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Muslim Identity & the Nation-State: Critiquing Wael Hallaq — Transcript

by nous · 27,471 words · 2,023 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00मैं वही कह रहा हूं कि कॉन्सेप्चुअल कैटेगरीज डिफरेंट फॉर्म्स में हो सकती है
  2. 0:03ना। मैं ये कह रहा हूं कि जो ये कॉन्सेप्चुअल कैटेगरी है अभी नेशन स्टेट
  3. 0:06की वो इनसफिशिएंट है जो हो रहा है उसको
  4. 0:08डिफाइन करने की उसको एक्सपैंड करने की जरूरत है जो होता है।
  5. 0:11दैट आई अंडरस्टैंड हलाक एक पर्टिकुलर वे में उस कंसेप्चुअल
  6. 0:15कैटेगरी को खड़ा कर रहा है और इस्लामिक कंसेप्चुअल कैटेगरी को भी एक पर्टिकुलर वे
  7. 0:20में खड़ा कर रहा है कि एक खिलाफत के फॉर्म में ना तो वह उस रियलिटी में उस तरह
  8. 0:24एग्जिस्ट किया वो भी एक डायनेमिकल प्रोसेस के थ्रू एक एंड तक आता है। और यहां पे भी
  9. 0:28उस तरह का स्टेट्स एक्सिज़िस्ट नहीं करता है। तो जो दो आइडियाज के बीच में रीजनिंग
  10. 0:32हो रही है वो आइडियाज हाइपोथेटिकल है। जमीयत उस वक्त भी कहती थी कि हम
  11. 0:37हिंदुस्तान के साथ हैं। आज भी कहती है। पर्सनल लॉ बोर्ड के किसी भी आलिम ने कभी
  12. 0:42ये नहीं कहा कि भाई हम जो है वो पाकिस्तान जाना चाहते हैं। देवबंद मूवमेंट जो है
  13. 0:47उसने बड़ा जो है इंडियन इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल में पार्टिसिपेट किया है। थ्यरी
  14. 0:52सारी कंस्ट्रक्ट हो रही है उस टाइम जब आपके पास रिलेटिव फ्रीडम है। इसलिए जमीयत
  15. 0:56भी बन रही है। जमात भी बन रही है। एएमयू भी बन रहा है। जामिया भी बन रहा है, नदवा
  16. 1:00भी बन रहा है। मोस्ट इंडिपेंडेंट इंडिया में कोई मेजर तहरीक जो ओरिजिनल हो, कोई
  17. 1:06मेजर मूवमेंट जो ओरिजिनल हो, डेरिवेटिव ना हो, डेरिवेटिव मूवमेंट्स तो बहुत हैं। जो
  18. 1:11नेशन स्टेट है इट डेवलप्ड ऑन द जडियो क्रिश्चियन ट्रेडिशन। तो ऐसा नहीं है कि
  19. 1:17इट डस नॉट हैव दी स्पिरिचुअल एलिमेंट। इट हैज़ दी स्पिरिचुअल एलिमेंट बट ऑफ अ
  20. 1:23डिफरेंट टाइप। जैसे लिबरल्स जो हैं या कम्युनिस्ट हैं जो उनका क्लेम है अपनी
  21. 1:28मोरालिटी को अपने पैराडाइम में वो ट्रांसशनल है कि नेशन स्टेट कोई भी हो
  22. 1:33सकता है। वो प्रिंसिपल्स जब अप्लाई होंगे तो इस तरह की सोसाइटी कंस्ट्रक्ट होनी
  23. 1:37चाहिए। मुसलमान वो क्लेम नहीं कर पा रहे। लेकिन अब यह जो कंट्री
  24. 1:43जिस डायरेक्शन में जा रहा है वो डायरेक्शन हमारे लिए एलियन डायरेक्शन है। हमने ये
  25. 1:50नेगोशिएट कभी नहीं किया था कि इस तरीके का वायलेंस होगा हमारे खिलाफ। तो प्रॉब्लम ये
  26. 1:56आती है कि जब हम लोग स्टेट को एक कंस्ट्रक्ट में लाते हैं और वो फिलॉसफी
  27. 2:02जो आप उसमें कंस्ट्रक्ट कर रहे हैं इंपोज करते हैं कि एज इफ स्टेट में सोवनिटी
  28. 2:08एक्सिस्ट नहीं करती थी। इस तरह से वो पहली बार नेशन स्टेट में हुआ। ऐसा नहीं है।
  29. 2:11मेरा यही चैलेंज है हलाक को। आर मुस्लिम्स इन इंडिया लिविंग इन अ स्टेट
  30. 2:15ऑफ़ एक्सेप्शन? जो जिम्मेदारी स्टेट की है आप वो
  31. 2:19एग्जीक्यूट नहीं कर सकते। जिस लेवल ऑफ इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। आप टैक्स पेयर
  32. 2:23भी हैं। आप सेल्स टैक्स भी दे रहे हैं। आप बाकी भी चीजों में कंट्रीब्यूट कर रहे
  33. 2:27हैं। उसके बाद आपको बोला जाए आप गेटों में हैं। आप सड़क भी बनाइए। तो इन ऑन द बेसिस
  34. 2:31ऑफ़ ऑल ऑफ़ द डिस्कशन जो हमने जो डिस्कशंस किए हैं आपकी अंडरस्टैंडिंग में वेयर डू
  35. 2:38वी फॉल? जो कलाम की डिबेट 400 साल पहले हुई शाह वली उल्ला देहलवी ने करी या फिर
  36. 2:43उनसे पहले करी। आज की डेट में मैथमेटिकल क्लेम्स टू लॉजिक एक्सपेंड हो गया। मंतिक
  37. 2:48एक्सपैंड हो गया है। आपका चाहे विज़न सेम रहे लेकिन आपको फिर से सिंथेसाइज करना
  38. 2:54पड़ेगा। लार्जर बॉडी ऑफ़ नॉलेज में प्रिंसिपल्स ऑफ इस्लामिक अंडरस्टैंडिंग ऑफ
  39. 3:00रियलिटी वो नहीं है।
  40. 3:16नाउस एक इंडिपेंडेंट थिंक टैंक मीडिया प्लेटफार्म है जो माइनॉरिटी और ह्यूमन
  41. 3:20राइट्स के इशूज़ पर रिसर्च और एविडेंस बेस्ड कन्वर्सेशंस को एंपलीफाई करता है।
  42. 3:26इसे और मजबूत बनाने के लिए नाउ को सब्सक्राइब करें और सपोर्ट करें। हम लोग
  43. 3:32आज एक नया सीरीज शुरू कर रहे हैं। वी आर कॉलिंग इट एस कॉन्वर्सेशंस जहां पर हम
  44. 3:39लोगों को बुला के उनसे बातें करेंगे और इट विल बी मोर फ्री फ्लोइंग इट विल बी मोर
  45. 3:46इंटरेक्टिव इंशाल्लाह। और हमारे सामने आज अली जावेद साहब हैं जो चीफ एग्जीक्यूटिव
  46. 3:54ऑफिसर हैं नाउस नेटवर्क के। अह नाउ नेटवर्क के बारे में लोग ज्यादातर जानते
  47. 3:59हैं। अह जो भी वीडियोस आते हैं, बड़े इनफेटिव होते हैं। बल्कि कई लोगों का यह
  48. 4:06कहना है कि इज वन ऑफ द मोस्ट इमर्जिंग मीडिया प्लेटफॉर्म्स इन इंडिया।
  49. 4:10अल्हम्दुलिल्लाह। वी हैव हैड मेनी कन्वर्सेशंस। हमारी आपकी भी बात हुई है
  50. 4:14अली भाई। तो नाउ वी आर गोइंग टू स्टार्ट दिस कॉन्वर्सेशन और इसमें वी आर गोइंग टू
  51. 4:20स्टार्ट विद अली भाई। जो हमारी आपकी पहले बातचीत हो चुकी हैं कई चीजों पे।
  52. 4:27हमने फिलॉसफी डिस्कस की है, थ्योरी डिस्कस की है।
  53. 4:32हमने मुस्लिम आइडेंटिटी के इश्यूज को डिस्कस किया है। है ना?
  54. 4:37इस्लामिक पैराडाइम को डिस्कस किया है। मेटाफिजिक्स है। ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिस
  55. 4:43पे आपके कुछ आइडियाज हैं। हमने डिस्कस भी किया है। काफी कुछ इस पे
  56. 4:48मेरा ख्याल है कि आपने डेवलप भी किया है। यू नो दी अदर डे यू हैव अ पर्टिकुलर मॉडल
  57. 4:54जिस पे आप बता रहे थे, एक्सप्लेन कर रहे थे। सो आई थिंक उन चीजों पे भी हम बात कर
  58. 4:59सकते हैं। प्रोबेबबली नॉट इन दिस कन्वर्सेशन प्रोबेब्ली इन द फ्यूचर
  59. 5:03कन्वर्सेशंस। इस कन्वर्सेशन को हम लोग थोड़ा सा ग्राउंडेड रखेंगे। इनिशियल
  60. 5:08कन्वर्सेशन है क्योंकि और जैसा हमने पहले डिस्कस किया है कि हम इस
  61. 5:14कॉन्वर्सेशन को और एक्सपेंड करेंगे और लोगों के को इसमें इंक्लूड करेंगे।
  62. 5:21मुख्तलिफ चीजों पर डिस्कस करेंगे और चीजों को एक डिफरेंट पर्सपेक्टिव से समझने
  63. 5:28की कोशिश करेंगे। क्योंकि जनरली जो नाउस के वीडियो के जो प्लेटफार्म है उस पे
  64. 5:34हम करंट इश्यूज पे बातें करते हैं। यू नो और जो इमर्जिंग प्रॉब्लम्स हैं उस पे
  65. 5:41बातें कर रहे हैं। कंटेंपरेरी इश्यूज जो हैं उस पे बातें कर रहे हैं। बट आई थिंक
  66. 5:47कॉन्वर्सेशंस आर गोइंग टू बी मोर मोर ग्राउंडेड इन
  67. 5:53द अंडरस्टैंडिंग ऑफ थिंग्स इन अ मोर थ्योरिटिकल सेंस। है ना? थ्योरी है,
  68. 5:57फिलॉसफी है। इन चीजों में थियोलॉजी है उन चीजों में करेंगे। पहला क्वेश्चन जो मेरा
  69. 6:03होगा वो वो यह है कि सी यू हैव एन एकेडमिक बैकग्राउंड है ना यू
  70. 6:11कम फ्रॉम जेएनयू आपने वहां से एमफिल किया है। कुछ सोच के आपने नर्वस नेटवर्क आपने
  71. 6:18और आपके लोगों ने टीम ने डेवलप किया था। वो कुछ फिलॉसफी रही होगी। कुछ ना कुछ
  72. 6:26अंडरस्टैंडिंग रही होगी। और वो अंडरस्टैंडिंग कहीं ना कहीं
  73. 6:31मुस्लिम्स इन इंडिया से रिलेट करती होगी। कंटेंपररी मुस्लिम प्रॉब्लम से रिलेट करती
  74. 6:37होगी। फॉर एग्जांपल जस्टिस का इशू है। इनकलिटी का इशू है। मार्जिनलाइजेशन का इशू
  75. 6:44है। वायलेंस का इशू है। है ना? कहीं ना कहीं ये चीजों में वो जिसको कहते हैं
  76. 6:50इंटरसेक्ट करती है। जिस जैसी हमारी आपके डिस्कशन हुए हैं पहले। तो आई जस्ट वांट टू
  77. 6:55अंडरस्टैंड एस द फर्स्ट क्वेश्चन कि मुस्लिम आइडेंटिटी
  78. 7:03एक तो प्रॉब्लम है कि मुस्लिम आइडेंटिटी का
  79. 7:08कॉम्प्रिहेंशन। ठीक है? कि मुस्लिम आइडेंटिटी का कंस्ट्रक्शन कैसे हो? दैट्स
  80. 7:14वन प्रॉब्लम। दूसरी प्रॉब्लम है मुस्लिम आइडेंटिटी का कंस्ट्रक्शन और रियलाइजेशन
  81. 7:20इंडियन कॉन्टेक्स्ट में कैसे हो? यह दूसरी प्रॉब्लम है। आई एम पुटिंग अप दिस
  82. 7:26क्वेश्चन टू यू बिकॉज़ अ ऑफ वन ऑफ द मोस्ट फेमस आइडियाज जिसको
  83. 7:35प्रोफेसर वाइल बिल हल्लाक ने यू नो लिखा है और प्रमोट किया है वो ये कि
  84. 7:43जो जो मुस्लिम अंडरस्टैंडिंग है ऑफ कम्युनिटी ऑफ ऑफ देयर ओन सेल्फ
  85. 7:49जिसको आप कहें चाहे उसको आप खुद ही कहें इकबालिक इकबाल के सेंस में या आप जिसको आप
  86. 7:54उसको कौम कहें या फिर आप इसको उम्मा कहें उसको नेशन स्टेट में रियलाइज करना मुश्किल
  87. 8:01काम है। एंड प्रोबेबबली इंपॉसिबल है जो एक टेंपलेट है द इंपॉसिबल स्टेट की। तो उस
  88. 8:08कॉन्टेक्स्ट को या उस बैकग्राउंड को ज़हन में रखते हुए दीज़ आर द टू क्वेश्चंस आई
  89. 8:13हैव। वन हाउ डू यू लुक एट द कंस्ट्रक्शन ऑफ़ मुस्लिम आइडेंटिटी इन जनरल सेंस इन अ
  90. 8:19नेशन स्टेट? एंड नंबर टू हाउ वुड यू अंडरस्टैंड कि एक मुस्लिम की आइडेंटिटी
  91. 8:25इंडिया में कैसे कंस्ट्रक्ट होगी या होनी चाहिए या हुई है एंड प्रोबेब्ली वी कैन
  92. 8:30स्टार्ट फ्रॉम देयर? ये बहुत इंपॉर्टेंट दो सवाल हैं। तो पहले मेरा जो फोकस रहेगा
  93. 8:36वो क्योंकि आपने वाइल हल्लाक की बात की। वाइल अल्लाह को कहा जा सकता है कि मौजूदा
  94. 8:41दौर के वन ऑफ दी मोस्ट प्रोमिनेंट इंटेलेक्चुअल्स हैं जो
  95. 8:48मुस्लिम इंटेलेक्चुअल थॉट को के बारे में लिखते हैं और प्रेजेंट करते हैं। कोलंबिया
  96. 8:54यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं उनकी कई बहुत इंपॉर्टेंट किताबें हैं। जैसे
  97. 8:58रीस्टेटिंग ओरिएंटलिज्म के एडवर्ड सईद ने जब ओरिएंटलिज्म का फ्रेमवर्क सामने रखा के
  98. 9:05ब्राननिया हुकूमत हुकूमत हो या फिर दूसरी मुख्तलिफ वेस्टर्न हुकूमत हो जिन्होंने
  99. 9:10कॉलोनाइज किया दुनिया को और उस वक्त कॉलोनाइज करने में क्योंकि आप रूल कर रहे
  100. 9:16हैं कॉलोनी की तरह मुख्तलिफ इलाकों को दुनिया के तो आपने पावर और स्ट्रक्चर को
  101. 9:21इंपोज करने के लिए नॉलेज के इंस्टीटशंस भी बनाए कि जिस तरह से इल्म को और इंस्टीटशंस
  102. 9:27को और इदारों को एक ब्रिटिश कॉन्टेक्स्ट में या फिर फ्रेंच कॉन्टेक्स्ट में या
  103. 9:34मुख्तलिफ जितने भी कॉलोनाइजर्स हैं उनकी फ्रेमवर्क के कॉन्टेक्स्ट में इस तरह
  104. 9:39बनाया जाए कि जो कॉलोनी है जैसे हिंदुस्तान थी जैसे अफ्रीका थी बल्कि काफी
  105. 9:46हद तक बहुत लेट उनका इंडिपेंडेंस हुआ है। इस तरह के इदारे और इल्मी इदारे स्पेशली
  106. 9:52और नॉलेज सिस्टम्स प्रोड्यूस किए जाएं कि जिसमें इंडीजनस पॉपुलेशंस जो उस
  107. 9:57ज्योग्राफी की नेटिव्स हैं वो अपने बारे में अपनी हिस्ट्री के बारे में अपनी जो
  108. 10:04वजूद है एग्जिस्टेंस है आइडेंटिटी के बारे में वो उन फ्रेमवर्क्स से समझें जो
  109. 10:09फ्रेमवर्क्स डेवलप किए गए हैं एक कॉलोनाइजर के थ्रू या वेस्टर्न
  110. 10:13एनलाइटनमेंट प्रोजेक्ट के थ्रू। जब हम वेस्टर्न एनलाइटमेंट प्रोजेक्ट की बात
  111. 10:18करते हैं तो सामने कुछ चीजें आती हैं कि जो यूरोप है वो अपनी एक सिविलाइजेशनल
  112. 10:24हिस्ट्री से गुजरा। बोला जाता है कि 1000 साल के करीब यूरोप में डार्क एजेस थी।
  113. 10:30डार्क एजेस का मतलब यह था कि वहां पे कोई इंटेलेक्चुअल प्रोसेस नहीं हो रहा था।
  114. 10:35हालांकि उसी दौर में एक बड़ा तबका है, एक बड़ा अरसा है जिसको इस्लामिक गोल्डन एज
  115. 10:41बोला जाता है कि जहां मुस्लिम एंपायर था वहां पर एक्चुअली थॉट
  116. 10:45रीजनिंग इंटेले इंटेलेक्चुअल ट्रेडिशन और इवन जो इन्वेंशंस के ट्रेडिशन है थ्यरी के
  117. 10:52कंस्ट्रक्शन के ट्रेडिशंस हैं वो ऑनगोइंग थे बट वेस्ट में नहीं था
  118. 10:56तो वेस्ट में एक तरीके से एक एपिसोड शुरू हुआ जिसमें लोगों ने सोचना शुरू करा वापस
  119. 11:03उस लंबे ट्रेडिशन में रेफरमेशन रेनेसों और फिर एनलाइटनमेंट कि जहां पे यह बात रखी गई
  120. 11:11कि जिन ट्रेडिशनल तरीकों से दुनिया या इंसानियत अपने आप को अपने रिलेशन को
  121. 11:20दुनिया और दूसरों के कॉन्टेक्स्ट से सोचती है, समझती है। उसमें अब तक जो रिलीजियस
  122. 11:27टेक्स्ट्स हैं या जो ट्रेडिशनल वैल्यू सिस्टम्स हैं उनको यह समझा गया कि वो सही
  123. 11:33तौर से रिप्रेजेंट करते हैं कि सिविलाइजेशंस ऑर्डर में कैसे आती हैं।
  124. 11:38उसके बनिस्बत अक्ल को, रीजन को, आपकी एविडेंस को और एक मेथड जिससे अक्ल और
  125. 11:48एविडेंस को कंबाइन करके एक टेंपरामेंट जिसे साइंटिफिक मेथड बोला गया। उसको वजूद
  126. 11:55में लाया जा लाया जा सके, जो अल्टीमेटली इस दुनिया को समझने का एक फ्रेमवर्क होगा।
  127. 12:00तो, एक लंबा अरसा था कि जिसमें, यह जब कोई भी डिबेट शुरू होती है और क्योंकि दुनिया
  128. 12:06गॉडली वर्ल्ड था। मतलब लोग अक्सर कोई अल्लाह का वजूद कहेगा, कोई भगवान
  129. 12:13बोलेगा, कोई बुद्धा बोलेगा, कोई अलग-अलग ट्रेडिशंस में एक हायर
  130. 12:19एग्जिस्टेंस और अथॉरिटी की अंडरस्टैंडिंग होती है या होती थी। वो चैलेंज होनी शुरू
  131. 12:25हुई। शुरू में इस तरह नहीं कि भई वह अथॉरिटी हो नहीं सकती। यह डिबेट होनी शुरू
  132. 12:31हुई कि अकल और एंपेरिकल फैक्ट्स और ट्रेडिशनल नॉलेज जो इंट्यूशन के थ्रू आ
  133. 12:39सकती है, जो गॉड की ट्रांसमिशन के थ्रू आ सकती है वो कोएस्ट कैसे करेगी? और
  134. 12:45धीरे-धीरे क्योंकि जो वेस्टर्न जो प्रोजेक्ट था रीजनिंग का उनके जो अपने
  135. 12:51टेक्स्ट थे वो कंप्लीटली मॉडर्न साइंटिफिक प्रोग्रेस और फाइंडिंग से कई बार मेल नहीं
  136. 12:58खा रहे थे। जैसे डार्विन ने एवोल्यूशन की थ्योरी दी। तो लोगों ने जब बाइबल की तरफ
  137. 13:02देखा और बोला यहां पर तो क्रिएशनिज्म एक स्टोरी है और इस तरह से इंसान वजूद में
  138. 13:07आता है। इस तरह से बाकी जो मखलूकात हैं या फिर जो क्रिएशंस हैं जो डिफरेंट फ्लोरा
  139. 13:14है, फौना है, एनिमल्स हैं, बाकी सारी चीजें हैं वो इस तरह से वजूद में आती है
  140. 13:18कि कोई एक हायर एग्जिस्टेंस है जो वर्ल्ड को क्रिएट कर रही है। तो
  141. 13:23धीरे-धीरे जब मॉडर्न थ्यरीज जो कंस्ट्रक्ट रीजन और एविडेंस के बेस पर हो रही थी जो
  142. 13:28फिजिक्स के प्रिंसिपल्स हो रहे थे न्यूटॉनियन मैकेनिक्स गैलीलियो का
  143. 13:31प्रिंसिपल कि भाई कि अर्थ इज नॉट द सेंटर ऑफ द यूनिवर्स
  144. 13:36अर्थ भी एक जो यूनिवर्सल सिस्टम है जिसमें यूनिवर्स बीइंग में आ रहा है उसका एक
  145. 13:42हिस्सा है उसकी जरूरत नहीं है कि वो कोई बहुत स्पेशल एकिस्टेंस होगा। इसी तरह कि
  146. 13:48जो दुनिया है वो अक्ल के अराउंड और रीजन के अराउंड जो फ्रेमवर्क्स कंस्ट्रक्ट किए
  147. 13:54जा सकते हैं जो एक्सप्लेन कर रहा हो इंसान की कंडीशन को उसको दर्जा और तरजीह देनी
  148. 13:59जाने लगी और जो ट्रेडिशनल मेथड्स थे उनमें लोगों को गैब्स दिखने लगे।
  149. 14:04जी। तो इस कॉन्टेक्स्ट में धीरे-धीरे ओवर द
  150. 14:07पीरियड ऑफ टाइम यह हुआ कि जो एनलाइटनमेंट प्रोजेक्ट था उसमें क्योंकि जो ट्रेडिशनल
  151. 14:13मॉडल्स थे वो फिट नहीं हो रहे ने उनको बोला कि इनकी जरूरत नहीं है। और 19th 20th
  152. 14:18सेंचुरी आते-आते जब नीचा अपनी नी जो फ्रेडरिक नीच जर्मन फिलॉसोफर है वो जब लिख
  153. 14:24रहे हैं कि गॉड इज़ डेड। का मतलब यह था कि इन ऑल पोटेंशियल पॉसिबल वेज़ ऑफ़ लाइफ इन
  154. 14:30व्हिच गॉड कॉन्शियसनेस एंड लिटरेचर प्रोड्यूस अराउंड गॉड कैन कंट्रीब्यूट टू
  155. 14:35द प्रोग्रेस उसकी जरूरत और उसका पोटेंशियल खत्म हो गया है। सो इन ऑल पॉसिबल वेज़ जो
  156. 14:41गॉड की जरूरत है रियलिटी को कंस्ट्रक्ट करने में वो खत्म हो गई है। तो इस तरह से
  157. 14:48जो फलसफा होता है या जो आपकी फ्रेमवर्क्स होते हैं वह सिर्फ ऐसा नहीं होता है कि वह
  158. 14:53किस तरह से दुनिया को देखा जा रहा है उसी पे असरात होते हैं। आप किस तरह के
  159. 14:58इंस्टीटशंस बनाते हैं? जी
  160. 15:00आपका इकोनॉमिक ऑर्डर क्या होगा? जब आपने इंडिविजुअल
  161. 15:04रीजन सेंट्रिक दुनिया बना दी तो आपने जो मटेरियल कंडीशंस हैं उस पे भी
  162. 15:10सोचना शुरू करा। तो एक लिबरल मटेरियल कंडीशन को एंगेज करने के लिए जो मार्केट
  163. 15:16ऑर्डर होता है वह कैपिटलिज्म होता है कि भाई सब सेल्फिश हैं। लेकिन सबकी
  164. 15:20सेल्फिशनेस जब मिलके अपने-अपने एंड्स को अचीव करना चाह रही है तो अल्टीमेटली जो जो
  165. 15:26डिर्व करेगा उसको वो मिलेगा और उस तरह से जहां पे जो रिसोर्सेज डिस्ट्रीब्यूटेड हैं
  166. 15:32लोग वहां जाएंगे और अच्छा प्रोड्यूस करने की कोशिश करेंगे। हम
  167. 15:36फिर दूसरी थ्यरीज आई कि भाई कई बार ऐसा होता है कि आप यह अस्यूम कर रहे हैं कि हर
  168. 15:42किसी के पास फ्रीडम है। दुनिया में ताकत भी है, पावर भी है। मार्क्स बोलते हैं कि
  169. 15:47भाई कंट्रोल ऑफ रिसोर्सेज भी है। तो इस तरह से एक्सप्लेनेशन चल रहा था और उसका
  170. 15:51लबोलबाब ये हो रहा था कि इन सब चीजों को एक्सप्लेन करने के लिए हिस्टोरिकल मेथड एक
  171. 15:57डायलेक्टिकल प्रोसेस वो इनफ है। गॉड की जरूरत नहीं है।
  172. 16:01जी। और फिर जो स्टेट के इंस्टीटशंस लॉ भी धीरे-धीरे इमर्ज हो रहे थे। मैग्नाका से
  173. 16:07जब शुरू हुई जर्नी तो फिर लॉक, हॉब्स, रूसो अलग-अलग ट्रेडिशंस गुजरे जिन्होंने
  174. 16:13लीगल ट्रेडिशंस को इंटरप्रेट करना शुरू करा। तो धीरे-धीरे वहां पे भी एक आईडिया
  175. 16:19क्रिएट हुआ कि क्योंकि अलग-अलग जो कम्युनिटीज हैं वो अलग-अलग नजरिए से अपने
  176. 16:25ट्रेडिशंस और लॉ को भी देखती हैं। अगर हायर प्रोग्रेस की तरफ देखना है तो ये जो
  177. 16:30साइंटिफिक मेथड है या जो इसकी कंस्ट्रक्टेड सपोजिट इक्वलिटी है वही एक
  178. 16:35पैराडाइम और मार्कर होना चाहिए। चीजों को जज करने तो वहां पे भी
  179. 16:39स्टैंडर्डाइजेशन हो गया। उसके बाद यह हुआ कि स्टेट एज एन इंस्टीट्यूशन भी जब तक
  180. 16:45सेुलर नहीं होगा मतलब कि जब तक वो यह पोजीशन नहीं लेगा कि मैं किसी भी
  181. 16:50कम्युनिटी के बीच में अपनी कोई पोजीशन नहीं लूंगा। ये जो
  182. 16:54कम्युनिटी एग्नोस्टिक जी
  183. 16:57और ट्रेडिशनल वैल्यू एग्नोस्टिक जो लीगल फ्रेमवर्क बन रहा है वो जज करेगा लोगों के
  184. 17:02बीच में। हम तो इसको हल्लाक ने बोला कि ये वेस्टर्न
  185. 17:05मॉडर्निटी का प्रोजेक्ट है जो ट्रांसेंडेंटल यानी कि मटेरियल दुनिया से
  186. 17:11ऊपर भी कोई एकिस्टेंस हो सकती है। उसके डिनाइयल पे बना है और वो जो एथिक्स है जो
  187. 17:18इस तरह के ट्रेडिशनल फ्रेमवर्क से आती है जो अल्लाह के वजूद को या भगवान के वजूद को
  188. 17:24एक प्रिंसिपल कंपोनेंट मानती है दुनिया की एकिस्टेंस का।
  189. 17:28जी। तो उनके मोरल क्लेम्स भी खत्म हो जाते हैं। तो हलाक का आर्गुममेंट यह है कि
  190. 17:33इस्लाम जो खुद गॉड की सोवनिटी को प्रिंसिपल कंस्ट्रक्ट मानता है जिससे
  191. 17:38दुनिया ऐसी शक्ल ले सकती है कि वो दुनिया अच्छी होगी, जस्ट होगी, जिसमें अदल होगा
  192. 17:45वो पूरा का पूरा इकोसिस्टम या पैराडाइम चैलेंज हो जाता है। एक ऐसे मॉडर्न स्टेट
  193. 17:51के कंस्ट्रक्ट में जो यह बोलता है कि नहीं गॉड की कोई रियलिटी नहीं है। उसकी कोई
  194. 17:57जरूरत नहीं है। अगर आप उस चीज़ पे बिलीव भी कर रहे हो अपनी इररेशनल क्लेम्स की वजह से
  195. 18:02तो आप अपने पर्सनल लाइफ में कर सकते हैं। वह प्रिंसिपल्स ऑफ़ एंगेजमेंट नहीं बन
  196. 18:07सकता। तो उनके हिसाब से जो मटेरियल कंस्ट्रक्शन
  197. 18:12ऑफ सेल्फ है या रीजन है उसमें बहुत सारी ऐसी पोटेंशियल्स नहीं है कि जो मोरल लाइफ
  198. 18:19को कैसे गवर्न किया जाए बता सकें। तो ये दो आइडियाज एट ऑड्स हो गए। उनके लिए
  199. 18:25सिर्फ इस्लामिक स्टेट नहीं इवन अ हिंदू स्टेट इवन अ बुद्धिस्ट स्टेट कोई भी ऐसा
  200. 18:32स्टेट या आइडिया जो बिय्ड मटेरियल कंसेप्शंस को स्पेस देगा जब तक इस तरह का
  201. 18:40नेशन स्टेट एक्सिस्ट करता है जो सेकुलरिज्म को प्रिंसिपल मानेगा और गॉड की
  202. 18:46सोवनिटी या ट्रांस मटेरियल आइडियाज की सोवनिटी की पॉसिबिलिटी को डिनाई करेगा तब
  203. 18:52तक ये दो आइडियाज को एक्सिस्ट नहीं कर सकते। यह उनका क्लेम है।
  204. 18:56देखिए अली भाई आई आई अंडरस्टैंड व्हाट यू आर सेइंग। आप यू नो योर आर्गुमेंट इज दैट
  205. 19:00स्टेट जिसको आप नेशन स्टेट कह रहे हैं वो एक मटेरियल इंस्टीट्यूशन है।
  206. 19:05हल्ला कह रहे हैं। जी जी नॉट ओनली इन हलाकियन सेंस बट
  207. 19:09इवन इन इन अ वेरी आई वुड से इन अ वेरी फिजिकल सेंस है ना जो हिस्ट्री है नेशन
  208. 19:17स्टेट की वो एक्चुअली कुछ ऐसे एजम्पशंस पे बेस्ड है जो बड़े ही आई वुड से नैरो और
  209. 19:27मटेरियल एजम्पशनंस हैं। जैसे फॉर एग्जांपल सोवनिटी के लिए टेरिटरी होना जरूरी है।
  210. 19:34ठीक है? स्टेट के लिए बाउंड्री होना जरूरी है। है ना? कई सारी चीजें हैं। और इनमें
  211. 19:41बहुत बड़ा रोल जो है वो फिजिसिस्ट्स ने यू नो उनका है। फॉर एग्जांपल वन ऑफ़ द वन ऑफ द
  212. 19:48मोस्ट इंटरेस्टिंग एग्जांपल्स इज़ जब हम इंटरनेशनल लॉ पढ़ते हैं और इनफैक्ट
  213. 19:56इंटरनेशनल लॉ और इंटरनेशनल रिलेशंस दोनों पढ़ते हैं। तो उसमें एक ट्रीटी आती है
  214. 20:01ट्रीटी ऑफ़ वेस्टफेलिया है ना 1648 की और वो ट्रीटी थी बिटवीन कैथोलिक्स एंड
  215. 20:07प्रोटेस्टेंट्स दोनों की लड़ाई थी और वो एक ट्रीटी हुई जिससे वो चीजें सेटल हुई और उस
  216. 20:12ट्रीटी में बात हुई जिसको कहते हैं आप ऑटोनोमी की कि स्टेट्स ऑटोनॉमस होंगे। कोई
  217. 20:21जरूरी नहीं है कि आप जो है वो आईडियोलॉजी के बेसिस पे अलाइन करें। आप इंडिपेंडेंट
  218. 20:27हैं। आपको जिससे जो अलाइनमेंट करना है कीजिए। जैसे फॉर एग्जांपल पाकिस्तान भी
  219. 20:31मुस्लिम स्टेट है। अफगानिस्तान भी मुस्लिम स्टेट है। उनको जिससे अलाइन करना है वो
  220. 20:35करें। दे आर इंडिपेंडेंट। तो उस ट्रीटी के बाद नेशन स्टेट को एक इंडिपेंडेंट
  221. 20:39एग्जिस्टेंस मिलती है। और वहां से कांसेप्ट ऑफ सोवनिटी स्टार्ट होता है
  222. 20:45इंटरनेशनल रिलेशंस में। लेकिन ये जो ये जो इंडिपेंडेंस ऑफ स्टेट
  223. 20:50को सोवनिटी में ट्रांसलेशन होता है और सोवनिटी का ट्रांसलेशन जुरिसडिक्शन में
  224. 20:56होता है ये एक्चुअली होता है थ्रू दी वर्क्स ऑफ लीबनेस
  225. 21:03लाइबनेस लाइबनेस जो जिसको जो हु इज द इन्वेंटर ऑफ
  226. 21:07कैलकुलस अदर देन न्यूटन
  227. 21:10डिफरेंशियल कैलकुलस डिफरेंशियल कैलकुलस अदर दैन न्यूटन तो
  228. 21:13कहने का मतलब ये है कि ये जो एक नेशन स्टेट का जो एक का्सप्ट सेप्शन है। बड़ा ही
  229. 21:17मटेरियल है और ये ये बड़ी फिजिकल रियलिटी पे बेस्ड है। तो ऑफ कोर्स ट्रांसेंडेंटल
  230. 21:24और स्पिरिचुअल रियलिटी इसमें एक्सिस्ट नहीं करती। सो आई अंडरस्टैंड दैट एंड
  231. 21:29उसमें अगर आप एक स्पिरिचुअल एलिमेंट लेके आते हैं। जहां पे कम्युनिटी एक एक जिसको
  232. 21:37कहते हैं हायर बीइंग को देखती है या जस्टिस जो है वो फॉर एग्जांपल आफ्टर डेथ
  233. 21:42आप अस्यूम करते हैं कि साहब डेथ के बाद अल्लाह करेगा जस्टिस। जैसे डे ऑफ़ जजमेंट
  234. 21:46है या आप जो करेंगे उसका रिजल्ट्स आपको मिलेंगे या देयर वाज़ अ लाइफ बिफोर यू टेक
  235. 21:52बर्थ। ये सारी चीजें जो हैं वो उसमें मिसमैच होती हैं। ये बिल्कुल सच बात है।
  236. 21:58लेकिन इसमें एक एलिमेंट और है व्हिच आई थिंक इज़ क्रूशियल एंड एंड एंड देन आई थिंक
  237. 22:05वी विल कम टू द सेकंड क्वेश्चन दैट आई आस्क्ड यू इनिशियली जो मैंने आपसे शुरू
  238. 22:08में पूछा था कि मुस्लिम आइडेंटिटी कंस्ट्रक्शन इंडिया में कैसे होगा? है ना?
