Muslim Identity & the Nation-State: Critiquing Wael Hallaq — Transcript
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- 0:00मैं वही कह रहा हूं कि कॉन्सेप्चुअल कैटेगरीज डिफरेंट फॉर्म्स में हो सकती है
- 0:03ना। मैं ये कह रहा हूं कि जो ये कॉन्सेप्चुअल कैटेगरी है अभी नेशन स्टेट
- 0:06की वो इनसफिशिएंट है जो हो रहा है उसको
- 0:08डिफाइन करने की उसको एक्सपैंड करने की जरूरत है जो होता है।
- 0:11दैट आई अंडरस्टैंड हलाक एक पर्टिकुलर वे में उस कंसेप्चुअल
- 0:15कैटेगरी को खड़ा कर रहा है और इस्लामिक कंसेप्चुअल कैटेगरी को भी एक पर्टिकुलर वे
- 0:20में खड़ा कर रहा है कि एक खिलाफत के फॉर्म में ना तो वह उस रियलिटी में उस तरह
- 0:24एग्जिस्ट किया वो भी एक डायनेमिकल प्रोसेस के थ्रू एक एंड तक आता है। और यहां पे भी
- 0:28उस तरह का स्टेट्स एक्सिज़िस्ट नहीं करता है। तो जो दो आइडियाज के बीच में रीजनिंग
- 0:32हो रही है वो आइडियाज हाइपोथेटिकल है। जमीयत उस वक्त भी कहती थी कि हम
- 0:37हिंदुस्तान के साथ हैं। आज भी कहती है। पर्सनल लॉ बोर्ड के किसी भी आलिम ने कभी
- 0:42ये नहीं कहा कि भाई हम जो है वो पाकिस्तान जाना चाहते हैं। देवबंद मूवमेंट जो है
- 0:47उसने बड़ा जो है इंडियन इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल में पार्टिसिपेट किया है। थ्यरी
- 0:52सारी कंस्ट्रक्ट हो रही है उस टाइम जब आपके पास रिलेटिव फ्रीडम है। इसलिए जमीयत
- 0:56भी बन रही है। जमात भी बन रही है। एएमयू भी बन रहा है। जामिया भी बन रहा है, नदवा
- 1:00भी बन रहा है। मोस्ट इंडिपेंडेंट इंडिया में कोई मेजर तहरीक जो ओरिजिनल हो, कोई
- 1:06मेजर मूवमेंट जो ओरिजिनल हो, डेरिवेटिव ना हो, डेरिवेटिव मूवमेंट्स तो बहुत हैं। जो
- 1:11नेशन स्टेट है इट डेवलप्ड ऑन द जडियो क्रिश्चियन ट्रेडिशन। तो ऐसा नहीं है कि
- 1:17इट डस नॉट हैव दी स्पिरिचुअल एलिमेंट। इट हैज़ दी स्पिरिचुअल एलिमेंट बट ऑफ अ
- 1:23डिफरेंट टाइप। जैसे लिबरल्स जो हैं या कम्युनिस्ट हैं जो उनका क्लेम है अपनी
- 1:28मोरालिटी को अपने पैराडाइम में वो ट्रांसशनल है कि नेशन स्टेट कोई भी हो
- 1:33सकता है। वो प्रिंसिपल्स जब अप्लाई होंगे तो इस तरह की सोसाइटी कंस्ट्रक्ट होनी
- 1:37चाहिए। मुसलमान वो क्लेम नहीं कर पा रहे। लेकिन अब यह जो कंट्री
- 1:43जिस डायरेक्शन में जा रहा है वो डायरेक्शन हमारे लिए एलियन डायरेक्शन है। हमने ये
- 1:50नेगोशिएट कभी नहीं किया था कि इस तरीके का वायलेंस होगा हमारे खिलाफ। तो प्रॉब्लम ये
- 1:56आती है कि जब हम लोग स्टेट को एक कंस्ट्रक्ट में लाते हैं और वो फिलॉसफी
- 2:02जो आप उसमें कंस्ट्रक्ट कर रहे हैं इंपोज करते हैं कि एज इफ स्टेट में सोवनिटी
- 2:08एक्सिस्ट नहीं करती थी। इस तरह से वो पहली बार नेशन स्टेट में हुआ। ऐसा नहीं है।
- 2:11मेरा यही चैलेंज है हलाक को। आर मुस्लिम्स इन इंडिया लिविंग इन अ स्टेट
- 2:15ऑफ़ एक्सेप्शन? जो जिम्मेदारी स्टेट की है आप वो
- 2:19एग्जीक्यूट नहीं कर सकते। जिस लेवल ऑफ इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। आप टैक्स पेयर
- 2:23भी हैं। आप सेल्स टैक्स भी दे रहे हैं। आप बाकी भी चीजों में कंट्रीब्यूट कर रहे
- 2:27हैं। उसके बाद आपको बोला जाए आप गेटों में हैं। आप सड़क भी बनाइए। तो इन ऑन द बेसिस
- 2:31ऑफ़ ऑल ऑफ़ द डिस्कशन जो हमने जो डिस्कशंस किए हैं आपकी अंडरस्टैंडिंग में वेयर डू
- 2:38वी फॉल? जो कलाम की डिबेट 400 साल पहले हुई शाह वली उल्ला देहलवी ने करी या फिर
- 2:43उनसे पहले करी। आज की डेट में मैथमेटिकल क्लेम्स टू लॉजिक एक्सपेंड हो गया। मंतिक
- 2:48एक्सपैंड हो गया है। आपका चाहे विज़न सेम रहे लेकिन आपको फिर से सिंथेसाइज करना
- 2:54पड़ेगा। लार्जर बॉडी ऑफ़ नॉलेज में प्रिंसिपल्स ऑफ इस्लामिक अंडरस्टैंडिंग ऑफ
- 3:00रियलिटी वो नहीं है।
- 3:16नाउस एक इंडिपेंडेंट थिंक टैंक मीडिया प्लेटफार्म है जो माइनॉरिटी और ह्यूमन
- 3:20राइट्स के इशूज़ पर रिसर्च और एविडेंस बेस्ड कन्वर्सेशंस को एंपलीफाई करता है।
- 3:26इसे और मजबूत बनाने के लिए नाउ को सब्सक्राइब करें और सपोर्ट करें। हम लोग
- 3:32आज एक नया सीरीज शुरू कर रहे हैं। वी आर कॉलिंग इट एस कॉन्वर्सेशंस जहां पर हम
- 3:39लोगों को बुला के उनसे बातें करेंगे और इट विल बी मोर फ्री फ्लोइंग इट विल बी मोर
- 3:46इंटरेक्टिव इंशाल्लाह। और हमारे सामने आज अली जावेद साहब हैं जो चीफ एग्जीक्यूटिव
- 3:54ऑफिसर हैं नाउस नेटवर्क के। अह नाउ नेटवर्क के बारे में लोग ज्यादातर जानते
- 3:59हैं। अह जो भी वीडियोस आते हैं, बड़े इनफेटिव होते हैं। बल्कि कई लोगों का यह
- 4:06कहना है कि इज वन ऑफ द मोस्ट इमर्जिंग मीडिया प्लेटफॉर्म्स इन इंडिया।
- 4:10अल्हम्दुलिल्लाह। वी हैव हैड मेनी कन्वर्सेशंस। हमारी आपकी भी बात हुई है
- 4:14अली भाई। तो नाउ वी आर गोइंग टू स्टार्ट दिस कॉन्वर्सेशन और इसमें वी आर गोइंग टू
- 4:20स्टार्ट विद अली भाई। जो हमारी आपकी पहले बातचीत हो चुकी हैं कई चीजों पे।
- 4:27हमने फिलॉसफी डिस्कस की है, थ्योरी डिस्कस की है।
- 4:32हमने मुस्लिम आइडेंटिटी के इश्यूज को डिस्कस किया है। है ना?
- 4:37इस्लामिक पैराडाइम को डिस्कस किया है। मेटाफिजिक्स है। ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिस
- 4:43पे आपके कुछ आइडियाज हैं। हमने डिस्कस भी किया है। काफी कुछ इस पे
- 4:48मेरा ख्याल है कि आपने डेवलप भी किया है। यू नो दी अदर डे यू हैव अ पर्टिकुलर मॉडल
- 4:54जिस पे आप बता रहे थे, एक्सप्लेन कर रहे थे। सो आई थिंक उन चीजों पे भी हम बात कर
- 4:59सकते हैं। प्रोबेबबली नॉट इन दिस कन्वर्सेशन प्रोबेब्ली इन द फ्यूचर
- 5:03कन्वर्सेशंस। इस कन्वर्सेशन को हम लोग थोड़ा सा ग्राउंडेड रखेंगे। इनिशियल
- 5:08कन्वर्सेशन है क्योंकि और जैसा हमने पहले डिस्कस किया है कि हम इस
- 5:14कॉन्वर्सेशन को और एक्सपेंड करेंगे और लोगों के को इसमें इंक्लूड करेंगे।
- 5:21मुख्तलिफ चीजों पर डिस्कस करेंगे और चीजों को एक डिफरेंट पर्सपेक्टिव से समझने
- 5:28की कोशिश करेंगे। क्योंकि जनरली जो नाउस के वीडियो के जो प्लेटफार्म है उस पे
- 5:34हम करंट इश्यूज पे बातें करते हैं। यू नो और जो इमर्जिंग प्रॉब्लम्स हैं उस पे
- 5:41बातें कर रहे हैं। कंटेंपरेरी इश्यूज जो हैं उस पे बातें कर रहे हैं। बट आई थिंक
- 5:47कॉन्वर्सेशंस आर गोइंग टू बी मोर मोर ग्राउंडेड इन
- 5:53द अंडरस्टैंडिंग ऑफ थिंग्स इन अ मोर थ्योरिटिकल सेंस। है ना? थ्योरी है,
- 5:57फिलॉसफी है। इन चीजों में थियोलॉजी है उन चीजों में करेंगे। पहला क्वेश्चन जो मेरा
- 6:03होगा वो वो यह है कि सी यू हैव एन एकेडमिक बैकग्राउंड है ना यू
- 6:11कम फ्रॉम जेएनयू आपने वहां से एमफिल किया है। कुछ सोच के आपने नर्वस नेटवर्क आपने
- 6:18और आपके लोगों ने टीम ने डेवलप किया था। वो कुछ फिलॉसफी रही होगी। कुछ ना कुछ
- 6:26अंडरस्टैंडिंग रही होगी। और वो अंडरस्टैंडिंग कहीं ना कहीं
- 6:31मुस्लिम्स इन इंडिया से रिलेट करती होगी। कंटेंपररी मुस्लिम प्रॉब्लम से रिलेट करती
- 6:37होगी। फॉर एग्जांपल जस्टिस का इशू है। इनकलिटी का इशू है। मार्जिनलाइजेशन का इशू
- 6:44है। वायलेंस का इशू है। है ना? कहीं ना कहीं ये चीजों में वो जिसको कहते हैं
- 6:50इंटरसेक्ट करती है। जिस जैसी हमारी आपके डिस्कशन हुए हैं पहले। तो आई जस्ट वांट टू
- 6:55अंडरस्टैंड एस द फर्स्ट क्वेश्चन कि मुस्लिम आइडेंटिटी
- 7:03एक तो प्रॉब्लम है कि मुस्लिम आइडेंटिटी का
- 7:08कॉम्प्रिहेंशन। ठीक है? कि मुस्लिम आइडेंटिटी का कंस्ट्रक्शन कैसे हो? दैट्स
- 7:14वन प्रॉब्लम। दूसरी प्रॉब्लम है मुस्लिम आइडेंटिटी का कंस्ट्रक्शन और रियलाइजेशन
- 7:20इंडियन कॉन्टेक्स्ट में कैसे हो? यह दूसरी प्रॉब्लम है। आई एम पुटिंग अप दिस
- 7:26क्वेश्चन टू यू बिकॉज़ अ ऑफ वन ऑफ द मोस्ट फेमस आइडियाज जिसको
- 7:35प्रोफेसर वाइल बिल हल्लाक ने यू नो लिखा है और प्रमोट किया है वो ये कि
- 7:43जो जो मुस्लिम अंडरस्टैंडिंग है ऑफ कम्युनिटी ऑफ ऑफ देयर ओन सेल्फ
- 7:49जिसको आप कहें चाहे उसको आप खुद ही कहें इकबालिक इकबाल के सेंस में या आप जिसको आप
- 7:54उसको कौम कहें या फिर आप इसको उम्मा कहें उसको नेशन स्टेट में रियलाइज करना मुश्किल
- 8:01काम है। एंड प्रोबेबबली इंपॉसिबल है जो एक टेंपलेट है द इंपॉसिबल स्टेट की। तो उस
- 8:08कॉन्टेक्स्ट को या उस बैकग्राउंड को ज़हन में रखते हुए दीज़ आर द टू क्वेश्चंस आई
- 8:13हैव। वन हाउ डू यू लुक एट द कंस्ट्रक्शन ऑफ़ मुस्लिम आइडेंटिटी इन जनरल सेंस इन अ
- 8:19नेशन स्टेट? एंड नंबर टू हाउ वुड यू अंडरस्टैंड कि एक मुस्लिम की आइडेंटिटी
- 8:25इंडिया में कैसे कंस्ट्रक्ट होगी या होनी चाहिए या हुई है एंड प्रोबेब्ली वी कैन
- 8:30स्टार्ट फ्रॉम देयर? ये बहुत इंपॉर्टेंट दो सवाल हैं। तो पहले मेरा जो फोकस रहेगा
- 8:36वो क्योंकि आपने वाइल हल्लाक की बात की। वाइल अल्लाह को कहा जा सकता है कि मौजूदा
- 8:41दौर के वन ऑफ दी मोस्ट प्रोमिनेंट इंटेलेक्चुअल्स हैं जो
- 8:48मुस्लिम इंटेलेक्चुअल थॉट को के बारे में लिखते हैं और प्रेजेंट करते हैं। कोलंबिया
- 8:54यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं उनकी कई बहुत इंपॉर्टेंट किताबें हैं। जैसे
- 8:58रीस्टेटिंग ओरिएंटलिज्म के एडवर्ड सईद ने जब ओरिएंटलिज्म का फ्रेमवर्क सामने रखा के
- 9:05ब्राननिया हुकूमत हुकूमत हो या फिर दूसरी मुख्तलिफ वेस्टर्न हुकूमत हो जिन्होंने
- 9:10कॉलोनाइज किया दुनिया को और उस वक्त कॉलोनाइज करने में क्योंकि आप रूल कर रहे
- 9:16हैं कॉलोनी की तरह मुख्तलिफ इलाकों को दुनिया के तो आपने पावर और स्ट्रक्चर को
- 9:21इंपोज करने के लिए नॉलेज के इंस्टीटशंस भी बनाए कि जिस तरह से इल्म को और इंस्टीटशंस
- 9:27को और इदारों को एक ब्रिटिश कॉन्टेक्स्ट में या फिर फ्रेंच कॉन्टेक्स्ट में या
- 9:34मुख्तलिफ जितने भी कॉलोनाइजर्स हैं उनकी फ्रेमवर्क के कॉन्टेक्स्ट में इस तरह
- 9:39बनाया जाए कि जो कॉलोनी है जैसे हिंदुस्तान थी जैसे अफ्रीका थी बल्कि काफी
- 9:46हद तक बहुत लेट उनका इंडिपेंडेंस हुआ है। इस तरह के इदारे और इल्मी इदारे स्पेशली
- 9:52और नॉलेज सिस्टम्स प्रोड्यूस किए जाएं कि जिसमें इंडीजनस पॉपुलेशंस जो उस
- 9:57ज्योग्राफी की नेटिव्स हैं वो अपने बारे में अपनी हिस्ट्री के बारे में अपनी जो
- 10:04वजूद है एग्जिस्टेंस है आइडेंटिटी के बारे में वो उन फ्रेमवर्क्स से समझें जो
- 10:09फ्रेमवर्क्स डेवलप किए गए हैं एक कॉलोनाइजर के थ्रू या वेस्टर्न
- 10:13एनलाइटनमेंट प्रोजेक्ट के थ्रू। जब हम वेस्टर्न एनलाइटमेंट प्रोजेक्ट की बात
- 10:18करते हैं तो सामने कुछ चीजें आती हैं कि जो यूरोप है वो अपनी एक सिविलाइजेशनल
- 10:24हिस्ट्री से गुजरा। बोला जाता है कि 1000 साल के करीब यूरोप में डार्क एजेस थी।
- 10:30डार्क एजेस का मतलब यह था कि वहां पे कोई इंटेलेक्चुअल प्रोसेस नहीं हो रहा था।
- 10:35हालांकि उसी दौर में एक बड़ा तबका है, एक बड़ा अरसा है जिसको इस्लामिक गोल्डन एज
- 10:41बोला जाता है कि जहां मुस्लिम एंपायर था वहां पर एक्चुअली थॉट
- 10:45रीजनिंग इंटेले इंटेलेक्चुअल ट्रेडिशन और इवन जो इन्वेंशंस के ट्रेडिशन है थ्यरी के
- 10:52कंस्ट्रक्शन के ट्रेडिशंस हैं वो ऑनगोइंग थे बट वेस्ट में नहीं था
- 10:56तो वेस्ट में एक तरीके से एक एपिसोड शुरू हुआ जिसमें लोगों ने सोचना शुरू करा वापस
- 11:03उस लंबे ट्रेडिशन में रेफरमेशन रेनेसों और फिर एनलाइटनमेंट कि जहां पे यह बात रखी गई
- 11:11कि जिन ट्रेडिशनल तरीकों से दुनिया या इंसानियत अपने आप को अपने रिलेशन को
- 11:20दुनिया और दूसरों के कॉन्टेक्स्ट से सोचती है, समझती है। उसमें अब तक जो रिलीजियस
- 11:27टेक्स्ट्स हैं या जो ट्रेडिशनल वैल्यू सिस्टम्स हैं उनको यह समझा गया कि वो सही
- 11:33तौर से रिप्रेजेंट करते हैं कि सिविलाइजेशंस ऑर्डर में कैसे आती हैं।
- 11:38उसके बनिस्बत अक्ल को, रीजन को, आपकी एविडेंस को और एक मेथड जिससे अक्ल और
- 11:48एविडेंस को कंबाइन करके एक टेंपरामेंट जिसे साइंटिफिक मेथड बोला गया। उसको वजूद
- 11:55में लाया जा लाया जा सके, जो अल्टीमेटली इस दुनिया को समझने का एक फ्रेमवर्क होगा।
- 12:00तो, एक लंबा अरसा था कि जिसमें, यह जब कोई भी डिबेट शुरू होती है और क्योंकि दुनिया
- 12:06गॉडली वर्ल्ड था। मतलब लोग अक्सर कोई अल्लाह का वजूद कहेगा, कोई भगवान
- 12:13बोलेगा, कोई बुद्धा बोलेगा, कोई अलग-अलग ट्रेडिशंस में एक हायर
- 12:19एग्जिस्टेंस और अथॉरिटी की अंडरस्टैंडिंग होती है या होती थी। वो चैलेंज होनी शुरू
- 12:25हुई। शुरू में इस तरह नहीं कि भई वह अथॉरिटी हो नहीं सकती। यह डिबेट होनी शुरू
- 12:31हुई कि अकल और एंपेरिकल फैक्ट्स और ट्रेडिशनल नॉलेज जो इंट्यूशन के थ्रू आ
- 12:39सकती है, जो गॉड की ट्रांसमिशन के थ्रू आ सकती है वो कोएस्ट कैसे करेगी? और
- 12:45धीरे-धीरे क्योंकि जो वेस्टर्न जो प्रोजेक्ट था रीजनिंग का उनके जो अपने
- 12:51टेक्स्ट थे वो कंप्लीटली मॉडर्न साइंटिफिक प्रोग्रेस और फाइंडिंग से कई बार मेल नहीं
- 12:58खा रहे थे। जैसे डार्विन ने एवोल्यूशन की थ्योरी दी। तो लोगों ने जब बाइबल की तरफ
- 13:02देखा और बोला यहां पर तो क्रिएशनिज्म एक स्टोरी है और इस तरह से इंसान वजूद में
- 13:07आता है। इस तरह से बाकी जो मखलूकात हैं या फिर जो क्रिएशंस हैं जो डिफरेंट फ्लोरा
- 13:14है, फौना है, एनिमल्स हैं, बाकी सारी चीजें हैं वो इस तरह से वजूद में आती है
- 13:18कि कोई एक हायर एग्जिस्टेंस है जो वर्ल्ड को क्रिएट कर रही है। तो
- 13:23धीरे-धीरे जब मॉडर्न थ्यरीज जो कंस्ट्रक्ट रीजन और एविडेंस के बेस पर हो रही थी जो
- 13:28फिजिक्स के प्रिंसिपल्स हो रहे थे न्यूटॉनियन मैकेनिक्स गैलीलियो का
- 13:31प्रिंसिपल कि भाई कि अर्थ इज नॉट द सेंटर ऑफ द यूनिवर्स
- 13:36अर्थ भी एक जो यूनिवर्सल सिस्टम है जिसमें यूनिवर्स बीइंग में आ रहा है उसका एक
- 13:42हिस्सा है उसकी जरूरत नहीं है कि वो कोई बहुत स्पेशल एकिस्टेंस होगा। इसी तरह कि
- 13:48जो दुनिया है वो अक्ल के अराउंड और रीजन के अराउंड जो फ्रेमवर्क्स कंस्ट्रक्ट किए
- 13:54जा सकते हैं जो एक्सप्लेन कर रहा हो इंसान की कंडीशन को उसको दर्जा और तरजीह देनी
- 13:59जाने लगी और जो ट्रेडिशनल मेथड्स थे उनमें लोगों को गैब्स दिखने लगे।
- 14:04जी। तो इस कॉन्टेक्स्ट में धीरे-धीरे ओवर द
- 14:07पीरियड ऑफ टाइम यह हुआ कि जो एनलाइटनमेंट प्रोजेक्ट था उसमें क्योंकि जो ट्रेडिशनल
- 14:13मॉडल्स थे वो फिट नहीं हो रहे ने उनको बोला कि इनकी जरूरत नहीं है। और 19th 20th
- 14:18सेंचुरी आते-आते जब नीचा अपनी नी जो फ्रेडरिक नीच जर्मन फिलॉसोफर है वो जब लिख
- 14:24रहे हैं कि गॉड इज़ डेड। का मतलब यह था कि इन ऑल पोटेंशियल पॉसिबल वेज़ ऑफ़ लाइफ इन
- 14:30व्हिच गॉड कॉन्शियसनेस एंड लिटरेचर प्रोड्यूस अराउंड गॉड कैन कंट्रीब्यूट टू
- 14:35द प्रोग्रेस उसकी जरूरत और उसका पोटेंशियल खत्म हो गया है। सो इन ऑल पॉसिबल वेज़ जो
- 14:41गॉड की जरूरत है रियलिटी को कंस्ट्रक्ट करने में वो खत्म हो गई है। तो इस तरह से
- 14:48जो फलसफा होता है या जो आपकी फ्रेमवर्क्स होते हैं वह सिर्फ ऐसा नहीं होता है कि वह
- 14:53किस तरह से दुनिया को देखा जा रहा है उसी पे असरात होते हैं। आप किस तरह के
- 14:58इंस्टीटशंस बनाते हैं? जी
- 15:00आपका इकोनॉमिक ऑर्डर क्या होगा? जब आपने इंडिविजुअल
- 15:04रीजन सेंट्रिक दुनिया बना दी तो आपने जो मटेरियल कंडीशंस हैं उस पे भी
- 15:10सोचना शुरू करा। तो एक लिबरल मटेरियल कंडीशन को एंगेज करने के लिए जो मार्केट
- 15:16ऑर्डर होता है वह कैपिटलिज्म होता है कि भाई सब सेल्फिश हैं। लेकिन सबकी
- 15:20सेल्फिशनेस जब मिलके अपने-अपने एंड्स को अचीव करना चाह रही है तो अल्टीमेटली जो जो
- 15:26डिर्व करेगा उसको वो मिलेगा और उस तरह से जहां पे जो रिसोर्सेज डिस्ट्रीब्यूटेड हैं
- 15:32लोग वहां जाएंगे और अच्छा प्रोड्यूस करने की कोशिश करेंगे। हम
- 15:36फिर दूसरी थ्यरीज आई कि भाई कई बार ऐसा होता है कि आप यह अस्यूम कर रहे हैं कि हर
- 15:42किसी के पास फ्रीडम है। दुनिया में ताकत भी है, पावर भी है। मार्क्स बोलते हैं कि
- 15:47भाई कंट्रोल ऑफ रिसोर्सेज भी है। तो इस तरह से एक्सप्लेनेशन चल रहा था और उसका
- 15:51लबोलबाब ये हो रहा था कि इन सब चीजों को एक्सप्लेन करने के लिए हिस्टोरिकल मेथड एक
- 15:57डायलेक्टिकल प्रोसेस वो इनफ है। गॉड की जरूरत नहीं है।
- 16:01जी। और फिर जो स्टेट के इंस्टीटशंस लॉ भी धीरे-धीरे इमर्ज हो रहे थे। मैग्नाका से
- 16:07जब शुरू हुई जर्नी तो फिर लॉक, हॉब्स, रूसो अलग-अलग ट्रेडिशंस गुजरे जिन्होंने
- 16:13लीगल ट्रेडिशंस को इंटरप्रेट करना शुरू करा। तो धीरे-धीरे वहां पे भी एक आईडिया
- 16:19क्रिएट हुआ कि क्योंकि अलग-अलग जो कम्युनिटीज हैं वो अलग-अलग नजरिए से अपने
- 16:25ट्रेडिशंस और लॉ को भी देखती हैं। अगर हायर प्रोग्रेस की तरफ देखना है तो ये जो
- 16:30साइंटिफिक मेथड है या जो इसकी कंस्ट्रक्टेड सपोजिट इक्वलिटी है वही एक
- 16:35पैराडाइम और मार्कर होना चाहिए। चीजों को जज करने तो वहां पे भी
- 16:39स्टैंडर्डाइजेशन हो गया। उसके बाद यह हुआ कि स्टेट एज एन इंस्टीट्यूशन भी जब तक
- 16:45सेुलर नहीं होगा मतलब कि जब तक वो यह पोजीशन नहीं लेगा कि मैं किसी भी
- 16:50कम्युनिटी के बीच में अपनी कोई पोजीशन नहीं लूंगा। ये जो
- 16:54कम्युनिटी एग्नोस्टिक जी
- 16:57और ट्रेडिशनल वैल्यू एग्नोस्टिक जो लीगल फ्रेमवर्क बन रहा है वो जज करेगा लोगों के
- 17:02बीच में। हम तो इसको हल्लाक ने बोला कि ये वेस्टर्न
- 17:05मॉडर्निटी का प्रोजेक्ट है जो ट्रांसेंडेंटल यानी कि मटेरियल दुनिया से
- 17:11ऊपर भी कोई एकिस्टेंस हो सकती है। उसके डिनाइयल पे बना है और वो जो एथिक्स है जो
- 17:18इस तरह के ट्रेडिशनल फ्रेमवर्क से आती है जो अल्लाह के वजूद को या भगवान के वजूद को
- 17:24एक प्रिंसिपल कंपोनेंट मानती है दुनिया की एकिस्टेंस का।
- 17:28जी। तो उनके मोरल क्लेम्स भी खत्म हो जाते हैं। तो हलाक का आर्गुममेंट यह है कि
- 17:33इस्लाम जो खुद गॉड की सोवनिटी को प्रिंसिपल कंस्ट्रक्ट मानता है जिससे
- 17:38दुनिया ऐसी शक्ल ले सकती है कि वो दुनिया अच्छी होगी, जस्ट होगी, जिसमें अदल होगा
- 17:45वो पूरा का पूरा इकोसिस्टम या पैराडाइम चैलेंज हो जाता है। एक ऐसे मॉडर्न स्टेट
- 17:51के कंस्ट्रक्ट में जो यह बोलता है कि नहीं गॉड की कोई रियलिटी नहीं है। उसकी कोई
- 17:57जरूरत नहीं है। अगर आप उस चीज़ पे बिलीव भी कर रहे हो अपनी इररेशनल क्लेम्स की वजह से
- 18:02तो आप अपने पर्सनल लाइफ में कर सकते हैं। वह प्रिंसिपल्स ऑफ़ एंगेजमेंट नहीं बन
- 18:07सकता। तो उनके हिसाब से जो मटेरियल कंस्ट्रक्शन
- 18:12ऑफ सेल्फ है या रीजन है उसमें बहुत सारी ऐसी पोटेंशियल्स नहीं है कि जो मोरल लाइफ
- 18:19को कैसे गवर्न किया जाए बता सकें। तो ये दो आइडियाज एट ऑड्स हो गए। उनके लिए
- 18:25सिर्फ इस्लामिक स्टेट नहीं इवन अ हिंदू स्टेट इवन अ बुद्धिस्ट स्टेट कोई भी ऐसा
- 18:32स्टेट या आइडिया जो बिय्ड मटेरियल कंसेप्शंस को स्पेस देगा जब तक इस तरह का
- 18:40नेशन स्टेट एक्सिस्ट करता है जो सेकुलरिज्म को प्रिंसिपल मानेगा और गॉड की
- 18:46सोवनिटी या ट्रांस मटेरियल आइडियाज की सोवनिटी की पॉसिबिलिटी को डिनाई करेगा तब
- 18:52तक ये दो आइडियाज को एक्सिस्ट नहीं कर सकते। यह उनका क्लेम है।
- 18:56देखिए अली भाई आई आई अंडरस्टैंड व्हाट यू आर सेइंग। आप यू नो योर आर्गुमेंट इज दैट
- 19:00स्टेट जिसको आप नेशन स्टेट कह रहे हैं वो एक मटेरियल इंस्टीट्यूशन है।
- 19:05हल्ला कह रहे हैं। जी जी नॉट ओनली इन हलाकियन सेंस बट
- 19:09इवन इन इन अ वेरी आई वुड से इन अ वेरी फिजिकल सेंस है ना जो हिस्ट्री है नेशन
- 19:17स्टेट की वो एक्चुअली कुछ ऐसे एजम्पशंस पे बेस्ड है जो बड़े ही आई वुड से नैरो और
- 19:27मटेरियल एजम्पशनंस हैं। जैसे फॉर एग्जांपल सोवनिटी के लिए टेरिटरी होना जरूरी है।
- 19:34ठीक है? स्टेट के लिए बाउंड्री होना जरूरी है। है ना? कई सारी चीजें हैं। और इनमें
- 19:41बहुत बड़ा रोल जो है वो फिजिसिस्ट्स ने यू नो उनका है। फॉर एग्जांपल वन ऑफ़ द वन ऑफ द
- 19:48मोस्ट इंटरेस्टिंग एग्जांपल्स इज़ जब हम इंटरनेशनल लॉ पढ़ते हैं और इनफैक्ट
- 19:56इंटरनेशनल लॉ और इंटरनेशनल रिलेशंस दोनों पढ़ते हैं। तो उसमें एक ट्रीटी आती है
- 20:01ट्रीटी ऑफ़ वेस्टफेलिया है ना 1648 की और वो ट्रीटी थी बिटवीन कैथोलिक्स एंड
- 20:07प्रोटेस्टेंट्स दोनों की लड़ाई थी और वो एक ट्रीटी हुई जिससे वो चीजें सेटल हुई और उस
- 20:12ट्रीटी में बात हुई जिसको कहते हैं आप ऑटोनोमी की कि स्टेट्स ऑटोनॉमस होंगे। कोई
- 20:21जरूरी नहीं है कि आप जो है वो आईडियोलॉजी के बेसिस पे अलाइन करें। आप इंडिपेंडेंट
- 20:27हैं। आपको जिससे जो अलाइनमेंट करना है कीजिए। जैसे फॉर एग्जांपल पाकिस्तान भी
- 20:31मुस्लिम स्टेट है। अफगानिस्तान भी मुस्लिम स्टेट है। उनको जिससे अलाइन करना है वो
- 20:35करें। दे आर इंडिपेंडेंट। तो उस ट्रीटी के बाद नेशन स्टेट को एक इंडिपेंडेंट
- 20:39एग्जिस्टेंस मिलती है। और वहां से कांसेप्ट ऑफ सोवनिटी स्टार्ट होता है
- 20:45इंटरनेशनल रिलेशंस में। लेकिन ये जो ये जो इंडिपेंडेंस ऑफ स्टेट
- 20:50को सोवनिटी में ट्रांसलेशन होता है और सोवनिटी का ट्रांसलेशन जुरिसडिक्शन में
- 20:56होता है ये एक्चुअली होता है थ्रू दी वर्क्स ऑफ लीबनेस
- 21:03लाइबनेस लाइबनेस जो जिसको जो हु इज द इन्वेंटर ऑफ
- 21:07कैलकुलस अदर देन न्यूटन
- 21:10डिफरेंशियल कैलकुलस डिफरेंशियल कैलकुलस अदर दैन न्यूटन तो
- 21:13कहने का मतलब ये है कि ये जो एक नेशन स्टेट का जो एक का्सप्ट सेप्शन है। बड़ा ही
- 21:17मटेरियल है और ये ये बड़ी फिजिकल रियलिटी पे बेस्ड है। तो ऑफ कोर्स ट्रांसेंडेंटल
- 21:24और स्पिरिचुअल रियलिटी इसमें एक्सिस्ट नहीं करती। सो आई अंडरस्टैंड दैट एंड
- 21:29उसमें अगर आप एक स्पिरिचुअल एलिमेंट लेके आते हैं। जहां पे कम्युनिटी एक एक जिसको
- 21:37कहते हैं हायर बीइंग को देखती है या जस्टिस जो है वो फॉर एग्जांपल आफ्टर डेथ
- 21:42आप अस्यूम करते हैं कि साहब डेथ के बाद अल्लाह करेगा जस्टिस। जैसे डे ऑफ़ जजमेंट
- 21:46है या आप जो करेंगे उसका रिजल्ट्स आपको मिलेंगे या देयर वाज़ अ लाइफ बिफोर यू टेक
- 21:52बर्थ। ये सारी चीजें जो हैं वो उसमें मिसमैच होती हैं। ये बिल्कुल सच बात है।
- 21:58लेकिन इसमें एक एलिमेंट और है व्हिच आई थिंक इज़ क्रूशियल एंड एंड एंड देन आई थिंक
- 22:05वी विल कम टू द सेकंड क्वेश्चन दैट आई आस्क्ड यू इनिशियली जो मैंने आपसे शुरू
- 22:08में पूछा था कि मुस्लिम आइडेंटिटी कंस्ट्रक्शन इंडिया में कैसे होगा? है ना?
