गरीब कुम्हार की धानी किस्मत और रहस्यमयी घड़ा | MORAL STORIES | HINDI KAHANIYAN | HINDI STORIES — Transcript
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- 0:06चंदनपुर नाम का एक छोटा सा गांव था। जहां
- 0:09मिट्टी की खुशबू और गरीबी दोनों साथ-साथ
- 0:12रहती थी। उसी गांव के एक कोने में एक
- 0:15झोपड़ी थी। जिसमें रामू कुम्हार अपनी
- 0:18पत्नी कोमल, नन्ही सी बेटी गुड़िया और
- 0:21अपनी बूढ़ी मां के साथ गुजारा करता था।
- 0:24रामू गांव के ही एक अमीर और कठोर दिल वाले
- 0:28व्यापारी भैरव सेठ की मटकों की दुकान पर
- 0:31मजदूरी करता था। सुबह से शाम तक वह कड़ी
- 0:35मेहनत करता। उसके हाथ छिल जाते। पसीना
- 0:38मिट्टी में घुल जाता। लेकिन बदले में
- 0:41मिलती थी सिर्फ थोड़ी सी मजदूरी जो घर का
- 0:44चूल्हा जलाए रखने के लिए कभी काफी नहीं
- 0:47होती थी।
- 0:53सुनिए जी कल सेठ भैरव ने फिर वही पुरानी
- 0:56मजदूरी दी। दिन भर धूप में काम करते हैं
- 0:59और मिलता क्या? मां की दवा खत्म हो गई है।
- 1:03राधा के कपड़े भी फट गए हैं। मैं समझ नहीं
- 1:06पा रही क्या करें।
- 1:08मैं क्या करूं कोमल? पैरों सेठ बस इतना ही
- 1:11देता है। रोज सुबह से शाम तक मिट्टी में
- 1:14घुस जाता हूं। पर मेहनत का मोल अब दुनिया
- 1:16में कहां मिलता है? गरीब के पसीने की कीमत
- 1:19तो सेठ लोग अपने हिसाब से लिखते हैं।
- 1:22फिर आप उनके लिए काम क्यों करते हैं? जी
- 1:25आपके हाथ के मटके तो पूरे चंदनपुर में
- 1:27मशहूर हैं। क्या पता अगर आप खुद बेचना
- 1:30शुरू करें तो? आपकी कमाई दुगनी हो जाए।
- 1:35सेठ के लिए क्यों अपना पसीना और कला दोनों
- 1:38बर्बाद कर रहे हो?
- 1:40अरे कोमल दुकान खोलने के लिए पैसा चाहिए,
- 1:44जगह चाहिए और हमारे पास क्या है? ये छोटी
- 1:48सी झोपड़ी।
- 1:50आप चिंता मत कीजिए। स्टार्टिंग में
- 1:53प्रॉब्लम होगी पर सब ठीक हो जाएगा। हम
- 1:56थोड़ा-थोड़ा करके सब कर लेंगे। भगवान पर
- 1:59भरोसा रखिए।
- 2:01बेटा, सही कह रही है तेरी पत्नी। सेठ के
- 2:04लिए काम करके कब तक पेट पालोगे? अपना कुछ
- 2:07कर। मिट्टी तेरे हाथ में है तो किस्मत भी
- 2:10तू ही बना सकता है।
- 2:12ठीक है कोमल कल सेठ से कह दूंगा अब और
- 2:16मजदूरी नहीं।
- 2:19अगले दिन रामू भैररो सेठ के पास जाता है।
- 2:24उस दिन रामू ने फैसला कर लिया था कि अब वह
- 2:28सेठ के लिए नहीं खुद के लिए काम करेगा।
- 2:35मालिक नमस्ते। मुझे आपसे एक बात कहनी थी।
- 2:39हां बोलो रामू क्या बात है?
- 2:41मालिक आप मेरा हिसाब कर दीजिए। मैं अब
- 2:44यहां काम नहीं करूंगा।
- 2:46क्या बोला तूने? इतना देता हूं फिर भी तू
- 2:50काम नहीं करेगा।
- 2:51मालिक गलत मत समझना। मैंने कभी शिकायत
- 2:55नहीं की पर घर का खर्चा नहीं चल रहा। सोचा
- 2:59खुद कुछ कोशिश कर लूं।
- 3:02कोशिश?
