Madhya Pradesh के वीरों का इतिहास | MP Special GK | MP History for MPPSC EXAMS | By Hari Sir — Transcript
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- 0:00नमस्कार साथियों, मैं हरी सिंह राजपूत आप
- 0:03सभी के लिए एक बेहद ही शानदार क्लास लेकर
- 0:05आया हूं और इस क्लास में हम लोग एमपी
- 0:08हिस्ट्री स्पेशल एक पूरा का पूरा वीडियो
- 0:10कवर करेंगे जिसमें मैं आपको आप देख सकते
- 0:12हैं लिखा है मध्य प्रदेश के वीरों का
- 0:14इतिहास। यानी इस वीडियो में हम उन सभी
- 0:17वीरों के बारे में बात करेंगे। में उन सभी
- 0:19वीरों के इतिहास के बारे में बात करेंगे
- 0:21जिन्होंने मध्य प्रदेश के इतिहास में अपना
- 0:24महत्वपूर्ण योगदान रखा है। साथ-साथ जो
- 0:26एमपीपीएससी के एग्जाम के लिए बहुत ही
- 0:29महत्वपूर्ण है। चाहे वह रानी दुर्गावती
- 0:31हो, चाहे वह राजा शंकर शाह हो, चाहे वह
- 0:33राजा संग्राम शाह गोंड हो, चाहे वह रानी
- 0:36अवंती बाई हो, चाहे वह भीमा नायक हो, चाहे
- 0:38वो टंट्या भील हो, चाहे वो शहादत खान हो,
- 0:41जितने भी हमारे क्रांतिकारी रहे हैं,
- 0:43जितने भी हमारे वीर योद्धा रहे हैं,
- 0:45जिन्होंने मध्य प्रदेश के इतिहास में अपना
- 0:47महत्वपूर्ण योगदान दिया है, उन सभी को इस
- 0:50वीडियो में हम लोग समझने वाले हैं। आप देख
- 0:52सकते हैं रानी कमलापति भी इसमें हैं। इसके
- 0:55अलावा चंद्रशेखर आजाद भी इसमें हैं। यानी
- 0:57इस पूरे वीडियो में हम इन सभी की बात करने
- 0:59वाले हैं। यह क्लास काफी धमाकेदार होने
- 1:02वाली है। तो जुड़े रहिए इस वीडियो में।
- 1:04लेकिन इससे पहले मैं आपको बता दूं हमारा
- 1:06एक शानदार ऑफर चल रहा है। देखिए हमारा
- 1:08शानदार ऑफर क्या है कि अभी हमारा एक बैच
- 1:10ल्च हुआ है जिसका नाम है आरंभ 17.0।
- 1:14आरंभ 17.0 याद रखिएगा प्री से लेके
- 1:16इंटरव्यू तक का वन स्टॉप सॉल्यूशन। यानी
- 1:19इसमें आपको मिलेगा वन स्टॉप सॉल्यूशन।
- 1:21प्री से लेके इंटरव्यू तक की पूरी तैयारी
- 1:23की जिम्मेदारी स्टडी आईक्यू और हमारी है।
- 1:26इस बैच में आपको लाइव क्लासेस मिलेगी।
- 1:29लाइव क्लासेस के साथ-साथ आपको रिकॉर्डेड
- 1:31क्लासेस मिलेगी और बहुत कुछ इसमें आपको
- 1:32मिलने वाला है। आपको करना क्या है? आप
- 1:34मेरा रेफरल कोड यूज़ कर सकते हैं। हरी
- 1:36लाइव। जैसे ही आप मेरा रेफरल कोड हरी लाइव
- 1:39यूज़ करेंगे आपको मैक्सिमम इस पर डिस्काउंट
- 1:42भी मिल सकता है। इसके साथ-साथ क्योंकि इस
- 1:45समय न्यू ईयर सेल चल रही है। जैसा कि आप
- 1:48सबको पता है आज 31 दिसंबर है और कल से
- 1:51शुरू होने वाला है नया साल और स्टडी
- 1:53आईक्यू दे रहा है आपको नव वर्ष पर ढेर
- 1:56सारे ऑफर दे रहा है। जिसमें आपको बता दूं
- 1:58मैं कि सबसे पहले तो आपको मिल रहा है जो
- 2:00हमारी फीस है उस पर 50% का ऑफ। यानी अगर
- 2:03आप आज 12:00 बजे से पहले ऑफर यानी कोई भी
- 2:06कोर्स एमबीपीएससी का परचेस करते हैं तो
- 2:08आपको 50% का ऑफ मिलने वाला है। दूसरी
- 2:10इंपॉर्टेंट चीज कोई भी कोर्स परचेस करने
- 2:13पर आपको डबल वैलिडिटी मिलने वाली है। यानी
- 2:15जो भी वैलिडिटी है कोर्स की वो डबल हो
- 2:18जाएगी। और तीसरी खास बात इसमें है जो आपको
- 2:20याद रखना है कि कोई भी कोर्स स्टडी आईक्यू
- 2:24का जो आप खरीदते हैं जो ₹10,000 से अधिक
- 2:26का है। कितने का? ₹10,000 से अधिक का है।
- 2:29उसमें आपको श्यर्ड गिफ्ट मिलेंगे। जैसे
- 2:32iPhone मिल सकता है, टैबलेट मिल सकता है,
- 2:34एयरपड्स मिल सकते हैं। तो ढेर सारे गिफ्ट
- 2:36स्टडी आईक्यू की टीम के द्वारा रखे गए
- 2:38हैं। बस यह याद रखना है कि जो यह सेल है
- 2:42याद रखिएगा यह 4 जनवरी तक है। कितने तक
- 2:44है? 4 जनवरी तक है। तो आपको याद रखना है
- 2:46कि आप कोशिश कीजिए कि आज से 4 जनवरी तक जो
- 2:50है आप अपने मनपसंद कोर्स को एनरोल कर लें।
- 2:53तो आइए हम लोग क्लास को कंटिन्यू करते हैं
- 2:55और इस क्लास में हम लोग पढ़ने वाले हैं
- 2:58एक-एक करके सभी मध्य प्रदेश के वीरों के
- 3:00इतिहास के बारे में।
- 3:02थैंक यू।
- 3:12नमस्कार साथियों, आप सभी का एमपीबीएससी
- 3:15स्टडी आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है।
- 3:17उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे होंगे और आप
- 3:19सभी की तैयारी बेहतर चल रही होगी। दोस्तों
- 3:22मध्य प्रदेश के वीरों के इतिहास की सीरीज
- 3:24में आज हम बात करने वाले हैं मातृभूमि के
- 3:27सच्चे सपूत मातृभूमि के सच्चे वीर बात
- 3:30करने वाले हम लोग चंद्रशेखर आजाद के बारे
- 3:33में। यूं तो चंद्रशेखर आजाद के बारे में
- 3:36आप लोगों ने पहले पढ़ा होगा। लेकिन थोड़ी
- 3:38सी बात हम लोग भी करेंगे कि चंद्रशेखर
- 3:40आजाद जिन्हें हम शहीद के नाम से जानते
- 3:43हैं। तो सही चंद्रशेखर आजाद कौन थे? और
- 3:45किस प्रकार उन्होंने जो है स्वतंत्रता
- 3:47आंदोलन में अपना योगदान दिया। आज के हम इस
- 3:50लेक्चर में शहीद चंद्रशेखर आजाद के बारे
- 3:52में बात करेंगे। एक और इंपॉर्टेंट बात कि
- 3:55शहीद एआम कहा जाता है भगत सिंह को और शहीद
- 3:58कहा जाता है चंद्रशेखर आजाद को। शहीद
- 4:00चंद्रशेखर आजाद और शहीद एआम भगत सिंह
- 4:03दोनों में थोड़ा सा डिफरेंस याद रखिएगा।
- 4:05अब कौन है चंद्रशेखर आजाद और किस तरीके से
- 4:07इन्होंने क्रांतिकारी आंदोलन में अपना
- 4:10योगदान दिया। भारत की आजादी में इन्होंने
- 4:12अपना योगदान दिया। तो आइए चर्चा करते हैं
- 4:14चंद्रशेखर आजाद की। सबसे पहले चंद्रशेखर
- 4:17आजाद के बारे में हम उनका बायोडाटा देखते
- 4:19हैं कि वह कौन थे? उनके पिताजी का नाम
- 4:21क्या था? तो इनका पूरा नाम था चंद्रशेखर
- 4:24तिवारी। नंबर वन आपको याद रखना है कि
- 4:27चंद्रशेखर आजाद जो हैं उनका पूरा नाम क्या
- 4:29था? चंद्रशेखर तिवारी था। इनके पिता का
- 4:31नाम याद रखिएगा इनके पिता का नाम था पंडित
- 4:34सीताराम तिवारी। पंडित सीताराम तिवारी कौन
- 4:37थे? पंडित सीताराम तिवारी उनके पिता का
- 4:39नाम था। और पंडित सीताराम तिवारी के घर
- 4:42में 23 जुलाई याद रखिएगा 23 जुलाई 1906 को
- 4:46जन्म होता है चंद्रशेखर आजाद का। तो
- 4:49चंद्रशेखर आजाद का जन्म कब हुआ था? 23
- 4:51जुलाई को और 23 जुलाई 1906 को इनका जो
- 4:54जन्म है वो हुआ था एक गांव है जिसका नाम
- 4:56है भाबरा गांव। भाबरा गांव पहले झाबुआ
- 5:00जिले में आता था। लेकिन वर्तमान में यह जो
- 5:02है वो अली अलीराजपुर मध्य प्रदेश का
- 5:04हिस्सा है। याद रखिएगा। सवाल ये उठता है
- 5:07कि चंद्रशेखर आजाद और उनकी जो फैमिली है
- 5:10वो यहां पे क्या कर रहे हैं? क्योंकि कहा
- 5:12जाता है कि उनका जो मूल स्थान है जहां से
- 5:14वो लोग आए थे वो उत्तर प्रदेश था। तो आइए
- 5:17चर्चा करते हैं। तो सबसे पहले देखते हैं
- 5:19पहले उनकी माता का नाम भी देख लेते हैं
- 5:21क्योंकि एग्जाम में कई बार पूछा गया है कि
- 5:23उनकी माता का नाम क्या था? जगरानी देवी।
- 5:24तो इसमें हमने अभी चार चीजें जान ली। नंबर
- 5:26वन उनका बर्थ हुआ है 23 जुलाई 1906 को
- 5:30भाबरा ग्राम में। और भाबरा ग्राम पड़ता
- 5:31है। वर्तमान अलीराजपुर जिले के याद रखिएगा
- 5:35अलीराजपुर जिले में याद रखिएगा भाबरा
- 5:37ग्राम है। पहले एक्चुअली में यह झाबुआ
- 5:39ग्राम झाबुआ जिले में आता था जिसकी वजह से
- 5:41आपको कंफ्यूजन हो सकती है। और इस भाव जो
- 5:45गांव है इसका नाम वर्तमान में क्या कर
- 5:47दिया गया? चंद्रशेखर आजाद नगर। चंद्रशेखर
- 5:50आजाद नगर कर दिया गया है। उनके बर्थ की
- 5:53वजह से चंद्रशेखर आजाद नगर। ठीक है? तो
- 5:55चंद्रशेखर आजाद नगर किसका नाम है? भाबरा
- 5:58ग्राम का है जो कि वर्तमान में मध्य
- 6:00प्रदेश के अलीराजपुर जिले में आता है। अब
- 6:02आप इस तस्वीर को देखिए। क्या इस तस्वीर से
- 6:05खूबसूरत कोई दूसरी तस्वीर हो सकती है?
- 6:08क्या यह जो शख्स आपको दिख रहा है जो हमेशा
- 6:10अपनी मूछों पे ताव देते हुए आपको नजर
- 6:12आएंगे। यही है हमारे द ग्रेट चंद्रशेखर
- 6:15आजाद। वही चंद्रशेखर आजाद जिन्होंने
- 6:18सोंडर्स की हत्या में अपना बहुत
- 6:20इंपॉर्टेंट रोल प्ले किया। जिन्होंने
- 6:21वायसराय को मारने का प्रयास किया।
- 6:23जिन्होंने एक बहुत बड़ी पार्टी बनाई जिसका
- 6:26नाम था हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन
- 6:28पार्टी। तो आइए चर्चा करते हैं चंद्रशेखर
- 6:31आजाद की। तो चंद्रशेखर आजाद के जो फैमिली
- 6:34थी वो बेसिकली उत्तर प्रदेश के उन्नाव
- 6:36जिले से बिलोंग करती थी। उत्तर प्रदेश में
- 6:38उन्नाव जिले में एक बदर गांव था। वहां के
- 6:40ये लोग रहने वाले थे। लेकिन वहां पे भीषण
- 6:43अकाल पड़ा और अकाल के दौरान ये लोग कहां आ
- 6:45जाते हैं? अकाल के दौरान यह मध्य प्रदेश
- 6:47के भाबरा ग्राम में आ जाते हैं। अगर आप
- 6:50मध्य प्रदेश से बिलोंग करते हैं या आपको
- 6:52पता है कि जो झाबुआ वाला पार्ट है
- 6:54अलीराजपुर वाला वो पश्चिमी मध्य प्रदेश का
- 6:57पार्ट है और इस पश्चिमी मध्य प्रदेश में
- 7:00सबसे ज्यादा पाए जाते हैं भील। ये यानी
- 7:03भील जनजाति का क्षेत्र था। क्योंकि आसपास
- 7:06भीलों का क्षेत्र था। इसीलिए यहां पर
- 7:08चंद्रशेखर आजाद ने क्या किया था? यहां पर
- 7:10धनुष बाण चलाना सीखा। निशाना लगाना सीखा।
- 7:13यानी चंद्रशेखर आजाद का जो बचपन है वो
- 7:16भीलों के साथ बीता जो जन्म से ही बहुत
- 7:18अच्छे तीरंदाज होते हैं, बहुत अच्छे
- 7:21निशांची होते हैं और वीर प्रवृत्ति के
- 7:23होते हैं। तो उनको वो पूरा एनवायरमेंट
- 7:25मिला जिससे कि उनकी जो मानसिकता है वो
- 7:27एकदम वीरता वाली हो गई। तो ये तो उनका
- 7:30इंट्रोडक्शन हो गया। कहां से बिलोंग करते
- 7:32थे। ठीक है? कहां से आए थे? उन्नाव जिले
- 7:34के बदरगांव से आए थे। और भावरा जो कि
- 7:36वर्तमान अलीराजपुर जिले में है वहां पे बस
- 7:38गए थे। अब बात करते हैं इनकी प्रारंभिक
- 7:40शिक्षा की। इनका जो प्राइमरी एजुकेशन है
- 7:42वह भाबवरा गांव में हुआ हुआ था और भाबरा
- 7:45गांव जिसे हम वर्तमान में अलीराजपुर नगर
- 7:47चंद्रशेखर आजाद नगर के नाम से जानते हैं।
- 7:49इसके बाद इन्होंने आगे की शिक्षा के लिए
- 7:51याद रखिएगा बनारस गए। बनारस में एक कॉलेज
- 7:54है जिसको हम बोलते हैं क्वींस कॉलेज। याद
- 7:56रखिएगा यह बहुत इंपॉर्टेंट हो सकता है। तो
- 7:58क्वींस कॉलेज से इन्होंने अपना हायर
- 8:01एजुकेशन कंप्लीट किया क्वींस कॉलेज में।
- 8:04और इसी क्वींस कॉलेज में पढ़ते हुए एक
- 8:05घटना होती है जिसमें हम अभी चर्चा करेंगे।
- 8:08बनारस बनारस में जब ये थे क्वींस कॉलेज
- 8:11में जब ये स्टडी कर रहे थे उसी समय
- 8:13इन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन के बारे में
- 8:14जाना और गांधी जी के असहयोग आंदोलन के
- 8:16बारे में सुना और याद रखिएगा इन्होंने
- 8:19अपने पहली बार इन्होंने जिस आंदोलन से खुद
- 8:22को जोड़ा वो था राष्ट्रीय आंदोलन और खासकर
- 8:24गांधी जी का असहयोग आंदोलन।
- 8:271920 में गांधी जी ने एक आंदोलन चलाया था
- 8:29जिसे हम असहयोग आंदोलन के नाम से जानते
- 8:31हैं और इस आंदोलन के माध्यम से गांधी जी
- 8:34ने कहा था कि अगर आप लोग मेरा एक साल तक
- 8:36समर्थन देंगे तो एक साल के अंदर मैं
- 8:38अंग्रेजों को भारत से खदेड़ दूंगा यानी
- 8:41भारत अंग्रेज छोड़ने के लिए मजबूर हो
- 8:43जाएंगे गांधी जी ने यह असहयोग आंदोलन
- 8:45चलाया। अब धीरे-धीरे समय बीता लेकिन
- 8:48आंदोलन बहुत तेजी से बढ़ा। आंदोलन जब तेजी
- 8:51से बढ़ रहा था बाद में आपने सुना होगा एक
- 8:53घटना होती है जिसे हम चौरीचौरा कांड के
- 8:55नाम से जानते हैं और उसकी वजह से गांधी जी
- 8:57ने अपना असहयोग आंदोलन वापस ले लिया। जब
- 9:00गांधी जी ने अपना असहयोग आंदोलन वापस ले
- 9:02लिया जिसकी वजह से हमारे चंद्रशेखर जो
- 9:04आजाद हैं वो क्या होते हैं? वो उनको बड़ा
- 9:07दुख पहुंचता है कि क्यों गांधी जी ने अपना
- 9:09आंदोलन वापस ले लिया? एक अच्छा मौका था
- 9:11अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने का। तो 1921
- 9:14में असहयोग आंदोलन के दौरान वह पहली बार
- 9:16गिरफ्तार हुए। यानी अगर कभी पूछा जाए पहली
- 9:18बार चंद्रशेखर आजाद किस आंदोलन से जुड़े
- 9:21असहयोग आंदोलन से 1921 में और 1921 में जब
- 9:24वो एक बार विरोध कर रहे थे ब्रिटिश सरकार
- 9:27का तभी उन्हें कर लिया गया गिरफ्तार।
- 9:29गिरफ्तार जब उन्हें किया गया तब न्यायाधीश
- 9:32ने उनसे पूछा कि भैया न्यायाधीश पूछता है
- 9:36कि उनका नाम क्या है? तो चंद्रशेखर आजाद
- 9:38कहते हैं मेरा नाम है आजाद।
- 9:42न्यायाधीश पूछता है आपके पिता का नाम क्या
- 9:44है? तो चंद्रशेखर आजाद कहते हैं
- 9:46स्वतंत्रता।
- 9:48न्यायाधीश पूछता है आपका घर कहां है? आपका
- 9:51निवास क्या है? तो वह कहते हैं जेलखाना और
- 9:55तभी से क्योंकि उन्होंने भरे कोर्ट में
- 9:58न्यायाधीश के समक्ष वीरतापूर्ण तरीके से
- 10:00कहा कि मैं आजाद हूं। मेरे पिता का नाम
- 10:03स्वतंत्रता है और मेरा घर है जेलखाना।
- 10:05न्यायाधीश ने उनको सजा दी। और यहीं से याद
- 10:08रखिएगा उनका नाम पड़ गया था चंद्रशेखर
- 10:10आजाद। उनके नाम के साथ जुड़ गया चंद्रशेखर
- 10:13तिवारी से चंद्रशेखर आजाद क्योंकि
- 10:15उन्होंने खुद को आजाद बोल दिया। अब
- 10:17क्योंकि जब उन्होंने न्यायाधीश को इस
- 10:19तरीके से कहा तो यहां पर न्यायाधीश के
- 10:21द्वारा उनको सजा दी गई थी 15 बेत की।
- 10:24कितने की? 15 बेत की सजा दी गई। अभी उनकी
- 10:27उम्र ज्यादा नहीं थी और उनके ऊपर 15 बेत
- 10:29चलाए गए और जब उनके ऊपर बेत मारे जा रहे
- 10:32थे तो वह कह रहे थे भारत माता की जय।
- 10:35गांधी जी जिंदाबाद। भारत माता की जय। तो
- 10:40इस प्रकार चंद्रशेखर आजाद ने वह 15 वैदत
- 10:42पूरे के पूरे जो है खाए लेकिन उफ तक नहीं
- 10:45किया और ना ही उन्होंने उस दर्द को बयां
- 10:47किया और वह अपना मूछ पे ताव देते हैं और
- 10:51क्योंकि उन्होंने 15 वेद खाए तो उनको कुछ
- 10:53आना कुछ पैसे उनको सरकार द्वारा दिए गए
- 10:55जिस क्योंकि उन्होंने वह बैत खाए थे लेकिन
- 10:57उन पैसों को वो उसी अधिकारी के मुंह पर
- 11:00मारकर वहां से चले गए। तो इस प्रकार उनका
- 11:02नाम पड़ा था आजाद। आपको याद रखना है। ठीक
- 11:04है? तो एक इंपॉर्टेंट पार्ट यह हो गया। अब
- 11:07आते हैं कि वह आगे क्रांतिकारी आंदोलन से
- 11:10कैसे जुड़ते हैं? क्योंकि पहले गांधी जी
- 11:12के साथ जुड़े उन्हें लग रहा था कि गांधी
- 11:14जी का यह आंदोलन हमें आजादी दिला देगा।
- 11:16लेकिन गांधी जी ने जब असहयोग आंदोलन बंद
- 11:18कर दिया तब शुरुआत होती है दूसरे
- 11:20क्रांतिकारी आंदोलनों की। आइए चर्चा करते
- 11:23हैं। गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन के
- 11:25निलंबन ने उन्हें निराश कर दिया क्योंकि
- 11:27गांधी जी ने अचानक असहयोग आंदोलन को बंद
- 11:30कर दिया। चंद्रशेखर आजाद के साथ-साथ भारत
- 11:32के बहुत बड़े-बड़े नेता जैसे मोतीलाल
- 11:34नेहरू और मोतीलाल नेहरू का नाम आपने सुना
- 11:37होगा सीआर दास यानी चित्रंजन दास जैसे
- 11:39नेताओं ने गांधी जी के इस फैसले का विरोध
- 11:42किया था। उन्हीं में चंद्रशेखर आजाद हैं
- 11:44जिनको बुरा लगा कि यार गांधी जी ने क्यों
- 11:46यह आंदोलन समाप्त कर दिया? उसके बाद क्या
- 11:48होता है? कहानी शुरू होती है। कहानी कैसे
- 11:51शुरू होती है कि अभी जो भारत के
- 11:53रिवोल्यूशनरी थे, क्रांतिकारी थे, वह
- 11:55गांधी जी का साथ दे रहे थे। लेकिन अब
- 11:58बंगाल,
- 12:00बिहार और यूपी इन तीनों जगह के
- 12:04क्रांतिकारी जो है इकट्ठे होते हैं और
- 12:06इकट्ठे होकर एक जगह में मीटिंग बुलाते हैं
- 12:08जिसका नाम होता है कानपुर। तो कानपुर में
- 12:11क्रांतिकारियों की एक मीटिंग होती है और
- 12:13मीटिंग में यह तय होता है कि गांधी जी ने
- 12:15यह जो आंदोलन बंद किया है इस तरीके से अब
- 12:18हमको आजादी नहीं मिलने वाली और अगर हमें
- 12:20आजादी चाहिए तो अब हमें हथियारों का उपयोग
- 12:22करना पड़ेगा और अब हमें सीधा अंग्रेजों से
- 12:26लड़ना पड़ेगा। इसी सीक्वेंस में जब ये
- 12:28बातें हो रही थी तो इसी सीक्वेंस में एक
- 12:30इंपॉर्टेंट काम होता है। 1924 में कानपुर
- 12:33में एक आर्मी यानी एक संगठन का निर्माण
- 12:36होता है जिसे हम लोग जनरली हिंदुस्तान
- 12:38रिपब्लिकन एसोसिएशन यानी एचआरए के नाम से
- 12:41जानते हैं। एग्जाम में क्वेश्चन पूछा जाता
- 12:43है कि एचआरए कब बना था? याद रखिएगा। तो
- 12:45एचआरए बना था 1924 में और एचआरए के जो
- 12:48फाउंडर हैं उनका नाम था सचिंद्र सान्याल।
- 12:51क्या नाम था बच्चों? सचिंद्र सान्याल।
- 12:54सचिंद्र सान्याल के द्वारा एक क्रांतिकारी
- 12:56संगठन बनाया गया कानपुर में 1924 में और
- 12:59इस संगठन का नाम था एचआरए यानी हिंदुस्तान
- 13:02रिपब्लिकन एसोसिएशन और इस एसोसिएशन से
- 13:04बड़े-बड़े क्रांतिकारी जुड़े जिसमें पंडित
- 13:06राम प्रसाद बिस्मिल राजेंद्र लहड़ी अशफाक
- 13:10उल्लाह खान जैसे लोग थे और उसी में शामिल
- 13:12हैं हमारे शहीद चंद्रशेखर आजाद। अब
- 13:16सचिंद्र सान्याल के द्वारा यह पार्टी बनाई
- 13:18गई और इस पार्टी ने अपना उद्देश्य रखा कि
- 13:20हम हथियारों के दम पर भारत की आजादी
- 13:22प्राप्त करेंगे। ठीक है? तो बाद में 1928
- 13:25में एक उन्होंने इस पार्टी को रिफॉर्म
- 13:27किया था। वो मैं आगे आपको बताऊंगा। अभी आप
- 13:29देख सकते हैं। 1928 में उन्होंने एक और
- 13:31पार्टी बनाई थी जिसका नाम था हिंदुस्तान
- 13:33सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। वो क्यों
- 13:36बनानी पड़ी? अभी हम इस पे चर्चा करेंगे।
- 13:39अब होता क्या है कि उन्होंने पार्टी बना
- 13:41ली। पार्टी बना ली तो कुछ ना कुछ घटनाक्रम
- 13:43तो करना पड़ेगा क्योंकि एचआरए यानी
- 13:45हिंदुस्तान रिपब्ल हिंदुस्तान
- 13:48रिपब्लिकन एसोसिएशन बन चुका है तो कुछ ना
- 13:50कुछ तो करना पड़ेगा। सरकार को जवाब तो
- 13:52देना पड़ेगा और इसी क्रम में चंद्रशेखर
- 13:55आजाद के जो मेन क्रांतिकारी घटना है वो
- 13:57आपको मैं बताने वाला हूं। ध्यान से
- 13:59सुनिएगा आप। पहला जो उनका काम है वो है
- 14:02काकोरी ट्रेन डकैती 1925। इसको वर्तमान
- 14:06में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसका नाम बदल
- 14:08दिया है। इसको बोलते हैं काकोरी ट्रेन
- 14:10एक्शन डे। काकोरी ट्रेन एक्शन डे कब हुआ
- 14:12था? 9 अगस्त 1925 को। क्या है यह
- 14:15घटनाक्रम? आइए इस घटनाक्रम को समझते हैं।
- 14:18इस घटनाक्रम में क्या होता है कि एचआरए के
- 14:22जितने भी लोग थे उन्होंने एक प्लान बनाया
- 14:24कि हम सरकारी खजाने को लूटेंगे। तो एक
- 14:26ट्रेन है जो कि जाती थी लखनऊ से सहारनपुर।
- 14:29लखनऊ से सहारनपुर एक ट्रेन जाती थी दो
- 14:32स्टेशनों के बीच लखनऊ और जाती थी
- 14:34सहारनपुर।
- 14:36तो लखनऊ से सहारनपुर जब ट्रेन जा रही थी
- 14:38और इस ट्रेन में सरकारी खजाना था। ठीक है?
- 14:42इस ट्रेन का नाम था एट डाउन ट्रेन। क्या
- 14:45नाम था? एट डाउन ट्रेन थी। और इस ट्रेन
- 14:48में दोनों स्टेशनों के बीच एक स्टेशन
- 14:51पड़ता था। उसका नाम था काकोरी स्टेशन जो
- 14:53कि उत्तर प्रदेश में पड़ता है। तो काकोरी
- 14:55नामक स्टेशन पर यह प्लान किया गया कि हम
- 14:58इस स्टेशन पर क्या करेंगे? इस ट्रेन को
- 15:00लूटेंगे क्योंकि इस ट्रेन में एट डाउन
- 15:02ट्रेन में जा रहा था सरकारी खजाना। तो इस
- 15:05सरकारी खजाने को एचआरए के द्वारा लूटने का
- 15:08प्रयास किया गया। इसमें क्या है? सरकारी
- 15:10खजाना। अब कौन लोग लूटने के लिए आए हैं?
- 15:13एचआरए। एचआरए कौन है? हिंदुस्तान
- 15:15रिपब्लिकन एसोसिएशन जो संगठन जिसे सचिंद्र
- 15:18सान्याल के द्वारा बनाया गया। एचआरए ने
- 15:20अपने जीवन का पहला काम किया। पहला काम
- 15:23क्या किया? कि इस काकोरी नामक स्टेशन पर
- 15:25उन्होंने इस ट्रेन को क्या किया? लूट
- 15:27लिया। इस घटना को भारतीय इतिहास में क्या
- 15:30कहते हैं? इस घटना को भारतीय इतिहास में
- 15:32बोलते हैं काकोरी कांड या इसको बोलते हैं
- 15:34काकोरी ट्रेन एक्शन डे। तो यह था काकोरी
- 15:37कांड जो कि किस दिन हुआ था? काकोरी कांड
- 15:39हुआ था 9 अगस्त 1925 को। याद रखिएगा।
- 15:439 अगस्त 1925 को तो 9 अगस्त 1925 को
- 15:47सरकारी खजाना लूटने के लिए एचआरए के
- 15:50क्रांतिकारियों के द्वारा काकोरी नामक
- 15:52स्टेशन पर ट्रेन को लूटा गया। लेकिन इस
- 15:55ट्रेन के लूट के बाद यह लूट तो लिया
- 15:57उन्होंने लेकिन इसके बाद पुलिस द्वारा जब
- 15:59इन लोगों को पकड़ा गया पुलिस द्वारा जब
- 16:02केस किया गया और पुलिस द्वारा जब गिरफ्तार
- 16:03किया गया तो ज्यादातर एचआरए के मेंबर जेल
- 16:07में चले गए और चार लोगों को फांसी हो गई।
- 16:09पंडित राम प्रसाद बिस्मिल
- 16:12आपने नाम सुना होगा पंडित राम प्रसाद
- 16:15बिस्मिल इसके अलावा अशफाक उल्ला खान
- 16:19अशफाक उल्ला खान राजेंद्र लाहड़ी
- 16:27राजेंद्र लाहड़ी और ठाकुर रोशन सिंह ठाकुर
- 16:31रोशन सिंह इन चार लोगों को इस केस में जो
- 16:34है फांसी दे दी गई थी। बाकी लोगों को जेल
- 16:37में डाल दिया गया। सचिंद्र सान्याल को भी
- 16:40जेल हो गई। केवल एकमात्र क्रांतिकारी हैं
- 16:43जो बच निकले क्योंकि उन्होंने बचपन में
- 16:45कसम खाई थी कि मैं आजाद हूं आजाद ही
- 16:48रहूंगा वो थे हमारे चंद्रशेखर आजाद तो कौन
- 16:51निकले बच निकले चंद्रशेखर आजाद काकोरी
- 16:54कांड में बच गए और कुछ समय के लिए
- 16:56अंडरग्राउंड हो गए यानी पुलिस से छुपकर
- 16:58रहने लगे तो एचआरए किसने बनाया था सचिंद्र
- 17:01सान्याल ने बनाया था 1924 में कानपुर में
- 17:04और इसका पहला काम क्या था काकोरी कांड याद
- 17:07रखिएगा और यह जो इसके फाउंडर थे सचिंद्र
- 17:10सान्याल उनको को जेल हो गई थी और सचिंद्र
- 17:12सान्याल ने जेल में एक किताब लिखी है
- 17:14क्योंकि उन्होंने अपना बाकी जीवन जेल में
- 17:17बिताया और उनकी पुस्तक का नाम आप लोगों ने
- 17:20एग्जाम में सुना होगा कई बार आती है बंदी
- 17:23जीवन तो याद रखिएगा बंदी जीवन किसकी
- 17:25पुस्तक है तो बंदी जीवन पुस्तक है सचिंद्र
- 17:27सान्याल की तो अब चंद्रशेखर आजाद क्या
- 17:30करेंगे चंद्रशेखर आजाद ने क्या किया अपना
- 17:32ठिकाना बदला और वो क्योंकि ये पूरा का
- 17:35पूरा जो एचआरए समाप्त हो गया उसके
- 17:36ज्यादातर मेंबर जेल में है चार मेन लोगों
- 17:38को फांसी हो गई पंडित राम प्रसाद बिस्मिल,
- 17:41अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लहाड़ी और
- 17:43ठाकुर रोशन सिंह। अशफाक उल्ला खान पहले
- 17:45मुस्लिम हैं जो फांसी पर चढ़े। आप लोगों
- 17:47ने इनका क्वेश्चन देखा होगा। भारत के पहले
- 17:50मुस्लिम क्रांतिकारी जो फांसी पर चढ़े
- 17:52उनका नाम था अशफाक उल्ला खान। अब हमारे
- 17:54चंद्रशेखर आजाद ने सोचा कि इस केस को
- 17:58थोड़ा सा ठंडा होने देते हैं क्योंकि यह
- 18:00सरकार की नजरों में अभी तेज था। यानी
- 18:02सरकार लोगों को ढूंढ रही थी। चंद्रशेखर
- 18:05चंद्रशेखर आजाद पहुंचते हैं हमारे झांसी।
- 18:08झांसी के पास आपने सुना है ओरछा। ओरछा के
- 18:11पास एक गांव है
- 18:13और उस गांव के पास एक नदी बहती है जिसका
- 18:16नाम है सतार नदी। इस सतार नदी के पास जो
- 18:19है एक कुटिया बनाकर रहने लगे और आज भी उस
- 18:21कुटिया में उनकी एक तस्वीर लगी है। आप
- 18:23जाकर देख सकते हैं। ठीक है? धीमार गांव
- 18:26है। गांव का नाम क्या था? धीमार गांव।
- 18:27ओरछा के पास पड़ता है धीमार गांव। इस गांव
- 18:30में आज भी उनकी कुटिया बनी है। इस गांव
- 18:32में उन्होंने कुछ समय के लिए फरारी काटी
- 18:34और उन्होंने अपना नाम रखा था हरिनारायण
- 18:37ब्रह्मचारी। हरिनारायण ब्रह्मचारी के रूप
- 18:39में वो यहां रहने लगे और इसी समय उन्होंने
- 18:42झांसी के पास जो है एक गैरेज में काम किया
- 18:45और बताते हैं कार चलाना भी सीखा था। जब
- 18:48कुछ साल बीते और यह काकोरी कांड का मुद्दा
- 18:51समाप्त हो गया। तब हमारे चंद्रशेखर आजाद
- 18:53इस नाम से बाहर निकलते हैं और दोबारा से
- 18:56क्रांतिकारी गतिविधियों में जुड़ जाते
- 18:57हैं। यानी चंद्रशेखर आजाद रूप बदलने में
- 19:00भी माहिर थे। उन्होंने अंग्रेजों को बहुत
- 19:02चकमा दिया। किस नाम से? हरिनारायण
- 19:04ब्रह्मचारी के नाम से वो कहां रहे थे? याद
- 19:07रखिएगा झांसी में। तो उनके जीवन की एक
- 19:09बहुत बड़ी घटना थी काकोरी कांड जिसके बारे
- 19:11में मैंने आपको बताया। इसके अलावा दूसरी
- 19:13घटना देखते हैं। उसके बाद उन्होंने 1928
- 19:17में एक और बड़े काम को अंजाम देने का
- 19:19प्रयास किया जिसमें वह सफल नहीं हुए और उस
- 19:21काम का नाम है वायसराय ट्रेन बम प्रयास।
- 19:25मतलब यह कि भारत के जो वायसराॉय थे उनको
- 19:27बम से उड़ाने का प्रयास किया ट्रेन में
- 19:30लेकिन इस काम में उनको सफलता नहीं मिली।
- 19:31दिल्ली में ब्रिटिश वायसराय की हत्या की
- 19:33योजना बनाई लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।
- 19:35इसके बाद चंद्रशेखर आजाद का जो सबसे बड़ा
- 19:38नाम आता है वो आता है लाहौर षड्यंत्र
- 19:41मामला 1928 जिसमें उन्होंने क्या किया था
- 19:44आप सबको याद होगा कि 1928 में जब साइमन
- 19:47कमीशन आया तो साइमन कमीशन का विरोध करते
- 19:49हुए लाला लाजपत राय की लाठियों से पीट-पीट
- 19:51कर हत्या कर दी गई। उस हत्या का बदला लेने
- 19:54के लिए चंद्रशेखर आजाद ने भगत सिंह के साथ
- 19:57मिलकर लाहौर के एसएसपी लाहौर का जो एसएसपी
- 20:00था जिसका नाम था सोंडर्स उसकी हत्या कर
- 20:02दी। तो लाला लाजपत राय की मौत का बदला
- 20:04लेने के लिए उन्होंने क्या किया था?
- 20:06सोंडर्स नामक जो अंग्रेज अधिकारी था लाहौर
- 20:09का उसकी हत्या कर दी और इस हत्या में भगत
- 20:11सिंह, राजगुरु और सुखदेव भी शामिल थे। ठीक
- 20:14है? याद रखिएगा। तो चंद्रशेखर आजाद का एक
- 20:16काम क्या हो जाएगा? लाहौर षड्यंत्र केस या
- 20:18साउंडर्स की हत्या करना। एक काम क्या है?
- 20:20वायसराय को ट्रेन से उड़ा ट्रेन में बम से
- 20:23उड़ाने का प्रयास। हालांकि इसमें सफलता
- 20:24नहीं मिली। और एक हो गया काकोरी ट्रेन
- 20:26एक्शन डे। इसके अलावा याद रखिएगा उनकी
- 20:29विचारधारा ब्रिटिश उत्पीड़न के खिलाफ
- 20:30सशस्त्र क्रांति में विश्वास रखती थी।
- 20:32जैसा मैंने आपको बता दिया। उनका आदर्श
- 20:34वाक्य है कि शक्ति के माध्यम से
- 20:36स्वतंत्रता समर्पण के माध्यम से नहीं
- 20:39विचारधारा है विदेशी शासन का अंत समाजवाद
- 20:42की स्थापना युवाओं में देशभक्ति की भावना
- 20:45ये उनका मोटिव रहा है। अब हम और बात करते
- 20:49हैं। उनके क्रांतिकारियों से कौन किन
- 20:51किस-किस क्रांतिकारियों से संबंधित है? तो
- 20:53याद रखिएगा राम प्रसाद बिस्मिल उनके गुरु
- 20:55और वरिष्ठ क्रांतिकारी थे। इनको वह बहुत
- 20:57मानते थे जिनकी जिनको फांसी दे दी गई थी
- 21:00काकोरी कांड में। इसके अलावा उनके साथी और
- 21:02सहयोगी हैं। घनिष्ठ सहयोगी हैं जिनका नाम
- 21:04भगत सिंह है। अभी हम भगत सिंह के बारे में
- 21:06बात करेंगे। इसके अलावा सुखदेव राजगुरु
- 21:08बटुकेश्वर दत्त स्वतंत्रता के लिए सहनानी
- 21:10है। आजाद ने कई युवा क्रांतिकारियों को
- 21:12हथियारों के उपयोग और गोरिल्ला वॉर में
- 21:15प्रशिक्षित किया था। क्योंकि चंद्रशेखर
- 21:17आजाद एक अच्छे निशांची भी थे और गोरिल्ला
- 21:19वॉर में दक्ष भी थे। तो उन्होंने युवाओं
- 21:22को ट्रेनिंग दी और ट्रेनिंग देने के लिए
- 21:23उन्होंने ये सारी गतिविधियां की। झांसी
- 21:25वाला किस्सा मैंने आपको बता दिया कि झांसी
- 21:27से 15 कि.मी. दूर ओरछा के जंगलों में वह
- 21:30अपने साथियों के साथ निशानेबाजी किया करते
- 21:32थे। अचूक निशानेबाज होने के कारण
- 21:34चंद्रशेखर आजाद दूसरे क्रांतिकारियों को
- 21:36प्रशिक्षण देते थे और यहां पर वो पंडित
- 21:39हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से बच्चों को
- 21:41पढ़ाने का काम भी करते थे। इसी दरमियान वो
- 21:44कहां रहते थे? धिमार गांव में रहते ओरछा
- 21:46के बाद जो सतार नदी के किनारे है और इसी
- 21:48समय चंद्रशेखर आजाद ने गाड़ी चलाना भी
- 21:51सीखा था। तो यह थी चंद्रशेखर आजाद की
- 21:53कहानी। अब अंग्रेजों के साथ उनके और जो
- 21:57काम रहे उन पे चर्चा करते हैं। अंग्रेजों
- 21:59से संघर्ष हुआ तो उन्हें अंग्रेजों ने
- 22:01मोस्ट वांटेड क्रिमिनल कह दिया। अंग्रेजों
- 22:04ने उन्हें भारत का मोस्ट वांटेड क्रिमिनल
- 22:06कह दिया और उन्होंने कभी भी जिंदा नहीं
- 22:08पकड़े जाने की कसम खाई थी। चंद्रशेखर आजाद
- 22:10ने कसम खाई थी कि वह आजाद हैं और आजाद ही
- 22:14रहेंगे। उन्हें अंग्रेज कभी भी पकड़ नहीं
- 22:16पाएंगे। उनका सेंटेंस था मैं आजाद हूं।
- 22:19आजाद रहूंगा और आजाद ही रहूंगा। ठीक है?
- 22:22याद रखिएगा। तो पुलिस ने बहुत पीछा किया
- 22:24लेकिन वो उनको पकड़ नहीं पाई। चंद्रशेखर
- 22:27आजाद के बारे में कहा जाता है कि उन्हें
- 22:29जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए लगभग उस
- 22:31समय 5,000 का इनाम सरकार द्वारा घोषित
- 22:34किया गया था। चंद्रशेखर आजाद का पता पता
- 22:36लगा अह देने वाले को 5,000 का इनाम जिंदा
- 22:39या मुर्दा अंग्रेजों द्वारा लगाया गया। यह
- 22:42पोस्टर उनके बारे में जानकारी देता है। अब
- 22:44हम बात करते हैं आखिरी हमारी एक घटना है
- 22:47जिसका नाम है अल्फ्रेड पार्क की घटना। यूं
- 22:49तो चंद्रशेखर आजाद का जो मेन अगर आप रोल
- 22:52देखेंगे वो है क्रांतिकारियों को ट्रेनिंग
- 22:55देना, क्रांतिकारियों को निशानेबाजी,
- 22:57क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण देना।
- 22:59क्रांतिकारियों को बहुत प्रेरणा उनके
- 23:02द्वारा मिली। सभी क्रांतिकारी उन्हें
- 23:04पंडित जी कह के बुलाते थे क्योंकि वो
- 23:06तिवारी जी थे। चंद्रशेखर आजाद का जो लास्ट
- 23:10किस्सा है हम उस पर चल रहे हैं और मैं
- 23:11कोशिश करूंगा कि आपको उनके बारे में बहुत
- 23:14अच्छे से सारी चीजें समझ में आई। उनका
- 23:15बर्थ प्लेस, उनके फादर का नाम, मदर का नाम
- 23:18और उनका पहला आंदोलन असहयोग आंदोलन बाद
- 23:20में एचआरए से जुड़े काकोरी कांड, ट्रेन
- 23:22में वायसराय को मारने की हत्या और सबसे
- 23:24पॉपुलर है उनका सडर्स की हत्या में जो
- 23:27उनका योगदान रहा। इसके बाद क्या होता है?
- 23:30इसके बाद आपको एक घटनाक्रम बताता हूं। इस
- 23:32घटनाक्रम को समझने से पहले आपको एक छोटा
- 23:35सा पार्ट इसका समझना पड़ेगा। मैंने बता
- 23:37दिया था लेकिन दोबारा मैं आपको बता रहा
- 23:39हूं। देखिए सबसे पहले वह एक संगठन से
- 23:42जुड़े थे जिसका नाम था एचआरए। एचआरए 1924
- 23:46में कानपुर में बना था। लेकिन जब हुआ
- 23:49काकोरी कांड तो काकोरी कांड की वजह से यह
- 23:52जो एचआरए है काकोरी कांड कब हुआ था
- 23:54बच्चों? 9 अगस्त 1925 को हुआ था। तब 9
- 23:57अगस्त 1925 को जब काकोरी कांड हुआ था।
- 24:00जिसकी वजह से एचआरए हो गया था समाप्त।
- 24:02यानी एचआरए के ज्यादातर मेंबर कहां चले
- 24:04गए? जेल में चले गए। और चार बड़े मेंबर को
- 24:07फांसी हो गई। तो फिर बीच में चंद्रशेखर
- 24:09आजाद क्या हुए? अंडरग्राउंड हुए। और
- 24:11अंडरग्राउंड रहने के बाद बाद में कब आए?
- 24:141928 में। 1928 में चंद्रशेखर आजाद के
- 24:17द्वारा एक पार्टी बनाई गई और वो भारत की
- 24:20बहुत ही फेमस पार्टी रही है। क्रांतिकारी
- 24:22संगठन रहा है जिसका नाम था एचएसआरए।
- 24:26इसमें सब कुछ पुराना है। बस एक शब्द नया
- 24:29है जिसका नाम है एस। एस मतलब था सोशलिस्ट।
- 24:32इसका पूरा नाम था
- 24:35हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन।
- 24:38ये क्या है? एचआरए है हिंदुस्तान
- 24:40रिपब्लिकन एसोसिएशन और यह है एचएसआरए।
- 24:43इसकी जो स्थापना है उन्होंने की थी दिल्ली
- 24:45के फिरोजशाह कोटला मैदान में। दिल्ली के
- 24:48फिरोजशाह कोटला मैदान में।
- 24:58फिरोजशाह
- 25:00कोटला मैदान तो दिल्ली के फिरोजशाह कोटला
- 25:03मैदान में चंद्रशेखर आजाद द्वारा एक संगठन
- 25:05बनाया गया। इसके संस्थापक कौन थे?
- 25:07चंद्रशेखर आजाद। याद रखिएगा चंद्रशेखर
- 25:10आजाद के द्वारा एक नया क्रांतिकारी संगठन
- 25:13बनाया गया। जिसका नाम था एच एस आर ए। और
- 25:16इस संगठन से कई सारे क्रांतिकारी जुड़े
- 25:19जिसके एक बहुत ही फेमस मेंबर हैं। कौन?
- 25:22भगत सिंह। तो अन्य सदस्यों में कौन थे?
- 25:25अन्य सदस्यों में बहुत सारे लोग हैं
- 25:27जिसमें भगत सिंह हैं, सुखदेव हैं, राजगुरु
- 25:32हैं। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु,
- 25:37शिव वर्मा,
- 25:39यशपाल,
- 25:41भगवती चरण बोरा, यशपाल, भगवती चरण बोरा
- 25:45आदि बहुत सारे क्रांतिकारी थे। और इसके जो
- 25:48मेन फाउंडर हैं, वह कौन है? चंद्रशेखर
- 25:50आजाद। चंद्रशेखर आजाद ने इस पुराने संगठन
- 25:53को एचआरए क्योंकि एचआरए किस में इनवॉल्व
- 25:55हो गया था? काकोरी कांड में। इसके
- 25:57ज्यादातर मेंबर जेल में चले गए। कुछ को
- 25:59फांसी हो गई। तो इसको पुनर्जीवित किया और
- 26:02इसको रिफॉर्म करके एक नया नाम दिया 1928
- 26:04में जिसका नाम था हिंदुस्तान सोशलिस्ट
- 26:07रिपब्लिकन एसोसिएशन जिसे हम एचएसआरए कहते
- 26:10हैं। एचएसआरए ने दो काम किए थे। एचएसआरए
- 26:13ने दो काम क्या किए थे? पहला काम इसने
- 26:16किया था सोंडर्स की हत्या जो मैंने आपको
- 26:18बताया। सोंडर्स की हत्या किसने की थी?
- 26:20सोंडर्स की हत्या की थी चंद्रशेखर आजाद,
- 26:23भगत सिंह और सुखदेव यह लोग उसमें इनवॉल्व
- 26:26हुए थे। 1928 में इन्होंने अक्टूबर 1928
- 26:30में सोडर्स की हत्या कर दी थी लाहौर में।
- 26:32और इस केस को भारतीय इतिहास में लाहौर
- 26:34कॉस्परेसी केस यानी लाहौर षड्यंत्र केस
- 26:37कहते हैं। यह एचएसआरए का पहला काम था। आप
- 26:40ऐसा भी समझ सकते हैं कि एचएसआरए ने केवल
- 26:44सोंडर्स की हत्या करने के लिए ही मतलब यह
- 26:47बना था एचएसआरए। क्योंकि यह जो सडंडर्स है
- 26:50इसी के द्वारा जो है लाला लाजपत राय पर
- 26:52प्रहार किए गए थे जिसकी वजह से उनकी डेथ
- 26:54हो गई। बाद में एचएसआरए ने एक और काम किया
- 26:56जो उनका आखिरी काम हो गया और उस काम का
- 26:58नाम था केंद्रीय विधानमंडल में बम कांड।
- 27:03केंद्रीय जो विधानमंडल है बच्चों केंद्रीय
- 27:06विधानमंडल जिसे सेंट्रल लेजिसलेटिव
- 27:08असेंबली कहते थे। 1929 में इस पर जो है
- 27:12इसकी खाली बेंचों पर भगत सिंह और उनके
- 27:15साथी ने क्या किया था? यहां पर याद रखिएगा
- 27:17बम फेंके थे और इस घटना से क्या हुआ था?
- 27:20सरकार बहुत गुस्सा हुई और इस घटना के बाद
- 27:23भगत सिंह को कर लिया गया था गिरफ्तार। जब
- 27:26भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया तो उसके
- 27:28बाद बाकी लोगों को भी गिरफ्तार किया गया
- 27:30और इस तरीके से एक केस बनता है जिसको
- 27:33बोलते हैं हम लोग लाहौर षड्यंत्र केस।
- 27:37एचएसआरए के दो ही इंपॉर्टेंट काम है। नंबर
- 27:39वन पहला काम है सोंडर्स की हत्या। दूसरा
- 27:42इंपॉर्टेंट काम है सेंट्रल लेजिसलेटिव
- 27:44असेंबली 1929 में बम फेंके। खाली बेंचों
- 27:47पर बम फेंके और बम के साथ कुछ पर्चे फेंके
- 27:50और पर्चों पे लिखा था कि बहरे कानों तक
- 27:52आवाज पहुंचाने के लिए धमाका किया गया है।
- 27:55यानी इस गूंगी सरकार को अपनी बात पहुंचाने
- 27:58के लिए धमाका किया है और यहीं पर भगत सिंह
- 28:01ने नारा दिया था साम्राज्यवाद का नाश हो।
- 28:04इंकलाब जिंदाबाद। इंकलाब जिंदाबाद। तो
- 28:07उसके बाद उनको अरेस्ट कर लिया गया। अरेस्ट
- 28:10करने के बाद उनको जो है
- 28:12अरेस्ट करने के बाद क्या किया गया? तीन
- 28:15लोगों को इसमें भगत सिंह,
- 28:19सुखदेव,
- 28:21भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु। याद रखिएगा
- 28:24इन तीनों पर इन तीनों पर एक केस चलाया गया
- 28:28सोंडर्स की हत्या का जिसे हम लाहौर
- 28:31कॉनस्परेसी केस कहते हैं और तीनों को उस
- 28:34केस में फांसी की सजा सुनाई गई। क्या
- 28:37सुनाई गई? फांसी की सजा सुनाई गई कि इनको
- 28:40तीनों को फांसी दी जाएगी। फांसी की सजा
- 28:43सुनाई गई थी लाहौर षड्यंत्र केस में। किस
- 28:45केस में इनको फांसी हुई थी? लाहौर
- 28:47षड्यंत्र केस। कौन सा है लाहौर षड्यंत्र
- 28:49केस? लाहौर षड्यंत्र केस है वही सोंडर्स
- 28:51की हत्या वाला। तो इस केस में जब इनको
- 28:54फांसी की सजा सुनाई गई तो अब कौन बचा है?
- 28:57याद रखिएगा। चंद्रशेखर आजाद हमारे यानी
- 29:00पंडित जी परेशान हैं। क्योंकि उनके तीन
- 29:03मेन साथी जो हैं क्या कर रहे हैं? उनके
- 29:05तीन मेन साथियों को क्या होने वाली है?
- 29:07फांसी होने वाली है। इसलिए चंद्रशेखर आजाद
- 29:10उन्हों उनको बचाने के लिए इनकी फांसी की
- 29:13डेट तय की गई थी मार्च 1931। क्या तय किया
- 29:16गया था? इनकी फांसी की डेट तय की गई थी
- 29:18मार्च 1931। जैसा कि आप जानते हैं 23
- 29:21मार्च को इनको फांसी हुई थी। तो अभी केवल
- 29:24डेट तय हुई है। क्या हुई थी? डेट फिक्स
- 29:26हुई थी। फांसी नहीं हुई थी। तो अब
- 29:29चंद्रशेखर आजाद इन तीनों को बचाने के लिए
- 29:32पूरा जी जान लगा देते क्योंकि उनके साथी
- 29:34थे। उन्होंने कहा कि किसी ना किसी तरीके
- 29:36से मैं भगत सिंह की फांसी रुकवाऊंगा। किसी
- 29:38ना किसी तरीके से मैं इनकी सजा को कम
- 29:40करवाऊंगा। इसके लिए गणेश शंकर विद्यार्थी
- 29:43के कहने पर जो एक बहुत बड़े क्रांतिकारी
- 29:46थे उनके कहने पर यह आनंद भवन गए और आनंद
- 29:50भवन कहां पर है? याद रखिएगा आनंद भवन है
- 29:52इलाहाबाद में पंडित नेहरू के घर। पंडित जी
- 29:55के जब घर गए पंडित जवाहरलाल नेहरू के घर
- 29:58पहुंचे तो वहां पर वह उनसे इसलिए मिलना
- 30:00चाहते थे क्योंकि नेहरू जी तक अगर यह अपनी
- 30:03बात पहुंचाएंगे कि इन युवकों की फांसी रोक
- 30:05दीजिए तो नेहरू जी इस बात को रख देंगे
- 30:07गांधी जी को क्योंकि गांधी जी 5 मार्च
- 30:101931 को लॉर्ड इरविन से एक समझौता करने
- 30:13वाले थे क्योंकि गांधी जी ने 1930 में
- 30:15आंदोलन चलाया था सविनय अवज्ञा आंदोलन।
- 30:18सविनय अवज्ञा आंदोलन को बंद कराने के लिए
- 30:20अंग्रेज उनसे बातचीत कर रहे थे और अंग्रेज
- 30:22गांधी जी को लंदन में भेजना चाहते थे
- 30:24गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए।
- 30:26इसीलिए वो हर हाल में गांधी जी से समझौता
- 30:29करना चाहते थे और इसी वजह से पंडित
- 30:31जवाहरलाल नेहरू आनंद भवन इलाहाबाद पहुंचे
- 30:34जवाहरलाल नेहरू से मिलने के लिए पर शायद
- 30:36उनकी मुलाकात नहीं हो पाई वो अपनी बात
- 30:38नहीं कह पाए और जब वो वहां से लौट रहे थे
- 30:40यहां से जब वो लौट रहे थे तो किसी ने उनकी
- 30:43खबर जो है किसी ने उनकी खबर कहां दे दी कि
- 30:46वो इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में हैं।
- 30:48तो इलाहाबाद में एक पार्क है जिसका नाम है
- 30:50अल्फ्रेड पार्क। तो इस अल्फ्रेड पार्क में
- 30:53वह अपने एक साथी के साथ जो है पहुंचे थे।
- 30:56बातचीत कर रहे थे कि इतने में इतने में
- 30:59पता चला कि पीछे से पुलिस आ गई।
- 31:03पेड़ों की झुरमुट से कदमों की आहट आई। समझ
- 31:06गए शेखर के गद्दारों ने अपनी जात दिखाई।
- 31:09पेड़ों की झुरमुट से कदमों की आहट आई। समझ
- 31:11गए शेखर के गद्दारों ने अपनी जात दिखाई।
- 31:15मिटा दूंगा फिरंगियों को। मिटा दूंगा
- 31:17फिरंगियों को। आजाद ने अपने प्राणों से भी
- 31:20प्यारी वह पिस्तौल उठाई। उनका दोस्त उनसे
- 31:23कहता है, वह अपने दोस्त से कहते हैं, जा
- 31:25भाई मैं इनको देख लूंगा। इन अंग्रेजों को,
- 31:27इन गोरे अंग्रेजों को मैं देख लूंगा। तो
- 31:29उनका दोस्त जा नहीं रहा था। इमोशनल हो रहा
- 31:32था। तो आजाद कहते हैं अपने दोस्त से तुम
- 31:35क्या सोचते हो? तुम क्या सोचते हो इन
- 31:37फिरंगियों को जिंदा छोड़ दूंगा मैं? या
- 31:40तुम क्या सोचते हो? लड़ते-लड़ते दम तोड़
- 31:43दूंगा मैं? या सोचते हो इन जिंदा इन
- 31:45फिरंगियों को जिंदा छोड़ दूंगा मैं। अरे
- 31:48कायर कारतूसों की क्या बिसात कालचक्र को
- 31:51मोड़ दूंगा मैं। अरे कायर कारतूसों की
- 31:53क्या विसात कालचक्र को मोड़ दूंगा। मृत्यु
- 31:56सबकी स्वामिनी मृत्यु सबकी स्वामिनी आज
- 31:59उसका यह भ्रम भी तोड़ दूंगा मैं। तो इस
- 32:01प्रकार उन्होंने अपने साथी से कहा कि भाई
- 32:03तुम जाओ मैं लडूंगा। मैं आप निकल जाओ
- 32:07अभियान जारी रखना क्योंकि आपका जाना जरूरी
- 32:10है और मैं तो इनको रोक कर आ जाऊंगा। इस
- 32:13प्रकार चंद्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क में
- 32:15घिर जाते हैं। मार्च में फांसी होनी है।
- 32:17गिर जाते हैं 27 फरवरी को। 27 फरवरी 1931
- 32:22को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में हमारे
- 32:25चंद्रशेखर आजाद जो हैं अंग्रेजी पुलिस के
- 32:28द्वारा घेर लिए जाते हैं और अब वो क्षण
- 32:30आता है कि पुलिस उनको पकड़ने की सोच रही
- 32:33है। पुलिस उनको पकड़ने की सोच रही है।
- 32:35लेकिन उन्होंने बचपन में कसम खाई थी। मैं
- 32:38आजाद हूं। आजाद था आजाद रहूंगा। अब आजाद
- 32:42तो पकड़ में आने वाले नहीं। उन्होंने तो
- 32:44डिसाइड कर लिया कि सूट एट साइड चलेगा मतलब
- 32:46मारेंगे या मरेंगे। तो गोलियां चलने लगी।
- 32:49गोलियां चलने लगी तो फिर क्या हुआ? आजाद
- 32:51ने दो गोरे मार गिराए।
- 32:54समझ में आ रहा है यहां तक? आजाद ने दो
- 32:56गोरे मार गिराए। फिर जेबें चेक की। आजाद
- 32:59ने दो गोरे मार गिराए। फिर जेब जेबें चेक
- 33:02किए।
- 33:04एक बार फिर एक बार फिर मृत्यु ने भाग्य को
- 33:08धोखा दिया। पिस्तौल की आखिरी गोली ने आजाद
- 33:11को चौंका दिया। एक बार फिर मृत्यु ने
- 33:13भाग्य को धोखा दिया। पिस्तौल की आखिरी
- 33:16गोली ने आजाद को चौंका दिया।
- 33:20मुझे पूरी पोएम उनकी याद नहीं आ रही। मैं
- 33:22प्रयास कर रहा हूं आपको बताने का। वैसे
- 33:24मेरे पास लिखी है लेकिन बहुत टाइम से पढ़ी
- 33:26नहीं है। तो फिर क्या होता है? उनका
- 33:27मुठभेड़ होता है और इस मुठभेड़ में
- 33:29चंद्रशेखर राजा दो अंग्रेजों को मार
- 33:31गिराते हैं और जब आखिरी गोली बजती है जेब
- 33:34में चेक कहते हैं जब गोली नहीं होती है तो
- 33:36पिस्तौल को उठाते हैं और अपनी कनपटी पे
- 33:38लगा के फायर कर देते हैं और वहां से वह
- 33:41मिट्टी उठाते हैं माथे पर लगाते हैं और
- 33:43फायर करके आत्महत्या कर लेते हैं। क्यों?
- 33:45क्योंकि उन्होंने बचपन में कसम ली थी कि
- 33:47वह आजाद है। आजाद थे और आजाद रहेंगे। तो
- 33:50ये थे हमारे पंडित जी चंद्रशेखर आजाद
- 33:52जिन्होंने इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में
- 33:53अंग्रेजों से मुठभेड़ करते हुए अंग्रेजों
- 33:56को मारते हुए अंतिम गोली अपनी कनपटी पे
- 33:59चला दी और वीरगति को प्राप्त हुए।
- 34:02आई होप आपको समझ में आ गया होगा और जो
- 34:05पोएट्री रही है वह मैं फिर कभी आपको
- 34:07सुनाऊंगा क्योंकि वह अभी अधूरी है तो मजा
- 34:10नहीं आएगा। तो फरवरी 1931 में पहली बार
- 34:13याद रखिएगा।
- 34:15पहली बार क्या होता है? गणेश शंकर
- 34:18विद्यार्थी के कहने पर वह इलाहाबाद में
- 34:20जवाहरलाल नेहरू से मिलने आनंद भवन पहुंचे।
- 34:22लेकिन वहां पर नेहरू ने उनसे मिलने से
- 34:24इंकार कर दिया और इसके बाद वह गुस्से में
- 34:26वहां से अल्फ्रेड पार्क चले गए। इस वक्त
- 34:28उनके साथ सुखदेव भी थे। वह यहां पर अपनी
- 34:31आगामी रणनीति तैयार कर रहे थे। तभी किसी
- 34:33मुखबिर के कहने पर वहां पर नॉट बोबर नॉट
- 34:36बोबर वो अंग्रेज अधिकारी है जो आ गया और
- 34:38ब्रिटिश पुलिस टुकड़ी ने उन्हें चारों तरफ
- 34:40से घेर लिया। आजाद ने तुरंत खतरा भांपते
- 34:43हुए सुखदेव को वहां से सुरक्षित निकाल
- 34:45दिया। पर अंग्रेजों और फिर अंग्रेजों पर
- 34:48फायर कर दिए। लेकिन जब उनके पास आखिरी एक
- 34:50गोली बची तो उन्होंने खुद से खुद के प्राण
- 34:52लेकर अपनी कथनी को सच साबित कर दिया।
- 34:54अल्फ्रेड पार्क में 27 फरवरी 1931 को उनके
- 34:57दिए गए इस बलिदान को भारत कभी नहीं भुला
- 35:00पाएगा। आजादी के बाद इस पार्क का नाम
- 35:02बदलकर चंद्रशेखर आजाद पार्क कर दिया गया
- 35:04है। मध्य प्रदेश के जिस गांव में वह रहे
- 35:06थे उस गांव का उसका धीमारपुरा नाम बदलकर
- 35:09आजादपुरा कर दिया गया है और मध्य प्रदेश
- 35:12के जिस गांव में उनका जन्म हुआ था उसका
- 35:14नाम भी बदल दिया गया है। यह है चंद्रशेखर
- 35:16आजाद पार्क अल्फ्रेड पार्क जिसका पुराना
- 35:18नाम है और यह है यूपी इलाहाबाद में। यह वह
- 35:21पेड़ है जहां पर उन्होंने अपना बलिदान
- 35:23दिया था। स्मृति को आखिरी बार अपने माथे
- 35:25पर लगाया था। ठीक है? और यह है हमारे भारत
- 35:28के वह शेर। भारत का वह केसरी जिन्होंने
- 35:31अपनी मूछों पर ताव देते हुए बचपन में लिया
- 35:34गया उस प्रण को पूरा किया कि मैं आजाद
- 35:36हूं, आजाद था और आजाद रहूंगा। ठीक है? ये
- 35:39अल्फ्रेड पार्क की तस्वीर है। तो ये थे
- 35:41हमारे चंद्रशेखर आजाद। उम्मीद है आपको
- 35:43चंद्रशेखर आजाद के बारे में अच्छे से समझ
- 35:45में आया होगा। चंद्रशेखर आजाद के जो फेमस
- 35:47कोर्ट्स हैं वो हैं। यदि फिर भी तुम्हारा
- 35:49लहू क्रोधित नहीं होता तो यह तुम्हारी
- 35:51रगों में बहने वाला पानी है। मैं आजाद था,
- 35:54आजाद हूं और आजाद रहूंगा। दुश्मन की
- 35:56गोलियों का हम सामना करेंगे। आजाद ही
- 35:59रहेंगे। आजाद ही रहेंगे। दुश्मन की
- 36:02गोलियों का हम सामना करेंगे। आजाद ही
- 36:04रहेंगे। आजाद ही रहेंगे। मुझे जब से मैंने
- 36:08यह तस्वीर देखी है मुझे कुछ अच्छा नहीं लग
- 36:10रहा। मुझे लगता है कि सोचिए क्या
- 36:12पर्सनालिटी रही होगी चंद्रशेखर आजाद की
- 36:14पंडित जी की। तो ये थे हमारे भारत के महान
- 36:18स्वतंत्रता सेनानी मातृभूमि के सच्चे सपूत
- 36:21महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जिन्हें
- 36:24हम लोग शहीद चंद्रशेखर आजाद के नाम से
- 36:26जानते हैं। एग्जाम ओरिएंटेड चीजें कहां
- 36:29जन्म हुआ है मध्य प्रदेश में? माता-पिता
- 36:31का नाम कहां से आए थे? काकोरी कांड से
- 36:33क्या कनेक्शन है? एचएसआरए से क्या कनेक्शन
- 36:35है? एचआरए से क्या कनेक्शन है? भगत सिंह
- 36:38से क्या कनेक्शन है? ये सारे चीजों को
- 36:40आपको याद रखना है और इलाहाबाद के अल्फ्रेड
- 36:42पार्क में 27 फरवरी 1931 को शहीद हो जाते
- 36:45हैं। कमाल की बात क्या है कि यह भगत सिंह
- 36:48की फांसी को रोकना चाहते थे। कब? 23 मार्च
- 36:50को जो होने वाली थी उससे पहले ही
- 36:51चंद्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क में शहीद
- 36:54हो गए। तो यह थे जगदंबा का वो केहरी जो
- 36:56अल्फ्रेड पार्क में दहाड़ रहा था। जगदंबा
- 37:00का केहरी अल्फ्रेड पार्क में दहाड़ रहा
- 37:02था। इंद्र का एरावत इंकलावी भाषा में
- 37:04चिंघाड़ रहा था।
- 37:07पोएट्री बहुत शानदार है। मैं माफी चाहता
- 37:09हूं। मुझे अभी क्लिक नहीं कर रही। दोबारा
- 37:11जरूर कभी सुनाऊंगा। किसी दिन स्पेशली उसी
- 37:14पर वीडियो बनाऊंगा तब आपको सुनाऊंगा। मुझे
- 37:16उम्मीद है कि आपको यह वीडियो अच्छा लगा
- 37:18होगा और इस वीडियो के माध्यम से आप
- 37:19चंद्रशेखर आजाद के बारे में बहुत कुछ जान
- 37:22सकते हैं। अब मेरे दो क्वेश्चन है जिनका
- 37:24जवाब आपको वीडियो के अंत में कमेंट सेक्शन
- 37:26में देना है। पहला आपको कमेंट सेक्शन में
- 37:29बताना है कि चंद्रशेखर आजाद ने एचएसआरए की
- 37:32स्थापना किस स्थान पे की थी? पहला प्रश्न
- 37:34है। दूसरा प्रश्न है। आपको बताना है कि एच
- 37:36एस अह चंद्रशेखर आजाद ने बनारस के किस
- 37:39कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की थी? कमेंट
- 37:41करके बताइएगा यह आपको वीडियो कैसा लगा। तब
- 37:43तक मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक
- 37:45के लिए जय हिंद वंदे मातरम। सहीद
- 37:48चंद्रशेखर आजाद अमर रहे। भारत माता की जय।
- 37:52थैंक यू।
- 38:08हेलो एवरीवन आप सभी का एमपीपीएससी स्टडी
- 38:11आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है। उम्मीद है
- 38:13आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन लगाकर पढ़
- 38:15रहे होंगे। साथियों आज हम बात करने वाले
- 38:18हैं रानी दुर्गावती के बारे में जो कि
- 38:20गोंडवाना की श्रेणी और बलिदान एवं शौर्य
- 38:24का प्रतीक मानी जाती हैं। रानी दुर्गावती
- 38:27जो गोंडवाना के अलावा भारतीय इतिहास की उन
- 38:31वीरांगनाओं में शामिल है जिनका नाम इतिहास
- 38:34की अग्रिम पंक्ति में लिखा जाता है। तो आज
- 38:37हम बात करेंगे वीरांगना रानी दुर्गावती के
- 38:40बारे में जो कि चंदेल वंश की राजकुमारी और
- 38:43गोंड वंश की या गोंडवाना की शासिका थी। तो
- 38:46आइए हम समझते हैं रानी दुर्गावती के
- 38:49इतिहास को। सबसे पहले मैं आपको बताना
- 38:51चाहता हूं रानी दुर्गावती के अगर हम
- 38:53इतिहास की बात करेंगे तो
- 38:56आपको यहां पर उनसे रिलेटेड स्टोरी जो है
- 38:59आपको सुननी है। देखिए अभी हम केवल और केवल
- 39:03रानी दुर्गावती के इतिहास के बारे में बात
- 39:05करेंगे इस सीरीज में। लेकिन जब हम मध्य
- 39:07प्रदेश का इतिहास पढ़ते हैं और उसमें जब
- 39:09हम गोंल्ड डायनेस्टी की बात करते हैं तो
- 39:11उसमें हम सभी गोंड राजाओं की बात करते
- 39:13हैं। तो आइए चर्चा करते हैं। सबसे पहले
- 39:16यहां पर कुछ तस्वीरें हैं। ये तस्वीरों को
- 39:18आपको ध्यान से देखना है और इन तस्वीरों के
- 39:21माध्यम से आपको क्या याद रखना है कि रानी
- 39:23दुर्गावती से संबंधित प्रमुख जो हैं यह
- 39:26स्थल हैं। जिसमें कि अगर आप यह देख रहे
- 39:28हैं सिंघोड़ा सिंघोरागढ़ जो फोर्ट है यह
- 39:30मध्य प्रदेश के दमोह डिस्ट्रिक्ट में है।
- 39:32तो यह आप याद रखेंगे रानी दुर्गावती या
- 39:35गोंड वंश से संबंधित है। यह रानी
- 39:37दुर्गावती की समाधि है जो बरेला ग्राम और
- 39:40बरेला ग्राम कहां पर है? याद रखिएगा
- 39:42जबलपुर में है। तो हम यह लास्ट में भी
- 39:44देखेंगे अभी। यह मदन महल फोर्ट है जो कि
- 39:47जबलपुर में काफी फेमस है जिसे पिंक स्टेशन
- 39:50के नाम से फेमस है और ये एक्चुअली में
- 39:52सिंघोरागढ़ फोर्ट का ही पार्ट है। हालांकि
- 39:55एक और फोर्ट है। मैं यहां नाम लिख देता
- 39:56हूं जो उनसे संबंधित है या गोंडो से
- 39:58संबंधित है जिसको चौरागढ़ फोर्ट कहते हैं।
- 40:01चौरागढ़ का किला या फिर हम बोल सकते हैं
- 40:04इसको चौगान किला कहते हैं। क्या बोलते
- 40:06हैं? चौगान किला। और यह जो किला है याद
- 40:09रखिएगा। यह किला पड़ता है हमारा मध्य
- 40:13प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में। कहां पर
- 40:16पड़ता है? नरसिंहपुर जिले में। ठीक है? तो
- 40:18यह कुछ किले हैं उनसे संबंधित। लेकिन हम
- 40:21पहले बात करेंगे रानी दुर्गावती के इतिहास
- 40:23के बारे में और उनके
- 40:27उनके जन्म से लेके उनके बलिदान दिवस तक की
- 40:30ये शौर्यगाथा मैं आपको बताने वाला हूं।
- 40:32देखिए सबसे पहले हम रानी दुर्गावती के
- 40:35बारे में अगर जानते हैं तो हम ये जानते
- 40:36हैं कि वो चंदेल वंश की राजकुमारी और
- 40:39गोंडवाना की शासिका थी। ठीक है? तो अब हम
- 40:42उनका जो है सबसे पहले क्या देखने वाले
- 40:44हैं? उनका जीवन परिचय देखने वाले उनके
- 40:47जन्म की कहानी देखने वाले हैं। तो याद
- 40:49रखिएगा रानी दुर्गावती का जो जन्म है वो
- 40:51चंदेल राजा कीरत राय या कीर्ति सिंह
- 40:53चंदेल। अगर आपको ऑप्शन में यह नाम नहीं
- 40:56मिलता है तो आपको ऑप्शन में एक दूसरा नाम
- 40:58मिलेगा और वह होंगे शालीवाहन राजा। याद
- 41:01रखिएगा अगर आपसे पूछा जाए कि जो रानी
- 41:05दुर्गावती थी वो किसकी पुत्री थी तो ऑप्शन
- 41:07में कीर्तिराज चंदेल मिलेंगे या कीर्ति
- 41:09चंदेल मिलेंगे या फिर आपको मिलेंगे ये
- 41:11नहीं होंगे तो आपको शालीवाहन की पुत्री के
- 41:13तौर पे उनका नाम याद रखना है। तो कालिंजर
- 41:16का जो किला है जो कि उत्तर प्रदेश के
- 41:18बांदा डिस्ट्रिक्ट में यहां पर 5 अक्टूबर
- 41:211524 को उनका जन्म होता है। 5 अक्टूबर
- 41:241524 को रानी दुर्गावती का जन्म कालिंजर
- 41:27के किले में राजा कीर्ति सिंह चंदेल के घर
- 41:28में हुआ था। क्योंकि उनका जो जन्म है वो
- 41:31दुर्गा अष्टमी के दिन हुआ था। इसीलिए उनका
- 41:33जो नाम है वो क्या रखा गया था? दुर्गावती।
- 41:36ठीक है? दुर्गा अष्टमी के दिन जन्म लेने
- 41:38के कारण रानी दुर्गावती का नाम दुर्गावती
- 41:41रखा गया। कालिंजर का जो किला है वर्तमान
- 41:43में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में आता
- 41:45है। जब रानी दुर्गावती का जन्म होता है तो
- 41:48उनकी जो मां है उनका उनकी मां का निधन जो
- 41:51है बचपन में हो जाता है और जब रानी
- 41:53दुर्गावती की मां की मृत्यु हो रही थी तो
- 41:55उन्होंने राजा कीर्ति सिंह चंदेल से एक
- 41:57वचन लिया और उस वचन में उन्होंने कहा था
- 41:59कि आप मुझे वचन दो कि आप इस पुत्री का जो
- 42:01है पालन-पोषण एक पुत्र की तरह करेंगे और
- 42:04जब भी इसकी शादी करेंगे तो इसकी स्वेच्छा
- 42:06यानी इसकी मर्जी से करेंगे। राजा जो कीरत
- 42:09सिंह चंदेल थे या कीरत राय थे उन्होंने
- 42:11बड़े ही सम्मान से उनका नाम लिया जाता था
- 42:14बुंदेलखंड में क्योंकि राजा कीर्ति सिंह
- 42:16चंदेल का संबंध उस महान चंदेल वंश से था
- 42:19जिसके महान राजा विद्याधर चंदेल ने महमूद
- 42:22गजनवी से संघर्ष किया था या महमूद गजनवी
- 42:25से याद रखिएगा महमूद गजनवी को पराजित किया
- 42:29था राजा विद्याधर चंदेल ने। ठीक है? और
- 42:32खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिरों के निर्माण
- 42:34के लिए यह राज्य जाना जाता था। तो ये कुछ
- 42:36बेसिक बातें उनके पिता का नाम, उनके जन्म
- 42:38की बात हो गई। अब हम बात करते हैं आगे।
- 42:41देखिए इसमें एक और बात याद रखना है। उनके
- 42:43पिता ने उनका पालन-पोषण पुत्र की तरह किया
- 42:45था। बचपन से ही उन्हें तीरंदाजी,
- 42:47घुड़सवारी और अस्त्र-शस्त्र चलाने की
- 42:49शिक्षा दी थी क्योंकि वो एक राजपूत कुल
- 42:52में जन्मी थी और वैसे भी राजपूतों के यहां
- 42:54चाहे पुत्र हो या पुत्री हो उनको सैन्य
- 42:57शिक्षा दी जाती थी। अब इसके बाद हम आगे
- 43:00बात करते हैं। रानी दुर्गावती के विवाह की
- 43:02बात करते हैं। रानी दुर्गावती का विवाह
- 43:04किससे हुआ? कब हुआ? तो यहां पर रानी
- 43:07दुर्गावती के विवाह के बारे में हम एक
- 43:09सामान्य सी बात करेंगे और एक स्टोरी मैं
- 43:10आपको सुनाना चाहूंगा। जब कन्या दुर्गावती
- 43:13विवाह योग्य हुई तब 1542 में उनका विवाह
- 43:15गोंड राजा संग्राम शाह के पुत्र याद
- 43:18रखिएगा दलपत शाह के साथ हुआ था। दोनों
- 43:20पक्षों की जाति अलग थी। इसीलिए कहानी जो
- 43:23है यहां पे स्टार्ट होती है। 1524 में
- 43:26जन्म हो रहा है और 1542 में उनकी शादी हो
- 43:28रही है। तो दो बातें आप याद रखिएगा। उनका
- 43:30जो विवाह है वो गोंड वंश के महान राजा
- 43:33संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह के साथ
- 43:36संपन्न होता है। अब यहां पे एक स्टोरी है
- 43:39जिसे आप कह सकते हैं कि यह स्टोरी संभवत
- 43:42मैं आपको बताने जा रहा हूं जिससे कि आपको
- 43:44इसमें थोड़ा सा इंटरेस्ट आए। देखिए इस समय
- 43:47गोंड राज्य ज्यादा बड़ा था। गोंड राज्य के
- 43:49पास 52 किले थे और लगभग दक्षिण पूर्वी
- 43:52मध्य प्रदेश का जो काफी बड़ा हिस्सा है वो
- 43:54गोंडवाना साम्राज्य के अंतर्गत आता था और
- 43:56उसके राजा थे राजा संग्राम शाह। उनके जो
- 43:59पुत्र थे उनके दो पुत्र थे। बड़े पुत्र का
- 44:01नाम दलपत शाह छोटे पुत्र का नाम चंद्र शाह
- 44:03था। तो यहां पर हम दलपत शाह की बात करने
- 44:06जा रहे हैं और रानी दुर्गावती के पिता जो
- 44:09चंदेल वंश के शासक हैं। कीर्ति राय चंदेल
- 44:11की बात करने वाले हैं। अब यहां पर होता यह
- 44:14है कि एक तरफ हैं गोंड और एक तरफ है
- 44:16राजपूत चंदेल।
- 44:18यह उस समय की बात है जब राजपूत जो हैं
- 44:21अपनी कन्याओं का जो विवाह है वह गैर
- 44:24राजपूतों से नहीं करते थे। अब समस्या यह
- 44:27थी कि किस प्रकार कीर्तिराज चंदेल इस
- 44:29विवाह के लिए तैयार होते हैं। तो इसमें एक
- 44:31छोटी सी कहानी पहले यह है कि जो हमारी
- 44:34रानी दुर्गावती हैं जब वो युवा अवस्था में
- 44:37थी तो वो क्या करती थी? अपनी दो सहेलियों
- 44:39के साथ एक शिव मंदिर में जाती थी। वो शिव
- 44:41जी की बड़ी भक्त थी और वो अक्सर वहां जाया
- 44:44करती थी। जब वो अक्सर वहां जाया करती थी
- 44:46तो एक बड़ वृक्ष के नीचे वो अक्सर रुका
- 44:48करती थी और वहां पर एक बाबा जी बैठते थे
- 44:50और उनको डेली नमस्ते करती थी। तो वो बाबा
- 44:52जी के पास जाकर बाबा जी जो है उनको जो है
- 44:55कहानियां सुनाते थे। तो जब भी दुर्गावती
- 44:57उनके पास जाती थी और वो कहती थी बाबा जी
- 44:59किसी राजपूत राजा की कहानी सुनाओ। तो बाबा
- 45:02जी उस उनको जो है राजपूत राजाओं की शौर्य
- 45:04की वीरता की कहानी सुनाते थे। इससे उनको
- 45:06बड़ा अच्छा लगता था। उन्हीं बाबा जी के
- 45:09द्वारा जो है एक बार कहानी सुनाई गई थी।
- 45:12गोंड शासक संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह
- 45:15की और दलपत शाह के बारे में उन्होंने
- 45:17बताया था कि दलपत शाह बड़े ही वीर साहसी
- 45:20और योग्य व्यक्ति हैं। योग्य राजकुमार हैं
- 45:22जो मुगलों से संघर्ष ले रहे थे और
- 45:24उन्होंने मुगलों का रास्ता जो है मध्य
- 45:26भारत में रोक रखा था। यानी गोंडवाना एक
- 45:28शक्तिशाली राज्य था और उसके राजकुमार थे
- 45:31राजा दलपत शाह। राजा दलपत शाह बोल सकते
- 45:34हैं या राजकुमार दलपत शाह बोल सकते हैं जो
- 45:36कि संग्राम शाह के पुत्र थे। अब आगे क्या
- 45:39होता है?
