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Musalmanau ke Masail Ka wahid hal | Moulana Abdul subhan Nadwi — Transcript

by FikrokhabarTV · 5,996 words · 771 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:02अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल
  2. 0:05आलमीन अ सलात वस्सलाम आला सदल मुरसलीन
  3. 0:11सदल अवलीन वल
  4. 0:15आरीन सैयदना व
  5. 0:18नबीना हबी बना व इ मामना
  6. 0:23वदनांग दि वाला
  7. 0:26आलीही ही अजमान
  8. 0:30वन तबिया ब
  9. 0:33सानि वदा ब
  10. 0:35दावती इला यदन अमा
  11. 0:40बाद बिल्ला मिन शैतान
  12. 0:43रजी बिस्मिल्लाह रहमान
  13. 0:47रहीम इनल्लाह यदा फलना
  14. 0:52आमन इनल्लाह लाय कुला वानि
  15. 0:56कफूर ल ताला
  16. 1:00याय ह लजीना
  17. 1:02आमन इंतन सुरला यन सर कुम वय सत अदा म कुम
  18. 1:09ला अ
  19. 1:11वजल इना लन सुर रु सुलना लजीना आमन फिल
  20. 1:17हयाती दुनिया यय कोमल
  21. 1:20अशद सद
  22. 1:23कलाम मोहतरम मज
  23. 1:28सामन
  24. 1:31खुसूस भटकल मुस्लिम यूथ फेडरेशन के
  25. 1:35जिम्मेदाराना और कार
  26. 1:41कुनानन वाले काजी
  27. 1:45साहबान हमारे
  28. 1:47सामने तशरीफ रखने वाले महतम में
  29. 1:51जामिया जनाब मकबूल साहब और तमाम मजस
  30. 1:58सामन अभी आप हजरात
  31. 2:01ने
  32. 2:03नातिया मुसाबका सुना और उससे पहले नात के
  33. 2:09ताल्लुक से कुछ रोशनी डाली गई
  34. 2:13थी जो भी नातें पेश की जाती
  35. 2:19हैं उनकी असल
  36. 2:22बुनियाद खबे रसूल है अकीदत रसूल है अजमत
  37. 2:29रसूल है
  38. 2:32और उसी
  39. 2:33अजमत उसी अकीदत और उसी मोहब्बत से जो फूल
  40. 2:39खिलते हैं उसमें एक अजीम तरीन फूल इतबा
  41. 2:45रसूल है सवात अलाही व सलाम
  42. 2:49अल मोहब्बत की कोई इंतिहा नहीं होती अगर
  43. 2:55मोहब्बत की कोई इंतिहा मानी जाए वह इंतिहा
  44. 2:59फना इयत है आदमी अपने आप को महबूब की राह
  45. 3:05में फना कर दे गोया उसने मोहब्बत की एक
  46. 3:10मेराज को छू लिया और मोहब्बत की एक इंतिहा
  47. 3:14को उसने पा लिया और हकीकत में हमारे तमाम
  48. 3:19गमों का हल और हमारी तमाम परेशानियों का
  49. 3:23हल अल्लाह रब्बुल इज्जत की मोहब्बत और
  50. 3:27अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अल वसल से
  51. 3:30सच्ची मोहब्बत है यह मोहब्बत अगर पैदा हो
  52. 3:34गई और यह मोहब्बत अगर दिल के निहा खानों
  53. 3:39में रच बस गई और जिस्म में खून बनकर
  54. 3:43गर्दिश करने लग गई तो फिर हमारा हर हर
  55. 3:47मसला हल है चाहे वक्ती मसला हो चाहे आरजी
  56. 3:51मसला हो चाहे दामी मसला हो तमाम मसाइल का
  57. 3:56हल यही है और यहां की जमीन में हमारे लिए
  58. 4:00जो आखिरी हिसार है हमारे लिए जो आखिरी
  59. 4:04पनाहगाह है व अल्लाह की मोहब्बत और अल्लाह
  60. 4:08के रसूल सल्लल्लाहु अल वसल्लम की मोहब्बत
  61. 4:10है इसे अच्छी तरह से जान ले कि यह हिसार
  62. 4:14अगर टूट गया तो फिर हमारी हैसियत कूड़े
  63. 4:19कचरे के ढेर से भी बढ़कर नहीं है बल्कि
  64. 4:23उससे भी गई गुजरी होगी इस कीमती मता को
  65. 4:27दिलो जान में इस कीमती मता को अपनी जान से
  66. 4:32बढ़कर अजीज रखिए और इसके लिए जो कुर्बानी
  67. 4:36दे सकते हो उस कुर्बानी के लिए सब के सब
  68. 4:40तैयार र मोहब्बत चाहती है फनात को मोहब्बत
  69. 4:46चाहती है
  70. 4:52[संगीत]
  71. 4:55इस्तकाम्या पर यह सारा दीन हम तक पहुंचा
  72. 4:59है बद्र अहद के व मारके ना होते वह हिजरत
  73. 5:03मुबारका ना होती वह अव्वन सदा ना होती या
  74. 5:08अनास कुल ला इलाहा इल्लल्लाह तुली व हजरत
  75. 5:12बिलाल रज अल्लाह ताला अन को उस सख्त तरीन
  76. 5:16और तपती हुई चट्टानों पर अगर घसीटा ना
  77. 5:19जाता वह अहद अहद की सदाएं ना होती तो आज
  78. 5:23हम यहां हुब्ब रसूल के तराने गा नहीं रहे
  79. 5:26होते कोई किसी मंदिर की घंटी बजा रहा होता
  80. 5:30और पता नहीं कोई किस गजा गिरजा घर में
  81. 5:33जाकर अल्लाह के साथ शिर्क जैसी मलून और
  82. 5:37मनहूस चीज के साथ
  83. 5:40[संगीत]
  84. 5:47मुलव्याध जज्बात हैं जिनके नतीजे में हमें
  85. 5:51दीन नसीब हुआ ईमान नसीब हुआ अखलाक नसीब
  86. 5:55हुए हमें कुरान मिला सबसे बढ़कर हमें
  87. 5:58अल्लाह र ल इज्जत की जात मिली अल्लाह की
  88. 6:01जन्नत के रास्ते मिले जहन्नम से बचने के
  89. 6:04तरीके मिले एक दीनी गैरत मिली दीनी
  90. 6:08मोहब्बत मिली ये जो सौगात हमें मिली है
  91. 6:11जान से बढ़कर उसकी हिफाजत कीजिए और उसके
  92. 6:14लिए अगर जान की बाजी भी हार नहीं पड़ जाए
  93. 6:18तो उसे अपने लिए सबसे बड़ी जीत और अपने
  94. 6:21लिए सबसे नुमाया तमग इमतियाज
  95. 6:24समझे जो भी अच्छी आवाज कितनी प्यारी आवाज
  96. 6:29और अच्छी आवाज से जो नातें पेश की गई हर
  97. 6:32इंसान यह तय कर ले यह नातें ये अच्छी
  98. 6:36आवाजें हमें इस बात पर भी आमादा करती हैं
  99. 6:40कि हर अच्छी आवाज पर सबसे पहला हक अल्लाह
  100. 6:44रब्बुल इज्जत का है अल्लाह के कलाम का है
  101. 6:47फिर उस पर सबसे दूसरा जो हक है वह अल्लाह
  102. 6:51के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का है
  103. 6:53इसी पर कयास करें जो भी सलाहियत हमें मिली
  104. 6:57है अल्लाह की तरफ से किसी को जिनत की
  105. 7:00सलाहियत किसी को खिताबत की सलाहियत किसी
  106. 7:03को शेर शायरी की सलाहियत किसी को फिक
  107. 7:06सलाहियत किसी को जो भी सलाहियत िक ममन मन
  108. 7:11अल्ला तुम्हें जो भी नेमत मुसर है व तनहा
