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My Beggar Husband | Epi 301 To 321 | Hindi Audio Story | Kismat, Pyaar Aur Ek Nayi Subah — Transcript

by Audio story world · 51,647 words · 6,444 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00हेलो YouTube फैमिली मैं सुमित आपका
  2. 0:01प्यारा सुमित आपके लिए ला रहा हूं भाई
  3. 0:03बैगर एपिसोड 3001 से लेकर 321 भाई यह
  4. 0:07कंटेंट मेरा खुद का ओरिजिनल है और यह
  5. 0:10मैंने टेक्स्ट स्पीच ऑडियो से बनाया है
  6. 0:13किसी भी कॉपीराइट किसी भी संबंधित नहीं है
  7. 0:16और ये स्टोरी यहां पॉकेट एफएम से रिलेटेड
  8. 0:19किसी भी ऐप से रिलेटेड है और एंटीपरेसी ऐप
  9. 0:23से भी रिलेटेड नहीं है और चैनल को लाइक
  10. 0:25सब्सक्राइब करना ना भूलें और भाई लोग अभी
  11. 0:27चैनल मोनेटाइज नहीं हुआ है इसलिए इनकम
  12. 0:30नहीं हो पा रही इसलिए कुछ दिनों तक लॉन्ग
  13. 0:34वीडियो डालूंगा एक हफ्ते टाइम लेकर और
  14. 0:40चैनल के साथ-साथ और चैनल को भी सपोर्ट
  15. 0:42दिखाएं भाई लोगों
  16. 0:44सुमित नाम से
  17. 0:46मुख्तार भाई अपनी प्लानिंग को लेकर पूरी
  18. 0:49तरह आश्वस्त थे। वहीं बलवंत राय को लग रहा
  19. 0:54था कि कुछ ठीक नहीं हो रहा है। वह मुख्तार
  20. 0:58भाई पर भरोसा तो कर रहे थे लेकिन यह भी
  21. 1:02अच्छी तरह जानते थे कि मुख्तार भाई का
  22. 1:04बैकग्राउंड अंडरवर से जुड़ा हुआ है। कहीं
  23. 1:08शिप्रा का तलाक कराने के चक्कर में वह
  24. 1:11शिप्रा का कोई नुकसान ना कर दें। और अगर
  25. 1:14राजदीप को यह पता चल गया कि शिप्रा का
  26. 1:17तलाक कराने के लिए वे किस तरह का षड्यंत्र
  27. 1:21रच रहे हैं तो कहीं वह उनसे नफरत ना करने
  28. 1:24लगे। यह बात दिमाग में आते ही बलवंत राय
  29. 1:28ने संशय भरे स्वर में कहा, "पता नहीं यह
  30. 1:33जो कुछ भी हो रहा है, मुझे ठीक नहीं लग
  31. 1:36रहा।" बृजभूषण [संगीत] ने तुरंत उनकी ओर
  32. 1:39देखते हुए कहा, "यह आप कैसी बात कर रहे
  33. 1:42हैं पिताजी? आप भी तो चाहते हैं कि शिप्रा
  34. 1:45का तलाक शौर्य से हो जाए तो फिर यह संकोच
  35. 1:48कैसा? वह मन ही मन खुश हो रहे थे। उन्हें
  36. 1:52तो कुछ करना ही नहीं था। जो कुछ करना था
  37. 1:55[संगीत] मुख्तार भाई और अशोक सोलंकी ही
  38. 1:58करने वाले थे। उन्हें तो बस अपनी [संगीत]
  39. 2:01सहमति देनी थी। बृजभूषण की बात सुनकर
  40. 2:05बलवंत राय घूर कर उसे देखने लगे। तभी अशोक
  41. 2:09सोलंकी धूर्ततापूर्ण मुस्कान [संगीत] के
  42. 2:11साथ बोले आप शिप्रा की चिंता मत कीजिए राय
  43. 2:15साहब। उसे कुछ नहीं होगा। हमें तो उस
  44. 2:18भिखारी को सबक सिखाना है जिसका घमंड बहुत
  45. 2:21बड़ा हो गया है। और जहां तक शिप्रा का
  46. 2:24सवाल है तलाक के बाद अगर आप दोबारा उसकी
  47. 2:28शादी करना चाहेंगे [संगीत] तो अच्छे
  48. 2:29लड़कों की कोई कमी नहीं होगी। अगर आप बुरा
  49. 2:33ना माने तो मैं भी आपके सामने शिप्रा से
  50. 2:36शादी का प्रपोजल रखना चाहूंगा। मैं जानता
  51. 2:39हूं कि मैं उससे 101 साल बड़ा हूं। लेकिन
  52. 2:42आप जानते ही हैं [संगीत] कि हमारा सामाजिक
  53. 2:45रुतबा विशालगढ़ में कैसा है। अगर शिप्रा
  54. 2:48की शादी मुझसे हो भी जाती है तो इससे आपके
  55. 2:51रुतबे को भी कोई नुकसान नहीं होगा। अशोक
  56. 2:55सोलंकी की बात सुनकर बलवंत राय का चेहरा
  57. 2:58कसला हो गया। उन्होंने नागवारी से [संगीत]
  58. 3:01उसकी तरफ देखा। उनके दिमाग में आया कि इस
  59. 3:05बेशर्म आदमी को यह [संगीत] कहते हुए शर्म
  60. 3:08भी नहीं आई। शिप्रा और इस आदमी का भला
  61. 3:11क्या मेल हो सकता है? मुख्तार भाई बलवंत
  62. 3:15राय के चेहरे के भावों से समझ गए कि अशोक
  63. 3:18सोलंकी की बात उन्हें जरा भी पसंद नहीं
  64. 3:21आई। इसलिए उन्होंने जल्दी से बात को आगे
  65. 3:24बढ़ाते हुए कहा। अभी फिलहाल इस बारे में
  66. 3:28बात करने का कोई [संगीत] फायदा नहीं है।
  67. 3:30पहली प्राथमिकता तो यह है कि शिप्रा और
  68. 3:33श्रवण का तलाक हो जाए। बाद की बातें बलवंत
  69. 3:36[संगीत] जी खुद डिसाइड कर लेंगे। मुख्तार
  70. 3:40भाई की इस बात से बलवंत राय को कुछ राहत
  71. 3:42मिली। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा
  72. 3:46क्योंकि मुझे श्रवण से शिप्रा का तलाक
  73. 3:48करवाना है। इसलिए मैं आपकी बात से [संगीत]
  74. 3:51सहमत हूं मुख्तार भाई। लेकिन आप इस बात का
  75. 3:55ध्यान रखिएगा कि इस सब में मेरी बच्ची का
  76. 3:58कुछ भी नुकसान नहीं होना चाहिए। मुख्तार
  77. 4:02भाई ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा,
  78. 4:04"इसकी आप जरा भी चिंता मत कीजिए। राय
  79. 4:07साहब। मैं इस बात का पूरा ध्यान रखूंगा।
  80. 4:11इधर दूसरी तरफ शौर्य कनिका से मिलने के
  81. 4:14लिए [संगीत] होटल पैराडाइज के लिए निकल
  82. 4:16गया। एक बार फिर शिप्रा शौर्य से कनिका को
  83. 4:20लेकर नाराज हो गई थी। शौर्य सिर्फ आह भर
  84. 4:24कर रह गया। जब उसे लगा कि अब [संगीत] सब
  85. 4:27कुछ ठीक हो गया है। तभी कुछ ना कुछ ऐसा हो
  86. 4:31जाता था [संगीत] कि बात फिर वहीं पहुंच
  87. 4:33जाती थी।
  88. 4:35लेकिन शौर्य को यह समझ नहीं आ रहा था कि
  89. 4:37जब सब कुछ फाइनल था तो फिर कनिका [संगीत]
  90. 4:40अभी तक इस उलझन में क्यों थी? वो अपना
  91. 4:43फैसला क्यों नहीं ले पा रही थी। जब वह
  92. 4:46पहली बार शौर्य से मिली थी तब उसका मिजाज
  93. 4:50ऐसा था कि जैसे ही उसे मौका मिलेगा
  94. 4:53[संगीत] वो तुरंत शौर्य को नापसंद कर
  95. 4:55देगी।
  96. 4:57लेकिन अब जब उसे फैसला लेना था तो वह
  97. 5:00फैसला नहीं कर पा रही थी। शौर्य ने एक बार
  98. 5:04फिर कनिका के बारे में सोचा। उसकी आंखों
  99. 5:07के सामने कनिका का खूबसूरत चेहरा घूम गया।
  100. 5:11उसका वो रॉयल अंदाज जो किसी को भी अपनी
  101. 5:14तरफ तुरंत आकर्षित कर सकता था। अगर शौर्य
  102. 5:18की जिंदगी [संगीत] में शिप्रा नहीं होती
  103. 5:20तो वह कनिका को अपनी तरफ आकर्षित करने का
  104. 5:23कोई भी मौका नहीं चूकता।
  105. 5:26लेकिन जब से शिप्रा उसकी जिंदगी में आई
  106. 5:28थी, उसने किसी दूसरी लड़की को अपने करीब
  107. 5:31आने देने की कल्पना तक नहीं की थी। अब
  108. 5:34उसकी सबसे बड़ी चिंता यही थी कि वो कनिका
  109. 5:37को खुद से कैसे दूर करें। वैसे एक प्लान
  110. 5:41उसके दिमाग में जन्म ले चुका था और उसे
  111. 5:44पूरा विश्वास था कि यह प्लान जरूर काम
  112. 5:47करेगा। शौर्य कनिका से पहले ही होटल
  113. 5:51पैराडाइज पहुंच गया।
  114. 5:53उसने कनिका को फोन करके पूछा, कहां हो
  115. 5:56तुम? मैं तो होटल पैराडाइज पहुंच गया हूं।
  116. 6:00कनिका ने जवाब [संगीत] दिया, क्या बात है?
  117. 6:04बड़ी जल्दी है मुझसे मिलने की। [संगीत]
  118. 6:06मैंने तो 10:00 बजे का टाइम दिया था। अभी
  119. 6:09तो 10:00 बजने में 20 मिनट बाकी है। शौर्य
  120. 6:13ने तुरंत बात बनाते हुए [संगीत] कहा, "मैं
  121. 6:16तो इसलिए जल्दी आ गया था कि मैंने सोचा
  122. 6:19तुम्हें इंतजार ना करना पड़े।
  123. 6:21[संगीत]
  124. 6:22कनिका की आवाज में सरकास्टिक अंदाज साफ
  125. 6:25झलक रहा था। उसने कहा बहुत खूब मुझे नहीं
  126. 6:30पता था कि तुम्हें मेरी इतनी फिक्र है।
  127. 6:33खैर कोई बात नहीं। जल्दी पहुंच गए हो।
  128. 6:37[संगीत] तो जो मन करे आर्डर देकर रखो। मैं
  129. 6:40रास्ते में ही हूं। पहुंच रही हूं। इसके
  130. 6:44बाद शौर्य ने फोन काट दिया। उसने घड़ी की
  131. 6:47तरफ देखा तो सच में [संगीत] अभी 10:00
  132. 6:49बजने में 20 मिनट बाकी थे। इतना समय था
  133. 6:53इसलिए उसने सोचा कि एक बार जाकर रूपा से
  134. 6:56मिल लिया [संगीत] जाए। अब तक रूपा जान
  135. 6:59चुकी थी कि शौर्य ही इस होटल का मालिक है।
  136. 7:03उसने रूपा को फोन लगाया। फोन उठते ही रूपा
  137. 7:06का मधुर स्वर उसके [संगीत] कानों में
  138. 7:08पड़ा। गुड मॉर्निंग सर। मुझे उम्मीद नहीं
  139. 7:12थी कि यूं सुबह-सुबह आपका कॉल आएगा। शौर्य
  140. 7:15ने रिक्वेस्ट करने वाले अंदाज में कहा,
  141. 7:18मिस रूपा, ऐसा है कि मैं अभी होटल
  142. 7:20पैराडाइज में हूं। अगर हो सके तो आप मेरे
  143. 7:24लिए अभी कोई एक केबिन रिजर्व कर दीजिए।
  144. 7:26दरअसल कुछ ही देर में मेरी एक फ्रेंड आ
  145. 7:29रही है। तो उससे पहले आप केबिन अरेंज कर
  146. 7:31दें तो अच्छा रहेगा। रूपा तुरंत अटेंशन की
  147. 7:35मुद्रा में आ गई और बोली, "यह आप कैसी बात
  148. 7:38कर रहे हैं सर?" [संगीत] आप तो हुक्म
  149. 7:40कीजिए। मैं अभी आपके पास आती हूं। वैसे
  150. 7:43अभी आप हैं कहां पर? शौर्य ने जवाब दिया,
  151. 7:47मैं अभी होटल के रेस्टोरेंट वाले एरिया
  152. 7:49में हूं। वैसे आपको आने की कोई जरूरत नहीं
  153. 7:51है। आप बस बता दीजिए कि कौन सा केबिन अभी
  154. 7:54खाली है। मैं [संगीत] खुद ही चला जाऊंगा
  155. 7:57क्योंकि मेरी दोस्त को पता नहीं है कि इस
  156. 8:00होटल से मेरा क्या वास्ता [संगीत] है और
  157. 8:02मैं चाहता भी नहीं हूं कि किसी को यह पता
  158. 8:05चले कि यह होटल मेरा है। शौर्य नहीं चाहता
  159. 8:09था कि रूपा उसे [संगीत] कनिका के सामने
  160. 8:11कोई खास अटेंशन दे। जिससे कनिका को उस पर
  161. 8:14शक करने का मौका मिल जाए। रूपा ने उसे
  162. 8:17आश्वस्त करते हुए कहा
  163. 8:19उसकी आप चिंता मत कीजिए सर। [संगीत] आप
  164. 8:22जैसा चाहेंगे वैसा ही होगा। लेकिन मैं अभी
  165. 8:25आपके पास आ रही हूं। इतना कहकर रूपा ने
  166. 8:28फोन काट दिया। शौर्य को कुछ कहने का मौका
  167. 8:32भी नहीं मिला। वो वहीं रेस्टोरेंट एरिया
  168. 8:35की एक टेबल पर बैठकर रूपा के आने का
  169. 8:38इंतजार करने लगा। ज्यादा समय नहीं बीता और
  170. 8:41जल्द ही उसे रूपा [संगीत] रेस्टोरेंट
  171. 8:44एरिया में आती नजर आ गई।
  172. 8:46रूपा को अपनी तरफ आते देखकर शौर्य खड़ा हो
  173. 8:49गया। उसने हाथ बढ़ाकर रूपा से हाथ मिलाया
  174. 8:52और रूपा ने भी शिष्टता से उससे हाथ मिला
  175. 8:55लिया। रूपा ने कहा, "आप मेरे साथ चलिए
  176. 8:59सर।" इतना कहकर रूपा एक तरफ बढ़ गई और
  177. 9:02शौर्य उसके पीछे हो लिया। [संगीत] जल्द ही
  178. 9:05रूपा एक केबिन के पास पहुंची। उसने केबिन
  179. 9:09का दरवाजा खोला तो अंदर दो वेटरर्स साफ
  180. 9:11सफाई करते दिखाई दिए। शौर्य यह देखकर समझ
  181. 9:15गया कि रूपा ने उसके बारे में जानने के
  182. 9:17बाद केबिन को खासतौर पर उसके [संगीत] लिए
  183. 9:20तैयार करवाया था। शौर्य और रूपा के अंदर
  184. 9:24आते ही दोनों वेटर वहां से चले गए। उनके
  185. 9:27जाते ही एक वेटर हाथ में ट्रे लिए अंदर
  186. 9:30दाखिल हुआ। ट्रे पर एक ड्रिंक का ग्लास
  187. 9:33रखा हुआ था। उसने वह ग्लास शौर्य की तरफ
  188. 9:36बढ़ाया। शौर्य ने जल्दी से ग्लास ट्रे से
  189. 9:39उठाया और रूपा से कहा इसकी कोई जरूरत नहीं
  190. 9:43थी मिस रूपा मैंने कहा ना कि मुझे यह
  191. 9:46अटेंशन नहीं चाहिए आप मेरे साथ एक नॉर्मल
  192. 9:50कस्टमर की तरह बिहेव कीजिए क्योंकि किसी
  193. 9:52भी समय मेरी वह दोस्त यहां आ जाएगी। अगर
  194. 9:56उसे जरा भी एहसास हो गया कि मेरा इस होटल
  195. 9:59से कोई नाता है तो यह बात मेरे लिए अच्छी
  196. 10:02नहीं होगी।
  197. 10:03रूपा ने शर्मिंदगीगी भरे अंदाज में कहा उस
  198. 10:07बात की आप चिंता मत कीजिएगा सर आपकी दोस्त
  199. 10:10के सामने ऐसा कुछ नहीं होगा लेकिन जब तक
  200. 10:13आप अकेले हैं तब तक तो आप मुझे अपने मन की
  201. 10:16करने से नहीं रोक सकते इससे पहले जब
  202. 10:19[संगीत] भी आप यहां इस होटल में आए उस समय
  203. 10:22मैं आपकी हकीकत से वाकिफ नहीं थी इस वजह
  204. 10:25से जिस तरह का वेलकम मुझे आपका करना चाहिए
  205. 10:28था वो मैं कभी कर ही नहीं पाई इसका मुझे
  206. 10:31बहुत अफसोस [संगीत]
  207. 10:33शौर्य मुस्कुराते हुए बोला, वो आपकी गलती
  208. 10:37नहीं थी क्योंकि मैं खुद उस समय ऐसा नहीं
  209. 10:39चाहता था और अभी भी मैं वैसा नहीं चाहता।
  210. 10:43[संगीत] आप जाकर अपना काम देख सकती हैं।
  211. 10:46मैं भी तब तक अपनी दोस्त का इंतजार यहीं
  212. 10:48बैठकर करता हूं। तभी एक वेटर ट्रे में कुछ
  213. 10:52स्नैक्स लेकर अंदर दाखिल हुआ। शौर्य की
  214. 10:55नजर जैसे ही वेटर के हाथ की ट्रे पर पड़ी
  215. 10:58वो मुस्कुराते हुए बोला लगता है आप मेरी
  216. 11:01दोस्त के आने से पहले ही मेरा पेट [संगीत]
  217. 11:03फुला देंगी जिसके बाद मैं उसके साथ कुछ खा
  218. 11:06ही नहीं पाऊंगा रूपा ने व्यवहार कुशल
  219. 11:09मुस्कान के साथ कहा आप मजाक कर रहे हैं सर
  220. 11:13यह इतना भी नहीं [संगीत] है कि इसके बाद
  221. 11:15आप कुछ खा ही ना पाएं इसी समय शौर्य का
  222. 11:18फोन रिंग करने लगा उसने स्क्रीन पर देखा
  223. 11:22तो कनिका का फोन था उसने तुरंत कॉल उठाया।
  224. 11:26कनिका ने पूछा, मैं होटल के अंदर ही हूं।
  225. 11:29कहां हो तुम? शौर्य ने जवाब दिया, "मैं
  226. 11:33केबिन नंबर तीन में हूं। यहीं आ जाओ।"
  227. 11:36कनिका अपने आसपास देखते हुए बोली, तुम्हें
  228. 11:39केबिन [संगीत] रिजर्व करने की क्या जरूरत
  229. 11:41थी? हम रेस्टोरेंट में बैठकर भी तो बात कर
  230. 11:44सकते थे। वैसे भी इस समय रेस्टोरेंट की
  231. 11:47ज्यादातर टेबल [संगीत] खाली ही नजर आ रही
  232. 11:49हैं। शौर्य ने गर्व भरे स्वर में कहा,
  233. 11:53"तुम भी कैसी बात [संगीत] कर रही हो? तुम
  234. 11:55जैसी लड़की सबके बीच आम लोगों की तरह बैठे
  235. 11:59यह मुझे क्या अच्छा लगेगा? अब ज्यादा सोचो
  236. 12:02मत और आ जाओ। मैंने तो तुम्हारे और अपने
  237. 12:05लिए नाश्ता भी ऑर्डर [संगीत] कर दिया है।
  238. 12:07रूपा जो उसके सामने खड़ी थी, आश्चर्य से
  239. 12:11शौर्य की बात सुन [संगीत] रही थी। उसे समझ
  240. 12:13नहीं आ रहा था कि यह क्या चक्कर है। एक
  241. 12:16तरफ शौर्य अपनी उस दोस्त [संगीत] को अपनी
  242. 12:18हकीकत भी नहीं बताना चाहता था और दूसरी
  243. 12:21तरफ यह भी दिखा रहा था कि वो उसे आम
  244. 12:24रेस्टोरेंट में कैसे बिठा सकता है। इसलिए
  245. 12:27[संगीत] उसने उसके लिए केबिन रिजर्व किया
  246. 12:29है। रूपा को शौर्य का कैरेक्टर कुछ अजीब
  247. 12:32लगा। उसे ध्यान [संगीत] आया कि शौर्य तो
  248. 12:35पहले से शादीशुदा भी है। उसकी पत्नी
  249. 12:38[संगीत] कितनी खूबसूरत है। उसके बाद भी वो
  250. 12:42यहां अकेले केबिन में [संगीत] एक लड़की से
  251. 12:43मिलने आया है। रूपा को लगने लगा कि जरूर
  252. 12:47उसका बॉस लड़कियों के मामले में कुछ
  253. 12:49ज्यादा ही आगे है। तभी तो घर पर इतनी
  254. 12:52[संगीत] खूबसूरत पत्नी होने के बावजूद
  255. 12:54यहां अकेले दूसरी लड़की के साथ डेट पर आया
  256. 12:57है। अचानक ही रूपा की नजरों में शौर्य का
  257. 13:00कैरेक्टर बदल गया। उसे लगा [संगीत] कि उसे
  258. 13:03संभल कर रहना चाहिए। कहीं ऐसा ना हो कि
  259. 13:06उसका यह अय्याश बॉस उस पर भी लाइन [संगीत]
  260. 13:08मारने लगे। इसलिए अब वो पहले से थोड़ी
  261. 13:12सतर्क हो गई। [संगीत] रूपा ने जल्दी से
  262. 13:14वहां से निकलने की कोशिश करते हुए कहा।
  263. 13:17लगता है आपकी वो दोस्त आ गई है बॉस। इसलिए
  264. 13:20मैं अब यहां से चलती हूं। वो केबिन से
  265. 13:23निकल पाती। उससे [संगीत] पहले ही शौर्य ने
  266. 13:25उसे रोकते हुए कहा। सुनो तुम ऐसा करना।
  267. 13:30अपनी पसंद से दो लोगों के लिए नाश्ता
  268. 13:32भिजवा देना और अगर हो सके तो एक बढ़िया
  269. 13:34शैंपेन की बोतल भी। रूपा ने तुरंत कहा,
  270. 13:38"यस सर, बस अभी भिजवाती हूं।" इतना कहकर
  271. 13:42[संगीत]
  272. 13:42रूपा जल्दी से केबिन से बाहर निकल गई। अब
  273. 13:46उसके चेहरे [संगीत] पर शौर्य के लिए पहले
  274. 13:47जैसी रिस्पेक्ट नहीं थी। उसकी नजरों में
  275. 13:50तो शौर्य का पूरा कैरेक्टर ही बदल चुका
  276. 13:52था। अब उसे शौर्य एक रईस अय्याश [संगीत]
  277. 13:56नजर आने लगा था।
  278. 13:58रूपा केबिन से निकलकर अपने ऑफिस की तरफ
  279. 14:00बढ़ गई। वो अभी रेस्टोरेंट से गुजर ही रही
  280. 14:03थी कि [संगीत] तभी उसे सामने से आती हुई
  281. 14:06कनिका नजर आई। कनिका का इस होटल में
  282. 14:09रेगुलर आना जाना था। इसलिए कनिका और रूपा
  283. 14:12[संगीत] एक दूसरे से परिचित थी। कनिका
  284. 14:15रूपा की एक वैल्यूुएबल कस्टमर थी। [संगीत]
  285. 14:17इसलिए रूपा को उसकी पसंद नापसंद के बारे
  286. 14:20में भी अच्छी तरह पता था।
  287. 14:22रूपा ने कनिका का स्वागत करते [संगीत] हुए
  288. 14:25व्यवहार कुशल मुस्कान के साथ कहा, मिस
  289. 14:28कनिका आपका स्वागत है। क्या मैं आपके
  290. 14:31[संगीत] लिए कोई केबिन तैयार करवाऊं?
  291. 14:33कनिका ने प्यारी सी मुस्कान के साथ जवाब
  292. 14:35दिया। अरे नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है।
  293. 14:39मैं जिसके साथ हूं उसने पहले [संगीत] ही
  294. 14:42केबिन रिजर्व कर रखा है। रूपा ने कहा
  295. 14:46अच्छा तो [संगीत] आप किसी के साथ हैं। फिर
  296. 14:49तो मैं आपको नहीं रोकूंगी। आप जाइए। अगर
  297. 14:52किसी चीज की जरूरत हो तो आप मुझे याद
  298. 14:54कीजिएगा। कनिका रूपा के पास से निकल गई।
  299. 14:58रूपा उसे जाते हुए देखती रही। वो यह देखने
  300. 15:02के लिए वहीं रुक गई [संगीत] कि आखिर आज
  301. 15:04मिस कनिका यहां किसके साथ आई हैं। कुछ ही
  302. 15:07पल बाद [संगीत] कनिका उसी केबिन में जाती
  303. 15:10दिखाई दी जिसमें शौर्य पहले से मौजूद था।
  304. 15:13कनिका को उसी केबिन में जाते देखकर रूपा
  305. 15:16का माथा ठनका। अब उसे समझ आया कि शौर्य
  306. 15:20[संगीत] जिस लड़की दोस्त की बात कर रहा था
  307. 15:22क्या वो मिस कनिका ही थी? रूपा को कनिका
  308. 15:26के लिए दया [संगीत] आई। उसे लगा कि वो
  309. 15:29उसके अय्याश बॉस के चंगुल में फंसने जा
  310. 15:31रही है। लेकिन वो कुछ नहीं कर सकती थी। वो
  311. 15:35सिर्फ कनिका के ऊपर दया कर सकती थी। अब
  312. 15:38सवाल यह था कि केबिन नंबर [संगीत] तीन में
  313. 15:41शौर्य और कनिका की मुलाकात किस मोड़ पर
  314. 15:44जाएगी? क्या कनिका शौर्य के जाल में
  315. 15:47[संगीत] फंसेगी या शौर्य का बनाया प्लान
  316. 15:49उल्टा उसी पर भारी पड़ेगा? वहीं दूसरी तरफ
  317. 15:54मुख्तार भाई का षड्यंत्र क्या सच में
  318. 15:57कामयाब होगा? और आखिर शौर्य ने कनिका को
  319. 16:01खुद से दूर करने के लिए क्या प्लान बनाया
  320. 16:04है?
  321. 16:05इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए जैसे
  322. 16:09ही कैबिन नंबर तीन में दाखिल हुई, उसने
  323. 16:12देखा कि शौर्य के सामने पहले से ही
  324. 16:14स्नैक्स की प्लेट रखी हुई थी। साथ ही एक
  325. 16:18गिलास में ड्रिंक भी मौजूद थी। कनिका ने
  326. 16:21अपनी भौंए चढ़ाते हुए शौर्य को घूरा और
  327. 16:24बोली, वाह, तुम तो बड़े फास्ट निकले। मेरा
  328. 16:29इंतजार भी नहीं किया और शुरू हो गए। शौर्य
  329. 16:32ने तुरंत सफाई देने की कोशिश करते हुए
  330. 16:34कहा, "अरे नहीं, जैसा तुम सोच रही हो,
  331. 16:38वैसा नहीं है। यह तो यहां की मैनेजर की
  332. 16:41तरफ से कॉम्प्लीमेंट्री है। जो आर्डर
  333. 16:43मैंने किया है, वह तो अभी आना है। कनिका
  334. 16:47ने शक भरी नजरों से उसके चेहरे को घूरते
  335. 16:50हुए कहा, फिर तो मानना पड़ेगा कि यहां की
  336. 16:54मैनेजर तुम पर कुछ खास ही मेहरबान है। मैं
  337. 16:57भी यहां अक्सर आती रहती हूं। लेकिन मुझ पर
  338. 17:00तो उसने आज तक ऐसी कोई मेहरबानी नहीं की।
  339. 17:03कनिका को शक होने लगा कि कहीं शौर्य ने
  340. 17:06पहले आकर यहां सब कुछ फिक्स करने की कोशिश
  341. 17:08तो नहीं की थी ताकि होटल पैराडाइज में
  342. 17:11उसका रुआबाब दिखे। क्या यह सब खुद को
  343. 17:14प्रभावशाली साबित करने का कोई तरीका था?
  344. 17:17यह ख्याल आते ही उसे शौर्य की इस बेवकूफी
  345. 17:20पर हंसी आ गई। शौर्य ने जब कनिका को अभी
  346. 17:23भी दरवाजे के पास खड़ा देखा तो हड़बड़ा कर
  347. 17:26बोला, तुम अभी तक खड़ी क्यों हो? आकर बैठो
  348. 17:29तो सही। कनिका आगे बढ़ी और शौर्य के सामने
  349. 17:33वाले सोफे पर बैठ गई। उसे याद आया कि
  350. 17:36शौर्य ने कहा था कि उसने पहले ही दोनों के
  351. 17:38लिए नाश्ते का आर्डर कर दिया है। कनिका तो
  352. 17:42यहां शौर्य से सिर्फ बात करने आई थी और वह
  353. 17:44बात बाहर रेस्टोरेंट में भी हो सकती थी।
  354. 17:48लेकिन शौर्य ने पहले आकर कैबिन रिजर्व कर
  355. 17:50लिया था। इस बात को लेकर कनिका को उसकी
  356. 17:53नियत पर शक होने लगा। कनिका को किसी सोच
  357. 17:56में गुम देखकर शौर्य ने उसका ध्यान अपनी
  358. 17:59तरफ खींचते हुए पूछा, कहां खो गई तुम?
  359. 18:03तुम्हें कुछ बात करनी थी ना मुझसे? बताओ
  360. 18:06क्या बात करनी है? शौर्य ऐसा दिखाने की
  361. 18:09कोशिश कर रहा था जैसे कनिका से मिलकर उसे
  362. 18:12बहुत खुशी हुई हो। कनिका का ध्यान उसकी
  363. 18:15बात से भंग हुआ। उसने शौर्य के चेहरे पर
  364. 18:18आई मुस्कान को देखा तो अगले ही पल उसके मन
  365. 18:21में फिर सवाल उठा कि कहीं वह शौर्य के
  366. 18:24बारे में कुछ ज्यादा ही गलत तो नहीं सोच
  367. 18:26रही? फिर उसने खुद से कहा कि अब वह पहले
  368. 18:30से कुछ भी अस्यूम नहीं करेगी। अगर शौर्य
  369. 18:33के दिल में कुछ काला होगा तो वह खुद ही
  370. 18:35सामने आ जाएगा। कनिका ने एक टक शौर्य के
  371. 18:39चेहरे को देखते हुए कहा।
  372. 18:41तुम तो समझ ही रहे हो कि यह समय मेरे लिए
  373. 18:43कितना मुश्किल है। यह मेरी जिंदगी का
  374. 18:46फैसला है। इसलिए कुछ भी डिसीजन लेने से
  375. 18:49पहले बहुत कुछ सोचना पड़ता है। मैं नहीं
  376. 18:52चाहती कि जल्दबाजी में आकर मैं कोई गलत
  377. 18:55फैसला ले लूं। शौर्य भी उसके चेहरे को
  378. 18:58पढ़ने की कोशिश करते हुए बोला। मैं समझता
  379. 19:01हूं लेकिन क्या अब तुमने अपना डिसीजन ले
  380. 19:04लिया है कि तुम्हें क्या करना है? कनिका
  381. 19:07ने शौर्य को गहरी नजरों से घूरते हुए
  382. 19:09पूछा। तुम बताओ कि मुझे क्या करना चाहिए?
  383. 19:14मुझे किसको पसंद करना चाहिए? शौर्य ने
  384. 19:17बेबाकी से जवाब [संगीत] दिया। यह क्या बात
  385. 19:20हुई? अगर मैं तुम्हें बताऊंगा कि तुम्हें
  386. 19:22क्या करना चाहिए? तो क्या मैं खुद को
  387. 19:25छोड़कर तुम्हें उस कुणाल को पसंद करने के
  388. 19:27लिए कहूंगा? शौर्य की यह बेबाकी [संगीत]
  389. 19:30कनिका को भी पसंद आई। उसने सोचा सही तो कह
  390. 19:34रहा है शौर्य। वह उससे भला [संगीत] क्यों
  391. 19:37कहेगा कि वह उसे छोड़कर कुणाल को पसंद
  392. 19:40करें? कुछ सोचने के बाद कनिका ने पूछा,
  393. 19:44"तुम्हारी बात अपनी [संगीत] जगह सही है,
  394. 19:46लेकिन मुझे यह बताओ कि मुझे तुमको ही
  395. 19:48क्यों पसंद करना चाहिए?" शौर्य [संगीत] ने
  396. 19:51एक पल सोचा और फिर बोला, क्योंकि मैं
  397. 19:55तुमको बहुत पसंद [संगीत] करता हूं। कनिका
  398. 19:58ने तुरंत सवाल किया अगर सिर्फ पसंद करने
  399. 20:01की बात है तो कुणाल भी मुझे बहुत [संगीत]
  400. 20:03पसंद करता है। कुछ और कारण बताओ। शौर्य ने
  401. 20:07अपने चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान लाते हुए
  402. 20:09कहा। मुझे लगता है कि मैं कुणाल से ज्यादा
  403. 20:13हैंडसम हूं। उसे लगता था कि उसकी यह
  404. 20:16मुस्कान लड़कियों को बहुत भाती थी।
  405. 20:18[संगीत]
  406. 20:19कनिका ने एक पल उसके चेहरे को गौर से देखा
  407. 20:22और उसकी बात से सहमति जताते हुए [संगीत]
  408. 20:24बोली तुम्हारी यह बात ठीक है लेकिन शादी
  409. 20:29करने के लिए यह एक रीजन काफी नहीं है।
  410. 20:32माना [संगीत] कि तुम कुणाल से थोड़े
  411. 20:34ज्यादा हैंडसम हो लेकिन कुणाल भी कुछ कम
  412. 20:37हैंडसम नहीं है। शौर्य ने बात कनिका के
  413. 20:40ऊपर डालते हुए पूछा तो फिर तुम ही बताओ कि
  414. 20:44तुम्हारी नजर में शादी करने के लिए और
  415. 20:47क्या-क्या क्वालिटी होनी चाहिए? कनिका
  416. 20:49उसके चेहरे के बदलते भावों को पढ़ने की
  417. 20:52कोशिश करते हुए बोली तुम मुझे कितना चाहते
  418. 20:55हो या तुम कितने हैंडसम हो इसके अलावा
  419. 21:00तुम्हारा सोशल स्टेटस क्या है तुम्हारा
  420. 21:03काम क्या है लोगों से तुम्हारा रिश्ता
  421. 21:06कैसा है यह सब भी तो देखा जाएगा शौर्य ने
  422. 21:10अपने हिसाब से कुणाल से अपनी तुलना करते
  423. 21:12हुए कहा देखो जहां तक सोशल स्टेटस की बात
  424. 21:16है तो अब मेरी भी पहचान चंद्रभान राठौर के
  425. 21:19पोते के तौर पर होगी तो स्टेटस तो अपने आप
  426. 21:23बढ़ जाएगा। जहां तक रही बात कि मैं क्या
  427. 21:26काम करता हूं [संगीत] तो यह तुमसे छुपा
  428. 21:28हुआ तो होगा नहीं। हां, आगे जाकर जब
  429. 21:32परिवार का सपोर्ट मिलेगा, तो धीरे-धीरे
  430. 21:34मेरे काम का स्तर भी बढ़ता चला जाएगा। इस
  431. 21:38मामले में मुझे नहीं लगता कि कुणाल मुझसे
  432. 21:40कोई बहुत ज्यादा आगे होगा। कनिका ने
  433. 21:42कटाक्ष भरे स्वर में कहा तुम्हें पता भी
  434. 21:45है कि कुणाल का सोशल स्टेटस बिना उसकी
  435. 21:48फैमिली के नाम के ही विशालगढ़ में कितना
  436. 21:50बड़ा है? जहां तक उसके काम की बात है तो
  437. 21:53वह और प्रतीक विशालगढ़ के [संगीत] टॉप
  438. 21:55बिजनेसमैन के रूप में जाने जाते हैं। फिर
  439. 21:58तुम्हारी तुलना इस मामले में उससे कैसे की
  440. 22:00जा सकती है? इसी समय वेटर ने आकर दोनों के
  441. 22:03सामने नाश्ते की प्लेटें सजा दी। कनिका ने
  442. 22:06अपने सामने रखी प्लेट में [संगीत] मौजूद
  443. 22:08सभी डिशेस को देखा तो वह आश्चर्यचकित रह
  444. 22:11गई। उसके सामने उसकी पसंद की सारी चीजें
  445. 22:14मौजूद थी। उसने तारीफ भरी नजरों से शौर्य
  446. 22:17को देखते हुए पूछा। तुम्हें मेरी पसंद
  447. 22:20कैसे पता चली? मैं देख रही हूं कि मेरे
  448. 22:23सामने जो भी आइटम [संगीत] है, सब मेरी
  449. 22:25पसंद का है। जबकि शौर्य खुद यह देखकर
  450. 22:28आश्चर्यचकित था। उसने तो रूपा से सिर्फ
  451. 22:31अपनी पसंद के हिसाब से दो लोगों के लिए
  452. 22:33नाश्ता भेजने को कहा था। कहीं ऐसा तो नहीं
  453. 22:36था कि रूपा ने कनिका को केबिन में आते देख
  454. 22:39लिया हो और उसे कनिका की पसंद पता हो
  455. 22:42इसलिए उसने उसकी पसंद के हिसाब से नाश्ता
  456. 22:45भेज दिया। जरूर यही [संगीत] बात होगी।
  457. 22:48शौर्य ने मन ही मन सोचा।
  458. 22:50लेकिन प्रत्यक्ष में उसने कनिका से कहा जो
  459. 22:53किसी [संगीत] को पसंद करता है वह उसकी
  460. 22:56छोटी बड़ी पसंद तो जान ही लेता है। इस बात
  461. 22:59के लिए कनिका की आंखों में भी शौर्य के
  462. 23:01लिए तारीफ के भाव दिखाई दिए। लेकिन अगले
  463. 23:04ही पल वह अपने मुद्दे पर लौट आई और बोली
  464. 23:07तुमने मेरी लास्ट वाली बात का जवाब नहीं
  465. 23:09दिया। शौर्य कुछ पल सोचता रहा। फिर बोलना
  466. 23:13शुरू किया। देखो मुझे नहीं पता कि कुणाल
  467. 23:17कितना [संगीत] सफल बिजनेसमैन है या यहां
  468. 23:19विशालगढ़ में उसका सोशल स्टेटस क्या है।
  469. 23:22मेरे बारे में अभी तुम जानती ही [संगीत]
  470. 23:24कितना हो जो तुम्हें मेरा सोशल स्टेटस पता
  471. 23:27चलेगा। तुम यहां विशालगढ़ तक अटकी हुई हो।
  472. 23:31क्या पता मैं एक दिन अपना स्टेटस इतना
  473. 23:34बड़ा कर लूं कि भारत ही नहीं भारत के बाहर
  474. 23:37भी मेरे नाम की चर्चा हो। [संगीत]
  475. 23:39शौर्य ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा,
  476. 23:42लेकिन इन सब से जिंदगी थोड़ी ही चलती है।
  477. 23:45मैंने तुम्हारे बारे में भी सुना है। तुम
  478. 23:48भी तो [संगीत] बिजनेस वर्ल्ड में अच्छा
  479. 23:49खासा नाम बनाई हुई हो। तो फिर कहां तुम
  480. 23:52अपने लेवल के आदमी को ही ढूंढ रही हो।
  481. 23:55तुम्हारे पास तो खुद समय नहीं होगा।
  482. 23:57तुम्हें तो एक ऐसा आदमी चाहिए जिसके पास
  483. 24:00तुम्हारे [संगीत] लिए ज्यादा समय हो। और
  484. 24:03उसके लिए मैं एकदम परफेक्ट हूं। अब तुम
  485. 24:06बताओ मैंने सही [संगीत] कहा कि नहीं?
  486. 24:08शौर्य अपनी भौहें ऊपर करते हुए बोला।
  487. 24:11कनिका उसकी बातों [संगीत] से प्रभावित नजर
  488. 24:13आने लगी। उसने तारीफ भरे स्वर में कहा,
  489. 24:18मानना पड़ेगा बातों के तुम धनी हो। शौर्य
  490. 24:22ने अपनी बात [संगीत] आगे बढ़ाते हुए कहा,
  491. 24:24अब मैं तुमसे एक बात और कहता हूं। जब मैं
  492. 24:28पहली [संगीत] बार तुमसे मिला था, उस समय
  493. 24:30मैं तुम्हें एकदम पसंद नहीं था। तुमने तो
  494. 24:33उसी समय मेरे मुंह पर ही अपनी नापसंद
  495. 24:36जाहिर कर दी थी। फिर मैं तुमसे [संगीत] कल
  496. 24:38मिला और अब तो तुम्हारे पास ऑप्शन भी था।
  497. 24:42शौर्य ने विश्वास से उसकी तरफ देखते हुए
  498. 24:44कहा, जो बात तुमने मुझसे [संगीत] पहली
  499. 24:47मीटिंग में कही थी, उसके बाद कल की
  500. 24:50मुलाकात तो हमारी एक फॉर्मेलिटी मात्र थी।
  501. 24:53मैं यह मानकर चल रहा था कि अब तो मेरा
  502. 24:56तुमसे शादी होने का कोई चांस ही [संगीत]
  503. 24:58नहीं है। और कल तुम्हारी बातों से भी यही
  504. 25:01लगा कि तुमने कुणाल को लगभग पसंद कर
  505. 25:03[संगीत] ही लिया है। वह थोड़ा मुस्कुराया
  506. 25:06और बोला मैं तो बस [संगीत] अब इस बात का
  507. 25:09इंतजार कर रहा था कि कब मुझे मेरे पिताजी
  508. 25:12से यह सुनने को मिलेगा कि तुमने मेरी जगह
  509. 25:15कुणाल को पसंद कर लिया। लेकिन आज तुम यहां
  510. 25:18होटल में मेरे साथ बैठी नाश्ता कर रही हो।
  511. 25:21इसका मतलब कुणाल तुम्हें पसंद नहीं आया और
  512. 25:25फाइनली तुमने मुझे ही पसंद किया है। अब
  513. 25:29यही बात तुम्हारी मुंह से भी सुन लूंगा तो
  514. 25:32मुझे चैन आएगा। कनिका की आंखों में अचानक
  515. 25:36एक चमक दिखाई दी। उसने शौर्य को देखते हुए
  516. 25:39कहा। क्या बात है? तुम तो सारी सच्चाई
  517. 25:43पहले ही जाने बैठे हो। मानना पड़ेगा
  518. 25:46तुम्हारे दिमाग को। कितनी सफाई से तुमने
  519. 25:49मेरे दिल की हर बात जान ली है। उसके चेहरे
  520. 25:53पर ऐसा भाव था जैसे उसके दिमाग में कोई नई
  521. 25:56चाल चलने [संगीत] लगी हो। शौर्य उत्साहित
  522. 26:00स्वर में बोला। बस एक बार तुम अपने मुंह
  523. 26:03से यह कुबूल कर लो तो फिर शक की कोई
  524. 26:06गुंजाइश नहीं रह जाएगी। कनिका ने ऐसे कहा
  525. 26:09[संगीत] जैसे उसने शौर्य की बात स्वीकार
  526. 26:11कर ली हो। जब सब कुछ तुमको समझ में आ ही
  527. 26:15गया है तो क्या मुझे अपने मुंह से बोलने
  528. 26:18की कोई जरूरत है? शौर्य की आंखों में चमक
  529. 26:21आ गई। उसने खुशी से कहा चलो फाइनली तुमने
  530. 26:27[संगीत] मुझे स्वीकार तो किया। कनिका
  531. 26:29शौर्य के चेहरे पर आई खुशी को देखती रही।
  532. 26:32फिर कुछ सोचकर उसने पूछा अच्छा मुझे एक
  533. 26:36[संगीत] चीज बताओ। आज तो तुम शिप्रा को
  534. 26:40प्रपोज करने जा रहे थे।
  535. 26:42लेकिन अचानक ही [संगीत] यह पता चलते ही कि
  536. 26:45मैंने तुमसे शादी करने का प्रस्ताव
  537. 26:47स्वीकार कर लिया है। क्या अब यह तुम्हारा
  538. 26:49शिप्रा के साथ चीटिंग नहीं मानी जाएगी?
  539. 26:53शौर्य ने राहत की सांस लेते हुए कहा। चलो
  540. 26:57शुक्र है कि मैंने अभी शिप्रा को प्रपोज
  541. 26:59नहीं किया। नहीं तो मुझे उसको जवाब देना
  542. 27:02मुश्किल हो जाता। कनिका ने गहरी नजरों से
  543. 27:06शौर्य को देखते हुए पूछा। तो क्या
  544. 27:08तुम्हारे दिल में शिप्रा के लिए कोई प्यार
  545. 27:11नहीं है? शौर्य ने बात को टालने की कोशिश
  546. 27:14करते हुए कहा, अब रहने दो ना। तुम भी किस
  547. 27:18बात को लेकर बैठ गई? तुम यह जानो कि मैं
  548. 27:22सिर्फ तुमसे प्यार करता हूं। इतना कहते
  549. 27:25हुए शौर्य ने अपना एक हाथ बढ़ाकर कनिका के
  550. 27:28हाथ पर रख दिया। कनिका की निगाह सीधे अपने
  551. 27:32उस हाथ पर चली गई जिस पर शौर्य ने अपना
  552. 27:35हाथ रखा था। उसने वहां से अपना हाथ हटाने
  553. 27:38की कोई कोशिश नहीं की। शायद वह भी देखना
  554. 27:41चाहती थी कि शौर्य किस लिमिट तक जाता है।
  555. 27:45उसके दिल में तो शौर्य की इसी बात से
  556. 27:47गुस्सा आ गया था। कहां तो आज ही वह शिप्रा
  557. 27:51को प्रपोज करने जा रहा था और उसके यह
  558. 27:53दिखाने पर कि वह उससे शादी करने को तैयार
  559. 27:56है। उसने अगले ही पल शिप्रा को दूध में
  560. 27:59पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंका। अब वह यह
  561. 28:02देखना चाहती थी कि शौर्य उसके साथ किस हद
  562. 28:06तक जाता है। अब यहां एक शह और मात का खेल
  563. 28:10शुरू हो चुका था। दोनों एक दूसरे को
  564. 28:12बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे थे। कनिका
  565. 28:16को ध्यान आया कि शौर्य ने उससे पूछा था
  566. 28:18[संगीत] कि आज वह अपने भाइयों के साथ तो
  567. 28:20नहीं आ रही है। इसलिए उसने शौर्य की तरफ
  568. 28:23देखते हुए प्यार [संगीत] भरे स्वर में
  569. 28:25पूछा। आज मुझे एक बात समझ नहीं आई। जब
  570. 28:29मैंने तुमसे मिलने की बात की तो तुमने ऐसा
  571. 28:32क्यों कहा कि अपने भाइयों के साथ तो नहीं
  572. 28:34आ रही। अगर वह आ ही जाते तो क्या बिगड़
  573. 28:37जाता। उन्हें भी पता चल जाता कि हमने अपने
  574. 28:40बारे में क्या फैसला किया है। कनिका असल
  575. 28:44में शौर्य के दिल में क्या चल रहा था यह
  576. 28:46जानने की कोशिश कर रही थी। शौर्य को भी
  577. 28:50ऐसा लग रहा था जैसे उसे कनिका को गुस्सा
  578. 28:53दिलाने [संगीत] का मौका खुद ब खुद मिलता
  579. 28:55जा रहा हो। उसने प्यार भरी नजरों से कनिका
  580. 28:58की आंखों में देखते हुए कहा, अब इतनी छोटी
  581. 29:02बात तुम्हारी समझ में ना आए ऐसा कैसे हो
  582. 29:04सकता है? भला हम दो प्रेमियों के बीच
  583. 29:08तुम्हारे भाइयों का क्या काम? करने को तो
  584. 29:11शौर्य यह पूरा ड्रामा कर रहा था। लेकिन जब
  585. 29:14[संगीत] एक बार उसने कनिका की आंखों में
  586. 29:16देखना शुरू किया तो उसे एहसास हुआ [संगीत]
  587. 29:19कि सच में कनिका कितनी खूबसूरत है। उसे
  588. 29:23कुणाल की किस्मत से जलन होने लगी जिसके
  589. 29:26नसीब में कनिका जाने [संगीत] वाली थी।
  590. 29:28कनिका ने शौर्य के मुंह से कुछ और
  591. 29:30निकलवाने की कोशिश [संगीत] करते हुए कहा।
  592. 29:33यह अच्छा नहीं होता कि मेरे भाइयों को भी
  593. 29:36मेरे रिश्ते के बारे में पता चल जाता।
  594. 29:39शौर्य को भी ऐसा [संगीत] लग रहा था जैसे
  595. 29:41उसे कनिका को गुस्सा दिलाने का मौका खुद ब
  596. 29:44खुद मिलता जा रहा हो। उसने सहजता से कहा,
  597. 29:48तुम कैसी बात कर रही हो? यह बात छुपने
  598. 29:51वाली तो है नहीं। उन्हें पता तो चलना ही
  599. 29:54है। तुम्हें नहीं लगता कि उनके यहां होने
  600. 29:57से हम अपने कुछ रोमांटिक पल खो देते। इतना
  601. 30:01कहते हुए शौर्य ने कनिका का हाथ पकड़ा और
  602. 30:04अपने चेहरे के पास लाकर उसके हाथ पर किस
  603. 30:07कर लिया। कनिका ने शर्माने का अभिनय करते
  604. 30:10हुए अपना हाथ पीछे खींच लिया और बोली
  605. 30:14तुम्हें नहीं लग रहा कि तुम कुछ ज्यादा ही
  606. 30:17जल्दबाजी कर रहे हो। शौर्य ने बेझिझक
  607. 30:20अंदाज में कहा इसमें जल्दबाजी कैसी? यह तो
  608. 30:24नेचुरल चीज है। देखो यह समय हमारी जिंदगी
  609. 30:28में दोबारा नहीं आने वाला। इसलिए हमें हर
  610. 30:31एक पल को एंजॉय करना चाहिए। और वैसे भी
  611. 30:34[संगीत] आज नहीं तो कल हम पतिप बनने ही
  612. 30:37वाले हैं। तो क्यों इन रोमांटिक पलों को
  613. 30:39खराब करना? कनिका ने उसे समझाने की कोशिश
  614. 30:43करते हुए कहा, फिर भी मुझे यह ठीक नहीं लग
  615. 30:47रहा। जब इतने दिनों तक कुछ नहीं [संगीत]
  616. 30:49किया तो फिर शादी तक रुक जाने में क्या
  617. 30:52जाता है? शौर्य ने उसे समझाने के अंदाज
  618. 30:56में कहा, "क्या कनिका, तुम इतनी मॉडर्न
  619. 30:59होकर भी क्या पुरानी दयानूसी बात को लेकर
  620. 31:02बैठी हुई हो?
  621. 31:03आज के समय में कौन इन सब बातों पर ध्यान
  622. 31:06देता है? जब हम पतिप बनने वाले हैं तो कुछ
  623. 31:10खास पनों को एंजॉय करने में [संगीत] क्या
  624. 31:12जाता है? शौर्य ने अपनी बात जारी रखते हुए
  625. 31:15कहा, "यह वो पल हैं जो जितने [संगीत]
  626. 31:18ज्यादा हो सके उतने हमें अपनी जिंदगी से
  627. 31:21चुरा लेने चाहिए। अगर जीवन [संगीत] के इन
  628. 31:24पलों का आनंद नहीं लिया तो क्या लिया?
  629. 31:27मेरी बात मानो। अभी जो [संगीत] तुम्हारे
  630. 31:30दिमाग में सही गलत की बात चल रही है ना जब
  631. 31:33एक बार इन पलों का आनंद लोगी तो खुद
  632. 31:36बार-बार चाहोगी कि कैसे उड़कर मेरे
  633. 31:38[संगीत] पास पहुंच जाओ। इतना कहकर शौर्य
  634. 31:42अपनी जगह से उठा और कनिका के पास आ गया।
  635. 31:45उसने उसका एक हाथ पकड़ा और उसे खड़ा करते
  636. 31:48हुए बोला, "अगर तुम कहो तो मैं इस होटल
  637. 31:51में एक कमरा भी बुक करवा लेता हूं।" "हें
  638. 31:54थोड़ी देर एक साथ समय बिताना चाहिए।"
  639. 31:57कनिका ने नादान बनने का अभिनय करते हुए
  640. 32:00पूछा वह तो ठीक है पर कमरा किस लिए बुक
  641. 32:04कराना है अब कनिका शौर्य के सामने खड़ी थी
  642. 32:09शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा क्या कनिका
  643. 32:13तुम कितनी नादान हो ऐसा करते हैं पहले
  644. 32:16कमरे में चलते हैं फिर तुम्हें यह भी पता
  645. 32:19चल जाएगा कि हमने कमरा क्यों बुक कराया है
  646. 32:22इतना कहते हुए शौर्य ने कनिका का हाथ पकड़
  647. 32:25लिया फिर वह धीरे-धीरे [संगीत] उसके करीब
  648. 32:28गया। शौर्य की नाकों में कनिका के शरीर की
  649. 32:32खुशबू दूर से ही महसूस [संगीत] होने लगी।
  650. 32:35एक पल के लिए उसका दिल लरच गया। उसने
  651. 32:38हिम्मत करके अपना हाथ कनिका की कमर की तरफ
  652. 32:41बढ़ाया। तड़ाक। अगले ही पल एक जोरदार
  653. 32:45थप्पड़ शौर्य के गाल पर पड़ा। शौर्य
  654. 32:48स्तब्ध रह गया। कनिका की आंखों में अब तक
  655. 32:52की सारी नरमी गायब थी। आखिर इस थप्पड़ के
  656. 32:55पीछे कनिका का असली इरादा क्या था? क्या
  657. 32:59शौर्य और कनिका के रिश्ते का अंत यहीं
  658. 33:01लिखा था या किस्मत का कोई और चक्र अभी
  659. 33:04चलना बाकी था? जानने के लिए शौर्य के
  660. 33:08चेहरे पर हैरानी के भाव आ गए। उसका हाथ
  661. 33:11अपने आप ही गाल पर चला गया। उसने ऐसा
  662. 33:15जताया जैसे उसे समझ ही नहीं आया कि कनिका
  663. 33:18ने उसे थप्पड़ क्यों मारा है। शौर्य कुछ
  664. 33:22कहता उससे पहले ही कनिका ने उसे पीछे की
  665. 33:25तरफ धक्का देते हुए गुस्से में कहा।
  666. 33:28दिखा दी ना अपनी औकात। उंगली हाथ में दिया
  667. 33:32नहीं कि पूरा हाथ ही थाम लिया। [संगीत]
  668. 33:34शौर्य ने मासूमियत ओढ़ते हुए उसकी तरफ
  669. 33:37देखा और सफाई देते हुए कहा। पर मैंने ऐसा
  670. 33:42क्या किया जो तुम इतनी गुस्सा हो रही हो?
  671. 33:45देखो तुम्हें कुछ गलतफहमी हुई है। मेरा
  672. 33:48ऐसा कोई इरादा नहीं था। मैं तुम्हें हर्ट
  673. 33:51नहीं करना चाहता। अगर तुम्हें यह पसंद
  674. 33:54नहीं है तो कोई बात नहीं। [संगीत]
  675. 33:56हम शादी के बाद ही इसके बारे में सोचेंगे।
  676. 34:00शादी?
