मुझसे कुछ पूछा ही कहां था? तुम बताओ मुझे
  4594. 3:23:28क्या करना चाहिए था? सबके पास जाकर बोलता
  4595. 3:23:30कि सुनिए मैं पढ़ा लिखा हूं। कहते हुए
  4596. 3:23:33शौर्य ने तुरंत खुद को संभाला और अपनी
  4597. 3:23:36दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए बोला खैर मुझे पता
  4598. 3:23:39है कि मैं किस परिस्थिति के कारण यहां
  4599. 3:23:41हूं। कुछ [संगीत] समय की बात है। जब
  4600. 3:23:43सिचुएशन नॉर्मल हो जाएगी तो मेरी कोई
  4601. 3:23:45जरूरत नहीं रह जाएगी यहां पर। शौर्य की
  4602. 3:23:48बात सुनकर सभी खामोश हो गए। पहले से
  4603. 3:23:50इंप्रेस्ड राहुल ने मन ही [संगीत] मन कहा।
  4604. 3:23:52यह अपनी सोच को लेकर कितने क्लियर हैं।
  4605. 3:23:55इधर शिप्रा को भी शौर्य की बात सुनकर
  4606. 3:23:57अच्छा लगा कि वो कितना प्रैक्टिकल है।
  4607. 3:23:59पहले शिप्रा जिस अवसाद में रहती थी कि
  4608. 3:24:01उसके साथ यह क्या हो गया है अब वो
  4609. 3:24:03धीरे-धीरे दूर हो रहा था। शौर्य की बातों
  4610. 3:24:06से उसे इतना तो समझ आ गया कि वो उससे कोई
  4611. 3:24:08उम्मीद नहीं रख रहा है। वो शौर्य ही था
  4612. 3:24:10जिसकी वजह से शिपरा अपने परिवार वालों के
  4613. 3:24:12सामने मजबूती से अपनी बात रख पाई थी। फिर
  4614. 3:24:15चाहे वह तलाक हो या दूसरी शादी। वो फिर से
  4615. 3:24:18किसी पचड़े में नहीं पड़ना चाहती थी और
  4616. 3:24:20परिवार वालों को दिखाने के लिए अपनी ढाल
  4617. 3:24:23के रूप में वह शौर्य को यूज कर सकती थी।
  4618. 3:24:25पहले उसे डर था कि शौर्य पता नहीं अपनी
  4619. 3:24:27बात पर खड़ा रह पाएगा या नहीं। पर आज उसकी
  4620. 3:24:30बातें सुनकर उसे इतना तो अंदाजा हो ही गया
  4621. 3:24:32था कि वह बाकियों की तरह मतलबी नहीं है।
  4622. 3:24:35उसके दिल में दूसरों के लिए दया भी है और
  4623. 3:24:37सम्मान भी। इसीलिए तो खुद गरीब होते हुए
  4624. 3:24:40भी किसी और को प्रॉब्लम में देखकर अपनी
  4625. 3:24:42कीमती अंगूठी गिरवी रखने में वो एक बार भी
  4626. 3:24:45नहीं हिचका। इन्हीं सब ख्यालों के साथ
  4627. 3:24:48शिप्रा अब काफी हल्का महसूस कर [संगीत]
  4628. 3:24:49रही थी। अगर तुम्हारे सवाल खत्म हो गए हो
  4629. 3:24:53तो अब मैं अपने क्वार्टर में जाऊं। शौर्य
  4630. 3:24:55ने मुस्कुराते हुए राहुल से कहा। तभी
  4631. 3:24:57रागिनी ने बड़े भोलेपन से सवाल किया।
  4632. 3:25:00राहुल मुझे एक बात समझ नहीं आई। जब श्रवण
  4633. 3:25:03हमारे जीजाजी हैं तो फिर इन्हें सर्वेंट
  4634. 3:25:05क्वार्टर में क्यों ठहराया गया है? यह घर
  4635. 3:25:07में क्यों नहीं रहते? इस सवाल का जवाब
  4636. 3:25:10राहुल के पास नहीं था। वो शिप्रा की ओर
  4637. 3:25:12देखने लगा कि शायद वह रागिनी को जवाब दे
  4638. 3:25:14पाएगी। लेकिन शिप्रा की स्थिति भी अजीब
  4639. 3:25:17थी। वो खुद इस बात को जस्टिफाई नहीं कर
  4640. 3:25:19सकती थी। तभी शौर्य बोल उठा आप अच्छा मजाक
  4641. 3:25:22कर लेती हैं रागिनी। आपको सब पता है फिर
  4642. 3:25:25भी ऐसा सवाल पूछ रही हैं। [संगीत] मुझे
  4643. 3:25:27अपनी हैसियत का पता है और मैं उसमें ही
  4644. 3:25:29ठीक हूं। अभी तो मैंने कहा कि मैं यहां
  4645. 3:25:31सिर्फ हालातों के कारण हूं और हालात हमेशा
  4646. 3:25:34एक जैसे नहीं रहते। वो बदलेंगे और मैं चला
  4647. 3:25:37जाऊंगा। तो फिर ऐसा सवाल पूछकर आप राहुल
  4648. 3:25:39को मुश्किल में क्यों डाल रही हैं? ऐसा
  4649. 3:25:42कहकर शौर्य ने राहुल को ऑकवर्डनेस से बाहर
  4650. 3:25:44निकाल दिया। शौर्य का जवाब सुनकर राहुल ने
  4651. 3:25:47राहत की सांस ली। शिप्रा भी उसकी
  4652. 3:25:49बुद्धिमानी की [संगीत] कायल होती जा रही
  4653. 3:25:51थी और हो भी क्यों ना। एक वही तो है जो हर
  4654. 3:25:54मुश्किल वक्त में ढाल बनकर सामने आ जाता
  4655. 3:25:57है। तभी रागिनी ने शौर्य की बात का अर्थ
  4656. 3:26:00निकालते हुए पूछा। इसका मतलब आप जो मेरे
  4657. 3:26:02जीजाजी हैं वो टेंपरेरी बेसिस पर हैं।
  4658. 3:26:06हां। इसीलिए आप मुझे जीजाजी ना कहें तो
  4659. 3:26:08अच्छा होगा। आप मुझे मेरे नाम से बुला
  4660. 3:26:10सकती हैं। श्रवण शौर्य ने स्पष्ट रूप से
  4661. 3:26:14जवाब दिया। जितनी देर तक रागिनी शौर्य से
  4662. 3:26:17बात करती उतना ही वह उससे प्रभावित होती
  4663. 3:26:19जा रही थी। उसे अब अपने उस व्यवहार के लिए
  4664. 3:26:21अफसोस हो रहा था जो उसने शुरू में
  4665. 3:26:23जानबूझकर शौर्य को डीमोरलाइज करने के लिए
  4666. 3:26:26किया था। खैर, अगली सुबह शौर्य जल्दी नहा
  4667. 3:26:28धोकर तैयार हो गया। उसने खुद को एक बार
  4668. 3:26:31शीशे में देखा तो उसका हाथ खुद-ब खुद अपनी
  4669. 3:26:33बढ़ी हुई दाढ़ी पर चला गया। अब उसे अपनी
  4670. 3:26:36दाढ़ी अजीब लगने लगी थी क्योंकि वह फिर से
  4671. 3:26:38अपनी सामान्य जिंदगी में लौट रहा था और
  4672. 3:26:40इसीलिए अब उसे अपना रूप बदलना था। आज उसे
  4673. 3:26:43अपने दादाजी से मिलने जाना था। वो सोच रहा
  4674. 3:26:46था कि पता नहीं यह मुलाकात कैसी होने वाली
  4675. 3:26:48है। शौर्य के दादा चंद्रभान राठौड़ राजगढ़
  4676. 3:26:53के राजघराने से हैं। अब उनकी राजशाही तो
  4677. 3:26:55चली गई है पर राजगढ़ के लोग अभी भी उनको
  4678. 3:26:58राजा मानते हैं और उन्हें राजा साहब कह कर
  4679. 3:27:01ही बुलाते हैं। राजा साहब के तीन बच्चे
  4680. 3:27:03हैं। वीरभद्र, सूर्यभान [संगीत] और बेटी
  4681. 3:27:06स्वर्णलता राठौड़। शौर्य के डैड सूर्यभान
  4682. 3:27:09की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। दरअसल राजा
  4683. 3:27:12साहब सूर्यभान की शादी अपने एक दोस्त की
  4684. 3:27:14बेटी के साथ करना चाहते थे। पर सूर्यभान
  4685. 3:27:16अपने कॉलेज की दोस्त कल्पना के प्रेम में
  4686. 3:27:18थे। जब सूर्यभान ने अपने पिताजी के सामने
  4687. 3:27:21अपने प्यार की बात जाहिर की तो चंद्रभान
  4688. 3:27:23जी तमतमा उठे। वो अपने दोस्त को जुबान दे
  4689. 3:27:26चुके थे और प्यार में पड़ा उनका बेटा अपनी
  4690. 3:27:28मनमानी करके उनके रुतबे को ठेस पहुंचा रहा
  4691. 3:27:31था। उन्होंने अपने बेटे की एक ना सुनी और
  4692. 3:27:33उसके सामने एक शर्त रख दी कि वह प्यार और