  109. 7:14अल्लाह रबल इजत की तरफ से मुय सर है हुजूर
  110. 7:17अकरम सल्लल्लाहु अल वसल्लम गोया हर सुबह
  111. 7:21यह दुआ फरमाया करते थे अल्लाहु मा
  112. 7:26मनक ला शरील लक का शुक्र परवरदिगार मुझे
  113. 7:32जो भी निमत मयस्सर है व अल्लाह तन्हा तेरी
  114. 7:35तरफ से मयस्सर है तारीफ तेरी है शुक्र
  115. 7:39तेरा है सब कुछ तेरी तरफ से मिला है जो
  116. 7:42[संगीत]
  117. 7:45नमतरा की दी हुई इस सलाहियत को अल्लाह की
  118. 7:49दी हुई इस नेमत को वो अल्लाह के लिए
  119. 7:51कुर्बान करेगा रसूल अल्लाह के लिए कुर्बान
  120. 7:54करेगा अल्लाह के दीन के लिए कुर्बान करेगा
  121. 7:57हमारे ख्याल में वो श इंतिहा नाशक है जिसे
  122. 8:01अच्छी आवाज मिली हो और वह उससे अल्लाह के
  123. 8:04कलाम को अच्छे अंदाज से ना पढ़े वह अल्लाह
  124. 8:06के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नातों
  125. 8:08को ना गुनगुनाए वो गजलों में पड़ पढ जाए
  126. 8:12या खुदा नखता व गानों में पड़ जाए अच्छी
  127. 8:14आवाज पर पहला हक अच्छी आवाज पर अबदीमंडी
  128. 8:29और अल्लाह के दीन के हैं हम ये तय कर लें
  129. 8:34हमें अपने दीन के लिए कुर्बानी देनी है जो
  130. 8:37अल्लाह के लिए कुर्बानी देता है वो कुछ
  131. 8:40खोता नहीं है हमें मिजाजे हिजरत भी पैदा
  132. 8:43करना है और मिजाजे जिहाद भी पैदा करना है
  133. 8:47मिजाजे जिहाद ये है हर काम अल्लाह रब्बुल
  134. 8:50इज्जत के लिए वक्फ कर दिया जाए जो भी काम
  135. 8:53करें इंसान वो अल्लाह के लिए करें अल्लाह
  136. 8:56के लिए काम करने का सलीका पैदा किया जाए
  137. 8:59कुराने करीम जिसकी तालीम देते हुए कहता है
  138. 9:02कुल इना सलाती नुस की व मयाय व म माती
  139. 9:07लिल्ला रब्बिल आलमीन कहिए ऐ मोहम्मद
  140. 9:10सल्लल्लाहु अल वसल्लम बेशक मेरी नमाज मेरी
  141. 9:13कुर्बानी मेरा जीना मेरा मरना सब अल्लाह
  142. 9:16के लिए है हम अपने लिए पैदा ही नहीं किए
  143. 9:19गए हैं हकीकत में हम पैदा किए गए हैं
  144. 9:22अल्लाह रब्बुल इज्जत के लिए और जाहिरी तौर
  145. 9:25पर हमारा हर काम होना चाहिए इंसानियत के
  146. 9:28लिए इंसानों के लिए हुजूर अकरम सल्लल्लाहु
  147. 9:31अलैहि वसल्लम की मुबारक जिंदगी का अगर दो
  148. 9:34जुमलो में खुलासा बयान किया जाए जो हमने
  149. 9:37मुता जगहों पर बताया है और बयान किया है
  150. 9:40वो यह कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की
  151. 9:42हकीकी जिंदगी अल्लाह रब्बुल इज्जत के लिए
  152. 9:45बसर हो रही थी एक सेकंड एक मिनट और एक
  153. 9:48लम्हे के वक्फ के बगैर और आप सल्लल्लाहु
  154. 9:51अलैहि वसल्लम की जाहिरी जो जिंदगी बसर हो
  155. 9:54रही थी वह तमाम इंसानों के लिए बसर हो रही
  156. 9:57थी इंसानों को फायदा पहुंचाना इंसानों को
  157. 10:00रास्ता दिखाना इंसानों के लिए कुर्बानियां
  158. 10:03देना बंदगा ने खुदा को सही रास्ते पर लाना
  159. 10:06उनको गोया कमर पकड़ पकड़ कर जहन्नम से अलग
  160. 10:09करना मिसाल भी हुजूर अकरम सल्लल्लाहु
  161. 10:12वसल्लम ने पेश फरमाई कि मेरी और तुम्हारी
  162. 10:14मिसाल उस शख्स कीसी जिसने आग का अलाव
  163. 10:17जलाया हो परवाने और पतंगे उस पर आ आकर गिर
  164. 10:21रहे हो और वह उसे निकाल निकाल कर अलग कर
  165. 10:24रहा हूं यही मेरी मिसाल है कि मैं तुम्हें
  166. 10:26कमर पकड़ पकड़ कर जहन्नम से दूर कर रहा
  167. 10:29हूं और तुम हो कि उसमें गिरे जा रहे हो यह
  168. 10:33मोहब्बत हो यह मव दत हो यह तड़प हो यह कसक
  169. 10:37हो ये एहसास हो अपनी उम्मत के ताल्लुक से
  170. 10:40भी उम्मते मोहम्मदिया के ताल्लुक से भी जो
  171. 10:43आखीर में जो अशर पढ़े गए हैं उसके अंदर उस
  172. 10:46दर्द का इजहार है और तमाम कौम के ताल्लुक
  173. 10:49से तमाम उम्म तों के ताल्लुक से इस पर
  174. 10:52बहुत ज्यादा गौर ना किया जाए कि हम पर
  175. 10:55इल्जा मात लग रहे हैं हमें मरीद इल्जाम
  176. 10:58ठहराया जा रहा है इन तमाम इल्जा मात की
  177. 11:00कोई हैसियत नहीं इल्जा मात लगते रहेंगे और
  178. 11:03वह खत्म भी होते रहेंगे हमें अपने मिशन को
  179. 11:06याद रखना है हमें अपने मकसद को याद रखना
  180. 11:09है हम आए ही इसलिए हैं कि तमाम इंसानों का
  181. 11:12हम भला करें कुतु
  182. 11:16नास र बिल मारूफ त मुनकर न बिल्ला तुम
  183. 11:22सबसे बेहतरीन उम्मत हो जिस उम्मत को तमाम
  184. 11:25इंसानों के लिए बरपा किया गया तुम्हारा
  185. 11:28काम यह है कि तुम हर हर भलाई का हुक्म
  186. 11:30दोगे तुम हर बुराई से रोकोगे और तुम
  187. 11:33अल्लाह रब्बुल इज्जत पर पूरा ईमान रखोगे
  188. 11:36कहां है वह अमर बिल मारूफ कहां है वह नही
  189. 11:39अनिल मुनकर कहां है वो ईमान की दिलनवाज
  190. 11:42कैफियात जिस ईमान की कैफियात अगर वो इंसान
  191. 11:45के कुलूब में दाखिल हो जाएं इंसान के लिए
  192. 11:48दुनिया जन्नत बन जाए और इंसान दुनिया के
  193. 11:51अंदर ही जन्नत के मजे हासिल करना शुरू कर
  194. 11:54दे उस तरह का ईमान पैदा करने के लिए यह ना
  195. 11:58शरीफ की मजलिस मुना मुकद की गई यह दीनी
  196. 12:00जलसे मुनाद किए जाते हैं यह मालूमात में
  197. 12:03इजाफे के लिए या किसी का खिताब सुनने के
  198. 12:06लिए किसी की तकरीर सुनने के लिए किसी की
  199. 12:09बातें सुनने के लिए नहीं यह हकीकत में
  200. 12:11अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि
