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molana manzoor mengal bayan | Maulana hannan Siddiqui ki mot | Maulana manzoor mengal — Transcript

by hadayatullahofficial · 1,076 words · 146 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00सलाउज
  2. 0:04बिल्ला शैतजीम
  3. 0:06बिस्मिल्लाहिर्रहमाहीम
  4. 0:13नूरदी
  5. 0:18सलादी
  6. 0:22मुस्तकीम
  7. 0:25अल्लाह सला मोहम्मद मोहम्मद कमा स
  8. 0:29इब्राहीम इब्राहीम इनद मजीद अल्लाह
  9. 0:34मोहम्मद आ मोहम्मद कमाक तला इब्राहीमला
  10. 0:38इब्राहीम इन हमीद मजीद
  11. 0:43बाहर से तशरीफ लाने वाले मुअजज़ उलमा इकराम
  12. 0:47और मौजज़ सामन जामिया के मुबनीन और मुसादीन
  13. 0:54जामिया से अकीद अकीदत रखने वाले हजरात
  14. 0:59अजीज तलबा और जामिया के फजला इकराम जो इस
  15. 1:03दफा फारग हो चुके हैं।
  16. 1:10आप में से कोई आठ साल यहां पढ़ा है। किसी
  17. 1:12ने 10 साल पढ़ा है। और कोई 2 साल दीगर
  18. 1:16मदारिस में मुख्तलिफ दर्जात पढ़ करके यहां
  19. 1:202 साल से पढ़ रहे हैं। कोई एक साल से दौर
  20. 1:23हदीस में आया हुआ है।
  21. 1:27आपके वालिदैन बहुत से हैं। आपके बड़े भाई
  22. 1:31किसी का आया है। किसी का वालिद साहब आया,
  23. 1:33किसी का चाचा आया है।
  24. 1:36वह खुशियां मना रहे हैं। अल्लाह उनकी
  25. 1:39खुशियों में इजाफ़ा करे। लेकिन मंजूर के
  26. 1:41लिए भी दुआ करें।
  27. 1:47यह दुनिया है।
  28. 1:52जो आपकी क्लास की रौनक हैं। जो आपकी क्लास
  29. 1:55की नूरानियत है।
  30. 1:59बाहर के लोगों से भी अर्ज करूंगा कि अब इन
  31. 2:01नूरानी चेहरों को देख तो लो और आसमान को
  32. 2:04चैलेंज करके कह दो और जमीन को पहाड़ों को
  33. 2:07बर बयाबो कि क्या यह मंजर आपको कहीं नजर
  34. 2:10आया है या आएगा?
  35. 2:15हमारे लोगों को सिर्फ मौली मंजूर की हंसी
  36. 2:18बातें की हंसी और मजाक की बातें उन्होंने
  37. 2:21सुनी है। लेकिन क्लास में कभी आ के रोने
  38. 2:24वालों को भी तो देख लो।
  39. 2:26आपने मौली मंजूर की गालियां और मजाक सुने
  40. 2:31लेकिन उसी क्लास में हंसी मजाक भी हो और
  41. 2:34उसमें छत को आसमानों पर वो उठा दे सरों पर
  42. 2:37उठा दे लेकिन उसी क्लास में आप आएंगे 510
  43. 2:40मिनट के बाद रोने वाले भी आपको मिलेंगे।
  44. 2:44बहरहाल
  45. 2:46आपके लिए दुआ कर सकता हूं। 10 12 दिन हो
  46. 2:49गए कि शायद मैं आपसे जुदा हूं।
  47. 2:59सरमाएदार यहां बैठे हुए हैं। बड़े-बड़े
  48. 3:02अफसर सरकारी भी बैठे हुए हैं।
  49. 3:05[नाक से की जाने वाली आवाज़] हुकूमत के
  50. 3:06मुख्तलिफ शोबों में तलाश करते रहो। ये चीज
  51. 3:09अगर आपको नजर आ जाए फिर बता दें।
  52. 3:14और उनके वालिदैन से भी मेरी गुजारिश होगी।
  53. 3:19आप मुझसे बिछड़ रहे। मैं अली मोहम्मद से
