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Madhya Pradesh के वीरों का इतिहास | MP Special GK | MP History for MPPSC EXAMS | By Hari Sir — Transcript

by MPPSC StudyIQ · 69,908 words · 8,719 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00नमस्कार साथियों, मैं हरी सिंह राजपूत आप
  2. 0:03सभी के लिए एक बेहद ही शानदार क्लास लेकर
  3. 0:05आया हूं और इस क्लास में हम लोग एमपी
  4. 0:08हिस्ट्री स्पेशल एक पूरा का पूरा वीडियो
  5. 0:10कवर करेंगे जिसमें मैं आपको आप देख सकते
  6. 0:12हैं लिखा है मध्य प्रदेश के वीरों का
  7. 0:14इतिहास। यानी इस वीडियो में हम उन सभी
  8. 0:17वीरों के बारे में बात करेंगे। में उन सभी
  9. 0:19वीरों के इतिहास के बारे में बात करेंगे
  10. 0:21जिन्होंने मध्य प्रदेश के इतिहास में अपना
  11. 0:24महत्वपूर्ण योगदान रखा है। साथ-साथ जो
  12. 0:26एमपीपीएससी के एग्जाम के लिए बहुत ही
  13. 0:29महत्वपूर्ण है। चाहे वह रानी दुर्गावती
  14. 0:31हो, चाहे वह राजा शंकर शाह हो, चाहे वह
  15. 0:33राजा संग्राम शाह गोंड हो, चाहे वह रानी
  16. 0:36अवंती बाई हो, चाहे वह भीमा नायक हो, चाहे
  17. 0:38वो टंट्या भील हो, चाहे वो शहादत खान हो,
  18. 0:41जितने भी हमारे क्रांतिकारी रहे हैं,
  19. 0:43जितने भी हमारे वीर योद्धा रहे हैं,
  20. 0:45जिन्होंने मध्य प्रदेश के इतिहास में अपना
  21. 0:47महत्वपूर्ण योगदान दिया है, उन सभी को इस
  22. 0:50वीडियो में हम लोग समझने वाले हैं। आप देख
  23. 0:52सकते हैं रानी कमलापति भी इसमें हैं। इसके
  24. 0:55अलावा चंद्रशेखर आजाद भी इसमें हैं। यानी
  25. 0:57इस पूरे वीडियो में हम इन सभी की बात करने
  26. 0:59वाले हैं। यह क्लास काफी धमाकेदार होने
  27. 1:02वाली है। तो जुड़े रहिए इस वीडियो में।
  28. 1:04लेकिन इससे पहले मैं आपको बता दूं हमारा
  29. 1:06एक शानदार ऑफर चल रहा है। देखिए हमारा
  30. 1:08शानदार ऑफर क्या है कि अभी हमारा एक बैच
  31. 1:10ल्च हुआ है जिसका नाम है आरंभ 17.0।
  32. 1:14आरंभ 17.0 याद रखिएगा प्री से लेके
  33. 1:16इंटरव्यू तक का वन स्टॉप सॉल्यूशन। यानी
  34. 1:19इसमें आपको मिलेगा वन स्टॉप सॉल्यूशन।
  35. 1:21प्री से लेके इंटरव्यू तक की पूरी तैयारी
  36. 1:23की जिम्मेदारी स्टडी आईक्यू और हमारी है।
  37. 1:26इस बैच में आपको लाइव क्लासेस मिलेगी।
  38. 1:29लाइव क्लासेस के साथ-साथ आपको रिकॉर्डेड
  39. 1:31क्लासेस मिलेगी और बहुत कुछ इसमें आपको
  40. 1:32मिलने वाला है। आपको करना क्या है? आप
  41. 1:34मेरा रेफरल कोड यूज़ कर सकते हैं। हरी
  42. 1:36लाइव। जैसे ही आप मेरा रेफरल कोड हरी लाइव
  43. 1:39यूज़ करेंगे आपको मैक्सिमम इस पर डिस्काउंट
  44. 1:42भी मिल सकता है। इसके साथ-साथ क्योंकि इस
  45. 1:45समय न्यू ईयर सेल चल रही है। जैसा कि आप
  46. 1:48सबको पता है आज 31 दिसंबर है और कल से
  47. 1:51शुरू होने वाला है नया साल और स्टडी
  48. 1:53आईक्यू दे रहा है आपको नव वर्ष पर ढेर
  49. 1:56सारे ऑफर दे रहा है। जिसमें आपको बता दूं
  50. 1:58मैं कि सबसे पहले तो आपको मिल रहा है जो
  51. 2:00हमारी फीस है उस पर 50% का ऑफ। यानी अगर
  52. 2:03आप आज 12:00 बजे से पहले ऑफर यानी कोई भी
  53. 2:06कोर्स एमबीपीएससी का परचेस करते हैं तो
  54. 2:08आपको 50% का ऑफ मिलने वाला है। दूसरी
  55. 2:10इंपॉर्टेंट चीज कोई भी कोर्स परचेस करने
  56. 2:13पर आपको डबल वैलिडिटी मिलने वाली है। यानी
  57. 2:15जो भी वैलिडिटी है कोर्स की वो डबल हो
  58. 2:18जाएगी। और तीसरी खास बात इसमें है जो आपको
  59. 2:20याद रखना है कि कोई भी कोर्स स्टडी आईक्यू
  60. 2:24का जो आप खरीदते हैं जो ₹10,000 से अधिक
  61. 2:26का है। कितने का? ₹10,000 से अधिक का है।
  62. 2:29उसमें आपको श्यर्ड गिफ्ट मिलेंगे। जैसे
  63. 2:32iPhone मिल सकता है, टैबलेट मिल सकता है,
  64. 2:34एयरपड्स मिल सकते हैं। तो ढेर सारे गिफ्ट
  65. 2:36स्टडी आईक्यू की टीम के द्वारा रखे गए
  66. 2:38हैं। बस यह याद रखना है कि जो यह सेल है
  67. 2:42याद रखिएगा यह 4 जनवरी तक है। कितने तक
  68. 2:44है? 4 जनवरी तक है। तो आपको याद रखना है
  69. 2:46कि आप कोशिश कीजिए कि आज से 4 जनवरी तक जो
  70. 2:50है आप अपने मनपसंद कोर्स को एनरोल कर लें।
  71. 2:53तो आइए हम लोग क्लास को कंटिन्यू करते हैं
  72. 2:55और इस क्लास में हम लोग पढ़ने वाले हैं
  73. 2:58एक-एक करके सभी मध्य प्रदेश के वीरों के
  74. 3:00इतिहास के बारे में।
  75. 3:02थैंक यू।
  76. 3:12नमस्कार साथियों, आप सभी का एमपीबीएससी
  77. 3:15स्टडी आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है।
  78. 3:17उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे होंगे और आप
  79. 3:19सभी की तैयारी बेहतर चल रही होगी। दोस्तों
  80. 3:22मध्य प्रदेश के वीरों के इतिहास की सीरीज
  81. 3:24में आज हम बात करने वाले हैं मातृभूमि के
  82. 3:27सच्चे सपूत मातृभूमि के सच्चे वीर बात
  83. 3:30करने वाले हम लोग चंद्रशेखर आजाद के बारे
  84. 3:33में। यूं तो चंद्रशेखर आजाद के बारे में
  85. 3:36आप लोगों ने पहले पढ़ा होगा। लेकिन थोड़ी
  86. 3:38सी बात हम लोग भी करेंगे कि चंद्रशेखर
  87. 3:40आजाद जिन्हें हम शहीद के नाम से जानते
  88. 3:43हैं। तो सही चंद्रशेखर आजाद कौन थे? और
  89. 3:45किस प्रकार उन्होंने जो है स्वतंत्रता
  90. 3:47आंदोलन में अपना योगदान दिया। आज के हम इस
  91. 3:50लेक्चर में शहीद चंद्रशेखर आजाद के बारे
  92. 3:52में बात करेंगे। एक और इंपॉर्टेंट बात कि
  93. 3:55शहीद एआम कहा जाता है भगत सिंह को और शहीद
  94. 3:58कहा जाता है चंद्रशेखर आजाद को। शहीद
  95. 4:00चंद्रशेखर आजाद और शहीद एआम भगत सिंह
  96. 4:03दोनों में थोड़ा सा डिफरेंस याद रखिएगा।
  97. 4:05अब कौन है चंद्रशेखर आजाद और किस तरीके से
  98. 4:07इन्होंने क्रांतिकारी आंदोलन में अपना
  99. 4:10योगदान दिया। भारत की आजादी में इन्होंने
  100. 4:12अपना योगदान दिया। तो आइए चर्चा करते हैं
  101. 4:14चंद्रशेखर आजाद की। सबसे पहले चंद्रशेखर
  102. 4:17आजाद के बारे में हम उनका बायोडाटा देखते
  103. 4:19हैं कि वह कौन थे? उनके पिताजी का नाम
  104. 4:21क्या था? तो इनका पूरा नाम था चंद्रशेखर
  105. 4:24तिवारी। नंबर वन आपको याद रखना है कि
  106. 4:27चंद्रशेखर आजाद जो हैं उनका पूरा नाम क्या
  107. 4:29था? चंद्रशेखर तिवारी था। इनके पिता का
  108. 4:31नाम याद रखिएगा इनके पिता का नाम था पंडित
  109. 4:34सीताराम तिवारी। पंडित सीताराम तिवारी कौन
  110. 4:37थे? पंडित सीताराम तिवारी उनके पिता का
  111. 4:39नाम था। और पंडित सीताराम तिवारी के घर
  112. 4:42में 23 जुलाई याद रखिएगा 23 जुलाई 1906 को
  113. 4:46जन्म होता है चंद्रशेखर आजाद का। तो
  114. 4:49चंद्रशेखर आजाद का जन्म कब हुआ था? 23
  115. 4:51जुलाई को और 23 जुलाई 1906 को इनका जो
  116. 4:54जन्म है वो हुआ था एक गांव है जिसका नाम
  117. 4:56है भाबरा गांव। भाबरा गांव पहले झाबुआ
  118. 5:00जिले में आता था। लेकिन वर्तमान में यह जो
  119. 5:02है वो अली अलीराजपुर मध्य प्रदेश का
  120. 5:04हिस्सा है। याद रखिएगा। सवाल ये उठता है
  121. 5:07कि चंद्रशेखर आजाद और उनकी जो फैमिली है
  122. 5:10वो यहां पे क्या कर रहे हैं? क्योंकि कहा
  123. 5:12जाता है कि उनका जो मूल स्थान है जहां से
  124. 5:14वो लोग आए थे वो उत्तर प्रदेश था। तो आइए
  125. 5:17चर्चा करते हैं। तो सबसे पहले देखते हैं
  126. 5:19पहले उनकी माता का नाम भी देख लेते हैं
  127. 5:21क्योंकि एग्जाम में कई बार पूछा गया है कि
  128. 5:23उनकी माता का नाम क्या था? जगरानी देवी।
  129. 5:24तो इसमें हमने अभी चार चीजें जान ली। नंबर
  130. 5:26वन उनका बर्थ हुआ है 23 जुलाई 1906 को
  131. 5:30भाबरा ग्राम में। और भाबरा ग्राम पड़ता
  132. 5:31है। वर्तमान अलीराजपुर जिले के याद रखिएगा
  133. 5:35अलीराजपुर जिले में याद रखिएगा भाबरा
  134. 5:37ग्राम है। पहले एक्चुअली में यह झाबुआ
  135. 5:39ग्राम झाबुआ जिले में आता था जिसकी वजह से
  136. 5:41आपको कंफ्यूजन हो सकती है। और इस भाव जो
  137. 5:45गांव है इसका नाम वर्तमान में क्या कर
  138. 5:47दिया गया? चंद्रशेखर आजाद नगर। चंद्रशेखर
  139. 5:50आजाद नगर कर दिया गया है। उनके बर्थ की
  140. 5:53वजह से चंद्रशेखर आजाद नगर। ठीक है? तो
  141. 5:55चंद्रशेखर आजाद नगर किसका नाम है? भाबरा
  142. 5:58ग्राम का है जो कि वर्तमान में मध्य
  143. 6:00प्रदेश के अलीराजपुर जिले में आता है। अब
  144. 6:02आप इस तस्वीर को देखिए। क्या इस तस्वीर से
  145. 6:05खूबसूरत कोई दूसरी तस्वीर हो सकती है?
  146. 6:08क्या यह जो शख्स आपको दिख रहा है जो हमेशा
  147. 6:10अपनी मूछों पे ताव देते हुए आपको नजर
  148. 6:12आएंगे। यही है हमारे द ग्रेट चंद्रशेखर
  149. 6:15आजाद। वही चंद्रशेखर आजाद जिन्होंने
  150. 6:18सोंडर्स की हत्या में अपना बहुत
  151. 6:20इंपॉर्टेंट रोल प्ले किया। जिन्होंने
  152. 6:21वायसराय को मारने का प्रयास किया।
  153. 6:23जिन्होंने एक बहुत बड़ी पार्टी बनाई जिसका
  154. 6:26नाम था हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन
  155. 6:28पार्टी। तो आइए चर्चा करते हैं चंद्रशेखर
  156. 6:31आजाद की। तो चंद्रशेखर आजाद के जो फैमिली
  157. 6:34थी वो बेसिकली उत्तर प्रदेश के उन्नाव
  158. 6:36जिले से बिलोंग करती थी। उत्तर प्रदेश में
  159. 6:38उन्नाव जिले में एक बदर गांव था। वहां के
  160. 6:40ये लोग रहने वाले थे। लेकिन वहां पे भीषण
  161. 6:43अकाल पड़ा और अकाल के दौरान ये लोग कहां आ
  162. 6:45जाते हैं? अकाल के दौरान यह मध्य प्रदेश
  163. 6:47के भाबरा ग्राम में आ जाते हैं। अगर आप
  164. 6:50मध्य प्रदेश से बिलोंग करते हैं या आपको
  165. 6:52पता है कि जो झाबुआ वाला पार्ट है
  166. 6:54अलीराजपुर वाला वो पश्चिमी मध्य प्रदेश का
  167. 6:57पार्ट है और इस पश्चिमी मध्य प्रदेश में
  168. 7:00सबसे ज्यादा पाए जाते हैं भील। ये यानी
  169. 7:03भील जनजाति का क्षेत्र था। क्योंकि आसपास
  170. 7:06भीलों का क्षेत्र था। इसीलिए यहां पर
  171. 7:08चंद्रशेखर आजाद ने क्या किया था? यहां पर
  172. 7:10धनुष बाण चलाना सीखा। निशाना लगाना सीखा।
  173. 7:13यानी चंद्रशेखर आजाद का जो बचपन है वो
  174. 7:16भीलों के साथ बीता जो जन्म से ही बहुत
  175. 7:18अच्छे तीरंदाज होते हैं, बहुत अच्छे
  176. 7:21निशांची होते हैं और वीर प्रवृत्ति के
  177. 7:23होते हैं। तो उनको वो पूरा एनवायरमेंट
  178. 7:25मिला जिससे कि उनकी जो मानसिकता है वो
  179. 7:27एकदम वीरता वाली हो गई। तो ये तो उनका
  180. 7:30इंट्रोडक्शन हो गया। कहां से बिलोंग करते
  181. 7:32थे। ठीक है? कहां से आए थे? उन्नाव जिले
  182. 7:34के बदरगांव से आए थे। और भावरा जो कि
  183. 7:36वर्तमान अलीराजपुर जिले में है वहां पे बस
  184. 7:38गए थे। अब बात करते हैं इनकी प्रारंभिक
  185. 7:40शिक्षा की। इनका जो प्राइमरी एजुकेशन है
  186. 7:42वह भाबवरा गांव में हुआ हुआ था और भाबरा
  187. 7:45गांव जिसे हम वर्तमान में अलीराजपुर नगर
  188. 7:47चंद्रशेखर आजाद नगर के नाम से जानते हैं।
  189. 7:49इसके बाद इन्होंने आगे की शिक्षा के लिए
  190. 7:51याद रखिएगा बनारस गए। बनारस में एक कॉलेज
  191. 7:54है जिसको हम बोलते हैं क्वींस कॉलेज। याद
  192. 7:56रखिएगा यह बहुत इंपॉर्टेंट हो सकता है। तो
  193. 7:58क्वींस कॉलेज से इन्होंने अपना हायर
  194. 8:01एजुकेशन कंप्लीट किया क्वींस कॉलेज में।
  195. 8:04और इसी क्वींस कॉलेज में पढ़ते हुए एक
  196. 8:05घटना होती है जिसमें हम अभी चर्चा करेंगे।
  197. 8:08बनारस बनारस में जब ये थे क्वींस कॉलेज
  198. 8:11में जब ये स्टडी कर रहे थे उसी समय
  199. 8:13इन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन के बारे में
  200. 8:14जाना और गांधी जी के असहयोग आंदोलन के
  201. 8:16बारे में सुना और याद रखिएगा इन्होंने
  202. 8:19अपने पहली बार इन्होंने जिस आंदोलन से खुद
  203. 8:22को जोड़ा वो था राष्ट्रीय आंदोलन और खासकर
  204. 8:24गांधी जी का असहयोग आंदोलन।
  205. 8:271920 में गांधी जी ने एक आंदोलन चलाया था
  206. 8:29जिसे हम असहयोग आंदोलन के नाम से जानते
  207. 8:31हैं और इस आंदोलन के माध्यम से गांधी जी
  208. 8:34ने कहा था कि अगर आप लोग मेरा एक साल तक
  209. 8:36समर्थन देंगे तो एक साल के अंदर मैं
  210. 8:38अंग्रेजों को भारत से खदेड़ दूंगा यानी
  211. 8:41भारत अंग्रेज छोड़ने के लिए मजबूर हो
  212. 8:43जाएंगे गांधी जी ने यह असहयोग आंदोलन
  213. 8:45चलाया। अब धीरे-धीरे समय बीता लेकिन
  214. 8:48आंदोलन बहुत तेजी से बढ़ा। आंदोलन जब तेजी
  215. 8:51से बढ़ रहा था बाद में आपने सुना होगा एक
  216. 8:53घटना होती है जिसे हम चौरीचौरा कांड के
  217. 8:55नाम से जानते हैं और उसकी वजह से गांधी जी
  218. 8:57ने अपना असहयोग आंदोलन वापस ले लिया। जब
  219. 9:00गांधी जी ने अपना असहयोग आंदोलन वापस ले
  220. 9:02लिया जिसकी वजह से हमारे चंद्रशेखर जो
  221. 9:04आजाद हैं वो क्या होते हैं? वो उनको बड़ा
  222. 9:07दुख पहुंचता है कि क्यों गांधी जी ने अपना
  223. 9:09आंदोलन वापस ले लिया? एक अच्छा मौका था
  224. 9:11अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने का। तो 1921
  225. 9:14में असहयोग आंदोलन के दौरान वह पहली बार
  226. 9:16गिरफ्तार हुए। यानी अगर कभी पूछा जाए पहली
  227. 9:18बार चंद्रशेखर आजाद किस आंदोलन से जुड़े
  228. 9:21असहयोग आंदोलन से 1921 में और 1921 में जब
  229. 9:24वो एक बार विरोध कर रहे थे ब्रिटिश सरकार
  230. 9:27का तभी उन्हें कर लिया गया गिरफ्तार।
  231. 9:29गिरफ्तार जब उन्हें किया गया तब न्यायाधीश
  232. 9:32ने उनसे पूछा कि भैया न्यायाधीश पूछता है
  233. 9:36कि उनका नाम क्या है? तो चंद्रशेखर आजाद
  234. 9:38कहते हैं मेरा नाम है आजाद।
  235. 9:42न्यायाधीश पूछता है आपके पिता का नाम क्या
  236. 9:44है? तो चंद्रशेखर आजाद कहते हैं
  237. 9:46स्वतंत्रता।
  238. 9:48न्यायाधीश पूछता है आपका घर कहां है? आपका
  239. 9:51निवास क्या है? तो वह कहते हैं जेलखाना और
  240. 9:55तभी से क्योंकि उन्होंने भरे कोर्ट में
  241. 9:58न्यायाधीश के समक्ष वीरतापूर्ण तरीके से
  242. 10:00कहा कि मैं आजाद हूं। मेरे पिता का नाम
  243. 10:03स्वतंत्रता है और मेरा घर है जेलखाना।
  244. 10:05न्यायाधीश ने उनको सजा दी। और यहीं से याद
  245. 10:08रखिएगा उनका नाम पड़ गया था चंद्रशेखर
  246. 10:10आजाद। उनके नाम के साथ जुड़ गया चंद्रशेखर
  247. 10:13तिवारी से चंद्रशेखर आजाद क्योंकि
  248. 10:15उन्होंने खुद को आजाद बोल दिया। अब
  249. 10:17क्योंकि जब उन्होंने न्यायाधीश को इस
  250. 10:19तरीके से कहा तो यहां पर न्यायाधीश के
  251. 10:21द्वारा उनको सजा दी गई थी 15 बेत की।
  252. 10:24कितने की? 15 बेत की सजा दी गई। अभी उनकी
  253. 10:27उम्र ज्यादा नहीं थी और उनके ऊपर 15 बेत
  254. 10:29चलाए गए और जब उनके ऊपर बेत मारे जा रहे
  255. 10:32थे तो वह कह रहे थे भारत माता की जय।
  256. 10:35गांधी जी जिंदाबाद। भारत माता की जय। तो
  257. 10:40इस प्रकार चंद्रशेखर आजाद ने वह 15 वैदत
  258. 10:42पूरे के पूरे जो है खाए लेकिन उफ तक नहीं
  259. 10:45किया और ना ही उन्होंने उस दर्द को बयां
  260. 10:47किया और वह अपना मूछ पे ताव देते हैं और
  261. 10:51क्योंकि उन्होंने 15 वेद खाए तो उनको कुछ
  262. 10:53आना कुछ पैसे उनको सरकार द्वारा दिए गए
  263. 10:55जिस क्योंकि उन्होंने वह बैत खाए थे लेकिन
  264. 10:57उन पैसों को वो उसी अधिकारी के मुंह पर
  265. 11:00मारकर वहां से चले गए। तो इस प्रकार उनका
  266. 11:02नाम पड़ा था आजाद। आपको याद रखना है। ठीक
  267. 11:04है? तो एक इंपॉर्टेंट पार्ट यह हो गया। अब
  268. 11:07आते हैं कि वह आगे क्रांतिकारी आंदोलन से
  269. 11:10कैसे जुड़ते हैं? क्योंकि पहले गांधी जी
  270. 11:12के साथ जुड़े उन्हें लग रहा था कि गांधी
  271. 11:14जी का यह आंदोलन हमें आजादी दिला देगा।
  272. 11:16लेकिन गांधी जी ने जब असहयोग आंदोलन बंद
  273. 11:18कर दिया तब शुरुआत होती है दूसरे
  274. 11:20क्रांतिकारी आंदोलनों की। आइए चर्चा करते
  275. 11:23हैं। गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन के
  276. 11:25निलंबन ने उन्हें निराश कर दिया क्योंकि
  277. 11:27गांधी जी ने अचानक असहयोग आंदोलन को बंद
  278. 11:30कर दिया। चंद्रशेखर आजाद के साथ-साथ भारत
  279. 11:32के बहुत बड़े-बड़े नेता जैसे मोतीलाल
  280. 11:34नेहरू और मोतीलाल नेहरू का नाम आपने सुना
  281. 11:37होगा सीआर दास यानी चित्रंजन दास जैसे
  282. 11:39नेताओं ने गांधी जी के इस फैसले का विरोध
  283. 11:42किया था। उन्हीं में चंद्रशेखर आजाद हैं
  284. 11:44जिनको बुरा लगा कि यार गांधी जी ने क्यों
  285. 11:46यह आंदोलन समाप्त कर दिया? उसके बाद क्या
  286. 11:48होता है? कहानी शुरू होती है। कहानी कैसे
  287. 11:51शुरू होती है कि अभी जो भारत के
  288. 11:53रिवोल्यूशनरी थे, क्रांतिकारी थे, वह
  289. 11:55गांधी जी का साथ दे रहे थे। लेकिन अब
  290. 11:58बंगाल,
  291. 12:00बिहार और यूपी इन तीनों जगह के
  292. 12:04क्रांतिकारी जो है इकट्ठे होते हैं और
  293. 12:06इकट्ठे होकर एक जगह में मीटिंग बुलाते हैं
  294. 12:08जिसका नाम होता है कानपुर। तो कानपुर में
  295. 12:11क्रांतिकारियों की एक मीटिंग होती है और
  296. 12:13मीटिंग में यह तय होता है कि गांधी जी ने
  297. 12:15यह जो आंदोलन बंद किया है इस तरीके से अब
  298. 12:18हमको आजादी नहीं मिलने वाली और अगर हमें
  299. 12:20आजादी चाहिए तो अब हमें हथियारों का उपयोग
  300. 12:22करना पड़ेगा और अब हमें सीधा अंग्रेजों से
  301. 12:26लड़ना पड़ेगा। इसी सीक्वेंस में जब ये
  302. 12:28बातें हो रही थी तो इसी सीक्वेंस में एक
  303. 12:30इंपॉर्टेंट काम होता है। 1924 में कानपुर
  304. 12:33में एक आर्मी यानी एक संगठन का निर्माण
  305. 12:36होता है जिसे हम लोग जनरली हिंदुस्तान
  306. 12:38रिपब्लिकन एसोसिएशन यानी एचआरए के नाम से
  307. 12:41जानते हैं। एग्जाम में क्वेश्चन पूछा जाता
  308. 12:43है कि एचआरए कब बना था? याद रखिएगा। तो
  309. 12:45एचआरए बना था 1924 में और एचआरए के जो
  310. 12:48फाउंडर हैं उनका नाम था सचिंद्र सान्याल।
  311. 12:51क्या नाम था बच्चों? सचिंद्र सान्याल।
  312. 12:54सचिंद्र सान्याल के द्वारा एक क्रांतिकारी
  313. 12:56संगठन बनाया गया कानपुर में 1924 में और
  314. 12:59इस संगठन का नाम था एचआरए यानी हिंदुस्तान
  315. 13:02रिपब्लिकन एसोसिएशन और इस एसोसिएशन से
  316. 13:04बड़े-बड़े क्रांतिकारी जुड़े जिसमें पंडित
  317. 13:06राम प्रसाद बिस्मिल राजेंद्र लहड़ी अशफाक
  318. 13:10उल्लाह खान जैसे लोग थे और उसी में शामिल
  319. 13:12हैं हमारे शहीद चंद्रशेखर आजाद। अब
  320. 13:16सचिंद्र सान्याल के द्वारा यह पार्टी बनाई
  321. 13:18गई और इस पार्टी ने अपना उद्देश्य रखा कि
  322. 13:20हम हथियारों के दम पर भारत की आजादी
  323. 13:22प्राप्त करेंगे। ठीक है? तो बाद में 1928
  324. 13:25में एक उन्होंने इस पार्टी को रिफॉर्म
  325. 13:27किया था। वो मैं आगे आपको बताऊंगा। अभी आप
  326. 13:29देख सकते हैं। 1928 में उन्होंने एक और
  327. 13:31पार्टी बनाई थी जिसका नाम था हिंदुस्तान
  328. 13:33सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। वो क्यों
  329. 13:36बनानी पड़ी? अभी हम इस पे चर्चा करेंगे।
  330. 13:39अब होता क्या है कि उन्होंने पार्टी बना
  331. 13:41ली। पार्टी बना ली तो कुछ ना कुछ घटनाक्रम
  332. 13:43तो करना पड़ेगा क्योंकि एचआरए यानी
  333. 13:45हिंदुस्तान रिपब्ल हिंदुस्तान
  334. 13:48रिपब्लिकन एसोसिएशन बन चुका है तो कुछ ना
  335. 13:50कुछ तो करना पड़ेगा। सरकार को जवाब तो
  336. 13:52देना पड़ेगा और इसी क्रम में चंद्रशेखर
  337. 13:55आजाद के जो मेन क्रांतिकारी घटना है वो
  338. 13:57आपको मैं बताने वाला हूं। ध्यान से
  339. 13:59सुनिएगा आप। पहला जो उनका काम है वो है
  340. 14:02काकोरी ट्रेन डकैती 1925। इसको वर्तमान
  341. 14:06में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसका नाम बदल
  342. 14:08दिया है। इसको बोलते हैं काकोरी ट्रेन
  343. 14:10एक्शन डे। काकोरी ट्रेन एक्शन डे कब हुआ
  344. 14:12था? 9 अगस्त 1925 को। क्या है यह
  345. 14:15घटनाक्रम? आइए इस घटनाक्रम को समझते हैं।
  346. 14:18इस घटनाक्रम में क्या होता है कि एचआरए के
  347. 14:22जितने भी लोग थे उन्होंने एक प्लान बनाया
  348. 14:24कि हम सरकारी खजाने को लूटेंगे। तो एक
  349. 14:26ट्रेन है जो कि जाती थी लखनऊ से सहारनपुर।
  350. 14:29लखनऊ से सहारनपुर एक ट्रेन जाती थी दो
  351. 14:32स्टेशनों के बीच लखनऊ और जाती थी
  352. 14:34सहारनपुर।
  353. 14:36तो लखनऊ से सहारनपुर जब ट्रेन जा रही थी
  354. 14:38और इस ट्रेन में सरकारी खजाना था। ठीक है?
  355. 14:42इस ट्रेन का नाम था एट डाउन ट्रेन। क्या
  356. 14:45नाम था? एट डाउन ट्रेन थी। और इस ट्रेन
  357. 14:48में दोनों स्टेशनों के बीच एक स्टेशन
  358. 14:51पड़ता था। उसका नाम था काकोरी स्टेशन जो
  359. 14:53कि उत्तर प्रदेश में पड़ता है। तो काकोरी
  360. 14:55नामक स्टेशन पर यह प्लान किया गया कि हम
  361. 14:58इस स्टेशन पर क्या करेंगे? इस ट्रेन को
  362. 15:00लूटेंगे क्योंकि इस ट्रेन में एट डाउन
  363. 15:02ट्रेन में जा रहा था सरकारी खजाना। तो इस
  364. 15:05सरकारी खजाने को एचआरए के द्वारा लूटने का
  365. 15:08प्रयास किया गया। इसमें क्या है? सरकारी
  366. 15:10खजाना। अब कौन लोग लूटने के लिए आए हैं?
  367. 15:13एचआरए। एचआरए कौन है? हिंदुस्तान
  368. 15:15रिपब्लिकन एसोसिएशन जो संगठन जिसे सचिंद्र
  369. 15:18सान्याल के द्वारा बनाया गया। एचआरए ने
  370. 15:20अपने जीवन का पहला काम किया। पहला काम
  371. 15:23क्या किया? कि इस काकोरी नामक स्टेशन पर
  372. 15:25उन्होंने इस ट्रेन को क्या किया? लूट
  373. 15:27लिया। इस घटना को भारतीय इतिहास में क्या
  374. 15:30कहते हैं? इस घटना को भारतीय इतिहास में
  375. 15:32बोलते हैं काकोरी कांड या इसको बोलते हैं
  376. 15:34काकोरी ट्रेन एक्शन डे। तो यह था काकोरी
  377. 15:37कांड जो कि किस दिन हुआ था? काकोरी कांड
  378. 15:39हुआ था 9 अगस्त 1925 को। याद रखिएगा।
  379. 15:439 अगस्त 1925 को तो 9 अगस्त 1925 को
  380. 15:47सरकारी खजाना लूटने के लिए एचआरए के
  381. 15:50क्रांतिकारियों के द्वारा काकोरी नामक
  382. 15:52स्टेशन पर ट्रेन को लूटा गया। लेकिन इस
  383. 15:55ट्रेन के लूट के बाद यह लूट तो लिया
  384. 15:57उन्होंने लेकिन इसके बाद पुलिस द्वारा जब
  385. 15:59इन लोगों को पकड़ा गया पुलिस द्वारा जब
  386. 16:02केस किया गया और पुलिस द्वारा जब गिरफ्तार
  387. 16:03किया गया तो ज्यादातर एचआरए के मेंबर जेल
  388. 16:07में चले गए और चार लोगों को फांसी हो गई।
  389. 16:09पंडित राम प्रसाद बिस्मिल
  390. 16:12आपने नाम सुना होगा पंडित राम प्रसाद
  391. 16:15बिस्मिल इसके अलावा अशफाक उल्ला खान
  392. 16:19अशफाक उल्ला खान राजेंद्र लाहड़ी
  393. 16:27राजेंद्र लाहड़ी और ठाकुर रोशन सिंह ठाकुर
  394. 16:31रोशन सिंह इन चार लोगों को इस केस में जो
  395. 16:34है फांसी दे दी गई थी। बाकी लोगों को जेल
  396. 16:37में डाल दिया गया। सचिंद्र सान्याल को भी
  397. 16:40जेल हो गई। केवल एकमात्र क्रांतिकारी हैं
  398. 16:43जो बच निकले क्योंकि उन्होंने बचपन में
  399. 16:45कसम खाई थी कि मैं आजाद हूं आजाद ही
  400. 16:48रहूंगा वो थे हमारे चंद्रशेखर आजाद तो कौन
  401. 16:51निकले बच निकले चंद्रशेखर आजाद काकोरी
  402. 16:54कांड में बच गए और कुछ समय के लिए
  403. 16:56अंडरग्राउंड हो गए यानी पुलिस से छुपकर
  404. 16:58रहने लगे तो एचआरए किसने बनाया था सचिंद्र
  405. 17:01सान्याल ने बनाया था 1924 में कानपुर में
  406. 17:04और इसका पहला काम क्या था काकोरी कांड याद
  407. 17:07रखिएगा और यह जो इसके फाउंडर थे सचिंद्र
  408. 17:10सान्याल उनको को जेल हो गई थी और सचिंद्र
  409. 17:12सान्याल ने जेल में एक किताब लिखी है
  410. 17:14क्योंकि उन्होंने अपना बाकी जीवन जेल में
  411. 17:17बिताया और उनकी पुस्तक का नाम आप लोगों ने
  412. 17:20एग्जाम में सुना होगा कई बार आती है बंदी
  413. 17:23जीवन तो याद रखिएगा बंदी जीवन किसकी
  414. 17:25पुस्तक है तो बंदी जीवन पुस्तक है सचिंद्र
  415. 17:27सान्याल की तो अब चंद्रशेखर आजाद क्या
  416. 17:30करेंगे चंद्रशेखर आजाद ने क्या किया अपना
  417. 17:32ठिकाना बदला और वो क्योंकि ये पूरा का
  418. 17:35पूरा जो एचआरए समाप्त हो गया उसके
  419. 17:36ज्यादातर मेंबर जेल में है चार मेन लोगों
  420. 17:38को फांसी हो गई पंडित राम प्रसाद बिस्मिल,
  421. 17:41अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लहाड़ी और
  422. 17:43ठाकुर रोशन सिंह। अशफाक उल्ला खान पहले
  423. 17:45मुस्लिम हैं जो फांसी पर चढ़े। आप लोगों
  424. 17:47ने इनका क्वेश्चन देखा होगा। भारत के पहले
  425. 17:50मुस्लिम क्रांतिकारी जो फांसी पर चढ़े
  426. 17:52उनका नाम था अशफाक उल्ला खान। अब हमारे
  427. 17:54चंद्रशेखर आजाद ने सोचा कि इस केस को
  428. 17:58थोड़ा सा ठंडा होने देते हैं क्योंकि यह
  429. 18:00सरकार की नजरों में अभी तेज था। यानी
  430. 18:02सरकार लोगों को ढूंढ रही थी। चंद्रशेखर
  431. 18:05चंद्रशेखर आजाद पहुंचते हैं हमारे झांसी।
  432. 18:08झांसी के पास आपने सुना है ओरछा। ओरछा के
  433. 18:11पास एक गांव है
  434. 18:13और उस गांव के पास एक नदी बहती है जिसका
  435. 18:16नाम है सतार नदी। इस सतार नदी के पास जो
  436. 18:19है एक कुटिया बनाकर रहने लगे और आज भी उस
  437. 18:21कुटिया में उनकी एक तस्वीर लगी है। आप
  438. 18:23जाकर देख सकते हैं। ठीक है? धीमार गांव
  439. 18:26है। गांव का नाम क्या था? धीमार गांव।
  440. 18:27ओरछा के पास पड़ता है धीमार गांव। इस गांव
  441. 18:30में आज भी उनकी कुटिया बनी है। इस गांव
  442. 18:32में उन्होंने कुछ समय के लिए फरारी काटी
  443. 18:34और उन्होंने अपना नाम रखा था हरिनारायण
  444. 18:37ब्रह्मचारी। हरिनारायण ब्रह्मचारी के रूप
  445. 18:39में वो यहां रहने लगे और इसी समय उन्होंने
  446. 18:42झांसी के पास जो है एक गैरेज में काम किया
  447. 18:45और बताते हैं कार चलाना भी सीखा था। जब
  448. 18:48कुछ साल बीते और यह काकोरी कांड का मुद्दा
  449. 18:51समाप्त हो गया। तब हमारे चंद्रशेखर आजाद
  450. 18:53इस नाम से बाहर निकलते हैं और दोबारा से
  451. 18:56क्रांतिकारी गतिविधियों में जुड़ जाते
  452. 18:57हैं। यानी चंद्रशेखर आजाद रूप बदलने में
  453. 19:00भी माहिर थे। उन्होंने अंग्रेजों को बहुत
  454. 19:02चकमा दिया। किस नाम से? हरिनारायण
  455. 19:04ब्रह्मचारी के नाम से वो कहां रहे थे? याद
  456. 19:07रखिएगा झांसी में। तो उनके जीवन की एक
  457. 19:09बहुत बड़ी घटना थी काकोरी कांड जिसके बारे
  458. 19:11में मैंने आपको बताया। इसके अलावा दूसरी
  459. 19:13घटना देखते हैं। उसके बाद उन्होंने 1928
  460. 19:17में एक और बड़े काम को अंजाम देने का
  461. 19:19प्रयास किया जिसमें वह सफल नहीं हुए और उस
  462. 19:21काम का नाम है वायसराय ट्रेन बम प्रयास।
  463. 19:25मतलब यह कि भारत के जो वायसराॉय थे उनको
  464. 19:27बम से उड़ाने का प्रयास किया ट्रेन में
  465. 19:30लेकिन इस काम में उनको सफलता नहीं मिली।
  466. 19:31दिल्ली में ब्रिटिश वायसराय की हत्या की
  467. 19:33योजना बनाई लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।
  468. 19:35इसके बाद चंद्रशेखर आजाद का जो सबसे बड़ा
  469. 19:38नाम आता है वो आता है लाहौर षड्यंत्र
  470. 19:41मामला 1928 जिसमें उन्होंने क्या किया था
  471. 19:44आप सबको याद होगा कि 1928 में जब साइमन
  472. 19:47कमीशन आया तो साइमन कमीशन का विरोध करते
  473. 19:49हुए लाला लाजपत राय की लाठियों से पीट-पीट
  474. 19:51कर हत्या कर दी गई। उस हत्या का बदला लेने
  475. 19:54के लिए चंद्रशेखर आजाद ने भगत सिंह के साथ
  476. 19:57मिलकर लाहौर के एसएसपी लाहौर का जो एसएसपी
  477. 20:00था जिसका नाम था सोंडर्स उसकी हत्या कर
  478. 20:02दी। तो लाला लाजपत राय की मौत का बदला
  479. 20:04लेने के लिए उन्होंने क्या किया था?
  480. 20:06सोंडर्स नामक जो अंग्रेज अधिकारी था लाहौर
  481. 20:09का उसकी हत्या कर दी और इस हत्या में भगत
  482. 20:11सिंह, राजगुरु और सुखदेव भी शामिल थे। ठीक
  483. 20:14है? याद रखिएगा। तो चंद्रशेखर आजाद का एक
  484. 20:16काम क्या हो जाएगा? लाहौर षड्यंत्र केस या
  485. 20:18साउंडर्स की हत्या करना। एक काम क्या है?
  486. 20:20वायसराय को ट्रेन से उड़ा ट्रेन में बम से
  487. 20:23उड़ाने का प्रयास। हालांकि इसमें सफलता
  488. 20:24नहीं मिली। और एक हो गया काकोरी ट्रेन
  489. 20:26एक्शन डे। इसके अलावा याद रखिएगा उनकी
  490. 20:29विचारधारा ब्रिटिश उत्पीड़न के खिलाफ
  491. 20:30सशस्त्र क्रांति में विश्वास रखती थी।
  492. 20:32जैसा मैंने आपको बता दिया। उनका आदर्श
  493. 20:34वाक्य है कि शक्ति के माध्यम से
  494. 20:36स्वतंत्रता समर्पण के माध्यम से नहीं
  495. 20:39विचारधारा है विदेशी शासन का अंत समाजवाद
  496. 20:42की स्थापना युवाओं में देशभक्ति की भावना
  497. 20:45ये उनका मोटिव रहा है। अब हम और बात करते
  498. 20:49हैं। उनके क्रांतिकारियों से कौन किन
  499. 20:51किस-किस क्रांतिकारियों से संबंधित है? तो
  500. 20:53याद रखिएगा राम प्रसाद बिस्मिल उनके गुरु
  501. 20:55और वरिष्ठ क्रांतिकारी थे। इनको वह बहुत
  502. 20:57मानते थे जिनकी जिनको फांसी दे दी गई थी
  503. 21:00काकोरी कांड में। इसके अलावा उनके साथी और
  504. 21:02सहयोगी हैं। घनिष्ठ सहयोगी हैं जिनका नाम
  505. 21:04भगत सिंह है। अभी हम भगत सिंह के बारे में
  506. 21:06बात करेंगे। इसके अलावा सुखदेव राजगुरु
  507. 21:08बटुकेश्वर दत्त स्वतंत्रता के लिए सहनानी
  508. 21:10है। आजाद ने कई युवा क्रांतिकारियों को
  509. 21:12हथियारों के उपयोग और गोरिल्ला वॉर में
  510. 21:15प्रशिक्षित किया था। क्योंकि चंद्रशेखर
  511. 21:17आजाद एक अच्छे निशांची भी थे और गोरिल्ला
  512. 21:19वॉर में दक्ष भी थे। तो उन्होंने युवाओं
  513. 21:22को ट्रेनिंग दी और ट्रेनिंग देने के लिए
  514. 21:23उन्होंने ये सारी गतिविधियां की। झांसी
  515. 21:25वाला किस्सा मैंने आपको बता दिया कि झांसी
  516. 21:27से 15 कि.मी. दूर ओरछा के जंगलों में वह
  517. 21:30अपने साथियों के साथ निशानेबाजी किया करते
  518. 21:32थे। अचूक निशानेबाज होने के कारण
  519. 21:34चंद्रशेखर आजाद दूसरे क्रांतिकारियों को
  520. 21:36प्रशिक्षण देते थे और यहां पर वो पंडित
  521. 21:39हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से बच्चों को
  522. 21:41पढ़ाने का काम भी करते थे। इसी दरमियान वो
  523. 21:44कहां रहते थे? धिमार गांव में रहते ओरछा
  524. 21:46के बाद जो सतार नदी के किनारे है और इसी
  525. 21:48समय चंद्रशेखर आजाद ने गाड़ी चलाना भी
  526. 21:51सीखा था। तो यह थी चंद्रशेखर आजाद की
  527. 21:53कहानी। अब अंग्रेजों के साथ उनके और जो
  528. 21:57काम रहे उन पे चर्चा करते हैं। अंग्रेजों
  529. 21:59से संघर्ष हुआ तो उन्हें अंग्रेजों ने
  530. 22:01मोस्ट वांटेड क्रिमिनल कह दिया। अंग्रेजों
  531. 22:04ने उन्हें भारत का मोस्ट वांटेड क्रिमिनल
  532. 22:06कह दिया और उन्होंने कभी भी जिंदा नहीं
  533. 22:08पकड़े जाने की कसम खाई थी। चंद्रशेखर आजाद
  534. 22:10ने कसम खाई थी कि वह आजाद हैं और आजाद ही
  535. 22:14रहेंगे। उन्हें अंग्रेज कभी भी पकड़ नहीं
  536. 22:16पाएंगे। उनका सेंटेंस था मैं आजाद हूं।
  537. 22:19आजाद रहूंगा और आजाद ही रहूंगा। ठीक है?
  538. 22:22याद रखिएगा। तो पुलिस ने बहुत पीछा किया
  539. 22:24लेकिन वो उनको पकड़ नहीं पाई। चंद्रशेखर
  540. 22:27आजाद के बारे में कहा जाता है कि उन्हें
  541. 22:29जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए लगभग उस
  542. 22:31समय 5,000 का इनाम सरकार द्वारा घोषित
  543. 22:34किया गया था। चंद्रशेखर आजाद का पता पता
  544. 22:36लगा अह देने वाले को 5,000 का इनाम जिंदा
  545. 22:39या मुर्दा अंग्रेजों द्वारा लगाया गया। यह
  546. 22:42पोस्टर उनके बारे में जानकारी देता है। अब
  547. 22:44हम बात करते हैं आखिरी हमारी एक घटना है
  548. 22:47जिसका नाम है अल्फ्रेड पार्क की घटना। यूं
  549. 22:49तो चंद्रशेखर आजाद का जो मेन अगर आप रोल
  550. 22:52देखेंगे वो है क्रांतिकारियों को ट्रेनिंग
  551. 22:55देना, क्रांतिकारियों को निशानेबाजी,
  552. 22:57क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण देना।
  553. 22:59क्रांतिकारियों को बहुत प्रेरणा उनके
  554. 23:02द्वारा मिली। सभी क्रांतिकारी उन्हें
  555. 23:04पंडित जी कह के बुलाते थे क्योंकि वो
  556. 23:06तिवारी जी थे। चंद्रशेखर आजाद का जो लास्ट
  557. 23:10किस्सा है हम उस पर चल रहे हैं और मैं
  558. 23:11कोशिश करूंगा कि आपको उनके बारे में बहुत
  559. 23:14अच्छे से सारी चीजें समझ में आई। उनका
  560. 23:15बर्थ प्लेस, उनके फादर का नाम, मदर का नाम
  561. 23:18और उनका पहला आंदोलन असहयोग आंदोलन बाद
  562. 23:20में एचआरए से जुड़े काकोरी कांड, ट्रेन
  563. 23:22में वायसराय को मारने की हत्या और सबसे
  564. 23:24पॉपुलर है उनका सडर्स की हत्या में जो
  565. 23:27उनका योगदान रहा। इसके बाद क्या होता है?
  566. 23:30इसके बाद आपको एक घटनाक्रम बताता हूं। इस
  567. 23:32घटनाक्रम को समझने से पहले आपको एक छोटा
  568. 23:35सा पार्ट इसका समझना पड़ेगा। मैंने बता
  569. 23:37दिया था लेकिन दोबारा मैं आपको बता रहा
  570. 23:39हूं। देखिए सबसे पहले वह एक संगठन से
  571. 23:42जुड़े थे जिसका नाम था एचआरए। एचआरए 1924
  572. 23:46में कानपुर में बना था। लेकिन जब हुआ
  573. 23:49काकोरी कांड तो काकोरी कांड की वजह से यह
  574. 23:52जो एचआरए है काकोरी कांड कब हुआ था
  575. 23:54बच्चों? 9 अगस्त 1925 को हुआ था। तब 9
  576. 23:57अगस्त 1925 को जब काकोरी कांड हुआ था।
  577. 24:00जिसकी वजह से एचआरए हो गया था समाप्त।
  578. 24:02यानी एचआरए के ज्यादातर मेंबर कहां चले
  579. 24:04गए? जेल में चले गए। और चार बड़े मेंबर को
  580. 24:07फांसी हो गई। तो फिर बीच में चंद्रशेखर
  581. 24:09आजाद क्या हुए? अंडरग्राउंड हुए। और
  582. 24:11अंडरग्राउंड रहने के बाद बाद में कब आए?
  583. 24:141928 में। 1928 में चंद्रशेखर आजाद के
  584. 24:17द्वारा एक पार्टी बनाई गई और वो भारत की
  585. 24:20बहुत ही फेमस पार्टी रही है। क्रांतिकारी
  586. 24:22संगठन रहा है जिसका नाम था एचएसआरए।
  587. 24:26इसमें सब कुछ पुराना है। बस एक शब्द नया
  588. 24:29है जिसका नाम है एस। एस मतलब था सोशलिस्ट।
  589. 24:32इसका पूरा नाम था
  590. 24:35हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन।
  591. 24:38ये क्या है? एचआरए है हिंदुस्तान
  592. 24:40रिपब्लिकन एसोसिएशन और यह है एचएसआरए।
  593. 24:43इसकी जो स्थापना है उन्होंने की थी दिल्ली
  594. 24:45के फिरोजशाह कोटला मैदान में। दिल्ली के
  595. 24:48फिरोजशाह कोटला मैदान में।
  596. 24:58फिरोजशाह
  597. 25:00कोटला मैदान तो दिल्ली के फिरोजशाह कोटला
  598. 25:03मैदान में चंद्रशेखर आजाद द्वारा एक संगठन
  599. 25:05बनाया गया। इसके संस्थापक कौन थे?
  600. 25:07चंद्रशेखर आजाद। याद रखिएगा चंद्रशेखर
  601. 25:10आजाद के द्वारा एक नया क्रांतिकारी संगठन
  602. 25:13बनाया गया। जिसका नाम था एच एस आर ए। और
  603. 25:16इस संगठन से कई सारे क्रांतिकारी जुड़े
  604. 25:19जिसके एक बहुत ही फेमस मेंबर हैं। कौन?
  605. 25:22भगत सिंह। तो अन्य सदस्यों में कौन थे?
  606. 25:25अन्य सदस्यों में बहुत सारे लोग हैं
  607. 25:27जिसमें भगत सिंह हैं, सुखदेव हैं, राजगुरु
  608. 25:32हैं। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु,
  609. 25:37शिव वर्मा,
  610. 25:39यशपाल,
  611. 25:41भगवती चरण बोरा, यशपाल, भगवती चरण बोरा
  612. 25:45आदि बहुत सारे क्रांतिकारी थे। और इसके जो
  613. 25:48मेन फाउंडर हैं, वह कौन है? चंद्रशेखर
  614. 25:50आजाद। चंद्रशेखर आजाद ने इस पुराने संगठन
  615. 25:53को एचआरए क्योंकि एचआरए किस में इनवॉल्व
  616. 25:55हो गया था? काकोरी कांड में। इसके
  617. 25:57ज्यादातर मेंबर जेल में चले गए। कुछ को
  618. 25:59फांसी हो गई। तो इसको पुनर्जीवित किया और
  619. 26:02इसको रिफॉर्म करके एक नया नाम दिया 1928
  620. 26:04में जिसका नाम था हिंदुस्तान सोशलिस्ट
  621. 26:07रिपब्लिकन एसोसिएशन जिसे हम एचएसआरए कहते
  622. 26:10हैं। एचएसआरए ने दो काम किए थे। एचएसआरए
  623. 26:13ने दो काम क्या किए थे? पहला काम इसने
  624. 26:16किया था सोंडर्स की हत्या जो मैंने आपको
  625. 26:18बताया। सोंडर्स की हत्या किसने की थी?
  626. 26:20सोंडर्स की हत्या की थी चंद्रशेखर आजाद,
  627. 26:23भगत सिंह और सुखदेव यह लोग उसमें इनवॉल्व
  628. 26:26हुए थे। 1928 में इन्होंने अक्टूबर 1928
  629. 26:30में सोडर्स की हत्या कर दी थी लाहौर में।
  630. 26:32और इस केस को भारतीय इतिहास में लाहौर
  631. 26:34कॉस्परेसी केस यानी लाहौर षड्यंत्र केस
  632. 26:37कहते हैं। यह एचएसआरए का पहला काम था। आप
  633. 26:40ऐसा भी समझ सकते हैं कि एचएसआरए ने केवल
  634. 26:44सोंडर्स की हत्या करने के लिए ही मतलब यह
  635. 26:47बना था एचएसआरए। क्योंकि यह जो सडंडर्स है
  636. 26:50इसी के द्वारा जो है लाला लाजपत राय पर
  637. 26:52प्रहार किए गए थे जिसकी वजह से उनकी डेथ
  638. 26:54हो गई। बाद में एचएसआरए ने एक और काम किया
  639. 26:56जो उनका आखिरी काम हो गया और उस काम का
  640. 26:58नाम था केंद्रीय विधानमंडल में बम कांड।
  641. 27:03केंद्रीय जो विधानमंडल है बच्चों केंद्रीय
  642. 27:06विधानमंडल जिसे सेंट्रल लेजिसलेटिव
  643. 27:08असेंबली कहते थे। 1929 में इस पर जो है
  644. 27:12इसकी खाली बेंचों पर भगत सिंह और उनके
  645. 27:15साथी ने क्या किया था? यहां पर याद रखिएगा
  646. 27:17बम फेंके थे और इस घटना से क्या हुआ था?
  647. 27:20सरकार बहुत गुस्सा हुई और इस घटना के बाद
  648. 27:23भगत सिंह को कर लिया गया था गिरफ्तार। जब
  649. 27:26भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया तो उसके
  650. 27:28बाद बाकी लोगों को भी गिरफ्तार किया गया
  651. 27:30और इस तरीके से एक केस बनता है जिसको
  652. 27:33बोलते हैं हम लोग लाहौर षड्यंत्र केस।
  653. 27:37एचएसआरए के दो ही इंपॉर्टेंट काम है। नंबर
  654. 27:39वन पहला काम है सोंडर्स की हत्या। दूसरा
  655. 27:42इंपॉर्टेंट काम है सेंट्रल लेजिसलेटिव
  656. 27:44असेंबली 1929 में बम फेंके। खाली बेंचों
  657. 27:47पर बम फेंके और बम के साथ कुछ पर्चे फेंके
  658. 27:50और पर्चों पे लिखा था कि बहरे कानों तक
  659. 27:52आवाज पहुंचाने के लिए धमाका किया गया है।
  660. 27:55यानी इस गूंगी सरकार को अपनी बात पहुंचाने
  661. 27:58के लिए धमाका किया है और यहीं पर भगत सिंह
  662. 28:01ने नारा दिया था साम्राज्यवाद का नाश हो।
  663. 28:04इंकलाब जिंदाबाद। इंकलाब जिंदाबाद। तो
  664. 28:07उसके बाद उनको अरेस्ट कर लिया गया। अरेस्ट
  665. 28:10करने के बाद उनको जो है
  666. 28:12अरेस्ट करने के बाद क्या किया गया? तीन
  667. 28:15लोगों को इसमें भगत सिंह,
  668. 28:19सुखदेव,
  669. 28:21भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु। याद रखिएगा
  670. 28:24इन तीनों पर इन तीनों पर एक केस चलाया गया
  671. 28:28सोंडर्स की हत्या का जिसे हम लाहौर
  672. 28:31कॉनस्परेसी केस कहते हैं और तीनों को उस
  673. 28:34केस में फांसी की सजा सुनाई गई। क्या
  674. 28:37सुनाई गई? फांसी की सजा सुनाई गई कि इनको
  675. 28:40तीनों को फांसी दी जाएगी। फांसी की सजा
  676. 28:43सुनाई गई थी लाहौर षड्यंत्र केस में। किस
  677. 28:45केस में इनको फांसी हुई थी? लाहौर
  678. 28:47षड्यंत्र केस। कौन सा है लाहौर षड्यंत्र
  679. 28:49केस? लाहौर षड्यंत्र केस है वही सोंडर्स
  680. 28:51की हत्या वाला। तो इस केस में जब इनको
  681. 28:54फांसी की सजा सुनाई गई तो अब कौन बचा है?
  682. 28:57याद रखिएगा। चंद्रशेखर आजाद हमारे यानी
  683. 29:00पंडित जी परेशान हैं। क्योंकि उनके तीन
  684. 29:03मेन साथी जो हैं क्या कर रहे हैं? उनके
  685. 29:05तीन मेन साथियों को क्या होने वाली है?
  686. 29:07फांसी होने वाली है। इसलिए चंद्रशेखर आजाद
  687. 29:10उन्हों उनको बचाने के लिए इनकी फांसी की
  688. 29:13डेट तय की गई थी मार्च 1931। क्या तय किया
  689. 29:16गया था? इनकी फांसी की डेट तय की गई थी
  690. 29:18मार्च 1931। जैसा कि आप जानते हैं 23
  691. 29:21मार्च को इनको फांसी हुई थी। तो अभी केवल
  692. 29:24डेट तय हुई है। क्या हुई थी? डेट फिक्स
  693. 29:26हुई थी। फांसी नहीं हुई थी। तो अब
  694. 29:29चंद्रशेखर आजाद इन तीनों को बचाने के लिए
  695. 29:32पूरा जी जान लगा देते क्योंकि उनके साथी
  696. 29:34थे। उन्होंने कहा कि किसी ना किसी तरीके
  697. 29:36से मैं भगत सिंह की फांसी रुकवाऊंगा। किसी
  698. 29:38ना किसी तरीके से मैं इनकी सजा को कम
  699. 29:40करवाऊंगा। इसके लिए गणेश शंकर विद्यार्थी
  700. 29:43के कहने पर जो एक बहुत बड़े क्रांतिकारी
  701. 29:46थे उनके कहने पर यह आनंद भवन गए और आनंद
  702. 29:50भवन कहां पर है? याद रखिएगा आनंद भवन है
  703. 29:52इलाहाबाद में पंडित नेहरू के घर। पंडित जी
  704. 29:55के जब घर गए पंडित जवाहरलाल नेहरू के घर
  705. 29:58पहुंचे तो वहां पर वह उनसे इसलिए मिलना
  706. 30:00चाहते थे क्योंकि नेहरू जी तक अगर यह अपनी
  707. 30:03बात पहुंचाएंगे कि इन युवकों की फांसी रोक
  708. 30:05दीजिए तो नेहरू जी इस बात को रख देंगे
  709. 30:07गांधी जी को क्योंकि गांधी जी 5 मार्च
  710. 30:101931 को लॉर्ड इरविन से एक समझौता करने
  711. 30:13वाले थे क्योंकि गांधी जी ने 1930 में
  712. 30:15आंदोलन चलाया था सविनय अवज्ञा आंदोलन।
  713. 30:18सविनय अवज्ञा आंदोलन को बंद कराने के लिए
  714. 30:20अंग्रेज उनसे बातचीत कर रहे थे और अंग्रेज
  715. 30:22गांधी जी को लंदन में भेजना चाहते थे
  716. 30:24गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए।
  717. 30:26इसीलिए वो हर हाल में गांधी जी से समझौता
  718. 30:29करना चाहते थे और इसी वजह से पंडित
  719. 30:31जवाहरलाल नेहरू आनंद भवन इलाहाबाद पहुंचे
  720. 30:34जवाहरलाल नेहरू से मिलने के लिए पर शायद
  721. 30:36उनकी मुलाकात नहीं हो पाई वो अपनी बात
  722. 30:38नहीं कह पाए और जब वो वहां से लौट रहे थे
  723. 30:40यहां से जब वो लौट रहे थे तो किसी ने उनकी
  724. 30:43खबर जो है किसी ने उनकी खबर कहां दे दी कि
  725. 30:46वो इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में हैं।
  726. 30:48तो इलाहाबाद में एक पार्क है जिसका नाम है
  727. 30:50अल्फ्रेड पार्क। तो इस अल्फ्रेड पार्क में
  728. 30:53वह अपने एक साथी के साथ जो है पहुंचे थे।
  729. 30:56बातचीत कर रहे थे कि इतने में इतने में
  730. 30:59पता चला कि पीछे से पुलिस आ गई।
  731. 31:03पेड़ों की झुरमुट से कदमों की आहट आई। समझ
  732. 31:06गए शेखर के गद्दारों ने अपनी जात दिखाई।
  733. 31:09पेड़ों की झुरमुट से कदमों की आहट आई। समझ
  734. 31:11गए शेखर के गद्दारों ने अपनी जात दिखाई।
  735. 31:15मिटा दूंगा फिरंगियों को। मिटा दूंगा
  736. 31:17फिरंगियों को। आजाद ने अपने प्राणों से भी
  737. 31:20प्यारी वह पिस्तौल उठाई। उनका दोस्त उनसे
  738. 31:23कहता है, वह अपने दोस्त से कहते हैं, जा
  739. 31:25भाई मैं इनको देख लूंगा। इन अंग्रेजों को,
  740. 31:27इन गोरे अंग्रेजों को मैं देख लूंगा। तो
  741. 31:29उनका दोस्त जा नहीं रहा था। इमोशनल हो रहा
  742. 31:32था। तो आजाद कहते हैं अपने दोस्त से तुम
  743. 31:35क्या सोचते हो? तुम क्या सोचते हो इन
  744. 31:37फिरंगियों को जिंदा छोड़ दूंगा मैं? या
  745. 31:40तुम क्या सोचते हो? लड़ते-लड़ते दम तोड़
  746. 31:43दूंगा मैं? या सोचते हो इन जिंदा इन
  747. 31:45फिरंगियों को जिंदा छोड़ दूंगा मैं। अरे
  748. 31:48कायर कारतूसों की क्या बिसात कालचक्र को
  749. 31:51मोड़ दूंगा मैं। अरे कायर कारतूसों की
  750. 31:53क्या विसात कालचक्र को मोड़ दूंगा। मृत्यु
  751. 31:56सबकी स्वामिनी मृत्यु सबकी स्वामिनी आज
  752. 31:59उसका यह भ्रम भी तोड़ दूंगा मैं। तो इस
  753. 32:01प्रकार उन्होंने अपने साथी से कहा कि भाई
  754. 32:03तुम जाओ मैं लडूंगा। मैं आप निकल जाओ
  755. 32:07अभियान जारी रखना क्योंकि आपका जाना जरूरी
  756. 32:10है और मैं तो इनको रोक कर आ जाऊंगा। इस
  757. 32:13प्रकार चंद्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क में
  758. 32:15घिर जाते हैं। मार्च में फांसी होनी है।
  759. 32:17गिर जाते हैं 27 फरवरी को। 27 फरवरी 1931
  760. 32:22को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में हमारे
  761. 32:25चंद्रशेखर आजाद जो हैं अंग्रेजी पुलिस के
  762. 32:28द्वारा घेर लिए जाते हैं और अब वो क्षण
  763. 32:30आता है कि पुलिस उनको पकड़ने की सोच रही
  764. 32:33है। पुलिस उनको पकड़ने की सोच रही है।
  765. 32:35लेकिन उन्होंने बचपन में कसम खाई थी। मैं
  766. 32:38आजाद हूं। आजाद था आजाद रहूंगा। अब आजाद
  767. 32:42तो पकड़ में आने वाले नहीं। उन्होंने तो
  768. 32:44डिसाइड कर लिया कि सूट एट साइड चलेगा मतलब
  769. 32:46मारेंगे या मरेंगे। तो गोलियां चलने लगी।
  770. 32:49गोलियां चलने लगी तो फिर क्या हुआ? आजाद
  771. 32:51ने दो गोरे मार गिराए।
  772. 32:54समझ में आ रहा है यहां तक? आजाद ने दो
  773. 32:56गोरे मार गिराए। फिर जेबें चेक की। आजाद
  774. 32:59ने दो गोरे मार गिराए। फिर जेब जेबें चेक
  775. 33:02किए।
  776. 33:04एक बार फिर एक बार फिर मृत्यु ने भाग्य को
  777. 33:08धोखा दिया। पिस्तौल की आखिरी गोली ने आजाद
  778. 33:11को चौंका दिया। एक बार फिर मृत्यु ने
  779. 33:13भाग्य को धोखा दिया। पिस्तौल की आखिरी
  780. 33:16गोली ने आजाद को चौंका दिया।
  781. 33:20मुझे पूरी पोएम उनकी याद नहीं आ रही। मैं
  782. 33:22प्रयास कर रहा हूं आपको बताने का। वैसे
  783. 33:24मेरे पास लिखी है लेकिन बहुत टाइम से पढ़ी
  784. 33:26नहीं है। तो फिर क्या होता है? उनका
  785. 33:27मुठभेड़ होता है और इस मुठभेड़ में
  786. 33:29चंद्रशेखर राजा दो अंग्रेजों को मार
  787. 33:31गिराते हैं और जब आखिरी गोली बजती है जेब
  788. 33:34में चेक कहते हैं जब गोली नहीं होती है तो
  789. 33:36पिस्तौल को उठाते हैं और अपनी कनपटी पे
  790. 33:38लगा के फायर कर देते हैं और वहां से वह
  791. 33:41मिट्टी उठाते हैं माथे पर लगाते हैं और
  792. 33:43फायर करके आत्महत्या कर लेते हैं। क्यों?
  793. 33:45क्योंकि उन्होंने बचपन में कसम ली थी कि
  794. 33:47वह आजाद है। आजाद थे और आजाद रहेंगे। तो
  795. 33:50ये थे हमारे पंडित जी चंद्रशेखर आजाद
  796. 33:52जिन्होंने इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में
  797. 33:53अंग्रेजों से मुठभेड़ करते हुए अंग्रेजों
  798. 33:56को मारते हुए अंतिम गोली अपनी कनपटी पे
  799. 33:59चला दी और वीरगति को प्राप्त हुए।
  800. 34:02आई होप आपको समझ में आ गया होगा और जो
  801. 34:05पोएट्री रही है वह मैं फिर कभी आपको
  802. 34:07सुनाऊंगा क्योंकि वह अभी अधूरी है तो मजा
  803. 34:10नहीं आएगा। तो फरवरी 1931 में पहली बार
  804. 34:13याद रखिएगा।
  805. 34:15पहली बार क्या होता है? गणेश शंकर
  806. 34:18विद्यार्थी के कहने पर वह इलाहाबाद में
  807. 34:20जवाहरलाल नेहरू से मिलने आनंद भवन पहुंचे।
  808. 34:22लेकिन वहां पर नेहरू ने उनसे मिलने से
  809. 34:24इंकार कर दिया और इसके बाद वह गुस्से में
  810. 34:26वहां से अल्फ्रेड पार्क चले गए। इस वक्त
  811. 34:28उनके साथ सुखदेव भी थे। वह यहां पर अपनी
  812. 34:31आगामी रणनीति तैयार कर रहे थे। तभी किसी
  813. 34:33मुखबिर के कहने पर वहां पर नॉट बोबर नॉट
  814. 34:36बोबर वो अंग्रेज अधिकारी है जो आ गया और
  815. 34:38ब्रिटिश पुलिस टुकड़ी ने उन्हें चारों तरफ
  816. 34:40से घेर लिया। आजाद ने तुरंत खतरा भांपते
  817. 34:43हुए सुखदेव को वहां से सुरक्षित निकाल
  818. 34:45दिया। पर अंग्रेजों और फिर अंग्रेजों पर
  819. 34:48फायर कर दिए। लेकिन जब उनके पास आखिरी एक
  820. 34:50गोली बची तो उन्होंने खुद से खुद के प्राण
  821. 34:52लेकर अपनी कथनी को सच साबित कर दिया।
  822. 34:54अल्फ्रेड पार्क में 27 फरवरी 1931 को उनके
  823. 34:57दिए गए इस बलिदान को भारत कभी नहीं भुला
  824. 35:00पाएगा। आजादी के बाद इस पार्क का नाम
  825. 35:02बदलकर चंद्रशेखर आजाद पार्क कर दिया गया
  826. 35:04है। मध्य प्रदेश के जिस गांव में वह रहे
  827. 35:06थे उस गांव का उसका धीमारपुरा नाम बदलकर
  828. 35:09आजादपुरा कर दिया गया है और मध्य प्रदेश
  829. 35:12के जिस गांव में उनका जन्म हुआ था उसका
  830. 35:14नाम भी बदल दिया गया है। यह है चंद्रशेखर
  831. 35:16आजाद पार्क अल्फ्रेड पार्क जिसका पुराना
  832. 35:18नाम है और यह है यूपी इलाहाबाद में। यह वह
  833. 35:21पेड़ है जहां पर उन्होंने अपना बलिदान
  834. 35:23दिया था। स्मृति को आखिरी बार अपने माथे
  835. 35:25पर लगाया था। ठीक है? और यह है हमारे भारत
  836. 35:28के वह शेर। भारत का वह केसरी जिन्होंने
  837. 35:31अपनी मूछों पर ताव देते हुए बचपन में लिया
  838. 35:34गया उस प्रण को पूरा किया कि मैं आजाद
  839. 35:36हूं, आजाद था और आजाद रहूंगा। ठीक है? ये
  840. 35:39अल्फ्रेड पार्क की तस्वीर है। तो ये थे
  841. 35:41हमारे चंद्रशेखर आजाद। उम्मीद है आपको
  842. 35:43चंद्रशेखर आजाद के बारे में अच्छे से समझ
  843. 35:45में आया होगा। चंद्रशेखर आजाद के जो फेमस
  844. 35:47कोर्ट्स हैं वो हैं। यदि फिर भी तुम्हारा
  845. 35:49लहू क्रोधित नहीं होता तो यह तुम्हारी
  846. 35:51रगों में बहने वाला पानी है। मैं आजाद था,
  847. 35:54आजाद हूं और आजाद रहूंगा। दुश्मन की
  848. 35:56गोलियों का हम सामना करेंगे। आजाद ही
  849. 35:59रहेंगे। आजाद ही रहेंगे। दुश्मन की
  850. 36:02गोलियों का हम सामना करेंगे। आजाद ही
  851. 36:04रहेंगे। आजाद ही रहेंगे। मुझे जब से मैंने
  852. 36:08यह तस्वीर देखी है मुझे कुछ अच्छा नहीं लग
  853. 36:10रहा। मुझे लगता है कि सोचिए क्या
  854. 36:12पर्सनालिटी रही होगी चंद्रशेखर आजाद की
  855. 36:14पंडित जी की। तो ये थे हमारे भारत के महान
  856. 36:18स्वतंत्रता सेनानी मातृभूमि के सच्चे सपूत
  857. 36:21महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जिन्हें
  858. 36:24हम लोग शहीद चंद्रशेखर आजाद के नाम से
  859. 36:26जानते हैं। एग्जाम ओरिएंटेड चीजें कहां
  860. 36:29जन्म हुआ है मध्य प्रदेश में? माता-पिता
  861. 36:31का नाम कहां से आए थे? काकोरी कांड से
  862. 36:33क्या कनेक्शन है? एचएसआरए से क्या कनेक्शन
  863. 36:35है? एचआरए से क्या कनेक्शन है? भगत सिंह
  864. 36:38से क्या कनेक्शन है? ये सारे चीजों को
  865. 36:40आपको याद रखना है और इलाहाबाद के अल्फ्रेड
  866. 36:42पार्क में 27 फरवरी 1931 को शहीद हो जाते
  867. 36:45हैं। कमाल की बात क्या है कि यह भगत सिंह
  868. 36:48की फांसी को रोकना चाहते थे। कब? 23 मार्च
  869. 36:50को जो होने वाली थी उससे पहले ही
  870. 36:51चंद्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क में शहीद
  871. 36:54हो गए। तो यह थे जगदंबा का वो केहरी जो
  872. 36:56अल्फ्रेड पार्क में दहाड़ रहा था। जगदंबा
  873. 37:00का केहरी अल्फ्रेड पार्क में दहाड़ रहा
  874. 37:02था। इंद्र का एरावत इंकलावी भाषा में
  875. 37:04चिंघाड़ रहा था।
  876. 37:07पोएट्री बहुत शानदार है। मैं माफी चाहता
  877. 37:09हूं। मुझे अभी क्लिक नहीं कर रही। दोबारा
  878. 37:11जरूर कभी सुनाऊंगा। किसी दिन स्पेशली उसी
  879. 37:14पर वीडियो बनाऊंगा तब आपको सुनाऊंगा। मुझे
  880. 37:16उम्मीद है कि आपको यह वीडियो अच्छा लगा
  881. 37:18होगा और इस वीडियो के माध्यम से आप
  882. 37:19चंद्रशेखर आजाद के बारे में बहुत कुछ जान
  883. 37:22सकते हैं। अब मेरे दो क्वेश्चन है जिनका
  884. 37:24जवाब आपको वीडियो के अंत में कमेंट सेक्शन
  885. 37:26में देना है। पहला आपको कमेंट सेक्शन में
  886. 37:29बताना है कि चंद्रशेखर आजाद ने एचएसआरए की
  887. 37:32स्थापना किस स्थान पे की थी? पहला प्रश्न
  888. 37:34है। दूसरा प्रश्न है। आपको बताना है कि एच
  889. 37:36एस अह चंद्रशेखर आजाद ने बनारस के किस
  890. 37:39कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की थी? कमेंट
  891. 37:41करके बताइएगा यह आपको वीडियो कैसा लगा। तब
  892. 37:43तक मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक
  893. 37:45के लिए जय हिंद वंदे मातरम। सहीद
  894. 37:48चंद्रशेखर आजाद अमर रहे। भारत माता की जय।
  895. 37:52थैंक यू।
  896. 38:08हेलो एवरीवन आप सभी का एमपीपीएससी स्टडी
  897. 38:11आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है। उम्मीद है
  898. 38:13आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन लगाकर पढ़
  899. 38:15रहे होंगे। साथियों आज हम बात करने वाले
  900. 38:18हैं रानी दुर्गावती के बारे में जो कि
  901. 38:20गोंडवाना की श्रेणी और बलिदान एवं शौर्य
  902. 38:24का प्रतीक मानी जाती हैं। रानी दुर्गावती
  903. 38:27जो गोंडवाना के अलावा भारतीय इतिहास की उन
  904. 38:31वीरांगनाओं में शामिल है जिनका नाम इतिहास
  905. 38:34की अग्रिम पंक्ति में लिखा जाता है। तो आज
  906. 38:37हम बात करेंगे वीरांगना रानी दुर्गावती के
  907. 38:40बारे में जो कि चंदेल वंश की राजकुमारी और
  908. 38:43गोंड वंश की या गोंडवाना की शासिका थी। तो
  909. 38:46आइए हम समझते हैं रानी दुर्गावती के
  910. 38:49इतिहास को। सबसे पहले मैं आपको बताना
  911. 38:51चाहता हूं रानी दुर्गावती के अगर हम
  912. 38:53इतिहास की बात करेंगे तो
  913. 38:56आपको यहां पर उनसे रिलेटेड स्टोरी जो है
  914. 38:59आपको सुननी है। देखिए अभी हम केवल और केवल
  915. 39:03रानी दुर्गावती के इतिहास के बारे में बात
  916. 39:05करेंगे इस सीरीज में। लेकिन जब हम मध्य
  917. 39:07प्रदेश का इतिहास पढ़ते हैं और उसमें जब
  918. 39:09हम गोंल्ड डायनेस्टी की बात करते हैं तो
  919. 39:11उसमें हम सभी गोंड राजाओं की बात करते
  920. 39:13हैं। तो आइए चर्चा करते हैं। सबसे पहले
  921. 39:16यहां पर कुछ तस्वीरें हैं। ये तस्वीरों को
  922. 39:18आपको ध्यान से देखना है और इन तस्वीरों के
  923. 39:21माध्यम से आपको क्या याद रखना है कि रानी
  924. 39:23दुर्गावती से संबंधित प्रमुख जो हैं यह
  925. 39:26स्थल हैं। जिसमें कि अगर आप यह देख रहे
  926. 39:28हैं सिंघोड़ा सिंघोरागढ़ जो फोर्ट है यह
  927. 39:30मध्य प्रदेश के दमोह डिस्ट्रिक्ट में है।
  928. 39:32तो यह आप याद रखेंगे रानी दुर्गावती या
  929. 39:35गोंड वंश से संबंधित है। यह रानी
  930. 39:37दुर्गावती की समाधि है जो बरेला ग्राम और
  931. 39:40बरेला ग्राम कहां पर है? याद रखिएगा
  932. 39:42जबलपुर में है। तो हम यह लास्ट में भी
  933. 39:44देखेंगे अभी। यह मदन महल फोर्ट है जो कि
  934. 39:47जबलपुर में काफी फेमस है जिसे पिंक स्टेशन
  935. 39:50के नाम से फेमस है और ये एक्चुअली में
  936. 39:52सिंघोरागढ़ फोर्ट का ही पार्ट है। हालांकि
  937. 39:55एक और फोर्ट है। मैं यहां नाम लिख देता
  938. 39:56हूं जो उनसे संबंधित है या गोंडो से
  939. 39:58संबंधित है जिसको चौरागढ़ फोर्ट कहते हैं।
  940. 40:01चौरागढ़ का किला या फिर हम बोल सकते हैं
  941. 40:04इसको चौगान किला कहते हैं। क्या बोलते
  942. 40:06हैं? चौगान किला। और यह जो किला है याद
  943. 40:09रखिएगा। यह किला पड़ता है हमारा मध्य
  944. 40:13प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में। कहां पर
  945. 40:16पड़ता है? नरसिंहपुर जिले में। ठीक है? तो
  946. 40:18यह कुछ किले हैं उनसे संबंधित। लेकिन हम
  947. 40:21पहले बात करेंगे रानी दुर्गावती के इतिहास
  948. 40:23के बारे में और उनके
  949. 40:27उनके जन्म से लेके उनके बलिदान दिवस तक की
  950. 40:30ये शौर्यगाथा मैं आपको बताने वाला हूं।
  951. 40:32देखिए सबसे पहले हम रानी दुर्गावती के
  952. 40:35बारे में अगर जानते हैं तो हम ये जानते
  953. 40:36हैं कि वो चंदेल वंश की राजकुमारी और
  954. 40:39गोंडवाना की शासिका थी। ठीक है? तो अब हम
  955. 40:42उनका जो है सबसे पहले क्या देखने वाले
  956. 40:44हैं? उनका जीवन परिचय देखने वाले उनके
  957. 40:47जन्म की कहानी देखने वाले हैं। तो याद
  958. 40:49रखिएगा रानी दुर्गावती का जो जन्म है वो
  959. 40:51चंदेल राजा कीरत राय या कीर्ति सिंह
  960. 40:53चंदेल। अगर आपको ऑप्शन में यह नाम नहीं
  961. 40:56मिलता है तो आपको ऑप्शन में एक दूसरा नाम
  962. 40:58मिलेगा और वह होंगे शालीवाहन राजा। याद
  963. 41:01रखिएगा अगर आपसे पूछा जाए कि जो रानी
  964. 41:05दुर्गावती थी वो किसकी पुत्री थी तो ऑप्शन
  965. 41:07में कीर्तिराज चंदेल मिलेंगे या कीर्ति
  966. 41:09चंदेल मिलेंगे या फिर आपको मिलेंगे ये
  967. 41:11नहीं होंगे तो आपको शालीवाहन की पुत्री के
  968. 41:13तौर पे उनका नाम याद रखना है। तो कालिंजर
  969. 41:16का जो किला है जो कि उत्तर प्रदेश के
  970. 41:18बांदा डिस्ट्रिक्ट में यहां पर 5 अक्टूबर
  971. 41:211524 को उनका जन्म होता है। 5 अक्टूबर
  972. 41:241524 को रानी दुर्गावती का जन्म कालिंजर
  973. 41:27के किले में राजा कीर्ति सिंह चंदेल के घर
  974. 41:28में हुआ था। क्योंकि उनका जो जन्म है वो
  975. 41:31दुर्गा अष्टमी के दिन हुआ था। इसीलिए उनका
  976. 41:33जो नाम है वो क्या रखा गया था? दुर्गावती।
  977. 41:36ठीक है? दुर्गा अष्टमी के दिन जन्म लेने
  978. 41:38के कारण रानी दुर्गावती का नाम दुर्गावती
  979. 41:41रखा गया। कालिंजर का जो किला है वर्तमान
  980. 41:43में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में आता
  981. 41:45है। जब रानी दुर्गावती का जन्म होता है तो
  982. 41:48उनकी जो मां है उनका उनकी मां का निधन जो
  983. 41:51है बचपन में हो जाता है और जब रानी
  984. 41:53दुर्गावती की मां की मृत्यु हो रही थी तो
  985. 41:55उन्होंने राजा कीर्ति सिंह चंदेल से एक
  986. 41:57वचन लिया और उस वचन में उन्होंने कहा था
  987. 41:59कि आप मुझे वचन दो कि आप इस पुत्री का जो
  988. 42:01है पालन-पोषण एक पुत्र की तरह करेंगे और
  989. 42:04जब भी इसकी शादी करेंगे तो इसकी स्वेच्छा
  990. 42:06यानी इसकी मर्जी से करेंगे। राजा जो कीरत
  991. 42:09सिंह चंदेल थे या कीरत राय थे उन्होंने
  992. 42:11बड़े ही सम्मान से उनका नाम लिया जाता था
  993. 42:14बुंदेलखंड में क्योंकि राजा कीर्ति सिंह
  994. 42:16चंदेल का संबंध उस महान चंदेल वंश से था
  995. 42:19जिसके महान राजा विद्याधर चंदेल ने महमूद
  996. 42:22गजनवी से संघर्ष किया था या महमूद गजनवी
  997. 42:25से याद रखिएगा महमूद गजनवी को पराजित किया
  998. 42:29था राजा विद्याधर चंदेल ने। ठीक है? और
  999. 42:32खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिरों के निर्माण
  1000. 42:34के लिए यह राज्य जाना जाता था। तो ये कुछ
  1001. 42:36बेसिक बातें उनके पिता का नाम, उनके जन्म
  1002. 42:38की बात हो गई। अब हम बात करते हैं आगे।
  1003. 42:41देखिए इसमें एक और बात याद रखना है। उनके
  1004. 42:43पिता ने उनका पालन-पोषण पुत्र की तरह किया
  1005. 42:45था। बचपन से ही उन्हें तीरंदाजी,
  1006. 42:47घुड़सवारी और अस्त्र-शस्त्र चलाने की
  1007. 42:49शिक्षा दी थी क्योंकि वो एक राजपूत कुल
  1008. 42:52में जन्मी थी और वैसे भी राजपूतों के यहां
  1009. 42:54चाहे पुत्र हो या पुत्री हो उनको सैन्य
  1010. 42:57शिक्षा दी जाती थी। अब इसके बाद हम आगे
  1011. 43:00बात करते हैं। रानी दुर्गावती के विवाह की
  1012. 43:02बात करते हैं। रानी दुर्गावती का विवाह
  1013. 43:04किससे हुआ? कब हुआ? तो यहां पर रानी
  1014. 43:07दुर्गावती के विवाह के बारे में हम एक
  1015. 43:09सामान्य सी बात करेंगे और एक स्टोरी मैं
  1016. 43:10आपको सुनाना चाहूंगा। जब कन्या दुर्गावती
  1017. 43:13विवाह योग्य हुई तब 1542 में उनका विवाह
  1018. 43:15गोंड राजा संग्राम शाह के पुत्र याद
  1019. 43:18रखिएगा दलपत शाह के साथ हुआ था। दोनों
  1020. 43:20पक्षों की जाति अलग थी। इसीलिए कहानी जो
  1021. 43:23है यहां पे स्टार्ट होती है। 1524 में
  1022. 43:26जन्म हो रहा है और 1542 में उनकी शादी हो
  1023. 43:28रही है। तो दो बातें आप याद रखिएगा। उनका
  1024. 43:30जो विवाह है वो गोंड वंश के महान राजा
  1025. 43:33संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह के साथ
  1026. 43:36संपन्न होता है। अब यहां पे एक स्टोरी है
  1027. 43:39जिसे आप कह सकते हैं कि यह स्टोरी संभवत
  1028. 43:42मैं आपको बताने जा रहा हूं जिससे कि आपको
  1029. 43:44इसमें थोड़ा सा इंटरेस्ट आए। देखिए इस समय
  1030. 43:47गोंड राज्य ज्यादा बड़ा था। गोंड राज्य के
  1031. 43:49पास 52 किले थे और लगभग दक्षिण पूर्वी
  1032. 43:52मध्य प्रदेश का जो काफी बड़ा हिस्सा है वो
  1033. 43:54गोंडवाना साम्राज्य के अंतर्गत आता था और
  1034. 43:56उसके राजा थे राजा संग्राम शाह। उनके जो
  1035. 43:59पुत्र थे उनके दो पुत्र थे। बड़े पुत्र का
  1036. 44:01नाम दलपत शाह छोटे पुत्र का नाम चंद्र शाह
  1037. 44:03था। तो यहां पर हम दलपत शाह की बात करने
  1038. 44:06जा रहे हैं और रानी दुर्गावती के पिता जो
  1039. 44:09चंदेल वंश के शासक हैं। कीर्ति राय चंदेल
  1040. 44:11की बात करने वाले हैं। अब यहां पर होता यह
  1041. 44:14है कि एक तरफ हैं गोंड और एक तरफ है
  1042. 44:16राजपूत चंदेल।
  1043. 44:18यह उस समय की बात है जब राजपूत जो हैं
  1044. 44:21अपनी कन्याओं का जो विवाह है वह गैर
  1045. 44:24राजपूतों से नहीं करते थे। अब समस्या यह
  1046. 44:27थी कि किस प्रकार कीर्तिराज चंदेल इस
  1047. 44:29विवाह के लिए तैयार होते हैं। तो इसमें एक
  1048. 44:31छोटी सी कहानी पहले यह है कि जो हमारी
  1049. 44:34रानी दुर्गावती हैं जब वो युवा अवस्था में
  1050. 44:37थी तो वो क्या करती थी? अपनी दो सहेलियों
  1051. 44:39के साथ एक शिव मंदिर में जाती थी। वो शिव
  1052. 44:41जी की बड़ी भक्त थी और वो अक्सर वहां जाया
  1053. 44:44करती थी। जब वो अक्सर वहां जाया करती थी
  1054. 44:46तो एक बड़ वृक्ष के नीचे वो अक्सर रुका
  1055. 44:48करती थी और वहां पर एक बाबा जी बैठते थे
  1056. 44:50और उनको डेली नमस्ते करती थी। तो वो बाबा
  1057. 44:52जी के पास जाकर बाबा जी जो है उनको जो है
  1058. 44:55कहानियां सुनाते थे। तो जब भी दुर्गावती
  1059. 44:57उनके पास जाती थी और वो कहती थी बाबा जी
  1060. 44:59किसी राजपूत राजा की कहानी सुनाओ। तो बाबा
  1061. 45:02जी उस उनको जो है राजपूत राजाओं की शौर्य
  1062. 45:04की वीरता की कहानी सुनाते थे। इससे उनको
  1063. 45:06बड़ा अच्छा लगता था। उन्हीं बाबा जी के
  1064. 45:09द्वारा जो है एक बार कहानी सुनाई गई थी।
  1065. 45:12गोंड शासक संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह
  1066. 45:15की और दलपत शाह के बारे में उन्होंने
  1067. 45:17बताया था कि दलपत शाह बड़े ही वीर साहसी
  1068. 45:20और योग्य व्यक्ति हैं। योग्य राजकुमार हैं
  1069. 45:22जो मुगलों से संघर्ष ले रहे थे और
  1070. 45:24उन्होंने मुगलों का रास्ता जो है मध्य
  1071. 45:26भारत में रोक रखा था। यानी गोंडवाना एक
  1072. 45:28शक्तिशाली राज्य था और उसके राजकुमार थे
  1073. 45:31राजा दलपत शाह। राजा दलपत शाह बोल सकते
  1074. 45:34हैं या राजकुमार दलपत शाह बोल सकते हैं जो
  1075. 45:36कि संग्राम शाह के पुत्र थे। अब आगे क्या
  1076. 45:39होता है?