  201. 12:13वसल्लम पर कुर्बान होने के लिए और आप
  202. 12:15सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की लाई हुई शरीयत
  203. 12:18पर पूरे एतमाद के साथ पूरी मोहब्बत के साथ
  204. 12:21पूरी ताकत के साथ पूरी कुवत के साथ अमल
  205. 12:25करने के लिए और उसको अपने लिए निशान मंजिल
  206. 12:28बनाने के लिए बल्कि उसे अपने लिए मंजिल
  207. 12:30मकसूद बनाने के लिए ये जलसे मुनक किए जाते
  208. 12:33हैं इस्लाम पर हमले हो रहे हैं हम जानते
  209. 12:36हैं यहां तक के रिसालत मा आप सल्लल्लाहु
  210. 12:39अलैहि वसल्लम की जात अकदर पर भी हमले किए
  211. 12:42जा रहे हैं लेकिन मामला हमारा अपना है
  212. 12:44हमारी अपनी मोहब्बत को क्या हो गया हमारी
  213. 12:47अपनी गैरत को क्या हो गया हम अपने दीन के
  214. 12:50ताल्लुक से कितने संजीदा हैं अल्लाह ताला
  215. 12:53ने जहां अपनी इता और अपने रसूल सल्लल्लाहु
  216. 12:55अलैहि वसल्लम की इता का हुक्म दिया वहां
  217. 12:57इसका भी हुक्म दिया कि आदमी बहुत होशियार
  218. 13:00रहे ती अल्लाह ती रसूल वहर अल्लाह की तात
  219. 13:05करो और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अल
  220. 13:07वसल्लम की तात करो देखो होशियार रहो
  221. 13:10होशियार रहने का मतलब क्या है जो दौलत
  222. 13:12तुम्हारे पास मौजूद है कहीं वो दौलत लुट
  223. 13:15तो नहीं रही है कहीं वो दौलत मिट तो नहीं
  224. 13:18रही है कहीं उस दौलत पर डाके तो नहीं डाले
  225. 13:20जा रहे हैं कहीं हम गफलत की नींद सो तो
  226. 13:23नहीं रहे हर इंसान हस्सा रहे हर इंसान
  227. 13:26बेदार रहे हर मामले के उसके पास भरपूर
  228. 13:30तैयारी हो जहनी तैयारी हो कल्बी तैयारी हो
  229. 13:34इल्मी तैयारी हो अमली तैयारी हो जिक्र
  230. 13:37इलाही के लिहाज से तैयारी हो
  231. 13:40तात हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अ वसल्लम के
  232. 13:43बारे में आता है हर चीज के लिए आप
  233. 13:45सल्लल्लाहु अल वसल्लम के पास भरपूर तैयारी
  234. 13:48रहती थी हम उस तरह तैयार रहे हम इबादत के
  235. 13:52लिहाज से तैयार रहे हम अखलाक के लिहाज से
  236. 13:54तैयार रहे हम सच्चे मामलात के लिहाज से
  237. 13:57तैयार रहे हम दियानत दार बने
  238. 14:01अमानतदीने
  239. 14:03जाय हो रही हैं और अमानतोंबझने
  240. 14:27[संगीत]
  241. 14:29ईमान मला अमानत वला दन मलाला बहुत कम ऐसा
  242. 14:34हुआ है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ
  243. 14:36वसल्लम ने कोई खिताब फरमाया हो कोई खुतबा
  244. 14:39इरशाद फरमाया हो और उसमें यह बात इरशाद ना
  245. 14:42फरमाई हो जिसमें अमानतदीने उसमें कोई ईमान
  246. 14:46नहीं जिसमें अहद की पाबंदी नहीं उसका कोई
  247. 14:49दीन नहीं ये हम लोगों के लिए तमाम अहा दीस
  248. 14:53गौर और फिक्र की दावत देती हैं हम सच्ची
  249. 14:56जिंदगी बसर करेंगे हमारे अंदर अमानत दार
  250. 14:59होगी हमारे अंदर शुक्र गुजारी होगी हमारे
  251. 15:02अंदर अल्लाह के दीन की कदर कीमत होगी और
  252. 15:05अल्लाह के दीन की कदर कीमत का मतलब ही यही
  253. 15:07है उसके लिए हम जान की बाजी हारने के लिए
  254. 15:10तैयार हो जाएं उसके लिए हम अपनी दौलत
  255. 15:12कुर्बान करने के लिए तैयार हो जाएं उसके
  256. 15:15लिए अपना सब कुछ निछावर करने के लिए तैयार
  257. 15:17हो जाएं दीन की कद्र कीमत रहेगी शुक्र
  258. 15:21गुजारी का जज्बा रहेगा अल्लाह का वादा यह
  259. 15:24है कि वो खुद हिमायत करेगा व खुद तरफदारी
  260. 15:27करेगा वो खुद मुहा बनेगा वह खुद हमारी तरफ
  261. 15:31से अल्लाह रब्बुल इजत की तरफ से हमारी
  262. 15:33हिमायत
  263. 15:35होगी इल्ला
  264. 15:38यमन
  265. 15:41इला आमन बेशक अल्लाह ताला ईमान वालों की
  266. 15:45तरफ से खुद मुदा फात करेगा खुद
  267. 15:49दिफाई करेगा खुद उनकी हिमायत करेगा खुद
  268. 15:52उनकी तरफ से गोया लड़ेगा लेकिन कब
  269. 15:57इलाह कफ अल्लाह ताला को नफरत है अल्लाह
  270. 16:01ताला को सख्त नापसंद है वह तमाम लोग जिनके
  271. 16:04अंदर दगाबाजी पाई जाती है जिनके अंदर
  272. 16:07खयानत पाई जाती है जिनमें नाशक पाई जाती
  273. 16:10है हम अपने दीन के ताल्लुक से गौर करें हर
  274. 16:13इंसान गौर करें दूसरों में गौर करने से
  275. 16:16पहले वो अपनी जात के ताल्लुक से गौर करें
  276. 16:19दीन की कितनी गैरत बाकी है दीन की कितनी
  277. 16:21मोहब्बत बाकी है दीन के ताल्लुक से कितनी
  278. 16:24अमानतदीने
  279. 16:29बहुत ही मुबारक हो लेकिन उसी सूरत में जबक
  280. 16:31उनके पुष्ट पर हकीकत हो सच्ची हकीक तों का
  281. 16:34मुजहरा अगर किया जाए वह इंतिहा मुबारक
  282. 16:37तरीन मुजहरा है लेकिन अगर मुजहरा रह गए और
  283. 16:41हकीक तों के लिए वह मुजहरा एक आड़ बनते
  284. 16:44चले गए तो फिर वो मुजहरा भी अल्लाह रब्बुल
  285. 16:46इज्जत के दरबार में कबूल नहीं होंगे वह
  286. 16:49सच्ची हकीकत हमें अल्लाह के रसूल
  287. 16:51सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने याद दिलाई थी
  288. 16:53और उन्हीं हकीक तों को आम करने के लिए
  289. 16:56उन्हीं हकीक तों को कल्बो जिगर में बसा ने
  290. 16:59के लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु वसल्लम
  291. 17:01तशरीफ लाए थे हम वो अमानतदीने बसर करेंगे
  292. 17:05हम वो दियानत दारी की जिंदगी बसर करेंगे
  293. 17:07हम शुक्र इलाही की जिंदगी बसर करेंगे
  294. 17:10अल्लाह का वादा यह है कि जो सब्र