- 45:40यहीं से जो हमारी राजकुमारी दुर्गावती है
- 45:43उनके मन में जो है राजा दलपत शाह के प्रति
- 45:46जो है एक तरीके से प्रेम होता है या वो मन
- 45:48ही मन उनको पसंद करने लगती हैं। सेम कहानी
- 45:51जो है दलपत शाह के साथ होती है। दलपत शाह
- 45:54ने भी रानी दुर्गावती के बारे में सुन रखा
- 45:56था कि रानी दुर्गावती काफी सुंदर हैं।
- 45:58बड़ी वीर हैं, साहसी और वह शिकार के लिए
- 46:00बड़ी प्रसिद्ध थी। उनका निशाना बड़ा तेज
- 46:02था। तो दलपत शाह भी संभवत उनको मन ही मन
- 46:05पसंद करने लगे थे। अब यहां पे समझना ये
- 46:07दोनों राज्य अलग हैं और दोनों एक दूसरे के
- 46:09एक तरीके से विरोधी कह सकते हो क्योंकि
- 46:11गोंड और राजपूतों में बहुत डिफरेंस था। उस
- 46:13समय की बात कर रहा हूं। अब एक दिन क्या
- 46:16होता है जब रानी दुर्गावती अपनी दो
- 46:19सहेलियों एक का नाम श्यामा और एक का नाम
- 46:21कुछ और था। उनके साथ जब वो शिव मंदिर में
- 46:23जा रही थी तो उस दिन क्या है? शाम का समय
- 46:25हो गया था। और उसी समय वो देखती हैं कि उस
- 46:28मंदिर के पास पेड़ के नीचे अंधेरे में दो
- 46:30व्यक्ति खड़े थे। वो दो व्यक्ति जो है अब
- 46:33रानी जो है उस समय जब अपनी सहेलियों के
- 46:35साथ खड़ी थी तो उनमें से एक व्यक्ति जो है
- 46:37वो डरता हुआ आया और रानी के पास आकर खड़ा
- 46:39हुआ और उसने पूछा क्या आप ही राजकुमारी
- 46:42दुर्गावती हैं? तो उन्होंने कहा उनकी जो
- 46:44सहेली है उन्होंने कहा हां मैं ही
- 46:46राजकुमारी दुर्गावती हूं। तो इसके बाद
- 46:48यहां पर क्या होता है कि वो एक पत्र जो है
- 46:52वो रानी दुर्गावती को देता है। रानी
- 46:54दुर्गावती ने पूछा यह किसका पत्र है और
- 46:56क्या? तो उन्होंने बताया है कि गोंड वंश
- 46:58के राजा दलपत शाह का पत्र है और इस पत्र
- 47:02को मैं आपको उन्होंने मुझे आपको देने के
- 47:04लिए कहा था। जैसे ही रानी दुर्गावती ने उस
- 47:07पत्र को पढ़ा तो उसमें उन्होंने सबसे पहले
- 47:09यह लिखा था दलपत शाह ने लिखा कि इस तरीके
- 47:11से मैंने आपको यह पत्र लिखा उसके लिए मैं
- 47:13क्षमा चाहता हूं और
- 47:20इसके बाद क्या होता है यहां पर आपको सुनना
- 47:23है तो उन्होंने क्षमा के लिए कहा मतलब
- 47:26उन्होंने कहा कि मैं सबसे पहले देखिए मेरे
- 47:28मन में आपसे विवाह करने का जो है विचार
- 47:31आया है और मैं आपकी मर्जी पहले जानना
- 47:34चाहता था इसीलिए मैंने पहले आपको पत्र
- 47:35लिखा है। वरना मैं यह पत्र आपके पिता को
- 47:37भेजने वाला था। तो रानी दुर्गावती ने उस
- 47:40पत्र को पढ़ा और जब वो बाद में मंदिर से
- 47:43नीचे उतर रही थी तो उन दोनों सैनिकों ने
- 47:45रानी दुर्गावती के सामने जाकर फिर से जवाब
- 47:47पूछा तो रानी दुर्गावती ने यह कहा कि आप
- 47:50राजकुमार को हमारा नमस्ते कहना और इसके
- 47:52बाद वह चली जाती हैं। इसके एक सप्ताह बाद
- 47:54जो हमारे दलपत शाह हैं वह अपना एक पत्र जो
- 47:57है वो राजा कीर्तिराज चंदेल को भेजते हैं।
- 48:00अब जब कीर्ति चंदेल को यह पत्र मिला तो वह
- 48:02बड़े चिंतित हो गए क्योंकि वह राजपूत थे
- 48:05और गोंड राजा का जो बेटा है दलपत शाह वो
- 48:07उनकी पुत्री से शादी करना चाहता है। तो
- 48:10इसी असमंजस में क्या होता है कि उनको समझ
- 48:13में नहीं आ रहा था क्या करें? तो उन्होंने
- 48:14राजपूतों की एक मीटिंग बुलाई और उस मीटिंग
- 48:16में एक सभा में ये डिस्कस किया गया क्या
- 48:19हमें दुर्गावती का विवाह जो है चंदेल वंश
- 48:22की जो राजकुमारी उनका जो विवाह है वो गोंड
- 48:25वंश के राजकुमार से करना चाहिए। तो यहां
- 48:27पर सभी राजपूतों ने अपनी तलवार निकाली और
- 48:29कहा कि यह संभव नहीं है क्योंकि गोंड हमसे
- 48:32जो है अलग हैं। और राजपूत जो है एक तरीके
- 48:34से उच्च जाति में आते थे। तो इसलिए
- 48:36राजपूतों ने मना कर दिया। लेकिन यहां ये
- 48:39बात आप भूल मत जाना कि इस समय चंदेल राज्य
- 48:41एक छोटा राज्य है और गोंडवाना एक
- 48:44साम्राज्य है जिसमें 52 किले आते हैं और
- 48:46गोंड इस समय काफी शक्तिशाली थे। तो जब
- 48:49राजपूतों ने ये तय किया कि वह विवाह नहीं
- 48:51करेंगे तो इसका सीधा सा मतलब था कि राजा
- 48:53दलपत शाह और राजा संग्राम शाह यानी
- 48:55संग्राम शाह अपने पुत्र दलपत शाह के साथ
- 48:57इस क्षेत्र पर हमला भी कर सकते हैं और ऐसा
- 48:59हुआ भी। जो स्टोरी मिलती है उसमें यही कहा
- 49:01गया है कि राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत
- 49:05शाह ने जो है महोबा राज्य पर यानी जिसे हम
- 49:07चंदेल राज्य कह रहे हैं उस पर हमला कर
- 49:09दिया और इस युद्ध में जो है राजा
- 49:11कीर्तिराज चंदेल की हार होती है और बाद
- 49:13में राजा रानी दुर्गावती का जो विवाह है
- 49:15वो गोंड वंश के जो राजकुमार है यानी दलपत
- 49:18शाह के साथ संपन्न होता है। तो ये एक छोटी
- 49:20सी स्टोरी थी। इस तरीके से उन दोनों का
- 49:22विवाह होता है जो मैंने आपको बता दिया। तो
- 49:25दोनों पक्षों की जाति अलग थी इसलिए स्टोरी
- 49:27सुनाना जरूरी थी। तो राजा संग्राम सागर का
- 49:29राज्य बहुत ही विशाल था। उनके राज्य में
- 49:31कितने 52 किले थे। सोचिएगा बहुत बड़ा
- 49:34राज्य था। उनका राज्य वर्तमान अगर हम बात
- 49:36करें तो मंडला मंडला पूरा आता था। जबलपुर
- 49:38पूरा आता था। नरसिंहपुर, होशंगाबाद,
- 49:40भोपाल, सागर, दमोह और वर्तमान छत्तीसगढ़
- 49:43के कुछ हिस्सों तक फैला था। यानी गोंडवाना
- 49:46एक बड़ा साम्राज्य था जिसे गढ़ कट, गढ़ंगा
- 49:49या गोंडवाना के नाम से जाना जाता था। अब
- 49:51इसमें आपको एक और बात याद रखनी है कि गोंड
- 49:54राजवंश और राजपूतों के स्मेल से शेरशाह
- 49:56सूरी को करारा झटका लगा। क्योंकि अब क्या
- 49:59हुआ कि दो लोग बड़े पावरफुल थे और दोनों
- 50:01एक हो गए। चंदेल और गोंड मिल गए। इस समय
- 50:04शेरशाह सूरी दिल्ली का सुल्तान था और उसने
- 50:07जो है कालिंजर पर हमला किया था। याद
- 50:09रखिएगा इसी समय 1545 में उसने कालिंजर पर
- 50:12हमला किया था। तो एक छोटी सी जानकारी ये
- 50:14भी है कि शेरशाह सूरी ने 1545 को कालिंजर
- 50:16पर हमला किया और बड़ी मुश्किल से कालिंदर
- 50:19के किले को जीतने में सफल हो गया। परंतु
- 50:21अचानक बारूद में विस्फोट हुआ जिससे वो
- 50:23मारा गया था। अब शादी हो गई है दुर्गावती
- 50:26की और दुर्गावती गोंड राज्य की जो है क्या
- 50:28बनी है? राजकुमारी बनी है। हम इस स्टोरी
- 50:30पे चर्चा नहीं करेंगे। हम रानी दुर्गावती
- 50:33की स्टोरी पे ही चर्चा करेंगे क्योंकि अभी
- 50:34स्टोरी यह लंबी है थोड़ी सी। ठीक है? 1545
- 50:38में रानी दुर्गावती ने एक पुत्र को जन्म
- 50:40दिया और उस पुत्र का नाम था वीर नारायण
- 50:42रखा गया। याद रखिएगा। लेकिन 1550 में राजा
- 50:45दलपत शाह की मृत्यु हो गई जो कि गोंड वंश
- 50:47के शासक थे और इस दुख की घड़ी में रानी को
- 50:50अपने नाबालिक पुत्र वीर नारायण को जो है
- 50:52क्या किया? राजगद्दी पर बैठाकर स्वयं
- 50:54राजकाज की बागडोर संभालनी पड़ी। कुल
- 50:57मिलाकर आपने अभी तक ये जाना कि उनका जन्म
- 50:59कैसे हुआ? उनके पिता कौन थे? उनका विवाह
- 51:02कब और कैसे हुआ? और अब हमने इसमें से काम
- 51:05की चीजें जो मैं हाईलाइट कर रहा हूं कि
- 51:07उनका जो पुत्र है कब होता है? 1545 में और
- 51:091550 में राजा की मृत्यु हो जाती है। जब
- 51:13राजा दलपत शाह की मृत्यु हो गई जो कि गोंड
- 51:15वंश के राजा थे। संग्राम शाह के बाद दलपत
- 51:18शाह राजा बने थे और दलपत शाह 1550 में
- 51:20स्वर्ग लोक सिधार गए। उनके बाद क्या हुआ?
- 51:23रानी दुर्गावती की जो राजधानी याद रखिएगा
- 51:25ये सिंघोरागढ़ है। याद रखेंगे सिंघोरा कण
- 51:28सिंघोरागढ़ कहां है? मध्य प्रदेश के दमोहो
- 51:30डिस्ट्रिक्ट में है। ठीक है? याद रखिएगा।
- 51:32तो यह उन्होंने अपनी राजधानी बना रखी थी
- 51:34और आगे याद रखिएगा यह जबलपुर दमोह मार्ग
- 51:37पर स्थित है लेकिन डिस्ट्रिक्ट दमोह लगता
- 51:39है। रानी दुर्गावती की प्रतिमा से 6
- 51:41कि.मी. दूर स्थित याद रखिएगा सिंघोरागढ़
- 51:44का किला बना हुआ है सिंघोरागढ़ के
- 51:45अतिरिक्त मदन महल और इन किलों की बात हम
- 51:47बाद में करेंगे। ठीक है? ये कुछ जानकारी
- 51:50है उनके राज्य के बारे में कि रानी का
- 51:52राज्य वर्तमान जबलपुर, नरसिंहपुर, दमोह।
- 51:55ठीक है? होशंगाबाद, छिंदवाड़ा और
- 51:56छत्तीसगढ़ के आदि क्षेत्रों में फैला हुआ
- 51:58था। अब यहां से हम आगे बात कर रहे हैं और
- 52:00अब आपको थोड़ा सा स्टोरी को बहुत ध्यान से
- 52:03सुनना है। देखिए रानी दुर्गावती गोंडवाना
- 52:06राज्य की रानी बन चुकी हैं। उन्होंने अपने
- 52:08नाबालिक पुत्र वीर नारायण को गद्दी पर
- 52:10बैठाया और गोंडवाना राज्य की संरक्षिका के
- 52:13तौर पर वो शासन करने लगी। राजा रानी
- 52:15दुर्गावती के दो विश्वसनीय सेनापति थे। दो
- 52:18विश्वसनीय सलाहकार थे। जिनकी सलाह से वो
- 52:21अपने राज्य का संचालन कर रही थी। उनका नाम
- 52:23है एक का नाम था सेनापतियों में आधार सिंह
- 52:25कायस्त हैं बहुत इंपॉर्टेंट है ये एग्जाम
- 52:27ओरिएंटेड है जिनको मैं हाईलाइट कर रहा हूं
- 52:29आधार सिंह कायस्त और दूसरे थे ठाकुर
- 52:31मानसिंह ये दो उनके मुख्य सेनापति और
- 52:34मुख्य सलाहकार थे इन्हीं की सहायता से वो
- 52:36अपने राज्य का अच्छे से संचालन कर रही थी
- 52:39रानी दुर्गावती ने 1550 से 1564 तक
- 52:42सफलतापूर्वक शासन किया। रानी दुर्गावती के
- 52:44शासनकाल में प्रजा बहुत सुखी थी और उनका
- 52:47राज्य भी लगातार जो है क्या कर रहा था?
- 52:49प्रगति कर रहे प्रगति कर रहा था। और रानी
- 52:51दुर्गावती के शासनकाल में उनके राज्य की
- 52:53ख्याति दूर-दूर तक फैल गई। कुल मिलाकर
- 52:55रानी दुर्गावती ने 1550 में राजा दलपत शाह
- 52:58की मृत्यु के बाद राज्य संभाला। 1564 तक
- 53:01उन्होंने जो है राज्य का संचालन किया और
- 53:03इस समय में लगभग ये 16 वर्षों में उनका जो
- 53:05राज्य है गोंडवाना काफी समृद्ध हो गया और
- 53:08उसकी चर्चा जो है दूर-दूर तक होने लगी और
- 53:10रानी दुर्गावती का जो नाम है वह दूर-दूर
- 53:12तक फैल गया। और जब किसी का नाम दूर-दूर तक
- 53:15फैलता है और कोई तरक्की करता है तो किसी
- 53:17ना किसी की नजर लगती है। और आइए अब देखिए
- 53:20यहां पर क्या होने वाला है। इस बीच उनके
- 53:23राज्य पर दो हमले होते हैं। थोड़ा सा उनके
- 53:25राज्य के बारे में भी लिखा हुआ है। उनके
- 53:27कुछ निर्माण कार्यों के बारे में भी लिखा
- 53:29है क्योंकि ये एग्जाम ओरिएंटेड है। तो
- 53:31मेरा काम है आपको बताना। रानी दुर्गावती
- 53:33ने अपने शासनकाल में कई मंदिर, इमारतें और
- 53:36तालाब बनवाए थे। इसमें खासकर तालाब बहुत
- 53:37इंपॉर्टेंट है। जिनमें सबसे प्रमुख है
- 53:39जबलपुर का रानी तालाब। यह उन्होंने अपने
- 53:42नाम पर बनवाया था। जबलपुर का रानी ताल
- 53:44जिसको बोलते हैं। दूसरा रानी दुर्गावती ने
- 53:46अपने नाम पर बनवाया था। उन्होंने अपनी
- 53:48दासी जिसका एक नाम था चेरीताल। उनकी दासी
- 53:51थी चेरी जिसके नाम पर उन्होंने चेरीताल
- 53:53बनवाया। तो जबलपुर का रानीताल, चेरीताल और
- 53:56उनके सेनापति जिसका नाम था आधार सिंह।
- 53:58आधार सिंह के नाम पर आधार ताल का निर्माण
- 54:01करवाया। तो तीन तालाब जबलपुर में उनके
- 54:03द्वारा बनवाए गए। कई सारे मंदिरों का
- 54:05निर्माण करवाया गया। इस समय एक और बात है।
- 54:08रानी दुर्गावती ने अपने शासनकाल में
- 54:10जातपात से दूर रहकर सभी को सम्मान दिया,
- 54:12अधिकार दिए। उनके शासनकाल में गोंड,
- 54:15राजपूत और कई मुस्लिम सेनापति भी मुख्य
- 54:17पदों पर आसीन थे। यानी दुर्गावती जो है
- 54:20काफी अच्छी रानी थी और उन्होंने योग्यता
- 54:22के आधार पर लोगों को पद दिए। अब आते हैं
- 54:24रानी दुर्गावती का एक बहुत इंपॉर्टेंट
- 54:26क्वेश्चन है। बल्लभ संप्रदाय के एक बहुत
- 54:28प्रसिद्ध संत थे। रानी दुर्गावती ने बल्लभ
- 54:30संप्रदाय के स्वामी विट्ठलनाथ का स्वागत
- 54:33किया था और उनको कई सारे जो गांव हैं वह
- 54:35क्या किए थे? वह भेंट किए थे। याद रखिएगा
- 54:38पूछा जाएगा कि कौन से संत को उन्होंने दान
- 54:41दिया था या कौन से संत गोंडवाना राज्य की
- 54:43यात्रा पर आए थे? तो याद रखिएगा बल्लभ
- 54:45संप्रदाय के स्वामी विट्ठलनाथ। ठीक है?
- 54:48कौन थे स्वामी विट्ठलनाथ? रानी दुर्गावती
- 54:51को उनकी कई विशेषताओं के कारण जाना जाता
- 54:53था। वह बहुत सुंदर होने के साथ-साथ बहादुर
- 54:55और योग्य शासका थी। उन्होंने दुनिया को यह
- 54:57बताया कि दुश्मन की आगे यानी दुश्मन के
- 55:00आगे शीश झुकाकर अपमानजनक जीवन जीने से
- 55:03बेहतर है मृत्यु का वरण करना। ठीक है? तो
- 55:06ये उनकी सबसे बड़ी खूबी है। अब हम बात
- 55:08करते हैं उन पे हुए दो हमलों की। पहला
- 55:10हमला होता है बाज बहादुर की तरफ से और
- 55:12दूसरा हमला होता है अकबर की तरफ से। दोनों
- 55:14की कहानी को समझेंगे और फिर हम इसको खत्म
- 55:17करेंगे। सबसे पहले देखिए आपको इस थोड़ी सी
- 55:20स्टोरी को सुनना पड़ेगा। तभी आप समझ
- 55:22पाएंगे कि किस तरीके से गोंडवाना राज्य
- 55:24फैला हुआ था और किस तरीके से गोंडवाना
- 55:26राज्य को आप समझ सकते हैं। हम यह जानते
- 55:28हैं कि एक राज्य हुआ करता था जिसका नाम था
- 55:31मालवा। मालवा आपने सुना है मालवा जो राज्य
- 55:34था इस मालवा में मालवा जो राज्य था इस
- 55:38मालवा राज्य का एक शासक था जिसका नाम था
- 55:42बाज बहादुर। बाज बहादुर यूं तो बेसिकली
- 55:44जिसके लिए फेमस है वह अपनी प्रेम कहानी के
- 55:47लिए फेमस है। उसकी जो पत्नी थी रानी
- 55:49रूपमती जिनसे प्रेम के लिए वह बड़ा
- 55:51प्रसिद्ध था। रानी रूपमती और बाज बहादुर
- 55:54यह मालवा के शासक थे। यह एक अफगान शासक
- 55:56था। सुजात खान का लड़का था। और इस समय अगर
- 56:00आप यह देखेंगे यहां पर यह केसरिया
- 56:04यह देख रहे हैं आप। यह जो है यह गोंडवाना
- 56:06साम्राज्य था। गोंडवाना एक बड़ा राज्य था।
- 56:09जैसा कि आप यहां पे भी देख सकते हैं
- 56:11गोंडवाना राज्य और इस गोंडवाना राज्य की
- 56:13जो शासिका हैं वो हैं हमारी रानी
- 56:15दुर्गावती जो अपने दो सेनापतियों के साथ
- 56:18राज्य का संचालन कर रही हैं। एक सेनापति
- 56:20का नाम आधार सिंह कायस्त और एक का नाम था
- 56:22ठाकुर मानसिंह। इसी समय एक छोटा सा राज्य
- 56:24और उनके पास में था। आप सब जानते हैं इस
- 56:26राज्य का नाम था रीवा राज्य। कौन सा राज्य
- 56:29था? रीवा राज्य। पहले आपको स्टोरी को
- 56:31सुनना है। तो सबसे पहले क्या होता है कि
- 56:34ये जो व्यक्ति है मालवा का शासक इसने सोचा
- 56:37कि रानी तो अकेली हैं गोंडवाना की और एक
- 56:39महिला है। अब इसमें दो बातें हैं कि वो
- 56:42रानी पे भी संभवत नजर रखता था और ये सोचता
- 56:45था कि रानी जो है एक महिला है और इनके
- 56:47राज्य को आसानी से जीत सकता है। इसीलिए
- 56:50उसने क्या किया? रानी दुर्गावती पर हमला
- 56:52किया और दोनों के बीच में युद्ध हुआ।
- 56:55जिसमें बाज बहादुर की बुरी पराजय होती।
- 56:58यानी वह बुरी तरह से हार गया और रानी
- 57:00दुर्गावती की कीर्ति और यश बढ़ गया कि
- 57:03उन्होंने मालवा के एक अफगान शासक बाज
- 57:05बहादुर को बुरी तरीके से हरा दिया और याद
- 57:07रखिएगा मालवा के शासक बाज बहादुर की बुरी
- 57:10किरकिरी होती है क्योंकि वो एक महिला से
- 57:12हार गया। इसने दो बार रानी के राज्य को
- 57:14जीतने का प्रयास किया परंतु यह असफल रहा।
- 57:17ठीक है? तो उसने जो है अपना यह सपना छोड़
- 57:19दिया रानी के राज्य को जीतने का क्योंकि
- 57:21वह एक संगीतकार के तौर पर भी प्रसिद्ध है।
- 57:23गाने के लिए जाना जाता है और रानी रूपमती
- 57:26के प्रेम के लिए जाना जाता है। तो वो उसी
- 57:27चीज में खो गया। अब कुछ समय बाद यहां पर
- 57:30एंट्री होती है खलनायक की। अब वो खलनायक
- 57:33कौन है? आपको थोड़ा सा सुनना पड़ेगा। उस
- 57:35खलनायक का नाम है अकबर। अभी-अभी एनसीईआरटी
- 57:38के सिलेबस में चेंज हुआ है। जिसे अकबर
- 57:40महान कहते थे। अब अकबर को एक क्रूर शासक
- 57:43के तौर पर एनसीआरटी में दर्ज कर दिया गया
- 57:46है। अकबर ने सबसे पहले क्या किया? इस
- 57:48मालवा को जीत लिया।
- 57:51156162 में याद रखिएगा 61 से 62 के बीच यह
- 57:55जो पूरा का पूरा मालवा है यह ग्रीन हो गया
- 57:57और इसी मुगल साम्राज्य का हिस्सा बन गया।
- 57:59बाज बहादुर जो है पराजित होता है और याद
- 58:02रखिएगा रानी रूपमती ने आत्महत्या कर ली थी
- 58:05और बाद में बाज बहादुर अकबर के दरबार में
- 58:07गया। का संरक्षण लिया और बाद में उसने भी
- 58:08जो है रानी रूपमती की दरगाह उस पे कब्र पर
- 58:11जाकर अपना सिर पटका और जो है उनके वियोग
- 58:14में अपना दम तोड़ दिया। बाज बहादुर रानी
- 58:16रूपमती दोनों की प्रेम कहानी बड़ी
- 58:18प्रसिद्ध है। इसी समय क्या होता है कि
- 58:20अकबर का एक सेनापति पहले तो मालवा को
- 58:22जीतता है। हम इसमें सेनापतियों की बात
- 58:24नहीं कर रहे हैं क्योंकि हम अभी पूरा
- 58:26गोंडवाना नहीं पढ़ रहे हैं। अभी हमारा
- 58:28उद्देश्य है रानी दुर्गावती की स्टोरी को
- 58:30कवर करना। ठीक है? जब हम दूसरे लेक्चर में
- 58:32कवर करेंगे तो उसमें फैक्ट बताऊंगा कि
- 58:34किसने हमला किया, कौन था आदम खान। समझ रहे
- 58:37हैं आप? पीर मोहम्मद और आदम खान ने इसको
- 58:38जीता था। फिर क्या होता है? इसी समय जो
- 58:40रीवा राज्य है, रीवा राज्य भी जो है ग्रीन
- 58:43हो गया क्योंकि ये भी मुगलों के अधिकार
- 58:45में आ गया। मुगल सेनापति ने इसको भी जीत
- 58:47लिया। तो रीवा राज्य का जो राजा था उसने
- 58:50भी मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली और
- 58:52कड़ा यानी इलाहाबाद जिसको कहते थे। ये जो
- 58:55इलाहाबाद है वो मुगलों का एक सूबा था।
- 58:57सूबे सूबेदार रहता था इलाहाबाद में। ठीक
- 59:00है? तो इलाहाबाद की सेना ने आकर जो है
- 59:02रीवा राज्य को जीत लिया। अब आप देखो मालवा
- 59:05और रीवा राज्य दोनों ही मुगलों के अधिकार
- 59:07में हैं। और इन दोनों की जो सीमाएं हैं वो
- 59:09किससे टच होने लगी हैं? इन दोनों की ही
- 59:12सीमाएं टच होने लगी हैं गोंडवाना
- 59:14साम्राज्य से। इसका मतलब यह है कि अब मुगल
- 59:17साम्राज्य की सीमाएं गोंडवाना को छूने
- 59:19लगी। और अब यह जरूरी था दो पड़ोसी इतिहास
- 59:22में कभी अच्छे दोस्त नहीं होते। और इसका
- 59:25मतलब यह है कि अब संघर्ष होने वाला है।
- 59:27मुगलों और रानी दुर्गावती के मध्य या
- 59:31मुगलों और गोंडों के मध्य। लेकिन इसकी
- 59:33शुरुआत कैसे होगी और कब होगी? आइए ये
- 59:36समझते हैं। रानी दुर्गावती जिनके पास दो
- 59:39नायाब चीजें हैं। एक उनका सेनापति।
- 59:42सेनापति बहुत वीर है जिनका नाम है आधार
- 59:44सिंह कायस्त। काफी योग्य थे। आधार सिंह
- 59:46कायस्त उनके सेनापति थे और साथ-साथ उनका
- 59:49एक सफेद हाथी बड़ा फेमस था जिसका नाम था
- 59:52क्या? सरमन हाथी। यह रानी का बहुत प्रिय
- 59:55हाथी था और यह वाइट हाथी था जो रानी को
- 59:57बहुत पसंद था। तो इस हाथी और इस सेनापति
- 1:00:00के चर्चे अकबर तक भी थे। अब अकबर कोई ना
- 1:00:03कोई तो रीजन ढूंढेगा ना लड़ने के लिए।
- 1:00:05अचानक अगर हमला करेगा तो क्या बताएगा कि
- 1:00:07हमने क्यों हमला किया और दूसरे राज्य भी
- 1:00:09तो देखेंगे। तो लड़ने के लिए कोई वजह
- 1:00:11चाहिए। लड़ने की पहली वजह तो है सीमा। अब
- 1:00:14अकबर ने इनको एक लेटर भेजा रानी दुर्गावती
- 1:00:16को और उसमें यह लिखा कि आप अपने सेनापति
- 1:00:18आधार सिंह कायस्त और अपने हाथी सरमन को
- 1:00:21हमारे पास भेज दीजिए। बाकी कोई दिक्कत
- 1:00:23नहीं है और हमारी अधीनता स्वीकार कर
- 1:00:25लीजिए। रानी ने अकबर के इस प्रस्ताव को जो
- 1:00:28है ठुगरा दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं
- 1:00:31हो सकता। हम जो है याद रखिएगा हम गोंडवाना
- 1:00:34की शासिका हैं और आपके इस धमकी से डरने
- 1:00:36वाले नहीं हैं। तो रानी ने जब यह जवाब
- 1:00:39दिया तो इसका मतलब यह है कि अब मुगल
- 1:00:40सेनाएं गोंडवाना राज्य पर हमला करेंगी।
- 1:00:43हां या ना? समझ में आ गया कि नहीं आया? तो
- 1:00:45यहां पर हमने यही लिखा है। पहले रानी
- 1:00:47दुर्गावती और अकबर की लड़ाई से पहले किसकी
- 1:00:49लड़ाई हुई थी? रानी दुर्गावती और बाज
- 1:00:51बहादुर की जो मैंने आपको बता दिया। ठीक
- 1:00:53है? बाज बहादुर ने लगभग कम हमला किया था।
- 1:00:56बाज बहादुर ने 1556 में जो है रानी
- 1:00:58दुर्गावती पर हमला कर दिया। रानी की सेना
- 1:01:00बड़ी बहादुरी के साथ लड़ी और बाज बहादुर
- 1:01:03को युद्ध में हार का सामना करना पड़ा और
- 1:01:05रानी दुर्गावती की सेना की जीत हुई। युद्ध
- 1:01:08में बाज बहादुर की सेना का बहुत नुकसान
- 1:01:09हुआ और इस विजय के बाद रानी का नाम और
- 1:01:11प्रसिद्धि जो है अधिक बढ़ गई थी। ठीक है?
- 1:01:14बाज बहादुर कौन था? सुजात खान का लड़का
- 1:01:16था। सुजात खान एक अफगान था। अब रानी
- 1:01:20दुर्गावती और अकबर की लड़ाई यह सबसे फेमस
- 1:01:22है। 1564 का यह संघर्ष है और इस संघर्ष ने
- 1:01:26रानी को और अमर बना दिया। रानी को और महान
- 1:01:29बना दिया। अब हम इसी संघर्ष की बात करने
- 1:01:31वाले हैं। आइए इस संघर्ष को समझते हैं।
- 1:01:33सबसे पहले देखिए जैसा कि मैंने आपको बताया
- 1:01:37कि 1562 में अकबर ने मालवा पर आक्रमण कर
- 1:01:39मालवा के सुल्तान बाज बहादुर को पराजित कर
- 1:01:42दिया और अधिकार कर लिया मालवा पर। ठीक है?
- 1:01:44अब मुगल साम्राज्य की सीमा रानी दुर्गावती
- 1:01:46के राज्य की सीमाओं को क्या करने लगी?
- 1:01:48छूने लगी। वहीं दूसरी तरफ अकबर के आदेश पर
- 1:01:50उसके सेनापति अब्दुल माजिद खान ने रीवा
- 1:01:53राज्य पर भी अधिकार कर लिया। तो रीवा भी
- 1:01:55उनके अधिकार में आ गया और अकबर अपने
- 1:01:57साम्राज्य को और अधिक बढ़ाना चाहता था।
- 1:01:59इसी कारण वह गोंडवाना साम्राज्य को हड़पने
- 1:02:01की योजना बनाने लगा। जैसा कि मैंने आपको
- 1:02:03इस डायग्राम में बताया। यही यहां पर लिखा
- 1:02:05हुआ है। अब लड़ाई की शुरुआत कैसे करेंगे?
- 1:02:09तो रानी दुर्गावती के पास अकबर ने एक
- 1:02:11संदेश भिजवाया जिसमें लिखा था कि वह अपने
- 1:02:13प्रिय हाथी शरमन और सूबेदार आधार सिंह को
- 1:02:17मुगल दरबार में भेज दें। रानी अकबर के
- 1:02:19मंसूबों को भली-भांति परिचित थी। उन्होंने
- 1:02:21अकबर की बात मानने से इंकार कर दिया और
- 1:02:23अपनी सेना को युद्ध की तैयारी करने का
- 1:02:25आदेश दे दिया। अकबर ने सेनापति आसफ खान ये
- 1:02:29इंपॉर्टेंट है। आसफ खान को गोंडवाना
- 1:02:31साम्राज्य पर अटैक करने का आदेश दे दिया
- 1:02:33और इस प्रकार संघर्ष होने जा रहा है। अब
- 1:02:35आपको संघर्ष को समझना है। यानी जैसा कि
- 1:02:39मैंने आपको अभी बताया कि जो रानी का राज्य
- 1:02:42है, रानी का राज्य कौन सा है? रानी का
- 1:02:44राज्य जो गोंडवाना था, यह वाला गोंडवाना
- 1:02:46साम्राज्य यह दो ओर से मुगल साम्राज्य से
- 1:02:48घिर चुका है। यानी गोंडवाना जो राज्य है,
- 1:02:51इसकी जो सीमा है, दो ओर से मुगलों से लग
- 1:02:53गई है। या आप ऐसे भी समझ लीजिए कि तीन ओर
- 1:02:55से ये जो पूरा इलाका था, यह वाला भी यह
- 1:02:58वाला जो इलाका है, यह मुगल साम्राज्य का
- 1:03:00पार्ट ऑलरेडी बन चुका था। या क्या बन चुका
- 1:03:03था? यह मुगल स्टेट बन चुका था। यानी मुगल
- 1:03:05साम्राज्य का हिस्सा बन चुका था। और ऊपर
- 1:03:08के दोनों हिस्सों से जो है ये गोंडवाना
- 1:03:09मुगल राज्य से सीमा साझा करता था। इसीलिए
- 1:03:12अब युद्ध जरूरी हो गया। और गोंडवाना राज्य
- 1:03:15की जो रानी दुर्गावती हैं, रानी दुर्गावती
- 1:03:17का जो पुत्र है उनका नाम याद रखिएगा वीर
- 1:03:19नारायण जो युद्ध में उनके साथ लड़ने के
- 1:03:22लिए तैयार है। तो रानी दुर्गावती अपने
- 1:03:24पुत्र वीर नारायण और अपने सेनापतियों के
- 1:03:27साथ युद्धभूमि में तैयार हो जाती हैं और
- 1:03:29अकबर की सेनाओं का सामना करने के लिए
- 1:03:32तैयार हैं। याद रखिएगा अकबर बहुत ही
- 1:03:34शक्तिशाली है लेकिन गोंडवाना भी कम नहीं
- 1:03:36है। अब लड़ाई की जो है तैयारियां यहां पर
- 1:03:39हो जाती हैं। और अब युद्ध कैसे होता है?
- 1:03:41तो युद्ध की कहानी सिंपल सी है। देखिए
- 1:03:46रानी को पता था। देखिए
- 1:03:50जब रानी दुर्गावती पर मुगल सेनाओं ने हमला
- 1:03:54किया तो पहला जब हमला किया आसफ खान के
- 1:03:56द्वारा जो मुगलों का सेनापति था अकबर का
- 1:03:58सेनापति तो उस पहले हमले में रानी
- 1:04:00दुर्गावती की जो गोंड सेना थी उस सेना ने
- 1:04:03मुगलों की सेना को खदेड़ दिया। याद रखिएगा
- 1:04:06पहली दिन की लड़ाई में रानी बड़ी हावी रही
- 1:04:09और युद्ध रुक जाता है। रानी चाहती थी कि
- 1:04:12हम इस युद्ध विराम में रात के रात के समय
- 1:04:15भी जो है मुगलों पर हमला करें और उनको
- 1:04:17खदेड़ दें। लेकिन उनके सेनापतियों ने ऐसा
- 1:04:19करने की सलाह नहीं दी और उन्होंने कहा कि
- 1:04:21नहीं कल हम लड़ेंगे। अब आसफ खान जो कि
- 1:04:24अकबर का सेनापति था वह अपनी हार से
- 1:04:26तिलमिलाया हुआ था और वह बदला लेना चाहता
- 1:04:28था। तो दूसरे दिन उसने अपनी सेना को थोड़ा
- 1:04:30और बड़ा किया और बड़ा करके जो है रानी पर
- 1:04:32हमला कर दिया। रानी जो है पुरुष वेश में
- 1:04:35सैनिक रूप धारण करके जो है मुगलों से
- 1:04:38संघर्ष कर रही थी। इसी समय रानी के पास एक
- 1:04:40तीर जो है आता है और उनकी गर्दन में लग
- 1:04:43जाता है। उनके पास शरीर में लग जाता है
- 1:04:45जिससे वो मूर्छित हो जाती हैं। जब उनको
- 1:04:47बाहर ले जाने की कोशिश की गई तो उन्होंने
- 1:04:49मना कर दिया और कुछ समय पश्चात जो है रानी
- 1:04:51जब दोबारा उनको होश आता है और वो लड़ती
- 1:04:54हैं तो देखती हैं कि वो चारों ओर से जो है
- 1:04:57किससे? मुगलों से घिर चुकी थी। जब वो
- 1:04:59चारों ओर से मुगलों से घिर चुकी तो
- 1:05:02उन्होंने एक प्रतिज्ञा ली उन्होंने कहा था
- 1:05:03कि मैं जीते जी दुश्मन के हाथ नहीं आऊंगी
- 1:05:06और जीते जी मैं अपने शरीर को दुश्मन को
- 1:05:08हाथ नहीं लगाने दूंगी। तो जब वो मुगलों से
- 1:05:10घिर जाती हैं तो उन्होंने अपनी तलवार लेकर
- 1:05:13जो है अपने आप को खत्म कर लिया। लेकिन
- 1:05:15इसमें एक बात यह है कि जब वो चारों ओर से
- 1:05:18घिर जाती हैं तो उनके सेनापति आधार सिंह
- 1:05:20कायस्त उनके पास आते हैं और उनसे कहते हैं
- 1:05:22कि रानी आप यहां से सुरक्षित चली जाइए। तो
- 1:05:24रानी जाने से मना करती हैं। रानी अपने
- 1:05:27सेनापति से कहती हैं कि अपनी तलवार लो और
- 1:05:30मेरा सर काट दो क्योंकि वो नहीं चाहती थी
- 1:05:32कि वो पकड़ी जाए और मुगलों के कैद में
- 1:05:35जाएं मुगल उनको हाथ लगाएं। तो रानी जब
- 1:05:37रानी ने अपने सेनापति से ऐसा करने के लिए
- 1:05:39कहा तो सेनापति ने मना कर दिया तो
- 1:05:41उन्होंने अपनी कटार से लेकर जो है अपने आप
- 1:05:43को समाप्त कर लिया और इस प्रकार रानी ने
- 1:05:45अपना बलिदान दे दिया। तो देखिए आइए आसफ
- 1:05:49खान एक विशाल सेना लेकर रानी पर आक्रमण
- 1:05:52करने के लिए आगे बढ़ा। रानी दुर्गावती
- 1:05:54जानती थी कि उनकी सेना अकबर की सेना के
- 1:05:56आगे बहुत छोटी है। युद्ध में एक और जहां
- 1:05:58मुगलों की विशाल सेना आधुनिक
- 1:05:59अस्त्र-शस्त्र के साथ प्रशिक्षित सेना थी।
- 1:06:02वहीं रानी दुर्गावती की सेना छोटी और
- 1:06:04पुराने हथियार जो कि गों के थे उनसे तैयार
- 1:06:07थी। उन्होंने अपनी सेना को नरई नाला ये
- 1:06:09वर्ड इंपॉर्टेंट है। नरई नाला घाटी की तरफ
- 1:06:11कूच करने का आदेश दिया। क्योंकि नरई नाला
- 1:06:13एक ऐसी घाटी थी जो जंगल से घिरी हुई थी।
- 1:06:15जहां पर थोड़ा सा गों के लिए एडवांटेज हो
- 1:06:18सकता था। ठीक है? ठीक है? रानी दुर्गावती
- 1:06:19के लिए नरई युद्ध हेतु सुविधाजनक स्थान
- 1:06:22नरई के चारों तरफ घने जंगल से घिरी
- 1:06:24पहाड़ियां थी और मुगल सेना के लिए यह
- 1:06:25क्षेत्र थोड़ा सा अनजान था। अब क्या होता
- 1:06:28है रानी दुर्गावती का बलवान बलिदान अपनी
- 1:06:31हार से तिलमिलाए मुगल सेना के सेनापति आसफ
- 1:06:33खान ने याद रखिएगा दूसरे दिन विशाल सेना
- 1:06:35एकत्र करके तोपों के साथ जो है रानी पर
- 1:06:38हमला कर दिया और रानी दुर्गावती भी अपने
- 1:06:41प्रिय सफेद हाथी याद रखिएगा उनके प्रिय
- 1:06:43सफेद हाथी का नाम क्या है? सरवन पर सवार
- 1:06:45होकर युद्ध मैदान में उतरी। रानी के साथ
- 1:06:47राजकुमार वीर नारायण भी थे। रानी की सेना
- 1:06:50ने कई बार मुगल सेना को पीछे धकेला। कुंवर
- 1:06:52वीर नारायण के घायल हो जाने से रानी ने
- 1:06:55उन्हें युद्ध से बाहर सुरक्षित जगह भिजवा
- 1:06:57दिया। याद रखिएगा सबसे पहले वीर नारायण
- 1:06:59घायल होते हैं। रानी ने उनको सुरक्षित
- 1:07:01स्थान पर भेज दिया और रानी युद्ध करने
- 1:07:03लगती हैं। युद्ध के मैदान में एक तीर रानी
- 1:07:05दुर्गावती के कान के पास लगा और दूसरा जो
- 1:07:07तीर है उनकी गर्दन में लगा। तीर लगने से
- 1:07:09रानी कुछ समय के लिए अचेत हो गई। जब पुनः
- 1:07:12रानी को होश में आया तब तक मुगल सेना ने
- 1:07:14क्या कर लिया? अपना पल्ला भारी कर लिया।
- 1:07:17यह जो तीर थे, वह निर्णायक सिद्ध हुए और
- 1:07:20मुगल सेना हावी हो गई। रानी के सेनापतियों
- 1:07:23ने उन्हें युद्ध का मैदान छोड़कर सुरक्षित
- 1:07:25स्थान पर जाने की सलाह दी। परंतु रानी ने
- 1:07:27इस सलाह को दरकिनार कर दिया। यानी मना कर
- 1:07:29दिया और अपने आप को चारों तरफ से घिरता
- 1:07:31देख रानी ने अपने शरीर को शत्रुओं के हाथ
- 1:07:34ना लगने का सौगंध खाया था। याद रखिए रानी
- 1:07:37ने यह सौगंध ली थी कि वह जीते जी जो है
- 1:07:39शत्रुओं के हाथ नहीं आएंगी और कोई शत्रु
- 1:07:41उनको छू नहीं पाएगा। जीते जी। याद रखिएगा
- 1:07:44इसी कथन का अनुसरण रानी अवंतीबाई ने किया
- 1:07:46था क्योंकि वह भी इस क्षेत्र से आती थी
- 1:07:48रामगढ़ की जो रानी थी अवंतीबाई उन्होंने
- 1:07:50कहा था कि हमारी दुर्गावती ने कसम खाई थी
- 1:07:53कि जीते जी वो बैरी के हाथ नहीं छुए
- 1:07:56जाएंगी और उसी परंपरा का अनुसरण करते हुए
- 1:07:58रानी जो अवंतीबाई हैं उन्होंने भी क्या कर
- 1:08:01लिया था अपनी कटार से अपना बलिदान दे दिया
- 1:08:03था। अपने मान सम्मान की रक्षा हेतु अपनी
- 1:08:06तलवार निकाली और स्वयं तलवार घोंप कर अपना
- 1:08:09बलिदान दे दिया और इतिहास में वीरांगना
- 1:08:11रानी सदा सदा के लिए क्या हो गई? अमर हो
- 1:08:13गई। जिस दिन रानी ने अपना बलिदान दिया उस
- 1:08:15दिन का नाम उस दिन की तारीख है 24 जून
- 1:08:191564।
- 1:08:2024 दिन याद रखिएगा 24 जून जो है वह रानी
- 1:08:23दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उनकी समाधि
- 1:08:25पर प्रत्येक वर्ष 24 दिन को एक तरीके से
- 1:08:2824 जून को मेला लगता है। अब प्रतिवर्ष 24
- 1:08:31जून को बलिदान दिवस शौर्य दिवस के रूप में
- 1:08:33मनाया जाता है और रानी दुर्गावती को स्मरण
- 1:08:35किया जाता है। महारानी गोंड वंश की रानी
- 1:08:37सदैव अमर रहेंगी और संपूर्ण गोंडवाना
- 1:08:39साम्राज्य के ऐतिहासिक तौर पर जानी
- 1:08:41जाएंगी। इसके बाद उनके बलिदान के बाद उनके
- 1:08:45राज्य का क्या हुआ? थोड़ा सा है। देखिए
- 1:08:48रानी दुर्गावती के बलिदान के बाद उनका जो
- 1:08:50राज्य है याद रखना कुछ समय के लिए उनके जो
- 1:08:53बेटे हैं यानी वीर नारायण ने चौरागढ़ से
- 1:08:55शासन किया। लेकिन मुगलों ने जब चौरागढ़ पर
- 1:08:57हमला किया तो चौरागढ़ में वो लड़ते हुए
- 1:09:00मारे गए। तो रानी दुर्गावती के बलिदान के
- 1:09:02बाद कुंवर वीर नारायण चौरागढ़ में मुगलों
- 1:09:03से युद्ध करते हुए जो है वीरगति को
- 1:09:05प्राप्त हुए और अब संपूर्ण गोंडवाना
- 1:09:07मुगलों के अधिकार में चला गया। अब इसमें
- 1:09:10एक लास्ट बात और है कि युद्ध के पश्चात
- 1:09:12संग्राम शाह के छोटे पुत्र रानी दुर्गावती
- 1:09:14के जो देवर हैं जिनका नाम था चंद्र शाह।
- 1:09:17चंद्र शाह ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर
- 1:09:19ली और इनको कुछ किले दे दिए गए। 52 किलों
- 1:09:21में से कुछ किले जो है चंद्र शाह को सौंप
- 1:09:23दिए गए क्योंकि कहते हैं चंद्र शाह मुगलों
- 1:09:26से मिले हुए थे और चंद्र शाह ने रानी के
- 1:09:28विरुद्ध जो है क्या किया था? मुगलों की
- 1:09:30सहायता की थी। ठीक है? ठीक है? तो ये सारी
- 1:09:32स्टोरी जो है रानी दुर्गावती के बारे में
- 1:09:34है। रानी दुर्गावती की जो समाधि है वो
- 1:09:36बरेला में है जो रानी दुर्गावती का समाधि
- 1:09:38स्थल है और ये बरेला ग्राम कहां है?
- 1:09:40जबलपुर में है। ठीक है? इसके अलावा यहां
- 1:09:43प्रतिवर्ष 24 जून को महारानी दुर्गावती के
- 1:09:45बलिदान दिवस पर क्या लगता है? गोंडवाना जो
- 1:09:47समाज है एवं मध्य प्रदेश शासन स्थान पर
- 1:09:49उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता है। इसके
- 1:09:52अलावा कुछ और विशेष जानकारी है। 1988 में
- 1:09:54जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर रानी
- 1:09:57दुर्गावती विश्वविद्यालय कर दिया। तो यह
- 1:09:59आपके लिए इंपॉर्टेंट हो सकता है। भारत
- 1:10:01शासन द्वारा 24 जून 1988 को रानी
- 1:10:03दुर्गावती के बलिदान दिवस पर एक डाक टिकट
- 1:10:05जारी कर जो है उनको सन सम्मान दिया गया और
- 1:10:08याद रखिएगा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय
- 1:10:10जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम कर दिया गया।
- 1:10:12इसके अलावा कुछ चीजें और हैं। कुछ स्कूल
- 1:10:14कॉलेज बनाए गए हैं जिनके बारे में मैंने
- 1:10:16आप लोगों को यहां बता दिया। मुझे उम्मीद
- 1:10:18है कि जो जानकारी मुझे मेरे द्वारा दी गई
- 1:10:21है वो आप लोगों को क्लियर होगी और इसमें
- 1:10:23हमने रानी दुर्गावती के शौर्य के बारे में
- 1:10:26जाना। रानी दुर्गावती के सम्मान के बारे
- 1:10:28में जाना। रानी दुर्गावती जिन्होंने अपने
- 1:10:30आत्मसम्मान के लिए जिन्होंने अपने सित्व
- 1:10:33की रक्षा करने के लिए जो है क्या कर दिया?
- 1:10:35सबसे बड़ा बलिदान दे दिया। रानी दुर्गावती
- 1:10:38को इतिहास में इसलिए भी जाना जाना चाहिए
- 1:10:40और आप सबको उनको नमन करना चाहिए कि उस समय
- 1:10:43अकबर जैसा शक्तिशाली शासक जिसके आगे चाहती
- 1:10:46रानी अगर उनको अपना शासन चलाना होता, अपने
- 1:10:48राज्य को झुकाना होता या वह अपनी गर्दन को
- 1:10:51झुकाना चाहती, तो वह क्या कर सकती थी?
- 1:10:52अकबर की अधीनता भी स्वीकार कर सकती थी।
- 1:10:54लेकिन उन्होंने अपने स्वाभिमान सम्मान के
- 1:10:57बदले क्या चुना? अपने शीश को कटाना बेहतर
- 1:11:00चुना। इसीलिए रानी दुर्गावती भारतीय
- 1:11:03इतिहास की उन वीरांगनाओं में शामिल हैं जो
- 1:11:06अग्रिम पंक्ति में जिनका नाम लिखा जाता है
- 1:11:08रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मीबाई जो भारत
- 1:11:11की उन महान वीरांगना महिलाओं में शामिल
- 1:11:13हैं जिन्होंने अपना बलिदान जो है अपना
- 1:11:15सर्वस्व बलिदान दिया था। यह गोंडवाना
- 1:11:17साम्राज्य की महान राजकुमारी थी। याद
- 1:11:20रखिएगा रानी दुर्गावती ने चंदेल वंश का
- 1:11:22नाम भी रोशन किया है कि वो राजपूत कुल से
- 1:11:24बिलोंग करती थी और उन्होंने गोंडवाना वंश
- 1:11:27की आन वांसान और परंपरा का भी पालन किया
- 1:11:29है क्योंकि गोंड इस समय एक शक्तिशाली
- 1:11:31राज्य था और गोंड जो लोग हैं वह अपनी
- 1:11:33वीरता और साहस के लिए जाने जाते हैं। तो
- 1:11:36इस वीडियो में मुझे उम्मीद है कि आप लोगों
- 1:11:38को यह वीडियो अच्छा लगेगा। इस वीडियो में
- 1:11:40हमने रानी दुर्गावती के शौर्य की कहानी
- 1:11:42सुनी और रानी दुर्गावती के बारे में बहुत
- 1:11:44कुछ जाना। ठीक है? आप इनमें से कुछ
- 1:11:47इमारतों को जरूर याद रखिएगा। तो ये हमारी
- 1:11:49रानी दुर्गावती हैं जो गोंडवाना की शेरनी
- 1:11:52के नाम से प्रसिद्ध हैं और इन्हें शौर्य
- 1:11:54एवं बलिदान का प्रतीक भी माना जाता है।
- 1:11:56कभी पूछा जाए किसे शौर्य एवं बलिदान का
- 1:11:59प्रतीक माना जाता है रानी दुर्गावती। किसे
- 1:12:01गोंडवाना की शेरनी कहते हैं रानी
- 1:12:03दुर्गावती। ये जो कुछ इमारतें थी जो मैंने
- 1:12:05आपको बताई याद रखिएगा। चौरागढ़ का किला
- 1:12:08याद रखिएगा कहां पर है? यह नरसिंहपुर जिले
- 1:12:10में है। सिंघोरागढ़ कहां है? दमोह में है।
- 1:12:13बरेला ग्राम उनकी समाधि है जो कहां पर है?
- 1:12:15जबलपुर में है और मदन मोहन फोर्ट मदन महल
- 1:12:19फ़ोर्ट याद रखिएगा यह सबसे छोटा किला है
- 1:12:21मध्य प्रदेश का। मध्य प्रदेश का सबसे छोटा
- 1:12:23किला कौन सा है? यही सबसे छोटा किला है
- 1:12:25मध्य प्रदेश का और इसको आप याद रखेंगे। ये
- 1:12:28जबलपुर में है जिसे पिंक स्टेशन के नाम से
- 1:12:31भी जानते हैं। ठीक है? तो ये सारे जो
- 1:12:33स्थान है ये गोंड वंश से संबंधित हैं।
- 1:12:36मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को यह लेक्चर
- 1:12:38अच्छा लगेगा और आप इस पे अपना फीडबैक जरूर
- 1:12:40देंगे। आगे आप किस क्रांतिकारी, किस वीर
- 1:12:43योद्धा के बारे में जानना चाहते हैं? किस
- 1:12:45वीरांगना के बारे में जानना चाहते हैं।
- 1:12:47जितने ज्यादा कमेंट आएंगे उसी टॉपिक पर
- 1:12:49आपको वीडियो मिलेगा। मुझे उम्मीद है कि आप
- 1:12:51लोगों को यह वीडियो काफी पसंद आएगा।
- 1:12:54थैंक यू। जय हिंद।
- 1:13:07नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार पुनः
- 1:13:09स्वागत है मध्य प्रदेश के वीरों के इतिहास
- 1:13:12की इस सीरीज में और आज हम बात करने वाले
- 1:13:14हैं मध्य प्रदेश के एक बहुत ही महान शासक
- 1:13:17जिन्होंने गोंड साम्राज्य में 52 किलों पर
- 1:13:20अधिकार कर गोंड सत्ता को जो है काफी मजबूत
- 1:13:22कर दिया था। और आज की कहानी के हमारे नायक
- 1:13:25हैं जिनका नाम है राजा संग्राम शाह गोंड।
- 1:13:29तो राजा संग्राम शाह गोंड कौन थे और किस
- 1:13:31तरीके से उन्होंने जो है इस राज्य की
- 1:13:34स्थापना की थी। गोंडवाना को मजबूत किया ये
- 1:13:36आज के लेक्चर में हम लोग जानेंगे। तो 15
- 1:13:38मिनट मुझे दीजिए और संग्राम शाह के बारे
- 1:13:40में जितने भी इंपॉर्टेंट तथ्य हैं एग्जाम
- 1:13:42ओरिएंटेड जो बातें हैं वो सभी की सभी आपको
- 1:13:44पता चल जाएंगी। तो मध्य प्रदेश के वीरों
- 1:13:46के इतिहास की सीरीज में आज हम बात कर रहे
- 1:13:48हैं राजा संग्राम शाह गोंड जिनका एक फेमस
- 1:13:51टाइटल नेम है जिसे हम बोलते हैं 52
- 1:13:53गणाधिपति अर्थात 52 किलों के स्वामी। तो
- 1:13:56आखिर यह क्या कहानी है? 52 किलो के स्वामी
- 1:13:59की आइए चर्चा करते हैं। तो इसके लिए आपको
- 1:14:01सबसे पहले एक छोटी सी स्टोरी सुननी पड़ेगी
- 1:14:04कि किस प्रकार जो है हमारे जो संग्राम शाह
- 1:14:08हैं वो गद्दी पर बैठते हैं। संग्राम शाह
- 1:14:10की गद्दी पर बैठने की कहानी क्या है
- 1:14:12एक्चुअली में इसे समझना पड़ेगा। इसे समझने
- 1:14:14के लिए हमको क्या करना पड़ेगा? देखो बड़ा
- 1:14:16सिंपल सा है।
- 1:14:18सबसे पहले आपको चलना पड़ेगा एक अभिलेख के
- 1:14:21पास और इस अभिलेख का नाम है रामनगर
- 1:14:24प्रशस्ति अभिलेख। देखिए रामनगर प्रशस्ति
- 1:14:28जो अभिलेख है उसका क्याेंस है यह आपको
- 1:14:31समझना है। रामनगर प्रशस्ति अभिलेख रामनगर
- 1:14:35जो प्रशस्ति है या रामनगर प्रशस्ति अभिलेख
- 1:14:37इसको कहा जाता है। इस अभिलेख
- 1:14:41के जो रचनाकार हैं जिन्होंने इस अभिलेख को
- 1:14:44लिखा है रचनाकार उनका नाम है पंडित जय
- 1:14:47गोविंद। क्या नाम था? पंडित जय गोविंद
- 1:14:50इसके रचनाकार हैं। और पंडित जय गोविंद ने
- 1:14:53क्या लिखा है? इसमें जरा ध्यान से सुनना।
- 1:14:55पंडित जय गोविंद ने इस विजयनगर इस रामनगर
- 1:15:00प्रशस्ति में याद रखिएगा गोंड वंश के 53
- 1:15:04राजाओं का उल्लेख किया है। बेसिकली यह जो
- 1:15:06अभिलेख है इसमें गोंड वंश के राजाओं की
- 1:15:09वंशावली मिलती है। गोंड वंश के 53 राजाओं
- 1:15:13का उल्लेख है। 53 राजाओं का उल्लेख है।
- 1:15:17पहली चीज और यह आपको याद रखना है। यह जो
- 1:15:2053 राजा हैं इनकी जो वंशावली है वह शुरू
- 1:15:23होती है कहां से? याद रखिएगा इनकी जो
- 1:15:25वंशावली शुरू होती है वह शुरू होती है
- 1:15:27हमारी यादव राय से। यादव राय जो कि गोंड
- 1:15:31वंश के संस्थापक थे यादव राय से प्रारंभ
- 1:15:34होकर यादव राय से प्रारंभ होती है। और जिन
- 1:15:38शासक के द्वारा इसका निर्माण करवाया गया
- 1:15:41था। यानी यह जो रामनगर प्रशस्ति है इसके
- 1:15:43रचनाकार तो यह हो गए। और किस राजा का है
- 1:15:46यह अभिलेख? तो वो है हमारे याद रखिएगा
- 1:15:48हृदय शाह गोंड जिन्होंने रामनगर को कैपिटल
- 1:15:52बनाया था। तो हृदय शाह गोंड के द्वारा एक
- 1:15:54अभिलेख लिखवाया गया था और इस अभिलेख का
- 1:15:56नाम क्या था? रामनगर प्रशस्ति। तो इस
- 1:15:58अभिलेख में उन्होंने राजा हृदय शाह जो
- 1:16:01गोंड थे उन्होंने अपने पूर्वजों के बारे
- 1:16:03में लिखवाया था और इसमें उन्होंने बताया
- 1:16:05था कि हमारे जो आदि पूर्वज हैं वो यादव
- 1:16:07राय हैं। इनके द्वारा ही क्या किया गया
- 1:16:09था? गोंड वंश की स्थापना की गई। और याद
- 1:16:12रखिएगा इसी 53 राजाओं की क्रम में 53 जो
- 1:16:15राजा रहे हैं यादव राय से लेकर इसमें इसी
- 1:16:19की 48वीं पीढ़ी में 48वीं पीढ़ी में याद
- 1:16:22रखिएगा यानी 48वें जो राजा हैं याद रखिएगा
- 1:16:25वो उन राजा का नाम क्या था? उन राजा का
- 1:16:28नाम था संग्राम शाह। तो आखिर संग्राम शाह
- 1:16:31कौन है? इसके बारे में एक डिटेल में
- 1:16:34इंफॉर्मेशन मिलती है। रामनगर प्रशस्ति
- 1:16:36अभिलेख। इसके जो कॉमन क्वेश्चन है वो क्या
- 1:16:38है कि रामनगर प्रशस्ति अभिलेख अगर आपसे
- 1:16:40पूछा जाए किस राजा का है? हृदय शाह गोंड।
- 1:16:43इसके लेखक कौन है? तो याद रखिएगा पंडित जय
- 1:16:45गोविंद है। यह कहां से मिला है? मंडला
- 1:16:48डिस्ट्रिक्ट में एक जगह है रामनगर। इसमें
- 1:16:50कितने राजाओं का उल्लेख है? गोंड वंश के
- 1:16:5253 राजाओं का उल्लेख है। और 48वीं पीढ़ी
- 1:16:54में कौन होते हैं? संग्राम शाह। तो ये एक
- 1:16:56बेसिक इंफॉर्मेशन हमको मिलती है। यह हो गई
- 1:16:59बात यहां पर। अब सवाल यह उठता है कि आखिर
- 1:17:03संग्राम शाह गोंड को सत्ता कैसे मिली और
- 1:17:05इन्होंने क्या-क्या किया? मैं तो बहुत कम
- 1:17:06शब्दों में आपको बताता हूं। इस कहानी को
- 1:17:08आप ऐसे समझिए कि एक गोंड राजा थे। एक गोंड
- 1:17:13राजा थे और उनका नाम था यह हमारा गोंडवाना
- 1:17:16साम्राज्य है। इसको आपको समझना पड़ेगा। यह
- 1:17:19है हमारा गोंडवाना साम्राज्य। और यह जो
- 1:17:22गोंडवाना साम्राज्य इस गोंडवाना साम्राज्य
- 1:17:24के जो शासक हैं उनका नाम था
- 1:17:27अर्जुन दास। यानी अभी राजा कौन है? अर्जुन
- 1:17:31दास गोंडवाना के राजा हैं। और अर्जुन दास
- 1:17:34के दो बेटे हैं। अर्जुन दास के कितने
- 1:17:36पुत्र हैं? अर्जुन दास के दो पुत्र हैं।
- 1:17:38एक पुत्र का नाम है आमणदास या जिसे अमन
- 1:17:43दास भी कहते हैं। आमदास
- 1:17:48याद रखिएगा और दूसरे थे जिनका नाम था
- 1:17:51जोगीराज।
- 1:17:53क्या नाम था? जोगीराज।
- 1:17:55अब कहानी में क्या ट्विस्ट आता है कि
- 1:17:57गोंडवाना राज्य का एक पड़ोसी राज्य था और
- 1:18:00इस राज्य का नाम था बघेल राज। जिसे हम
- 1:18:02बघेलखंड कहते हैं ना वह इन्हीं बघेल
- 1:18:05राजाओं के नाम पर बघेल राज बघेल राज्य के
- 1:18:08जो शासक थे उनका नाम था जो यहां के शासक
- 1:18:12हैं उनका नाम था वीर सिंह देव वीर सिंह
- 1:18:15देव बघेल है जो कि एक शक्तिशाली राजा थे
- 1:18:18वीर सिंह देव बघेल तो यह भी आपको याद रखना
- 1:18:20है वीर सिंह देव बघेल बघेल के बारे में अब
- 1:18:23होता क्या है कि यह जो राजा है गोंडवाना
- 1:18:26के जिनका नाम अर्जुन दास है और इनके दो
- 1:18:27बेटे हैं एक का नाम बामणदास एक का नाम
- 1:18:29जोगीराज है। प्रॉब्लम यह थी कि इनका जो यह
- 1:18:32बेटा है वह विद्रोही प्रवृत्ति का था
- 1:18:34जिसका नाम आमनदास था और विद्रोह करके यह
- 1:18:37क्या करते हैं? भाग जाते हैं। जिनका नाम
- 1:18:39होता है किसके राज में भाग जाते हैं? बघेल
- 1:18:41राज्य के राजा वीर सिंह देव के यहां शरण
- 1:18:43लेते हैं। इस समय अब अर्जुन दास ने क्या
- 1:18:47किया? अर्जुन दास ने अपने दूसरे बेटे को
- 1:18:48राजा बना दिया जिनका नाम जोगीराज था। तो
- 1:18:51जोगीराज जो है वो राजा बना दिए गए। अब इस
- 1:18:53बात से ये नाराज हुए कौन? आमरणदास नाराज
- 1:18:56हुए और आमरणदास ने आकर क्या कर दिया? बाद
- 1:18:58में यह यहां से लौटे और उन्होंने आके अपने
- 1:19:00पिता की हत्या कर दी जिनका नाम था अर्जुन
- 1:19:03दास और अपने पिता की हत्या करके जो है इस
- 1:19:05राज्य पर अधिकार कर लिया किस राज्य पर
- 1:19:07गोंडवाना पर लेकिन जैसे ही यह खबर लगी
- 1:19:10किसको वीर सिंह देव को तो वीर सिंह देव ने
- 1:19:13क्या किया इस राज्य पर हमला कर दिया किस
- 1:19:15राज्य पर यानी बघेल राज्य पर हमला इस पे
- 1:19:17गोंडवाना राज्य पर हमला करके इसे अपने
- 1:19:19अधिकार में ले लिया ठीक है तो कुल मिलाकर
- 1:19:22कहानी का सार यह है कि गोंडवाना के जो
- 1:19:25शासक है अर्जुन देश उनकी हत्या कर दी उनके
- 1:19:27बेटे बेटे ने जिनका नाम आमणदास है। लेकिन
- 1:19:30आमणदास के इस राज्य पर कब्जा कर लिया वीर
- 1:19:32सिंह देव जो बघेल शासक हैं जो उनके पड़ोसी
- 1:19:36राजा हैं। लेकिन वीर सिंह देव से बाद में
- 1:19:38इसने जो आमणदास है यानी यह वाला जो लड़का
- 1:19:41है आमदास इसने माफी मांगी और माफी मांगते
- 1:19:43हुए कहा कि जो कुछ हुआ वह गलती हो गई।
- 1:19:46मुझे माफ कर दो। क्योंकि पुराने संबंध थे
- 1:19:48क्योंकि पहले इनके यहां नौकरी कर चुका था।
- 1:19:50तो राजा वीर सिंह देव ने इसे माफ कर दिया
- 1:19:53और इन्हें गोंडवाना का शासक बना दिया और
- 1:19:56यही जो शासक हैं गोंडवाना के जो कहलाते
- 1:19:58हैं आमणदास। आमदास धीरे याद रखिएगा आमणदास
- 1:20:02जो हैं राजा बने और यही आमणदास आगे चल के
- 1:20:05क्या बन जाएंगे? आमदास के पास एक टाइटल
- 1:20:07होगा जिसको हम बोलते हैं संग्राम शाह। तो
- 1:20:10संग्राम शाह कैसे बने यह हम जानते हैं।
- 1:20:13फिलहाल आपको यह जानना है कि ये अपने पिता
- 1:20:15की हत्या कर गद्दी पर बैठे थे। इन्होंने
- 1:20:17अपने पिता की हत्या की थी। तो आइए मैं
- 1:20:19स्टोरी को पढ़ के बताता हूं आपको। जीवन
- 1:20:21परिचय के बारे में जो मैंने आपको बताया
- 1:20:23वही होगा। कुछ अलग नहीं होगा। क्या है कि
- 1:20:25इनके अर्जुन दास के दो पुत्र थे। एक का
- 1:20:28नाम था आमरणदास और एक का नाम जोगीदास या
- 1:20:30जोगीराज था। ठीक है? आमदास की दो पत्नियां
- 1:20:34भी थी। एक पत्नी का नाम पद्मावती और एक का
- 1:20:36नाम सुमति था। पद्मावती से उनको दो बेटे
- 1:20:38होंगे। यानी संग्राम शाह के भी दो बेटे
- 1:20:40हैं। एक का नाम दलपत शाह और चंद्र शाह
- 1:20:42जिनके बारे में अभी हम पढ़ेंगे। अब सवाल
- 1:20:45यह उठता है कि आखिर इनको यह जो टाइटल है
- 1:20:47संग्राम शाह वो किसने दिया है? तो इसके
- 1:20:49पीछे दो कहानियां चलती हैं। एग्जाम के लिए
- 1:20:51जो याद रखनी जो अबुल फजल ने भी इस बात का
- 1:20:54जिक्र किया है कि संग्राम शाह जो उपाधि है
- 1:20:57वो गुजरात के शासक सुल्तान बहादुर शाह ने
- 1:21:00रायसेन विजय में सहायता देने के कारण
- 1:21:02आमदास को दी थी। ठीक है? ये स्टोरी भी मैं
- 1:21:05आपको बता बताता हूं। यानी आपको अगर यह
- 1:21:07पूछा जाए कि आखिर संग्राम शाह को संग्राम
- 1:21:10शाह का टाइटल किसने दिया? तो आप याद रखिए
- 1:21:12गुजरात का शासक है बहादुर शाह जो बहुत
- 1:21:14शक्तिशाली था।
- 1:21:16ठीक है? तो याद रखिएगा। अब आगे बढ़ते हैं।
- 1:21:19आमदास की जो दो पत्नियां हैं जिनके नाम
- 1:21:22पद्मावती और सिमती हैं। इनका उल्लेख उनके
- 1:21:24ग्रंथ जिसका नाम है जिसमें उन्होंने खुद
- 1:21:26ही लिखा है रस्म रत्नमाला में मिलता है।
- 1:21:28मैं अभी इसके बारे में भी और चर्चा
- 1:21:30करूंगा। आगे चलते हैं और आगे चर्चा करते
- 1:21:32हैं। अब आगे क्या हुआ? तो गद्दी कैसे
- 1:21:35प्राप्त की? तो मैंने बता दिया। अबुल फजल
- 1:21:37ने इसमें लिखा है कि अबुल फजल की रचना
- 1:21:39अकबरनामा के अनुसार अर्जुन दास ने अपने
- 1:21:41जेष्ठ पुत्र रामदास को उसकी विद्रोही
- 1:21:43प्रवृत्ति के कारण कैद कर लिया था। किंतु
- 1:21:45शीघ्र ही कैद से छोड़े जाने के उपरांत
- 1:21:47आमरणदास बघेलखंड के शासक वीर सिंह देव
- 1:21:50जिनके बारे में मैंने अभी आपको बताया वहां
- 1:21:52पर चला गया और उनके पुत्र के वीरभानु सिंह
- 1:21:55देव जो उनके पुत्र थे उनके संरक्षक के रूप
- 1:21:57में काम किया। कुछ वर्षों के उपरांत जब
- 1:21:59वीर सिंह देव सिकंदर लोदी की सेवा में
- 1:22:01दिल्ली गया तो उसी समय आमदास को पता चला
- 1:22:04कि उसके पिता अपने छोटे पुत्र जोगीदास को
- 1:22:06उत्तराधिकारी घोषित करने वाले हैं तो उसने
- 1:22:08क्या किया गड़ा आया लौटा और उसने आकर जो
- 1:22:11है अपने पिता अर्जुन दास की हत्या कर दी
- 1:22:13और गड़ा पर अधिकार कर लिया। ठीक है? तो ये
- 1:22:15जो मैंने आपको बताया कि जब इस बात की
- 1:22:17जानकारी वीर सिंह देव को पता चली तो
- 1:22:19उन्होंने गड़ा पर आक्रमण किया तथा आवरण
- 1:22:21दास को वहां से भागना पड़ा। लेकिन बाद में
- 1:22:23क्या हुआ कि वीर सिंह देव के पास आकर
- 1:22:26क्षमा याचना की जिससे वीर सिंह देव ने उसे
- 1:22:28गड़ा का राज्य जो है सौंप दिया। तो कुल
- 1:22:30मिलाकर अभी हमने तीन चीजें जानी कि
- 1:22:32संग्राम शाह गड़ा के शासक कैसे बने और
- 1:22:35संग्राम शाह को याद रखिएगा संग्राम शाह को
- 1:22:38किसने गड़ा का राज्य वापस दिया। अब कहानी
- 1:22:41में अगला मोड़ है कि कैसे इन्होंने एक
- 1:22:43बड़े राज्य की स्थापना की। 52 किलों को
- 1:22:45जीता। तो अब हम इनकी राजनीतिक उपलब्धियों
- 1:22:48की चर्चा करने वाले हैं कि इनका जो संघर्ष
- 1:22:50है वो मेनली किस-किस से हुआ। तो देखो मैं
- 1:22:52अगर इसको थोड़ा सा समझाना चाहूं तो आप ऐसे
- 1:22:55समझ सकते हैं कि जिस समय की ये बात है
- 1:22:58गोंडवाना कुछ ऐसे फैला हुआ था। यह हमारा
- 1:23:01गोंडवाना है। याद रखिएगा गोंडवाना
- 1:23:03साम्राज्य है। गोंडवाना साम्राज्य को या
- 1:23:05गोंडवाना राज्य को दो ओर से दो लोग घेरते
- 1:23:07हैं। इधर से अगर हम देखें तो यह राजपूत
- 1:23:10शासक हैं जिनका नाम बघेल है और बघेलों से
- 1:23:12इनके अच्छे संबंध हैं। क्योंकि जो अभी
- 1:23:14बघेलखंड के शासक हैं जिनका नाम क्या है?
- 1:23:17वीर सिंह देव वो उनके मित्र बन चुके हैं।
- 1:23:19इधर बात करेंगे तो यहां पर एक मुस्लिम
- 1:23:21राज्य है जिसका नाम मालवा है और यह इनका
- 1:23:23सबसे दुश्मन राज्य है मालवा। मालवा में
- 1:23:26शासन है खिलजी खिलजी वंश का है जो
- 1:23:28गयासुद्दीन खिलजी आपने नाम सुना होगा
- 1:23:30महमूद खिलजी और गयासुद्दीन खिलजी। ठीक है?
- 1:23:34अगर हम बात करें इसी समय तो इसी समय
- 1:23:36बुंदेलखंड की अगर बात करेंगे बुंदेलखंड तो
- 1:23:38बुंदेलखंड में किसका शासन है? याद रखिएगा
- 1:23:41बुंदेलखंड में इसमें क बुंदेलखंड के जो
- 1:23:44शासक हैं उनका नाम है कालिंजर के शासक जो
- 1:23:46कालिंजर इसकी राजधानी है राजा कीरत सिंह
- 1:23:49क्या नाम है राजा कीरत सिंह चंदेल जिनकी
- 1:23:52पुत्री होंगी हमारी कौन याद रखिएगा रानी
- 1:23:55दुर्गावती बघेल शासक कौन है वीरभानुदेव
- 1:23:58हैं वीरभानुदेव के बाद सॉरी पहले हैं
- 1:24:01हमारे वीर सिंह देव और वीर सिंह देव के
- 1:24:03बाद उनका लड़का गद्दी पर बैठेगा जिनका नाम
- 1:24:05होगा वीरभानु इनका बेटा होगा चलो बेटे को
- 1:24:08अभी रहने दो मालवा में गयासुद्दीन खिलजी
- 1:24:11का शासन चल रहा है। मालवा का शासक कौन है?
- 1:24:14गयासुद्दीन खिलजी है। गयासुद्दीन खिलजी।
- 1:24:18गयासुद्दीन खिलजी। तो पहले तो इनका जो
- 1:24:21संघर्ष है वो यहां पर होता है। यह आपस में
- 1:24:23इधर संघर्ष करते रहते हैं मालवा के शासक
- 1:24:26से और बताते हैं कि जब मालवा के शासक
- 1:24:28गयासुद्दीन खिलजी ने हमला किया तो
- 1:24:30गोंडवाना के शासक संग्राम शाह ने उनको
- 1:24:32डिफीट कर दिया। नंबर वन इनके साथ इन्होंने
- 1:24:34क्या किया? यहां पर इन्होंने वैवाहिक
- 1:24:36संबंध स्थापित किए। चंदेल वंश की जो
- 1:24:39राजकुमारी हैं कीरत सिंह की पुत्री हैं
- 1:24:41जिनका नाम था रानी दुर्गावती तो रानी
- 1:24:44दुर्गावती से अपने बेटे की शादी कर दी
- 1:24:46जिन्हें हम रानी दुर्गावती से अपने बेटे
- 1:24:49की शादी कर दी और इनके बेटे का नाम था
- 1:24:51दलपत शाह इनके साथ मित्रवत संबंध थे। अगर
- 1:24:54आप इस कहानी को समझ पा रहे हैं तो यह समझ
- 1:24:56पा रहे होंगे कि जो राजा संग्राम शाह हैं
- 1:24:59जो कि गोंड शासक हैं उन्होंने अपनी
- 1:25:01कूटनीति के द्वारा अपने दो शक्तिशाली
- 1:25:03पड़ोसी राज्यों से अच्छे संबंध बनाए। एक
- 1:25:06राजपूत बुंदेलखंड के चंदेल राजपूतों से
- 1:25:08वैवाहिक संबंध किए और अपने बेटे की शादी
- 1:25:10रानी दुर्गावती से कर दी। बघेल राज्य के
- 1:25:13राजा से उनके मित्रवत संबंध है। केवल एक
- 1:25:15ही फ्रंट पे तो लड़ना पड़ रहा है। तो
- 1:25:16गोंडवाना की लड़ाई वेस्ट में थी। याद
- 1:25:18रखिएगा आप मालवा के खिलजी सुल्तानों से थी
- 1:25:21जो मालवा में शासन करते थे। यहां तक आपको
- 1:25:24ये समझ में आ गया होगा। अब इन्होंने अपनी
- 1:25:26कूटनीति के द्वारा और इन राजपूत राज्यों
- 1:25:29की सहायता से एक बड़ा राज्य स्थापित किया
- 1:25:31और बताया जाता है कि इनके पास 52 किले थे।
- 1:25:34इसीलिए एक संस्कृत श्लोक संग्रह है गणेश
- 1:25:37नृप वर्णनम जिसमें यह कहा गया है कि 52
- 1:25:40किलों के स्वामी थी इसीलिए इनको 52
- 1:25:42गणाधिपति कहा जाता है। अब इसी समय एक और
- 1:25:45समस्या है वो भी जान लीजिए। कुछ समय
- 1:25:47पश्चात यहां पे गुजरात है और गुजरात के जो
- 1:25:50शासक हैं गुजरात। गुजरात के जो शासक हैं
- 1:25:54वो लगातार हमला करते हैं कहां पर? मालवा
- 1:25:56पर। तो जब वो मालवा पर हमला करेंगे तो याद
- 1:25:58रखिएगा मालवा में एक जगह है रायसेन। कौन
- 1:26:01सी जगह है? रायसेन। तो जब वह रायसेन पर
- 1:26:04हमला करेंगे गुजरात के शासक जिनका नाम
- 1:26:06होगा बहादुर शाह। तो बहादुर शाह ने जब
- 1:26:09गुजरात के शासक बहादुर शाह ने जब मालवा पे
- 1:26:12हमला किया और रायसेन पर हमला किया तो इस
- 1:26:14रायसेन विजय में उन्होंने क्योंकि देखो
- 1:26:17गोंडवाना का दुश्मन मालवा। गुजरात का
- 1:26:19दुश्मन मालवा। जब दोनों का ही दुश्मन
- 1:26:22मालवा है तो यह दोनों आपस में क्या बन
- 1:26:24जाएंगे? समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा
- 1:26:25है? राजनीति क्या कहती? दुश्मन का दुश्मन
- 1:26:28क्या हो जाता है? दोस्त हो जाता है। और
- 1:26:30इसी क्रम में संग्राम शाह ने क्या किया?
- 1:26:32बहादुर शाह की सहायता की मालवा के
- 1:26:34विरुद्ध। और इसीलिए बहादुर शाह के द्वारा
- 1:26:37इनको संग्राम शाह की उपाधि से सम्मानित
- 1:26:39किया गया था। क्या आपको यह समझ में आया?
- 1:26:42संग्राम शाह की उपाधि उनको किसने दी थी?
- 1:26:45याद रखिएगा। तो संग्राम शाह की उपाधि दी
- 1:26:47थी गुजरात के शासक बहादुर शाह ने। गुजरात
- 1:26:50के शक्तिशाली शासक बहादुर शाह ने उन्हें
- 1:26:52संग्राम शाह कहा क्योंकि उन्होंने रायसेन
- 1:26:55के युद्ध में उनकी सहायता की थी। नंबर वन।
- 1:26:57नंबर टू। इस समय अगर मैं दिल्ली की बात
- 1:26:59करूं तो दिल्ली में जो है सिकंदर लोदी का
- 1:27:02शासन था और
- 1:27:04सिकंदर लोदी के बाद फिर आता है इब्राहिम
- 1:27:06लोदी। तो इब्राहिम लोदी का जो विद्रोही
- 1:27:08भाई है वो भी आया था गड़ा तो उसके विरुद्ध
- 1:27:11जो है उन्होंने इब्राहिम लोदी की सहायता
- 1:27:13की थी। तो कुल मिलाकर ये समकालीन राजाओं
- 1:27:15की कुछ कहानियां लिखी हैं। आई होप आपको
- 1:27:17समझ में आ गया होगा। अगर नहीं समझ में आया
- 1:27:19तो यह मैं पढ़ देता हूं। अब आपको अच्छे से
- 1:27:21समझ में आ जाएगा क्योंकि मैंने आपको समझा
- 1:27:23दिया है। आमदास एक सफल कूटनीतिक शासक था
- 1:27:26जिसे निम्नलिखित उदाहरणों के अंतर्गत समझा
- 1:27:28जा सकता है। नंबर वन आमदास ने दिल्ली के
- 1:27:31सुल्तान इब्राहिम लोदी का विश्वास प्राप्त
- 1:27:33करने हेतु उसके विद्रोही भाई जिसका नाम था
- 1:27:36जलाल खान। जलाल खान को गड़ा कटंगा से पकड़
- 1:27:38कर सुल्तान को सौंप दिया। यानी याद रखिएगा
- 1:27:41बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है कि इस समय
- 1:27:43दिल्ली में इब्राहिम लोदी का शासन था और
- 1:27:45उसका एक भाई था जो विद्रोह कर गया था
- 1:27:47जिसका नाम था जलाल खान। तो जलाल खान जब
- 1:27:49विद्रोह करके गढ़ा आया तो उसे पकड़ कर जो
- 1:27:52है इब्राहिम लोदी को सौंप दिया। तो दिल्ली
- 1:27:54के साथ दोस्ती हो गई। यानी दिल्ली के
- 1:27:56सुल्तान से होने वाले आक्रमण से बच गए।
- 1:27:58दूसरी कूटनीति देखिए उसने गुजरात के शासक
- 1:28:01बहादुर शाह को रायसेन विजय में सहायता
- 1:28:03प्रदान कर मित्रवत संबंध स्थापित कर लिए
- 1:28:05और इसीलिए गुजरात के शासक ने उनको कहा
- 1:28:08संग्राम शाह यानी तुम संग्राम में मेरा
- 1:28:11साथ दिए हो। तीसरी खास बात क्या है?
- 1:28:13बघेलखंड के शासक वीर सिंह देव के साथ भी
- 1:28:15उसके संबंध हमेशा मधुर बने रहे। तो यह
- 1:28:17अच्छी चीज रही नहीं तो पड़ोसी हमला करते
- 1:28:20तो दिक्कत होती। एक और है आमरणदास ने
- 1:28:22कालिंजर के शासक कीरत सिंह चंदेल की
- 1:28:24राजकुमारी दुर्गावती से अपने पुत्र दलपत
- 1:28:27शाह का विवाह कर चंदेलों को भी क्या कर
- 1:28:29लिया? अपने संबंधी बना लिया। तो ये इनकी
- 1:28:32राजनीतिक उपलब्धियां थी आमरणदास की। अब हम
- 1:28:35लोग आगे बढ़ते हैं और पहले आमदास का
- 1:28:37चैप्टर क्लोज करते हैं। फिर कुछ बातें
- 1:28:38इधर-उधर की भी करेंगे। अगर हम सांस्कृतिक
- 1:28:41उपलब्धियों की बात करें एग्जाम ओरिएंटेड।
- 1:28:43तो बहुत इंपॉर्टेंट है कि आमरदास ने
- 1:28:45संस्कृत भाषा में एक काव्य ग्रंथ लिखा था
- 1:28:48जिसका नाम है रस रत्नमाला और इसी रस
- 1:28:51रत्नमाला में उनकी दो पत्नियों का उल्लेख
- 1:28:53है। उनकी दो पत्नियों के नाम क्या थे? इस
- 1:28:55बात की जानकारी कहां मिलती है? उन्हीं की
- 1:28:58पुस्तक में मिलती है जिसका नाम है रस
- 1:29:00रत्नमाला। अर्थात संग्राम शाह या जिनका
- 1:29:03नाम आमण दास है। वह लिखने में भी माहिर
- 1:29:06थे। तलवार के साथ-साथ कलम के भी धनी हैं।
- 1:29:09और कलम में याद रखिएगा उन्होंने एक ग्रंथ
- 1:29:11लिखा है जिसका नाम है रस रत्नमाला। इसके
- 1:29:13अलावा उनके दरबार में एक बहुत बड़े
- 1:29:15विद्वान रहते थे और उन विद्वान का नाम है
- 1:29:17दामोदर ठाकुर एवं अनंत दीक्षित जिसमें
- 1:29:20ज्यादा चर्चित हैं कौन? याद रखिए जिसमें
- 1:29:22ज्यादा चर्चित हैं दामोदर ठाकुर। क्योंकि
- 1:29:25दामोदर ठाकुर ने उनके समय रहते हुए दो
- 1:29:27विशेष ग्रंथ लिखे जिनका नाम है संग्राम
- 1:29:29शाही विवेक दीपिका जो इन्हीं के नाम पर है
- 1:29:32संग्राम शाह और दूसरा है दिव्य निर्णय। तो
- 1:29:35बहुत इंपॉर्टेंट हो जाएगा कि अगर आपसे
- 1:29:38पूछा जाए कि दामोदर ठाकुर नामक विद्वान
- 1:29:40किस गौण शासक के दरबार में रहते थे तो
- 1:29:42आपको बताना है संग्राम शाह। संग्राम शाह
- 1:29:44ने कौन सी पुस्तक लिखी? रस रत्नमाला। और
- 1:29:46याद रखिएगा संग्राम शाह के दरबार में रहने
- 1:29:49वाले दामोदर ठाकुर के द्वारा कौन सी किताब
- 1:29:51लिखी गई? संग्राम शाही विवेक दीपिका और
- 1:29:54दिव्य निर्णय नामक ग्रंथ लिखे गए। इसके
- 1:29:57अलावा एक और इंपॉर्टेंट बात है। हम बात
- 1:29:58करते हैं कुछ सिक्कों की। राजा संग्राम
- 1:30:01शाह के द्वारा ध्यान से सुनिएगा। सोना,
- 1:30:04चांदी, पीतल और तांबे यानी सभी प्रकार के
- 1:30:07सिक्के चलवाए गए। इनके द्वारा चलवाए गए
- 1:30:09सोने के सिक्के आज भी इंग्लैंड के
- 1:30:11संग्रहालय में रखे हैं। ब्रिटेन के
- 1:30:12संग्रहालय में रखे हैं। एक और इंपॉर्टेंट
- 1:30:15बात है जो बहुत इंपॉर्टेंट है। याद
- 1:30:16रखिएगा। अगर हम बात करें इनके सिक्कों पर
- 1:30:19तो इनके सिक्कों पर एक जानकारी मिलती है
- 1:30:22कि इन्होंने अपने सिक्कों पर खुद को याद
- 1:30:24रखिएगा क्या कहा है? तो खुद को पुलत्स्य
- 1:30:26वंशी कहा है। यह पुलत्स्य वंशी का क्या
- 1:30:28कनेक्शन है? मैं आपको बताता हूं। गड़ा के
- 1:30:30शासकों का राजकीय चिन्ह क्या था? यह भी
- 1:30:32याद रखिएगा। गड़ा के शासक यानी गोंड
- 1:30:34शासकों का राजकीय चिन्ह है हाथी दबोचे हुए
- 1:30:37सींग वाला शेर। यानी एक ऐसा शेर जिसने
- 1:30:40हाथी को पकड़ रखा हुआ है जो गड़ा राज्य
- 1:30:42में जबलपुर के कोतवाली और गोकुलदास महल
- 1:30:45में आज भी विद्यमान है। तो याद रखिएगा
- 1:30:48सिक्का कौन से चलाए? सोने के, चांदी के,
- 1:30:51तांबे के सिक्के चलाए। और इनके जो सोने के
- 1:30:53सिक्के हैं, आज भी ब्रिटिश म्यूजियम में
- 1:30:56रखे हैं। कहां रखे हैं? ब्रिटिश संग्रहालय
- 1:30:58में रखे हैं। ब्रिटिश म्यूजियम में रखे
- 1:31:00हुए हैं। तो यह भी एक अच्छा क्वेश्चन है
- 1:31:02जो आपके काम आ जाएगा। ठीक है? इसके अलावा
- 1:31:05इनका राजकीय चिन्ह क्या है? हाथी दबोचे
- 1:31:07हुए सींग वाला शेर यानी ऐसा शेर जिसने
- 1:31:09हाथी को कंट्रोल कर रखा है। नंबर वन नंबर
- 1:31:12टू इनके सिक्कों पर इन्हें क्या कहा गया?
- 1:31:14पुलस्य वंशी कहा गया। इसका किस्सा भी सुन
- 1:31:16लीजिए। देखिए अगर आप ध्यान से सुनेंगे जब
- 1:31:20कभी आप गोंड ट्राइब पढ़ेंगे तो गण जो लोग
- 1:31:22हैं वह रावण को अपना वंशज मानते हैं। मतलब
- 1:31:26रावण से अपना संबंध जोड़ते हैं। नंबर वन
- 1:31:28यहां पर जो गण शासक हैं संग्राम शाह
- 1:31:31संग्राम शाह के हमें कुछ सिक्के मिले हैं
- 1:31:34और इन सिक्कों पर संग्राम शाह के सिक्कों
- 1:31:36पर लिखा है पुलत्स्य वंशी। क्या लिखा है?
- 1:31:39पुलत्स्य। पुलत्स्य कौन है? याद रखिए
- 1:31:41पुलस्य।
- 1:31:43पुलस्य वंशी लिखा है। तो पुलस्य वंशी
- 1:31:46एग्जाम में पूछा जा सकता है। पुलस्य वंशी
- 1:31:48का क्या मतलब है?
- 1:31:50देखो रावण जो थे रावण
- 1:31:55रावण के दादाजी का नाम था। रावण के दादाजी
- 1:31:59का नाम क्या था? पुलस्य था। पुलस्य ऋषि था
- 1:32:03जो ब्रह्मा जी के पुत्र थे। पुलस ऋषि। तो
- 1:32:06संभवत इससे यह पता चलता है कि वो गौण जो
- 1:32:10लोग हैं वह अपने आप को क्या बोलते हैं? वह
- 1:32:12रावण का वंशज कहते हैं। आज के बाद याद
- 1:32:14रखिएगा यह संग्राम शाह किसका वंशज स्वयं
- 1:32:17को कहता है? तो रावण का वंशज स्वयं को
- 1:32:19कहता है क्योंकि इसके सिक्कों पर पुलस्य
- 1:32:21वंशी वर्ड मिला है। पुलस्य ऋषि के पुत्र
- 1:32:24का पुत्र था जिनका नाम था रावण। रावण की
- 1:32:27मां का नाम केसी और पिता का नाम आप कमेंट
- 1:32:29सेक्शन में बताएंगे जो भी लोग ये वीडियो
- 1:32:31देख रहे हैं। कमेंट सेक्शन में कम से कम
- 1:32:3350 कमेंट आने चाहिए जिसमें लिखा हो कि
- 1:32:35रावण के पिता का नाम क्या था? ठीक है? तो,
- 1:32:37यह एक इंपॉर्टेंट बात हो गई। तो, हमने
- 1:32:39यहां पर क्या देख लिया? उनके सिक्के देख
- 1:32:41लिए। उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियां देख ली।
- 1:32:43लास्ट जो इंपॉर्टेंट चीज है उसके बाद हम
- 1:32:44कुछ और बातों की बात करेंगे। उनका राज्य
- 1:32:46कहां से कहां तक फैला था। देखिए उनके बारे
- 1:32:48में यूं तो हजारों बातें हैं जो मैं आपको
- 1:32:50बताना चाहता हूं। लेकिन मैं चाहता हूं कम
- 1:32:53समय में हम इतनी बातें जाने जो आपके काम
- 1:32:55की हैं। देखो आमणदास ने कई महत्वपूर्ण
- 1:32:59इमारतों का या स्थापत्य का निर्माण करवाया
- 1:33:01जो एग्जाम के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है।
- 1:33:03जिनको आपको पता होना चाहिए। नंबर वन वाजना
- 1:33:06मठ बहुत ही प्रसिद्ध है। उसका कारण है कि
- 1:33:08वो भैरव भैरव दास जी जो थे याद रखिएगा
- 1:33:11भैरव बाबा के उपासक थे। किसके उपासक थे?