- 3:04[हंसी]
- 3:05चल ठीक है जा मैं भी देखता हूं तू क्या कर
- 3:08लेगा। रे चमचे इसका हिसाब कर। जी मालिक
- 3:13पिछली बार इसने अपनी मां की दवा के लिए जो
- 3:15बड़ी रकम एडवांस ली थी और मिट्टी के जो
- 3:18बचे हुए दाम थे सब जोड़ घटा कर देखा जाए
- 3:21तो रामू के हिस्से में कुछ नहीं बचता
- 3:23मालिक। इसका हिसाब तो पूरा-पूरा जीरो हो
- 3:26गया। सुन लिया रामू तेरे सब पैसे कट गए।
- 3:30तू पहले ही ले चुका है। अब कुछ नहीं
- 3:33मिलेगा।
- 3:35मालिक वो तो आपने खुद कहा था तब के लिए।
- 3:37मैंने कब कहा सब पैसे ले लो। यह तो अन्याय
- 3:41है।
- 3:42बस खामोश रह। औकात देख अपनी। तू मुझे मेरा
- 3:47हिसाब समझाएगा। हां। तेरे हाथ की मिट्टी
- 3:51में वो दम नहीं जो दुकान खोले। जा और हां
- 3:55जब हार कर वापस आएगा ना तब दोगुनी गुलामी
- 3:58करने को तैयार रहना।
- 4:01[हंसी]
- 4:05रामू की आंखों में आंसू आ जाते हैं।
- 4:09वह बिना पलट कर देखे ही अपनी झोपड़ी की
- 4:12तरफ चल [संगीत] पड़ता है।
- 4:18क्या हुआ जी? सेठ ने पैसे दिए क्या? नहीं
- 4:22कोमल सब पैसे काट दिए। कहते हैं तो मैंने
- 4:25पहले ही ले लिया था। मुझे भगा दिया। हंस
- 4:28के बोला देखते हैं कैसे दुकान खोलते हो।
- 4:31सुनिए जी पैसे चले गए तो क्या हुआ? हिम्मत
- 4:35तो हमारे पास है ना। हम सब मिलके करेंगे।
- 4:38मां मिट्टी बनाएंगी। मैं बिक्री में मदद
- 4:41करूंगी। गुड़िया छोटी है पर दुआ तो करेगी।
- 4:45बेटा दुकान नहीं। अपना सपना खोल। सेठ ने
- 4:50तेरा पैसा नहीं रोका। तेरी किस्मत रोकी
- 4:54है। अब वक्त है उसको तोड़ने का।
- 5:05अगले दिन से रामू मिट्टी के मटके बनाना
- 5:08शुरू करता है और उन्हें बाजार में ले जाकर
- 5:11बेचने बैठता है। गर्मी से तपता हुआ दिन,
- 5:14बाजार में लोगों की भीड़। सब अपने-अपने
- 5:18सामान बेच रहे हैं।
- 5:29बीच में रामू एक पेड़ के नीचे मटके, घड़े
- 5:32और दिए सजाता है। उसके चेहरे पे उम्मीद
- 5:36है। पर दिल में थोड़ा डर भी।
- 5:39आइए आइए रामू कुम्हार के ठंडे मटके सस्ते
- 5:43और मजबूत।
- 5:50रामू की आवाज सुनकर कुछ गांव वाले रामू के
- 5:53पास आते हैं।
- 5:56अरे भाई यह मटका तो हल्का लग रहा है। लगता
- 5:59है मिट्टी कच्ची थी।
- 6:00हां रे। और रंग भी ढीला है। लगता है
- 6:04मिट्टी भी सही नहीं पकाई गई। भैरब के मटके
- 6:07देखे हैं? एकदम चमकदार। बहन जी मिट्टी
- 6:11चाहे सिंपल हो पर मेरे मटके दिल से बनाए
- 6:14गए हैं। पानी रखिए इसमें देखिएगा। ठंडक और
- 6:18स्वाद दोनों मिलेंगे।
- 6:20दिल से बने मटके। [हंसी]
- 6:24अरे भाई पानी नहीं दिल रखेंगे क्या इसमें?
- 6:28भैरव के मटके तो राजा महाराजा तक ले जाते
- 6:31हैं। और तू रामू तू तो नया-नया आया है
- 6:34बाजार में। कौन खरीदेगा तेरे मटके? बाबूजी
- 6:38हर बड़ा आदमी कभी छोटा ही था। बस एक मौका
- 6:41दीजिए अगर पसंद ना आए तो पैसा वापस।
- 6:44अरे नहीं भाई हम रिस्क नहीं लेते। कल अगर
- 6:48मटका फट गया तो तू मिलने भी नहीं आएगा।
- 6:52[हंसी]
- 6:53अच्छा भाई बता तो सही। कितने का दे रहा है
- 6:57यह दिल से बना मटका?
- 7:00सिर्फ ₹10 का है बाबूजी। क्या बोला? ₹10?