  295. 17:19इस्तकाम्या है वही इस्तकामेश्वरी
  296. 17:29दिल से कायम रहेंगे जो हमारी जुबान कह रही
  297. 17:32हो वह हमारा दिल भी कह रहा हो बल्कि हमारा
  298. 17:35दिल रो रहा हो हमारी जुबान रो रही हो
  299. 17:38हमारा दिल तड़प रहा हो हमारे अंदर वो
  300. 17:40कैफियत पाई जाए और भरपूर तरीके से पाई जाए
  301. 17:44अल्लाह रब्बुल इज्जत की तरफ से वादा है जो
  302. 17:46अल्लाह के लिए खोता है वो अल्लाह के लिए
  303. 17:49अल्लाह रब्बुल इज्जत की तरफ से वो पाता है
  304. 17:51हजरत इब्राहिम अल सलातो सलाम अपने एक बेटे
  305. 17:54को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए थे
  306. 17:57अल्लाह रब्बुल इज्जत की तरफ से फैसला हुआ
  307. 18:00कि वह बेटा भी जिंदा सही सलामत रहा और
  308. 18:02अल्लाह की तरफ से एक और बेटे की बशारत
  309. 18:04सुनाई गई वरना भीक नबी
  310. 18:09मकना वाला इक हमने इस्माइल अल सलाम को
  311. 18:12कुर्बान करने के नतीजे में उस जज्बे के
  312. 18:15नतीजे में हमने इब्राहिम को बशारत दी कि
  313. 18:18इसहाक की बशारत दी इसकी बशारत दी कि
  314. 18:21अल्लाह के बजदा बंदे होंगे इसकी बशारत दी
  315. 18:24कि व अल्लाह के नबी होंगे और हमने इस्माइल
  316. 18:26पर भी बरकत उतारी और इस पर भी हमने बरकत
  317. 18:30उतारी हजरत अयूब अल सलाम ने सब्र किया
  318. 18:33इस्तकाम्या अल्लाह के लिए वो डटे रहे
  319. 18:36अल्लाह के लिए जमे रहे जब मामला हद से आगे
  320. 18:39बढ़ा तो उन्होंने अल्लाह ही के हुजूर दुआ
  321. 18:42की
  322. 18:44यूनानी म
  323. 18:46रान हमारे बंदे अयूब को याद करो जब वो
  324. 18:50अपने रब के सामने उसने हाथ उठाकर दुआए की
  325. 18:53अपने रब को उसने पुकारा कि परवरदिगार बारे
  326. 18:56इलाहा मैं बहुत तकलीफ में मुतला किया गया
  327. 18:59हूं तकलीफ ने मुझे घेर लिया है
  328. 19:03रान और तू सबसे बढ़कर रहम फरमाने वाला
  329. 19:07हैना हमने उनकी दुआ कबूल की ना म जो तकलीफ
  330. 19:12उनको ला ई व तकलीफ हमने दूर की
  331. 19:19ना और उनके घर वाले जो उनसे छुड़ा दिए गए
  332. 19:23थे जो उनसे गोया उनसे अलग कर दिए गए थे वह
  333. 19:26घरवाले भी हमने उनको दिए उतने ही और दिए
  334. 19:30मुरीन ने लिखा और बिल्कुल सही लिखा है जो
  335. 19:33उनके जानवर थे दुगने जानवर मिले जो उनके
  336. 19:36मवेशी थे दुगनी मवेशी उनको मिले जो उनके
  337. 19:39घर वाले थे उनकी तादाद भी दुगनी कर दी गई
  338. 19:42हर चीज दुगनी कर दी गई और अल्लाह ताला ने
  339. 19:44बात इरशाद फरमाई
  340. 19:49केय म
  341. 19:57[संगीत]
  342. 20:01रबन अपनी तरफ से बतौर रहमत के और इबादत
  343. 20:05गुजार के लिए याद दिहानी के तौर पर जो
  344. 20:07अल्लाह की इबादत करता है जो अल्लाह के लिए
  345. 20:10मर मिटता है जो अल्लाह के दीन के लिए अपने
  346. 20:12आप को फना करता है जो अल्लाह के रसूल
  347. 20:15सल्लल्लाहु अ वसल्लम की मोहब्बत में अपने
  348. 20:17आप को कुर्बान करता है अल्लाह रब्बुल
  349. 20:20इज्जत ने ऐसे इबादत गुजारो की याद दिहानी
  350. 20:23के लिए यह मिसाले पेश की और आ हजरत
  351. 20:26सल्लल्लाहु अल वसल्लम का मामला तो ऐसा
  352. 20:28गरीब कि मदीने की जमीन कदमों के नीचे से
  353. 20:32खिसक रही थी मालूम यह हो रहा था कि अब गई
  354. 20:35तब गई अल्लाह का फैसला तो यही था कि दन
  355. 20:38चमकेगा यह दिन हमेशा हमेश चमकता रहेगा यह
  356. 20:42निहार पर पहुंचकर हमेशा के लिए रुक जाएगा
  357. 20:45इसके लिए कोई जवाल नहीं लेकिन जाहिरी तौर
  358. 20:48पर कैफियत ऐसी थी कुरान शरीफ ने पूरी मंजर
  359. 20:51कशी की हैन
  360. 21:01व तुम्हारे ऊपर से आए तुम्हारे नीचे से आए
  361. 21:04और कलेजे मुंह को आने लग गए निगाह फटी की
  362. 21:07फटी रह गई और तुम तरह तरह के गुमान करने
  363. 21:10लग गए
  364. 21:11ना वहां अहले ईमान को झोड़ा गया उनको
  365. 21:16आजमाया गया
  366. 21:18लल पूरी तरह उनको हिला कर रख दिया गया और
  367. 21:22उस वक्त अहले ईमान ने जब उन लश्कर को देखा
  368. 21:25तो उन्होंने कहा ल
  369. 21:30माला रसू लश्कर पर लश्कर उमड़ हुए आ रहे
  370. 21:33थे बनू असद भी आ रहे हैं बनू अफान भी आ
  371. 21:36रहे हैं मुशरिकीन मक्का भी आ रहे हैं कुल
  372. 21:39तादाद 10000 की बताई जा रही है यहां
  373. 21:42मुसलमानों की मदीने की आबादी हो सकता है
  374. 21:44कि 10000 के आसपास हो हर तरफ से लश्कर आ आ
  375. 21:48रहे हैं और उनका इरादा यह था कि मदीने
  376. 21:51मुनव्वरा को तहस नहज कर दिया जाए अल्लाह
  377. 21:53ताला उस जमीन को हमेशा आबाद रखे और वो
  378. 21:56आबाद रहेगी इंशा अल्लाह ताक में कयामत
  379. 21:59लेकिन उनका इरादा वो था मोमिनीन ने जब वो
  380. 22:02लश्कर देखा क्या उनके अजाइम थे क्या उनकी
  381. 22:05हिम्मतें थी क्या उनके हौसले थे उन्होंने
  382. 22:08कहा हा मावाद अल्ला रसू ये तो वही लश्कर
  383. 22:12है जिसका वादा हमसे अल्लाह ने किया और
  384. 22:14जिसका वादा हमसे अल्लाह के रसूल
  385. 22:16सल्लल्लाहु सलम ने किया लश्कर का आना
  386. 22:18ताज्जुब की बात नहीं लश्कर ना आते तो हमें
  387. 22:21ताज्जुब होता व सल्ला रसूल अल्लाह का
  388. 22:25फरमाया हुआ बरहक अल्लाह के रसूल
  389. 22:27सल्लल्लाहु अ वसल्लम का कहा हुआ सच
  390. 22:30ला मान लीमा और लश्कर ने लश्कर के देखने
  391. 22:35ने लश्कर के इस तरह सामना करने ने उनके
  392. 22:38ईमान में इजाफा किया उनकी सुपुर्दगी में