- 22:12सो आई विल कम टू दैट अ लिटिल लेटर बट इन बिटवीन
- 22:17आई जस्ट वांटेड टू अंडरस्टैंड कि ये जो नेशन स्टेट का जो मटेरियल
- 22:21यू नो अंडरस्टैंडिंग है जिसको आप कह रहे हैं कि स्पिरिचुअल अंडरस्टैंडिंग से ये
- 22:26मेल नहीं खाता अकॉर्डिंग टू हर लाक एंड प्रोबेबबली ये एग्जिस्ट को एक्सिस्ट नहीं
- 22:31कर पाएगा एंड दैट्स द रीज़न व्हाई देयर इज़ अ इंपॉसिबल स्टेट इंपॉसिबल नेशन स्टेट तो
- 22:36कहने का मतलब यह है कि यह जो आप जो बात बोल रहे हैं इट्स अ वेरी अंडरस्टैंडेबल
- 22:42थिंग कि इस्लामिक कंसेप्शन में नेशन स्टेट में एक कंट्राडिक्शन है। अब ये
- 22:47कंट्राडिक्शन किस लेवल का है? क्या यह इंपॉसिबल है रिकंसाइल करना या इसको
- 22:53पॉसिबिलिटी है रिकंसाइल करने की थ्रू अ पर्टिकुलर स्ट्रेटजी? दैट्स द थिंग। बट
- 22:58बिफोर वी कम टू दैट माय क्वेश्चन इज़ क्या जो नेशन स्टेट है इट डेवलप्ड ऑन द जडियो
- 23:07क्रिश्चियन ट्रेडिशन। ठीक है? जो टेंपलेट है उसकी वक्र क्रिश्चियन ट्रेडिशन है। तो
- 23:13ऐसा नहीं है कि इट डज नॉट हैव दी स्पिरिचुअल एलिमेंट। इट हैज़ दी स्पिरिचुअल
- 23:20एलिमेंट बट ऑफ अ डिफरेंट टाइप। फॉर एग्जांपल है ना? जहां पर आप गॉड की बात
- 23:25नहीं कर रहे हैं, लेकिन गॉड की बात कर रहे हैं इन अ डिफरेंट सेंस। फॉर एग्जांपल
- 23:32यू अस्यूम दैट ह्यूमन बीइंग इज क्रिएटेड इन द इमेज ऑफ़ गॉड। एंड देयर फॉर ह्यूमन
- 23:38बीइंग कैन डू व्हाटएवर गॉड वांट्स हिम टू डू। ठीक है? तो ह्यूमन एकशंस जो हैं वह
- 23:43अलाइन होते हैं गॉड के इंटेंशन से। और जैसे गॉड की लैंग्वेज यूनिवर्सल है वैसे
- 23:48ही ह्यूमन बीइंग की लैंग्वेज भी यूनिवर्सल हो सकती है। सो नेशन स्टेट उस
- 23:53यूनिवर्सलिटी पे बेस्ड है। उसी चीज पे बात करता है। तो टू से दैट इट इज़ कंप्लीटली
- 23:59मटेरियल इज़ दैट द राइट थिंग। दैट दैट्स दैट दैट इज़
- 24:04वन थिंग दैट आई वुड लाइक टू अंडरस्टैंड। तो इवन इफ इट इज़ अ सेकुलराइज़्ड मटेरियल
- 24:09कंसेप्शन इज़ इट डिवॉइड ऑफ़ द स्पिरिचुअलिटी और प्रोबेबबली जिसको आप कहें मोर
- 24:16एक्यूरेटली इज इट डिवॉइड ऑफ़ एनी थियोलॉजिकल कोनोटेशन और बेसिस असल में
- 24:22इसके दो कंपोनेंट हैं। जी
- 24:24एक इसका फिलॉसोफिकल कंपोनेंट है और एक इसका स्टेट एज एन इंस्टीट्यूशनल कंपोनेंट
- 24:29है। फिलोसोफिकल कंपोनेंट यह है कि जब हल्लाक किस तरह से इस्लामिक स्टेट या किसी
- 24:36भी ऐसे स्टेट को जो अदर देन नेशन स्टेट एक वैल्यू सिस्टम को इनकंपास करता है वो उनको
- 24:43एक तरफ रखते हैं और एक आईडिया ऑफ़ नेशन स्टेट जो एक
- 24:47फिलॉसोफिकल कंस्ट्रक्ट है जिसमें एक सर्टेन सेट ऑफ एजम्पशनंस हैं। सोवनिटी
- 24:51होगी तो ऐसी होगी किसकी सोवनिटी होगी। उसके बाद एक मेटाफिजिक्स है कि क्या
- 25:00एक्सिस्ट करता है? कैसे एक्सिस्ट कर सकता है? क्यों एक्सिस्ट करता है?
- 25:03फिर उसकी एक थ्योरी ऑफ़ नॉलेज है। एपिस्टमोलॉजी है कि आप उसको कैसे जान सकते
- 25:07हैं? क्यों जान सकते हैं? फिर उस थ्योरी ऑफ़ नॉलेज को इंस्टीटशंस में
- 25:14तब्दील करने के लिए एक मेथोडोलॉजी होगी उस एपिस्टमोलॉजी की। मेटाफिजिक्स है तो उसकी
- 25:19एकोलॉजी भी होगी कि भ मेरी एग्जिस्टेंस जो है एज अ एज अ इंडिविजुअल एज अ कलेक्टिव
- 25:26इसकी क्या रियलिटी है? कंपोनेंट्स हैं। जी।
- 25:30यह तो हो गई कि आपकी इंग्रेडिएंट्स ऑफ फिलॉसफी क्या है जिससे आप अपना वर्ल्ड
- 25:35व्यू कंस्ट्रक्ट करते हैं। अगर इसको क्योंकि आपने लाइब्स का हवाला दिया
- 25:38लाइबिट्स और न्यूटन दोनों एक ही जमाने में फिजिसिस्ट्स थे। और दोनों का एक बहुत बड़ा
- 25:46झगड़ा है। जो रॉयल इंस्टट्यूट जो है उस टाइम पर साइंस का जो सोसाइटी था
- 25:53उसमें वो झगड़ा आगे गया। न्यूटन का भी क्लेम था कि उसने कैलकुलस
- 25:58बनाया। अब्सोलुटली और लाइवनेट्स का भी क्लेम था उसने कैलकुलस
- 26:02बनाया। जी।
- 26:03न्यूटन क्योंकि एक क्रिश्चियन बिलीविंग फ्रेमवर्क से अपनी फिलॉसोफिकल
- 26:09कंस्ट्रक्शन कर रहा था तो वो एक यूनिफाइड कंटीन्यूअस मोनेस्ट रियलिटी में बिलीव
- 26:16करता था। क्योंकि क्रिश्चियनिटी में मोनोथिज्म है।
- 26:20और उस फिलॉसोफिकल कंडीशनिंग की वजह से जो कैलकुलस उसने कंस्ट्रक्ट किया वो इंटीग्रल
- 26:26कैलकुलस कहलाता है। कैलकुलस के दो हिस्से हैं। एक डिफरेंशियल कैलकुलस है।
- 26:30एक इंटीग्रल कैलकुलस है। इंटीग्रल कैलकुलस क्या करता है कि वो मैथमेटिक्स के
- 26:35प्रिंसिपल्स को इस्तेमाल करके डिफरेंसेस को इंटीग्रेट कैसे किया जा सकता है कि
- 26:41कर्व कैसे एग्जिस्ट कर सकता है? उसके ऊपर आप प्रेडिक्शंस कर सकते हैं।
- 26:47जी मैथमेटिकल मॉडलिंग कर सकते हैं।
- 26:49जी। उसके बनिस्बत जो लाइमनेट्स था उसका फलसफा उसके बिल्कुल विपरीत और ऑोजिट था।
- 26:55वो एक डीकंस्ट्रक्शनिस्ट अप्रोच थी उसकी के दुनिया जो है वो मोनड्स में एक्सिस्ट
- 27:01करती है। टूटे हुए हिस्सों में इतने छोटे-छोटे जो मोनड्स होते हैं वो
- 27:05कंस्ट्रक्शंस इन इटसेल्फ हैं। थिंग्स इन इटसेल्फ हैं जो एक पर्टिकुलर आईडिया को
- 27:10कंप्लीटली रिप्रेजेंट करते हैं। और वो एक डिसजॉइंटेड रियलिटी है।
- 27:15और उनमें कम्युनिकेशन इसलिए होता है क्योंकि एक मोनाड दूसरे मोनाड को मिरर कर
- 27:20रहा है। अब दोनों और इस वजह से उन्होंने डिफरेंस का कैलकुलस किया कि कंटिन्यूटी को
- 27:26तोड़ा कैसे जा सकता है? अब अगर आप इसको बहुत गहराई से सोचेंगे, यह मैं अपना जो
- 27:31फ्लेम फ्रेमवर्क फिलॉसफी का मेटाफिजिक्स कंस्ट्रक्ट करता हूं, उसकी बुनियादी सवाल
- 27:35है। मैं इस डिबेट को लाता हूं। मैं यह बोलता हूं कि यह जो डिबेट है, यह एक
- 27:40प्रॉब्लम ऑफ फिलॉसोफी है जो बर्टन रसेल ने भी बोला अपनी किताब में। क्या दुनिया
- 27:44कंटीन्यूअस है? या दुनिया डिस्क्रीट है, टूटी हुई है? अगर दुनिया कंटीन्यूअस है तो
- 27:51आप और मैं अलग-अलग क्यों है? यह प्रिंसिपल और
- 27:56डिफरेंस कहां से आ रहा है? और अगर दुनिया डिस्क्रीट है तो हमारे बीच में कंटीन्यूअस
- 28:02लैंग्वेज कंटीन्यूअस वर्ल्ड ये सारी चीजें जो हमें कम्युनिकेट करने दे रही हैं
- 28:08केमिस्ट्री बायोलॉजी जिसमें कंटिन्यूटी ऑफ एग्जिस्टेंस है वो कहां से आ रही है?
- 28:13जी। यह एक फंडामेंटल प्रॉब्लम है फिलॉसफी की जिसको कोई भी फ्रेमवर्क अभी तक डिॉल्व
- 28:19नहीं कर पाया। जी। क्या दुनिया इंफिनिट है
- 28:24या फिर लिमिटेड है? नहीं एक्चुअली ये जो आप बात कह रहे हैं ना आई कैन आई कैन
- 28:28अंडरस्टैंड। आई कैन गिव यू टू एग्जांपल्स जो मेरे ज़हन में आ रहा है। एक तो एग्जांपल
- 28:32है प्लेबिस और न्यूटन का जो आप बात कर रहे हैं। दोनों स्पेस को ऐसे ही डिफाइन करते
- 28:38हैं। जी। ठीक है? न्यूटन स्पेस को एज अ
- 28:42यूनिवर्सल यूनिफाइड फ्रेमवर्क में देखता है।
- 28:45यूनिवर्सल फ्रेम ऑफ रेफरेंस। हां, है उसके
- 28:47और लिबनस उसको डिस्क्रीट फ्रेमवर्क में देखता है एज बॉडीज।
- 28:50जी। ठीक है? एक तो ये है समथिंग सिमिलर इज़ द
- 28:55रिलेशनशिप बिटवीन एरिस्टोटलल एंड रेनी डिकार्थ।
- 28:58डिकार्ट। डिकार्ट
- 28:59आईडिया ऑफ़ सेल्फ ना। यस। जो बात करता है कि एरिस्टोटल सेज़ द
- 29:05नंबर्स आर डिस्क्रीट। जी। अर्थमैटिक कैन नॉट बी यूज्ड टू
- 29:09अंडरस्टैंड द वर्ल्ड। दुनिया को क्योंकि दुनिया कंटीन्यूअस है। तो अर्थमैटिक यूज़
- 29:14नहीं कर सकते। बट व्हाट रेनी डज़ इज़ ही क्रिएट्स
- 29:19कोऑर्डिनेट जहां पे वो कंटिन्यूटी दिखाता है नंबर की
- 29:24जहां पे आप थ्रू ज्योमेट्री जहां पे आप नंबर्स के थ्रू ज्योमेट्री क्रिएट कर सकते
- 29:29हैं। है ना? सो आई थिंक यू आर एब्सोलुटली राइट इन दिस। ऑफ कोर्स यू आर राइट। बट बट
- 29:35दिस इज एन एग्जांपल वेयर जहां पे आप देख रहे हैं कि डिस्क्रीट और जो कंटिन्यूटी है
- 29:42ये दोनों आपस में यू आर नॉट एबल टू रिकंसाइल
- 29:46है ना और ये डिबेट आगे बढ़ती है यूनिवर्सलिज्म में
- 29:52और पर्टिकुलैरिटी में और पर्टिकुलैरिटी में तो हाउ डू यू लुक एट
- 29:57इट? जब इस तरह के कंस्ट्रक्ट्स डेवलप होते हैं
- 30:00कि व्हाट इज एंड व्हाट व्हाट टू बी? जी तो जो हलाक की डिबेट हमने सामने रखी वो
- 30:05व्हाट ऑ टू बी की डिबेट है। जी
- 30:08कि उनकी एक पर्टिकुलर अंडरस्टैंडिंग है कि इस्लामिक गवर्नेंस क्या है?
- 30:12हम उसके एजम्पशनंस हैं। जैसे न्यूटन ने
- 30:14एजम्पशन लिया कि स्पेस कंटीन्यूअस है। यूक्लिडियन है मतलब स्ट्रेट है। ठीक है?
- 30:18उसमें आप मूव कर सकते हैं। अब्सोलुटली।
- 30:22उसको काटीज़ियन प्लेन जो आपने बोला कि टू डायमेंशनल ज्योमेट्री में मैप किया जा
- 30:27सकता है। और जब वह मैप किया जा सकता है तो उससे लॉज़ ऑफ फिजिक्स इमर्ज हो जाते हैं।
- 30:31अब्सोलुटली। अब वो जो लॉज़ ऑफ फिजिक्स के लिए जो
- 30:36अजम्पशंस उसने लिए वो लेटर आइंस्टाइन आके चैलेंज करता है।
- 30:40यस। आइंस्टाइन बोलता है कि जो मरकरी है
- 30:44हमारे सोलर सिस्टम में हम उसका एक्यूरेट पाथ नहीं हम डेवलप कर पा
- 30:49रहे। जो हमारी एविडेंस है। और जो मैथमेटिक्स है न्यूटन की उसमें कुछ
- 30:55पॉइंट्स के लेवल पर 1% या कुछ ऐसे डिफरेंस है
- 31:00और बहुत इंटरेस्टिंग मूवी है इसके ऊपर
- 31:02आइंस्टाइन एंड एडिंगन एडिंगटन की जी
- 31:05और इस पे पूरा का पूरा उनका तो आइंस्टाइन ये बोलते हैं कि जो ट्रू मैथमेटिकल थ्योरी
- 31:10होती है यूनिवर्स की उसमें एरर नहीं होता
- 31:13जी एरर दो वजह से हो सकता है
- 31:17लोगों ने उसको एक्सप्लेन करने की कोशिश की या तो एक एक्स्ट्रा प्लनेट है जो प्लनेट
- 31:22एक्स या कुछ है जो सोलर सिस्टम में दिखाई नहीं दे पा रहा है
- 31:26जिसकी वजह से ग्रेविटेशनल कांस्टेंट्स चेंज हो रहे हैं और वो मरकरी पे इंपैक्ट
- 31:30कर रहे हैं लेकिन अगर ऐसा प्लनेट है तो वो और भी
- 31:34जगह करना चाहिए उसको करना चाहिए और बाकी जगह पे उतना ज्यादा
- 31:37डिफरेंस नहीं दिख रहा है। दूसरा ये था कि जो स्पेस को आपने ये समझा कि वो
- 31:43यूक्लिडियन स्ट्रेट है ये अपने आप में एक मिसनमर हो सकता है।
- 31:47बिलकुल। क्योंकि उस वक्त तक मैथमेटिक्स के डिफरेंट
- 31:50कॉसेप्शनंस आ चुके थे। गाउस ने यह बोला कि जब उसने डेजर्ट्स को
- 31:54पढ़ने की कोशिश करी जो डेजर्ट्स के सैंड ड्यून्स होते हैं वो ऊपर नीचे होते हैं।
- 31:59हम और स्ट्रेट नहीं होते हैं। अब उसको दिक्कत
- 32:02होती है कि भ हमारे पास जो मैथमेटिक्स है वो एक स्ट्रेट ज्योमेट्री की है।
- 32:07यहां पे कर्वेचर है। ये सारी चीजें हैं। इसको मैं कैसे रीड करूं? तो उसने एक स्पेस
- 32:12की मैथमेटिकल थ्योरी कंस्ट्रक्ट की जिसमें कर्वेचर को भी
- 32:18समझा जा सकता था। तो आइंस्टाइन ने ये अस्यूम करा और भी
- 32:22मुख्तलिफ रीज़ंस थे कि हो सकता है कि स्पेस सीधा ना हो
- 32:26कर्व्ड हो। और जब उसने इस थ्योरी को इस्तेमाल करके स्पेशल थ्योरी ऑफ़
- 32:30रिलेटिविटी बनाई और बाद में जनरल थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी बनाई। उससे और सारे बहुत
- 32:34सारे भी कांसेप्ट्स आते हैं। तो वहां पे मरकरी का एक्यूरेट पाथ आ जाता है।
- 32:38जी। तो अब उसमें दो केस हुए कि न्यूटन ने अस्यूम करा कि जो स्पेस है वो स्ट्रेट है
- 32:44और आइंस्टाइन ने उसे कर्व कर दिया। अब जो स्ट्रेट स्पेस होता है वो एक पर्टिकुलर
- 32:51केस होता है कर्वेचर का कि जहां पे ज़ीरो कर्वेचर है।
- 32:55जी तो अगर आप कर्वेचर को वन कर दें या वो कर
- 32:59दें तो आपका स्पेस स्ट्रेट हो जाएगा। व्हेन यू डिफरशिएट
- 33:03अकाउंट व्हेन यू डिफरशिएट तो जो न्यूटन की
- 33:05मैकेनिक्स है वो आइंस्टाइन के फ्रेमवर्क में जब आप ये कंडीशन लगा देते हैं तो
- 33:09न्यूटन मैकेनिक्स एक स्पेशल केस बन जाता है
- 33:11जी और आइंस्टाइन की मैकेनिक्स एक स्पेशल केस
- 33:14होता है हम
- 33:15तो हम क्या करते हैं कि जब दुनिया को देखते हैं सोशियोलॉजिकली स्पीकिंग आल्सो
- 33:19जिस तरह हम फिजिक्स में कर रहे हैं जी
- 33:22तो हम आइडियाज को स्पेस में फॉर्म करते हैं
- 33:25जी एजम्पशनंस दे के कि कैपिटलिज्म है कि हर
- 33:29कोई जहां चाहे जा सकता है क्योंकि बाउंड्रीज जो जो है वो अस्यूम नहीं की गई
- 33:33है कि मुझे रोकेंगी इंडिया से पाकिस्तान या इंडिया से बांग्लादेश या इंडिया से
- 33:37यूएस जाने में। मुझे पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये जो फ्रिक्शन है बॉर्डर्स
- 33:42का वो उसमें अस्यूम्ड है कि एक्सिस्ट नहीं करता है। बट ऐसा होता नहीं है।
- 33:46जी उसमें ये अस्यूम होता है कि परफेक्ट
- 33:48कंपटीशन है। जी
- 33:50जो फर्स्ट एडमम स्मिथ की थ्योरी है लेकिन कंपटीशन भी परफेक्ट नहीं है।
- 33:53जी कोई सेकंड जनरेशनल लर्नर है।
- 33:56जी कोई बिजनेसमैन का बेटा है।
- 33:59कोई एरिस्टोक्रेटिक फैमिली से आ रहा है। जिसने बचपन से ही लिबरल साइंसेस पढ़ी हैं।
- 34:04उसकी जो बचपन से ही ट्रेनिंग है थॉट में वो ज्यादा है।
- 34:07तो उसके पास एक सोशल कैपिटल है। एक एज है जिसकी वजह से जो ट्रू कैपिटलिज्म है वो
- 34:13कभी भी रियल स्पेस में मैनिफेस्ट नहीं करता। जी
- 34:16जभी आपको कम्युनिज्म सोचना पड़ता है कि अच्छा पावर रिलेशंस हैं। लेकिन ट्रू
- 34:20कम्युनिस्ट सोसाइटी के भी जो अजमशनंस हैं वो भी फेल हो जाते हैं।
- 34:24जी तो प्रॉब्लम ये आती है कि जब हम लोग स्टेट
- 34:27को एक कंस्ट्रक्ट में लाते हैं और वो फिलॉसफी
- 34:32जो आप उसमें कंस्ट्रक्ट कर रहे हैं इंपोज करते हैं कि एज इफ स्टेट में सोवनिटी
- 34:38एक्सिस्ट नहीं करती थी। इस तरह से वो पहली बार नेशन स्टेट में हुआ। ऐसा नहीं है।
- 34:41मेरा यही चैलेंज है हल्लाक को। क्यों हलाक की अंडरस्टैंडिंग
- 34:46एक तरह का मोरल डायलेमा क्रिएट करती है मुस्लिम लाइफ में क्योंकि अगर ऐसा स्पेस
- 34:53एकिस्ट करता है तो आप इस्लाम को प्रैक्टिस नहीं कर सकते और क्योंकि ऐसा स्पेस जब तक
- 34:59एग्जिस्ट होना खत्म नहीं होगा तब तक इस्लाम आ नहीं सकता। तो अब आप क्या करेंगे
- 35:05कनंड्रम में कि वो स्पेस चेंज भी हो सकता है या नहीं या स्पेस के साथ सिर्फ आपका
- 35:09जीरो सम गेम है इस नेशन स्टेट का। तो पहला सवाल मैंने पूछा अपने आप से जब मैंने देखा
- 35:15कि स्टेट की लेगसी क्या है? ह्यूमंस जब ऑर्गेनाइज करते हैं वो किन प्रिंसिपल्स पे
- 35:20ऑर्गेनाइज करते हैं? क्या बाउंड्री जो है वो क्या मॉडर्न रियलिटी है? बाउंड्री तो
- 35:27स्पार्ट की भी थी। बाउंड्री तो एंशिएंट जो किंगडम्स हैं या बिजेंटिन है या जुडिया है
- 35:37या उहूद है या जो भी आपके वो हैं वो एक एंपायर्स बाउंड्रीज एक स्टेट का फॉर्मेशन
- 35:43था। इवन मक्का इटसेल्फ अगर आप मदीना मक्का को स्टडी करेंगे फ्रॉम पॉलिटिकल
- 35:49पर्सपेक्टिव उसमें लिखा आएगा सिटी स्टेट्स एथ एथेंस वाज़ अ सिटी स्टेट नेशन स्टेट
- 35:55सिटी स्टेट नेशन एक बड़ा कंस्ट्रक्ट है जहां ज्योग्राफी ज्यादा हैं जहां जहां
- 36:00कॉम्प्लेक्सिटी ऑफ कम्युनल एग्ज़िस्टेंस ज्यादा है जैसे आइंस्टाइन की ज्योमेट्री
- 36:07ज्यादा कॉम्प्लेक्स है कंपेयर टू न्यूटोनियन जो सिटी स्टेट में होगा वहां
- 36:11लेस कॉम्प्लेक्स कम्युनल प्रॉब्लम्स लेकिन मक्का में भी कुरैश एक्सिस्ट करते
- 36:17थे। दूसरी ट्राइब्स भी एक्सिस्ट करती थी। मक्का की एक डिफाइंड बाउंड्री थी। जहां
- 36:21बोला जाता था अब आप मक्का में एंटर कर रहे हैं। वहां की एक एंशिएंट हिस्ट्री थी। जो
- 36:26मॉडर्न नेशन स्टेट्स हैं वो अपने आप को ये भी बोलते हैं कि भ हमारी एक कंटिन्यूड
- 36:32हिस्ट्री है जो डिस्कर्सिव है। जो मटेरियली डलेक्टिकल है।
- 36:37जी। तो ऐसा तो कुछ इंपॉर्टेंट नहीं है जो यहां
- 36:41नहीं हुआ। वहां पर आप बोल सकते हैं ऐसे भी स्टेट हुए हैं हिस्ट्री में जिसमें जैसे
- 36:47चारवाक यहां पर एक्सिस्ट करते थे। हमेशा गॉड का आईडिया ऐसा नहीं रहा है कि मतलब
- 36:50वही आईडिया रहा है। ट्राइबल ऑर्गेनाइजेशंस हुए हैं उसके बीच में। ट्राइबल भी एक
- 36:56स्मॉल स्पेस है कि भ ये ट्राइब का हिस्सा है। जहां ये लोग यह बोलते हैं कि ये जो
- 37:00टेरिटोरियलिटी है वो इतनी फिक्स्ड हो गई वो उसकी वजह है। क्योंकि पहले क्या था?
- 37:04लोग फैल रहे थे। छोटी ट्राइब्स थी, छोटे सिटीज थे। देयर वाज़ अ वर्ल्ड टू बी
- 37:09क्लेम्ड। नो मैनस लैंड थे। लोग जा सकते थे। अपनी टेरिटरी एक्सपेंड कर सकते थे।
- 37:16वेस्ट फेलिया का क्योंकि आपने जिक्र किया। अब वो दौर आ गया था कि किंगडम्स इतने
- 37:20एक्सपैंड हो चुके थे कि उनके टेरिटोरियल क्लेम्स ओवरलैप कर रहे थे और लड़ाई झगड़ा
- 37:26इतना हो गया था कि वो खूनम खारी में बदल रहा था। तो आपको एक नेगोशिएशन ट्रीटी
- 37:30चाहिए थी जो फिक्सेट कर सके कि यह जो टेरिटोरियल बाउंड्रीज हैं और जब वो
- 37:35टेरिटोरियलिटी आ जाती है क्योंकि इधर भी प्रोटेस्टेंट थे इधर भी।
- 37:40मतलब आप एक आर्टिफिशियल जब कंस्ट्रक्शन करते हैं और उसको इंपोज करते हैं एक
- 37:45एंटिटी की तरह जैसे मक्का में भी थे मुसलमान हुबिया ट्रीटी से पहले बाद में भी
- 37:51और इधर भी थे अब आप उसको कैसे डील करेंगे तो आप नेगोशिएशन करेंगे क्योंकि अब हम
- 37:56लड़ना बंद करेंगे तो कुछ राइट्स नेगोशिएट कर लेते हैं उस पे डिस्कशन होगा कि
- 38:02प्लूरलिज्म को इस टेरिटोरियल सोवनिटी में डील कैसे किया जाए
- 38:07तो क्योंकि एनलाइटनमेंट प्रोजेक्ट चल रहा था तो उन्होंने बोला कि आप प्लूरलिज्म को
- 38:11जब डील कर सकते हैं जब आप प्लूरलिटी जिस वजह से कंस्ट्रक्ट हो रही हो उसकी रीजनिंग
- 38:16को स्टेट से डिवाइड कर दें जो चर्च और उस पे ये हुआ स्कीजम हुआ तो एक तो यह सवाल है
- 38:23कि भ ऐसा आइडियल ट्रीटी बनी लेकिन स्टेट कभी भी मॉडर्न नेशन स्टेट भी
- 38:30इस तरह आइडियली एक्सिस्ट नहीं करा। नहीं आई विल कम टू दैट अली भाई। देखिए
- 38:34इसमें आई आई वांट टू हैव मोर क्लेरिटी ऑन दिस।
- 38:38देखिए आप जब यह कह रहे हैं ना कि वी विल कम टू द ओरिजिनल क्वेश्चन अगेन। ठीक?
- 38:44ओरिजिनल क्वेश्चन पे हम आते हैं कि साहब हल्ला इज़ द आर्गुम हिज आर्गुमेंट इज़ दैट
- 38:54प्रोबेबबली इन अ मोर जिसको आप कहते हैं एक एक मोर जेनेरिक सेंस में एक स्पिरिचुअल
- 39:00ट्रेडिशन और एक मटेरियल ट्रेडिशन को एक्सिस्ट नहीं कर सकते।
- 39:03फिलोसोफिकली फिलोसफिकली।
- 39:04और वो अस्यूम कर रहे हैं कि रियलिटी में भी ऐसे ही मैनिफेस्ट होता है ट्रेडिशन।
- 39:07मेरा आर्गुमेंट ये है कि जो फिलॉसोफिकली जो थ्यरीज कंस्ट्रक्ट होती हैं और जिसमें
- 39:14ये अस्यूम कर लिया जाता है जो कुछ रियलिटी के कंपोनेंट्स विज़िबल हैं लेकिन अस्यूम कर
- 39:18लिया जाता है कि नहीं परफेक्ट अकाउंट दिख रहा है आपको
- 39:21जी कि मर्केंटाइल क्लास के हाथ में कंट्रोल
- 39:23है उसके बावजूद भी आप थरेटिकली अस्यूम कर रहे हैं कि कंट्रोल नहीं है। तो जो लॉज़
- 39:29इमर्ज होंगे आपको जो बजाहिर लॉज़ इमर्ज होंगे वो कुछ और
- 39:34एंड्स कंक्लूड कर रहे होंगे और दुनिया में कुछ और हो रहा होगा। तो मेरा कहने का मतलब
- 39:39है जो आप जिस तरह से स्टेट को डिस्क्राइब कर रहे हैं इवन जब कॉन्स्टिट्यूशन भी
- 39:44इंडिया का है वो बहुत सारी चीजें कहता है लेकिन जब एथनो नेशनलिस्ट बन जाती है
- 39:47डेमोक्रे डेमोक्रेसी या फिर मेजॉरिटेरियन होता है स्टेट इसका मतलब यह होता है कि जो
- 39:52एक्चुअल रिटन कोड ऑफ कंडक्ट है वो आइडियली मैनिफेस्ट नहीं करता पावर रिलेशंस होते
- 39:57हैं। कंपीटिंग क्लेम्स होते हैं। आई अंडरस्टैंड दैट बट वी विल कम टू दिस। माय
- 40:02क्वेश्चन इज अगेन गोइंग बैक टू दी आर्गुममेंट। अगर हलाक का यह कहना है कि
- 40:06नेशन स्टेट फ्रॉम मुस्लिम पर्सपेक्टिव एकिस्ट नहीं कर सकता या मुस्लिम नेशन
- 40:13स्टेट में बिलोंग नहीं कर सकते। ठीक है? इफ दैट इज हिज क्लेम माय क्वेश्चन इज़
- 40:19व्हाट इज हिज एजम्पशन अबाउट द नेशन स्टेट? क्या वो नेशन स्टेट को एज एन एथिस्टिक
- 40:24एंटिटी देखता है? वो मॉडर्निटी का प्रोडक्ट देख रहे हैं या
- 40:27फिर जो क्रिश्चियन प्रोडक्ट
- 40:29नहीं वो ये भी नहीं बोल रहे हैं। वो बोल रहे हैं कि भ जो जैसे जूडो क्रिश्चियन
- 40:31एथिक्स भी है ना ये जो पिछले 50 100 साल में देखिए ये सब रीडिंग होती है। कार्ल
- 40:39स्मिथ ने बोला कि भ आप जो लिबरलिज्म को इंपोज कर रहे हैं जो मॉडर्निटी और
- 40:44लिबरलिज्म इंपोज कर रहे हैं अंडर द रेडार एनिमोसिटीज जनरेट होती हैं। क्योंकि आप
- 40:53किसी की लिव्ड एक्सपीरियंस को लिव्ड कंडीशन को एनफोर्स करके चेंज कर रहे हैं।
- 40:58तो जब हल्लाक या ये जब क्योंकि हल्ला नहीं बोल रहे हैं लेकिन जब हम ये अस्यूम कर रहे
- 41:02हैं कि जो मॉडर्न नेशन स्टेट यूरोपियन वेस्टर्न कॉन्टेक्स्ट में है उसमें जूडो
- 41:08क्रिश्चियन एथिक्स हैं। तो असल में सवाल यह हो रहा है कि जब एनलाइटनमेंट प्रोजेक्ट
- 41:14बन रहा है। उसके बाद स्टेट फॉर्मेशन हो रहा है। जब 1776 में अमेरिका बन रहा है तो
- 41:20बावजूद इसके कि ऑन पेपर एक आइडियल कंस्ट्रक्शन है।
- 41:25जैसे बावजूद उसके कि इंडिया की आइडियल कंस्ट्रक्शन कुछ है। डायरेक्टिव
- 41:30प्रिंसिपल्स ये बोलते हैं कि यूनिफॉर्म सिविल कोड हो। डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स ये
- 41:34बोलते हैं कि एनश्योर किया जाए कि काऊ सॉर्टर ना हो। तो अब ये सेकुलर तो नहीं
- 41:39रहा ना। यह डिबेट हो सकता है कि उनका मोरल क्रेम राइट है या रॉन्ग है। यह एक अलग
- 41:44डिबेट है। तो जो आइडियल स्टेट को ऑन पेपर डिफाइन
- 41:49किया जा रहा है एज अ नेशन स्टेट वो कभी रियलिटी में एक्सिस्ट ना किया है ना
- 41:53करेगा। क्योंकि जो रियलिटी होती है वह प्रैक्टिस पर होती है। उसमें जो थ्यरी
- 42:00रिड्यूस करके अजमशंस को कंस्ट्रक्ट की जाती है क्योंकि अजमशंस रिड्यूस्ड हैं
- 42:04वैसा स्टेट एकिस्ट ही नहीं करता है। स्टेट जूडो क्रिश्चियन एथिक्स पे इसलिए क्लेम्ड
- 42:09है क्योंकि वहां की मेजॉरिटी वो वाइट सुप्रीमजम को या वैल्यू एथिक्स को
- 42:14नेगोशिएट कर पा रही है एज अ पावर रिलेशन। और बाय ऑल पॉसिबल डीफैक्टोलॉजिक
- 42:20वो मटेरियली ट्रांसलेट हो रहा है पावर रिलेशंस बिटवीन ब्लैक्स एंड वाइट्स ओवर द
- 42:25हिस्टोरिकल कोर्स आज भी डिस्पाइट द फैक्ट कि एक लिबरेशन मूवमेंट हुआ डिस्पाइट द
- 42:31फैक्ट हिंदुस्तान में एससी एसटी के ऊपर लॉ है अभी भी 99% ऑफ द मैनुअल स्कैवेंजर्स
- 42:38दलित ही हैं। आप जो आर्ग्यू कर रहे हैं ना अली भाई वो इट्स अ वेरी इंटरेस्टिंग
- 42:43आर्गुमेंट क्योंकि अगर इफ दैट इज द केस देन इट मींस कि
- 42:50कैलिफेट जो है वो एक स्ट्रेटेजिक इंस्टीट्यूशन है।
- 42:54मैं उसको बताता हूं कि जब हम इज इट एन स्ट्रेटेजिक इंस्टीट्यूशन
- 42:57स्ट्रेटेजिक नहीं बोलेंगे आप उसको। किसी ने क्या वो इस्लामिक इंस्टीट्यूशन है या
- 43:02वो एक ऐसा इंस्टिट्यूशन है जो मुस्लिम्स को एग्जिस्ट करने में मदद करता है?
