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- 0:00क्या आपने कभी सोचा है कि आपके कपड़े,
- 0:02शूज, स्कूल बैग, फर्नीचर, फोन, कंप्यूटर
- 0:05जैसी चीजें कैसे बनती हैं? इनफैक्ट हर
- 0:07प्रोडक्ट को आप तक पहुंचने से पहले
- 0:09प्रोडक्शन प्रोसेस से गुजरना होता है। तो
- 0:11आज के इस वीडियो में हम एक ऐसे चैप्टर को
- 0:14पढ़ने वाले हैं जिससे हमें बहुत कुछ सीखने
- 0:16को मिलने वाला है कि कैसे किसी चीज का
- 0:18प्रोडक्शन होता है। फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन
- 0:20क्या है और यह एक दूसरे के साथ कैसे
- 0:23इंटरकनेक्टेड है और साथ ही हम पढ़ेंगे कि
- 0:25हेल्थ, एजुकेशन एंड ह्यूमन कैपिटल किसी
- 0:28कंट्री के इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए क्यों
- 0:30इंपॉर्टेंट है। एंड बिलीव मी इस वीडियो को
- 0:32एंड तक देखने के बाद यह चैप्टर आपको इतना
- 0:35इजी लगने लगेगा कि यह चैप्टर आपके 100%
- 0:38मार्क्स सिक्योर कर देगा। तो चलिए वीडियो
- 0:40को स्टार्ट करते हैं।
- 0:46[संगीत]
- 0:47पहला टॉपिक है हमारा फैक्टर्स ऑफ
- 0:49प्रोडक्शन। फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन का क्या
- 0:51मतलब होता है? तो देखो फैक्टर्स ऑफ
- 0:52प्रोडक्शन वह रिसोर्सेज हैं जो किसी भी
- 0:54चीज को प्रोड्यूस करने के लिए यूज़ होते
- 0:56हैं। मतलब अगर आपको कपड़े, फोन या फर्नीचर
- 0:59बनाना है तो आपको कुछ बेसिक रिसोर्सेज की
- 1:02रिक्वायरमेंट होगी। हमारे बुक में चार
- 1:04फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन दिए हुए हैं। लैंड,
- 1:06लेबर, कैपिटल एंड एंटरप्रेन्योरशिप।
- 1:09कैपिटल एंड एंटरप्रेन्योरशिप को हम वीडियो
- 1:11में आगे डिस्कस करेंगे। तो पहले हम लैंड
- 1:13की बात करते हैं। इकोनॉमिक्स में लैंड
- 1:15सिर्फ जमीन को रिप्रेजेंट नहीं करता बल्कि
- 1:18इसमें सभी नेचुरल रिसोर्सेज इंक्लूड होते
- 1:20हैं। जैसे सोइल, फॉरेस्ट्स, वाटर, एयर,
- 1:23सनलाइट, मिनरल्स, ऑयल एंड गैस। अगर आपको
- 1:26बिजनेस करने के लिए लैंड चाहिए तो आपके
- 1:28पास दो ऑप्शंस होते हैं। या तो आप लैंड
- 1:31खरीद लो या फिर रेंट पे ले लो। इसी तरह
- 1:33बड़े बिज़नेसेस भी अपनी फैक्ट्रीज़ और
- 1:35प्रोडक्शन के लिए लैंड ऑपरेट करते हैं। अब
- 1:38आप ही सोचो अगर आपके पास सिर्फ लैंड है तो
- 1:40क्या आप बिना लेबर के प्रोडक्शन कर लोगे?