  1077. 45:40यहीं से जो हमारी राजकुमारी दुर्गावती है
  1078. 45:43उनके मन में जो है राजा दलपत शाह के प्रति
  1079. 45:46जो है एक तरीके से प्रेम होता है या वो मन
  1080. 45:48ही मन उनको पसंद करने लगती हैं। सेम कहानी
  1081. 45:51जो है दलपत शाह के साथ होती है। दलपत शाह
  1082. 45:54ने भी रानी दुर्गावती के बारे में सुन रखा
  1083. 45:56था कि रानी दुर्गावती काफी सुंदर हैं।
  1084. 45:58बड़ी वीर हैं, साहसी और वह शिकार के लिए
  1085. 46:00बड़ी प्रसिद्ध थी। उनका निशाना बड़ा तेज
  1086. 46:02था। तो दलपत शाह भी संभवत उनको मन ही मन
  1087. 46:05पसंद करने लगे थे। अब यहां पे समझना ये
  1088. 46:07दोनों राज्य अलग हैं और दोनों एक दूसरे के
  1089. 46:09एक तरीके से विरोधी कह सकते हो क्योंकि
  1090. 46:11गोंड और राजपूतों में बहुत डिफरेंस था। उस
  1091. 46:13समय की बात कर रहा हूं। अब एक दिन क्या
  1092. 46:16होता है जब रानी दुर्गावती अपनी दो
  1093. 46:19सहेलियों एक का नाम श्यामा और एक का नाम
  1094. 46:21कुछ और था। उनके साथ जब वो शिव मंदिर में
  1095. 46:23जा रही थी तो उस दिन क्या है? शाम का समय
  1096. 46:25हो गया था। और उसी समय वो देखती हैं कि उस
  1097. 46:28मंदिर के पास पेड़ के नीचे अंधेरे में दो
  1098. 46:30व्यक्ति खड़े थे। वो दो व्यक्ति जो है अब
  1099. 46:33रानी जो है उस समय जब अपनी सहेलियों के
  1100. 46:35साथ खड़ी थी तो उनमें से एक व्यक्ति जो है
  1101. 46:37वो डरता हुआ आया और रानी के पास आकर खड़ा
  1102. 46:39हुआ और उसने पूछा क्या आप ही राजकुमारी
  1103. 46:42दुर्गावती हैं? तो उन्होंने कहा उनकी जो
  1104. 46:44सहेली है उन्होंने कहा हां मैं ही
  1105. 46:46राजकुमारी दुर्गावती हूं। तो इसके बाद
  1106. 46:48यहां पर क्या होता है कि वो एक पत्र जो है
  1107. 46:52वो रानी दुर्गावती को देता है। रानी
  1108. 46:54दुर्गावती ने पूछा यह किसका पत्र है और
  1109. 46:56क्या? तो उन्होंने बताया है कि गोंड वंश
  1110. 46:58के राजा दलपत शाह का पत्र है और इस पत्र
  1111. 47:02को मैं आपको उन्होंने मुझे आपको देने के
  1112. 47:04लिए कहा था। जैसे ही रानी दुर्गावती ने उस
  1113. 47:07पत्र को पढ़ा तो उसमें उन्होंने सबसे पहले
  1114. 47:09यह लिखा था दलपत शाह ने लिखा कि इस तरीके
  1115. 47:11से मैंने आपको यह पत्र लिखा उसके लिए मैं
  1116. 47:13क्षमा चाहता हूं और
  1117. 47:20इसके बाद क्या होता है यहां पर आपको सुनना
  1118. 47:23है तो उन्होंने क्षमा के लिए कहा मतलब
  1119. 47:26उन्होंने कहा कि मैं सबसे पहले देखिए मेरे
  1120. 47:28मन में आपसे विवाह करने का जो है विचार
  1121. 47:31आया है और मैं आपकी मर्जी पहले जानना
  1122. 47:34चाहता था इसीलिए मैंने पहले आपको पत्र
  1123. 47:35लिखा है। वरना मैं यह पत्र आपके पिता को
  1124. 47:37भेजने वाला था। तो रानी दुर्गावती ने उस
  1125. 47:40पत्र को पढ़ा और जब वो बाद में मंदिर से
  1126. 47:43नीचे उतर रही थी तो उन दोनों सैनिकों ने
  1127. 47:45रानी दुर्गावती के सामने जाकर फिर से जवाब
  1128. 47:47पूछा तो रानी दुर्गावती ने यह कहा कि आप
  1129. 47:50राजकुमार को हमारा नमस्ते कहना और इसके
  1130. 47:52बाद वह चली जाती हैं। इसके एक सप्ताह बाद
  1131. 47:54जो हमारे दलपत शाह हैं वह अपना एक पत्र जो
  1132. 47:57है वो राजा कीर्तिराज चंदेल को भेजते हैं।
  1133. 48:00अब जब कीर्ति चंदेल को यह पत्र मिला तो वह
  1134. 48:02बड़े चिंतित हो गए क्योंकि वह राजपूत थे
  1135. 48:05और गोंड राजा का जो बेटा है दलपत शाह वो
  1136. 48:07उनकी पुत्री से शादी करना चाहता है। तो
  1137. 48:10इसी असमंजस में क्या होता है कि उनको समझ
  1138. 48:13में नहीं आ रहा था क्या करें? तो उन्होंने
  1139. 48:14राजपूतों की एक मीटिंग बुलाई और उस मीटिंग
  1140. 48:16में एक सभा में ये डिस्कस किया गया क्या
  1141. 48:19हमें दुर्गावती का विवाह जो है चंदेल वंश
  1142. 48:22की जो राजकुमारी उनका जो विवाह है वो गोंड
  1143. 48:25वंश के राजकुमार से करना चाहिए। तो यहां
  1144. 48:27पर सभी राजपूतों ने अपनी तलवार निकाली और
  1145. 48:29कहा कि यह संभव नहीं है क्योंकि गोंड हमसे
  1146. 48:32जो है अलग हैं। और राजपूत जो है एक तरीके
  1147. 48:34से उच्च जाति में आते थे। तो इसलिए
  1148. 48:36राजपूतों ने मना कर दिया। लेकिन यहां ये
  1149. 48:39बात आप भूल मत जाना कि इस समय चंदेल राज्य
  1150. 48:41एक छोटा राज्य है और गोंडवाना एक
  1151. 48:44साम्राज्य है जिसमें 52 किले आते हैं और
  1152. 48:46गोंड इस समय काफी शक्तिशाली थे। तो जब
  1153. 48:49राजपूतों ने ये तय किया कि वह विवाह नहीं
  1154. 48:51करेंगे तो इसका सीधा सा मतलब था कि राजा
  1155. 48:53दलपत शाह और राजा संग्राम शाह यानी
  1156. 48:55संग्राम शाह अपने पुत्र दलपत शाह के साथ
  1157. 48:57इस क्षेत्र पर हमला भी कर सकते हैं और ऐसा
  1158. 48:59हुआ भी। जो स्टोरी मिलती है उसमें यही कहा
  1159. 49:01गया है कि राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत
  1160. 49:05शाह ने जो है महोबा राज्य पर यानी जिसे हम
  1161. 49:07चंदेल राज्य कह रहे हैं उस पर हमला कर
  1162. 49:09दिया और इस युद्ध में जो है राजा
  1163. 49:11कीर्तिराज चंदेल की हार होती है और बाद
  1164. 49:13में राजा रानी दुर्गावती का जो विवाह है
  1165. 49:15वो गोंड वंश के जो राजकुमार है यानी दलपत
  1166. 49:18शाह के साथ संपन्न होता है। तो ये एक छोटी
  1167. 49:20सी स्टोरी थी। इस तरीके से उन दोनों का
  1168. 49:22विवाह होता है जो मैंने आपको बता दिया। तो
  1169. 49:25दोनों पक्षों की जाति अलग थी इसलिए स्टोरी
  1170. 49:27सुनाना जरूरी थी। तो राजा संग्राम सागर का
  1171. 49:29राज्य बहुत ही विशाल था। उनके राज्य में
  1172. 49:31कितने 52 किले थे। सोचिएगा बहुत बड़ा
  1173. 49:34राज्य था। उनका राज्य वर्तमान अगर हम बात
  1174. 49:36करें तो मंडला मंडला पूरा आता था। जबलपुर
  1175. 49:38पूरा आता था। नरसिंहपुर, होशंगाबाद,
  1176. 49:40भोपाल, सागर, दमोह और वर्तमान छत्तीसगढ़
  1177. 49:43के कुछ हिस्सों तक फैला था। यानी गोंडवाना
  1178. 49:46एक बड़ा साम्राज्य था जिसे गढ़ कट, गढ़ंगा
  1179. 49:49या गोंडवाना के नाम से जाना जाता था। अब
  1180. 49:51इसमें आपको एक और बात याद रखनी है कि गोंड
  1181. 49:54राजवंश और राजपूतों के स्मेल से शेरशाह
  1182. 49:56सूरी को करारा झटका लगा। क्योंकि अब क्या
  1183. 49:59हुआ कि दो लोग बड़े पावरफुल थे और दोनों
  1184. 50:01एक हो गए। चंदेल और गोंड मिल गए। इस समय
  1185. 50:04शेरशाह सूरी दिल्ली का सुल्तान था और उसने
  1186. 50:07जो है कालिंजर पर हमला किया था। याद
  1187. 50:09रखिएगा इसी समय 1545 में उसने कालिंजर पर
  1188. 50:12हमला किया था। तो एक छोटी सी जानकारी ये
  1189. 50:14भी है कि शेरशाह सूरी ने 1545 को कालिंजर
  1190. 50:16पर हमला किया और बड़ी मुश्किल से कालिंदर
  1191. 50:19के किले को जीतने में सफल हो गया। परंतु
  1192. 50:21अचानक बारूद में विस्फोट हुआ जिससे वो
  1193. 50:23मारा गया था। अब शादी हो गई है दुर्गावती
  1194. 50:26की और दुर्गावती गोंड राज्य की जो है क्या
  1195. 50:28बनी है? राजकुमारी बनी है। हम इस स्टोरी
  1196. 50:30पे चर्चा नहीं करेंगे। हम रानी दुर्गावती
  1197. 50:33की स्टोरी पे ही चर्चा करेंगे क्योंकि अभी
  1198. 50:34स्टोरी यह लंबी है थोड़ी सी। ठीक है? 1545
  1199. 50:38में रानी दुर्गावती ने एक पुत्र को जन्म
  1200. 50:40दिया और उस पुत्र का नाम था वीर नारायण
  1201. 50:42रखा गया। याद रखिएगा। लेकिन 1550 में राजा
  1202. 50:45दलपत शाह की मृत्यु हो गई जो कि गोंड वंश
  1203. 50:47के शासक थे और इस दुख की घड़ी में रानी को
  1204. 50:50अपने नाबालिक पुत्र वीर नारायण को जो है
  1205. 50:52क्या किया? राजगद्दी पर बैठाकर स्वयं
  1206. 50:54राजकाज की बागडोर संभालनी पड़ी। कुल
  1207. 50:57मिलाकर आपने अभी तक ये जाना कि उनका जन्म
  1208. 50:59कैसे हुआ? उनके पिता कौन थे? उनका विवाह
  1209. 51:02कब और कैसे हुआ? और अब हमने इसमें से काम
  1210. 51:05की चीजें जो मैं हाईलाइट कर रहा हूं कि
  1211. 51:07उनका जो पुत्र है कब होता है? 1545 में और
  1212. 51:091550 में राजा की मृत्यु हो जाती है। जब
  1213. 51:13राजा दलपत शाह की मृत्यु हो गई जो कि गोंड
  1214. 51:15वंश के राजा थे। संग्राम शाह के बाद दलपत
  1215. 51:18शाह राजा बने थे और दलपत शाह 1550 में
  1216. 51:20स्वर्ग लोक सिधार गए। उनके बाद क्या हुआ?
  1217. 51:23रानी दुर्गावती की जो राजधानी याद रखिएगा
  1218. 51:25ये सिंघोरागढ़ है। याद रखेंगे सिंघोरा कण
  1219. 51:28सिंघोरागढ़ कहां है? मध्य प्रदेश के दमोहो
  1220. 51:30डिस्ट्रिक्ट में है। ठीक है? याद रखिएगा।
  1221. 51:32तो यह उन्होंने अपनी राजधानी बना रखी थी
  1222. 51:34और आगे याद रखिएगा यह जबलपुर दमोह मार्ग
  1223. 51:37पर स्थित है लेकिन डिस्ट्रिक्ट दमोह लगता
  1224. 51:39है। रानी दुर्गावती की प्रतिमा से 6
  1225. 51:41कि.मी. दूर स्थित याद रखिएगा सिंघोरागढ़
  1226. 51:44का किला बना हुआ है सिंघोरागढ़ के
  1227. 51:45अतिरिक्त मदन महल और इन किलों की बात हम
  1228. 51:47बाद में करेंगे। ठीक है? ये कुछ जानकारी
  1229. 51:50है उनके राज्य के बारे में कि रानी का
  1230. 51:52राज्य वर्तमान जबलपुर, नरसिंहपुर, दमोह।
  1231. 51:55ठीक है? होशंगाबाद, छिंदवाड़ा और
  1232. 51:56छत्तीसगढ़ के आदि क्षेत्रों में फैला हुआ
  1233. 51:58था। अब यहां से हम आगे बात कर रहे हैं और
  1234. 52:00अब आपको थोड़ा सा स्टोरी को बहुत ध्यान से
  1235. 52:03सुनना है। देखिए रानी दुर्गावती गोंडवाना
  1236. 52:06राज्य की रानी बन चुकी हैं। उन्होंने अपने
  1237. 52:08नाबालिक पुत्र वीर नारायण को गद्दी पर
  1238. 52:10बैठाया और गोंडवाना राज्य की संरक्षिका के
  1239. 52:13तौर पर वो शासन करने लगी। राजा रानी
  1240. 52:15दुर्गावती के दो विश्वसनीय सेनापति थे। दो
  1241. 52:18विश्वसनीय सलाहकार थे। जिनकी सलाह से वो
  1242. 52:21अपने राज्य का संचालन कर रही थी। उनका नाम
  1243. 52:23है एक का नाम था सेनापतियों में आधार सिंह
  1244. 52:25कायस्त हैं बहुत इंपॉर्टेंट है ये एग्जाम
  1245. 52:27ओरिएंटेड है जिनको मैं हाईलाइट कर रहा हूं
  1246. 52:29आधार सिंह कायस्त और दूसरे थे ठाकुर
  1247. 52:31मानसिंह ये दो उनके मुख्य सेनापति और
  1248. 52:34मुख्य सलाहकार थे इन्हीं की सहायता से वो
  1249. 52:36अपने राज्य का अच्छे से संचालन कर रही थी
  1250. 52:39रानी दुर्गावती ने 1550 से 1564 तक
  1251. 52:42सफलतापूर्वक शासन किया। रानी दुर्गावती के
  1252. 52:44शासनकाल में प्रजा बहुत सुखी थी और उनका
  1253. 52:47राज्य भी लगातार जो है क्या कर रहा था?
  1254. 52:49प्रगति कर रहे प्रगति कर रहा था। और रानी
  1255. 52:51दुर्गावती के शासनकाल में उनके राज्य की
  1256. 52:53ख्याति दूर-दूर तक फैल गई। कुल मिलाकर
  1257. 52:55रानी दुर्गावती ने 1550 में राजा दलपत शाह
  1258. 52:58की मृत्यु के बाद राज्य संभाला। 1564 तक
  1259. 53:01उन्होंने जो है राज्य का संचालन किया और
  1260. 53:03इस समय में लगभग ये 16 वर्षों में उनका जो
  1261. 53:05राज्य है गोंडवाना काफी समृद्ध हो गया और
  1262. 53:08उसकी चर्चा जो है दूर-दूर तक होने लगी और
  1263. 53:10रानी दुर्गावती का जो नाम है वह दूर-दूर
  1264. 53:12तक फैल गया। और जब किसी का नाम दूर-दूर तक
  1265. 53:15फैलता है और कोई तरक्की करता है तो किसी
  1266. 53:17ना किसी की नजर लगती है। और आइए अब देखिए
  1267. 53:20यहां पर क्या होने वाला है। इस बीच उनके
  1268. 53:23राज्य पर दो हमले होते हैं। थोड़ा सा उनके
  1269. 53:25राज्य के बारे में भी लिखा हुआ है। उनके
  1270. 53:27कुछ निर्माण कार्यों के बारे में भी लिखा
  1271. 53:29है क्योंकि ये एग्जाम ओरिएंटेड है। तो
  1272. 53:31मेरा काम है आपको बताना। रानी दुर्गावती
  1273. 53:33ने अपने शासनकाल में कई मंदिर, इमारतें और
  1274. 53:36तालाब बनवाए थे। इसमें खासकर तालाब बहुत
  1275. 53:37इंपॉर्टेंट है। जिनमें सबसे प्रमुख है
  1276. 53:39जबलपुर का रानी तालाब। यह उन्होंने अपने
  1277. 53:42नाम पर बनवाया था। जबलपुर का रानी ताल
  1278. 53:44जिसको बोलते हैं। दूसरा रानी दुर्गावती ने
  1279. 53:46अपने नाम पर बनवाया था। उन्होंने अपनी
  1280. 53:48दासी जिसका एक नाम था चेरीताल। उनकी दासी
  1281. 53:51थी चेरी जिसके नाम पर उन्होंने चेरीताल
  1282. 53:53बनवाया। तो जबलपुर का रानीताल, चेरीताल और
  1283. 53:56उनके सेनापति जिसका नाम था आधार सिंह।
  1284. 53:58आधार सिंह के नाम पर आधार ताल का निर्माण
  1285. 54:01करवाया। तो तीन तालाब जबलपुर में उनके
  1286. 54:03द्वारा बनवाए गए। कई सारे मंदिरों का
  1287. 54:05निर्माण करवाया गया। इस समय एक और बात है।
  1288. 54:08रानी दुर्गावती ने अपने शासनकाल में
  1289. 54:10जातपात से दूर रहकर सभी को सम्मान दिया,
  1290. 54:12अधिकार दिए। उनके शासनकाल में गोंड,
  1291. 54:15राजपूत और कई मुस्लिम सेनापति भी मुख्य
  1292. 54:17पदों पर आसीन थे। यानी दुर्गावती जो है
  1293. 54:20काफी अच्छी रानी थी और उन्होंने योग्यता
  1294. 54:22के आधार पर लोगों को पद दिए। अब आते हैं
  1295. 54:24रानी दुर्गावती का एक बहुत इंपॉर्टेंट
  1296. 54:26क्वेश्चन है। बल्लभ संप्रदाय के एक बहुत
  1297. 54:28प्रसिद्ध संत थे। रानी दुर्गावती ने बल्लभ
  1298. 54:30संप्रदाय के स्वामी विट्ठलनाथ का स्वागत
  1299. 54:33किया था और उनको कई सारे जो गांव हैं वह
  1300. 54:35क्या किए थे? वह भेंट किए थे। याद रखिएगा
  1301. 54:38पूछा जाएगा कि कौन से संत को उन्होंने दान
  1302. 54:41दिया था या कौन से संत गोंडवाना राज्य की
  1303. 54:43यात्रा पर आए थे? तो याद रखिएगा बल्लभ
  1304. 54:45संप्रदाय के स्वामी विट्ठलनाथ। ठीक है?
  1305. 54:48कौन थे स्वामी विट्ठलनाथ? रानी दुर्गावती
  1306. 54:51को उनकी कई विशेषताओं के कारण जाना जाता
  1307. 54:53था। वह बहुत सुंदर होने के साथ-साथ बहादुर
  1308. 54:55और योग्य शासका थी। उन्होंने दुनिया को यह
  1309. 54:57बताया कि दुश्मन की आगे यानी दुश्मन के
  1310. 55:00आगे शीश झुकाकर अपमानजनक जीवन जीने से
  1311. 55:03बेहतर है मृत्यु का वरण करना। ठीक है? तो
  1312. 55:06ये उनकी सबसे बड़ी खूबी है। अब हम बात
  1313. 55:08करते हैं उन पे हुए दो हमलों की। पहला
  1314. 55:10हमला होता है बाज बहादुर की तरफ से और
  1315. 55:12दूसरा हमला होता है अकबर की तरफ से। दोनों
  1316. 55:14की कहानी को समझेंगे और फिर हम इसको खत्म
  1317. 55:17करेंगे। सबसे पहले देखिए आपको इस थोड़ी सी
  1318. 55:20स्टोरी को सुनना पड़ेगा। तभी आप समझ
  1319. 55:22पाएंगे कि किस तरीके से गोंडवाना राज्य
  1320. 55:24फैला हुआ था और किस तरीके से गोंडवाना
  1321. 55:26राज्य को आप समझ सकते हैं। हम यह जानते
  1322. 55:28हैं कि एक राज्य हुआ करता था जिसका नाम था
  1323. 55:31मालवा। मालवा आपने सुना है मालवा जो राज्य
  1324. 55:34था इस मालवा में मालवा जो राज्य था इस
  1325. 55:38मालवा राज्य का एक शासक था जिसका नाम था
  1326. 55:42बाज बहादुर। बाज बहादुर यूं तो बेसिकली
  1327. 55:44जिसके लिए फेमस है वह अपनी प्रेम कहानी के
  1328. 55:47लिए फेमस है। उसकी जो पत्नी थी रानी
  1329. 55:49रूपमती जिनसे प्रेम के लिए वह बड़ा
  1330. 55:51प्रसिद्ध था। रानी रूपमती और बाज बहादुर
  1331. 55:54यह मालवा के शासक थे। यह एक अफगान शासक
  1332. 55:56था। सुजात खान का लड़का था। और इस समय अगर
  1333. 56:00आप यह देखेंगे यहां पर यह केसरिया
  1334. 56:04यह देख रहे हैं आप। यह जो है यह गोंडवाना
  1335. 56:06साम्राज्य था। गोंडवाना एक बड़ा राज्य था।
  1336. 56:09जैसा कि आप यहां पे भी देख सकते हैं
  1337. 56:11गोंडवाना राज्य और इस गोंडवाना राज्य की
  1338. 56:13जो शासिका हैं वो हैं हमारी रानी
  1339. 56:15दुर्गावती जो अपने दो सेनापतियों के साथ
  1340. 56:18राज्य का संचालन कर रही हैं। एक सेनापति
  1341. 56:20का नाम आधार सिंह कायस्त और एक का नाम था
  1342. 56:22ठाकुर मानसिंह। इसी समय एक छोटा सा राज्य
  1343. 56:24और उनके पास में था। आप सब जानते हैं इस
  1344. 56:26राज्य का नाम था रीवा राज्य। कौन सा राज्य
  1345. 56:29था? रीवा राज्य। पहले आपको स्टोरी को
  1346. 56:31सुनना है। तो सबसे पहले क्या होता है कि
  1347. 56:34ये जो व्यक्ति है मालवा का शासक इसने सोचा
  1348. 56:37कि रानी तो अकेली हैं गोंडवाना की और एक
  1349. 56:39महिला है। अब इसमें दो बातें हैं कि वो
  1350. 56:42रानी पे भी संभवत नजर रखता था और ये सोचता
  1351. 56:45था कि रानी जो है एक महिला है और इनके
  1352. 56:47राज्य को आसानी से जीत सकता है। इसीलिए
  1353. 56:50उसने क्या किया? रानी दुर्गावती पर हमला
  1354. 56:52किया और दोनों के बीच में युद्ध हुआ।
  1355. 56:55जिसमें बाज बहादुर की बुरी पराजय होती।
  1356. 56:58यानी वह बुरी तरह से हार गया और रानी
  1357. 57:00दुर्गावती की कीर्ति और यश बढ़ गया कि
  1358. 57:03उन्होंने मालवा के एक अफगान शासक बाज
  1359. 57:05बहादुर को बुरी तरीके से हरा दिया और याद
  1360. 57:07रखिएगा मालवा के शासक बाज बहादुर की बुरी
  1361. 57:10किरकिरी होती है क्योंकि वो एक महिला से
  1362. 57:12हार गया। इसने दो बार रानी के राज्य को
  1363. 57:14जीतने का प्रयास किया परंतु यह असफल रहा।
  1364. 57:17ठीक है? तो उसने जो है अपना यह सपना छोड़
  1365. 57:19दिया रानी के राज्य को जीतने का क्योंकि
  1366. 57:21वह एक संगीतकार के तौर पर भी प्रसिद्ध है।
  1367. 57:23गाने के लिए जाना जाता है और रानी रूपमती
  1368. 57:26के प्रेम के लिए जाना जाता है। तो वो उसी
  1369. 57:27चीज में खो गया। अब कुछ समय बाद यहां पर
  1370. 57:30एंट्री होती है खलनायक की। अब वो खलनायक
  1371. 57:33कौन है? आपको थोड़ा सा सुनना पड़ेगा। उस
  1372. 57:35खलनायक का नाम है अकबर। अभी-अभी एनसीईआरटी
  1373. 57:38के सिलेबस में चेंज हुआ है। जिसे अकबर
  1374. 57:40महान कहते थे। अब अकबर को एक क्रूर शासक
  1375. 57:43के तौर पर एनसीआरटी में दर्ज कर दिया गया
  1376. 57:46है। अकबर ने सबसे पहले क्या किया? इस
  1377. 57:48मालवा को जीत लिया।
  1378. 57:51156162 में याद रखिएगा 61 से 62 के बीच यह
  1379. 57:55जो पूरा का पूरा मालवा है यह ग्रीन हो गया
  1380. 57:57और इसी मुगल साम्राज्य का हिस्सा बन गया।
  1381. 57:59बाज बहादुर जो है पराजित होता है और याद
  1382. 58:02रखिएगा रानी रूपमती ने आत्महत्या कर ली थी
  1383. 58:05और बाद में बाज बहादुर अकबर के दरबार में
  1384. 58:07गया। का संरक्षण लिया और बाद में उसने भी
  1385. 58:08जो है रानी रूपमती की दरगाह उस पे कब्र पर
  1386. 58:11जाकर अपना सिर पटका और जो है उनके वियोग
  1387. 58:14में अपना दम तोड़ दिया। बाज बहादुर रानी
  1388. 58:16रूपमती दोनों की प्रेम कहानी बड़ी
  1389. 58:18प्रसिद्ध है। इसी समय क्या होता है कि
  1390. 58:20अकबर का एक सेनापति पहले तो मालवा को
  1391. 58:22जीतता है। हम इसमें सेनापतियों की बात
  1392. 58:24नहीं कर रहे हैं क्योंकि हम अभी पूरा
  1393. 58:26गोंडवाना नहीं पढ़ रहे हैं। अभी हमारा
  1394. 58:28उद्देश्य है रानी दुर्गावती की स्टोरी को
  1395. 58:30कवर करना। ठीक है? जब हम दूसरे लेक्चर में
  1396. 58:32कवर करेंगे तो उसमें फैक्ट बताऊंगा कि
  1397. 58:34किसने हमला किया, कौन था आदम खान। समझ रहे
  1398. 58:37हैं आप? पीर मोहम्मद और आदम खान ने इसको
  1399. 58:38जीता था। फिर क्या होता है? इसी समय जो
  1400. 58:40रीवा राज्य है, रीवा राज्य भी जो है ग्रीन
  1401. 58:43हो गया क्योंकि ये भी मुगलों के अधिकार
  1402. 58:45में आ गया। मुगल सेनापति ने इसको भी जीत
  1403. 58:47लिया। तो रीवा राज्य का जो राजा था उसने
  1404. 58:50भी मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली और
  1405. 58:52कड़ा यानी इलाहाबाद जिसको कहते थे। ये जो
  1406. 58:55इलाहाबाद है वो मुगलों का एक सूबा था।
  1407. 58:57सूबे सूबेदार रहता था इलाहाबाद में। ठीक
  1408. 59:00है? तो इलाहाबाद की सेना ने आकर जो है
  1409. 59:02रीवा राज्य को जीत लिया। अब आप देखो मालवा
  1410. 59:05और रीवा राज्य दोनों ही मुगलों के अधिकार
  1411. 59:07में हैं। और इन दोनों की जो सीमाएं हैं वो
  1412. 59:09किससे टच होने लगी हैं? इन दोनों की ही
  1413. 59:12सीमाएं टच होने लगी हैं गोंडवाना
  1414. 59:14साम्राज्य से। इसका मतलब यह है कि अब मुगल
  1415. 59:17साम्राज्य की सीमाएं गोंडवाना को छूने
  1416. 59:19लगी। और अब यह जरूरी था दो पड़ोसी इतिहास
  1417. 59:22में कभी अच्छे दोस्त नहीं होते। और इसका
  1418. 59:25मतलब यह है कि अब संघर्ष होने वाला है।
  1419. 59:27मुगलों और रानी दुर्गावती के मध्य या
  1420. 59:31मुगलों और गोंडों के मध्य। लेकिन इसकी
  1421. 59:33शुरुआत कैसे होगी और कब होगी? आइए ये
  1422. 59:36समझते हैं। रानी दुर्गावती जिनके पास दो
  1423. 59:39नायाब चीजें हैं। एक उनका सेनापति।
  1424. 59:42सेनापति बहुत वीर है जिनका नाम है आधार
  1425. 59:44सिंह कायस्त। काफी योग्य थे। आधार सिंह
  1426. 59:46कायस्त उनके सेनापति थे और साथ-साथ उनका
  1427. 59:49एक सफेद हाथी बड़ा फेमस था जिसका नाम था
  1428. 59:52क्या? सरमन हाथी। यह रानी का बहुत प्रिय
  1429. 59:55हाथी था और यह वाइट हाथी था जो रानी को
  1430. 59:57बहुत पसंद था। तो इस हाथी और इस सेनापति
  1431. 1:00:00के चर्चे अकबर तक भी थे। अब अकबर कोई ना
  1432. 1:00:03कोई तो रीजन ढूंढेगा ना लड़ने के लिए।
  1433. 1:00:05अचानक अगर हमला करेगा तो क्या बताएगा कि
  1434. 1:00:07हमने क्यों हमला किया और दूसरे राज्य भी
  1435. 1:00:09तो देखेंगे। तो लड़ने के लिए कोई वजह
  1436. 1:00:11चाहिए। लड़ने की पहली वजह तो है सीमा। अब
  1437. 1:00:14अकबर ने इनको एक लेटर भेजा रानी दुर्गावती
  1438. 1:00:16को और उसमें यह लिखा कि आप अपने सेनापति
  1439. 1:00:18आधार सिंह कायस्त और अपने हाथी सरमन को
  1440. 1:00:21हमारे पास भेज दीजिए। बाकी कोई दिक्कत
  1441. 1:00:23नहीं है और हमारी अधीनता स्वीकार कर
  1442. 1:00:25लीजिए। रानी ने अकबर के इस प्रस्ताव को जो
  1443. 1:00:28है ठुगरा दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं
  1444. 1:00:31हो सकता। हम जो है याद रखिएगा हम गोंडवाना
  1445. 1:00:34की शासिका हैं और आपके इस धमकी से डरने
  1446. 1:00:36वाले नहीं हैं। तो रानी ने जब यह जवाब
  1447. 1:00:39दिया तो इसका मतलब यह है कि अब मुगल
  1448. 1:00:40सेनाएं गोंडवाना राज्य पर हमला करेंगी।
  1449. 1:00:43हां या ना? समझ में आ गया कि नहीं आया? तो
  1450. 1:00:45यहां पर हमने यही लिखा है। पहले रानी
  1451. 1:00:47दुर्गावती और अकबर की लड़ाई से पहले किसकी
  1452. 1:00:49लड़ाई हुई थी? रानी दुर्गावती और बाज
  1453. 1:00:51बहादुर की जो मैंने आपको बता दिया। ठीक
  1454. 1:00:53है? बाज बहादुर ने लगभग कम हमला किया था।
  1455. 1:00:56बाज बहादुर ने 1556 में जो है रानी
  1456. 1:00:58दुर्गावती पर हमला कर दिया। रानी की सेना
  1457. 1:01:00बड़ी बहादुरी के साथ लड़ी और बाज बहादुर
  1458. 1:01:03को युद्ध में हार का सामना करना पड़ा और
  1459. 1:01:05रानी दुर्गावती की सेना की जीत हुई। युद्ध
  1460. 1:01:08में बाज बहादुर की सेना का बहुत नुकसान
  1461. 1:01:09हुआ और इस विजय के बाद रानी का नाम और
  1462. 1:01:11प्रसिद्धि जो है अधिक बढ़ गई थी। ठीक है?
  1463. 1:01:14बाज बहादुर कौन था? सुजात खान का लड़का
  1464. 1:01:16था। सुजात खान एक अफगान था। अब रानी
  1465. 1:01:20दुर्गावती और अकबर की लड़ाई यह सबसे फेमस
  1466. 1:01:22है। 1564 का यह संघर्ष है और इस संघर्ष ने
  1467. 1:01:26रानी को और अमर बना दिया। रानी को और महान
  1468. 1:01:29बना दिया। अब हम इसी संघर्ष की बात करने
  1469. 1:01:31वाले हैं। आइए इस संघर्ष को समझते हैं।
  1470. 1:01:33सबसे पहले देखिए जैसा कि मैंने आपको बताया
  1471. 1:01:37कि 1562 में अकबर ने मालवा पर आक्रमण कर
  1472. 1:01:39मालवा के सुल्तान बाज बहादुर को पराजित कर
  1473. 1:01:42दिया और अधिकार कर लिया मालवा पर। ठीक है?
  1474. 1:01:44अब मुगल साम्राज्य की सीमा रानी दुर्गावती
  1475. 1:01:46के राज्य की सीमाओं को क्या करने लगी?
  1476. 1:01:48छूने लगी। वहीं दूसरी तरफ अकबर के आदेश पर
  1477. 1:01:50उसके सेनापति अब्दुल माजिद खान ने रीवा
  1478. 1:01:53राज्य पर भी अधिकार कर लिया। तो रीवा भी
  1479. 1:01:55उनके अधिकार में आ गया और अकबर अपने
  1480. 1:01:57साम्राज्य को और अधिक बढ़ाना चाहता था।
  1481. 1:01:59इसी कारण वह गोंडवाना साम्राज्य को हड़पने
  1482. 1:02:01की योजना बनाने लगा। जैसा कि मैंने आपको
  1483. 1:02:03इस डायग्राम में बताया। यही यहां पर लिखा
  1484. 1:02:05हुआ है। अब लड़ाई की शुरुआत कैसे करेंगे?
  1485. 1:02:09तो रानी दुर्गावती के पास अकबर ने एक
  1486. 1:02:11संदेश भिजवाया जिसमें लिखा था कि वह अपने
  1487. 1:02:13प्रिय हाथी शरमन और सूबेदार आधार सिंह को
  1488. 1:02:17मुगल दरबार में भेज दें। रानी अकबर के
  1489. 1:02:19मंसूबों को भली-भांति परिचित थी। उन्होंने
  1490. 1:02:21अकबर की बात मानने से इंकार कर दिया और
  1491. 1:02:23अपनी सेना को युद्ध की तैयारी करने का
  1492. 1:02:25आदेश दे दिया। अकबर ने सेनापति आसफ खान ये
  1493. 1:02:29इंपॉर्टेंट है। आसफ खान को गोंडवाना
  1494. 1:02:31साम्राज्य पर अटैक करने का आदेश दे दिया
  1495. 1:02:33और इस प्रकार संघर्ष होने जा रहा है। अब
  1496. 1:02:35आपको संघर्ष को समझना है। यानी जैसा कि
  1497. 1:02:39मैंने आपको अभी बताया कि जो रानी का राज्य
  1498. 1:02:42है, रानी का राज्य कौन सा है? रानी का
  1499. 1:02:44राज्य जो गोंडवाना था, यह वाला गोंडवाना
  1500. 1:02:46साम्राज्य यह दो ओर से मुगल साम्राज्य से
  1501. 1:02:48घिर चुका है। यानी गोंडवाना जो राज्य है,
  1502. 1:02:51इसकी जो सीमा है, दो ओर से मुगलों से लग
  1503. 1:02:53गई है। या आप ऐसे भी समझ लीजिए कि तीन ओर
  1504. 1:02:55से ये जो पूरा इलाका था, यह वाला भी यह
  1505. 1:02:58वाला जो इलाका है, यह मुगल साम्राज्य का
  1506. 1:03:00पार्ट ऑलरेडी बन चुका था। या क्या बन चुका
  1507. 1:03:03था? यह मुगल स्टेट बन चुका था। यानी मुगल
  1508. 1:03:05साम्राज्य का हिस्सा बन चुका था। और ऊपर
  1509. 1:03:08के दोनों हिस्सों से जो है ये गोंडवाना
  1510. 1:03:09मुगल राज्य से सीमा साझा करता था। इसीलिए
  1511. 1:03:12अब युद्ध जरूरी हो गया। और गोंडवाना राज्य
  1512. 1:03:15की जो रानी दुर्गावती हैं, रानी दुर्गावती
  1513. 1:03:17का जो पुत्र है उनका नाम याद रखिएगा वीर
  1514. 1:03:19नारायण जो युद्ध में उनके साथ लड़ने के
  1515. 1:03:22लिए तैयार है। तो रानी दुर्गावती अपने
  1516. 1:03:24पुत्र वीर नारायण और अपने सेनापतियों के
  1517. 1:03:27साथ युद्धभूमि में तैयार हो जाती हैं और
  1518. 1:03:29अकबर की सेनाओं का सामना करने के लिए
  1519. 1:03:32तैयार हैं। याद रखिएगा अकबर बहुत ही
  1520. 1:03:34शक्तिशाली है लेकिन गोंडवाना भी कम नहीं
  1521. 1:03:36है। अब लड़ाई की जो है तैयारियां यहां पर
  1522. 1:03:39हो जाती हैं। और अब युद्ध कैसे होता है?
  1523. 1:03:41तो युद्ध की कहानी सिंपल सी है। देखिए
  1524. 1:03:46रानी को पता था। देखिए
  1525. 1:03:50जब रानी दुर्गावती पर मुगल सेनाओं ने हमला
  1526. 1:03:54किया तो पहला जब हमला किया आसफ खान के
  1527. 1:03:56द्वारा जो मुगलों का सेनापति था अकबर का
  1528. 1:03:58सेनापति तो उस पहले हमले में रानी
  1529. 1:04:00दुर्गावती की जो गोंड सेना थी उस सेना ने
  1530. 1:04:03मुगलों की सेना को खदेड़ दिया। याद रखिएगा
  1531. 1:04:06पहली दिन की लड़ाई में रानी बड़ी हावी रही
  1532. 1:04:09और युद्ध रुक जाता है। रानी चाहती थी कि
  1533. 1:04:12हम इस युद्ध विराम में रात के रात के समय
  1534. 1:04:15भी जो है मुगलों पर हमला करें और उनको
  1535. 1:04:17खदेड़ दें। लेकिन उनके सेनापतियों ने ऐसा
  1536. 1:04:19करने की सलाह नहीं दी और उन्होंने कहा कि
  1537. 1:04:21नहीं कल हम लड़ेंगे। अब आसफ खान जो कि
  1538. 1:04:24अकबर का सेनापति था वह अपनी हार से
  1539. 1:04:26तिलमिलाया हुआ था और वह बदला लेना चाहता
  1540. 1:04:28था। तो दूसरे दिन उसने अपनी सेना को थोड़ा
  1541. 1:04:30और बड़ा किया और बड़ा करके जो है रानी पर
  1542. 1:04:32हमला कर दिया। रानी जो है पुरुष वेश में
  1543. 1:04:35सैनिक रूप धारण करके जो है मुगलों से
  1544. 1:04:38संघर्ष कर रही थी। इसी समय रानी के पास एक
  1545. 1:04:40तीर जो है आता है और उनकी गर्दन में लग
  1546. 1:04:43जाता है। उनके पास शरीर में लग जाता है
  1547. 1:04:45जिससे वो मूर्छित हो जाती हैं। जब उनको
  1548. 1:04:47बाहर ले जाने की कोशिश की गई तो उन्होंने
  1549. 1:04:49मना कर दिया और कुछ समय पश्चात जो है रानी
  1550. 1:04:51जब दोबारा उनको होश आता है और वो लड़ती
  1551. 1:04:54हैं तो देखती हैं कि वो चारों ओर से जो है
  1552. 1:04:57किससे? मुगलों से घिर चुकी थी। जब वो
  1553. 1:04:59चारों ओर से मुगलों से घिर चुकी तो
  1554. 1:05:02उन्होंने एक प्रतिज्ञा ली उन्होंने कहा था
  1555. 1:05:03कि मैं जीते जी दुश्मन के हाथ नहीं आऊंगी
  1556. 1:05:06और जीते जी मैं अपने शरीर को दुश्मन को
  1557. 1:05:08हाथ नहीं लगाने दूंगी। तो जब वो मुगलों से
  1558. 1:05:10घिर जाती हैं तो उन्होंने अपनी तलवार लेकर
  1559. 1:05:13जो है अपने आप को खत्म कर लिया। लेकिन
  1560. 1:05:15इसमें एक बात यह है कि जब वो चारों ओर से
  1561. 1:05:18घिर जाती हैं तो उनके सेनापति आधार सिंह
  1562. 1:05:20कायस्त उनके पास आते हैं और उनसे कहते हैं
  1563. 1:05:22कि रानी आप यहां से सुरक्षित चली जाइए। तो
  1564. 1:05:24रानी जाने से मना करती हैं। रानी अपने
  1565. 1:05:27सेनापति से कहती हैं कि अपनी तलवार लो और
  1566. 1:05:30मेरा सर काट दो क्योंकि वो नहीं चाहती थी
  1567. 1:05:32कि वो पकड़ी जाए और मुगलों के कैद में
  1568. 1:05:35जाएं मुगल उनको हाथ लगाएं। तो रानी जब
  1569. 1:05:37रानी ने अपने सेनापति से ऐसा करने के लिए
  1570. 1:05:39कहा तो सेनापति ने मना कर दिया तो
  1571. 1:05:41उन्होंने अपनी कटार से लेकर जो है अपने आप
  1572. 1:05:43को समाप्त कर लिया और इस प्रकार रानी ने
  1573. 1:05:45अपना बलिदान दे दिया। तो देखिए आइए आसफ
  1574. 1:05:49खान एक विशाल सेना लेकर रानी पर आक्रमण
  1575. 1:05:52करने के लिए आगे बढ़ा। रानी दुर्गावती
  1576. 1:05:54जानती थी कि उनकी सेना अकबर की सेना के
  1577. 1:05:56आगे बहुत छोटी है। युद्ध में एक और जहां
  1578. 1:05:58मुगलों की विशाल सेना आधुनिक
  1579. 1:05:59अस्त्र-शस्त्र के साथ प्रशिक्षित सेना थी।
  1580. 1:06:02वहीं रानी दुर्गावती की सेना छोटी और
  1581. 1:06:04पुराने हथियार जो कि गों के थे उनसे तैयार
  1582. 1:06:07थी। उन्होंने अपनी सेना को नरई नाला ये
  1583. 1:06:09वर्ड इंपॉर्टेंट है। नरई नाला घाटी की तरफ
  1584. 1:06:11कूच करने का आदेश दिया। क्योंकि नरई नाला
  1585. 1:06:13एक ऐसी घाटी थी जो जंगल से घिरी हुई थी।
  1586. 1:06:15जहां पर थोड़ा सा गों के लिए एडवांटेज हो
  1587. 1:06:18सकता था। ठीक है? ठीक है? रानी दुर्गावती
  1588. 1:06:19के लिए नरई युद्ध हेतु सुविधाजनक स्थान
  1589. 1:06:22नरई के चारों तरफ घने जंगल से घिरी
  1590. 1:06:24पहाड़ियां थी और मुगल सेना के लिए यह
  1591. 1:06:25क्षेत्र थोड़ा सा अनजान था। अब क्या होता
  1592. 1:06:28है रानी दुर्गावती का बलवान बलिदान अपनी
  1593. 1:06:31हार से तिलमिलाए मुगल सेना के सेनापति आसफ
  1594. 1:06:33खान ने याद रखिएगा दूसरे दिन विशाल सेना
  1595. 1:06:35एकत्र करके तोपों के साथ जो है रानी पर
  1596. 1:06:38हमला कर दिया और रानी दुर्गावती भी अपने
  1597. 1:06:41प्रिय सफेद हाथी याद रखिएगा उनके प्रिय
  1598. 1:06:43सफेद हाथी का नाम क्या है? सरवन पर सवार
  1599. 1:06:45होकर युद्ध मैदान में उतरी। रानी के साथ
  1600. 1:06:47राजकुमार वीर नारायण भी थे। रानी की सेना
  1601. 1:06:50ने कई बार मुगल सेना को पीछे धकेला। कुंवर
  1602. 1:06:52वीर नारायण के घायल हो जाने से रानी ने
  1603. 1:06:55उन्हें युद्ध से बाहर सुरक्षित जगह भिजवा
  1604. 1:06:57दिया। याद रखिएगा सबसे पहले वीर नारायण
  1605. 1:06:59घायल होते हैं। रानी ने उनको सुरक्षित
  1606. 1:07:01स्थान पर भेज दिया और रानी युद्ध करने
  1607. 1:07:03लगती हैं। युद्ध के मैदान में एक तीर रानी
  1608. 1:07:05दुर्गावती के कान के पास लगा और दूसरा जो
  1609. 1:07:07तीर है उनकी गर्दन में लगा। तीर लगने से
  1610. 1:07:09रानी कुछ समय के लिए अचेत हो गई। जब पुनः
  1611. 1:07:12रानी को होश में आया तब तक मुगल सेना ने
  1612. 1:07:14क्या कर लिया? अपना पल्ला भारी कर लिया।
  1613. 1:07:17यह जो तीर थे, वह निर्णायक सिद्ध हुए और
  1614. 1:07:20मुगल सेना हावी हो गई। रानी के सेनापतियों
  1615. 1:07:23ने उन्हें युद्ध का मैदान छोड़कर सुरक्षित
  1616. 1:07:25स्थान पर जाने की सलाह दी। परंतु रानी ने
  1617. 1:07:27इस सलाह को दरकिनार कर दिया। यानी मना कर
  1618. 1:07:29दिया और अपने आप को चारों तरफ से घिरता
  1619. 1:07:31देख रानी ने अपने शरीर को शत्रुओं के हाथ
  1620. 1:07:34ना लगने का सौगंध खाया था। याद रखिए रानी
  1621. 1:07:37ने यह सौगंध ली थी कि वह जीते जी जो है
  1622. 1:07:39शत्रुओं के हाथ नहीं आएंगी और कोई शत्रु
  1623. 1:07:41उनको छू नहीं पाएगा। जीते जी। याद रखिएगा
  1624. 1:07:44इसी कथन का अनुसरण रानी अवंतीबाई ने किया
  1625. 1:07:46था क्योंकि वह भी इस क्षेत्र से आती थी
  1626. 1:07:48रामगढ़ की जो रानी थी अवंतीबाई उन्होंने
  1627. 1:07:50कहा था कि हमारी दुर्गावती ने कसम खाई थी
  1628. 1:07:53कि जीते जी वो बैरी के हाथ नहीं छुए
  1629. 1:07:56जाएंगी और उसी परंपरा का अनुसरण करते हुए
  1630. 1:07:58रानी जो अवंतीबाई हैं उन्होंने भी क्या कर
  1631. 1:08:01लिया था अपनी कटार से अपना बलिदान दे दिया
  1632. 1:08:03था। अपने मान सम्मान की रक्षा हेतु अपनी
  1633. 1:08:06तलवार निकाली और स्वयं तलवार घोंप कर अपना
  1634. 1:08:09बलिदान दे दिया और इतिहास में वीरांगना
  1635. 1:08:11रानी सदा सदा के लिए क्या हो गई? अमर हो
  1636. 1:08:13गई। जिस दिन रानी ने अपना बलिदान दिया उस
  1637. 1:08:15दिन का नाम उस दिन की तारीख है 24 जून
  1638. 1:08:191564।
  1639. 1:08:2024 दिन याद रखिएगा 24 जून जो है वह रानी
  1640. 1:08:23दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उनकी समाधि
  1641. 1:08:25पर प्रत्येक वर्ष 24 दिन को एक तरीके से
  1642. 1:08:2824 जून को मेला लगता है। अब प्रतिवर्ष 24
  1643. 1:08:31जून को बलिदान दिवस शौर्य दिवस के रूप में
  1644. 1:08:33मनाया जाता है और रानी दुर्गावती को स्मरण
  1645. 1:08:35किया जाता है। महारानी गोंड वंश की रानी
  1646. 1:08:37सदैव अमर रहेंगी और संपूर्ण गोंडवाना
  1647. 1:08:39साम्राज्य के ऐतिहासिक तौर पर जानी
  1648. 1:08:41जाएंगी। इसके बाद उनके बलिदान के बाद उनके
  1649. 1:08:45राज्य का क्या हुआ? थोड़ा सा है। देखिए
  1650. 1:08:48रानी दुर्गावती के बलिदान के बाद उनका जो
  1651. 1:08:50राज्य है याद रखना कुछ समय के लिए उनके जो
  1652. 1:08:53बेटे हैं यानी वीर नारायण ने चौरागढ़ से
  1653. 1:08:55शासन किया। लेकिन मुगलों ने जब चौरागढ़ पर
  1654. 1:08:57हमला किया तो चौरागढ़ में वो लड़ते हुए
  1655. 1:09:00मारे गए। तो रानी दुर्गावती के बलिदान के
  1656. 1:09:02बाद कुंवर वीर नारायण चौरागढ़ में मुगलों
  1657. 1:09:03से युद्ध करते हुए जो है वीरगति को
  1658. 1:09:05प्राप्त हुए और अब संपूर्ण गोंडवाना
  1659. 1:09:07मुगलों के अधिकार में चला गया। अब इसमें
  1660. 1:09:10एक लास्ट बात और है कि युद्ध के पश्चात
  1661. 1:09:12संग्राम शाह के छोटे पुत्र रानी दुर्गावती
  1662. 1:09:14के जो देवर हैं जिनका नाम था चंद्र शाह।
  1663. 1:09:17चंद्र शाह ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर
  1664. 1:09:19ली और इनको कुछ किले दे दिए गए। 52 किलों
  1665. 1:09:21में से कुछ किले जो है चंद्र शाह को सौंप
  1666. 1:09:23दिए गए क्योंकि कहते हैं चंद्र शाह मुगलों
  1667. 1:09:26से मिले हुए थे और चंद्र शाह ने रानी के
  1668. 1:09:28विरुद्ध जो है क्या किया था? मुगलों की
  1669. 1:09:30सहायता की थी। ठीक है? ठीक है? तो ये सारी
  1670. 1:09:32स्टोरी जो है रानी दुर्गावती के बारे में
  1671. 1:09:34है। रानी दुर्गावती की जो समाधि है वो
  1672. 1:09:36बरेला में है जो रानी दुर्गावती का समाधि
  1673. 1:09:38स्थल है और ये बरेला ग्राम कहां है?
  1674. 1:09:40जबलपुर में है। ठीक है? इसके अलावा यहां
  1675. 1:09:43प्रतिवर्ष 24 जून को महारानी दुर्गावती के
  1676. 1:09:45बलिदान दिवस पर क्या लगता है? गोंडवाना जो
  1677. 1:09:47समाज है एवं मध्य प्रदेश शासन स्थान पर
  1678. 1:09:49उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता है। इसके
  1679. 1:09:52अलावा कुछ और विशेष जानकारी है। 1988 में
  1680. 1:09:54जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर रानी
  1681. 1:09:57दुर्गावती विश्वविद्यालय कर दिया। तो यह
  1682. 1:09:59आपके लिए इंपॉर्टेंट हो सकता है। भारत
  1683. 1:10:01शासन द्वारा 24 जून 1988 को रानी
  1684. 1:10:03दुर्गावती के बलिदान दिवस पर एक डाक टिकट
  1685. 1:10:05जारी कर जो है उनको सन सम्मान दिया गया और
  1686. 1:10:08याद रखिएगा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय
  1687. 1:10:10जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम कर दिया गया।
  1688. 1:10:12इसके अलावा कुछ चीजें और हैं। कुछ स्कूल
  1689. 1:10:14कॉलेज बनाए गए हैं जिनके बारे में मैंने
  1690. 1:10:16आप लोगों को यहां बता दिया। मुझे उम्मीद
  1691. 1:10:18है कि जो जानकारी मुझे मेरे द्वारा दी गई
  1692. 1:10:21है वो आप लोगों को क्लियर होगी और इसमें
  1693. 1:10:23हमने रानी दुर्गावती के शौर्य के बारे में
  1694. 1:10:26जाना। रानी दुर्गावती के सम्मान के बारे
  1695. 1:10:28में जाना। रानी दुर्गावती जिन्होंने अपने
  1696. 1:10:30आत्मसम्मान के लिए जिन्होंने अपने सित्व
  1697. 1:10:33की रक्षा करने के लिए जो है क्या कर दिया?
  1698. 1:10:35सबसे बड़ा बलिदान दे दिया। रानी दुर्गावती
  1699. 1:10:38को इतिहास में इसलिए भी जाना जाना चाहिए
  1700. 1:10:40और आप सबको उनको नमन करना चाहिए कि उस समय
  1701. 1:10:43अकबर जैसा शक्तिशाली शासक जिसके आगे चाहती
  1702. 1:10:46रानी अगर उनको अपना शासन चलाना होता, अपने
  1703. 1:10:48राज्य को झुकाना होता या वह अपनी गर्दन को
  1704. 1:10:51झुकाना चाहती, तो वह क्या कर सकती थी?
  1705. 1:10:52अकबर की अधीनता भी स्वीकार कर सकती थी।
  1706. 1:10:54लेकिन उन्होंने अपने स्वाभिमान सम्मान के
  1707. 1:10:57बदले क्या चुना? अपने शीश को कटाना बेहतर
  1708. 1:11:00चुना। इसीलिए रानी दुर्गावती भारतीय
  1709. 1:11:03इतिहास की उन वीरांगनाओं में शामिल हैं जो
  1710. 1:11:06अग्रिम पंक्ति में जिनका नाम लिखा जाता है
  1711. 1:11:08रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मीबाई जो भारत
  1712. 1:11:11की उन महान वीरांगना महिलाओं में शामिल
  1713. 1:11:13हैं जिन्होंने अपना बलिदान जो है अपना
  1714. 1:11:15सर्वस्व बलिदान दिया था। यह गोंडवाना
  1715. 1:11:17साम्राज्य की महान राजकुमारी थी। याद
  1716. 1:11:20रखिएगा रानी दुर्गावती ने चंदेल वंश का
  1717. 1:11:22नाम भी रोशन किया है कि वो राजपूत कुल से
  1718. 1:11:24बिलोंग करती थी और उन्होंने गोंडवाना वंश
  1719. 1:11:27की आन वांसान और परंपरा का भी पालन किया
  1720. 1:11:29है क्योंकि गोंड इस समय एक शक्तिशाली
  1721. 1:11:31राज्य था और गोंड जो लोग हैं वह अपनी
  1722. 1:11:33वीरता और साहस के लिए जाने जाते हैं। तो
  1723. 1:11:36इस वीडियो में मुझे उम्मीद है कि आप लोगों
  1724. 1:11:38को यह वीडियो अच्छा लगेगा। इस वीडियो में
  1725. 1:11:40हमने रानी दुर्गावती के शौर्य की कहानी
  1726. 1:11:42सुनी और रानी दुर्गावती के बारे में बहुत
  1727. 1:11:44कुछ जाना। ठीक है? आप इनमें से कुछ
  1728. 1:11:47इमारतों को जरूर याद रखिएगा। तो ये हमारी
  1729. 1:11:49रानी दुर्गावती हैं जो गोंडवाना की शेरनी
  1730. 1:11:52के नाम से प्रसिद्ध हैं और इन्हें शौर्य
  1731. 1:11:54एवं बलिदान का प्रतीक भी माना जाता है।
  1732. 1:11:56कभी पूछा जाए किसे शौर्य एवं बलिदान का
  1733. 1:11:59प्रतीक माना जाता है रानी दुर्गावती। किसे
  1734. 1:12:01गोंडवाना की शेरनी कहते हैं रानी
  1735. 1:12:03दुर्गावती। ये जो कुछ इमारतें थी जो मैंने
  1736. 1:12:05आपको बताई याद रखिएगा। चौरागढ़ का किला
  1737. 1:12:08याद रखिएगा कहां पर है? यह नरसिंहपुर जिले
  1738. 1:12:10में है। सिंघोरागढ़ कहां है? दमोह में है।
  1739. 1:12:13बरेला ग्राम उनकी समाधि है जो कहां पर है?
  1740. 1:12:15जबलपुर में है और मदन मोहन फोर्ट मदन महल
  1741. 1:12:19फ़ोर्ट याद रखिएगा यह सबसे छोटा किला है
  1742. 1:12:21मध्य प्रदेश का। मध्य प्रदेश का सबसे छोटा
  1743. 1:12:23किला कौन सा है? यही सबसे छोटा किला है
  1744. 1:12:25मध्य प्रदेश का और इसको आप याद रखेंगे। ये
  1745. 1:12:28जबलपुर में है जिसे पिंक स्टेशन के नाम से
  1746. 1:12:31भी जानते हैं। ठीक है? तो ये सारे जो
  1747. 1:12:33स्थान है ये गोंड वंश से संबंधित हैं।
  1748. 1:12:36मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को यह लेक्चर
  1749. 1:12:38अच्छा लगेगा और आप इस पे अपना फीडबैक जरूर
  1750. 1:12:40देंगे। आगे आप किस क्रांतिकारी, किस वीर
  1751. 1:12:43योद्धा के बारे में जानना चाहते हैं? किस
  1752. 1:12:45वीरांगना के बारे में जानना चाहते हैं।
  1753. 1:12:47जितने ज्यादा कमेंट आएंगे उसी टॉपिक पर
  1754. 1:12:49आपको वीडियो मिलेगा। मुझे उम्मीद है कि आप
  1755. 1:12:51लोगों को यह वीडियो काफी पसंद आएगा।
  1756. 1:12:54थैंक यू। जय हिंद।
  1757. 1:13:07नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एक बार पुनः
  1758. 1:13:09स्वागत है मध्य प्रदेश के वीरों के इतिहास
  1759. 1:13:12की इस सीरीज में और आज हम बात करने वाले
  1760. 1:13:14हैं मध्य प्रदेश के एक बहुत ही महान शासक
  1761. 1:13:17जिन्होंने गोंड साम्राज्य में 52 किलों पर
  1762. 1:13:20अधिकार कर गोंड सत्ता को जो है काफी मजबूत
  1763. 1:13:22कर दिया था। और आज की कहानी के हमारे नायक
  1764. 1:13:25हैं जिनका नाम है राजा संग्राम शाह गोंड।
  1765. 1:13:29तो राजा संग्राम शाह गोंड कौन थे और किस
  1766. 1:13:31तरीके से उन्होंने जो है इस राज्य की
  1767. 1:13:34स्थापना की थी। गोंडवाना को मजबूत किया ये
  1768. 1:13:36आज के लेक्चर में हम लोग जानेंगे। तो 15
  1769. 1:13:38मिनट मुझे दीजिए और संग्राम शाह के बारे
  1770. 1:13:40में जितने भी इंपॉर्टेंट तथ्य हैं एग्जाम
  1771. 1:13:42ओरिएंटेड जो बातें हैं वो सभी की सभी आपको
  1772. 1:13:44पता चल जाएंगी। तो मध्य प्रदेश के वीरों
  1773. 1:13:46के इतिहास की सीरीज में आज हम बात कर रहे
  1774. 1:13:48हैं राजा संग्राम शाह गोंड जिनका एक फेमस
  1775. 1:13:51टाइटल नेम है जिसे हम बोलते हैं 52
  1776. 1:13:53गणाधिपति अर्थात 52 किलों के स्वामी। तो
  1777. 1:13:56आखिर यह क्या कहानी है? 52 किलो के स्वामी
  1778. 1:13:59की आइए चर्चा करते हैं। तो इसके लिए आपको
  1779. 1:14:01सबसे पहले एक छोटी सी स्टोरी सुननी पड़ेगी
  1780. 1:14:04कि किस प्रकार जो है हमारे जो संग्राम शाह
  1781. 1:14:08हैं वो गद्दी पर बैठते हैं। संग्राम शाह
  1782. 1:14:10की गद्दी पर बैठने की कहानी क्या है
  1783. 1:14:12एक्चुअली में इसे समझना पड़ेगा। इसे समझने
  1784. 1:14:14के लिए हमको क्या करना पड़ेगा? देखो बड़ा
  1785. 1:14:16सिंपल सा है।
  1786. 1:14:18सबसे पहले आपको चलना पड़ेगा एक अभिलेख के
  1787. 1:14:21पास और इस अभिलेख का नाम है रामनगर
  1788. 1:14:24प्रशस्ति अभिलेख। देखिए रामनगर प्रशस्ति
  1789. 1:14:28जो अभिलेख है उसका क्याेंस है यह आपको
  1790. 1:14:31समझना है। रामनगर प्रशस्ति अभिलेख रामनगर
  1791. 1:14:35जो प्रशस्ति है या रामनगर प्रशस्ति अभिलेख
  1792. 1:14:37इसको कहा जाता है। इस अभिलेख
  1793. 1:14:41के जो रचनाकार हैं जिन्होंने इस अभिलेख को
  1794. 1:14:44लिखा है रचनाकार उनका नाम है पंडित जय
  1795. 1:14:47गोविंद। क्या नाम था? पंडित जय गोविंद
  1796. 1:14:50इसके रचनाकार हैं। और पंडित जय गोविंद ने
  1797. 1:14:53क्या लिखा है? इसमें जरा ध्यान से सुनना।
  1798. 1:14:55पंडित जय गोविंद ने इस विजयनगर इस रामनगर
  1799. 1:15:00प्रशस्ति में याद रखिएगा गोंड वंश के 53
  1800. 1:15:04राजाओं का उल्लेख किया है। बेसिकली यह जो
  1801. 1:15:06अभिलेख है इसमें गोंड वंश के राजाओं की
  1802. 1:15:09वंशावली मिलती है। गोंड वंश के 53 राजाओं
  1803. 1:15:13का उल्लेख है। 53 राजाओं का उल्लेख है।
  1804. 1:15:17पहली चीज और यह आपको याद रखना है। यह जो
  1805. 1:15:2053 राजा हैं इनकी जो वंशावली है वह शुरू
  1806. 1:15:23होती है कहां से? याद रखिएगा इनकी जो
  1807. 1:15:25वंशावली शुरू होती है वह शुरू होती है
  1808. 1:15:27हमारी यादव राय से। यादव राय जो कि गोंड
  1809. 1:15:31वंश के संस्थापक थे यादव राय से प्रारंभ
  1810. 1:15:34होकर यादव राय से प्रारंभ होती है। और जिन
  1811. 1:15:38शासक के द्वारा इसका निर्माण करवाया गया
  1812. 1:15:41था। यानी यह जो रामनगर प्रशस्ति है इसके
  1813. 1:15:43रचनाकार तो यह हो गए। और किस राजा का है
  1814. 1:15:46यह अभिलेख? तो वो है हमारे याद रखिएगा
  1815. 1:15:48हृदय शाह गोंड जिन्होंने रामनगर को कैपिटल
  1816. 1:15:52बनाया था। तो हृदय शाह गोंड के द्वारा एक
  1817. 1:15:54अभिलेख लिखवाया गया था और इस अभिलेख का
  1818. 1:15:56नाम क्या था? रामनगर प्रशस्ति। तो इस
  1819. 1:15:58अभिलेख में उन्होंने राजा हृदय शाह जो
  1820. 1:16:01गोंड थे उन्होंने अपने पूर्वजों के बारे
  1821. 1:16:03में लिखवाया था और इसमें उन्होंने बताया
  1822. 1:16:05था कि हमारे जो आदि पूर्वज हैं वो यादव
  1823. 1:16:07राय हैं। इनके द्वारा ही क्या किया गया
  1824. 1:16:09था? गोंड वंश की स्थापना की गई। और याद
  1825. 1:16:12रखिएगा इसी 53 राजाओं की क्रम में 53 जो
  1826. 1:16:15राजा रहे हैं यादव राय से लेकर इसमें इसी
  1827. 1:16:19की 48वीं पीढ़ी में 48वीं पीढ़ी में याद
  1828. 1:16:22रखिएगा यानी 48वें जो राजा हैं याद रखिएगा
  1829. 1:16:25वो उन राजा का नाम क्या था? उन राजा का
  1830. 1:16:28नाम था संग्राम शाह। तो आखिर संग्राम शाह
  1831. 1:16:31कौन है? इसके बारे में एक डिटेल में
  1832. 1:16:34इंफॉर्मेशन मिलती है। रामनगर प्रशस्ति
  1833. 1:16:36अभिलेख। इसके जो कॉमन क्वेश्चन है वो क्या
  1834. 1:16:38है कि रामनगर प्रशस्ति अभिलेख अगर आपसे
  1835. 1:16:40पूछा जाए किस राजा का है? हृदय शाह गोंड।
  1836. 1:16:43इसके लेखक कौन है? तो याद रखिएगा पंडित जय
  1837. 1:16:45गोविंद है। यह कहां से मिला है? मंडला
  1838. 1:16:48डिस्ट्रिक्ट में एक जगह है रामनगर। इसमें
  1839. 1:16:50कितने राजाओं का उल्लेख है? गोंड वंश के
  1840. 1:16:5253 राजाओं का उल्लेख है। और 48वीं पीढ़ी
  1841. 1:16:54में कौन होते हैं? संग्राम शाह। तो ये एक
  1842. 1:16:56बेसिक इंफॉर्मेशन हमको मिलती है। यह हो गई
  1843. 1:16:59बात यहां पर। अब सवाल यह उठता है कि आखिर
  1844. 1:17:03संग्राम शाह गोंड को सत्ता कैसे मिली और
  1845. 1:17:05इन्होंने क्या-क्या किया? मैं तो बहुत कम
  1846. 1:17:06शब्दों में आपको बताता हूं। इस कहानी को
  1847. 1:17:08आप ऐसे समझिए कि एक गोंड राजा थे। एक गोंड
  1848. 1:17:13राजा थे और उनका नाम था यह हमारा गोंडवाना
  1849. 1:17:16साम्राज्य है। इसको आपको समझना पड़ेगा। यह
  1850. 1:17:19है हमारा गोंडवाना साम्राज्य। और यह जो
  1851. 1:17:22गोंडवाना साम्राज्य इस गोंडवाना साम्राज्य
  1852. 1:17:24के जो शासक हैं उनका नाम था
  1853. 1:17:27अर्जुन दास। यानी अभी राजा कौन है? अर्जुन
  1854. 1:17:31दास गोंडवाना के राजा हैं। और अर्जुन दास
  1855. 1:17:34के दो बेटे हैं। अर्जुन दास के कितने
  1856. 1:17:36पुत्र हैं? अर्जुन दास के दो पुत्र हैं।
  1857. 1:17:38एक पुत्र का नाम है आमणदास या जिसे अमन
  1858. 1:17:43दास भी कहते हैं। आमदास
  1859. 1:17:48याद रखिएगा और दूसरे थे जिनका नाम था
  1860. 1:17:51जोगीराज।
  1861. 1:17:53क्या नाम था? जोगीराज।
  1862. 1:17:55अब कहानी में क्या ट्विस्ट आता है कि
  1863. 1:17:57गोंडवाना राज्य का एक पड़ोसी राज्य था और
  1864. 1:18:00इस राज्य का नाम था बघेल राज। जिसे हम
  1865. 1:18:02बघेलखंड कहते हैं ना वह इन्हीं बघेल
  1866. 1:18:05राजाओं के नाम पर बघेल राज बघेल राज्य के
  1867. 1:18:08जो शासक थे उनका नाम था जो यहां के शासक
  1868. 1:18:12हैं उनका नाम था वीर सिंह देव वीर सिंह
  1869. 1:18:15देव बघेल है जो कि एक शक्तिशाली राजा थे
  1870. 1:18:18वीर सिंह देव बघेल तो यह भी आपको याद रखना
  1871. 1:18:20है वीर सिंह देव बघेल बघेल के बारे में अब
  1872. 1:18:23होता क्या है कि यह जो राजा है गोंडवाना
  1873. 1:18:26के जिनका नाम अर्जुन दास है और इनके दो
  1874. 1:18:27बेटे हैं एक का नाम बामणदास एक का नाम
  1875. 1:18:29जोगीराज है। प्रॉब्लम यह थी कि इनका जो यह
  1876. 1:18:32बेटा है वह विद्रोही प्रवृत्ति का था
  1877. 1:18:34जिसका नाम आमनदास था और विद्रोह करके यह
  1878. 1:18:37क्या करते हैं? भाग जाते हैं। जिनका नाम
  1879. 1:18:39होता है किसके राज में भाग जाते हैं? बघेल
  1880. 1:18:41राज्य के राजा वीर सिंह देव के यहां शरण
  1881. 1:18:43लेते हैं। इस समय अब अर्जुन दास ने क्या
  1882. 1:18:47किया? अर्जुन दास ने अपने दूसरे बेटे को
  1883. 1:18:48राजा बना दिया जिनका नाम जोगीराज था। तो
  1884. 1:18:51जोगीराज जो है वो राजा बना दिए गए। अब इस
  1885. 1:18:53बात से ये नाराज हुए कौन? आमरणदास नाराज
  1886. 1:18:56हुए और आमरणदास ने आकर क्या कर दिया? बाद
  1887. 1:18:58में यह यहां से लौटे और उन्होंने आके अपने
  1888. 1:19:00पिता की हत्या कर दी जिनका नाम था अर्जुन
  1889. 1:19:03दास और अपने पिता की हत्या करके जो है इस
  1890. 1:19:05राज्य पर अधिकार कर लिया किस राज्य पर
  1891. 1:19:07गोंडवाना पर लेकिन जैसे ही यह खबर लगी
  1892. 1:19:10किसको वीर सिंह देव को तो वीर सिंह देव ने
  1893. 1:19:13क्या किया इस राज्य पर हमला कर दिया किस
  1894. 1:19:15राज्य पर यानी बघेल राज्य पर हमला इस पे
  1895. 1:19:17गोंडवाना राज्य पर हमला करके इसे अपने
  1896. 1:19:19अधिकार में ले लिया ठीक है तो कुल मिलाकर
  1897. 1:19:22कहानी का सार यह है कि गोंडवाना के जो
  1898. 1:19:25शासक है अर्जुन देश उनकी हत्या कर दी उनके
  1899. 1:19:27बेटे बेटे ने जिनका नाम आमणदास है। लेकिन
  1900. 1:19:30आमणदास के इस राज्य पर कब्जा कर लिया वीर
  1901. 1:19:32सिंह देव जो बघेल शासक हैं जो उनके पड़ोसी
  1902. 1:19:36राजा हैं। लेकिन वीर सिंह देव से बाद में
  1903. 1:19:38इसने जो आमणदास है यानी यह वाला जो लड़का
  1904. 1:19:41है आमदास इसने माफी मांगी और माफी मांगते
  1905. 1:19:43हुए कहा कि जो कुछ हुआ वह गलती हो गई।
  1906. 1:19:46मुझे माफ कर दो। क्योंकि पुराने संबंध थे
  1907. 1:19:48क्योंकि पहले इनके यहां नौकरी कर चुका था।
  1908. 1:19:50तो राजा वीर सिंह देव ने इसे माफ कर दिया
  1909. 1:19:53और इन्हें गोंडवाना का शासक बना दिया और
  1910. 1:19:56यही जो शासक हैं गोंडवाना के जो कहलाते
  1911. 1:19:58हैं आमणदास। आमदास धीरे याद रखिएगा आमणदास
  1912. 1:20:02जो हैं राजा बने और यही आमणदास आगे चल के
  1913. 1:20:05क्या बन जाएंगे? आमदास के पास एक टाइटल
  1914. 1:20:07होगा जिसको हम बोलते हैं संग्राम शाह। तो
  1915. 1:20:10संग्राम शाह कैसे बने यह हम जानते हैं।
  1916. 1:20:13फिलहाल आपको यह जानना है कि ये अपने पिता
  1917. 1:20:15की हत्या कर गद्दी पर बैठे थे। इन्होंने
  1918. 1:20:17अपने पिता की हत्या की थी। तो आइए मैं
  1919. 1:20:19स्टोरी को पढ़ के बताता हूं आपको। जीवन
  1920. 1:20:21परिचय के बारे में जो मैंने आपको बताया
  1921. 1:20:23वही होगा। कुछ अलग नहीं होगा। क्या है कि
  1922. 1:20:25इनके अर्जुन दास के दो पुत्र थे। एक का
  1923. 1:20:28नाम था आमरणदास और एक का नाम जोगीदास या
  1924. 1:20:30जोगीराज था। ठीक है? आमदास की दो पत्नियां
  1925. 1:20:34भी थी। एक पत्नी का नाम पद्मावती और एक का
  1926. 1:20:36नाम सुमति था। पद्मावती से उनको दो बेटे
  1927. 1:20:38होंगे। यानी संग्राम शाह के भी दो बेटे
  1928. 1:20:40हैं। एक का नाम दलपत शाह और चंद्र शाह
  1929. 1:20:42जिनके बारे में अभी हम पढ़ेंगे। अब सवाल
  1930. 1:20:45यह उठता है कि आखिर इनको यह जो टाइटल है
  1931. 1:20:47संग्राम शाह वो किसने दिया है? तो इसके
  1932. 1:20:49पीछे दो कहानियां चलती हैं। एग्जाम के लिए
  1933. 1:20:51जो याद रखनी जो अबुल फजल ने भी इस बात का
  1934. 1:20:54जिक्र किया है कि संग्राम शाह जो उपाधि है
  1935. 1:20:57वो गुजरात के शासक सुल्तान बहादुर शाह ने
  1936. 1:21:00रायसेन विजय में सहायता देने के कारण
  1937. 1:21:02आमदास को दी थी। ठीक है? ये स्टोरी भी मैं
  1938. 1:21:05आपको बता बताता हूं। यानी आपको अगर यह
  1939. 1:21:07पूछा जाए कि आखिर संग्राम शाह को संग्राम
  1940. 1:21:10शाह का टाइटल किसने दिया? तो आप याद रखिए
  1941. 1:21:12गुजरात का शासक है बहादुर शाह जो बहुत
  1942. 1:21:14शक्तिशाली था।
  1943. 1:21:16ठीक है? तो याद रखिएगा। अब आगे बढ़ते हैं।
  1944. 1:21:19आमदास की जो दो पत्नियां हैं जिनके नाम
  1945. 1:21:22पद्मावती और सिमती हैं। इनका उल्लेख उनके
  1946. 1:21:24ग्रंथ जिसका नाम है जिसमें उन्होंने खुद
  1947. 1:21:26ही लिखा है रस्म रत्नमाला में मिलता है।
  1948. 1:21:28मैं अभी इसके बारे में भी और चर्चा
  1949. 1:21:30करूंगा। आगे चलते हैं और आगे चर्चा करते
  1950. 1:21:32हैं। अब आगे क्या हुआ? तो गद्दी कैसे
  1951. 1:21:35प्राप्त की? तो मैंने बता दिया। अबुल फजल
  1952. 1:21:37ने इसमें लिखा है कि अबुल फजल की रचना
  1953. 1:21:39अकबरनामा के अनुसार अर्जुन दास ने अपने
  1954. 1:21:41जेष्ठ पुत्र रामदास को उसकी विद्रोही
  1955. 1:21:43प्रवृत्ति के कारण कैद कर लिया था। किंतु
  1956. 1:21:45शीघ्र ही कैद से छोड़े जाने के उपरांत
  1957. 1:21:47आमरणदास बघेलखंड के शासक वीर सिंह देव
  1958. 1:21:50जिनके बारे में मैंने अभी आपको बताया वहां
  1959. 1:21:52पर चला गया और उनके पुत्र के वीरभानु सिंह
  1960. 1:21:55देव जो उनके पुत्र थे उनके संरक्षक के रूप
  1961. 1:21:57में काम किया। कुछ वर्षों के उपरांत जब
  1962. 1:21:59वीर सिंह देव सिकंदर लोदी की सेवा में
  1963. 1:22:01दिल्ली गया तो उसी समय आमदास को पता चला
  1964. 1:22:04कि उसके पिता अपने छोटे पुत्र जोगीदास को
  1965. 1:22:06उत्तराधिकारी घोषित करने वाले हैं तो उसने
  1966. 1:22:08क्या किया गड़ा आया लौटा और उसने आकर जो
  1967. 1:22:11है अपने पिता अर्जुन दास की हत्या कर दी
  1968. 1:22:13और गड़ा पर अधिकार कर लिया। ठीक है? तो ये
  1969. 1:22:15जो मैंने आपको बताया कि जब इस बात की
  1970. 1:22:17जानकारी वीर सिंह देव को पता चली तो
  1971. 1:22:19उन्होंने गड़ा पर आक्रमण किया तथा आवरण
  1972. 1:22:21दास को वहां से भागना पड़ा। लेकिन बाद में
  1973. 1:22:23क्या हुआ कि वीर सिंह देव के पास आकर
  1974. 1:22:26क्षमा याचना की जिससे वीर सिंह देव ने उसे
  1975. 1:22:28गड़ा का राज्य जो है सौंप दिया। तो कुल
  1976. 1:22:30मिलाकर अभी हमने तीन चीजें जानी कि
  1977. 1:22:32संग्राम शाह गड़ा के शासक कैसे बने और
  1978. 1:22:35संग्राम शाह को याद रखिएगा संग्राम शाह को
  1979. 1:22:38किसने गड़ा का राज्य वापस दिया। अब कहानी
  1980. 1:22:41में अगला मोड़ है कि कैसे इन्होंने एक
  1981. 1:22:43बड़े राज्य की स्थापना की। 52 किलों को
  1982. 1:22:45जीता। तो अब हम इनकी राजनीतिक उपलब्धियों
  1983. 1:22:48की चर्चा करने वाले हैं कि इनका जो संघर्ष
  1984. 1:22:50है वो मेनली किस-किस से हुआ। तो देखो मैं
  1985. 1:22:52अगर इसको थोड़ा सा समझाना चाहूं तो आप ऐसे
  1986. 1:22:55समझ सकते हैं कि जिस समय की ये बात है
  1987. 1:22:58गोंडवाना कुछ ऐसे फैला हुआ था। यह हमारा
  1988. 1:23:01गोंडवाना है। याद रखिएगा गोंडवाना
  1989. 1:23:03साम्राज्य है। गोंडवाना साम्राज्य को या
  1990. 1:23:05गोंडवाना राज्य को दो ओर से दो लोग घेरते
  1991. 1:23:07हैं। इधर से अगर हम देखें तो यह राजपूत
  1992. 1:23:10शासक हैं जिनका नाम बघेल है और बघेलों से
  1993. 1:23:12इनके अच्छे संबंध हैं। क्योंकि जो अभी
  1994. 1:23:14बघेलखंड के शासक हैं जिनका नाम क्या है?
  1995. 1:23:17वीर सिंह देव वो उनके मित्र बन चुके हैं।
  1996. 1:23:19इधर बात करेंगे तो यहां पर एक मुस्लिम
  1997. 1:23:21राज्य है जिसका नाम मालवा है और यह इनका
  1998. 1:23:23सबसे दुश्मन राज्य है मालवा। मालवा में
  1999. 1:23:26शासन है खिलजी खिलजी वंश का है जो
  2000. 1:23:28गयासुद्दीन खिलजी आपने नाम सुना होगा
  2001. 1:23:30महमूद खिलजी और गयासुद्दीन खिलजी। ठीक है?
  2002. 1:23:34अगर हम बात करें इसी समय तो इसी समय
  2003. 1:23:36बुंदेलखंड की अगर बात करेंगे बुंदेलखंड तो
  2004. 1:23:38बुंदेलखंड में किसका शासन है? याद रखिएगा
  2005. 1:23:41बुंदेलखंड में इसमें क बुंदेलखंड के जो
  2006. 1:23:44शासक हैं उनका नाम है कालिंजर के शासक जो
  2007. 1:23:46कालिंजर इसकी राजधानी है राजा कीरत सिंह
  2008. 1:23:49क्या नाम है राजा कीरत सिंह चंदेल जिनकी
  2009. 1:23:52पुत्री होंगी हमारी कौन याद रखिएगा रानी
  2010. 1:23:55दुर्गावती बघेल शासक कौन है वीरभानुदेव
  2011. 1:23:58हैं वीरभानुदेव के बाद सॉरी पहले हैं
  2012. 1:24:01हमारे वीर सिंह देव और वीर सिंह देव के
  2013. 1:24:03बाद उनका लड़का गद्दी पर बैठेगा जिनका नाम
  2014. 1:24:05होगा वीरभानु इनका बेटा होगा चलो बेटे को
  2015. 1:24:08अभी रहने दो मालवा में गयासुद्दीन खिलजी
  2016. 1:24:11का शासन चल रहा है। मालवा का शासक कौन है?
  2017. 1:24:14गयासुद्दीन खिलजी है। गयासुद्दीन खिलजी।
  2018. 1:24:18गयासुद्दीन खिलजी। तो पहले तो इनका जो
  2019. 1:24:21संघर्ष है वो यहां पर होता है। यह आपस में
  2020. 1:24:23इधर संघर्ष करते रहते हैं मालवा के शासक
  2021. 1:24:26से और बताते हैं कि जब मालवा के शासक
  2022. 1:24:28गयासुद्दीन खिलजी ने हमला किया तो
  2023. 1:24:30गोंडवाना के शासक संग्राम शाह ने उनको
  2024. 1:24:32डिफीट कर दिया। नंबर वन इनके साथ इन्होंने
  2025. 1:24:34क्या किया? यहां पर इन्होंने वैवाहिक
  2026. 1:24:36संबंध स्थापित किए। चंदेल वंश की जो
  2027. 1:24:39राजकुमारी हैं कीरत सिंह की पुत्री हैं
  2028. 1:24:41जिनका नाम था रानी दुर्गावती तो रानी
  2029. 1:24:44दुर्गावती से अपने बेटे की शादी कर दी
  2030. 1:24:46जिन्हें हम रानी दुर्गावती से अपने बेटे
  2031. 1:24:49की शादी कर दी और इनके बेटे का नाम था
  2032. 1:24:51दलपत शाह इनके साथ मित्रवत संबंध थे। अगर
  2033. 1:24:54आप इस कहानी को समझ पा रहे हैं तो यह समझ
  2034. 1:24:56पा रहे होंगे कि जो राजा संग्राम शाह हैं
  2035. 1:24:59जो कि गोंड शासक हैं उन्होंने अपनी
  2036. 1:25:01कूटनीति के द्वारा अपने दो शक्तिशाली
  2037. 1:25:03पड़ोसी राज्यों से अच्छे संबंध बनाए। एक
  2038. 1:25:06राजपूत बुंदेलखंड के चंदेल राजपूतों से
  2039. 1:25:08वैवाहिक संबंध किए और अपने बेटे की शादी
  2040. 1:25:10रानी दुर्गावती से कर दी। बघेल राज्य के
  2041. 1:25:13राजा से उनके मित्रवत संबंध है। केवल एक
  2042. 1:25:15ही फ्रंट पे तो लड़ना पड़ रहा है। तो
  2043. 1:25:16गोंडवाना की लड़ाई वेस्ट में थी। याद
  2044. 1:25:18रखिएगा आप मालवा के खिलजी सुल्तानों से थी
  2045. 1:25:21जो मालवा में शासन करते थे। यहां तक आपको
  2046. 1:25:24ये समझ में आ गया होगा। अब इन्होंने अपनी
  2047. 1:25:26कूटनीति के द्वारा और इन राजपूत राज्यों
  2048. 1:25:29की सहायता से एक बड़ा राज्य स्थापित किया
  2049. 1:25:31और बताया जाता है कि इनके पास 52 किले थे।
  2050. 1:25:34इसीलिए एक संस्कृत श्लोक संग्रह है गणेश
  2051. 1:25:37नृप वर्णनम जिसमें यह कहा गया है कि 52
  2052. 1:25:40किलों के स्वामी थी इसीलिए इनको 52
  2053. 1:25:42गणाधिपति कहा जाता है। अब इसी समय एक और
  2054. 1:25:45समस्या है वो भी जान लीजिए। कुछ समय
  2055. 1:25:47पश्चात यहां पे गुजरात है और गुजरात के जो
  2056. 1:25:50शासक हैं गुजरात। गुजरात के जो शासक हैं
  2057. 1:25:54वो लगातार हमला करते हैं कहां पर? मालवा
  2058. 1:25:56पर। तो जब वो मालवा पर हमला करेंगे तो याद
  2059. 1:25:58रखिएगा मालवा में एक जगह है रायसेन। कौन
  2060. 1:26:01सी जगह है? रायसेन। तो जब वह रायसेन पर
  2061. 1:26:04हमला करेंगे गुजरात के शासक जिनका नाम
  2062. 1:26:06होगा बहादुर शाह। तो बहादुर शाह ने जब
  2063. 1:26:09गुजरात के शासक बहादुर शाह ने जब मालवा पे
  2064. 1:26:12हमला किया और रायसेन पर हमला किया तो इस
  2065. 1:26:14रायसेन विजय में उन्होंने क्योंकि देखो
  2066. 1:26:17गोंडवाना का दुश्मन मालवा। गुजरात का
  2067. 1:26:19दुश्मन मालवा। जब दोनों का ही दुश्मन
  2068. 1:26:22मालवा है तो यह दोनों आपस में क्या बन
  2069. 1:26:24जाएंगे? समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा
  2070. 1:26:25है? राजनीति क्या कहती? दुश्मन का दुश्मन
  2071. 1:26:28क्या हो जाता है? दोस्त हो जाता है। और
  2072. 1:26:30इसी क्रम में संग्राम शाह ने क्या किया?