- 43:08नहीं एक्चुअली अब ये अगेन क्योंकि मैं ये बोल रहा हूं कि जब हम एज एन एकेडमिक एक
- 43:13पर्टिकुलर पर्सपेक्टिव से हिस्ट्री की रीडिंग करते हैं तो हम हिस्ट्री को भी
- 43:17कंस्ट्रक्ट और रिकंस्ट्रक्ट करते हैं अपने मॉडर्न लॉजिक के फ्रेमवर्क में।
- 43:22तो जो पूरी डिबेट है खिलाफत की या किसी भी स्टेट की जो किसी भी ट्रेडिशनल पास्ट
- 43:30लॉजिक पे बेस्ड हुआ था वो भी हम लोग मॉडर्न कैटेगरीज में रिड्यूस करते हैं।
- 43:36अगर आप अल्लाह के रसूल सल्लसम को देखेंगे और उनकी 23 इयर्स की प्रॉफिटहुड को
- 43:43देखेंगे जी
- 43:44तो सबसे पहले जब उनके ऊपर रेवोलेशन आ रहा है वही आ रही है इरा वो नॉलेज के ऊपर आ
- 43:50रही है। जो क्लेम है नॉलेज का अगर आप फुकोडियन फ्रेमवर्क में देखेंगे नॉलेज इज
- 43:55पावर। जी
- 43:57एंड पावर इज़ पॉलिटिक्स एंड सोवनिटी बिकॉज़ इट ट्रांसलेट्स इन इंस्टीटशंस। जो पहला ही
- 44:02क्लेम है उस वक्त का जो ऑर्डर है मक्का में जो मार्जिनलाइजेशन लगता है जो क्लास
- 44:08स्ट्रक्चर को लाता है जो ट्राइबल हायरार्की को लाता है जो स्लेव्स को
- 44:14परेशान करता है जो औरतों के हुकूक को एक पर्टिकुलर पर्सपेक्टिव में देखता है
- 44:20उस नॉलेज पैराडाइम को एक सोवन चैलेंज होता है और उसका क्लेम एक ट्रांसेंडेंटल क्लेम
- 44:27है कि बिय्ड मटेरियल के ये ऊपर से आ रहा है।
- 44:30ठीक है? तो यह एक पॉलिटिकल जो पॉलिटिक्स की
- 44:34डेफिनेशन है वह स्टेट में अगर सिर्फ ना देखें स्टेट फॉरमेशन उसका एक एंड हो सकता
- 44:40है एंड होता है। जी
- 44:42जो पॉलिटिकल थॉट इन इस्लाम है इस्लामिक पॉलिटिकल इथोस है उसमें जब आप एक
- 44:48डेमोग्राफिक डिविडेंड तक पहुंचते हैं तो इंस्टीटशंस बनने शुरू होते हैं।
- 44:53स्टेट भी एक इंस्टीट्यूशन है। ठीक है? जो एक सर्टेन कॉन्टेक्स्ट में
- 44:57रिक्वायरमेंट बन जाता है। क्योंकि आप उस लेवल पे नेगोशिएट कर पाते हैं। तो पहले आप
- 45:02एज एन इंडिविजुअल करते हैं। फिर आप एक दो-तीन साल का अरसा है जो गुजारते हैं
- 45:07अकेले अपनी नफसियात पे सिर्फ आपकी जो अ हमसफर हैं जो आपकी जो बीवी हैं अ खदीजा
- 45:15रदी अल्लाह अनू उनके साथ आप ये एक्सपीरियंसेस शेयर कर रहे हैं। तो आपकी
- 45:19जो पॉलिटिकल सोनिटी है, आप गार में जा रहे हैं, बाहर जा रहे हैं। आप एक्सपीरियंस कर
- 45:24रहे हैं वह अपनी नफ्स पे है। अपनी बीइंग पे है, अपनी रूह पे है। फिर अपनी फैमिली
- 45:30पे है। फिर आप उसके बाद दावत देते हैं। ऊपर से वही आती है, रेवोलेशन आता है। नाउ
- 45:35यू शुड एक्सपेंड। पहले इंस्ट्रक्शन यह है कि वेट।
- 45:40फिर इंस्ट्रक्शन यह है कि नाउ यू इनवाइट योर फ्रेंड सर्कल। योर क्लोज रिलेटिव्स।
- 45:45अब यह पॉलिटिकल सोनिटी का एक्सपेंशन है। एक सोशल कंस्ट्रक्ट में पॉलिटिक्स एज
- 45:51नेगोशिएशन, पॉलिटिक्स हैज़ अल्टरनेटिव रिलेशन
- 45:57टू इंस्टीटशंस। ठीक है?
- 45:59फिर उसके बाद आप दावत खुल के देते हैं। मक्का के दूसरे लोगों को देते हैं। यहां
- 46:04सब जगह आप एडवोकेसी, एक्टिविज्म, डिस्कोर्स कंस्ट्रक्शन और अल्टरनेटिव
- 46:09ह्यूमन राइट्स, अल्टरनेटिव ह्यूमन कंडक्ट, अल्टरनेटिव ह्यूमन ड्यूटीज, अल्टरनेटिव
- 46:15क्लेम्स टुवर्ड्स हाउ आइडियली इंस्टीटश टू शुड वर्क। हम्।
- 46:19यह एक आंदोलन है। यह एक सिविलाइजेशन इथोस को रिकंस्ट्रक्ट कर रहे हैं। यह भी एक
- 46:25तरीके की पॉलिटिकल सोवनिटी है। ठीक है?
- 46:28आपको परेशान किया जाता है। क्योंकि आप पावर से जो अगर हम फुकडियन फ्रेमवर्क में
- 46:33देखें क्योंकि आप पावर की जो हायरार्की है, उसकी लेगसी है, उसको चैलेंज कर रहे
- 46:37हैं। जो मक्का के सरदार हैं, लीडर्स हैं वो क्या बोलते हैं? क्योंकि प्रॉफेट
- 46:42मोहम्मद कम्स फ्रॉम ए एक कुरैश बैकग्राउंड। तो उनको बोलते हैं क्योंकि वह
- 46:48हजरत बिलाल जो एक ब्लैक स्लेव हैं। इसी तरह के जो दूसरे लोग हैं स्लेव्स हैं आप
- 46:54उनको आजाद करने की बात कर रहे हैं। उनकी डिग्निटी की बात कर रहे हैं। उनके
- 46:58इमसिपेशन की बात कर रहे हैं। वो ये बोलते हैं मोहम्मदों जो हमारी रिलेटिव पोजीशन है
- 47:03सोसाइटी में उसको चैलेंज कर रहे हो। जी
- 47:06ये हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। आप ये चीज गिव अप कर दो इस तरह की। द थ्रोन इज यर्स
- 47:11एंड आवर्स फॉर द टेकिंग। यह भी पॉलिटिकल सोवनिटी के साथ नेगोशिएशन है कि स्टेट के
- 47:17इंस्टीटशंस का ऑर्डरिंग ऑफ द सोसाइटी में क्लेम क्या
- 47:21होगा? उसके बाद ये सारी डिबेट्स जो चल रही हैं जैसे आज हिंदुस्तान में चल रही हैं,
- 47:26दुनिया देख रहा है, कहीं और चल रही हैं। तो ये डिबेट्स
- 47:30पास में यथरिब है। कई किलोमीटर दूर। क्योंकि मक्का काबा एक सेंटर है। दुनिया
- 47:36भर के लोग इधर आते हैं। वहां पर 365 आइडल्स हैं। सब ट्राइब्स का एक रिलेशन है।
- 47:41आते हैं। मार्केट भी होती है। सब पता लगता रहता है। यहां ये चल रहा है। इधर-उधर लोग
- 47:45जा रहे हैं क्योंकि यथरेप बहुत करीब है। और वहां पे स्टेबिलिटी ऑफ़ पॉलिटिकल
- 47:50फॉर्मेशन नहीं है। कमटिंग क्लेम्स हैं। कोई एक सोवन ओवरलॉर्ड नहीं है जो उस सिटी
- 47:56स्टेट को ऑर्डर में ला पा रहा है। ठीक। तो वहां से लोग आते हैं। एक किसी इसी
- 48:00तरह का हज होता है। उनके पास पहुंचते हैं कि हम लोगों ने आपका मैसेज समझा सुना।
- 48:04हमें समझ आता है बात। वी आर इंटरेस्टेड। आप हमें लीड कीजिए। तो बोलते हैं आप जाइए।
- 48:11मेरे कुछ लोग को लेके जाइए। जो मेरा मैसेज है मेरे जो लोग हैं आपकी जो जितनी भी
- 48:17ट्राइब्स हैं 10 12 वहां जाएंगे। उस मैसेजिंग को बताएंगे। फिर लोगों का सर्वे
- 48:22करेंगे कि भाई आपके सेंटीमेंट्स क्या हैं? और फिर आप वापस आइए। तो फिर वह वापस आते
- 48:28हैं कि देखिए हम लोगों ने यह आपके लोग हैं। इन्होंने सब रीडिंग कर ली है। लोगों
- 48:31को मैसेजिंग कर दिए। पीपल वांट यू। डिमांड आई। और फिर जब आप जा रहे हैं और जो
- 48:37कॉन्ट्रैक्ट कर रहे हैं वो पहली बार ऐसा कॉन्ट्रैक्ट है जिसमें आप स्टेट एज एन
- 48:43इंस्टीट्यूशन जो स्मॉल स्टेट है उसमें मल्टी कल्चरल मल्टीप्लूरल ट्रीटी कर रहे
- 48:49हैं। जिसको पहला प्रोटोटिपिकल स्टेट भी बोला।
- 48:53अब वो क्या खिलाफत है या नहीं? वो क्या स्टेट है या नहीं? यह सारी डिबेट्स हुई है
- 48:57ना जब कॉलोनियल इंडिया में जो मौलाना हुसैन अहमद मदनी, अल्लामा इकबाल, मौलाना
- 49:03आजाद, मौलाना मौदूदी ये जो डिबेट्स कर रहे हैं वो इन्हीं फ्रेमवर्क्स पे कर रहे हैं
- 49:09कि इस्लामिक पॉलिटिकल सोवनिटी है क्या? उसका कंस्ट्रक्ट्स ऑफ मॉडर्निटी,
- 49:15कंस्ट्रक्ट्स ऑफ अल्टरनेट प्लुरलिटीज और उनके क्लेम से रिलेशन क्या है? शेर अली
- 49:20तरीन की जो एक किताब अभी आई है पेरलस इंटिमसीज कि मुस्लिम पॉलिटिकल सोवनिटी जो
- 49:26मुगल एरा में रिड्यूस हो जाती है खत्म हो जाती है उसको कैसे नेगोशिएट किया जाएगा तो
- 49:31जब आप उस पर्सपेक्टिव से देखेंगे अल्टीमेटली सुले खुदबिया होता है।
- 49:36लड़ाईयां होती हैं। लड़ाई के बाद वो होता है। मक्का के ऊपर वापस फतेह होती है। बहुत
- 49:40पीसफुल होती है। इंस्टीट्यूशन एक्सपैंड करता है। मल्टीस्टेट बन जाता है। समझ रहे
- 49:45हैं कि पहली बात दो सिटी स्टेट्स मिलके फिर वॉर एक्सपैंड होता है। फिर एक
- 49:50एक्सपेंशन की तरफ बढ़ता है। एंपायर बनता है। फिर खिलाफत का एक तस्सवुर आता है जो
- 49:55बाद में एक तो अब सवाल यह है कि इस पूरी जर्नी में
- 50:01जिस आइडियल स्टेट के कंस्ट्रक्शन की हम बात कर रहे हैं वो क्या है और कब बनता है?
- 50:05और वो कैसे बनता है? वो किस प्रोसेस से गुजरता है? उसमें आप जब इंस्टीटशंस बिल्ड
- 50:11करते हैं जैसे आप मदीना में या त्रिब में जब पहली बार जाते हैं फर्स्ट सिक्स मंथ्स
- 50:15में आप मस्जिद भी बनाते हैं। आप कुरैश और मतलब जो आप लोग आए हैं इधर से मुहाजिर जो
- 50:21चलके आए हैं जिन्होंने हिजरत की है जिन्होंने माइग्रेट किया है आपके साथ और
- 50:24जो वहां पे रहने वाली जो ट्राइब्स हैं अंसार जो वहां के लोकल्स हैं जब उनके बीच
- 50:28में जो आपको एक्सेप्ट करते हैं आपकी फर्स्ट उम्मत बनते हैं कि आपके फॉलोअर्स
- 50:34बनते हैं इन अ डिफरेंट सिटी स्टेट उनकी शादियां करवाते हैं तो ये जो डिफरेंसेस
- 50:38हैं आने जाने के हायरार्की ये डिॉल्व हो जाए परमानेंट हो जाए और आप मार्केट बना
- 50:43रहे हैं। अब मार्केट जो है सिर्फ इससे डील नहीं कर रहा है जो मुस्लिम है। अभी यह
- 50:48सारी चीजों मस्जिद बनाना तो मुसलमानों के लिए है। शादियां करवाना तो मुसलमानों के
- 50:52बीच में है। जो आपने इकोनॉमिक एंटरप्राइज किया मार्केट वहां जूस भी आ रहे हैं। वहां
- 50:59पेगंस भी आ रहे हैं। वहां पे पहली बार ऐसा हो रहा है दो एक तो जो ओवरऑल ट्रीटी ऑफ़
- 51:05मदीना है उसमें जो आपके कॉन्ट्रैक्ट बन रहे हैं कि आप एक दूसरे को कैसे सेफ
- 51:09रखेंगे, सिक्योर रखेंगे। लेकिन एक एक्चुअली डेली लिव्ड एक्सपीरियंस में
- 51:13कम्युनिटीज इंटरेक्ट कर रही हैं ऐसे फ्रेमवर्क में जिसमें किसी का पर्सनल मफाद
- 51:20स्पिरिचुअल नहीं है और फिर वो देख रही हैं कि ट्रेड प्रैक्टिससेस कैसे डिफरेंट है।
- 51:26मुशार का जैसे कि लेबर और कैपिटल के बीच में क्या रिलेशन रहेगा। ऐसी छोटी सी चीज
- 51:30कि आप जो पहले मार्केट में सुबह आएगा वो अपनी जगह कहां पे टेंट लगाएगा वो डिसाइड
- 51:36करेगा। क्योंकि जब शुरू में मार्केट शुरू होती है जो पहले टेंट होते हैं उसमें लोग
- 51:39जल्दी से खरीद के चले भी जाते हैं तो आपकी पोजीशनिंग जो होती है वो भी डिसाइड करती
- 51:43है कि आपकी दुकान कितनी चलेगी। ये छोटी-छोटी चीजें जो वो लगती है ये अपने आप
- 51:48में इकोनॉमिक ऑर्डरिंग है। आई अंडरस्टैंड अली भाई व्हाटएवर यू आर सेइंग बट अ कपल ऑफ
- 51:53क्वेश्चंस है ना पहला एंड आप आप जो बात कर रहे हैं बाय
- 51:59इंप्लिकेशन मुझे ये समझ में आ रहा है। आई जस्ट वांट टू अंडरस्टैंड कि क्या ये क्या
- 52:03दिस इज़ व्हाट यू आर इंप्लाइंग। पहली चीज आपके पूरे डिस्क्रिप्शन से मुझे यह समझ
- 52:08में आ रहा है कि मुस्लिम पॉलिटिकल एजेंसी इज इन अ परपचुअल स्टेट ऑफ नेगोशिएशन।
- 52:17बिल्कुल। इसलिए कॉन्ट्रैक्ट को इस्लाम में बहुत
- 52:21अव्वल दर्जा दिया गया कि आप नेगोशिएट कर रहे हैं हर लेवल पे।
- 52:24ठीक है। व्हाट यू आर सेइंग इज कि मुस्लिम पॉलिटिकल एजेंसी जो है वो परपीचुअली
- 52:28नेगोशिएट करना पड़ेगा। आपको हमेशा करते रहना पड़ेगा।
- 52:32स्टेजेस आएंगे। उसकी जो भी स्टेजेस हैं कहने का मतलब उसकी कोई पॉइंट ऑफ
- 52:38सर्ट यू नो पॉइंट ऐसा नहीं आएगा जहां पे आप उसको मेजर कर पाएं। इट्स अ कंटीन्यूअस
- 52:42मूवमेंट। दैट्स वन थिंग इन व्हाटएवर डायरेक्शन इट इज़। आगे जा रहा है, पीछे आ
- 52:46रहा है, ऑसिलेट कर रहा है। व्हाटएवर इट इज़। दैट्स वन
- 52:50चेंज भी होता रहता है। हां चेंज। दैट्स वन थिंग।
- 52:53जो दूसरी चीज मुझे समझ में आ रही है वो यह कि मुस्लिम पॉलिटिकल अंडरस्टैंडिंग जो है
- 53:00इन योर इन इन जिस तरीके से आप उसको डिफाइन कर रहे हैं वो शायद
- 53:07सोशल कंस्ट्रक्शन में एग्जिस्ट करती है। ठीक है? इट एक्सिस्ट इन द सोशल
- 53:14कंस्ट्रक्शन और मोस्ट प्रोबेबबली इन सोशल रिलेशंस।
- 53:18कि सोशल रिलेशंस के थ्रू मुस्लिम पॉलिटिक्स या मुस्लिम पॉलिटिकल एजेंसी या
- 53:25मुस्लिम पॉलिटिकल इंस्टीट्यूशन का कंस्ट्रक्शन होगा।
- 53:30ठीक है? प्रोफेटिक लाइफ में ऐसे ही हुआ है। मतलब
- 53:31मेरा क्लेम है जब मैं उनकी लाइफ को देख रहा हूं और वो ऐसा नहीं है कि मतलब लोग कई
- 53:35बार रिड्यूस कर देते हैं कि भ सोसाइटी में हो रहा है, चल रहा है। तो इसी तरह हमारी
- 53:39जो ऑर्डर्स ऑफ़ गवर्नेंस है वो इंप्लिकेट हो जाएगी। नहीं आप हर लेवल पे इंस्टीटशंस
- 53:43भी बनाते हैं। ठीक है? दैट्स इट। दैट आई अंडरस्टैंड।
- 53:46लेकिन वो जो इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग है वो एक्चुअली सोशल रिलेशंस के थ्रू अब ठीक है
- 53:51अगेन कमिंग बैक टू हल्ला ठीक है
- 53:54दिस एक्चुअली सपोर्ट्स हल्ला आई विल टेल यू व्हाई दैट्स अ क्वेश्चन
- 54:00अगर स्टेट एक ऐसा एंटिटी है जो एक स्टेटिक एंटिटी है नेशन स्टेट अगर एक स्टेटिक
- 54:07एंटिटी है एक एक ओसिफाइड एंटिटी है एक डिमार्केटेड एंड ऑलरेडी एस्टैब्लिश्ड
- 54:14एंटिटी है उसमें कंटीन्यूसली नेगोशिएटेड सोशल रियलिटी तो एक्सिस्ट कर ही नहीं
- 54:20सकती। यही तो मेरा काउंटर है कि पहली बात तो यह
- 54:23है कि देन ही इज़ राइट इन दैट सेंस।
- 54:26नहीं वो वो आईडिया ही सही नहीं है कि पहली बात तो ये है कि जो ये नेशन स्टेट का
- 54:31तस्सवुर है और जो इमेजिनेशन है कि वो इन इटसेल्फ है।
- 54:37पहली बात तो है कि दुनिया में 200 नेशन स्टेट से ज्यादा हैं। क्यों यूएस एज अ
- 54:43नेशन स्टेट? बाकी सारी नेशन स्टेट्स पर हावी होकर उसकी पॉलिटिकल सोवनिटी और
- 54:48इंटरनल रिलेशंस को अफेक्ट कर पाता है। क्यों वो वहां पर रिजीम चेंज करवा पाता
- 54:54है? क्यों गजा में इतना लंबा जेनोसाइड होने के बावजूद किसी जो मुस्लिम स्टेट्स
- 55:00की पॉलिटिकल सोवनिटी है एक्सटेंडेड टुवर्ड्स जियोपॉलिटिक्स
- 55:05वो क्यों वेस्टर्न स्टेट्स के चैलेंज को वो नहीं कर पाता कि दे आर मोर
- 55:10कंटीन्यूअसली एंबेडेड। जी। तो पहली बात तो यह है कि जो नेशन
- 55:14स्टेट का कंस्ट्रक्शन जिस तरह से इमेजिन किया गया है वो एक क्लोज्ड इकॉनमी की तरह
- 55:18सोचा जा रहा है। एज इफ इट इज़ डिवॉइड ऑफ इनफ्लेक्सेस, डायनेमिकल चेंजेस,
- 55:24कॉम्प्लेक्सिटीज, रिलेशंस। अपने आप में वो डायनेमिक एंटिटी एंड
- 55:30प्रैक्टिस इन रियलिटी। क्योंकि वो कॉन्सेंटली नॉट जस्ट मुस्लिम्स। एवरीबडी
- 55:33इज़ नेगोशिएटिंग टुगेदर। कल को जीएसटी नहीं था फिर जीएसटी आ गया। कल को अडानी के पास
- 55:40कॉन्ट्रैक्ट्स नहीं थे। चेंज होता है। अदानी के पास कॉन्ट्रैक्ट आ गया।
- 55:44कल को आप माइनॉरिटीज की जो रिजर्वेशंस हैं उस पे बात कर सकते थे। उनको स्कॉलरशिप्स
- 55:53दे सकते थे। आज नहीं कर सकते। कल आपकी वक्फ की प्रॉपर्टीज एग्जिस्ट कर सकती थी
- 55:59एज अ कम्युनल प्रॉपर्टी। कम्युनिटी की प्रॉपर्टी इवन कॉन्स्टिट्यूशनल स्पीकिंग।
- 56:04आज उस कॉन्स्टिट्यूशनल कंस्ट्रक्ट को चेंज कर दिया गया। तो नेशन स्टेट पहली बात तो
- 56:09ओसिफाइड नहीं है जो एजमशन है। दूसरी बात वो क्लोज्ड नहीं है। वो ऑस्मोटिक है। आप
- 56:14ट्रैवल कर सकते हैं। आप इंडियन डायस्पोरा या हिंदू डायस्पोरा बाहर होते हुए आप यहां
- 56:20की पॉलिसी के ऊपर इंपैक्ट कर सकते हैं। आप अपना नेगोशिएशन यूएस सेनेट के सामने भी रख
- 56:25सकते हैं। यूएन के सामने भी रख सकते हैं। तो मेरा कहना है कि जिस तरह से नेशन स्टेट
- 56:30को डिफाइन किया जा रहा है मॉडर्निटी के पर्सपेक्टिव से फ्रॉम अ थ्यरेटिकल
- 56:33पर्सपेक्टिव उस तरह का नेशन स्टेट कहीं एक्सिस्ट नहीं करता। मुझे नहीं दिखता। जिस
- 56:38तरह का कैपिटलिज्म एडम स्मिथ ने बोला वो कैपिटलिज्म जो है उसकी कुछ यूनिवर्सल्स
- 56:44हैं जो एक्सिस्ट करते हैं। जैसे कार्ल मार्क्स ने जब थ्यरी दी कम्युनिज्म की तो
- 56:50कार्ल मार्क्स पॉजिटिविस्ट थे। साइंटिफिक टेंपरामेंट के थे।
- 56:57और उसके बाद वो पावर रिलेशंस और रिस्ट्रीब्यूशन की बात करते थे। लेकिन अब
- 57:00के जब आप मार्क्सिस्ट देखेंगे वो पोस्ट मॉडर्निस्ट्स हैं। वो रिलेटिविस्ट्स हैं।
- 57:05वो या तो क्रिटिकल थरिस्ट हैं। समझ रहे हैं कि फिलोसोफिकल पैराडाइम कंप्लीटली
- 57:10चेंज हो गया। अगर आप लिबरलिज्म की बात करेंगे मतलब आज की डेट में क्या है?
- 57:14मॉडर्निटी को एज अ अगर एज अ प्रोजेक्ट देखा जाए इट इज़ नॉट जस्ट मॉडर्निटी। मतलब
- 57:18मॉडर्निटी उसका रिस्पांस पोस्ट मॉडर्न मतलब जो मॉडर्निटी के खुद के लिमिटेशंस
- 57:22हैं कि आपने स्ट्रक्चरल विज़न में यह सोचा है कि एक पॉजिटिविस्ट यूनिफाइड वर्जन हो
- 57:28सकता है रियलिटी का। क्योंकि आपकी इंटीग्रल रियलिटी है। तो जैसे लाइव्स को
- 57:33अगर आप इंप्ल्लाई करें अब सोशल कंस्ट्रक्शन में लोगों के लिव्ड
- 57:37एक्सपीरियंसेस और थराइजेशंस अपनी बाउंडेड रैशनलिटीज की वजह से डिफरेंटली मैनिफेस्ट
- 57:42करते हैं ट्रुथ क्लेम्स में। तो उसको बोल दिया गया पोस्ट मॉडर्न ये सबका अपना ट्रुथ
- 57:46है। फिर उसके रिस्पांस में सिंथेसिस आता है।
- 57:48उसी टाइम पे वो बोलते हैं दोनों चीजें को एकिस्ट करती हैं कि जब ये नेगोशिएशन चलता
- 57:52रहता है यूनिवर्सल और पर्टिकुलर के बीच में तो एक नेगोशिएटेड रियलिटी एज अ वर्ल्ड
- 57:58व्यू कंस्ट्रक्ट होती है जो डायलेक्टिकल है जो हिस्टोरिकल है जो चेंज तो होती है
- 58:05लेकिन वो एग्जिस्ट भी कर सकती है एक टाइम पे फॉर अ पीरियड ऑफ़ टाइम और फिर उसको
- 58:08नेगोशिएट भी किया जा सकता है। तो ये सब सही है। यू नो डलेक्टिकल प्रोसेस मैं इसको
- 58:14अस्यूम करता हूं। लेकिन इसमें क्योंकि ट्रांसेंडेंटल्स ट्रांसेंडेंस को खत्म कर
- 58:18दिया गया कि एक क्लेम और है जैसे आपने जब आइंस्टाइन के स्पेस को कर्वड्ड कर दिया तो
- 58:24इनफिनिट पॉसिबिलिटीज बढ़ गई सिर्फ एक डायमेंशन बढ़ाने की वजह से। समझ रहे हैं
- 58:28क्या? मतलब वो इतना कॉम्प्लेक्स हो गया कि उसमें पोटेंशियल ऑफ यूनिवर्स की
- 58:32एक्सप्लेनेशंस उसमें ब्लैक होल भी इमर्ज हो गया। जो न्यूटन के स्पेस में नहीं हो
- 58:36सकता। मैं समझ गया आपकी बात। अली भाई बट इवन देन अगर आप यह कह रहे हैं ना कि साहब
- 58:42स्टेट इज एन ओसिफाइड कैटेगरी या ऐसा एकिस्ट नहीं करता। सोशल रियलिटी इज
- 58:48डिफरेंट फ्रॉम व्हाट यू कंस्ट्रक्ट। परफेक्ट नेशन परफेक्ट नेशन स्टेट नहीं है।
- 58:52स्टेट हैं उनकी बट दो चीजें हैं यहां पे। एक चीज ये कि
- 58:57अगर आप इस तरीके का एजमशन नहीं करते हैं। हाउ वुड यू कंस्ट्रक्ट कॉनसेप्चुअल
- 59:03कैटेगरीज? दैट्स द फर्स्ट क्वेश्चन। ठीक है? क्योंकि कंसेप्चुअल कैटेगरीज के लिए
- 59:08आपको एक्सक्लूसिविटी बनानी पड़ेगी और आइडियल टाइप्स बनाने पड़ेंगे। जब तक आप
- 59:13आइडियल टाइप्स नहीं बनाएंगे आप उसकी बेसिस पे मेजरमेंट्स नहीं कर सकते। तो आपको नेशन
- 59:18स्टेट का एक आइडियल टाइप एक एक ऐसा बनाना पड़ेगा जिसकी बेसिस पे आप समझेंगे कि नेशन
- 59:25स्टेट क्या होता है। दैट्स वन थिंग। सो दिस इज़ अ नेसेसिटी। आई आई से इट टू
- 59:30कंस्ट्रक्ट एन आईडिया ऑफ़ स्टेट दैट रिप्रेजेंट्स रियलिटी इज अ नेसेसिटी।
- 59:36नहीं नेसेसिटी ये नहीं है कि ये पर्टिकुलर आर्किटाइप ही मेरा सिर्फ मेरा सिर्फ ये
- 59:40चैलेंज चैलेंज क्या बोलूं? मेरा रीजनिंग है कि जिस आर्किटाइप को हम अस्यूम कर रहे
- 59:45हैं उससे बेटर थराइज़ेशन अब हो सकता है। ठीक है? आई अंडरस्टैंड दैट। और उसका जो
- 59:50कंस्ट्रक्ट है वो मैं खुद क्योंकि करता हूं कि मैं इसको क्योंकि इकोनॉमिक्स का
- 59:54स्टूडेंट रहा हूं। इकोनॉमिक्स से इसको बहुत अच्छे से समझा जा सकता है कि
- 59:58इकोनॉमिक थ्योरी कैसे डेवलप हुई। पहले एक स्मॉल इकोनमी का मॉडल बनाया जाता है
- 1:00:03क्योंकि वो सिंपल है। उसमें चीजों को सिंपलर लेवल पे तोड़ के इजी रिलेशंस
- 1:00:08डिफाइन किए जा सकते हैं एज अ कॉनंसेप्चुअल कैटेगरी।
- 1:00:10बट वो रियलिटी से बिल्कुल दूर है। ठीक है?
- 1:00:14तो वो जो कंस्ट्रक्टेड कैटेगरीज हैं वो यूज़लेस हैं क्योंकि वो जो पॉलिसी बनाती
- 1:00:20हैं वो रियलिटी से इतनी दूर हैं कि उससे स्टेट फॉरमेशन और या फिर जो मटेरियल
- 1:00:25कंडीशंस इकॉनमी के थ्रू बेहतर हो सकती थी वो और ज्यादा खराब हो जाती हैं। क्योंकि
- 1:00:29आपको कहां इन्वेस्ट करना है, कितना इन्वेस्ट करना है, इनकलिटी क्यों
- 1:00:32प्रोड्यूस हो रही है, उसकी एजम्पशंस चेंज हो जाती हैं। तो, आपकी पॉलिसी राइट बन ही
- 1:00:36नहीं सकती। मेरा आर्गुमेंट ये है कि हमेशा से ऐसा होता आया है इवन जो ग्रीक फिलॉसफी
- 1:00:41से क्योंकि रिटन फिलॉसफी वो है एरिस्टोटलल ने कुछ बोला पहले प्रेटो ने कुछ बोला जो
- 1:00:47आइडियलिज्म की बात करी प्लेटॉनिक आइडियल तो एरिस्टोटलल ने बोला भाई सब कुछ
- 1:00:51एंपेरिकल है तो फिर न्यू प्लॉटिनस फिलॉसफी जिसने सिंथेसाइज किया कि इन दोनों का
- 1:00:55रिलेशन कैसे हो सकता है यह ट्रेडिशन आप इस्लामिक डिबेट्स में और कलाम की डिबेट्स
- 1:01:02में भी ले सकते हैं। जैसे अशरी स्कूल ऑफ थॉट है। मातुरिदी स्कूल ऑफ थॉट है। अथरी
- 1:01:07स्कूल ऑफ थॉट है। यू नो मोतलाइट्स हैं। इनके फंडामेंटल क्लेम्स क्या है? अथरी
- 1:01:12बोलते हैं कि भई सिर्फ टेक्सचुअल इंटरप्रिटेशन हो सकता है कुरान का। मतलब
- 1:01:16जो लिखा है एक्जेक्टली उस पर आप कुछ भी अक्ल नहीं लगा सकते। मोतलाइ जो अहले राय
- 1:01:22बोले गए उन्होंने बोला कि नहीं देखिए अक्ल क्योंकि अल्लाह के के निजाम में है तो हम
- 1:01:29क्योंकि अल्लाह की ही मखलूकात हैं तो अल्लाह ने हमें इस तरह से पोटेंशियल रखा
- 1:01:34है कि हम अक्ल को इस्तेमाल करके भी उन्हीं यूनिवर्सल कैटेगरीज की तरफ जा सकते हैं जो
- 1:01:39रेवोलेशन के थ्रू आई हैं। ठीक है?