  677. 34:01कनिका के चेहरे पर गुस्सा और भड़क उठा। वो
  678. 34:05उसे [संगीत] घूरते हुए बोली और तुमसे भूल
  679. 34:10जाओ मैं पहले सही थी जब मैंने कहा था कि
  680. 34:13मैं तुमसे कभी शादी नहीं कर सकती। पता
  681. 34:17नहीं करण को तुम में क्या दिख गया जो वो
  682. 34:19तुम्हें पसंद करने लगा और मुझे तुम्हारे
  683. 34:22बारे में सोचने [संगीत] के लिए कन्विंस
  684. 34:23करने लगा। कनिका के मुंह से जैसे अंगारे
  685. 34:26बरस रहे थे। वो शौर्य को [संगीत] इस तरह
  686. 34:29देख रही थी जैसे अपनी आंखों से ही उसे जला
  687. 34:32देगी। शौर्य ने अपनी सफाई देने की [संगीत]
  688. 34:35कोशिश करते हुए कहा, देखो कनिका तुम्हें
  689. 34:39मेरे बारे में बहुत बड़ी गलतफहमी हो गई
  690. 34:41है। तुम समझने की कोशिश करो। मेरा तुम्हें
  691. 34:45हर्ट करने का कोई इरादा नहीं था। मुझे लगा
  692. 34:49शायद यह तुम्हें पसंद आएगा क्योंकि आजकल
  693. 34:51मॉडर्न [संगीत] एरा में लोग इस तरह की
  694. 34:54चीजें करते रहते हैं। मैं अपनी गलती मानता
  695. 34:57हूं। कसम खाकर कह रहा हूं। आगे से ऐसी कोई
  696. 35:01कोशिश नहीं करूंगा। बस तुम मुझे समझने की
  697. 35:05कोशिश करो। शौर्य कनिका के सामने
  698. 35:08गिड़गिड़ा रहा था। लेकिन कनिका का गुस्सा
  699. 35:11कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। उसने
  700. 35:15तंज भरे स्वर में कहा, "तुम जैसे छोटे
  701. 35:18लोगों की सोच कभी बड़ी नहीं हो सकती।
  702. 35:20[संगीत]
  703. 35:21तुम्हारा नसीब अच्छा था कि राजा साहब ने
  704. 35:24तुम्हें अपना लिया। नहीं तो तुम दर-दर की
  705. 35:27ठोकरें खाते रहते। [संगीत]
  706. 35:29कनिका के शब्द शौर्य के दिल पर चोट कर रहे
  707. 35:32थे।
  708. 35:33लेकिन वह फिर भी उसे मनाने में लगा रहा।
  709. 35:36अपने चेहरे पर दुनिया भर की मासूमियत लाते
  710. 35:38हुए शौर्य ने कहा, अब मैं तुम्हें कैसे
  711. 35:42समझाऊं? मैं कसम खाकर कहता हूं आगे से तुम
  712. 35:46जैसा कहोगी, मैं वैसा ही करूंगा। बस तुम
  713. 35:50शादी के लिए मना मत करना। नहीं तो मैं
  714. 35:52अपने पिताजी से आंख नहीं मिला [संगीत]
  715. 35:54पाऊंगा। अगर उस समय कोई शौर्य को देखता तो
  716. 35:58उसे यही लगता कि उससे ज्यादा [संगीत]
  717. 36:00सच्चा और मासूम इंसान कोई हो ही नहीं सकता
  718. 36:03था। लेकिन कनिका की आंखों से उसकी
  719. 36:06मासूमियत का पर्दा [संगीत] पूरी तरह हट
  720. 36:08चुका था। वो गुस्से में बोली, "मैं
  721. 36:12पेरेंट्स को अपना फाइनल डिसीजन सुनाने से
  722. 36:14पहले [संगीत] एक बार तुम दोनों से अकेले
  723. 36:16मिलना चाहती थी ताकि आगे भविष्य को लेकर
  724. 36:20हमारी क्या संभावनाएं हो सकती [संगीत]
  725. 36:21हैं। उसके बारे में बात कर सकूं और यह देख
  726. 36:24सकूं कि किसकी सोच मुझे अपनी सोच से मिलती
  727. 36:28जुलती लगती है। मैंने तो कभी सपने में भी
  728. 36:31नहीं सोचा था कि [संगीत] तुम्हारी सोच
  729. 36:33इतनी गंदी हो सकती है। कनिका की बात सुनकर
  730. 36:36[संगीत]
  731. 36:37शौर्य का सिर झुक गया। उसके हाव-भाव से
  732. 36:40साफ नजर आ रहा था कि उसके पास कहने के लिए
  733. 36:43अब कुछ भी नहीं बचा [संगीत] था। कनिका के
  734. 36:46लिए वहां एक पल भी और खड़ा रहना मुश्किल
  735. 36:49हो [संगीत] रहा था। उसने अपना पर्स उठाया
  736. 36:52और गुस्से से शौर्य की तरफ देखते हुए कहा।
  737. 36:55[संगीत]
  738. 36:56आगे से दोबारा कभी मेरे सामने आने की
  739. 36:58कोशिश भी मत करना। [संगीत]
  740. 37:01इतना कहकर वो कैबिन से बाहर निकल गई।
  741. 37:04शौर्य उदास आंखों से उसे जाते हुए देखता
  742. 37:07रहा। लेकिन कनिका के कैबिन से बाहर निकलते
  743. 37:10ही शौर्य के चेहरे का रंग बदल गया। उसके
  744. 37:14चेहरे पर अचानक संतुष्टि की मुस्कान आ गई।
  745. 37:18वो आराम से अपने सोफे पर बैठा और सामने
  746. 37:20रखी नाश्ते की प्लेट पर टूट पड़ा। दूसरी
  747. 37:24तरफ रूपा का ध्यान लगातार शौर्य के कैबिन
  748. 37:27की तरफ था। जब से [संगीत] उसने कनिका को
  749. 37:30उसके कैबिन में जाते देखा था तभी से उसे
  750. 37:33कनिका को लेकर चिंता होने लगी थी [संगीत]
  751. 37:35और अब इतनी देर बाद जब उसने कनिका को
  752. 37:39गुस्से में कैबिन से बाहर आते देखा तो वह
  753. 37:42तुरंत उसके सामने पहुंची [संगीत] और चिंता
  754. 37:44से पूछा अरे मिस कनिका आप जा रही हैं आप
  755. 37:49गुस्से में लग रही हैं सब ठीक तो है कनिका
  756. 37:53एक पल के लिए रूपा के पास रुकी उसने उसे
  757. 37:57सर्द निगाहों से देखा और फिर बिना कुछ कहे
  758. 38:00उसके सामने से निकल गई। लगभग 1 घंटे बाद
  759. 38:04कनिका अपने घर [संगीत] में थी। उसने अपने
  760. 38:07दादाजी से दो दिन बाद अपना फैसला सुनाने
  761. 38:11का समय लिया था। लेकिन अब उसे उन दो
  762. 38:14[संगीत] दिनों की कोई जरूरत महसूस नहीं हो
  763. 38:17रही थी।
  764. 38:18इस वक्त [संगीत] वह इतने गुस्से में थी कि
  765. 38:21उसने कुणाल से मिलने के बारे में भी नहीं
  766. 38:23सोचा और उसी वक्त फैसला कर लिया कि अब वह
  767. 38:26कुणाल [संगीत] से ही शादी करेगी। वो तेजी
  768. 38:29से अपने दादाजी के कमरे में पहुंची। उसके
  769. 38:32पिताजी वीरभद्र [संगीत] जी भी इस वक्त
  770. 38:34उनके साथ ही बैठे हुए थे। शायद वे किसी
  771. 38:38गंभीर विषय पर चर्चा कर रहे थे। कनिका को
  772. 38:41कमरे में आते देखकर विक्रमजीत जी ने उसकी
  773. 38:44तरफ देखा और पूछा क्या बात है तुम्हें कुछ
  774. 38:48कहना है? कनिका ने एक बार दोनों के चेहरों
  775. 38:52की तरफ देखा और फिर अपना गला साफ करते हुए
  776. 38:55बोली
  777. 38:57दादा जी मैंने फैसला कर लिया है [संगीत]
  778. 39:00कि मुझे किससे शादी करनी है। कनिका की बात
  779. 39:04सुनकर विक्रमजीत जी अपनी जगह पर तन कर बैठ
  780. 39:06गए। उनके चेहरे पर प्रसन्नता नजर आने लगी।
  781. 39:10उन्होंने वीरभद्र की तरफ एक नजर देखा और
  782. 39:13फिर कनिका से पूछा अच्छा तो फिर बताओ
  783. 39:17तुमने आखिर किसको पसंद किया? कनिका ने
  784. 39:20बिना किसी झिझक के [संगीत] जवाब दिया। मैं
  785. 39:23कुणाल से शादी करने को तैयार हूं। कनिका
  786. 39:26की बात सुनकर विक्रमजीत जी के चेहरे के
  787. 39:29भाव एक पल के लिए [संगीत] बदले। लेकिन
  788. 39:31अगले ही पल उन्होंने खुद को संभालते हुए
  789. 39:34वे पूछा। तुमने अच्छी तरह सोच लिया है कि
  790. 39:38तुम्हें कुणाल से ही शादी करनी है।
  791. 39:41वीरभद्र जी भी नहीं चाहते थे कि कनिका
  792. 39:43कुणाल से शादी करें। उन्हें शौर्य बहुत
  793. 39:46पसंद आया था। दो-तीन बार जब भी उनकी शौर्य
  794. 39:50से मुलाकात हुई थी, शौर्य ने उन पर अपना
  795. 39:52अच्छा प्रभाव छोड़ा था। उन्होंने कनिका को
  796. 39:56समझाते हुए कहा, देखो बेटी, तुम्हें जल्दी
  797. 40:00करने की कोई जरूरत नहीं है। हमने तुम्हें
  798. 40:032 दिन का समय दिया है। तुम अच्छी तरह इस
  799. 40:06बारे में सोच लो। लेकिन कनिका अपने फैसले
  800. 40:09पर अडिग थी। उसने भावहीन चेहरे के साथ
  801. 40:12कहा। मैंने आपको [संगीत] अच्छी तरह सोच कर
  802. 40:15ही जवाब दिया है पिताजी। मुझे कुणाल से ही
  803. 40:18शादी करनी है। इसलिए आप उसकी फैमिली को अब
  804. 40:21जवाब दे सकते हैं। विक्रमजीत [संगीत] जी
  805. 40:24ने उसकी बात सुनी और फिर बिना देर किए
  806. 40:27अपना फैसला सुना दिया। उन्होंने दृढ़ स्वर
  807. 40:30में कहा।
  808. 40:31ठीक है। जब तुमने [संगीत] यह फैसला कर ही
  809. 40:34लिया है तो मैं अभी चंद्रभान को इसकी
  810. 40:36सूचना दे देता हूं। और तुम्हें भी यह बता
  811. 40:39दे रहा हूं [संगीत] कि आज से 5 दिन बाद
  812. 40:41तुम्हारे बर्थडे के दिन ही तुम्हारी
  813. 40:43इंगेजमेंट कुणाल से कर दी जाएगी। इसी
  814. 40:47महीने का कोई अच्छा सा मुहूर्त देखकर हमने
  815. 40:50तुम्हारी शादी भी करने का फैसला किया है।
  816. 40:53कनिका को बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उसके
  817. 40:56दादाजी इतनी जल्दी उसकी शादी करने का
  818. 40:58फैसला कर देंगे। उसने परेशानी भरे स्वर
  819. 41:01में कहा, इंगेजमेंट तक तो बात ठीक है दादा
  820. 41:04जी लेकिन इतनी जल्दी शादी करने की क्या
  821. 41:07जरूरत है? शादी तो हम कुछ समय बाद भी कर
  822. 41:10सकते हैं। विक्रमजीत जी अपनी बात पर अड़े
  823. 41:14रहे। उन्होंने सख्ती से कहा, नहीं उसकी
  824. 41:18कोई जरूरत नहीं है। [संगीत] तुम यह बात
  825. 41:20गांठ बांध लो कि इसी महीने में तुम्हारी
  826. 41:23शादी होनी है। एक बार तुम्हारी शादी हो
  827. 41:26जाएगी तो फिर जल्दी ही नंदिनी की भी शादी
  828. 41:28कर दी जाएगी। उन्हें अभी भी डर था कि शादी
  829. 41:32में ज्यादा समय लगने पर कहीं फिर से कुछ
  830. 41:35बुरा ना हो जाए या [संगीत] कोई अड़चन ना आ
  831. 41:37जाए जिसके कारण शादी टूट जाए। कनिका के
  832. 41:41सामने अब कोई चारा नहीं था। वह अपना मुंह
  833. 41:44लटकाए कमरे से बाहर निकल गई। कनिका के
  834. 41:47कमरे से जाते ही विक्रमजीत जी ने अपना
  835. 41:49मोबाइल निकाला और चंद्रभान जी को फोन लगा
  836. 41:52दिया। उन्होंने उन्हें अपना फैसला सुनाते
  837. 41:55हुए बताया कि कनिका [संगीत] कुणाल से शादी
  838. 41:58करेगी। साथ ही उन्होंने 10 तारीख को कनिका
  839. 42:01के बर्थडे के लिए राठौर फैमिली को इनवाइट
  840. 42:04भी किया और चंद्रभान जी से जानना चाहा कि
  841. 42:08अगर वह तैयार [संगीत] हो तो कनिका के
  842. 42:10बर्थडे के दिन ही कुणाल के साथ उसकी
  843. 42:12इंगेजमेंट भी कर दी जाए। भला चंद्रभान जी
  844. 42:16को इससे क्या आपत्ति होती? सबसे पहले तो
  845. 42:19उन्हें यह जानकर ही खुशी हुई कि [संगीत]
  846. 42:21कनिका कुणाल से शादी करना चाहती है। उनके
  847. 42:24सिर से सारा बोझ एक पल में ही हट गया। अब
  848. 42:28उन्हें अपना सिर बहुत हल्का-हल्का सा लग
  849. 42:30रहा था। नहीं तो अभी [संगीत] तक वो इसी
  850. 42:32चिंता में डूबे हुए थे, कि अगर कनिका ने
  851. 42:35कहीं शौर्य को पसंद कर लिया, तो फिर वह इस
  852. 42:38स्थिति को कैसे संभालेंगे? कैसे वह अपने
  853. 42:41दोस्त को बताएंगे कि शौर्य की शादी पहले
  854. 42:44ही हो चुकी है। लेकिन अब सब ठीक था।
  855. 42:47[संगीत] उनकी आवाज में भी खुशी की खनक आ
  856. 42:50गई थी। इसलिए उन्होंने विक्रमजीत जी की
  857. 42:53सारी बातें मान ली। दूसरी तरफ शौर्य अभी
  858. 42:57भी होटल पैराडाइज के अपने कैबिन में ही
  859. 43:00बैठा हुआ था। अभी जो कुछ भी हुआ था उसके
  860. 43:04बाद शौर्य अब पूरी तरह निश्चिंत था
  861. 43:07[संगीत] कि कनिका किसी भी सूरत में उससे
  862. 43:10शादी करने के लिए तैयार नहीं होगी। उसने
  863. 43:13सोचा कि इसकी जानकारी शिप्रा को दे दे।
  864. 43:16[संगीत] लेकिन तभी उसे ध्यान आया कि वह भी
  865. 43:18अभी उससे नाराज है। जब वह उससे मिलेगा तभी
  866. 43:22उसे आज जो कुछ भी हुआ उसके बारे में
  867. 43:25बताएगा।
  868. 43:26अब जब शौर्य को लग गया था कि कनिका के साथ
  869. 43:29उसका जो भी मसला था वह निपट गया है तो वह
  870. 43:33फ्री होकर अपने काम पर ध्यान दे सकता था।
  871. 43:36इस वक्त उसकी सबसे पहली प्रायोरिटी अपनी
  872. 43:39फिल्म की शूटिंग शुरू करना थी क्योंकि
  873. 43:42रत्नाकर शेट्टी ने ऑलरेडी सब कुछ बुक कर
  874. 43:44रखा था। [संगीत] इसलिए उसने अपना फोन
  875. 43:47निकाला और रत्नाकर शेट्टी को यहीं होटल
  876. 43:49में बुला लिया। लगभग आधे घंटे बाद रत्नाकर
  877. 43:53शेट्टी शौर्य के सामने मौजूद था। [संगीत]
  878. 43:56रत्नाकर शेट्टी ने शौर्य की मूवी के लिए
  879. 43:59जो म्यूजिक तैयार हुआ था वो उसे सुनाया।
  880. 44:02शौर्य म्यूजिक सुनकर संतुष्ट नजर आया।
  881. 44:05रत्नाकर शेट्टी ने साथ में शौर्य को उस
  882. 44:08वीडियो का लिंक भी शेयर किया जिसकी शूटिंग
  883. 44:11कुछ दिन पहले ही हुई थी। शौर्य ने जब
  884. 44:14वीडियो देखा तो उसे रत्नाकर शेट्टी के काम
  885. 44:17पर बहुत संतुष्टि हुई। [संगीत] उसने सोचा
  886. 44:19भी नहीं था कि उसके सॉन्ग का वीडियो फाइनल
  887. 44:22एडिट होकर आने के बाद इतना [संगीत] शानदार
  888. 44:25लगेगा। उसे खुद से भी ऐसी उम्मीद नहीं थी
  889. 44:28कि वह इस वीडियो में इस तरह निखर कर सामने
  890. 44:31आएगा। उसने खासकर इस बात को नोटिस किया कि
  891. 44:35[संगीत] पूरे सांग में रत्नाकर शेट्टी ने
  892. 44:37खासतौर पर उसी के ऊपर ज्यादा फोकस किया
  893. 44:40था। शौर्य ने रत्नाकर शेट्टी की तारीफ
  894. 44:43करते हुए कहा। मुझे उम्मीद नहीं थी शेट्टी
  895. 44:46साहब कि आप मुझसे इस तरह का काम करवा
  896. 44:49पाएंगे। रत्नाकर शेट्टी भी उसकी तारीफ
  897. 44:52करते हुए बोला मिस्टर शौर्य अगर मैं आपसे
  898. 44:55कहूं कि आप में एक एक्स फैक्टर है जो
  899. 44:57[संगीत] नेचुरल तरीके से आता है। आपको
  900. 45:00ज्यादा कोशिश करने की भी जरूरत नहीं
  901. 45:02पड़ती। अगर आप इस लाइन को सीरियसली
  902. 45:04लीजिएगा तो मैं यकीन के साथ कहता हूं कि
  903. 45:07जल्दी ही आप इंडस्ट्री का एक बड़ा नाम
  904. 45:09होंगे। शौर्य हल्की सी मुस्कान के साथ
  905. 45:12बोला, "क्या शेट्टी साहब, आप तो मुझे कुछ
  906. 45:16ज्यादा ही हवा में उड़ा रहे हैं। यह तो
  907. 45:18मैंने ईगो में आकर एक्टिंग करने का फैसला
  908. 45:20कर लिया है। यह जो मैंने दो फिल्में करने
  909. 45:23की बात कही है, यही मेरी पहली और आखिरी
  910. 45:26फिल्में होंगी। [संगीत] इससे ज्यादा तो आप
  911. 45:28मुझसे उम्मीद कीजिएगा नहीं। बाकी फिल्म
  912. 45:31निर्माण का जो काम है, वह जारी रहेगा।
  913. 45:34आपको कभी फुर्सत नहीं मिलने वाली है।
  914. 45:37रत्नाकर शेट्टी समझ रहा था कि शौर्य सिर्फ
  915. 45:40रणधीर शेखावत के साथ अपने विवाद को लेकर
  916. 45:43ही फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आया है।
  917. 45:45जहां तक एक्टिंग करने की बात थी तो वह भी
  918. 45:48एक तरह से रणधीर शेखावत को शौर्य की तरफ
  919. 45:50से जवाब ही था। क्योंकि रणधीर शेखावत ने
  920. 45:54शौर्य को चैलेंज किया था कि वह शौर्य को
  921. 45:56इंडस्ट्री में पैर रखने की जगह तक नहीं
  922. 45:58देगा। रत्नाकर शेट्टी मुद्दे पर आते हुए
  923. 46:02बोला।
  924. 46:03ठीक है मिस्टर शौर्य अगर आप शूटिंग के लिए
  925. 46:05समय दे देते तो मैं इस काम को शुरू कर
  926. 46:08देता। [संगीत] प्री प्रोडक्शन का सारा काम
  927. 46:10फाइनल हो रखा है। बस आपकी डेट का इंतजार
  928. 46:13है। शौर्य ने बिना देर किए कहा। आप तो कल
  929. 46:17से ही मेरी डेट ले लीजिए शेट्टी साहब। बस
  930. 46:20आपसे एक रिक्वेस्ट [संगीत] है कि आप
  931. 46:21शेड्यूल इस तरह से बनाइए कि मेरा काम पहले
  932. 46:24फाइनल कर दीजिए। बाकी की शूटिंग आप अपनी
  933. 46:27सहूलियत के हिसाब से करते रहिए। शौर्य
  934. 46:31चाहता था कि उसका काम जितनी जल्दी खत्म हो
  935. 46:33जाए उतनी जल्दी वह फ्री हो [संगीत] सके।
  936. 46:36रत्नाकर शेट्टी ने अपना हिसाब लगाते हुए
  937. 46:39कहा, "अगर ऐसी बात [संगीत] है, तो आप मुझे
  938. 46:42लगातार अपने 10 दिन दे दीजिए। उसके बाद
  939. 46:44मैं आपको तकलीफ नहीं दूंगा। मैं सबसे पहले
  940. 46:47आपके सारे शॉट्स ही शूट कर लूंगा और बाकी
  941. 46:50के आर्टिस्ट को अलग-अलग शेड्यूल दे
  942. 46:52दूंगा।" शौर्य भी शेट्टी साहब की बात से
  943. 46:55सहमत हो गया। उसने कहा ठीक है फिर कल से
  944. 46:59अगले 10 दिनों के लिए मैं आपके हवाले हूं।
  945. 47:01बाकी बीच में अगर कोई छोटा-मोटा काम आता
  946. 47:04है तो मैं मैनेज कर लूंगा। दूसरी तरफ
  947. 47:07चंद्रभान जी ने अपने घर के सदस्यों को एक
  948. 47:10जगह इकट्ठा करके विक्रमजीत जी के फैसले से
  949. 47:13अवगत करा दिया। शूर्यभान जी को यह जानकर
  950. 47:17बड़ा दुख हुआ कि कनिका ने शौर्य को नापसंद
  951. 47:20कर दिया। उन्हें समझ नहीं आया कि कोई
  952. 47:22शौर्य को कैसे नापसंद कर सकता है। उनकी
  953. 47:25नजर में तो उनके बेटे से काबिल कोई हो ही
  954. 47:28नहीं सकता था। जिसने इतनी कम उम्र में
  955. 47:31बिजनेस में अपना इतना नाम बनाया था। यूके
  956. 47:34में तो शौर्य को बिजनेस फ्रेटरनिटी द्वारा
  957. 47:38सबसे कम उम्र [संगीत] के बिजनेस आइकॉन का
  958. 47:40अवार्ड भी मिला था। बड़े-बड़े बिजनेस
  959. 47:43सेमिनार में शौर्य को इतनी कम उम्र में
  960. 47:46इतनी सफलता पाने के कारण विशेष अतिथि
  961. 47:49[संगीत] के रूप में आमंत्रित किया जाता
  962. 47:51था। सूर्यभान जी मन ही मन सोच रहे थे कि
  963. 47:55आखिर इस लड़की कनिका में थोड़ी भी समझ
  964. 47:58नहीं थी जो उसने शौर्य की जगह कुणाल को
  965. 48:01पसंद किया। अगर वह दोनों में तुलना भी
  966. 48:04[संगीत] करती तो कुणाल शौर्य के सामने
  967. 48:07कहीं टिकता ही नहीं। उन्हें यह भी लगा कि
  968. 48:10शायद इस सब में उनके पिताजी का भी हाथ
  969. 48:13होगा। शायद उनके पिता भी नहीं चाहते थे कि
  970. 48:16शौर्य की शादी कनिका से हो। तभी तो उनके
  971. 48:20चेहरे पर इस बात को लेकर कोई दुख नजर नहीं
  972. 48:22आ रहा था। दूसरी तरफ शिप्रा का आज ऑफिस
  973. 48:26में बिल्कुल मन नहीं लग रहा था। उसके
  974. 48:29दिमाग में रह-रह कर कनिका का चेहरा घूम
  975. 48:32रहा था। उसके मन में यही चल रहा था कि पता
  976. 48:35नहीं शौर्य और कनिका की आज क्या बात हुई
  977. 48:38होगी। वो उम्मीद कर रही थी कि शौर्य उसे
  978. 48:42फोन करके बताएगा कि उसकी कनिका से क्या
  979. 48:44बात हुई। वो खुद शौर्य को फोन करके पूछना
  980. 48:48नहीं [संगीत] चाहती थी क्योंकि सुबह वह
  981. 48:50कनिका की बात को लेकर ही शौर्य से नाराज
  982. 48:53हो गई थी और अब वह उसके [संगीत] आगे झुकना
  983. 48:55नहीं चाहती थी। लेकिन बहुत इंतजार के बाद
  984. 48:59भी जब शौर्य का फोन उसके पास नहीं आया तो
  985. 49:02वह बेचैन होकर ऑफिस से घर के लिए निकल गई।
  986. 49:06अभी वह कुछ ही दूर आई [संगीत] थी कि तभी
  987. 49:08एक कार ने तेजी से ओवरटेक करके उसकी कार
  988. 49:11के सामने अपनी कार खड़ी कर दी। यह शहर का
  989. 49:15व्यस्त रोड था। मजबूरन शिप्रा को अपनी कार
  990. 49:18रोकनी पड़ी। ज्यादा [संगीत] समय नहीं बीता
  991. 49:21था कि उसने देखा आगे वाली कार का दरवाजा
  992. 49:25खुला और एक खूबसूरत [संगीत] लड़की उस कार
  993. 49:28से बाहर आई और शिप्रा की कार की तरफ बढ़ने
  994. 49:31लगी। शिप्रा ने जैसे ही उस लड़की का चेहरा
  995. 49:34देखा, उसके चेहरे पर हैरानी के भाव आ गए।
  996. 49:38वो सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि यह
  997. 49:41लड़की [संगीत] इस तरह उसका रास्ता रोकने
  998. 49:43की कोशिश करेगी। अब आगे क्या होगा? आखिर
  999. 49:47किस लड़की ने शिप्रा का रास्ता रोका और
  1000. 49:50क्यों? क्या कनिका की [संगीत] इंगेजमेंट
  1001. 49:52कुणाल से हो पाएगी? जानने के लिए सुनते
  1002. 49:55रहिए।
  1003. 49:56शिप्रा आश्चर्य से सामने से आ रही उस
  1004. 49:59लड़की का चेहरा देख रही थी। उसे यकीन ही
  1005. 50:01नहीं हो रहा था कि उसने उसकी कार का
  1006. 50:04रास्ता रोक दिया है। वो लड़की शिप्रा की
  1007. 50:06साइड में आई [संगीत] और कार के शीशे पर
  1008. 50:09अपनी उंगली से नक किया। शिप्रा अपनी
  1009. 50:11हैरानी से बाहर आई। उसने कार का शीशा नीचे
  1010. 50:15किया और हैरानी से बोली [संगीत] श्रव्या
  1011. 50:18तुम यहां तुमने मेरी कार का रास्ता क्यों
  1012. 50:20रोका है? वो लड़की कोई और नहीं बल्कि
  1013. 50:24श्रव्या सोलंकी ही थी। उसने शिप्रा की तरफ
  1014. 50:27देखते हुए कहा मुझे तुमसे कुछ बात करनी
  1015. 50:29है। मैं अभी तुम्हारे ऑफिस में तुमसे
  1016. 50:32मिलने ही आ रही थी। तभी मैंने तुम्हें
  1017. 50:34बाहर आते देखा तो मैं तुम्हारे पीछे यहां
  1018. 50:36आ गई। शिप्रा ने हैरानी से उसकी तरफ देखते
  1019. 50:39हुए पूछा। पर तुम मुझसे मिलना क्यों चाहती
  1020. 50:42हो? श्रव्या ने आसपास देखते हुए सहज भाव
  1021. 50:45से सुझाव दिया। क्या हम यहां यूं सड़क पर
  1022. 50:48खड़े-खड़े बात करेंगे? तुम ऐसा [संगीत]
  1023. 50:50क्यों नहीं करती? अपनी कार का दरवाजा
  1024. 50:52खोलो। मैं कार के अंदर आकर तुमसे बात करती
  1025. 50:55हूं। तुम कार को साइड में भी कर लेना ताकि
  1026. 50:58ट्रैफिक जाम ना हो। शिप्रा ने ना चाहते
  1027. 51:01हुए भी अपनी कार का दरवाजा खोल दिया।
  1028. 51:03श्रव्या घूम कर कार के दूसरी तरफ आई और
  1029. 51:06अंदर बैठकर दरवाजा बंद कर लिया। श्रव्या
  1030. 51:09की कार में बैठते ही आगे वाली कार खुद ही
  1031. 51:11आगे बढ़ गई। उसके बाद शिप्रा ने भी अपनी
  1032. 51:14कार आगे बढ़ा दी और थोड़ा आगे जाकर जहां
  1033. 51:17उसे साइड में जगह मिली कार को एक तरफ ले
  1034. 51:20जाकर खड़ा कर दिया। इसके बाद उसने श्रव्या
  1035. 51:23की ओर देखते हुए पूछा। कहो तुम्हें मुझसे
  1036. 51:26क्या बात करनी है? श्रव्या कुछ पल तक
  1037. 51:29शिप्रा को घूरती रही और फिर नम्र स्वर में
  1038. 51:32बोली तुम्हारा श्रवण के साथ रिश्ता कैसा
  1039. 51:35चल रहा है? शिप्रा को समझ नहीं आया कि
  1040. 51:37श्रव्या उससे यह सवाल [संगीत] क्यों पूछ
  1041. 51:39रही है? इसलिए वह असमंजस भरे स्वर में
  1042. 51:42बोली तुम्हारे सवाल का क्या मतलब है? हम
  1043. 51:45पतिप हैं तो स्वाभाविक [संगीत] है कि वैसा
  1044. 51:48ही रिश्ता है। श्रव्या व्यंग भरी मुस्कान
  1045. 51:50के साथ बोली क्या सच में तुम दोनों के बीच
  1046. 51:54पति-पत्नी वाला ही रिश्ता है? मुझे पता है
  1047. 51:57कि तुम दोनों की शादी किन परिस्थितियों
  1048. 51:59में हुई है। इसलिए तुम्हारा यह [संगीत]
  1049. 52:01कहना तो बिल्कुल सही नहीं हो सकता कि तुम
  1050. 52:03दोनों के बीच पति पत्नी वाला ही रिश्ता
  1051. 52:06है। शिप्रा ने थोड़े [संगीत] तीखे स्वर
  1052. 52:08में पूछा। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरे और
  1053. 52:11श्रवण के बीच क्या [संगीत] रिश्ता है।
  1054. 52:13इससे तुम्हें क्या फर्क पड़ता है और तुम
  1055. 52:16यह जानना भी क्यों चाहती हो। श्रव्या ने
  1056. 52:18अपना संयम बनाए [संगीत] रखते हुए शांत
  1057. 52:20स्वर में कहा। देखो तुम्हें यूं अपना आपा
  1058. 52:24खोने की कोई जरूरत नहीं है। कोई भी बात
  1059. 52:27अगर सलीके [संगीत] से हो तो उसका परिणाम
  1060. 52:29अच्छा रहता है। क्योंकि मैं समझती हूं कि
  1061. 52:32तुम दोनों सिर्फ नाम के पतिपत्नी हो।
  1062. 52:34[संगीत] असलियत में तो यह एक तरह का
  1063. 52:36समझौता ही है जिसे तुम ढो रही हो। जहां तक
  1064. 52:39मुझे पता है तुम्हारे परिवार वाले भी नहीं
  1065. 52:42चाहते कि तुम दोनों का रिश्ता ज्यादा
  1066. 52:44दिनों [संगीत] तक चले। और यह भी हो सकता
  1067. 52:47है कि देर सवेेर तुम श्रवण से तलाक ले लो।
  1068. 52:50मैं तो बस तुम्हारे मुंह से असलियत जानना
  1069. 52:52[संगीत] चाहती हूं। शिप्रा की आवाज में अब
  1070. 52:55नाराजगी साफ छलकने लगी। उसने तीखे स्वर
  1071. 52:58में कहा, "मैं भी तो यही जानना चाहती हूं
  1072. 53:01कि [संगीत] आखिर तुम्हें हमारे रिश्ते के
  1073. 53:03बारे में जानने में क्या इंटरेस्ट है। मैं
  1074. 53:05श्रवण से तलाक लूंगी या नहीं लूंगी। इससे
  1075. 53:08तुम्हें क्या फर्क पड़ता है। श्रव्या के
  1076. 53:11चेहरे के भाव बदलने लगे। उसने अब अपने मन
  1077. 53:13की बात साफ करते हुए कहा
  1078. 53:16अगर तुम जानना ही चाहती हो तो समझ लो कि
  1079. 53:19तुम में तो नहीं पर श्रवण में मेरा
  1080. 53:21इंटरेस्ट है। इसलिए मैं चाहती हूं कि
  1081. 53:24तुम्हारी यह फेक शादी तुम जितनी जल्दी
  1082. 53:26खत्म कर लो उतना ही अच्छा है। जब देर
  1083. 53:29सवेेर तुम्हें श्रवण से अलग होना ही है तो
  1084. 53:32अभी उससे अलग होकर इस किस्से को खत्म करो।
  1085. 53:35बोलते-बोलते श्रव्या के चेहरे का रंग भी
  1086. 53:37बदलने लगा था। जो श्रव्या अभी तक थोड़े
  1087. 53:40नम्र स्वर में बात कर रही थी। अब
  1088. 53:42धीरे-धीरे उसके बात करने का लहजा तीखा
  1089. 53:45होता जा रहा था। शिप्रा ने पूरे
  1090. 53:47कॉन्फिडेंस के साथ उसकी तरफ देखते हुए
  1091. 53:50कहा, "तुमने यह कैसे समझ लिया [संगीत] कि
  1092. 53:52मैं देर सवेेर श्रवण से तलाक लूंगी?"
  1093. 53:55मैंने तो ऐसा कभी नहीं कहा। मेरे परिवार
  1094. 53:58वाले क्या चाहते हैं? उससे मुझे कोई फर्क
  1095. 54:00नहीं पड़ता। लेकिन मैं तुम्हें स्पष्ट कर
  1096. 54:03दूं कि मैं श्रवण [संगीत] से कभी तलाक
  1097. 54:05नहीं लेने वाली हूं। हम पतिपत्नी हैं और
  1098. 54:08आगे भी पति-पत्नी ही रहेंगे। श्रव्या को
  1099. 54:11उम्मीद नहीं थी कि शिप्रा से उसे यह सुनने
  1100. 54:14को मिलेगा। उसे तो अभी तक यही लग रहा था
  1101. 54:17कि [संगीत] यह दोनों शायद अपने रिश्ते को
  1102. 54:20सिर्फ ढो रहे हैं। श्रव्या गहरी नजरों से
  1103. 54:23शिप्रा को देखने [संगीत] लगी। वो यकीन
  1104. 54:26करने की कोशिश कर रही थी कि क्या जो
  1105. 54:28शिप्रा कह रही है वो सच है? एक पल के लिए
  1106. 54:32श्रव्या को लगा कि कहीं शिप्रा उसे
  1107. 54:34[संगीत] चिढ़ाने के लिए तो ऐसा नहीं बोल
  1108. 54:36रही है। इसलिए उसने खुद को थोड़ा शांत
  1109. 54:39किया और बात [संगीत] संभालते हुए फिर से
  1110. 54:42शिप्रा से पूछा क्या तुम दोनों अभी तक
  1111. 54:44सिर्फ नाम के पति पत्नी नहीं हो? क्या तुम
  1112. 54:47दोनों [संगीत] के बीच सच में पतिप वाला
  1113. 54:50कोई रिश्ता है भी? क्या तुम्हें श्रवण से
  1114. 54:54प्यार है?
  1115. 54:56मैं जानती हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं है।
  1116. 54:58उसके बाद भी तुम इस रिश्ते को क्यों ढूंढ
  1117. 55:01रही हो? [संगीत] मुझे यह समझ नहीं आ रहा
  1118. 55:03है। शिप्रा ने तल्ख लहजे में जवाब दिया।
  1119. 55:07तुम किसी गलतफहमी में जी रही हो। तुम्हें
  1120. 55:09यह किसने कहा कि हम सिर्फ नाम के पतिपत्नी
  1121. 55:12हैं या हम में प्यार नहीं है। मैं तुम्हें
  1122. 55:15फिर से स्पष्ट कर दूं कि हम सिर्फ नाम के
  1123. 55:18पतिपत्नी नहीं बल्कि वास्तविकता [संगीत]
  1124. 55:20में भी पतिपत्नी हैं और मैं श्रवण से
  1125. 55:23प्यार भी करती हूं।
  1126. 55:25लेकिन क्या तुम मुझे यह बताओगी कि तुम यह
  1127. 55:28सब मुझसे क्यों पूछ रही हो? तुम्हारा
  1128. 55:30श्रवण से क्या वास्ता है? शिप्रा की बात
  1129. 55:34सुनकर श्रव्या के चेहरे पर एक व्यंग भरी
  1130. 55:36मुस्कान फैल गई। उसने अविश्वास से कहा,
  1131. 55:40"तुम यह बेवकूफ किसे बना रही हो। मुझे समझ
  1132. 55:43नहीं आ रहा कि तुम्हारी क्या मजबूरी
  1133. 55:45[संगीत] है। जो तुम यह दिखावा कर रही हो
  1134. 55:47कि तुम दोनों वास्तविकता में भी पति पत्नी
  1135. 55:50की तरह ही हो।
  1136. 55:51[संगीत]
  1137. 55:51जबकि मैं पहले ही देख चुकी हूं कि तुम
  1138. 55:54दोनों का रिश्ता नॉर्मल नहीं है। और जब
  1139. 55:57तुम यह जानना ही चाहती हो कि [संगीत] मैं
  1140. 55:59यह क्यों पूछ रही हूं तो मैं तुम्हें
  1141. 56:01स्पष्ट कर देती हूं कि मैं श्रवण से प्यार
  1142. 56:04करने लगी हूं और मैं उससे शादी भी करना
  1143. 56:06चाहती हूं। लेकिन उसके लिए सबसे पहली और
  1144. 56:10जरूरी चीज यह है कि उससे तुम्हारा तलाक हो
  1145. 56:13जाए। तुमसे मिलने का भी यही कारण है कि
  1146. 56:16मैं [संगीत] चाहती हूं कि जितनी जल्दी तुम
  1147. 56:18श्रवण से तलाक लो उतनी जल्दी मैं भी अपने
  1148. 56:21रिश्ते के लिए आगे प्रयास कर सकूं।
  1149. 56:24श्रव्या की बात से शिप्रा को जोर का झटका
  1150. 56:27लगा। उसे इसी बात का डर था जो आज सच साबित
  1151. 56:31हो गया था। शिप्रा ने मन ही मन सोचा आखिर
  1152. 56:35इस पर भी शौर्य का जादू चल ही गया।
  1153. 56:38इसकी गलतफहमी दूर करनी [संगीत] पड़ेगी
  1154. 56:40नहीं तो यह रोग और बढ़ता ही जाएगा। यह
  1155. 56:44सोचकर शिप्रा ने खुद को संयत किया [संगीत]
  1156. 56:46और समझाने वाले भाव में श्रव्या से बोली
  1157. 56:49देखो श्रव्या मुझे नहीं पता कि
  1158. 56:51[गला साफ़ करने की आवाज़] तुम्हें ऐसा
  1159. 56:52क्यों लगा [संगीत] कि हम दोनों का रिश्ता
  1160. 56:54नॉर्मल नहीं है। लेकिन मैं तुम्हें फिर से
  1161. 56:57कह रही हूं कि हम दोनों एक दूसरे से बहुत
  1162. 56:59[संगीत] प्यार करते हैं और हमारा अलग होने
  1163. 57:02का भी कोई इरादा नहीं है। अगर तुम्हें
  1164. 57:04किसी कारणवश ऐसा लगा कि हम दोनों का
  1165. 57:07रिश्ता नॉर्मल नहीं है तो मैं यही कहूंगी
  1166. 57:10कि यह तुम्हारी गलतफहमी है। श्रवण है ही
  1167. 57:13ऐसा कि किसी को उससे प्यार हो जाए। मैं
  1168. 57:17तुम्हें दोष भी नहीं दे रही लेकिन मैं
  1169. 57:19तुमसे यह कहना चाहती हूं कि अगर तुम्हारे
  1170. 57:22दिल में श्रवण के लिए ऐसी कोई भावना है तो
  1171. 57:25तुम उसे अपने दिल से निकाल दो क्योंकि
  1172. 57:28श्रवण मेरा पति [संगीत] है और मैं उसे
  1173. 57:30किसी भी हाल में तलाक नहीं देने वाली।
  1174. 57:33शिप्रा की बात सुनकर श्रव्या तो उसे देखती
  1175. 57:36ही रह गई। उसे कहीं से भी शिप्रा झूठ
  1176. 57:39बोलती हुई नहीं लग रही थी। उसके मन में
  1177. 57:42सवाल उठा तो क्या वह इन दोनों के बारे में
  1178. 57:45गलत सोच रही थी? एक ही पल [संगीत] में
  1179. 57:48श्रव्या का सारा सपना टूट कर चूर हो गया।
  1180. 57:51अचानक ही उसके चेहरे पर उदासी नजर आने
  1181. 57:54लगी। अब आगे उससे शिप्रा से कुछ कहते नहीं
  1182. 57:57बना। उसने गंभीर नजरों से एक बार शिप्रा
  1183. 58:00को देखा। फिर मन में कुछ निश्चय करके वो
  1184. 58:03उसकी कार से बाहर आ गई। कार से बाहर आने
  1185. 58:06के बाद उसने एक बार पलट कर शिप्रा की तरफ
  1186. 58:09देखा और भावहीन स्वर में पूछा क्या श्रवण
  1187. 58:13भी तुमसे प्यार करता है? शिप्रा ने
  1188. 58:16संतुलित स्वर में जवाब दिया मैं तुमसे
  1189. 58:19[संगीत] फिर कह रही हूं श्रव्या कि अगर
  1190. 58:21तुम्हारे मन में श्रवण को लेकर कोई उम्मीद
  1191. 58:24है तो तुम उसे अपने दिल से निकाल दो। वो
  1192. 58:28मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा है जिसे मैं
  1193. 58:32किसी भी सूरत में खुद से दूर नहीं कर
  1194. 58:34सकती। श्रव्या ने उसकी तरफ देखते हुए
  1195. 58:37नाराजगी से कहा मैंने तुमसे अपने लिए कोई
  1196. 58:40राय नहीं पूछी। तुमसे एक सिंपल से सवाल का
  1197. 58:44जवाब भी नहीं दिया गया। इतना कहकर श्रव्या
  1198. 58:47पीछे की तरफ पड़ गई। शिप्रा की कार के
  1199. 58:50पीछे ही ना जाने कब श्रव्या की कार भी आकर
  1200. 58:53रुक गई थी। श्रव्या के वहां से जाने के
  1201. 58:56बाद भी शिप्रा सोचती रही कि अभी-अभी यह
  1202. 58:59क्या हुआ? क्या सच में श्रव्या शौर्य को
  1203. 59:03इतना पसंद करने लगी है कि इसके लिए वो उसे
  1204. 59:06शिप्रा से तलाक लेने के लिए भी कहने लगी?
  1205. 59:09अभी [संगीत] तक तो वो कनिका के कारण ही
  1206. 59:11परेशान थी। अब यह श्रव्या भी उसे परेशान
  1207. 59:13करने आ गई थी। शिप्रा ने सोचा कि क्या उसे
  1208. 59:17शौर्य को इसके बारे में बताना चाहिए? फिर
  1209. 59:20अगले ही पल उसने खुद ही सोचा नहीं इतनी
  1210. 59:24जल्दी करने की क्या जरूरत है? अगर दोबारा
  1211. 59:27कभी वो इस बारे में मुझसे बात करेगी तभी
  1212. 59:30मैं शौर्य से इसके बारे में बात करूंगी।
  1213. 59:33वैसे भी मैंने श्रव्या से यह स्पष्ट तो कर
  1214. 59:36ही दिया है कि मैं शौर्य से कभी तलाक नहीं
  1215. 59:39लेने वाली। शायद वह समझ जाए कि अब इस लकीर
  1216. 59:42को पीटने का कोई फायदा नहीं है। इतना
  1217. 59:46सोचकर उसे लगा कि यही सही रहेगा। लेकिन अब
  1218. 59:49अचानक उसे शौर्य की याद और भी ज्यादा
  1219. 59:52परेशान करने लगी। सुबह वो शौर्य से नाराज
  1220. 59:55भी हो गई थी। लेकिन अब उसका मन कर रहा था
  1221. 59:58कि कितनी जल्दी वो शौर्य से मिलकर अपनी
  1222. 1:00:01नाराजगी दूर करें। यह सोचकर उसने अब और
  1223. 1:00:04इंतजार करने का नहीं सोचा। उसने मोबाइल
  1224. 1:00:07निकाला और शौर्य को फोन लगा दिया। [संगीत]
  1225. 1:00:10एक दो रिंग के बाद ही शौर्य ने फोन उठा
  1226. 1:00:13लिया। शिप्रा इंतजार करने लगी कि शौर्य
  1227. 1:00:16आगे से कुछ बोले।
  1228. 1:00:18लेकिन शौर्य फोन उठाने के बाद भी खामोशी
  1229. 1:00:21से फोन कान से लगाए रहा। वो भी सोच चुका
  1230. 1:00:24[संगीत] था कि जब तक आगे से शिप्रा कुछ
  1231. 1:00:27नहीं बोलती तब तक वो भी कुछ नहीं बोलेगा।
  1232. 1:00:30जब ऐसे ही लगभग एक मिनट खामोशी में गुजर
  1233. 1:00:33गया तो मजबूरन शिप्रा ने रूखे स्वर में
  1234. 1:00:35पूछा। कहां हो तुम? शिप्रा का सवाल सुनकर
  1235. 1:00:40शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आ गई। अपनी
  1236. 1:00:43हंसी दबाते [संगीत] हुए उसने छेड़ने वाले
  1237. 1:00:46अंदाज में पूछा। क्या हुआ? तुम्हें हमेशा
  1238. 1:00:49यह क्यों जानना होता है कि मैं कहां हूं?
  1239. 1:00:53शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा को और तेज
  1240. 1:00:55गुस्सा [संगीत] आ गया। वो और भी कड़े स्वर
  1241. 1:00:58में बोली। बकवास मत करो और जल्दी से बताओ
  1242. 1:01:02कहां हो तुम? कुछ पल की खामोशी के बाद
  1243. 1:01:05शौर्य ने जवाब दिया। मैं अभी होटल
  1244. 1:01:08पैराडाइज के केबिन नंबर तीन में हूं।
  1245. 1:01:10पिल्ल स्नपिंग तुम यह क्यों पूछ रही हो?
  1246. 1:01:13मैं अब यहां से निकलने ही वाला हूं।
  1247. 1:01:16शिप्रा ने तुरंत रूखे स्वर में जवाब दिया।
  1248. 1:01:19कोई जरूरत नहीं है। अभी तुम वहीं रुकोगे।
  1249. 1:01:22मैं अभी आधे घंटे में वहीं आ रही हूं।
  1250. 1:01:25शौर्य ने भी जवाब देने में देर नहीं की।
  1251. 1:01:28उसने कहा यह क्या [संगीत] बात हुई? मैंने
  1252. 1:01:31कहा ना मैं अभी यहां से निकल रहा हूं। तुम
  1253. 1:01:34बताओ तुम कहां हो? मैं वहीं आ जाता हूं।
  1254. 1:01:38शिप्रा ने हुक्म देने वाले अंदाज में कहा।
  1255. 1:01:42मैंने कहा ना कि मैं वहीं आ रही हूं। तो
  1256. 1:01:44तुम्हें वहां से निकलने की कोई जरूरत नहीं
  1257. 1:01:47है। तुम थोड़ी देर वहीं इंतजार करो। इसके
  1258. 1:01:50बाद उसने दूसरी तरफ की बात सुने बिना ही
  1259. 1:01:53फोन काट [संगीत] दिया। अब शौर्य ने आगे
  1260. 1:01:56कुछ नहीं कहा। उसके होठों पर एक प्यारी सी
  1261. 1:02:00मुस्कान नजर आने लगी। वो पहले ही समझ गया
  1262. 1:02:03था कि अब कुछ ऐसा ही होने वाला था। अब वो
  1263. 1:02:07काफी हद तक शिप्रा को समझने लगा था। वैसे
  1264. 1:02:10भी शिप्रा से यह सुनने के बाद कि वो यहां
  1265. 1:02:13आ रही है। वो कहीं जाने वाला नहीं था। वो
  1266. 1:02:16तो बस उसे छेड़ने के लिए ऐसा बोल रहा था
  1267. 1:02:19कि वो ही उसके पास आ रहा है। उधर शिप्रा
  1268. 1:02:23को भी अब शौर्य के पास पहुंचने [संगीत] की
  1269. 1:02:25जल्दी थी। उसने अपनी कार होटल पैराडाइज की
  1270. 1:02:28तरफ मोड़ दी। अब आगे क्या होगा? क्या
  1271. 1:02:32श्रव्या इतनी आसानी से शिप्रा की बात मान
  1272. 1:02:35जाएगी या उसके दिमाग में कुछ और चल रहा
  1273. 1:02:38है?
  1274. 1:02:39और क्या होगा जब शिप्रा शौर्य से मिलेगी
  1275. 1:02:43जानने के लिए सुन
  1276. 1:02:44ही शिप्रा होटल पैराडाइज पहुंच [संगीत] गई
  1277. 1:02:47वो बिना इधर-उधर देखे सीधे होटल के अंदर
  1278. 1:02:50चली गई [संगीत]
  1279. 1:02:52रेस्टोरेंट एरिया से गुजरते हुए अचानक एक
  1280. 1:02:55शख्स की नजर शिप्रा पर पड़ी [संगीत] तो
  1281. 1:02:57उसकी आंखों में हैरानी उभर आई वो शिप्रा
  1282. 1:03:01को आवाज देना चाहता था लेकिन उसे इतनी
  1283. 1:03:04जल्दबाजी में देखकर वो बस यह देखने लगा कि
  1284. 1:03:07शिप्रा किसी के साथ [संगीत] है या किसी से
  1285. 1:03:09मिलने आई है। तभी उसने शिप्रा को एक कैबिन
  1286. 1:03:13के अंदर जाते देखा। उस शख्स की आंखें
  1287. 1:03:16हैरानी से फैल गई। वो किसी दूसरे शख्स के
  1288. 1:03:19साथ बैठा हुआ था। शायद उसकी कोई बिजनेस
  1289. 1:03:22मीटिंग चल रही थी। शिप्रा [संगीत] के
  1290. 1:03:25कैबिन के अंदर जाते ही उसने अपने साथ बैठे
  1291. 1:03:28व्यक्ति के साथ मीटिंग खत्म की और कैबिन
  1292. 1:03:30नंबर तीन के सामने आकर बैठ गया। वह दरवाजे
  1293. 1:03:34के सामने बैठकर ही शिप्रा के बाहर आने का
  1294. 1:03:36इंतजार करने लगा। दूसरी तरफ शिप्रा कैबिन
  1295. 1:03:40को बिना नॉक किए अंदर चली गई। [संगीत]
  1296. 1:03:42उसने देखा कि शौर्य सोफे पर अपना सिर
  1297. 1:03:45टिकाए आराम की मुद्रा में आंखें बंद किए
  1298. 1:03:48हुए [संगीत] पड़ा था। यह कहना ज्यादा सही
  1299. 1:03:51होगा कि वह सो ही रहा था। शायद शिप्रा का
  1300. 1:03:54इंतजार करते-करते उसकी आंख लग गई थी। जब
  1301. 1:03:58शिप्रा ने देखा कि उसके कैबिन में आने के
  1302. 1:04:00बाद भी [संगीत] शौर्य की आंखें बंद थी तो
  1303. 1:04:03वह एक पल वहीं खड़ी रहकर एक टक शौर्य को
  1304. 1:04:06देखती रही। उसने कोई आवाज नहीं की। अंदर
  1305. 1:04:10जाकर शौर्य के सामने वाले सोफे पर [संगीत]
  1306. 1:04:12बैठ गई और टेबल पर अपनी कोहनी टिकाकर
  1307. 1:04:15हथेली पर ठोड़ी जमाए [संगीत] शौर्य को एक
  1308. 1:04:18टक देखने लगी। इसी समय रूपा अपनी कैबिन
  1309. 1:04:22में बैठी हुई [संगीत] दीवार पर लगे
  1310. 1:04:24स्क्रीन पर नजर गड़ाए हुए थी। स्क्रीन पर
  1311. 1:04:27कैबिन नंबर तीन का फुटेज ही चल रहा था।
  1312. 1:04:30[संगीत] उसने अभी-अभी शिप्रा को कैबिन
  1313. 1:04:32नंबर तीन में जाते देखा था। वो शिप्रा को
  1314. 1:04:35शौर्य की वाइफ के रूप में जानती थी। उसके
  1315. 1:04:38मन में यही ख्याल आया कि [संगीत] कहीं
  1316. 1:04:40शिप्रा को यह तो पता नहीं चल गया कि शौर्य
  1317. 1:04:43यहां कनिका से मिलने आया था। यानी अब इन
  1318. 1:04:46दोनों मियां बीवी की लड़ाई होना पक्की है।
  1319. 1:04:50रूपा के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई।
  1320. 1:04:52[संगीत] उसने बेल बजाकर एक वेटर को बुलाया
  1321. 1:04:55और उसे कैबिन नंबर तीन में जाकर ऑर्डर
  1322. 1:04:57लेने के लिए बोल दिया। उधर कैबिन में
  1323. 1:05:00शिप्रा अभी भी खामोशी से शौर्य को देखे जा
  1324. 1:05:03रही थी। इसी समय कैबिन के दरवाजे पर बाहर
  1325. 1:05:06से नॉक हुआ। खटखटाने की आवाज सुनते ही
  1326. 1:05:09शौर्य की आंखें खुल गई। शिप्रा भी जल्दी
  1327. 1:05:13से सीधी होकर बैठ गई। उसके चेहरे के
  1328. 1:05:15एक्सप्रेशन भी बदल गए थे। शौर्य ने सामने
  1329. 1:05:19शिप्रा को बैठे देखा तो वह भी हड़बड़ा कर
  1330. 1:05:21सीधा होते हुए बोला। तुम कब आई? शिप्रा ने
  1331. 1:05:26सहजता से जवाब दिया। अभी-अभी ही इसी समय
  1332. 1:05:30कैबिन के दरवाजे पर फिर से नॉक हुआ। शौर्य
  1333. 1:05:34ने दरवाजे की ओर देखते हुए कहा, "आ जाओ।"
  1334. 1:05:37[संगीत]
  1335. 1:05:38एक वेटर हाथ में पानी की बोतल लिए अंदर
  1336. 1:05:41दाखिल हुआ। उसने पानी की बोतल टेबल पर रखी
  1337. 1:05:44और शौर्य की ओर देखते हुए पूछा, "सर, कोई
  1338. 1:05:48ऑर्डर है?" [संगीत]
  1339. 1:05:50शौर्य ने शिप्रा की ओर देखा। जैसे उससे
  1340. 1:05:52पूछ रहा हो कि तुम्हें कुछ लेना है तो
  1341. 1:05:55ऑर्डर कर दो। [संगीत]
  1342. 1:05:57शिप्रा ने वेटर की तरफ देखते हुए कहा,
  1343. 1:06:00"अभी तो दो कॉफी ले आओ। फिर देखते हैं।"
  1344. 1:06:02[संगीत]
  1345. 1:06:03वेटर ऑर्डर लेकर चला गया। वेटर के जाने के
  1346. 1:06:07बाद कैबिन में फिर से खामोशी छा गई।
  1347. 1:06:10[संगीत]
  1348. 1:06:10सुबह जो हुआ था, उसके कारण दोनों का मूड
  1349. 1:06:13पहले ही बिगड़ा हुआ था। [संगीत]
  1350. 1:06:16कौन बातचीत की शुरुआत करें? बस दोनों इसी
  1351. 1:06:19का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार शौर्य ने ही
  1352. 1:06:22शिप्रा की तरफ देखते हुए पूछा। अब बोलो भी
  1353. 1:06:26क्या बात करनी है जो [संगीत] मुझे यहां
  1354. 1:06:29रुकने के लिए बोली थी। शिप्रा ने घूर कर
  1355. 1:06:32शौर्य को देखा और नाराजगी से पूछा तुम बात
  1356. 1:06:36कैसे कर रहे हो? शौर्य ने हैरानी से अपनी
  1357. 1:06:40आंखें बड़ी करते हुए कहा अब क्या [संगीत]
  1358. 1:06:42किया? पूछा ही तो है कि क्या बात करनी है?
  1359. 1:06:47शिप्रा ने बात टालने वाले अंदाज में कहा।
  1360. 1:06:50जल्दी क्या है? कॉफी आ जाने दो। शौर्य
  1361. 1:06:54बेसब्री से बोला, कॉफी तो आ ही जाएगी
  1362. 1:06:57[संगीत] पर बात क्या है वह तो बताओ। फोन
  1363. 1:07:01पर तो तुम्हें बहुत जल्दी थी। बेसब्री के
  1364. 1:07:04बावजूद शौर्य ठीक से शिप्रा की तरफ देख भी
  1365. 1:07:07नहीं रहा था। [संगीत] शौर्य को बेसब्र
  1366. 1:07:10होते देखकर शिप्रा उसके चेहरे की तरफ
  1367. 1:07:12देखते हुए बोली, [संगीत]
  1368. 1:07:14तुम कनिका से मिले थे? क्या बात हुई?
  1369. 1:07:18शौर्य समझ रहा था कि इस बात को लेकर
  1370. 1:07:21शिप्रा कितनी परेशान होगी। कनिका से क्या
  1371. 1:07:24बात हुई? यह जानने की जिज्ञासा में तो वह
  1372. 1:07:26मरी जा रही होगी। शौर्य ने मन ही मन सोच
  1373. 1:07:30लिया कि इतनी आसानी से तो वह उसे बताएगा
  1374. 1:07:33नहीं। अभी शौर्य के दिमाग में यही बात चल
  1375. 1:07:36ही रही
  1376. 1:07:37[संगीत]
  1377. 1:07:37थी कि तभी उसका फोन रिंग करने लगा। फोन
  1378. 1:07:40टेबल पर ही रखा हुआ था। स्क्रीन पर उसके
  1379. 1:07:43पापा का नाम फ्लैश हो [संगीत] रहा था।
  1380. 1:07:46शिप्रा की निगाह भी फोन पर चली गई। पापा
  1381. 1:07:49का नाम देखकर उसके [संगीत] भी कान खड़े हो
  1382. 1:07:51गए। इसी समय वेटर कॉफी लेकर आया और दोनों
  1383. 1:07:55कप टेबल पर रख दिए। शौर्य ने उसे जाने
  1384. 1:07:58[संगीत] का इशारा किया और फोन उठाकर कॉल
  1385. 1:08:01एक्सेप्ट कर लिया। दूसरी तरफ [संगीत] से
  1386. 1:08:04सूर्यभान जी की आवाज आई। तुम्हें पता है
  1387. 1:08:08आज पापा के पास [संगीत] विक्रमजीत अंकल का
  1388. 1:08:10कॉल आया था। शौर्य ने सोचते हुए पूछा
  1389. 1:08:14अच्छा क्या कहा उन्होंने? [संगीत] शिप्रा
  1390. 1:08:18को दूसरी तरफ की बात सुनाई नहीं दे रही थी
  1391. 1:08:22लेकिन उसे एहसास हो गया कि जरूर बात कनिका
  1392. 1:08:24के बारे में ही हो रही होगी। उसने एक पल
  1393. 1:08:28भी [संगीत] नहीं लगाया और जल्दी से अपनी
  1394. 1:08:30सीट से उठकर शौर्य के सोफे पर जाकर बैठ
  1395. 1:08:33गई। फिर अपना कान [संगीत] उसके कान से लगा
  1396. 1:08:35दिया। शौर्य ने जब शिप्रा को अपने पापा की
  1397. 1:08:39बात सुनने की कोशिश [संगीत] करते देखा तो
  1398. 1:08:41उसने उससे दूर होने की कोशिश की। यह देखकर
  1399. 1:08:45शिप्रा ने जबरदस्ती [संगीत] उसका हाथ पकड़
  1400. 1:08:47कर अपनी तरफ खींच लिया और गुस्से भरी
  1401. 1:08:50निगाहों से उसे देखा। शिप्रा का इरादा
  1402. 1:08:53[संगीत] देखकर शौर्य ने फिर उससे दूर जाने
  1403. 1:08:55की कोशिश तो छोड़ दी लेकिन उसने मोबाइल को
  1404. 1:08:58शिप्रा की तरफ वाले कान से हटाकर दूसरी
  1405. 1:09:01तरफ [संगीत] वाले कान से लगा लिया। यह
  1406. 1:09:04देखकर शिप्रा का पारा और हाई हो गया। उसने
  1407. 1:09:07झटके से [संगीत] शौर्य के हाथ से उसका
  1408. 1:09:09मोबाइल छीना और लाउडस्कर ऑन करके शौर्य के
  1409. 1:09:13मुंह [संगीत] के सामने कर दिया। सूर्यभंजी
  1410. 1:09:16अपनी बात बताने की जगह शौर्य से ही पूछ
  1411. 1:09:19रहे थे [संगीत] तुम्हारी कनिका से क्या
  1412. 1:09:21बात हुई थी? शौर्य ने एक नजर शिप्रा को
  1413. 1:09:24देखा। फिर मोबाइल के करीब [संगीत] अपना
  1414. 1:09:27चेहरा ले जाकर बोला ऐसा कुछ खास तो हुआ
  1415. 1:09:30नहीं जो बताया जा [संगीत] सके पापा। पर
  1416. 1:09:33उन्होंने क्या कहा यह तो बताइए।
  1417. 1:09:36शिप्रा अभी भी एक हाथ [संगीत] से शौर्य की
  1418. 1:09:39बाह थामे हुए थी। सूर्यभान जी ने लंबी
  1419. 1:09:42चौड़ी भूमिका बनाते हुए कहा, देखो जिंदगी
  1420. 1:09:46[संगीत] में कई बार ऐसी बातें होती हैं जो
  1421. 1:09:48हमारे मन के मुताबिक नहीं होती। [संगीत]
  1422. 1:09:51इसका मतलब यह नहीं होता कि हम उस लायक
  1423. 1:09:53नहीं हैं। शायद इसका कारण यह भी हो सकता
  1424. 1:09:57है [संगीत] कि शायद उससे भी बेहतर चीज
  1425. 1:09:59हमें मिलने वाली हो। इसलिए अगर ऐसी कोई
  1426. 1:10:02बात सामने आती है तो तुम उस बात से परेशान
  1427. 1:10:05मत होना। शौर्य समझ रहा था कि उसके पापा
  1428. 1:10:09[संगीत] उसे क्या कहना चाहते हैं। उसे यह
  1429. 1:10:12स्पष्ट हो गया कि जरूर कनिका के दादाजी ने
  1430. 1:10:15कनिका का [संगीत] रिश्ता कुणाल के साथ
  1431. 1:10:16करने का फैसला कर लिया होगा। इसी बात से
  1432. 1:10:20उसके पापा [संगीत] दुखी हो रहे होंगे।
  1433. 1:10:23शौर्य ने अपने पापा को हौसला देते हुए
  1434. 1:10:25कहा। [संगीत] मैं समझता हूं पापा। आप मेरी
  1435. 1:10:29चिंता मत कीजिए। उन्होंने क्या कहा? आप यह
  1436. 1:10:33बताइए। सूर्यभान जी से यह कहते नहीं बन
  1437. 1:10:36रहा था कि [संगीत] विक्रमजीत जी ने क्या
  1438. 1:10:38कहा है? आखिर उन्होंने सीधे-सीधे कहने के
  1439. 1:10:41बजाय अपनी [संगीत] बातों से ही सब कुछ
  1440. 1:10:44स्पष्ट कर दिया। उन्होंने बेटे को समझाते
  1441. 1:10:47हुए कहा, [संगीत] शौर्य मेरे बेटे कनिका
  1442. 1:10:51से अच्छी लड़की तुम्हारी लाइफ में आएगी।
  1443. 1:10:54इसलिए तुम इस बात को अपने दिल पर मत
  1444. 1:10:56[संगीत] लेना। शौर्य ने शिप्रा की तरफ
  1445. 1:10:59देखते हुए आखिरकार साफ-साफ अपने पापा से
  1446. 1:11:02पूछ ही लिया। तो क्या आप यह कहना चाहते
  1447. 1:11:05हैं कि विक्रमजीत [संगीत] जी ने कनिका का
  1448. 1:11:07रिश्ता कुणाल के साथ करने का फैसला किया
  1449. 1:11:09है? शौर्य की बात [संगीत] सुनकर सूर्यभान
  1450. 1:11:13जी के होठों पर चुप्पी छा गई। कुछ पल बाद
  1451. 1:11:16उन्होंने शौर्य को हौसला देते हुए कहा।
  1452. 1:11:20मैंने कहा [संगीत] ना उससे भी अच्छी लड़की
  1453. 1:11:22तुम्हारी जिंदगी में आएगी।
  1454. 1:11:24उसका नसीब खराब है जो वह तुम्हें समझ नहीं
  1455. 1:11:27पाई। शौर्य समझ रहा था कि उसके पापा सोच
  1456. 1:11:31रहे होंगे कि वो इस बात से बहुत दुखी
  1457. 1:11:34होगा। इसलिए अपने पापा का दुख कम करने के
  1458. 1:11:37लिए वो मुस्कुराते हुए बोला। थैंक गॉड
  1459. 1:11:41पापा जो विक्रमजीत जी ने कनिका का रिश्ता
  1460. 1:11:43कुणाल के साथ कर दिया। मुझे तो वह वैसे भी
  1461. 1:11:46पसंद नहीं थी। मैं तो खुद उससे शादी नहीं
  1462. 1:11:49करना चाहता था। वह तो आपने वचन दे दिया
  1463. 1:11:53था। उसी [संगीत] चक्कर में मैं मजबूरन
  1464. 1:11:55उससे शादी करने को तैयार हुआ था। सूर्यभान
  1465. 1:11:58जी की आवाज में साफ आश्चर्य था। उन्हें
  1466. 1:12:02विश्वास नहीं हो रहा था कि उनका बेटा
  1467. 1:12:04स्वयं [संगीत] कनिका से शादी नहीं करना
  1468. 1:12:06चाहता था। उन्होंने हैरानी से पूछा। क्या
  1469. 1:12:10तुम सच कह रहे हो? शौर्य ने उन्हें यकीन
  1470. 1:12:13दिलाते हुए कहा, "मैं बिल्कुल सच कह रहा
  1471. 1:12:16हूं। पिताजी, "मैं सच में कनिका से शादी
  1472. 1:12:19नहीं करना [संगीत] चाहता था।"
  1473. 1:12:21यह तो अच्छा है कि उन्होंने कनिका के लिए
  1474. 1:12:24कुणाल को पसंद कर लिया है। शौर्य की बात
  1475. 1:12:27सुनकर सूर्यभान जी ने चैन की सांस लेते
  1476. 1:12:30हुए कहा, तुम्हारी इस बात [संगीत] से मेरे
  1477. 1:12:33सिर से एक बहुत बड़ा बोझ हट गया। मैं यह
  1478. 1:12:36सोचकर परेशान था कि तुम इस बात को कैसे
  1479. 1:12:39बर्दाश्त करोगे।
  1480. 1:12:41शौर्य ने उन्हें दिलासा देते हुए कहा,
  1481. 1:12:44[संगीत] "आप मेरी चिंता ना करें पिताजी।"
  1482. 1:12:47वैसे और क्या बात हुई विक्रमजीत जी से?
  1483. 1:12:50[संगीत] शौर्य जानना चाहता था कि दोनों की
  1484. 1:12:53इंगेजमेंट की कोई डेट फाइनल हुई या नहीं।
  1485. 1:12:57सूर्यभान जी ने बताया बस उनको यही बताना
  1486. 1:13:01था कि कनिका कुणाल के साथ शादी करना चाहती
  1487. 1:13:04है। बाकी इस 10 तारीख को दोनों की
  1488. 1:13:07इंगेजमेंट होना तय हुआ [संगीत] है। उस दिन
  1489. 1:13:10शायद कनिका का बर्थडे भी है। इसके बाद कुछ
  1490. 1:13:14और बात करने के बाद शौर्य ने फोन काट
  1491. 1:13:17दिया। शिप्रा जो फोन को लाउडस्पीकर पर सुन
  1492. 1:13:20रही थी। सूर्यभं जी की बात सुनकर उसे बहुत
  1493. 1:13:23तसल्ली [संगीत] हुई। आज फाइनली उसके सबसे
  1494. 1:13:27बड़े सिर दर्द का निपटारा हो गया था। दिल
  1495. 1:13:30ही दिल [संगीत] में तो वह बहुत खुश थी
  1496. 1:13:33लेकिन चेहरे पर उसने कोई एक्सप्रेशन आने
  1497. 1:13:35नहीं दिया। शौर्य ने फोन शिप्रा के हाथ से
  1498. 1:13:39लेकर [संगीत] टेबल पर रखा और उसका हाथ
  1499. 1:13:41छुड़ाकर खिसकते हुए उससे दूर हो गया।
  1500. 1:13:44शिप्रा शौर्य की इस हरकत पर घूर कर उसे
  1501. 1:13:47देखने लगी। क्योंकि इस समय वह शौर्य
  1502. 1:13:50[संगीत] के बहुत पास बैठी हुई थी। उसकी
  1503. 1:13:52निगाह अचानक शौर्य के गाल पर गई। [संगीत]
  1504. 1:13:55उसे उसके गाल पर कुछ निशान नजर आया।
  1505. 1:13:58शिप्रा को समझ नहीं आया कि यह निशान कैसा
  1506. 1:14:01था। वह थोड़ा खिसक कर उसके और करीब
  1507. 1:14:04[संगीत] गई और उसका चेहरा पकड़ कर गौर से
  1508. 1:14:07उसके गाल को देखने लगी। [संगीत]
  1509. 1:14:10शौर्य खुद को छुड़ाने की कोशिश करते हुए
  1510. 1:14:12बोला, "यह तुम क्या कर रही हो? छोड़ो
  1511. 1:14:16मुझे। [संगीत]
  1512. 1:14:17लेकिन शिप्रा कहां शौर्य की कोई बात सुनने
  1513. 1:14:20वाली थी? उसने उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाते
  1514. 1:14:23हुए पूछा। यह तुम्हारे गाल [संगीत] पर
  1515. 1:14:26निशान कैसे हैं? शौर्य का हाथ स्वयं ही
  1516. 1:14:29अपने गाल पर चला गया। वह शिप्रा से नजरें
  1517. 1:14:33चुराते हुए बोला। कौन सा निशान? पता नहीं
  1518. 1:14:37तुम्हें क्या-क्या दिख रहा है। चलो छोड़ो
  1519. 1:14:41मुझे। शिप्रा ने उसे घूरते हुए कहा।
  1520. 1:14:45ज्यादा ड्रामा मत करो। [संगीत] सीधे होकर
  1521. 1:14:48बैठ जाओ और साफ-साफ बताओ। यह थप्पड़ तुमने
  1522. 1:14:51कहां खाया है? यह कहते-कहते अब शिप्रा
  1523. 1:14:54[संगीत] के हावभाव भी बदलते जा रहे थे।
  1524. 1:14:57शौर्य शिप्रा से नजरें मिलाने की हिम्मत
  1525. 1:14:59नहीं जुटा पा रहा था। उसने बचने की
  1526. 1:15:02[संगीत] कोशिश करते हुए कहा, कुछ भी।
  1527. 1:15:06किसने कहा कि मैंने थप्पड़ खाया है?
  1528. 1:15:09शिप्रा ने उसके गाल की [संगीत] तरफ इशारा
  1529. 1:15:11करते हुए कहा, "यह जो तुम्हारे गाल पर
  1530. 1:15:14निशान है, वह किसी के थप्पड़ का है। अब
  1531. 1:15:18बिना किसी [संगीत] ड्रामा के साफ-साफ बताओ
  1532. 1:15:20क्या हुआ था?" इतना कहते हुए शिप्रा ने
  1533. 1:15:24शौर्य का कॉलर पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच
  1534. 1:15:26[संगीत] लिया। शौर्य अपना कॉलर छुड़ाने की
  1535. 1:15:30कोशिश करते हुए बोला, अजीब जबरदस्ती है।
  1536. 1:15:34[संगीत] जब मैं कह रहा हूं कि कुछ भी नहीं
  1537. 1:15:36हुआ तो तुम मान क्यों नहीं रही? और वैसे
  1538. 1:15:39भी तुम तो मुझसे बात नहीं कर रही थी तो अब
  1539. 1:15:42इस जबरदस्ती का क्या मोटिवेशंस [संगीत]
  1540. 1:15:44है? देखा जाए तो शौर्य सच में ड्रामा ही
  1541. 1:15:48कर रहा था। वह सिर्फ खुद [संगीत] को
  1542. 1:15:50शिप्रा से छुड़ाने की कोशिश कर रहा था।
  1543. 1:15:53लेकिन असलियत में वह खुद को छुड़ाने में
  1544. 1:15:55ज्यादा जोर नहीं लगा रहा था। शिप्रा ने
  1545. 1:15:58[संगीत] उसे गहरी नजरों से देखते हुए कहा,
  1546. 1:16:01"अब अगर और ज्यादा ड्रामा किया तो [संगीत]
  1547. 1:16:04एक गाल पर थप्पड़ के निशान है ही। दूसरे
  1548. 1:16:07गाल पर भी निशान छप जाएंगे।" शौर्य
  1549. 1:16:10[संगीत] की आंखें फैल गई। उसने आश्चर्य से
  1550. 1:16:13पूछा,
  1551. 1:16:15"क्या तुम मुझे थप्पड़ मारोगी?"
  1552. 1:16:18शिप्रा [संगीत] ने सख्त निगाहों से उसे
  1553. 1:16:20देखते हुए कहा अगर अब ज्यादा ड्रामा किया
  1554. 1:16:23तो इसलिए [संगीत] शराफत से बता दो कि
  1555. 1:16:26तुम्हारे और कनिका के बीच में क्या बात
  1556. 1:16:28हुई। शौर्य बस खामोशी से उसके चेहरे पर
  1557. 1:16:32बदलते भावों [संगीत] को देखता रहा। इसी
  1558. 1:16:35बीच शिप्रा ने टेबल से कॉफी का एक कप
  1559. 1:16:38उठाया और उसे शौर्य के होठों की तरफ
  1560. 1:16:40[संगीत] बढ़ा दिया। शौर्य ने उसके हाथ से
  1561. 1:16:43कप लेने के लिए अपना हाथ बढ़ाया।
  1562. 1:16:46[संगीत]
  1563. 1:16:46लेकिन शिप्रा ने तुरंत अपना हाथ पीछे कर
  1564. 1:16:48लिया और दोबारा कप उसके होठों की तरफ बढ़ा
  1565. 1:16:51दिया। शौर्य ने बेचारगी से कहा, कप मुझे
  1566. 1:16:56[संगीत] दे दो। मैं खुद पी सकता हूं। इसी
  1567. 1:17:00बीच शौर्य ने टेबल पर पड़े दूसरे कप की
  1568. 1:17:02तरफ अपना हाथ बढ़ाया। जैसे ही शिप्रा ने
  1569. 1:17:06उसे कप की तरफ हाथ बढ़ाते देखा, उसने उसके
  1570. 1:17:09हाथ पर हल्की सी चपत जमा दी। मजबूरन शौर्य
  1571. 1:17:13को अपना हाथ पीछे लेना पड़ा और शिप्रा के
  1572. 1:17:16हाथ से ही [संगीत] कॉफी की चुस्की लेनी
  1573. 1:17:18पड़ी। शौर्य के दो-तीन सिप लेने के बाद
  1574. 1:17:21शिप्रा ने भी उसी [संगीत] कप से खुद कॉफी
  1575. 1:17:23पीना शुरू कर दिया। अब शौर्य बिना कुछ
  1576. 1:17:27बोले बस शिप्रा को देखता रहा। इसी समय
  1577. 1:17:30धड़ाक [संगीत] से केबिन का दरवाजा खुला और
  1578. 1:17:33एक शख्स उस केबिन में दाखिल हुआ। शौर्य और
  1579. 1:17:37शिप्रा दोनों आश्चर्य से उस शख्स [संगीत]
  1580. 1:17:39को देखते रह गए।
  1581. 1:17:41उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह
  1582. 1:17:44शख्स उन्हें यूं अपने सामने देखेगा।
  1583. 1:17:46[संगीत]
  1584. 1:17:47जबकि उस शख्स के चेहरे पर उनसे कहीं
  1585. 1:17:50ज्यादा आश्चर्य नजर आ रहा था। [संगीत]
  1586. 1:17:52उसने भी नहीं सोचा था कि शिप्रा उसे किसी
  1587. 1:17:55और के साथ एक केबिन में इस तरह नजर आएगी।
  1588. 1:17:59आखिर कौन था यह शख्स जो बिना पूछे [संगीत]
  1589. 1:18:02सीधे शिप्रा केबिन में घुस आया था? क्या
  1590. 1:18:05यह शख्स शिप्रा के लिए कोई बड़ी परेशानी
  1591. 1:18:08खड़ी करने वाला हैं कि इंतजार की भी एक
  1592. 1:18:11सीमा होती है [संगीत] और जब वो बर्दाश्त
  1593. 1:18:14से बाहर हो जाए तो उसका परिणाम हमेशा मन
  1594. 1:18:18के मुताबिक नहीं होता। ऐसा ही कुछ उस शख्स
  1595. 1:18:22के साथ हो रहा था जो शिप्रा के कैबिन के
  1596. 1:18:25अंदर जाने के बाद उसके बाहर निकलने का
  1597. 1:18:27इंतजार कर रहा था। अब उससे और इंतजार करना
  1598. 1:18:31मुश्किल होता जा रहा था। जब [संगीत] उसका
  1599. 1:18:34सब्र जवाब देने लगा तो उसने फैसला किया कि
  1600. 1:18:38अब वह खुद कैबिन के अंदर जाकर शिप्रा से
  1601. 1:18:40मिलेगा। उसे पता नहीं था कि उस कैबिन में
  1602. 1:18:43शिप्रा के साथ और कौन है। लेकिन वो यह
  1603. 1:18:46कल्पना नहीं करना चाहता था कि वो किसी
  1604. 1:18:48लड़के के साथ कैबिन के अंदर होगी। आखिरकार
  1605. 1:18:52वो अपनी जगह से [संगीत] उठा और बिना
  1606. 1:18:54दरवाजे पर नॉक किए कैबिन के अंदर चला गया।
  1607. 1:18:58लेकिन अंदर का दृश्य देखकर उसके होश उड़
  1608. 1:19:00गए। शिप्रा शौर्य के साथ एक ही सोफे पर
  1609. 1:19:03बैठी थी और उसके हाथ में कॉफी का कप था
  1610. 1:19:06जिसे वह अपने होठों से लगाने ही जा रही
  1611. 1:19:08थी। अच्छी बात यह थी कि दोनों किसी अजीब
  1612. 1:19:12या आपत्तिजनक [संगीत] स्थिति में नहीं थे।
  1613. 1:19:14हां, एक ही सोफे पर बैठे होने के कारण यह
  1614. 1:19:17जरूर [संगीत] जाहिर हो रहा था कि दोनों एक
  1615. 1:19:20दूसरे के बेहद करीब थे। दूसरी तरफ शौर्य
  1616. 1:19:24और शिप्रा ने भी यह उम्मीद नहीं की थी कि
  1617. 1:19:26कोई यूं बिना दरवाजे पर नॉक किए कैबिन के
  1618. 1:19:29अंदर आ जाएगा।
  1619. 1:19:31दोनों हैरानी से उस आने वाले शख्स को
  1620. 1:19:33देखने लगे। शौर्य तो हैरानी में तुरंत
  1621. 1:19:36अपनी जगह पर खड़ा हो गया। शौर्य ने विराज
  1622. 1:19:39चौहान को यूं अचानक कैबिन के अंदर आया
  1623. 1:19:41देखकर हैरानी से पूछा। मिस्टर विराज आप
  1624. 1:19:45यहां यूं अचानक हां यह शख्स कोई और नहीं
  1625. 1:19:50बल्कि विराज चौहान [संगीत] ही था। उसने
  1626. 1:19:52नहीं सोचा था कि शिप्रा के साथ इस कैबिन
  1627. 1:19:55में जो शख्स होगा वो शौर्य ही होगा।
  1628. 1:19:58शिप्रा भी कॉफी का कप टेबल पर रखते
  1629. 1:20:00[संगीत] हुए अपनी जगह पर खड़ी हो गई और
  1630. 1:20:02आश्चर्य भरे स्वर में बोली मिस्टर विराज
  1631. 1:20:05[संगीत]
  1632. 1:20:06आप अचानक इस कैबिन के अंदर कैसे आ गए।
  1633. 1:20:09विराज को समझ नहीं आया कि इस स्थिति में
  1634. 1:20:11वो [संगीत] दोनों को क्या जवाब दें। फिर
  1635. 1:20:14उसे ध्यान आया कि एक तरफ तो शौर्य कनिका
  1636. 1:20:16[संगीत] से शादी करना चाहता है और दूसरी
  1637. 1:20:19तरफ वो कनिका की दोस्त के साथ ही डेट कर
  1638. 1:20:21रहा है और वह भी उसकी [संगीत] पसंद की
  1639. 1:20:24लड़की के साथ। इसी बात पर गुस्सा करते हुए
  1640. 1:20:27विराज ने शौर्य से कहा, शौर्य, यह क्या
  1641. 1:20:31है? [संगीत] एक तरफ तो तुम्हारे रिश्ते की
  1642. 1:20:33बात कनिका के साथ हो रही है और तुम उसके
  1643. 1:20:35साथ ही धोखा करते हुए उसकी दोस्त के साथ
  1644. 1:20:38डेट कर रहे हो। [संगीत] शौर्य ने तीखे
  1645. 1:20:41स्वर में जवाब दिया। मैं क्या कर रहा हूं?