- 7:05अरे भाई भैरव के मटके तो साथ में मिलते
- 7:08हैं और वह तो राजा जैसे चमकते हैं।
- 7:11हां हां यह तो नया कुम्हार है और दाम देखो
- 7:16भैरव सेठ से भी ज्यादा। अरे हम पैसे दे
- 7:19रहे हैं। दया नहीं मांग रहे।
- 7:22लगता है इसने मटका के साथ अपने सपने भी
- 7:25बेचने का सोच लिया है। ₹10? अरे भाई हमारे
- 7:30गांव में इतने में दो कुल्फी आ जाती हैं।
- 7:33बाबूजी [संगीत] मेहनत के दाम रखे हैं।
- 7:35मिट्टी भी मेहनत से उठाई। दिन रात जलाया
- 7:39[संगीत] तब यह मटका बना है।
- 7:41अरे छोड़ो भाई इमोशनल मत हो। मटका लेने आए
- 7:44हैं। कहानी सुनने नहीं। [हंसी]
- 7:49आजा रे। चल भैरब की दुकान चलते [संगीत]
- 7:51हैं। वहीं असली माल मिलता है। यह रामू तो
- 7:55सपनों के दाम लगाता है।
- 7:59सब लोग हंस कर चले जाते हैं। रामू चुप हो
- 8:02जाता है। उसके चेहरे पर पसीना और उदासी
- 8:06दोनों हैं।
- 8:08दूर से भैरव सेठ आता है और उसके पीछे उसके
- 8:12दो चमचे। सेठ के चेहरे पर वही घमंड भरी
- 8:16मुस्कान है।
- 8:17अरे अरे यह तो हमारा रामू कुम्हार है।
- 8:21क्या हाल है रे रामू? मुझे लगा था तू अपना
- 8:24यह मिट्टी का नौटंकी बंद करके वापस मेरे
- 8:26पास आ जाएगा। पर तू तो लगता है अपनी जिद
- 8:29पर अड़ गया है।
- 8:30सेठ जी जिद नहीं विश्वास है मैं अपनी
- 8:35मेहनत से जीना चाहता हूं। आपके द्वार पर
- 8:38गुलामी करके पेट तो भर जाता था लेकिन मन
- 8:41भूखा रहता था। सुन रे मन भूखा। मन से कोई
- 8:46जीता है क्या? पेट भरता है पैसों से और
- 8:49पैसा मिलता है धंधे से जो तुझ में कभी था
- 8:52ही नहीं।
- 8:54देखो सेठ जी ये देखो।
- 8:56क्या मिट्टी का काम किया है। ऊपर से पूरा
- 8:59खुरदुरा नीचे से टेढ़ामेढ़ा लगता है बर्तन
- 9:03नहीं टूटी हुई तोड़ी बना रहा था। और देखो
- 9:06इसके रंग को बिल्कुल फीका जैसे मैदा में
- 9:10मिट्टी घुमा दी हो।
- 9:11हां सेठ जी मेरा बर्तन चमकदार नहीं है। पर
- 9:15इसमें मिट्टी की सच्चाई है। मैं चमक के
- 9:17पीछे नहीं मजबूती [संगीत] के पीछे भागता
- 9:19हूं।
- 9:20वाह वाह बड़े-बड़े बोल। पर सच यह है रामू।
- 9:24तेरे हाथ की मिट्टी में दम नहीं है। तेरे
- 9:27बर्तन बिकते नहीं क्योंकि तेरा नसीब ही
- 9:30कच्चा है। समझा? यह गांव सिर्फ भैररो सेठ
- 9:33के माल पर जीता है। शहर की मिट्टी, चमकदार
- 9:37मिट्टी, महंगी मिट्टी। तेरे जैसे को यहां
- 9:40कोई नहीं पूछता। सेठ जी, मिट्टी बेकार
- 9:44नहीं होती। बस उसको समझने वाला हाथ चाहिए।
- 9:47आप शहरों की मिट्टी में सोना ढूंढते हैं
- 9:49और मैं अपने गांव की धरती में जीवन। फर्क
- 9:52वही है। बहुत बोलने लगा है रामू। लगता है
- 9:55दो दिन का धूप में बैठना तुझे फिलॉसफर बना
- 9:58गया। ठीक है। बोल दिया तूने। पर याद रखना
- 10:04जब हार के मेरे पास वापस आओगे ना तो
- 10:06तनख्वाह भी आधी मिलेगी।
- 10:09चल रे चमचों चलते हैं। मिट्टी के राजा से
- 10:12मिल लिया। भैररो सेठ और उसके चमचे हंसकर
- 10:15निकल जाते हैं। रामू का चेहरा शांत है पर
- 10:19आंखों में जज्बात उभर रहे हैं। सुबह से
- 10:22दोपहर हो चुकी है। सूरज अब अपने शिखर पर
- 10:26तप रहा है और गर्मी चरम सीमा पर है।
- 10:30रामू की उम्मीदें टूट रही हैं। उसका एक भी
- 10:34घरा अभी तक नहीं बिका है। हर ग्राहक उसके
- 10:37पास आता है। मिट्टी के बर्तनों को एक नजर