  239. 22:12सो आई विल कम टू दैट अ लिटिल लेटर बट इन बिटवीन
  240. 22:17आई जस्ट वांटेड टू अंडरस्टैंड कि ये जो नेशन स्टेट का जो मटेरियल
  241. 22:21यू नो अंडरस्टैंडिंग है जिसको आप कह रहे हैं कि स्पिरिचुअल अंडरस्टैंडिंग से ये
  242. 22:26मेल नहीं खाता अकॉर्डिंग टू हर लाक एंड प्रोबेबबली ये एग्जिस्ट को एक्सिस्ट नहीं
  243. 22:31कर पाएगा एंड दैट्स द रीज़न व्हाई देयर इज़ अ इंपॉसिबल स्टेट इंपॉसिबल नेशन स्टेट तो
  244. 22:36कहने का मतलब यह है कि यह जो आप जो बात बोल रहे हैं इट्स अ वेरी अंडरस्टैंडेबल
  245. 22:42थिंग कि इस्लामिक कंसेप्शन में नेशन स्टेट में एक कंट्राडिक्शन है। अब ये
  246. 22:47कंट्राडिक्शन किस लेवल का है? क्या यह इंपॉसिबल है रिकंसाइल करना या इसको
  247. 22:53पॉसिबिलिटी है रिकंसाइल करने की थ्रू अ पर्टिकुलर स्ट्रेटजी? दैट्स द थिंग। बट
  248. 22:58बिफोर वी कम टू दैट माय क्वेश्चन इज़ क्या जो नेशन स्टेट है इट डेवलप्ड ऑन द जडियो
  249. 23:07क्रिश्चियन ट्रेडिशन। ठीक है? जो टेंपलेट है उसकी वक्र क्रिश्चियन ट्रेडिशन है। तो
  250. 23:13ऐसा नहीं है कि इट डज नॉट हैव दी स्पिरिचुअल एलिमेंट। इट हैज़ दी स्पिरिचुअल
  251. 23:20एलिमेंट बट ऑफ अ डिफरेंट टाइप। फॉर एग्जांपल है ना? जहां पर आप गॉड की बात
  252. 23:25नहीं कर रहे हैं, लेकिन गॉड की बात कर रहे हैं इन अ डिफरेंट सेंस। फॉर एग्जांपल
  253. 23:32यू अस्यूम दैट ह्यूमन बीइंग इज क्रिएटेड इन द इमेज ऑफ़ गॉड। एंड देयर फॉर ह्यूमन
  254. 23:38बीइंग कैन डू व्हाटएवर गॉड वांट्स हिम टू डू। ठीक है? तो ह्यूमन एकशंस जो हैं वह
  255. 23:43अलाइन होते हैं गॉड के इंटेंशन से। और जैसे गॉड की लैंग्वेज यूनिवर्सल है वैसे
  256. 23:48ही ह्यूमन बीइंग की लैंग्वेज भी यूनिवर्सल हो सकती है। सो नेशन स्टेट उस
  257. 23:53यूनिवर्सलिटी पे बेस्ड है। उसी चीज पे बात करता है। तो टू से दैट इट इज़ कंप्लीटली
  258. 23:59मटेरियल इज़ दैट द राइट थिंग। दैट दैट्स दैट दैट इज़
  259. 24:04वन थिंग दैट आई वुड लाइक टू अंडरस्टैंड। तो इवन इफ इट इज़ अ सेकुलराइज़्ड मटेरियल
  260. 24:09कंसेप्शन इज़ इट डिवॉइड ऑफ़ द स्पिरिचुअलिटी और प्रोबेबबली जिसको आप कहें मोर
  261. 24:16एक्यूरेटली इज इट डिवॉइड ऑफ़ एनी थियोलॉजिकल कोनोटेशन और बेसिस असल में
  262. 24:22इसके दो कंपोनेंट हैं। जी
  263. 24:24एक इसका फिलॉसोफिकल कंपोनेंट है और एक इसका स्टेट एज एन इंस्टीट्यूशनल कंपोनेंट
  264. 24:29है। फिलोसोफिकल कंपोनेंट यह है कि जब हल्लाक किस तरह से इस्लामिक स्टेट या किसी
  265. 24:36भी ऐसे स्टेट को जो अदर देन नेशन स्टेट एक वैल्यू सिस्टम को इनकंपास करता है वो उनको
  266. 24:43एक तरफ रखते हैं और एक आईडिया ऑफ़ नेशन स्टेट जो एक
  267. 24:47फिलॉसोफिकल कंस्ट्रक्ट है जिसमें एक सर्टेन सेट ऑफ एजम्पशनंस हैं। सोवनिटी
  268. 24:51होगी तो ऐसी होगी किसकी सोवनिटी होगी। उसके बाद एक मेटाफिजिक्स है कि क्या
  269. 25:00एक्सिस्ट करता है? कैसे एक्सिस्ट कर सकता है? क्यों एक्सिस्ट करता है?
  270. 25:03फिर उसकी एक थ्योरी ऑफ़ नॉलेज है। एपिस्टमोलॉजी है कि आप उसको कैसे जान सकते
  271. 25:07हैं? क्यों जान सकते हैं? फिर उस थ्योरी ऑफ़ नॉलेज को इंस्टीटशंस में
  272. 25:14तब्दील करने के लिए एक मेथोडोलॉजी होगी उस एपिस्टमोलॉजी की। मेटाफिजिक्स है तो उसकी
  273. 25:19एकोलॉजी भी होगी कि भ मेरी एग्जिस्टेंस जो है एज अ एज अ इंडिविजुअल एज अ कलेक्टिव
  274. 25:26इसकी क्या रियलिटी है? कंपोनेंट्स हैं। जी।
  275. 25:30यह तो हो गई कि आपकी इंग्रेडिएंट्स ऑफ फिलॉसफी क्या है जिससे आप अपना वर्ल्ड
  276. 25:35व्यू कंस्ट्रक्ट करते हैं। अगर इसको क्योंकि आपने लाइब्स का हवाला दिया
  277. 25:38लाइबिट्स और न्यूटन दोनों एक ही जमाने में फिजिसिस्ट्स थे। और दोनों का एक बहुत बड़ा
  278. 25:46झगड़ा है। जो रॉयल इंस्टट्यूट जो है उस टाइम पर साइंस का जो सोसाइटी था
  279. 25:53उसमें वो झगड़ा आगे गया। न्यूटन का भी क्लेम था कि उसने कैलकुलस
  280. 25:58बनाया। अब्सोलुटली और लाइवनेट्स का भी क्लेम था उसने कैलकुलस
  281. 26:02बनाया। जी।
  282. 26:03न्यूटन क्योंकि एक क्रिश्चियन बिलीविंग फ्रेमवर्क से अपनी फिलॉसोफिकल
  283. 26:09कंस्ट्रक्शन कर रहा था तो वो एक यूनिफाइड कंटीन्यूअस मोनेस्ट रियलिटी में बिलीव
  284. 26:16करता था। क्योंकि क्रिश्चियनिटी में मोनोथिज्म है।
  285. 26:20और उस फिलॉसोफिकल कंडीशनिंग की वजह से जो कैलकुलस उसने कंस्ट्रक्ट किया वो इंटीग्रल
  286. 26:26कैलकुलस कहलाता है। कैलकुलस के दो हिस्से हैं। एक डिफरेंशियल कैलकुलस है।
  287. 26:30एक इंटीग्रल कैलकुलस है। इंटीग्रल कैलकुलस क्या करता है कि वो मैथमेटिक्स के
  288. 26:35प्रिंसिपल्स को इस्तेमाल करके डिफरेंसेस को इंटीग्रेट कैसे किया जा सकता है कि
  289. 26:41कर्व कैसे एग्जिस्ट कर सकता है? उसके ऊपर आप प्रेडिक्शंस कर सकते हैं।
  290. 26:47जी मैथमेटिकल मॉडलिंग कर सकते हैं।
  291. 26:49जी। उसके बनिस्बत जो लाइमनेट्स था उसका फलसफा उसके बिल्कुल विपरीत और ऑोजिट था।
  292. 26:55वो एक डीकंस्ट्रक्शनिस्ट अप्रोच थी उसकी के दुनिया जो है वो मोनड्स में एक्सिस्ट
  293. 27:01करती है। टूटे हुए हिस्सों में इतने छोटे-छोटे जो मोनड्स होते हैं वो
  294. 27:05कंस्ट्रक्शंस इन इटसेल्फ हैं। थिंग्स इन इटसेल्फ हैं जो एक पर्टिकुलर आईडिया को
  295. 27:10कंप्लीटली रिप्रेजेंट करते हैं। और वो एक डिसजॉइंटेड रियलिटी है।
  296. 27:15और उनमें कम्युनिकेशन इसलिए होता है क्योंकि एक मोनाड दूसरे मोनाड को मिरर कर
  297. 27:20रहा है। अब दोनों और इस वजह से उन्होंने डिफरेंस का कैलकुलस किया कि कंटिन्यूटी को
  298. 27:26तोड़ा कैसे जा सकता है? अब अगर आप इसको बहुत गहराई से सोचेंगे, यह मैं अपना जो
  299. 27:31फ्लेम फ्रेमवर्क फिलॉसफी का मेटाफिजिक्स कंस्ट्रक्ट करता हूं, उसकी बुनियादी सवाल
  300. 27:35है। मैं इस डिबेट को लाता हूं। मैं यह बोलता हूं कि यह जो डिबेट है, यह एक
  301. 27:40प्रॉब्लम ऑफ फिलॉसोफी है जो बर्टन रसेल ने भी बोला अपनी किताब में। क्या दुनिया
  302. 27:44कंटीन्यूअस है? या दुनिया डिस्क्रीट है, टूटी हुई है? अगर दुनिया कंटीन्यूअस है तो
  303. 27:51आप और मैं अलग-अलग क्यों है? यह प्रिंसिपल और
  304. 27:56डिफरेंस कहां से आ रहा है? और अगर दुनिया डिस्क्रीट है तो हमारे बीच में कंटीन्यूअस
  305. 28:02लैंग्वेज कंटीन्यूअस वर्ल्ड ये सारी चीजें जो हमें कम्युनिकेट करने दे रही हैं
  306. 28:08केमिस्ट्री बायोलॉजी जिसमें कंटिन्यूटी ऑफ एग्जिस्टेंस है वो कहां से आ रही है?
  307. 28:13जी। यह एक फंडामेंटल प्रॉब्लम है फिलॉसफी की जिसको कोई भी फ्रेमवर्क अभी तक डिॉल्व
  308. 28:19नहीं कर पाया। जी। क्या दुनिया इंफिनिट है
  309. 28:24या फिर लिमिटेड है? नहीं एक्चुअली ये जो आप बात कह रहे हैं ना आई कैन आई कैन
  310. 28:28अंडरस्टैंड। आई कैन गिव यू टू एग्जांपल्स जो मेरे ज़हन में आ रहा है। एक तो एग्जांपल
  311. 28:32है प्लेबिस और न्यूटन का जो आप बात कर रहे हैं। दोनों स्पेस को ऐसे ही डिफाइन करते
  312. 28:38हैं। जी। ठीक है? न्यूटन स्पेस को एज अ
  313. 28:42यूनिवर्सल यूनिफाइड फ्रेमवर्क में देखता है।
  314. 28:45यूनिवर्सल फ्रेम ऑफ रेफरेंस। हां, है उसके
  315. 28:47और लिबनस उसको डिस्क्रीट फ्रेमवर्क में देखता है एज बॉडीज।
  316. 28:50जी। ठीक है? एक तो ये है समथिंग सिमिलर इज़ द
  317. 28:55रिलेशनशिप बिटवीन एरिस्टोटलल एंड रेनी डिकार्थ।
  318. 28:58डिकार्ट। डिकार्ट
  319. 28:59आईडिया ऑफ़ सेल्फ ना। यस। जो बात करता है कि एरिस्टोटल सेज़ द
  320. 29:05नंबर्स आर डिस्क्रीट। जी। अर्थमैटिक कैन नॉट बी यूज्ड टू
  321. 29:09अंडरस्टैंड द वर्ल्ड। दुनिया को क्योंकि दुनिया कंटीन्यूअस है। तो अर्थमैटिक यूज़
  322. 29:14नहीं कर सकते। बट व्हाट रेनी डज़ इज़ ही क्रिएट्स
  323. 29:19कोऑर्डिनेट जहां पे वो कंटिन्यूटी दिखाता है नंबर की
  324. 29:24जहां पे आप थ्रू ज्योमेट्री जहां पे आप नंबर्स के थ्रू ज्योमेट्री क्रिएट कर सकते
  325. 29:29हैं। है ना? सो आई थिंक यू आर एब्सोलुटली राइट इन दिस। ऑफ कोर्स यू आर राइट। बट बट
  326. 29:35दिस इज एन एग्जांपल वेयर जहां पे आप देख रहे हैं कि डिस्क्रीट और जो कंटिन्यूटी है
  327. 29:42ये दोनों आपस में यू आर नॉट एबल टू रिकंसाइल
  328. 29:46है ना और ये डिबेट आगे बढ़ती है यूनिवर्सलिज्म में
  329. 29:52और पर्टिकुलैरिटी में और पर्टिकुलैरिटी में तो हाउ डू यू लुक एट
  330. 29:57इट? जब इस तरह के कंस्ट्रक्ट्स डेवलप होते हैं
  331. 30:00कि व्हाट इज एंड व्हाट व्हाट टू बी? जी तो जो हलाक की डिबेट हमने सामने रखी वो
  332. 30:05व्हाट ऑ टू बी की डिबेट है। जी
  333. 30:08कि उनकी एक पर्टिकुलर अंडरस्टैंडिंग है कि इस्लामिक गवर्नेंस क्या है?
  334. 30:12हम उसके एजम्पशनंस हैं। जैसे न्यूटन ने
  335. 30:14एजम्पशन लिया कि स्पेस कंटीन्यूअस है। यूक्लिडियन है मतलब स्ट्रेट है। ठीक है?
  336. 30:18उसमें आप मूव कर सकते हैं। अब्सोलुटली।
  337. 30:22उसको काटीज़ियन प्लेन जो आपने बोला कि टू डायमेंशनल ज्योमेट्री में मैप किया जा
  338. 30:27सकता है। और जब वह मैप किया जा सकता है तो उससे लॉज़ ऑफ फिजिक्स इमर्ज हो जाते हैं।
  339. 30:31अब्सोलुटली। अब वो जो लॉज़ ऑफ फिजिक्स के लिए जो
  340. 30:36अजम्पशंस उसने लिए वो लेटर आइंस्टाइन आके चैलेंज करता है।
  341. 30:40यस। आइंस्टाइन बोलता है कि जो मरकरी है
  342. 30:44हमारे सोलर सिस्टम में हम उसका एक्यूरेट पाथ नहीं हम डेवलप कर पा
  343. 30:49रहे। जो हमारी एविडेंस है। और जो मैथमेटिक्स है न्यूटन की उसमें कुछ
  344. 30:55पॉइंट्स के लेवल पर 1% या कुछ ऐसे डिफरेंस है
  345. 31:00और बहुत इंटरेस्टिंग मूवी है इसके ऊपर
  346. 31:02आइंस्टाइन एंड एडिंगन एडिंगटन की जी
  347. 31:05और इस पे पूरा का पूरा उनका तो आइंस्टाइन ये बोलते हैं कि जो ट्रू मैथमेटिकल थ्योरी
  348. 31:10होती है यूनिवर्स की उसमें एरर नहीं होता
  349. 31:13जी एरर दो वजह से हो सकता है
  350. 31:17लोगों ने उसको एक्सप्लेन करने की कोशिश की या तो एक एक्स्ट्रा प्लनेट है जो प्लनेट
  351. 31:22एक्स या कुछ है जो सोलर सिस्टम में दिखाई नहीं दे पा रहा है
  352. 31:26जिसकी वजह से ग्रेविटेशनल कांस्टेंट्स चेंज हो रहे हैं और वो मरकरी पे इंपैक्ट
  353. 31:30कर रहे हैं लेकिन अगर ऐसा प्लनेट है तो वो और भी
  354. 31:34जगह करना चाहिए उसको करना चाहिए और बाकी जगह पे उतना ज्यादा
  355. 31:37डिफरेंस नहीं दिख रहा है। दूसरा ये था कि जो स्पेस को आपने ये समझा कि वो
  356. 31:43यूक्लिडियन स्ट्रेट है ये अपने आप में एक मिसनमर हो सकता है।
  357. 31:47बिलकुल। क्योंकि उस वक्त तक मैथमेटिक्स के डिफरेंट
  358. 31:50कॉसेप्शनंस आ चुके थे। गाउस ने यह बोला कि जब उसने डेजर्ट्स को
  359. 31:54पढ़ने की कोशिश करी जो डेजर्ट्स के सैंड ड्यून्स होते हैं वो ऊपर नीचे होते हैं।
  360. 31:59हम और स्ट्रेट नहीं होते हैं। अब उसको दिक्कत
  361. 32:02होती है कि भ हमारे पास जो मैथमेटिक्स है वो एक स्ट्रेट ज्योमेट्री की है।
  362. 32:07यहां पे कर्वेचर है। ये सारी चीजें हैं। इसको मैं कैसे रीड करूं? तो उसने एक स्पेस
  363. 32:12की मैथमेटिकल थ्योरी कंस्ट्रक्ट की जिसमें कर्वेचर को भी
  364. 32:18समझा जा सकता था। तो आइंस्टाइन ने ये अस्यूम करा और भी
  365. 32:22मुख्तलिफ रीज़ंस थे कि हो सकता है कि स्पेस सीधा ना हो
  366. 32:26कर्व्ड हो। और जब उसने इस थ्योरी को इस्तेमाल करके स्पेशल थ्योरी ऑफ़
  367. 32:30रिलेटिविटी बनाई और बाद में जनरल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी बनाई। उससे और सारे बहुत
  368. 32:34सारे भी कांसेप्ट्स आते हैं। तो वहां पे मरकरी का एक्यूरेट पाथ आ जाता है।
  369. 32:38जी। तो अब उसमें दो केस हुए कि न्यूटन ने अस्यूम करा कि जो स्पेस है वो स्ट्रेट है
  370. 32:44और आइंस्टाइन ने उसे कर्व कर दिया। अब जो स्ट्रेट स्पेस होता है वो एक पर्टिकुलर
  371. 32:51केस होता है कर्वेचर का कि जहां पे ज़ीरो कर्वेचर है।
  372. 32:55जी तो अगर आप कर्वेचर को वन कर दें या वो कर
  373. 32:59दें तो आपका स्पेस स्ट्रेट हो जाएगा। व्हेन यू डिफरशिएट
  374. 33:03अकाउंट व्हेन यू डिफरशिएट तो जो न्यूटन की
  375. 33:05मैकेनिक्स है वो आइंस्टाइन के फ्रेमवर्क में जब आप ये कंडीशन लगा देते हैं तो
  376. 33:09न्यूटन मैकेनिक्स एक स्पेशल केस बन जाता है
  377. 33:11जी और आइंस्टाइन की मैकेनिक्स एक स्पेशल केस
  378. 33:14होता है हम
  379. 33:15तो हम क्या करते हैं कि जब दुनिया को देखते हैं सोशियोलॉजिकली स्पीकिंग आल्सो
  380. 33:19जिस तरह हम फिजिक्स में कर रहे हैं जी
  381. 33:22तो हम आइडियाज को स्पेस में फॉर्म करते हैं
  382. 33:25जी एजम्पशनंस दे के कि कैपिटलिज्म है कि हर
  383. 33:29कोई जहां चाहे जा सकता है क्योंकि बाउंड्रीज जो जो है वो अस्यूम नहीं की गई
  384. 33:33है कि मुझे रोकेंगी इंडिया से पाकिस्तान या इंडिया से बांग्लादेश या इंडिया से
  385. 33:37यूएस जाने में। मुझे पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये जो फ्रिक्शन है बॉर्डर्स
  386. 33:42का वो उसमें अस्यूम्ड है कि एक्सिस्ट नहीं करता है। बट ऐसा होता नहीं है।
  387. 33:46जी उसमें ये अस्यूम होता है कि परफेक्ट
  388. 33:48कंपटीशन है। जी
  389. 33:50जो फर्स्ट एडमम स्मिथ की थ्योरी है लेकिन कंपटीशन भी परफेक्ट नहीं है।
  390. 33:53जी कोई सेकंड जनरेशनल लर्नर है।
  391. 33:56जी कोई बिजनेसमैन का बेटा है।
  392. 33:59कोई एरिस्टोक्रेटिक फैमिली से आ रहा है। जिसने बचपन से ही लिबरल साइंसेस पढ़ी हैं।
  393. 34:04उसकी जो बचपन से ही ट्रेनिंग है थॉट में वो ज्यादा है।
  394. 34:07तो उसके पास एक सोशल कैपिटल है। एक एज है जिसकी वजह से जो ट्रू कैपिटलिज्म है वो
  395. 34:13कभी भी रियल स्पेस में मैनिफेस्ट नहीं करता। जी
  396. 34:16जभी आपको कम्युनिज्म सोचना पड़ता है कि अच्छा पावर रिलेशंस हैं। लेकिन ट्रू
  397. 34:20कम्युनिस्ट सोसाइटी के भी जो अजमशनंस हैं वो भी फेल हो जाते हैं।
  398. 34:24जी तो प्रॉब्लम ये आती है कि जब हम लोग स्टेट
  399. 34:27को एक कंस्ट्रक्ट में लाते हैं और वो फिलॉसफी
  400. 34:32जो आप उसमें कंस्ट्रक्ट कर रहे हैं इंपोज करते हैं कि एज इफ स्टेट में सोवनिटी
  401. 34:38एक्सिस्ट नहीं करती थी। इस तरह से वो पहली बार नेशन स्टेट में हुआ। ऐसा नहीं है।
  402. 34:41मेरा यही चैलेंज है हल्लाक को। क्यों हलाक की अंडरस्टैंडिंग
  403. 34:46एक तरह का मोरल डायलेमा क्रिएट करती है मुस्लिम लाइफ में क्योंकि अगर ऐसा स्पेस
  404. 34:53एकिस्ट करता है तो आप इस्लाम को प्रैक्टिस नहीं कर सकते और क्योंकि ऐसा स्पेस जब तक
  405. 34:59एग्जिस्ट होना खत्म नहीं होगा तब तक इस्लाम आ नहीं सकता। तो अब आप क्या करेंगे
  406. 35:05कनंड्रम में कि वो स्पेस चेंज भी हो सकता है या नहीं या स्पेस के साथ सिर्फ आपका
  407. 35:09जीरो सम गेम है इस नेशन स्टेट का। तो पहला सवाल मैंने पूछा अपने आप से जब मैंने देखा
  408. 35:15कि स्टेट की लेगसी क्या है? ह्यूमंस जब ऑर्गेनाइज करते हैं वो किन प्रिंसिपल्स पे
  409. 35:20ऑर्गेनाइज करते हैं? क्या बाउंड्री जो है वो क्या मॉडर्न रियलिटी है? बाउंड्री तो
  410. 35:27स्पार्ट की भी थी। बाउंड्री तो एंशिएंट जो किंगडम्स हैं या बिजेंटिन है या जुडिया है
  411. 35:37या उहूद है या जो भी आपके वो हैं वो एक एंपायर्स बाउंड्रीज एक स्टेट का फॉर्मेशन
  412. 35:43था। इवन मक्का इटसेल्फ अगर आप मदीना मक्का को स्टडी करेंगे फ्रॉम पॉलिटिकल
  413. 35:49पर्सपेक्टिव उसमें लिखा आएगा सिटी स्टेट्स एथ एथेंस वाज़ अ सिटी स्टेट नेशन स्टेट
  414. 35:55सिटी स्टेट नेशन एक बड़ा कंस्ट्रक्ट है जहां ज्योग्राफी ज्यादा हैं जहां जहां
  415. 36:00कॉम्प्लेक्सिटी ऑफ कम्युनल एग्ज़िस्टेंस ज्यादा है जैसे आइंस्टाइन की ज्योमेट्री
  416. 36:07ज्यादा कॉम्प्लेक्स है कंपेयर टू न्यूटोनियन जो सिटी स्टेट में होगा वहां
  417. 36:11लेस कॉम्प्लेक्स कम्युनल प्रॉब्लम्स लेकिन मक्का में भी कुरैश एक्सिस्ट करते
  418. 36:17थे। दूसरी ट्राइब्स भी एक्सिस्ट करती थी। मक्का की एक डिफाइंड बाउंड्री थी। जहां
  419. 36:21बोला जाता था अब आप मक्का में एंटर कर रहे हैं। वहां की एक एंशिएंट हिस्ट्री थी। जो
  420. 36:26मॉडर्न नेशन स्टेट्स हैं वो अपने आप को ये भी बोलते हैं कि भ हमारी एक कंटिन्यूड
  421. 36:32हिस्ट्री है जो डिस्कर्सिव है। जो मटेरियली डलेक्टिकल है।
  422. 36:37जी। तो ऐसा तो कुछ इंपॉर्टेंट नहीं है जो यहां
  423. 36:41नहीं हुआ। वहां पर आप बोल सकते हैं ऐसे भी स्टेट हुए हैं हिस्ट्री में जिसमें जैसे
  424. 36:47चारवाक यहां पर एक्सिस्ट करते थे। हमेशा गॉड का आईडिया ऐसा नहीं रहा है कि मतलब
  425. 36:50वही आईडिया रहा है। ट्राइबल ऑर्गेनाइजेशंस हुए हैं उसके बीच में। ट्राइबल भी एक
  426. 36:56स्मॉल स्पेस है कि भ ये ट्राइब का हिस्सा है। जहां ये लोग यह बोलते हैं कि ये जो
  427. 37:00टेरिटोरियलिटी है वो इतनी फिक्स्ड हो गई वो उसकी वजह है। क्योंकि पहले क्या था?
  428. 37:04लोग फैल रहे थे। छोटी ट्राइब्स थी, छोटे सिटीज थे। देयर वाज़ अ वर्ल्ड टू बी
  429. 37:09क्लेम्ड। नो मैनस लैंड थे। लोग जा सकते थे। अपनी टेरिटरी एक्सपेंड कर सकते थे।
  430. 37:16वेस्ट फेलिया का क्योंकि आपने जिक्र किया। अब वो दौर आ गया था कि किंगडम्स इतने
  431. 37:20एक्सपैंड हो चुके थे कि उनके टेरिटोरियल क्लेम्स ओवरलैप कर रहे थे और लड़ाई झगड़ा
  432. 37:26इतना हो गया था कि वो खूनम खारी में बदल रहा था। तो आपको एक नेगोशिएशन ट्रीटी
  433. 37:30चाहिए थी जो फिक्सेट कर सके कि यह जो टेरिटोरियल बाउंड्रीज हैं और जब वो
  434. 37:35टेरिटोरियलिटी आ जाती है क्योंकि इधर भी प्रोटेस्टेंट थे इधर भी।
  435. 37:40मतलब आप एक आर्टिफिशियल जब कंस्ट्रक्शन करते हैं और उसको इंपोज करते हैं एक
  436. 37:45एंटिटी की तरह जैसे मक्का में भी थे मुसलमान हुबिया ट्रीटी से पहले बाद में भी
  437. 37:51और इधर भी थे अब आप उसको कैसे डील करेंगे तो आप नेगोशिएशन करेंगे क्योंकि अब हम
  438. 37:56लड़ना बंद करेंगे तो कुछ राइट्स नेगोशिएट कर लेते हैं उस पे डिस्कशन होगा कि
  439. 38:02प्लूरलिज्म को इस टेरिटोरियल सोवनिटी में डील कैसे किया जाए
  440. 38:07तो क्योंकि एनलाइटनमेंट प्रोजेक्ट चल रहा था तो उन्होंने बोला कि आप प्लूरलिज्म को
  441. 38:11जब डील कर सकते हैं जब आप प्लूरलिटी जिस वजह से कंस्ट्रक्ट हो रही हो उसकी रीजनिंग
  442. 38:16को स्टेट से डिवाइड कर दें जो चर्च और उस पे ये हुआ स्कीजम हुआ तो एक तो यह सवाल है
  443. 38:23कि भ ऐसा आइडियल ट्रीटी बनी लेकिन स्टेट कभी भी मॉडर्न नेशन स्टेट भी
  444. 38:30इस तरह आइडियली एक्सिस्ट नहीं करा। नहीं आई विल कम टू दैट अली भाई। देखिए
  445. 38:34इसमें आई आई वांट टू हैव मोर क्लेरिटी ऑन दिस।
  446. 38:38देखिए आप जब यह कह रहे हैं ना कि वी विल कम टू द ओरिजिनल क्वेश्चन अगेन। ठीक?
  447. 38:44ओरिजिनल क्वेश्चन पे हम आते हैं कि साहब हल्ला इज़ द आर्गुम हिज आर्गुमेंट इज़ दैट
  448. 38:54प्रोबेबबली इन अ मोर जिसको आप कहते हैं एक एक मोर जेनेरिक सेंस में एक स्पिरिचुअल
  449. 39:00ट्रेडिशन और एक मटेरियल ट्रेडिशन को एक्सिस्ट नहीं कर सकते।
  450. 39:03फिलोसोफिकली फिलोसफिकली।
  451. 39:04और वो अस्यूम कर रहे हैं कि रियलिटी में भी ऐसे ही मैनिफेस्ट होता है ट्रेडिशन।
  452. 39:07मेरा आर्गुमेंट ये है कि जो फिलॉसोफिकली जो थ्यरीज कंस्ट्रक्ट होती हैं और जिसमें
  453. 39:14ये अस्यूम कर लिया जाता है जो कुछ रियलिटी के कंपोनेंट्स विज़िबल हैं लेकिन अस्यूम कर
  454. 39:18लिया जाता है कि नहीं परफेक्ट अकाउंट दिख रहा है आपको
  455. 39:21जी कि मर्केंटाइल क्लास के हाथ में कंट्रोल
  456. 39:23है उसके बावजूद भी आप थरेटिकली अस्यूम कर रहे हैं कि कंट्रोल नहीं है। तो जो लॉज़
  457. 39:29इमर्ज होंगे आपको जो बजाहिर लॉज़ इमर्ज होंगे वो कुछ और
  458. 39:34एंड्स कंक्लूड कर रहे होंगे और दुनिया में कुछ और हो रहा होगा। तो मेरा कहने का मतलब
  459. 39:39है जो आप जिस तरह से स्टेट को डिस्क्राइब कर रहे हैं इवन जब कॉन्स्टिट्यूशन भी
  460. 39:44इंडिया का है वो बहुत सारी चीजें कहता है लेकिन जब एथनो नेशनलिस्ट बन जाती है
  461. 39:47डेमोक्रे डेमोक्रेसी या फिर मेजॉरिटेरियन होता है स्टेट इसका मतलब यह होता है कि जो
  462. 39:52एक्चुअल रिटन कोड ऑफ कंडक्ट है वो आइडियली मैनिफेस्ट नहीं करता पावर रिलेशंस होते
  463. 39:57हैं। कंपीटिंग क्लेम्स होते हैं। आई अंडरस्टैंड दैट बट वी विल कम टू दिस। माय
  464. 40:02क्वेश्चन इज अगेन गोइंग बैक टू दी आर्गुममेंट। अगर हलाक का यह कहना है कि
  465. 40:06नेशन स्टेट फ्रॉम मुस्लिम पर्सपेक्टिव एकिस्ट नहीं कर सकता या मुस्लिम नेशन
  466. 40:13स्टेट में बिलोंग नहीं कर सकते। ठीक है? इफ दैट इज हिज क्लेम माय क्वेश्चन इज़
  467. 40:19व्हाट इज हिज एजम्पशन अबाउट द नेशन स्टेट? क्या वो नेशन स्टेट को एज एन एथिस्टिक
  468. 40:24एंटिटी देखता है? वो मॉडर्निटी का प्रोडक्ट देख रहे हैं या
  469. 40:27फिर जो क्रिश्चियन प्रोडक्ट
  470. 40:29नहीं वो ये भी नहीं बोल रहे हैं। वो बोल रहे हैं कि भ जो जैसे जूडो क्रिश्चियन
  471. 40:31एथिक्स भी है ना ये जो पिछले 50 100 साल में देखिए ये सब रीडिंग होती है। कार्ल
  472. 40:39स्मिथ ने बोला कि भ आप जो लिबरलिज्म को इंपोज कर रहे हैं जो मॉडर्निटी और
  473. 40:44लिबरलिज्म इंपोज कर रहे हैं अंडर द रेडार एनिमोसिटीज जनरेट होती हैं। क्योंकि आप
  474. 40:53किसी की लिव्ड एक्सपीरियंस को लिव्ड कंडीशन को एनफोर्स करके चेंज कर रहे हैं।
  475. 40:58तो जब हल्लाक या ये जब क्योंकि हल्ला नहीं बोल रहे हैं लेकिन जब हम ये अस्यूम कर रहे
  476. 41:02हैं कि जो मॉडर्न नेशन स्टेट यूरोपियन वेस्टर्न कॉन्टेक्स्ट में है उसमें जूडो
  477. 41:08क्रिश्चियन एथिक्स हैं। तो असल में सवाल यह हो रहा है कि जब एनलाइटनमेंट प्रोजेक्ट
  478. 41:14बन रहा है। उसके बाद स्टेट फॉर्मेशन हो रहा है। जब 1776 में अमेरिका बन रहा है तो
  479. 41:20बावजूद इसके कि ऑन पेपर एक आइडियल कंस्ट्रक्शन है।
  480. 41:25जैसे बावजूद उसके कि इंडिया की आइडियल कंस्ट्रक्शन कुछ है। डायरेक्टिव
  481. 41:30प्रिंसिपल्स ये बोलते हैं कि यूनिफॉर्म सिविल कोड हो। डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स ये
  482. 41:34बोलते हैं कि एनश्योर किया जाए कि काऊ सॉर्टर ना हो। तो अब ये सेकुलर तो नहीं
  483. 41:39रहा ना। यह डिबेट हो सकता है कि उनका मोरल क्रेम राइट है या रॉन्ग है। यह एक अलग
  484. 41:44डिबेट है। तो जो आइडियल स्टेट को ऑन पेपर डिफाइन
  485. 41:49किया जा रहा है एज अ नेशन स्टेट वो कभी रियलिटी में एक्सिस्ट ना किया है ना
  486. 41:53करेगा। क्योंकि जो रियलिटी होती है वह प्रैक्टिस पर होती है। उसमें जो थ्यरी
  487. 42:00रिड्यूस करके अजमशंस को कंस्ट्रक्ट की जाती है क्योंकि अजमशंस रिड्यूस्ड हैं
  488. 42:04वैसा स्टेट एकिस्ट ही नहीं करता है। स्टेट जूडो क्रिश्चियन एथिक्स पे इसलिए क्लेम्ड
  489. 42:09है क्योंकि वहां की मेजॉरिटी वो वाइट सुप्रीमजम को या वैल्यू एथिक्स को
  490. 42:14नेगोशिएट कर पा रही है एज अ पावर रिलेशन। और बाय ऑल पॉसिबल डीफैक्टोलॉजिक
  491. 42:20वो मटेरियली ट्रांसलेट हो रहा है पावर रिलेशंस बिटवीन ब्लैक्स एंड वाइट्स ओवर द
  492. 42:25हिस्टोरिकल कोर्स आज भी डिस्पाइट द फैक्ट कि एक लिबरेशन मूवमेंट हुआ डिस्पाइट द
  493. 42:31फैक्ट हिंदुस्तान में एससी एसटी के ऊपर लॉ है अभी भी 99% ऑफ द मैनुअल स्कैवेंजर्स
  494. 42:38दलित ही हैं। आप जो आर्ग्यू कर रहे हैं ना अली भाई वो इट्स अ वेरी इंटरेस्टिंग
  495. 42:43आर्गुमेंट क्योंकि अगर इफ दैट इज द केस देन इट मींस कि
  496. 42:50कैलिफेट जो है वो एक स्ट्रेटेजिक इंस्टीट्यूशन है।
  497. 42:54मैं उसको बताता हूं कि जब हम इज इट एन स्ट्रेटेजिक इंस्टीट्यूशन
  498. 42:57स्ट्रेटेजिक नहीं बोलेंगे आप उसको। किसी ने क्या वो इस्लामिक इंस्टीट्यूशन है या
  499. 43:02वो एक ऐसा इंस्टिट्यूशन है जो मुस्लिम्स को एग्जिस्ट करने में मदद करता है?