  2073. 1:26:32बहादुर शाह की सहायता की मालवा के
  2074. 1:26:34विरुद्ध। और इसीलिए बहादुर शाह के द्वारा
  2075. 1:26:37इनको संग्राम शाह की उपाधि से सम्मानित
  2076. 1:26:39किया गया था। क्या आपको यह समझ में आया?
  2077. 1:26:42संग्राम शाह की उपाधि उनको किसने दी थी?
  2078. 1:26:45याद रखिएगा। तो संग्राम शाह की उपाधि दी
  2079. 1:26:47थी गुजरात के शासक बहादुर शाह ने। गुजरात
  2080. 1:26:50के शक्तिशाली शासक बहादुर शाह ने उन्हें
  2081. 1:26:52संग्राम शाह कहा क्योंकि उन्होंने रायसेन
  2082. 1:26:55के युद्ध में उनकी सहायता की थी। नंबर वन।
  2083. 1:26:57नंबर टू। इस समय अगर मैं दिल्ली की बात
  2084. 1:26:59करूं तो दिल्ली में जो है सिकंदर लोदी का
  2085. 1:27:02शासन था और
  2086. 1:27:04सिकंदर लोदी के बाद फिर आता है इब्राहिम
  2087. 1:27:06लोदी। तो इब्राहिम लोदी का जो विद्रोही
  2088. 1:27:08भाई है वो भी आया था गड़ा तो उसके विरुद्ध
  2089. 1:27:11जो है उन्होंने इब्राहिम लोदी की सहायता
  2090. 1:27:13की थी। तो कुल मिलाकर ये समकालीन राजाओं
  2091. 1:27:15की कुछ कहानियां लिखी हैं। आई होप आपको
  2092. 1:27:17समझ में आ गया होगा। अगर नहीं समझ में आया
  2093. 1:27:19तो यह मैं पढ़ देता हूं। अब आपको अच्छे से
  2094. 1:27:21समझ में आ जाएगा क्योंकि मैंने आपको समझा
  2095. 1:27:23दिया है। आमदास एक सफल कूटनीतिक शासक था
  2096. 1:27:26जिसे निम्नलिखित उदाहरणों के अंतर्गत समझा
  2097. 1:27:28जा सकता है। नंबर वन आमदास ने दिल्ली के
  2098. 1:27:31सुल्तान इब्राहिम लोदी का विश्वास प्राप्त
  2099. 1:27:33करने हेतु उसके विद्रोही भाई जिसका नाम था
  2100. 1:27:36जलाल खान। जलाल खान को गड़ा कटंगा से पकड़
  2101. 1:27:38कर सुल्तान को सौंप दिया। यानी याद रखिएगा
  2102. 1:27:41बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है कि इस समय
  2103. 1:27:43दिल्ली में इब्राहिम लोदी का शासन था और
  2104. 1:27:45उसका एक भाई था जो विद्रोह कर गया था
  2105. 1:27:47जिसका नाम था जलाल खान। तो जलाल खान जब
  2106. 1:27:49विद्रोह करके गढ़ा आया तो उसे पकड़ कर जो
  2107. 1:27:52है इब्राहिम लोदी को सौंप दिया। तो दिल्ली
  2108. 1:27:54के साथ दोस्ती हो गई। यानी दिल्ली के
  2109. 1:27:56सुल्तान से होने वाले आक्रमण से बच गए।
  2110. 1:27:58दूसरी कूटनीति देखिए उसने गुजरात के शासक
  2111. 1:28:01बहादुर शाह को रायसेन विजय में सहायता
  2112. 1:28:03प्रदान कर मित्रवत संबंध स्थापित कर लिए
  2113. 1:28:05और इसीलिए गुजरात के शासक ने उनको कहा
  2114. 1:28:08संग्राम शाह यानी तुम संग्राम में मेरा
  2115. 1:28:11साथ दिए हो। तीसरी खास बात क्या है?
  2116. 1:28:13बघेलखंड के शासक वीर सिंह देव के साथ भी
  2117. 1:28:15उसके संबंध हमेशा मधुर बने रहे। तो यह
  2118. 1:28:17अच्छी चीज रही नहीं तो पड़ोसी हमला करते
  2119. 1:28:20तो दिक्कत होती। एक और है आमरणदास ने
  2120. 1:28:22कालिंजर के शासक कीरत सिंह चंदेल की
  2121. 1:28:24राजकुमारी दुर्गावती से अपने पुत्र दलपत
  2122. 1:28:27शाह का विवाह कर चंदेलों को भी क्या कर
  2123. 1:28:29लिया? अपने संबंधी बना लिया। तो ये इनकी
  2124. 1:28:32राजनीतिक उपलब्धियां थी आमरणदास की। अब हम
  2125. 1:28:35लोग आगे बढ़ते हैं और पहले आमदास का
  2126. 1:28:37चैप्टर क्लोज करते हैं। फिर कुछ बातें
  2127. 1:28:38इधर-उधर की भी करेंगे। अगर हम सांस्कृतिक
  2128. 1:28:41उपलब्धियों की बात करें एग्जाम ओरिएंटेड।
  2129. 1:28:43तो बहुत इंपॉर्टेंट है कि आमरदास ने
  2130. 1:28:45संस्कृत भाषा में एक काव्य ग्रंथ लिखा था
  2131. 1:28:48जिसका नाम है रस रत्नमाला और इसी रस
  2132. 1:28:51रत्नमाला में उनकी दो पत्नियों का उल्लेख
  2133. 1:28:53है। उनकी दो पत्नियों के नाम क्या थे? इस
  2134. 1:28:55बात की जानकारी कहां मिलती है? उन्हीं की
  2135. 1:28:58पुस्तक में मिलती है जिसका नाम है रस
  2136. 1:29:00रत्नमाला। अर्थात संग्राम शाह या जिनका
  2137. 1:29:03नाम आमण दास है। वह लिखने में भी माहिर
  2138. 1:29:06थे। तलवार के साथ-साथ कलम के भी धनी हैं।
  2139. 1:29:09और कलम में याद रखिएगा उन्होंने एक ग्रंथ
  2140. 1:29:11लिखा है जिसका नाम है रस रत्नमाला। इसके
  2141. 1:29:13अलावा उनके दरबार में एक बहुत बड़े
  2142. 1:29:15विद्वान रहते थे और उन विद्वान का नाम है
  2143. 1:29:17दामोदर ठाकुर एवं अनंत दीक्षित जिसमें
  2144. 1:29:20ज्यादा चर्चित हैं कौन? याद रखिए जिसमें
  2145. 1:29:22ज्यादा चर्चित हैं दामोदर ठाकुर। क्योंकि
  2146. 1:29:25दामोदर ठाकुर ने उनके समय रहते हुए दो
  2147. 1:29:27विशेष ग्रंथ लिखे जिनका नाम है संग्राम
  2148. 1:29:29शाही विवेक दीपिका जो इन्हीं के नाम पर है
  2149. 1:29:32संग्राम शाह और दूसरा है दिव्य निर्णय। तो
  2150. 1:29:35बहुत इंपॉर्टेंट हो जाएगा कि अगर आपसे
  2151. 1:29:38पूछा जाए कि दामोदर ठाकुर नामक विद्वान
  2152. 1:29:40किस गौण शासक के दरबार में रहते थे तो
  2153. 1:29:42आपको बताना है संग्राम शाह। संग्राम शाह
  2154. 1:29:44ने कौन सी पुस्तक लिखी? रस रत्नमाला। और
  2155. 1:29:46याद रखिएगा संग्राम शाह के दरबार में रहने
  2156. 1:29:49वाले दामोदर ठाकुर के द्वारा कौन सी किताब
  2157. 1:29:51लिखी गई? संग्राम शाही विवेक दीपिका और
  2158. 1:29:54दिव्य निर्णय नामक ग्रंथ लिखे गए। इसके
  2159. 1:29:57अलावा एक और इंपॉर्टेंट बात है। हम बात
  2160. 1:29:58करते हैं कुछ सिक्कों की। राजा संग्राम
  2161. 1:30:01शाह के द्वारा ध्यान से सुनिएगा। सोना,
  2162. 1:30:04चांदी, पीतल और तांबे यानी सभी प्रकार के
  2163. 1:30:07सिक्के चलवाए गए। इनके द्वारा चलवाए गए
  2164. 1:30:09सोने के सिक्के आज भी इंग्लैंड के
  2165. 1:30:11संग्रहालय में रखे हैं। ब्रिटेन के
  2166. 1:30:12संग्रहालय में रखे हैं। एक और इंपॉर्टेंट
  2167. 1:30:15बात है जो बहुत इंपॉर्टेंट है। याद
  2168. 1:30:16रखिएगा। अगर हम बात करें इनके सिक्कों पर
  2169. 1:30:19तो इनके सिक्कों पर एक जानकारी मिलती है
  2170. 1:30:22कि इन्होंने अपने सिक्कों पर खुद को याद
  2171. 1:30:24रखिएगा क्या कहा है? तो खुद को पुलत्स्य
  2172. 1:30:26वंशी कहा है। यह पुलत्स्य वंशी का क्या
  2173. 1:30:28कनेक्शन है? मैं आपको बताता हूं। गड़ा के
  2174. 1:30:30शासकों का राजकीय चिन्ह क्या था? यह भी
  2175. 1:30:32याद रखिएगा। गड़ा के शासक यानी गोंड
  2176. 1:30:34शासकों का राजकीय चिन्ह है हाथी दबोचे हुए
  2177. 1:30:37सींग वाला शेर। यानी एक ऐसा शेर जिसने
  2178. 1:30:40हाथी को पकड़ रखा हुआ है जो गड़ा राज्य
  2179. 1:30:42में जबलपुर के कोतवाली और गोकुलदास महल
  2180. 1:30:45में आज भी विद्यमान है। तो याद रखिएगा
  2181. 1:30:48सिक्का कौन से चलाए? सोने के, चांदी के,
  2182. 1:30:51तांबे के सिक्के चलाए। और इनके जो सोने के
  2183. 1:30:53सिक्के हैं, आज भी ब्रिटिश म्यूजियम में
  2184. 1:30:56रखे हैं। कहां रखे हैं? ब्रिटिश संग्रहालय
  2185. 1:30:58में रखे हैं। ब्रिटिश म्यूजियम में रखे
  2186. 1:31:00हुए हैं। तो यह भी एक अच्छा क्वेश्चन है
  2187. 1:31:02जो आपके काम आ जाएगा। ठीक है? इसके अलावा
  2188. 1:31:05इनका राजकीय चिन्ह क्या है? हाथी दबोचे
  2189. 1:31:07हुए सींग वाला शेर यानी ऐसा शेर जिसने
  2190. 1:31:09हाथी को कंट्रोल कर रखा है। नंबर वन नंबर
  2191. 1:31:12टू इनके सिक्कों पर इन्हें क्या कहा गया?
  2192. 1:31:14पुलस्य वंशी कहा गया। इसका किस्सा भी सुन
  2193. 1:31:16लीजिए। देखिए अगर आप ध्यान से सुनेंगे जब
  2194. 1:31:20कभी आप गोंड ट्राइब पढ़ेंगे तो गण जो लोग
  2195. 1:31:22हैं वह रावण को अपना वंशज मानते हैं। मतलब
  2196. 1:31:26रावण से अपना संबंध जोड़ते हैं। नंबर वन
  2197. 1:31:28यहां पर जो गण शासक हैं संग्राम शाह
  2198. 1:31:31संग्राम शाह के हमें कुछ सिक्के मिले हैं
  2199. 1:31:34और इन सिक्कों पर संग्राम शाह के सिक्कों
  2200. 1:31:36पर लिखा है पुलत्स्य वंशी। क्या लिखा है?
  2201. 1:31:39पुलत्स्य। पुलत्स्य कौन है? याद रखिए
  2202. 1:31:41पुलस्य।
  2203. 1:31:43पुलस्य वंशी लिखा है। तो पुलस्य वंशी
  2204. 1:31:46एग्जाम में पूछा जा सकता है। पुलस्य वंशी
  2205. 1:31:48का क्या मतलब है?
  2206. 1:31:50देखो रावण जो थे रावण
  2207. 1:31:55रावण के दादाजी का नाम था। रावण के दादाजी
  2208. 1:31:59का नाम क्या था? पुलस्य था। पुलस्य ऋषि था
  2209. 1:32:03जो ब्रह्मा जी के पुत्र थे। पुलस ऋषि। तो
  2210. 1:32:06संभवत इससे यह पता चलता है कि वो गौण जो
  2211. 1:32:10लोग हैं वह अपने आप को क्या बोलते हैं? वह
  2212. 1:32:12रावण का वंशज कहते हैं। आज के बाद याद
  2213. 1:32:14रखिएगा यह संग्राम शाह किसका वंशज स्वयं
  2214. 1:32:17को कहता है? तो रावण का वंशज स्वयं को
  2215. 1:32:19कहता है क्योंकि इसके सिक्कों पर पुलस्य
  2216. 1:32:21वंशी वर्ड मिला है। पुलस्य ऋषि के पुत्र
  2217. 1:32:24का पुत्र था जिनका नाम था रावण। रावण की
  2218. 1:32:27मां का नाम केसी और पिता का नाम आप कमेंट
  2219. 1:32:29सेक्शन में बताएंगे जो भी लोग ये वीडियो
  2220. 1:32:31देख रहे हैं। कमेंट सेक्शन में कम से कम
  2221. 1:32:3350 कमेंट आने चाहिए जिसमें लिखा हो कि
  2222. 1:32:35रावण के पिता का नाम क्या था? ठीक है? तो,
  2223. 1:32:37यह एक इंपॉर्टेंट बात हो गई। तो, हमने
  2224. 1:32:39यहां पर क्या देख लिया? उनके सिक्के देख
  2225. 1:32:41लिए। उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियां देख ली।
  2226. 1:32:43लास्ट जो इंपॉर्टेंट चीज है उसके बाद हम
  2227. 1:32:44कुछ और बातों की बात करेंगे। उनका राज्य
  2228. 1:32:46कहां से कहां तक फैला था। देखिए उनके बारे
  2229. 1:32:48में यूं तो हजारों बातें हैं जो मैं आपको
  2230. 1:32:50बताना चाहता हूं। लेकिन मैं चाहता हूं कम
  2231. 1:32:53समय में हम इतनी बातें जाने जो आपके काम
  2232. 1:32:55की हैं। देखो आमणदास ने कई महत्वपूर्ण
  2233. 1:32:59इमारतों का या स्थापत्य का निर्माण करवाया
  2234. 1:33:01जो एग्जाम के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है।
  2235. 1:33:03जिनको आपको पता होना चाहिए। नंबर वन वाजना
  2236. 1:33:06मठ बहुत ही प्रसिद्ध है। उसका कारण है कि
  2237. 1:33:08वो भैरव भैरव दास जी जो थे याद रखिएगा
  2238. 1:33:11भैरव बाबा के उपासक थे। किसके उपासक थे?
  2239. 1:33:14भैरव के उपासक थे हमारे आम दास जी। और याद
  2240. 1:33:17रखिएगा उन्होंने एक तंत्र मंदिर बनवाया है
  2241. 1:33:20जो बेसिकली तांत्रिक क्रियाओं के लिए
  2242. 1:33:22प्रसिद्ध है। उसका नाम है बाजना मठ। बहुत
  2243. 1:33:24इंपॉर्टेंट है एग्जाम के लिए। बाजना मठ का
  2244. 1:33:26निर्माण किसने करवाया था? कहां पर है?
  2245. 1:33:28बाजना मठ जबलपुर में है। किसने बनवाया है?
  2246. 1:33:30संग्राम शाह ने। क्या होता है यहां पर?
  2247. 1:33:32यहां तांत्रिक विद्या का केंद्र है। वटुक
  2248. 1:33:34भैरव का मंदिर तथा शनि मंदिर भी निर्मित
  2249. 1:33:36है। याद रखना आज के बाद कभी पूछा जाए कि
  2250. 1:33:38संग्राम शाह किसके उपासक थे? भैरव बाबा।
  2251. 1:33:41नंबर टू याद रखिएगा संग्राम सागर नामक
  2252. 1:33:44उन्होंने एक सरोवर बनवाया था। यह संग्राम
  2253. 1:33:46सागर कहां पर है? याद रखिएगा जबलपुर में
  2254. 1:33:48है। और यह बाजना मठ में निर्मित एक
  2255. 1:33:51कृत्रिम झील है। यानी बाजना मठ के पास में
  2256. 1:33:53ही निर्मित है जिसको हम बोलते हैं संग्राम
  2257. 1:33:55सागर सरोवर। इसके अलावा उन्होंने एक गांव
  2258. 1:33:58बसाया था। एक जगह बसाई थी जिसका नाम है
  2259. 1:34:00संग्रामपुर। उन्होंने अपने नाम पर बसाया
  2260. 1:34:02था जो कि दमोह डिस्ट्रिक्ट में है। याद
  2261. 1:34:04रखिएगा यह कलचुरियों द्वारा बनाए गए
  2262. 1:34:06पुराने सिंगौरगढ़ के किले के निकट बना हुआ
  2263. 1:34:08है। लास्ट है चौरागढ़ का किला। चौरागढ़ का
  2264. 1:34:12किला नरसिंहपुर जिले में है। याद रखिएगा।
  2265. 1:34:14तो चौरागढ़ का फोर्ट किसने बनवाया था? याद
  2266. 1:34:17रखिए चौरागढ़ का फोर्ट बनवाया है।
  2267. 1:34:19संग्रामपुर नामक गांव बसाया। संग्रामपुर
  2268. 1:34:21दमोहो में है। चौरागढ़ नरसिंहपुर में है।
  2269. 1:34:23इसके अलावा संग्राम सागर सरोवर जबलपुर और
  2270. 1:34:26बाजना मठ जबलपुर इनके निर्माण के लिए जाना
  2271. 1:34:29जाता है संग्राम शाह को। अगर आप ध्यान से
  2272. 1:34:31देखें तो संग्राम शाह की सांस्कृतिक,
  2273. 1:34:33संग्राम शाह के सिक्के और संग्राम शाह की
  2274. 1:34:35राजनीतिक उपलब्धियां और साथ-साथ हम लोगों
  2275. 1:34:37ने उनके निर्माण कार्यों को पढ़ लिया। तो
  2276. 1:34:39ये थे हमारे वो राजा जिन्हें हम बावन
  2277. 1:34:42गणाधिपति के नाम से जानते हैं। महान गौड
  2278. 1:34:44शासक जिनका नाम था संग्राम शाह। जिनके
  2279. 1:34:47बारे में क्या है? जिनके बारे में जानकारी
  2280. 1:34:49रामनगर प्रशस्ति अभिलेख से मिलती है कि वह
  2281. 1:34:51इस पीढ़ी के याद रखिएगा गोंड वंश के 48वें
  2282. 1:34:54शासक थे जिनका नाम था संग्राम शाह जिनका
  2283. 1:34:56वास्तविक नाम क्या था? आमदास था। गुजरात
  2284. 1:34:58के बहादुर शाह ने उन्हें उन्हें संग्राम
  2285. 1:35:00शाह की उपाधि दी। उनके पिता का नाम अर्जुन
  2286. 1:35:03दास था। उनके भाई का नाम जोगीदास या
  2287. 1:35:04जोगीराज था। इसके अलावा उनकी दो पत्नियां
  2288. 1:35:07थी और दो बेटे थे। बेटों पर हम चलेंगे।
  2289. 1:35:08उससे पहले मैं आपको बताना चाहता हूं। एक
  2290. 1:35:11और छोटी सी जानकारी मैं आपको देना चाहता
  2291. 1:35:13हूं। देखिए संग्राम शाह के बारे में लिखा
  2292. 1:35:16हुआ है कि संग्राम शाह ने 52 किलों को
  2293. 1:35:18जीता था और इसीलिए रामनगर जो प्रशस्ति है
  2294. 1:35:22जब उनके बारे में लिखा जाता है रामनगर
  2295. 1:35:24प्रशस्ति में तो उनके लिए एक बात लिखी है
  2296. 1:35:26कि प्रतापी अर्जुन उनके पापा का नाम क्या
  2297. 1:35:28है अर्जुन दास प्रतापी अर्जुन सिंह का
  2298. 1:35:31पुत्र याद रखिएगा संग्राम सा था और जिस
  2299. 1:35:34भांति ध्यान से सुनना जिस भांति विशाल
  2300. 1:35:36कपास का ढेर एक छोटी सी चिंगारी से नष्ट
  2301. 1:35:38हो जाता है उसी भांति उसके शत्रुगण तेजहीन
  2302. 1:35:41हो गए थे मध्यकाल का सूर्य भी उसके प्रताप
  2303. 1:35:43आपके सामने धूमिल दिखाई देता था। तो मुझे
  2304. 1:35:46लगता है किसी दिन यह लाइन पूछेंगे और
  2305. 1:35:47पूछेंगे यह लाइन किस गोंड शासक के लिए है?
  2306. 1:35:50तो रामनगर प्रशस्ति में उनकी तारीफ करते
  2307. 1:35:53हुए लिखा हुआ है याद रखिए क्या लिखा है?
  2308. 1:35:55जिस भांति विशाल कपास का ढेर कपास के ढेर
  2309. 1:35:58में विशाल कपास के ढेर में एक चिंगारी की
  2310. 1:36:01वजह से पूरा नष्ट हो जाता है कपास का ढेर।
  2311. 1:36:03याद रखिए उस छोटी सी चिंगारी से नष्ट हो
  2312. 1:36:05जाए। उसी भांति उसके शत्रुघ तेजहीन हो गए
  2313. 1:36:07थे। ये मध्यकाल के सूर्य भी उसके प्रताप
  2314. 1:36:10के सामने धूमिल सा दिखाई देता था। मानो
  2315. 1:36:13सारी पृथ्वी को जीत लेने का उसने निश्चय
  2316. 1:36:15किया हो। तदन अनुसार उसने 52 किलड़ों को
  2317. 1:36:17जीत लिया था। और ये सारे के सारे 52 जो
  2318. 1:36:20किले हैं उच्च पर्वतीय श्रेणियों पर स्थित
  2319. 1:36:22थे जो विशाल प्राचीनों बुर्जियों से
  2320. 1:36:23परिलक्षित होते थे और इस कारण ये दुर्वेद
  2321. 1:36:26दुभेद माने जाते थे। अब गोंडों में एक
  2322. 1:36:29कहावत प्रचलित है। मैं चाहता हूं आप यह भी
  2323. 1:36:31सुन लीजिएगा। कल के दिन एग्जाम में आएगी
  2324. 1:36:33तो आप बता देंगे। गोंडों में एक कहावत
  2325. 1:36:35प्रचलित है। क्या प्रचलित है? कि आमन बुध
  2326. 1:36:38बावन में आवन बुद्ध 52 में किससे रिलेटेड
  2327. 1:36:41है? याद रखिएगा संग्राम शाह से रिलेटेड है
  2328. 1:36:43यह कहावत आवन बुध बावन में और अब मैं आपको
  2329. 1:36:46यह भी बताना चाहता हूं कि उनका साम्राज्य
  2330. 1:36:48कहां से कहां फैला हुआ था। इतना जानने के
  2331. 1:36:50बाद मुझे लगता है कि एग्जाम में आने वाले
  2332. 1:36:52किसी प्रश्न से तो आप नहीं बचेंगे। बाकी
  2333. 1:36:55गोंड कौन थे? इनके आदि पूर्वज कौन थे?
  2334. 1:36:57इनके बारे में कहां से जानकारी मिलती?
  2335. 1:36:59कलजुनियों से इनका क्या कनेक्शन है? यह जब
  2336. 1:37:01हम गोंड डायनेस्टी पढ़ेंगे तो गोंड
  2337. 1:37:02डायनेस्टी के इतिहास में पूरा गोंड वंश
  2338. 1:37:04मैं आपको समझाऊंगा। आज की कहानी केवल 52
  2339. 1:37:08गणाधिपति यानी संग्राम शाह के बारे में
  2340. 1:37:10थी। अब इनके जो राज्य है उसमें जो 52 किले
  2341. 1:37:14और इनका जो साम्राज्य था वो इंग्लैंड के
  2342. 1:37:16बराबर था। ऐसा कहा जाता है वज्र प्राहे
  2343. 1:37:19पर्वते प्रौढ़ गाड़े इस तरीके से एक संस्कृत
  2344. 1:37:22श्लोक लिखा हुआ है। उसके बाद इनके जो 52
  2345. 1:37:24किले हैं उनके बारे में बताया गया है जो
  2346. 1:37:25वर्तमान 13 जिलों में अवस्थित हैं। जैसे
  2347. 1:37:27कि एक है गड़ा जबलपुर का एक मारूगढ़ है,
  2348. 1:37:30पचेल है, सिंघोरगढ़ है, अमोदा है, कनोजा
  2349. 1:37:34है, बक्सरा है, टीपागढ़ है, रामगढ़ है,
  2350. 1:37:36प्रतापगढ़ है, अमरगढ़ है, देवगढ़ है, पाटनगढ़
  2351. 1:37:40है, फतेहपुर है। ऐसे करके सारे नाम लिखे
  2352. 1:37:42हैं। और इनका साम्राज्य कहां से कहां तक
  2353. 1:37:44फैला था? ध्यान से सुनिएगा। इनका
  2354. 1:37:47साम्राज्य पूर्व में रतनपुर झारखंड प्रदेश
  2355. 1:37:50से पश्चिम में मालवा तक जिसकी लंबाई 150
  2356. 1:37:53कोस थी और उत्तर में पन्ना यानी ऊपर में
  2357. 1:37:56पन्ना से लेकर याद रखिएगा दक्षिण में
  2358. 1:37:58दक्कन बरार तक जिसकी चौड़ाई 80 कोस थी। वह
  2359. 1:38:02राज्य गढ़ा कटंगा था। इस दृष्टि से भी
  2360. 1:38:04देखा जाए तो संग्राम शाह का साम्राज्य
  2361. 1:38:06लगभग इंग्लैंड के क्षेत्रफल के बराबर था।
  2362. 1:38:08इससे बड़ी अचीवमेंट कुछ नहीं हो सकती गोंड
  2363. 1:38:11शासकों के लिए। इनका साम्राज्य बहुत बड़ा
  2364. 1:38:14था। चार डायरेक्शन उनके साम्राज्य की लिख
  2365. 1:38:16दी गई। जैसे चार डायरेक्शन होती हैं। तो
  2366. 1:38:18उत्तर में उनका साम्राज्य कहां से है? याद
  2367. 1:38:20रखिएगा उत्तर में पन्ना से फैला था। और
  2368. 1:38:23दक्षिण में कहां तक है? तो दक्षिण में
  2369. 1:38:24बरार तक था। बरार और इसकी जो लेंथ है वो
  2370. 1:38:2880 कोस थी। 80 कोस ये फैला था। अगर हम बात
  2371. 1:38:32करें पूर्व में तो पूर्व में झारखंड तक
  2372. 1:38:34फैला था।
  2373. 1:38:37और याद रखिएगा पश्चिम में। पश्चिम में
  2374. 1:38:39कहां तक फैला था? मालवा।
  2375. 1:38:42पश्चिम में मालवा तक फैला था और इसकी जो
  2376. 1:38:45लंबाई है वह 150 कोस थी। ऐसा लिखा हुआ है।
  2377. 1:38:48इसीलिए उनका साम्राज्य कहा जाता है
  2378. 1:38:51इंग्लैंड के बराबर था। ठीक है? याद
  2379. 1:38:53रखिएगा। तो पश्चिम में रायसेन और पूर्व
  2380. 1:38:55में रतनपुर। अब तो मेरे ख्याल से रतनपुर
  2381. 1:38:58जो है वो छत्तीसगढ़ में आता है। छत्तीसगढ़
  2382. 1:39:01होना चाहिए। झारखंड नहीं होना चाहिए। तो
  2383. 1:39:03छत्तीसगढ़ से लेके मालवा के रायसेन तक और
  2384. 1:39:07ऊपर से पन्ना से लेकर बरार तक फैला हुआ
  2385. 1:39:09था। इतना बड़ा एंपायर था हमारे किसका?
  2386. 1:39:13संग्राम शाह का। सो संग्राम शाह के बारे
  2387. 1:39:15में कहा जाता है कि उनका साम्राज्य किसके
  2388. 1:39:17बराबर था? इंग्लैंड के इक्वल था। तो ये थे
  2389. 1:39:20हमारे महान गौण शासक जिनके बारे में जितने
  2390. 1:39:22भी जो प्रश्न बन सकते हैं, मैंने आप लोगों
  2391. 1:39:24को समझाए। मुझे उम्मीद है यह जो सीरीज
  2392. 1:39:26हमारी पहले चल रही थी, यह सीरीज कुछ दिनों
  2393. 1:39:29के लिए ब्रेक हो गई थी। लेकिन आज से मेरा
  2394. 1:39:31प्रयास है कि आपको यह सीरीज बहुत अच्छे से
  2395. 1:39:33दोबारा से कंटिन्यू कर सकूं। अब मैं यह
  2396. 1:39:36देखना चाहता हूं कि इस वीडियो पर आप लोगों
  2397. 1:39:37का क्या रिस्पांस मिलता है क्योंकि काफी
  2398. 1:39:39दिनों बाद यह वीडियो आया है। अगर आपको यह
  2399. 1:39:41पसंद आया तो ढेर सारे कमेंट करके बताइएगा
  2400. 1:39:44और कमेंट में सभी लोग बताएंगे कि रावण के
  2401. 1:39:46पिता का नाम क्या था? बाकी संग्राम शाह की
  2402. 1:39:48राजनीतिक उपलब्धियां, उनकी सांस्कृतिक
  2403. 1:39:50उपलब्धियां, उनके सिक्के, उनका साम्राज्य
  2404. 1:39:52कहां से कहां तक फैला था? उनके बारे में
  2405. 1:39:54जानकारी किस शिलालेख से मिलती है? रामनगर
  2406. 1:39:57का प्रशस्ति अभिलेख किसने लिखा है? यह भी
  2407. 1:40:00आपको कमेंट करके बताना है। तो, दो
  2408. 1:40:02क्वेश्चन कमेंट के लिए छोड़ के जा रहा
  2409. 1:40:03हूं। रामनगर का प्रशस्ति अभिलेख किसने
  2410. 1:40:05लिखा है और रावण के पिता का नाम क्या था?
  2411. 1:40:07ये आपको बताना है। मिलते हैं नेक्स्ट
  2412. 1:40:09वीडियो में। तब तक के लिए जय हिंद वंदे
  2413. 1:40:11मातरम। थैंक यू।
  2414. 1:40:28नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एमपीपीएससी
  2415. 1:40:30स्टडी आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है।
  2416. 1:40:32उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन
  2417. 1:40:34लगाकर पढ़ रहे होंगे। दोस्तों, आप सभी को
  2418. 1:40:37यह सीरीज काफी पसंद आ रही है। मैंने आप
  2419. 1:40:40लोगों का फीडबैक देखा और इसी क्रम में मैं
  2420. 1:40:42आपके लिए लाया हूं एक बहुत ही इंपॉर्टेंट
  2421. 1:40:45व्यक्तित्व जिनका नाम है रानी कमलापति।
  2422. 1:40:47देखिए रानी कमलापति कौन है? आपने यह
  2423. 1:40:49थंबनेल देख लिया होगा। इन्हें भोपाल की
  2424. 1:40:52अंतिम हिंदू रानी या अंतिम एक गोंड रानी
  2425. 1:40:55के तौर पर जाना जाता है। रानी कमलापति का
  2426. 1:40:58जो इतिहास है वह काफी फेमस है और इनका
  2427. 1:41:00इतिहास में अपना एक योगदान है मध्य प्रदेश
  2428. 1:41:02के हम सब जानते हैं कि वर्तमान में जो
  2429. 1:41:05हमारी मध्य प्रदेश सरकार है उसने इनके नाम
  2430. 1:41:07पर कुछ चेंजेस भी किए हैं और एग्जाम से
  2431. 1:41:09रिलेटेड भी हैं। तो आज का जो हमारा टॉपिक
  2432. 1:41:12है इसमें हम जानेंगे भोपाल की प्रसिद्ध
  2433. 1:41:14रानी कमलापति के बारे में जिन्हें भोपाल
  2434. 1:41:16की अंतिम हिंदू रानी भी माना जाता है। आइए
  2435. 1:41:18शुरुआत करते हैं। भोपाल की अंतिम रानी।
  2436. 1:41:21देखिए कितनी खूबसूरत रानी है रानी कमलापति
  2437. 1:41:23जिनका यह स्टैचू बना हुआ है भोपाल में। तो
  2438. 1:41:26सबसे पहले समझते हैं कि आखिर यह रानी
  2439. 1:41:28कमलापति कौन थी और इनका संबंध किस जगह से
  2440. 1:41:31है। देखिए अगर हम बात करें 18वीं शताब्दी
  2441. 1:41:34में जो रानी कमलापति थी वो शासन करती थी
  2442. 1:41:36भोपाल पर। ठीक है? और इन्हें जो है इस
  2443. 1:41:39क्षेत्र की गोंड रानी के नाम से जाना जाता
  2444. 1:41:41है। यानी गोंड रानी के रूप में प्रसिद्ध
  2445. 1:41:43थी। इनके जो पति थे उनका नाम था निजाम
  2446. 1:41:45शाह। और निजाम शाह की टोटल सात पत्नियां
  2447. 1:41:47थी। और उन सात पत्नियों में सबसे खूबसूरत
  2448. 1:41:50और महत्वपूर्ण पत्नी थी जिनका नाम था रानी
  2449. 1:41:52कमलापति जिन्हें निजाम शाह अत्यधिक प्रेम
  2450. 1:41:55करते थे। ठीक है? अब आगे क्या होता है कि
  2451. 1:41:58जो रानी कमलापति हैं याद रखिएगा ये मैंने
  2452. 1:42:00आपको बता दिया बेसिक सा। अब हम उनके
  2453. 1:42:02बायोडाटा के बारे में बात करते हैं। फिर
  2454. 1:42:04हम ये समझेंगे आखिर क्यों इतिहास में उनका
  2455. 1:42:06योगदान है और क्या वजह है जिसकी वजह से वो
  2456. 1:42:09इतनी चर्चित हैं। देखिए सबसे पहले जन्म की
  2457. 1:42:12बात करते हैं। रानी रानी कमलापति का जन्म
  2458. 1:42:14कहां और कब कैसे हुआ था। देखिए एक जगह है
  2459. 1:42:16जिसका नाम है सलकनपुर। आप सब ने सुना होगा
  2460. 1:42:18सलकनपुर काफी फेमस है यहां पे जो मंदिर है
  2461. 1:42:21उसकी वजह से। सलकनपुर जिला सीहोर यहां पर
  2462. 1:42:24रियासत हुआ करती थी। आप सलकनपुर रियासत
  2463. 1:42:26बोल सकते हैं या इसे सीहोर रियासत बोल
  2464. 1:42:28सकते हैं। इस रियासत के एक राजा थे जिनका
  2465. 1:42:30नाम था कृपाल सिंह सरौतिया। कहीं-कहीं पर
  2466. 1:42:34इनके जो पिता हैं उनका नाम कृपाराम चौधरी
  2467. 1:42:36मिलता है। कृपाराम चौधरी एक्चुअली में या
  2468. 1:42:39तो इन्हें आप कृपाराम चौधरी कह लो या यही
  2469. 1:42:42है कृपाल सिंह सरतिया। कृपाल सिंह को
  2470. 1:42:44कहीं-कहीं कृपाराम लिख गया है। तो वह
  2471. 1:42:46कृपाल सिंह सरतिया हैं जो कि सलकनपुर
  2472. 1:42:49रियासत के राजा थे। सलकनपुर रियासत एक
  2473. 1:42:51छोटी रियासत थी। उस रियासत के राजा थे और
  2474. 1:42:54इन्हीं के शासनकाल में याद रखिएगा इनके
  2475. 1:42:56शासनकाल में जो सलकनपुर की प्रजा थी काफी
  2476. 1:42:59खुश थी संपन्न थी। और उनके यहां एक
  2477. 1:43:01खूबसूरत कन्या का जन्म होता है। यानी
  2478. 1:43:04सलकनपुर के जो राजा हैं जिनका नाम क्या
  2479. 1:43:06है? कृपाल सिंह सरतिया कहीं-कहीं इनका नाम
  2480. 1:43:08कृपाराम चौधरी भी मिलता है और इन्हीं के
  2481. 1:43:11यहां एक कमल जैसी कन्या का जन्म होता है।
  2482. 1:43:13याद रखिएगा वह बचपन से ही कमल की तरह बहुत
  2483. 1:43:16सुंदर थी। इसीलिए उनका नाम रखा गया
  2484. 1:43:18कमलापति।
  2485. 1:43:19ठीक है? उनकी सुंदरता को देखते हुए उनका
  2486. 1:43:21नाम क्या रखा गया? कमलापति रखा गया। तो
  2487. 1:43:23इसमें आपको तीन बातें मिल गई कि वो किसकी
  2488. 1:43:25पुत्री हैं? किस राज्य से संबंधित थी। ठीक
  2489. 1:43:27है? याद रखिएगा। अब आप यह देखेंगे कि जब
  2490. 1:43:30उनका संबंध एक राज परिवार से है तो उनका
  2491. 1:43:32पालन-पोषण कैसे होगा? योद्धा की तरह होगा।
  2492. 1:43:35तो देखिएगा ध्यान से सुनिएगा आगे क्या है
  2493. 1:43:37कि वह बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और साहसी
  2494. 1:43:40थी। शिक्षा, घुड़सवारी, मल युद्ध। मल
  2495. 1:43:42युद्ध होता है यानी इंडिविजुअल जो फाइट
  2496. 1:43:44होती है। ठीक है? और तीर कमान चलाने में
  2497. 1:43:47वह उन्हें महारत हासिल थी। यानी वो बहुत
  2498. 1:43:50ही योग्य थी। इसके अलावा उन्होंने अनेक
  2499. 1:43:52कलाओं में पारंगत होकर कुशल प्रशिक्षण
  2500. 1:43:54प्राप्त कर सेनापति बनी। यानी अपने पिता
  2501. 1:43:57के सैन्य अभियानों में उन्होंने योगदान
  2502. 1:43:59किया था। ठीक है? और पिता के सैन्य बल के
  2503. 1:44:02साथ-साथ अपने महिला साथी दल के साथ
  2504. 1:44:03युद्धों में शत्रुओं से लोहा लेती थी। तो
  2505. 1:44:05कुल मिलाकर उनका पालन-पोषण एक योद्धा की
  2506. 1:44:08तरह हुआ। एक सेनापति की तरह हुआ और उनके
  2507. 1:44:10अंदर एक कुशल नेतृत्व की भावना भी थी।
  2508. 1:44:12पड़ोसी राज्य अक्सर खेत खलियान धन संपत्ति
  2509. 1:44:15लूटने के लिए आक्रमण किया करते थे। और
  2510. 1:44:18सलकनपुर याद रखिएगा। और सलकनपुर राज्य की
  2511. 1:44:20देखरेख करने की पूरी जिम्मेदारी राजा
  2512. 1:44:22कृपाल सिंह सरतिया और उनकी राजकुमारी
  2513. 1:44:25कमलापति पर थी। यानी जितने भी पड़ोसी
  2514. 1:44:27राज्य सलकनपुर पर आक्रमण करते थे तो
  2515. 1:44:29सलकनपुर के जो राजा हैं कौन? याद रखिएगा
  2516. 1:44:32कृपाल सिंह सरतिया और उनकी जो पुत्री हैं
  2517. 1:44:35कौन? कमलापति वो युद्ध में नेतृत्व करती
  2518. 1:44:38थी और पड़ोसी राजाओं को डिफीट करती थी।
  2519. 1:44:40इसके बाद कहानी में ट्विस्ट आता है और
  2520. 1:44:42धीरे-धीरे राजकुमारी बड़ी होने लगती है।
  2521. 1:44:45फिर राजकुमारी की शादी की बात आएगी।
  2522. 1:44:47राजकुमारी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और
  2523. 1:44:49उनकी खूबसूरती की चर्चा चारों दिशाओं में
  2524. 1:44:51होने लगी। इसी सलकनंदपुर राज्य के पास में
  2525. 1:44:54एक राज्य था। बाड़ी राज्य बोल सकते हो या
  2526. 1:44:56बाड़ी का किला बोलते हैं। तो जो बाड़ी
  2527. 1:44:58किले का जमींदार था और उस जमींदार का जो
  2528. 1:45:01लड़का है उसका नाम था चैन सिंह। याद
  2529. 1:45:03रखिएगा चैन सिंह इस स्टोरी में एक विलेन
  2530. 1:45:05है। ठीक है? कौन है? एक विलेन है चैन
  2531. 1:45:08सिंह। तो चैन सिंह बाड़ी किले का जमींदार
  2532. 1:45:10का लड़का था जो कृपाल सिंह सरौतिया का
  2533. 1:45:13रिश्ते में भांजा भी लगता था। वह
  2534. 1:45:15राजकुमारी कमलापति से विवाह करने की इच्छा
  2535. 1:45:18रखता था। लेकिन इस छोटे से गांव के
  2536. 1:45:20जमींदार से राजकुमारी कमलापति ने शादी
  2537. 1:45:22करने से क्या कर दिया? मना कर दिया। याद
  2538. 1:45:25रखिएगा जब कोई व्यक्ति किसी को मना करता
  2539. 1:45:28है किसी चीज के लिए तो सामने वाला उससे
  2540. 1:45:30बदला लेना चाहता है। और यह जो राजकुमारी
  2541. 1:45:33कमलापति ने जैसे ही जो बाड़ी का जो
  2542. 1:45:36राजकुमार है या बाड़ी का जो किले के
  2543. 1:45:38जमींदार का जो लड़का है जिसका नाम क्या
  2544. 1:45:39है? चैन सिंह इसको जैसे ही मना किया रानी
  2545. 1:45:43तो खुश हैं क्योंकि उनकी शादी इससे नहीं
  2546. 1:45:45होती है लेकिन चैन सिंह उनसे ईर्ष्या रखने
  2547. 1:45:48लगता है और बदला लेने की भावना हमेशा जीवन
  2548. 1:45:50में रखे रहता है। आगे क्या होता है देखिए
  2549. 1:45:54इसी समय 16वीं सदी में भोपाल से 55 कि.मी.
  2550. 1:45:57दूर 750 गांवों को मिलाकर एक राज्य था
  2551. 1:46:00जिसका नाम था गिन्नौरगढ़ रियासत। दोस्तों
  2552. 1:46:03गिन्नौरगढ़ रियासत जो है वर्तमान सिहौर का
  2553. 1:46:06पार्ट है। तो गिन्नौरगढ़ रियासत जो थी
  2554. 1:46:08उसमें 750 गांव आते थे और इस गांव के जो
  2555. 1:46:11राजा है उनका नाम है निजाम शाह जिनसे रानी
  2556. 1:46:13कमलावती का विवाह होने वाला है। ठीक है?
  2557. 1:46:15तो जो देहलावाड़ी के पास आता था इसके राजा
  2558. 1:46:18थे सुराज सिंह शाह और इन्हीं का लड़का है।
  2559. 1:46:21याद रखिएगा इनके पुत्र थे निजाम शाह जो
  2560. 1:46:23बहुत बहादुर निडर तथा हर कार्य में क्या
  2561. 1:46:27थे? निपुण थे। उन्हीं से रानी कमलावती का
  2562. 1:46:29विवाह हुआ और बाद में इनका एक पुत्र होता
  2563. 1:46:32है जिसका नाम होता है नवल शाह। यानी हमारी
  2564. 1:46:35इस स्टोरी में चार कैरेक्टर हैं। नंबर वन
  2565. 1:46:38है निजाम शाह।
  2566. 1:46:41निजाम शाह राजा हैं और निजाम शाह की जो
  2567. 1:46:43पत्नी है उनका नाम क्या है? रानी कमलापति।
  2568. 1:46:46रानी कमलापति का एक लड़का है। रानी
  2569. 1:46:50कमलापति। इन दोनों का एक लड़का है। याद
  2570. 1:46:52रखिएगा। और उस पुत्र का नाम क्या है?
  2571. 1:46:54नवलसा। ये तीन कैरेक्टर बहुत इंपॉर्टेंट
  2572. 1:46:56है और इसमें खलनायक की भूमिका में दो नायक
  2573. 1:46:59आएंगे। दो लोग हैं खलनायक। एक है चैनसा।
  2574. 1:47:02याद रखिएगा। चैनसा कौन है? बाड़ी का
  2575. 1:47:06जमींदार है और दूसरा खलनायक आएगा चैन शाह
  2576. 1:47:09के बाद जिसका नाम होगा दोस्त मोहम्मद। तो
  2577. 1:47:12ये चार नाम आपको याद रखना है इस स्टोरी
  2578. 1:47:14में। निजाम शाह जिनकी पत्नी है रानी
  2579. 1:47:15कमलापति और उनसे एक पुत्र होता है जिसका
  2580. 1:47:17नाम होता है नवल शाह। आगे देखते हैं क्या
  2581. 1:47:20होता है। बाड़ी किले का जो जमींदार का
  2582. 1:47:23लड़का है चैन सिंह राजा निशामशाह का भतीजा
  2583. 1:47:25लगता था। निजाम निजाम शाह जो थे उनका
  2584. 1:47:27भतीजा था जिसका नाम था चैनसा शाह और यह जो
  2585. 1:47:30चैन शाह है यह रानी पर बुरी नजर रखता था।
  2586. 1:47:33यानी रिश्ते में चाची लगेंगी। याद रखना इस
  2587. 1:47:36बात को। तो चैन सिंह के चाचा कौन है?
  2588. 1:47:38निजाम शाह। निजाम शाह का भतीजा कौन है?
  2589. 1:47:41चैन सिंह। चैन सिंह वही व्यक्ति है जिसे
  2590. 1:47:43रानी ने ठुकरा दिया था। यह एक तरीके से
  2591. 1:47:46रिश्ते में लगता था। और यह अलग छोटी सी जो
  2592. 1:47:48रियासत थी या जमींदार थी बाड़ी वहां का यह
  2593. 1:47:51प्रमुख था। अब क्या होता है? वह राजकुमारी
  2594. 1:47:55कमलापति से शादी होने के बावजूद भी उनकी
  2595. 1:47:58उनसे विवाह करने की इच्छा रखता था और उसने
  2596. 1:48:00अनेक बार राजा निजा निजाम शाह को मारने की
  2597. 1:48:03कोशिश की जिसमें वह असफल रहा। तो कुल
  2598. 1:48:06मिलाकर बात यह है कि जो निजाम शाह हैं वो
  2599. 1:48:08अपनी पत्नी कमलापति के साथ खुश हैं। निजाम
  2600. 1:48:10शाह की टोटल सात पत्नियां जिनमें सबसे
  2601. 1:48:12फेमस हैं कमलापति और उनका एक बेटा है
  2602. 1:48:14जिसका नाम है नवल शाह। लेकिन उनकी स्टोरी
  2603. 1:48:16में विलेन कौन बनकर आया? उस विलेन का नाम
  2604. 1:48:18है चैन शाह जो बाड़ी का जमींदार है।
  2605. 1:48:21रिश्ते में निजामशाह का भतीजा लगता है और
  2606. 1:48:23वह बार-बार निजाम शाह को मारने का प्रयास
  2607. 1:48:25करता है। लेकिन कैसे भी निजाम शाह बच जाते
  2608. 1:48:27हैं। एक दिन उन्होंने यानी जो चैन सिंह है
  2609. 1:48:30बाड़ी का किलेदार या बाड़ी का जो जमींदार
  2610. 1:48:32है उसने जो है निजाम शाह को एक निमंत्रण
  2611. 1:48:35दिया प्रेम पूर्वक कि आप हमारे यहां खाने
  2612. 1:48:37पर आइए। निजाम शाह उसकी बातों में आ गया
  2613. 1:48:40और उसके यहां खाने पर जब जाते हैं तो चैन
  2614. 1:48:42सिंह निजाम शाह के भोजन में विष मिला देता
  2615. 1:48:44है। देखिए एक दिन प्रेम पूर्वक उसने राजा
  2616. 1:48:47निजाम शाह को भोजन पर आमंत्रित किया और
  2617. 1:48:49भोजन में जहर देकर जो है उनकी धोखे से
  2618. 1:48:51हत्या कर दी। किसकी? यानी चैन शाह ने
  2619. 1:48:54किसकी हत्या कर दी? निजाम शाह की हत्या कर
  2620. 1:48:56दी। आगे क्या होता है? राजा निजाम शाह की
  2621. 1:48:58मौत की खबर से पूरा जो गिन्नौरगढ़ राज्य
  2622. 1:49:01है उसमें क्या है? खलबली हो गई। और चैन
  2623. 1:49:03सिंह ने रानी कमलापति को अकेले में जानकर
  2624. 1:49:07उन्हें पाने की नियत से गिन्नौरगढ़ के
  2625. 1:49:09किले पर हमला कर दिया। रानी कमलापति उस
  2626. 1:49:12समय अपने कुछ वफादारों और 12 वर्षीय बेटे
  2627. 1:49:14नवल शाह के साथ भोपाल में बने इस महल में
  2628. 1:49:17छुप जाने का निर्णय लेती हैं जो उस समय
  2629. 1:49:19सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण था।
  2630. 1:49:22आई होप आपको यहां तक स्टोरी समझ में आ गई
  2631. 1:49:24होगी। अगर आपको नहीं समझ में आई तो इसके
  2632. 1:49:26लिए एक छोटा सा डायग्राम हम बना देते हैं।
  2633. 1:49:28देखो अगर आप इस स्टोरी को समझेंगे तभी तो
  2634. 1:49:32आपको सही समझ में आएगा। एक राज्य है जिसका
  2635. 1:49:34नाम है गिन्नौरगढ़। क्या नाम है?
  2636. 1:49:37गिन्नौरगढ़ का किला बड़ा फेमस है। तोतों
  2637. 1:49:40के लिए प्रसिद्ध है। गिन्नौरगढ़ जो राज्य
  2638. 1:49:42है वर्तमान में कहां आता है बच्चों? याद
  2639. 1:49:44रखना। तो गिन्नौरगढ़ जो राज्य है वो
  2640. 1:49:46वर्तमान में या जो गिन्नौरगढ़ का किला है
  2641. 1:49:47वो सीहोर में आता है। इस राज्य के जो राजा
  2642. 1:49:50हैं उनका नाम है निजामशाह। निजाम शाह की
  2643. 1:49:52जो पत्नी है उनका नाम क्या है? याद रखना
  2644. 1:49:56कमलापति और कमलापति का एक लड़का है जिसका
  2645. 1:49:59नाम क्या है?
  2646. 1:50:01इन दोनों का पुत्र है जिसका नाम है नवलसा।
  2647. 1:50:05अब इस स्टोरी में विलेन कौन है? इस स्टोरी
  2648. 1:50:08में विलेन है जिसका नाम है चैनसा। याद
  2649. 1:50:11रखिएगा बाड़ी का जमींदार है और बाड़ी का
  2650. 1:50:15जमींदार
  2651. 1:50:16जिसका नाम क्या है? चैनसा। कहीं-कहीं पर
  2652. 1:50:19इसको याद रखिएगा आलम शाह भी कहा गया है।
  2653. 1:50:22चैन शाह या कहीं-कहीं पर इसको आलम शाह कहा
  2654. 1:50:24गया। आप चैन शाह याद रखेंगे। इसने क्या कर
  2655. 1:50:27दिया? राजा निजाम शाह की धोखे से हत्या कर
  2656. 1:50:29दी। तो राजा निजाम शाह की जब इसने धोखे से
  2657. 1:50:32हत्या कर दी तो अब रानी कमलापति अपने बेटे
  2658. 1:50:35नवल शाह के साथ एक महल में जाती हैं।
  2659. 1:50:37लेकिन इस महल का निर्माण किसने करवाया? तो
  2660. 1:50:39याद रखेंगे भोपाल जो है वर्तमान भोपाल।
  2661. 1:50:43यहां पर रानी कमलापति के लिए एक महल
  2662. 1:50:45बनवाया था राजा निजाम शाह ने। उसका नाम था
  2663. 1:50:48कमलापति पैलेस या कमलापति महल बोलते थे और
  2664. 1:50:51यह काफी खूबसूरत था। भव्य महल है और इस
  2665. 1:50:54महल का निर्माण करवाया था किसने? निजाम
  2666. 1:50:57शाह ने। तो रानी ने ये सोचा होता क्या है
  2667. 1:51:00कि जो हमारा यह निजाम शाह का भतीजा है चैन
  2668. 1:51:03शाह यह क्या करता है? यह गिन्नौरगढ़ पर
  2669. 1:51:05हमला करके इस गिन्नौरगढ़ रियासत पे क्या
  2670. 1:51:07कर लेता है? अधिकार कर लेता है। तो कुल
  2671. 1:51:09मिलाकर रानी को गिन्नौरगढ़ का जो किला है
  2672. 1:51:11उसको छोड़कर जाना पड़ता है। और रानी अपने
  2673. 1:51:14बेटे के साथ उनके बेटे का नाम क्या है
  2674. 1:51:16बेटा? उनके बेटे का नाम है नवल शाह। इसके
  2675. 1:51:19साथ इस महल में शरण ले लेती हैं। किस महल
  2676. 1:51:22में शरण ले लेती हैं? क्योंकि सुरक्षा की
  2677. 1:51:24दृष्टि से जो कमलापति महल है जो कि भोपाल
  2678. 1:51:26में है ये कैसा था? यह सुरक्षित था।
  2679. 1:51:28इसीलिए कमलापति और अपने बेटे के साथ जो है
  2680. 1:51:31वो इस महल में चली जाती हैं। ठीक है? अब
  2681. 1:51:33इस स्टोरी में क्या होता है कि रानी
  2682. 1:51:35कमलापति की पति की रानी कमलापति के पति का
  2683. 1:51:38हत्यारा कौन है? तो याद रखिएगा वो है
  2684. 1:51:40चैनसा जो इस स्टोरी में विलेन है। कुछ समय
  2685. 1:51:44बाद रानी को यह पता चलता है कि भोपाल के
  2686. 1:51:46पास में ही कुछ अफगानों ने जो है डेरा
  2687. 1:51:49डाला हुआ है। ठीक है? और अफगानों ने डेरा
  2688. 1:51:52डाला हुआ है। उनमें एक अफगान सरदार था
  2689. 1:51:54जिसका नाम था दोस्त मोहम्मद। इसकी स्टोरी
  2690. 1:51:56को हम किसी और दिन समझेंगे। दोस्त
  2691. 1:51:59मोहम्मद। कौन है दोस्त मोहम्मद? दोस्त
  2692. 1:52:01मोहम्मद एक अफगान है जिसका मुख्य काम यह
  2693. 1:52:04है कि यह पैसे लेकर किसी को भी अपनी
  2694. 1:52:06सुरक्षा दे सकता था या जिससे पैसा लेता था
  2695. 1:52:10उसकी तरफ से ये युद्ध करता था। कुल मिलाकर
  2696. 1:52:11ये भाड़े पर अपनी सेना पहुंचाता था या
  2697. 1:52:14लोगों के लिए भाड़े पर काम करता था। ठीक
  2698. 1:52:16है? क्या नाम है इसका? दोस्त मोहम्मद है।
  2699. 1:52:18इसके जो पूर्वज हैं वो अफगानिस्तान से आए
  2700. 1:52:20थे। इसने खुद औरंगजेब के यहां कुछ काम
  2701. 1:52:22किया था। बाद में यह जो मालवा आ जाता है
  2702. 1:52:24इसकी एक बहुत लंबी स्टोरी है और यही आगे
  2703. 1:52:26चलकर भोपाल राज्य का संस्थापक भी है। तो
  2704. 1:52:28दोस्त मोहम्मद ने जो है क्या किया था?
  2705. 1:52:31भोपाल के नजदीक जो है डेरा डाला था। एक
  2706. 1:52:33जगह थी जगदीशपुर। जगदीशपुर को जीतकर उसका
  2707. 1:52:35नाम रख दिया था इस्लामगढ़। तो रानी को यह
  2708. 1:52:39पता चला कि ये जो है लोगों की मदद करता
  2709. 1:52:41है। पैसे लेकर उनकी तरफ से लड़ता है। तो
  2710. 1:52:43रानी ने इससे कांटेक्ट किया। देखिए रानी
  2711. 1:52:46ने क्या किया? रानी ने इससे मदद मांगी।
  2712. 1:52:49ठीक है? तो मदद के बदले में इसने क्या
  2713. 1:52:51मांग रखी? इसने जो है ₹1 लाख की मांग रखी
  2714. 1:52:54कि हम आपकी मदद करेंगे। आप हमको क्या दें?
  2715. 1:52:58₹1 लाख देंगे। इस बात को ध्यान से समझना
  2716. 1:53:00है। यानी रानी कमलापति ने अपने पति की
  2717. 1:53:03मृत्यु का बदला लेने के लिए किसके विरुद्ध
  2718. 1:53:05मदद मांगी? चैन शाह के विरुद्ध जो कहां का
  2719. 1:53:07जमींदार है? बाड़ी का जमींदार है। और
  2720. 1:53:09दोस्त मोहम्मद ने कहा कि वह मदद करेगा
  2721. 1:53:12लेकिन बदले में कितना रुपया चाहिए? उसको
  2722. 1:53:13₹1 लाख चाहिए। रानी ने उससे कहा कि अभी
  2723. 1:53:16मेरे पास ₹1 लाख नहीं है। रानी ने कुछ
  2724. 1:53:18पैसे उसको नगद दे दिए और कुछ के बदले जमीन
  2725. 1:53:21देने का वादा किया। तो अफगान सरदार जिसका
  2726. 1:53:24नाम दोस्त मोहम्मद है उसने रानी कमलापति
  2727. 1:53:27की जो गोंड सेना है और उसके साथ-साथ अपनी
  2728. 1:53:29अफगान सेना इन दोनों सेनाओं को लेकर किस
  2729. 1:53:32पर हमला कर दिया? याद रखिएगा दोस्त
  2730. 1:53:35मोहम्मद ने गोंडों और अपनी सेना के साथ
  2731. 1:53:37मिलकर इस पर गिन्नौरगढ़ के किले पर अटैक
  2732. 1:53:40कर दिया और अटैक करके जो है क्या कर दी?
  2733. 1:53:42इसकी हत्या कर दी। चैन शाह को मार डाला और
  2734. 1:53:45इस प्रकार जो है अफगान सरदार जो है क्या
  2735. 1:53:48करता है? रानी कमलापति की जो है मदद करता
  2736. 1:53:51है। अब इस बीच दो स्टोरियां मिलती हैं जो
  2737. 1:53:54आपको जाननी है। पहली स्टोरी यह है कि जब
  2738. 1:53:57रानी कमलापति ने ये मदद मांगी थी तो
  2739. 1:53:59उन्होंने उस समय जो है एक धागा जो है
  2740. 1:54:01दोस्त मोहम्मद की कलाई पर बांधा था और एक
  2741. 1:54:04तरीके से बहन भाई का जो है रिश्ता यहां पर
  2742. 1:54:06दोनों के बीच में स्थापित हो गया जिससे कि
  2743. 1:54:08उन दोनों के बीच संबंध बने रहे। दूसरी
  2744. 1:54:11स्टोरी है जो ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर मतलब उसी
  2745. 1:54:14चीज को ज़्यादा उम तवज्जो दिया जाता है और
  2746. 1:54:16ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि वही
  2747. 1:54:19सत्य है। उस स्टोरी में होता यह है कि
  2748. 1:54:22क्योंकि ये जो दोस्त मोहम्मद है शुरू में
  2749. 1:54:24रानी की मदद करता है लेकिन बाद में इस
  2750. 1:54:26दोस्त मोहम्मद की जो नियत है वो रानी की
  2751. 1:54:29जो सुंदरता है उस पर खराब हो जाती है और
  2752. 1:54:32वो रानी को अकेला समझकर उनकी सुंदरता के
  2753. 1:54:34प्रति तो आकर्षित है ही। साथ-साथ उनका जो
  2754. 1:54:37राज्य है जैसे कि जो भोपाल में अभी वो हैं
  2755. 1:54:39और गिन्नौड़गढ़ रियासत पूरी की रियासत को
  2756. 1:54:41वो हड़पना चाहता है और इसी क्रम में दोस्त
  2757. 1:54:44मोहम्मद क्या करेगा कि पहले जो है क्या
  2758. 1:54:46करेगा वो जाकर चैन शाह की हत्या करता है
  2759. 1:54:49चैन शाह की हत्या करने के बाद इस
  2760. 1:54:50गिन्नौरगढ़ के किले पर अधिकार कर लेगा अब
  2761. 1:54:52ये गिन्नौरगढ़ का जो किला है या जो राज्य
  2762. 1:54:55है बेसिकली किसका है कमलापति का तो जब
  2763. 1:54:57दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर
  2764. 1:55:00अधिकार किया तो रानी ने इसको नजरअंदाज कर
  2765. 1:55:02दिया कि चलो ठीक है जो हुआ सो हो जाने दो
  2766. 1:55:04वो भोपाल में खुश लेकिन कुछ समय पश्चात
  2767. 1:55:07उसने क्या किया कि भोपाल में रानी कमलापति
  2768. 1:55:10पर हमला किया। तो इस समय रानी कमलापति
  2769. 1:55:12क्या करती हैं कि अपने पुत्र जिसका नाम
  2770. 1:55:15नवल शाह है उसे सुरक्षित स्थान पर भेजती
  2771. 1:55:18हैं और वो जो है अपने महल में जिसे
  2772. 1:55:21कमलापति महल कहते हैं जो कि भोपाल में
  2773. 1:55:23बड़ी झील के पास स्थित है और यहां पर क्या
  2774. 1:55:26करती हैं? वह जल समाधि ले लेती हैं। अब
  2775. 1:55:28इसकी स्टोरी को भी हम समझते हैं। मैं आपको
  2776. 1:55:30थोड़ा सा आगे ले चलता हूं। देखिए कुछ दिन
  2777. 1:55:34बाद क्या होता है। अभी जो मैं आपको स्टोरी
  2778. 1:55:36बताया था उसके आगे आप लोगों को बता रहा
  2779. 1:55:37हूं। कुछ समय बाद भोपाल में समय बिताने के
  2780. 1:55:40बाद रानी कमलापति को पता चला कि भोपाल की
  2781. 1:55:43सीमा के पास कुछ अफगानी आकर रुके हुए हैं।
  2782. 1:55:46जिन्होंने जगदीशपुर जगदीशपुर एक राजपूतों
  2783. 1:55:49का राज्य था जिसे इसने जीत लिया था और
  2784. 1:55:51इसका नाम रख दिया था इस्लामनगर। जगदीशपुर
  2785. 1:55:54पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में ले लिया
  2786. 1:55:56है। ठीक है? तो रानी को यह पता चला इन
  2787. 1:55:58अफगानों का सरदार था जिसका नाम था दोस्त
  2788. 1:56:00मोहम्मद खान था। याद रखिएगा जो पैसा लेकर
  2789. 1:56:03ध्यान से सुनना इसे कहते हैं भाड़े का
  2790. 1:56:05टट्टू बोल सकते हैं जो पैसा लेकर किसी की
  2791. 1:56:08तरफ से भी युद्ध लड़ता था। लोकमान्यता है
  2792. 1:56:10कि रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद को 1
  2793. 1:56:13लाख मोहरें देकर चैन सिंह पर हमला करने को
  2794. 1:56:16कहा। यह एक स्टोरी मिलती है। ठीक है? यह
  2795. 1:56:19दोस्त मोहम्मद है वो अफगान लुटेरा। याद
  2796. 1:56:21रखिएगा हमारी स्टोरी में दूसरा खलनायक।
  2797. 1:56:23पहला खलनायक चैनसा है। दूसरा खलनायक दोस्त
  2798. 1:56:26मोहम्मद है। आगे बढ़ते हैं। दोस्त मोहम्मद
  2799. 1:56:30ने गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया और
  2800. 1:56:32जिसने चैन सिंह जिसमें चैन सिंह मारा गया
  2801. 1:56:35और किले को उसने हड़प लिया। किसने हड़प
  2802. 1:56:37लिया? यानी जो दोस्त मोहम्मद है उसने चैन
  2803. 1:56:40सिंह को मार डाला और गिन्नौरगढ़ का जो किला
  2804. 1:56:42है उसे हड़प लिया। रानी कमलापवती को अपने
  2805. 1:56:44छोटे बेटे की परवरिश की चिंता थी। इसलिए
  2806. 1:56:46उन्होंने दोस्त मोहम्मद के इस कदम पर कोई
  2807. 1:56:48आपत्ति नहीं जताई। और दोस्त मोहम्मद अब
  2808. 1:56:51संपूर्ण भोपाल की रियासत पर क्या करना
  2809. 1:56:53चाहता था? अधिकार करना चाहता था। यह आगे
  2810. 1:56:57के संघर्ष को अब हम समझने वाले हैं। उसने
  2811. 1:57:01रानी कमलापति को अपने हरम में शामिल होने
  2812. 1:57:03और शादी करने का प्रस्ताव रखा और वह
  2813. 1:57:05वास्तव में रानी को अपने हरम में रखना
  2814. 1:57:08चाहता था। दोस्त मोहम्मद खान के इस नापाक
  2815. 1:57:10इरादे को देखते हुए रानी कमलापति यह
  2816. 1:57:13स्टोरी भी ध्यान से सुनना। रानी कमलापति
  2817. 1:57:15का 14 वर्षीय बेटा जिसका नाम नवल शाह है
  2818. 1:57:18अपने 100 लड़ाकों के साथ लाल घाटी में
  2819. 1:57:20युद्ध करने चला गया और इस घमासान युद्ध
  2820. 1:57:23में दोस्त मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार
  2821. 1:57:25दिया और इस स्थान पर इतना खून बहा कि यह
  2822. 1:57:29जमीन लाल हो गई और इसी कारण इसे लाल घाटी
  2823. 1:57:31कहा गया यानी दोस्त मोहम्मद से जो रानी का
  2824. 1:57:35लड़का है जिसका नाम नवल शाह है नवल शाह को
  2825. 1:57:37जब यह पता चला कि दोस्त मोहम्मद उनकी मां
  2826. 1:57:39के प्रति बुरी नजर रखता है तो उसने जो है
  2827. 1:57:42गुस्से में आकर नवल शाह ने अपने कुछ 100
  2828. 1:57:44योद्धाओं को इकट्ठा किया और लड़ने के लिए
  2829. 1:57:46चला गया। दोनों के बीच युद्ध हुआ और इस
  2830. 1:57:47युद्ध में नवल शाह मारा गया। जैसे ही यह
  2831. 1:57:50खबर नवल शाह के मरने की रानी को पता लगी
  2832. 1:57:52और उन्हें पता चला कि दोस्त मोहम्मद उनकी
  2833. 1:57:54तरफ आ रहा है तो रानी ने जल समाधि ले ली।
  2834. 1:57:57रानी कमलावती ने विषम परिस्थितियों को
  2835. 1:57:59देखते हुए अपनी इज्जत को बचाने के लिए
  2836. 1:58:00बड़े तालाब बांध का जो है सकरा रास्ता
  2837. 1:58:03खुलवा दिया। जिससे बड़े तालाब का पानी
  2838. 1:58:05रिसकर दूसरी तरफ आने लगा और इसे आज छोटा
  2839. 1:58:09तालाब के रूप में जाना जाता है। इसमें
  2840. 1:58:11रानी कम रानी कमलापति ने महल की समस्त
  2841. 1:58:13धनदौलत और जेवरात को उसी जल समाधि में डाल
  2842. 1:58:16दिया और इस प्रकार जो है उन्होंने जल
  2843. 1:58:18समाधि ले ली। तो इस प्रकार रानी कमलापति
  2844. 1:58:20की मृत्यु हो जाती है। दोस्त मोहम्मद खान
  2845. 1:58:22जब तक अपनी सेना को साथ लेकर लाल घाटी से
  2846. 1:58:25लाल किले तक इस किले तक पहुंचा यानी महल
  2847. 1:58:28तक पहुंचा तब तक सब कुछ खत्म हो गया था।
  2848. 1:58:30उसके हाथ कुछ नहीं लगा। ना रानी ना सोना
  2849. 1:58:32ना संपत्ति सब जो है जल समाधि में चला
  2850. 1:58:34गया। दोस्त मोहम्मद खान को ना रानी
  2851. 1:58:36कमलापति मिली और ना ही धन दौलत। जीते जी
  2852. 1:58:38उन्होंने भोपाल पर परधर्मी या विधर्मी को
  2853. 1:58:41नहीं बैठने दिया। सोर्सों के अनुसार रानी
  2854. 1:58:44कमलापति ने सन 1723 में अपनी जीवन लीला
  2855. 1:58:46खत्म की और उनकी मृत्यु के साथ ही भोपाल
  2856. 1:58:50में शुरू होता है दोस्त मोहम्मद का राज
  2857. 1:58:52जिसे भोपाल रियासत कहते हैं। दोस्त
  2858. 1:58:53मोहम्मद खान के साथ ही नवाबों का दौर शुरू
  2859. 1:58:56होता है और भोपाल में नवाबों का राज्य
  2860. 1:58:58शुरू हो जाता है। तो इस प्रकार रानी
  2861. 1:59:00कमलापति का राज दोस्त मोहम्मद ने हड़प
  2862. 1:59:03लिया। ये इस स्टोरी में पूरी की पूरी
  2863. 1:59:05कहानी थी। अब इस स्टोरी में खास क्या है?
  2864. 1:59:08यह बताता हूं। यह पीडीएफ अगर आपको चाहिए
  2865. 1:59:10हो तो सब कुछ इसमें लिखा है। रानी कमलापति
  2866. 1:59:13कौन थी? उनके पति कौन थे? उनकी मृत्यु का
  2867. 1:59:15कारण क्या था? यह सारी बातें हमने यहां पर
  2868. 1:59:17देख ली। रानी कमलापति महल की बात करते
  2869. 1:59:20हैं। ये भोपाल में इसका तस्वीर में मैं
  2870. 1:59:22आपको दिखा देता हूं। देखिए यह भोपाल का
  2871. 1:59:25सबसे प्राचीन शहर है। 18वीं शताब्दी में
  2872. 1:59:27बना था कि यार भोपाल में जितनी भी इमारतें
  2873. 1:59:29हैं उनमें सबसे पुराना यही पैलेस है जिसका
  2874. 1:59:31नाम रानी कमलापति पैलेस है। इस महल का जो
  2875. 1:59:33निर्माण है वो निजाम शाह ने अपनी पत्नी के
  2876. 1:59:35लिए करवाया था। किसके लिए? कमलापति के लिए
  2877. 1:59:38याद रखिएगा। ठीक है? तो, यह एक वास्तुकला
  2878. 1:59:41का एक उत्कृष्ट उदाहरण हमको देखने को
  2879. 1:59:43मिलता है जिसमें नुकीले मेहराबों को
  2880. 1:59:46प्रयोग किया गया। बहुत सारी इसकी खास
  2881. 1:59:47बातें हैं। इसका तस्वीर मैं आप लोगों को
  2882. 1:59:49दिखाता हूं। यह है कमलापति पैलेस।
  2883. 1:59:53कमलापति महल बोलते हैं जो कि कहां पर बना
  2884. 1:59:56हुआ है। भोपाल में बना हुआ है। याद
  2885. 1:59:59रखिएगा। बड़ा खूबसूरत है। इसी के सामने एक
  2886. 2:00:01पैलेस बना पार्क बना हुआ है जिसको बोलते
  2887. 2:00:03हैं कमला पार्क या रानी कमलापति पार्क
  2888. 2:00:06इसको कहा जाता है। तो कमलापति पार्क जो है
  2889. 2:00:08इसी महल के सामने बना हुआ है। ठीक है? यह
  2890. 2:00:11भी भोपाल में है और यह भोपाल के नवाब ने
  2891. 2:00:14बनवाया था।
  2892. 2:00:16ठीक है? तो ये दोनों चीजें हम लोगों को
  2893. 2:00:17यहां देखने को मिलती हैं। आई होप आप लोगों
  2894. 2:00:20को यहां तक समझ में आ गया होगा। अब हम एक
  2895. 2:00:21लास्ट और इंटरेस्टिंग बात करेंगे। ध्यान
  2896. 2:00:24से सुनिएगा। हबीबगंज रेलवे स्टेशन जिसका
  2897. 2:00:27नया नाम कर दिया गया है रानी कमलापति
  2898. 2:00:29स्टेशन। ध्यान से सुनेंगे। बहुत
  2899. 2:00:30इंपॉर्टेंट है। यह आप देख सकते हैं। यह
  2900. 2:00:32बहुत ही आधुनिक है। यह देश का पहला
  2901. 2:00:35प्राइवेट जो है क्या है? रेलवे स्टेशन है
  2902. 2:00:37और यह एक एयरपोर्ट की तरह बना हुआ है।
  2903. 2:00:39यानी काफी आधुनिक सुसज्जा के साथ यह हमको
  2904. 2:00:42देखने को मिलता है। तो आपको अगर पूछा जाए
  2905. 2:00:44कि हबीबंज रेलवे स्टेशन का नाम क्या कर
  2906. 2:00:46दिया गया है? तो याद रखिएगा रानी कमलापति
  2907. 2:00:49स्टेशन कर दिया गया है और यह भोपाल शहर
  2908. 2:00:51में स्थित है और भोपाल शहर का दूसरा
  2909. 2:00:53स्टेशन है। पहला जो मेन स्टेशन है उसके
  2910. 2:00:55बाद दूसरा यह है। यह भारत का पहला आईएसओ
  2911. 2:00:57प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाला निजी रेलवे
  2912. 2:00:59स्टेशन है। 14 नवंबर 2021 को हबीबंद रेलवे
  2913. 2:01:03स्टेशन का नाम याद रखिएगा कब बदला गया यह
  2914. 2:01:05नाम? तो 2021 को इसका नाम बदलकर कमलापति
  2915. 2:01:07के नाम पे रख दिया गया है। और यह भारत का
  2916. 2:01:09पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन है जिसे बंसल
  2917. 2:01:12ग्रुप के द्वारा कौन सा ग्रुप इसको चलाता
  2918. 2:01:14है? तो याद रखिए कभी पूछा जाए किस ग्रुप
  2919. 2:01:16के अंडर में आता है ये प्राइवेट रेलवे
  2920. 2:01:19स्टेशन है। बंसल ग्रुप इसको लीड करता है।
  2921. 2:01:21एक और इंपॉर्टेंट बात कि आखिरकार इसका नाम
  2922. 2:01:23हबीबगंज रेलवे स्टेशन पहले क्यों था? तो
  2923. 2:01:26किसके नाम पर था? देखिए हबीबगंज का जो नाम
  2924. 2:01:29है वो हबीब मियां के नाम पर था। ये हबीब
  2925. 2:01:31मियां कौन है? देखिए इस स्टेशन का सबसे
  2926. 2:01:34पुराना नाम शाहपुर था। बाद में एक हबीब
  2927. 2:01:36मियां थे जिन्होंने अपनी जमीन इसके लिए
  2928. 2:01:38दान दी थी। और उन्होंने क्योंकि जमीन दान
  2929. 2:01:40दी उनके नाम पर इसका नाम हबीबगंज रेलवे
  2930. 2:01:42स्टेशन पड़ा और वर्तमान में इसका नाम क्या
  2931. 2:01:44हो गया? रानी कमलापति स्टेशन। तीन नाम हो
  2932. 2:01:47गए। पहले शाहपुर, फिर हबीबगंज और वर्तमान
  2933. 2:01:49में क्या है? याद रखिएगा रानी कमलापति
  2934. 2:01:51स्टेशन। आई होप आप लोगों को यह सारी
  2935. 2:01:54जानकारी अच्छे से समझ में आ गई होगी।
  2936. 2:01:56देखिए तो आज हम लोगों ने किसके बारे में
  2937. 2:01:58बात की है? आज हम लोगों ने बात की है
  2938. 2:02:00भोपाल की सबसे प्रसिद्ध रानी जिनका नाम
  2939. 2:02:02क्या था? रानी कमलापति जो कि भोपाल की
  2940. 2:02:05अंतिम हिंदू रानी थी। देखिए रानी कमलापति
  2941. 2:02:08गों की रानी थी और भोपाल की अंतिम रानी
  2942. 2:02:11थी। वो भोपाल की अंतिम हिंदू रानी थी
  2943. 2:02:12जिनका योगदान बड़ा महत्वपूर्ण है। इनके
  2944. 2:02:15राज्य को हड़प लिया था एक अफगान लुटेरे ने
  2945. 2:02:17जिसका नाम था दोस्त मोहम्मद और यहां पर जो
  2946. 2:02:20गिन्नौरगढ़ से जो भोपाल का जो पूरा एरिया
  2947. 2:02:22था उसे छीनकर उसने जो है यहां पर भोपाल
  2948. 2:02:24रियासत की नींव रखी और भोपाल में नवाबों
  2949. 2:02:26का शासन यहां पे शुरू होता है। मुझे
  2950. 2:02:28उम्मीद है कि आज के इस सेशन में आप लोगों
  2951. 2:02:30को रानी कमलापति की स्टोरी अच्छे से समझ
  2952. 2:02:32में आई होगी और आपको जो मेन किरदार है
  2953. 2:02:35उनके नाम समझ में आए होंगे कि चैन शाह कौन
  2954. 2:02:37है? नवल शाह कौन है? और याद रखिएगा निजाम
  2955. 2:02:40शाह कौन है? और सबसे इंपॉर्टेंट दोस्त
  2956. 2:02:41मोहम्मद कौन था? कमलापति पैलेस कहां है?
  2957. 2:02:44कमलापति पार्क कहां पर है? और रानी
  2958. 2:02:46कमलापति ने कहां जल समाधि ली थी? ये सारी
  2959. 2:02:49बातें आप लोगों को अच्छे से समझ में आ गई
  2960. 2:02:51होंगी। इसी के साथ इस वीडियो को मैं यहीं
  2961. 2:02:53समाप्त करता हूं और मुझे आप बताइएगा कमेंट
  2962. 2:02:56करके कि आप नेक्स्ट वीडियो किस पर चाहते
  2963. 2:02:58हैं। जय हिंद। थैंक यू।
  2964. 2:03:06नमस्कार साथियों आप सभी का एमपीपीएससी
  2965. 2:03:09स्टडी का आईक्यू के इस चैनल पर बहुत-बहुत
  2966. 2:03:11स्वागत है। उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे
  2967. 2:03:13होंगे और मन लगाकर पढ़ रहे होंगे। तो
  2968. 2:03:15दोस्तों मैं आप सभी के लिए एक बहुत ही
  2969. 2:03:18बेहतरीन सीरीज लेकर आया हूं और इस सीरीज
  2970. 2:03:20का नाम है मध्य प्रदेश के वीरों का
  2971. 2:03:22इतिहास। यानी इस सीरीज में हम लोग मध्य
  2972. 2:03:25प्रदेश के उन वीरों के बारे में चर्चा
  2973. 2:03:27करने वाले हैं जिन्होंने मध्य प्रदेश के
  2974. 2:03:30स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण
  2975. 2:03:32रोल दिया। इसके साथ-साथ उनसे रिलेटेड जो
  2976. 2:03:35क्वेश्चन है वह एमपीपीएससी और अन्य
  2977. 2:03:37परीक्षाओं में भी पूछे जाते हैं। तो आज की
  2978. 2:03:40इस सीरीज में मैं आप सभी के लिए लेकर आया
  2979. 2:03:42हूं मध्य प्रदेश के एक वीर स्वतंत्रता
  2980. 2:03:45सेनानी, भीलों के जो हैं मसीहा,
  2981. 2:03:47आदिवासियों के मसीहा, मध्य प्रदेश के
  2982. 2:03:50जननायक और भारतीय रॉबिनहुड। मैं बात कर
  2983. 2:03:53रहा हूं
  2984. 2:03:54द ग्रेट टंट्या भील की। तो आज के इस सेशन
  2985. 2:03:58में हम लोग बात करेंगे आदिवासियों के
  2986. 2:04:00मसीहा, गरीबों के मसीहा भारतीय रॉबिन हिट
  2987. 2:04:03रॉबिनहुड टंट्या भील के बारे में। देखिए
  2988. 2:04:05ये जो सीरीज है ये एक छोटी सी सीरीज है।
  2989. 2:04:08मतलब इसमें ज्यादा समय आपका नहीं लूंगा।
  2990. 2:04:1010 से 15 मिनट में आपको बहुत इंपॉर्टेंट
  2991. 2:04:13जानकारी दूंगा जिससे आप एग्जाम के
  2992. 2:04:14क्वेश्चन भी सॉल्व कर सकें। प्रीलिम्स में
  2993. 2:04:16बनने वाले फैक्ट को भी कवर कर सकें। मेंस
  2994. 2:04:19के लिए आपको एक कांसेप्ट भी मिल जाए और
  2995. 2:04:21साथ-साथ अगर इससे रिलेटेड कुछ और क्वेश्चन
  2996. 2:04:23इंटरव्यू में पूछे जाते हैं तो उन सभी में
  2997. 2:04:25आपको इससे हेल्प मिले। तो आइए बात करते
  2998. 2:04:27हैं हम द ग्रेट टंट्या भील की। ठीक है?
  2999. 2:04:30सबसे पहले हम लोग बात करेंगे उनके जीवन
  3000. 2:04:33परिचय के बारे में कि जो मध्य प्रदेश के
  3001. 2:04:35जननायक हैं टंट्या भील उनका जीवन परिचय
  3002. 2:04:37कैसा रहा। तो दोस्तों इसमें कुछ सामान्य
  3003. 2:04:40सी बातें जो आपको याद रखनी है यहां पर।
  3004. 2:04:42सबसे पहले देखिए उनका बर्थ है और उनका जो
  3005. 2:04:44जन्म होता है वो होता है 26 जनवरी 1842 को
  3006. 2:04:48एक गांव है जिसका नाम है बड़ा अहीर गांव
  3007. 2:04:51और यह गांव पड़ता है पंधाना तहसील खंडवा।
  3008. 2:04:54इसीलिए कई जगह पे पूर्वी निवाड़ भी लिखा
  3009. 2:04:57रहता है। आप याद रखिएगा खंडवा की पंधाना
  3010. 2:04:59तहसील के बड़दा अहीर गांव में 26 जनवरी
  3011. 2:05:011842 को उनका जन्म होता है। ठीक है? अब
  3012. 2:05:04इसमें कुछ बायोडाटा उनकी समाधि के बारे
  3013. 2:05:07में दिया है। उनकी समाधि पाताल पानी इंदौर
  3014. 2:05:09में है। 4 दिसंबर को देखिए कई बार एग्जाम
  3015. 2:05:12में उनकी जो है फांसी के बारे में पूछते
  3016. 2:05:15हैं। कब उनको फांसी हुई थी? और 1889 में
  3017. 2:05:18एक समाचार पत्र था न्यूयॉर्क का। उस
  3018. 2:05:21समाचार पत्र ने उनको यह टाइटल दिया था। तो
  3019. 2:05:23एग्जाम में यह क्वेश्चन भी पूछा जा सकता
  3020. 2:05:25है कि किस समाचार पत्र ने उन्हें इंडियन
  3021. 2:05:28रॉबिनहुड का टाइटल दिया था? तो वह समाचार
  3022. 2:05:30पत्र था द न्यूयॉर्क टाइम्स। और 10 नवंबर
  3023. 2:05:331889 को यह न्यूज़ जो है न्यूयॉर्क टाइम्स
  3024. 2:05:36में प्रकाशित की गई थी और उसमें उन्हें
  3025. 2:05:38भारतीय रॉबिनहुड कहा गया था। तो ये तो
  3026. 2:05:40इसमें से दो-तीन बातें होंगी लेकिन हम
  3027. 2:05:42डिटेल में चर्चा करने वाले हैं तांत्या
  3028. 2:05:46भील के बारे में। तो सबसे पहले उनके बर्थ
  3029. 2:05:48के बारे में बात करते हैं। अर्ली लाइफ के
  3030. 2:05:50बारे में बात करते हैं। तो देखिए सबसे
  3031. 2:05:53पहले जैसे कि मैंने आपको बताया उनका जन्म
  3032. 2:05:55जो है 1842 में तत्कालीन मध्य प्रांत यानी
  3033. 2:05:58मध्य प्रदेश के पूर्वी निवाड़ और खंडवा
  3034. 2:06:00जिले की पंधाना तहसील के इसमें जो
  3035. 2:06:03इंपॉर्टेंट है वो बर्दा आहीर गांव है जो
  3036. 2:06:05एग्जाम में आपके काम आ सकता है। साथ-साथ
  3037. 2:06:07अगर गांव नहीं आएगा तो ये पंधाना तहसील आ
  3038. 2:06:10सकती है। खंडवा जिले की पंधाना तहसील के
  3039. 2:06:13बड़दा गांव में उनका जन्म होता है। टंड्या
  3040. 2:06:16भील का जन्म एक भील परिवार में हुआ था और
  3041. 2:06:18उनके जो पिता हैं उनका नाम भाव सिंह या
  3042. 2:06:21ज्यादातर जगहों पर भास सिंह भील था। भाव
  3043. 2:06:24सिंह भील या भा सिंह भील था और उनकी माता
  3044. 2:06:26का नाम जीवनी था। माताजी का जो निधन है
  3045. 2:06:29उनका बहुत मतलब पहले हो चुका था लेकिन
  3046. 2:06:32उनके जो पिता थे उन्होंने उन्हें भीलों
  3047. 2:06:34में सबसे इंपॉर्टेंट होता है तीर धनुष तीर
  3048. 2:06:37चलाने की जो शिक्षा होती है और गोफन तो
  3049. 2:06:39याद रखिएगा उनके जो पिता हैं उन्होंने
  3050. 2:06:42टंट्या को लाठी गोफन और तीर कमान चलाने का
  3051. 2:06:46प्रशिक्षण दिया था बचपन में यानी वह लाठी
  3052. 2:06:49चलाने में माहिर थे गोफन होता है जो फेंक
  3053. 2:06:51कर घुमाकर फेंकते हैं और थर्ड नंबर पे है
  3054. 2:06:53धनुष तीर और आगे चलकर जब वह अंग्रेजों से
  3055. 2:06:56संघर्ष करते हैं तो इसमें इसमें एक और चीज
  3056. 2:06:58जोड़ देंगे बंदूक। उनके साथ हमेशा कंधे पर
  3057. 2:07:01एक बंदूक रहती थी जिससे वह अंग्रेजों का
  3058. 2:07:03सामना करते थे। जमींदारों साहूकारों के
  3059. 2:07:05अत्याचार के विरुद्ध जो है संघर्ष करते
  3060. 2:07:08थे। तो ये उनका वर्थ हो गया। वर्थ के बाद
  3061. 2:07:10आइए बात करते हैं। उनके वास्तविक नाम को
  3062. 2:07:13लेकर कुछ कंफ्यूजन क्रिएट होता है। हमारे
  3063. 2:07:15एमबीबीएससी प्रीलिम्स में एक क्वेश्चन
  3064. 2:07:16पूछा गया था। मैं आपको बताना चाहूंगा।
  3065. 2:07:18देखिए उनका जो रियल नेम है वो तांत्या था।
  3066. 2:07:21ध्यान से सुनना। घर वालों ने उनका नाम
  3067. 2:07:24तांत्या रखा था। लेकिन याद रखेंगे इस
  3068. 2:07:27तांत्या के अलावा एक नाम और याद रखना है
  3069. 2:07:29आपको। तांत्या उनका रियल नेम है। ठीक है?