  4693. 3:27:35पिता के बीच किसी एक को चुन ले। राजा साहब
  4694. 3:27:39के अहम को जरूर बहुत ठेस पहुंची होगी जब
  4695. 3:27:41[संगीत] उस मुश्किल वक्त में सूर्यभान ने
  4696. 3:27:43परिवार की जगह अपने प्यार यानी कल्पना को
  4697. 3:27:46चुना। कल्पना से शादी के बाद सूर्यभान का
  4698. 3:27:49राजगढ़ में रहना मुश्किल था। अब परिवार को
  4699. 3:27:51उनसे कोई मतलब नहीं था। इसीलिए सूर्यभान
  4700. 3:27:54कल्पना के साथ भारत छोड़कर इंग्लैंड चले
  4701. 3:27:56गए। इंग्लैंड में उन्होंने नए सिरे से
  4702. 3:27:59अपने जीवन की शुरुआत की। उन्होंने अलग-अलग
  4703. 3:28:01कंपनी में जॉब की। फिर कुछ समय बाद ही
  4704. 3:28:04उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू किया।
  4705. 3:28:06राजघराने का खून होने के कारण किसी के
  4706. 3:28:08अंडर रहकर काम करना उनके बस का नहीं था।
  4707. 3:28:11स्टार्टअप में उन्हें जल्दी ही सफलता मिली
  4708. 3:28:13और उसके बाद वह आगे बढ़ते ही गए। सूर्य
  4709. 3:28:15भांजी के दो बच्चे हुए। शौर्य और नीलिमा।
  4710. 3:28:19वक्त अपना परवान चढ़ता रहा। शौर्य ने भी
  4711. 3:28:21अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद पिताजी के
  4712. 3:28:24बिजनेस को ना जॉइ करके अपना ही स्टार्टअप
  4713. 3:28:26शुरू किया। बिग बुल जल्दी ही बिग बबुल
  4714. 3:28:29इंग्लैंड में एक बड़ा नाम हो गया। सारे
  4715. 3:28:31बड़े-बड़े ब्रांड का एक स्टोर में एक साथ
  4716. 3:28:34होना उसकी सफलता का एक बहुत बड़ा कारण था।
  4717. 3:28:37आज के समय अगर बिग बबुल में किसी फैशन
  4718. 3:28:39ब्रांड को जगह मिल जाती है तो मानो उसे एक
  4719. 3:28:42बड़ा ब्रांड बनने का लाइसेंस मिल जाता है।
  4720. 3:28:45इंग्लैंड में बिग बबुल की सफलता देखकर ही
  4721. 3:28:47सूर्यभान जी ने शौर्य को इंडिया में भी
  4722. 3:28:49इसकी [संगीत] फ्रेंचाइजी खोलने का सुझाव
  4723. 3:28:51दिया और अपने शहर राजगढ़ से इसकी शुरुआत
  4724. 3:28:54करनी चाही। यही वह समय था जब राजगढ़ में
  4725. 3:28:57शौर्य की दादी का निधन हो गया। मरते समय
  4726. 3:29:00सूर्यभान की मां की इच्छा थी कि सूर्यभान
  4727. 3:29:02ही उसकी चिता को अग्नि दे। अपनी पत्नी की
  4728. 3:29:05इच्छा को ध्यान में रखकर चंद्रभान जी ने
  4729. 3:29:07सूर्यभान के एक दोस्त से कहकर सूर्यभान तक
  4730. 3:29:10उसकी मां की मौत की खबर पहुंचाई और उनकी
  4731. 3:29:12इच्छा के बारे में भी बताया। लगभग 25 वर्ष
  4732. 3:29:15के बाद सूर्यभान अपनी बेटी नीलिमा के साथ
  4733. 3:29:18अपने घर वापस आया था। अपनी मां के श्राद्ध
  4734. 3:29:21कर्म तक वो हवेली में ही रुका। लेकिन इस
  4735. 3:29:24दौरान भी राजा साहब ने सूर्यभान से कोई
  4736. 3:29:27बात नहीं की। फिर जब उनका सामना अपनी पोती
  4737. 3:29:30से हुआ तो वह उसका मोह त्याग नहीं सके।
  4738. 3:29:33नीलिमा थी ही इतनी प्यारी। नीलिमा से
  4739. 3:29:35मिलने से पहले चंद्रभान जी को यह भी नहीं
  4740. 3:29:37पता था कि सूर्यभान के कितने बच्चे हैं।
  4741. 3:29:40जब उन्हें पता चला कि सूर्यभान के साथ
  4742. 3:29:42उनकी पोती भी आई है तो वह उससे मिलने को
  4743. 3:29:45उत्सुक हो गए। शुरुआत में नीलिमा उनके
  4744. 3:29:48सामने पड़ते ही डर के मारे छुप जाती थी।
  4745. 3:29:52उस समय कांता प्रसाद ने नीलिमा और उसके
  4746. 3:29:54दादाजी के बीच सेतु का काम किया। फिर तो
  4747. 3:29:57दादा पोती के बीच जो प्यार पनपा उसका कहना
  4748. 3:30:00ही क्या? चंद्रभान जी सूर्यभान से तो बात
  4749. 3:30:03नहीं करते थे पर नीलिमा से बात किए बिना
  4750. 3:30:06रह भी नहीं पाते थे। नीलिमा से ही उन्हें
  4751. 3:30:08पता चला कि उसका एक भाई भी है। जब
  4752. 3:30:11चंद्रभान जी को शौर्य के बारे में पता चला
  4753. 3:30:13तो उन्होंने [संगीत] नीलिमा से पूछा
  4754. 3:30:16शौर्य क्यों नहीं आया? तो नीलिमा ने बताया
  4755. 3:30:20कितना डर डर के तो मैं ही आई थी कि पता
  4756. 3:30:22नहीं आप कितना गुस्सा करेंगे। उस पर अगर
  4757. 3:30:24शौर्य भी आता तो पता नहीं कि आप क्या कर
  4758. 3:30:27जाते। हमने सुना था कि आप बहुत गुस्से
  4759. 3:30:29वाले हैं। इसीलिए मैं अकेली आई क्योंकि
  4760. 3:30:32आपके बारे में यह भी सुना था कि आप
  4761. 3:30:33लड़कियों पर गुस्सा नहीं करते। इस पर
  4762. 3:30:36[संगीत] चंद्रभान जी बोले मेरी नाराजगी
  4763. 3:30:39सूर्यभान से है। अपने पोते-पोतियों से
  4764. 3:30:42नहीं। इस तरह जब तक नीलिमा राजगढ़ में रही
  4765. 3:30:45चंद्रभान जी का लगाव उससे बढ़ता ही रहा।
  4766. 3:30:48सूर्यभान राठौड़ और नीलिमा के वापस चले
  4767. 3:30:51जाने के बाद चंद्रभान जी नीलिमा को मिस
  4768. 3:30:53करने लगे। अब उनके मन में अपने पोते से भी
  4769. 3:30:57मिलने की इच्छा प्रबल होने लगी थी। एक दिन
  4770. 3:30:59जब वह बीमार होकर हॉस्पिटल में भर्ती हुए
  4771. 3:31:01[संगीत] तो उन्होंने बेटे सूर्यभान को फोन
  4772. 3:31:04किया और शौर्य को उनके पास भेजने को कहा।
  4773. 3:31:07वो चाहते थे कि जीवन रहते ही वह अपने पोते
  4774. 3:31:09को उसका हक दे दें। नहीं तो वीरभद्र और
  4775. 3:31:12स्वर्णलता उसके हाथ कुछ भी नहीं लगने
  4776. 3:31:15देंगे। इसी वजह से शौर्य भारत आया था।
  4777. 3:31:18जिसके बाद उसका एक्सीडेंट हो गया। या यूं
  4778. 3:31:20कहूं कि किसी ने उसे जान से मारने की
  4779. 3:31:22कोशिश की थी। कुछ ही पलों में ये सारी
  4780. 3:31:25बातें शौर्य के दिमाग में किसी चलचित्र की
  4781. 3:31:27भांति घूम गई। वो भी अपने दादाजी से मिलना
  4782. 3:31:30चाहता था। इसके लिए उसे अपने लुक को थोड़ा
  4783. 3:31:32सुधारना था। शौर्य अपने क्वार्टर से निकला
  4784. 3:31:35और गिरधर के क्वार्टर में पहुंचा। गिरधर
  4785. 3:31:37भी तैयार था। उसे भी राय साहब को ऑफिस
  4786. 3:31:39लेकर जाना था।
  4787. 3:31:40[संगीत]
  4788. 3:31:40जब शौर्य गिरधर के रूम में पहुंचा तो वहां
  4789. 3:31:42पर संतो पहले से ही बैठी गप्पे हाक रही
  4790. 3:31:45थी। तब उसने शौर्य को आते देखा तो वह बोली
  4791. 3:31:49कुछ तो रहम करो अपने ऊपर साहब। शौर्य को
  4792. 3:31:52उसकी बात समझ नहीं आई। वो संतो की ओर
  4793. 3:31:54देखते हुए बोला तुम कहना क्या चाहती हो?