- 1:42नहीं ना? इसलिए प्रोडक्शन में लेबर बहुत
- 1:45इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है। और यह लेबर
- 1:47हर फील्ड में अलग तरीके से काम करता है।
- 1:49जैसे कारपेंटर्स, फार्मर्स, कंस्ट्रक्शन
- 1:52वर्कर्स, टीचर्स और डॉक्टर्स अपनी फिजिकल
- 1:55स्ट्रेंथ, नॉलेज और स्किल्स के अलग-अलग
- 1:57लेवल का यूज करके ताकि सोसाइटी के लिए
- 2:00गुड्स और सर्विसेज क्रिएट कर सकें। पीपल
- 2:02एज रिसोर्सेज। दोस्तों, ह्यूमन बीइंग्स
- 2:05किसी भी इकॉनमी में बहुत इंपॉर्टेंट रोल
- 2:07प्ले करते हैं। क्योंकि वही अपनी नॉलेज,
- 2:10स्किल्स और डिसीजन मेकिंग एबिलिटीज का यूज
- 2:12करके गुड्स और सर्विसेज क्रिएट करते हैं।
- 2:14जैसे एक पुलिस ऑफिसर लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन
- 2:17करता है। एक साइंटिस्ट नए टेक्नोलॉजीस
- 2:19इन्वेंट करता है और एक शेफ नए रेसिपीज
- 2:21डेवलप करता है। सभी अपनी अलग-अलग स्किल्स
- 2:24और नॉलेज का यूज करते हैं ताकि अपना काम
- 2:26बेस्ट तरीके से कर सकें। अब आप ही सोचो
- 2:28अगर किसी कंट्री के पास स्किल्ड डॉक्टर्स,
- 2:31इंजीनियर्स, टीचर्स, साइंटिस्ट और
- 2:33टेक्नशियंस ना हो तो क्या वो कंट्री डेवलप
- 2:35कर पाएगी? नहीं ना? तो हम लिख सकते हैं
- 2:37ह्यूमन कैपिटल रेफर्स टू द नॉलेज, स्किल्स
- 2:40एंड एबिलिटीज व्हिच पीपल हैव दैट मेक देम
- 2:42प्रोडक्टिव एंड हेल्प इन अ कंट्रीज
- 2:44इकोनॉमिक ग्रोथ। अब दोस्तों, किसी भी
- 2:47कंट्री की पॉपुलेशन को ह्यूमन कैपिटल में
- 2:49कन्वर्ट होने के लिए दो चीजें चाहिए जो है
- 2:52हेल्थ एंड एजुकेशन। अब आप खुद ही सोचो अगर
- 2:55किसी को अच्छी मेडिकल और एजुकेशन फैसिलिटी
- 2:57मिलेगी तभी तो वह अपने लाइफ में प्रोग्रेस
- 3:00कर पाएगा। वहीं दूसरी ओर अगर किसी को
- 3:02अच्छी मेडिकल एंड एजुकेशन फैसिलिटी नहीं
- 3:04मिली तो क्या वो अपनी लाइफ में आगे बढ़
- 3:06पाएगा? नहीं ना। तो अगर हमें नॉर्मल
- 3:08ह्यूमन कैपिटल प्रोडक्टिव बनाना है तो
- 3:11उसके लिए हमें अच्छी एजुकेशन और अच्छी
- 3:13हेल्थ केयर प्रोवाइड करानी होगी। सबसे
- 3:15पहले बात करते हैं एजुकेशन की। किसी भी
- 3:17कंट्री की पॉपुलेशन को प्रोडक्टिव बनाने
- 3:20में एजुकेशन बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले
- 3:22करता है। क्योंकि एजुकेशन ह्यूमंस को
- 3:24नॉलेज और स्किल्स प्रोवाइड करता है। जो
- 3:26बेसिक लिटरेसी से लेकर किसी स्पेसिफिक
- 3:28फील्ड में एक्सपर्टीज तक जाते हैं। फॉर
- 3:30एग्जांपल अभी आप स्कूल में हो और जो नॉलेज
- 3:33और स्किल्स आप यहां सीख रहे हो वही आपके
- 3:36फ्यूचर में काम आएंगी और कंट्री के
- 3:37डेवलपमेंट में कंट्रीब्यूट कर पाओगे।