- 1:33:14भैरव के उपासक थे हमारे आम दास जी। और याद
- 1:33:17रखिएगा उन्होंने एक तंत्र मंदिर बनवाया है
- 1:33:20जो बेसिकली तांत्रिक क्रियाओं के लिए
- 1:33:22प्रसिद्ध है। उसका नाम है बाजना मठ। बहुत
- 1:33:24इंपॉर्टेंट है एग्जाम के लिए। बाजना मठ का
- 1:33:26निर्माण किसने करवाया था? कहां पर है?
- 1:33:28बाजना मठ जबलपुर में है। किसने बनवाया है?
- 1:33:30संग्राम शाह ने। क्या होता है यहां पर?
- 1:33:32यहां तांत्रिक विद्या का केंद्र है। वटुक
- 1:33:34भैरव का मंदिर तथा शनि मंदिर भी निर्मित
- 1:33:36है। याद रखना आज के बाद कभी पूछा जाए कि
- 1:33:38संग्राम शाह किसके उपासक थे? भैरव बाबा।
- 1:33:41नंबर टू याद रखिएगा संग्राम सागर नामक
- 1:33:44उन्होंने एक सरोवर बनवाया था। यह संग्राम
- 1:33:46सागर कहां पर है? याद रखिएगा जबलपुर में
- 1:33:48है। और यह बाजना मठ में निर्मित एक
- 1:33:51कृत्रिम झील है। यानी बाजना मठ के पास में
- 1:33:53ही निर्मित है जिसको हम बोलते हैं संग्राम
- 1:33:55सागर सरोवर। इसके अलावा उन्होंने एक गांव
- 1:33:58बसाया था। एक जगह बसाई थी जिसका नाम है
- 1:34:00संग्रामपुर। उन्होंने अपने नाम पर बसाया
- 1:34:02था जो कि दमोह डिस्ट्रिक्ट में है। याद
- 1:34:04रखिएगा यह कलचुरियों द्वारा बनाए गए
- 1:34:06पुराने सिंगौरगढ़ के किले के निकट बना हुआ
- 1:34:08है। लास्ट है चौरागढ़ का किला। चौरागढ़ का
- 1:34:12किला नरसिंहपुर जिले में है। याद रखिएगा।
- 1:34:14तो चौरागढ़ का फोर्ट किसने बनवाया था? याद
- 1:34:17रखिए चौरागढ़ का फोर्ट बनवाया है।
- 1:34:19संग्रामपुर नामक गांव बसाया। संग्रामपुर
- 1:34:21दमोहो में है। चौरागढ़ नरसिंहपुर में है।
- 1:34:23इसके अलावा संग्राम सागर सरोवर जबलपुर और
- 1:34:26बाजना मठ जबलपुर इनके निर्माण के लिए जाना
- 1:34:29जाता है संग्राम शाह को। अगर आप ध्यान से
- 1:34:31देखें तो संग्राम शाह की सांस्कृतिक,
- 1:34:33संग्राम शाह के सिक्के और संग्राम शाह की
- 1:34:35राजनीतिक उपलब्धियां और साथ-साथ हम लोगों
- 1:34:37ने उनके निर्माण कार्यों को पढ़ लिया। तो
- 1:34:39ये थे हमारे वो राजा जिन्हें हम बावन
- 1:34:42गणाधिपति के नाम से जानते हैं। महान गौड
- 1:34:44शासक जिनका नाम था संग्राम शाह। जिनके
- 1:34:47बारे में क्या है? जिनके बारे में जानकारी
- 1:34:49रामनगर प्रशस्ति अभिलेख से मिलती है कि वह
- 1:34:51इस पीढ़ी के याद रखिएगा गोंड वंश के 48वें
- 1:34:54शासक थे जिनका नाम था संग्राम शाह जिनका
- 1:34:56वास्तविक नाम क्या था? आमदास था। गुजरात
- 1:34:58के बहादुर शाह ने उन्हें उन्हें संग्राम
- 1:35:00शाह की उपाधि दी। उनके पिता का नाम अर्जुन
- 1:35:03दास था। उनके भाई का नाम जोगीदास या
- 1:35:04जोगीराज था। इसके अलावा उनकी दो पत्नियां
- 1:35:07थी और दो बेटे थे। बेटों पर हम चलेंगे।
- 1:35:08उससे पहले मैं आपको बताना चाहता हूं। एक
- 1:35:11और छोटी सी जानकारी मैं आपको देना चाहता
- 1:35:13हूं। देखिए संग्राम शाह के बारे में लिखा
- 1:35:16हुआ है कि संग्राम शाह ने 52 किलों को
- 1:35:18जीता था और इसीलिए रामनगर जो प्रशस्ति है
- 1:35:22जब उनके बारे में लिखा जाता है रामनगर
- 1:35:24प्रशस्ति में तो उनके लिए एक बात लिखी है
- 1:35:26कि प्रतापी अर्जुन उनके पापा का नाम क्या
- 1:35:28है अर्जुन दास प्रतापी अर्जुन सिंह का
- 1:35:31पुत्र याद रखिएगा संग्राम सा था और जिस
- 1:35:34भांति ध्यान से सुनना जिस भांति विशाल
- 1:35:36कपास का ढेर एक छोटी सी चिंगारी से नष्ट
- 1:35:38हो जाता है उसी भांति उसके शत्रुगण तेजहीन
- 1:35:41हो गए थे मध्यकाल का सूर्य भी उसके प्रताप
- 1:35:43आपके सामने धूमिल दिखाई देता था। तो मुझे
- 1:35:46लगता है किसी दिन यह लाइन पूछेंगे और
- 1:35:47पूछेंगे यह लाइन किस गोंड शासक के लिए है?
- 1:35:50तो रामनगर प्रशस्ति में उनकी तारीफ करते
- 1:35:53हुए लिखा हुआ है याद रखिए क्या लिखा है?
- 1:35:55जिस भांति विशाल कपास का ढेर कपास के ढेर
- 1:35:58में विशाल कपास के ढेर में एक चिंगारी की
- 1:36:01वजह से पूरा नष्ट हो जाता है कपास का ढेर।
- 1:36:03याद रखिए उस छोटी सी चिंगारी से नष्ट हो
- 1:36:05जाए। उसी भांति उसके शत्रुघ तेजहीन हो गए
- 1:36:07थे। ये मध्यकाल के सूर्य भी उसके प्रताप
- 1:36:10के सामने धूमिल सा दिखाई देता था। मानो
- 1:36:13सारी पृथ्वी को जीत लेने का उसने निश्चय
- 1:36:15किया हो। तदन अनुसार उसने 52 किलड़ों को
- 1:36:17जीत लिया था। और ये सारे के सारे 52 जो
- 1:36:20किले हैं उच्च पर्वतीय श्रेणियों पर स्थित
- 1:36:22थे जो विशाल प्राचीनों बुर्जियों से
- 1:36:23परिलक्षित होते थे और इस कारण ये दुर्वेद
- 1:36:26दुभेद माने जाते थे। अब गोंडों में एक
- 1:36:29कहावत प्रचलित है। मैं चाहता हूं आप यह भी
- 1:36:31सुन लीजिएगा। कल के दिन एग्जाम में आएगी
- 1:36:33तो आप बता देंगे। गोंडों में एक कहावत
- 1:36:35प्रचलित है। क्या प्रचलित है? कि आमन बुध
- 1:36:38बावन में आवन बुद्ध 52 में किससे रिलेटेड
- 1:36:41है? याद रखिएगा संग्राम शाह से रिलेटेड है
- 1:36:43यह कहावत आवन बुध बावन में और अब मैं आपको
- 1:36:46यह भी बताना चाहता हूं कि उनका साम्राज्य
- 1:36:48कहां से कहां फैला हुआ था। इतना जानने के
- 1:36:50बाद मुझे लगता है कि एग्जाम में आने वाले
- 1:36:52किसी प्रश्न से तो आप नहीं बचेंगे। बाकी
- 1:36:55गोंड कौन थे? इनके आदि पूर्वज कौन थे?
- 1:36:57इनके बारे में कहां से जानकारी मिलती?
- 1:36:59कलजुनियों से इनका क्या कनेक्शन है? यह जब
- 1:37:01हम गोंड डायनेस्टी पढ़ेंगे तो गोंड
- 1:37:02डायनेस्टी के इतिहास में पूरा गोंड वंश
- 1:37:04मैं आपको समझाऊंगा। आज की कहानी केवल 52
- 1:37:08गणाधिपति यानी संग्राम शाह के बारे में
- 1:37:10थी। अब इनके जो राज्य है उसमें जो 52 किले
- 1:37:14और इनका जो साम्राज्य था वो इंग्लैंड के
- 1:37:16बराबर था। ऐसा कहा जाता है वज्र प्राहे
- 1:37:19पर्वते प्रौढ़ गाड़े इस तरीके से एक संस्कृत
- 1:37:22श्लोक लिखा हुआ है। उसके बाद इनके जो 52
- 1:37:24किले हैं उनके बारे में बताया गया है जो
- 1:37:25वर्तमान 13 जिलों में अवस्थित हैं। जैसे
- 1:37:27कि एक है गड़ा जबलपुर का एक मारूगढ़ है,
- 1:37:30पचेल है, सिंघोरगढ़ है, अमोदा है, कनोजा
- 1:37:34है, बक्सरा है, टीपागढ़ है, रामगढ़ है,
- 1:37:36प्रतापगढ़ है, अमरगढ़ है, देवगढ़ है, पाटनगढ़
- 1:37:40है, फतेहपुर है। ऐसे करके सारे नाम लिखे
- 1:37:42हैं। और इनका साम्राज्य कहां से कहां तक
- 1:37:44फैला था? ध्यान से सुनिएगा। इनका
- 1:37:47साम्राज्य पूर्व में रतनपुर झारखंड प्रदेश
- 1:37:50से पश्चिम में मालवा तक जिसकी लंबाई 150
- 1:37:53कोस थी और उत्तर में पन्ना यानी ऊपर में
- 1:37:56पन्ना से लेकर याद रखिएगा दक्षिण में
- 1:37:58दक्कन बरार तक जिसकी चौड़ाई 80 कोस थी। वह
- 1:38:02राज्य गढ़ा कटंगा था। इस दृष्टि से भी
- 1:38:04देखा जाए तो संग्राम शाह का साम्राज्य
- 1:38:06लगभग इंग्लैंड के क्षेत्रफल के बराबर था।
- 1:38:08इससे बड़ी अचीवमेंट कुछ नहीं हो सकती गोंड
- 1:38:11शासकों के लिए। इनका साम्राज्य बहुत बड़ा
- 1:38:14था। चार डायरेक्शन उनके साम्राज्य की लिख
- 1:38:16दी गई। जैसे चार डायरेक्शन होती हैं। तो
- 1:38:18उत्तर में उनका साम्राज्य कहां से है? याद
- 1:38:20रखिएगा उत्तर में पन्ना से फैला था। और
- 1:38:23दक्षिण में कहां तक है? तो दक्षिण में
- 1:38:24बरार तक था। बरार और इसकी जो लेंथ है वो
- 1:38:2880 कोस थी। 80 कोस ये फैला था। अगर हम बात
- 1:38:32करें पूर्व में तो पूर्व में झारखंड तक
- 1:38:34फैला था।
- 1:38:37और याद रखिएगा पश्चिम में। पश्चिम में
- 1:38:39कहां तक फैला था? मालवा।
- 1:38:42पश्चिम में मालवा तक फैला था और इसकी जो
- 1:38:45लंबाई है वह 150 कोस थी। ऐसा लिखा हुआ है।
- 1:38:48इसीलिए उनका साम्राज्य कहा जाता है
- 1:38:51इंग्लैंड के बराबर था। ठीक है? याद
- 1:38:53रखिएगा। तो पश्चिम में रायसेन और पूर्व
- 1:38:55में रतनपुर। अब तो मेरे ख्याल से रतनपुर
- 1:38:58जो है वो छत्तीसगढ़ में आता है। छत्तीसगढ़
- 1:39:01होना चाहिए। झारखंड नहीं होना चाहिए। तो
- 1:39:03छत्तीसगढ़ से लेके मालवा के रायसेन तक और
- 1:39:07ऊपर से पन्ना से लेकर बरार तक फैला हुआ
- 1:39:09था। इतना बड़ा एंपायर था हमारे किसका?
- 1:39:13संग्राम शाह का। सो संग्राम शाह के बारे
- 1:39:15में कहा जाता है कि उनका साम्राज्य किसके
- 1:39:17बराबर था? इंग्लैंड के इक्वल था। तो ये थे
- 1:39:20हमारे महान गौण शासक जिनके बारे में जितने
- 1:39:22भी जो प्रश्न बन सकते हैं, मैंने आप लोगों
- 1:39:24को समझाए। मुझे उम्मीद है यह जो सीरीज
- 1:39:26हमारी पहले चल रही थी, यह सीरीज कुछ दिनों
- 1:39:29के लिए ब्रेक हो गई थी। लेकिन आज से मेरा
- 1:39:31प्रयास है कि आपको यह सीरीज बहुत अच्छे से
- 1:39:33दोबारा से कंटिन्यू कर सकूं। अब मैं यह
- 1:39:36देखना चाहता हूं कि इस वीडियो पर आप लोगों
- 1:39:37का क्या रिस्पांस मिलता है क्योंकि काफी
- 1:39:39दिनों बाद यह वीडियो आया है। अगर आपको यह
- 1:39:41पसंद आया तो ढेर सारे कमेंट करके बताइएगा
- 1:39:44और कमेंट में सभी लोग बताएंगे कि रावण के
- 1:39:46पिता का नाम क्या था? बाकी संग्राम शाह की
- 1:39:48राजनीतिक उपलब्धियां, उनकी सांस्कृतिक
- 1:39:50उपलब्धियां, उनके सिक्के, उनका साम्राज्य
- 1:39:52कहां से कहां तक फैला था? उनके बारे में
- 1:39:54जानकारी किस शिलालेख से मिलती है? रामनगर
- 1:39:57का प्रशस्ति अभिलेख किसने लिखा है? यह भी
- 1:40:00आपको कमेंट करके बताना है। तो, दो
- 1:40:02क्वेश्चन कमेंट के लिए छोड़ के जा रहा
- 1:40:03हूं। रामनगर का प्रशस्ति अभिलेख किसने
- 1:40:05लिखा है और रावण के पिता का नाम क्या था?
- 1:40:07ये आपको बताना है। मिलते हैं नेक्स्ट
- 1:40:09वीडियो में। तब तक के लिए जय हिंद वंदे
- 1:40:11मातरम। थैंक यू।
- 1:40:28नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एमपीपीएससी
- 1:40:30स्टडी आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है।
- 1:40:32उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन
- 1:40:34लगाकर पढ़ रहे होंगे। दोस्तों, आप सभी को
- 1:40:37यह सीरीज काफी पसंद आ रही है। मैंने आप
- 1:40:40लोगों का फीडबैक देखा और इसी क्रम में मैं
- 1:40:42आपके लिए लाया हूं एक बहुत ही इंपॉर्टेंट
- 1:40:45व्यक्तित्व जिनका नाम है रानी कमलापति।
- 1:40:47देखिए रानी कमलापति कौन है? आपने यह
- 1:40:49थंबनेल देख लिया होगा। इन्हें भोपाल की
- 1:40:52अंतिम हिंदू रानी या अंतिम एक गोंड रानी
- 1:40:55के तौर पर जाना जाता है। रानी कमलापति का
- 1:40:58जो इतिहास है वह काफी फेमस है और इनका
- 1:41:00इतिहास में अपना एक योगदान है मध्य प्रदेश
- 1:41:02के हम सब जानते हैं कि वर्तमान में जो
- 1:41:05हमारी मध्य प्रदेश सरकार है उसने इनके नाम
- 1:41:07पर कुछ चेंजेस भी किए हैं और एग्जाम से
- 1:41:09रिलेटेड भी हैं। तो आज का जो हमारा टॉपिक
- 1:41:12है इसमें हम जानेंगे भोपाल की प्रसिद्ध
- 1:41:14रानी कमलापति के बारे में जिन्हें भोपाल
- 1:41:16की अंतिम हिंदू रानी भी माना जाता है। आइए
- 1:41:18शुरुआत करते हैं। भोपाल की अंतिम रानी।
- 1:41:21देखिए कितनी खूबसूरत रानी है रानी कमलापति
- 1:41:23जिनका यह स्टैचू बना हुआ है भोपाल में। तो
- 1:41:26सबसे पहले समझते हैं कि आखिर यह रानी
- 1:41:28कमलापति कौन थी और इनका संबंध किस जगह से
- 1:41:31है। देखिए अगर हम बात करें 18वीं शताब्दी
- 1:41:34में जो रानी कमलापति थी वो शासन करती थी
- 1:41:36भोपाल पर। ठीक है? और इन्हें जो है इस
- 1:41:39क्षेत्र की गोंड रानी के नाम से जाना जाता
- 1:41:41है। यानी गोंड रानी के रूप में प्रसिद्ध
- 1:41:43थी। इनके जो पति थे उनका नाम था निजाम
- 1:41:45शाह। और निजाम शाह की टोटल सात पत्नियां
- 1:41:47थी। और उन सात पत्नियों में सबसे खूबसूरत
- 1:41:50और महत्वपूर्ण पत्नी थी जिनका नाम था रानी
- 1:41:52कमलापति जिन्हें निजाम शाह अत्यधिक प्रेम
- 1:41:55करते थे। ठीक है? अब आगे क्या होता है कि
- 1:41:58जो रानी कमलापति हैं याद रखिएगा ये मैंने
- 1:42:00आपको बता दिया बेसिक सा। अब हम उनके
- 1:42:02बायोडाटा के बारे में बात करते हैं। फिर
- 1:42:04हम ये समझेंगे आखिर क्यों इतिहास में उनका
- 1:42:06योगदान है और क्या वजह है जिसकी वजह से वो
- 1:42:09इतनी चर्चित हैं। देखिए सबसे पहले जन्म की
- 1:42:12बात करते हैं। रानी रानी कमलापति का जन्म
- 1:42:14कहां और कब कैसे हुआ था। देखिए एक जगह है
- 1:42:16जिसका नाम है सलकनपुर। आप सब ने सुना होगा
- 1:42:18सलकनपुर काफी फेमस है यहां पे जो मंदिर है
- 1:42:21उसकी वजह से। सलकनपुर जिला सीहोर यहां पर
- 1:42:24रियासत हुआ करती थी। आप सलकनपुर रियासत
- 1:42:26बोल सकते हैं या इसे सीहोर रियासत बोल
- 1:42:28सकते हैं। इस रियासत के एक राजा थे जिनका
- 1:42:30नाम था कृपाल सिंह सरौतिया। कहीं-कहीं पर
- 1:42:34इनके जो पिता हैं उनका नाम कृपाराम चौधरी
- 1:42:36मिलता है। कृपाराम चौधरी एक्चुअली में या
- 1:42:39तो इन्हें आप कृपाराम चौधरी कह लो या यही
- 1:42:42है कृपाल सिंह सरतिया। कृपाल सिंह को
- 1:42:44कहीं-कहीं कृपाराम लिख गया है। तो वह
- 1:42:46कृपाल सिंह सरतिया हैं जो कि सलकनपुर
- 1:42:49रियासत के राजा थे। सलकनपुर रियासत एक
- 1:42:51छोटी रियासत थी। उस रियासत के राजा थे और
- 1:42:54इन्हीं के शासनकाल में याद रखिएगा इनके
- 1:42:56शासनकाल में जो सलकनपुर की प्रजा थी काफी
- 1:42:59खुश थी संपन्न थी। और उनके यहां एक
- 1:43:01खूबसूरत कन्या का जन्म होता है। यानी
- 1:43:04सलकनपुर के जो राजा हैं जिनका नाम क्या
- 1:43:06है? कृपाल सिंह सरतिया कहीं-कहीं इनका नाम
- 1:43:08कृपाराम चौधरी भी मिलता है और इन्हीं के
- 1:43:11यहां एक कमल जैसी कन्या का जन्म होता है।
- 1:43:13याद रखिएगा वह बचपन से ही कमल की तरह बहुत
- 1:43:16सुंदर थी। इसीलिए उनका नाम रखा गया
- 1:43:18कमलापति।
- 1:43:19ठीक है? उनकी सुंदरता को देखते हुए उनका
- 1:43:21नाम क्या रखा गया? कमलापति रखा गया। तो
- 1:43:23इसमें आपको तीन बातें मिल गई कि वो किसकी
- 1:43:25पुत्री हैं? किस राज्य से संबंधित थी। ठीक
- 1:43:27है? याद रखिएगा। अब आप यह देखेंगे कि जब
- 1:43:30उनका संबंध एक राज परिवार से है तो उनका
- 1:43:32पालन-पोषण कैसे होगा? योद्धा की तरह होगा।
- 1:43:35तो देखिएगा ध्यान से सुनिएगा आगे क्या है
- 1:43:37कि वह बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और साहसी
- 1:43:40थी। शिक्षा, घुड़सवारी, मल युद्ध। मल
- 1:43:42युद्ध होता है यानी इंडिविजुअल जो फाइट
- 1:43:44होती है। ठीक है? और तीर कमान चलाने में
- 1:43:47वह उन्हें महारत हासिल थी। यानी वो बहुत
- 1:43:50ही योग्य थी। इसके अलावा उन्होंने अनेक
- 1:43:52कलाओं में पारंगत होकर कुशल प्रशिक्षण
- 1:43:54प्राप्त कर सेनापति बनी। यानी अपने पिता
- 1:43:57के सैन्य अभियानों में उन्होंने योगदान
- 1:43:59किया था। ठीक है? और पिता के सैन्य बल के
- 1:44:02साथ-साथ अपने महिला साथी दल के साथ
- 1:44:03युद्धों में शत्रुओं से लोहा लेती थी। तो
- 1:44:05कुल मिलाकर उनका पालन-पोषण एक योद्धा की
- 1:44:08तरह हुआ। एक सेनापति की तरह हुआ और उनके
- 1:44:10अंदर एक कुशल नेतृत्व की भावना भी थी।
- 1:44:12पड़ोसी राज्य अक्सर खेत खलियान धन संपत्ति
- 1:44:15लूटने के लिए आक्रमण किया करते थे। और
- 1:44:18सलकनपुर याद रखिएगा। और सलकनपुर राज्य की
- 1:44:20देखरेख करने की पूरी जिम्मेदारी राजा
- 1:44:22कृपाल सिंह सरतिया और उनकी राजकुमारी
- 1:44:25कमलापति पर थी। यानी जितने भी पड़ोसी
- 1:44:27राज्य सलकनपुर पर आक्रमण करते थे तो
- 1:44:29सलकनपुर के जो राजा हैं कौन? याद रखिएगा
- 1:44:32कृपाल सिंह सरतिया और उनकी जो पुत्री हैं
- 1:44:35कौन? कमलापति वो युद्ध में नेतृत्व करती
- 1:44:38थी और पड़ोसी राजाओं को डिफीट करती थी।
- 1:44:40इसके बाद कहानी में ट्विस्ट आता है और
- 1:44:42धीरे-धीरे राजकुमारी बड़ी होने लगती है।
- 1:44:45फिर राजकुमारी की शादी की बात आएगी।
- 1:44:47राजकुमारी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और
- 1:44:49उनकी खूबसूरती की चर्चा चारों दिशाओं में
- 1:44:51होने लगी। इसी सलकनंदपुर राज्य के पास में
- 1:44:54एक राज्य था। बाड़ी राज्य बोल सकते हो या
- 1:44:56बाड़ी का किला बोलते हैं। तो जो बाड़ी
- 1:44:58किले का जमींदार था और उस जमींदार का जो
- 1:45:01लड़का है उसका नाम था चैन सिंह। याद
- 1:45:03रखिएगा चैन सिंह इस स्टोरी में एक विलेन
- 1:45:05है। ठीक है? कौन है? एक विलेन है चैन
- 1:45:08सिंह। तो चैन सिंह बाड़ी किले का जमींदार
- 1:45:10का लड़का था जो कृपाल सिंह सरौतिया का
- 1:45:13रिश्ते में भांजा भी लगता था। वह
- 1:45:15राजकुमारी कमलापति से विवाह करने की इच्छा
- 1:45:18रखता था। लेकिन इस छोटे से गांव के
- 1:45:20जमींदार से राजकुमारी कमलापति ने शादी
- 1:45:22करने से क्या कर दिया? मना कर दिया। याद
- 1:45:25रखिएगा जब कोई व्यक्ति किसी को मना करता
- 1:45:28है किसी चीज के लिए तो सामने वाला उससे
- 1:45:30बदला लेना चाहता है। और यह जो राजकुमारी
- 1:45:33कमलापति ने जैसे ही जो बाड़ी का जो
- 1:45:36राजकुमार है या बाड़ी का जो किले के
- 1:45:38जमींदार का जो लड़का है जिसका नाम क्या
- 1:45:39है? चैन सिंह इसको जैसे ही मना किया रानी
- 1:45:43तो खुश हैं क्योंकि उनकी शादी इससे नहीं
- 1:45:45होती है लेकिन चैन सिंह उनसे ईर्ष्या रखने
- 1:45:48लगता है और बदला लेने की भावना हमेशा जीवन
- 1:45:50में रखे रहता है। आगे क्या होता है देखिए
- 1:45:54इसी समय 16वीं सदी में भोपाल से 55 कि.मी.
- 1:45:57दूर 750 गांवों को मिलाकर एक राज्य था
- 1:46:00जिसका नाम था गिन्नौरगढ़ रियासत। दोस्तों
- 1:46:03गिन्नौरगढ़ रियासत जो है वर्तमान सिहौर का
- 1:46:06पार्ट है। तो गिन्नौरगढ़ रियासत जो थी
- 1:46:08उसमें 750 गांव आते थे और इस गांव के जो
- 1:46:11राजा है उनका नाम है निजाम शाह जिनसे रानी
- 1:46:13कमलावती का विवाह होने वाला है। ठीक है?
- 1:46:15तो जो देहलावाड़ी के पास आता था इसके राजा
- 1:46:18थे सुराज सिंह शाह और इन्हीं का लड़का है।
- 1:46:21याद रखिएगा इनके पुत्र थे निजाम शाह जो
- 1:46:23बहुत बहादुर निडर तथा हर कार्य में क्या
- 1:46:27थे? निपुण थे। उन्हीं से रानी कमलावती का
- 1:46:29विवाह हुआ और बाद में इनका एक पुत्र होता
- 1:46:32है जिसका नाम होता है नवल शाह। यानी हमारी
- 1:46:35इस स्टोरी में चार कैरेक्टर हैं। नंबर वन
- 1:46:38है निजाम शाह।
- 1:46:41निजाम शाह राजा हैं और निजाम शाह की जो
- 1:46:43पत्नी है उनका नाम क्या है? रानी कमलापति।
- 1:46:46रानी कमलापति का एक लड़का है। रानी
- 1:46:50कमलापति। इन दोनों का एक लड़का है। याद
- 1:46:52रखिएगा। और उस पुत्र का नाम क्या है?
- 1:46:54नवलसा। ये तीन कैरेक्टर बहुत इंपॉर्टेंट
- 1:46:56है और इसमें खलनायक की भूमिका में दो नायक
- 1:46:59आएंगे। दो लोग हैं खलनायक। एक है चैनसा।
- 1:47:02याद रखिएगा। चैनसा कौन है? बाड़ी का
- 1:47:06जमींदार है और दूसरा खलनायक आएगा चैन शाह
- 1:47:09के बाद जिसका नाम होगा दोस्त मोहम्मद। तो
- 1:47:12ये चार नाम आपको याद रखना है इस स्टोरी
- 1:47:14में। निजाम शाह जिनकी पत्नी है रानी
- 1:47:15कमलापति और उनसे एक पुत्र होता है जिसका
- 1:47:17नाम होता है नवल शाह। आगे देखते हैं क्या
- 1:47:20होता है। बाड़ी किले का जो जमींदार का
- 1:47:23लड़का है चैन सिंह राजा निशामशाह का भतीजा
- 1:47:25लगता था। निजाम निजाम शाह जो थे उनका
- 1:47:27भतीजा था जिसका नाम था चैनसा शाह और यह जो
- 1:47:30चैन शाह है यह रानी पर बुरी नजर रखता था।
- 1:47:33यानी रिश्ते में चाची लगेंगी। याद रखना इस
- 1:47:36बात को। तो चैन सिंह के चाचा कौन है?
- 1:47:38निजाम शाह। निजाम शाह का भतीजा कौन है?
- 1:47:41चैन सिंह। चैन सिंह वही व्यक्ति है जिसे
- 1:47:43रानी ने ठुकरा दिया था। यह एक तरीके से
- 1:47:46रिश्ते में लगता था। और यह अलग छोटी सी जो
- 1:47:48रियासत थी या जमींदार थी बाड़ी वहां का यह
- 1:47:51प्रमुख था। अब क्या होता है? वह राजकुमारी
- 1:47:55कमलापति से शादी होने के बावजूद भी उनकी
- 1:47:58उनसे विवाह करने की इच्छा रखता था और उसने
- 1:48:00अनेक बार राजा निजा निजाम शाह को मारने की
- 1:48:03कोशिश की जिसमें वह असफल रहा। तो कुल
- 1:48:06मिलाकर बात यह है कि जो निजाम शाह हैं वो
- 1:48:08अपनी पत्नी कमलापति के साथ खुश हैं। निजाम
- 1:48:10शाह की टोटल सात पत्नियां जिनमें सबसे
- 1:48:12फेमस हैं कमलापति और उनका एक बेटा है
- 1:48:14जिसका नाम है नवल शाह। लेकिन उनकी स्टोरी
- 1:48:16में विलेन कौन बनकर आया? उस विलेन का नाम
- 1:48:18है चैन शाह जो बाड़ी का जमींदार है।
- 1:48:21रिश्ते में निजामशाह का भतीजा लगता है और
- 1:48:23वह बार-बार निजाम शाह को मारने का प्रयास
- 1:48:25करता है। लेकिन कैसे भी निजाम शाह बच जाते
- 1:48:27हैं। एक दिन उन्होंने यानी जो चैन सिंह है
- 1:48:30बाड़ी का किलेदार या बाड़ी का जो जमींदार
- 1:48:32है उसने जो है निजाम शाह को एक निमंत्रण
- 1:48:35दिया प्रेम पूर्वक कि आप हमारे यहां खाने
- 1:48:37पर आइए। निजाम शाह उसकी बातों में आ गया
- 1:48:40और उसके यहां खाने पर जब जाते हैं तो चैन
- 1:48:42सिंह निजाम शाह के भोजन में विष मिला देता
- 1:48:44है। देखिए एक दिन प्रेम पूर्वक उसने राजा
- 1:48:47निजाम शाह को भोजन पर आमंत्रित किया और
- 1:48:49भोजन में जहर देकर जो है उनकी धोखे से
- 1:48:51हत्या कर दी। किसकी? यानी चैन शाह ने
- 1:48:54किसकी हत्या कर दी? निजाम शाह की हत्या कर
- 1:48:56दी। आगे क्या होता है? राजा निजाम शाह की
- 1:48:58मौत की खबर से पूरा जो गिन्नौरगढ़ राज्य
- 1:49:01है उसमें क्या है? खलबली हो गई। और चैन
- 1:49:03सिंह ने रानी कमलापति को अकेले में जानकर
- 1:49:07उन्हें पाने की नियत से गिन्नौरगढ़ के
- 1:49:09किले पर हमला कर दिया। रानी कमलापति उस
- 1:49:12समय अपने कुछ वफादारों और 12 वर्षीय बेटे
- 1:49:14नवल शाह के साथ भोपाल में बने इस महल में
- 1:49:17छुप जाने का निर्णय लेती हैं जो उस समय
- 1:49:19सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण था।
- 1:49:22आई होप आपको यहां तक स्टोरी समझ में आ गई
- 1:49:24होगी। अगर आपको नहीं समझ में आई तो इसके
- 1:49:26लिए एक छोटा सा डायग्राम हम बना देते हैं।
- 1:49:28देखो अगर आप इस स्टोरी को समझेंगे तभी तो
- 1:49:32आपको सही समझ में आएगा। एक राज्य है जिसका
- 1:49:34नाम है गिन्नौरगढ़। क्या नाम है?
- 1:49:37गिन्नौरगढ़ का किला बड़ा फेमस है। तोतों
- 1:49:40के लिए प्रसिद्ध है। गिन्नौरगढ़ जो राज्य
- 1:49:42है वर्तमान में कहां आता है बच्चों? याद
- 1:49:44रखना। तो गिन्नौरगढ़ जो राज्य है वो
- 1:49:46वर्तमान में या जो गिन्नौरगढ़ का किला है
- 1:49:47वो सीहोर में आता है। इस राज्य के जो राजा
- 1:49:50हैं उनका नाम है निजामशाह। निजाम शाह की
- 1:49:52जो पत्नी है उनका नाम क्या है? याद रखना
- 1:49:56कमलापति और कमलापति का एक लड़का है जिसका
- 1:49:59नाम क्या है?
- 1:50:01इन दोनों का पुत्र है जिसका नाम है नवलसा।
- 1:50:05अब इस स्टोरी में विलेन कौन है? इस स्टोरी
- 1:50:08में विलेन है जिसका नाम है चैनसा। याद
- 1:50:11रखिएगा बाड़ी का जमींदार है और बाड़ी का
- 1:50:15जमींदार
- 1:50:16जिसका नाम क्या है? चैनसा। कहीं-कहीं पर
- 1:50:19इसको याद रखिएगा आलम शाह भी कहा गया है।
- 1:50:22चैन शाह या कहीं-कहीं पर इसको आलम शाह कहा
- 1:50:24गया। आप चैन शाह याद रखेंगे। इसने क्या कर
- 1:50:27दिया? राजा निजाम शाह की धोखे से हत्या कर
- 1:50:29दी। तो राजा निजाम शाह की जब इसने धोखे से
- 1:50:32हत्या कर दी तो अब रानी कमलापति अपने बेटे
- 1:50:35नवल शाह के साथ एक महल में जाती हैं।
- 1:50:37लेकिन इस महल का निर्माण किसने करवाया? तो
- 1:50:39याद रखेंगे भोपाल जो है वर्तमान भोपाल।
- 1:50:43यहां पर रानी कमलापति के लिए एक महल
- 1:50:45बनवाया था राजा निजाम शाह ने। उसका नाम था
- 1:50:48कमलापति पैलेस या कमलापति महल बोलते थे और
- 1:50:51यह काफी खूबसूरत था। भव्य महल है और इस
- 1:50:54महल का निर्माण करवाया था किसने? निजाम
- 1:50:57शाह ने। तो रानी ने ये सोचा होता क्या है
- 1:51:00कि जो हमारा यह निजाम शाह का भतीजा है चैन
- 1:51:03शाह यह क्या करता है? यह गिन्नौरगढ़ पर
- 1:51:05हमला करके इस गिन्नौरगढ़ रियासत पे क्या
- 1:51:07कर लेता है? अधिकार कर लेता है। तो कुल
- 1:51:09मिलाकर रानी को गिन्नौरगढ़ का जो किला है
- 1:51:11उसको छोड़कर जाना पड़ता है। और रानी अपने
- 1:51:14बेटे के साथ उनके बेटे का नाम क्या है
- 1:51:16बेटा? उनके बेटे का नाम है नवल शाह। इसके
- 1:51:19साथ इस महल में शरण ले लेती हैं। किस महल
- 1:51:22में शरण ले लेती हैं? क्योंकि सुरक्षा की
- 1:51:24दृष्टि से जो कमलापति महल है जो कि भोपाल
- 1:51:26में है ये कैसा था? यह सुरक्षित था।
- 1:51:28इसीलिए कमलापति और अपने बेटे के साथ जो है
- 1:51:31वो इस महल में चली जाती हैं। ठीक है? अब
- 1:51:33इस स्टोरी में क्या होता है कि रानी
- 1:51:35कमलापति की पति की रानी कमलापति के पति का
- 1:51:38हत्यारा कौन है? तो याद रखिएगा वो है
- 1:51:40चैनसा जो इस स्टोरी में विलेन है। कुछ समय
- 1:51:44बाद रानी को यह पता चलता है कि भोपाल के
- 1:51:46पास में ही कुछ अफगानों ने जो है डेरा
- 1:51:49डाला हुआ है। ठीक है? और अफगानों ने डेरा
- 1:51:52डाला हुआ है। उनमें एक अफगान सरदार था
- 1:51:54जिसका नाम था दोस्त मोहम्मद। इसकी स्टोरी
- 1:51:56को हम किसी और दिन समझेंगे। दोस्त
- 1:51:59मोहम्मद। कौन है दोस्त मोहम्मद? दोस्त
- 1:52:01मोहम्मद एक अफगान है जिसका मुख्य काम यह
- 1:52:04है कि यह पैसे लेकर किसी को भी अपनी
- 1:52:06सुरक्षा दे सकता था या जिससे पैसा लेता था
- 1:52:10उसकी तरफ से ये युद्ध करता था। कुल मिलाकर
- 1:52:11ये भाड़े पर अपनी सेना पहुंचाता था या
- 1:52:14लोगों के लिए भाड़े पर काम करता था। ठीक
- 1:52:16है? क्या नाम है इसका? दोस्त मोहम्मद है।
- 1:52:18इसके जो पूर्वज हैं वो अफगानिस्तान से आए
- 1:52:20थे। इसने खुद औरंगजेब के यहां कुछ काम
- 1:52:22किया था। बाद में यह जो मालवा आ जाता है
- 1:52:24इसकी एक बहुत लंबी स्टोरी है और यही आगे
- 1:52:26चलकर भोपाल राज्य का संस्थापक भी है। तो
- 1:52:28दोस्त मोहम्मद ने जो है क्या किया था?
- 1:52:31भोपाल के नजदीक जो है डेरा डाला था। एक
- 1:52:33जगह थी जगदीशपुर। जगदीशपुर को जीतकर उसका
- 1:52:35नाम रख दिया था इस्लामगढ़। तो रानी को यह
- 1:52:39पता चला कि ये जो है लोगों की मदद करता
- 1:52:41है। पैसे लेकर उनकी तरफ से लड़ता है। तो
- 1:52:43रानी ने इससे कांटेक्ट किया। देखिए रानी
- 1:52:46ने क्या किया? रानी ने इससे मदद मांगी।
- 1:52:49ठीक है? तो मदद के बदले में इसने क्या
- 1:52:51मांग रखी? इसने जो है ₹1 लाख की मांग रखी
- 1:52:54कि हम आपकी मदद करेंगे। आप हमको क्या दें?
- 1:52:58₹1 लाख देंगे। इस बात को ध्यान से समझना
- 1:53:00है। यानी रानी कमलापति ने अपने पति की
- 1:53:03मृत्यु का बदला लेने के लिए किसके विरुद्ध
- 1:53:05मदद मांगी? चैन शाह के विरुद्ध जो कहां का
- 1:53:07जमींदार है? बाड़ी का जमींदार है। और
- 1:53:09दोस्त मोहम्मद ने कहा कि वह मदद करेगा
- 1:53:12लेकिन बदले में कितना रुपया चाहिए? उसको
- 1:53:13₹1 लाख चाहिए। रानी ने उससे कहा कि अभी
- 1:53:16मेरे पास ₹1 लाख नहीं है। रानी ने कुछ
- 1:53:18पैसे उसको नगद दे दिए और कुछ के बदले जमीन
- 1:53:21देने का वादा किया। तो अफगान सरदार जिसका
- 1:53:24नाम दोस्त मोहम्मद है उसने रानी कमलापति
- 1:53:27की जो गोंड सेना है और उसके साथ-साथ अपनी
- 1:53:29अफगान सेना इन दोनों सेनाओं को लेकर किस
- 1:53:32पर हमला कर दिया? याद रखिएगा दोस्त
- 1:53:35मोहम्मद ने गोंडों और अपनी सेना के साथ
- 1:53:37मिलकर इस पर गिन्नौरगढ़ के किले पर अटैक
- 1:53:40कर दिया और अटैक करके जो है क्या कर दी?
- 1:53:42इसकी हत्या कर दी। चैन शाह को मार डाला और
- 1:53:45इस प्रकार जो है अफगान सरदार जो है क्या
- 1:53:48करता है? रानी कमलापति की जो है मदद करता
- 1:53:51है। अब इस बीच दो स्टोरियां मिलती हैं जो
- 1:53:54आपको जाननी है। पहली स्टोरी यह है कि जब
- 1:53:57रानी कमलापति ने ये मदद मांगी थी तो
- 1:53:59उन्होंने उस समय जो है एक धागा जो है
- 1:54:01दोस्त मोहम्मद की कलाई पर बांधा था और एक
- 1:54:04तरीके से बहन भाई का जो है रिश्ता यहां पर
- 1:54:06दोनों के बीच में स्थापित हो गया जिससे कि
- 1:54:08उन दोनों के बीच संबंध बने रहे। दूसरी
- 1:54:11स्टोरी है जो ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर मतलब उसी
- 1:54:14चीज को ज़्यादा उम तवज्जो दिया जाता है और
- 1:54:16ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि वही
- 1:54:19सत्य है। उस स्टोरी में होता यह है कि
- 1:54:22क्योंकि ये जो दोस्त मोहम्मद है शुरू में
- 1:54:24रानी की मदद करता है लेकिन बाद में इस
- 1:54:26दोस्त मोहम्मद की जो नियत है वो रानी की
- 1:54:29जो सुंदरता है उस पर खराब हो जाती है और
- 1:54:32वो रानी को अकेला समझकर उनकी सुंदरता के
- 1:54:34प्रति तो आकर्षित है ही। साथ-साथ उनका जो
- 1:54:37राज्य है जैसे कि जो भोपाल में अभी वो हैं
- 1:54:39और गिन्नौड़गढ़ रियासत पूरी की रियासत को
- 1:54:41वो हड़पना चाहता है और इसी क्रम में दोस्त
- 1:54:44मोहम्मद क्या करेगा कि पहले जो है क्या
- 1:54:46करेगा वो जाकर चैन शाह की हत्या करता है
- 1:54:49चैन शाह की हत्या करने के बाद इस
- 1:54:50गिन्नौरगढ़ के किले पर अधिकार कर लेगा अब
- 1:54:52ये गिन्नौरगढ़ का जो किला है या जो राज्य
- 1:54:55है बेसिकली किसका है कमलापति का तो जब
- 1:54:57दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर
- 1:55:00अधिकार किया तो रानी ने इसको नजरअंदाज कर
- 1:55:02दिया कि चलो ठीक है जो हुआ सो हो जाने दो
- 1:55:04वो भोपाल में खुश लेकिन कुछ समय पश्चात
- 1:55:07उसने क्या किया कि भोपाल में रानी कमलापति
- 1:55:10पर हमला किया। तो इस समय रानी कमलापति
- 1:55:12क्या करती हैं कि अपने पुत्र जिसका नाम
- 1:55:15नवल शाह है उसे सुरक्षित स्थान पर भेजती
- 1:55:18हैं और वो जो है अपने महल में जिसे
- 1:55:21कमलापति महल कहते हैं जो कि भोपाल में
- 1:55:23बड़ी झील के पास स्थित है और यहां पर क्या
- 1:55:26करती हैं? वह जल समाधि ले लेती हैं। अब
- 1:55:28इसकी स्टोरी को भी हम समझते हैं। मैं आपको
- 1:55:30थोड़ा सा आगे ले चलता हूं। देखिए कुछ दिन
- 1:55:34बाद क्या होता है। अभी जो मैं आपको स्टोरी
- 1:55:36बताया था उसके आगे आप लोगों को बता रहा
- 1:55:37हूं। कुछ समय बाद भोपाल में समय बिताने के
- 1:55:40बाद रानी कमलापति को पता चला कि भोपाल की
- 1:55:43सीमा के पास कुछ अफगानी आकर रुके हुए हैं।
- 1:55:46जिन्होंने जगदीशपुर जगदीशपुर एक राजपूतों
- 1:55:49का राज्य था जिसे इसने जीत लिया था और
- 1:55:51इसका नाम रख दिया था इस्लामनगर। जगदीशपुर
- 1:55:54पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में ले लिया
- 1:55:56है। ठीक है? तो रानी को यह पता चला इन
- 1:55:58अफगानों का सरदार था जिसका नाम था दोस्त
- 1:56:00मोहम्मद खान था। याद रखिएगा जो पैसा लेकर
- 1:56:03ध्यान से सुनना इसे कहते हैं भाड़े का
- 1:56:05टट्टू बोल सकते हैं जो पैसा लेकर किसी की
- 1:56:08तरफ से भी युद्ध लड़ता था। लोकमान्यता है
- 1:56:10कि रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद को 1
- 1:56:13लाख मोहरें देकर चैन सिंह पर हमला करने को
- 1:56:16कहा। यह एक स्टोरी मिलती है। ठीक है? यह
- 1:56:19दोस्त मोहम्मद है वो अफगान लुटेरा। याद
- 1:56:21रखिएगा हमारी स्टोरी में दूसरा खलनायक।
- 1:56:23पहला खलनायक चैनसा है। दूसरा खलनायक दोस्त
- 1:56:26मोहम्मद है। आगे बढ़ते हैं। दोस्त मोहम्मद
- 1:56:30ने गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया और
- 1:56:32जिसने चैन सिंह जिसमें चैन सिंह मारा गया
- 1:56:35और किले को उसने हड़प लिया। किसने हड़प
- 1:56:37लिया? यानी जो दोस्त मोहम्मद है उसने चैन
- 1:56:40सिंह को मार डाला और गिन्नौरगढ़ का जो किला
- 1:56:42है उसे हड़प लिया। रानी कमलापवती को अपने
- 1:56:44छोटे बेटे की परवरिश की चिंता थी। इसलिए
- 1:56:46उन्होंने दोस्त मोहम्मद के इस कदम पर कोई
- 1:56:48आपत्ति नहीं जताई। और दोस्त मोहम्मद अब
- 1:56:51संपूर्ण भोपाल की रियासत पर क्या करना
- 1:56:53चाहता था? अधिकार करना चाहता था। यह आगे
- 1:56:57के संघर्ष को अब हम समझने वाले हैं। उसने
- 1:57:01रानी कमलापति को अपने हरम में शामिल होने
- 1:57:03और शादी करने का प्रस्ताव रखा और वह
- 1:57:05वास्तव में रानी को अपने हरम में रखना
- 1:57:08चाहता था। दोस्त मोहम्मद खान के इस नापाक
- 1:57:10इरादे को देखते हुए रानी कमलापति यह
- 1:57:13स्टोरी भी ध्यान से सुनना। रानी कमलापति
- 1:57:15का 14 वर्षीय बेटा जिसका नाम नवल शाह है
- 1:57:18अपने 100 लड़ाकों के साथ लाल घाटी में
- 1:57:20युद्ध करने चला गया और इस घमासान युद्ध
- 1:57:23में दोस्त मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार
- 1:57:25दिया और इस स्थान पर इतना खून बहा कि यह
- 1:57:29जमीन लाल हो गई और इसी कारण इसे लाल घाटी
- 1:57:31कहा गया यानी दोस्त मोहम्मद से जो रानी का
- 1:57:35लड़का है जिसका नाम नवल शाह है नवल शाह को
- 1:57:37जब यह पता चला कि दोस्त मोहम्मद उनकी मां
- 1:57:39के प्रति बुरी नजर रखता है तो उसने जो है
- 1:57:42गुस्से में आकर नवल शाह ने अपने कुछ 100
- 1:57:44योद्धाओं को इकट्ठा किया और लड़ने के लिए
- 1:57:46चला गया। दोनों के बीच युद्ध हुआ और इस
- 1:57:47युद्ध में नवल शाह मारा गया। जैसे ही यह
- 1:57:50खबर नवल शाह के मरने की रानी को पता लगी
- 1:57:52और उन्हें पता चला कि दोस्त मोहम्मद उनकी
- 1:57:54तरफ आ रहा है तो रानी ने जल समाधि ले ली।
- 1:57:57रानी कमलावती ने विषम परिस्थितियों को
- 1:57:59देखते हुए अपनी इज्जत को बचाने के लिए
- 1:58:00बड़े तालाब बांध का जो है सकरा रास्ता
- 1:58:03खुलवा दिया। जिससे बड़े तालाब का पानी
- 1:58:05रिसकर दूसरी तरफ आने लगा और इसे आज छोटा
- 1:58:09तालाब के रूप में जाना जाता है। इसमें
- 1:58:11रानी कम रानी कमलापति ने महल की समस्त
- 1:58:13धनदौलत और जेवरात को उसी जल समाधि में डाल
- 1:58:16दिया और इस प्रकार जो है उन्होंने जल
- 1:58:18समाधि ले ली। तो इस प्रकार रानी कमलापति
- 1:58:20की मृत्यु हो जाती है। दोस्त मोहम्मद खान
- 1:58:22जब तक अपनी सेना को साथ लेकर लाल घाटी से
- 1:58:25लाल किले तक इस किले तक पहुंचा यानी महल
- 1:58:28तक पहुंचा तब तक सब कुछ खत्म हो गया था।
- 1:58:30उसके हाथ कुछ नहीं लगा। ना रानी ना सोना
- 1:58:32ना संपत्ति सब जो है जल समाधि में चला
- 1:58:34गया। दोस्त मोहम्मद खान को ना रानी
- 1:58:36कमलापति मिली और ना ही धन दौलत। जीते जी
- 1:58:38उन्होंने भोपाल पर परधर्मी या विधर्मी को
- 1:58:41नहीं बैठने दिया। सोर्सों के अनुसार रानी
- 1:58:44कमलापति ने सन 1723 में अपनी जीवन लीला
- 1:58:46खत्म की और उनकी मृत्यु के साथ ही भोपाल
- 1:58:50में शुरू होता है दोस्त मोहम्मद का राज
- 1:58:52जिसे भोपाल रियासत कहते हैं। दोस्त
- 1:58:53मोहम्मद खान के साथ ही नवाबों का दौर शुरू
- 1:58:56होता है और भोपाल में नवाबों का राज्य
- 1:58:58शुरू हो जाता है। तो इस प्रकार रानी
- 1:59:00कमलापति का राज दोस्त मोहम्मद ने हड़प
- 1:59:03लिया। ये इस स्टोरी में पूरी की पूरी
- 1:59:05कहानी थी। अब इस स्टोरी में खास क्या है?
- 1:59:08यह बताता हूं। यह पीडीएफ अगर आपको चाहिए
- 1:59:10हो तो सब कुछ इसमें लिखा है। रानी कमलापति
- 1:59:13कौन थी? उनके पति कौन थे? उनकी मृत्यु का
- 1:59:15कारण क्या था? यह सारी बातें हमने यहां पर
- 1:59:17देख ली। रानी कमलापति महल की बात करते
- 1:59:20हैं। ये भोपाल में इसका तस्वीर में मैं
- 1:59:22आपको दिखा देता हूं। देखिए यह भोपाल का
- 1:59:25सबसे प्राचीन शहर है। 18वीं शताब्दी में
- 1:59:27बना था कि यार भोपाल में जितनी भी इमारतें
- 1:59:29हैं उनमें सबसे पुराना यही पैलेस है जिसका
- 1:59:31नाम रानी कमलापति पैलेस है। इस महल का जो
- 1:59:33निर्माण है वो निजाम शाह ने अपनी पत्नी के
- 1:59:35लिए करवाया था। किसके लिए? कमलापति के लिए
- 1:59:38याद रखिएगा। ठीक है? तो, यह एक वास्तुकला
- 1:59:41का एक उत्कृष्ट उदाहरण हमको देखने को
- 1:59:43मिलता है जिसमें नुकीले मेहराबों को
- 1:59:46प्रयोग किया गया। बहुत सारी इसकी खास
- 1:59:47बातें हैं। इसका तस्वीर मैं आप लोगों को
- 1:59:49दिखाता हूं। यह है कमलापति पैलेस।
- 1:59:53कमलापति महल बोलते हैं जो कि कहां पर बना
- 1:59:56हुआ है। भोपाल में बना हुआ है। याद
- 1:59:59रखिएगा। बड़ा खूबसूरत है। इसी के सामने एक
- 2:00:01पैलेस बना पार्क बना हुआ है जिसको बोलते
- 2:00:03हैं कमला पार्क या रानी कमलापति पार्क
- 2:00:06इसको कहा जाता है। तो कमलापति पार्क जो है
- 2:00:08इसी महल के सामने बना हुआ है। ठीक है? यह
- 2:00:11भी भोपाल में है और यह भोपाल के नवाब ने
- 2:00:14बनवाया था।
- 2:00:16ठीक है? तो ये दोनों चीजें हम लोगों को
- 2:00:17यहां देखने को मिलती हैं। आई होप आप लोगों
- 2:00:20को यहां तक समझ में आ गया होगा। अब हम एक
- 2:00:21लास्ट और इंटरेस्टिंग बात करेंगे। ध्यान
- 2:00:24से सुनिएगा। हबीबगंज रेलवे स्टेशन जिसका
- 2:00:27नया नाम कर दिया गया है रानी कमलापति
- 2:00:29स्टेशन। ध्यान से सुनेंगे। बहुत
- 2:00:30इंपॉर्टेंट है। यह आप देख सकते हैं। यह
- 2:00:32बहुत ही आधुनिक है। यह देश का पहला
- 2:00:35प्राइवेट जो है क्या है? रेलवे स्टेशन है
- 2:00:37और यह एक एयरपोर्ट की तरह बना हुआ है।
- 2:00:39यानी काफी आधुनिक सुसज्जा के साथ यह हमको
- 2:00:42देखने को मिलता है। तो आपको अगर पूछा जाए
- 2:00:44कि हबीबंज रेलवे स्टेशन का नाम क्या कर
- 2:00:46दिया गया है? तो याद रखिएगा रानी कमलापति
- 2:00:49स्टेशन कर दिया गया है और यह भोपाल शहर
- 2:00:51में स्थित है और भोपाल शहर का दूसरा
- 2:00:53स्टेशन है। पहला जो मेन स्टेशन है उसके
- 2:00:55बाद दूसरा यह है। यह भारत का पहला आईएसओ
- 2:00:57प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाला निजी रेलवे
- 2:00:59स्टेशन है। 14 नवंबर 2021 को हबीबंद रेलवे
- 2:01:03स्टेशन का नाम याद रखिएगा कब बदला गया यह
- 2:01:05नाम? तो 2021 को इसका नाम बदलकर कमलापति
- 2:01:07के नाम पे रख दिया गया है। और यह भारत का
- 2:01:09पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन है जिसे बंसल
- 2:01:12ग्रुप के द्वारा कौन सा ग्रुप इसको चलाता
- 2:01:14है? तो याद रखिए कभी पूछा जाए किस ग्रुप
- 2:01:16के अंडर में आता है ये प्राइवेट रेलवे
- 2:01:19स्टेशन है। बंसल ग्रुप इसको लीड करता है।
- 2:01:21एक और इंपॉर्टेंट बात कि आखिरकार इसका नाम
- 2:01:23हबीबगंज रेलवे स्टेशन पहले क्यों था? तो
- 2:01:26किसके नाम पर था? देखिए हबीबगंज का जो नाम
- 2:01:29है वो हबीब मियां के नाम पर था। ये हबीब
- 2:01:31मियां कौन है? देखिए इस स्टेशन का सबसे
- 2:01:34पुराना नाम शाहपुर था। बाद में एक हबीब
- 2:01:36मियां थे जिन्होंने अपनी जमीन इसके लिए
- 2:01:38दान दी थी। और उन्होंने क्योंकि जमीन दान
- 2:01:40दी उनके नाम पर इसका नाम हबीबगंज रेलवे
- 2:01:42स्टेशन पड़ा और वर्तमान में इसका नाम क्या
- 2:01:44हो गया? रानी कमलापति स्टेशन। तीन नाम हो
- 2:01:47गए। पहले शाहपुर, फिर हबीबगंज और वर्तमान
- 2:01:49में क्या है? याद रखिएगा रानी कमलापति
- 2:01:51स्टेशन। आई होप आप लोगों को यह सारी
- 2:01:54जानकारी अच्छे से समझ में आ गई होगी।
- 2:01:56देखिए तो आज हम लोगों ने किसके बारे में
- 2:01:58बात की है? आज हम लोगों ने बात की है
- 2:02:00भोपाल की सबसे प्रसिद्ध रानी जिनका नाम
- 2:02:02क्या था? रानी कमलापति जो कि भोपाल की
- 2:02:05अंतिम हिंदू रानी थी। देखिए रानी कमलापति
- 2:02:08गों की रानी थी और भोपाल की अंतिम रानी
- 2:02:11थी। वो भोपाल की अंतिम हिंदू रानी थी
- 2:02:12जिनका योगदान बड़ा महत्वपूर्ण है। इनके
- 2:02:15राज्य को हड़प लिया था एक अफगान लुटेरे ने
- 2:02:17जिसका नाम था दोस्त मोहम्मद और यहां पर जो
- 2:02:20गिन्नौरगढ़ से जो भोपाल का जो पूरा एरिया
- 2:02:22था उसे छीनकर उसने जो है यहां पर भोपाल
- 2:02:24रियासत की नींव रखी और भोपाल में नवाबों
- 2:02:26का शासन यहां पे शुरू होता है। मुझे
- 2:02:28उम्मीद है कि आज के इस सेशन में आप लोगों
- 2:02:30को रानी कमलापति की स्टोरी अच्छे से समझ
- 2:02:32में आई होगी और आपको जो मेन किरदार है
- 2:02:35उनके नाम समझ में आए होंगे कि चैन शाह कौन
- 2:02:37है? नवल शाह कौन है? और याद रखिएगा निजाम
- 2:02:40शाह कौन है? और सबसे इंपॉर्टेंट दोस्त
- 2:02:41मोहम्मद कौन था? कमलापति पैलेस कहां है?
- 2:02:44कमलापति पार्क कहां पर है? और रानी
- 2:02:46कमलापति ने कहां जल समाधि ली थी? ये सारी
- 2:02:49बातें आप लोगों को अच्छे से समझ में आ गई
- 2:02:51होंगी। इसी के साथ इस वीडियो को मैं यहीं
- 2:02:53समाप्त करता हूं और मुझे आप बताइएगा कमेंट
- 2:02:56करके कि आप नेक्स्ट वीडियो किस पर चाहते
- 2:02:58हैं। जय हिंद। थैंक यू।
- 2:03:06नमस्कार साथियों आप सभी का एमपीपीएससी
- 2:03:09स्टडी का आईक्यू के इस चैनल पर बहुत-बहुत
- 2:03:11स्वागत है। उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे
- 2:03:13होंगे और मन लगाकर पढ़ रहे होंगे। तो
- 2:03:15दोस्तों मैं आप सभी के लिए एक बहुत ही
- 2:03:18बेहतरीन सीरीज लेकर आया हूं और इस सीरीज
- 2:03:20का नाम है मध्य प्रदेश के वीरों का
- 2:03:22इतिहास। यानी इस सीरीज में हम लोग मध्य
- 2:03:25प्रदेश के उन वीरों के बारे में चर्चा
- 2:03:27करने वाले हैं जिन्होंने मध्य प्रदेश के
- 2:03:30स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण
- 2:03:32रोल दिया। इसके साथ-साथ उनसे रिलेटेड जो
- 2:03:35क्वेश्चन है वह एमपीपीएससी और अन्य
- 2:03:37परीक्षाओं में भी पूछे जाते हैं। तो आज की
- 2:03:40इस सीरीज में मैं आप सभी के लिए लेकर आया
- 2:03:42हूं मध्य प्रदेश के एक वीर स्वतंत्रता
- 2:03:45सेनानी, भीलों के जो हैं मसीहा,
- 2:03:47आदिवासियों के मसीहा, मध्य प्रदेश के
- 2:03:50जननायक और भारतीय रॉबिनहुड। मैं बात कर
- 2:03:53रहा हूं
- 2:03:54द ग्रेट टंट्या भील की। तो आज के इस सेशन
- 2:03:58में हम लोग बात करेंगे आदिवासियों के
- 2:04:00मसीहा, गरीबों के मसीहा भारतीय रॉबिन हिट
- 2:04:03रॉबिनहुड टंट्या भील के बारे में। देखिए
- 2:04:05ये जो सीरीज है ये एक छोटी सी सीरीज है।
- 2:04:08मतलब इसमें ज्यादा समय आपका नहीं लूंगा।
- 2:04:1010 से 15 मिनट में आपको बहुत इंपॉर्टेंट
- 2:04:13जानकारी दूंगा जिससे आप एग्जाम के
- 2:04:14क्वेश्चन भी सॉल्व कर सकें। प्रीलिम्स में
- 2:04:16बनने वाले फैक्ट को भी कवर कर सकें। मेंस
- 2:04:19के लिए आपको एक कांसेप्ट भी मिल जाए और
- 2:04:21साथ-साथ अगर इससे रिलेटेड कुछ और क्वेश्चन
- 2:04:23इंटरव्यू में पूछे जाते हैं तो उन सभी में
- 2:04:25आपको इससे हेल्प मिले। तो आइए बात करते
- 2:04:27हैं हम द ग्रेट टंट्या भील की। ठीक है?
- 2:04:30सबसे पहले हम लोग बात करेंगे उनके जीवन
- 2:04:33परिचय के बारे में कि जो मध्य प्रदेश के
- 2:04:35जननायक हैं टंट्या भील उनका जीवन परिचय
- 2:04:37कैसा रहा। तो दोस्तों इसमें कुछ सामान्य
- 2:04:40सी बातें जो आपको याद रखनी है यहां पर।
- 2:04:42सबसे पहले देखिए उनका बर्थ है और उनका जो
- 2:04:44जन्म होता है वो होता है 26 जनवरी 1842 को
- 2:04:48एक गांव है जिसका नाम है बड़ा अहीर गांव
- 2:04:51और यह गांव पड़ता है पंधाना तहसील खंडवा।
- 2:04:54इसीलिए कई जगह पे पूर्वी निवाड़ भी लिखा
- 2:04:57रहता है। आप याद रखिएगा खंडवा की पंधाना
- 2:04:59तहसील के बड़दा अहीर गांव में 26 जनवरी
- 2:05:011842 को उनका जन्म होता है। ठीक है? अब
- 2:05:04इसमें कुछ बायोडाटा उनकी समाधि के बारे
- 2:05:07में दिया है। उनकी समाधि पाताल पानी इंदौर
- 2:05:09में है। 4 दिसंबर को देखिए कई बार एग्जाम
- 2:05:12में उनकी जो है फांसी के बारे में पूछते
- 2:05:15हैं। कब उनको फांसी हुई थी? और 1889 में
- 2:05:18एक समाचार पत्र था न्यूयॉर्क का। उस
- 2:05:21समाचार पत्र ने उनको यह टाइटल दिया था। तो
- 2:05:23एग्जाम में यह क्वेश्चन भी पूछा जा सकता
- 2:05:25है कि किस समाचार पत्र ने उन्हें इंडियन
- 2:05:28रॉबिनहुड का टाइटल दिया था? तो वह समाचार
- 2:05:30पत्र था द न्यूयॉर्क टाइम्स। और 10 नवंबर
- 2:05:331889 को यह न्यूज़ जो है न्यूयॉर्क टाइम्स
- 2:05:36में प्रकाशित की गई थी और उसमें उन्हें
- 2:05:38भारतीय रॉबिनहुड कहा गया था। तो ये तो
- 2:05:40इसमें से दो-तीन बातें होंगी लेकिन हम
- 2:05:42डिटेल में चर्चा करने वाले हैं तांत्या
- 2:05:46भील के बारे में। तो सबसे पहले उनके बर्थ
- 2:05:48के बारे में बात करते हैं। अर्ली लाइफ के
- 2:05:50बारे में बात करते हैं। तो देखिए सबसे
- 2:05:53पहले जैसे कि मैंने आपको बताया उनका जन्म
- 2:05:55जो है 1842 में तत्कालीन मध्य प्रांत यानी
- 2:05:58मध्य प्रदेश के पूर्वी निवाड़ और खंडवा
- 2:06:00जिले की पंधाना तहसील के इसमें जो
- 2:06:03इंपॉर्टेंट है वो बर्दा आहीर गांव है जो
- 2:06:05एग्जाम में आपके काम आ सकता है। साथ-साथ
- 2:06:07अगर गांव नहीं आएगा तो ये पंधाना तहसील आ
- 2:06:10सकती है। खंडवा जिले की पंधाना तहसील के
- 2:06:13बड़दा गांव में उनका जन्म होता है। टंड्या
- 2:06:16भील का जन्म एक भील परिवार में हुआ था और
- 2:06:18उनके जो पिता हैं उनका नाम भाव सिंह या
- 2:06:21ज्यादातर जगहों पर भास सिंह भील था। भाव
- 2:06:24सिंह भील या भा सिंह भील था और उनकी माता
- 2:06:26का नाम जीवनी था। माताजी का जो निधन है
- 2:06:29उनका बहुत मतलब पहले हो चुका था लेकिन
- 2:06:32उनके जो पिता थे उन्होंने उन्हें भीलों
- 2:06:34में सबसे इंपॉर्टेंट होता है तीर धनुष तीर
- 2:06:37चलाने की जो शिक्षा होती है और गोफन तो
- 2:06:39याद रखिएगा उनके जो पिता हैं उन्होंने
- 2:06:42टंट्या को लाठी गोफन और तीर कमान चलाने का
- 2:06:46प्रशिक्षण दिया था बचपन में यानी वह लाठी
- 2:06:49चलाने में माहिर थे गोफन होता है जो फेंक
- 2:06:51कर घुमाकर फेंकते हैं और थर्ड नंबर पे है
- 2:06:53धनुष तीर और आगे चलकर जब वह अंग्रेजों से
- 2:06:56संघर्ष करते हैं तो इसमें इसमें एक और चीज
- 2:06:58जोड़ देंगे बंदूक। उनके साथ हमेशा कंधे पर
- 2:07:01एक बंदूक रहती थी जिससे वह अंग्रेजों का
- 2:07:03सामना करते थे। जमींदारों साहूकारों के
- 2:07:05अत्याचार के विरुद्ध जो है संघर्ष करते
- 2:07:08थे। तो ये उनका वर्थ हो गया। वर्थ के बाद
- 2:07:10आइए बात करते हैं। उनके वास्तविक नाम को
- 2:07:13लेकर कुछ कंफ्यूजन क्रिएट होता है। हमारे
- 2:07:15एमबीबीएससी प्रीलिम्स में एक क्वेश्चन
- 2:07:16पूछा गया था। मैं आपको बताना चाहूंगा।
- 2:07:18देखिए उनका जो रियल नेम है वो तांत्या था।
- 2:07:21ध्यान से सुनना। घर वालों ने उनका नाम
- 2:07:24तांत्या रखा था। लेकिन याद रखेंगे इस
- 2:07:27तांत्या के अलावा एक नाम और याद रखना है
- 2:07:29आपको। तांत्या उनका रियल नेम है। ठीक है?
- 2:07:32अब होता क्या है? जो अंग्रेज लोग थे
- 2:07:34अंग्रेज अंग्रेज लोगों ने उनको उस समय
- 2:07:38टुंड्रा कह दिया। तो कई जगह पे उनका नाम
- 2:07:40टुंड्रा मिला है। टुंड्रा नाम किसने दिया
- 2:07:43है? यह अंग्रेजों ने दिया है। तो, यह आप
- 2:07:45याद रख सकते हैं। इसके अलावा लोग उन्हें
- 2:07:47प्यार से भीलों में आपने सुना होगा मामा
- 2:07:50संबोधन उनको ज्यादा पसंद है। तो, लोग
- 2:07:52उन्हें प्यार से टंट्या मामा कहते हैं।
- 2:07:55ठीक है? अब इसमें एक इंपॉर्टेंट और
- 2:07:58इंटरेस्टिंग फैक्ट मैं आपको बता रहा हूं।
- 2:08:00यह जो तांत्या और टुंड्रा का क्या
- 2:08:02कांसेप्ट है? देखिए, भीलों में जो ज्वार
- 2:08:05का पेड़ होता है, वह एकदम सीधा और खड़ा
- 2:08:07होता है और उसको यह लोग क्या कहते हैं?
- 2:08:10टंट्या कहते हैं या ऐसा एक वर्ड इस्तेमाल
- 2:08:12करते हैं। तो इनका जो रियल नेम है वह रियल
- 2:08:14नेम क्या था? तांत्या। तांत्या के बाद यह
- 2:08:17बन गया था टंट्या। टंट्या से मतलब है
- 2:08:20ज्वार के पेड़ की बात हो रही है। ज्वार का
- 2:08:22जो पेड़ होता है उसको जो है भीलों में
- 2:08:25टंट्या कहा जाता है। ठीक है? तो लोग उनको
- 2:08:28क्या बोलते थे? टंट्या। लेकिन अंग्रेजों
- 2:08:30ने इस टंट्या का नाम बिगाड़ के क्या कर
- 2:08:32दिया? टुंड्रा कर दिया। और हमारे
- 2:08:34एमपीपीएससी ने ऐसा क्वेश्चन कुछ समय पहले
- 2:08:37ही पूछा था। तो ये इनका रियल नेम तांत्या
- 2:08:40है। ज्वार के पेड़ के कारण इन्हें लोग
- 2:08:42टंटिया इनके जो स्कूल फ्रेंड थे वो इन्हें
- 2:08:45टंटिया टंटिया कह के बुलाते थे क्योंकि ये
- 2:08:47सीधे एकदम थे मतलब ज्वार के पेड़ की तरह
- 2:08:50थे इसलिए इनको टंटिया कहते थे। अंग्रेजों
- 2:08:53ने इनको टुंड्रा कर दिया और सामान्य लोग
- 2:08:55आगे चलकर जब ये लोकप्रिय हुए तो इन्हें
- 2:08:57टंट्या मामा कहते थे। तो इनके बर्थ के
- 2:08:59बारे में हो गए। इनका रियल नेम हो गया।
- 2:09:01ठीक है? रियल नेम इनका तात्या है। लोग
- 2:09:03इनको भील जो युवा थे उन्होंने टंट्या कहा
- 2:09:06और अंग्रेजों ने इनका नाम टुंड्रा कर
- 2:09:07दिया। अब आते हैं विद्रोह की बात। देखिए
- 2:09:10आखिरकार विद्रोह होता क्यों है? और
- 2:09:12विद्रोह की कहानी क्या है? तो इनके जो
- 2:09:15पिता थे जिनका नाम था भाऊ सिंह भील
- 2:09:17उन्होंने कुछ कर्जा लिया था और उन्होंने
- 2:09:20अपनी जो जमीन है गांव के एक जमींदार को
- 2:09:22गिरवी रखी थी और उस गांव के जमींदार का
- 2:09:25नाम था मतलब वो एक पटेल था। उसको यहां पर
- 2:09:27उन्होंने अपनी जमीन जो है गिरवी रखी थी।
- 2:09:29जब इनके पिता की मृत्यु हुई तो यह जो हैं
- 2:09:33हमारे जो तात्या भील हैं वो जाते हैं और
- 2:09:35उनसे क्या करते हैं? अपनी जमीन वापस
- 2:09:37मांगते हैं। तो जमींदार ने जमीन तो इनको
- 2:09:40वापस नहीं दी। उल्टा इन पर आरोप लगाकर
- 2:09:43इन्हें जो है जेल करवा दी। तो जब ये जेल
- 2:09:46में गए तो अंग्रेजों से इनका मतलब पुलिस
- 2:09:48जो थी पुलिस ने क्या किया? इनके साथ
- 2:09:51मारपीट की और वहां से ये जेल तोड़कर भाग
- 2:09:54जाते हैं। उसके बाद क्या होता है? इनका जो
- 2:09:57पहला संघर्ष होता है अगर आप देखेंगे
- 2:10:00तांत्या भील का जो पहला संघर्ष है ठीक है
- 2:10:03रियल नेम क्या है याद रखिएगा तांत्या है
- 2:10:06यह रियल नेम है लोगों ने ज्वार के पेड़ के
- 2:10:09कारण क्या कर दिया है टंट्या कर दिया है
- 2:10:11ये याद रखना और अंग्रेजों ने इनको क्या
- 2:10:14नाम दिया टुंड्रा कर दिया तो कहीं-कहीं
- 2:10:16इनको टुंड्रा टुंडा भी कहते हैं ठीक है तो
- 2:10:19ये नाम पड़ गया अब ये जो पहले शिकार बनते
- 2:10:22हैं ये पहले शिकार किसके बनते हैं साहूकार
- 2:10:25और जमींदारों यानी टांटिया भील पर जो पहला
- 2:10:29अत्याचार हुआ वो साहूकार और जमींदारों का
- 2:10:32हुआ। जमींदारों का अत्याचार। ठीक है?
- 2:10:36साहूकार और जमींदारों का अत्याचार इन पर
- 2:10:39हुआ और साथ-साथ इसमें क्योंकि जमींदारों
- 2:10:42का साथ कौन देती है? जमींदार किसके साथ
- 2:10:44होती है? पुलिस जो इस समय अंग्रेजों की
- 2:10:46थी। क्योंकि इस समय जो गरीब आदिवासी किसान
- 2:10:50होते थे, उनकी जमीनों को जमींदार हड़प
- 2:10:53लेते थे। जब वो उधार लेते थे साहूकारों से
- 2:10:56तो उनको जो है साहूकार और पुलिस मिलकर
- 2:10:58पुलिस थाने में कैद करवा देती और उनके साथ
- 2:11:00मारपीट करती थी। यानी हमारे जो तांत्या
- 2:11:03भील हैं वो जमींदारों और साहूकारों के
- 2:11:06अत्याचार का शिकार बनते हैं। जब उन्हें
- 2:11:08खंडवा जेल में रखा गया तो वो तीन दिन बाद
- 2:11:10ही जेल तोड़कर भाग जाते हैं। उसके बाद जो
- 2:11:14हमारे तांत्या भील हैं उनकी जो लड़ाई है
- 2:11:17याद रखिएगा। तांत्या भील क्या उठा लेते
- 2:11:19हैं? विद्रोह कर देते हैं और विद्रोह करने
- 2:11:22के पश्चात जो है वह बंदूक उठा लेते हैं और
- 2:11:25जब वो बंदूक उठाएंगे आपने देखा होगा
- 2:11:27पुरानी फिल्मों में जब डाकू बनते थे डाकू
- 2:11:30नहीं मैं बागी शब्द का इस्तेमाल करूंगा जो
- 2:11:32चंबल की कहानी है बागी तो वो क्यों बागी
- 2:11:35बनते थे जब उनके ऊपर अत्याचार किया जाता
- 2:11:38था तो वह बागी बनते थे और ऐसा ही यानी जो
- 2:11:41आदिवासी जनजाति हैं या जो भील वर्ग है
- 2:11:44उनके विरुद्ध जब अत्याचार हो रहा था
- 2:11:46गरीबों पर जनता पर अत्याचार हो रहा था तो
- 2:11:49उस अत्याचार के विरोध में तांभ्या भील ने
- 2:11:51बंदूक उठा ली क्योंकि साहूकारों से उनका
- 2:11:54विरोध है। अब जब वो साहूकारों और
- 2:11:56जमींदारों को लूटेंगे समझ में आ रहा है
- 2:11:58ना? साहूकारों जमींदारों को लूटेंगे तो
- 2:12:00पुलिस आएगी तो पुलिस से भी उनकी मुठभेड़
- 2:12:02होगी। तो कुल मिलाकर उनका यहीं से संघर्ष
- 2:12:05शुरू होता है अंग्रेजों के साथ। ठीक है?
- 2:12:08यहीं से अंग्रेजों के साथ संघर्ष शुरू
- 2:12:10होता है।
- 2:12:13अंग्रेजों के साथ संघर्ष जो है तांद्या
- 2:12:16भील का शुरू होता है। अब इसमें एक और बात
- 2:12:19है कि जब वो छोटे थे तभी जो है 1857 की
- 2:12:24क्रांति होती है और 1857 की क्रांति में
- 2:12:27उनकी कुछ भूमिका थी।
- 2:12:321857 की क्रांति में उनकी कुछ भूमिका थी।
- 2:12:35हालांकि इनका जो ज्यादा रोल है यानी
- 2:12:38तांत्या जो भील है हमारे उनका जो ज्यादा
- 2:12:40रोल है वो हमको 1857 के बाद देखने को
- 2:12:43मिलता है। अब लगातार इन्होंने क्या किया
- 2:12:46कि ये क्या करते साहूकारों के घर में डाका
- 2:12:48डालते जमींदारों के घर में डाका डालते और
- 2:12:51जो सरकारी जो खजाने होते थे सरकारी जो
- 2:12:54ट्रेनें होती थी जिनमें अनाज जाता था उनको
- 2:12:56लूटते थे और उनको लूट कर गरीब असहाय और
- 2:13:00दीन लोगों में बांट देते थे। तांत्या भील
- 2:13:02के बारे में हम कुछ और बातें करने जा रहे
- 2:13:05हैं जिनको आपको बहुत ध्यान से सुनना है।
- 2:13:07तो देखिए अर्ली लाइफ के बारे में बता
- 2:13:09दिया। जन्म हो गया हमारा वास्तविक नाम हो
- 2:13:12गया। विद्रोह हो गया। ठीक है? और ब्रिटिश
- 2:13:14शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ विद्रोह
- 2:13:16किया। आदिवासी समुदाय को संगठित किया। और
- 2:13:19टंडिया ने गोरिल्ला युद्ध कला को उपयोग
- 2:13:21किया और ब्रिटिश सेना उन्हें 12 वर्षों तक
- 2:13:2412 साल तक इन्होंने अंग्रेजों को नाखों
- 2:13:26चने चने चबवाए और अंग्रेज इनको नहीं पकड़
- 2:13:31पाए। 12 वर्ष तक अंग्रेज इनके पीछे लगे
- 2:13:33रहे। तो जो टंडिया भील की जो मेन भूमिका
- 2:13:36है वो आपको समझनी है। आखिर अंग्रेजों से
- 2:13:38उनका संघर्ष क्यों होता है? वो है जमींदार
- 2:13:41साहूकारों का अत्याचार और उसी के विरुद्ध
- 2:13:43वो आवाज उठाते हैं और उसके साथ ही उनका
- 2:13:46संघर्ष जो है ब्रिटिश पुलिस से और
- 2:13:48अंग्रेजों से होने लगता है। ठीक है? अब
- 2:13:50आगे की कड़ी में देखते हैं क्या और आपको
- 2:13:52याद रखना है। देखिए यहां पर जैसे मैंने
- 2:13:54आपको बताया सबसे पॉपुलर एक क्वेश्चन है।
- 2:13:57हो सकता है मुख्य परीक्षा में यह क्वेश्चन
- 2:13:59इस तरीके से पूछा जाए कि तां्या भील को
- 2:14:01भारतीय रॉबिनहुड कहा जाता है। आखिर क्यों?
- 2:14:04तो ऐसा उन्होंने क्या किया? ठीक है? अब ये
- 2:14:07रॉबिनहुड का क्या कांसेप्ट है? रॉबिनहुड
- 2:14:09एक यूरोपीय योद्धा था जो यूरोप में गरीबों
- 2:14:12को लूटने वाले जमींदारों और जो साहूकार
- 2:14:15होते थे उनको लूटता था और उनसे लूटा हुआ
- 2:14:17जो माल है वो गरीबों में बांट देता था
- 2:14:20जिसे रॉबिनहुड कहा जाता था| इसीलिए
- 2:14:22क्योंकि अब यह काम आदिवासी इलाके में कौन
- 2:14:25कर रहे हैं हमारे तांत्या भील कर रहे हैं
- 2:14:28इसीलिए देखिए गरीब कन्याओं की शादी कराना
- 2:14:31निर्धन और असहाय लोगों की मदद करना इसके
- 2:14:34अलावा टक है इन सभी कामों से टंट्या मामा
- 2:14:37सबके प्रिय प्रिय बन गए जिससे उनकी पूजा
- 2:14:40होने लगी। अमीरों से लूटकर गरीबों में
- 2:14:42बांटने के कारण वह आदिवासियों का रॉबिनहुड
- 2:14:46बन गया तथा उन्होंने अमीरों से धन छीनकर
- 2:14:48गरीबों और वंचितों की मदद की। इसीलिए
- 2:14:50उन्हें भारत में या भारतीय रॉबिनहुड के
- 2:14:53नाम से जाना जाता है। तो रॉबिनहुड क्यों
- 2:14:55कहते हैं? अमीरों को लूटते हैं, गरीबों
- 2:14:58में बांट देते हैं। जमींदारों को लूटते
- 2:15:00हैं, गरीबों में बांट देते हैं। सरकारी
- 2:15:02खजाने को लूटते हैं, गरीबों में बांट देते
- 2:15:05हैं। इसीलिए लोग इन्हें भारतीय रॉबिनहुड
- 2:15:07के नाम से जानते हैं। अब भारतीय रॉबिनहुड
- 2:15:11भी हो गया। अब लगातार 12 वर्ष तक
- 2:15:14अंग्रेजों को इन्होंने चकमा दिया तो सरकार
- 2:15:17ने लगभग 2000 लोगों की एक पलटन इनके पीछे
- 2:15:20लगा दी जो भील पलटन के नाम से फेमस थी। अब
- 2:15:23वो इनको पकड़ने का काम कर रही है और
- 2:15:25तांत्या देखिए तांत्या की दो खूबी और हैं
- 2:15:27जो मैं आपको बताना चाहता हूं। पहली चीज ये
- 2:15:30कहा जाता है कि तांत्या जो हैं वो कई सारे
- 2:15:33अपने हम शक्ल रखते थे। ठीक है? कौन रखते
- 2:15:37थे? कई सारे हम शक्ल रखते थे और इनका
- 2:15:40इस्तेमाल करते थे वो अलग-अलग जगह पर जिससे
- 2:15:42कि उनको आसानी से ना पकड़ा जा सके।
- 2:15:44क्योंकि उनको जंगल से लगाव था जंगल में।
- 2:15:48बताते हैं कि जब भी पुलिस उनको पकड़ने के
- 2:15:51लिए सेना उनको पकड़ने के लिए आती थी तो वह
- 2:15:53एकदम से जंगल में गायब हो जाते हैं। एक
- 2:15:56किस्सा है कि जब एक बार पुलिस उन्हें
- 2:15:58पकड़ने के लिए आती है तो वह 20 फीट ऊंची
- 2:16:00दीवार को कूदकर जो है जंगल में भाग जाते
- 2:16:03हैं। हाथों में बंदूक होती है तो 12 साल
- 2:16:05का जो संघर्ष है अंग्रेजों को करना पड़ा।
- 2:16:08जब अंग्रेज तांत्या भील को पकड़ने में
- 2:16:10लाचार हो गए, विवश हो गए। तब उन्होंने एक
- 2:16:13ऐसी नीति उन पे एक इनाम निकाल दिया। तब
- 2:16:16जाके तांत्या भील के जो करीबी और उनके खास
- 2:16:19लोग थे और हम सब जानते हैं रावण को भी
- 2:16:22विभीषण ने मरवाया है यानी उनके अपने ने
- 2:16:25अपने व्यक्ति ने ऐसे ही तांत्या भील को
- 2:16:27मरवाने में या उनको पकड़वाने में उनके ही
- 2:16:30करीबी व्यक्ति का हाथ है। आइए हम यहां पर
- 2:16:32बात कर रहे हैं रक्षाबंधन के त्यौहार की।
- 2:16:36इस त्यौहार को भी कलंकित करने का प्रयास
- 2:16:39किया गया। देखिए यहां पर एक व्यक्ति है
- 2:16:41जिसका नाम है गणपत।
- 2:16:43याद रखिएगा क्या नाम था? गणपत सिंह गणपत
- 2:16:47सिंह था और जो उनकी पत्नी थी यह जो गणपत
- 2:16:50सिंह थे यह तां के करीबी थे। कौन थे?
- 2:16:54तांत्या के करीबी थे। बहुत ही खास थे। समझ
- 2:16:58में आ रहा है? करीबी दोस्त थे। और इनकी जो
- 2:17:01पत्नी थी इनको तांत्या जो है वह अपनी बहन
- 2:17:05मानते थे। यह नाम आप याद रखिएगा। एग्जाम
- 2:17:08के लिए याद रखेंगे। तांत्या भील को
- 2:17:10पकड़वाने वाले उस देशद्रोही और गद्दार का
- 2:17:14नाम विश्वासघाती का नाम गणपत है। गणपत एक
- 2:17:16इंपॉर्टेंट कैरेक्टर है। तो गणपत जो है
- 2:17:19अंग्रेजों के पास जाता है उस लालच के
- 2:17:20चक्कर में कि अंग्रेजों से पैसा मिलेगा और
- 2:17:23अंग्रेजों ने यह भी लालच दिया कि यह पैसा
- 2:17:25आगे भी मिलता रहेगा। गणपत जो है वो उनका
- 2:17:28सहयोगी भी था और उनकी पत्नी को जो हमारे
- 2:17:31तात्या मामा हैं वह भील मान अपनी बहन
- 2:17:35मानते थे। तो होता क्या है कि रक्षाबंधन
- 2:17:37के दिन वो अपनी बहन के घर राखी बंधवाने के
- 2:17:40लिए आते हैं तो अंग्रेजों की जो सेना है
- 2:17:42वो सुबह से शाम तक उनका इंतजार करती है।
- 2:17:45रात के लगभग 10:00 बजे जब तांत्या गणपत के
- 2:17:48घर पहुंचते हैं तो गणपत ने उनके कुछ जो
- 2:17:50साथी थे उनको उनसे अलग किया और जब वो सो
- 2:17:53रहे थे तो उनकी जो बंदूक थी वो उनसे दूर
- 2:17:56कर दी और अचानक अंग्रेजों ने आकर उनको
- 2:17:58पकड़ लिया। तो कुल मिलाकर यह जो गणपत सिंह
- 2:18:01था ना इसने जो है धोखे से उनको गिरफ्तार
- 2:18:04करवा दिया। जब वो अपनी बहन के घर राखी
- 2:18:06बंधवाने गए थे। बेसिकली ये उनका जीजा लगता
- 2:18:08था क्योंकि ये इनकी मुंह बेली बहन थी और
- 2:18:10उसका ये पति था। ब्रिटिश सरकार द्वारा
- 2:18:13टंटिया मामा को गिरफ्तार कर जबलपुर में जो
- 2:18:15है याद रखिएगा फांसी दे दी गई। अब ये
- 2:18:17जबलपुर का क्या किस्सा है थोड़ा सा इसको
- 2:18:19भी हम डिटेल में करेंगे। इसमें तीन डेट
- 2:18:21आपको लिखनी है। एक है 11 अगस्त क्योंकि
- 2:18:25अगस्त के महीने में रक्षाबंधन आता है।
- 2:18:271889 को उनको किया गया गिरफ्तार। आप यह
- 2:18:30नोट कर लेना। नंबर वन नंबर टू 19 अक्टूबर
- 2:18:3619 अक्टूबर 1889 को जबलपुर कोर्ट द्वारा
- 2:18:40यानी जबलपुर न्यायालय ने उनको फांसी की
- 2:18:42सजा सुनाई या जबलपुर न्यायालय ने उनको
- 2:18:45क्या दी है? फांसी की सजा अनाउंस की है।
- 2:18:50सुनाई है। दी नहीं है। और इसके बाद उनको 4
- 2:18:54दिसंबर जो है याद रखिएगा 1889 को जो है
- 2:18:58फांसी दी गई। तो फांसी कब दी गई? ये
- 2:19:01एग्जाम में बहुत पूछा जाता है। 4 दिसंबर
- 2:19:041889 को उनको फांसी दी गई। 11 अगस्त को
- 2:19:07उनको गिरफ्तार किया गया और 19 अक्टूबर को
- 2:19:09उनको फांसी की सजा सुनाई गई थी। अब उनको
- 2:19:11जो है क्या किया गया? गिरफ्तार किया गया
- 2:19:13और जबलपुर न्यायालय ने उनको जो है फांसी
- 2:19:15की सजा सुनाई। बाद में जबलपुर में ही
- 2:19:18संभवत उनकी हत्या कर दी गई थी। यानी उनको
- 2:19:20फांसी दे दी गई थी। और उनकी लाश को जो है
- 2:19:23इंदौर में एक जगह है पाताल पानी। वहां पर
- 2:19:25जो है फेंक दिया गया। ठीक है? कहां पर?