  4794. 3:31:58जरा साफ-साफ समझाओगी। इस पर संतो अपनी बात
  4795. 3:32:01स्पष्ट करती हुई बोली। कल कहा था ना कि
  4796. 3:32:04अपनी दाढ़ी साफ करवा लो या कम से कम ट्रिम
  4797. 3:32:06ही करवा लो। अरे मान लो मेरी बात अच्छे
  4798. 3:32:10लगोगे। ठीक है। अगर तुम कहती हो तो यह
  4799. 3:32:13करने की सोचूंगा। शौर्य ने बस उसकी बोलती
  4800. 3:32:16बंद करने के लिए कहा था। लेकिन शंतो इसे
  4801. 3:32:18सच मान बैठी और उछल पड़ी। देखना उसके बाद
  4802. 3:32:21दुआएं दोगे मुझे। तभी गिरधर काका बीच में
  4803. 3:32:24बोल पड़े। तुम जब इतना ही इसके पीछे पड़ी
  4804. 3:32:27हो तो आज मैं खुद इसकी शेव करवा दूंगा।
  4805. 3:32:31ठीक है काका आप ही करा दीजिए। बस ध्यान
  4806. 3:32:33रखना। इतना भी हैंडसम मत बना देना कि इनके
  4807. 3:32:36लिए खुद ही आईने से नजर हटाना मुश्किल हो
  4808. 3:32:38जाए। [हंसी]
  4809. 3:32:40इतना कहकर शंतू खिलखिलाती हुई वहां से
  4810. 3:32:42निकल गई। तभी शौर्य का फोन रिंग हुआ।
  4811. 3:32:45शौर्य ने फोन की स्क्रीन की ओर देखा और
  4812. 3:32:47फोन उठा लिया। शौर्य ने फोन की स्क्रीन पर
  4813. 3:32:50शिप्रा का नाम देखा और तुरंत फोन उठाया।
  4814. 3:32:52शिप्रा ने पूछा तुम तैयार हो गए? हां, अभी
  4815. 3:32:56आता हूं। इतना बोलकर शौर्य ने फोन कट किया
  4816. 3:32:59और गिरधर की तरफ मुड़कर बोला, "चलता हूं
  4817. 3:33:02काका। कैंटीन [संगीत] में मिलता हूं। अरे
  4818. 3:33:05रुको पहले थोड़ा नाश्ता तो कर लो फिर चले
  4819. 3:33:07जाना। गिरधर एक प्लेट में दो परांठे और
  4820. 3:33:10चटनी ले आया था। शौर्य झिझकते [संगीत] हुए
  4821. 3:33:12बोला अरे काका इसकी क्या जरूरत थी? मैं तो
  4822. 3:33:16रोज कैंटीन में नाश्ता कर लेता हूं।
  4823. 3:33:17[संगीत]
  4824. 3:33:18भाई मैं तो अपने लिए बना ही रहा था। दो
  4825. 3:33:20परांठे ज्यादा बना लिए। गिरधर की बातों
  4826. 3:33:23में उसका स्नेह झलक रहा था। इसीलिए शौर्य
  4827. 3:33:25मना नहीं कर पाया। उसने जल्दी से नाश्ता
  4828. 3:33:28किया और पार्किंग के पास पहुंच गया। जहां
  4829. 3:33:30शिप्रा खड़ी थी। उसने शिप्रा से चाबी ली
  4830. 3:33:33और कार बाहर निकाली। तभी सामने से युविका
  4831. 3:33:36आती दिखाई दी। शिप्रा ने कार का दरवाजा
  4832. 3:33:38खोला और पीछे जाकर बैठ गई। तभी युविका
  4833. 3:33:41उसके पास से गुजरते हुए बोली मुझे नहीं
  4834. 3:33:44पता था कि तुमने पति के रूप में एक
  4835. 3:33:46ड्राइवर रखा है। शिप्रा दांत पीसते हुए
  4836. 3:33:49बोली सुबह-सुबह अगर कुछ अच्छा नहीं बोल
  4837. 3:33:51सकती तो मुंह बंद रखना चाहिए।
  4838. 3:33:54ओहो इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है?
  4839. 3:33:57मैंने क्या गलत कहा? जो सच है वह सामने
  4840. 3:33:59है। इतना बोलकर युविका मुस्कुराती हुई
  4841. 3:34:02वहां से निकल गई। युविका की बात सुनकर
  4842. 3:34:04शौर्य के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। उसे
  4843. 3:34:07उसकी बात बिल्कुल भी बुरी नहीं लगी थी। वो
  4844. 3:34:09तो चाहता था कि तकदीर का ऐसा कोई चक्र चले
  4845. 3:34:12कि वो हमेशा शिप्रा का ड्राइवर बना रहे।
  4846. 3:34:14पर शिप्रा युविका की बात सुनकर थोड़ी
  4847. 3:34:17नर्वस दिखाई दे रही थी। [संगीत] वो यह
  4848. 3:34:19सोचकर ज्यादा चिंतित थी कि श्रवण को बुरा
  4849. 3:34:21लगा होगा। अपराध बोध से दबी शिप्रा बोली
  4850. 3:34:25तुम युविका की बातों को दिल पर मत लेना।
  4851. 3:34:27मैं तुम्हें ड्राइवर नहीं मानती। मैं तो
  4852. 3:34:29तुम्हें सिर्फ इसीलिए साथ ले जा रही हूं
  4853. 3:34:31कि पापाम मेरे अकेले घर से निकलने के फेवर
  4854. 3:34:34में नहीं है। अब वो किसी बॉडीगार्ड को
  4855. 3:34:36मेरे साथ भेजते। इससे अच्छा है कि मैं
  4856. 3:34:39तुम्हारे साथ जाऊं। यह सुनकर शौर्य के दिल
  4857. 3:34:42में हलचल हुई। उसे अच्छा लगा कि शिप्रा
  4858. 3:34:44उसके साथ खुद को सुरक्षित महसूस करती है।
  4859. 3:34:47वो बोला पर मैंने तो उनकी बातों को दिल पर
  4860. 3:34:50लिया ही नहीं। लेकिन [संगीत] लगता है आपको
  4861. 3:34:52जरूर उनकी बात बुरी लग गई। शिप्रा समझ
  4862. 3:34:55नहीं पाई कि क्या जवाब दे। [संगीत] तभी
  4863. 3:34:57शौर्य बोला, "आप किसी और की बातों पर
  4864. 3:35:00ध्यान मत दीजिए और यह भी मत सोचिए कि मुझे
  4865. 3:35:03कैसा लगेगा। जो लोग मेरे लिए मायने नहीं
  4866. 3:35:06रखते, उनकी बातों को भी मैं कोईेंस नहीं
  4867. 3:35:08देता। आप मेरी तरफ से निश्चिंत रहिए।
  4868. 3:35:11[संगीत] ऐसी बातों का मुझ पर कोई असर नहीं
  4869. 3:35:13होता। शिप्रा शौर्य की समझदारी से हैरान
  4870. 3:35:17थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इतना समझदार
  4871. 3:35:20होकर भी शौर्य भिखारियों वाली लाइफ क्यों
  4872. 3:35:22जी रहा था। फिर उसे शौर्य की पिछली शाम को
  4873. 3:35:25कही बातें याद आई। कुछ सोचकर उसने शौर्य
  4874. 3:35:28से कहा, [संगीत] "गा गाड़ी जरा साइड में
  4875. 3:35:30रोकना। शौर्य को समझ नहीं आया कि भरे
  4876. 3:35:33बाजार में वो गाड़ी रोकने को क्यों बोल
  4877. 3:35:35रही है। उसने पूछा, "क्या हुआ? आप गाड़ी
  4878. 3:35:38क्यों रुकवा रही हैं? पहले [संगीत] रोको
  4879. 3:35:41तो सही।" शिप्रा दरवाजे की तरफ खिसकती हुई
  4880. 3:35:44बोली। शौर्य ने गाड़ी सड़क किनारे रोक दी।
  4881. 3:35:47शिप्रा दरवाजा खोलकर बाहर आई और फिर आगे
  4882. 3:35:49का दरवाजा खोलकर ड्राइवर के बगल वाली सीट
  4883. 3:35:52पर बैठ गई। यह आप क्या कर रही हैं? शौर्य
  4884. 3:35:55ने उसकी ओर देखते हुए पूछा तो शिप्रा खुश
  4885. 3:35:58होते हुए बोली मैं सोच रही थी कि युविका
  4886. 3:36:01ने ऐसा क्यों कहा? फिर मुझे लगा उसने कुछ
  4887. 3:36:04गलत भी तो नहीं कहा। जैसे मैं पीछे बैठी