- 3:40किसी भी पॉपुलेशन के लिए गुड हेल्थ उतनी
- 3:43ही जरूरी है जितनी कि एजुकेशन। अब तुम ही
- 3:45सोचो अगर इंसान हेल्दी ही नहीं होगा तो
- 3:48क्या वो अपना बेस्ट दे पाएगा? अगर बच्चे
- 3:50बार-बार बीमार पड़ते रहे तो क्या वो स्कूल
- 3:52रेगुलरली जा पाएंगे? और अगर वर्कर्स
- 3:54हेल्दी नहीं रहेंगे तो क्या वो अपना काम
- 3:56एफिशिएंटली कर पाएंगे? नहीं ना? इसलिए गुड
- 3:59हेल्थ पॉपुलेशन को मेंटली और फिजिकली
- 4:01दोनों तरह से स्ट्रांग बनाती है। जब हेल्थ
- 4:04अच्छी होती है तो हम ज्यादा एनर्जेटिक,
- 4:06फोकस्ड और प्रोडक्टिव रहते हैं। सोशल एंड
- 4:08कल्चरल इन्फ्लुएंसेस। इसका मतलब है कि
- 4:11किसी भी कंट्री का कल्चर और सोसाइटी का
- 4:13माइंडसेट डिसाइड करता है कि उसके लोग अपने
- 4:16काम और ग्रोथ को किस नजरिए से देखते हैं।
- 4:18अब आप यह सोचो ना अगर सोसाइटी में हार्ड
- 4:20वर्क, डिसिप्लिन और कंटीन्यूअस
- 4:22इंप्रूवमेंट की सोच हो तो लोग नेचुरली
- 4:24अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश करते
- 4:26हैं। और इसी से कंट्री प्रोग्रेस करती है।
- 4:29जैसे जापान का एक कांसेप्ट है काइजन जिसका
- 4:32मतलब होता है कंटीन्यूअस इंप्रूवमेंट।
- 4:34मतलब हर दिन अपने काम में थोड़ा बेहतर
- 4:36होना। यह सोच जापान में 1940 से फॉलो की
- 4:39जा रही है और इसी माइंडसेट ने जापान को एक
- 4:42डेवलप्ड नेशन बनाया जहां लोगों का
- 4:44स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग भी बहुत हाई है। अब
- 4:46दोस्तों ऐसा नहीं है कि इंडिया ने ह्यूमन
- 4:48कैपिटल के फील्ड में प्रोग्रेस नहीं किया
- 4:50है। 1947 के बाद हमने एजुकेशन, हेल्थ और
- 4:54स्किल्स के एरिया में काफी लंबा सफर तय
- 4:56किया है। आज इंडिया का एडल्ट लिटरेसी रेट
- 4:592030 के वर्ल्ड बैंक सर्वे के हिसाब से
- 5:01लगभग 85% मेल्स और 70% फीमेल्स के आसपास
- 5:06है। लिटरेसी रेट का मतलब होता है कि 15
- 5:08साल से ऊपर के कितने लोग किसी भी लैंग्वेज
- 5:11में पढ़ और लिख सकते हैं। यह किसी कंट्री
- 5:13के एजुकेशनल डेवलपमेंट का एक इंपॉर्टेंट
- 5:16इंडिकेटर होता है। 2030 के वर्ल्ड बैंक
- 5:18सर्वे के हिसाब से भारत में लगभग 85% मेल
- 5:22और 70% फीमेल लिटरेट हैं। जो एजुकेशन के
- 5:25क्षेत्र में एक बड़ा इंप्रूवमेंट है।
- 5:26हालांकि हमें अभी भी बहुत इंप्रूवमेंट की
- 5:28जरूरत है। लेकिन फिर भी ह्यूमन कैपिटल
- 5:31डेवलप करने में कुछ चैलेंजेस अभी भी बचे
- 5:33हुए हैं। जैसे इकोनॉमिक सर्वे ऑफ इंडिया
- 5:362024 के अकॉर्डिंग इंडिया के 65% लोग 35
- 5:39साल से कम उम्र के हैं। इसका मतलब है कि
- 5:42हमारे पास एक यंग और एनर्जेटिक पॉपुलेशन
- 5:44है जो कि किसी भी कंट्री के डेवलपमेंट के