  3070. 2:07:32अब होता क्या है? जो अंग्रेज लोग थे
  3071. 2:07:34अंग्रेज अंग्रेज लोगों ने उनको उस समय
  3072. 2:07:38टुंड्रा कह दिया। तो कई जगह पे उनका नाम
  3073. 2:07:40टुंड्रा मिला है। टुंड्रा नाम किसने दिया
  3074. 2:07:43है? यह अंग्रेजों ने दिया है। तो, यह आप
  3075. 2:07:45याद रख सकते हैं। इसके अलावा लोग उन्हें
  3076. 2:07:47प्यार से भीलों में आपने सुना होगा मामा
  3077. 2:07:50संबोधन उनको ज्यादा पसंद है। तो, लोग
  3078. 2:07:52उन्हें प्यार से टंट्या मामा कहते हैं।
  3079. 2:07:55ठीक है? अब इसमें एक इंपॉर्टेंट और
  3080. 2:07:58इंटरेस्टिंग फैक्ट मैं आपको बता रहा हूं।
  3081. 2:08:00यह जो तांत्या और टुंड्रा का क्या
  3082. 2:08:02कांसेप्ट है? देखिए, भीलों में जो ज्वार
  3083. 2:08:05का पेड़ होता है, वह एकदम सीधा और खड़ा
  3084. 2:08:07होता है और उसको यह लोग क्या कहते हैं?
  3085. 2:08:10टंट्या कहते हैं या ऐसा एक वर्ड इस्तेमाल
  3086. 2:08:12करते हैं। तो इनका जो रियल नेम है वह रियल
  3087. 2:08:14नेम क्या था? तांत्या। तांत्या के बाद यह
  3088. 2:08:17बन गया था टंट्या। टंट्या से मतलब है
  3089. 2:08:20ज्वार के पेड़ की बात हो रही है। ज्वार का
  3090. 2:08:22जो पेड़ होता है उसको जो है भीलों में
  3091. 2:08:25टंट्या कहा जाता है। ठीक है? तो लोग उनको
  3092. 2:08:28क्या बोलते थे? टंट्या। लेकिन अंग्रेजों
  3093. 2:08:30ने इस टंट्या का नाम बिगाड़ के क्या कर
  3094. 2:08:32दिया? टुंड्रा कर दिया। और हमारे
  3095. 2:08:34एमपीपीएससी ने ऐसा क्वेश्चन कुछ समय पहले
  3096. 2:08:37ही पूछा था। तो ये इनका रियल नेम तांत्या
  3097. 2:08:40है। ज्वार के पेड़ के कारण इन्हें लोग
  3098. 2:08:42टंटिया इनके जो स्कूल फ्रेंड थे वो इन्हें
  3099. 2:08:45टंटिया टंटिया कह के बुलाते थे क्योंकि ये
  3100. 2:08:47सीधे एकदम थे मतलब ज्वार के पेड़ की तरह
  3101. 2:08:50थे इसलिए इनको टंटिया कहते थे। अंग्रेजों
  3102. 2:08:53ने इनको टुंड्रा कर दिया और सामान्य लोग
  3103. 2:08:55आगे चलकर जब ये लोकप्रिय हुए तो इन्हें
  3104. 2:08:57टंट्या मामा कहते थे। तो इनके बर्थ के
  3105. 2:08:59बारे में हो गए। इनका रियल नेम हो गया।
  3106. 2:09:01ठीक है? रियल नेम इनका तात्या है। लोग
  3107. 2:09:03इनको भील जो युवा थे उन्होंने टंट्या कहा
  3108. 2:09:06और अंग्रेजों ने इनका नाम टुंड्रा कर
  3109. 2:09:07दिया। अब आते हैं विद्रोह की बात। देखिए
  3110. 2:09:10आखिरकार विद्रोह होता क्यों है? और
  3111. 2:09:12विद्रोह की कहानी क्या है? तो इनके जो
  3112. 2:09:15पिता थे जिनका नाम था भाऊ सिंह भील
  3113. 2:09:17उन्होंने कुछ कर्जा लिया था और उन्होंने
  3114. 2:09:20अपनी जो जमीन है गांव के एक जमींदार को
  3115. 2:09:22गिरवी रखी थी और उस गांव के जमींदार का
  3116. 2:09:25नाम था मतलब वो एक पटेल था। उसको यहां पर
  3117. 2:09:27उन्होंने अपनी जमीन जो है गिरवी रखी थी।
  3118. 2:09:29जब इनके पिता की मृत्यु हुई तो यह जो हैं
  3119. 2:09:33हमारे जो तात्या भील हैं वो जाते हैं और
  3120. 2:09:35उनसे क्या करते हैं? अपनी जमीन वापस
  3121. 2:09:37मांगते हैं। तो जमींदार ने जमीन तो इनको
  3122. 2:09:40वापस नहीं दी। उल्टा इन पर आरोप लगाकर
  3123. 2:09:43इन्हें जो है जेल करवा दी। तो जब ये जेल
  3124. 2:09:46में गए तो अंग्रेजों से इनका मतलब पुलिस
  3125. 2:09:48जो थी पुलिस ने क्या किया? इनके साथ
  3126. 2:09:51मारपीट की और वहां से ये जेल तोड़कर भाग
  3127. 2:09:54जाते हैं। उसके बाद क्या होता है? इनका जो
  3128. 2:09:57पहला संघर्ष होता है अगर आप देखेंगे
  3129. 2:10:00तांत्या भील का जो पहला संघर्ष है ठीक है
  3130. 2:10:03रियल नेम क्या है याद रखिएगा तांत्या है
  3131. 2:10:06यह रियल नेम है लोगों ने ज्वार के पेड़ के
  3132. 2:10:09कारण क्या कर दिया है टंट्या कर दिया है
  3133. 2:10:11ये याद रखना और अंग्रेजों ने इनको क्या
  3134. 2:10:14नाम दिया टुंड्रा कर दिया तो कहीं-कहीं
  3135. 2:10:16इनको टुंड्रा टुंडा भी कहते हैं ठीक है तो
  3136. 2:10:19ये नाम पड़ गया अब ये जो पहले शिकार बनते
  3137. 2:10:22हैं ये पहले शिकार किसके बनते हैं साहूकार
  3138. 2:10:25और जमींदारों यानी टांटिया भील पर जो पहला
  3139. 2:10:29अत्याचार हुआ वो साहूकार और जमींदारों का
  3140. 2:10:32हुआ। जमींदारों का अत्याचार। ठीक है?
  3141. 2:10:36साहूकार और जमींदारों का अत्याचार इन पर
  3142. 2:10:39हुआ और साथ-साथ इसमें क्योंकि जमींदारों
  3143. 2:10:42का साथ कौन देती है? जमींदार किसके साथ
  3144. 2:10:44होती है? पुलिस जो इस समय अंग्रेजों की
  3145. 2:10:46थी। क्योंकि इस समय जो गरीब आदिवासी किसान
  3146. 2:10:50होते थे, उनकी जमीनों को जमींदार हड़प
  3147. 2:10:53लेते थे। जब वो उधार लेते थे साहूकारों से
  3148. 2:10:56तो उनको जो है साहूकार और पुलिस मिलकर
  3149. 2:10:58पुलिस थाने में कैद करवा देती और उनके साथ
  3150. 2:11:00मारपीट करती थी। यानी हमारे जो तांत्या
  3151. 2:11:03भील हैं वो जमींदारों और साहूकारों के
  3152. 2:11:06अत्याचार का शिकार बनते हैं। जब उन्हें
  3153. 2:11:08खंडवा जेल में रखा गया तो वो तीन दिन बाद
  3154. 2:11:10ही जेल तोड़कर भाग जाते हैं। उसके बाद जो
  3155. 2:11:14हमारे तांत्या भील हैं उनकी जो लड़ाई है
  3156. 2:11:17याद रखिएगा। तांत्या भील क्या उठा लेते
  3157. 2:11:19हैं? विद्रोह कर देते हैं और विद्रोह करने
  3158. 2:11:22के पश्चात जो है वह बंदूक उठा लेते हैं और
  3159. 2:11:25जब वो बंदूक उठाएंगे आपने देखा होगा
  3160. 2:11:27पुरानी फिल्मों में जब डाकू बनते थे डाकू
  3161. 2:11:30नहीं मैं बागी शब्द का इस्तेमाल करूंगा जो
  3162. 2:11:32चंबल की कहानी है बागी तो वो क्यों बागी
  3163. 2:11:35बनते थे जब उनके ऊपर अत्याचार किया जाता
  3164. 2:11:38था तो वह बागी बनते थे और ऐसा ही यानी जो
  3165. 2:11:41आदिवासी जनजाति हैं या जो भील वर्ग है
  3166. 2:11:44उनके विरुद्ध जब अत्याचार हो रहा था
  3167. 2:11:46गरीबों पर जनता पर अत्याचार हो रहा था तो
  3168. 2:11:49उस अत्याचार के विरोध में तांभ्या भील ने
  3169. 2:11:51बंदूक उठा ली क्योंकि साहूकारों से उनका
  3170. 2:11:54विरोध है। अब जब वो साहूकारों और
  3171. 2:11:56जमींदारों को लूटेंगे समझ में आ रहा है
  3172. 2:11:58ना? साहूकारों जमींदारों को लूटेंगे तो
  3173. 2:12:00पुलिस आएगी तो पुलिस से भी उनकी मुठभेड़
  3174. 2:12:02होगी। तो कुल मिलाकर उनका यहीं से संघर्ष
  3175. 2:12:05शुरू होता है अंग्रेजों के साथ। ठीक है?
  3176. 2:12:08यहीं से अंग्रेजों के साथ संघर्ष शुरू
  3177. 2:12:10होता है।
  3178. 2:12:13अंग्रेजों के साथ संघर्ष जो है तांद्या
  3179. 2:12:16भील का शुरू होता है। अब इसमें एक और बात
  3180. 2:12:19है कि जब वो छोटे थे तभी जो है 1857 की
  3181. 2:12:24क्रांति होती है और 1857 की क्रांति में
  3182. 2:12:27उनकी कुछ भूमिका थी।
  3183. 2:12:321857 की क्रांति में उनकी कुछ भूमिका थी।
  3184. 2:12:35हालांकि इनका जो ज्यादा रोल है यानी
  3185. 2:12:38तांत्या जो भील है हमारे उनका जो ज्यादा
  3186. 2:12:40रोल है वो हमको 1857 के बाद देखने को
  3187. 2:12:43मिलता है। अब लगातार इन्होंने क्या किया
  3188. 2:12:46कि ये क्या करते साहूकारों के घर में डाका
  3189. 2:12:48डालते जमींदारों के घर में डाका डालते और
  3190. 2:12:51जो सरकारी जो खजाने होते थे सरकारी जो
  3191. 2:12:54ट्रेनें होती थी जिनमें अनाज जाता था उनको
  3192. 2:12:56लूटते थे और उनको लूट कर गरीब असहाय और
  3193. 2:13:00दीन लोगों में बांट देते थे। तांत्या भील
  3194. 2:13:02के बारे में हम कुछ और बातें करने जा रहे
  3195. 2:13:05हैं जिनको आपको बहुत ध्यान से सुनना है।
  3196. 2:13:07तो देखिए अर्ली लाइफ के बारे में बता
  3197. 2:13:09दिया। जन्म हो गया हमारा वास्तविक नाम हो
  3198. 2:13:12गया। विद्रोह हो गया। ठीक है? और ब्रिटिश
  3199. 2:13:14शासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ विद्रोह
  3200. 2:13:16किया। आदिवासी समुदाय को संगठित किया। और
  3201. 2:13:19टंडिया ने गोरिल्ला युद्ध कला को उपयोग
  3202. 2:13:21किया और ब्रिटिश सेना उन्हें 12 वर्षों तक
  3203. 2:13:2412 साल तक इन्होंने अंग्रेजों को नाखों
  3204. 2:13:26चने चने चबवाए और अंग्रेज इनको नहीं पकड़
  3205. 2:13:31पाए। 12 वर्ष तक अंग्रेज इनके पीछे लगे
  3206. 2:13:33रहे। तो जो टंडिया भील की जो मेन भूमिका
  3207. 2:13:36है वो आपको समझनी है। आखिर अंग्रेजों से
  3208. 2:13:38उनका संघर्ष क्यों होता है? वो है जमींदार
  3209. 2:13:41साहूकारों का अत्याचार और उसी के विरुद्ध
  3210. 2:13:43वो आवाज उठाते हैं और उसके साथ ही उनका
  3211. 2:13:46संघर्ष जो है ब्रिटिश पुलिस से और
  3212. 2:13:48अंग्रेजों से होने लगता है। ठीक है? अब
  3213. 2:13:50आगे की कड़ी में देखते हैं क्या और आपको
  3214. 2:13:52याद रखना है। देखिए यहां पर जैसे मैंने
  3215. 2:13:54आपको बताया सबसे पॉपुलर एक क्वेश्चन है।
  3216. 2:13:57हो सकता है मुख्य परीक्षा में यह क्वेश्चन
  3217. 2:13:59इस तरीके से पूछा जाए कि तां्या भील को
  3218. 2:14:01भारतीय रॉबिनहुड कहा जाता है। आखिर क्यों?
  3219. 2:14:04तो ऐसा उन्होंने क्या किया? ठीक है? अब ये
  3220. 2:14:07रॉबिनहुड का क्या कांसेप्ट है? रॉबिनहुड
  3221. 2:14:09एक यूरोपीय योद्धा था जो यूरोप में गरीबों
  3222. 2:14:12को लूटने वाले जमींदारों और जो साहूकार
  3223. 2:14:15होते थे उनको लूटता था और उनसे लूटा हुआ
  3224. 2:14:17जो माल है वो गरीबों में बांट देता था
  3225. 2:14:20जिसे रॉबिनहुड कहा जाता था| इसीलिए
  3226. 2:14:22क्योंकि अब यह काम आदिवासी इलाके में कौन
  3227. 2:14:25कर रहे हैं हमारे तांत्या भील कर रहे हैं
  3228. 2:14:28इसीलिए देखिए गरीब कन्याओं की शादी कराना
  3229. 2:14:31निर्धन और असहाय लोगों की मदद करना इसके
  3230. 2:14:34अलावा टक है इन सभी कामों से टंट्या मामा
  3231. 2:14:37सबके प्रिय प्रिय बन गए जिससे उनकी पूजा
  3232. 2:14:40होने लगी। अमीरों से लूटकर गरीबों में
  3233. 2:14:42बांटने के कारण वह आदिवासियों का रॉबिनहुड
  3234. 2:14:46बन गया तथा उन्होंने अमीरों से धन छीनकर
  3235. 2:14:48गरीबों और वंचितों की मदद की। इसीलिए
  3236. 2:14:50उन्हें भारत में या भारतीय रॉबिनहुड के
  3237. 2:14:53नाम से जाना जाता है। तो रॉबिनहुड क्यों
  3238. 2:14:55कहते हैं? अमीरों को लूटते हैं, गरीबों
  3239. 2:14:58में बांट देते हैं। जमींदारों को लूटते
  3240. 2:15:00हैं, गरीबों में बांट देते हैं। सरकारी
  3241. 2:15:02खजाने को लूटते हैं, गरीबों में बांट देते
  3242. 2:15:05हैं। इसीलिए लोग इन्हें भारतीय रॉबिनहुड
  3243. 2:15:07के नाम से जानते हैं। अब भारतीय रॉबिनहुड
  3244. 2:15:11भी हो गया। अब लगातार 12 वर्ष तक
  3245. 2:15:14अंग्रेजों को इन्होंने चकमा दिया तो सरकार
  3246. 2:15:17ने लगभग 2000 लोगों की एक पलटन इनके पीछे
  3247. 2:15:20लगा दी जो भील पलटन के नाम से फेमस थी। अब
  3248. 2:15:23वो इनको पकड़ने का काम कर रही है और
  3249. 2:15:25तांत्या देखिए तांत्या की दो खूबी और हैं
  3250. 2:15:27जो मैं आपको बताना चाहता हूं। पहली चीज ये
  3251. 2:15:30कहा जाता है कि तांत्या जो हैं वो कई सारे
  3252. 2:15:33अपने हम शक्ल रखते थे। ठीक है? कौन रखते
  3253. 2:15:37थे? कई सारे हम शक्ल रखते थे और इनका
  3254. 2:15:40इस्तेमाल करते थे वो अलग-अलग जगह पर जिससे
  3255. 2:15:42कि उनको आसानी से ना पकड़ा जा सके।
  3256. 2:15:44क्योंकि उनको जंगल से लगाव था जंगल में।
  3257. 2:15:48बताते हैं कि जब भी पुलिस उनको पकड़ने के
  3258. 2:15:51लिए सेना उनको पकड़ने के लिए आती थी तो वह
  3259. 2:15:53एकदम से जंगल में गायब हो जाते हैं। एक
  3260. 2:15:56किस्सा है कि जब एक बार पुलिस उन्हें
  3261. 2:15:58पकड़ने के लिए आती है तो वह 20 फीट ऊंची
  3262. 2:16:00दीवार को कूदकर जो है जंगल में भाग जाते
  3263. 2:16:03हैं। हाथों में बंदूक होती है तो 12 साल
  3264. 2:16:05का जो संघर्ष है अंग्रेजों को करना पड़ा।
  3265. 2:16:08जब अंग्रेज तांत्या भील को पकड़ने में
  3266. 2:16:10लाचार हो गए, विवश हो गए। तब उन्होंने एक
  3267. 2:16:13ऐसी नीति उन पे एक इनाम निकाल दिया। तब
  3268. 2:16:16जाके तांत्या भील के जो करीबी और उनके खास
  3269. 2:16:19लोग थे और हम सब जानते हैं रावण को भी
  3270. 2:16:22विभीषण ने मरवाया है यानी उनके अपने ने
  3271. 2:16:25अपने व्यक्ति ने ऐसे ही तांत्या भील को
  3272. 2:16:27मरवाने में या उनको पकड़वाने में उनके ही
  3273. 2:16:30करीबी व्यक्ति का हाथ है। आइए हम यहां पर
  3274. 2:16:32बात कर रहे हैं रक्षाबंधन के त्यौहार की।
  3275. 2:16:36इस त्यौहार को भी कलंकित करने का प्रयास
  3276. 2:16:39किया गया। देखिए यहां पर एक व्यक्ति है
  3277. 2:16:41जिसका नाम है गणपत।
  3278. 2:16:43याद रखिएगा क्या नाम था? गणपत सिंह गणपत
  3279. 2:16:47सिंह था और जो उनकी पत्नी थी यह जो गणपत
  3280. 2:16:50सिंह थे यह तां के करीबी थे। कौन थे?
  3281. 2:16:54तांत्या के करीबी थे। बहुत ही खास थे। समझ
  3282. 2:16:58में आ रहा है? करीबी दोस्त थे। और इनकी जो
  3283. 2:17:01पत्नी थी इनको तांत्या जो है वह अपनी बहन
  3284. 2:17:05मानते थे। यह नाम आप याद रखिएगा। एग्जाम
  3285. 2:17:08के लिए याद रखेंगे। तांत्या भील को
  3286. 2:17:10पकड़वाने वाले उस देशद्रोही और गद्दार का
  3287. 2:17:14नाम विश्वासघाती का नाम गणपत है। गणपत एक
  3288. 2:17:16इंपॉर्टेंट कैरेक्टर है। तो गणपत जो है
  3289. 2:17:19अंग्रेजों के पास जाता है उस लालच के
  3290. 2:17:20चक्कर में कि अंग्रेजों से पैसा मिलेगा और
  3291. 2:17:23अंग्रेजों ने यह भी लालच दिया कि यह पैसा
  3292. 2:17:25आगे भी मिलता रहेगा। गणपत जो है वो उनका
  3293. 2:17:28सहयोगी भी था और उनकी पत्नी को जो हमारे
  3294. 2:17:31तात्या मामा हैं वह भील मान अपनी बहन
  3295. 2:17:35मानते थे। तो होता क्या है कि रक्षाबंधन
  3296. 2:17:37के दिन वो अपनी बहन के घर राखी बंधवाने के
  3297. 2:17:40लिए आते हैं तो अंग्रेजों की जो सेना है
  3298. 2:17:42वो सुबह से शाम तक उनका इंतजार करती है।
  3299. 2:17:45रात के लगभग 10:00 बजे जब तांत्या गणपत के
  3300. 2:17:48घर पहुंचते हैं तो गणपत ने उनके कुछ जो
  3301. 2:17:50साथी थे उनको उनसे अलग किया और जब वो सो
  3302. 2:17:53रहे थे तो उनकी जो बंदूक थी वो उनसे दूर
  3303. 2:17:56कर दी और अचानक अंग्रेजों ने आकर उनको
  3304. 2:17:58पकड़ लिया। तो कुल मिलाकर यह जो गणपत सिंह
  3305. 2:18:01था ना इसने जो है धोखे से उनको गिरफ्तार
  3306. 2:18:04करवा दिया। जब वो अपनी बहन के घर राखी
  3307. 2:18:06बंधवाने गए थे। बेसिकली ये उनका जीजा लगता
  3308. 2:18:08था क्योंकि ये इनकी मुंह बेली बहन थी और
  3309. 2:18:10उसका ये पति था। ब्रिटिश सरकार द्वारा
  3310. 2:18:13टंटिया मामा को गिरफ्तार कर जबलपुर में जो
  3311. 2:18:15है याद रखिएगा फांसी दे दी गई। अब ये
  3312. 2:18:17जबलपुर का क्या किस्सा है थोड़ा सा इसको
  3313. 2:18:19भी हम डिटेल में करेंगे। इसमें तीन डेट
  3314. 2:18:21आपको लिखनी है। एक है 11 अगस्त क्योंकि
  3315. 2:18:25अगस्त के महीने में रक्षाबंधन आता है।
  3316. 2:18:271889 को उनको किया गया गिरफ्तार। आप यह
  3317. 2:18:30नोट कर लेना। नंबर वन नंबर टू 19 अक्टूबर
  3318. 2:18:3619 अक्टूबर 1889 को जबलपुर कोर्ट द्वारा
  3319. 2:18:40यानी जबलपुर न्यायालय ने उनको फांसी की
  3320. 2:18:42सजा सुनाई या जबलपुर न्यायालय ने उनको
  3321. 2:18:45क्या दी है? फांसी की सजा अनाउंस की है।
  3322. 2:18:50सुनाई है। दी नहीं है। और इसके बाद उनको 4
  3323. 2:18:54दिसंबर जो है याद रखिएगा 1889 को जो है
  3324. 2:18:58फांसी दी गई। तो फांसी कब दी गई? ये
  3325. 2:19:01एग्जाम में बहुत पूछा जाता है। 4 दिसंबर
  3326. 2:19:041889 को उनको फांसी दी गई। 11 अगस्त को
  3327. 2:19:07उनको गिरफ्तार किया गया और 19 अक्टूबर को
  3328. 2:19:09उनको फांसी की सजा सुनाई गई थी। अब उनको
  3329. 2:19:11जो है क्या किया गया? गिरफ्तार किया गया
  3330. 2:19:13और जबलपुर न्यायालय ने उनको जो है फांसी
  3331. 2:19:15की सजा सुनाई। बाद में जबलपुर में ही
  3332. 2:19:18संभवत उनकी हत्या कर दी गई थी। यानी उनको
  3333. 2:19:20फांसी दे दी गई थी। और उनकी लाश को जो है
  3334. 2:19:23इंदौर में एक जगह है पाताल पानी। वहां पर
  3335. 2:19:25जो है फेंक दिया गया। ठीक है? कहां पर?
  3336. 2:19:28पाताल पानी में फेंक दिया गया और पाताल
  3337. 2:19:31पानी जो प्लेस था यह वाला पाताल पानी
  3338. 2:19:34इंदौर
  3339. 2:19:35यहां पर जो है उनको क्या कर दिया गया उनकी
  3340. 2:19:38डेड बॉडी जो थी यहां पर उनकी डेड बॉडी को
  3341. 2:19:40फेंक दिया गया इसीलिए इसीलिए इस जगह पर
  3342. 2:19:44उनकी वर्तमान में क्या बनी है समाधि बनी
  3343. 2:19:46है तो जो हमारे तात्या भील है उनकी समाधि
  3344. 2:19:50कहां बनी है जबलपुर में ठीक है सॉरी पाताल
  3345. 2:19:53पानी इंदौर में उनकी समाधि बनी है अभी इस
  3346. 2:19:55पर हम चर्चा करेंगे
  3347. 2:19:58उनके मरने से पहले उनके एक सेंटेंस है जो
  3348. 2:20:00बड़े फेमस है। उनके सेंटेंस का नाम क्या
  3349. 2:20:03है? मैं मरूंगा नहीं मैं फिर आऊंगा। ऐसा
  3350. 2:20:07बताते हैं किवदंती है कि उन्होंने मरने से
  3351. 2:20:09पहले कहा था मैं मरूंगा नहीं मैं फिर
  3352. 2:20:11आऊंगा। आज भी जो 4 दिसंबर है ना 4 दिसंबर
  3353. 2:20:154 दिसंबर को यहां पर वार्षिक मेला लगता
  3354. 2:20:18है। याद रखिएगा। नेक्स्ट क्वेश्चन है आपका
  3355. 2:20:21कि जो तंत्र्या भील बलिदान मेला है वह
  3356. 2:20:24कहां और कब लगता है? ये डेट आपको याद रखना
  3357. 2:20:27है। पाताल पानी में 4 दिसंबर को हर साल एक
  3358. 2:20:30मेला लगता है तात्या भील के ऊपर। तो ये थी
  3359. 2:20:32तांत्या भील की कहानी। अब इसमें कुछ और
  3360. 2:20:34बातें हैं। जैसे कि पहली बात यह है कि
  3361. 2:20:39आखिर यह जो केस था तांत्या भील को
  3362. 2:20:42गिरफ्तार करके खंडवा या खरगोन में क्यों
  3363. 2:20:44केस नहीं चलाया गया? क्योंकि वहां पे वो
  3364. 2:20:46बहुत ज्यादा लोकप्रिय थे जनता में। अगर
  3365. 2:20:49वहां पे केस चलाया जाता तो जनता जेल तोड़
  3366. 2:20:51देती उनको छुड़ाने के लिए। इसीलिए वहां से
  3367. 2:20:53उनको जबलपुर ले जाया गया। जबलपुर में
  3368. 2:20:55ट्रायल हुआ। वहीं के न्यायालय द्वारा
  3369. 2:20:57उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई और फाइनली 4
  3370. 2:21:00दिसंबर 1889 को उन्हें फांसी देकर इस
  3371. 2:21:03इलाके में यानी पाताल पानी इलाके में उनकी
  3372. 2:21:05लाश को फेंक दिया गया। इस बात को आपको याद
  3373. 2:21:08रखना है। अब इसमें 2 मिनट की बात और है जो
  3374. 2:21:11आपको सुननी है। देखिए तो ये बात हो गई। 4
  3375. 2:21:15दिसंबर को हम उनका बलिदान दिवस मनाते हैं।
  3376. 2:21:17अब कुछ एग्जाम उपयोगी जो क्वेश्चन है वह
  3377. 2:21:20भी हैं। उनके बारे में भी आप सुन लीजिए कि
  3378. 2:21:23मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कुछ नामों में
  3379. 2:21:26परिवर्तन किया गया मध्य प्रदेश सरकार
  3380. 2:21:28द्वारा। एमपी जो गवर्नमेंट है उसने कुछ
  3381. 2:21:29परिवर्तन किया है। जैसे खंडवा में एक तांभ
  3382. 2:21:33भील स्मारक बनाया है। इंदौर खंडवा हाईवे
  3383. 2:21:35का हिस्सा एक उनके नाम पर किया गया है।
  3384. 2:21:38लेकिन जो सबसे ज्यादा एग्जाम ओरिएंटेड हैं
  3385. 2:21:39वो ये तीन पॉइंट आप याद रख सकते हैं।
  3386. 2:21:41तीनों इंदौर में हैं। नंबर वन सॉरी पहला
  3387. 2:21:44वाला हां इंदौर डिस्ट्रिक्ट का ही पार्ट
  3388. 2:21:46है। पाताल पानी जो रेलवे स्टेशन है इसका
  3389. 2:21:48नाम बदलकर कर दिया गया जननायक शहीद टंट्या
  3390. 2:21:51भील और यहां पर उनकी एक बहुत बड़ी जो है
  3391. 2:21:54क्या है? स्टैचू बनाई गई है। 2021 में
  3392. 2:21:57मध्य प्रदेश सरकार के तत्कालीन राज्यपाल
  3393. 2:21:59और मुख्यमंत्री ने उनके परिवार के जो वंशज
  3394. 2:22:02हैं उनको वहां बुलाकर सम्मान भी दिया था।
  3395. 2:22:04तो पाताल पानी स्टेशन जहां पाताल पानी
  3396. 2:22:06उनकी समाधि है वहां पर अब क्या है उसका
  3397. 2:22:09नाम बदलकर कर दिया गया टंट्या भील जो है
  3398. 2:22:11स्टेशन कर दिया गया है। एक और इंपॉर्टेंट
  3399. 2:22:13बात है बताते जहां उनकी समाधि है। आज भी
  3400. 2:22:16जब कोई ट्रेन वहां से गुजरती है तो थोड़ी
  3401. 2:22:18देर के लिए रुकती है टंट्या भील के सम्मान
  3402. 2:22:20में। ठीक है? दूसरी बात इंदौर का जो
  3403. 2:22:23प्रसिद्ध भंरकुआ चौराहा है इस चौराहे का
  3404. 2:22:25नाम बदलकर कर दिया गया द नायक टंट्या भील
  3405. 2:22:28चौराहा या इसका सही नाम है जननायक टंट्या
  3406. 2:22:31भील चौराहा। इसके अलावा इंदौर में एमआर10
  3407. 2:22:35रोड पर बन रहा एक आईएसबीटी यानी इंटरस्ट
  3408. 2:22:38जो बस स्टेशन है इसका नाम बदलकर के भी
  3409. 2:22:40टंट्या मामा के नाम पर रखा गया है। यानी
  3410. 2:22:42इंदौर का भंवरकुआ हो भंवरकुआ चौराहा इंदौर
  3411. 2:22:46का जो आईएसबीटी जो स्टेशन बन रहा है वो भी
  3412. 2:22:50टंट्या भील के नाम पर किया गया है। और एक
  3413. 2:22:52और इंपॉर्टेंट बात है पाताल पानी रेलवे
  3414. 2:22:54स्टेशन का नाम भी टंट्या भील के नाम पर
  3415. 2:22:56किया गया है। एक और इंपॉर्टेंट बात कि जो
  3416. 2:22:59मध्य प्रदेश सरकार है उसके द्वारा जननायक
  3417. 2:23:01टंट्या भील एक पुरस्कार दिया जाता है।
  3418. 2:23:042008 में यह पुरस्कार राजाराम मौर्य को
  3419. 2:23:06दिया गया है। तो यह कहानी थी जनजातीय जो
  3420. 2:23:10हमारे बहुत बड़े नेता थे आदिवासियों के
  3421. 2:23:13भीलों के जिनका नाम था तांत्या भील और
  3422. 2:23:16तात्या भील को क्या कहते हैं? भारतीय
  3423. 2:23:17रॉबिनहुड कहा जाता है। आदिवासियों का
  3424. 2:23:20मसीहा, गरीबों का मसीहा और सेरे निमाड़ के
  3425. 2:23:24नाम से भी जाना जाता है। उम्मीद है आज की
  3426. 2:23:26जो जानकारी है वो आपको अच्छी लगी होगी।
  3427. 2:23:29अगर आप इसमें एग्जाम उपयोगी तथ्यों को
  3428. 2:23:31देखेंगे तो इस सिस्टमैटिक जो तरीका था
  3429. 2:23:34इसको जरूर फॉलो करिएगा। है ना? इसमें एक
  3430. 2:23:36क्वेश्चन बहुत इंपॉर्टेंट है। भारतीय
  3431. 2:23:38रॉबिनहुड आदिवासियों का मसीहा या
  3432. 2:23:40महाविद्रोही किसे कहते हैं? इनके नाम हैं।
  3433. 2:23:42इसके अलावा इन्हें मध्य प्रदेश का जननायक
  3434. 2:23:45भी कहा जाता है। तो 1 2 3 और जननायक चार
  3435. 2:23:48इंपॉर्टेंट पॉइंट हो जाएंगे एज अ उनके
  3436. 2:23:50टाइटल। इसके अलावा उनकी फांसी बहुत
  3437. 2:23:52इंपॉर्टेंट है। कब? 4 दिसंबर 1889 को
  3438. 2:23:54जबलपुर में हुई थी। हालांकि उनकी समाधि
  3439. 2:23:56कहां है? पाताल पानी। यह भी बहुत
  3440. 2:23:58इंपॉर्टेंट है। उनका बर्थ प्लेस भी
  3441. 2:24:00इंपॉर्टेंट है। इसके अलावा यह सिस्टमैटिक
  3442. 2:24:03एक तरीका है। उनका जन्म। जन्म के बारे
  3443. 2:24:06में। पिता का नाम भासी भील और माता का नाम
  3444. 2:24:08जीव था। याद रखिएगा। रियल नेम उनका क्या
  3445. 2:24:11है? तांत्या है। युवाओं ने क्या कर दिया
  3446. 2:24:13था? भील टंट्या और अंग्रेजों ने क्या कर
  3447. 2:24:16दिया था? टुंड्रा। ठीक है? तो विद्रोह किस
  3448. 2:24:18तरीके से रहा? 1857 के समय। हालांकि उनका
  3449. 2:24:21ज्यादा योगदान नहीं रहा क्योंकि उस समय वो
  3450. 2:24:23छोटे थे। लेकिन उसके बाद उन्होंने बड़े
  3451. 2:24:25पैमाने पर ब्रिटिश जो लोग थे उनसे संघर्ष
  3452. 2:24:28किया। जमींदार साहूकारों को परेशान किया
  3453. 2:24:30और लगभग 16 सालों तक वो जो है संघर्ष करते
  3454. 2:24:34रहे। पूरा कैरियर जो उनका रहा और लगभग 49
  3455. 2:24:36की ऐज में उन्हें फांसी दे दी गई। तो ये
  3456. 2:24:38थे हमारे द ग्रेट टंट्या भील जिनके बारे
  3457. 2:24:40में हम लोगों ने चर्चा की। उम्मीद है आज
  3458. 2:24:42की जो इंफॉर्मेशन है आप लोगों को अच्छी
  3459. 2:24:44लगी होगी। कल फिर हम मिलेंगे एक नए हीरो
  3460. 2:24:47के साथ, एक नए मध्य प्रदेश के वीर के साथ।
  3461. 2:24:49इसी के साथ इस क्लास को मैं यहीं समाप्त
  3462. 2:24:52करता हूं। जय हिंद। थैंक यू।
  3463. 2:25:07हेलो एवरीवन, मैं हरी सिंह राजपूत आप सभी
  3464. 2:25:10के लिए मध्य प्रदेश के वीरों के इतिहास की
  3465. 2:25:12सीरीज में लाया हूं आज एक महान वीर
  3466. 2:25:15स्वतंत्रता सेनानी जिनका नाम है राजा हृदय
  3467. 2:25:18शाह लोदी। याद रखिएगा दोस्तों राजा हृदय
  3468. 2:25:21शाह लोदी मध्य प्रदेश के 1842 के बुंदेला
  3469. 2:25:25विद्रोह के मुख्य नायक हैं और साथ-साथ
  3470. 2:25:27इनके पूरे परिवार ने 1857 की क्रांति में
  3471. 2:25:30भी अपना जो है बहुमूल्य योगदान दिया है।
  3472. 2:25:33तो आज की इस सीरीज में हम बात करेंगे राजा
  3473. 2:25:35हृदयशाह लोदी के बारे में और याद रखिएगा
  3474. 2:25:38जब आप राजा हृदयशाह लोदी के बारे में पढ़
  3475. 2:25:40रहे हैं या जानकारी जुटा रहे हैं तो याद
  3476. 2:25:42रखिएगा इस नाम से दो अन्य शासक भी हैं। एक
  3477. 2:25:45हृदयशाह बुंदेला हैं और एक हृदयशा गोंड
  3478. 2:25:49है। याद रखिएगा रामनगर के जो गोंड शासक
  3479. 2:25:51थे। तो थोड़ा सा आप जानकारी जुटाते समय
  3480. 2:25:54थोड़ा सावधान रहें। आइए हम बात करते हैं
  3481. 2:25:56राजा हृदय शाह लोदी कौन है? तो सबसे पहले
  3482. 2:25:58देखिए मैं आपको दो बातें बताना चाहता हूं।
  3483. 2:26:00इनका जो मेन रोल रहा है यानी ये मुख्य
  3484. 2:26:03नायक हैं बुंदेला विद्रोह 1842 के। इसके
  3485. 2:26:06साथ-साथ इनके संपूर्ण परिवार ने 18 57 की
  3486. 2:26:10क्रांति में अपना बहुमूल्य योगदान दिया।
  3487. 2:26:12तो सबसे पहले हम बात करते हैं कि इनकी
  3488. 2:26:14रियासत कहां थी और ये कौन थे? तो ये
  3489. 2:26:17हीरापुर के राजा थे। जैसा कि आप सब जानते
  3490. 2:26:19हैं हीरापुर जो रियासत है वर्तमान
  3491. 2:26:21नरसिंहपुर जिले में है मध्य प्रदेश के।
  3492. 2:26:23ठीक है? राजा हृददेश शाह जुदेव के हीरागढ़
  3493. 2:26:26राज्य के अंतर्गत इनका जो राज्य था उसमें
  3494. 2:26:2910,883 यानी लगभग 2000 गांव आते थे। यानी
  3495. 2:26:33इनकी रियासत छोटी नहीं थी। बड़ी रियासत
  3496. 2:26:35थी। इनके पास लगभग 80 बड़ी तोपें थी। 100
  3497. 2:26:38छोटी तोपें थी। 200 गुरावे थी। सात हाथी,
  3498. 2:26:421600 घोड़े और अश्वराही अश्वारोही सैनिक
  3499. 2:26:46थे यानी कैबिलरी मैन थे। इसके अलावा 21686
  3500. 2:26:49सैनिक मतलब लगभग 22,000 जो है पैदल सैनिक
  3501. 2:26:52थे और 500 ऊंट थे और 200 जो है खच्चर थे।
  3502. 2:26:55इतनी बड़ी सेना जो थी, राजा हृदशाह लोदी
  3503. 2:26:59की थी। यह आप देख सकते हैं राजा हृदय शाह
  3504. 2:27:01लोदी का तस्वीर है जो हीरापुर रियासत
  3505. 2:27:04नरसिंहपुर जिले मध्य प्रदेश में आती है।
  3506. 2:27:06यहां पर आपको इनसे रिलेटेड कुछ पिक्चर मैं
  3507. 2:27:09आप लोगों को बताने जा रहा हूं। यह जो
  3508. 2:27:12हीरापुर रियासत थी उसका जो किले का अवशेष
  3509. 2:27:14है यह भी उसके किले का अवशेष है और अभी
  3510. 2:27:17मध्य प्रदेश के दमोह में उनकी एक बहुत
  3511. 2:27:20बड़ी प्रतिमा है। इसका अनावरण किया गया
  3512. 2:27:22है। तो याद रखिएगा अगर पूछा जाए कि राजा
  3513. 2:27:25हृदयशाह लोदी का स्मारक मध्य प्रदेश के
  3514. 2:27:27किस जिले में बनाया गया है? तो याद रखिएगा
  3515. 2:27:29दमोह और किस जिले में उनकी रियासत थी? तो
  3516. 2:27:32याद रखिएगा वर्तमान नरसिंहपुर। अब थोड़ा
  3517. 2:27:34सा हम इसकी पृष्ठभूमि पर जाएंगे और फिर
  3518. 2:27:36मैं आपको राजा हृदशा लोधी की कहानी को
  3519. 2:27:38बताने वाला हूं। सबसे पहले हम बात करते
  3520. 2:27:41हैं कि यह जो मध्य प्रदेश का क्षेत्र था
  3521. 2:27:43अगर हम दक्षिणी मध्य प्रदेश की बात करें
  3522. 2:27:45या पूर्वी मध्य प्रदेश की बात करें जहां
  3523. 2:27:48पर मुख्यतः गोंडों का शासन था। उस पूरे
  3524. 2:27:50इलाके को नर्मदा, सतपुड़ा और विंध्या के
  3525. 2:27:54अंचल में मराठों के जो इलाके थे उन्हें
  3526. 2:27:561818 में मराठों की पराजय के बाद
  3527. 2:27:59अंग्रेजों ने अपने अधिकार में कर लिया।
  3528. 2:28:01इसका मतलब यह है आप सबको पता होगा। मैं
  3529. 2:28:04चाहता हूं कि मैं आपको पहले लिखकर थोड़ी
  3530. 2:28:06सी स्टोरी समझा दूं। मुझे पता है उससे
  3531. 2:28:07आपको जल्दी समझ में आ जाएगी।
  3532. 2:28:10देखते हैं आप कितनी जल्दी इसको समझते हैं
  3533. 2:28:13और किस तरीके से समझते हैं। तो इसको हम
  3534. 2:28:16ऐसे समझ सकते हैं। जैसे मान के चलिए
  3535. 2:28:19कि मध्य प्रदेश का
  3536. 2:28:22मध्य प्रदेश का
  3537. 2:28:24बहुत बड़ा जो भाग था मध्य प्रदेश का
  3538. 2:28:27दक्षिण दक्षिणी एवं जो पूर्वी भाग है मैं
  3539. 2:28:30उसकी बात कर रहा हूं। यह जो दक्षिणी
  3540. 2:28:32पूर्वी भाग है यह एक्चुअली में पहले
  3541. 2:28:34मराठों ने जीत लिया था। अगर आपको याद हो
  3542. 2:28:37लास्ट सीरीज में हमने बात की थी कि जो
  3543. 2:28:40राजा शंकर शाह के बारे में जब हम लोग पढ़
  3544. 2:28:42रहे थे तो यह बताया था कि उनके जो पिता थे
  3545. 2:28:45उनके पिता को किसने कैद कर लिया था? उनके
  3546. 2:28:47पिता को मराठों ने कैद कर लिया था। तो यह
  3547. 2:28:50जो इलाका था, इस इलाके पर मराठों ने
  3548. 2:28:53अधिकार कर लिया। ठीक है? मराठों ने क्या
  3549. 2:28:55कर लिया? अधिकार कर लिया। लेकिन आप सबको
  3550. 2:28:57पता है कि जो तीसरा युद्ध हुआ था, जिसे हम
  3551. 2:29:01बोलते हैं तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध। तो
  3552. 2:29:04तृतीय आंग्ल मराठा युद्ध जो था, इस तृतीय
  3553. 2:29:07आंग्ल मराठा युद्ध में क्या हुआ? 1818 में
  3554. 2:29:11यह एंड होता है। इसमें मराठे हार गए। और
  3555. 2:29:13इनके हारने के बाद यह पूरा का पूरा जो
  3556. 2:29:15क्षेत्र है वो ईस्ट इंडिया कंपनी यानी
  3557. 2:29:18अंग्रेजों के पास आ गया। और अंग्रेजों ने
  3558. 2:29:20इस इलाके का जो यह दक्षिण पूर्वी जो भाग
  3559. 2:29:22था मध्य प्रदेश का इस इलाके में एक नया
  3560. 2:29:25एरिया बनाया जिसका नाम रखा था नर्मदा सागर
  3561. 2:29:29टेरिटरीज। आप सब लोगों ने इसे बुंदेला
  3562. 2:29:31विद्रोह में पढ़ा होगा। नर्मदा सागर
  3563. 2:29:33टेरिटरी जो है इसका गठन किया गया। का गठन
  3564. 2:29:381820 में हुआ था। कब हुआ? 1820 में इसका
  3565. 2:29:41गठन हो गया और इस क्षेत्र का जो प्रशासन
  3566. 2:29:44है एक अधिकारी के द्वारा किया जाता था और
  3567. 2:29:47यह जो अंग्रेज अधिकारी था इसे बोलते थे
  3568. 2:29:49गवर्नर जनरल का एजेंट। ठीक है? याद रखिएगा
  3569. 2:29:52और इसका हेड क्वार्टर जो है वो सागर को
  3570. 2:29:55बनाया गया था। ठीक है? यानी कुल मिलाकर इस
  3571. 2:29:58क्षेत्र में अब अंग्रेजों का शासन था और
  3572. 2:29:59इसका एक जो अधिकारी होता था वो गवर्नर
  3573. 2:30:02जनरल का एजेंट कहलाता था। याद रखिएगा और
  3574. 2:30:04इसका हेड क्वार्टर क्या था? सागर। तो अब
  3575. 2:30:06इसी बात को मैं थोड़ा सा पढ़ के बताऊंगा
  3576. 2:30:08तो आपको जल्दी से समझ में आ जाएगा। थोड़ा
  3577. 2:30:10सा हम पढ़ लेते हैं। ठीक है? तो क्या हुआ
  3578. 2:30:13कि उन्हें नर्मदा सागर टेरिटरीज अर्थात
  3579. 2:30:15नर्मदा सागर प्रदेश के रूप में गठित किया
  3580. 2:30:17गया। इसे एक फौजी अधिकारी के अंतर्गत रख
  3581. 2:30:20दिया गया जो सीधे गवर्नर जनरल के प्रति
  3582. 2:30:22उत्तरदाई था। ठीक है? इस अधिकारी को
  3583. 2:30:25गवर्नर जनरल का एजेंट सागर नर्मदा
  3584. 2:30:28टेरिटरीज कहा जाता था। और इसकी खास बात है
  3585. 2:30:31इस एजेंट का जो मुख्यालय था वो क्या था?
  3586. 2:30:33वो सागर था। ठीक है? तो ये कुछ बेसिक
  3587. 2:30:35बातें हम लोगों ने इसमें जान ली। अब आगे
  3588. 2:30:38क्या होता है? ठीक है? आगे क्या होता है
  3589. 2:30:40कि इस क्षेत्र में तमाम जागीरदार और
  3590. 2:30:43मालगुजार रहते थे जो इस क्षेत्र से टैक्स
  3591. 2:30:45कलेक्ट करते थे। उनमें पहला जो काम है वो
  3592. 2:30:47बुंदेलों का था। उसके बाद आते थे इसमें
  3593. 2:30:49लोधी। ठीक है? उसके बाद आते थे गोंड। तो
  3594. 2:30:52गोंडों का क्रम आता था। यानी लोधी। याद
  3595. 2:30:55रखिएगा। पहले आते थे बुंदेला। उसके बाद
  3596. 2:30:57लोधी और फिर गोंडों का क्रम आता था। यानी
  3597. 2:30:59इस क्षेत्र के सबसे बड़े जमींदारों में
  3598. 2:31:01तालुका तालुकादारों में कौन शामिल था?
  3599. 2:31:03पहले बुंदेला फिर लोदी और सबसे नीचे आते
  3600. 2:31:06थे कौन गोंड मतलब ये उनका एक डिवाइडेशन था
  3601. 2:31:08काम करने का क्योंकि इस विद्रोह में
  3602. 2:31:10बुंदेले लोग सबसे आगे थे इसलिए इस बुंदेला
  3603. 2:31:13विद्रोह 1842 का जो नाम है वो बुंदेला
  3604. 2:31:15विद्रोह नाम पड़ा क्योंकि सबसे पहले इसकी
  3605. 2:31:17शुरुआत बुंदेलों ने की थी। इस व्यापक
  3606. 2:31:19विद्रोह में नर्मदा तट के उत्तर में
  3607. 2:31:21नर्मदा और हिरण याद रखिएगा एक प्रश्न आपका
  3608. 2:31:24तैयार हो गया अगर आपसे पूछा जाए कि जो
  3609. 2:31:26हीरापुर राज्य था वो किन दो नदियों के
  3610. 2:31:28संगम पर स्थित था? तो हीरापुर जो राज्य है
  3611. 2:31:31वो दो नदियों के संगम पर स्थित था। नर्मदा
  3612. 2:31:33और हिरण नदियों के संगम पर स्थित हीरापुर
  3613. 2:31:36के जागीरदार राजा हृदय शाह ने भी हिस्सा
  3614. 2:31:38लिया। ठीक है? तो ये थोड़ी सी कहानी हो गई
  3615. 2:31:41कि किस तरीके से नर्मदा सागर टेरिटरीज
  3616. 2:31:43बनी। अब मैं आगे आपको बताने वाला हूं। ठीक
  3617. 2:31:46है? चलिए ये सब आप पढ़ लीजिए। अगर आपको
  3618. 2:31:48पीपीडी चाहिए तो मैं आपको बता दूंगा। अब
  3619. 2:31:50यह जो इलाका था उस समय हीरापुर तालुका के
  3620. 2:31:52नाम से जाना जाता था और इस समय याद रखिएगा
  3621. 2:31:55यह पहले जबलपुर जिले में आता था।
  3622. 2:31:56नरसिंहपुर तो बाद में बना है। तो वह कहानी
  3623. 2:31:59है वह हम डिस्ट्रिक्ट में कवर कर लेते
  3624. 2:32:01हैं। अब क्या हुआ यह देखिए यहां पर
  3625. 2:32:06मध्य प्रदेश का जो आंतरिक भूभाग है यानी
  3626. 2:32:08नरसिंहपुर जिले की एक छोटी सी रियासत
  3627. 2:32:10हीरापुर के लोधी राजपूत हृदय शाह लोदी ने
  3628. 2:32:13तत्कालीन जमींदारों और कुछ देशभक्त लोगों
  3629. 2:32:16को साथ लेकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह
  3630. 2:32:18का झंडा उठाया था। याद रखिएगा। और ठीक है?
  3631. 2:32:22अब यह जो बुंदेला विद्रोह है वह 1857 के
  3632. 2:32:25पूर्व की है। यानी हृदय शाह लोदी एक ऐसे
  3633. 2:32:28नायक थे जिन्होंने राजपाट के एसोआराम को
  3634. 2:32:30छोड़कर जंगल-जंगल भटक कर स्वतंत्रता
  3635. 2:32:33संघर्ष को अपना जीवन मान लिया और देश के
  3636. 2:32:36लिए अपने परिवार तक को त्याग दिया बलिदान
  3637. 2:32:39दिया। बूढ़े होने पर भी फिरंगियों को वो
  3638. 2:32:41छकाते रहे। 1842 में पहले बुंदेला विद्रोह
  3639. 2:32:45के सूत्रधार के रूप में हृदयशाह इतिहास के
  3640. 2:32:47पन्नों में कुछ ही शब्दों में सीमित हो
  3641. 2:32:49गए। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मैं राजा हृद
  3642. 2:32:52शाह लोदी के बारे में बहुत डिटेल में
  3643. 2:32:54बताने वाला हूं। जिससे आप यह जो लाइन है
  3644. 2:32:57इस लाइन को हम कट कर दें। कुछ शब्दों में
  3645. 2:32:59तो नहीं लेकिन आज के बाद आपको इतना पता
  3646. 2:33:01होगा कि हृदय शाह लोदी कौन थे? उनका
  3647. 2:33:03परिवार कौन था और उन्होंने क्या-क्या
  3648. 2:33:04किया। हमने यहां टाइटल दिया है हीरापुर का
  3649. 2:33:07हीरा यानी राजा हृदय शाह लोदी। अब इनकी
  3650. 2:33:12संक्षिप्त में कहानी बताता हूं क्योंकि
  3651. 2:33:14ऐसे पढ़ते हैं तो आपको ऐसा लगेगा कि क्या
  3652. 2:33:16सर आप पढ़ के बता रहे हो। पढ़ने में तो
  3653. 2:33:18मजा हमको भी नहीं आता मगर क्या करें।
  3654. 2:33:21तो अब इस कहानी को आप कैसे समझेंगे? देखिए
  3655. 2:33:25सबसे पहले हम एक स्टेट का निर्माण करते
  3656. 2:33:28हैं और उस स्टेट का नाम है हीरापुर। ध्यान
  3657. 2:33:30से सुनना आपको इसी में पूरी कहानी बताने
  3658. 2:33:32का मेरा प्रयास रहेगा। हीरापुर याद रखिएगा
  3659. 2:33:35इसको हीरापुर नहीं कहते थे पहले। इस राज्य
  3660. 2:33:37का नाम था हीरागढ़ राज्य या हीरागढ़
  3661. 2:33:40रियासत बोलते थे। कौन सी रियासत है?
  3662. 2:33:42हीरागढ़ रियासत है। मध्य प्रदेश के किस
  3663. 2:33:45डिस्ट्रिक्ट में आती है? याद रखिएगा।
  3664. 2:33:47नरसिंहपुर में आती है। नरसिंहपुर मध्य
  3665. 2:33:49प्रदेश। यह जो रियासत है, मैं इसके सारे
  3666. 2:33:52प्रश्न यहीं पर आपको बताने वाला हूं। याद
  3667. 2:33:54रखिएगा यह किन दो नदियों के संगम पर स्थित
  3668. 2:33:56है? नर्मदा व हिरण नदी के संगम पर स्थित
  3669. 2:33:59है। अगर आपसे पूछा जाए किन दो नदियों के
  3670. 2:34:02संगम पर स्थित है यह रियासत तो नर्मदा और
  3671. 2:34:05हिरण नदी के संगम पर स्थित है। नरसिंहपुर
  3672. 2:34:07जिले में स्थित है। इस रियासत के जो शासक
  3673. 2:34:10थे इस रियासत के जो शासक थे उनका नाम हमने
  3674. 2:34:14अभी जाना। उनका नाम है राजा हृदय शाह
  3675. 2:34:16लोदी। राजा हृदय शाह लोदी। याद रखिएगा एक
  3676. 2:34:21हृदयशाह गोंड है और एक हृदयशाह बुंदेला
  3677. 2:34:24है। इसलिए जब भी आप इंफॉर्मेशन जुटाएं तो
  3678. 2:34:26आप थोड़ा सा ध्यान से जुटाइएगा वरना आपको
  3679. 2:34:28कंफ्यूजन बहुत हो जाएगी। राजा हृदयशाह
  3680. 2:34:31लोदी। राजा हृदयशाह लोदी के कुछ भाई थे।
  3681. 2:34:34याद रखिएगा जिसमें दो भाइयों का नाम आप कम
  3682. 2:34:37से कम याद रखेंगे। यह उनके भाई हैं। एक का
  3683. 2:34:40नाम बसंत है। बसंत सिंह लोधी और एक का नाम
  3684. 2:34:44था गजराज सिंह लोधी। गजराज सिंह लोधी।
  3685. 2:34:48आपको जरूरी है कि आप उनके संघर्ष को वसंत
  3686. 2:34:51सिंह लोधी और गजराज सिंह लोधी। इसके अलावा
  3687. 2:34:54उनके जो सुपुत्र हैं उनका नाम आपको जरूर
  3688. 2:34:56पता होना चाहिए। राजा हृद हृदशाह लोधी के
  3689. 2:34:59जो पुत्र हैं उनका नाम था मेहरवान सिंह
  3690. 2:35:02लोधी या आप मेहरवान सिंह याद रख सकते हैं।
  3691. 2:35:06मेहरवान सिंह लोदी जिन्हें याद रखिएगा
  3692. 2:35:09जिन्हें इस विद्रोह के दौरान यानी 1857 की
  3693. 2:35:13क्रांति के दौरान उन्हें जंगी राजा के नाम
  3694. 2:35:15से जाना गया। एक नया क्वेश्चन आपको मिल
  3695. 2:35:18गया। कौन जंगी राजा के नाम से प्रसिद्ध
  3696. 2:35:20था? तो याद रखिएगा जंगी राजा के नाम से
  3697. 2:35:23प्रसिद्ध थे उनके पुत्र जिनका नाम था
  3698. 2:35:25क्या? मेहरवान सिंह लोधी। और मेहरवान सिंह
  3699. 2:35:28लोधी का जो सबसे बड़ा इंपॉर्टेंट रोल है
  3700. 2:35:31वो यह है कि ये 1857 की क्रांति के हीरो
  3701. 2:35:34हैं। 1857 की क्रांति में याद रखिएगा वसंत
  3702. 2:35:38सिंह, गजराज सिंह और मेहरबान सिंह लोदी इन
  3703. 2:35:41तीनों ने जो है क्या किया था? हीरापुर
  3704. 2:35:43रियासत का नेतृत्व किया था। हालांकि उस
  3705. 2:35:46समय राजा हृदय शाह लोदी भी थे जो कि वृद्ध
  3706. 2:35:48हो चुके थे। हम पूरी कहानी को समझेंगे। इन
  3707. 2:35:50लोगों की हमको जरूरत क्यों पड़ी ये मैं
  3708. 2:35:52अभी आपको बताने वाला हूं। अब देखिए हुआ
  3709. 2:35:54क्या? सबसे पहले हम ये समझते हैं कि पहले
  3710. 2:35:56कौन सा विद्रोह होता है? तो राजा हृदयशाह
  3711. 2:35:59लोदी ने क्या किया था? 1842 का जो बुंदेला
  3712. 2:36:03विद्रोह है, उस बुंदेला विद्रोह में भाग
  3713. 2:36:05लिया और इस बुंदेला विद्रोह के बन गए वह
  3714. 2:36:08कौन? मेन नायक।
  3715. 2:36:10क्या बन जाते हैं? मेन नायक बन जाते हैं।
  3716. 2:36:13याद रखिएगा। 1842 का जो बुंदेला विद्रोह
  3717. 2:36:16है उसके कौन बन गए? मेन नायक बन गए और इस
  3718. 2:36:19बुंदेला विद्रोह में उन्होंने क्या किया?
  3719. 2:36:21भाग लिया। क्या आपको ये बात समझ में आ गई?
  3720. 2:36:23बुंदेला विद्रोह में उन्होंने भाग लिया।
  3721. 2:36:25अब जब वो बुंदेला विद्रोह में भाग ले रहे
  3722. 2:36:28थे तो बुंदेला विद्रोह की कहानी क्या है?
  3723. 2:36:31वे सभी जागीरदार और जमींदार जो अंग्रेजी
  3724. 2:36:34शासन से नाराज थे जिनके अंग्रेजों द्वारा
  3725. 2:36:37अधिकार छीने गए थे। बहुत लंबी कहानी है वो
  3726. 2:36:39हम बुंदेला विद्रोह में कवर करेंगे।
  3727. 2:36:40क्योंकि अगर हम बुंदेला विद्रोह के कारणों
  3728. 2:36:42को यहां पर डिस्कस करेंगे तो टॉपिक बहुत
  3729. 2:36:44बड़ा हो जाएगा। तो उन सभी लोगों ने जो
  3730. 2:36:46अंग्रेजी शासन से नाराज थे ईस्ट इंडिया
  3731. 2:36:48कंपनी के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और याद
  3732. 2:36:51रखिएगा अंग्रेजों के विरुद्ध बुंदेलखंड की
  3733. 2:36:53धरती पर जो सबसे बड़ी जो ज्वाला भड़की उसे
  3734. 2:36:55हम बुंदेला विद्रोह के रूप में जानते हैं।
  3735. 2:36:57इसके मेन सूत्रधार बनते हैं राजा हृद शाह
  3736. 2:36:59लोदी। ये क्या करते हैं? बुंदेला विद्रोह
  3737. 2:37:01में भाग लेते हैं। और इन्होंने याद रखिएगा
  3738. 2:37:04एक जगह थी तेजगढ़। यहां पर जो है हमला
  3739. 2:37:08किया। मतलब यहां पर शरण ली इस क्षेत्र में
  3740. 2:37:10अंग्रेजों को हराया। फिर यह आगे पहुंचे
  3741. 2:37:12जबलपुर की तरफ़ और जबलपुर से होते हुए यह
  3742. 2:37:15पहुंचते हैं सागर की तरफ़। कहां पहुंचते
  3743. 2:37:16हैं? सागर। जब यह सागर के पास पहुंचते हैं
  3744. 2:37:19इस विद्रोह में याद रखिएगा तो यहां पर
  3745. 2:37:22इनके साथ एक धोखा होता है। और जो शाहगढ़
  3746. 2:37:25रियासत का राजा था। कौन? शाहगढ़ रियासत का
  3747. 2:37:29जो राजा था, शाहगढ़ रियासत जो कि सागर में
  3748. 2:37:32है के राजा जिनका नाम था राजा बखत बली।
  3749. 2:37:35राजा बखत वली ने इनको धोखे से गिरफ्तार
  3750. 2:37:37करवा दिया। बोले इनका साथ देंगे। तो बखत
  3751. 2:37:40वली द्वारा इनको गिरफ्तार करवा दिया गया
  3752. 2:37:43था अंग्रेजों के हाथों। ठीक है? तो इन पर
  3753. 2:37:46याद रखिएगा इस समय जो हमारे राजा
  3754. 2:37:51हमारे राजा हृदय शाह लोदी हैं। इन पर
  3755. 2:37:54सरकार ने इस समय 10,000 का इनाम रखा था।
  3756. 2:37:58कितना इनाम रखा था? 10,000 का इनाम रखा
  3757. 2:38:00था। और याद रखिएगा किस देशद्रोही के
  3758. 2:38:04द्वारा या ऐसे हम इन्हें इस समय गद्दार कह
  3759. 2:38:07सकते हैं जिनकी वजह से इन्हें गिरफ्तार कर
  3760. 2:38:08दिया गया। गिरफ्तार करवाकर याद रखिएगा
  3761. 2:38:10इनको ले जाया गया चुनार दुर्ग में। चुनार
  3762. 2:38:14दुर्ग जो कि यूपी में है। यूपी के चुनार
  3763. 2:38:16दुर्ग में इनको कैद करके रखा गया और इस
  3764. 2:38:19कैदी जीवन में आगे चलकर क्या होता है? 1
  3765. 2:38:22वर्ष बाद 1843 में इनको रिहा कर दिया जाता
  3766. 2:38:26है। क्या कर दिया जाता है? रिहा। ठीक है?
  3767. 2:38:28अब इसमें एक छोटा सा सेंटेंस यह है कि जो
  3768. 2:38:31आप यह रियासत देख रहे हैं। बताते हैं कि
  3769. 2:38:33जब अंग्रेजों ने अंग्रेजों द्वारा इस
  3770. 2:38:37रियासत पर हमला किया गया था तो यह जो
  3771. 2:38:40रियासत थी यह नष्ट हो गई थी इसके किला
  3772. 2:38:42वगैरह और उसके बाद इस रियासत को हीरापुर
  3773. 2:38:45के नाम से जाना गया। यानी वर्तमान में
  3774. 2:38:47इसका नाम क्या है? वर्तमान में हम इसको
  3775. 2:38:49बोलते हैं हीरापुर। लेकिन उससे पहले इसे
  3776. 2:38:52कहा जाता था हीरागढ़। अब इस कहानी को आप
  3777. 2:38:55अच्छे से पिरो सकते हैं। यानी हीरागढ़
  3778. 2:38:58रियासत जो कि वर्तमान नरसिंहपुर मध्य
  3779. 2:39:00प्रदेश में है। नर्मदा और हिरण नदी के
  3780. 2:39:02संगम पर स्थित है। इस रियासत के जो राजा
  3781. 2:39:05थे हृदय शालोदी उन्होंने 1842 के बुंदेला
  3782. 2:39:07विद्रोह में भाग लिया और बुंदेला विद्रोह
  3783. 2:39:09के मुख्य नायक थे। यह दक्षिणी बुंदेलखंड
  3784. 2:39:12में मुख्यता एक्टिव थे। दक्षिणी बुंदेलखंड
  3785. 2:39:14से इन्होंने क्या किया? यानी अगर आपको
  3786. 2:39:16लिखना पड़े कि इन्होंने किस-किस क्षेत्र
  3787. 2:39:18में अंग्रेजों से संघर्ष किया तो
  3788. 2:39:19नरसिंहपुर है। तेजगढ़ है। याद रखिएगा।
  3789. 2:39:22इसके बाद इन्होंने जबलपुर आदि जो क्षेत्र
  3790. 2:39:24था जबलपुर का जो इलाका था वहां पर भी जो
  3791. 2:39:26है किसानों को संगठित किया। तालुकेदारे
  3792. 2:39:29जमींदारों को संगठित किया। अंग्रेजों के
  3793. 2:39:30विरुद्ध संघर्ष किया। जब ये सागर की तरफ
  3794. 2:39:32जा रहे थे तो सागर के याद रखिएगा एक शासक
  3795. 2:39:36थे जो कि शाहगढ़ रियासत के राजा थे जिनका
  3796. 2:39:38नाम बखत वली था। उन्होंने इनको कैद करवा
  3797. 2:39:41दिया था। देखिए अंग्रेज जब बुंदेला
  3798. 2:39:43विद्रोह को दबा नहीं सके तो उन्होंने एक
  3799. 2:39:45स्कीम निकाली वो स्कीम ये थी कि अगर कोई
  3800. 2:39:48व्यक्ति इन लोगों को पकड़वाता है तो उनको
  3801. 2:39:50इनाम दिया जाएगा। तो उस इनाम के लालच के
  3802. 2:39:53चक्कर में बहुत सारे लोगों ने जो है गुप्त
  3803. 2:39:55सूचनाएं जो है क्रांतिकारियों की
  3804. 2:39:57विद्रोहियों की अंग्रेजों को दी थी।
  3805. 2:39:59हालांकि जो शाहगढ़ के राजा थे उनका कुछ
  3806. 2:40:01अलग इंटरेस्ट था। वो अपने एक जो गड़ाकोटा
  3807. 2:40:04फोर्ट था उसको वापस पाना चाहते थे। इसीलिए
  3808. 2:40:06उन्होंने अंग्रेजों का साथ दिया था। तो ये
  3809. 2:40:08बात तो हो गई इंफॉर्मेशन। ठीक है? आई होप
  3810. 2:40:10आप लोगों को याद रहेगा। अब 1843 में इनको
  3811. 2:40:13रिहा कर दिया गया। इनके ऊपर बहुत सारा जो
  3812. 2:40:17है जुल्म ढाए गए और बाद में जो है इनकी
  3813. 2:40:19संपत्ति छीन ली गई। तो इनसे यह कहा गया था
  3814. 2:40:221843 में कि यह कभी अब विद्रोह नहीं
  3815. 2:40:24करेंगे। इस समय एक और चीज अगर आप याद रख
  3816. 2:40:27सकें इस समय जो इस समय जो गवर्नर जनरल था
  3817. 2:40:31उसका नाम था एललेनवररो। इस समय ब्रिटिश
  3818. 2:40:34गवर्नर जनरल का नाम क्या था? लॉर्ड
  3819. 2:40:36एललेनवररो इस समय भारत का गवर्नर जनरल था।
  3820. 2:40:39लॉर्ड एललेन वरो। लॉर्ड एललेनवररो कौन था?
  3821. 2:40:42इस समय भारत का गवर्नर जनरल था। ठीक है?
  3822. 2:40:45अब कहानी में एक नया ट्विस्ट और है। वह
  3823. 2:40:47ट्विस्ट क्या है कि यह सब होने के बाद जब
  3824. 2:40:50अंग्रेजों ने इनको शर्त दी थी कि आप आगे
  3825. 2:40:52चलकर कोई विद्रोह में भाग नहीं लेंगे।
  3826. 2:40:55देखिएगा इस विद्रोह में तो इन्होंने बहुत
  3827. 2:40:56संघर्ष किया है क्योंकि हर संघर्ष की लाइन
  3828. 2:40:58को मैं यहां नहीं लिख सकता। लेकिन आपको
  3829. 2:41:00बता दिया। अब ये जो उनका परिवार है इनका
  3830. 2:41:02नाम आपको 1857 की क्रांति में याद रखना
  3831. 2:41:05है। आइए हम पढ़ते हैं थोड़ा आगे की कहानी।
  3832. 2:41:07तो देखिए क्या था आपको अब समझ में आ
  3833. 2:41:09जाएगा। राजा हृदय शाह लोदी ने नरसिंहपुर
  3834. 2:41:13जिले की हीरागढ़ रियासत से संपूर्ण सागर
  3835. 2:41:15और नर्मदा टेरिटरीज के तहत सागर, दमो,
  3836. 2:41:18जबलपुर व नरसिंहपुर जिले के सभी बुंदेला
  3837. 2:41:20बुंदेला विद्रोह में इन तीन मुख्यता लोगों
  3838. 2:41:23के द्वारा भाग लिया गया था। बुंदेला,
  3839. 2:41:24गोंड, लोधी। ठीक है? याद रखिएगा। राजाओं
  3840. 2:41:27से को संगठित कर जो है अंग्रेजों के
  3841. 2:41:29विरुद्ध बुंदेला विद्रोह का सफल नेतृत्व
  3842. 2:41:31किया। इस दौरान हीरागढ़ हीरापुर रियासत के
  3843. 2:41:35परिवारजन गजराज सिंह, सावंत सिंह, लटकंजू,
  3844. 2:41:39मेहरवान सिंह आदि इन सभी ने मिलकर याद
  3845. 2:41:42रखिएगा और ईश्वरी सिंह आदि ने मिलकर
  3846. 2:41:44अंग्रेजों से लगभग 18 माह तक संघर्ष किया
  3847. 2:41:47था। यानी बुंदेला विद्रोह में राजा हृद
  3848. 2:41:49शाह और उनके परिवार ने कितना संघर्ष किया?
  3849. 2:41:5118 माह तक ये लोग अंग्रेजों से लड़ते गए।
  3850. 2:41:53बाद में हृदय शाह को जो है गिरफ्तार कर
  3851. 2:41:55लिया गया था। ठीक है? हृदय शाह की रियासत
  3852. 2:41:58के बारे में मैंने आपको बता ही दिया है।
  3853. 2:41:59लंबे संघर्ष को देखकर अंग्रेजों ने 18
  3854. 2:42:02महीने तक अंग्रेजों से लड़ना बड़ी बात है।
  3855. 2:42:04लंबे संघर्ष को देखकर राजा हृदयशाह पर
  3856. 2:42:06₹10,000 का इनाम रखा गया। सागर जिले के
  3857. 2:42:09शाहगढ़ के राजा बखत वली ने धोखे से राजा
  3858. 2:42:12हृदयशाह को उनके परिवार सहित 22 दिसंबर यह
  3859. 2:42:15डेट याद रख सकते हैं। कब गिरफ्तार करवाया
  3860. 2:42:17गया? 22 दिसंबर 1842 को गिरफ्तार करवा
  3861. 2:42:20दिया। भीषण संघर्ष के बाद ब्रिटिश सरकार
  3862. 2:42:23को समझौता करना पड़ा और नरसिंहपुर जिले के
  3863. 2:42:25लगान में 10% की छूट दी गई और साथ ही सभी
  3864. 2:42:28भ्रष्ट अधिकारियों का तबादला करना पड़ा तो
  3865. 2:42:30बाद में इनसे समझौता हो गया था। 43 में
  3866. 2:42:33इनको रिहा कर दिया गया। लास्ट क्या है?
  3867. 2:42:36देखिए बुंदेला विद्रोह में तो इनके पूरे
  3868. 2:42:38परिवार की भूमिका है ही है। साथ-साथ 1857
  3869. 2:42:41की क्रांति में भी इनकी भूमिका रही है।
  3870. 2:42:43जैसे कि याद रखिएगा हीरापुर के राजघराने
  3871. 2:42:46ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए 1857 की
  3872. 2:42:49क्रांति में भी जिले का नेतृत्व किया।
  3873. 2:42:51ध्यान देना हीरापुर का जो रियासत है यानी
  3874. 2:42:54हीरापुर का जो राज परिवार है जो लोधी
  3875. 2:42:56राजवंश है उन्होंने बुंदेला विद्रोह में
  3876. 2:42:59भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और क्रांति में
  3877. 2:43:00भी 1857 की क्रांति में भी बढ़-चढ़कर
  3878. 2:43:03हिस्सा लिया है। राजा हृदय शाह के भाई
  3879. 2:43:05गजराज सिंह पहले ही मैंने आपको चार्ट में
  3880. 2:43:07बता दिया है भी लगातार संघर्ष करते रहे और
  3881. 2:43:09अंग्रेजों ने उन्हें जबलपुर के चांडाल
  3882. 2:43:12भाटा में याद रखिएगा 29 नवंबर 1857 को
  3883. 2:43:15फांसी दे दी थी। यानी इनके एक भाई जो हैं
  3884. 2:43:17फांसी पर संघर्ष करते हुए मारे गए। इसके
  3885. 2:43:21अलावा इनका जो 50 किलो का बख्तर है, 25
  3886. 2:43:24किलो का तोप और 25 किलो का जो गुटन्ना है
  3887. 2:43:26वो आज भी नागपुर के म्यूजियम में रखा है
  3888. 2:43:29इनके भैया का। ठीक है? इसके अलावा 1857 की
  3889. 2:43:32क्रांति में नरसिंहपुर जिले का नेतृत्व
  3890. 2:43:34हीरापुर के राजा हृदयशाह के पुत्र मेहरबान
  3891. 2:43:37सिंह जिनको मैंने अभी बताया इन्हीं को
  3892. 2:43:39बोलते हैं जंगी राजा। किस नाम से जाना
  3893. 2:43:42जाता है? जंगी राजा के नाम से प्रसिद्ध
  3894. 2:43:44थे। याद रखिएगा। जंगी राजा के नाम से
  3895. 2:43:47प्रसिद्ध थे। ठीक है? तो इनके द्वारा जो
  3896. 2:43:50है
  3897. 2:43:52जंगी राजा यानी मेहरवान सिंह जो कि जंगी
  3898. 2:43:54राजा उपनाम से जाने जाते थे। पूरी ताकत
  3899. 2:43:56झोंकने के बावजूद अंग्रेज क्रांतिकारी
  3900. 2:43:58मेहरबान सिंह को नहीं पकड़ सके। याद
  3901. 2:44:00रखिएगा वृद्ध राजा हृदय शाह ने अंग्रेजों
  3902. 2:44:03की शर्तें मानने से इंकार कर दिया। यानी
  3903. 2:44:04इस समय 1857 की क्रांति जब हो रही थी राजा
  3904. 2:44:08हृदय शाह वृद्ध हो चुके थे और उनके पुत्र
  3905. 2:44:10जो हैं नेतृत्व कर रहे थे। याद रखिएगा। तो
  3906. 2:44:13उन्होंने शर्तें मानने से इंकार कर दिया।
  3907. 2:44:16इस कारण से 3 अप्रैल 1857 को अंग्रेजों ने
  3908. 2:44:19हीरागढ़ रियासत की पूरी संपत्ति यानी पूरा
  3909. 2:44:21राज्य जो है छीन लिया। ठीक है? महान
  3910. 2:44:24क्रांतिकारी राजा हृदशाह लोदी भीषण मारकाट
  3911. 2:44:27और यह जो कुछ 1857 में चल रहा था उनके
  3912. 2:44:29दोनों भाई मारे गए। उनका पुत्र मारा गया।
  3913. 2:44:31इससे दुखी होकर 28 अप्रैल 1858 को इस
  3914. 2:44:35दुनिया से चले गए। तो इसमें अगर आपसे कहूं
  3915. 2:44:38मैं तीन डेट याद रखने के लिए तो पहली डेट
  3916. 2:44:40आपको याद रखनी है। उनको गिरफ्तार कब किया
  3917. 2:44:42गया था? तो वह 22 दिसंबर 1842 अगर पूछा
  3918. 2:44:45जाए उनकी मृत्यु कब हुई तो 28 अप्रैल 1858
  3919. 2:44:48यह उनका बलिदान दिवस है याद रखना और
  3920. 2:44:51इसीलिए इनका जो स्मारक है वह वर्तमान में
  3921. 2:44:54कहां बनाया गया है मैं स्मारक आपको बता
  3922. 2:44:56चुका हूं इनका स्मारक बनाया गया है यहां
  3923. 2:44:58पर कहां ये रहा ठीक है ये दमोह में उनका
  3924. 2:45:02स्मारक बनाया गया शायद पिक्चर आप लोगों को
  3925. 2:45:04क्लियर नहीं होगा ठीक है तो ये राजा हृदय
  3926. 2:45:07शाह के बारे में मैंने आप लोगों को
  3927. 2:45:09अभी-अभी बताया आई होप आप लोगों को अच्छे
  3928. 2:45:11से समझ में आ गया होगा। यानी राजा हृददेश
  3929. 2:45:14शाह लोदी जो थे उन्होंने अपने साथ-साथ
  3930. 2:45:17अपने संपूर्ण परिवार के साथ अपने भाइयों
  3931. 2:45:19के साथ अपने पुत्र के साथ जो है पहले
  3932. 2:45:22बुंदेला विद्रोह में भाग लिया और उसके बाद
  3933. 2:45:241857 की क्रांति में भाग लिया और अपने
  3934. 2:45:26संपूर्ण बलिदान अपने संपूर्ण परिवार का जो
  3935. 2:45:30है बलिदान कर दिया। राजा हृदय शाह लोदी को
  3936. 2:45:33इतिहास के पन्नों में वह जगह नहीं मिली
  3937. 2:45:35जिसके वह हकदार थे। और मेरा प्रयास इस
  3938. 2:45:37सीरीज में यही है कि आप सभी लोग राजा हृदय
  3939. 2:45:40शाह लोदी के बारे में अधिक से अधिक जाने
  3940. 2:45:42क्योंकि अभी तक राजा हृदय शाह लोदी के
  3941. 2:45:44बारे में केवल लोधी कम्युनिटी के जो लोग
  3942. 2:45:46हैं वह जानते हैं। उनका सम्मान करते हैं।
  3943. 2:45:49उनकी पूजा करते हैं। तो याद रखिएगा 1842
  3944. 2:45:52के बुंदेला विद्रोह में उन्होंने अंग्रेजी
  3945. 2:45:54हुकूमत को चुनौती दी और अपने क्षेत्र के
  3946. 2:45:57समस्त जागीरदारों, तालुकेदारों, गोंड
  3947. 2:46:00राजाओं इसके साथ-साथ बुंदेला सरदारों के
  3948. 2:46:02साथ संगठित होकर विद्रोह किया। मेनली उनका
  3949. 2:46:05जो विद्रोह था वह दक्षिणी बुंदेलखंड में
  3950. 2:46:07था। उनके साथ-साथ इस विद्रोह में जयपुर के
  3951. 2:46:10राजा परीक्षित इसके अलावा मधुकर शाह, गणेश
  3952. 2:46:13जी बुंदेला, जवाहर सिंह बुंदेला आदि लोगों
  3953. 2:46:15ने भी साथ दिया था। इसके साथ-साथ एक गोंड
  3954. 2:46:18शासक बहुत इंपॉर्टेंट है जिनको हम अगली
  3955. 2:46:20सीरीज में कवर करेंगे। ढिल्लन शाह गोंड
  3956. 2:46:22शासक ढिल्लन शाह जो कि मदनपुर के रहने
  3957. 2:46:24वाले थे। तो इन सभी लोगों ने बलिदान दिया।
  3958. 2:46:27लेकिन इस जब इस पूरी रिपोर्ट को तैयार
  3959. 2:46:30किया और अंग्रेजों ने एक जो बजट सॉरी
  3960. 2:46:33अंग्रेजी गजट में जब इस बात का जिक्र किया
  3961. 2:46:35कि इस 1842 के बुंदेला विद्रोह के जो
  3962. 2:46:38मुख्य सूत्रधार या जो मुख्य नायक थे वो थे
  3963. 2:46:41राजा हृद शाह लोदी। इसीलिए उनके परिवार के
  3964. 2:46:44साथ और उनकी जो गलत व्यवहार किया गया।
  3965. 2:46:47उनके साथ कड़ी अह बहुत ज्यादतियां की गई
  3966. 2:46:49और उनकी संपत्ति को जब्त कर लिया। मुझे
  3967. 2:46:51उम्मीद है कि आप लोगों को जो कुछ भी मैंने
  3968. 2:46:54राजा हृदय शाह लोदी के बारे में बताया वो
  3969. 2:46:57आपको अच्छे से याद रहेगा। एक और
  3970. 2:46:58इंपॉर्टेंट बात ये जो चार्ट है यह जरूर
  3971. 2:47:01याद रखिएगा। इसमें सब कुछ कवर है। उनके
  3972. 2:47:03बेटे का नाम क्या था? उनके बेटे का नाम था
  3973. 2:47:06मेहरवान सिंह लोदी जिन्हें जंगी राजा के
  3974. 2:47:08नाम से जाना जाता है। उन्होंने 1857 की
  3975. 2:47:10क्रांति में हीरापुर रियासत का नेतृत्व
  3976. 2:47:12किया था। साथ-साथ उनके जो भाई थे जिनका
  3977. 2:47:15नाम वसंत सिंह था। उन्होंने भी 1857 की
  3978. 2:47:18क्रांति में अपना योगदान दिया और उनके जो
  3979. 2:47:20भाई थे जिनका नाम था गजराज सिंह यानी ये
  3980. 2:47:23तीनों बसंत सिंह, गजराज सिंह और मेहरवान
  3981. 2:47:25सिंह ये तीनों की जो मृत्यु है या तीनों
  3982. 2:47:28की जो वीरगति है वो 1857 की क्रांति में
  3983. 2:47:30संघर्ष से हुई है। और राजा हृद शाह लोदी
  3984. 2:47:33क्योंकि इस समय वृद्ध अवस्था में थे और
  3985. 2:47:35उनकी भी जो डेथ है वह 1858 में हुई है।
  3986. 2:47:38अप्रैल 1858 में। मुझे लगता है अगर आप
  3987. 2:47:40इतनी सारी बातों को याद रखते हो तो आपको
  3988. 2:47:43राजा हृददी बहुत अच्छे से याद रहेंगे और
  3989. 2:47:46अब आपके मन में एक अगर सवाल हो कि बुंदेला
  3990. 2:47:48विद्रोह क्या था? उसके कारण क्या थे? तो
  3991. 2:47:50आने वाली आने वाले नेक्स्ट पार्ट में जब
  3992. 2:47:53हम बुंदेला विद्रोह पे कभी वीडियो बनाएंगे
  3993. 2:47:55तो मैं आपको उसके कारण परिणाम और उसके जो
  3994. 2:47:57मुख्य नायक थे जैसे कि मदनपुर का ढिल्लन
  3995. 2:48:00शाह, हीरापुर के हमने अभी कवर कर लिए। के
  3996. 2:48:03राजा हृद शाह लोदी, जयपुर के राजा
  3997. 2:48:04परीक्षित और गणेश बुंदेला, मधुकर शाह
  3998. 2:48:08बुंदेला जो कि नरहट के जमींदार थे और सागर
  3999. 2:48:10के जमींदार जिनका नाम था जवाहर सिंह
  4000. 2:48:12बुंदेला सभी को कवर करेंगे। आई होप आप
  4001. 2:48:15लोगों को यह वीडियो भी बहुत पसंद आएगा।
  4002. 2:48:17इसी के साथ इस वीडियो को यहां हम समाप्त
  4003. 2:48:19करते हैं। जय हिंद। थैंक यू।
  4004. 2:48:35हेलो एवरीवन आप सभी का स्वागत है
  4005. 2:48:37एमपीपीएससी स्टडी आईक्यू पर और आज हम बात
  4006. 2:48:40करने वाले हैं मध्य प्रदेश के वीरों के
  4007. 2:48:42इतिहास की इस सीरीज में भारत की एक ऐसी
  4008. 2:48:45आदर्श शासिका के बारे में एक ऐसे विशेष
  4009. 2:48:48व्यक्तित्व के बारे में जिन्हें प्रजा या
  4010. 2:48:51जो आम जनता है वह देवी या लोक माता के नाम
  4011. 2:48:53से जानती थी। आपने देख लिया होगा हम किन
  4012. 2:48:56की बात करने वाले हैं। तो हम बात करने
  4013. 2:48:58वाले हैं मालवा की एक महान रानी इंदौर के
  4014. 2:49:01होलका डायनेस्टी की एक महान रानी या हम
  4015. 2:49:04कहें कि भारतवर्ष की एक महान शासिका जिनका
  4016. 2:49:07नाम है रानी अहिल्याबाई होलकर जिन्हें हम
  4017. 2:49:10भारत की आदर्श शासिका के तौर पर जानते
  4018. 2:49:13हैं। तो देवी अहिल्याबाई होलकर कौन है और
  4019. 2:49:16किस तरीके का उनका व्यक्तित्व था और आखिर
  4020. 2:49:18क्यों उन्हें जनता या जो लोग हैं वह देवी
  4021. 2:49:21और लोकमाता कहते हैं तो उन सभी पहलुओं की
  4022. 2:49:23आज हम चर्चा करने वाले हैं। तो आइए शुरुआत
  4023. 2:49:26करते हैं सबसे पहले के कौन थी हमारी देवी
  4024. 2:49:29लोकमाता अहिल्याबाई होलकर। तो सबसे पहले
  4025. 2:49:32हम इनके बचपन की बात करते हैं। इनके जीवन
  4026. 2:49:34परिचय की बात करते हैं। अगर हम देखें इनका
  4027. 2:49:37जो व्रत है वो हुआ था महाराष्ट्र में एक
  4028. 2:49:39जगह है महाराष्ट्र के औरंगाबाद
  4029. 2:49:41डिस्ट्रिक्ट में। तो इनका जो बर्थ है उस
  4030. 2:49:44बर्थ प्लेस का नाम था क्या? चौड़ी गांव।
  4031. 2:49:46याद रखिएगा ये जो चौड़ी गांव है ये चौड़ी
  4032. 2:49:49गांव कहां पर था? तो आपको याद रखना है ये
  4033. 2:49:51जो चौड़ी गांव है वो औरंगाबाद जिले में था
  4034. 2:49:54महाराष्ट्र के और इनका जो बर्थ ईयर है वो
  4035. 2:49:56भी आपको याद रखना पड़ेगा क्योंकि मध्य
  4036. 2:49:58प्रदेश के इतिहास में इंपॉर्टेंट है 1725
  4037. 2:50:00में। तो 1725 में इनका जन्म होता है
  4038. 2:50:03महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के चौड़ी
  4039. 2:50:04नामक ग्राम में। तो चौड़ी और ईयर दोनों
  4040. 2:50:07इंपॉर्टेंट है 1725 चौड़ी ग्राम। इनके
  4041. 2:50:09पिताजी की बात करें तो इनके पिताजी का नाम
  4042. 2:50:11था मानको जी सिंधे और अगर माता की बात
  4043. 2:50:14करें तो माताजी का नाम था सुशीला तो
  4044. 2:50:16माता-पिता और जन्म चौड़ी नामक ग्राम माता
  4045. 2:50:19का नाम क्या है? सुशीला और पिता का नाम
  4046. 2:50:20क्या है? याद रखिएगा मनको जी सिंधे। इनकी
  4047. 2:50:23शादी 8 वर्ष की उम्र में शादी हुई थी 1733
  4048. 2:50:28में। 1733 में इनकी जो शादी है वह मल्हार
  4049. 2:50:31राव के जो पुत्र हैं खांडेराव होलकर के
  4050. 2:50:33साथ हुई थी। और जब इनकी शादी हुई तो आप
  4051. 2:50:36देखिए उनकी ऐज केवल और केवल 8 साल की थी।
  4052. 2:50:398 साल की उम्र में उनकी शादी जो है मल्हार
  4053. 2:50:42राव होलकर जो कि इंदौर के होलकर वंश के
  4054. 2:50:44संस्थापक थे उनके बेटे के साथ हो जाती है
  4055. 2:50:47जिनका नाम होता है खांडेराव तो खांडेराव
  4056. 2:50:49इनके पति थे। अगर हम बात करें इनके
  4057. 2:50:51खांडेराव यानी जो इनके पति हैं तो
  4058. 2:50:53खांडेराव की जो मृत्यु है वो बहुत ही
  4059. 2:50:55जल्दी हो गई थी। भरतपुर की एक लड़ाई हुई
  4060. 2:50:58थी 1754 में जिसे वॉर ऑफ कुमेरी कहा जाता
  4061. 2:51:01है। कुमेरी बेसिकली जाटों का एक किला था
  4062. 2:51:05जिस पर सूरजमल जाट का अधिकार था और जब
  4063. 2:51:08मल्हार राव होलकर ने सूरजमल जाट के उस
  4064. 2:51:11कुमेरी दुर्ग को घेर लिया तो उसमें एक
  4065. 2:51:13दुर्घटना में इनके पति की मृत्यु हो गई।
  4066. 2:51:15अभी मैं थोड़ा सा और डिटेल में आप लोगों
  4067. 2:51:16को बताऊंगा। ठीक है? इनका एकमात्र जीवित
  4068. 2:51:19पुत्र था। एकमात्र पुत्र था जिसका नाम
  4069. 2:51:21मालेराव था और इनकी एक पुत्री थी जिसका
  4070. 2:51:23नाम था मुक्ताबाई। ठीक है? ठीक है? तो आप
  4071. 2:51:26इनके परिवार से आप मिल लिए और इनके जो
  4072. 2:51:28दामाद थे, दामाद का नाम था यशवंत राव
  4073. 2:51:30फड़से।
  4074. 2:51:32क्या नाम था? यशवंत राव फड़से इनके दामाद
  4075. 2:51:36थे। ये जरूर याद रखिएगा कि उनकी बेटी हैं
  4076. 2:51:38तो बेटी की शादी होगी। तो इनके दामाद का
  4077. 2:51:40नाम था यशवंत राव फड़से। तो ये हो गया
  4078. 2:51:42हमारा जीवन परिचय। ठीक है? जीवन परिचय के
  4079. 2:51:45बाद हम बात करते हैं कि किस तरीके से अब
  4080. 2:51:47खांडेराव होलकर के बारे में कुछ बातें
  4081. 2:51:49यहां पर मेंशन की गई हैं। आप चाहे तो इन
  4082. 2:51:51बातों को जरा ध्यान से देख लीजिए।
  4083. 2:51:53खांडेराव होलकर मल्हार राव होलकर के पुत्र
  4084. 2:51:56थे और मल्हार राव होलकर ने एक बार भरतपुर
  4085. 2:51:59के जाट शासक जिनका नाम था सूरजमल जाट उनको
  4086. 2:52:02घेर लिया क्योंकि पेशवा का आदेश था कि
  4087. 2:52:05इनसे चौथ वसूला जाए। तो जब वो मैं इसमें
  4088. 2:52:08एक डायग्राम बनाकर आपको समझाता हूं और
  4089. 2:52:10मुझे लगता है जब हम डायग्राम के थ्रू
  4090. 2:52:12समझेंगे तो आपको बहुत जल्दी अच्छे से समझ
  4091. 2:52:14में आ जाएगा। चलिए तो कहानी कैसे होती है?