  500. 43:08नहीं एक्चुअली अब ये अगेन क्योंकि मैं ये बोल रहा हूं कि जब हम एज एन एकेडमिक एक
  501. 43:13पर्टिकुलर पर्सपेक्टिव से हिस्ट्री की रीडिंग करते हैं तो हम हिस्ट्री को भी
  502. 43:17कंस्ट्रक्ट और रिकंस्ट्रक्ट करते हैं अपने मॉडर्न लॉजिक के फ्रेमवर्क में।
  503. 43:22तो जो पूरी डिबेट है खिलाफत की या किसी भी स्टेट की जो किसी भी ट्रेडिशनल पास्ट
  504. 43:30लॉजिक पे बेस्ड हुआ था वो भी हम लोग मॉडर्न कैटेगरीज में रिड्यूस करते हैं।
  505. 43:36अगर आप अल्लाह के रसूल सल्लसम को देखेंगे और उनकी 23 इयर्स की प्रॉफिटहुड को
  506. 43:43देखेंगे जी
  507. 43:44तो सबसे पहले जब उनके ऊपर रेवोलेशन आ रहा है वही आ रही है इरा वो नॉलेज के ऊपर आ
  508. 43:50रही है। जो क्लेम है नॉलेज का अगर आप फुकोडियन फ्रेमवर्क में देखेंगे नॉलेज इज
  509. 43:55पावर। जी
  510. 43:57एंड पावर इज़ पॉलिटिक्स एंड सोवनिटी बिकॉज़ इट ट्रांसलेट्स इन इंस्टीटशंस। जो पहला ही
  511. 44:02क्लेम है उस वक्त का जो ऑर्डर है मक्का में जो मार्जिनलाइजेशन लगता है जो क्लास
  512. 44:08स्ट्रक्चर को लाता है जो ट्राइबल हायरार्की को लाता है जो स्लेव्स को
  513. 44:14परेशान करता है जो औरतों के हुकूक को एक पर्टिकुलर पर्सपेक्टिव में देखता है
  514. 44:20उस नॉलेज पैराडाइम को एक सोवन चैलेंज होता है और उसका क्लेम एक ट्रांसेंडेंटल क्लेम
  515. 44:27है कि बिय्ड मटेरियल के ये ऊपर से आ रहा है।
  516. 44:30ठीक है? तो यह एक पॉलिटिकल जो पॉलिटिक्स की
  517. 44:34डेफिनेशन है वह स्टेट में अगर सिर्फ ना देखें स्टेट फॉरमेशन उसका एक एंड हो सकता
  518. 44:40है एंड होता है। जी
  519. 44:42जो पॉलिटिकल थॉट इन इस्लाम है इस्लामिक पॉलिटिकल इथोस है उसमें जब आप एक
  520. 44:48डेमोग्राफिक डिविडेंड तक पहुंचते हैं तो इंस्टीटशंस बनने शुरू होते हैं।
  521. 44:53स्टेट भी एक इंस्टीट्यूशन है। ठीक है? जो एक सर्टेन कॉन्टेक्स्ट में
  522. 44:57रिक्वायरमेंट बन जाता है। क्योंकि आप उस लेवल पे नेगोशिएट कर पाते हैं। तो पहले आप
  523. 45:02एज एन इंडिविजुअल करते हैं। फिर आप एक दो-तीन साल का अरसा है जो गुजारते हैं
  524. 45:07अकेले अपनी नफसियात पे सिर्फ आपकी जो अ हमसफर हैं जो आपकी जो बीवी हैं अ खदीजा
  525. 45:15रदी अल्लाह अनू उनके साथ आप ये एक्सपीरियंसेस शेयर कर रहे हैं। तो आपकी
  526. 45:19जो पॉलिटिकल सोनिटी है, आप गार में जा रहे हैं, बाहर जा रहे हैं। आप एक्सपीरियंस कर
  527. 45:24रहे हैं वह अपनी नफ्स पे है। अपनी बीइंग पे है, अपनी रूह पे है। फिर अपनी फैमिली
  528. 45:30पे है। फिर आप उसके बाद दावत देते हैं। ऊपर से वही आती है, रेवोलेशन आता है। नाउ
  529. 45:35यू शुड एक्सपेंड। पहले इंस्ट्रक्शन यह है कि वेट।
  530. 45:40फिर इंस्ट्रक्शन यह है कि नाउ यू इनवाइट योर फ्रेंड सर्कल। योर क्लोज रिलेटिव्स।
  531. 45:45अब यह पॉलिटिकल सोनिटी का एक्सपेंशन है। एक सोशल कंस्ट्रक्ट में पॉलिटिक्स एज
  532. 45:51नेगोशिएशन, पॉलिटिक्स हैज़ अल्टरनेटिव रिलेशन
  533. 45:57टू इंस्टीटशंस। ठीक है?
  534. 45:59फिर उसके बाद आप दावत खुल के देते हैं। मक्का के दूसरे लोगों को देते हैं। यहां
  535. 46:04सब जगह आप एडवोकेसी, एक्टिविज्म, डिस्कोर्स कंस्ट्रक्शन और अल्टरनेटिव
  536. 46:09ह्यूमन राइट्स, अल्टरनेटिव ह्यूमन कंडक्ट, अल्टरनेटिव ह्यूमन ड्यूटीज, अल्टरनेटिव
  537. 46:15क्लेम्स टुवर्ड्स हाउ आइडियली इंस्टीटश टू शुड वर्क। हम्।
  538. 46:19यह एक आंदोलन है। यह एक सिविलाइजेशन इथोस को रिकंस्ट्रक्ट कर रहे हैं। यह भी एक
  539. 46:25तरीके की पॉलिटिकल सोवनिटी है। ठीक है?
  540. 46:28आपको परेशान किया जाता है। क्योंकि आप पावर से जो अगर हम फुकडियन फ्रेमवर्क में
  541. 46:33देखें क्योंकि आप पावर की जो हायरार्की है, उसकी लेगसी है, उसको चैलेंज कर रहे
  542. 46:37हैं। जो मक्का के सरदार हैं, लीडर्स हैं वो क्या बोलते हैं? क्योंकि प्रॉफेट
  543. 46:42मोहम्मद कम्स फ्रॉम ए एक कुरैश बैकग्राउंड। तो उनको बोलते हैं क्योंकि वह
  544. 46:48हजरत बिलाल जो एक ब्लैक स्लेव हैं। इसी तरह के जो दूसरे लोग हैं स्लेव्स हैं आप
  545. 46:54उनको आजाद करने की बात कर रहे हैं। उनकी डिग्निटी की बात कर रहे हैं। उनके
  546. 46:58इमसिपेशन की बात कर रहे हैं। वो ये बोलते हैं मोहम्मदों जो हमारी रिलेटिव पोजीशन है
  547. 47:03सोसाइटी में उसको चैलेंज कर रहे हो। जी
  548. 47:06ये हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। आप ये चीज गिव अप कर दो इस तरह की। द थ्रोन इज यर्स
  549. 47:11एंड आवर्स फॉर द टेकिंग। यह भी पॉलिटिकल सोवनिटी के साथ नेगोशिएशन है कि स्टेट के
  550. 47:17इंस्टीटशंस का ऑर्डरिंग ऑफ द सोसाइटी में क्लेम क्या
  551. 47:21होगा? उसके बाद ये सारी डिबेट्स जो चल रही हैं जैसे आज हिंदुस्तान में चल रही हैं,
  552. 47:26दुनिया देख रहा है, कहीं और चल रही हैं। तो ये डिबेट्स
  553. 47:30पास में यथरिब है। कई किलोमीटर दूर। क्योंकि मक्का काबा एक सेंटर है। दुनिया
  554. 47:36भर के लोग इधर आते हैं। वहां पर 365 आइडल्स हैं। सब ट्राइब्स का एक रिलेशन है।
  555. 47:41आते हैं। मार्केट भी होती है। सब पता लगता रहता है। यहां ये चल रहा है। इधर-उधर लोग
  556. 47:45जा रहे हैं क्योंकि यथरेप बहुत करीब है। और वहां पे स्टेबिलिटी ऑफ़ पॉलिटिकल
  557. 47:50फॉर्मेशन नहीं है। कमटिंग क्लेम्स हैं। कोई एक सोवन ओवरलॉर्ड नहीं है जो उस सिटी
  558. 47:56स्टेट को ऑर्डर में ला पा रहा है। ठीक। तो वहां से लोग आते हैं। एक किसी इसी
  559. 48:00तरह का हज होता है। उनके पास पहुंचते हैं कि हम लोगों ने आपका मैसेज समझा सुना।
  560. 48:04हमें समझ आता है बात। वी आर इंटरेस्टेड। आप हमें लीड कीजिए। तो बोलते हैं आप जाइए।
  561. 48:11मेरे कुछ लोग को लेके जाइए। जो मेरा मैसेज है मेरे जो लोग हैं आपकी जो जितनी भी
  562. 48:17ट्राइब्स हैं 10 12 वहां जाएंगे। उस मैसेजिंग को बताएंगे। फिर लोगों का सर्वे
  563. 48:22करेंगे कि भाई आपके सेंटीमेंट्स क्या हैं? और फिर आप वापस आइए। तो फिर वह वापस आते
  564. 48:28हैं कि देखिए हम लोगों ने यह आपके लोग हैं। इन्होंने सब रीडिंग कर ली है। लोगों
  565. 48:31को मैसेजिंग कर दिए। पीपल वांट यू। डिमांड आई। और फिर जब आप जा रहे हैं और जो
  566. 48:37कॉन्ट्रैक्ट कर रहे हैं वो पहली बार ऐसा कॉन्ट्रैक्ट है जिसमें आप स्टेट एज एन
  567. 48:43इंस्टीट्यूशन जो स्मॉल स्टेट है उसमें मल्टी कल्चरल मल्टीप्लूरल ट्रीटी कर रहे
  568. 48:49हैं। जिसको पहला प्रोटोटिपिकल स्टेट भी बोला।
  569. 48:53अब वो क्या खिलाफत है या नहीं? वो क्या स्टेट है या नहीं? यह सारी डिबेट्स हुई है
  570. 48:57ना जब कॉलोनियल इंडिया में जो मौलाना हुसैन अहमद मदनी, अल्लामा इकबाल, मौलाना
  571. 49:03आजाद, मौलाना मौदूदी ये जो डिबेट्स कर रहे हैं वो इन्हीं फ्रेमवर्क्स पे कर रहे हैं
  572. 49:09कि इस्लामिक पॉलिटिकल सोवनिटी है क्या? उसका कंस्ट्रक्ट्स ऑफ मॉडर्निटी,
  573. 49:15कंस्ट्रक्ट्स ऑफ अल्टरनेट प्लुरलिटीज और उनके क्लेम से रिलेशन क्या है? शेर अली
  574. 49:20तरीन की जो एक किताब अभी आई है पेरलस इंटिमसीज कि मुस्लिम पॉलिटिकल सोवनिटी जो
  575. 49:26मुगल एरा में रिड्यूस हो जाती है खत्म हो जाती है उसको कैसे नेगोशिएट किया जाएगा तो
  576. 49:31जब आप उस पर्सपेक्टिव से देखेंगे अल्टीमेटली सुले खुदबिया होता है।
  577. 49:36लड़ाईयां होती हैं। लड़ाई के बाद वो होता है। मक्का के ऊपर वापस फतेह होती है। बहुत
  578. 49:40पीसफुल होती है। इंस्टीट्यूशन एक्सपैंड करता है। मल्टीस्टेट बन जाता है। समझ रहे
  579. 49:45हैं कि पहली बात दो सिटी स्टेट्स मिलके फिर वॉर एक्सपैंड होता है। फिर एक
  580. 49:50एक्सपेंशन की तरफ बढ़ता है। एंपायर बनता है। फिर खिलाफत का एक तस्सवुर आता है जो
  581. 49:55बाद में एक तो अब सवाल यह है कि इस पूरी जर्नी में
  582. 50:01जिस आइडियल स्टेट के कंस्ट्रक्शन की हम बात कर रहे हैं वो क्या है और कब बनता है?
  583. 50:05और वो कैसे बनता है? वो किस प्रोसेस से गुजरता है? उसमें आप जब इंस्टीटशंस बिल्ड
  584. 50:11करते हैं जैसे आप मदीना में या त्रिब में जब पहली बार जाते हैं फर्स्ट सिक्स मंथ्स
  585. 50:15में आप मस्जिद भी बनाते हैं। आप कुरैश और मतलब जो आप लोग आए हैं इधर से मुहाजिर जो
  586. 50:21चलके आए हैं जिन्होंने हिजरत की है जिन्होंने माइग्रेट किया है आपके साथ और
  587. 50:24जो वहां पे रहने वाली जो ट्राइब्स हैं अंसार जो वहां के लोकल्स हैं जब उनके बीच
  588. 50:28में जो आपको एक्सेप्ट करते हैं आपकी फर्स्ट उम्मत बनते हैं कि आपके फॉलोअर्स
  589. 50:34बनते हैं इन अ डिफरेंट सिटी स्टेट उनकी शादियां करवाते हैं तो ये जो डिफरेंसेस
  590. 50:38हैं आने जाने के हायरार्की ये डिॉल्व हो जाए परमानेंट हो जाए और आप मार्केट बना
  591. 50:43रहे हैं। अब मार्केट जो है सिर्फ इससे डील नहीं कर रहा है जो मुस्लिम है। अभी यह
  592. 50:48सारी चीजों मस्जिद बनाना तो मुसलमानों के लिए है। शादियां करवाना तो मुसलमानों के
  593. 50:52बीच में है। जो आपने इकोनॉमिक एंटरप्राइज किया मार्केट वहां जूस भी आ रहे हैं। वहां
  594. 50:59पेगंस भी आ रहे हैं। वहां पे पहली बार ऐसा हो रहा है दो एक तो जो ओवरऑल ट्रीटी ऑफ़
  595. 51:05मदीना है उसमें जो आपके कॉन्ट्रैक्ट बन रहे हैं कि आप एक दूसरे को कैसे सेफ
  596. 51:09रखेंगे, सिक्योर रखेंगे। लेकिन एक एक्चुअली डेली लिव्ड एक्सपीरियंस में
  597. 51:13कम्युनिटीज इंटरेक्ट कर रही हैं ऐसे फ्रेमवर्क में जिसमें किसी का पर्सनल मफाद
  598. 51:20स्पिरिचुअल नहीं है और फिर वो देख रही हैं कि ट्रेड प्रैक्टिससेस कैसे डिफरेंट है।
  599. 51:26मुशार का जैसे कि लेबर और कैपिटल के बीच में क्या रिलेशन रहेगा। ऐसी छोटी सी चीज
  600. 51:30कि आप जो पहले मार्केट में सुबह आएगा वो अपनी जगह कहां पे टेंट लगाएगा वो डिसाइड
  601. 51:36करेगा। क्योंकि जब शुरू में मार्केट शुरू होती है जो पहले टेंट होते हैं उसमें लोग
  602. 51:39जल्दी से खरीद के चले भी जाते हैं तो आपकी पोजीशनिंग जो होती है वो भी डिसाइड करती
  603. 51:43है कि आपकी दुकान कितनी चलेगी। ये छोटी-छोटी चीजें जो वो लगती है ये अपने आप
  604. 51:48में इकोनॉमिक ऑर्डरिंग है। आई अंडरस्टैंड अली भाई व्हाटएवर यू आर सेइंग बट अ कपल ऑफ
  605. 51:53क्वेश्चंस है ना पहला एंड आप आप जो बात कर रहे हैं बाय
  606. 51:59इंप्लिकेशन मुझे ये समझ में आ रहा है। आई जस्ट वांट टू अंडरस्टैंड कि क्या ये क्या
  607. 52:03दिस इज़ व्हाट यू आर इंप्लाइंग। पहली चीज आपके पूरे डिस्क्रिप्शन से मुझे यह समझ
  608. 52:08में आ रहा है कि मुस्लिम पॉलिटिकल एजेंसी इज इन अ परपचुअल स्टेट ऑफ नेगोशिएशन।
  609. 52:17बिल्कुल। इसलिए कॉन्ट्रैक्ट को इस्लाम में बहुत
  610. 52:21अव्वल दर्जा दिया गया कि आप नेगोशिएट कर रहे हैं हर लेवल पे।
  611. 52:24ठीक है। व्हाट यू आर सेइंग इज कि मुस्लिम पॉलिटिकल एजेंसी जो है वो परपीचुअली
  612. 52:28नेगोशिएट करना पड़ेगा। आपको हमेशा करते रहना पड़ेगा।
  613. 52:32स्टेजेस आएंगे। उसकी जो भी स्टेजेस हैं कहने का मतलब उसकी कोई पॉइंट ऑफ
  614. 52:38सर्ट यू नो पॉइंट ऐसा नहीं आएगा जहां पे आप उसको मेजर कर पाएं। इट्स अ कंटीन्यूअस
  615. 52:42मूवमेंट। दैट्स वन थिंग इन व्हाटएवर डायरेक्शन इट इज़। आगे जा रहा है, पीछे आ
  616. 52:46रहा है, ऑसिलेट कर रहा है। व्हाटएवर इट इज़। दैट्स वन
  617. 52:50चेंज भी होता रहता है। हां चेंज। दैट्स वन थिंग।
  618. 52:53जो दूसरी चीज मुझे समझ में आ रही है वो यह कि मुस्लिम पॉलिटिकल अंडरस्टैंडिंग जो है
  619. 53:00इन योर इन इन जिस तरीके से आप उसको डिफाइन कर रहे हैं वो शायद
  620. 53:07सोशल कंस्ट्रक्शन में एग्जिस्ट करती है। ठीक है? इट एक्सिस्ट इन द सोशल
  621. 53:14कंस्ट्रक्शन और मोस्ट प्रोबेबबली इन सोशल रिलेशंस।
  622. 53:18कि सोशल रिलेशंस के थ्रू मुस्लिम पॉलिटिक्स या मुस्लिम पॉलिटिकल एजेंसी या
  623. 53:25मुस्लिम पॉलिटिकल इंस्टीट्यूशन का कंस्ट्रक्शन होगा।
  624. 53:30ठीक है? प्रोफेटिक लाइफ में ऐसे ही हुआ है। मतलब
  625. 53:31मेरा क्लेम है जब मैं उनकी लाइफ को देख रहा हूं और वो ऐसा नहीं है कि मतलब लोग कई
  626. 53:35बार रिड्यूस कर देते हैं कि भ सोसाइटी में हो रहा है, चल रहा है। तो इसी तरह हमारी
  627. 53:39जो ऑर्डर्स ऑफ़ गवर्नेंस है वो इंप्लिकेट हो जाएगी। नहीं आप हर लेवल पे इंस्टीटशंस
  628. 53:43भी बनाते हैं। ठीक है? दैट्स इट। दैट आई अंडरस्टैंड।
  629. 53:46लेकिन वो जो इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग है वो एक्चुअली सोशल रिलेशंस के थ्रू अब ठीक है
  630. 53:51अगेन कमिंग बैक टू हल्ला ठीक है
  631. 53:54दिस एक्चुअली सपोर्ट्स हल्ला आई विल टेल यू व्हाई दैट्स अ क्वेश्चन
  632. 54:00अगर स्टेट एक ऐसा एंटिटी है जो एक स्टेटिक एंटिटी है नेशन स्टेट अगर एक स्टेटिक
  633. 54:07एंटिटी है एक एक ओसिफाइड एंटिटी है एक डिमार्केटेड एंड ऑलरेडी एस्टैब्लिश्ड
  634. 54:14एंटिटी है उसमें कंटीन्यूसली नेगोशिएटेड सोशल रियलिटी तो एक्सिस्ट कर ही नहीं
  635. 54:20सकती। यही तो मेरा काउंटर है कि पहली बात तो यह
  636. 54:23है कि देन ही इज़ राइट इन दैट सेंस।
  637. 54:26नहीं वो वो आईडिया ही सही नहीं है कि पहली बात तो ये है कि जो ये नेशन स्टेट का
  638. 54:31तस्सवुर है और जो इमेजिनेशन है कि वो इन इटसेल्फ है।
  639. 54:37पहली बात तो है कि दुनिया में 200 नेशन स्टेट से ज्यादा हैं। क्यों यूएस एज अ
  640. 54:43नेशन स्टेट? बाकी सारी नेशन स्टेट्स पर हावी होकर उसकी पॉलिटिकल सोवनिटी और
  641. 54:48इंटरनल रिलेशंस को अफेक्ट कर पाता है। क्यों वो वहां पर रिजीम चेंज करवा पाता
  642. 54:54है? क्यों गजा में इतना लंबा जेनोसाइड होने के बावजूद किसी जो मुस्लिम स्टेट्स
  643. 55:00की पॉलिटिकल सोवनिटी है एक्सटेंडेड टुवर्ड्स जियोपॉलिटिक्स
  644. 55:05वो क्यों वेस्टर्न स्टेट्स के चैलेंज को वो नहीं कर पाता कि दे आर मोर
  645. 55:10कंटीन्यूअसली एंबेडेड। जी। तो पहली बात तो यह है कि जो नेशन
  646. 55:14स्टेट का कंस्ट्रक्शन जिस तरह से इमेजिन किया गया है वो एक क्लोज्ड इकॉनमी की तरह
  647. 55:18सोचा जा रहा है। एज इफ इट इज़ डिवॉइड ऑफ इनफ्लेक्सेस, डायनेमिकल चेंजेस,
  648. 55:24कॉम्प्लेक्सिटीज, रिलेशंस। अपने आप में वो डायनेमिक एंटिटी एंड
  649. 55:30प्रैक्टिस इन रियलिटी। क्योंकि वो कॉन्सेंटली नॉट जस्ट मुस्लिम्स। एवरीबडी
  650. 55:33इज़ नेगोशिएटिंग टुगेदर। कल को जीएसटी नहीं था फिर जीएसटी आ गया। कल को अडानी के पास
  651. 55:40कॉन्ट्रैक्ट्स नहीं थे। चेंज होता है। अदानी के पास कॉन्ट्रैक्ट आ गया।
  652. 55:44कल को आप माइनॉरिटीज की जो रिजर्वेशंस हैं उस पे बात कर सकते थे। उनको स्कॉलरशिप्स
  653. 55:53दे सकते थे। आज नहीं कर सकते। कल आपकी वक्फ की प्रॉपर्टीज एग्जिस्ट कर सकती थी
  654. 55:59एज अ कम्युनल प्रॉपर्टी। कम्युनिटी की प्रॉपर्टी इवन कॉन्स्टिट्यूशनल स्पीकिंग।
  655. 56:04आज उस कॉन्स्टिट्यूशनल कंस्ट्रक्ट को चेंज कर दिया गया। तो नेशन स्टेट पहली बात तो
  656. 56:09ओसिफाइड नहीं है जो एजमशन है। दूसरी बात वो क्लोज्ड नहीं है। वो ऑस्मोटिक है। आप
  657. 56:14ट्रैवल कर सकते हैं। आप इंडियन डायस्पोरा या हिंदू डायस्पोरा बाहर होते हुए आप यहां
  658. 56:20की पॉलिसी के ऊपर इंपैक्ट कर सकते हैं। आप अपना नेगोशिएशन यूएस सेनेट के सामने भी रख
  659. 56:25सकते हैं। यूएन के सामने भी रख सकते हैं। तो मेरा कहना है कि जिस तरह से नेशन स्टेट
  660. 56:30को डिफाइन किया जा रहा है मॉडर्निटी के पर्सपेक्टिव से फ्रॉम अ थ्यरेटिकल
  661. 56:33पर्सपेक्टिव उस तरह का नेशन स्टेट कहीं एक्सिस्ट नहीं करता। मुझे नहीं दिखता। जिस
  662. 56:38तरह का कैपिटलिज्म एडम स्मिथ ने बोला वो कैपिटलिज्म जो है उसकी कुछ यूनिवर्सल्स
  663. 56:44हैं जो एक्सिस्ट करते हैं। जैसे कार्ल मार्क्स ने जब थ्यरी दी कम्युनिज्म की तो
  664. 56:50कार्ल मार्क्स पॉजिटिविस्ट थे। साइंटिफिक टेंपरामेंट के थे।
  665. 56:57और उसके बाद वो पावर रिलेशंस और रिस्ट्रीब्यूशन की बात करते थे। लेकिन अब
  666. 57:00के जब आप मार्क्सिस्ट देखेंगे वो पोस्ट मॉडर्निस्ट्स हैं। वो रिलेटिविस्ट्स हैं।
  667. 57:05वो या तो क्रिटिकल थरिस्ट हैं। समझ रहे हैं कि फिलोसोफिकल पैराडाइम कंप्लीटली
  668. 57:10चेंज हो गया। अगर आप लिबरलिज्म की बात करेंगे मतलब आज की डेट में क्या है?
  669. 57:14मॉडर्निटी को एज अ अगर एज अ प्रोजेक्ट देखा जाए इट इज़ नॉट जस्ट मॉडर्निटी। मतलब
  670. 57:18मॉडर्निटी उसका रिस्पांस पोस्ट मॉडर्न मतलब जो मॉडर्निटी के खुद के लिमिटेशंस
  671. 57:22हैं कि आपने स्ट्रक्चरल विज़न में यह सोचा है कि एक पॉजिटिविस्ट यूनिफाइड वर्जन हो
  672. 57:28सकता है रियलिटी का। क्योंकि आपकी इंटीग्रल रियलिटी है। तो जैसे लाइव्स को
  673. 57:33अगर आप इंप्ल्लाई करें अब सोशल कंस्ट्रक्शन में लोगों के लिव्ड
  674. 57:37एक्सपीरियंसेस और थराइजेशंस अपनी बाउंडेड रैशनलिटीज की वजह से डिफरेंटली मैनिफेस्ट
  675. 57:42करते हैं ट्रुथ क्लेम्स में। तो उसको बोल दिया गया पोस्ट मॉडर्न ये सबका अपना ट्रुथ
  676. 57:46है। फिर उसके रिस्पांस में सिंथेसिस आता है।
  677. 57:48उसी टाइम पे वो बोलते हैं दोनों चीजें को एकिस्ट करती हैं कि जब ये नेगोशिएशन चलता
  678. 57:52रहता है यूनिवर्सल और पर्टिकुलर के बीच में तो एक नेगोशिएटेड रियलिटी एज अ वर्ल्ड
  679. 57:58व्यू कंस्ट्रक्ट होती है जो डायलेक्टिकल है जो हिस्टोरिकल है जो चेंज तो होती है
  680. 58:05लेकिन वो एग्जिस्ट भी कर सकती है एक टाइम पे फॉर अ पीरियड ऑफ़ टाइम और फिर उसको
  681. 58:08नेगोशिएट भी किया जा सकता है। तो ये सब सही है। यू नो डलेक्टिकल प्रोसेस मैं इसको
  682. 58:14अस्यूम करता हूं। लेकिन इसमें क्योंकि ट्रांसेंडेंटल्स ट्रांसेंडेंस को खत्म कर
  683. 58:18दिया गया कि एक क्लेम और है जैसे आपने जब आइंस्टाइन के स्पेस को कर्वड्ड कर दिया तो
  684. 58:24इनफिनिट पॉसिबिलिटीज बढ़ गई सिर्फ एक डायमेंशन बढ़ाने की वजह से। समझ रहे हैं
  685. 58:28क्या? मतलब वो इतना कॉम्प्लेक्स हो गया कि उसमें पोटेंशियल ऑफ यूनिवर्स की
  686. 58:32एक्सप्लेनेशंस उसमें ब्लैक होल भी इमर्ज हो गया। जो न्यूटन के स्पेस में नहीं हो
  687. 58:36सकता। मैं समझ गया आपकी बात। अली भाई बट इवन देन अगर आप यह कह रहे हैं ना कि साहब
  688. 58:42स्टेट इज एन ओसिफाइड कैटेगरी या ऐसा एकिस्ट नहीं करता। सोशल रियलिटी इज
  689. 58:48डिफरेंट फ्रॉम व्हाट यू कंस्ट्रक्ट। परफेक्ट नेशन परफेक्ट नेशन स्टेट नहीं है।
  690. 58:52स्टेट हैं उनकी बट दो चीजें हैं यहां पे। एक चीज ये कि
  691. 58:57अगर आप इस तरीके का एजमशन नहीं करते हैं। हाउ वुड यू कंस्ट्रक्ट कॉनसेप्चुअल
  692. 59:03कैटेगरीज? दैट्स द फर्स्ट क्वेश्चन। ठीक है? क्योंकि कंसेप्चुअल कैटेगरीज के लिए
  693. 59:08आपको एक्सक्लूसिविटी बनानी पड़ेगी और आइडियल टाइप्स बनाने पड़ेंगे। जब तक आप
  694. 59:13आइडियल टाइप्स नहीं बनाएंगे आप उसकी बेसिस पे मेजरमेंट्स नहीं कर सकते। तो आपको नेशन
  695. 59:18स्टेट का एक आइडियल टाइप एक एक ऐसा बनाना पड़ेगा जिसकी बेसिस पे आप समझेंगे कि नेशन
  696. 59:25स्टेट क्या होता है। दैट्स वन थिंग। सो दिस इज़ अ नेसेसिटी। आई आई से इट टू
  697. 59:30कंस्ट्रक्ट एन आईडिया ऑफ़ स्टेट दैट रिप्रेजेंट्स रियलिटी इज अ नेसेसिटी।
  698. 59:36नहीं नेसेसिटी ये नहीं है कि ये पर्टिकुलर आर्किटाइप ही मेरा सिर्फ मेरा सिर्फ ये
  699. 59:40चैलेंज चैलेंज क्या बोलूं? मेरा रीजनिंग है कि जिस आर्किटाइप को हम अस्यूम कर रहे
  700. 59:45हैं उससे बेटर थराइज़ेशन अब हो सकता है। ठीक है? आई अंडरस्टैंड दैट। और उसका जो
  701. 59:50कंस्ट्रक्ट है वो मैं खुद क्योंकि करता हूं कि मैं इसको क्योंकि इकोनॉमिक्स का
  702. 59:54स्टूडेंट रहा हूं। इकोनॉमिक्स से इसको बहुत अच्छे से समझा जा सकता है कि
  703. 59:58इकोनॉमिक थ्योरी कैसे डेवलप हुई। पहले एक स्मॉल इकोनमी का मॉडल बनाया जाता है
  704. 1:00:03क्योंकि वो सिंपल है। उसमें चीजों को सिंपलर लेवल पे तोड़ के इजी रिलेशंस
  705. 1:00:08डिफाइन किए जा सकते हैं एज अ कॉनंसेप्चुअल कैटेगरी।
  706. 1:00:10बट वो रियलिटी से बिल्कुल दूर है। ठीक है?
  707. 1:00:14तो वो जो कंस्ट्रक्टेड कैटेगरीज हैं वो यूज़लेस हैं क्योंकि वो जो पॉलिसी बनाती
  708. 1:00:20हैं वो रियलिटी से इतनी दूर हैं कि उससे स्टेट फॉरमेशन और या फिर जो मटेरियल
  709. 1:00:25कंडीशंस इकॉनमी के थ्रू बेहतर हो सकती थी वो और ज्यादा खराब हो जाती हैं। क्योंकि
  710. 1:00:29आपको कहां इन्वेस्ट करना है, कितना इन्वेस्ट करना है, इनकलिटी क्यों
  711. 1:00:32प्रोड्यूस हो रही है, उसकी एजम्पशंस चेंज हो जाती हैं। तो, आपकी पॉलिसी राइट बन ही
  712. 1:00:36नहीं सकती। मेरा आर्गुमेंट ये है कि हमेशा से ऐसा होता आया है इवन जो ग्रीक फिलॉसफी
  713. 1:00:41से क्योंकि रिटन फिलॉसफी वो है एरिस्टोटलल ने कुछ बोला पहले प्रेटो ने कुछ बोला जो
  714. 1:00:47आइडियलिज्म की बात करी प्लेटॉनिक आइडियल तो एरिस्टोटलल ने बोला भाई सब कुछ
  715. 1:00:51एंपेरिकल है तो फिर न्यू प्लॉटिनस फिलॉसफी जिसने सिंथेसाइज किया कि इन दोनों का
  716. 1:00:55रिलेशन कैसे हो सकता है यह ट्रेडिशन आप इस्लामिक डिबेट्स में और कलाम की डिबेट्स
  717. 1:01:02में भी ले सकते हैं। जैसे अशरी स्कूल ऑफ थॉट है। मातुरिदी स्कूल ऑफ थॉट है। अथरी
  718. 1:01:07स्कूल ऑफ थॉट है। यू नो मोतलाइट्स हैं। इनके फंडामेंटल क्लेम्स क्या है? अथरी
  719. 1:01:12बोलते हैं कि भई सिर्फ टेक्सचुअल इंटरप्रिटेशन हो सकता है कुरान का। मतलब
  720. 1:01:16जो लिखा है एक्जेक्टली उस पर आप कुछ भी अक्ल नहीं लगा सकते। मोतलाइ जो अहले राय
  721. 1:01:22बोले गए उन्होंने बोला कि नहीं देखिए अक्ल क्योंकि अल्लाह के के निजाम में है तो हम
  722. 1:01:29क्योंकि अल्लाह की ही मखलूकात हैं तो अल्लाह ने हमें इस तरह से पोटेंशियल रखा
  723. 1:01:34है कि हम अक्ल को इस्तेमाल करके भी उन्हीं यूनिवर्सल कैटेगरीज की तरफ जा सकते हैं जो
  724. 1:01:39रेवोलेशन के थ्रू आई हैं। ठीक है?