  393. 22:41इजाफा किया अल्लाह रब्बुल इजत की तरफ से
  394. 22:43फैसला यह हुआ कि अल्लाह ताला ने जंग करने
  395. 22:47की भी
  396. 22:49कुलफी
  397. 22:51लाता
  398. 22:53ला अल्लाह ताला ने मुशरिकीन को ग गजब सम
  399. 22:57दांत पीसते हुए कुड़ते हुए जलकर कबाब बनते
  400. 23:01हुए व सब के सब अल्लाह ताला ने सबको जो
  401. 23:03नाकाम नामुराद फेर दिया
  402. 23:06लाता और अल्लाह ताला अहले ईमान के लिए
  403. 23:09किता के वास्ते काफी हो गया
  404. 23:13वनला अल्लाह ताला बे इंतिहा ताकतवर अल्लाह
  405. 23:17ताला बेपनाह जबरदस्त है और अल्लाह रब्बुल
  406. 23:20इजत ने जो फैसला किया वह फैसला कुराने
  407. 23:23करीम ने बयान किया लाला
  408. 23:41किता जिन अले किताब ने गद्दारी करके उन
  409. 23:45मुशरिकीन की मदद की थी अल्लाह ने उनको
  410. 23:47उनके कलो से उतार दिया उनके दिलों के अंदर
  411. 23:49दहशत बिठा दी एक तबके को तुम उनका तिमा कर
  412. 23:53रहे थे दूसरे तबके तुम कदी बना रहे थे
  413. 23:55अल्लाह ने उनकी जमीन का तुम्ह वारिस बनाया
  414. 23:59उनके इलाकों का तुम्हें वारिस बनाया और उस
  415. 24:01सरजमीन का भी अल्लाह ने तुम्हें मालिक
  416. 24:03बनाया जिस सरजमीन से अभी तुम्हारे निशान
  417. 24:07कदम तक वाकिफ नहीं है कहां मदीने की जमीन
  418. 24:10जो कदमों तले खिसकी जा रही थी वो जमीन
  419. 24:13बरकरार रही और जमीनें मिली मुल्कों के
  420. 24:16मुल्क अल्लाह रब्बुल इज्जत की तरफ से
  421. 24:17तोहफे में दे दिए गए उसी
  422. 24:28कैफियत नहीं हुई जो डटने की कैफियत है
  423. 24:31हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को
  424. 24:33अव्वन मरहले में यह बात कह दी गई थी कि
  425. 24:35वली रबिक फसर ऐ मोहम्मद सल्लल्लाहु अलम आप
  426. 24:39डट जाइए आप जम जाइए अपने रब के लिए अगर वो
  427. 24:43कैफियत नहीं रहेगी अजीब और गरीब बात है
  428. 24:47अल्लाह ताला अपनी लिखी हुई चीज वापस ले
  429. 24:50जाता है जिस चीज को अल्लाह ने लिख दिया है
  430. 24:52वो चीज तक अल्लाह ताला वापस ले लेता है
  431. 24:55हजरत मूसा अल सलाम की कौम से हजरत मूसा
  432. 24:58लाम ने कहा
  433. 25:02[संगीत]
  434. 25:07या मेरी उस जमीन पर दाखिल हो जाओ जो जमीन
  435. 25:11अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दी है और
  436. 25:14पिछले पांव पलट कर ना आना वरना तुम सब कुछ
  437. 25:17खो जाने वालों में हो जाओगे उन्होंने
  438. 25:19बदतमीजी की हद कर दी यहां तक कह
  439. 25:25दिया मूसा आप जाइए आपका रब चला आ जाए आप
  440. 25:28दोनों जाकर वहां जंग ले हम यहां बैठकर
  441. 25:31तमाशा देखते रहेंगे आखीर में मूसा अल सलाम
  442. 25:34ने यह बात कही कि अल्लाह मेरे और इस कौम
  443. 25:37के दरमियान इस फास कौम के दरमियान फसल
  444. 25:39पैदा कर दीजिए और अल्लाह रब्बुल इजत की
  445. 25:42तरफ से लान
  446. 25:45हुआ यहां पर वक्त कीजिए कि जमीन उनके लिए
  447. 25:49हमेशा के लिए हराम है किसी और को मिलेगी
  448. 25:52तो मिलेगी लेकिन इनको नहीं मिलेगी
  449. 25:56अ 40 साल तक वो जो वादी सीना है उस सहरा
  450. 26:00के अंदर मारे मारे फिरा करेंगे लेकिन उनको
  451. 26:03कुछ नहीं मिलेगा फिर उस 40 साल के बाद में
  452. 26:06जो नई नस्ल नमूद हुई एक जफा कश नस्ल एक
  453. 26:10हिम्मत वाली नस्ल हजरत मूसा अल सलाम का उस
  454. 26:12दौरान इंतकाल हो गया व अल्लाह के हुजूर
  455. 26:15पहुंच गए अल्लाह की रहमत की आगोश में
  456. 26:17पहुंच गए और उसके बाद में ह यूशा अल सलाम
  457. 26:19के जरिए से वो पूरा इलाका फतह हुआ लेकिन
  458. 26:22गौर करने की बात है जिस बात को अल्लाह ने
  459. 26:24फरमाया कि कतब अल्लाह लकम जो जमीन अल्लाह
  460. 26:27ने तुम्हा लिख दी थी अल्लाह ने अपना लिखा
  461. 26:30हुआ वापस ले लिया इस वजह से कि कौम ने
  462. 26:33नाफरमानी की हम अगर
  463. 26:37इस्तकाम्या का सबूत देंगे हम अगर मोहब्बत
  464. 26:39का सबूत देंगे हम अगर अपने आप को भुला
  465. 26:42देंगे अपने आप को हम फरामोश कर देंगे
  466. 26:46अल्लाह रब्बुल इज्जत के लिए अल्लाह के
  467. 26:48रसूल सल्लल्लाहु अल वसल्लम के लिए अल्लाह
  468. 26:50के दीन के लिए अल्लाह के शरीयत के लिए
  469. 26:53आदमी ऐसा सरशर हो जाए कि शरीयत के मुकाबले
  470. 26:56में कोई भी चीज आज कोई भी चीज आ जाए पहले
  471. 27:00मरहले में ला के दे चीज नहीं है इसको हम
  472. 27:04कबूल नहीं कर सकते अली दलाल जबाती दलाल सब
  473. 27:07बाद में फराम किए जाएंगे पहले इंकार इंकार
  474. 27:12इंकार
  475. 27:25शरी मोहम्मद सला सलम हमने आपको अपने दीन
  476. 27:30की खास शरीयत पर खास तरीके पर
  477. 27:34गामजीन लोगों की ख्वाहिश के पीछे ना चले
  478. 27:38जो कुछ नहीं जानते हैं शरीयत से टकराने
  479. 27:40वाली जो भी चीज है वो चीज ख्वाहिश परस्ती
  480. 27:44है वो चीज ख्वाहिश पसंदी है वो चीज जहालत
  481. 27:47है वो चीज जाहिल है पहले मरहले में इंसान
  482. 27:50इंकार करे बसा औकात इल्मी तम तलाक के साथ
  483. 27:54जो उसूल है जो बुनियाद हैं शरीयत की उसके
  484. 27:58मुकाबले पर उस इल्म को लाया जाता है वह
  485. 28:00इल्म भी जहल से बदतर है हजरत अंबिया सलातो
  486. 28:04सलाम का मुकाबला उस इल्म से भी किया गया
  487. 28:07था जो कि जहल से बदतर है
  488. 28:13फना जब अल्लाह के रसूल उनके पास खुली हुई
  489. 28:16निशानिया लेकर आए अल्लाह की तरफ से सदाकत
  490. 28:19अल्लाह की तरफ से बयान करदा हकीकत तो उस