  1646. 1:20:44यह तो मेरी बात [संगीत] है मिस्टर विराज।
  1647. 1:20:46पर यह आपका कौन सा संस्कार है कि आप यूं
  1648. 1:20:49बिना नॉक किए किसी के प्राइवेट कैबिन के
  1649. 1:20:51अंदर घुस आए? विराज [संगीत] ने बेशर्मी से
  1650. 1:20:54जवाब दिया, "मुझे नहीं पता था कि तुम इस
  1651. 1:20:56कैबिन के अंदर हो।" मैं तो यहां शिप्रा को
  1652. 1:20:59देखकर आया था। शिप्रा ने अपनी नाराजगी
  1653. 1:21:02जाहिर [संगीत] करते हुए पूछा, "मुझे
  1654. 1:21:04देखकर?" पर आपको कैसे पता था कि मैं इस
  1655. 1:21:07कैबिन के अंदर हूं? क्या आप मेरा पीछा कर
  1656. 1:21:10रहे थे? विराज ने तुरंत सफाई देते हुए
  1657. 1:21:13कहा, "तुम गलत समझ रही हो?" [संगीत]
  1658. 1:21:16दरअसल, जब तुम आई थी, उसी समय मैंने
  1659. 1:21:18तुम्हें इस कैबिन में आते देख लिया था।
  1660. 1:21:21मैं [संगीत] बहुत देर से तुम्हारे बाहर
  1661. 1:21:23आने का इंतजार कर रहा था। जब तुम बाहर
  1662. 1:21:25नहीं आई तो मैं [संगीत] ही तुमसे मिलने इस
  1663. 1:21:28कैबिन के अंदर आ गया। शिप्रा ने फिर भी
  1664. 1:21:31उसके बिना नॉक किए अंदर आने पर सवाल उठाते
  1665. 1:21:33हुए कहा, पर इस तरह बिना नॉक किए [संगीत]
  1666. 1:21:37कैबिन के अंदर आना यह तो ठीक बात नहीं है।
  1667. 1:21:40विराज ने अपनी सफाई देते हुए शिप्रा से
  1668. 1:21:43सवाल किया। मैं समझा था कि [संगीत] तुम
  1669. 1:21:45कैबिन के अंदर अकेली हो और किसी का इंतजार
  1670. 1:21:48कर रही हो। इसलिए मैं बिना नॉक [संगीत]
  1671. 1:21:50किए अंदर आ गया था। पर तुम इस कैबिन में
  1672. 1:21:53शौर्य के साथ क्या कर रही हो? विराज का
  1673. 1:21:56सवाल सुनकर शिप्रा थोड़ा नर्वस महसूस करने
  1674. 1:21:59लगी। उसे ऐसा महसूस होने लगा जैसे उसकी
  1675. 1:22:03कोई चोरी पकड़ी गई हो। वो सोचने लगी कि
  1676. 1:22:06विराज को क्या जवाब दे? तभी शौर्य ने उसे
  1677. 1:22:09जवाब देने का मौका दिए बिना उसके करीब
  1678. 1:22:12जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे अपने
  1679. 1:22:14करीब खींचते हुए बोला क्यों यह मेरे साथ
  1680. 1:22:19है तो आपको क्या दिक्कत है मिस्टर विराज
  1681. 1:22:21हम एक दूसरे को डेट कर रहे हैं तो एक साथ
  1682. 1:22:24होना तो बनता है शिप्रा शौर्य से छिटक कर
  1683. 1:22:27दूर जाना चाहती थी लेकिन शौर्य ने मजबूती
  1684. 1:22:30से उसके कंधे को पकड़े [संगीत] रखा शिप्रा
  1685. 1:22:33के चेहरे पर उलझन के भाव आ गए विराज ने
  1686. 1:22:37तल्ख लहजे में कहा मैं तुमसे सवाल नहीं कर
  1687. 1:22:40रहा जो तुम जवाब दे [संगीत] रहे हो। तुम
  1688. 1:22:43इस लायक नहीं हो कि शिप्रा जैसी लड़की
  1689. 1:22:45तुम्हें डेट करे। फिर वो शिप्रा की तरफ
  1690. 1:22:48मुड़कर बोला शिप्रा तुम इस फ्रॉड [संगीत]
  1691. 1:22:52लड़के से सतर्क रहो। यह एक बहुत बड़ा
  1692. 1:22:55धूर्त है। एक ही समय में यह [संगीत] एक
  1693. 1:22:58तरफ तो कनिका के साथ शादी करना चाहता है
  1694. 1:23:02और दूसरी तरफ तुमको डेट करने की कोशिश
  1695. 1:23:04[संगीत] भी कर रहा है। विराज की बात सुनकर
  1696. 1:23:08शिप्रा के चेहरे पर असमंजस के भाव आ गए।
  1697. 1:23:11वो विराज के सामने गलत नहीं दिखना चाहती
  1698. 1:23:14थी। दूसरी तरफ वो यह भी नहीं समझ [संगीत]
  1699. 1:23:17पा रही थी कि इस स्थिति में शौर्य उससे
  1700. 1:23:21क्या उम्मीद कर रहा था। जिस तरह शौर्य
  1701. 1:23:24[संगीत] बेशर्मी से विराज के सामने यह
  1702. 1:23:26दिखाने की कोशिश कर रहा था कि वे दोनों
  1703. 1:23:29डेट कर रहे हैं, उसका कोई [संगीत] औचित्य
  1704. 1:23:31शिप्रा को समझ नहीं आ रहा था। इसलिए उसने
  1705. 1:23:34सोचा कि वह खामोश ही रहेगी। और शौर्य खुद
  1706. 1:23:38विराज को जवाब [संगीत] देगा। शौर्य ने
  1707. 1:23:41विराज से चिढ़े हुए स्वर में कहा। मैं किस
  1708. 1:23:44लायक हूं इसका सर्टिफिकेट मुझे आपसे नहीं
  1709. 1:23:47[संगीत] चाहिए। विराज अच्छा यह होगा कि आप
  1710. 1:23:50यहां से चले जाइए और हमारे रोमांटिक पल को
  1711. 1:23:53बर्बाद मत कीजिए। विराज ने गुस्से में
  1712. 1:23:56शौर्य को घूरते हुए कहा तुमने देख लिया
  1713. 1:23:59शिप्रा इस आदमी की बेशर्मी को। [संगीत]
  1714. 1:24:02अभी कल ही यह हम लोगों के साथ कनिका से
  1715. 1:24:04मिलने आया था ताकि वह इसको पसंद कर ले। पर
  1716. 1:24:08एक दिन बाद ही यह तुम्हारे साथ डेट पर
  1717. 1:24:10होने की बात कर रहा है। इसी से तुम
  1718. 1:24:13[संगीत] इसके चरित्र को समझ सकती हो कि यह
  1719. 1:24:15तुम्हारे साथ कितना लॉयल रह सकता है।
  1720. 1:24:18शौर्य ने तीखे स्वर में विराज को चेतावनी
  1721. 1:24:21देते हुए कहा। मिस्टर विराज आपने पहले ही
  1722. 1:24:25बिना नॉक किए मेरे कैबिन में आकर अपने
  1723. 1:24:27गिरे हुए चरित्र का परिचय दे दिया है। अब
  1724. 1:24:30अगर आप यहां से तुरंत गए नहीं तो मैं
  1725. 1:24:33सिक्योरिटी के लोगों को बुलवाकर आपको
  1726. 1:24:35धक्के देकर यहां से बाहर करवा दूंगा।
  1727. 1:24:38इसलिए आप बिना एक भी पल की देरी किए मेरे
  1728. 1:24:41रिजर्व कैबिन से बाहर चले जाइए। शौर्य को
  1729. 1:24:44विराज का यहां आना बिल्कुल भी अच्छा नहीं
  1730. 1:24:46लगा था। उसके और शिप्रा के बीच जब सब कुछ
  1731. 1:24:50बढ़िया चल रहा था। [संगीत] उसी समय उसका
  1732. 1:24:53यहां आ जाना रंग में भंग डालने जैसा था।
  1733. 1:24:56अगर वह यहां नहीं आया होता तो अब तक शायद
  1734. 1:24:59शिप्रा अपनी नाराजगी भूलकर उसकी बाहों में
  1735. 1:25:02[संगीत] होती। शौर्य की बात सुनकर विराज
  1736. 1:25:06के पूरे शरीर में गुस्से की लहर दौड़ गया।
  1737. 1:25:09उसका मन किया कि वह आगे बढ़े और शौर्य के
  1738. 1:25:12शरीर पर एक तेज घूंसा जमा दे। उसे खुद पर
  1739. 1:25:16[संगीत] एक मार्शल आर्ट फाइटर होने का
  1740. 1:25:18बड़ा घमंड था। उसने सोच लिया था कि एक दिन
  1741. 1:25:22वह [संगीत] अपने घूंसे से शौर्य की हड्डी
  1742. 1:25:24पसली जरूर तोड़ेगा। अभी तो उसे शिप्रा की
  1743. 1:25:27चिंता थी कि कहीं वह शौर्य [संगीत] की
  1744. 1:25:29बातों में ना आ जाए। वो अभी तक यही समझ
  1745. 1:25:32रहा था कि शिप्रा जो यह [संगीत] सब कर रही
  1746. 1:25:35थी वो कनिका के कहने पर ही कर रही थी।
  1747. 1:25:38क्योंकि कनिका का पहले यही प्लान था कि
  1748. 1:25:41[संगीत] वह शौर्य और शिप्रा को करीब ले आए
  1749. 1:25:43और अपने दादाजी को बताएं कि शौर्य का पहले
  1750. 1:25:46से [संगीत] ही किसी दूसरी लड़की के साथ
  1751. 1:25:48अफेयर है। जिससे उसके दादाजी शौर्य के साथ
  1752. 1:25:52कनिका की होने वाली इंगेजमेंट तोड़ दें।
  1753. 1:25:55लेकिन उसके दादाजी के कनिका द्वारा कुणाल
  1754. 1:25:57[संगीत]
  1755. 1:25:58या शौर्य में से किसी एक को पसंद करने की
  1756. 1:26:00बात मान जाने के कारण वह मसला तो पहले ही
  1757. 1:26:03हल हो गया था। [संगीत]
  1758. 1:26:05यह बात शिप्रा को तो पता नहीं होगी। इसलिए
  1759. 1:26:08वह अभी तक कनिका की [संगीत] बात को सच
  1760. 1:26:10करने में लगी हुई है। विराज को शिप्रा के
  1761. 1:26:14लिए बुरा लग रहा था। [संगीत] इस बेचारी को
  1762. 1:26:16कनिका के कारण शौर्य की डेट बनने के लिए
  1763. 1:26:19मजबूर होना पड़ रहा था। विराज ने शिप्रा
  1764. 1:26:22के करीब जाते हुए कहा, शिप्रा तुम्हें
  1765. 1:26:26शौर्य [संगीत] के साथ प्यार करने का
  1766. 1:26:28ड्रामा करने की अब कोई जरूरत नहीं है।
  1767. 1:26:31इसका खेल पहले [संगीत] ही खराब हो चुका
  1768. 1:26:33है। इसलिए अब तुमको इससे मिलने की कोई
  1769. 1:26:36जरूरत नहीं है।
  1770. 1:26:38इतना कहते हुए विराज ने शिप्रा का हाथ
  1771. 1:26:40पकड़ा और उसे इस केबिन से बाहर ले जाना
  1772. 1:26:43चाहा। लेकिन शौर्य शिप्रा के सामने आकर
  1773. 1:26:46दीवार बनकर खड़ा हो गया। शौर्य ने विराज
  1774. 1:26:50की छाती पर अपना हाथ टिकाते हुए चेतावनी
  1775. 1:26:53भरे स्वर में कहा। लगता है तुम्हें मेरा
  1776. 1:26:56सम्मान देना रास नहीं आ रहा है। इसलिए
  1777. 1:26:59अपनी बेइज्जती करवा कर ही मानोगे। विराज
  1778. 1:27:02जहां का तहां ठिटक गया। शौर्य को विराज
  1779. 1:27:06पहले से ही पसंद नहीं था। अब जबकि उसका
  1780. 1:27:09कनिका के साथ का मामला निपट गया था तो उसे
  1781. 1:27:12विराज के सामने अच्छा बनने की कोशिश करने
  1782. 1:27:14की भी कोई जरूरत नहीं थी। शौर्य की बात
  1783. 1:27:18सुनकर विराज का पारा और हाई हो गया। उसका
  1784. 1:27:21मन किया कि वह यहीं शौर्य को धूल चटा दे।
  1785. 1:27:25लेकिन इसी समय अचानक फिर से कैबिन का
  1786. 1:27:27दरवाजा खुला और दिलीप कामत [संगीत] उस
  1787. 1:27:30कैबिन के अंदर दाखिल हुआ।
  1788. 1:27:32रूपा पहले से ही शौर्य के कैबिन पर नजर
  1789. 1:27:35गड़ाए हुए थी। उसने विराज को शौर्य के
  1790. 1:27:38कैबिन में बिना इजाजत के जाते देख लिया
  1791. 1:27:41था। इसलिए उसने जल्दी से दिलीप कामत को
  1792. 1:27:44वहां भेज दिया था। [संगीत] शौर्य ने दिलीप
  1793. 1:27:47कामत को कैबिन के अंदर आया देखकर कहा
  1794. 1:27:50मिस्टर कामत अच्छा हुआ जो आप यहां आ गए।
  1795. 1:27:54अब जरा इन महोदय को शराफत से होटल के बाहर
  1796. 1:27:57[संगीत] छोड़ आइए।
  1797. 1:27:59इनको बड़ा ही शौक है किसी और के प्राइवेट
  1798. 1:28:02कैबिन में ताकझाक करने का। दिलीप कामत
  1799. 1:28:05विराज की तरफ बढ़ा। लेकिन उससे पहले ही
  1800. 1:28:08विराज उससे छिटकते हुए बोला, कोई जरूरत
  1801. 1:28:11नहीं है मुझे पकड़ने की। मैं खुद ही यहां
  1802. 1:28:14से जाता हूं। इतना कहकर विराज कैबिन से
  1803. 1:28:17बाहर की तरफ बढ़ गया। लेकिन जाते-जाते वो
  1804. 1:28:21शिप्रा को सलाह देना नहीं भूला। विराज ने
  1805. 1:28:24शिप्रा की तरफ देखकर कहा, मिस शिप्रा अब
  1806. 1:28:28तुम्हें इस फटीचर को झेलने की कोई जरूरत
  1807. 1:28:31नहीं है। तुम जितनी जल्दी हो सके इसको
  1808. 1:28:34छोड़कर यहां से चले जाओ। शिप्रा अपने
  1809. 1:28:37चेहरे पर मासूमियत के भाव लिए विराज को
  1810. 1:28:40जाते हुए देखती रही। दिलीप कामत भी विराज
  1811. 1:28:44के पीछे कैबिन [संगीत] से बाहर जाने लगा।
  1812. 1:28:47तभी शौर्य ने उसे आवाज देते हुए कहा,
  1813. 1:28:50"मिस्टर कामत, आप जाते हुए दो कॉफी और दो
  1814. 1:28:53प्लेट पास्ता भिजवा दीजिएगा।"
  1815. 1:28:56दिलीप कामत ने सहमति में सिर हिलाया।
  1816. 1:28:59शौर्य की आवाज विराज के कानों में भी
  1817. 1:29:01पड़ी। उसने पलट कर खूंखार नजरों से शौर्य
  1818. 1:29:05को घूरा और फिर कैबिन से बाहर चला गया। अब
  1819. 1:29:09कैबिन में शौर्य और शिप्रा अकेले रह गए
  1820. 1:29:11थे। दोनों को समझ नहीं आ रहा था कि अब इस
  1821. 1:29:15अजीब स्थिति से बाहर कैसे आए। शौर्य
  1822. 1:29:18दोबारा अपने सोफे पर बैठ गया। शिप्रा भी
  1823. 1:29:21वापस जाकर शौर्य के सामने वाले सोफे पर
  1824. 1:29:24बैठ गई। शौर्य ने घूर कर शिप्रा [संगीत]
  1825. 1:29:27की तरफ देखा जैसे उससे पूछ रहा हो कि अब
  1826. 1:29:30वह वापस दूसरे सोफे पर क्यों चली गई। अभी
  1827. 1:29:34तो विराज के आने से पहले वो जबरदस्ती अपने
  1828. 1:29:37हाथों से उसे कॉफी पिला रही थी। लेकिन अब
  1829. 1:29:40[संगीत] विराज के जाते ही फिर से अपने
  1830. 1:29:42पुराने अवतार में क्यों चली गई? शौर्य से
  1831. 1:29:45रहा नहीं गया तो उसने [संगीत] पूछ ही लिया
  1832. 1:29:48यह क्या है? अभी थोड़ी देर पहले विराज जब
  1833. 1:29:51यहां नहीं था तब जबरदस्ती [संगीत] मुझे
  1834. 1:29:54अपने हाथ से कॉफी पिला रही थी और अब विराज
  1835. 1:29:57के यहां से जाते ही पलट गई। शिप्रा ने
  1836. 1:29:59तिरछी नजरों से शौर्य को देखते हुए कहा
  1837. 1:30:03क्यों? सुना नहीं कि वह क्या कह कर गया
  1838. 1:30:06है। अब मुझे यह ड्रामा करने की कोई जरूरत
  1839. 1:30:09नहीं है। कनिका को मुझसे जो काम था उसका
  1840. 1:30:13मसला हल हो गया है। इसलिए अब मुझे
  1841. 1:30:15तुम्हारे [संगीत] साथ प्यार करने का
  1842. 1:30:17ड्रामा करने की कोई जरूरत नहीं है। इसलिए
  1843. 1:30:20मुझे तुमसे दूर ही रहना चाहिए। शौर्य
  1844. 1:30:23हैरानी से मुंह बाएं शिप्रा के इस बदले
  1845. 1:30:25रूप को देखता रह गया। वो समझ गया कि
  1846. 1:30:28शिप्रा अब जानबूझकर उसके साथ शरारत कर रही
  1847. 1:30:31है। लेकिन वह भी [संगीत] अब अपने मन की
  1848. 1:30:34करने की ठान चुका था। वो अपनी जगह से उठा
  1849. 1:30:37और जाकर शिप्रा के सोफे पर बैठ गया।
  1850. 1:30:40शिप्रा खिसक कर सोफे के किनारे पर चली गई।
  1851. 1:30:44शौर्य ने शिकायती लहजे में कहा। अब तुम
  1852. 1:30:47अपना यह ड्रामा बंद करोगी। तुम सुबह से ही
  1853. 1:30:51मुझे बहुत सता रही हो। यह ठीक नहीं
  1854. 1:30:53[संगीत] है। एक पल को आकर मेरी भावनाएं
  1855. 1:30:56भड़का देती हो और फिर दूर हो जस्ती हो।
  1856. 1:31:00दूसरी तरफ विराज होटल [संगीत] से बाहर चला
  1857. 1:31:02तो गया था लेकिन उसके मन में शौर्य को
  1858. 1:31:05लेकर गुस्सा भरा हुआ था। वो शिप्रा को
  1859. 1:31:08शौर्य के पास से निकालना [संगीत] चाहता
  1860. 1:31:10था। उसे कनिका पर भी बहुत गुस्सा आ रहा
  1861. 1:31:13था। आज अगर शिप्रा [संगीत] शौर्य के साथ
  1862. 1:31:16थी तो वह सिर्फ कनिका के कारण ही थी। अब
  1863. 1:31:19अगर शिप्रा को शौर्य से दूर करना है तो
  1864. 1:31:22कनिका ही यह काम [संगीत] कर सकती थी। यही
  1865. 1:31:25सोचकर विराज ने अपना फोन निकाला और कनिका
  1866. 1:31:28को फोन लगाने लगा। अब आगे क्या होगा?
  1867. 1:31:31[संगीत]
  1868. 1:31:32क्या करेगी कनिका शिप्रा को शौर्य से दूर
  1869. 1:31:35करने के लिए? क्या कनिका शिप्रा को विराज
  1870. 1:31:38के करीब लाई सबसे ज्यादा दुखी कब होता है?
  1871. 1:31:42वह तब ज्यादा दुखी नहीं होता जब [संगीत]
  1872. 1:31:44उसकी कोई बहुमूल्य चीज उसके सामने तो होती
  1873. 1:31:48है लेकिन उसे मिलती नहीं बल्कि असली तकलीफ
  1874. 1:31:52तब होती है जब कोई बहुमूल्य चीज उसे ना
  1875. 1:31:55मिलकर उसके किसी दोस्त या दुश्मन के पास
  1876. 1:31:58चली जाए और वह दूर से बस उसे देखता रह
  1877. 1:32:01जाए। कुछ ऐसा ही हाल इस समय विराज का था।
  1878. 1:32:06शिप्रा की खूबसूरती का वह दीवाना हो गया
  1879. 1:32:09था। लेकिन इस समय शिप्रा उसके पास ना होकर
  1880. 1:32:13शौर्य के पास थी। जो बात उसे अंदर तकलीफ
  1881. 1:32:17दे रही थी। उस लड़की में वह सब कुछ था
  1882. 1:32:20जिसकी ख्वाहिश विराज कर सकता था। लेकिन वो
  1883. 1:32:24लड़की भी उससे दूर जाती हुई प्रतीत हो रही
  1884. 1:32:27थी। और इसका सबसे बड़ा दोषी उसकी नजर में
  1885. 1:32:31कनिका थी। उसने कनिका को फोन लगाया। दो
  1886. 1:32:35रिंग के बाद ही कनिका ने फोन उठा लिया।
  1887. 1:32:37कनिका ने सहजता से पूछा हां विराज भाई
  1888. 1:32:41कहिए कैसे फोन किया विराज की आवाज में
  1889. 1:32:44कड़वाहट साफ नजर आ रही थी उसने [संगीत]
  1890. 1:32:47पूछा तुम्हें पता है इस समय मैं कहां हूं
  1891. 1:32:50कनिका के माथे पर बल पड़ गए उसने मन ही मन
  1892. 1:32:54सोचा अब इनको क्या हो गया है फिर खुद को
  1893. 1:32:57व्यवस्थित करते हुए धैर्य से बोली क्या
  1894. 1:33:00हुआ है आपकी आवाज से लग रहा है कि आपकी
  1895. 1:33:03स्थिति कुछ ठीक नहीं है वैसे आप ही बता
  1896. 1:33:06दीजिए कि इस समय आप कहां हैं? विराज की
  1897. 1:33:08आवाज में तड़प साफ नजर आ रही थी। उसने
  1898. 1:33:11कहा, तो सुनो इस समय मैं होटल पैराडाइज के
  1899. 1:33:15बाहर हूं या यूं कहूं कि होटल से बाहर कर
  1900. 1:33:18दिया गया हूं। और [संगीत] जानती हो ऐसा
  1901. 1:33:21किसके कारण हुआ है? किसी अनजान आशंका के
  1902. 1:33:25तहत कनिका के मन में कई ख्याल आने जाने
  1903. 1:33:28लगे। उसने बेचैनी से पूछा, "क्या हुआ है?
  1904. 1:33:32आप साफ-साफ बताइए।"
  1905. 1:33:34विराज गुस्से में आग उगलता हुआ बोला। उस
  1906. 1:33:38शौर्य की इतनी हिम्मत हो गई है कि उसने
  1907. 1:33:40मुझे होटल से बाहर करवा दिया। उसको मैंने
  1908. 1:33:43छठी का दूध याद ना दिलाया तो मेरा नाम
  1909. 1:33:45विराज चौहान नहीं। जो आशंका कनिका के
  1910. 1:33:49दिमाग में जन्म ले रही थी, वह सच साबित हो
  1911. 1:33:51गई। विराज के उखड़े मिजाज के पीछे शौर्य
  1912. 1:33:54ही था। लेकिन उसे यह समझ नहीं आया कि
  1913. 1:33:58शौर्य ने आखिर विराज को होटल से बाहर कैसे
  1914. 1:34:00करवा दिया। कनिका ने उलझन भरे स्वर में
  1915. 1:34:03पूछा, विराज भाई, आप साफ-साफ बताएंगे कि
  1916. 1:34:07आखिर ऐसा क्या हुआ जो शौर्य ने आपको होटल
  1917. 1:34:10से बाहर करवा दिया? विराज ने गहरी सांस
  1918. 1:34:14लेते हुए कहा, ठीक है। तो फिर सुनो कि
  1919. 1:34:17यहां क्या हुआ है। इसके बाद विराज ने
  1920. 1:34:20कनिका को बताया कि वह किस [संगीत] तरह
  1921. 1:34:22होटल के अंदर चला गया था। कैसे वह केबिन
  1922. 1:34:25के अंदर पहुंचा और किस तरह शौर्य [संगीत]
  1923. 1:34:28ने सिक्योरिटी स्टाफ से उसे होटल से बाहर
  1924. 1:34:30कर देने को कह दिया था। सब कुछ सुनकर
  1925. 1:34:33कनिका का दिमाग भी खराब होने लगा। [संगीत]
  1926. 1:34:36उसने भी सोचा कि उसके द्वारा शौर्य के
  1927. 1:34:39रिश्ते से मना कर देने के बाद अब वह अपनी
  1928. 1:34:41औकात दिखाने लगा है। उसने जानबूझकर विराज
  1929. 1:34:45भाई को बेइज्जत करने की कोशिश की होगी।
  1930. 1:34:48उसने भी मन ही मन ठान लिया कि [संगीत] वह
  1931. 1:34:50उसे एक दिन सबक तो जरूर सिखाएगी। लेकिन
  1932. 1:34:53इसके साथ ही उसने यह भी सोचा [संगीत] कि
  1933. 1:34:55विराज भाई को किसी के पर्सनल मैटर में
  1934. 1:34:58घुसने की क्या जरूरत थी। आखिरकार वो बोल
  1935. 1:35:01ही पड़ी। विराज भाई आपको भी उसके [संगीत]
  1936. 1:35:04केबिन में घुसने से पहले दरवाजे पर नॉक
  1937. 1:35:07करना चाहिए था। विराज ने अपनी गलती मानते
  1938. 1:35:10हुए कहा। समझता हूं पर मैंने तो ऐसा सोचा
  1939. 1:35:14ही नहीं था। मुझे लगा था कि शिप्रा उस
  1940. 1:35:16केबिन में अकेली [संगीत] है। मैं शौर्य के
  1941. 1:35:19साथ उसकी कल्पना भी नहीं कर सकता था। यह
  1942. 1:35:22सब तेरी [संगीत] गलती है। तुम्हारे उकसावे
  1943. 1:35:25के कारण ही आज शिप्रा शौर्य को डेट करने
  1944. 1:35:27लगी है। कनिका [संगीत] ने हैरानी से अपनी
  1945. 1:35:30सफाई देते हुए कहा। मैंने इसमें मैंने
  1946. 1:35:34क्या किया है? [संगीत] भला मैं क्यों
  1947. 1:35:36चाहूंगी कि शिप्रा शौर्य को डेट करे।
  1948. 1:35:39विराज ने उसे [संगीत] याद दिलाते हुए कहा,
  1949. 1:35:42"तुम यह बात इतनी जल्दी भूल कैसे सकती
  1950. 1:35:44हो?" तुम भूल गई जब तुमने [संगीत] शिप्रा
  1951. 1:35:47को शौर्य के साथ प्यार की पींगे बढ़ाने के
  1952. 1:35:50लिए कहा था, ताकि तुम उसे आधार बनाकर
  1953. 1:35:53शौर्य के साथ अपनी एंगेजमेंट तोड़ [संगीत]
  1954. 1:35:55सको। उसके बाद ही तो शिप्रा शौर्य को डेट
  1955. 1:35:58करने लगी होगी। अब तुम सबसे पहला काम यह
  1956. 1:36:02करो कि उसे शौर्य की असलियत [संगीत] बताओ
  1957. 1:36:04और उसे शौर्य से दूर रहने को बोलो। अब वो
  1958. 1:36:08एक पल के लिए भी शिप्रा को शौर्य के साथ
  1959. 1:36:11देखना नहीं चाहता था। [संगीत] कनिका को भी
  1960. 1:36:13एहसास हुआ कि विराज भाई शायद सही कह रहे
  1961. 1:36:16हैं। उसने ही तो शिप्रा को बुलाकर शौर्य
  1962. 1:36:19को अपने प्यार के चक्कर में उलझाने को कहा
  1963. 1:36:22था। बेचारी शिप्रा उसके चक्कर में उस ठरकी
  1964. 1:36:25आदमी के फंदे में फंस गई थी। कनिका ने
  1965. 1:36:28विराज को तसल्ली देते हुए कहा। आप चिंता
  1966. 1:36:32ना करें विराज भाई। मैं शिप्रा से बात
  1967. 1:36:34करके उसे समझाती हूं। [संगीत] वह मेरा कहा
  1968. 1:36:38जरूर समझ जाएगी। विराज ने जल्दी करने की
  1969. 1:36:41हिदायत देते हुए कहा, हां, जितनी जल्दी
  1970. 1:36:44उसे शौर्य की असलियत बता दोगी, उतना अच्छा
  1971. 1:36:47होगा। और एक [संगीत] बात तुम्हें मेरे लिए
  1972. 1:36:50शिप्रा से बात करनी पड़ेगी। कनिका के माथे
  1973. 1:36:53पर फिर बल पड़ गए। उसने हिम्मत करके पूछा,
  1974. 1:36:57"मुझे शिप्रा से आपके बारे में क्या
  1975. 1:36:59[संगीत] बात करनी पड़ेगी?"
  1976. 1:37:01विराज ने झुंझलाते हुए कहा, "तुम इतनी
  1977. 1:37:04बेवकूफ हो क्या जो इतनी छोटी सी बात भी
  1978. 1:37:07तुम्हें समझानी पड़ेगी? देखो, मुझे
  1979. 1:37:10तुम्हारी वो [संगीत] दोस्त बहुत पसंद है।
  1980. 1:37:12मैं उसे तुम्हारी भाभी बनाना चाहता हूं।
  1981. 1:37:15इतना काम तो तुम मेरे लिए कर ही [संगीत]
  1982. 1:37:17सकती हो। बोलते हुए विराज की आवाज में
  1983. 1:37:20उम्मीद साफ नजर आ रही थी कि [संगीत] कनिका
  1984. 1:37:23उसका यह काम आसानी से कर देगी। अब जाकर
  1985. 1:37:26कनिका को भी एहसास हुआ कि उसका विराज भाई
  1986. 1:37:29शिप्रा को लेकर कुछ ज्यादा ही सीरियस हो
  1987. 1:37:32गया है। वैसे तो शिप्रा कनिका की पुरानी
  1988. 1:37:34दोस्त [संगीत] थी और उसे शिप्रा पसंद भी
  1989. 1:37:37थी। उसे भी लगा कि अगर सच में शिप्रा और
  1990. 1:37:40विराज भाई एक हो जाते हैं तो कितना अच्छा
  1991. 1:37:42[संगीत] होगा। इस एक सोच से उसका दिल जोर
  1992. 1:37:47से मचल गया। वो विराज को उम्मीद बंधाते
  1993. 1:37:50हुए बोली। तो यह बात है। मेरी उस दोस्त ने
  1994. 1:37:54लगता है आपके दिल पर कुछ ज्यादा ही गहरा
  1995. 1:37:56असर कर दिया है। विराज ने उम्मीद भरे स्वर
  1996. 1:37:59में कहा, बात तो 16 आने सच है। अब जो करना
  1997. 1:38:04है वह तुमको ही करना है। इतना तो तुम
  1998. 1:38:07समझती ही हो। कनिका ने हामी भरते हुए कहा।
  1999. 1:38:11ठीक है। ठीक है। मैं पूरी कोशिश करूंगी।
  2000. 1:38:14मैं सबसे पहले शिप्रा को ही शौर्य से अलग
  2001. 1:38:16करूंगी। इसके बाद उसने विराज का फोन काट
  2002. 1:38:19दिया। दूसरी तरफ शौर्य अभी भी शिप्रा के
  2003. 1:38:23साथ उसी कैबिन में था। वो देख रहा था कि
  2004. 1:38:26किस [संगीत] तरह शिप्रा कनिका की बात को
  2005. 1:38:28लेकर उसके मजे ले रही थी। एक बार फिर वेटर
  2006. 1:38:32कॉफी के साथ दो प्लेट में पास्ता सर्व
  2007. 1:38:35करके चला गया था। शौर्य ने अपना कप उठाया
  2008. 1:38:38[संगीत] और जल्दी से कॉफी पीने लगा। अचानक
  2009. 1:38:41उसे जहांगीर खान का ध्यान आ गया। उसने
  2010. 1:38:44सोचा अगर वह आज भी जहांगीर खान के पास
  2011. 1:38:47जाकर उस आदमी के बारे में पता नहीं कर
  2012. 1:38:50पाया जिसने जहांगीर खान को उसे मारने की
  2013. 1:38:53सुपारी दी है तो फिर उसे कई दिनों तक समय
  2014. 1:38:56नहीं मिलने वाला क्योंकि कल से उसने अगले
  2015. 1:38:5910 दिनों [संगीत] के लिए रत्नाकर शेट्टी
  2016. 1:39:01को अपना समय दे दिया था इसलिए उसके पास
  2017. 1:39:04सिर्फ आज का दिन ही था। शौर्य वापस अपने
  2018. 1:39:07सोफे पर आ गया। उसे वापस अपने सोफे पर
  2019. 1:39:10जाते देखकर शिप्रा आश्चर्य से उसकी तरफ
  2020. 1:39:13देखने लगी। उसे तो लगा था कि अब शौर्य
  2021. 1:39:17इतनी आसानी से हार नहीं मानेगा। लेकिन वो
  2022. 1:39:20तो बिना कोई कोशिश किए ही [संगीत] वापस
  2023. 1:39:22अपने सोफे पर चला गया। वो चिढ़ाने वाले
  2024. 1:39:25अंदाज में शौर्य से बोली। मेरे सोफे पर तो
  2025. 1:39:29ऐसे आए थे जैसे पता नहीं क्या कर लोगे। पर
  2026. 1:39:32जल्दी ही समझ गए कि अब तुम्हारी दाल नहीं
  2027. 1:39:35गलने वाली। शौर्य बेचारगी से बोला अब रहने
  2028. 1:39:39भी दो। मेरे पास आने पर ऐसी दुबक कर सोफे
  2029. 1:39:42के किनारे पर चली गई कि अगर मैं और
  2030. 1:39:45तुम्हारे पास आता तो कहीं तुम सोफे से
  2031. 1:39:47नीचे ही ना गिर जाती। अब मेरा तुम्हें
  2032. 1:39:50जमीन पर गिराने का कोई इरादा नहीं है। तुम
  2033. 1:39:53ही खुश रहो। अब तो मुझे यह देखने की आदत
  2034. 1:39:56हो गई है। बेचारे हम मर्दों की किस्मत में
  2035. 1:39:59तो सताया जाना ही लिखा है। शिप्रा अपने
  2036. 1:40:02होठों में बुदबुदाई।
  2037. 1:40:04मेरी तो किस्मत ही खराब है। कैसे लल्लू
  2038. 1:40:07आदमी से पाला पड़ा है। इसकी जगह लड़का तो
  2039. 1:40:11मुझे होना चाहिए था। क्योंकि शौर्य को अब
  2040. 1:40:14शैडो बॉक्सर क्लब के लिए भी निकलना था।
  2041. 1:40:16इसलिए उसने शिप्रा से बहस करने का विचार
  2042. 1:40:19त्याग दिया। जबकि शौर्य का उदासीन रवैया
  2043. 1:40:22देखकर शिप्रा को अपने दिल में एक सुई की
  2044. 1:40:25चुभन सी महसूस हुई। वो एक टक शौर्य
  2045. 1:40:28[संगीत] को देख रही थी। लेकिन शौर्य बिना
  2046. 1:40:30उसकी तरफ देखे अपना पास्ता खत्म करने में
  2047. 1:40:33लगा था। शिप्रा ने तंज कसते हुए कहा, कोई
  2048. 1:40:38तुम्हारी प्लेट तुमसे यहां छीनने वाला
  2049. 1:40:39नहीं है। तुम आराम से खा सकते हो। शौर्य
  2050. 1:40:43ने उसे नजरअंदाज करते हुए कहा, अब तो किसी
  2051. 1:40:47पर भरोसा भी नहीं रहा। क्या पता किसी की
  2052. 1:40:49नजर ही लग जाए। वैसे भी मुझे कहीं जल्दी
  2053. 1:40:53पहुंचना है। शिप्रा ने असमंजस भरे स्वर
  2054. 1:40:56में पूछा।
  2055. 1:40:58अब अचानक तुम्हें कहां जाना है? पहले तो
  2056. 1:41:00तुमने इस बारे में बताया नहीं था। शौर्य
  2057. 1:41:03हल्की मुस्कान के साथ बोला, अब बता रहा
  2058. 1:41:07हूं ना। तुमको कहीं छोड़ना है तो बता दो।
  2059. 1:41:10अरे नहीं वैसे भी तुम [संगीत] तो अपनी कार
  2060. 1:41:13से हो। इसलिए इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।
  2061. 1:41:16शिप्रा ने कॉफी तो पी ली थी लेकिन उसने
  2062. 1:41:19[संगीत] पास्ता खाना शुरू नहीं किया था।
  2063. 1:41:22शौर्य ने उसके सामने रखी प्लेट को वैसे ही
  2064. 1:41:25देखा तो बोला अब तुम किसका इंतजार कर रही
  2065. 1:41:28हो? [संगीत] जल्दी से खा लो नहीं तो ठंडा
  2066. 1:41:31होने के बाद अच्छा नहीं लगेगा। शिप्रा ने
  2067. 1:41:34तंज भरे स्वर में कहा मैं खाऊं या ना खाऊं
  2068. 1:41:38इससे किसी को क्या ही फर्क पड़ेगा। तुमने
  2069. 1:41:41खा लिया ना? शिप्रा की तंज भरी बातें
  2070. 1:41:44शौर्य को बेचैन करने के लिए काफी थी।
  2071. 1:41:48शौर्य ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा।
  2072. 1:41:51तुम्हें पता है कभी-कभी [संगीत] ना तुम
  2073. 1:41:54मुझे एकदम समझ में नहीं आती। सब कुछ अच्छा
  2074. 1:41:57चल रहा होता है [संगीत] और अचानक तुम्हारा
  2075. 1:41:59मूड बिगड़ जाता है। या यूं कहूं कि तुम तो
  2076. 1:42:03मुझसे बातें करना ही बंद कर देती हो। इससे
  2077. 1:42:06अच्छे तो हम पहले ही थे। चलो [संगीत] हम
  2078. 1:42:10फिर से पहले वाली स्थिति को बहाल कर लेते
  2079. 1:42:12हैं। ना हम दोनों एक दूसरे से कोई उम्मीद
  2080. 1:42:15रखेंगे और ना ही यह जानने की कोशिश करेंगे
  2081. 1:42:18[संगीत] कि कौन क्या कर रहा है। शिप्रा
  2082. 1:42:22उसकी तरफ घूरती रही। शौर्य ने उसे चुपचाप
  2083. 1:42:25अपनी तरफ घूरते [संगीत] देखकर कहा। अब इस
  2084. 1:42:28बात पर हाथ तो मिलाओ। शिप्रा किसी छोटी
  2085. 1:42:31[संगीत] बच्ची की तरह तुनकते हुए बोली।
  2086. 1:42:34तुम तो ऐसा ही चाहोगे क्योंकि उसके बाद
  2087. 1:42:37तुम्हें दूसरी लड़कियों के पास जाने का
  2088. 1:42:39लाइसेंस मिल जाएगा [संगीत] ना। शौर्य ने
  2089. 1:42:42उसे चिढ़ाते हुए कहा, "अरे तुम्हें पहले
  2090. 1:42:45भी तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था।
  2091. 1:42:48तो अब क्या फर्क पड़ेगा? तुमसे मेरी खुशी
  2092. 1:42:51देखी नहीं जाती क्या? शिप्रा गुस्से भरी
  2093. 1:42:54आंखों से उसे देखती रही। फिर वो उठकर
  2094. 1:42:56शौर्य के पास उसके सोफे पर जाकर बैठ गई।
  2095. 1:43:00उसने दृढ़ स्वर में कहा इस बारे में
  2096. 1:43:03दोबारा सोचना भी नहीं तो जिस लड़की
  2097. 1:43:07[संगीत] को मैंने तुम्हारे साथ देख लिया
  2098. 1:43:09उसका खून कर दूंगी और यह किसने कहा कि
  2099. 1:43:13मुझे पहले इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था।
  2100. 1:43:16मुझे हमेशा इससे फर्क पड़ता था और पड़ता
  2101. 1:43:19रहेगा। तुम किसी मुगालते में मत रहना।
  2102. 1:43:23इतना कहकर शिप्रा ने अपनी पास्ता वाली
  2103. 1:43:25प्लेट खींचकर शौर्य के सामने कर दी और
  2104. 1:43:28अपनी बाहें शौर्य की बाहों में फंसा ली।
  2105. 1:43:32शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आ गई। वो समझ
  2106. 1:43:36गया कि उसका काम बन गया। अब उसे शिप्रा को
  2107. 1:43:39कैसे हैंडल करना है [संगीत] यह वो अच्छे
  2108. 1:43:42से समझ गया था। शिप्रा ने शौर्य के चेहरे
  2109. 1:43:45पर मुस्कान देखी तो अपना मुंह फुलाते हुए
  2110. 1:43:48[संगीत] बोली, अब ऐसे मुस्कुरा क्यों रहे
  2111. 1:43:51हो? मुझे अपने हाथों से खाना खिलाओ। शौर्य
  2112. 1:43:55ने प्यार भरे अंदाज में कहा, उससे पहले एक
  2113. 1:43:58झप्पी तो दे दो। कब से तुम्हारी खुशबू को
  2114. 1:44:02महसूस करने के लिए मचलता जा रहा हूं और
  2115. 1:44:04तुम मुझसे नाराज होकर मुझे खुद के पास भी
  2116. 1:44:07आने नहीं दे रही। शौर्य के [संगीत] चेहरे
  2117. 1:44:10पर याचना के भाव थे। अभी तक बड़ी मुश्किल
  2118. 1:44:13से उसने खुद की भावनाओं को कंट्रोल कर रखा
  2119. 1:44:16था। शिप्रा अपनी जगह से उठी और आकर शौर्य
  2120. 1:44:20की गोद में बैठ गई। उसने कसकर शौर्य को
  2121. 1:44:23अपनी बाहों में भर लिया। अगले ही पल
  2122. 1:44:26[संगीत] शौर्य खुद को जन्नत की सैर करता
  2123. 1:44:29महसूस कर रहा था। शौर्य ने अपने हंठ
  2124. 1:44:32[संगीत] शिप्रा के कान के पास ले जाकर
  2125. 1:44:34फुसफुसाते हुए कहा। छोटी-छोटी बातों पर
  2126. 1:44:38मुझे यूं सताना जरूरी है क्या? शिप्रा ने
  2127. 1:44:41शौर्य के कान के कोर पर किस करते [संगीत]
  2128. 1:44:44हुए कहा अच्छा तो तुम्हें क्या लगता है कि
  2129. 1:44:48तुमसे दूर होकर मुझे अच्छा लगता [संगीत]
  2130. 1:44:50है? शौर्य ने शिकायती लहजे में कहा अच्छा
  2131. 1:44:54ही लगता [संगीत] होगा। तभी तो जब मन होता
  2132. 1:44:57है तब रूठ कर मुझसे दूर हो जाती हो।
  2133. 1:45:00शिप्रा ने उसे चेतावनी देते हुए कहा। अब
  2134. 1:45:03अगर और ऐसी बात करोगे तो मुझे फिर से
  2135. 1:45:06तुमको दूर करना पड़ेगा। जब शौर्य ने महसूस
  2136. 1:45:09किया कि दोनों को इस स्थिति में काफी समय
  2137. 1:45:12बीत गया है तो उसने शिप्रा के कान के पास
  2138. 1:45:15कहा अब तुम चाहो तो अलग हो सकती हो लेकिन
  2139. 1:45:20शिप्रा तो अपनी आंखें बंद किए शौर्य के
  2140. 1:45:23आलिंगन में खो चुकी थी शौर्य ने उसे
  2141. 1:45:26हिलाते हुए कहा अब तुम अलग होकर बैठ सकती
  2142. 1:45:29हो चलो मैं अपने हाथों से अब तुमको खाना
  2143. 1:45:33खिलाता हूं शिप्रा अनमने भाव से शौर्य से
  2144. 1:45:37अलग अलग हुई। शौर्य ने उसे अपने हाथों से
  2145. 1:45:40खाना खिलाया। अब शिप्रा के चेहरे का भाव
  2146. 1:45:43बिल्कुल बदल चुका था। उसके चेहरे पर शौर्य
  2147. 1:45:47से नाराजगी का निशान दूर-दूर तक नहीं था।
  2148. 1:45:50जब शिप्रा का खाना हो गया तो शौर्य ने
  2149. 1:45:53कहा, "अभी के लिए मुझे इजाजत दो।" मुझे एक
  2150. 1:45:57जगह अर्जेंटली पहुंचना है। शौर्य खड़ा हो
  2151. 1:46:01गया। वह गेट की तरफ बढ़ने ही वाला था कि
  2152. 1:46:04शिप्रा पीछे से आकर उसकी कमर में हाथ
  2153. 1:46:08डालकर उसे थाम लिया। शिप्रा ने पीछे से
  2154. 1:46:11उसके कंधे पर अपनी ठोड़ी टिकाते हुए पूछा।
  2155. 1:46:15जाना जरूरी है क्या? मैं तो ऑफिस छोड़कर
  2156. 1:46:19तुम्हारे साथ समय बिताने आई थी और तुम
  2157. 1:46:22मुझे यूं अकेला छोड़कर जा रहे हो। शौर्य
  2158. 1:46:25ने गंभीरता से कहा।
  2159. 1:46:27ज्यादा ही जरूरी है। अगर आज मैंने यह काम
  2160. 1:46:31नहीं किया तो फिर अगले 10 दिन तक तो मुझे
  2161. 1:46:34और भी समय नहीं मिलने वाला। शौर्य की बात
  2162. 1:46:38सुनकर फिर से शिप्रा के चेहरे का भाव बदल
  2163. 1:46:41गया। वो शौर्य के पीछे से निकल कर उसके
  2164. 1:46:44सामने आई। उसने उलझन भरे स्वर में पूछा।
  2165. 1:46:48क्यों? कल से तुम कहां बिजी होने जा रहे
  2166. 1:46:51हो? जो अगले 10 दिन तुमको [संगीत] समय ही
  2167. 1:46:54नहीं मिलने वाला है। शौर्य ने प्यारी
  2168. 1:46:57मुस्कान के साथ शिप्रा को अपनी बाहों में
  2169. 1:46:59भरते हुए कहा। इसके बारे में घर आकर रात
  2170. 1:47:03में बात करूंगा ना। और भी तो बहुत सारी
  2171. 1:47:06बातें तुम्हें बतानी है। जैसे कनिका के
  2172. 1:47:10साथ क्या बात हुई और यह निशान मेरे गाल पर
  2173. 1:47:13कैसे आया। इसी समय शिप्रा का मोबाइल रिंग
  2174. 1:47:16करने लगा। उसने अपना मोबाइल निकाला तो उस
  2175. 1:47:19पर कनिका का नाम फ्लैश हो रहा था।
  2176. 1:47:22शिप्रा [संगीत] ने अपने होठों में
  2177. 1:47:23बुदबुदाते हुए कहा, "अब यह किस लिए फोन कर
  2178. 1:47:27रही है?" शौर्य ने भी कनिका का नाम शिप्रा
  2179. 1:47:30के मोबाइल स्क्रीन पर फ्लैश होते देखा, तो
  2180. 1:47:33उसे समझ आ गया कि कनिका क्यों उसे फोन कर
  2181. 1:47:36रही होगी। वो मुस्कुराते हुए बोला, "कॉल
  2182. 1:47:40एक्सेप्ट कर लो।" अभी पता चल जाएगा कि वह
  2183. 1:47:43किस लिए फोन कर रही है। शिप्रा ने भी बिना
  2184. 1:47:46दिमाग पर कोई जोर दिए कॉल एक्सेप्ट
  2185. 1:47:48[संगीत] कर लिया। अब आगे क्या होगा? कनिका
  2186. 1:47:52ने शिप्रा को फोन क्यों किया? क्या शिप्रा
  2187. 1:47:55कनिका की बातों में आएगी या नहीं? क्या
  2188. 1:47:58शौर्य अपनी [संगीत] हत्या की सुपारी देने
  2189. 1:48:00वाले को जान पाएगा? शिप्रा ने किसी अनजाने
  2190. 1:48:02डर के अधीन होकर कनिका का फोन उठाया। उसे
  2191. 1:48:06समझ नहीं आ रहा था कि अब उसे कनिका से
  2192. 1:48:09क्या सुनने को मिलेगा। उसने अपने दिल को
  2193. 1:48:11मजबूत किया और फोन उठाकर बोली, हेलो
  2194. 1:48:15कनिका, कैसी हो? कनिका की संशय भरी आवाज
  2195. 1:48:19शिप्रा के कानों में पड़ी। मैं तो बढ़िया
  2196. 1:48:22हूं। तुम बताओ [संगीत] इस समय तुम कहां
  2197. 1:48:24हो? शिप्रा ने अपना फोन लाउडस्कर पर कर
  2198. 1:48:28दिया था। [संगीत] जिसके कारण शौर्य भी
  2199. 1:48:30कनिका की आवाज सुन पा रहा था। शिप्रा ने
  2200. 1:48:33मोबाइल का माइक म्यूट कर रखा था जिसके
  2201. 1:48:36[संगीत] कारण इधर की आवाज दूसरी तरफ नहीं
  2202. 1:48:38जा रही थी। उसने शौर्य से पूछा कि वह
  2203. 1:48:42कनिका को क्या बोले? तो शौर्य ने उसे
  2204. 1:48:44समझाया कि वह कहे कि इस समय वह घर जा रही
  2205. 1:48:47है और रास्ते में है। अगर कनिका पूछे कि
  2206. 1:48:51वह किसी के साथ है या नहीं तो वह बोले कि
  2207. 1:48:53वह अकेली है। शिप्रा ने ऐसा ही किया। उसने
  2208. 1:48:57माइक अनम्यूट किया और कनिका से [संगीत]
  2209. 1:48:59बोली मैं अभी घर जा रही हूं और रास्ते में
  2210. 1:49:02ही हूं। कनिका ने शंका भरे स्वर में पूछा।
  2211. 1:49:06क्या तुम्हारे पास इस समय कोई है भी?
  2212. 1:49:09शिप्रा ने आश्चर्य से जवाब दिया।
  2213. 1:49:11[संगीत]
  2214. 1:49:11नहीं तो पर तुम क्यों ऐसा पूछ रही हो?
  2215. 1:49:14शिप्रा की बात सुनकर कनिका ने एक लंबी
  2216. 1:49:17सांस ली और बोली, चलो बढ़िया है। मैं तो
  2217. 1:49:21फालतू में डर रही थी। शिप्रा ने कनिका की
  2218. 1:49:24बात समझने [संगीत] की कोशिश करते हुए
  2219. 1:49:26पूछा, "इसमें बढ़िया क्या है? और तुम किस
  2220. 1:49:29बात से डर रही थी? कनिका ऐसे अंदाज में
  2221. 1:49:32बोली जैसे उसे यकीन हो कि विराज भाई का
  2222. 1:49:35नाम सुनते ही शिप्रा सारी बात समझ [संगीत]
  2223. 1:49:38जाएगी। अभी थोड़ी देर पहले मेरे पास विराज
  2224. 1:49:41भाई का फोन आया था। तुम समझ ही सकती हो कि
  2225. 1:49:44उनसे मुझे [संगीत] क्या सुनने को मिला
  2226. 1:49:46होगा और यह बात सच भी थी। शिप्रा ने भी
  2227. 1:49:50ऐसा ही जताते हुए कहा अच्छा तो तुम्हारे
  2228. 1:49:54विराज भाई का फोन तुम्हारे पास आ गया और
  2229. 1:49:57क्या कहा उन्होंने? यार उन्हें थोड़ा मैनर
  2230. 1:50:00समझा देना कि किसी के प्राइवेट केबिन में
  2231. 1:50:02जाने से पहले कम [संगीत] से कम दरवाजे पर
  2232. 1:50:04नॉक तो कर लिया करें। तुम समझ सकती हो वह
  2233. 1:50:08[संगीत] समय मेरे लिए कितना शर्मिंदगीगी
  2234. 1:50:10वाला था जब वह बिना नॉक किए केबिन का
  2235. 1:50:12द्रोजवा खोलकर अंदर आ गए थे। कनिका की
  2236. 1:50:16आवाज में नाराजगी साफ छलक रही थी।
  2237. 1:50:19उन्होंने मुझे बताया था कि वहां क्या हुआ
  2238. 1:50:21था। पर साथ में मैंने यह भी सुना कि शौर्य
  2239. 1:50:24ने उन्हें बुरा भला कहने में कोई कसर नहीं
  2240. 1:50:27छोड़ी थी। शिप्रा ने शौर्य का पक्ष लेते
  2241. 1:50:30हुए कहा, हां, यह बात सच है। शौर्य ने
  2242. 1:50:34उन्हें कुछ खरी-खोटी तो सुनाई थी, पर जिस
  2243. 1:50:37तरह की हरकत विराज भाई ने की थी, उस बात
  2244. 1:50:40से किसी को भी गुस्सा आ सकता था। शिप्रा
  2245. 1:50:43की बात सुनकर कनिका कुछ पल के लिए खामोश
  2246. 1:50:45रह गई। फिर कुछ सोचते हुए उसने शिप्रा से
  2247. 1:50:48पूछा, तुम यह बताओ तुम वहां कैसे पहुंच
  2248. 1:50:52गई? क्या तुम्हें पता है तुम्हारे शौर्य
  2249. 1:50:55के पास आने से पहले शौर्य और किससे मिला
  2250. 1:50:58था? शिप्रा ने सोचते हुए जवाब दिया, पर
  2251. 1:51:02तुम यह मुझसे क्यों पूछ रही हो? जहां तक
  2252. 1:51:05मुझे पता है, मुझसे मिलने से पहले किसी
  2253. 1:51:07रत्नाकर शेट्टी के साथ उसकी मीटिंग हुई
  2254. 1:51:10थी। उसके बाद ही मैं वहां पहुंची थी।
  2255. 1:51:13शौर्य ने शुरुआत में सिर्फ [संगीत] एक बार
  2256. 1:51:15शिप्रा को समझाया था कि उसे कनिका से कैसे
  2257. 1:51:18बात करनी है। उसके बाद शिप्रा [संगीत] खुद
  2258. 1:51:21ही सारी बातें अच्छे से संभाल रही थी।
  2259. 1:51:24उसकी समझदारी देखकर शौर्य को उस पर बहुत
  2260. 1:51:27प्यार आया। वह चुपके से शिप्रा के करीब
  2261. 1:51:30गया और उसके गाल पर किस [संगीत] कर लिया।
  2262. 1:51:33शिप्रा ने शौर्य की यह शरारत देखी तो
  2263. 1:51:36आंखें तड़ कर उस पर गुस्सा [संगीत] जताया।
  2264. 1:51:39लेकिन शौर्य पर इसका क्या फर्क पड़ने वाला
  2265. 1:51:41था? वह शिप्रा के दूसरे गाल पर भी किस
  2266. 1:51:44करने के लिए आगे बढ़ा। मगर शिप्रा ने अपने
  2267. 1:51:46खाली हाथ से उसका चेहरा ढक दिया। दूसरी
  2268. 1:51:50तरफ कनिका को शिप्रा का जवाब सुनकर लगा कि
  2269. 1:51:53क्या सच में यह दोनों रिलेशनशिप में आ गए
  2270. 1:51:55हैं? उसे अपने विहान भाई के लिए बुरा लगने
  2271. 1:51:58लगा। वह शिप्रा को कितना पसंद करने लगे
  2272. 1:52:02थे। वैसे कनिका को शौर्य और शिप्रा का
  2273. 1:52:05रिलेशन भी पसंद नहीं था। उसे शौर्य से
  2274. 1:52:08[संगीत] इतनी नफरत हो गई थी कि वह किसी भी
  2275. 1:52:11सूरत में शिप्रा को शौर्य के करीब जाते
  2276. 1:52:14[संगीत] नहीं देख सकती थी। अपना गला साफ
  2277. 1:52:17करते हुए उसने शिप्रा से कहा सुनना
  2278. 1:52:20[संगीत] मैंने जो तुम्हें शौर्य को अपने
  2279. 1:52:22प्यार में फंसाने के लिए कहा था अब उसकी
  2280. 1:52:25कोई जरूरत नहीं है। मेरा मसला ऑलरेडी
  2281. 1:52:28सॉल्व हो [संगीत] गया है। इसलिए अब
  2282. 1:52:30तुम्हें मेरे लिए उस गंदे आदमी के करीब
  2283. 1:52:32जाने की कोई जरूरत नहीं है। शौर्य जो
  2284. 1:52:36शिप्रा को कनिका के साथ बातें करते देखकर
  2285. 1:52:39बीच-बीच में उसे पोख कर रहा था। [संगीत]
  2286. 1:52:42जब उसने कनिका की बात सुनी तो उसके चेहरे
  2287. 1:52:44का रंग उतर गया। वह सोचने को मजबूर हो गया
  2288. 1:52:48कि क्या उसकी हरकतों ने कनिका को इतना
  2289. 1:52:51हर्ट कर दिया था कि वो उसके बारे में ऐसा
  2290. 1:52:54बोलने के लिए मजबूर हो गई। शौर्य के चेहरे
  2291. 1:52:57पर एक उदास मुस्कान फैल गई। कनिका और
  2292. 1:53:00शिप्रा की बातें सुनते हुए वो वापस सोफे
  2293. 1:53:03पर जाकर बैठ गया। [संगीत] शिप्रा ने शौर्य
  2294. 1:53:06का उतरा हुआ चेहरा देखा तो उसे भी उसके
  2295. 1:53:08लिए बुरा लगा। शिप्रा ने कनिका को जवाब
  2296. 1:53:11दिया, वह तो ठीक है, पर तुम्हारे चक्कर
  2297. 1:53:15में मैं उसके साथ इतना आगे बढ़ गई हूं कि
  2298. 1:53:17इतनी आसानी [संगीत] से वापस नहीं आ सकती।
  2299. 1:53:20इस बीच वो शौर्य के करीब गई और उसकी गोद
  2300. 1:53:23में बैठकर अपना गाल शौर्य के होठों से सटा
  2301. 1:53:26दिया। शिप्रा की इस मासूमियत पर शौर्य को
  2302. 1:53:29हंसी आ गई। अभी एक पल पहले ही जब वो
  2303. 1:53:33शिप्रा [संगीत] के गाल को चूमना चाह रहा
  2304. 1:53:34था तब उसने उसे दूर कर दिया था।
  2305. 1:53:38लेकिन अगले ही पल जब उसे यह एहसास हुआ कि
  2306. 1:53:40कनिका की बात सुनकर शौर्य बुरा महसूस करने
  2307. 1:53:43लगा है तो वह खुद आगे बढ़कर अपना गाल
  2308. 1:53:46शौर्य के होठों के सामने ले आई थी। दूसरी
  2309. 1:53:49तरफ कनिका को शिप्रा की बात से बड़ी
  2310. 1:53:51हैरानी हुई। वो थोड़ा उत्तेजित [संगीत]
  2311. 1:53:54स्वर में बोली। यह तुम कैसी बात कर रही
  2312. 1:53:57हो? वो एक नंबर का कमीना है। तुम उससे दूर
  2313. 1:54:00ही रहो। [संगीत] तुम उससे बहुत अच्छा
  2314. 1:54:02लड़का डिर्व करती हो। शिप्रा ने कनिका को
  2315. 1:54:05तसल्ली देते हुए कहा, तुम छोड़ो ना इस बात
  2316. 1:54:08को। अब जो होना होगा देखा जाएगा। [संगीत]
  2317. 1:54:11तुम परेशान मत हो। कनिका ने उसकी बात
  2318. 1:54:14काटते हुए कहा, "ऐसे कैसे [संगीत] छोड़
  2319. 1:54:17सकती हूं? तुम मेरे कारण इस जंजाल में
  2320. 1:54:19फंसी हो। तुम्हें उसकी चिंता करने की कोई
  2321. 1:54:22जरूरत नहीं है। वो इस लायक नहीं है कि तुम
  2322. 1:54:25उसकी इतनी चिंता करो कि वह क्या सोचेगा।
  2323. 1:54:27[संगीत]
  2324. 1:54:28तुम विराज भाई को तो जानती हो। क्यों ना
  2325. 1:54:31तुम उनसे एकद बार मिलकर देखो। उन्हें
  2326. 1:54:33समझने की कोशिश करो। मुझे लगता है कि वह
  2327. 1:54:36तुम्हें पसंद करने लगे हैं। मैंने उन्हें
  2328. 1:54:39तुम्हारी [संगीत] चिंता करते देखा है।
  2329. 1:54:41अप्रत्यक्ष रूप से कनिका शिप्रा से यही कह
  2330. 1:54:44रही थी कि उसे विराज के बारे में सोचना
  2331. 1:54:46चाहिए। शिप्रा का तो माथा घूम गया। उसने
  2332. 1:54:51सोचा तो क्या अब कनिका [संगीत] उसे अपना
  2333. 1:54:53भाभी बनाना चाहती है? वो जल्दी से उसे मना
  2334. 1:54:56करते हुए बोली यह तुम कैसी बात कर रही हो?
  2335. 1:55:00अभी मैं एक जंजाल से निकली नहीं हूं और
  2336. 1:55:02तुम मुझे दूसरे जंजाल में फंसाना चाहती हो
  2337. 1:55:05और वैसे भी विराज भाई को तो मैं एक भाई के
  2338. 1:55:08रूप में ही देखती हूं। उन्हें डेट करने के
  2339. 1:55:11बारे में कैसे सोच सकती हूं? शिप्रा की
  2340. 1:55:14बात सुनकर कनिका को लगा कि उसके विराज भाई
  2341. 1:55:17का घर तो बसने से पहले ही उजड़ गया। वो
  2342. 1:55:20जल्दी से शिप्रा की बात काटते हुए बोली,
  2343. 1:55:23तुम भी कैसी बच्चों जैसी बात कर रही हो?
  2344. 1:55:26विराज भाई मेरे भाई हैं तुम्हारे नहीं।
  2345. 1:55:29तुम क्यों उनकी बहन बनने लगी? उनके लिए
  2346. 1:55:32अपना नजरिया बदल कर तो देखो। वह तुम्हें
  2347. 1:55:34अच्छे लगने लगेंगे। शिप्रा ने अपनी बात
  2348. 1:55:37स्पष्ट करते हुए कहा, देखो अभी मेरा कोई
  2349. 1:55:41इरादा नहीं है कि मैं एक रिलेशन से निकल
  2350. 1:55:44कर फिर से दूसरे रिलेशन में जाऊं। तुम
  2351. 1:55:46मुझे क्या बनाना चाहती हो? अभी दो दिन हुए
  2352. 1:55:50नहीं किसी को डेट करना शुरू किया और सीधा
  2353. 1:55:52बिना किसी बात के उसके साथ ब्रेकअप
  2354. 1:55:54[संगीत] करके दूसरे के साथ रिलेशन में चली
  2355. 1:55:57जाऊं। अगर किसी को पता चलेगा कि मैंने
  2356. 1:56:00क्या किया है तो लोग उस शौर्य को नहीं
  2357. 1:56:02मुझे गलत समझने लगेंगे। समझेंगे [संगीत]
  2358. 1:56:06कि मैं कितनी बड़ी गोल्ड डिगर लड़की हूं
  2359. 1:56:08कि किसी पैसे वाले को देखा नहीं कि एक
  2360. 1:56:11[संगीत] को छोड़कर दूसरे के पीछे पड़ गई।
  2361. 1:56:14ना बाबा ना यह मुझसे नहीं होगा। शिप्रा ने
  2362. 1:56:18विराज के साथ रिलेशन में ना जाने का एक
  2363. 1:56:20[संगीत] सॉलिड रीजन कनिका के सामने रख
  2364. 1:56:22दिया था। कनिका के पास अब इसका कोई जवाब
  2365. 1:56:26नहीं था। हारकर उसने पूछा तो क्या तुम
  2366. 1:56:29शौर्य को डेट करना कंटिन्यू रखोगी? एक पल
  2367. 1:56:33शिप्रा ने सोचने में लगाया और फिर बोली
  2368. 1:56:35[संगीत]
  2369. 1:56:36नहीं ऐसा तो नहीं सोच रही हूं। पर अगर
  2370. 1:56:39उससे अलग भी होना है तो [संगीत] एक सॉलिड
  2371. 1:56:42रीजन देकर ब्रेकअप करना है ना। जहां यह
  2372. 1:56:45लगे कि अगर मैंने शौर्य के साथ ब्रेकअप
  2373. 1:56:47किया है तो उसका कारण शौर्य खुद है। मैं
  2374. 1:56:50अपने ऊपर इल्जाम लेकर उससे अलग नहीं हो
  2375. 1:56:53सकती। अब कनिका के सामने शिप्रा को कुछ और
  2376. 1:56:57कहने का कोई मतलब नहीं था। फोन रखने से
  2377. 1:57:00पहले उसने शिप्रा से कहा, ठीक है, मैं
  2378. 1:57:03तुम्हें कुछ भी करने के लिए प्रेशर नहीं
  2379. 1:57:05करूंगी। तुम खुद डिसाइड करना कि तुम कैसे
  2380. 1:57:08शौर्य के रिलेशन से बाहर आओगी। [संगीत] अब
  2381. 1:57:11दूसरी बात यह है कि इस 10 तारीख को मेरा
  2382. 1:57:14बर्थडे है। और शायद इसी दिन मेरी
  2383. 1:57:16इंगेजमेंट भी होगी। इसलिए तुम्हें [संगीत]
  2384. 1:57:19उस दिन पार्टी में जरूर आना है। शिप्रा
  2385. 1:57:22खुश होते हुए बोली अच्छा तो तुम जल्दी ही
  2386. 1:57:26शादी कर रही हो। यह तो बताओ कि वो खुशनसीब
  2387. 1:57:29कौन है? कनिका [संगीत] झेपते हुए बोली वो
  2388. 1:57:33कुणाल नारंग है। शायद तुम जानती होगी।
  2389. 1:57:37शिप्रा ने जवाब दिया। ठीक है मैं कोशिश
  2390. 1:57:40करूंगी कि मैं तुम्हारी इंगेजमेंट पार्टी
  2391. 1:57:42में जरूर प्रेजेंट रहूं। इसके साथ ही
  2392. 1:57:45कनिका ने फोन रख दिया। अब शिप्रा ने शौर्य
  2393. 1:57:48की तरफ देखा। शौर्य तारीफ [संगीत] भरी
  2394. 1:57:51नजरों से उसी को देख रहा था। शिप्रा ने जब
  2395. 1:57:54एक टक शौर्य को अपनी तरफ देखते पाया तो वह
  2396. 1:57:57शर्मा कर बोली अब ऐसे क्या मेरी तरफ देख
  2397. 1:58:01रहे हो? शौर्य ने उसकी तारीफ करते हुए
  2398. 1:58:04कहा, देख रहा हूं कि मेरी हमसफर कितनी
  2399. 1:58:08समझदार है। तुमने बहुत ही अच्छे से इस
  2400. 1:58:11कनिका नाम की बला को हैंडल किया है।
  2401. 1:58:14शिप्रा ने व्यंग भरे स्वर में पूछा तो फिर
  2402. 1:58:17क्या कहते हो? मैं कनिका की बात पर अमल
  2403. 1:58:20करना शुरू कर दूं। शौर्य ने बनावटी रोष
  2404. 1:58:23जाहिर करते हुए कहा। अमल करने की कोशिश तो
  2405. 1:58:26करो। फिर देखना मैं तुम्हारा क्या हाल
  2406. 1:58:29करता हूं। शिप्रा उसे छेड़ते [संगीत] हुए
  2407. 1:58:32बोली, "अच्छा जरा बताना तो क्या हाल
  2408. 1:58:35करोगे।" मैं भी तो देखूं [संगीत] कि तुम
  2409. 1:58:37उस स्थिति में क्या कर सकते हो। शौर्य ने
  2410. 1:58:40अचानक बात बदलते हुए कहा, जरा खड़ी होना
  2411. 1:58:43तो। शिप्रा शौर्य की बात सुनकर [संगीत]
  2412. 1:58:46खड़ी हो गई। उसके चेहरे पर जिज्ञासा साफ
  2413. 1:58:49नजर आ रही थी कि शौर्य ने उसे खड़े होने
  2414. 1:58:51[संगीत] के लिए क्यों कहा। जैसे ही शिप्रा
  2415. 1:58:54खड़ी हुई शौर्य भी खड़ा हो गया और उससे
  2416. 1:58:57बोला मैं पहले ही बहुत लेट हो गया हूं। अब
  2417. 1:59:01मुझे जल्दी [संगीत] कहीं पहुंचना है।
  2418. 1:59:03शिप्रा ने मुस्कुराते हुए कहा बस कुछ
  2419. 1:59:06बोलने को [संगीत] बचा नहीं तो भागने की
  2420. 1:59:08तैयारी कर लिए। ठीक है जाओ। पर वापस कब तक
  2421. 1:59:13आओगे यह बता कर जाओ। यह कहते हुए शिप्रा
  2422. 1:59:16[संगीत] शौर्य के पास गई और उसे अपनी
  2423. 1:59:18बाहों में भर लिया। शौर्य ने उसके चेहरे
  2424. 1:59:21को अपनी दोनों हथेलियों में थामकर उसकी
  2425. 1:59:24आंखों में देखते हुए कहा, "कोशि करूंगा
  2426. 1:59:27जितनी जल्दी हो सके वापस आ जाऊं। पर पहले
  2427. 1:59:31यहां से जाऊं तो। इसके लगभग आधे घंटे बाद
  2428. 1:59:34शौर्य शैडो बॉक्सर क्लब के बाहर खड़ा था।
  2429. 1:59:37गेट पर उसे आज भी पिछली बार वाला गार्ड ही
  2430. 1:59:40मिला। इस बार उसने शौर्य को अंदर जाने से
  2431. 1:59:43नहीं रोका। शौर्य ने देखा कि इस क्लब का
  2432. 1:59:46वातावरण बहुत ही बढ़िया था।
  2433. 1:59:48[संगीत]
  2434. 1:59:48चारों तरफ हरियाली और खूबसूरती से सजे लॉन
  2435. 1:59:51इस क्लब की सुंदरता को और बढ़ा रहे थे।
  2436. 1:59:54राहदारी से होता हुआ शौर्य सीधा उस
  2437. 1:59:57बॉक्सिंग रिंग के पास पहुंचा जहां बहुत से
  2438. 2:00:00यंग लड़के भीड़ लगाए खड़े थे। शायद रिंग
  2439. 2:00:03में कोई मैच चल रहा था। शौर्य जब करीब
  2440. 2:00:06पहुंचा तो उसने देखा कि रिंग में रूबिया
  2441. 2:00:08और एक यंग लड़का आपस में फाइट कर रहे
  2442. 2:00:10[संगीत] थे। उन दोनों को घेरे हुए लड़के
  2443. 2:00:13दोनों फाइटर्स का उत्साह बढ़ा रहे थे।
  2444. 2:00:16[संगीत]
  2445. 2:00:16इसी बीच उस यंग लड़के ने रुबिया के सिर को
  2446. 2:00:19निशाना बनाकर तेजी से एक फ्लाइंग किक
  2447. 2:00:22मारी। लेकिन आखिरी मौके पर रुबिया ने किसी
  2448. 2:00:25तरह खुद को उस किक से बचा लिया। किक मिस
  2449. 2:00:29होने के बावजूद लड़के ने अपने शरीर का
  2450. 2:00:31संतुलन नहीं खोया। एक गुलाटी लेते हुए वो
  2451. 2:00:35रुबिया के पीछे जा पहुंचा। रुबिया के
  2452. 2:00:37चेहरे पर उस लड़के के लिए तारीफ के भाव
  2453. 2:00:40आए। लेकिन वो जरा भी ढीली नहीं पड़ी।
  2454. 2:00:43उल्टा उसने अपनी जगह से एक [संगीत] बैग
  2455. 2:00:45स्प्लिट लिया और लड़के के करीब पहुंच गई।
  2456. 2:00:48फिर बिना किसी देरी के उसने अपना बाया पैर
  2457. 2:00:51घुमाते हुए स्पिन [संगीत] लिया और उसका
  2458. 2:00:53दाया पैर सीधा उस लड़के की गर्दन पर जा
  2459. 2:00:56पड़ा। लड़का उछल कर रिंग के बाहर जा
  2460. 2:00:59पहुंचा। उसका शरीर शौर्य से टकराने ही
  2461. 2:01:02वाला था कि शौर्य ने तेजी से उसे संभाल
  2462. 2:01:04लिया। लड़का मुश्किल से अपने पैरों पर
  2463. 2:01:07खड़ा हुआ और जाकर रुबिया के पास सम्मान के
  2464. 2:01:10साथ अपनी हार कबूल कर ली। रिंग में खड़ी
  2465. 2:01:14रुबिया की निगाह शौर्य पर पड़ी। वो रिंग
  2466. 2:01:17के किनारे आई। उसकी आंखों में शौर्य को
  2467. 2:01:20ललकारने का भाव साफ नजर आ रहा था। दरअसल
  2468. 2:01:23एक बार जब वो शौर्य का पीछा कर रही थी तब
  2469. 2:01:26वो शौर्य के हाथों हार गई थी। यह बात उसे
  2470. 2:01:29बर्दाश्त नहीं हो रही थी कि वो शौर्य से
  2471. 2:01:32हार सकती है। उस दिन की स्थिति भी उसके
  2472. 2:01:34अनुरूप नहीं थी। उसे लगा आज मौका है।
  2473. 2:01:38क्यों ना वो शौर्य के साथ एक फाइट करके
  2474. 2:01:41उसे आजमा ले। यह सोच दिमाग में आते ही वो
  2475. 2:01:44रिंग के किनारे से शौर्य की ओर देखते हुए
  2476. 2:01:48बोली मिस्टर शौर्य मुझे पता है कि आप भी
  2477. 2:01:53मार्शल आर्ट के अच्छे फाइटर हैं। तो क्यों
  2478. 2:01:55ना एक फ्रेंडली मुकाबला हो जाए? इससे
  2479. 2:01:59हमारे लड़कों को भी कुछ सीखने [संगीत] को
  2480. 2:02:01मिलेगा?