  725. 1:01:43दोनों में कंपटीशन हुआ। तो फिर सिंथेसिस हुआ दो स्कूल मातुरी दीदी और अशरी के
  726. 1:01:48उन्होंने बोला कि नहीं अकल कलब वही नकल
  727. 1:01:52नकल जो इनके ना कॉम्बिनेशन में आप सिंथेसिस थ्योरी ला सकते हैं और इन सबके
  728. 1:01:58प्रोडक्ट हैं स्कूल्स ऑफ थॉट क्योंकि मोज लाइट्स को कंप्लीटली
  729. 1:02:02डाउन प्ले हो गए स्पेशली जब इमाम गजाली ने अपना जो पूरा इनकोरेंस ऑफ़ द फिलॉसफर लिखा
  730. 1:02:07वो जो पूरा एक 200 300 साल का डिबेट चला है उसमें तीन स्कूल्स ऑफ थॉट और चार
  731. 1:02:13प्रिंसिपल स्कूल्स ऑफ जरस प्रोडेंस सर्वाइव कर गए जो उनकी बेसिकली
  732. 1:02:19एपिस्टेमोलॉजी है थ्यरी ऑफ़ जस्टिस में। जी।
  733. 1:02:22तो दुनिया में हमेशा ऐसा होता रहा है कि कॉनसेप्चुअल कैटेगरीज
  734. 1:02:27एविडेंस को देख के कि वो जो एग्जिस्टिंग तजदीद क्या है? अगर वो डिबेट जो हुआ
  735. 1:02:33इत्तेहाद जो होना है ये सारी चीजें या जो मॉडर्न कंस्ट्रशंस में रीथराइजेशंस हैं।
  736. 1:02:38फूको ने क्यों पावर को रीइमेजिन किया? डिल्यूस ने क्यों एक नई मेटाफिसिक्स को
  737. 1:02:43सोचा? यह सारी चीजें नेसेसिटीज हैं। तो एक वक्त में एक मॉडर्न नेशन स्टेट को कंसीव
  738. 1:02:50किया गया और वह कांसेप्ट ऑन पेपर सही है कि यह आइडियल है जिसकी तरफ नेशन स्टेट्स
  739. 1:02:56को बार-बार बोला जाता है बढ़ना चाहिए। बट सोशियोलॉजिकल रिलेशंस, इंस्टीट्यूशन के
  740. 1:03:02साथ रिलेशंस, प्लूरल फ्रेमवर्क में कल्चरर्स का इंटरेक्शन और उससे जो क्योंकि
  741. 1:03:07आप अगर कोर्ट्स के कॉन्टेक्स्ट में देखेंगे कि कोर्ट्स में जो जजेस होते हैं
  742. 1:03:11वो भी किसी ट्रेडिशन से आ रहे होते हैं। वो भी अपने जजमेंट्स में वो रिफ्लेक्ट
  743. 1:03:16करते हैं। लेकिन आइडियली अगर आप कोर्ट को बोलेंगे ऑन पेपर वो एक सेकुलर
  744. 1:03:21इंस्टीट्यूशन है। वो लॉ को सिर्फ अप्लाई कर रहा है। लेकिन ऐसा नहीं है। हम खुद
  745. 1:03:27देखते हैं वक्फ के केस में दूसरे केस में लॉ की रीजनिंग बियों्ड द कंस्ट्रक्शंस ऑफ
  746. 1:03:32लॉ जो तय कर दी गई थी उससे ओवर एंड अबव एंड बियोंड होती हैं। तो यहां मैं चैलेंज
  747. 1:03:38मुझे फील होता है कि इससे क्या होता है कि जब आप अजंपशंस ऐसे लगा देते हैं जो
  748. 1:03:42रियलिटी को रिफ्लेक्ट नहीं करते हैं। तो आप और मैंने आपको बता दिया कि प्रोफेटिक
  749. 1:03:49लाइफ में मल्टीपल स्टेट फॉरमेशंस हुए हैं एज एंड व्हेन रिक्वायर्ड और मूविंग
  750. 1:03:52टुवर्ड्स समथिंग। तो ये जीरो सम गेम नहीं है। मॉडर्न नेशन स्टेट में ही क्योंकि वो
  751. 1:03:58थ्यरेटिकली इनकंप्लीट है। पोटेंशियल आते हैं उसके रप्चर्स के।
  752. 1:04:04इसीलिए मॉडर्न नेशन स्टेट्स होमोजेनियस नहीं है पूरी दुनिया में। अगर वो ऑन पेपर
  753. 1:04:08सेम होते। 200 से प्लस तरीके के मॉडर्न नेशन स्टेट्स हैं जो डिफरेंट रियलिटीज को
  754. 1:04:13रिफ्लेक्ट करते हैं। यूएई भी नेशन स्टेट है, सऊदी भी, इजराइल भी, इंडिया भी,
  755. 1:04:18पाकिस्तान भी, बांग्लादेश भी, मलेशिया भी, यूएस भी, यूके भी, फ्रांस भी, जर्मनी भी।
  756. 1:04:23क्या आप ये बोल देंगे कि जो रियलिटी जिसज नेशन स्टेट की तेरी को कंस्ट्रक्ट किया जा
  757. 1:04:28रहा है, उसके हिसाब से तो होमोजेनिटी होनी चाहिए थी। एक ही तरह का स्टेट एक्सिस्ट
  758. 1:04:33करता, एक ही तरह के रिलेशंस होते, एक ही तरह की आइडेंटिटी कंस्ट्रक्ट होती। बट ऐसा
  759. 1:04:38नहीं है। अगर सिर्फ आप कंसेप्चुअल कैटेगरी तक ही इसको अगर आप लिमिट रखें ठीक है नेशन
  760. 1:04:44स्टेट एज अ कंसेप्चुअल कैटेगरी लेट अस्यूम देखिए कॉनंसेप्चुअल कैटेगरी में आईडिया ऑफ
  761. 1:04:50मेजरमेंट नहीं होता है ना आईडिया ऑफ़ मेजरमेंट उसका फर्दर डेवलपमेंट है
  762. 1:04:57जी तो व्हाट यू आर ट्राइंग टू इंप्ल्लाई इज़
  763. 1:05:00एक्चुअली द आईडिया ऑफ़ मेजरमेंट जैसे आप कह रहे हैं ना कि यूएस है, जर्मनी
  764. 1:05:05है, फ्रांस है, इंडिया है। कौन सा अच्छा नेशन स्टेट है, कौन क्लोज है
  765. 1:05:12या कौन आइडियल टाइप है? दिस इज़ अ क्वेश्चन ऑफ़ मेजरमेंट।
  766. 1:05:15नहीं नहीं मेरा कहना है कि अगर नेशन स्टेट का आर्किटाइप
  767. 1:05:19जी रियल होता तो सिर्फ दुनिया में एक ही टाइप
  768. 1:05:23के स्टेट्स एक्सिस्ट करते। नहीं मैं वही कह रहा हूं कि कॉन्सेप्चुअल
  769. 1:05:25कैटेगरीज डिफरेंट फॉर्म्स में हो सकती है ना।
  770. 1:05:28मैं ये कह रहा हूं कि जो ये कॉन्सेप्चुअल कैटेगरी है अभी नेशन स्टेट की
  771. 1:05:31हां। वो इनसफिशिएंट है जो हो रहा है उसको
  772. 1:05:33डिफाइन करने की। उसको एक्सपैंड करने की जरूरत है। जो होता है।
  773. 1:05:35दैट आई अंडरस्टैंड। बस वही है मेरा क्लेम। और क्योंकि हल्ला एक पर्टिकुलर वे में उस
  774. 1:05:41कॉन्सेप्चुअल कैटेगरी को खड़ा कर रहा है और इस्लामिक कॉन्सेप्चुअल कैटेगरी को भी
  775. 1:05:45एक पर्टिकुलर वे में खड़ा कर रहा है कि एक खिलाफत के फॉर्म में ना तो वो उस रियलिटी
  776. 1:05:50में उस तरह एक्सिस्ट किया वो भी एक डायनेमिकल प्रोसेस के थ्रू एक एंड तक आता
  777. 1:05:53है। और यहां पे भी उस तरह का स्टेट एक्सिस्ट नहीं करता है। तो जो जो
  778. 1:05:59दो आइडियाज़ के बीच में रीजनिंग हो रही है वो आइडियाज हाइपोथेटिकल हैं। आप समझ रहे
  779. 1:06:04हैं मैं क्या कहना चाहूंगा? आई अंडरस्टैंड। बस मेरा इतना ही क्लेम है।
  780. 1:06:07तो इस वजह से जो रियलिटी हल्ला कंस्ट्रक्ट कर रहा है कि इसका जो
  781. 1:06:12इंपैक्ट आता है वो इंपैक्ट अनरियल है और वो होपलेसनेस
  782. 1:06:16क्रिएट करता है। बल्कि प्रोफेटिक लाइफ में एक्चुअली वो
  783. 1:06:20स्टेट कैटेगरी सिटी स्टेट में क्योंकि जो नेशन स्टेट की बहुत सारी कैटेगरीज हैं वो
  784. 1:06:24एंबॉडेड है। एंबेडेड है। उसी प्रोसेस के थ्रू गुजर के गवर्नेंस आई
  785. 1:06:30है। तो मेरे लिए ये रिलेशनली इस्लामिक नहीं रह गया। यह जो यह जो क्रिटिक है
  786. 1:06:35क्योंकि इस्लाम इटसेल्फ इन मोड से गुजरा है फ्रॉम द प्रोफेटिक लाइफ। तो क्लेम फिट
  787. 1:06:42नहीं बैठ रहा है। इट्स मोर थ्यरी इट्स मोर हाइपोथेसिस बेस्ड ऑन हिज अंडरस्टैंडिंग जो
  788. 1:06:46आज की डेट में जो मैं जिस तरह से बता रहा हूं वो रियलिटी में फिट नहीं बैठता। ऐसे
  789. 1:06:52सेकुलर थ्यरीज पे भी होता है। नहीं आई आई कंप्लीटली अंडरस्टैंड। बट यहां
  790. 1:06:56पे सवाल मेरा ये है कि इफ दैट इज डी केस देखिए इस्लामी जो शरीयत है जो शरिया है
  791. 1:07:03उसकी एक बड़ी इंटरेस्टिंग चीज जो है वो ये है कि द नॉलेज ऑफ शरिया बिलोंग्स टू द
  792. 1:07:12स्कॉलर्स ओलेमा ओलेमा के पास है ओलेमा की मीरास है ठीक है प्रॉफिट से वह उलेमा में
  793. 1:07:20ट्रांसफर होती है नॉलेज और नॉलेज जो है
  794. 1:07:25वो क्योंकि ओलेमा के पास है और ओलेमा की ट्रेनिंग अलग-अलग है, बैकग्राउंड अलग है,
  795. 1:07:33अंडरस्टैंडिंग कैपेबिलिटीज अलग है, रैशनलिटी अलग है एंड स्पिरिचुअलिटी अलग
  796. 1:07:39है, कमिटमेंट अलग-अलग है। तो जो उसका जो प्रोडक्ट निकलेगा शरिया के फॉर्म में जब
  797. 1:07:47वह अपना रीजनिंग लगाएंगे तो वह सब्जेक्टिव निकलेगा। ठीक है? कोई जरूरी नहीं है कि हर
  798. 1:07:53इंसान एक चीज पर अराइव करे। तो इन एसेंस जो नॉलेज फ्रेमवर्क है इस्लाम का वो
  799. 1:08:02सब्जेक्टिविटी पे बिल्ड होता है। है ना? और
  800. 1:08:06इस पे एक्चुअली आप जो बात बोल रहे हैं क्योंकि लेट मी कंप्लीट इससे एग्री नहीं
  801. 1:08:12करेंगे। कहने का मतलब यह है कि शरिया में एक सब्जेक्टिविटी जो है वो एंबेडेड है। यह
  802. 1:08:18बहुत इंपॉर्टेंट चीज है। क्योंकि अगर आप यह कह रहे हैं कि इस्लाम सोशल रियलिटी के
  803. 1:08:23बेसिस पे अपने आपको अपने इंस्टीटशंस को कंस्ट्रक्ट करता है तो सोशल रियलिटीज का
  804. 1:08:30वन ऑफ द नेसेसिटी जो है वो सब्जेक्टिविटी है। ठीक है? इसका मतलब सब्जेक्टिविटी उसके
  805. 1:08:36अंदर होगी। दैट्स वन थिंग। अब सवाल यह है कि इस सब्जेक्टिविटी के बेसिस पर कोहेरेंस
  806. 1:08:42कैसे डेवलप हो जो सबसे बड़ा चैलेंज है कि अगर चीजें इतनी सब्जेक्टिव हो गई तो
  807. 1:08:47कोहेरेंसी कैसे डेवलप होगी? तो कोहेरेंसी को डेवलप करने के लिए ओलेमा ने मेथड
  808. 1:08:53डिवाइज किया कि इस मेथड को यूज करके आप जो रिजल्ट
  809. 1:09:00निकालेंगे क्योंकि मेथड सिमिलर होगा वो रिजल्ट की बेसिस पे एक कोहेरेंसी आएगी
  810. 1:09:08थ्रू ट्रेडिशन। एक लॉन्ग पीरियड ऑफ़ टाइम में उसी मेथड को अप्लाई करने से आप एक
  811. 1:09:14कोहेरेंट लिटरेचर डेवलप करेंगे। दैट इज़ व्हाट इट इज़। जैसे फॉर एग्जांपल लोग ये
  812. 1:09:20कहते हैं कि साहब इमाम अबू हनीफा इज दी फाउंडर ऑफ हफी स्कूल। ठीक है? या इमाम
  813. 1:09:26मालिक इज द फाउंडर ऑफ मालिकी स्कूल। दे आर नॉट फाउंडर्स।
  814. 1:09:30दे नेवर क्लेम्ड टू बी फाउंडर्स। ठीक है? वो इतने टॉप लेवल के स्कॉलर्स
  815. 1:09:36अपने वक्त के हैं कि उनके मेथड को उनके स्टूडेंट्स या और लोग अडॉप करते हैं। और
  816. 1:09:44क्योंकि वो उस मेथड को बार-बार रेप्लिकेट करते हैं। एक पर्टिकुलर काइंड ऑफ लिटरेचर
  817. 1:09:50डेवलप होता है ओवर अ लॉन्ग पीरियड ऑफ़ टाइम। एंड बिकॉज़ द मेथड कि मेथड के टॉप पर
  818. 1:09:57एक स्कॉलर बैठा है। इसलिए उस मेथड को आप हनीफी मेथड कह रहे हैं। बट इट्स नॉट
  819. 1:10:02डेवलप्ड बाय हिम इन दैट सेंस। ही इज़ नॉट द समवन जो उसको डेवलप करके खत्म कर दिया
  820. 1:10:06उसने। ही लुक्ड एट इट इन इन अ पर्टिकुलर वे और उसको लोगों ने और इस्टैब्लिश किया।
  821. 1:10:12तो कहने का मकसद यह है कि जो सब्जेक्टिविटी है बिल्ट इस्लामिक
  822. 1:10:16अंडरस्टैंडिंग में उसमें कोहेरेंसी जो है वह थ्रू ट्रेडिशन आती है। इस पे इनफैक्ट
  823. 1:10:23बहुत अच्छे अच्छी किताब आर्टिकल है हुसैन अली अकरमा का आई थिंक 2011 और समथिंग
  824. 1:10:31बहुत फैंटास्टिक आर्टिकल। द टाइटल ऑफ द आर्टिकल इज एंथ्रोपोलॉजी ऑफ अ फतवा। वो यह
  825. 1:10:38बताते हैं कि जो वेबेरियन अंडरस्टैंडिंग है कि साहब
  826. 1:10:44जो जो इस्लामिक स्कॉलर्स हैं उनके पास अथॉरिटी नहीं है। वो पेड़ के नीचे बैठ के
  827. 1:10:49भी जस्टिस कर दे रहे हैं। एडहॉक सिस्टम में जस्टिस कर रहे हैं। पता ही नहीं है लॉ
  828. 1:10:52क्या है। तो उसको वो चैलेंज करता है और यह कहता है कि देखिए अथॉरिटी ऑफ लॉ जो है
  829. 1:10:58इस्लाम में वो ट्रेडिशन से आती है। एक पर्टिकुलर मेथड को फॉलो करने से अथॉरिटी
  830. 1:11:03आती है। आपके बोलने से अथॉरिटी नहीं आती है। बिकॉज़ यू बिलोंग टू दैट ट्रेडिशन
  831. 1:11:09बिकॉज़ यू आर अ स्टूडेंट ऑफ इबने तैमिया। देयर फॉर यू शुड बी लिसन टू ठीक है एंड
  832. 1:11:14दैट दैट एक्चुअली टेक्स यू बैक टू द प्रॉफेट हिमसेल्फ प्रॉफम हजरत उमर कीेंस
  833. 1:11:18इसलिए है बिकॉज़ ही लिसन डायरेक्टली फ्रॉम द प्रॉफेट है ना तो ये उस ट्रेडिशन से
  834. 1:11:24चीजें निकल रही हैं तो आई अंडरस्टैंड कि सब्जेक्टिविटी की बेसिस पे आप कोहेरेंसी
  835. 1:11:29डेवलप कर सकते हैं और उस कोहेरेंसी को इस्लाम प्रमोट और प्रोपगेट करता है और वो
  836. 1:11:36अपनी सोशल रियलिटी में मैनिफेस्ट होती है। दैट आई दैट आई अंडरस्टैंड। बट मेरा मानना
  837. 1:11:43यह है कि अगर आप उसको ये कहते हैं कि साहब ये जिसको कहते हैं आप नेशन स्टेट की
  838. 1:11:53कैटेगरी की बात मत कीजिए आप। एक इंस्टीट्यूशनल लेवल पर बात मत कीजिए आप।
  839. 1:11:58आप यह देखिए कि लोगों ने नेगोशिएट कैसे किया। लोगों ने अपनी रियलिटी की बेसिस पे
  840. 1:12:06कंस्ट्रक्शन कैसे किया। और उस कंस्ट्रक्शन के बेसिस पर उन्होंने अपने आप को रिीडफाइन
  841. 1:12:12कैसे किया? दिस इज मोरेंट। दैट्स व्हाट आई अंडरस्टैंड फ्रॉम यू।
  842. 1:12:18नहीं नहीं मैं ये नहीं कह रहा हूं मेरा कि मुस्लिम्स जो हैं आप आप उसको आप
  843. 1:12:23मुस्लिम्स को या इस्लामिक मेथड या शरिया को आप इस सेंस में मत देखिए कि नेशन स्टेट
  844. 1:12:29है या नहीं है या नेशन स्टेट में कैसे नेगोशिएट करना है। आप उसको ऐसे देखिए कि
  845. 1:12:34मुस्लिम कम्युनिटी ने हर एज में कैसे नेगोशिएट किया है अपनी कंडीशंस में और
  846. 1:12:42उसकी बेसिस पर आप अंडरस्टैंडिंग डेवलप कीजिए कि इस्लामिक पॉलिटिकल अंडरस्टैंडिंग
  847. 1:12:48क्या होगी एट अ पर्टिकुलर गिवन टाइम या एट अ पर्टिकुलर गिवन कॉन्टेक्स्ट और स्पेस इज
  848. 1:12:55दिस व्हाट यू आर सेइंग? इसमें भी एक्चुअली
  849. 1:12:59थोड़े से लेयर्स हैं निजाम भाई। लेयर्स ये हैं कि जो ये कंस्ट्रक्शन और ये
  850. 1:13:06पूरी 20थ सेंचुरी की डिबेट्स हुई इवन इमाम इब्न तैमिया की जब बात हो रही है तो मेरा
  851. 1:13:10आर्गुमेंट ये है कि ये जो चार स्कूल्स ऑफ़ थॉट्स हैं फॉर एग्जांपल सुन्न व जमात के
  852. 1:13:16कॉन्टेक्स्ट में जो इस अकीदे के उसमें आ रहे हैं। शवुला दहलवी ने इनको दो में
  853. 1:13:21सिंथेसाइज करने की बात की उनके अपने उसकी वजह से। मेरा फिलोसोफिकल आर्गुमेंट है।
  854. 1:13:26फिक में मेरी कोई ट्रेनिंग नहीं है। मैं ये बोल सकता हूं फिलोसोफिकली स्पीकिंग एज
  855. 1:13:29अ स्टूडेंट ऑफ फिलोसोफी इन सारे ट्रेडिशंस की मेटाफिजिकल फाउंडेशंस को अ सिंथेसाइज
  856. 1:13:36किया जा सकता है एक यूनिवर्सल मेटाफिजिक्स में रिलेटिव टू व्हाट टुडे इट एक्सिस्ट।
  857. 1:13:40अब वो ट्रू यूनिवर्सल है या नहीं वो तो ओवर द पीरियड ऑफ़ टाइम या फिर वो एक क्लेम
  858. 1:13:45है बेसिकली। तो उससे क्या होता है कि जो बॉडी ऑफ लिटरेचर है या बॉडी जो कॉरपस ऑफ
  859. 1:13:50डिस्कर्सिव ट्रेडिशन है वो तो सेम रहता है लेकिन आपके पास एक प्रिसाइज़ मेथोडोलॉजी आ
  860. 1:13:54जाती है कि कब जो इमाम इब्ने तैमिया ने जो मेथोडोलॉजी शुरू करी कि यू शुड बी एबल टू
  861. 1:13:59चूज़ बट ही कुड नॉट क्रिएट अ लार्जर मेटाफिजिक्स और इमाम इब्ने तैमिया ने
  862. 1:14:04लार्जर मेटाफिजिक्स इसलिए नहीं क्रिएट कर पाई क्योंकि वो अथरी ट्रेडिशन को क्लेम कर
  863. 1:14:08रहे थे टेक्स्चुअल इंटरप्रिटेशन के लेकिन जब वो गॉड को के डिफेंड में आर्गुमेंट दे
  864. 1:14:14रहे हैं तो वो कलाम ट्रेडिशंस हैं तो ऑटोमेटिकली ही इज़ अ वेरी कॉम्प्लेक्स
  865. 1:14:18फिगर। तो उनको उनके ट्रेडिशन को एक लेवल तक ही अचीव किया गया। जो ट्रुथ एमियन
  866. 1:14:23ट्रेडिशन होता वो ये होता कि टेक्सचुअल क्लेम्स को आप किस तरह से रीज़ंड लॉजिक में
  867. 1:14:31कंस्ट्रक्ट कर सकते हैं। अल्टीमेटली गजाली ने जो स्टैंडर्ड इमाम अल गजाली ने
  868. 1:14:37स्टैंडर्ड दिए कि जो ट्रांसेंडेंटल रियलिटी का जो क्लेम है रेवोलेशन वही जो
  869. 1:14:42इंसान की पोटेंशियल है रीजन करके थ थ्यरी को डिफाइन
  870. 1:14:47करने की रियलिटी की और जो एंपेरिकल एविडेंस है जो ऑब्जर्वेबल एविडेंस है वो
  871. 1:14:53तीनों अलाइन करने चाहिए क्योंकि अल्लाह ने इस दुनिया को बनाया है या किसी क्रिएशन ने
  872. 1:14:58इस दुनिया को बनाया है। अगर यह तीनों चीजें अलाइन नहीं कर रही है प्रिंसिपली तो
  873. 1:15:03कहीं ना कहीं आपके अंडरस्टैंडिंग में कोई कुथाई हो रही है। तो जो मुसलमान है और
  874. 1:15:08दूसरे लोग भी नॉट जस्ट मुस्लिम्स दुनिया इस वक्त इस क्राइसिस से गुजर रही है कि
  875. 1:15:12उसके पास इन तीन पिलर्स को यूनिफाई करने की मेटाफिजिक्स नहीं है। फाउंडेशंस को रूट
  876. 1:15:21करने की। तो जब आपका एक ट्रेडिशनल क्लेम है ट्रेडिशन का अब तक हो क्या रहा था?
  877. 1:15:30के इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन होने से पहले जो क्लेम टू प्रोग्रेस था वो एक पर्टिकुलर
  878. 1:15:37स्टैंडर्ड से डिफाइन होता था और इस्लामिक गोल्डन एज की सिविलाइजेशनल क्लेम्स में
  879. 1:15:42मुसलमानों का एज था उस प्रोग्रेस में हुआ यह कि क्योंकि
  880. 1:15:48मुस्लिम ट्रेडिशन में क्योंकि आपके पास प्रॉफिट के वफात के बाद डायरेक्ट स्टेट
  881. 1:15:54रहा मोस्ट ऑफ द टाइम इबने तैमिया स्पेशल क्लेम इसीलिए करते हैं कि उस टाइम पे
  882. 1:15:58मोंगोल्स आके कि एक्चुअली स्टेट उनको खतरा हुआ गिर सकता है। समझ रहे हैं? वो एक बहुत
  883. 1:16:03डिस्रोपोशननेट रियलिटी को डील कर रहे थे। इस वजह से ही वाज़ फोर्स्ड टू रिकंस्ट्रक्ट
  884. 1:16:08एवरीथिंग। उनको पोजीशंस चेंज करनी पड़ी। उन्हें लगा कि यार ये जो कैटेगरीज हैं ये
  885. 1:16:13इस डाउनफॉल को तो डील ही नहीं कर पा रही हैं। तो उनको तकलीद के बाहर आके कि जो आप
  886. 1:16:18बोल रहे हैं ना कि ट्रेडिशन कंस्ट्रक्ट उनको ये विद इन तकलीद भी बोलना है कि अगर
  887. 1:16:22हालांकि वो जो मेथड उन्होंने डिवाइस किया कि आप चूज़ कर सकते हैं। लेकिन उसकी
  888. 1:16:26कंप्लीट मेटाफिजिक्स या एपिस्टेमोलॉजी नहीं कंस्ट्रक्ट करी क्योंकि उस जमाने में
  889. 1:16:32पॉसिबल थी नहीं थी एक अलग सवाल है। तो ये जो दौर है उसमें जो मुस्लिम्स ने एज
  890. 1:16:41खोया वो इस वजह से खोया क्योंकि जो उनका कलाम का ट्रेडिशन उनका दुनिया को
  891. 1:16:48प्रोग्रेस देने का ट्रेडिशन और उनका जो जस्टिस का ट्रेडिशन है वो हिस्टोरिकली
  892. 1:16:54मिसअलाइन हो गया क्योंकि आपने इनको कमटिंग गोल समझने लगे एक पॉइंट ऑफ़ टाइम। यूज्वली
  893. 1:16:59होता है स्टेट फॉर्मेशन में करप्शन आता है। लोगों के पास पावर आ जाती है। पावर आ
  894. 1:17:03जाती है तो आप हुकूमत क्या करती है कि अपने कंट्रोल में पैसा और वेल्थ रखना
  895. 1:17:07चाहती है। उसके लिए वो क्या करती है कि वो अब अदिल को खत्म करना पड़ेगा। इक्विटी को
  896. 1:17:12खत्म करनी पड़ेगी। तो वो प्रोग्रेस को फंड नहीं करते। शुरू के जो खफा थे या जो
  897. 1:17:17रूलर्स थे उनका इंटरेस्ट था कि इस्लामिक गवर्नेंस एक्सपेंड हो। उसके मॉडल्स
  898. 1:17:23इंप्लिकेट हो। तो वो पूरा इन्वेस्टमेंट जो बिल बैतुल हिकमा और उसमें एक प्रोडक्शन
  899. 1:17:28हुआ बाद के जो रूलर्स का था वो प्रिजर्वेशन था ऑफ देयर ओन वो तो उससे
  900. 1:17:33क्या हुआ जो ये मल्टीपल ट्रेडिशंस यूनिफाइड एक्सिस्ट करते थे उलमा और
  901. 1:17:37डिस्कर्सिव ट्रेडिशन में वो घूमते चले गए और उसी दौरान पे पैरेलल मॉडर्निटीज
  902. 1:17:43प्रोड्यूस हो रही थी जिसका क्लेम वेस्ट को था। उन्होंने अपना क्या किया कि भाई
  903. 1:17:48ट्रांसेंडेंटल क्लेम को हटा के अपना यूनिफिकेशन एक लेवल पर करके सामने रख दिया
  904. 1:17:53कि यह अदिल है और उसको कॉलोनियल स्ट्रक्चर्स के थ्रू ऑपरेशन के थ्रू
  905. 1:17:57मुसल्लत किया लोगों पे और कॉलोनीज़ के थ्रू जो एक्सट्रैक्ट हो रहा था प्रॉफिट को उसको
  906. 1:18:03अपने अपनी कंट्रीज में लगा के एक मटेरियल गेन दिखाया देखो हम कितने आगे हैं। समझ
  907. 1:18:10रहे हैं? वो जो सेकंड वर्ल्ड थर्ड वर्ल्ड की एक्सप्लइटेशन से आपने एक फॉल्स
  908. 1:18:16यूटोपिया क्रिएट किया और बोला देखो हम कर सकते हैं। तो प्रोग्रेस ये सब हमारे
  909. 1:18:20हिस्से के हैं। तो ये जो आप बात बोल रहे हैं जो अभी की डेट में क्योंकि
  910. 1:18:25मेटाफिजिक्स नहीं है उस ट्रेडिशन को रिकंस्ट्रक्ट करने की उस वोकैबलरी में जो
  911. 1:18:31दुनिया समझती है स्टेट इंस्टीटशंस के फॉर्म में आपकी इकोनॉमिक्स क्या होगी? आप
  912. 1:18:36इक्वलिटी को डील कैसे करेंगे इनकलिटी को? आपकी इवन प्रिंसिपल्स ऑफ बायोलॉजी क्या
  913. 1:18:42होगी? आप गलत और सही के बीच में ऑब्जेक्टिव क्लेम कैसे करेंगे? जैसे आपने
  914. 1:18:48सब्जेक्टिविटी की कोई बात करी। कुरान खुद सूर इमरान में बोल रहा है सातवीं आयत में
  915. 1:18:53क्योंकि ये डिबेट्स हो रही थी उस जमाने में कि बहुत सारी चीजें लोग इंटरप्रेट कर
  916. 1:18:59रहे हैं। समझ नहीं आ रही। फलाना आदमी कुरान की सेम आयत सुन के यह समझ रहा है।
  917. 1:19:03फलाना आदमी यह समझ रहा है। तो आयत उतरी कि जो बेशतर आयतें हैं कुरान की या जो लार्जर
  918. 1:19:09कॉर्पस है वो बिल्कुल ए्बगुस नहीं है। और हां कुछ हिस्से हैं उसके जिसमें
  919. 1:19:15ए्बिगुटी है। फितना करने वाले उस ए्बिगुटी को एक्सप्लइट करके फितना करेंगे। और जिन
  920. 1:19:22लोगों को कमांड है मैं मफूम बता रहा हूं। उन ऑब्जेक्टिव आयत पे उनके लिए वो
  921. 1:19:26ए्बिगुटी इसलिए खत्म हो जाएगी क्योंकि उनको
  922. 1:19:29कॉन्टेक्स्ट समझ आ रहा है। इसी को मैं ट्रांसेंडेंटल कॉन्टेक्स्चुअलिज्म बोल रहा
  923. 1:19:32हूं कि वो जो ए्बिगुटी है वो ए्बिगुटी इसलिए है क्योंकि आप रिड्यूस्ड फ्रेमवर्क
  924. 1:19:37से इस्लाम को समझने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे नेशन स्टेट के कंस्ट्रक्शन में
  925. 1:19:41इस्लाम को घुसाने की कोशिश कर रहे हैं। बल्कि इस्लाम का अपना एक अंडरस्टैंडिंग है
  926. 1:19:46कि सोसाइटी पावर रिलेशंस में स्टेट इंस्टीटशंस में ऑर्गेनाइज कैसे होती है और
  927. 1:19:52वो अपने अचीव कैसे करती है गोल्स। तो ये क्लैशेस जो है ये फंडामेंटली इस्लामिक
  928. 1:19:57नहीं होने चाहिए थे और सब्जेक्टिव क्लेम्स को कुरान खुद एक्सेप्ट कर रहा है लेकिन वो
  929. 1:20:02एक बॉडी ऑफ़ लिटरेचर विद इन कुरान खुद दे रहा है। वो जगह-जगह बोल रहा है कि आप अक्ल
  930. 1:20:06को इस्तेमाल करें। जगह-जगह वो बोल रहा है आप कल्ब को इस्तेमाल करें। बता रहा है
  931. 1:20:10डिफरेंस कहां पे है। जगह-जगह वो ये भी बोल रहा है कि अक्ल कल्व में भी, हार्ट में भी
  932. 1:20:16रिसाइड कर जाती है। वहां भी वो ये भी बोल रहा है कि क्यों
  933. 1:20:20आपको वही की जरूरत है? क्यों आपकी नॉलेज लिमिट है? मैं अभी पढ़ रहा था इस
  934. 1:20:23कॉन्टेक्स्ट में बहुत सारी चीजें। तो कुरान जो मेटाफिजिक्स कंस्ट्रक्ट कर रहा
  935. 1:20:28है और क्योंकि हमारी ट्रेनिंग जो ट्रेडिशन में हो गई है थराइजेशन की। हमारे जो जिन
  936. 1:20:32उलमाओं की आप बात कर रहे हैं ना आज की डेट में मुझे वो दिखते नहीं है। वो ना एक वो
  937. 1:20:39एक डिफरेंट खाद थी। जिसमें ट्रेडिशन में होलिस्टिक नॉलेज एंबेडेड होती थी।
  938. 1:20:45एक्सिस्ट करती थी। उसके लिए दीन और दुनिया अलग नहीं था। वो उसको शेप कर रहा था। वो
  939. 1:20:50थ्यरीज़ दे रहा था जस्टिफिकेशन की कि क्यों इस तरह का काम होना चाहिए और जिससे लोग
  940. 1:20:55मुतासिर हो रहे तो सिर्फ मुसलमान नहीं वो मिसिंग है। तो मैं इस रियलिटी को बोल रहा
  941. 1:21:01हूं कि आज की डेट में अल्टरनेटिव मेटाफिजिक्स मैं तो खुद मेरा जो जर्नी है
  942. 1:21:05वो वही है कि अल्टरनेट मेटाफिजिक्स क्या होगी। मेरा एक अपना उसमें एक
  943. 1:21:08अंडरस्टैंडिंग है जो मैं बोल रहा हूं। ट्रांसलर कॉन्टक्चुअलिज्म बोलता हूं। और
  944. 1:21:12मेरे वालिद साहब से भी वो बहुत चीजें आ रही है। और दो 20थ सेंचुरी में डिबेट्स
  945. 1:21:16हुई है। ऐसा नहीं है वो। वो डिस्कर्सिव ट्रेडिशन मैं मानता हूं एक्सिस्ट करता है
  946. 1:21:19कि ओवर द पीरियड ऑफ़ टाइम कि आज की डेट में दूसरी बात एक आपने क्योंकि ट्रेडिशनल
  947. 1:21:23क्लेम किया ऐसी कोई सिविलाइजेशन नहीं है जी
  948. 1:21:26जो ट्रेडिशन को क्लेम नहीं करती इंक्लूडिंग सेकुलर तो वो भी ग्रीक फिलॉसफी
  949. 1:21:31को क्लेम करती है एज अ ट्रेडिशन वहां पे भी डिस्कर्सिव ट्रेडिशन है कि जो
  950. 1:21:34एरिस्टोटल से चल रहा है जो प्लेटो से चल रहा है जो न्यू प्लॉटिनस में आया जो
  951. 1:21:38चलते-चलते टॉमस एक्वस और उन्होंने लिया फिर उसके बाद वो ट्रेडिशन डेकार में आया
  952. 1:21:43डेकार के बाद फिर वो ट्रेडिशन न्यूटन लाइब रूसो लॉक हॉब्स और आपके इमैनुअल कांट फिर
  953. 1:21:51हेगल फिर उसके बाद आपके एक मां समझ रहे हैं
  954. 1:21:54वो ट्रेडिशन की पूरी लेगसी वो भी लाते हैं वो भी शजरा लाते हैं कि मैंने कहां से
  955. 1:21:58लिया उसने उससे लिया जॉन स्टमिल ने ऐसे लिया
  956. 1:22:01तो पहली बात ये कोई इस्लामिक थियोलॉजिकल क्लेम नहीं है कि
  957. 1:22:07हमारे पास ही सिर्फ ट्रेडिशन है या मेथड है
  958. 1:22:10ऑफकोर्स ऑफकोर्स इट्स नॉट और आज की डेट में जो हमारा ट्रेडिशनल मेथड
  959. 1:22:14है सवाल यह है क्या वो सफिशिएंट है? हां, फख में है। बहुत सारी चीजों में मैं यह
  960. 1:22:19नहीं डिनाई कर रहा। मैं कह रहा हूं फिलोसोफिकली जब रीज़ करते हैं हम बाहर तो
  961. 1:22:23मुझे तो एक जो कलाम की डिबेट 400 साल पहले हुई शाह वली उल्ला देहलवी ने करी या फिर
  962. 1:22:29उनसे पहले करी। आज की डेट में मैथमेटिकल क्लेम्स टू लॉजिक एक्सपैंड हो गए हैं।
  963. 1:22:34मंतिक एक्सपैंड हो गया है। समझ रहे हैं? जी।
  964. 1:22:37आपका चाहे विज़न सेम रहे लेकिन आपको फिर से सिंथेसाइज करना पड़ेगा। लार्जर बॉडी ऑफ़
  965. 1:22:43नॉलेज में प्रिंसिपल्स ऑफ इस्लामिक अंडरस्टैंडिंग ऑफ रियलिटी वो नहीं है। दिस
  966. 1:22:50टेक्स अस टू द सेकंड क्वेश्चन जो जो मैंने शुरू में पोज़ किया था कि
  967. 1:22:57मुस्लिम्स इंडिया में अपनी आइडेंटिटी को कंस्ट्रक्ट
  968. 1:23:01कैसे करें? नाउ बेस्ड ऑन हमने जो डिस्कशंस किए हैं लेट मी गिव एन इनिशियल स्टेटमेंट।
  969. 1:23:08इनिशियल स्टेटमेंट जिसकी बेसिस पे वी कैन डिस्कस इट
  970. 1:23:14शुड दे अंडरस्टैंड
  971. 1:23:19द कॉन्स्टिट्यूशन दी
  972. 1:23:24स्टेट आफ्टर 1947
  973. 1:23:30एज समथिंग जो उन पे इंपोज की गई जिसमें उनको नेगोशिएट करना पड़ेगा
  974. 1:23:36परपचुअली व्हिच वी डिस्कस्ड ठीक है कि क्या मुस्लिम
  975. 1:23:41स्टेट ऑफ पॉलिटिकल अंडरस्टैंडिंग इज इन परपचुअल स्टेट ऑफ नेगोशिएशन ठीक है क्या
  976. 1:23:47वो परपचुअली स्ट्रेटेजिकली आपको नेगोशिएट करना है क्योंकि वो इनफोर्स्ड है एक
  977. 1:23:53पर्टिकुलर टेंपलेट आपके ऊपर दैट्स वन या फिर
  978. 1:23:59आप यह मान के चलें कि बिकॉज़ आफ्टर 1857 और इनफैक्ट एक्ट 1857 जो है उसमें उस
  979. 1:24:10रिवोल्ट में सबसे बड़ा रोल मुसलमानों का ही था। एक्चुअली भाई मुगल एंपायर था ये।
  980. 1:24:16मुगल्स के अंडर में था। जाहिर सी बात है मुगल्स ही
  981. 1:24:19उन्हीं वही करेंगे। तो ये बहुत लॉजिकल बात है। तो 1857 के बाद से मुसलमानों ने जो
  982. 1:24:28रेजिस्टेंस दिखाया अगेंस्ट एक्सटर्नल फोर्सेस
  983. 1:24:32वो कंटिन्यू होता है टिल 1947 एट लीस्ट। इन व्हाटएवर फॉर्म इट इज। ठीक है? कोई भी
  984. 1:24:39फॉर्म हो और फिर वह मैनिफेस्ट होता है फर्दर
  985. 1:24:46भले बहुत ही डाइल्यूटेड फॉर्म में हो लेकिन इन डिफरेंट वेज़ फॉर एग्जांपल देवबंद
  986. 1:24:51आज भी एक्सिस्ट करता है। ठीक है? जो 186 में बना था।
  987. 1:24:57जमीयत उलमा-ए-ह हिंद 1900 1920 में बनी थी। आज भी एक्सिस्ट करती है।
  988. 1:25:05जमात इस्लामी 1947 से बनी से पहले बनी थी। 1941
  989. 1:25:11यस जमात इस्लामी हिंद आज भी एक्सिस्ट करती है।
  990. 1:25:16अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एज अ यूनिवर्सिटी वजूद 1920 में आती है। आज भी
  991. 1:25:21एक्सिस्ट करती है। तो वो जो एक आइडेंटिटी की बात है वो
  992. 1:25:26कंटीन्यूअस है। प्री इंडिपेंडेंस आफ्टर इंडिपेंडेंस। तो पहला चीज तो यह था क्या
  993. 1:25:32यह जो नेशन स्टेट या इंडिया एज अ स्टेट या कॉन्स्टिट्यूशन को हम एक फोर्स्ड
  994. 1:25:39माने जिसमें हमको परबचुअली नेगोशिएट करना है या इसको हम यह माने कि साहब यह एक ऐसी
  995. 1:25:45चीज है जिसमें हमने खुद कंट्रीब्यूट किया है। ठीक है? एंड देयर फॉर इट्स नॉट अ
  996. 1:25:51क्वेश्चन ऑफ नेगोशिएशन। इट इज़ अ क्वेश्चन ऑफ क्लेम कि मेरा शेयर
  997. 1:25:57भी है इसके अंदर। ठीक है? जो जो राहत इंदौरी का शेर है सभी के सभी का खून है
  998. 1:26:04शामिल यहां की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है। ठीक है? सो इज दैट
  999. 1:26:10दैट्स अ सेकंड कैटेगरी। दैट्स अ सेकंड थिंग देन देयर इज़ अ थर्ड थिंग कि साहब
  1000. 1:26:18हमने नेगोशिएट किया था। हमने उसको वजूद में लाया था। हमारा बहुत
  1001. 1:26:26बड़ा कंट्रीब्यूशन था। आज भी हमारा कंट्रीब्यूशन है। लेकिन अब यह जो कंट्री
  1002. 1:26:33जिस डायरेक्शन में जा रहा है, वो डायरेक्शन हमारे लिए एलियन डायरेक्शन है।
  1003. 1:26:40ठीक है? हमने यह नेगोशिएट कभी नहीं किया था कि इस तरीके का वायलेंस होगा हमारे
  1004. 1:26:46खिलाफ। यह हमारा इस तरीके का मार्जिनलाइजेशन होगा। या हमारा इस तरीके
  1005. 1:26:51का सप्रेशन होगा। चाहे वह आप सिटीजनशिप पे ले लें, चाहे रिफ्यूजी में ले लें। अभी कल
  1006. 1:26:56ही परसों की न्यूज़ है कि भ दिल्ली में जो है वो इललीगल बांग्लादेशी माइग्रेंट्स को
  1007. 1:27:01पकड़ा गया। डॉक्यूमेंट्स नहीं थे। यह वो सारे हिंदुस्तान में चल रहा है। ये ठीक
  1008. 1:27:04है? या डिमोलिशन को ले लें आप, चाहे वफ को ले लें आप, चाहे पर्सनल लॉ को ले लें आप,
  1009. 1:27:09चाहे कम्युनल वायलेंस को ले लें, बाबरी केस को ले लीजिए।
  1010. 1:27:18थर्ड कैटेगरी ऑफ़ आर्गुमेंट ये है कि साहब हमने यह हिंदुस्तान नेगोशिएट नहीं किया
  1011. 1:27:23था। ठीक है? तो ये जिस डायरेक्शन में जा रहा है
  1012. 1:27:29ये एलियन डायरेक्शन है। जहां हमारी सिटीजनशिप खत्म हो रही है, आइडेंटिटी खत्म
  1013. 1:27:33हो रही है, डाइल्यूट हो रही है। नाउ अगेन वी हैव टू कम ऑन द टेबल
  1014. 1:27:41टू नेगोशिएट। नाउ अगेन वी हैव टू
  1015. 1:27:47स्टार्ट डूइंग समथिंग। सो दैट हमारा एकिस्टेंस
  1016. 1:27:52दिखाई तो दे आपको। दिस इज अ थर्ड थिंग जिसको कुछ लोग जो हैं वह यह कह रहे हैं कि
  1017. 1:27:58साहब रीनेगोशिएटिंग द हिंदू मुस्लिम डील हसन सुरूर ने शायद किताब लिखी है कि क्या
  1018. 1:28:06वो रीनेगोशिएट करना पड़ेगा हमको। ठीक है? क्या वह जो झंडा है हिंदुस्तान का जो झंडा
  1019. 1:28:14है जिसमें दोनों कलर्स आपने सिंबॉलिकली दिखाए हैं हिंदू मुस्लिम के और बीच में
  1020. 1:28:20वाइट दिखाया है एज अ मैटर ऑफ पीस क्या उसके लिए भी आपको लड़ना पड़ेगा?