  491. 28:22वक्त के जितने भी वो लोग थे जिनको अपने
  492. 28:25इल्म पर नाज था जो इम इल्म शरीयत से टकरा
  493. 28:28रहा था जो जाहिर में इल्म था बातिन में
  494. 28:31जहल से बढ़कर बदतर था
  495. 28:34फ उनके पास जो इल्म था उस इल्म के हवाले
  496. 28:37दे देकर वो इतराने
  497. 28:41लगे नतीजा यह निकला के जो कुछ मजाक उड़ाया
  498. 28:45करते थे वही मजाक उनको आ घेरा और व सब के
  499. 28:48सब बर्बाद कर दिए गए अल्लाह की शरीयत को
  500. 28:51अपने सर का ताज बनाइए अल्लाह की शरीयत को
  501. 28:55अपनी आंखों का नूर बनाइए अल्लाह की शरीयत
  502. 28:58को अपने दिल का सुरूर बनाइए और अल्लाह की
  503. 29:01शरीयत से टकराने वाली कोई भी चीज हो उसमें
  504. 29:04चाहे जितना फायदा हमें नजर आए लाखों का
  505. 29:07करोड़ों का अरबों का खरबों का उस फायदे पर
  506. 29:11हम फूकना भी पसंद ना करें इस
  507. 29:16तकादीना की शरीयत को अपनाकर अगर कोई
  508. 29:20नुकसान भी हो रहा हो फर्ज कर ले और हकीकत
  509. 29:22में कोई नुकसान नहीं शरीयत सरासर अल्लाह
  510. 29:25रब्बुल इज्जत की रहमत है अल्लाह रब्बुल
  511. 29:28इज्जत की इनायत है अल्लाह रब्बुल इज्जत की
  512. 29:30मेहरबानी है कुरान करीम की हर सूरत
  513. 29:33बिस्मिल्लाह रहमान रहीम से शुरू होती है
  514. 29:35जो इस बात की गवाही देती हुई गोया शुरू की
  515. 29:39जाती है कि सूरत ये आयात ये हुरूफ ये
  516. 29:42जुमले ये कलमा ये अल्लाह की रहमत है
  517. 29:45अल्लाह की इनायत है अल्लाह की मेहरबानी है
  518. 29:48फिर भी जाहिरी तौर पर अगर कोई नुकसान होता
  519. 29:50हुआ नजर आए उस नुकसान को मरहबा कहना सीखिए
  520. 29:54उस नुकसान का इस्तकबाल करना सीखिए हमें
  521. 29:57अजीज है तो अल्लाह की शरीयत अजीज है आं
  522. 29:59हजरत सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को क्या
  523. 30:01सादिक का लकब नहीं दिया गया था क्या अमीन
  524. 30:04का लकब नहीं दिया गया था क्या आप
  525. 30:06सल्लल्लाहु वसल्लम अपने पूरे मुशे की आंख
  526. 30:08के तारे नहीं थे क्या मुशरिकीन मक्का आप
  527. 30:11सल्लल्लाहु अल वसल्लम को अपनी सर आंखों पर
  528. 30:14बिठाते नहीं थे लेकिन जिस दिन आप
  529. 30:16सल्लल्लाहु अ वसल्लम ने खुदा की शरीयत का
  530. 30:18ऐलान किया एक अल्लाह की वहदा नियत का ऐलान
  531. 30:21किया वो सारे अलकाब वापस ले लिए गए वापस
  532. 30:24क्या लिए गए आप सल्लल्लाह वसम खुद ही उनके
  533. 30:26मुंह पर मार दिए कि तुम किसी लकब की जरूरत
  534. 30:29नहीं तुम्हारे किसी की जरूरत नहीं
  535. 30:31तुम्हारी किसी भी चीज की जरूरत नहीं
  536. 30:33अल्लाह रल इत की तरफ से मुझे इजत मिली है
  537. 30:36व इत मेरे लिए काफी है ला
  538. 30:40रस
  539. 30:43ना इत अल्लाह की इत रसूलल्लाह की इत अले
  540. 30:47ईमान की लेकिन मुनाफिक जानते नहीं है ब
  541. 30:52मुना
  542. 30:55मुनाली मुनाफिकन को ममद
  543. 30:58आप यह खबर सुनाइए कि उनके लिए दर्दनाक
  544. 31:00अजाब है और उनके अफल क्या बताए गए हैं
  545. 31:03मुख्तलिफ औकात में मुख्तलिफ उनकी जो जो
  546. 31:07सिफात बद है उनको बयान किया गया लेकिन
  547. 31:10यहां पर जो बात बयान की गई व यह कि अल
  548. 31:13काफिन
  549. 31:15लियानी जो खुदा के बागियों को खुदा के
  550. 31:18मुनकर को अपना गहरा दोस्त बनाते हैं अहले
  551. 31:21ईमान को छोड़कर जो बात इससे पहले कही गई
  552. 31:24फला क्रिकेटर क्रिकेटर हमारा हीरो है फला
  553. 31:28फुटबॉलर वो हीरो है और फला फिल्म स्टार जो
  554. 31:30कि सरासर एक वाहियात है गलाज है एक नजासत
  555. 31:34है नापाकी का एक पूरा संडास है वह हमारा
  556. 31:37हीरो है इस तरह के अगर ख्यालात है यह निफा
  557. 31:40की अलामत है यह दीन से दूरी की अलामत है
  558. 31:43यह अल्लाह की शरीयत से मोहब्बत ना होने की
  559. 31:46अलामत है अ
  560. 31:49काया जो काफिरों को खुदा के मुनकर को खुदा
  561. 31:53के बागियों को अपना गहरा दोस्त बनाते हैं
  562. 31:56अहले ईमान को छोड़कर
  563. 31:59क्या उनके पास जा जाकर इजत के मुतला होते
  564. 32:02हैं इजत के तलबगार होते
  565. 32:05हैं जमी सुनले तमाम के तमाम सारी इत
  566. 32:09अल्लाह रबल इत की है
  567. 32:13मन जमी जो भी इजत चाहता है व सुन ले कान
  568. 32:18खोलकर सारी इजत अल्लाह रब्बुल इजत की है
  569. 32:21और उस इत को पाने का
  570. 32:24[संगीत]
  571. 32:26तरीका अच्छी बातें अल्लाह की तरफ उरूज
  572. 32:29करती हैं बुलंदी पर चढ़ती चली जाती है अमल
  573. 32:33सालेह उनको और ऊपर उठाते हैं या अच्छी
  574. 32:36बातें अमल सालेह को और ऊपर उठाते हैं
  575. 32:38अच्छा काम हो अच्छी बातें हो दर्दमंद दिल
  576. 32:42हो अच्छे अखलाक हो सही दावत हो एक फिक्र
  577. 32:46हो एक सच्चा जज्बा हो फिर उसे इज्जत
  578. 32:49मिलेंगी उस पर अल्लाह का वादा यह है और
  579. 32:52अल्लाह का कोई वादा झूठा नहीं हो सकता
  580. 32:54इनल्लाह
  581. 32:56अल्लाह अपने वाद खिलाफ वजी नहीं करता
  582. 33:00ला हदी अल्लाह से बढ़कर किसकी गुफ्तगू
  583. 33:03सच्ची है
  584. 33:05लाला अल्लाह से बढ़कर किसका कल सच्चा है
  585. 33:09अल्लाह का वादा यह है
  586. 33:15ी जो लोग बुरी बुरी तदबीर करते हैं बुरी
  587. 33:18बुरी चाले चलते हैं उनके लिए सख तरीन अजाब
  588. 33:21है य आखिरत में और उनकी जितनी भी मक्कार
  589. 33:25सबके तार पोत बिखेर दिए जाएंगे हम ये नहीं
  590. 33:28कहते कि इंसान खा में गफलत में रहे लेकिन