  2481. 2:02:03अब आगे क्या होगा? क्या शौर्य रुबिया के
  2482. 2:02:07साथ मुकाबला करने को तैयार होगा? क्या
  2483. 2:02:10रुबिया शौर्य से अपनी पिछली हार का बदला
  2484. 2:02:13ले पाएगी?
  2485. 2:02:15जानने के लिए सुनते रहिए कहानी का अगला।
  2486. 2:02:18ने सोचा भी नहीं था कि रुबिया यूं अचानक
  2487. 2:02:21उसे अपने साथ मुकाबला करने के लिए
  2488. 2:02:23बुलाएगी। वो हल्की मुस्कान के साथ बोला
  2489. 2:02:27माफ कीजिए मिस रुबिया। मेरी ऐसी कोई
  2490. 2:02:30प्रैक्टिस नहीं है। मैं भला आपसे मुकाबला
  2491. 2:02:33कैसे कर पाऊंगा। इसलिए आप इसे रहने ही
  2492. 2:02:36दीजिए।
  2493. 2:02:37लेकिन रुबिया कहां मानने वाली थी? उसके
  2494. 2:02:40अंदर तो शौर्य को सबक सिखाने की जिद सवार
  2495. 2:02:43थी। उसने दृढ़ता से कहा, यहां कोई मेडल
  2496. 2:02:47किसी के नाम नहीं होना है। मिस्टर शौर्य
  2497. 2:02:50यह तो बस एक फ्रेंडली मुकाबला है। आइए ना।
  2498. 2:02:54हमारे लड़कों को भी कुछ सीखने को मिल
  2499. 2:02:56जाएगा। शौर्य ने बात टालने की कोशिश करते
  2500. 2:03:00हुए कहा, "मिस रुबिया, "मैं यहां जहांगीर
  2501. 2:03:04खान से मिलने आया हूं।" आप मुझे कहां फाइट
  2502. 2:03:07के लिए बुला रही हैं? मुझे बस जल्दी से
  2503. 2:03:10अपना काम निपटाना है। रुबिया ने उसकी बात
  2504. 2:03:13काटते हुए कहा, "अभी तो मास्टर भी यहां
  2505. 2:03:16नहीं है मिस्टर शौर्य। उन्हें आने में भी
  2506. 2:03:18लगभग आधा घंटा लगेगा। तब तक तो हमारा
  2507. 2:03:22मुकाबला भी हो जाएगा। अब आ भी जाइए। यह बस
  2508. 2:03:26एक फ्रेंडली मैच ही तो है। तभी रिंग के
  2509. 2:03:30बाहर खड़ा रैंबो भी शौर्य के पास आ गया।
  2510. 2:03:33उसने शौर्य को पकड़ कर रिंग की तरफ ले
  2511. 2:03:35जाने की कोशिश करते हुए कहा, अब तो चलिए
  2512. 2:03:39भी मिस्टर शौर्य सीनियर आपसे इतनी
  2513. 2:03:42रिक्वेस्ट कर रही हैं और हम भी तो देखें
  2514. 2:03:44कि आप सच में मार्शल आर्ट के जानकार हैं
  2515. 2:03:47या बस सीनियर ऐसे ही आपकी तारीफ किए जा
  2516. 2:03:50रही हैं। शौर्य समझ गया कि रुबिया उससे
  2517. 2:03:53मुकाबला करके ही मानेगी। वो जानता था कि
  2518. 2:03:56उसके दिल [संगीत] में उसके लिए पुरानी टीस
  2519. 2:03:59अब भी बाकी है जो उसे उसके सामने खड़ा
  2520. 2:04:02होने के लिए मजबूर कर रही थी। उसने मन ही
  2521. 2:04:05मन सोचा कि जब उसे खुद की कोई चिंता नहीं
  2522. 2:04:08है तो फिर वो क्यों उसके बारे में सोच रहा
  2523. 2:04:10है? यही सोचकर शौर्य आखिरकार रिंग के अंदर
  2524. 2:04:14चला गया। रुबिया के सामने शौर्य को रिंग
  2525. 2:04:18में उतरते देखकर वहां मौजूद लड़के हुटिंग
  2526. 2:04:21करने लगे। तभी भीड़ में से किसी की तेज
  2527. 2:04:24आवाज आई। सीनियर इसे ज्यादा बुरी तरह मत
  2528. 2:04:28हराना। नहीं तो बेचारे का हौसला ही टूट
  2529. 2:04:30जाएगा। पता नहीं फिर कभी यह मार्शल आर्ट
  2530. 2:04:33करने की सोचेगा भी या नहीं। भीड़ की आवाज
  2531. 2:04:37सुनकर शौर्य के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ
  2532. 2:04:40गई। वो रिंग के बीच जाकर खड़ा हो गया और
  2533. 2:04:43गौर से रुबिया की तरफ देखने लगा।
  2534. 2:04:46रुबिया आगे बढ़ी और शौर्य से हाथ मिलाते
  2535. 2:04:49हुए बोली, "अगर आप तैयार हैं, तो क्या हम
  2536. 2:04:52मुकाबला शुरू कर सकते हैं?" शौर्य एक कदम
  2537. 2:04:56पीछे हटकर अपनी पोजीशन लेते हुए बोला,
  2538. 2:04:59"मैं तैयार हूं। तुम शुरू करो।" रूबिया
  2539. 2:05:03शौर्य के चारों तरफ घूमते हुए सही अटैक के
  2540. 2:05:06लिए अपनी पोजीशन देखने लगी। अचानक उसने
  2541. 2:05:09अपने स्थान से बिल्ली की तरह छलांग लगाई।
  2542. 2:05:12उसके पैर का निशाना सीधे शौर्य की छाती
  2543. 2:05:15थी। लेकिन शौर्य ने बस हल्की सी बॉडी
  2544. 2:05:18मूवमेंट की और रुबिया के हमले से खुद को
  2545. 2:05:21बचा लिया। रुबिया का वार खाली चला गया और
  2546. 2:05:25वह सीधा शौर्य के पीछे जाकर स्प्लिट करते
  2547. 2:05:28हुए फर्श पर उतरी। उसकी आंखों में शौर्य
  2548. 2:05:31के लिए अनचाही तारीफ उभर आई थी। उसे
  2549. 2:05:34हैरानी थी कि शौर्य ने इतनी आसानी से उसके
  2550. 2:05:37हमले से खुद को बचा [संगीत] लिया।
  2551. 2:05:40रुबिया समझ गई कि दूर से शौर्य का कुछ
  2552. 2:05:42बिगाड़ पाना मुश्किल होगा। इसलिए वह तुरंत
  2553. 2:05:45उसके [संगीत] करीब पहुंची और अपने हाथ का
  2554. 2:05:47सीधा पंच शौर्य के चेहरे पर जमा [संगीत]
  2555. 2:05:50दिया।
  2556. 2:05:51लेकिन एक बार फिर शौर्य ने अपनी गर्दन दाई
  2557. 2:05:54ओर झुका कर उसके वार को खाली कर दिया।
  2558. 2:05:58वहां मौजूद लड़कों ने जोरदार शोर मचाया।
  2559. 2:06:01लेकिन जब उन्होंने देखा कि इस बार भी
  2560. 2:06:04रुबिया का वार खाली चला गया तो कई चेहरों
  2561. 2:06:06पर निराशा छा गई। अब उनका शौर्य को देखने
  2562. 2:06:10का नजरिया बदल चुका था। अभी तक वे उसे
  2563. 2:06:13रुबिया के लिए आसान टारगेट समझ रहे थे।
  2564. 2:06:17अपने दोनों वार खाली जाते देखकर रुबिया के
  2565. 2:06:20चेहरे पर भी शर्मिंदगीगी झलकने [संगीत]
  2566. 2:06:22लगी। वो अभी तक शौर्य को छू तक नहीं पाई
  2567. 2:06:25थी। एक बार फिर
  2568. 2:06:27[संगीत]
  2569. 2:06:27रुबिया ने अपनी पोजीशन ली। इस बार वह तेजी
  2570. 2:06:30से शौर्य की तरफ दौड़ी और अपने शरीर को
  2571. 2:06:33गेंद की तरह मोड़ते हुए [संगीत] उसकी तरफ
  2572. 2:06:35उछल गई। निशाना फिर वही था शौर्य की छाती।
  2573. 2:06:41इस बार शौर्य सिर्फ दाई ओर हटकर नहीं बच
  2574. 2:06:43सकता था। इसलिए उसने लंबी छलांग लगाई और
  2575. 2:06:47हवा में स्प्लिट करते [संगीत] हुए रुबिया
  2576. 2:06:49के पीछे जाकर खड़ा हो गया। सामने का
  2577. 2:06:52टारगेट अचानक गायब हो जाने [संगीत] पर
  2578. 2:06:55रुबिया का शरीर गेंद की तरह फर्श पर जा
  2579. 2:06:57गिरा। चोट तेज लगी थी लेकिन वह तुरंत
  2580. 2:07:01[संगीत] अपने पैरों पर खड़ी हुई और दोबारा
  2581. 2:07:03अपनी पोजीशन ले ली। उसका यह वार भी
  2582. 2:07:06[संगीत] खाली जा चुका था। रुबिया का चेहरा
  2583. 2:07:10शर्मिंदगीगी से लाल हो गया। उसने ऐसी
  2584. 2:07:13बेइज्जती [संगीत] पहले कभी महसूस नहीं की
  2585. 2:07:16थी। उसे सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की थी
  2586. 2:07:20कि वह अभी तक शौर्य [संगीत] को छू भी नहीं
  2587. 2:07:22पाई थी। रुबिया और शौर्य का मुकाबला देख
  2588. 2:07:25रहे लड़कों को अब लगने लगा था जैसे शौर्य
  2589. 2:07:29उसके साथ खेल रहा हो। रुबिया उनके क्लब की
  2590. 2:07:32सबसे बेहतरीन फाइटर थी। लेकिन शौर्य के
  2591. 2:07:36सामने वह एकदम लाचार नजर आ रही थी। रुबिया
  2592. 2:07:40के चेहरे के भाव देखकर अब शौर्य को भी
  2593. 2:07:43उसके लिए बुरा लगने लगा। रुबिया एक बार
  2594. 2:07:46फिर धीरे-धीरे शौर्य के करीब गई और इस बार
  2595. 2:07:50उसने राउंड हाउस किक का इस्तेमाल किया।
  2596. 2:07:52शौर्य ने इस बार रुबिया की किक से बचने की
  2597. 2:07:55कोशिश नहीं की। हां, उसने इतना जरूर किया
  2598. 2:07:58कि जो किक उसकी पसली पर पड़ने वाली थी,
  2599. 2:08:01उसे अपने शरीर को उछालकर अपनी जांघ पर ले
  2600. 2:08:04लिया। वार का असर जांघ पर लेने के कारण
  2601. 2:08:08शौर्य को ज्यादा चोट नहीं लगी। लेकिन उसने
  2602. 2:08:11अपने चेहरे से ऐसा जताया जैसे उसे बहुत
  2603. 2:08:13तेज चोट लगी हो। यह देखकर लड़कों का
  2604. 2:08:17उत्साह चीखों में बदल गया। लेकिन रुबिया
  2605. 2:08:20खुद अपने वार से संतुष्ट नहीं थी। उसे साफ
  2606. 2:08:23महसूस हुआ कि शौर्य ने जानबूझकर उसकी किक
  2607. 2:08:26अपने ऊपर ली थी। अगर वह बचना चाहता तो इस
  2608. 2:08:30वार से भी आसानी से बच सकता था। उसकी
  2609. 2:08:33आंखों में अब शौर्य के लिए शक नजर आने
  2610. 2:08:35लगा। रुबिया ने एक बार फिर शौर्य पर
  2611. 2:08:38स्पिनिंग बैक किक का इस्तेमाल किया। उसका
  2612. 2:08:41वार शौर्य की पीठ पर पड़ने वाला था। लेकिन
  2613. 2:08:44शौर्य ने उसी वक्त खुद को इतना आगे कर
  2614. 2:08:47लिया कि रुबिया का पंच उसकी पीठ को सिर्फ
  2615. 2:08:50छू कर निकल गया। फिर भी [संगीत] शौर्य ने
  2616. 2:08:53आगे की तरफ गुलाटी मारते हुए ऐसा अभिनय
  2617. 2:08:55किया जैसे उसकी पीठ पर जोरदार पंच पड़ा
  2618. 2:08:58हो। देखने वालों को यही लगा कि रुबिया
  2619. 2:09:01[संगीत] का तेज वार शौर्य को लग गया है।
  2620. 2:09:04लेकिन असलियत सिर्फ रुबिया जानती थी। उसका
  2621. 2:09:07पंच तो शौर्य की पीठ को [संगीत] छूकर भी
  2622. 2:09:10मुश्किल से निकला था। अब रुबिया को यकीन
  2623. 2:09:13हो गया कि शौर्य जानबूझकर ऐसा कर रहा है।
  2624. 2:09:16शौर्य उसे किसी बच्चे की तरह ट्रीट कर रहा
  2625. 2:09:19था। यह सोचकर रुबिया का गुस्सा और भी बढ़
  2626. 2:09:22गया। उसने शौर्य पर साइड से एक हुक वार
  2627. 2:09:25किया। इस बार शौर्य ने खुद को बचाया और
  2628. 2:09:29तुरंत रुबिया पर गिलोटिन चोक मूव का
  2629. 2:09:31इस्तेमाल कर लिया। इस मूव में विरोधी की
  2630. 2:09:34गर्दन को बाहों में जकड़ कर लॉक कर लिया
  2631. 2:09:37जाता है और उससे निकलना आसान नहीं होता।
  2632. 2:09:40रुबिया [संगीत] को अपनी सांसे बंद होती
  2633. 2:09:42महसूस होने लगी। लेकिन वो हार मानने को
  2634. 2:09:45तैयार नहीं थी। जैसे ही शौर्य ने महसूस
  2635. 2:09:48किया कि रुबिया की सांसे रुकने लगी हैं,
  2636. 2:09:51उसने अपनी पकड़ थोड़ी ढीली कर दी। अपनी
  2637. 2:09:54गर्दन पर शौर्य की पकड़ ढीली [संगीत] होते
  2638. 2:09:56ही रुबिया अपनी जगह पर घूम गई। अचानक उसका
  2639. 2:10:00चेहरा शौर्य के चेहरे के एकदम करीब आ गया।
  2640. 2:10:03शौर्य की सांसों में रुबिया की खुशबू
  2641. 2:10:05[संगीत] इस तरह समा गई कि वह खुद को एक पल
  2642. 2:10:08के लिए मदहोश सा महसूस करने लगा।
  2643. 2:10:11रुबिया के शरीर की नजदीकी और उसके सीने की
  2644. 2:10:14हल्की सी चुभन [संगीत]
  2645. 2:10:15शौर्य ने अपनी छाती पर महसूस की तो अनायास
  2646. 2:10:18ही उसकी पकड़ और ढीली हो गई। [संगीत]
  2647. 2:10:21रुबिया ने मौका सही जानकर शौर्य के ऊपर
  2648. 2:10:24अपरकट पंच का हमला कर दिया। उसका पंच नीचे
  2649. 2:10:27[संगीत] से ऊपर की ओर गया और सीधे शौर्य
  2650. 2:10:30की ठोड़ी पर लगा। शौर्य सीधा [संगीत]
  2651. 2:10:33उछलता हुआ रिंग के बाहर जाकर गिरा।
  2652. 2:10:36रूबिया ने अपने ही हमले को याद किया तो
  2653. 2:10:38उसे महसूस हुआ कि उसके पंच में इतनी ताकत
  2654. 2:10:41ही नहीं थी कि शौर्य इस तरह उड़कर रिंग के
  2655. 2:10:44बाहर जा गिरे। वो समझ नहीं पा रही थी कि
  2656. 2:10:47[संगीत] आखिर उसके उस हल्के से पंच का असर
  2657. 2:10:50इतना ज्यादा कैसे हो गया। कूटिंग की आवाज
  2658. 2:10:53से पूरा रिंग गूंज उठा। सभी शोर मचाकर
  2659. 2:10:57रुबिया को उसकी जीत की बधाई देने लगे।
  2660. 2:11:00लेकिन रुबिया असमंजस भरी नजरों से शौर्य
  2661. 2:11:03को ही देखती रही। शौर्य अपनी जगह पर खड़ा
  2662. 2:11:06हुआ और वहीं से रुबिया को बधाई देते हुए
  2663. 2:11:08बोला, "मुबारक हो मिस रुबिया। आखिर आपने
  2664. 2:11:12मुझे हरा ही दिया। लेकिन रुबिया के चेहरे
  2665. 2:11:15पर जीत की कोई खुशी नहीं थी। इसी समय
  2666. 2:11:19जहांगीर खान बाहर से आता हुआ दिखाई दिया।
  2667. 2:11:22वो गहरी नजरों से शौर्य और रुबिया दोनों
  2668. 2:11:25की तरफ देख रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे
  2669. 2:11:28जहांगीर खान काफी देर पहले ही वहां आ चुका
  2670. 2:11:31था और एक जगह खड़े होकर दोनों का पूरा
  2671. 2:11:34मुकाबला देख रहा था। उसने देखा था [संगीत]
  2672. 2:11:37कि किस तरह रुबिया ने यह मुकाबला जीता था।
  2673. 2:11:40रिंग के पास पहुंचकर जहांगीर खान ने
  2674. 2:11:43रुबिया और शौर्य दोनों से अपने साथ चलने
  2675. 2:11:45[संगीत] को कहा। दोनों उसके पीछे-पीछे
  2676. 2:11:48उसके कैबिन में चले गए। साथ चलते हुए
  2677. 2:11:51रुबिया को कहीं से भी नहीं लगा कि शौर्य
  2678. 2:11:54को कोई चोट लगी [संगीत] होगी। अभी उसने
  2679. 2:11:56शौर्य के ऊपर अपरकट पंच का इस्तेमाल किया
  2680. 2:11:59था। लेकिन शौर्य के चेहरे पर उसके पंच का
  2681. 2:12:03[संगीत] कोई निशान तक नहीं था। उसका शक अब
  2682. 2:12:07यकीन में बदलने लगा था।
  2683. 2:12:10उसने पलट कर अपने क्लब के उन लड़कों की
  2684. 2:12:13तरफ देखा जिनके चेहरों पर रुबिया के जीतने
  2685. 2:12:16की खुशी अब भी साफ नजर आ रही थी।
  2686. 2:12:20कुछ ही देर [संगीत] में जहांगीर खान अपने
  2687. 2:12:22कैबिन के अंदर पहुंच गया और जाकर अपनी सीट
  2688. 2:12:25पर बैठ गया। उसके पीछे-पीछे रुबिया और
  2689. 2:12:28शौर्य भी अंदर आए और जहांगीर खान के सामने
  2690. 2:12:31रखी दो कुर्सियों पर बैठ गए। [संगीत]
  2691. 2:12:33जहांगीर खान ने गौर से दोनों के चेहरों को
  2692. 2:12:36देखा और फिर रुबिया की ओर देखते हुए बोला,
  2693. 2:12:40"क्या बात है रुबिया? तुम्हारे चेहरे पर
  2694. 2:12:42अपनी जीत की खुशी दिखाई नहीं दे रही।" सब
  2695. 2:12:46ठीक तो है?
  2696. 2:12:47रूबिया ने असमंजस भरी नजरों से शौर्य की
  2697. 2:12:50तरफ देखा और बोली पता नहीं मास्टर [संगीत]
  2698. 2:12:54मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। मेरा दिल यह
  2699. 2:12:57मानने को तैयार ही नहीं है कि मैं जीत
  2700. 2:12:59[संगीत] गई हूं। शौर्य ने बात संभालने की
  2701. 2:13:03कोशिश करते हुए कहा, इतना विनम्र होने की
  2702. 2:13:06जरूरत नहीं है। रुबिया तुमने अच्छा फाइट
  2703. 2:13:09किया है और [संगीत] स्वाभाविक रूप से
  2704. 2:13:10तुमने मुझे हरा दिया है। इसलिए तुम्हें
  2705. 2:13:14ऐसा बोलने की कोई जरूरत नहीं है।
  2706. 2:13:17लेकिन रुबिया के चेहरे पर अब भी जीत की
  2707. 2:13:19कोई खुशी नहीं थी। जहांगीर खान ने गंभीर
  2708. 2:13:23नजरों से शौर्य की तरफ देखते हुए कहा आपको
  2709. 2:13:27ऐसा नहीं करना चाहिए था मिस्टर शौर्य
  2710. 2:13:30शौर्य ने असमंजस में उसकी तरफ देखते हुए
  2711. 2:13:33पूछा मैं समझा नहीं
  2712. 2:13:36आप कहना क्या चाहते हैं मिस्टर खान
  2713. 2:13:39जहांगीर खान के चेहरे की गंभीरता और बढ़
  2714. 2:13:42गई उसने साफ शब्दों में कहा [संगीत] आपको
  2715. 2:13:46जानबूझकर रुबिया से हारने का दिखावा नहीं
  2716. 2:13:48करना चाहिए था शौर्य ने इंकार में अपना
  2717. 2:13:52सिर हिलाते हुए कहा, "यह आप क्या कह रहे
  2718. 2:13:55हैं? मैं भला ऐसा क्यों करूंगा?" जहांगीर
  2719. 2:13:59खान ने रूबिया के चेहरे की ओर इशारा करते
  2720. 2:14:01हुए शौर्य से सवाल किया।
  2721. 2:14:04मिस्टर शौर्य, क्या आपको रुबिया के चेहरे
  2722. 2:14:07पर उसके जीतने की खुशी दिखाई दे रही है?
  2723. 2:14:10शौर्य ने तिरछी नजरों से रूबिया की ओर
  2724. 2:14:13देखते हुए कहा, "वो तो इसलिए मिस्टर खान
  2725. 2:14:16क्योंकि मिस रुबिया मुझे बुरा महसूस नहीं
  2726. 2:14:19कराना चाहती।
  2727. 2:14:20जहांगीर खान ने हल्की फीकी मुस्कान के साथ
  2728. 2:14:23कहा मिस्टर शौर्य मैंने भी आप दोनों का
  2729. 2:14:27पूरा मुकाबला देखा था। [संगीत] मुझे पता
  2730. 2:14:29है कि रुबिया कैसे इस मुकाबले में जीती
  2731. 2:14:32है? आपकी ट्रिक से आप उन लड़कों को बेवकूफ
  2732. 2:14:36[संगीत] बना सकते हैं। लेकिन क्या आपको
  2733. 2:14:38लगता है कि सब कुछ अपनी आंखों से देखने के
  2734. 2:14:41बाद भी मैं [संगीत] बेवकूफ बना रह सकता
  2735. 2:14:43हूं। पता नहीं आपने ऐसा क्यों किया। लेकिन
  2736. 2:14:47मैं अच्छे से जानता हूं कि आपने जानबूझकर
  2737. 2:14:50रुबिया को वह मुकाबला जिताया है। जहांगीर
  2738. 2:14:53खान की बात सुनते ही रुबिया के मन में बचा
  2739. 2:14:56हुआ आखिरी संशय भी खत्म हो गया। अब उसे
  2740. 2:15:00पक्का [संगीत] यकीन हो गया था कि शौर्य ने
  2741. 2:15:02जानबूझकर उससे हारने का दिखावा किया था।
  2742. 2:15:06रुबिया के चेहरे पर उभरे संशय को देखकर
  2743. 2:15:08जहांगीर [संगीत]
  2744. 2:15:09खान उसकी ओर देखते हुए बोला,
  2745. 2:15:12"तुम अपने दिल में यह गलतफहमी मत पालना
  2746. 2:15:14रूबिया [संगीत]
  2747. 2:15:15कि तुम मिस्टर शौर्य से मार्शल आर्ट के
  2748. 2:15:18मुकाबले में जीत सकती हो।" जहांगीर खान
  2749. 2:15:21[संगीत] की बात सुनकर रूबिया का सिर नीचे
  2750. 2:15:23झुक गया। उसका झुका हुआ सिर देखकर जहांगीर
  2751. 2:15:27खान ने उसका हौसला बढ़ाते हुए कहा,
  2752. 2:15:30तुम्हें इसमें बुरा महसूस करने की कोई
  2753. 2:15:32जरूरत नहीं है। यह कोई ऐसा मुकाबला नहीं
  2754. 2:15:35था जिसे तुम्हें जीतना ही चाहिए था।
  2755. 2:15:39रुबिया को समझ नहीं आया कि उसका मास्टर
  2756. 2:15:41आखिर कैसी बात कर रहा था। उसे भला शौर्य
  2757. 2:15:44से क्यों नहीं जीतना चाहिए था।
  2758. 2:15:47रुबिया के चेहरे पर छाए इसी सवाल को देखकर
  2759. 2:15:50जहांगीर खान मुस्कुराया और बोला, तुम यूं
  2760. 2:15:54आश्चर्य से मेरी तरफ मत देखो। तुम्हारी
  2761. 2:15:57जानकारी के लिए मैं तुम्हें बता दूं कि
  2762. 2:15:59मैं खुद भी मार्शल आर्ट के मुकाबले में
  2763. 2:16:01मिस्टर शौर्य से नहीं जीत सकता।
  2764. 2:16:04रूबिया का मुंह आश्चर्य से खुला रह गया।
  2765. 2:16:07उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका मास्टर
  2766. 2:16:10यह कैसी बात कह रहा है। रूबिया के आश्चर्य
  2767. 2:16:13से भरे चेहरे को देखकर जहांगीर खान ने फिर
  2768. 2:16:16मुस्कुराते [संगीत] हुए कहा, "इसमें
  2769. 2:16:19आश्चर्य करने जैसी कोई बात नहीं है। मैं
  2770. 2:16:22तुम्हें बता दूं कि पहले ही एक मुकाबले
  2771. 2:16:24में मैं मिस्टर शौर्य से हार चुका हूं। और
  2772. 2:16:27मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि मैं कितनी
  2773. 2:16:30भी कोशिश कर लूं फिर भी उनसे जीत नहीं
  2774. 2:16:32पाऊंगा।
  2775. 2:16:34अब रुबिया के सामने शौर्य की असली ताकत की
  2776. 2:16:37एक झलक सामने आ चुकी थी। लेकिन एक सवाल अब
  2777. 2:16:41भी बाकी था। आखिर शौर्य ने जानबूझकर
  2778. 2:16:45रुबिया से वो मुकाबला क्यों हारा? और सबसे
  2779. 2:16:48बड़ा सवाल जब शौर्य जहांगीर खान के साथ
  2780. 2:16:52उसकी मौत की सुपारी देने वाले तक पहुंचेगा
  2781. 2:16:55तब क्या होगा? आखिर कौन था शौर्य की मौत
  2782. 2:16:58की सुपारी देने वाले के पीछे? जानने के
  2783. 2:17:02लिए सुनते रहिए। रुबिया के लिए अपनी
  2784. 2:17:05मास्टर पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था।
  2785. 2:17:08वो यह मानने को तैयार नहीं थी कि शौर्य
  2786. 2:17:12उसके मास्टर [संगीत] को भी हरा सकता है।
  2787. 2:17:14उसे याद आया कि कैसे उसका मास्टर भी दो
  2788. 2:17:18दिन तक शौर्य की कैद में रहा था। ना चाहते
  2789. 2:17:21हुए भी [संगीत] उसे अपने मास्टर पर
  2790. 2:17:24विश्वास करना पड़ा। लेकिन उसके मन की
  2791. 2:17:26जिज्ञासा शांत नहीं हो रही थी। वो यह नहीं
  2792. 2:17:30समझ पा रही थी [संगीत] कि जब शौर्य इतना
  2793. 2:17:32बहादुर था तो फिर उसने जानबूझकर उससे हार
  2794. 2:17:36क्यों मानी? आखिरकार उससे रहा नहीं गया
  2795. 2:17:38[संगीत] और उसने शौर्य से पूछ ही लिया।
  2796. 2:17:41रुबिया ने उत्सुकता से उसकी तरफ देखते हुए
  2797. 2:17:44पूछा, शौर्य, क्या आप मुझे बताएंगे कि
  2798. 2:17:47आपका जानबूझकर मुझसे हारने के पीछे क्या
  2799. 2:17:50मकसद था? शौर्य मुस्कुराते हुए उसकी तरफ
  2800. 2:17:53देखने लगा और बोला, क्या सच में तुम यह
  2801. 2:17:56रीजन जानना चाहती हो? रुबिया ने अपनी उलझन
  2802. 2:17:59जाहिर करते हुए कहा [संगीत] बिल्कुल
  2803. 2:18:02क्योंकि तब से ही मेरा मस्तिष्क चक्कर
  2804. 2:18:04घिन्नी बना हुआ है। मैं समझ नहीं पा रही
  2805. 2:18:07कि इसके पीछे आपका मकसद क्या है? शौर्य ने
  2806. 2:18:11सहजता से जवाब दिया। इसके पीछे ऐसा भी कोई
  2807. 2:18:14रॉकेट साइंस नहीं है जो समझ में ना आए।
  2808. 2:18:17अगर तुम जानना ही चाहती हो तो सुनो। तुम
  2809. 2:18:20यहां अपने क्लब की स्टार मार्शल आर्टिस्ट
  2810. 2:18:22हो। अगर तुमको तुम्हारे जूनियर हारते
  2811. 2:18:25देखते तो उनके मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव
  2812. 2:18:27पड़ता। [संगीत] मेरा क्या है? मुझे यहां
  2813. 2:18:30जानता ही कौन है? इसलिए मेरा हारना जीतना
  2814. 2:18:34दोनों एक समान है। बस इतनी सी बात है।
  2815. 2:18:38शौर्य का जवाब सुनकर रुबिया के दिल में
  2816. 2:18:41उसके लिए सम्मान बहुत बढ़ [संगीत] गया।
  2817. 2:18:44उसने कभी नहीं सोचा था कि कोई इन बातों को
  2818. 2:18:47सोचकर भी किसी से हार सकता है। रूबिया ने
  2819. 2:18:50कृतज्ञता भरे स्वर में कहा, थैंक्स मिस्टर
  2820. 2:18:54शौर्य कि आपने हमारे लड़कों के लिए इतना
  2821. 2:18:57सोचा पर मुझे लगता है कि आपको जानबूझकर
  2822. 2:19:01हारने का दिखावा नहीं करना चाहिए था। अगर
  2823. 2:19:04हमारे लड़के इस तरह के मेंटल प्रेशर को
  2824. 2:19:06नहीं झेल पाते हैं तो वे कभी बड़े फाइटर
  2825. 2:19:09नहीं बन पाएंगे। शौर्य ने बात खत्म करते
  2826. 2:19:12हुए कहा, अच्छा ठीक है। इस बात को यहीं
  2827. 2:19:16छोड़ते हैं। आइंदा कभी अगर हमारा मुकाबला
  2828. 2:19:19होता है तो मैं इस बात का ध्यान रखूंगा।
  2829. 2:19:23फिर शौर्य जहांगीर खान की तरफ मुड़ा और
  2830. 2:19:25गंभीरता से बोला मिस्टर खान बाकी बातों को
  2831. 2:19:30छोड़कर अगर आप मुझे उस शख्स की कोई
  2832. 2:19:32जानकारी दें तो बेहतर होगा जिसने आपको
  2833. 2:19:35मुझे मारने की सुपारी दी थी। जहांगीर खान
  2834. 2:19:38ने गंभीरता से जवाब दिया। यह इतना आसान
  2835. 2:19:41नहीं है। [संगीत] इसके लिए मुझे आपको खुद
  2836. 2:19:44उसके पास लेकर जाना पड़ेगा। शौर्य ने
  2837. 2:19:47हैरानी से पूछा, "क्या? पर इसकी क्या
  2838. 2:19:50जरूरत है? आप बस मुझे उसका नाम बता दीजिए।
  2839. 2:19:54बाकी मैं खुद ही देख लूंगा। जहांगीर खान
  2840. 2:19:57ने समझाते हुए कहा, "यह इतना भी आसान नहीं
  2841. 2:20:01है मिस्टर शौर्य।"
  2842. 2:20:02मेरे बताने के बाद आप उस शख्स तक चले गए
  2843. 2:20:06तो भी किसी भी सूरत में वह इस बात को
  2844. 2:20:09स्वीकार नहीं करेगा। शौर्य की आंखों में
  2845. 2:20:12शंका उभर आई। [संगीत] उसने पूछा ऐसा आप
  2846. 2:20:16किस बिना पर बोल रहे हैं मिस्टर खान?
  2847. 2:20:18जहांगीर खान ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए
  2848. 2:20:21कहा क्योंकि उस शख्स को भी यह नहीं पता है
  2849. 2:20:24कि [संगीत] किलर उसको जानता है। अगर
  2850. 2:20:27किलर खुद उसके सामने जाकर उससे बात
  2851. 2:20:30करेगा तो शायद वह इंकार ना कर सके। शौर्य
  2852. 2:20:34को जहांगीर खान की बात समझ में आ गई।
  2853. 2:20:36[संगीत] उसने सहमति जताते हुए कहा अगर ऐसा
  2854. 2:20:40है मिस्टर खान तो मैं जरूर आपको इसके लिए
  2855. 2:20:42तकलीफ दूंगा। पर इससे आपकी पहचान भी तो
  2856. 2:20:45उजागर होने की संभावना है। जहांगीर खान
  2857. 2:20:48मुस्कुराते हुए बोला, उसकी चिंता आप ना
  2858. 2:20:51करें। मैं इस बात का ध्यान रखूंगा। इसी
  2859. 2:20:55समय उसने अपनी टेबल की दराज से एक मुखौटा
  2860. 2:20:58निकाला और अपने हाथ में थाम लिया। जहांगीर
  2861. 2:21:02खान के हाथ में मुखौटा देखकर शौर्य को समझ
  2862. 2:21:05आ गया कि वह क्या करने वाला है। उसकी
  2863. 2:21:08तैयारी देखकर शौर्य ने जल्दी से कहा, तो
  2864. 2:21:11फिर अब ज्यादा देर करने की जरूरत नहीं है।
  2865. 2:21:14जितनी जल्दी आप मेरा यह काम कर दीजिएगा,
  2866. 2:21:17उतनी जल्दी आप फ्री हो जाएंगे। जहांगीर
  2867. 2:21:20खान ने उगते हुए कहा, ठीक है, चलिए।
  2868. 2:21:23[संगीत]
  2869. 2:21:24जहांगीर खान अपनी जगह से खड़ा हो गया।
  2870. 2:21:28शौर्य भी उसके साथ खड़ा हो गया। तभी
  2871. 2:21:31रुबिया ने जहांगीर खान से पूछा, मैं भी
  2872. 2:21:34आपके साथ चलूं क्या मास्टर? जहांगीर खान
  2873. 2:21:37ने कुछ पल सोचने के बाद सहमति में सिर
  2874. 2:21:40हिलाते हुए कहा, "हां, तुम भी तैयार हो
  2875. 2:21:43जाओ।" इसके बाद जहांगीर खान ने अपनी दराज
  2876. 2:21:47से एक और मास्क निकाला और उसे रुबिया की
  2877. 2:21:50तरफ बढ़ा दिया।
  2878. 2:21:52रूबिया वहां से गई और थोड़ी देर बाद वापस
  2879. 2:21:55आई तो अब उसने ब्लैक कलर की टाइट [संगीत]
  2880. 2:21:58जींस और टीशर्ट पहन रखी थी। जहांगीर खान
  2881. 2:22:01का आउटफिट भी ब्लैक [संगीत] कलर का ही था।
  2882. 2:22:04जहांगीर खान शौर्य और रुबिया के साथ अपने
  2883. 2:22:07क्लब से बाहर आया। शौर्य ने ध्यान दिया कि
  2884. 2:22:11रुबिया इस बीच अपने साथ एक पिट्ठू बैग भी
  2885. 2:22:14[संगीत]
  2886. 2:22:14ले आई थी। दोनों शौर्य की कार में सवार
  2887. 2:22:17हुए और शौर्य ने कार आगे बढ़ा दी। जहांगीर
  2888. 2:22:21खान लगातार शौर्य को रास्ता गाइड करता
  2889. 2:22:24रहा। लगभग आधे घंटे बाद शौर्य की कार एक
  2890. 2:22:28खाली प्लॉट के सामने आकर रुकी। जहांगीर
  2891. 2:22:31खान ने अपनी जेब से एक बॉक्स निकाला और
  2892. 2:22:34उसमें से एक ट्रांसमीटर निकालकर शौर्य की
  2893. 2:22:37तरफ बढ़ाते हुए कहा, "इसे अपने कान में
  2894. 2:22:40लगा लो।" एक ट्रांसमीटर [संगीत] जहांगीर
  2895. 2:22:43खान ने अपने कान में लगाया और दूसरा
  2896. 2:22:45रुबिया की तरफ बढ़ा दिया। शौर्य को कुछ
  2897. 2:22:48समझ तो नहीं आया लेकिन उसने वह रिसीवर
  2898. 2:22:51अपने कान में लगा लिया। वो देख रहा था कि
  2899. 2:22:54वहां पर जो कुछ भी बोला जा रहा था वो
  2900. 2:22:56रिसीवर के द्वारा उसके कान में स्पष्ट
  2901. 2:22:58सुनाई दे [संगीत] रहा था। इसके बाद
  2902. 2:23:01जहांगीर खान ने शौर्य को समझाया कि उसे अब
  2903. 2:23:04क्या करना है। जहांगीर खान ध्यान से शौर्य
  2904. 2:23:07की बात [संगीत] सुनता रहा। जब उसने शौर्य
  2905. 2:23:10को पूरी तरह समझा दिया कि उसे क्या करना
  2906. 2:23:12है। उसके बाद वो और रुबिया कार से बाहर आ
  2907. 2:23:15गए। शौर्य ने कार आगे बढ़ा दी। वो देख रहा
  2908. 2:23:19था कि यह एक इंडस्ट्रियल एरिया था। करीब
  2909. 2:23:22220 मीटर आगे जाकर शौर्य ने एक बिल्डिंग
  2910. 2:23:25के सामने अपनी कार खड़ी कर दी। बिल्डिंग
  2911. 2:23:28के एक हिस्से पर बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था
  2912. 2:23:31जिस पर लिखा हुआ था ग्लोबल पैसेज।
  2913. 2:23:34बोर्ड देखकर लग रहा था कि यह एक्सपोर्टइ
  2914. 2:23:37इंपोर्ट करने वाली कंपनी है। शौर्य इस
  2915. 2:23:40बंदे [संगीत] की तारीफ करने से खुद को रोक
  2916. 2:23:42नहीं सका जो एक्सपोर्टइ इंपोर्ट के नाम पर
  2917. 2:23:45किसी की सुपारी लेने देने का काम करता था।
  2918. 2:23:48वहां ज्यादा चहल-पहल नहीं थी। शौर्य ने
  2919. 2:23:51बेल बजाई तो थोड़ी देर बाद एक हट्टाकट्टा
  2920. 2:23:54आदमी गेट पर आया और रूखे स्वर में पूछा।
  2921. 2:23:58क्या है? किससे मिलना है? शौर्य ने उस
  2922. 2:24:01बंदे को घूरते हुए जवाब दिया। मुझे मिस्टर
  2923. 2:24:04विमल रस्तोगी से मिलना है। उस बंदे ने
  2924. 2:24:07शौर्य को घूरा। फिर उसने सड़क पर दोनों
  2925. 2:24:10तरफ देखा कि यहां कोई और भी है क्या? सड़क
  2926. 2:24:14को खाली देखकर [संगीत] उसने रूखे स्वर में
  2927. 2:24:16पूछा। क्या काम है? शौर्य ने बेपरवाही से
  2928. 2:24:20जवाब दिया। यह तो विमल साहब को ही
  2929. 2:24:23बताऊंगा। उस शख्स की आंखों में संदेह उभर
  2930. 2:24:26आया। उसने पूछा तुम्हें यहां किसने भेजा
  2931. 2:24:30है? शौर्य ने उसे टालते हुए कहा, "तुम इस
  2932. 2:24:34पछड़े में क्यों पड़ते हो? मुझे जो भी
  2933. 2:24:36बताना होगा, मैं वह बात विमल रस्तोगी को
  2934. 2:24:39ही बताऊंगा। उस शख्स ने [संगीत] बेरुखी से
  2935. 2:24:42कहा, "अगर ऐसी बात है, तो तुम यहां से जा
  2936. 2:24:45सकते हो।" यहां कोई विमल रस्तोगी नहीं
  2937. 2:24:48रहता है। इतना बोलकर वो शख्स पलटने ही
  2938. 2:24:51वाला था कि तभी जेब में पड़ा उसका मोबाइल
  2939. 2:24:54बजने लगा। वो शख्स रुक गया। उसने मोबाइल
  2940. 2:24:58निकालकर नंबर देखा तो अचानक उसका शरीर
  2941. 2:25:00अटेंशन की मुद्रा में आ गया। इस बीच शौर्य
  2942. 2:25:04समझने की कोशिश कर रहा था कि अब वो क्या
  2943. 2:25:06करें। लेकिन तभी उसने उस शख्स को मोबाइल
  2944. 2:25:09पर किसी से बात करते देखा तो वह उम्मीद
  2945. 2:25:12भरी नजरों से उसे देखने लगा। बात करने के
  2946. 2:25:15बाद उस शख्स ने मोबाइल वापस अपनी जेब में
  2947. 2:25:18रखा और शौर्य को घूरते हुए कहा। चलो सर
  2948. 2:25:23तुमसे मिलने को तैयार हो गए हैं। शौर्य को
  2949. 2:25:26समझ नहीं आया कि यह कैसे हुआ। सामने वाले
  2950. 2:25:29शख्स ने अंदर तो कोई खबर भिजवाई नहीं थी।
  2951. 2:25:32फिर अंदर से उसके लिए बुलावा कैसे आ गया।
  2952. 2:25:35अचानक उसकी निगाह सामने वाले शख्स के
  2953. 2:25:37[संगीत] पीछे ऊपर छत पर लगे एक सीसीटीवी
  2954. 2:25:40पर चली गई। यानी जो भी शख्स अंदर था, वह
  2955. 2:25:44सीसीटीवी के जरिए मेन गेट पर नजर रखे हुए
  2956. 2:25:47था। फिर भी शौर्य को समझ नहीं आया कि अगर
  2957. 2:25:50वह नजर भी रखे हुए हैं तो उसने उसे अंदर
  2958. 2:25:53क्यों बुलवा [संगीत] लिया। जबकि बाहर आया
  2959. 2:25:56यह शख्स तो सीधा ही उसे वापस जाने को बोल
  2960. 2:25:58रहा था। चलो जो भी होगा अंदर जाने पर पता
  2961. 2:26:03चल ही जाएगा। शौर्य ने मन ही मन सोचा।
  2962. 2:26:07सामने वाले शख्स ने गेट खोला और शौर्य को
  2963. 2:26:10अंदर आने का इशारा किया। शौर्य उसके
  2964. 2:26:13पीछे-पीछे कोठी के अंदर पहुंच गया। वह एक
  2965. 2:26:16हॉल में पहुंचा [संगीत] जहां तीन और आदमी
  2966. 2:26:19लापरवाही से अलग-अलग हिस्सों में पड़े हुए
  2967. 2:26:21थे। सबके हाथों में मोबाइल था और सभी अपने
  2968. 2:26:25मनोरंजन के लिए मोबाइल पर कुछ ना कुछ देख
  2969. 2:26:28रहे थे। इन चारों के अलावा भी उस हॉल के
  2970. 2:26:31एक कोने में एक डेस्क पर कंप्यूटर के
  2971. 2:26:34सामने करीब 24-25 साल की खूबसूरत लड़की
  2972. 2:26:37बैठी हुई किसी काम में बिजी थी। शौर्य को
  2973. 2:26:41हॉल में आया देखकर एक शख्स ने उसे लाने
  2974. 2:26:44वाले व्यक्ति की तरफ देखा और पूछा बबंदा
  2975. 2:26:48यह आप किसको अंदर ले आए हैं? बब्बन ने
  2976. 2:26:51सफाई देते हुए कहा, [संगीत] "मैं कौन होता
  2977. 2:26:54हूं अपने मन से किसी को अंदर लाने ले जाने
  2978. 2:26:56वाला?" बॉस का हुक्म हुआ तो अंदर ले आया।"
  2979. 2:27:01उस शख्स ने शौर्य की तरफ देखकर मजाकिया
  2980. 2:27:04लहजे में कहा, "क्यों बे चिकने? तुम्हें
  2981. 2:27:08पता तो है ना कि तुम कहां आए हो? उस शख्स
  2982. 2:27:11की बात पर शौर्य ने कुछ नहीं कहा। उसने बस
  2983. 2:27:14एक नजर उसकी तरफ देखा और फिर बब्बन की ओर
  2984. 2:27:18देखने लगा। उस शख्स ने दोबारा बब्बन से
  2985. 2:27:21कहा, जा ले जा। बब्बन शौर्य को लेकर एक
  2986. 2:27:26कमरे के दरवाजे पर पहुंचा और नॉक किया।
  2987. 2:27:29दरवाजा अपने आप खुल गया। शौर्य ने देखा कि
  2988. 2:27:33अंदर एक 38-40 साल का शख्स टेबल के दूसरी
  2989. 2:27:37तरफ बैठा हुआ था। शार्प नैन नक्ष के साथ
  2990. 2:27:41शारीरिक रूप से भी वो शख्स मजबूत दिखाई दे
  2991. 2:27:44रहा था। उसकी पैनी निगाह शौर्य पर ही गड़ी
  2992. 2:27:48हुई थी। शौर्य बब्बन के साथ कमरे के अंदर
  2993. 2:27:51आ गया। सामने बैठे शख्स ने बब्बन को वहां
  2994. 2:27:54से जाने को बोल दिया। शौर्य को छोड़कर
  2995. 2:27:57बब्बन कमरे से बाहर चला गया। सामने बैठे
  2996. 2:28:00शख्स ने शौर्य को देखते हुए पूछा, हां,
  2997. 2:28:04बताओ तुम किस लिए मुझसे मिलना चाहते थे?
  2998. 2:28:07शौर्य ने व्यंग्ञात्मक मुस्कान के साथ
  2999. 2:28:09पूछा, "क्या तुम्हें सच में नहीं पता कि
  3000. 2:28:12मैं तुमसे क्यों मिलना चाहता था?" विमल
  3001. 2:28:15रस्तोगी नाराजगी जताते हुए बोला, "मुझे
  3002. 2:28:18कैसे पता होगा कि तुम मुझसे क्यों मिलना
  3003. 2:28:20चाहते हो?" शौर्य ने होठों पर हल्की
  3004. 2:28:23मुस्कान लाते हुए कहा, पर मुझे कैसे लग
  3005. 2:28:26रहा है कि तुमको सब कुछ पता है कि मैं
  3006. 2:28:28यहां क्यों आया हूं? विमल रस्तोगी [संगीत]
  3007. 2:28:30ने कड़वे स्वर में कहा, ज्यादा ओवर
  3008. 2:28:33स्मार्ट बनने की जरूरत नहीं है। कुछ काम
  3009. 2:28:36है तो बताओ नहीं तो फालतू में मेरा समय
  3010. 2:28:38खराब करने की कोई जरूरत नहीं है। शौर्य एक
  3011. 2:28:41तक उसकी आंखों में देखते हुए बोला, तो तुम
  3012. 2:28:44क्या चाहते हो कि जैसे मैं यहां आया वैसे
  3013. 2:28:48ही यहां से खाली चला जाऊं? विमल रस्तोगी
  3014. 2:28:51शौर्य से लगातार नजर मिलाने का ताव ना ला
  3015. 2:28:54सका। उसने नजरें संभालते हुए कहा, देखो
  3016. 2:28:58[संगीत] मुझे नहीं पता तुम यहां क्यों आए
  3017. 2:28:59हो। अगर सिर्फ टाइम पास करने आए हो तो यही
  3018. 2:29:03अच्छा होगा कि जैसे यहां आए हो वैसे ही
  3019. 2:29:06यहां से वापस चले [संगीत] जाओ। शौर्य ने
  3020. 2:29:08बेफिक्री से कहा, चिंता मत करो। मुझे भी
  3021. 2:29:12यहां रुकने का कोई शौक नहीं है। मैं यहां
  3022. 2:29:14जिस लिए आया हूं, मेरा वो काम कर दो, तो
  3023. 2:29:17मैं यहां से चला जाऊंगा। शौर्य कमरे में
  3024. 2:29:20नजर दौड़ाता हुआ सामने वाली चेयर पर बैठ
  3025. 2:29:23चुका था। तभी उसकी नजर विमल रस्तोगी के
  3026. 2:29:26पीछे वॉल पर लगी एक टीवी स्क्रीन पर गई
  3027. 2:29:29जिस पर सामने वाले गेट का फुटेज चल रहा
  3028. 2:29:31था। शौर्य समझ गया था कि विमल रस्तोगी
  3029. 2:29:34[संगीत] ने इसी स्क्रीन पर उसे देखा होगा।
  3030. 2:29:37विमल रस्तोगी ने शक भरी नजरों से शौर्य को
  3031. 2:29:40देखते हुए पूछा। तुम्हारा कौन सा काम है?
  3032. 2:29:44शौर्य ने बिना पलकें झपकाए सवाल किया।
  3033. 2:29:48मुझे मारने की सुपारी तुम्हें किसने दी
  3034. 2:29:50थी? विमल रस्तोगी आश्चर्य से शौर्य का
  3035. 2:29:53चेहरा देखने लगा। उसने हकलाते हुए कहा,
  3036. 2:29:57"क्या कहा? मारने की सुपारी। यह तुम क्या
  3037. 2:30:01बकवास कर रहे हो? मुझे कोई तुमको मारने की
  3038. 2:30:04सुपारी क्यों देगा?" शौर्य ने सामने टेबल
  3039. 2:30:07पर अपने दोनों हाथ जमाते हुए कहा, यही तो
  3040. 2:30:11मैं जानना [संगीत] चाहता हूं। तुम
  3041. 2:30:13सीधे-सीधे मुझे बता दो, तो मैं यहां से
  3042. 2:30:15चला जाऊंगा। विमल रस्तोगी ने खुद को
  3043. 2:30:18संभालते हुए कहा, तुम्हें जरूर कोई
  3044. 2:30:21गलतफहमी [संगीत] हुई है। यह एक एक्सपोर्ट
  3045. 2:30:23इंपोर्ट की कंपनी है। यहां पर सुपारी
  3046. 2:30:26किलिंग नहीं होती जो मैं तुम्हारी मौत की
  3047. 2:30:29सुपारी लूंगा। विमल रस्तोगी ने पूरी कोशिश
  3048. 2:30:32की कि उसकी आवाज में उसका कॉन्फिडेंस नजर
  3049. 2:30:35आए। शौर्य ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में
  3050. 2:30:38कहा। कोई गलतफहमी नहीं है। मुझे पक्का
  3051. 2:30:42यकीन [संगीत] है कि तुमने ही मुझे मारने
  3052. 2:30:44की सुपारी किलर फॉक्स को दी थी। अब मैं यह
  3053. 2:30:48जानना चाहता हूं कि तुमको यह काम किसने
  3054. 2:30:50दिया है। क्योंकि मुझे यह तो [संगीत] यकीन
  3055. 2:30:53है कि तुम्हारी मेरे साथ पहले की कोई
  3056. 2:30:55दुश्मनी नहीं है। इसलिए तुमने अपनी तरफ से
  3057. 2:30:58तो मुझे मारने की सुपारी नहीं दी होगी।
  3058. 2:31:01इसका मतलब [संगीत] तुम्हें यह काम किसी और
  3059. 2:31:03ने दिया होगा। अब अगर तुम ईमानदारी से
  3060. 2:31:06मुझे उसका नाम बता दोगे तो मैं यहां से
  3061. 2:31:09चला जाऊंगा। पहले शौर्य के दिल में शक रहा
  3062. 2:31:12भी हो कि यह काम विमल [संगीत] रस्तोगी का
  3063. 2:31:14नहीं होगा। लेकिन अब उसे पक्का यकीन था कि
  3064. 2:31:18जहांगीर खान को विमल रस्तोगी ने ही
  3065. 2:31:21[संगीत] उसे मारने की सुपारी दी है। विमल
  3066. 2:31:23रस्तोगी ने अपनी घबराहट छिपाते हुए कहा
  3067. 2:31:27देखो [संगीत] अंधेरे में तीर मारने से कुछ
  3068. 2:31:30नहीं होगा। मेरा इस सब से कोई मतलब नहीं
  3069. 2:31:33है। पता नहीं कैसे तुम्हें यह गलतफहमी हो
  3070. 2:31:36गई है। है तुम्हारे पास कोई सबूत कि मैंने
  3071. 2:31:40ही तुम्हें मारने की सुपारी दी है। शौर्य
  3072. 2:31:42ने आत्मविश्वास के साथ उसकी आंखों में
  3073. 2:31:45देखते हुए कहा सच कहूं तो यहां आने से
  3074. 2:31:49पहले मुझे पक्का यह यकीन नहीं था कि तुमने
  3075. 2:31:52किलर फॉक्स को मुझे मारने की सुपारी दी है
  3076. 2:31:55या नहीं।
  3077. 2:31:57पर यहां आने के बाद मुझे पक्का यकीन हो
  3078. 2:32:00गया है कि किलर फॉक्स को मुझे मारने की
  3079. 2:32:03सुपारी तुमने ही दी है। और यह बात 1 मिनट
  3080. 2:32:08में मैं साबित भी कर सकता हूं कि यह काम
  3081. 2:32:11तुम्हारा ही है। विमल रस्तोगी का तो सर ही
  3082. 2:32:14घूम गया कि शौर्य इतने कॉन्फिडेंस से यह
  3083. 2:32:18बात कैसे कह रहा है? वो सोचने पर मजबूर हो
  3084. 2:32:22गया कि आखिर उससे गलती कहां हुई है। बहुत
  3085. 2:32:26सोचने पर भी जब उसे कुछ समझ नहीं आया तो
  3086. 2:32:30उसे लगा कि शौर्य सिर्फ ब्लफ मार रहा है।
  3087. 2:32:34इसलिए उसने दोबारा शौर्य से सवाल किया।
  3088. 2:32:37[संगीत]
  3089. 2:32:37विमल ने चुनौती देते हुए कहा। अगर तुम्हें
  3090. 2:32:41लगता है कि तुम सही हो तो साबित करो कि
  3091. 2:32:44मैं तुमसे झूठ बोल रहा हूं। शौर्य ने बिना
  3092. 2:32:47घबराए कहा, "अगर ऐसी बात है [संगीत] तो
  3093. 2:32:50सुनो।" इसके बाद शौर्य ने विमल के सामने
  3094. 2:32:53अपना पक्ष रखा। शौर्य की बात सुनते ही
  3095. 2:32:57विमल को अपनी गलती का एहसास हो गया। वो
  3096. 2:33:00सोचने पर मजबूर हो गया कि इतनी बड़ी गलती
  3097. 2:33:03[संगीत] उसने आखिर कर कैसे दी। अब आगे
  3098. 2:33:07क्या होगा? साबित किया कि विमल रस्तोगी ने
  3099. 2:33:10ही उसकी सुपारी किलर फॉक्स को दी थी और
  3100. 2:33:13विमल शौर्य की बात को नकार भी नहीं सका।
  3101. 2:33:17मग चक्कर घिन्नी बना हुआ था। उसे समझ नहीं
  3102. 2:33:21आ रहा था कि आखिर उसने गलती कहां की? तभी
  3103. 2:33:25शौर्य ने उससे सवाल किया। जब तुम्हारा वो
  3104. 2:33:29बब्बन मुझे गेट से ही वापस जाने के लिए कह
  3105. 2:33:31रहा था तो तुमने मुझे अंदर लाने के लिए
  3106. 2:33:34क्यों कहा था?
  3107. 2:33:36विमल सोचने पर मजबूर हो गया कि यह कैसी
  3108. 2:33:39बात हुई? इससे कहां साबित होता है कि
  3109. 2:33:42शौर्य को मारने की सुपारी किलर फॉक्स को
  3110. 2:33:45उसने ही दी है। उसे इस बात में जरा भी ऐसा
  3111. 2:33:49कुछ नजर नहीं आ रहा था जिससे शौर्य यह
  3112. 2:33:52साबित कर सके कि उसकी सुपारी विमल ने ही
  3113. 2:33:55दी है। विमल ने खुद को संभालते हुए कहा।
  3114. 2:33:59इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है। मुझे
  3115. 2:34:02लगा कि शायद तुम्हें मुझसे कोई काम होगा।
  3116. 2:34:05इसलिए मैंने तुम्हें अंदर ले आने के लिए
  3117. 2:34:07बोल दिया। शौर्य ने उसकी आंखों में देखते
  3118. 2:34:10हुए पूछा,
  3119. 2:34:12"अच्छा,
  3120. 2:34:13क्या तुम मुझे जानते हो?" विमल के चेहरे
  3121. 2:34:17पर असमंजस के भाव आ गए। वह सोचने लगा कि
  3122. 2:34:20इस सवाल का क्या जवाब दें? कुछ सोचने के
  3123. 2:34:23बाद उसने कहा,
  3124. 2:34:26नहीं, मैं तुम्हें नहीं जानता।
  3125. 2:34:29शौर्य के चेहरे पर एक धूर्ततापूर्ण
  3126. 2:34:31मुस्कान आ गई। वह बोला, बहुत बढ़िया। तुम
  3127. 2:34:36मुझे नहीं जानते। फिर भी तुमने मुझे अंदर
  3128. 2:34:38बुलवा लिया। कमाल है। तुम ऐसे कितने लोगों
  3129. 2:34:42को बिना जाने अंदर बुला लेते हो। शौर्य के
  3130. 2:34:46इस सवाल पर विमल फंस गया। उसे समझ नहीं आ
  3131. 2:34:49रहा था कि क्या जवाब दें। लेकिन उसने अपनी
  3132. 2:34:52भावनाओं पर काबू रखते हुए कहा। वैसे ऐसा
  3133. 2:34:56बहुत कम होता है कि बिना जान पहचान वाले
  3134. 2:34:59व्यक्ति को मैं अंदर बुला लूं। लेकिन
  3135. 2:35:01कभी-कभी ऐसा कर भी लेता हूं जैसे आज किया।
  3136. 2:35:06शौर्य की मुस्कान और चौड़ी हो गई। उसने
  3137. 2:35:09पूछा, बहुत बढ़िया। जब तुम ऐसे लोगों को
  3138. 2:35:13अंदर बुलाते हो जिन्हें तुम नहीं जानते तो
  3139. 2:35:16सबसे पहला काम क्या करते हो? विमल के दिल
  3140. 2:35:20की धड़कन तेज होती जा रही थी। उसे समझ
  3141. 2:35:23नहीं आ रहा था कि शौर्य के इन सवालों का
  3142. 2:35:25मतलब क्या है? फिर कुछ सोचते हुए उसने
  3143. 2:35:29जवाब दिया।
  3144. 2:35:31ऑब्वियसली सबसे पहले उसके बारे में पूछता
  3145. 2:35:34हूं। फिर उसके काम के बारे में पूछता हूं।
  3146. 2:35:37शौर्य ने विमल के पीछे दीवार पर टंगी घड़ी
  3147. 2:35:40की तरफ देखते हुए पूछा।
  3148. 2:35:43बहुत बढ़िया। मुझे बताओगे कि मुझे यहां आए
  3149. 2:35:46हुए कितनी देर हो गई है? अब विमल को यकीन
  3150. 2:35:50होने लगा था कि उसने जरूर कोई ब्लंडर कर
  3151. 2:35:53दिया है। उसने कांपते [संगीत] दिल के साथ
  3152. 2:35:55कहा,
  3153. 2:35:57यही कोई 810 मिनट।
  3154. 2:36:00शौर्य ने उसकी तरफ देखते हुए अपनी [संगीत]
  3155. 2:36:02बात आगे बढ़ाई।
  3156. 2:36:05बहुत बढ़िया। अब जरा मेरे इस लास्ट प्रश्न
  3157. 2:36:08का जवाब दे दो। [संगीत]
  3158. 2:36:10मुझे यहां आए लगभग 10 मिनट हो गए हैं।
  3159. 2:36:13तुमने सारे जहान की बातें कर ली जबकि तुम
  3160. 2:36:16मुझे जानते तक नहीं। उसके बाद भी तुमने
  3161. 2:36:20मेरे बारे में जानने [संगीत] की कोई कोशिश
  3162. 2:36:21नहीं की।
  3163. 2:36:23इसका एकमात्र कारण यही है कि तुमने गेट पर
  3164. 2:36:26मुझे देखते ही पहचान लिया था कि मैं कौन
  3165. 2:36:29हूं। इसलिए अंदर आने के बाद [संगीत] भी
  3166. 2:36:32तुमने मेरे बारे में जानने की कोई कोशिश
  3167. 2:36:34नहीं की। यह बात तुम्हारे दिमाग [संगीत]
  3168. 2:36:37में भी नहीं आई कि कम से कम दिखावे के लिए
  3169. 2:36:40ही तुम मेरे बारे में पूछ लेते।
  3170. 2:36:43बोलते बोलते शौर्य टेबल पर अपनी [संगीत]
  3171. 2:36:45गर्दन विमल की तरफ बढ़ाते हुए थोड़ा आगे
  3172. 2:36:48झुक गया। विमल को अपनी गलती का एहसास हो
  3173. 2:36:51गया था।
  3174. 2:36:52अब उसे समझ आ चुका था कि उससे [संगीत]
  3175. 2:36:55कितनी बड़ी चूक हुई है। शौर्य ने चेहरे पर
  3176. 2:36:58गहरी मुस्कान लाते हुए कहा, "अब बताओ कुछ
  3177. 2:37:02और साबित करने की जरूरत है।" विमल की
  3178. 2:37:06आंखों में अचानक एक अजीब सा जुनून नजर
  3179. 2:37:09आया। ऐसा लगा जैसे वह कोई फैसला ले रहा
  3180. 2:37:12हो। अचानक उसका हाथ नीचे से निकल कर सामने
  3181. 2:37:15आया। शौर्य ने देखा कि उसके हाथ में
  3182. 2:37:18पिस्टल थी जिसका मुंह सीधे उसकी तरफ था।
  3183. 2:37:22शौर्य अपनी चेयर की पुश्त से पीठ टिकाते
  3184. 2:37:25हुए बोला तुम्हारे इस एक्शन ने तो अब 100%
  3185. 2:37:29पक्का कर दिया कि मेरे शक को गलत होने की
  3186. 2:37:32कोई गुंजाइश नहीं है। विमल जहरीली
  3187. 2:37:36हंसी-हंसते हुए बोला। जब सब जान ही गए तो
  3188. 2:37:40फिर तुमसे ज्यादा बेवकूफ और कौन होगा जो
  3189. 2:37:42खुद ही बलि की वेदी पर चढ़ने के लिए यहां
  3190. 2:37:45आ गया।
  3191. 2:37:46तुमने तो मेरा काम और आसान कर दिया। जो
  3192. 2:37:49काम मेरा पहले अधूरा रह गया था, वह अब
  3193. 2:37:52पूरा होगा।
  3194. 2:37:54शौर्य ने भी चेहरे पर फीकी मुस्कान लाते
  3195. 2:37:56हुए पूछा, "तुम्हें पक्का यकीन है कि इस
  3196. 2:38:00बार तुम अपने काम में सफल हो जाओगे?"
  3197. 2:38:03शौर्य की बात सुनकर विमल के चेहरे पर शक
  3198. 2:38:06की परछाई नजर आने लगी। फिर भी उसने अपने
  3199. 2:38:09दिल को कड़ा करते हुए कहा,
  3200. 2:38:12तुम्हें इसमें शक है? तुम ही बताओ अब कौन
  3201. 2:38:16रोकेगा मुझे? शौर्य विमल के हाथ की तरफ
  3202. 2:38:20ध्यान से देखते हुए बोला, तुम्हें क्या
  3203. 2:38:23लगता है कि मैं यहां अकेला आ गया और मैंने
  3204. 2:38:26अपनी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की
  3205. 2:38:28होगी? अगर तुमने मेरी जान ली तो बचोगे तो
  3206. 2:38:32तुम भी नहीं। विमल ने पिस्तल शौर्य की तरफ
  3207. 2:38:36लहराते हुए कहा, "इस कोरी भमकी का कोई
  3208. 2:38:39फायदा नहीं।"
  3209. 2:38:41एक बार मैं तुम्हारे झांसे में आ गया।
  3210. 2:38:43तुमको क्या लगता है कि काठ की हाड़ी हर
  3211. 2:38:46बार चढ़ जाएगी? शौर्य ने आखिरी चेतावनी
  3212. 2:38:49देते हुए कहा, देखो अभी भी मैं तुम्हें एक
  3213. 2:38:53मौका दे रहा हूं। अगर तुम मुझे बता देते
  3214. 2:38:56हो कि मुझे मारने की सुपारी तुम्हें किसने
  3215. 2:38:58दी थी, तो मैं तुम्हारे सारे गुनाह माफ कर
  3216. 2:39:01दूंगा। विमल ने हैरानी से उसकी तरफ देखते
  3217. 2:39:04हुए कहा, मानना पड़ेगा पिस्तल सर पर टंगी
  3218. 2:39:08हुई है। उसके बाद भी तुम में इतनी हिम्मत
  3219. 2:39:11है [संगीत] कि तुम मुझे अपनी बात मनवाने
  3220. 2:39:13की कोशिश कर रहे हो। पर इसका कोई फायदा
  3221. 2:39:17नहीं। तुमने यहां आकर अपनी अनिश्चित मौत
  3222. 2:39:20को निश्चित कर लिया है। बोलते हुए विमल का
  3223. 2:39:24ध्यान टेबल के ऊपर मौजूद एक स्विच की तरफ
  3224. 2:39:27गया। वह शायद बाहर [संगीत] मौजूद किसी बेल
  3225. 2:39:30का स्विच था जिसे बजाने पर बाहर से कोई
  3226. 2:39:33कमरे के अंदर आ जाता। विमल [संगीत] ने
  3227. 2:39:36दो-तीन बार उस बेल को बजाया लेकिन कमरे
  3228. 2:39:39में कोई भी नहीं आया। यह देखकर [संगीत]
  3229. 2:39:41उसके चेहरे पर परेशानी के भाव नजर आने
  3230. 2:39:44लगे। वहीं शौर्य समझ गया कि शायद जहांगीर
  3231. 2:39:47खान और [संगीत] रुबिया ने अपना काम कर
  3232. 2:39:49दिया था।
  3233. 2:39:50हॉल में मौजूद उन चारों मस्तों को जहांगीर
  3234. 2:39:54खान और रुबिया द्वारा ठिकाने लगाना कोई
  3235. 2:39:56मुश्किल काम नहीं था। विमल के चेहरे पर
  3236. 2:39:59परेशानी [संगीत] साफ दिखाई दे रही थी।
  3237. 2:40:02शौर्य ने इसी मौके का फायदा उठाया। चेयर
  3238. 2:40:05पर बैठे-बैठे ही उसने अपने दोनों पैरों का
  3239. 2:40:08सम्मिलित वार टेबल के साइड पर किया। टेबल
  3240. 2:40:12सीधा विमल की छाती से जा टकराया और विमल
  3241. 2:40:15अपनी चेयर के साथ पीछे की तरफ पलट गया।
  3242. 2:40:18पिस्तल उसके हाथ से छूट कर कहीं दूर जाकर
  3243. 2:40:21गिर पड़ी। शौर्य ने इतने पर ही बस नहीं
  3244. 2:40:24किया। वह फुर्ती से अपनी जगह से उठा और
  3245. 2:40:27सबसे पहले पिस्तल को अपने कब्जे में किया।
  3246. 2:40:31उसके बाद वह इत्मीनान से वापस अपनी चेयर
  3247. 2:40:33पर बैठ गया। विमल ने भी खुद को संभाला।
  3248. 2:40:37उसने अपनी पिस्टल की तलाश में नजरें घुमाई
  3249. 2:40:40तो पिस्टल उसे शौर्य की उंगलियों में
  3250. 2:40:42घूमती नजर आई। वह समझ गया [संगीत] कि इतनी
  3251. 2:40:45देर में यहां पूरा खेल पलट चुका था। अब
  3252. 2:40:49उसके चेहरे पर परेशानी के भाव साफ नजर आने
  3253. 2:40:52लगे। विमल जबरदस्ती खुद में हिम्मत पैदा
  3254. 2:40:55करने की कोशिश करते हुए बोला, "यह तुमने
  3255. 2:40:58[संगीत] ठीक नहीं किया।" "तुम अब यहां से
  3256. 2:41:01बचकर नहीं जा पाओगे।" शौर्य ने उसका उपहास
  3257. 2:41:04उड़ाते हुए कहा, "कमाल है। तुमको अभी भी
  3258. 2:41:08लगता है कि तुम मेरा कुछ बिगाड़ पाओगे?"