- 5:46लिए प्लस पॉइंट है। लेकिन ये तभी पॉसिबल
- 5:49है जब हर यूथ को अच्छी एजुकेशन, ट्रेनिंग
- 5:51और हेल्थ केयर मिल पाए। अब तुम ही सोचो
- 5:53कंट्री के पास यंग पॉपुलेशन होने का क्या
- 5:55फायदा अगर वो एजुकेटेड, हेल्दी और स्किल्ड
- 5:57ही ना हो तो क्या वो कंट्री डेवलपमेंट में
- 5:59अपना योगदान दे पाएंगे? नहीं ना। इंडिया
- 6:01का स्किल बेस्ड नॉलेज सिस्टम तो एंशिएंट
- 6:04टाइम्स से ही स्ट्रांग रहा है। जैसे हमारे
- 6:06एंशिएंट इंडिया में काम करना सिर्फ
- 6:08अर्निंग का जरिया नहीं था बल्कि एक डिवोशन
- 6:10था। लोग अपने काम को पूजा की तरह मानते
- 6:12थे। इनफैक्ट उस समय भी हमारा स्किल्ड
- 6:14बेस्ड नॉलेज इतना इंप्रूव्ड था कि एंशिएंट
- 6:16इंडियंस ने शिप बिल्डिंग में एक यूनिक
- 6:18टेक्निक यूज की थी जिसमें वुडन प्लैंक्स
- 6:20को नेल्स से नहीं बल्कि कॉर्ड्स से स्टिच
- 6:23किया जाता था। यह शिप्स फ्लेक्सिबल होते
- 6:25थे और ईजीली इंडियन ओशन में ट्रैवल कर
- 6:27लेते थे। इसी स्किल की वजह से हमारा
- 6:29मैरिटाइम ट्रेड और कल्चरल एक्सचेंज पूरे
- 6:32वर्ल्ड में पॉसिबल हुआ। अब दोस्तों सोचो
- 6:34अगर किसी के पास लैंड भी है, वर्कर्स भी
- 6:37हैं लेकिन उसके पास पैसे या सामान खरीदने
- 6:40के लिए रिसोर्सेज ही नहीं है, तो क्या वह
- 6:41प्रोडक्शन कर पाएगा? नहीं ना। इसीलिए
- 6:44तीसरा और बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर होता है
- 6:46कैपिटल। कैपिटल का मतलब सिर्फ पैसे से
- 6:49नहीं होता बल्कि उन सब चीजों से होता है
- 6:51जो ह्यूमन मेड होते हैं और प्रोडक्शन में
- 6:54यूज किए जाते हैं। जैसे मशीनरी, टूल्स,
- 6:56व्हीकल्स, कंप्यूटरटर्स, शॉप्स, फैक्ट्रीज
- 7:00और ऑफिस बिल्डिंग्स। अगर किसी बिजनेस को
- 7:02चलाना है, तो उससे लैंड के साथ-साथ यह सब
- 7:05चीजें भी चाहिए होती हैं। तभी तो गुड्स और
- 7:08सर्विज का प्रोडक्शन पॉसिबल होता है।
- 7:10लेकिन सवाल यह उठता है कि यह कैपिटल आता
- 7:12कहां से है? तो देखो दोस्तों कैपिटल दो
- 7:14तरीके से आता है। एक तो पर्सनल सोर्सेस से
- 7:17जैसे अपनी सेविंग, फैमिली या फ्रेंड से और
- 7:20दूसरा एक्सटर्नल सोर्सेस से जैसे बैंक से
- 7:23लोन एंड स्टॉक मार्केट। स्टॉक मार्केट
- 7:25बड़े बिजनेसेस के लिए होते हैं। बड़े
- 7:27बिजनेसेस को प्रोडक्शन करने के लिए ज्यादा
- 7:29पैसा चाहिए होता है। तो वह पैसा स्टॉक
- 7:30मार्केट से उठाते हैं। स्टॉक मार्केट एक
- 7:32ऐसा स्पेशल मार्केट होता है जहां शेयर्स
- 7:35खरीदे और बेचे जाते हैं। लास्ट फैक्टर है
- 7:38एंटरप्रेन्योरशिप। इसका मतलब होता है अपना
- 7:40खुद का बिजनेस शुरू करना या कोई नया
- 7:42आईडिया लाना जो किसी प्रॉब्लम का सशन दे।