  591. 33:31दूसरे क्या कर रहे हैं उसके पीछे हद से
  592. 33:33ज्यादा लगे रहना अल्लाह ने इसका हुक्म
  593. 33:36नहीं दिया है आदमी जान ले क्या कुछ
  594. 33:38साजिशें हो रही है उसके बाद में उसे अपना
  595. 33:41काम करना है फित जो आते हैं उनके करने से
  596. 33:44नहीं आते हमारे ना करने से आते हैं
  597. 33:52लियाला कबीर जो खुदा के बागी और मुनकर है
  598. 33:55वो एक दूसरे से
  599. 33:58बड़ी साबाज रहती है दोस्ती टते हैं वह और
  600. 34:01एक दूसरे से गहरा ताल्लुक रखते हैं
  601. 34:04इला इला तल इला तल मोमिन अगर तुमने य नहीं
  602. 34:10किया अगर तुमने य नहीं किया इला
  603. 34:17तलवा अगर तुम एक दूसरे के वली नहीं बने एक
  604. 34:20दूसरे के मददगार नहीं बने एक दूसरे के
  605. 34:23सच्चे खैर नहीं बने
  606. 34:25ित जमीन में फित बरपा होगा और मामूली फसाद
  607. 34:29नहीं बहुत बड़ा फसाद बरपा होगा हमें
  608. 34:31अल्लाह की बुनियाद पर रसूल अल्लाह की
  609. 34:34बुनियाद पर खुदा के दीन की बुनियाद पर
  610. 34:36खब्बे रसूल की बुनियाद पर ताते रसूल की
  611. 34:39बुनियाद पर मोहब्बत खुदा की बुनियाद पर
  612. 34:42कुरान करीम की बुनियाद पर अमर बिल मारूफ
  613. 34:45की बुनियाद पर नही अनिल मुनकर की बुनियाद
  614. 34:47पर हमें जुड़ना होगा यही हमारी कामयाबी का
  615. 34:50राज है अल्लाह हुजूर अकरम सल्लल्लाहु
  616. 34:53अलैहि वसल्लम इसी काम के लिए मबस फरमाए गए
  617. 34:56थे हजारों मकसद बयान किए जा सकते हैं जो
  618. 34:59दो बुनियादी मकास हैं तमाम अंबिया अल
  619. 35:02सलातो सलाम की बसत के वो दो बुनियादी मकसद
  620. 35:05यह हैं एक मकसद यह कि बंदों को खुदा से
  621. 35:08जोड़ा जाए दूसरे के बंदों को अल्लाह
  622. 35:10रब्बुल इज्जत की बुनियाद पर बंदों को
  623. 35:12बंदों से जोड़ा जाए उसी मकसद के लिए हम
  624. 35:15जिएंगे उसी मकसद के लिए पूरे इदार कायम
  625. 35:18किए गए हैं उसी मकसद के लिए तमाम तंजीम
  626. 35:21हैं उसी मकसद के लिए जितने भी स्पोर्ट्स
  627. 35:23क्लब हैं ये भी उसी मकसद के लिए उसी मकसद
  628. 35:26के लिए प्रोग्राम है उस मकसद के लिए
  629. 35:28तकरीरें हैं हम उस मकसद पर मुत्त फिक हो
  630. 35:30जाएं एक अल्लाह की इबादत पर मुत्त फिक हो
  631. 35:33जाएं और एक अल्लाह के लिए हम अल्लाह के
  632. 35:36बंदों से जुड़ जाएं अगर वो कैफियत पैदा
  633. 35:39होगी हर मोमिन दूसरे मोमिन का वली होगा हर
  634. 35:42मोमिन दूसरे मोमिन की इज्जत का पास बा
  635. 35:45होगा मुहाफिज होगा अल्लाह रब्बुल इज्जत की
  636. 35:48तरफ से रहमो करम की बारिशें मुसलसल होती
  637. 35:51रहेंगी ल मुमिन मोमिना बाद औलिया बाद तमाम
  638. 35:55मोमिन मर्द और तमाम मोमिन औरत एक दूसरे के
  639. 35:59वली हैं एक दूसरे से गहरा ताल्लुक रखते
  640. 36:01हैं तमाम औरतें एक दूसरे की रफी कात है एक
  641. 36:05दूसरे से सच्ची चाहत रखती है लेकिन
  642. 36:07बुनियाद क्या हो बुनियाद कोई दूसरी चीज ना
  643. 36:10हो बुनियाद ये है र बिल
  644. 36:13मारूफ मुनक
  645. 36:16सलाका
  646. 36:18लारस वो भला का हुक्म देते हैं बुराइयों
  647. 36:21से रोकते हैं नमाज को कायम करते हैं जकात
  648. 36:25अदा करते हैं और सबका मजमुआ य खुशी खुशी
  649. 36:28अल्लाह की इता करते हैं इता का मतलब सिर्फ
  650. 36:31बात मानना नहीं तौ के अंदर अंदर से गोया
  651. 36:34कि जज्बा उभर रहा हो खुशी-खुशी बात मानना
  652. 36:37किसी का बड़ा किसी को कोई हुक्म दे दे कोई
  653. 36:40किसी का बहुत ही महबूब उस्ताद हो वो किसी
  654. 36:43को कोई हुक्म दे दे उसे कितना अच्छा लगता
  655. 36:45है कि हमारे उस्ताद ने हम पर एतमाद किया
  656. 36:48किसी का मुरब्बी किसी के शेख किसी के पीर
  657. 36:51किसी के मुर्शिद या किसी के बहुत ही मज्ज
  658. 36:54और मोहतरम बाप किसी की मां उसे कोई हुक्म
  659. 36:57देती है कि कितना अच्छा लगता है कि हम पर
  660. 36:59एतमाद किया गया अल्लाह रब्बुल इज्जत का हर
  661. 37:02हुक्म इस लायक है कि खुशी-खुशी उसकी बात
  662. 37:05मानी जाए और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु
  663. 37:07अलैहि वसल्लम की इता की जाए अल्लाह का
  664. 37:09वादा यह है कि ऐसे तमाम मोमिनीन पर अल्लाह
  665. 37:12की रहमत बरसेंगे ऐसी तमाम मोमिना पर
  666. 37:15अल्लाह की रहमत बरसेंगे इस तरह हमें एक
  667. 37:18इत्तेहाद का दर्स दिया गया इस तरह हमें
  668. 37:20इत्तेफाक का दर्स दिया गया और इसी
  669. 37:23इत्तेहाद के लिए इसी इत्तेफाक के लिए इसी
  670. 37:25खुदा परस्ती के लिए उसी इंसानियत को एक
  671. 37:28इतरे मजमुआ बनाने के लिए हुजूर अकरम
  672. 37:31सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बसत हुई और आप
  673. 37:33सल्लल्लाहु वसल्लम ने वो काम करके दिखाया
  674. 37:36आज भी जमाना हमारा मुंतज है हम कभी ये ना
  675. 37:39सोचे कि हमें जमाने से लेना क्या हम तो
  676. 37:41देने के लिए आए हैं जमाने को भिकारी समझे
  677. 37:45जमाने को फकीर समझे हमारे पास अल्लाह की
  678. 37:48किताब है हमारे पास अल्लाह के रसूल
  679. 37:50सल्लल्लाह सलम की सुन्नत है हमारे पास
  680. 37:53हिदायत रब्बा निया है हमारे पास अल्लाह के
  681. 37:56रसूल सल्लल्लाह के इरशाद है
  682. 37:59वकर कैसे मुमकिन है कि तुम कुफ्र कर जाओ
  683. 38:03तुम नाशक करो वंतुम
  684. 38:07लायाला रसू जबकि तुम्हारे सामने अल्लाह की
  685. 38:10आयतें पढ़ पढ़कर सुनाई जाती है और
  686. 38:12तुम्हारे अंदर अल्लाह के रसूल मौजूद हैं