  3259. 2:41:12इसके बाद शौर्य ने पिस्तल की नाल को टेबल
  3260. 2:41:14पर ठोकते हुए कहा, अब शराफत से सामने वाली
  3261. 2:41:18चेयर पर बैठ जाओ और मैं जो कुछ तुमसे
  3262. 2:41:21पूछने [संगीत] वाला हूं, शराफत से उसका
  3263. 2:41:23जवाब देते जाओ। विमल सुनी आंखों से शौर्य
  3264. 2:41:27को घूरता रहा। अचानक बदली [संगीत]
  3265. 2:41:29परिस्थितियों में उसे समझ नहीं आ रहा था
  3266. 2:41:32कि यह सब क्या हो गया। [संगीत] उसे यह भी
  3267. 2:41:35समझ नहीं आ रहा था कि उसके चारों
  3268. 2:41:37बॉडीगार्ड कहां गायब हो गए। इस मुसीबत के
  3269. 2:41:41वक्त ही
  3270. 2:41:41[संगीत]
  3271. 2:41:42चारों को गायब होना था। वह समझने की कोशिश
  3272. 2:41:45कर ही रहा था कि उन चारों को आखिर हुआ
  3273. 2:41:47क्या है। [संगीत] तभी उसके कमरे का दरवाजा
  3274. 2:41:50एक झटके से खुला और दो व्यक्ति कमरे के
  3275. 2:41:53अंदर आए। दोनों के चेहरे पर मास्क [संगीत]
  3276. 2:41:56चढ़ा हुआ था। यह दोनों कोई और नहीं बल्कि
  3277. 2:42:00जहांगीर खान और रुबिया ही थे। दोनों बड़ी
  3278. 2:42:03फुर्ती से [संगीत] कमरे के अंदर आए। लेकिन
  3279. 2:42:06कमरे के अंदर का दृश्य देखकर वहीं स्थिर
  3280. 2:42:08हो गए। वे उम्मीद कर रहे थे कि शौर्य विमल
  3281. 2:42:12की पिस्तल के निशाने पर होगा क्योंकि
  3282. 2:42:14[संगीत] थोड़ी देर पहले यहां की आवाज
  3283. 2:42:17सुनकर उन्हें ऐसा ही लगा था कि विमल ने
  3284. 2:42:20शौर्य पर [संगीत] पिस्तल तान रखी है।
  3285. 2:42:22इसीलिए उन्होंने जल्दबाजी में विमल के
  3286. 2:42:25आदमियों पर हमला कर दिया था। वे चारों इस
  3287. 2:42:28कोठी के मेन हॉल में जमीन पर पड़े कराह
  3288. 2:42:31रहे थे। उसके बाद जहांगीर खान को कमरे
  3289. 2:42:35[संगीत] के अंदर क्या हुआ है यह जानने का
  3290. 2:42:37होश ही नहीं रहा था। वह तो यही समझ रहा था
  3291. 2:42:40कि अभी भी शौर्य विमल की पिस्तल [संगीत]
  3292. 2:42:43के निशाने पर होगा। लेकिन कमरे के अंदर का
  3293. 2:42:46सीन पूरी तरह बदल चुका था। पिस्तल अब
  3294. 2:42:50शौर्य के हाथ में थी और विमल उसके सामने
  3295. 2:42:53लाचार स्थिति में खड़ा था। जहांगीर खान ने
  3296. 2:42:56स्थिति देखकर तारीफ भरे स्वर में कहा,
  3297. 2:43:00बहुत अच्छे। तुम तो पहले ही बाजी पलट चुके
  3298. 2:43:03हो। यहां स्थिति कंट्रोल में देखकर
  3299. 2:43:06जहांगीर खान ने रुबिया को वापस हॉल में
  3300. 2:43:08जाने को कहा ताकि वह उन चारों बदमाशों पर
  3301. 2:43:12नजर बनाए रख सके। रुबिया वहां से चली गई।
  3302. 2:43:16अब उस कमरे में सिर्फ शौर्य, विमल और
  3303. 2:43:19जहांगीर खान रह गए थे। विमल हैरान नजरों
  3304. 2:43:23से जहांगीर खान की तरफ देखने लगा और पूछा
  3305. 2:43:27तुम कौन हो? शौर्य ने लापरवाही से कहा,
  3306. 2:43:31"यह वो है जिसको तुमने मुझे मारने की
  3307. 2:43:34सुपारी दी थी।" विमल हैरानी से जहांगीर
  3308. 2:43:37खान की तरफ देखते हुए बोला, "कलर फॉक्स,
  3309. 2:43:42क्या तुम किलर फॉक्स हो?" जहांगीर खान ने
  3310. 2:43:45शांत लहजे में पूछा, "क्या तुम्हें मेरे
  3311. 2:43:49होने पर शक है?" विमल हैरान स्वर में
  3312. 2:43:52बोला, पर तुम्हें पता कैसे चला कि मैंने
  3313. 2:43:55ही तुम्हें शौर्य को मारने की सुपारी दी
  3314. 2:43:57है? जहांगीर खान ने शांत भाव से कहा, "यह
  3315. 2:44:01इतना भी मुश्किल नहीं था। मैं तो तुम्हारे
  3316. 2:44:04बारे में बहुत पहले से जानता हूं, लेकिन
  3317. 2:44:07कभी तुम्हारे पास आने की जरूरत नहीं पड़ी।
  3318. 2:44:10आज जब शौर्य खुद मुझ तक पहुंच गया, तो
  3319. 2:44:12मजबूरन मुझे इसको तुम्हारे पास लाना पड़ा।
  3320. 2:44:16विमल की आंखों में हैरानी और बढ़ गई। वो
  3321. 2:44:19बोला, "क्या कहा? शौर्य तुम्हें ढूंढते
  3322. 2:44:23हुए तुम तक पहुंच गया। कमाल है। जिस काम
  3323. 2:44:27को आज तक कोई नहीं कर सका, उसे इस लड़के
  3324. 2:44:30ने मुमकिन कर दिया। विमल ने भी बहुत बार
  3325. 2:44:33किलर फॉक्स के बारे में जानने की कोशिश की
  3326. 2:44:35थी, लेकिन वो उसके बारे में कुछ भी पता
  3327. 2:44:38नहीं कर पाया था। जहांगीर खान ने आगे कहा,
  3328. 2:44:42सिर्फ इतना ही नहीं इसने मुझे इस हद तक
  3329. 2:44:45मजबूर कर दिया कि मुझे इसको तुम्हारे पास
  3330. 2:44:48तक लाना पड़ा। जहांगीर खान ने शौर्य यहां
  3331. 2:44:51तक कैसे पहुंचा? इसकी पूरी बात विमल को
  3332. 2:44:54बता दी। विमल शौर्य की तरफ देखने लगा। अब
  3333. 2:44:58उसे समझ आ गया था कि शौर्य उसके पास कैसे
  3334. 2:45:01पहुंच गया। विमल हारे हुए स्वर में बोला,
  3335. 2:45:05"तुम मुझसे क्या चाहते हो?" शौर्य ने उसका
  3336. 2:45:09उपहास उड़ाते हुए कहा, अब आए ना तुम लाइन
  3337. 2:45:12पर? अगर पहले ही हमारी बात मान गए होते,
  3338. 2:45:15तो फालतू में यूं चोट तो नहीं खानी पड़ती।
  3339. 2:45:18विमल खामोशी से शौर्य की बात सुन गया।
  3340. 2:45:21शौर्य ने जिज्ञासा भरी नजरों से विमल को
  3341. 2:45:24देखते हुए कहा, "अब तुम इतने भी नादान
  3342. 2:45:28नहीं हो कि मेरे यहां तक आने का कारण
  3343. 2:45:30तुम्हें समझ नहीं आया होगा।" विमल अनजान
  3344. 2:45:34बनने की कोशिश करते हुए बोला, "जक तुम
  3345. 2:45:37कहोगे नहीं, तब तक मुझे कैसे समझ आएगा कि
  3346. 2:45:40तुम मुझसे क्या जानना चाहते हो।" शौर्य ने
  3347. 2:45:43गंभीर स्वर में कहा, ठीक है। जब तुम
  3348. 2:45:46साफ-साफ ही सुनना चाहते हो, तो सुनो।
  3349. 2:45:49मुझे यह जानना है कि मुझे मारने की सुपारी
  3350. 2:45:52[संगीत] तुम्हें किसने दी थी। विमल बेचैनी
  3351. 2:45:56से पहलू बदलने लगा। वो जहांगीर [संगीत]
  3352. 2:45:58खान की तरफ देखने लगा जैसे वो यह उम्मीद
  3353. 2:46:01कर रहा हो कि जहांगीर खान उसकी मनस्थिति
  3354. 2:46:04को समझकर [संगीत]
  3355. 2:46:05शायद शौर्य को कुछ समझाए। जहांगीर खान ने
  3356. 2:46:09विमल की बेचैनी को समझते हुए कहा, कोई
  3357. 2:46:12फायदा नहीं है। तुम्हें बताना ही पड़ेगा
  3358. 2:46:15[संगीत]
  3359. 2:46:15नहीं तो तुम इसका दुष्परिणाम झेल नहीं
  3360. 2:46:18पाओगे।
  3361. 2:46:19विमल अपनी आंखें बड़ी करते हुए बोला, पर
  3362. 2:46:22मैं तो खुद नहीं जानता कि इनको मारने की
  3363. 2:46:25सुपारी देने वाली कौन है। विमल की [संगीत]
  3364. 2:46:28बात सुनकर शौर्य चौंक गया। उसने हैरान
  3365. 2:46:31स्वर में पूछा। क्या तुम्हें जिसने मुझे
  3366. 2:46:34मारने की सुपारी दी है वो एक औरत थी? विमल
  3367. 2:46:38ने बेचैनी से पहलू बदलते हुए कहा। हां पर
  3368. 2:46:42वो कभी मेरे सामने नहीं आई। मेरी उससे
  3369. 2:46:45दो-तीन बार बात ही हुई थी। उसने फोन पर
  3370. 2:46:48अपने बारे में कुछ नहीं बताया। मैंने जब
  3371. 2:46:51भी जानने [संगीत] की कोशिश की उसने यही
  3372. 2:46:53कहा तुम आम खाओ गुठली मत गिनो। शौर्य की
  3373. 2:46:58आवाज अचानक सर्द हो गई। उसने कहा ऐसे तो
  3374. 2:47:02बात नहीं बनेगी मिस्टर विमल। अगर मुझे
  3375. 2:47:05अपने काम की जानकारी नहीं मिलेगी तो फिर
  3376. 2:47:08मेरे आपके पास आने तक की मेहनत तो फेल ही
  3377. 2:47:10हो जाएगी। विमल ने बेचारगी से कहा, "मैं
  3378. 2:47:14सच कह रहा हूं। मुझे सच में उसके बारे में
  3379. 2:47:17कुछ नहीं पता है। तुम मेरा यकीन करो।
  3380. 2:47:21शौर्य की आवाज किसी खूंखार भेड़िए की तरह
  3381. 2:47:24गूंज उठी। उसने कहा मुझे अपनी सुपारी देने
  3382. 2:47:28वाले को ढूंढना था तो मैं तुम तक
  3383. 2:47:30पहुंचाना। [संगीत]
  3384. 2:47:32अगर तुम भी अपनी सलामती चाहते हो तो मुझे
  3385. 2:47:35यह पता करके बताओ कि तुम्हें मुझे मारने
  3386. 2:47:37की सुपारी किसने दी। नहीं तो फिर मैं
  3387. 2:47:40तुम्हारा क्या हाल करूंगा। तुम सोच भी
  3388. 2:47:43नहीं सकते। विमल के माथे पर पसीने की
  3389. 2:47:46बूंदे [संगीत] झिलमिला उठी। जहांगीर खान
  3390. 2:47:50को भी विमल की परेशानी समझ में आ गई। वो
  3391. 2:47:53अपेक्षाकृत शांत स्वर में बोला। तुम जरा
  3392. 2:47:56सिलसिलेवार ढंग से बताओ कि तुम्हारे पास
  3393. 2:47:59यह सुपारी कैसे आई? विमल ने जवाब दिया।
  3394. 2:48:03हमारी जो भी बातचीत हुई वो Google मीट के
  3395. 2:48:06द्वारा हुई थी। दूसरी तरफ से एक औरत की
  3396. 2:48:09आवाज ही आती थी। पेमेंट [संगीत] भी मुझे
  3397. 2:48:13हवाला के जरिए ही हुआ था। पर यह पक्का है
  3398. 2:48:17कि वह जो भी औरत थी, उसकी शौर्य से गहरी
  3399. 2:48:20नफरत होगी। क्योंकि उसकी बातों में शौर्य
  3400. 2:48:24के लिए बहुत नफरत झलक रही थी। विमल उम्मीद
  3401. 2:48:27भरी नजरों से शौर्य को देखने लगा। जैसे
  3402. 2:48:30उसे उम्मीद हो कि शौर्य इतनी जानकारी
  3403. 2:48:33[संगीत] से ही काम चला लेगा।
  3404. 2:48:35लेकिन उसकी उम्मीद के विपरीत शौर्य ने
  3405. 2:48:38अपना सिर ना में हिलाते हुए कहा इतनी
  3406. 2:48:41जानकारी [संगीत] से कुछ नहीं होना है। कुछ
  3407. 2:48:43ऐसी पुख्ता जानकारी दो जिससे मुझे उस तक
  3408. 2:48:46पहुंचने का मौका मिल जाए। तभी जहांगीर खान
  3409. 2:48:50ने कुछ सोचकर विमल से पूछा। तुमने उस औरत
  3410. 2:48:53से यह नहीं पूछा कि उसे तुम्हारे बारे में
  3411. 2:48:55कैसे पता चला? जैसे ही विमल ने जहांगीर
  3412. 2:48:59खान का सवाल सुना, उसकी आंखों में चमक आ
  3413. 2:49:02गई। वो थोड़ा उत्साहित होकर बोला, हां,
  3414. 2:49:05मैंने उससे यह सवाल किया था। तो उसने
  3415. 2:49:08मुझसे कहा था कि उसे मेरे बारे में
  3416. 2:49:10जानकारी जमुनालाल झावेरी से मिली थी।
  3417. 2:49:14शौर्य उत्सुकतावश खुद को रोक नहीं सका।
  3418. 2:49:17उसने पूछा कौन है यह जमुनालाल झावेरी?
  3419. 2:49:21विमल ने जवाब दिया, जमुनालाल झावेरी
  3420. 2:49:25विशालगढ़ का बहुत बड़ा हीरों का व्यापारी
  3421. 2:49:28है। शौर्य को तसल्ली हुई कि चलो कुछ तो
  3422. 2:49:31क्लू मिला। जिसने भी उसे मारने की सुपारी
  3423. 2:49:34विमल को दी है, शायद जमुनालाल झावेरी के
  3424. 2:49:37जरिए उस तक पहुंचा जा सके। लेकिन उसने
  3425. 2:49:40प्रत्यक्ष में विमल से कहा, "मुझे नहीं
  3426. 2:49:43पता कि तुम यह कैसे पता करोगे, [संगीत]
  3427. 2:49:45लेकिन यह तुम ही को पता करके मुझे बताना
  3428. 2:49:47है कि इस सबके पीछे कौन है।" मैं तुम्हें
  3429. 2:49:5010 दिन का समय देता हूं। अगर तुम मुझे
  3430. 2:49:53उसके बारे में बताने में असमर्थ रहे, तो
  3431. 2:49:56मैं गारंटी करता हूं कि इस शहर में तुम
  3432. 2:49:58कोई धंधा करने [संगीत] लायक नहीं रहोगे।
  3433. 2:50:01अब आगे क्या होगा? क्या विमल रस्तोगी पता
  3434. 2:50:04लगा पाएगा कि शौर्य को मारने की सुपारी
  3435. 2:50:06उसे किसने दी थी? क्या होगा जब शौर्य को
  3436. 2:50:10पता चलेगा कि उसे मरवाने की सुपारी देने
  3437. 2:50:12वाला मास्टरमाइंड कौन है? जानने के लिए
  3438. 2:50:15सुनते रहिए कहानी का अगला एपिसोड। उसगी को
  3439. 2:50:19यह वार्निंग देकर वहां से निकल गया कि
  3440. 2:50:21अगले 10 दिनों में उसे किसी भी तरह पता
  3441. 2:50:24करके बताना होगा कि शौर्य की सुपारी
  3442. 2:50:27[संगीत] उसे किसने दी थी। साथ ही जहांगीर
  3443. 2:50:31खान ने भी शौर्य को आश्वस्त किया कि वह
  3444. 2:50:34खुद भी पता लगाने की कोशिश करेगा कि आखिर
  3445. 2:50:37शौर्य को मारने की सुपारी किसने [संगीत]
  3446. 2:50:39दी थी। उसने विमल रस्तोगी से वो ईमेल आईडी
  3447. 2:50:42ले ली थी जिस पर विमल की बात सुपारी
  3448. 2:50:44[संगीत] देने वाली औरत के साथ हुई थी। साथ
  3449. 2:50:47ही जहांगीर खान ने विमल से वह ईमेल आईडी
  3450. 2:50:50भी ले ली थी जिसके जरिए वह सुपारी देने
  3451. 2:50:53वाली लेडी से कनेक्ट करता था। जहांगीर खान
  3452. 2:50:56[संगीत] ने तो उसी समय उस आईडी पर एक मेल
  3453. 2:50:59भी कर दिया था कि अगर वह अभी भी शौर्य का
  3454. 2:51:02कत्ल करना चाहती है तो वह फिर से इस काम
  3455. 2:51:05को अंजाम दे सकता है। शौर्य को भी जहांगीर
  3456. 2:51:08खान का यह आईडिया पसंद आया था। सब कुछ
  3457. 2:51:12फाइनल होने के बाद शौर्य जहांगीर खान
  3458. 2:51:15[संगीत] और रुबिया के साथ विमल रस्तोगी के
  3459. 2:51:17ऑफिस से निकल गया। शौर्य जहांगीर खान और
  3460. 2:51:21रुबिया को छोड़ने उनके क्लब आ गया। जब
  3461. 2:51:24शौर्य जाने को हुआ तो जहांगीर खान ने उसे
  3462. 2:51:27रोकते हुए कहा, शौर्य तुम्हारा मार्शल
  3463. 2:51:30आर्ट बहुत अच्छा है। क्यों ना तुम बीच-बीच
  3464. 2:51:33में हमारे क्लब में आकर [संगीत] हमारे
  3465. 2:51:35बच्चों को थोड़े टिप्स दिया करो। शौर्य ने
  3466. 2:51:38क्लब के बोर्ड की तरफ देखते हुए कहा, "अगर
  3467. 2:51:41आप ऐसा चाहते हैं, तो जब भी समय मिलेगा,
  3468. 2:51:44मैं [संगीत] जरूर आपके क्लब में आया
  3469. 2:51:46करूंगा। मुझे खुद भी मार्शल आर्ट बहुत
  3470. 2:51:49पसंद है। पर जब से इंडिया आया हूं, मेरी
  3471. 2:51:52प्रैक्टिस नहीं हो पाती।
  3472. 2:51:54जहांगीर खान ने उम्मीद भरी आंखों से शौर्य
  3473. 2:51:57की तरफ देखते हुए कहा, फिर तो तुम्हें
  3474. 2:52:00जरूर यहां आते रहना चाहिए और अपनी स्किल
  3475. 2:52:02को और बेहतर [संगीत] करना चाहिए। शौर्य ने
  3476. 2:52:06कुछ पल जहांगीर खान को देखा। फिर गंभीरता
  3477. 2:52:09से कहा, "अगर आप प्रॉमिस करते हैं कि आप
  3478. 2:52:12दोबारा [संगीत] सुपारी किलिंग जैसे काम
  3479. 2:52:14नहीं करेंगे, तो मैं यहां जरूर आते रहने
  3480. 2:52:17के बारे में सोच सकता [संगीत] हूं।" पता
  3481. 2:52:19नहीं क्यों? लेकिन शौर्य को जहांगीर खान
  3482. 2:52:22और इस क्लब के साथ एक अपनापन सा महसूस
  3483. 2:52:25होने लगा था। इसलिए वह [संगीत] दिल से
  3484. 2:52:27चाहता था कि जहांगीर खान गलत काम करना
  3485. 2:52:30छोड़ दे। जहांगीर खान [संगीत] ने शौर्य को
  3486. 2:52:33अपने फैसले से वाकिफ कराते हुए कहा, वह तो
  3487. 2:52:37मैंने पहले ही निश्चय कर लिया है कि
  3488. 2:52:39[संगीत] अब से कोई भी गलत काम नहीं
  3489. 2:52:41करूंगा। सच कहूं तो महंत के जाने के बाद
  3490. 2:52:44मैंने कोई भी गलत काम अपने हाथ में नहीं
  3491. 2:52:47लिया है और अब [संगीत] आगे भी कोई गलत काम
  3492. 2:52:50करने का इरादा नहीं है। अब हमारा फोकस
  3493. 2:52:53पूरी तरह से शैडो बॉक्सर क्लब को ऊंचाइयों
  3494. 2:52:56पर पहुंचाने का है। यह सुनकर शौर्य के
  3495. 2:52:59चेहरे पर खुशी आ गई। उसने कहा यह तो बहुत
  3496. 2:53:03खुशी की बात है। फिर तो मैं जरूर क्लब में
  3497. 2:53:06आया करूंगा। शौर्य जब जाने को हुआ तो
  3498. 2:53:10रुबिया ने उसे रोकते हुए कहा सुनो शौर्य 9
  3499. 2:53:14तारीख को ब्रह्मा स्टेडियम में मार्शल
  3500. 2:53:16आर्ट चैंपियनशिप का आयोजन होने जा रहा है।
  3501. 2:53:19क्यों ना तुम उस दिन हमारा उत्साह बढ़ाने
  3502. 2:53:21के लिए हमारे साथ रहो? अगर तुम आओगे तो
  3503. 2:53:24हमें अच्छा लगेगा। [संगीत]
  3504. 2:53:26यह सुनते ही शौर्य की आंखों में चमक आ गई।
  3505. 2:53:29उसने उत्सुकता [संगीत] से पूछा। क्या तुम
  3506. 2:53:32उसमें पार्टिसिपेट कर रही हो? रुबिया ने
  3507. 2:53:35बताया [संगीत]
  3508. 2:53:36हां। मेरे साथ दो और लड़के हमारे क्लब से
  3509. 2:53:39उसमें हिस्सा लेंगे। शौर्य ने इस बारे में
  3510. 2:53:43सोचा तो उसे ध्यान आया कि [संगीत] कल से
  3511. 2:53:45तो वह 10 दिनों के लिए रत्नाकर शेट्टी के
  3512. 2:53:48साथ शूटिंग में रहने वाला है। फिर वह उस
  3513. 2:53:51चैंपियनशिप [संगीत] को देखने के लिए कैसे
  3514. 2:53:53आ सकता था। कुछ सोचकर उसने रुबिया से
  3515. 2:53:56पूछा। वैसे यह स्टार्ट किस टाइम होगा?
  3516. 2:54:00रुबिया ने शौर्य को संशय भरी नजरों से
  3517. 2:54:02देखते हुए कहा। मैच शाम को [संगीत] 7:00
  3518. 2:54:05बजे से स्टार्ट होगी और लगभग 12:00 बजे तक
  3519. 2:54:08चलेगी। इस चैंपियनशिप में स्टेट के लगभग
  3520. 2:54:12जितने भी बड़े फाइट क्लब हैं सभी हिस्सा
  3521. 2:54:14लेंगे। शौर्य ने रुबिया को आश्वस्त करते
  3522. 2:54:18हुए कहा देखो [संगीत] मैं पक्का वादा तो
  3523. 2:54:21नहीं करता पर कोशिश करूंगा कि मैं उस
  3524. 2:54:24चैंपियनशिप को देखने के लिए जरूर आऊं।
  3525. 2:54:27जहांगीर खान ने भी शौर्य को आने के लिए
  3526. 2:54:30कहते हुए [संगीत] कहा, तुम कोशिश करोगे तो
  3527. 2:54:33जरूर आ जाओगे। वैसे तुम्हें आना चाहिए
  3528. 2:54:36तुम्हें अच्छा लगेगा। पहली बार हमारा क्लब
  3529. 2:54:39इस टूर्नामेंट [संगीत] में पार्टिसिपेट कर
  3530. 2:54:41रहा है। नहीं तो आज तक हम सिर्फ दर्शक
  3531. 2:54:45दीर्घा में बैठकर ही इसमें [संगीत] होने
  3532. 2:54:47वाली फाइट देखते थे। शौर्य ने मुस्कुराते
  3533. 2:54:50हुए कहा। मैं पूरी कोशिश [संगीत] करूंगा
  3534. 2:54:53मास्टर। शौर्य की बात सुनकर जहांगीर खान
  3535. 2:54:57ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। यह पहली
  3536. 2:55:00[संगीत] बार था जब शौर्य ने उसे मास्टर
  3537. 2:55:02कहा था। शौर्य समझ गया कि जहांगीर खान ने
  3538. 2:55:06उसे आश्चर्य से क्यों देखा है? वो
  3539. 2:55:09मुस्कुराते [संगीत] हुए बोला जिस समय आपने
  3540. 2:55:11कहा कि अब आप कोई भी गलत काम नहीं करेंगे।
  3541. 2:55:15उसी समय मैंने आपको मास्टर मान लिया।
  3542. 2:55:18जहांगीर खान झेपते हुए बोले पर तुम तो
  3543. 2:55:22मार्शल आर्ट में मुझसे [संगीत] कहीं आगे
  3544. 2:55:24हो। शौर्य ने विनम्रता से कहा हो सकता है
  3545. 2:55:28कि फाइट करने में मैं आपसे थोड़ा आगे हूं।
  3546. 2:55:31पर आपका तजुर्बा [संगीत] मुझसे बहुत आगे
  3547. 2:55:33है। इसलिए मेरे लिए आप मास्टर ही रहेंगे।
  3548. 2:55:37यह कहते हुए शौर्य जहांगीर खान के सामने
  3549. 2:55:40सम्मान में थोड़ा झुका और फिर अपनी कार की
  3550. 2:55:44तरफ बढ़ते हुए बोला। अब मैं चलता हूं
  3551. 2:55:46मास्टर।
  3552. 2:55:48इसके बाद शौर्य वहां से निकल गया। कल से
  3553. 2:55:51उसे शूटिंग पर निकलना था। इसलिए उसने सोचा
  3554. 2:55:54कि आज वह अपने दादाजी के महल जाकर अपने
  3555. 2:55:57मम्मी पापा से मिल ले और उन्हें अपने
  3556. 2:55:59हालात से भी वाकिफ करा दे जिससे वे उसके
  3557. 2:56:02लिए परेशान ना हो। शौर्य लगभग आधे घंटे
  3558. 2:56:06बाद अपने दादाजी के महल में पहुंचा। अब
  3559. 2:56:08महल के गार्ड शौर्य को पहचान गए थे। इसलिए
  3560. 2:56:11उसे पूछताछ के लिए गेट पर नहीं रोका जाता
  3561. 2:56:14था। शौर्य ने देखा कि महल के कंपाउंड में
  3562. 2:56:17कई लग्जरियस कारें खड़ी थी। यानी बाहर से
  3563. 2:56:21कुछ लोग महल में आए हुए थे। शौर्य भी अपनी
  3564. 2:56:24कार बाहर खड़ी करके महल में प्रवेश कर
  3565. 2:56:26गया। वह ड्राइंग हॉल में पहुंचा तो उसे एक
  3566. 2:56:30बहुत जोर का ठहाका सुनाई दिया। उसने देखा
  3567. 2:56:33[संगीत] कि चंद्रभान जी, स्वर्णलता जी,
  3568. 2:56:36जयभान जी, विशाल नारंग और साथ में शौर्य
  3569. 2:56:39के पिता सूर्यभान जी एक गोल मेज के चारों
  3570. 2:56:42तरफ बैठे हुए थे। विशाल नारंग किसी बात पर
  3571. 2:56:46जोर से ठहाका लगाकर हंस पड़े थे। शौर्य ने
  3572. 2:56:49गौर किया कि उस राउंड टेबल के चारों तरफ
  3573. 2:56:52जितने भी लोग मौजूद थे, [संगीत] सभी के
  3574. 2:56:54चेहरे पर खुशी झलक रही थी। सिर्फ उसके
  3575. 2:56:57पापा ही थे जिनका चेहरा उतरा हुआ था।
  3576. 2:57:00शौर्य समझ रहा था कि ऐसा क्यों था। विशाल
  3577. 2:57:04नारंग की खुशी जिस तरह उबाल मार रही थी,
  3578. 2:57:07वही सूर्यभान जी के दुख का कारण था। कहां
  3579. 2:57:10तो वह यह मान बैठे थे कि कनिका उनके
  3580. 2:57:12[संगीत] बेटे की बहू बनेगी। लेकिन आज यह
  3581. 2:57:15फैसला हो गया था कि कनिका कुणाल से शादी
  3582. 2:57:18कर रही है। उस हॉल में कुणाल, [संगीत]
  3583. 2:57:21प्रतीक, अरविंद और विक्की भी मौजूद थे।
  3584. 2:57:24लेकिन इन लोगों का अलग ही ग्रुप था। शौर्य
  3585. 2:57:27ने उनके साथ दो खूबसूरत लड़कियों को भी
  3586. 2:57:30देखा। एक की मांग में सिंदूर झलक रहा था
  3587. 2:57:33जिससे समझा जा सकता था कि वह शादीशुदा
  3588. 2:57:36होगी। जबकि उसके साथ एक दूसरी खूबसूरत
  3589. 2:57:39लड़की भी थी जो यकीनन कुंवारी होगी। शौर्य
  3590. 2:57:43ने देखा कि विक्की उस लड़की के पीछे पड़ा
  3591. 2:57:46हुआ था। पहली औरत शायद अरविंद की पत्नी थी
  3592. 2:57:49क्योंकि जिस तरह वह अरविंद के पहलू में
  3593. 2:57:52खड़ी थी, उससे जाहिर हो रहा था कि वह
  3594. 2:57:54अरविंद की पत्नी ही होगी। शौर्य ने इससे
  3595. 2:57:57पहले उसे नहीं देखा था। इसलिए वह उन्हें
  3596. 2:58:00पहचानता नहीं था। एक साइड में उसकी मां
  3597. 2:58:03नीलिमा और प्रतीक की मां जानवी राठौर भी
  3598. 2:58:06बैठी आपस में बातें कर रही थी। जानवी
  3599. 2:58:10राठौर जी के चेहरे से ही प्रतीत हो रहा था
  3600. 2:58:12कि वह कुछ बीमार रही होंगी। इसलिए उनके
  3601. 2:58:15चेहरे की रौनक थोड़ी मध्यम पड़ गई थी। महल
  3602. 2:58:19के नौकर चाकर सबके आभगत में लगे हुए थे।
  3603. 2:58:22शौर्य सीधा अपने दादाजी के पास पहुंचा और
  3604. 2:58:25उनके पैर छूकर प्रणाम किया। इसके बाद उसने
  3605. 2:58:29वहां मौजूद सभी लोगों को प्रणाम किया।
  3606. 2:58:31[संगीत]
  3607. 2:58:32चंद्रभान जी ने शौर्य की बाह पकड़ते हुए
  3608. 2:58:34कहा, आ गए तुम कहां रहते हो तुम? [संगीत]
  3609. 2:58:37कभी दिखाई ही नहीं देते। शौर्य ने सहजता
  3610. 2:58:41से जवाब दिया। कुछ नहीं दादा जी कुछ काम
  3611. 2:58:44हाथ में ले लिया है। [संगीत] उसको ही पूरा
  3612. 2:58:46करना है जिससे समय नहीं मिल पाता। विशाल
  3613. 2:58:50नारंग ने गर्व से सीना [संगीत] चौड़ा करते
  3614. 2:58:52हुए कहा। शौर्य मैंने सुना है तुम जो काम
  3615. 2:58:56कर रहे हो तुम किसी कंपनी का ब्रांड
  3616. 2:58:58एंडोर्समेंट का [संगीत] काम देख रहे हो ना
  3617. 2:59:01कहां इन छोटे-मोटे कामों में लगे हुए हो
  3618. 2:59:04तुम आओ मेरी कंपनी में मैं तुम्हें एक
  3619. 2:59:06बड़े [संगीत] पोस्ट पर वहां ज्वाइन करवाता
  3620. 2:59:08हूं शौर्य ने कटाक्ष करते हुए कहा आपके
  3621. 2:59:12ऑफर के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद फूफा जी
  3622. 2:59:14[संगीत]
  3623. 2:59:15पर अभी मैं अपनी हैसियत के हिसाब से काम
  3624. 2:59:17कर रहा हूं कहीं आपकी कंपनी को मेरे कारण
  3625. 2:59:20कोई नुकसान हो गया [संगीत] तो मैं भरपाई
  3626. 2:59:22कैसे कर पाऊंगा
  3627. 2:59:24लेकिन विशाल नारंग भी मोटी चमड़ी वाले
  3628. 2:59:26व्यक्ति थे। वह ठहाका लगाते हुए बोले,
  3629. 2:59:29बहुत अच्छे तुम मजाक अच्छा कर लेते हो। पर
  3630. 2:59:33मैं सच में [संगीत] चाहता हूं कि तुम कोई
  3631. 2:59:35ढंग की कंपनी में काम करो। आखिर तुम राठौर
  3632. 2:59:38फैमिली के पोते हो। क्या यह [संगीत] अच्छा
  3633. 2:59:40लगेगा कि तुम किसी बाहर की कंपनी में काम
  3634. 2:59:42करो? शौर्य ने खिसियानी हंसी-हंसते हुए
  3635. 2:59:46कहा, मैंने कहा ना फूफा जी, अभी मुझे इसकी
  3636. 2:59:49कोई जरूरत [संगीत] नहीं है। जब मुझे जरूरत
  3637. 2:59:52होगी तो मैं जरूर आपसे मदद लेने आऊंगा।
  3638. 2:59:55जयभान जी भी बीच में अपनी रोटी सेकने आ
  3639. 2:59:58गए। उन्होंने कहा, आपको शौर्य के लिए इतना
  3640. 3:00:02सोचने की कोई जरूरत नहीं है। विशाल
  3641. 3:00:04[संगीत] जी शौर्य के भाई हैं ना? शौर्य
  3642. 3:00:08चाहे तो अपने बड़े भाई अरविंद को असिस्ट
  3643. 3:00:11कर सकता है। जैसे ही एक्सपीरियंस होगा तो
  3644. 3:00:15उसको अपनी कंपनी में कोई बड़ी जिम्मेदारी
  3645. 3:00:17भी मिल जाएगी।
  3646. 3:00:19सूर्यभान जी को यह सुनकर बड़ा गुस्सा आया।
  3647. 3:00:23उनका मन तो किया कि वह सबको बता दें कि
  3648. 3:00:26जितनी बड़ी कंपनी का मालिक होने का दम यह
  3649. 3:00:29लोग भर रहे हैं, इतनी छोटी उम्र में उनका
  3650. 3:00:32बेटा उन सबसे बड़ी कंपनी अपने दम पर खड़ी
  3651. 3:00:35कर चुका है। और अगर सूर्यभान जी की कंपनी
  3652. 3:00:38को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो वह उनके
  3653. 3:00:41सामने भिखारी ही नजर आएंगे।
  3654. 3:00:44लेकिन प्रत्यक्ष में उन्होंने कुछ नहीं
  3655. 3:00:46कहा। बस अपने बेटे को छोटा साबित करने की
  3656. 3:00:50कोशिश करते अपने भाई और बहनोई को देखते
  3657. 3:00:53रहे।
  3658. 3:00:55शौर्य को तो इस सब से कोई फर्क ही नहीं
  3659. 3:00:57पड़ता था। उसे फर्क पड़ता [संगीत] था तो
  3660. 3:01:00सिर्फ इस बात से कि उसके कारण उसके पापा
  3661. 3:01:03को कोई तकलीफ ना हो। शौर्य ने सभी की तरफ
  3662. 3:01:07[संगीत] देखते हुए कहा, "मुझे यह देखकर
  3663. 3:01:10बड़ी खुशी हो रही है कि आप सब मेरे बारे
  3664. 3:01:13में कितना सोच [संगीत] रहे हैं। पर मैं आप
  3665. 3:01:16सबका धन्यवाद करते हुए कहना चाहता हूं कि
  3666. 3:01:19अभी कुछ समय मैं आजाद रहना चाहता हूं। अभी
  3667. 3:01:22तो मैं सीख रहा हूं। जब मुझे लगेगा कि मैं
  3668. 3:01:26कुछ कर सकता हूं तो मैं जरूर आप सब से मदद
  3669. 3:01:29मांगूंगा।
  3670. 3:01:30स्वर्णलता जी ने शौर्य को ताना [संगीत]
  3671. 3:01:32मारते हुए कहा तुम अब जीवन के प्रति
  3672. 3:01:35सीरियस हो जाओ शौर्य अगर तुम ढंग का कुछ
  3673. 3:01:39कर रहे होते तो क्या कनिका तुमको नापसंद
  3674. 3:01:42करके कुणाल को पसंद करती वैसे इससे कोई
  3675. 3:01:45फर्क नहीं पड़ता जो भी हो आखिर वह आ तो
  3676. 3:01:49हमारे परिवार में ही रही है शौर्य ने भी
  3677. 3:01:52स्वर्णलता जी पर तंज कसते हुए कहा
  3678. 3:01:56जो भी हो बुआ यह आपके लिए तो अच्छा ही
  3679. 3:01:59हुआ। अब चौहान फैमिली की बेटी आपकी बहू
  3680. 3:02:02बनने वाली है। चंद्रभान जी ने सबको चुप
  3681. 3:02:06कराते हुए कहा, क्या तुम लोग शौर्य के
  3682. 3:02:09पीछे पड़ गए हो? अच्छी बात है कि कनिका ने
  3683. 3:02:12कुणाल को पसंद किया है। तो इसका मतलब यह
  3684. 3:02:15नहीं है कि तुम शौर्य को छोटा साबित करने
  3685. 3:02:17पर तुले हुए हो। तुम सबको शौर्य के लिए
  3686. 3:02:20सोचने की ज्यादा जरूरत नहीं है। अभी उसका
  3687. 3:02:24दादा उसके [संगीत] लिए सोचने को जिंदा है।
  3688. 3:02:28स्वर्णलता को इसी बात का डर था कि कहीं
  3689. 3:02:30चंद्रभान जी फैब्रिक ट्रेड को शौर्य को ना
  3690. 3:02:33सौंप दें।
  3691. 3:02:34विशाल नारंग ने शौर्य के सामने एक बार फिर
  3692. 3:02:37कनिका की चर्चा करते हुए उसे यह जताने की
  3693. 3:02:40कोशिश की कि कनिका ने उसको नापसंद करके
  3694. 3:02:43कुणाल को पसंद किया है। उन्होंने कहा
  3695. 3:02:47शौर्य तुम्हें तो पता चल ही गया होगा कि
  3696. 3:02:50कनिका ने कुणाल के साथ शादी करने का फैसला
  3697. 3:02:52कर लिया है। इस 10 तारीख [संगीत] को दोनों
  3698. 3:02:55की इंगेजमेंट भी है। पूरा परिवार इस समय
  3699. 3:02:59एक साथ उपस्थित होगा। इसलिए तुमको भी इस
  3700. 3:03:02खुशी के मौके पर वहां उपस्थित होना है।
  3701. 3:03:06शौर्य ने सहमति जताते हुए कहा, "मैं कोशिश
  3702. 3:03:09करूंगा फूफा जी।" तभी कुणाल ने दूर से
  3703. 3:03:13शौर्य को आवाज दी। अरे शौर्य, [संगीत]
  3704. 3:03:16तुम आ गए? इधर आना तो जरा। शौर्य समझ गया
  3705. 3:03:21कि अब कुणाल भी उसके सामने खुद को सुपर
  3706. 3:03:24साबित करने की कोशिश करेगा। वह जताएगा कि
  3707. 3:03:28देखो [संगीत]
  3708. 3:03:28तुम्हें कनिका ने नापसंद कर दिया और मुझे
  3709. 3:03:31उसने पसंद किया है। लेकिन शौर्य को अब इस
  3710. 3:03:35बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था। कुणाल को
  3711. 3:03:38क्या [संगीत] पता कि वह खुद चाहता था कि
  3712. 3:03:40कनिका उसको ना पसंद करे। वो कुणाल के पास
  3713. 3:03:44गया और पूछा [संगीत]
  3714. 3:03:46हां बोलो क्या बात है? कुणाल ने शौर्य से
  3715. 3:03:50सैंपथी जताते हुए कहा। देखो यार तुम इस
  3716. 3:03:54बात को अपने दिल पर मत लेना कि कनिका ने
  3717. 3:03:57तुमको नापसंद करके मुझे पसंद कर लिया।
  3718. 3:04:01शौर्य मुस्कुराते हुए बोला
  3719. 3:04:04तुम कुछ ज्यादा ही सोच रहे हो। मुझे इस
  3720. 3:04:07बात [संगीत] से कोई तकलीफ नहीं है। तुम
  3721. 3:04:10डिर्व करते थे कि कनिका तुमको पसंद करें।
  3722. 3:04:13कुणाल [संगीत] ने मुस्कुराते हुए कहा चलो।
  3723. 3:04:17अच्छी बात है कि तुमने इस बात को एक्सेप्ट
  3724. 3:04:20कर लिया। बोलते हुए कुणाल के चेहरे पर एक
  3725. 3:04:23कनिंग स्माइल आ गई। तभी एक लड़की चलती हुई
  3726. 3:04:27उन सबके सामने आई। शौर्य ने गौर किया कि
  3727. 3:04:31विक्की उसके [संगीत] पीछे-पीछे चलता हुआ
  3728. 3:04:33डोल रहा था। उस लड़की ने शौर्य की तरफ
  3729. 3:04:37इशारा करते हुए अरविंद से पूछा। [संगीत]
  3730. 3:04:40मैं यहां सबको तो जानती हूं। पर यह लड़का
  3731. 3:04:42कौन है? जीजू? अरविंद ने [संगीत] जवाब
  3732. 3:04:45दिया। यह सूर्यभान अंकल का बेटा शौर्य है।
  3733. 3:04:50हेमा ने शौर्य की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा,
  3734. 3:04:54हेलो हैंडसम। मैं हेमा तुमसे मिलकर खुशी
  3735. 3:04:58हुई। शौर्य ने हेमा के पीछे खड़े विक्की
  3736. 3:05:01को देखते हुए मुस्कुरा कर कहा। अगर आप ऐसे
  3737. 3:05:05तारीफ भरी नजरों से मेरी तरफ देखेंगी तो
  3738. 3:05:08किसी बेचारे का दिल टूट जाएगा।
  3739. 3:05:12शौर्य की बात सुनकर विक्की झेप गया।
  3740. 3:05:14[संगीत] जबकि हेमा खिलखिला कर हंस पड़ी।
  3741. 3:05:18हेमा ने हंसते हुए कहा, "मैंने तो सुना था
  3742. 3:05:21आप बड़े बोरिंग हैं। पर लगता है किसी ने
  3743. 3:05:24गलत अफवाह फैला दी है। उस कनिका का तो
  3744. 3:05:27नसीब खराब था जिसने आपको नापसंद कर
  3745. 3:05:29[संगीत] दिया। यह कहते हुए हेमा ने तिरछी
  3746. 3:05:33नजरों से कुणाल की तरफ देखा।
  3747. 3:05:37[संगीत] शौर्य को समझते देर नहीं लगी कि
  3748. 3:05:39हेमा कुणाल को कुछ खास पसंद नहीं करती।
  3749. 3:05:43शौर्य मुस्कुराते हुए बोला, "क्या पता
  3750. 3:05:46शायद मेरा [संगीत] नसीब अच्छा था जो उसने
  3751. 3:05:49मुझे पसंद नहीं किया। शायद उससे कोई बेहतर
  3752. 3:05:52मेरे नसीब में होगी।" हेमा भी शौर्य का
  3753. 3:05:56तंज समझकर जोर से हंस दी। प्रतीक भी बीच
  3754. 3:05:59में अपनी नाक घुसाते हुए बोला, "यह कहावत
  3755. 3:06:03है ना कि अंगूर खट्टे हैं। वह तुम्हारे
  3756. 3:06:05जैसे लोगों के लिए ही है।" उसे शौर्य का
  3757. 3:06:09यूं हेमा के सामने निखर कर आना अच्छा नहीं
  3758. 3:06:11[संगीत] लगा।
  3759. 3:06:13शौर्य ने भी प्रतीक को जवाब देने में देर
  3760. 3:06:15नहीं की। उसने मुस्कुराते हुए कहा।
  3761. 3:06:19तुम्हें अंगूर का स्वाद बहुत पता है।
  3762. 3:06:21तुम्हें चखने का मौका मिला तो है ना?
  3763. 3:06:25शौर्य की बात सुनकर प्रतीक [संगीत] दांत
  3764. 3:06:27पीसकर रह गया। जबकि एक बार फिर हेमा
  3765. 3:06:30खिलखिलाती हुई बोली,
  3766. 3:06:32तुम्हारा सेंस ऑफ ह्यूमर तो कमाल का है
  3767. 3:06:34शौर्य। अब तो मैं यकीन के साथ कह सकती हूं
  3768. 3:06:38कि उस कनिका का टेस्ट वाकई खराब होगा जो
  3769. 3:06:41उसने तुम्हें पसंद नहीं किया। अरविंद ने
  3770. 3:06:44मजाकिया लहजे में कहा। जिस तरह तुम शौर्य
  3771. 3:06:47की तारीफ किए जा रही हो, कहीं तुम्हें तो
  3772. 3:06:50शौर्य पसंद नहीं आ गया। हेमा ने तिरछी नजर
  3773. 3:06:53से कुणाल की तरफ देखते हुए कहा, "अभी यह
  3774. 3:06:57कहना जल्दबाजी होगा जीजू। पर क्या पता आगे
  3775. 3:07:00चलकर आपकी बात सही साबित हो जाए।" शौर्य
  3776. 3:07:04को समझते देर नहीं लगी कि जरूर कुणाल और
  3777. 3:07:07हेमा का कोई पुराना इशू होगा। जिसके कारण
  3778. 3:07:10हेमा कुणाल को टारगेट कर रही थी।
  3779. 3:07:13लेकिन अभी शौर्य यह नहीं जानता था कि इस
  3780. 3:07:16पुराने इशू का असर आने वाले दिनों में
  3781. 3:07:19[संगीत] उसकी जिंदगी पर कितना गहरा पड़ने
  3782. 3:07:21वाला था।
  3783. 3:07:23क्या होगा जब कुणाल और कनिका की सगाई
  3784. 3:07:26होगी। क्या शौर्य कुणाल की सगाई में
  3785. 3:07:28उपस्थित होगा? मार्शल आर्ट चैंपियनशिप के
  3786. 3:07:32दौरान क्या होगा? जानने के लिए सुनते
  3787. 3:07:35शौर्य से यूं प्रभावित होना वहां मौजूद
  3788. 3:07:38किसी को भी पसंद नहीं आ रहा था।
  3789. 3:07:41लेकिन कोई कुछ कर भी नहीं सकता था। वे बस
  3790. 3:07:45मन ही मन चिढ़ सकते थे। प्रतीक को हेमा का
  3791. 3:07:49इस तरह शौर्य का तरफदार बनना बिल्कुल
  3792. 3:07:52अच्छा नहीं लगा। इसलिए शौर्य की अकड़ कम
  3793. 3:07:55करने के इरादे से उसने बात छेड़ी।
  3794. 3:07:58प्रतीक ने व्यंग भरे अंदाज में पूछा। हां
  3795. 3:08:02तो शौर्य अब तुम्हारी और शिप्रा की दोस्ती
  3796. 3:08:05कैसी चल रही है?
  3797. 3:08:07शौर्य समझ गया कि प्रतीक शिप्रा का नाम
  3798. 3:08:10यहां लेकर क्या जताना चाहता है। उसने
  3799. 3:08:13बेपरवाही से जवाब दिया, [संगीत] सब बढ़िया
  3800. 3:08:16है। तुम्हें हम दोनों की दोस्ती की चिंता
  3801. 3:08:19करने की कोई जरूरत नहीं है। प्रतीक के
  3802. 3:08:22चेहरे पर कुटिल मुस्कान फैल [संगीत] गई।
  3803. 3:08:25उसने शौर्य को कुरेदते हुए पूछा। अच्छा
  3804. 3:08:29क्या वह अब तुमसे बात भी [संगीत] करती है?
  3805. 3:08:32मुझे नहीं लगता कि उस दिन के बाद उसने
  3806. 3:08:34तुमसे फिर कभी बात भी की होगी। शौर्य
  3807. 3:08:38मुस्कुराया [संगीत] और सहजता से बोला,
  3808. 3:08:40"मुझे लगता है तुम कुछ ज्यादा ही सोचते
  3809. 3:08:43हो।"
  3810. 3:08:44मेरी तो उससे रोज बातें होती हैं। प्रतीक
  3811. 3:08:47को [संगीत] विश्वास नहीं हुआ कि शौर्य जो
  3812. 3:08:49कह रहा है, वह सच हो सकता है। वह तो यही
  3813. 3:08:53सोच रहा था कि उस दिन शौर्य ने शिप्रा के
  3814. 3:08:56साथ जितनी नीच हरकत की थी, उसके बाद तो
  3815. 3:08:59शिप्रा उसकी तरफ पलट कर भी नहीं देखेगी।
  3816. 3:09:01[संगीत]
  3817. 3:09:02लेकिन शौर्य तो कह रहा था कि उसकी शिप्रा
  3818. 3:09:05से रोज बात होती है। तो क्या उसने शिप्रा
  3819. 3:09:08को परखने में गलती कर दी थी? वह तो शिप्रा
  3820. 3:09:12को एक स्ट्रांग [संगीत] कैरेक्टर वाली
  3821. 3:09:14लड़की समझता था। फिर शौर्य की बदतमीजी के
  3822. 3:09:17बाद भी वह उससे बात कैसे करने लगी? उसे
  3823. 3:09:21लगा जरूर [संगीत] शौर्य ब्लफ मार रहा है।
  3824. 3:09:24प्रतीक ने अविश्वास से कहा, तुम्हें झूठ
  3825. 3:09:28बोलने में शर्म भी नहीं आती। मैं मान ही
  3826. 3:09:31नहीं सकता कि उस इंसिडेंट के बाद शिप्रा
  3827. 3:09:34तुमसे कभी [संगीत] बात भी करेगी।
  3828. 3:09:36शौर्य ने लापरवाह अंदाज में जवाब दिया,
  3829. 3:09:40मैं तुम्हारे मानने या ना मानने का मोहताज
  3830. 3:09:43तो नहीं हूं? तुमको नहीं मानना है तो मत
  3831. 3:09:45मानो। इसमें मैं क्या [संगीत] कर सकता
  3832. 3:09:47हूं। वहां मौजूद बाकी लोगों को समझ नहीं
  3833. 3:09:51आया कि यह दोनों [संगीत] किस बारे में बात
  3834. 3:09:53करने लगे हैं। लेकिन कुणाल को कुछ समझ
  3835. 3:09:56आया। उसने प्रतीक से जिज्ञासा भरे स्वर
  3836. 3:10:00में पूछा। क्या तुम उसी शिप्रा की बात
  3837. 3:10:03[संगीत] कर रहे हो जिसे नाना जी ने
  3838. 3:10:04फैब्रिक ट्रेंड की सीईओ बनाया है? कहा हां
  3839. 3:10:09मैं उसी की बात कर रहा हूं। कुणाल ने
  3840. 3:10:13हैरानी से पूछा। पर वह शौर्य से क्यों बात
  3841. 3:10:16नहीं करेगी? प्रतीक ने शौर्य की तरफ देखते
  3842. 3:10:20हुए कुटिलता से कहा क्योंकि इसने [संगीत]
  3843. 3:10:22उसके साथ एक बार जबरदस्ती करने की कोशिश
  3844. 3:10:25की थी। तुम्हें क्या लगता है कि उसके बाद
  3845. 3:10:28भी शिप्रा इसके साथ बात करेगी?
  3846. 3:10:31यह [संगीत] सुनते ही अरविंद आगे आया। उसके
  3847. 3:10:34चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था। उसने
  3848. 3:10:38आवेग में शौर्य से पूछा। [संगीत]
  3849. 3:10:40क्या कहा? इसने शिप्रा के साथ जबरदस्ती
  3850. 3:10:44करने की कोशिश की? शौर्य, क्या [संगीत]
  3851. 3:10:47तुम इतना गिर गए कि तुमने शिप्रा के साथ
  3852. 3:10:49ऐसी हरकत की? शौर्य ने बिना विचलित हुए
  3853. 3:10:53शांत स्वर में [संगीत] जवाब दिया। क्या
  3854. 3:10:56अरविंद भाई आपको लगता है कि अगर मैंने
  3855. 3:10:59शिप्रा के साथ जबरदस्ती [संगीत] करने की
  3856. 3:11:01कोशिश की होती तो वह चुप रहती? वह किसी से
  3857. 3:11:05मेरी शिकायत नहीं करती। अरविंद की आंखें
  3858. 3:11:08[संगीत] सोचने वाले भाव में सिकुड़ गई।
  3859. 3:11:11वहीं हेमा के चेहरे पर भी बात को समझने
  3860. 3:11:14वाला भाव उभर आया। उसने शौर्य का पक्ष
  3861. 3:11:18लेते हुए कहा। बात तो सही है। अगर इसने
  3862. 3:11:22[संगीत] शिप्रा से जबरदस्ती करने की कोशिश
  3863. 3:11:24की होती तो उसे इसकी शिकायत तो करनी चाहिए
  3864. 3:11:27थी। प्रतीक को समझ नहीं आया कि वह इस बात
  3865. 3:11:30का क्या जवाब दे। उसे [संगीत] लग रहा था
  3866. 3:11:33कि शिप्रा के शौर्य की शिकायत ना करने के
  3867. 3:11:36पीछे सबसे बड़ा कारण शायद यह रहा होगा कि
  3868. 3:11:39[संगीत] उसके मन में यह संशय रहा होगा कि
  3869. 3:11:42कहीं शौर्य की शिकायत करने से उसकी जॉब पर
  3870. 3:11:45बात ना बनाए।
  3871. 3:11:47इसलिए उसने अरविंद के सामने अपनी सफाई
  3872. 3:11:49[संगीत] देते हुए कहा, "मेरे ख्याल से
  3873. 3:11:52शिप्रा को शायद यह डर होगा कि अगर वह
  3874. 3:11:55शौर्य की शिकायत करती [संगीत] है, तो बात
  3875. 3:11:58उसकी जॉब पर भी बन सकती है। इसलिए उसने
  3876. 3:12:01इसकी शिकायत नहीं की होगी। मुझे तो यही
  3877. 3:12:04बात समझ में [संगीत] आ रही है। प्रतीक की
  3878. 3:12:07पूरी बात सुनने के बाद अरविंद ने शौर्य को
  3879. 3:12:10घूर कर देखा [संगीत]
  3880. 3:12:12और गंभीर स्वर में कहा, अगर ऐसी बात है
  3881. 3:12:15शौर्य तो यह बहुत गलत बात है। ऐसा हमारे
  3882. 3:12:19परिवार में कभी नहीं हुआ कि किसी लड़के ने
  3883. 3:12:22किसी लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश
  3884. 3:12:25[संगीत] की हो। अगर यह बात दादाजी को पता
  3885. 3:12:28चल गई तो समझते हो तुम्हारी [संगीत] क्या
  3886. 3:12:30इज्जत रह जाएगी।
  3887. 3:12:33शौर्य के चेहरे पर हल्की सी तंज [संगीत]
  3888. 3:12:35भरी मुस्कान आई। उसने शांत स्वर में कहा।
  3889. 3:12:39पर ऐसा तो प्रतीक कह रहा है और आपने इसकी
  3890. 3:12:42बात को मान भी लिया। यह ज्यादा अच्छा नहीं
  3891. 3:12:45होगा कि आप शिप्रा से ही इस बात की तस्दीक
  3892. 3:12:48कर लें या किसी और माध्यम से इस बात की
  3893. 3:12:51पुष्टि करें कि इस बात में कोई सच्चाई है
  3894. 3:12:54भी या नहीं।
  3895. 3:12:57हेमा पूरी तरह शौर्य का पक्ष लेते हुए
  3896. 3:13:00बोली। शौर्य की बात अपनी जगह सही है। जीजू
  3897. 3:13:04आपको यूं ही शौर्य पर इल्जाम लगाने से
  3898. 3:13:07पहले इस बात की तस्दीक कर लेनी चाहिए कि
  3899. 3:13:10इस बात में कोई सच्चाई है भी या नहीं। अगर
  3900. 3:13:13शौर्य इतने कॉन्फिडेंस से अपनी बात कह रहा
  3901. 3:13:16है तो आप इसकी बात को यूं नकार भी नहीं
  3902. 3:13:18सकते।
  3903. 3:13:20यह भी तो हो [संगीत] सकता है कि प्रतीक को
  3904. 3:13:22समझने में कोई गलतफहमी हुई हो।
  3905. 3:13:25अरविंद ने हेमा की तरफ देखा और व्यंग करते
  3906. 3:13:28हुए कहा मुझे तो तुम्हारे लिए आश्चर्य हो
  3907. 3:13:32रहा है कि तुम तो अभी शौर्य से मिली हो और
  3908. 3:13:35इतनी स्ट्रांगली उसका पक्ष ले रही हो।
  3909. 3:13:38इतनी जल्दी इसने ऐसा क्या जादू कर दिया
  3910. 3:13:40तुम पर? हेमा ने बिना झिझके [संगीत] जवाब
  3911. 3:13:43दिया। इसमें जादू करने जैसा कुछ भी नहीं
  3912. 3:13:47है जीजू। किसी की [संगीत] सच्चाई उसकी
  3913. 3:13:49आंखों में ही दिख जाती है और मुझे लग रहा
  3914. 3:13:52है कि शौर्य जो कह रहा है वह सही [संगीत]
  3915. 3:13:55है। हेमा अभी भी मजबूती से शौर्य के पक्ष
  3916. 3:13:58में खड़ी थी। शौर्य को भी आश्चर्य हो रहा
  3917. 3:14:01था कि जिस लड़की से वह अभी-अभी [संगीत]
  3918. 3:14:04मिला है, वो क्यों इतनी स्ट्रांगली उसका
  3919. 3:14:06पक्ष ले रही है। लेकिन अगले [संगीत] ही पल
  3920. 3:14:09उसने मन ही मन सोचा। चलो, यह अच्छा ही है
  3921. 3:14:13कि इतने लोगों के बीच में कोई तो है जो
  3922. 3:14:15मेरी तरफ से बोल रही है।
  3923. 3:14:18अरविंद ने एक गहरी सांस लेते हुए प्रतीक
  3924. 3:14:21की तरफ देखा और कहा
  3925. 3:14:23वैसे तो अब इस बात का कोई आधार नहीं है कि
  3926. 3:14:26इस बारे में कोई बात की जाए क्योंकि
  3927. 3:14:28परिवार में किसी को भी इस बारे में कोई
  3928. 3:14:31जानकारी नहीं है लेकिन प्रतीक बिना सोचे
  3929. 3:14:34समझे किसी पर इतना बड़ा इल्जाम नहीं लगाना
  3930. 3:14:37चाहिए यह एक तरह से किसी के कैरेक्टर
  3931. 3:14:40[संगीत] को धूमिल करने वाली बात हुई यह
  3932. 3:14:43बात प्रतीक को बुरी लगी कि [संगीत] उसके
  3933. 3:14:45भाई ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया।
  3934. 3:14:48इसलिए उसने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा,
  3935. 3:14:51[संगीत]
  3936. 3:14:52मैं कोई झूठ नहीं बोल रहा हूं भाई। मैंने
  3937. 3:14:54खुद अपनी आंखों से देखा था और मुझे अभी भी
  3938. 3:14:57यकीन नहीं है कि उस घटना के बाद शिप्रा
  3939. 3:15:00इससे बात भी करती होगी। अरविंद को आश्चर्य
  3940. 3:15:04हुआ कि प्रतीक [संगीत] अभी भी अपनी बात पर
  3941. 3:15:06अड़ा हुआ है। वो थोड़ा चिढ़कर बोला। इस
  3942. 3:15:10बात का अब कोई आधार है जो तुम इस बात के
  3943. 3:15:12पीछे [संगीत] पड़े हो? प्रतीक ने आवेग में
  3944. 3:15:15जवाब दिया। क्योंकि शौर्य ने मुझे गलत
  3945. 3:15:18साबित [संगीत] करने की कोशिश की है कि
  3946. 3:15:20उसने ऐसा कुछ नहीं किया है। इसलिए मैं इस
  3947. 3:15:23बात के पीछे पड़ा हूं। मैं अपनी आंखों
  3948. 3:15:25देखी बात को कैसे [संगीत] नकार सकता हूं।
  3949. 3:15:28अगर आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं है तो
  3950. 3:15:31क्यों ना आप शिप्रा से ही इस बात को
  3951. 3:15:32कंफर्म कर लेते हैं। प्रतीक ने जितने
  3952. 3:15:36कॉन्फिडेंस से अपनी बात कही उसे देखकर
  3953. 3:15:38अरविंद को भी लगने लगा कि शायद प्रतीक जो
  3954. 3:15:41कह रहा है वो सच है। लेकिन साथ ही उसने
  3955. 3:15:44सोचा कि इस बात के पीछे पड़ने का कोई
  3956. 3:15:47फायदा है क्या? वो नहीं चाहता था कि अगर
  3957. 3:15:50इस बात में सच्चाई भी हो [संगीत] तो यह
  3958. 3:15:52बात दादाजी या परिवार के लोगों के बीच आए।
  3959. 3:15:56इससे परिवार की बदनामी ही होगी। यही
  3960. 3:15:59[संगीत] सोचकर उसने गंभीर स्वर में कहा,
  3961. 3:16:02"अगर एक मिनट के लिए यह मान भी लिया जाए
  3962. 3:16:05कि जो तुम कह रहे हो वह सही है तो भी इस
  3963. 3:16:08बात को तूल देने का अब कोई आधार नहीं
  3964. 3:16:11[संगीत] है। क्योंकि अगर इसमें थोड़ी भी
  3965. 3:16:13सच्चाई है और यह बात दादाजी या परिवार के
  3966. 3:16:17लोगों के सामने आती है तो इससे हमारे
  3967. 3:16:19परिवार की बदनामी ही होगी। इसलिए इस बात
  3968. 3:16:23को यहीं छोड़ देना ज्यादा ठीक है।
  3969. 3:16:26शौर्य को अरविंद की यह समझदारी वाली बात
  3970. 3:16:28सुनकर आश्चर्य हुआ। वह नहीं समझता था कि
  3971. 3:16:32अरविंद की सोच इस तरह की होगी। वह तो सोच
  3972. 3:16:36रहा था कि अरविंद आंखें बंद करके अपने भाई
  3973. 3:16:38का पक्ष लेगा। लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं
  3974. 3:16:41किया। इसलिए उसके मन में अरविंद के लिए एक
  3975. 3:16:44स्वाभाविक सम्मान की भावना आ गई। नहीं तो
  3976. 3:16:48वह अभी तक अपने परिवार में सबको अपने
  3977. 3:16:50खिलाफ ही समझता था। अरविंद की एक बात ने
  3978. 3:16:54शौर्य के सोचने का नजरिया बदल दिया था।
  3979. 3:16:57प्रतीक ने शौर्य की तरफ देखते हुए [संगीत]
  3980. 3:17:00अपनी आंखों से जैसे अंगारे बरसाए और कहा
  3981. 3:17:04भाई मैं समझता हूं [संगीत] कि आपको परिवार
  3982. 3:17:07की बदनामी की चिंता है। पर मैं आपको
  3983. 3:17:09एश्योर करता हूं कि यह बात हम लोगों से
  3984. 3:17:12बाहर नहीं जाएगी। लेकिन आपको यह जानने की
  3985. 3:17:15कोशिश करनी पड़ेगी कि मैं सच बोल रहा हूं
  3986. 3:17:18या झूठ। [संगीत]
  3987. 3:17:20प्रतीक ने इतने कन्विक्शन से अपनी बात कही
  3988. 3:17:22कि अरविंद ही क्या? वहां मौजूद बाकी सभी
  3989. 3:17:25को भी लगने लगा कि प्रतीक जो कह रहा है वह
  3990. 3:17:28सच है। यहां तक कि अब हेमा को भी प्रतीक
  3991. 3:17:32[संगीत] सच बोलता हुआ प्रतीत होने लगा था।
  3992. 3:17:35शौर्य ने यह महसूस कर लिया। इसलिए किसी के
  3993. 3:17:39कुछ बोलने का इंतजार किए बिना वह [संगीत]
  3994. 3:17:41पहले ही बोल पड़ा। अब तो मैं भी चाहता हूं
  3995. 3:17:45अरविंद भाई कि आप खुद इस बात को अपने
  3996. 3:17:48तरीके से तस्दीक [संगीत]
  3997. 3:17:49करें कि क्या मैंने सच में ऐसा कुछ किया
  3998. 3:17:52था जैसा प्रतीक मेरे लिए बोल रहा है
  3999. 3:17:55क्योंकि मैं भी अपने
  4000. 3:17:56[संगीत]
  4001. 3:17:56ऊपर यह लांछन लगा हुआ नहीं देख सकता।
  4002. 3:18:00शौर्य की बात सुनकर प्रतीक तो उसका मुंह
  4003. 3:18:03देखता ही रह गया। उसने सोचा नहीं था कि
  4004. 3:18:06शौर्य खुद आगे बढ़कर अरविंद को यह पता
  4005. 3:18:09करने के लिए बोलेगा कि उसने शिप्रा के साथ
  4006. 3:18:12जबरदस्ती की थी या नहीं। और सिर्फ प्रतीक
  4007. 3:18:15ही क्या? बाकी उपस्थित लोगों ने भी तुरंत
  4008. 3:18:18अपना नजरिया बदल लिया। एक पल पहले जो लोग
  4009. 3:18:22प्रतीक की बात को सच मानने लगे थे। अब
  4010. 3:18:24अगले ही पल उन्हें लगने लगा कि नहीं शौर्य
  4011. 3:18:28ही अपनी जगह सही है। अरविंद भी पशुपेश में
  4012. 3:18:32नजर आने लगा। उसने प्रतीक से ही पूछा तुम
  4013. 3:18:36ही बताओ कि किस तरह से इस बात की तस्दीक
  4014. 3:18:39की जाए कि शौर्य ने शिप्रा के साथ
  4015. 3:18:41जबरदस्ती की [संगीत] थी या नहीं। प्रतीक
  4016. 3:18:45ने एक पल सोचा और फिर बोला यह बात आप सीधे
  4017. 3:18:48शिप्रा को फोन करके भी पूछ सकते हैं या
  4018. 3:18:51जैसा कि मुझे उम्मीद है कि उस घटना के बाद
  4019. 3:18:54शिप्रा शौर्य से बात नहीं करती होगी।
  4020. 3:18:56[संगीत]
  4021. 3:18:57तो क्यों ना आप शौर्य को ही बोले कि वह
  4022. 3:19:00सबके सामने शिप्रा से बात करने की कोशिश
  4023. 3:19:02करें और खुद ही पूछे कि उसने उसके साथ
  4024. 3:19:05बदतमीजी करने की कोशिश की थी या नहीं।
  4025. 3:19:09प्रतीक की बात सुनकर अरविंद शौर्य की ओर
  4026. 3:19:11देखने लगा। जैसे वह उससे पूछ रहा हो कि
  4027. 3:19:14तुम [संगीत] बताओ तुम इस बारे में क्या
  4028. 3:19:16कहते हो? शौर्य अरविंद का भाव समझ गया।
  4029. 3:19:20इसलिए उसने शांत स्वर में कहा।
  4030. 3:19:24आपको जैसा ठीक लगे [संगीत] आप उस तरह से
  4031. 3:19:26इस बात की तस्दीक करने की कोशिश कर सकते
  4032. 3:19:29हैं। मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी।
  4033. 3:19:32शौर्य का कॉन्फिडेंस देखकर अरविंद [संगीत]
  4034. 3:19:34को लगने लगा कि प्रतीक बहुत बुरी तरह
  4035. 3:19:37फंसने वाला है। लेकिन बात अब [संगीत] इतनी
  4036. 3:19:40आगे बढ़ चुकी थी कि वो यहां से पीछे नहीं
  4037. 3:19:42हट सकता था। कुछ पल सोचने के बाद अरविंद
  4038. 3:19:46ने कहा क्यों ना तुम खुद अभी शिप्रा को
  4039. 3:19:49फोन लगाओ। तुम दोनों के बात करने के ढंग
  4040. 3:19:52से ही पता चल जाएगा कि तुम दोनों के बीच
  4041. 3:19:54ऐसी कोई बात हुई थी भी या नहीं।
  4042. 3:19:58शौर्य को लगा यह तो बड़ा आसान है। लेकिन
  4043. 3:20:03अगले ही पल उसे ध्यान आया कि अभी तो उसकी
  4044. 3:20:05शिप्रा के साथ पूरी तरह सुलह हुई भी नहीं
  4045. 3:20:08थी। इस समय तक तो उसे उसके पास होना चाहिए
  4046. 3:20:12था। कहीं शिप्रा नाराजगी में कुछ उल्टा
  4047. 3:20:15सीधा ना बोल दे। यह सोचकर उसे घबराहट होने
  4048. 3:20:19लगी। उसे यह तरीका बिल्कुल सही नहीं लग
  4049. 3:20:22रहा था और उसके चेहरे पर परेशानी के भाव
  4050. 3:20:25साफ नजर आने लगे। प्रतीक ने शौर्य के
  4051. 3:20:28चेहरे की घबराहट को नोटिस कर लिया था। वो
  4052. 3:20:31तुरंत तंज कसते हुए [संगीत] बोला, "क्या
  4053. 3:20:34हुआ? अब किस सोच में खो गए?" "चलो निकालो
  4054. 3:20:38[संगीत] फोन और लगाओ शिप्रा को।" शौर्य ने
  4055. 3:20:41बात को पलटने की कोशिश करते हुए कहा, "तुम
  4056. 3:20:45ऐसा क्यों नहीं [संगीत] करते कि तुम अपने
  4057. 3:20:47फोन से ही शिप्रा को फोन लगाओ। और खुद ही
  4058. 3:20:50उससे पूछो कि क्या मैंने उसके साथ कभी कोई
  4059. 3:20:52बदतमीजी या जबरदस्ती करने की कोशिश
  4060. 3:20:55[संगीत] की है? तुम्हें स्वयं ही उसका
  4061. 3:20:57जवाब मिल जाएगा। प्रतीक को शौर्य द्वारा
  4062. 3:21:01खुद को उकसाए जाने पर आश्चर्य हुआ। उसे
  4063. 3:21:04लगा जरूर इसमें कोई पेंच है। तभी शौर्य
  4064. 3:21:08खुद उसको फोन करने की कोशिश करने से बचना
  4065. 3:21:10चाहता है। [संगीत] इसलिए वह शौर्य को कोई
  4066. 3:21:13मौका देना नहीं चाहता था। वो तंज भरे स्वर
  4067. 3:21:17में बोला नहीं मैं तुम्हें बाद में यह
  4068. 3:21:20कहने का मौका नहीं देना चाहता कि तुम यह
  4069. 3:21:23कहो कि मेरी [संगीत] पहले से ही शिप्रा से
  4070. 3:21:25कोई मिलीभगत है। इसलिए तुम खुद ही अपने
  4071. 3:21:28फोन से उसे फोन करो। अरविंद ने भी यह
  4072. 3:21:32महसूस किया था कि शौर्य शिप्रा को फोन
  4073. 3:21:35करने से बचना चाहता है। इसलिए उसने प्रतीक
  4074. 3:21:38की बात को ध्यान में रखते हुए कहा, शौर्य,
  4075. 3:21:42यह अच्छा रहेगा कि तुम खुद शिप्रा को अपने
  4076. 3:21:44मोबाइल से फोन करो।
  4077. 3:21:47शौर्य ने एक पल के लिए फोन अपनी हथेली में
  4078. 3:21:50कसकर पकड़ लिया। कमरे में मौजूद हर शख्स
  4079. 3:21:53की नजर अब उसी पर थी। उसे ऐसा लग रहा था
  4080. 3:21:57जैसे वह सिर्फ शिप्रा को फोन नहीं कर रहा।
  4081. 3:22:00बल्कि अपने ऊपर लगे इल्जाम का फैसला करने
  4082. 3:22:03जा रहा हो। उसने शिप्रा का नंबर मिलाया।
  4083. 3:22:07फोन कान से लगाते ही कमरे में एक अजीब सी
  4084. 3:22:10खामोशी छा गई। एक रिंग फिर दूसरी रिंग।
  4085. 3:22:15शौर्य की धड़कनें तेज होने लगी। उसकी नजर
  4086. 3:22:19अनायास सामने बैठे लोगों पर गई। कोई कुछ
  4087. 3:22:22नहीं बोल रहा था। लेकिन हर चेहरे पर
  4088. 3:22:25इंतजार साफ दिखाई दे रहा था।
  4089. 3:22:28तीसरी रिंग के बाद भी शिप्रा [संगीत] ने
  4090. 3:22:30फोन नहीं उठाया। शौर्य ने होठ भी लिए। तभी
  4091. 3:22:35प्रतीक के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान
  4092. 3:22:38उभरी। उसने बाकी लोगों की तरफ देखकर कहा,
  4093. 3:22:42"मैंने पहले ही कहा था, शिप्रा शौर्य का
  4094. 3:22:45फोन तक नहीं उठाएगी।" [संगीत]
  4095. 3:22:47शौर्य ने खुद को संभालते हुए फोन नीचे
  4096. 3:22:50किया और सफाई देने की कोशिश की। हो सकता
  4097. 3:22:54है उसने फोन कहीं रख [संगीत] दिया हो और
  4098. 3:22:56उसे पता ही ना चला हो। प्रतीक ने तुरंत
  4099. 3:22:59उसकी बात पकड़ ली और व्यंग से मुस्कुराते
  4100. 3:23:02हुए कहा तो एक बार और कोशिश कर लो। शायद
  4101. 3:23:06इस बार उसे तुम्हारी आवाज सुनाई दे जाए।
  4102. 3:23:09[संगीत]
  4103. 3:23:09शौर्य ने बिना कुछ कहे दोबारा नंबर
  4104. 3:23:11मिलाया। इस बार कमरे की खामोशी [संगीत]
  4105. 3:23:14पहले से भी ज्यादा भारी थी। एक रिंग।
  4106. 3:23:18शौर्य की उंगलियां फोन पर और कस गई। दो
  4107. 3:23:22रिंग और तभी अचानक कॉल कट गई। शौर्य की
  4108. 3:23:27आंखें फोन की स्क्रीन पर टिक गई। कुछ
  4109. 3:23:30[संगीत] पल के लिए उसे जैसे यकीन ही नहीं
  4110. 3:23:33हुआ कि शिप्रा ने सच में उसकी कॉल काट दी
  4111. 3:23:35है। प्रतीक की मुस्कान इस बार और गहरी हो
  4112. 3:23:39गई। उसने धीमे मगर बेहद यकीन भरे अंदाज
  4113. 3:23:43में कहा। अब भी कोई बहाना बाकी है शौर्य।
  4114. 3:23:47पहली बार उसने फोन नहीं उठाया।
  4115. 3:23:50लेकिन दूसरी बार तो उसने खुद कॉल काट दी।
  4116. 3:23:53कमरे में मौजूद बाकी लोगों की निगाहें
  4117. 3:23:56धीरे-धीरे शौर्य की तरफ उठ गई। शौर्य के
  4118. 3:24:00चेहरे पर असहजता साफ दिखाई देने लगी। जिस
  4119. 3:24:03भरोसे के साथ उसने कहा था कि उसने शिप्रा
  4120. 3:24:06के साथ कोई बदतमीजी नहीं की है, वह बात
  4121. 3:24:09[संगीत] अब उसके गले की फांस बन चुकी थी।
  4122. 3:24:12उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस वक्त वह खुद
  4123. 3:24:15को कैसे सही साबित करें। उसने नजरें झुका
  4124. 3:24:18ली।
  4125. 3:24:20लेकिन तभी उसके दिमाग [संगीत] में अचानक
  4126. 3:24:21एक विचार कौंधा।
  4127. 3:24:24शौर्य ने धीरे-धीरे सिर उठाया और उसकी नजर
  4128. 3:24:27सामने बैठी हेमा पर जाकर टिक गई। उसकी
  4129. 3:24:30आंखों में जैसे अचानक उम्मीद की एक किरण
  4130. 3:24:33चमकी। आखिर शौर्य को ऐसा क्या सूझा था?