  1021. 1:28:30सो इन ऑन द बेसिस ऑफ ऑल ऑफ द डिस्कशन जो हमने जो डिस्कशनंस किए हैं
  1022. 1:28:36आपकी अंडरस्टैंडिंग में वेयर डू वी फॉल आपका काफी लेयर्ड कॉम्प्लेक्स और एडवांस्ड
  1023. 1:28:44क्वेश्चन है जो पिछले 300 साल अगर हम 1857 से भी पीछे
  1024. 1:28:50लेके चलें और मुगल मुगलिया जो सल्तनत है उसका डाउनफॉल क्यों शुरू होता है
  1025. 1:28:57जी उसकी तरफ भी हम तव तवज्जो दें और
  1026. 1:29:00जो शाह वली उल्ला दहलवी और उनसे पहले जो स्कॉलरशिप हो रही थी वो ये आर्ग्यू कर रहे
  1027. 1:29:08थे कि जो मुगल स्टेट है वो इस्लामिक प्रिंसिपल्स ऑफ गवर्नेंस
  1028. 1:29:13अदल जस्टिस जो भी इमेजिनेशंस हैं कि व्हाट ऑट टू बी
  1029. 1:29:18हम उससे हटके वो पावर रिलेशंस
  1030. 1:29:22सर्वाइवल कंट्रोल मॉडर्न स्टेट भी अब जैसे आप ईटन का हमने पडकास्ट किया था मैंने
  1031. 1:29:29रिचर्ड ईटन का तो उनका बोलना था कि अकबर और औरंगजेब
  1032. 1:29:35दोनों वर वेरी मॉडर्न जी
  1033. 1:29:39अकबर ने जो मॉडर्न नेशन स्टेट में इंस्टीटशंस ऑफ एफिशिएंसी होते हैं कि किस
  1034. 1:29:44तरह से स्टेट मल्टीपल लेवल्स पे ऑर्गेनाइज्ड होगा मिलिट्री इकोनमी
  1035. 1:29:49पॉलिटिक्स ब्यूरोक्रेसी ही इज़ द वन हु इंट्रोड्यूस्ड इट इवन बिफोर
  1036. 1:29:54मॉडर्न नेशन स्टेट और दूसरी तरफ औरंगजेब जिसने रूलर को फिर से पहली बार बिलो द रूल
  1037. 1:30:03ऑफ रॉ रखा के शरीयत ऊपर है। अभी तक क्या चला रहा था कि ठीक है वो है लेकिन जो रूलर
  1038. 1:30:09है उसके ऊपर लॉ अप्लाई नहीं हो रहा था। तो इन प्रिंसिपल एक मॉडर्न स्टेट का जो ये भी
  1039. 1:30:15लॉजिक है कि जो कॉन्स्टिट्यूशन है वो सीट ऑफ अथॉरिटी और सोवनिटी है।
  1040. 1:30:21जी और एक इस्लामिक गवर्नेंस के मॉडल में
  1041. 1:30:25क्योंकि कुरान और जो कॉरपस ऑफ हदीस लिटरेचर है
  1042. 1:30:31उससे जो इमर्ज होने वाली शरीयत है फिक है वो सीट ऑफ सोवनिटी बन जाता है इन टर्म्स
  1043. 1:30:38ऑफ जुरिस प्रिडेंस
  1044. 1:30:41जी तो औरंगजेब भी इन मॉडर्न लॉजिक के अगर
  1045. 1:30:45हिसाब से सोचेंगे रूल ऑफ लॉ के अंडर है। लेकिन क्योंकि मोरल करप्शन क्योंकि
  1046. 1:30:51इनकलिटीज क्योंकि स्टेट के सर्वाइवल के लिए जो
  1047. 1:30:57रिलेशंस आप बिल्ड कर रहे हैं दूसरे स्टेट्स के साथ, दूसरे ग्रुप्स के साथ।
  1048. 1:31:02हिंदुस्तान में कास्ट एक बड़ा फैक्टर है। इस्लाम का जो क्लेम है वो एक रेडिकल
  1049. 1:31:09ह्यूमनिज्म का है। जी।
  1050. 1:31:12लेकिन वह हिंदुस्तान जैसी जग्राफी में नहीं एक्सिस्ट करता है। इवन स्कॉलर्स लाइक
  1051. 1:31:18शाह वली उ्ला दहलवी टू मौलाना मौदूदी आजाद मौलाना हुसैन अहमद मदनी ये जो लंबा डिबेट
  1052. 1:31:25का सिलसिला हुआ 200 250 साल कहीं पे भी इस इनकलिटी को जो एकिस्ट करती है मुआशरे में
  1053. 1:31:32जी उसको सीरियसली नहीं लिया गया। जी
  1054. 1:31:36तो एक तो ये है कि मोरल करप्शन के स्टेट सर्वाइव करते हैं जस्टिस पे
  1055. 1:31:41हम या कम से कम परसेप्शन ऑफ जस्टिस पे आप
  1056. 1:31:46बहुत लंबे वफे तक कंट्रोल को इस्तेमाल करके
  1057. 1:31:51आप स्टेट को स्टेबल नहीं रख सकते जो वेस्टर्न नेशन स्टेट्स हैं डिस्पाइट
  1058. 1:31:58देयर ऑपरेशन थ्रूउ द वर्ल्ड उन्होंने जो फ्रीडम्स दिए हैं अपने नेशन स्टेट्स के
  1059. 1:32:03विद इन टू देयर पपुलेशंस वो उनके सर्वाइवल के लिए नेसेसरी है। दैट शराड जो इस वक्त
  1060. 1:32:09यूएस में हो रहा है अंडर ट्रंप वो फ्रिक्शन जब मैनिफेस्ट हो रहा है आप देखिए
  1061. 1:32:13स्टेबिलिटी कैसे है? हर कुछ महीने में गवर्नमेंट शटडाउन हो जाता है।
  1062. 1:32:18जी आप सोचिए दुनिया का टॉप नेशन स्टेट में
  1063. 1:32:22अगर आपको ये सुनने में आ रहा हो गवर्नमेंट शटडाउन है। आप क्या उसको स्टेबिलिटी
  1064. 1:32:27लेंगे? तो एक तो मुस्लिम आइडेंटिटी को पहले हमें देखना पड़ेगा कि वह
  1065. 1:32:33जब से लेकर 1857 तक डाउनफॉल हो रहा है और काउंटर क्लेम जब भी आ रहा है शाह उ्लाह
  1066. 1:32:39बोल रहे हैं कि डाउनफॉल आ रहा है सिंथेसिस करना पड़ेगा
  1067. 1:32:44वो सिंथेसिस करने की कोशिश भी कर रहा है लेकिन वो सिंथेसिस किस चीज में हो रहा है
  1068. 1:32:48थियोलॉजिकल डिबेट्स में हम
  1069. 1:32:50वैदानियत की डिबेट्स में वो मॉडर्निटी जो डेवलप हो रही है सो कॉल्ड
  1070. 1:32:57जो इल्म के नए जो शोबे
  1071. 1:33:04दुनिया में इमर्ज हो रहे हैं वो उसका सिंथेसिस नहीं है।
  1072. 1:33:08जी तो ही इज़ ग्रेट विद इन द ट्रेडिशन बट ही
  1073. 1:33:11इज़ नॉट ग्रेट एज अ सिंथेसिस ऑफ द ओवरऑल दुनिया में जो चल रहा है।
  1074. 1:33:18ठीक है? उसके बाद शाह वलीला दहलवी को बोला जाता है
  1075. 1:33:22कि हर वो ट्रेडिशन क्योंकि सीड तो थी सिंथेसिस की।
  1076. 1:33:27जो फिर उसके बाद हिंदुस्तान में गुजरा जो छह बड़े ट्रेडिशंस हैं देवबंद का ट्रेडिशन
  1077. 1:33:32है बरेलवी का ट्रेडिशन है मौलाना जो ये हैं के मौदूदी हैं सर सैयद हैं इस तरह के
  1078. 1:33:41मैं मिस भी कर रहा हूं वो सब शाह वली उल्ला दहलवी की
  1079. 1:33:46अंडरस्टैंडिंग ऑफ व्हाई देयर शुड बी सिंथेसिस जैसे हेगल ने जब बोला
  1080. 1:33:50डायलेक्टिक्स है उसने रिसोंड किसे किया इमैनुअल कांट को
  1081. 1:33:54इमैनुअल कांट क्या कर रहा था सिंथेसाइज कर रहा था लेकिन उसके बाद एक रीइटरप्रिटेशन
  1082. 1:33:58ने डायलेक्टिस के उसके बाद सिर्फ डिफरेंसेस लाया वेस्टर्न एकेडमिया में
  1083. 1:34:03उसी तरह शाह शाह वली उल्लाह ऑलदो ट्राइंग टू सिंथेसाइज बिकम द प्राइमरी रीज़
  1084. 1:34:12ऑफ़ फैक्शंस। ठीक है? उनकी अपनी जो इंटरप्रिटेशन जो लोग
  1085. 1:34:16कर रहे हैं जो उनके उसमें हालांकि ही इज़ ग्रेट इन इन हिमसेल्फ कि वो जो कोशिश कर
  1086. 1:34:20रहे हैं बट लोग जो उनको फिर रीड कर रहे हैं उस सिंथेसिस को वो अपने-अपने
  1087. 1:34:24पर्सपेक्टिव से कर रहे हैं। 1857 में क्योंकि एक ब्रिटानिया हुकूमत ने एक और
  1088. 1:34:30स्टेज ऑफ पॉलीटिकल सोवनिटी की फॉल को अचीव किया मुस्लिम्स की इंडिया में तो वो जो
  1089. 1:34:37क्राइसिस है वो इतना मैनिफेस्ट हो गया कि दो मेजर ट्रेडिशंस एक क्योंकि उलमा उसमें
  1090. 1:34:44बहुत इनवॉल्व थे। उनके जान माल और इदारों का बहुत नुकसान हुआ। तो उन्होंने यह सोचा
  1091. 1:34:50कि कैसे एक देवबंद जैसी तहरीक हो जी
  1092. 1:34:53कि जिसमें आपकी जो अपनी पॉलिटिकल सोवनिटी स्टेट के इंस्टीट्यूशन में मैनिफेस्ट होती
  1093. 1:34:59थी आप उसको नॉन स्टेट इंस्टीटशंस में प्रिजर्व कर
  1094. 1:35:04लें। जी
  1095. 1:35:05जो शरीयत का एक हिस्टोरिकल खिलाफत के अंडर अस्यूम किया जाता है कि वो इस तरह हालांकि
  1096. 1:35:10वो भी एक क्लेम है। ऐसा नहीं है कि आप खिलाफत के अंडर कंप्लीटली इंडिपेंडेंट थे।
  1097. 1:35:14बट सफिशिएंटली इंडिपेंडेंट थे इतना कि आप सिवाय टॉप लीडरशिप के आपके पास एफआईआर था
  1098. 1:35:21जजमेंट्स का और सफिशिएंटली आपको इंडिपेंडेंस थी तो एक तरफ वो हुआ कि भ अब
  1099. 1:35:27स्टेट रिलेशंस चेंज हो रहे हैं। ब्रिटिश जो है वो प्राइमरी जो ऑब्जेक्टिव ऑफ हेट
  1100. 1:35:34है फ्रॉम इंस्टीट्यूशनल्स गवर्नेंस पर्सपेक्टिव उसको मुसलमान दिख रहा है
  1101. 1:35:38क्योंकि उसी का क्लेम है पॉलिटिकल। जी
  1102. 1:35:41तो उसने भी बायसेस क्रिएट किए हिंदू मुस्लिम रिलेशंस में।
  1103. 1:35:44जी। तो सर सैयद अहमद खान क्योंकि
  1104. 1:35:47एजुकेटेड ब्रिटिश उसमें भी वह किया बाहर भी जाके देखा वो भी किया उन्होंने सोचा कि
  1105. 1:35:53भाई यह एक सिंथेसिस तो हो रहा है लेकिन मॉडर्निटी के साथ नहीं हो रहा है जो उलूम
  1106. 1:35:56हो रहा है उन्होंने एक एफर्ट मारा
  1107. 1:35:59लेकिन वहां पे भी रियल सिंथेसिस नहीं हुआ तो वो कमटिंग रियलिटीज हो गई देवबंद ने
  1108. 1:36:04उनको क्रिटिक भी किया कि आप जो कर रहे हैं मॉडर्न एजुकेशन के नाम पे
  1109. 1:36:10वो ट्रेडिशनल कैटेगरीज को आप डाइल्यूट कर रहे हैं फरिश्ते क्या हैं उनका रोल क्या
  1110. 1:36:16है। आप रैशनलाइज कर रहे हैं इस्लाम को तो आप उसको रिड्यूस कर रहे हैं उसके
  1111. 1:36:21इंपैक्ट को क्योंकि वो बिय्ड अक्ल क्योंकि ये डिबेट्स तो पहले भी हो चुकी हैं।
  1112. 1:36:25ये तो गजाली के वक्त भी हो चुकी है। ऐसा नहीं है ना कि ये डिबेट्स अक्ल की और नकल
  1113. 1:36:30की और वही की हुई नहीं है। जी
  1114. 1:36:33वो मॉडर्न फाउंडेशंस में जो एक्सपैंड हुआ है वो लॉजिक उसके कॉन्टेक्स्ट में नहीं
  1115. 1:36:37हुई। तो किसी के पास भी पूरा जवाब नहीं है।
  1116. 1:36:41जी लेकिन विज़न सबको आ रहा है। और ये सिर्फ
  1117. 1:36:45इंडिया में नहीं हो रहा है। जमालुद्दीन अफगानी, राशिद उल रिदा, खिलाफत का
  1118. 1:36:49डाउनफॉल, अल्लामा इकबाल सब लोग रीड कर रहे हैं कि भई अब जो हमारी ओवरऑल पॉलिटिकल
  1119. 1:36:56सोनिटी है ग्लोबल। वो खत्म हो रही है। जी।
  1120. 1:36:59अब हम क्या करें? तैमियन मूवमेंट आता है। मूवमेंट एक तरीके से ना आ रहा है। दैट इज
  1121. 1:37:04व्हाई इमाम इबने तैमिया बिकम्स रेलेवेंट अगेन। वह बीच की हिस्ट्री में गायब है।
  1122. 1:37:11क्योंकि मोंगोल्स का इन्वज़ अब दूसरी बार ऐसे हो रहा है कि एक तरीके से कि आपकी
  1123. 1:37:16पॉलिटिकल सोवनिटी की ग्लोबल इंस्टीट्यूशन को चैलेंज मिल गया। जी
  1124. 1:37:22खिलाफत मूवमेंट बाकी सारी चीजें मुस्लिम जो आइडेंटिटी है वो अब कंफ्यूज हो जा रही
  1125. 1:37:28है। इंडिया में भी जो स्टेट और पावर रिलेशंस हैं वो चेंज हो रहे हैं। जो हिंदू
  1126. 1:37:34मुस्लिम सिख ईसाई जितने भी आदिवासी उनको लग रहा है कि एक नया क्लेम और नेगोशिएशन
  1127. 1:37:42हो सकता है। जी
  1128. 1:37:44और उन पावर रिलेशंस में जो सफिशिएंट क्योंकि आपको ब्रिटिश ने अपने इंस्टीटश
  1129. 1:37:51में भागीदार नहीं हुआ। आप ब्यूरोक्रेट्स नहीं बन पाए। आपको जॉब्स नहीं मिली। आपका
  1130. 1:37:56सिस्टमिक डेप्रिवेशन जो आज हम बोलते हैं आपका सिस्टमिक डेप्रिवेशन एज अ स्टेट
  1131. 1:38:01पॉलिसी जी।
  1132. 1:38:02क्योंकि खतरा आपसे है। और जो दूसरी कम्युनिटीज हैं उन्होंने अपने
  1133. 1:38:07आप को इंटीग्रेट करना शुरू करा। जी।
  1134. 1:38:10तो एक प्रिविलेज क्लास होती है। उसमें से फिर फ्रीडम मूवमेंट होता है। सारी चीजें
  1135. 1:38:15होती हैं। लेकिन जो प्राइमरी क्राइसिस है वो डिबेट में आता है फिर से कि मुस्लिम
  1136. 1:38:21पॉलिटिकल थॉट क्या होगा? और जो हमने पहले बोला कि मुस्लिम पॉलिटिकल थॉट प्रोफेटिक
  1137. 1:38:26लेगसी में 23 इयर्स में डिफरेंट तरीके से इमर्ज हुआ है।
  1138. 1:38:30जी। अल्लामा इकबाल क्योंकि कहीं लाहौर और
  1139. 1:38:33पंजाब और उस इलाके में रह रहे थे। जहां मुस्लिम मेजॉरिटी में भी था। थोड़ा साइड
  1140. 1:38:37में जाके माइनॉरिटी भी आ रही थी। तो उन्होंने सोचा फेडरल होना चाहिए।
  1141. 1:38:42जिन्ना के इमेजिनेशन में ज्यादा हो रहा था कि जो मुस्लिम डोमिनेटेड इलाके हैं
  1142. 1:38:47वहां पे अचीव कर ले हम या मौलाना मौदूदी सोच रहे थे कि कैसे एक फाइनलिटी इकामत दीन
  1143. 1:38:53द प्रोजेक्ट ऑफ एप्लीकेशन ऑफ इस्लाम वो होलिस्टिक होगा। लेकिन उसकी एक मेथोडोलॉजी
  1144. 1:38:58उसकी जो एक ग्रेजुअल एक परपेचुअल स्ट्रगल है उसको अचीव करने की वो बहुत डिफाइन नहीं
  1145. 1:39:03थी। जी दूसरी तरफ हमारे जो अकाबरीन हमारे जो उलमा है देवबंद के उनमें भी दो फैशंस
  1146. 1:39:12थी। उनमें से एक फैक्शन था जो गांधी और बाकी लोग आजाद थे।
  1147. 1:39:16मौलाना हुसैन अहमद मदनी थे। उनका ये कहना था कि मिसाके मदीनिया में तो जो कौमी कौम
  1148. 1:39:21और उम्मत की डेफिनेशन है उसमें यहूदी भी थे और पेगंस भी थे।
  1149. 1:39:25जी या पॉलिथीस भी थे। तो उस हिसाब से आज की
  1150. 1:39:29डेट में जो हमारी जो रेंज ऑफ पॉलिटिकल सोवनिटी है वो हमारी अपनी वजूआत की वजह से
  1151. 1:39:36पीछे चले गई है। अब हमें सोसाइटी पे भी काम करना पड़ेगा।
  1152. 1:39:41हमें उस मोरल क्लेम को ज री कंफिगर कर सकते हैं जब हमारा सोसाइटी पे कोई क्लेम
  1153. 1:39:47होगा। जी
  1154. 1:39:47उसका मेथड वो डिफाइन नहीं कर पाए। जी
  1155. 1:39:50उसका क्लेम बोल दिया कि ऐसा होना चाहिए। अल्लामा इकबाल ने बोल दिया कि
  1156. 1:39:53रिकंस्ट्रक्शन होना चाहिए। कैसे होना चाहिए? क्योंकि वो स्टेज नहीं थी। होता है
  1157. 1:39:57ना ये सारी चीजें इन टाइम होती हैं। उस टाइम मॉडर्निटी की कंप्लीट कैनवस दुनिया
  1158. 1:40:02के सामने जाहिर नहीं थी। पोस्ट मॉडर्निटी से कोई डील नहीं कर रहा है। क्रिटिकल
  1159. 1:40:06थ्योरी से कोई डील नहीं कर रहा है। नेशनलिज्म से लोग डील कर रहे हैं। नेशन
  1160. 1:40:09स्टेट से नहीं कर रहे हैं। समझ रहे हैं कि जैसे कैपिटलिज्म और एक
  1161. 1:40:12कैपिटलिस्ट स्टेट में डिफरेंस है। उसी तरह नेशनलिज्म और नेशन स्टेट में डिफरेंस है।
  1162. 1:40:18तो इनकंप्लीट मॉडल्स ऑफ हाउ मुस्लिम्स कैन नेगोशिएट क्योंकि ब्रिटानिया हुकूमत का भी
  1163. 1:40:26समझ आ रहा था। वर्ल्ड वॉर वर्ल्ड वॉर टू के बाद वन टू के बाद इनका भी कोलैप्स हो
  1164. 1:40:29सकता है। फ्रीडम मूवमेंट भी चल रहा है। तो ये सब नेगोशिएटिंग पोजीशन है। अंबेडकर बात
  1165. 1:40:34कर रहे हैं दलित आइडेंटिटी की। पूरा है। अंबेडकर बोल रहे हैं कि मुसलमानों में
  1166. 1:40:40प्रिंसिपली इक्वलिटी है। लेकिन जब वो एंगेज कर रहे हैं मुसलमानों से कोई उस
  1167. 1:40:43क्वेश्चन में इंटरेस्टेड नहीं है। तो हम लोगों ने अभी तक ये जो डिस्कशंस किए कि
  1168. 1:40:50मुसलमानों का क्या रोल रहेगा? पार्टीशन होते ही मुसलमानों का बंटवारा हो गया। जी
  1169. 1:40:57यह सारे मॉडल्स एक यूनिफाइड इंडिया के क्लेम की तरफ थे।
  1170. 1:41:03थरी सारी कंस्ट्रक्ट हो रही है उस टाइम जब आपके पास रिलेटिव फ्रीडम है। इसलिए जमीयत
  1171. 1:41:07भी बन रही है, जमात भी बन रही है, एएमयू भी बन रहा है, जामिया भी बन रहा है, नदवा
  1172. 1:41:11भी बन रहा है। जी।
  1173. 1:41:13पोस्ट इंडिपेंडेंट इंडिया में कोई मेजर तहरीक जो ओरिजिनल हो। कोई मेजर मूवमेंट जो
  1174. 1:41:19ओरिजिनल हो, डेरिवेटिव ना हो। डेरिटिव मूवमेंट्स तो बहुत हैं
  1175. 1:41:24क्योंकि जो स्टेट फॉर्मेशन हुआ जो आप नेगोशिएशंस नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि
  1176. 1:41:29आपने पावर और कंट्रीब्यूशन आपका खत्म हो गया और आपका जो क्लेम टुवर्ड्स क्योंकि
  1177. 1:41:34पार्टीशन हो गया पार्टीशन होने की वजह से जो आपका क्लेम की मोरल हाई ग्राउंड है वो
  1178. 1:41:40रिलेटिवली रिड्यूस हो गई प्रिंसिपली तो अब जब आप नेगोशिएटिंग टेबल पे आए तो आपकी जो
  1179. 1:41:47रिलेटिवली जो आप एक्सपेक्ट कर रहे थे उससे रिड्यूस्ड राइट्स हो गए
  1180. 1:41:52फिर भी बहुत सारी चीजें नेगोशिएट हो गई। जी।
  1181. 1:41:55प्रिंसिपली स्पीकिंग कॉन्स्टिट्यूशन प्लूरल रहा, सेकुलर रहा, लिबरल रहा। लेकिन
  1182. 1:42:01उसके अंदर इंटरप्रेटिव कैटेगरीज जैसे नेशन स्टेट जो है हम बात कर रहे थे वो एक
  1183. 1:42:06यूटोपियन कंस्ट्रक्ट है। जी। जब आपने बात करी कि भाई ट्रेडिशंस की
  1184. 1:42:10भी सब्जेक्टिव रीडिंग होती है तो सब लोगों को लग रहा था कि भाई कॉन्स्टिट्यूशन बन
  1185. 1:42:15गया है तो अब इसने ट्रेडिशन जो बनेगा हिंदुस्तान में अगला वो प्रिजर्व कर लिया
  1186. 1:42:22ये एजम्पशन नहीं रहा कि अगर कम्युनलिज्म स्ट्राइव करेगा मेजॉरिटेरियन स्टेट इमर्ज
  1187. 1:42:28होगा वो भी नेगोशिएट कर रहे हैं आप भी नेगोशिएट कर रहे हो उनका नेगोशिएटिंग
  1188. 1:42:32क्लेम ज्यादा होगा आप इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग नहीं करेंगे आप रिफॉर्म नहीं
  1189. 1:42:37करेंगे जी तो उसका असर यह हुआ कि मुस्लिम एक तो
  1190. 1:42:41पॉलिटिकल सोवनिटी में जो स्टेट अपनी एक थ्यरी कंस्ट्रक्ट करता है पास्ट की उसमें
  1191. 1:42:47आप अदर हो गए आप बाहरी हैं। क्योंकि जो हिंदुत्व राइट है उन्होंने एक पर्टिकुलर
  1192. 1:42:52क्लेम किया कि भाई ये तो बाहर से आए हैं। ठीक है?
  1193. 1:42:55तो आपकी जो सोशियोलॉजिकल कंडीशनिंग है और रीजनिंग है उसमें आपका अदराइजेशन हो गया
  1194. 1:43:01और सिर्फ आपका नहीं हुआ। क्योंकि यह ग्लोबल नेशन स्टेट्स बनने की वजह से सबसे
  1195. 1:43:06ज्यादा जो नुकसान हुआ है वो मुसलमानों का हुआ है। वो इस वजह से हुआ है क्योंकि वो
  1196. 1:43:13जैसे लिबरल्स जो हैं या कम्युनिस्ट हैं उनका जो मोरल फ्रेमवर्क जो उनका क्लेम है
  1197. 1:43:20अपनी मोरालिटी को अपने पैराडाइम में वो ट्रांस नेशनल है कि नेशन स्टेट कोई भी हो
  1198. 1:43:24सकता है। वो प्रिंसिपल्स जब अप्लाई होंगे तो इस तरह की सोसाइटी कंस्ट्रक्ट होनी
  1199. 1:43:28चाहिए। जी
  1200. 1:43:30मुसलमान वो क्लेम नहीं कर पा रहे। क्योंकि जहां मुसलमान मेजॉरिटी में है वहां वो कुछ
  1201. 1:43:35और मांग रहे हैं। वो अफगानिस्तान में कुछ और मांग रहे हैं। ईरान में कुछ मांग रहे
  1202. 1:43:38हैं। इंडिया में कुछ मांग रहे हैं। पाकिस्तान में कुछ मांग रहे हैं।
  1203. 1:43:41बांग्लादेश में क्यों जा रहे? ये सब लैक ऑफ मेटाफिजिक्स की वजह से है। लैक ऑफ
  1204. 1:43:44थ्यरी की वजह से है कि आपकी यूनिवर्सल मोरल थ्यरी नहीं है। कोई गांधी ने कलेक्ट
  1205. 1:43:51कोई मुस्लिम गांधी क्यों नहीं हुआ? कि जिसके पीछे सारे लोग इकट्ठे हो सकते
  1206. 1:43:57हैं। डिफरेंट मज़ाहिब के हिंदू ही क्यों हुआ गांधी?
  1207. 1:44:02उसी तरह जब हम इस कंडीशन की बात करते हैं कि जिसमें मुसलमान एक 200 नेशन स्टेट्स
  1208. 1:44:09में बट गए फ्रॉम माइक्रो माइनॉरिटी टू मेजॉरिटी तो वो 23 साल में जो माइक्रो
  1209. 1:44:15माइनॉरिटी से लेकर मेजॉरिटी तक का जो टेंपलेट्स हैं
  1210. 1:44:18जी जो परपेचुअल रियलिटीज थी वो फ्रोजन
  1211. 1:44:21रियलिटीज बन गई और लैंग्वेज ना होने की वजह से ट्रांस नेशनल के वो अगर लैंग्वेज
  1212. 1:44:27होगी तो वो नेशन स्टेट से कमट करेगी जो हलाकिन पैराडाइम हम डिस्कस कर रहे जी
  1213. 1:44:32वो एजमशन से आ रहा कि ऐसा है नहीं प्रॉफेट ने इंस्टीट्यूशनलाइज किया उस
  1214. 1:44:38मोमेंट में तो मुसलमान को आर्ट ऑफ गवर्नेंस आर्ट ऑफ
  1215. 1:44:43नेशन बिल्डिंग आर्ट ऑफ सोशल बिल्डिंग आर्ट ऑफ कंट्रीब्यूटिंग आर्ट ऑफ प्रोग्रेस अपने
  1216. 1:44:50वैल्यू सिस्टम से वो आर्ट एक लॉस आर्ट बन गई और वो रिएक्शनरी एक आइडेंटिटी
  1217. 1:44:56कंस्ट्रक्ट हो गई जो सिर्फ अपनी मार्जिनलाइजेशन अपने ऑपरेशन
  1218. 1:45:01को ही यह समझती है कि वही डिफेंड करना का मतलब यह हो गया कि मुस्लिम आइडेंटिटी
  1219. 1:45:06नेगोशिएट हो गई। जी तो ये रियलिटी है बेसिकली। हम इस पे और
  1220. 1:45:11बात कर सकते हैं कि इस रियलिटी के और क्या प्रोडक्ट्स हैं? क्यों इसमें चैलेंजेस
  1221. 1:45:14हैं? इसमें सशंस क्या हो सकते हैं? बट
  1222. 1:45:18मोटा-मोटा यह है कि आपके पास इस जमाने को समझने के लिए और इसमें
  1223. 1:45:25एग्जिस्ट करने के लिए अपने ट्रेडिशन से क्लेम्स खत्म हो गए। जो क्लेम्स रहे जो
  1224. 1:45:33हमें पोटेंशियल देते हैं एक्सिस्ट करने के जैसे मौलाना आजाद ने किया।
  1225. 1:45:38वो क्लेम आपका सिर्फ इतना आ गया कि आप थियोलॉजिकली एज अ माइनॉरिटी एक्सिस्ट कर
  1226. 1:45:44सकते हैं। प्लूरल नेशन स्टेट में। आपका कंट्रीब्यूशन क्या होगा?
  1227. 1:45:49वो वहां पे कोई डेफिनेटिव आंसर नहीं है। इशारे हैं। इशारे तो सब कर रहे हैं। जब तक
  1228. 1:45:56आपके पास कॉनंक्रीट मेथडोलॉजी नहीं होती है। कि आप चेंज लाएंगे कैसे? क्या होगा?
  1229. 1:46:02जब तक आपके पास नॉलेज प्रोडक्शन का मैकेनिज्म नहीं होता है कि आप नॉलेज
  1230. 1:46:07प्रोड्यूस करके दुनिया में बेहतरी कैसे करेंगे अपने लिए और दूसरे के लिए तब तक
  1231. 1:46:14जैसे ब्लैक्स हैं फॉर अ लॉन्ग टाइम हिस्ट्री ऑप्रेस रहे दलित्स लॉन्ग टाइम ऑफ
  1232. 1:46:18हिस्ट्री लाए ओप्रेस लाए जी
  1233. 1:46:21क्योंकि वो आइडेंटिटी को उन प्रिंसिपल्स पे कंस्ट्रक्ट नहीं कर पा रहे थे जिससे वो
  1234. 1:46:26अपने आप को डिटच कर सकें अपनी मार्जिनलाइजेशन की
  1235. 1:46:32फ्रेमवर्क में कि भाई कास्ट है तो दलित सबसे नीचे है। तो अंबेडकर ने उसको
  1236. 1:46:39डीकंस्ट्रक्ट करा, डेमोलिश करा, उसको पॉलिसी में कन्वर्ट किया, एनालेशन पे बात
  1237. 1:46:44की। हम
  1238. 1:46:45मुसलमान को अभी ये नहीं पता है कि उसको क्या नेगोशिएट करना है। सिवाय इसके कि भ
  1239. 1:46:50मेरी सिक्योरिटी होनी चाहिए। मेरा एंपावरमेंट होना चाहिए। कैसे होना चाहिए?
  1240. 1:46:54किस तरह से जो लीगल प्लूरलिज्म है जिसकी हम बात करते हैं मॉडर्न उसमें इस्लाम में
  1241. 1:47:01तो वह पहली बार सिर्फ अकेला थियोलॉजी है जिसमें दूसरी जब हम मेजॉरिटी बन जाते हैं
  1242. 1:47:08और हम गवर्नेंस करते हैं और स्टे स्ट्रक्चर बनाते हैं उसके बावजूद
  1243. 1:47:13प्रोटेक्शन ऑफ माइनॉरिटीज उनका कल्चर उनका हेरिटेज हमारी थियोलॉजी में बाकायदा
  1244. 1:47:18डेवलप्ड कंस्ट्रक्टेड और बहुत रिच ट्रेडिशन है। इवन ऑटोमंस में जो मिल्लत
  1245. 1:47:23सिस्टम रहा समझ रहे हैं? तो हम इवन इस्लाम क्या चाहता
  1246. 1:47:29है? वो किस तरह से डिफरेंटली मैनिफेस्ट करता है?