- 1:01:43दोनों में कंपटीशन हुआ। तो फिर सिंथेसिस हुआ दो स्कूल मातुरी दीदी और अशरी के
- 1:01:48उन्होंने बोला कि नहीं अकल कलब वही नकल
- 1:01:52नकल जो इनके ना कॉम्बिनेशन में आप सिंथेसिस थ्योरी ला सकते हैं और इन सबके
- 1:01:58प्रोडक्ट हैं स्कूल्स ऑफ थॉट क्योंकि मोज लाइट्स को कंप्लीटली
- 1:02:02डाउन प्ले हो गए स्पेशली जब इमाम गजाली ने अपना जो पूरा इनकोरेंस ऑफ़ द फिलॉसफर लिखा
- 1:02:07वो जो पूरा एक 200 300 साल का डिबेट चला है उसमें तीन स्कूल्स ऑफ थॉट और चार
- 1:02:13प्रिंसिपल स्कूल्स ऑफ जरस प्रोडेंस सर्वाइव कर गए जो उनकी बेसिकली
- 1:02:19एपिस्टेमोलॉजी है थ्यरी ऑफ़ जस्टिस में। जी।
- 1:02:22तो दुनिया में हमेशा ऐसा होता रहा है कि कॉनसेप्चुअल कैटेगरीज
- 1:02:27एविडेंस को देख के कि वो जो एग्जिस्टिंग तजदीद क्या है? अगर वो डिबेट जो हुआ
- 1:02:33इत्तेहाद जो होना है ये सारी चीजें या जो मॉडर्न कंस्ट्रशंस में रीथराइजेशंस हैं।
- 1:02:38फूको ने क्यों पावर को रीइमेजिन किया? डिल्यूस ने क्यों एक नई मेटाफिसिक्स को
- 1:02:43सोचा? यह सारी चीजें नेसेसिटीज हैं। तो एक वक्त में एक मॉडर्न नेशन स्टेट को कंसीव
- 1:02:50किया गया और वह कांसेप्ट ऑन पेपर सही है कि यह आइडियल है जिसकी तरफ नेशन स्टेट्स
- 1:02:56को बार-बार बोला जाता है बढ़ना चाहिए। बट सोशियोलॉजिकल रिलेशंस, इंस्टीट्यूशन के
- 1:03:02साथ रिलेशंस, प्लूरल फ्रेमवर्क में कल्चरर्स का इंटरेक्शन और उससे जो क्योंकि
- 1:03:07आप अगर कोर्ट्स के कॉन्टेक्स्ट में देखेंगे कि कोर्ट्स में जो जजेस होते हैं
- 1:03:11वो भी किसी ट्रेडिशन से आ रहे होते हैं। वो भी अपने जजमेंट्स में वो रिफ्लेक्ट
- 1:03:16करते हैं। लेकिन आइडियली अगर आप कोर्ट को बोलेंगे ऑन पेपर वो एक सेकुलर
- 1:03:21इंस्टीट्यूशन है। वो लॉ को सिर्फ अप्लाई कर रहा है। लेकिन ऐसा नहीं है। हम खुद
- 1:03:27देखते हैं वक्फ के केस में दूसरे केस में लॉ की रीजनिंग बियों्ड द कंस्ट्रक्शंस ऑफ
- 1:03:32लॉ जो तय कर दी गई थी उससे ओवर एंड अबव एंड बियोंड होती हैं। तो यहां मैं चैलेंज
- 1:03:38मुझे फील होता है कि इससे क्या होता है कि जब आप अजंपशंस ऐसे लगा देते हैं जो
- 1:03:42रियलिटी को रिफ्लेक्ट नहीं करते हैं। तो आप और मैंने आपको बता दिया कि प्रोफेटिक
- 1:03:49लाइफ में मल्टीपल स्टेट फॉरमेशंस हुए हैं एज एंड व्हेन रिक्वायर्ड और मूविंग
- 1:03:52टुवर्ड्स समथिंग। तो ये जीरो सम गेम नहीं है। मॉडर्न नेशन स्टेट में ही क्योंकि वो
- 1:03:58थ्यरेटिकली इनकंप्लीट है। पोटेंशियल आते हैं उसके रप्चर्स के।
- 1:04:04इसीलिए मॉडर्न नेशन स्टेट्स होमोजेनियस नहीं है पूरी दुनिया में। अगर वो ऑन पेपर
- 1:04:08सेम होते। 200 से प्लस तरीके के मॉडर्न नेशन स्टेट्स हैं जो डिफरेंट रियलिटीज को
- 1:04:13रिफ्लेक्ट करते हैं। यूएई भी नेशन स्टेट है, सऊदी भी, इजराइल भी, इंडिया भी,
- 1:04:18पाकिस्तान भी, बांग्लादेश भी, मलेशिया भी, यूएस भी, यूके भी, फ्रांस भी, जर्मनी भी।
- 1:04:23क्या आप ये बोल देंगे कि जो रियलिटी जिसज नेशन स्टेट की तेरी को कंस्ट्रक्ट किया जा
- 1:04:28रहा है, उसके हिसाब से तो होमोजेनिटी होनी चाहिए थी। एक ही तरह का स्टेट एक्सिस्ट
- 1:04:33करता, एक ही तरह के रिलेशंस होते, एक ही तरह की आइडेंटिटी कंस्ट्रक्ट होती। बट ऐसा
- 1:04:38नहीं है। अगर सिर्फ आप कंसेप्चुअल कैटेगरी तक ही इसको अगर आप लिमिट रखें ठीक है नेशन
- 1:04:44स्टेट एज अ कंसेप्चुअल कैटेगरी लेट अस्यूम देखिए कॉनंसेप्चुअल कैटेगरी में आईडिया ऑफ
- 1:04:50मेजरमेंट नहीं होता है ना आईडिया ऑफ़ मेजरमेंट उसका फर्दर डेवलपमेंट है
- 1:04:57जी तो व्हाट यू आर ट्राइंग टू इंप्ल्लाई इज़
- 1:05:00एक्चुअली द आईडिया ऑफ़ मेजरमेंट जैसे आप कह रहे हैं ना कि यूएस है, जर्मनी
- 1:05:05है, फ्रांस है, इंडिया है। कौन सा अच्छा नेशन स्टेट है, कौन क्लोज है
- 1:05:12या कौन आइडियल टाइप है? दिस इज़ अ क्वेश्चन ऑफ़ मेजरमेंट।
- 1:05:15नहीं नहीं मेरा कहना है कि अगर नेशन स्टेट का आर्किटाइप
- 1:05:19जी रियल होता तो सिर्फ दुनिया में एक ही टाइप
- 1:05:23के स्टेट्स एक्सिस्ट करते। नहीं मैं वही कह रहा हूं कि कॉन्सेप्चुअल
- 1:05:25कैटेगरीज डिफरेंट फॉर्म्स में हो सकती है ना।
- 1:05:28मैं ये कह रहा हूं कि जो ये कॉन्सेप्चुअल कैटेगरी है अभी नेशन स्टेट की
- 1:05:31हां। वो इनसफिशिएंट है जो हो रहा है उसको
- 1:05:33डिफाइन करने की। उसको एक्सपैंड करने की जरूरत है। जो होता है।
- 1:05:35दैट आई अंडरस्टैंड। बस वही है मेरा क्लेम। और क्योंकि हल्ला एक पर्टिकुलर वे में उस
- 1:05:41कॉन्सेप्चुअल कैटेगरी को खड़ा कर रहा है और इस्लामिक कॉन्सेप्चुअल कैटेगरी को भी
- 1:05:45एक पर्टिकुलर वे में खड़ा कर रहा है कि एक खिलाफत के फॉर्म में ना तो वो उस रियलिटी
- 1:05:50में उस तरह एक्सिस्ट किया वो भी एक डायनेमिकल प्रोसेस के थ्रू एक एंड तक आता
- 1:05:53है। और यहां पे भी उस तरह का स्टेट एक्सिस्ट नहीं करता है। तो जो जो
- 1:05:59दो आइडियाज़ के बीच में रीजनिंग हो रही है वो आइडियाज हाइपोथेटिकल हैं। आप समझ रहे
- 1:06:04हैं मैं क्या कहना चाहूंगा? आई अंडरस्टैंड। बस मेरा इतना ही क्लेम है।
- 1:06:07तो इस वजह से जो रियलिटी हल्ला कंस्ट्रक्ट कर रहा है कि इसका जो
- 1:06:12इंपैक्ट आता है वो इंपैक्ट अनरियल है और वो होपलेसनेस
- 1:06:16क्रिएट करता है। बल्कि प्रोफेटिक लाइफ में एक्चुअली वो
- 1:06:20स्टेट कैटेगरी सिटी स्टेट में क्योंकि जो नेशन स्टेट की बहुत सारी कैटेगरीज हैं वो
- 1:06:24एंबॉडेड है। एंबेडेड है। उसी प्रोसेस के थ्रू गुजर के गवर्नेंस आई
- 1:06:30है। तो मेरे लिए ये रिलेशनली इस्लामिक नहीं रह गया। यह जो यह जो क्रिटिक है
- 1:06:35क्योंकि इस्लाम इटसेल्फ इन मोड से गुजरा है फ्रॉम द प्रोफेटिक लाइफ। तो क्लेम फिट
- 1:06:42नहीं बैठ रहा है। इट्स मोर थ्यरी इट्स मोर हाइपोथेसिस बेस्ड ऑन हिज अंडरस्टैंडिंग जो
- 1:06:46आज की डेट में जो मैं जिस तरह से बता रहा हूं वो रियलिटी में फिट नहीं बैठता। ऐसे
- 1:06:52सेकुलर थ्यरीज पे भी होता है। नहीं आई आई कंप्लीटली अंडरस्टैंड। बट यहां
- 1:06:56पे सवाल मेरा ये है कि इफ दैट इज डी केस देखिए इस्लामी जो शरीयत है जो शरिया है
- 1:07:03उसकी एक बड़ी इंटरेस्टिंग चीज जो है वो ये है कि द नॉलेज ऑफ शरिया बिलोंग्स टू द
- 1:07:12स्कॉलर्स ओलेमा ओलेमा के पास है ओलेमा की मीरास है ठीक है प्रॉफिट से वह उलेमा में
- 1:07:20ट्रांसफर होती है नॉलेज और नॉलेज जो है
- 1:07:25वो क्योंकि ओलेमा के पास है और ओलेमा की ट्रेनिंग अलग-अलग है, बैकग्राउंड अलग है,
- 1:07:33अंडरस्टैंडिंग कैपेबिलिटीज अलग है, रैशनलिटी अलग है एंड स्पिरिचुअलिटी अलग
- 1:07:39है, कमिटमेंट अलग-अलग है। तो जो उसका जो प्रोडक्ट निकलेगा शरिया के फॉर्म में जब
- 1:07:47वह अपना रीजनिंग लगाएंगे तो वह सब्जेक्टिव निकलेगा। ठीक है? कोई जरूरी नहीं है कि हर
- 1:07:53इंसान एक चीज पर अराइव करे। तो इन एसेंस जो नॉलेज फ्रेमवर्क है इस्लाम का वो
- 1:08:02सब्जेक्टिविटी पे बिल्ड होता है। है ना? और
- 1:08:06इस पे एक्चुअली आप जो बात बोल रहे हैं क्योंकि लेट मी कंप्लीट इससे एग्री नहीं
- 1:08:12करेंगे। कहने का मतलब यह है कि शरिया में एक सब्जेक्टिविटी जो है वो एंबेडेड है। यह
- 1:08:18बहुत इंपॉर्टेंट चीज है। क्योंकि अगर आप यह कह रहे हैं कि इस्लाम सोशल रियलिटी के
- 1:08:23बेसिस पे अपने आपको अपने इंस्टीटशंस को कंस्ट्रक्ट करता है तो सोशल रियलिटीज का
- 1:08:30वन ऑफ द नेसेसिटी जो है वो सब्जेक्टिविटी है। ठीक है? इसका मतलब सब्जेक्टिविटी उसके
- 1:08:36अंदर होगी। दैट्स वन थिंग। अब सवाल यह है कि इस सब्जेक्टिविटी के बेसिस पर कोहेरेंस
- 1:08:42कैसे डेवलप हो जो सबसे बड़ा चैलेंज है कि अगर चीजें इतनी सब्जेक्टिव हो गई तो
- 1:08:47कोहेरेंसी कैसे डेवलप होगी? तो कोहेरेंसी को डेवलप करने के लिए ओलेमा ने मेथड
- 1:08:53डिवाइज किया कि इस मेथड को यूज करके आप जो रिजल्ट
- 1:09:00निकालेंगे क्योंकि मेथड सिमिलर होगा वो रिजल्ट की बेसिस पे एक कोहेरेंसी आएगी
- 1:09:08थ्रू ट्रेडिशन। एक लॉन्ग पीरियड ऑफ़ टाइम में उसी मेथड को अप्लाई करने से आप एक
- 1:09:14कोहेरेंट लिटरेचर डेवलप करेंगे। दैट इज़ व्हाट इट इज़। जैसे फॉर एग्जांपल लोग ये
- 1:09:20कहते हैं कि साहब इमाम अबू हनीफा इज दी फाउंडर ऑफ हफी स्कूल। ठीक है? या इमाम
- 1:09:26मालिक इज द फाउंडर ऑफ मालिकी स्कूल। दे आर नॉट फाउंडर्स।
- 1:09:30दे नेवर क्लेम्ड टू बी फाउंडर्स। ठीक है? वो इतने टॉप लेवल के स्कॉलर्स
- 1:09:36अपने वक्त के हैं कि उनके मेथड को उनके स्टूडेंट्स या और लोग अडॉप करते हैं। और
- 1:09:44क्योंकि वो उस मेथड को बार-बार रेप्लिकेट करते हैं। एक पर्टिकुलर काइंड ऑफ लिटरेचर
- 1:09:50डेवलप होता है ओवर अ लॉन्ग पीरियड ऑफ़ टाइम। एंड बिकॉज़ द मेथड कि मेथड के टॉप पर
- 1:09:57एक स्कॉलर बैठा है। इसलिए उस मेथड को आप हनीफी मेथड कह रहे हैं। बट इट्स नॉट
- 1:10:02डेवलप्ड बाय हिम इन दैट सेंस। ही इज़ नॉट द समवन जो उसको डेवलप करके खत्म कर दिया
- 1:10:06उसने। ही लुक्ड एट इट इन इन अ पर्टिकुलर वे और उसको लोगों ने और इस्टैब्लिश किया।
- 1:10:12तो कहने का मकसद यह है कि जो सब्जेक्टिविटी है बिल्ट इस्लामिक
- 1:10:16अंडरस्टैंडिंग में उसमें कोहेरेंसी जो है वह थ्रू ट्रेडिशन आती है। इस पे इनफैक्ट
- 1:10:23बहुत अच्छे अच्छी किताब आर्टिकल है हुसैन अली अकरमा का आई थिंक 2011 और समथिंग
- 1:10:31बहुत फैंटास्टिक आर्टिकल। द टाइटल ऑफ द आर्टिकल इज एंथ्रोपोलॉजी ऑफ अ फतवा। वो यह
- 1:10:38बताते हैं कि जो वेबेरियन अंडरस्टैंडिंग है कि साहब
- 1:10:44जो जो इस्लामिक स्कॉलर्स हैं उनके पास अथॉरिटी नहीं है। वो पेड़ के नीचे बैठ के
- 1:10:49भी जस्टिस कर दे रहे हैं। एडहॉक सिस्टम में जस्टिस कर रहे हैं। पता ही नहीं है लॉ
- 1:10:52क्या है। तो उसको वो चैलेंज करता है और यह कहता है कि देखिए अथॉरिटी ऑफ लॉ जो है
- 1:10:58इस्लाम में वो ट्रेडिशन से आती है। एक पर्टिकुलर मेथड को फॉलो करने से अथॉरिटी
- 1:11:03आती है। आपके बोलने से अथॉरिटी नहीं आती है। बिकॉज़ यू बिलोंग टू दैट ट्रेडिशन
- 1:11:09बिकॉज़ यू आर अ स्टूडेंट ऑफ इबने तैमिया। देयर फॉर यू शुड बी लिसन टू ठीक है एंड
- 1:11:14दैट दैट एक्चुअली टेक्स यू बैक टू द प्रॉफेट हिमसेल्फ प्रॉफम हजरत उमर कीेंस
- 1:11:18इसलिए है बिकॉज़ ही लिसन डायरेक्टली फ्रॉम द प्रॉफेट है ना तो ये उस ट्रेडिशन से
- 1:11:24चीजें निकल रही हैं तो आई अंडरस्टैंड कि सब्जेक्टिविटी की बेसिस पे आप कोहेरेंसी
- 1:11:29डेवलप कर सकते हैं और उस कोहेरेंसी को इस्लाम प्रमोट और प्रोपगेट करता है और वो
- 1:11:36अपनी सोशल रियलिटी में मैनिफेस्ट होती है। दैट आई दैट आई अंडरस्टैंड। बट मेरा मानना
- 1:11:43यह है कि अगर आप उसको ये कहते हैं कि साहब ये जिसको कहते हैं आप नेशन स्टेट की
- 1:11:53कैटेगरी की बात मत कीजिए आप। एक इंस्टीट्यूशनल लेवल पर बात मत कीजिए आप।
- 1:11:58आप यह देखिए कि लोगों ने नेगोशिएट कैसे किया। लोगों ने अपनी रियलिटी की बेसिस पे
- 1:12:06कंस्ट्रक्शन कैसे किया। और उस कंस्ट्रक्शन के बेसिस पर उन्होंने अपने आप को रिीडफाइन
- 1:12:12कैसे किया? दिस इज मोरेंट। दैट्स व्हाट आई अंडरस्टैंड फ्रॉम यू।
- 1:12:18नहीं नहीं मैं ये नहीं कह रहा हूं मेरा कि मुस्लिम्स जो हैं आप आप उसको आप
- 1:12:23मुस्लिम्स को या इस्लामिक मेथड या शरिया को आप इस सेंस में मत देखिए कि नेशन स्टेट
- 1:12:29है या नहीं है या नेशन स्टेट में कैसे नेगोशिएट करना है। आप उसको ऐसे देखिए कि
- 1:12:34मुस्लिम कम्युनिटी ने हर एज में कैसे नेगोशिएट किया है अपनी कंडीशंस में और
- 1:12:42उसकी बेसिस पर आप अंडरस्टैंडिंग डेवलप कीजिए कि इस्लामिक पॉलिटिकल अंडरस्टैंडिंग
- 1:12:48क्या होगी एट अ पर्टिकुलर गिवन टाइम या एट अ पर्टिकुलर गिवन कॉन्टेक्स्ट और स्पेस इज
- 1:12:55दिस व्हाट यू आर सेइंग? इसमें भी एक्चुअली
- 1:12:59थोड़े से लेयर्स हैं निजाम भाई। लेयर्स ये हैं कि जो ये कंस्ट्रक्शन और ये
- 1:13:06पूरी 20थ सेंचुरी की डिबेट्स हुई इवन इमाम इब्न तैमिया की जब बात हो रही है तो मेरा
- 1:13:10आर्गुमेंट ये है कि ये जो चार स्कूल्स ऑफ़ थॉट्स हैं फॉर एग्जांपल सुन्न व जमात के
- 1:13:16कॉन्टेक्स्ट में जो इस अकीदे के उसमें आ रहे हैं। शवुला दहलवी ने इनको दो में
- 1:13:21सिंथेसाइज करने की बात की उनके अपने उसकी वजह से। मेरा फिलोसोफिकल आर्गुमेंट है।
- 1:13:26फिक में मेरी कोई ट्रेनिंग नहीं है। मैं ये बोल सकता हूं फिलोसोफिकली स्पीकिंग एज
- 1:13:29अ स्टूडेंट ऑफ फिलोसोफी इन सारे ट्रेडिशंस की मेटाफिजिकल फाउंडेशंस को अ सिंथेसाइज
- 1:13:36किया जा सकता है एक यूनिवर्सल मेटाफिजिक्स में रिलेटिव टू व्हाट टुडे इट एक्सिस्ट।
- 1:13:40अब वो ट्रू यूनिवर्सल है या नहीं वो तो ओवर द पीरियड ऑफ़ टाइम या फिर वो एक क्लेम
- 1:13:45है बेसिकली। तो उससे क्या होता है कि जो बॉडी ऑफ लिटरेचर है या बॉडी जो कॉरपस ऑफ
- 1:13:50डिस्कर्सिव ट्रेडिशन है वो तो सेम रहता है लेकिन आपके पास एक प्रिसाइज़ मेथोडोलॉजी आ
- 1:13:54जाती है कि कब जो इमाम इब्ने तैमिया ने जो मेथोडोलॉजी शुरू करी कि यू शुड बी एबल टू
- 1:13:59चूज़ बट ही कुड नॉट क्रिएट अ लार्जर मेटाफिजिक्स और इमाम इब्ने तैमिया ने
- 1:14:04लार्जर मेटाफिजिक्स इसलिए नहीं क्रिएट कर पाई क्योंकि वो अथरी ट्रेडिशन को क्लेम कर
- 1:14:08रहे थे टेक्स्चुअल इंटरप्रिटेशन के लेकिन जब वो गॉड को के डिफेंड में आर्गुमेंट दे
- 1:14:14रहे हैं तो वो कलाम ट्रेडिशंस हैं तो ऑटोमेटिकली ही इज़ अ वेरी कॉम्प्लेक्स
- 1:14:18फिगर। तो उनको उनके ट्रेडिशन को एक लेवल तक ही अचीव किया गया। जो ट्रुथ एमियन
- 1:14:23ट्रेडिशन होता वो ये होता कि टेक्सचुअल क्लेम्स को आप किस तरह से रीज़ंड लॉजिक में
- 1:14:31कंस्ट्रक्ट कर सकते हैं। अल्टीमेटली गजाली ने जो स्टैंडर्ड इमाम अल गजाली ने
- 1:14:37स्टैंडर्ड दिए कि जो ट्रांसेंडेंटल रियलिटी का जो क्लेम है रेवोलेशन वही जो
- 1:14:42इंसान की पोटेंशियल है रीजन करके थ थ्यरी को डिफाइन
- 1:14:47करने की रियलिटी की और जो एंपेरिकल एविडेंस है जो ऑब्जर्वेबल एविडेंस है वो
- 1:14:53तीनों अलाइन करने चाहिए क्योंकि अल्लाह ने इस दुनिया को बनाया है या किसी क्रिएशन ने
- 1:14:58इस दुनिया को बनाया है। अगर यह तीनों चीजें अलाइन नहीं कर रही है प्रिंसिपली तो
- 1:15:03कहीं ना कहीं आपके अंडरस्टैंडिंग में कोई कुथाई हो रही है। तो जो मुसलमान है और
- 1:15:08दूसरे लोग भी नॉट जस्ट मुस्लिम्स दुनिया इस वक्त इस क्राइसिस से गुजर रही है कि
- 1:15:12उसके पास इन तीन पिलर्स को यूनिफाई करने की मेटाफिजिक्स नहीं है। फाउंडेशंस को रूट
- 1:15:21करने की। तो जब आपका एक ट्रेडिशनल क्लेम है ट्रेडिशन का अब तक हो क्या रहा था?
- 1:15:30के इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन होने से पहले जो क्लेम टू प्रोग्रेस था वो एक पर्टिकुलर
- 1:15:37स्टैंडर्ड से डिफाइन होता था और इस्लामिक गोल्डन एज की सिविलाइजेशनल क्लेम्स में
- 1:15:42मुसलमानों का एज था उस प्रोग्रेस में हुआ यह कि क्योंकि
- 1:15:48मुस्लिम ट्रेडिशन में क्योंकि आपके पास प्रॉफिट के वफात के बाद डायरेक्ट स्टेट
- 1:15:54रहा मोस्ट ऑफ द टाइम इबने तैमिया स्पेशल क्लेम इसीलिए करते हैं कि उस टाइम पे
- 1:15:58मोंगोल्स आके कि एक्चुअली स्टेट उनको खतरा हुआ गिर सकता है। समझ रहे हैं? वो एक बहुत
- 1:16:03डिस्रोपोशननेट रियलिटी को डील कर रहे थे। इस वजह से ही वाज़ फोर्स्ड टू रिकंस्ट्रक्ट
- 1:16:08एवरीथिंग। उनको पोजीशंस चेंज करनी पड़ी। उन्हें लगा कि यार ये जो कैटेगरीज हैं ये
- 1:16:13इस डाउनफॉल को तो डील ही नहीं कर पा रही हैं। तो उनको तकलीद के बाहर आके कि जो आप
- 1:16:18बोल रहे हैं ना कि ट्रेडिशन कंस्ट्रक्ट उनको ये विद इन तकलीद भी बोलना है कि अगर
- 1:16:22हालांकि वो जो मेथड उन्होंने डिवाइस किया कि आप चूज़ कर सकते हैं। लेकिन उसकी
- 1:16:26कंप्लीट मेटाफिजिक्स या एपिस्टेमोलॉजी नहीं कंस्ट्रक्ट करी क्योंकि उस जमाने में
- 1:16:32पॉसिबल थी नहीं थी एक अलग सवाल है। तो ये जो दौर है उसमें जो मुस्लिम्स ने एज
- 1:16:41खोया वो इस वजह से खोया क्योंकि जो उनका कलाम का ट्रेडिशन उनका दुनिया को
- 1:16:48प्रोग्रेस देने का ट्रेडिशन और उनका जो जस्टिस का ट्रेडिशन है वो हिस्टोरिकली
- 1:16:54मिसअलाइन हो गया क्योंकि आपने इनको कमटिंग गोल समझने लगे एक पॉइंट ऑफ़ टाइम। यूज्वली
- 1:16:59होता है स्टेट फॉर्मेशन में करप्शन आता है। लोगों के पास पावर आ जाती है। पावर आ
- 1:17:03जाती है तो आप हुकूमत क्या करती है कि अपने कंट्रोल में पैसा और वेल्थ रखना
- 1:17:07चाहती है। उसके लिए वो क्या करती है कि वो अब अदिल को खत्म करना पड़ेगा। इक्विटी को
- 1:17:12खत्म करनी पड़ेगी। तो वो प्रोग्रेस को फंड नहीं करते। शुरू के जो खफा थे या जो
- 1:17:17रूलर्स थे उनका इंटरेस्ट था कि इस्लामिक गवर्नेंस एक्सपेंड हो। उसके मॉडल्स
- 1:17:23इंप्लिकेट हो। तो वो पूरा इन्वेस्टमेंट जो बिल बैतुल हिकमा और उसमें एक प्रोडक्शन
- 1:17:28हुआ बाद के जो रूलर्स का था वो प्रिजर्वेशन था ऑफ देयर ओन वो तो उससे
- 1:17:33क्या हुआ जो ये मल्टीपल ट्रेडिशंस यूनिफाइड एक्सिस्ट करते थे उलमा और
- 1:17:37डिस्कर्सिव ट्रेडिशन में वो घूमते चले गए और उसी दौरान पे पैरेलल मॉडर्निटीज
- 1:17:43प्रोड्यूस हो रही थी जिसका क्लेम वेस्ट को था। उन्होंने अपना क्या किया कि भाई
- 1:17:48ट्रांसेंडेंटल क्लेम को हटा के अपना यूनिफिकेशन एक लेवल पर करके सामने रख दिया
- 1:17:53कि यह अदिल है और उसको कॉलोनियल स्ट्रक्चर्स के थ्रू ऑपरेशन के थ्रू
- 1:17:57मुसल्लत किया लोगों पे और कॉलोनीज़ के थ्रू जो एक्सट्रैक्ट हो रहा था प्रॉफिट को उसको
- 1:18:03अपने अपनी कंट्रीज में लगा के एक मटेरियल गेन दिखाया देखो हम कितने आगे हैं। समझ
- 1:18:10रहे हैं? वो जो सेकंड वर्ल्ड थर्ड वर्ल्ड की एक्सप्लइटेशन से आपने एक फॉल्स
- 1:18:16यूटोपिया क्रिएट किया और बोला देखो हम कर सकते हैं। तो प्रोग्रेस ये सब हमारे
- 1:18:20हिस्से के हैं। तो ये जो आप बात बोल रहे हैं जो अभी की डेट में क्योंकि
- 1:18:25मेटाफिजिक्स नहीं है उस ट्रेडिशन को रिकंस्ट्रक्ट करने की उस वोकैबलरी में जो
- 1:18:31दुनिया समझती है स्टेट इंस्टीटशंस के फॉर्म में आपकी इकोनॉमिक्स क्या होगी? आप
- 1:18:36इक्वलिटी को डील कैसे करेंगे इनकलिटी को? आपकी इवन प्रिंसिपल्स ऑफ बायोलॉजी क्या
- 1:18:42होगी? आप गलत और सही के बीच में ऑब्जेक्टिव क्लेम कैसे करेंगे? जैसे आपने
- 1:18:48सब्जेक्टिविटी की कोई बात करी। कुरान खुद सूर इमरान में बोल रहा है सातवीं आयत में
- 1:18:53क्योंकि ये डिबेट्स हो रही थी उस जमाने में कि बहुत सारी चीजें लोग इंटरप्रेट कर
- 1:18:59रहे हैं। समझ नहीं आ रही। फलाना आदमी कुरान की सेम आयत सुन के यह समझ रहा है।
- 1:19:03फलाना आदमी यह समझ रहा है। तो आयत उतरी कि जो बेशतर आयतें हैं कुरान की या जो लार्जर
- 1:19:09कॉर्पस है वो बिल्कुल ए्बगुस नहीं है। और हां कुछ हिस्से हैं उसके जिसमें
- 1:19:15ए्बिगुटी है। फितना करने वाले उस ए्बिगुटी को एक्सप्लइट करके फितना करेंगे। और जिन
- 1:19:22लोगों को कमांड है मैं मफूम बता रहा हूं। उन ऑब्जेक्टिव आयत पे उनके लिए वो
- 1:19:26ए्बिगुटी इसलिए खत्म हो जाएगी क्योंकि उनको
- 1:19:29कॉन्टेक्स्ट समझ आ रहा है। इसी को मैं ट्रांसेंडेंटल कॉन्टेक्स्चुअलिज्म बोल रहा
- 1:19:32हूं कि वो जो ए्बिगुटी है वो ए्बिगुटी इसलिए है क्योंकि आप रिड्यूस्ड फ्रेमवर्क
- 1:19:37से इस्लाम को समझने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे नेशन स्टेट के कंस्ट्रक्शन में
- 1:19:41इस्लाम को घुसाने की कोशिश कर रहे हैं। बल्कि इस्लाम का अपना एक अंडरस्टैंडिंग है
- 1:19:46कि सोसाइटी पावर रिलेशंस में स्टेट इंस्टीटशंस में ऑर्गेनाइज कैसे होती है और
- 1:19:52वो अपने अचीव कैसे करती है गोल्स। तो ये क्लैशेस जो है ये फंडामेंटली इस्लामिक
- 1:19:57नहीं होने चाहिए थे और सब्जेक्टिव क्लेम्स को कुरान खुद एक्सेप्ट कर रहा है लेकिन वो
- 1:20:02एक बॉडी ऑफ़ लिटरेचर विद इन कुरान खुद दे रहा है। वो जगह-जगह बोल रहा है कि आप अक्ल
- 1:20:06को इस्तेमाल करें। जगह-जगह वो बोल रहा है आप कल्ब को इस्तेमाल करें। बता रहा है
- 1:20:10डिफरेंस कहां पे है। जगह-जगह वो ये भी बोल रहा है कि अक्ल कल्व में भी, हार्ट में भी
- 1:20:16रिसाइड कर जाती है। वहां भी वो ये भी बोल रहा है कि क्यों
- 1:20:20आपको वही की जरूरत है? क्यों आपकी नॉलेज लिमिट है? मैं अभी पढ़ रहा था इस
- 1:20:23कॉन्टेक्स्ट में बहुत सारी चीजें। तो कुरान जो मेटाफिजिक्स कंस्ट्रक्ट कर रहा
- 1:20:28है और क्योंकि हमारी ट्रेनिंग जो ट्रेडिशन में हो गई है थराइजेशन की। हमारे जो जिन
- 1:20:32उलमाओं की आप बात कर रहे हैं ना आज की डेट में मुझे वो दिखते नहीं है। वो ना एक वो
- 1:20:39एक डिफरेंट खाद थी। जिसमें ट्रेडिशन में होलिस्टिक नॉलेज एंबेडेड होती थी।
- 1:20:45एक्सिस्ट करती थी। उसके लिए दीन और दुनिया अलग नहीं था। वो उसको शेप कर रहा था। वो
- 1:20:50थ्यरीज़ दे रहा था जस्टिफिकेशन की कि क्यों इस तरह का काम होना चाहिए और जिससे लोग
- 1:20:55मुतासिर हो रहे तो सिर्फ मुसलमान नहीं वो मिसिंग है। तो मैं इस रियलिटी को बोल रहा
- 1:21:01हूं कि आज की डेट में अल्टरनेटिव मेटाफिजिक्स मैं तो खुद मेरा जो जर्नी है
- 1:21:05वो वही है कि अल्टरनेट मेटाफिजिक्स क्या होगी। मेरा एक अपना उसमें एक
- 1:21:08अंडरस्टैंडिंग है जो मैं बोल रहा हूं। ट्रांसलर कॉन्टक्चुअलिज्म बोलता हूं। और
- 1:21:12मेरे वालिद साहब से भी वो बहुत चीजें आ रही है। और दो 20थ सेंचुरी में डिबेट्स
- 1:21:16हुई है। ऐसा नहीं है वो। वो डिस्कर्सिव ट्रेडिशन मैं मानता हूं एक्सिस्ट करता है
- 1:21:19कि ओवर द पीरियड ऑफ़ टाइम कि आज की डेट में दूसरी बात एक आपने क्योंकि ट्रेडिशनल
- 1:21:23क्लेम किया ऐसी कोई सिविलाइजेशन नहीं है जी
- 1:21:26जो ट्रेडिशन को क्लेम नहीं करती इंक्लूडिंग सेकुलर तो वो भी ग्रीक फिलॉसफी
- 1:21:31को क्लेम करती है एज अ ट्रेडिशन वहां पे भी डिस्कर्सिव ट्रेडिशन है कि जो
- 1:21:34एरिस्टोटल से चल रहा है जो प्लेटो से चल रहा है जो न्यू प्लॉटिनस में आया जो
- 1:21:38चलते-चलते टॉमस एक्वस और उन्होंने लिया फिर उसके बाद वो ट्रेडिशन डेकार में आया
- 1:21:43डेकार के बाद फिर वो ट्रेडिशन न्यूटन लाइब रूसो लॉक हॉब्स और आपके इमैनुअल कांट फिर
- 1:21:51हेगल फिर उसके बाद आपके एक मां समझ रहे हैं
- 1:21:54वो ट्रेडिशन की पूरी लेगसी वो भी लाते हैं वो भी शजरा लाते हैं कि मैंने कहां से
- 1:21:58लिया उसने उससे लिया जॉन स्टमिल ने ऐसे लिया
- 1:22:01तो पहली बात ये कोई इस्लामिक थियोलॉजिकल क्लेम नहीं है कि
- 1:22:07हमारे पास ही सिर्फ ट्रेडिशन है या मेथड है
- 1:22:10ऑफकोर्स ऑफकोर्स इट्स नॉट और आज की डेट में जो हमारा ट्रेडिशनल मेथड
- 1:22:14है सवाल यह है क्या वो सफिशिएंट है? हां, फख में है। बहुत सारी चीजों में मैं यह
- 1:22:19नहीं डिनाई कर रहा। मैं कह रहा हूं फिलोसोफिकली जब रीज़ करते हैं हम बाहर तो
- 1:22:23मुझे तो एक जो कलाम की डिबेट 400 साल पहले हुई शाह वली उल्ला देहलवी ने करी या फिर
- 1:22:29उनसे पहले करी। आज की डेट में मैथमेटिकल क्लेम्स टू लॉजिक एक्सपैंड हो गए हैं।
- 1:22:34मंतिक एक्सपैंड हो गया है। समझ रहे हैं? जी।
- 1:22:37आपका चाहे विज़न सेम रहे लेकिन आपको फिर से सिंथेसाइज करना पड़ेगा। लार्जर बॉडी ऑफ़
- 1:22:43नॉलेज में प्रिंसिपल्स ऑफ इस्लामिक अंडरस्टैंडिंग ऑफ रियलिटी वो नहीं है। दिस
- 1:22:50टेक्स अस टू द सेकंड क्वेश्चन जो जो मैंने शुरू में पोज़ किया था कि
- 1:22:57मुस्लिम्स इंडिया में अपनी आइडेंटिटी को कंस्ट्रक्ट
- 1:23:01कैसे करें? नाउ बेस्ड ऑन हमने जो डिस्कशंस किए हैं लेट मी गिव एन इनिशियल स्टेटमेंट।
- 1:23:08इनिशियल स्टेटमेंट जिसकी बेसिस पे वी कैन डिस्कस इट
- 1:23:14शुड दे अंडरस्टैंड
- 1:23:19द कॉन्स्टिट्यूशन दी
- 1:23:24स्टेट आफ्टर 1947
- 1:23:30एज समथिंग जो उन पे इंपोज की गई जिसमें उनको नेगोशिएट करना पड़ेगा
- 1:23:36परपचुअली व्हिच वी डिस्कस्ड ठीक है कि क्या मुस्लिम
- 1:23:41स्टेट ऑफ पॉलिटिकल अंडरस्टैंडिंग इज इन परपचुअल स्टेट ऑफ नेगोशिएशन ठीक है क्या
- 1:23:47वो परपचुअली स्ट्रेटेजिकली आपको नेगोशिएट करना है क्योंकि वो इनफोर्स्ड है एक
- 1:23:53पर्टिकुलर टेंपलेट आपके ऊपर दैट्स वन या फिर
- 1:23:59आप यह मान के चलें कि बिकॉज़ आफ्टर 1857 और इनफैक्ट एक्ट 1857 जो है उसमें उस
- 1:24:10रिवोल्ट में सबसे बड़ा रोल मुसलमानों का ही था। एक्चुअली भाई मुगल एंपायर था ये।
- 1:24:16मुगल्स के अंडर में था। जाहिर सी बात है मुगल्स ही
- 1:24:19उन्हीं वही करेंगे। तो ये बहुत लॉजिकल बात है। तो 1857 के बाद से मुसलमानों ने जो
- 1:24:28रेजिस्टेंस दिखाया अगेंस्ट एक्सटर्नल फोर्सेस
- 1:24:32वो कंटिन्यू होता है टिल 1947 एट लीस्ट। इन व्हाटएवर फॉर्म इट इज। ठीक है? कोई भी
- 1:24:39फॉर्म हो और फिर वह मैनिफेस्ट होता है फर्दर
- 1:24:46भले बहुत ही डाइल्यूटेड फॉर्म में हो लेकिन इन डिफरेंट वेज़ फॉर एग्जांपल देवबंद
- 1:24:51आज भी एक्सिस्ट करता है। ठीक है? जो 186 में बना था।
- 1:24:57जमीयत उलमा-ए-ह हिंद 1900 1920 में बनी थी। आज भी एक्सिस्ट करती है।
- 1:25:05जमात इस्लामी 1947 से बनी से पहले बनी थी। 1941
- 1:25:11यस जमात इस्लामी हिंद आज भी एक्सिस्ट करती है।
- 1:25:16अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एज अ यूनिवर्सिटी वजूद 1920 में आती है। आज भी
- 1:25:21एक्सिस्ट करती है। तो वो जो एक आइडेंटिटी की बात है वो
- 1:25:26कंटीन्यूअस है। प्री इंडिपेंडेंस आफ्टर इंडिपेंडेंस। तो पहला चीज तो यह था क्या
- 1:25:32यह जो नेशन स्टेट या इंडिया एज अ स्टेट या कॉन्स्टिट्यूशन को हम एक फोर्स्ड
- 1:25:39माने जिसमें हमको परबचुअली नेगोशिएट करना है या इसको हम यह माने कि साहब यह एक ऐसी
- 1:25:45चीज है जिसमें हमने खुद कंट्रीब्यूट किया है। ठीक है? एंड देयर फॉर इट्स नॉट अ
- 1:25:51क्वेश्चन ऑफ नेगोशिएशन। इट इज़ अ क्वेश्चन ऑफ क्लेम कि मेरा शेयर
- 1:25:57भी है इसके अंदर। ठीक है? जो जो राहत इंदौरी का शेर है सभी के सभी का खून है
- 1:26:04शामिल यहां की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है। ठीक है? सो इज दैट
- 1:26:10दैट्स अ सेकंड कैटेगरी। दैट्स अ सेकंड थिंग देन देयर इज़ अ थर्ड थिंग कि साहब
- 1:26:18हमने नेगोशिएट किया था। हमने उसको वजूद में लाया था। हमारा बहुत
- 1:26:26बड़ा कंट्रीब्यूशन था। आज भी हमारा कंट्रीब्यूशन है। लेकिन अब यह जो कंट्री
- 1:26:33जिस डायरेक्शन में जा रहा है, वो डायरेक्शन हमारे लिए एलियन डायरेक्शन है।
- 1:26:40ठीक है? हमने यह नेगोशिएट कभी नहीं किया था कि इस तरीके का वायलेंस होगा हमारे
- 1:26:46खिलाफ। यह हमारा इस तरीके का मार्जिनलाइजेशन होगा। या हमारा इस तरीके
- 1:26:51का सप्रेशन होगा। चाहे वह आप सिटीजनशिप पे ले लें, चाहे रिफ्यूजी में ले लें। अभी कल
- 1:26:56ही परसों की न्यूज़ है कि भ दिल्ली में जो है वो इललीगल बांग्लादेशी माइग्रेंट्स को
- 1:27:01पकड़ा गया। डॉक्यूमेंट्स नहीं थे। यह वो सारे हिंदुस्तान में चल रहा है। ये ठीक
- 1:27:04है? या डिमोलिशन को ले लें आप, चाहे वफ को ले लें आप, चाहे पर्सनल लॉ को ले लें आप,
- 1:27:09चाहे कम्युनल वायलेंस को ले लें, बाबरी केस को ले लीजिए।
- 1:27:18थर्ड कैटेगरी ऑफ़ आर्गुमेंट ये है कि साहब हमने यह हिंदुस्तान नेगोशिएट नहीं किया
- 1:27:23था। ठीक है? तो ये जिस डायरेक्शन में जा रहा है
- 1:27:29ये एलियन डायरेक्शन है। जहां हमारी सिटीजनशिप खत्म हो रही है, आइडेंटिटी खत्म
- 1:27:33हो रही है, डाइल्यूट हो रही है। नाउ अगेन वी हैव टू कम ऑन द टेबल
- 1:27:41टू नेगोशिएट। नाउ अगेन वी हैव टू
- 1:27:47स्टार्ट डूइंग समथिंग। सो दैट हमारा एकिस्टेंस
- 1:27:52दिखाई तो दे आपको। दिस इज अ थर्ड थिंग जिसको कुछ लोग जो हैं वह यह कह रहे हैं कि
- 1:27:58साहब रीनेगोशिएटिंग द हिंदू मुस्लिम डील हसन सुरूर ने शायद किताब लिखी है कि क्या
- 1:28:06वो रीनेगोशिएट करना पड़ेगा हमको। ठीक है? क्या वह जो झंडा है हिंदुस्तान का जो झंडा
- 1:28:14है जिसमें दोनों कलर्स आपने सिंबॉलिकली दिखाए हैं हिंदू मुस्लिम के और बीच में
- 1:28:20वाइट दिखाया है एज अ मैटर ऑफ पीस क्या उसके लिए भी आपको लड़ना पड़ेगा?