  4092. 2:52:18जैसे कि एक दुर्ग है और इस दुर्ग का नाम
  4093. 2:52:21है कुमेरी। ध्यान से सुनिएगा। यह जो
  4094. 2:52:24कुमेरी दुर्ग है, वह कहां आता था? कुमेरी
  4095. 2:52:27दुर्ग आता था राजस्थान में। कुमेरी दुर्ग
  4096. 2:52:32और यह भरतपुर राजस्थान में था। और यहां के
  4097. 2:52:35जो सा शासक थे जिनका नाम था सूरजमल जाट।
  4098. 2:52:39सूरजमल जाट जिनकी वाइफ का नाम था
  4099. 2:52:42किशोरीबाई। सूरजमल जाट जो जाटों के सबसे
  4100. 2:52:45प्रसिद्ध शासक रहे हैं जिनके लिए कहा जाता
  4101. 2:52:47है इन्हें जाटों का अफलातून कहते हैं।
  4102. 2:52:50जाटों का प्लेटो कहा जाता है और बहुत ही
  4103. 2:52:52महान शासक थे जाटों के जिनका नाम था
  4104. 2:52:54सूरजमल जाट। तो क्या हुआ कि मल्हार राव
  4105. 2:52:57होलकर ने अपनी सेना के साथ मल्हार राव कौन
  4106. 2:53:00है? खांडेराव के पति सॉरी खांडेराव के
  4107. 2:53:02पिता हैं मल्हार राव।
  4108. 2:53:09यह रहे हमारे मल्हार
  4109. 2:53:12राव होलकर। मल्हार राव जो होलकर हैं
  4110. 2:53:16इन्होंने अपने बेटे के साथ मालवा के शासक
  4111. 2:53:20हैं। और इनके पुत्र का नाम क्या था? इनके
  4112. 2:53:22पुत्र का नाम था खांडेराव। तो इन्होंने
  4113. 2:53:24अपने पुत्र के साथ पेशवा की सेना का
  4114. 2:53:26प्रतिनिधित्व करते हुए और भी लोग थे। इन
  4115. 2:53:29सभी लोगों ने क्या कर लिया? घेर लिया।
  4116. 2:53:31किसको घेर लिया? कुमेरी को घेर लिया। और
  4117. 2:53:33कुमेरी दुर्ग जो कि सूरजमल जाट का था और
  4118. 2:53:36इसे घेर के खड़े हो गए। तो बताते हैं कि
  4119. 2:53:38जब इस दुर्ग को उन्होंने घेर रखा था और
  4120. 2:53:41यहां उनकी जीत नहीं हुई थी। एक समय वो
  4121. 2:53:43अपनी पालकी में बैठकर वो पालकी में बैठे
  4122. 2:53:46थे खांडेरा होलकर और पालकी में बैठकर जब
  4123. 2:53:49वो निरीक्षण कर रहे थे अपनी सेना का उसी
  4124. 2:53:51समय बताया जाता है कि यहां से कुमेरी
  4125. 2:53:54दुर्ग की तरफ से एक बंदूक चलाई जाती है।
  4126. 2:53:56एक बंदूक चलाई जाती है और उसकी गोली से जो
  4127. 2:53:59है खांडेराव की क्या हो जाती है? तोप का
  4128. 2:54:01गोला चलता है। किले से एक क्या चला? तोप
  4129. 2:54:04का गोला चला। और इस तोप के गोले से जो है
  4130. 2:54:06दुर्घटना में खांडेराव होलकर की 1754 में
  4131. 2:54:09मृत्यु हो गई। क्या हो गई? 1754 में
  4132. 2:54:13मृत्यु हो गई। और यह याद रखिएगा मल्हहार
  4133. 2:54:15राव होलकर के एकमात्र पुत्र थे और यही
  4134. 2:54:17अहिल्याबाई के पति हैं खांडेराव होलकर। जब
  4135. 2:54:20उनकी मृत्यु हुई तो मल्हार राव होलकर ने
  4136. 2:54:22कसम खाई कि वो इस दुर्ग को मिट्टी में
  4137. 2:54:25मिला देंगे। लेकिन बाद में कुछ ऐसी
  4138. 2:54:27परिस्थितियां बनी कि पेशवा और सूरजमल जाट
  4139. 2:54:29के मध्य समझौता हो गया और बाद में बताते
  4140. 2:54:32हैं कि जो सूरजमल जाट और उनकी वाइफ थी
  4141. 2:54:35उन्होंने क्या किया? माफी मांगी इनसे कि
  4142. 2:54:37ये जो कुछ भी हुआ वो दुर्घटनावश हुआ और
  4143. 2:54:39बाद में इनकी समाधि यहां पर एक छतरी का
  4144. 2:54:42निर्माण करवा दिया था। क्या करवा दिया? एक
  4145. 2:54:44छतरी का निर्माण करवा दिया। तो इनकी जो
  4146. 2:54:46छतरी है खांडेरा होलकर की वो यहीं पर बनी
  4147. 2:54:48हुई है। तो ये एक बड़ी दुर्घटना थी। अब
  4148. 2:54:51इसके बाद क्या होता है? आगे की कहानी सुन
  4149. 2:54:54सुनिए। तो जब यहां पर इनकी मृत्यु हो गई
  4150. 2:54:57तो मल्हार राव होलकर की जो बहू है और
  4151. 2:54:59खांडेराव होलकर की जो पत्नी हैं
  4152. 2:55:01अहिल्याबाई होलकर वो सती होना चाहती थी।
  4153. 2:55:04वो सती होना चाहती थी क्योंकि पहले कई
  4154. 2:55:06महिलाएं सती होती थी अपने पति की मृत्यु
  4155. 2:55:08के बाद तो जब वो सती होना चाहती थी तो
  4156. 2:55:10मल्हहार होलकर ने उनसे कहा कि मेरा बेटा
  4157. 2:55:13तो गया। मेरा बेटा तो गया। अब आज से तुम
  4158. 2:55:17ही मेरी बेटा हो। बेटी को वो क्या कहते
  4159. 2:55:19हैं? मल्हार होलकर। अहिल्याबाई होलकर से
  4160. 2:55:21कहते हैं कि मेरा बेटा तो गया और आज से
  4161. 2:55:23तुम ही मेरा बेटा हो इसलिए तुम सती नहीं
  4162. 2:55:26हो और फिर वो सती होने से मतलब उनको मना
  4163. 2:55:30कर दिया गया और जब वो सती नहीं होती हैं
  4164. 2:55:31तो फिर वो चली जाती है और उनके बच्चे हैं
  4165. 2:55:33जो मैंने अभी आपको बताया तो इस प्रकार
  4166. 2:55:35उनके पति कौन थे? खांडेराव होलकर थे जिनके
  4167. 2:55:38बारे में हम लोगों ने अभी जान लिया।
  4168. 2:55:40खांडेराव होलकर की मृत्यु कहां हुई थी? ये
  4169. 2:55:42हम लोगों ने जान लिया। अब खांडेराव होलकर
  4170. 2:55:44के बाद की घटनाएं उनको हम लोग देखते हैं।
  4171. 2:55:46खांडेराव होलकर से उनको कौन था? तो याद
  4172. 2:55:48रखिएगा एक पुत्र है जिसका नाम मालेराव है
  4173. 2:55:50और पुत्री का नाम मुक्ताबाई है। शादी कब
  4174. 2:55:52हुई थी? 1733 में हुई थी। यह भी हमने पढ़
  4175. 2:55:54लिया और इनकी मृत्यु कहां हुई थी? कुमेरी
  4176. 2:55:56के युद्ध में हुई थी। भरतपुर में 1754 में
  4177. 2:55:59होगी। यह भी मैंने आपको बता दिया जब वो एक
  4178. 2:56:01पालकी में बैठे हुए थे। आगे क्या होता है?
  4179. 2:56:05आगे की बात करते हैं। इसके बाद हम लोग
  4180. 2:56:08देवी अहिल्याबाई को आगे समझते हैं कि आखिर
  4181. 2:56:10अहिल्याबाई होलकर के जीवन में आगे क्या
  4182. 2:56:14हुआ। तो देखो यह रहे हमारे मल्हार राव
  4183. 2:56:16होलकर। क्या नाम है इनका? मल्हार राव।
  4184. 2:56:21मल्हहार
  4185. 2:56:22राव होलकर। मल्हार राव होलकर
  4186. 2:56:27की जो मृत्यु है ध्यान से सुनना। मल्हार
  4187. 2:56:30राव होलकर की मृत्यु होती है 1766 में।
  4188. 2:56:331766 एडी में उनकी मृत्यु हो गई। और उनकी
  4189. 2:56:36जो मृत्यु हुई थी वो आलमपुर में हुई थी।
  4190. 2:56:38भिंड के आलमपुर में और यहीं पर उनकी समाधि
  4191. 2:56:41बनी हुई है। यह आलमपुर कहां है? भिंड
  4192. 2:56:43डिस्ट्रिक्ट में पड़ता है। यहां पर उनकी
  4193. 2:56:45समाधि बनी हुई है भिंड के आलमपुर में। और
  4194. 2:56:47इस समाधि का निर्माण करवाया था देवी
  4195. 2:56:49अहिल्याबाई ने। देवी अहिल्याबाई द्वारा
  4196. 2:56:52अपने ससुर की समाधि का निर्माण करवाया
  4197. 2:56:54गया। और
  4198. 2:56:56उनकी समाधि कहां पर है? आलमपुर भिंड में
  4199. 2:56:58है। तो मल्हाराव होलकर के बाद क्योंकि
  4200. 2:57:01उनका जो पुत्र था वो तो उनके शासनकाल में
  4201. 2:57:03ही उनकी डेथ हो गई थी। इसीलिए इनका जो
  4202. 2:57:06पौत्र है पौत्र मतलब बेटे का बेटा है उनका
  4203. 2:57:09नाम था मालेराव जो कि अहिल्याबाई होलकर और
  4204. 2:57:12खांडेराव होलकर का एकमात्र पुत्र था। तो
  4205. 2:57:15ये गद्दी पर बैठे और यह शासन करते हैं
  4206. 2:57:181766 में जब ये गद्दी पर बैठे तो याद
  4207. 2:57:21रखिएगा केवल 9 माह में। कितने? केवल 9
  4208. 2:57:26महीने में इनकी मृत्यु हो गई। कितने महीने
  4209. 2:57:28में? 9 महीने में इनकी मृत्यु हो गई। और
  4210. 2:57:31इनको क्या बीमारी हो गई थी? तो इनको
  4211. 2:57:33दिमागी बुखार जिसे हम मस्तिष्क ज्वर कहते
  4212. 2:57:36हैं। यानी मस्तिष्क ज्वर के कारण इनकी
  4213. 2:57:38क्या हो जाती है? मृत्यु हो जाती है।
  4214. 2:57:42अब आप सोचिए क्या परिस्थिति रही होगी देवी
  4215. 2:57:45अहिल्याबाई होलकर की कि 1754 में उनके जो
  4216. 2:57:49बेटे हैं बेटे का नाम क्या था? मल्हार राव
  4217. 2:57:51होलकर के और उनके पति खांडेराव होलकर। तो
  4218. 2:57:54खांडेराव होलकर की मृत्यु 54 में हो गई।
  4219. 2:57:57ठीक है? उनके ससुर जी की मृत्यु 66 में हो
  4220. 2:58:00गई। और उनका जो एकमात्र जीवित पुत्र था
  4221. 2:58:02मालेरा उसकी मृत्यु 1766 में हो गई और जब
  4222. 2:58:06उनके पुत्र की मृत्यु हो गई तो उस
  4223. 2:58:08परिस्थिति में उनको बनाया गया होलकर वंश
  4224. 2:58:11का शासक और यहीं से शुरू होती है
  4225. 2:58:14अहिल्याबाई होलकर का राजनीतिक कैरियर और
  4226. 2:58:17राजनीतिक करियर में उन्होंने क्या किया यह
  4227. 2:58:19हम जानेंगे। अहिल्याबाई होलकर की अगर हम
  4228. 2:58:22उपलब्धियों की बात करें तो अहिल्याबाई
  4229. 2:58:24होलकर जो है हमारी देवी अहिल्याबाई होलकर
  4230. 2:58:28देवी अहिल्याबाई जो होलकर हैं
  4231. 2:58:32देवी अहिल्याबाई होलकर इनके जीवन को समझने
  4232. 2:58:36के लिए इनको समझने के लिए हम इनकी
  4233. 2:58:38उपलब्धियों को तीन पार्ट में देख सकते
  4234. 2:58:40हैं। नंबर वन, सबसे पहले हम देखेंगे इनकी
  4235. 2:58:44कूटनीतिक
  4236. 2:58:47कूटनीतज्ञ के रूप में कूटनीतिज्ञ को बोल
  4237. 2:58:49सकते हैं राजनीतिज्ञ के रूप में कि एक
  4238. 2:58:51अच्छी राजनेता कैसे थीं वो? तो हम एक
  4239. 2:58:54कूटनीतिक के रूप में उनके जीवन को
  4240. 2:58:56समझेंगे। दूसरा उनके बारे में कहा जाता है
  4241. 2:58:59कि वो एक महान शिव भक्त थी और उन्होंने
  4242. 2:59:02देश भर में कई कई सारे शिवालय का निर्माण
  4243. 2:59:05करवाया था। तो एक महान शिव भक्त के रूप
  4244. 2:59:08में उनको हम समझेंगे। इसके साथ-साथ हम बात
  4245. 2:59:10करेंगे कि उन्होंने याद रखिएगा कई सारे
  4246. 2:59:14लोक कल्याणकारी कार्य किए और इन्हीं लोक
  4247. 2:59:17कल्याणकारी कार्यों की वजह से समस्त प्रजा
  4248. 2:59:20उनको क्या कहला कहती थी? तो समस्त प्रजा
  4249. 2:59:23उनको बुलाती थी देवी या लोकमाता। तो हम
  4250. 2:59:26इनको तीन पार्ट में समझेंगे। ये तीनों
  4251. 2:59:29चीजें सबसे पहले हम बात करेंगे राजनीतिक
  4252. 2:59:32के रूप में। तो सबसे पहले देखिए क्या हुआ?
  4253. 2:59:35उनके पति की मृत्यु हो गई। उनके ससुर की
  4254. 2:59:38मृत्यु हो गई और उनके बेटे की मृत्यु हो
  4255. 2:59:40गई। तब 1766 में
  4256. 2:59:43सॉरी
  4257. 2:59:451766 में वह गद्दी पर बैठी और उन्होंने
  4258. 2:59:491795 तक शासन किया था। 1795 तक शासन किया।
  4259. 2:59:54तो उन्होंने शासन कैसे किया? क्योंकि शासन
  4260. 2:59:56करने के लिए कोई ना कोई उनको सपोर्ट करने
  4261. 2:59:58के लिए भी चाहिए। तो मल्हार राव होलकर के
  4262. 3:00:01एक भतीजे थे जिनका नाम था तुकोजीराव
  4263. 3:00:04होलकर। तो उन्होंने अपना सेनापति बनाया
  4264. 3:00:07तुकोजीराव होलकर को। किसको बनाया?
  4265. 3:00:09तुकोजीराव जो कि एक बहुत ही योग्य व्यक्ति
  4266. 3:00:12थे। तुकोजीराव होलकर। तुकोजीराव होलकर को
  4267. 3:00:15अपना सेनापति बनाया और इनकी मदद से अच्छे
  4268. 3:00:18से अपने राज्य को चलाया। तो हम एक-एक करके
  4269. 3:00:20इनकी उपलब्धियों को समझने वाले। सबसे पहले
  4270. 3:00:22राजनीतिक, महान सेवक और लोक कल्याणकारी।
  4271. 3:00:24जब आप इन तीनों पहलुओं को समझ लेंगे तो
  4272. 3:00:27आपको समझ में आ जाएगा कि क्यों उन्हें
  4273. 3:00:29देवी या लोकमाता के नाम से या एक
  4274. 3:00:32आदर्शवादी महिला शासिका के रूप में उनको
  4275. 3:00:34जाना जाता है। एक और इंपॉर्टेंट बात है जो
  4276. 3:00:37आपको बहुत ध्यान से सुननी और समझनी है कि
  4277. 3:00:40जब उनके पति की मृत्यु हो गई। ठीक है?
  4278. 3:00:441754 में उनके ससुर की मृत्यु हो गई। ठीक
  4279. 3:00:48है? उनका एकमात्र बेटा भी चल बसा। और उनकी
  4280. 3:00:52जो बेटी हैं मुक्ताबाई और उनके जो दामाद
  4281. 3:00:55हैं यशवंतराव फड़से उन सभी की मृत्यु उनके
  4282. 3:00:58जीवन काल में हो गई। अब आप सोचिए जिस महल
  4283. 3:01:01में वो रहती होंगी उनके महल का नाम क्या
  4284. 3:01:03था? पहले सभी लोग इंदौर में जो राजवाड़ा
  4285. 3:01:06पैलेस है वहां पे रहा करते थे। यह इनका
  4286. 3:01:08पैलेस था। राजवाड़ा पैलेस। कहां पर है
  4287. 3:01:10राजवाड़ा पैलेस? इंदौर में रहते हैं। ठीक
  4288. 3:01:13है? अब आप मुझे एक बात बताओ। जिस घर में
  4289. 3:01:15उनके सभी लोगों की मृत्यु हो गई। क्या वो
  4290. 3:01:17जगह उनको अच्छी लगेगी? क्या वो राजसी वैभव
  4291. 3:01:21उनको अच्छा लगेगा जहां पर उनकी मृत्यु
  4292. 3:01:23हुई। आप अगर इंदौर और महेश्वर को कभी
  4293. 3:01:26कंपेयर करेंगे तो आपको समझ में आ जाएगा कि
  4294. 3:01:28राजवाड़ा जो इंदौर है उसमें सब राजसी
  4295. 3:01:30चीजें आपको मिल जाएंगी। ये वो वैभव आपको
  4296. 3:01:32मिल जाएगा। लेकिन जब आप महेश्वर की तरफ
  4297. 3:01:34जाएंगे जो महेश्वर की जो पहचान है वह देवी
  4298. 3:01:37अहिल्याबाई होलकर की वजह से है। और जब आप
  4299. 3:01:39महेश्वर जाएंगे तो आपको वहां मिलेगी
  4300. 3:01:41शांति। आपको मिलेगा वहां पे संत प्रवृत्ति
  4301. 3:01:44का उनका जीवन और उनकी सामान्य लाइफ उनको
  4302. 3:01:47आपको देखने को मिलेगी और जो कुछ उन्होंने
  4303. 3:01:49की किया महेश्वर में वो मैं आपको अभी
  4304. 3:01:51बताने वाला हूं। तो इसको वो छोड़ देंगी और
  4305. 3:01:53वो अपनी राजधानी कहां बनाएंगी? महेश्वर और
  4306. 3:01:56महेश्वर में ही उन्होंने अपने पूरे जीवन
  4307. 3:01:57को बिताया था। महेश्वर उनकी राजधानी बनती
  4308. 3:02:00है। तो महेश्वर को राजधानी बनाने वाली थी
  4309. 3:02:02हमारी देवी अहिल्याबाई होलकर। तो यह
  4310. 3:02:05शिफ्टिंग कैसे हुई? आइए इसको समझते हैं।
  4311. 3:02:07सबसे पहले हम उनका जो चित्रण कर रहे हैं,
  4312. 3:02:11वह एक राजनीतिज्ञ के रूप में कर रहे हैं।
  4313. 3:02:13हम यह कह सकते हैं कि देवी अहिल्याबाई
  4314. 3:02:15होलकर एक महान राजनीतिज्ञ थी। एक कूटनी
  4315. 3:02:18कूटनीतिज्ञ थी जो कूटनीति का जवाब कूटनीति
  4316. 3:02:21से देना जानती थी। जैसे इनके दो किस्से
  4317. 3:02:23हमको मिलते हैं। अहिल्याबाई होलकर एक महान
  4318. 3:02:26कूटनीतिक महिला थी। इसका उदाहरण पेशवा को
  4319. 3:02:29लिखे पत्र में लिख मिलता है। उन्होंने एक
  4320. 3:02:32बार पेशवा को एक लेटर लिखा था अंग्रेजों
  4321. 3:02:34के रिगार्डिंग कि अंग्रेजों के बारे में
  4322. 3:02:36वह क्या सोचती हैं? उन्होंने कहा था कि
  4323. 3:02:38अंग्रेजों के साथ निकटता बढ़ाना भालू के
  4324. 3:02:40साथ निकटता बढ़ाने जैसा है। अन्य पशु तो
  4325. 3:02:43किसी ना किसी तरीके से युक्ति से मारे जा
  4326. 3:02:45सकते हैं। लेकिन भालू को मारना दुष्कर है।
  4327. 3:02:48इसका मतलब यह है कि वो अंग्रेजों को क्या
  4328. 3:02:50समझ रही हैं कि अंग्रेज बड़े चालाक हैं।
  4329. 3:02:52अंग्रेज बड़े पावरफुल हैं और उनके साथ
  4330. 3:02:55निकटता बढ़ाना भालू की तरह भालू से निकटता
  4331. 3:02:58बढ़ाने जैसा है। हम हर जानवर को मारने का
  4332. 3:03:00तरीका ढूंढ सकते हैं। लेकिन भालू को मारने
  4333. 3:03:02का कोई तरीका नहीं। तो यह उनकी एक
  4334. 3:03:04कूटनीतिक है। दूसरी उनकी एक कूटनीतिकता का
  4335. 3:03:07परिचय हमको तब देखने को मिलता है जब पेशवा
  4336. 3:03:10का भाई होता है राघोबा। इनका किस्सा मैं
  4337. 3:03:12आपको बताता हूं। आपको सुनना पड़ेगा।
  4338. 3:03:15मालेराव होलकर जब 9 साल 9 महीने शासन करने
  4339. 3:03:19के बाद उनकी मृत्यु हो गई। बहुत यंग एज
  4340. 3:03:21में उनकी डेथ हो गई। तो पेशवा थे उस समय
  4341. 3:03:24मराठा साम्राज्य के जो पेशवा थे उनका नाम
  4342. 3:03:26था माधवराव प्रथम। ठीक है? तो माधवराव जो
  4343. 3:03:29प्रथम हैं उनके कौन लगते हैं? माधवराव
  4344. 3:03:32प्रथम के लगते थे चाचा और उससे पहले जो
  4345. 3:03:34पेशवा थे जिनका नाम था रघुनाथ
  4346. 3:03:39बालाजी बाजीराव आपने शायद सुना होगा मैं
  4347. 3:03:42लिख देता हूं
  4348. 3:03:44तभी आपको समझ में आएगा बालाजी बाजीराव
  4349. 3:03:47बालाजी बाजीराव को सामान्यता बाजीराव
  4350. 3:03:51बालाजीराव के नाम से जानते हैं। बालाजी
  4351. 3:03:53बाजीराव इनको कहते हैं। इनका जो टाइम
  4352. 3:03:55पीरियड है वो 1740 से लेके रहा था 1761
  4353. 3:03:58तक। 61 में इनकी मृत्यु हो गई और इनकी
  4354. 3:04:00मृत्यु के बाद इनका बेटा गद्दी पर बैठा था
  4355. 3:04:02जिसका नाम था माधवराव फर्स्ट। यह पेशवा
  4356. 3:04:05बने थे जिनका नाम था माधवराव फर्स्ट।
  4357. 3:04:07माधवराव फर्स्ट जो हैं वो 1761 से लेके
  4358. 3:04:101772 तक पेशवा रहे। तो यह जो बालाजी
  4359. 3:04:13बाजीराव हैं इनके एक भाई थे। इनका किस्सा
  4360. 3:04:16आप सुन लीजिए। इनके एक भाई थे और इनके भाई
  4361. 3:04:19का नाम राघोवा उर्फ रघुनाथ राव था। राघोबा
  4362. 3:04:24उर्फ रघुनाथ राव। तो अब जब यह गद्दी पर
  4363. 3:04:27बैठी 66 का समय चल रहा है तो 66 में पेशवा
  4364. 3:04:30कौन है? अब आप इससे समझ सकते हो। पेशवा का
  4365. 3:04:32नाम है माधवराव प्रथम। देखिए टाइम पीरियड
  4366. 3:04:34लिखा है। तो
  4367. 3:04:37राघव बाग को पता चला कि मालवा की जो
  4368. 3:04:39शासिका है मतलब मालवा का शासक मर चुका है
  4369. 3:04:42और अब मालवा का शासन एक महिला के हाथों
  4370. 3:04:44में है। तो किसी ने उनको सलाह दी कि मालवा
  4371. 3:04:46पे हमला करके यानी इंदौर पे हमला करके इस
  4372. 3:04:48जागीर को जब्त कर लिया जाए। तो राघव अपनी
  4373. 3:04:51सेना लेकर उन पर हमला कर देते हैं। तो अब
  4374. 3:04:54जरा सुनना कि जो देवी अहिल्याबाई होलकर है
  4375. 3:04:58वो क्या करने जा रही हैं? सबसे पहले तो
  4376. 3:05:00उन्हें पता है कि अगर यह लड़ने के लिए आ
  4377. 3:05:02रहे हैं तो लड़ने के लिए हमको तैयार रहना
  4378. 3:05:04पड़ेगा। तो इसीलिए उन्होंने सबसे पहले
  4379. 3:05:05जानते हो क्या किया? उनके पड़ोस में जो
  4380. 3:05:08शासनकर्ते थे जिनसे उनके बहुत ही अच्छे
  4381. 3:05:11संबंध थे वो थे ग्वालियर के सिंधिया और
  4382. 3:05:13ग्वालियर में इस समय शासन था महाजी
  4383. 3:05:15सिंधिया का। कभी आप ये दोनों डायनेस्टी को
  4384. 3:05:17कंपैरिजन करके पढ़ेंगे तो आपको समझ में
  4385. 3:05:19आएगा महाद जी कितने ग्रेट शासक थे। महाजी
  4386. 3:05:23सिंधिया से उन्होंने हेल्प मांगी कि भैया
  4387. 3:05:25ऐसीऐसी बात है और आप हमारी मदद करिए। तो
  4388. 3:05:28महाजी सिंधिया ने उनको वादा कर दिया कि वो
  4389. 3:05:30अपनी सेना लेकर तैयार खड़े हैं। आ जाएंगे
  4390. 3:05:32पीछे से। तो एक तो उन्होंने अपनी सेना
  4391. 3:05:34तैयार कर ली लड़ने के लिए। दूसरा उन्होंने
  4392. 3:05:36देखो क्या कहा। कूटनीतिकता का एक अन्य
  4393. 3:05:38उदाहरण राघोबा के इंदौर पर चढ़ाई के समय
  4394. 3:05:42लिखे पत्र से प्राप्त होता है। जिसमें
  4395. 3:05:43उन्होंने राघोबा को लिखा। देखो क्या लिखा
  4396. 3:05:46राघोबा मतलब पेशवा का भाई जो उनकी रियासत
  4397. 3:05:48को जब्त करने आ रहा है उसको लिखा क्या
  4398. 3:05:50लिखा कि ध्यान से सुनिएगा आप जैसे वीरों
  4399. 3:05:54को यह धर्म नहीं है आप जैसे वीरों का यह
  4400. 3:05:56धर्म नहीं है कि आप एक अबला यानी एक अबला
  4401. 3:05:59नारी पर चढ़ाई करें फिर भी मैं हर तरह से
  4402. 3:06:02क्या हूं तैयार हूं मतलब मैं लड़ने के लिए
  4403. 3:06:04तैयार हूं मैं हर तरह से तैयार हूं अगर
  4404. 3:06:06मैं हार गई तो इसमें मुझे कोई बुरा नहीं
  4405. 3:06:09कहेगा परंतु दुर्भाग्यवश यदि आपकी पराजय
  4406. 3:06:13हुई तो संसार क्या कहेगा इस पर जारी इस पर
  4407. 3:06:16जरा विचार कीजिएगा। यानी पूरी दुनिया आप
  4408. 3:06:18पर हंसेगी अगर आप हार गए। इस जवाब को
  4409. 3:06:21सुनकर राघोबा ने यह कहा। राघोबा ने क्या
  4410. 3:06:23कहा? राघव बाबा को शर्म आई और उन्होंने
  4411. 3:06:25कहा कि नहीं आप गलत समझ रही हैं। मैं तो
  4412. 3:06:28आपके पुत्र की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त
  4413. 3:06:30करने के लिए आ रहा हूं और फिर राघोबा लौट
  4414. 3:06:33जाते हैं। तो इन तीन उदाहरण से हमको देखने
  4415. 3:06:35को पता चलता है कि वह एक महान राजनीतिज्ञ
  4416. 3:06:38थी और कूटनीति का जवाब कूटनीति से देना
  4417. 3:06:40जानती थी। इनमें से प्रश्न भी बनेंगे याद
  4418. 3:06:43रखिएगा। महाजी सिंधिया के साथ उनके अच्छे
  4419. 3:06:45संबंध थे। कई समय पर महाजी सिंधिया ने
  4420. 3:06:47उनसे मदद ली और उन्होंने मांझी सिंधिया की
  4421. 3:06:49मदद की। अब आगे बढ़ते हैं।
  4422. 3:06:52दूसरा उनका काम है दूसरा जो पहलू है वो है
  4423. 3:06:55उनको लोक कल्याणकारी कार्यों के रूप में
  4424. 3:06:57देखना या जन कल्याणकारी कार्य आप ऐसे समझ
  4425. 3:07:00लीजिए कि उनका एकमात्र बेटा जिसकी मृत्यु
  4426. 3:07:03हो चुकी है। उनके पति की मृत्यु हो चुकी
  4427. 3:07:05है। उनकी बेटी की मृत्यु हो चुकी। उनके
  4428. 3:07:06दामाद की मृत्यु हो चुकी। तो उनका कोई
  4429. 3:07:08नहीं है। तो उन्होंने क्या कर लिया कि जो
  4430. 3:07:11समस्त प्रजा है जो उनके राज्य की जो समस्त
  4431. 3:07:14प्रजा है उनका राज्य तो छोड़िए। समस्त देश
  4432. 3:07:17की जो जनता थी उस समय पूरे देश को
  4433. 3:07:19उन्होंने अपनी जनता मान लिया अपना पुत्र
  4434. 3:07:21मान लिया और समस्त प्रजा के लिए लोक
  4435. 3:07:24कल्याणकारी कार्य किए और जो अपना खजाना है
  4436. 3:07:27पूरा उस खजाने का जो द्वार है पूरा लोक
  4437. 3:07:30कल्याणकारी कार्यों के लिए खोल दिया। यानी
  4438. 3:07:32देश में कोई भी मंदिर टूटा हो। मैं अभी
  4439. 3:07:35दो-तीन दिन पहले ही महेश्वर गया था।
  4440. 3:07:37बाकायदा एक मैप बना हुआ है कि उन्होंने
  4441. 3:07:39देश के किन-किन मंदिरों का निर्माण
  4442. 3:07:40करवाया, किनको दान दिया, किनकी मरम्मत
  4443. 3:07:42करवाई। तो देखो लगभग उन्होंने 30 साल शासन
  4444. 3:07:45किया। अपने 30 वर्ष के शासनकाल में
  4445. 3:07:47अहिल्याबाई ने अनेकों मंदिर, मंदिर,
  4446. 3:07:50घाटों, धर्मशालाओं, बाबड़ियों, कुओं आदि का
  4447. 3:07:53निर्माण करवाया। यानी हर वो जरूरत की चीज
  4448. 3:07:57जो आम आदमी के लिए है, सड़कों का निर्माण
  4449. 3:07:59करवाया। पेड़ लगवाए सड़कों पे, छांव के
  4450. 3:08:01लिए। कुएं बनवाए, तालाब बनवाए, घाट बनवाए।
  4451. 3:08:04सारी चीजों का निर्माण उन्होंने करवाया।
  4452. 3:08:06सराय यानी धर्मशालाओं का निर्माण उन्होंने
  4453. 3:08:08करवाया। अहिल्याबाई होलकर ने देश भर में
  4454. 3:08:10लगभग 65 मंदिरों का निर्माण करवाया। 65
  4455. 3:08:13टेंपल्स उन्होंने बनवाए थे। जिनमें काशी
  4456. 3:08:17का विश्वनाथ मंदिर जो सबसे प्रसिद्ध मंदिर
  4457. 3:08:19है काशी विश्वनाथ मंदिर। गुजरात का सोमनाथ
  4458. 3:08:21मंदिर जो कि सबसे प्रसिद्ध शिवलिंग है
  4459. 3:08:23भारत का। इसके अलावा गया का विष्णुपद
  4460. 3:08:26मंदिर है। कांगड़ा का बैजनाथ मंदिर है।
  4461. 3:08:29याद रखिएगा। एलोरा के गणेश्वर मंदिर का
  4462. 3:08:32जीर्णोद्धार करवाया। यह मंदिर उन्होंने
  4463. 3:08:34नहीं बनवाए। इन मंदिरों की उन्होंने
  4464. 3:08:35मरम्मत करवाई क्योंकि ये किसी ना किसी
  4465. 3:08:38कारण से टूट गए थे। औरंगजेब के शासनकाल
  4466. 3:08:40में सोमनाथ मंदिर को काशी विश्वनाथ मंदिर
  4467. 3:08:42को तोड़ दिया गया था। तो इन मंदिरों की
  4468. 3:08:44उन्होंने पुनः मरम्मत करवाई या
  4469. 3:08:45जीर्णोद्धार करवाया। इसके अलावा उज्जैन
  4470. 3:08:48हरिद्वार, नासिक, अयोध्या, कांची,
  4471. 3:08:50द्वारका, बद्रीनाथ, केदारनाथ आदि स्थानों
  4472. 3:08:52पर कई मंदिरों का निर्माण करवाया।
  4473. 3:08:54अहिल्याबाई द्वारा सोमनाथ, काशी विश्वनाथ,
  4474. 3:08:56बद्रीनाथ, केदारनाथ सहित अन्य प्रमुख
  4475. 3:08:58तीर्थ स्थलों पर कई निर्माण कार्य करवाए
  4476. 3:09:00गए। जो आप देख रहे हैं ना ये वही मंदिर है
  4477. 3:09:03बद्रीनाथ और केदारनाथ उत्तराखंड वाले देश
  4478. 3:09:06के प्रत्येक कोने में नॉर्थ से ले साउथ और
  4479. 3:09:08ईस्ट से ले वेस्ट तक जगह-जगह पर उन्होंने
  4480. 3:09:10मंदिर बनवाए पुराने मंदिरों का पुनः
  4481. 3:09:12निर्माण करवाया घाटों का निर्माण करवाया
  4482. 3:09:14ये सारी चीजें उन्होंने बनवाई अब आते हैं
  4483. 3:09:16उनके सबसे इंपॉर्टेंट क्वेश्चन पर इसमें
  4484. 3:09:19से सारे क्वेश्चन बनेंगे एमपीपीएससी के
  4485. 3:09:21लिए याद रखना ये जो मंदिर मैंने बताए ये
  4486. 3:09:22सब आपको याद रखना पड़ेगा खासकर गया का
  4487. 3:09:24विष्णुपद मंदिर जो अलग से भी बताता हूं
  4488. 3:09:26अभी अहिल्याबाई ने महेश्वर के निकट अपनी
  4489. 3:09:30राजधानी का निर्माण करवाया और वहां पर
  4490. 3:09:32सुंदर घाट और अन्य स्थापत्य का निर्माण
  4491. 3:09:35करवाया। यानी जैसा मैंने आपको बताया कि
  4492. 3:09:37महेश्वर उन्होंने अपनी राजधानी बनवाई। ठीक
  4493. 3:09:39है? देखो बनारस का एक बहुत ही प्रसिद्ध
  4494. 3:09:43घाट है जिसका नाम है मणिकर्णिका घाट। तो
  4495. 3:09:45मणिकर्णिका घाट बनारस में किसने बनवाया
  4496. 3:09:47था? देवी अहिल्याबाई होलकर ने। गया का
  4497. 3:09:50अष्टपदी मंदिर का निर्माण किसने करवाया
  4498. 3:09:51था? अहिल्याबाई होलकर ने। महेश्वर घाट का
  4499. 3:09:54निर्माण किसने करवाया था? अहिल्याबाई
  4500. 3:09:55होलकर ने। महेश्वर के निकट किले का
  4501. 3:09:58निर्माण किसने करवाया? अहिल्याबाई होलकर
  4502. 3:09:59ने राजधानी इंदौर से महेश्वर कौन ले गई?
  4503. 3:10:02अहिल्याबाई होलकर। तो ये सारे जो पॉइंट्स
  4504. 3:10:04आप देख रहे हैं वो एग्जाम के लिए बहुत ही
  4505. 3:10:06ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अब मैं आपको कुछ और
  4506. 3:10:09काम उनके बताने वाला हूं शिव भक्त के रूप
  4507. 3:10:11में।
  4508. 3:10:15सॉरी
  4509. 3:10:17अगर हम देखेंगे कि अहिल्याबाई होलकर के
  4510. 3:10:19इन्हीं जन कल्याणकारी कार्यों के कारण
  4511. 3:10:21जनता उनको क्या कहने लगी? देवी के नाम से
  4512. 3:10:24संबोधित करने लगी। और उनकी उपलब्धियों को
  4513. 3:10:26देखने के लिए देखते हुए जो अभी वर्तमान
  4514. 3:10:29गवर्नमेंट रही हैं भारत मध्य प्रदेश सरकार
  4515. 3:10:31की उनके द्वारा कई सारे सम्मान कई सारी
  4516. 3:10:34योजनाएं और इंदौर का नामकरण भी चेंज किया
  4517. 3:10:36गया। जैसे कि 1995 में याद रखिएगा भारत
  4518. 3:10:40सरकार ने उनके नाम पर एक डाक टिकट जारी
  4519. 3:10:43किया था भारत सरकार ने। इंदौर स्थित जो
  4520. 3:10:46विश्वविद्यालय है जिसका नाम है देवी
  4521. 3:10:48अहिल्याबाई होलकर विश्वविद्यालय। तो उनके
  4522. 3:10:50नाम पर इंदौर का विश्वविद्यालय का नाम कर
  4523. 3:10:52दिया गया। साथ में जो इंदौर का हवाई अड्डा
  4524. 3:10:54है उसका नाम भी क्या कर दिया गया? देवी
  4525. 3:10:56अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा। तो एयरपोर्ट
  4526. 3:11:00प्लस विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर
  4527. 3:11:02किया गया है। साथ ही अगर हम देखें तो मध्य
  4528. 3:11:04प्रदेश की जो सबसे प्रसिद्ध शहर है इंदौर।
  4529. 3:11:07इंदौर को महा मां अहिल्याबाई नगरी यानी
  4530. 3:11:11इंदौर का जो नाम है वह अहिल्याबाई नगरी के
  4531. 3:11:13नाम से जाना जाता है। इस प्रकार याद
  4532. 3:11:15रखिएगा। उनके शासनकाल की जो तुलना है वह
  4533. 3:11:18ब्रिटेन की साम्राज्ञ जो थी ब्रिटेन की
  4534. 3:11:20महान महारानी थी जिनका नाम था एलिजाबेथ
  4535. 3:11:23कैथरीन ऑफ एलिजाबेथ से उनकी तुलना की जाती
  4536. 3:11:26है यानी हमारी अहिल्याबाई होलकर के
  4537. 3:11:28शासनकाल की तुलना इंग्लैंड की एक महारानी
  4538. 3:11:30से की जाती है क्योंकि उनका शासनकाल काफी
  4539. 3:11:32प्रसिद्ध रहा। अब आ जाते हैं आगे एक लास्ट
  4540. 3:11:34पार्ट है। जैसे अगर आपने देखा होगा कि
  4541. 3:11:38उनके द्वारा ज्यादातर देश के शिवलिंगों का
  4542. 3:11:40निर्माण करवाया यानी शिवालयों का निर्माण
  4543. 3:11:43करवाया। इसीलिए हम ये कहते हैं कि वो एक
  4544. 3:11:44महान शिव भक्त थी। फिर भी इस बात को मैं
  4545. 3:11:47इस तरीके से तीनों पार्ट में इसलिए बता
  4546. 3:11:48रहा हूं क्योंकि अगर मुख्य परीक्षा में
  4547. 3:11:50आपको लिखने को मिले तो आप किस तरीके से
  4548. 3:11:52बताएंगे? एक शिव भक्त के रूप में, एक लोक
  4549. 3:11:54कल्याणकारी कार्यों के रूप में और एक
  4550. 3:11:56कूटनीतिक के रूप में उनका परिचय आप कैसे
  4551. 3:11:58देंगे? अहिल्याबाई होलकर
  4552. 3:12:02याद रखिएगा अहिल्याबाई जो होलकर हैं वो
  4553. 3:12:05धार्मिक एवं दार्शनिक प्रवृत्ति की महिला
  4554. 3:12:08थी। इसीलिए उन्हें दार्शनिक रानी भी कहा
  4555. 3:12:10जाता है। अहिल्याबाई स्वभाव से शिव भक्त
  4556. 3:12:12थी। याद रखिएगा महान शिव भक्त थी। इसी
  4557. 3:12:15कारण उन्होंने अपनी राजधानी नर्मदा के तट
  4558. 3:12:18पर बनाई और वहां पर महेश्वर का मंदिर
  4559. 3:12:20बनवाया जो कि एक शिवलिंग है।
  4560. 3:12:24उन्होंने संपूर्ण भारत में मुख्यता शिव
  4561. 3:12:27मंदिरों एवं अनेक घाटों का निर्माण कराया।
  4562. 3:12:30जिसमें अभी आपको बताया था कौन-कौन से
  4563. 3:12:32मंदिर प्रमुख थे। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ
  4564. 3:12:35आदि जो भारत के प्रसिद्ध शिवलिंग हैं उनका
  4565. 3:12:37निर्माण करवाया था। शिव मंदिरों का
  4566. 3:12:39निर्माण। इसके अलावा गया, अयोध्या, मथुरा,
  4567. 3:12:41हरिद्वार ये सारी बातें रिपीट हो गई हैं
  4568. 3:12:44और कुछ घाटों का निर्माण भी उनके द्वारा
  4569. 3:12:46करवाया गया था। वो राज्य का प्रबंधन
  4570. 3:12:48अहिल्याबाई ने एक ट्रस्टी के रूप में
  4571. 3:12:49किया। देवी अहिल्याबाई का एक सेंटेंस अभी
  4572. 3:12:52मैं आपको बताऊंगा। उन्होंने कहा था कि जो
  4573. 3:12:54समस्त उनका राज्य है उसकी वैसे तो वह
  4574. 3:12:56मालिक हैं। लेकिन उन्होंने कहा मैं केवल
  4575. 3:12:57एक ट्रस्टी हूं और ट्रस्टी के रूप में
  4576. 3:12:59उन्होंने शासन किया। पूरा का पूरा जो काम
  4577. 3:13:01है उन्होंने अपने किसके लिए किया था? अपनी
  4578. 3:13:03प्रजा के लिए कर दिया।
  4579. 3:13:06डॉ. हीरालाल शर्मा एक इतिहासकार हैं। वो
  4580. 3:13:08उनके बारे में लिखते हैं और जानते हैं
  4581. 3:13:10क्या लिखते हैं उनके बारे में। उनके बारे
  4582. 3:13:11में लिखते हैं और कहते हैं कि अहिल्याबाई
  4583. 3:13:14होलकर ने अहिल्याबाई होलकर एक श्रेष्ठ एवं
  4584. 3:13:17आदर्श शासिका थी। जिन्होंने अपनी प्रजा के
  4585. 3:13:19लिए सच्चे अर्थ में राम राज्य की शुरुआत
  4586. 3:13:21की। अतः भारतीय इतिहास में उनका नाम सदैव
  4587. 3:13:24स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा। ये
  4588. 3:13:26स्टेटमेंट पूछा जाए किसने कहा था? तो याद
  4589. 3:13:28रखिएगा डॉ. हीरालाल शर्मा। इसके अलावा एक
  4590. 3:13:31अंग्रेज अधिकारी है जिसका नाम था जॉन
  4591. 3:13:33मेलकम। जॉन मेलकम ने अपनी एक मेमोरी लिखी
  4592. 3:13:36थी जिसका नाम है मेमोरी ऑफ मालवा। उसमें
  4593. 3:13:38उनके बारे में लिखा। देखें क्या लिखा है।
  4594. 3:13:41वो लिखता है कि अहिल्याबाई के लिए जो कुछ
  4595. 3:13:44कहा जाता है वह निसंदेह ठीक है। उसमें
  4596. 3:13:47संदेह को स्थान नहीं है। वास्तव में वह एक
  4597. 3:13:49अद्वितीय और असाधारण मूर्ति थी। उनको
  4598. 3:13:52अभिमान बिल्कुल भी नहीं था। उनको अभिमान
  4599. 3:13:54छू तक ना पाया था। धर्म में कट्टर होते
  4600. 3:13:56हुए भी सहनशीलता की वह उज्जवल प्रतिमा थी।
  4601. 3:14:00यद्यपि वह एक तंत्री शासिका थी। तथापि
  4602. 3:14:03उनके प्रत्येक कार्य में उच्च विवेक,
  4603. 3:14:04अद्वितीय नीतिमत्ता और धर्म की छाप रहती
  4604. 3:14:07थी। यही कारण है कि आज भी मालवा में लोग
  4605. 3:14:10उन्हें देवी के नाम से या ईश्वरीय अवतार
  4606. 3:14:13के नाम से संबोधित करते हैं। तो यह थी
  4607. 3:14:17हमारी देवी अहिल्याबाई होलकर। अब इनका
  4608. 3:14:19लास्ट थोड़ा सा पार्ट मैं आपको बताना
  4609. 3:14:21चाहता हूं जो मेरा अनुभव रहा है अभी।
  4610. 3:14:23देखिए यहां पर कुछ चीजें आपको दिख रही
  4611. 3:14:25होंगी जिसमें एक पिक्चर में मैं दिख रहा
  4612. 3:14:27हूं। देखिए ये महेश्वर स्थित उनकी एक
  4613. 3:14:29स्टैचू बनी है। ये स्टैचू कहां पर है?
  4614. 3:14:32महेश्वर में है। याद रखिएगा। ये जो आप देख
  4615. 3:14:35रहे हैं ये उनकी समाधि है। 1795 में उनकी
  4616. 3:14:38मृत्यु हुई थी और उनकी मृत्यु के बाद जो
  4617. 3:14:40उनकी समाधि है। याद रखिएगा। उनकी समाधि
  4618. 3:14:43कहां पर है? तो उनकी समाधि महेश्वर में
  4619. 3:14:45बनी है। जिस तस्वीर के सामने जिस
  4620. 3:14:47स्ट्रक्चर के सामने मैं खड़ा हूं ये उनकी
  4621. 3:14:49समाधि है। तो उनकी समाधि कहां पर है?
  4622. 3:14:51महेश्वर में है। आप जानते हो उनकी समाधि
  4623. 3:14:53पर जो उनकी मूर्ति है उस मूर्ति के बाहर
  4624. 3:14:56उनके वर्ड लिखे हुए हैं। उनके वर्ड एज इट
  4625. 3:14:58इज़ जानते हो क्या है? वो लिखती हैं।
  4626. 3:15:00उन्होंने कहा कि ईश्वर ने मुझ पर जो उत्तर
  4627. 3:15:03दायित्व सौंपा है उसे मुझे निभाना है।
  4628. 3:15:05मेरा काम प्रजा को सुखी रखना है। मैं अपने
  4629. 3:15:08प्रत्येक काम के लिए जिम्मेदार हूं।
  4630. 3:15:10सामर्थ्य और सत्ता के बल पर मैं जहां जो
  4631. 3:15:14कुछ भी कर रही हूं उसका ईश्वर के यहां
  4632. 3:15:16मुझे जवाब देना होगा। मेरा यहां कुछ नहीं
  4633. 3:15:19है। जिसका है उसी के पास भेजती हूं। जो
  4634. 3:15:22कुछ लेती हूं वह मेरे ऊपर कर्ज है। ना
  4635. 3:15:25जाने मैं कैसे चुका पाऊंगी। तो ये उनके
  4636. 3:15:28वर्ड हैं जो उनकी समाधि पर लिखे हैं। देवी
  4637. 3:15:30अहिल्याबाई होलकर जिन्होंने समस्त प्रजा
  4638. 3:15:33को अपनी संतानवत प्रेम किया और समस्त
  4639. 3:15:35प्रजा के कल्याण के लिए अनेक कार्य करवाए।
  4640. 3:15:38कुएं, मंदिर, तालाब, घाट, सराय, सड़कें सब
  4641. 3:15:42बनवाया। इसीलिए लोग उन्हें किसके नाम से?
  4642. 3:15:44देवी के नाम से जानते हैं। एक और खास बात
  4643. 3:15:46ये दोनों बातें कहां पर हो गई? महेश्वर
  4644. 3:15:48में मूर्ति भी और यह समाधि भी। यह जो आप
  4645. 3:15:51देख रहे हैं,
  4646. 3:15:53यह महेश्वर का किला है।
  4647. 3:15:56और इस महेश्वर किले का निर्माण भी हमारी
  4648. 3:15:58किसने करवाया है? देवी अहिल्याबाई होलकर
  4649. 3:16:01ने करवाया है। यह नर्मदा नदी के तट पर है
  4650. 3:16:04और बिल्कुल इसके जस्ट सामने नर्मदा नदी
  4651. 3:16:06है। आप बिलीव नहीं मानेंगे। अभी जब मैं
  4652. 3:16:09महेश्वर गया तो मुझे समझ में आया कि लोग
  4653. 3:16:11उन्हें क्यों देवी कहते हैं। तो पहले तो
  4654. 3:16:13यह फोर्ट है। फोर्ट तो चलिए सभी बनवाते
  4655. 3:16:16हैं। लेकिन फोर्ट के अंदर जब हम यहां से
  4656. 3:16:18ऊपर कर जाते हैं तो ये उनकी सबसे पहले
  4657. 3:16:20समाधि मिलती है और एक हिस्से में इसके
  4658. 3:16:23यहां पर उनका एक सिंहासन बना हुआ है जहां
  4659. 3:16:25वो बैठती थी। और आप बिलीव नहीं मानेंगे जब
  4660. 3:16:27मैं वहां गया तो इतना सिंपल था सब कुछ। यह
  4661. 3:16:30देखिए एक सामान्य सी गद्दी है जहां पर वो
  4662. 3:16:32यहां बैठती थी। यहां पर उनका सिंहासन लगता
  4663. 3:16:35था। जहां पर बैठकर वो न्याय करती थी। और
  4664. 3:16:37ये जो पूरा स्ट्रक्चर आप देख रहे हैं बगल
  4665. 3:16:39का ऐसा लगेगा कि एक बहुत सामान्य सी एक वो
  4666. 3:16:42बनी हुई है ना कोई बड़ा महल सा बना है
  4667. 3:16:44बहुत सामान्य सा है जैसे एक संत की कुटिया
  4668. 3:16:46होती हो तो मतलब यह है कि उन्होंने अपने
  4669. 3:16:49जीवन को एक संत प्रवृत्ति का रखा हुआ था
  4670. 3:16:51बहुत सामान्य सी उनकी दिनचर्या थी जिस
  4671. 3:16:53तरीके से वो रहती थी और एक चीज जो हम
  4672. 3:16:56जानते हैं उनके बारे में यह तस्वीर जरूर
  4673. 3:16:58देखिएगा हम जब पढ़ते हैं उनके बारे में तो
  4674. 3:17:00हम यह पढ़ते हैं कि महेश्वर में उनके
  4675. 3:17:02द्वारा उस समय साड़ी उद्योग स्थापित
  4676. 3:17:05करवाया गया था जिससे कि महेश्वर की जो
  4677. 3:17:07जनता है उसको रोजगार मिल सके। साड़ी
  4678. 3:17:10उद्योग स्थापित किया गया था और उनके
  4679. 3:17:12द्वारा स्थापित साड़ी उद्योग आज भी वैसे
  4680. 3:17:16ही चल रहा है जैसे उनके द्वारा स्थापित
  4681. 3:17:18किया गया था। यह जो तस्वीर है यह वहां के
  4682. 3:17:21साड़ी उद्योग की है जो उनके किले के अंदर
  4683. 3:17:23ही है। यानी महेश्वर में आज भी उस किले के
  4684. 3:17:26अंदर वो साड़ी उद्योग चल रहा है जो उस समय
  4685. 3:17:28से उनके द्वारा स्थापित किया गया था जिससे
  4686. 3:17:30उनके लोगों को रोजगार मिले। तो इसीलिए
  4687. 3:17:33महेश्वर की साड़ियां बहुत प्रसिद्ध हैं।
  4688. 3:17:35मध्य प्रदेश में दो जगह की साड़ियां
  4689. 3:17:37प्रसिद्ध हैं। एक चंदेरी की और एक महेश्वर
  4690. 3:17:39की। तो ये महेश्वर की साड़ी हैं और ये
  4691. 3:17:41साड़ियां उसी महेश्वर के किले में बनती
  4692. 3:17:44हैं। और यह जो जगह है उनके सिंहासन से
  4693. 3:17:46मतलब उनका जो दरबार लगता था जहां वो बैठती
  4694. 3:17:49थी उसके पास में ही है। तो ये पूरा का
  4695. 3:17:51पूरा जो चैप्टर था जो मैंने अभी आप लोगों
  4696. 3:17:54को बताया। यह था हमारे देवी या लोकमाता
  4697. 3:17:58जिनका नाम है देवी अहिल्याबाई होलकर के
  4698. 3:18:00बारे में। मुझे उम्मीद है आप लोगों को जो
  4699. 3:18:03कुछ मैंने अभी बताया देवी अहिल्याबाई
  4700. 3:18:05होलकर के बारे में वह आपको बहुत अच्छे से
  4701. 3:18:07समझ में आया होगा कि देवी अहिल्याबाई
  4702. 3:18:09होलकर कौन थी? उनके पिता का नाम क्या था?
  4703. 3:18:12माता का नाम क्या था? उनकी शादी किससे हुई
  4704. 3:18:14थी? उनके बेटे का नाम, बेटी का नाम, दामाद
  4705. 3:18:17का नाम और कैसे वो जो है गद्दी पर बैठती
  4706. 3:18:20हैं? और उनके शासन में सबसे ज्यादा मदद की
  4707. 3:18:24थी उनके सेनापति जिनका नाम था तुकोजीराव
  4708. 3:18:26होलकर ने। महान शिव भक्त के रूप में एक और
  4709. 3:18:29इंपॉर्टेंट बात थी जो शायद इसमें मिस हो
  4710. 3:18:30गई कि उन्होंने मंदिर तो बनवाए, शिवालय तो
  4711. 3:18:32बनवाए, मंदिरों की मरम्मत तो करवाई लेकिन
  4712. 3:18:35उन्होंने ऐसे सिक्के भी चलवाए थे जिन
  4713. 3:18:37सिक्कों पर नंदी, त्रिशूल और शिवलिंग बना
  4714. 3:18:40था। तो कभी पूछा जाए कि शिवलिंग वाले
  4715. 3:18:42सिक्के याद रखिएगा होल किस होलकर शासक ने
  4716. 3:18:45चलवाए थे? तो वो हैं हमारी अहिल्याबाई
  4717. 3:18:47होलकर। और उनके इन्हीं कार्यों की वजह से
  4718. 3:18:49उनके और यह एक और चीज थी इनकी कि यह न्याय
  4719. 3:18:52के लिए भी बड़ी प्रसिद्ध थी। बहुत
  4720. 3:18:53न्यायप्रिय शासिका थी। इसीलिए इन्हें भारत
  4721. 3:18:55की आदर्श शासिका के तौर पर जाना जाता है।
  4722. 3:18:58मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को जो कुछ
  4723. 3:19:00मैंने बताया देवी अहिल्याबाई होलकर के
  4724. 3:19:02बारे में वो आपको अच्छा लगेगा। अब मैं
  4725. 3:19:03आपको दो क्वेश्चन पूछता हूं जो आपको कमेंट
  4726. 3:19:05सेक्शन में बताना है। एक प्रश्न है। आपको
  4727. 3:19:08बताना है कि उनके दामाद का नाम क्या था?
  4728. 3:19:10अगर आपने ये पूरा वीडियो देखा है तो आप
  4729. 3:19:12उनके दामाद का नाम कमेंट सेक्शन में
  4730. 3:19:14बताएंगे। और दूसरा एक क्वेश्चन आपको बताना
  4731. 3:19:16है कि
  4732. 3:19:18दूसरा आपको एक क्वेश्चन बना बताना है कि
  4733. 3:19:20गया में उन्होंने किस मंदिर का निर्माण
  4734. 3:19:22करवाया था? तो गया के किस प्रसिद्ध मंदिर
  4735. 3:19:25का निर्माण करवाया था? यह कमेंट सेक्शन
  4736. 3:19:26में बताइएगा और उनके दामाद का नाम क्या
  4737. 3:19:29था? यह कमेंट सेक्शन में बताइएगा। मिलते
  4738. 3:19:31हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए जय
  4739. 3:19:34हिंद। थैंक यू।
  4740. 3:19:49नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एमपीपीएससी
  4741. 3:19:52स्टडी आई के पर बहुत-बहुत स्वागत है।
  4742. 3:19:54उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन
  4743. 3:19:56लगाकर पढ़ रहे होंगे। दोस्तों, आप सभी को
  4744. 3:19:59यह सीरीज काफी पसंद आ रही है। मैंने आप
  4745. 3:20:01लोगों का फीडबैक देखा और इसी क्रम में मैं
  4746. 3:20:04आपके लिए लाया हूं एक बहुत ही इंपॉर्टेंट
  4747. 3:20:07व्यक्तित्व जिनका नाम है रानी कमलापति।
  4748. 3:20:09देखिए रानी कमलापति कौन है? आपने यह
  4749. 3:20:11थंबनेल देख लिया होगा। इन्हें भोपाल की
  4750. 3:20:14अंतिम हिंदू रानी या अंतिम एक गोंड रानी
  4751. 3:20:16के तौर पर जाना जाता है। रानी कमलापति का
  4752. 3:20:19जो इतिहास है वह काफी फेमस है और इनका
  4753. 3:20:22इतिहास में अपना एक योगदान है मध्य प्रदेश
  4754. 3:20:24के हम सब जानते हैं कि वर्तमान में जो
  4755. 3:20:26हमारी मध्य प्रदेश सरकार है उसने इनके नाम
  4756. 3:20:28पर कुछ चेंजेस भी किए हैं और एग्जाम से
  4757. 3:20:31रिलेटेड भी हैं। तो आज का जो हमारा टॉपिक
  4758. 3:20:33है इसमें हम जानेंगे भोपाल की प्रसिद्ध
  4759. 3:20:36रानी कमलापति के बारे में जिन्हें भोपाल
  4760. 3:20:38की अंतिम हिंदू रानी भी माना जाता है। आइए
  4761. 3:20:40शुरुआत करते हैं। भोपाल की अंतिम रानी।
  4762. 3:20:42देखिए कितनी खूबसूरत रानी है रानी कमलापति
  4763. 3:20:45जिनका यह स्टैचू बना हुआ है भोपाल में। तो
  4764. 3:20:47सबसे पहले समझते हैं कि आखिर यह रानी
  4765. 3:20:49कमलापति कौन थी और इनका संबंध किस जगह से
  4766. 3:20:52है। देखिए अगर हम बात करें 18वीं शताब्दी
  4767. 3:20:55में जो रानी कमलापति थी वो शासन करती थी
  4768. 3:20:58भोपाल पर। ठीक है? और इन्हें जो है इस
  4769. 3:21:01क्षेत्र की गोंड रानी के नाम से जाना जाता
  4770. 3:21:03है। यानी गोंड रानी के रूप में प्रसिद्ध
  4771. 3:21:05थी। इनके जो पति थे उनका नाम था निजाम
  4772. 3:21:07शाह। और निजाम शाह की टोटल सात पत्नियां
  4773. 3:21:09थी और उन सात पत्नियों में सबसे खूबसूरत
  4774. 3:21:12और महत्वपूर्ण पत्नी थी जिनका नाम था रानी
  4775. 3:21:14कमलापति जिन्हें निजाम शाह अत्यधिक प्रेम
  4776. 3:21:16करते थे। ठीक है? अब आगे क्या होता है कि
  4777. 3:21:19जो रानी कमलापति हैं याद रखिएगा ये मैंने
  4778. 3:21:22आपको बता दिया बेसिक सा। अब हम उनके
  4779. 3:21:24बायोडाटा के बारे में बात करते हैं। फिर
  4780. 3:21:25हम यह समझेंगे आखिर क्यों इतिहास में उनका
  4781. 3:21:28योगदान है और क्या वजह है जिसकी वजह से वो
  4782. 3:21:31इतनी चर्चित हैं। देखिए सबसे पहले जन्म की
  4783. 3:21:33बात करते हैं। रानी रानी कमलापति का जन्म
  4784. 3:21:35कहां और कब कैसे हुआ था। देखिए एक जगह है
  4785. 3:21:38जिसका नाम है सलकनपुर। आप सब ने सुना होगा
  4786. 3:21:40सलकनपुर काफी फेमस है यहां पे जो मंदिर है
  4787. 3:21:42उसकी वजह से। सलकनपुर जिला सिहौर। यहां पर
  4788. 3:21:45रियासत हुआ करती आप सलकनपुर रियासत बोल
  4789. 3:21:48सकते हैं या इसे सीहोर रियासत बोल सकते
  4790. 3:21:50हैं। इस रियासत के एक राजा थे जिनका नाम
  4791. 3:21:52था कृपाल सिंह सरौतिया। कहीं-कहीं पर इनके
  4792. 3:21:56जो पिता हैं उनका नाम कृपाराम चौधरी मिलता
  4793. 3:21:58है। कृपाराम चौधरी एक्चुअली में या तो
  4794. 3:22:01इन्हें आप कृपाराम चौधरी कह लो या यही है
  4795. 3:22:03कृपाल सिंह सरतिया। कृपाल सिंह को
  4796. 3:22:06कहीं-कहीं कृपाराम लिख गया है। तो वह
  4797. 3:22:08कृपाल सिंह सरौतिया हैं जो कि सलकनपुर
  4798. 3:22:10रियासत के राजा थे। सलकनपुर रियासत एक
  4799. 3:22:13छोटी रियासत उस रियासत के राजा थे और
  4800. 3:22:15इन्हीं के शासनकाल में याद रखिएगा इनके
  4801. 3:22:18शासनकाल में जो सलकनपुर की प्रजा थी काफी
  4802. 3:22:20खुश थी संपन्न थी और उनके यहां एक खूबसूरत
  4803. 3:22:23कन्या का जन्म होता है। यानी सलकनपुर के
  4804. 3:22:26जो राजा हैं जिनका नाम क्या है? कृपाल
  4805. 3:22:28सिंह सरोतिया कहीं-कहीं इनका नाम कृपाराम
  4806. 3:22:30चौधरी भी मिलता है। और इन्हीं के यहां एक
  4807. 3:22:32कमल जैसी कन्या का जन्म होता है। याद
  4808. 3:22:35रखिएगा वह बचपन से ही कमल की तरह बहुत
  4809. 3:22:37सुंदर थी। इसीलिए उनका नाम रखा गया
  4810. 3:22:39कमलापति।
  4811. 3:22:41ठीक है? उनकी सुंदरता को देखते हुए उनका
  4812. 3:22:43नाम क्या रखा गया? कमलापति रखा गया। तो
  4813. 3:22:45इसमें आपको तीन बातें मिल गई कि वो किसकी
  4814. 3:22:47पुत्री हैं? किस राज्य से संबंधित थी। ठीक
  4815. 3:22:49है? याद रखिएगा। अब आप ये देखेंगे कि जब
  4816. 3:22:52उनका संबंध एक राज परिवार से है तो उनका
  4817. 3:22:54पालन-पोषण कैसे होगा? योद्धा की तरह होगा।
  4818. 3:22:56तो देखिएगा ध्यान से सुनिएगा आगे क्या है
  4819. 3:22:59कि वह बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और साहसी
  4820. 3:23:01थी। शिक्षा, घुड़सवारी, मल युद्ध। मल
  4821. 3:23:04युद्ध होता है यानी इंडिविजुअल जो फाइट
  4822. 3:23:06होती है। ठीक है? और तीर कमान चलाने में
  4823. 3:23:09वह उन्हें महारत हासिल थी। यानी वह बहुत
  4824. 3:23:11ही योग्य थी। इसके अलावा उन्होंने अनेक
  4825. 3:23:14कलाओं में पारंगत होकर कुशल प्रशिक्षण
  4826. 3:23:16प्राप्त कर सेनापति बनी। यानी अपने पिता
  4827. 3:23:19के सैन्य अभियानों में उन्होंने योगदान
  4828. 3:23:21किया था। ठीक है? और पिता के सैन्य बल के
  4829. 3:23:23साथ-साथ अपने महिला साथी दल के साथ
  4830. 3:23:25युद्धों में शत्रुओं से लोहा लेती थी। तो
  4831. 3:23:27कुल मिलाकर उनका पालन-पोषण एक योद्धा की
  4832. 3:23:29तरह हुआ। एक सेनापति की तरह हुआ और उनके
  4833. 3:23:31अंदर एक कुशल नेतृत्व की भावना भी थी।
  4834. 3:23:34पड़ोसी राज्य अक्सर खेत खलियान धन संपत्ति
  4835. 3:23:37लूटने के लिए आक्रमण किया करते थे और
  4836. 3:23:39सलकनपुर याद रखिएगा और सलकनपुर राज्य की
  4837. 3:23:42देखरेख करने की पूरी जिम्मेदारी राजा
  4838. 3:23:44कृपाल सिंह सरतिया और उनकी राजकुमारी
  4839. 3:23:46कमलापति पर थी। यानी जितने भी पड़ोसी
  4840. 3:23:49राज्य सलकनपुर पर आक्रमण करते थे। तो
  4841. 3:23:51सलकनपुर के जो राजा हैं कौन? याद रखिएगा
  4842. 3:23:54कृपाल सिंह सरतिया और उनकी जो पुत्री हैं
  4843. 3:23:57कौन? कमलापति वो युद्ध में नेतृत्व करती
  4844. 3:23:59थी और पड़ोसी राजाओं को डिफीट करती थी।
  4845. 3:24:01इसके बाद कहानी में ट्विस्ट आता है और
  4846. 3:24:04धीरे-धीरे राजकुमारी बड़ी होने लगती हैं।
  4847. 3:24:06फिर राजकुमारी की शादी की बात आएगी।
  4848. 3:24:09राजकुमारी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और
  4849. 3:24:11उनकी खूबसूरती की चर्चा चारों दिशाओं में
  4850. 3:24:13होने लगी। इसी सलकनंदपुर राज्य के पास में
  4851. 3:24:15एक राज्य था बाड़ी राज्य बोल सकते हो या
  4852. 3:24:17बाड़ी का किला बोलते हैं। तो जो बाड़ी
  4853. 3:24:20किले का जमींदार था और उस जमींदार का जो
  4854. 3:24:22लड़का है उसका नाम था चैन सिंह। याद
  4855. 3:24:24रखिएगा चैन सिंह इस स्टोरी में एक विलेन
  4856. 3:24:27है। ठीक है? कौन है? एक विलेन है चैन
  4857. 3:24:30सिंह। तो चैन सिंह बाड़ी किले का जमींदार
  4858. 3:24:32का लड़का था जो कृपाल सिंह सरौतिया का
  4859. 3:24:35रिश्ते में भांजा भी लगता था। वह
  4860. 3:24:37राजकुमारी कमलापति से विवाह करने की इच्छा
  4861. 3:24:39रखता था। लेकिन इस छोटे से गांव के
  4862. 3:24:42जमींदार से राजकुमारी कमलापति ने शादी
  4863. 3:24:44करने से क्या कर दिया? मना कर दिया। याद
  4864. 3:24:47रखिएगा जब कोई व्यक्ति किसी को मना करता
  4865. 3:24:49है किसी चीज के लिए तो सामने वाला उससे
  4866. 3:24:52बदला लेना चाहता है और यह जो राजकुमारी
  4867. 3:24:55कमलापति ने जैसे ही जो बाड़ी का जो
  4868. 3:24:58राजकुमार है या बाड़ी का जो किले के
  4869. 3:24:59जमींदार का जो लड़का है जिसका नाम क्या
  4870. 3:25:01है? चैन सिंह इसको जैसे ही मना किया रानी
  4871. 3:25:05तो खुश हैं क्योंकि उनकी शादी इससे नहीं
  4872. 3:25:07होती हैं लेकिन चैन सिंह उनसे ईर्ष्या
  4873. 3:25:09रखने लगता है और बदला लेने की भावना हमेशा
  4874. 3:25:12जीवन में रखे रहता है। आगे क्या होता है
  4875. 3:25:14देखिए इसी समय 16वीं सदी में भोपाल से 55
  4876. 3:25:18कि.मी. दूर 750 गांवों को मिलाकर एक राज्य
  4877. 3:25:22था जिसका नाम था गिन्नौरगढ़ रियासत।
  4878. 3:25:24दोस्तों गिन्नौरगढ़ रियासत जो है वर्तमान
  4879. 3:25:27सिहौर का पार्ट है। तो गिन्नौरगढ़ रियासत
  4880. 3:25:29जो थी उसमें 750 गांव आते थे और इस गांव
  4881. 3:25:32के जो राजा है उनका नाम है निजाम शाह
  4882. 3:25:34जिनसे रानी कमलावती का विवाह होने वाला
  4883. 3:25:36है। ठीक है? तो जो देहलावाड़ी के पास आता
  4884. 3:25:39था इसके राजा थे सुराज सिंह शाह और इन्हीं
  4885. 3:25:42का लड़का है। याद रखिएगा इनके पुत्र थे
  4886. 3:25:44निजाम शाह जो बहुत बहादुर निडर तथा हर
  4887. 3:25:48कार्य में क्या थे? निपुण थे। उन्हीं से
  4888. 3:25:50रानी कमलावती का विवाह हुआ और बाद में
  4889. 3:25:53इनका एक पुत्र होता है जिसका नाम होता है
  4890. 3:25:55नवल शाह। यानी हमारी इस स्टोरी में चार
  4891. 3:25:58कैरेक्टर हैं। नंबर वन है निजाम शाह।
  4892. 3:26:02निजाम शाह राजा हैं और निजाम शाह की जो
  4893. 3:26:05पत्नी है उनका नाम क्या है? रानी कमलापति।
  4894. 3:26:08रानी कमलापति का एक लड़का है। रानी
  4895. 3:26:11कमलापति। इन दोनों का एक लड़का है। याद
  4896. 3:26:13रखिएगा। और उस पुत्र का नाम क्या है?
  4897. 3:26:16नवलसा। ये तीन कैरेक्टर बहुत इंपॉर्टेंट
  4898. 3:26:18है और इसमें खलनायक की भूमिका में दो नायक
  4899. 3:26:21आएंगे। दो लोग हैं खलनायक। एक है चैनसा
  4900. 3:26:24शाह। याद रखिएगा। चैनसा कौन है? बाड़ी का
  4901. 3:26:27जमींदार है और दूसरा खलनायक आएगा चैन शाह
  4902. 3:26:31के बाद जिसका नाम होगा दोस्त मोहम्मद। तो
  4903. 3:26:33ये चार नाम आपको याद रखना है इस स्टोरी
  4904. 3:26:35में। निजाम शाह जिनकी पत्नी है रानी
  4905. 3:26:37कमलापति और उनसे एक पुत्र होता है जिसका
  4906. 3:26:39नाम होता है नवल शाह। आगे देखते हैं क्या
  4907. 3:26:41होता है। बाड़ी किले का जो जमींदार का
  4908. 3:26:44लड़का है चैन सिंह राजा निजाम शाह का
  4909. 3:26:46भतीजा लगता था। निजाम निजाम शाह जो थे
  4910. 3:26:49उनका भतीजा था जिसका नाम था चैनसा शाह और
  4911. 3:26:51यह जो चैन शाह है यह रानी पर बुरी नजर
  4912. 3:26:54रखता था। यानी रिश्ते में चाची लगेंगी।
  4913. 3:26:57याद रखना इस बात को। तो चैन सिंह के चाचा
  4914. 3:27:00कौन है? निजाम शाह। निजामशाह का भतीजा कौन
  4915. 3:27:02है? चैन सिंह। चैन सिंह वही व्यक्ति है
  4916. 3:27:04जिसे रानी ने ठुकरा दिया था। यह एक तरीके
  4917. 3:27:08से रिश्ते में लगता था। और यह अलग छोटी सी
  4918. 3:27:10जो रियासत थी या जमींदार थी बाड़ी वहां का
  4919. 3:27:13यह प्रमुख था। अब क्या होता है? वह
  4920. 3:27:16राजकुमारी कमलापति से शादी होने के बावजूद
  4921. 3:27:19भी उनकी उनसे विवाह करने की इच्छा रखता था
  4922. 3:27:21और उसने अनेक बार राजा निजाम शाह को मारने
  4923. 3:27:25की कोशिश की जिसमें वह असफल रहा। तो कुल
  4924. 3:27:28मिलाकर बात यह है कि जो निजाम शाह हैं वह
  4925. 3:27:30अपनी पत्नी कमलापति के साथ खुश हैं। निजाम
  4926. 3:27:32शाह की टोटल सात पत्नियां जिनमें सबसे
  4927. 3:27:34फेमस हैं कमलापति और उनका एक बेटा है
  4928. 3:27:36जिसका नाम है नवल शाह। लेकिन उनकी स्टोरी
  4929. 3:27:38में विलेन कौन बनकर आया? उस विलेन का नाम
  4930. 3:27:40है चैनसा शाह जो बाड़ी का जमींदार है।
  4931. 3:27:42रिश्ते में निजाम शाह का भतीजा लगता है और
  4932. 3:27:45वह बार-बार निजाम शाह को मारने का प्रयास
  4933. 3:27:47करता है। लेकिन कैसे भी निजाम शाह बच जाते
  4934. 3:27:49हैं। एक दिन उन्होंने यानी जो चैन सिंह है
  4935. 3:27:52बाड़ी का किलेदार या बाड़ी का जो जमींदार
  4936. 3:27:54है उसने जो है निजाम शाह को एक निमंत्रण
  4937. 3:27:56दिया प्रेम पूर्वक कि आप हमारे यहां खाने
  4938. 3:27:59पर आइए। निजाम शाह उसकी बातों में आ गए और
  4939. 3:28:01उसके यहां खाने पर जब जाते हैं तो चैन
  4940. 3:28:04सिंह निजाम शाह के भोजन में विष मिला देता
  4941. 3:28:06है। देखिए एक दिन प्रेम पूर्वक उसने राजा
  4942. 3:28:08निजाम शाह को भोजन पर आमंत्रित किया और
  4943. 3:28:10भोजन में जहर देकर जो है उनकी धोखे से
  4944. 3:28:12हत्या कर दी। किसकी? यानी चैन शाह ने
  4945. 3:28:15किसकी हत्या कर दी? निजाम शाह की हत्या कर
  4946. 3:28:18दी। आगे क्या होता है? राजा निजाम शाह की
  4947. 3:28:20मौत की खबर से पूरा जो गिन्नौरगढ़ राज्य
  4948. 3:28:22है उसमें क्या है? खलबली हो गई। और चैन
  4949. 3:28:25सिंह ने रानी कमलापति को अकेले में जानकर
  4950. 3:28:29उन्हें पाने की नियत से गिन्नौरगढ़ के
  4951. 3:28:31किले पर हमला कर दिया। रानी कमलापति उस
  4952. 3:28:33समय अपने कुछ वफादारों और 12 वर्षीय बेटे
  4953. 3:28:36नवल शाह के साथ भोपाल में बने इस महल में
  4954. 3:28:39छुप जाने का निर्णय लेती हैं जो उस समय
  4955. 3:28:41सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण था।
  4956. 3:28:43आई होप आपको यहां तक स्टोरी समझ में आ गई
  4957. 3:28:45होगी। अगर आपको नहीं समझ में आई तो इसके
  4958. 3:28:47लिए एक छोटा सा डायग्राम हम बना देते हैं।
  4959. 3:28:50देखो अगर आप इस स्टोरी को समझेंगे तभी तो
  4960. 3:28:53आपको सही समझ में आएगा। एक राज्य है जिसका
  4961. 3:28:56नाम है गिन्नौरगढ़। क्या नाम है?
  4962. 3:28:58गिन्नौरगढ़ का किला बड़ा फेमस है। तोतों
  4963. 3:29:02के लिए प्रसिद्ध है। गिन्नौरगढ़ जो राज्य
  4964. 3:29:03है वर्तमान में कहां आता है बच्चों? याद
  4965. 3:29:06रखना। तो गिन्नौरगढ़ जो राज्य है वो
  4966. 3:29:07वर्तमान में या जो गिन्नौरगढ़ का किला है
  4967. 3:29:09सीर में आता है। इस राज्य के जो राजा हैं
  4968. 3:29:12उनका नाम है निजाम शाह। निजाम शाह की जो
  4969. 3:29:14पत्नी है उनका नाम क्या है? याद रखना
  4970. 3:29:17कमलापति और कमलापति का एक लड़का है जिसका
  4971. 3:29:21नाम क्या है?