  1247. 1:47:34उसका हायरल हायर मोरल क्लेम क्या है? आज की डेट में ह्यूमन राइट्स में आके हम
  1248. 1:47:38लिबरल ह्यूमन राइट्स के पीछे क्यों जाते हैं? क्योंकि उनका हायर मोरल क्लेम है ना
  1249. 1:47:41एस एस पब्लिक स्फीयर। हमारा हायर मोरल क्लेम नहीं है पब्लिक स्फीयर में। जो
  1250. 1:47:48अल्लाह के रसूल सल्ला वसल्लम ने प्रॉफेट ने मक्कन पीरियड में किया। उन्होंने
  1251. 1:47:52स्टैंडर्ड ऑफ मोरालिटी को सामने रखा लोगों के और लोगों ने उसको
  1252. 1:47:58अप्रिशिएट किया। उस मूवमेंट में पार्टिसिपेट किया। गज़्जा के बावजूद
  1253. 1:48:04यह तो है कि भाई जेनोसाइड हो रहा है इसलिए लिबरल ह्यूमन राइट्स फ्रेमवर्क में इनको
  1254. 1:48:08नहीं मारना चाहिए। लेकिन मुस्लिम मोरल क्लेम फिर भी डिफिट हो गया। कोई मुसलमान
  1255. 1:48:13स्टेट साथ नहीं आया। समझ रहे हैं? मुस्लिम माशरा उस लेवल पर
  1256. 1:48:19ऑर्गेनाइज नहीं हो पाया कि वो एक्चुअली प्रॉपर्ली चीजों को बॉयकॉट कर सके। आज भी
  1257. 1:48:25टू इयर्स आफ्टर अ लाइव जेनोसाइड और इतने लो पे आने के बाद भी
  1258. 1:48:33आपकी साइकोलॉजिकल कंडीशंस रिएक्शनरी हैं। क्योंकि आपके पास थ्यरीलेस है। आपके पास
  1259. 1:48:40फ्रेमवर्क ही नहीं है नेगोशिएट करने का। अह मुस्लिम्स लिविंग इन अ स्टेट ऑफ
  1260. 1:48:44एक्सेप्शन। स्टेट ऑफ एक्सेप्शन नेशन स्टेट्स की पर्टिकुलरिटी है। मतलब
  1261. 1:48:51अगर आप बोले कि भाई क्या ईरान में मुस्लिम स्टेट ऑफ एक्सेप्शन में नहीं है? शियाओं
  1262. 1:48:57ने कम से कम अपनी ट्रांसेंडेंटल फिलॉसफी को, फिक को तसवुफ
  1263. 1:49:03की डिबेट को और अपने पॉलिटिकल इस्लाम को। उनके यहां एक कलाम का ट्रेडिशन है। वो फिक
  1264. 1:49:07से बहुत जुड़ा हुआ है 12 में। और उसमें पॉलिटिकल इंस्टीटश विलायत फकी के थ्रू
  1265. 1:49:13आयतुल्लाह खुमेनी ने बनाए और स्टेट फॉर्मेशन दे दी। नहीं बट बट इज़ स्टेट
  1266. 1:49:18फॉर्मेशन नॉट इन स्टेट ऑफ़ एक्सेप्शन एज अगेंस्ट उ्मा और अगेंस्ट
  1267. 1:49:24द इमामेट इन इन इन शिया ट्रेडिशन। शिया ट्रेडिशन में इमामेट के खिलाफ नहीं है
  1268. 1:49:30क्या स्टेट? नहीं वो उसको ऑनगोइंग। वो बोलते हैं कि भ
  1269. 1:49:32हमारा फाइव स्टेजेस हैं। जी
  1270. 1:49:34वहां अचीव करनी है। हम सेकंड स्टेज पे हैं। फिर हम थर्ड स्टेज पे आएंगे। वो जो
  1271. 1:49:38बयान करते हैं तो वो स्टेजेस की क्लेरिटी है उनको। चलिए लेट अस अस्यूम कि ऐसा है।
  1272. 1:49:46कमिंग बैक टू इंडिया में आप बात करें। गाजा के सेंस में भी बात कर सकते हैं। आप
  1273. 1:49:53मुस्लिम्स इन इंडिया लिविंग इन अ स्टेट ऑफ एक्सेप्शन।
  1274. 1:49:56क्योंकि स्टेट ऑफ एक्सेप्शन में ही क्वेश्चन सिक्योरिटी का आता है। स्टेट ऑफ
  1275. 1:50:02एक्सेप्शन में ही प्राइमरी क्वेश्चन सिक्योरिटी का आता है। वहां पे आप
  1276. 1:50:05नेगोशिएटिंग पोजीशन पे नहीं होते। असल में स्टेट ऑफ एक्सेप्शन जिस तरह से आगांबन बोल
  1277. 1:50:09रहा है वो और स्ट्रांग कंडीशंस हैं। समझ रहे हैं? मतलब वो इतनी स्ट्रांग कंडीशंस
  1278. 1:50:16हैं कि आपकी जो बेसिक बायोलॉजिकल लाइफ के क्लेम्स ऑफ राइट्स हैं
  1279. 1:50:22जी। वो सस्पेंड हो जाते हैं। हम
  1280. 1:50:25हिंदुस्तान के मुसलमानों के साथ इस वक्त फ्यूचर में हो सकता है वो लेवल नहीं है।
  1281. 1:50:30उस प्रोसेस की तरफ है क्योंकि आप तो इसके एक्सपर्ट हैं। हमने इस पे पॉडकास्ट किया
  1282. 1:50:34है। बल्कि मैंने आपसे इस पे काफी चीजें सीखी हैं कि एज अ सेकंड क्लास सिटीजन
  1283. 1:50:39मुस्लिम थ्रू लॉ कंस्ट्रक्ट कैसे हो रहा है? मैं हम वन गुर्जर पे गए। ट्राइबल
  1284. 1:50:44मुस्लिम कम्युनिटी है, फॉरेस्ट ड्वेलिंग है।
  1285. 1:50:47वो किस तरह से उसको स्टेटलेस बनाया जा रहा है। वफ के कानून पे आपने काम किया है।
  1286. 1:50:51हमने वीडियोस बनाए हैं। किस तरह से प्रोसेस है। लेकिन प्रोसेससेस रुक भी जाते
  1287. 1:50:57हैं। जी।
  1288. 1:50:58अगर उनके अगेंस्ट कंपटिंग अच्छा काम किया जाए।
  1289. 1:51:04लेकिन स्टेट ऑफ एक्सेप्शन उन उन प्रिंसिपल्स में जिसमें डिफाइन होता है
  1290. 1:51:09जहां पर आपको एन मास कहीं भी मारा जा सकता है। आपकी लिंचिंग अभी भी है। स्टेट ऑफ
  1291. 1:51:13एक्सेप्शन आपकी कई पॉकेट्स में है। लोग एक्चुअली इसको भी मैं थोड़ा सा वाज़ कर
  1292. 1:51:18देता हूं कि मैं सोवनिटी को कैसे देखता हूं। कितने लेवल्स पे देखता हूं। मेरे लिए
  1293. 1:51:24जो मुस्लिम सोवनिटी ओखला में है वो रिलेटिवली अगर मैं जुलैना तक चले जाता हूं
  1294. 1:51:29या और आगे चला जाता हूं वो चेंज हो जाती है। इवन नेशन स्टेट होमोजेनियसली
  1295. 1:51:33डिस्ट्रीब्यूटेड राइट्स नहीं है। बिल्कुल
  1296. 1:51:35आप अगर केरला में हैं तो आपकी पॉलिटिकल सोवनिटी का इंडेक्स
  1297. 1:51:40और आपकी पोटेंशियल टू अचीव राइट्स बढ़ जाते हैं।
  1298. 1:51:43जी तो हमें होमोजनाइज और मोनोलिथिक फ्रेम में
  1299. 1:51:46इवन विद इन नेशन स्टेट भी नहीं सोचना चाहिए। स्ट्रेटेजिकली भी प्रॉब्लम है और
  1300. 1:51:49रियलिटी में भी प्रॉब्लम है। जी।
  1301. 1:51:52तो हां स्टेट ऑफ एक्सेप्शनंस हैं बहुत जगहों पर बट जनरली स्पीकिंग नहीं है। अभी
  1302. 1:51:58हम उस स्टेज पे नहीं हैं। लेकिन क्योंकि एक्सेप्शनंस एक्सेप्शनल जगहों पर हैं।
  1303. 1:52:03जी तो एक्सेप्शनल
  1304. 1:52:06जगहों से वो एक्सेप्शनंस जनरल भी हो सकते हैं। उस तरफ हम बढ़ रहे हैं और बहुत तेजी
  1305. 1:52:12से बढ़ रहे हैं। स्पेशली लीगल फ्रेमवर्क के थ्रू। अगर ये
  1306. 1:52:17स्टेट स्टेट ऑफ एक्सेप्शन नहीं है एंड मतलब
  1307. 1:52:23अग्री करता हूं मैं आपकी बात से क्योंकि कई जगह बिल्कुल सच बात है। कई जगह बहुत
  1308. 1:52:29एक्सट्रीम पे हैं चीजें। आप लोगों को घर भी नहीं मिल रहा है। घर डिमोलिश भी हो रहा
  1309. 1:52:33है। लिंचिंग भी हो रही है। आप अपने जो है छोटी-छोटी चीजें बेच भी नहीं सकते हैं। तो
  1310. 1:52:43क्योंकि ये फंडामेंटल चीजें हैं जिंदा रहने की। आप पैसा कमाएंगे नहीं तो जिंदा
  1311. 1:52:48कैसे रहेंगे? घर नहीं होगा तो जिंदा कैसे रहेंगे? ठीक है? ट्रेड नहीं करेंगे,
  1312. 1:52:51खाने-पीने का काम नहीं करेंगे, जिंदा कैसे रहेंगे? तो दीज़ आर वेरी फंडामेंटल थिंग्स।
  1313. 1:52:55तो वो एक एक्सेप्शन मान सकते हैं। एंड आई आई आई एग्री विद यू
  1314. 1:53:00व्हाट यू आर सेइंग। बट इफ जनरली स्पीकिंग मुस्लिम्स आर नॉट लिविंग इन द स्टेट ऑफ
  1315. 1:53:08एक्सेप्शन इज द वेरी आईडिया।
  1316. 1:53:13यह जो आइडिया है कि आई बिलोंग टू दिस प्लेस।
  1317. 1:53:18दिस प्लेस बिलोंग्स टू मी। क्या यह एलिमेंट ऑफ बिलोंगिंगनेस?
  1318. 1:53:25एलिनेट नहीं हो रही है। स्टेट की तरफ से तो हो रही है।
  1319. 1:53:29देखिए सिटीजनशिप है, रिफ्यूजी है, वह सारी चीजें हैं। स्टेट की तरफ से हो रही है।
  1320. 1:53:35स्टेटमेंट्स आप देख लीजिए। आउटसाइडर्स हैं, इनवेडर्स हैं। ठीक है? सिक्योरिटी
  1321. 1:53:40सेंस स्टेट की तरफ से हो रही है। बट आई एम आई एम आस्किंग यू फ्रॉम द पर्सपेक्टिव ऑफ
  1322. 1:53:45द कम्युनिटी। क्या
  1323. 1:53:49मुस्लिम्स भी ये मानते हैं? नाउ आई एम नॉट आस्किंग दिस
  1324. 1:53:56क्वेश्चन कि साहब इस पे एक इंपेरिकल स्टडी होनी चाहिए। ऑफ कोर्स इस पे इंटरव्यू,
  1325. 1:54:00सर्वे वो सारी चीजें आप कर सकते हैं। बट गोइंग बिय्ड दैट जनरली स्पीकिंग जो इस
  1326. 1:54:05वक्त माहौल है क्या वो यह मान रहे हैं कि
  1327. 1:54:14दिस समवेयर डू नॉट बिलोंग टू दिस प्लेस। दो रीजन है। पहला क्योंकि नेचर ऑफ स्टेट,
  1328. 1:54:21नेचर ऑफ कॉन्स्टिट्यूशनल अंडरस्टैंडिंग, नेचर ऑफ सोसाइटी चेंजिंग। हमने यह
  1329. 1:54:26नेगोशिएट नहीं किया था जो मैंने पहले कहा। या तो इस वजह से हम बिलोंग नहीं कर रहे
  1330. 1:54:30हैं। ठीक है? या स्टेट ऑपरेशन इतना हो रहा है कि हम समझ नहीं पा रहे। हम अपने आप को
  1331. 1:54:35बिलोंग नहीं कर रहे हैं। कर पा रहे हैं। और इसी वजह से वी आर ऑलवेज इन द परपचुअल
  1332. 1:54:40स्टेट ऑफ मैं सेफ कैसे रहूं। मैं अपने को सेफ गार्ड कैसे करूं? अगर यह सिचुएशन है
  1333. 1:54:47तो ऑफकोर्स दे विल नॉट बी एबल टू नेगोशिएट।
  1334. 1:54:53ठीक है? और जब वो नेगोशिएट नहीं कर सकते तो जो
  1335. 1:54:58हमने पहले डिस्कस किया था कि मुस्लिम्स इन अ परपचुअल स्टेट ऑफ नेगोशिएशन विद
  1336. 1:55:04रिस्पेक्ट टू देयर एनवायरमेंट विद रिस्पेक्ट टू द सोशल कंडीशंस जहां पे वो
  1337. 1:55:07रहते हैं तो आपका एक पॉलिटिकल फॉर्मेशन होना बहुत
  1338. 1:55:11मुश्किल है। आपकी खुद की पॉलिटिक्स होना बहुत मुश्किल है। जिसका एक बहुत सिंपल सा
  1339. 1:55:16एग्जांपल है एंड ऑफ कोर्स ये अदर इंस्टीटशंस में भी है। बट मुस्लिम
  1340. 1:55:22इंस्टीटशंस में ज्यादा है। ज्यादा है। फॉर एग्जांपल एएमयू में स्टूडेंट्स यूनियन
  1341. 1:55:26नहीं है। जामिया में स्टूडेंट्स यूनियन नहीं है। तो अगर स्टूडेंट्स यूनियन नहीं
  1342. 1:55:31है यूनिवर्सिटी में तो पॉलिटिक्स तो नहीं हो सकती। ठीक है? और पॉलिटिक्स की बेसिस
  1343. 1:55:41पर किसी भी तरह का पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस एंड प्रोबेबबली पॉलिटिकल फॉरेशन जो है वो
  1344. 1:55:48बहुत मुश्किल है। बट नॉट ओनली दैट अगर आप इन इंस्टीटशंस को क्लोजली देखें
  1345. 1:55:56ये वो इंस्टीटशंस हैं। दीज़ आर वेरीेंट इंस्टीटश और आपने तो एक बकायदा पॉडकास्ट
  1346. 1:56:00भी किया था लॉरेंस गॉटियर के साथ। यह इंस्टीटशंस हैं
  1347. 1:56:06जिन्होंने मुस्लिम आइडेंटिटी कंस्ट्रक्शन में बहुत कंट्रीब्यूट किया है। ठीक है?
  1348. 1:56:10अगर आप उन इंस्टीटशंस को बहुत क्लोजली देखेंगे तो आपको यह समझ में आएगा कि साहब
  1349. 1:56:17यहां पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस पॉलिटिक्स या टू टू टू काइंड ऑफ पुश इट इंटू अ पॉलिटिकल
  1350. 1:56:25फॉर्मेशन इन फ्यूचर जो डीयू में होता है कि साहब कांग्रेस लड़ती है एबीवीपी लड़ती है
  1351. 1:56:32या जेएनयू में होता है जहां लेफ्ट की पार्टीज लड़ती है एबीवीपी एंड अदर प्लेसेस
  1352. 1:56:37आर कमिंग यू नो पार्टीज आर कमिंग यहां पे सोशल फॉर्मेशन ही अलाउड नहीं है।
  1353. 1:56:42पॉलिटिक्स और पॉलिटिकल फॉर्मेशन या पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस तो छोड़ दीजिए। ठीक
  1354. 1:56:46है? तो जब ये अंडर ये ये एलिमेंट इतना स्टंटेड है तो क्या
  1355. 1:56:55ये फोर्स करता है आपको ये एंड यू यू लिंक इट विथ द लिंचिंग द वायलेंस एंड एवरीथिंग
  1356. 1:57:01एल्स जब आप इन सबको कनेक्ट करते हैं तो क्या यह लगता है कि साहब वी डू नॉट बिलोंग
  1357. 1:57:06टू दिस प्लेस। एंड सिंस वी आर वी डू नॉट बिलोंग टू दिस प्लेस सम पॉकेट्स देयर आर
  1358. 1:57:11स्टेट्स ऑफ एक्सेप्शन बट लेट अस्यूम नहीं है
  1359. 1:57:16हम उस पोजीशन में नहीं हैं कि हम नेगोशिएट कर सकें एंड देयर फॉर वी ऑलवेज हैव टू
  1360. 1:57:24थिंक अबाउट सिक्योरिटी ठीक है कि हम सेफ हैं इतने में काफी है बस
  1361. 1:57:31इतना कर दो यार ठीक है इससे ज्यादा नहीं चाहिए एक नौकरी दे दो यार बस नौकरी नहीं
  1362. 1:57:37दे रहे हो। कम से कम ठेला लगा लेने दो भाई। ठीक है?
  1363. 1:57:43इज दिस दी सिचुएशन? इसको हमें दो तरीके से सोचना होगा। एक हमें ये सोचना होगा कि
  1364. 1:57:50हिंदुत्व जो नेशन स्टेट है उसका मॉडल क्या है? वह अपने जो रिलेशंस
  1365. 1:57:57हैं बिटवीन कम्युनिटीज और उसके बेसिस पर वह जिस तरह की
  1366. 1:58:04इंस्टीटशंस को रिफ्रेम करता है, फ्रेम करता है और जिस तरह की एक पॉलिटिकल ऑर्डर
  1367. 1:58:10को कंस्ट्रक्ट करता है एक वो हमारे सामने मॉडल है कि भ जहां पे हमारी ह्यूमन
  1368. 1:58:15सिक्योरिटी भी लाइफ भी खतरे में है। और दूसरी तरफ सेलर लिबरल स्टेट है जो
  1369. 1:58:22जिसको कांग्रेस आर्किटेिकली डिफाइन करती थी
  1370. 1:58:27वो एक 50 60 साल ये चला कि भ जो समाजवादी टाइप की पॉलिटिक्स है समाजवाद की जो
  1371. 1:58:36पॉलिटिक्स है उसमें जो माइनॉरिटी इंटरेस्ट हैं मुस्लिम इंटरेस्ट है वो सेफगार्डेड है
  1372. 1:58:42और वो 2007 में जो सचर कमेटी रिपोर्ट आई उससे पहले भी 10 साल से ये सारी चीजें चल
  1373. 1:58:48रही थी और उससे पहले से भी चल रही थी। ये डिस्कशन तो 50, 60, 80, 90 चल रहा था।
  1374. 1:58:55लेकिन पहली बार स्टेट की रिपोर्ट एंपेरिकली वेरीिफाइड रिपोर्ट स्टेट के
  1375. 1:59:00डेटा पे ये बताती है कैसे मुसलमान हर लेवल पे डिप्र्राइव होता चला जाता है।
  1376. 1:59:05जी। तो एक तो दो काइंड्स ऑफ डेप्रिवेशंस हैं।
  1377. 1:59:09दो ग्रेड्स ऑफ डेप्रिवेशंस हैं। जिन्होंने
  1378. 1:59:14जिसको इंडियन मुस्लिम्स ने पोस्ट इंडिपेंडेंस
  1379. 1:59:20इंगेज किया है या सफर किया है। जी
  1380. 1:59:25तो जो एक पहला स्टेज था उसमें यह था कि बजाहिर
  1381. 1:59:31आपको यह बता के यह दिखा के कि भाई आपके पास प्रिविलेज है। आप तो पार्टीशन के थ्रू
  1382. 1:59:37निकले हैं। आपको फिर भी मिल गया। उसके बावजूद हम आपको स्पेस दे रहे हैं। देखिए
  1383. 1:59:41आप कमा सकते हैं, खा सकते हैं। और आपकी एक पॉलिटिकल इलीट को सामने रखते हुए एक होता
  1384. 1:59:48है ना कि आज की डेट में गोदी मीडिया बोलते हैं, मीडिया जो दिखाती है लोग परसेप्शन
  1385. 1:59:51क्रिएट करते हैं। तो एक तरफ तो आपका ये परसेप्शन क्रिएट किया जा रहा था कि आपके
  1386. 1:59:57टोकन रिप्रेजेंटेशंस हैं यहां पर। आपके लोग हैं यहां पर। वो पार्टी लाइन ले
  1387. 2:00:02रहे थे। वो पॉलिसी मुसलमानों के फेवर में है या नहीं। उनको कोई मकसद नहीं था। मंडल
  1388. 2:00:08कमीशन बन गया, ओबीसी राइट्स आ गए तो उसमें क्योंकि वह एक जनरल ब्रॉड स्ट्रोक में काम
  1389. 2:00:13हो रहे थे तो कुछ मुसलमानों को भी मिल गए। बट मुसलमानों ने कोई तहरीक की हो
  1390. 2:00:17जी कि जिसमें वो पॉलिसी के तहत अपने राइट्स
  1391. 2:00:20को कैसे नेगोशिएट कर सकते हैं। एक एक मूवमेंट की तरह उनका रोड मैप क्या होगा?
  1392. 2:00:26उनका विज़ क्या होगा? वो आज तक क्लेरिटी नहीं थी। तो एक तरफ तो वो रियलिटी थी कि
  1393. 2:00:32आपको फिर भी एक कंसीव्ड आपका लिंचिंग नहीं हो रही है। हालांकि उस टाइम पे भी आपको
  1394. 2:00:38टेरर लॉस के नाम पे जेलों में डाला जा रहा है।
  1395. 2:00:41टाडा पोटा सारी चीजें हो रही हैं। अंडर ग्राउंड या अंडर इंस्टीटशंस जो छोटे लेवल
  1396. 2:00:47पे ब्यूरोक्रेसीज में आरएसएस के लोग घुस गए हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया
  1397. 2:00:53जैसे इंस्टीटशंस पाथ पास्ट मिथिकल हिंदू पास्ट को कंस्ट्रक्ट कर रहे हैं।
  1398. 2:00:58जी जिससे राम मंदिर मूवमेंट को जस्टिफिकेशन
  1399. 2:01:01मिल रहा है। जी
  1400. 2:01:02जो अल्टीमेटली 2019 में आके एक स्टेट लॉ बन रहा है। तो पहली बात तो ये दो कंडीशंस
  1401. 2:01:09डिसजॉइंटेड नहीं है। जी
  1402. 2:01:12ये दो कंडीशंस रिलेटेड कंडीशंस हैं और उसकी ग्रेडेशंस हैं हम
  1403. 2:01:16कि जहां पे मुस्लिम आइडेंटिटी मुस्लिम पर्सपेक्टिव से कंस्ट्रक्ट ही नहीं की जा
  1404. 2:01:21सकती है। वो हमेशा किसी पॉलिटिकल अदर को अपने बिहाफ पे उसके रिप्रेजेंटेशन की
  1405. 2:01:29पॉलिटिक्स करने की एजेंसी देता है। जी क्योंकि वह डिर्व नहीं करता है इस
  1406. 2:01:33पॉलिटिकल ऑर्डरिंग में अपने राइट्स को अपने बिहाफ पे अपने पर्सपेक्टिव से वो
  1407. 2:01:38नेगोशिएट कर सके तो यह भी एक पॉलिटिकल एक्सेप्शन है। अगर आप एक्सेप्शनंस को
  1408. 2:01:43ग्रेडेड उसमें बोले कि भ अगंबन का जो स्टेट ऑफ एक्सेप्शन है कि आप बेयर लाइफ
  1409. 2:01:48में आ गए हैं। बेयर लाइफ में तो आप अभी तक नहीं आए हैं। लेकिन जो स्टेजेस ऑफ
  1410. 2:01:52जेनोसाइड का डिबेट है। आप कौन से स्टेज पे हैं? कौन से स्टेट में हैं? जो पानी का
  1411. 2:01:57गिलास कितना भरा हुआ है। कोई बोलता है कि आधा खाली आधा भरा हुआ है।
  1412. 2:02:01जी तो आप किस पर्सेक्टिव से मुस्लिम राइट्स
  1413. 2:02:06को कंस्ट्रक्ट कर रहे हैं और उसमें कितने लेयर्स पे मुसलमानों को यह पर्सव किया जा
  1414. 2:02:11रहा है। करवाया जा रहा है कि आप बिलोंग करते हैं या नहीं करते हैं। एक तरफ उनको
  1415. 2:02:15यह बिलीव करवा के आप बिलोंग करते हैं तो उनके वोट को लेके उनको गरीब रखा जा रहा
  1416. 2:02:20है। एक तरफ आपको यह बिलीव करवा के आप यहां
  1417. 2:02:24बिलोंग नहीं करते हैं। एक डिफरेंट लेवल ऑफ कंसोलिडेशन हो रहा है जो हिंदुत्व
  1418. 2:02:29हायरार्की में हो रहा है। जहां पे दलित क्योंकि अपने राइट्स को कॉन्स्टिट्यूशनली
  1419. 2:02:33नेगोशिएट कर चुका है। एक पास्ट में उनके साथ क्या हुआ वो एक रियलिटी की तरह
  1420. 2:02:40प्रोड्यूस हो चुका है। मुसलमानों का पास्ट यहां रूलिंग का है। उनका हमेशा से
  1421. 2:02:45ऑप्रेस्ड आइडेंटिटी का है। तो उनको एक नया क्लास चाहिए था। या एक कास्ट चाहिए थी जो
  1422. 2:02:54चीप लेबर का काम कर सके। जी
  1423. 2:02:57जिसके पास हक कम हो और जो जवाब बार-बार देता रहे जिसको ये पुश कर दिया जाए
  1424. 2:03:03तुम्हें यहां पे रोटी कपड़ा मकान इतना दे दिया जा रहा है ये तुम गनीमत समझो वरना
  1425. 2:03:09तुम्हें तो दो हिस्से दे दिए गए थे। जी मेरा आर्गुममेंट तो यहां तक है कि जब सीएए
  1426. 2:03:14के बाद मैंने हिस्ट्री पढ़ी और मैंने देखा कि 1875
  1427. 2:03:21से लेकर 1947 तक किस तरह के मूवमेंट्स इमर्ज हो रहे हैं। आर्य समाज क्या कर रहा
  1428. 2:03:28है? हिंदू महासभा क्या कर रहा है? आरएसएस का
  1429. 2:03:31कैसे फॉर्मेशन हो रहा है? ये भी पॉलिटिकल कंटिन्यूटी है एक तरह की ऑर्डरिंग को
  1430. 2:03:38डेवलप करने की। तो वो जो पॉसिबिलिटी ऑफ आपका
  1431. 2:03:45कंसोलिडेशन ऑफ आइडेंटिटी ऑफ इंडिया एज अ होल जिसमें मुसलमान भी नेगोशिएट कर सकता
  1432. 2:03:51था। इवन मोहम्मद अली जिन्ना जैसा आदमी जो पार्टीशन का एक तरीके से बोला जाता है
  1433. 2:03:56जिम्मेदार भी बना वो एक जमाने में कांग्रेस में है। वो 1940 तक भी एक तरह का
  1434. 2:04:03नेगोशिएशन कर रहा है। जी
  1435. 2:04:05तो जब बार-बार हिंदू राइट ने हिंदुत्व ने ये रियलिटी
  1436. 2:04:12कंस्ट्रक्ट की कि आप सेफ नहीं हो सकते। वो आज का प्रोटोटाइप मॉडल नहीं है। और वहां
  1437. 2:04:18मुसलमानों की गलती यह है कि रादर देन स्टैंडिंग देयर ग्राउंड इफ वी बिलोंग
  1438. 2:04:24हियर। जी।
  1439. 2:04:27एक दूसरी कम्युनिटी जो आपको अप्रेस करना चाहती है उसका काम होता है कि वो आपको
  1440. 2:04:32अप्रेस करें। जी।
  1441. 2:04:33क्या एक पाकिस्तान और एक बांग्लादेश बनने से हिंदुस्तान में मुसलमान नहीं रह गए?
  1442. 2:04:38जी। क्या उनकी फर्दर नेगोशिएशंस प्रॉब्लमेटाइज
  1443. 2:04:42नहीं हो गई? वी लॉस्ट द बैटल ऑफ हाई मोरालिटी।
  1444. 2:04:48कि हम कंट्रीब्यूट डिस्पाइट द फैक्ट आप हमें डरा रहे हो। आपने अपनी पॉलिटिकल
  1445. 2:04:55सोवनिटी खुद लूज करी क्योंकि आप डेमोक्रेटिक नेशन स्टेट में नंबर्स का गेम
  1446. 2:05:00ही हार गए। ये मेरा व्यू हो सकता है इस पे। आप अग्री डिसएग्री सब कर सकते हैं
  1447. 2:05:04क्योंकि पोटेंशियल रियलिटीज वर्ल्ड लाइंस एक बड़ा वो है कि यह नहीं होता। दूसरा
  1448. 2:05:08आर्गुमेंट ये था कि जब भी होता लिंचिंग होती लेकिन हम केरला को भी देखते हैं कि
  1449. 2:05:12इसके बावजूद एक जमाने तक दूसरी जगह भी देखते हैं कि वहां पे मुसलमान ग्रो कर
  1450. 2:05:17सकता था। ऐसा नहीं है कि मतलब कंप्लीटली आपने यहां पे प्रिविलजेस एंजॉय नहीं करें
  1451. 2:05:22हैं। तो एक लार्जर जो विज़न कम्युनिटी एज अ होल का जो हिंदू राइट का था वो मुस्लिम्स
  1452. 2:05:29का नहीं था। और उनके पास पेशेंस था कि जब देश बटेगा
  1453. 2:05:35और उसमें जो डिस्ट्रीब्यूशन होगा मेरा कंजेक्चर है क्योंकि ये बातें चल रही
  1454. 2:05:41हैं उस टाइम पे उसका फायदा ऑटोमेटिकली एक ही डायरेक्शन में जाना था। एक
  1455. 2:05:47मेजॉरिटेरियन एथनिक नेशन स्टेट ही बनना था। क्योंकि उसमें पॉलिटिकल अदरिंग की
  1456. 2:05:54पूरी डिबेट ऑलरेडी प्री पार्टीशन कंस्ट्रक्ट हो गई थी सावरकर के पैराडाइम
  1457. 2:05:59में। समझ रहे हैं? वो प्रिंसिपल्स एस्टैब्लिश
  1458. 2:06:02हो गए थे। वो पोस्ट पार्टीशन नहीं है। जी
  1459. 2:06:05उसकी वायलेंस का प्रोटोटाइप ऑलरेडी एक्सपेरिमेंट हो चुका था। जो हम 2014 के
  1460. 2:06:10बाद देख रहे हैं वो कोई नई चीज नहीं है। जी।
  1461. 2:06:12लोग ऐसे सोचते हैं कि भाई कुछ नया हो गया। वो एक हिस्टोरिकल माइक्रो लेवल का
  1462. 2:06:17एक्सपेरिमेंट इंस्टीट्यूशनल लेवल पर रेप्लिकेट हुआ जो अल्टीमेटली स्टेट के
  1463. 2:06:22इंस्टीटशंस में इनफ्यूज हो रहा है तो इस कॉन्टेक्स्ट में अदरिंग है
  1464. 2:06:29और मुसलमान ऑन दैट फील भी करेगा लेकिन अगर आप प्रॉपर्ली
  1465. 2:06:36अपने आप को ऑर्गेनाइज करते हैं अपने राइट्स को नेगोशिएट करते हैं क्योंकि यह
  1466. 2:06:40वो मक्कन फेस है जब मुझे ऐसा लगता है कि सूर मरियम आई
  1467. 2:06:45द काइंड ऑफ ऑपरेशन दैट द कम्युनिटी वाज़ डीलिंग एज अ
  1468. 2:06:50माइनॉरिटी वाज़ अनबियरेबल। हजरत बिलाल के ऊपर जो
  1469. 2:06:55तशद्दुद हो रहा है उनके ऊपर पत्थर रख दिया जा रहा है। उसको आप क्या बोलेंगे?
  1470. 2:07:02लेकिन क्योंकि मोरल डिस्कोर्स में एक हाई मोरल ग्राउंड कंस्ट्रक्ट हो चुका था। एक
  1471. 2:07:08क्लेम कंस्ट्रक्ट हो चुका था। तो एक बेटर पिटिकल रियलिटी कंसीवेबल हो पाई। हालांकि
  1472. 2:07:15लोगों को दिख नहीं रही थी। हम अभी भी उस स्टेज पर नहीं है कि हम अपनी बात खुद कर
  1473. 2:07:19रहे हो। हम अपने इंस्टीटशंस बना रहे हो। मैं एक मीटिंग में था। वहां पे बड़े
  1474. 2:07:24दिग्गज बैठे हुए थे। वह यह आर्ग्यू कर रहे थे कि क्यों मुसलमानों की बात नहीं होनी
  1475. 2:07:30चाहिए क्योंकि यह हेट की तरफ जाता है। मैंने उनसे सवाल किया कि आप जिन पॉलिटिकल
  1476. 2:07:36मूवमेंट्स के प्रोडक्ट हैं आजादी के वक्त के गांधी की आप बात करते हैं। गांधी अगर
  1477. 2:07:44अंबेडकर से डील नहीं करते। आजाद से डील नहीं करते। गांधी का अपना क्रिटिक है। मैं
  1478. 2:07:48खुद उनको क्रिटिक कर सकता हूं 10 जगह पे। लेकिन कुछ अचीवमेंट भी है उस पर्सनालिटी
  1479. 2:07:52का। और तो इंक्लूजनरी पॉलिटिक्स ऑफ सोवनिटी की पोटेंशियल कहां
  1480. 2:07:58से अराइज होती है? आप हमें लेवल प्लेइंग फील्ड से पहले ही बाहर निकाल दे रहे हो।
  1481. 2:08:05नहीं, मैं वही समझना चाह रहा हूं। देखिए, आप आई अंडरस्टैंड कि यू लॉस्ट द हाई मोरल
  1482. 2:08:11ग्राउंड। अंडरस्टुड? द क्वेश्चन इज़ यू लॉस्ट दी हाई मोरल ग्राउंड। आप हाई मोरल
  1483. 2:08:17ग्राउंड लूज़ करते हैं इन फ्रंट ऑफ अदर्स। ठीक है। इंटरनली भी आपके यहां रिफॉर्म्स
  1484. 2:08:24नहीं है। मैं वही पूछ रहा हूं। देखिए आप इब्राहिम सलाम की कहानी लीजिए। ठीक है?
  1485. 2:08:29व्हाट इज ही डूइंग? ही इज लीविंग ह एंटायर कम्युनिटी
  1486. 2:08:35एंड ही इज़ लीविंग एवरीथिंग एंड ही इज़ गोइंग अलोन। ही इज़ गोइंग अलोन। नो वन इज़
  1487. 2:08:40इज़ विद हिम। बट ही हैज़ ही स्टिल हैज़ अ हाई मोरल ग्राउंड। ही स्टिल हैज़ दैट हाई मोरल
  1488. 2:08:47ग्राउंड। ठीक है? आपका पार्टीशन भी होता है।
  1489. 2:08:52भले दूसरे समझे कि यू आर अ लूजर। फॉर एग्जांपल इब्राहिम सलाम के टाइम में हो
  1490. 2:08:56सकता है लोगों ने समझा हो कि ही इज अ लूजर। ही इज लूजिंग। ही इज़ नॉट एबल टू लिव
  1491. 2:09:00विद अस। वो चले गए छोड़ के। बट फॉर हिम एज अ प्रॉफेट और फॉर हिम ही वाज़ ऑन अ हाई
  1492. 2:09:08मोरल ग्राउंड। ठीक है? देखिए उनकी लाइफ में बाद में क्या होता है? ही डज़ नॉट नो
  1493. 2:09:14कि भ उनकी लाइफ से एक जनरेशन निकलेगी, प्रॉफिट्स की जनरेशन होगी, कम्युनिटीज़
  1494. 2:09:20बनेंगी। उनको नहीं मालूम है। ही विल बी द फादर ऑफ।
  1495. 2:09:23ठीक है। ही विल बी द फादर ऑफ नेशंस। ही डज नॉट नो। दैट इज हिज प्रेयर।
  1496. 2:09:28वो उनकी प्रेयर है। बट ही स्टिल ऑक्यूुपाई हाई मोरल ग्राउंड। तो माय क्वेश्चन इज़ कि
  1497. 2:09:35अगर पार्टीशन होता भी है, आपकी पपुलेशन कम भी होती है, आप डेमोग्राफिकली रिड्यूस भी
  1498. 2:09:42होते हैं। आप इकोनॉमिकली वीक भी होते हैं। सोशली आप रिड्यूस भी होते हैं अपने सेंस
  1499. 2:09:48में। हाई मोरल ग्राउंड आपका खत्म कैसे होता है?