- 10:40देखता है और बिना दाम पूछे ही आगे बढ़
- 10:43जाता है। ग्राहकों की यह बेरुखी रामू को
- 10:47अंदर तक थका चुकी है। निराश होकर
- 10:52रामू पास के एक घने पेड़ की छांव में जाकर
- 10:55बैठ जाता है।
- 11:00हे भगवान मैंने कभी किसी का बुरा नहीं
- 11:02चाहा। फिर क्यों मेरी मेहनत का मोल कोई
- 11:04नहीं समझता। पर ठीक है। जब तक सांस है
- 11:09मेहनत करता रहूंगा।
- 11:15उसकी पत्नी कोमल ने सुबह उसके लिए एक
- 11:18प्याज और दो सूखी रोटियां पोटली में रख दी
- 11:21थी।
- 11:25तभी एक अति सुंदर दूधिया सफेद गाय उसके
- 11:29पास आती है। उसकी आंखें बहुत शांत और गहरी
- 11:33हैं। रामू जैसे ही रोटी तोड़ने लगता है,
- 11:37वह धीरे से बिना कोई हलचल किए रामू के पास
- 11:41आकर खड़ी हो जाती है।
- 11:46अरे तू कहां से आई सुंदरी भोजन ढूंढ रही
- 11:49है। ले ले क्या हुआ अगर मुझे धंधे में
- 11:54बेरंगी है पर अतिथि का मान तो रखना ही
- 11:57चाहिए। खा मेरी अच्छी दोस्त गुड़िया होती
- 12:01तो तुझे गले लगा लेती।
- 12:03वह सुंदर गाय बड़े ही प्रेम और सभ्यता से
- 12:07रामू के हाथों [संगीत] से रोटी खाती है।
- 12:09रामू उसे स्नेह से अपने हाथों से सहलाता
- 12:13है जिससे गाय और शांत हो जाती है। जैसे ही
- 12:17रोटी खत्म होती है, गाय एक पल रुकती है,
- 12:21फिर धीरे से मुड़ती है और जंगल के घने
- 12:24पेड़ों के बीचों-बीच [संगीत] उनकी
- 12:26गहराइयों में ओझल हो जाती है।
- 12:31रामू अपनी थकान को झाड़ा और वापस अपने काम
- 12:34पर लग गया। वह फिर अपने मटके साफ करने
- 12:37लगता है। थोड़ी देर बाद उसके कान में कुछ
- 12:40हंगामा की आवाज आती है। रामू तुरंत पलट कर
- 12:43उस दिशा में देखता है जहां से हंगामे की
- 12:46आवाज आ रही थी। आवाज सीधे भैरव सेठ की
- 12:50दुकान से आ रही थी। जो बाजार में अपनी धौस
- 12:53के लिए जानी जाती थी। भैरव सेठ के चमचे
- 12:57मिलकर एक बूढ़े आदमी को पीट रहे थे। रामू
- 13:00अपनी जगह से भागता है। उसकी आंखों में
- 13:03बूढ़े आदमी के प्रति दया और चमचों के
- 13:06प्रति तीव्र क्रोध है। वह तेजी से भीड़ की
- 13:10ओर बढ़ता है।
- 13:13अरे रुक जाओ। क्या कर रहे हो तुम लोग?
- 13:16बुड्ढे पर हाथ उठाते शर्म नहीं आती?
- 13:19अरे ये बूढ़ा सेठ जी के मटके तोड़ दिया।
- 13:22इसलिए मार रहे हैं।
- 13:24मटके तोड़ दिए तो जान लोगे क्या? क्या हुआ
- 13:27सेठ जी? क्या मसला है?
- 13:29रामू तुम बीच में मत पड़ो। इसने मेरे पांच
- 13:32मटके तोड़ दिए। एक-एक मटका ₹20 का था।
- 13:36नुकसान कौन भरेगा?
- 13:38सेठ जी मैंने तोड़े नहीं गिर गए गलती से।
- 13:43सुबह से कुछ खाया नहीं था। हाथ हिल गया।
- 13:47मुझे बीवी के लिए दवाई लेनी थी। दो दिन से
- 13:50बीमार है। मैंने आपसे एडवांस मांगा तो
- 13:54आपने डांट दिया।
- 13:56बीमारी सब झूठ है। काम करो या निकल जाओ
- 13:59यहां से।
- 14:00सेठ जी गलती सबसे होती है। आप इतने बड़े
- 14:04आदमी हो। कुछ दया भी तो रखिए। एक बूढ़े
- 14:07आदमी को मारना इंसानियत नहीं जालिमियत है।
- 14:11अरे रामू तू अपना काम संभाल। यह हीरो मत
- 14:14बन। ले जाओ इसे यहां से। वरना तुझे भी
- 14:17निकाल दूंगा बाजार से।
- 14:19सेठ जी बाजार आपका हो सकता है पर इंसानियत
- 14:23हर किसी का अधिकार है। बाबा चलिए मैं देख
- 14:29लूंगा। आपको दवाई के पैसे चाहिए ना?