- 7:45एंटरप्रेन्योर वो होता है जो एक बिजनेस
- 7:47आईडिया सोचता है, रिस्क लेता है,
- 7:49रिसोर्सेज को जुटाता है और अपनी मेहनत से
- 7:51उस आईडिया को सक्सेसफुल बिजनेस में बदलता
- 7:53है। वो नए प्रोडक्ट्स और सर्विज मार्केट
- 7:55में लाता है, नए जॉब्स क्रिएट करता है और
- 7:58कंट्री के डेवलपमेंट में कंट्रीब्यूट करता
- 8:00है। एग्जांपल के तौर पर जेआरडी टाटा एक
- 8:03विज़नरी एंटरप्रेन्योर थे। उन्होंने सिर्फ
- 8:05बिजनेस नहीं बनाया बल्कि सोसाइटी के लिए
- 8:07भी काम किया। उन्होंने 1932 में Tata
- 8:09एयरलाइंस जो आज का एयर इंडिया है शुरू
- 8:11किया और Tata ग्रुप को स्टील, कार्स, पावर
- 8:13और केमिकल्स जैसे सेक्टर्स में एक्सपेंड
- 8:15किया। जे आरडी टाटा बिलीव करते थे कि
- 8:17बिजनेस सिर्फ प्रॉफिट के लिए नहीं बल्कि
- 8:19लोगों के भले के लिए भी होना चाहिए। उनकी
- 8:21ऑनेस्टी, हार्ड वर्क और विज़न ने उन्हें
- 8:23इंडिया के ग्रेटेस्ट एंटरप्रेन्यर्स में
- 8:25से एक बना दिया। जिसके लिए उन्हें भारत
- 8:27रत्न 1992 से सम्मानित किया गया। अब
- 8:30दोस्तों मान लो आपके पास लैंड है, लेबर
- 8:32है, कैपिटल भी रेडी है और एक
- 8:34एंटरप्रेन्योर भी है जो सब कुछ मैनेज कर
- 8:36रहा है। तो क्या आप बिना टेक्नोलॉजी के
- 8:37प्रोडक्शन कर पाओगे? बिल्कुल नहीं।
- 8:39क्योंकि टेक्नोलॉजी ही वो टूल है जो इन सब
- 8:42फैक्टर्स को सपोर्ट कर रहा है। अब आप ही
- 8:44सोचो कि देखो अगर फैक्ट्री में मशीन ही ना
- 8:46हो या किसान के पास मॉडर्न टूल्स ही ना हो
- 8:48तो क्या लार्ज स्केल प्रोडक्शन पॉसिबल हो
- 8:50पाएगा? नहीं ना? इसीलिए टेक्नोलॉजी काम को
- 8:53फास्ट, इजी और एफिशिएंट बना देती है। आज
- 8:55के टाइम में टेक्नोलॉजी हर फील्ड में
- 8:57एक्सपेंड कर चुकी है। फॉर एग्जांपल हम एक
- 8:59क्लिक में यूपीआई से पेमेंट कर लेते हैं।
- 9:01फार्मर्स मोबाइल पर वेदर अपडेट देखकर अपना
- 9:04एग्रीकल्चर प्लान कर लेते हैं। और जीपीएस
- 9:06से गुड्स को डिलीवर करने के लिए शॉर्टेस्ट
- 9:08रूट मिल जाता है। और यही नहीं आज
- 9:10टेक्नोलॉजी ने एजुकेशन और जॉब्स दोनों को
- 9:12ही ईजीली एक्सेसिबल बना दिया है। जैसे
- 9:14गवर्नमेंट का स्वयं प्लेटफार्म जहां
- 9:16स्टूडेंट्स ग्रेड नाइन से लेकर कॉलेज तक
- 9:18के फ्री ऑनलाइन कोर्सर्सेस कर सकते हैं।
- 9:20रोबोटिक्स, टेक्सटाइल, प्रिंटिंग,
- 9:21एक्वाकल्चर जैसे नए सब्जेक्ट्स घर बैठे
- 9:24सीख सकते हैं। इसी तरह नेशनल करियर सर्विस
- 9:27एनसीएस पोर्टल लोगों को डिफरेंट फील्ड्स
- 9:30में जॉब अपॉर्चुनिटीज ढूंढने में हेल्प
- 9:31करता है। चाहे वो प्लंबर हो, अकाउंटेंट हो
- 9:33या टीचर हो। हाउ आर द फैक्टर्स कनेक्टेड?