  1500. 2:09:53व्हाई आई एम आस्किंग यू दिस क्वेश्चन? बिकॉज़ जमीयत उस वक्त भी कहती थी कि हम
  1501. 2:09:58हिंदुस्तान के साथ हैं। आज भी कहती है। लैंग्वेज तो चेंज नहीं हुई है उसकी। ठीक
  1502. 2:10:04है? पर्सनल लॉ बोर्ड के किसी भी आलिम ने कभी यह नहीं कहा कि भाई हम जो है वो
  1503. 2:10:08पाकिस्तान जाना चाहते हैं। कभी भी नहीं कहा। ठीक है? देवबंद मूवमेंट जो है उसने
  1504. 2:10:14बड़ा जो है इंडियन इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल में पार्टिसिपेट किया है। बहुत
  1505. 2:10:19कंट्रीब्यूट किया है। तो आपका जो कन्वर्सेशन है, आपका जो आर्गुममेंट है, वो
  1506. 2:10:27तो इंटैक्ट है। चेंज तो होता नहीं है। इंटैक्ट है बट पब्लिक स्फेयर में नोन और
  1507. 2:10:33एक्सेप्टेड नहीं है। उसकी रीजनिंग वही कॉन्फिडेंस से नहीं आ रही है।
  1508. 2:10:37हाउ इज दिस हैपनिंग? व्हाई इज दिस हैपनिंग? बिकॉज़ मैंने जैसे शुरू में कहा
  1509. 2:10:40कि भई जो आपकी थ्यरिटिकल फाउंडेशंस जब वीक हो जाती हैं अपने आर्गुमेंट को पोट्रे
  1510. 2:10:45करने की जब आप हिस्ट्री को रीड नहीं करते हैं। जब आपके पास फ्रेमवर्क नहीं होता है
  1511. 2:10:48तो आप बहुत कम लोग हैं जो ये बोलेंगे कि भई हिस्ट्री अनफोल्ड कैसे हुई पार्टीशन
  1512. 2:10:53की। अल्टीमेटली जो क्लेम्स ऑफ वो हो जाते हैं वो जिन्ना पे सिर्फ आते हैं। हालांकि
  1513. 2:10:58वो भी रिस्पांसिबल है मेरे हिसाब से क्योंकि मुस्लिम साइड भी वो है। मैं उनको
  1514. 2:11:02ये नहीं समझता हूं कि वो रिस्पांसिबल नहीं है। लेकिन हिंदू महासभा उससे ज्यादा
  1515. 2:11:05रिस्पांसिबल है और कांग्रेस भी उतनी रिस्पांसिबल है क्योंकि वो जो नेगोशिएटिंग
  1516. 2:11:10टेबल पे सेंट्रिस्ट पोजीशन ले रही थी वो नेगोशिएट नहीं करवा पाई। उसने अपने
  1517. 2:11:14बेनिफिट्स देखे। जी।
  1518. 2:11:15तो ये सिर्फ सवाल मुसलमानों पे क्यों आ जाता है? और मुसलमान उसको कॉन्टेक्स्ट कर
  1519. 2:11:20कंटेस्ट करने के लिए हिस्ट्री को आर्काइव को रीड करके एविडेंस क्यों नहीं प्रमोट कर
  1520. 2:11:24प्रोड्यूस करते क्योंकि उनकी एकेडमिक रिगरस ट्रेनिंग नहीं है। एकेडमिक रिगरस
  1521. 2:11:29ट्रेनिंग होने के लिए या फिर इस तरह की ट्रेनिंग होने के लिए आपको इन्वेस्ट करना
  1522. 2:11:33पड़ता अपने नौजवानों में अपने इंस्टीटशंस में आपने समझा जो आपके पास इंस्टीटशंस हैं
  1523. 2:11:38वो मोर देन इनफ है। आप एक फॉल्स सुपीरियरिटी
  1524. 2:11:44के ताबे आपने अपने 50 60 साल गुजार दिए। समझ रहे हैं कि कॉन्फिडेंस मिस लोकेटेड
  1525. 2:11:50मिसरप्रेजेंटेड रहा। जब आपका कॉन्फिडेंस टूटना शुरू हुआ क्योंकि आपको लगा यह
  1526. 2:11:55इंस्टीटशंस आपको प्रिजर्व कर सकते हैं। आपको नेगोशिएट करवा सकते हैं। तो एकदम
  1527. 2:12:00हार्ट हिटिंग रियलिटी आई कि ना हम अल्टरनेट बना पाए। हिजाब कोर्ट जजमेंट
  1528. 2:12:04लीजिए उस टाइम पे। बच्चियों के पास स्कूल नहीं थे पढ़ने के लिए।
  1529. 2:12:07जी। या तो आप स्कूल जा सकते हैं या आपको
  1530. 2:12:10छोड़ना पड़ेगा। आपने अल्टरनेटिव बनाए नहीं। आपके लिए मेन स्ट्रीम खत्म कर दिया
  1531. 2:12:16गया। तो आपका जो ओवर कॉन्फिडेंस था अपनी अंडरस्टैंडिंग पे और आपको जो रिगर होना
  1532. 2:12:22चाहिए था इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग में और आपको जो एक क्लास ऑफ सिटीजंस इंडिया में
  1533. 2:12:29प्रोड्यूस करने चाहिए थे वो आपने नहीं किया। आपके इंटरनल रिफॉर्म्स नहीं हुए।
  1534. 2:12:33आपके यहां कास्ट का मसला आज की डेट में भी मुझे नहीं पता था दो चार साल पहले तक।
  1535. 2:12:39मुझे लगता था कि मुसलमानों में मुझे मुझे पता ही नहीं था जातपात क्या है उस तरह से।
  1536. 2:12:42इतना सली रीज़ंड है। हिंदू में तो बहुत आम है, साफ है। लेकिन फिर जब आप शादियां करने
  1537. 2:12:49जाते हैं, फिर जब आपकी बात होती है, आप इधर से आते हैं, आप उधर से आते हैं। मैं
  1538. 2:12:53सैयद हूं, मैं शेख हूं। तुम
  1539. 2:12:57जुलाहे हो, अंसारी हो, हलालखोर हो, हलालखोर हो, गाड़े हो।
  1540. 2:13:04ये तेली हो। ये रियलिटीज जब आपने डील ही नहीं करी,
  1541. 2:13:10आपका क्लेम कहां से आएगा? आपके यहां जहेज लिया जा रहा है। आजकल तो ये सारी चीजें
  1542. 2:13:15मैं तो मेरे वालिद साहब क्योंकि स्कॉलर हैं और उनका काम है मैं उनका प्रोडक्ट हूं
  1543. 2:13:20एक तरीके से कि जो उन्होंने काम किया है कि कुरान सिर्फ ऐसा नहीं है कि भ आपकी एक
  1544. 2:13:26लिमिटेड किताब है कि चंद जो फिककी मसाइल है बस उसी तक है। वो एक मुकम्मल दीन हयात
  1545. 2:13:32और एक मुकम्मल निजाम को भरपा करने का एक फ्रेमवर्क है। होलिस्टिक पैराडाइम है।
  1546. 2:13:37उसमें सही और गलत को जज करने के लिए उसमें प्रिस्रिप्शंस हैं। बाकायदा किस तरह की
  1547. 2:13:42मोरल सोसाइटी कैसे कंस्ट्रक्ट की जाएगी उसकी पूरी प्रिस्रिप्शंस हैं। पर आपने तो
  1548. 2:13:48वह नहीं किया। और जिन लोगों ने यह कोशिश की उनको आपने स्पेस नहीं दिया। क्योंकि
  1549. 2:13:53आपने इंटरनल इंस्टीट्यूशनल हेजिमनीज़ क्रिएट की। आपने जब वह इंस्टीट्यूशनल
  1550. 2:14:00हेजमनीज क्रिएट करी तो आप आपस में कमपीट कर रहे हैं। तो यह सारी इंटररिलेटेड
  1551. 2:14:07प्रॉब्लम्स हैं क्योंकि आपके पास इस वक्त अपने आपको रीलोकेट करने की कॉन्फिडेंटली
  1552. 2:14:15मैं क्या कर सकता हूं? आज की डेट में अगर आप मुझसे पूछें मैं
  1553. 2:14:21जीएनयू में स्टूडेंट था। तालिब था। यह सवाल मेरे सामने आया। मैं क्या कर सकता
  1554. 2:14:26हूं? बहसियत स्टूडेंट जिसकी ट्रेनिंग फिलॉसफी
  1555. 2:14:32पॉलिटिक्स इकोनॉमिक्स में है। जिसने इंजीनियरिंग भी पढ़ा है। साइंस साइड से
  1556. 2:14:37है। वालिद साहब के लिए मैं वीडियो भी एडिट करता था क्योंकि उनकी जो किताबें हैं मुझे
  1557. 2:14:41लगता था कि वो लोगों के पास आना चाहिए था। तो मेरे लिए यह था कि मैं रिसर्च को और
  1558. 2:14:47मीडिया को कोशिश कर सकता हूं कि जोड़ूं। सक्सेसफुल मैं अभी भी नहीं हूं। लेकिन एक
  1559. 2:14:53कोशिश कर सकता हूं। तो सवाल ये है कि आज की डेट में
  1560. 2:14:59मेरे 4 साल के एक्सपीरियंस में जब मैंने नौजवानों को भी देखा जो प्रोडक्ट है
  1561. 2:15:03मॉडर्निटी के जामिया एएमयू कोई ऐसा नहीं है कि वो मॉडर्न यूनिवर्सिटीज नहीं है।
  1562. 2:15:10उनमें हर वो चीज जो करिकुलम है, जो अंडरस्टैंडिंग है, जो इकोनॉमिक्स को आपको
  1563. 2:15:14पढ़ाया जा रहा है, जो पॉलिटिकल थ्यरी पढ़ाई जा रही है, जो टेंपलेट्स आपके दिमाग
  1564. 2:15:18में कंस्ट्रक्ट किए जा रहे हैं, जिससे आप जो आप बोल रहे थे कि रीजन करेंगे
  1565. 2:15:23जी। वो सारे टेंप्लेट्स तो वो हैं जो मेरी
  1566. 2:15:26आइडेंटिटी को मुश्किल बनाते हैं। एट ऑड्स बनाते हैं। इसलिए मैं हल्ला को क्रिटिक
  1567. 2:15:33करता हूं। बहुत रिगरस थराइजेशन है। बहुत रिगरस
  1568. 2:15:39थराइजेशन तो न्यूटन का भी था। 200 साल तक वो मोस्ट डोमिनेंट थराइजेशन था। बट सही
  1569. 2:15:44नहीं था। लिमिटेडली सही था। एट द स्केल ऑफ सोलर
  1570. 2:15:49सिस्टम। आज भी वो सक्सेसफुल है। बट उसके जस्ट आगे फेल हो जाता है।
  1571. 2:15:53तो वो टेंपलेट की एक मिनिमम यूटिलिटी है। हम लोगों का
  1572. 2:16:00हेल्थ का मॉडल क्या होगा? दुनिया में इनकलिटी की बात होती है।
  1573. 2:16:06इस्लाम में तो बाकायदा क्लास स्ट्रगल को लेके वेल्थ पे टैक्स है,
  1574. 2:16:11जकात है, उश्र है, खुमस है। मैं नहीं बोल रहा हूं ये हमारे वालिद साहब का काम है इस
  1575. 2:16:17पे। मैं तो उसका एक बेनिफिशरी हूं। लेकिन मैं जब एज अ स्टूडेंट ऑफ इकोनॉमिक्स
  1576. 2:16:22इसको रिलेट कर रहा था टोमा पिकटी के काम से। उन्होंने बोला वो भी वेल्थ पे टैक्स
  1577. 2:16:28लगाने की बात करते हैं ग्लोबली। मुझे बड़ा इंटरेस्टिंग लगा। उन्होंने बोला है कि
  1578. 2:16:32हिस्टोरिकली जो कैपिटल और लेबर का रिलेशन है उसमें लेबर कैपिटल से नीचे रहा है
  1579. 2:16:39नेगोशिएशन में ट्रीटी में कैपिटल को इंटरेस्ट रेट मिलता
  1580. 2:16:44है लेबर को वेज मिलती है तो क्योंकि कैपिटल प्रिविलेज्ड पोजीशन में रहा है तो
  1581. 2:16:51जो इंटरेस्ट है रिबा है उसने कंडीशनलिटीज ऑफ इक्वलिटी को चेंज कर
  1582. 2:16:59दिया इनकलिटी परपेचुएट होती हैं। अपने आप में लेबर और कैपिटल का जो कॉन्ट्रैक्ट है
  1583. 2:17:05वो मुशारका है कि भ आप इक्विटी पे रखेंगे। बाद में उसके मुदार और बहुत सारे डिफरेंट
  1584. 2:17:11कॉन्टेक्स्चुअल इंटरप्रिटेशंस आए। आप इनकम पे सिर्फ नहीं कर सकते हैं या फिर सेल्स
  1585. 2:17:18पे नहीं। आपका जो टैक्सेशन पैराडाइम होगा वो वहां
  1586. 2:17:22होगा जहां पे लोग एक्चुअली एक्यूमुलेट करते हैं वेल्थ को। अमीर के पास तो जमीनें
  1587. 2:17:27हैं, जायदाद हैं। जी।
  1588. 2:17:29और आपका हाईएस्ट टैक्स इनकम पर है। आपका वेल्थ पर टैक्स नहीं है। हमारे यहां आज हम
  1589. 2:17:34सोना रख दें। मेरी बीवी के पास जितना भी सोना है, हमारे पास रनिंग फ्लो ऑफ इनकम
  1590. 2:17:39नहीं है। फिर भी हमें देना पड़ता है। जी।
  1591. 2:17:41और वो किसको देना पड़ता है? उसकी शरायत रख दी। आठ कैटेगरीज हैं।
  1592. 2:17:44जी। गरीब है, यह है वो है। वो सारी वो कैटेगरीज है जो किसी सोशल इवल को चैलेंज
  1593. 2:17:49कर रही हैं। तो एक मुनजम निजाम है कि जो एक मुआशरे की पर्टिकुलर प्रॉब्लम को सॉल्व
  1594. 2:17:57करता है। जी।
  1595. 2:18:00आपकी मार्केट कैसे वो होगी, ऑर्डर होगी वो हमने बात की थी मदीने में। आपकी सिर्फ जो
  1596. 2:18:07यह हायरार्किकल रिलेशंस हैं ऊंचनीच के मेरी जो लेगसी है मैं एक सैयद हूं।
  1597. 2:18:16हम मैं एक प्रिविलेज हूं। मैं शेख हूं। मैं खान हूं। मैं अंसारी हूं। अल्लाह के
  1598. 2:18:24रसूल ससल्लम ने तो शादियां करवा दी। ब्लड मिक्स हो गया। तुम क्या हो? कौन हो?
  1599. 2:18:32यह चैलेंजेस आ रहे थे ना वो जो 23 साल में हुआ है वो मिनी मॉडल है जो ह्यूमन रिलेशंस
  1600. 2:18:40में जो आम प्रॉब्लम्स आती हैं इट्स अ वेरी प्रैक्टिकल और इसलिए वो 23 इयर्स में आया
  1601. 2:18:47कि मतलब लोग सोचते हैं ना एक ही टाइम पे दे देते हैं पूरी की पूरी वो नहीं क्योंकि
  1602. 2:18:51सोसाइटी टाइम लेती है समझ रहे हैं देखिए प्रॉफिटिक मॉडल में कितना एंबेडेड है कि
  1603. 2:18:56जीरो और वंस नहीं है शराब को भी कई लेयर्स में बैन किया गया स्लेवरी को कई लेयर्स
  1604. 2:19:03में इस तरह कंस्ट्रक्ट की गई रियलिटी कि स्लेव को आजाद करवाना एक सबसे अच्छे सवाब
  1605. 2:19:09कमाने के काम में हो गया। औरतों के हुकूक कि अगर हम गिने के एन नंबर ऑफ टाइम्स कि
  1606. 2:19:18जहां पे औरत के हुकूक ज्यादा हैं या मर्द के हैं। तो उसमें 60% ऑफ द केसेस में एक
  1607. 2:19:24यकीन का वीडियो था। एक्चुअली औरत का अपर हैंड है।
  1608. 2:19:29जी। लेकिन हमारी सोसाइटी रैंपेंटली पेट्रियकल है। जो दुनिया को जो
  1609. 2:19:35भी उसकी फ्रेमवर्क कह रही हैं, कैपिटलिस्ट कैपिटलिज्म कर रहा है। हिंदूइज़्म अपने
  1610. 2:19:40उसकी बात कर रहा है। मुसलमान जिस अदिल की बात करता है, जिस मोरल सुपीरियरिटी की बात
  1611. 2:19:47करता है, उसमें कहीं खड़ा नहीं पाता। नहीं आई अंडरस्टैंड आप बिल्कुल सही कह रहे
  1612. 2:19:53हैं। एंड आई एग्री विद यू ऑन ऑन ऑलमोस्ट ऑल द पॉइंट्स। आई डोंट थिंक आई हैव एनी
  1613. 2:19:59डिसए्रीमेंट। लेकिन
  1614. 2:20:04ये प्रॉब्लम
  1615. 2:20:08इंड्यूस्ड भी तो हो सकती है ना। कहने का मतलब ये कि आप जो हैं वो अ देयर इज नो
  1616. 2:20:16डाउट कि भाई मुस्लिम्स जो हैं वो मोरली करप्ट हो गए हैं। आप मिडिल ईस्ट को देख
  1617. 2:20:24गाजा में जो हो रहा है मिडिल ईस्ट कुछ नहीं कर रहा है तो जाहिर सी बात है आप
  1618. 2:20:27बहुत कुछ कर सकते थे आपने कुछ नहीं किया तो ये एक आर्गुमेंट बिल्कुल सही है कि
  1619. 2:20:30मुस्लिम्स जो हैं दे आर नॉट मोरली वो लो ग्राउंड पे हैं मोरली मोरल करप्शन है दैट
  1620. 2:20:36इज वन थिंग लेकिन ये जो एक मोरल लो ग्राउंड आप कहते हैं या मोरल करप्शन जो आप
  1621. 2:20:44कहें या मैं उसको मोरल करप्शन नहीं कहूंगा ये जो चीज है इसको मैं मोरल करप्शन कहूंगा
  1622. 2:20:49मैं दूसरी चीज को कहूंगा दी इंपोजशन ऑफ इनफीरियोरिटी।
  1623. 2:20:56ठीक है? यह स्टेट से आती है। ठीक है? जो बहुत हद तक पोस्ट इंडिपेंडेंट इंडिया में
  1624. 2:21:05स्टेट ने किया है। जी।
  1625. 2:21:08थ्रू द मीन्स ऑफ लॉ लॉ को यूज़ करके
  1626. 2:21:16थ्रू इरेजन ऑफ हिस्ट्री। इरेजन ऑफ हिस्ट्री
  1627. 2:21:22जो बड़ी इंटरेस्टिंग चीज है। जब मुस्लिम हिस्ट्री इंडिया से इरेज होती है तो लोगों
  1628. 2:21:26को प्रॉब्लम नहीं होती। लेकिन जब लेफ्ट हिस्ट्री इरेज होती है तो लोगों को बड़ी
  1629. 2:21:30प्रॉब्लम होती है। ठीक है? तो 1857 के पूरे रिवोल्ट को आप हिस्ट्री की किताब में
  1630. 2:21:36पढ़ लीजिए। आपको मुस्लिम कॉन्टेक्स्ट मिलेगा ही नहीं। ठीक है? आपको एनसीआरटी
  1631. 2:21:40किताबों में हमारे टाइम में भी नहीं था। तो
  1632. 2:21:44क्या मिलेगा? दो चार नाम मिल जाएंगे आपको ज्यादा से ज्यादा। ठीक है?
  1633. 2:21:50जो मूवमेंट्स हैं जमीयत उलमा हिंद है ये सब ये तो बहुत
  1634. 2:21:55पुराने मूवमेंट्स हैं। फ्रीडम स्ट्रगल में है। इनका कोई जिक्र आपको नहीं मिलेगा। कुछ
  1635. 2:22:00भी नहीं मिलेगा। तो इरेजर ऑफ हिस्ट्री है या आप ये कहिए कि मार्जिनलाइजेशन ऑफ
  1636. 2:22:07लिटरेचर है। ठीक है? लैंग्वेज स्क्रिप्ट है। जब मुझे याद है
  1637. 2:22:142000 अ आई थिंक 111 में जब वालिद साहब भोपाल में
  1638. 2:22:20थे जब मेरे ख्याल से भोपाल गए वो तो मुझे आज भी इंसिडेंट याद है कि वो दवा की दुकान
  1639. 2:22:27में हम गए और उसने दवा की दुकान में दवा के जिस जिस
  1640. 2:22:37एनुल जो जिसको कहते हैं ना जिस उसमें उसने उसने दवा रखी वो कागज का था पैकेट और उस
  1641. 2:22:46पैकेट पे उसने सुबह दोपहर शाम लिखना होता है। तो सुबह दोपहर शाम उसने हिंदी में
  1642. 2:22:51लिखा ठीक है। तो वालिद साहब ने कहा अभी तुम हिंदी में क्यों लिख रहे हो?
  1643. 2:22:59तुम उर्दू में नहीं लिख सकते। मैंने कहा नहीं मुझे नहीं
  1644. 2:23:05आती।
  1645. 2:23:08तो वालिद साहब ने कहा भाई मुझे बड़ी हैरानी है इस बात की क्योंकि यह मुसलमान
  1646. 2:23:12रियासत थी। है ना? और यहां पे मसाजिद में भी जो दुआएं हैं वो हिंदी में लिखी हुई
  1647. 2:23:22हैं। नाउ ये क्वेश्चन हिंदी और उर्दू का
  1648. 2:23:29नहीं है क्योंकि आप अगर हिंदुस्तानी लैंग्वेज बोलते हैं तो कोई प्रॉब्लम नहीं
  1649. 2:23:34है। लेकिन इरेजर ऑफ स्क्रिप्ट
  1650. 2:23:40जो है जब आप उसको खत्म करते हैं वह प्रॉब्लम है। भले वो लैंग्वेज रहे अब तो
  1651. 2:23:46खैर लैंग्वेज भी खत्म हो रही है। प्योर जिसको कहते हैं ना हिंदी लैंग्वेज यूज़
  1652. 2:23:51करने का जो जो इंप्लीमेंटेशन है वो प्रॉब्लमैटिक है। लेकिन आप एक आर्गुमेंट
  1653. 2:23:57ये दे सकते हैं कि साहब हिंदी में लिखें, देवनागरी में लिखें चाहे जिसको कहते हैं
  1654. 2:24:02पर्शियन स्क्रिप्ट में लिखें। उसमें क्या ही प्रॉब्लम है। जो हिंदुस्तानी
  1655. 2:24:08आर्गुममेंट है उसमें प्रॉब्लम यह है कि इरेजर ऑफ स्क्रिप्ट है ना और वो स्क्रिप्ट
  1656. 2:24:12का इरेजर जो है वह बहुत बड़ा इरेजर है क्योंकि ज्यादातर जो मटेरियल है मुस्लिम
  1657. 2:24:20हिस्ट्री का मुस्लिम कल्चर का जो ट्रेडिशन का पिछले 100 200 साल 300 साल का वो तो
  1658. 2:24:25उसी में है। तो वो स्क्रिप्ट नहीं पढ़ रहे हैं आप। तो कहने का मतलब यह कि वो इरेजर
  1659. 2:24:30हिस्ट्री का भी हो रहा है, स्क्रिप्ट का भी हो रहा है। अब जैसे मैं आपको
  1660. 2:24:36इंस्टीट्यूशन की बात हो रही थी एएमयू है या जामिया है।
  1661. 2:24:41बहुत इंटरेस्टिंग है। मैं अभी बात करते-करते मैं सोच रहा था ये कितनी
  1662. 2:24:45इंटरेस्टिंग बात है कि एएमयू में और जामिया में
  1663. 2:24:52एंड आई मे बी रॉन्ग। क्योंकि मैंने इलाहाबाद या बीएचयू नहीं देखा। आई डू नॉट
  1664. 2:24:57नो। बट इनमें पॉलिटिकल पार्टीज ने कभी एंट्री
  1665. 2:25:03नहीं ली। यह बहुत इंटरेस्टिंग चीज है। आपको कभी भी स्टूडेंट्स यूनियन का इलेक्शन
  1666. 2:25:10जब भी होता था वहां आपको
  1667. 2:25:15फ्रेम में कांग्रेस नहीं मिलेगी। इंटरेस्टिंग
  1668. 2:25:19एबीवीपी भी नहीं मिलेगी। आपको समाजवादी पार्टी भी नहीं मिलेगी।
  1669. 2:25:24इज दिस इंटेंशनल? क्योंकि अगर पॉलिटिकल पार्टी फ्रेम में
  1670. 2:25:28होगी तो जाहिर सी बात है मुस्लिम पॉलिटिक्स के लिए पॉलिटिकल उसमें एक चैनल
  1671. 2:25:34बनेगा। फ्रेमिंग होगी, फिर डिमांड होगी, फिर
  1672. 2:25:37रिक्वायरमेंट होगी, एक पॉलिटिकल क्लास इमर्ज होगी मुसलमानों में।
  1673. 2:25:41जी। वेरी इंटरेस्टिंग पॉइंट। मुझे नहीं पता
  1674. 2:25:44था। मैंने मैंने अभी बैठे-बैठे मैं सोच रहा था
  1675. 2:25:47कि आखिर ऐसा क्यों है? ठीक है। क्योंकि स्टूडेंट्स यूनियन अभी की
  1676. 2:25:50तो नहीं है। बहुत पुरानी स्टूडेंट्स यूनियन है भाई।
  1677. 2:25:53यह वो यूनिवर्सिटीज हैं जो पॉलिटिकल सीन में डोमिनेंट थी।
  1678. 2:26:00खिलाफत मूवमेंट में, नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट में हम
  1679. 2:26:04ठीक है? जो गांधी जी के साथ बहुत क्लोजली एसोसिएटेड थी जिसकी वजह से कॉलेजेस
  1680. 2:26:10यूनिवर्सिटीज में तब्दील हुए। हम
  1681. 2:26:12मॉमडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज यूनिवर्सिटी बना बिकॉज़ ऑफ़ नॉन कोऑपरेशन खिलाफत एंड ऑल
  1682. 2:26:16दैट। ठीक है? उसी में बना ना जामिया एएमयू से निकल रही है वो भी उसी
  1683. 2:26:21टाइम में निकल रही है। ठीक है? तो आई मे बी रोंग बिकॉज़ एज आई सेड
  1684. 2:26:27मुझे नहीं मालूम कि भ बीएचयू में इलेक्शंस कैसे होते हैं या या इलाहाबाद में
  1685. 2:26:33इलेक्शंस कैसे होते हैं। हो सकता है वहां भी इस तरीके की टेंपलेट हो। लेकिन मुझे
  1686. 2:26:36ऐसा लगता है कि यहां एक बड़ा बड़ा ही डेलीबेट जिसको कहते हैं आप इन एक बड़ी
  1687. 2:26:43इंटेंशनल चीज है कि आप जो हैं वो पॉलिटिकल सेंसिटाइजेशन कहें या इशू फ्रेमिंग कहें
  1688. 2:26:50या इशू पर बात करना कहें वो आपको नहीं मिलेगा। आपको क्या मिलेगा?
  1689. 2:26:57डाइनिंग हॉल में फीस बढ़ गई है। उस पर धरना मिल जाएगा। ट्यूशन फीस बढ़ गई है उस
  1690. 2:27:04पर धरना हो जाएगा। ज्यादातर धरना तो इसी बात पर होता है कि
  1691. 2:27:09भैया स्टूडेंट्स यूनियन बना दो। ठीक है? 70-80% टाइम्स तो धरना सिर्फ इसी बात के
  1692. 2:27:15लिए होता है कि स्टूडेंट्स को एक यूनियन चाहिए। ठीक है? तो कहने का मकसद ये कि ये
  1693. 2:27:22ये जो एक यू आर लूजिंग द मोरल हाई ग्राउंड एक तो आई रिमेंबर 1960 या 70ज की बड़ी
  1694. 2:27:31इंटरेस्टिंग किताब है अब्दुल हामिद अबू सुलेमान की द क्राइसिस ऑफ़ मुस्लिम माइंड
  1695. 2:27:36बहुत अच्छी किताब है। फैंटास्टिक बुक एंड ही सेज़ कि आफ्टर दी डिमाइस ऑफ़ कैलिफेट
  1696. 2:27:44कैलिफेट के खत्म होने के बाद हालांकि बहुत ही गल गई थी। बहुत ही खत्म हो गई थी। सारी
  1697. 2:27:49चीजें थी। एक टोकनिज्म था। सिर्फ एक इमेजरी थी। कोई उसकी अथॉरिटी नहीं थी।
  1698. 2:27:55लेकिन 1920 में उसको खत्म होने के बाद मुसलमानों के साथ सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह
  1699. 2:28:00हुई कि वी बिलोंग वेयर। कहां बिलोंग करें हम। ठीक है? क्योंकि कैलिफेट तो खत्म हो
  1700. 2:28:06गई। और फिर नेशन स्टेट बनता है तो उनको समझ में नहीं आता कि भाई हम नेगोशिएट कैसे
  1701. 2:28:14करें बिटवीन बीइंग एन अफगानी एंड बीइंग पार्ट ऑफ एन उ्मा एन इंडियन एंड एन उ्मा
  1702. 2:28:21तो इसको नेगोशिएट हम कैसे करें? तो यह प्रॉब्लम उनको फील हुई। तो कहने का मकसद
  1703. 2:28:27यह है कि ये ये जो एक मोरल लो ग्राउंड आपका है वो एक पार्टीशन की वजह से होता है
  1704. 2:28:34ऑटोमेटिकली। आपको समझ में नहीं आता कि यार मैं अपने को हिंदुस्तानी कैसे कहूं।
  1705. 2:28:40क्यों? क्योंकि मुसलमान तो पाकिस्तान चले गए। और लोगों का यह कहना है कि मुसलमानों
  1706. 2:28:44के लिए पाकिस्तान बना है। तो फिर मुसलमान हिंदुस्तान में क्या कर रहे हैं? तो आई
  1707. 2:28:48अंडरस्टैंड वो एक क्राइसिस ऑफ द माइंड वो हो सकता है। दैट कैन हैपन दैट दैट कैन बी
  1708. 2:28:54अ साइकोलॉजिकल थिंग। बट दैट कैन नॉट कंटिन्यू बिकॉज़ वो इंस्टीटशंस जो 1920 के
  1709. 2:29:02थे दे डिड नॉट ट्रांसफर टू पाकिस्तान। दे आर स्टिल हियर इन इंडिया। ठीक है? यह
  1710. 2:29:09इस लेवल तक है कि हमदर्द लेबोरेटरी जो है
  1711. 2:29:15आजादी से पहले की है। लेकिन ऐसा थोड़ी हुआ कि आजादी हो गई तो
  1712. 2:29:20पाकिस्तान चली गई। पाकिस्तान में भी हैं वो हिंदुस्तान में भी हैं। उनके एक भाई
  1713. 2:29:25शायद पाकिस्तान चले गए थे। तो वहां भी हमदर्द है। यहां भी हमदर्द है।
  1714. 2:29:30ठीक है? इनफैक्ट किसी ने आई थिंक जुबैर अब्बासी साहब हैं। कौन है? जिन्होंने एक
  1715. 2:29:35बड़ा इंटरेस्टिंग आर्टिकल लिखा है। वफ पे ही लिखा है। जहां पे उन्होंने
  1716. 2:29:39हमदर्द लैबोरेटरीज इन पाकिस्तान को डिस्कस किया है कि हाउ इट कैन सर्व एज अ वेरी गुड
  1717. 2:29:46मॉडल ऑफ वफ इंस्टीट्यूशन। ठीक है? एंड आई एम श्योर इट इज़ हैपनिंग सिमिलरली इन
  1718. 2:29:51इंडिया। इंस्टीटशंस वो कंटिन्यू कर रहे हैं। तो आप मोरल हाई ग्राउंड जो आप लूज कर
  1719. 2:29:56रहे हैं वो इतना लूज आपको नहीं करना चाहिए।
  1720. 2:29:59मोरल करप्शन है अबब्सोलुटली अग्री आपकी सोसाइटी में जो करप्शन है जो प्रॉब्लम्स
  1721. 2:30:06हैं वह अब्सोलुटली बिल्कुल सही है लेकिन जो तीसरा एलिमेंट है जो सबसे ज्यादा
  1722. 2:30:12इंपॉर्टेंट है कि आपकी पॉलिटिकल एजेंसी या रिप्रेजेंटेशन
  1723. 2:30:20या आइडेंटिटी इन पब्लिक स्पेस उसको
  1724. 2:30:25इतना सप्रेस किया गया है थ्रू टू दी इंस्ट्रूमेंटालिटी ऑफ़ द स्टेट कि
  1725. 2:30:33आप बिल्कुल ऐसे हो गए हैं जैसे अल्लाह के
  1726. 2:30:38रसूल सल्ला वसल्लम ने कहा ना कि इस्लाम जो है वो एलियन हो जाएगा।
  1727. 2:30:44ठीक है? आप इसको यकीन नहीं कर सकते कैसी बात है?