- 2:19:28पाताल पानी में फेंक दिया गया और पाताल
- 2:19:31पानी जो प्लेस था यह वाला पाताल पानी
- 2:19:34इंदौर
- 2:19:35यहां पर जो है उनको क्या कर दिया गया उनकी
- 2:19:38डेड बॉडी जो थी यहां पर उनकी डेड बॉडी को
- 2:19:40फेंक दिया गया इसीलिए इसीलिए इस जगह पर
- 2:19:44उनकी वर्तमान में क्या बनी है समाधि बनी
- 2:19:46है तो जो हमारे तात्या भील है उनकी समाधि
- 2:19:50कहां बनी है जबलपुर में ठीक है सॉरी पाताल
- 2:19:53पानी इंदौर में उनकी समाधि बनी है अभी इस
- 2:19:55पर हम चर्चा करेंगे
- 2:19:58उनके मरने से पहले उनके एक सेंटेंस है जो
- 2:20:00बड़े फेमस है। उनके सेंटेंस का नाम क्या
- 2:20:03है? मैं मरूंगा नहीं मैं फिर आऊंगा। ऐसा
- 2:20:07बताते हैं किवदंती है कि उन्होंने मरने से
- 2:20:09पहले कहा था मैं मरूंगा नहीं मैं फिर
- 2:20:11आऊंगा। आज भी जो 4 दिसंबर है ना 4 दिसंबर
- 2:20:154 दिसंबर को यहां पर वार्षिक मेला लगता
- 2:20:18है। याद रखिएगा। नेक्स्ट क्वेश्चन है आपका
- 2:20:21कि जो तंत्र्या भील बलिदान मेला है वह
- 2:20:24कहां और कब लगता है? ये डेट आपको याद रखना
- 2:20:27है। पाताल पानी में 4 दिसंबर को हर साल एक
- 2:20:30मेला लगता है तात्या भील के ऊपर। तो ये थी
- 2:20:32तांत्या भील की कहानी। अब इसमें कुछ और
- 2:20:34बातें हैं। जैसे कि पहली बात यह है कि
- 2:20:39आखिर यह जो केस था तांत्या भील को
- 2:20:42गिरफ्तार करके खंडवा या खरगोन में क्यों
- 2:20:44केस नहीं चलाया गया? क्योंकि वहां पे वो
- 2:20:46बहुत ज्यादा लोकप्रिय थे जनता में। अगर
- 2:20:49वहां पे केस चलाया जाता तो जनता जेल तोड़
- 2:20:51देती उनको छुड़ाने के लिए। इसीलिए वहां से
- 2:20:53उनको जबलपुर ले जाया गया। जबलपुर में
- 2:20:55ट्रायल हुआ। वहीं के न्यायालय द्वारा
- 2:20:57उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई और फाइनली 4
- 2:21:00दिसंबर 1889 को उन्हें फांसी देकर इस
- 2:21:03इलाके में यानी पाताल पानी इलाके में उनकी
- 2:21:05लाश को फेंक दिया गया। इस बात को आपको याद
- 2:21:08रखना है। अब इसमें 2 मिनट की बात और है जो
- 2:21:11आपको सुननी है। देखिए तो ये बात हो गई। 4
- 2:21:15दिसंबर को हम उनका बलिदान दिवस मनाते हैं।
- 2:21:17अब कुछ एग्जाम उपयोगी जो क्वेश्चन है वह
- 2:21:20भी हैं। उनके बारे में भी आप सुन लीजिए कि
- 2:21:23मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कुछ नामों में
- 2:21:26परिवर्तन किया गया मध्य प्रदेश सरकार
- 2:21:28द्वारा। एमपी जो गवर्नमेंट है उसने कुछ
- 2:21:29परिवर्तन किया है। जैसे खंडवा में एक तांभ
- 2:21:33भील स्मारक बनाया है। इंदौर खंडवा हाईवे
- 2:21:35का हिस्सा एक उनके नाम पर किया गया है।
- 2:21:38लेकिन जो सबसे ज्यादा एग्जाम ओरिएंटेड हैं
- 2:21:39वो ये तीन पॉइंट आप याद रख सकते हैं।
- 2:21:41तीनों इंदौर में हैं। नंबर वन सॉरी पहला
- 2:21:44वाला हां इंदौर डिस्ट्रिक्ट का ही पार्ट
- 2:21:46है। पाताल पानी जो रेलवे स्टेशन है इसका
- 2:21:48नाम बदलकर कर दिया गया जननायक शहीद टंट्या
- 2:21:51भील और यहां पर उनकी एक बहुत बड़ी जो है
- 2:21:54क्या है? स्टैचू बनाई गई है। 2021 में
- 2:21:57मध्य प्रदेश सरकार के तत्कालीन राज्यपाल
- 2:21:59और मुख्यमंत्री ने उनके परिवार के जो वंशज
- 2:22:02हैं उनको वहां बुलाकर सम्मान भी दिया था।
- 2:22:04तो पाताल पानी स्टेशन जहां पाताल पानी
- 2:22:06उनकी समाधि है वहां पर अब क्या है उसका
- 2:22:09नाम बदलकर कर दिया गया टंट्या भील जो है
- 2:22:11स्टेशन कर दिया गया है। एक और इंपॉर्टेंट
- 2:22:13बात है बताते जहां उनकी समाधि है। आज भी
- 2:22:16जब कोई ट्रेन वहां से गुजरती है तो थोड़ी
- 2:22:18देर के लिए रुकती है टंट्या भील के सम्मान
- 2:22:20में। ठीक है? दूसरी बात इंदौर का जो
- 2:22:23प्रसिद्ध भंरकुआ चौराहा है इस चौराहे का
- 2:22:25नाम बदलकर कर दिया गया द नायक टंट्या भील
- 2:22:28चौराहा या इसका सही नाम है जननायक टंट्या
- 2:22:31भील चौराहा। इसके अलावा इंदौर में एमआर10
- 2:22:35रोड पर बन रहा एक आईएसबीटी यानी इंटरस्ट
- 2:22:38जो बस स्टेशन है इसका नाम बदलकर के भी
- 2:22:40टंट्या मामा के नाम पर रखा गया है। यानी
- 2:22:42इंदौर का भंवरकुआ हो भंवरकुआ चौराहा इंदौर
- 2:22:46का जो आईएसबीटी जो स्टेशन बन रहा है वो भी
- 2:22:50टंट्या भील के नाम पर किया गया है। और एक
- 2:22:52और इंपॉर्टेंट बात है पाताल पानी रेलवे
- 2:22:54स्टेशन का नाम भी टंट्या भील के नाम पर
- 2:22:56किया गया है। एक और इंपॉर्टेंट बात कि जो
- 2:22:59मध्य प्रदेश सरकार है उसके द्वारा जननायक
- 2:23:01टंट्या भील एक पुरस्कार दिया जाता है।
- 2:23:042008 में यह पुरस्कार राजाराम मौर्य को
- 2:23:06दिया गया है। तो यह कहानी थी जनजातीय जो
- 2:23:10हमारे बहुत बड़े नेता थे आदिवासियों के
- 2:23:13भीलों के जिनका नाम था तांत्या भील और
- 2:23:16तात्या भील को क्या कहते हैं? भारतीय
- 2:23:17रॉबिनहुड कहा जाता है। आदिवासियों का
- 2:23:20मसीहा, गरीबों का मसीहा और सेरे निमाड़ के
- 2:23:24नाम से भी जाना जाता है। उम्मीद है आज की
- 2:23:26जो जानकारी है वो आपको अच्छी लगी होगी।
- 2:23:29अगर आप इसमें एग्जाम उपयोगी तथ्यों को
- 2:23:31देखेंगे तो इस सिस्टमैटिक जो तरीका था
- 2:23:34इसको जरूर फॉलो करिएगा। है ना? इसमें एक
- 2:23:36क्वेश्चन बहुत इंपॉर्टेंट है। भारतीय
- 2:23:38रॉबिनहुड आदिवासियों का मसीहा या
- 2:23:40महाविद्रोही किसे कहते हैं? इनके नाम हैं।
- 2:23:42इसके अलावा इन्हें मध्य प्रदेश का जननायक
- 2:23:45भी कहा जाता है। तो 1 2 3 और जननायक चार
- 2:23:48इंपॉर्टेंट पॉइंट हो जाएंगे एज अ उनके
- 2:23:50टाइटल। इसके अलावा उनकी फांसी बहुत
- 2:23:52इंपॉर्टेंट है। कब? 4 दिसंबर 1889 को
- 2:23:54जबलपुर में हुई थी। हालांकि उनकी समाधि
- 2:23:56कहां है? पाताल पानी। यह भी बहुत
- 2:23:58इंपॉर्टेंट है। उनका बर्थ प्लेस भी
- 2:24:00इंपॉर्टेंट है। इसके अलावा यह सिस्टमैटिक
- 2:24:03एक तरीका है। उनका जन्म। जन्म के बारे
- 2:24:06में। पिता का नाम भासी भील और माता का नाम
- 2:24:08जीव था। याद रखिएगा। रियल नेम उनका क्या
- 2:24:11है? तांत्या है। युवाओं ने क्या कर दिया
- 2:24:13था? भील टंट्या और अंग्रेजों ने क्या कर
- 2:24:16दिया था? टुंड्रा। ठीक है? तो विद्रोह किस
- 2:24:18तरीके से रहा? 1857 के समय। हालांकि उनका
- 2:24:21ज्यादा योगदान नहीं रहा क्योंकि उस समय वो
- 2:24:23छोटे थे। लेकिन उसके बाद उन्होंने बड़े
- 2:24:25पैमाने पर ब्रिटिश जो लोग थे उनसे संघर्ष
- 2:24:28किया। जमींदार साहूकारों को परेशान किया
- 2:24:30और लगभग 16 सालों तक वो जो है संघर्ष करते
- 2:24:34रहे। पूरा कैरियर जो उनका रहा और लगभग 49
- 2:24:36की ऐज में उन्हें फांसी दे दी गई। तो ये
- 2:24:38थे हमारे द ग्रेट टंट्या भील जिनके बारे
- 2:24:40में हम लोगों ने चर्चा की। उम्मीद है आज
- 2:24:42की जो इंफॉर्मेशन है आप लोगों को अच्छी
- 2:24:44लगी होगी। कल फिर हम मिलेंगे एक नए हीरो
- 2:24:47के साथ, एक नए मध्य प्रदेश के वीर के साथ।
- 2:24:49इसी के साथ इस क्लास को मैं यहीं समाप्त
- 2:24:52करता हूं। जय हिंद। थैंक यू।
- 2:25:07हेलो एवरीवन, मैं हरी सिंह राजपूत आप सभी
- 2:25:10के लिए मध्य प्रदेश के वीरों के इतिहास की
- 2:25:12सीरीज में लाया हूं आज एक महान वीर
- 2:25:15स्वतंत्रता सेनानी जिनका नाम है राजा हृदय
- 2:25:18शाह लोदी। याद रखिएगा दोस्तों राजा हृदय
- 2:25:21शाह लोदी मध्य प्रदेश के 1842 के बुंदेला
- 2:25:25विद्रोह के मुख्य नायक हैं और साथ-साथ
- 2:25:27इनके पूरे परिवार ने 1857 की क्रांति में
- 2:25:30भी अपना जो है बहुमूल्य योगदान दिया है।
- 2:25:33तो आज की इस सीरीज में हम बात करेंगे राजा
- 2:25:35हृदयशाह लोदी के बारे में और याद रखिएगा
- 2:25:38जब आप राजा हृदयशाह लोदी के बारे में पढ़
- 2:25:40रहे हैं या जानकारी जुटा रहे हैं तो याद
- 2:25:42रखिएगा इस नाम से दो अन्य शासक भी हैं। एक
- 2:25:45हृदयशाह बुंदेला हैं और एक हृदयशा गोंड
- 2:25:49है। याद रखिएगा रामनगर के जो गोंड शासक
- 2:25:51थे। तो थोड़ा सा आप जानकारी जुटाते समय
- 2:25:54थोड़ा सावधान रहें। आइए हम बात करते हैं
- 2:25:56राजा हृदय शाह लोदी कौन है? तो सबसे पहले
- 2:25:58देखिए मैं आपको दो बातें बताना चाहता हूं।
- 2:26:00इनका जो मेन रोल रहा है यानी ये मुख्य
- 2:26:03नायक हैं बुंदेला विद्रोह 1842 के। इसके
- 2:26:06साथ-साथ इनके संपूर्ण परिवार ने 18 57 की
- 2:26:10क्रांति में अपना बहुमूल्य योगदान दिया।
- 2:26:12तो सबसे पहले हम बात करते हैं कि इनकी
- 2:26:14रियासत कहां थी और ये कौन थे? तो ये
- 2:26:17हीरापुर के राजा थे। जैसा कि आप सब जानते
- 2:26:19हैं हीरापुर जो रियासत है वर्तमान
- 2:26:21नरसिंहपुर जिले में है मध्य प्रदेश के।
- 2:26:23ठीक है? राजा हृददेश शाह जुदेव के हीरागढ़
- 2:26:26राज्य के अंतर्गत इनका जो राज्य था उसमें
- 2:26:2910,883 यानी लगभग 2000 गांव आते थे। यानी
- 2:26:33इनकी रियासत छोटी नहीं थी। बड़ी रियासत
- 2:26:35थी। इनके पास लगभग 80 बड़ी तोपें थी। 100
- 2:26:38छोटी तोपें थी। 200 गुरावे थी। सात हाथी,
- 2:26:421600 घोड़े और अश्वराही अश्वारोही सैनिक
- 2:26:46थे यानी कैबिलरी मैन थे। इसके अलावा 21686
- 2:26:49सैनिक मतलब लगभग 22,000 जो है पैदल सैनिक
- 2:26:52थे और 500 ऊंट थे और 200 जो है खच्चर थे।
- 2:26:55इतनी बड़ी सेना जो थी, राजा हृदशाह लोदी
- 2:26:59की थी। यह आप देख सकते हैं राजा हृदय शाह
- 2:27:01लोदी का तस्वीर है जो हीरापुर रियासत
- 2:27:04नरसिंहपुर जिले मध्य प्रदेश में आती है।
- 2:27:06यहां पर आपको इनसे रिलेटेड कुछ पिक्चर मैं
- 2:27:09आप लोगों को बताने जा रहा हूं। यह जो
- 2:27:12हीरापुर रियासत थी उसका जो किले का अवशेष
- 2:27:14है यह भी उसके किले का अवशेष है और अभी
- 2:27:17मध्य प्रदेश के दमोह में उनकी एक बहुत
- 2:27:20बड़ी प्रतिमा है। इसका अनावरण किया गया
- 2:27:22है। तो याद रखिएगा अगर पूछा जाए कि राजा
- 2:27:25हृदयशाह लोदी का स्मारक मध्य प्रदेश के
- 2:27:27किस जिले में बनाया गया है? तो याद रखिएगा
- 2:27:29दमोह और किस जिले में उनकी रियासत थी? तो
- 2:27:32याद रखिएगा वर्तमान नरसिंहपुर। अब थोड़ा
- 2:27:34सा हम इसकी पृष्ठभूमि पर जाएंगे और फिर
- 2:27:36मैं आपको राजा हृदशा लोधी की कहानी को
- 2:27:38बताने वाला हूं। सबसे पहले हम बात करते
- 2:27:41हैं कि यह जो मध्य प्रदेश का क्षेत्र था
- 2:27:43अगर हम दक्षिणी मध्य प्रदेश की बात करें
- 2:27:45या पूर्वी मध्य प्रदेश की बात करें जहां
- 2:27:48पर मुख्यतः गोंडों का शासन था। उस पूरे
- 2:27:50इलाके को नर्मदा, सतपुड़ा और विंध्या के
- 2:27:54अंचल में मराठों के जो इलाके थे उन्हें
- 2:27:561818 में मराठों की पराजय के बाद
- 2:27:59अंग्रेजों ने अपने अधिकार में कर लिया।
- 2:28:01इसका मतलब यह है आप सबको पता होगा। मैं
- 2:28:04चाहता हूं कि मैं आपको पहले लिखकर थोड़ी
- 2:28:06सी स्टोरी समझा दूं। मुझे पता है उससे
- 2:28:07आपको जल्दी समझ में आ जाएगी।
- 2:28:10देखते हैं आप कितनी जल्दी इसको समझते हैं
- 2:28:13और किस तरीके से समझते हैं। तो इसको हम
- 2:28:16ऐसे समझ सकते हैं। जैसे मान के चलिए
- 2:28:19कि मध्य प्रदेश का
- 2:28:22मध्य प्रदेश का
- 2:28:24बहुत बड़ा जो भाग था मध्य प्रदेश का
- 2:28:27दक्षिण दक्षिणी एवं जो पूर्वी भाग है मैं
- 2:28:30उसकी बात कर रहा हूं। यह जो दक्षिणी
- 2:28:32पूर्वी भाग है यह एक्चुअली में पहले
- 2:28:34मराठों ने जीत लिया था। अगर आपको याद हो
- 2:28:37लास्ट सीरीज में हमने बात की थी कि जो
- 2:28:40राजा शंकर शाह के बारे में जब हम लोग पढ़
- 2:28:42रहे थे तो यह बताया था कि उनके जो पिता थे
- 2:28:45उनके पिता को किसने कैद कर लिया था? उनके
- 2:28:47पिता को मराठों ने कैद कर लिया था। तो यह
- 2:28:50जो इलाका था, इस इलाके पर मराठों ने
- 2:28:53अधिकार कर लिया। ठीक है? मराठों ने क्या
- 2:28:55कर लिया? अधिकार कर लिया। लेकिन आप सबको
- 2:28:57पता है कि जो तीसरा युद्ध हुआ था, जिसे हम
- 2:29:01बोलते हैं तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध। तो
- 2:29:04तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध जो था, इस तृतीय
- 2:29:07आंग्ल मराठा युद्ध में क्या हुआ? 1818 में
- 2:29:11यह एंड होता है। इसमें मराठे हार गए। और
- 2:29:13इनके हारने के बाद यह पूरा का पूरा जो
- 2:29:15क्षेत्र है वो ईस्ट इंडिया कंपनी यानी
- 2:29:18अंग्रेजों के पास आ गया। और अंग्रेजों ने
- 2:29:20इस इलाके का जो यह दक्षिण पूर्वी जो भाग
- 2:29:22था मध्य प्रदेश का इस इलाके में एक नया
- 2:29:25एरिया बनाया जिसका नाम रखा था नर्मदा सागर
- 2:29:29टेरिटरीज। आप सब लोगों ने इसे बुंदेला
- 2:29:31विद्रोह में पढ़ा होगा। नर्मदा सागर
- 2:29:33टेरिटरी जो है इसका गठन किया गया। का गठन
- 2:29:381820 में हुआ था। कब हुआ? 1820 में इसका
- 2:29:41गठन हो गया और इस क्षेत्र का जो प्रशासन
- 2:29:44है एक अधिकारी के द्वारा किया जाता था और
- 2:29:47यह जो अंग्रेज अधिकारी था इसे बोलते थे
- 2:29:49गवर्नर जनरल का एजेंट। ठीक है? याद रखिएगा
- 2:29:52और इसका हेड क्वार्टर जो है वो सागर को
- 2:29:55बनाया गया था। ठीक है? यानी कुल मिलाकर इस
- 2:29:58क्षेत्र में अब अंग्रेजों का शासन था और
- 2:29:59इसका एक जो अधिकारी होता था वो गवर्नर
- 2:30:02जनरल का एजेंट कहलाता था। याद रखिएगा और
- 2:30:04इसका हेड क्वार्टर क्या था? सागर। तो अब
- 2:30:06इसी बात को मैं थोड़ा सा पढ़ के बताऊंगा
- 2:30:08तो आपको जल्दी से समझ में आ जाएगा। थोड़ा
- 2:30:10सा हम पढ़ लेते हैं। ठीक है? तो क्या हुआ
- 2:30:13कि उन्हें नर्मदा सागर टेरिटरीज अर्थात
- 2:30:15नर्मदा सागर प्रदेश के रूप में गठित किया
- 2:30:17गया। इसे एक फौजी अधिकारी के अंतर्गत रख
- 2:30:20दिया गया जो सीधे गवर्नर जनरल के प्रति
- 2:30:22उत्तरदाई था। ठीक है? इस अधिकारी को
- 2:30:25गवर्नर जनरल का एजेंट सागर नर्मदा
- 2:30:28टेरिटरीज कहा जाता था। और इसकी खास बात है
- 2:30:31इस एजेंट का जो मुख्यालय था वो क्या था?
- 2:30:33वो सागर था। ठीक है? तो ये कुछ बेसिक
- 2:30:35बातें हम लोगों ने इसमें जान ली। अब आगे
- 2:30:38क्या होता है? ठीक है? आगे क्या होता है
- 2:30:40कि इस क्षेत्र में तमाम जागीरदार और
- 2:30:43मालगुजार रहते थे जो इस क्षेत्र से टैक्स
- 2:30:45कलेक्ट करते थे। उनमें पहला जो काम है वो
- 2:30:47बुंदेलों का था। उसके बाद आते थे इसमें
- 2:30:49लोधी। ठीक है? उसके बाद आते थे गोंड। तो
- 2:30:52गोंडों का क्रम आता था। यानी लोधी। याद
- 2:30:55रखिएगा। पहले आते थे बुंदेला। उसके बाद
- 2:30:57लोधी और फिर गोंडों का क्रम आता था। यानी
- 2:30:59इस क्षेत्र के सबसे बड़े जमींदारों में
- 2:31:01तालुका तालुकादारों में कौन शामिल था?
- 2:31:03पहले बुंदेला फिर लोदी और सबसे नीचे आते
- 2:31:06थे कौन गोंड मतलब ये उनका एक डिवाइडेशन था
- 2:31:08काम करने का क्योंकि इस विद्रोह में
- 2:31:10बुंदेले लोग सबसे आगे थे इसलिए इस बुंदेला
- 2:31:13विद्रोह 1842 का जो नाम है वो बुंदेला
- 2:31:15विद्रोह नाम पड़ा क्योंकि सबसे पहले इसकी
- 2:31:17शुरुआत बुंदेलों ने की थी। इस व्यापक
- 2:31:19विद्रोह में नर्मदा तट के उत्तर में
- 2:31:21नर्मदा और हिरण याद रखिएगा एक प्रश्न आपका
- 2:31:24तैयार हो गया अगर आपसे पूछा जाए कि जो
- 2:31:26हीरापुर राज्य था वो किन दो नदियों के
- 2:31:28संगम पर स्थित था? तो हीरापुर जो राज्य है
- 2:31:31वो दो नदियों के संगम पर स्थित था। नर्मदा
- 2:31:33और हिरण नदियों के संगम पर स्थित हीरापुर
- 2:31:36के जागीरदार राजा हृदय शाह ने भी हिस्सा
- 2:31:38लिया। ठीक है? तो ये थोड़ी सी कहानी हो गई
- 2:31:41कि किस तरीके से नर्मदा सागर टेरिटरीज
- 2:31:43बनी। अब मैं आगे आपको बताने वाला हूं। ठीक
- 2:31:46है? चलिए ये सब आप पढ़ लीजिए। अगर आपको
- 2:31:48पीपीडी चाहिए तो मैं आपको बता दूंगा। अब
- 2:31:50यह जो इलाका था उस समय हीरापुर तालुका के
- 2:31:52नाम से जाना जाता था और इस समय याद रखिएगा
- 2:31:55यह पहले जबलपुर जिले में आता था।
- 2:31:56नरसिंहपुर तो बाद में बना है। तो वह कहानी
- 2:31:59है वह हम डिस्ट्रिक्ट में कवर कर लेते
- 2:32:01हैं। अब क्या हुआ यह देखिए यहां पर
- 2:32:06मध्य प्रदेश का जो आंतरिक भूभाग है यानी
- 2:32:08नरसिंहपुर जिले की एक छोटी सी रियासत
- 2:32:10हीरापुर के लोधी राजपूत हृदय शाह लोदी ने
- 2:32:13तत्कालीन जमींदारों और कुछ देशभक्त लोगों
- 2:32:16को साथ लेकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह
- 2:32:18का झंडा उठाया था। याद रखिएगा। और ठीक है?
- 2:32:22अब यह जो बुंदेला विद्रोह है वह 1857 के
- 2:32:25पूर्व की है। यानी हृदय शाह लोदी एक ऐसे
- 2:32:28नायक थे जिन्होंने राजपाट के एसोआराम को
- 2:32:30छोड़कर जंगल-जंगल भटक कर स्वतंत्रता
- 2:32:33संघर्ष को अपना जीवन मान लिया और देश के
- 2:32:36लिए अपने परिवार तक को त्याग दिया बलिदान
- 2:32:39दिया। बूढ़े होने पर भी फिरंगियों को वो
- 2:32:41छकाते रहे। 1842 में पहले बुंदेला विद्रोह
- 2:32:45के सूत्रधार के रूप में हृदयशाह इतिहास के
- 2:32:47पन्नों में कुछ ही शब्दों में सीमित हो
- 2:32:49गए। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मैं राजा हृद
- 2:32:52शाह लोदी के बारे में बहुत डिटेल में
- 2:32:54बताने वाला हूं। जिससे आप यह जो लाइन है
- 2:32:57इस लाइन को हम कट कर दें। कुछ शब्दों में
- 2:32:59तो नहीं लेकिन आज के बाद आपको इतना पता
- 2:33:01होगा कि हृदय शाह लोदी कौन थे? उनका
- 2:33:03परिवार कौन था और उन्होंने क्या-क्या
- 2:33:04किया। हमने यहां टाइटल दिया है हीरापुर का
- 2:33:07हीरा यानी राजा हृदय शाह लोदी। अब इनकी
- 2:33:12संक्षिप्त में कहानी बताता हूं क्योंकि
- 2:33:14ऐसे पढ़ते हैं तो आपको ऐसा लगेगा कि क्या
- 2:33:16सर आप पढ़ के बता रहे हो। पढ़ने में तो
- 2:33:18मजा हमको भी नहीं आता मगर क्या करें।
- 2:33:21तो अब इस कहानी को आप कैसे समझेंगे? देखिए
- 2:33:25सबसे पहले हम एक स्टेट का निर्माण करते
- 2:33:28हैं और उस स्टेट का नाम है हीरापुर। ध्यान
- 2:33:30से सुनना आपको इसी में पूरी कहानी बताने
- 2:33:32का मेरा प्रयास रहेगा। हीरापुर याद रखिएगा
- 2:33:35इसको हीरापुर नहीं कहते थे पहले। इस राज्य
- 2:33:37का नाम था हीरागढ़ राज्य या हीरागढ़
- 2:33:40रियासत बोलते थे। कौन सी रियासत है?
- 2:33:42हीरागढ़ रियासत है। मध्य प्रदेश के किस
- 2:33:45डिस्ट्रिक्ट में आती है? याद रखिएगा।
- 2:33:47नरसिंहपुर में आती है। नरसिंहपुर मध्य
- 2:33:49प्रदेश। यह जो रियासत है, मैं इसके सारे
- 2:33:52प्रश्न यहीं पर आपको बताने वाला हूं। याद
- 2:33:54रखिएगा यह किन दो नदियों के संगम पर स्थित
- 2:33:56है? नर्मदा व हिरण नदी के संगम पर स्थित
- 2:33:59है। अगर आपसे पूछा जाए किन दो नदियों के
- 2:34:02संगम पर स्थित है यह रियासत तो नर्मदा और
- 2:34:05हिरण नदी के संगम पर स्थित है। नरसिंहपुर
- 2:34:07जिले में स्थित है। इस रियासत के जो शासक
- 2:34:10थे इस रियासत के जो शासक थे उनका नाम हमने
- 2:34:14अभी जाना। उनका नाम है राजा हृदय शाह
- 2:34:16लोदी। राजा हृदय शाह लोदी। याद रखिएगा एक
- 2:34:21हृदयशाह गोंड है और एक हृदयशाह बुंदेला
- 2:34:24है। इसलिए जब भी आप इंफॉर्मेशन जुटाएं तो
- 2:34:26आप थोड़ा सा ध्यान से जुटाइएगा वरना आपको
- 2:34:28कंफ्यूजन बहुत हो जाएगी। राजा हृदयशाह
- 2:34:31लोदी। राजा हृदयशाह लोदी के कुछ भाई थे।
- 2:34:34याद रखिएगा जिसमें दो भाइयों का नाम आप कम
- 2:34:37से कम याद रखेंगे। यह उनके भाई हैं। एक का
- 2:34:40नाम बसंत है। बसंत सिंह लोधी और एक का नाम
- 2:34:44था गजराज सिंह लोधी। गजराज सिंह लोधी।
- 2:34:48आपको जरूरी है कि आप उनके संघर्ष को वसंत
- 2:34:51सिंह लोधी और गजराज सिंह लोधी। इसके अलावा
- 2:34:54उनके जो सुपुत्र हैं उनका नाम आपको जरूर
- 2:34:56पता होना चाहिए। राजा हृद हृदशाह लोधी के
- 2:34:59जो पुत्र हैं उनका नाम था मेहरवान सिंह
- 2:35:02लोधी या आप मेहरवान सिंह याद रख सकते हैं।
- 2:35:06मेहरवान सिंह लोदी जिन्हें याद रखिएगा
- 2:35:09जिन्हें इस विद्रोह के दौरान यानी 1857 की
- 2:35:13क्रांति के दौरान उन्हें जंगी राजा के नाम
- 2:35:15से जाना गया। एक नया क्वेश्चन आपको मिल
- 2:35:18गया। कौन जंगी राजा के नाम से प्रसिद्ध
- 2:35:20था? तो याद रखिएगा जंगी राजा के नाम से
- 2:35:23प्रसिद्ध थे उनके पुत्र जिनका नाम था
- 2:35:25क्या? मेहरवान सिंह लोधी। और मेहरवान सिंह
- 2:35:28लोधी का जो सबसे बड़ा इंपॉर्टेंट रोल है
- 2:35:31वो यह है कि ये 1857 की क्रांति के हीरो
- 2:35:34हैं। 1857 की क्रांति में याद रखिएगा वसंत
- 2:35:38सिंह, गजराज सिंह और मेहरबान सिंह लोदी इन
- 2:35:41तीनों ने जो है क्या किया था? हीरापुर
- 2:35:43रियासत का नेतृत्व किया था। हालांकि उस
- 2:35:46समय राजा हृदय शाह लोदी भी थे जो कि वृद्ध
- 2:35:48हो चुके थे। हम पूरी कहानी को समझेंगे। इन
- 2:35:50लोगों की हमको जरूरत क्यों पड़ी ये मैं
- 2:35:52अभी आपको बताने वाला हूं। अब देखिए हुआ
- 2:35:54क्या? सबसे पहले हम ये समझते हैं कि पहले
- 2:35:56कौन सा विद्रोह होता है? तो राजा हृदयशाह
- 2:35:59लोदी ने क्या किया था? 1842 का जो बुंदेला
- 2:36:03विद्रोह है, उस बुंदेला विद्रोह में भाग
- 2:36:05लिया और इस बुंदेला विद्रोह के बन गए वह
- 2:36:08कौन? मेन नायक।
- 2:36:10क्या बन जाते हैं? मेन नायक बन जाते हैं।
- 2:36:13याद रखिएगा। 1842 का जो बुंदेला विद्रोह
- 2:36:16है उसके कौन बन गए? मेन नायक बन गए और इस
- 2:36:19बुंदेला विद्रोह में उन्होंने क्या किया?
- 2:36:21भाग लिया। क्या आपको ये बात समझ में आ गई?
- 2:36:23बुंदेला विद्रोह में उन्होंने भाग लिया।
- 2:36:25अब जब वो बुंदेला विद्रोह में भाग ले रहे
- 2:36:28थे तो बुंदेला विद्रोह की कहानी क्या है?
- 2:36:31वे सभी जागीरदार और जमींदार जो अंग्रेजी
- 2:36:34शासन से नाराज थे जिनके अंग्रेजों द्वारा
- 2:36:37अधिकार छीने गए थे। बहुत लंबी कहानी है वो
- 2:36:39हम बुंदेला विद्रोह में कवर करेंगे।
- 2:36:40क्योंकि अगर हम बुंदेला विद्रोह के कारणों
- 2:36:42को यहां पर डिस्कस करेंगे तो टॉपिक बहुत
- 2:36:44बड़ा हो जाएगा। तो उन सभी लोगों ने जो
- 2:36:46अंग्रेजी शासन से नाराज थे ईस्ट इंडिया
- 2:36:48कंपनी के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और याद
- 2:36:51रखिएगा अंग्रेजों के विरुद्ध बुंदेलखंड की
- 2:36:53धरती पर जो सबसे बड़ी जो ज्वाला भड़की उसे
- 2:36:55हम बुंदेला विद्रोह के रूप में जानते हैं।
- 2:36:57इसके मेन सूत्रधार बनते हैं राजा हृद शाह
- 2:36:59लोदी। ये क्या करते हैं? बुंदेला विद्रोह
- 2:37:01में भाग लेते हैं। और इन्होंने याद रखिएगा
- 2:37:04एक जगह थी तेजगढ़। यहां पर जो है हमला
- 2:37:08किया। मतलब यहां पर शरण ली इस क्षेत्र में
- 2:37:10अंग्रेजों को हराया। फिर यह आगे पहुंचे
- 2:37:12जबलपुर की तरफ़ और जबलपुर से होते हुए यह
- 2:37:15पहुंचते हैं सागर की तरफ़। कहां पहुंचते
- 2:37:16हैं? सागर। जब यह सागर के पास पहुंचते हैं
- 2:37:19इस विद्रोह में याद रखिएगा तो यहां पर
- 2:37:22इनके साथ एक धोखा होता है। और जो शाहगढ़
- 2:37:25रियासत का राजा था। कौन? शाहगढ़ रियासत का
- 2:37:29जो राजा था, शाहगढ़ रियासत जो कि सागर में
- 2:37:32है के राजा जिनका नाम था राजा बखत बली।
- 2:37:35राजा बखत वली ने इनको धोखे से गिरफ्तार
- 2:37:37करवा दिया। बोले इनका साथ देंगे। तो बखत
- 2:37:40वली द्वारा इनको गिरफ्तार करवा दिया गया
- 2:37:43था अंग्रेजों के हाथों। ठीक है? तो इन पर
- 2:37:46याद रखिएगा इस समय जो हमारे राजा
- 2:37:51हमारे राजा हृदय शाह लोदी हैं। इन पर
- 2:37:54सरकार ने इस समय 10,000 का इनाम रखा था।
- 2:37:58कितना इनाम रखा था? 10,000 का इनाम रखा
- 2:38:00था। और याद रखिएगा किस देशद्रोही के
- 2:38:04द्वारा या ऐसे हम इन्हें इस समय गद्दार कह
- 2:38:07सकते हैं जिनकी वजह से इन्हें गिरफ्तार कर
- 2:38:08दिया गया। गिरफ्तार करवाकर याद रखिएगा
- 2:38:10इनको ले जाया गया चुनार दुर्ग में। चुनार
- 2:38:14दुर्ग जो कि यूपी में है। यूपी के चुनार
- 2:38:16दुर्ग में इनको कैद करके रखा गया और इस
- 2:38:19कैदी जीवन में आगे चलकर क्या होता है? 1
- 2:38:22वर्ष बाद 1843 में इनको रिहा कर दिया जाता
- 2:38:26है। क्या कर दिया जाता है? रिहा। ठीक है?
- 2:38:28अब इसमें एक छोटा सा सेंटेंस यह है कि जो
- 2:38:31आप यह रियासत देख रहे हैं। बताते हैं कि
- 2:38:33जब अंग्रेजों ने अंग्रेजों द्वारा इस
- 2:38:37रियासत पर हमला किया गया था तो यह जो
- 2:38:40रियासत थी यह नष्ट हो गई थी इसके किला
- 2:38:42वगैरह और उसके बाद इस रियासत को हीरापुर
- 2:38:45के नाम से जाना गया। यानी वर्तमान में
- 2:38:47इसका नाम क्या है? वर्तमान में हम इसको
- 2:38:49बोलते हैं हीरापुर। लेकिन उससे पहले इसे
- 2:38:52कहा जाता था हीरागढ़। अब इस कहानी को आप
- 2:38:55अच्छे से पिरो सकते हैं। यानी हीरागढ़
- 2:38:58रियासत जो कि वर्तमान नरसिंहपुर मध्य
- 2:39:00प्रदेश में है। नर्मदा और हिरण नदी के
- 2:39:02संगम पर स्थित है। इस रियासत के जो राजा
- 2:39:05थे हृदय शालोदी उन्होंने 1842 के बुंदेला
- 2:39:07विद्रोह में भाग लिया और बुंदेला विद्रोह
- 2:39:09के मुख्य नायक थे। यह दक्षिणी बुंदेलखंड
- 2:39:12में मुख्यता एक्टिव थे। दक्षिणी बुंदेलखंड
- 2:39:14से इन्होंने क्या किया? यानी अगर आपको
- 2:39:16लिखना पड़े कि इन्होंने किस-किस क्षेत्र
- 2:39:18में अंग्रेजों से संघर्ष किया तो
- 2:39:19नरसिंहपुर है। तेजगढ़ है। याद रखिएगा।
- 2:39:22इसके बाद इन्होंने जबलपुर आदि जो क्षेत्र
- 2:39:24था जबलपुर का जो इलाका था वहां पर भी जो
- 2:39:26है किसानों को संगठित किया। तालुकेदारे
- 2:39:29जमींदारों को संगठित किया। अंग्रेजों के
- 2:39:30विरुद्ध संघर्ष किया। जब ये सागर की तरफ
- 2:39:32जा रहे थे तो सागर के याद रखिएगा एक शासक
- 2:39:36थे जो कि शाहगढ़ रियासत के राजा थे जिनका
- 2:39:38नाम बखत वली था। उन्होंने इनको कैद करवा
- 2:39:41दिया था। देखिए अंग्रेज जब बुंदेला
- 2:39:43विद्रोह को दबा नहीं सके तो उन्होंने एक
- 2:39:45स्कीम निकाली वो स्कीम ये थी कि अगर कोई
- 2:39:48व्यक्ति इन लोगों को पकड़वाता है तो उनको
- 2:39:50इनाम दिया जाएगा। तो उस इनाम के लालच के
- 2:39:53चक्कर में बहुत सारे लोगों ने जो है गुप्त
- 2:39:55सूचनाएं जो है क्रांतिकारियों की
- 2:39:57विद्रोहियों की अंग्रेजों को दी थी।
- 2:39:59हालांकि जो शाहगढ़ के राजा थे उनका कुछ
- 2:40:01अलग इंटरेस्ट था। वो अपने एक जो गड़ाकोटा
- 2:40:04फोर्ट था उसको वापस पाना चाहते थे। इसीलिए
- 2:40:06उन्होंने अंग्रेजों का साथ दिया था। तो ये
- 2:40:08बात तो हो गई इंफॉर्मेशन। ठीक है? आई होप
- 2:40:10आप लोगों को याद रहेगा। अब 1843 में इनको
- 2:40:13रिहा कर दिया गया। इनके ऊपर बहुत सारा जो
- 2:40:17है जुल्म ढाए गए और बाद में जो है इनकी
- 2:40:19संपत्ति छीन ली गई। तो इनसे यह कहा गया था
- 2:40:221843 में कि यह कभी अब विद्रोह नहीं
- 2:40:24करेंगे। इस समय एक और चीज अगर आप याद रख
- 2:40:27सकें इस समय जो इस समय जो गवर्नर जनरल था
- 2:40:31उसका नाम था एललेनवररो। इस समय ब्रिटिश
- 2:40:34गवर्नर जनरल का नाम क्या था? लॉर्ड
- 2:40:36एललेनवररो इस समय भारत का गवर्नर जनरल था।
- 2:40:39लॉर्ड एललेन वरो। लॉर्ड एललेनवररो कौन था?
- 2:40:42इस समय भारत का गवर्नर जनरल था। ठीक है?
- 2:40:45अब कहानी में एक नया ट्विस्ट और है। वह
- 2:40:47ट्विस्ट क्या है कि यह सब होने के बाद जब
- 2:40:50अंग्रेजों ने इनको शर्त दी थी कि आप आगे
- 2:40:52चलकर कोई विद्रोह में भाग नहीं लेंगे।
- 2:40:55देखिएगा इस विद्रोह में तो इन्होंने बहुत
- 2:40:56संघर्ष किया है क्योंकि हर संघर्ष की लाइन
- 2:40:58को मैं यहां नहीं लिख सकता। लेकिन आपको
- 2:41:00बता दिया। अब ये जो उनका परिवार है इनका
- 2:41:02नाम आपको 1857 की क्रांति में याद रखना
- 2:41:05है। आइए हम पढ़ते हैं थोड़ा आगे की कहानी।
- 2:41:07तो देखिए क्या था आपको अब समझ में आ
- 2:41:09जाएगा। राजा हृदय शाह लोदी ने नरसिंहपुर
- 2:41:13जिले की हीरागढ़ रियासत से संपूर्ण सागर
- 2:41:15और नर्मदा टेरिटरीज के तहत सागर, दमो,
- 2:41:18जबलपुर व नरसिंहपुर जिले के सभी बुंदेला
- 2:41:20बुंदेला विद्रोह में इन तीन मुख्यता लोगों
- 2:41:23के द्वारा भाग लिया गया था। बुंदेला,
- 2:41:24गोंड, लोधी। ठीक है? याद रखिएगा। राजाओं
- 2:41:27से को संगठित कर जो है अंग्रेजों के
- 2:41:29विरुद्ध बुंदेला विद्रोह का सफल नेतृत्व
- 2:41:31किया। इस दौरान हीरागढ़ हीरापुर रियासत के
- 2:41:35परिवारजन गजराज सिंह, सावंत सिंह, लटकंजू,
- 2:41:39मेहरवान सिंह आदि इन सभी ने मिलकर याद
- 2:41:42रखिएगा और ईश्वरी सिंह आदि ने मिलकर
- 2:41:44अंग्रेजों से लगभग 18 माह तक संघर्ष किया
- 2:41:47था। यानी बुंदेला विद्रोह में राजा हृद
- 2:41:49शाह और उनके परिवार ने कितना संघर्ष किया?
- 2:41:5118 माह तक ये लोग अंग्रेजों से लड़ते गए।
- 2:41:53बाद में हृदय शाह को जो है गिरफ्तार कर
- 2:41:55लिया गया था। ठीक है? हृदय शाह की रियासत
- 2:41:58के बारे में मैंने आपको बता ही दिया है।
- 2:41:59लंबे संघर्ष को देखकर अंग्रेजों ने 18
- 2:42:02महीने तक अंग्रेजों से लड़ना बड़ी बात है।
- 2:42:04लंबे संघर्ष को देखकर राजा हृदयशाह पर
- 2:42:06₹10,000 का इनाम रखा गया। सागर जिले के
- 2:42:09शाहगढ़ के राजा बखत वली ने धोखे से राजा
- 2:42:12हृदयशाह को उनके परिवार सहित 22 दिसंबर यह
- 2:42:15डेट याद रख सकते हैं। कब गिरफ्तार करवाया
- 2:42:17गया? 22 दिसंबर 1842 को गिरफ्तार करवा
- 2:42:20दिया। भीषण संघर्ष के बाद ब्रिटिश सरकार
- 2:42:23को समझौता करना पड़ा और नरसिंहपुर जिले के
- 2:42:25लगान में 10% की छूट दी गई और साथ ही सभी
- 2:42:28भ्रष्ट अधिकारियों का तबादला करना पड़ा तो
- 2:42:30बाद में इनसे समझौता हो गया था। 43 में
- 2:42:33इनको रिहा कर दिया गया। लास्ट क्या है?
- 2:42:36देखिए बुंदेला विद्रोह में तो इनके पूरे
- 2:42:38परिवार की भूमिका है ही है। साथ-साथ 1857
- 2:42:41की क्रांति में भी इनकी भूमिका रही है।
- 2:42:43जैसे कि याद रखिएगा हीरापुर के राजघराने
- 2:42:46ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए 1857 की
- 2:42:49क्रांति में भी जिले का नेतृत्व किया।
- 2:42:51ध्यान देना हीरापुर का जो रियासत है यानी
- 2:42:54हीरापुर का जो राज परिवार है जो लोधी
- 2:42:56राजवंश है उन्होंने बुंदेला विद्रोह में
- 2:42:59भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और क्रांति में
- 2:43:00भी 1857 की क्रांति में भी बढ़-चढ़कर
- 2:43:03हिस्सा लिया है। राजा हृदय शाह के भाई
- 2:43:05गजराज सिंह पहले ही मैंने आपको चार्ट में
- 2:43:07बता दिया है भी लगातार संघर्ष करते रहे और
- 2:43:09अंग्रेजों ने उन्हें जबलपुर के चांडाल
- 2:43:12भाटा में याद रखिएगा 29 नवंबर 1857 को
- 2:43:15फांसी दे दी थी। यानी इनके एक भाई जो हैं
- 2:43:17फांसी पर संघर्ष करते हुए मारे गए। इसके
- 2:43:21अलावा इनका जो 50 किलो का बख्तर है, 25
- 2:43:24किलो का तोप और 25 किलो का जो गुटन्ना है
- 2:43:26वो आज भी नागपुर के म्यूजियम में रखा है
- 2:43:29इनके भैया का। ठीक है? इसके अलावा 1857 की
- 2:43:32क्रांति में नरसिंहपुर जिले का नेतृत्व
- 2:43:34हीरापुर के राजा हृदयशाह के पुत्र मेहरबान
- 2:43:37सिंह जिनको मैंने अभी बताया इन्हीं को
- 2:43:39बोलते हैं जंगी राजा। किस नाम से जाना
- 2:43:42जाता है? जंगी राजा के नाम से प्रसिद्ध
- 2:43:44थे। याद रखिएगा। जंगी राजा के नाम से
- 2:43:47प्रसिद्ध थे। ठीक है? तो इनके द्वारा जो
- 2:43:50है
- 2:43:52जंगी राजा यानी मेहरवान सिंह जो कि जंगी
- 2:43:54राजा उपनाम से जाने जाते थे। पूरी ताकत
- 2:43:56झोंकने के बावजूद अंग्रेज क्रांतिकारी
- 2:43:58मेहरबान सिंह को नहीं पकड़ सके। याद
- 2:44:00रखिएगा वृद्ध राजा हृदय शाह ने अंग्रेजों
- 2:44:03की शर्तें मानने से इंकार कर दिया। यानी
- 2:44:04इस समय 1857 की क्रांति जब हो रही थी राजा
- 2:44:08हृदय शाह वृद्ध हो चुके थे और उनके पुत्र
- 2:44:10जो हैं नेतृत्व कर रहे थे। याद रखिएगा। तो
- 2:44:13उन्होंने शर्तें मानने से इंकार कर दिया।
- 2:44:16इस कारण से 3 अप्रैल 1857 को अंग्रेजों ने
- 2:44:19हीरागढ़ रियासत की पूरी संपत्ति यानी पूरा
- 2:44:21राज्य जो है छीन लिया। ठीक है? महान
- 2:44:24क्रांतिकारी राजा हृदशाह लोदी भीषण मारकाट
- 2:44:27और यह जो कुछ 1857 में चल रहा था उनके
- 2:44:29दोनों भाई मारे गए। उनका पुत्र मारा गया।
- 2:44:31इससे दुखी होकर 28 अप्रैल 1858 को इस
- 2:44:35दुनिया से चले गए। तो इसमें अगर आपसे कहूं
- 2:44:38मैं तीन डेट याद रखने के लिए तो पहली डेट
- 2:44:40आपको याद रखनी है। उनको गिरफ्तार कब किया
- 2:44:42गया था? तो वह 22 दिसंबर 1842 अगर पूछा
- 2:44:45जाए उनकी मृत्यु कब हुई तो 28 अप्रैल 1858
- 2:44:48यह उनका बलिदान दिवस है याद रखना और
- 2:44:51इसीलिए इनका जो स्मारक है वह वर्तमान में
- 2:44:54कहां बनाया गया है मैं स्मारक आपको बता
- 2:44:56चुका हूं इनका स्मारक बनाया गया है यहां
- 2:44:58पर कहां ये रहा ठीक है ये दमोह में उनका
- 2:45:02स्मारक बनाया गया शायद पिक्चर आप लोगों को
- 2:45:04क्लियर नहीं होगा ठीक है तो ये राजा हृदय
- 2:45:07शाह के बारे में मैंने आप लोगों को
- 2:45:09अभी-अभी बताया आई होप आप लोगों को अच्छे
- 2:45:11से समझ में आ गया होगा। यानी राजा हृददेश
- 2:45:14शाह लोदी जो थे उन्होंने अपने साथ-साथ
- 2:45:17अपने संपूर्ण परिवार के साथ अपने भाइयों
- 2:45:19के साथ अपने पुत्र के साथ जो है पहले
- 2:45:22बुंदेला विद्रोह में भाग लिया और उसके बाद
- 2:45:241857 की क्रांति में भाग लिया और अपने
- 2:45:26संपूर्ण बलिदान अपने संपूर्ण परिवार का जो
- 2:45:30है बलिदान कर दिया। राजा हृदय शाह लोदी को
- 2:45:33इतिहास के पन्नों में वह जगह नहीं मिली
- 2:45:35जिसके वह हकदार थे। और मेरा प्रयास इस
- 2:45:37सीरीज में यही है कि आप सभी लोग राजा हृदय
- 2:45:40शाह लोदी के बारे में अधिक से अधिक जाने
- 2:45:42क्योंकि अभी तक राजा हृदय शाह लोदी के
- 2:45:44बारे में केवल लोधी कम्युनिटी के जो लोग
- 2:45:46हैं वह जानते हैं। उनका सम्मान करते हैं।
- 2:45:49उनकी पूजा करते हैं। तो याद रखिएगा 1842
- 2:45:52के बुंदेला विद्रोह में उन्होंने अंग्रेजी
- 2:45:54हुकूमत को चुनौती दी और अपने क्षेत्र के
- 2:45:57समस्त जागीरदारों, तालुकेदारों, गोंड
- 2:46:00राजाओं इसके साथ-साथ बुंदेला सरदारों के
- 2:46:02साथ संगठित होकर विद्रोह किया। मेनली उनका
- 2:46:05जो विद्रोह था वह दक्षिणी बुंदेलखंड में
- 2:46:07था। उनके साथ-साथ इस विद्रोह में जयपुर के
- 2:46:10राजा परीक्षित इसके अलावा मधुकर शाह, गणेश
- 2:46:13जी बुंदेला, जवाहर सिंह बुंदेला आदि लोगों
- 2:46:15ने भी साथ दिया था। इसके साथ-साथ एक गोंड
- 2:46:18शासक बहुत इंपॉर्टेंट है जिनको हम अगली
- 2:46:20सीरीज में कवर करेंगे। ढिल्लन शाह गोंड
- 2:46:22शासक ढिल्लन शाह जो कि मदनपुर के रहने
- 2:46:24वाले थे। तो इन सभी लोगों ने बलिदान दिया।
- 2:46:27लेकिन इस जब इस पूरी रिपोर्ट को तैयार
- 2:46:30किया और अंग्रेजों ने एक जो बजट सॉरी
- 2:46:33अंग्रेजी गजट में जब इस बात का जिक्र किया
- 2:46:35कि इस 1842 के बुंदेला विद्रोह के जो
- 2:46:38मुख्य सूत्रधार या जो मुख्य नायक थे वो थे
- 2:46:41राजा हृद शाह लोदी। इसीलिए उनके परिवार के
- 2:46:44साथ और उनकी जो गलत व्यवहार किया गया।
- 2:46:47उनके साथ कड़ी अह बहुत ज्यादतियां की गई
- 2:46:49और उनकी संपत्ति को जब्त कर लिया। मुझे
- 2:46:51उम्मीद है कि आप लोगों को जो कुछ भी मैंने
- 2:46:54राजा हृदय शाह लोदी के बारे में बताया वो
- 2:46:57आपको अच्छे से याद रहेगा। एक और
- 2:46:58इंपॉर्टेंट बात ये जो चार्ट है यह जरूर
- 2:47:01याद रखिएगा। इसमें सब कुछ कवर है। उनके
- 2:47:03बेटे का नाम क्या था? उनके बेटे का नाम था
- 2:47:06मेहरवान सिंह लोदी जिन्हें जंगी राजा के
- 2:47:08नाम से जाना जाता है। उन्होंने 1857 की
- 2:47:10क्रांति में हीरापुर रियासत का नेतृत्व
- 2:47:12किया था। साथ-साथ उनके जो भाई थे जिनका
- 2:47:15नाम वसंत सिंह था। उन्होंने भी 1857 की
- 2:47:18क्रांति में अपना योगदान दिया और उनके जो
- 2:47:20भाई थे जिनका नाम था गजराज सिंह यानी ये
- 2:47:23तीनों बसंत सिंह, गजराज सिंह और मेहरवान
- 2:47:25सिंह ये तीनों की जो मृत्यु है या तीनों
- 2:47:28की जो वीरगति है वो 1857 की क्रांति में
- 2:47:30संघर्ष से हुई है। और राजा हृद शाह लोदी
- 2:47:33क्योंकि इस समय वृद्ध अवस्था में थे और
- 2:47:35उनकी भी जो डेथ है वह 1858 में हुई है।
- 2:47:38अप्रैल 1858 में। मुझे लगता है अगर आप
- 2:47:40इतनी सारी बातों को याद रखते हो तो आपको
- 2:47:43राजा हृददी बहुत अच्छे से याद रहेंगे और
- 2:47:46अब आपके मन में एक अगर सवाल हो कि बुंदेला
- 2:47:48विद्रोह क्या था? उसके कारण क्या थे? तो
- 2:47:50आने वाली आने वाले नेक्स्ट पार्ट में जब
- 2:47:53हम बुंदेला विद्रोह पे कभी वीडियो बनाएंगे
- 2:47:55तो मैं आपको उसके कारण परिणाम और उसके जो
- 2:47:57मुख्य नायक थे जैसे कि मदनपुर का ढिल्लन
- 2:48:00शाह, हीरापुर के हमने अभी कवर कर लिए। के
- 2:48:03राजा हृद शाह लोदी, जयपुर के राजा
- 2:48:04परीक्षित और गणेश बुंदेला, मधुकर शाह
- 2:48:08बुंदेला जो कि नरहट के जमींदार थे और सागर
- 2:48:10के जमींदार जिनका नाम था जवाहर सिंह
- 2:48:12बुंदेला सभी को कवर करेंगे। आई होप आप
- 2:48:15लोगों को यह वीडियो भी बहुत पसंद आएगा।
- 2:48:17इसी के साथ इस वीडियो को यहां हम समाप्त
- 2:48:19करते हैं। जय हिंद। थैंक यू।
- 2:48:35हेलो एवरीवन आप सभी का स्वागत है
- 2:48:37एमपीपीएससी स्टडी आईक्यू पर और आज हम बात
- 2:48:40करने वाले हैं मध्य प्रदेश के वीरों के
- 2:48:42इतिहास की इस सीरीज में भारत की एक ऐसी
- 2:48:45आदर्श शासिका के बारे में एक ऐसे विशेष
- 2:48:48व्यक्तित्व के बारे में जिन्हें प्रजा या
- 2:48:51जो आम जनता है वह देवी या लोक माता के नाम
- 2:48:53से जानती थी। आपने देख लिया होगा हम किन
- 2:48:56की बात करने वाले हैं। तो हम बात करने
- 2:48:58वाले हैं मालवा की एक महान रानी इंदौर के
- 2:49:01होलका डायनेस्टी की एक महान रानी या हम
- 2:49:04कहें कि भारतवर्ष की एक महान शासिका जिनका
- 2:49:07नाम है रानी अहिल्याबाई होलकर जिन्हें हम
- 2:49:10भारत की आदर्श शासिका के तौर पर जानते
- 2:49:13हैं। तो देवी अहिल्याबाई होलकर कौन है और
- 2:49:16किस तरीके का उनका व्यक्तित्व था और आखिर
- 2:49:18क्यों उन्हें जनता या जो लोग हैं वह देवी
- 2:49:21और लोकमाता कहते हैं तो उन सभी पहलुओं की
- 2:49:23आज हम चर्चा करने वाले हैं। तो आइए शुरुआत
- 2:49:26करते हैं सबसे पहले के कौन थी हमारी देवी
- 2:49:29लोकमाता अहिल्याबाई होलकर। तो सबसे पहले
- 2:49:32हम इनके बचपन की बात करते हैं। इनके जीवन
- 2:49:34परिचय की बात करते हैं। अगर हम देखें इनका
- 2:49:37जो व्रत है वो हुआ था महाराष्ट्र में एक
- 2:49:39जगह है महाराष्ट्र के औरंगाबाद
- 2:49:41डिस्ट्रिक्ट में। तो इनका जो बर्थ है उस
- 2:49:44बर्थ प्लेस का नाम था क्या? चौड़ी गांव।
- 2:49:46याद रखिएगा ये जो चौड़ी गांव है ये चौड़ी
- 2:49:49गांव कहां पर था? तो आपको याद रखना है ये
- 2:49:51जो चौड़ी गांव है वो औरंगाबाद जिले में था
- 2:49:54महाराष्ट्र के और इनका जो बर्थ ईयर है वो
- 2:49:56भी आपको याद रखना पड़ेगा क्योंकि मध्य
- 2:49:58प्रदेश के इतिहास में इंपॉर्टेंट है 1725
- 2:50:00में। तो 1725 में इनका जन्म होता है
- 2:50:03महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के चौड़ी
- 2:50:04नामक ग्राम में। तो चौड़ी और ईयर दोनों
- 2:50:07इंपॉर्टेंट है 1725 चौड़ी ग्राम। इनके
- 2:50:09पिताजी की बात करें तो इनके पिताजी का नाम
- 2:50:11था मानको जी सिंधे और अगर माता की बात
- 2:50:14करें तो माताजी का नाम था सुशीला तो
- 2:50:16माता-पिता और जन्म चौड़ी नामक ग्राम माता
- 2:50:19का नाम क्या है? सुशीला और पिता का नाम
- 2:50:20क्या है? याद रखिएगा मनको जी सिंधे। इनकी
- 2:50:23शादी 8 वर्ष की उम्र में शादी हुई थी 1733
- 2:50:28में। 1733 में इनकी जो शादी है वह मल्हार
- 2:50:31राव के जो पुत्र हैं खांडेराव होलकर के
- 2:50:33साथ हुई थी। और जब इनकी शादी हुई तो आप
- 2:50:36देखिए उनकी ऐज केवल और केवल 8 साल की थी।
- 2:50:398 साल की उम्र में उनकी शादी जो है मल्हार
- 2:50:42राव होलकर जो कि इंदौर के होलकर वंश के
- 2:50:44संस्थापक थे उनके बेटे के साथ हो जाती है
- 2:50:47जिनका नाम होता है खांडेराव तो खांडेराव
- 2:50:49इनके पति थे। अगर हम बात करें इनके
- 2:50:51खांडेराव यानी जो इनके पति हैं तो
- 2:50:53खांडेराव की जो मृत्यु है वो बहुत ही
- 2:50:55जल्दी हो गई थी। भरतपुर की एक लड़ाई हुई
- 2:50:58थी 1754 में जिसे वॉर ऑफ कुमेरी कहा जाता
- 2:51:01है। कुमेरी बेसिकली जाटों का एक किला था
- 2:51:05जिस पर सूरजमल जाट का अधिकार था और जब
- 2:51:08मल्हार राव होलकर ने सूरजमल जाट के उस
- 2:51:11कुमेरी दुर्ग को घेर लिया तो उसमें एक
- 2:51:13दुर्घटना में इनके पति की मृत्यु हो गई।
- 2:51:15अभी मैं थोड़ा सा और डिटेल में आप लोगों
- 2:51:16को बताऊंगा। ठीक है? इनका एकमात्र जीवित
- 2:51:19पुत्र था। एकमात्र पुत्र था जिसका नाम
- 2:51:21मालेराव था और इनकी एक पुत्री थी जिसका
- 2:51:23नाम था मुक्ताबाई। ठीक है? ठीक है? तो आप
- 2:51:26इनके परिवार से आप मिल लिए और इनके जो
- 2:51:28दामाद थे, दामाद का नाम था यशवंत राव
- 2:51:30फड़से।
- 2:51:32क्या नाम था? यशवंत राव फड़से इनके दामाद
- 2:51:36थे। ये जरूर याद रखिएगा कि उनकी बेटी हैं
- 2:51:38तो बेटी की शादी होगी। तो इनके दामाद का
- 2:51:40नाम था यशवंत राव फड़से। तो ये हो गया
- 2:51:42हमारा जीवन परिचय। ठीक है? जीवन परिचय के
- 2:51:45बाद हम बात करते हैं कि किस तरीके से अब
- 2:51:47खांडेराव होलकर के बारे में कुछ बातें
- 2:51:49यहां पर मेंशन की गई हैं। आप चाहे तो इन
- 2:51:51बातों को जरा ध्यान से देख लीजिए।
- 2:51:53खांडेराव होलकर मल्हार राव होलकर के पुत्र
- 2:51:56थे और मल्हार राव होलकर ने एक बार भरतपुर
- 2:51:59के जाट शासक जिनका नाम था सूरजमल जाट उनको
- 2:52:02घेर लिया क्योंकि पेशवा का आदेश था कि
- 2:52:05इनसे चौथ वसूला जाए। तो जब वो मैं इसमें
- 2:52:08एक डायग्राम बनाकर आपको समझाता हूं और
- 2:52:10मुझे लगता है जब हम डायग्राम के थ्रू
- 2:52:12समझेंगे तो आपको बहुत जल्दी अच्छे से समझ
- 2:52:14में आ जाएगा। चलिए तो कहानी कैसे होती है?
- 2:52:18जैसे कि एक दुर्ग है और इस दुर्ग का नाम
- 2:52:21है कुमेरी। ध्यान से सुनिएगा। यह जो
- 2:52:24कुमेरी दुर्ग है, वह कहां आता था? कुमेरी
- 2:52:27दुर्ग आता था राजस्थान में। कुमेरी दुर्ग
- 2:52:32और यह भरतपुर राजस्थान में था। और यहां के
- 2:52:35जो सा शासक थे जिनका नाम था सूरजमल जाट।
- 2:52:39सूरजमल जाट जिनकी वाइफ का नाम था
- 2:52:42किशोरीबाई। सूरजमल जाट जो जाटों के सबसे
- 2:52:45प्रसिद्ध शासक रहे हैं जिनके लिए कहा जाता
- 2:52:47है इन्हें जाटों का अफलातून कहते हैं।
- 2:52:50जाटों का प्लेटो कहा जाता है और बहुत ही
- 2:52:52महान शासक थे जाटों के जिनका नाम था
- 2:52:54सूरजमल जाट। तो क्या हुआ कि मल्हार राव
- 2:52:57होलकर ने अपनी सेना के साथ मल्हार राव कौन
- 2:53:00है? खांडेराव के पति सॉरी खांडेराव के
- 2:53:02पिता हैं मल्हार राव।
- 2:53:09यह रहे हमारे मल्हार
- 2:53:12राव होलकर। मल्हार राव जो होलकर हैं
- 2:53:16इन्होंने अपने बेटे के साथ मालवा के शासक
- 2:53:20हैं। और इनके पुत्र का नाम क्या था? इनके
- 2:53:22पुत्र का नाम था खांडेराव। तो इन्होंने
- 2:53:24अपने पुत्र के साथ पेशवा की सेना का
- 2:53:26प्रतिनिधित्व करते हुए और भी लोग थे। इन
- 2:53:29सभी लोगों ने क्या कर लिया? घेर लिया।
- 2:53:31किसको घेर लिया? कुमेरी को घेर लिया। और
- 2:53:33कुमेरी दुर्ग जो कि सूरजमल जाट का था और
- 2:53:36इसे घेर के खड़े हो गए। तो बताते हैं कि
- 2:53:38जब इस दुर्ग को उन्होंने घेर रखा था और
- 2:53:41यहां उनकी जीत नहीं हुई थी। एक समय वो
- 2:53:43अपनी पालकी में बैठकर वो पालकी में बैठे
- 2:53:46थे खांडेरा होलकर और पालकी में बैठकर जब
- 2:53:49वो निरीक्षण कर रहे थे अपनी सेना का उसी
- 2:53:51समय बताया जाता है कि यहां से कुमेरी
- 2:53:54दुर्ग की तरफ से एक बंदूक चलाई जाती है।
- 2:53:56एक बंदूक चलाई जाती है और उसकी गोली से जो
- 2:53:59है खांडेराव की क्या हो जाती है? तोप का
- 2:54:01गोला चलता है। किले से एक क्या चला? तोप
- 2:54:04का गोला चला। और इस तोप के गोले से जो है
- 2:54:06दुर्घटना में खांडेराव होलकर की 1754 में
- 2:54:09मृत्यु हो गई। क्या हो गई? 1754 में
- 2:54:13मृत्यु हो गई। और यह याद रखिएगा मल्हहार
- 2:54:15राव होलकर के एकमात्र पुत्र थे और यही
- 2:54:17अहिल्याबाई के पति हैं खांडेराव होलकर। जब
- 2:54:20उनकी मृत्यु हुई तो मल्हार राव होलकर ने
- 2:54:22कसम खाई कि वो इस दुर्ग को मिट्टी में
- 2:54:25मिला देंगे। लेकिन बाद में कुछ ऐसी
- 2:54:27परिस्थितियां बनी कि पेशवा और सूरजमल जाट
- 2:54:29के मध्य समझौता हो गया और बाद में बताते
- 2:54:32हैं कि जो सूरजमल जाट और उनकी वाइफ थी
- 2:54:35उन्होंने क्या किया? माफी मांगी इनसे कि
- 2:54:37ये जो कुछ भी हुआ वो दुर्घटनावश हुआ और
- 2:54:39बाद में इनकी समाधि यहां पर एक छतरी का
- 2:54:42निर्माण करवा दिया था। क्या करवा दिया? एक
- 2:54:44छतरी का निर्माण करवा दिया। तो इनकी जो
- 2:54:46छतरी है खांडेरा होलकर की वो यहीं पर बनी
- 2:54:48हुई है। तो ये एक बड़ी दुर्घटना थी। अब
- 2:54:51इसके बाद क्या होता है? आगे की कहानी सुन
- 2:54:54सुनिए। तो जब यहां पर इनकी मृत्यु हो गई
- 2:54:57तो मल्हार राव होलकर की जो बहू है और
- 2:54:59खांडेराव होलकर की जो पत्नी हैं
- 2:55:01अहिल्याबाई होलकर वो सती होना चाहती थी।
- 2:55:04वो सती होना चाहती थी क्योंकि पहले कई
- 2:55:06महिलाएं सती होती थी अपने पति की मृत्यु
- 2:55:08के बाद तो जब वो सती होना चाहती थी तो
- 2:55:10मल्हहार होलकर ने उनसे कहा कि मेरा बेटा
- 2:55:13तो गया। मेरा बेटा तो गया। अब आज से तुम
- 2:55:17ही मेरी बेटा हो। बेटी को वो क्या कहते
- 2:55:19हैं? मल्हार होलकर। अहिल्याबाई होलकर से
- 2:55:21कहते हैं कि मेरा बेटा तो गया और आज से
- 2:55:23तुम ही मेरा बेटा हो इसलिए तुम सती नहीं
- 2:55:26हो और फिर वो सती होने से मतलब उनको मना
- 2:55:30कर दिया गया और जब वो सती नहीं होती हैं
- 2:55:31तो फिर वो चली जाती है और उनके बच्चे हैं
- 2:55:33जो मैंने अभी आपको बताया तो इस प्रकार
- 2:55:35उनके पति कौन थे? खांडेराव होलकर थे जिनके
- 2:55:38बारे में हम लोगों ने अभी जान लिया।
- 2:55:40खांडेराव होलकर की मृत्यु कहां हुई थी? ये
- 2:55:42हम लोगों ने जान लिया। अब खांडेराव होलकर
- 2:55:44के बाद की घटनाएं उनको हम लोग देखते हैं।
- 2:55:46खांडेराव होलकर से उनको कौन था? तो याद
- 2:55:48रखिएगा एक पुत्र है जिसका नाम मालेराव है
- 2:55:50और पुत्री का नाम मुक्ताबाई है। शादी कब
- 2:55:52हुई थी? 1733 में हुई थी। यह भी हमने पढ़
- 2:55:54लिया और इनकी मृत्यु कहां हुई थी? कुमेरी
- 2:55:56के युद्ध में हुई थी। भरतपुर में 1754 में
- 2:55:59होगी। यह भी मैंने आपको बता दिया जब वो एक
- 2:56:01पालकी में बैठे हुए थे। आगे क्या होता है?
- 2:56:05आगे की बात करते हैं। इसके बाद हम लोग
- 2:56:08देवी अहिल्याबाई को आगे समझते हैं कि आखिर
- 2:56:10अहिल्याबाई होलकर के जीवन में आगे क्या
- 2:56:14हुआ। तो देखो यह रहे हमारे मल्हार राव
- 2:56:16होलकर। क्या नाम है इनका? मल्हार राव।
- 2:56:21मल्हहार
- 2:56:22राव होलकर। मल्हार राव होलकर
- 2:56:27की जो मृत्यु है ध्यान से सुनना। मल्हार
- 2:56:30राव होलकर की मृत्यु होती है 1766 में।
- 2:56:331766 एडी में उनकी मृत्यु हो गई। और उनकी
- 2:56:36जो मृत्यु हुई थी वो आलमपुर में हुई थी।
- 2:56:38भिंड के आलमपुर में और यहीं पर उनकी समाधि
- 2:56:41बनी हुई है। यह आलमपुर कहां है? भिंड
- 2:56:43डिस्ट्रिक्ट में पड़ता है। यहां पर उनकी
- 2:56:45समाधि बनी हुई है भिंड के आलमपुर में। और
- 2:56:47इस समाधि का निर्माण करवाया था देवी
- 2:56:49अहिल्याबाई ने। देवी अहिल्याबाई द्वारा
- 2:56:52अपने ससुर की समाधि का निर्माण करवाया
- 2:56:54गया। और
- 2:56:56उनकी समाधि कहां पर है? आलमपुर भिंड में
- 2:56:58है। तो मल्हाराव होलकर के बाद क्योंकि
- 2:57:01उनका जो पुत्र था वो तो उनके शासनकाल में
- 2:57:03ही उनकी डेथ हो गई थी। इसीलिए इनका जो
- 2:57:06पौत्र है पौत्र मतलब बेटे का बेटा है उनका
- 2:57:09नाम था मालेराव जो कि अहिल्याबाई होलकर और
- 2:57:12खांडेराव होलकर का एकमात्र पुत्र था। तो
- 2:57:15ये गद्दी पर बैठे और यह शासन करते हैं
- 2:57:181766 में जब ये गद्दी पर बैठे तो याद
- 2:57:21रखिएगा केवल 9 माह में। कितने? केवल 9
- 2:57:26महीने में इनकी मृत्यु हो गई। कितने महीने
- 2:57:28में? 9 महीने में इनकी मृत्यु हो गई। और
- 2:57:31इनको क्या बीमारी हो गई थी? तो इनको
- 2:57:33दिमागी बुखार जिसे हम मस्तिष्क ज्वर कहते
- 2:57:36हैं। यानी मस्तिष्क ज्वर के कारण इनकी
- 2:57:38क्या हो जाती है? मृत्यु हो जाती है।
- 2:57:42अब आप सोचिए क्या परिस्थिति रही होगी देवी
- 2:57:45अहिल्याबाई होलकर की कि 1754 में उनके जो
- 2:57:49बेटे हैं बेटे का नाम क्या था? मल्हार राव
- 2:57:51होलकर के और उनके पति खांडेराव होलकर। तो
- 2:57:54खांडेराव होलकर की मृत्यु 54 में हो गई।
- 2:57:57ठीक है? उनके ससुर जी की मृत्यु 66 में हो
- 2:58:00गई। और उनका जो एकमात्र जीवित पुत्र था
- 2:58:02मालेरा उसकी मृत्यु 1766 में हो गई और जब
- 2:58:06उनके पुत्र की मृत्यु हो गई तो उस
- 2:58:08परिस्थिति में उनको बनाया गया होलकर वंश
- 2:58:11का शासक और यहीं से शुरू होती है
- 2:58:14अहिल्याबाई होलकर का राजनीतिक कैरियर और
- 2:58:17राजनीतिक करियर में उन्होंने क्या किया यह
- 2:58:19हम जानेंगे। अहिल्याबाई होलकर की अगर हम
- 2:58:22उपलब्धियों की बात करें तो अहिल्याबाई
- 2:58:24होलकर जो है हमारी देवी अहिल्याबाई होलकर
- 2:58:28देवी अहिल्याबाई जो होलकर हैं
- 2:58:32देवी अहिल्याबाई होलकर इनके जीवन को समझने
- 2:58:36के लिए इनको समझने के लिए हम इनकी
- 2:58:38उपलब्धियों को तीन पार्ट में देख सकते
- 2:58:40हैं। नंबर वन, सबसे पहले हम देखेंगे इनकी
- 2:58:44कूटनीतिक
- 2:58:47कूटनीतज्ञ के रूप में कूटनीतिज्ञ को बोल
- 2:58:49सकते हैं राजनीतिज्ञ के रूप में कि एक
- 2:58:51अच्छी राजनेता कैसे थीं वो? तो हम एक
- 2:58:54कूटनीतिक के रूप में उनके जीवन को
- 2:58:56समझेंगे। दूसरा उनके बारे में कहा जाता है
- 2:58:59कि वो एक महान शिव भक्त थी और उन्होंने
- 2:59:02देश भर में कई कई सारे शिवालय का निर्माण
- 2:59:05करवाया था। तो एक महान शिव भक्त के रूप
- 2:59:08में उनको हम समझेंगे। इसके साथ-साथ हम बात
- 2:59:10करेंगे कि उन्होंने याद रखिएगा कई सारे
- 2:59:14लोक कल्याणकारी कार्य किए और इन्हीं लोक
- 2:59:17कल्याणकारी कार्यों की वजह से समस्त प्रजा
- 2:59:20उनको क्या कहला कहती थी? तो समस्त प्रजा
- 2:59:23उनको बुलाती थी देवी या लोकमाता। तो हम
- 2:59:26इनको तीन पार्ट में समझेंगे। ये तीनों
- 2:59:29चीजें सबसे पहले हम बात करेंगे राजनीतिक
- 2:59:32के रूप में। तो सबसे पहले देखिए क्या हुआ?
- 2:59:35उनके पति की मृत्यु हो गई। उनके ससुर की
- 2:59:38मृत्यु हो गई और उनके बेटे की मृत्यु हो
- 2:59:40गई। तब 1766 में
- 2:59:43सॉरी
- 2:59:451766 में वह गद्दी पर बैठी और उन्होंने
- 2:59:491795 तक शासन किया था। 1795 तक शासन किया।
- 2:59:54तो उन्होंने शासन कैसे किया? क्योंकि शासन
- 2:59:56करने के लिए कोई ना कोई उनको सपोर्ट करने
- 2:59:58के लिए भी चाहिए। तो मल्हार राव होलकर के
- 3:00:01एक भतीजे थे जिनका नाम था तुकोजीराव
- 3:00:04होलकर। तो उन्होंने अपना सेनापति बनाया
- 3:00:07तुकोजीराव होलकर को। किसको बनाया?
- 3:00:09तुकोजीराव जो कि एक बहुत ही योग्य व्यक्ति
- 3:00:12थे। तुकोजीराव होलकर। तुकोजीराव होलकर को
- 3:00:15अपना सेनापति बनाया और इनकी मदद से अच्छे
- 3:00:18से अपने राज्य को चलाया। तो हम एक-एक करके
- 3:00:20इनकी उपलब्धियों को समझने वाले। सबसे पहले
- 3:00:22राजनीतिक, महान सेवक और लोक कल्याणकारी।
- 3:00:24जब आप इन तीनों पहलुओं को समझ लेंगे तो
- 3:00:27आपको समझ में आ जाएगा कि क्यों उन्हें
- 3:00:29देवी या लोकमाता के नाम से या एक
- 3:00:32आदर्शवादी महिला शासिका के रूप में उनको
- 3:00:34जाना जाता है। एक और इंपॉर्टेंट बात है जो
- 3:00:37आपको बहुत ध्यान से सुननी और समझनी है कि
- 3:00:40जब उनके पति की मृत्यु हो गई। ठीक है?
- 3:00:441754 में उनके ससुर की मृत्यु हो गई। ठीक
- 3:00:48है? उनका एकमात्र बेटा भी चल बसा। और उनकी
- 3:00:52जो बेटी हैं मुक्ताबाई और उनके जो दामाद
- 3:00:55हैं यशवंतराव फड़से उन सभी की मृत्यु उनके
- 3:00:58जीवन काल में हो गई। अब आप सोचिए जिस महल
- 3:01:01में वो रहती होंगी उनके महल का नाम क्या
- 3:01:03था? पहले सभी लोग इंदौर में जो राजवाड़ा
- 3:01:06पैलेस है वहां पे रहा करते थे। यह इनका
- 3:01:08पैलेस था। राजवाड़ा पैलेस। कहां पर है
- 3:01:10राजवाड़ा पैलेस? इंदौर में रहते हैं। ठीक
- 3:01:13है? अब आप मुझे एक बात बताओ। जिस घर में
- 3:01:15उनके सभी लोगों की मृत्यु हो गई। क्या वो
- 3:01:17जगह उनको अच्छी लगेगी? क्या वो राजसी वैभव
- 3:01:21उनको अच्छा लगेगा जहां पर उनकी मृत्यु
- 3:01:23हुई। आप अगर इंदौर और महेश्वर को कभी
- 3:01:26कंपेयर करेंगे तो आपको समझ में आ जाएगा कि
- 3:01:28राजवाड़ा जो इंदौर है उसमें सब राजसी
- 3:01:30चीजें आपको मिल जाएंगी। ये वो वैभव आपको
- 3:01:32मिल जाएगा। लेकिन जब आप महेश्वर की तरफ
- 3:01:34जाएंगे जो महेश्वर की जो पहचान है वह देवी
- 3:01:37अहिल्याबाई होलकर की वजह से है। और जब आप
- 3:01:39महेश्वर जाएंगे तो आपको वहां मिलेगी
- 3:01:41शांति। आपको मिलेगा वहां पे संत प्रवृत्ति
- 3:01:44का उनका जीवन और उनकी सामान्य लाइफ उनको
- 3:01:47आपको देखने को मिलेगी और जो कुछ उन्होंने
- 3:01:49की किया महेश्वर में वो मैं आपको अभी
- 3:01:51बताने वाला हूं। तो इसको वो छोड़ देंगी और
- 3:01:53वो अपनी राजधानी कहां बनाएंगी? महेश्वर और
- 3:01:56महेश्वर में ही उन्होंने अपने पूरे जीवन
- 3:01:57को बिताया था। महेश्वर उनकी राजधानी बनती
- 3:02:00है। तो महेश्वर को राजधानी बनाने वाली थी
- 3:02:02हमारी देवी अहिल्याबाई होलकर। तो यह
- 3:02:05शिफ्टिंग कैसे हुई? आइए इसको समझते हैं।
- 3:02:07सबसे पहले हम उनका जो चित्रण कर रहे हैं,
- 3:02:11वह एक राजनीतिज्ञ के रूप में कर रहे हैं।
- 3:02:13हम यह कह सकते हैं कि देवी अहिल्याबाई
- 3:02:15होलकर एक महान राजनीतिज्ञ थी। एक कूटनी
- 3:02:18कूटनीतिज्ञ थी जो कूटनीति का जवाब कूटनीति
- 3:02:21से देना जानती थी। जैसे इनके दो किस्से
- 3:02:23हमको मिलते हैं। अहिल्याबाई होलकर एक महान
- 3:02:26कूटनीतिक महिला थी। इसका उदाहरण पेशवा को
- 3:02:29लिखे पत्र में लिख मिलता है। उन्होंने एक
- 3:02:32बार पेशवा को एक लेटर लिखा था अंग्रेजों
- 3:02:34के रिगार्डिंग कि अंग्रेजों के बारे में
- 3:02:36वह क्या सोचती हैं? उन्होंने कहा था कि
- 3:02:38अंग्रेजों के साथ निकटता बढ़ाना भालू के
- 3:02:40साथ निकटता बढ़ाने जैसा है। अन्य पशु तो
- 3:02:43किसी ना किसी तरीके से युक्ति से मारे जा
- 3:02:45सकते हैं। लेकिन भालू को मारना दुष्कर है।
- 3:02:48इसका मतलब यह है कि वो अंग्रेजों को क्या
- 3:02:50समझ रही हैं कि अंग्रेज बड़े चालाक हैं।
- 3:02:52अंग्रेज बड़े पावरफुल हैं और उनके साथ
- 3:02:55निकटता बढ़ाना भालू की तरह भालू से निकटता
- 3:02:58बढ़ाने जैसा है। हम हर जानवर को मारने का
- 3:03:00तरीका ढूंढ सकते हैं। लेकिन भालू को मारने
- 3:03:02का कोई तरीका नहीं। तो यह उनकी एक
- 3:03:04कूटनीतिक है। दूसरी उनकी एक कूटनीतिकता का
- 3:03:07परिचय हमको तब देखने को मिलता है जब पेशवा
- 3:03:10का भाई होता है राघोबा। इनका किस्सा मैं
- 3:03:12आपको बताता हूं। आपको सुनना पड़ेगा।
- 3:03:15मालेराव होलकर जब 9 साल 9 महीने शासन करने
- 3:03:19के बाद उनकी मृत्यु हो गई। बहुत यंग एज
- 3:03:21में उनकी डेथ हो गई। तो पेशवा थे उस समय
- 3:03:24मराठा साम्राज्य के जो पेशवा थे उनका नाम
- 3:03:26था माधवराव प्रथम। ठीक है? तो माधवराव जो
- 3:03:29प्रथम हैं उनके कौन लगते हैं? माधवराव
- 3:03:32प्रथम के लगते थे चाचा और उससे पहले जो
- 3:03:34पेशवा थे जिनका नाम था रघुनाथ
- 3:03:39बालाजी बाजीराव आपने शायद सुना होगा मैं
- 3:03:42लिख देता हूं
- 3:03:44तभी आपको समझ में आएगा बालाजी बाजीराव
- 3:03:47बालाजी बाजीराव को सामान्यता बाजीराव
- 3:03:51बालाजीराव के नाम से जानते हैं। बालाजी
- 3:03:53बाजीराव इनको कहते हैं। इनका जो टाइम
- 3:03:55पीरियड है वो 1740 से लेके रहा था 1761
- 3:03:58तक। 61 में इनकी मृत्यु हो गई और इनकी
- 3:04:00मृत्यु के बाद इनका बेटा गद्दी पर बैठा था
- 3:04:02जिसका नाम था माधवराव फर्स्ट। यह पेशवा
- 3:04:05बने थे जिनका नाम था माधवराव फर्स्ट।
- 3:04:07माधवराव फर्स्ट जो हैं वो 1761 से लेके
- 3:04:101772 तक पेशवा रहे। तो यह जो बालाजी
- 3:04:13बाजीराव हैं इनके एक भाई थे। इनका किस्सा
- 3:04:16आप सुन लीजिए। इनके एक भाई थे और इनके भाई
- 3:04:19का नाम राघोवा उर्फ रघुनाथ राव था। राघोबा
- 3:04:24उर्फ रघुनाथ राव। तो अब जब यह गद्दी पर
- 3:04:27बैठी 66 का समय चल रहा है तो 66 में पेशवा
- 3:04:30कौन है? अब आप इससे समझ सकते हो। पेशवा का
- 3:04:32नाम है माधवराव प्रथम। देखिए टाइम पीरियड
- 3:04:34लिखा है। तो
- 3:04:37राघव बाग को पता चला कि मालवा की जो
- 3:04:39शासिका है मतलब मालवा का शासक मर चुका है
- 3:04:42और अब मालवा का शासन एक महिला के हाथों
- 3:04:44में है। तो किसी ने उनको सलाह दी कि मालवा
- 3:04:46पे हमला करके यानी इंदौर पे हमला करके इस
- 3:04:48जागीर को जब्त कर लिया जाए। तो राघव अपनी
- 3:04:51सेना लेकर उन पर हमला कर देते हैं। तो अब
- 3:04:54जरा सुनना कि जो देवी अहिल्याबाई होलकर है
- 3:04:58वो क्या करने जा रही हैं? सबसे पहले तो
- 3:05:00उन्हें पता है कि अगर यह लड़ने के लिए आ
- 3:05:02रहे हैं तो लड़ने के लिए हमको तैयार रहना
- 3:05:04पड़ेगा। तो इसीलिए उन्होंने सबसे पहले
- 3:05:05जानते हो क्या किया? उनके पड़ोस में जो
- 3:05:08शासनकर्ते थे जिनसे उनके बहुत ही अच्छे
- 3:05:11संबंध थे वो थे ग्वालियर के सिंधिया और
- 3:05:13ग्वालियर में इस समय शासन था महाजी
- 3:05:15सिंधिया का। कभी आप ये दोनों डायनेस्टी को
- 3:05:17कंपैरिजन करके पढ़ेंगे तो आपको समझ में
- 3:05:19आएगा महाद जी कितने ग्रेट शासक थे। महाजी
- 3:05:23सिंधिया से उन्होंने हेल्प मांगी कि भैया
- 3:05:25ऐसीऐसी बात है और आप हमारी मदद करिए। तो
- 3:05:28महाजी सिंधिया ने उनको वादा कर दिया कि वो
- 3:05:30अपनी सेना लेकर तैयार खड़े हैं। आ जाएंगे
- 3:05:32पीछे से। तो एक तो उन्होंने अपनी सेना
- 3:05:34तैयार कर ली लड़ने के लिए। दूसरा उन्होंने
- 3:05:36देखो क्या कहा। कूटनीतिकता का एक अन्य
- 3:05:38उदाहरण राघोबा के इंदौर पर चढ़ाई के समय
- 3:05:42लिखे पत्र से प्राप्त होता है। जिसमें
- 3:05:43उन्होंने राघोबा को लिखा। देखो क्या लिखा
- 3:05:46राघोबा मतलब पेशवा का भाई जो उनकी रियासत
- 3:05:48को जब्त करने आ रहा है उसको लिखा क्या
- 3:05:50लिखा कि ध्यान से सुनिएगा आप जैसे वीरों
- 3:05:54को यह धर्म नहीं है आप जैसे वीरों का यह
- 3:05:56धर्म नहीं है कि आप एक अबला यानी एक अबला
- 3:05:59नारी पर चढ़ाई करें फिर भी मैं हर तरह से
- 3:06:02क्या हूं तैयार हूं मतलब मैं लड़ने के लिए
- 3:06:04तैयार हूं मैं हर तरह से तैयार हूं अगर
- 3:06:06मैं हार गई तो इसमें मुझे कोई बुरा नहीं
- 3:06:09कहेगा परंतु दुर्भाग्यवश यदि आपकी पराजय
- 3:06:13हुई तो संसार क्या कहेगा इस पर जारी इस पर
- 3:06:16जरा विचार कीजिएगा। यानी पूरी दुनिया आप
- 3:06:18पर हंसेगी अगर आप हार गए। इस जवाब को
- 3:06:21सुनकर राघोबा ने यह कहा। राघोबा ने क्या
- 3:06:23कहा? राघव बाबा को शर्म आई और उन्होंने
- 3:06:25कहा कि नहीं आप गलत समझ रही हैं। मैं तो
- 3:06:28आपके पुत्र की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त
- 3:06:30करने के लिए आ रहा हूं और फिर राघोबा लौट
- 3:06:33जाते हैं। तो इन तीन उदाहरण से हमको देखने
- 3:06:35को पता चलता है कि वह एक महान राजनीतिज्ञ
- 3:06:38थी और कूटनीति का जवाब कूटनीति से देना
- 3:06:40जानती थी। इनमें से प्रश्न भी बनेंगे याद
- 3:06:43रखिएगा। महाजी सिंधिया के साथ उनके अच्छे
- 3:06:45संबंध थे। कई समय पर महाजी सिंधिया ने
- 3:06:47उनसे मदद ली और उन्होंने मांझी सिंधिया की
- 3:06:49मदद की। अब आगे बढ़ते हैं।
- 3:06:52दूसरा उनका काम है दूसरा जो पहलू है वो है
- 3:06:55उनको लोक कल्याणकारी कार्यों के रूप में
- 3:06:57देखना या जन कल्याणकारी कार्य आप ऐसे समझ
- 3:07:00लीजिए कि उनका एकमात्र बेटा जिसकी मृत्यु
- 3:07:03हो चुकी है। उनके पति की मृत्यु हो चुकी
- 3:07:05है। उनकी बेटी की मृत्यु हो चुकी। उनके
- 3:07:06दामाद की मृत्यु हो चुकी। तो उनका कोई
- 3:07:08नहीं है। तो उन्होंने क्या कर लिया कि जो
- 3:07:11समस्त प्रजा है जो उनके राज्य की जो समस्त
- 3:07:14प्रजा है उनका राज्य तो छोड़िए। समस्त देश
- 3:07:17की जो जनता थी उस समय पूरे देश को
- 3:07:19उन्होंने अपनी जनता मान लिया अपना पुत्र
- 3:07:21मान लिया और समस्त प्रजा के लिए लोक
- 3:07:24कल्याणकारी कार्य किए और जो अपना खजाना है
- 3:07:27पूरा उस खजाने का जो द्वार है पूरा लोक
- 3:07:30कल्याणकारी कार्यों के लिए खोल दिया। यानी
- 3:07:32देश में कोई भी मंदिर टूटा हो। मैं अभी
- 3:07:35दो-तीन दिन पहले ही महेश्वर गया था।
- 3:07:37बाकायदा एक मैप बना हुआ है कि उन्होंने
- 3:07:39देश के किन-किन मंदिरों का निर्माण
- 3:07:40करवाया, किनको दान दिया, किनकी मरम्मत
- 3:07:42करवाई। तो देखो लगभग उन्होंने 30 साल शासन
- 3:07:45किया। अपने 30 वर्ष के शासनकाल में
- 3:07:47अहिल्याबाई ने अनेकों मंदिर, मंदिर,
- 3:07:50घाटों, धर्मशालाओं, बाबड़ियों, कुओं आदि का
- 3:07:53निर्माण करवाया। यानी हर वो जरूरत की चीज
- 3:07:57जो आम आदमी के लिए है, सड़कों का निर्माण
- 3:07:59करवाया। पेड़ लगवाए सड़कों पे, छांव के
- 3:08:01लिए। कुएं बनवाए, तालाब बनवाए, घाट बनवाए।
- 3:08:04सारी चीजों का निर्माण उन्होंने करवाया।
- 3:08:06सराय यानी धर्मशालाओं का निर्माण उन्होंने
- 3:08:08करवाया। अहिल्याबाई होलकर ने देश भर में
- 3:08:10लगभग 65 मंदिरों का निर्माण करवाया। 65
- 3:08:13टेंपल्स उन्होंने बनवाए थे। जिनमें काशी
- 3:08:17का विश्वनाथ मंदिर जो सबसे प्रसिद्ध मंदिर
- 3:08:19है काशी विश्वनाथ मंदिर। गुजरात का सोमनाथ
- 3:08:21मंदिर जो कि सबसे प्रसिद्ध शिवलिंग है
- 3:08:23भारत का। इसके अलावा गया का विष्णुपद
- 3:08:26मंदिर है। कांगड़ा का बैजनाथ मंदिर है।
- 3:08:29याद रखिएगा। एलोरा के गणेश्वर मंदिर का
- 3:08:32जीर्णोद्धार करवाया। यह मंदिर उन्होंने
- 3:08:34नहीं बनवाए। इन मंदिरों की उन्होंने
- 3:08:35मरम्मत करवाई क्योंकि ये किसी ना किसी
- 3:08:38कारण से टूट गए थे। औरंगजेब के शासनकाल
- 3:08:40में सोमनाथ मंदिर को काशी विश्वनाथ मंदिर
- 3:08:42को तोड़ दिया गया था। तो इन मंदिरों की
- 3:08:44उन्होंने पुनः मरम्मत करवाई या
- 3:08:45जीर्णोद्धार करवाया। इसके अलावा उज्जैन
- 3:08:48हरिद्वार, नासिक, अयोध्या, कांची,
- 3:08:50द्वारका, बद्रीनाथ, केदारनाथ आदि स्थानों
- 3:08:52पर कई मंदिरों का निर्माण करवाया।
- 3:08:54अहिल्याबाई द्वारा सोमनाथ, काशी विश्वनाथ,
- 3:08:56बद्रीनाथ, केदारनाथ सहित अन्य प्रमुख
- 3:08:58तीर्थ स्थलों पर कई निर्माण कार्य करवाए
- 3:09:00गए। जो आप देख रहे हैं ना ये वही मंदिर है
- 3:09:03बद्रीनाथ और केदारनाथ उत्तराखंड वाले देश
- 3:09:06के प्रत्येक कोने में नॉर्थ से ले साउथ और
- 3:09:08ईस्ट से ले वेस्ट तक जगह-जगह पर उन्होंने
- 3:09:10मंदिर बनवाए पुराने मंदिरों का पुनः
- 3:09:12निर्माण करवाया घाटों का निर्माण करवाया
- 3:09:14ये सारी चीजें उन्होंने बनवाई अब आते हैं
- 3:09:16उनके सबसे इंपॉर्टेंट क्वेश्चन पर इसमें
- 3:09:19से सारे क्वेश्चन बनेंगे एमपीपीएससी के
- 3:09:21लिए याद रखना ये जो मंदिर मैंने बताए ये
- 3:09:22सब आपको याद रखना पड़ेगा खासकर गया का
- 3:09:24विष्णुपद मंदिर जो अलग से भी बताता हूं
- 3:09:26अभी अहिल्याबाई ने महेश्वर के निकट अपनी
- 3:09:30राजधानी का निर्माण करवाया और वहां पर
- 3:09:32सुंदर घाट और अन्य स्थापत्य का निर्माण
- 3:09:35करवाया। यानी जैसा मैंने आपको बताया कि
- 3:09:37महेश्वर उन्होंने अपनी राजधानी बनवाई। ठीक
- 3:09:39है? देखो बनारस का एक बहुत ही प्रसिद्ध
- 3:09:43घाट है जिसका नाम है मणिकर्णिका घाट। तो
- 3:09:45मणिकर्णिका घाट बनारस में किसने बनवाया
- 3:09:47था? देवी अहिल्याबाई होलकर ने। गया का
- 3:09:50अष्टपदी मंदिर का निर्माण किसने करवाया
- 3:09:51था? अहिल्याबाई होलकर ने। महेश्वर घाट का
- 3:09:54निर्माण किसने करवाया था? अहिल्याबाई
- 3:09:55होलकर ने। महेश्वर के निकट किले का
- 3:09:58निर्माण किसने करवाया? अहिल्याबाई होलकर
- 3:09:59ने राजधानी इंदौर से महेश्वर कौन ले गई?