  54. 3:22बिछड़ चुका हूं।
  55. 3:25आज से 40 42 साल पहले आपसे मैंने अर्ज
  56. 3:30किया कि एक यतीम लड़का
  57. 3:34जो शायद मेरे क्लास में मौलाना अली
  58. 3:36मोहम्मद से पढ़ने वाले सबके कपड़े भी
  59. 3:38मुझसे अच्छे थे और सबके पास पैसों की भी
  60. 3:43सहूलत थी। जामे फारूकी में भी यही हाल था।
  61. 3:46लेकिन खुदा ने शायद उस यतीमी में अल्लाह
  62. 3:49ने कोई हिकमत रखी उस यतीमी का यही है कि
  63. 3:53अल्लाह पाक ने आप जैसे चश्म चिराग मुझे दे
  64. 3:56दिए।
  65. 3:58आपके आने पे खुशी है। आपके जाने पर आपके
  66. 4:02वालिदन को खुशी है। लेकिन जो आपके असातिजा
  67. 4:05को असातिजा हदीस को और जामिया को जो सदमा
  68. 4:08है। आप अंदाजा करें कि एक जमीन पर बेहतरीन
  69. 4:11किस्म की फसल तैयार हो गई और वो हरी भरी
  70. 4:14हो गई वो जमीन फसल से। फिर काश्तकार आकर
  71. 4:17के उस फसल को काटे। उस जमीन की रौनकें
  72. 4:20क्या रहेंगी? आप वो फल है कि आपको काट के
  73. 4:23मुझसे ले जा रहे हैं।
  74. 4:32और मौसम सर्दी का मौसम आ जाए। दरख्तों के
  75. 4:35पत्ते जड़ जाए तो उस दरख्त को कौन देखने
  76. 4:38को कौन किसका जी चाहता है?
  77. 4:42दरख्तों को देखा हुआ उनके पत्ते ना। पत्ते
  78. 4:45दरख्त से जुदा हो तो दरख्त उनके लिए रोए।
  79. 4:47और पत्ते खुद अपने लिए अपने साथ खुद अलग
  80. 4:50रोए कि हम दरख्त से किस तरीके पर अलग हो
  81. 4:53गए। यह जामे आपका है। लेकिन क्योंकि
  82. 4:55अल्लाह के फैसले हैं। व रजा बिल कजा वाजिब
  83. 4:59अल्लाह के फैसलों पर रजामंदी आप यहां से
  84. 5:03जाएंगे जाने के बाद मेहरबानी कर लेना।
  85. 5:05आजकल बड़ी सहूलत है। और अपने इस नालायक
  86. 5:08उस्ताद से राब्ता करना। सलाम कह देना कभी
  87. 5:11टेलीफोन के जरिए से।
  88. 5:17आपकी शादियां होंगी और आपको खुशी भी होगी।
  89. 5:20मुख्तलिफ इलाके वाले आपके दर्द से
  90. 5:22इस्तफादा भी करेंगे। आप मुफसिर भी बन गए,
  91. 5:25मुदिस भी बन गए। लोग आपके फजात से
  92. 5:29इस्तफादा करेंगे। मुबारकबाद हो। उनको उन
  93. 5:32अजीजों को, उन वालिदन को मुबारकबाद पेश
  94. 5:34करता हूं। आपके रिश्तेदारों को मुबारकबाद
  95. 5:37पेश करता हूं। लेकिन मेरे लिए सब्र की दुआ
  96. 5:39फरमाएं। हर साल यही खेल मेरे साथ मौलाना
  97. 5:42अब्दुल बासिद खेलता रहता है और यही खेल
  98. 5:45कारी उस्मान और मौत रहमान ये हजरात यही
  99. 5:49खेल होता है मैं बाहर के लोगों को बता
  100. 5:53दूंगा
  101. 5:54कि मकात जवल के अंदर एक हदीस है मर तुम
  102. 5:58जन्नत फीहा जब जन्नत के बागात से गुजरो तो
  103. 6:02उनमें रेस्ट करो मजे ले लो मर तुम जन्नत
  104. 6:06फीहा
  105. 6:07जन्नत के बागात से गुजरो तो वहां रेस्ट
  106. 6:10करो और मजे ले लो। कालू रियाज़ जन्नत या
  107. 6:13रसूल अल्लाह हज़रत जन्नत के बागात क्या है?