- 1:28:30सो इन ऑन द बेसिस ऑफ ऑल ऑफ द डिस्कशन जो हमने जो डिस्कशनंस किए हैं
- 1:28:36आपकी अंडरस्टैंडिंग में वेयर डू वी फॉल आपका काफी लेयर्ड कॉम्प्लेक्स और एडवांस्ड
- 1:28:44क्वेश्चन है जो पिछले 300 साल अगर हम 1857 से भी पीछे
- 1:28:50लेके चलें और मुगल मुगलिया जो सल्तनत है उसका डाउनफॉल क्यों शुरू होता है
- 1:28:57जी उसकी तरफ भी हम तव तवज्जो दें और
- 1:29:00जो शाह वली उल्ला दहलवी और उनसे पहले जो स्कॉलरशिप हो रही थी वो ये आर्ग्यू कर रहे
- 1:29:08थे कि जो मुगल स्टेट है वो इस्लामिक प्रिंसिपल्स ऑफ गवर्नेंस
- 1:29:13अदल जस्टिस जो भी इमेजिनेशंस हैं कि व्हाट ऑट टू बी
- 1:29:18हम उससे हटके वो पावर रिलेशंस
- 1:29:22सर्वाइवल कंट्रोल मॉडर्न स्टेट भी अब जैसे आप ईटन का हमने पडकास्ट किया था मैंने
- 1:29:29रिचर्ड ईटन का तो उनका बोलना था कि अकबर और औरंगजेब
- 1:29:35दोनों वर वेरी मॉडर्न जी
- 1:29:39अकबर ने जो मॉडर्न नेशन स्टेट में इंस्टीटशंस ऑफ एफिशिएंसी होते हैं कि किस
- 1:29:44तरह से स्टेट मल्टीपल लेवल्स पे ऑर्गेनाइज्ड होगा मिलिट्री इकोनमी
- 1:29:49पॉलिटिक्स ब्यूरोक्रेसी ही इज़ द वन हु इंट्रोड्यूस्ड इट इवन बिफोर
- 1:29:54मॉडर्न नेशन स्टेट और दूसरी तरफ औरंगजेब जिसने रूलर को फिर से पहली बार बिलो द रूल
- 1:30:03ऑफ रॉ रखा के शरीयत ऊपर है। अभी तक क्या चला रहा था कि ठीक है वो है लेकिन जो रूलर
- 1:30:09है उसके ऊपर लॉ अप्लाई नहीं हो रहा था। तो इन प्रिंसिपल एक मॉडर्न स्टेट का जो ये भी
- 1:30:15लॉजिक है कि जो कॉन्स्टिट्यूशन है वो सीट ऑफ अथॉरिटी और सोवनिटी है।
- 1:30:21जी और एक इस्लामिक गवर्नेंस के मॉडल में
- 1:30:25क्योंकि कुरान और जो कॉरपस ऑफ हदीस लिटरेचर है
- 1:30:31उससे जो इमर्ज होने वाली शरीयत है फिक है वो सीट ऑफ सोवनिटी बन जाता है इन टर्म्स
- 1:30:38ऑफ जुरिस प्रिडेंस
- 1:30:41जी तो औरंगजेब भी इन मॉडर्न लॉजिक के अगर
- 1:30:45हिसाब से सोचेंगे रूल ऑफ लॉ के अंडर है। लेकिन क्योंकि मोरल करप्शन क्योंकि
- 1:30:51इनकलिटीज क्योंकि स्टेट के सर्वाइवल के लिए जो
- 1:30:57रिलेशंस आप बिल्ड कर रहे हैं दूसरे स्टेट्स के साथ, दूसरे ग्रुप्स के साथ।
- 1:31:02हिंदुस्तान में कास्ट एक बड़ा फैक्टर है। इस्लाम का जो क्लेम है वो एक रेडिकल
- 1:31:09ह्यूमनिज्म का है। जी।
- 1:31:12लेकिन वह हिंदुस्तान जैसी जग्राफी में नहीं एक्सिस्ट करता है। इवन स्कॉलर्स लाइक
- 1:31:18शाह वली उ्ला दहलवी टू मौलाना मौदूदी आजाद मौलाना हुसैन अहमद मदनी ये जो लंबा डिबेट
- 1:31:25का सिलसिला हुआ 200 250 साल कहीं पे भी इस इनकलिटी को जो एकिस्ट करती है मुआशरे में
- 1:31:32जी उसको सीरियसली नहीं लिया गया। जी
- 1:31:36तो एक तो ये है कि मोरल करप्शन के स्टेट सर्वाइव करते हैं जस्टिस पे
- 1:31:41हम या कम से कम परसेप्शन ऑफ जस्टिस पे आप
- 1:31:46बहुत लंबे वफे तक कंट्रोल को इस्तेमाल करके
- 1:31:51आप स्टेट को स्टेबल नहीं रख सकते जो वेस्टर्न नेशन स्टेट्स हैं डिस्पाइट
- 1:31:58देयर ऑपरेशन थ्रूउ द वर्ल्ड उन्होंने जो फ्रीडम्स दिए हैं अपने नेशन स्टेट्स के
- 1:32:03विद इन टू देयर पपुलेशंस वो उनके सर्वाइवल के लिए नेसेसरी है। दैट शराड जो इस वक्त
- 1:32:09यूएस में हो रहा है अंडर ट्रंप वो फ्रिक्शन जब मैनिफेस्ट हो रहा है आप देखिए
- 1:32:13स्टेबिलिटी कैसे है? हर कुछ महीने में गवर्नमेंट शटडाउन हो जाता है।
- 1:32:18जी आप सोचिए दुनिया का टॉप नेशन स्टेट में
- 1:32:22अगर आपको ये सुनने में आ रहा हो गवर्नमेंट शटडाउन है। आप क्या उसको स्टेबिलिटी
- 1:32:27लेंगे? तो एक तो मुस्लिम आइडेंटिटी को पहले हमें देखना पड़ेगा कि वह
- 1:32:33जब से लेकर 1857 तक डाउनफॉल हो रहा है और काउंटर क्लेम जब भी आ रहा है शाह उ्लाह
- 1:32:39बोल रहे हैं कि डाउनफॉल आ रहा है सिंथेसिस करना पड़ेगा
- 1:32:44वो सिंथेसिस करने की कोशिश भी कर रहा है लेकिन वो सिंथेसिस किस चीज में हो रहा है
- 1:32:48थियोलॉजिकल डिबेट्स में हम
- 1:32:50वैदानियत की डिबेट्स में वो मॉडर्निटी जो डेवलप हो रही है सो कॉल्ड
- 1:32:57जो इल्म के नए जो शोबे
- 1:33:04दुनिया में इमर्ज हो रहे हैं वो उसका सिंथेसिस नहीं है।
- 1:33:08जी तो ही इज़ ग्रेट विद इन द ट्रेडिशन बट ही
- 1:33:11इज़ नॉट ग्रेट एज अ सिंथेसिस ऑफ द ओवरऑल दुनिया में जो चल रहा है।
- 1:33:18ठीक है? उसके बाद शाह वलीला दहलवी को बोला जाता है
- 1:33:22कि हर वो ट्रेडिशन क्योंकि सीड तो थी सिंथेसिस की।
- 1:33:27जो फिर उसके बाद हिंदुस्तान में गुजरा जो छह बड़े ट्रेडिशंस हैं देवबंद का ट्रेडिशन
- 1:33:32है बरेलवी का ट्रेडिशन है मौलाना जो ये हैं के मौदूदी हैं सर सैयद हैं इस तरह के
- 1:33:41मैं मिस भी कर रहा हूं वो सब शाह वली उल्ला दहलवी की
- 1:33:46अंडरस्टैंडिंग ऑफ व्हाई देयर शुड बी सिंथेसिस जैसे हेगल ने जब बोला
- 1:33:50डायलेक्टिक्स है उसने रिसोंड किसे किया इमैनुअल कांट को
- 1:33:54इमैनुअल कांट क्या कर रहा था सिंथेसाइज कर रहा था लेकिन उसके बाद एक रीइटरप्रिटेशन
- 1:33:58ने डायलेक्टिस के उसके बाद सिर्फ डिफरेंसेस लाया वेस्टर्न एकेडमिया में
- 1:34:03उसी तरह शाह शाह वली उल्लाह ऑलदो ट्राइंग टू सिंथेसाइज बिकम द प्राइमरी रीज़
- 1:34:12ऑफ़ फैक्शंस। ठीक है? उनकी अपनी जो इंटरप्रिटेशन जो लोग
- 1:34:16कर रहे हैं जो उनके उसमें हालांकि ही इज़ ग्रेट इन इन हिमसेल्फ कि वो जो कोशिश कर
- 1:34:20रहे हैं बट लोग जो उनको फिर रीड कर रहे हैं उस सिंथेसिस को वो अपने-अपने
- 1:34:24पर्सपेक्टिव से कर रहे हैं। 1857 में क्योंकि एक ब्रिटानिया हुकूमत ने एक और
- 1:34:30स्टेज ऑफ पॉलीटिकल सोवनिटी की फॉल को अचीव किया मुस्लिम्स की इंडिया में तो वो जो
- 1:34:37क्राइसिस है वो इतना मैनिफेस्ट हो गया कि दो मेजर ट्रेडिशंस एक क्योंकि उलमा उसमें
- 1:34:44बहुत इनवॉल्व थे। उनके जान माल और इदारों का बहुत नुकसान हुआ। तो उन्होंने यह सोचा
- 1:34:50कि कैसे एक देवबंद जैसी तहरीक हो जी
- 1:34:53कि जिसमें आपकी जो अपनी पॉलिटिकल सोवनिटी स्टेट के इंस्टीट्यूशन में मैनिफेस्ट होती
- 1:34:59थी आप उसको नॉन स्टेट इंस्टीटशंस में प्रिजर्व कर
- 1:35:04लें। जी
- 1:35:05जो शरीयत का एक हिस्टोरिकल खिलाफत के अंडर अस्यूम किया जाता है कि वो इस तरह हालांकि
- 1:35:10वो भी एक क्लेम है। ऐसा नहीं है कि आप खिलाफत के अंडर कंप्लीटली इंडिपेंडेंट थे।
- 1:35:14बट सफिशिएंटली इंडिपेंडेंट थे इतना कि आप सिवाय टॉप लीडरशिप के आपके पास एफआईआर था
- 1:35:21जजमेंट्स का और सफिशिएंटली आपको इंडिपेंडेंस थी तो एक तरफ वो हुआ कि भ अब
- 1:35:27स्टेट रिलेशंस चेंज हो रहे हैं। ब्रिटिश जो है वो प्राइमरी जो ऑब्जेक्टिव ऑफ हेट
- 1:35:34है फ्रॉम इंस्टीट्यूशनल्स गवर्नेंस पर्सपेक्टिव उसको मुसलमान दिख रहा है
- 1:35:38क्योंकि उसी का क्लेम है पॉलिटिकल। जी
- 1:35:41तो उसने भी बायसेस क्रिएट किए हिंदू मुस्लिम रिलेशंस में।
- 1:35:44जी। तो सर सैयद अहमद खान क्योंकि
- 1:35:47एजुकेटेड ब्रिटिश उसमें भी वह किया बाहर भी जाके देखा वो भी किया उन्होंने सोचा कि
- 1:35:53भाई यह एक सिंथेसिस तो हो रहा है लेकिन मॉडर्निटी के साथ नहीं हो रहा है जो उलूम
- 1:35:56हो रहा है उन्होंने एक एफर्ट मारा
- 1:35:59लेकिन वहां पे भी रियल सिंथेसिस नहीं हुआ तो वो कमटिंग रियलिटीज हो गई देवबंद ने
- 1:36:04उनको क्रिटिक भी किया कि आप जो कर रहे हैं मॉडर्न एजुकेशन के नाम पे
- 1:36:10वो ट्रेडिशनल कैटेगरीज को आप डाइल्यूट कर रहे हैं फरिश्ते क्या हैं उनका रोल क्या
- 1:36:16है। आप रैशनलाइज कर रहे हैं इस्लाम को तो आप उसको रिड्यूस कर रहे हैं उसके
- 1:36:21इंपैक्ट को क्योंकि वो बिय्ड अक्ल क्योंकि ये डिबेट्स तो पहले भी हो चुकी हैं।
- 1:36:25ये तो गजाली के वक्त भी हो चुकी है। ऐसा नहीं है ना कि ये डिबेट्स अक्ल की और नकल
- 1:36:30की और वही की हुई नहीं है। जी
- 1:36:33वो मॉडर्न फाउंडेशंस में जो एक्सपैंड हुआ है वो लॉजिक उसके कॉन्टेक्स्ट में नहीं
- 1:36:37हुई। तो किसी के पास भी पूरा जवाब नहीं है।
- 1:36:41जी लेकिन विज़न सबको आ रहा है। और ये सिर्फ
- 1:36:45इंडिया में नहीं हो रहा है। जमालुद्दीन अफगानी, राशिद उल रिदा, खिलाफत का
- 1:36:49डाउनफॉल, अल्लामा इकबाल सब लोग रीड कर रहे हैं कि भई अब जो हमारी ओवरऑल पॉलिटिकल
- 1:36:56सोनिटी है ग्लोबल। वो खत्म हो रही है। जी।
- 1:36:59अब हम क्या करें? तैमियन मूवमेंट आता है। मूवमेंट एक तरीके से ना आ रहा है। दैट इज
- 1:37:04व्हाई इमाम इबने तैमिया बिकम्स रेलेवेंट अगेन। वह बीच की हिस्ट्री में गायब है।
- 1:37:11क्योंकि मोंगोल्स का इन्वज़ अब दूसरी बार ऐसे हो रहा है कि एक तरीके से कि आपकी
- 1:37:16पॉलिटिकल सोवनिटी की ग्लोबल इंस्टीट्यूशन को चैलेंज मिल गया। जी
- 1:37:22खिलाफत मूवमेंट बाकी सारी चीजें मुस्लिम जो आइडेंटिटी है वो अब कंफ्यूज हो जा रही
- 1:37:28है। इंडिया में भी जो स्टेट और पावर रिलेशंस हैं वो चेंज हो रहे हैं। जो हिंदू
- 1:37:34मुस्लिम सिख ईसाई जितने भी आदिवासी उनको लग रहा है कि एक नया क्लेम और नेगोशिएशन
- 1:37:42हो सकता है। जी
- 1:37:44और उन पावर रिलेशंस में जो सफिशिएंट क्योंकि आपको ब्रिटिश ने अपने इंस्टीटश
- 1:37:51में भागीदार नहीं हुआ। आप ब्यूरोक्रेट्स नहीं बन पाए। आपको जॉब्स नहीं मिली। आपका
- 1:37:56सिस्टमिक डेप्रिवेशन जो आज हम बोलते हैं आपका सिस्टमिक डेप्रिवेशन एज अ स्टेट
- 1:38:01पॉलिसी जी।
- 1:38:02क्योंकि खतरा आपसे है। और जो दूसरी कम्युनिटीज हैं उन्होंने अपने
- 1:38:07आप को इंटीग्रेट करना शुरू करा। जी।
- 1:38:10तो एक प्रिविलेज क्लास होती है। उसमें से फिर फ्रीडम मूवमेंट होता है। सारी चीजें
- 1:38:15होती हैं। लेकिन जो प्राइमरी क्राइसिस है वो डिबेट में आता है फिर से कि मुस्लिम
- 1:38:21पॉलिटिकल थॉट क्या होगा? और जो हमने पहले बोला कि मुस्लिम पॉलिटिकल थॉट प्रोफेटिक
- 1:38:26लेगसी में 23 इयर्स में डिफरेंट तरीके से इमर्ज हुआ है।
- 1:38:30जी। अल्लामा इकबाल क्योंकि कहीं लाहौर और
- 1:38:33पंजाब और उस इलाके में रह रहे थे। जहां मुस्लिम मेजॉरिटी में भी था। थोड़ा साइड
- 1:38:37में जाके माइनॉरिटी भी आ रही थी। तो उन्होंने सोचा फेडरल होना चाहिए।
- 1:38:42जिन्ना के इमेजिनेशन में ज्यादा हो रहा था कि जो मुस्लिम डोमिनेटेड इलाके हैं
- 1:38:47वहां पे अचीव कर ले हम या मौलाना मौदूदी सोच रहे थे कि कैसे एक फाइनलिटी इकामत दीन
- 1:38:53द प्रोजेक्ट ऑफ एप्लीकेशन ऑफ इस्लाम वो होलिस्टिक होगा। लेकिन उसकी एक मेथोडोलॉजी
- 1:38:58उसकी जो एक ग्रेजुअल एक परपेचुअल स्ट्रगल है उसको अचीव करने की वो बहुत डिफाइन नहीं
- 1:39:03थी। जी दूसरी तरफ हमारे जो अकाबरीन हमारे जो उलमा है देवबंद के उनमें भी दो फैशंस
- 1:39:12थी। उनमें से एक फैक्शन था जो गांधी और बाकी लोग आजाद थे।
- 1:39:16मौलाना हुसैन अहमद मदनी थे। उनका ये कहना था कि मिसाके मदीनिया में तो जो कौमी कौम
- 1:39:21और उम्मत की डेफिनेशन है उसमें यहूदी भी थे और पेगंस भी थे।
- 1:39:25जी या पॉलिथीस भी थे। तो उस हिसाब से आज की
- 1:39:29डेट में जो हमारी जो रेंज ऑफ पॉलिटिकल सोवनिटी है वो हमारी अपनी वजूआत की वजह से
- 1:39:36पीछे चले गई है। अब हमें सोसाइटी पे भी काम करना पड़ेगा।
- 1:39:41हमें उस मोरल क्लेम को ज री कंफिगर कर सकते हैं जब हमारा सोसाइटी पे कोई क्लेम
- 1:39:47होगा। जी
- 1:39:47उसका मेथड वो डिफाइन नहीं कर पाए। जी
- 1:39:50उसका क्लेम बोल दिया कि ऐसा होना चाहिए। अल्लामा इकबाल ने बोल दिया कि
- 1:39:53रिकंस्ट्रक्शन होना चाहिए। कैसे होना चाहिए? क्योंकि वो स्टेज नहीं थी। होता है
- 1:39:57ना ये सारी चीजें इन टाइम होती हैं। उस टाइम मॉडर्निटी की कंप्लीट कैनवस दुनिया
- 1:40:02के सामने जाहिर नहीं थी। पोस्ट मॉडर्निटी से कोई डील नहीं कर रहा है। क्रिटिकल
- 1:40:06थ्योरी से कोई डील नहीं कर रहा है। नेशनलिज्म से लोग डील कर रहे हैं। नेशन
- 1:40:09स्टेट से नहीं कर रहे हैं। समझ रहे हैं कि जैसे कैपिटलिज्म और एक
- 1:40:12कैपिटलिस्ट स्टेट में डिफरेंस है। उसी तरह नेशनलिज्म और नेशन स्टेट में डिफरेंस है।
- 1:40:18तो इनकंप्लीट मॉडल्स ऑफ हाउ मुस्लिम्स कैन नेगोशिएट क्योंकि ब्रिटानिया हुकूमत का भी
- 1:40:26समझ आ रहा था। वर्ल्ड वॉर वर्ल्ड वॉर टू के बाद वन टू के बाद इनका भी कोलैप्स हो
- 1:40:29सकता है। फ्रीडम मूवमेंट भी चल रहा है। तो ये सब नेगोशिएटिंग पोजीशन है। अंबेडकर बात
- 1:40:34कर रहे हैं दलित आइडेंटिटी की। पूरा है। अंबेडकर बोल रहे हैं कि मुसलमानों में
- 1:40:40प्रिंसिपली इक्वलिटी है। लेकिन जब वो एंगेज कर रहे हैं मुसलमानों से कोई उस
- 1:40:43क्वेश्चन में इंटरेस्टेड नहीं है। तो हम लोगों ने अभी तक ये जो डिस्कशंस किए कि
- 1:40:50मुसलमानों का क्या रोल रहेगा? पार्टीशन होते ही मुसलमानों का बंटवारा हो गया। जी
- 1:40:57यह सारे मॉडल्स एक यूनिफाइड इंडिया के क्लेम की तरफ थे।
- 1:41:03थरी सारी कंस्ट्रक्ट हो रही है उस टाइम जब आपके पास रिलेटिव फ्रीडम है। इसलिए जमीयत
- 1:41:07भी बन रही है, जमात भी बन रही है, एएमयू भी बन रहा है, जामिया भी बन रहा है, नदवा
- 1:41:11भी बन रहा है। जी।
- 1:41:13पोस्ट इंडिपेंडेंट इंडिया में कोई मेजर तहरीक जो ओरिजिनल हो। कोई मेजर मूवमेंट जो
- 1:41:19ओरिजिनल हो, डेरिवेटिव ना हो। डेरिटिव मूवमेंट्स तो बहुत हैं
- 1:41:24क्योंकि जो स्टेट फॉर्मेशन हुआ जो आप नेगोशिएशंस नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि
- 1:41:29आपने पावर और कंट्रीब्यूशन आपका खत्म हो गया और आपका जो क्लेम टुवर्ड्स क्योंकि
- 1:41:34पार्टीशन हो गया पार्टीशन होने की वजह से जो आपका क्लेम की मोरल हाई ग्राउंड है वो
- 1:41:40रिलेटिवली रिड्यूस हो गई प्रिंसिपली तो अब जब आप नेगोशिएटिंग टेबल पे आए तो आपकी जो
- 1:41:47रिलेटिवली जो आप एक्सपेक्ट कर रहे थे उससे रिड्यूस्ड राइट्स हो गए
- 1:41:52फिर भी बहुत सारी चीजें नेगोशिएट हो गई। जी।
- 1:41:55प्रिंसिपली स्पीकिंग कॉन्स्टिट्यूशन प्लूरल रहा, सेकुलर रहा, लिबरल रहा। लेकिन
- 1:42:01उसके अंदर इंटरप्रेटिव कैटेगरीज जैसे नेशन स्टेट जो है हम बात कर रहे थे वो एक
- 1:42:06यूटोपियन कंस्ट्रक्ट है। जी। जब आपने बात करी कि भाई ट्रेडिशंस की
- 1:42:10भी सब्जेक्टिव रीडिंग होती है तो सब लोगों को लग रहा था कि भाई कॉन्स्टिट्यूशन बन
- 1:42:15गया है तो अब इसने ट्रेडिशन जो बनेगा हिंदुस्तान में अगला वो प्रिजर्व कर लिया
- 1:42:22ये एजम्पशन नहीं रहा कि अगर कम्युनलिज्म स्ट्राइव करेगा मेजॉरिटेरियन स्टेट इमर्ज
- 1:42:28होगा वो भी नेगोशिएट कर रहे हैं आप भी नेगोशिएट कर रहे हो उनका नेगोशिएटिंग
- 1:42:32क्लेम ज्यादा होगा आप इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग नहीं करेंगे आप रिफॉर्म नहीं
- 1:42:37करेंगे जी तो उसका असर यह हुआ कि मुस्लिम एक तो
- 1:42:41पॉलिटिकल सोवनिटी में जो स्टेट अपनी एक थ्यरी कंस्ट्रक्ट करता है पास्ट की उसमें
- 1:42:47आप अदर हो गए आप बाहरी हैं। क्योंकि जो हिंदुत्व राइट है उन्होंने एक पर्टिकुलर
- 1:42:52क्लेम किया कि भाई ये तो बाहर से आए हैं। ठीक है?
- 1:42:55तो आपकी जो सोशियोलॉजिकल कंडीशनिंग है और रीजनिंग है उसमें आपका अदराइजेशन हो गया
- 1:43:01और सिर्फ आपका नहीं हुआ। क्योंकि यह ग्लोबल नेशन स्टेट्स बनने की वजह से सबसे
- 1:43:06ज्यादा जो नुकसान हुआ है वो मुसलमानों का हुआ है। वो इस वजह से हुआ है क्योंकि वो
- 1:43:13जैसे लिबरल्स जो हैं या कम्युनिस्ट हैं उनका जो मोरल फ्रेमवर्क जो उनका क्लेम है
- 1:43:20अपनी मोरालिटी को अपने पैराडाइम में वो ट्रांस नेशनल है कि नेशन स्टेट कोई भी हो
- 1:43:24सकता है। वो प्रिंसिपल्स जब अप्लाई होंगे तो इस तरह की सोसाइटी कंस्ट्रक्ट होनी
- 1:43:28चाहिए। जी
- 1:43:30मुसलमान वो क्लेम नहीं कर पा रहे। क्योंकि जहां मुसलमान मेजॉरिटी में है वहां वो कुछ
- 1:43:35और मांग रहे हैं। वो अफगानिस्तान में कुछ और मांग रहे हैं। ईरान में कुछ मांग रहे
- 1:43:38हैं। इंडिया में कुछ मांग रहे हैं। पाकिस्तान में कुछ मांग रहे हैं।
- 1:43:41बांग्लादेश में क्यों जा रहे? ये सब लैक ऑफ मेटाफिजिक्स की वजह से है। लैक ऑफ
- 1:43:44थ्यरी की वजह से है कि आपकी यूनिवर्सल मोरल थ्यरी नहीं है। कोई गांधी ने कलेक्ट
- 1:43:51कोई मुस्लिम गांधी क्यों नहीं हुआ? कि जिसके पीछे सारे लोग इकट्ठे हो सकते
- 1:43:57हैं। डिफरेंट मज़ाहिब के हिंदू ही क्यों हुआ गांधी?
- 1:44:02उसी तरह जब हम इस कंडीशन की बात करते हैं कि जिसमें मुसलमान एक 200 नेशन स्टेट्स
- 1:44:09में बट गए फ्रॉम माइक्रो माइनॉरिटी टू मेजॉरिटी तो वो 23 साल में जो माइक्रो
- 1:44:15माइनॉरिटी से लेकर मेजॉरिटी तक का जो टेंपलेट्स हैं
- 1:44:18जी जो परपेचुअल रियलिटीज थी वो फ्रोजन
- 1:44:21रियलिटीज बन गई और लैंग्वेज ना होने की वजह से ट्रांस नेशनल के वो अगर लैंग्वेज
- 1:44:27होगी तो वो नेशन स्टेट से कमट करेगी जो हलाकिन पैराडाइम हम डिस्कस कर रहे जी
- 1:44:32वो एजमशन से आ रहा कि ऐसा है नहीं प्रॉफेट ने इंस्टीट्यूशनलाइज किया उस
- 1:44:38मोमेंट में तो मुसलमान को आर्ट ऑफ गवर्नेंस आर्ट ऑफ
- 1:44:43नेशन बिल्डिंग आर्ट ऑफ सोशल बिल्डिंग आर्ट ऑफ कंट्रीब्यूटिंग आर्ट ऑफ प्रोग्रेस अपने
- 1:44:50वैल्यू सिस्टम से वो आर्ट एक लॉस आर्ट बन गई और वो रिएक्शनरी एक आइडेंटिटी
- 1:44:56कंस्ट्रक्ट हो गई जो सिर्फ अपनी मार्जिनलाइजेशन अपने ऑपरेशन
- 1:45:01को ही यह समझती है कि वही डिफेंड करना का मतलब यह हो गया कि मुस्लिम आइडेंटिटी
- 1:45:06नेगोशिएट हो गई। जी तो ये रियलिटी है बेसिकली। हम इस पे और
- 1:45:11बात कर सकते हैं कि इस रियलिटी के और क्या प्रोडक्ट्स हैं? क्यों इसमें चैलेंजेस
- 1:45:14हैं? इसमें सशंस क्या हो सकते हैं? बट
- 1:45:18मोटा-मोटा यह है कि आपके पास इस जमाने को समझने के लिए और इसमें
- 1:45:25एग्जिस्ट करने के लिए अपने ट्रेडिशन से क्लेम्स खत्म हो गए। जो क्लेम्स रहे जो
- 1:45:33हमें पोटेंशियल देते हैं एक्सिस्ट करने के जैसे मौलाना आजाद ने किया।
- 1:45:38वो क्लेम आपका सिर्फ इतना आ गया कि आप थियोलॉजिकली एज अ माइनॉरिटी एक्सिस्ट कर
- 1:45:44सकते हैं। प्लूरल नेशन स्टेट में। आपका कंट्रीब्यूशन क्या होगा?
- 1:45:49वो वहां पे कोई डेफिनेटिव आंसर नहीं है। इशारे हैं। इशारे तो सब कर रहे हैं। जब तक
- 1:45:56आपके पास कॉनंक्रीट मेथडोलॉजी नहीं होती है। कि आप चेंज लाएंगे कैसे? क्या होगा?
- 1:46:02जब तक आपके पास नॉलेज प्रोडक्शन का मैकेनिज्म नहीं होता है कि आप नॉलेज
- 1:46:07प्रोड्यूस करके दुनिया में बेहतरी कैसे करेंगे अपने लिए और दूसरे के लिए तब तक
- 1:46:14जैसे ब्लैक्स हैं फॉर अ लॉन्ग टाइम हिस्ट्री ऑप्रेस रहे दलित्स लॉन्ग टाइम ऑफ
- 1:46:18हिस्ट्री लाए ओप्रेस लाए जी
- 1:46:21क्योंकि वो आइडेंटिटी को उन प्रिंसिपल्स पे कंस्ट्रक्ट नहीं कर पा रहे थे जिससे वो
- 1:46:26अपने आप को डिटच कर सकें अपनी मार्जिनलाइजेशन की
- 1:46:32फ्रेमवर्क में कि भाई कास्ट है तो दलित सबसे नीचे है। तो अंबेडकर ने उसको
- 1:46:39डीकंस्ट्रक्ट करा, डेमोलिश करा, उसको पॉलिसी में कन्वर्ट किया, एनालेशन पे बात
- 1:46:44की। हम
- 1:46:45मुसलमान को अभी ये नहीं पता है कि उसको क्या नेगोशिएट करना है। सिवाय इसके कि भ
- 1:46:50मेरी सिक्योरिटी होनी चाहिए। मेरा एंपावरमेंट होना चाहिए। कैसे होना चाहिए?
- 1:46:54किस तरह से जो लीगल प्लूरलिज्म है जिसकी हम बात करते हैं मॉडर्न उसमें इस्लाम में
- 1:47:01तो वह पहली बार सिर्फ अकेला थियोलॉजी है जिसमें दूसरी जब हम मेजॉरिटी बन जाते हैं
- 1:47:08और हम गवर्नेंस करते हैं और स्टे स्ट्रक्चर बनाते हैं उसके बावजूद
- 1:47:13प्रोटेक्शन ऑफ माइनॉरिटीज उनका कल्चर उनका हेरिटेज हमारी थियोलॉजी में बाकायदा
- 1:47:18डेवलप्ड कंस्ट्रक्टेड और बहुत रिच ट्रेडिशन है। इवन ऑटोमंस में जो मिल्लत
- 1:47:23सिस्टम रहा समझ रहे हैं? तो हम इवन इस्लाम क्या चाहता
- 1:47:29है? वो किस तरह से डिफरेंटली मैनिफेस्ट करता है?