- 3:10:02अहिल्याबाई होलकर। तो ये सारे जो पॉइंट्स
- 3:10:04आप देख रहे हैं वो एग्जाम के लिए बहुत ही
- 3:10:06ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अब मैं आपको कुछ और
- 3:10:09काम उनके बताने वाला हूं शिव भक्त के रूप
- 3:10:11में।
- 3:10:15सॉरी
- 3:10:17अगर हम देखेंगे कि अहिल्याबाई होलकर के
- 3:10:19इन्हीं जन कल्याणकारी कार्यों के कारण
- 3:10:21जनता उनको क्या कहने लगी? देवी के नाम से
- 3:10:24संबोधित करने लगी। और उनकी उपलब्धियों को
- 3:10:26देखने के लिए देखते हुए जो अभी वर्तमान
- 3:10:29गवर्नमेंट रही हैं भारत मध्य प्रदेश सरकार
- 3:10:31की उनके द्वारा कई सारे सम्मान कई सारी
- 3:10:34योजनाएं और इंदौर का नामकरण भी चेंज किया
- 3:10:36गया। जैसे कि 1995 में याद रखिएगा भारत
- 3:10:40सरकार ने उनके नाम पर एक डाक टिकट जारी
- 3:10:43किया था भारत सरकार ने। इंदौर स्थित जो
- 3:10:46विश्वविद्यालय है जिसका नाम है देवी
- 3:10:48अहिल्याबाई होलकर विश्वविद्यालय। तो उनके
- 3:10:50नाम पर इंदौर का विश्वविद्यालय का नाम कर
- 3:10:52दिया गया। साथ में जो इंदौर का हवाई अड्डा
- 3:10:54है उसका नाम भी क्या कर दिया गया? देवी
- 3:10:56अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा। तो एयरपोर्ट
- 3:11:00प्लस विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर
- 3:11:02किया गया है। साथ ही अगर हम देखें तो मध्य
- 3:11:04प्रदेश की जो सबसे प्रसिद्ध शहर है इंदौर।
- 3:11:07इंदौर को महा मां अहिल्याबाई नगरी यानी
- 3:11:11इंदौर का जो नाम है वह अहिल्याबाई नगरी के
- 3:11:13नाम से जाना जाता है। इस प्रकार याद
- 3:11:15रखिएगा। उनके शासनकाल की जो तुलना है वह
- 3:11:18ब्रिटेन की साम्राज्ञ जो थी ब्रिटेन की
- 3:11:20महान महारानी थी जिनका नाम था एलिजाबेथ
- 3:11:23कैथरीन ऑफ एलिजाबेथ से उनकी तुलना की जाती
- 3:11:26है यानी हमारी अहिल्याबाई होलकर के
- 3:11:28शासनकाल की तुलना इंग्लैंड की एक महारानी
- 3:11:30से की जाती है क्योंकि उनका शासनकाल काफी
- 3:11:32प्रसिद्ध रहा। अब आ जाते हैं आगे एक लास्ट
- 3:11:34पार्ट है। जैसे अगर आपने देखा होगा कि
- 3:11:38उनके द्वारा ज्यादातर देश के शिवलिंगों का
- 3:11:40निर्माण करवाया यानी शिवालयों का निर्माण
- 3:11:43करवाया। इसीलिए हम ये कहते हैं कि वो एक
- 3:11:44महान शिव भक्त थी। फिर भी इस बात को मैं
- 3:11:47इस तरीके से तीनों पार्ट में इसलिए बता
- 3:11:48रहा हूं क्योंकि अगर मुख्य परीक्षा में
- 3:11:50आपको लिखने को मिले तो आप किस तरीके से
- 3:11:52बताएंगे? एक शिव भक्त के रूप में, एक लोक
- 3:11:54कल्याणकारी कार्यों के रूप में और एक
- 3:11:56कूटनीतिक के रूप में उनका परिचय आप कैसे
- 3:11:58देंगे? अहिल्याबाई होलकर
- 3:12:02याद रखिएगा अहिल्याबाई जो होलकर हैं वो
- 3:12:05धार्मिक एवं दार्शनिक प्रवृत्ति की महिला
- 3:12:08थी। इसीलिए उन्हें दार्शनिक रानी भी कहा
- 3:12:10जाता है। अहिल्याबाई स्वभाव से शिव भक्त
- 3:12:12थी। याद रखिएगा महान शिव भक्त थी। इसी
- 3:12:15कारण उन्होंने अपनी राजधानी नर्मदा के तट
- 3:12:18पर बनाई और वहां पर महेश्वर का मंदिर
- 3:12:20बनवाया जो कि एक शिवलिंग है।
- 3:12:24उन्होंने संपूर्ण भारत में मुख्यता शिव
- 3:12:27मंदिरों एवं अनेक घाटों का निर्माण कराया।
- 3:12:30जिसमें अभी आपको बताया था कौन-कौन से
- 3:12:32मंदिर प्रमुख थे। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ
- 3:12:35आदि जो भारत के प्रसिद्ध शिवलिंग हैं उनका
- 3:12:37निर्माण करवाया था। शिव मंदिरों का
- 3:12:39निर्माण। इसके अलावा गया, अयोध्या, मथुरा,
- 3:12:41हरिद्वार ये सारी बातें रिपीट हो गई हैं
- 3:12:44और कुछ घाटों का निर्माण भी उनके द्वारा
- 3:12:46करवाया गया था। वो राज्य का प्रबंधन
- 3:12:48अहिल्याबाई ने एक ट्रस्टी के रूप में
- 3:12:49किया। देवी अहिल्याबाई का एक सेंटेंस अभी
- 3:12:52मैं आपको बताऊंगा। उन्होंने कहा था कि जो
- 3:12:54समस्त उनका राज्य है उसकी वैसे तो वह
- 3:12:56मालिक हैं। लेकिन उन्होंने कहा मैं केवल
- 3:12:57एक ट्रस्टी हूं और ट्रस्टी के रूप में
- 3:12:59उन्होंने शासन किया। पूरा का पूरा जो काम
- 3:13:01है उन्होंने अपने किसके लिए किया था? अपनी
- 3:13:03प्रजा के लिए कर दिया।
- 3:13:06डॉ. हीरालाल शर्मा एक इतिहासकार हैं। वो
- 3:13:08उनके बारे में लिखते हैं और जानते हैं
- 3:13:10क्या लिखते हैं उनके बारे में। उनके बारे
- 3:13:11में लिखते हैं और कहते हैं कि अहिल्याबाई
- 3:13:14होलकर ने अहिल्याबाई होलकर एक श्रेष्ठ एवं
- 3:13:17आदर्श शासिका थी। जिन्होंने अपनी प्रजा के
- 3:13:19लिए सच्चे अर्थ में राम राज्य की शुरुआत
- 3:13:21की। अतः भारतीय इतिहास में उनका नाम सदैव
- 3:13:24स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा। ये
- 3:13:26स्टेटमेंट पूछा जाए किसने कहा था? तो याद
- 3:13:28रखिएगा डॉ. हीरालाल शर्मा। इसके अलावा एक
- 3:13:31अंग्रेज अधिकारी है जिसका नाम था जॉन
- 3:13:33मेलकम। जॉन मेलकम ने अपनी एक मेमोरी लिखी
- 3:13:36थी जिसका नाम है मेमोरी ऑफ मालवा। उसमें
- 3:13:38उनके बारे में लिखा। देखें क्या लिखा है।
- 3:13:41वो लिखता है कि अहिल्याबाई के लिए जो कुछ
- 3:13:44कहा जाता है वह निसंदेह ठीक है। उसमें
- 3:13:47संदेह को स्थान नहीं है। वास्तव में वह एक
- 3:13:49अद्वितीय और असाधारण मूर्ति थी। उनको
- 3:13:52अभिमान बिल्कुल भी नहीं था। उनको अभिमान
- 3:13:54छू तक ना पाया था। धर्म में कट्टर होते
- 3:13:56हुए भी सहनशीलता की वह उज्जवल प्रतिमा थी।
- 3:14:00यद्यपि वह एक तंत्री शासिका थी। तथापि
- 3:14:03उनके प्रत्येक कार्य में उच्च विवेक,
- 3:14:04अद्वितीय नीतिमत्ता और धर्म की छाप रहती
- 3:14:07थी। यही कारण है कि आज भी मालवा में लोग
- 3:14:10उन्हें देवी के नाम से या ईश्वरीय अवतार
- 3:14:13के नाम से संबोधित करते हैं। तो यह थी
- 3:14:17हमारी देवी अहिल्याबाई होलकर। अब इनका
- 3:14:19लास्ट थोड़ा सा पार्ट मैं आपको बताना
- 3:14:21चाहता हूं जो मेरा अनुभव रहा है अभी।
- 3:14:23देखिए यहां पर कुछ चीजें आपको दिख रही
- 3:14:25होंगी जिसमें एक पिक्चर में मैं दिख रहा
- 3:14:27हूं। देखिए ये महेश्वर स्थित उनकी एक
- 3:14:29स्टैचू बनी है। ये स्टैचू कहां पर है?
- 3:14:32महेश्वर में है। याद रखिएगा। ये जो आप देख
- 3:14:35रहे हैं ये उनकी समाधि है। 1795 में उनकी
- 3:14:38मृत्यु हुई थी और उनकी मृत्यु के बाद जो
- 3:14:40उनकी समाधि है। याद रखिएगा। उनकी समाधि
- 3:14:43कहां पर है? तो उनकी समाधि महेश्वर में
- 3:14:45बनी है। जिस तस्वीर के सामने जिस
- 3:14:47स्ट्रक्चर के सामने मैं खड़ा हूं ये उनकी
- 3:14:49समाधि है। तो उनकी समाधि कहां पर है?
- 3:14:51महेश्वर में है। आप जानते हो उनकी समाधि
- 3:14:53पर जो उनकी मूर्ति है उस मूर्ति के बाहर
- 3:14:56उनके वर्ड लिखे हुए हैं। उनके वर्ड एज इट
- 3:14:58इज़ जानते हो क्या है? वो लिखती हैं।
- 3:15:00उन्होंने कहा कि ईश्वर ने मुझ पर जो उत्तर
- 3:15:03दायित्व सौंपा है उसे मुझे निभाना है।
- 3:15:05मेरा काम प्रजा को सुखी रखना है। मैं अपने
- 3:15:08प्रत्येक काम के लिए जिम्मेदार हूं।
- 3:15:10सामर्थ्य और सत्ता के बल पर मैं जहां जो
- 3:15:14कुछ भी कर रही हूं उसका ईश्वर के यहां
- 3:15:16मुझे जवाब देना होगा। मेरा यहां कुछ नहीं
- 3:15:19है। जिसका है उसी के पास भेजती हूं। जो
- 3:15:22कुछ लेती हूं वह मेरे ऊपर कर्ज है। ना
- 3:15:25जाने मैं कैसे चुका पाऊंगी। तो ये उनके
- 3:15:28वर्ड हैं जो उनकी समाधि पर लिखे हैं। देवी
- 3:15:30अहिल्याबाई होलकर जिन्होंने समस्त प्रजा
- 3:15:33को अपनी संतानवत प्रेम किया और समस्त
- 3:15:35प्रजा के कल्याण के लिए अनेक कार्य करवाए।
- 3:15:38कुएं, मंदिर, तालाब, घाट, सराय, सड़कें सब
- 3:15:42बनवाया। इसीलिए लोग उन्हें किसके नाम से?
- 3:15:44देवी के नाम से जानते हैं। एक और खास बात
- 3:15:46ये दोनों बातें कहां पर हो गई? महेश्वर
- 3:15:48में मूर्ति भी और यह समाधि भी। यह जो आप
- 3:15:51देख रहे हैं,
- 3:15:53यह महेश्वर का किला है।
- 3:15:56और इस महेश्वर किले का निर्माण भी हमारी
- 3:15:58किसने करवाया है? देवी अहिल्याबाई होलकर
- 3:16:01ने करवाया है। यह नर्मदा नदी के तट पर है
- 3:16:04और बिल्कुल इसके जस्ट सामने नर्मदा नदी
- 3:16:06है। आप बिलीव नहीं मानेंगे। अभी जब मैं
- 3:16:09महेश्वर गया तो मुझे समझ में आया कि लोग
- 3:16:11उन्हें क्यों देवी कहते हैं। तो पहले तो
- 3:16:13यह फोर्ट है। फोर्ट तो चलिए सभी बनवाते
- 3:16:16हैं। लेकिन फोर्ट के अंदर जब हम यहां से
- 3:16:18ऊपर कर जाते हैं तो ये उनकी सबसे पहले
- 3:16:20समाधि मिलती है और एक हिस्से में इसके
- 3:16:23यहां पर उनका एक सिंहासन बना हुआ है जहां
- 3:16:25वो बैठती थी। और आप बिलीव नहीं मानेंगे जब
- 3:16:27मैं वहां गया तो इतना सिंपल था सब कुछ। यह
- 3:16:30देखिए एक सामान्य सी गद्दी है जहां पर वो
- 3:16:32यहां बैठती थी। यहां पर उनका सिंहासन लगता
- 3:16:35था। जहां पर बैठकर वो न्याय करती थी। और
- 3:16:37ये जो पूरा स्ट्रक्चर आप देख रहे हैं बगल
- 3:16:39का ऐसा लगेगा कि एक बहुत सामान्य सी एक वो
- 3:16:42बनी हुई है ना कोई बड़ा महल सा बना है
- 3:16:44बहुत सामान्य सा है जैसे एक संत की कुटिया
- 3:16:46होती हो तो मतलब यह है कि उन्होंने अपने
- 3:16:49जीवन को एक संत प्रवृत्ति का रखा हुआ था
- 3:16:51बहुत सामान्य सी उनकी दिनचर्या थी जिस
- 3:16:53तरीके से वो रहती थी और एक चीज जो हम
- 3:16:56जानते हैं उनके बारे में यह तस्वीर जरूर
- 3:16:58देखिएगा हम जब पढ़ते हैं उनके बारे में तो
- 3:17:00हम यह पढ़ते हैं कि महेश्वर में उनके
- 3:17:02द्वारा उस समय साड़ी उद्योग स्थापित
- 3:17:05करवाया गया था जिससे कि महेश्वर की जो
- 3:17:07जनता है उसको रोजगार मिल सके। साड़ी
- 3:17:10उद्योग स्थापित किया गया था और उनके
- 3:17:12द्वारा स्थापित साड़ी उद्योग आज भी वैसे
- 3:17:16ही चल रहा है जैसे उनके द्वारा स्थापित
- 3:17:18किया गया था। यह जो तस्वीर है यह वहां के
- 3:17:21साड़ी उद्योग की है जो उनके किले के अंदर
- 3:17:23ही है। यानी महेश्वर में आज भी उस किले के
- 3:17:26अंदर वो साड़ी उद्योग चल रहा है जो उस समय
- 3:17:28से उनके द्वारा स्थापित किया गया था जिससे
- 3:17:30उनके लोगों को रोजगार मिले। तो इसीलिए
- 3:17:33महेश्वर की साड़ियां बहुत प्रसिद्ध हैं।
- 3:17:35मध्य प्रदेश में दो जगह की साड़ियां
- 3:17:37प्रसिद्ध हैं। एक चंदेरी की और एक महेश्वर
- 3:17:39की। तो ये महेश्वर की साड़ी हैं और ये
- 3:17:41साड़ियां उसी महेश्वर के किले में बनती
- 3:17:44हैं। और यह जो जगह है उनके सिंहासन से
- 3:17:46मतलब उनका जो दरबार लगता था जहां वो बैठती
- 3:17:49थी उसके पास में ही है। तो ये पूरा का
- 3:17:51पूरा जो चैप्टर था जो मैंने अभी आप लोगों
- 3:17:54को बताया। यह था हमारे देवी या लोकमाता
- 3:17:58जिनका नाम है देवी अहिल्याबाई होलकर के
- 3:18:00बारे में। मुझे उम्मीद है आप लोगों को जो
- 3:18:03कुछ मैंने अभी बताया देवी अहिल्याबाई
- 3:18:05होलकर के बारे में वह आपको बहुत अच्छे से
- 3:18:07समझ में आया होगा कि देवी अहिल्याबाई
- 3:18:09होलकर कौन थी? उनके पिता का नाम क्या था?
- 3:18:12माता का नाम क्या था? उनकी शादी किससे हुई
- 3:18:14थी? उनके बेटे का नाम, बेटी का नाम, दामाद
- 3:18:17का नाम और कैसे वो जो है गद्दी पर बैठती
- 3:18:20हैं? और उनके शासन में सबसे ज्यादा मदद की
- 3:18:24थी उनके सेनापति जिनका नाम था तुकोजीराव
- 3:18:26होलकर ने। महान शिव भक्त के रूप में एक और
- 3:18:29इंपॉर्टेंट बात थी जो शायद इसमें मिस हो
- 3:18:30गई कि उन्होंने मंदिर तो बनवाए, शिवालय तो
- 3:18:32बनवाए, मंदिरों की मरम्मत तो करवाई लेकिन
- 3:18:35उन्होंने ऐसे सिक्के भी चलवाए थे जिन
- 3:18:37सिक्कों पर नंदी, त्रिशूल और शिवलिंग बना
- 3:18:40था। तो कभी पूछा जाए कि शिवलिंग वाले
- 3:18:42सिक्के याद रखिएगा होल किस होलकर शासक ने
- 3:18:45चलवाए थे? तो वो हैं हमारी अहिल्याबाई
- 3:18:47होलकर। और उनके इन्हीं कार्यों की वजह से
- 3:18:49उनके और यह एक और चीज थी इनकी कि यह न्याय
- 3:18:52के लिए भी बड़ी प्रसिद्ध थी। बहुत
- 3:18:53न्यायप्रिय शासिका थी। इसीलिए इन्हें भारत
- 3:18:55की आदर्श शासिका के तौर पर जाना जाता है।
- 3:18:58मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को जो कुछ
- 3:19:00मैंने बताया देवी अहिल्याबाई होलकर के
- 3:19:02बारे में वो आपको अच्छा लगेगा। अब मैं
- 3:19:03आपको दो क्वेश्चन पूछता हूं जो आपको कमेंट
- 3:19:05सेक्शन में बताना है। एक प्रश्न है। आपको
- 3:19:08बताना है कि उनके दामाद का नाम क्या था?
- 3:19:10अगर आपने ये पूरा वीडियो देखा है तो आप
- 3:19:12उनके दामाद का नाम कमेंट सेक्शन में
- 3:19:14बताएंगे। और दूसरा एक क्वेश्चन आपको बताना
- 3:19:16है कि
- 3:19:18दूसरा आपको एक क्वेश्चन बना बताना है कि
- 3:19:20गया में उन्होंने किस मंदिर का निर्माण
- 3:19:22करवाया था? तो गया के किस प्रसिद्ध मंदिर
- 3:19:25का निर्माण करवाया था? यह कमेंट सेक्शन
- 3:19:26में बताइएगा और उनके दामाद का नाम क्या
- 3:19:29था? यह कमेंट सेक्शन में बताइएगा। मिलते
- 3:19:31हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए जय
- 3:19:34हिंद। थैंक यू।
- 3:19:49नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एमपीपीएससी
- 3:19:52स्टडी आई के पर बहुत-बहुत स्वागत है।
- 3:19:54उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन
- 3:19:56लगाकर पढ़ रहे होंगे। दोस्तों, आप सभी को
- 3:19:59यह सीरीज काफी पसंद आ रही है। मैंने आप
- 3:20:01लोगों का फीडबैक देखा और इसी क्रम में मैं
- 3:20:04आपके लिए लाया हूं एक बहुत ही इंपॉर्टेंट
- 3:20:07व्यक्तित्व जिनका नाम है रानी कमलापति।
- 3:20:09देखिए रानी कमलापति कौन है? आपने यह
- 3:20:11थंबनेल देख लिया होगा। इन्हें भोपाल की
- 3:20:14अंतिम हिंदू रानी या अंतिम एक गोंड रानी
- 3:20:16के तौर पर जाना जाता है। रानी कमलापति का
- 3:20:19जो इतिहास है वह काफी फेमस है और इनका
- 3:20:22इतिहास में अपना एक योगदान है मध्य प्रदेश
- 3:20:24के हम सब जानते हैं कि वर्तमान में जो
- 3:20:26हमारी मध्य प्रदेश सरकार है उसने इनके नाम
- 3:20:28पर कुछ चेंजेस भी किए हैं और एग्जाम से
- 3:20:31रिलेटेड भी हैं। तो आज का जो हमारा टॉपिक
- 3:20:33है इसमें हम जानेंगे भोपाल की प्रसिद्ध
- 3:20:36रानी कमलापति के बारे में जिन्हें भोपाल
- 3:20:38की अंतिम हिंदू रानी भी माना जाता है। आइए
- 3:20:40शुरुआत करते हैं। भोपाल की अंतिम रानी।
- 3:20:42देखिए कितनी खूबसूरत रानी है रानी कमलापति
- 3:20:45जिनका यह स्टैचू बना हुआ है भोपाल में। तो
- 3:20:47सबसे पहले समझते हैं कि आखिर यह रानी
- 3:20:49कमलापति कौन थी और इनका संबंध किस जगह से
- 3:20:52है। देखिए अगर हम बात करें 18वीं शताब्दी
- 3:20:55में जो रानी कमलापति थी वो शासन करती थी
- 3:20:58भोपाल पर। ठीक है? और इन्हें जो है इस
- 3:21:01क्षेत्र की गोंड रानी के नाम से जाना जाता
- 3:21:03है। यानी गोंड रानी के रूप में प्रसिद्ध
- 3:21:05थी। इनके जो पति थे उनका नाम था निजाम
- 3:21:07शाह। और निजाम शाह की टोटल सात पत्नियां
- 3:21:09थी और उन सात पत्नियों में सबसे खूबसूरत
- 3:21:12और महत्वपूर्ण पत्नी थी जिनका नाम था रानी
- 3:21:14कमलापति जिन्हें निजाम शाह अत्यधिक प्रेम
- 3:21:16करते थे। ठीक है? अब आगे क्या होता है कि
- 3:21:19जो रानी कमलापति हैं याद रखिएगा ये मैंने
- 3:21:22आपको बता दिया बेसिक सा। अब हम उनके
- 3:21:24बायोडाटा के बारे में बात करते हैं। फिर
- 3:21:25हम यह समझेंगे आखिर क्यों इतिहास में उनका
- 3:21:28योगदान है और क्या वजह है जिसकी वजह से वो
- 3:21:31इतनी चर्चित हैं। देखिए सबसे पहले जन्म की
- 3:21:33बात करते हैं। रानी रानी कमलापति का जन्म
- 3:21:35कहां और कब कैसे हुआ था। देखिए एक जगह है
- 3:21:38जिसका नाम है सलकनपुर। आप सब ने सुना होगा
- 3:21:40सलकनपुर काफी फेमस है यहां पे जो मंदिर है
- 3:21:42उसकी वजह से। सलकनपुर जिला सिहौर। यहां पर
- 3:21:45रियासत हुआ करती आप सलकनपुर रियासत बोल
- 3:21:48सकते हैं या इसे सीहोर रियासत बोल सकते
- 3:21:50हैं। इस रियासत के एक राजा थे जिनका नाम
- 3:21:52था कृपाल सिंह सरौतिया। कहीं-कहीं पर इनके
- 3:21:56जो पिता हैं उनका नाम कृपाराम चौधरी मिलता
- 3:21:58है। कृपाराम चौधरी एक्चुअली में या तो
- 3:22:01इन्हें आप कृपाराम चौधरी कह लो या यही है
- 3:22:03कृपाल सिंह सरतिया। कृपाल सिंह को
- 3:22:06कहीं-कहीं कृपाराम लिख गया है। तो वह
- 3:22:08कृपाल सिंह सरौतिया हैं जो कि सलकनपुर
- 3:22:10रियासत के राजा थे। सलकनपुर रियासत एक
- 3:22:13छोटी रियासत उस रियासत के राजा थे और
- 3:22:15इन्हीं के शासनकाल में याद रखिएगा इनके
- 3:22:18शासनकाल में जो सलकनपुर की प्रजा थी काफी
- 3:22:20खुश थी संपन्न थी और उनके यहां एक खूबसूरत
- 3:22:23कन्या का जन्म होता है। यानी सलकनपुर के
- 3:22:26जो राजा हैं जिनका नाम क्या है? कृपाल
- 3:22:28सिंह सरोतिया कहीं-कहीं इनका नाम कृपाराम
- 3:22:30चौधरी भी मिलता है। और इन्हीं के यहां एक
- 3:22:32कमल जैसी कन्या का जन्म होता है। याद
- 3:22:35रखिएगा वह बचपन से ही कमल की तरह बहुत
- 3:22:37सुंदर थी। इसीलिए उनका नाम रखा गया
- 3:22:39कमलापति।
- 3:22:41ठीक है? उनकी सुंदरता को देखते हुए उनका
- 3:22:43नाम क्या रखा गया? कमलापति रखा गया। तो
- 3:22:45इसमें आपको तीन बातें मिल गई कि वो किसकी
- 3:22:47पुत्री हैं? किस राज्य से संबंधित थी। ठीक
- 3:22:49है? याद रखिएगा। अब आप ये देखेंगे कि जब
- 3:22:52उनका संबंध एक राज परिवार से है तो उनका
- 3:22:54पालन-पोषण कैसे होगा? योद्धा की तरह होगा।
- 3:22:56तो देखिएगा ध्यान से सुनिएगा आगे क्या है
- 3:22:59कि वह बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और साहसी
- 3:23:01थी। शिक्षा, घुड़सवारी, मल युद्ध। मल
- 3:23:04युद्ध होता है यानी इंडिविजुअल जो फाइट
- 3:23:06होती है। ठीक है? और तीर कमान चलाने में
- 3:23:09वह उन्हें महारत हासिल थी। यानी वह बहुत
- 3:23:11ही योग्य थी। इसके अलावा उन्होंने अनेक
- 3:23:14कलाओं में पारंगत होकर कुशल प्रशिक्षण
- 3:23:16प्राप्त कर सेनापति बनी। यानी अपने पिता
- 3:23:19के सैन्य अभियानों में उन्होंने योगदान
- 3:23:21किया था। ठीक है? और पिता के सैन्य बल के
- 3:23:23साथ-साथ अपने महिला साथी दल के साथ
- 3:23:25युद्धों में शत्रुओं से लोहा लेती थी। तो
- 3:23:27कुल मिलाकर उनका पालन-पोषण एक योद्धा की
- 3:23:29तरह हुआ। एक सेनापति की तरह हुआ और उनके
- 3:23:31अंदर एक कुशल नेतृत्व की भावना भी थी।
- 3:23:34पड़ोसी राज्य अक्सर खेत खलियान धन संपत्ति
- 3:23:37लूटने के लिए आक्रमण किया करते थे और
- 3:23:39सलकनपुर याद रखिएगा और सलकनपुर राज्य की
- 3:23:42देखरेख करने की पूरी जिम्मेदारी राजा
- 3:23:44कृपाल सिंह सरतिया और उनकी राजकुमारी
- 3:23:46कमलापति पर थी। यानी जितने भी पड़ोसी
- 3:23:49राज्य सलकनपुर पर आक्रमण करते थे। तो
- 3:23:51सलकनपुर के जो राजा हैं कौन? याद रखिएगा
- 3:23:54कृपाल सिंह सरतिया और उनकी जो पुत्री हैं
- 3:23:57कौन? कमलापति वो युद्ध में नेतृत्व करती
- 3:23:59थी और पड़ोसी राजाओं को डिफीट करती थी।
- 3:24:01इसके बाद कहानी में ट्विस्ट आता है और
- 3:24:04धीरे-धीरे राजकुमारी बड़ी होने लगती हैं।
- 3:24:06फिर राजकुमारी की शादी की बात आएगी।
- 3:24:09राजकुमारी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और
- 3:24:11उनकी खूबसूरती की चर्चा चारों दिशाओं में
- 3:24:13होने लगी। इसी सलकनंदपुर राज्य के पास में
- 3:24:15एक राज्य था बाड़ी राज्य बोल सकते हो या
- 3:24:17बाड़ी का किला बोलते हैं। तो जो बाड़ी
- 3:24:20किले का जमींदार था और उस जमींदार का जो
- 3:24:22लड़का है उसका नाम था चैन सिंह। याद
- 3:24:24रखिएगा चैन सिंह इस स्टोरी में एक विलेन
- 3:24:27है। ठीक है? कौन है? एक विलेन है चैन
- 3:24:30सिंह। तो चैन सिंह बाड़ी किले का जमींदार
- 3:24:32का लड़का था जो कृपाल सिंह सरौतिया का
- 3:24:35रिश्ते में भांजा भी लगता था। वह
- 3:24:37राजकुमारी कमलापति से विवाह करने की इच्छा
- 3:24:39रखता था। लेकिन इस छोटे से गांव के
- 3:24:42जमींदार से राजकुमारी कमलापति ने शादी
- 3:24:44करने से क्या कर दिया? मना कर दिया। याद
- 3:24:47रखिएगा जब कोई व्यक्ति किसी को मना करता
- 3:24:49है किसी चीज के लिए तो सामने वाला उससे
- 3:24:52बदला लेना चाहता है और यह जो राजकुमारी
- 3:24:55कमलापति ने जैसे ही जो बाड़ी का जो
- 3:24:58राजकुमार है या बाड़ी का जो किले के
- 3:24:59जमींदार का जो लड़का है जिसका नाम क्या
- 3:25:01है? चैन सिंह इसको जैसे ही मना किया रानी
- 3:25:05तो खुश हैं क्योंकि उनकी शादी इससे नहीं
- 3:25:07होती हैं लेकिन चैन सिंह उनसे ईर्ष्या
- 3:25:09रखने लगता है और बदला लेने की भावना हमेशा
- 3:25:12जीवन में रखे रहता है। आगे क्या होता है
- 3:25:14देखिए इसी समय 16वीं सदी में भोपाल से 55
- 3:25:18कि.मी. दूर 750 गांवों को मिलाकर एक राज्य
- 3:25:22था जिसका नाम था गिन्नौरगढ़ रियासत।
- 3:25:24दोस्तों गिन्नौरगढ़ रियासत जो है वर्तमान
- 3:25:27सिहौर का पार्ट है। तो गिन्नौरगढ़ रियासत
- 3:25:29जो थी उसमें 750 गांव आते थे और इस गांव
- 3:25:32के जो राजा है उनका नाम है निजाम शाह
- 3:25:34जिनसे रानी कमलावती का विवाह होने वाला
- 3:25:36है। ठीक है? तो जो देहलावाड़ी के पास आता
- 3:25:39था इसके राजा थे सुराज सिंह शाह और इन्हीं
- 3:25:42का लड़का है। याद रखिएगा इनके पुत्र थे
- 3:25:44निजाम शाह जो बहुत बहादुर निडर तथा हर
- 3:25:48कार्य में क्या थे? निपुण थे। उन्हीं से
- 3:25:50रानी कमलावती का विवाह हुआ और बाद में
- 3:25:53इनका एक पुत्र होता है जिसका नाम होता है
- 3:25:55नवल शाह। यानी हमारी इस स्टोरी में चार
- 3:25:58कैरेक्टर हैं। नंबर वन है निजाम शाह।
- 3:26:02निजाम शाह राजा हैं और निजाम शाह की जो
- 3:26:05पत्नी है उनका नाम क्या है? रानी कमलापति।
- 3:26:08रानी कमलापति का एक लड़का है। रानी
- 3:26:11कमलापति। इन दोनों का एक लड़का है। याद
- 3:26:13रखिएगा। और उस पुत्र का नाम क्या है?
- 3:26:16नवलसा। ये तीन कैरेक्टर बहुत इंपॉर्टेंट
- 3:26:18है और इसमें खलनायक की भूमिका में दो नायक
- 3:26:21आएंगे। दो लोग हैं खलनायक। एक है चैनसा
- 3:26:24शाह। याद रखिएगा। चैनसा कौन है? बाड़ी का
- 3:26:27जमींदार है और दूसरा खलनायक आएगा चैन शाह
- 3:26:31के बाद जिसका नाम होगा दोस्त मोहम्मद। तो
- 3:26:33ये चार नाम आपको याद रखना है इस स्टोरी
- 3:26:35में। निजाम शाह जिनकी पत्नी है रानी
- 3:26:37कमलापति और उनसे एक पुत्र होता है जिसका
- 3:26:39नाम होता है नवल शाह। आगे देखते हैं क्या
- 3:26:41होता है। बाड़ी किले का जो जमींदार का
- 3:26:44लड़का है चैन सिंह राजा निजाम शाह का
- 3:26:46भतीजा लगता था। निजाम निजाम शाह जो थे
- 3:26:49उनका भतीजा था जिसका नाम था चैनसा शाह और
- 3:26:51यह जो चैन शाह है यह रानी पर बुरी नजर
- 3:26:54रखता था। यानी रिश्ते में चाची लगेंगी।
- 3:26:57याद रखना इस बात को। तो चैन सिंह के चाचा
- 3:27:00कौन है? निजाम शाह। निजामशाह का भतीजा कौन
- 3:27:02है? चैन सिंह। चैन सिंह वही व्यक्ति है
- 3:27:04जिसे रानी ने ठुकरा दिया था। यह एक तरीके
- 3:27:08से रिश्ते में लगता था। और यह अलग छोटी सी
- 3:27:10जो रियासत थी या जमींदार थी बाड़ी वहां का
- 3:27:13यह प्रमुख था। अब क्या होता है? वह
- 3:27:16राजकुमारी कमलापति से शादी होने के बावजूद
- 3:27:19भी उनकी उनसे विवाह करने की इच्छा रखता था
- 3:27:21और उसने अनेक बार राजा निजाम शाह को मारने
- 3:27:25की कोशिश की जिसमें वह असफल रहा। तो कुल
- 3:27:28मिलाकर बात यह है कि जो निजाम शाह हैं वह
- 3:27:30अपनी पत्नी कमलापति के साथ खुश हैं। निजाम
- 3:27:32शाह की टोटल सात पत्नियां जिनमें सबसे
- 3:27:34फेमस हैं कमलापति और उनका एक बेटा है
- 3:27:36जिसका नाम है नवल शाह। लेकिन उनकी स्टोरी
- 3:27:38में विलेन कौन बनकर आया? उस विलेन का नाम
- 3:27:40है चैनसा शाह जो बाड़ी का जमींदार है।
- 3:27:42रिश्ते में निजाम शाह का भतीजा लगता है और
- 3:27:45वह बार-बार निजाम शाह को मारने का प्रयास
- 3:27:47करता है। लेकिन कैसे भी निजाम शाह बच जाते
- 3:27:49हैं। एक दिन उन्होंने यानी जो चैन सिंह है
- 3:27:52बाड़ी का किलेदार या बाड़ी का जो जमींदार
- 3:27:54है उसने जो है निजाम शाह को एक निमंत्रण
- 3:27:56दिया प्रेम पूर्वक कि आप हमारे यहां खाने
- 3:27:59पर आइए। निजाम शाह उसकी बातों में आ गए और
- 3:28:01उसके यहां खाने पर जब जाते हैं तो चैन
- 3:28:04सिंह निजाम शाह के भोजन में विष मिला देता
- 3:28:06है। देखिए एक दिन प्रेम पूर्वक उसने राजा
- 3:28:08निजाम शाह को भोजन पर आमंत्रित किया और
- 3:28:10भोजन में जहर देकर जो है उनकी धोखे से
- 3:28:12हत्या कर दी। किसकी? यानी चैन शाह ने
- 3:28:15किसकी हत्या कर दी? निजाम शाह की हत्या कर
- 3:28:18दी। आगे क्या होता है? राजा निजाम शाह की
- 3:28:20मौत की खबर से पूरा जो गिन्नौरगढ़ राज्य
- 3:28:22है उसमें क्या है? खलबली हो गई। और चैन
- 3:28:25सिंह ने रानी कमलापति को अकेले में जानकर
- 3:28:29उन्हें पाने की नियत से गिन्नौरगढ़ के
- 3:28:31किले पर हमला कर दिया। रानी कमलापति उस
- 3:28:33समय अपने कुछ वफादारों और 12 वर्षीय बेटे
- 3:28:36नवल शाह के साथ भोपाल में बने इस महल में
- 3:28:39छुप जाने का निर्णय लेती हैं जो उस समय
- 3:28:41सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण था।
- 3:28:43आई होप आपको यहां तक स्टोरी समझ में आ गई
- 3:28:45होगी। अगर आपको नहीं समझ में आई तो इसके
- 3:28:47लिए एक छोटा सा डायग्राम हम बना देते हैं।
- 3:28:50देखो अगर आप इस स्टोरी को समझेंगे तभी तो
- 3:28:53आपको सही समझ में आएगा। एक राज्य है जिसका
- 3:28:56नाम है गिन्नौरगढ़। क्या नाम है?
- 3:28:58गिन्नौरगढ़ का किला बड़ा फेमस है। तोतों
- 3:29:02के लिए प्रसिद्ध है। गिन्नौरगढ़ जो राज्य
- 3:29:03है वर्तमान में कहां आता है बच्चों? याद
- 3:29:06रखना। तो गिन्नौरगढ़ जो राज्य है वो
- 3:29:07वर्तमान में या जो गिन्नौरगढ़ का किला है
- 3:29:09सीर में आता है। इस राज्य के जो राजा हैं
- 3:29:12उनका नाम है निजाम शाह। निजाम शाह की जो
- 3:29:14पत्नी है उनका नाम क्या है? याद रखना
- 3:29:17कमलापति और कमलापति का एक लड़का है जिसका
- 3:29:21नाम क्या है?
- 3:29:23इन दोनों का पुत्र है जिसका नाम है नवलसा।
- 3:29:26अब इस स्टोरी में विलेन कौन है? इस स्टोरी
- 3:29:30में विलेन है जिसका नाम है चैनसा। याद
- 3:29:33रखिएगा बाड़ी का जमींदार है। और बाड़ी का
- 3:29:36जमींदार
- 3:29:38जिसका नाम क्या है? चैनसा। कहीं-कहीं पर
- 3:29:41इसको याद रखिएगा आलम शाह भी कहा गया है।
- 3:29:43चैन शाह या कहीं-कहीं पर इसको आलम शाह कहा
- 3:29:46गया। आप चैन शाह याद रखेंगे। इसने क्या कर
- 3:29:48दिया? राजा निजाम शाह की धोखे से हत्या कर
- 3:29:51दी। तो राजा निजाम शाह की जब इसने धोखे से
- 3:29:53हत्या कर दी तो अब रानी कमलापति अपने बेटे
- 3:29:56नवल शाह के साथ एक महल में जाती हैं।
- 3:29:58लेकिन इस महल का निर्माण किसने करवाया? तो
- 3:30:01याद रखेंगे भोपाल जो है वर्तमान भोपाल।
- 3:30:04यहां पर रानी कमलापति के लिए एक महल
- 3:30:06बनवाया था राजा निजाम शाह ने। उसका नाम था
- 3:30:10कमलापति पैलेस या कमलापति महल बोलते थे और
- 3:30:13यह काफी खूबसूरत था। भव्य महल है और इस
- 3:30:16महल का निर्माण करवाया था किसने? निजाम
- 3:30:18शाह ने। तो रानी ने ये सोचा होता क्या है
- 3:30:22कि जो हमारा यह निजाम शाह का भतीजा है चैन
- 3:30:25शाह यह क्या करता है? यह गिन्नौरगढ़ पर
- 3:30:27हमला करके इस गिन्नौरगढ़ रियासत पे क्या
- 3:30:29कर लेता है? अधिकार कर लेता है। तो कुल
- 3:30:31मिलाकर रानी को गिन्नौरगढ़ का जो किला है
- 3:30:33उसको छोड़कर जाना पड़ता है। और रानी अपने
- 3:30:36बेटे के साथ उनके बेटे का नाम क्या है
- 3:30:38बेटा? उनके बेटे का नाम है नवल शाह। इसके
- 3:30:41साथ इस महल में शरण ले लेती हैं। किस महल
- 3:30:43में शरण ले लेती हैं? क्योंकि सुरक्षा की
- 3:30:45दृष्टि से ये जो कमलापति महल है जो कि
- 3:30:47भोपाल में है ये कैसा था? यह सुरक्षित था।
- 3:30:50इसीलिए कमलापति और अपने बेटे के साथ जो है
- 3:30:52वो इस महल में चली जाती हैं। ठीक है? अब
- 3:30:55इस स्टोरी में क्या होता है कि रानी
- 3:30:57कमलापति की पति की रानी कमलापति के पति का
- 3:31:00हत्यारा कौन है? तो याद रखिएगा वो है
- 3:31:02चैनसा शाह जो इस स्टोरी में विलेन है। कुछ
- 3:31:05समय बाद रानी को यह पता चलता है कि भोपाल
- 3:31:08के पास में ही कुछ अफगानों ने जो है डेरा
- 3:31:10डाला हुआ है। ठीक है? और अफगानों ने डेरा
- 3:31:14डाला हुआ है। उनमें एक अफगान सरदार था
- 3:31:16जिसका नाम था दोस्त मोहम्मद। इसकी स्टोरी
- 3:31:18को हम किसी और दिन समझेंगे। दोस्त
- 3:31:20मोहम्मद। कौन है दोस्त मोहम्मद? दोस्त
- 3:31:23मोहम्मद एक अफगान है जिसका मुख्य काम यह
- 3:31:25है कि यह पैसे लेकर किसी को भी अपनी
- 3:31:28सुरक्षा दे सकता था या जिससे पैसा लेता था
- 3:31:31उसकी तरफ से ये युद्ध करता था। कुल मिलाकर
- 3:31:33ये भाड़े पर अपनी सेना पहुंचाता था या
- 3:31:36लोगों के लिए भाड़े पर काम करता था। ठीक
- 3:31:38है? क्या नाम है इसका? दोस्त मोहम्मद है।
- 3:31:40इसके जो पूर्वज हैं वो अफगानिस्तान से आए
- 3:31:42थे। इसने खुद औरंगजेब के यहां कुछ काम
- 3:31:44किया था। बाद में यह जो मालवा आ जाता है
- 3:31:46इसकी एक बहुत लंबी स्टोरी है और यही आगे
- 3:31:48चलकर भोपाल राज्य का संस्थापक भी है। तो
- 3:31:50दोस्त मोहम्मद ने जो है क्या किया था?
- 3:31:52भोपाल के नजदीक जो है डेरा डाला था। एक
- 3:31:54जगह थी जगदीशपुर। जगदीशपुर को जीतकर उसका
- 3:31:57नाम रख दिया था इस्लामगढ़। तो रानी को यह
- 3:32:00पता चला कि ये जो है लोगों की मदद करता
- 3:32:03है। पैसे लेकर उनकी तरफ से लड़ता है। तो
- 3:32:05रानी ने इससे कांटेक्ट किया। देखिए रानी
- 3:32:08ने क्या किया? रानी ने इससे मदद मांगी।
- 3:32:11ठीक है? तो मदद के बदले में इसने क्या
- 3:32:13मांग रखी? इसने जो है ₹1 लाख की मांग रखी
- 3:32:16है कि हम आपकी मदद करेंगे। आप हमको क्या
- 3:32:19दें? ₹1 लाख देंगे। इस बात को ध्यान से
- 3:32:21समझना है। यानी रानी कमलापति ने अपने पति
- 3:32:24की मृत्यु का बदला लेने के लिए किसके
- 3:32:26विरुद्ध मदद मांगी? चैन शाह के विरुद्ध।
- 3:32:28जो कहां का जमींदार है? बाड़ी का जमींदार
- 3:32:30है। और दोस्त मोहम्मद ने कहा कि वह मदद
- 3:32:33करेगा लेकिन बदले में कितना रुपया चाहिए?
- 3:32:35उसको ₹1 लाख चाहिए। रानी ने उससे कहा कि
- 3:32:38अभी मेरे पास ₹1 लाख नहीं है। रानी ने कुछ
- 3:32:40पैसे उसको नगद दे दिए और कुछ के बदले जमीन
- 3:32:42देने का वादा किया। तो अफगान सरदार जिसका
- 3:32:46नाम दोस्त मोहम्मद है उसने रानी कमलापति
- 3:32:49की जो गोंड सेना है और उसके साथ-साथ अपनी
- 3:32:51अफगान सेना इन दोनों सेनाओं को लेकर किस
- 3:32:54पर हमला कर दिया? याद रखिएगा दोस्त
- 3:32:57मोहम्मद ने गोंडों और अपनी सेना के साथ
- 3:32:59मिलकर इस पर गिन्नौरगढ़ के किले पर अटैक
- 3:33:02कर दिया और अटैक करके जो है क्या कर दी?
- 3:33:04इसकी हत्या कर दी। चैन शाह को मार डाला और
- 3:33:07इस प्रकार जो है अफगान सरदार जो है क्या
- 3:33:09करता है? रानी कमलापति की जो है मदद करता
- 3:33:13है। अब इस बीच दो स्टोरियां मिलती हैं जो
- 3:33:15आपको जाननी है। पहली स्टोरी यह है कि जब
- 3:33:18रानी कमलापति ने ये मदद मांगी थी तो
- 3:33:21उन्होंने उस समय जो है एक धागा जो है
- 3:33:23दोस्त मोहम्मद की कलाई पर बांधा था और एक
- 3:33:25तरीके से बहन भाई का जो है रिश्ता यहां पर
- 3:33:28दोनों के बीच में स्थापित हो गया जिससे कि
- 3:33:30उन दोनों के बीच संबंध बने रहे। दूसरी
- 3:33:33स्टोरी है जो ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर मतलब उसी
- 3:33:35चीज को ज्यादा तवज्जो दिया जाता है और
- 3:33:38ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि वही
- 3:33:40सत्य है। उस स्टोरी में होता यह है कि
- 3:33:43क्योंकि ये जो दोस्त मोहम्मद है शुरू में
- 3:33:46रानी की मदद करता है लेकिन बाद में इस
- 3:33:48दोस्त मोहम्मद की जो नियत है वो रानी की
- 3:33:51जो सुंदरता है उस पर खराब हो जाती है और
- 3:33:53वो रानी को अकेला समझकर उनकी सुंदरता के
- 3:33:56प्रति तो आकर्षित है ही। साथ-साथ उनका जो
- 3:33:59राज्य है जैसे कि जो भोपाल में अभी वो हैं
- 3:34:01और गिन्नौड़गढ़ रियासत पूरी की रियासत को
- 3:34:03वो हड़पना चाहता है और इसी क्रम में दोस्त
- 3:34:05मोहम्मद क्या करेगा कि पहले जो है क्या
- 3:34:08करेगा वो जाकर चैनसा की हत्या करता है और
- 3:34:10चैन शाह की हत्या करने के बाद इस
- 3:34:12गिन्नौरगढ़ के किले पर अधिकार कर लेगा अब
- 3:34:14ये गिन्नौरगढ़ का जो किला है या जो राज्य
- 3:34:16है बेसिकली किसका है कमलापति का तो जब
- 3:34:19दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर
- 3:34:21अधिकार किया तो रानी ने इसको नजरअंदाज कर
- 3:34:23दिया कि चलो ठीक है जो हुआ सो हो जाने दो
- 3:34:26वो भोपाल में खुश हैं लेकिन लेकिन कुछ समय
- 3:34:28पश्चात उसने क्या किया कि भोपाल में रानी
- 3:34:31कमलापति पर हमला किया। तो इस समय रानी
- 3:34:33कमलापति क्या करती हैं कि अपने पुत्र
- 3:34:36जिसका नाम नवल शाह है उसे सुरक्षित स्थान
- 3:34:39पर भेजती हैं और वो जो है अपने महल में
- 3:34:42जिसे कमलापति महल कहते हैं जो कि भोपाल
- 3:34:45में बड़ी झील के पास स्थित है और यहां पर
- 3:34:47क्या करती हैं? वह जल समाधि ले लेती हैं।
- 3:34:50अब इसकी स्टोरी को भी हम समझते हैं। मैं
- 3:34:52आपको थोड़ा सा आगे ले चलता हूं। देखिए कुछ
- 3:34:55दिन बाद क्या होता है? अभी जो मैं आपको
- 3:34:57स्टोरी बताया था उसके आगे आप लोगों को बता
- 3:34:59रहा हूं। कुछ समय बाद भोपाल में समय
- 3:35:01बिताने के बाद रानी कमलापति को पता चला कि
- 3:35:04भोपाल की सीमा के पास कुछ अफगानी आकर रुके
- 3:35:07हुए हैं। जिन्होंने जगदीशपुर जगदीशपुर एक
- 3:35:10राजपूतों का राज्य था जिसे इसने जीत लिया
- 3:35:13था और इसका नाम रख दिया था इस्लामनगर।
- 3:35:15जगदीशपुर पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में
- 3:35:17ले लिया है। ठीक है? तो रानी को यह पता
- 3:35:19चला। इन अफ़गानों का सरदार था जिसका नाम था
- 3:35:22दोस्त मोहम्मद खान था। याद रखिएगा जो पैसा
- 3:35:25लेकर ध्यान से सुनना इसे कहते हैं भाड़े
- 3:35:27का टट्टू बोल सकते हैं जो पैसा लेकर किसी
- 3:35:29की तरफ से भी युद्ध लड़ता था। लोक मान्यता
- 3:35:32है कि रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद को 1
- 3:35:35लाख मोहरे देकर चैन सिंह पर हमला करने को
- 3:35:38कहा। यह एक स्टोरी मिलती है। ठीक है? यह
- 3:35:40दोस्त मोहम्मद है वो अफगान लुटेरा। याद
- 3:35:42रखिएगा। हमारी स्टोरी में दूसरा खलनायक।
- 3:35:45पहला खलनायक चैन शाह है। दूसरा खलनायक
- 3:35:47दोस्त मोहम्मद है। आगे बढ़ते हैं। दोस्त
- 3:35:51मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर
- 3:35:53दिया और जिसने चैन सिंह जिसमें चैन सिंह
- 3:35:56मारा गया और किले को उसने हड़प लिया। किसने
- 3:35:59हड़प लिया? यानी जो दोस्त मोहम्मद है उसने
- 3:36:01चैन सिंह को मार डाला और गिन्नौरगढ़ का जो
- 3:36:03किला है उसे हड़प लिया। रानी कमलापति को
- 3:36:05अपने छोटे बेटे की परवरिश की चिंता थी।
- 3:36:07इसलिए उन्होंने दोस्त मोहम्मद के इस कदम
- 3:36:10पर कोई आपत्ति नहीं जताई और दोस्त मोहम्मद
- 3:36:12अब संपूर्ण भोपाल की रियासत पर क्या करना
- 3:36:14चाहता था? अधिकार करना चाहता था। यह आगे
- 3:36:18के संघर्ष को अब हम समझने वाले हैं। उसने
- 3:36:22रानी कमलापति को अपने हरम में शामिल होने
- 3:36:25और शादी करने का प्रस्ताव रखा और वह
- 3:36:27वास्तव में रानी को अपने हरम में रखना
- 3:36:29चाहता था। दोस्त मोहम्मद खान के इस नापाक
- 3:36:32इरादे को देखते हुए रानी कमलापति यह
- 3:36:35स्टोरी भी ध्यान से सुनना। रानी कमलापति
- 3:36:37का 14 वर्षीय बेटा जिसका नाम नवल शाह है
- 3:36:40अपने 100 लड़ाकों के साथ लाल घाटी में
- 3:36:42युद्ध करने चला गया और इस घमासान युद्ध
- 3:36:44में दोस्त मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार
- 3:36:47दिया और इस स्थान पर इतना खून बहा कि यह
- 3:36:51जमीन लाल हो गई और इसी कारण इसे लाल घाटी
- 3:36:53कहा गया। यानी दोस्त मोहम्मद से जो रानी
- 3:36:56का लड़का है जिसका नाम नवल शाह है। नवल
- 3:36:58शाह को जब यह पता चला कि दोस्त मोहम्मद
- 3:37:00उनकी मां के प्रति बुरी नजर रखता है तो
- 3:37:03उसने जो है गुस्से में आकर नवल शाह ने
- 3:37:05अपने कुछ 100 योद्धाओं को इकट्ठा किया और
- 3:37:07लड़ने के लिए चला गया। दोनों के बीच युद्ध
- 3:37:09हुआ और इस युद्ध में नवल शाह मारा गया।
- 3:37:11जैसे ही यह खबर नवल शाह के मरने की रानी
- 3:37:13को पता लगी और उन्हें पता चला कि दोस्त
- 3:37:15मोहम्मद उनकी तरफ आ रहा है तो रानी ने जल
- 3:37:18समाधि ले ली। रानी कमलावती ने विषम
- 3:37:20परिस्थितियों को देखते हुए अपनी इज्जत को
- 3:37:22बचाने के लिए बड़े तालाब बांध का जो है
- 3:37:24सकरा रास्ता खुलवा दिया जिससे बड़े तालाब
- 3:37:26का पानी रिस कर दूसरी तरफ आने लगा और इसे
- 3:37:29आज छोटा तालाब के रूप में जाना जाता है।
- 3:37:32इसमें रानी कम रानी कमलापति ने महल की
- 3:37:34समस्त धनदौलत और जेवरात को उसी जल समाधि
- 3:37:37में डाल दिया और इस प्रकार जो है उन्होंने
- 3:37:39जल समाधि ले ली तो इस प्रकार रानी कमलापति
- 3:37:42की मृत्यु हो जाती है। दोस्त, मोहम्मद खान
- 3:37:44जब तक अपनी सेना को साथ लेकर लाल घाटी से
- 3:37:46लाल किले तक ला इस किले तक पहुंचा, यानी
- 3:37:49महल तक पहुंचा, तब तक सब कुछ खत्म हो गया
- 3:37:51था। उसके हाथ कुछ नहीं लगा। ना रानी, ना
- 3:37:53सोना, ना संपत्ति सब जो है जल समाधि में
- 3:37:56चला गया। दोस्त मोहम्मद खान को ना रानी
- 3:37:58कमलापति मिली और ना ही धन दौलत। जीते जी
- 3:38:00उन्होंने भोपाल पर परधर्मी या विधर्मी को
- 3:38:03नहीं बैठने दिया। सोर्सों के अनुसार रानी
- 3:38:06कमलापति ने सन 1723 में अपनी जीवन लीला
- 3:38:08खत्म की और उनकी मृत्यु के साथ ही भोपाल
- 3:38:11में शुरू होता है दोस्त मोहम्मद का राज
- 3:38:13जिसे भोपाल रियासत कहते हैं। दोस्त
- 3:38:15मोहम्मद खान के साथ ही नवाबों का दौर शुरू
- 3:38:17होता है और भोपाल में नवाबों का राज्य
- 3:38:20शुरू हो जाता है। तो इस प्रकार रानी
- 3:38:22कमलापति का राज दोस्त मोहम्मद ने हड़प
- 3:38:24लिया। यह इस स्टोरी में पूरी की पूरी
- 3:38:27कहानी थी। अब इस स्टोरी में खास क्या है?
- 3:38:29यह बताता हूं। यह पीडीएफ अगर आपको चाहिए
- 3:38:32हो तो सब कुछ इसमें लिखा है। रानी कमलापति
- 3:38:34कौन थी? उनके पति कौन थे? उनकी मृत्यु का
- 3:38:37कारण क्या था? यह सारी बातें हमने यहां पर
- 3:38:39देख ली। रानी कमलापति महल की बात करते
- 3:38:42हैं। ये भोपाल में इसका तस्वीर में मैं
- 3:38:43आपको दिखा देता हूं। देखिए यह भोपाल का
- 3:38:46सबसे प्राचीन शहर है। 18वीं शताब्दी में
- 3:38:49बना था कि यार भोपाल में जितनी भी इमारतें
- 3:38:50हैं उनमें सबसे पुराना यही पैलेस है जिसका
- 3:38:52नाम रानी कमलापति पैलेस है। इस महल का जो
- 3:38:55निर्माण है वो निजाम शाह ने अपनी पत्नी के
- 3:38:57लिए करवाया था। किसके लिए? कमलापति के लिए
- 3:39:00याद रखिएगा। ठीक है? तो, यह एक वास्तुकला
- 3:39:03का एक उत्कृष्ट उदाहरण हमको देखने को
- 3:39:05मिलता है जिसमें नुकीले मेहरावों को
- 3:39:07प्रयोग किया गया। बहुत सारी इसकी खास
- 3:39:09बातें हैं। इसका तस्वीर मैं आप लोगों को
- 3:39:11दिखाता हूं। यह है कमलापति पैलेस।
- 3:39:15कमलापति महल बोलते हैं जो कि कहां पर बना
- 3:39:18हुआ है। भोपाल में बना हुआ है। याद
- 3:39:20रखिएगा। बड़ा खूबसूरत है। इसी के सामने एक
- 3:39:23पैलेस बना हुआ पार्क बना हुआ है जिसको
- 3:39:25बोलते हैं कमला पार्क या रानी कमलापति
- 3:39:27पार्क इसको कहा जाता है। तो कमलापति पार्क
- 3:39:30जो इसी महल के सामने बना हुआ है। ठीक है?
- 3:39:32यह भी भोपाल में है और यह भोपाल के नवाब
- 3:39:35ने बनवाया था।
- 3:39:37ठीक है? तो ये दोनों चीजें हम लोगों को
- 3:39:39यहां देखने को मिलती हैं। आई होप आप लोगों
- 3:39:41को यहां तक समझ में आ गया होगा। अब हम एक
- 3:39:43लास्ट और इंटरेस्टिंग बात करेंगे। ध्यान
- 3:39:46से सुनिएगा। हबीबगंज रेलवे स्टेशन जिसका
- 3:39:48नया नाम कर दिया गया है रानी कमलापति
- 3:39:51स्टेशन। ध्यान से सुनेंगे। बहुत
- 3:39:52इंपॉर्टेंट है। यह आप देख सकते हैं। यह
- 3:39:54बहुत ही आधुनिक है। यह देश का पहला
- 3:39:57प्राइवेट जो है क्या है? रेलवे स्टेशन है
- 3:39:59और यह एक एयरपोर्ट की तरह बना हुआ है।
- 3:40:01यानी काफी आधुनिक सुसज्जा के साथ यह हमको
- 3:40:04देखने को मिलता है। तो आपको अगर पूछा जाए
- 3:40:06कि हबीबंज रेलवे स्टेशन का नाम क्या कर
- 3:40:08दिया गया है? तो याद रखिएगा रानी कमलापति
- 3:40:10स्टेशन कर दिया गया है और यह भोपाल शहर
- 3:40:12में स्थित है और भोपाल शहर का दूसरा
- 3:40:14स्टेशन है। पहला जो मेन स्टेशन है उसके
- 3:40:16बाद दूसरा यह है। यह भारत का पहला आईएसओ
- 3:40:19प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाला निजी रेलवे
- 3:40:21स्टेशन है। 14 नवंबर 2021 को हबीबंद रेलवे
- 3:40:24स्टेशन का नाम याद रखिएगा कब बदला गया यह
- 3:40:26नाम? तो 2021 को इसका नाम बदलकर कमलापति
- 3:40:29के नाम पे रख दिया गया है। और यह भारत का
- 3:40:31पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन है जिसे बंसल
- 3:40:33ग्रुप के द्वारा कौन सा ग्रुप इसको चलाता
- 3:40:36है? तो याद रखिए कभी पूछा जाए किस ग्रुप
- 3:40:38के अंडर में आता है ये प्राइवेट रेलवे
- 3:40:40स्टेशन है। बंसल ग्रुप इसको लीड करता है।
- 3:40:42एक और इंपॉर्टेंट बात कि आखिरकार इसका नाम
- 3:40:45हबीबगंज रेलवे स्टेशन पहले क्यों था? तो
- 3:40:48किसके नाम पर था? देखिए हबीबगंज का जो नाम
- 3:40:51है वो हबीब मियां के नाम पर था। ये हबीब
- 3:40:53मियां कौन है? देखिए इस स्टेशन का सबसे
- 3:40:56पुराना नाम शाहपुर था। बाद में एक हबीब
- 3:40:58मियां थे जिन्होंने अपनी जमीन इसके लिए
- 3:41:00दान दी थी। और उन्होंने क्योंकि जमीन दान
- 3:41:02दी थी। उनके नाम पर इसका नाम हबीबगंज
- 3:41:04रेलवे स्टेशन पड़ा और वर्तमान में इसका
- 3:41:06नाम क्या हो गया? रानी कमलापति स्टेशन।
- 3:41:08तीन नाम हो गए। पहले शाहपुर, फिर हबीबगंज
- 3:41:10और वर्तमान में क्या है? याद रखिएगा रानी
- 3:41:12कमलापति स्टेशन।
- 3:41:14आई होप आप लोगों को यह सारी जानकारी अच्छे
- 3:41:17से समझ में आ गई होगी। देखिए तो आज हम
- 3:41:19लोगों ने किसके बारे में बात की है? आज हम
- 3:41:21लोगों ने बात की है भोपाल की सबसे
- 3:41:23प्रसिद्ध रानी जिनका नाम क्या था? रानी
- 3:41:25कमलापति जो कि भोपाल की अंतिम हिंदू रानी
- 3:41:27थी। देखिए रानी कमलापति गों की रानी थी और
- 3:41:31भोपाल की अंतिम रानी थी। भोपाल की अंतिम
- 3:41:33हिंदू रानी थी जिनका योगदान बड़ा
- 3:41:35महत्वपूर्ण है। इनके राज्य को हड़प लिया
- 3:41:37था एक अफगान लुटेरे ने जिसका नाम था दोस्त
- 3:41:40मोहम्मद और यहां पर जो गिन्नौरगढ़ से जो
- 3:41:42भोपाल का जो पूरा एरिया था उसे छीनकर उसने
- 3:41:45जो है यहां पर भोपाल रियासत की नींव रखी
- 3:41:47और भोपाल में नवाबों का शासन यहां पे शुरू
- 3:41:49होता है। मुझे उम्मीद है कि आज के इस सेशन
- 3:41:52में आप लोगों को रानी कमलापति की स्टोरी
- 3:41:53अच्छे से समझ में आई होगी और आपको जो मेन
- 3:41:56किरदार है उनके नाम समझ में आए होंगे कि
- 3:41:58चैन शाह कौन है? नवल शाह कौन है? और याद
- 3:42:01रखिएगा निजाम शाह कौन है? और सबसे
- 3:42:02इंपॉर्टेंट दोस्त मोहम्मद कौन था? कमलापति
- 3:42:05पैलेस कहां है? कमलापति पार्क कहां पर है?
- 3:42:07और रानी कमलापति ने कहां जल समाधि ली थी?
- 3:42:10ये सारी बातें आप लोगों को अच्छे से समझ
- 3:42:12में आ गई होंगी। इसी के साथ इस वीडियो को
- 3:42:14मैं यहीं समाप्त करता हूं और मुझे आप
- 3:42:17बताइएगा कमेंट करके कि आप नेक्स्ट वीडियो
- 3:42:19किस पर चाहते हैं। जय हिंद। थैंक यू।
- 3:42:31नमस्कार साथियों, मेरा नाम है हरी सिंह
- 3:42:33राजपूत और आप सभी का मैं स्वागत करता हूं
- 3:42:36हमारी सीरीज में जिसका नाम है मध्य प्रदेश
- 3:42:38के वीरों का इतिहास और आज की सीरीज में हम
- 3:42:41एक ऐसे शूरवीर की बात करने वाले हैं जिसका
- 3:42:44इतिहास कहीं ना कहीं इतिहास के पन्नों में
- 3:42:46दब गया। और आज हम बात कर रहे हैं एक महान
- 3:42:49स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने मालवा में
- 3:42:511857 की क्रांति का नेतृत्व किया और खासकर
- 3:42:55इंदौर में इंदौर में होलकर सेना का
- 3:42:57नेतृत्व किया और अंग्रेजों के विरुद्ध जो
- 3:42:59है विद्रोह कर दिया। तो शहादत खान कौन थे
- 3:43:02और उन उन्होंने किस प्रकार जो है विद्रोह
- 3:43:04किया था? आज के हम इस सेशन में जानने वाले
- 3:43:06हैं इंदौर के प्रसिद्ध क्रांतिकारी नायक
- 3:43:08शादत खान के बारे में। तो शहादत खान का
- 3:43:11सबसे पहले शुरुआत कहां से होती है? देखिए
- 3:43:14शहादत खान कौन थे? उनके माता-पिता का नाम
- 3:43:16क्या था? इसके बारे में अभी तक ज्यादा
- 3:43:18अच्छे सोर्सेस अवेलेबल नहीं है। यह बताया
- 3:43:21जाता है कि जो उनके पूर्वज हैं, वह बहुत
- 3:43:23पहले ही जो है भारत में आकर बस गए। यानी
- 3:43:25मालवा वाले रीजन में वो रहने लगे थे और
- 3:43:28उनके जो पिता और पिता के जो पिता थे वो
- 3:43:31ऑलरेडी होलकर सेना में पहले से ही थे। तो
- 3:43:33आइए हम लोग शहादत खान के बारे में आगे बात
- 3:43:35करते हैं। तो सबसे पहले शहादत खान के बारे
- 3:43:38में एक बात शुरू करने से पहले मैं आपको
- 3:43:40बताना चाहता हूं कि मध्य प्रदेश में जब हम
- 3:43:421857 की क्रांति की बात करते हैं तो मध्य
- 3:43:45प्रदेश में जो 1857 की जो क्रांति है उसकी
- 3:43:48शुरुआत मोहम्मद अली बेग ये नाम याद रख
- 3:43:51लीजिएगा क्योंकि एग्जाम से रिलेट करता है।
- 3:43:53मोहम्मद अली बेग के नेतृत्व में 3 जून
- 3:43:561857 को नीमच छावनी से शुरू हुआ था। कहां
- 3:43:59से शुरू हुआ था? नीमच छावनी से। याद
- 3:44:02रखिएगा। यानी एक क्वेश्चन पूछा जाता है कि
- 3:44:04मध्य प्रदेश में 1857 की क्रांति कब और
- 3:44:06कहां से शुरू हुई थी? तो कब शुरू हुई थी?
- 3:44:093 जून 1857 को। याद रखिएगा कहां से शुरू
- 3:44:12हुई थी? नीमच छावनी में। और किसके द्वारा
- 3:44:14शुरू की गई? तो उनका नाम है मोहम्मद अली
- 3:44:17वेग। हम सभी जानते हैं कि 1857 की क्रांति
- 3:44:20का जो कारण था, वह बहुत सारे कारण थे और
- 3:44:23इसका तात्कालिक जो कारण था, वह चर्बी वाले
- 3:44:25कारतूस थे। हालांकि अंग्रेजों के विरुद्ध
- 3:44:28ये जो क्रांति है वो सामाजिक, आर्थिक,
- 3:44:30राजनीतिक कारणों का परिणाम थी। सैन्य
- 3:44:32असंतोष एक तरीके से उसका एक तात्कालिक
- 3:44:35कारण था जिसमें हम चर्बी वाले कारतूसों को
- 3:44:37महत्व देते हैं। तो कुल मिलाकर जब पूरे
- 3:44:40भारतवर्ष में ये क्रांति हुई और इस
- 3:44:41क्रांति की शुरुआत भारत में मेरठ से हुई
- 3:44:44थी। मेरठ छावनी में 10 मई 1857 को जब 1857
- 3:44:48की क्रांति की शुरुआत हुई, तो उसी के साथ
- 3:44:50ही संपूर्ण भारतवर्ष में ये क्रांति हो
- 3:44:52गई। क्योंकि पूरे भारत में ये क्रांति हो
- 3:44:54रही थी तो जिसका परिणाम मध्य प्रदेश पर भी
- 3:44:56पड़ा और मध्य प्रदेश में इस क्रांति की
- 3:44:58शुरुआत 3 जून 1857 को नीमच छावनी से हुई
- 3:45:01और इसके नेतृत्वकर्ता हैं मोहम्मद अली बेग
- 3:45:03जिनके द्वारा इस क्रांति की शुरुआत की गई।
- 3:45:05उसके बाद यह जो क्रांति है वो 14 जून को
- 3:45:07ग्वालियर में भड़क गई और इस प्रकार जो है
- 3:45:1014 जून के बाद 18 जून महाकौशल क्षेत्र में
- 3:45:12और धीरे-धीरे यह जो क्रांति है वह संपूर्ण
- 3:45:15मध्य प्रदेश में फैल गई। और इसी क्रम में
- 3:45:17क्योंकि संपूर्ण मध्य प्रदेश में पार्ट
- 3:45:19आता है इंदौर का। इसीलिए याद रखिएगा। 1
- 3:45:22जुलाई 1857 को सहादत खान के नेतृत्व में
- 3:45:25विद्रोह इंदौर में फैल गया। कहां फैल गया?
- 3:45:28इंदौर पहुंच गया। फिर इंदौर के बाद ये
- 3:45:30पहुंच जाएगा महू छावनी में। पहले इंदौर
- 3:45:32में फिर महू छावनी में यह विद्रोह पहुंच
- 3:45:35गया। तो आइए देखते हैं क्या ये कहानी है
- 3:45:37शहादत खान की। तो सबसे पहले हम लोग बात कर
- 3:45:40रहे हैं कि शहादत खान का योगदान क्या है।
- 3:45:42यह पिक्चर महाराजा तुकोजीराव होलकर
- 3:45:45द्वितीय की है जो उस समय इंदौर के राजा
- 3:45:47थे। क्योंकि मैं चाहता हूं आपको ये याद
- 3:45:49रहे कि 1857 की क्रांति के दौरान होलकर
- 3:45:52शासक कौन था? तो याद रखिए वो है हमारे
- 3:45:54तुगोजीराव होलकर द्वितीय। इन्हीं की सेना
- 3:45:56का एक अधिकारी हैं। इन्हीं की सेना के एक
- 3:45:59सैनिक हैं जिनका नाम है शहादत खान। तो
- 3:46:01शहादत खान आइए बात करते हैं। अगर कभी पूछा
- 3:46:04जाए कि शहादत खान कौन थे? किस क्षेत्र में
- 3:46:06उन्होंने विद्रोह किया था? याद रखिएगा।
- 3:46:081857 की क्रांति में शहादत खान जो है
- 3:46:10उन्होंने मालवा और इंदौर क्षेत्र में
- 3:46:13विद्रोह किया था। कहां पर विद्रोह किया
- 3:46:15था? याद रखिएगा। मालवा और इंदौर मेन इंदौर
- 3:46:20के क्रांतिकारी हैं। याद रखिएगा। तो मालवा
- 3:46:22और इंदौर में विद्रोह का नेतृत्व किसने
- 3:46:24किया था? सहादत खान ने किया था। अब इस समय
- 3:46:27एक घटना घटती है। वो घटना क्या है? ये मैं
- 3:46:30आपको बताना चाहता हूं। जब 1857 की क्रांति
- 3:46:33में संपूर्ण भारतवर्ष में विद्रोह हो रहा
- 3:46:35था। उसी समय सहादत खान अपने महाराजा से
- 3:46:38कहते हैं। देखिए इंदौर रियासत की सुरक्षा
- 3:46:40हेतु शहादत खान ने महाराजा तुकोजीराव
- 3:46:43होलकर द्वितीय से अर्ज किया। देखिए क्या
- 3:46:45कहा उन्होंने कहा है उनके शब्द है हमने
- 3:46:48आपका नमक खाया है ये एक अच्छा मौका है आप
- 3:46:52हमारे सर पर हाथ रखें| हम आपको महेश्वर
- 3:46:55महू रेजिडेंसी का इलाका वापस दिलाकर
- 3:46:58रहेंगे और आपको अंग्रेजी शिकंजे से आजाद
- 3:47:01करा कर देंगे। अगर आप 1818 में हुए
- 3:47:04महाराजा मल्हार राव तृतीय के सुलहनामे के
- 3:47:06कारण ऐसा नहीं कर सकते तो आप अंग्रेजों को
- 3:47:09बता दीजिए कि आप अंग्रेजों को बता दीजिए
- 3:47:12याद रखिए कि मेरे सारे फौजी मेरे सारे
- 3:47:16सिपाही बागी हो गए हैं और बगावत की खबरें
- 3:47:19सुनकर इंदौर खामोश ना रह सका और 1 जुलाई
- 3:47:221857 को शहादत खाने क्रांति का बिगुल बजा
- 3:47:25दिया। मैं आपको रोकना चाहूंगा और इसी
- 3:47:27सेंटेंस को हम दोबारा से समझते हैं। जैसे
- 3:47:29कि ये कहा जाता है कि जो इंदौर के जो
- 3:47:32होलकर शासक थे अब देखिए जितने भी जो उस
- 3:47:34समय राजा महाराजा थे उन्होंने अंग्रेजों
- 3:47:36से एक संधि कर रखी थी। जैसे कि होलकर
- 3:47:38रियासत ने एक संधि कर रखी थी जो मल्हार
- 3:47:40राव तृतीय के समय की गई थी। ठीक है? और इस
- 3:47:44संधि के द्वारा इस संधि के द्वारा होलकर
- 3:47:46रियासत अंग्रेजों के अधीन थी और इसी संधि
- 3:47:48के बाद जो है महू में एक छावनी बनाई गई थी
- 3:47:51अंग्रेजों की जो कहीं ना कहीं इंदौर
- 3:47:53रियासत पर कंट्रोल रखती थी। तो हमारे जो
- 3:47:56शहादत खान है वो इस समय यह कह रहे हैं कि
- 3:47:58महाराज ये एक अच्छा मौका है। आप हमारे सर
- 3:48:00पर हाथ रख दीजिए। हमें सपोर्ट कर दीजिए।
- 3:48:02हम आपको महू छावनी, महेश्वर पूरा का पूरा
- 3:48:04इलाका वापस दिला देंगे जो अंग्रेजों के
- 3:48:07अधिकार में है। और अगर आप ऐसा नहीं कर
- 3:48:09सकते क्योंकि आपने संधि कर रखी है तो आप
- 3:48:11अंग्रेजों को यह कह दो कि हम मेरे सारे
- 3:48:13सैनिक, मेरे सारे सैनिक बागी हो गए हैं।
- 3:48:15विद्रोही हो गए हैं और वो विद्रोह कर रहे
- 3:48:18हैं। इसीलिए कहा जाता है कि होलकर जो शासक
- 3:48:20थे उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से जो है
- 3:48:22क्रांति को समर्थित किया। यानी देखने में
- 3:48:25तो वो अंग्रेजों के साथ देखने को मिलेंगे
- 3:48:27लेकिन उनकी जो सेना के सिपाही हैं वो
- 3:48:29विद्रोह कर रहे हैं। इसमें एक इंपॉर्टेंट
- 3:48:31बात ये है कि जो शहादत खान है वो अंग्रेजी
- 3:48:34सेना के सिपाही नहीं है। वो होलकर महाराजा
- 3:48:37होलकर की सेना के सिपाही हैं। तो इसमें
- 3:48:39हमको दो-तीन चीजें मिल गई आपके काम की।
- 3:48:41खासकर शासक का नाम मिल गया। ठीक है? अब इस
- 3:48:45डेट को हमको हाईलाइट करना है। किस डेट को?
- 3:48:481 जुलाई 1857 को। क्यों? क्योंकि एग्जाम
- 3:48:51में क्वेश्चन यहां से आएगा कि इंदौर में
- 3:48:52विद्रोह कब हुआ? 1 जुलाई 1857 को इंदौर
- 3:48:55में विद्रोह पहुंचा और इस विद्रोह की
- 3:48:57शुरुआत करने वाले व्यक्ति हैं सहादत खान।
- 3:49:00लेकिन क्या शहादत खान अकेले थे? नहीं।
- 3:49:02क्योंकि उनकी पूरी टीम थी उनके साथ और भी
- 3:49:04लोग थे जिनका नाम एग्जाम में पूछा जाता
- 3:49:06है। तो शहादत खान के नेतृत्व में क्रांति
- 3:49:08की तोपें गड़गड़ा उठी और शहादत खान याद
- 3:49:11रखिएगा भागीरथ सिलावट
- 3:49:14वंश गोपाल और भाई सरदार खान। मैं चाहता
- 3:49:18हूं कि ये जो नाम आप देख रहे हैं एक दो
- 3:49:21तीन और ये चार इनको आप बहुत अच्छे से याद
- 3:49:24कर लीजिए। क्यों? क्योंकि ये ऑलरेडी आपके
- 3:49:26एमपीपीएससी प्रीलिम्स में पूछे जा चुके
- 3:49:29हैं और पहले भी कई सारे एग्जामों में आते
- 3:49:31रहते हैं। तो आपसे ये भी पूछा जा सकता है
- 3:49:34कि इंदौर में 1857 की क्रांति में कौन-कौन
- 3:49:38मेन विद्रोही थे? प्रमुख विद्रोही थे? तो
- 3:49:40याद रखिए सबसे इंपॉर्टेंट है शहादत खान।
- 3:49:43उसके बाद है भागीरथ सिलावट। बहुत
- 3:49:45इंपॉर्टेंट नाम है भागीरथ सिलावत। उसके
- 3:49:47बाद बंस गोपाल और याद रखिएगा एक और हैं
- 3:49:50जिनके नाम है भाई सरदार खान। और यह इनके
- 3:49:53साथी और थे और अन्य साथी रेजिडेंसी जा
- 3:49:55पहुंचे। उस समय कर्नल एच एच डूरंड। याद
- 3:49:59रखिएगा। एक और क्वेश्चन मिल गया आपको कि
- 3:50:01इस समय इंदौर छावनी का कर्नल कौन है?
- 3:50:03डूरंड। याद रखिएगा। डूरंड। कर्नल डूरंड जो
- 3:50:06है वो इंदौर छावनी का रेजिडेंट था। ठीक
- 3:50:08है? याद रखिएगा। रेजिडेंसी कोठी में अपनी
- 3:50:10टेबल पर काम कर रहा था। तो ये सभी के सभी
- 3:50:14लोग जितने लोग आप ये देख रहे हैं ये सभी
- 3:50:16के सभी कौन हैं? ये होलकर सेना के सिपाही
- 3:50:18हैं। कौन है? ये होलकर सेना के सिपाही
- 3:50:21हैं। और होलकर सेना के ये एक तरीके से
- 3:50:23अधिकारी हैं। और इन सभी ने मिलकर जो है
- 3:50:26क्या कर दिया? विद्रोह कर दिया। अब देखिए
- 3:50:27क्या होता है। शहादत खान अपने दामाद और
- 3:50:30उनके दामाद का नाम था हुसैन खान। याद
- 3:50:32रखिएगा। अपने दामाद और फौज के लेफ्टिनेंट
- 3:50:36हुसैन खान के साथ रेजिडेंसी पहुंच सकते
- 3:50:38हैं। पहुंचते हैं और कर्नल डूरंड से बात
- 3:50:41करना चाहते हैं। पर वह कर्नल डूरंड
- 3:50:43अनापशनाब बगने लगा बकने लगा जिसका
- 3:50:46उन्होंने विरोध किया। इस पर क्या हुआ?