  4131. 3:24:37उसने हेमा की तरफ ही क्यों देखा? क्या यही
  4132. 3:24:40तरीका उसे वहां उपस्थित लोगों के सामने
  4133. 3:24:43निर्दोष [संगीत] साबित कर पाएगा? या फिर
  4134. 3:24:46शिप्रा को की गई एक छोटी सी कॉल ने शौर्य
  4135. 3:24:49[संगीत] को एक और बड़ी मुसीबत में फंसा
  4136. 3:24:51दिया था। चेहरे पर अचानक आई सभी लोग हैरान
  4137. 3:24:54रह गए। आखिर इस एक पल में ऐसा क्या हुआ
  4138. 3:24:58[संगीत] था? अभी कुछ देर पहले तक शिप्रा
  4139. 3:25:01के फोन काट देने के बाद शौर्य गहरे सदमे
  4140. 3:25:04में नजर आ रहा था। फिर अचानक उसकी आंखों
  4141. 3:25:07में यह उम्मीद कहां से आ गई? प्रतीक से
  4142. 3:25:11रहा नहीं गया।
  4143. 3:25:12[संगीत]
  4144. 3:25:12उसने शौर्य पर कटाक्ष करते हुए कहा, अब
  4145. 3:25:15तुम्हें कोई पागलपन का दौरा तो नहीं पड़
  4146. 3:25:17गया [संगीत] जो तुम्हारे दिमाग में कोई नई
  4147. 3:25:19खुराफात जन्म लेने लगी है? शौर्य ने उसकी
  4148. 3:25:23तरफ देखते हुए [संगीत] उम्मीद भरी मुस्कान
  4149. 3:25:25के साथ कहा, तुम्हारी बात सच है। मेरी सोच
  4150. 3:25:29में एक खुराफात तो सच में आई है और
  4151. 3:25:31[संगीत] वही यह भी साबित कर देगी कि मैं
  4152. 3:25:33सही हूं और तुम गलत। अरविंद भी शौर्य की
  4153. 3:25:37बात सुनकर उलझन [संगीत] में पड़ गए।
  4154. 3:25:39उन्होंने पूछा अब तुम क्या करने की सोच
  4155. 3:25:42रहे हो शौर्य? शौर्य ने पूरे विश्वास के
  4156. 3:25:46साथ कहा, "अर भाई, मैं आपसे कहना चाहता
  4157. 3:25:49हूं कि शिप्रा ने मेरा फोन काटा तो है,
  4158. 3:25:52[संगीत]
  4159. 3:25:52लेकिन उसका रीजन कुछ और है। वो बिल्कुल भी
  4160. 3:25:55वह वजह नहीं है जो प्रतीक ने बताई है।"
  4161. 3:25:58अरविंद ने उसे समझाते हुए कहा, रहने दो
  4162. 3:26:01शौर्य। अब कुछ भी साबित करने की जरूरत
  4163. 3:26:03[संगीत] नहीं है। क्योंकि तुम जितना खुद
  4164. 3:26:06को निर्दोष साबित करने की कोशिश करोगे,
  4165. 3:26:08उतना ही इस मामले में और फंसते चले जाओगे।
  4166. 3:26:11[संगीत]
  4167. 3:26:12यहां कोई तुम्हें कुछ नहीं कह रहा है और
  4168. 3:26:14मैं तुमसे वादा करता हूं कि यह बात हम
  4169. 3:26:17लोगों के बीच ही रहेगी। यहां से बाहर नहीं
  4170. 3:26:19जाएगी।
  4171. 3:26:21शौर्य ने तुरंत [संगीत] कहा इसकी जरूरत
  4172. 3:26:24नहीं पड़ेगी अरविंद भाई। बस आप मुझे थोड़ा
  4173. 3:26:27सा समय दीजिए। अभी खुद मेरे पास शिप्रा की
  4174. 3:26:30तरफ से फोन [संगीत] आएगा और वह खुद बताएगी
  4175. 3:26:32कि जैसा आप लोग सोच रहे हैं वैसा कुछ भी
  4176. 3:26:35नहीं है। अरविंद ने हैरानी से पूछा। अब
  4177. 3:26:40तुम क्या करने की सोच रहे हो? शौर्य ने
  4178. 3:26:43हेमा की तरफ देखा और फिर अरविंद से पूछा,
  4179. 3:26:47क्या मैं हेमा के साथ एक सेल्फी
  4180. 3:26:49[संगीत]
  4181. 3:26:49ले सकता हूं? इतना कहकर शौर्य ने कुछ सोचा
  4182. 3:26:52और फिर खुद ही बात संभालते हुए बोला,
  4183. 3:26:54[संगीत]
  4184. 3:26:55अरे इसमें इतना पूछने की क्या जरूरत है?
  4185. 3:26:58हेमा तो वैसे भी आपकी साली हैं और मेरा
  4186. 3:27:01इतना हक तो बनता है कि उनके साथ एक सेल्फी
  4187. 3:27:04ले ही [संगीत] सकता हूं। इतना कहकर शौर्य
  4188. 3:27:06हेमा के पास पहुंचा। उसने मोबाइल का कैमरा
  4189. 3:27:09ऑन किया और हेमा [संगीत] के कंधे पर अपना
  4190. 3:27:12हाथ रखते हुए दूसरे हाथ से सेल्फी ले ली।
  4191. 3:27:15शौर्य की इस हरकत से हेमा भी [संगीत] उलझन
  4192. 3:27:18में पड़ गई। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि
  4193. 3:27:21आखिर शौर्य क्या करने की कोशिश [संगीत] कर
  4194. 3:27:23रहा है। लेकिन जब शौर्य ने कैमरे की तरफ
  4195. 3:27:26देखकर सेल्फी लेने की कोशिश की तो हेमा ने
  4196. 3:27:29भी मुस्कुराते हुए [संगीत] कैमरे के सामने
  4197. 3:27:31पोज़ दे दिया। शौर्य ने तस्वीर देखी और
  4198. 3:27:35संतुष्ट होकर बोला, परफेक्ट यही तो मुझे
  4199. 3:27:39चाहिए था। इतना कहने के बाद उसने [संगीत]
  4200. 3:27:42किसी की भी बात का इंतजार नहीं किया और वो
  4201. 3:27:44सेल्फी शिप्रा को भेज दी। शौर्य के अलावा
  4202. 3:27:48वहां मौजूद [संगीत] किसी को भी समझ नहीं
  4203. 3:27:50आया कि आखिर उसने उस तस्वीर के साथ ऐसा
  4204. 3:27:53क्या कर दिया था। लेकिन उन्हें ज्यादा देर
  4205. 3:27:56तक इंतजार नहीं करना पड़ा। अचानक [संगीत]
  4206. 3:27:59शौर्य का मोबाइल रिंग करने लगा। सभी की
  4207. 3:28:02नजरें तुरंत शौर्य की तरफ उठ गई। शौर्य ने
  4208. 3:28:05मोबाइल की स्क्रीन सबके सामने कर दी।
  4209. 3:28:08स्क्रीन पर साफ-साफ [संगीत] शिप्रा का नाम
  4210. 3:28:10फ्लैश हो रहा था। यह देखकर प्रतीक की
  4211. 3:28:13आंखें हैरानी से फैल गई। यह कैसे हो गया?
  4212. 3:28:17वहीं बाकी लोगों के चेहरों पर भी आश्चर्य
  4213. 3:28:20[संगीत] साफ नजर आने लगा। शौर्य ने अभी जो
  4214. 3:28:23कहा था वो सच साबित हो [संगीत] चुका था।
  4215. 3:28:26अरविंद ने अपनी भावनाओं पर काबू रखते हुए
  4216. 3:28:29तुरंत कहा,
  4217. 3:28:31ठीक है, तुम कॉल एक्सेप्ट [संगीत] करो और
  4218. 3:28:33मोबाइल को लाउडस्पीकर पर डालो। लेकिन
  4219. 3:28:36शौर्य के लिए यह [संगीत] थोड़ा जोखिम भरा
  4220. 3:28:38था। पता नहीं शिप्रा फोन उठाते ही कैसे
  4221. 3:28:41रिएक्ट करें। उसे तो यह पता [संगीत] भी
  4222. 3:28:43नहीं होगा कि शौर्य के मोबाइल की आवाज
  4223. 3:28:46वहां मौजूद बाकी लोग भी सुन रहे हैं।
  4224. 3:28:49शौर्य अभी इसी [संगीत] सोच में डूबा हुआ
  4225. 3:28:52था कि क्या किया जाए। तभी अरविंद की आवाज
  4226. 3:28:55फिर उसके कानों में पड़ी। उन्होंने कहा,
  4227. 3:28:59अब सोच क्या रहे हो? जल्दी से कॉल
  4228. 3:29:01एक्सेप्ट करो। अब शौर्य के पास कोई चारा
  4229. 3:29:04नहीं था। मजबूरन उसने कॉल उठा लिया। फोन
  4230. 3:29:08उठते ही शिप्रा की गुस्से [संगीत] से भरी
  4231. 3:29:11आवाज पूरे कमरे में गूंज गई। यह तुम किसके
  4232. 3:29:15साथ हो? और मुझे उसके [संगीत] साथ का फोटो
  4233. 3:29:17भेजने का क्या मतलब है? शिप्रा की आवाज
  4234. 3:29:20सुनते ही अरविंद की आंखें फैल गई। अब
  4235. 3:29:23उन्हें समझ में आने लगा था कि शौर्य ने
  4236. 3:29:26हेमा के साथ सेल्फी लेकर [संगीत] वो
  4237. 3:29:28तस्वीर शिप्रा को क्यों भेजी थी। आखिर
  4238. 3:29:31तस्वीर देखते ही शिप्रा ने तुरंत फोन
  4239. 3:29:33क्यों किया? क्या शिप्रा और शौर्य एक
  4240. 3:29:36दूसरे को पसंद करते [संगीत] थे? जरूर यही
  4241. 3:29:40बात थी। तभी तो हेमा के साथ शौर्य [संगीत]
  4242. 3:29:43की तस्वीर देखते ही शिप्रा खुद को रोक
  4243. 3:29:46नहीं पाई और तुरंत उसे फोन कर दिया।
  4244. 3:29:49अरविंद को एक पल में पूरा मामला [संगीत]
  4245. 3:29:51समझ आ गया और उन्हें अपने भाई प्रतीक पर
  4246. 3:29:55दया आने लगी। वहीं शौर्य [संगीत] ने
  4247. 3:29:57शिप्रा को भड़का हुआ देखकर जल्दी से कहा।
  4248. 3:30:01थोड़ा दम धरो देवी जी। यह मोहतरमा हमारे
  4249. 3:30:04अरविंद भाई की साली [संगीत] है और मैं अभी
  4250. 3:30:06अपने भाइयों के साथ अपने दादाजी के महल
  4251. 3:30:09में हूं। मैं फोन इसलिए कर [संगीत] रहा था
  4252. 3:30:11क्योंकि मेरे भाइयों को यह गलतफहमी हो गई
  4253. 3:30:13है कि मैंने तुम्हारे साथ पहले कभी
  4254. 3:30:15जबरदस्ती या बदतमीजी करने की कोशिश की थी।
  4255. 3:30:19यह सब तुम्हारी [संगीत] आवाज सुन रहे हैं।
  4256. 3:30:22क्या तुम इन्हें बताओगी कि क्या मैंने
  4257. 3:30:24तुम्हारे साथ कभी कोई बदतमीजी या [संगीत]
  4258. 3:30:26जबरदस्ती करने की कोशिश की है? शौर्य ने
  4259. 3:30:30एक ही सांस में सारी बात शिप्रा के सामने
  4260. 3:30:33स्पष्ट कर दी। ताकि वह फोन [संगीत] पर
  4261. 3:30:35ज्यादा कुछ ऐसा ना बोल दे जिससे उसकी
  4262. 3:30:38परेशानी और बढ़ जाए। दूसरी तरफ [संगीत]
  4263. 3:30:41शिप्रा को समझ ही नहीं आया कि आखिर यह सब
  4264. 3:30:43क्या हो रहा है। वो तो शौर्य का फोन समझकर
  4265. 3:30:47अपनी [संगीत] नाराजगी के कारण उसकी कॉल
  4266. 3:30:49काट रही थी। लेकिन शौर्य की बात सुनते ही
  4267. 3:30:52उसे समझते देर नहीं लगी कि जरूर प्रतीक ने
  4268. 3:30:56शौर्य [संगीत] के लिए कोई मुसीबत खड़ी
  4269. 3:30:57करने की कोशिश की है। वो संभल कर बोली।
  4270. 3:31:01मुझे क्या पता था कि तुम किस लिए फोन कर
  4271. 3:31:03रहे हो? मैं तो तुमसे गुस्सा [संगीत] थी
  4272. 3:31:06इसलिए फोन नहीं उठा रही थी। शौर्य ने वहां
  4273. 3:31:09मौजूद सभी चेहरों [संगीत] की तरफ देखा।
  4274. 3:31:12सबके भाव बदल चुके थे। जिस तरह से शिप्रा
  4275. 3:31:15शौर्य से बात कर रही [संगीत] थी, उससे
  4276. 3:31:17दोनों के बीच की नजदीकी साफ महसूस हो रही
  4277. 3:31:20थी। अरविंद अपनी जिज्ञासा को रोक नहीं
  4278. 3:31:23सके। उन्होंने धीरे से शौर्य से पूछा। वो
  4279. 3:31:27तुमसे गुस्सा क्यों थी?
  4280. 3:31:29मजबूरन शौर्य को अनजान बनते हुए शिप्रा से
  4281. 3:31:32पूछना पड़ा। तुम मुझसे गुस्सा किस बात पर
  4282. 3:31:36थी? कुछ पल की चुप्पी के बाद शिप्रा ने
  4283. 3:31:39कहा, बहुत अच्छे। पूछ रहे हो कि मैं
  4284. 3:31:42गुस्सा क्यों थी? तुम आज मुझसे मिलने वाले
  4285. 3:31:46थे ना पर तुम बोलने के बाद भी आए। शिप्रा
  4286. 3:31:49ने कहने को तो कुछ और कहा था। लेकिन उसके
  4287. 3:31:52शब्दों के पीछे छिपा मतलब शौर्य अच्छी तरह
  4288. 3:31:55समझ गया था। वो कहना चाहती थी कि इस वक्त
  4289. 3:31:58तक शौर्य को उसके साथ होना चाहिए था।
  4290. 3:32:01शौर्य ने ऐसे अभिनय किया जैसे उसे अपनी
  4291. 3:32:04गलती का एहसास हो गया हो। उसने कहा अच्छा
  4292. 3:32:09उस बात [संगीत] के लिए। अरे क्या कहूं?
  4293. 3:32:12मुझे यहां दादाजी के पास आना था। इसी
  4294. 3:32:15चक्कर में मैं आ नहीं सका। तभी शौर्य को
  4295. 3:32:18ध्यान आया कि शिप्रा ने अभी तक यह स्पष्ट
  4296. 3:32:21नहीं [संगीत] किया था कि उसने उसके साथ
  4297. 3:32:23कभी कोई बदतमीजी या जबरदस्ती करने की
  4298. 3:32:26कोशिश की थी या नहीं। यह याद आते ही उसने
  4299. 3:32:29[संगीत] फिर पूछा शिप्रा अरविंद भाई
  4300. 3:32:33तुम्हारी बात सुन रहे हैं। क्या तुम
  4301. 3:32:36इन्हें स्पष्ट करोगी कि मैंने तुम्हारे
  4302. 3:32:38साथ पहले कभी कोई बदतमीजी या जबरदस्ती
  4303. 3:32:41करने की कोशिश की थी? शौर्य की बात सुनकर
  4304. 3:32:45शिप्रा एक पल के लिए सकुचा गई। फिर खुद को
  4305. 3:32:48संयत करते हुए बोली, उनसे यह किसने कहा कि
  4306. 3:32:52तुमने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश
  4307. 3:32:54की? तुम्हें इतनी हिम्मत है कि तुम मेरे
  4308. 3:32:57साथ जबरदस्ती कर सको। शिप्रा की बात सुनते
  4309. 3:33:01ही शौर्य ने अरविंद की तरफ देखा। जैसे
  4310. 3:33:04उसकी आंखें उनसे पूछ रही हो। अब आप क्या
  4311. 3:33:07कहते हैं? अरविंद ने धीरे से प्रतीक की
  4312. 3:33:10तरफ देखा। प्रतीक का चेहरा ऐसा हो गया था
  4313. 3:33:14जैसे किसी ने भरे बाजार में उसके गाल पर
  4314. 3:33:17जोरदार तमाचा जड़ दिया हो। शौर्य ने देखा
  4315. 3:33:20कि शिप्रा अभी भी फोन पर थी इसलिए उसने
  4316. 3:33:23सबसे पहले उससे कहा मैं तुमसे बाद में बात
  4317. 3:33:26करता हूं। इतना कहकर उसने [संगीत] कॉल काट
  4318. 3:33:29दी और फिर अरविंद की तरफ देखते हुए पूछा।
  4319. 3:33:33क्या अभी भी आपको लगता है कि मैंने शिप्रा
  4320. 3:33:35के साथ कोई जबरदस्ती करने की कोशिश की
  4321. 3:33:38होगी? अरविंद के [संगीत] चेहरे पर बेबसी
  4322. 3:33:40के भाव उभर आए। तभी हेमा ने प्रतीक और
  4323. 3:33:44कुणाल की तरफ देखते हुए कटाक्ष [संगीत]
  4324. 3:33:46किया।
  4325. 3:33:47यही होता है जब कोई किसी और के चेहरे पर
  4326. 3:33:50कालिख पोतने की कोशिश [संगीत] करता है तो
  4327. 3:33:52गंदा उसका अपना हाथ भी होता है। प्रतीक के
  4328. 3:33:56पास अब कहने के लिए कुछ भी [संगीत] नहीं
  4329. 3:33:57था। वो बस गुस्से भरी नजरों से शौर्य को
  4330. 3:34:01देखता रहा। उसने शौर्य को बहुत कम करके
  4331. 3:34:04आंका था।
  4332. 3:34:05[संगीत]
  4333. 3:34:05लेकिन शिप्रा को इस तरह पलटते देखकर वह
  4334. 3:34:08समझ चुका था कि उन दोनों के बीच सिर्फ
  4335. 3:34:11साधारण दोस्ती नहीं थी। दोनों के बीच कोई
  4336. 3:34:14अलग ही केमिस्ट्री चल रही थी। इसी बीच
  4337. 3:34:17हेमा चलकर शौर्य के पास आई और सीधे उससे
  4338. 3:34:20पूछा क्या शिप्रा तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?
  4339. 3:34:25शौर्य को उम्मीद नहीं थी कि हेमा उनसे
  4340. 3:34:27इतनी सीधे [संगीत] तरीके से सवाल करेंगी।
  4341. 3:34:30वो हिचकिचाते हुए बोला,
  4342. 3:34:33"तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो?" [संगीत] हेमा
  4343. 3:34:35ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, क्योंकि
  4344. 3:34:38तुम दोनों की बातों से मुझे लगा कि तुम
  4345. 3:34:41दोनों का रिश्ता दोस्ती से कुछ बढ़कर
  4346. 3:34:44[संगीत] है। शौर्य ने तुरंत सफाई देते हुए
  4347. 3:34:47कहा, नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। हम [संगीत]
  4348. 3:34:51बस अच्छे दोस्त हैं। यह कहते हुए शौर्य ने
  4349. 3:34:55प्रतीक और कुणाल की तरफ देखा। उसके अंदाज
  4350. 3:34:58से साफ लग रहा था कि वह उन दोनों को चिढ़ा
  4351. 3:35:01रहा था। हेमा ने उसकी बात पर हल्का सा
  4352. 3:35:04कटाक्ष करते हुए कहा, "अच्छा? क्या सच
  4353. 3:35:08[संगीत] में? पता नहीं क्यों? लेकिन मुझे
  4354. 3:35:11तुम्हारी बात पर विश्वास नहीं हो रहा।"
  4355. 3:35:14शौर्य को लगा कि अगर वह [संगीत] थोड़ी देर
  4356. 3:35:16और यहां रुका, तो बातें और बढ़ती चली
  4357. 3:35:19जाएंगी। इससे अच्छा था कि वह वहां से निकल
  4358. 3:35:22जाए। उसने कहा, ठीक है, अभी मैं आप सब से
  4359. 3:35:27विदा लेता हूं। मुझे मां से जाकर मिलना
  4360. 3:35:29है। इतना कहकर शौर्य वहां से निकल गया और
  4361. 3:35:33एक तरफ बैठी अपनी मां की ओर बढ़ गया।
  4362. 3:35:37प्रतीक, कुणाल, अरविंद और हेमा भी शौर्य
  4363. 3:35:40को जाते हुए देखते रहे। शौर्य अपनी मां के
  4364. 3:35:43पास पहुंचा और उनके पैर छूकर प्रणाम किया।
  4365. 3:35:47इसके बाद उसने उनके साथ बैठी जानवी राठौड़
  4366. 3:35:50को भी प्रणाम किया। [संगीत]
  4367. 3:35:52कल्पना जी ने चोरी छिपे शिकायत करते हुए
  4368. 3:35:55कहा, "क्या फायदा मेरे वापस आने का? जब
  4369. 3:35:58[संगीत] यहां आने के बाद भी मुझे तुम्हें
  4370. 3:36:00देखे हुए कई दिन बीत जाते हैं।" शौर्य ने
  4371. 3:36:04अपनी मां का हाथ थामते हुए प्यार से कहा।
  4372. 3:36:08बस कुछ दिनों की बात है मां। उसके बाद
  4373. 3:36:11मुझसे मिलने के लिए फिर आपको यूं इंतजार
  4374. 3:36:13नहीं करना पड़ेगा। [संगीत]
  4375. 3:36:15इसी समय सूर्यभान जी भी शौर्य और कल्पना
  4376. 3:36:18जी के पास आ गए। उन्होंने शौर्य से कहा
  4377. 3:36:22तुम जरा मेरे साथ आओ। मुझे तुमसे कुछ बात
  4378. 3:36:25करनी है। शौर्य सूर्यभान जी के साथ हॉल से
  4379. 3:36:29अंदर कमरे की तरफ बढ़ गया। कल्पना जी और
  4380. 3:36:33नीलिमा भी उनके पीछे-पीछे कमरे में आ गई।
  4381. 3:36:36कमरे के अंदर पहुंचते [संगीत] ही सूर्यभान
  4382. 3:36:39जी ने शौर्य की तरफ देखते हुए कहा, अब
  4383. 3:36:42मुझे लग रहा है कि मेरा बेटा सच में बड़ा
  4384. 3:36:45हो गया है। मैं समझता हूं कि तुमने
  4385. 3:36:48जानबूझकर मेरा दिल रखने के लिए यह कहा था
  4386. 3:36:50कि [संगीत] तुम्हें कनिका पसंद नहीं है।
  4387. 3:36:53शौर्य को हैरानी हुई कि उसके पापा अभी भी
  4388. 3:36:56उसके लिए परेशान थे। उसने सोचा कि अब
  4389. 3:36:59उन्हें और ज्यादा अंधेरे में रखने की कोई
  4390. 3:37:02जरूरत नहीं है। कहीं ऐसा ना हो कि उनके मन
  4391. 3:37:05में बेवजह ग्लानी का भाव आ जाए। शौर्य ने
  4392. 3:37:09अपनी मां की तरफ देखा और फिर सूर्यभान जी
  4393. 3:37:12की ओर देखते हुए कहा। पापा
  4394. 3:37:16एक बात [संगीत] है जो मुझे आपसे कहनी है।
  4395. 3:37:19सूर्यभान जी ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए
  4396. 3:37:22कहा। यह भी कोई बात हुई? तुम्हें मुझसे
  4397. 3:37:25कुछ कहने के लिए कब से [संगीत] पूछना
  4398. 3:37:27पड़ने लगा? शौर्य ने अपने हाथ मलते हुए
  4399. 3:37:31कहा, पापा,
  4400. 3:37:34बात ऐसी है [संगीत] कि मुझे आपसे यह बात
  4401. 3:37:36पहले ही बता देनी चाहिए थी। लेकिन कुछ ऐसे
  4402. 3:37:40हालात बने कि मैं आपसे यह बात कह नहीं
  4403. 3:37:42सका।
  4404. 3:37:44सूर्यभान जी गौर से शौर्य का चेहरा देखने
  4405. 3:37:46[संगीत] लगे। वह सोचने लगे कि आखिर ऐसी
  4406. 3:37:50क्या बात है जिसके लिए शौर्य [संगीत] इतनी
  4407. 3:37:52भूमिका बना रहा है?
  4408. 3:37:54उन्होंने एक नजर कल्पना जी की तरफ भी
  4409. 3:37:56देखा। जैसे यह परखने [संगीत] की कोशिश कर
  4410. 3:37:59रहे हो कि शौर्य जो बात कहने वाला है,
  4411. 3:38:02क्या कल्पना जी को उसके बारे में पहले से
  4412. 3:38:04पता है? शौर्य ने अब [संगीत] ज्यादा देर
  4413. 3:38:07करना ठीक नहीं समझा। उसने सीधे कहा, पापा,
  4414. 3:38:13बात ऐसी [संगीत] है कि मेरी शादी पहले ही
  4415. 3:38:16हो चुकी है।
  4416. 3:38:18क्या?
  4417. 3:38:19सूर्यभान जी का मुंह आश्चर्य [संगीत] से
  4418. 3:38:21खुला का खुला रह गया। उन्हें पहले लगा कि
  4419. 3:38:25शायद शौर्य उनके साथ मजाक कर रहा है।
  4420. 3:38:28लेकिन फिर उन्होंने [संगीत] कल्पना जी और
  4421. 3:38:30नीलिमा की तरफ देखा। दोनों के चेहरों पर
  4422. 3:38:34किसी तरह का आश्चर्य नहीं था। इसका मतलब
  4423. 3:38:37साफ [संगीत] था वे दोनों पहले से इस बात
  4424. 3:38:40से वाकिफ थी। यह देखकर सूर्यभान जी की
  4425. 3:38:43हैरानी और बढ़ गई। उन्होंने कल्पना जी की
  4426. 3:38:47ओर [संगीत] देखते हुए थोड़े रूखे स्वर में
  4427. 3:38:49पूछा।
  4428. 3:38:51क्या तुम्हें यह बात पहले से पता [संगीत]
  4429. 3:38:53थी? कल्पना जी ने तुरंत सफाई देते हुए
  4430. 3:38:56कहा, इतना भी पहले से पता नहीं था। मुझे
  4431. 3:39:01तो अभी [संगीत] कुछ दिनों पहले ही यह बात
  4432. 3:39:03पता चली।
  4433. 3:39:04सूर्यभान जी भावुक होते हुए बोले, "मुझे
  4434. 3:39:08विश्वास नहीं हो रहा है कि तुम लोगों ने
  4435. 3:39:11इतनी बड़ी बात मुझसे छुपा कर रखी। और मैं
  4436. 3:39:14यह सोचकर परेशान हो रहा था कि कनिका ने
  4437. 3:39:17इससे [संगीत] शादी के लिए मना कर दिया तो
  4438. 3:39:20यह कितना दुखी होगा।
  4439. 3:39:22नीलिमा सामने आते हुए अपने पापा पर ही
  4440. 3:39:25सारा दोष मड़ते हुए बोली
  4441. 3:39:28पापा
  4442. 3:39:29देखा जाए तो इसमें आपकी ही गलती है।
  4443. 3:39:32क्योंकि जिस दिन आप यहां आए उसी [संगीत]
  4444. 3:39:35दिन आपने बिना भैया की मर्जी जाने उनकी
  4445. 3:39:37शादी कनिका के साथ फिक्स कर दी। इस स्थिति
  4446. 3:39:41में भैया आपसे बताते [संगीत] भी तो कैसे
  4447. 3:39:43बताते? आप तो पूरी तरह ताल ठोक कर
  4448. 3:39:46विक्रमजीत अंकल को वचन दे चुके थे कि आपका
  4449. 3:39:50बेटा आपकी बात से नहीं मुकरेगा।
  4450. 3:39:53तो फिर भैया के पास और चारा ही क्या बचता
  4451. 3:39:56था? [संगीत]
  4452. 3:39:58सूर्यभान जी कुछ पल के लिए खामोश हो गए।
  4453. 3:40:01उन्होंने उस समय के बारे में सोचा। फिर
  4454. 3:40:05उन्हें याद आया कि [संगीत] किस तरह
  4455. 3:40:07उन्होंने जल्दबाजी में शौर्य का रिश्ता
  4456. 3:40:09विक्रमजीत जी की पोती के साथ [संगीत] तय
  4457. 3:40:11कर दिया था।
  4458. 3:40:13यह बात याद आते ही उन्हें अपनी गलती का
  4459. 3:40:16एहसास हुआ। सच में उन्होंने उस समय यह
  4460. 3:40:20जानने की कोशिश तक नहीं की थी कि उनका
  4461. 3:40:23बेटा कनिका [संगीत] से शादी करना चाहता भी
  4462. 3:40:25है या नहीं।
  4463. 3:40:27सूर्यभान जी अभी अपनी सोच में ही डूबे हुए
  4464. 3:40:30थे कि [संगीत] तभी शौर्य का मोबाइल रिंग
  4465. 3:40:32करने लगा।
  4466. 3:40:34लेकिन शौर्य अभी मोबाइल अपनी जेब से
  4467. 3:40:36निकालता [संगीत]
  4468. 3:40:37उससे पहले ही फोन कट गया। आखिर शौर्य के
  4469. 3:40:41पास किसका फोन आया था?
  4470. 3:40:44क्या यह फोन उसकी जिंदगी में आने वाले
  4471. 3:40:47किसी नए तूफान का संकेत था? और सबसे बड़ा
  4472. 3:40:51[संगीत] सवाल जब सूर्यभान जी को पता चलेगा
  4473. 3:40:54कि शिप्रा ही उनकी बहू है तब इस घर में
  4474. 3:40:57क्या होगा? दिल निकाल कर देखा कि किसका
  4475. 3:41:00मिस्ड कॉल था।
  4476. 3:41:01स्क्रीन पर शिप्रा का नाम देखकर वह समझ
  4477. 3:41:04गया कि शिप्रा ने जानबूझकर मिस्ड कॉल किया
  4478. 3:41:07था। ताकि अगर वह लोगों के बीच हो तो साइड
  4479. 3:41:10में जाकर खुद उसे फोन कर सके। यह सोचकर
  4480. 3:41:14शौर्य के चेहरे पर मुस्कान [संगीत] आ गई।
  4481. 3:41:17सूर्यभान जी अभी इसी उलझन में थे कि शौर्य
  4482. 3:41:20ने शादी कर ली है और उन्हें इसकी भनक तक
  4483. 3:41:23नहीं लगी। [संगीत] उन्होंने शौर्य को
  4484. 3:41:25मोबाइल देखकर मुस्कुराते हुए देखा तो
  4485. 3:41:27उत्सुकता से पूछ बैठे। किसका मिस्ड
  4486. 3:41:30[संगीत] कॉल था जो मोबाइल देखकर मुस्कुरा
  4487. 3:41:32रहे हो? शौर्य ने अपने पिता को छेड़ते हुए
  4488. 3:41:36मुस्कुराकर कहा, "आपकी बहू मुझे मिस्ड कॉल
  4489. 3:41:39कर रही है पापा।" सूर्यभान जी ने नकली
  4490. 3:41:42नाराजगी जताते हुए कहा, "मैं ऐसी शादी को
  4491. 3:41:46नहीं मानता जिसके बारे में मुझे पता तक
  4492. 3:41:48नहीं है।" [संगीत] तुम सब मिलकर मेरे साथ
  4493. 3:41:50खेल खेल रहे हो। कल्पना जी सूर्यभान जी के
  4494. 3:41:54करीब आते हुए मुस्कुरा कर बोली पूछोगे
  4495. 3:41:57नहीं कि आपकी बहू कौन है? सूर्यभान जी ने
  4496. 3:42:01हैरानी से कल्पना जी की ओर देखते हुए पूछा
  4497. 3:42:04क्या कहा?
  4498. 3:42:05क्या तुम अपनी बहू [संगीत] से मिल चुकी
  4499. 3:42:07हो? कल्पना जी की मुस्कान और गहरी हो गई।
  4500. 3:42:11उन्होंने कहा मिल तो आप भी चुके हैं
  4501. 3:42:14[संगीत] लेकिन उस समय आपको पता नहीं था कि
  4502. 3:42:16वह आपकी बहू है। सूर्यभान जी ने दोनों हाथ
  4503. 3:42:20खड़े करते हुए कहा
  4504. 3:42:22अब अगर तुम लोगों का मेरे साथ खेलना हो
  4505. 3:42:24गया हो तो क्या तुम सब मुझे बता सकते हो
  4506. 3:42:26कि आखिर कौन है मेरी बहू? नीलिमा गंभीरता
  4507. 3:42:30से अपने पिता के पास आई और बोली पापा क्या
  4508. 3:42:34मैं आपसे [संगीत] पूछ सकती हूं कि दादाजी
  4509. 3:42:36की कंपनी फैब्रिक ट्रेंड की नई सीईओ
  4510. 3:42:38शिप्रा आपको कैसी लगती हैं? सूर्यभान जी
  4511. 3:42:42[संगीत] के कान खड़े हो गए। वह तुरंत समझ
  4512. 3:42:45गए कि नीलिमा यूं ही किसी के बारे में
  4513. 3:42:47नहीं पूछ सकती। उन्होंने कल्पना जी की ओर
  4514. 3:42:50मुड़कर पूछा क्या शिप्रा ही हमारी बहू है?
  4515. 3:42:54कल्पना जी मुस्कुराते हुए बोली मुझे नहीं
  4516. 3:42:58पता यह तो आप अपने बेटे से पूछिए।
  4517. 3:43:01सूर्यभान जी अब और बेचैन हो उठे। उन्होंने
  4518. 3:43:05दिखावटी गुस्से में कहा। अब बहुत हो गया।
  4519. 3:43:09अब तुम लोग मेरे साथ खेलना बंद करो और
  4520. 3:43:11साफ-साफ बताओ। क्या शिप्रा ही हमारी बहू
  4521. 3:43:14है?
  4522. 3:43:15नीलिमा उनके सामने जाकर शरारत से अपनी
  4523. 3:43:18आंखें मटकाते हुए बोली, "क्यों पापा? पहले
  4524. 3:43:22यह बताइए क्या बहू आपको पसंद है?"
  4525. 3:43:25सूर्यभान जी के चेहरे पर अचानक खुशी फैल
  4526. 3:43:28गई। उन्होंने कहा, "यानी सच में शिप्रा ही
  4527. 3:43:31हमारी बहू है।" वह तो बहुत अच्छी लड़की
  4528. 3:43:34है। लेकिन अगले ही पल उन्हें कुछ याद आया।
  4529. 3:43:38वो ठिटक कर शौर्य की ओर देखने लगे और
  4530. 3:43:41बोले, [संगीत] एक मिनट। क्या पिताजी को
  4531. 3:43:44पहले से ही पता है कि शिप्रा तुम्हारी
  4532. 3:43:45पत्नी है? शौर्य मुस्कुराते हुए बोला, तो
  4533. 3:43:50आपको क्या लगता है? [संगीत] उन्होंने ऐसे
  4534. 3:43:52ही शिप्रा को अपनी कंपनी का सीईओ बना
  4535. 3:43:54दिया? सूर्यभान जी को जैसे पूरी बात समझ
  4536. 3:43:58में आ गई। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा,
  4537. 3:44:02तो यह बात
  4538. 3:44:03[संगीत]
  4539. 3:44:03थी। मैं बेवजह पिताजी को तुम्हारा दुश्मन
  4540. 3:44:06समझ रहा था। मैं अभी तक इस [संगीत]
  4541. 3:44:08गलतफहमी में जी रहा था कि पिताजी जानबूझकर
  4542. 3:44:11नहीं चाहते कि तुम्हारी शादी कनिका से हो।
  4543. 3:44:15अब मेरी समझ में आया कि वह ऐसा क्यों
  4544. 3:44:17चाहते थे। कल्पना जी ने व्यंग करते हुए
  4545. 3:44:20कहा अगर आपने उस दिन शौर्य का रिश्ता
  4546. 3:44:23कनिका से करने की जल्दबाजी नहीं की होती
  4547. 3:44:26तो अब तक आप अपनी बहू के हाथ की चाय पी
  4548. 3:44:28चुके [संगीत] होते। सूर्यभान जी बेसब्र
  4549. 3:44:31होकर बोले अभी कहां है मेरी बहू? मुझे अभी
  4550. 3:44:35जाकर उससे मिलना है। अब मैं और इंतजार
  4551. 3:44:38नहीं कर सकता।
  4552. 3:44:40शौर्य ने उन्हें समझाते हुए कहा, अभी इतनी
  4553. 3:44:43[संगीत] जल्दी करने की जरूरत नहीं है
  4554. 3:44:45पापा। जब तक कुणाल और कनिका की शादी लगभग
  4555. 3:44:48फाइनल [संगीत] नहीं हो जाती तब तक यह बात
  4556. 3:44:50सबकी नजरों से छिपी रहे तो ही अच्छा है।
  4557. 3:44:53वरना फालतू में सवाल आपके ऊपर ही उठेंगे
  4558. 3:44:56कि बेटे की शादी के बारे में जानने के बाद
  4559. 3:44:58भी [संगीत] आपने वीरभद्र की बेटी से अपने
  4560. 3:45:01बेटे का रिश्ता करने की कोशिश क्यों की?
  4561. 3:45:04सूर्यभान जी ने सिर हिलाते हुए कहा, ठीक
  4562. 3:45:07है समझ गया। मैं कोई ढोल [संगीत] नहीं पीट
  4563. 3:45:10रहा कि कनिका मेरी बहू है। लेकिन मुझे
  4564. 3:45:13अपनी बहू से मिलना तो है। मुझे उसे
  4565. 3:45:16आशीर्वाद देना है। मुझे याद आ रहा है जब
  4566. 3:45:20वह पहले भी मुझसे मिली थी तो उसने मेरे
  4567. 3:45:22पैर छूकर मुझे प्रणाम किया था। लेकिन मैं
  4568. 3:45:25ही बेवकूफ था [संगीत] जो उसकी भावना को
  4569. 3:45:27समझ नहीं सका। कल्पना जी ने उन्हें समझाते
  4570. 3:45:31हुए कहा, अब खुद को कोसने का कोई फायदा
  4571. 3:45:34नहीं है। हम कल सुबह अपनी बहू से मिलने
  4572. 3:45:37चलेंगे। [संगीत]
  4573. 3:45:38अभी अगर जल्दबाजी करेंगे तो बाकी लोगों को
  4574. 3:45:41शक हो सकता है। सूर्यभान जी सोफे पर बैठते
  4575. 3:45:45हुए अफसोस भरे स्वर [संगीत] में बोले।
  4576. 3:45:48यानी मुझे अपनी बहू से मिलने के लिए कल तक
  4577. 3:45:52का [संगीत] इंतजार करना पड़ेगा।
  4578. 3:45:55कल्पना जी भी उनके बगल में बैठते हुए
  4579. 3:45:57[संगीत] व्यंग से बोली।
  4580. 3:45:59मैं सुबह तक की ही तो बात कर रही हूं।
  4581. 3:46:01दो-चार दिन बाद की नहीं जो आप इतना अफसोस
  4582. 3:46:05कर रहे हैं। सूर्यभान जी ने कुछ पल इस
  4583. 3:46:08बारे में सोचा। फिर शौर्य की ओर मुड़कर
  4584. 3:46:11पूछा।
  4585. 3:46:12क्या तुम मुझे बताओगे कि यह सब कब और कैसे
  4586. 3:46:16हुआ?
  4587. 3:46:17इसके बाद शौर्य ने इत्मीनान से उन्हें
  4588. 3:46:20अपने साथ बीती हर घटना के बारे में बताया।
  4589. 3:46:23कल्पना जी को भी इस बारे में कुछ पता नहीं
  4590. 3:46:25था। इसलिए वह भी सूर्यभांजी के साथ शांति
  4591. 3:46:29से शौर्य की पूरी बात सुनती [संगीत] रही।
  4592. 3:46:32जब उन्हें पता चला कि इतने समय में उनके
  4593. 3:46:35बेटे ने क्या-क्या झेला है तो उनकी आंखें
  4594. 3:46:38नम हो गई। [संगीत] सूर्यभान जी ने भावुक
  4595. 3:46:41होकर कहा वाकई बहुत मुश्किल सफर रहा है
  4596. 3:46:44तुम दोनों का। लेकिन अब मैं अपनी बहू पर
  4597. 3:46:48कोई भी आंच नहीं आने दूंगा।
  4598. 3:46:51शौर्य की आंखों में भी भावनाएं उमड़ आई।
  4599. 3:46:54उसने कहा
  4600. 3:46:56अब तो आप सारी बात जान गए हैं पापा। मैं
  4601. 3:46:59पहले भी आपसे यह बात छिपाना नहीं चाहता
  4602. 3:47:01था। लेकिन जिस तरह के हालात बन गए थे, मैं
  4603. 3:47:05चाहकर भी आपको [संगीत] यह बात बता नहीं पा
  4604. 3:47:07रहा था। इसके लिए आप मुझे माफ कर दीजिएगा।
  4605. 3:47:12सूर्यभान जी ने उसे भावुक होकर देखा और
  4606. 3:47:15फिर मुस्कुराते [संगीत] हुए कहा।
  4607. 3:47:17बस कर पगले। अब क्या रुलाएगा मुझे?
  4608. 3:47:21मुझे अपने बेटे पर पूरा विश्वास है। मुझे
  4609. 3:47:24पता है [संगीत] कि तुम कोई भी अनुचित कदम
  4610. 3:47:26नहीं उठाओगे।
  4611. 3:47:28अब तुम जल्दी से अपनी बहू के पास जाओ। मैं
  4612. 3:47:31सुबह आ रहा हूं उससे मिलने।
  4613. 3:47:34यह कहते हुए सूर्यभान जी खड़े हो गए।
  4614. 3:47:37शौर्य को अपने पिता की समझदारी पर गर्व
  4615. 3:47:40हुआ। उसके कुछ कहने से पहले ही उसके पिता
  4616. 3:47:43समझ गए थे कि इस वक्त शौर्य को शिप्रा के
  4617. 3:47:46पास होना चाहिए।
  4618. 3:47:48इसके बाद शौर्य वहां से विदा लेकर मॉडल
  4619. 3:47:50टाउन के लिए निकल गया। रास्ते में शौर्य
  4620. 3:47:53को अचानक एक शरारत सूझी। शिप्रा ने उसे
  4621. 3:47:56मिस्ड कॉल किया था और शौर्य ने अभी तक उसे
  4622. 3:48:00कोई जवाब नहीं दिया था। उसने मोबाइल
  4623. 3:48:03निकाला और शिप्रा को फोन लगा दिया। इस
  4624. 3:48:06वक्त तक शौर्य अपने घर पहुंचने ही वाला
  4625. 3:48:08था। जैसे ही उसकी कार घर के बाहर आकर रुकी
  4626. 3:48:12उसी समय शिप्रा ने उसका फोन उठा लिया।
  4627. 3:48:15शिकायत [संगीत] भरे स्वर में शिप्रा बोली
  4628. 3:48:18तुम्हें रिप्लाई करने में इतना टाइम लग
  4629. 3:48:20गया मैंने कितनी देर पहले तुम्हें मिस्ड
  4630. 3:48:23कॉल दिया था शौर्य ने किसी बच्चे की तरह
  4631. 3:48:26रूठते हुए कहा अरे क्या करता अब जाकर मुझे
  4632. 3:48:30एकांत मिला है तभी तो तुम्हें फोन कर पा
  4633. 3:48:33रहा हूं एक तो मैंने इतनी [संगीत] मुश्किल
  4634. 3:48:35से तुम्हें फोन किया और उसके बाद भी तुम
  4635. 3:48:38शिकायत कर रही हो शिप्रा बेचैनी से बोली
  4636. 3:48:42तो क्या तुम अभी तक दादाजी के महल में ही
  4637. 3:48:45हो। कितनी रात हो गई है। अब तुम कब आओगे?
  4638. 3:48:50शौर्य ने बेचारगी [संगीत] भरे अंदाज में
  4639. 3:48:52कहा। अरे तो मैं क्या करूं? कोई मुझे यहां
  4640. 3:48:55से आने ही नहीं दे रहा। पापा भी पीछे पड़े
  4641. 3:48:58हुए हैं कि इतनी रात को कहां जाऊंगा? अब
  4642. 3:49:02तो मुश्किल ही लग रहा है कि मैं अभी
  4643. 3:49:04तुम्हारे पास आ पाऊंगा।
  4644. 3:49:06शिप्रा की आवाज में तड़प [संगीत] साफ झलक
  4645. 3:49:09रही थी। वो नाराज होकर बोली क्या तुम भूल
  4646. 3:49:13गए? तुमने मुझसे वादा किया था कि शाम तक
  4647. 3:49:16ही तुम वापस घर आ जाओगे और अब तुम कह रहे
  4648. 3:49:19हो कि अभी नहीं आ पाओगे। मैं कुछ नहीं
  4649. 3:49:22जानती। तुम्हें अभी आना है तो आना है।
  4650. 3:49:26शौर्य ने उदासी भरे स्वर में कहा। समझा
  4651. 3:49:30करो इतने दिनों के बाद पापा से मिलना हुआ
  4652. 3:49:33है। अब मैं उनकी बात को कैसे टाल दूं?
  4653. 3:49:37शिप्रा गुस्से में बोली। तो फिर फोन करने
  4654. 3:49:41की भी क्या जरूरत थी? फोन भी नहीं करते।
  4655. 3:49:44यह बताकर मुझ पर एहसान करने की क्या जरूरत
  4656. 3:49:47थी? मुझे तो तुम्हारा फोन ही नहीं उठाना
  4657. 3:49:50चाहिए था। मैंने गलती कर दी जो तुम्हारा
  4658. 3:49:52फोन उठा लिया।
  4659. 3:49:55शिप्रा को इतने गुस्से में देखकर शौर्य को
  4660. 3:49:57लगा कि कहीं उसने [संगीत] फिर से मधुमक्खी
  4661. 3:50:00के छत्ते में हाथ तो नहीं डाल दिया। एक
  4662. 3:50:03बार शिप्रा नाराज हो जाए तो उसे मनाना
  4663. 3:50:05इतना आसान नहीं था। शौर्य ने उसे शांत
  4664. 3:50:08कराने की कोशिश करते हुए कहा,
  4665. 3:50:11"अरे तुम इतना नाराज क्यों हो रही हो?"
  4666. 3:50:14मैं सुबह आ रहा हूं ना तुम्हारे पास। उसके
  4667. 3:50:17बाद ही कहीं जाऊंगा। पक्का वादा करता हूं।
  4668. 3:50:21इस समय तक शौर्य चलते-चलते अपने कमरे के
  4669. 3:50:24बाहर पहुंच चुका था। उसने दरवाजे को धक्का
  4670. 3:50:27दिया। [संगीत]
  4671. 3:50:28लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था। वो कमरे के
  4672. 3:50:32पीछे की ओर घूम कर बालकनी में पहुंचा।
  4673. 3:50:34[संगीत]
  4674. 3:50:35वहां का दरवाजा खुला हुआ था।
  4675. 3:50:38उसने कमरे में झांक कर देखा तो अंदर नाइट
  4676. 3:50:42बल्ब जल रहा था और शिप्रा बेड पर औंधे
  4677. 3:50:46मुंह लेटी हुई थी। शिप्रा नाराज होकर बोली
  4678. 3:50:51जैसे तुम हो वैसे ही तुम्हारे वादे हैं।
  4679. 3:50:54तुमने आज के लिए भी वादा किया था। लेकिन
  4680. 3:50:57क्या किया? तुम फोन रखो। मुझे तुमसे बात
  4681. 3:51:00ही [संगीत] नहीं करनी है। इतना कहकर
  4682. 3:51:03शिप्रा ने अपना फोन बेड पर पटक दिया। फिर
  4683. 3:51:06उसने [संगीत] तकिया उठाया और उसे अपनी
  4684. 3:51:09बाहों में भरकर उसी अवस्था में पेट के बल
  4685. 3:51:12लेट गई और अपना सिर तकिए पर रख लिया।
  4686. 3:51:16शौर्य को शिप्रा का यह हाल देखकर उस पर
  4687. 3:51:19तरस भी आया और साथ ही उसके लिए प्यार भी
  4688. 3:51:22उमड़ पड़ा। वो धीरे से बेड के पास गया और
  4689. 3:51:26बिना कोई आहट किए उसकी दूसरी तरफ जाकर लेट
  4690. 3:51:30गया। कुछ देर तक वो वैसे ही लेटा रहा
  4691. 3:51:34लेकिन शिप्रा के शरीर में कोई [संगीत]
  4692. 3:51:36हलचल नहीं हुई। कुछ ही पल बाद शिप्रा ने
  4693. 3:51:40फिर अपना मोबाइल उठाया और शौर्य का नंबर
  4694. 3:51:43मिलाने लगी। शौर्य ने देखा कि शिप्रा उसी
  4695. 3:51:47के नंबर पर फोन कर रही है। तो उसने जल्दी
  4696. 3:51:50से अपने मोबाइल को साइलेंट मोड पर कर दिया
  4697. 3:51:52और आहिस्ता [संगीत]
  4698. 3:51:53से बेड से नीचे उतर गया। अगले ही पल उसके
  4699. 3:51:57मोबाइल पर शिप्रा की कॉल आ रही थी। उसने
  4700. 3:52:00फोन उठाया लेकिन कुछ नहीं बोला। शिप्रा भी
  4701. 3:52:04खामोश रही और शौर्य [संगीत] के बोलने का
  4702. 3:52:06इंतजार करने लगी। कुछ पल की खामोशी के बाद
  4703. 3:52:10आखिरकार शिप्रा ने ही कहा अब तक तो सभी
  4704. 3:52:14सोने चले गए होंगे अब तो आ सकते हो शौर्य
  4705. 3:52:18ने बहुत धीमे स्वर में कहा पर तुम तो अभी
  4706. 3:52:22मुझसे कह रही थी कि तुम मुझसे बात ही नहीं
  4707. 3:52:24करोगी तो फिर मैं आकर ही क्या करूंगा
  4708. 3:52:28शिप्रा ने उम्मीद भरे स्वर में कहा ठीक है
  4709. 3:52:32अगर तुम अभी आ जाते हो तो मैं अपनी बात
  4710. 3:52:34वापस लेती हूं शौर्य ने मजे लेते हुए पूछा
  4711. 3:52:38पूछा पर मेरे आने के बाद तुम पलट गई तो
  4712. 3:52:42शिप्रा बेसब्री से बोली नहीं पलटूंगी बस
  4713. 3:52:46तुम जल्दी से आ जाओ शौर्य के चेहरे पर
  4714. 3:52:49शरारती मुस्कान आ गई उसने कहा ठीक है
  4715. 3:52:53[संगीत] मैं एक शर्त पर आऊंगा अगर मैं
  4716. 3:52:56तुम्हारे साथ कोई भी शरारत करूंगा तो तुम
  4717. 3:52:58मुझे रोकने की कोशिश नहीं करोगी अगर
  4718. 3:53:01तुम्हें यह मंजूर है तभी मैं आने के बारे
  4719. 3:53:04में सोचूंगा
  4720. 3:53:06शौर्य की बात सुनकर शिप्रा कुछ पल के लिए
  4721. 3:53:08खामोश रही। फिर उसने कहा, "मुझे तुम्हारी
  4722. 3:53:12[संगीत] सारी शर्तें मंजूर है। बस तुम
  4723. 3:53:15जल्दी से आ जाओ।"
  4724. 3:53:17शौर्य दरवाजे के पास खड़ा शिप्रा को देख
  4725. 3:53:20रहा था। उसके पैर का एक हिस्सा ऊपर की ओर
  4726. 3:53:23मुड़ा हुआ था। [संगीत] जिससे उसकी नाइटी
  4727. 3:53:26घुटने के ऊपर तक खिसक गई थी। नाइट बल्ब
  4728. 3:53:29[संगीत] की हल्की रोशनी में उसका चेहरा और
  4729. 3:53:32उसकी बेचैनी साफ नजर आ रही थी। शौर्य ने
  4730. 3:53:36खुद को संभालते हुए कहा, सोच लो [संगीत]
  4731. 3:53:40मेरे आने के बाद तुम फिर कोई ड्रामा नहीं
  4732. 3:53:43करोगी। शिप्रा चिढ़कर बोली अब एक ही बात
  4733. 3:53:47[संगीत] कितनी बार बोलोगे? जितनी देर से
  4734. 3:53:50तुम फालतू की बहस किए जा रहे हो, इतनी देर
  4735. 3:53:53में तो आ भी जाते।
  4736. 3:53:55शौर्य मुस्कुराया और बोला, ठीक है, तुम
  4737. 3:53:58अपनी आंखें बंद करो। मैं कुछ ही पल में
  4738. 3:54:01तुम्हारे पास होऊंगा।
  4739. 3:54:03शिप्रा ने उसकी ही शैली में जवाब दिया। कर
  4740. 3:54:06ली आंखें बंद
  4741. 3:54:07[संगीत]
  4742. 3:54:08लेकिन तुम तो आए नहीं। शौर्य ने धीरे से
  4743. 3:54:11कहा मैंने ड्रामा करने से मना किया था ना।
  4744. 3:54:15तुम बस अपनी आंखें बंद करके मेरे बारे में
  4745. 3:54:17सोचो। कोई होशियारी नहीं।
  4746. 3:54:21ईमानदारी से आंखें बंद करके मेरे बारे में
  4747. 3:54:24सोचो। मजबूरन शिप्रा ने अपनी आंखें बंद कर
  4748. 3:54:27ली।
  4749. 3:54:28शौर्य धीरे से बेड पर गया और शिप्रा के
  4750. 3:54:31बगल में लेटते हुए उसकी [संगीत] कमर में
  4751. 3:54:33अपनी बाह डाल दी। शिप्रा को जैसे अचानक
  4752. 3:54:37करंट सा लगा वो तड़प कर पीछे की ओर पलटी
  4753. 3:54:40[संगीत] और सामने शौर्य को देखकर हैरान रह
  4754. 3:54:42गई। उसने हैरानी से पूछा तुम कब आए?
  4755. 3:54:47[संगीत] शौर्य शरारत भरे अंदाज में
  4756. 3:54:49मुस्कुराया और बोला जैसे ही तुमने अपनी
  4757. 3:54:53आंखें बंद की मैं प्रकट हो गया।
  4758. 3:54:56शिप्रा को समझ [संगीत] आ गया कि शौर्य
  4759. 3:54:59जानबूझकर उसे सता रहा था। वो उसे खुद से
  4760. 3:55:02दूर धक्का देते हुए बोली, "यानी तुम
  4761. 3:55:05जानबूझकर अभी तक मुझे सता रहे थे। तुम
  4762. 3:55:08धोखेबाज हो। शाम को आने का कहकर इतनी देर
  4763. 3:55:12से आए हो।" शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा,
  4764. 3:55:16"तुम भूल गई कि अभी तुमने क्या वादा
  4765. 3:55:18[संगीत] किया था।" "मैंने तुम्हारे साथ
  4766. 3:55:21कुछ भी किया तो तुम विरोध नहीं करोगी।"
  4767. 3:55:24इतना कहकर शौर्य ने शिप्रा को अपनी बाहों
  4768. 3:55:27में भर लिया। शिप्रा ने हल्का विरोध किया
  4769. 3:55:31लेकिन शौर्य ने [संगीत] उसे अपने करीब
  4770. 3:55:33थामे रखा। अगले ही पल उसने झुककर शिप्रा
  4771. 3:55:37के होठों को चूम लिया। कुछ पल तक शिप्रा
  4772. 3:55:41संकोच में रही।
  4773. 3:55:42[संगीत]
  4774. 3:55:42लेकिन धीरे-धीरे उसका विरोध खत्म होने लगा
  4775. 3:55:45और वह भी शौर्य की बाहों में सिमट गई।
  4776. 3:55:48[संगीत]
  4777. 3:55:48जब शौर्य ने महसूस किया कि शिप्रा अब पूरी
  4778. 3:55:52तरह उसके करीब आ चुकी है तो वो थोड़ा अलग
  4779. 3:55:55हुआ और अपने कान पकड़ते हुए बोला सॉरी
  4780. 3:56:01लेकिन शुप्रा इस वक्त [संगीत] शौर्य का
  4781. 3:56:03कोई सॉरी सुनने के मूड में नहीं थी। इतने
  4782. 3:56:06समय से उसके दिल में जो तड़प थी वो उसे एक
  4783. 3:56:09[संगीत] पल के लिए भी गवाना नहीं चाहती
  4784. 3:56:11थी। उसने शौर्य को इतनी मजबूती से अपने
  4785. 3:56:15सीने से लगा लिया जैसे उससे [संगीत] दूर
  4786. 3:56:18रहने की सारी कसर वो एक ही पल में पूरी कर
  4787. 3:56:21लेना चाहती हो।
  4788. 3:56:23अब आगे क्या होगा? [संगीत]
  4789. 3:56:25सूर्यभान जी जब शिप्रा से मिलने आएंगे तो
  4790. 3:56:28क्या होगा? शौर्य जब शूटिंग पर जाएगा तो
  4791. 3:56:32कौन सा नया [संगीत] मूड सामने आएगा? क्या
  4792. 3:56:34कनिका और कुणाल की इंगेजमेंट हो पाएगी? इन
  4793. 3:56:38सभी शौर्य जल्दी ही उठ गया।
  4794. 3:56:40[संगीत]
  4795. 3:56:40लेकिन शिप्रा अभी भी उसके कंधे पर सिर
  4796. 3:56:43रखकर गहरी नींद में सोई हुई थी। शौर्य ने
  4797. 3:56:47उसे कुछ पल देखा। फिर शरारत करते हुए उसकी
  4798. 3:56:51[संगीत] नाक पकड़ कर हिला दी। शिप्रा की
  4799. 3:56:54आंखें खुल गई। शौर्य के चेहरे पर शरारत
  4800. 3:56:57भरी मुस्कान देखकर [संगीत] उसने तुनकते
  4801. 3:56:59हुए कहा। क्या है अभी मुझे और सोना है?
  4802. 3:57:04शौर्य ने मुस्कुराते हुए उसके सिर की तरफ
  4803. 3:57:06इशारा किया और बोला। [संगीत]
  4804. 3:57:08अरे तो तुम सोओ ना। मुझे तो छोड़ो तभी तो
  4805. 3:57:11मैं उठ पाऊंगा। शिप्रा ने शौर्य की बात
  4806. 3:57:15सुनी [संगीत] तो और खिसक कर उसके सीने पर
  4807. 3:57:17आ गई और उसकी कमर को अपनी बाहों में भरते
  4808. 3:57:20हुए [संगीत] बोली, "मुझे तो अभी ऐसे ही
  4809. 3:57:23सोना है।" शौर्य ने बेफिक्री से अपने
  4810. 3:57:26दोनों हाथ सिर के नीचे रखे [संगीत] और छत
  4811. 3:57:28की ओर देखते हुए कहा, ठीक है, तो फिर सो
  4812. 3:57:32आराम से। जब मेरी मां आएगी और देखेगी
  4813. 3:57:35[संगीत] कि उसकी बहू तो इस समय तक घोड़े
  4814. 3:57:37बेचकर सोई हुई है तो पता नहीं उसके क्या
  4815. 3:57:40विचार होंगे [संगीत] अपनी बहू के लिए।
  4816. 3:57:42शौर्य की बात सुनते ही शिप्रा एक झटके से
  4817. 3:57:45उठकर बैठ गई। क्या कहा? [संगीत]
  4818. 3:57:48मां आ रही हैं और तुमने मुझे यह पहले
  4819. 3:57:51बताया भी नहीं। शिप्रा ने हैरानी [संगीत]
  4820. 3:57:54से कहा। शौर्य भी उठकर बैठ गया और
  4821. 3:57:56मुस्कुराते हुए बोला, "मैं बताता [संगीत]
  4822. 3:57:59कब? तुम्हें अपनी शिकायतों से फुर्सत
  4823. 3:58:02मिलती तब तो मैं तुम्हें कुछ बताता।
  4824. 3:58:05[संगीत] शिप्रा ने उसे घूरते हुए कहा। यह
  4825. 3:58:08एक लाइन बताने में क्या घंटे दो घंटे लगते
  4826. 3:58:10हैं [संगीत] जो तुम फालतू की शिकायत कर
  4827. 3:58:12रहे हो? शिप्रा बेड से खड़ी हुई। उसने एक
  4828. 3:58:16नजर अपने कैपेसिटों पर डाली और उन्हें
  4829. 3:58:18[संगीत] ठीक किया। फिर बेड की दूसरी तरफ
  4830. 3:58:21से आकर शौर्य के बगल में बैठते हुए आगे
  4831. 3:58:24बोली। अब बताओ [संगीत]
  4832. 3:58:26वो कब और कैसे आने वाली है? शौर्य ने
  4833. 3:58:30शिप्रा की तरफ देखते हुए [संगीत] कहा,
  4834. 3:58:32एग्जैक्ट समय तो नहीं बता सकता लेकिन वो
  4835. 3:58:35कभी भी आ सकती हैं और मां अकेली नहीं
  4836. 3:58:38होंगी। उनके साथ पापा और नीलिमा भी होंगे।
  4837. 3:58:42शौर्य ने [संगीत] जैसे ही यह कहा शिप्रा
  4838. 3:58:44को एक और झटका लगा। क्या पापा भी होंगे?