- 9:36अब दोस्तों, बात करते हैं कि लैंड, लेबर,
- 9:39कैपिटल, एंटरप्रेन्योरशिप और टेक्नोलॉजी
- 9:41एक दूसरे के साथ कैसे कनेक्टेड होते हैं?
- 9:43देखो, किसी भी गुड या सर्विस का प्रोडक्शन
- 9:45तभी पॉसिबल है जब यह सारे फ़ैक्टर्स मिलकर
- 9:48काम करते हैं। हर प्रोडक्ट के लिए इनका
- 9:50प्रोपोर्शन अलग-अलग होता है। जैसे
- 9:52एग्रीकल्चर, कंस्ट्रक्शन और हैंडीक्राफ्ट
- 9:54जैसे सेक्टर्स में ज्यादा लेबर की जरूरत
- 9:56होती है। इसीलिए इन्हें लेबर इंटेंसिव
- 9:58सेक्टर्स कहा जाता है। वहीं दूसरी तरफ
- 10:00सेमीकंडक्टर चिप्स या सेटेलाइट्स बनाने के
- 10:02लिए ज्यादा कैपिटल और स्पेशलाइज्ड मशीनरी
- 10:05चाहिए होती है। इसीलिए यह कैपिटल इंटेंसिव
- 10:07सेक्टर्स कहलाते हैं। यह सब फैक्टर्स एक
- 10:10दूसरे के बिना अधूरे हैं। अगर कोई फैक्टर
- 10:12मिसिंग हो या गलत यूज़ हो तो प्रोडक्शन
- 10:14इनफिशिएंट हो जाता है या रुक भी सकता है।
- 10:16लेकिन टेक्नोलॉजी के आने से इन सबके बीच
- 10:18का बैलेंस बदला है। जैसे एग्रीकल्चर में
- 10:20मशीनंस के यूज़ से लेबर पर डिपेंडेंस कम हो
- 10:23गया और 3T प्रिंटिंग ने हैंडलूम और
- 10:25टेक्सटाइल आर्ट को नए तरीके से रिवाइव कर
- 10:26दिया। जिससे ट्रेडिशनल डिज़ाइंस अब बड़े
- 10:29स्केल पर प्रोड्यूस हो पा रहे हैं। लेकिन
- 10:31प्रॉब्लम यह है कि सारे प्रोडक्शन इनपुट्स
- 10:32हर जगह नहीं मिलते। लैंड कहीं और, रॉ
- 10:35मटेरियल कहीं और से और स्किल्ड लेबर किसी
- 10:37और सिटी या कंट्री में मिलेगा। इसीलिए
- 10:39बिजनेसेस इन सब रिसोर्सेज को अलग-अलग जगह
- 10:42से प्रक्योर करके कंबाइन करते हैं। इसीलिए
- 10:44प्रोडक्शन एक तरह से ज्योग्राफिकली
- 10:46इंटरकनेक्टेड प्रोसेस है। प्रोडक्शन के हर
- 10:48स्टेज में ह्यूमन एफर्ट लगता है। चाहे
- 10:50डिजाइन बनाना हो, सुपरवाइज करना हो या
- 10:52टेक्नोलॉजी इंप्रूव करना हो। इंजीनियर्स
- 10:54अपनी एक्सपर्टीज लगाते हैं और प्रोजेक्ट
- 10:56मैनेजर्स कोऑर्डिनेशन संभालते हैं।
- 10:58एंटरप्रेन्योर लीडर की तरह डिसाइड करता है
- 11:00कि रिसोर्सेज कैसे यूज़ होंगे। इस चैप्टर
- 11:03का लास्ट टॉपिक है रिस्पांसिबिलिटीज
- 11:05टुवर्ड्स फैक्टर्स ऑफ प्रोडक्शन। मतलब जब
- 11:07हम गुड्स या सर्विज प्रोड्यूस करते हैं तो
- 11:09उन रिसोर्सेज के प्रति हमारी क्या