- 3:50:48दोनों में एक तरीके से कहासुनी हुई
- 3:50:50अंग्रेजों में और शहादत खान के लोगों में
- 3:50:52और इस प्रकार डूरंड ने तमंचे से उन पर वार
- 3:50:55किया जो उनके कान को छूता हुआ निकल गया।
- 3:50:58शहादत खान बचते हुए सीधे अपने घोड़े पर
- 3:51:01बैठना चाहते थे। इसी बीच कर्नल ट्रेवर्स आ
- 3:51:03गए। दो अधिकारी हो गए। एक कर्नल डूरंड और
- 3:51:06एक ट्रेवर्स। कर्नल ट्रेवर्स आ पहुंचा और
- 3:51:09धमकाते हुए तलवार से मुकाबला करना चाहा
- 3:51:12जिसमें एक गहरा ये जो लाइन मैं अंडरलाइन
- 3:51:14कर रहा हूं जिसमें एक गहरा घाव शहादत खान
- 3:51:17के गाल पर लग गया और आगे चलकर यही घाव जो
- 3:51:20है शहादत खान को पकड़ाएगा जब वह यहां से
- 3:51:22फरार हो जाएंगे। तो कुल मिलाकर उन्होंने
- 3:51:25जो है इंदौर में 1 जुलाई 1857 को क्या कर
- 3:51:28दिया? विद्रोह कर दिया। ठीक है? अब इसमें
- 3:51:30एक और चीज है। जैसे कि ये इंदौर है और
- 3:51:36इंदौर में विद्रोह कर रहे हैं कौन? इंदौर
- 3:51:39में जो रेजिडेंसी थी वहां पर विद्रोह
- 3:51:41कौन-कौन कर रहे हैं? तो हमने देख लिया एक
- 3:51:43सबसे मेन व्यक्ति हैं शहादत खान। याद
- 3:51:45रखिएगा। दूसरे व्यक्ति कौन है जिनका नाम
- 3:51:48है वंश गोपाल।
- 3:51:52तीसरे व्यक्ति हैं जिनका नाम है भागीरथ
- 3:51:55सिलावट।
- 3:51:56यह सबसे मेन है और यह कई बार एग्जामों में
- 3:51:59पूछे गए हैं। तो इनका नाम याद रखिएगा। तो
- 3:52:01कुल मिलाकर इन्होंने इंदौर छावनी में या
- 3:52:04इंदौर रेजिडेंसी में क्या कर दिया था?
- 3:52:06विद्रोह। तो इंदौर रेजिडेंसी के
- 3:52:08विद्रोहियों का नाम आपके सामने है। इन इस
- 3:52:10विद्रोह की खबर सुनकर याद रखिएगा जब यह
- 3:52:13विद्रोह भड़का तो इस विद्रोह की खबर सुनकर
- 3:52:16महू छावनी में भी विद्रोह हो गया। और वहां
- 3:52:18से भी क्वेश्चन पूछा जाता है। महूछ छावनी
- 3:52:21में विद्रोह किसके नेतृत्व में हुआ था?
- 3:52:23याद रखिएगा। तो इंदौर में विद्रोह का
- 3:52:26नेतृत्व कौन करते हैं? ये लोग और महू
- 3:52:28छावनी में विद्रोह का नेतृत्व करते हैं।
- 3:52:30याद रखिएगा मुराद अली जो कई बार एग्जाम
- 3:52:33में आते हैं हाईलाइट होते हैं। अगर मुराद
- 3:52:36अली का नाम नहीं है देन आप बता सकते हैं
- 3:52:38शहादत खान। लेकिन याद रखिएगा इंदौर छावनी
- 3:52:41में इन लोगों के द्वारा विद्रोह किया गया
- 3:52:43और महू छावनी में विद्रोह का नेतृत्व करते
- 3:52:45हैं मुराद अली। तो इस प्रकार जो है
- 3:52:47विद्रोह जो है पूरे मालवा में फैल जाता
- 3:52:49है। पूरे इंदौर रियासत में यानी होलकर
- 3:52:52रियासत में फैल जाता है। अब हम आगे बढ़ते
- 3:52:54हैं। तो कुल मिलाकर आपको ये कहानी समझ में
- 3:52:57आ गई। यानी कुल मिलाकर अभी क्या होता है
- 3:52:59कि इंदौर रेजिडेंसी पर उन्होंने हमला कर
- 3:53:01दिया और इंदौर रेजिडेंसी पर उनके द्वारा
- 3:53:03तोपों से गोले दागे गए और संघर्ष हुआ। जिस
- 3:53:06संघर्ष में क्या हुआ कि वो घायल हो गए और
- 3:53:08घायल होकर यहां से निकल गए। ठीक है? तो ये
- 3:53:10घटनाक्रम हमें देखने को मिलता है कहां का?
- 3:53:12इंदौर छावनी का। अब कहानी में क्या
- 3:53:15ट्विस्ट आता है कि यहां पर युद्ध हुआ
- 3:53:17दोनों में। युद्ध होने के बाद हमारे जो
- 3:53:19शहादत खान और उनके जो लोग थे वो यहां से
- 3:53:21फरार हो जाते हैं। ठीक है? क्योंकि आपको
- 3:53:23सबको पता है कि आखिरकार अंग्रेजों ने क्या
- 3:53:27किया था? अपने सभी उन क्षेत्रों को वापस
- 3:53:29जीत लिया था जो धीरे-धीरे उनके हाथ से
- 3:53:31निकल गए थे और इस क्रम में सबसे पहले आती
- 3:53:33है दिल्ली। तो कुल मिलाकर यही कहानी है
- 3:53:36मेन जहां पर यह विद्रोह हुआ था। अब आगे
- 3:53:38कहानी में ट्विस्ट ये है कि वो क्या करते
- 3:53:40हैं और कैसे उनको पकड़ा जाता है। हम उसको
- 3:53:42पढ़ते हैं। चलिए अब होता क्या है? इसमें
- 3:53:46एक डेट और दी है जो कि बहुत इंपॉर्टेंट
- 3:53:48है। डेट क्यों इंपॉर्टेंट बताता हूं। 20
- 3:53:51सितंबर 1857 को अंग्रेजों ने दिल्ली पर
- 3:53:53फिर से कब्जा कर लिया। यानी कभी पूछा जाए
- 3:53:56कि अंग्रेजों ने सबसे पहले किस जगह को
- 3:53:57दोबारा कब्जा किया था? वो थी दिल्ली। और
- 3:53:59जो मुगल सम्राट थे जिनका नाम था बहादुर
- 3:54:02शाह जफर। हम सब जानते हैं कि बहादुर शाह
- 3:54:04जफर को क्या कर लिया गया? बंदी बना लिया
- 3:54:06गया। और इस प्रकार जो 1857 की क्रांति है
- 3:54:09वो धीरे-धीरे क्या होने लगी? असफल होने
- 3:54:11लगी। और जब क्रांति असफल होने लगी तो जो
- 3:54:14क्रांतिकारियों के जो समूह है वो बिखर
- 3:54:16जाते हैं। ठीक है? और बाद में अंग्रेजों
- 3:54:18द्वारा जो क्रांतिकारी नेता हैं नेताओं को
- 3:54:21ढूंढ-ढूंढ कर किसी को काला पानी की सजा,
- 3:54:23किसी को फांसी की सजा और किसी को तोपों से
- 3:54:25उड़ाने का काम अंग्रेजों के द्वारा किया
- 3:54:27जाता है। अब हम वापिस अपनी कहानी पे आते
- 3:54:29हैं। तो कुल मिलाकर इंदौर में यह हुआ। फिर
- 3:54:32महू छावनी में यह हुआ और इसके बाद
- 3:54:34घटनाक्रम क्या आता है कि इसके बाद जो इनकी
- 3:54:37टोली है किन की टोली है शहादत खान वंश
- 3:54:41गोपाल भागीरथ सिलावट ये सभी के सभी लोग जो
- 3:54:43हैं दिल्ली की तरफ जाते हैं। ध्यान से
- 3:54:45सुनिएगा। कहां जाते हैं? ये सभी की स के
- 3:54:49सभी लोग जो हैं यहां पे विद्रोह करके जो
- 3:54:51है दिल्ली की तरफ जाते हैं। परंतु ये
- 3:54:53दिल्ली पहुंच नहीं पाते हैं। ठीक है? जब
- 3:54:55ये दिल्ली नहीं पहुंच पाते तो सब
- 3:54:57तितर-वितरितर हो जाते हैं। और उसी क्रम
- 3:54:59में याद रखिएगा ये जो हमारे शहादत खान हैं
- 3:55:02वो राजस्थान में एक जगह है। उधर जाकर नाम
- 3:55:05बदलकर रहने लगते हैं। और शहादत खान याद
- 3:55:07रखिएगा राजस्थान की तरफ जो है छिप जाते
- 3:55:10हैं। फरार हो जाते हैं। और वहीं पर अपना
- 3:55:12नाम चेंज करके रहते हैं। और आइए मैं बताता
- 3:55:14हूं उन्होंने अपना नाम क्या रखा था। ठीक
- 3:55:16है? देखिए। इसी बीच शहादत खान क्या हो गए?
- 3:55:20फरार हो जाते हैं और छुपते-छुपाते
- 3:55:22बांसवाड़ा जो कि राजस्थान में है, पहुंच
- 3:55:24जाते हैं और वहां अपना नाम क्या रख लेते
- 3:55:26हैं? वहां उन्होंने अपना नाम रखा अकबर खान
- 3:55:29और लगभग अकबर खान जो है 16 17 सालों तक
- 3:55:32वहां पर छुपे रहते हैं। लेकिन याद रखिएगा
- 3:55:36क्योंकि उन्होंने इतना बड़ा विद्रोह किया
- 3:55:37था तो उनकी तलाश में अंग्रेजों ने उन पर
- 3:55:405000 का इनाम घोषित कर रखा था। कितना?
- 3:55:43लगभग ₹5000 का इनाम उन पर घोषित कर रखा
- 3:55:45था। जिसकी वजह से कहीं ना कहीं उनको
- 3:55:48पकड़ने के लिए अभी भी प्रयास जारी थे
- 3:55:50शहादत खान को। ठीक है? अब होता क्या है
- 3:55:52आगे? 17 साल बाद इस क्रांति के 17 साल बाद
- 3:55:56लगभग कितना? 17 साल बाद 1874 में शहादत
- 3:56:00खान को उनके चेहरे के जख्म के निशान की
- 3:56:02वजह से पहचान लिया गया। और याद रखिएगा
- 3:56:05उनको कहां से? राजस्थान के बांसवाड़ा में
- 3:56:08गिरफ्तार कर इंदौर लाया जाता है। और 1
- 3:56:10अक्टूबर 1874 को शहादत खान को फांसी दे दी
- 3:56:14गई। तो देखिए अंग्रेज उनके पीछे इतना पड़े
- 3:56:16हुए थे कि 1 अक्टूबर 1874 को शहादत खान को
- 3:56:20क्या दे दी गई? फांसी दे दी गई। यानी
- 3:56:21उन्हें फांसी पर लटका दिया गया और उन्हें
- 3:56:23फांसी पर वहीं लटकाया गया जहां जाना आपका
- 3:56:27उद्देश्य है। यानी जो हमारा लोक सेवा आयोग
- 3:56:30है क्या है? मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग जो
- 3:56:34है मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग मध्य प्रदेश
- 3:56:38लोक सेवा आयोग के सामने जो है उनको क्या
- 3:56:40दे दी गई? उनको फांसी दे दी गई। इसीलिए अब
- 3:56:43उनकी समाधि हमको कहां देखने को मिलेगी?
- 3:56:46उनकी समाधि हमको वहीं देखने को मिलेगी।
- 3:56:48उनकी स्मारक एवं जो उनकी समाधि बनी है
- 3:56:50शहादत खान की वह एक पेड़ के नीचे बनी हुई
- 3:56:53है। जहां पर उनको क्या किया गया था? फांसी
- 3:56:55दी गई थी। तो कहां पर मिलेगी उनकी समाधि?
- 3:56:58इंदौर लोक सेवा आयोग की कोठी के सामने
- 3:57:01स्मारक है जो हमेशा उनके योगदान को क्या
- 3:57:03करता है? हमेशा उनके योगदान को याद दिलाता
- 3:57:06है। तो ये क्वेश्चन बहुत ही इंपॉर्टेंट है
- 3:57:08कि उनकी समाधि कहां पर है? नंबर वन। नंबर
- 3:57:11टू ये क्वेश्चन बहुत इंपॉर्टेंट है कि
- 3:57:13उनको फांसी कब दी गई? एक और क्वेश्चन है
- 3:57:16कि उनको गिरफ्तार कहां से किया गया? तो आप
- 3:57:18बांसवाड़ा याद रख सकते हैं। तीसरा
- 3:57:20इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है कि वो किस राजा की
- 3:57:22सेना के सिपाही थे? तो याद रखिएगा वो हैं
- 3:57:25हमारे होलकर शासक कौन? तुकोजीराव होलकर
- 3:57:28द्वितीय। अब ये जो आप देख रहे हैं उनका
- 3:57:30समाधि स्थल है। मैं इसको एक दूसरे पिक्चर
- 3:57:32में दिखाता हूं। यह देखिए यह जो आप देख
- 3:57:34रहे हैं यह लिखा हुआ है। इसी पेड़ के नीचे
- 3:57:36उनको जो है क्या है? समाधि दी गई थी। और
- 3:57:38यहां पर बीच में लिखा भी है शहीद शहादत
- 3:57:42शहीद शहादत खान
- 3:57:46यहां पे यही लिखा हुआ है स्मारक इस पेड़
- 3:57:50के नीचे जो है उनको फांसी दे दी गई थी जो
- 3:57:52कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के सामने
- 3:57:53बिल्कुल बना हुआ है। इसके साथ-साथ अभी एक
- 3:57:56नई चीज है जो आपको जानना है वह यह है कि
- 3:58:00इंदौर का जो याद रखिएगा रेजिडेंसी कोठी
- 3:58:03है। इंदौर की जो रेजिडेंसी कोठी है इसका
- 3:58:05नाम बदलने को लेकर सियासत चलती रहती है।
- 3:58:08याद रखिएगा इसका नाम बदलकर क्या रखने की
- 3:58:10सिफारिश की जाती है? इसका नाम बदलकर जो है
- 3:58:13किसके नाम पर? याद रखिएगा। तो वह है हमारे
- 3:58:16सहादत खान के नाम पर रखने की जो है
- 3:58:19सिफारिश की जाती है। ठीक है? और हो सकता
- 3:58:21है कि कुछ समय में जो है इसका नाम जल्दी
- 3:58:23ही परिवर्तित हो जाए। तो मुझे उम्मीद है
- 3:58:26कि आज जो मैंने आपको शहादत खान के बारे
- 3:58:27में बताया वह आप लोगों को बहुत अच्छे से
- 3:58:30समझ में आ गया होगा। हालांकि इसमें जो बीच
- 3:58:32की स्टोरी है उसको हमने बहुत ज्यादा डिटेल
- 3:58:34में नहीं लिया। उसका कारण है कि कहीं ना
- 3:58:36कहीं उसकी आवश्यकता नहीं होती है और फिर
- 3:58:38बहुत ज्यादा टाइम हमारा चला जाता है। मैं
- 3:58:41आपको बता देता हूं कि इन इन लोगों ने
- 3:58:42इंदौर में जब विद्रोह किया था तो इंदौर
- 3:58:44में विद्रोह करके ये जो हैं दिल्ली की तरफ
- 3:58:47कूच करते हैं। बीच में ग्वालियर के
- 3:58:48क्रांतिकारियों से मिलते हैं। फिर जो
- 3:58:50धीरे-धीरे ये जो हैं तितर-विितर हो जाते
- 3:58:52हैं। यानी सब अलग-अलग हो जाते हैं और उसी
- 3:58:54क्रम में हमारे जो शहादत खान हैं वो
- 3:58:56राजस्थान में एक जगह थी जिसका नाम था
- 3:58:59बांसवाड़ा। तो बांसवाड़ा की तरफ चले जाते
- 3:59:02हैं और बाद में उनको वहां से गिरफ्तार कर
- 3:59:04लिया जाता है क्योंकि उनके चेहरे पे एक
- 3:59:06जख्म बना था जो कर्नल ट्रेवर्स ने उनके
- 3:59:09ऊपर चेहरे पे तलवार मारी थी। तो याद
- 3:59:12रखिएगा जब सादत खान ने इंदौर रेजिडेंसी पर
- 3:59:15हमला किया था तोप उन्होंने पहली तोप से
- 3:59:18रेजिडेंसी का गेट उड़ा दिया था और वहीं पर
- 3:59:21याद रखिएगा वहीं पर जो है यह जो रेजिडेंसी
- 3:59:24अभी मैंने आपको तस्वीर में दिखाई है इस
- 3:59:26रेजिडेंसी का नाम यानी इस रेजिडें
- 3:59:29रेजिडेंसी का नाम इसीलिए बदलकर जो है
- 3:59:31सिफारिश की जाती है। पूरा पिक्चर नहीं है।
- 3:59:34तो यह इंदौर रेजिडेंसी है जो उस समय
- 3:59:36अंग्रेज इसका इस्तेमाल करते थे और इसी का
- 3:59:39नाम बदलने की सिफारिश जो है की जा रही है।
- 3:59:41तो मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को जो
- 3:59:43मैंने अभी आप लोगों को इंफॉर्मेशन दी वो
- 3:59:45आपको काम आएगी। आपके एग्जाम में हेल्प
- 3:59:47करेगी। तो ये थे हमारे महान स्वतंत्रता
- 3:59:50सेनानी जिन्होंने मालवा में 1857 की
- 3:59:53क्रांति का नेतृत्व किया। और इनका नाम था
- 3:59:56क्या? शहादत खान। तो शहादत खान के बारे
- 3:59:59में हम लोगों ने यहां पर चर्चा की।
- 4:00:02मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को यह लेक्चर
- 4:00:04अच्छा लगेगा। अगर आपको यह लेक्चर अच्छा
- 4:00:05लगे तो कमेंट करके जरूर बताइएगा। थैंक यू।
- 4:00:08जय हिंद।
- 4:00:18हेलो एवरीवन, आप सभी का एमपीपीएससी स्टडी
- 4:00:21आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है। तो
- 4:00:23दोस्तों, हमारी जो सीरीज है मध्य प्रदेश
- 4:00:25के वीरों का इतिहास। इस सीरीज में आज हम
- 4:00:28बात करने वाले हैं मध्य प्रदेश के एक महान
- 4:00:30स्वतंत्रता सैनी सेनानी एक महान आदिवासी
- 4:00:34भील योद्धा जिनका नाम था खाज्जा नायक। तो
- 4:00:36दोस्तों खाज्जा नायक की जो वीरगाथा है आज
- 4:00:39हम उसके बारे में बात करने वाले हैं।
- 4:00:41लास्ट दो वीरों की गाथाएं जो हैं मैं आप
- 4:00:44लोगों को ऑलरेडी बता चुका हूं। मामा
- 4:00:46टांटिया भील और उसके अलावा भीमा नायक। आज
- 4:00:48की कड़ी में हम बात करने वाले हैं मध्य
- 4:00:51प्रदेश के महान वीर खाज्जा नायक की
- 4:00:53वीरगाथा के बारे में। तो कौन है खाद्या
- 4:00:56नायक और किस प्रकार जो है उन्होंने
- 4:00:58स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान दिया।
- 4:01:00इसे हम 10 मिनट में ही अच्छे से समझेंगे।
- 4:01:03सबसे पहले मैं आपको बताना चाहता हूं देखिए
- 4:01:08जो हमारे खाज नायक जी हैं उन्हें वो उतना
- 4:01:11क्रेडिट नहीं मिला जितना बाकी लोगों को
- 4:01:13मिला। इसीलिए हम इस सीरीज में खासकर उन
- 4:01:16लोगों की बात कर रहे हैं जिनका नाम कहीं
- 4:01:18ना कहीं उन स्वर्णिम अक्षरों की जगह पर
- 4:01:22कहीं छूट गया या अंधकार में चला गया। तो
- 4:01:24उसी सी इस सीरीज के माध्यम से हमारा यह
- 4:01:27प्रयास है कि उन वीर नायकों को उन वीर
- 4:01:30पुरुषों को वो सम्मान दिया जाए और इसमें
- 4:01:32हमारा एक प्रयास यह है कि मध्य प्रदेश लोक
- 4:01:35सेवा आयोग की परीक्षा में बनने वाले
- 4:01:37प्रश्नों को भी आसानी से सॉल्व किया जा
- 4:01:39सके। तो जैसे कि सबसे पहले हम खाद्या नायक
- 4:01:42के जन्म के बारे में बात कर लेते हैं। कौन
- 4:01:44है खाद्या नायक? देखिए खाद्या नायक का जो
- 4:01:47जन्म है वो सांगली ग्राम में हुआ था। आप
- 4:01:50इसे बड़वानी जिले में याद रखेंगे बड़वानी
- 4:01:53एमपी और यह जो है निमाड़ का इलाका है। इसी
- 4:01:57इलाके में हमारे जो याद रखिएगा भीमा नायक
- 4:02:00जी हैं उनका भी जन्म हुआ था। ठीक है? इनके
- 4:02:02जो पिता थे उनका नाम गुमान नायक था। तो
- 4:02:04गुमान नायक के घर में इनका जन्म होता है।
- 4:02:06तो इसमें आपके काम की दो चीजें हो गई।
- 4:02:09इनका जन्म सांगली जो है कहां पर याद
- 4:02:11रखिएगा बड़वानी क्षेत्र में इनका जन्म
- 4:02:13होता है। दूसरा ये गांव का नाम है उनके और
- 4:02:15गुमान नायक इनके फादर थे। इनके जो पिता थे
- 4:02:18वो सेंधवा घाट जो कि बड़वानी में है। काफी
- 4:02:21फेमस है ये घाट क्योंकि यहां पर मध्य
- 4:02:24प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच में यानी
- 4:02:26मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का जो बॉर्डर
- 4:02:28था उस समय जो स्वतंत्रता आंदोलनकारी जो थे
- 4:02:30उनके लिए काफी इंपॉर्टेंट रोल रखता था
- 4:02:32सेंधवा घाट। तो वहां के ये वार्डन थे यानी
- 4:02:35अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी में नौकरी
- 4:02:37करते थे।
- 4:02:39उन्हें नायक की उपाधि प्राप्त थी इनके
- 4:02:41पिता को। इसके बाद 1833 में इनके पिता की
- 4:02:44मृत्यु हो गई गुमान नायक जी की और मृत्यु
- 4:02:47के बाद ये सेंधवा घाट के नायक बनते हैं।
- 4:02:49अब इस कहानी को थोड़ा सा हम अपने तरीके से
- 4:02:51समझते हैं और उसके बाद मैं आपको ये पूरी
- 4:02:53कहानी जो है बताता हूं। देखिए होता क्या
- 4:02:56है बेसिकली यह हमारे जो खाज नायक जी हैं
- 4:03:03देखिए तो खाज्या नायक जी जो थे यहां पर हम
- 4:03:07कुछ गिनी चुनी बातों को करेंगे जो आपके
- 4:03:10काम की हैं। खाज्या नायक जो है 1833 में
- 4:03:151833 में अपने पापा की मृत्यु के बाद जो
- 4:03:18है सेंधवा घाट जो है बड़वानी में इस
- 4:03:21सेंधवा घाट के वार्डन बनते हैं। सेंधवा
- 4:03:24घाट के क्या बनते हैं? बार्डन। तो जब ये
- 4:03:27सेंधवा घाट के बार्डन बनते हैं तो इनका
- 4:03:30काम था कि इस क्षेत्र से जो भी गतिविधियां
- 4:03:34हो रही हैं उन गतिविधियों पर नजर रखना। तो
- 4:03:37यहां पर यह काम करते थे और 1851 तक
- 4:03:40इन्होंने इस क्षेत्र में वार्डन के तौर पर
- 4:03:42काम किया था। एक दिन क्या होता है कि इस
- 4:03:46क्षेत्र से रात में कुछ गतिविधियां हो रही
- 4:03:48थी। कुछ लोग जा रहे थे जिसकी छानबीन
- 4:03:50इन्होंने की और उस संघर्ष में जब वह उसे
- 4:03:53रोकने का प्रयास किया तो इनके द्वारा एक
- 4:03:56व्यक्ति की हत्या कर दी गई यानी वो
- 4:03:58बीच-बचाव में वो मारा गया जिसकी वजह से
- 4:04:01अंग्रेजों ने इन्हें क्या किया 10 वर्ष की
- 4:04:04सजा सुना दी यानी लगभग 1851 तक तो
- 4:04:07इन्होंने यहां पर काम किया है। याद रखिएगा
- 4:04:09एज अ वार्डन। उसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी
- 4:04:12ने इनको क्या किया? बर्खास्त कर दिया। और
- 4:04:15बर्खास्त करने के बाद क्या किया? इनको 10
- 4:04:17साल की सजा सुना दी। 10 वर्ष की सजा। तो
- 4:04:22अंग्रेजों ने इनकी जो ईमानदारी थी, इनका
- 4:04:26जो वफादारी थी, उसकी जो सजा है वो 10 वर्ष
- 4:04:29की सजा है। और इनके लेकिन जेल में अच्छे
- 4:04:31आचरण की वजह से, अच्छे व्यवहार की वजह से
- 4:04:34यह जो सजा है वह कम कर दी गई और यहां पर
- 4:04:37इनकी सजा घटाकर 5 वर्ष कर दी गई। यानी 5
- 4:04:40वर्ष में यह जेल से बाहर आ गए। ठीक है? तो
- 4:04:43मेन जो बात है वो आपको यह जाननी है कि
- 4:04:46भीमा नायक के जो सॉरी खाज्जा नायक के जो
- 4:04:49पिता थे पिता का नाम क्या था गुमान नायक
- 4:04:52ठीक है और जो गुमान नायक थे वो कौन थे तो
- 4:04:55याद रखिएगा वो वार्डन थे किस क्षेत्र के
- 4:04:58सेंधवा घाट के गुमान नायक के बाद जो है
- 4:05:00वार्डन कौन बने थे 1833 में सेंधवा घाट के
- 4:05:03वार्डन खाज नायक बने 1851 51 तक वार्डन
- 4:05:07रहे बाद में अंग्रेजों ने इन्हें बर्खास्त
- 4:05:09करके 10 साल की सजा सुनाई लेकिन अच्छे
- 4:05:11आचरण की वजह से इन्हें ने जो है क्या कर
- 4:05:13दिया? इनकी सजा को माफ। अब इसमें क्या
- 4:05:16होता है? इसमें आगे कहानी में ट्विस्ट आता
- 4:05:19है। इसी क्षेत्र में एक महान क्रांतिकारी
- 4:05:22रहते थे जिन्होंने सेंधवा को या बड़वानी
- 4:05:25को अपना केंद्र बना रखा था। उनका नाम था
- 4:05:28बड़वानी जिनका केंद्र था और उनका नाम है
- 4:05:32भीमा नायक। ऑलरेडी आप भीमा नायक की कहानी
- 4:05:34को अच्छे से समझ चुके हैं। तो भीमा नायक
- 4:05:37इस क्षेत्र में क्या कर रहे थे? भीलपलटन
- 4:05:40बनाकर अंग्रेजों से संघर्ष कर रहे थे।
- 4:05:42जिनका उद्देश्य था अंग्रेजी शासन को उखाड़
- 4:05:44फेंकना। इन भीमा नायक को खाज्या नायक की
- 4:05:47एक बहन थी। खाज नायक की कौन थी? एक बहन।
- 4:05:51तो खाज्या नायक की जो बहन थी उनको भीमा
- 4:05:53नायक जी पसंद करते थे। और इस प्रकार जो
- 4:05:56भीमा नायक हैं वह क्या करते हैं? इनकी बहन
- 4:05:59से शादी कर लेते हैं। और इस प्रकार अगर आप
- 4:06:01ध्यान से सुने तो यह जो हैं खाद्या नायक
- 4:06:04के कौन बन जाते हैं? तो खाद्य नायक के
- 4:06:06लगते थे यह बहनोई यानी बहन के पति। तो
- 4:06:10दोनों के बीच में क्या रिश्ता था वो आप
- 4:06:12जान लेना। इसी समय क्या होता है 1857 की
- 4:06:16क्रांति जैसे कि मैंने आपको बताया 1857 की
- 4:06:19क्रांति यहां पर चल रही थी। 1857 की जब
- 4:06:22क्रांति चल रही थी
- 4:06:251857 की क्रांति। तो इस क्रांति के दौरान
- 4:06:321857 की क्रांति जब चल रही थी तो इस
- 4:06:35क्रांति के दौरान अब क्या होता है? दो
- 4:06:37योद्धा एक साथ मिल गए। एक हैं भीमा नायक
- 4:06:41और दूसरे का नाम क्या है? भीमा नायक और एक
- 4:06:45हैं हमारे खाज नायक। तो याद रखिएगा दोनों
- 4:06:48दोनों ने मिलकर यहां पर काम किया है।
- 4:06:51दोनों एक दूसरे के रिश्तेदार थे यानी
- 4:06:53खाज्या नायक के बहनोई थे। तो इन लोगों ने
- 4:06:55क्या किया? अंग्रेजों के विरुद्ध जो है
- 4:06:58अपनी भील सेना थी उसके द्वारा मुकाबला
- 4:07:00किया। अब यहां पर एक स्टोरी में एक और
- 4:07:02कहानी है। जब 1857 की क्रांति शुरू हुई,
- 4:07:06तो अंग्रेजों ने उन सभी अधिकारियों और
- 4:07:09सैनिकों को वापस बुलाया था जो बर्खास्त
- 4:07:11किए थे या जो नौकरी से हट गए थे क्योंकि
- 4:07:13उनके पास लड़ने का अनुभव था। तो यह ऑफर
- 4:07:16खाजिया नायक को भी आया। खाजिया नायक ने इस
- 4:07:18ऑफर को ठुकरा दिया और अपने बहनोई भीमा
- 4:07:21नायक के साथ जो है अंग्रेजों के विरुद्ध
- 4:07:24जो है संघर्ष किया। इस कहानी में जो मैंने
- 4:07:26आपको बताया यहां पर अब दोबारा हम इसमें
- 4:07:28देख लेते हैं। देखिए विद्रोह क्यों किया
- 4:07:31था?
- 4:07:321857 की क्रांति के एक महायोद्धा थे
- 4:07:35बलिदानी खाज्जा नायक जिन्होंने ब्रिटिश
- 4:07:37आर्मी में होते हुए अंग्रेजों से बगावत कर
- 4:07:39दी और देश के बल देश को बलिदान देकर अमरता
- 4:07:43प्राप्त की। खाज्जा नायक अंग्रेजों की भील
- 4:07:45पलटन में एक सामान्य सिपाही थे। अंग्रेजों
- 4:07:47के रीति-रिवाज पर नीति और षड्यंत्रों के
- 4:07:51कारण उन्हें अंग्रेजों से नफरत करने लगे।
- 4:07:53एक न्यायोचित कार्य के लिए पर भी शासन ने
- 4:07:57कानून अपने हाथ में लेने पर उन्हें 10 साल
- 4:07:59की सजा सुनाई थी जो मैंने आपको कहानी
- 4:08:01सुनाई। जेल से छूटकर उनके मन में इस
- 4:08:04विदेशी सत्ता से लड़ने की छटपटाहट और बढ़
- 4:08:06गई और खाज्जा नायक ने जनजातीय भील समुदाय
- 4:08:10में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की भावना
- 4:08:12जगाई और अपने भील साथियों के साथ
- 4:08:14अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। अब
- 4:08:17क्या होता है यह भी जान लीजिए। उनके मन
- 4:08:20में प्रतिशोध की भावना इतनी प्रबल थी कि
- 4:08:22वह बड़वानी क्षेत्र के क्रांतिकारी नेता
- 4:08:25भीमा नायक से मिले जो रिश्ते में उनके
- 4:08:28क्या लगते थे बहनोई इसमें एग्जाम ओरिएंटेड
- 4:08:30क्वेश्चन जो है वो मैंने आपको बता दिया
- 4:08:32समझ में आया कहां से सांगली ग्राम से
- 4:08:35संबंध है पिता का नाम क्या है गुमान सिंह
- 4:08:37नायक सेंधवा के वार्डन थे यह स्वयं वार्डन
- 4:08:40बने लेकिन बाद में अंग्रेजों के विरुद्ध
- 4:08:42विद्रोह कर दिया यहीं से इन दोनों की
- 4:08:44जोड़ी बनी जिसने भीलों की सेना बनाकर
- 4:08:46निमाड़ क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध
- 4:08:49वातावरण जो है युद्ध का कर दिया। अब एक
- 4:08:52महान वॉर के बारे में जो मैंने आपको भीमा
- 4:08:54नायक में भी समझाया था। अगर आप हर योद्धा
- 4:08:57की कहानी को ध्यान से सुनेंगे और उसे आपस
- 4:08:59में कनेक्ट करेंगे तो आपकी जो नॉलेज है वो
- 4:09:01भी बढ़ेगी और एग्जाम के जो तथ्य हैं वो भी
- 4:09:04आपकी पकड़ में आएंगे। अब देखिए एक युद्ध
- 4:09:06होता है जो आपके लिए काम का है। एग्जाम
- 4:09:09उपयोगी है। उस युद्ध का नाम क्या है? अंबा
- 4:09:12पानी की लड़ाई। इसे अंबा पानी का युद्ध भी
- 4:09:14कहते हैं। बेसिकली वो जो गांव था उस गांव
- 4:09:17का नाम अंबा पानी नहीं आमल्या पानी गांव
- 4:09:20था। लेकिन आम सामान्य भाषा में उसे अंबा
- 4:09:23पानी कहते हैं। तो क्रांतिकारी जो वीर
- 4:09:26योद्धा हैं यानी एक तरफ हमारे कौन है?
- 4:09:28पूरे के पूरे भील साथी हैं हमारे जिसमें
- 4:09:32भीमा नायक जी भी हैं। याद रखिएगा। भीमा
- 4:09:34नायक के साथ-साथ इस युद्ध में कौन है?
- 4:09:37खाज्या नायक भी हैं और खाज्या नायक के
- 4:09:40बेटे भी साथ में लड़ रहे हैं जिनका नाम था
- 4:09:42दौलत सिंह। याद रखिएगा इनके बेटे हैं दौलत
- 4:09:45सिंह। इन सभी योद्धाओं ने अपनी सेना को
- 4:09:48इकट्ठा किया और अंबा पानी जो जगह थी वहां
- 4:09:51पर जो है ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और
- 4:09:53इनके बीच में एक भयंकर लड़ाई होती है और
- 4:09:56इस लड़ाई का जो डेट है वो है 11 अप्रैल
- 4:10:001858।
- 4:10:02इस भीषण संघर्ष में दो लोगों की देखिए
- 4:10:06यहां पर जो हमारे यह हैं
- 4:10:08दौलत सिंह जो इनके बेटे थे इनकी मृत्यु हो
- 4:10:11गई और खाज नायक हैं इनकी भी मृत्यु हो गई
- 4:10:14तो खाज नायक का जो बलिदान दिवस है वो
- 4:10:17मनाया जाता है 11 अप्रैल भीमा नायक बच
- 4:10:19निकले थे जो बाद में अंग्रेजों द्वारा
- 4:10:22उन्हें एक विश्वासघाती के द्वारा पकड़कर
- 4:10:24उन्हें काला पानी की सजा हुई थी जो हम
- 4:10:26उनके पार्ट में पढ़ चुके हैं पोर्ट ब्लियर
- 4:10:28जहां पर उनकी मृत्यु 29 दिसंबर 1876 को हो
- 4:10:31गई थी। तो कुल मिलाकर यह जो लड़ाई है अंबा
- 4:10:34पानी की वह बड़ी फेमस है। इस युद्ध में
- 4:10:36भीमा नायक, खाज्जा नायक और उनके जो बेटे
- 4:10:40हैं जिनका नाम था दौलत सिंह इन लोगों ने
- 4:10:42अंग्रेजों से एक भीषण संघर्ष किया। परंतु
- 4:10:45अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार थे। इनके
- 4:10:47पास परंपरागत हथियार थे। जिसकी वजह से जो
- 4:10:49भील सेना है वो हार गई। इनके कई साथी
- 4:10:51युद्ध में मारे जाते हैं। सिर्फ इसमें
- 4:10:54भीमा नायक जी बचते हैं। तो यही लिखा हुआ
- 4:10:57है। देखिए क्रांतिकारी वीर योद्धा खाज्जा
- 4:10:59नायक ने जनजातीय भील समुदाय में चेतना
- 4:11:01लाते हुए अंग्रेजों से सीधे युद्ध किया
- 4:11:04था। वर्ष 18 57 की क्रांति में जिसने
- 4:11:07बड़वानी क्षेत्र में भीलों की बागडोर
- 4:11:09संभाली। वहीं 11 अप्रैल 1858 को बड़वानी
- 4:11:12और सिलावत के बीच स्थित अमल्यापानी गांव
- 4:11:15में अंग्रेज सेना और इस भील सेना की
- 4:11:18मुठभेड़ हो गई। अंग्रेज सेना के पास
- 4:11:20आधुनिक शस्त्र थे। जबकि भील अपने परंपरागत
- 4:11:23शस्त्रों से ही मुकाबला कर रहे थे। प्रातः
- 4:11:268:00 बजे यह जो लड़ाई है सुबह 8:00 बजे
- 4:11:28शुरू हुई थी। शाम के 3:00 बजे तक चलती है
- 4:11:31और इस युद्ध में खाज्या नायक और उनके जो
- 4:11:34पुत्र हैं दौलत सिंह यह अनेक योद्धा जो
- 4:11:36हैं वो यहां पर वीरगति को प्राप्त होते
- 4:11:39हैं। कुछ जो सोर्स हैं या कुछ इतिहासकार
- 4:11:42जो हैं वो इनका जो बलिदान दिवस है वो यह
- 4:11:45बताते हैं। इसमें एक छोटी सी कहानी जोड़ते
- 4:11:48हैं और वह 3 अक्टूबर 1860 को बताते हैं।
- 4:11:52इसमें क्या ट्विस्ट है मैं आपको बता देता
- 4:11:54हूं। वह बताते हैं कि इस युद्ध में खाज्जा
- 4:11:57नायक जी बच निकले थे और वह जो है फिर से
- 4:11:59भीलों का नेतृत्व कर रहे थे। उसी समय क्या
- 4:12:02होता है कि एक दिन वह अपनी पलटन को लेकर
- 4:12:04एक नदी में स्नान कर रहे थे और वहां पर एक
- 4:12:07रोहित्दीन नाम का व्यक्ति था जो एक
- 4:12:09मुस्लिम था यह आया जो इनका विश्वास पात्र
- 4:12:12बना था। एक्चुअली में रोहित्दीन नाम का जो
- 4:12:14व्यक्ति था इस व्यक्ति को अंग्रेजों ने
- 4:12:17इनके पास भेजा था जासूस बनाकर और इस
- 4:12:19रोहित्दीन ने क्या किया था? इनका विश्वास
- 4:12:21जीत लिया। और एक दिन जब हमारे खाज नायक उस
- 4:12:25नदी में स्नान कर रहे थे क्योंकि वह एक
- 4:12:27धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और जैसे
- 4:12:29ही वह स्नान के लिए निकले और सूर्य पूजा
- 4:12:31कर रहे थे तो रोहित ने पीछे से उनकी पीठ
- 4:12:34में तलवार मार दी और उनकी हत्या कर दी। जब
- 4:12:36उनकी बहन उन्हें बचाने के लिए आती है तो
- 4:12:38उनकी बहन की भी हत्या कर दी थी। तो इस
- 4:12:41प्रकार जो है खाजिया नायक की हत्या
- 4:12:43रोहित्दीन नामक व्यक्ति ने की। तो कुछ जो
- 4:12:46सोर्स हैं वो इनका बलिदान दिवस 3 अक्टूबर
- 4:12:481860 को मानते हैं। लेकिन अगर आप कहीं पर
- 4:12:51भी सर्च करेंगे क्योंकि इन क्रांतिकारी
- 4:12:53वीर योद्धाओं के बारे में वो
- 4:12:56प्रॉपर जानकारी अवेलेबल नहीं है जो
- 4:12:58वास्तविक रूप से होनी चाहिए। तो जिसकी वजह
- 4:13:00से संभवत ये एक तथ्य है जो आपको याद रखना
- 4:13:04है। अब इसमें एक आखिरी बात जो मुझे आपको
- 4:13:07बतानी है। देखिए लास्ट सेशन में जब मैंने
- 4:13:10आप लोगों को
- 4:13:12भीमा नायक जी के बारे में बताया था तो
- 4:13:14उनकी जो गढ़ी थी उसके बारे में आपको बताया
- 4:13:16था और उसका पिक्चर भी दिखाया था जो
- 4:13:18बड़वानी जिले में है जिसका नाम धोला
- 4:13:20बाबड़ी या ढाबा बाबड़ी के नाम से फेमस है।
- 4:13:23याद रखिए धोला बाबड़ी या ढाबा बाबड़ी।
- 4:13:25यहां पर एक किला लिखा हुआ है भरगढ़ का
- 4:13:28किला। यह जो किला है मध्य प्रदेश के
- 4:13:30बड़वानी जिले में है। इससे आपका एक फैक्ट
- 4:13:32भी तैयार होगा और एक खास बात क्या है कि
- 4:13:34यह जो किला था यह महान जो हमारे वीर
- 4:13:38योद्धा हैं खाज्या नायक उनकी कर्मस्थली
- 4:13:42थी। इस किले को जो है उनकी कर्मस्थली माना
- 4:13:45जाता है जिसका नाम है भंवरगढ़ का किला। इस
- 4:13:47किले का जो वर्तमान में यह स्थिति है
- 4:13:49बड़वानी में है। यहां पर जो सरकार है मध्य
- 4:13:53प्रदेश सरकार ध्यान से सुनिएगा। मध्य
- 4:13:55प्रदेश सरकार ने यहां पर क्या किया है?
- 4:13:57हाल ही में जो मुख्यमंत्री जी थे उन्होंने
- 4:13:59यहां पर एक प्रेरणा केंद्र बनाने की घोषणा
- 4:14:02भी की है। तो एक क्वेश्चन यह पूछा जा सकता
- 4:14:05है कि मध्य प्रदेश के किस किले को खाद्य
- 4:14:07न्याय की कर्मस्थली के रूप में जाना जाता
- 4:14:09है और यह सेंधवा जो कि बड़वानी में उससे
- 4:14:1214 किमी दूरी है यानी उसके पास में स्थित
- 4:14:14है जिसका नाम है क्या? भंवरगढ़ का किला।
- 4:14:17तो यह थी आज की जो हमारी कहानी जिसमें
- 4:14:20हमने एक महान स्वतंत्रता सेनानी मध्य
- 4:14:22प्रदेश के वीर आदिवासी योद्धा भील योद्धा
- 4:14:25खाज्या नायक के बारे में जाना। उनके पिता
- 4:14:28का नाम गुमान सिंह नायक। सेंधवा घाट से
- 4:14:30उनका संबंध है। भीमा नायक उनके बहनोई थे
- 4:14:33और अंबा पानी के युद्ध में उनके पुत्र की
- 4:14:35मृत्यु होती है जिनका नाम दौलत सिंह था और
- 4:14:38वह भीलपल्टन में नौकरी करते थे। इसके
- 4:14:41अलावा एक और इंपॉर्टेंट बात जो मैंने आपको
- 4:14:44बताई थी। मैं चाहता हूं आप दोबारा भी देख
- 4:14:46लें। इसमें कोई परेशानी नहीं है। यह जो
- 4:14:48धोला बाबड़ी है या इसको ढाबा बाबड़ी भी
- 4:14:51कहते हैं। यह जो है अगर कभी पूछा जाए इसका
- 4:14:54संबंध किससे है? याद रखिएगा तो यह जो है
- 4:14:57वह भीमा नायक की कर्मस्थली है या उनकी
- 4:14:59गढ़ी के रूप में जाना जाता है। सरकार
- 4:15:01द्वारा यहां पर एक भीमा नायक प्रेरणा
- 4:15:04केंद्र बनाया गया है करोड़ों रुपए खर्च
- 4:15:06करके। तो यह भी पूछा जा सकता है कि भीमा
- 4:15:08नायक प्रेरणा केंद्र कहां पर है? बड़वानी
- 4:15:10जिले में जिसका नाम है धोलाबावड़ी के पास।
- 4:15:13आई होप आप लोगों को जो जानकारी आज मेरे
- 4:15:16द्वारा दी गई है, यह सीरीज आप लोगों को
- 4:15:19काफी हेल्प कर रही होगी और इस सीरीज के
- 4:15:21माध्यम से आप मध्य प्रदेश के उन वीरों के
- 4:15:23बारे में जान पा रहे हैं जो कहीं ना कहीं
- 4:15:26गुमनाम रहे। कहीं ना कहीं उनको वह सम्मान
- 4:15:28नहीं प्राप्त हुआ जिसके वह हकदार थे। आगे
- 4:15:31की सीरीज में हम और वीर योद्धाओं के बारे
- 4:15:34में बात करेंगे। आप लोगों से बस इतना
- 4:15:36रिक्वेस्ट है कि अगर आपको यह सीरीज पसंद आ
- 4:15:38रही है तो आप कमेंट करके जरूर बताएं। जय
- 4:15:41हिंद। थैंक यू।
- 4:15:49नमस्कार साथियों आप सभी का एमपीपीएससी
- 4:15:52स्टडी आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है।
- 4:15:54उम्मीद है आप सभी लोग मन लगाकर पढ़ रहे
- 4:15:56होंगे और आपकी तैयारी बेहतर होगी। साथियों
- 4:16:00आप सभी लोग जानते हैं कि मेरे द्वारा एक
- 4:16:02सीरीज स्टार्ट की गई है जिसका नाम है मध्य
- 4:16:04प्रदेश के वीरों का इतिहास। तो इस सीरीज
- 4:16:07में हम अभी तक बहुत सारे वीरों की चर्चा
- 4:16:09कर चुके हैं और आज हम बात करने वाले हैं
- 4:16:12मध्य प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम के एक वीर
- 4:16:15और एक प्रमुख योद्धा जिनका नाम है रघुनाथ
- 4:16:18सिंह मंडलोई। तो दोस्तों आप लोगों ने नाम
- 4:16:21सुना होगा रघुनाथ सिंह मंडलोई जी का जो
- 4:16:23निवाड़ क्षेत्र के एक आदिवासी योद्धा थे
- 4:16:25जिन्होंने 1857 की क्रांति के समय
- 4:16:28स्वतंत्रता आंदोलन में अपना बहुमूल्य
- 4:16:30योगदान दिया। तो आइए बात करते हैं कि कौन
- 4:16:32है रघुनाथ सिंह मंडलोई जी जिन्होंने
- 4:16:35स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और अपना
- 4:16:38योगदान दिया। तो देखिए रघुनाथ सिंह मंडलोई
- 4:16:40के बारे में अगर हम बात करें तो सबसे पहले
- 4:16:42रघुनाथ सिंह जो मंडलोई हैं उनके जन्म को
- 4:16:45आपको याद रखना है। इनका जो जन्म है वो
- 4:16:47ग्राम टांडा बरूड़ कचहरी इसको बोलते हैं।
- 4:16:50यह एक्चुअली में खरगोन डिस्ट्रिक्ट में
- 4:16:52आता है जो कि निमाड़ का पार्ट है। यहां पर
- 4:16:55इनका जन्म हुआ था। आप सभी ने आप सब ने अभी
- 4:16:58तक जितने भी योद्धाओं के बारे में पढ़ा
- 4:17:00आदिवासी वीर वीर योद्धा खाज्या नायक, भीमा
- 4:17:03नायक, बिरजू नायक, सीताराम कवर, टांट्या
- 4:17:06भील ये सभी के सभी निमाड़ क्षेत्र के
- 4:17:08आदिवासी योद्धा थे। इसका एक मतलब यह है कि
- 4:17:11अगर आपसे कभी एग्जाम में मुख्य परीक्षा
- 4:17:13में भी पूछा जाए कि निमाड़ के प्रमुख
- 4:17:16आदिवासी योद्धाओं के बारे में लिखिए
- 4:17:18जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपना
- 4:17:20महत्वपूर्ण योगदान दिया तो आप सभी के बारे
- 4:17:22में बता सकते हैं। अब बात करते हैं कि
- 4:17:24इनके पिता इनके पिता का नाम था दीवान सिंह
- 4:17:27जो उस समय 52 गांव की आदिवासी
- 4:17:3152 आदिवासी गांव के जमींदार थे। और इनका
- 4:17:34जो मुख्य काम था इनके पिता का इन आदिवासी
- 4:17:36गांव से टैक्स कलेक्ट करना इस क्षेत्र में
- 4:17:39जहां इनका जन्म हुआ और इनके आसपास के जो
- 4:17:41क्षेत्र जहां पे इनके पिताजी जमींदार थे
- 4:17:44वहां पर पान की खेती मुख्य रूप से होती थी
- 4:17:46और जो पान करते थे जो लोग पान की खेती
- 4:17:49करते थे उनसे ये कर वसूलते थे जैसे कि
- 4:17:52टांडा वरुड़ विस्टान ऊन रोम चिल्ली
- 4:17:55देवनलिया ये जो आदि गांव थे यह पान की
- 4:17:58खेती के लिए बड़े विख्यात थे और याद
- 4:18:00रखेंगे खेत की चुंगी का करारोपण इनके पिता
- 4:18:02दीवान सिंह के हाथों में था। यानी जो पान
- 4:18:05की खेती पर टैक्स लिया जाता था वह इनके
- 4:18:07पिताजी वसूलते थे और उसका एक हिस्सा जो है
- 4:18:10होलकर दरबार को भेजा करते थे। क्योंकि इस
- 4:18:12क्षेत्र में होलकर राज्य का प्रभाव था। तो
- 4:18:16अब क्या होता है कि वह पान की खेती करने
- 4:18:18वाले जो किसान हैं उनसे 2% करारोपण लेते
- 4:18:21थे और जो गरीब किसान होते थे उनको जो है
- 4:18:23कुछ छूट देते थे टैक्स में। तो यह इनके
- 4:18:26पिता की बात हो गई। अब हम बात करते हैं
- 4:18:28आगे रघुनाथ सिंह मंडलोई ने क्या किया? तो
- 4:18:31देखिए रघुनाथ सिंह मंडलोई ने 1800 देखिए
- 4:18:34इसमें एक डेट लिखी है अक्टूबर 1858 के कुछ
- 4:18:37पहले ही टांडा बारूद के रघुनाथ सिंह
- 4:18:39मंडलोई याद रखिएगा इन्होंने विद्रोह कर
- 4:18:41दिया और फरार हो गए। अब इससे आगे की कहानी
- 4:18:44को मैं समझाऊं उससे पहले मैं आपको एक छोटा
- 4:18:46सा चार्ट बनाकर बताता हूं जिससे कि आप
- 4:18:48आसानी से समझ पाएंगे। मुझे लगता है कि अगर
- 4:18:51मैं यह बताऊंगा तो आपको आसानी से यह बात
- 4:18:52समझ में आएगी कि किस तरीके से जो है यहां
- 4:18:55पर घटनाक्रम होता है। तो देखो
- 4:19:09देखिए यहां पर क्या होता है?
- 4:19:16जैसे कि पहले हम चलते हैं निर्माण
- 4:19:19क्षेत्र। यह रहा निर्माण क्षेत्र। ध्यान
- 4:19:22से सुनिएगा आप। इस निर्माण क्षेत्र में
- 4:19:24अभी जो क्रांतिकारी योद्धा हैं या जो इस
- 4:19:27क्षेत्र में एक्टिव हैं उनका नाम था
- 4:19:29रघुनाथ सिंह मंडलोई और रघुनाथ सिंह मंडलोई
- 4:19:33जिनके सहायक हैं मतलब मेन जो योद्धा हैं
- 4:19:35इस क्षेत्र के उनका नाम है सीताराम कंवर
- 4:19:38सीताराम कंवर हम लोग पढ़ चुके हैं
- 4:19:40जिन्होंने क्या किया था आदिवासी लोगों को
- 4:19:43इकट्ठा करके जो है विद्रोह कर दिया तो
- 4:19:45सीताराम कमर इस क्षेत्र के प्रमुख
- 4:19:47विद्रोही थे ठीक है कौन थे यह प्रमुख
- 4:19:50विद्रोही इन्होंने आदिवासियों को इकट्ठा
- 4:19:52किया था और यह क्या कर रहे थे? यह
- 4:19:54आदिवासियों को इकट्ठा कर अंग्रेजों के
- 4:19:56विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे। अब आपने एक
- 4:19:59वर्ड सुना होगा। यह है इंदौर रियासत या
- 4:20:01इंदौर राज्य हम बोल सकते हैं। इंदौर
- 4:20:04रियासत के द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में
- 4:20:07एक अधिकारी अपॉइंट किया जाता था। जिनको
- 4:20:09मंडलोई बोलते थे। मंडलोई बेसिकली एक टाइटल
- 4:20:13है। याद रखिएगा। जिनका काम था क्षेत्र
- 4:20:16विशेष से कर संग्रह करना। क्या करना? कर
- 4:20:19संग्रह करना। ठीक है? कर संग्रह करना। तो
- 4:20:22पहले इनके जो पिता थे यानी रघुनाथ सिंह
- 4:20:24मंडलोई के जो पिता थे वो इस क्षेत्र से कर
- 4:20:27वसूलते थे जिनका नाम था दीवान सिंह।
- 4:20:30ठीक है? बाद में इस क्षेत्र के मंडलोई
- 4:20:33अपॉइंट किए गए जिनका नाम था रघुनाथ सिंह।
- 4:20:36याद रखना रघुनाथ सिंह मंडलोई। तो रघुनाथ
- 4:20:40सिंह मंडलोई को यह जिम्मेदारी दी गई कि वह
- 4:20:42किसानों से टैक्स कलेक्ट करें। अब इस बीच
- 4:20:45क्या होता है कि जो ब्रिटिश सरकार है याद
- 4:20:48रखिएगा सरकार है या आप ऐसा समझते हैं कि
- 4:20:50होलकर रियासत इनके द्वारा जो पान की खेती
- 4:20:53है क्या है पान की खेती इस पर कर बढ़ा
- 4:20:57दिया गया इस पे क्या कर दिया गया कर
- 4:20:58वृद्धि कर दी गई तो इस कर वृद्धि से यह जो
- 4:21:01है हमारे दीवान सिंह के जो पुत्र हैं यानी
- 4:21:04रघुनाथ सिंह मंडोई वो हो जाते हैं नाराज
- 4:21:06हो जाते हैं और नाराज होकर वो यह कहते हैं
- 4:21:09कि यदि आपने यह कर वापस नहीं लिया तो बुरा
- 4:21:12अंजाम होगा तो पहले तो सरकार ने क्या किया
- 4:21:16इनको उपाधि दी राव की उपाधि दी और उनको
- 4:21:19कुछ पेंशन देने की कोशिश की कि आप इस
- 4:21:21क्षेत्र में ऐसा कुछ ना करें लेकिन जब यह
- 4:21:24विरोध करते हैं तो इनकी जो ये मंडलों यानी
- 4:21:27इनकी जो जमींदारी हम बोल सकते हैं इनकी जो
- 4:21:30जमींदारी है इस क्षेत्र की वो जमींदारी
- 4:21:32इनसे छीन ली जाती है और इस जगह पर एक
- 4:21:35दूसरा जमींदार अपॉइंट किया जाता है जिसको
- 4:21:38यह जिम्मेदारी दी गई कि वह रघुनाथ सिंह
- 4:21:40मंडलोई को यहां पर पकड़ ले या उनके इस
- 4:21:43क्षेत्र में उनके जो वर्चस्व है उसको
- 4:21:45समाप्त कर दे। तो इस बीच यह जो हैं हमारे
- 4:21:48रघुनाथ सिंह मंडलोई मिल जाते हैं। किसके
- 4:21:50साथ? इनके साथ मिल जाते हैं जिनका नाम है
- 4:21:53सीताराम कमर। तो रघुनाथ मंडलोई किसके साथ
- 4:21:56आ गए? तो रघुनाथ मंडलोई आ जाते हैं
- 4:21:58सीताराम कमर के साथ आ जाते हैं जो इस
- 4:22:00क्षेत्र के प्रमुख विद्रोही थे। सहयोगी बन
- 4:22:03गए। अब इस बीच एक दुर्घटना हुई। ठीक है?
- 4:22:06आपको याद होगा सीताराम कमर जो थे उनको
- 4:22:10अंग्रेजों के द्वारा उन्हीं के गांव में 8
- 4:22:13अक्टूबर 1858 को घेर लिया गया था जिसमें
- 4:22:16सीताराम कमर लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त
- 4:22:20हुए थे। तो सीताराम कंवर जो हैं जब इनकी
- 4:22:23मृत्यु हो जाती है। याद रखिएगा कब? 8
- 4:22:25अक्टूबर 8 अक्टूबर 1858 को जब ये शहीद हो
- 4:22:29जाते हैं। ठीक है? इन्हीं के गांव पे
- 4:22:31अंग्रेजों ने हमला किया था जिसमें ये शहीद
- 4:22:33हो गए। लास्ट लेक्चर में आप लोगों को
- 4:22:34पढ़ाया था। तो बाद में इनकी मृत्यु के
- 4:22:37पश्चात इस क्षेत्र में जो प्रमुख विद्रोही
- 4:22:40बनते हैं या इस क्षेत्र में इनके बाद
- 4:22:43आदिवासियों का नेतृत्व कौन करते हैं?
- 4:22:45रघुनाथ सिंह मंडलोई आदिवासियों का नेतृत्व
- 4:22:48करते हैं। और इन्होंने क्या किया जो इस
- 4:22:51क्षेत्र के भील इस क्षेत्र के भिलाला जो
- 4:22:55आदिवासी थे इनको मिलाकर एक अपना संगठन
- 4:22:58तैयार कर लिया। और यह जो संगठन क्या करने
- 4:23:01लगा? यह संगठन जमींदारों और अंग्रेजों को
- 4:23:05लूटने लगा। किसको लूटने लगा? जमींदारों और
- 4:23:08अंग्रेजों को लूटने लगा। ठीक है? तो इस
- 4:23:11प्रकार यह जमींदारों और अंग्रेजों को
- 4:23:13लूटते थे और बताते हैं कि इनके साथ क्या
- 4:23:16होता है कि यह लूट कर एक किले में छिप
- 4:23:18जाया करते थे। जिस किले का नाम था
- 4:23:20बीजागढ़। आपने सुना होगा बीजागढ़। बीजागढ़
- 4:23:24की पहाड़ी भी आपने सुनी होगी। तो बीजागढ़
- 4:23:26जो किला है यहां पर यह छिप जाया करते थे।
- 4:23:28इस लूट के माल को लेकर रघुनाथ सिंह
- 4:23:30मंडलोई। इन्होंने अपनी जो सेना बनाई थी
- 4:23:34उसमें इनके साथ 3000 विद्रोही थे। सोचिएगा
- 4:23:37कितनी बड़ी सेना इनके द्वारा बनाई गई।
- 4:23:39यानी निमाड़ क्षेत्र के आदिवासियों का
- 4:23:42समर्थन इन्हें प्राप्त था। तो इन्होंने
- 4:23:44क्या किया? जमींदारों और अंग्रेजों को
- 4:23:45लूटना प्रारंभ किया। क्योंकि ऑलरेडी ये
- 4:23:48सीताराम कंवर के सहयोगी थे। अंग्रेजों के
- 4:23:50विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे। तो उन्होंने
- 4:23:52उसी रास्ते को चुना और परंतु एक दिन ऐसा
- 4:23:55होता है कि जब ये बीजागढ़ फोर्ट में छुपे
- 4:23:58हुए थे तो एक अंग्रेज अधिकारी इन्हें
- 4:24:00पकड़ने के लिए आता है जिसका नाम था मेजर
- 4:24:02कीटिंग। क्या नाम था? मेजर कीटिंग। तो
- 4:24:06मेजर कीटिंग ने क्या किया? इस पर छापा
- 4:24:08मारा और इस पर छापा मार के मतलब इसको घेर
- 4:24:11लिया और घेर कर जो है इनको गिरफ्तार कर
- 4:24:14लिया और इनको गिरफ्तार करने के बाद बताते
- 4:24:17हैं मंडलेश्वर के पास इनको गिरफ्तार करके
- 4:24:20रखा गया और वहीं जो है इनको फांसी दे दी।
- 4:24:23अब यह कहानी जो मैंने आपको समझाई इस कहानी
- 4:24:25में से काम की बातें क्या है? वह आपको
- 4:24:28कैसे निकालनी है? पहली बात यह है कि
- 4:24:30रघुनाथ सिंह मंडलोई कौन थे? तो आप याद
- 4:24:33रखिएगा रघुनाथ सिंह मंडलोई निमाड़ क्षेत्र
- 4:24:35के एक प्रमुख आदिवासी क्या थे? योद्धा थे।
- 4:24:38इन्होंने 1857 की क्रांति में भाग लिया।
- 4:24:41अब इसमें हम याद रखना यह वर्ड कि 1857 की
- 4:24:45क्रांति चल रही है और 1857 की क्रांति में
- 4:24:49इनका योगदान है। यह आपको याद रखना है।
- 4:24:521857 की क्रांति में क्या है? इनका योगदान
- 4:24:55है। और 1857 की क्रांति में यह किसके
- 4:24:58सहयोगी बने थे? सीताराम कंवर के सहयोगी
- 4:25:01बने थे। सीताराम के शहीद होने के बाद
- 4:25:03इन्होंने इस क्षेत्र में विद्रोह का
- 4:25:04नेतृत्व किया। अंग्रेजों से संघर्ष किया।
- 4:25:07ये अंग्रेजों और जमींदारों को लूटकर अपनी
- 4:25:09जो लूट का माल है वो बीजागढ़ फोर्ट में
- 4:25:11रखते थे। लेकिन मेजर की ने वीजागढ़ फोर्ट
- 4:25:14पर कब्जा कर लिया और इन्हें धोखे से
- 4:25:16इन्हने कहा कि बातचीत के बहाने इनको
- 4:25:19बुलाया और इनको अरेस्ट कर लिया और बाद में
- 4:25:20जो है इनको फांसी दे दी गई। अब यहां पे जो
- 4:25:23लिखा हुआ है मैं आपको वह पढ़ के बताता हूं
- 4:25:25जिससे आपको थोड़ा सा और अच्छे से समझ में
- 4:25:27आ जाएगा। देखिए ये लिखा हुआ है इस पर
- 4:25:31देखिए जब इन्होंने विद्रोह किया था मतलब
- 4:25:33इन्होंने किसानों पर जो टैक्स बढ़ाया गया
- 4:25:36उसका जब इन्होंने विरोध किया तो इंदौर
- 4:25:38दरबार ने उनका वतन वतन बोलते हैं जागीर को
- 4:25:41जिस 52 गांव के इनके पिता जागीरदार थे
- 4:25:44जमींदार थे उसकी बात चली तो वतन बोलते हैं
- 4:25:46जागीर को तो इंदौर दरबार ने इनके स्थान पर
- 4:25:49बलवंत सिंह मंडलोई मंडलोई एक टाइटल है जो
- 4:25:53उस क्षेत्र से टैक्स कलेक्शन करता था
- 4:25:55बलवंत सिंह मंडलोई के नाम पर कर दिया।
- 4:25:57यानी इनकी जो जमींदारी वह बलवंत सिंह
- 4:25:59मंडलोई को दे दी और बलवंत सिंह से कहा कि
- 4:26:02आप रघुनाथ सिंह को और उनके साथियों को
- 4:26:04पकड़ने की कोशिश करें। रघुनाथ सिंह ने
- 4:26:07इसका विरोध कर 1858 में करारोपण नीति के
- 4:26:10खिलाफ आदिवासी भील, बारेला, भिलाला आदि के
- 4:26:14साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन
- 4:26:16किया। अंग्रेजों ने रघुनाथ सिंह को पकड़ने
- 4:26:19के लिए कई रेज़ेंट को लगाया। कई अंग्रेज
- 4:26:21अधिकारी रेजीमेंट को लगाया। परंतु उन्हें
- 4:26:23वह नहीं पकड़ पाए। उनकी सेना में 3000
- 4:26:26क्रांतिकारी हो गए। अक्टूबर 1858 को
- 4:26:29उन्हें अंग्रेजों ने धोखे से गिरफ्तार कर
- 4:26:32लिया। इंदौर में रखने के बाद महेश्वर जेल
- 4:26:34में भेजा जहां कुछ समय बाद महेश्वर में
- 4:26:37रघुनाथ सिंह को फांसी दे दी गई। स्थानीय
- 4:26:39लोगों ने उनके नाम पर स्मारक बनाने की
- 4:26:41मांग की है। तो यह कहानी थी रघुनाथ सिंह
- 4:26:44मंडलोई की। ठीक है? जो मैंने आपको बताई।
- 4:26:47रघुनाथ सिंह मंडलोई की सेना में कितने
- 4:26:49क्रांतिकारी थे? 3000 क्रांतिकारी थे। याद
- 4:26:52रखिएगा।
- 4:26:54हालांकि अंग्रेजों ने उनसे बचने के लिए और
- 4:26:56उनको खुश करने के लिए राव का टाइटल दिया
- 4:26:59था। याद रखिएगा अंग्रेजों ने इनके विरोध
- 4:27:01से बचने के लिए उनको राव की उपाधि दी और
- 4:27:03₹35,000 माह पेंशन पुरस्कार देने की जो है
- 4:27:07बात भी कही थी। अन्य सुविधाएं भी दी।
- 4:27:09परंतु रघुनाथ सिंह ने इसका विरोध किया और
- 4:27:121858 में करारोपण नीति के खिलाफ
- 4:27:14आदिवासियों को इकट्ठा करके विद्रोह किया।
- 4:27:17फाइनली याद रखिएगा इनके बारे में जो मैंने
- 4:27:20आपको मेन-मेन पॉइंट्स बताए वह क्या हैं कि
- 4:27:22इन्होंने विद्रोह जो किया था उसका कारण था
- 4:27:25करारोपण नीति अर्थात पान की खेती पर
- 4:27:28अत्यधिक कर लगाना जिसकी वजह से इन्होंने
- 4:27:30किसानों का समर्थन लिया और क्योंकि इस
- 4:27:33क्षेत्र में जो वीर योद्धा पहले से
- 4:27:36अंग्रेजों के विरुद्ध सक्रिय थे यह उनके
- 4:27:38साथ मिल गए और अंग्रेजों का विरोध किया।
- 4:27:41अंग्रेजों ने इन्हें पकड़ने के लिए बड़ी
- 4:27:43सेनाएं लगाई। जब इन्हें नहीं पकड़ पाए तो
- 4:27:45धोखे से इनको बीजागढ़ किले में बीजागढ़
- 4:27:47किला कहां है? याद रखिएगा खरगोन
- 4:27:49डिस्ट्रिक्ट में है। तो वहां पर बीजागढ़
- 4:27:51महादेव का एक प्रसिद्ध मंदिर भी है और
- 4:27:53वहां पर इनको जो है मेजर कीटिंग ने इनको
- 4:27:56गिरफ्तार कर लिया और कहा जाता है इनको जो
- 4:27:57है फांसी चढ़ा दी गई थी। तो अब आपके मन
- 4:28:01में एक सवाल होगा सर इसमें काम के
- 4:28:03क्वेश्चन क्या है? तो इसमें काम का
- 4:28:04क्वेश्चन तो यह है कि इनको अरेस्ट कहां
- 4:28:06किया गया? किसने अरेस्ट किया? तो मेजर
- 4:28:08कीटिंग बीजागढ़ का जो किला है वहां अरेस्ट
- 4:28:10किया। इन्होंने किस वजह से विद्रोह किया
- 4:28:13था? तो याद रखिएगा करारोपण नीति जो
- 4:28:15बार-बार यहां पर लिखी है। कौन सी नीति?
- 4:28:18करारोपण नीति के विरुद्ध विद्रोह किया था।
- 4:28:20बेसिकली यह खुद जमींदार थे। इसीलिए समझते
- 4:28:23थे कि किसानों से कितना कर लेना चाहिए और
- 4:28:26कितना नहीं लेना चाहिए। ज्यादा कर लेना
- 4:28:28सही नहीं था क्योंकि किसानों की स्थिति
- 4:28:30दयनीय थी। तो इस प्रकार इन्होंने विद्रोह
- 4:28:32किया। यह सीताराम कंवर के सहयोगी हैं।
- 4:28:35इंपॉर्टेंट है। सीताराम कंवर के सहयोगी
- 4:28:38हैं। याद रखिएगा।
- 4:28:41यह जो मैंने अभी आपको पूरी स्टोरी बताई
- 4:28:43इसका निचोड़ था जो आप याद रख सकते हैं।
- 4:28:45ठीक है? आई होप आपको समझ में आ गया होगा।
- 4:28:48टांडा बारूद इनके बर्थ प्लेस का नाम पिता
- 4:28:50का नाम दीवान सिंह है और इनकी जागीर छीनकर
- 4:28:54बलवंत सिंह मंडलोई को दी गई थी। तो अगर आप
- 4:28:57मुख्य 10 से 12 पॉइंट अगर याद रख सकते हैं
- 4:28:59इनके बारे में तो आप आसानी से बता सकते
- 4:29:01हैं कि रघुनाथ सिंह मंडलोई कौन थे? रघुनाथ
- 4:29:04सिंह मंडलोई टांडा के रहने वाले थे। इनके
- 4:29:07पिता दीवान सिंह 52 आदिवासी गांव के
- 4:29:09जमींदार थे जो उस क्षेत्र से कर संग्रह
- 4:29:12करते थे। परंतु जब इनके पिता के बाद यह उस
- 4:29:14क्षेत्र के जमींदार बने तो अंग्रेजों ने
- 4:29:17क्या किया? इस क्षेत्र पर कर ज्यादा बढ़ा
- 4:29:20दिया। पान की खेती पर कर लगा दिया जिसका
- 4:29:22इन्होंने विरोध किया और इन्होंने विद्रोह
- 4:29:25कर दिया। इन्होंने विद्रोह कर जो 1857 के
- 4:29:28विद्रोही थे सीताराम कंवर के ये साथ हो
- 4:29:30गए। यानी सीताराम कंवर मेन हैं और यह उनके
- 4:29:33सहयोगी बनते हैं। लेकिन इस बीच सीताराम
- 4:29:35कंवर की जब मृत्यु हो जाती है तो यह उस
- 4:29:38क्षेत्र में प्रमुख विद्रोही बन जाते हैं
- 4:29:40और यह अंग्रेजों और जमींदारों को लूट कर
- 4:29:42वीजागढ़ किले में छिपते हैं। लेकिन एक दिन
- 4:29:45धोखे से मेजर कीटिंग ने इनको घेर लिया और
- 4:29:47इन्हें गिरफ्तार करके जो है इन्हें फांसी
- 4:29:49दे दी। तो यह कहानी थी रघुनाथ सिंह मंडलोई
- 4:29:53की। बीजागढ़ का संबंध इनसे है। टांडा का
- 4:29:56संबंध इनसे है। दीवान सिंह इनके पिता हैं।
- 4:29:58और इनकी जागीर छीनकर दी गई थी बलवंत सिंह
- 4:30:01मंडलोई को। यह मुख्य बातें हैं। पान की
- 4:30:04खेती इंपॉर्टेंट है। इन बातों पर अगर आप
- 4:30:06ध्यान देंगे तो आसानी से आप रघुनाथ सिंह
- 4:30:08मंडलोई को बता सकते हैं, समझा सकते हैं।
- 4:30:11आई होप आपको जो जानकारी दी है रघुनाथ सिंह
- 4:30:13मंडलोई के बारे में वह आपको अच्छी लगी
- 4:30:15होगी। फिर मिलेंगे एक किसी और हम वीर
- 4:30:18आदिवासी योद्धा के साथ, किसी और नए योद्धा
- 4:30:22के साथ। तो इस सेशन में हम आज इन्हीं की
- 4:30:25बात करते हैं और इसको यहीं समाप्त करते
- 4:30:26हैं। जय हिंद। थैंक यू।
- 4:30:37नमस्कार साथियों, आप सभी का एमपीपीएससी
- 4:30:40स्टडी आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है।
- 4:30:42उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन
- 4:30:44लगाकर पढ़ रहे होंगे। दोस्तों, हमारे
- 4:30:46द्वारा एक सीरीज शुरू की गई है और सीरीज
- 4:30:48का नाम है मध्य प्रदेश के वीरों का
- 4:30:50इतिहास। हम सभी लोग जानते हैं कि मध्य
- 4:30:53प्रदेश में कई ऐसे वीर हुए हैं जिन्होंने
- 4:30:55स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण
- 4:30:57योगदान दिया है। उन्हीं वीरों की अपुन
- 4:31:00उन्हीं वीरों की कहानी हम इस सीरीज में
- 4:31:02स्टार्ट कर रहे हैं। और एक वी एक जो हमारे
- 4:31:05महान वीर थे जिनकी कहानी हम ऑलरेडी पिछले
- 4:31:08वीडियो में डिस्कस कर चुके हैं। टंट्या
- 4:31:10भील मामा के बारे में। और आज की जो कहानी
- 4:31:13है उसके हमारे जो वीर हैं, हमारे जो
- 4:31:15महापुरुष हैं, आज के जो हमारे हीरो हैं,
- 4:31:17उनका नाम है भीमा नायक जी। तो आज हम बात
- 4:31:20करेंगे स्पेशली निमाड़ के जो रॉबिनहुड हैं
- 4:31:23यानी भीमा नायक जी के बारे में। भीमा नायक
- 4:31:26जी 1857 की क्रांति के उन महान स्वतंत्रता
- 4:31:29सेनानियों में से एक हैं जिन्हें वह
- 4:31:31सम्मान और प्रसिद्धि नहीं मिली जो बाकी
- 4:31:34लोगों को मिली। तो आइए बात करते हैं भीमा
- 4:31:36नायक जी के बारे में। सबसे पहले भीमा नायक
- 4:31:39जी के जीवन परिचय को हम लोग देख लेते हैं।
- 4:31:42खासकर इसमें आपको तीन चीजें समझनी है।
- 4:31:44उनका जन्म, माता-पिता का नाम और उनकी जो
- 4:31:46मृत्यु स्थल है। देखिए भीमा नायक जी का जो
- 4:31:49जन्म है वो पंचमोहाली गांव में हुआ था और
- 4:31:51यह गांव जो है बड़वानी में पड़ता है।
- 4:31:53बड़वानी मध्य प्रदेश में। इससे क्वेश्चन
- 4:31:55भी पूछा जाता है कि उनका जो जन्म है वो
- 4:31:58किस गांव में हुआ था? और किस रियासत का
- 4:32:00हिस्सा माना जाता था उनका गांव? तो
- 4:32:02बड़वानी रियासत आप बताएंगे। उनकी मां का
- 4:32:04नाम सुरसी था। उनका जन्म एक भील परिवार
- 4:32:07में हुआ था। पिता का नाम रामा था और बाद
- 4:32:10में जब अंग्रेज उनको गिरफ्तार करेंगे तो
- 4:32:11उनकी जो मृत्यु है वो पोर्ट विलियर में
- 4:32:13होगी जिसे काला पानी के सजा के तौर पे हम
- 4:32:16लोग जानते हैं। और उनका जो टाइटल नेम है
- 4:32:18वो क्या है? निमाड़ का रॉबिनहुड। इसमें
- 4:32:21आपको हमेशा एक बात याद रखनी है। अगर आपसे
- 4:32:23पूछा जाए भीलों का रॉबिनहुड या आदिवासियों
- 4:32:26का रॉबिनहुड किसे कहा जाता है? या भारत का
- 4:32:28रॉबिनहुड किसे कहा जाता है? तो आप बताएंगे
- 4:32:30टंट्या भील मामा। और अगर आपसे पूछा जाए
- 4:32:33स्पेसिफिक निमाड़ का रॉबिनहुड किसे कहते
- 4:32:36हैं? तो वो हैं हमारे भीमा नायक जी। भीमा
- 4:32:39नायक जी निमाड़ क्षेत्र में काफी एक्टिव
- 4:32:41थे। अब इनकी कहानी को हम लोग आगे समझते
- 4:32:44हैं। सबसे पहले मैं आप लोगों को बताता हूं
- 4:32:47कि भीमा नायक जी की कहानी किस प्रकार रहती
- 4:32:49है। तो आपको एक छोटे से चार्ट के थ्रू मैं
- 4:32:51आप लोगों को समझाने का प्रयास करता हूं।
- 4:32:53जिससे आप उनकी कहानी को अच्छे से समझ
- 4:32:55पाएंगे। देखिए जो भीमा नायक जी थे जैसे कि
- 4:32:59एक रियासत है। आप इसको ऐसे समझिएगा। एक
- 4:33:01रियासत थी और उस रियासत का नाम था बड़वानी
- 4:33:05रियासत। ठीक है? तो बड़वानी जो रियासत थी
- 4:33:08हमारी इस बड़वानी रियासत में जन्म होता है
- 4:33:11भीमा नायक जी का। तो अगर आपसे कभी पूछा
- 4:33:13जाए किस रियासत में उनका जन्म हुआ था? तो
- 4:33:16आप बताएंगे बड़वानी रियासत या बड़वानी जो
- 4:33:18डिस्ट्रिक्ट है। इस बड़वानी रियासत में एक
- 4:33:21गांव था और इस गांव का नाम था पंचमोहाली।
- 4:33:24इस पंचमोहाली जो गांव था इस पंचमोहाली
- 4:33:27गांव में एक भील परिवार रहता था और इस भील
- 4:33:31परिवार का जो
- 4:33:33मालिक है या जो उसके स्वामी थे उनका नाम
- 4:33:37था रामा। तो रामा जो भील हैं और उनकी जो
- 4:33:40पत्नी थी जिनका नाम था सुरसीबाई। सुरसीबाई
- 4:33:44और रामा भील के घर में एक महान
- 4:33:47क्रांतिकारी का जन्म होता है। जिन्हें हम
- 4:33:50आज के लेक्चर में कवर करने वाले हैं। और
- 4:33:52उनका नाम था भीमा नायक। अर्थात भीमा नायक
- 4:33:56जी का जन्म जो है कहां हुआ था? तो बड़वानी
- 4:33:58रियासत के पंचमोहाली गांव में हुआ था। एक
- 4:34:01भील आदिवासी परिवार के घर में और उनके
- 4:34:04पिता का नाम रामा भील था और माता का नाम
- 4:34:07क्या था? सुरसीबाई था। भीमा नायक को जो
- 4:34:10संस्कार मिले थे उनके पिता और उनकी माता
- 4:34:13से प्राप्त हुए थे। उनकी माता के द्वारा
- 4:34:15उनको जो है जमींदारों और साहूकारों के
- 4:34:18अत्याचारों के विरुद्ध जो है लड़ने की
- 4:34:21शिक्षा दी गई थी। लड़ने की ट्रेनिंग दी गई
- 4:34:23थी। भीमा नायक जी ने सबसे पहले क्या किया?
- 4:34:26भील युवाओं की भील युवाओं की एक टोली
- 4:34:31बनाई।
- 4:34:34एक छोटी सी सेना बनाई जिसमें करीब 500 भील
- 4:34:37युवा थे और इनके द्वारा इन्होंने सबसे
- 4:34:39पहले क्योंकि देखिए शुरुआत अत्याचार की
- 4:34:41कौन करता है? जो शुरुआत थी वो अंग्रेजों
- 4:34:44के द्वारा इस क्षेत्र में अत्याचार किया
- 4:34:46जा रहा था। अंग्रेजों के साथ-साथ कौन थे?
- 4:34:48जमींदार थे और जमींदारों के साथ-साथ कौन
- 4:34:51थे? साहूकार थे। तो इन लोगों के शोषण के
- 4:34:53विरुद्ध उन्होंने अपनी आवाज उठाई और वो जो
- 4:34:56अपना जो संगठन था उसके माध्यम से
- 4:34:58जमींदारों को लूटते थे। साहूकारों को
- 4:35:00लूटते थे। अंग्रेजी जो खजाना था उसको
- 4:35:02लूटते थे और गरीबों में बांट देते थे। इस
- 4:35:05कहानी में आगे एक किरदार की एंट्री होती
- 4:35:07है। जब निवाड़ क्षेत्र में जो बड़वानी का
- 4:35:10इलाका है वो निवाड़ क्षेत्र में आता है।
- 4:35:12जब निवाड़ क्षेत्र में वो काफी एक्टिव थे।
- 4:35:15तब इस समय एक महान स्वतंत्रता सेनानी इस
- 4:35:18क्षेत्र में आते हैं जो नर्मदा पार करने
- 4:35:20के लिए आते हैं जिनका नाम था तात्या टोपे
- 4:35:23जी। तो तात्या टोपे जब इस क्षेत्र में
- 4:35:26नर्मदा नदी पार करने के लिए आते हैं तो
- 4:35:28उनको नर्मदा पार करने में सहायता करने
- 4:35:31वाले थे कौन? भीमा नायक जी। क्वेश्चन पूछा
- 4:35:34जाता है किस व्यक्ति ने तात्या टोपे के
- 4:35:37नर्मदा पार करने में सहायता की थी? याद
- 4:35:40रखिएगा। तो भीमा नायक जी हैं उन उन्होंने
- 4:35:42उनकी सहायता की। तात्या टोपे से मिलकर वह
- 4:35:45काफी प्रभावित होते हैं। तात्या टोपे उनके
- 4:35:48इस एहसान का बदला चुकाने के लिए कहते हैं
- 4:35:50कि यदि हमारा अभियान सफल रहा तो मैं आपके
- 4:35:53इस जो जो भी आपने मुझ पर उपकार किया इसका
- 4:35:56जो है बदला जरूर चुकाऊंगा। और इसी समय
- 4:35:58तात्या टोपे ने उनको जो है क्या किया?