  4839. 3:58:49क्या तुमने पापा को हमारे बारे में बता
  4840. 3:58:51दिया है? ओह माय गॉड। और तुम यह बात अब
  4841. 3:58:54मुझे बता रहे हो? शिप्रा ने शौर्य के सीने
  4842. 3:58:58पर मुक्का मारते हुए कहा, शौर्य उसकी
  4843. 3:59:01घबराहट देखकर मुस्कुराया और बोला, "अरे
  4844. 3:59:04मेरे मम्मी पापा ही आ रहे हैं। तुम इस बात
  4845. 3:59:07को लेकर इतना परेशान क्यों हो रही हो?" वो
  4846. 3:59:10यहां आकर तुम्हें खा नहीं जाएंगे जो तुम
  4847. 3:59:12इतनी [संगीत] हाइपर हो रही हो।" शिप्रा ने
  4848. 3:59:15रोनी सूरत बनाकर कहा, परेशान होने की बात
  4849. 3:59:18कैसे नहीं है? वो पहली बार यहां आ रहे हैं
  4850. 3:59:21और मैं उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई
  4851. 3:59:24तो वह क्या सोचेंगे मेरे बारे में? तुम
  4852. 3:59:26बहुत गंदे हो। तुम्हें पहले बताना चाहिए
  4853. 3:59:29था ना? शौर्य ने लापरवाही से कहा। अरे वो
  4854. 3:59:33मेरे मम्मी पापा [संगीत] हैं। मैं उन्हें
  4855. 3:59:35अच्छी तरह जानता हूं। वो यहां तुमसे मिलने
  4856. 3:59:38आ रहे हैं ना कि तुम्हारी [संगीत]
  4857. 3:59:39खातिरदारी देखने के लिए। लेकिन शिप्रा
  4858. 3:59:42कहां मानने वाली थी? वो जल्दी-जल्दी पूछने
  4859. 3:59:45लगी। [संगीत] कुछ भी हो पर मुझे तो अपना
  4860. 3:59:48काम करना पड़ेगा ना। तुम एक बार पूछ कर
  4861. 3:59:50बताओ ना कि वह कब तक आएंगे और हां उन्हें
  4862. 3:59:53[संगीत] खाने में क्या-क्या पसंद है मुझे
  4863. 3:59:55यह भी बता दो। शिप्रा की हड़बड़ाहट देखकर
  4864. 3:59:59शौर्य को मजा आ रहा था। लेकिन आखिरकार
  4865. 4:00:02उसने अपने मम्मी पापा की पसंद नापसंद के
  4866. 4:00:05बारे में शिप्रा को [संगीत] बता ही दिया।
  4867. 4:00:07शिप्रा तुरंत शौर्य के पास से उठी और
  4868. 4:00:10जल्दी से बाथरूम में चली गई। कुछ ही देर
  4869. 4:00:13बाद वो कपड़े [संगीत] बदलकर बाथरूम से
  4870. 4:00:15बाहर आई। अब वो एकदम फ्रेश नजर आ रही थी।
  4871. 4:00:18वो कमरे से बाहर जाने लगी। तभी शौर्य ने
  4872. 4:00:21आगे बढ़कर उसे पकड़ लिया। शौर्य ने
  4873. 4:00:24[संगीत] पीछे से शिप्रा को अपनी बाहों में
  4874. 4:00:26भरते हुए शरारत से कहा। यह क्या? मेरे
  4875. 4:00:30मम्मी पापा आ रहे हैं तो अब तुम्हें मेरा
  4876. 4:00:32कोई ख्याल ही नहीं [संगीत] है। शिप्रा ने
  4877. 4:00:35अपनी कमर से शौर्य का हाथ छुड़ाते हुए
  4878. 4:00:37कहा। मैं तुम्हारा ध्यान बाद में रख
  4879. 4:00:40लूंगी।
  4880. 4:00:40[संगीत]
  4881. 4:00:41अभी छोड़ो मुझे। अभी मेरे पास बिल्कुल समय
  4882. 4:00:44नहीं है। फिर कमरे से [संगीत] बाहर
  4883. 4:00:46जाते-जाते उसने पलट कर शौर्य से पूछा।
  4884. 4:00:50क्या तुमने अपनी मम्मी से बात की? वो
  4885. 4:00:52[संगीत] यहां कब तक आएंगी? शौर्य ने
  4886. 4:00:54बेफिक्र स्वर में कहा। चिंता मत [संगीत]
  4887. 4:00:57करो। वो 510 मिनट में घर से निकलने वाली
  4888. 4:01:00हैं। शिप्रा ने मन ही मन [संगीत] हिसाब
  4889. 4:01:03लगाया और बोली। यानी ज्यादा से ज्यादा एक
  4890. 4:01:06घंटा है मेरे पास। ठीक है तुम फ्रेश हो
  4891. 4:01:09लो। [संगीत]
  4892. 4:01:10मैं गिरजा दीदी से तुम्हारे पास चाय
  4893. 4:01:12भिजवाती हूं। शौर्य ने उसे रोकते हुए कहा,
  4894. 4:01:16"अरे तुम जाकर फिर किचन में बिजी [संगीत]
  4895. 4:01:18हो जाओगी?" मुझे तुमसे कुछ और भी बात करनी
  4896. 4:01:22थी। शौर्य ने शिप्रा को अपने शूट पर जाने
  4897. 4:01:25वाली बात अभी तक नहीं बताई [संगीत] थी।
  4898. 4:01:27उसे पता था कि जैसे ही शिप्रा को यह पता
  4899. 4:01:30चलेगा कि वह शूटिंग के [संगीत] लिए 810
  4900. 4:01:33दिनों के लिए घर से बाहर रहने वाला है,
  4901. 4:01:36उसे उसकी नाराजगी का सामना भी [संगीत]
  4902. 4:01:38करना पड़ेगा। शिप्रा ने साफ शब्दों में
  4903. 4:01:41कहा, "अभी नहीं। एक बार जब मैं फ्री हो
  4904. 4:01:46जाऊंगी, उसके बाद बात करते हैं।" इतना
  4905. 4:01:49कहकर शिप्रा कमरे से बाहर चली गई। अपने
  4906. 4:01:53कमरे से निकलकर शिप्रा सीधा किचन में
  4907. 4:01:55पहुंची। उसने गिरजा को बुलाया और उसे
  4908. 4:01:58समझाया कि क्या-क्या करना है। फिर खुद भी
  4909. 4:02:02[संगीत] उसके साथ मिलकर काम में लग गई।
  4910. 4:02:04इसी बीच उसने गिरजा को शौर्य के लिए चाय
  4911. 4:02:08[संगीत] लेकर उसके कमरे में भी भेज दिया।
  4912. 4:02:10तभी मेघा भी किचन में पहुंच गई। उसने
  4913. 4:02:13शिप्रा को किचन में [संगीत] काम करते देखा
  4914. 4:02:15तो आश्चर्य से पूछा।
  4915. 4:02:18क्या बात है भाभी? आज सुबह-सुबह आप खुद
  4916. 4:02:21किचन में लगी हुई हैं। शिप्रा ने परेशानी
  4917. 4:02:24भरे स्वर में कहा।
  4918. 4:02:26आज तुम्हारे भैया के मम्मी पापा यहां आने
  4919. 4:02:28वाले हैं। वो पहली बार यहां आ रहे हैं।
  4920. 4:02:32अगर मैं उनकी सही से खातिरदारी [संगीत]
  4921. 4:02:34नहीं कर पाई तो वो मेरे बारे में क्या
  4922. 4:02:36सोचेंगे?
  4923. 4:02:38मेघा यह सुनकर उत्साहित [संगीत] हो गई।
  4924. 4:02:40उसने तुरंत कहा सच में अंकल आंटी आज आने
  4925. 4:02:44वाले हैं। ठीक है भाभी आप मुझे [संगीत]
  4926. 4:02:47बताओ क्या करना है? मैं भी आपका हाथ बटाती
  4927. 4:02:50हूं। गिरजा भी वहीं मौजूद [संगीत] थी।
  4928. 4:02:53जैसे ही उसने यह सुना उसके शरीर में भी
  4929. 4:02:56जैसे फुर्ती आ गई। तीनों ने मिलकर जल्दी
  4930. 4:02:59[संगीत] ही किचन का सारा काम समाप्त कर
  4931. 4:03:01लिया। जब शिप्रा को यह एहसास हुआ कि सब
  4932. 4:03:04कुछ ठीक उसी तरह तैयार हो गया है जैसा वह
  4933. 4:03:07चाहती थी तो उसके चेहरे पर संतुष्टि की
  4934. 4:03:10मुस्कान [संगीत] आ गई। वो अब शौर्य से यह
  4935. 4:03:13पूछने ही जा रही थी कि मम्मी पापा कब तक
  4936. 4:03:16आएंगे कि तभी बाहर किसी गाड़ी के हॉर्न की
  4937. 4:03:19आवाज सुनाई दी। शिप्रा ने [संगीत] देखा
  4938. 4:03:22शौर्य सीढ़ियां उतर कर नीचे आ रहा था। वो
  4939. 4:03:25सीधा ड्राइंग रूम से होते हुए बाहर चला
  4940. 4:03:27गया। कुछ ही पल बाद जब शौर्य वापस ड्राइंग
  4941. 4:03:31रूम में [संगीत] दाखिल हुआ तो उसके साथ
  4942. 4:03:33सूर्यभान जी, कल्पना जी और नीलिमा तीनों
  4943. 4:03:36मौजूद थे। शिप्रा, मेघा और गिरजा [संगीत]
  4944. 4:03:40तीनों ड्राइंग रूम में ही थी। जैसे ही
  4945. 4:03:42सूर्यभान जी और कल्पना जी अंदर आए, शिप्रा
  4946. 4:03:45[संगीत] ने आगे बढ़कर दोनों के पैर छूकर
  4947. 4:03:47प्रणाम किया। उसके पीछेछे मेघा [संगीत] ने
  4948. 4:03:51भी उन्हें प्रणाम किया। सूर्यभान जी ने
  4949. 4:03:54शिप्रा को देखते हुए उदासीन भाव से
  4950. 4:03:56[संगीत] कहा, तो तुम मेरी बहू हो? तुम
  4951. 4:04:00मुझसे पहले भी मिली थी ना? तब तुमने मुझे
  4952. 4:04:03बताया क्यों नहीं कि तुम मेरी बहू हो? इस
  4953. 4:04:06बात से मैं तुमसे नाराज हूं। शिप्रा ने
  4954. 4:04:09तुरंत [संगीत] सफाई देते हुए कहा। पर
  4955. 4:04:11पिताजी मैं बताना तो चाहती थी लेकिन शौर्य
  4956. 4:04:15ने ही मुझे बताने नहीं दिया। [संगीत]
  4957. 4:04:17इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। सूर्यभान जी
  4958. 4:04:20ने शौर्य की तरफ देखा। फिर शिप्रा के सिर
  4959. 4:04:23पर हाथ रखते हुए बोले, "मैं जानता था यह
  4960. 4:04:27सब इस गधे [संगीत] का ही किया धरा होगा।"
  4961. 4:04:30वरना मेरी बहू मुझसे यह बात क्यों छुपाती?
  4962. 4:04:33शौर्य ने अपने पापा को तंज भरी नजरों
  4963. 4:04:35[संगीत] से देखते हुए कहा। पापा, यह सब
  4964. 4:04:39आपकी गलती के कारण था। कल मैंने बताया था
  4965. 4:04:42ना? उसके बाद भी आप इस बात का दोष किसी और
  4966. 4:04:45पर कैसे डाल सकते हैं? नीलिमा ने तुरंत
  4967. 4:04:48शौर्य का पक्ष लेते हुए कहा, "भैया, पापा
  4968. 4:04:51[संगीत] को आदत हो गई है अपनी गलती किसी
  4969. 4:04:54और के ऊपर मरने की।" सूर्यभान जी ने
  4970. 4:04:57शिकायत भरे अंदाज में कल्पना जी की ओर
  4971. 4:05:00देखा और बोले, देख रही हो? इसने भी अपना
  4972. 4:05:04पाला बदल लिया है। इसी बीच कल्पना जी का
  4973. 4:05:08ध्यान मेघा पर गया। वो अब तक खामोशी से उन
  4974. 4:05:11सबकी बातें सुन रही थी। कल्पना जी मेघा के
  4975. 4:05:14पास पहुंची और [संगीत] उसका हाथ पकड़ कर
  4976. 4:05:17उसे अपने सामने करती हुई बोली
  4977. 4:05:20तो तुम हो मेरी बड़ी बेटी। अपनी छोटी बहन
  4978. 4:05:23से मिल लो। बहुत शरारती [संगीत] है। अब
  4979. 4:05:26तुम्हें इसका भी ध्यान रखना है। कोशिश
  4980. 4:05:29करना कि यह [संगीत] भी तुम्हारी तरह
  4981. 4:05:31डॉक्टर बन जाए। मेघा अभी तक खुद को थोड़ी
  4982. 4:05:35अजीब स्थिति में महसूस कर रही थी। उसे लग
  4983. 4:05:38रहा [संगीत] था कि अंकल आंटी तो उसके बारे
  4984. 4:05:40में जानते भी नहीं होंगे। लेकिन कल्पना जी
  4985. 4:05:43के मुंह से अपने लिए बड़ी बेटी शब्द सुनते
  4986. 4:05:46ही उसकी आंखों में आंसू आ गए। कल्पना जी
  4987. 4:05:49ने मेघा की आंखों में आंसू देखे [संगीत]
  4988. 4:05:51तो उसे डांटते हुए पूछा।
  4989. 4:05:54यह आंसू किस लिए बह रहे हैं? मेघा ने
  4990. 4:05:57[संगीत] अपने आंसू पछते हुए भावुक स्वर
  4991. 4:06:00में कहा। यह तो खुशी के आंसू हैं आंटी।
  4992. 4:06:04मैंने कभी सोचा नहीं था कि मुझे कभी
  4993. 4:06:06[संगीत] ऐसा भी दिन देखने को मिलेगा।
  4994. 4:06:09कल्पना जी ने उसे फिर डांटते हुए कहा, "यह
  4995. 4:06:12आंटी किसको कहा तुमने?" बेटियां अपनी मां
  4996. 4:06:15को आंटी कब से कहने लगी? अभी बोल दिया तो
  4997. 4:06:18बोल [संगीत] दिया। दोबारा मैं कभी यह
  4998. 4:06:20सुनना नहीं चाहती। फिर सूर्यभान जी ने
  4999. 4:06:24अपने दोनों हाथ मेघा की ओर फैलाते [संगीत]
  5000. 4:06:26हुए कहा।
  5001. 4:06:28अगर अपनी मां से मिल ली हो तो आकर अपने
  5002. 4:06:30पापा के भी गले। मेघा बिना कुछ सोचे भाग
  5003. 4:06:34कर गई और सूर्यभान जी के गले लग गई।
  5004. 4:06:37सूर्यभान जी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ
  5005. 4:06:41फेरा। मेघा की आंखों से आंसू थमने का नाम
  5006. 4:06:45ही नहीं ले रहे थे। जब सूर्यभान जी ने
  5007. 4:06:48महसूस किया कि भावुकता के कारण मेघा
  5008. 4:06:51[संगीत] की आंखों से लगातार आंसू बह रहे
  5009. 4:06:53हैं तो उन्होंने माहौल को हल्का करते हुए
  5010. 4:06:56कहा। यह आंसू बचा कर रखो बेटी। यह विदाई
  5011. 4:07:00के वक्त काम आएंगे और अभी इतनी जल्दी मैं
  5012. 4:07:03तुम्हें अपने पास से विदा नहीं करने वाला।
  5013. 4:07:07मेघा सूर्यभान जी से अलग हुई और अपनी
  5014. 4:07:10[संगीत] आंखों के आंसू पोंछते हुए भावुक
  5015. 4:07:12स्वर में बोली
  5016. 4:07:14आज सबसे खुशनसीब तो मैं हूं [संगीत]
  5017. 4:07:17जो मुझे एक साथ मेरे मम्मी पापा दोनों मिल
  5018. 4:07:20गए। नीलिमा आगे आती हुई अपना मुंह फुलाकर
  5019. 4:07:24बोली इट्स नॉट फेयर। मम्मी पापा तो याद
  5020. 4:07:28रहे और अपनी छोटी बहन को भूल गई। मेघा को
  5021. 4:07:32अपनी गलती का एहसास हुआ। वो तुरंत नीलिमा
  5022. 4:07:35के पास गई और [संगीत] उसके सामने झुक कर
  5023. 4:07:37अपने कान पकड़ते हुए बोली,
  5024. 4:07:40सॉरी [संगीत] मेरी गलती। मैं तुम्हें कैसे
  5025. 4:07:44भूल सकती हूं? इतनी प्यारी और [संगीत]
  5026. 4:07:46खूबसूरत बहन को पाकर तो मैं धन्य हो गई।
  5027. 4:07:50इतना कहकर उसने नीलिमा को खींच कर [संगीत]
  5028. 4:07:53अपने गले से लगा लिया। इस बीच गिरजा भी
  5029. 4:07:56आगे बढ़ी और सूर्यभान जी तथा [संगीत]
  5030. 4:07:59कल्पना जी को नमस्कार किया। शौर्य ने
  5031. 4:08:02गिरजा का परिचय अपने मम्मी पापा से कराते
  5032. 4:08:05हुए मुस्कुराकर [संगीत]
  5033. 4:08:06कहा, मां, यह गिरजा दीदी हैं। आपके बेटे
  5034. 4:08:11के सेहतमंद होने का राज इनके हाथ का खाना
  5035. 4:08:14है। हां, कभी-कभी आपकी बहू के हाथ का भी
  5036. 4:08:17खाना नसीब हो जाता है। शौर्य की बात सुनकर
  5037. 4:08:21शिप्रा ने उसे घूर कर देखा। इसके बाद सभी
  5038. 4:08:25लोग हॉल में बैठ गए। गिरजा ने सबको चाय
  5039. 4:08:28लाकर दी। शिप्रा आज बहुत खुश थी। आज उसे
  5040. 4:08:32सही मायने में यह एहसास हुआ था कि [संगीत]
  5041. 4:08:35उसे उसका पूरा परिवार मिल गया है। पहले
  5042. 4:08:39उसे सूर्यभान जी को लेकर डर था कि पता
  5043. 4:08:42नहीं यह जानने के बाद कि शिप्रा उनकी बहू
  5044. 4:08:45है। वह कैसे रिएक्ट करेंगे।
  5045. 4:08:48लेकिन जिस [संगीत] खुले दिल से उन्होंने
  5046. 4:08:50शिप्रा को अपनाया उससे शिप्रा को एक पल के
  5047. 4:08:53लिए भी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि आज वह पहली
  5048. 4:08:56बार अपने सासससुर से मिल रही है। उन्होंने
  5049. 4:09:00उसे एक बेटी की तरह अपनाया था और जिस तरह
  5050. 4:09:03उन्होंने मेघा को भी अपनी बेटी का दर्जा
  5051. 4:09:05दिया। [संगीत] उसने शिप्रा के दिल में
  5052. 4:09:08उनके लिए सम्मान को और भी ऊंचा कर दिया
  5053. 4:09:10था। उन्होंने मेघा को एक पल के लिए
  5054. 4:09:13[संगीत] भी यह एहसास नहीं होने दिया कि वह
  5055. 4:09:16सिर्फ शौर्य की मुंह बोली बहन है बल्कि
  5056. 4:09:19उसे अपनी बड़ी बेटी का दर्जा दे दिया था।
  5057. 4:09:23ऐसे सासससुर पाकर शिप्रा सचमुच खुद को
  5058. 4:09:26धन्य महसूस कर रही थी। वो तो शौर्य को भी
  5059. 4:09:29भूलकर अपने सासससुर की आव भगत में लगी
  5060. 4:09:32[संगीत] हुई थी। शिप्रा ने खुद अपने हाथों
  5061. 4:09:36से अपने सासससुर को खाना परोसा [संगीत]
  5062. 4:09:38और जबरदस्ती करके उनकी पसंद की चीजें
  5063. 4:09:41खिलाती रही। आखिरकार [संगीत] सूर्यभान जी
  5064. 4:09:44ने अपनी प्लेट के ऊपर दोनों हाथ रखते हुए
  5065. 4:09:47कहा। बस करो शिप्रा अब इससे ज्यादा मैं
  5066. 4:09:51नहीं खा पाऊंगा। शिप्रा कहां मानने वाली
  5067. 4:09:54थी? उसने
  5068. 4:09:55[संगीत]
  5069. 4:09:55तुरंत एक बेसन में फ्राई किया हुआ बैंगन
  5070. 4:09:58का चक्का उनकी प्लेट में डालते हुए कहा।
  5071. 4:10:02बस पापा जी [संगीत] बस एक यह बैंगन का
  5072. 4:10:04चक्का और ले लीजिए। इसके बाद मैं और नहीं
  5073. 4:10:07कहूंगी।
  5074. 4:10:08कल्पना जी ने [संगीत] शौर्य की तरफ देखते
  5075. 4:10:10हुए हैरानी से पूछा।
  5076. 4:10:13शिप्रा बेटी तुम्हें कैसे पता चला कि
  5077. 4:10:16तुम्हारे पापा जी को यह बैंगन फ्राई अच्छा
  5078. 4:10:18लगता है? वह समझ रही थी कि जरूर [संगीत]
  5079. 4:10:22शौर्य ने ही शिप्रा को उनकी पसंद नापसंद
  5080. 4:10:25के बारे में बताया होगा। शिप्रा ने तुरंत
  5081. 4:10:28कहा, "मुझे तो आपकी पसंद भी पता है मम्मी
  5082. 4:10:31जी। आप यह लीजिए आलू की [संगीत] चिप्स।"
  5083. 4:10:34आपको भी बेसन में फ्राई आलू की चिप्स पसंद
  5084. 4:10:37है ना? कहते हुए शिप्रा ने कल्पना जी की
  5085. 4:10:40प्लेट में आलू की फ्राई की हुई चिप्स डाल
  5086. 4:10:43दी। कल्पना जी ने मुस्कुराते हुए उसे रोक
  5087. 4:10:46कर कहा। अब बस करो। इससे ज्यादा अब नहीं
  5088. 4:10:50खा सकती।" शौर्य ने तुरंत शिकायत भरे
  5089. 4:10:53अंदाज में कहा। देख रही [संगीत] हो मां?
  5090. 4:10:57मुझसे ही तुम्हारी पसंद नापसंद के बारे
  5091. 4:10:59में जाना और मेरी पसंद को भूल गई। [संगीत]
  5092. 4:11:02शिप्रा ने भी उसे जवाब देने में देर नहीं
  5093. 4:11:05की। वह शौर्य की तरफ देखकर बोली।
  5094. 4:11:08डेली तो अपनी पसंद का ही खाते हो। एक दिन
  5095. 4:11:11मम्मी पापा की पसंद की चीज नहीं खा सकते।
  5096. 4:11:15फिर उसने [संगीत] शौर्य की एक और शिकायत
  5097. 4:11:17करते हुए कहा। पता है मां आप लोग आने वाले
  5098. 4:11:21हैं। यह बात भी इसने [संगीत] मुझे आज सुबह
  5099. 4:11:23बताई। इसे मुझे यह बात रात में ही नहीं
  5100. 4:11:26बतानी चाहिए थी। कल्पना जी ने शौर्य को
  5101. 4:11:30झिड़कते हुए कहा, "यह तो गलत बात है
  5102. 4:11:33शौर्य। वैसे यह मेरी ही गलती है। मुझे खुद
  5103. 4:11:37तुम्हें फोन करके बता देना चाहिए था।
  5104. 4:11:39शिप्रा तुरंत बोली, नहीं मां, यह आपकी
  5105. 4:11:43गलती नहीं है। यह सरासर शौर्य की गलती है।
  5106. 4:11:47इसे ही मुझे बताना चाहिए था। सूर्यभान जी
  5107. 4:11:51भी शिप्रा की बात से सहमत होते हुए बोले,
  5108. 4:11:54तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो। मैं 100%
  5109. 4:11:58तुमसे सहमत हूं। तुम्हें इस पर नकेल लगाकर
  5110. 4:12:01रखनी पड़ेगी। शौर्य हैरान होकर अपने मम्मी
  5111. 4:12:05पापा को शिप्रा का साथ देते हुए देखता रह
  5112. 4:12:08गया। अब सवाल यह था कि शौर्य शिप्रा को कब
  5113. 4:12:12बताएगा कि वो अगले 10 दिनों के लिए शूटिंग
  5114. 4:12:15में व्यस्त रहने वाला है। और जब शिप्रा को
  5115. 4:12:18यह बात पता चलेगी तो उसका क्या [संगीत]
  5116. 4:12:20रिएक्शन होगा?
  5117. 4:12:22मार्शल आर्ट चैंपियनशिप के दौरान आखिर
  5118. 4:12:25क्या होने वाला है? देर शौर्य और शिप्रा
  5119. 4:12:28एक दूसरे के [संगीत] आलिंगन में रहे।
  5120. 4:12:31दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई। बस एक
  5121. 4:12:34दूसरे की मौजूदगी को महसूस करते रहे।
  5122. 4:12:37आखिरकार शौर्य ने उनके बीच पसरी खामोशी को
  5123. 4:12:41तोड़ा और शांत स्वर में शिप्रा से बोला,
  5124. 4:12:45अब मुझे [संगीत] जाना पड़ेगा। जानती हूं
  5125. 4:12:48पर क्या करूं? मन नहीं मान रहा। 10 दिन
  5126. 4:12:52तुम्हारे बिना कैसे रहूंगी? शिप्रा उदास
  5127. 4:12:55स्वर में बोली, मेरी जान [संगीत] यह 10
  5128. 4:12:58दिन की बात है। 10 साल की नहीं जो तुम
  5129. 4:13:02इतनी उदास हो रही हो। शौर्य शिप्रा की
  5130. 4:13:05[संगीत]
  5131. 4:13:05ओर पलकते हुए बोला। अभी क्या कहा तुमने?
  5132. 4:13:08अचानक शिप्रा शौर्य की आंखों [संगीत] में
  5133. 4:13:10देखते हुए बोली। मैंने कहा यह 10 दिन की
  5134. 4:13:14बात है। 10 साल की नहीं। शौर्य उसके सवाल
  5135. 4:13:18को ना समझने वाले अंदाज में बोला। नहीं
  5136. 4:13:21इससे [संगीत] पहले क्या कहा था? शिप्रा
  5137. 4:13:24उसे याद दिलाने की कोशिश करते हुए बोली,
  5138. 4:13:28यही तो कहा [संगीत] था और क्या कहा था?
  5139. 4:13:31शौर्य अनजान बनते हुए बोला, तुमने पूरा
  5140. 4:13:34[संगीत] वाक्य क्या कहा था वो बताओ।
  5141. 4:13:37शिप्रा अपनी बात पर जोर देते हुए बोली,
  5142. 4:13:40शौर्य ने अपने ही कहे हुए शब्दों को मन ही
  5143. 4:13:43मन दोहराया। तभी उसे समझ आया कि शिप्रा
  5144. 4:13:47आखिर क्या सुनना चाहती [संगीत] थी। वह
  5145. 4:13:49शरारत भरे स्वर में बोला, "मैं तुम्हें
  5146. 4:13:52मेरी जान कहा था। क्या तुम्हें पसंद नहीं
  5147. 4:13:55आया? मैंने कब कहा कि मुझे पसंद नहीं आया?
  5148. 4:13:59बल्कि मुझे तो बहुत [संगीत] पसंद आया। पता
  5149. 4:14:02नहीं क्यों मुझे कभी-कभी लगता है कि तुम
  5150. 4:14:05मेरे पास होते हुए भी मेरे पास नहीं होते।
  5151. 4:14:08मैं चाहती हूं कि तुम मेरे साथ अपने प्यार
  5152. 4:14:11का इजहार [संगीत] दिल खोलकर किया करो। पर
  5153. 4:14:14अभी भी मुझे लगता है कि तुम मेरे पास होने
  5154. 4:14:17के बाद भी अपने एहसास को खुलकर मेरे साथ
  5155. 4:14:20व्यक्त नहीं करते। अभी तुमने एक छोटा सा
  5156. 4:14:23वाक्य कहा और उसमें मुझे कितना [संगीत]
  5157. 4:14:25अपनापन महसूस हुआ बता नहीं सकती। बस मैं
  5158. 4:14:29यही चाहती हूं कि तुम जितनी देर भी मेरे
  5159. 4:14:32साथ होते हो बस [संगीत] मेरे बनकर रहो
  5160. 4:14:35बिना किसी बनावट के। अपने दिल के उद्गार
  5161. 4:14:38मेरे साथ व्यक्त करने में कंजूसी मत किया
  5162. 4:14:40करो। शिप्रा अपनी भावनाओं में बहकर शौर्य
  5163. 4:14:44के सामने अपने दिल की बात कहती चली गई।
  5164. 4:14:48फिर तो ऐसा है कि मेरा मन फिर से तुम्हारे
  5165. 4:14:50साथ शरारत करने को कर रहा है। अगर कहो तो
  5166. 4:14:54एक बार फिर से अपना कार्यक्रम चालू करें।
  5167. 4:14:57शौर्य शरारत भरी नजरों से शिप्रा की
  5168. 4:14:59[संगीत] तरफ देखते हुए बोला। अच्छा अब
  5169. 4:15:03तुम्हें जाने में देर नहीं हो रही। शिप्रा
  5170. 4:15:06शौर्य के गले में अपनी दोनों [संगीत]
  5171. 4:15:07बाहें डालते हुए बोली। शौर्य ने सोचा था
  5172. 4:15:11कि अगर वह शरारत भरी बातें करेगा तो शायद
  5173. 4:15:14शिप्रा [संगीत] उसे रोकने लगेगी। लेकिन
  5174. 4:15:16शिप्रा का अंदाज ऐसा था जैसे उसे शौर्य की
  5175. 4:15:19बात से कोई आपत्ति ही नहीं हुई हो। शिप्रा
  5176. 4:15:23समझ गई [संगीत] कि शौर्य के दिमाग में
  5177. 4:15:25क्या चल रहा है। वह मुस्कुराते हुए बोली
  5178. 4:15:29मुझे भरमाने [संगीत] की कोई जरूरत नहीं
  5179. 4:15:31है। मैं समझ रही हूं कि तुम्हें जाने की
  5180. 4:15:34कितनी जल्दी [संगीत] है। तुम बहुत तेज हो।
  5181. 4:15:37तुम्हें पहले ही पता चल जाता है कि अब मैं
  5182. 4:15:40क्या [संगीत] करने वाला हूं। शौर्य उसकी
  5183. 4:15:42तारीफ करते हुए बोला, अब ज्यादा मक्खन
  5184. 4:15:46लगाने की जरूरत नहीं है। तुम जा सकते हो,
  5185. 4:15:49लेकिन रात में तो समय मिलेगा। [संगीत]
  5186. 4:15:51बीच में समय निकाल कर आ सकते हो। शिप्रा
  5187. 4:15:55उम्मीद भरी आंखों से शौर्य को देखते हुए
  5188. 4:15:58बोली, "यह भी कोई कहने की बात है। मैं खुद
  5189. 4:16:02ही कहां तुमसे इतने दिन तक दूर रह [संगीत]
  5190. 4:16:03पाऊंगा।" "मैं नहीं आया तो तुम्हें बुला
  5191. 4:16:06लूंगा।"
  5192. 4:16:08शौर्य शिप्रा के माथे को चूमते हुए
  5193. 4:16:10[संगीत] बोला। शिप्रा ने भी शौर्य को कसकर
  5194. 4:16:13अपनी बाहों में भर लिया। कुछ पल बाद शौर्य
  5195. 4:16:17उससे अलग हुआ और बोला अब अगर तुम्हारी
  5196. 4:16:20इजाजत हो तो मैं जा सकता [संगीत] हूं।
  5197. 4:16:24ठीक है। अच्छे से जाना और मुझसे बात करते
  5198. 4:16:27रहना। [संगीत]
  5199. 4:16:28शिप्रा प्यार भरी नजरों से शौर्य को देखते
  5200. 4:16:31हुए बोली। शौर्य बेड से उतरने के लिए कंबल
  5201. 4:16:35साइड [संगीत] करने ही वाला था कि शिप्रा
  5202. 4:16:37ने कसकर कंबल पकड़ लिया। अभी तक दोनों के
  5203. 4:16:40कपड़े अस्त-व्यस्त [संगीत]
  5204. 4:16:41थे। शौर्य को अपनी गलती का एहसास हुआ
  5205. 4:16:45इसलिए उसने कंबल के अंदर रहते [संगीत] हुए
  5206. 4:16:47ही अपने कपड़े ठीक किए और फिर कंबल से
  5207. 4:16:50बाहर आ गया। शिप्रा ने भी कंबल को अपने
  5208. 4:16:53शरीर पर लपेट रखा था। मैं इतने दिनों के
  5209. 4:16:56लिए बाहर जा रहा हूं। क्या तुम मुझे बाहर
  5210. 4:16:58छोड़ने नहीं आओगी? शौर्य शरारत भरे स्वर
  5211. 4:17:01में बोला, ठीक है, फिर तुम नीचे ड्राइंग
  5212. 4:17:05रूम में बैठो। मैं अभी तैयार होकर आती
  5213. 4:17:07हूं। मैं सोच रही [संगीत] हूं कि तुम्हें
  5214. 4:17:10शूटिंग लोकेशन तक ही छोड़ आती हूं। शिप्रा
  5215. 4:17:13शौर्य की शरारत को समझ कर बोली, "इसकी कोई
  5216. 4:17:16जरूरत नहीं है। तुम रहने दो। नहीं तो मैं
  5217. 4:17:19[संगीत] और लेट हो जाऊंगा। इतना बोलकर
  5218. 4:17:22शौर्य कमरे से बाहर निकल गया। रत्नाकर
  5219. 4:17:26शेट्टी ने शौर्य को पहले ही लोकेशन भेज
  5220. 4:17:28रखी थी। इसलिए शौर्य को पता था कि उसे
  5221. 4:17:31कहां जाना है। वह बाहर आया। अपनी कार में
  5222. 4:17:35बैठा और कार की स्क्रीन पर लोकेशन सेट
  5223. 4:17:38करके कार आगे बढ़ा दी। दूसरी तरफ कनिका को
  5224. 4:17:42अपने बर्थडे के लिए आज मार्केटिंग करनी
  5225. 4:17:44थी। वीरभद्र जी ने इस बार कनिका का बर्थडे
  5226. 4:17:48विशालगढ़ में ही करने का फैसला किया था।
  5227. 4:17:50इसलिए उन्होंने कनिका की मां सुमित्रा
  5228. 4:17:53देवी को भानगढ़ से विशालगढ़ ही बुला लिया
  5229. 4:17:56था। क्योंकि यह तय हुआ था कि कनिका के
  5230. 4:17:59बर्थडे के दिन ही कुणाल के साथ उसकी सगाई
  5231. 4:18:01भी होगी। इसलिए वीरभद्र जी ने आज कुणाल को
  5232. 4:18:05भी यहां बुला लिया था ताकि उसके लिए भी
  5233. 4:18:07कुछ खरीदारी की [संगीत] जा सके। कनिका की
  5234. 4:18:10मां सुमित्रा देवी अभी तक कुणाल से मिली
  5235. 4:18:12नहीं थी। तो वीरभद्र जी का यह भी प्लान था
  5236. 4:18:15कि इसी बहाने सुमित्रा [संगीत] देवी कुणाल
  5237. 4:18:17से भी मिल ले। मार्केटिंग के लिए जो
  5238. 4:18:20डेस्टिनेशन चुना गया था वह [संगीत] बिग
  5239. 4:18:22बुल था। क्योंकि उन्हें पता था कि अलग-अलग
  5240. 4:18:25चीजों के लिए अलग-अलग जगह भटकने की जरूरत
  5241. 4:18:28नहीं पड़ेगी। बिगबुल में आकर ही उनकी सारी
  5242. 4:18:31जरूरत की चीजें एक ही जगह मिल जाएंगी और
  5243. 4:18:34वो भी टॉप ब्रांड्स की। बिगबुल अपने आप
  5244. 4:18:37में ही एक बड़े मॉल के समान था। जहां
  5245. 4:18:39[संगीत] एक ही छत के नीचे जरूरत का लगभग
  5246. 4:18:42हर सामान मिल जाता था। इस समय कनिका और
  5247. 4:18:46नंदिनी बिगबुल [संगीत] के फर्स्ट फ्लोर पर
  5248. 4:18:48स्थित रेस्टोरेंट में बैठी कुणाल के आने
  5249. 4:18:50का इंतजार कर रही थी। अभी ही उनकी कुणाल
  5250. 4:18:53से बात हुई थी। उसने बताया था कि वह बस
  5251. 4:18:56पहुंचने ही वाला [संगीत] है। कनिका और
  5252. 4:18:59नंदिनी रेस्टोरेंट के ऐसे हिस्से में बैठी
  5253. 4:19:01हुई थी जहां से बिगबुल का मेन गेट साफ
  5254. 4:19:04दिखाई दे रहा था। अगर कुणाल वहां से अंदर
  5255. 4:19:07आता तो उन्हें तुरंत पता चल जाता कि वह
  5256. 4:19:09बिग बबुल पहुंच गया है। कनिका को ज्यादा
  5257. 4:19:12इंतजार नहीं करना पड़ा। उसे मेन गेट से
  5258. 4:19:15कुणाल और प्रतीक दोनों साथ में आते नजर आ
  5259. 4:19:17गए। कुणाल पहले भी बिगबुल में आ चुका था।
  5260. 4:19:21[संगीत] इसलिए उसे पता था कि रेस्टोरेंट
  5261. 4:19:22किस फ्लोर पर है। बिगबुल के अंदर आते ही
  5262. 4:19:26उसने सिर उठाकर [संगीत]
  5263. 4:19:27रेस्टोरेंट वाले एरिया की तरफ देखा तो उसे
  5264. 4:19:30फर्स्ट फ्लोर पर छत की रेलिंग के पास
  5265. 4:19:32कनिका और नंदिनी बैठी नजर आ गई। कुणाल
  5266. 4:19:35जल्दी से एस्केलेटर के जरिए फर्स्ट फ्लोर
  5267. 4:19:37पर पहुंचा और कनिका की टेबल की तरफ बढ़
  5268. 4:19:40गया। वहां जाकर वो कनिका के साथ उसी टेबल
  5269. 4:19:43पर बैठ गया। कनिका ने प्रतीक और कुणाल की
  5270. 4:19:47तरफ देखा और [संगीत] मेनू कार्ड उनकी तरफ
  5271. 4:19:49बढ़ाते हुए बोली, "तुम दोनों क्या लोगे?
  5272. 4:19:52जल्दी से बता दो। हमने तो अपना आर्डर कर
  5273. 4:19:55दिया है। प्रतीक और कुणाल ने मेनू कार्ड
  5274. 4:19:58चेक किया और अपना आर्डर फाइनल करके काउंटर
  5275. 4:20:00पर जाकर आर्डर प्लेस कर [संगीत] दिया।
  5276. 4:20:03दरअसल, यह रेस्टोरेंट सेल्फ सर्विस
  5277. 4:20:05रेस्टोरेंट था। एक बार आर्डर देने के बाद
  5278. 4:20:08ऑर्डर लेने के लिए भी खुद ही जाना होता
  5279. 4:20:10था। ऑर्डर प्लेस करने के साथ ही एक कूपन
  5280. 4:20:13नंबर मिलता था। और जैसे ही आर्डर तैयार
  5281. 4:20:16होता वो [संगीत] कूपन नंबर बिलिंग काउंटर
  5282. 4:20:18के ऊपर लगे एक बोर्ड पर फ्लैश होने लगता
  5283. 4:20:20था। आर्डर प्लेस करने के बाद कुणाल वापस
  5284. 4:20:23आकर फिर से उसी टेबल पर बैठ गया। वो कनिका
  5285. 4:20:27की तरफ देखते हुए बोला, "क्या बात [संगीत]
  5286. 4:20:29थी? अचानक इतनी जल्दबाजी में क्यों
  5287. 4:20:31बुलाया? तुम्हें पता ही है जितनी जल्दबाजी
  5288. 4:20:35में सब कुछ हो रहा है, उसमें किसी भी चीज
  5289. 4:20:37के लिए समय ही नहीं मिला। मुझे अपने
  5290. 4:20:40बर्थडे के लिए कुछ मार्केटिंग करनी थी। तो
  5291. 4:20:42पापा ने कहा था कि कुछ सामान तुम्हारे लिए
  5292. 4:20:45भी लेना है। इसलिए मैंने सोचा कि तुम्हें
  5293. 4:20:48भी यहां बुला लूं [संगीत] ताकि तुम अपने
  5294. 4:20:50लिए सामान पसंद कर सको। कनिका ने कुणाल को
  5295. 4:20:53उसे यहां बुलाने का कारण बताया। अच्छा तो
  5296. 4:20:57यह बात थी। इतना कहकर कुणाल ने अपने चारों
  5297. 4:21:01तरफ देखा और फिर कनिका की ओर देखते हुए
  5298. 4:21:04बोला। क्या तुम दोनों यहां अकेली आई हुई
  5299. 4:21:07हो? हां। क्या तुम्हें किसी और [संगीत] के
  5300. 4:21:10भी यहां आने की उम्मीद थी? कनिका कुणाल की
  5301. 4:21:14आंखों में देखते हुए बोली, नहीं, ऐसा नहीं
  5302. 4:21:17है। पर मैंने सोचा था कि हो सकता है करण
  5303. 4:21:21और विराज भाई भी कहीं मार्केटिंग करने आए
  5304. 4:21:23हुए हो। कुणाल आंखें चुराते हुए बोला, इसी
  5305. 4:21:27समय काउंटर के ऊपर लगे बोर्ड पर कूपन नंबर
  5306. 4:21:3025 शो होने लगा। नंदिनी कनिका की ओर देखकर
  5307. 4:21:34बोली, "ल लगता है हमारा आर्डर तैयार हो
  5308. 4:21:37गया है। तुम यहीं बैठो। मैं अभी लेकर आती
  5309. 4:21:40हूं।" नंदिनी को उठकर काउंटर की तरफ जाते
  5310. 4:21:43देखकर प्रतीक भी अपनी जगह से खड़ा होता
  5311. 4:21:46हुआ बोला। रुको मैं भी तुम्हारे साथ चलता
  5312. 4:21:49हूं। प्रतीक की बात सुनकर [संगीत] नंदिनी
  5313. 4:21:52अपनी जगह पर रुक गई। प्रतीक जल्दी से उसके
  5314. 4:21:55पास पहुंचा और [संगीत] फिर दोनों साथ में
  5315. 4:21:58काउंटर की तरफ पड़ गए। इधर टेबल पर बैठी
  5316. 4:22:01कनिका और कुणाल के होठों पर मुस्कान
  5317. 4:22:03[संगीत] आ गई। बेचारी कब से दोनों अकेले
  5318. 4:22:07मिलने का सोच रहे थे। अब जाकर उन्हें मौका
  5319. 4:22:10मिला। कुणाल मुस्कुराते हुए बोला, कहीं
  5320. 4:22:14ऐसा तो नहीं कि [संगीत] तुम भी मुझसे
  5321. 4:22:16अकेले मिलना चाहते थे? कनिका गहरी नजरों
  5322. 4:22:19से कुणाल को देखते हुए बोली, "अगर मैं हां
  5323. 4:22:23कहूं तो? क्या इसमें कुछ गलत बात होगी?"
  5324. 4:22:27कुणाल ने हिम्मत करके अपने दिल [संगीत] की
  5325. 4:22:29बात बता दी। नहीं ऐसा नहीं है। यह
  5326. 4:22:33स्वाभाविक है। आखिर कुछ दिनों [संगीत] बाद
  5327. 4:22:36हमारी शादी होने जा रही है। तो ऐसा सोचना
  5328. 4:22:39गलत कैसे हो सकता है? कनिका अपने चेहरे पर
  5329. 4:22:43मीठी मुस्कान लाते हुए बोली। ऐसा लग रहा
  5330. 4:22:46था जैसे उसने इस बात को स्वीकार कर लिया
  5331. 4:22:48हो कि अब उसकी शादी [संगीत] कुणाल से ही
  5332. 4:22:51होनी है। चलो शुक्र है। इस बात पर तुमने
  5333. 4:22:55मुझे गलत नहीं समझा। मुझे लगा था कहीं तुम
  5334. 4:22:58इस बात के गलत [संगीत] मायने ना निकालने
  5335. 4:23:00लगो। कुणाल थोड़ा शर्मिंदा होते हुए बोला।
  5336. 4:23:04मैं भला इस बात के गलत मायने क्यों
  5337. 4:23:06निकालूंगी? पर मैं तुम्हें बता [संगीत]
  5338. 4:23:09दूं कि मैं इस बात को लेकर श्योर हूं कि
  5339. 4:23:12भले हम कितनी बार एक दूसरे [संगीत] से मिल
  5340. 4:23:14लें, घूम लें लेकिन हम अपनी उस लिमिट को
  5341. 4:23:17क्रॉस नहीं करेंगे जिसकी इजाजत हमें शादी
  5342. 4:23:20के बाद ही मिलती है। कनिका ने बड़ी साफगोई
  5343. 4:23:24से अपनी [संगीत] बात कुणाल के सामने रखी।
  5344. 4:23:27मैं खुद भी इस बात से इत्तेफाक रखता हूं।
  5345. 4:23:30मैं खुद नहीं चाहूंगा कि शादी से पहले मैं
  5346. 4:23:32कुछ ऐसे कृत करूं जिसे तुम्हें शर्मिंदा
  5347. 4:23:35होना पड़े। कुणाल पूरी शराफत से बोला।
  5348. 4:23:39उसने अपने ऊपर शराफत का ऐसा नकाब ओढ़ रखा
  5349. 4:23:42था कि [संगीत] कोई उसे देखकर यह नहीं कह
  5350. 4:23:44सकता था कि कुणाल के मन में कुछ गलत ख्याल
  5351. 4:23:47पनपे भी होंगे। [संगीत]
  5352. 4:23:49इन दोनों को यहां आने में इतनी देर क्यों
  5353. 4:23:51हो रही है? आखिर दोनों करने क्या लगे हैं?
  5354. 4:23:54बोलती हुई कनिका काउंटर की ओर देखने लगी।
  5355. 4:23:58उसने देखा कि प्रतीक और नंदिनी दोनों
  5356. 4:24:00काउंटर के पास खड़े आपस में बातें कर रहे
  5357. 4:24:03थे। तभी कुणाल के द्वारा दिया गया आर्डर
  5358. 4:24:06भी बोर्ड पर कूपन नंबर के रूप में शो होने
  5359. 4:24:09लगा। [संगीत] प्रतीक ने वह आर्डर भी रिसीव
  5360. 4:24:11किया और वापस अपनी टेबल पर आ गया। उसने
  5361. 4:24:14सबके सामने प्लेटें सजाई और फिर नंदिनी के
  5362. 4:24:17साथ टेबल पर बैठ गया। [संगीत] इसके बाद
  5363. 4:24:20सभी धीरे-धीरे अपने-अपने ऑर्डर की हुई
  5364. 4:24:23चीजें खाने लगे। क्या तुम हमारी जो यह
  5365. 4:24:26इंगेजमेंट होने जा रही है, उससे खुश हो?
  5366. 4:24:30कनिका अपने सामने रखे परी सैंडविच [संगीत]
  5367. 4:24:32का एक टुकड़ा मुंह में लेते हुए बोली।
  5368. 4:24:35कुणाल को उम्मीद नहीं थी कि कनिका उससे
  5369. 4:24:38ऐसा कुछ पूछ सकती है। [संगीत] उसका सवाल
  5370. 4:24:40सुनते ही वह हड़बड़ा कर बोला। यह तुम कैसी
  5371. 4:24:44बात कर रही हो? तुम खुश होने की बात कर
  5372. 4:24:46रही हो। मैं इससे वाकई बहुत खुश हूं। मैं
  5373. 4:24:49सच में तुम्हें बहुत पसंद करने लगा हूं।
  5374. 4:24:52जब से मैंने तुम्हें देखा है, हर जगह तुम
  5375. 4:24:55मेरे ख्यालों में मंडराती रहती हो। क्या
  5376. 4:24:58सच में? [संगीत]
  5377. 4:24:59क्या कनिका भूत बनकर कुणाल के सिर पर
  5378. 4:25:02मंडराती रहती है? कुणाल की बात सुनकर
  5379. 4:25:04नंदिनी व्यंग भरे स्वर में बोली। नंदिनी
  5380. 4:25:08की बात सुनकर कनिका ने घूर कर नंदिनी को
  5381. 4:25:10देखा [संगीत] जैसे वह आंखों के इशारे से
  5382. 4:25:13उसे कह रही हो। फालतू की बकवास करने की
  5383. 4:25:16कोई जरूरत नहीं है। अच्छा बाबा मैं कोई
  5384. 4:25:19बकवास नहीं करती। [संगीत] इतना बोलकर
  5385. 4:25:22नंदिनी अपनी प्लेट साफ करने लगी। वहां कुछ
  5386. 4:25:25पल के लिए खामोशी छा गई। सभी आराम से अपना
  5387. 4:25:28नाश्ता करने लगे। इसी समय किसी की हंसी की
  5388. 4:25:32आवाज [संगीत] सुनकर प्रतीक का ध्यान उस
  5389. 4:25:34तरफ चला गया। उसे वहां एक चेहरा दिखाई
  5390. 4:25:37दिया और उस चेहरे पर फैली मासूमियत ने
  5391. 4:25:40बरबस ही प्रतीक का ध्यान अपनी तरफ खींच
  5392. 4:25:42लिया। प्रतीक ने कुणाल का हाथ पकड़ कर उसे
  5393. 4:25:46भी उस तरफ देखने का इशारा किया। कुणाल ने
  5394. 4:25:49भी जब प्रतीक की नजरों [संगीत] का पीछा
  5395. 4:25:51किया और उस चेहरे को देखा तो उसके चेहरे
  5396. 4:25:54पर भी आश्चर्य के भाव उभर आए।
  5397. 4:25:57आखिर कौन [संगीत] था वह शख्स जिसे देखकर
  5398. 4:25:59प्रतीक और कुणाल दोनों के चेहरे पर अचानक
  5399. 4:26:02आश्चर्य नजर आने लगा। क्या कनिका और कुणाल
  5400. 4:26:06की इंगेजमेंट समय पर हो पाएगी? और कुणाल
  5401. 4:26:08को अपने से कुछ दूर मौजूद एक टेबल [संगीत]
  5402. 4:26:12पर बैठी लड़की को आश्चर्य से घूरते देखा
  5403. 4:26:15तो उसने प्रतीक से पूछा क्या तुम उस लड़की
  5404. 4:26:18को जानते हो? कनिका का सवाल सुनकर प्रतीक
  5405. 4:26:22ने कुणाल की तरफ देखा। जैसे उससे पूछ रहा
  5406. 4:26:25हो कि क्या [संगीत] उसे बताना चाहिए कि वो
  5407. 4:26:28लड़की कौन है? कनिका की निगाह भी कुणाल की
  5408. 4:26:32तरफ घूम गई। अब उसने कुणाल से पूछा, "कौन
  5409. 4:26:36है वो लड़की? जिसको देखकर तुम दोनों के
  5410. 4:26:38चेहरे पर आश्चर्य उभर आया है। कुणाल ने
  5411. 4:26:41अपना गला खंखारते हुए कहा, "यह नीलिमा
  5412. 4:26:45[संगीत] है।" शौर्य की छोटी बहन। कुणाल से
  5413. 4:26:48यह जानकर कि जिस लड़की को वे दोनों देख
  5414. 4:26:51रहे हैं वो शौर्य की बहन नीलिमा है। कनिका
  5415. 4:26:55ने भी गौर से नीलिमा की तरफ देखा। उसे
  5416. 4:26:58नीलिमा बहुत ही मासूम और [संगीत] प्यारी
  5417. 4:27:00लगी। फिर तो वो तुम्हारी भी बहन हुई? क्या
  5418. 4:27:05तुम्हें उससे मिलना नहीं चाहिए? कनिका
  5419. 4:27:08कुणाल के साथ नीलिमा के रिश्ते के बारे
  5420. 4:27:10में सोचते [संगीत] हुए बोली। कुणाल ने
  5421. 4:27:12देखा कि नीलिमा एक और खूबसूरत लड़की के
  5422. 4:27:15साथ बैठी हुई उससे बात करने में मशगूल थी।
  5423. 4:27:19वो लड़की कोई और नहीं बल्कि [संगीत] मेघा
  5424. 4:27:22थी जिसके साथ नीलिमा मार्केटिंग करने आई
  5425. 4:27:25थी। कुणाल ने जब नीलिमा को किसी दूसरी
  5426. 4:27:28लड़की के साथ देखा [संगीत] तो कनिका से
  5427. 4:27:30बहाना करते हुए बोला। लगता है वह अपने
  5428. 4:27:33किसी दोस्त के साथ मार्केटिंग करने आई है।
  5429. 4:27:35तो शायद इस समय उससे बात [संगीत] करना सही
  5430. 4:27:38नहीं रहेगा। कुणाल की बात सुनकर कनिका को
  5431. 4:27:41कुछ शक हुआ तो उसने [संगीत] पूछा क्या तुम
  5432. 4:27:44दोनों के रिश्ते कुछ ठीक नहीं है? नहीं
  5433. 4:27:47ऐसा नहीं है। दरअसल अभी नीलिमा को यहां आए
  5434. 4:27:51हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। इसलिए हम अभी
  5435. 4:27:54एक दूसरे के साथ ज्यादा ओपन नहीं हुए हैं।
  5436. 4:27:57बस इतनी सी बात [संगीत] है। कुणाल ने
  5437. 4:27:59हिचकिचाते हुए कनिका को जवाब दिया। ओह तो
  5438. 4:28:03यह [संगीत] बात है। कनिका की समझ में बात
  5439. 4:28:06आई। फिर उसने नीलिमा की तरफ एक उचटती
  5440. 4:28:09निगाह डालते हुए कहा जो भी हो बहुत प्यारी
  5441. 4:28:13लड़की है। हां सच में अभी उसे यहां आए
  5442. 4:28:18ज्यादा समय नहीं हुआ है। पर हमारे परिवार
  5443. 4:28:20में उसने सबके दिलों पर अपनी छाप [संगीत]
  5444. 4:28:22छोड़ दी है। प्रतीक भी नीलिमा के बारे में
  5445. 4:28:25अपनी राय देने से पीछे नहीं रहा। दोनों एक
  5446. 4:28:28ही घर में रहते थे। इसलिए नीलिमा अपने
  5447. 4:28:31सारे रिश्तेदारों के साथ घुलने मिलने में
  5448. 4:28:34कोई कंजूसी नहीं करती थी। वह पहले भी
  5449. 4:28:37राजमहल आकर रह चुकी थी। इसलिए उसकी प्रतीक
  5450. 4:28:40से भी अच्छी बोलचाल थी। इसी समय नीलिमा को
  5451. 4:28:44भी एहसास हुआ कि [संगीत] यहां कुछ लोग
  5452. 4:28:46बार-बार उसकी तरफ देख रहे हैं। यह महसूस
  5453. 4:28:49होते ही उसने भी ध्यान से अपने आसपास
  5454. 4:28:52मौजूद लोगों की तरफ देखा। उसकी निगाह
  5455. 4:28:56[संगीत] प्रतीक के ऊपर जाकर रुक गई।
  5456. 4:28:58प्रतीक को वहां देखकर उसके चेहरे पर भी
  5457. 4:29:00मुस्कान आ गई। उसने मेघा से कहा, मैं अभी
  5458. 4:29:045 मिनट में [संगीत] वापस आती हूं दीदी।
  5459. 4:29:07इतना कहकर वह अपनी जगह से उठी और प्रतीक
  5460. 4:29:10[संगीत] के पास पहुंच गई। हेलो प्रतीक
  5461. 4:29:13भैया आप भी यहां मार्केटिंग करने आए हैं?
  5462. 4:29:16आपको यहां देखकर बहुत अच्छा लगा। अरे
  5463. 4:29:20कुणाल भैया भी यहीं हैं। नीलिमा ने प्रतीक
  5464. 4:29:23के बाद कुणाल को देखते हुए कहा। मुझे भी
  5465. 4:29:26तुम्हें यहां देखकर आश्चर्य हुआ। तुम
  5466. 4:29:29किसके साथ यहां आई हो? प्रतीक ने नीलिमा
  5467. 4:29:32से नजर हटाकर मेघा की ओर देखते हुए पूछा।
  5468. 4:29:36मेघा उसके [संगीत] लिए एक अनजान लड़की थी।
  5469. 4:29:39लेकिन उसकी खूबसूरती देखकर वह अचंभित जरूर
  5470. 4:29:41हुआ था। उसके मन में ख्याल आया कि कहीं यह
  5471. 4:29:45शौर्य की कोई गर्लफ्रेंड तो नहीं है जिसके
  5472. 4:29:47साथ नीलिमा मार्केटिंग करने आई है। नीलिमा
  5473. 4:29:51ने प्रतीक की नजरों का [संगीत] पीछा किया
  5474. 4:29:53और मेघा की ओर देखते हुए बोली, वो मेघा
  5475. 4:29:56दीदी हैं। मैं उन्हीं के साथ मार्केटिंग
  5476. 4:29:59करने के लिए आई हूं।
  5477. 4:30:01यह मेघा कौन [संगीत] है? मैं तो पहले कभी
  5478. 4:30:04इनसे नहीं मिला। फिर तुम इन्हें कैसे
  5479. 4:30:06जानती हो? प्रतीक ने गहरी नजरों से मेघा
  5480. 4:30:10की ओर देखते हुए पूछा। [संगीत]
  5481. 4:30:12नीलिमा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
  5482. 4:30:15मैंने बताया ना मेरी बड़ी बहन जैसी हैं।
  5483. 4:30:19दरअसल [संगीत] शौर्य भैया ने इन्हें अपनी
  5484. 4:30:21बहन माना है। तो यह मेरी भी बड़ी बहन के
  5485. 4:30:24जैसी ही हुई ना?
  5486. 4:30:26नीलिमा की बात सुनकर कनिका ने भी पलट
  5487. 4:30:29[संगीत] कर मेघा की ओर देखा। वह भी मेघा
  5488. 4:30:32की खूबसूरती से प्रभावित हुई। लेकिन उसे
  5489. 4:30:34यह बात हजम नहीं [संगीत] हुई कि शौर्य ने
  5490. 4:30:37उसे अपनी बहन माना होगा। कनिका की नजर में
  5491. 4:30:40तो शौर्य एक लड़कियों के पीछे भागने वाला
  5492. 4:30:43लड़का था। उसे यकीन था कि जरूर यह भी उसकी
  5493. 4:30:47कोई गर्लफ्रेंड ही होगी जिसे उसने अपनी
  5494. 4:30:49बहन बनाकर नीलिमा से मिलवा दिया होगा।
  5495. 4:30:52कनिका को शिप्रा की वह बात याद [संगीत] आई
  5496. 4:30:55जब शिप्रा ने कहा था कि शौर्य ऐसा लड़का
  5497. 4:30:58है जो भी लड़की उसे दिखाई देती है उसे उसी
  5498. 4:31:01से प्यार हो जाता है। अब शौर्य की इमेज
  5499. 4:31:04कनिका की नजर में कुछ ऐसी ही बन चुकी थी।
  5500. 4:31:08मुझे विश्वास [संगीत] नहीं होता कि
  5501. 4:31:10तुम्हारा भाई किसी को अपनी बहन भी बना
  5502. 4:31:12सकता है। कनिका ने नीलिमा से व्यंग भरे
  5503. 4:31:15स्वर में कहा। कनिका की बात सुनकर नीलिमा
  5504. 4:31:19का ध्यान भी उसकी तरफ गया। उसने देखा कि
  5505. 4:31:22कनिका [संगीत]
  5506. 4:31:23और नंदिनी भी प्रतीक और कुणाल के साथ बैठी
  5507. 4:31:26हुई हैं। उसे कनिका [संगीत] की बात जरा भी
  5508. 4:31:29पसंद नहीं आई। गुस्सा तो उसे बहुत आया
  5509. 4:31:33लेकिन उसने खुद को संयम में रखा और प्रतीक
  5510. 4:31:35से बोली [संगीत] क्या यह दोनों आप दोनों
  5511. 4:31:38की गर्लफ्रेंड है? नीलिमा कुछ गलत बात बोल
  5512. 4:31:42देती। उससे पहले ही कुणाल ने बात स्पष्ट
  5513. 4:31:45करते [संगीत] हुए कहा, "यह कनिका है और यह
  5514. 4:31:48नंदिनी।"
  5515. 4:31:49तुमने इनके बारे में तो सुना ही होगा। यह
  5516. 4:31:52वही हैं [संगीत] जिनके साथ हमारा रिश्ता
  5517. 4:31:54तय हुआ है। कुणाल की बात सुनकर नीलिमा को
  5518. 4:31:58समझ में आ गया कि आखिर कनिका ने उसके
  5519. 4:32:00[संगीत] भाई के लिए वैसा क्यों कहा था।
  5520. 4:32:03लेकिन अभी कनिका ने उसके भाई के लिए कुछ
  5521. 4:32:06ऐसे शब्द कहे थे जो नीलिमा को बिल्कुल
  5522. 4:32:09पसंद नहीं आए थे। इसी बात को ध्यान में
  5523. 4:32:12रखते हुए [संगीत] वो व्यंग भरे स्वर में
  5524. 4:32:14कनिका से बोली। अच्छा तो आप दोनों वही हैं
  5525. 4:32:18जो कुछ समय में [संगीत] मेरी भाभी बनने
  5526. 4:32:20वाली है। मुझे आप दोनों से मिलकर बहुत
  5527. 4:32:23खुशी हुई। कनिका ने नीलिमा का मन टटोलने
  5528. 4:32:27के लिए पूछा। [संगीत]
  5529. 4:32:28तुम्हें तो यह जानकर बहुत बुरा लगा होगा
  5530. 4:32:31कि मैंने तुम्हारे भाई शौर्य को पसंद नहीं
  5531. 4:32:33किया और कुणाल को पसंद किया। नीलिमा ने
  5532. 4:32:37बिना किसी झिझक के स्मार्टली जवाब दिया।
  5533. 4:32:40[संगीत]
  5534. 4:32:40मुझे क्यों बुरा लगेगा? आप शौर्य भैया को
  5535. 4:32:44भी पसंद करती तो भी [संगीत] मेरी भाभी ही
  5536. 4:32:46होती और अब कुणाल भैया के साथ भी आपकी
  5537. 4:32:49शादी होगी तो भी आप मेरी भाभी ही [संगीत]
  5538. 4:32:51होंगी। दोनों ही सूरत में तो आप मेरी भाभी
  5539. 4:32:55ही रहेंगी। कनिका को नीलिमा की समझदारी पर
  5540. 4:32:58आश्चर्य हुआ। लेकिन वह हार मानने को तैयार
  5541. 4:33:02नहीं थी। उसने फिर कहा फिर भी शौर्य
  5542. 4:33:05तुम्हारा अपना भाई है तो तुम्हें कुछ तो
  5543. 4:33:08बुरा लगा ही होगा कि मैंने तुम्हारे भाई
  5544. 4:33:10को पसंद नहीं किया।
  5545. 4:33:12बिल्कुल नहीं। [संगीत] उल्टा मुझे तो यह
  5546. 4:33:14लगा कि शायद उनके नसीब में आपसे भी ज्यादा
  5547. 4:33:17अच्छी लड़की होगी। [संगीत] तभी आपने
  5548. 4:33:19उन्हें पसंद नहीं किया क्योंकि मैं जानती
  5549. 4:33:22हूं कि मेरे भाई का नसीब बहुत बढ़िया
  5550. 4:33:24[संगीत] है। उन्होंने अपनी जिंदगी में
  5551. 4:33:26हमेशा बेस्ट चीज ही हासिल की है। नीलिमा
  5552. 4:33:30अपने भाई को याद करते हुए गर्व से बोली।
  5553. 4:33:33कनिका आश्चर्य से नीलिमा का चेहरा देखती
  5554. 4:33:37रह गई। उसे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हो रहा
  5555. 4:33:40था कि नीलिमा को अपने भाई पर कितना
  5556. 4:33:43विश्वास था। उसने सोचा कि [संगीत] इसमें
  5557. 4:33:46नीलिमा की कोई गलती नहीं है। हर एक लड़की
  5558. 4:33:49अपने भाई को बेस्ट [संगीत] ही समझती है और
  5559. 4:33:51उसे सबसे अच्छा ही मानती है। तो भला
  5560. 4:33:54नीलिमा इसमें अपवाद कैसे हो सकती है?
  5561. 4:33:57स्वाभाविक [संगीत] है कि वह अपने भाई का
  5562. 4:33:59ही पक्ष लेगी। इसलिए उसने मुस्कुराते हुए
  5563. 4:34:03नीलिमा से कहा। मैं भी आशा करती हूं कि
  5564. 4:34:06तुम्हारी बात सच साबित हो। बिल्कुल होगी।
  5565. 4:34:10मुझे अपने भाई पर पूरा विश्वास है। नीलिमा
  5566. 4:34:14शौर्य की तारीफ करने से जरा भी नहीं चूकी।
  5567. 4:34:17इतना कहने के बाद नीलिमा ने मेघा की ओर
  5568. 4:34:20देखा। मेघा अपनी जगह पर बैठी नीलिमा की ओर
  5569. 4:34:23ही देख रही [संगीत] थी। नीलिमा ने इन
  5570. 4:34:26चारों की ओर देखते हुए कहा।
  5571. 4:34:28ठीक है। आप चारों को भी मार्केटिंग करनी
  5572. 4:34:31होगी। इसलिए आप लोग इसे एंजॉय कीजिए। मैं
  5573. 4:34:35भी मेघा दीदी के पास जा रही हूं। कुणाल
  5574. 4:34:38नीलिमा की सारी बातें सुन रहा था। उसे लगा
  5575. 4:34:42कि नीलिमा ने अपने भाई को लेकर जो बात कही
  5576. 4:34:44है, शायद वह कनिका को बुरी लगी होगी।
  5577. 4:34:48इसलिए उसने कनिका से कहा, तुम उसकी बातों
  5578. 4:34:51को दिल पर मत लेना। यह लड़की थोड़ी
  5579. 4:34:54बाततूनी है [संगीत] और बोलने से पहले कुछ
  5580. 4:34:57भी फिल्टर नहीं करती कि उसकी बातें सामने
  5581. 4:35:00वाले को कैसी लग सकती हैं। कुणाल की बात
  5582. 4:35:03सुनकर कनिका ने उसकी तरफ देखते हुए कहा,
  5583. 4:35:07तुम गलत समझ [संगीत] रहे हो। मुझे उसकी
  5584. 4:35:10बात क्यों बुरी लगेगी? उसने ऐसा [संगीत]
  5585. 4:35:12क्या गलत कहा? सही तो कहा उसने। हर एक
  5586. 4:35:16लड़की को अपने भाई पर पूरा विश्वास होता
  5587. 4:35:19है जो कि उसको भी है। इसलिए उसने जो भी
  5588. 4:35:22कहा उसमें कुछ [संगीत] भी गलत नहीं था।
  5589. 4:35:25अच्छी लड़की है। यह बात अलग है कि वह अपने
  5590. 4:35:29[संगीत] भाई के चरित्र से अनजान है। इसका
  5591. 4:35:32मतलब तुम्हें उसकी कोई बात बुरी नहीं लगी।
  5592. 4:35:35कुणाल ने आश्चर्य से कनिका [संगीत] की ओर
  5593. 4:35:38देखते हुए पूछा। कनिका ने सहजता से जवाब
  5594. 4:35:41दिया। मैं इतनी छोटी सोच वाली नहीं हूं कि
  5595. 4:35:45ऐसी छोटी-मोटी बातों को अपने दिल पर
  5596. 4:35:47लगाऊंगी। और वैसे भी [संगीत] मेरी नजर में
  5597. 4:35:50उसने ऐसा कुछ भी गलत नहीं कहा जो मुझे
  5598. 4:35:53बुरा लगना चाहिए था। उसके उद्गार अपने भाई
  5599. 4:35:56के लिए एकदम [संगीत] सही थे। उसकी जगह कोई
  5600. 4:36:00भी दूसरी लड़की होती तो उसे भी वैसा ही
  5601. 4:36:03करना चाहिए था। जैसा [संगीत] अभी नीलिमा
  5602. 4:36:06ने किया। मेरे सामने भी अगर कोई मेरे भाई
  5603. 4:36:09के बारे में कुछ कहे तो [संगीत] मैं अपने
  5604. 4:36:11भाई को प्रोटेक्ट करूंगी ना कि किसी और
  5605. 4:36:14को। कनिका की बात सुनकर कुणाल ने राहत की
  5606. 4:36:17सांस ली। अभी तक उसे यही डर सता रहा था कि
  5607. 4:36:21कहीं कनिका को नीलिमा की बात बुरी ना लग
  5608. 4:36:23गई हो। [संगीत]
  5609. 4:36:25अब तक सभी ने अपने सामने रखे स्नैक्स खत्म
  5610. 4:36:27कर लिए थे। कनिका अपनी जगह पर खड़ी होते
  5611. 4:36:30हुए बोली, तो अब चलें उस काम को कर लें
  5612. 4:36:34जिसके लिए हम यहां आए हैं। कनिका के साथ
  5613. 4:36:37बाकी सब भी उठ गए और फिर सभी ज्वेलरी
  5614. 4:36:39डिपार्टमेंट की तरफ बढ़ गए। जाने से पहले
  5615. 4:36:43कनिका ने एक बार अपनी नजर घुमाकर उस तरफ
  5616. 4:36:46देखा जहां नीलिमा गई हुई थी। लेकिन उसे
  5617. 4:36:49वहां नीलिमा नजर नहीं आई। शायद वह उनसे
  5618. 4:36:52पहले ही वहां से निकल गई थी। ज्वेलरी
  5619. 4:36:55डिपार्टमेंट में पहुंचकर कुणाल ने अलग-अलग
  5620. 4:36:57ब्रांड के ज्वेलरी आइटम देखते हुए पूछा।
  5621. 4:36:59[संगीत]
  5622. 4:37:00हम यहां किस लिए आए हैं? कनिका ने उसकी
  5623. 4:37:03तरफ देखते हुए जवाब दिया।
  5624. 4:37:05[संगीत]
  5625. 4:37:05पापा ने हम दोनों के लिए रिंग लेने के लिए
  5626. 4:37:07कहा था जो इंगेजमेंट के दिन हमें एक दूसरे
  5627. 4:37:10को पहनानी है। तुम्हें [संगीत] यहां
  5628. 4:37:12बुलाने का भी यही कारण था कि तुम भी एक
  5629. 4:37:15बार उस रिंग को पसंद कर लो इसलिए हम यहां
  5630. 4:37:17आए हैं। कुणाल ने ज्वेलरी डिपार्टमेंट की
  5631. 4:37:20तरफ एक नजर दौड़ाई तो [संगीत] उसे वहां
  5632. 4:37:23दुनिया के सारे ही टॉप ब्रांड्स के कॉर्नर
  5633. 4:37:25दिखाई दिए। वो कनिका के साथ आगे बढ़ते हुए
  5634. 4:37:28अलग-अलग ब्रांड की इंगेजमेंट रिंग देखने
  5635. 4:37:30[संगीत] लगा। कनिका कुणाल के साथ चलते हुए
  5636. 4:37:34टिफनी एंड कंपनी के कॉर्नर पर पहुंची।
  5637. 4:37:37वहां उसने देखा कि नीलिमा मेघा के साथ
  5638. 4:37:39पहले से ही मौजूद थी और उसके हाथ में एक
  5639. 4:37:42रिंग थी जिसे वह मेघा को दिखा रही थी। उन
  5640. 4:37:45दोनों के चेहरों से लग रहा था कि उन्हें
  5641. 4:37:47वह रिंग का जोड़ा बहुत पसंद आ रहा था।
  5642. 4:37:49[संगीत]
  5643. 4:37:50कनिका ने नीलिमा के हाथ में मौजूद उस रिंग
  5644. 4:37:53के जोड़े को देखा तो उसे भी वह एक ही नजर
  5645. 4:37:56में पसंद आ गया। वो ललचाई नजरों से उस
  5646. 4:37:59रिंग के जोड़े को देखने लगी। कनिका की नजर
  5647. 4:38:02सामने खड़ी नीलिमा और मेघा पर ठहर गई।
  5648. 4:38:05नीलिमा के हाथ में अंगूठियों का वह
  5649. 4:38:07खूबसूरत जोड़ा था। वो उसे बड़े ध्यान से
  5650. 4:38:10देख रही थी। उसे वह जोड़ा इतना पसंद आया
  5651. 4:38:13था कि वह उसे खरीदने का मन बना चुकी थी।
  5652. 4:38:16संयोग से वही जोड़ा कनिका को भी पहली नजर
  5653. 4:38:19में पसंद आ गया। कनिका कुछ दूर खड़ी होकर
  5654. 4:38:22नीलिमा को देखने लगी। उसके मन में सवाल
  5655. 4:38:25उठा कि आखिर नीलिमा यह अंगूठियां किसके
  5656. 4:38:27[संगीत] लिए खरीद रही है? तभी नीलिमा की
  5657. 4:38:30नजर कनिका पर पड़ी। वो मुस्कुराते हुए
  5658. 4:38:32उसके पास आई और बोली, [संगीत] भाभी आप भी
  5659. 4:38:35आ गई? फिर अचानक जैसे उसे कुछ याद आया।
  5660. 4:38:39उसने थोड़ा [संगीत] झिझकते हुए पूछा, वैसे
  5661. 4:38:42मैंने आपको भाभी कहा, आपको बुरा तो नहीं
  5662. 4:38:45लगा? [संगीत] कनिका मुस्कुराई और बोली,
  5663. 4:38:48नहीं बिल्कुल नहीं। वैसे भी कुछ समय बाद
  5664. 4:38:51तुम मुझे भाभी ही कहने वाली हो। तो अभी से
  5665. 4:38:54आदत डाल लो। नीलिमा भी मुस्कुरा दी। फिर
  5666. 4:38:58उसने अपने हाथ में पकड़ी अंगूठियों का
  5667. 4:39:00जोड़ा कनिका की दिखाते हुए कहा, "भाभी,
  5668. 4:39:03[संगीत] यह अंगूठियां देखिए। मुझे बहुत
  5669. 4:39:06पसंद आई हैं। मैं इन्हें खरीदने वाली हूं।
  5670. 4:39:09पर तुम इसे किसके लिए खरीदने की सोच रही
  5671. 4:39:12हो? कनिका की नजर उस अंगूठियों की जोड़ी
  5672. 4:39:15पर टिक गई थी जिसे नीलिमा अपने हाथ में
  5673. 4:39:17थामे हुए थी। वही जोड़ी जिसे देखते ही
  5674. 4:39:21कनिका का दिल कह उठा था कि यही अंगूठियां
  5675. 4:39:24उसके और कुणाल की इंगेजमेंट के लिए सबसे
  5676. 4:39:27खूबसूरत रहेंगी।
  5677. 4:39:29लेकिन अगले ही पल नीलिमा के शब्दों ने
  5678. 4:39:31उसके चेहरे की मुस्कान को भीतर [संगीत] तक
  5679. 4:39:33चुभा दिया। यह मेरे भैया भाभी के लिए है।
  5680. 4:39:37नीलिमा खुशी-खुशी बोली। कनिका के भीतर
  5681. 4:39:41जैसे कुछ खटक गया। भैया यानी शौर्य। उसके
  5682. 4:39:46चेहरे पर एक पल के लिए हैरानी आई और फिर
  5683. 4:39:49उसके भीतर अजीब सी बेचैनी फैलने लगी। कल
  5684. 4:39:52तक तो शौर्य की शादी की कोई [संगीत] बात
  5685. 4:39:54नहीं थी और आज उसके लिए अंगूठियां खरीदी
  5686. 4:39:57जा रही थी। उसने नीलिमा [संगीत] को गौर से
  5687. 4:40:00देखा। उसके चेहरे पर अपने भाई के लिए इतनी
  5688. 4:40:03खुशी थी कि कनिका की बेचैनी और बढ़ गई। कल
  5689. 4:40:07ही उसने शौर्य को ठुकराकर [संगीत] कुणाल
  5690. 4:40:09को चुना था। उसे लगा था कि शौर्य को इस
  5691. 4:40:12बात से चोट लगेगी। उसका घमंड टूटेगा और
  5692. 4:40:16शायद उसे अपनी हार का एहसास होगा। लेकिन
  5693. 4:40:19यहां तो तस्वीर ही उल्टी नजर आ रही थी।
  5694. 4:40:22शौर्य के लिए कोई दूसरी लड़की [संगीत]
  5695. 4:40:24पहले ही चुन ली गई थी। कनिका के भीतर
  5696. 4:40:27अचानक एक अजीब सी चुभन उठी। उसे खुद समझ
  5697. 4:40:31नहीं आया कि शौर्य के लिए [संगीत] किसी
  5698. 4:40:32दूसरी लड़की का नाम सुनकर उसे इतना बुरा
  5699. 4:40:35क्यों लग रहा है। उसने नजरें अंगूठियों से
  5700. 4:40:38हटाकर नीलिमा के चेहरे पर जमा दी। कौन है
  5701. 4:40:41वो लड़की? यह सवाल [संगीत] उसके होठों तक
  5702. 4:40:44आते-आते रुक गया। उसके मन में एक और सवाल
  5703. 4:40:48उससे भी ज्यादा [संगीत] जोर से उठा। क्या
  5704. 4:40:51शौर्य को मुझसे इतनी जल्दी बेहतर लड़की
  5705. 4:40:55[संगीत] मिल गई? यह विचार आते ही उसके
  5706. 4:40:58भीतर का अह जैसे तिलमिला उठा। जिस शौर्य
  5707. 4:41:03को वह कल [संगीत] तक यह समझकर ठुकरा कर आई
  5708. 4:41:05थी कि वह उसके पीछे भागता रहेगा। आज वही
  5709. 4:41:09शौर्य अपनी जिंदगी में किसी और लड़की को
  5710. 4:41:12जगह देकर आगे बढ़ चुका था और सबसे ज्यादा
  5711. 4:41:16तकलीफ इस बात की थी कि शायद उसे फर्क ही
  5712. 4:41:19नहीं पड़ा था कि कनिका ने उसे ठुकरा दिया।
  5713. 4:41:23कनिका ने होंठ खींच लिए। उसकी नजर [संगीत]
  5714. 4:41:26फिर उसी अंगूठियों की जोड़ी पर चली गई।
  5715. 4:41:29उसने पूछा लेकिन शौर्य की शादी तो अभी
  5716. 4:41:32फिक्स भी नहीं हुई है। फिर ये अंगूठियां
  5717. 4:41:35अभी क्यों?