  1728. 2:30:48जब इस्लाम डोमिनेट करेगा दुनिया में तो एलियन कैसे हो जाएगा? समथिंग सिमिलर इज़
  1729. 2:30:52हैपनिंग हियर। हिंदुस्तान में मुसलमान जो हैं दे वर एट द
  1730. 2:30:59पीक दे वर रनिंग द ज्योग्राफी इस पूरी जग्राफी को रन करते थे वो क्या मतलब है
  1731. 2:31:06दाढ़ी नहीं थी क्या उनके टोपी नहीं थी क्या उनके पास क्या हिजाब
  1732. 2:31:10नहीं पहनते थे लोग हाउ कैन दिस बिकम एलिनेटेड हाउ कैन दिस
  1733. 2:31:16बिकम समथिंग दैट दैट इट इज स्ट्रेंज तो मुझे ऐसा लगता है कि इसमें बहुत बड़ा रोल
  1734. 2:31:22जो है वो स्टेट की एजेंसी का है। और मेरी
  1735. 2:31:28अंडरस्टैंडिंग यह है कि व्हाट व्हाट वी यू नो डिस्कस्ड अर्लियर कि
  1736. 2:31:36वी नीड टू अंडरस्टैंड एंड वी नीड टू डिवाइस मेथड्स जहां पे हम
  1737. 2:31:44नेगोशिएटिंग पोजीशन में आ सकें। जहां पे हम नेगोशिएटिंग स्ट्रेटजीस डिवाइज कर
  1738. 2:31:52सकें। है ना? एंड देयर फॉर आई वुड डिसएग्री विद
  1739. 2:31:59हर लास्ट प्रोपज़िशन इन दैट सेंस। आई विल अग्री विद यू इन दैट सेंस बिकॉज़
  1740. 2:32:06कंसेंस सी ही इज़
  1741. 2:32:11राइट इन वन सेंस एंड दैट्स दैट्स अब्सोलुटली करेक्ट।
  1742. 2:32:14ऑफकोर्स एवरीबडी एवरी गुड थिंकर इज़ राइट इन सम सेंस।
  1743. 2:32:17ही इज़ अब्सोलुटली राइट इन दैट। बट द क्वेश्चन इज
  1744. 2:32:23हाउ वुड आई एस अ मुस्लिम नेगोशिएट इन इंडिया? नहीं
  1745. 2:32:29आप बिल्कुल सही बात कह रहे हैं। दो लेवल्स हैं क्लेम के जो मैं करना चाह रहा था। एक
  1746. 2:32:34तो ऑफ कोर्स आप ना उसका भी कंटेंट देखेंगे तो ज्यादातर चीजें हम वही बात कर रहे होते
  1747. 2:32:40हैं कि स्टेट का क्या रोल है और माइनॉरिटी मेजॉरिटी का क्या रिलेशन है
  1748. 2:32:46और ऑफकोर्स उस फ्रंट पे हम लोगों को ये अंदाजा भी होता है आपकी और मेरी खुद की इस
  1749. 2:32:53पे गुफ्तगू हुई है माइनॉरिटी मेजॉरिटी रिलेशन स्टेट फॉरेशन उसमें स्टेट किस तरह
  1750. 2:32:59से मेजॉरिटेरियन हो जाता है और उसमें स्पेशली जो मुस्लिम
  1751. 2:33:03कंडीशन है हिंदुस्तान में उस पे क्या इंपैक्ट पड़ा है? उसकी उसमें कोई दो राह
  1752. 2:33:07नहीं है। मेरा असल में दूसरा सवाल यह होता है कि यह
  1753. 2:33:12तो हमेशा रहा है। ऐसा कभी नहीं हुआ दुनिया में क्योंकि बहुत सारी चीजें ऐसी होती हैं
  1754. 2:33:18कि स्टेट को एकेडमिकली पढ़ना एज अ सब्जेक्ट।
  1755. 2:33:24यह भी एक बहुत मॉडर्न तरीके से एक बहुत ज्यादा जिसे किया है
  1756. 2:33:29लोगों ने स्टेट का। लेकिन एक होता है ना कि जिसकी जब पहले क्या होता था पीएचडी अगर
  1757. 2:33:34कोई कर रहा है तो एक शायद लेस देन 1% ऑफ़ द पीपल वुड डू दैट मे बी इवन लेस आज की डेट
  1758. 2:33:41में क्रिटिकल स्टडीज एकेडमिक स्टडीज बहुत होती हैं और उसमें ज्यादातर चीजें जो
  1759. 2:33:45कंटेंपरेरी होती हैं लोग क्योंकि करियर बनाना चाहते हैं बहुत सारी चीजें होती हैं
  1760. 2:33:50वो बहुत जो इमीडिएट चीजें गुजरी होती हैं हुई होती हैं उस पे ज्यादा काम होता है।
  1761. 2:33:57तो इस वजह से मॉडर्न नेशन स्टेट मुझे ऐसा लगता है कि प्री मॉडर्न नेशन स्टेट्स के
  1762. 2:34:04रिलेटिव उन पे बहुत ज्यादा काम हुआ है और कई बार जो क्रिटिक होता है नेशन स्टेट का
  1763. 2:34:11और यह समझा जाता है कि प्री मॉडर्न नेशन स्टेट में वो एट्रिब्यूट्स नहीं थे। जी
  1764. 2:34:17मैं जब भी थोड़ा सा नजर डालता हूं और समझने की कोशिश करता हूं मुझे लगता है कि
  1765. 2:34:22और मैं देखता हूं कि मे बी इन अ रिलेटिवली रिड्यूस्ड फॉर्म बट वो स्टेट की हर
  1766. 2:34:27फॉरमेशन में वो लॉजिक ऑपरेट करते हैं। स्केल कॉन्फ़िगरेशन
  1767. 2:34:33किस लेवल पे आप ऑपरेट कर रहे हैं ये एक सब्जेक्टिव एक रिलेशनल
  1768. 2:34:38पोजीशन हो सकती है। बट उसी तारीख को जब दूसरे पर्सपेक्टिव से देखा जाता है
  1769. 2:34:43रेजिस्टेंस के पर्सपेक्टिव से और कंस्ट्रक्शन के पर्सपेक्टिव से तो
  1770. 2:34:47माइनॉरिटीज हमेशा वो राइज करती हैं जो अपने ऊपर स्पेशल
  1771. 2:34:53कंडीशन लगाती है कि मुझे प्रोग्रेस करना है। मुझे कंट्रीब्यूट करना है। दो चार
  1772. 2:34:59पांच लोग होते हैं जो एक तरीके से पूरी जिम्मेदारी उठा लेते हैं कौम की।
  1773. 2:35:05ऐसा नहीं होता है कि एक यू नो मैसिस हम मूवमेंट्स बनाते हैं। जो क्रिटिकल मास
  1774. 2:35:13होता है किसी सोशल मूवमेंट को बनाने का कंस्ट्रक्ट करने का वो कुछ जिद्दी लोग
  1775. 2:35:17होते हैं। जी
  1776. 2:35:19जब मैं इस पर्सपेक्टिव से फ्लिप करके पिक्चर को देखता हूं तो वो क्रिटिकल मास
  1777. 2:35:26के वो अलग-अलग स्पेशलिस्ट हैं। कोई किसी चीज का स्पेशलिस्ट है, कोई वो लेकिन वो जो
  1778. 2:35:32एक इंडिविजुअल या कुछ सेट ऑफ इंडिविजुअल्स में वह जिद होना
  1779. 2:35:39कि वो इवन नेगेटिव कंडीशनलिटीज को पॉजिटिव में तब्दील कर सकें। वो मुझे दिखता है
  1780. 2:35:46चैलेंज क्योंकि एक एग्जांपल मैं आपको देता हूं। ओखला एक घटो है और गेटो के बारे में
  1781. 2:35:52जितनी भी ज्यादातर बातें की जाती हैं वो एक नेगेटिव लेंस से की जाती हैं।
  1782. 2:35:56जी। अगेन अगर क्वेश्चन फ्लिप कर दिया जाए कि
  1783. 2:35:59घटोस की अच्छाइयां क्या है? एक स्मॉलर पॉकेट में एक कल्चर प्रिजर्व
  1784. 2:36:06होता है। कल्चर की अपनी लाइफ होती है। कल्चर से और उनकी वे ऑफ़ लाइफ से जुड़ी हुई
  1785. 2:36:14जो नेसेसिटीज़ होती हैं, वह बिज़नेस एंटरप्राइजेस में तब्दील होती हैं।
  1786. 2:36:18हम आपकी एंटरप्रेन्योरशिप होती है। आपके सोशल
  1787. 2:36:21रिलेशनशिप्स बिल्ड होते हैं। आपकी सिक्योरिटी होती है। मतलब गेटो तो एक बहुत
  1788. 2:36:25सिक्योर जिसे कहते हैं नेबरहुड होता है। और उस
  1789. 2:36:30सबसे ज्यादा जो आपने बोला वहां पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन होता है। आपका एमपी हो सकता
  1790. 2:36:35है। आपका एमएलए हो सकता है। और वह एमपी वो
  1791. 2:36:38एमएलए वह जाके पार्लियामेंट में असेंबली में आपकी बात रख सकता है।
  1792. 2:36:45मैं जामिया मिलिया इस्लामिया में था 2016-18 तक मैं अक्सर ये बात बोलता हूं।
  1793. 2:36:49मैं इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में था। मैं ये देखता था कि यूनिवर्सिटी में और भी
  1794. 2:36:53सारे मुख्तलिफ डिपार्टमेंट्स हैं जो कभी अगर किसी सर्वे को करने की जरूरत हो। यहां
  1795. 2:36:58की फैकल्टी इस इलाके का या दिल्ली का एनसीआर का कम से कम मुस्लिम या माइनॉरिटी
  1796. 2:37:04सर्वे क्यों नहीं करती? हम उसमें उसके स्टूडेंट्स भी इनवॉल्व होते।
  1797. 2:37:08उनको एक प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस भी मिलता। जी।
  1798. 2:37:11तो कई बार आपके पास रिसोर्सेज होती हैं। एएमयू में आप अलीगढ़ फिर आपके इतने सारे
  1799. 2:37:16बैचेस होते हैं। आप ओवर द पीरियड ऑफ टाइम ऑलमोस्ट पूरे हिंदुस्तान में फिर साउथ में
  1800. 2:37:22यूनिवर्सिटीज हैं। सारी चीजें हैं। आप एक्चुअली एक्शननेबल सोशियोइकोनॉमिक सर्वेज़
  1801. 2:37:27कर सकते थे। आप पॉलिसी डॉक्यूमेंट बना सकते थे। बहुत सारी जगहों पर दुनिया में
  1802. 2:37:32एकेडमिया ही है जो पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स बनाता है, स्टडी करता है और उसके बाद
  1803. 2:37:36लोगों के सामने रखता है। ऐसा नहीं है कि ऐसा काम नहीं हुआ है। एक सर्वे 2007 में
  1804. 2:37:422008 में हुआ था सचर कमेटी के लेकिन उसका सिर्फ सैंपल साइज 800 था। नॉट जस्ट इन
  1805. 2:37:47ओखला ऐसी जितनी भी 30-40 जो लोकालिटीज हैं मुस्लिम डोमिनेटेड
  1806. 2:37:54एनसीआर में यहां पे 30001 लोकालिटी में वो 840 लोकालिटी में। इसी तरह जब बटला हाउस
  1807. 2:38:00एनकाउंटर हुआ तो उसके बाद एक किताब की शक्ल में या जामिया ने एक इनिशिएटिव भी
  1808. 2:38:06लिया कि किस तरह से जो लीगल फ्रेमिंग हो रही है एंटी मुस्लिम उसको कंटेस्ट किया
  1809. 2:38:11जाए। लेकिन ये नॉर्म नहीं है। ये एक्सेप्शन है
  1810. 2:38:15कि आपके जो इंस्टीटशंस हैं भी और उसमें जो आपके प्रोफेसर्स हैं, एकेडमिक्स हैं,
  1811. 2:38:23थिंकर्स हैं। एक एग्जांपल यूनिवर्सिटी के हवाले से बोल
  1812. 2:38:26रहा हूं। वो एक्चुअली बहुत सारी चीज अचीव कर सकते थे। लेकिन जब आपका इंटरेस्ट ना हो
  1813. 2:38:33आपके पास प्रिविलेज भी हो। आपका यहां से असेंबली में आदमी जाता है। आपका
  1814. 2:38:38पार्लियामेंट में जा सकता है। हिंदुस्तान में इतने वो क्या इश्यूज रेज कर रहे हैं?
  1815. 2:38:43जी। कैसे जो मुसलमान बच्चे पढ़ के निकल रहे
  1816. 2:38:46हैं, वो अपने करियर को तो बनाने में जा रहे हैं। बट वो ये क्वेश्चन ऑफ मुस्लिम
  1817. 2:38:51आइडेंटिटी को जी।
  1818. 2:38:53एक रिगरस एकेडमिक फ्रेमवर्क में लेंस में एक पॉलिसी के तहत अलग-अलग शोबे में वो
  1819. 2:39:01क्यों नहीं आ रहा है और अगर आ भी रहा है तो वो हिस्टोरिकल रीडिंग क्यों है बस एक
  1820. 2:39:04होता है ना कि इंटेलेक्चुअल हिस्ट्री हो रही है फलाने ने फलाने जमाने में वो जरूरी
  1821. 2:39:10है बट आज के कॉन्टेक्स्ट में वो पॉलिसी में जब नेशन स्टेट है तो नेशन स्टेट की
  1822. 2:39:16अपनी इंस्टीटशंस हैं जिसमें पॉलिसी फॉर्मेशन होता है
  1823. 2:39:21तो आपकी जो इंस्टिटशंस के हवाले से या स्टेट के जो
  1824. 2:39:27गवर्नेंस है उसके हवाले से जो आपकी बेनिफिट्स बेनिफिट्स हो सकते हैं वो आपको
  1825. 2:39:31मिलते हैं। जी
  1826. 2:39:33तो वो विज़ कंप्लीटली लैकिंग है कि आप इस स्टेज में भी इस स्टेट में भी बहुत कुछ
  1827. 2:39:38अचीव कर सकते हैं और उसके लिए एक्चुअली आपको बिय्ड मटेरियल कंस्ट्रक्ट्स अपने
  1828. 2:39:43करियर को आपको कम्युनिटी ओरिएंटेड कुछ काम करने पड़ते हैं। रिस्क लेने पड़ते हैं।
  1829. 2:39:48जिस तरह इंसान बिजनेस में रिस्क लेता है बहुत हैवी एंटरप्रेन्योरल रिस्क लेता है।
  1830. 2:39:53सोशल एंटरप्रेन्योरशिप में मुझे बजाहिर जब मैं देखा यहां पे रहा जामिया पास है
  1831. 2:39:58जेएनयू जो रियल कॉम्प्रोमाइज या सैक्रिफाइस करने की जरूरत है इंस्टीट्यूशन
  1832. 2:40:03बिल्डिंग के लिए जिसके लिए अभी सफिशिएंट ह्यूमन रिसोर्स एग्जिस्ट करती है
  1833. 2:40:08वो दो लेवल पे होता है। एक ह्यूमन रिसोर्स एक्सिस्ट करें दूसरा लोग उन्हें फंड करें।
  1834. 2:40:14जी तो जितनी ट्रेडिशनल ऑर्गेनाइजेशंस हैं वो
  1835. 2:40:16जैसे मैंने बोला कि वो अपनी इंटरनल हेजिमिनीस में है। उन्होंने इंटरनली एक
  1836. 2:40:21ओल्ड लॉजिक को कंटिन्यूड रखा। से क्या अचीव हो रहा है, कितना अचीव हो रहा है, वो
  1837. 2:40:25एफिशिएंट है या नहीं? उसकी कोई मेजरेबल आउटकम्स नहीं है। और वो बाहर के बंदे को
  1838. 2:40:31जो मतलब कम्युनिटी का ही कोई अपराध हो सकता है उसको ना तो फंड करने को रेडी हैं
  1839. 2:40:38ना उसको प्रमोट करने को रेडी हैं। तो आज की डेट में मुस्लिम कम्युनिटी ऑलमोस्ट
  1840. 2:40:45आई थिंक 180 करोड़ से 1.8 बिलियन है। 180 करोड़ मुसलमान हैं दुनिया में। उनके
  1841. 2:40:5256 नेशंस हैं। उनके कतर जैसे और मुख्तलिफ और स्टेट्स हाईएस्ट पर कैपिटा इनकम भी
  1842. 2:40:59आपके पास वेल्थ ऑफ ब्लैक गोल्ड ऑयल जिससे आपने अपने पूरे के पूरे फॉर्च्यून बनाए।
  1843. 2:41:07उसके अलावा आपके पास मैसेस भी इंडोनेशिया, बांग्लादेश, इंडिया, पाकिस्तान आपके पास
  1844. 2:41:15नॉलेज भी बहुत प्रोड्यूस हुई। आप तो एक तरफ आपके पास वो गरीब मुसलमान है जिस पे
  1845. 2:41:21तशद्दुद हो रहा है और एक तरफ आपके पास वो इलीट मुसलमान है जो बहाने मार रहा है।
  1846. 2:41:27जी तो आपके पास डबल
  1847. 2:41:30समझ रहे हैं कि वो एक्स्ट्राऑर्डिनरी कंडीशंस आ रही है कि आप दोनों लेवल ऑफ
  1848. 2:41:35डिफिकल्टीज कोएस्ट कर रही हैं। हम
  1849. 2:41:39और उनके सशंस ऑफ कोर्स वो डिफाइंड है और वो है। तो मैं इस चीज को बोलता हूं कि ऑफ
  1850. 2:41:45कोर्स स्टेट मेजॉरिटी उसकी कॉन्फ़िगरेशंस है रहेंगी। बट कोई भी माइनॉरिटी
  1851. 2:41:51हिस्टोरिकली स्पीकिंग अगर ब्लैक्स 1960 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर के अंडर और
  1852. 2:41:58मालकम एक्स के साथ अगर ब्लैक लाइव की मूवमेंट नहीं करते।
  1853. 2:42:04जी लोग बोलते हैं बहुत सारे कि भाई पहले
  1854. 2:42:07एजुकेशन आएगी फिर आपके पास अपने राइट्स आएंगे। ठीक है? एक लेवल तक बट मैं उससे
  1855. 2:42:13थोड़ा सा डिसएग्री भी करता हूं। जी कि जो मुस्लिम कम्युनिटी प्रॉफिट की थी
  1856. 2:42:19उसको पहले राइट्स आए हैं फिर एजुकेशन आई है।
  1857. 2:42:21जी क्योंकि राइट्स आप एडवोकेसी और मूवमेंट के
  1858. 2:42:25थ्रू नेगोशिएट करते हैं। दलितों की हिंदुस्तान में पहले राइट्स आए हैं। फिर
  1859. 2:42:29राइट्स की वजह से पॉलिसी बनके एजुकेशन आई है।
  1860. 2:42:32जी क्योंकि आप
  1861. 2:42:35एज अ कम्युनिटी जो जिम्मेदारी स्टेट की है आप वो एग्जीक्यूट नहीं कर सकते। जिस लेवल
  1862. 2:42:41ऑफ इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। आप टैक्स पेयर भी हैं, आप सेल्स टैक्स भी दे रहे
  1863. 2:42:45हैं। आप बाकी भी चीजों में कंट्रीब्यूट कर रहे हैं। उसके बाद आपको बोला जाए आप गेटों
  1864. 2:42:49में आप सड़क भी बनाइए। सड़क इज नॉट अ प्राइवेट इन्वेस्टमेंट।
  1865. 2:42:54जी। फिर आपसे बोला जाए कूड़ा भी उठाइए।
  1866. 2:42:57फिर आपसे बोला जाए कि आप अपने स्कूल भी बनाइए। ये एक चैलेंज है। लेकिन एक चैलेंज
  1867. 2:43:01यह भी है कि आप जो बना भी रहे हैं उसको भी आप उस तरीके से कंसीव या उस तरह से आप
  1868. 2:43:08सीरियस होके नहीं कर रहे हैं कि आप एक्चुअली आपका
  1869. 2:43:13इंटेंडेड गोल कुछ अचीव करना हो। आप उसको भी एक कैपिटलिस्ट मॉडल बना दे रहे
  1870. 2:43:19हैं। कमाने का जरिया बना दे रहे हैं। कमाई में कोई बुराई नहीं है। एज लॉन्ग एज
  1871. 2:43:25वो एक तरह की नस्ल पैदा करें। जी
  1872. 2:43:29तो मैं ये है कि मतलब डबल हो गया। एक तरफ तो स्टेट आपका इंस्टीट्यूशन है। दूसरी तरफ
  1873. 2:43:34वो जो होपलेसनेस हेल्पलेसनेस इसलिए प्रोड्यूस होती है कि आप इंडिया में मैं
  1874. 2:43:40इसको बड़े अफसोस के साथ कहना चाहता हूं। मैंने तो सिर्फ सीए मूवमेंट देखा है। मैं
  1875. 2:43:44उससे पहले देखता था कि जितने इंडिया में पॉलिटिकल मूवमेंट्स या राइट्स मूवमेंट्स
  1876. 2:43:48मुसलमानों की उससे जितने लीडर्स प्रोडक्ट बने
  1877. 2:43:51जी। सबका ज्यादातर का हाल ये हुआ कि वो उसी
  1878. 2:43:54तरह के जो हेजमेनिक फ्रेमवर्क्स हैं उसमें अपने आप को इनफ्यूज कर दिया। अफसोस की बात
  1879. 2:44:01यह है कि हमारी जनरेशन को भी यही मैंने देखा। या तो लोगों ने छोड़ दिया काम करना
  1880. 2:44:06या फिर उन्होंने वही हथकंडे अपना लिए। मार्केटिंग करनी है। अपने अराउंड चीजें
  1881. 2:44:10करनी है। उसको एक प्रोडक्ट बना के उसमें आपको एक तरीके का एनजीओ मॉडल बना देना।
  1882. 2:44:16हम तो ये चैलेंज तो हमें खुद ही फेस करना
  1883. 2:44:19पड़ेगा। इसके लिए तहरीक भी हमें खुद ही करनी पड़ेगी। उसके लिए आपको एप्लीकेशन ऑफ
  1884. 2:44:25इस्लाम आपकी अपने मुआशरे में अलग लेवल पे जो डिस्कस जो डिस्कशन हुआ हालांकि हम
  1885. 2:44:30अप्लाइड इस्लामिक्स का बहुत ज्यादा जिक्र नहीं कर पाया जो वालिद साहब का फ्रेमवर्क
  1886. 2:44:33लेकिन क्योंकि मैंने अभी उनका पॉडकास्ट किया है वो एनीवेज इंडिपेंडेंटली आ रहा
  1887. 2:44:37है। तो कोशिश ये हमें करनी है कि हम इस तरह की
  1888. 2:44:42कन्वर्सेशंस नहीं इस तरह के सिस्टम्स कि जहां पे हम एक्चुअली अपने राइट्स को गिवन
  1889. 2:44:47द फैक्ट दैट वी हैव प्रिविलेज इन गेटोस। हम
  1890. 2:44:50आपका पिटिकल रिप्रेजेंटेशन यहां से हो पा रहा है। अगर एक बंदा भी आपका यहां पर है
  1891. 2:44:55अगर आप उसको भी ब्रीफ नहीं कर पा रहे हैं कि आपको इशूज़ कैसे रेज करने हैं
  1892. 2:45:00तो ये उसका नहीं आपका फेलियर है। दिल्ली इज अ प्रिविलेज गेट हो।
  1893. 2:45:05हम यहां के हिंदुस्तान के बहुत जहीन लोग रहते
  1894. 2:45:09हैं, प्रोफेशनल्स रहते हैं। एकेडमिक्स रहते हैं, एक्टिविस्ट रहते हैं।
  1895. 2:45:13यहां पे हिंदुस्तान की टॉप मुस्लिम जमातों के दफ्तर हैं।
  1896. 2:45:16जी। मुसलमानों के टॉप एनजीओस के दफ्तर है। हम
  1897. 2:45:20तो यहां से तो आपका एक्सपेक्टेशन रहेगा ना। जी।
  1898. 2:45:23तो इसकी तरफ मेरा इशारा है कि ये ये एक मोरल डिके आप यू आर हैप्पी
  1899. 2:45:30विद मच लेस देन व्हाट द कम्युनिटी डिर्व। बिकॉज़ आपका उसमें चल जा रहा है।
  1900. 2:45:37ये चैलेंज हमें खुद पूरा करना पड़ेगा। दैट इज व्हाट आई बिलीव। और उसके लिए बहुत
  1901. 2:45:41स्ट्रगल है। उसके लिए सबसे पहले थ्योरेटिकल स्ट्रगल है कि आप अपने वजूद को
  1902. 2:45:47अपनी जो कलाम है या जो आपका टेक्स्ट है या उसकी रीजनिंग है उसके थ्रू एक्चुअली आप
  1903. 2:45:54एक्शनेबल बना सकें। हम जी वो जो कॉम्प्लेक्स रियलिटीज़ जिन तरह के
  1904. 2:45:58नेशन स्टेट्स के डिस्कोर्सेज जिस तरह की इकोनॉमिक
  1905. 2:46:02डिसएडवांटेजेस जिस तरह के पॉलिटिकल डिसएडवांटेजेस से आप
  1906. 2:46:06डील कर रहे हैं हिस्ट्री में कभी भी कोई भी कम्युनिटी विदाउट स्ट्रगल ऊपर नहीं
  1907. 2:46:11आइए। जिस ट्रॉमा से हम गुजर रहे हैं उस ट्रॉमा का इलाज यही है कि आप होपलेस ना
  1908. 2:46:16हो। जी
  1909. 2:46:17तब तक आप चेंज नहीं ला सकते। नहीं मेरे ख्याल से काफी लंबी गुफ्तगू की
  1910. 2:46:22हमने। बहुत सारे टॉपिक्स को एड्रेस किया। अली भाई वी वेंट फ्रॉम
  1911. 2:46:28वी स्टार्टेड एक्चुअली वी डिस्कस्ड टू मेजर क्वेश्चंस जो हमने स्टार्टिंग में
  1912. 2:46:34पिक किए थे और उन्हीं दोनों क्वेश्चंस को वी हैव
  1913. 2:46:38ट्राइड टू एक्सपेंड या आप ये कहें कि उनको तोड़ मरोड़ के वी
  1914. 2:46:44डिस्कस्ड इट इन डिफरेंट कॉन्टेक्स्ट। काफी अच्छी कन्वर्सेशन रही।
  1915. 2:46:48अल्हम्दुलिल्लाह वी डिस्कस फिलॉसोफी साइंस वी डिस्कस्ड बिट ऑफ थियोलॉजी इकोनॉमिक्स
  1916. 2:46:57अच्छा है काफी रिच कन्वर्सेशन अल्हम्दुलिल्लाह रही एंड आई थिंक इस तरीके
  1917. 2:47:02की कन्वर्सेशंस जरूरी हैं।
  1918. 2:47:07अ इसलिए भी जरूरी हैं सो दैट
  1919. 2:47:12हमारे कन्वर्सेशंस का स्टैंडर्ड बढ़े। मुस्लिम लीगसी जो है बहुत एक्स्ट्रा
  1920. 2:47:20ऑर्डिनरी है। इमाम शाफई वाज़ मेड वेरी एट अ वेरी यंग एज
  1921. 2:47:26अ मुफ्ती। ही वाज़ नॉट इवन 15 इफ आई एम नॉट रोंग। है ना?
  1922. 2:47:32बाय द टाइम ही वेंट टू इमाम मालिक टू स्टडी। उनकी मां ने जब उनको भेजा था।
  1923. 2:47:41बहुत छोटी उम्र थी। 13 14 साल की उम्र थी। एंड ही हैड ऑलरेडी
  1924. 2:47:46कंप्लीटेड द एंटायर थिंग जो उस वक्त की एकिस्टिंग थी।
  1925. 2:47:52इमाम बुखारी ने जो किताब लिखी जो
  1926. 2:47:57साइंस ऑफ द हदीस नैरेटर्स ही रोट इट एट अ वेरी यंग एज
  1927. 2:48:06और दैट बुक इज स्टिल कंसीडर्ड द बेस्ट बुक ऑन
  1928. 2:48:13दैट हम सब्जेक्ट
  1929. 2:48:16प्रोफेस वसल्लम ने अपने इंतकाल से पहले एक एक्सपडिशन को भेजा था जिसमें जिसका लीडर
  1930. 2:48:24इयर्स के थे जो कमांडर था वो
  1931. 2:48:2617 साल 17 साल के थे
  1932. 2:48:29और प्रॉफिट सल्ल वसल्लम की इंतकाल के बाद लोगों का यह हुआ कि भाई उस एक्सपिडिशन को
  1933. 2:48:37ना भेजा जाए या अगर भेजा जाए तो कमांडर चेंज कर दिया जाए क्योंकि बच्चा है वह
  1934. 2:48:44वो बहुत कम उम्र है। तो उस वक्त हजरत अबू बकर ने यह कहा कि आई कैन नॉट डू दैट।
  1935. 2:48:53व्हाटएवर प्रॉफिट डड आई कैन नॉट अनडू दैट। हजरत उमर नहीं चाहते थे कि वो
  1936. 2:48:58एक्सपेक्टेशन पे क्योंकि उनको लगा कि नौजवान हैं।
  1937. 2:49:01शायद उतने राइज़ नहीं होंगे मिलिट्री स्ट्रेटजी को लेके।
  1938. 2:49:04एक बड़ी इंटरेस्टिंग चीज जो मैंने देखी है। एंड आई थिंक वी कैन प्रोबेबबली एंड ऑन
  1939. 2:49:09दिस। वी कैन हैव अ सेपरेट कन्वर्सेशन ऑन समथिंग एल्स आल्सो
  1940. 2:49:14जो द मोस्ट फेमस बायोग्राफी ऑफ़ द प्रॉफेट
  1941. 2:49:20प्रॉफेट सल्ल वसल्लम एटलीस्ट फ्रॉम द मुस्लिम पर्सपेक्टिव इज़ अल रही मखतूम
  1942. 2:49:30उस बायोग्राफी को अगर आप पढ़ेंगे उसमें बड़ी इंटरेस्टिंग चीज है। अगर आप प्रॉफम की
  1943. 2:49:34एक्सपेडिशन को देखेंगे ना जो
  1944. 2:49:40जैसे आप कहें साहब जंगे बदर है फिर ओहद है खंदक है फिर उसके बाद माइनर
  1945. 2:49:49एक्सपिडिशंस हैं। ठीक है? अगर आप गौर से उनको देखें। सिर्फ दो चीज
  1946. 2:49:55पे आप फोकस करें। एक हु इज लीडिंग दैट एक्सपेडिशन।
  1947. 2:50:03एंड दूसरा हु इज होल्डिंग दी फ्लैग। फ्लैग सबसे इंपॉर्टेंट है। वही सिंबल है।
  1948. 2:50:10फ्लैग नीचे है तो इसका मतलब दी आर्मी इज़ डीमोरलाइज्ड या हार गई। तो दो लोग हैं। एक
  1949. 2:50:15कमांडर है और एक फ्लैग बियरर है। इफ यू लुक एट इट एंड इफ यू फोकस ऑन इट
  1950. 2:50:22यू विल बी सरप्राइज्ड। बिकॉज़
  1951. 2:50:28ही इज़
  1952. 2:50:32सेंडिंग डिफरेंट पीपल ऑलमोस्ट इन ऑलमोस्ट इन एव्री एक्सपेडिशन।
  1953. 2:50:39हम्म देयर इज़ नो सिंगल कमांडर। देयर इज़ नो
  1954. 2:50:44सिंगल पर्सन हु होल्ड्स द फ्लैग। ठीक है? दैट्स वन थिंग।
  1955. 2:50:49बट व्हाट इज फार मोर इंटरेस्टिंग इज द अमाउंट ऑफ
  1956. 2:50:56फेथ एंड ट्रस्ट
  1957. 2:51:00ही हैज़ इन हिज ओन पीपल तुमको कमांडर बना दिया जाओ
  1958. 2:51:07क्या होगा जीतोगे हारोगे अल्लाह के हाथ में है
  1959. 2:51:12बट ही हैस दैट काइंड ऑफ ट्रस्ट कि ही इज नॉट दिस इज अ प्रॉफिटिक ट्रेडिशन
  1960. 2:51:19वेयर ही इज़ नॉट डिस्क्रिमिनेटिंग या डिस्टिंग्विशिंग
  1961. 2:51:23कि यह ज्यादा काबिल आदमी इसको होना चाहिए। यह कम काबिल आदमी इसको होना चाहिए। आप
  1962. 2:51:28अक्रॉस देखेंगे कि मतलब द काइंड ऑफ ट्रेनिंग, द काइंड ऑफ़ एंगेजमेंट ही हैज़
  1963. 2:51:33विद पीपल इज़ ऑफ अ वेरी डवर्स टाइप। यही वजह है कि उनके इंतकाल के बाद ऑलमोस्ट
  1964. 2:51:41एवरीवन बिकम्स अ लीडर। बिकॉज़ ही इज़ नॉट फोकसिंग ऑन वन।
  1965. 2:51:47एंड द काइंड ऑफ ट्रस्ट ही हैज़ ऑन पीपल गिव देम सो मच ऑफ कॉन्फिडेंस
  1966. 2:51:55कि भाई मैं तो जाकर कर सकता हूं। 17 साल का लड़का आप अगर एक्सपेडिशन को अगर भेज रहे
  1967. 2:52:00हैं आप समझ रहे हैं कितना बड़ा यू आर टेकिंग रिस्क
  1968. 2:52:05बाई मेकिंग हिम द कमांडर। 17 साल के लड़के को क्या मालूम।
  1969. 2:52:10बट तो आई थिंक वो जो एक लीगसी है ना वी हैव वी आर लूजिंग दैट लीगसी। हमारे यहां
  1970. 2:52:17जो टॉप में लोग हैं वो वो नेक्स्ट जनरेशन पे ना उनका इतना ध्यान
  1971. 2:52:27है। अनफॉर्चूनेटली वो स्पेस भी नहीं है।
  1972. 2:52:31वो नर्चरिंग भी नहीं है। वही 5 7 10 लोग हैं।
  1973. 2:52:37बड़ी कॉरपोरेशंस, बड़ी ऑर्गेनाइजेशंस जो हैं वो हमेशा अपने सक्सेसर को ग्रूम करती
  1974. 2:52:44हैं। मुझे याद है कोई हार्व यूनिवर्सिटी का कोई
  1975. 2:52:48कमेंसमेंट देख रहा था मैं तो उसमें जो
  1976. 2:52:54स्टार्ट कर रहा था कम लेडी थी बहुत जबरदस्त बात बोली उसने कहा कि यू नो
  1977. 2:53:02वी आर हावर्ड वी आर नोन टू प्रोड्यूस
  1978. 2:53:07लीडर्स वी आर नोन टू प्रोड्यूस बिग पीपल वी हैव प्रोड्यूस बिग पीपल इन द पास्ट बट
  1979. 2:53:15वी आर हार्व। वी लुक एट द फ्यूचर। वी डोंट लुक एट द पास्ट। तो जो आपने बात
  1980. 2:53:23कही वो एक्चुअली बहुत इंपॉर्टेंट बात है कि अल्लाह के रसूल वसल्लम की जिंदगी में
  1981. 2:53:28ही उन्होंने वो रिस्क और वो ट्रस्ट शो करा और उन्हें
  1982. 2:53:35पता था कि आप नर्चर और कल्टीवेट जब करते हैं फ्यूचर जनरेशंस को जब उनको मौका मिले।
  1983. 2:53:41जी एक्ट करने का, रिएक्ट करने का, कुछ चीजें
  1984. 2:53:44एक्सपेरिमेंट करने का। अनफॉर्चूनेटली हमारे यहां अक्रॉस द बोर्ड
  1985. 2:53:50लीडरशिप ट्रांसफर का कोई प्रोग्राम ही नहीं है।
  1986. 2:53:54कोई नर्चरिंग ही नहीं है। कोई सेकंड जनरेशन लीडरशिप नहीं है। आप कहीं पे भी
  1987. 2:53:58चले जाइए। आपको यह दिखेगा कि जो बड़े पोजीशंस पर लीडर्स हैं, बड़ी-बड़ी मिली
  1988. 2:54:06तंजीमों में उनके साथ कोई भी नौजवान आपको बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट पोजीशन में
  1989. 2:54:13हां, सेक्रेटरी की तरह आप उनको ले जाएंगे। किसी एक उस तरह ले जाएंगे। बट एज कि भ
  1990. 2:54:18नहीं यू आर हियर टू लीड। जी।
  1991. 2:54:21यू आर हियर टू सी फ्रॉम ए वेरी डिसाइसिव पर्सेक्टिव। व्हाट नीड्स टू बी डन और यू
  1992. 2:54:25कंट्रीब्यूट। आपका डिसीजन हो सकता है। इट इज नॉट हैपनिंग। किसी भी इदारे में यह
  1993. 2:54:33नहीं पता कि कल को कोई उनका लीडर चला जाए तो क्या होगा उस इदारे का?
  1994. 2:54:39और जो आपने एग्जांपल दिया ना कि प्रॉफेट सल्ल वसल्लम के वफात के बाद
  1995. 2:54:43देयर वर 100्स ऑफ लीडर्स जो डोमेन में भी लीड कर
  1996. 2:54:48रहे थे। उनके जनरल कैपेसिटी भी थी। लेकिन उनके बीच में इतना कंसेंस और
  1997. 2:54:53अंडरस्टैंडिंग भी था कि आपको किस तरह से कम्युनिटी को शेप करना है।
  1998. 2:54:58वो ट्रस्ट वो न्चरिंग वो विज़ वो कंप्लीटली ऑफ कोर्स ही इज़ अ परफेक्ट
  1999. 2:55:04मैन। जिस तरह से उनको अल्लाह ने नवाजा है उस काबिलियत से उस तरह से हमारे यहां नहीं
  2000. 2:55:10होगा लोग। लेकिन वो छोटी सी भी कैपेसिटी में अगर हम नर्चर कर पाते तो शायद डिफरेंस
  2001. 2:55:15होता। तो खैर मुझे लगता है क्योंकि कन्वर्सेशन बहुत लंबी हो गई है।
  2002. 2:55:19नहीं बहुत अच्छा लगा अली भाई और इंशाल्लाह वी विल कंटिन्यू दिस कन्वर्सेशन और आई
  2003. 2:55:23थिंक दिस इज़ देयर इज अ नीड टू टू डू दिस काइंड ऑफ जिसको कहते हैं ना
  2004. 2:55:27सीरियस डिस्कशन। तो बस मैं भी इस पे एंड करना चाहूंगा
  2005. 2:55:30क्योंकि फॉर मी इट वाज़ अ फर्स्ट ऑफ अ काइंड ओपोरर्चुनिटी।
  2006. 2:55:35तो आपसे बात हुई तो आपने बोला इस तरह का होना चाहिए कन्वर्सेशंस हम सबके बीच में
  2007. 2:55:39भी वेयर आई कुड आल्सो एक्सप्रेस जो मेरे दिमाग में मेरे ज़हन में है। मैं
  2008. 2:55:43यूजुअली इस तरफ से सवाल पूछ रहा होता हूं। आज मुझे
  2009. 2:55:47जवाब देने का मौका मिला और मैं अपने हमारे व्यूअर्स को ये बताना
  2010. 2:55:51चाहूंगा कि ये हमारी एक अब एक स्ट्रेटजी का हिस्सा है कि किस तरह से हम
  2011. 2:55:56सब मिलके कुछ कन्वर्सेशंस हम वो तो है ही कि हम लोग बाहर लोगों से इंगेज करेंगे। जी
  2012. 2:56:02लेकिन बहुत सारे चैलेंजेस यह जनरेशन खुद फेस कर रही है। तो हम कोशिश करेंगे कि यंग
  2013. 2:56:08लोगों को या हम आपस में कई बार डिस्कस कर रहे हैं या फिर और लोग हैं जिनसे हम
  2014. 2:56:13डिस्कस कर रहे हैं। नाउ में भी और सीनियर लोग हैं जावेद जमील साहब हैं। बसरा खानम
  2015. 2:56:18मोस्ट प्रोबब्ली विल जॉइन। तो ये हम सिलसिला शुरू करें के डीप कॉन्वर्सेशंस हम
  2016. 2:56:23पैरेलली करें। जी ताकि जो लोग इंटरेस्टेड हैं इस तरह की
  2017. 2:56:28कॉन्वर्सेशंस में उनको एक विंडो मिले कंज्यूम करने का इंटरेक्ट करने का और
  2018. 2:56:35इंडियन कॉन्टेक्स्ट में जो दुनिया में मुस्लिम डिबेट्स हो रही हैं वो उस डेप्थ
  2019. 2:56:39के साथ नहीं हो रही हैं। हो सकता है कि इस तरह की कन्वर्सेशन हो तो और भी लोग इसको
  2020. 2:56:45आगे बढ़ाएं और लोग कर भी रहे होंगे। हम लोग के नजर से सब कुछ नहीं गुजरता है। जिस
  2021. 2:56:51तरह हमें सब नहीं देख रहे हैं। हम भी सब कुछ नहीं देख पा रहे हैं। बट ये एक हमारा
  2022. 2:56:55एक पर्पस है इस कन्वर्सेशन को करने का। बहुत शुक्रिया। बहुत शुक्रिया।
  2023. 2:57:00वालेकुम। अस्सलाम वालेकुम।

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