  4972. 3:29:23इन दोनों का पुत्र है जिसका नाम है नवलसा।
  4973. 3:29:26अब इस स्टोरी में विलेन कौन है? इस स्टोरी
  4974. 3:29:30में विलेन है जिसका नाम है चैनसा। याद
  4975. 3:29:33रखिएगा बाड़ी का जमींदार है। और बाड़ी का
  4976. 3:29:36जमींदार
  4977. 3:29:38जिसका नाम क्या है? चैनसा। कहीं-कहीं पर
  4978. 3:29:41इसको याद रखिएगा आलम शाह भी कहा गया है।
  4979. 3:29:43चैन शाह या कहीं-कहीं पर इसको आलम शाह कहा
  4980. 3:29:46गया। आप चैन शाह याद रखेंगे। इसने क्या कर
  4981. 3:29:48दिया? राजा निजाम शाह की धोखे से हत्या कर
  4982. 3:29:51दी। तो राजा निजाम शाह की जब इसने धोखे से
  4983. 3:29:53हत्या कर दी तो अब रानी कमलापति अपने बेटे
  4984. 3:29:56नवल शाह के साथ एक महल में जाती हैं।
  4985. 3:29:58लेकिन इस महल का निर्माण किसने करवाया? तो
  4986. 3:30:01याद रखेंगे भोपाल जो है वर्तमान भोपाल।
  4987. 3:30:04यहां पर रानी कमलापति के लिए एक महल
  4988. 3:30:06बनवाया था राजा निजाम शाह ने। उसका नाम था
  4989. 3:30:10कमलापति पैलेस या कमलापति महल बोलते थे और
  4990. 3:30:13यह काफी खूबसूरत था। भव्य महल है और इस
  4991. 3:30:16महल का निर्माण करवाया था किसने? निजाम
  4992. 3:30:18शाह ने। तो रानी ने ये सोचा होता क्या है
  4993. 3:30:22कि जो हमारा यह निजाम शाह का भतीजा है चैन
  4994. 3:30:25शाह यह क्या करता है? यह गिन्नौरगढ़ पर
  4995. 3:30:27हमला करके इस गिन्नौरगढ़ रियासत पे क्या
  4996. 3:30:29कर लेता है? अधिकार कर लेता है। तो कुल
  4997. 3:30:31मिलाकर रानी को गिन्नौरगढ़ का जो किला है
  4998. 3:30:33उसको छोड़कर जाना पड़ता है। और रानी अपने
  4999. 3:30:36बेटे के साथ उनके बेटे का नाम क्या है
  5000. 3:30:38बेटा? उनके बेटे का नाम है नवल शाह। इसके
  5001. 3:30:41साथ इस महल में शरण ले लेती हैं। किस महल
  5002. 3:30:43में शरण ले लेती हैं? क्योंकि सुरक्षा की
  5003. 3:30:45दृष्टि से ये जो कमलापति महल है जो कि
  5004. 3:30:47भोपाल में है ये कैसा था? यह सुरक्षित था।
  5005. 3:30:50इसीलिए कमलापति और अपने बेटे के साथ जो है
  5006. 3:30:52वो इस महल में चली जाती हैं। ठीक है? अब
  5007. 3:30:55इस स्टोरी में क्या होता है कि रानी
  5008. 3:30:57कमलापति की पति की रानी कमलापति के पति का
  5009. 3:31:00हत्यारा कौन है? तो याद रखिएगा वो है
  5010. 3:31:02चैनसा शाह जो इस स्टोरी में विलेन है। कुछ
  5011. 3:31:05समय बाद रानी को यह पता चलता है कि भोपाल
  5012. 3:31:08के पास में ही कुछ अफगानों ने जो है डेरा
  5013. 3:31:10डाला हुआ है। ठीक है? और अफगानों ने डेरा
  5014. 3:31:14डाला हुआ है। उनमें एक अफगान सरदार था
  5015. 3:31:16जिसका नाम था दोस्त मोहम्मद। इसकी स्टोरी
  5016. 3:31:18को हम किसी और दिन समझेंगे। दोस्त
  5017. 3:31:20मोहम्मद। कौन है दोस्त मोहम्मद? दोस्त
  5018. 3:31:23मोहम्मद एक अफगान है जिसका मुख्य काम यह
  5019. 3:31:25है कि यह पैसे लेकर किसी को भी अपनी
  5020. 3:31:28सुरक्षा दे सकता था या जिससे पैसा लेता था
  5021. 3:31:31उसकी तरफ से ये युद्ध करता था। कुल मिलाकर
  5022. 3:31:33ये भाड़े पर अपनी सेना पहुंचाता था या
  5023. 3:31:36लोगों के लिए भाड़े पर काम करता था। ठीक
  5024. 3:31:38है? क्या नाम है इसका? दोस्त मोहम्मद है।
  5025. 3:31:40इसके जो पूर्वज हैं वो अफगानिस्तान से आए
  5026. 3:31:42थे। इसने खुद औरंगजेब के यहां कुछ काम
  5027. 3:31:44किया था। बाद में यह जो मालवा आ जाता है
  5028. 3:31:46इसकी एक बहुत लंबी स्टोरी है और यही आगे
  5029. 3:31:48चलकर भोपाल राज्य का संस्थापक भी है। तो
  5030. 3:31:50दोस्त मोहम्मद ने जो है क्या किया था?
  5031. 3:31:52भोपाल के नजदीक जो है डेरा डाला था। एक
  5032. 3:31:54जगह थी जगदीशपुर। जगदीशपुर को जीतकर उसका
  5033. 3:31:57नाम रख दिया था इस्लामगढ़। तो रानी को यह
  5034. 3:32:00पता चला कि ये जो है लोगों की मदद करता
  5035. 3:32:03है। पैसे लेकर उनकी तरफ से लड़ता है। तो
  5036. 3:32:05रानी ने इससे कांटेक्ट किया। देखिए रानी
  5037. 3:32:08ने क्या किया? रानी ने इससे मदद मांगी।
  5038. 3:32:11ठीक है? तो मदद के बदले में इसने क्या
  5039. 3:32:13मांग रखी? इसने जो है ₹1 लाख की मांग रखी
  5040. 3:32:16है कि हम आपकी मदद करेंगे। आप हमको क्या
  5041. 3:32:19दें? ₹1 लाख देंगे। इस बात को ध्यान से
  5042. 3:32:21समझना है। यानी रानी कमलापति ने अपने पति
  5043. 3:32:24की मृत्यु का बदला लेने के लिए किसके
  5044. 3:32:26विरुद्ध मदद मांगी? चैन शाह के विरुद्ध।
  5045. 3:32:28जो कहां का जमींदार है? बाड़ी का जमींदार
  5046. 3:32:30है। और दोस्त मोहम्मद ने कहा कि वह मदद
  5047. 3:32:33करेगा लेकिन बदले में कितना रुपया चाहिए?
  5048. 3:32:35उसको ₹1 लाख चाहिए। रानी ने उससे कहा कि
  5049. 3:32:38अभी मेरे पास ₹1 लाख नहीं है। रानी ने कुछ
  5050. 3:32:40पैसे उसको नगद दे दिए और कुछ के बदले जमीन
  5051. 3:32:42देने का वादा किया। तो अफगान सरदार जिसका
  5052. 3:32:46नाम दोस्त मोहम्मद है उसने रानी कमलापति
  5053. 3:32:49की जो गोंड सेना है और उसके साथ-साथ अपनी
  5054. 3:32:51अफगान सेना इन दोनों सेनाओं को लेकर किस
  5055. 3:32:54पर हमला कर दिया? याद रखिएगा दोस्त
  5056. 3:32:57मोहम्मद ने गोंडों और अपनी सेना के साथ
  5057. 3:32:59मिलकर इस पर गिन्नौरगढ़ के किले पर अटैक
  5058. 3:33:02कर दिया और अटैक करके जो है क्या कर दी?
  5059. 3:33:04इसकी हत्या कर दी। चैन शाह को मार डाला और
  5060. 3:33:07इस प्रकार जो है अफगान सरदार जो है क्या
  5061. 3:33:09करता है? रानी कमलापति की जो है मदद करता
  5062. 3:33:13है। अब इस बीच दो स्टोरियां मिलती हैं जो
  5063. 3:33:15आपको जाननी है। पहली स्टोरी यह है कि जब
  5064. 3:33:18रानी कमलापति ने ये मदद मांगी थी तो
  5065. 3:33:21उन्होंने उस समय जो है एक धागा जो है
  5066. 3:33:23दोस्त मोहम्मद की कलाई पर बांधा था और एक
  5067. 3:33:25तरीके से बहन भाई का जो है रिश्ता यहां पर
  5068. 3:33:28दोनों के बीच में स्थापित हो गया जिससे कि
  5069. 3:33:30उन दोनों के बीच संबंध बने रहे। दूसरी
  5070. 3:33:33स्टोरी है जो ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर मतलब उसी
  5071. 3:33:35चीज को ज्यादा तवज्जो दिया जाता है और
  5072. 3:33:38ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि वही
  5073. 3:33:40सत्य है। उस स्टोरी में होता यह है कि
  5074. 3:33:43क्योंकि ये जो दोस्त मोहम्मद है शुरू में
  5075. 3:33:46रानी की मदद करता है लेकिन बाद में इस
  5076. 3:33:48दोस्त मोहम्मद की जो नियत है वो रानी की
  5077. 3:33:51जो सुंदरता है उस पर खराब हो जाती है और
  5078. 3:33:53वो रानी को अकेला समझकर उनकी सुंदरता के
  5079. 3:33:56प्रति तो आकर्षित है ही। साथ-साथ उनका जो
  5080. 3:33:59राज्य है जैसे कि जो भोपाल में अभी वो हैं
  5081. 3:34:01और गिन्नौड़गढ़ रियासत पूरी की रियासत को
  5082. 3:34:03वो हड़पना चाहता है और इसी क्रम में दोस्त
  5083. 3:34:05मोहम्मद क्या करेगा कि पहले जो है क्या
  5084. 3:34:08करेगा वो जाकर चैनसा की हत्या करता है और
  5085. 3:34:10चैन शाह की हत्या करने के बाद इस
  5086. 3:34:12गिन्नौरगढ़ के किले पर अधिकार कर लेगा अब
  5087. 3:34:14ये गिन्नौरगढ़ का जो किला है या जो राज्य
  5088. 3:34:16है बेसिकली किसका है कमलापति का तो जब
  5089. 3:34:19दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर
  5090. 3:34:21अधिकार किया तो रानी ने इसको नजरअंदाज कर
  5091. 3:34:23दिया कि चलो ठीक है जो हुआ सो हो जाने दो
  5092. 3:34:26वो भोपाल में खुश हैं लेकिन लेकिन कुछ समय
  5093. 3:34:28पश्चात उसने क्या किया कि भोपाल में रानी
  5094. 3:34:31कमलापति पर हमला किया। तो इस समय रानी
  5095. 3:34:33कमलापति क्या करती हैं कि अपने पुत्र
  5096. 3:34:36जिसका नाम नवल शाह है उसे सुरक्षित स्थान
  5097. 3:34:39पर भेजती हैं और वो जो है अपने महल में
  5098. 3:34:42जिसे कमलापति महल कहते हैं जो कि भोपाल
  5099. 3:34:45में बड़ी झील के पास स्थित है और यहां पर
  5100. 3:34:47क्या करती हैं? वह जल समाधि ले लेती हैं।
  5101. 3:34:50अब इसकी स्टोरी को भी हम समझते हैं। मैं
  5102. 3:34:52आपको थोड़ा सा आगे ले चलता हूं। देखिए कुछ
  5103. 3:34:55दिन बाद क्या होता है? अभी जो मैं आपको
  5104. 3:34:57स्टोरी बताया था उसके आगे आप लोगों को बता
  5105. 3:34:59रहा हूं। कुछ समय बाद भोपाल में समय
  5106. 3:35:01बिताने के बाद रानी कमलापति को पता चला कि
  5107. 3:35:04भोपाल की सीमा के पास कुछ अफगानी आकर रुके
  5108. 3:35:07हुए हैं। जिन्होंने जगदीशपुर जगदीशपुर एक
  5109. 3:35:10राजपूतों का राज्य था जिसे इसने जीत लिया
  5110. 3:35:13था और इसका नाम रख दिया था इस्लामनगर।
  5111. 3:35:15जगदीशपुर पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में
  5112. 3:35:17ले लिया है। ठीक है? तो रानी को यह पता
  5113. 3:35:19चला। इन अफ़गानों का सरदार था जिसका नाम था
  5114. 3:35:22दोस्त मोहम्मद खान था। याद रखिएगा जो पैसा
  5115. 3:35:25लेकर ध्यान से सुनना इसे कहते हैं भाड़े
  5116. 3:35:27का टट्टू बोल सकते हैं जो पैसा लेकर किसी
  5117. 3:35:29की तरफ से भी युद्ध लड़ता था। लोक मान्यता
  5118. 3:35:32है कि रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद को 1
  5119. 3:35:35लाख मोहरे देकर चैन सिंह पर हमला करने को
  5120. 3:35:38कहा। यह एक स्टोरी मिलती है। ठीक है? यह
  5121. 3:35:40दोस्त मोहम्मद है वो अफगान लुटेरा। याद
  5122. 3:35:42रखिएगा। हमारी स्टोरी में दूसरा खलनायक।
  5123. 3:35:45पहला खलनायक चैन शाह है। दूसरा खलनायक
  5124. 3:35:47दोस्त मोहम्मद है। आगे बढ़ते हैं। दोस्त
  5125. 3:35:51मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर
  5126. 3:35:53दिया और जिसने चैन सिंह जिसमें चैन सिंह
  5127. 3:35:56मारा गया और किले को उसने हड़प लिया। किसने
  5128. 3:35:59हड़प लिया? यानी जो दोस्त मोहम्मद है उसने
  5129. 3:36:01चैन सिंह को मार डाला और गिन्नौरगढ़ का जो
  5130. 3:36:03किला है उसे हड़प लिया। रानी कमलापति को
  5131. 3:36:05अपने छोटे बेटे की परवरिश की चिंता थी।
  5132. 3:36:07इसलिए उन्होंने दोस्त मोहम्मद के इस कदम
  5133. 3:36:10पर कोई आपत्ति नहीं जताई और दोस्त मोहम्मद
  5134. 3:36:12अब संपूर्ण भोपाल की रियासत पर क्या करना
  5135. 3:36:14चाहता था? अधिकार करना चाहता था। यह आगे
  5136. 3:36:18के संघर्ष को अब हम समझने वाले हैं। उसने
  5137. 3:36:22रानी कमलापति को अपने हरम में शामिल होने
  5138. 3:36:25और शादी करने का प्रस्ताव रखा और वह
  5139. 3:36:27वास्तव में रानी को अपने हरम में रखना
  5140. 3:36:29चाहता था। दोस्त मोहम्मद खान के इस नापाक
  5141. 3:36:32इरादे को देखते हुए रानी कमलापति यह
  5142. 3:36:35स्टोरी भी ध्यान से सुनना। रानी कमलापति
  5143. 3:36:37का 14 वर्षीय बेटा जिसका नाम नवल शाह है
  5144. 3:36:40अपने 100 लड़ाकों के साथ लाल घाटी में
  5145. 3:36:42युद्ध करने चला गया और इस घमासान युद्ध
  5146. 3:36:44में दोस्त मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार
  5147. 3:36:47दिया और इस स्थान पर इतना खून बहा कि यह
  5148. 3:36:51जमीन लाल हो गई और इसी कारण इसे लाल घाटी
  5149. 3:36:53कहा गया। यानी दोस्त मोहम्मद से जो रानी
  5150. 3:36:56का लड़का है जिसका नाम नवल शाह है। नवल
  5151. 3:36:58शाह को जब यह पता चला कि दोस्त मोहम्मद
  5152. 3:37:00उनकी मां के प्रति बुरी नजर रखता है तो
  5153. 3:37:03उसने जो है गुस्से में आकर नवल शाह ने
  5154. 3:37:05अपने कुछ 100 योद्धाओं को इकट्ठा किया और
  5155. 3:37:07लड़ने के लिए चला गया। दोनों के बीच युद्ध
  5156. 3:37:09हुआ और इस युद्ध में नवल शाह मारा गया।
  5157. 3:37:11जैसे ही यह खबर नवल शाह के मरने की रानी
  5158. 3:37:13को पता लगी और उन्हें पता चला कि दोस्त
  5159. 3:37:15मोहम्मद उनकी तरफ आ रहा है तो रानी ने जल
  5160. 3:37:18समाधि ले ली। रानी कमलावती ने विषम
  5161. 3:37:20परिस्थितियों को देखते हुए अपनी इज्जत को
  5162. 3:37:22बचाने के लिए बड़े तालाब बांध का जो है
  5163. 3:37:24सकरा रास्ता खुलवा दिया जिससे बड़े तालाब
  5164. 3:37:26का पानी रिस कर दूसरी तरफ आने लगा और इसे
  5165. 3:37:29आज छोटा तालाब के रूप में जाना जाता है।
  5166. 3:37:32इसमें रानी कम रानी कमलापति ने महल की
  5167. 3:37:34समस्त धनदौलत और जेवरात को उसी जल समाधि
  5168. 3:37:37में डाल दिया और इस प्रकार जो है उन्होंने
  5169. 3:37:39जल समाधि ले ली तो इस प्रकार रानी कमलापति
  5170. 3:37:42की मृत्यु हो जाती है। दोस्त, मोहम्मद खान
  5171. 3:37:44जब तक अपनी सेना को साथ लेकर लाल घाटी से
  5172. 3:37:46लाल किले तक ला इस किले तक पहुंचा, यानी
  5173. 3:37:49महल तक पहुंचा, तब तक सब कुछ खत्म हो गया
  5174. 3:37:51था। उसके हाथ कुछ नहीं लगा। ना रानी, ना
  5175. 3:37:53सोना, ना संपत्ति सब जो है जल समाधि में
  5176. 3:37:56चला गया। दोस्त मोहम्मद खान को ना रानी
  5177. 3:37:58कमलापति मिली और ना ही धन दौलत। जीते जी
  5178. 3:38:00उन्होंने भोपाल पर परधर्मी या विधर्मी को
  5179. 3:38:03नहीं बैठने दिया। सोर्सों के अनुसार रानी
  5180. 3:38:06कमलापति ने सन 1723 में अपनी जीवन लीला
  5181. 3:38:08खत्म की और उनकी मृत्यु के साथ ही भोपाल
  5182. 3:38:11में शुरू होता है दोस्त मोहम्मद का राज
  5183. 3:38:13जिसे भोपाल रियासत कहते हैं। दोस्त
  5184. 3:38:15मोहम्मद खान के साथ ही नवाबों का दौर शुरू
  5185. 3:38:17होता है और भोपाल में नवाबों का राज्य
  5186. 3:38:20शुरू हो जाता है। तो इस प्रकार रानी
  5187. 3:38:22कमलापति का राज दोस्त मोहम्मद ने हड़प
  5188. 3:38:24लिया। यह इस स्टोरी में पूरी की पूरी
  5189. 3:38:27कहानी थी। अब इस स्टोरी में खास क्या है?
  5190. 3:38:29यह बताता हूं। यह पीडीएफ अगर आपको चाहिए
  5191. 3:38:32हो तो सब कुछ इसमें लिखा है। रानी कमलापति
  5192. 3:38:34कौन थी? उनके पति कौन थे? उनकी मृत्यु का
  5193. 3:38:37कारण क्या था? यह सारी बातें हमने यहां पर
  5194. 3:38:39देख ली। रानी कमलापति महल की बात करते
  5195. 3:38:42हैं। ये भोपाल में इसका तस्वीर में मैं
  5196. 3:38:43आपको दिखा देता हूं। देखिए यह भोपाल का
  5197. 3:38:46सबसे प्राचीन शहर है। 18वीं शताब्दी में
  5198. 3:38:49बना था कि यार भोपाल में जितनी भी इमारतें
  5199. 3:38:50हैं उनमें सबसे पुराना यही पैलेस है जिसका
  5200. 3:38:52नाम रानी कमलापति पैलेस है। इस महल का जो
  5201. 3:38:55निर्माण है वो निजाम शाह ने अपनी पत्नी के
  5202. 3:38:57लिए करवाया था। किसके लिए? कमलापति के लिए
  5203. 3:39:00याद रखिएगा। ठीक है? तो, यह एक वास्तुकला
  5204. 3:39:03का एक उत्कृष्ट उदाहरण हमको देखने को
  5205. 3:39:05मिलता है जिसमें नुकीले मेहरावों को
  5206. 3:39:07प्रयोग किया गया। बहुत सारी इसकी खास
  5207. 3:39:09बातें हैं। इसका तस्वीर मैं आप लोगों को
  5208. 3:39:11दिखाता हूं। यह है कमलापति पैलेस।
  5209. 3:39:15कमलापति महल बोलते हैं जो कि कहां पर बना
  5210. 3:39:18हुआ है। भोपाल में बना हुआ है। याद
  5211. 3:39:20रखिएगा। बड़ा खूबसूरत है। इसी के सामने एक
  5212. 3:39:23पैलेस बना हुआ पार्क बना हुआ है जिसको
  5213. 3:39:25बोलते हैं कमला पार्क या रानी कमलापति
  5214. 3:39:27पार्क इसको कहा जाता है। तो कमलापति पार्क
  5215. 3:39:30जो इसी महल के सामने बना हुआ है। ठीक है?
  5216. 3:39:32यह भी भोपाल में है और यह भोपाल के नवाब
  5217. 3:39:35ने बनवाया था।
  5218. 3:39:37ठीक है? तो ये दोनों चीजें हम लोगों को
  5219. 3:39:39यहां देखने को मिलती हैं। आई होप आप लोगों
  5220. 3:39:41को यहां तक समझ में आ गया होगा। अब हम एक
  5221. 3:39:43लास्ट और इंटरेस्टिंग बात करेंगे। ध्यान
  5222. 3:39:46से सुनिएगा। हबीबगंज रेलवे स्टेशन जिसका
  5223. 3:39:48नया नाम कर दिया गया है रानी कमलापति
  5224. 3:39:51स्टेशन। ध्यान से सुनेंगे। बहुत
  5225. 3:39:52इंपॉर्टेंट है। यह आप देख सकते हैं। यह
  5226. 3:39:54बहुत ही आधुनिक है। यह देश का पहला
  5227. 3:39:57प्राइवेट जो है क्या है? रेलवे स्टेशन है
  5228. 3:39:59और यह एक एयरपोर्ट की तरह बना हुआ है।
  5229. 3:40:01यानी काफी आधुनिक सुसज्जा के साथ यह हमको
  5230. 3:40:04देखने को मिलता है। तो आपको अगर पूछा जाए
  5231. 3:40:06कि हबीबंज रेलवे स्टेशन का नाम क्या कर
  5232. 3:40:08दिया गया है? तो याद रखिएगा रानी कमलापति
  5233. 3:40:10स्टेशन कर दिया गया है और यह भोपाल शहर
  5234. 3:40:12में स्थित है और भोपाल शहर का दूसरा
  5235. 3:40:14स्टेशन है। पहला जो मेन स्टेशन है उसके
  5236. 3:40:16बाद दूसरा यह है। यह भारत का पहला आईएसओ
  5237. 3:40:19प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाला निजी रेलवे
  5238. 3:40:21स्टेशन है। 14 नवंबर 2021 को हबीबंद रेलवे
  5239. 3:40:24स्टेशन का नाम याद रखिएगा कब बदला गया यह
  5240. 3:40:26नाम? तो 2021 को इसका नाम बदलकर कमलापति
  5241. 3:40:29के नाम पे रख दिया गया है। और यह भारत का
  5242. 3:40:31पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन है जिसे बंसल
  5243. 3:40:33ग्रुप के द्वारा कौन सा ग्रुप इसको चलाता
  5244. 3:40:36है? तो याद रखिए कभी पूछा जाए किस ग्रुप
  5245. 3:40:38के अंडर में आता है ये प्राइवेट रेलवे
  5246. 3:40:40स्टेशन है। बंसल ग्रुप इसको लीड करता है।
  5247. 3:40:42एक और इंपॉर्टेंट बात कि आखिरकार इसका नाम
  5248. 3:40:45हबीबगंज रेलवे स्टेशन पहले क्यों था? तो
  5249. 3:40:48किसके नाम पर था? देखिए हबीबगंज का जो नाम
  5250. 3:40:51है वो हबीब मियां के नाम पर था। ये हबीब
  5251. 3:40:53मियां कौन है? देखिए इस स्टेशन का सबसे
  5252. 3:40:56पुराना नाम शाहपुर था। बाद में एक हबीब
  5253. 3:40:58मियां थे जिन्होंने अपनी जमीन इसके लिए
  5254. 3:41:00दान दी थी। और उन्होंने क्योंकि जमीन दान
  5255. 3:41:02दी थी। उनके नाम पर इसका नाम हबीबगंज
  5256. 3:41:04रेलवे स्टेशन पड़ा और वर्तमान में इसका
  5257. 3:41:06नाम क्या हो गया? रानी कमलापति स्टेशन।
  5258. 3:41:08तीन नाम हो गए। पहले शाहपुर, फिर हबीबगंज
  5259. 3:41:10और वर्तमान में क्या है? याद रखिएगा रानी
  5260. 3:41:12कमलापति स्टेशन।
  5261. 3:41:14आई होप आप लोगों को यह सारी जानकारी अच्छे
  5262. 3:41:17से समझ में आ गई होगी। देखिए तो आज हम
  5263. 3:41:19लोगों ने किसके बारे में बात की है? आज हम
  5264. 3:41:21लोगों ने बात की है भोपाल की सबसे
  5265. 3:41:23प्रसिद्ध रानी जिनका नाम क्या था? रानी
  5266. 3:41:25कमलापति जो कि भोपाल की अंतिम हिंदू रानी
  5267. 3:41:27थी। देखिए रानी कमलापति गों की रानी थी और
  5268. 3:41:31भोपाल की अंतिम रानी थी। भोपाल की अंतिम
  5269. 3:41:33हिंदू रानी थी जिनका योगदान बड़ा
  5270. 3:41:35महत्वपूर्ण है। इनके राज्य को हड़प लिया
  5271. 3:41:37था एक अफगान लुटेरे ने जिसका नाम था दोस्त
  5272. 3:41:40मोहम्मद और यहां पर जो गिन्नौरगढ़ से जो
  5273. 3:41:42भोपाल का जो पूरा एरिया था उसे छीनकर उसने
  5274. 3:41:45जो है यहां पर भोपाल रियासत की नींव रखी
  5275. 3:41:47और भोपाल में नवाबों का शासन यहां पे शुरू
  5276. 3:41:49होता है। मुझे उम्मीद है कि आज के इस सेशन
  5277. 3:41:52में आप लोगों को रानी कमलापति की स्टोरी
  5278. 3:41:53अच्छे से समझ में आई होगी और आपको जो मेन
  5279. 3:41:56किरदार है उनके नाम समझ में आए होंगे कि
  5280. 3:41:58चैन शाह कौन है? नवल शाह कौन है? और याद
  5281. 3:42:01रखिएगा निजाम शाह कौन है? और सबसे
  5282. 3:42:02इंपॉर्टेंट दोस्त मोहम्मद कौन था? कमलापति
  5283. 3:42:05पैलेस कहां है? कमलापति पार्क कहां पर है?
  5284. 3:42:07और रानी कमलापति ने कहां जल समाधि ली थी?
  5285. 3:42:10ये सारी बातें आप लोगों को अच्छे से समझ
  5286. 3:42:12में आ गई होंगी। इसी के साथ इस वीडियो को
  5287. 3:42:14मैं यहीं समाप्त करता हूं और मुझे आप
  5288. 3:42:17बताइएगा कमेंट करके कि आप नेक्स्ट वीडियो
  5289. 3:42:19किस पर चाहते हैं। जय हिंद। थैंक यू।
  5290. 3:42:31नमस्कार साथियों, मेरा नाम है हरी सिंह
  5291. 3:42:33राजपूत और आप सभी का मैं स्वागत करता हूं
  5292. 3:42:36हमारी सीरीज में जिसका नाम है मध्य प्रदेश
  5293. 3:42:38के वीरों का इतिहास और आज की सीरीज में हम
  5294. 3:42:41एक ऐसे शूरवीर की बात करने वाले हैं जिसका
  5295. 3:42:44इतिहास कहीं ना कहीं इतिहास के पन्नों में
  5296. 3:42:46दब गया। और आज हम बात कर रहे हैं एक महान
  5297. 3:42:49स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने मालवा में
  5298. 3:42:511857 की क्रांति का नेतृत्व किया और खासकर
  5299. 3:42:55इंदौर में इंदौर में होलकर सेना का
  5300. 3:42:57नेतृत्व किया और अंग्रेजों के विरुद्ध जो
  5301. 3:42:59है विद्रोह कर दिया। तो शहादत खान कौन थे
  5302. 3:43:02और उन उन्होंने किस प्रकार जो है विद्रोह
  5303. 3:43:04किया था? आज के हम इस सेशन में जानने वाले
  5304. 3:43:06हैं इंदौर के प्रसिद्ध क्रांतिकारी नायक
  5305. 3:43:08शादत खान के बारे में। तो शहादत खान का
  5306. 3:43:11सबसे पहले शुरुआत कहां से होती है? देखिए
  5307. 3:43:14शहादत खान कौन थे? उनके माता-पिता का नाम
  5308. 3:43:16क्या था? इसके बारे में अभी तक ज्यादा
  5309. 3:43:18अच्छे सोर्सेस अवेलेबल नहीं है। यह बताया
  5310. 3:43:21जाता है कि जो उनके पूर्वज हैं, वह बहुत
  5311. 3:43:23पहले ही जो है भारत में आकर बस गए। यानी
  5312. 3:43:25मालवा वाले रीजन में वो रहने लगे थे और
  5313. 3:43:28उनके जो पिता और पिता के जो पिता थे वो
  5314. 3:43:31ऑलरेडी होलकर सेना में पहले से ही थे। तो
  5315. 3:43:33आइए हम लोग शहादत खान के बारे में आगे बात
  5316. 3:43:35करते हैं। तो सबसे पहले शहादत खान के बारे
  5317. 3:43:38में एक बात शुरू करने से पहले मैं आपको
  5318. 3:43:40बताना चाहता हूं कि मध्य प्रदेश में जब हम
  5319. 3:43:421857 की क्रांति की बात करते हैं तो मध्य
  5320. 3:43:45प्रदेश में जो 1857 की जो क्रांति है उसकी
  5321. 3:43:48शुरुआत मोहम्मद अली बेग ये नाम याद रख
  5322. 3:43:51लीजिएगा क्योंकि एग्जाम से रिलेट करता है।
  5323. 3:43:53मोहम्मद अली बेग के नेतृत्व में 3 जून
  5324. 3:43:561857 को नीमच छावनी से शुरू हुआ था। कहां
  5325. 3:43:59से शुरू हुआ था? नीमच छावनी से। याद
  5326. 3:44:02रखिएगा। यानी एक क्वेश्चन पूछा जाता है कि
  5327. 3:44:04मध्य प्रदेश में 1857 की क्रांति कब और
  5328. 3:44:06कहां से शुरू हुई थी? तो कब शुरू हुई थी?
  5329. 3:44:093 जून 1857 को। याद रखिएगा कहां से शुरू
  5330. 3:44:12हुई थी? नीमच छावनी में। और किसके द्वारा
  5331. 3:44:14शुरू की गई? तो उनका नाम है मोहम्मद अली
  5332. 3:44:17वेग। हम सभी जानते हैं कि 1857 की क्रांति
  5333. 3:44:20का जो कारण था, वह बहुत सारे कारण थे और
  5334. 3:44:23इसका तात्कालिक जो कारण था, वह चर्बी वाले
  5335. 3:44:25कारतूस थे। हालांकि अंग्रेजों के विरुद्ध
  5336. 3:44:28ये जो क्रांति है वो सामाजिक, आर्थिक,
  5337. 3:44:30राजनीतिक कारणों का परिणाम थी। सैन्य
  5338. 3:44:32असंतोष एक तरीके से उसका एक तात्कालिक
  5339. 3:44:35कारण था जिसमें हम चर्बी वाले कारतूसों को
  5340. 3:44:37महत्व देते हैं। तो कुल मिलाकर जब पूरे
  5341. 3:44:40भारतवर्ष में ये क्रांति हुई और इस
  5342. 3:44:41क्रांति की शुरुआत भारत में मेरठ से हुई
  5343. 3:44:44थी। मेरठ छावनी में 10 मई 1857 को जब 1857
  5344. 3:44:48की क्रांति की शुरुआत हुई, तो उसी के साथ
  5345. 3:44:50ही संपूर्ण भारतवर्ष में ये क्रांति हो
  5346. 3:44:52गई। क्योंकि पूरे भारत में ये क्रांति हो
  5347. 3:44:54रही थी तो जिसका परिणाम मध्य प्रदेश पर भी
  5348. 3:44:56पड़ा और मध्य प्रदेश में इस क्रांति की
  5349. 3:44:58शुरुआत 3 जून 1857 को नीमच छावनी से हुई
  5350. 3:45:01और इसके नेतृत्वकर्ता हैं मोहम्मद अली बेग
  5351. 3:45:03जिनके द्वारा इस क्रांति की शुरुआत की गई।
  5352. 3:45:05उसके बाद यह जो क्रांति है वो 14 जून को
  5353. 3:45:07ग्वालियर में भड़क गई और इस प्रकार जो है
  5354. 3:45:1014 जून के बाद 18 जून महाकौशल क्षेत्र में
  5355. 3:45:12और धीरे-धीरे यह जो क्रांति है वह संपूर्ण
  5356. 3:45:15मध्य प्रदेश में फैल गई। और इसी क्रम में
  5357. 3:45:17क्योंकि संपूर्ण मध्य प्रदेश में पार्ट
  5358. 3:45:19आता है इंदौर का। इसीलिए याद रखिएगा। 1
  5359. 3:45:22जुलाई 1857 को सहादत खान के नेतृत्व में
  5360. 3:45:25विद्रोह इंदौर में फैल गया। कहां फैल गया?
  5361. 3:45:28इंदौर पहुंच गया। फिर इंदौर के बाद ये
  5362. 3:45:30पहुंच जाएगा महू छावनी में। पहले इंदौर
  5363. 3:45:32में फिर महू छावनी में यह विद्रोह पहुंच
  5364. 3:45:35गया। तो आइए देखते हैं क्या ये कहानी है
  5365. 3:45:37शहादत खान की। तो सबसे पहले हम लोग बात कर
  5366. 3:45:40रहे हैं कि शहादत खान का योगदान क्या है।
  5367. 3:45:42यह पिक्चर महाराजा तुकोजीराव होलकर
  5368. 3:45:45द्वितीय की है जो उस समय इंदौर के राजा
  5369. 3:45:47थे। क्योंकि मैं चाहता हूं आपको ये याद
  5370. 3:45:49रहे कि 1857 की क्रांति के दौरान होलकर
  5371. 3:45:52शासक कौन था? तो याद रखिए वो है हमारे
  5372. 3:45:54तुगोजीराव होलकर द्वितीय। इन्हीं की सेना
  5373. 3:45:56का एक अधिकारी हैं। इन्हीं की सेना के एक
  5374. 3:45:59सैनिक हैं जिनका नाम है शहादत खान। तो
  5375. 3:46:01शहादत खान आइए बात करते हैं। अगर कभी पूछा
  5376. 3:46:04जाए कि शहादत खान कौन थे? किस क्षेत्र में
  5377. 3:46:06उन्होंने विद्रोह किया था? याद रखिएगा।
  5378. 3:46:081857 की क्रांति में शहादत खान जो है
  5379. 3:46:10उन्होंने मालवा और इंदौर क्षेत्र में
  5380. 3:46:13विद्रोह किया था। कहां पर विद्रोह किया
  5381. 3:46:15था? याद रखिएगा। मालवा और इंदौर मेन इंदौर
  5382. 3:46:20के क्रांतिकारी हैं। याद रखिएगा। तो मालवा
  5383. 3:46:22और इंदौर में विद्रोह का नेतृत्व किसने
  5384. 3:46:24किया था? सहादत खान ने किया था। अब इस समय
  5385. 3:46:27एक घटना घटती है। वो घटना क्या है? ये मैं
  5386. 3:46:30आपको बताना चाहता हूं। जब 1857 की क्रांति
  5387. 3:46:33में संपूर्ण भारतवर्ष में विद्रोह हो रहा
  5388. 3:46:35था। उसी समय सहादत खान अपने महाराजा से
  5389. 3:46:38कहते हैं। देखिए इंदौर रियासत की सुरक्षा
  5390. 3:46:40हेतु शहादत खान ने महाराजा तुकोजीराव
  5391. 3:46:43होलकर द्वितीय से अर्ज किया। देखिए क्या
  5392. 3:46:45कहा उन्होंने कहा है उनके शब्द है हमने
  5393. 3:46:48आपका नमक खाया है ये एक अच्छा मौका है आप
  5394. 3:46:52हमारे सर पर हाथ रखें| हम आपको महेश्वर
  5395. 3:46:55महू रेजिडेंसी का इलाका वापस दिलाकर
  5396. 3:46:58रहेंगे और आपको अंग्रेजी शिकंजे से आजाद
  5397. 3:47:01करा कर देंगे। अगर आप 1818 में हुए
  5398. 3:47:04महाराजा मल्हार राव तृतीय के सुलहनामे के
  5399. 3:47:06कारण ऐसा नहीं कर सकते तो आप अंग्रेजों को
  5400. 3:47:09बता दीजिए कि आप अंग्रेजों को बता दीजिए
  5401. 3:47:12याद रखिए कि मेरे सारे फौजी मेरे सारे
  5402. 3:47:16सिपाही बागी हो गए हैं और बगावत की खबरें
  5403. 3:47:19सुनकर इंदौर खामोश ना रह सका और 1 जुलाई
  5404. 3:47:221857 को शहादत खाने क्रांति का बिगुल बजा
  5405. 3:47:25दिया। मैं आपको रोकना चाहूंगा और इसी
  5406. 3:47:27सेंटेंस को हम दोबारा से समझते हैं। जैसे
  5407. 3:47:29कि ये कहा जाता है कि जो इंदौर के जो
  5408. 3:47:32होलकर शासक थे अब देखिए जितने भी जो उस
  5409. 3:47:34समय राजा महाराजा थे उन्होंने अंग्रेजों
  5410. 3:47:36से एक संधि कर रखी थी। जैसे कि होलकर
  5411. 3:47:38रियासत ने एक संधि कर रखी थी जो मल्हार
  5412. 3:47:40राव तृतीय के समय की गई थी। ठीक है? और इस
  5413. 3:47:44संधि के द्वारा इस संधि के द्वारा होलकर
  5414. 3:47:46रियासत अंग्रेजों के अधीन थी और इसी संधि
  5415. 3:47:48के बाद जो है महू में एक छावनी बनाई गई थी
  5416. 3:47:51अंग्रेजों की जो कहीं ना कहीं इंदौर
  5417. 3:47:53रियासत पर कंट्रोल रखती थी। तो हमारे जो
  5418. 3:47:56शहादत खान है वो इस समय यह कह रहे हैं कि
  5419. 3:47:58महाराज ये एक अच्छा मौका है। आप हमारे सर
  5420. 3:48:00पर हाथ रख दीजिए। हमें सपोर्ट कर दीजिए।
  5421. 3:48:02हम आपको महू छावनी, महेश्वर पूरा का पूरा
  5422. 3:48:04इलाका वापस दिला देंगे जो अंग्रेजों के
  5423. 3:48:07अधिकार में है। और अगर आप ऐसा नहीं कर
  5424. 3:48:09सकते क्योंकि आपने संधि कर रखी है तो आप
  5425. 3:48:11अंग्रेजों को यह कह दो कि हम मेरे सारे
  5426. 3:48:13सैनिक, मेरे सारे सैनिक बागी हो गए हैं।
  5427. 3:48:15विद्रोही हो गए हैं और वो विद्रोह कर रहे
  5428. 3:48:18हैं। इसीलिए कहा जाता है कि होलकर जो शासक
  5429. 3:48:20थे उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से जो है
  5430. 3:48:22क्रांति को समर्थित किया। यानी देखने में
  5431. 3:48:25तो वो अंग्रेजों के साथ देखने को मिलेंगे
  5432. 3:48:27लेकिन उनकी जो सेना के सिपाही हैं वो
  5433. 3:48:29विद्रोह कर रहे हैं। इसमें एक इंपॉर्टेंट
  5434. 3:48:31बात ये है कि जो शहादत खान है वो अंग्रेजी
  5435. 3:48:34सेना के सिपाही नहीं है। वो होलकर महाराजा
  5436. 3:48:37होलकर की सेना के सिपाही हैं। तो इसमें
  5437. 3:48:39हमको दो-तीन चीजें मिल गई आपके काम की।
  5438. 3:48:41खासकर शासक का नाम मिल गया। ठीक है? अब इस
  5439. 3:48:45डेट को हमको हाईलाइट करना है। किस डेट को?
  5440. 3:48:481 जुलाई 1857 को। क्यों? क्योंकि एग्जाम
  5441. 3:48:51में क्वेश्चन यहां से आएगा कि इंदौर में
  5442. 3:48:52विद्रोह कब हुआ? 1 जुलाई 1857 को इंदौर
  5443. 3:48:55में विद्रोह पहुंचा और इस विद्रोह की
  5444. 3:48:57शुरुआत करने वाले व्यक्ति हैं सहादत खान।
  5445. 3:49:00लेकिन क्या शहादत खान अकेले थे? नहीं।
  5446. 3:49:02क्योंकि उनकी पूरी टीम थी उनके साथ और भी
  5447. 3:49:04लोग थे जिनका नाम एग्जाम में पूछा जाता
  5448. 3:49:06है। तो शहादत खान के नेतृत्व में क्रांति
  5449. 3:49:08की तोपें गड़गड़ा उठी और शहादत खान याद
  5450. 3:49:11रखिएगा भागीरथ सिलावट
  5451. 3:49:14वंश गोपाल और भाई सरदार खान। मैं चाहता
  5452. 3:49:18हूं कि ये जो नाम आप देख रहे हैं एक दो
  5453. 3:49:21तीन और ये चार इनको आप बहुत अच्छे से याद
  5454. 3:49:24कर लीजिए। क्यों? क्योंकि ये ऑलरेडी आपके
  5455. 3:49:26एमपीपीएससी प्रीलिम्स में पूछे जा चुके
  5456. 3:49:29हैं और पहले भी कई सारे एग्जामों में आते
  5457. 3:49:31रहते हैं। तो आपसे ये भी पूछा जा सकता है
  5458. 3:49:34कि इंदौर में 1857 की क्रांति में कौन-कौन
  5459. 3:49:38मेन विद्रोही थे? प्रमुख विद्रोही थे? तो
  5460. 3:49:40याद रखिए सबसे इंपॉर्टेंट है शहादत खान।
  5461. 3:49:43उसके बाद है भागीरथ सिलावट। बहुत
  5462. 3:49:45इंपॉर्टेंट नाम है भागीरथ सिलावत। उसके
  5463. 3:49:47बाद बंस गोपाल और याद रखिएगा एक और हैं
  5464. 3:49:50जिनके नाम है भाई सरदार खान। और यह इनके
  5465. 3:49:53साथी और थे और अन्य साथी रेजिडेंसी जा
  5466. 3:49:55पहुंचे। उस समय कर्नल एच एच डूरंड। याद
  5467. 3:49:59रखिएगा। एक और क्वेश्चन मिल गया आपको कि
  5468. 3:50:01इस समय इंदौर छावनी का कर्नल कौन है?
  5469. 3:50:03डूरंड। याद रखिएगा। डूरंड। कर्नल डूरंड जो
  5470. 3:50:06है वो इंदौर छावनी का रेजिडेंट था। ठीक
  5471. 3:50:08है? याद रखिएगा। रेजिडेंसी कोठी में अपनी
  5472. 3:50:10टेबल पर काम कर रहा था। तो ये सभी के सभी
  5473. 3:50:14लोग जितने लोग आप ये देख रहे हैं ये सभी
  5474. 3:50:16के सभी कौन हैं? ये होलकर सेना के सिपाही
  5475. 3:50:18हैं। कौन है? ये होलकर सेना के सिपाही
  5476. 3:50:21हैं। और होलकर सेना के ये एक तरीके से
  5477. 3:50:23अधिकारी हैं। और इन सभी ने मिलकर जो है
  5478. 3:50:26क्या कर दिया? विद्रोह कर दिया। अब देखिए
  5479. 3:50:27क्या होता है। शहादत खान अपने दामाद और
  5480. 3:50:30उनके दामाद का नाम था हुसैन खान। याद
  5481. 3:50:32रखिएगा। अपने दामाद और फौज के लेफ्टिनेंट
  5482. 3:50:36हुसैन खान के साथ रेजिडेंसी पहुंच सकते
  5483. 3:50:38हैं। पहुंचते हैं और कर्नल डूरंड से बात
  5484. 3:50:41करना चाहते हैं। पर वह कर्नल डूरंड
  5485. 3:50:43अनापशनाब बगने लगा बकने लगा जिसका
  5486. 3:50:46उन्होंने विरोध किया। इस पर क्या हुआ?
  5487. 3:50:48दोनों में एक तरीके से कहासुनी हुई
  5488. 3:50:50अंग्रेजों में और शहादत खान के लोगों में
  5489. 3:50:52और इस प्रकार डूरंड ने तमंचे से उन पर वार
  5490. 3:50:55किया जो उनके कान को छूता हुआ निकल गया।
  5491. 3:50:58शहादत खान बचते हुए सीधे अपने घोड़े पर
  5492. 3:51:01बैठना चाहते थे। इसी बीच कर्नल ट्रेवर्स आ
  5493. 3:51:03गए। दो अधिकारी हो गए। एक कर्नल डूरंड और
  5494. 3:51:06एक ट्रेवर्स। कर्नल ट्रेवर्स आ पहुंचा और
  5495. 3:51:09धमकाते हुए तलवार से मुकाबला करना चाहा
  5496. 3:51:12जिसमें एक गहरा ये जो लाइन मैं अंडरलाइन
  5497. 3:51:14कर रहा हूं जिसमें एक गहरा घाव शहादत खान
  5498. 3:51:17के गाल पर लग गया और आगे चलकर यही घाव जो
  5499. 3:51:20है शहादत खान को पकड़ाएगा जब वह यहां से
  5500. 3:51:22फरार हो जाएंगे। तो कुल मिलाकर उन्होंने
  5501. 3:51:25जो है इंदौर में 1 जुलाई 1857 को क्या कर
  5502. 3:51:28दिया? विद्रोह कर दिया। ठीक है? अब इसमें
  5503. 3:51:30एक और चीज है। जैसे कि ये इंदौर है और
  5504. 3:51:36इंदौर में विद्रोह कर रहे हैं कौन? इंदौर
  5505. 3:51:39में जो रेजिडेंसी थी वहां पर विद्रोह
  5506. 3:51:41कौन-कौन कर रहे हैं? तो हमने देख लिया एक
  5507. 3:51:43सबसे मेन व्यक्ति हैं शहादत खान। याद
  5508. 3:51:45रखिएगा। दूसरे व्यक्ति कौन है जिनका नाम
  5509. 3:51:48है वंश गोपाल।
  5510. 3:51:52तीसरे व्यक्ति हैं जिनका नाम है भागीरथ
  5511. 3:51:55सिलावट।
  5512. 3:51:56यह सबसे मेन है और यह कई बार एग्जामों में
  5513. 3:51:59पूछे गए हैं। तो इनका नाम याद रखिएगा। तो
  5514. 3:52:01कुल मिलाकर इन्होंने इंदौर छावनी में या
  5515. 3:52:04इंदौर रेजिडेंसी में क्या कर दिया था?
  5516. 3:52:06विद्रोह। तो इंदौर रेजिडेंसी के
  5517. 3:52:08विद्रोहियों का नाम आपके सामने है। इन इस
  5518. 3:52:10विद्रोह की खबर सुनकर याद रखिएगा जब यह
  5519. 3:52:13विद्रोह भड़का तो इस विद्रोह की खबर सुनकर
  5520. 3:52:16महू छावनी में भी विद्रोह हो गया। और वहां
  5521. 3:52:18से भी क्वेश्चन पूछा जाता है। महूछ छावनी
  5522. 3:52:21में विद्रोह किसके नेतृत्व में हुआ था?
  5523. 3:52:23याद रखिएगा। तो इंदौर में विद्रोह का
  5524. 3:52:26नेतृत्व कौन करते हैं? ये लोग और महू
  5525. 3:52:28छावनी में विद्रोह का नेतृत्व करते हैं।
  5526. 3:52:30याद रखिएगा मुराद अली जो कई बार एग्जाम
  5527. 3:52:33में आते हैं हाईलाइट होते हैं। अगर मुराद
  5528. 3:52:36अली का नाम नहीं है देन आप बता सकते हैं
  5529. 3:52:38शहादत खान। लेकिन याद रखिएगा इंदौर छावनी
  5530. 3:52:41में इन लोगों के द्वारा विद्रोह किया गया
  5531. 3:52:43और महू छावनी में विद्रोह का नेतृत्व करते
  5532. 3:52:45हैं मुराद अली। तो इस प्रकार जो है
  5533. 3:52:47विद्रोह जो है पूरे मालवा में फैल जाता
  5534. 3:52:49है। पूरे इंदौर रियासत में यानी होलकर
  5535. 3:52:52रियासत में फैल जाता है। अब हम आगे बढ़ते
  5536. 3:52:54हैं। तो कुल मिलाकर आपको ये कहानी समझ में
  5537. 3:52:57आ गई। यानी कुल मिलाकर अभी क्या होता है
  5538. 3:52:59कि इंदौर रेजिडेंसी पर उन्होंने हमला कर
  5539. 3:53:01दिया और इंदौर रेजिडेंसी पर उनके द्वारा
  5540. 3:53:03तोपों से गोले दागे गए और संघर्ष हुआ। जिस
  5541. 3:53:06संघर्ष में क्या हुआ कि वो घायल हो गए और
  5542. 3:53:08घायल होकर यहां से निकल गए। ठीक है? तो ये
  5543. 3:53:10घटनाक्रम हमें देखने को मिलता है कहां का?
  5544. 3:53:12इंदौर छावनी का। अब कहानी में क्या
  5545. 3:53:15ट्विस्ट आता है कि यहां पर युद्ध हुआ
  5546. 3:53:17दोनों में। युद्ध होने के बाद हमारे जो
  5547. 3:53:19शहादत खान और उनके जो लोग थे वो यहां से
  5548. 3:53:21फरार हो जाते हैं। ठीक है? क्योंकि आपको
  5549. 3:53:23सबको पता है कि आखिरकार अंग्रेजों ने क्या
  5550. 3:53:27किया था? अपने सभी उन क्षेत्रों को वापस
  5551. 3:53:29जीत लिया था जो धीरे-धीरे उनके हाथ से
  5552. 3:53:31निकल गए थे और इस क्रम में सबसे पहले आती
  5553. 3:53:33है दिल्ली। तो कुल मिलाकर यही कहानी है
  5554. 3:53:36मेन जहां पर यह विद्रोह हुआ था। अब आगे
  5555. 3:53:38कहानी में ट्विस्ट ये है कि वो क्या करते
  5556. 3:53:40हैं और कैसे उनको पकड़ा जाता है। हम उसको
  5557. 3:53:42पढ़ते हैं। चलिए अब होता क्या है? इसमें
  5558. 3:53:46एक डेट और दी है जो कि बहुत इंपॉर्टेंट
  5559. 3:53:48है। डेट क्यों इंपॉर्टेंट बताता हूं। 20
  5560. 3:53:51सितंबर 1857 को अंग्रेजों ने दिल्ली पर
  5561. 3:53:53फिर से कब्जा कर लिया। यानी कभी पूछा जाए
  5562. 3:53:56कि अंग्रेजों ने सबसे पहले किस जगह को
  5563. 3:53:57दोबारा कब्जा किया था? वो थी दिल्ली। और
  5564. 3:53:59जो मुगल सम्राट थे जिनका नाम था बहादुर
  5565. 3:54:02शाह जफर। हम सब जानते हैं कि बहादुर शाह
  5566. 3:54:04जफर को क्या कर लिया गया? बंदी बना लिया
  5567. 3:54:06गया। और इस प्रकार जो 1857 की क्रांति है
  5568. 3:54:09वो धीरे-धीरे क्या होने लगी? असफल होने
  5569. 3:54:11लगी। और जब क्रांति असफल होने लगी तो जो
  5570. 3:54:14क्रांतिकारियों के जो समूह है वो बिखर
  5571. 3:54:16जाते हैं। ठीक है? और बाद में अंग्रेजों
  5572. 3:54:18द्वारा जो क्रांतिकारी नेता हैं नेताओं को
  5573. 3:54:21ढूंढ-ढूंढ कर किसी को काला पानी की सजा,
  5574. 3:54:23किसी को फांसी की सजा और किसी को तोपों से
  5575. 3:54:25उड़ाने का काम अंग्रेजों के द्वारा किया
  5576. 3:54:27जाता है। अब हम वापिस अपनी कहानी पे आते
  5577. 3:54:29हैं। तो कुल मिलाकर इंदौर में यह हुआ। फिर
  5578. 3:54:32महू छावनी में यह हुआ और इसके बाद
  5579. 3:54:34घटनाक्रम क्या आता है कि इसके बाद जो इनकी
  5580. 3:54:37टोली है किन की टोली है शहादत खान वंश
  5581. 3:54:41गोपाल भागीरथ सिलावट ये सभी के सभी लोग जो
  5582. 3:54:43हैं दिल्ली की तरफ जाते हैं। ध्यान से
  5583. 3:54:45सुनिएगा। कहां जाते हैं? ये सभी की स के
  5584. 3:54:49सभी लोग जो हैं यहां पे विद्रोह करके जो
  5585. 3:54:51है दिल्ली की तरफ जाते हैं। परंतु ये
  5586. 3:54:53दिल्ली पहुंच नहीं पाते हैं। ठीक है? जब
  5587. 3:54:55ये दिल्ली नहीं पहुंच पाते तो सब
  5588. 3:54:57तितर-वितरितर हो जाते हैं। और उसी क्रम
  5589. 3:54:59में याद रखिएगा ये जो हमारे शहादत खान हैं
  5590. 3:55:02वो राजस्थान में एक जगह है। उधर जाकर नाम
  5591. 3:55:05बदलकर रहने लगते हैं। और शहादत खान याद
  5592. 3:55:07रखिएगा राजस्थान की तरफ जो है छिप जाते
  5593. 3:55:10हैं। फरार हो जाते हैं। और वहीं पर अपना
  5594. 3:55:12नाम चेंज करके रहते हैं। और आइए मैं बताता
  5595. 3:55:14हूं उन्होंने अपना नाम क्या रखा था। ठीक
  5596. 3:55:16है? देखिए। इसी बीच शहादत खान क्या हो गए?
  5597. 3:55:20फरार हो जाते हैं और छुपते-छुपाते
  5598. 3:55:22बांसवाड़ा जो कि राजस्थान में है, पहुंच
  5599. 3:55:24जाते हैं और वहां अपना नाम क्या रख लेते
  5600. 3:55:26हैं? वहां उन्होंने अपना नाम रखा अकबर खान
  5601. 3:55:29और लगभग अकबर खान जो है 16 17 सालों तक
  5602. 3:55:32वहां पर छुपे रहते हैं। लेकिन याद रखिएगा
  5603. 3:55:36क्योंकि उन्होंने इतना बड़ा विद्रोह किया
  5604. 3:55:37था तो उनकी तलाश में अंग्रेजों ने उन पर
  5605. 3:55:405000 का इनाम घोषित कर रखा था। कितना?
  5606. 3:55:43लगभग ₹5000 का इनाम उन पर घोषित कर रखा
  5607. 3:55:45था। जिसकी वजह से कहीं ना कहीं उनको
  5608. 3:55:48पकड़ने के लिए अभी भी प्रयास जारी थे
  5609. 3:55:50शहादत खान को। ठीक है? अब होता क्या है
  5610. 3:55:52आगे? 17 साल बाद इस क्रांति के 17 साल बाद
  5611. 3:55:56लगभग कितना? 17 साल बाद 1874 में शहादत
  5612. 3:56:00खान को उनके चेहरे के जख्म के निशान की
  5613. 3:56:02वजह से पहचान लिया गया। और याद रखिएगा
  5614. 3:56:05उनको कहां से? राजस्थान के बांसवाड़ा में
  5615. 3:56:08गिरफ्तार कर इंदौर लाया जाता है। और 1
  5616. 3:56:10अक्टूबर 1874 को शहादत खान को फांसी दे दी
  5617. 3:56:14गई। तो देखिए अंग्रेज उनके पीछे इतना पड़े
  5618. 3:56:16हुए थे कि 1 अक्टूबर 1874 को शहादत खान को
  5619. 3:56:20क्या दे दी गई? फांसी दे दी गई। यानी
  5620. 3:56:21उन्हें फांसी पर लटका दिया गया और उन्हें
  5621. 3:56:23फांसी पर वहीं लटकाया गया जहां जाना आपका
  5622. 3:56:27उद्देश्य है। यानी जो हमारा लोक सेवा आयोग
  5623. 3:56:30है क्या है? मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग जो
  5624. 3:56:34है मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग मध्य प्रदेश
  5625. 3:56:38लोक सेवा आयोग के सामने जो है उनको क्या
  5626. 3:56:40दे दी गई? उनको फांसी दे दी गई। इसीलिए अब
  5627. 3:56:43उनकी समाधि हमको कहां देखने को मिलेगी?
  5628. 3:56:46उनकी समाधि हमको वहीं देखने को मिलेगी।
  5629. 3:56:48उनकी स्मारक एवं जो उनकी समाधि बनी है
  5630. 3:56:50शहादत खान की वह एक पेड़ के नीचे बनी हुई
  5631. 3:56:53है। जहां पर उनको क्या किया गया था? फांसी
  5632. 3:56:55दी गई थी। तो कहां पर मिलेगी उनकी समाधि?
  5633. 3:56:58इंदौर लोक सेवा आयोग की कोठी के सामने
  5634. 3:57:01स्मारक है जो हमेशा उनके योगदान को क्या
  5635. 3:57:03करता है? हमेशा उनके योगदान को याद दिलाता
  5636. 3:57:06है। तो ये क्वेश्चन बहुत ही इंपॉर्टेंट है
  5637. 3:57:08कि उनकी समाधि कहां पर है? नंबर वन। नंबर
  5638. 3:57:11टू ये क्वेश्चन बहुत इंपॉर्टेंट है कि
  5639. 3:57:13उनको फांसी कब दी गई? एक और क्वेश्चन है
  5640. 3:57:16कि उनको गिरफ्तार कहां से किया गया? तो आप
  5641. 3:57:18बांसवाड़ा याद रख सकते हैं। तीसरा
  5642. 3:57:20इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है कि वो किस राजा की
  5643. 3:57:22सेना के सिपाही थे? तो याद रखिएगा वो हैं
  5644. 3:57:25हमारे होलकर शासक कौन? तुकोजीराव होलकर
  5645. 3:57:28द्वितीय। अब ये जो आप देख रहे हैं उनका
  5646. 3:57:30समाधि स्थल है। मैं इसको एक दूसरे पिक्चर
  5647. 3:57:32में दिखाता हूं। यह देखिए यह जो आप देख
  5648. 3:57:34रहे हैं यह लिखा हुआ है। इसी पेड़ के नीचे
  5649. 3:57:36उनको जो है क्या है? समाधि दी गई थी। और
  5650. 3:57:38यहां पर बीच में लिखा भी है शहीद शहादत
  5651. 3:57:42शहीद शहादत खान
  5652. 3:57:46यहां पे यही लिखा हुआ है स्मारक इस पेड़
  5653. 3:57:50के नीचे जो है उनको फांसी दे दी गई थी जो
  5654. 3:57:52कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के सामने
  5655. 3:57:53बिल्कुल बना हुआ है। इसके साथ-साथ अभी एक
  5656. 3:57:56नई चीज है जो आपको जानना है वह यह है कि
  5657. 3:58:00इंदौर का जो याद रखिएगा रेजिडेंसी कोठी
  5658. 3:58:03है। इंदौर की जो रेजिडेंसी कोठी है इसका
  5659. 3:58:05नाम बदलने को लेकर सियासत चलती रहती है।
  5660. 3:58:08याद रखिएगा इसका नाम बदलकर क्या रखने की
  5661. 3:58:10सिफारिश की जाती है? इसका नाम बदलकर जो है
  5662. 3:58:13किसके नाम पर? याद रखिएगा। तो वह है हमारे
  5663. 3:58:16सहादत खान के नाम पर रखने की जो है
  5664. 3:58:19सिफारिश की जाती है। ठीक है? और हो सकता
  5665. 3:58:21है कि कुछ समय में जो है इसका नाम जल्दी
  5666. 3:58:23ही परिवर्तित हो जाए। तो मुझे उम्मीद है
  5667. 3:58:26कि आज जो मैंने आपको शहादत खान के बारे
  5668. 3:58:27में बताया वह आप लोगों को बहुत अच्छे से
  5669. 3:58:30समझ में आ गया होगा। हालांकि इसमें जो बीच
  5670. 3:58:32की स्टोरी है उसको हमने बहुत ज्यादा डिटेल
  5671. 3:58:34में नहीं लिया। उसका कारण है कि कहीं ना
  5672. 3:58:36कहीं उसकी आवश्यकता नहीं होती है और फिर
  5673. 3:58:38बहुत ज्यादा टाइम हमारा चला जाता है। मैं
  5674. 3:58:41आपको बता देता हूं कि इन इन लोगों ने
  5675. 3:58:42इंदौर में जब विद्रोह किया था तो इंदौर
  5676. 3:58:44में विद्रोह करके ये जो हैं दिल्ली की तरफ
  5677. 3:58:47कूच करते हैं। बीच में ग्वालियर के
  5678. 3:58:48क्रांतिकारियों से मिलते हैं। फिर जो
  5679. 3:58:50धीरे-धीरे ये जो हैं तितर-विितर हो जाते
  5680. 3:58:52हैं। यानी सब अलग-अलग हो जाते हैं और उसी
  5681. 3:58:54क्रम में हमारे जो शहादत खान हैं वो
  5682. 3:58:56राजस्थान में एक जगह थी जिसका नाम था
  5683. 3:58:59बांसवाड़ा। तो बांसवाड़ा की तरफ चले जाते
  5684. 3:59:02हैं और बाद में उनको वहां से गिरफ्तार कर
  5685. 3:59:04लिया जाता है क्योंकि उनके चेहरे पे एक
  5686. 3:59:06जख्म बना था जो कर्नल ट्रेवर्स ने उनके
  5687. 3:59:09ऊपर चेहरे पे तलवार मारी थी। तो याद
  5688. 3:59:12रखिएगा जब सादत खान ने इंदौर रेजिडेंसी पर
  5689. 3:59:15हमला किया था तोप उन्होंने पहली तोप से
  5690. 3:59:18रेजिडेंसी का गेट उड़ा दिया था और वहीं पर
  5691. 3:59:21याद रखिएगा वहीं पर जो है यह जो रेजिडेंसी
  5692. 3:59:24अभी मैंने आपको तस्वीर में दिखाई है इस
  5693. 3:59:26रेजिडेंसी का नाम यानी इस रेजिडें
  5694. 3:59:29रेजिडेंसी का नाम इसीलिए बदलकर जो है
  5695. 3:59:31सिफारिश की जाती है। पूरा पिक्चर नहीं है।
  5696. 3:59:34तो यह इंदौर रेजिडेंसी है जो उस समय
  5697. 3:59:36अंग्रेज इसका इस्तेमाल करते थे और इसी का
  5698. 3:59:39नाम बदलने की सिफारिश जो है की जा रही है।
  5699. 3:59:41तो मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को जो
  5700. 3:59:43मैंने अभी आप लोगों को इंफॉर्मेशन दी वो
  5701. 3:59:45आपको काम आएगी। आपके एग्जाम में हेल्प
  5702. 3:59:47करेगी। तो ये थे हमारे महान स्वतंत्रता
  5703. 3:59:50सेनानी जिन्होंने मालवा में 1857 की
  5704. 3:59:53क्रांति का नेतृत्व किया। और इनका नाम था
  5705. 3:59:56क्या? शहादत खान। तो शहादत खान के बारे
  5706. 3:59:59में हम लोगों ने यहां पर चर्चा की।
  5707. 4:00:02मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को यह लेक्चर
  5708. 4:00:04अच्छा लगेगा। अगर आपको यह लेक्चर अच्छा
  5709. 4:00:05लगे तो कमेंट करके जरूर बताइएगा। थैंक यू।
  5710. 4:00:08जय हिंद।
  5711. 4:00:18हेलो एवरीवन, आप सभी का एमपीपीएससी स्टडी
  5712. 4:00:21आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है। तो
  5713. 4:00:23दोस्तों, हमारी जो सीरीज है मध्य प्रदेश
  5714. 4:00:25के वीरों का इतिहास। इस सीरीज में आज हम
  5715. 4:00:28बात करने वाले हैं मध्य प्रदेश के एक महान
  5716. 4:00:30स्वतंत्रता सैनी सेनानी एक महान आदिवासी
  5717. 4:00:34भील योद्धा जिनका नाम था खाज्जा नायक। तो
  5718. 4:00:36दोस्तों खाज्जा नायक की जो वीरगाथा है आज
  5719. 4:00:39हम उसके बारे में बात करने वाले हैं।
  5720. 4:00:41लास्ट दो वीरों की गाथाएं जो हैं मैं आप
  5721. 4:00:44लोगों को ऑलरेडी बता चुका हूं। मामा
  5722. 4:00:46टांटिया भील और उसके अलावा भीमा नायक। आज
  5723. 4:00:48की कड़ी में हम बात करने वाले हैं मध्य
  5724. 4:00:51प्रदेश के महान वीर खाज्जा नायक की
  5725. 4:00:53वीरगाथा के बारे में। तो कौन है खाद्या
  5726. 4:00:56नायक और किस प्रकार जो है उन्होंने
  5727. 4:00:58स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान दिया।
  5728. 4:01:00इसे हम 10 मिनट में ही अच्छे से समझेंगे।
  5729. 4:01:03सबसे पहले मैं आपको बताना चाहता हूं देखिए
  5730. 4:01:08जो हमारे खाज नायक जी हैं उन्हें वो उतना
  5731. 4:01:11क्रेडिट नहीं मिला जितना बाकी लोगों को
  5732. 4:01:13मिला। इसीलिए हम इस सीरीज में खासकर उन
  5733. 4:01:16लोगों की बात कर रहे हैं जिनका नाम कहीं
  5734. 4:01:18ना कहीं उन स्वर्णिम अक्षरों की जगह पर
  5735. 4:01:22कहीं छूट गया या अंधकार में चला गया। तो
  5736. 4:01:24उसी सी इस सीरीज के माध्यम से हमारा यह
  5737. 4:01:27प्रयास है कि उन वीर नायकों को उन वीर
  5738. 4:01:30पुरुषों को वो सम्मान दिया जाए और इसमें
  5739. 4:01:32हमारा एक प्रयास यह है कि मध्य प्रदेश लोक
  5740. 4:01:35सेवा आयोग की परीक्षा में बनने वाले
  5741. 4:01:37प्रश्नों को भी आसानी से सॉल्व किया जा
  5742. 4:01:39सके। तो जैसे कि सबसे पहले हम खाद्या नायक
  5743. 4:01:42के जन्म के बारे में बात कर लेते हैं। कौन
  5744. 4:01:44है खाद्या नायक? देखिए खाद्या नायक का जो
  5745. 4:01:47जन्म है वो सांगली ग्राम में हुआ था। आप
  5746. 4:01:50इसे बड़वानी जिले में याद रखेंगे बड़वानी
  5747. 4:01:53एमपी और यह जो है निमाड़ का इलाका है। इसी
  5748. 4:01:57इलाके में हमारे जो याद रखिएगा भीमा नायक
  5749. 4:02:00जी हैं उनका भी जन्म हुआ था। ठीक है? इनके
  5750. 4:02:02जो पिता थे उनका नाम गुमान नायक था। तो
  5751. 4:02:04गुमान नायक के घर में इनका जन्म होता है।
  5752. 4:02:06तो इसमें आपके काम की दो चीजें हो गई।
  5753. 4:02:09इनका जन्म सांगली जो है कहां पर याद
  5754. 4:02:11रखिएगा बड़वानी क्षेत्र में इनका जन्म
  5755. 4:02:13होता है। दूसरा ये गांव का नाम है उनके और
  5756. 4:02:15गुमान नायक इनके फादर थे। इनके जो पिता थे
  5757. 4:02:18वो सेंधवा घाट जो कि बड़वानी में है। काफी
  5758. 4:02:21फेमस है ये घाट क्योंकि यहां पर मध्य
  5759. 4:02:24प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच में यानी
  5760. 4:02:26मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का जो बॉर्डर
  5761. 4:02:28था उस समय जो स्वतंत्रता आंदोलनकारी जो थे
  5762. 4:02:30उनके लिए काफी इंपॉर्टेंट रोल रखता था
  5763. 4:02:32सेंधवा घाट। तो वहां के ये वार्डन थे यानी
  5764. 4:02:35अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी में नौकरी
  5765. 4:02:37करते थे।
  5766. 4:02:39उन्हें नायक की उपाधि प्राप्त थी इनके
  5767. 4:02:41पिता को। इसके बाद 1833 में इनके पिता की
  5768. 4:02:44मृत्यु हो गई गुमान नायक जी की और मृत्यु
  5769. 4:02:47के बाद ये सेंधवा घाट के नायक बनते हैं।
  5770. 4:02:49अब इस कहानी को थोड़ा सा हम अपने तरीके से
  5771. 4:02:51समझते हैं और उसके बाद मैं आपको ये पूरी
  5772. 4:02:53कहानी जो है बताता हूं। देखिए होता क्या
  5773. 4:02:56है बेसिकली यह हमारे जो खाज नायक जी हैं
  5774. 4:03:03देखिए तो खाज्या नायक जी जो थे यहां पर हम
  5775. 4:03:07कुछ गिनी चुनी बातों को करेंगे जो आपके
  5776. 4:03:10काम की हैं। खाज्या नायक जो है 1833 में
  5777. 4:03:151833 में अपने पापा की मृत्यु के बाद जो
  5778. 4:03:18है सेंधवा घाट जो है बड़वानी में इस
  5779. 4:03:21सेंधवा घाट के वार्डन बनते हैं। सेंधवा
  5780. 4:03:24घाट के क्या बनते हैं? बार्डन। तो जब ये
  5781. 4:03:27सेंधवा घाट के बार्डन बनते हैं तो इनका
  5782. 4:03:30काम था कि इस क्षेत्र से जो भी गतिविधियां
  5783. 4:03:34हो रही हैं उन गतिविधियों पर नजर रखना। तो
  5784. 4:03:37यहां पर यह काम करते थे और 1851 तक
  5785. 4:03:40इन्होंने इस क्षेत्र में वार्डन के तौर पर
  5786. 4:03:42काम किया था। एक दिन क्या होता है कि इस
  5787. 4:03:46क्षेत्र से रात में कुछ गतिविधियां हो रही
  5788. 4:03:48थी। कुछ लोग जा रहे थे जिसकी छानबीन
  5789. 4:03:50इन्होंने की और उस संघर्ष में जब वह उसे
  5790. 4:03:53रोकने का प्रयास किया तो इनके द्वारा एक
  5791. 4:03:56व्यक्ति की हत्या कर दी गई यानी वो
  5792. 4:03:58बीच-बचाव में वो मारा गया जिसकी वजह से
  5793. 4:04:01अंग्रेजों ने इन्हें क्या किया 10 वर्ष की
  5794. 4:04:04सजा सुना दी यानी लगभग 1851 तक तो
  5795. 4:04:07इन्होंने यहां पर काम किया है। याद रखिएगा
  5796. 4:04:09एज अ वार्डन। उसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी
  5797. 4:04:12ने इनको क्या किया? बर्खास्त कर दिया। और
  5798. 4:04:15बर्खास्त करने के बाद क्या किया? इनको 10
  5799. 4:04:17साल की सजा सुना दी। 10 वर्ष की सजा। तो
  5800. 4:04:22अंग्रेजों ने इनकी जो ईमानदारी थी, इनका
  5801. 4:04:26जो वफादारी थी, उसकी जो सजा है वो 10 वर्ष
  5802. 4:04:29की सजा है। और इनके लेकिन जेल में अच्छे
  5803. 4:04:31आचरण की वजह से, अच्छे व्यवहार की वजह से
  5804. 4:04:34यह जो सजा है वह कम कर दी गई और यहां पर
  5805. 4:04:37इनकी सजा घटाकर 5 वर्ष कर दी गई। यानी 5
  5806. 4:04:40वर्ष में यह जेल से बाहर आ गए। ठीक है? तो
  5807. 4:04:43मेन जो बात है वो आपको यह जाननी है कि
  5808. 4:04:46भीमा नायक के जो सॉरी खाज्जा नायक के जो
  5809. 4:04:49पिता थे पिता का नाम क्या था गुमान नायक
  5810. 4:04:52ठीक है और जो गुमान नायक थे वो कौन थे तो
  5811. 4:04:55याद रखिएगा वो वार्डन थे किस क्षेत्र के
  5812. 4:04:58सेंधवा घाट के गुमान नायक के बाद जो है
  5813. 4:05:00वार्डन कौन बने थे 1833 में सेंधवा घाट के
  5814. 4:05:03वार्डन खाज नायक बने 1851 51 तक वार्डन
  5815. 4:05:07रहे बाद में अंग्रेजों ने इन्हें बर्खास्त
  5816. 4:05:09करके 10 साल की सजा सुनाई लेकिन अच्छे
  5817. 4:05:11आचरण की वजह से इन्हें ने जो है क्या कर
  5818. 4:05:13दिया? इनकी सजा को माफ। अब इसमें क्या
  5819. 4:05:16होता है? इसमें आगे कहानी में ट्विस्ट आता
  5820. 4:05:19है। इसी क्षेत्र में एक महान क्रांतिकारी
  5821. 4:05:22रहते थे जिन्होंने सेंधवा को या बड़वानी
  5822. 4:05:25को अपना केंद्र बना रखा था। उनका नाम था
  5823. 4:05:28बड़वानी जिनका केंद्र था और उनका नाम है
  5824. 4:05:32भीमा नायक। ऑलरेडी आप भीमा नायक की कहानी
  5825. 4:05:34को अच्छे से समझ चुके हैं। तो भीमा नायक
  5826. 4:05:37इस क्षेत्र में क्या कर रहे थे? भीलपलटन
  5827. 4:05:40बनाकर अंग्रेजों से संघर्ष कर रहे थे।
  5828. 4:05:42जिनका उद्देश्य था अंग्रेजी शासन को उखाड़
  5829. 4:05:44फेंकना। इन भीमा नायक को खाज्या नायक की
  5830. 4:05:47एक बहन थी। खाज नायक की कौन थी? एक बहन।
  5831. 4:05:51तो खाज्या नायक की जो बहन थी उनको भीमा
  5832. 4:05:53नायक जी पसंद करते थे। और इस प्रकार जो
  5833. 4:05:56भीमा नायक हैं वह क्या करते हैं? इनकी बहन
  5834. 4:05:59से शादी कर लेते हैं। और इस प्रकार अगर आप
  5835. 4:06:01ध्यान से सुने तो यह जो हैं खाद्या नायक
  5836. 4:06:04के कौन बन जाते हैं? तो खाद्य नायक के
  5837. 4:06:06लगते थे यह बहनोई यानी बहन के पति। तो
  5838. 4:06:10दोनों के बीच में क्या रिश्ता था वो आप
  5839. 4:06:12जान लेना। इसी समय क्या होता है 1857 की
  5840. 4:06:16क्रांति जैसे कि मैंने आपको बताया 1857 की
  5841. 4:06:19क्रांति यहां पर चल रही थी। 1857 की जब
  5842. 4:06:22क्रांति चल रही थी
  5843. 4:06:251857 की क्रांति। तो इस क्रांति के दौरान
  5844. 4:06:321857 की क्रांति जब चल रही थी तो इस
  5845. 4:06:35क्रांति के दौरान अब क्या होता है? दो
  5846. 4:06:37योद्धा एक साथ मिल गए। एक हैं भीमा नायक
  5847. 4:06:41और दूसरे का नाम क्या है? भीमा नायक और एक
  5848. 4:06:45हैं हमारे खाज नायक। तो याद रखिएगा दोनों
  5849. 4:06:48दोनों ने मिलकर यहां पर काम किया है।
  5850. 4:06:51दोनों एक दूसरे के रिश्तेदार थे यानी
  5851. 4:06:53खाज्या नायक के बहनोई थे। तो इन लोगों ने
  5852. 4:06:55क्या किया? अंग्रेजों के विरुद्ध जो है
  5853. 4:06:58अपनी भील सेना थी उसके द्वारा मुकाबला
  5854. 4:07:00किया। अब यहां पर एक स्टोरी में एक और
  5855. 4:07:02कहानी है। जब 1857 की क्रांति शुरू हुई,
  5856. 4:07:06तो अंग्रेजों ने उन सभी अधिकारियों और
  5857. 4:07:09सैनिकों को वापस बुलाया था जो बर्खास्त
  5858. 4:07:11किए थे या जो नौकरी से हट गए थे क्योंकि
  5859. 4:07:13उनके पास लड़ने का अनुभव था। तो यह ऑफर
  5860. 4:07:16खाजिया नायक को भी आया। खाजिया नायक ने इस
  5861. 4:07:18ऑफर को ठुकरा दिया और अपने बहनोई भीमा
  5862. 4:07:21नायक के साथ जो है अंग्रेजों के विरुद्ध
  5863. 4:07:24जो है संघर्ष किया। इस कहानी में जो मैंने
  5864. 4:07:26आपको बताया यहां पर अब दोबारा हम इसमें
  5865. 4:07:28देख लेते हैं। देखिए विद्रोह क्यों किया
  5866. 4:07:31था?
  5867. 4:07:321857 की क्रांति के एक महायोद्धा थे
  5868. 4:07:35बलिदानी खाज्जा नायक जिन्होंने ब्रिटिश
  5869. 4:07:37आर्मी में होते हुए अंग्रेजों से बगावत कर
  5870. 4:07:39दी और देश के बल देश को बलिदान देकर अमरता
  5871. 4:07:43प्राप्त की। खाज्जा नायक अंग्रेजों की भील
  5872. 4:07:45पलटन में एक सामान्य सिपाही थे। अंग्रेजों
  5873. 4:07:47के रीति-रिवाज पर नीति और षड्यंत्रों के
  5874. 4:07:51कारण उन्हें अंग्रेजों से नफरत करने लगे।
  5875. 4:07:53एक न्यायोचित कार्य के लिए पर भी शासन ने
  5876. 4:07:57कानून अपने हाथ में लेने पर उन्हें 10 साल
  5877. 4:07:59की सजा सुनाई थी जो मैंने आपको कहानी
  5878. 4:08:01सुनाई। जेल से छूटकर उनके मन में इस
  5879. 4:08:04विदेशी सत्ता से लड़ने की छटपटाहट और बढ़
  5880. 4:08:06गई और खाज्जा नायक ने जनजातीय भील समुदाय
  5881. 4:08:10में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की भावना
  5882. 4:08:12जगाई और अपने भील साथियों के साथ
  5883. 4:08:14अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। अब
  5884. 4:08:17क्या होता है यह भी जान लीजिए। उनके मन
  5885. 4:08:20में प्रतिशोध की भावना इतनी प्रबल थी कि
  5886. 4:08:22वह बड़वानी क्षेत्र के क्रांतिकारी नेता
  5887. 4:08:25भीमा नायक से मिले जो रिश्ते में उनके
  5888. 4:08:28क्या लगते थे बहनोई इसमें एग्जाम ओरिएंटेड
  5889. 4:08:30क्वेश्चन जो है वो मैंने आपको बता दिया
  5890. 4:08:32समझ में आया कहां से सांगली ग्राम से
  5891. 4:08:35संबंध है पिता का नाम क्या है गुमान सिंह
  5892. 4:08:37नायक सेंधवा के वार्डन थे यह स्वयं वार्डन
  5893. 4:08:40बने लेकिन बाद में अंग्रेजों के विरुद्ध
  5894. 4:08:42विद्रोह कर दिया यहीं से इन दोनों की
  5895. 4:08:44जोड़ी बनी जिसने भीलों की सेना बनाकर
  5896. 4:08:46निमाड़ क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध
  5897. 4:08:49वातावरण जो है युद्ध का कर दिया। अब एक
  5898. 4:08:52महान वॉर के बारे में जो मैंने आपको भीमा
  5899. 4:08:54नायक में भी समझाया था। अगर आप हर योद्धा
  5900. 4:08:57की कहानी को ध्यान से सुनेंगे और उसे आपस
  5901. 4:08:59में कनेक्ट करेंगे तो आपकी जो नॉलेज है वो
  5902. 4:09:01भी बढ़ेगी और एग्जाम के जो तथ्य हैं वो भी
  5903. 4:09:04आपकी पकड़ में आएंगे। अब देखिए एक युद्ध
  5904. 4:09:06होता है जो आपके लिए काम का है। एग्जाम
  5905. 4:09:09उपयोगी है। उस युद्ध का नाम क्या है? अंबा
  5906. 4:09:12पानी की लड़ाई। इसे अंबा पानी का युद्ध भी
  5907. 4:09:14कहते हैं। बेसिकली वो जो गांव था उस गांव
  5908. 4:09:17का नाम अंबा पानी नहीं आमल्या पानी गांव
  5909. 4:09:20था। लेकिन आम सामान्य भाषा में उसे अंबा
  5910. 4:09:23पानी कहते हैं। तो क्रांतिकारी जो वीर
  5911. 4:09:26योद्धा हैं यानी एक तरफ हमारे कौन है?
  5912. 4:09:28पूरे के पूरे भील साथी हैं हमारे जिसमें
  5913. 4:09:32भीमा नायक जी भी हैं। याद रखिएगा। भीमा
  5914. 4:09:34नायक के साथ-साथ इस युद्ध में कौन है?
  5915. 4:09:37खाज्या नायक भी हैं और खाज्या नायक के
  5916. 4:09:40बेटे भी साथ में लड़ रहे हैं जिनका नाम था
  5917. 4:09:42दौलत सिंह। याद रखिएगा इनके बेटे हैं दौलत
  5918. 4:09:45सिंह। इन सभी योद्धाओं ने अपनी सेना को
  5919. 4:09:48इकट्ठा किया और अंबा पानी जो जगह थी वहां
  5920. 4:09:51पर जो है ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और
  5921. 4:09:53इनके बीच में एक भयंकर लड़ाई होती है और
  5922. 4:09:56इस लड़ाई का जो डेट है वो है 11 अप्रैल
  5923. 4:10:001858।
  5924. 4:10:02इस भीषण संघर्ष में दो लोगों की देखिए
  5925. 4:10:06यहां पर जो हमारे यह हैं
  5926. 4:10:08दौलत सिंह जो इनके बेटे थे इनकी मृत्यु हो
  5927. 4:10:11गई और खाज नायक हैं इनकी भी मृत्यु हो गई
  5928. 4:10:14तो खाज नायक का जो बलिदान दिवस है वो
  5929. 4:10:17मनाया जाता है 11 अप्रैल भीमा नायक बच
  5930. 4:10:19निकले थे जो बाद में अंग्रेजों द्वारा
  5931. 4:10:22उन्हें एक विश्वासघाती के द्वारा पकड़कर
  5932. 4:10:24उन्हें काला पानी की सजा हुई थी जो हम
  5933. 4:10:26उनके पार्ट में पढ़ चुके हैं पोर्ट ब्लियर
  5934. 4:10:28जहां पर उनकी मृत्यु 29 दिसंबर 1876 को हो
  5935. 4:10:31गई थी। तो कुल मिलाकर यह जो लड़ाई है अंबा
  5936. 4:10:34पानी की वह बड़ी फेमस है। इस युद्ध में
  5937. 4:10:36भीमा नायक, खाज्जा नायक और उनके जो बेटे
  5938. 4:10:40हैं जिनका नाम था दौलत सिंह इन लोगों ने
  5939. 4:10:42अंग्रेजों से एक भीषण संघर्ष किया। परंतु
  5940. 4:10:45अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार थे। इनके
  5941. 4:10:47पास परंपरागत हथियार थे। जिसकी वजह से जो
  5942. 4:10:49भील सेना है वो हार गई। इनके कई साथी
  5943. 4:10:51युद्ध में मारे जाते हैं। सिर्फ इसमें
  5944. 4:10:54भीमा नायक जी बचते हैं। तो यही लिखा हुआ
  5945. 4:10:57है। देखिए क्रांतिकारी वीर योद्धा खाज्जा
  5946. 4:10:59नायक ने जनजातीय भील समुदाय में चेतना
  5947. 4:11:01लाते हुए अंग्रेजों से सीधे युद्ध किया
  5948. 4:11:04था। वर्ष 18 57 की क्रांति में जिसने
  5949. 4:11:07बड़वानी क्षेत्र में भीलों की बागडोर
  5950. 4:11:09संभाली। वहीं 11 अप्रैल 1858 को बड़वानी
  5951. 4:11:12और सिलावत के बीच स्थित अमल्यापानी गांव
  5952. 4:11:15में अंग्रेज सेना और इस भील सेना की
  5953. 4:11:18मुठभेड़ हो गई। अंग्रेज सेना के पास
  5954. 4:11:20आधुनिक शस्त्र थे। जबकि भील अपने परंपरागत
  5955. 4:11:23शस्त्रों से ही मुकाबला कर रहे थे। प्रातः
  5956. 4:11:268:00 बजे यह जो लड़ाई है सुबह 8:00 बजे
  5957. 4:11:28शुरू हुई थी। शाम के 3:00 बजे तक चलती है
  5958. 4:11:31और इस युद्ध में खाज्या नायक और उनके जो
  5959. 4:11:34पुत्र हैं दौलत सिंह यह अनेक योद्धा जो
  5960. 4:11:36हैं वो यहां पर वीरगति को प्राप्त होते
  5961. 4:11:39हैं। कुछ जो सोर्स हैं या कुछ इतिहासकार
  5962. 4:11:42जो हैं वो इनका जो बलिदान दिवस है वो यह
  5963. 4:11:45बताते हैं। इसमें एक छोटी सी कहानी जोड़ते
  5964. 4:11:48हैं और वह 3 अक्टूबर 1860 को बताते हैं।
  5965. 4:11:52इसमें क्या ट्विस्ट है मैं आपको बता देता
  5966. 4:11:54हूं। वह बताते हैं कि इस युद्ध में खाज्जा
  5967. 4:11:57नायक जी बच निकले थे और वह जो है फिर से
  5968. 4:11:59भीलों का नेतृत्व कर रहे थे। उसी समय क्या
  5969. 4:12:02होता है कि एक दिन वह अपनी पलटन को लेकर
  5970. 4:12:04एक नदी में स्नान कर रहे थे और वहां पर एक
  5971. 4:12:07रोहित्दीन नाम का व्यक्ति था जो एक
  5972. 4:12:09मुस्लिम था यह आया जो इनका विश्वास पात्र
  5973. 4:12:12बना था। एक्चुअली में रोहित्दीन नाम का जो
  5974. 4:12:14व्यक्ति था इस व्यक्ति को अंग्रेजों ने
  5975. 4:12:17इनके पास भेजा था जासूस बनाकर और इस
  5976. 4:12:19रोहित्दीन ने क्या किया था? इनका विश्वास
  5977. 4:12:21जीत लिया। और एक दिन जब हमारे खाज नायक उस
  5978. 4:12:25नदी में स्नान कर रहे थे क्योंकि वह एक
  5979. 4:12:27धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे और जैसे
  5980. 4:12:29ही वह स्नान के लिए निकले और सूर्य पूजा
  5981. 4:12:31कर रहे थे तो रोहित ने पीछे से उनकी पीठ
  5982. 4:12:34में तलवार मार दी और उनकी हत्या कर दी। जब
  5983. 4:12:36उनकी बहन उन्हें बचाने के लिए आती है तो
  5984. 4:12:38उनकी बहन की भी हत्या कर दी थी। तो इस
  5985. 4:12:41प्रकार जो है खाजिया नायक की हत्या
  5986. 4:12:43रोहित्दीन नामक व्यक्ति ने की। तो कुछ जो
  5987. 4:12:46सोर्स हैं वो इनका बलिदान दिवस 3 अक्टूबर
  5988. 4:12:481860 को मानते हैं। लेकिन अगर आप कहीं पर
  5989. 4:12:51भी सर्च करेंगे क्योंकि इन क्रांतिकारी
  5990. 4:12:53वीर योद्धाओं के बारे में वो
  5991. 4:12:56प्रॉपर जानकारी अवेलेबल नहीं है जो
  5992. 4:12:58वास्तविक रूप से होनी चाहिए। तो जिसकी वजह
  5993. 4:13:00से संभवत ये एक तथ्य है जो आपको याद रखना
  5994. 4:13:04है। अब इसमें एक आखिरी बात जो मुझे आपको
  5995. 4:13:07बतानी है। देखिए लास्ट सेशन में जब मैंने
  5996. 4:13:10आप लोगों को
  5997. 4:13:12भीमा नायक जी के बारे में बताया था तो
  5998. 4:13:14उनकी जो गढ़ी थी उसके बारे में आपको बताया
  5999. 4:13:16था और उसका पिक्चर भी दिखाया था जो
  6000. 4:13:18बड़वानी जिले में है जिसका नाम धोला
  6001. 4:13:20बाबड़ी या ढाबा बाबड़ी के नाम से फेमस है।
  6002. 4:13:23याद रखिए धोला बाबड़ी या ढाबा बाबड़ी।
  6003. 4:13:25यहां पर एक किला लिखा हुआ है भरगढ़ का
  6004. 4:13:28किला। यह जो किला है मध्य प्रदेश के
  6005. 4:13:30बड़वानी जिले में है। इससे आपका एक फैक्ट
  6006. 4:13:32भी तैयार होगा और एक खास बात क्या है कि
  6007. 4:13:34यह जो किला था यह महान जो हमारे वीर
  6008. 4:13:38योद्धा हैं खाज्या नायक उनकी कर्मस्थली
  6009. 4:13:42थी। इस किले को जो है उनकी कर्मस्थली माना
  6010. 4:13:45जाता है जिसका नाम है भंवरगढ़ का किला। इस
  6011. 4:13:47किले का जो वर्तमान में यह स्थिति है
  6012. 4:13:49बड़वानी में है। यहां पर जो सरकार है मध्य
  6013. 4:13:53प्रदेश सरकार ध्यान से सुनिएगा। मध्य
  6014. 4:13:55प्रदेश सरकार ने यहां पर क्या किया है?