  687. 38:15हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अ वसल्लम की रुखसत
  688. 38:17होने के बाद आपकी सुन्नतें आपकी मुबारक
  689. 38:20सीरत आपकी हिदायत आपकी अहा दीस मुबारका और
  690. 38:24आपके अहा दीस से जो मसाइल इस्तं बात किए
  691. 38:26गए हैं तमाम फुकाहा ने तमाम उलमा ने तमाम
  692. 38:29मुहसीन ने तमाम मुफस्सिर ने जो काम किए
  693. 38:32हैं वो सारे काम आप सल्लल्लाहु अल वसल्लम
  694. 38:35ही की हिदायत को अपनाना है और आपकी हिदायत
  695. 38:39आपके कायम मकाम है इतनी बड़ी दौलत होने के
  696. 38:42बाद फिर हमें बेचार कीी का एहसास हो हमें
  697. 38:45यह एहसास मारे डाल रहा हो हम बेचारे बहुत
  698. 38:48कमजोर हैं कुछ नहीं है सब कुछ हमारे पास
  699. 38:51है शर्त ये है कि वो एहसास अपने दिल में
  700. 38:53बेदार किया जाए और बेदार रखा जाए घर घर इस
  701. 38:57एहसास को आम कीजिए दुनिया के अमीर तरीन हम
  702. 39:01हैं बल्कि हकीकत में देखा जाए दुनिया के
  703. 39:03हकीकी बादशाह हम हैं यही फर्क था हम में
  704. 39:06और सहाब किराम में आयतें उतरती थी और वह
  705. 39:10अपने आप को उन आयात का मिस्क समझकर उनकी
  706. 39:13पूरी जिंदगियां उसी तरह होती थी जन्नत का
  707. 39:15तस्करा हुआ तो अल्लाह ने फरमाया
  708. 39:20ल कबीरा जब आप वहां देखेंगे तो वहां
  709. 39:24नेमतों की बहता देखेंगे एक जबरदस्त बाद
  710. 39:27शाह देखेंगे हर सहाबी अपने आप को जन्नती
  711. 39:30समझता था इस मफू में कि हम जिम्मेदारियां
  712. 39:33अदा करेंगे और जन्नती बनेंगे आखिरत की
  713. 39:36बादशाहत की खुशबू उनको महसूस होने लगी थी
  714. 39:39वो किसी बादशाह के दरबार में गए कभी वो
  715. 39:42मुतासिर नहीं हुए मुतकब्बीर
  716. 39:45करर नहीं गए लेकिन खुदा के दाई बनकर गए
  717. 39:48खुदा के पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा
  718. 39:51सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नुमाइंदे बनकर
  719. 39:53गए और वो दूसरों को ये समझते रहे कि उन
  720. 39:56बेचार के पास कुछ नहीं है हम देने के लिए
  721. 39:58जा रहे हैं अल्लाह ताला ने हर जन्नती को
  722. 40:01इसी अंदाज से पेश किया कि हर जन्नती अपनी
  723. 40:04ममल कत का गोया बादशाह होगा और फरिश्तों
  724. 40:07के फफूद के फफूद जिस तरह किसी मजस बादशाह
  725. 40:10के दरबार में मज फफूद आते हैं वो फफूद
  726. 40:13उनको सलाम करने के लिए आएंगे ल
  727. 40:17मला बा सलाम
  728. 40:20अकमा बदार तमाम फरिश्ते फरिश्तों के
  729. 40:24फरिश्ते जितने भी हर दरवाजे से उनके पास
  730. 40:26आएंगे और यह कहेंगे कि तुम पर सलामती हो
  731. 40:29आखिरत का घराना कितना अजीम घराना है कितना
  732. 40:32अच्छा घराना है वह एकाद पैदा करके हम
  733. 40:36आखिरत के तालिब बनकर हम दुनिया में छा
  734. 40:39सकते हैं हम दुनिया के तालिब बनकर दुनिया
  735. 40:41पर कभी हुक्मरान कर नहीं सकते री दुनिया
  736. 40:45तुम दुनिया का सामान चाहते हो अल्लाह आखरा
  737. 40:49अल्लाह ताला आखिरत चाहता है दुनिया की
  738. 40:51इज्जत भी मिलेगी आखिरत की इज्जत भी मिलेगी
  739. 40:54लेकिन हुजूर अकरम सलाम की सच्ची मोहब्बत
  740. 40:57आप सल्लल्लाह सलम की सच्ची गुलामी और
  741. 40:59अल्लाह रब्बुल इज्जत की सच्ची इबादत
  742. 41:01अल्लाह रब्बुल इज्जत की सच्ची तात आखिरत
  743. 41:04के वादों पर सच्चा यकीन यह सारे जो हमारे
  744. 41:07असलहे हैं यह हमारी जो सौगात है ये हमारे
  745. 41:10जो तोहफे हैं इन तोफ को लेकर अवाम आलम के
  746. 41:13पास जाएंगे
  747. 41:17ल यह कुरान करीम मेरी तरफ वही किया गया है
  748. 41:21ताकि इसके जरिए से मैं तुम्हें डराऊ और
  749. 41:23जहां तक अल्लाह का कलाम पहुंचे मैं लोगों
  750. 41:26को डराता वो सौगात लेकर हम जाएंगे वो
  751. 41:29नेमतें लेकर जाएंगे हम खुद तरसी में कभी
  752. 41:32मुब्तला नहीं होंगे हम अकीर फकीर फुरत हम
  753. 41:35क्या है सब हम पर जुल्म करें हैं हम खुद
  754. 41:37तरसी में मुब्तला नहीं होंगे हम दुनिया को
  755. 41:39ये समझेंगे कि दुनिया जो है हमारी मोहताज
  756. 41:42है और वो पैगाम लेकर अगर हम जाएंगे इंशा
  757. 41:45अल्लाह तो सीरत रसूल का मकसद और नातिया
  758. 41:48कलाम का मकसद सुन्नते रसूल का मकसद कलाम
  759. 41:51इलाही का मकसद किसी हद तक हम पूरा करने
  760. 41:54वाले बन जाएंगे इस ये जो पूरा इलाका है है
  761. 41:57इसे हम आमतौर से उम्मल कुरा कहते हैं यहां
  762. 42:00से अगर वो आवाज उठेगी यहां से वो कैफियात
  763. 42:03अपनाई जाएंगी औरस पड़ोस के जितने इलाके
  764. 42:06हैं वहां तक वो कैफियात पहुंचती चली
  765. 42:08जाएंगी और अल्लाह ने चाहा तो एक दुनिया के
  766. 42:11एक कोने से दूसरे कोने तक हम वो पैगाम
  767. 42:13पहुंचाने वाले बन जाएंगे शर्त है अजम शर्त
  768. 42:17है मोहब्बत शर्त है इरादा शर्त है सच्चा
  769. 42:21इल्म और शर्त है सच्चा यकीन अल्लाह मुझे
  770. 42:24भी वह सच नसीब फरमाए आप हजरात को भी व सचन
  771. 42:27फरमाए दवाना हमदुलिल्ला रमी

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This page contains the full transcript of Musalmanau ke Masail Ka wahid hal | Moulana Abdul subhan Nadwi by FikrokhabarTV, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,996 words across 771 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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