  4888. 3:36:07थी। कोई भी हमें देखकर यही सोचता। लेकिन
  4889. 3:36:10अब ठीक है। चलो। शिप्रा की बात सुनकर
  4890. 3:36:13शौर्य के चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गई।
  4891. 3:36:15जिसे नोटिस करके शिप्रा बोल पड़ी। क्या
  4892. 3:36:18मैं तुम्हारे चेहरे की मुस्कान का कारण
  4893. 3:36:20जान सकती हूं? मुझे यह सोचकर हंसी आ रही
  4894. 3:36:23है कि आपके दिमाग से अभी तक युविका की बात
  4895. 3:36:26नहीं गई। इसीलिए आप आगे बैठकर यह जताना
  4896. 3:36:28चाह रही हैं कि आप मुझे ड्राइवर नहीं
  4897. 3:36:30समझती। शौर्य की इस बात पर शिप्रा सवालिया
  4898. 3:36:33नजर से शौर्य को देखती हुई बोली। तो इसमें
  4899. 3:36:36गलत क्या है? किसी और के बोलने या समझने
  4900. 3:36:39से आप अपने एक्शन बदल रही हैं तो यह गलत
  4901. 3:36:42हुआ ना? शौर्य की समझदारी वाली बात सुनकर
  4902. 3:36:45शिप्रा आश्चर्य से उसे देखने लगी। तो
  4903. 3:36:47शौर्य बोला क्या हुआ? अब क्या मैं आपके इस
  4904. 3:36:50तरह देखने का कारण जान सकता हूं? तुम्हें
  4905. 3:36:53पता है जैसे तुम दिखाई देते हो और जैसी
  4906. 3:36:56बातें तुम करते हो वो आपस में बिल्कुल मैच
  4907. 3:36:59नहीं करती। कहते हुए शिप्रा की आंखें
  4908. 3:37:01सिकुड़ गई। जैसे वो समझने की कोशिश कर रही
  4909. 3:37:04हो कि शौर्य आखिर है क्या चीज? शौर्य
  4910. 3:37:07शिप्रा के चेहरे पर ही नजर गड़ाए हुए
  4911. 3:37:09बोला। [संगीत]
  4912. 3:37:10अब इस बात को मैं अपनी तारीफ समझूं या यह
  4913. 3:37:12समझूं कि आपको लगता है कि मैं सिर्फ
  4914. 3:37:14समझदार होने का दिखावा कर रहा हूं। इस पर
  4915. 3:37:17शिप्रा अपनी एक आइब्रो उठाकर बोली यह भी
  4916. 3:37:20तुम ही बताओ कि मैं तुम्हारे बारे में
  4917. 3:37:22क्या सोचूं? आप खुद ज्यादा ही सोच रही
  4918. 3:37:25हैं। किसी चीज के बारे में ज्यादा सोचने
  4919. 3:37:28से सही गलत के बीच अंतर बताना मुश्किल हो
  4920. 3:37:30जाता है। कहते हुए शौर्य शिप्रा की तरफ
  4921. 3:37:33मुड़ा और बोला युविका ने मुझे ड्राइवर कह
  4922. 3:37:36दिया। आप इस बात को लेकर इतना परेशान
  4923. 3:37:39क्यों हो रही हैं? क्या मैं आपका ड्राइवर
  4924. 3:37:41होने के लायक भी नहीं हूं? मुझे काम मिल
  4925. 3:37:43गया और यह ड्राइवर का काम कोई बुरा तो
  4926. 3:37:45नहीं है ना? शिप्रा को समझ नहीं आया कि वो
  4927. 3:37:48इसका क्या जवाब दे? इसका मतलब ड्राइवर की
  4928. 3:37:51जॉब से तुम्हें कोई परेशानी नहीं है।
  4929. 3:37:53परेशानी क्यों होगी? जब तक यहां हूं तब तक
  4930. 3:37:56तो यह जॉब कर ही सकता हूं। शौर्य तुरंत
  4931. 3:37:59बोला तो शिप्रा उसे घूरती हुई बोली। अच्छा
  4932. 3:38:02फिर उसके बाद क्या करोगे? बाहर कोई काम
  4933. 3:38:06देखूंगा। इसके लिए मैंने एक दोस्त से बात
  4934. 3:38:08भी कर रखी है। यह बोलकर शौर्य शिप्रा का
  4935. 3:38:11रिएक्शन देखना चाहता था। शिप्रा को समझ ही
  4936. 3:38:14नहीं आया कि अब वो क्या बोले? जब उसे कुछ
  4937. 3:38:16नहीं सूझा तो उसने कहा अब यही खड़े-खड़े
  4938. 3:38:19समय खराब करना है या मुझे ऑफिस भी
  4939. 3:38:22पहुंचाओगे।
  4940. 3:38:23आप पहले पीछे जाकर बैठ जाइए। अगर ऑफिस के
  4941. 3:38:26लोगों ने आपको आगे बैठे देखा तो फिर से वो
  4942. 3:38:29तरह-तरह की बातें बनाएंगे।
  4943. 3:38:31शौर्य ने शिप्रा को समझाने की कोशिश की।
  4944. 3:38:33लेकिन [संगीत] शिप्रा शायद अपना मन बना
  4945. 3:38:35चुकी थी। कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम
  4946. 3:38:39है कहना। [संगीत] अब ऑफिस भी पहुंचाओगे या
  4947. 3:38:42पूरा दिन कार में ही बैठे रहना है? ऐसा
  4948. 3:38:45बोलकर शिप्रा खिलखिला कर हंस दी। पहली बार
  4949. 3:38:47शौर्य ने उसे इस तरह खुलकर हंसते देखा।
  4950. 3:38:50[संगीत] कुछ देर बाद शौर्य शिप्रा को लेकर
  4951. 3:38:52हिल टॉप हेवन पहुंचा।
  4952. 3:38:55आज आपको कहीं बाहर मीटिंग के लिए जाना तो
  4953. 3:38:57नहीं है ना? शिप्रा कार से उतरती उससे
  4954. 3:39:00पहले ही शौर्य ने पूछा। इस पर शिप्रा बोली
  4955. 3:39:03ऐसा क्यों पूछ रहे हो? शौर्य ने कहा दरअसल
  4956. 3:39:08आज मुझे कहीं जाना है। अगर आपको ऐतराज ना
  4957. 3:39:11हो तो मैं अपना काम निपटा के आता हूं।
  4958. 3:39:13किससे मिलने जा रहे हो? शिप्रा ये पूछने
  4959. 3:39:16से खुद को रोक नहीं सकी। है मेरा एक जानने
  4960. 3:39:20वाला। वो हॉस्पिटल में एडमिट है। [संगीत]
  4961. 3:39:22शौर्य के जवाब से शिप्रा के चेहरे पर
  4962. 3:39:24चिंता झलक आई। कुछ सीरियस तो नहीं है?
  4963. 3:39:28नहीं नहीं कोई चिंता की बात नहीं है।
  4964. 3:39:30शौर्य धीरे से बोला तो शिप्रा ने कहा ठीक
  4965. 3:39:33है कोई बात नहीं मैं खुद वापस चली जाऊंगी।
  4966. 3:39:35तुम इत्मीनान से जाओ। नहीं घर जाने के
  4967. 3:39:38टाइम तक तो मैं आ जाऊंगा। मैंने तो यह सोच
  4968. 3:39:41कर पूछा कि बीच में आपको कहीं जाना हुआ तो
  4969. 3:39:44शौर्य ने समझाया तो शिप्रा बोली ठीक है
  4970. 3:39:46मैं देख लूंगी। अगर तुम कार ले जाना चाहते
  4971. 3:39:49हो तो ले जा सकते हो। नहीं मुझे कार नहीं
  4972. 3:39:52चाहिए। मैं टैक्सी [संगीत] करके चला
  4973. 3:39:54जाऊंगा। शौर्य ने स्पष्ट किया तो शिप्रा
  4974. 3:39:56कार से उतरते हुए बोली तुम देख लो जैसा
  4975. 3:40:00तुम्हें ठीक लगे।
  4976. 3:40:02शौर्य ने कार पार्क करके चाबी गार्ड को
  4977. 3:40:04थमा दी और फिर कैंटीन में जाकर उसने
  4978. 3:40:06विक्रम को फोन किया। विक्रम उसी के फोन का
  4979. 3:40:09इंतजार कर रहा था।
  4980. 3:40:11कहां हो तुम? शौर्य ने पूछा तो विक्रम
  4981. 3:40:14बोला,
  4982. 3:40:15"मैं तो अभी होटल में ही हूं। आप बताइए
  4983. 3:40:17कहां आना है?"