- 14:31बेटा
- 14:33भगवान तुझे खुश रखे।
- 14:36तेरे जैसा आदमी आज के जमाने में मिलना
- 14:40मुश्किल है।
- 14:41आप घर जाइए बाबा। बीवी को दवाई खिलाइए।
- 14:45काम की चिंता मत कीजिए। जब मेरी अपनी
- 14:47दुकान खुल जाएगी ना मैं आपको जरूर नौकरी
- 14:50दूंगा।
- 14:53पहले अपनी दुकान तो खोल लो रामू फिर
- 14:55दुनिया को नौकरियां देना।
- 14:58जरूर खोलूंगा सेठ जी क्योंकि दिल से चला
- 15:01धंधा कभी बंद नहीं होता।
- 15:05[संगीत]
- 15:11आज क्या हुआ? इतने चुप क्यों हो जी? जरूर
- 15:15आज भी।
- 15:17क्या बताऊं कोमल आज भी वही हाल
- 15:22दिन भर धूप में बैठा रहा कोई
- 15:24[संगीत]
- 15:24दाम पूछ कर चला गया तो कोई हल्के से
- 15:27छिड़कर चला गया एक मटका नहीं बिका जब से
- 15:31भैरव का काम छोड़ा है लगता है धंधा ही रूठ
- 15:34गया है मुझसे
- 15:36देखिए आप हिम्मत मत हारिए भैरव का घमंड
- 15:39उसका साथ दे रहा है लेकिन आपकी मेहनत वो
- 15:43आपका साथ देगी आपका काम सच्चा [संगीत]
- 15:45अच्छा है बस थोड़ी सी देर है।
- 15:48कितनी देर कोमल एक-एक दिन कितना मुश्किल
- 15:52हो रहा है। तुम्हारे लिए अच्छी साड़ी नहीं
- 15:55खरीद पाता। गुड़िया का पेट भी ठीक से नहीं
- 15:58भर पाता। और अब तो मां की दवाई भी खत्म हो
- 16:02गई है।
- 16:04हां, कल सुबह तो जरूर देनी पड़ेगी। और उधर
- 16:07गुड़िया वो तो आज भी भूखी सोई है। उसके
- 16:11लिए एक नया जोड़ा भी नहीं ले सकते। बस यही
- 16:14सोचता हूं कि काश कुछ [संगीत] ऐसा हो जाए
- 16:17कि हमारी किस्मत पलट जाए जिसे मैं मां की
- 16:21दवाई ला सकूं और गुड़िया को खुश रख सकूं।
- 16:24चिंता मत [संगीत] करो स्वामी। वो ऊपर वाला
- 16:27सब देखता है। जब इंसान की कोशिश अच्छी
- 16:30होती है ना तो भगवान कोई ना कोई रास्ता
- 16:33जरूर [संगीत] दिखाता है। आप कल फिर जाइए।
- 16:37कोशिश मत छोड़ना।
- 16:39हां, तुम सही कहती हो। कल फिर जाऊंगा। कल
- 16:42तकलीफ है तो कल खुशियां भी आएंगी। मां और
- 16:45गुड़िया के लिए मुझे जीतना होगा।
- 16:53जंगल की हवा आज कुछ अलग सी थी। दूर तक
- 16:56अंधेरा घने पैरों के पीछे छिप कर बैठा लग
- 17:00रहा था। रामू धीरे-धीरे कदम बढ़ाता हुआ
- 17:03जंगल के बीच जा रहा था। उसके चेहरे पर
- 17:07थकान थी। [संगीत] पर आंखों में एक अजीब सा
- 17:10संकल्प भी। उसे पता नहीं था आज का यह दिन
- 17:13उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा।
- 17:17धुंधली सी रोशनी में [संगीत] रामू को एक
- 17:19गाय दिखाई देती है। वही गाय जो हर दिन
- 17:22उसके घर तक आती थी।
- 17:25अरे यह तो वही गाय है। रोज मेरे पास आती
- 17:29है। रोटी खाती है। फिर चुपचाप जंगल में खो
- 17:32जाती है। आज मैं इसका राज जरूर जानकर
- 17:35रहूंगा। देखता हूं यह आती कहां से है।
- 17:39गाय आगे बढ़ती है। रामू [संगीत] चुपके से
- 17:41उसके पीछे चल पड़ता है।
- 17:47लेकिन कुछ ही कदम बाद गाय अचानक पेड़ों के
- 17:50बीच गायब हो जाती है।
- 17:54अरे यह तो यहीं थी। कहां चली गई?