  6015. 4:13:57हाल ही में जो मुख्यमंत्री जी थे उन्होंने
  6016. 4:13:59यहां पर एक प्रेरणा केंद्र बनाने की घोषणा
  6017. 4:14:02भी की है। तो एक क्वेश्चन यह पूछा जा सकता
  6018. 4:14:05है कि मध्य प्रदेश के किस किले को खाद्य
  6019. 4:14:07न्याय की कर्मस्थली के रूप में जाना जाता
  6020. 4:14:09है और यह सेंधवा जो कि बड़वानी में उससे
  6021. 4:14:1214 किमी दूरी है यानी उसके पास में स्थित
  6022. 4:14:14है जिसका नाम है क्या? भंवरगढ़ का किला।
  6023. 4:14:17तो यह थी आज की जो हमारी कहानी जिसमें
  6024. 4:14:20हमने एक महान स्वतंत्रता सेनानी मध्य
  6025. 4:14:22प्रदेश के वीर आदिवासी योद्धा भील योद्धा
  6026. 4:14:25खाज्या नायक के बारे में जाना। उनके पिता
  6027. 4:14:28का नाम गुमान सिंह नायक। सेंधवा घाट से
  6028. 4:14:30उनका संबंध है। भीमा नायक उनके बहनोई थे
  6029. 4:14:33और अंबा पानी के युद्ध में उनके पुत्र की
  6030. 4:14:35मृत्यु होती है जिनका नाम दौलत सिंह था और
  6031. 4:14:38वह भीलपल्टन में नौकरी करते थे। इसके
  6032. 4:14:41अलावा एक और इंपॉर्टेंट बात जो मैंने आपको
  6033. 4:14:44बताई थी। मैं चाहता हूं आप दोबारा भी देख
  6034. 4:14:46लें। इसमें कोई परेशानी नहीं है। यह जो
  6035. 4:14:48धोला बाबड़ी है या इसको ढाबा बाबड़ी भी
  6036. 4:14:51कहते हैं। यह जो है अगर कभी पूछा जाए इसका
  6037. 4:14:54संबंध किससे है? याद रखिएगा तो यह जो है
  6038. 4:14:57वह भीमा नायक की कर्मस्थली है या उनकी
  6039. 4:14:59गढ़ी के रूप में जाना जाता है। सरकार
  6040. 4:15:01द्वारा यहां पर एक भीमा नायक प्रेरणा
  6041. 4:15:04केंद्र बनाया गया है करोड़ों रुपए खर्च
  6042. 4:15:06करके। तो यह भी पूछा जा सकता है कि भीमा
  6043. 4:15:08नायक प्रेरणा केंद्र कहां पर है? बड़वानी
  6044. 4:15:10जिले में जिसका नाम है धोलाबावड़ी के पास।
  6045. 4:15:13आई होप आप लोगों को जो जानकारी आज मेरे
  6046. 4:15:16द्वारा दी गई है, यह सीरीज आप लोगों को
  6047. 4:15:19काफी हेल्प कर रही होगी और इस सीरीज के
  6048. 4:15:21माध्यम से आप मध्य प्रदेश के उन वीरों के
  6049. 4:15:23बारे में जान पा रहे हैं जो कहीं ना कहीं
  6050. 4:15:26गुमनाम रहे। कहीं ना कहीं उनको वह सम्मान
  6051. 4:15:28नहीं प्राप्त हुआ जिसके वह हकदार थे। आगे
  6052. 4:15:31की सीरीज में हम और वीर योद्धाओं के बारे
  6053. 4:15:34में बात करेंगे। आप लोगों से बस इतना
  6054. 4:15:36रिक्वेस्ट है कि अगर आपको यह सीरीज पसंद आ
  6055. 4:15:38रही है तो आप कमेंट करके जरूर बताएं। जय
  6056. 4:15:41हिंद। थैंक यू।
  6057. 4:15:49नमस्कार साथियों आप सभी का एमपीपीएससी
  6058. 4:15:52स्टडी आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है।
  6059. 4:15:54उम्मीद है आप सभी लोग मन लगाकर पढ़ रहे
  6060. 4:15:56होंगे और आपकी तैयारी बेहतर होगी। साथियों
  6061. 4:16:00आप सभी लोग जानते हैं कि मेरे द्वारा एक
  6062. 4:16:02सीरीज स्टार्ट की गई है जिसका नाम है मध्य
  6063. 4:16:04प्रदेश के वीरों का इतिहास। तो इस सीरीज
  6064. 4:16:07में हम अभी तक बहुत सारे वीरों की चर्चा
  6065. 4:16:09कर चुके हैं और आज हम बात करने वाले हैं
  6066. 4:16:12मध्य प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम के एक वीर
  6067. 4:16:15और एक प्रमुख योद्धा जिनका नाम है रघुनाथ
  6068. 4:16:18सिंह मंडलोई। तो दोस्तों आप लोगों ने नाम
  6069. 4:16:21सुना होगा रघुनाथ सिंह मंडलोई जी का जो
  6070. 4:16:23निवाड़ क्षेत्र के एक आदिवासी योद्धा थे
  6071. 4:16:25जिन्होंने 1857 की क्रांति के समय
  6072. 4:16:28स्वतंत्रता आंदोलन में अपना बहुमूल्य
  6073. 4:16:30योगदान दिया। तो आइए बात करते हैं कि कौन
  6074. 4:16:32है रघुनाथ सिंह मंडलोई जी जिन्होंने
  6075. 4:16:35स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और अपना
  6076. 4:16:38योगदान दिया। तो देखिए रघुनाथ सिंह मंडलोई
  6077. 4:16:40के बारे में अगर हम बात करें तो सबसे पहले
  6078. 4:16:42रघुनाथ सिंह जो मंडलोई हैं उनके जन्म को
  6079. 4:16:45आपको याद रखना है। इनका जो जन्म है वो
  6080. 4:16:47ग्राम टांडा बरूड़ कचहरी इसको बोलते हैं।
  6081. 4:16:50यह एक्चुअली में खरगोन डिस्ट्रिक्ट में
  6082. 4:16:52आता है जो कि निमाड़ का पार्ट है। यहां पर
  6083. 4:16:55इनका जन्म हुआ था। आप सभी ने आप सब ने अभी
  6084. 4:16:58तक जितने भी योद्धाओं के बारे में पढ़ा
  6085. 4:17:00आदिवासी वीर वीर योद्धा खाज्या नायक, भीमा
  6086. 4:17:03नायक, बिरजू नायक, सीताराम कवर, टांट्या
  6087. 4:17:06भील ये सभी के सभी निमाड़ क्षेत्र के
  6088. 4:17:08आदिवासी योद्धा थे। इसका एक मतलब यह है कि
  6089. 4:17:11अगर आपसे कभी एग्जाम में मुख्य परीक्षा
  6090. 4:17:13में भी पूछा जाए कि निमाड़ के प्रमुख
  6091. 4:17:16आदिवासी योद्धाओं के बारे में लिखिए
  6092. 4:17:18जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपना
  6093. 4:17:20महत्वपूर्ण योगदान दिया तो आप सभी के बारे
  6094. 4:17:22में बता सकते हैं। अब बात करते हैं कि
  6095. 4:17:24इनके पिता इनके पिता का नाम था दीवान सिंह
  6096. 4:17:27जो उस समय 52 गांव की आदिवासी
  6097. 4:17:3152 आदिवासी गांव के जमींदार थे। और इनका
  6098. 4:17:34जो मुख्य काम था इनके पिता का इन आदिवासी
  6099. 4:17:36गांव से टैक्स कलेक्ट करना इस क्षेत्र में
  6100. 4:17:39जहां इनका जन्म हुआ और इनके आसपास के जो
  6101. 4:17:41क्षेत्र जहां पे इनके पिताजी जमींदार थे
  6102. 4:17:44वहां पर पान की खेती मुख्य रूप से होती थी
  6103. 4:17:46और जो पान करते थे जो लोग पान की खेती
  6104. 4:17:49करते थे उनसे ये कर वसूलते थे जैसे कि
  6105. 4:17:52टांडा वरुड़ विस्टान ऊन रोम चिल्ली
  6106. 4:17:55देवनलिया ये जो आदि गांव थे यह पान की
  6107. 4:17:58खेती के लिए बड़े विख्यात थे और याद
  6108. 4:18:00रखेंगे खेत की चुंगी का करारोपण इनके पिता
  6109. 4:18:02दीवान सिंह के हाथों में था। यानी जो पान
  6110. 4:18:05की खेती पर टैक्स लिया जाता था वह इनके
  6111. 4:18:07पिताजी वसूलते थे और उसका एक हिस्सा जो है
  6112. 4:18:10होलकर दरबार को भेजा करते थे। क्योंकि इस
  6113. 4:18:12क्षेत्र में होलकर राज्य का प्रभाव था। तो
  6114. 4:18:16अब क्या होता है कि वह पान की खेती करने
  6115. 4:18:18वाले जो किसान हैं उनसे 2% करारोपण लेते
  6116. 4:18:21थे और जो गरीब किसान होते थे उनको जो है
  6117. 4:18:23कुछ छूट देते थे टैक्स में। तो यह इनके
  6118. 4:18:26पिता की बात हो गई। अब हम बात करते हैं
  6119. 4:18:28आगे रघुनाथ सिंह मंडलोई ने क्या किया? तो
  6120. 4:18:31देखिए रघुनाथ सिंह मंडलोई ने 1800 देखिए
  6121. 4:18:34इसमें एक डेट लिखी है अक्टूबर 1858 के कुछ
  6122. 4:18:37पहले ही टांडा बारूद के रघुनाथ सिंह
  6123. 4:18:39मंडलोई याद रखिएगा इन्होंने विद्रोह कर
  6124. 4:18:41दिया और फरार हो गए। अब इससे आगे की कहानी
  6125. 4:18:44को मैं समझाऊं उससे पहले मैं आपको एक छोटा
  6126. 4:18:46सा चार्ट बनाकर बताता हूं जिससे कि आप
  6127. 4:18:48आसानी से समझ पाएंगे। मुझे लगता है कि अगर
  6128. 4:18:51मैं यह बताऊंगा तो आपको आसानी से यह बात
  6129. 4:18:52समझ में आएगी कि किस तरीके से जो है यहां
  6130. 4:18:55पर घटनाक्रम होता है। तो देखो
  6131. 4:19:09देखिए यहां पर क्या होता है?
  6132. 4:19:16जैसे कि पहले हम चलते हैं निर्माण
  6133. 4:19:19क्षेत्र। यह रहा निर्माण क्षेत्र। ध्यान
  6134. 4:19:22से सुनिएगा आप। इस निर्माण क्षेत्र में
  6135. 4:19:24अभी जो क्रांतिकारी योद्धा हैं या जो इस
  6136. 4:19:27क्षेत्र में एक्टिव हैं उनका नाम था
  6137. 4:19:29रघुनाथ सिंह मंडलोई और रघुनाथ सिंह मंडलोई
  6138. 4:19:33जिनके सहायक हैं मतलब मेन जो योद्धा हैं
  6139. 4:19:35इस क्षेत्र के उनका नाम है सीताराम कंवर
  6140. 4:19:38सीताराम कंवर हम लोग पढ़ चुके हैं
  6141. 4:19:40जिन्होंने क्या किया था आदिवासी लोगों को
  6142. 4:19:43इकट्ठा करके जो है विद्रोह कर दिया तो
  6143. 4:19:45सीताराम कमर इस क्षेत्र के प्रमुख
  6144. 4:19:47विद्रोही थे ठीक है कौन थे यह प्रमुख
  6145. 4:19:50विद्रोही इन्होंने आदिवासियों को इकट्ठा
  6146. 4:19:52किया था और यह क्या कर रहे थे? यह
  6147. 4:19:54आदिवासियों को इकट्ठा कर अंग्रेजों के
  6148. 4:19:56विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे। अब आपने एक
  6149. 4:19:59वर्ड सुना होगा। यह है इंदौर रियासत या
  6150. 4:20:01इंदौर राज्य हम बोल सकते हैं। इंदौर
  6151. 4:20:04रियासत के द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में
  6152. 4:20:07एक अधिकारी अपॉइंट किया जाता था। जिनको
  6153. 4:20:09मंडलोई बोलते थे। मंडलोई बेसिकली एक टाइटल
  6154. 4:20:13है। याद रखिएगा। जिनका काम था क्षेत्र
  6155. 4:20:16विशेष से कर संग्रह करना। क्या करना? कर
  6156. 4:20:19संग्रह करना। ठीक है? कर संग्रह करना। तो
  6157. 4:20:22पहले इनके जो पिता थे यानी रघुनाथ सिंह
  6158. 4:20:24मंडलोई के जो पिता थे वो इस क्षेत्र से कर
  6159. 4:20:27वसूलते थे जिनका नाम था दीवान सिंह।
  6160. 4:20:30ठीक है? बाद में इस क्षेत्र के मंडलोई
  6161. 4:20:33अपॉइंट किए गए जिनका नाम था रघुनाथ सिंह।
  6162. 4:20:36याद रखना रघुनाथ सिंह मंडलोई। तो रघुनाथ
  6163. 4:20:40सिंह मंडलोई को यह जिम्मेदारी दी गई कि वह
  6164. 4:20:42किसानों से टैक्स कलेक्ट करें। अब इस बीच
  6165. 4:20:45क्या होता है कि जो ब्रिटिश सरकार है याद
  6166. 4:20:48रखिएगा सरकार है या आप ऐसा समझते हैं कि
  6167. 4:20:50होलकर रियासत इनके द्वारा जो पान की खेती
  6168. 4:20:53है क्या है पान की खेती इस पर कर बढ़ा
  6169. 4:20:57दिया गया इस पे क्या कर दिया गया कर
  6170. 4:20:58वृद्धि कर दी गई तो इस कर वृद्धि से यह जो
  6171. 4:21:01है हमारे दीवान सिंह के जो पुत्र हैं यानी
  6172. 4:21:04रघुनाथ सिंह मंडोई वो हो जाते हैं नाराज
  6173. 4:21:06हो जाते हैं और नाराज होकर वो यह कहते हैं
  6174. 4:21:09कि यदि आपने यह कर वापस नहीं लिया तो बुरा
  6175. 4:21:12अंजाम होगा तो पहले तो सरकार ने क्या किया
  6176. 4:21:16इनको उपाधि दी राव की उपाधि दी और उनको
  6177. 4:21:19कुछ पेंशन देने की कोशिश की कि आप इस
  6178. 4:21:21क्षेत्र में ऐसा कुछ ना करें लेकिन जब यह
  6179. 4:21:24विरोध करते हैं तो इनकी जो ये मंडलों यानी
  6180. 4:21:27इनकी जो जमींदारी हम बोल सकते हैं इनकी जो
  6181. 4:21:30जमींदारी है इस क्षेत्र की वो जमींदारी
  6182. 4:21:32इनसे छीन ली जाती है और इस जगह पर एक
  6183. 4:21:35दूसरा जमींदार अपॉइंट किया जाता है जिसको
  6184. 4:21:38यह जिम्मेदारी दी गई कि वह रघुनाथ सिंह
  6185. 4:21:40मंडलोई को यहां पर पकड़ ले या उनके इस
  6186. 4:21:43क्षेत्र में उनके जो वर्चस्व है उसको
  6187. 4:21:45समाप्त कर दे। तो इस बीच यह जो हैं हमारे
  6188. 4:21:48रघुनाथ सिंह मंडलोई मिल जाते हैं। किसके
  6189. 4:21:50साथ? इनके साथ मिल जाते हैं जिनका नाम है
  6190. 4:21:53सीताराम कमर। तो रघुनाथ मंडलोई किसके साथ
  6191. 4:21:56आ गए? तो रघुनाथ मंडलोई आ जाते हैं
  6192. 4:21:58सीताराम कमर के साथ आ जाते हैं जो इस
  6193. 4:22:00क्षेत्र के प्रमुख विद्रोही थे। सहयोगी बन
  6194. 4:22:03गए। अब इस बीच एक दुर्घटना हुई। ठीक है?
  6195. 4:22:06आपको याद होगा सीताराम कमर जो थे उनको
  6196. 4:22:10अंग्रेजों के द्वारा उन्हीं के गांव में 8
  6197. 4:22:13अक्टूबर 1858 को घेर लिया गया था जिसमें
  6198. 4:22:16सीताराम कमर लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त
  6199. 4:22:20हुए थे। तो सीताराम कंवर जो हैं जब इनकी
  6200. 4:22:23मृत्यु हो जाती है। याद रखिएगा कब? 8
  6201. 4:22:25अक्टूबर 8 अक्टूबर 1858 को जब ये शहीद हो
  6202. 4:22:29जाते हैं। ठीक है? इन्हीं के गांव पे
  6203. 4:22:31अंग्रेजों ने हमला किया था जिसमें ये शहीद
  6204. 4:22:33हो गए। लास्ट लेक्चर में आप लोगों को
  6205. 4:22:34पढ़ाया था। तो बाद में इनकी मृत्यु के
  6206. 4:22:37पश्चात इस क्षेत्र में जो प्रमुख विद्रोही
  6207. 4:22:40बनते हैं या इस क्षेत्र में इनके बाद
  6208. 4:22:43आदिवासियों का नेतृत्व कौन करते हैं?
  6209. 4:22:45रघुनाथ सिंह मंडलोई आदिवासियों का नेतृत्व
  6210. 4:22:48करते हैं। और इन्होंने क्या किया जो इस
  6211. 4:22:51क्षेत्र के भील इस क्षेत्र के भिलाला जो
  6212. 4:22:55आदिवासी थे इनको मिलाकर एक अपना संगठन
  6213. 4:22:58तैयार कर लिया। और यह जो संगठन क्या करने
  6214. 4:23:01लगा? यह संगठन जमींदारों और अंग्रेजों को
  6215. 4:23:05लूटने लगा। किसको लूटने लगा? जमींदारों और
  6216. 4:23:08अंग्रेजों को लूटने लगा। ठीक है? तो इस
  6217. 4:23:11प्रकार यह जमींदारों और अंग्रेजों को
  6218. 4:23:13लूटते थे और बताते हैं कि इनके साथ क्या
  6219. 4:23:16होता है कि यह लूट कर एक किले में छिप
  6220. 4:23:18जाया करते थे। जिस किले का नाम था
  6221. 4:23:20बीजागढ़। आपने सुना होगा बीजागढ़। बीजागढ़
  6222. 4:23:24की पहाड़ी भी आपने सुनी होगी। तो बीजागढ़
  6223. 4:23:26जो किला है यहां पर यह छिप जाया करते थे।
  6224. 4:23:28इस लूट के माल को लेकर रघुनाथ सिंह
  6225. 4:23:30मंडलोई। इन्होंने अपनी जो सेना बनाई थी
  6226. 4:23:34उसमें इनके साथ 3000 विद्रोही थे। सोचिएगा
  6227. 4:23:37कितनी बड़ी सेना इनके द्वारा बनाई गई।
  6228. 4:23:39यानी निमाड़ क्षेत्र के आदिवासियों का
  6229. 4:23:42समर्थन इन्हें प्राप्त था। तो इन्होंने
  6230. 4:23:44क्या किया? जमींदारों और अंग्रेजों को
  6231. 4:23:45लूटना प्रारंभ किया। क्योंकि ऑलरेडी ये
  6232. 4:23:48सीताराम कंवर के सहयोगी थे। अंग्रेजों के
  6233. 4:23:50विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे। तो उन्होंने
  6234. 4:23:52उसी रास्ते को चुना और परंतु एक दिन ऐसा
  6235. 4:23:55होता है कि जब ये बीजागढ़ फोर्ट में छुपे
  6236. 4:23:58हुए थे तो एक अंग्रेज अधिकारी इन्हें
  6237. 4:24:00पकड़ने के लिए आता है जिसका नाम था मेजर
  6238. 4:24:02कीटिंग। क्या नाम था? मेजर कीटिंग। तो
  6239. 4:24:06मेजर कीटिंग ने क्या किया? इस पर छापा
  6240. 4:24:08मारा और इस पर छापा मार के मतलब इसको घेर
  6241. 4:24:11लिया और घेर कर जो है इनको गिरफ्तार कर
  6242. 4:24:14लिया और इनको गिरफ्तार करने के बाद बताते
  6243. 4:24:17हैं मंडलेश्वर के पास इनको गिरफ्तार करके
  6244. 4:24:20रखा गया और वहीं जो है इनको फांसी दे दी।
  6245. 4:24:23अब यह कहानी जो मैंने आपको समझाई इस कहानी
  6246. 4:24:25में से काम की बातें क्या है? वह आपको
  6247. 4:24:28कैसे निकालनी है? पहली बात यह है कि
  6248. 4:24:30रघुनाथ सिंह मंडलोई कौन थे? तो आप याद
  6249. 4:24:33रखिएगा रघुनाथ सिंह मंडलोई निमाड़ क्षेत्र
  6250. 4:24:35के एक प्रमुख आदिवासी क्या थे? योद्धा थे।
  6251. 4:24:38इन्होंने 1857 की क्रांति में भाग लिया।
  6252. 4:24:41अब इसमें हम याद रखना यह वर्ड कि 1857 की
  6253. 4:24:45क्रांति चल रही है और 1857 की क्रांति में
  6254. 4:24:49इनका योगदान है। यह आपको याद रखना है।
  6255. 4:24:521857 की क्रांति में क्या है? इनका योगदान
  6256. 4:24:55है। और 1857 की क्रांति में यह किसके
  6257. 4:24:58सहयोगी बने थे? सीताराम कंवर के सहयोगी
  6258. 4:25:01बने थे। सीताराम के शहीद होने के बाद
  6259. 4:25:03इन्होंने इस क्षेत्र में विद्रोह का
  6260. 4:25:04नेतृत्व किया। अंग्रेजों से संघर्ष किया।
  6261. 4:25:07ये अंग्रेजों और जमींदारों को लूटकर अपनी
  6262. 4:25:09जो लूट का माल है वो बीजागढ़ फोर्ट में
  6263. 4:25:11रखते थे। लेकिन मेजर की ने वीजागढ़ फोर्ट
  6264. 4:25:14पर कब्जा कर लिया और इन्हें धोखे से
  6265. 4:25:16इन्हने कहा कि बातचीत के बहाने इनको
  6266. 4:25:19बुलाया और इनको अरेस्ट कर लिया और बाद में
  6267. 4:25:20जो है इनको फांसी दे दी गई। अब यहां पे जो
  6268. 4:25:23लिखा हुआ है मैं आपको वह पढ़ के बताता हूं
  6269. 4:25:25जिससे आपको थोड़ा सा और अच्छे से समझ में
  6270. 4:25:27आ जाएगा। देखिए ये लिखा हुआ है इस पर
  6271. 4:25:31देखिए जब इन्होंने विद्रोह किया था मतलब
  6272. 4:25:33इन्होंने किसानों पर जो टैक्स बढ़ाया गया
  6273. 4:25:36उसका जब इन्होंने विरोध किया तो इंदौर
  6274. 4:25:38दरबार ने उनका वतन वतन बोलते हैं जागीर को
  6275. 4:25:41जिस 52 गांव के इनके पिता जागीरदार थे
  6276. 4:25:44जमींदार थे उसकी बात चली तो वतन बोलते हैं
  6277. 4:25:46जागीर को तो इंदौर दरबार ने इनके स्थान पर
  6278. 4:25:49बलवंत सिंह मंडलोई मंडलोई एक टाइटल है जो
  6279. 4:25:53उस क्षेत्र से टैक्स कलेक्शन करता था
  6280. 4:25:55बलवंत सिंह मंडलोई के नाम पर कर दिया।
  6281. 4:25:57यानी इनकी जो जमींदारी वह बलवंत सिंह
  6282. 4:25:59मंडलोई को दे दी और बलवंत सिंह से कहा कि
  6283. 4:26:02आप रघुनाथ सिंह को और उनके साथियों को
  6284. 4:26:04पकड़ने की कोशिश करें। रघुनाथ सिंह ने
  6285. 4:26:07इसका विरोध कर 1858 में करारोपण नीति के
  6286. 4:26:10खिलाफ आदिवासी भील, बारेला, भिलाला आदि के
  6287. 4:26:14साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन
  6288. 4:26:16किया। अंग्रेजों ने रघुनाथ सिंह को पकड़ने
  6289. 4:26:19के लिए कई रेज़ेंट को लगाया। कई अंग्रेज
  6290. 4:26:21अधिकारी रेजीमेंट को लगाया। परंतु उन्हें
  6291. 4:26:23वह नहीं पकड़ पाए। उनकी सेना में 3000
  6292. 4:26:26क्रांतिकारी हो गए। अक्टूबर 1858 को
  6293. 4:26:29उन्हें अंग्रेजों ने धोखे से गिरफ्तार कर
  6294. 4:26:32लिया। इंदौर में रखने के बाद महेश्वर जेल
  6295. 4:26:34में भेजा जहां कुछ समय बाद महेश्वर में
  6296. 4:26:37रघुनाथ सिंह को फांसी दे दी गई। स्थानीय
  6297. 4:26:39लोगों ने उनके नाम पर स्मारक बनाने की
  6298. 4:26:41मांग की है। तो यह कहानी थी रघुनाथ सिंह
  6299. 4:26:44मंडलोई की। ठीक है? जो मैंने आपको बताई।
  6300. 4:26:47रघुनाथ सिंह मंडलोई की सेना में कितने
  6301. 4:26:49क्रांतिकारी थे? 3000 क्रांतिकारी थे। याद
  6302. 4:26:52रखिएगा।
  6303. 4:26:54हालांकि अंग्रेजों ने उनसे बचने के लिए और
  6304. 4:26:56उनको खुश करने के लिए राव का टाइटल दिया
  6305. 4:26:59था। याद रखिएगा अंग्रेजों ने इनके विरोध
  6306. 4:27:01से बचने के लिए उनको राव की उपाधि दी और
  6307. 4:27:03₹35,000 माह पेंशन पुरस्कार देने की जो है
  6308. 4:27:07बात भी कही थी। अन्य सुविधाएं भी दी।
  6309. 4:27:09परंतु रघुनाथ सिंह ने इसका विरोध किया और
  6310. 4:27:121858 में करारोपण नीति के खिलाफ
  6311. 4:27:14आदिवासियों को इकट्ठा करके विद्रोह किया।
  6312. 4:27:17फाइनली याद रखिएगा इनके बारे में जो मैंने
  6313. 4:27:20आपको मेन-मेन पॉइंट्स बताए वह क्या हैं कि
  6314. 4:27:22इन्होंने विद्रोह जो किया था उसका कारण था
  6315. 4:27:25करारोपण नीति अर्थात पान की खेती पर
  6316. 4:27:28अत्यधिक कर लगाना जिसकी वजह से इन्होंने
  6317. 4:27:30किसानों का समर्थन लिया और क्योंकि इस
  6318. 4:27:33क्षेत्र में जो वीर योद्धा पहले से
  6319. 4:27:36अंग्रेजों के विरुद्ध सक्रिय थे यह उनके
  6320. 4:27:38साथ मिल गए और अंग्रेजों का विरोध किया।
  6321. 4:27:41अंग्रेजों ने इन्हें पकड़ने के लिए बड़ी
  6322. 4:27:43सेनाएं लगाई। जब इन्हें नहीं पकड़ पाए तो
  6323. 4:27:45धोखे से इनको बीजागढ़ किले में बीजागढ़
  6324. 4:27:47किला कहां है? याद रखिएगा खरगोन
  6325. 4:27:49डिस्ट्रिक्ट में है। तो वहां पर बीजागढ़
  6326. 4:27:51महादेव का एक प्रसिद्ध मंदिर भी है और
  6327. 4:27:53वहां पर इनको जो है मेजर कीटिंग ने इनको
  6328. 4:27:56गिरफ्तार कर लिया और कहा जाता है इनको जो
  6329. 4:27:57है फांसी चढ़ा दी गई थी। तो अब आपके मन
  6330. 4:28:01में एक सवाल होगा सर इसमें काम के
  6331. 4:28:03क्वेश्चन क्या है? तो इसमें काम का
  6332. 4:28:04क्वेश्चन तो यह है कि इनको अरेस्ट कहां
  6333. 4:28:06किया गया? किसने अरेस्ट किया? तो मेजर
  6334. 4:28:08कीटिंग बीजागढ़ का जो किला है वहां अरेस्ट
  6335. 4:28:10किया। इन्होंने किस वजह से विद्रोह किया
  6336. 4:28:13था? तो याद रखिएगा करारोपण नीति जो
  6337. 4:28:15बार-बार यहां पर लिखी है। कौन सी नीति?
  6338. 4:28:18करारोपण नीति के विरुद्ध विद्रोह किया था।
  6339. 4:28:20बेसिकली यह खुद जमींदार थे। इसीलिए समझते
  6340. 4:28:23थे कि किसानों से कितना कर लेना चाहिए और
  6341. 4:28:26कितना नहीं लेना चाहिए। ज्यादा कर लेना
  6342. 4:28:28सही नहीं था क्योंकि किसानों की स्थिति
  6343. 4:28:30दयनीय थी। तो इस प्रकार इन्होंने विद्रोह
  6344. 4:28:32किया। यह सीताराम कंवर के सहयोगी हैं।
  6345. 4:28:35इंपॉर्टेंट है। सीताराम कंवर के सहयोगी
  6346. 4:28:38हैं। याद रखिएगा।
  6347. 4:28:41यह जो मैंने अभी आपको पूरी स्टोरी बताई
  6348. 4:28:43इसका निचोड़ था जो आप याद रख सकते हैं।
  6349. 4:28:45ठीक है? आई होप आपको समझ में आ गया होगा।
  6350. 4:28:48टांडा बारूद इनके बर्थ प्लेस का नाम पिता
  6351. 4:28:50का नाम दीवान सिंह है और इनकी जागीर छीनकर
  6352. 4:28:54बलवंत सिंह मंडलोई को दी गई थी। तो अगर आप
  6353. 4:28:57मुख्य 10 से 12 पॉइंट अगर याद रख सकते हैं
  6354. 4:28:59इनके बारे में तो आप आसानी से बता सकते
  6355. 4:29:01हैं कि रघुनाथ सिंह मंडलोई कौन थे? रघुनाथ
  6356. 4:29:04सिंह मंडलोई टांडा के रहने वाले थे। इनके
  6357. 4:29:07पिता दीवान सिंह 52 आदिवासी गांव के
  6358. 4:29:09जमींदार थे जो उस क्षेत्र से कर संग्रह
  6359. 4:29:12करते थे। परंतु जब इनके पिता के बाद यह उस
  6360. 4:29:14क्षेत्र के जमींदार बने तो अंग्रेजों ने
  6361. 4:29:17क्या किया? इस क्षेत्र पर कर ज्यादा बढ़ा
  6362. 4:29:20दिया। पान की खेती पर कर लगा दिया जिसका
  6363. 4:29:22इन्होंने विरोध किया और इन्होंने विद्रोह
  6364. 4:29:25कर दिया। इन्होंने विद्रोह कर जो 1857 के
  6365. 4:29:28विद्रोही थे सीताराम कंवर के ये साथ हो
  6366. 4:29:30गए। यानी सीताराम कंवर मेन हैं और यह उनके
  6367. 4:29:33सहयोगी बनते हैं। लेकिन इस बीच सीताराम
  6368. 4:29:35कंवर की जब मृत्यु हो जाती है तो यह उस
  6369. 4:29:38क्षेत्र में प्रमुख विद्रोही बन जाते हैं
  6370. 4:29:40और यह अंग्रेजों और जमींदारों को लूट कर
  6371. 4:29:42वीजागढ़ किले में छिपते हैं। लेकिन एक दिन
  6372. 4:29:45धोखे से मेजर कीटिंग ने इनको घेर लिया और
  6373. 4:29:47इन्हें गिरफ्तार करके जो है इन्हें फांसी
  6374. 4:29:49दे दी। तो यह कहानी थी रघुनाथ सिंह मंडलोई
  6375. 4:29:53की। बीजागढ़ का संबंध इनसे है। टांडा का
  6376. 4:29:56संबंध इनसे है। दीवान सिंह इनके पिता हैं।
  6377. 4:29:58और इनकी जागीर छीनकर दी गई थी बलवंत सिंह
  6378. 4:30:01मंडलोई को। यह मुख्य बातें हैं। पान की
  6379. 4:30:04खेती इंपॉर्टेंट है। इन बातों पर अगर आप
  6380. 4:30:06ध्यान देंगे तो आसानी से आप रघुनाथ सिंह
  6381. 4:30:08मंडलोई को बता सकते हैं, समझा सकते हैं।
  6382. 4:30:11आई होप आपको जो जानकारी दी है रघुनाथ सिंह
  6383. 4:30:13मंडलोई के बारे में वह आपको अच्छी लगी
  6384. 4:30:15होगी। फिर मिलेंगे एक किसी और हम वीर
  6385. 4:30:18आदिवासी योद्धा के साथ, किसी और नए योद्धा
  6386. 4:30:22के साथ। तो इस सेशन में हम आज इन्हीं की
  6387. 4:30:25बात करते हैं और इसको यहीं समाप्त करते
  6388. 4:30:26हैं। जय हिंद। थैंक यू।
  6389. 4:30:37नमस्कार साथियों, आप सभी का एमपीपीएससी
  6390. 4:30:40स्टडी आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है।
  6391. 4:30:42उम्मीद है आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन
  6392. 4:30:44लगाकर पढ़ रहे होंगे। दोस्तों, हमारे
  6393. 4:30:46द्वारा एक सीरीज शुरू की गई है और सीरीज
  6394. 4:30:48का नाम है मध्य प्रदेश के वीरों का
  6395. 4:30:50इतिहास। हम सभी लोग जानते हैं कि मध्य
  6396. 4:30:53प्रदेश में कई ऐसे वीर हुए हैं जिन्होंने
  6397. 4:30:55स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण
  6398. 4:30:57योगदान दिया है। उन्हीं वीरों की अपुन
  6399. 4:31:00उन्हीं वीरों की कहानी हम इस सीरीज में
  6400. 4:31:02स्टार्ट कर रहे हैं। और एक वी एक जो हमारे
  6401. 4:31:05महान वीर थे जिनकी कहानी हम ऑलरेडी पिछले
  6402. 4:31:08वीडियो में डिस्कस कर चुके हैं। टंट्या
  6403. 4:31:10भील मामा के बारे में। और आज की जो कहानी
  6404. 4:31:13है उसके हमारे जो वीर हैं, हमारे जो
  6405. 4:31:15महापुरुष हैं, आज के जो हमारे हीरो हैं,
  6406. 4:31:17उनका नाम है भीमा नायक जी। तो आज हम बात
  6407. 4:31:20करेंगे स्पेशली निमाड़ के जो रॉबिनहुड हैं
  6408. 4:31:23यानी भीमा नायक जी के बारे में। भीमा नायक
  6409. 4:31:26जी 1857 की क्रांति के उन महान स्वतंत्रता
  6410. 4:31:29सेनानियों में से एक हैं जिन्हें वह
  6411. 4:31:31सम्मान और प्रसिद्धि नहीं मिली जो बाकी
  6412. 4:31:34लोगों को मिली। तो आइए बात करते हैं भीमा
  6413. 4:31:36नायक जी के बारे में। सबसे पहले भीमा नायक
  6414. 4:31:39जी के जीवन परिचय को हम लोग देख लेते हैं।
  6415. 4:31:42खासकर इसमें आपको तीन चीजें समझनी है।
  6416. 4:31:44उनका जन्म, माता-पिता का नाम और उनकी जो
  6417. 4:31:46मृत्यु स्थल है। देखिए भीमा नायक जी का जो
  6418. 4:31:49जन्म है वो पंचमोहाली गांव में हुआ था और
  6419. 4:31:51यह गांव जो है बड़वानी में पड़ता है।
  6420. 4:31:53बड़वानी मध्य प्रदेश में। इससे क्वेश्चन
  6421. 4:31:55भी पूछा जाता है कि उनका जो जन्म है वो
  6422. 4:31:58किस गांव में हुआ था? और किस रियासत का
  6423. 4:32:00हिस्सा माना जाता था उनका गांव? तो
  6424. 4:32:02बड़वानी रियासत आप बताएंगे। उनकी मां का
  6425. 4:32:04नाम सुरसी था। उनका जन्म एक भील परिवार
  6426. 4:32:07में हुआ था। पिता का नाम रामा था और बाद
  6427. 4:32:10में जब अंग्रेज उनको गिरफ्तार करेंगे तो
  6428. 4:32:11उनकी जो मृत्यु है वो पोर्ट विलियर में
  6429. 4:32:13होगी जिसे काला पानी के सजा के तौर पे हम
  6430. 4:32:16लोग जानते हैं। और उनका जो टाइटल नेम है
  6431. 4:32:18वो क्या है? निमाड़ का रॉबिनहुड। इसमें
  6432. 4:32:21आपको हमेशा एक बात याद रखनी है। अगर आपसे
  6433. 4:32:23पूछा जाए भीलों का रॉबिनहुड या आदिवासियों
  6434. 4:32:26का रॉबिनहुड किसे कहा जाता है? या भारत का
  6435. 4:32:28रॉबिनहुड किसे कहा जाता है? तो आप बताएंगे
  6436. 4:32:30टंट्या भील मामा। और अगर आपसे पूछा जाए
  6437. 4:32:33स्पेसिफिक निमाड़ का रॉबिनहुड किसे कहते
  6438. 4:32:36हैं? तो वो हैं हमारे भीमा नायक जी। भीमा
  6439. 4:32:39नायक जी निमाड़ क्षेत्र में काफी एक्टिव
  6440. 4:32:41थे। अब इनकी कहानी को हम लोग आगे समझते
  6441. 4:32:44हैं। सबसे पहले मैं आप लोगों को बताता हूं
  6442. 4:32:47कि भीमा नायक जी की कहानी किस प्रकार रहती
  6443. 4:32:49है। तो आपको एक छोटे से चार्ट के थ्रू मैं
  6444. 4:32:51आप लोगों को समझाने का प्रयास करता हूं।
  6445. 4:32:53जिससे आप उनकी कहानी को अच्छे से समझ
  6446. 4:32:55पाएंगे। देखिए जो भीमा नायक जी थे जैसे कि
  6447. 4:32:59एक रियासत है। आप इसको ऐसे समझिएगा। एक
  6448. 4:33:01रियासत थी और उस रियासत का नाम था बड़वानी
  6449. 4:33:05रियासत। ठीक है? तो बड़वानी जो रियासत थी
  6450. 4:33:08हमारी इस बड़वानी रियासत में जन्म होता है
  6451. 4:33:11भीमा नायक जी का। तो अगर आपसे कभी पूछा
  6452. 4:33:13जाए किस रियासत में उनका जन्म हुआ था? तो
  6453. 4:33:16आप बताएंगे बड़वानी रियासत या बड़वानी जो
  6454. 4:33:18डिस्ट्रिक्ट है। इस बड़वानी रियासत में एक
  6455. 4:33:21गांव था और इस गांव का नाम था पंचमोहाली।
  6456. 4:33:24इस पंचमोहाली जो गांव था इस पंचमोहाली
  6457. 4:33:27गांव में एक भील परिवार रहता था और इस भील
  6458. 4:33:31परिवार का जो
  6459. 4:33:33मालिक है या जो उसके स्वामी थे उनका नाम
  6460. 4:33:37था रामा। तो रामा जो भील हैं और उनकी जो
  6461. 4:33:40पत्नी थी जिनका नाम था सुरसीबाई। सुरसीबाई
  6462. 4:33:44और रामा भील के घर में एक महान
  6463. 4:33:47क्रांतिकारी का जन्म होता है। जिन्हें हम
  6464. 4:33:50आज के लेक्चर में कवर करने वाले हैं। और
  6465. 4:33:52उनका नाम था भीमा नायक। अर्थात भीमा नायक
  6466. 4:33:56जी का जन्म जो है कहां हुआ था? तो बड़वानी
  6467. 4:33:58रियासत के पंचमोहाली गांव में हुआ था। एक
  6468. 4:34:01भील आदिवासी परिवार के घर में और उनके
  6469. 4:34:04पिता का नाम रामा भील था और माता का नाम
  6470. 4:34:07क्या था? सुरसीबाई था। भीमा नायक को जो
  6471. 4:34:10संस्कार मिले थे उनके पिता और उनकी माता
  6472. 4:34:13से प्राप्त हुए थे। उनकी माता के द्वारा
  6473. 4:34:15उनको जो है जमींदारों और साहूकारों के
  6474. 4:34:18अत्याचारों के विरुद्ध जो है लड़ने की
  6475. 4:34:21शिक्षा दी गई थी। लड़ने की ट्रेनिंग दी गई
  6476. 4:34:23थी। भीमा नायक जी ने सबसे पहले क्या किया?
  6477. 4:34:26भील युवाओं की भील युवाओं की एक टोली
  6478. 4:34:31बनाई।
  6479. 4:34:34एक छोटी सी सेना बनाई जिसमें करीब 500 भील
  6480. 4:34:37युवा थे और इनके द्वारा इन्होंने सबसे
  6481. 4:34:39पहले क्योंकि देखिए शुरुआत अत्याचार की
  6482. 4:34:41कौन करता है? जो शुरुआत थी वो अंग्रेजों
  6483. 4:34:44के द्वारा इस क्षेत्र में अत्याचार किया
  6484. 4:34:46जा रहा था। अंग्रेजों के साथ-साथ कौन थे?
  6485. 4:34:48जमींदार थे और जमींदारों के साथ-साथ कौन
  6486. 4:34:51थे? साहूकार थे। तो इन लोगों के शोषण के
  6487. 4:34:53विरुद्ध उन्होंने अपनी आवाज उठाई और वो जो
  6488. 4:34:56अपना जो संगठन था उसके माध्यम से
  6489. 4:34:58जमींदारों को लूटते थे। साहूकारों को
  6490. 4:35:00लूटते थे। अंग्रेजी जो खजाना था उसको
  6491. 4:35:02लूटते थे और गरीबों में बांट देते थे। इस
  6492. 4:35:05कहानी में आगे एक किरदार की एंट्री होती
  6493. 4:35:07है। जब निवाड़ क्षेत्र में जो बड़वानी का
  6494. 4:35:10इलाका है वो निवाड़ क्षेत्र में आता है।
  6495. 4:35:12जब निवाड़ क्षेत्र में वो काफी एक्टिव थे।
  6496. 4:35:15तब इस समय एक महान स्वतंत्रता सेनानी इस
  6497. 4:35:18क्षेत्र में आते हैं जो नर्मदा पार करने
  6498. 4:35:20के लिए आते हैं जिनका नाम था तात्या टोपे
  6499. 4:35:23जी। तो तात्या टोपे जब इस क्षेत्र में
  6500. 4:35:26नर्मदा नदी पार करने के लिए आते हैं तो
  6501. 4:35:28उनको नर्मदा पार करने में सहायता करने
  6502. 4:35:31वाले थे कौन? भीमा नायक जी। क्वेश्चन पूछा
  6503. 4:35:34जाता है किस व्यक्ति ने तात्या टोपे के
  6504. 4:35:37नर्मदा पार करने में सहायता की थी? याद
  6505. 4:35:40रखिएगा। तो भीमा नायक जी हैं उन उन्होंने
  6506. 4:35:42उनकी सहायता की। तात्या टोपे से मिलकर वह
  6507. 4:35:45काफी प्रभावित होते हैं। तात्या टोपे उनके
  6508. 4:35:48इस एहसान का बदला चुकाने के लिए कहते हैं
  6509. 4:35:50कि यदि हमारा अभियान सफल रहा तो मैं आपके
  6510. 4:35:53इस जो जो भी आपने मुझ पर उपकार किया इसका
  6511. 4:35:56जो है बदला जरूर चुकाऊंगा। और इसी समय
  6512. 4:35:58तात्या टोपे ने उनको जो है क्या किया?
  6513. 4:36:011857 की क्रांति चल रही थी और 1857 की
  6514. 4:36:05क्रांति में लड़ने के लिए प्रेरित किया।
  6515. 4:36:08तो याद रखिएगा यहीं से उनका जो अगला सफर
  6516. 4:36:10होता है वह 1857 की क्रांति है। तो इस
  6517. 4:36:13प्रकार वह 1857 की क्रांति में किस
  6518. 4:36:16क्षेत्र में एक्टिव हो गए? निमाड़ क्षेत्र
  6519. 4:36:18में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले हैं।
  6520. 4:36:20क्योंकि उनके साथ भील, भिलाला, कोरकू जैसी
  6521. 4:36:23तमाम जो जनजातियां हैं वो भी इसमें शामिल
  6522. 4:36:25थी। अब आगे हम लोग थोड़ा सा यहां पर पढ़
  6523. 4:36:29लेते हैं। जिसके बाद आगे मैं आप लोगों को
  6524. 4:36:30समझाता हूं। तो देखिए अभी आप लोगों को बता
  6525. 4:36:33दिया उनका जन्म कहां होता है। पिता रामा
  6526. 4:36:36ने उन्हें हथियार चलाना सिखाया जबकि मां
  6527. 4:36:38सुरसी हर क्रांतिकारी मोर्चे पर उनका साथ
  6528. 4:36:41देती रही। भीमा की जो मां सुरसी हैं
  6529. 4:36:43उन्होंने भी संघर्ष में योगदान दिया।
  6530. 4:36:45उन्होंने 150 महिलाओं को युद्ध कौशल में
  6531. 4:36:47प्रशिक्षित किया जिससे महिलाओं ने भी
  6532. 4:36:50क्रांति में सक्रिय भूमिका निभाई। यानी
  6533. 4:36:52मां हो तो भीमा नायक जैसी जिन्होंने जो है
  6534. 4:36:55अपने पुत्र को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए
  6535. 4:36:57प्रेरित किया और अपने साथ-साथ 150 महिलाओं
  6536. 4:37:01का एक दल बनाया और वह भी जो है अपने पुत्र
  6537. 4:37:03के साथ कंधे से कंधा मिलाकर 1857 की
  6538. 4:37:06क्रांति में शामिल हो जाती हैं। अब आगे
  6539. 4:37:08बढ़ते हैं। यहां पर ध्यान से सुनिएगा।
  6540. 4:37:10अंग्रेजों के शोषण और अत्याचार के से
  6541. 4:37:13मुक्ति पाने के लिए भीमा ने 1837 में अपनी
  6542. 4:37:16एक सैनिक टुकड़ी बनाना शुरू किया था और एक
  6543. 4:37:19वर्ष में उनके पास 500 प्रशिक्षित सेनानी
  6544. 4:37:21हो गए। भीमा की फौज में भील भिलाला मकरानी
  6545. 4:37:25सैनिक शामिल थे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित
  6546. 4:37:28करने के लिए भीमा ने धाना बाबड़ी में एक
  6547. 4:37:30गढ़ी का निर्माण किया था। जिसका पिक्चर
  6548. 4:37:32मैं अभी आप लोगों को दिखाने वाला हूं।
  6549. 4:37:35देखिए यहां पर हम बात करेंगे। आपको स्टोरी
  6550. 4:37:38से एक कनेक्शन समझ में आ गया होगा। अब
  6551. 4:37:41क्या होता है? अकाल के दौरान अंग्रेजों ने
  6552. 4:37:43लगान वसूली में जोर जबरदस्ती की, घूसखोरी,
  6553. 4:37:46हिंसा का सहारा लिया। इस अन्याय के
  6554. 4:37:48विरुद्ध जो है भीमा ने सूदखोरों, बनियों,
  6555. 4:37:51सामंतों, साहूकारों, सरकारी खजाने से
  6556. 4:37:53सामान छीनकर गरीबों में बांट दिया और अपनी
  6557. 4:37:56याद रखिएगा अपनी कुलदेवी नागरी माता के
  6558. 4:37:58समक्ष भीमा ने भीलों का शोषण करने वाले
  6559. 4:38:00अंग्रेजों को बाहर खदेड़ने खदेड़ने की शपथ
  6560. 4:38:03खाई। इसीलिए क्योंकि वो अमीरों का पैसा
  6561. 4:38:07लूटकर जमींदारों, साहूकारों, अंग्रेजों का
  6562. 4:38:09जो पैसा लूटकर गरीबों में बांटते थे
  6563. 4:38:11इसीलिए उन्हें निमाड़ का रॉबिनहुड कहते
  6564. 4:38:14हैं। अगर कोई पूछे क्यों कहते हो उन्हें
  6565. 4:38:16निमाड़ का रॉबिनहुड? याद रखिएगा क्योंकि
  6566. 4:38:18वह इस क्षेत्र में अमीरों को लूटकर गरीबों
  6567. 4:38:20को पैसा बांटते थे। अब यह सब चलने लगा।
  6568. 4:38:23इसी बीच क्या होता है? तात्या टोपे का इस
  6569. 4:38:25क्षेत्र में आगमन होता है। अंग्रेजों ने
  6570. 4:38:28तात्या टोपे को दक्षिण की ओर बढ़ने से
  6571. 4:38:29रोकने के लिए आधा दर्जन जनरल नियुक्त किए
  6572. 4:38:31थे। इस समय सेंधवा जो घाट है जो बड़वानी
  6573. 4:38:34में है याद रखिएगा लेकर महाराष्ट्र तक
  6574. 4:38:36भीमा नायक रेवलिया नायक खाज्या नायक इसमें
  6575. 4:38:40एक बहुत इंपॉर्टेंट नायक हैं खाज्या नायक
  6576. 4:38:43इनका नाम बहुत जरूर याद रखना खोजे सिंह
  6577. 4:38:46खोजे सिंह और कालू बाबा जैसे वीर
  6578. 4:38:48क्रांतिकारियों का प्रभाव था तो तात्या
  6579. 4:38:51टोपे जब नर्मदा नदी पार करने के लिए आते
  6580. 4:38:53हैं तो भीमा नायक उनकी सहायता करते हैं।
  6581. 4:38:56भीमा नायक जी को जो है तात्या टोपे
  6582. 4:38:58प्रेरित करते हैं कि इस समय 1857 की महान
  6583. 4:39:01क्रांति चल रही है और आप भी उसमें अपना
  6584. 4:39:02योगदान दीजिए। निमाड़ क्षेत्र में भीलों
  6585. 4:39:04का नेतृत्व कर अंग्रेजों को परेशान कीजिए
  6586. 4:39:07और ऐसा ही उन्होंने किया। ठीक है? देखिए
  6587. 4:39:10जब भीमा ने तात्या टोपे को नर्मदा नदी पार
  6588. 4:39:13करने में मदद की। तब जाते समय तात्या ने
  6589. 4:39:15कहा यदि हमारा अभियान सफल होता है तो इस
  6590. 4:39:18उपकार का बदला हम अवश्य चुकाएंगे। तो ये
  6591. 4:39:22भीमा नायक जी को तात्या टोपे कह के जाते
  6592. 4:39:24हैं। अब एक कहानी है छोटी सी। उसके बाद हम
  6593. 4:39:27इसको एंड करेंगे। देखिए इधर है ईस्ट
  6594. 4:39:31इंडिया कंपनी यानी अंग्रेजों ने एक बड़ी
  6595. 4:39:32सेना बनाई और इधर कुछ क्रांतिकारी हैं
  6596. 4:39:35जिसमें हमारे हैं भीमा नायक। भीमा नायक के
  6597. 4:39:38एक सहयोगी थे जिनका नाम था खाद्या नायक।
  6598. 4:39:41रिश्तेदार लगते थे। अगले चैप्टर में हम
  6599. 4:39:43इनकी बात करेंगे। खाजिया नायक। खाद्या
  6600. 4:39:45नायक के साथ-साथ यहां पर हैं याद रखिएगा
  6601. 4:39:47रेवलिया नायक। तो ऐसे कुछ वीर थे
  6602. 4:39:50जिन्होंने क्या किया? अपनी सेना तैयार की
  6603. 4:39:53और जो है अंग्रेजों से एक जोरदार संघर्ष
  6604. 4:39:56किया और इस संघर्ष का नाम है अंबा पानी का
  6605. 4:39:58युद्ध। बड़वानी जिले के अंबापानी ग्राम
  6606. 4:40:01में एक युद्ध होता है जिसको कहा जाता है
  6607. 4:40:03अंबा पानी का युद्ध। यह युद्ध बड़ा ही
  6608. 4:40:05खतरनाक था। इस भीषण संघर्ष में कई
  6609. 4:40:08क्रांतिकारी मारे जाते हैं। 11 अप्रैल
  6610. 4:40:111858 को यह जो संघर्ष है होता है। इस
  6611. 4:40:14युद्ध में हमारे जो खाज्जा नायक है यह
  6612. 4:40:17वीरगति को प्राप्त हुए थे। अगर कभी पूछा
  6613. 4:40:19जाए खाज्जा नायक का विजय दिवस या उनकी जो
  6614. 4:40:22मृत्यु है कब हुई थी? याद रखिएगा और भीमा
  6615. 4:40:24नायक बच निकले। हालांकि इसमें संघर्ष बहुत
  6616. 4:40:27तगड़ा होता है और एग्जाम में यह वॉर पूछा
  6617. 4:40:30जाता है कि ये वॉर कब हुआ था? याद रखिएगा
  6618. 4:40:3211 11 अप्रैल 1858 को हुआ था। इसमें
  6619. 4:40:35खाद्या नायक की मृत्यु हो गई थी। लेकिन जो
  6620. 4:40:37हमारे भीमा नायक हैं, वह अभी भी युवाओं को
  6621. 4:40:39भील युवाओं को लेकर जो है बड़वानी क्षेत्र
  6622. 4:40:41में और जो निमाड़ क्षेत्र है वहां पर
  6623. 4:40:43अंग्रेजों के छुड़ा रहे थे।
  6624. 4:40:45अंग्रेजों को उन्होंने काफी परेशान किया।
  6625. 4:40:47अब अंग्रेजों ने उन पर एक धावा बोला उनके
  6626. 4:40:49गांव में उनके इलाके में देखिए।
  6627. 4:40:534 फरवरी 1859 को कैटिंग एक अंग्रेज कैप्टन
  6628. 4:40:56था। के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने धोला
  6629. 4:40:59बावड़ी यह धोला बावड़ी आपसे पूछा जा सकता
  6630. 4:41:01है। धोला बाबड़ी है क्या? धोला बावड़ी का
  6631. 4:41:04ये डायग्राम देख सकते हैं। यह बड़वानी में
  6632. 4:41:06जो हमारे भीमा नायक थे उनका गढ़ था। उनकी
  6633. 4:41:10गढ़ी थी। यानी उन्होंने एक छोटी सी गढ़ी
  6634. 4:41:13यानी छोटा सा जो किला होता है उसको गढ़ी
  6635. 4:41:15कहते हैं। उस पर अधिकार करके इस पे
  6636. 4:41:17निगरानी इससे वो निगरानी रखते थे
  6637. 4:41:19अंग्रेजों पर। तो यहां पर आज भी जो है
  6638. 4:41:21बंदूकों के और तोपों के जो निशान है वो
  6639. 4:41:23मौजूद हैं। ये धोला बाबड़ी किसका गढ़ था
  6640. 4:41:26या किसकी गढ़ी थी? याद रखिए भीमा नायक जी
  6641. 4:41:28जिसमें वो रहते थे। अब अंग्रेजों ने एक
  6642. 4:41:30बड़ी सेना लेकर इस पर हमला कर दिया तो
  6643. 4:41:32क्या होता है? 13 फरवरी 1859 को भीमा के
  6644. 4:41:35गांव पंच बावबली में युद्ध हुआ। पंच
  6645. 4:41:39बावबली जिसे पंचमहाली भी कहते हैं। भीलों
  6646. 4:41:41को जंगलों में शरण लेनी पड़ी और इस भीषण
  6647. 4:41:43संग्राम में भीमा के 10 साथी शहीद हो गए
  6648. 4:41:46और कई क्रांतिकारियों को क्या कर लिया
  6649. 4:41:48गया? गिरफ्तार कर लिया गया। अब क्या होता
  6650. 4:41:50है? लास्ट में आप देखिएगा। इसी समय जब
  6651. 4:41:54अंग्रेजों ने हमला किया था तो उनकी जो मां
  6652. 4:41:56थी सुरसी बाई को मंडलेश्वर जेल में कैद कर
  6653. 4:41:59लिया गया था। याद रखना उनकी मां का बहुत
  6654. 4:42:01बड़ा रोल है। अब उनकी मां को मंडलेश्वर
  6655. 4:42:03जेल में जब कैद कर लिया गया तो उन पर कई
  6656. 4:42:06सारी अत्याचार किए गए। कई मानवीय यातनाएं
  6657. 4:42:08दे दी गई जिससे कि वह भीमा नायक का पता
  6658. 4:42:10बता दें। जब उन्होंने पता नहीं बताया तो
  6659. 4:42:13इसी में उनकी मानवीय यातनाएं यानी
  6660. 4:42:15अंग्रेजों द्वारा सताने से मंडलेश्वर जेल
  6661. 4:42:17में ही युद्ध हो जाता है। मंडलेश्वर जेल
  6662. 4:42:20में पहले उनकी मृत्यु हो गई। जब मां सुरसी
  6663. 4:42:22के मरने का खबर भीमा नायक को मिला तो भीमा
  6664. 4:42:26नायक अपनी सेना के साथ इसी जेल पर हमला कर
  6665. 4:42:28देते हैं और फिर से एक भीषण संघर्ष होता
  6666. 4:42:30है जिसमें कई जनजातीय कई आदिवासी युवा जो
  6667. 4:42:34है मारे जाते हैं परंतु अभी भीमा
  6668. 4:42:37नायक को अंग्रेज नहीं पकड़ पाए। तो भीमा
  6669. 4:42:39नायक आप समझ में आ रहे हैं निमाड़ क्षेत्र
  6670. 4:42:41के एक शक्तिशाली योद्धा थे। जिन्होंने
  6671. 4:42:421857 की क्रांति में अंग्रेजों के दांत
  6672. 4:42:45खट्टे कर दिए। एक महान योद्धा, एक महान
  6673. 4:42:49कुशल नेतृत्वकर्ता जिन्होंने अंग्रेजों को
  6674. 4:42:51इस क्षेत्र में काफी लंबे समय तक जो है
  6675. 4:42:53पराजित करके रखा था। अब क्या होता है?
  6676. 4:42:56माता का तो निधन हो गया और वो जो है जंगल
  6677. 4:42:58में छुप जाते हैं। इसी बीच क्या होता है?
  6678. 4:43:01ध्यान से सुनना। फिर आगे चलकर उनके कई
  6679. 4:43:03साथी जो थे यहां पर लिखा हुआ है उनके
  6680. 4:43:05साथियों के बारे में। कई साथियों को जो है
  6681. 4:43:07फांसी दे दी जाती है। परंतु अभी भी जो है
  6682. 4:43:10भीमा नायक को ब्रिटिश सेना यानी अंग्रेज
  6683. 4:43:13पकड़ नहीं पाते। अब इसमें से वह निर्णायक
  6684. 4:43:17क्षण क्षण आता है जब हमारे भीमा नायक जी
  6685. 4:43:19को देखिए इतिहास गवाह है जब किसी व्यक्ति
  6686. 4:43:22को कोई नहीं पकड़ पाया यानी अंग्रेज नहीं
  6687. 4:43:24पकड़ पाए तो उन्होंने हमेशा छल का सहारा
  6688. 4:43:26लिया है। देखिए 16 दिसंबर 1866 को निवाड़
  6689. 4:43:30के सभी भील नायकों ने मिलकर अंग्रेजों पर
  6690. 4:43:32बड़ा हमला किया जिससे अंग्रेजों को भारी
  6691. 4:43:34नुकसान हुआ। हालांकि धर पकड़ के दौरान
  6692. 4:43:37बड़वानी के कई भील क्रांतिकारी पकड़े गए
  6693. 4:43:39और अंग्रेज लगातार भीमा नायक को खोजते
  6694. 4:43:42रहे। परंतु पता नहीं चला कि भीमा नायक
  6695. 4:43:44कहां छुपे हुए हैं। आखिर में क्या होता
  6696. 4:43:47है? अंततः 2 अप्रैल 1867 को 1867 को एक
  6697. 4:43:52गद्दार की सूचना पर ये गद्दार का नाम नहीं
  6698. 4:43:54पता लेकिन एक गद्दार की सूचना पर
  6699. 4:43:56अंग्रेजों ने सतपुड़ा के घने जंगल में
  6700. 4:43:58भीमा नायक को सोते हुए गिरफ्तार कर लिया।
  6701. 4:44:01तो अगर इसमें एग्जाम ओरिएंटेड क्वेश्चन
  6702. 4:44:03देखें तो एक क्वेश्चन ये होगा कि कब उनको
  6703. 4:44:05गिरफ्तार किया गया 1867 में और पकड़ कर
  6704. 4:44:08अंग्रेजों ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाया और
  6705. 4:44:10फाइनली उन्हें पोर्ट विलेयर यानी जिसे
  6706. 4:44:12काला पानी की सजा कहते हैं उनको सजा दे दी
  6707. 4:44:15गई। जहां पर 29 दिसंबर 1876 को पोर्ट
  6708. 4:44:18विलेयर में उनकी क्या हो गई? मृत्यु हो
  6709. 4:44:20गई। ठीक है? अब इससे क्वेश्चन क्या-क्या
  6710. 4:44:23बन सकते हैं? मैं आपको यह और बता देता
  6711. 4:44:24हूं। एक क्वेश्चन है कि उनकी मृत्यु कब
  6712. 4:44:27हुई? तो आप बताएंगे 29 दिसंबर 1876 को।
  6713. 4:44:31दूसरा उनका बलिदान दिवस कब मनाते हैं? तो
  6714. 4:44:34अगर आपसे पूछा जाए एग्जाम में कि भीमा
  6715. 4:44:36नायक का बलिदान दिवस कब मनाते हैं? 29
  6716. 4:44:38दिसंबर को। अगर आपसे पूछा जाए कि जो हमारे
  6717. 4:44:42धोला बाबड़ी नामक जो स्थान है वो किसका
  6718. 4:44:45गढ़ था? यानी धोला बाबड़ी किस क्रांतिकारी
  6719. 4:44:48की गढ़ी थी या गढ़ था? तो आप बताएंगे भीमा
  6720. 4:44:50नायक। भीमा नायक की जो मां है उनको पकड़
  6721. 4:44:53कर जो है याद रखिएगा किस जेल में रखा गया
  6722. 4:44:55था? तो एक क्वेश्चन होगा मंडलेश्वर जेल
  6723. 4:44:58में वहीं पर उनकी मृत्यु हो जाती है। ठीक
  6724. 4:45:00है? याद रखना एक क्वेश्चन आपसे यह पूछा
  6725. 4:45:02जाएगा कि अंबा पानी का युद्ध कब हुआ था और
  6726. 4:45:05इसमें कौन सा आदिवासी योद्धा शहीद हुआ? तो
  6727. 4:45:08शहीद हुए हैं खाज्जा नायक और यह युद्ध हुआ
  6728. 4:45:11है 11 अप्रैल 1800 58 को। इस युद्ध में
  6729. 4:45:14भीमा नायक की भी इंपॉर्टेंट भूमिका थी।
  6730. 4:45:16हालांकि अंग्रेज भीमा नायक को गिरफ्तार
  6731. 4:45:19नहीं कर पाए। इसके अलावा एक क्वेश्चन यह
  6732. 4:45:22है जो मैंने आपको बता दिया कि तात्या टोपे
  6733. 4:45:25जब आए थे तो उनको नर्मदा पार करने में
  6734. 4:45:27किसने सहायता की थी? कुल मिलाकर अगर आप इस
  6735. 4:45:30तरीके का एक डायग्राम भी याद रखते हैं ना
  6736. 4:45:32ये तो इस डायग्राम में सारी कहानी आप
  6737. 4:45:35लोगों को यहां पर क्लियर मिल जाएंगी।
  6738. 4:45:37तात्या टोपे की सहायता और ऐड कर लेना और
  6739. 4:45:39इसी के बाद अंबा पानी का युद्ध ऐड कर
  6740. 4:45:41लेना। उनकी गिरफ्तारी ऐड कर लेना और उनकी
  6741. 4:45:43मृत्यु ऐड कर लेना।
  6742. 4:45:46तो उम्मीद है कि आज का जो जानकारी है आप
  6743. 4:45:50लोगों को अच्छी लगी होगी और मध्य प्रदेश
  6744. 4:45:52के वीरों का जो इतिहास सीरीज है इसको आप
  6745. 4:45:54काफी प्यार और अपना सपोर्ट देंगे। तो इसी
  6746. 4:45:57तरह यह सीरीज चलती रहेगी और आगे की सीरीज
  6747. 4:45:59में हम और महान क्रांतिकारियों के बारे
  6748. 4:46:01में बात करेंगे। इसमें आपको एग्जाम उपयोगी
  6749. 4:46:04जानकारी भी दी गई है। किन तथ्यों पर आपको
  6750. 4:46:06काम करना है और एक ओवरऑल जानकारी भी दी गई
  6751. 4:46:09है। देखिए ऐसे कई सारे योद्धा हैं जिनके
  6752. 4:46:12बारे में अभी भी लोगों को सही से नहीं पता
  6753. 4:46:15है। चाहे वो बृजू नायक हो, चाहे वो खाज्जा
  6754. 4:46:18नायक हो और भी कई सारे योद्धा हैं। लेकिन
  6755. 4:46:20हमारी इस सीरीज में कोशिश है कि सभी वीर
  6756. 4:46:22योद्धाओं को एक श्रद्धांजलि दी जाए और सभी
  6757. 4:46:25के बारे में आप लोगों के साथ इंफॉर्मेशन
  6758. 4:46:27शेयर की जाए। तो अगर आप लोगों को यह सीरीज
  6759. 4:46:29अच्छी लगी तो अपना सपोर्ट जरूर दिखाएं और
  6760. 4:46:32कमेंट सेक्शन में बताइएगा आपको यह जानकारी
  6761. 4:46:34कैसी लगी। जय हिंद। थैंक यू।
  6762. 4:46:48नमस्कार दोस्तों, आप सभी का एमपीपीएससी
  6763. 4:46:51स्टडी आई के पर स्वागत है। दोस्तों,
  6764. 4:46:55आज हम बात करने वाले हैं मध्य प्रदेश की
  6765. 4:46:58पहली महिला शहीद या 1857 की क्रांति की
  6766. 4:47:01पहली महिला शहीद रानी अवंतीबाई के बारे
  6767. 4:47:04में। रानी अवंतीबाई जिन्होंने कहा था कि
  6768. 4:47:07हमारी दुर्गावती ने प्रण लिया था कि वह
  6769. 4:47:10जीते जी किसी वैरी के हाथ नहीं आएंगी और
  6770. 4:47:14उन्होंने उसी तरीके से रानी दुर्गावती के
  6771. 4:47:18कथन का अनुसरण करते हुए अपने प्राणों का
  6772. 4:47:20उत्सर्ग किया था। तो दोस्तों मैं हूं हर
  6773. 4:47:23सिंह राजपूत और आज मैं आपको बताने वाला
  6774. 4:47:25हूं रानी अवंतीबाई की कहानी। तो रानी
  6775. 4:47:28अवंतीबाई जिन्हें रामगढ़ की लक्ष्मीबाई के
  6776. 4:47:31नाम से भी जाना जाता है। आइए हम जानते हैं
  6777. 4:47:33रानी अवंतीबाई के बारे में। यह जो सीरीज
  6778. 4:47:36है इसमें आपको पता है कि हम दो तरीके से
  6779. 4:47:39इस सीरीज को कवर कर रहे हैं। एक एग्जाम
  6780. 4:47:41ओरिएंटेड कंटेंट को भी हम इसमें शामिल कर
  6781. 4:47:43रखे हैं। दूसरा एक कहानी के रूप में भी
  6782. 4:47:46आपको सारी बात बता रहा हूं। सबसे पहले
  6783. 4:47:48रामगढ़ रियासत की बात करते हैं कि रामगढ़
  6784. 4:47:50रियासत है कहां पर? रामगढ़ रियासत वर्तमान
  6785. 4:47:53में डिंडोरी जिले का हिस्सा है। इससे पहले
  6786. 4:47:56यह याद रखिएगा मंडला जिले में आता था। ठीक
  6787. 4:47:59है? तो अभी हम वो बाद में भी मैं एक जगह
  6788. 4:48:01लिख दूंगा। तो रामगढ़ की रानी अवंतीबाई
  6789. 4:48:03लोधी जी की यह कहानी है जिसको आपको समझना
  6790. 4:48:06है। सबसे पहले उनके जन्म की बात करते हैं
  6791. 4:48:08और उनके परिवार की तो देखिए रानी अवंतीबाई
  6792. 4:48:11का जो जन्म है वह 16 अगस्त 1831 को ग्राम
  6793. 4:48:14मनकेहड़ी और याद रखिएगा यह जो मनकेहड़ी है
  6794. 4:48:17वो शिवनी में है। ठीक है? यानी आपको याद
  6795. 4:48:20रखना है कि रानी अवंतीबाई का जन्म
  6796. 4:48:22मनकेहड़ी ग्राम में हुआ था जो कि शिवनी
  6797. 4:48:24जिले में आता है और उनके पिता का नाम था
  6798. 4:48:26जो कि एक जमींदार फैमिली से थे राव जुझार
  6799. 4:48:29सिंह यानी रानी अवंतीबाई का जन्म राव
  6800. 4:48:32जुझार सिंह के यहां शिविवनी जिले के
  6801. 4:48:34मनकेहड़ी गांव में हुआ था। रानी अवंतीबाई
  6802. 4:48:37की जो प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा है वो
  6803. 4:48:39ग्राम मनकेहड़ी में ही हुई थी। संपन्न
  6804. 4:48:41हुई। जुझार सिंह ने अपनी कन्या अवंतीबाई
  6805. 4:48:44का जो विवाह है याद रखिएगा रामगढ़ रियासत
  6806. 4:48:47के जो राजा है लक्ष्मण सिंह आपसे पूछ सकते
  6807. 4:48:50हैं कि वो किस राजा की बहू थी और किस राजा
  6808. 4:48:53की पत्नी थी तो याद रखिएगा रामगढ़ रियासत
  6809. 4:48:55के राजा लक्ष्मण सिंह लोधी के पुत्र
  6810. 4:48:58विक्रमादित्य से उनका विवाह हुआ था। यानी
  6811. 4:49:00कि उनके पति का नाम विक्रमादित्य सिंह
  6812. 4:49:02लोधी था। जबकि उनके ससुर का नाम लक्ष्मण
  6813. 4:49:04सिंह था। ठीक है? अब क्या हुआ? राजा
  6814. 4:49:07लक्ष्मण सिंह 1817 से 1850 तक जो है
  6815. 4:49:10रामगढ़ के शासक थे। यानी उनके जो ससुर थे
  6816. 4:49:13जिनका नाम था राजा क्या? लक्ष्मण सिंह
  6817. 4:49:16उन्होंने 1850 तक शासन किया और 1850 में
  6818. 4:49:19रामगढ़ के शासक बनते हैं उनके पुत्र जिनका
  6819. 4:49:22नाम था क्या? राजकुमार विक्रमादित्य या
  6820. 4:49:25जिन्हें हम बोल सकते हैं। ठीक है? राजा
  6821. 4:49:28विक्रमादित्य। तो राजा विक्रमादित्य 1850
  6822. 4:49:30में रामगढ़ के शासक बन जाते हैं। लेकिन
  6823. 4:49:33इनके साथ कुछ समस्या थी कि जो
  6824. 4:49:34विक्रमादित्य हैं वह बचपन से ही वीतरागी
  6825. 4:49:37प्रवृत्ति के थे। पूजा पाठ और धार्मिक
  6826. 4:49:39अनुष्ठानों में लगे रहते थे। ये तो उनके
  6827. 4:49:41गुण थे। लेकिन आगे चलकर क्या होता है कि
  6828. 4:49:45जो राजा विक्रमादित्य हैं वो विक्षिप्त हो
  6829. 4:49:47जाते हैं। और इस वजह से राज्य के संचालन
  6830. 4:49:50का जो भार है वो रानी अवंतीबाई पर आ जाता
  6831. 4:49:52है। तो राज्य का संचालन रानी अवंतीबाई ही
  6832. 4:49:54करती थी। याद रखिएगा इनके दो पुत्र हैं।
  6833. 4:49:57एक का नाम था अमान सिंह और एक का नाम था
  6834. 4:49:59शेर सिंह। तो शेर सिंह और अममान सिंह जो
  6835. 4:50:02है रानी के दो पुत्र हैं। और राजा रानी के
  6836. 4:50:04पति का नाम क्या है? विक्रमादित्य। ससुर
  6837. 4:50:06का नाम क्या है? लक्ष्मण सिंह। बर्थ प्लेस
  6838. 4:50:08क्या है? ग्राम मनखेड़ी और पिता का नाम है
  6839. 4:50:10जुझार सिंह। तो ये उनका एक तरीके से
  6840. 4:50:12इंफॉर्मेशन हो गई। उनका बायोडाटा हो गया।
  6841. 4:50:15अब कहानी में आगे चलकर एक जो है कहानी में
  6842. 4:50:19एक ट्विस्ट आता है। जैसा कि मैंने बताया
  6843. 4:50:21कि राजा जो विक्रमादित्य थे वो विक्षिप्त
  6844. 4:50:23हो जाते हैं और उनकी दिमागी स्थिति सही
  6845. 4:50:26नहीं होती है। जिसकी वजह से राज्य की
  6846. 4:50:27कंप्लीट जिम्मेदारी रानी अवंतीबाई के ऊपर
  6847. 4:50:30आ जाती है। अब रानी अवंतीबाई किस तरीके से
  6848. 4:50:32अपने राज्य का संचालन करेंगी। लेकिन आप
  6849. 4:50:35सबको पता है कि इस समय याद रखिएगा जैसे कि
  6850. 4:50:37यह हमारी रामगढ़ रियासत है। ठीक है? यह जो
  6851. 4:50:40रामगढ़ रियासत है वर्तमान में अगर देखा
  6852. 4:50:42जाए अगर कोई आपसे पूछे किस जिले का पार्ट
  6853. 4:50:45है तो याद रखिएगा यह वर्तमान में डिंडोरी
  6854. 4:50:47में आता है लेकिन उससे पहले यह मंडला जिले
  6855. 4:50:49का हिस्सा हुआ करता था। ठीक है? तो
  6856. 4:50:52वर्तमान डिंडोरी का पार्ट है। अब क्या
  6857. 4:50:55हुआ? आप सबको पता था कि अगर उस जमाने में
  6858. 4:50:58जब ब्रिटिश शासन चल रहा था कि यदि किसी
  6859. 4:51:00राज्य का राजा विकसित हो जाए या कुछ ऐसी
  6860. 4:51:03समस्या हो जाए तो ईस्ट इंडिया कंपनी ऐसे
  6861. 4:51:05राज्यों को हड़पने के लिए तैयार रहती थी।
  6862. 4:51:08क्योंकि डलहौजी का शासन भी था। 1853 में
  6863. 4:51:11पालक न्यायालय में एक मुकदमा चलता है।
  6864. 4:51:14रामगढ़ के राजा विक्रमादित्य सिंह को
  6865. 4:51:16विक्षिप्त तथा उनके जो बेटे हैं अमान सिंह
  6866. 4:51:19और शेर सिंह को नाबालिक घोषित कर दिया
  6867. 4:51:21जाता है। और अंग्रेजों ने रामगढ़ राज्य को
  6868. 4:51:24हड़पने की दृष्टि से ठीक है। अंग्रेज
  6869. 4:51:26शासकों ने पालक न्यायालय यानी कोर्ट ऑफ
  6870. 4:51:28वार्ड जिसे कहते थे कि कार्यवाही की एवं
  6871. 4:51:30राज्य के प्रशासन के लिए सर्वराहकार
  6872. 4:51:33नियुक्त कर शेख मोहम्मद और मोहम्मद
  6873. 4:51:36अब्दुल्ला को रामगढ़ भेजा। कुल मिलाकर बात
  6874. 4:51:38इतनी सी है कि जो पालक न्यायालय था उसने
  6875. 4:51:42राजा को विक्षिप्त घोषित कर दिया और उनके
  6876. 4:51:45जो पुत्र थे शेर सिंह और अमान सिंह उनको
  6877. 4:51:48नाबालिक घोषित कर दिया और यह कहा कि इस
  6878. 4:51:50राज्य पर अब अंग्रेजों का नियंत्रण होगा।
  6879. 4:51:53ठीक है? और अंग्रेजों ने दो मुस्लिम
  6880. 4:51:55अधिकारियों को उस राज्य में भेजा। एक शेख
  6881. 4:51:57मोहम्मद और एक का नाम था मोहम्मद
  6882. 4:51:58अब्दुल्लाह। यह कहानी आपको बहुत अच्छे से
  6883. 4:52:01समझ में आ रही होगी। जिससे रामगढ़ रियासत
  6884. 4:52:03कोर्ट ऑफ वार्ड्स के कब्जे में चली गई।
  6885. 4:52:05कुल मिलाकर अब जो है रामगढ़ रियासत
  6886. 4:52:07स्वतंत्र नहीं बची और रामगढ़ रियासत जो है
  6887. 4:52:10ब्रिटिश अधीन में यानी अंग्रेजों के
  6888. 4:52:12संरक्षण में चली गई। अब आगे की कहानी क्या
  6889. 4:52:15है वो सुनिए। अंग्रेज शासकों की इस हड़प
  6890. 4:52:17नीति का परिणाम भी रानी अवंतीबाई जानती
  6891. 4:52:20थी। फिर भी दोनों सर्वराहकारों को
  6892. 4:52:23उन्होंने रामगढ़ से निकाल दिया। यानी इसके
  6893. 4:52:25बावजूद यह जानती थी रानी के क्या हो सकता
  6894. 4:52:28है। उसके बावजूद रानी ने उन दोनों को
  6895. 4:52:30निकाल दिया।
  6896. 4:52:321855 में अचानक राजा विक्रमादित सिंह एक
  6897. 4:52:34दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। अब
  6898. 4:52:36नाबालिक पुत्रों की संरक्षिका के रूप में
  6899. 4:52:39राज्य शक्ति रानी के हाथों में आ गई और
  6900. 4:52:41रानी ने राज्य के कृषकों को अंग्रेजों के
  6901. 4:52:43निर्देशों को ना मानने का आदेश दिया और इस
  6902. 4:52:46सुधार कार्य से रानी की जो है लोकप्रियता
  6903. 4:52:48बढ़ गई। यानी रानी ने राज्य को संभाल लिया
  6904. 4:52:51और किसानों से यह कहा कि वह अंग्रेजों को
  6905. 4:52:53टैक्स ना दें। अब इस कहानी में आगे क्या
  6906. 4:52:55ट्विस्ट है वो देखिए। इस कहानी में आता है
  6907. 4:52:58इसी समय 1857 का वो विद्रोह। 1857 के
  6908. 4:53:02विद्रोह में किस प्रकार घटनाक्रम बढ़ते
  6909. 4:53:04हैं हमको पता है। अचानक ये विद्रोह जो है
  6910. 4:53:06एक चिंगारी की वजह से जिन्हें चर्बी वाले
  6911. 4:53:08कारतूस कहते हैं। चिंगारी की तरह इसमें
  6912. 4:53:10विस्फोट हो गया और ये पूरे भारत में फैल
  6913. 4:53:12गया था। 1857 में हमने जब राजा शंकर शाह
  6914. 4:53:16के बारे में पढ़ा था तो उस समय भी एक छोटे
  6915. 4:53:18से पैराग्राफ में रानी अवंतीबाई का जिक्र
  6916. 4:53:21किया था। अब हम इस कहानी को दोबारा देखते
  6917. 4:53:23हैं। 1857 का जो विद्रोह है वो संपूर्ण
  6918. 4:53:26भारतवर्ष में फैल गया। इस समय एक
  6919. 4:53:28क्षेत्रीय सम्मेलन होता है 1857 में मई
  6920. 4:53:31में और इस क्षेत्रीय सम्मेलन का मतलब है
  6921. 4:53:34कि रामगढ़ और उसके आसपास के जितने भी
  6922. 4:53:36जमींदार, जागीदार, तालुकेदार, राजा, वह
  6923. 4:53:39सभी सम्मेलन में भाग ले रहे थे। 1857
  6924. 4:53:42ईस्वी में सागर एवं नर्मदा परिक्षेत्र के
  6925. 4:53:44निर्माण के साथ अंग्रेजों की शक्ति में
  6926. 4:53:46वृद्धि हो गई। जिसे हम नर्मदा सागर
  6927. 4:53:48टेरिटरीज़ कहते थे। अब अंग्रेजों को रोक
  6928. 4:53:50पाना किसी एक राजा या तालुकेदार के बस में
  6929. 4:53:52नहीं रहा। रानी ने राज्य के आसपास के
  6930. 4:53:55राजाओं, परगनादारों, जमींदारों और बड़े
  6931. 4:53:58मालगुजारों को क्या किया? एक विशाल
  6932. 4:54:00सम्मेलन में रामगढ़ में आयोजित किया। यानी
  6933. 4:54:02यह सम्मेलन कहां हुआ? रामगढ़ में। लेकिन
  6934. 4:54:05इसकी अध्यक्षता करते हैं कौन? याद रखिएगा
  6935. 4:54:08राजा शंकर शाह गोंड जो कि कहां रहते थे?
  6936. 4:54:11जबलपुर के पुरवा में। ये रानी दुर्गावती
  6937. 4:54:13के वंशज है जिनके बारे में जब हमने लेक्चर
  6938. 4:54:16को देखा था रामगढ़ के जो सॉरी जब हमने
  6939. 4:54:20राजा शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह को पढ़ा था
  6940. 4:54:22तो उसमें हमने समझा था कि उन्होंने इस
  6941. 4:54:24सम्मेलन की अध्यक्षता थी अध्यक्षता की थी।
  6942. 4:54:27इस गुप्त सम्मेलन के बारे में जबलपुर के
  6943. 4:54:30जो कमिश्नर हैं मेजर स्काइन आर्सकाइन
  6944. 4:54:33बोलते थे और मंडला के डिप्टी कमिश्नर
  6945. 4:54:35वांटन को भी पता नहीं चला। यानी अंग्रेजों
  6946. 4:54:38को इस सम्मेलन के बारे में पता नहीं लगा
  6947. 4:54:40और एक मीटिंग बुलाई गई। इस मीटिंग में यह
  6948. 4:54:42तय हुआ कि हम सभी लोग अपने-अपने क्षेत्रों
  6949. 4:54:44में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करेंगे
  6950. 4:54:46और अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंकेंगे। अब
  6951. 4:54:48कहानी में हम आगे बढ़ते हैं। कहानी में
  6952. 4:54:51आगे बढ़ते हैं। इस गुप्त सम्मेलन की एक
  6953. 4:54:53खास बात है जो हमने राजा शंकर शाह में भी
  6954. 4:54:55जिक्र किया था कि इस सम्मेलन में लिए गए
  6955. 4:54:58निर्णय के अनुसार प्रचार का दायित्व रानी
  6956. 4:55:00पर दिया गया। यानी रानी अवंतीबाई को इसकी
  6957. 4:55:03जिम्मेदारी दी गई कि वह सभी लोगों को
  6958. 4:55:04एकजुट करें और इसका प्रचार करें। रानी
  6959. 4:55:06अवंतीबाई ने एक पत्र याद रखिएगा और दो
  6960. 4:55:10काली चूड़ियां क्वेश्चन पूछा जा सकता है
  6961. 4:55:12कि रामगढ़ रियासत में या पूछा जा सकता है
  6962. 4:55:15कि जबलपुर में मैसेज किस तरीके से
  6963. 4:55:17ट्रांसफर होता था तो एक पत्र और दो काली
  6964. 4:55:19चूड़ियों की एक पुड़िया बनाकर प्रसाद के
  6965. 4:55:22रूप में वितरित करना था। यानी एक पत्र
  6966. 4:55:24देना था और एक प्रसाद की पुड़िया और साथ
  6967. 4:55:27में दो चूड़ियां देनी थी। अगर पत्र में
  6968. 4:55:30लिखा गया था अंग्रेजों से संघर्ष के लिए
  6969. 4:55:33तैयार रहो या चूड़ियां पहनकर घर में बैठो।
  6970. 4:55:36पत्र सौहार्द और एकजुटता का प्रतीक था तो
  6971. 4:55:38चूड़ियां पुरुषार्थ जागृत करने का सशक्त
  6972. 4:55:41माध्यम बनी। पुड़िया लेने का अर्थ था कि
  6973. 4:55:43अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति में अपना
  6974. 4:55:45समर्थन देना। समझ में आया कि नहीं आया?