- 4:36:011857 की क्रांति चल रही थी और 1857 की
- 4:36:05क्रांति में लड़ने के लिए प्रेरित किया।
- 4:36:08तो याद रखिएगा यहीं से उनका जो अगला सफर
- 4:36:10होता है वह 1857 की क्रांति है। तो इस
- 4:36:13प्रकार वह 1857 की क्रांति में किस
- 4:36:16क्षेत्र में एक्टिव हो गए? निमाड़ क्षेत्र
- 4:36:18में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले हैं।
- 4:36:20क्योंकि उनके साथ भील, भिलाला, कोरकू जैसी
- 4:36:23तमाम जो जनजातियां हैं वो भी इसमें शामिल
- 4:36:25थी। अब आगे हम लोग थोड़ा सा यहां पर पढ़
- 4:36:29लेते हैं। जिसके बाद आगे मैं आप लोगों को
- 4:36:30समझाता हूं। तो देखिए अभी आप लोगों को बता
- 4:36:33दिया उनका जन्म कहां होता है। पिता रामा
- 4:36:36ने उन्हें हथियार चलाना सिखाया जबकि मां
- 4:36:38सुरसी हर क्रांतिकारी मोर्चे पर उनका साथ
- 4:36:41देती रही। भीमा की जो मां सुरसी हैं
- 4:36:43उन्होंने भी संघर्ष में योगदान दिया।
- 4:36:45उन्होंने 150 महिलाओं को युद्ध कौशल में
- 4:36:47प्रशिक्षित किया जिससे महिलाओं ने भी
- 4:36:50क्रांति में सक्रिय भूमिका निभाई। यानी
- 4:36:52मां हो तो भीमा नायक जैसी जिन्होंने जो है
- 4:36:55अपने पुत्र को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए
- 4:36:57प्रेरित किया और अपने साथ-साथ 150 महिलाओं
- 4:37:01का एक दल बनाया और वह भी जो है अपने पुत्र
- 4:37:03के साथ कंधे से कंधा मिलाकर 1857 की
- 4:37:06क्रांति में शामिल हो जाती हैं। अब आगे
- 4:37:08बढ़ते हैं। यहां पर ध्यान से सुनिएगा।
- 4:37:10अंग्रेजों के शोषण और अत्याचार के से
- 4:37:13मुक्ति पाने के लिए भीमा ने 1837 में अपनी
- 4:37:16एक सैनिक टुकड़ी बनाना शुरू किया था और एक
- 4:37:19वर्ष में उनके पास 500 प्रशिक्षित सेनानी
- 4:37:21हो गए। भीमा की फौज में भील भिलाला मकरानी
- 4:37:25सैनिक शामिल थे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित
- 4:37:28करने के लिए भीमा ने धाना बाबड़ी में एक
- 4:37:30गढ़ी का निर्माण किया था। जिसका पिक्चर
- 4:37:32मैं अभी आप लोगों को दिखाने वाला हूं।
- 4:37:35देखिए यहां पर हम बात करेंगे। आपको स्टोरी
- 4:37:38से एक कनेक्शन समझ में आ गया होगा। अब
- 4:37:41क्या होता है? अकाल के दौरान अंग्रेजों ने
- 4:37:43लगान वसूली में जोर जबरदस्ती की, घूसखोरी,
- 4:37:46हिंसा का सहारा लिया। इस अन्याय के
- 4:37:48विरुद्ध जो है भीमा ने सूदखोरों, बनियों,
- 4:37:51सामंतों, साहूकारों, सरकारी खजाने से
- 4:37:53सामान छीनकर गरीबों में बांट दिया और अपनी
- 4:37:56याद रखिएगा अपनी कुलदेवी नागरी माता के
- 4:37:58समक्ष भीमा ने भीलों का शोषण करने वाले
- 4:38:00अंग्रेजों को बाहर खदेड़ने खदेड़ने की शपथ
- 4:38:03खाई। इसीलिए क्योंकि वो अमीरों का पैसा
- 4:38:07लूटकर जमींदारों, साहूकारों, अंग्रेजों का
- 4:38:09जो पैसा लूटकर गरीबों में बांटते थे
- 4:38:11इसीलिए उन्हें निमाड़ का रॉबिनहुड कहते
- 4:38:14हैं। अगर कोई पूछे क्यों कहते हो उन्हें
- 4:38:16निमाड़ का रॉबिनहुड? याद रखिएगा क्योंकि
- 4:38:18वह इस क्षेत्र में अमीरों को लूटकर गरीबों
- 4:38:20को पैसा बांटते थे। अब यह सब चलने लगा।
- 4:38:23इसी बीच क्या होता है? तात्या टोपे का इस
- 4:38:25क्षेत्र में आगमन होता है। अंग्रेजों ने
- 4:38:28तात्या टोपे को दक्षिण की ओर बढ़ने से
- 4:38:29रोकने के लिए आधा दर्जन जनरल नियुक्त किए
- 4:38:31थे। इस समय सेंधवा जो घाट है जो बड़वानी
- 4:38:34में है याद रखिएगा लेकर महाराष्ट्र तक
- 4:38:36भीमा नायक रेवलिया नायक खाज्या नायक इसमें
- 4:38:40एक बहुत इंपॉर्टेंट नायक हैं खाज्या नायक
- 4:38:43इनका नाम बहुत जरूर याद रखना खोजे सिंह
- 4:38:46खोजे सिंह और कालू बाबा जैसे वीर
- 4:38:48क्रांतिकारियों का प्रभाव था तो तात्या
- 4:38:51टोपे जब नर्मदा नदी पार करने के लिए आते
- 4:38:53हैं तो भीमा नायक उनकी सहायता करते हैं।
- 4:38:56भीमा नायक जी को जो है तात्या टोपे
- 4:38:58प्रेरित करते हैं कि इस समय 1857 की महान
- 4:39:01क्रांति चल रही है और आप भी उसमें अपना
- 4:39:02योगदान दीजिए। निमाड़ क्षेत्र में भीलों
- 4:39:04का नेतृत्व कर अंग्रेजों को परेशान कीजिए
- 4:39:07और ऐसा ही उन्होंने किया। ठीक है? देखिए
- 4:39:10जब भीमा ने तात्या टोपे को नर्मदा नदी पार
- 4:39:13करने में मदद की। तब जाते समय तात्या ने
- 4:39:15कहा यदि हमारा अभियान सफल होता है तो इस
- 4:39:18उपकार का बदला हम अवश्य चुकाएंगे। तो ये
- 4:39:22भीमा नायक जी को तात्या टोपे कह के जाते
- 4:39:24हैं। अब एक कहानी है छोटी सी। उसके बाद हम
- 4:39:27इसको एंड करेंगे। देखिए इधर है ईस्ट
- 4:39:31इंडिया कंपनी यानी अंग्रेजों ने एक बड़ी
- 4:39:32सेना बनाई और इधर कुछ क्रांतिकारी हैं
- 4:39:35जिसमें हमारे हैं भीमा नायक। भीमा नायक के
- 4:39:38एक सहयोगी थे जिनका नाम था खाद्या नायक।
- 4:39:41रिश्तेदार लगते थे। अगले चैप्टर में हम
- 4:39:43इनकी बात करेंगे। खाजिया नायक। खाद्या
- 4:39:45नायक के साथ-साथ यहां पर हैं याद रखिएगा
- 4:39:47रेवलिया नायक। तो ऐसे कुछ वीर थे
- 4:39:50जिन्होंने क्या किया? अपनी सेना तैयार की
- 4:39:53और जो है अंग्रेजों से एक जोरदार संघर्ष
- 4:39:56किया और इस संघर्ष का नाम है अंबा पानी का
- 4:39:58युद्ध। बड़वानी जिले के अंबापानी ग्राम
- 4:40:01में एक युद्ध होता है जिसको कहा जाता है
- 4:40:03अंबा पानी का युद्ध। यह युद्ध बड़ा ही
- 4:40:05खतरनाक था। इस भीषण संघर्ष में कई
- 4:40:08क्रांतिकारी मारे जाते हैं। 11 अप्रैल
- 4:40:111858 को यह जो संघर्ष है होता है। इस
- 4:40:14युद्ध में हमारे जो खाज्जा नायक है यह
- 4:40:17वीरगति को प्राप्त हुए थे। अगर कभी पूछा
- 4:40:19जाए खाज्जा नायक का विजय दिवस या उनकी जो
- 4:40:22मृत्यु है कब हुई थी? याद रखिएगा और भीमा
- 4:40:24नायक बच निकले। हालांकि इसमें संघर्ष बहुत
- 4:40:27तगड़ा होता है और एग्जाम में यह वॉर पूछा
- 4:40:30जाता है कि ये वॉर कब हुआ था? याद रखिएगा
- 4:40:3211 11 अप्रैल 1858 को हुआ था। इसमें
- 4:40:35खाद्या नायक की मृत्यु हो गई थी। लेकिन जो
- 4:40:37हमारे भीमा नायक हैं, वह अभी भी युवाओं को
- 4:40:39भील युवाओं को लेकर जो है बड़वानी क्षेत्र
- 4:40:41में और जो निमाड़ क्षेत्र है वहां पर
- 4:40:43अंग्रेजों के छुड़ा रहे थे।
- 4:40:45अंग्रेजों को उन्होंने काफी परेशान किया।
- 4:40:47अब अंग्रेजों ने उन पर एक धावा बोला उनके
- 4:40:49गांव में उनके इलाके में देखिए।
- 4:40:534 फरवरी 1859 को कैटिंग एक अंग्रेज कैप्टन
- 4:40:56था। के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने धोला
- 4:40:59बावड़ी यह धोला बावड़ी आपसे पूछा जा सकता
- 4:41:01है। धोला बाबड़ी है क्या? धोला बावड़ी का
- 4:41:04ये डायग्राम देख सकते हैं। यह बड़वानी में
- 4:41:06जो हमारे भीमा नायक थे उनका गढ़ था। उनकी
- 4:41:10गढ़ी थी। यानी उन्होंने एक छोटी सी गढ़ी
- 4:41:13यानी छोटा सा जो किला होता है उसको गढ़ी
- 4:41:15कहते हैं। उस पर अधिकार करके इस पे
- 4:41:17निगरानी इससे वो निगरानी रखते थे
- 4:41:19अंग्रेजों पर। तो यहां पर आज भी जो है
- 4:41:21बंदूकों के और तोपों के जो निशान है वो
- 4:41:23मौजूद हैं। ये धोला बाबड़ी किसका गढ़ था
- 4:41:26या किसकी गढ़ी थी? याद रखिए भीमा नायक जी
- 4:41:28जिसमें वो रहते थे। अब अंग्रेजों ने एक
- 4:41:30बड़ी सेना लेकर इस पर हमला कर दिया तो
- 4:41:32क्या होता है? 13 फरवरी 1859 को भीमा के
- 4:41:35गांव पंच बावबली में युद्ध हुआ। पंच
- 4:41:39बावबली जिसे पंचमहाली भी कहते हैं। भीलों
- 4:41:41को जंगलों में शरण लेनी पड़ी और इस भीषण
- 4:41:43संग्राम में भीमा के 10 साथी शहीद हो गए
- 4:41:46और कई क्रांतिकारियों को क्या कर लिया
- 4:41:48गया? गिरफ्तार कर लिया गया। अब क्या होता
- 4:41:50है? लास्ट में आप देखिएगा। इसी समय जब
- 4:41:54अंग्रेजों ने हमला किया था तो उनकी जो मां
- 4:41:56थी सुरसी बाई को मंडलेश्वर जेल में कैद कर
- 4:41:59लिया गया था। याद रखना उनकी मां का बहुत
- 4:42:01बड़ा रोल है। अब उनकी मां को मंडलेश्वर
- 4:42:03जेल में जब कैद कर लिया गया तो उन पर कई
- 4:42:06सारी अत्याचार किए गए। कई मानवीय यातनाएं
- 4:42:08दे दी गई जिससे कि वह भीमा नायक का पता
- 4:42:10बता दें। जब उन्होंने पता नहीं बताया तो
- 4:42:13इसी में उनकी मानवीय यातनाएं यानी
- 4:42:15अंग्रेजों द्वारा सताने से मंडलेश्वर जेल
- 4:42:17में ही युद्ध हो जाता है। मंडलेश्वर जेल
- 4:42:20में पहले उनकी मृत्यु हो गई। जब मां सुरसी
- 4:42:22के मरने का खबर भीमा नायक को मिला तो भीमा
- 4:42:26नायक अपनी सेना के साथ इसी जेल पर हमला कर
- 4:42:28देते हैं और फिर से एक भीषण संघर्ष होता
- 4:42:30है जिसमें कई जनजातीय कई आदिवासी युवा जो
- 4:42:34है मारे जाते हैं परंतु अभी भीमा
- 4:42:37नायक को अंग्रेज नहीं पकड़ पाए। तो भीमा
- 4:42:39नायक आप समझ में आ रहे हैं निमाड़ क्षेत्र
- 4:42:41के एक शक्तिशाली योद्धा थे। जिन्होंने
- 4:42:421857 की क्रांति में अंग्रेजों के दांत
- 4:42:45खट्टे कर दिए। एक महान योद्धा, एक महान
- 4:42:49कुशल नेतृत्वकर्ता जिन्होंने अंग्रेजों को
- 4:42:51इस क्षेत्र में काफी लंबे समय तक जो है
- 4:42:53पराजित करके रखा था। अब क्या होता है?
- 4:42:56माता का तो निधन हो गया और वो जो है जंगल
- 4:42:58में छुप जाते हैं। इसी बीच क्या होता है?
- 4:43:01ध्यान से सुनना। फिर आगे चलकर उनके कई
- 4:43:03साथी जो थे यहां पर लिखा हुआ है उनके
- 4:43:05साथियों के बारे में। कई साथियों को जो है
- 4:43:07फांसी दे दी जाती है। परंतु अभी भी जो है
- 4:43:10भीमा नायक को ब्रिटिश सेना यानी अंग्रेज
- 4:43:13पकड़ नहीं पाते। अब इसमें से वह निर्णायक
- 4:43:17क्षण क्षण आता है जब हमारे भीमा नायक जी
- 4:43:19को देखिए इतिहास गवाह है जब किसी व्यक्ति
- 4:43:22को कोई नहीं पकड़ पाया यानी अंग्रेज नहीं
- 4:43:24पकड़ पाए तो उन्होंने हमेशा छल का सहारा
- 4:43:26लिया है। देखिए 16 दिसंबर 1866 को निवाड़
- 4:43:30के सभी भील नायकों ने मिलकर अंग्रेजों पर
- 4:43:32बड़ा हमला किया जिससे अंग्रेजों को भारी
- 4:43:34नुकसान हुआ। हालांकि धर पकड़ के दौरान
- 4:43:37बड़वानी के कई भील क्रांतिकारी पकड़े गए
- 4:43:39और अंग्रेज लगातार भीमा नायक को खोजते
- 4:43:42रहे। परंतु पता नहीं चला कि भीमा नायक
- 4:43:44कहां छुपे हुए हैं। आखिर में क्या होता
- 4:43:47है? अंततः 2 अप्रैल 1867 को 1867 को एक
- 4:43:52गद्दार की सूचना पर ये गद्दार का नाम नहीं
- 4:43:54पता लेकिन एक गद्दार की सूचना पर
- 4:43:56अंग्रेजों ने सतपुड़ा के घने जंगल में
- 4:43:58भीमा नायक को सोते हुए गिरफ्तार कर लिया।
- 4:44:01तो अगर इसमें एग्जाम ओरिएंटेड क्वेश्चन
- 4:44:03देखें तो एक क्वेश्चन ये होगा कि कब उनको
- 4:44:05गिरफ्तार किया गया 1867 में और पकड़ कर
- 4:44:08अंग्रेजों ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाया और
- 4:44:10फाइनली उन्हें पोर्ट विलेयर यानी जिसे
- 4:44:12काला पानी की सजा कहते हैं उनको सजा दे दी
- 4:44:15गई। जहां पर 29 दिसंबर 1876 को पोर्ट
- 4:44:18विलेयर में उनकी क्या हो गई? मृत्यु हो
- 4:44:20गई। ठीक है? अब इससे क्वेश्चन क्या-क्या
- 4:44:23बन सकते हैं? मैं आपको यह और बता देता
- 4:44:24हूं। एक क्वेश्चन है कि उनकी मृत्यु कब
- 4:44:27हुई? तो आप बताएंगे 29 दिसंबर 1876 को।
- 4:44:31दूसरा उनका बलिदान दिवस कब मनाते हैं? तो
- 4:44:34अगर आपसे पूछा जाए एग्जाम में कि भीमा
- 4:44:36नायक का बलिदान दिवस कब मनाते हैं? 29
- 4:44:38दिसंबर को। अगर आपसे पूछा जाए कि जो हमारे
- 4:44:42धोला बाबड़ी नामक जो स्थान है वो किसका
- 4:44:45गढ़ था? यानी धोला बाबड़ी किस क्रांतिकारी
- 4:44:48की गढ़ी थी या गढ़ था? तो आप बताएंगे भीमा
- 4:44:50नायक। भीमा नायक की जो मां है उनको पकड़
- 4:44:53कर जो है याद रखिएगा किस जेल में रखा गया
- 4:44:55था? तो एक क्वेश्चन होगा मंडलेश्वर जेल
- 4:44:58में वहीं पर उनकी मृत्यु हो जाती है। ठीक
- 4:45:00है? याद रखना एक क्वेश्चन आपसे यह पूछा
- 4:45:02जाएगा कि अंबा पानी का युद्ध कब हुआ था और
- 4:45:05इसमें कौन सा आदिवासी योद्धा शहीद हुआ? तो
- 4:45:08शहीद हुए हैं खाज्जा नायक और यह युद्ध हुआ
- 4:45:11है 11 अप्रैल 1800 58 को। इस युद्ध में
- 4:45:14भीमा नायक की भी इंपॉर्टेंट भूमिका थी।
- 4:45:16हालांकि अंग्रेज भीमा नायक को गिरफ्तार
- 4:45:19नहीं कर पाए। इसके अलावा एक क्वेश्चन यह
- 4:45:22है जो मैंने आपको बता दिया कि तात्या टोपे
- 4:45:25जब आए थे तो उनको नर्मदा पार करने में
- 4:45:27किसने सहायता की थी? कुल मिलाकर अगर आप इस
- 4:45:30तरीके का एक डायग्राम भी याद रखते हैं ना
- 4:45:32ये तो इस डायग्राम में सारी कहानी आप
- 4:45:35लोगों को यहां पर क्लियर मिल जाएंगी।
- 4:45:37तात्या टोपे की सहायता और ऐड कर लेना और
- 4:45:39इसी के बाद अंबा पानी का युद्ध ऐड कर
- 4:45:41लेना। उनकी गिरफ्तारी ऐड कर लेना और उनकी
- 4:45:43मृत्यु ऐड कर लेना।
- 4:45:46तो उम्मीद है कि आज का जो जानकारी है आप
- 4:45:50लोगों को अच्छी लगी होगी और मध्य प्रदेश
- 4:45:52के वीरों का जो इतिहास सीरीज है इसको आप
- 4:45:54काफी प्यार और अपना सपोर्ट देंगे। तो इसी
- 4:45:57तरह यह सीरीज चलती रहेगी और आगे की सीरीज
- 4:45:59में हम और महान क्रांतिकारियों के बारे
- 4:46:01में बात करेंगे। इसमें आपको एग्जाम उपयोगी
- 4:46:04जानकारी भी दी गई है। किन तथ्यों पर आपको
- 4:46:06काम करना है और एक ओवरऑल जानकारी भी दी गई
- 4:46:09है। देखिए ऐसे कई सारे योद्धा हैं जिनके
- 4:46:12बारे में अभी भी लोगों को सही से नहीं पता
- 4:46:15है। चाहे वो बृजू नायक हो, चाहे वो खाज्जा
- 4:46:18नायक हो और भी कई सारे योद्धा हैं। लेकिन
- 4:46:20हमारी इस सीरीज में कोशिश है कि सभी वीर
- 4:46:22योद्धाओं को एक श्रद्धांजलि दी जाए और सभी
- 4:46:25के बारे में आप लोगों के साथ इंफॉर्मेशन
- 4:46:27शेयर की जाए। तो अगर आप लोगों को यह सीरीज
- 4:46:29अच्छी लगी तो अपना सपोर्ट जरूर दिखाएं और
- 4:46:32कमेंट सेक्शन में बताइएगा आपको यह जानकारी
- 4:46:34कैसी लगी। जय हिंद। थैंक यू।
- 4:46:48नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एमपीपीएससी
- 4:46:51स्टडी आई के पर स्वागत है। दोस्तों,
- 4:46:55आज हम बात करने वाले हैं मध्य प्रदेश की
- 4:46:58पहली महिला शहीद या 1857 की क्रांति की
- 4:47:01पहली महिला शहीद रानी अवंतीबाई के बारे
- 4:47:04में। रानी अवंतीबाई जिन्होंने कहा था कि
- 4:47:07हमारी दुर्गावती ने प्रण लिया था कि वह
- 4:47:10जीते जी किसी वैरी के हाथ नहीं आएंगी और
- 4:47:14उन्होंने उसी तरीके से रानी दुर्गावती के
- 4:47:18कथन का अनुसरण करते हुए अपने प्राणों का
- 4:47:20उत्सर्ग किया था। तो दोस्तों मैं हूं हर
- 4:47:23सिंह राजपूत और आज मैं आपको बताने वाला
- 4:47:25हूं रानी अवंतीबाई की कहानी। तो रानी
- 4:47:28अवंतीबाई जिन्हें रामगढ़ की लक्ष्मीबाई के
- 4:47:31नाम से भी जाना जाता है। आइए हम जानते हैं
- 4:47:33रानी अवंतीबाई के बारे में। यह जो सीरीज
- 4:47:36है इसमें आपको पता है कि हम दो तरीके से
- 4:47:39इस सीरीज को कवर कर रहे हैं। एक एग्जाम
- 4:47:41ओरिएंटेड कंटेंट को भी हम इसमें शामिल कर
- 4:47:43रखे हैं। दूसरा एक कहानी के रूप में भी
- 4:47:46आपको सारी बात बता रहा हूं। सबसे पहले
- 4:47:48रामगढ़ रियासत की बात करते हैं कि रामगढ़
- 4:47:50रियासत है कहां पर? रामगढ़ रियासत वर्तमान
- 4:47:53में डिंडोरी जिले का हिस्सा है। इससे पहले
- 4:47:56यह याद रखिएगा मंडला जिले में आता था। ठीक
- 4:47:59है? तो अभी हम वो बाद में भी मैं एक जगह
- 4:48:01लिख दूंगा। तो रामगढ़ की रानी अवंतीबाई
- 4:48:03लोधी जी की यह कहानी है जिसको आपको समझना
- 4:48:06है। सबसे पहले उनके जन्म की बात करते हैं
- 4:48:08और उनके परिवार की तो देखिए रानी अवंतीबाई
- 4:48:11का जो जन्म है वह 16 अगस्त 1831 को ग्राम
- 4:48:14मनकेहड़ी और याद रखिएगा यह जो मनकेहड़ी है
- 4:48:17वो शिवनी में है। ठीक है? यानी आपको याद
- 4:48:20रखना है कि रानी अवंतीबाई का जन्म
- 4:48:22मनकेहड़ी ग्राम में हुआ था जो कि शिवनी
- 4:48:24जिले में आता है और उनके पिता का नाम था
- 4:48:26जो कि एक जमींदार फैमिली से थे राव जुझार
- 4:48:29सिंह यानी रानी अवंतीबाई का जन्म राव
- 4:48:32जुझार सिंह के यहां शिविवनी जिले के
- 4:48:34मनकेहड़ी गांव में हुआ था। रानी अवंतीबाई
- 4:48:37की जो प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा है वो
- 4:48:39ग्राम मनकेहड़ी में ही हुई थी। संपन्न
- 4:48:41हुई। जुझार सिंह ने अपनी कन्या अवंतीबाई
- 4:48:44का जो विवाह है याद रखिएगा रामगढ़ रियासत
- 4:48:47के जो राजा है लक्ष्मण सिंह आपसे पूछ सकते
- 4:48:50हैं कि वो किस राजा की बहू थी और किस राजा
- 4:48:53की पत्नी थी तो याद रखिएगा रामगढ़ रियासत
- 4:48:55के राजा लक्ष्मण सिंह लोधी के पुत्र
- 4:48:58विक्रमादित्य से उनका विवाह हुआ था। यानी
- 4:49:00कि उनके पति का नाम विक्रमादित्य सिंह
- 4:49:02लोधी था। जबकि उनके ससुर का नाम लक्ष्मण
- 4:49:04सिंह था। ठीक है? अब क्या हुआ? राजा
- 4:49:07लक्ष्मण सिंह 1817 से 1850 तक जो है
- 4:49:10रामगढ़ के शासक थे। यानी उनके जो ससुर थे
- 4:49:13जिनका नाम था राजा क्या? लक्ष्मण सिंह
- 4:49:16उन्होंने 1850 तक शासन किया और 1850 में
- 4:49:19रामगढ़ के शासक बनते हैं उनके पुत्र जिनका
- 4:49:22नाम था क्या? राजकुमार विक्रमादित्य या
- 4:49:25जिन्हें हम बोल सकते हैं। ठीक है? राजा
- 4:49:28विक्रमादित्य। तो राजा विक्रमादित्य 1850
- 4:49:30में रामगढ़ के शासक बन जाते हैं। लेकिन
- 4:49:33इनके साथ कुछ समस्या थी कि जो
- 4:49:34विक्रमादित्य हैं वह बचपन से ही वीतरागी
- 4:49:37प्रवृत्ति के थे। पूजा पाठ और धार्मिक
- 4:49:39अनुष्ठानों में लगे रहते थे। ये तो उनके
- 4:49:41गुण थे। लेकिन आगे चलकर क्या होता है कि
- 4:49:45जो राजा विक्रमादित्य हैं वो विक्षिप्त हो
- 4:49:47जाते हैं। और इस वजह से राज्य के संचालन
- 4:49:50का जो भार है वो रानी अवंतीबाई पर आ जाता
- 4:49:52है। तो राज्य का संचालन रानी अवंतीबाई ही
- 4:49:54करती थी। याद रखिएगा इनके दो पुत्र हैं।
- 4:49:57एक का नाम था अमान सिंह और एक का नाम था
- 4:49:59शेर सिंह। तो शेर सिंह और अममान सिंह जो
- 4:50:02है रानी के दो पुत्र हैं। और राजा रानी के
- 4:50:04पति का नाम क्या है? विक्रमादित्य। ससुर
- 4:50:06का नाम क्या है? लक्ष्मण सिंह। बर्थ प्लेस
- 4:50:08क्या है? ग्राम मनखेड़ी और पिता का नाम है
- 4:50:10जुझार सिंह। तो ये उनका एक तरीके से
- 4:50:12इंफॉर्मेशन हो गई। उनका बायोडाटा हो गया।
- 4:50:15अब कहानी में आगे चलकर एक जो है कहानी में
- 4:50:19एक ट्विस्ट आता है। जैसा कि मैंने बताया
- 4:50:21कि राजा जो विक्रमादित्य थे वो विक्षिप्त
- 4:50:23हो जाते हैं और उनकी दिमागी स्थिति सही
- 4:50:26नहीं होती है। जिसकी वजह से राज्य की
- 4:50:27कंप्लीट जिम्मेदारी रानी अवंतीबाई के ऊपर
- 4:50:30आ जाती है। अब रानी अवंतीबाई किस तरीके से
- 4:50:32अपने राज्य का संचालन करेंगी। लेकिन आप
- 4:50:35सबको पता है कि इस समय याद रखिएगा जैसे कि
- 4:50:37यह हमारी रामगढ़ रियासत है। ठीक है? यह जो
- 4:50:40रामगढ़ रियासत है वर्तमान में अगर देखा
- 4:50:42जाए अगर कोई आपसे पूछे किस जिले का पार्ट
- 4:50:45है तो याद रखिएगा यह वर्तमान में डिंडोरी
- 4:50:47में आता है लेकिन उससे पहले यह मंडला जिले
- 4:50:49का हिस्सा हुआ करता था। ठीक है? तो
- 4:50:52वर्तमान डिंडोरी का पार्ट है। अब क्या
- 4:50:55हुआ? आप सबको पता था कि अगर उस जमाने में
- 4:50:58जब ब्रिटिश शासन चल रहा था कि यदि किसी
- 4:51:00राज्य का राजा विकसित हो जाए या कुछ ऐसी
- 4:51:03समस्या हो जाए तो ईस्ट इंडिया कंपनी ऐसे
- 4:51:05राज्यों को हड़पने के लिए तैयार रहती थी।
- 4:51:08क्योंकि डलहौजी का शासन भी था। 1853 में
- 4:51:11पालक न्यायालय में एक मुकदमा चलता है।
- 4:51:14रामगढ़ के राजा विक्रमादित्य सिंह को
- 4:51:16विक्षिप्त तथा उनके जो बेटे हैं अमान सिंह
- 4:51:19और शेर सिंह को नाबालिक घोषित कर दिया
- 4:51:21जाता है। और अंग्रेजों ने रामगढ़ राज्य को
- 4:51:24हड़पने की दृष्टि से ठीक है। अंग्रेज
- 4:51:26शासकों ने पालक न्यायालय यानी कोर्ट ऑफ
- 4:51:28वार्ड जिसे कहते थे कि कार्यवाही की एवं
- 4:51:30राज्य के प्रशासन के लिए सर्वराहकार
- 4:51:33नियुक्त कर शेख मोहम्मद और मोहम्मद
- 4:51:36अब्दुल्ला को रामगढ़ भेजा। कुल मिलाकर बात
- 4:51:38इतनी सी है कि जो पालक न्यायालय था उसने
- 4:51:42राजा को विक्षिप्त घोषित कर दिया और उनके
- 4:51:45जो पुत्र थे शेर सिंह और अमान सिंह उनको
- 4:51:48नाबालिक घोषित कर दिया और यह कहा कि इस
- 4:51:50राज्य पर अब अंग्रेजों का नियंत्रण होगा।
- 4:51:53ठीक है? और अंग्रेजों ने दो मुस्लिम
- 4:51:55अधिकारियों को उस राज्य में भेजा। एक शेख
- 4:51:57मोहम्मद और एक का नाम था मोहम्मद
- 4:51:58अब्दुल्लाह। यह कहानी आपको बहुत अच्छे से
- 4:52:01समझ में आ रही होगी। जिससे रामगढ़ रियासत
- 4:52:03कोर्ट ऑफ वार्ड्स के कब्जे में चली गई।
- 4:52:05कुल मिलाकर अब जो है रामगढ़ रियासत
- 4:52:07स्वतंत्र नहीं बची और रामगढ़ रियासत जो है
- 4:52:10ब्रिटिश अधीन में यानी अंग्रेजों के
- 4:52:12संरक्षण में चली गई। अब आगे की कहानी क्या
- 4:52:15है वो सुनिए। अंग्रेज शासकों की इस हड़प
- 4:52:17नीति का परिणाम भी रानी अवंतीबाई जानती
- 4:52:20थी। फिर भी दोनों सर्वराहकारों को
- 4:52:23उन्होंने रामगढ़ से निकाल दिया। यानी इसके
- 4:52:25बावजूद यह जानती थी रानी के क्या हो सकता
- 4:52:28है। उसके बावजूद रानी ने उन दोनों को
- 4:52:30निकाल दिया।
- 4:52:321855 में अचानक राजा विक्रमादित सिंह एक
- 4:52:34दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। अब
- 4:52:36नाबालिक पुत्रों की संरक्षिका के रूप में
- 4:52:39राज्य शक्ति रानी के हाथों में आ गई और
- 4:52:41रानी ने राज्य के कृषकों को अंग्रेजों के
- 4:52:43निर्देशों को ना मानने का आदेश दिया और इस
- 4:52:46सुधार कार्य से रानी की जो है लोकप्रियता
- 4:52:48बढ़ गई। यानी रानी ने राज्य को संभाल लिया
- 4:52:51और किसानों से यह कहा कि वह अंग्रेजों को
- 4:52:53टैक्स ना दें। अब इस कहानी में आगे क्या
- 4:52:55ट्विस्ट है वो देखिए। इस कहानी में आता है
- 4:52:58इसी समय 1857 का वो विद्रोह। 1857 के
- 4:53:02विद्रोह में किस प्रकार घटनाक्रम बढ़ते
- 4:53:04हैं हमको पता है। अचानक ये विद्रोह जो है
- 4:53:06एक चिंगारी की वजह से जिन्हें चर्बी वाले
- 4:53:08कारतूस कहते हैं। चिंगारी की तरह इसमें
- 4:53:10विस्फोट हो गया और ये पूरे भारत में फैल
- 4:53:12गया था। 1857 में हमने जब राजा शंकर शाह
- 4:53:16के बारे में पढ़ा था तो उस समय भी एक छोटे
- 4:53:18से पैराग्राफ में रानी अवंतीबाई का जिक्र
- 4:53:21किया था। अब हम इस कहानी को दोबारा देखते
- 4:53:23हैं। 1857 का जो विद्रोह है वो संपूर्ण
- 4:53:26भारतवर्ष में फैल गया। इस समय एक
- 4:53:28क्षेत्रीय सम्मेलन होता है 1857 में मई
- 4:53:31में और इस क्षेत्रीय सम्मेलन का मतलब है
- 4:53:34कि रामगढ़ और उसके आसपास के जितने भी
- 4:53:36जमींदार, जागीदार, तालुकेदार, राजा, वह
- 4:53:39सभी सम्मेलन में भाग ले रहे थे। 1857
- 4:53:42ईस्वी में सागर एवं नर्मदा परिक्षेत्र के
- 4:53:44निर्माण के साथ अंग्रेजों की शक्ति में
- 4:53:46वृद्धि हो गई। जिसे हम नर्मदा सागर
- 4:53:48टेरिटरीज़ कहते थे। अब अंग्रेजों को रोक
- 4:53:50पाना किसी एक राजा या तालुकेदार के बस में
- 4:53:52नहीं रहा। रानी ने राज्य के आसपास के
- 4:53:55राजाओं, परगनादारों, जमींदारों और बड़े
- 4:53:58मालगुजारों को क्या किया? एक विशाल
- 4:54:00सम्मेलन में रामगढ़ में आयोजित किया। यानी
- 4:54:02यह सम्मेलन कहां हुआ? रामगढ़ में। लेकिन
- 4:54:05इसकी अध्यक्षता करते हैं कौन? याद रखिएगा
- 4:54:08राजा शंकर शाह गोंड जो कि कहां रहते थे?
- 4:54:11जबलपुर के पुरवा में। ये रानी दुर्गावती
- 4:54:13के वंशज है जिनके बारे में जब हमने लेक्चर
- 4:54:16को देखा था रामगढ़ के जो सॉरी जब हमने
- 4:54:20राजा शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह को पढ़ा था
- 4:54:22तो उसमें हमने समझा था कि उन्होंने इस
- 4:54:24सम्मेलन की अध्यक्षता थी अध्यक्षता की थी।
- 4:54:27इस गुप्त सम्मेलन के बारे में जबलपुर के
- 4:54:30जो कमिश्नर हैं मेजर स्काइन आर्सकाइन
- 4:54:33बोलते थे और मंडला के डिप्टी कमिश्नर
- 4:54:35वांटन को भी पता नहीं चला। यानी अंग्रेजों
- 4:54:38को इस सम्मेलन के बारे में पता नहीं लगा
- 4:54:40और एक मीटिंग बुलाई गई। इस मीटिंग में यह
- 4:54:42तय हुआ कि हम सभी लोग अपने-अपने क्षेत्रों
- 4:54:44में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करेंगे
- 4:54:46और अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंकेंगे। अब
- 4:54:48कहानी में हम आगे बढ़ते हैं। कहानी में
- 4:54:51आगे बढ़ते हैं। इस गुप्त सम्मेलन की एक
- 4:54:53खास बात है जो हमने राजा शंकर शाह में भी
- 4:54:55जिक्र किया था कि इस सम्मेलन में लिए गए
- 4:54:58निर्णय के अनुसार प्रचार का दायित्व रानी
- 4:55:00पर दिया गया। यानी रानी अवंतीबाई को इसकी
- 4:55:03जिम्मेदारी दी गई कि वह सभी लोगों को
- 4:55:04एकजुट करें और इसका प्रचार करें। रानी
- 4:55:06अवंतीबाई ने एक पत्र याद रखिएगा और दो
- 4:55:10काली चूड़ियां क्वेश्चन पूछा जा सकता है
- 4:55:12कि रामगढ़ रियासत में या पूछा जा सकता है
- 4:55:15कि जबलपुर में मैसेज किस तरीके से
- 4:55:17ट्रांसफर होता था तो एक पत्र और दो काली
- 4:55:19चूड़ियों की एक पुड़िया बनाकर प्रसाद के
- 4:55:22रूप में वितरित करना था। यानी एक पत्र
- 4:55:24देना था और एक प्रसाद की पुड़िया और साथ
- 4:55:27में दो चूड़ियां देनी थी। अगर पत्र में
- 4:55:30लिखा गया था अंग्रेजों से संघर्ष के लिए
- 4:55:33तैयार रहो या चूड़ियां पहनकर घर में बैठो।
- 4:55:36पत्र सौहार्द और एकजुटता का प्रतीक था तो
- 4:55:38चूड़ियां पुरुषार्थ जागृत करने का सशक्त
- 4:55:41माध्यम बनी। पुड़िया लेने का अर्थ था कि
- 4:55:43अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति में अपना
- 4:55:45समर्थन देना। समझ में आया कि नहीं आया?
- 4:55:47पुड़िया लेना मतलब आप क्रांति में
- 4:55:50अंग्रेजों का साथ नहीं देंगे। इन
- 4:55:52आंदोलनकारियों का साथ देंगे। अदरवाइज आप
- 4:55:54चूड़ियां ले लो घर बैठो। ठीक है? तो, यह
- 4:55:57कहानी हो गई। अब रानी अवंतीबाई ने डिसाइड
- 4:56:01कर लिया कि वह अपने राज्य को जिस पर
- 4:56:03अंग्रेजों ने अपना अधिकार कर लिया उस
- 4:56:05राज्य को वह वापस ले लेंगी और इस समय एक
- 4:56:07युद्ध होता है जिसे बोलते हैं खैरी युद्ध।
- 4:56:0923 नवंबर 1857 को रानी अवंतीबाई ने अपनी
- 4:56:13सेना के साथ मिलकर जो अंग्रेज वार्डन था।
- 4:56:16अंग्रेज जो अह कमांडर था जो कि मंडला का
- 4:56:18जो अधिकारी था उसका नाम था वार्डन या इसे
- 4:56:21वार्डिंग बोलते थे। आप याद रखिएगा। वार्डन
- 4:56:23या क्या बोलते हैं? वार्डिंगन। दोनों
- 4:56:25नामों में से जो आपको मिले याद रखिएगा। तो
- 4:56:28यह अंग्रेज अधिकारी है जिससे रानी का
- 4:56:30युद्ध होता है। तो मंडला नगर नगर को
- 4:56:32छोड़कर याद रखिएगा पूरा जो जिला है वह
- 4:56:34स्वतंत्र हो चुका था। अवंतीबाई ने मंडला
- 4:56:36विजय के लिए सिपाहियों सहित प्रस्थान किया
- 4:56:40और खैरी नामक स्थान पर अंग्रेजी सेना को
- 4:56:43पराजित कर पूरे मंडला जिले पर अधिकार कर
- 4:56:45लिया। ठीक है? इसमें यही लिखा है कि रानी
- 4:56:48के सिपाहियों ने क्या किया? खैरी के पास
- 4:56:51अंग्रेज सिपाहियों के साथ रानी अवंतीबाई
- 4:56:53का युद्ध हुआ। वाडिंगटन पूरी शक्ति लगाने
- 4:56:56के बाद भी कुछ ना कर सका और मंडला छोड़
- 4:56:58शिवनी की ओर भाग गया और इस प्रकार पूरा
- 4:57:00मंडला जिला और रामगढ़ राज्य स्वतंत्र हो
- 4:57:02गया। इस विजय के उपरांत आंदोलनकारियों की
- 4:57:05शक्ति में कमी जरूर आई परंतु उल्लास में
- 4:57:07कमी नहीं आई और रानी रामगढ़ वापस हो गई।
- 4:57:10अब हम लास्ट उस पर चलेंगे। यानी रानी ने
- 4:57:14विद्रोह में भाग ले लिया। रानी ने पूरे
- 4:57:16रामगढ़ पर अधिकार कर लिया। अब अंग्रेजों
- 4:57:18की बारी है। अंग्रेज बदले की तलाश में है।
- 4:57:20वाडिंगटन रानी से बदला लेना चाहता है और
- 4:57:23वह रानी को हराना चाहता है। इसलिए याद
- 4:57:25रखिएगा रानी से अपनी हार का बदला लेने के
- 4:57:28लिए अंग्रेज जो हैं बौखलाए हुए थे।
- 4:57:30उन्होंने अपनी हार का बदला लेना चाहा।
- 4:57:32अंग्रेज लगातार अपनी शक्ति सहजते रहे।
- 4:57:34अंग्रेजों ने 15 जनवरी 1858 को घुगरी जो
- 4:57:38कि इसी में पास में है को घेर लिया घुगरी
- 4:57:41को और मार्च 1858 के दूसरे सप्ताह में
- 4:57:44रीवा नरेश। याद रखिएगा हमें तो अपनों ने
- 4:57:46लूटा। गैरों में कहां दम था? यानी अगर
- 4:57:48पूछा जाए कि रामगढ़ रियासत के विरुद्ध या
- 4:57:51रानी अवंतीबाई के विरुद्ध किस राजा ने
- 4:57:53अंग्रेजों की सहायता की? वो हैं रीवा
- 4:57:55नरेश। याद रखिएगा रीवा नरेश ने उनकी
- 4:57:57सहायता की। ठीक है? और वीरांगना रानी
- 4:58:01अवंतीबाई की सेना जो अंग्रेजों की सेना की
- 4:58:03तुलना में बहुत छोटी थी। फिर भी साहस
- 4:58:05पूर्वक अंग्रेजों का सामना किया। रानी ने
- 4:58:08परिस्थितियों को भांपते हुए अपने किले से
- 4:58:09निकलकर डिंडोरी के पास देवगढ़ के जंगल है।
- 4:58:13यहां पहाड़ियों पर अपना शिविर बना लिया।
- 4:58:15अब आते हैं रानी के बलिदान दिवस की ओर।
- 4:58:19ठीक है? तो रानी का बलिदान किस प्रकार
- 4:58:20होता है? आइए समझिए। अब हमको यह समझना है
- 4:58:23कि रानी एक जगह पर छिपी हुई है और इस जगह
- 4:58:26का नाम है देवहारगढ़।
- 4:58:28सबसे इंपॉर्टेंट बात है देवहारगढ़। और यह
- 4:58:31अंतिम युद्ध होने वाला है देवहारगढ़ का
- 4:58:33युद्ध 1858 में। और आप याद रखिएगा डेट भी
- 4:58:3720 मार्च याद रख सकते हैं। डिडोरी में
- 4:58:39पड़ता है यह। यहां पर रानी जो हैं छुपी
- 4:58:41हुई हैं और अब जो है अंग्रेज सेना उनको
- 4:58:44ढूंढ रही है। तो अब क्या होगा? अंग्रेज
- 4:58:46सेना जब उनको ढूंढते हुए देहारगढ़ के पास
- 4:58:49पहुंची तो पहले तो दोनों सेनाओं के मध्य
- 4:58:51संघर्ष होता है और जब रानी को लगा कि वह
- 4:58:54हार जाएंगी तो रानी ने क्या कहा? आइए मैं
- 4:58:56आपको बताता हूं। रानी अवंतीबाई ने अपने आप
- 4:58:59को अंग्रेजों से घिरता देख रानी वीरांगना
- 4:59:03जो दुर्गावती हैं। याद रखिएगा। वीरांगना
- 4:59:05रानी दुर्गावती का अनुकरण करते हुए अपनी
- 4:59:08तलवार निकाली और कहा उन्होंने अपनी तलवार
- 4:59:11निकाल ली और क्या कहा ध्यान से सुनिएगा
- 4:59:14उन्होंने कहा हमारी दुर्गावती ने जीते जी
- 4:59:18हमारी दुर्गावती ने जीते जी वैरी के हाथ
- 4:59:20अंग ना छुए जाने का प्रण लिया था यानी
- 4:59:23जीते जी उनके दुश्मन उनको हाथ ना लगा पाएं
- 4:59:26और इसे ना भूलना ऐसा कहते हुए उन्होंने
- 4:59:28अपने सीने में अपनी तलवार मार ली और देश
- 4:59:31के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे गई
- 4:59:33वीरांगना रानी अवंती बाई ने याद रखिएगा जब
- 4:59:38रानी अवंतीबाई जब मृत्यु सैया पर थी तब
- 4:59:40उन्होंने अंग्रेजों को अपना बयान दिया और
- 4:59:42कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मैंने
- 4:59:45ही विद्रोह के लिए भड़काया था। उकसाया था।
- 4:59:47प्रजा बिल्कुल निर्दोष है। और इस प्रकार
- 4:59:50रानी ने हजारों लोगों को अंग्रेजों द्वारा
- 4:59:52किए जाने वाले अत्याचार से और उनकी
- 4:59:54यातनाओं से बचा लिया। क्योंकि अगर रानी
- 4:59:57अवंतीबाई यह सेंटेंस नहीं देते तो अंग्रेज
- 5:00:00प्रजा पर भी अत्याचार करते। और 20 मार्च
- 5:00:021858 को रानी अवंतीबाई जो हैं शहीद हो
- 5:00:06जाती हैं। इसीलिए याद रखिएगा रानी
- 5:00:08अवंतीबाई लोधी जो हैं वो 1857 की जो
- 5:00:11क्रांति है 1857 की क्रांति की प्रथम
- 5:00:15महिला शहीद हैं। 1857 की क्रांति की प्रथम
- 5:00:19महिला शहीद किसे माना जाता है? रानी
- 5:00:21अवंतीबाई को माना जाता है। याद रखना
- 5:00:24क्योंकि रानी
- 5:00:26लक्ष्मीबाई इसके बाद शहीद होती हैं जून
- 5:00:28में। पहले मार्च में रानी अवंतीबाई शहीद
- 5:00:31होती हैं और जून में कौन शहीद होता है?
- 5:00:33रानी लक्ष्मीबाई। ठीक है? याद रखिएगा
- 5:00:36क्योंकि इनकी कहानी लक्ष्मीबाई की तरह है।
- 5:00:38इसलिए रानी अवंतीबाई को रामगढ़ की
- 5:00:41लक्ष्मीबाई भी कहते हैं। क्या कहते हैं?
- 5:00:43रामगढ़ की लक्ष्मीबाई। तो किसे रामगढ़ की
- 5:00:46लक्ष्मीबाई कहते हैं? याद रखिएगा वो हैं
- 5:00:48रानी अवंतीबाई। रानी अवंतीबाई के
- 5:00:50माता-पिता कौन थे? उनके पति का नाम क्या
- 5:00:52था? उनके बच्चों का नाम क्या था? किस
- 5:00:54रियासत की रानी रानी थी वो? और किससे उनका
- 5:00:58युद्ध हुआ है? वाडिंगटन। याद रखिएगा
- 5:01:00वार्डन भी याद रख सकते हैं या वाडिंगन आप
- 5:01:02याद रख सकते हैं। इसके अलावा किस संघर्ष
- 5:01:05में उनकी मृत्यु हुई या उनका अंतिम युद्ध
- 5:01:07है देवहारगढ़ का युद्ध। 20 मार्च 1858 को
- 5:01:10यहां पर रानी की क्या हो जाती है? मृत्यु
- 5:01:13हो जाती है जो कि शाहपुर के पास स्थित है।
- 5:01:15ठीक है? अब मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को
- 5:01:20रानी अवंतीबाई बहुत अच्छे से समझ में आ
- 5:01:22गई। रानी अवंतीबाई लोधी जिन्होंने 1857 की
- 5:01:25क्रांति में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया
- 5:01:27और अपने राज्य की खातिर, अपनी मातृभूमि की
- 5:01:30खातिर, अपनी प्रजा की खातिर उन्होंने
- 5:01:32अंग्रेजों से लोहा लिया और लोहा लेते हुए
- 5:01:34वो वीरगति को प्राप्त हो गई। मरने से पहले
- 5:01:37उन्होंने रानी दुर्गावती के उस वक्तव्य को
- 5:01:40याद रखा और उस प्रण को याद रखा जो
- 5:01:42उन्होंने कहा था कि जीते जी वह किसी वैरी
- 5:01:44के हाथ नहीं आएंगी। किसी दुश्मन के हाथ
- 5:01:46नहीं आएंगी। और उन्होंने अपनी तलवार से
- 5:01:48अपना जो है बलिदान दे दिया और खुद ही जो
- 5:01:51है वीरगति को प्राप्त हो गई। रानी
- 5:01:53अवंतीबाई याद रखिएगा मध्य प्रदेश की पहली
- 5:01:55महिला शहीद हैं जिनका 1857 की क्रांति में
- 5:01:58अपना योगदान है। अब आप रानी अवंतीबाई पर
- 5:02:00आसानी से जो है कुछ भी लिख सकते हैं। चाहे
- 5:02:03प्रीलिम्स हो या मेंस हो। इसमें आपको सारी
- 5:02:05चीजें मैंने बता दी। कारण भी बता दिया।
- 5:02:08राजा शंकर शाह से उनका जो संबंध था वो उस
- 5:02:10सम्मेलन में था। जो पुरवा के राजा थे ये
- 5:02:13सारी चीजें हम लोग इस पार्ट में डिस्कस कर
- 5:02:15चुके हैं। मुझे उम्मीद है कि आपको रानी
- 5:02:18अवंतीबाई के बारे में दी गई ये जानकारी
- 5:02:20काफी अच्छी लगी होगी। तो रानी अवंतीबाई जो
- 5:02:22हैं रामगढ़ की लक्ष्मीबाई याद रखिएगा
- 5:02:25जिन्होंने रामगढ़ का मान बढ़ाया। रामगढ़
- 5:02:28वर्तमान में डिंडोरी जिले में स्थित है।
- 5:02:30तो हमें गर्व करना चाहिए कि हमारे देश में
- 5:02:32ऐसी वीरांगनाएं हुई हैं। रानी अवंतीबाई,
- 5:02:35रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मीबाई और ना
- 5:02:38जाने कैसी और ना जाने और कितनी जो महिलाएं
- 5:02:40हैं जिन्होंने इस तरीके से अपने सर्वस्व
- 5:02:43अपना बलिदान दिया है। मुझे उम्मीद है आपको
- 5:02:45यह लेक्चर पसंद आएगा। जय हिंद। थैंक यू।
- 5:03:03नमस्कार साथियों, मैं हरी सिंह राजपूत
- 5:03:05आपके लिए लेकर आया हूं मध्य प्रदेश के
- 5:03:07वीरों के इतिहास की सीरीज में एक अन्य
- 5:03:10महत्वपूर्ण वीर का नाम और वह वीर हैं मध्य
- 5:03:13प्रदेश के गोंड राजवंश के महानतम शासक और
- 5:03:17हम कह सकते हैं रानी दुर्गावती के वंशज
- 5:03:19जिनका नाम है राजा शंकर शाह गोंड एवं उनके
- 5:03:21पुत्र कुंवर कुंवर रघुनाथ शाह गोंड। तो
- 5:03:24दोस्तों आज हम बात करेंगे राजा शंकर शाह
- 5:03:26एवं रघुनाथ शाह गोंड के बारे में
- 5:03:28जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपना
- 5:03:31बलिदान दिया और अंग्रेजों ने क्रूरतम
- 5:03:34तरीके से उनको जो है एक तोप से बांधकर जो
- 5:03:36है उड़ा दिया। तो आइए जानते हैं कौन है
- 5:03:39राजा शंकर शाह और कौन थे उनके पुत्र
- 5:03:41रघुनाथ शाह। तो जैसा कि साथियों आप सभी
- 5:03:44लोग जानते हैं कि राजा शंकर शाह जिन्होंने
- 5:03:471857 की क्रांति में अपना महत्वपूर्ण
- 5:03:50बलिदान दिया। यह हैं हमारे राजा शंकर शाह
- 5:03:52और यह हैं उनके पुत्र जिनका नाम था रघुनाथ
- 5:03:54शाह। तो अब देखेंगे थोड़ा सा इनके बारे
- 5:03:57में मैं आपको बताना चाहता हूं और आप इस
- 5:04:00पूरे घटनाक्रम को सिस्टमैटिक तरीके से
- 5:04:02देखिएगा क्योंकि इसमें आपको परीक्षा
- 5:04:04उपयोगी चीजें बहुत सारी मिलने वाली हैं।
- 5:04:06जैसे कि सबसे पहले याद रखिएगा शंकर शाह
- 5:04:09गोंड है कौन? शंकर शाह आखिर कौन थे? तो
- 5:04:11देखिए गोंड वंश गोंड राजवंश के एक अंतिम
- 5:04:14प्रसिद्ध शासक थे जिनका नाम था निजाम शाह
- 5:04:16जो कि मंडला के गोंड शासक थे। और उनके बाद
- 5:04:19इस वंश में एक अंतिम राजा हुए जिनका नाम
- 5:04:21था सुमेर शाह। तो इन्हीं सुमेरशाह गोंड के
- 5:04:24परिवार में जन्म होता है राजा शंकर शाह
- 5:04:27का। राजा सुमेर शाह गोंड को मराठों ने
- 5:04:30बंदी बना के सागर में रखा था और बाद में
- 5:04:32उनको जब रिहा किया गया तो उन्हें एक छोटी
- 5:04:35सी जागीर दे दी गई थी। और यह जागीर जो है
- 5:04:38जबलपुर के पूर्वाग्राम में थी। तो यहां पर
- 5:04:40हमारे लिए एक इंपॉर्टेंट वर्ड है जबलपुर
- 5:04:42का पूर्वाग्राम। कहां है ये? यह जबलपुर
- 5:04:46में है। इस गांव का नाम है पुरवाग्राम। तो
- 5:04:48राजा सुमेर शाह गोंड इसी पूर्वाग्राम में
- 5:04:51रहने लगे थे और यहीं पर उनकी मृत्यु के
- 5:04:54बाद यह जो जागीर है पूर्वा जागीर यह मिल
- 5:04:56जाती है राजा शंकर शाह को। याद रखिएगा और
- 5:04:58शंकर शाह के पुत्र हैं जिनका नाम था
- 5:05:00रघुनाथ शाह गोंड। ठीक है? अगर हम देखें
- 5:05:03राजा शंकर शाह और उनके जो पुत्र रघुनाथ
- 5:05:05शाह हैं इन दोनों का जन्म जो है मंडला के
- 5:05:08किले में हुआ था। क्योंकि इससे पहले राजा
- 5:05:11सुमेर शाह जो गोंड थे वह मंडला के किले
- 5:05:13में रहते थे। लेकिन मराठों ने आक्रमण कर
- 5:05:15उनको कैद कर लिया और उसके पश्चात जो है
- 5:05:18मराठों ने उनका जो राज्य है वो छीन लिया
- 5:05:20और उन्हें एक छोटी सी जागीर दे दी जो थी
- 5:05:22कहां पर? पूर्वाग्राम जबलपुर में। आइए हम
- 5:05:25आगे बात करते हैं। इसमें यह भी बताया गया
- 5:05:27है कि जो मंडला का जो किला है वह गोंड वंश
- 5:05:30के राजा नरेंद्र शाह ने बनवाया था 1698
- 5:05:32में। जो कि नर्मदा नदी के किनारे स्थित है
- 5:05:36और नर्मदा नदी इसे तीन ओर से सुरक्षा
- 5:05:38प्रदान करती है। अब हम बात कर रहे हैं कि
- 5:05:41राजा शंकर शाह का 1857 की क्रांति में
- 5:05:43योगदान किस प्रकार रहा। थोड़ा सा और आप
- 5:05:45इनके बारे में जान लीजिए। राजा शंकर शाह
- 5:05:47के जो पिता हैं सुमेर शाह के समय मंडला
- 5:05:50पेशवाओं और मराठाओं के अधीन आ गया था।
- 5:05:53जैसा कि मैंने आपको बताया कि मराठाओं ने
- 5:05:54आक्रमण कर मंडला पर अधिकार कर लिया और जो
- 5:05:57राजा सुमेर शाह हैं उन्हें कैद कर लिया
- 5:05:59था। और पेशवा के प्रतिनिधि के रूप में
- 5:06:02सुमेर शाह याद रखिएगा सुमेर शाह मंडला के
- 5:06:04राजा के रूप में शासन चला रहे थे। इसी समय
- 5:06:07नरहरी शाह और सुमेर शाह के बीच सत्ता का
- 5:06:10संघर्ष चला और 1818 में मंडला अंग्रेजों
- 5:06:13के अधीन आ गया। यानी पहले मराठों ने
- 5:06:15अधिकार किया और मराठों से यह जो किला है
- 5:06:171818 में वो अंग्रेजों ने छीन लिया था।
- 5:06:20नरहरी शाह और सुमेर शाह के बीच में एक
- 5:06:23झगड़ा हुआ था। वह एक जब हम गोंड राजवंश
- 5:06:26पढ़ेंगे तो उसमें हम इसको डिस्कस करेंगे।
- 5:06:28राजा शंकर शाह पहले के राजाओं की तरह
- 5:06:30स्वतंत्र राजा नहीं थे क्योंकि उनकी जो
- 5:06:32जागीर है वह अंग्रेजों ने छीनी। पहले
- 5:06:34मराठों ने छीनी और बाद में मराठों से
- 5:06:36अंग्रेजों ने छीनी। तो कुल मिलाकर अब उनका
- 5:06:38जो राज्य और जागीर है वो अंग्रेजों के पास
- 5:06:40है। उनके पास मात्र पुरवा याद रखिएगा यह
- 5:06:43पुरवा इंपॉर्टेंट है। पुरवा और कुछ गांव
- 5:06:46की जागीरदारी बची थी और उन्हें अंग्रेजों
- 5:06:48से पेंशन मिलती थी। परंतु गढ़मंडला और
- 5:06:51जबलपुर की जनता उन्हें वही मानसान देती थी
- 5:06:54जो उनके पूर्वजों को प्राप्त था। यानी
- 5:06:57राजा शंकर शाह महानतम गोंड शासक संग्राम
- 5:07:00शाह और रानी दुर्गावती के ही वंशज थे।
- 5:07:02इनके पिता मंडला के शासक थे जिनका नाम
- 5:07:05सुमेर शाह था। जिन्हें मराठों ने पहले कैद
- 5:07:07किया। बाद में मराठों ने जब इन्हें रिहा
- 5:07:09किया तो फिर इन्ह इनका जो क्षेत्र है वो
- 5:07:10अंग्रेजों ने इनसे छीन लिया और इन्हें
- 5:07:12पुरवा नाम के क्षेत्र की जागीर दे दी।
- 5:07:14उनके एकमात्र पुत्र रघुनाथ शाह थे। याद
- 5:07:17रखिएगा जैसा कि मैंने आपको बता दिया और
- 5:07:19रघुनाथ शाह का जो विवाह है वह रानी मन
- 5:07:21कुंवर से हुआ था। जबकि इनकी वाइफ का नाम
- 5:07:23फूल कुंवर था। अभी हम और चर्चा करेंगे। अब
- 5:07:25देखिए होता क्या है इसमें?
- 5:07:28आखिर राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने 1857
- 5:07:32की क्रांति में विद्रोह क्यों किया? इसका
- 5:07:34कारण मैं आपको बता रहा हूं। जैसा कि हम सब
- 5:07:36जानते हैं कि डलहौजी ने भारतीय राज्यों को
- 5:07:38हड़पने के लिए एक नीति चलाई जिसे
- 5:07:40डॉक्ट्राइन ऑफ लैप्स या जिसे हम लोग हड़प
- 5:07:43नीति के नाम से जानते हैं। और इस नीति के
- 5:07:46द्वारा उसने क्या किया था कि यदि किसी
- 5:07:47राजा का आनुवांशिक उत्तराधिकारी नहीं होता
- 5:07:50था तो उसे अंग्रेजी राज्य में विलय कर
- 5:07:52लिया जाता था। यानी यदि कोई राजा बिना
- 5:07:55उत्तराधिकारी के मर जाए तो उसका जो राज्य
- 5:07:58है वो अंग्रेजों के पास चला जाता था।
- 5:08:00डलहौजी की यही कहलाती है डॉक्ट्राइन ऑफ
- 5:08:02लैप्स या जिसे हम हड़प नीति कहते हैं। अब
- 5:08:05इस नीति के तहत कौन-कौन से राज्य झांसी,
- 5:08:07नागपुर, अवध, कानपुर, मंडला के रामगढ़।
- 5:08:10याद रखिएगा इन सभी राज्यों को अंग्रेजों
- 5:08:12ने अपने अधिकार में कर लिया था। और इन्हीं
- 5:08:15के इन्हीं सभी चीजों की वजह से यह नाराज
- 5:08:18थे। इसके अलावा गाय और सूअर की चर्बी वाले
- 5:08:20कारतूस क्रांति का मुख्य कारण बने थे। तो
- 5:08:22यह सब 1857 की क्रांति का मुख्य कारण थे
- 5:08:25और इन्हीं घटनाओं की वजह से इसके पूर्व
- 5:08:27में 1842 के आदिवासी आंदोलन को अंग्रेजों
- 5:08:29ने बर्बरता से कुचल दिया था। राजा रघुनाथ
- 5:08:33शाह इन सभी घटनाओं से राजा रघुनाथ शाह और
- 5:08:35शंकर शाह इन सभी घटनाओं से क्या थे? आहत
- 5:08:38थे और वह अंग्रेजों को इस देश से भगाना
- 5:08:40चाहते थे। यह है कहानी। अब मैं आपको इस
- 5:08:43कहानी को थोड़ा सा लिखकर बताता हूं
- 5:08:45क्योंकि मुझे लगता है कि आपको बहुत अच्छे
- 5:08:47से सारी बातें पता होनी चाहिए। इसमें हमने
- 5:08:50जो भी बातें की वो मुख्यता चार पांच बातें
- 5:08:52हैं। एक गोंड राजा हैं जिनका नाम है सुमेर
- 5:08:56शाह। ध्यान से सुनिएगा। क्या नाम था इनका?
- 5:08:58सुमेर शाह। जो सुमेर शाह गोंड है
- 5:09:06सुमेर शाह गोंड। तो सुमेर शाह जो गोंड है
- 5:09:10इनके जो पुत्र हैं उनका नाम क्या है? याद
- 5:09:12रखिएगा। सुमेर शाह जो गोंड है जो कि मंडला
- 5:09:15के शासक थे। कहां के शासक थे? यह मंडला
- 5:09:18के। मैं आपको एक मंडला के राजा थे। तो
- 5:09:22इनका जो राज्य है पहले किसने छीन लिया?
- 5:09:25पहले मराठों ने इनका क्षेत्र छीना। मराठों
- 5:09:28ने क्षेत्र छीना और बाद में यह जो क्षेत्र
- 5:09:32है वह मराठों से निकलकर किसके पास आ गया?
- 5:09:35ईआईसी यानी ईस्ट इंडिया कंपनी के पास आ
- 5:09:37गया। यानी अंग्रेजों ने मराठों से एक
- 5:09:39क्षेत्र जो है वह छीन लिया। मराठों से
- 5:09:42किसने छीन लिया? अंग्रेजों ने। बाद में
- 5:09:44क्या होता है कि राजा सुमेर शाह के बेटे
- 5:09:46होते हैं जिनका नाम होता है शंकर शाह
- 5:09:49जिनके बारे में हम पढ़ रहे हैं राजा शंकर
- 5:09:51शाह। अब शंकर शाह जो हैं याद रखिएगा कौन
- 5:09:54है? यह कोई स्वतंत्र शासक नहीं है। क्यों
- 5:09:57नहीं है स्वतंत्र शासक? क्योंकि इनका जो
- 5:09:59क्षेत्र है वह अंग्रेजों ने अपने अधिकार
- 5:10:01में ले लिया। ठीक है? इनके पास केवल पुरवा
- 5:10:05और उसके आसपास की जागीर है। याद रखिएगा
- 5:10:08पुरवा जो है एक फेमस प्लेस है। पुरवाग्राम
- 5:10:11की जागीर है। और याद रखिएगा यह जो हैं
- 5:10:14क्या करते हैं? इनको अंग्रेजों से एक
- 5:10:16पेंशन मिलती है और यह पेंशन पर अपना
- 5:10:18गुजारा करते हैं। क्या मिलती है? पेंशन
- 5:10:21मिलती है अंग्रेजों से। शंकर शाह किसके
- 5:10:23बेटे हैं? याद रखिएगा सुमेश शाह। और शंकर
- 5:10:26शाह के बेटे हैं जिनका नाम है रघुनाथ शाह।
- 5:10:28कुंवर रघुनाथ शाह। अब कैसे इनका 1857 की
- 5:10:32क्रांति में योगदान है और किस प्रकार
- 5:10:34अंग्रेज इनको पकड़ते हैं इस बात को हम
- 5:10:37जानने की कोशिश करते हैं और कोशिश करेंगे
- 5:10:40कि इसको अच्छे से समझ सके। इसी बीच क्या
- 5:10:43होता है? इसी बीच एक घटनाक्रम होता है कि
- 5:10:46जैसे यह जो है यह पुरवा है। पुरवा कहां
- 5:10:49है? मैंने आपको बता दिया। पुरवा की यह
- 5:10:51जागीर है और इस जागीर के मालिक हैं जिनका
- 5:10:54नाम है क्या? तो इस जागीर के मालिक का नाम
- 5:10:57है राजा शंकर शाह। ठीक है? तो यह कौन हो
- 5:11:01गए? राजा शंकर शाह हो गए यहां के मालिक।
- 5:11:03और उनके बेटे हैं जिनका नाम क्या हो
- 5:11:05जाएगा? रघुनाथ शाह। शंकर शाह की जो उम्र
- 5:11:07है वो लगभग 70 साल है। याद रखिएगा राजा
- 5:11:10शंकर शाह की एक खास बात है। राजा शंकर शाह
- 5:11:13क्या करते थे? कविताएं लिखा करते थे। क्या
- 5:11:16लिखा करते थे? कविताएं लिखा करते थे। और
- 5:11:18यह जो कविताएं थी वो एक तरीके से वीर रस
- 5:11:21वाली थी। कौन सी? वीर रस वाली थी।
- 5:11:24अतिशयोक्ति वाली कविताएं थी। जिसका मतलब
- 5:11:26यह है कि वो भारत के युवाओं को क्रांति के
- 5:11:29लिए प्रेरित करना चाहते थे। क्योंकि इस
- 5:11:31समय देश में क्या चल रही है? इस समय देश
- 5:11:34में 1857 की क्रांति जो है वो प्रारंभ हो
- 5:11:37चुकी है। तो 1857 की क्रांति चल रही है और
- 5:11:401857 की क्रांति में वो एक तरीके से एक
- 5:11:43प्लान बनाते हैं। वो प्लान यह बनाते हैं
- 5:11:46कि जबलपुर में अंग्रेजों की एक रेजीमेंट
- 5:11:48रहा करती थी। ध्यान से सुनते जाइएगा पूरी
- 5:11:51कहानी। जबलपुर में ईआईसी की यानी
- 5:11:54अंग्रेजों की एक रेजीमेंट थी
- 5:11:57और इस रेजीमेंट का नाम था 52वीं रेजीमेंट।
- 5:12:0052 वी रेजीमेंट कहते थे। तो ये जो 52वीं
- 5:12:04रेजीमेंट है इस रेजीमेंट के बहुत सारे जो
- 5:12:06सिपाही हैं वो क्या करते थे? अक्सर जो है
- 5:12:09इनके महल में कहां आते थे? इनके महल में
- 5:12:12आते थे। इनके जो सिपाही हैं याद रखिएगा वो
- 5:12:15राजा साहब के महल में जाते थे। ठीक है?
- 5:12:18कहां जाते थे? राजा शंकर शाह के महल या घर
- 5:12:20पे जाते थे। और यहां पर जो है बैठक चलती
- 5:12:22थी और बैठक में राजा शंकर शाह 52वीं
- 5:12:25रेजीमेंट के सिपाहियों को विद्रोह करने के
- 5:12:28लिए भड़काना चाहते थे। अब यह बात जो है
- 5:12:30याद रखिएगा जब 1857 की क्रांति चल रही थी
- 5:12:33तो अंग्रेजों ने भी अपने जासूस भेज रखे थे
- 5:12:36और इस समय जबलपुर का जो अंग्रेज
- 5:12:39अधिकारी था उसका नाम था क्लार्क। याद
- 5:12:44रखिएगा क्या नाम था? मेजर क्लार्क जो है
- 5:12:46वह जबलपुर का अंग्रेज अधिकारी था। तो
- 5:12:49क्लार्क ने अपने कुछ जासूस जो हैं वह इस
- 5:12:53महल के पास छोड़ रखे थे। किसके? राजा शंकर
- 5:12:56शाह के। तो क्लार्क को यह मैसेज मिला कि
- 5:12:58राजा शंकर शाह इन सिपाहियों को भड़का कर
- 5:13:01जो रेजीमेंट का मुख्यालय है अंग्रेजों का
- 5:13:04उस पर हमला करना चाहते हैं। तो राजा अपने
- 5:13:06सिपाहियों के साथ राजा इन विद्रोहियों के
- 5:13:09साथ जबलपुर के जो अंग्रेजी कार्यालय है उस
- 5:13:12पर हमला करें। उससे पहले ही क्या करता है?
- 5:13:14क्लार्क जो है इसको सूचना मिल जाती है। तो
- 5:13:16यह जो है अटैक कर देता है राजा के महल पर
- 5:13:19और राजा के महल पर अटैक करके यहां पर राजा
- 5:13:22रघुनाथ शाह को राजा रघुनाथ शाह और उनके जो
- 5:13:28पिता हैं राजा रघुनाथ शाह और उनके जो पिता
- 5:13:31हैं जिनका नाम है राजा शंकर शाह। शंकर शाह
- 5:13:34की उम्र याद रखिएगा 70 साल है जो राजा
- 5:13:36हैं। राजा शंकर शाह और उनके जो कुंवर हैं
- 5:13:39राजा नहीं लगाएंगे क्योंकि पिता भी राजा
- 5:13:41हैं तो उनके जो पुत्र हैं जिनका नाम है
- 5:13:44कुंवर शाह इन लोगों को क्या कर लेते हैं?
- 5:13:46गिरफ्तार कर लेते हैं। जब को इनको
- 5:13:48गिरफ्तार किया गया तो इसका मतलब यह है कि
- 5:13:50यह जो मैसेज है वो इन सिपाहियों के पास भी
- 5:13:53गया होगा। जनता के पास भी गया होगी। जनता
- 5:13:55उन्हें अपना राजा मानती है। रानी
- 5:13:57दुर्गावती का वंशज मानती है। तो जनता में
- 5:14:00आक्रोश है। तो अंग्रेजों ने सोचा कि अगर
- 5:14:02इनको ज्यादा समय तक हमने जेल में रखा तो
- 5:14:05जनता भड़क सकती है और हमला करके इन्हें
- 5:14:07छुड़ा सकती है। तो इसीलिए क्या किया?
- 5:14:09अंग्रेजों ने एक सैन्य अदालत बुलाई और
- 5:14:12सैन्य अदालत बुलाकर इनको जो है इन पर क्या
- 5:14:16किया? देशद्रोह का आरोप लगाया कि यह दोनों
- 5:14:18के दोनों देशद्रोही हैं और इनके द्वारा
- 5:14:22अपराध किया गया है क्योंकि यह भारत के
- 5:14:24लोगों को भड़का रहे हैं अंग्रेजों के
- 5:14:25विरुद्ध और इन पर यह आरोप लगाकर याद
- 5:14:28रखिएगा इन दोनों को 18 सितंबर 1857
- 5:14:34को यानी अभी एक साल भी नहीं हुआ था
- 5:14:36क्रांति की जब शुरुआत थी
- 5:14:39कब बच्चों याद रखिएगा
- 5:14:4418 सितंबर 1857 57 को इन दोनों पिता पुत्र
- 5:14:47को जो है क्या कर दिया गया? जो है तोप से
- 5:14:50उड़ा दिया गया। कुछ विद्वान यह मानते हैं
- 5:14:53कुछ जगह पे यह लिखा है कि इन दोनों को
- 5:14:55फांसी दे दी गई जबलपुर में और कुछ लोग
- 5:14:57कहते हैं कि इनको इस क्षेत्र में दहशत
- 5:15:00फैलाने के लिए जबलपुर में इन दोनों को
- 5:15:02क्या है? तोप से उड़ा दिया गया। तो यह जो
- 5:15:05क्लार्क है, इस समय जबलपुर का कमिश्नर था
- 5:15:08जिसका नाम था आर्स्किन। और यह जो है उसका
- 5:15:10सहयोगी था। तो क्लार्क ने इन पर हमला करके
- 5:15:13इन सभी को गिरफ्तार कर लिया। राजा और उनके
- 5:15:15पुत्र के साथ-साथ जो है 11 लोगों को
- 5:15:17गिरफ्तार किया गया था। जब गिरफ्तार किया
- 5:15:19गया तो महल से राजा शंकर शाह के महल से
- 5:15:22कुछ ऐसी चीजें मिली। कुछ ऐसे पत्र मिले
- 5:15:25जिनमें वो कविताएं लिखी थी जो लोगों को
- 5:15:27भड़काने के लिए थी। तो अंग्रेजों ने उन
- 5:15:29पत्रों को आधार बनाकर इन पर सैन्य अदालत
- 5:15:32में केस चलाया और 18 सितंबर 1857 को इन
- 5:15:35दोनों पिता पुत्र को तोप से बांधकर जो है
- 5:15:37उड़ा दिया। इन दोनों की समाधि जबलपुर में
- 5:15:39है। राजा शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह का जो
- 5:15:42संग्रहालय है वो भी जबलपुर में है। लेकिन
- 5:15:44मैं कुछ बातें हैं जो मैं आपको पढ़कर
- 5:15:46बताना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि आपको
- 5:15:48आगे पता रहे। तो ये सब तो हम लोग यहां जान
- 5:15:50चुके हैं। कौन थे इनके पिता? पुत्र कौन
- 5:15:52थे? ये सारी बातें होंगी। अब देखिए कुछ
- 5:15:54यहां लिखा भी है। देखिए
- 5:15:56आखिरकार क्या हुआ? तो राजा शंकर शाह और
- 5:16:00रघुनाथ शाह दोनों ही बहुत वीर साथी अच्छे
- 5:16:02कवि थे और अपनी कविताओं के माध्यम से
- 5:16:05लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार कर
- 5:16:07रहे थे। अब मैं पढ़कर बता रहा हूं तो आपको
- 5:16:09हर एक लाइन अच्छे से समझ में आएगी। इसी
- 5:16:11समय जबलपुर अंग्रेजों में जबलपुर में
- 5:16:14अंग्रेजों में 52वीं रेजीमेंट तैनात थी।
- 5:16:16यानी जबलपुर में अंग्रेजों की कौन सी
- 5:16:18रेजीमेंट तैनात थी? 52 बी रेजीमेंट। यह
- 5:16:20याद रखिएगा। जिसके कई सैनिक अंग्रेजों के
- 5:16:23विरुद्ध विद्रोह का मन बना चुके और इस समय
- 5:16:25तक क्रांति देश के अधिकांश भागों में फैल
- 5:16:27चुकी थी। मध्य भारत में राजा शंकर शाह
- 5:16:30जिनकी उम्र लगभग 70 वर्ष थी। क्रांति का
- 5:16:32नेता इन्हें चुना गया। यानी जबलपुर में आप
- 5:16:34याद रख सकते हैं महाकौशल क्षेत्र में।
- 5:16:36राजा शंकर शाह की अध्यक्षता में पुरवा में
- 5:16:39आसपास के जमींदारों और राजाओं की सुरभा
- 5:16:41बुलाई गई। जिसमें रानी अवंतीबाई भी शामिल
- 5:16:44हुई थी। याद रखिएगा इसमें रानी अवंतीबाई
- 5:16:46भी शामिल हुई थी। इस क्षेत्र में प्रचार
- 5:16:48के लिए एक पत्र और दो काली चूड़ियों की एक
- 5:16:50पुड़िया बनाकर क्या? एक पत्र और दो काली
- 5:16:53चूड़ियों की एक पुड़िया बनाकर प्रसाद के
- 5:16:56रूप में वितरित गई। यह एक तरीके से क्या
- 5:16:58था? सिंबल था क्रांतिकारियों के बीच में।
- 5:17:00इसके पत्र में लिखा गया कि अंग्रेजों से
- 5:17:02संघर्ष के लिए तैयार रहो या चूड़ियां
- 5:17:05पहनकर घर बैठो। यानी लोगों को इस तरीके से
- 5:17:08प्रेरित किया गया। या तो अंग्रेजों से
- 5:17:10संघर्ष करो या चूड़ियां पहनकर घर बैठो।
- 5:17:12इसके याद रखिएगा जो राजा जमींदार और
- 5:17:15मालगुजार पुड़िया ले लें तो इसका अर्थ है
- 5:17:17क्रांति में अंग्रेजों के विरुद्ध अपना
- 5:17:19समर्थन देना है और नहीं लेंगे तो वो
- 5:17:21विद्रोहीओं का साथ नहीं देंगे। अब क्या
- 5:17:24होता है? राजा शंकर शाह जबलपुर की अंग्रेज
- 5:17:26छावनी में तैनात भारतीय सैनिकों की सहायता
- 5:17:29से छावनी पर आक्रमण कर अंग्रेजों को भगाना
- 5:17:32चाहते थे। किंतु राजा शंकर शाह के महल के
- 5:17:34कुछ लोग महल की गोपनीय सूचनाएं किन को
- 5:17:36पहुंचा देते? अंग्रेजों को पहुंचा देते।
- 5:17:39हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम
- 5:17:41था? सेम कहानी। अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर ने
- 5:17:44अपने गुप्तचरों को साधु के विषय में गढ़
- 5:17:46पुरवा भेजा। गढ़ पुरवा वही है जिसको मैं
- 5:17:48ग्राम पुरवा बोल रहा हूं। ताकि वो राजा
- 5:17:50शंकर शाह की क्या कर सके? तैयारियों की
- 5:17:52जानकारी ले सकें। राजा धार्मिक प्रवृत्ति
- 5:17:54के व्यक्ति थे। उन्होंने साधुओं का स्वागत
- 5:17:56किया और अपनी योजना उन्हें बतला दी।
- 5:18:00कितने अच्छे राजा थे। जबलपुर का डिप्टी
- 5:18:02कमिश्नर सभी भेद जान चुका था। उसने अपने
- 5:18:04गुप्तचरों को फैला दिया। 14 सितंबर वो डेट
- 5:18:07जिस दिन राजा को गिरफ्तार किया गया। 14
- 5:18:09सितंबर 1857 को रात्रि अंग्रेजों ने लगभग
- 5:18:1220 घुड़सवार 40 पैदल सिपाहियों के साथ
- 5:18:14राजा की हवेली पर धावा बोल दिया। राजा
- 5:18:17शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह
- 5:18:19को 13 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
- 5:18:21पूरे घर की तलाशी ली जिसमें राजा द्वारा
- 5:18:23सरदारों जमींदारों को लिखे गए पत्र मिले
- 5:18:25जो राजा द्वारा लिखी गई कुछ कविताएं थी।
- 5:18:28जिन कविताओं में लोगों को उत्साहित किया
- 5:18:30गया था। जिसमें लिखा था मूंद आंख मूंद मुख
- 5:18:33इंडन को चुगलों को चबाई खाए खूंद दौड़
- 5:18:36दुष्टन को शत्रु संहारिका मार अंग्रेज रेज
- 5:18:40कर देई मात चंडी बचऊ नहीं बैर बाल बच्चे
- 5:18:43संघारिका शंकर की रक्षा कर दास प्रतिपाल
- 5:18:46कर दीन की सुन आए मात कालिका इस तरीके से
- 5:18:50कुछ लाइनें लिखी गई थी जिसमें लोगों को
- 5:18:52क्रांति के लिए क्या किया गया था उत्साहित
- 5:18:54किया गया था अब क्या होता है यह कविताएं
- 5:18:58उनके हाथ लग जाती हैं और वह क्या करते
- 5:19:00हैं? अंग्रेज इस आधार पर उनको क्या करते
- 5:19:03हैं? पहले तो कैद करते हैं। जबलपुर हाई
- 5:19:05कोर्ट और एल्गिन हॉस्पिटल के पास उनको रखा
- 5:19:08गया और बाद में क्या किया गया? बाद में
- 5:19:11जैसा कि आप जानते हैं 18 सितंबर 1857 को
- 5:19:14जबलपुर में जो है फांसी दे दी गई। कुछ
- 5:19:17कहते हैं कि उन्हें तोप से उड़ा दिया गया।
- 5:19:20हम तोप वाली बात को हमने लिख लिया। ठीक
- 5:19:22है? तो दोनों को देखने के लिए विशाल
- 5:19:25जलसेना उमड़ रहा था राजा शंकर शाह और
- 5:19:27रघुनाथ शाह। पर कोई डर का कोई प्रभाव नहीं
- 5:19:30था। दोनों की हथकड़ियां खोल दी गई और
- 5:19:33दोनों को तोप के मुंह से बांध दिया गया।
- 5:19:35तोप से बांधते समय राजा और राजकुमार दोनों
- 5:19:37तेजमय चेहरे के साथ गर्भ से चलकर तोपों के
- 5:19:40सामने आए और दोनों ने सीना तानकर ऐसे खड़े
- 5:19:42हो गए और जब तोप चली तो दोनों के जो शरीर
- 5:19:45के टुकड़े हैं वो 50 मीटर तक दूर तक फैल
- 5:19:47गए। तो इस प्रकार राजा शंकर शाह और रघुनाथ
- 5:19:50शाह का जो है बलिदान हो जाता है। अब कहानी
- 5:19:52है एक रानी फूल कुंवर की। मोस्ट
- 5:19:54इंपोर्टेंट नाम है। याद रखिएगा कौन है?
- 5:19:56राजा शंकर शाह की पत्नी है। जिन्होंने उन
- 5:19:58सबों को उन सब के टुकड़ों को इकट्ठा करके
- 5:20:01उनको क्या किया? उनका अंतिम संस्कार किया
- 5:20:04और बदला लेने की कसम खाई। फिर रानी फूल
- 5:20:06कुंवर ने इस क्षेत्र में अंग्रेजों के
- 5:20:08विरुद्ध विद्रोह किया। लेकिन बाद में वह
- 5:20:10अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए पराजित हो
- 5:20:12गई। तो इसमें याद रखिएगा रानी फूल कुंवर
- 5:20:14कौन थी? यह भी आपको समझ में आ जाएगा। राजा
- 5:20:16शंकर शाह की पत्नी फूल कुंवर थी। याद
- 5:20:18रखिएगा इंपॉर्टेंट है। ठीक है? तो बाद में
- 5:20:21जो है याद रखिएगा क्या होता है कि राजा
- 5:20:24शंकर शाह के मरने के बाद उन्होंने जो है
- 5:20:25विद्रोह किया था और लास्ट में उनकी भी
- 5:20:28मृत्यु हो जाती है। तो ये कहानी थी राजा
- 5:20:31शंकर शाह और रघुनाथ शाह की। उम्मीद है
- 5:20:33आपको इसमें से जो सारे क्वेश्चन हैं कौन
- 5:20:35सी रेजीमेंट है? 52 बी रेजीमेंट है। कौन
- 5:20:38सी जागीर उनको दी गई थी? पूर्वा जागीर
- 5:20:40उनको दी गई थी। कब उनको गिरफ्तार किया
- 5:20:42गया? 14 सितंबर 1857 को। कब उनको फांसी दी
- 5:20:44गई? 20 सितंबर 1857 को। तो आई होप आपको
- 5:20:47सारी जो इंफॉर्मेशन है राजा शंकर शाह और
- 5:20:50रघुनाथ शाह के बारे में अच्छे से पता चल
- 5:20:52गई होगी। यह वो स्थान है जहां पर उनका
- 5:20:55क्या बना है? यह जबलपुर में उनका स्मारक
- 5:20:58बना है। अगर कभी आपसे पूछा जाए राजा शंकर
- 5:21:00शाह और रघुनाथ शाह की समाधि कहां है?
- 5:21:02जबलपुर। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह का
- 5:21:04संग्रहालय कहां है? जबलपुर। ठीक है?
- 5:21:06उम्मीद है आप लोगों को आज के सेशन में
- 5:21:09राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह गोंड की जो
- 5:21:11कहानी है, वह आपको अच्छी लगी होगी। अगर
- 5:21:14आपको यह कहानी अच्छी लगी तो कमेंट सेक्शन
- 5:21:15में बताइएगा। नेक्स्ट टॉपिक में हम फिर
- 5:21:18बात करेंगे मध्य प्रदेश के किसी वीर
- 5:21:20योद्धा के बारे में। जय हिंद साथियों।
- 5:21:23थैंक यू।
- 5:21:27नमस्कार साथियों, मैं हरी सिंह राजपूत आप
- 5:21:30सभी के लिए लेकर आया हूं फिर से मध्य
- 5:21:32प्रदेश के वीरों के इतिहास की सीरीज में
- 5:21:35एक नया वीर योद्धा जिसके बारे में अभी तक
- 5:21:38आप लोगों ने कम सुना होगा। और आज हम बात
- 5:21:42करने वाले हैं निमाड़ के एक प्रसिद्ध
- 5:21:44आदिवासी वीर वीर योद्धा जिनका नाम है
- 5:21:48क्या? वीर विजु नायक। देखिए यह एक ऐसे
- 5:21:52योद्धा हैं जिनके नाम के आगे पहले से ही
- 5:21:54वीर शब्द लगता है और यह वीर नाम इनको
- 5:21:57किसने दिया है? तो आज की कहानी में हम लोग
- 5:21:59जानेंगे। उम्मीद है दोस्तों आप सभी को यह
- 5:22:03जो सीरीज है मध्य प्रदेश के वीरों का
- 5:22:05इतिहास यह काफी पसंद आ रही होगी और आज इस
- 5:22:08सीरीज में हमारे जो नायक हैं हमारे जो वीर
- 5:22:11योद्धा हैं उनका नाम है बिरजू नायक। बिरजू
- 5:22:14नायक मध्य प्रदेश के उन वीरों में से एक
- 5:22:17हैं जिनका नाम उतना प्रसिद्ध नहीं है
- 5:22:20जितना बाकी क्रांतिकारियों का रहा। और
- 5:22:23हमारी इस सीरीज में हमारा उद्देश्य ही यही
- 5:22:25है कि हम उन वीरों के नाम सभी के सामने
- 5:22:29प्रस्तुत कर सकें या उन वीरों को वो
- 5:22:31श्रद्धांजलि दे सकें जिनके वह हकदार थे।
- 5:22:34तो आइए हम बात करते हैं वीर विजू नायक जी
- 5:22:37के बारे में। तो सबसे पहले आप यह तस्वीर
- 5:22:39देखिए जिसमें आप देख सकते हैं कि जो बिरजू
- 5:22:41नायक जी हैं उनके हाथों में धनुष तीर है।
- 5:22:44वैसे तो यह धनुष तीर हर आदिवासी योद्धा का
- 5:22:48हथियार होता है खासकर भीलों में। लेकिन ये
- 5:22:51जो थे हमारे विजु नायक जी एक प्रसिद्ध
- 5:22:54धनुर्धर थे या हम कह सकते हैं कि धनुष कला
- 5:22:57में निपुण थे। तो कौन हैं और कैसे इनका
- 5:23:00इतिहास हम जान सकते हैं। ठीक है? आइए हम
- 5:23:02बात करते हैं। तो सबसे पहले निवाड़ के
- 5:23:05क्रांतिकारी योद्धा हैं और इनका एक टाइटल
- 5:23:07है वीर। ठीक है? चलिए आइए बात करते हैं।
- 5:23:09कुछ विशेष बातें आप लोगों को यहां पर
- 5:23:11बताऊंगा। आपको उनको ध्यान देना है। देखिए
- 5:23:14यह जो हमारे विजू नायक जी हैं इनके जन्म
- 5:23:17को लेकर ज्यादा प्रमाणिक जानकारी नहीं है
- 5:23:20कि कहां पर एग्जैक्ट हुआ और इनके
- 5:23:22माता-पिता कौन हैं। लेकिन जितनी भी
- 5:23:24जानकारी सीमित जो मेरे पास उपलब्ध है
- 5:23:27जिसके माध्यम से आप उनके बारे में एक छोटी
- 5:23:30सी जो है एक टिप्पणी जरूर कर सकते हैं और
- 5:23:32यह जान सकते हैं कि आखिर उनका क्या योगदान
- 5:23:34रहा। तो सबसे पहले बात करते हैं इनके एक
- 5:23:37जीवनी के बारे में। क्या इनकी जीवनी रही
- 5:23:39है? तो सबसे पहले देखिए इनकी जो जन्मभूमि
- 5:23:42है वो है ग्राम सावर्दा मटली। यह जो है
- 5:23:45इनका सब कुछ आपको याद रखना बड़वानी
- 5:23:48डिस्ट्रिक्ट में है मध्य प्रदेश। ठीक है?