- 17:58तभी एक दर्द भरी करा उसके कानों तक
- 18:01पहुंचती है। एक दुबली पतली बूढ़ी मां
- 18:04लकड़ी का भारी गट्ठा उठाने की कोशिश कर
- 18:07रही होती है। उनके हाथ कांपते हैं। कमर
- 18:11दर्द से झुक जाती है।
- 18:12आ अब ये हाथ पैर भी साथ नहीं देते। कैसे
- 18:16ले जाऊंगी इन लकड़ियों को।
- 18:18रामू तुरंत भाग कर उनके पास पहुंचता है।
- 18:22मां रुक जाइए। आप अकेले या कैसे उठाएंगी?
- 18:25दीजिए। मैं मदद करता हूं।
- 18:28रामू एक ही झटके में लकड़ियों का गट्टा
- 18:30उठा लेता है। बूढ़ी मां उसे हैरानी से
- 18:33देखती हैं। दोनों जंगल के अंदर चल पड़ते
- 18:36हैं।
- 18:38कुछ ही देर में एक छोटी सी कुटिया सामने आ
- 18:41जाती है।
- 18:43रामू गट्ठा जमीन पर रखता है। तभी उसकी नजर
- 18:47एक कोने में बैठी गाय पर पड़ती है।
- 18:50अरे यह तो वही गाय है जो रोज मेरे पास आती
- 18:53है और मेरी रोटी खाती है।
- 18:56हां बेटा। यह मेरी गौरी है। बहुत मासूम
- 18:59है। तुम इतने उदास क्यों दिख रहे हो बेटा?
- 19:02क्या परेशानी है?
- 19:03मां, मैं चंदनपुर का कुम्हार हूं। मेरा
- 19:07नाम रामू है। मैं बहुत मेहनत करता हूं पर
- 19:10मेरे बर्तन कोई नहीं खरीदता। भैररो सेठ ने
- 19:13मेरी जिंदगी मुश्किल कर दी है। कहता है
- 19:16मेरी मिट्टी में दम नहीं। मेरी पत्नी भी
- 19:19दुखी है। कैसे गुजारा करूं मां?
- 19:23बेटा दुनिया का काम ही है बोलना। पर मैं
- 19:26तुम्हारे चेहरे पर मेहनत और ईमानदारी
- 19:29दोनों देख सकती हूं।
- 19:34मेरी बात ध्यान से सुनो। इस कुटिया के
- 19:37पीछे एक बड़ा पेड़ है। उसके नीचे एक छोटा
- 19:41सा जमीन का टुकड़ा है। जहां लोग जाने से
- 19:44डरते हैं। वहां की मिट्टी को देवी माटी
- 19:47कहते हैं। वह मिट्टी गर्मी से नहीं
- 19:51आशीर्वाद से पकती है। उस मिट्टी से जो
- 19:54बर्तन बनता है उसमें देवी का स्पर्श होता
- 19:57है।
- 19:58अम्मा क्या मैं?
- 20:00हां बेटा ले जाओ। पर याद रखना इस मिट्टी
- 20:03का इस्तेमाल सिर्फ सच्चाई और नेक इरादे से
- 20:06करना। [संगीत] तभी किस्मत बदलती है।
- 20:09मां आप मेरे लिए इतना क्यों कर रही हैं?
- 20:13क्योंकि बेटा तुमने जब कुछ नहीं था तब भी
- 20:16मेरी गौरी को रोटी का आखिरी टुकड़ा दिया।
- 20:19इंसान की नियत ही उसका भाग्य बदलती है।
- 20:22रामू का दिल भर आता है। उसने कभी सोचा
- 20:26नहीं था कि एक छोटी सी रोटी किसी दिन उसकी
- 20:29पूरी जिंदगी का मोर बन जाएगी। उसकी आंखों
- 20:32में उम्मीद की चमक लौट आती है। रामू घर
- 20:36जाता है। तुरंत एक टोकरी और कुदाल उठाता
- 20:39है। बूढ़ी मां के बताए हुए पेड़ के पास
- 20:42जाकर
- 20:46वह ध्यान से देवी माटी की मिट्टी उठाता
- 20:48है।
- 20:53थका हुआ लेकिन आंखों में एक नई चमक लिए
- 20:57रामू अपने सर पर मिट्टी की टोकरी में देवी
- 21:00माटी लिए आता है। झोपड़ी के बाहर उसकी
- 21:03पत्नी कोमल उसे चिंता से देखती है।
- 21:06स्वामी आपको इतनी देर कहां लग गई? मैं कब
- 21:09से आपका इंतजार कर रही थी और ये बोझ कैसा?
- 21:13शांत हो जाओ कोमल। मैं ठीक हूं। यह बोझ
- 21:17नहीं है। यह तो हमारी किस्मत है।
- 21:20किस्मत यह कैसी मिट्टी है स्वामी?