  4984. 3:40:191 घंटे बाद इंदिरा नगर में हिलटॉप हेवन के
  4985. 3:40:21बाहर मिलो। यहीं से साथ चलते हैं। सोच रहा
  4986. 3:40:25हूं आज शेविंग करा ही लूं। [संगीत] इतना
  4987. 3:40:27बोलकर शौर्य ने फोन काट दिया और फिर कुछ
  4988. 3:40:30सोचकर इधर-उधर देखने लगा। तभी उसकी नजर
  4989. 3:40:33गणेश पर पड़ी।
  4990. 3:40:35हेलो गणेश भाई कैसे हो? गणेश भी शौर्य को
  4991. 3:40:38देखकर खुश हुआ। अरे श्रवण तुमने वाल्मीकि
  4992. 3:40:42काका की बहुत बड़ी मदद की। वो तुम्हें याद
  4993. 3:40:45कर रहे थे। इस पर शौर्य बोला बस यार जरूरत
  4994. 3:40:49के वक्त एक दूसरे के काम आना चाहिए। अच्छा
  4995. 3:40:52सुनो यहां आसपास कोई सैलूून है क्या?
  4996. 3:40:55तुम्हें सैलूून जाना है? चलो मैं तुम्हें
  4997. 3:40:58ले चलता हूं। थोड़ी देर बाद शेविंग और
  4998. 3:41:01हेयर कट करवा कर जब शौर्य सैलून से बाहर
  4999. 3:41:03निकला तो गणेश की आंखें फैल गई। क्या लग
  5000. 3:41:06रहे हो यार श्रवण भाई? बिल्कुल फिल्मी
  5001. 3:41:08हीरो। इतना खूबसूरत चेहरा तुमने अब तक
  5002. 3:41:12दाढ़ी के पीछे क्यों छुपा रखा था? गणेश की
  5003. 3:41:14बात पर शौर्य बस मुस्कुरा कर रह गया। अरे
  5004. 3:41:17सही कह रहा हूं मैं। अब अगर कोई तुम्हें
  5005. 3:41:19देख ले तो तुम्हें ड्राइवर तो बिल्कुल
  5006. 3:41:21नहीं समझेगा। तुम तो मालिक लग रहे हो भाई।
  5007. 3:41:25गणेश की तारीफ खत्म होने का नाम ही नहीं
  5008. 3:41:27ले रही थी। खैर दोनों वापस हिलटॉप हेवन के
  5009. 3:41:30वेटिंग एरिया में पहुंच गए। शौर्य ने देखा
  5010. 3:41:33कि गिरधर काका भी आ चुके हैं। जब शौर्य
  5011. 3:41:36[संगीत] गणेश के साथ गिरधर काका के पास
  5012. 3:41:38पहुंचा तो गिरधर दबी हुई आवाज में गणेश से
  5013. 3:41:40बोला।
  5014. 3:41:43ओए गणेश ये किन साहब को साथ लेकर घूम रहा
  5015. 3:41:46है तू?
  5016. 3:41:47देखा यह भी धोखा खा गए ना। गणेश चुटकी
  5017. 3:41:51बजाते हुए बोला, गिरधर को कुछ समझ नहीं
  5018. 3:41:53आया।
  5019. 3:41:55क्या हुआ? क्या बोल रहा है तू? भांग चढ़ा
  5020. 3:41:57ली है क्या तूने? इस बीच शौर्य कुछ नहीं
  5021. 3:42:00बोल रहा था। वो सिर्फ खड़े-खड़े तमाशा देख
  5022. 3:42:02रहा था। गणेश गिरधर के पास गया और उसके
  5023. 3:42:05कान में बोला,
  5024. 3:42:07"क्या आप इन साहब को नहीं जानते?"
  5025. 3:42:10"मैं कैसे जानूंगा भला? मैं तो इन्हें
  5026. 3:42:13पहली बार देख रहा हूं।"
  5027. 3:42:14गिरधर शौर्य की तरफ देखता हुआ अनुमान लगा
  5028. 3:42:17रहा था कि आखिर यह है कौन। लेकिन [संगीत]
  5029. 3:42:19किसी स्पष्ट निर्णय पर ना पहुंच पाने के
  5030. 3:42:22कारण गिरधर गणेश को झड़कते हुए बोला अब तो
  5031. 3:42:25मुझे पक्का यकीन हो गया है कि तेरा दिमाग
  5032. 3:42:27फिर चुका है। जाने क्या बोले जा रहा है।
  5033. 3:42:30फिर वो शौर्य की तरफ देखकर बोला साहब क्या
  5034. 3:42:33आप मुझसे पहले भी कभी मिले हो। इतने में
  5035. 3:42:36शौर्य बोल पड़ा। क्या गिरधर काका आप भी
  5036. 3:42:39गणेश की तरह शुरू हो गए? शौर्य की आवाज
  5037. 3:42:43पहचानते ही गिरधर कुछ पल के लिए आंखें
  5038. 3:42:45बड़ी करके शौर्य को देखता रहा। फिर दोनों
  5039. 3:42:48हाथों से अपना सिर पकड़ कर बोला,
  5040. 3:42:51सही कहती थी संतो इसीलिए तो कहते हैं कि
  5041. 3:42:54औरतों की बात मान लेनी चाहिए। उनकी नजर
  5042. 3:42:57बहुत पारखी होती है। इस पर शौर्य गिरधर से
  5043. 3:43:01बोला, "अरे अब बस भी करो काका।" "आप क्या
  5044. 3:43:04मुझे झाड़ पर चढ़ाकर ही मानोगे?" तभी शौर्य
  5045. 3:43:07का फोन रिंग हुआ। यह विक्रम का कॉल था।
  5046. 3:43:10उसने फोन उठाया तो विक्रम की आवाज आई।
  5047. 3:43:13मैंने हिल टॉप हेवन के बाहर गाड़ी पार्क
  5048. 3:43:15कर रखी है। आप कितनी देर में आ रहे हो
  5049. 3:43:17बॉस?
  5050. 3:43:18तुम इंतजार करो। मैं बस आ ही रहा हूं।
  5051. 3:43:20[संगीत] इतना बोलकर शौर्य ने फोन काट दिया
  5052. 3:43:22और गिरधर से बोला। काका अभी मैं अपने एक
  5053. 3:43:25पहचान वाले से मिलने हॉस्पिटल जा रहा हूं।
  5054. 3:43:27वापस आकर आपसे बात करता हूं। हॉस्पिटल का
  5055. 3:43:30नाम सुनकर गिरधर के माथे पर बल पड़ गए।
  5056. 3:43:33हॉस्पिटल जा रहे हो? कोई परेशानी वाली बात
  5057. 3:43:36तो नहीं है? नहीं काका ऐसी कोई चिंता की
  5058. 3:43:39बात नहीं है। इतना बोलकर शौर्य वहां से
  5059. 3:43:41निकल गया। हिलटॉप हेवन से बाहर आकर उसने
  5060. 3:43:44चारों तरफ नजर दौड़ाई तो उसे रोड के दूसरी
  5061. 3:43:46तरफ एक लंबी सी गाड़ी के साथ टेक लगाए
  5062. 3:43:49विक्रम खड़ा दिखाई दिया। शौर्य विक्रम के
  5063. 3:43:52पास पहुंचा तो विक्रम मुस्कुराते हुए
  5064. 3:43:53बोला। अब लग रहे हो ना आप? दी शौर्य
  5065. 3:43:57राठौड़। चुप करो तुम। शौर्य ने विक्रम को
  5066. 3:44:00झिड़क दिया और कार में बैठ गया। विक्रम भी
  5067. 3:44:03ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और गाड़ी बढ़ा
  5068. 3:44:05दी। तभी शौर्य ने पूछा, मैं दादा जी से
  5069. 3:44:08मिलने जा रहा हूं। यह बात कांता प्रसाद जी
  5070. 3:44:11को बता दी। इस पर विक्रम ने जवाब दिया,
  5071. 3:44:14हां, अभी थोड़ी देर पहले ही उनका फोन आया
  5072. 3:44:16था। मैंने बोल दिया, आधे 1 घंटे में हम
  5073. 3:44:18हॉस्पिटल पहुंच जाएंगे। फिर कुछ देर बाद
  5074. 3:44:22शौर्य की गाड़ी सिटी हॉस्पिटल में प्रवेश
  5075. 3:44:24कर रही थी। शौर्य और विक्रम सिटी हॉस्पिटल
  5076. 3:44:27के वीआईपी एरिया में पहुंचे और फिर विक्रम
  5077. 3:44:29ने कांता प्रसाद को फोन किया। एक रिंग के
  5078. 3:44:32बाद ही फोन उठा लिया गया। ऐसा लगा जैसे वो
  5079. 3:44:35इसी फोन का इंतजार कर रहे थे।
  5080. 3:44:38हेलो कांता प्रसाद जी, हम नीचे वीआईपी
  5081. 3:44:41लाउंज में खड़े हैं। कहां पर आना है?