- 5:23:50यह जो निर्माण क्षेत्र रहा है। यह निवाड़
- 5:23:52क्षेत्र मध्य प्रदेश के उन अ महान वीर
- 5:23:55योद्धाओं की कर्मभूमि रहा है। जिसमें
- 5:23:58हमारे टांट्या भील थे। जिसमें हमारे भीमा
- 5:24:01नायक जी थे। जिसमें हमारे खाद्याज नायक जी
- 5:24:03थे। उसी के अंतर्गत आते हैं एक अगले वीर
- 5:24:05जिनका नाम है विजू नायक जी। तो बिरजू नायक
- 5:24:08जी का जो जन्म है बड़वानी जिले के सावरदा
- 5:24:10मटली नामक एक गांव में हुआ था। इनकी जो
- 5:24:13कर्मभूमि है वो बड़वानी जिले की एक सिंधी
- 5:24:16घाटी है जिसे सिंधी घाटी के नाम से भी
- 5:24:18जाना जाता है। जनरली सिंधी घाटी है। कभी
- 5:24:21अगर एग्जाम में पूछा जाए कि कौन सा वीर था
- 5:24:24जो सिंधी घाटी के वीर के नाम से प्रसिद्ध
- 5:24:26है? तो याद रखिएगा इन्हीं का नाम है।
- 5:24:28इन्हें सिंधी घाटी का वीर कहते हैं। तो
- 5:24:31इनके जो टाइटल हैं वो दो-तीन इस तरीके से
- 5:24:34रहेंगे। एक हो जाएगा हमारा सिंधी घाटी के
- 5:24:36वीर। ठीक है? किस व्यक्ति को सिंधी घाटी
- 5:24:39का वीर कहा जाता है? तो याद रखिएगा वो है
- 5:24:41बिरजू नायक। किस आदिवासी योद्धा को वीर की
- 5:24:45उपाधि दी जाती है? तो वो हैं हमारे बिरजू
- 5:24:47नायक। तो बिरजू नायक का जो जन्म है वह
- 5:24:49कहां होता है? सावरदा मटली जो कि बड़वानी
- 5:24:52डिस्ट्रिक्ट में है। इनकी कर्मभूमि है यह
- 5:24:54सिंधी घाटी। याद रखिएगा बड़वानी जिले में
- 5:24:57प्रसिद्ध है यह सिंधी घाटी। तो यह निमाड़
- 5:25:00का क्षेत्र है। यहां पर उनकी कर्मभूमि रही
- 5:25:02है। अभी और हम डिटेल में बात करेंगे।
- 5:25:04बड़वानी जिले की जो राजपुर तहसील है
- 5:25:06बड़वानी जिले की राजपुर तहसील में आता है
- 5:25:09हमारे विजु नायक का गांव जिसका नाम था
- 5:25:11सावरदा मटली। इनकी समाधि है ग्राम उपला
- 5:25:15में। तो जो मेन एग्जाम ओरिएंटेड फैक्ट हैं
- 5:25:18वो आपको यहीं मिल जाएंगे। समाधि स्थल उपला
- 5:25:20है और कर्मघर या इनका जो कर्म क्षेत्र है
- 5:25:22वह बांडी हवेली। सबसे चर्चित है याद
- 5:25:25रखिएगा बांडी हवेली। तो बांडी हवेली की हम
- 5:25:28अभी बात करेंगे और इनका शहीद दिवस मनाया
- 5:25:30जाता है 2 मई को। याद रखिएगा 4 दिसंबर
- 5:25:33किसका है? कमेंट सेक्शन में आप लोगों को
- 5:25:35बताना है। अगर आप लोग ये सीरीज देख रहे
- 5:25:37हैं तो मैं आज आपसे पूछना चाह रहा हूं कि
- 5:25:40जिन योद्धाओं के बारे बारे में मैंने अभी
- 5:25:43तक आप लोगों को बताया है, उसमें 4 दिसंबर
- 5:25:45किसका बलिदान दिवस या शहीदी दिवस है? 2 मई
- 5:25:48हो जाएगा हमारे बृजु नायक जी का। ठीक है?
- 5:25:50इनको हम क्यों याद कर रहे हैं? क्योंकि
- 5:25:521857 की क्रांति के दौर में अंग्रेजों के
- 5:25:55खिलाफ आदिवासियों के अंबापानी विद्रोह और
- 5:25:57सेंधवा विद्रोह यह वह इलाका है जहां पर
- 5:26:00भीमा नायक और जो हमारे टंट्या भील थे
- 5:26:02उन्होंने बड़े पैमाने पर विद्रोह किया था।
- 5:26:04तो इस पूरे क्षेत्र में यह भी एक
- 5:26:06महत्वपूर्ण योद्धा थे जिन्होंने कंधे से
- 5:26:08कंधा मिलाकर मामा टंटिया भील, भीमा नायक
- 5:26:11और खाद्य नायक की सहायता की। आइए अब मैं
- 5:26:14इनकी थोड़ी सी स्टोरी आप लोगों को बताता
- 5:26:16हूं। देखिए सबसे पहले हमको जो एरिया समझना
- 5:26:20है पहले मैं चाहता हूं कि थोड़ा सा आपके
- 5:26:22दिमाग में एक इमेज रहे तो मैं इमेज आपको
- 5:26:25बताता हूं।
- 5:26:27देखिए इमेज में हमको याद रखना है बड़वानी
- 5:26:30जिला। ठीक है? बड़वानी जिला जो है याद
- 5:26:34रखना है निवाड़ का पार्ट है। तो आप याद रख
- 5:26:36सकते हैं निवाड़ क्षेत्र। और यह जो निवाड़
- 5:26:38क्षेत्र है यह अगर आपको याद रखें तो
- 5:26:41सतपुड़ा पहाड़ी से घिरा है पूरा का पूरा।
- 5:26:43तो सतपुड़ा क्षेत्र के वीर के तौर पर भी
- 5:26:46हम इनको याद रख सकते हैं। इस बड़वानी
- 5:26:48डिस्ट्रिक्ट में एक तहसील है और उस तहसील
- 5:26:51का नाम क्या है? राजपुर तहसील और इस
- 5:26:54राजपुर तहसील में हमको दो इंपॉर्टेंट
- 5:26:57प्लेस मिलेंगे। एक इनका वर्थ प्लेस मिलेगा
- 5:26:59और एक इनका मिलेगा कर्मभूमि। ठीक है? इस
- 5:27:02तहसील में एक घाटी है जिसका नाम सिंधी
- 5:27:05घाटी क्षेत्र है। तो यह जो सिंधी घाटी
- 5:27:07क्षेत्र है इस सिंधु घाटी क्षेत्र में कई
- 5:27:10गांव आते हैं और इसी क्षेत्र में यह याद
- 5:27:13रखेंगे राजपुर सिंधी घाटी क्षेत्र ये इनका
- 5:27:15क्षेत्र था जहां पर इन्होंने विद्रोह किया
- 5:27:17था। इसमें हमको दो-तीन गांव के बारे में
- 5:27:20पढ़ना है। एक गांव है जिसका नाम है
- 5:27:23उपलाग्राम।
- 5:27:24उपलाग्राम। उपलाग्राम में इनकी समाधि
- 5:27:27मिलेगी। तो यह एक चर्चित है बड़वानी का और
- 5:27:29दूसरा हम बात करेंगे यहां पर अभी बांडी
- 5:27:31हवेली की तो बांडी हवेली जो है वह इनकी
- 5:27:34कर्मभूमि है। क्या है? कर्मभूमि। तो
- 5:27:36कर्मभूमि जो है याद रखिए दोनों के दोनों
- 5:27:38हमारे बड़वानी डिस्ट्रिक्ट में हैं। तो
- 5:27:40थोड़ी सी स्टोरी अब आप इनकी जान लीजिए
- 5:27:42क्या थी? आइए हम चर्चा को आगे बढ़ाते हैं।
- 5:27:45देखिए 1857 की क्रांति के वीर क्रांतिकारी
- 5:27:49एक महान योद्धा सतपुड़ा के सुदूर
- 5:27:51पहाड़ियों में रहने वाले निमाड़ के
- 5:27:53आदिवासी योद्धा बिरजू नायक। ठीक है? याद
- 5:27:56रखिए। जिनकी कहानी से बहुत ही कम लोग
- 5:27:58वाकिफ हैं। अंग्रेजी शासनकाल में कई
- 5:28:01क्रांतिकारी योद्धा कई क्रांतिकारी
- 5:28:04योद्धाओं ने अपना बलिदान दिया। उनमें से
- 5:28:05कई वीर ऐसे भी हैं जिनका जिक्र इतिहास में
- 5:28:08केवल एक लाइन से ज्यादा नहीं किया गया।
- 5:28:11उन्हीं वीरों में से एक हैं हमारे महान
- 5:28:14वीरजू नायक जिनका बलिदान दिवस या सही दिवस
- 5:28:17हम मनाते हैं 2 मई को। ठीक है? अब इनकी जो
- 5:28:20कर्मभूमि है मैं उसके बारे में बात करता
- 5:28:22हूं। इनकी जो कर्मभूमि रही है वह रही है
- 5:28:25प्रसिद्ध बांडी हवेली। यह आपको याद रखना
- 5:28:28है। यह बांडी हवेली कहां है? मध्य प्रदेश
- 5:28:30के बड़वानी जिले में है। बड़वानी याद
- 5:28:33रखिएगा मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में
- 5:28:35है। यह बांडी हवेली का आप तस्वीर देख सकते
- 5:28:37हैं। यह हवेली जो थी इस हवेली को इन्होंने
- 5:28:40अपना सेंटर बना रखा था और यहीं से ये 1857
- 5:28:44की क्रांति के दौरान अंग्रेजों के विरुद्ध
- 5:28:46जो है अपनी योजनाएं बनाते थे और संघर्ष
- 5:28:48करते थे। अब आगे देखिए इसमें क्या है? तो
- 5:28:51मध्य प्रदेश की बड़वानी जिले की राजपुर
- 5:28:52तहसील के नगर पलसूद के निकट ग्राम मटली
- 5:28:56एवं सावरदा के बीच यानी जो मटली और सावरदा
- 5:28:58गांव है उनके बीच में स्थित है यह हवेली
- 5:29:01और इस हवेली का नाम क्या है? बांडी हवेली
- 5:29:03है जिसका संबंध है बिरजू नायक जी से। यह
- 5:29:06विजु नानायक का कर्मघर है यानी कर्मभूमि
- 5:29:08है जो आज भी मौजूद है। हालांकि अब वह खंडर
- 5:29:12में तब्दील हो चुका है। इसको संरक्षित
- 5:29:14करने की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों से
- 5:29:16जानकारी के अनुसार ऐसी मान्यता है कि वीर
- 5:29:18बिरजू नायक बांडा हवेली में अपने साथियों
- 5:29:21के साथ अंग्रेजों के विरुद्ध योजना बनाकर
- 5:29:23उन्हें अंजाम देते थे। तो एक आपके लिए
- 5:29:25इंपॉर्टेंट ये हो जाएगा। दूसरा इंपॉर्टेंट
- 5:29:28आता है कि आखिर इनका रोल क्या है? आखिर हम
- 5:29:30क्यों इनको पढ़ रहे हैं? तो 1857 की
- 5:29:33क्रांति में इनका सेम वही योगदान है जो
- 5:29:35मामा टंट्या भील का था जो भीमा नायक का था
- 5:29:38जो खाज्जा नायक का था सेम इनकी कहानी है
- 5:29:41इन सभी के दुश्मन हैं अंग्रेज जमींदार
- 5:29:44साहूकार तो इस क्षेत्र में भीमा नायक का
- 5:29:48और खाज्या नायक और टांड्या भील का
- 5:29:50इन्होंने साथ दिया। आइए मैं आपको तीन
- 5:29:52इंपॉर्टेंट बातें बताता हूं। पहले तो आपको
- 5:29:54याद रखना है कि ये खाद्या नायक टांड्या
- 5:29:57मामा के साथ मिलकर कई जगहों पर लड़े थे और
- 5:30:00इनका जो सबसे बड़ा योगदान है कि जब तात्या
- 5:30:03टोपे आप सबको याद है ना कि जब तात्या टोपे
- 5:30:06जी आए थे और उनको नर्मदा नदी पार करनी थी
- 5:30:08तो उनके नर्मदा नदी पार करने में जिन
- 5:30:12लोगों ने सहायता की थी उन लोगों में एक तो
- 5:30:16हमारे थे कौन टंट्या वीर एक हमारे थे
- 5:30:19खाज्जा नायक और एक हमारे थे भीमा नायक
- 5:30:21उन्हीं वीरों में एक नाम हैं बिरजू नायक
- 5:30:24बताते हैं कि सतपुड़ा
- 5:30:26जो बड़वानी का जो पश्चिमी निवाड़ का
- 5:30:28क्षेत्र है वहां पर इन्होंने गुप्त
- 5:30:30रास्तों से तात्या टोपे की मदद की जिससे
- 5:30:33कि वह नदी नर्मदा नदी पार कर सकें और इसी
- 5:30:36वजह से याद रखिएगा तात्या टोपे के पश्चिम
- 5:30:38निवाड़ के आगमन पर राजपुर क्षेत्र के
- 5:30:40गुप्त रास्तों से नर नर्मदा नदी पार
- 5:30:43करवाकर मंजिल तक पहुंचाने में भीमा नायक
- 5:30:45खाज्जा नायक एवं मृजु नायक तथा साथियों का
- 5:30:48महत्वपूर्ण योगदान था। इसी योगदान के बदले
- 5:30:50उन्हें वीर की उपाधि से सम्मानित किया गया
- 5:30:53है। यानी तात्या टोपे को दुर्गम रास्तों
- 5:30:57से नर्मदा नदी पार करवाने के कारण इन्हें
- 5:30:59वीर कहा जाता है। जिससे पता चलता है कि
- 5:31:02सिंधु घाटी क्षेत्र जो है सिंधु घाटी
- 5:31:04क्षेत्र राजपुर तहसील बड़वानी गांव के वीर
- 5:31:07के नाम से इस क्षेत्र में यह चर्चित थे।
- 5:31:09आज भी उनके नाम के आगे लोग वीर लिखना नहीं
- 5:31:11भूलते। निवाली सिंधु घाटी याद रखिएगा
- 5:31:14निवाली सिंधु घाटी राजपूर उनका गढ़ था
- 5:31:16जहां पर उन्होंने विद्रोह किया था। ग्राम
- 5:31:18मटली में स्थित झरने। अब इसके आगे हम बात
- 5:31:20करने वाले हैं उनके शहादत की। आखिर ऐसा
- 5:31:23क्या हुआ जिसकी वजह से उन्हें उनकी शहादत
- 5:31:26हुई। ठीक है? तो कुल मिलाकर खाज नामक नायक
- 5:31:28का साथ दिया है उन्होंने। टांट्या भील का
- 5:31:30साथ दिया है। भीमा नायक का साथ दिया है और
- 5:31:32अंग्रेज जमींदारों साहूकारों को लूट कर
- 5:31:35गरीब आदिवासियों की सहायता की है। अब होता
- 5:31:38क्या है जरा हम बात करते हैं। एक और खास
- 5:31:41बात है इनकी कि जो बिरजू नायक हैं वह
- 5:31:43युद्ध कला में निपुण थे। बिरजू नायक
- 5:31:45प्रतिदिन की तरह एक बार झरने पर नहाने
- 5:31:48पहुंच गए। ठीक है? मैं उसका किस्सा यहीं
- 5:31:50पर बता देता हूं जो इनकी समाधि है। देखिए
- 5:31:53एक गांव है जिसका नाम है मटली गांव।
- 5:31:57मटली गांव में क्या था? एक यहां पे जो
- 5:32:00झरने होते हैं वाटरफॉल इन झरनों को कहा
- 5:32:03जाता है क्या? यहां पे कुंडी कहा जाता है
- 5:32:06कुंडी। तो एक बार ये मटली गांव के झरने
- 5:32:09में के लिए नहाने गए। बताते हैं कि इनके
- 5:32:11गांव के पास में था। तो अक्सर ये यहीं पर
- 5:32:14इसी कुंडी यानी झरने में नहाते थे। जब यह
- 5:32:16नहाने के लिए गए तो सामान्यता जब अंग्रेज
- 5:32:19इनके गांव में इन्हें पकड़ने के लिए आते
- 5:32:21थे या क्षेत्र में जब लोगों को परेशान
- 5:32:24करते थे तो यह उन्हें मार कर भगा देते थे।
- 5:32:27लेकिन अब अंग्रेजों ने सोचा कि डायरेक्ट
- 5:32:29हम इनको नहीं पकड़ पा रहे हैं। तो इनके एक
- 5:32:32करीबी को अपना एक तरीके से जासूस बनाकर
- 5:32:36पता करवाया कि यह कहां है? तो जब ये मटली
- 5:32:38गांव के इस झरने में नहाने के लिए गए तो
- 5:32:40ये जब नहा रहे थे झरने के नीचे तो इनके
- 5:32:43किसी रिश्तेदार या परिचित जो इनका खास था
- 5:32:45उसने इनकी गर्दन पीछे से कट कर दी। तो जब
- 5:32:48इनकी गर्दन को पीछे से काट दिया तो बताते
- 5:32:50हैं कि जो आदिवासी समुदाय है वो इनके बारे
- 5:32:53में जो कहानियां बताता है कि ऐसे थे वीर
- 5:32:56बिरजू नायक बताते हैं कि जब इनका सिर काट
- 5:32:59दिया गया। तो यहां पर इनका जो है सिर क्या
- 5:33:01है? काट दिया गया था। और जब इनका सिर काट
- 5:33:03दिया गया तो इनका जो धड़ है वह इस झरने से
- 5:33:07झरने से कुछ दूरी पर जाकर कुछ किलोमीटर की
- 5:33:10दूरी पर या कुछ दूरी पर जाकर एक गांव था
- 5:33:13जिसका नाम था उपला गांव। उपला गांव तक
- 5:33:16उनका जो धड़ है वो गया था और यहीं पर इसी
- 5:33:20गांव में उनकी समाधि बनी हुई है। तो ऐसे
- 5:33:23वीर थे हमारे विजू नायक जिनका सिर कटने के
- 5:33:26बाद धड़ भी लड़ा और धड़ आगे एक क्षेत्र तक
- 5:33:29पहुंचा। एक गांव तक पहुंचा जिसका नाम था
- 5:33:31उपला गांव। देखिए ये लिखा हुआ है। वहीं
- 5:33:33पलसूद के नजदीक ग्राम उपला में इनका समाधि
- 5:33:36स्थल है। जहां वर्तमान में भी इस क्षेत्र
- 5:33:38के समाज पहुंचकर वीर योद्धा को
- 5:33:40श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। वहीं समस्त
- 5:33:43मूल निवासी संगठनों द्वारा प्रतिवर्ष 2 मई
- 5:33:46को वीर बिरजू नायक का शहीद दिवस भी मनाया
- 5:33:48जाता है। तो ये कहानी हमने बात की यहां पर
- 5:33:51बिरजू नायक की। अगर आपको इस कहानी में से
- 5:33:54क्या-क्या क्वेश्चंस आप लोगों को निकालने
- 5:33:56हैं। मान के चलिए आपको लगे कि भाई क्या
- 5:33:58काम का है तो एक तो याद रखिएगा इनका जन्म
- 5:34:01क्षेत्र एक इनकी कर्मभूमि याद रखिएगा। ठीक
- 5:34:04है? दूसरा इंपॉर्टेंट है इनका समाधि।
- 5:34:10उसके बाद आ जाइएगा योगदान। तो योगदान है
- 5:34:12इनका 1857 की क्रांति में। और फिर इनका जो
- 5:34:16है किस तरीके से इनकी शहादत है, किस तारीख
- 5:34:18को है? तो ये अगर आप पांच छह पॉइंट्स को
- 5:34:21अगर ध्यान में रखेंगे तो आप आसानी से जो
- 5:34:24है विजू नायक के बारे में टिप्पणी कर सकते
- 5:34:26हैं। विजू नायक जी के बारे में बता सकते
- 5:34:28हैं। तो आई होप जो जानकारी मेरे द्वारा आप
- 5:34:31लोगों को दी गई है वह जानकारी आप लोगों को
- 5:34:34अच्छी लगी होगी और आप याद रखेंगे कि विजू
- 5:34:37नायक सतपुड़ा क्षेत्र के सिंधी घाटी के या
- 5:34:40फिर निमाड़ के आदिवासी वीर योद्धा थे।
- 5:34:43जिनकी कर्मभूमि प्रसिद्ध बांडी हवेली है
- 5:34:46और इनकी समाधि स्थल जो है ग्राम उपला में
- 5:34:49है जो कि वर्तमान बड़वानी जिले में आता
- 5:34:51है। याद रखिएगा पश्चिमी निवाड़ क्षेत्र
- 5:34:54में तात्या टोपे के नर्मदा पार में
- 5:34:56इन्होंने सहायता की थी। भीमा नायक, खज्जा
- 5:34:58नायक और टांट्या भील के साथ कई विद्रोहों
- 5:35:01में इन्होंने भाग लिया। अंबापानी का
- 5:35:03विद्रोह हो, सिंधवाघाट का विद्रोह हो,
- 5:35:05उसमें इन्होंने 1857 की क्रांति के दौरान
- 5:35:07योगदान दिया था। और जमींदारों और
- 5:35:10साहूकारों को लूटकर और अंग्रेजों को लूटकर
- 5:35:13गरीब आदिवासी जनता की सहायता की थी। तो आज
- 5:35:16का जो हमारे आज का जो हमारा सेशन था इस
- 5:35:18सेशन में हम लोगों ने बात की निमाड़
- 5:35:21सतपुड़ा घाटी के सिंधी घाटी के वीर के नाम
- 5:35:23से प्रसिद्ध आदिवासी वीर के नाम से
- 5:35:26प्रसिद्ध महान आदिवासी योद्धा बिरजू नायक
- 5:35:30जी के बारे में। आई होप आप लोगों को आज का
- 5:35:32सेशन अच्छा लगा होगा। आप लोग कमेंट करके
- 5:35:34बताइए कि 4 दिसंबर को किस आदिवासी योद्धा
- 5:35:37का बलिदान दिवस मनाया जाता है। नेक्स्ट
- 5:35:39सेशन में हम बात करेंगे हमारे नेक्स्ट वीर
- 5:35:41योद्धा के बारे में। तब तक के लिए जय
- 5:35:44हिंद। थैंक यू।
- 5:35:59हेलो एवरीवन आप सभी का एमपीपीएससी स्टडी
- 5:36:02आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है। उम्मीद है
- 5:36:04आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन लगाकर पढ़
- 5:36:06रहे होंगे। दोस्तों आज के हम टॉपिक में
- 5:36:09बात करने वाले हैं एक महान वीरांगना जिनका
- 5:36:12नाम है झलकारीबाई। देखिए झलकारीबाई का
- 5:36:15जन्म यूं तो झांसी में हुआ था लेकिन उनका
- 5:36:18मध्य प्रदेश के इतिहास से एक गहरा नाता है
- 5:36:20क्योंकि वह रानी लक्ष्मीबाई की सहायिका थी
- 5:36:22और रानी लक्ष्मीबाई और झलकारी बाई दोनों
- 5:36:25का योगदान जो है वो 1857 की क्रांति में
- 5:36:28बड़ा ही महत्वपूर्ण है। इसलिए हम बात
- 5:36:30करेंगे और आज हम समझेंगे झलकारीबाई को।
- 5:36:33देखिए यहां पर मैंने लिखा हुआ है। आप समझ
- 5:36:35भी सकते हैं। यहां पे लिखा है क्या लिखा
- 5:36:38है बच्चों? तो यहां पे मेंशन है वीरांगना
- 5:36:41झलकारी बाई और रानी लक्ष्मीबाई की छाया।
- 5:36:43अगर आप देखें तो इस शब्द का प्रयोग किया
- 5:36:45है। यानी जो हमारी झलकारी बाई थी वह कौन
- 5:36:48थी? वो वीरांगना लक्ष्मीबाई या रानी
- 5:36:52लक्ष्मीबाई की छाया थी। उनकी हम शकल मानी
- 5:36:54जाती थी। तो आइए जानते हैं कौन थी
- 5:36:56झलकारीबाई जिन्होंने 1857 की क्रांति में
- 5:36:59रानी लक्ष्मीबाई की तरह वेश धारण कर
- 5:37:01अंग्रेजों को कई स्थानों पर चकमा दिया और
- 5:37:03अंग्रेजों से लोहा लिया। उन्होंने अपने
- 5:37:05पति पून सिंह कोहली के साथ मिलकर
- 5:37:08अंग्रेजों के दांत खट्टे किए। तो आइए
- 5:37:10समझते हैं झलकारीबाई के बारे में। झलकारी
- 5:37:13बाई का इतिहास। सबसे पहले जब हम झलकारी
- 5:37:17बाई की बात करते हैं तो थोड़ा सा उनके
- 5:37:19जीवन परिचय की बात करते हैं। देखिए झलकारी
- 5:37:21बाई का जो जन्म है वो 22 नवंबर 1830 को
- 5:37:24झांसी के पास एक गांव था भोजला गांव वहां
- 5:37:27से ये बिलॉन्ग करती थी। 1830 में इनका
- 5:37:30जन्म होता है। 1857
- 5:37:32तक इनका जो है रोल रहता है 1857 की
- 5:37:35क्रांति में। ठीक है? चलिए आगे हम बात
- 5:37:38करते हैं।
- 5:37:40ये 58 है बच्चों। यह थोड़ा सा मिसप्रिंट
- 5:37:44हो गया है। 4 अप्रैल 1858 इस बात को याद
- 5:37:46रखिएगा। अब आगे की कहानी क्या है? यह
- 5:37:49समझिए। झलकारी बाई के जो पिता थे उनका नाम
- 5:37:51था क्या? उनके पिता का नाम था सदोवर सिंह
- 5:37:54और उनकी जो माता है उनका नाम था जमुना
- 5:37:56देवी। तो इसमें हमको तीन चीजें काम की मिल
- 5:37:58गई। उनका बर्थ प्लेस कौन सा गांव है?
- 5:38:00भोजला गांव है जो याद रखिएगा झांसी के पास
- 5:38:03है। दूसरा उनके पिता का नाम सदोवर सिंह और
- 5:38:05माता का नाम जमुना देवी था। अब इसमें जो
- 5:38:08क्वेश्चन अगर एग्जाम में बन सकता है वो यह
- 5:38:10बन सकता है कि भाई इनका विवाह किससे हुआ
- 5:38:12था? तो झलकारी बाई का जो विवाह है रानी
- 5:38:14लक्ष्मीबाई की सेना के एक सैनिक जिनका नाम
- 5:38:17था पून सिंह कोहली से हुआ था। पून सिंह
- 5:38:19कोहली इनके पति थे और पूरन भी बहुत ही
- 5:38:22ज्यादा बहादुर था। वो राजा गंगाधर राव और
- 5:38:25रानी लक्ष्मीबाई सेना रानी लक्ष्मीबाई की
- 5:38:27सेना का एक महत्वपूर्ण सिपाही था। ठीक है?
- 5:38:30वे लक्ष्मीबाई की हमल थी। और याद रखिएगा
- 5:38:33आगे चलकर वो रानी लक्ष्मीबाई की एक महिला
- 5:38:35रेजीमेंट थी जिस रेजीमेंट का नाम था महिला
- 5:38:38शाखा जिसका नाम था दुर्गादल। तो दुर्गादल
- 5:38:41की वो सेनापति थी। तो अगर आप इस स्लाइड
- 5:38:43में देखेंगे तो ये चार चीजें आपके काम की
- 5:38:45हैं। उनका बर्थ प्लेस कौन सा है? भोजला
- 5:38:48गांव झांसी। उनके पिता का नाम सदोवर सिंह।
- 5:38:51माता का नाम जमुना और याद रखिएगा उनके पति
- 5:38:53का नाम क्या है? पून सिंह कोहली। और वह
- 5:38:56महिला दुर्गा शाखा जो दल है उसकी सेनापति
- 5:38:58थी। यानी रानी लक्ष्मी के द्वारा महिलाओं
- 5:39:01का एक सैन्य संगठन बनाया गया था जिसका नाम
- 5:39:03था दुर्गादल। उसकी वो सेनापति थी। लेकिन
- 5:39:06यह रानी लक्ष्मी के पास पहुंचती कैसे हैं
- 5:39:08और किस प्रकार जो है इनका योगदान रहता है
- 5:39:11इसको हम एक कहानी के माध्यम से समझते हैं।
- 5:39:14देखिए सबसे पहले झलकारी बाई जब बहुत छोटी
- 5:39:17थी जो उनकी तो उनकी जो मां थी उनकी मृत्यु
- 5:39:19हो गई थी। जब उनकी मां की मृत्यु हो गई तो
- 5:39:22उनके जो पिता हैं उन्होंने ही उनको पाला
- 5:39:24पोशा और उनको प्रारंभ से ही अच्छी शिक्षा
- 5:39:26दी। वो बचपन से ही दृढ़ साहसी थी और लड़ने
- 5:39:30में माहिर थी। ठीक है? उनके पिता ने उनको
- 5:39:33एक लड़के की तरह पाला था। उन्हें
- 5:39:35घुड़सवारी और हथियारों का प्रयोग करने में
- 5:39:37प्रशिक्षित किया। यानी उन्हें हथियार
- 5:39:39चलाने की शिक्षा, घुड़सवारी करने की
- 5:39:41शिक्षा जो इन्हें उनके पिता से मिली और
- 5:39:44क्योंकि वो उनकी माता का निधन हो गया था
- 5:39:46तो उनके पिता ने उन्हें एक लड़के की तरह
- 5:39:48पाला था। ठीक है? उन दिनों सामाजिक
- 5:39:51परिस्थितियों के कारण उन्हें कई औपचारिक
- 5:39:54कोई औपचारिक शिक्षा तो प्राप्त नहीं हुई।
- 5:39:56मतलब ऑफिशियली हम नहीं कह सकते कि वह कहीं
- 5:39:58बहुत ज्यादा एजुकेटेड थी। लेकिन उन्होंने
- 5:40:01खुद को एक अच्छे योद्धा के रूप में विकसित
- 5:40:03किया था। झलकारी बाई बचपन से ही बहुत
- 5:40:06ज्यादा साहसी थी और दृढ़ प्रतिज्ञ मतलब एक
- 5:40:09दृढ़ निश्चय लेने वाली महिला थी। बालिका
- 5:40:11थी। याद रखिएगा झलकारी बाई घर के काम के
- 5:40:14अलावा पशुओं का रखरखाव और जंगल से लकड़ी
- 5:40:17इकट्ठा करने का काम भी करती थी। अब इसके
- 5:40:20बाद देखिए थोड़ा सा कुछ और बातें के बारे
- 5:40:22में हम लोग जानते हैं झलकारी बाई के बारे
- 5:40:23में। एक बार जंगल में उनकी जो मुठभेड़ है
- 5:40:26एक तेंदुए से हो गई और झलकारी बाई ने अपनी
- 5:40:29कुल्हाड़ी से उस तेंदुए को मार डाला। तो
- 5:40:31यह किस्सा जो है गांव में और लोगों के पास
- 5:40:33भी गया होगा कि झलकारी बाई एक बहुत ही जो
- 5:40:36है साहसी लड़की है जिसने कुल्हाड़ी से
- 5:40:38तेंदुए के काट डाला। अब क्या होता है? ऐसे
- 5:40:42ही एक किस्सा और है उनके जीवन का वो यह है
- 5:40:44कि एक बार गांव में डाकुओं ने डकैती डाली
- 5:40:47और एक व्यापारी के घर को लूटने के लिए आए।
- 5:40:49तो जब डकैतों के एक गिरोह ने गांव के एक
- 5:40:52व्यवसाई पर हमला किया तब झलकारी बाई ने
- 5:40:54अपनी बहादुरी से उन्हें पीछे हटने पर क्या
- 5:40:56कर दिया था? मजबूर कर दिया था। तो बचपन से
- 5:40:59ही उनके ये बहादुरी के किस्से जो हैं
- 5:41:01स्टार्ट होते हैं झलकारीबाई के। आगे क्या
- 5:41:03होता है? उनकी इस बहादुरी से खुश होकर
- 5:41:05गांव वालों ने उसका जो विवाह है यानी
- 5:41:07झलकारी बाई का जो विवाह है लक्ष्मीबाई की
- 5:41:09सेना के एक सैनिक पूनर सिंह कोहली से कर
- 5:41:11दिया। याद रखिएगा ये कोहली समाज से
- 5:41:13बिलॉन्ग करती थी। बहुत इंपॉर्टेंट है याद
- 5:41:16रखिएगा। ठीक है? और पूरन भी बहुत बहादुर
- 5:41:18था और पूरी सेना उसकी बहादुरी का लोहा
- 5:41:21मानती थी। देखिएगा वो खुद साहसी हैं, दृढ़
- 5:41:24निश्चयी हैं, बहादुर हैं और उनकी शादी भी
- 5:41:27किससे हुई है? एक बहादुर सैनिक जिसका नाम
- 5:41:29है पून सिंह कोहली जो राजा गंगाधर राव और
- 5:41:32रानी लक्ष्मीबाई का क्या है? सिपाही है।
- 5:41:34अब क्या होता है यहां से? जब वो अब आप
- 5:41:37समझिए जब वो एक साधारण सिपाही की पत्नी थी
- 5:41:40तो रानी से उनका अभी तक कोई संबंध स्थापित
- 5:41:42नहीं हुआ है। यानी रानी लक्ष्मीबाई से अभी
- 5:41:44उनकी मुलाकात नहीं हुई है। अब रानी
- 5:41:46लक्ष्मीबाई से उनकी मुलाकात कैसे होती है
- 5:41:47ये मैं आपको बताता हूं। एक बार गौरी पूजा
- 5:41:50गौरी पूजा के अवसर पर झलकारी गांव की अन्य
- 5:41:53महिलाओं के साथ महारानी को सम्मान देने
- 5:41:57झांसी के किले में गई। वहीं रानी
- 5:41:59लक्ष्मीबाई ने उनको देखा और देखकर वह अबाक
- 5:42:02रह गई। अक का मतलब होता है आश्चर्यचकित।
- 5:42:05क्या हुआ ऐसा? झलकारी बाई ने उन झलकारी
- 5:42:09बाई गांव की महिलाओं के साथ रानी को
- 5:42:10सम्मान देने के लिए जब मिलने गई तो रानी
- 5:42:12ने जब उनको देखा तो अक रह गई। क्यों?
- 5:42:15क्योंकि वो हूबहू रानी के जैसी दिखती थी।
- 5:42:18ठीक है? क्योंकि झलकारी बिल्कुल रानी
- 5:42:21लक्ष्मीबाई की तरह दिखती थी। दोनों के रूप
- 5:42:23में अलौकिक समानता थी। ठीक है? तो ये पहली
- 5:42:26चीज है कि वो समान दिखती थी। उनकी हमशक्कल
- 5:42:28बन जाती हैं। अन्य औरतों से झलकारी बाई की
- 5:42:31बहादुरी के किस्से सुनकर रानी लक्ष्मीबाई
- 5:42:33ने उनसे बहुत ज्यादा प्रभावित हुई और रानी
- 5:42:35ने झलकारी बाई को दुर्गा सेना में शामिल
- 5:42:38करने का आदेश दिया। झलकारी ने यहां अन्य
- 5:42:40महिलाओं के साथ बंदूक चलाना, तोप चलाना,
- 5:42:44तलवारबाजी देखिएगा। देखो अब उनके कैरेक्टर
- 5:42:48में किस तरीके से परिवर्तन हो रहा है।
- 5:42:50बचपन से साहसी है, निडर है, दृढ़ निश्चयी
- 5:42:53हैं। शादी होती है एक बहादुर सैनिक से
- 5:42:55जिसका नाम है पून सिंह कोहली। पून सिंह
- 5:42:57कोहली ने उन्हें और ज्यादा शिक्षित किया।
- 5:42:59मतलब हथियारों में ट्रेंड किया, बंदूक
- 5:43:02चलाना सिखाया, तोप चलाना सिखाया, तोप
- 5:43:04चलाना वो यहां पे सीखेंगी। तो इस प्रकार
- 5:43:06उनकी जो शिक्षा है हथियारों की वह और
- 5:43:08ज़्यादा बेहतर होती जाती है और रानी
- 5:43:10लक्ष्मी की जब वह दुर्गा दल में आती हैं
- 5:43:12तो उन्होंने और ज्यादा प्रशिक्षण लिया तो
- 5:43:14वो अब एक वेल ट्रेंड सैनिक बन जाती हैं।
- 5:43:16सैनिक नहीं वो दुर्गा दल की जो हैं
- 5:43:19सेनापति हैं। ठीक है? तो याद रखिए
- 5:43:21उन्होंने क्या किया? महिलाओं के साथ बंदूक
- 5:43:23चलाना, तोप चलाना और तलवारबाजी का
- 5:43:25प्रशिक्षण किया। यही वो समय था जब झांसी
- 5:43:27की सेना को किसी भी ब्रिटिश दुस्साहस का
- 5:43:30सामना करने के लिए मजबूत बनाया जा रहा था।
- 5:43:32यानी झांसी अपनी तैयारी कर रही थी। साइड
- 5:43:35में आप एक पिक्चर दे सकते हैं। भारत सरकार
- 5:43:37ने झलकारी बाई के सम्मान में एक टिकट जारी
- 5:43:40किया था 2001 में। तो ये सारी जो एडिशनल
- 5:43:42इंफॉर्मेशन है वो भी आपको याद रखना है।
- 5:43:45पहले मैं आपको और थोड़ा सा किस्सा बता
- 5:43:47दूं। अब देखिए स्वाधीनता संग्राम यानी
- 5:43:501857 में उनकी क्या भूमिका रही है? ये हम
- 5:43:54जानने जा रहे हैं। अब आप सबको पता है कि
- 5:43:571853 में लॉर्ड डलहौजी के द्वारा झांसी जो
- 5:44:01है उस पर कब्जा कर लिया था। झांसी को उसने
- 5:44:05इसलिए ब्रिटिश कंपनी में मिला लिया यानी
- 5:44:06ईस्ट इंडिया कंपनी में मिला लिया क्योंकि
- 5:44:08झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो
- 5:44:10चुकी थी और उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं
- 5:44:13था। जब रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को
- 5:44:15गोद लिया जिसका नाम दामोदर राव था तो
- 5:44:17डलहौजी ने उसे मान्यता देने से मना कर
- 5:44:19दिया और झांसी पे कब्जा कर लिया। पर इस
- 5:44:21बात से रानी नाराज थी। 1857 के प्रारंभ
- 5:44:25में जैसे ही क्रांति प्रारंभ होती है जून
- 5:44:27का महीना था। कब? झांसी में जब विद्रोह
- 5:44:30हुआ तब की बात कर रहा हूं मैं। तो लगभग 4
- 5:44:32से 5 जून के मध्य जो है रानी लक्ष्मीबाई
- 5:44:35ने ग्वाल जो झांसी का किला है उस पर क्या
- 5:44:37कर लिया? अधिकार कर लिया। और जैसे ही
- 5:44:39झांसी पर उन्होंने अधिकार कर लिया और
- 5:44:40अंग्रेजों को बाहर खदेड़ दिया। तो पहले तो
- 5:44:43झांसी का किला रानी के अधिकार में आ गया।
- 5:44:45लेकिन बाद में अंग्रेजों ने दोबारा झांसी
- 5:44:47के किले पर जब अधिकार किया तो रानी से
- 5:44:49संघर्ष होता है। इसी संघर्ष को हम यहां
- 5:44:51समझने वाले हैं। तो लॉर्ड डलहौजी की राज
- 5:44:53झड़पने की नीति के चलते ब्रिटिश ने
- 5:44:55निसंतान लक्ष्मीबाई को उनका उत्तराधिकारी
- 5:44:58गोद लेने की अनुमति नहीं दी। याद रखिएगा
- 5:45:00क्योंकि वे ऐसा करके राज्य को अपने
- 5:45:02नियंत्रण में लाना चाहते थे। हालांकि
- 5:45:04ब्रिटिश की इस कार्यवाही के विरोध में
- 5:45:06रानी की सारी सेना और उसके सेना उनके जो
- 5:45:08सेना नायक थे झांसी के लोग रानी के साथ
- 5:45:10लामबंद हो गए और उन्होंने आत्म समर्पण
- 5:45:13करने के बजाय अंग्रेजों से लड़ने का जो है
- 5:45:16संकल्प उठा लिया। यह कहानी है।
- 5:45:20बताइए यहां तक आपको समझ में आ गया? यह जो
- 5:45:22झलकारी बाई की जो तस्वीर आप देख रहे हैं,
- 5:45:24यह कहां मिलेगी हमको? यह मिलेगी झांसी
- 5:45:27संग्रहालय में। झांसी जो म्यूजियम है,
- 5:45:29संग्रहालय है, वहां पर रानी लक्ष्मीबाई और
- 5:45:31झलकारी बाई के कई सारे चित्र और उनके से
- 5:45:33जुड़ी हुई जो यादें हैं, उनको संग्रहित
- 5:45:35करके रखा गया है। अब आगे का कहानी में
- 5:45:38थोड़ा सा हम किस्से को समझते हैं। तो यहां
- 5:45:41तक जो है आपको जो मेन-मेन बातें मैं
- 5:45:42दोबारा एक बार रिपीट कर देता हूं। उनका
- 5:45:44बर्थ प्लेस भोजला गांव पति का नाम क्या
- 5:45:47है? याद रखिएगा पून सिंह कोहली और रानी
- 5:45:49लक्ष्मीबाई के वो दुर्गा दल की जो है
- 5:45:53सेनापति थी। ये मुख्य रूप से बातें थी।
- 5:45:55हथियार चलाने में वो माहिर थी। ठीक है? ये
- 5:45:57सारी चीजें हो जाती हैं। अब यहां पे जो
- 5:45:59किस्सा जुड़ता है उसको मैं ऐसे ही सुनाना
- 5:46:01चाहता हूं क्योंकि आगे की जो बात है उसका
- 5:46:04कोई ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है। देखिए जब
- 5:46:07अह झांसी का जो किला था उस पर रानी
- 5:46:09लक्ष्मी ने पहले अधिकार कर लिया। फिर जनरल
- 5:46:12ह्यूरो जो कि एक अंग्रेज अधिकारी था जिसने
- 5:46:14रानी लक्ष्मीबाई को झांसी के किले से बाहर
- 5:46:16किया था। तो जब वह अपनी सेना लेकर आया तो
- 5:46:19उस समय एक घटना घटती है कि रानी
- 5:46:21लक्ष्मीबाई झांसी के किले में रहकर
- 5:46:23अंग्रेजों से लड़ रही थी। संघर्ष कर रही
- 5:46:25थी। तो जब झांसी पूरी तरीके से अंग्रेजों
- 5:46:27से घिर गई तो जो झलकारी बाई जो उनकी हमशल
- 5:46:31थी उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई से कहा कि आप
- 5:46:33एक काम करिए आप अपने पुत्र को लेकर यहां
- 5:46:36से चले जाइए और मैं आपके वेश में आपका रूप
- 5:46:40धारण करके अंग्रेजों को क्या है भ्रमित कर
- 5:46:42दूंगी कि रानी लक्ष्मीबाई तो इधर जा रही
- 5:46:45हैं। आप उधर से निकल जाइए। तो इस प्रकार
- 5:46:47रानी लक्ष्मीबाई अपने पुत्र के साथ जो है
- 5:46:49झांसी का किला छोड़ देती हैं और झलकारी
- 5:46:52बाई रानी लक्ष्मीबाई का वेश धारण करके जो
- 5:46:54है अंग्रेजों को भ्रमित करती हैं। अब इसी
- 5:46:57बीच यहां से दो किस्से इसलिए जुड़ते हैं।
- 5:46:59इसमें मैं आपको दो किस्से बता रहा हूं।
- 5:47:01पहला किस्सा तो यह है कि झांसी के किले को
- 5:47:04जब अंग्रेज़ जीत नहीं पा रहे थे तो
- 5:47:05उन्होंने षड्यंत्र करके एक जो व्यक्ति था
- 5:47:08जो झांसी की ही सेना का व्यक्ति था उससे
- 5:47:10जो है झांसी के किले का एक दरवाजा खुलवा
- 5:47:12लिया। जिससे अंग्रेज आसानी से किले में
- 5:47:14प्रवेश कर गए। और इस प्रकार जो झांसी का
- 5:47:16किला है अंग्रेजों ने जीत लिया। अब दूसरा
- 5:47:18इसमें प्रसंग यह है कि झलकारीबाई का क्या
- 5:47:21हुआ? रानी लक्ष्मीबाई जो हैं झांसी से
- 5:47:23निकल कर चली जाती हैं कालपी की तरफ और
- 5:47:25कालपी के बाद वो ग्वालियर चली जाती हैं
- 5:47:27जैसा आप सबको पता है। लेकिन इसके बाद
- 5:47:29झलकारीबाई का क्या हुआ? इसको लेकर इतिहास
- 5:47:31में अलग-अलग कहानियां मिलती हैं। कुछ
- 5:47:33किवदंंतियां हैं जिसमें यह कहा जाता है कि
- 5:47:36अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ कर फांसी दे दी।
- 5:47:38कुछ किवदंतियां यह कहती हैं कि जब झलकारी
- 5:47:41बाई को अंग्रेजों ने पकड़ा तो उनसे पूछा
- 5:47:43कि वह कौन है? क्या है? तो उन्होंने निड
- 5:47:45निडरता पूर्वक जो जवाब दिया इससे प्रभावित
- 5:47:48होकर जो है जनरल हीरोज़ ने झलकारी बाई को
- 5:47:51रिहा कर दिया था और वह काफी समय तक जीवित
- 5:47:53रही। जिसमें एक और हमको किदंती ये मिलती
- 5:47:55है कि वो रानी के साथ काल्पियो और कालपी
- 5:47:58से होते हुए ग्वालियर जाती हैं और
- 5:48:00ग्वालियर में अंग्रेजों से संघर्ष करते
- 5:48:02हुए रानी लक्ष्मीबाई के साथ शहीद हो जाती
- 5:48:04हैं। क्योंकि उनकी जो समाधि है वो हमें
- 5:48:06ग्वालियर में देखने को मिलती है। रानी
- 5:48:08लक्ष्मीबाई और झलकारीबाई दोनों की समाधि
- 5:48:11ग्वालियर में है। तो मैं आपको दो बातें
- 5:48:12आगे बताना चाहता हूं। अब देखिए क्या होता
- 5:48:14है। जून में विद्रोह भड़का था। ठीक है?
- 5:48:17याद रखना। तो ये डेट थोड़ा सा आप इसको
- 5:48:19ध्यान दीजिएगा। 1857 के दौरान लक्ष्मीबाई
- 5:48:23ने झांसी के किले के भीतर से अपनी सेना का
- 5:48:25नेतृत्व किया और ब्रिटिश और उनके स्थानीय
- 5:48:28सहयोगियों द्वारा किए गए हमलों को नाकाम
- 5:48:30कर दिया। यानी अंग्रेजों से संघर्ष कर रही
- 5:48:32हैं। उनके जो हमले उनको नाकाम कर दिया।
- 5:48:35रानी के सेना नायकों में एक गद्दार है।
- 5:48:38देखो इसका नाम है दूल्हेराव।
- 5:48:40गद्दार। दूल्हेराव ने उसे धोखा दिया और
- 5:48:43किले का एक संरक्षित द्वार ब्रिटिश सेना
- 5:48:45के लिए खोल दिया। जब किले का पतन निश्चित
- 5:48:47हो गया तो रानी के सेनापतियों और झलकारी
- 5:48:50बाई ने उन्हें कुछ सैनिकों के साथ किला
- 5:48:53छोड़कर भागने की सलाह दी और रानी अपने
- 5:48:55घोड़े पर अपने कुछ विश्वस्त सैनिकों के
- 5:48:57साथ झांसी के किले से निकल कर चली जाती
- 5:49:00हैं। अब आगे क्या होता है? झलकारी बाई अब
- 5:49:03यहां पर जो इनका जो किस्सा है वह बहुत
- 5:49:05निर्णायक है। आप इसको ध्यान से सुने। जब
- 5:49:08रानी चली जाती हैं तो किले की सुरक्षा दो
- 5:49:11लोगों के पास है। एक इनका पति है झलकारी
- 5:49:13बाई का जिसका नाम है पूरन सिंह कोहली जो
- 5:49:15कि एक बहुत ही बहादुर सिपाही है। झलकारी
- 5:49:18बाई का जो पति है पूरन किले की रक्षा करते
- 5:49:20हुए शहीद हो गया। अब आप सोचिए झलकारी बाई
- 5:49:23को जब पता चला होगा कि उनके जो पति हैं वो
- 5:49:25लड़ते हुए शहीद हो गए तो उनके अंदर और
- 5:49:27ज्यादा गुस्सा बढ़ जाता है और वह जो है
- 5:49:30फुल एंड फाइनल यानी एक तरीके से अपने जान
- 5:49:32को हथेली पर रखकर अंग्रेजों से संघर्ष
- 5:49:34करने लगती हैं। ठीक है? झलकारी बाई ने
- 5:49:36बजाय अपनी पति पति की मृत्यु का शोक मनाने
- 5:49:39के लिए ब्रिटिश को धोखा देने का एक योजना
- 5:49:41बनाई यानी अंग्रेजों को धोखा देने की और
- 5:49:44जिससे कि धोखा क्यों देना चाहती हैं जिससे
- 5:49:45कि रानी सुरक्षित दूर निकल जाए झलकारी बाई
- 5:49:49ने रानी लक्ष्मीबाई की तरह कपड़े पहने
- 5:49:51झांसी की सेना की कमान अपने हाथ में ली और
- 5:49:54जिसके बाद वह किले के बाहर निकलकर ब्रिटिश
- 5:49:56जनरल ह्यूरो ये हरोज का नाम है कि शिविर
- 5:49:59में उससे मिलने पहुंची और शिविर में
- 5:50:01पहुंचने पर उसने चिल्लाकर कहा कि वह जनरल
- 5:50:04हरोज़ से मिलना चाहती आती है और इससे
- 5:50:07सुनकर अंग्रेज सैनिक प्रसन्न थे कि ना
- 5:50:09सिर्फ उन्होंने झांसी के किले पे कब्जा कर
- 5:50:11लिया बल्कि जीवित जो है रानी को भी पकड़
- 5:50:14लिया।
- 5:50:15जनरल हररोज़ ने उस समय उसे रानी ही समझ रहा
- 5:50:18था ने झलकारीबाई से पूछा कि उसके साथ क्या
- 5:50:21किया जाए? तो उसने जो है दृढ़ता के साथ
- 5:50:23कहा कि मुझे फांसी दो। जनरल हिरोज़ झलकारी
- 5:50:26बाई के साहस और उसके नेतृत्व क्षमता से
- 5:50:29बहुत प्रभावित हुआ और झलकारी बाई को रिहा
- 5:50:31कर दिया। देखिए कुछ लोग कहते हैं कुछ
- 5:50:34लोगों का कहना है कि उसने झलकारी बाई को
- 5:50:35रिहा कर दिया था और बाद में झलकारी बाई
- 5:50:37कुछ समय तक जीवित रही। लेकिन अन्य
- 5:50:39किवदंतियां ये कहती हैं कोई यह कहता है कि
- 5:50:42उन्हें फांसी दे दी गई अंग्रेजों द्वारा
- 5:50:43और कोई यह कहता है कि वो रानी लक्ष्मीबाई
- 5:50:46के साथ लड़ते हुए ग्वालियर में शहीद हो
- 5:50:47गई। तो ये अलग-अलग हैं। जैसे कि बुंदेलखंड
- 5:50:50की विवदती है बुंदेलखंड में कि झलकारी बाई
- 5:50:52के इस उत्तर से जनरल हीरोज़ दंग रह गया और
- 5:50:54उसने कहा कि यदि भारत की 1% महिलाएं भी
- 5:50:57उसके जैसी साहसी होती तो ब्रिटिश को जल्दी
- 5:50:59ही भारत छोड़ना होगा। ऐसा हम लोगों को
- 5:51:02सुनने को मिलता है। लास्ट सेंटेंस है। आइए
- 5:51:05इस पे चर्चा करते हैं और इसको खत्म करते
- 5:51:08हैं। देखिए क्या है लास्ट? आप ये जो
- 5:51:10तस्वीर देख रहे हैं वो है ग्वालियर में।
- 5:51:13ठीक है? तो अगर आपसे क्वेश्चन यह पूछा
- 5:51:15जाता है कि रानी लक्ष्मीबाई की समाधि कहां
- 5:51:18पर है या झलकारी बाई की समाधि कहां पर है?
- 5:51:21तो आपका आंसर होगा ग्वालियर। रानी
- 5:51:23लक्ष्मीबाई की भी समाधि ग्वालियर में है।
- 5:51:24यह है झलकारीबाई की तस्वीर। ऐसे ही एक
- 5:51:27तस्वीर एक मूर्ति जो है रानी लक्ष्मीबाई
- 5:51:29की लगी हुई है जिसमें वो हाथ में तलवार और
- 5:51:31उनका घोड़ा जो है उसके पैर हवा में हैं।
- 5:51:34तो वो रानी लक्ष्मीबाई की समाधि भी
- 5:51:35ग्वालियर में है और झलकारी बाई का भी आप
- 5:51:37देखिए घोड़े के पैर हवा में हैं। जब किसी
- 5:51:40योद्धा को इस तरीके से दिखाया जाता है कि
- 5:51:42उसके घोड़े के जो पैर हैं वो हवा में हो।
- 5:51:44हाथ में तलवार हो जिसका मतलब होता है कि
- 5:51:46वह युद्ध में लड़ते हुए शहीद हुआ है। तो
- 5:51:48रानी लक्ष्मीबाई के साथ झलकारी बाई
- 5:51:51ग्वालियर में शहीद हो जाती हैं। ग्वालियर
- 5:51:53में घुड़सवार के रूप में झलकारी बाई की ये
- 5:51:55प्रतिमा लगी हुई है। 8 फुट ऊंची ये
- 5:51:57प्रतिमा है जो ग्वालियर में आपको देखने को
- 5:51:59मिलती है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने
- 5:52:02झलकारीबाई की बहादुरी को इस प्रकार
- 5:52:05पंक्तिबद्ध किया था। यानी हमारे जो महान
- 5:52:08साहित्यकार हैं राष्ट्रकवि मैथिलीशरण
- 5:52:10गुप्त उन्होंने झलकारी बाई की वीरता पर
- 5:52:12कुछ लाइनें कहीं। उन्होंने कहा कि जाकर रण
- 5:52:15में ललकारी थी। वह तो झांसी की झलकारी थी।
- 5:52:19गोरों से लड़ना सीखा गई है। इतिहास में
- 5:52:22झलक रही वह भारत की ही नारी थी। तो ये
- 5:52:25झलकारी बाई के लिए राष्ट्रकवि मैथिलीशरण
- 5:52:27गुप्त ने कहा। हालांकि जो समय के
- 5:52:29मुख्यधारा के इतिहासकार थे उन्होंने
- 5:52:31झलकारी बाई को ज्यादा महत्व नहीं दिया।
- 5:52:33लेकिन बाद के जो आधुनिक लेखक थे उन्होंने
- 5:52:35झलकारी बाई के ऊपर बहुत सारी टिप्पणियां
- 5:52:38की है। बहुत कुछ लिखा है जिसकी वजह से आज
- 5:52:39हम झलकारी बाई की बात कर रहे हैं। भारत
- 5:52:42सरकार ने 22 जुलाई 2001 में झलकारी बाई के
- 5:52:45नाम सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया
- 5:52:47था। और एक और बात बता दूं झलकारी बाई केवल
- 5:52:50मध्य प्रदेश में ही नहीं उत्तर प्रदेश में
- 5:52:52राजस्थान में और कई अन्य राज्यों में भी
- 5:52:55सम्मानित हैं। उनके नाम की प्रतिमाएं और
- 5:52:57स्मारक भारत के कई राज्यों में बने हैं।
- 5:52:59जैसे कि उनकी प्रतिमा और एक स्मारक अजमेर।
- 5:53:02अजमेर कहां है? राजस्थान में। ठीक है?
- 5:53:04अजमेर में है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा
- 5:53:06उनकी एक प्रतिमा आगरा में स्थापित की गई
- 5:53:08है और साथ ही उनके नाम से लखनऊ में एक
- 5:53:11अस्पताल यानी एक धर्मार चिकित्सालय भी
- 5:53:14शुरू किया गया है। तो तीन स्टेट हैं।
- 5:53:16राजस्थान, उत्तर प्रदेश और एमपी में उनकी
- 5:53:18कई स्थानों पर प्रतिमाएं बनी है। आगरा में
- 5:53:21उनकी प्रतिमा लगभग ऐसी ही बनी है।
- 5:53:23ग्वालियर में उनकी प्रतिमा है। ठीक है? और
- 5:53:25यूपी में भी प्रतिमा है और राजस्थान में
- 5:53:27भी प्रतिमा है। तो यह थी हमारी झलकारी बाई
- 5:53:30जो रानी लक्ष्मीबाई की एक छाया के रूप में
- 5:53:33पहचानी जाती हैं। झलकारी बाई रानी
- 5:53:36लक्ष्मीबाई की क्या थी? हमसल थी और उनके
- 5:53:38जो दल है उनकी जो महिला सेना थी जिसका नाम
- 5:53:41था दुर्गा दल उसकी जो है वो क्या थी?
- 5:53:43सेनापति थी। मुझे उम्मीद है कि आप लोगों
- 5:53:45को ये जो सीरीज है वो बहुत पसंद आ रही
- 5:53:48होगी। इस सीरीज में काफी अभी लेक्चर हो
- 5:53:50चुके हैं जिसमें हम लोगों ने मध्य प्रदेश
- 5:53:52की वीर और वीरांगनाओं के बारे में चर्चा
- 5:53:54की है और मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को
- 5:53:56ये सीरीज बहुत पसंद आएगी। इसके साथ-साथ
- 5:53:58मैं एक और इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन आप लोगों
- 5:54:00को देना चाहता हूं। वो इंफॉर्मेशन यह है
- 5:54:03कि अभी 21 जुलाई यानी आज 21 जुलाई को
- 5:54:07स्टडी आईक्यू एक नया कोर्स स्टार्ट कर रहा
- 5:54:09है और यह कोर्स है मध्य प्रदेश स्टेट
- 5:54:12पीसीएस आरंभ 6.0 अगर आप चाहते हैं कि आपकी
- 5:54:16एमबीबीएससी की तैयारी बेहतर बने और उसे एक
- 5:54:18सही दिशा मिले तो आप आरंभ 6.0 के साथ
- 5:54:21तैयारी कर सकते हैं। इसमें प्रीलिम्स,
- 5:54:23मेंस और इंटरव्यू इन सभी के कोर्सेज़ इन
- 5:54:26सभी की पूरी तैयारी यानी प्री और मेंस और
- 5:54:28इंटरव्यू की कंप्लीट तैयारी इसमें आपको
- 5:54:30करवाई जाएगी। इसकी जो फीस है वो वैसे
- 5:54:33₹18,999 है। अगर आप मेरा कोड यूज़ करते हैं
- 5:54:36Har लाइव तो यह आपको केवल और केवल मात्र
- 5:54:39मिलेगा ₹1,999
- 5:54:41में। इस कोर्स में आपको बहुत सारे फीचर्स
- 5:54:43मिलने वाले हैं। जैसे कि 1100 घंटों की
- 5:54:46लाइव क्लासेस है। मेंस याद रखिएगा। डेली
- 5:54:49मेंस आंसर राइटिंग है। डेली मेंस का जो
- 5:54:51टॉपिक पढ़ाया जाएगा उसका क्वेश्चन आपको
- 5:54:52दिया जाता है। इसके साथ-साथ एक मेंटर आपको
- 5:54:55मिलेगा जो आपकी तैयारी में हर समय आपको
- 5:54:57हेल्प करेगा। जब भी आपको कोई डाउट है अपने
- 5:54:59मेंटर से पूछ सकते हैं। और सबसे
- 5:55:01इंपॉर्टेंट फीचर इस कोर्स का यह है कि यदि
- 5:55:03आप प्री क्वालीफाई कर लेते हैं। यदि आप
- 5:55:06प्री क्वालीफाई कर लेते हैं, तो आपकी 100%
- 5:55:08फीस रिफंड की जाएगी। ठीक है? 2 ईयर की
- 5:55:11कोर्स वैलिडिटी है। एनसीआरटी का रिकॉर्डेड
- 5:55:14कोर्स है। सब कुछ इसमें आपको मिलने वाला
- 5:55:16है। मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को जो कुछ
- 5:55:19भी मैंने झलकारी बाई के बारे में बताया
- 5:55:21आपको पसंद आया होगा। मैं आप लोगों से बस
- 5:55:24एक और बात कह रहा हूं कि आप लोग कमेंट
- 5:55:26सेक्शन में बताइएगा इस वीडियो को देखने के
- 5:55:28बाद कि आपको और किन वीर वीरांगनाओं के
- 5:55:30बारे में आपको इंफॉर्मेशन चाहिए। किन वीर
- 5:55:33वीरांगनाओं के बारे में आप जो है वीडियो
- 5:55:35चाहते हैं? जितने ज्यादा कमेंट्स जिस पर
- 5:55:38भी आएंगे उसी का वीडियो आप लोगों को
- 5:55:40नेक्स्ट सेशन में मिलेगा। नेक्स्ट टॉपिक
- 5:55:42में हम उन्हीं की चर्चा करेंगे। तो आज के
- 5:55:44सेशन को यहीं समाप्त करते हैं। जय हिंद।
- 5:55:46थैंक यू।
- 5:55:55नमस्कार दोस्तों, मैं हरी सिंह राजपूत आप
- 5:55:57सभी का एमपीपीएससी स्टडी आईक्यू पर
- 5:55:59बहुत-बहुत स्वागत करता हूं। उम्मीद है आप
- 5:56:01सभी लोग अच्छे होंगे और मन लगाकर पढ़ रहे
- 5:56:03होंगे। तो दोस्तों हमारी सीरीज मध्य
- 5:56:05प्रदेश के वीरों का इतिहास में आज हम बात
- 5:56:08करने वाले हैं मध्य प्रदेश के एक और महान
- 5:56:11आदिवासी वीर योद्धा जिनका नाम था सीताराम
- 5:56:14कमर। दोस्तों सीताराम कमर भी निमाड़
- 5:56:17क्षेत्र में 1857 की क्रांति में अपना
- 5:56:20योगदान देते हैं और उन्हीं बलिदानी
- 5:56:23क्रांतिकारियों में शामिल होते हैं
- 5:56:25जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपना
- 5:56:27सर्वस्व न्योछावर किया। तो आइए हम बात
- 5:56:30करते हैं वीर सीताराम कंवर जी के बारे
- 5:56:33में। तो सबसे पहले हम बात करेंगे कि जो
- 5:56:35सीताराम जी कंवर थे वो कहां से बिलोंग
- 5:56:38करते थे और इनकी क्या स्टोरी रही है। तो
- 5:56:4010 मिनट में आप अच्छे से इनके बारे में
- 5:56:43एग्जाम ओरिएंटेड और पूरी की पूरी
- 5:56:44इंफॉर्मेशन सुन लीजिएगा। सबसे पहली बात जो
- 5:56:47हमारे सीताराम जी कंवर हैं वो निमाड़
- 5:56:50क्षेत्र में एक डिस्ट्रिक्ट है निवाड़ का
- 5:56:52जिसका नाम है खरगोन। तो खरगोन डिस्ट्रिक्ट
- 5:56:55का एक गांव था जिसका नाम था डंग गांव। यह
- 5:56:58इसलिए याद रखना है क्योंकि इसी गांव में
- 5:57:01जहां पर उनका जन्म हुआ था इसी गांव में
- 5:57:03उनकी समाधि है। यानी इसी गांव में वह
- 5:57:05अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए शहीद हो
- 5:57:07जाएंगे। तो वीर क्रांतिकारी सीताराम कंवर
- 5:57:11का जो जन्म स्थान है वो निवाड़ क्षेत्र
- 5:57:12में खरगोन जिले के डंग गांव में था। अब
- 5:57:16इसके बाद क्या होता है कि वो जैसे ही बड़े
- 5:57:19होते हैं तो वो लड़ने में माहिर थे। ठीक
- 5:57:22है? एक वीर योद्धा थे। तो उन्होंने क्या
- 5:57:24किया था कि गोंडवाना राज्य के जो राजा थे
- 5:57:27गोंडवाना राज्य के उस समय के जो राजा थे
- 5:57:30जिनका जबलपुर केंद्र था और अगर आपको याद
- 5:57:32हो 1857 की क्रांति में राजा शंकर शाह
- 5:57:35वहां के राजा थे गोंडवाना के जो रानी
- 5:57:38दुर्गावती के वंशज थे। तो सीताराम वीर
- 5:57:41कंवर जो है उनके यहां पर जाते हैं और उनके
- 5:57:44यहां पर गुप्तचर विभाग के प्रमुख हो जाते
- 5:57:46हैं। दैट मींस कि जो राजा शंकर शाह है
- 5:57:49यानी जो गोंड राजा थे जबलपुर के उन्होंने
- 5:57:52अपना गुप्तचर विभाग का प्रमुख किसे बनाया?
- 5:57:55सीताराम कमर को बनाया। अब सीताराम कमर अभी
- 5:57:58जो है गोंडवाना राज्य में नौकरी कर रहे
- 5:58:00थे। अच्छा उसके पीछे एक कारण भी है। ये जो
- 5:58:03कमर वर्ड आता है वो गोंडों से रिलेट करता
- 5:58:06है। ठीक है? यानी यह गोंड समुदाय से रिलेट
- 5:58:09करता है। तो इसीलिए शायद इसीलिए संभवत जो
- 5:58:11है वह गोंडवाना राज्य में नौकरी करते थे।
- 5:58:14अब क्या हुआ कि 1857 की क्रांति के दौरान
- 5:58:17जबलपुर के जो गोंड शासक थे राजा शंकर शाह
- 5:58:20और रघुनाथ शाह उन्हें अंग्रेजों ने तोप से
- 5:58:22उड़ा दिया। तो क्या होता है कि लेकिन
- 5:58:25सितंबर 20 सितंबर को ऐसा हुआ था। 20
- 5:58:28सितंबर 1858 में अंग्रेजों ने गोंडवाना का
- 5:58:31दमन कर दिया और वीर शंकर शाह और उनके जो
- 5:58:34पुत्र थे रघुनाथ शाह को उन्हें तोप के
- 5:58:36मुंह के तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा दिया।
- 5:58:39तो होता क्या है कि जो हमारे वीर सीताराम
- 5:58:42कंवर होते हैं वो गोंडवाना राज्य को
- 5:58:44छोड़कर अब आ जाते हैं निवाड़ में। देखिए
- 5:58:47गोंडवाना राज्य के दमन के बाद वीर सीताराम
- 5:58:49कंवर अपनी टोली के साथ निवाड़ आ गए और
- 5:58:52यहां उन्होंने होलकर राज्य में पदाधिकारी
- 5:58:54वनवासियों से संपर्क किया और 1857 की
- 5:58:57क्रांति के भूमिगत नायकों से संपर्क किया
- 5:59:00और वनवासियों की टुकड़ी तैयार की। तो इस
- 5:59:03प्रकार उन्होंने निर्माण क्षेत्र में अपनी
- 5:59:05एक सेना का निर्माण किया। देखिए मैं आपको
- 5:59:08इसमें तो पढ़ के बता ही दूंगा लेकिन मैं
- 5:59:10चाहता हूं कि आपको मैं यहां पर एक
- 5:59:14इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन अपने तरीके से दूं
- 5:59:16जिससे आप आपको बेहतर तरीके से समझने में
- 5:59:20हेल्प मिले। देखिए चल क्या रहा है यहां पर
- 5:59:23सिचुएशन कुछ ऐसी है आपको बताता हूं। देखिए
- 5:59:26यह रहे हमारे सीताराम कंवर। तो जैसे मैंने
- 5:59:29आपको बताया कि सीताराम कंवर जो है
- 5:59:32उन्होंने सबसे पहले इनका जो जन्म स्थान है
- 5:59:34वह क्या है? इनका जन्म स्थान है निमाड़ का
- 5:59:37खरगोन डिस्ट्रिक्ट और खरगोन डिस्ट्रिक्ट
- 5:59:40में एक जगह थी जिसका नाम था डंग गांव। ठीक
- 5:59:43है? यानी जो डंग गांव है यह याद रखना
- 5:59:46इंपॉर्टेंट है। डंग गांव और कहां पड़ता
- 5:59:48है? खरगोन। यहां पर इनका जन्म होता है। और
- 5:59:50आगे चलकर यह क्या करते हैं? गोंडवाना के
- 5:59:53राजा जो थे गोंडवाना के शासक शंकर शाह के
- 5:59:56यहां यह नौकरी करते हैं। तो गोंडवाना के
- 5:59:59शासक का नाम क्या है? शंकर शाह। और शंकर
- 6:00:02शाह के ये कौन है? तो याद रखिएगा ये संकर
- 6:00:05शाह जो थे उन संकर शाह के ये गुप्तचर
- 6:00:08विभाग के प्रमुख बनाए गए। लेकिन क्या होता
- 6:00:11है कि जो संघर्ष शाह होते हैं उनको क्या
- 6:00:13किया जाता है? अंग्रेजों द्वारा उन्हें
- 6:00:15तोप से उड़ा दिया गया और इसी वजह से यह
- 6:00:18क्या करते हैं? गोंडवाना राज्य को छोड़कर
- 6:00:21वापस अपने निमाड़ राज्य में आ जाते हैं।
- 6:00:24ठीक है? तो इस तरीके से जो मेनमेन बातें
- 6:00:26हैं, वह आप याद रख सकते हैं इनके बारे
- 6:00:29में। अब होता क्या है? जब यह निवाड़ में
- 6:00:32आए। याद रखिएगा ध्यान से। निमाड़ में आते
- 6:00:35हैं तो निवाड़ मतलब इनका जो जन्मभूमि थी
- 6:00:38वापस से लौट आए और इनकी कर्मभूमि अभी कहां
- 6:00:40थी? गोंडवाना। तो जब ये निवाड़ में लौट कर
- 6:00:42आए तो इन्होंने क्या किया? यहां के जो
- 6:00:45आदिवासी वीर थे आदिवासियों
- 6:00:49से मिलकर आदिवासियों की एक टोली बनाई।
- 6:00:52टोली समझते हैं आप? यानी एक सेना का
- 6:00:54निर्माण किया। एक टोली का निर्माण किया और
- 6:00:57इसमें कई वीर आदिवासी योद्धाओं को शामिल
- 6:01:00किया। इसमें इनके एक सबसे बड़े सहयोगी हैं
- 6:01:02और मैं चाहता हूं कि उनके बारे में हम
- 6:01:04अगले लेक्चर में बात करेंगे। उनका काफी
- 6:01:07डिटेल में उनकी बात करेंगे। उनका नाम है
- 6:01:09रघुनाथ मंडलोई जी। क्योंकि रघुनाथ मंडलोई
- 6:01:14जी जो हैं याद रखिएगा
- 6:01:17मंडलोई उनके प्रमुख सहयोगी थे। यानी जब इस
- 6:01:21क्षेत्र में उन्होंने अपनी टोली यानी सेना
- 6:01:23बनाई तो इनके जो प्रमुख सहयोगी बनते हैं
- 6:01:26वह कौन बनते हैं? वीर रघुनाथ मंडलोई जी।
- 6:01:30अब वीर जो रघुनाथ मंडलोई जी हैं वो क्या
- 6:01:32करते हैं? मैं आपको बताना चाहूंगा कि यह
- 6:01:34जो वीर रघुनाथ मंडलोई जी हैं उन्होंने
- 6:01:36इनका साथ दिया और इस क्षेत्र में एक बड़ी
- 6:01:38सेना का निर्माण इन लोगों ने कर लिया और
- 6:01:411857 की क्रांति याद रखिएगा 1857 की जो
- 6:01:45क्रांति इस समय चल रही थी। इस क्रांति में
- 6:01:48इन्होंने अपना योगदान दिया। अब होता क्या
- 6:01:51है कि जैसे ही ब्रिटिश सरकार को यानी ईस्ट
- 6:01:55इंडिया कंपनी को यह खबर लगी कि सीताराम
- 6:01:59कमर और रघुनाथ मंडलोई जैसे वीर योद्धा
- 6:02:02निमाड़ में एक्टिव हो गए हैं। अब याद रखिए
- 6:02:05निमाड़ में यह वो दौर था जहां भीमा नायक,
- 6:02:07खाज्या नायक, बिरजू नायक और टंट्या वीर
- 6:02:10जैसे योद्धा थे। लेकिन वो सब अपने-अपने
- 6:02:12क्षेत्रों में एक्टिव थे और उनमें से कुछ
- 6:02:14का दमन कर दिया गया था और उनके दमन के
- 6:02:17पश्चात निमाड़ क्षेत्र में विद्रोह की जो
- 6:02:19चिंगारी है, विद्रोह की जो आग है, वो दो
- 6:02:22योद्धाओं ने जलाई। एक का नाम सीताराम कमर
- 6:02:24है और एक का नाम है रघुनाथ मंडलोई। मैं
- 6:02:27बात करूंगा नेक्स्ट लेक्चर में रघुनाथ
- 6:02:28मंडलोई जी की। अब क्या होता है? वायसराॉय
- 6:02:32ने एक मेजर को इन लोगों को पकड़ने के लिए
- 6:02:34भेजा जिसका नाम था मेजर कीटिंग। देखिए
- 6:02:37मेजर कीटिंग का जिक्र बार-बार आएगा। मेजर
- 6:02:39कीटिंग क्या करता है? अपनी दो सैन्य
- 6:02:42टुकड़ी ले जाकर निमाड़ में जो इनका एरिया
- 6:02:44होता है, इसको घेर लेता है। ध्यान देना इस
- 6:02:47बात को और यहां से साउथ में नागपुर से
- 6:02:50थोड़ी सी मदद मांगता है और नागपुर से एक
- 6:02:53सैन्य टुकड़ी अलग आती है। तो इनका जो गांव
- 6:02:56होता है जिसका नाम क्या है? डंग गांव। तो
- 6:02:58यहां पर जो डंग गांव था मैं इस डंग गांव
- 6:03:01का जिक्र कर देता हूं। इस डंग गांव को तीन
- 6:03:04ओर से जो है घेर लिया गया।
- 6:03:07दो सेनाएं
- 6:03:09कीटिंग के नेतृत्व में और एक सेना जो का
- 6:03:11किसके नेतृत्व में जाती है तो नागपुर की
- 6:03:14सेना की टुकड़ी थी तो इन लोगों ने जो है
- 6:03:16डंग गांव को घेर लिया। रात को जब अंधेरे
- 6:03:19में इस गांव को घेरा गया तो जो हमारे वीर
- 6:03:22हमारे जो जनजातीय वीर योद्धा थे आदिवासी
- 6:03:25योद्धा थे वो अभी तैयार नहीं थे और
- 6:03:27सुबह-सुबह जो है लड़ाई हो जाती है। अब आप
- 6:03:30सभी जानते हैं कि आखिरकार 1857 की क्रांति
- 6:03:33में हमारे जो वीर योद्धा थे वह क्यों
- 6:03:34हारे? क्योंकि उनके पास परंपरागत तीर,
- 6:03:37तलवार, भाले, लाठी, डंडे थे। वहीं
- 6:03:40अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार थे।
- 6:03:42अंग्रेजों के पास हर चीज उत्तम प्रवृत्ति
- 6:03:44की थी। तो जब इस डंग गांव में मुठभेड़
- 6:03:47होती है तो इस मुठभेड़ में 78 जो हमारे
- 6:03:52आदिवासी योद्धा हैं वो शहीद हो जाते हैं।
- 6:03:55और इन्हीं 78
- 6:03:58योद्धाओं में एक योद्धा थे जिनका नाम था
- 6:04:01वीर सीताराम कमर। यानी वीर सीताराम कंवर
- 6:04:04का जो है डंग गांव में ही जब लड़ाई हुई
- 6:04:06संघर्ष हुआ तो उनका सर काट दिया गया। उनका
- 6:04:09सर काटकर जो है क्या है? पूरे गांव में उस
- 6:04:11सर को ले जाकर घुमाया गया एक तलवार पे
- 6:04:13लटका कर जिससे कि गांव में दहशत का माहौल
- 6:04:16बनाया जा सके। और जो दूसरे क्रांतिकारी
- 6:04:19हमारे रघुनाथ मंडली इन्हें खरगोन के जो
- 6:04:21प्रसिद्ध बीजागढ़ फोर्ट है वहां पर
- 6:04:23गिरफ्तार किया था इसी मेजर कीटिंग ने। तो
- 6:04:26हम इस बात को बस याद रखना है कि सीताराम
- 6:04:29कमर का क्या योगदान है? एग्जाम से रिलेटेड
- 6:04:32क्या तथ्य हो सकते हैं? कहां से बिलॉन्ग
- 6:04:34करते थे? राजा शंकर शाह से इनका क्या
- 6:04:37संबंध था? और कहां पर इनकी मुठभेड़ होती
- 6:04:40है? तो आई होप इतना अभी मैंने आप लोगों को
- 6:04:42जब बताया तो आपको समझ में आ गया होगा। आगे
- 6:04:45की स्लाइड भी मैं आप लोगों को बता देता
- 6:04:47हूं। देखिए इसमें लिखा हुआ है कि इसकी
- 6:04:50सूचना जैसे ही यह निमाड़ में आते हैं तो
- 6:04:52इसकी सूचना अंग्रेजों को लग गई थी और यह
- 6:04:54भी माना जाता है कि गोंडवाना के दमन के
- 6:04:56साथ ही अंग्रेजों ने अंग्रेजों की नजर वीर
- 6:04:59सीताराम कमर पर थी। उनके हर मूवमेंट पर
- 6:05:01अंग्रेजों की नजर थी। इसीलिए गोंडवाना के
- 6:05:04दमन के साथ कीटिंग को निमाड़ रवाना किया
- 6:05:07गया। यानी मेजर कीटिंग एक बड़ी सेना लेकर
- 6:05:09निमाड़ आता है। वीर सीताराम कमर के दमन के
- 6:05:12लिए अंग्रेजों ने तीन ओर से घेरा था। दो
- 6:05:16टुकड़ियां तो कीटिंग के साथ आई और तीसरी
- 6:05:18टुकड़ी नागपुर से आई जिसका कैंप बैतूल में
- 6:05:21था जो नागपुर वाली टुकड़ी थी। अब कीटिंग
- 6:05:24ने इस समय वायसराय को एक लेटर लिखा था।
- 6:05:26उससे पता चलता है हमें कि क्या कहानी रही
- 6:05:28होगी। कीटिंग ने वायसराय को वीर सीताराम
- 6:05:30कमर का मूवमेंट लिखा था और सूचना दी थी कि
- 6:05:33वह सीताराम कमर और विद्रोहियों को समाप्त
- 6:05:36करने दो टुकड़ियों के साथ डंग जा रहा है।
- 6:05:39इस पत्र में कीटिंग ने अंग्रेजी सेना में
- 6:05:42दो टुकड़ियों के नायक यानी जो उनके कमांडर
- 6:05:44थे उनको बदलने की बात कही थी और इन दोनों
- 6:05:47टुकड़ियों के नए नायकों के नाम थे। एक का
- 6:05:49नाम था फरज अली और एक का नाम था दिलेर
- 6:05:52खान। यह एक्चुअली में उसे होलकर सेना से
- 6:05:54मिले थे। तो थोड़ा सा इंपॉर्टेंट है। फरज
- 6:05:57अली और दिलेर खान थे। इन लोगों ने जाकर
- 6:05:59क्या किया? डंग गांव को घेर लिया। ठीक है?
- 6:06:02तो डंग गांव को रात में घेर लिया गया।
- 6:06:04मुकाबला जो है शुरू हो गया और रात को जब
- 6:06:08घेरा सुबह-सुबह लड़ाई शुरू हुई। तो देखिए
- 6:06:11क्या होता है। वह डेट जिसमें इतिहास दर्ज
- 6:06:15है। 9 अक्टूबर 1858 की दिन था। जब 78
- 6:06:19क्रांतिकारियों के द्वारा अपना बलिदान
- 6:06:22दिया गया। उनके बाद अंग्रेजों ने डंग गांव
- 6:06:24सहित आसपास के अनेक जो गांव थे उनमें
- 6:06:27सर्चिंग शुरू की और गांव खेतों जंगलों में
- 6:06:29आग लगाना शुरू कर दी। जहां जो दिखा उसे
- 6:06:32मौत के घाट उतार दिया। अंग्रेजों ने इस
- 6:06:34क्षेत्र में सामूहिक अत्याचार किए और गांव
- 6:06:37के गांव उजाड़े। जो क्रांतिकारी नहीं थे
- 6:06:39उन्हें भी नहीं छोड़ा। यह डंग गांव
- 6:06:41अंग्रेजों के अत्याचार का शिकार इसलिए हुआ
- 6:06:44था क्योंकि वीर सीताराम कंवर का जन्म इसी
- 6:06:46डंग गांव में हुआ था। उनके नेतृत्व में ही
- 6:06:49वनवासियों की टुकड़ी ने अंग्रेजी फौज से
- 6:06:52मुकाबला किया था और इस संघर्ष में 20
- 6:06:54क्रांतिकारी मुकाबला करते हुए बलिदान हो
- 6:06:56गए। वीर सीताराम कमर का बलिदान होते ही
- 6:06:59शेष क्रांतिकारी बंदी बना लिए गए और इन
- 6:07:02बंदियों की संख्या 58 थी जिन्हें कैंप में
- 6:07:04ले जाकर तोप से उड़ा दिया गया। इस तरह
- 6:07:07संघर्ष में कुल 78 बलिदान हो जाते हैं।
- 6:07:11कहने का तात्पर्य यह है कि वीर सीताराम
- 6:07:14कमर मध्य प्रदेश के उन वीर योद्धाओं में
- 6:07:17शामिल है जिन्होंने 1857 की क्रांति में
- 6:07:20अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और इनका जो
- 6:07:24संबंध है वह निमाड़ के खरगोन जिले के डंग
- 6:07:27गांव से है। लेकिन इनका जो संबंध है वह
- 6:07:30गोंडवाना रियासत के राजा शंकर शाह से भी
- 6:07:32है। यह आपको याद रखना है क्योंकि अब मैं
- 6:07:35आपको बता रहा हूं कि कमर शब्द का क्या
- 6:07:37अर्थ है और आखिरकार क्यों हमने यह इसको
- 6:07:40वहां पे कनेक्ट किया था। तो देखिए यह आगे
- 6:07:42की कहानी लिखी है कि उनका सर काटकर जो है
- 6:07:45तलवार से लटका कर पूरे क्षेत्र में फैलाया
- 6:07:47गया जिससे कि वहां पर दहशत का माहौल बनाया
- 6:07:50जा सके। देखिए शहीद सीताराम जो कंवर है
- 6:07:53इनकी जो जयंती है इनका जो बलिदान दिवस है
- 6:07:56वो 9 अक्टूबर को मनाया जाता है। याद
- 6:07:58रखिएगा 9 अक्टूबर 1858 को इनकी जो है
- 6:08:01मृत्यु हुई थी। ठीक है? यह आप याद रखेंगे
- 6:08:04क्योंकि उसके बाद जो है 16 अक्टूबर को
- 6:08:07उसने एक पत्र लिखा था कीटिंग ने। तो इसका
- 6:08:09जिक्र किया गया है कि 16 अक्टूबर 58 को एक
- 6:08:11उसने पत्र लिखा था और उसमें उसने कहा था
- 6:08:14क्या कहा था?
- 6:08:16कि मेजर कीटिंग ने अंग्रेज गवर्नर को लिखा
- 6:08:18कि जिसमें उसने 78 का तो आंकड़ा दिया था।
- 6:08:21उसने बताया था मेजर कीटिंग ने कि इस
- 6:08:23क्षेत्र में हमने 78 लोगों को मार डाला और
- 6:08:25लिखा कि गांव में कॉम्बिंग ऑपरेशन कर दिया
- 6:08:27गया है। अब कोई विद्रोही ना बचा है। यह
- 6:08:30पत्र 16 अक्टूबर 1858 का है। तब अंग्रेजों
- 6:08:33की तलाश अभियान में यह कॉम्बिंग ऑपरेशन
- 6:08:36शब्द प्रचलित था। कॉम्बिंग ऑपरेशन का मतलब
- 6:08:39क्या होता है? जिस तरह कंघी से सिर में
- 6:08:41जुएं की तलाशी की जाती है, वैसे ही उस समय
- 6:08:44सेना विद्रोहियों की तलाशी करती थी। ठीक
- 6:08:47है? आई होप सीताराम कमर के बारे में जो
- 6:08:50मेन बातें थी वो आपको समझ में आ गई होंगी।
- 6:08:53देखिए गोंडवाना और महाकशल प्रदेश आपने
- 6:08:56सुना महाकशल इनके क्या मतलब है? इसके बारे
- 6:08:59में थोड़ा सा बताया गया है। देखिए
- 6:09:02आज भले प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से
- 6:09:05छत्तीसगढ़ पृथक प्रांत हो गया है लेकिन एक
- 6:09:08टाइम था कि जब छत्तीसगढ़ का जो हिस्सा है
- 6:09:10वो मध्य प्रदेश में आता था उस पूरे
- 6:09:11क्षेत्र को गोंडवाना कहते थे। लेकिन एक
- 6:09:14समय मालवा का निमाड़ ठीक है। क्षेत्र
- 6:09:16महाकौशल और छत्तीसगढ़ का एक ही साम्राज्य
- 6:09:19रहा करता था और इसे बोलचाल की भाषा में
- 6:09:21गोंडवाना कहते थे। बेसिकली गोंडवाना एक
- 6:09:23बहुत बड़ा एरिया था जहां पर गोंड जनजाति
- 6:09:26का शासन था। जबकि ऐतिहासिक दृष्टि से इसका
- 6:09:29जो नाम है महाकौशल हुआ करता था जो भगवान
- 6:09:32राम से इसका कनेक्शन है। इस राज्य की
- 6:09:35राजकुमारी कौशल्या थी जो मर्यादा
- 6:09:37पुरुषोत्तम राम जी की माता रही और उनकी
- 6:09:40जन्मस्थली अब छत्तीसगढ़ में है। यानी जो
- 6:09:42कौशल प्रदेश है वह अब छत्तीसगढ़ में है।
- 6:09:44पहले यह हमारा मध्य प्रदेश का भाग भी कौशल
- 6:09:47प्रदेश का हिस्सा था। आगे लिखा है कि अंचल
- 6:09:50में गॉड वनवासी रहते हैं जिनका उपनाम कमर
- 6:09:53है। अब इस शब्द से आप अंदाजा लगा लीजिएगा
- 6:09:56या कनेक्ट कर लीजिएगा कि इनका संबंध जो है
- 6:09:58गोंडवाना रियासत से क्यों था? गोंड राजा
- 6:10:01संघर्ष शाह से क्यों था? क्योंकि गोंड
- 6:10:03वनवासी जो हैं उनका एक उपनाम कमर है और आज
- 6:10:06भी कमर उपनाम के वनवासी जबलपुर मंडला
- 6:10:08छत्तीसगढ़ निर्माण क्षेत्र में मिलते हैं।
- 6:10:10इनका आंतरिक संगठन ज्ञान और वीरता का भाव
- 6:10:12अद्भुत होता है और हर युग के विदेशी
- 6:10:15आक्रांताओं का मुकाबला इस समाज ने सदैव
- 6:10:17साहस और वीरता से किया है। इंदौर के होलकर
- 6:10:20राज्य में भी अधिकांश मैदानी प्रधान के पद
- 6:10:23कमर और वीरों के पास ही रहते थे। आई होप
- 6:10:27जो जानकारी आपको सीताराम कंवर जी के बारे
- 6:10:30में दी गई है आपको अच्छी लगी होगी और आप
- 6:10:33लोगों को यह जो मध्य प्रदेश के वीरों का
- 6:10:35इतिहास जो सीरीज है उसमें आप हर दिन एक नए
- 6:10:38वीर योद्धा के बारे में जानते हैं और इससे
- 6:10:40आप अपने एग्जाम में भी इस जानकारी का
- 6:10:42सदुपयोग कर पाएंगे। तो इसी के साथ इस सेशन
- 6:10:45को मैं यहीं समाप्त करता हूं। कल फिर
- 6:10:47मिलेंगे एक महत्वपूर्ण वीर योद्धा के साथ
- 6:10:50और चर्चा करेंगे आगे। तब तक के लिए जय
- 6:10:53हिंद। थैंक यू।
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This page contains the full transcript of Madhya Pradesh के वीरों का इतिहास | MP Special GK | MP History for MPPSC EXAMS | By Hari Sir by MPPSC StudyIQ, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 69,908 words across 8,719 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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