- 11:11जिम्मेदारी बनती है? जब भी कोई प्रोडक्शन
- 11:13होता है तो हम नेचुरल रिसोर्सेज जैसे
- 11:15लैंड, वाटर और मिनरल्स का यूज करते हैं।
- 11:18यह रिसोर्सेज अर्थ पर लिमिटेड अमाउंट में
- 11:20होते हैं। मतलब इनका ओवरयूज या पोल्यूशन
- 11:23से नुकसान हो सकता है। उदाहरण के तौर पर
- 11:25तमिलनाडु में कई लोग लेदर फैक्ट्रीज में
- 11:27काम करके अपना गुजारा चलाते हैं जो उनके
- 11:29लिए इनकम का एकमात्र जरिया है। लेकिन इन
- 11:32फैक्ट्रीज का वेस्ट अगर बिना ट्रीटमेंट के
- 11:34नदियों में छोड़ दिया जाए तो वह पानी और
- 11:36मिट्टी दोनों को पोल्यूट कर देता है। इसी
- 11:38तरह जब पुराने स्मार्टफोनोंस या
- 11:40इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स को रिसाइकल नहीं किया
- 11:42जाता तो उनमें से लेड और मरकरी जैसे
- 11:44हार्मफुल केमिकल्स जमीन और पानी में मिल
- 11:46जाते हैं जो ह्यूमंस, एनिमल्स और प्लांट्स
- 11:49सबके लिए खतरनाक है। इसीलिए प्रोड्यूसर्स
- 11:51की रिस्पांसिबिलिटी होती है कि वह
- 11:53रिसोर्सेज रिस्पांसिबली यूज़ करें ताकि हम
- 11:55अपनी आज की जरूरत पूरी करते हुए फ्यूचर
- 11:57जनरेशंस के लिए रिसोर्सेज खत्म ना करें।
- 12:00यही कांसेप्ट सस्टेनेबल प्रोडक्शन कहलाता
- 12:02है। मतलब डेवलपमेंट ऐसा हो जो एनवायरमेंट
- 12:04को नुकसान ना पहुंचाए। दोस्तों, अब
- 12:06प्रोड्यूसर्स का एनवायरमेंट और नेचुरल
- 12:08रिसोर्सेज के प्रति रिस्पांसिबल होना बहुत
- 12:10जरूरी है। लेकिन उनकी जिम्मेदारी यहीं
- 12:12खत्म नहीं होती। उन्हें अपने वर्कर्स,
- 12:14एंप्लाइजज़ और सोसाइटी के प्रति भी इक्वली
- 12:16रिस्पांसिबल रहना पड़ता है। क्योंकि वही
- 12:18प्रोडक्शन प्रोसेस के बैकबोन होते हैं।
- 12:20इसीलिए उनके प्रति कुछ इंपॉर्टेंट
- 12:22रिस्पांसिबिलिटीज होती हैं जिनका ध्यान
- 12:24रखना हर एंप्लयर के लिए जरूरी होता है।
- 12:26जैसे कि फेयर कंपनसेशन एंड सेफ वर्किंग
- 12:28कंडीशंस। एंप्लॉयर्स को यह इंश्योर करना
- 12:30होता है कि वर्कर्स को उनके काम का सही
- 12:32पेमेंट मिले और उनके लिए सेफ और हेल्दी
- 12:34वर्किंग एनवायरमेंट हो। अब तुम ही सोचो ना
- 12:37कोई ऐसी जगह क्यों काम करना चाहेगा जहां
- 12:38उसे ना अच्छी इनकम मिले और ना ही सेफ
- 12:40एनवायरमेंट हो। स्किल डेवलपमेंट एंड