- 21:24पहले अंदर आओ। मुझे तुम्हें सब कुछ शुरू
- 21:27से बताना है। यह सफर बहुत खास था।
- 21:31रामू और कोमल घर के अंदर आते हैं। कोमल
- 21:35जल्दी से उसके लिए पानी लाती है। रामू थका
- 21:38हुआ है। पर उसकी आंखों में एक अजीब सी
- 21:41शांति है।
- 21:43रामू पानी पीता है। राहत की सांस लेता है।
- 21:47फिर कोमल को सारी बातें बताता है।
- 21:50तो यह मिट्टी यह आशीर्वाद है। भगवान ने
- 21:54हमारी सुन ली स्वामी। अब हम एक पल भी नहीं
- 21:58गवाएंगे। मैं तुरंत आपके लिए बर्तन बनाने
- 22:00की तैयारी करती हूं।
- 22:15आइए आइए। नए मजबूत और सुंदर मटके और
- 22:20बर्तन। इसकी गर्मी और ठंडक देखिए। इतनी
- 22:24बढ़िया मिट्टी के बर्तन आपको कहीं और नहीं
- 22:27मिलेंगे। एक बार इस्तेमाल करके देखिए
- 22:29बरसों चलेंगे। इन खूबसूरत बर्तनों से अपने
- 22:33घर को सजाइए।
- 22:36अरे रामू ये क्या चमत्कार है? ये बर्तन तो
- 22:40भैरव के बर्तनों से भी ज्यादा अच्छे हैं।
- 22:42कितने हल्के और मजबूत हैं। हां, रंग भी
- 22:46कितना गहरा है। कितने में दोगे रामू? बस
- 22:50वही दाम जो आम मिट्टी के दाम है। ₹5
- 22:55अरे भाई यह तो बहुत ठंडा है। बिल्कुल सेठ
- 22:58के मटके जैसे कितने का दिया?
- 23:01बस ₹5 बहन।
- 23:03₹5
- 23:04भैर अब सेठ तो ₹20 मांगता है। चलो मुझे दो
- 23:08दे दो भाई।
- 23:10पल भर में गांव वालों की भीड़ रामू की
- 23:13दुकान पर लग जाती है। रामू के बर्तनों की
- 23:16चमक और हल्कापन सबको बहुत पसंद आता है।
- 23:21रामू के चेहरे पर पहली बार मुस्कुराहट आती
- 23:24है। वो खुशी से मटका पैक करता है।
- 23:29जैसे ही शाम हुई, रामू ने अपनी सारी कमाई
- 23:33को संभाला और खुशी के मारे दौड़ा चला आया।
- 23:37घर के दरवाजे पर पहुंचते ही वह अपने
- 23:40उत्साह को रोक नहीं पाया और जोर से
- 23:42चिल्लाया।
- 23:43अरे मां कोमल जहां हो जल्दी आओ।
- 23:46रामू की आवाज सुनकर कोमल और बूढ़ी मां
- 23:49घबरा कर बाहर आई।
- 23:55क्या हुआ? कुछ हुआ है क्या? क्या घरे टूट
- 23:58गए या किसी से झगड़ा हो गया?
- 24:00अरे शांत हो जाओ। कुछ हुआ नहीं है बल्कि
- 24:03बहुत अच्छा हुआ है।
- 24:05तो जल्दी बताइए क्या हुआ?
- 24:08कोमल मां आज पहला दिन था और सारे के सारे
- 24:12मटके बिक गए।
- 24:13क्या सच में? हे भगवान ये तो बहुत अच्छी
- 24:17खबर है।
- 24:19देखा बेटा भगवान ने तेरी मेहनत का फल देना
- 24:22शुरू कर दिया है। उस गाय के रूप में भगवान
- 24:25ने ही रास्ता दिखाया है।
- 24:27हां कल और ज्यादा मटके बनाऊंगा। बस थोड़ा
- 24:30और पैसा जमा हो जाए, तो अपनी भट्टी की
- 24:32मरम्मत करवा लूं। फिर और भी मजबूत बर्तन
- 24:35बनेंगे।
- 24:37इधर रामू की आर्थिक स्थिति तेजी से सुधर
- 24:40रही थी। रामू के घड़ों की चर्चा दूर दराज
- 24:43के गांव तक पहुंच चुकी थी और दूसरी तरफ
- 24:46भैरव सेठ की हालत दिन-बदिन बिगड़ती जा रही
- 24:50थी।
- 24:50मालिक, मालिक [संगीत] सुना आपने? रामू
- 24:53कुमार के घड़े तो बाजार में छाए हुए हैं।
- 24:57लोग कह रहे हैं कि उसके घड़े ठंडे और
- 24:59सस्ते मिलते हैं। ग्राहक सुबह ही उसकी
- 25:02दुकान पर भीड़ लगा देते हैं।
- 25:05क्या वो रामू जिसने मेरे पास से काम छोड़ा
- 25:08था।
- 25:09अरे मैं तो सोचता था कि वह कुछ ही दिनों
- 25:13में भूखा मर जाएगा। उसे वापस आकर मेरे पैर