- 1:47:34उसका हायरल हायर मोरल क्लेम क्या है? आज की डेट में ह्यूमन राइट्स में आके हम
- 1:47:38लिबरल ह्यूमन राइट्स के पीछे क्यों जाते हैं? क्योंकि उनका हायर मोरल क्लेम है ना
- 1:47:41एस एस पब्लिक स्फीयर। हमारा हायर मोरल क्लेम नहीं है पब्लिक स्फीयर में। जो
- 1:47:48अल्लाह के रसूल सल्ला वसल्लम ने प्रॉफेट ने मक्कन पीरियड में किया। उन्होंने
- 1:47:52स्टैंडर्ड ऑफ मोरालिटी को सामने रखा लोगों के और लोगों ने उसको
- 1:47:58अप्रिशिएट किया। उस मूवमेंट में पार्टिसिपेट किया। गज़्जा के बावजूद
- 1:48:04यह तो है कि भाई जेनोसाइड हो रहा है इसलिए लिबरल ह्यूमन राइट्स फ्रेमवर्क में इनको
- 1:48:08नहीं मारना चाहिए। लेकिन मुस्लिम मोरल क्लेम फिर भी डिफिट हो गया। कोई मुसलमान
- 1:48:13स्टेट साथ नहीं आया। समझ रहे हैं? मुस्लिम माशरा उस लेवल पर
- 1:48:19ऑर्गेनाइज नहीं हो पाया कि वो एक्चुअली प्रॉपर्ली चीजों को बॉयकॉट कर सके। आज भी
- 1:48:25टू इयर्स आफ्टर अ लाइव जेनोसाइड और इतने लो पे आने के बाद भी
- 1:48:33आपकी साइकोलॉजिकल कंडीशंस रिएक्शनरी हैं। क्योंकि आपके पास थ्यरीलेस है। आपके पास
- 1:48:40फ्रेमवर्क ही नहीं है नेगोशिएट करने का। अह मुस्लिम्स लिविंग इन अ स्टेट ऑफ
- 1:48:44एक्सेप्शन। स्टेट ऑफ एक्सेप्शन नेशन स्टेट्स की पर्टिकुलरिटी है। मतलब
- 1:48:51अगर आप बोले कि भाई क्या ईरान में मुस्लिम स्टेट ऑफ एक्सेप्शन में नहीं है? शियाओं
- 1:48:57ने कम से कम अपनी ट्रांसेंडेंटल फिलॉसफी को, फिक को तसवुफ
- 1:49:03की डिबेट को और अपने पॉलिटिकल इस्लाम को। उनके यहां एक कलाम का ट्रेडिशन है। वो फिक
- 1:49:07से बहुत जुड़ा हुआ है 12 में। और उसमें पॉलिटिकल इंस्टीटश विलायत फकी के थ्रू
- 1:49:13आयतुल्लाह खुमेनी ने बनाए और स्टेट फॉर्मेशन दे दी। नहीं बट बट इज़ स्टेट
- 1:49:18फॉर्मेशन नॉट इन स्टेट ऑफ़ एक्सेप्शन एज अगेंस्ट उ्मा और अगेंस्ट
- 1:49:24द इमामेट इन इन इन शिया ट्रेडिशन। शिया ट्रेडिशन में इमामेट के खिलाफ नहीं है
- 1:49:30क्या स्टेट? नहीं वो उसको ऑनगोइंग। वो बोलते हैं कि भ
- 1:49:32हमारा फाइव स्टेजेस हैं। जी
- 1:49:34वहां अचीव करनी है। हम सेकंड स्टेज पे हैं। फिर हम थर्ड स्टेज पे आएंगे। वो जो
- 1:49:38बयान करते हैं तो वो स्टेजेस की क्लेरिटी है उनको। चलिए लेट अस अस्यूम कि ऐसा है।
- 1:49:46कमिंग बैक टू इंडिया में आप बात करें। गाजा के सेंस में भी बात कर सकते हैं। आप
- 1:49:53मुस्लिम्स इन इंडिया लिविंग इन अ स्टेट ऑफ एक्सेप्शन।
- 1:49:56क्योंकि स्टेट ऑफ एक्सेप्शन में ही क्वेश्चन सिक्योरिटी का आता है। स्टेट ऑफ
- 1:50:02एक्सेप्शन में ही प्राइमरी क्वेश्चन सिक्योरिटी का आता है। वहां पे आप
- 1:50:05नेगोशिएटिंग पोजीशन पे नहीं होते। असल में स्टेट ऑफ एक्सेप्शन जिस तरह से आगांबन बोल
- 1:50:09रहा है वो और स्ट्रांग कंडीशंस हैं। समझ रहे हैं? मतलब वो इतनी स्ट्रांग कंडीशंस
- 1:50:16हैं कि आपकी जो बेसिक बायोलॉजिकल लाइफ के क्लेम्स ऑफ राइट्स हैं
- 1:50:22जी। वो सस्पेंड हो जाते हैं। हम
- 1:50:25हिंदुस्तान के मुसलमानों के साथ इस वक्त फ्यूचर में हो सकता है वो लेवल नहीं है।
- 1:50:30उस प्रोसेस की तरफ है क्योंकि आप तो इसके एक्सपर्ट हैं। हमने इस पे पॉडकास्ट किया
- 1:50:34है। बल्कि मैंने आपसे इस पे काफी चीजें सीखी हैं कि एज अ सेकंड क्लास सिटीजन
- 1:50:39मुस्लिम थ्रू लॉ कंस्ट्रक्ट कैसे हो रहा है? मैं हम वन गुर्जर पे गए। ट्राइबल
- 1:50:44मुस्लिम कम्युनिटी है, फॉरेस्ट ड्वेलिंग है।
- 1:50:47वो किस तरह से उसको स्टेटलेस बनाया जा रहा है। वफ के कानून पे आपने काम किया है।
- 1:50:51हमने वीडियोस बनाए हैं। किस तरह से प्रोसेस है। लेकिन प्रोसेससेस रुक भी जाते
- 1:50:57हैं। जी।
- 1:50:58अगर उनके अगेंस्ट कंपटिंग अच्छा काम किया जाए।
- 1:51:04लेकिन स्टेट ऑफ एक्सेप्शन उन उन प्रिंसिपल्स में जिसमें डिफाइन होता है
- 1:51:09जहां पर आपको एन मास कहीं भी मारा जा सकता है। आपकी लिंचिंग अभी भी है। स्टेट ऑफ
- 1:51:13एक्सेप्शन आपकी कई पॉकेट्स में है। लोग एक्चुअली इसको भी मैं थोड़ा सा वाज़ कर
- 1:51:18देता हूं कि मैं सोवनिटी को कैसे देखता हूं। कितने लेवल्स पे देखता हूं। मेरे लिए
- 1:51:24जो मुस्लिम सोवनिटी ओखला में है वो रिलेटिवली अगर मैं जुलैना तक चले जाता हूं
- 1:51:29या और आगे चला जाता हूं वो चेंज हो जाती है। इवन नेशन स्टेट होमोजेनियसली
- 1:51:33डिस्ट्रीब्यूटेड राइट्स नहीं है। बिल्कुल
- 1:51:35आप अगर केरला में हैं तो आपकी पॉलिटिकल सोवनिटी का इंडेक्स
- 1:51:40और आपकी पोटेंशियल टू अचीव राइट्स बढ़ जाते हैं।
- 1:51:43जी तो हमें होमोजनाइज और मोनोलिथिक फ्रेम में
- 1:51:46इवन विद इन नेशन स्टेट भी नहीं सोचना चाहिए। स्ट्रेटेजिकली भी प्रॉब्लम है और
- 1:51:49रियलिटी में भी प्रॉब्लम है। जी।
- 1:51:52तो हां स्टेट ऑफ एक्सेप्शनंस हैं बहुत जगहों पर बट जनरली स्पीकिंग नहीं है। अभी
- 1:51:58हम उस स्टेज पे नहीं हैं। लेकिन क्योंकि एक्सेप्शनंस एक्सेप्शनल जगहों पर हैं।
- 1:52:03जी तो एक्सेप्शनल
- 1:52:06जगहों से वो एक्सेप्शनंस जनरल भी हो सकते हैं। उस तरफ हम बढ़ रहे हैं और बहुत तेजी
- 1:52:12से बढ़ रहे हैं। स्पेशली लीगल फ्रेमवर्क के थ्रू। अगर ये
- 1:52:17स्टेट स्टेट ऑफ एक्सेप्शन नहीं है एंड मतलब
- 1:52:23अग्री करता हूं मैं आपकी बात से क्योंकि कई जगह बिल्कुल सच बात है। कई जगह बहुत
- 1:52:29एक्सट्रीम पे हैं चीजें। आप लोगों को घर भी नहीं मिल रहा है। घर डिमोलिश भी हो रहा
- 1:52:33है। लिंचिंग भी हो रही है। आप अपने जो है छोटी-छोटी चीजें बेच भी नहीं सकते हैं। तो
- 1:52:43क्योंकि ये फंडामेंटल चीजें हैं जिंदा रहने की। आप पैसा कमाएंगे नहीं तो जिंदा
- 1:52:48कैसे रहेंगे? घर नहीं होगा तो जिंदा कैसे रहेंगे? ठीक है? ट्रेड नहीं करेंगे,
- 1:52:51खाने-पीने का काम नहीं करेंगे, जिंदा कैसे रहेंगे? तो दीज़ आर वेरी फंडामेंटल थिंग्स।
- 1:52:55तो वो एक एक्सेप्शन मान सकते हैं। एंड आई आई आई एग्री विद यू
- 1:53:00व्हाट यू आर सेइंग। बट इफ जनरली स्पीकिंग मुस्लिम्स आर नॉट लिविंग इन द स्टेट ऑफ
- 1:53:08एक्सेप्शन इज द वेरी आईडिया।
- 1:53:13यह जो आइडिया है कि आई बिलोंग टू दिस प्लेस।
- 1:53:18दिस प्लेस बिलोंग्स टू मी। क्या यह एलिमेंट ऑफ बिलोंगिंगनेस?
- 1:53:25एलिनेट नहीं हो रही है। स्टेट की तरफ से तो हो रही है।
- 1:53:29देखिए सिटीजनशिप है, रिफ्यूजी है, वह सारी चीजें हैं। स्टेट की तरफ से हो रही है।
- 1:53:35स्टेटमेंट्स आप देख लीजिए। आउटसाइडर्स हैं, इनवेडर्स हैं। ठीक है? सिक्योरिटी
- 1:53:40सेंस स्टेट की तरफ से हो रही है। बट आई एम आई एम आस्किंग यू फ्रॉम द पर्सपेक्टिव ऑफ
- 1:53:45द कम्युनिटी। क्या
- 1:53:49मुस्लिम्स भी ये मानते हैं? नाउ आई एम नॉट आस्किंग दिस
- 1:53:56क्वेश्चन कि साहब इस पे एक इंपेरिकल स्टडी होनी चाहिए। ऑफ कोर्स इस पे इंटरव्यू,
- 1:54:00सर्वे वो सारी चीजें आप कर सकते हैं। बट गोइंग बिय्ड दैट जनरली स्पीकिंग जो इस
- 1:54:05वक्त माहौल है क्या वो यह मान रहे हैं कि
- 1:54:14दिस समवेयर डू नॉट बिलोंग टू दिस प्लेस। दो रीजन है। पहला क्योंकि नेचर ऑफ स्टेट,
- 1:54:21नेचर ऑफ कॉन्स्टिट्यूशनल अंडरस्टैंडिंग, नेचर ऑफ सोसाइटी चेंजिंग। हमने यह
- 1:54:26नेगोशिएट नहीं किया था जो मैंने पहले कहा। या तो इस वजह से हम बिलोंग नहीं कर रहे
- 1:54:30हैं। ठीक है? या स्टेट ऑपरेशन इतना हो रहा है कि हम समझ नहीं पा रहे। हम अपने आप को
- 1:54:35बिलोंग नहीं कर रहे हैं। कर पा रहे हैं। और इसी वजह से वी आर ऑलवेज इन द परपचुअल
- 1:54:40स्टेट ऑफ मैं सेफ कैसे रहूं। मैं अपने को सेफ गार्ड कैसे करूं? अगर यह सिचुएशन है
- 1:54:47तो ऑफकोर्स दे विल नॉट बी एबल टू नेगोशिएट।
- 1:54:53ठीक है? और जब वो नेगोशिएट नहीं कर सकते तो जो
- 1:54:58हमने पहले डिस्कस किया था कि मुस्लिम्स इन अ परपचुअल स्टेट ऑफ नेगोशिएशन विद
- 1:55:04रिस्पेक्ट टू देयर एनवायरमेंट विद रिस्पेक्ट टू द सोशल कंडीशंस जहां पे वो
- 1:55:07रहते हैं तो आपका एक पॉलिटिकल फॉर्मेशन होना बहुत
- 1:55:11मुश्किल है। आपकी खुद की पॉलिटिक्स होना बहुत मुश्किल है। जिसका एक बहुत सिंपल सा
- 1:55:16एग्जांपल है एंड ऑफ कोर्स ये अदर इंस्टीटशंस में भी है। बट मुस्लिम
- 1:55:22इंस्टीटशंस में ज्यादा है। ज्यादा है। फॉर एग्जांपल एएमयू में स्टूडेंट्स यूनियन
- 1:55:26नहीं है। जामिया में स्टूडेंट्स यूनियन नहीं है। तो अगर स्टूडेंट्स यूनियन नहीं
- 1:55:31है यूनिवर्सिटी में तो पॉलिटिक्स तो नहीं हो सकती। ठीक है? और पॉलिटिक्स की बेसिस
- 1:55:41पर किसी भी तरह का पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस एंड प्रोबेबबली पॉलिटिकल फॉरेशन जो है वो
- 1:55:48बहुत मुश्किल है। बट नॉट ओनली दैट अगर आप इन इंस्टीटशंस को क्लोजली देखें
- 1:55:56ये वो इंस्टीटशंस हैं। दीज़ आर वेरीेंट इंस्टीटश और आपने तो एक बकायदा पॉडकास्ट
- 1:56:00भी किया था लॉरेंस गॉटियर के साथ। यह इंस्टीटशंस हैं
- 1:56:06जिन्होंने मुस्लिम आइडेंटिटी कंस्ट्रक्शन में बहुत कंट्रीब्यूट किया है। ठीक है?
- 1:56:10अगर आप उन इंस्टीटशंस को बहुत क्लोजली देखेंगे तो आपको यह समझ में आएगा कि साहब
- 1:56:17यहां पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस पॉलिटिक्स या टू टू टू काइंड ऑफ पुश इट इंटू अ पॉलिटिकल
- 1:56:25फॉर्मेशन इन फ्यूचर जो डीयू में होता है कि साहब कांग्रेस लड़ती है एबीवीपी लड़ती है
- 1:56:32या जेएनयू में होता है जहां लेफ्ट की पार्टीज लड़ती है एबीवीपी एंड अदर प्लेसेस
- 1:56:37आर कमिंग यू नो पार्टीज आर कमिंग यहां पे सोशल फॉर्मेशन ही अलाउड नहीं है।
- 1:56:42पॉलिटिक्स और पॉलिटिकल फॉर्मेशन या पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस तो छोड़ दीजिए। ठीक
- 1:56:46है? तो जब ये अंडर ये ये एलिमेंट इतना स्टंटेड है तो क्या
- 1:56:55ये फोर्स करता है आपको ये एंड यू यू लिंक इट विथ द लिंचिंग द वायलेंस एंड एवरीथिंग
- 1:57:01एल्स जब आप इन सबको कनेक्ट करते हैं तो क्या यह लगता है कि साहब वी डू नॉट बिलोंग
- 1:57:06टू दिस प्लेस। एंड सिंस वी आर वी डू नॉट बिलोंग टू दिस प्लेस सम पॉकेट्स देयर आर
- 1:57:11स्टेट्स ऑफ एक्सेप्शन बट लेट अस्यूम नहीं है
- 1:57:16हम उस पोजीशन में नहीं हैं कि हम नेगोशिएट कर सकें एंड देयर फॉर वी ऑलवेज हैव टू
- 1:57:24थिंक अबाउट सिक्योरिटी ठीक है कि हम सेफ हैं इतने में काफी है बस
- 1:57:31इतना कर दो यार ठीक है इससे ज्यादा नहीं चाहिए एक नौकरी दे दो यार बस नौकरी नहीं
- 1:57:37दे रहे हो। कम से कम ठेला लगा लेने दो भाई। ठीक है?
- 1:57:43इज दिस दी सिचुएशन? इसको हमें दो तरीके से सोचना होगा। एक हमें ये सोचना होगा कि
- 1:57:50हिंदुत्व जो नेशन स्टेट है उसका मॉडल क्या है? वह अपने जो रिलेशंस
- 1:57:57हैं बिटवीन कम्युनिटीज और उसके बेसिस पर वह जिस तरह की
- 1:58:04इंस्टीटशंस को रिफ्रेम करता है, फ्रेम करता है और जिस तरह की एक पॉलिटिकल ऑर्डर
- 1:58:10को कंस्ट्रक्ट करता है एक वो हमारे सामने मॉडल है कि भ जहां पे हमारी ह्यूमन
- 1:58:15सिक्योरिटी भी लाइफ भी खतरे में है। और दूसरी तरफ सेलर लिबरल स्टेट है जो
- 1:58:22जिसको कांग्रेस आर्किटेिकली डिफाइन करती थी
- 1:58:27वो एक 50 60 साल ये चला कि भ जो समाजवादी टाइप की पॉलिटिक्स है समाजवाद की जो
- 1:58:36पॉलिटिक्स है उसमें जो माइनॉरिटी इंटरेस्ट हैं मुस्लिम इंटरेस्ट है वो सेफगार्डेड है
- 1:58:42और वो 2007 में जो सचर कमेटी रिपोर्ट आई उससे पहले भी 10 साल से ये सारी चीजें चल
- 1:58:48रही थी और उससे पहले से भी चल रही थी। ये डिस्कशन तो 50, 60, 80, 90 चल रहा था।
- 1:58:55लेकिन पहली बार स्टेट की रिपोर्ट एंपेरिकली वेरीिफाइड रिपोर्ट स्टेट के
- 1:59:00डेटा पे ये बताती है कैसे मुसलमान हर लेवल पे डिप्र्राइव होता चला जाता है।
- 1:59:05जी। तो एक तो दो काइंड्स ऑफ डेप्रिवेशंस हैं।
- 1:59:09दो ग्रेड्स ऑफ डेप्रिवेशंस हैं। जिन्होंने
- 1:59:14जिसको इंडियन मुस्लिम्स ने पोस्ट इंडिपेंडेंस
- 1:59:20इंगेज किया है या सफर किया है। जी
- 1:59:25तो जो एक पहला स्टेज था उसमें यह था कि बजाहिर
- 1:59:31आपको यह बता के यह दिखा के कि भाई आपके पास प्रिविलेज है। आप तो पार्टीशन के थ्रू
- 1:59:37निकले हैं। आपको फिर भी मिल गया। उसके बावजूद हम आपको स्पेस दे रहे हैं। देखिए
- 1:59:41आप कमा सकते हैं, खा सकते हैं। और आपकी एक पॉलिटिकल इलीट को सामने रखते हुए एक होता
- 1:59:48है ना कि आज की डेट में गोदी मीडिया बोलते हैं, मीडिया जो दिखाती है लोग परसेप्शन
- 1:59:51क्रिएट करते हैं। तो एक तरफ तो आपका ये परसेप्शन क्रिएट किया जा रहा था कि आपके
- 1:59:57टोकन रिप्रेजेंटेशंस हैं यहां पर। आपके लोग हैं यहां पर। वो पार्टी लाइन ले
- 2:00:02रहे थे। वो पॉलिसी मुसलमानों के फेवर में है या नहीं। उनको कोई मकसद नहीं था। मंडल
- 2:00:08कमीशन बन गया, ओबीसी राइट्स आ गए तो उसमें क्योंकि वह एक जनरल ब्रॉड स्ट्रोक में काम
- 2:00:13हो रहे थे तो कुछ मुसलमानों को भी मिल गए। बट मुसलमानों ने कोई तहरीक की हो
- 2:00:17जी कि जिसमें वो पॉलिसी के तहत अपने राइट्स
- 2:00:20को कैसे नेगोशिएट कर सकते हैं। एक एक मूवमेंट की तरह उनका रोड मैप क्या होगा?
- 2:00:26उनका विज़ क्या होगा? वो आज तक क्लेरिटी नहीं थी। तो एक तरफ तो वो रियलिटी थी कि
- 2:00:32आपको फिर भी एक कंसीव्ड आपका लिंचिंग नहीं हो रही है। हालांकि उस टाइम पे भी आपको
- 2:00:38टेरर लॉस के नाम पे जेलों में डाला जा रहा है।
- 2:00:41टाडा पोटा सारी चीजें हो रही हैं। अंडर ग्राउंड या अंडर इंस्टीटशंस जो छोटे लेवल
- 2:00:47पे ब्यूरोक्रेसीज में आरएसएस के लोग घुस गए हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया
- 2:00:53जैसे इंस्टीटशंस पाथ पास्ट मिथिकल हिंदू पास्ट को कंस्ट्रक्ट कर रहे हैं।
- 2:00:58जी जिससे राम मंदिर मूवमेंट को जस्टिफिकेशन
- 2:01:01मिल रहा है। जी
- 2:01:02जो अल्टीमेटली 2019 में आके एक स्टेट लॉ बन रहा है। तो पहली बात तो ये दो कंडीशंस
- 2:01:09डिसजॉइंटेड नहीं है। जी
- 2:01:12ये दो कंडीशंस रिलेटेड कंडीशंस हैं और उसकी ग्रेडेशंस हैं हम
- 2:01:16कि जहां पे मुस्लिम आइडेंटिटी मुस्लिम पर्सपेक्टिव से कंस्ट्रक्ट ही नहीं की जा
- 2:01:21सकती है। वो हमेशा किसी पॉलिटिकल अदर को अपने बिहाफ पे उसके रिप्रेजेंटेशन की
- 2:01:29पॉलिटिक्स करने की एजेंसी देता है। जी क्योंकि वह डिर्व नहीं करता है इस
- 2:01:33पॉलिटिकल ऑर्डरिंग में अपने राइट्स को अपने बिहाफ पे अपने पर्सपेक्टिव से वो
- 2:01:38नेगोशिएट कर सके तो यह भी एक पॉलिटिकल एक्सेप्शन है। अगर आप एक्सेप्शनंस को
- 2:01:43ग्रेडेड उसमें बोले कि भ अगंबन का जो स्टेट ऑफ एक्सेप्शन है कि आप बेयर लाइफ
- 2:01:48में आ गए हैं। बेयर लाइफ में तो आप अभी तक नहीं आए हैं। लेकिन जो स्टेजेस ऑफ
- 2:01:52जेनोसाइड का डिबेट है। आप कौन से स्टेज पे हैं? कौन से स्टेट में हैं? जो पानी का
- 2:01:57गिलास कितना भरा हुआ है। कोई बोलता है कि आधा खाली आधा भरा हुआ है।
- 2:02:01जी तो आप किस पर्सेक्टिव से मुस्लिम राइट्स
- 2:02:06को कंस्ट्रक्ट कर रहे हैं और उसमें कितने लेयर्स पे मुसलमानों को यह पर्सव किया जा
- 2:02:11रहा है। करवाया जा रहा है कि आप बिलोंग करते हैं या नहीं करते हैं। एक तरफ उनको
- 2:02:15यह बिलीव करवा के आप बिलोंग करते हैं तो उनके वोट को लेके उनको गरीब रखा जा रहा
- 2:02:20है। एक तरफ आपको यह बिलीव करवा के आप यहां
- 2:02:24बिलोंग नहीं करते हैं। एक डिफरेंट लेवल ऑफ कंसोलिडेशन हो रहा है जो हिंदुत्व
- 2:02:29हायरार्की में हो रहा है। जहां पे दलित क्योंकि अपने राइट्स को कॉन्स्टिट्यूशनली
- 2:02:33नेगोशिएट कर चुका है। एक पास्ट में उनके साथ क्या हुआ वो एक रियलिटी की तरह
- 2:02:40प्रोड्यूस हो चुका है। मुसलमानों का पास्ट यहां रूलिंग का है। उनका हमेशा से
- 2:02:45ऑप्रेस्ड आइडेंटिटी का है। तो उनको एक नया क्लास चाहिए था। या एक कास्ट चाहिए थी जो
- 2:02:54चीप लेबर का काम कर सके। जी
- 2:02:57जिसके पास हक कम हो और जो जवाब बार-बार देता रहे जिसको ये पुश कर दिया जाए
- 2:03:03तुम्हें यहां पे रोटी कपड़ा मकान इतना दे दिया जा रहा है ये तुम गनीमत समझो वरना
- 2:03:09तुम्हें तो दो हिस्से दे दिए गए थे। जी मेरा आर्गुममेंट तो यहां तक है कि जब सीएए
- 2:03:14के बाद मैंने हिस्ट्री पढ़ी और मैंने देखा कि 1875
- 2:03:21से लेकर 1947 तक किस तरह के मूवमेंट्स इमर्ज हो रहे हैं। आर्य समाज क्या कर रहा
- 2:03:28है? हिंदू महासभा क्या कर रहा है? आरएसएस का
- 2:03:31कैसे फॉर्मेशन हो रहा है? ये भी पॉलिटिकल कंटिन्यूटी है एक तरह की ऑर्डरिंग को
- 2:03:38डेवलप करने की। तो वो जो पॉसिबिलिटी ऑफ आपका
- 2:03:45कंसोलिडेशन ऑफ आइडेंटिटी ऑफ इंडिया एज अ होल जिसमें मुसलमान भी नेगोशिएट कर सकता
- 2:03:51था। इवन मोहम्मद अली जिन्ना जैसा आदमी जो पार्टीशन का एक तरीके से बोला जाता है
- 2:03:56जिम्मेदार भी बना वो एक जमाने में कांग्रेस में है। वो 1940 तक भी एक तरह का
- 2:04:03नेगोशिएशन कर रहा है। जी
- 2:04:05तो जब बार-बार हिंदू राइट ने हिंदुत्व ने ये रियलिटी
- 2:04:12कंस्ट्रक्ट की कि आप सेफ नहीं हो सकते। वो आज का प्रोटोटाइप मॉडल नहीं है। और वहां
- 2:04:18मुसलमानों की गलती यह है कि रादर देन स्टैंडिंग देयर ग्राउंड इफ वी बिलोंग
- 2:04:24हियर। जी।
- 2:04:27एक दूसरी कम्युनिटी जो आपको अप्रेस करना चाहती है उसका काम होता है कि वो आपको
- 2:04:32अप्रेस करें। जी।
- 2:04:33क्या एक पाकिस्तान और एक बांग्लादेश बनने से हिंदुस्तान में मुसलमान नहीं रह गए?
- 2:04:38जी। क्या उनकी फर्दर नेगोशिएशंस प्रॉब्लमेटाइज
- 2:04:42नहीं हो गई? वी लॉस्ट द बैटल ऑफ हाई मोरालिटी।
- 2:04:48कि हम कंट्रीब्यूट डिस्पाइट द फैक्ट आप हमें डरा रहे हो। आपने अपनी पॉलिटिकल
- 2:04:55सोवनिटी खुद लूज करी क्योंकि आप डेमोक्रेटिक नेशन स्टेट में नंबर्स का गेम
- 2:05:00ही हार गए। ये मेरा व्यू हो सकता है इस पे। आप अग्री डिसएग्री सब कर सकते हैं
- 2:05:04क्योंकि पोटेंशियल रियलिटीज वर्ल्ड लाइंस एक बड़ा वो है कि यह नहीं होता। दूसरा
- 2:05:08आर्गुमेंट ये था कि जब भी होता लिंचिंग होती लेकिन हम केरला को भी देखते हैं कि
- 2:05:12इसके बावजूद एक जमाने तक दूसरी जगह भी देखते हैं कि वहां पे मुसलमान ग्रो कर
- 2:05:17सकता था। ऐसा नहीं है कि मतलब कंप्लीटली आपने यहां पे प्रिविलजेस एंजॉय नहीं करें
- 2:05:22हैं। तो एक लार्जर जो विज़न कम्युनिटी एज अ होल का जो हिंदू राइट का था वो मुस्लिम्स
- 2:05:29का नहीं था। और उनके पास पेशेंस था कि जब देश बटेगा
- 2:05:35और उसमें जो डिस्ट्रीब्यूशन होगा मेरा कंजेक्चर है क्योंकि ये बातें चल रही
- 2:05:41हैं उस टाइम पे उसका फायदा ऑटोमेटिकली एक ही डायरेक्शन में जाना था। एक
- 2:05:47मेजॉरिटेरियन एथनिक नेशन स्टेट ही बनना था। क्योंकि उसमें पॉलिटिकल अदरिंग की
- 2:05:54पूरी डिबेट ऑलरेडी प्री पार्टीशन कंस्ट्रक्ट हो गई थी सावरकर के पैराडाइम
- 2:05:59में। समझ रहे हैं? वो प्रिंसिपल्स एस्टैब्लिश
- 2:06:02हो गए थे। वो पोस्ट पार्टीशन नहीं है। जी
- 2:06:05उसकी वायलेंस का प्रोटोटाइप ऑलरेडी एक्सपेरिमेंट हो चुका था। जो हम 2014 के
- 2:06:10बाद देख रहे हैं वो कोई नई चीज नहीं है। जी।
- 2:06:12लोग ऐसे सोचते हैं कि भाई कुछ नया हो गया। वो एक हिस्टोरिकल माइक्रो लेवल का
- 2:06:17एक्सपेरिमेंट इंस्टीट्यूशनल लेवल पर रेप्लिकेट हुआ जो अल्टीमेटली स्टेट के
- 2:06:22इंस्टीटशंस में इनफ्यूज हो रहा है तो इस कॉन्टेक्स्ट में अदरिंग है
- 2:06:29और मुसलमान ऑन दैट फील भी करेगा लेकिन अगर आप प्रॉपर्ली
- 2:06:36अपने आप को ऑर्गेनाइज करते हैं अपने राइट्स को नेगोशिएट करते हैं क्योंकि यह
- 2:06:40वो मक्कन फेस है जब मुझे ऐसा लगता है कि सूर मरियम आई
- 2:06:45द काइंड ऑफ ऑपरेशन दैट द कम्युनिटी वाज़ डीलिंग एज अ
- 2:06:50माइनॉरिटी वाज़ अनबियरेबल। हजरत बिलाल के ऊपर जो
- 2:06:55तशद्दुद हो रहा है उनके ऊपर पत्थर रख दिया जा रहा है। उसको आप क्या बोलेंगे?
- 2:07:02लेकिन क्योंकि मोरल डिस्कोर्स में एक हाई मोरल ग्राउंड कंस्ट्रक्ट हो चुका था। एक
- 2:07:08क्लेम कंस्ट्रक्ट हो चुका था। तो एक बेटर पिटिकल रियलिटी कंसीवेबल हो पाई। हालांकि
- 2:07:15लोगों को दिख नहीं रही थी। हम अभी भी उस स्टेज पर नहीं है कि हम अपनी बात खुद कर
- 2:07:19रहे हो। हम अपने इंस्टीटशंस बना रहे हो। मैं एक मीटिंग में था। वहां पे बड़े
- 2:07:24दिग्गज बैठे हुए थे। वह यह आर्ग्यू कर रहे थे कि क्यों मुसलमानों की बात नहीं होनी
- 2:07:30चाहिए क्योंकि यह हेट की तरफ जाता है। मैंने उनसे सवाल किया कि आप जिन पॉलिटिकल
- 2:07:36मूवमेंट्स के प्रोडक्ट हैं आजादी के वक्त के गांधी की आप बात करते हैं। गांधी अगर
- 2:07:44अंबेडकर से डील नहीं करते। आजाद से डील नहीं करते। गांधी का अपना क्रिटिक है। मैं
- 2:07:48खुद उनको क्रिटिक कर सकता हूं 10 जगह पे। लेकिन कुछ अचीवमेंट भी है उस पर्सनालिटी
- 2:07:52का। और तो इंक्लूजनरी पॉलिटिक्स ऑफ सोवनिटी की पोटेंशियल कहां
- 2:07:58से अराइज होती है? आप हमें लेवल प्लेइंग फील्ड से पहले ही बाहर निकाल दे रहे हो।
- 2:08:05नहीं, मैं वही समझना चाह रहा हूं। देखिए, आप आई अंडरस्टैंड कि यू लॉस्ट द हाई मोरल
- 2:08:11ग्राउंड। अंडरस्टुड? द क्वेश्चन इज़ यू लॉस्ट दी हाई मोरल ग्राउंड। आप हाई मोरल
- 2:08:17ग्राउंड लूज़ करते हैं इन फ्रंट ऑफ अदर्स। ठीक है। इंटरनली भी आपके यहां रिफॉर्म्स
- 2:08:24नहीं है। मैं वही पूछ रहा हूं। देखिए आप इब्राहिम सलाम की कहानी लीजिए। ठीक है?
- 2:08:29व्हाट इज ही डूइंग? ही इज लीविंग ह एंटायर कम्युनिटी
- 2:08:35एंड ही इज़ लीविंग एवरीथिंग एंड ही इज़ गोइंग अलोन। ही इज़ गोइंग अलोन। नो वन इज़
- 2:08:40इज़ विद हिम। बट ही हैज़ ही स्टिल हैज़ अ हाई मोरल ग्राउंड। ही स्टिल हैज़ दैट हाई मोरल
- 2:08:47ग्राउंड। ठीक है? आपका पार्टीशन भी होता है।
- 2:08:52भले दूसरे समझे कि यू आर अ लूजर। फॉर एग्जांपल इब्राहिम सलाम के टाइम में हो
- 2:08:56सकता है लोगों ने समझा हो कि ही इज अ लूजर। ही इज लूजिंग। ही इज़ नॉट एबल टू लिव
- 2:09:00विद अस। वो चले गए छोड़ के। बट फॉर हिम एज अ प्रॉफेट और फॉर हिम ही वाज़ ऑन अ हाई
- 2:09:08मोरल ग्राउंड। ठीक है? देखिए उनकी लाइफ में बाद में क्या होता है? ही डज़ नॉट नो
- 2:09:14कि भ उनकी लाइफ से एक जनरेशन निकलेगी, प्रॉफिट्स की जनरेशन होगी, कम्युनिटीज़
- 2:09:20बनेंगी। उनको नहीं मालूम है। ही विल बी द फादर ऑफ।
- 2:09:23ठीक है। ही विल बी द फादर ऑफ नेशंस। ही डज नॉट नो। दैट इज हिज प्रेयर।
- 2:09:28वो उनकी प्रेयर है। बट ही स्टिल ऑक्यूुपाई हाई मोरल ग्राउंड। तो माय क्वेश्चन इज़ कि
- 2:09:35अगर पार्टीशन होता भी है, आपकी पपुलेशन कम भी होती है, आप डेमोग्राफिकली रिड्यूस भी
- 2:09:42होते हैं। आप इकोनॉमिकली वीक भी होते हैं। सोशली आप रिड्यूस भी होते हैं अपने सेंस
- 2:09:48में। हाई मोरल ग्राउंड आपका खत्म कैसे होता है?