- 12:42ट्रेनिंग। आज के टाइम में टेक्नोलॉजी और
- 12:44वर्किंग मेथड्स तेजी से बदल रहे हैं।
- 12:46इसीलिए बिजनेसेस का फर्ज बनता है कि वो
- 12:48अपने वर्कर्स को ट्रेनिंग और न्यू स्किल्स
- 12:50सिखाएं ताकि उन्हें नए जॉब अपोरर्चुनिटीज
- 12:53मिल सके और वह लेबर मार्केट में
- 12:54कॉम्पिटिटिव बने रहें। प्रोटेक्शन का भी
- 12:56ध्यान रखा जाना चाहिए। जैसे फेयर
- 12:58ट्रीटमेंट, नो डिस्क्रिमिनेशन और उन्हें
- 13:00बेनिफिट्स मिले जैसे हेल्थ केयर, पेड लीव
- 13:02और जॉब सिक्योरिटी। आजकल कई कंपनीज़
- 13:04कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के जरिए
- 13:06यह सब फॉलो करती हैं। सीएसआर का मतलब होता
- 13:09है कि बिजनेस सिर्फ प्रॉफिट के लिए नहीं
- 13:11बल्कि सोसाइटी और एनवायरमेंट के भले के
- 13:13लिए भी काम करें। सीएसआर के अंडर कंपनीज़
- 13:15यह काम करती हैं। पोल्यूशन कम करना, लोकल
- 13:17कम्युनिटीज की मदद करना, एंप्लाइजज़ और
- 13:19कस्टमर्स के साथ रिस्पेक्ट से पेश आना और
- 13:21एनवायरमेंट फ्रेंडली प्रोडक्शन मेथड्स
- 13:23अडॉप्ट करना। इससे सोसाइटी और
- 13:25बायोडायवर्सिटी दोनों का भला होता है और
- 13:27एक बैलेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट होता
- 13:29है। आसान शब्दों में कहें तो जब तक
- 13:31प्रोड्यूसर्स नेचर, वर्कर्स और सोसाइटी के
- 13:33प्रति रिस्पांसिबल नहीं होंगे, तब तक ट्रू
- 13:35डेवलपमेंट पॉसिबल नहीं है। प्रोडक्शन तभी
- 13:38सक्सेसफुल होता है जब प्रॉफिट के साथ
- 13:39एनवायरमेंट और लोगों का वेलफेयर भी ध्यान
- 13:41में रखा जाए। तो दोस्तों, यहां पर हमारा
- 13:44चैप्टर का एंड होता है। इस चैप्टर में
- 13:46हमने सीखा कि किसी भी कंट्री की पॉपुलेशन
- 13:48तभी प्रोडक्टिव बन सकती है जब वो
- 13:50एजुकेटेड, हेल्दी और स्किल्ड हो। ह्यूमन
- 13:52कैपिटल किसी भी देश के डेवलपमेंट का सबसे
- 13:54इंपॉर्टेंट एसेट होता है। आई होप आपने
- 13:57चैप्टर को अच्छे से समझा होगा। अगर आपको
- 13:59मेरी एक्सप्लेनेशन पसंद आई तो आप इस
- 14:00वीडियो को लाइक कर सकते हैं और चाहो तो
- 14:02चैनल को सब्सक्राइब भी कर सकते हैं। मिलते
- 14:03हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए
- 14:05बाय-ब टेक केयर।
- 14:08[संगीत]
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