- 25:17पकड़ने पड़ेंगे। यह सब बकवास है।
- 25:21पर मालिक यह बकवास नहीं है। सच कह रहा
- 25:24हूं। सब लोग तो अब वहीं जा रहे हैं।
- 25:27उसके घरे आजकल पड़ोसी गांव तक जा रहे हैं।
- 25:31वो रात दिन काम कर रहा है।
- 25:33ठीक है। मैं भी देखता हूं अब यह कहां तक
- 25:36जाता है। कल से अपने घड़े और सस्ते बेचना।
- 25:40दाम इतने गिरा देना कि रामू को घाटा हो
- 25:43जाए। हम उसे टिकने नहीं देंगे।
- 25:48एक महीना बीत चुका है। रामू ने अब अपनी
- 25:51पुरानी झोपड़ी के बाहर एक छोटी साफ सुथरी
- 25:55दुकान बना ली है। दुकान के ऊपर एक नया
- 25:58बोर्ड लगा है जिस पर गर्व से लिखा है रामू
- 26:02कुम्हार के मिट्टी के घड़े ठंडे और मजबूत।
- 26:06दुकान पर ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ है।
- 26:10रामू ग्राहकों से बात कर रहा है। उसकी
- 26:12पत्नी कोमल घड़ों को साफ कर रही है और
- 26:15बूढ़ी मां भी हिसाब किताब में मदद कर रही
- 26:18है। उनकी छोटी बेटी गुड़िया एक ग्राहक को
- 26:22पानी पिला रही है। तभी माहौल में ठंडक की
- 26:25जगह गर्मी आ जाती है। भैरव सेठ अपने चमचों
- 26:28के साथ वहां से गुजरता [संगीत] है। रामू
- 26:31की कामयाबी देखकर उसका चेहरा गुस्से से
- 26:34लाल हो जाता है। तो रामू बड़े आदमी बन गए
- 26:38हो। शक्ल तो बदल गई है तेरी। वाह।
- 26:42सेठ जी आप बड़े हैं। मैं तो अभी भी सीख
- 26:46रहा हूं। पर जो आपने मेरे साथ अन्याय किया
- 26:49था उसका जवाब मैंने किसी चाल से नहीं
- 26:51बल्कि केवल अपनी मेहनत से दिया है।
- 26:54देखो तूने तो हद कर दी। अब मेरे पुराने
- 26:58ग्राहक भी तूने खींच लिए।
- 27:00सेठ जी मैंने किसी का ग्राहक नहीं खींचा।
- 27:04बाजार सबका है। यहां सब अपनी मेहनत का
- 27:07खाते हैं। जहां तक ग्राहक की बात है, जहां
- 27:11गुणवत्ता और ईमानदारी होती है, ग्राहक खुद
- 27:14ब खुद वहीं खींचा चला आता है। गुणवत्ता
- 27:19[हंसी]
- 27:20यह सब फालतू बातें हैं। तेरी यह छोटी सी
- 27:23दुकान मेरे गोदाम के सामने एक तिनके से
- 27:26ज्यादा कुछ नहीं है। मैं तुझे जड़ से
- 27:28उखाड़ फेंकूंगा। यह धमकी है रामू।
- 27:32सेठ जी आप बड़े आदमी होंगे। पर याद रखिए
- 27:36ईमानदारी की नींव पर बनी दुकान को कोई
- 27:38नहीं हिला सकता। आपकी दौलत आप ही ताकत है।
- 27:41पर हमारी ताकत हमारा काम है।
- 27:43भैरव सेठ के पास कोमल के साहस का कोई जवाब
- 27:47नहीं होता। वो अपमानित महसूस करता है।
- 27:49उसका क्रोध इतना गहरा है कि वह एक शब्द भी
- 27:52नहीं कह पाता। बस जलती हुई निगाहों
- 27:54[संगीत] से रामू और कोमल को देखता है और
- 27:57तेजी से मुड़कर वहां से चला जाता है।
- 28:05भैरव के जाते ही गांव वाले रामू की
- 28:08प्रशंसा करते हैं। रामू और कोमल एक दूसरे
- 28:11को देखकर विजय की एक शांत मुस्कान के साथ
- 28:14हंस पड़ते हैं। मां गर्व से उन्हें देखती
- 28:17है।
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This page contains the full transcript of गरीब कुम्हार की धानी किस्मत और रहस्यमयी घड़ा | MORAL STORIES | HINDI KAHANIYAN | HINDI STORIES by STORY MITRA , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,857 words across 517 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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