  5082. 3:44:43विक्रम ने सीधा सवाल किया तो कांता प्रसाद
  5083. 3:44:46बोले,
  5084. 3:44:47आप नीचे लाउंज में ही इंतजार करें। मैं
  5085. 3:44:49वहीं पर आता हूं।
  5086. 3:44:51दो मिनट भी नहीं गुजरे थे कि शौर्य को
  5087. 3:44:5355-60 साल का एक बुजुर्ग हाथ में मोबाइल
  5088. 3:44:56लिए इधर-उधर देखता हुआ लाउंज में प्रवेश
  5089. 3:44:58करता दिखाई दिया। प्रभावशाली व्यक्तित्व
  5090. 3:45:01के धनी उस बुजुर्ग का रब वहां आते ही
  5091. 3:45:03दिखाई देने लगा था। वहां जो भी लोग
  5092. 3:45:06उपस्थित थे सभी उनकी तरफ रिस्पेक्ट से
  5093. 3:45:08देखने लगे थे। कारण यह था कि वह राजा साहब
  5094. 3:45:11के पर्सनल असिस्टेंट कम बटलर थे। इसीलिए
  5095. 3:45:14राजगढ़ में शायद ही कोई ऐसा होगा जो उनको
  5096. 3:45:16नहीं जानता होगा। शौर्य उनके प्रभाव को
  5097. 3:45:19देखते ही समझ गया कि यही कांता प्रसाद जी
  5098. 3:45:21होंगे। और कांता प्रसाद ने भी शौर्य और
  5099. 3:45:24विक्रम को देखकर अंदाजा लगा लिया कि यही
  5100. 3:45:26विक्रम और शौर्य होंगे। बस उनके लिए यह
  5101. 3:45:29अनुमान लगाना मुश्किल था कि इन दोनों में
  5102. 3:45:31से विक्रम कौन है और शौर्य कौन? उन्होंने
  5103. 3:45:34कपड़ों को देखकर पहचानने की कोशिश की।
  5104. 3:45:37विक्रम के कपड़े ज्यादा फैंसी थे। इसीलिए
  5105. 3:45:40कांता प्रसाद ने विक्रम को शौर्य समझ लिया
  5106. 3:45:42और शौर्य के पास जाकर बोले
  5107. 3:45:46आप ही विक्रम हो ना? शौर्य भी कांता
  5108. 3:45:49प्रसाद के मनोभाव को समझ गया था। इसीलिए
  5109. 3:45:52विक्रम कुछ बोलता उससे पहले शौर्य खुद बोल
  5110. 3:45:54दिया।
  5111. 3:45:56जी आप ही कांता प्रसाद जी हैं। विक्रम को
  5112. 3:46:00कुछ बोलने का मौका ही नहीं मिला। कांता
  5113. 3:46:02प्रसाद जी विक्रम की तरफ मुड़े और बोले तो
  5114. 3:46:06आप हैं शौर्य। राजा साहब को जब से पता चला
  5115. 3:46:09है कि आप आज उनसे मिलने के लिए आने वाले
  5116. 3:46:12हैं तब से उनकी नजर बस दरवाजे पर ही टिकी
  5117. 3:46:15है। चलिए पहले चलकर उनसे मिल लीजिए। नहीं
  5118. 3:46:18तो मुझे ही फटकार पड़ जाएगी। विक्रम कुछ
  5119. 3:46:22बोलना चाह रहा था। पर शौर्य ने आंख के
  5120. 3:46:24इशारे से उसे चुप रहने का संकेत दिया।
  5121. 3:46:27शौर्य और विक्रम लिफ्ट के जरिए कांता
  5122. 3:46:30प्रसाद के साथ फिफ्थ फ्लोर पर पहुंचे और
  5123. 3:46:32फिर चंद्रभान जी के कमरे में दाखिल हुए।
  5124. 3:46:35चंद्रभान जी बेड पर लेटे हुए थे और उनकी
  5125. 3:46:38नजर दरवाजे पर ही टिकी थी। लगभग 75 वर्ष
  5126. 3:46:42की उम्र में भी उनके चेहरे का जो ओज था वो
  5127. 3:46:45कमाल का था। उनकी निगाह शौर्य और विक्रम
  5128. 3:46:48दोनों के चेहरे का परीक्षण कर रही थी।
  5129. 3:46:51कांता प्रसाद बताने वाले थे कि दोनों में
  5130. 3:46:53से शौर्य कौन है। पर चंद्रभान जी ने
  5131. 3:46:56उन्हें रोक दिया।
  5132. 3:46:58तुम्हें बताने की जरूरत नहीं है कि इन
  5133. 3:47:01दोनों में से मेरा पोता कौन है। मैं खुद
  5134. 3:47:05ही पहचान लूंगा।
  5135. 3:47:08शौर्य भी दिलचस्पी से अपने दादाजी की तरफ
  5136. 3:47:10देखने लगा। शौर्य ने खुद आज अपने दादाजी
  5137. 3:47:13को पहली बार देखा था। वो उनके पैर छूकर
  5138. 3:47:16आशीर्वाद लेना चाहता था। पर जब उसने देखा
  5139. 3:47:19कि उसके दादाजी बिना उसके बताए उसे पहचान
  5140. 3:47:22जाएंगे। इस जिद के साथ बैठे थे तो वह भी
  5141. 3:47:25आजमाना चाहता था कि क्या सच में वो उसे
  5142. 3:47:28पहचान पाएंगे। कांता प्रसाद जी तो नहीं
  5143. 3:47:30पहचान पाए थे। आज पहली बार शौर्य का अपने
  5144. 3:47:34दादाजी से आमनासामना हुआ था। थोड़ी देर
  5145. 3:47:37देखने के बाद चंद्रभान जी शौर्य की तरफ
  5146. 3:47:39देखकर बोले
  5147. 3:47:41आजा मेरे बच्चे अपने दादाजी से गले नहीं
  5148. 3:47:45मिलेगा। जब कांता प्रसाद ने देखा कि
  5149. 3:47:48चंद्रभान जी शौर्य को अपना पोता समझ रहे
  5150. 3:47:50हैं तो वह विक्रम की तरफ इशारा कर बोल
  5151. 3:47:52पड़े। अरे नहीं साहब शौर्य बाबा तो यह
  5152. 3:47:56हैं। चंद्रभान जी ने विक्रम की तरफ देखा
  5153. 3:47:59पर उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि शौर्य वो
  5154. 3:48:02हो सकता है। फिर वह पूरे विश्वास के साथ
  5155. 3:48:04बोले
  5156. 3:48:06यह नहीं हो सकता। मेरी आंखें धोखा नहीं खा
  5157. 3:48:11सकती। कांता प्रसाद को समझ नहीं आ रहा था
  5158. 3:48:14कि वह चंद्रभान जी को कैसे समझाए। अभी
  5159. 3:48:17कांता प्रसाद कुछ बोलने की सोच ही रहे थे
  5160. 3:48:20कि तभी शौर्य आगे बढ़कर चंद्रभान जी का
  5161. 3:48:23पैर छूकर प्रणाम करता हुआ बोला
  5162. 3:48:26आप एकदम सही हैं दादा जी मैं ही आपका पोता
  5163. 3:48:29शौर्य हूं। शौर्य की बात सुनकर चंद्रभान
  5164. 3:48:32[संगीत] जी के चेहरे पर विजय मुस्कान खेल
  5165. 3:48:34गई। वो कांता प्रसाद की तरफ देखकर बोले
  5166. 3:48:38देखा मैंने कहा था ना कि मेरी नजर धोखा
  5167. 3:48:42नहीं खा सकती।
  5168. 3:48:44कांता प्रसाद किसी बेवकूफ की तरह कभी
  5169. 3:48:47शौर्य को तो कभी विक्रम को देख रहे थे।
  5170. 3:48:50उन्हें उलझन में देखकर शौर्य बोला
  5171. 3:48:53माफ कीजिएगा कांता प्रसाद जी मेरा इरादा
  5172. 3:48:55आपको भ्रमाने का नहीं था। पर जब आपने मुझे
  5173. 3:48:58विक्रम समझा तो मैं देखना चाहता था कि
  5174. 3:49:01दादा जी मुझे पहचानते हैं या नहीं। पर
  5175. 3:49:03देखिए आप तो धोखा खा गए पर दादा जी ने
  5176. 3:49:06मुझे एक नजर में ही पहचान लिया। कांता