  108. 6:15काल ही जिक्र जहां पर जिक्र के हलके कायम
  109. 6:18हो। बुखारी से बड़ा कायनात के अंदर कोई
  110. 6:21जिक्र भी नहीं है। तिरमिजी नस और अबू दाऊद
  111. 6:24इब्न माजद से भी नहीं।
  112. 6:25[नाक से की जाने वाली आवाज़] मेरी क्लास
  113. 6:26सिफ़तुल्लाह के लिए और मौलवी इदरीस के लिए
  114. 6:29भी रोएगी और आपके लिए भी मेरी क्लास
  115. 6:31रोएगी। मेरे क्लास के दररो दीवार भी और
  116. 6:34जिन्होंने क्लास बनाई है भाई शाहिद साहब
  117. 6:37दीगर हजरात जिनका ताुन रहा है और
  118. 6:42हाजी अब्दुल राजा साहब दीगर यहां हाजी
  119. 6:44जमान हाजी साले जितने मुख्तलफ़ हमारे साथी
  120. 6:47है हाजी मोहम्मद युसुफ साहब मैं नाम नहीं
  121. 6:50ले सकता मुझे माफ़ कीजिएगा अपने क्लास से
  122. 6:53आज जाकर के जब क्लास लगती है उस वक्त ये
  123. 6:56400 500 लड़के ये नूरानी चेहरे जिस वक्त
  124. 7:00बैठे हुए होते हैं उस वक्त उस वक्त भी आ
  125. 7:02के इनको देख लो और आज भी उस क्लास को जाकर
  126. 7:05के देख लो कि ये उस क्लास है। क्लास तो
  127. 7:07आपके सामने बोलेगी नहीं। अगर उस क्लास के
  128. 7:10सामने मोहम्मद रसूल्लाह आ जाए तो फिर उनके
  129. 7:13सामने वो रोएगी और अबू बकर उमर उस्मान अगर
  130. 7:16उस क्लास के सामने आ जाए और जामिया की चार
  131. 7:19चार दीवारी के सामने जब ये तलबा चले जाते
  132. 7:22हैं हमारे मदारिस में तीन महीने की
  133. 7:25छुट्टियां होती है। मैं छुट्टी नहीं करता।
  134. 7:27एक महीने मेरी बदबखती है कि बस मेरे जलसों
  135. 7:29में किसी के यहां खत्म बुखारी किसी के
  136. 7:31यहां खत्म बिना है। असबाब खत्म करके मैं
  137. 7:34इनसे जुदा हो चुका हूं। यहां से सीधा जाकर
  138. 7:37अपने कुतुब खाने में रोता रहा हूं। जिस
  139. 7:39दिन मेरा सबक पूरा हो गया है। मैं अपने
  140. 7:42कुतुब खाने में रोता रहा हूं। जहाजों में
  141. 7:44घूम रहा हूं, फिर रहा हूं। लेकिन दिल मेरा
  142. 7:46इस तरीके पर कांप रहा है। अल्लाह ताला
  143. 7:49मेरे साथियों को भी सबरे जमील अता फरमाए।
  144. 7:52अल्लाह आपके इल्म में अमल में बरकतें
  145. 7:54नाज़िल फरमाए। अल्लाह ताला आपकी उम्र में
  146. 7:56बरकत नाज़िल फरमाए।

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