  5718. 4:41:36नीलिमा ने जैसे कोई बहुत सामान्य सी बात
  5719. 4:41:39बताई हो उसी सहजता से कहा शौर्य भैया ने
  5720. 4:41:43लड़की पसंद कर ली है तो शादी भी जल्दी हो
  5721. 4:41:45जाएगी। शादी की तैयारियां तो पहले से ही
  5722. 4:41:48शुरू करनी पड़ती है ना। मम्मी ने मुझे
  5723. 4:41:50जिम्मेदारी दी है कि मैं [संगीत] भैया और
  5724. 4:41:53अपनी होने वाली भाभी के लिए अंगूठियां
  5725. 4:41:55पसंद करूं। इसलिए मैं यह लेने आई हूं।
  5726. 4:41:59नीलिमा की बात सुनते ही कनिका, कुणाल और
  5727. 4:42:01प्रतीक के चेहरे पर हैरानी जम गई। एक दिन
  5728. 4:42:05पहले ही कनिका ने शौर्य को ठुकराकर कुणाल
  5729. 4:42:07को चुना था। कुणाल को पूरा [संगीत]
  5730. 4:42:10विश्वास था कि उसके इस फैसले से शौर्य
  5731. 4:42:12बुरी तरह टूट गया होगा। उसके मन में कहीं
  5732. 4:42:16ना कहीं यह गर्व भी [संगीत] था कि आखिर
  5733. 4:42:18उसने शौर्य को मात दे दी। लेकिन आज आज
  5734. 4:42:22शौर्य की [संगीत] बहन उसके लिए किसी दूसरी
  5735. 4:42:24लड़की के साथ सगाई की अंगूठियां खरीद रही
  5736. 4:42:27थी। कुणाल के चेहरे से उसका सारा गर्व
  5737. 4:42:30जैसे एक ही पल में गायब हो गया। क्या
  5738. 4:42:33सचमुच शौर्य ने इतनी जल्दी किसी और लड़की
  5739. 4:42:36को पसंद कर लिया था और आखिर वह लड़की थी
  5740. 4:42:39कौन? कनिका की नजर अभी भी उसी अंगूठी के
  5741. 4:42:43जोड़े पर टिकी [संगीत] हुई थी जिसे वह खुद
  5742. 4:42:45पहली नजर में पसंद कर चुकी थी। अब वही
  5743. 4:42:48अंगूठियां शौर्य की होने वाली दुल्हन के
  5744. 4:42:51लिए खरीदी जाने वाली थी। क्या कनिका पता
  5745. 4:42:54लगा पाएगी कि आखिर [संगीत] शौर्य ने किस
  5746. 4:42:56लड़की को चुना है? क्या उसे अपनी पसंद की
  5747. 4:43:00वही अंगूठियां किसी और के हाथों में
  5748. 4:43:02[संगीत] जाती हुई देखनी पड़ेंगी? और सबसे
  5749. 4:43:05बड़ा सवाल आखिर शौर्य की जिंदगी में वो
  5750. 4:43:08लड़की कौन [संगीत] थी जिसके लिए उसने इतना
  5751. 4:43:11बड़ा फैसला इतनी जल्दी ले लिया था? ने उस
  5752. 4:43:14अंगूठी को अपने लिए पसंद कर लिया। [संगीत]
  5753. 4:43:17कनिका चाहकर भी नीलिमा से उस अंगूठी के
  5754. 4:43:21लिए कुछ नहीं कह [संगीत] पाई। उसने जब
  5755. 4:43:23अंगूठी की कीमत देखी तो उसकी आंखें हैरानी
  5756. 4:43:26से फैल दी।
  5757. 4:43:27[संगीत]
  5758. 4:43:28रिंग पूरे ₹16 लाख की थी। कनिका के मन में
  5759. 4:43:33सवाल उठा कि [संगीत] आखिर नीलिमा ने एक
  5760. 4:43:36बार भी उस कीमत के बारे में क्यों नहीं
  5761. 4:43:38सोचा? क्या उसके लिए ₹16 लाख कोई बड़ी रकम
  5762. 4:43:41नहीं थी? अभी-अभी तो वह राठौर फैमिली में
  5763. 4:43:44आई थी। क्या उसके [संगीत] लिए ₹16 लाख
  5764. 4:43:47खर्च करना इतना मामूली था? लेकिन नीलिमा
  5765. 4:43:50के चेहरे पर उस कीमत [संगीत] को लेकर जरा
  5766. 4:43:53सी भी झिझक नहीं थी। ₹16 लाख कनिका के
  5767. 4:43:56[संगीत] लिए भी छोटी रकम नहीं थी। एक
  5768. 4:43:59अंगूठी पर इतने पैसे खर्च करने से पहले
  5769. 4:44:02उसे भी कई बार सोचना पड़ता। लेकिन नीलिमा
  5770. 4:44:05तो जैसे कीमत देखकर [संगीत] भी बेफिक्र
  5771. 4:44:07थी। कनिका ने शौर्य के जॉब प्रोफाइल के
  5772. 4:44:10बारे में सोचा तो उसकी उलझन और बढ़ गई।
  5773. 4:44:14शौर्य की वर्तमान स्थिति [संगीत] में उसके
  5774. 4:44:16लिए ₹16 लाख बहुत बड़ी रकम होनी चाहिए थी।
  5775. 4:44:20फिर नीलिमा [संगीत] इतनी महंगी रिंग अपने
  5776. 4:44:22भाई के लिए इतनी आसानी से कैसे खरीद रही
  5777. 4:44:25थी? कहीं ऐसा तो नहीं कि राजा साहब
  5778. 4:44:28[संगीत] ने आते ही शौर्य के पेरेंट्स को
  5779. 4:44:30बहुत बड़ी रकम दे दी हो जिससे वे शौर्य की
  5780. 4:44:33सगाई के लिए इतनी महंगी रिंग खरीद पा रहे
  5781. 4:44:36हो। हां, जरूर यही बात होगी। कनिका ने मन
  5782. 4:44:41ही मन सोचा। रिंग की कीमत जानकर प्रतीक और
  5783. 4:44:44कुणाल भी हैरान थे। प्रतीक भी मन ही मन
  5784. 4:44:47यही सोचने लगा कि जरूर दादाजी ने आते ही
  5785. 4:44:51[संगीत] सूर्यभान अंकल को कोई बहुत बड़ी
  5786. 4:44:53रकम दे दी होगी। तभी नीलिमा इतनी [संगीत]
  5787. 4:44:56महंगी रिंग खरीदने में जरा भी नहीं हिचक
  5788. 4:44:58रही। तभी नीलिमा ने कनिका की तरफ देखते
  5789. 4:45:01हुए पूछा। भाभी आपको भी अपने लिए कोई रिंग
  5790. 4:45:05लेनी है? कुछ पसंद आया? कनिका ने [संगीत]
  5791. 4:45:08सेल्स गर्ल के हाथ में मौजूद उसी रिंग की
  5792. 4:45:11तरफ देखा और हल्की सी मुस्कान के साथ
  5793. 4:45:13बोली। अभी तो [संगीत] देख ही रही हूं। एक
  5794. 4:45:17रिंग पसंद आई थी लेकिन लगता है वो अब मेरी
  5795. 4:45:20किस्मत में नहीं है। तुमने [संगीत] जो
  5796. 4:45:23पसंद कर ली। कनिका की बात सुनकर कुणाल ने
  5797. 4:45:26नीलिमा की तरफ देखा। उसने महसूस किया कि
  5798. 4:45:29नीलिमा अभी भी उस रिंग को देखकर खुश हो
  5799. 4:45:32[संगीत] रही थी। वो सहजता से बोला। तो
  5800. 4:45:35इसमें इतनी बड़ी बात क्या है नीलिमा? तुम
  5801. 4:45:38कोई दूसरी रिंग पसंद कर लो। अगर भाभी को
  5802. 4:45:41यह पसंद [संगीत] आई है तो उन्हें लेने दो।
  5803. 4:45:44कनिका की आंखों में उम्मीद की चमक [संगीत]
  5804. 4:45:46आ गई। सच में नीलिमा क्या तुम मेरे लिए यह
  5805. 4:45:50रिंग छोड़ सकती हो? [संगीत]
  5806. 4:45:52उसने उम्मीद भरी नजरों से नीलिमा को देखते
  5807. 4:45:55हुए पूछा। नीलिमा कुछ पल [संगीत] उस रिंग
  5808. 4:45:58को देखती रही। फिर उसने कनिका की तरफ
  5809. 4:46:00देखा।
  5810. 4:46:02सॉरी भाभी। लेकिन इस बार मैं आपकी बात
  5811. 4:46:05नहीं मान सकती। कनिका की उम्मीद भरी आंखें
  5812. 4:46:08[संगीत] थोड़ी मायूस हो गई। नीलिमा ने
  5813. 4:46:11तुरंत सफाई देते हुए कहा, ऐसा मत सोचिए
  5814. 4:46:14[संगीत] कि मैं जानबूझकर आपको मना कर रही
  5815. 4:46:16हूं। लेकिन यह रिंग मैंने अपने भाई के लिए
  5816. 4:46:19पसंद की है। अब आप ही बताइए मैं अपने भाई
  5817. 4:46:23के लिए पसंद की हुई चीज किसी और को कैसे
  5818. 4:46:25दे दूं? कनिका कुछ कहती उससे पहले नीलिमा
  5819. 4:46:29ने हल्के मजाकिया अंदाज में कहा। यह तो
  5820. 4:46:33वैसा ही हुआ ना कि मैं आपसे कहूं। भाभी आप
  5821. 4:46:36कुणाल भैया को छोड़कर किसी और को पसंद कर
  5822. 4:46:39लीजिए। क्या आप मान जाएंगी? कुणाल ने
  5823. 4:46:42नीलिमा की तरफ देखा। उसके चेहरे पर साफ
  5824. 4:46:45लिखा था कि उसे नीलिमा की बात कुछ ज्यादा
  5825. 4:46:48ही पसंद आ गई थी। कनिका भी उसकी बात सुनकर
  5826. 4:46:51हल्का सा मुस्कुराई। नीलिमा ने प्यार से
  5827. 4:46:54कहा, "मुझे अपने [संगीत] भाई के लिए हमेशा
  5828. 4:46:58सबसे अच्छा ही चाहिए। और यह रिंग मुझे
  5829. 4:47:01उनके लिए परफेक्ट लगी है। इसलिए इसे
  5830. 4:47:04[संगीत] छोड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता।
  5831. 4:47:06आप नाराज मत होइए। इस स्टोर में इतनी सारी
  5832. 4:47:09खूबसूरत [संगीत] रिंग्स हैं। आपको इससे भी
  5833. 4:47:12अच्छी रिंग मिल जाएगी। कुणाल को अब
  5834. 4:47:15[संगीत] भी यकीन नहीं हो रहा था कि नीलिमा
  5835. 4:47:17इतनी आसानी से कनिका को मना कर [संगीत]
  5836. 4:47:19देगी। वो नीलिमा से कुछ कहने के लिए आगे
  5837. 4:47:22बढ़ा लेकिन कनिका ने ही उसे रोक दिया।
  5838. 4:47:26रहने दो कुणाल। कुणाल उसकी तरफ देखने लगा।
  5839. 4:47:30कनिका ने नीलिमा की तरफ देखकर शांत
  5840. 4:47:32[संगीत] स्वर में कहा।
  5841. 4:47:35नीलिमा अपनी जगह बिल्कुल सही है। उसने
  5842. 4:47:38अपने भाई [संगीत] के लिए इतने प्यार से यह
  5843. 4:47:40रिंग पसंद की है तो उसे छोड़ने के लिए
  5844. 4:47:42मजबूर करना भी ठीक नहीं होगा। नीलिमा के
  5845. 4:47:46चेहरे पर [संगीत] तुरंत राहत और खुशी आ
  5846. 4:47:48गई। थैंक यू भाभी। सच कहूं तो मुझे डर था
  5847. 4:47:53कि [संगीत] आपको मेरी बात बुरी लग जाएगी।
  5848. 4:47:55मैं आपको दुखी नहीं करना चाहती थी। लेकिन
  5849. 4:47:58अपने भाई के मामले [संगीत] में मैं थोड़ा
  5850. 4:48:00सा भी समझौता नहीं कर सकती। उन्हें जो
  5851. 4:48:03दूंगी सबसे अच्छा [संगीत] ही दूंगी। फिर
  5852. 4:48:06उसे जैसे अचानक वहां रुकना याद आया उसने
  5853. 4:48:10मेघा की तरफ देखा [संगीत] और बोली अच्छा
  5854. 4:48:13भाभी आप लोग आराम से अपने लिए शॉपिंग
  5855. 4:48:15कीजिए। मुझे भी अभी कुछ और चीजें देखनी
  5856. 4:48:18है। मैं जरा मेघा के साथ आगे जाकर देखती
  5857. 4:48:22हूं।
  5858. 4:48:24नीलिमा वहां से निकलने ही वाली थी कि
  5859. 4:48:26कनिका ने अचानक उसे रोक लिया। एक मिनट
  5860. 4:48:29[संगीत] नीलिमा।
  5861. 4:48:32नीलिमा रुक गई और पलट कर कनिका की तरफ
  5862. 4:48:35देखने [संगीत] लगी। कनिका ने कुछ पल उसे
  5863. 4:48:38देखा। फिर सहज बनने की कोशिश करते हुए
  5864. 4:48:40पूछा।
  5865. 4:48:42एक बात पूछूं? [संगीत] तुम मुझे बताओगी कि
  5866. 4:48:46तुम्हारे भाई ने अपने लिए किस लड़की को
  5867. 4:48:48पसंद किया है?
  5868. 4:48:50नीलिमा [संगीत] के चेहरे पर हल्की मुस्कान
  5869. 4:48:52आई। कनिका ने बात को और साफ करते हुए
  5870. 4:48:55पूछा। या यूं कहूं आखिर वो लड़की कौन है
  5871. 4:49:00[संगीत] जिससे तुम्हारे भाई की शादी होने
  5872. 4:49:01वाली है?
  5873. 4:49:03नीलिमा ने एक पल के लिए कनिका की आंखों
  5874. 4:49:05में देखा [संगीत] जैसे वह उसके सवाल के
  5875. 4:49:08पीछे छिपी बेचैनी को समझ रही हो। फिर बहुत
  5876. 4:49:11सहजता [संगीत] से बोली माफ कीजिएगा भाभी।
  5877. 4:49:15लेकिन अभी यह बात किसी को पता नहीं है।
  5878. 4:49:18इसलिए मैं आपको [संगीत] भी नहीं बता सकती।
  5879. 4:49:21कनिका के चेहरे पर निराशा आई। लेकिन
  5880. 4:49:24नीलिमा ने [संगीत] तुरंत आगे कहा, वैसे
  5881. 4:49:27आपको ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।
  5882. 4:49:30जैसे ही सगाई [संगीत] की डेट फाइनल होगी,
  5883. 4:49:32यह खबर पूरी दुनिया को पता चल जाएगी और तब
  5884. 4:49:36आप भी तो उस पार्टी में [संगीत] होंगी।
  5885. 4:49:38उसने मुस्कुरा कर कहा, फिर आप उस लड़की से
  5886. 4:49:41आमने-सामने मिल लेना।
  5887. 4:49:44नाम जानने की क्या जरूरत है? कनिका
  5888. 4:49:47[संगीत] कुछ नहीं बोली। नीलिमा मेघा के
  5889. 4:49:50साथ वहां से आगे बढ़ गई। जैसे ही नीलिमा
  5890. 4:49:53[संगीत] कुछ दूर गई, कनिका ने तुरंत कुणाल
  5891. 4:49:55और प्रतीक की तरफ देखा।
  5892. 4:49:58तुम दोनों को भी नहीं पता कि शौर्य की
  5893. 4:50:00सगाई [संगीत] किससे होने वाली है। कुणाल
  5894. 4:50:04ने गहरी सांस लेते हुए कहा, तुम्हें क्या
  5895. 4:50:07बताऊं कनिका? मैं खुद इस बात से हैरान
  5896. 4:50:10[संगीत] हूं। एक ही दिन में आखिर ऐसा क्या
  5897. 4:50:12हो गया कि शौर्य ने अपने लिए लड़की पसंद
  5898. 4:50:15कर ली?
  5899. 4:50:17प्रतीक ने उसकी तरफ देखा तो कुणाल ने आगे
  5900. 4:50:19कहा और सिर्फ लड़की [संगीत] पसंद ही नहीं
  5901. 4:50:22की। लगता है सगाई तक की तैयारी शुरू हो गई
  5902. 4:50:26है। तभी तो नीलिमा रिंग खरीदने यहां तक आ
  5903. 4:50:29गई।
  5904. 4:50:30कनिका की बेचैनी बढ़ गई। [संगीत] आखिर कौन
  5905. 4:50:34है वह लड़की? उसके मुंह से अनायास निकला।
  5906. 4:50:37कुछ पल तक वहां खामोशी रही। तभी अचानक
  5907. 4:50:40प्रतीक [संगीत] की आंखें सिकुड़ गई। जैसे
  5908. 4:50:43उसके दिमाग में कोई बात कौद गई हो। वह
  5909. 4:50:46उत्साहित होकर कुणाल की तरफ मुड़ा। एक
  5910. 4:50:49मिनट। कहीं शौर्य जिस लड़की से सगाई करने
  5911. 4:50:52वाला है, वह शिप्रा तो नहीं?
  5912. 4:50:56शिप्रा का नाम सुनते [संगीत] ही कनिका की
  5913. 4:50:58आंखें भी सिकुड़ गई। उसे तुरंत विराज की
  5914. 4:51:01कही हुई बातें याद [संगीत] आ गई। होटल
  5915. 4:51:03पैराडाइज में उसके जाने के बाद शिप्रा का
  5916. 4:51:06शौर्य से मिलने आना और विराज का उन दोनों
  5917. 4:51:09को आपत्तिजनक स्थिति में देखना।
  5918. 4:51:12लेकिन कनिका ने [संगीत] अपने चेहरे पर कुछ
  5919. 4:51:13जाहिर नहीं होने दिया। वह प्रतीक की तरफ
  5920. 4:51:16देखते हुए बोली, तुम्हें अचानक ऐसा क्यों
  5921. 4:51:20लगा कि वह लड़की शिप्रा हो सकती है?
  5922. 4:51:23प्रतीक ने कहा, क्योंकि मेरे पास इसकी एक
  5923. 4:51:26वजह है। फिर उसने वह पूरी बात बता दी कि
  5924. 4:51:30उसने एक बार शौर्य को शिप्रा के [संगीत]
  5925. 4:51:32साथ जबरदस्ती करते हुए देखा था।
  5926. 4:51:35लेकिन जब एक दिन पहले [संगीत] उसने अपने
  5927. 4:51:38भाइयों के सामने शौर्य की पोल खोलनी चाही
  5928. 4:51:40तो शौर्य ने साफ इंकार कर दिया और सिर्फ
  5929. 4:51:43शौर्य ही नहीं जब सबके सामने शिप्रा से इस
  5930. 4:51:46बारे में पूछा गया तो [संगीत] उसने भी इस
  5931. 4:51:49बात से इंकार कर दिया बल्कि उसने तो शौर्य
  5932. 4:51:52को ही सही ठहरा दिया। प्रतीक के [संगीत]
  5933. 4:51:55चेहरे पर उस समय की बेइज्जती का दर्द फिर
  5934. 4:51:57उभर आया। उस दिन मेरे भाइयों के सामने
  5935. 4:52:00मेरी ऐसी बेइज्जती हुई कि मैं कुछ बोल ही
  5936. 4:52:03नहीं पाया।
  5937. 4:52:05लेकिन उनकी बातों से हमें उसी वक्त शक हो
  5938. 4:52:08गया था कि इन दोनों के बीच कुछ ना कुछ
  5939. 4:52:10जरूर चल रहा है। कनिका चुपचाप उसकी बात
  5940. 4:52:14सुनती रही। प्रतीक की बातें सुनकर [संगीत]
  5941. 4:52:17अब उसका शक भी गहरा गया था। कल शिप्रा से
  5942. 4:52:21हुई अपनी बातचीत उसे याद आने लगी। शिप्रा
  5943. 4:52:24ने शौर्य के बारे में खुलकर कुछ नहीं कहा
  5944. 4:52:26था।
  5945. 4:52:27यहां तक कि [संगीत] जब उसने शिप्रा से
  5946. 4:52:29विराज से मिलने के लिए कहा था तब भी
  5947. 4:52:32शिप्रा उस बात को टालने की कोशिश करती रही
  5948. 4:52:34थी। कनिका का दिल अपने विराज भाई के लिए
  5949. 4:52:38[संगीत] दुखने लगा। उसे याद आया कि विराज
  5950. 4:52:41शिप्रा को कितना पसंद करने लगे थे। फिर
  5951. 4:52:44उसके मन में एक और सवाल उठा। कहीं शौर्य
  5952. 4:52:48और शिप्रा को करीब लाने की वजह वह खुद तो
  5953. 4:52:50नहीं थी।
  5954. 4:52:52अगर उसने शिप्रा को शौर्य को रिझाने के
  5955. 4:52:55लिए नहीं कहा होता तो शायद दोनों कभी
  5956. 4:52:57[संगीत] इतने करीब नहीं आते। लेकिन एक बात
  5957. 4:53:01अब भी कनिका की समझ से बाहर [संगीत] थी।
  5958. 4:53:04जिस शिप्रा की नजर में शौर्य एक नंबर का
  5959. 4:53:07लड़कीबाज था [संगीत] वही शिप्रा अचानक
  5960. 4:53:10उसके प्यार में कैसे पड़ सकती थी? और अगर
  5961. 4:53:13वह सच में शौर्य से प्यार करने लगी थी तो
  5962. 4:53:16फिर कनिका से अपनी बातें [संगीत] छिपाने
  5963. 4:53:18क्यों लगी थी? कनिका का दिमाग सवालों के
  5964. 4:53:21जाल में उलझ गया। उसे लगा कि उसे जल्द से
  5965. 4:53:25जल्द शिप्रा से मिलकर बात करनी होगी। वो
  5966. 4:53:28इतनी आसानी से हार मानने वाली नहीं थी।
  5967. 4:53:31कनिका को इस तरह सोच में डूबा [संगीत]
  5968. 4:53:33देखकर कुणाल ने उसकी तंद्रा भंग करते हुए
  5969. 4:53:36कहा। तुम किस सोच में खो गई? अब इतना मत
  5970. 4:53:41[संगीत] सोचो। जो भी होगा देर सवेेर पता
  5971. 4:53:43चल ही जाएगा। फिर उसने व्यंग से कहा। मुझे
  5972. 4:53:47तो उस बेचारी शिप्रा पर तरस आ रहा है जो
  5973. 4:53:50उस निखट्टू के साथ फंसने जा रही है। कनिका
  5974. 4:53:54कुछ बोलती [संगीत] उससे पहले काफी देर से
  5975. 4:53:56सबकी बातें सुन रही नंदिनी ने अचानक कहा।
  5976. 4:54:00एक बात पूछूं? [संगीत]
  5977. 4:54:02कहीं यह शिप्रा वही लड़की तो नहीं है जिसे
  5978. 4:54:05तुमने पहले शौर्य को रिझाने के लिए कहा
  5979. 4:54:07था। नंदिनी की बात सुनते ही प्रतीक
  5980. 4:54:10[संगीत] और कुणाल दोनों कनिका की तरफ
  5981. 4:54:12देखने लगे। प्रतीक के चेहरे पर साफ हैरानी
  5982. 4:54:16थी।
  5983. 4:54:17क्या मतलब तुम शिप्रा को पहले से जानती
  5984. 4:54:20हो? कुणाल ने भी तुरंत पूछा। कनिका समझ गई
  5985. 4:54:24कि अब उसके पास सच छिपाने [संगीत]
  5986. 4:54:26का कोई रास्ता नहीं था। उसने गहरी सांस ली
  5987. 4:54:29और आखिरकार बोली हां मैं शिप्रा को
  5988. 4:54:34[संगीत] पहले से जानती हूं बल्कि सिर्फ
  5989. 4:54:36जानती ही नहीं हम दोनों बहुत अच्छी दोस्त
  5990. 4:54:39हैं। कुणाल और प्रतीक ध्यान [संगीत] से
  5991. 4:54:42उसकी तरफ देखने लगे। कनिका ने आगे कहा हम
  5992. 4:54:46दोनों क्लासमेट हुआ करती थी। हॉस्टल में
  5993. 4:54:49भी हम [संगीत] एक ही रूम शेयर करती थी।
  5994. 4:54:52कुछ पल रुक कर उसने कहा जब कुछ दिनों पहले
  5995. 4:54:55दादाजी ने [संगीत] शौर्य से मेरी सगाई
  5996. 4:54:57पक्की कर दी थी। तब मेरे सामने सबसे बड़ी
  5997. 4:55:00समस्या [संगीत] यही थी कि मैं उस रिश्ते
  5998. 4:55:02से निकलूं कैसे? मेरे पास कोई रास्ता नहीं
  5999. 4:55:05था। कनिका की आवाज [संगीत] में अब पुरानी
  6000. 4:55:08परेशानी साफ झलक रही थी। तभी मैंने शिप्रा
  6001. 4:55:12से कहा था कि वह शौर्य को [संगीत] रिझाने
  6002. 4:55:14की कोशिश करें। मेरा मकसद सिर्फ इतना था
  6003. 4:55:18कि अगर शौर्य उसके पीछे पड़ जाए तो मैं
  6004. 4:55:20दादाजी के [संगीत] सामने उसके कररेक्टर पर
  6005. 4:55:22सवाल उठाकर इस सगाई से इंकार कर सकूं।
  6006. 4:55:26प्रतीक और कुणाल दोनों कुछ पल तक उसे
  6007. 4:55:28देखते रह गए। अचानक प्रतीक के चेहरे पर एक
  6008. 4:55:31नया ख्याल आया। वो बोला
  6009. 4:55:35लेकिन एक बात सोचो कहीं ऐसा तो नहीं कि
  6010. 4:55:38शिप्रा अभी भी शौर्य के साथ वही नाटक कर
  6011. 4:55:41रही हो। कनिका ने उसकी [संगीत] तरफ देखा।
  6012. 4:55:44प्रतीक ने अपनी बात आगे बढ़ाई। हो सकता है
  6013. 4:55:48[संगीत] उसने शौर्य को अभी भी इसी भ्रम
  6014. 4:55:50में रखा हो कि वह उससे सगाई करेगी। और
  6015. 4:55:53जैसे ही तुम्हारी और कुणाल की शादी हो
  6016. 4:55:55जाएगी, वह शौर्य का यह भ्रम भी तोड़ दे कि
  6017. 4:55:58वह उससे [संगीत] शादी करने वाली है।
  6018. 4:56:00प्रतीक की बात सुनकर कनिका चुप हो गई।
  6019. 4:56:03उसके मन में भी पहली बार उम्मीद की एक
  6020. 4:56:06किरण जगी। [संगीत]
  6021. 4:56:07क्या पता प्रतीक सही कह रहा हो। शायद
  6022. 4:56:10शिप्रा अभी भी वही कर रही थी जो [संगीत]
  6023. 4:56:13उसने उससे कहा था। शायद शौर्य को वह सिर्फ
  6024. 4:56:16एक भ्रम में रखे हुए थी। और अगर ऐसा था तो
  6025. 4:56:19अभी भी सब कुछ खत्म नहीं हुआ [संगीत] था।
  6026. 4:56:22कनिका के मन को जैसे अचानक राहत मिल गई।
  6027. 4:56:26उसने मन ही मन तय कर लिया कि वह जल्द से
  6028. 4:56:28[संगीत] जल्द शिप्रा से मिलेगी और इस पूरी
  6029. 4:56:30गु्थी को सुलझाएगी। अब उसे वहां रुकने की
  6030. 4:56:34कोई जरूरत नहीं थी। उसने जल्दी से अपने
  6031. 4:56:36लिए एक रिंग पसंद की और बाकी [संगीत] की
  6032. 4:56:38खरीदारी भी जल्द-जल्द पूरी कर ली। उसके मन
  6033. 4:56:42में अब सिर्फ एक ही बात थी। उसे शिप्रा से
  6034. 4:56:45बात करनी है। दूसरी तरफ नीलिमा मेघा के
  6035. 4:56:48साथ वहां से निकल तो गई थी लेकिन उसका
  6036. 4:56:51ध्यान अब भी कनिका, कुणाल और प्रतीक की
  6037. 4:56:53तरफ ही था। उसके चेहरे पर एक अलग ही
  6038. 4:56:56संतुष्टि थी। आखिर उसने कनिका को वो रिंग
  6039. 4:57:00लेने नहीं दी थी। दरअसल आज सुबह ही जब
  6040. 4:57:03कल्पना जी ने शिप्रा और शौर्य दोनों की
  6041. 4:57:05अनामिका उंगली खाली देखी [संगीत] थी। तभी
  6042. 4:57:08उन्होंने उन दोनों के लिए अंगूठियां
  6043. 4:57:10खरीदने का फैसला कर लिया था। खाना खाने के
  6044. 4:57:13बाद कल्पना [संगीत] जी सूर्यभान जी के साथ
  6045. 4:57:15मॉडल टाउन से निकल गई थी। लेकिन नीलिमा
  6046. 4:57:18मेघा के साथ वहीं रुक गई थी। कल्पना जी की
  6047. 4:57:22मर्जी से ही दोनों मार्केटिंग के लिए बिग
  6048. 4:57:24बुल आई थी। सूर्यभान जी ने पहले ही विक्रम
  6049. 4:57:27को फोन करके निर्देश दे दिया था कि जब
  6050. 4:57:30नीलिमा और मेघा मार्केटिंग के लिए बिग
  6051. 4:57:32बबुल जाएं तो वह वहां सब कुछ देख ले।
  6052. 4:57:35विक्रम को बिगबुल जाने की जरूरत भी नहीं
  6053. 4:57:37पड़ी। उसने फोन पर [संगीत] ही मोहित रैना
  6054. 4:57:40को दिशा निर्देश दे दिए थे कि उसे क्या
  6055. 4:57:42करना है। कुछ और खरीदारी करने के बाद
  6056. 4:57:45[संगीत] नीलिमा और मेघा भी बिग बुल से
  6057. 4:57:48निकलकर मॉडल टाउन के लिए रवाना हो गई।
  6058. 4:57:51नीलिमा मन ही मन सोच रही थी कि कनिका
  6059. 4:57:53[संगीत] जरूर इस बात को लेकर परेशान होगी
  6060. 4:57:56कि कल ही उसने शौर्य से शादी करने से
  6061. 4:57:58इंकार किया था और आज अचानक शौर्य ने किसी
  6062. 4:58:02दूसरी लड़की को पसंद भी कर लिया और सगाई
  6063. 4:58:05की तैयारी भी शुरू हो गई। जब नीलिमा और
  6064. 4:58:08मेघा घर पहुंची तब तक शिप्रा भी घर आ चुकी
  6065. 4:58:11थी। [संगीत] वो ड्राइंग रूम में बैठी चाय
  6066. 4:58:14पी रही थी। तभी उसकी नजर नीलिमा और मेघा
  6067. 4:58:18पर पड़ी। दोनों के हाथों में दो-दो
  6068. 4:58:21थैलियां थी। [संगीत]
  6069. 4:58:23शिप्रा को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि
  6070. 4:58:25नीलिमा अभी तक यहीं है। वो हैरानी से
  6071. 4:58:29बोली। अरे नीलिमा [संगीत] तुम अभी तक यहीं
  6072. 4:58:32हो।
  6073. 4:58:34नीलिमा ने तुरंत मुंह बनाया।
  6074. 4:58:37क्यों आपको इतनी जल्दी थी मेरे जाने की?
  6075. 4:58:41शिप्रा उसकी बात सुनकर मुस्कुरा पड़ी। यह
  6076. 4:58:44कैसी बातें कर [संगीत] रही हो तुम? मैं
  6077. 4:58:47भला क्यों चाहूंगी कि तुम जाओ?
  6078. 4:58:50मैं तो चाहती हूं मेरी गुड़िया हमेशा मेरे
  6079. 4:58:52पास रहे। उसने नीलिमा का हाथ पकड़ा और
  6080. 4:58:56प्यार से उसे अपने पास बैठा लिया। नीलिमा
  6081. 4:58:59के चेहरे [संगीत] पर तुरंत मुस्कान आ गई।
  6082. 4:59:02बस यही तो सुनना था मुझे। अब आई ना मेरी
  6083. 4:59:06प्यारी भाभी वाली बात। शिप्रा ने प्यार से
  6084. 4:59:09उसका गाल सहलाया और पूछा, "अच्छा अब बताओ"
  6085. 4:59:13मेरी गुड़िया क्या पिएगी? चाय या कॉफी?
  6086. 4:59:16[संगीत]
  6087. 4:59:18नीलिमा ने सिर हिलाते हुए कहा, नहीं अभी
  6088. 4:59:21कुछ नहीं चाहिए। पहले आप मेरे साथ बैठिए।
  6089. 4:59:24[संगीत]
  6090. 4:59:25मैंने आपके लिए कुछ खरीदा है। शिप्रा ने
  6091. 4:59:28हैरानी से उसके हाथ में मौजूद थैले को
  6092. 4:59:30देखा। मेरे लिए?
  6093. 4:59:33लेकिन तुमने मेरे लिए खरीदारी क्यों की?
  6094. 4:59:36नीलिमा ने मुस्कुराते हुए कहा, वो तो आप
  6095. 4:59:39मेरी परम पूज्य माता जी [संगीत] से पूछिए।
  6096. 4:59:42उन्होंने हुक्म दिया और आपकी यह गुड़िया
  6097. 4:59:45बस हुक्म बजाने निकल पड़ी। शिप्रा हंस
  6098. 4:59:48पड़ी। नीलिमा ने थैले में हाथ डाला और एक
  6099. 4:59:52[संगीत] खूबसूरत नीले रंग का बॉक्स निकाल
  6100. 4:59:54लिया।
  6101. 4:59:56बाकी सब बाद में पहले यह देखिए। और बताइए
  6102. 5:00:00आपको कैसी लगी?
  6103. 5:00:02शिप्रा ने उत्सुकता [संगीत] से बॉक्स उसके
  6104. 5:00:04हाथ से लिया। उसने धीरे से बॉक्स खोला।
  6105. 5:00:08अंदर रखी खूबसूरत जोड़ी [संगीत] रिंग्स को
  6106. 5:00:11देखते ही उसकी आंखों में चमक आ गई। कुछ पल
  6107. 5:00:15तक वो उन रिंग्स को देखती रही। फिर उसकी
  6108. 5:00:18नजर नीलिमा पर गई। उसके चेहरे पर खुशी और
  6109. 5:00:22आश्चर्य दोनों थे। नीलिमा तुमने यह पसंद
  6110. 5:00:27की है? नीलिमा मुस्कुरा [संगीत] दी।
  6111. 5:00:30शिप्रा ने फिर रिंग्स को देखा और खुशी से
  6112. 5:00:33बोली, "यह तो सच में बहुत [संगीत] खूबसूरत
  6113. 5:00:36है।" लेकिन शिप्रा इस बात से पूरी तरह
  6114. 5:00:39अनजान थी कि जिस [संगीत] रिंग को देखकर
  6115. 5:00:41उसकी आंखों में खुशी चमक रही थी, कुछ देर
  6116. 5:00:44पहले उसी रिंग के लिए कनिका की आंखों में
  6117. 5:00:47भी चाहत जगी थी। और नीलिमा ने उसे कनिका
  6118. 5:00:50[संगीत] को देने से साफ इंकार कर दिया था।
  6119. 5:00:54अब देखना यह [संगीत] था कि जब शिप्रा को
  6120. 5:00:56इस बात का पता चलेगा तो वह क्या करेगी।
  6121. 5:01:00क्या [संगीत] वो नीलिमा से नाराज होगी या
  6122. 5:01:03फिर उसे समझ आ जाएगा कि नीलिमा ने यह रिंग
  6123. 5:01:06आखिर किसके लिए चुनी है? और दूसरी तरफ
  6124. 5:01:10कनिका शौर्य की सगाई का सच [संगीत] जानने
  6125. 5:01:12के लिए शिप्रा से मिलने वाली थी। क्या
  6126. 5:01:15कनिका शिप्रा के मुंह से वह [संगीत] सच
  6127. 5:01:17निकलवा पाएगी जिसे जानने के लिए उसका दिल
  6128. 5:01:20बेताब था? या फिर इस कहानी के पीछे कोई
  6129. 5:01:24ऐसा राज छिपा है। रिंग पसंद आई। यह देखकर
  6130. 5:01:28[संगीत] नीलिमा भी खुश थी। अचानक उसकी नजर
  6131. 5:01:31रिंग की कीमत पर गई। [संगीत]
  6132. 5:01:34₹1 लाख देखकर उसकी आंखें बड़ी हो गई। इतनी
  6133. 5:01:39महंगी रिंग इसे लेने की क्या जरूरत थी?
  6134. 5:01:44क्या भाभी [संगीत] अब भी आप इसकी कीमत देख
  6135. 5:01:46रही हैं?
  6136. 5:01:48यह कितनी भी कीमती हो लेकिन आपसे ज्यादा
  6137. 5:01:51कीमती नहीं है। नीलिमा शिप्रा के दोनों
  6138. 5:01:55गाल खींचते हुए बोली [संगीत]
  6139. 5:01:57फिर भी इतनी महंगी रिंग की कोई जरूरत नहीं
  6140. 5:02:01थी। शिप्रा विरोध करती हुई बोली तो ठीक
  6141. 5:02:05है। फिर आप यही बात मां से कहना। फिर
  6142. 5:02:09देखना [संगीत] वो क्या कहती हैं। नीलिमा
  6143. 5:02:12बात अपनी मां पर डालते हुए बोली। वो अच्छी
  6144. 5:02:15तरह जानती थी कि शिप्रा अपनी सास [संगीत]
  6145. 5:02:17से यह कहने की हिम्मत नहीं करेगी। रख लो
  6146. 5:02:21भाभी। आपको नहीं पता इस रिंग के पीछे
  6147. 5:02:24कितनी बड़ी कहानी बनने वाली थी। मेघा
  6148. 5:02:28शरारत भरे स्वर में बोली। शिप्रा
  6149. 5:02:31बड़ी-बड़ी आंखों से मेघा की ओर देखते हुए
  6150. 5:02:33बोली, "क्यों ऐसा क्या होने वाला था? क्या
  6151. 5:02:39होने वाला [संगीत] था? आपको नहीं पता?
  6152. 5:02:41कुणाल, प्रतीक, कुणाल की होने वाली वाइफ
  6153. 5:02:44कनिका और उसकी बहन नंदिनी भी मार्केटिंग
  6154. 5:02:47के लिए आई हुई थी। मजेदार बात यह है कि
  6155. 5:02:51कनिका को भी यही रिंग पसंद आ गई थी।
  6156. 5:02:54उन्होंने तो नीलिमा से यह तक [संगीत] कह
  6157. 5:02:56दिया था कि क्या वो उनके लिए यह रिंग छोड़
  6158. 5:02:58सकती है? मेघा वहां घटी घटना को याद करते
  6159. 5:03:02हुए बोली। कनिका के बारे में जानकर शिप्रा
  6160. 5:03:05को भी आश्चर्य हुआ। उसने नीलिमा की ओर
  6161. 5:03:09देखते हुए पूछा। कनिका से तुमने क्या कहा?
  6162. 5:03:13कहना क्या था? मैंने मना कर दिया। मैंने
  6163. 5:03:16बोल दिया कि मुझे अपने [संगीत] भैया भाभी
  6164. 5:03:18के लिए बेस्ट चीज ही चाहिए। इसलिए मैं इस
  6165. 5:03:22रिंग के जोड़े को छोड़ नहीं सकती। नीलिमा
  6166. 5:03:25प्यार से शिप्रा को देखते हुए बोली।
  6167. 5:03:28शिप्रा को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि नीलिमा
  6168. 5:03:31ने उसके लिए इस रिंग के जोड़े को छोड़ने
  6169. 5:03:33से मना कर दिया था। वो जिज्ञासावश खुद को
  6170. 5:03:36पूछने से रोक नहीं सकी। तो क्या कनिका
  6171. 5:03:40तुम्हारी बात मान गई? उसने कुछ कहा नहीं।
  6172. 5:03:43कुणाल भैया को तो थोड़ा बुरा लगा लेकिन
  6173. 5:03:46[संगीत] कनिका भाभी मेरी भावना समझ गई।
  6174. 5:03:49हां, उन्हें यह जानने की बड़ी जिज्ञासा
  6175. 5:03:52[संगीत]
  6176. 5:03:52थी कि शौर्य भैया की सगाई किसके साथ होने
  6177. 5:03:55वाली है? नीलिमा सोचते हुए बोली जब कनिका
  6178. 5:04:00ने तुमसे पूछा कि शौर्य की सगाई किसके साथ
  6179. 5:04:03होने वाली है? तो तुमने क्या कहा?
  6180. 5:04:06शिप्रा की जिज्ञासा बढ़ती ही जा [संगीत]
  6181. 5:04:08रही थी। मैंने कह दिया कि जब होगी तो सारी
  6182. 5:04:12दुनिया को पता चल जाएगा और उसमें आप भी तो
  6183. 5:04:15आमंत्रित हो ही। उन्हें सबसे बड़ा झटका तो
  6184. 5:04:19इस बात से लगा था कि एक [संगीत] दिन पहले
  6185. 5:04:21ही उन्होंने शौर्य भैया को नापसंद किया था
  6186. 5:04:24और फिर एक ही दिन में उन्होंने किस
  6187. 5:04:26[संगीत] लड़की को अपने लिए पसंद कर लिया।
  6188. 5:04:30नीलिमा कनिका की बात याद करके मजे ले रही
  6189. 5:04:32थी।
  6190. 5:04:33इसके बाद भी शिप्रा नीलिमा [संगीत] से
  6191. 5:04:35कनिका के साथ हुई बातचीत की एक-एक बात
  6192. 5:04:38पूछती रही। इतना कुछ हो गया है तो जरूर
  6193. 5:04:42उसका फोन भी मेरे पास आएगा। शिप्रा सोचते
  6194. 5:04:45[संगीत] हुए बोली नीलिमा ने हैरानी से
  6195. 5:04:48शिप्रा की ओर देखा। आपके पास कनिका भाभी
  6196. 5:04:52का फोन आएगा? क्या आप कनिका भाभी को पहले
  6197. 5:04:55से जानती हैं? वो शक भरी नजरों से शिप्रा
  6198. 5:04:59को देखने लगी। हम दोनों [संगीत] अच्छे
  6199. 5:05:01दोस्त हैं।
  6200. 5:05:03हम दोनों कोलाज के समय हॉस्टल में एक ही
  6201. 5:05:06कमरे को शेयर करते थे। शिप्रा मुस्कुराते
  6202. 5:05:09हुए बोली, नीलिमा और मेघा [संगीत] दोनों
  6203. 5:05:12को यह जानकर हैरानी हुई कि शिप्रा और
  6204. 5:05:15कनिका एक दूसरे की दोस्त थी। अभी नीलिमा
  6205. 5:05:18शिप्रा से कुछ और [संगीत] पूछती तभी
  6206. 5:05:20शिप्रा का फोन रिंग करने लगा। जैसा कि
  6207. 5:05:24शिप्रा को उम्मीद थी। फोन [संगीत] कनिका
  6208. 5:05:26का ही था। उसने मोबाइल की स्क्रीन नीलिमा
  6209. 5:05:29और मेघा को दिखा दी। दोनों को चुप रहने का
  6210. 5:05:32इशारा करके शिप्रा ने फोन उठा लिया। हेलो
  6211. 5:05:37हेलो शिप्रा मुझे तुमसे मिलना है। तुम कब
  6212. 5:05:41मिल सकती हो? कनिका ने फोन उठते ही पूछा।
  6213. 5:05:44[संगीत]
  6214. 5:05:45क्या बात है? सब ठीक तो है? अचानक तुम्हें
  6215. 5:05:49[संगीत] मुझसे मिलने की क्या सूझी? शिप्रा
  6216. 5:05:52अभी कनिका से मिलने से बचना चाहती थी।
  6217. 5:05:55क्या तुमसे मिलने के लिए भी मुझे
  6218. 5:05:57रिक्वेस्ट करनी पड़ेगी? कनिका नाराजगी भरे
  6219. 5:06:00स्वर में बोली, अरे ऐसा कुछ नहीं है। ठीक
  6220. 5:06:05है। अगर तुमको मिलना ही है तो कल सुबह
  6221. 5:06:08मिलते हैं। बताओ कहां [संगीत] मिलना है?
  6222. 5:06:11शिप्रा ने पूछा।
  6223. 5:06:14ठीक है। फिर कल वहीं होटल पैराडाइज
  6224. 5:06:16[संगीत] में मिलते हैं। कनिका ने जवाब
  6225. 5:06:19दिया। इसके बाद [संगीत] शिप्रा ने फोन रख
  6226. 5:06:22दिया। नीलिमा जो दोनों की बातचीत सुन रही
  6227. 5:06:25थी। शिप्रा के फोन रखते [संगीत] ही पूछ
  6228. 5:06:28बैठी
  6229. 5:06:29वो किस लिए आपसे मिलना चाहती हैं? उसके मन
  6230. 5:06:33में यह [संगीत] शक भर गया होगा कि शौर्य
  6231. 5:06:35से जिसकी सगाई होने वाली है वो लड़की कहीं
  6232. 5:06:38मैं ही तो नहीं हूं। बस इसी बात को कंफर्म
  6233. 5:06:41करने के लिए वो [संगीत] मुझसे मिलना चाहती
  6234. 5:06:43होगी। शिप्रा मुस्कुराते हुए बोली पर
  6235. 5:06:47कनिका भाभी को आप पर शक कैसे हुआ?
  6236. 5:06:51नीलिमा के साथ-साथ मेघा के चेहरे पर भी
  6237. 5:06:54[संगीत] असमंजस के भाव थे। इसके पीछे भी
  6238. 5:06:57एक कहानी है। इसके बाद शिप्रा ने नीलिमा
  6239. 5:07:01और मेघा को शुरुआत [संगीत] से सारी कहानी
  6240. 5:07:03सुना दी कि किस तरह कनिका ने उसे चारे की
  6241. 5:07:07तरह इस्तेमाल करने की सोची थी और कैसे
  6242. 5:07:09उसका पहला प्लान शिप्रा को [संगीत]
  6243. 5:07:11इस्तेमाल करके शौर्य से अपनी सगाई
  6244. 5:07:13तुड़वाने का था। सारी बात सुनकर [संगीत]
  6245. 5:07:17नीलिमा और मेघा आश्चर्य से शिप्रा को
  6246. 5:07:19देखने लगी। आप कैसे यह दोहरी [संगीत]
  6247. 5:07:22जिंदगी जी पा रही हैं भाभी? आप कनिका भाभी
  6248. 5:07:25को सब सच क्यों नहीं बता देती? वो तो
  6249. 5:07:28इसलिए था क्योंकि पापा जी ने शौर्य की
  6250. 5:07:31हकीकत जाने [संगीत] बिना कनिका के दादाजी
  6251. 5:07:34को शौर्य की शादी कनिका से करने का वचन दे
  6252. 5:07:37दिया था। इसलिए मुझे कनिका से अपनी हकीकत
  6253. 5:07:40छुपानी पड़ रही थी।
  6254. 5:07:42लेकिन अब वैसी मजबूरी नहीं है। इसलिए अब
  6255. 5:07:45धीरे-धीरे कनिका के सामने अपनी सच्चाई
  6256. 5:07:47[संगीत] लानी है। एक बार कनिका की शादी
  6257. 5:07:49कुणाल से हो जाएगी तो फिर हमारे रिश्ते की
  6258. 5:07:52पर्देदारी की जरूरत भी नहीं रहेगी। शिप्रा
  6259. 5:07:55ने नीलिमा को पूरी वास्तविकता से परिचित
  6260. 5:07:58कराया। दूसरी तरफ नताशा एक कमरे की बालकनी
  6261. 5:08:01में खड़ी आसमान में चमकते [संगीत] चांद को
  6262. 5:08:04एक टक देखे जा रही थी। चांद की रोशनी में
  6263. 5:08:08उसका चेहरा चमक रहा था। तभी शौर्य कमरे
  6264. 5:08:11[संगीत] से निकलकर बालकनी में आया। उसने
  6265. 5:08:13नताशा को चांद को घूरते देखा तो उसके बगल
  6266. 5:08:16में खड़ा होकर पूछा, "तुम यहां अकेले क्या
  6267. 5:08:20कर रही हो? नीचे इतना हंगामा हो रहा है और
  6268. 5:08:23[संगीत] तुम यहां हो। नीचे चल कर देखो। सब
  6269. 5:08:26कितना मजा कर रहे हैं। नताशा शौर्य की
  6270. 5:08:29[संगीत]
  6271. 5:08:30ओर पलटी और उसकी आंखों में देखते हुए
  6272. 5:08:32बोली। मजा तो उन लोगों के लिए है। मेरे
  6273. 5:08:35लिए तो सजा [संगीत] है। फिर अपनी बात जारी
  6274. 5:08:38रखते हुए उसने पूछा अच्छा मेरी छोड़ो।
  6275. 5:08:41[संगीत]
  6276. 5:08:42तुम तो नीचे मजा कर सकते थे। फिर तुम
  6277. 5:08:45क्यों यहां आ गए? वो वो तो तुमको नीचे
  6278. 5:08:48नहीं देखा इसलिए तुम्हें ढूंढता हुआ मैं
  6279. 5:08:51यहां आ गया। शौर्य लड़खड़ाती [संगीत]
  6280. 5:08:53जुबान में बोला। नताशा फीकी हंसी-हंसते
  6281. 5:08:57हुए बोली, तुम्हें तो
  6282. 5:08:59[संगीत]
  6283. 5:08:59झूठ बोलना भी नहीं आता। सीधे-सीधे यह
  6284. 5:09:02क्यों नहीं कहते कि तुम्हें मेरी चिंता
  6285. 5:09:04होने लगी थी कि मैं ठीक तो हूं या नहीं।
  6286. 5:09:07इसीलिए तुम यह जांचने के लिए
  6287. 5:09:09[संगीत]
  6288. 5:09:09यहां आ गए। यह तुम कैसी बात कर रही हो?
  6289. 5:09:13अकेले यहां रहने से अच्छा है तुम भी नीचे
  6290. 5:09:15चलो। [संगीत]
  6291. 5:09:16नीचे सबके बीच तुम्हारा मन लग जाएगा।
  6292. 5:09:19बोलते हुए शौर्य के चेहरे पर गहरी संवेदना
  6293. 5:09:22नजर आने लगी। नताशा उसकी ओर देखते हुए
  6294. 5:09:25[संगीत] बोली। इस तरह मन को बहलाने से
  6295. 5:09:28कहीं मन बहलता है? अगर तुम्हें सच [संगीत]
  6296. 5:09:30में मेरी चिंता है तो मुझे यहां से दूर ले
  6297. 5:09:33चलो। बहुत दूर जहां चाहकर भी कोई हमें
  6298. 5:09:36ढूंढ ना पाए। बोलो करोगे [संगीत] ऐसा?
  6299. 5:09:40इतनी हिम्मत है तुम में? बोलते हुए नताशा
  6300. 5:09:43ने दोनों हाथों से शौर्य की शर्ट पकड़ ली।
  6301. 5:09:46फिर उसके करीब जाकर उसकी [संगीत] आंखों
  6302. 5:09:48में देखते हुए बोली, "मुझे तुम्हारी यह
  6303. 5:09:51नकली संवेदना नहीं चाहिए। मुझे तुम्हारा
  6304. 5:09:54साथ चाहिए।
  6305. 5:09:56शौर्य जरवत [संगीत] सा खड़ा नताशा को
  6306. 5:09:59देखता रह गया। उसकी आंखों में जैसे एक
  6307. 5:10:01जलजला सा नजर आने लगा। अचानक उसके [संगीत]
  6308. 5:10:05चेहरे पर एक निश्चित इरादा कर लेने वाला
  6309. 5:10:07भाव आया। उसने नताशा के दोनों कंधे थामते
  6310. 5:10:11हुए कहा। सोच लो अगर एक बार इस रास्ते
  6311. 5:10:15[संगीत] पर निकल गया तो फिर वापसी की कोई
  6312. 5:10:17संभावना नहीं रहेगी।
  6313. 5:10:20उसके बाद सारी दुनिया हमारी दुश्मन होगी।
  6314. 5:10:24शौर्य की बातें सुनकर नताशा का चेहरा खिल
  6315. 5:10:27उठा। वो एक झटके से [संगीत] शौर्य के गले
  6316. 5:10:30लग गई। मुझे नहीं आना है वापस। जहां मेरी
  6317. 5:10:34भावनाओं की कोई कदर नहीं वहां मैं वापस
  6318. 5:10:37आकर करूंगी भी क्या? मुझे वापस नहीं आना।
  6319. 5:10:41मुझे वापस नहीं आना। कट कट। तभी वहां
  6320. 5:10:45रत्नाकर शेट्टी की आवाज गूंजी और तालियों
  6321. 5:10:48की गड़गड़ाहट से पूरी [संगीत] बालकनी गूंज
  6322. 5:10:51उठी। रत्नाकर शेट्टी शौर्य और नताशा के
  6323. 5:10:54पास आया। क्या परफॉर्मेंस दी है आपने
  6324. 5:10:57मिस्टर शौर्य? [संगीत] आपके चेहरे पर क्या
  6325. 5:11:00भाव आया था? जवाब नहीं आपका। कोई आपके काम
  6326. 5:11:03को देखकर यह नहीं कह सकता कि आपने पहली
  6327. 5:11:06बार कैमरा फेस किया है। बस बस मिस्टर
  6328. 5:11:10शेट्टी। अब इतना भी मुझे हवा में मत
  6329. 5:11:12उड़ाइए कि मैं नीचे ही नहीं आ सकूं। शौर्य
  6330. 5:11:16झेपता हुआ बोला। चलिए ठीक है। जब आप कहते
  6331. 5:11:20हैं तो मैं ज्यादा नहीं बोलता। रत्नाकर
  6332. 5:11:22शेट्टी मुस्कुराते हुए बोला। इसी बीच एक
  6333. 5:11:26[संगीत] लाइटमैन उसके पास आकर बोला, दादा
  6334. 5:11:29अब आगे कहीं और भी लाइट शिफ्ट करनी है
  6335. 5:11:31क्या? नहीं ईशु, आज के लिए सभी का पैकअप
  6336. 5:11:34है। रत्नाकर शेट्टी के पैकअप कहते [संगीत]
  6337. 5:11:37ही बाकी क्रू मेंबर्स के चेहरों पर भी
  6338. 5:11:40खुशी की लहर दौड़ गई। नताशा शौर्य के पास
  6339. 5:11:43आई और उससे बोली आज की तुम्हारी बेहतरीन
  6340. 5:11:47परफॉर्मेंस के लिए तुम्हारी तरफ से पार्टी
  6341. 5:11:50तो होनी चाहिए। अगर ऐसी बात है तो मुझे
  6342. 5:11:53कोई आपत्ति नहीं है। शेट्टी साहब आज पूरी
  6343. 5:11:57क्रू मेंबर को हमारी तरफ से पार्टी है।
  6344. 5:12:00व्यवस्था आप कर दीजिए। शौर्य की इस
  6345. 5:12:03दरियादिली पर एक बार फिर पूरी क्रू के बीच
  6346. 5:12:06उसके लिए तालियां बजने लगी।
  6347. 5:12:09अगले दिन सुबह 9:00 बजे शिप्रा समय से
  6348. 5:12:12होटल पैराडाइज पहुंच गई। उसने कनिका को
  6349. 5:12:16फोन किया। मैं होटल पहुंच गई हूं। बताओ
  6350. 5:12:19कहां आना है? तीन नंबर कैबिन में आ जाओ।
  6351. 5:12:23कनिका ने संक्षिप्त सा जवाब दिया। शिप्रा
  6352. 5:12:27तीन नंबर कैबिन में पहुंची। [संगीत] अंदर
  6353. 5:12:29आते ही दो दिन पहले की यादें उसकी आंखों
  6354. 5:12:32के सामने ताजा हो गई। शिप्रा के अंदर आते
  6355. 5:12:35ही कनिका खड़ी हुई और उससे गले मिली। उसके
  6356. 5:12:39बाद दोनों अपनी-अपनी जगह पर आकर बैठ गई।
  6357. 5:12:42इसी बीच वेटर अंदर आया। कनिका से आर्डर
  6358. 5:12:45लिया और चला [संगीत] गया। कनिका ने अपने
  6359. 5:12:47पर्स से एक कार्ड निकाला और शिप्रा की तरफ
  6360. 5:12:50बढ़ा दिया। यह क्या है? शिप्रा कार्ड हाथ
  6361. 5:12:54में लेते हुए बोली। हाथ में है। देख लो।
  6362. 5:12:58कनिका मुस्कुराते हुए बोली। शिप्रा ने
  6363. 5:13:01कार्ड खोला। यह उसके बर्थडे का कार्ड था।
  6364. 5:13:05साथ ही उसमें उसकी इंगेजमेंट के बारे में
  6365. 5:13:07भी बताया गया था। फाइनली तुम्हारे [संगीत]
  6366. 5:13:10मन की हो गई। अब कुणाल के साथ तो खुश हो?
  6367. 5:13:14शिप्रा ने कार्ड से अपना ध्यान हटाकर
  6368. 5:13:16कनिका की तरफ देखते हुए पूछा।
  6369. 5:13:19हां, सब ठीक ही है। कनिका ने सादा सा जवाब
  6370. 5:13:23दिया। अब बताओ क्या बात है? तुमने सिर्फ
  6371. 5:13:27कार्ड देने के लिए तो मुझे मिलने के लिए
  6372. 5:13:29नहीं बुलाया होगा। शिप्रा कनिका को गहरी
  6373. 5:13:32नजरों से देखते हुए बोली। [संगीत]
  6374. 5:13:34वैसे उसे उम्मीद तो थी कि कनिका ने उसे
  6375. 5:13:37क्यों बुलाया है लेकिन वो कनिका के मुंह
  6376. 5:13:39से ही सुनना चाहती थी। कल मैं कुणाल के
  6377. 5:13:43साथ मार्केटिंग के लिए गई थी। पता है वहां
  6378. 5:13:46मुझे कौन मिला था? कनिका भूमिका बनाते हुए
  6379. 5:13:50बोली। कौन मिली थी? शिप्रा अपनी आंखें
  6380. 5:13:54सिकोड़ते हुए बोली। कल मुझे शौर्य की छोटी
  6381. 5:13:57बहन नीलिमा मिली थी। तुम तो उसे जानती ही
  6382. 5:14:00होगी। कनिका की निगाहें शिप्रा के चेहरे
  6383. 5:14:03पर ही टिकी हुई थी। हां, अच्छी तरह जानती
  6384. 5:14:07हूं। बहुत ही प्यारी लड़की है। शिप्रा
  6385. 5:14:10नीलिमा की तारीफ करते हुए बोली। कल नीलिमा
  6386. 5:14:14ने शौर्य की सगाई के लिए एक जोड़ी रिंग
  6387. 5:14:16खरीदी थी। क्या तुम्हें पता है कि शौर्य
  6388. 5:14:19की सगाई [संगीत] किससे हो रही है? बोलते
  6389. 5:14:21हुए कनिका की नजरें गहरी हो गई।
  6390. 5:14:25क्या शौर्य की भी सगाई हो रही है? यह कब
  6391. 5:14:29हुआ? शिप्रा के चेहरे पर आश्चर्य नजर आया।
  6392. 5:14:33कनिका की निगाहें उसके चेहरे पर ही टिकी
  6393. 5:14:35थी। शिप्रा का आश्चर्य देखकर उसे लगा कि
  6394. 5:14:39उसे इस बारे में सच में कुछ भी पता नहीं
  6395. 5:14:41[संगीत] था। फिर भी अपनी तसल्ली के लिए
  6396. 5:14:43उसने पूछा। क्या तुम्हें इस बारे में कुछ
  6397. 5:14:46नहीं पता है? मुझे भला कैसे पता होगा? अभी
  6398. 5:14:502 दिन पहले ही तो तुमने उसे सगाई करने से
  6399. 5:14:53मना किया था। फिर एक दिन में ही उसने
  6400. 5:14:55किसके साथ सगाई पक्की कर ली? और सबसे बड़ी
  6401. 5:14:58बात वैसे तो वह मुझे दिखाता है कि उसे
  6402. 5:15:02मुझसे बहुत प्यार है।
  6403. 5:15:04[संगीत]
  6404. 5:15:04लेकिन उसने मुझे भी अंधेरे में रखा।
  6405. 5:15:06शिप्रा ने कनिका के सामने यह जताने में
  6406. 5:15:09कोई कसर नहीं छोड़ी कि शौर्य ने उससे अपने
  6407. 5:15:12प्यार का इजहार [संगीत] कर दिया है। इससे
  6408. 5:15:14कनिका का विश्वास शिप्रा पर और पक्का हो
  6409. 5:15:17गया कि उसे सच में शौर्य की सगाई के बारे
  6410. 5:15:20में कुछ पता नहीं था। फिर अचानक शिप्रा के
  6411. 5:15:23दिमाग में कुछ आया। वो कनिका को घूरते हुए
  6412. 5:15:26बोली
  6413. 5:15:28वैसे इस बात से तुम्हें क्यों फर्क पड़
  6414. 5:15:31रहा है कि शौर्य किससे सगाई कर रहा है?
  6415. 5:15:34कनिका कुछ पल चुप रही। फिर दुखी मन से
  6416. 5:15:37बोली सच बात तो यह [संगीत] है कि मुझे इस
  6417. 5:15:40बात से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए।
  6418. 5:15:43लेकिन यह बात मुझे बर्दाश्त नहीं हो रही
  6419. 5:15:45[संगीत] है कि आज मैंने उसको यह कहा कि
  6420. 5:15:48मैं उससे शादी नहीं कर सकती और दूसरे दिन
  6421. 5:15:51पता चलता है कि वो सगाई कर रहा है।
  6422. 5:15:54तुम्हें पता है इस [संगीत] बात से मैं खुद
  6423. 5:15:56को कितना छोटा महसूस कर रही हूं। मुझे समझ
  6424. 5:16:00नहीं आ रहा कि तुम इस बात से क्यों
  6425. 5:16:01[संगीत] दुखी हो। शिप्रा आश्चर्य भरे स्वर
  6426. 5:16:04में बोली। कनिका ने गहरी सांस [संगीत] ली
  6427. 5:16:07और अपना दर्द प्रकट करते हुए बोली मुझे
  6428. 5:16:11लगा था कि मैं जब उसे यह बताऊंगी कि
  6429. 5:16:13[संगीत] मैंने उसे पसंद नहीं किया है तो
  6430. 5:16:16वह दुखी होगा। कुछ दिन तो उसके मन पर यह
  6431. 5:16:19चोट काबिज [संगीत] रहेगी कि मैंने उसे
  6432. 5:16:21ठुकरा दिया। लेकिन यह पता चलने पर [संगीत]
  6433. 5:16:24कि ऐसा तो कुछ भी नहीं हुआ। उल्टे उसने एक
  6434. 5:16:28ही दिन में किसी दूसरी लड़की से अपनी सगाई
  6435. 5:16:31भी पक्की [संगीत] कर ली। सोचो मेरे मन पर
  6436. 5:16:34क्या बीत रही होगी। कनिका की आंखों में
  6437. 5:16:37छिपा [संगीत] दर्द देखकर शिप्रा कुछ पल
  6438. 5:16:40उसे देखती रह गई। लेकिन असली सवाल अभी
  6439. 5:16:44बाकी था। क्या कनिका शिप्रा के चेहरे से
  6440. 5:16:47उसकी [संगीत] सच्चाई तक पहुंच पाएगी? अब
  6441. 5:16:51क्या होगा? क्या कनिका जान पाएगी कि
  6442. 5:16:54शिप्रा ही शौर्य की पत्नी है। और जब उसके
  6443. 5:16:57सामने शिप्रा की यह सच्चाई आएगी तो कनिका
  6444. 5:17:00पर क्या बीतेगा?

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