  5177. 3:49:09प्रसाद को भी तसल्ली हुई कि चंद्रभान जी
  5178. 3:49:11ने कोई गलती नहीं की। पर उत्सुकता वश वो
  5179. 3:49:14पूछने से खुद को रोक नहीं पाए। पर एक बात
  5180. 3:49:17मुझे समझ नहीं आई साहब कि आपने शौर्य को
  5181. 3:49:20पहचाना कैसे? इस पर चंद्रभान जी बोले बहुत
  5182. 3:49:25सिंपल है। शौर्य की आंखों में जो मुझे
  5183. 3:49:28अपने लिए प्यार और अपनापन नजर आया वो
  5184. 3:49:32विक्रम की आंखों में नहीं था। उल्टा मुझे
  5185. 3:49:36उसकी आंखों में डर नजर आ रहा था। बस इसी
  5186. 3:49:40से अपने पोते को पहचानने में आसानी हो गई।
  5187. 3:49:45कितना सही विश्लेषण किया था चंद्रभान जी
  5188. 3:49:47ने। तभी वह शौर्य को अपने पास बैठाते हुए
  5189. 3:49:50बोले आओ मेरे पास आकर बैठो तुम्हें जी भर
  5190. 3:49:55के देख तो लूं। शौर्य उनके पास बैठते हुए
  5191. 3:49:58बोला आपको क्या हुआ है दादा जी जो आप
  5192. 3:50:02हॉस्पिटल में भर्ती हो गए हैं? अरे कुछ
  5193. 3:50:05नहीं। थोड़ा सा बुखार हो गया था। साथ में
  5194. 3:50:08थोड़ी घबराहट हो रही थी। [संगीत] इसीलिए
  5195. 3:50:12डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने अपना बिल
  5196. 3:50:15बढ़ाने के लिए मुझे हॉस्पिटल में ही भर्ती
  5197. 3:50:18कर लिया। चंद्रभान जी धीमे स्वर में बोले।
  5198. 3:50:22इस पर कांता प्रसाद ने नाराजगी के भाव के
  5199. 3:50:24साथ कहा, बहुत बढ़िया। आपके ही हॉस्पिटल
  5200. 3:50:28में डॉक्टर आपको ही बिल के लिए भर्ती
  5201. 3:50:30करेगा।
  5202. 3:50:32शौर्य ने जब महसूस किया कि उसके दादा अपनी
  5203. 3:50:35बीमारी छुपाने का प्रयास कर रहे हैं तो वह
  5204. 3:50:37कांता प्रसाद से बोला आप बताइए अंकल दादा
  5205. 3:50:41जी को क्या हुआ है? अरे तुम किसकी बातों
  5206. 3:50:44में आ रहे हो? यह तो ऐसे ही क्या-क्या बोल
  5207. 3:50:48रहा है? इसकी बातों की तरफ ध्यान देने की
  5208. 3:50:51कोई जरूरत नहीं है। चंद्रभान जी बात को
  5209. 3:50:54टालने की कोशिश करते हुए बोले तो कांता
  5210. 3:50:57प्रसाद ने तुरंत कंसर्न दिखाते हुए कहा
  5211. 3:51:00इन्हें सीवियर हार्ट अटैक आया था। वो तो
  5212. 3:51:04शुक्र है कि मैं वहीं था और इन्हें समय पर
  5213. 3:51:06हॉस्पिटल ले आया। नहीं तो कुछ भी हो सकता
  5214. 3:51:09था। और आपको यह भी बता दूं शौर्य बाबा कि
  5215. 3:51:13इन्हें यह हार्ट अटैक अपने बच्चों के कारण
  5216. 3:51:15ही आया है। शौर्य को पता नहीं था कि उसके
  5217. 3:51:18दादा को हार्ट अटैक आया था। उसे तो लगा था
  5218. 3:51:21कि मामूली बीमारी होगी जिसके इलाज के लिए
  5219. 3:51:24वो हॉस्पिटल में भर्ती हुए हैं। उसने
  5220. 3:51:26कांता प्रसाद द्वारा कही बातों पर गौर
  5221. 3:51:28किया और फिर कुछ सोचते हुए बोला। आप कहना
  5222. 3:51:31क्या चाहते हैं अंकल? दादाजी को हार्ट
  5223. 3:51:33अटैक उनके बच्चों के कारण हुआ इसका क्या
  5224. 3:51:36मतलब है?
  5225. 3:51:38शौर्य बाबा मैं जो कह रहा हूं एकदम सही
  5226. 3:51:42है। दरअसल इनके [संगीत] दोनों बच्चों में
  5227. 3:51:45संपत्ति अपने नाम करने की होड़ लगी है। ना
  5228. 3:51:48वीरभद्र और ना ही स्वर्णलता कोई कसर छोड़
  5229. 3:51:51रहे हैं। दोनों इस कोशिश में लगे हैं कि
  5230. 3:51:54कौन सा बिजनेस [संगीत] कौन अपने नाम
  5231. 3:51:56करवाता है। हद तो तब हो गई जब पिछले
  5232. 3:51:59सप्ताह उन्हें पता चला कि [संगीत] साहब ने
  5233. 3:52:01सूर्यभान को फोन किया था कि वह आकर
  5234. 3:52:04संपत्ति में अपना हिस्सा ले ले। तो वह
  5235. 3:52:06दोनों राजा साहब पर ही आग बबूला हो गए कि
  5236. 3:52:09जब आपने उसे घर से निकाल दिया है तो उसे
  5237. 3:52:11संपत्ति में किस बात का हक मिलेगा। उस दिन
  5238. 3:52:14वीरभद्र और स्वर्णलता दौलत के लालच में
  5239. 3:52:17ऐसे अंधे हुए कि सारा लिहाज ही भूल गए। अब
  5240. 3:52:20तक जो बच्चे राजा साहब से ऊंची आवाज में
  5241. 3:52:23बात तक नहीं करते थे। उस दिन उन्होंने
  5242. 3:52:25बातों के ऐसे तीर चलाए कि राजा साहब के
  5243. 3:52:28सीने को चीर कर रख दिया। उन दोनों का यह
  5244. 3:52:31रूप देखकर ही राजा साहब को हार्ट अटैक आया
  5245. 3:52:34था।
  5246. 3:52:35कांता प्रसाद ने पूरा किस्सा बताया तो
  5247. 3:52:37शौर्य को विश्वास ही नहीं हुआ कि कोई दौलत
  5248. 3:52:40के लालच में इतना अंधा हो सकता है कि
  5249. 3:52:42रिश्ते का लिहाज तक भूल जाए। कांता प्रसाद
  5250. 3:52:46तुम क्या सुनाने लगे मेरे पोते को? एक तो
  5251. 3:52:49पहली बार यह मुझसे मिलने आया है और तुम
  5252. 3:52:52इसे यहां की प्रॉब्लम से परेशान करने लगे।
  5253. 3:52:56कहते हुए चंद्रभान जी ने कांता प्रसाद को
  5254. 3:52:58चुप रहने का इशारा किया। लेकिन एक वफादार
  5255. 3:53:01होने के नाते कांता प्रसाद ने स्पष्ट
  5256. 3:53:03शब्दों में कहा, नहीं राजा साहब इनको घर
  5257. 3:53:06के हालात जानना जरूरी है। यह भी इस
  5258. 3:53:09संपत्ति के हिस्सेदार हैं। मैं समझता हूं
  5259. 3:53:11कि वीरभद्र और स्वर्णलता जो यह ड्रामा कर
  5260. 3:53:14रहे हैं वो इसीलिए है कि सूर्यभान जी को
  5261. 3:53:17इस संपत्ति में से कुछ ना मिले। यह सुनकर
  5262. 3:53:20शौर्य ने कुछ सोचा और बोला दादा जी अब जब
  5263. 3:53:23हमें यह बातें पता चली हैं तो मुझे लगता
  5264. 3:53:26है कि यहां आने पर मुझे मारने की जो कोशिश
  5265. 3:53:29हुई है वो भी इन्हीं दोनों में से किसी ने
  5266. 3:53:32तो नहीं करवाई।
  5267. 3:53:34शौर्य ने अपना शक जाहिर किया तो चंद्रभान