- 2:09:53व्हाई आई एम आस्किंग यू दिस क्वेश्चन? बिकॉज़ जमीयत उस वक्त भी कहती थी कि हम
- 2:09:58हिंदुस्तान के साथ हैं। आज भी कहती है। लैंग्वेज तो चेंज नहीं हुई है उसकी। ठीक
- 2:10:04है? पर्सनल लॉ बोर्ड के किसी भी आलिम ने कभी यह नहीं कहा कि भाई हम जो है वो
- 2:10:08पाकिस्तान जाना चाहते हैं। कभी भी नहीं कहा। ठीक है? देवबंद मूवमेंट जो है उसने
- 2:10:14बड़ा जो है इंडियन इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल में पार्टिसिपेट किया है। बहुत
- 2:10:19कंट्रीब्यूट किया है। तो आपका जो कन्वर्सेशन है, आपका जो आर्गुममेंट है, वो
- 2:10:27तो इंटैक्ट है। चेंज तो होता नहीं है। इंटैक्ट है बट पब्लिक स्फेयर में नोन और
- 2:10:33एक्सेप्टेड नहीं है। उसकी रीजनिंग वही कॉन्फिडेंस से नहीं आ रही है।
- 2:10:37हाउ इज दिस हैपनिंग? व्हाई इज दिस हैपनिंग? बिकॉज़ मैंने जैसे शुरू में कहा
- 2:10:40कि भई जो आपकी थ्यरिटिकल फाउंडेशंस जब वीक हो जाती हैं अपने आर्गुमेंट को पोट्रे
- 2:10:45करने की जब आप हिस्ट्री को रीड नहीं करते हैं। जब आपके पास फ्रेमवर्क नहीं होता है
- 2:10:48तो आप बहुत कम लोग हैं जो ये बोलेंगे कि भई हिस्ट्री अनफोल्ड कैसे हुई पार्टीशन
- 2:10:53की। अल्टीमेटली जो क्लेम्स ऑफ वो हो जाते हैं वो जिन्ना पे सिर्फ आते हैं। हालांकि
- 2:10:58वो भी रिस्पांसिबल है मेरे हिसाब से क्योंकि मुस्लिम साइड भी वो है। मैं उनको
- 2:11:02ये नहीं समझता हूं कि वो रिस्पांसिबल नहीं है। लेकिन हिंदू महासभा उससे ज्यादा
- 2:11:05रिस्पांसिबल है और कांग्रेस भी उतनी रिस्पांसिबल है क्योंकि वो जो नेगोशिएटिंग
- 2:11:10टेबल पे सेंट्रिस्ट पोजीशन ले रही थी वो नेगोशिएट नहीं करवा पाई। उसने अपने
- 2:11:14बेनिफिट्स देखे। जी।
- 2:11:15तो ये सिर्फ सवाल मुसलमानों पे क्यों आ जाता है? और मुसलमान उसको कॉन्टेक्स्ट कर
- 2:11:20कंटेस्ट करने के लिए हिस्ट्री को आर्काइव को रीड करके एविडेंस क्यों नहीं प्रमोट कर
- 2:11:24प्रोड्यूस करते क्योंकि उनकी एकेडमिक रिगरस ट्रेनिंग नहीं है। एकेडमिक रिगरस
- 2:11:29ट्रेनिंग होने के लिए या फिर इस तरह की ट्रेनिंग होने के लिए आपको इन्वेस्ट करना
- 2:11:33पड़ता अपने नौजवानों में अपने इंस्टीटशंस में आपने समझा जो आपके पास इंस्टीटशंस हैं
- 2:11:38वो मोर देन इनफ है। आप एक फॉल्स सुपीरियरिटी
- 2:11:44के ताबे आपने अपने 50 60 साल गुजार दिए। समझ रहे हैं कि कॉन्फिडेंस मिस लोकेटेड
- 2:11:50मिसरप्रेजेंटेड रहा। जब आपका कॉन्फिडेंस टूटना शुरू हुआ क्योंकि आपको लगा यह
- 2:11:55इंस्टीटशंस आपको प्रिजर्व कर सकते हैं। आपको नेगोशिएट करवा सकते हैं। तो एकदम
- 2:12:00हार्ट हिटिंग रियलिटी आई कि ना हम अल्टरनेट बना पाए। हिजाब कोर्ट जजमेंट
- 2:12:04लीजिए उस टाइम पे। बच्चियों के पास स्कूल नहीं थे पढ़ने के लिए।
- 2:12:07जी। या तो आप स्कूल जा सकते हैं या आपको
- 2:12:10छोड़ना पड़ेगा। आपने अल्टरनेटिव बनाए नहीं। आपके लिए मेन स्ट्रीम खत्म कर दिया
- 2:12:16गया। तो आपका जो ओवर कॉन्फिडेंस था अपनी अंडरस्टैंडिंग पे और आपको जो रिगर होना
- 2:12:22चाहिए था इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग में और आपको जो एक क्लास ऑफ सिटीजंस इंडिया में
- 2:12:29प्रोड्यूस करने चाहिए थे वो आपने नहीं किया। आपके इंटरनल रिफॉर्म्स नहीं हुए।
- 2:12:33आपके यहां कास्ट का मसला आज की डेट में भी मुझे नहीं पता था दो चार साल पहले तक।
- 2:12:39मुझे लगता था कि मुसलमानों में मुझे मुझे पता ही नहीं था जातपात क्या है उस तरह से।
- 2:12:42इतना सली रीज़ंड है। हिंदू में तो बहुत आम है, साफ है। लेकिन फिर जब आप शादियां करने
- 2:12:49जाते हैं, फिर जब आपकी बात होती है, आप इधर से आते हैं, आप उधर से आते हैं। मैं
- 2:12:53सैयद हूं, मैं शेख हूं। तुम
- 2:12:57जुलाहे हो, अंसारी हो, हलालखोर हो, हलालखोर हो, गाड़े हो।
- 2:13:04ये तेली हो। ये रियलिटीज जब आपने डील ही नहीं करी,
- 2:13:10आपका क्लेम कहां से आएगा? आपके यहां जहेज लिया जा रहा है। आजकल तो ये सारी चीजें
- 2:13:15मैं तो मेरे वालिद साहब क्योंकि स्कॉलर हैं और उनका काम है मैं उनका प्रोडक्ट हूं
- 2:13:20एक तरीके से कि जो उन्होंने काम किया है कि कुरान सिर्फ ऐसा नहीं है कि भ आपकी एक
- 2:13:26लिमिटेड किताब है कि चंद जो फिककी मसाइल है बस उसी तक है। वो एक मुकम्मल दीन हयात
- 2:13:32और एक मुकम्मल निजाम को भरपा करने का एक फ्रेमवर्क है। होलिस्टिक पैराडाइम है।
- 2:13:37उसमें सही और गलत को जज करने के लिए उसमें प्रिस्रिप्शंस हैं। बाकायदा किस तरह की
- 2:13:42मोरल सोसाइटी कैसे कंस्ट्रक्ट की जाएगी उसकी पूरी प्रिस्रिप्शंस हैं। पर आपने तो
- 2:13:48वह नहीं किया। और जिन लोगों ने यह कोशिश की उनको आपने स्पेस नहीं दिया। क्योंकि
- 2:13:53आपने इंटरनल इंस्टीट्यूशनल हेजिमनीज़ क्रिएट की। आपने जब वह इंस्टीट्यूशनल
- 2:14:00हेजमनीज क्रिएट करी तो आप आपस में कमपीट कर रहे हैं। तो यह सारी इंटररिलेटेड
- 2:14:07प्रॉब्लम्स हैं क्योंकि आपके पास इस वक्त अपने आपको रीलोकेट करने की कॉन्फिडेंटली
- 2:14:15मैं क्या कर सकता हूं? आज की डेट में अगर आप मुझसे पूछें मैं
- 2:14:21जीएनयू में स्टूडेंट था। तालिब था। यह सवाल मेरे सामने आया। मैं क्या कर सकता
- 2:14:26हूं? बहसियत स्टूडेंट जिसकी ट्रेनिंग फिलॉसफी
- 2:14:32पॉलिटिक्स इकोनॉमिक्स में है। जिसने इंजीनियरिंग भी पढ़ा है। साइंस साइड से
- 2:14:37है। वालिद साहब के लिए मैं वीडियो भी एडिट करता था क्योंकि उनकी जो किताबें हैं मुझे
- 2:14:41लगता था कि वो लोगों के पास आना चाहिए था। तो मेरे लिए यह था कि मैं रिसर्च को और
- 2:14:47मीडिया को कोशिश कर सकता हूं कि जोड़ूं। सक्सेसफुल मैं अभी भी नहीं हूं। लेकिन एक
- 2:14:53कोशिश कर सकता हूं। तो सवाल ये है कि आज की डेट में
- 2:14:59मेरे 4 साल के एक्सपीरियंस में जब मैंने नौजवानों को भी देखा जो प्रोडक्ट है
- 2:15:03मॉडर्निटी के जामिया एएमयू कोई ऐसा नहीं है कि वो मॉडर्न यूनिवर्सिटीज नहीं है।
- 2:15:10उनमें हर वो चीज जो करिकुलम है, जो अंडरस्टैंडिंग है, जो इकोनॉमिक्स को आपको
- 2:15:14पढ़ाया जा रहा है, जो पॉलिटिकल थ्यरी पढ़ाई जा रही है, जो टेंपलेट्स आपके दिमाग
- 2:15:18में कंस्ट्रक्ट किए जा रहे हैं, जिससे आप जो आप बोल रहे थे कि रीजन करेंगे
- 2:15:23जी। वो सारे टेंप्लेट्स तो वो हैं जो मेरी
- 2:15:26आइडेंटिटी को मुश्किल बनाते हैं। एट ऑड्स बनाते हैं। इसलिए मैं हल्ला को क्रिटिक
- 2:15:33करता हूं। बहुत रिगरस थराइजेशन है। बहुत रिगरस
- 2:15:39थराइजेशन तो न्यूटन का भी था। 200 साल तक वो मोस्ट डोमिनेंट थराइजेशन था। बट सही
- 2:15:44नहीं था। लिमिटेडली सही था। एट द स्केल ऑफ सोलर
- 2:15:49सिस्टम। आज भी वो सक्सेसफुल है। बट उसके जस्ट आगे फेल हो जाता है।
- 2:15:53तो वो टेंपलेट की एक मिनिमम यूटिलिटी है। हम लोगों का
- 2:16:00हेल्थ का मॉडल क्या होगा? दुनिया में इनकलिटी की बात होती है।
- 2:16:06इस्लाम में तो बाकायदा क्लास स्ट्रगल को लेके वेल्थ पे टैक्स है,
- 2:16:11जकात है, उश्र है, खुमस है। मैं नहीं बोल रहा हूं ये हमारे वालिद साहब का काम है इस
- 2:16:17पे। मैं तो उसका एक बेनिफिशरी हूं। लेकिन मैं जब एज अ स्टूडेंट ऑफ इकोनॉमिक्स
- 2:16:22इसको रिलेट कर रहा था टोमा पिकटी के काम से। उन्होंने बोला वो भी वेल्थ पे टैक्स
- 2:16:28लगाने की बात करते हैं ग्लोबली। मुझे बड़ा इंटरेस्टिंग लगा। उन्होंने बोला है कि
- 2:16:32हिस्टोरिकली जो कैपिटल और लेबर का रिलेशन है उसमें लेबर कैपिटल से नीचे रहा है
- 2:16:39नेगोशिएशन में ट्रीटी में कैपिटल को इंटरेस्ट रेट मिलता
- 2:16:44है लेबर को वेज मिलती है तो क्योंकि कैपिटल प्रिविलेज्ड पोजीशन में रहा है तो
- 2:16:51जो इंटरेस्ट है रिबा है उसने कंडीशनलिटीज ऑफ इक्वलिटी को चेंज कर
- 2:16:59दिया इनकलिटी परपेचुएट होती हैं। अपने आप में लेबर और कैपिटल का जो कॉन्ट्रैक्ट है
- 2:17:05वो मुशारका है कि भ आप इक्विटी पे रखेंगे। बाद में उसके मुदार और बहुत सारे डिफरेंट
- 2:17:11कॉन्टेक्स्चुअल इंटरप्रिटेशंस आए। आप इनकम पे सिर्फ नहीं कर सकते हैं या फिर सेल्स
- 2:17:18पे नहीं। आपका जो टैक्सेशन पैराडाइम होगा वो वहां
- 2:17:22होगा जहां पे लोग एक्चुअली एक्यूमुलेट करते हैं वेल्थ को। अमीर के पास तो जमीनें
- 2:17:27हैं, जायदाद हैं। जी।
- 2:17:29और आपका हाईएस्ट टैक्स इनकम पर है। आपका वेल्थ पर टैक्स नहीं है। हमारे यहां आज हम
- 2:17:34सोना रख दें। मेरी बीवी के पास जितना भी सोना है, हमारे पास रनिंग फ्लो ऑफ इनकम
- 2:17:39नहीं है। फिर भी हमें देना पड़ता है। जी।
- 2:17:41और वो किसको देना पड़ता है? उसकी शरायत रख दी। आठ कैटेगरीज हैं।
- 2:17:44जी। गरीब है, यह है वो है। वो सारी वो कैटेगरीज है जो किसी सोशल इवल को चैलेंज
- 2:17:49कर रही हैं। तो एक मुनजम निजाम है कि जो एक मुआशरे की पर्टिकुलर प्रॉब्लम को सॉल्व
- 2:17:57करता है। जी।
- 2:18:00आपकी मार्केट कैसे वो होगी, ऑर्डर होगी वो हमने बात की थी मदीने में। आपकी सिर्फ जो
- 2:18:07यह हायरार्किकल रिलेशंस हैं ऊंचनीच के मेरी जो लेगसी है मैं एक सैयद हूं।
- 2:18:16हम मैं एक प्रिविलेज हूं। मैं शेख हूं। मैं खान हूं। मैं अंसारी हूं। अल्लाह के
- 2:18:24रसूल ससल्लम ने तो शादियां करवा दी। ब्लड मिक्स हो गया। तुम क्या हो? कौन हो?
- 2:18:32यह चैलेंजेस आ रहे थे ना वो जो 23 साल में हुआ है वो मिनी मॉडल है जो ह्यूमन रिलेशंस
- 2:18:40में जो आम प्रॉब्लम्स आती हैं इट्स अ वेरी प्रैक्टिकल और इसलिए वो 23 इयर्स में आया
- 2:18:47कि मतलब लोग सोचते हैं ना एक ही टाइम पे दे देते हैं पूरी की पूरी वो नहीं क्योंकि
- 2:18:51सोसाइटी टाइम लेती है समझ रहे हैं देखिए प्रॉफिटिक मॉडल में कितना एंबेडेड है कि
- 2:18:56जीरो और वंस नहीं है शराब को भी कई लेयर्स में बैन किया गया स्लेवरी को कई लेयर्स
- 2:19:03में इस तरह कंस्ट्रक्ट की गई रियलिटी कि स्लेव को आजाद करवाना एक सबसे अच्छे सवाब
- 2:19:09कमाने के काम में हो गया। औरतों के हुकूक कि अगर हम गिने के एन नंबर ऑफ टाइम्स कि
- 2:19:18जहां पे औरत के हुकूक ज्यादा हैं या मर्द के हैं। तो उसमें 60% ऑफ द केसेस में एक
- 2:19:24यकीन का वीडियो था। एक्चुअली औरत का अपर हैंड है।
- 2:19:29जी। लेकिन हमारी सोसाइटी रैंपेंटली पेट्रियकल है। जो दुनिया को जो
- 2:19:35भी उसकी फ्रेमवर्क कह रही हैं, कैपिटलिस्ट कैपिटलिज्म कर रहा है। हिंदूइज़्म अपने
- 2:19:40उसकी बात कर रहा है। मुसलमान जिस अदिल की बात करता है, जिस मोरल सुपीरियरिटी की बात
- 2:19:47करता है, उसमें कहीं खड़ा नहीं पाता। नहीं आई अंडरस्टैंड आप बिल्कुल सही कह रहे
- 2:19:53हैं। एंड आई एग्री विद यू ऑन ऑन ऑलमोस्ट ऑल द पॉइंट्स। आई डोंट थिंक आई हैव एनी
- 2:19:59डिसए्रीमेंट। लेकिन
- 2:20:04ये प्रॉब्लम
- 2:20:08इंड्यूस्ड भी तो हो सकती है ना। कहने का मतलब ये कि आप जो हैं वो अ देयर इज नो
- 2:20:16डाउट कि भाई मुस्लिम्स जो हैं वो मोरली करप्ट हो गए हैं। आप मिडिल ईस्ट को देख
- 2:20:24गाजा में जो हो रहा है मिडिल ईस्ट कुछ नहीं कर रहा है तो जाहिर सी बात है आप
- 2:20:27बहुत कुछ कर सकते थे आपने कुछ नहीं किया तो ये एक आर्गुमेंट बिल्कुल सही है कि
- 2:20:30मुस्लिम्स जो हैं दे आर नॉट मोरली वो लो ग्राउंड पे हैं मोरली मोरल करप्शन है दैट
- 2:20:36इज वन थिंग लेकिन ये जो एक मोरल लो ग्राउंड आप कहते हैं या मोरल करप्शन जो आप
- 2:20:44कहें या मैं उसको मोरल करप्शन नहीं कहूंगा ये जो चीज है इसको मैं मोरल करप्शन कहूंगा
- 2:20:49मैं दूसरी चीज को कहूंगा दी इंपोजशन ऑफ इनफीरियोरिटी।
- 2:20:56ठीक है? यह स्टेट से आती है। ठीक है? जो बहुत हद तक पोस्ट इंडिपेंडेंट इंडिया में
- 2:21:05स्टेट ने किया है। जी।
- 2:21:08थ्रू द मीन्स ऑफ लॉ लॉ को यूज़ करके
- 2:21:16थ्रू इरेजन ऑफ हिस्ट्री। इरेजन ऑफ हिस्ट्री
- 2:21:22जो बड़ी इंटरेस्टिंग चीज है। जब मुस्लिम हिस्ट्री इंडिया से इरेज होती है तो लोगों
- 2:21:26को प्रॉब्लम नहीं होती। लेकिन जब लेफ्ट हिस्ट्री इरेज होती है तो लोगों को बड़ी
- 2:21:30प्रॉब्लम होती है। ठीक है? तो 1857 के पूरे रिवोल्ट को आप हिस्ट्री की किताब में
- 2:21:36पढ़ लीजिए। आपको मुस्लिम कॉन्टेक्स्ट मिलेगा ही नहीं। ठीक है? आपको एनसीआरटी
- 2:21:40किताबों में हमारे टाइम में भी नहीं था। तो
- 2:21:44क्या मिलेगा? दो चार नाम मिल जाएंगे आपको ज्यादा से ज्यादा। ठीक है?
- 2:21:50जो मूवमेंट्स हैं जमीयत उलमा हिंद है ये सब ये तो बहुत
- 2:21:55पुराने मूवमेंट्स हैं। फ्रीडम स्ट्रगल में है। इनका कोई जिक्र आपको नहीं मिलेगा। कुछ
- 2:22:00भी नहीं मिलेगा। तो इरेजर ऑफ हिस्ट्री है या आप ये कहिए कि मार्जिनलाइजेशन ऑफ
- 2:22:07लिटरेचर है। ठीक है? लैंग्वेज स्क्रिप्ट है। जब मुझे याद है
- 2:22:142000 अ आई थिंक 111 में जब वालिद साहब भोपाल में
- 2:22:20थे जब मेरे ख्याल से भोपाल गए वो तो मुझे आज भी इंसिडेंट याद है कि वो दवा की दुकान
- 2:22:27में हम गए और उसने दवा की दुकान में दवा के जिस जिस
- 2:22:37एनुल जो जिसको कहते हैं ना जिस उसमें उसने उसने दवा रखी वो कागज का था पैकेट और उस
- 2:22:46पैकेट पे उसने सुबह दोपहर शाम लिखना होता है। तो सुबह दोपहर शाम उसने हिंदी में
- 2:22:51लिखा ठीक है। तो वालिद साहब ने कहा अभी तुम हिंदी में क्यों लिख रहे हो?
- 2:22:59तुम उर्दू में नहीं लिख सकते। मैंने कहा नहीं मुझे नहीं
- 2:23:05आती।
- 2:23:08तो वालिद साहब ने कहा भाई मुझे बड़ी हैरानी है इस बात की क्योंकि यह मुसलमान
- 2:23:12रियासत थी। है ना? और यहां पे मसाजिद में भी जो दुआएं हैं वो हिंदी में लिखी हुई
- 2:23:22हैं। नाउ ये क्वेश्चन हिंदी और उर्दू का
- 2:23:29नहीं है क्योंकि आप अगर हिंदुस्तानी लैंग्वेज बोलते हैं तो कोई प्रॉब्लम नहीं
- 2:23:34है। लेकिन इरेजर ऑफ स्क्रिप्ट
- 2:23:40जो है जब आप उसको खत्म करते हैं वह प्रॉब्लम है। भले वो लैंग्वेज रहे अब तो
- 2:23:46खैर लैंग्वेज भी खत्म हो रही है। प्योर जिसको कहते हैं ना हिंदी लैंग्वेज यूज़
- 2:23:51करने का जो जो इंप्लीमेंटेशन है वो प्रॉब्लमैटिक है। लेकिन आप एक आर्गुमेंट
- 2:23:57ये दे सकते हैं कि साहब हिंदी में लिखें, देवनागरी में लिखें चाहे जिसको कहते हैं
- 2:24:02पर्शियन स्क्रिप्ट में लिखें। उसमें क्या ही प्रॉब्लम है। जो हिंदुस्तानी
- 2:24:08आर्गुममेंट है उसमें प्रॉब्लम यह है कि इरेजर ऑफ स्क्रिप्ट है ना और वो स्क्रिप्ट
- 2:24:12का इरेजर जो है वह बहुत बड़ा इरेजर है क्योंकि ज्यादातर जो मटेरियल है मुस्लिम
- 2:24:20हिस्ट्री का मुस्लिम कल्चर का जो ट्रेडिशन का पिछले 100 200 साल 300 साल का वो तो
- 2:24:25उसी में है। तो वो स्क्रिप्ट नहीं पढ़ रहे हैं आप। तो कहने का मतलब यह कि वो इरेजर
- 2:24:30हिस्ट्री का भी हो रहा है, स्क्रिप्ट का भी हो रहा है। अब जैसे मैं आपको
- 2:24:36इंस्टीट्यूशन की बात हो रही थी एएमयू है या जामिया है।
- 2:24:41बहुत इंटरेस्टिंग है। मैं अभी बात करते-करते मैं सोच रहा था ये कितनी
- 2:24:45इंटरेस्टिंग बात है कि एएमयू में और जामिया में
- 2:24:52एंड आई मे बी रॉन्ग। क्योंकि मैंने इलाहाबाद या बीएचयू नहीं देखा। आई डू नॉट
- 2:24:57नो। बट इनमें पॉलिटिकल पार्टीज ने कभी एंट्री
- 2:25:03नहीं ली। यह बहुत इंटरेस्टिंग चीज है। आपको कभी भी स्टूडेंट्स यूनियन का इलेक्शन
- 2:25:10जब भी होता था वहां आपको
- 2:25:15फ्रेम में कांग्रेस नहीं मिलेगी। इंटरेस्टिंग
- 2:25:19एबीवीपी भी नहीं मिलेगी। आपको समाजवादी पार्टी भी नहीं मिलेगी।
- 2:25:24इज दिस इंटेंशनल? क्योंकि अगर पॉलिटिकल पार्टी फ्रेम में
- 2:25:28होगी तो जाहिर सी बात है मुस्लिम पॉलिटिक्स के लिए पॉलिटिकल उसमें एक चैनल
- 2:25:34बनेगा। फ्रेमिंग होगी, फिर डिमांड होगी, फिर
- 2:25:37रिक्वायरमेंट होगी, एक पॉलिटिकल क्लास इमर्ज होगी मुसलमानों में।
- 2:25:41जी। वेरी इंटरेस्टिंग पॉइंट। मुझे नहीं पता
- 2:25:44था। मैंने मैंने अभी बैठे-बैठे मैं सोच रहा था
- 2:25:47कि आखिर ऐसा क्यों है? ठीक है। क्योंकि स्टूडेंट्स यूनियन अभी की
- 2:25:50तो नहीं है। बहुत पुरानी स्टूडेंट्स यूनियन है भाई।
- 2:25:53यह वो यूनिवर्सिटीज हैं जो पॉलिटिकल सीन में डोमिनेंट थी।
- 2:26:00खिलाफत मूवमेंट में, नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट में हम
- 2:26:04ठीक है? जो गांधी जी के साथ बहुत क्लोजली एसोसिएटेड थी जिसकी वजह से कॉलेजेस
- 2:26:10यूनिवर्सिटीज में तब्दील हुए। हम
- 2:26:12मॉमडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज यूनिवर्सिटी बना बिकॉज़ ऑफ़ नॉन कोऑपरेशन खिलाफत एंड ऑल
- 2:26:16दैट। ठीक है? उसी में बना ना जामिया एएमयू से निकल रही है वो भी उसी
- 2:26:21टाइम में निकल रही है। ठीक है? तो आई मे बी रोंग बिकॉज़ एज आई सेड
- 2:26:27मुझे नहीं मालूम कि भ बीएचयू में इलेक्शंस कैसे होते हैं या या इलाहाबाद में
- 2:26:33इलेक्शंस कैसे होते हैं। हो सकता है वहां भी इस तरीके की टेंपलेट हो। लेकिन मुझे
- 2:26:36ऐसा लगता है कि यहां एक बड़ा बड़ा ही डेलीबेट जिसको कहते हैं आप इन एक बड़ी
- 2:26:43इंटेंशनल चीज है कि आप जो हैं वो पॉलिटिकल सेंसिटाइजेशन कहें या इशू फ्रेमिंग कहें
- 2:26:50या इशू पर बात करना कहें वो आपको नहीं मिलेगा। आपको क्या मिलेगा?
- 2:26:57डाइनिंग हॉल में फीस बढ़ गई है। उस पर धरना मिल जाएगा। ट्यूशन फीस बढ़ गई है उस
- 2:27:04पर धरना हो जाएगा। ज्यादातर धरना तो इसी बात पर होता है कि
- 2:27:09भैया स्टूडेंट्स यूनियन बना दो। ठीक है? 70-80% टाइम्स तो धरना सिर्फ इसी बात के
- 2:27:15लिए होता है कि स्टूडेंट्स को एक यूनियन चाहिए। ठीक है? तो कहने का मकसद ये कि ये
- 2:27:22ये जो एक यू आर लूजिंग द मोरल हाई ग्राउंड एक तो आई रिमेंबर 1960 या 70ज की बड़ी
- 2:27:31इंटरेस्टिंग किताब है अब्दुल हामिद अबू सुलेमान की द क्राइसिस ऑफ़ मुस्लिम माइंड
- 2:27:36बहुत अच्छी किताब है। फैंटास्टिक बुक एंड ही सेज़ कि आफ्टर दी डिमाइस ऑफ़ कैलिफेट
- 2:27:44कैलिफेट के खत्म होने के बाद हालांकि बहुत ही गल गई थी। बहुत ही खत्म हो गई थी। सारी
- 2:27:49चीजें थी। एक टोकनिज्म था। सिर्फ एक इमेजरी थी। कोई उसकी अथॉरिटी नहीं थी।
- 2:27:55लेकिन 1920 में उसको खत्म होने के बाद मुसलमानों के साथ सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह
- 2:28:00हुई कि वी बिलोंग वेयर। कहां बिलोंग करें हम। ठीक है? क्योंकि कैलिफेट तो खत्म हो
- 2:28:06गई। और फिर नेशन स्टेट बनता है तो उनको समझ में नहीं आता कि भाई हम नेगोशिएट कैसे
- 2:28:14करें बिटवीन बीइंग एन अफगानी एंड बीइंग पार्ट ऑफ एन उ्मा एन इंडियन एंड एन उ्मा
- 2:28:21तो इसको नेगोशिएट हम कैसे करें? तो यह प्रॉब्लम उनको फील हुई। तो कहने का मकसद
- 2:28:27यह है कि ये ये जो एक मोरल लो ग्राउंड आपका है वो एक पार्टीशन की वजह से होता है
- 2:28:34ऑटोमेटिकली। आपको समझ में नहीं आता कि यार मैं अपने को हिंदुस्तानी कैसे कहूं।
- 2:28:40क्यों? क्योंकि मुसलमान तो पाकिस्तान चले गए। और लोगों का यह कहना है कि मुसलमानों
- 2:28:44के लिए पाकिस्तान बना है। तो फिर मुसलमान हिंदुस्तान में क्या कर रहे हैं? तो आई
- 2:28:48अंडरस्टैंड वो एक क्राइसिस ऑफ द माइंड वो हो सकता है। दैट कैन हैपन दैट दैट कैन बी
- 2:28:54अ साइकोलॉजिकल थिंग। बट दैट कैन नॉट कंटिन्यू बिकॉज़ वो इंस्टीटशंस जो 1920 के
- 2:29:02थे दे डिड नॉट ट्रांसफर टू पाकिस्तान। दे आर स्टिल हियर इन इंडिया। ठीक है? यह
- 2:29:09इस लेवल तक है कि हमदर्द लेबोरेटरी जो है
- 2:29:15आजादी से पहले की है। लेकिन ऐसा थोड़ी हुआ कि आजादी हो गई तो
- 2:29:20पाकिस्तान चली गई। पाकिस्तान में भी हैं वो हिंदुस्तान में भी हैं। उनके एक भाई
- 2:29:25शायद पाकिस्तान चले गए थे। तो वहां भी हमदर्द है। यहां भी हमदर्द है।
- 2:29:30ठीक है? इनफैक्ट किसी ने आई थिंक जुबैर अब्बासी साहब हैं। कौन है? जिन्होंने एक
- 2:29:35बड़ा इंटरेस्टिंग आर्टिकल लिखा है। वफ पे ही लिखा है। जहां पे उन्होंने
- 2:29:39हमदर्द लैबोरेटरीज इन पाकिस्तान को डिस्कस किया है कि हाउ इट कैन सर्व एज अ वेरी गुड
- 2:29:46मॉडल ऑफ वफ इंस्टीट्यूशन। ठीक है? एंड आई एम श्योर इट इज़ हैपनिंग सिमिलरली इन
- 2:29:51इंडिया। इंस्टीटशंस वो कंटिन्यू कर रहे हैं। तो आप मोरल हाई ग्राउंड जो आप लूज कर
- 2:29:56रहे हैं वो इतना लूज आपको नहीं करना चाहिए।
- 2:29:59मोरल करप्शन है अबब्सोलुटली अग्री आपकी सोसाइटी में जो करप्शन है जो प्रॉब्लम्स
- 2:30:06हैं वह अब्सोलुटली बिल्कुल सही है लेकिन जो तीसरा एलिमेंट है जो सबसे ज्यादा
- 2:30:12इंपॉर्टेंट है कि आपकी पॉलिटिकल एजेंसी या रिप्रेजेंटेशन
- 2:30:20या आइडेंटिटी इन पब्लिक स्पेस उसको
- 2:30:25इतना सप्रेस किया गया है थ्रू टू दी इंस्ट्रूमेंटालिटी ऑफ़ द स्टेट कि
- 2:30:33आप बिल्कुल ऐसे हो गए हैं जैसे अल्लाह के
- 2:30:38रसूल सल्ला वसल्लम ने कहा ना कि इस्लाम जो है वो एलियन हो जाएगा।
- 2:30:44ठीक है? आप इसको यकीन नहीं कर सकते कैसी बात है?