  5268. 3:53:36[संगीत] जी चौंक कर बोले क्या कहा तुम्हें
  5269. 3:53:40मारने की कोशिश हुई यह कब हुआ
  5270. 3:53:44दादाजी मेरा प्लेन क्रैश कोई हादसा नहीं
  5271. 3:53:46एक सोची समझी साजिश [संगीत] थी इसके बाद
  5272. 3:53:49शौर्य ने सारी कहानी अपने दादाजी को बता
  5273. 3:53:51दी शौर्य की आपबीती सुनकर चंद्रभान जी का
  5274. 3:53:55चेहरा गुस्से में लाल हो गया और वह बोले
  5275. 3:53:58अगर तुम्हारे साथ हुई घटना में इन दोनों
  5276. 3:54:01में से किसी का भी हाथ साथ हुआ तो मैं उसे
  5277. 3:54:05छोडूंगा नहीं। ये दोनों इतना नीचे गिर
  5278. 3:54:08जाएंगे यह तो मैं सोच भी नहीं सकता।
  5279. 3:54:13आप ज्यादा परेशान मत होइए दादा जी। मैं
  5280. 3:54:15सही सलामत हूं। मैं खुद ही पता लगा लूंगा
  5281. 3:54:18कि मुझे मारने की कोशिश किसने [संगीत] की
  5282. 3:54:20थी। शौर्य ने दादा जी को शांत करने की
  5283. 3:54:23कोशिश की। लेकिन चंद्रभान जी अब यहां और
  5284. 3:54:26नहीं ठहरना चाहते थे। कांता प्रसाद मुझे
  5285. 3:54:30यहां से डिस्चार्ज कराओ। अब मैं ठीक हूं।
  5286. 3:54:33मुझे अपने पोते को अपने [संगीत] साथ घर ले
  5287. 3:54:36जाना है। नहीं साहब अभी डॉक्टर ने आपको
  5288. 3:54:40तीन-चार दिन और ऑब्जरर्वेशन में रहने को
  5289. 3:54:42कहा है। कांता प्रसाद ने स्थिति समझाई तो
  5290. 3:54:46शौर्य ने भी समझाते हुए कहा हां दादा जी
  5291. 3:54:49आप जल्दीबाजी ना करें। पहले आप पूरी तरह
  5292. 3:54:52ठीक हो जाइए फिर घर जाने का सोचिएगा।
  5293. 3:54:56तो ठीक है। फिर तुम कांता प्रसाद के साथ
  5294. 3:54:59चले जाना। यह तुम्हारे रहने की व्यवस्था
  5295. 3:55:02कर देगा। चंद्रभान जी कांता प्रसाद की तरफ
  5296. 3:55:05देखकर बोले। इस पर शौर्य ने दादा जी को
  5297. 3:55:08समझाते हुए कहा, "आप मेरे रहने की चिंता
  5298. 3:55:10[संगीत] मत करिए दादा जी। अभी मैं घर नहीं
  5299. 3:55:13जा सकता।" मैं तो यह चाहता था कि जब तक
  5300. 3:55:16मैं अपने दुश्मनों का पता यहां विशालगढ़
  5301. 3:55:18में हूं ना लगा लूं। तब तक किसी को यह पता
  5302. 3:55:21ना चले कि मैं जिंदा हूं।
  5303. 3:55:24ठीक है। अगर तुम घर नहीं जाना चाहते हो तो
  5304. 3:55:28ना सही। लेकिन तुम हमारे होटल में जाकर रह
  5305. 3:55:31सकते हो। चंद्रभान जी ने जिद की। फिर वो
  5306. 3:55:34कांता प्रसाद की तरफ मुड़कर बोले,
  5307. 3:55:37हां, यह ठीक रहेगा। कांता तुम शौर्य के
  5308. 3:55:42साथ जाकर होटल राजकमल में इसके रहने की
  5309. 3:55:44व्यवस्था करवा दो। नहीं, ऐसा करो। वहां के
  5310. 3:55:49मैनेजर को बोल देना आज से उस होटल का
  5311. 3:55:51मालिक शौर्य होगा। वैसे भी मैंने इसे आज
  5312. 3:55:55तक कुछ नहीं दिया है। तो यह छोटा सा गिफ्ट
  5313. 3:55:58तो बनता है। विक्रम ने यह सुना तो वो
  5314. 3:56:02हैरान रह गया। वो खुद होटल राजकमल में ही
  5315. 3:56:05ठहरा था। उसे नहीं पता था कि यह होटल
  5316. 3:56:08शौर्य के दादाजी का ही है और अभी
  5317. 3:56:10खड़े-खड़े दादाजी ने शौर्य को होटल का
  5318. 3:56:12मालिक बना दिया। उसी से विक्रम अंदाजा लगा
  5319. 3:56:15सकता था कि शौर्य के दादाजी के पास कितनी
  5320. 3:56:18संपत्ति होगी। शौर्य ने जब यह सुना तो वह
  5321. 3:56:21बोला अरे नहीं दादा जी इसकी कोई जरूरत
  5322. 3:56:24नहीं है। मुझे आपकी [संगीत] संपत्ति का
  5323. 3:56:26कोई लालच नहीं है। यह आप उन्हीं को दे
  5324. 3:56:29दीजिए जो इसके लिए मरे जा रहे हैं। कांता
  5325. 3:56:32प्रसाद शौर्य की बात सुनकर हैरान रह गए।
  5326. 3:56:34[संगीत]
  5327. 3:56:35वो राजा जी से बोले देखा साहब एक यह है
  5328. 3:56:40इन्हें आपकी संपत्ति का कोई लालच नहीं है
  5329. 3:56:43और एक वो हैं जो आपकी संपत्ति के लिए सारे
  5330. 3:56:46लिहाज भूल बैठे हैं। चंद्रभान जी ने सिर
  5331. 3:56:50हिलाया और फिर पुरजोर तरीके से शौर्य से
  5332. 3:56:52बोले बेटा तुम ऐसे मुझे मना नहीं कर सकते।
  5333. 3:56:57मैं तुम्हारा दादा हूं और वैसे भी यह होटल
  5334. 3:57:00तुम्हारे हाथ में रहेगा तो सही से रह
  5335. 3:57:03पाएगा। अगर यह वीरभद्र या स्वर्णलता के
  5336. 3:57:06हाथ चला गया तो वह नालायक उसे बर्बाद कर
  5337. 3:57:09देंगे। इसीलिए तो मैंने उन दोनों को आज तक
  5338. 3:57:13वहां कोई हस्तक्षेप करने नहीं दिया। तभी
  5339. 3:57:16कांता प्रसाद भी बोल पड़े।
  5340. 3:57:19अब आप इंकार मत करो। शौर्य बाबा साहब पहली
  5341. 3:57:22बार कोई चीज आपको दे रहे हैं तो इनका मान
  5342. 3:57:25रखो।
  5343. 3:57:26ठीक है दादा जी। जब आपकी यही जिद है तो
  5344. 3:57:29ठीक है।
  5345. 3:57:31कहते हुए शौर्य ने दादा जी का हाथ थाम
  5346. 3:57:33लिया। तभी कांता प्रसाद बोले तो ठीक है
  5347. 3:57:36राजा साहब आप आराम कीजिए। मैं शौर्य बाबा
  5348. 3:57:39को लेकर होटल जाता हूं। फिर वो शौर्य से
  5349. 3:57:43बोले चलें।
  5350. 3:57:45निकलने से पहले शौर्य ने दादा जी का हाथ
  5351. 3:57:47चूमा और बोला आप अपना ध्यान रखिए दादा जी।
  5352. 3:57:51[संगीत] मैं आपसे मिलने आता रहूंगा। इसके
  5353. 3:57:54बाद शौर्य और विक्रम कांता प्रसाद जी के
  5354. 3:57:56साथ बाहर निकल गए। तो क्या होगा आगे?
  5355. 3:58:00शौर्य की किस्मत उसे कहां ले जाएगी? क्या
  5356. 3:58:02वीरभद्र और स्वर्णलता पर उठा शौर्य का शक
  5357. 3:58:06सही साबित होगा? और आखिर होटल राजकमल में
  5358. 3:58:09क्या होने वाला है? जानने के लिए सुनते
  5359. 3:58:11रहिए बेगर हस्बैंड।
  5360. 3:58:16[संगीत]
  5361. 3:58:23[संगीत]

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