- 2:30:48जब इस्लाम डोमिनेट करेगा दुनिया में तो एलियन कैसे हो जाएगा? समथिंग सिमिलर इज़
- 2:30:52हैपनिंग हियर। हिंदुस्तान में मुसलमान जो हैं दे वर एट द
- 2:30:59पीक दे वर रनिंग द ज्योग्राफी इस पूरी जग्राफी को रन करते थे वो क्या मतलब है
- 2:31:06दाढ़ी नहीं थी क्या उनके टोपी नहीं थी क्या उनके पास क्या हिजाब
- 2:31:10नहीं पहनते थे लोग हाउ कैन दिस बिकम एलिनेटेड हाउ कैन दिस
- 2:31:16बिकम समथिंग दैट दैट इट इज स्ट्रेंज तो मुझे ऐसा लगता है कि इसमें बहुत बड़ा रोल
- 2:31:22जो है वो स्टेट की एजेंसी का है। और मेरी
- 2:31:28अंडरस्टैंडिंग यह है कि व्हाट व्हाट वी यू नो डिस्कस्ड अर्लियर कि
- 2:31:36वी नीड टू अंडरस्टैंड एंड वी नीड टू डिवाइस मेथड्स जहां पे हम
- 2:31:44नेगोशिएटिंग पोजीशन में आ सकें। जहां पे हम नेगोशिएटिंग स्ट्रेटजीस डिवाइज कर
- 2:31:52सकें। है ना? एंड देयर फॉर आई वुड डिसएग्री विद
- 2:31:59हर लास्ट प्रोपज़िशन इन दैट सेंस। आई विल अग्री विद यू इन दैट सेंस बिकॉज़
- 2:32:06कंसेंस सी ही इज़
- 2:32:11राइट इन वन सेंस एंड दैट्स दैट्स अब्सोलुटली करेक्ट।
- 2:32:14ऑफकोर्स एवरीबडी एवरी गुड थिंकर इज़ राइट इन सम सेंस।
- 2:32:17ही इज़ अब्सोलुटली राइट इन दैट। बट द क्वेश्चन इज
- 2:32:23हाउ वुड आई एस अ मुस्लिम नेगोशिएट इन इंडिया? नहीं
- 2:32:29आप बिल्कुल सही बात कह रहे हैं। दो लेवल्स हैं क्लेम के जो मैं करना चाह रहा था। एक
- 2:32:34तो ऑफ कोर्स आप ना उसका भी कंटेंट देखेंगे तो ज्यादातर चीजें हम वही बात कर रहे होते
- 2:32:40हैं कि स्टेट का क्या रोल है और माइनॉरिटी मेजॉरिटी का क्या रिलेशन है
- 2:32:46और ऑफकोर्स उस फ्रंट पे हम लोगों को ये अंदाजा भी होता है आपकी और मेरी खुद की इस
- 2:32:53पे गुफ्तगू हुई है माइनॉरिटी मेजॉरिटी रिलेशन स्टेट फॉरेशन उसमें स्टेट किस तरह
- 2:32:59से मेजॉरिटेरियन हो जाता है और उसमें स्पेशली जो मुस्लिम
- 2:33:03कंडीशन है हिंदुस्तान में उस पे क्या इंपैक्ट पड़ा है? उसकी उसमें कोई दो राह
- 2:33:07नहीं है। मेरा असल में दूसरा सवाल यह होता है कि यह
- 2:33:12तो हमेशा रहा है। ऐसा कभी नहीं हुआ दुनिया में क्योंकि बहुत सारी चीजें ऐसी होती हैं
- 2:33:18कि स्टेट को एकेडमिकली पढ़ना एज अ सब्जेक्ट।
- 2:33:24यह भी एक बहुत मॉडर्न तरीके से एक बहुत ज्यादा जिसे किया है
- 2:33:29लोगों ने स्टेट का। लेकिन एक होता है ना कि जिसकी जब पहले क्या होता था पीएचडी अगर
- 2:33:34कोई कर रहा है तो एक शायद लेस देन 1% ऑफ़ द पीपल वुड डू दैट मे बी इवन लेस आज की डेट
- 2:33:41में क्रिटिकल स्टडीज एकेडमिक स्टडीज बहुत होती हैं और उसमें ज्यादातर चीजें जो
- 2:33:45कंटेंपरेरी होती हैं लोग क्योंकि करियर बनाना चाहते हैं बहुत सारी चीजें होती हैं
- 2:33:50वो बहुत जो इमीडिएट चीजें गुजरी होती हैं हुई होती हैं उस पे ज्यादा काम होता है।
- 2:33:57तो इस वजह से मॉडर्न नेशन स्टेट मुझे ऐसा लगता है कि प्री मॉडर्न नेशन स्टेट्स के
- 2:34:04रिलेटिव उन पे बहुत ज्यादा काम हुआ है और कई बार जो क्रिटिक होता है नेशन स्टेट का
- 2:34:11और यह समझा जाता है कि प्री मॉडर्न नेशन स्टेट में वो एट्रिब्यूट्स नहीं थे। जी
- 2:34:17मैं जब भी थोड़ा सा नजर डालता हूं और समझने की कोशिश करता हूं मुझे लगता है कि
- 2:34:22और मैं देखता हूं कि मे बी इन अ रिलेटिवली रिड्यूस्ड फॉर्म बट वो स्टेट की हर
- 2:34:27फॉरमेशन में वो लॉजिक ऑपरेट करते हैं। स्केल कॉन्फ़िगरेशन
- 2:34:33किस लेवल पे आप ऑपरेट कर रहे हैं ये एक सब्जेक्टिव एक रिलेशनल
- 2:34:38पोजीशन हो सकती है। बट उसी तारीख को जब दूसरे पर्सपेक्टिव से देखा जाता है
- 2:34:43रेजिस्टेंस के पर्सपेक्टिव से और कंस्ट्रक्शन के पर्सपेक्टिव से तो
- 2:34:47माइनॉरिटीज हमेशा वो राइज करती हैं जो अपने ऊपर स्पेशल
- 2:34:53कंडीशन लगाती है कि मुझे प्रोग्रेस करना है। मुझे कंट्रीब्यूट करना है। दो चार
- 2:34:59पांच लोग होते हैं जो एक तरीके से पूरी जिम्मेदारी उठा लेते हैं कौम की।
- 2:35:05ऐसा नहीं होता है कि एक यू नो मैसिस हम मूवमेंट्स बनाते हैं। जो क्रिटिकल मास
- 2:35:13होता है किसी सोशल मूवमेंट को बनाने का कंस्ट्रक्ट करने का वो कुछ जिद्दी लोग
- 2:35:17होते हैं। जी
- 2:35:19जब मैं इस पर्सपेक्टिव से फ्लिप करके पिक्चर को देखता हूं तो वो क्रिटिकल मास
- 2:35:26के वो अलग-अलग स्पेशलिस्ट हैं। कोई किसी चीज का स्पेशलिस्ट है, कोई वो लेकिन वो जो
- 2:35:32एक इंडिविजुअल या कुछ सेट ऑफ इंडिविजुअल्स में वह जिद होना
- 2:35:39कि वो इवन नेगेटिव कंडीशनलिटीज को पॉजिटिव में तब्दील कर सकें। वो मुझे दिखता है
- 2:35:46चैलेंज क्योंकि एक एग्जांपल मैं आपको देता हूं। ओखला एक घटो है और गेटो के बारे में
- 2:35:52जितनी भी ज्यादातर बातें की जाती हैं वो एक नेगेटिव लेंस से की जाती हैं।
- 2:35:56जी। अगेन अगर क्वेश्चन फ्लिप कर दिया जाए कि
- 2:35:59घटोस की अच्छाइयां क्या है? एक स्मॉलर पॉकेट में एक कल्चर प्रिजर्व
- 2:36:06होता है। कल्चर की अपनी लाइफ होती है। कल्चर से और उनकी वे ऑफ़ लाइफ से जुड़ी हुई
- 2:36:14जो नेसेसिटीज़ होती हैं, वह बिज़नेस एंटरप्राइजेस में तब्दील होती हैं।
- 2:36:18हम आपकी एंटरप्रेन्योरशिप होती है। आपके सोशल
- 2:36:21रिलेशनशिप्स बिल्ड होते हैं। आपकी सिक्योरिटी होती है। मतलब गेटो तो एक बहुत
- 2:36:25सिक्योर जिसे कहते हैं नेबरहुड होता है। और उस
- 2:36:30सबसे ज्यादा जो आपने बोला वहां पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन होता है। आपका एमपी हो सकता
- 2:36:35है। आपका एमएलए हो सकता है। और वह एमपी वो
- 2:36:38एमएलए वह जाके पार्लियामेंट में असेंबली में आपकी बात रख सकता है।
- 2:36:45मैं जामिया मिलिया इस्लामिया में था 2016-18 तक मैं अक्सर ये बात बोलता हूं।
- 2:36:49मैं इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट में था। मैं ये देखता था कि यूनिवर्सिटी में और भी
- 2:36:53सारे मुख्तलिफ डिपार्टमेंट्स हैं जो कभी अगर किसी सर्वे को करने की जरूरत हो। यहां
- 2:36:58की फैकल्टी इस इलाके का या दिल्ली का एनसीआर का कम से कम मुस्लिम या माइनॉरिटी
- 2:37:04सर्वे क्यों नहीं करती? हम उसमें उसके स्टूडेंट्स भी इनवॉल्व होते।
- 2:37:08उनको एक प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस भी मिलता। जी।
- 2:37:11तो कई बार आपके पास रिसोर्सेज होती हैं। एएमयू में आप अलीगढ़ फिर आपके इतने सारे
- 2:37:16बैचेस होते हैं। आप ओवर द पीरियड ऑफ टाइम ऑलमोस्ट पूरे हिंदुस्तान में फिर साउथ में
- 2:37:22यूनिवर्सिटीज हैं। सारी चीजें हैं। आप एक्चुअली एक्शननेबल सोशियोइकोनॉमिक सर्वेज़
- 2:37:27कर सकते थे। आप पॉलिसी डॉक्यूमेंट बना सकते थे। बहुत सारी जगहों पर दुनिया में
- 2:37:32एकेडमिया ही है जो पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स बनाता है, स्टडी करता है और उसके बाद
- 2:37:36लोगों के सामने रखता है। ऐसा नहीं है कि ऐसा काम नहीं हुआ है। एक सर्वे 2007 में
- 2:37:422008 में हुआ था सचर कमेटी के लेकिन उसका सिर्फ सैंपल साइज 800 था। नॉट जस्ट इन
- 2:37:47ओखला ऐसी जितनी भी 30-40 जो लोकालिटीज हैं मुस्लिम डोमिनेटेड
- 2:37:54एनसीआर में यहां पे 30001 लोकालिटी में वो 840 लोकालिटी में। इसी तरह जब बटला हाउस
- 2:38:00एनकाउंटर हुआ तो उसके बाद एक किताब की शक्ल में या जामिया ने एक इनिशिएटिव भी
- 2:38:06लिया कि किस तरह से जो लीगल फ्रेमिंग हो रही है एंटी मुस्लिम उसको कंटेस्ट किया
- 2:38:11जाए। लेकिन ये नॉर्म नहीं है। ये एक्सेप्शन है
- 2:38:15कि आपके जो इंस्टीटशंस हैं भी और उसमें जो आपके प्रोफेसर्स हैं, एकेडमिक्स हैं,
- 2:38:23थिंकर्स हैं। एक एग्जांपल यूनिवर्सिटी के हवाले से बोल
- 2:38:26रहा हूं। वो एक्चुअली बहुत सारी चीज अचीव कर सकते थे। लेकिन जब आपका इंटरेस्ट ना हो
- 2:38:33आपके पास प्रिविलेज भी हो। आपका यहां से असेंबली में आदमी जाता है। आपका
- 2:38:38पार्लियामेंट में जा सकता है। हिंदुस्तान में इतने वो क्या इश्यूज रेज कर रहे हैं?
- 2:38:43जी। कैसे जो मुसलमान बच्चे पढ़ के निकल रहे
- 2:38:46हैं, वो अपने करियर को तो बनाने में जा रहे हैं। बट वो ये क्वेश्चन ऑफ मुस्लिम
- 2:38:51आइडेंटिटी को जी।
- 2:38:53एक रिगरस एकेडमिक फ्रेमवर्क में लेंस में एक पॉलिसी के तहत अलग-अलग शोबे में वो
- 2:39:01क्यों नहीं आ रहा है और अगर आ भी रहा है तो वो हिस्टोरिकल रीडिंग क्यों है बस एक
- 2:39:04होता है ना कि इंटेलेक्चुअल हिस्ट्री हो रही है फलाने ने फलाने जमाने में वो जरूरी
- 2:39:10है बट आज के कॉन्टेक्स्ट में वो पॉलिसी में जब नेशन स्टेट है तो नेशन स्टेट की
- 2:39:16अपनी इंस्टीटशंस हैं जिसमें पॉलिसी फॉर्मेशन होता है
- 2:39:21तो आपकी जो इंस्टिटशंस के हवाले से या स्टेट के जो
- 2:39:27गवर्नेंस है उसके हवाले से जो आपकी बेनिफिट्स बेनिफिट्स हो सकते हैं वो आपको
- 2:39:31मिलते हैं। जी
- 2:39:33तो वो विज़ कंप्लीटली लैकिंग है कि आप इस स्टेज में भी इस स्टेट में भी बहुत कुछ
- 2:39:38अचीव कर सकते हैं और उसके लिए एक्चुअली आपको बिय्ड मटेरियल कंस्ट्रक्ट्स अपने
- 2:39:43करियर को आपको कम्युनिटी ओरिएंटेड कुछ काम करने पड़ते हैं। रिस्क लेने पड़ते हैं।
- 2:39:48जिस तरह इंसान बिजनेस में रिस्क लेता है बहुत हैवी एंटरप्रेन्योरल रिस्क लेता है।
- 2:39:53सोशल एंटरप्रेन्योरशिप में मुझे बजाहिर जब मैं देखा यहां पे रहा जामिया पास है
- 2:39:58जेएनयू जो रियल कॉम्प्रोमाइज या सैक्रिफाइस करने की जरूरत है इंस्टीट्यूशन
- 2:40:03बिल्डिंग के लिए जिसके लिए अभी सफिशिएंट ह्यूमन रिसोर्स एग्जिस्ट करती है
- 2:40:08वो दो लेवल पे होता है। एक ह्यूमन रिसोर्स एक्सिस्ट करें दूसरा लोग उन्हें फंड करें।
- 2:40:14जी तो जितनी ट्रेडिशनल ऑर्गेनाइजेशंस हैं वो
- 2:40:16जैसे मैंने बोला कि वो अपनी इंटरनल हेजिमिनीस में है। उन्होंने इंटरनली एक
- 2:40:21ओल्ड लॉजिक को कंटिन्यूड रखा। से क्या अचीव हो रहा है, कितना अचीव हो रहा है, वो
- 2:40:25एफिशिएंट है या नहीं? उसकी कोई मेजरेबल आउटकम्स नहीं है। और वो बाहर के बंदे को
- 2:40:31जो मतलब कम्युनिटी का ही कोई अपराध हो सकता है उसको ना तो फंड करने को रेडी हैं
- 2:40:38ना उसको प्रमोट करने को रेडी हैं। तो आज की डेट में मुस्लिम कम्युनिटी ऑलमोस्ट
- 2:40:45आई थिंक 180 करोड़ से 1.8 बिलियन है। 180 करोड़ मुसलमान हैं दुनिया में। उनके
- 2:40:5256 नेशंस हैं। उनके कतर जैसे और मुख्तलिफ और स्टेट्स हाईएस्ट पर कैपिटा इनकम भी
- 2:40:59आपके पास वेल्थ ऑफ ब्लैक गोल्ड ऑयल जिससे आपने अपने पूरे के पूरे फॉर्च्यून बनाए।
- 2:41:07उसके अलावा आपके पास मैसेस भी इंडोनेशिया, बांग्लादेश, इंडिया, पाकिस्तान आपके पास
- 2:41:15नॉलेज भी बहुत प्रोड्यूस हुई। आप तो एक तरफ आपके पास वो गरीब मुसलमान है जिस पे
- 2:41:21तशद्दुद हो रहा है और एक तरफ आपके पास वो इलीट मुसलमान है जो बहाने मार रहा है।
- 2:41:27जी तो आपके पास डबल
- 2:41:30समझ रहे हैं कि वो एक्स्ट्राऑर्डिनरी कंडीशंस आ रही है कि आप दोनों लेवल ऑफ
- 2:41:35डिफिकल्टीज कोएस्ट कर रही हैं। हम
- 2:41:39और उनके सशंस ऑफ कोर्स वो डिफाइंड है और वो है। तो मैं इस चीज को बोलता हूं कि ऑफ
- 2:41:45कोर्स स्टेट मेजॉरिटी उसकी कॉन्फ़िगरेशंस है रहेंगी। बट कोई भी माइनॉरिटी
- 2:41:51हिस्टोरिकली स्पीकिंग अगर ब्लैक्स 1960 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर के अंडर और
- 2:41:58मालकम एक्स के साथ अगर ब्लैक लाइव की मूवमेंट नहीं करते।
- 2:42:04जी लोग बोलते हैं बहुत सारे कि भाई पहले
- 2:42:07एजुकेशन आएगी फिर आपके पास अपने राइट्स आएंगे। ठीक है? एक लेवल तक बट मैं उससे
- 2:42:13थोड़ा सा डिसएग्री भी करता हूं। जी कि जो मुस्लिम कम्युनिटी प्रॉफिट की थी
- 2:42:19उसको पहले राइट्स आए हैं फिर एजुकेशन आई है।
- 2:42:21जी क्योंकि राइट्स आप एडवोकेसी और मूवमेंट के
- 2:42:25थ्रू नेगोशिएट करते हैं। दलितों की हिंदुस्तान में पहले राइट्स आए हैं। फिर
- 2:42:29राइट्स की वजह से पॉलिसी बनके एजुकेशन आई है।
- 2:42:32जी क्योंकि आप
- 2:42:35एज अ कम्युनिटी जो जिम्मेदारी स्टेट की है आप वो एग्जीक्यूट नहीं कर सकते। जिस लेवल
- 2:42:41ऑफ इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। आप टैक्स पेयर भी हैं, आप सेल्स टैक्स भी दे रहे
- 2:42:45हैं। आप बाकी भी चीजों में कंट्रीब्यूट कर रहे हैं। उसके बाद आपको बोला जाए आप गेटों
- 2:42:49में आप सड़क भी बनाइए। सड़क इज नॉट अ प्राइवेट इन्वेस्टमेंट।
- 2:42:54जी। फिर आपसे बोला जाए कूड़ा भी उठाइए।
- 2:42:57फिर आपसे बोला जाए कि आप अपने स्कूल भी बनाइए। ये एक चैलेंज है। लेकिन एक चैलेंज
- 2:43:01यह भी है कि आप जो बना भी रहे हैं उसको भी आप उस तरीके से कंसीव या उस तरह से आप
- 2:43:08सीरियस होके नहीं कर रहे हैं कि आप एक्चुअली आपका
- 2:43:13इंटेंडेड गोल कुछ अचीव करना हो। आप उसको भी एक कैपिटलिस्ट मॉडल बना दे रहे
- 2:43:19हैं। कमाने का जरिया बना दे रहे हैं। कमाई में कोई बुराई नहीं है। एज लॉन्ग एज
- 2:43:25वो एक तरह की नस्ल पैदा करें। जी
- 2:43:29तो मैं ये है कि मतलब डबल हो गया। एक तरफ तो स्टेट आपका इंस्टीट्यूशन है। दूसरी तरफ
- 2:43:34वो जो होपलेसनेस हेल्पलेसनेस इसलिए प्रोड्यूस होती है कि आप इंडिया में मैं
- 2:43:40इसको बड़े अफसोस के साथ कहना चाहता हूं। मैंने तो सिर्फ सीए मूवमेंट देखा है। मैं
- 2:43:44उससे पहले देखता था कि जितने इंडिया में पॉलिटिकल मूवमेंट्स या राइट्स मूवमेंट्स
- 2:43:48मुसलमानों की उससे जितने लीडर्स प्रोडक्ट बने
- 2:43:51जी। सबका ज्यादातर का हाल ये हुआ कि वो उसी
- 2:43:54तरह के जो हेजमेनिक फ्रेमवर्क्स हैं उसमें अपने आप को इनफ्यूज कर दिया। अफसोस की बात
- 2:44:01यह है कि हमारी जनरेशन को भी यही मैंने देखा। या तो लोगों ने छोड़ दिया काम करना
- 2:44:06या फिर उन्होंने वही हथकंडे अपना लिए। मार्केटिंग करनी है। अपने अराउंड चीजें
- 2:44:10करनी है। उसको एक प्रोडक्ट बना के उसमें आपको एक तरीके का एनजीओ मॉडल बना देना।
- 2:44:16हम तो ये चैलेंज तो हमें खुद ही फेस करना
- 2:44:19पड़ेगा। इसके लिए तहरीक भी हमें खुद ही करनी पड़ेगी। उसके लिए आपको एप्लीकेशन ऑफ
- 2:44:25इस्लाम आपकी अपने मुआशरे में अलग लेवल पे जो डिस्कस जो डिस्कशन हुआ हालांकि हम
- 2:44:30अप्लाइड इस्लामिक्स का बहुत ज्यादा जिक्र नहीं कर पाया जो वालिद साहब का फ्रेमवर्क
- 2:44:33लेकिन क्योंकि मैंने अभी उनका पॉडकास्ट किया है वो एनीवेज इंडिपेंडेंटली आ रहा
- 2:44:37है। तो कोशिश ये हमें करनी है कि हम इस तरह की
- 2:44:42कन्वर्सेशंस नहीं इस तरह के सिस्टम्स कि जहां पे हम एक्चुअली अपने राइट्स को गिवन
- 2:44:47द फैक्ट दैट वी हैव प्रिविलेज इन गेटोस। हम
- 2:44:50आपका पिटिकल रिप्रेजेंटेशन यहां से हो पा रहा है। अगर एक बंदा भी आपका यहां पर है
- 2:44:55अगर आप उसको भी ब्रीफ नहीं कर पा रहे हैं कि आपको इशूज़ कैसे रेज करने हैं
- 2:45:00तो ये उसका नहीं आपका फेलियर है। दिल्ली इज अ प्रिविलेज गेट हो।
- 2:45:05हम यहां के हिंदुस्तान के बहुत जहीन लोग रहते
- 2:45:09हैं, प्रोफेशनल्स रहते हैं। एकेडमिक्स रहते हैं, एक्टिविस्ट रहते हैं।
- 2:45:13यहां पे हिंदुस्तान की टॉप मुस्लिम जमातों के दफ्तर हैं।
- 2:45:16जी। मुसलमानों के टॉप एनजीओस के दफ्तर है। हम
- 2:45:20तो यहां से तो आपका एक्सपेक्टेशन रहेगा ना। जी।
- 2:45:23तो इसकी तरफ मेरा इशारा है कि ये ये एक मोरल डिके आप यू आर हैप्पी
- 2:45:30विद मच लेस देन व्हाट द कम्युनिटी डिर्व। बिकॉज़ आपका उसमें चल जा रहा है।
- 2:45:37ये चैलेंज हमें खुद पूरा करना पड़ेगा। दैट इज व्हाट आई बिलीव। और उसके लिए बहुत
- 2:45:41स्ट्रगल है। उसके लिए सबसे पहले थ्योरेटिकल स्ट्रगल है कि आप अपने वजूद को
- 2:45:47अपनी जो कलाम है या जो आपका टेक्स्ट है या उसकी रीजनिंग है उसके थ्रू एक्चुअली आप
- 2:45:54एक्शनेबल बना सकें। हम जी वो जो कॉम्प्लेक्स रियलिटीज़ जिन तरह के
- 2:45:58नेशन स्टेट्स के डिस्कोर्सेज जिस तरह की इकोनॉमिक
- 2:46:02डिसएडवांटेजेस जिस तरह के पॉलिटिकल डिसएडवांटेजेस से आप
- 2:46:06डील कर रहे हैं हिस्ट्री में कभी भी कोई भी कम्युनिटी विदाउट स्ट्रगल ऊपर नहीं
- 2:46:11आइए। जिस ट्रॉमा से हम गुजर रहे हैं उस ट्रॉमा का इलाज यही है कि आप होपलेस ना
- 2:46:16हो। जी
- 2:46:17तब तक आप चेंज नहीं ला सकते। नहीं मेरे ख्याल से काफी लंबी गुफ्तगू की
- 2:46:22हमने। बहुत सारे टॉपिक्स को एड्रेस किया। अली भाई वी वेंट फ्रॉम
- 2:46:28वी स्टार्टेड एक्चुअली वी डिस्कस्ड टू मेजर क्वेश्चंस जो हमने स्टार्टिंग में
- 2:46:34पिक किए थे और उन्हीं दोनों क्वेश्चंस को वी हैव
- 2:46:38ट्राइड टू एक्सपेंड या आप ये कहें कि उनको तोड़ मरोड़ के वी
- 2:46:44डिस्कस्ड इट इन डिफरेंट कॉन्टेक्स्ट। काफी अच्छी कन्वर्सेशन रही।
- 2:46:48अल्हम्दुलिल्लाह वी डिस्कस फिलॉसोफी साइंस वी डिस्कस्ड बिट ऑफ थियोलॉजी इकोनॉमिक्स
- 2:46:57अच्छा है काफी रिच कन्वर्सेशन अल्हम्दुलिल्लाह रही एंड आई थिंक इस तरीके
- 2:47:02की कन्वर्सेशंस जरूरी हैं।
- 2:47:07अ इसलिए भी जरूरी हैं सो दैट
- 2:47:12हमारे कन्वर्सेशंस का स्टैंडर्ड बढ़े। मुस्लिम लीगसी जो है बहुत एक्स्ट्रा
- 2:47:20ऑर्डिनरी है। इमाम शाफई वाज़ मेड वेरी एट अ वेरी यंग एज
- 2:47:26अ मुफ्ती। ही वाज़ नॉट इवन 15 इफ आई एम नॉट रोंग। है ना?
- 2:47:32बाय द टाइम ही वेंट टू इमाम मालिक टू स्टडी। उनकी मां ने जब उनको भेजा था।
- 2:47:41बहुत छोटी उम्र थी। 13 14 साल की उम्र थी। एंड ही हैड ऑलरेडी
- 2:47:46कंप्लीटेड द एंटायर थिंग जो उस वक्त की एकिस्टिंग थी।
- 2:47:52इमाम बुखारी ने जो किताब लिखी जो
- 2:47:57साइंस ऑफ द हदीस नैरेटर्स ही रोट इट एट अ वेरी यंग एज
- 2:48:06और दैट बुक इज स्टिल कंसीडर्ड द बेस्ट बुक ऑन
- 2:48:13दैट हम सब्जेक्ट
- 2:48:16प्रोफेस वसल्लम ने अपने इंतकाल से पहले एक एक्सपडिशन को भेजा था जिसमें जिसका लीडर
- 2:48:24इयर्स के थे जो कमांडर था वो
- 2:48:2617 साल 17 साल के थे
- 2:48:29और प्रॉफिट सल्ल वसल्लम की इंतकाल के बाद लोगों का यह हुआ कि भाई उस एक्सपिडिशन को
- 2:48:37ना भेजा जाए या अगर भेजा जाए तो कमांडर चेंज कर दिया जाए क्योंकि बच्चा है वह
- 2:48:44वो बहुत कम उम्र है। तो उस वक्त हजरत अबू बकर ने यह कहा कि आई कैन नॉट डू दैट।
- 2:48:53व्हाटएवर प्रॉफिट डड आई कैन नॉट अनडू दैट। हजरत उमर नहीं चाहते थे कि वो
- 2:48:58एक्सपेक्टेशन पे क्योंकि उनको लगा कि नौजवान हैं।
- 2:49:01शायद उतने राइज़ नहीं होंगे मिलिट्री स्ट्रेटजी को लेके।
- 2:49:04एक बड़ी इंटरेस्टिंग चीज जो मैंने देखी है। एंड आई थिंक वी कैन प्रोबेबबली एंड ऑन
- 2:49:09दिस। वी कैन हैव अ सेपरेट कन्वर्सेशन ऑन समथिंग एल्स आल्सो
- 2:49:14जो द मोस्ट फेमस बायोग्राफी ऑफ़ द प्रॉफेट
- 2:49:20प्रॉफेट सल्ल वसल्लम एटलीस्ट फ्रॉम द मुस्लिम पर्सपेक्टिव इज़ अल रही मखतूम
- 2:49:30उस बायोग्राफी को अगर आप पढ़ेंगे उसमें बड़ी इंटरेस्टिंग चीज है। अगर आप प्रॉफम की
- 2:49:34एक्सपेडिशन को देखेंगे ना जो
- 2:49:40जैसे आप कहें साहब जंगे बदर है फिर ओहद है खंदक है फिर उसके बाद माइनर
- 2:49:49एक्सपिडिशंस हैं। ठीक है? अगर आप गौर से उनको देखें। सिर्फ दो चीज
- 2:49:55पे आप फोकस करें। एक हु इज लीडिंग दैट एक्सपेडिशन।
- 2:50:03एंड दूसरा हु इज होल्डिंग दी फ्लैग। फ्लैग सबसे इंपॉर्टेंट है। वही सिंबल है।
- 2:50:10फ्लैग नीचे है तो इसका मतलब दी आर्मी इज़ डीमोरलाइज्ड या हार गई। तो दो लोग हैं। एक
- 2:50:15कमांडर है और एक फ्लैग बियरर है। इफ यू लुक एट इट एंड इफ यू फोकस ऑन इट
- 2:50:22यू विल बी सरप्राइज्ड। बिकॉज़
- 2:50:28ही इज़
- 2:50:32सेंडिंग डिफरेंट पीपल ऑलमोस्ट इन ऑलमोस्ट इन एव्री एक्सपेडिशन।
- 2:50:39हम्म देयर इज़ नो सिंगल कमांडर। देयर इज़ नो
- 2:50:44सिंगल पर्सन हु होल्ड्स द फ्लैग। ठीक है? दैट्स वन थिंग।
- 2:50:49बट व्हाट इज फार मोर इंटरेस्टिंग इज द अमाउंट ऑफ
- 2:50:56फेथ एंड ट्रस्ट
- 2:51:00ही हैज़ इन हिज ओन पीपल तुमको कमांडर बना दिया जाओ
- 2:51:07क्या होगा जीतोगे हारोगे अल्लाह के हाथ में है
- 2:51:12बट ही हैस दैट काइंड ऑफ ट्रस्ट कि ही इज नॉट दिस इज अ प्रॉफिटिक ट्रेडिशन
- 2:51:19वेयर ही इज़ नॉट डिस्क्रिमिनेटिंग या डिस्टिंग्विशिंग
- 2:51:23कि यह ज्यादा काबिल आदमी इसको होना चाहिए। यह कम काबिल आदमी इसको होना चाहिए। आप
- 2:51:28अक्रॉस देखेंगे कि मतलब द काइंड ऑफ ट्रेनिंग, द काइंड ऑफ़ एंगेजमेंट ही हैज़
- 2:51:33विद पीपल इज़ ऑफ अ वेरी डवर्स टाइप। यही वजह है कि उनके इंतकाल के बाद ऑलमोस्ट
- 2:51:41एवरीवन बिकम्स अ लीडर। बिकॉज़ ही इज़ नॉट फोकसिंग ऑन वन।
- 2:51:47एंड द काइंड ऑफ ट्रस्ट ही हैज़ ऑन पीपल गिव देम सो मच ऑफ कॉन्फिडेंस
- 2:51:55कि भाई मैं तो जाकर कर सकता हूं। 17 साल का लड़का आप अगर एक्सपेडिशन को अगर भेज रहे
- 2:52:00हैं आप समझ रहे हैं कितना बड़ा यू आर टेकिंग रिस्क
- 2:52:05बाई मेकिंग हिम द कमांडर। 17 साल के लड़के को क्या मालूम।
- 2:52:10बट तो आई थिंक वो जो एक लीगसी है ना वी हैव वी आर लूजिंग दैट लीगसी। हमारे यहां
- 2:52:17जो टॉप में लोग हैं वो वो नेक्स्ट जनरेशन पे ना उनका इतना ध्यान
- 2:52:27है। अनफॉर्चूनेटली वो स्पेस भी नहीं है।
- 2:52:31वो नर्चरिंग भी नहीं है। वही 5 7 10 लोग हैं।
- 2:52:37बड़ी कॉरपोरेशंस, बड़ी ऑर्गेनाइजेशंस जो हैं वो हमेशा अपने सक्सेसर को ग्रूम करती
- 2:52:44हैं। मुझे याद है कोई हार्व यूनिवर्सिटी का कोई
- 2:52:48कमेंसमेंट देख रहा था मैं तो उसमें जो
- 2:52:54स्टार्ट कर रहा था कम लेडी थी बहुत जबरदस्त बात बोली उसने कहा कि यू नो
- 2:53:02वी आर हावर्ड वी आर नोन टू प्रोड्यूस
- 2:53:07लीडर्स वी आर नोन टू प्रोड्यूस बिग पीपल वी हैव प्रोड्यूस बिग पीपल इन द पास्ट बट
- 2:53:15वी आर हार्व। वी लुक एट द फ्यूचर। वी डोंट लुक एट द पास्ट। तो जो आपने बात
- 2:53:23कही वो एक्चुअली बहुत इंपॉर्टेंट बात है कि अल्लाह के रसूल वसल्लम की जिंदगी में
- 2:53:28ही उन्होंने वो रिस्क और वो ट्रस्ट शो करा और उन्हें
- 2:53:35पता था कि आप नर्चर और कल्टीवेट जब करते हैं फ्यूचर जनरेशंस को जब उनको मौका मिले।
- 2:53:41जी एक्ट करने का, रिएक्ट करने का, कुछ चीजें
- 2:53:44एक्सपेरिमेंट करने का। अनफॉर्चूनेटली हमारे यहां अक्रॉस द बोर्ड
- 2:53:50लीडरशिप ट्रांसफर का कोई प्रोग्राम ही नहीं है।
- 2:53:54कोई नर्चरिंग ही नहीं है। कोई सेकंड जनरेशन लीडरशिप नहीं है। आप कहीं पे भी
- 2:53:58चले जाइए। आपको यह दिखेगा कि जो बड़े पोजीशंस पर लीडर्स हैं, बड़ी-बड़ी मिली
- 2:54:06तंजीमों में उनके साथ कोई भी नौजवान आपको बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट पोजीशन में
- 2:54:13हां, सेक्रेटरी की तरह आप उनको ले जाएंगे। किसी एक उस तरह ले जाएंगे। बट एज कि भ
- 2:54:18नहीं यू आर हियर टू लीड। जी।
- 2:54:21यू आर हियर टू सी फ्रॉम ए वेरी डिसाइसिव पर्सेक्टिव। व्हाट नीड्स टू बी डन और यू
- 2:54:25कंट्रीब्यूट। आपका डिसीजन हो सकता है। इट इज नॉट हैपनिंग। किसी भी इदारे में यह
- 2:54:33नहीं पता कि कल को कोई उनका लीडर चला जाए तो क्या होगा उस इदारे का?
- 2:54:39और जो आपने एग्जांपल दिया ना कि प्रॉफेट सल्ल वसल्लम के वफात के बाद
- 2:54:43देयर वर 100्स ऑफ लीडर्स जो डोमेन में भी लीड कर
- 2:54:48रहे थे। उनके जनरल कैपेसिटी भी थी। लेकिन उनके बीच में इतना कंसेंस और
- 2:54:53अंडरस्टैंडिंग भी था कि आपको किस तरह से कम्युनिटी को शेप करना है।
- 2:54:58वो ट्रस्ट वो न्चरिंग वो विज़ वो कंप्लीटली ऑफ कोर्स ही इज़ अ परफेक्ट
- 2:55:04मैन। जिस तरह से उनको अल्लाह ने नवाजा है उस काबिलियत से उस तरह से हमारे यहां नहीं
- 2:55:10होगा लोग। लेकिन वो छोटी सी भी कैपेसिटी में अगर हम नर्चर कर पाते तो शायद डिफरेंस
- 2:55:15होता। तो खैर मुझे लगता है क्योंकि कन्वर्सेशन बहुत लंबी हो गई है।
- 2:55:19नहीं बहुत अच्छा लगा अली भाई और इंशाल्लाह वी विल कंटिन्यू दिस कन्वर्सेशन और आई
- 2:55:23थिंक दिस इज़ देयर इज अ नीड टू टू डू दिस काइंड ऑफ जिसको कहते हैं ना
- 2:55:27सीरियस डिस्कशन। तो बस मैं भी इस पे एंड करना चाहूंगा
- 2:55:30क्योंकि फॉर मी इट वाज़ अ फर्स्ट ऑफ अ काइंड ओपोरर्चुनिटी।
- 2:55:35तो आपसे बात हुई तो आपने बोला इस तरह का होना चाहिए कन्वर्सेशंस हम सबके बीच में
- 2:55:39भी वेयर आई कुड आल्सो एक्सप्रेस जो मेरे दिमाग में मेरे ज़हन में है। मैं
- 2:55:43यूजुअली इस तरफ से सवाल पूछ रहा होता हूं। आज मुझे
- 2:55:47जवाब देने का मौका मिला और मैं अपने हमारे व्यूअर्स को ये बताना
- 2:55:51चाहूंगा कि ये हमारी एक अब एक स्ट्रेटजी का हिस्सा है कि किस तरह से हम
- 2:55:56सब मिलके कुछ कन्वर्सेशंस हम वो तो है ही कि हम लोग बाहर लोगों से इंगेज करेंगे। जी
- 2:56:02लेकिन बहुत सारे चैलेंजेस यह जनरेशन खुद फेस कर रही है। तो हम कोशिश करेंगे कि यंग
- 2:56:08लोगों को या हम आपस में कई बार डिस्कस कर रहे हैं या फिर और लोग हैं जिनसे हम
- 2:56:13डिस्कस कर रहे हैं। नाउ में भी और सीनियर लोग हैं जावेद जमील साहब हैं। बसरा खानम
- 2:56:18मोस्ट प्रोबब्ली विल जॉइन। तो ये हम सिलसिला शुरू करें के डीप कॉन्वर्सेशंस हम
- 2:56:23पैरेलली करें। जी ताकि जो लोग इंटरेस्टेड हैं इस तरह की
- 2:56:28कॉन्वर्सेशंस में उनको एक विंडो मिले कंज्यूम करने का इंटरेक्ट करने का और
- 2:56:35इंडियन कॉन्टेक्स्ट में जो दुनिया में मुस्लिम डिबेट्स हो रही हैं वो उस डेप्थ
- 2:56:39के साथ नहीं हो रही हैं। हो सकता है कि इस तरह की कन्वर्सेशन हो तो और भी लोग इसको
- 2:56:45आगे बढ़ाएं और लोग कर भी रहे होंगे। हम लोग के नजर से सब कुछ नहीं गुजरता है। जिस
- 2:56:51तरह हमें सब नहीं देख रहे हैं। हम भी सब कुछ नहीं देख पा रहे हैं। बट ये एक हमारा
- 2:56:55एक पर्पस है इस कन्वर्सेशन को करने का। बहुत शुक्रिया। बहुत शुक्रिया।
- 2:57:00वालेकुम। अस्सलाम वालेकुम।
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