  6975. 4:55:47पुड़िया लेना मतलब आप क्रांति में
  6976. 4:55:50अंग्रेजों का साथ नहीं देंगे। इन
  6977. 4:55:52आंदोलनकारियों का साथ देंगे। अदरवाइज आप
  6978. 4:55:54चूड़ियां ले लो घर बैठो। ठीक है? तो, यह
  6979. 4:55:57कहानी हो गई। अब रानी अवंतीबाई ने डिसाइड
  6980. 4:56:01कर लिया कि वह अपने राज्य को जिस पर
  6981. 4:56:03अंग्रेजों ने अपना अधिकार कर लिया उस
  6982. 4:56:05राज्य को वह वापस ले लेंगी और इस समय एक
  6983. 4:56:07युद्ध होता है जिसे बोलते हैं खैरी युद्ध।
  6984. 4:56:0923 नवंबर 1857 को रानी अवंतीबाई ने अपनी
  6985. 4:56:13सेना के साथ मिलकर जो अंग्रेज वार्डन था।
  6986. 4:56:16अंग्रेज जो अह कमांडर था जो कि मंडला का
  6987. 4:56:18जो अधिकारी था उसका नाम था वार्डन या इसे
  6988. 4:56:21वार्डिंग बोलते थे। आप याद रखिएगा। वार्डन
  6989. 4:56:23या क्या बोलते हैं? वार्डिंगन। दोनों
  6990. 4:56:25नामों में से जो आपको मिले याद रखिएगा। तो
  6991. 4:56:28यह अंग्रेज अधिकारी है जिससे रानी का
  6992. 4:56:30युद्ध होता है। तो मंडला नगर नगर को
  6993. 4:56:32छोड़कर याद रखिएगा पूरा जो जिला है वह
  6994. 4:56:34स्वतंत्र हो चुका था। अवंतीबाई ने मंडला
  6995. 4:56:36विजय के लिए सिपाहियों सहित प्रस्थान किया
  6996. 4:56:40और खैरी नामक स्थान पर अंग्रेजी सेना को
  6997. 4:56:43पराजित कर पूरे मंडला जिले पर अधिकार कर
  6998. 4:56:45लिया। ठीक है? इसमें यही लिखा है कि रानी
  6999. 4:56:48के सिपाहियों ने क्या किया? खैरी के पास
  7000. 4:56:51अंग्रेज सिपाहियों के साथ रानी अवंतीबाई
  7001. 4:56:53का युद्ध हुआ। वाडिंगटन पूरी शक्ति लगाने
  7002. 4:56:56के बाद भी कुछ ना कर सका और मंडला छोड़
  7003. 4:56:58शिवनी की ओर भाग गया और इस प्रकार पूरा
  7004. 4:57:00मंडला जिला और रामगढ़ राज्य स्वतंत्र हो
  7005. 4:57:02गया। इस विजय के उपरांत आंदोलनकारियों की
  7006. 4:57:05शक्ति में कमी जरूर आई परंतु उल्लास में
  7007. 4:57:07कमी नहीं आई और रानी रामगढ़ वापस हो गई।
  7008. 4:57:10अब हम लास्ट उस पर चलेंगे। यानी रानी ने
  7009. 4:57:14विद्रोह में भाग ले लिया। रानी ने पूरे
  7010. 4:57:16रामगढ़ पर अधिकार कर लिया। अब अंग्रेजों
  7011. 4:57:18की बारी है। अंग्रेज बदले की तलाश में है।
  7012. 4:57:20वाडिंगटन रानी से बदला लेना चाहता है और
  7013. 4:57:23वह रानी को हराना चाहता है। इसलिए याद
  7014. 4:57:25रखिएगा रानी से अपनी हार का बदला लेने के
  7015. 4:57:28लिए अंग्रेज जो हैं बौखलाए हुए थे।
  7016. 4:57:30उन्होंने अपनी हार का बदला लेना चाहा।
  7017. 4:57:32अंग्रेज लगातार अपनी शक्ति सहजते रहे।
  7018. 4:57:34अंग्रेजों ने 15 जनवरी 1858 को घुगरी जो
  7019. 4:57:38कि इसी में पास में है को घेर लिया घुगरी
  7020. 4:57:41को और मार्च 1858 के दूसरे सप्ताह में
  7021. 4:57:44रीवा नरेश। याद रखिएगा हमें तो अपनों ने
  7022. 4:57:46लूटा। गैरों में कहां दम था? यानी अगर
  7023. 4:57:48पूछा जाए कि रामगढ़ रियासत के विरुद्ध या
  7024. 4:57:51रानी अवंतीबाई के विरुद्ध किस राजा ने
  7025. 4:57:53अंग्रेजों की सहायता की? वो हैं रीवा
  7026. 4:57:55नरेश। याद रखिएगा रीवा नरेश ने उनकी
  7027. 4:57:57सहायता की। ठीक है? और वीरांगना रानी
  7028. 4:58:01अवंतीबाई की सेना जो अंग्रेजों की सेना की
  7029. 4:58:03तुलना में बहुत छोटी थी। फिर भी साहस
  7030. 4:58:05पूर्वक अंग्रेजों का सामना किया। रानी ने
  7031. 4:58:08परिस्थितियों को भांपते हुए अपने किले से
  7032. 4:58:09निकलकर डिंडोरी के पास देवगढ़ के जंगल है।
  7033. 4:58:13यहां पहाड़ियों पर अपना शिविर बना लिया।
  7034. 4:58:15अब आते हैं रानी के बलिदान दिवस की ओर।
  7035. 4:58:19ठीक है? तो रानी का बलिदान किस प्रकार
  7036. 4:58:20होता है? आइए समझिए। अब हमको यह समझना है
  7037. 4:58:23कि रानी एक जगह पर छिपी हुई है और इस जगह
  7038. 4:58:26का नाम है देवहारगढ़।
  7039. 4:58:28सबसे इंपॉर्टेंट बात है देवहारगढ़। और यह
  7040. 4:58:31अंतिम युद्ध होने वाला है देवहारगढ़ का
  7041. 4:58:33युद्ध 1858 में। और आप याद रखिएगा डेट भी
  7042. 4:58:3720 मार्च याद रख सकते हैं। डिडोरी में
  7043. 4:58:39पड़ता है यह। यहां पर रानी जो हैं छुपी
  7044. 4:58:41हुई हैं और अब जो है अंग्रेज सेना उनको
  7045. 4:58:44ढूंढ रही है। तो अब क्या होगा? अंग्रेज
  7046. 4:58:46सेना जब उनको ढूंढते हुए देहारगढ़ के पास
  7047. 4:58:49पहुंची तो पहले तो दोनों सेनाओं के मध्य
  7048. 4:58:51संघर्ष होता है और जब रानी को लगा कि वह
  7049. 4:58:54हार जाएंगी तो रानी ने क्या कहा? आइए मैं
  7050. 4:58:56आपको बताता हूं। रानी अवंतीबाई ने अपने आप
  7051. 4:58:59को अंग्रेजों से घिरता देख रानी वीरांगना
  7052. 4:59:03जो दुर्गावती हैं। याद रखिएगा। वीरांगना
  7053. 4:59:05रानी दुर्गावती का अनुकरण करते हुए अपनी
  7054. 4:59:08तलवार निकाली और कहा उन्होंने अपनी तलवार
  7055. 4:59:11निकाल ली और क्या कहा ध्यान से सुनिएगा
  7056. 4:59:14उन्होंने कहा हमारी दुर्गावती ने जीते जी
  7057. 4:59:18हमारी दुर्गावती ने जीते जी वैरी के हाथ
  7058. 4:59:20अंग ना छुए जाने का प्रण लिया था यानी
  7059. 4:59:23जीते जी उनके दुश्मन उनको हाथ ना लगा पाएं
  7060. 4:59:26और इसे ना भूलना ऐसा कहते हुए उन्होंने
  7061. 4:59:28अपने सीने में अपनी तलवार मार ली और देश
  7062. 4:59:31के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे गई
  7063. 4:59:33वीरांगना रानी अवंती बाई ने याद रखिएगा जब
  7064. 4:59:38रानी अवंतीबाई जब मृत्यु सैया पर थी तब
  7065. 4:59:40उन्होंने अंग्रेजों को अपना बयान दिया और
  7066. 4:59:42कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मैंने
  7067. 4:59:45ही विद्रोह के लिए भड़काया था। उकसाया था।
  7068. 4:59:47प्रजा बिल्कुल निर्दोष है। और इस प्रकार
  7069. 4:59:50रानी ने हजारों लोगों को अंग्रेजों द्वारा
  7070. 4:59:52किए जाने वाले अत्याचार से और उनकी
  7071. 4:59:54यातनाओं से बचा लिया। क्योंकि अगर रानी
  7072. 4:59:57अवंतीबाई यह सेंटेंस नहीं देते तो अंग्रेज
  7073. 5:00:00प्रजा पर भी अत्याचार करते। और 20 मार्च
  7074. 5:00:021858 को रानी अवंतीबाई जो हैं शहीद हो
  7075. 5:00:06जाती हैं। इसीलिए याद रखिएगा रानी
  7076. 5:00:08अवंतीबाई लोधी जो हैं वो 1857 की जो
  7077. 5:00:11क्रांति है 1857 की क्रांति की प्रथम
  7078. 5:00:15महिला शहीद हैं। 1857 की क्रांति की प्रथम
  7079. 5:00:19महिला शहीद किसे माना जाता है? रानी
  7080. 5:00:21अवंतीबाई को माना जाता है। याद रखना
  7081. 5:00:24क्योंकि रानी
  7082. 5:00:26लक्ष्मीबाई इसके बाद शहीद होती हैं जून
  7083. 5:00:28में। पहले मार्च में रानी अवंतीबाई शहीद
  7084. 5:00:31होती हैं और जून में कौन शहीद होता है?
  7085. 5:00:33रानी लक्ष्मीबाई। ठीक है? याद रखिएगा
  7086. 5:00:36क्योंकि इनकी कहानी लक्ष्मीबाई की तरह है।
  7087. 5:00:38इसलिए रानी अवंतीबाई को रामगढ़ की
  7088. 5:00:41लक्ष्मीबाई भी कहते हैं। क्या कहते हैं?
  7089. 5:00:43रामगढ़ की लक्ष्मीबाई। तो किसे रामगढ़ की
  7090. 5:00:46लक्ष्मीबाई कहते हैं? याद रखिएगा वो हैं
  7091. 5:00:48रानी अवंतीबाई। रानी अवंतीबाई के
  7092. 5:00:50माता-पिता कौन थे? उनके पति का नाम क्या
  7093. 5:00:52था? उनके बच्चों का नाम क्या था? किस
  7094. 5:00:54रियासत की रानी रानी थी वो? और किससे उनका
  7095. 5:00:58युद्ध हुआ है? वाडिंगटन। याद रखिएगा
  7096. 5:01:00वार्डन भी याद रख सकते हैं या वाडिंगन आप
  7097. 5:01:02याद रख सकते हैं। इसके अलावा किस संघर्ष
  7098. 5:01:05में उनकी मृत्यु हुई या उनका अंतिम युद्ध
  7099. 5:01:07है देवहारगढ़ का युद्ध। 20 मार्च 1858 को
  7100. 5:01:10यहां पर रानी की क्या हो जाती है? मृत्यु
  7101. 5:01:13हो जाती है जो कि शाहपुर के पास स्थित है।
  7102. 5:01:15ठीक है? अब मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को
  7103. 5:01:20रानी अवंतीबाई बहुत अच्छे से समझ में आ
  7104. 5:01:22गई। रानी अवंतीबाई लोधी जिन्होंने 1857 की
  7105. 5:01:25क्रांति में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया
  7106. 5:01:27और अपने राज्य की खातिर, अपनी मातृभूमि की
  7107. 5:01:30खातिर, अपनी प्रजा की खातिर उन्होंने
  7108. 5:01:32अंग्रेजों से लोहा लिया और लोहा लेते हुए
  7109. 5:01:34वो वीरगति को प्राप्त हो गई। मरने से पहले
  7110. 5:01:37उन्होंने रानी दुर्गावती के उस वक्तव्य को
  7111. 5:01:40याद रखा और उस प्रण को याद रखा जो
  7112. 5:01:42उन्होंने कहा था कि जीते जी वह किसी वैरी
  7113. 5:01:44के हाथ नहीं आएंगी। किसी दुश्मन के हाथ
  7114. 5:01:46नहीं आएंगी। और उन्होंने अपनी तलवार से
  7115. 5:01:48अपना जो है बलिदान दे दिया और खुद ही जो
  7116. 5:01:51है वीरगति को प्राप्त हो गई। रानी
  7117. 5:01:53अवंतीबाई याद रखिएगा मध्य प्रदेश की पहली
  7118. 5:01:55महिला शहीद हैं जिनका 1857 की क्रांति में
  7119. 5:01:58अपना योगदान है। अब आप रानी अवंतीबाई पर
  7120. 5:02:00आसानी से जो है कुछ भी लिख सकते हैं। चाहे
  7121. 5:02:03प्रीलिम्स हो या मेंस हो। इसमें आपको सारी
  7122. 5:02:05चीजें मैंने बता दी। कारण भी बता दिया।
  7123. 5:02:08राजा शंकर शाह से उनका जो संबंध था वो उस
  7124. 5:02:10सम्मेलन में था। जो पुरवा के राजा थे ये
  7125. 5:02:13सारी चीजें हम लोग इस पार्ट में डिस्कस कर
  7126. 5:02:15चुके हैं। मुझे उम्मीद है कि आपको रानी
  7127. 5:02:18अवंतीबाई के बारे में दी गई ये जानकारी
  7128. 5:02:20काफी अच्छी लगी होगी। तो रानी अवंतीबाई जो
  7129. 5:02:22हैं रामगढ़ की लक्ष्मीबाई याद रखिएगा
  7130. 5:02:25जिन्होंने रामगढ़ का मान बढ़ाया। रामगढ़
  7131. 5:02:28वर्तमान में डिंडोरी जिले में स्थित है।
  7132. 5:02:30तो हमें गर्व करना चाहिए कि हमारे देश में
  7133. 5:02:32ऐसी वीरांगनाएं हुई हैं। रानी अवंतीबाई,
  7134. 5:02:35रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मीबाई और ना
  7135. 5:02:38जाने कैसी और ना जाने और कितनी जो महिलाएं
  7136. 5:02:40हैं जिन्होंने इस तरीके से अपने सर्वस्व
  7137. 5:02:43अपना बलिदान दिया है। मुझे उम्मीद है आपको
  7138. 5:02:45यह लेक्चर पसंद आएगा। जय हिंद। थैंक यू।
  7139. 5:03:03नमस्कार साथियों, मैं हरी सिंह राजपूत
  7140. 5:03:05आपके लिए लेकर आया हूं मध्य प्रदेश के
  7141. 5:03:07वीरों के इतिहास की सीरीज में एक अन्य
  7142. 5:03:10महत्वपूर्ण वीर का नाम और वह वीर हैं मध्य
  7143. 5:03:13प्रदेश के गोंड राजवंश के महानतम शासक और
  7144. 5:03:17हम कह सकते हैं रानी दुर्गावती के वंशज
  7145. 5:03:19जिनका नाम है राजा शंकर शाह गोंड एवं उनके
  7146. 5:03:21पुत्र कुंवर कुंवर रघुनाथ शाह गोंड। तो
  7147. 5:03:24दोस्तों आज हम बात करेंगे राजा शंकर शाह
  7148. 5:03:26एवं रघुनाथ शाह गोंड के बारे में
  7149. 5:03:28जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपना
  7150. 5:03:31बलिदान दिया और अंग्रेजों ने क्रूरतम
  7151. 5:03:34तरीके से उनको जो है एक तोप से बांधकर जो
  7152. 5:03:36है उड़ा दिया। तो आइए जानते हैं कौन है
  7153. 5:03:39राजा शंकर शाह और कौन थे उनके पुत्र
  7154. 5:03:41रघुनाथ शाह। तो जैसा कि साथियों आप सभी
  7155. 5:03:44लोग जानते हैं कि राजा शंकर शाह जिन्होंने
  7156. 5:03:471857 की क्रांति में अपना महत्वपूर्ण
  7157. 5:03:50बलिदान दिया। यह हैं हमारे राजा शंकर शाह
  7158. 5:03:52और यह हैं उनके पुत्र जिनका नाम था रघुनाथ
  7159. 5:03:54शाह। तो अब देखेंगे थोड़ा सा इनके बारे
  7160. 5:03:57में मैं आपको बताना चाहता हूं और आप इस
  7161. 5:04:00पूरे घटनाक्रम को सिस्टमैटिक तरीके से
  7162. 5:04:02देखिएगा क्योंकि इसमें आपको परीक्षा
  7163. 5:04:04उपयोगी चीजें बहुत सारी मिलने वाली हैं।
  7164. 5:04:06जैसे कि सबसे पहले याद रखिएगा शंकर शाह
  7165. 5:04:09गोंड है कौन? शंकर शाह आखिर कौन थे? तो
  7166. 5:04:11देखिए गोंड वंश गोंड राजवंश के एक अंतिम
  7167. 5:04:14प्रसिद्ध शासक थे जिनका नाम था निजाम शाह
  7168. 5:04:16जो कि मंडला के गोंड शासक थे। और उनके बाद
  7169. 5:04:19इस वंश में एक अंतिम राजा हुए जिनका नाम
  7170. 5:04:21था सुमेर शाह। तो इन्हीं सुमेरशाह गोंड के
  7171. 5:04:24परिवार में जन्म होता है राजा शंकर शाह
  7172. 5:04:27का। राजा सुमेर शाह गोंड को मराठों ने
  7173. 5:04:30बंदी बना के सागर में रखा था और बाद में
  7174. 5:04:32उनको जब रिहा किया गया तो उन्हें एक छोटी
  7175. 5:04:35सी जागीर दे दी गई थी। और यह जागीर जो है
  7176. 5:04:38जबलपुर के पूर्वाग्राम में थी। तो यहां पर
  7177. 5:04:40हमारे लिए एक इंपॉर्टेंट वर्ड है जबलपुर
  7178. 5:04:42का पूर्वाग्राम। कहां है ये? यह जबलपुर
  7179. 5:04:46में है। इस गांव का नाम है पुरवाग्राम। तो
  7180. 5:04:48राजा सुमेर शाह गोंड इसी पूर्वाग्राम में
  7181. 5:04:51रहने लगे थे और यहीं पर उनकी मृत्यु के
  7182. 5:04:54बाद यह जो जागीर है पूर्वा जागीर यह मिल
  7183. 5:04:56जाती है राजा शंकर शाह को। याद रखिएगा और
  7184. 5:04:58शंकर शाह के पुत्र हैं जिनका नाम था
  7185. 5:05:00रघुनाथ शाह गोंड। ठीक है? अगर हम देखें
  7186. 5:05:03राजा शंकर शाह और उनके जो पुत्र रघुनाथ
  7187. 5:05:05शाह हैं इन दोनों का जन्म जो है मंडला के
  7188. 5:05:08किले में हुआ था। क्योंकि इससे पहले राजा
  7189. 5:05:11सुमेर शाह जो गोंड थे वह मंडला के किले
  7190. 5:05:13में रहते थे। लेकिन मराठों ने आक्रमण कर
  7191. 5:05:15उनको कैद कर लिया और उसके पश्चात जो है
  7192. 5:05:18मराठों ने उनका जो राज्य है वो छीन लिया
  7193. 5:05:20और उन्हें एक छोटी सी जागीर दे दी जो थी
  7194. 5:05:22कहां पर? पूर्वाग्राम जबलपुर में। आइए हम
  7195. 5:05:25आगे बात करते हैं। इसमें यह भी बताया गया
  7196. 5:05:27है कि जो मंडला का जो किला है वह गोंड वंश
  7197. 5:05:30के राजा नरेंद्र शाह ने बनवाया था 1698
  7198. 5:05:32में। जो कि नर्मदा नदी के किनारे स्थित है
  7199. 5:05:36और नर्मदा नदी इसे तीन ओर से सुरक्षा
  7200. 5:05:38प्रदान करती है। अब हम बात कर रहे हैं कि
  7201. 5:05:41राजा शंकर शाह का 1857 की क्रांति में
  7202. 5:05:43योगदान किस प्रकार रहा। थोड़ा सा और आप
  7203. 5:05:45इनके बारे में जान लीजिए। राजा शंकर शाह
  7204. 5:05:47के जो पिता हैं सुमेर शाह के समय मंडला
  7205. 5:05:50पेशवाओं और मराठाओं के अधीन आ गया था।
  7206. 5:05:53जैसा कि मैंने आपको बताया कि मराठाओं ने
  7207. 5:05:54आक्रमण कर मंडला पर अधिकार कर लिया और जो
  7208. 5:05:57राजा सुमेर शाह हैं उन्हें कैद कर लिया
  7209. 5:05:59था। और पेशवा के प्रतिनिधि के रूप में
  7210. 5:06:02सुमेर शाह याद रखिएगा सुमेर शाह मंडला के
  7211. 5:06:04राजा के रूप में शासन चला रहे थे। इसी समय
  7212. 5:06:07नरहरी शाह और सुमेर शाह के बीच सत्ता का
  7213. 5:06:10संघर्ष चला और 1818 में मंडला अंग्रेजों
  7214. 5:06:13के अधीन आ गया। यानी पहले मराठों ने
  7215. 5:06:15अधिकार किया और मराठों से यह जो किला है
  7216. 5:06:171818 में वो अंग्रेजों ने छीन लिया था।
  7217. 5:06:20नरहरी शाह और सुमेर शाह के बीच में एक
  7218. 5:06:23झगड़ा हुआ था। वह एक जब हम गोंड राजवंश
  7219. 5:06:26पढ़ेंगे तो उसमें हम इसको डिस्कस करेंगे।
  7220. 5:06:28राजा शंकर शाह पहले के राजाओं की तरह
  7221. 5:06:30स्वतंत्र राजा नहीं थे क्योंकि उनकी जो
  7222. 5:06:32जागीर है वह अंग्रेजों ने छीनी। पहले
  7223. 5:06:34मराठों ने छीनी और बाद में मराठों से
  7224. 5:06:36अंग्रेजों ने छीनी। तो कुल मिलाकर अब उनका
  7225. 5:06:38जो राज्य और जागीर है वो अंग्रेजों के पास
  7226. 5:06:40है। उनके पास मात्र पुरवा याद रखिएगा यह
  7227. 5:06:43पुरवा इंपॉर्टेंट है। पुरवा और कुछ गांव
  7228. 5:06:46की जागीरदारी बची थी और उन्हें अंग्रेजों
  7229. 5:06:48से पेंशन मिलती थी। परंतु गढ़मंडला और
  7230. 5:06:51जबलपुर की जनता उन्हें वही मानसान देती थी
  7231. 5:06:54जो उनके पूर्वजों को प्राप्त था। यानी
  7232. 5:06:57राजा शंकर शाह महानतम गोंड शासक संग्राम
  7233. 5:07:00शाह और रानी दुर्गावती के ही वंशज थे।
  7234. 5:07:02इनके पिता मंडला के शासक थे जिनका नाम
  7235. 5:07:05सुमेर शाह था। जिन्हें मराठों ने पहले कैद
  7236. 5:07:07किया। बाद में मराठों ने जब इन्हें रिहा
  7237. 5:07:09किया तो फिर इन्ह इनका जो क्षेत्र है वो
  7238. 5:07:10अंग्रेजों ने इनसे छीन लिया और इन्हें
  7239. 5:07:12पुरवा नाम के क्षेत्र की जागीर दे दी।
  7240. 5:07:14उनके एकमात्र पुत्र रघुनाथ शाह थे। याद
  7241. 5:07:17रखिएगा जैसा कि मैंने आपको बता दिया और
  7242. 5:07:19रघुनाथ शाह का जो विवाह है वह रानी मन
  7243. 5:07:21कुंवर से हुआ था। जबकि इनकी वाइफ का नाम
  7244. 5:07:23फूल कुंवर था। अभी हम और चर्चा करेंगे। अब
  7245. 5:07:25देखिए होता क्या है इसमें?
  7246. 5:07:28आखिर राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने 1857
  7247. 5:07:32की क्रांति में विद्रोह क्यों किया? इसका
  7248. 5:07:34कारण मैं आपको बता रहा हूं। जैसा कि हम सब
  7249. 5:07:36जानते हैं कि डलहौजी ने भारतीय राज्यों को
  7250. 5:07:38हड़पने के लिए एक नीति चलाई जिसे
  7251. 5:07:40डॉक्ट्राइन ऑफ लैप्स या जिसे हम लोग हड़प
  7252. 5:07:43नीति के नाम से जानते हैं। और इस नीति के
  7253. 5:07:46द्वारा उसने क्या किया था कि यदि किसी
  7254. 5:07:47राजा का आनुवांशिक उत्तराधिकारी नहीं होता
  7255. 5:07:50था तो उसे अंग्रेजी राज्य में विलय कर
  7256. 5:07:52लिया जाता था। यानी यदि कोई राजा बिना
  7257. 5:07:55उत्तराधिकारी के मर जाए तो उसका जो राज्य
  7258. 5:07:58है वो अंग्रेजों के पास चला जाता था।
  7259. 5:08:00डलहौजी की यही कहलाती है डॉक्ट्राइन ऑफ
  7260. 5:08:02लैप्स या जिसे हम हड़प नीति कहते हैं। अब
  7261. 5:08:05इस नीति के तहत कौन-कौन से राज्य झांसी,
  7262. 5:08:07नागपुर, अवध, कानपुर, मंडला के रामगढ़।
  7263. 5:08:10याद रखिएगा इन सभी राज्यों को अंग्रेजों
  7264. 5:08:12ने अपने अधिकार में कर लिया था। और इन्हीं
  7265. 5:08:15के इन्हीं सभी चीजों की वजह से यह नाराज
  7266. 5:08:18थे। इसके अलावा गाय और सूअर की चर्बी वाले
  7267. 5:08:20कारतूस क्रांति का मुख्य कारण बने थे। तो
  7268. 5:08:22यह सब 1857 की क्रांति का मुख्य कारण थे
  7269. 5:08:25और इन्हीं घटनाओं की वजह से इसके पूर्व
  7270. 5:08:27में 1842 के आदिवासी आंदोलन को अंग्रेजों
  7271. 5:08:29ने बर्बरता से कुचल दिया था। राजा रघुनाथ
  7272. 5:08:33शाह इन सभी घटनाओं से राजा रघुनाथ शाह और
  7273. 5:08:35शंकर शाह इन सभी घटनाओं से क्या थे? आहत
  7274. 5:08:38थे और वह अंग्रेजों को इस देश से भगाना
  7275. 5:08:40चाहते थे। यह है कहानी। अब मैं आपको इस
  7276. 5:08:43कहानी को थोड़ा सा लिखकर बताता हूं
  7277. 5:08:45क्योंकि मुझे लगता है कि आपको बहुत अच्छे
  7278. 5:08:47से सारी बातें पता होनी चाहिए। इसमें हमने
  7279. 5:08:50जो भी बातें की वो मुख्यता चार पांच बातें
  7280. 5:08:52हैं। एक गोंड राजा हैं जिनका नाम है सुमेर
  7281. 5:08:56शाह। ध्यान से सुनिएगा। क्या नाम था इनका?
  7282. 5:08:58सुमेर शाह। जो सुमेर शाह गोंड है
  7283. 5:09:06सुमेर शाह गोंड। तो सुमेर शाह जो गोंड है
  7284. 5:09:10इनके जो पुत्र हैं उनका नाम क्या है? याद
  7285. 5:09:12रखिएगा। सुमेर शाह जो गोंड है जो कि मंडला
  7286. 5:09:15के शासक थे। कहां के शासक थे? यह मंडला
  7287. 5:09:18के। मैं आपको एक मंडला के राजा थे। तो
  7288. 5:09:22इनका जो राज्य है पहले किसने छीन लिया?
  7289. 5:09:25पहले मराठों ने इनका क्षेत्र छीना। मराठों
  7290. 5:09:28ने क्षेत्र छीना और बाद में यह जो क्षेत्र
  7291. 5:09:32है वह मराठों से निकलकर किसके पास आ गया?
  7292. 5:09:35ईआईसी यानी ईस्ट इंडिया कंपनी के पास आ
  7293. 5:09:37गया। यानी अंग्रेजों ने मराठों से एक
  7294. 5:09:39क्षेत्र जो है वह छीन लिया। मराठों से
  7295. 5:09:42किसने छीन लिया? अंग्रेजों ने। बाद में
  7296. 5:09:44क्या होता है कि राजा सुमेर शाह के बेटे
  7297. 5:09:46होते हैं जिनका नाम होता है शंकर शाह
  7298. 5:09:49जिनके बारे में हम पढ़ रहे हैं राजा शंकर
  7299. 5:09:51शाह। अब शंकर शाह जो हैं याद रखिएगा कौन
  7300. 5:09:54है? यह कोई स्वतंत्र शासक नहीं है। क्यों
  7301. 5:09:57नहीं है स्वतंत्र शासक? क्योंकि इनका जो
  7302. 5:09:59क्षेत्र है वह अंग्रेजों ने अपने अधिकार
  7303. 5:10:01में ले लिया। ठीक है? इनके पास केवल पुरवा
  7304. 5:10:05और उसके आसपास की जागीर है। याद रखिएगा
  7305. 5:10:08पुरवा जो है एक फेमस प्लेस है। पुरवाग्राम
  7306. 5:10:11की जागीर है। और याद रखिएगा यह जो हैं
  7307. 5:10:14क्या करते हैं? इनको अंग्रेजों से एक
  7308. 5:10:16पेंशन मिलती है और यह पेंशन पर अपना
  7309. 5:10:18गुजारा करते हैं। क्या मिलती है? पेंशन
  7310. 5:10:21मिलती है अंग्रेजों से। शंकर शाह किसके
  7311. 5:10:23बेटे हैं? याद रखिएगा सुमेश शाह। और शंकर
  7312. 5:10:26शाह के बेटे हैं जिनका नाम है रघुनाथ शाह।
  7313. 5:10:28कुंवर रघुनाथ शाह। अब कैसे इनका 1857 की
  7314. 5:10:32क्रांति में योगदान है और किस प्रकार
  7315. 5:10:34अंग्रेज इनको पकड़ते हैं इस बात को हम
  7316. 5:10:37जानने की कोशिश करते हैं और कोशिश करेंगे
  7317. 5:10:40कि इसको अच्छे से समझ सके। इसी बीच क्या
  7318. 5:10:43होता है? इसी बीच एक घटनाक्रम होता है कि
  7319. 5:10:46जैसे यह जो है यह पुरवा है। पुरवा कहां
  7320. 5:10:49है? मैंने आपको बता दिया। पुरवा की यह
  7321. 5:10:51जागीर है और इस जागीर के मालिक हैं जिनका
  7322. 5:10:54नाम है क्या? तो इस जागीर के मालिक का नाम
  7323. 5:10:57है राजा शंकर शाह। ठीक है? तो यह कौन हो
  7324. 5:11:01गए? राजा शंकर शाह हो गए यहां के मालिक।
  7325. 5:11:03और उनके बेटे हैं जिनका नाम क्या हो
  7326. 5:11:05जाएगा? रघुनाथ शाह। शंकर शाह की जो उम्र
  7327. 5:11:07है वो लगभग 70 साल है। याद रखिएगा राजा
  7328. 5:11:10शंकर शाह की एक खास बात है। राजा शंकर शाह
  7329. 5:11:13क्या करते थे? कविताएं लिखा करते थे। क्या
  7330. 5:11:16लिखा करते थे? कविताएं लिखा करते थे। और
  7331. 5:11:18यह जो कविताएं थी वो एक तरीके से वीर रस
  7332. 5:11:21वाली थी। कौन सी? वीर रस वाली थी।
  7333. 5:11:24अतिशयोक्ति वाली कविताएं थी। जिसका मतलब
  7334. 5:11:26यह है कि वो भारत के युवाओं को क्रांति के
  7335. 5:11:29लिए प्रेरित करना चाहते थे। क्योंकि इस
  7336. 5:11:31समय देश में क्या चल रही है? इस समय देश
  7337. 5:11:34में 1857 की क्रांति जो है वो प्रारंभ हो
  7338. 5:11:37चुकी है। तो 1857 की क्रांति चल रही है और
  7339. 5:11:401857 की क्रांति में वो एक तरीके से एक
  7340. 5:11:43प्लान बनाते हैं। वो प्लान यह बनाते हैं
  7341. 5:11:46कि जबलपुर में अंग्रेजों की एक रेजीमेंट
  7342. 5:11:48रहा करती थी। ध्यान से सुनते जाइएगा पूरी
  7343. 5:11:51कहानी। जबलपुर में ईआईसी की यानी
  7344. 5:11:54अंग्रेजों की एक रेजीमेंट थी
  7345. 5:11:57और इस रेजीमेंट का नाम था 52वीं रेजीमेंट।
  7346. 5:12:0052 वी रेजीमेंट कहते थे। तो ये जो 52वीं
  7347. 5:12:04रेजीमेंट है इस रेजीमेंट के बहुत सारे जो
  7348. 5:12:06सिपाही हैं वो क्या करते थे? अक्सर जो है
  7349. 5:12:09इनके महल में कहां आते थे? इनके महल में
  7350. 5:12:12आते थे। इनके जो सिपाही हैं याद रखिएगा वो
  7351. 5:12:15राजा साहब के महल में जाते थे। ठीक है?
  7352. 5:12:18कहां जाते थे? राजा शंकर शाह के महल या घर
  7353. 5:12:20पे जाते थे। और यहां पर जो है बैठक चलती
  7354. 5:12:22थी और बैठक में राजा शंकर शाह 52वीं
  7355. 5:12:25रेजीमेंट के सिपाहियों को विद्रोह करने के
  7356. 5:12:28लिए भड़काना चाहते थे। अब यह बात जो है
  7357. 5:12:30याद रखिएगा जब 1857 की क्रांति चल रही थी
  7358. 5:12:33तो अंग्रेजों ने भी अपने जासूस भेज रखे थे
  7359. 5:12:36और इस समय जबलपुर का जो अंग्रेज
  7360. 5:12:39अधिकारी था उसका नाम था क्लार्क। याद
  7361. 5:12:44रखिएगा क्या नाम था? मेजर क्लार्क जो है
  7362. 5:12:46वह जबलपुर का अंग्रेज अधिकारी था। तो
  7363. 5:12:49क्लार्क ने अपने कुछ जासूस जो हैं वह इस
  7364. 5:12:53महल के पास छोड़ रखे थे। किसके? राजा शंकर
  7365. 5:12:56शाह के। तो क्लार्क को यह मैसेज मिला कि
  7366. 5:12:58राजा शंकर शाह इन सिपाहियों को भड़का कर
  7367. 5:13:01जो रेजीमेंट का मुख्यालय है अंग्रेजों का
  7368. 5:13:04उस पर हमला करना चाहते हैं। तो राजा अपने
  7369. 5:13:06सिपाहियों के साथ राजा इन विद्रोहियों के
  7370. 5:13:09साथ जबलपुर के जो अंग्रेजी कार्यालय है उस
  7371. 5:13:12पर हमला करें। उससे पहले ही क्या करता है?
  7372. 5:13:14क्लार्क जो है इसको सूचना मिल जाती है। तो
  7373. 5:13:16यह जो है अटैक कर देता है राजा के महल पर
  7374. 5:13:19और राजा के महल पर अटैक करके यहां पर राजा
  7375. 5:13:22रघुनाथ शाह को राजा रघुनाथ शाह और उनके जो
  7376. 5:13:28पिता हैं राजा रघुनाथ शाह और उनके जो पिता
  7377. 5:13:31हैं जिनका नाम है राजा शंकर शाह। शंकर शाह
  7378. 5:13:34की उम्र याद रखिएगा 70 साल है जो राजा
  7379. 5:13:36हैं। राजा शंकर शाह और उनके जो कुंवर हैं
  7380. 5:13:39राजा नहीं लगाएंगे क्योंकि पिता भी राजा
  7381. 5:13:41हैं तो उनके जो पुत्र हैं जिनका नाम है
  7382. 5:13:44कुंवर शाह इन लोगों को क्या कर लेते हैं?
  7383. 5:13:46गिरफ्तार कर लेते हैं। जब को इनको
  7384. 5:13:48गिरफ्तार किया गया तो इसका मतलब यह है कि
  7385. 5:13:50यह जो मैसेज है वो इन सिपाहियों के पास भी
  7386. 5:13:53गया होगा। जनता के पास भी गया होगी। जनता
  7387. 5:13:55उन्हें अपना राजा मानती है। रानी
  7388. 5:13:57दुर्गावती का वंशज मानती है। तो जनता में
  7389. 5:14:00आक्रोश है। तो अंग्रेजों ने सोचा कि अगर
  7390. 5:14:02इनको ज्यादा समय तक हमने जेल में रखा तो
  7391. 5:14:05जनता भड़क सकती है और हमला करके इन्हें
  7392. 5:14:07छुड़ा सकती है। तो इसीलिए क्या किया?
  7393. 5:14:09अंग्रेजों ने एक सैन्य अदालत बुलाई और
  7394. 5:14:12सैन्य अदालत बुलाकर इनको जो है इन पर क्या
  7395. 5:14:16किया? देशद्रोह का आरोप लगाया कि यह दोनों
  7396. 5:14:18के दोनों देशद्रोही हैं और इनके द्वारा
  7397. 5:14:22अपराध किया गया है क्योंकि यह भारत के
  7398. 5:14:24लोगों को भड़का रहे हैं अंग्रेजों के
  7399. 5:14:25विरुद्ध और इन पर यह आरोप लगाकर याद
  7400. 5:14:28रखिएगा इन दोनों को 18 सितंबर 1857
  7401. 5:14:34को यानी अभी एक साल भी नहीं हुआ था
  7402. 5:14:36क्रांति की जब शुरुआत थी
  7403. 5:14:39कब बच्चों याद रखिएगा
  7404. 5:14:4418 सितंबर 1857 57 को इन दोनों पिता पुत्र
  7405. 5:14:47को जो है क्या कर दिया गया? जो है तोप से
  7406. 5:14:50उड़ा दिया गया। कुछ विद्वान यह मानते हैं
  7407. 5:14:53कुछ जगह पे यह लिखा है कि इन दोनों को
  7408. 5:14:55फांसी दे दी गई जबलपुर में और कुछ लोग
  7409. 5:14:57कहते हैं कि इनको इस क्षेत्र में दहशत
  7410. 5:15:00फैलाने के लिए जबलपुर में इन दोनों को
  7411. 5:15:02क्या है? तोप से उड़ा दिया गया। तो यह जो
  7412. 5:15:05क्लार्क है, इस समय जबलपुर का कमिश्नर था
  7413. 5:15:08जिसका नाम था आर्स्किन। और यह जो है उसका
  7414. 5:15:10सहयोगी था। तो क्लार्क ने इन पर हमला करके
  7415. 5:15:13इन सभी को गिरफ्तार कर लिया। राजा और उनके
  7416. 5:15:15पुत्र के साथ-साथ जो है 11 लोगों को
  7417. 5:15:17गिरफ्तार किया गया था। जब गिरफ्तार किया
  7418. 5:15:19गया तो महल से राजा शंकर शाह के महल से
  7419. 5:15:22कुछ ऐसी चीजें मिली। कुछ ऐसे पत्र मिले
  7420. 5:15:25जिनमें वो कविताएं लिखी थी जो लोगों को
  7421. 5:15:27भड़काने के लिए थी। तो अंग्रेजों ने उन
  7422. 5:15:29पत्रों को आधार बनाकर इन पर सैन्य अदालत
  7423. 5:15:32में केस चलाया और 18 सितंबर 1857 को इन
  7424. 5:15:35दोनों पिता पुत्र को तोप से बांधकर जो है
  7425. 5:15:37उड़ा दिया। इन दोनों की समाधि जबलपुर में
  7426. 5:15:39है। राजा शंकर शाह एवं रघुनाथ शाह का जो
  7427. 5:15:42संग्रहालय है वो भी जबलपुर में है। लेकिन
  7428. 5:15:44मैं कुछ बातें हैं जो मैं आपको पढ़कर
  7429. 5:15:46बताना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि आपको
  7430. 5:15:48आगे पता रहे। तो ये सब तो हम लोग यहां जान
  7431. 5:15:50चुके हैं। कौन थे इनके पिता? पुत्र कौन
  7432. 5:15:52थे? ये सारी बातें होंगी। अब देखिए कुछ
  7433. 5:15:54यहां लिखा भी है। देखिए
  7434. 5:15:56आखिरकार क्या हुआ? तो राजा शंकर शाह और
  7435. 5:16:00रघुनाथ शाह दोनों ही बहुत वीर साथी अच्छे
  7436. 5:16:02कवि थे और अपनी कविताओं के माध्यम से
  7437. 5:16:05लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार कर
  7438. 5:16:07रहे थे। अब मैं पढ़कर बता रहा हूं तो आपको
  7439. 5:16:09हर एक लाइन अच्छे से समझ में आएगी। इसी
  7440. 5:16:11समय जबलपुर अंग्रेजों में जबलपुर में
  7441. 5:16:14अंग्रेजों में 52वीं रेजीमेंट तैनात थी।
  7442. 5:16:16यानी जबलपुर में अंग्रेजों की कौन सी
  7443. 5:16:18रेजीमेंट तैनात थी? 52 बी रेजीमेंट। यह
  7444. 5:16:20याद रखिएगा। जिसके कई सैनिक अंग्रेजों के
  7445. 5:16:23विरुद्ध विद्रोह का मन बना चुके और इस समय
  7446. 5:16:25तक क्रांति देश के अधिकांश भागों में फैल
  7447. 5:16:27चुकी थी। मध्य भारत में राजा शंकर शाह
  7448. 5:16:30जिनकी उम्र लगभग 70 वर्ष थी। क्रांति का
  7449. 5:16:32नेता इन्हें चुना गया। यानी जबलपुर में आप
  7450. 5:16:34याद रख सकते हैं महाकौशल क्षेत्र में।
  7451. 5:16:36राजा शंकर शाह की अध्यक्षता में पुरवा में
  7452. 5:16:39आसपास के जमींदारों और राजाओं की सुरभा
  7453. 5:16:41बुलाई गई। जिसमें रानी अवंतीबाई भी शामिल
  7454. 5:16:44हुई थी। याद रखिएगा इसमें रानी अवंतीबाई
  7455. 5:16:46भी शामिल हुई थी। इस क्षेत्र में प्रचार
  7456. 5:16:48के लिए एक पत्र और दो काली चूड़ियों की एक
  7457. 5:16:50पुड़िया बनाकर क्या? एक पत्र और दो काली
  7458. 5:16:53चूड़ियों की एक पुड़िया बनाकर प्रसाद के
  7459. 5:16:56रूप में वितरित गई। यह एक तरीके से क्या
  7460. 5:16:58था? सिंबल था क्रांतिकारियों के बीच में।
  7461. 5:17:00इसके पत्र में लिखा गया कि अंग्रेजों से
  7462. 5:17:02संघर्ष के लिए तैयार रहो या चूड़ियां
  7463. 5:17:05पहनकर घर बैठो। यानी लोगों को इस तरीके से
  7464. 5:17:08प्रेरित किया गया। या तो अंग्रेजों से
  7465. 5:17:10संघर्ष करो या चूड़ियां पहनकर घर बैठो।
  7466. 5:17:12इसके याद रखिएगा जो राजा जमींदार और
  7467. 5:17:15मालगुजार पुड़िया ले लें तो इसका अर्थ है
  7468. 5:17:17क्रांति में अंग्रेजों के विरुद्ध अपना
  7469. 5:17:19समर्थन देना है और नहीं लेंगे तो वो
  7470. 5:17:21विद्रोहीओं का साथ नहीं देंगे। अब क्या
  7471. 5:17:24होता है? राजा शंकर शाह जबलपुर की अंग्रेज
  7472. 5:17:26छावनी में तैनात भारतीय सैनिकों की सहायता
  7473. 5:17:29से छावनी पर आक्रमण कर अंग्रेजों को भगाना
  7474. 5:17:32चाहते थे। किंतु राजा शंकर शाह के महल के
  7475. 5:17:34कुछ लोग महल की गोपनीय सूचनाएं किन को
  7476. 5:17:36पहुंचा देते? अंग्रेजों को पहुंचा देते।
  7477. 5:17:39हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम
  7478. 5:17:41था? सेम कहानी। अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर ने
  7479. 5:17:44अपने गुप्तचरों को साधु के विषय में गढ़
  7480. 5:17:46पुरवा भेजा। गढ़ पुरवा वही है जिसको मैं
  7481. 5:17:48ग्राम पुरवा बोल रहा हूं। ताकि वो राजा
  7482. 5:17:50शंकर शाह की क्या कर सके? तैयारियों की
  7483. 5:17:52जानकारी ले सकें। राजा धार्मिक प्रवृत्ति
  7484. 5:17:54के व्यक्ति थे। उन्होंने साधुओं का स्वागत
  7485. 5:17:56किया और अपनी योजना उन्हें बतला दी।
  7486. 5:18:00कितने अच्छे राजा थे। जबलपुर का डिप्टी
  7487. 5:18:02कमिश्नर सभी भेद जान चुका था। उसने अपने
  7488. 5:18:04गुप्तचरों को फैला दिया। 14 सितंबर वो डेट
  7489. 5:18:07जिस दिन राजा को गिरफ्तार किया गया। 14
  7490. 5:18:09सितंबर 1857 को रात्रि अंग्रेजों ने लगभग
  7491. 5:18:1220 घुड़सवार 40 पैदल सिपाहियों के साथ
  7492. 5:18:14राजा की हवेली पर धावा बोल दिया। राजा
  7493. 5:18:17शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह
  7494. 5:18:19को 13 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
  7495. 5:18:21पूरे घर की तलाशी ली जिसमें राजा द्वारा
  7496. 5:18:23सरदारों जमींदारों को लिखे गए पत्र मिले
  7497. 5:18:25जो राजा द्वारा लिखी गई कुछ कविताएं थी।
  7498. 5:18:28जिन कविताओं में लोगों को उत्साहित किया
  7499. 5:18:30गया था। जिसमें लिखा था मूंद आंख मूंद मुख
  7500. 5:18:33इंडन को चुगलों को चबाई खाए खूंद दौड़
  7501. 5:18:36दुष्टन को शत्रु संहारिका मार अंग्रेज रेज
  7502. 5:18:40कर देई मात चंडी बचऊ नहीं बैर बाल बच्चे
  7503. 5:18:43संघारिका शंकर की रक्षा कर दास प्रतिपाल
  7504. 5:18:46कर दीन की सुन आए मात कालिका इस तरीके से
  7505. 5:18:50कुछ लाइनें लिखी गई थी जिसमें लोगों को
  7506. 5:18:52क्रांति के लिए क्या किया गया था उत्साहित
  7507. 5:18:54किया गया था अब क्या होता है यह कविताएं
  7508. 5:18:58उनके हाथ लग जाती हैं और वह क्या करते
  7509. 5:19:00हैं? अंग्रेज इस आधार पर उनको क्या करते
  7510. 5:19:03हैं? पहले तो कैद करते हैं। जबलपुर हाई
  7511. 5:19:05कोर्ट और एल्गिन हॉस्पिटल के पास उनको रखा
  7512. 5:19:08गया और बाद में क्या किया गया? बाद में
  7513. 5:19:11जैसा कि आप जानते हैं 18 सितंबर 1857 को
  7514. 5:19:14जबलपुर में जो है फांसी दे दी गई। कुछ
  7515. 5:19:17कहते हैं कि उन्हें तोप से उड़ा दिया गया।
  7516. 5:19:20हम तोप वाली बात को हमने लिख लिया। ठीक
  7517. 5:19:22है? तो दोनों को देखने के लिए विशाल
  7518. 5:19:25जलसेना उमड़ रहा था राजा शंकर शाह और
  7519. 5:19:27रघुनाथ शाह। पर कोई डर का कोई प्रभाव नहीं
  7520. 5:19:30था। दोनों की हथकड़ियां खोल दी गई और
  7521. 5:19:33दोनों को तोप के मुंह से बांध दिया गया।
  7522. 5:19:35तोप से बांधते समय राजा और राजकुमार दोनों
  7523. 5:19:37तेजमय चेहरे के साथ गर्भ से चलकर तोपों के
  7524. 5:19:40सामने आए और दोनों ने सीना तानकर ऐसे खड़े
  7525. 5:19:42हो गए और जब तोप चली तो दोनों के जो शरीर
  7526. 5:19:45के टुकड़े हैं वो 50 मीटर तक दूर तक फैल
  7527. 5:19:47गए। तो इस प्रकार राजा शंकर शाह और रघुनाथ
  7528. 5:19:50शाह का जो है बलिदान हो जाता है। अब कहानी
  7529. 5:19:52है एक रानी फूल कुंवर की। मोस्ट
  7530. 5:19:54इंपोर्टेंट नाम है। याद रखिएगा कौन है?
  7531. 5:19:56राजा शंकर शाह की पत्नी है। जिन्होंने उन
  7532. 5:19:58सबों को उन सब के टुकड़ों को इकट्ठा करके
  7533. 5:20:01उनको क्या किया? उनका अंतिम संस्कार किया
  7534. 5:20:04और बदला लेने की कसम खाई। फिर रानी फूल
  7535. 5:20:06कुंवर ने इस क्षेत्र में अंग्रेजों के
  7536. 5:20:08विरुद्ध विद्रोह किया। लेकिन बाद में वह
  7537. 5:20:10अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए पराजित हो
  7538. 5:20:12गई। तो इसमें याद रखिएगा रानी फूल कुंवर
  7539. 5:20:14कौन थी? यह भी आपको समझ में आ जाएगा। राजा
  7540. 5:20:16शंकर शाह की पत्नी फूल कुंवर थी। याद
  7541. 5:20:18रखिएगा इंपॉर्टेंट है। ठीक है? तो बाद में
  7542. 5:20:21जो है याद रखिएगा क्या होता है कि राजा
  7543. 5:20:24शंकर शाह के मरने के बाद उन्होंने जो है
  7544. 5:20:25विद्रोह किया था और लास्ट में उनकी भी
  7545. 5:20:28मृत्यु हो जाती है। तो ये कहानी थी राजा
  7546. 5:20:31शंकर शाह और रघुनाथ शाह की। उम्मीद है
  7547. 5:20:33आपको इसमें से जो सारे क्वेश्चन हैं कौन
  7548. 5:20:35सी रेजीमेंट है? 52 बी रेजीमेंट है। कौन
  7549. 5:20:38सी जागीर उनको दी गई थी? पूर्वा जागीर
  7550. 5:20:40उनको दी गई थी। कब उनको गिरफ्तार किया
  7551. 5:20:42गया? 14 सितंबर 1857 को। कब उनको फांसी दी
  7552. 5:20:44गई? 20 सितंबर 1857 को। तो आई होप आपको
  7553. 5:20:47सारी जो इंफॉर्मेशन है राजा शंकर शाह और
  7554. 5:20:50रघुनाथ शाह के बारे में अच्छे से पता चल
  7555. 5:20:52गई होगी। यह वो स्थान है जहां पर उनका
  7556. 5:20:55क्या बना है? यह जबलपुर में उनका स्मारक
  7557. 5:20:58बना है। अगर कभी आपसे पूछा जाए राजा शंकर
  7558. 5:21:00शाह और रघुनाथ शाह की समाधि कहां है?
  7559. 5:21:02जबलपुर। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह का
  7560. 5:21:04संग्रहालय कहां है? जबलपुर। ठीक है?
  7561. 5:21:06उम्मीद है आप लोगों को आज के सेशन में
  7562. 5:21:09राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह गोंड की जो
  7563. 5:21:11कहानी है, वह आपको अच्छी लगी होगी। अगर
  7564. 5:21:14आपको यह कहानी अच्छी लगी तो कमेंट सेक्शन
  7565. 5:21:15में बताइएगा। नेक्स्ट टॉपिक में हम फिर
  7566. 5:21:18बात करेंगे मध्य प्रदेश के किसी वीर
  7567. 5:21:20योद्धा के बारे में। जय हिंद साथियों।
  7568. 5:21:23थैंक यू।
  7569. 5:21:27नमस्कार साथियों, मैं हरी सिंह राजपूत आप
  7570. 5:21:30सभी के लिए लेकर आया हूं फिर से मध्य
  7571. 5:21:32प्रदेश के वीरों के इतिहास की सीरीज में
  7572. 5:21:35एक नया वीर योद्धा जिसके बारे में अभी तक
  7573. 5:21:38आप लोगों ने कम सुना होगा। और आज हम बात
  7574. 5:21:42करने वाले हैं निमाड़ के एक प्रसिद्ध
  7575. 5:21:44आदिवासी वीर वीर योद्धा जिनका नाम है
  7576. 5:21:48क्या? वीर विजु नायक। देखिए यह एक ऐसे
  7577. 5:21:52योद्धा हैं जिनके नाम के आगे पहले से ही
  7578. 5:21:54वीर शब्द लगता है और यह वीर नाम इनको
  7579. 5:21:57किसने दिया है? तो आज की कहानी में हम लोग
  7580. 5:21:59जानेंगे। उम्मीद है दोस्तों आप सभी को यह
  7581. 5:22:03जो सीरीज है मध्य प्रदेश के वीरों का
  7582. 5:22:05इतिहास यह काफी पसंद आ रही होगी और आज इस
  7583. 5:22:08सीरीज में हमारे जो नायक हैं हमारे जो वीर
  7584. 5:22:11योद्धा हैं उनका नाम है बिरजू नायक। बिरजू
  7585. 5:22:14नायक मध्य प्रदेश के उन वीरों में से एक
  7586. 5:22:17हैं जिनका नाम उतना प्रसिद्ध नहीं है
  7587. 5:22:20जितना बाकी क्रांतिकारियों का रहा। और
  7588. 5:22:23हमारी इस सीरीज में हमारा उद्देश्य ही यही
  7589. 5:22:25है कि हम उन वीरों के नाम सभी के सामने
  7590. 5:22:29प्रस्तुत कर सकें या उन वीरों को वो
  7591. 5:22:31श्रद्धांजलि दे सकें जिनके वह हकदार थे।
  7592. 5:22:34तो आइए हम बात करते हैं वीर विजू नायक जी
  7593. 5:22:37के बारे में। तो सबसे पहले आप यह तस्वीर
  7594. 5:22:39देखिए जिसमें आप देख सकते हैं कि जो बिरजू
  7595. 5:22:41नायक जी हैं उनके हाथों में धनुष तीर है।
  7596. 5:22:44वैसे तो यह धनुष तीर हर आदिवासी योद्धा का
  7597. 5:22:48हथियार होता है खासकर भीलों में। लेकिन ये
  7598. 5:22:51जो थे हमारे विजु नायक जी एक प्रसिद्ध
  7599. 5:22:54धनुर्धर थे या हम कह सकते हैं कि धनुष कला
  7600. 5:22:57में निपुण थे। तो कौन हैं और कैसे इनका
  7601. 5:23:00इतिहास हम जान सकते हैं। ठीक है? आइए हम
  7602. 5:23:02बात करते हैं। तो सबसे पहले निवाड़ के
  7603. 5:23:05क्रांतिकारी योद्धा हैं और इनका एक टाइटल
  7604. 5:23:07है वीर। ठीक है? चलिए आइए बात करते हैं।
  7605. 5:23:09कुछ विशेष बातें आप लोगों को यहां पर
  7606. 5:23:11बताऊंगा। आपको उनको ध्यान देना है। देखिए
  7607. 5:23:14यह जो हमारे विजू नायक जी हैं इनके जन्म
  7608. 5:23:17को लेकर ज्यादा प्रमाणिक जानकारी नहीं है
  7609. 5:23:20कि कहां पर एग्जैक्ट हुआ और इनके
  7610. 5:23:22माता-पिता कौन हैं। लेकिन जितनी भी
  7611. 5:23:24जानकारी सीमित जो मेरे पास उपलब्ध है
  7612. 5:23:27जिसके माध्यम से आप उनके बारे में एक छोटी
  7613. 5:23:30सी जो है एक टिप्पणी जरूर कर सकते हैं और
  7614. 5:23:32यह जान सकते हैं कि आखिर उनका क्या योगदान
  7615. 5:23:34रहा। तो सबसे पहले बात करते हैं इनके एक
  7616. 5:23:37जीवनी के बारे में। क्या इनकी जीवनी रही
  7617. 5:23:39है? तो सबसे पहले देखिए इनकी जो जन्मभूमि
  7618. 5:23:42है वो है ग्राम सावर्दा मटली। यह जो है
  7619. 5:23:45इनका सब कुछ आपको याद रखना बड़वानी
  7620. 5:23:48डिस्ट्रिक्ट में है मध्य प्रदेश। ठीक है?
  7621. 5:23:50यह जो निर्माण क्षेत्र रहा है। यह निवाड़
  7622. 5:23:52क्षेत्र मध्य प्रदेश के उन अ महान वीर
  7623. 5:23:55योद्धाओं की कर्मभूमि रहा है। जिसमें
  7624. 5:23:58हमारे टांट्या भील थे। जिसमें हमारे भीमा
  7625. 5:24:01नायक जी थे। जिसमें हमारे खाद्याज नायक जी
  7626. 5:24:03थे। उसी के अंतर्गत आते हैं एक अगले वीर
  7627. 5:24:05जिनका नाम है विजू नायक जी। तो बिरजू नायक
  7628. 5:24:08जी का जो जन्म है बड़वानी जिले के सावरदा
  7629. 5:24:10मटली नामक एक गांव में हुआ था। इनकी जो
  7630. 5:24:13कर्मभूमि है वो बड़वानी जिले की एक सिंधी
  7631. 5:24:16घाटी है जिसे सिंधी घाटी के नाम से भी
  7632. 5:24:18जाना जाता है। जनरली सिंधी घाटी है। कभी
  7633. 5:24:21अगर एग्जाम में पूछा जाए कि कौन सा वीर था
  7634. 5:24:24जो सिंधी घाटी के वीर के नाम से प्रसिद्ध
  7635. 5:24:26है? तो याद रखिएगा इन्हीं का नाम है।
  7636. 5:24:28इन्हें सिंधी घाटी का वीर कहते हैं। तो
  7637. 5:24:31इनके जो टाइटल हैं वो दो-तीन इस तरीके से
  7638. 5:24:34रहेंगे। एक हो जाएगा हमारा सिंधी घाटी के
  7639. 5:24:36वीर। ठीक है? किस व्यक्ति को सिंधी घाटी
  7640. 5:24:39का वीर कहा जाता है? तो याद रखिएगा वो है
  7641. 5:24:41बिरजू नायक। किस आदिवासी योद्धा को वीर की
  7642. 5:24:45उपाधि दी जाती है? तो वो हैं हमारे बिरजू
  7643. 5:24:47नायक। तो बिरजू नायक का जो जन्म है वह
  7644. 5:24:49कहां होता है? सावरदा मटली जो कि बड़वानी
  7645. 5:24:52डिस्ट्रिक्ट में है। इनकी कर्मभूमि है यह
  7646. 5:24:54सिंधी घाटी। याद रखिएगा बड़वानी जिले में
  7647. 5:24:57प्रसिद्ध है यह सिंधी घाटी। तो यह निमाड़
  7648. 5:25:00का क्षेत्र है। यहां पर उनकी कर्मभूमि रही
  7649. 5:25:02है। अभी और हम डिटेल में बात करेंगे।
  7650. 5:25:04बड़वानी जिले की जो राजपुर तहसील है
  7651. 5:25:06बड़वानी जिले की राजपुर तहसील में आता है
  7652. 5:25:09हमारे विजु नायक का गांव जिसका नाम था
  7653. 5:25:11सावरदा मटली। इनकी समाधि है ग्राम उपला
  7654. 5:25:15में। तो जो मेन एग्जाम ओरिएंटेड फैक्ट हैं
  7655. 5:25:18वो आपको यहीं मिल जाएंगे। समाधि स्थल उपला
  7656. 5:25:20है और कर्मघर या इनका जो कर्म क्षेत्र है
  7657. 5:25:22वह बांडी हवेली। सबसे चर्चित है याद
  7658. 5:25:25रखिएगा बांडी हवेली। तो बांडी हवेली की हम
  7659. 5:25:28अभी बात करेंगे और इनका शहीद दिवस मनाया
  7660. 5:25:30जाता है 2 मई को। याद रखिएगा 4 दिसंबर
  7661. 5:25:33किसका है? कमेंट सेक्शन में आप लोगों को
  7662. 5:25:35बताना है। अगर आप लोग ये सीरीज देख रहे
  7663. 5:25:37हैं तो मैं आज आपसे पूछना चाह रहा हूं कि
  7664. 5:25:40जिन योद्धाओं के बारे बारे में मैंने अभी
  7665. 5:25:43तक आप लोगों को बताया है, उसमें 4 दिसंबर
  7666. 5:25:45किसका बलिदान दिवस या शहीदी दिवस है? 2 मई
  7667. 5:25:48हो जाएगा हमारे बृजु नायक जी का। ठीक है?
  7668. 5:25:50इनको हम क्यों याद कर रहे हैं? क्योंकि
  7669. 5:25:521857 की क्रांति के दौर में अंग्रेजों के
  7670. 5:25:55खिलाफ आदिवासियों के अंबापानी विद्रोह और
  7671. 5:25:57सेंधवा विद्रोह यह वह इलाका है जहां पर
  7672. 5:26:00भीमा नायक और जो हमारे टंट्या भील थे
  7673. 5:26:02उन्होंने बड़े पैमाने पर विद्रोह किया था।
  7674. 5:26:04तो इस पूरे क्षेत्र में यह भी एक
  7675. 5:26:06महत्वपूर्ण योद्धा थे जिन्होंने कंधे से
  7676. 5:26:08कंधा मिलाकर मामा टंटिया भील, भीमा नायक
  7677. 5:26:11और खाद्य नायक की सहायता की। आइए अब मैं
  7678. 5:26:14इनकी थोड़ी सी स्टोरी आप लोगों को बताता
  7679. 5:26:16हूं। देखिए सबसे पहले हमको जो एरिया समझना
  7680. 5:26:20है पहले मैं चाहता हूं कि थोड़ा सा आपके
  7681. 5:26:22दिमाग में एक इमेज रहे तो मैं इमेज आपको
  7682. 5:26:25बताता हूं।
  7683. 5:26:27देखिए इमेज में हमको याद रखना है बड़वानी
  7684. 5:26:30जिला। ठीक है? बड़वानी जिला जो है याद
  7685. 5:26:34रखना है निवाड़ का पार्ट है। तो आप याद रख
  7686. 5:26:36सकते हैं निवाड़ क्षेत्र। और यह जो निवाड़
  7687. 5:26:38क्षेत्र है यह अगर आपको याद रखें तो
  7688. 5:26:41सतपुड़ा पहाड़ी से घिरा है पूरा का पूरा।
  7689. 5:26:43तो सतपुड़ा क्षेत्र के वीर के तौर पर भी
  7690. 5:26:46हम इनको याद रख सकते हैं। इस बड़वानी
  7691. 5:26:48डिस्ट्रिक्ट में एक तहसील है और उस तहसील
  7692. 5:26:51का नाम क्या है? राजपुर तहसील और इस
  7693. 5:26:54राजपुर तहसील में हमको दो इंपॉर्टेंट
  7694. 5:26:57प्लेस मिलेंगे। एक इनका वर्थ प्लेस मिलेगा
  7695. 5:26:59और एक इनका मिलेगा कर्मभूमि। ठीक है? इस
  7696. 5:27:02तहसील में एक घाटी है जिसका नाम सिंधी
  7697. 5:27:05घाटी क्षेत्र है। तो यह जो सिंधी घाटी
  7698. 5:27:07क्षेत्र है इस सिंधु घाटी क्षेत्र में कई
  7699. 5:27:10गांव आते हैं और इसी क्षेत्र में यह याद
  7700. 5:27:13रखेंगे राजपुर सिंधी घाटी क्षेत्र ये इनका
  7701. 5:27:15क्षेत्र था जहां पर इन्होंने विद्रोह किया
  7702. 5:27:17था। इसमें हमको दो-तीन गांव के बारे में
  7703. 5:27:20पढ़ना है। एक गांव है जिसका नाम है
  7704. 5:27:23उपलाग्राम।
  7705. 5:27:24उपलाग्राम। उपलाग्राम में इनकी समाधि
  7706. 5:27:27मिलेगी। तो यह एक चर्चित है बड़वानी का और
  7707. 5:27:29दूसरा हम बात करेंगे यहां पर अभी बांडी
  7708. 5:27:31हवेली की तो बांडी हवेली जो है वह इनकी
  7709. 5:27:34कर्मभूमि है। क्या है? कर्मभूमि। तो
  7710. 5:27:36कर्मभूमि जो है याद रखिए दोनों के दोनों
  7711. 5:27:38हमारे बड़वानी डिस्ट्रिक्ट में हैं। तो
  7712. 5:27:40थोड़ी सी स्टोरी अब आप इनकी जान लीजिए
  7713. 5:27:42क्या थी? आइए हम चर्चा को आगे बढ़ाते हैं।
  7714. 5:27:45देखिए 1857 की क्रांति के वीर क्रांतिकारी
  7715. 5:27:49एक महान योद्धा सतपुड़ा के सुदूर
  7716. 5:27:51पहाड़ियों में रहने वाले निमाड़ के
  7717. 5:27:53आदिवासी योद्धा बिरजू नायक। ठीक है? याद
  7718. 5:27:56रखिए। जिनकी कहानी से बहुत ही कम लोग
  7719. 5:27:58वाकिफ हैं। अंग्रेजी शासनकाल में कई
  7720. 5:28:01क्रांतिकारी योद्धा कई क्रांतिकारी
  7721. 5:28:04योद्धाओं ने अपना बलिदान दिया। उनमें से
  7722. 5:28:05कई वीर ऐसे भी हैं जिनका जिक्र इतिहास में
  7723. 5:28:08केवल एक लाइन से ज्यादा नहीं किया गया।
  7724. 5:28:11उन्हीं वीरों में से एक हैं हमारे महान
  7725. 5:28:14वीरजू नायक जिनका बलिदान दिवस या सही दिवस
  7726. 5:28:17हम मनाते हैं 2 मई को। ठीक है? अब इनकी जो
  7727. 5:28:20कर्मभूमि है मैं उसके बारे में बात करता
  7728. 5:28:22हूं। इनकी जो कर्मभूमि रही है वह रही है
  7729. 5:28:25प्रसिद्ध बांडी हवेली। यह आपको याद रखना
  7730. 5:28:28है। यह बांडी हवेली कहां है? मध्य प्रदेश
  7731. 5:28:30के बड़वानी जिले में है। बड़वानी याद
  7732. 5:28:33रखिएगा मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में
  7733. 5:28:35है। यह बांडी हवेली का आप तस्वीर देख सकते
  7734. 5:28:37हैं। यह हवेली जो थी इस हवेली को इन्होंने
  7735. 5:28:40अपना सेंटर बना रखा था और यहीं से ये 1857
  7736. 5:28:44की क्रांति के दौरान अंग्रेजों के विरुद्ध
  7737. 5:28:46जो है अपनी योजनाएं बनाते थे और संघर्ष
  7738. 5:28:48करते थे। अब आगे देखिए इसमें क्या है? तो
  7739. 5:28:51मध्य प्रदेश की बड़वानी जिले की राजपुर
  7740. 5:28:52तहसील के नगर पलसूद के निकट ग्राम मटली
  7741. 5:28:56एवं सावरदा के बीच यानी जो मटली और सावरदा
  7742. 5:28:58गांव है उनके बीच में स्थित है यह हवेली
  7743. 5:29:01और इस हवेली का नाम क्या है? बांडी हवेली
  7744. 5:29:03है जिसका संबंध है बिरजू नायक जी से। यह
  7745. 5:29:06विजु नानायक का कर्मघर है यानी कर्मभूमि
  7746. 5:29:08है जो आज भी मौजूद है। हालांकि अब वह खंडर
  7747. 5:29:12में तब्दील हो चुका है। इसको संरक्षित
  7748. 5:29:14करने की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों से
  7749. 5:29:16जानकारी के अनुसार ऐसी मान्यता है कि वीर
  7750. 5:29:18बिरजू नायक बांडा हवेली में अपने साथियों
  7751. 5:29:21के साथ अंग्रेजों के विरुद्ध योजना बनाकर
  7752. 5:29:23उन्हें अंजाम देते थे। तो एक आपके लिए
  7753. 5:29:25इंपॉर्टेंट ये हो जाएगा। दूसरा इंपॉर्टेंट
  7754. 5:29:28आता है कि आखिर इनका रोल क्या है? आखिर हम
  7755. 5:29:30क्यों इनको पढ़ रहे हैं? तो 1857 की
  7756. 5:29:33क्रांति में इनका सेम वही योगदान है जो
  7757. 5:29:35मामा टंट्या भील का था जो भीमा नायक का था
  7758. 5:29:38जो खाज्जा नायक का था सेम इनकी कहानी है
  7759. 5:29:41इन सभी के दुश्मन हैं अंग्रेज जमींदार
  7760. 5:29:44साहूकार तो इस क्षेत्र में भीमा नायक का
  7761. 5:29:48और खाज्या नायक और टांड्या भील का
  7762. 5:29:50इन्होंने साथ दिया। आइए मैं आपको तीन
  7763. 5:29:52इंपॉर्टेंट बातें बताता हूं। पहले तो आपको
  7764. 5:29:54याद रखना है कि ये खाद्या नायक टांड्या
  7765. 5:29:57मामा के साथ मिलकर कई जगहों पर लड़े थे और
  7766. 5:30:00इनका जो सबसे बड़ा योगदान है कि जब तात्या
  7767. 5:30:03टोपे आप सबको याद है ना कि जब तात्या टोपे
  7768. 5:30:06जी आए थे और उनको नर्मदा नदी पार करनी थी
  7769. 5:30:08तो उनके नर्मदा नदी पार करने में जिन
  7770. 5:30:12लोगों ने सहायता की थी उन लोगों में एक तो
  7771. 5:30:16हमारे थे कौन टंट्या वीर एक हमारे थे
  7772. 5:30:19खाज्जा नायक और एक हमारे थे भीमा नायक
  7773. 5:30:21उन्हीं वीरों में एक नाम हैं बिरजू नायक
  7774. 5:30:24बताते हैं कि सतपुड़ा
  7775. 5:30:26जो बड़वानी का जो पश्चिमी निवाड़ का
  7776. 5:30:28क्षेत्र है वहां पर इन्होंने गुप्त
  7777. 5:30:30रास्तों से तात्या टोपे की मदद की जिससे
  7778. 5:30:33कि वह नदी नर्मदा नदी पार कर सकें और इसी
  7779. 5:30:36वजह से याद रखिएगा तात्या टोपे के पश्चिम
  7780. 5:30:38निवाड़ के आगमन पर राजपुर क्षेत्र के
  7781. 5:30:40गुप्त रास्तों से नर नर्मदा नदी पार
  7782. 5:30:43करवाकर मंजिल तक पहुंचाने में भीमा नायक
  7783. 5:30:45खाज्जा नायक एवं मृजु नायक तथा साथियों का
  7784. 5:30:48महत्वपूर्ण योगदान था। इसी योगदान के बदले
  7785. 5:30:50उन्हें वीर की उपाधि से सम्मानित किया गया
  7786. 5:30:53है। यानी तात्या टोपे को दुर्गम रास्तों
  7787. 5:30:57से नर्मदा नदी पार करवाने के कारण इन्हें
  7788. 5:30:59वीर कहा जाता है। जिससे पता चलता है कि
  7789. 5:31:02सिंधु घाटी क्षेत्र जो है सिंधु घाटी
  7790. 5:31:04क्षेत्र राजपुर तहसील बड़वानी गांव के वीर
  7791. 5:31:07के नाम से इस क्षेत्र में यह चर्चित थे।
  7792. 5:31:09आज भी उनके नाम के आगे लोग वीर लिखना नहीं
  7793. 5:31:11भूलते। निवाली सिंधु घाटी याद रखिएगा
  7794. 5:31:14निवाली सिंधु घाटी राजपूर उनका गढ़ था
  7795. 5:31:16जहां पर उन्होंने विद्रोह किया था। ग्राम
  7796. 5:31:18मटली में स्थित झरने। अब इसके आगे हम बात
  7797. 5:31:20करने वाले हैं उनके शहादत की। आखिर ऐसा
  7798. 5:31:23क्या हुआ जिसकी वजह से उन्हें उनकी शहादत
  7799. 5:31:26हुई। ठीक है? तो कुल मिलाकर खाज नामक नायक
  7800. 5:31:28का साथ दिया है उन्होंने। टांट्या भील का
  7801. 5:31:30साथ दिया है। भीमा नायक का साथ दिया है और
  7802. 5:31:32अंग्रेज जमींदारों साहूकारों को लूट कर
  7803. 5:31:35गरीब आदिवासियों की सहायता की है। अब होता
  7804. 5:31:38क्या है जरा हम बात करते हैं। एक और खास
  7805. 5:31:41बात है इनकी कि जो बिरजू नायक हैं वह
  7806. 5:31:43युद्ध कला में निपुण थे। बिरजू नायक
  7807. 5:31:45प्रतिदिन की तरह एक बार झरने पर नहाने
  7808. 5:31:48पहुंच गए। ठीक है? मैं उसका किस्सा यहीं
  7809. 5:31:50पर बता देता हूं जो इनकी समाधि है। देखिए
  7810. 5:31:53एक गांव है जिसका नाम है मटली गांव।
  7811. 5:31:57मटली गांव में क्या था? एक यहां पे जो
  7812. 5:32:00झरने होते हैं वाटरफॉल इन झरनों को कहा
  7813. 5:32:03जाता है क्या? यहां पे कुंडी कहा जाता है
  7814. 5:32:06कुंडी। तो एक बार ये मटली गांव के झरने
  7815. 5:32:09में के लिए नहाने गए। बताते हैं कि इनके
  7816. 5:32:11गांव के पास में था। तो अक्सर ये यहीं पर
  7817. 5:32:14इसी कुंडी यानी झरने में नहाते थे। जब यह
  7818. 5:32:16नहाने के लिए गए तो सामान्यता जब अंग्रेज
  7819. 5:32:19इनके गांव में इन्हें पकड़ने के लिए आते
  7820. 5:32:21थे या क्षेत्र में जब लोगों को परेशान
  7821. 5:32:24करते थे तो यह उन्हें मार कर भगा देते थे।
  7822. 5:32:27लेकिन अब अंग्रेजों ने सोचा कि डायरेक्ट
  7823. 5:32:29हम इनको नहीं पकड़ पा रहे हैं। तो इनके एक
  7824. 5:32:32करीबी को अपना एक तरीके से जासूस बनाकर
  7825. 5:32:36पता करवाया कि यह कहां है? तो जब ये मटली
  7826. 5:32:38गांव के इस झरने में नहाने के लिए गए तो
  7827. 5:32:40ये जब नहा रहे थे झरने के नीचे तो इनके
  7828. 5:32:43किसी रिश्तेदार या परिचित जो इनका खास था
  7829. 5:32:45उसने इनकी गर्दन पीछे से कट कर दी। तो जब
  7830. 5:32:48इनकी गर्दन को पीछे से काट दिया तो बताते
  7831. 5:32:50हैं कि जो आदिवासी समुदाय है वो इनके बारे
  7832. 5:32:53में जो कहानियां बताता है कि ऐसे थे वीर
  7833. 5:32:56बिरजू नायक बताते हैं कि जब इनका सिर काट
  7834. 5:32:59दिया गया। तो यहां पर इनका जो है सिर क्या
  7835. 5:33:01है? काट दिया गया था। और जब इनका सिर काट
  7836. 5:33:03दिया गया तो इनका जो धड़ है वह इस झरने से
  7837. 5:33:07झरने से कुछ दूरी पर जाकर कुछ किलोमीटर की
  7838. 5:33:10दूरी पर या कुछ दूरी पर जाकर एक गांव था
  7839. 5:33:13जिसका नाम था उपला गांव। उपला गांव तक
  7840. 5:33:16उनका जो धड़ है वो गया था और यहीं पर इसी
  7841. 5:33:20गांव में उनकी समाधि बनी हुई है। तो ऐसे
  7842. 5:33:23वीर थे हमारे विजू नायक जिनका सिर कटने के
  7843. 5:33:26बाद धड़ भी लड़ा और धड़ आगे एक क्षेत्र तक
  7844. 5:33:29पहुंचा। एक गांव तक पहुंचा जिसका नाम था
  7845. 5:33:31उपला गांव। देखिए ये लिखा हुआ है। वहीं
  7846. 5:33:33पलसूद के नजदीक ग्राम उपला में इनका समाधि
  7847. 5:33:36स्थल है। जहां वर्तमान में भी इस क्षेत्र
  7848. 5:33:38के समाज पहुंचकर वीर योद्धा को
  7849. 5:33:40श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। वहीं समस्त
  7850. 5:33:43मूल निवासी संगठनों द्वारा प्रतिवर्ष 2 मई
  7851. 5:33:46को वीर बिरजू नायक का शहीद दिवस भी मनाया
  7852. 5:33:48जाता है। तो ये कहानी हमने बात की यहां पर
  7853. 5:33:51बिरजू नायक की। अगर आपको इस कहानी में से
  7854. 5:33:54क्या-क्या क्वेश्चंस आप लोगों को निकालने
  7855. 5:33:56हैं। मान के चलिए आपको लगे कि भाई क्या
  7856. 5:33:58काम का है तो एक तो याद रखिएगा इनका जन्म
  7857. 5:34:01क्षेत्र एक इनकी कर्मभूमि याद रखिएगा। ठीक
  7858. 5:34:04है? दूसरा इंपॉर्टेंट है इनका समाधि।
  7859. 5:34:10उसके बाद आ जाइएगा योगदान। तो योगदान है
  7860. 5:34:12इनका 1857 की क्रांति में। और फिर इनका जो
  7861. 5:34:16है किस तरीके से इनकी शहादत है, किस तारीख
  7862. 5:34:18को है? तो ये अगर आप पांच छह पॉइंट्स को
  7863. 5:34:21अगर ध्यान में रखेंगे तो आप आसानी से जो
  7864. 5:34:24है विजू नायक के बारे में टिप्पणी कर सकते
  7865. 5:34:26हैं। विजू नायक जी के बारे में बता सकते
  7866. 5:34:28हैं। तो आई होप जो जानकारी मेरे द्वारा आप
  7867. 5:34:31लोगों को दी गई है वह जानकारी आप लोगों को
  7868. 5:34:34अच्छी लगी होगी और आप याद रखेंगे कि विजू
  7869. 5:34:37नायक सतपुड़ा क्षेत्र के सिंधी घाटी के या
  7870. 5:34:40फिर निमाड़ के आदिवासी वीर योद्धा थे।
  7871. 5:34:43जिनकी कर्मभूमि प्रसिद्ध बांडी हवेली है
  7872. 5:34:46और इनकी समाधि स्थल जो है ग्राम उपला में
  7873. 5:34:49है जो कि वर्तमान बड़वानी जिले में आता
  7874. 5:34:51है। याद रखिएगा पश्चिमी निवाड़ क्षेत्र
  7875. 5:34:54में तात्या टोपे के नर्मदा पार में
  7876. 5:34:56इन्होंने सहायता की थी। भीमा नायक, खज्जा
  7877. 5:34:58नायक और टांट्या भील के साथ कई विद्रोहों
  7878. 5:35:01में इन्होंने भाग लिया। अंबापानी का
  7879. 5:35:03विद्रोह हो, सिंधवाघाट का विद्रोह हो,
  7880. 5:35:05उसमें इन्होंने 1857 की क्रांति के दौरान
  7881. 5:35:07योगदान दिया था। और जमींदारों और
  7882. 5:35:10साहूकारों को लूटकर और अंग्रेजों को लूटकर
  7883. 5:35:13गरीब आदिवासी जनता की सहायता की थी। तो आज
  7884. 5:35:16का जो हमारे आज का जो हमारा सेशन था इस
  7885. 5:35:18सेशन में हम लोगों ने बात की निमाड़
  7886. 5:35:21सतपुड़ा घाटी के सिंधी घाटी के वीर के नाम
  7887. 5:35:23से प्रसिद्ध आदिवासी वीर के नाम से
  7888. 5:35:26प्रसिद्ध महान आदिवासी योद्धा बिरजू नायक
  7889. 5:35:30जी के बारे में। आई होप आप लोगों को आज का
  7890. 5:35:32सेशन अच्छा लगा होगा। आप लोग कमेंट करके
  7891. 5:35:34बताइए कि 4 दिसंबर को किस आदिवासी योद्धा
  7892. 5:35:37का बलिदान दिवस मनाया जाता है। नेक्स्ट
  7893. 5:35:39सेशन में हम बात करेंगे हमारे नेक्स्ट वीर
  7894. 5:35:41योद्धा के बारे में। तब तक के लिए जय
  7895. 5:35:44हिंद। थैंक यू।
  7896. 5:35:59हेलो एवरीवन आप सभी का एमपीपीएससी स्टडी
  7897. 5:36:02आईक्यू पर बहुत-बहुत स्वागत है। उम्मीद है
  7898. 5:36:04आप सभी लोग अच्छे होंगे और मन लगाकर पढ़
  7899. 5:36:06रहे होंगे। दोस्तों आज के हम टॉपिक में
  7900. 5:36:09बात करने वाले हैं एक महान वीरांगना जिनका
  7901. 5:36:12नाम है झलकारीबाई। देखिए झलकारीबाई का
  7902. 5:36:15जन्म यूं तो झांसी में हुआ था लेकिन उनका
  7903. 5:36:18मध्य प्रदेश के इतिहास से एक गहरा नाता है
  7904. 5:36:20क्योंकि वह रानी लक्ष्मीबाई की सहायिका थी
  7905. 5:36:22और रानी लक्ष्मीबाई और झलकारी बाई दोनों
  7906. 5:36:25का योगदान जो है वो 1857 की क्रांति में
  7907. 5:36:28बड़ा ही महत्वपूर्ण है। इसलिए हम बात
  7908. 5:36:30करेंगे और आज हम समझेंगे झलकारीबाई को।
  7909. 5:36:33देखिए यहां पर मैंने लिखा हुआ है। आप समझ
  7910. 5:36:35भी सकते हैं। यहां पे लिखा है क्या लिखा
  7911. 5:36:38है बच्चों? तो यहां पे मेंशन है वीरांगना
  7912. 5:36:41झलकारी बाई और रानी लक्ष्मीबाई की छाया।
  7913. 5:36:43अगर आप देखें तो इस शब्द का प्रयोग किया
  7914. 5:36:45है। यानी जो हमारी झलकारी बाई थी वह कौन
  7915. 5:36:48थी? वो वीरांगना लक्ष्मीबाई या रानी
  7916. 5:36:52लक्ष्मीबाई की छाया थी। उनकी हम शकल मानी
  7917. 5:36:54जाती थी। तो आइए जानते हैं कौन थी
  7918. 5:36:56झलकारीबाई जिन्होंने 1857 की क्रांति में
  7919. 5:36:59रानी लक्ष्मीबाई की तरह वेश धारण कर
  7920. 5:37:01अंग्रेजों को कई स्थानों पर चकमा दिया और
  7921. 5:37:03अंग्रेजों से लोहा लिया। उन्होंने अपने
  7922. 5:37:05पति पून सिंह कोहली के साथ मिलकर
  7923. 5:37:08अंग्रेजों के दांत खट्टे किए। तो आइए
  7924. 5:37:10समझते हैं झलकारीबाई के बारे में। झलकारी
  7925. 5:37:13बाई का इतिहास। सबसे पहले जब हम झलकारी
  7926. 5:37:17बाई की बात करते हैं तो थोड़ा सा उनके
  7927. 5:37:19जीवन परिचय की बात करते हैं। देखिए झलकारी
  7928. 5:37:21बाई का जो जन्म है वो 22 नवंबर 1830 को
  7929. 5:37:24झांसी के पास एक गांव था भोजला गांव वहां
  7930. 5:37:27से ये बिलॉन्ग करती थी। 1830 में इनका
  7931. 5:37:30जन्म होता है। 1857
  7932. 5:37:32तक इनका जो है रोल रहता है 1857 की
  7933. 5:37:35क्रांति में। ठीक है? चलिए आगे हम बात
  7934. 5:37:38करते हैं।
  7935. 5:37:40ये 58 है बच्चों। यह थोड़ा सा मिसप्रिंट
  7936. 5:37:44हो गया है। 4 अप्रैल 1858 इस बात को याद
  7937. 5:37:46रखिएगा। अब आगे की कहानी क्या है? यह
  7938. 5:37:49समझिए। झलकारी बाई के जो पिता थे उनका नाम
  7939. 5:37:51था क्या? उनके पिता का नाम था सदोवर सिंह
  7940. 5:37:54और उनकी जो माता है उनका नाम था जमुना
  7941. 5:37:56देवी। तो इसमें हमको तीन चीजें काम की मिल
  7942. 5:37:58गई। उनका बर्थ प्लेस कौन सा गांव है?
  7943. 5:38:00भोजला गांव है जो याद रखिएगा झांसी के पास
  7944. 5:38:03है। दूसरा उनके पिता का नाम सदोवर सिंह और
  7945. 5:38:05माता का नाम जमुना देवी था। अब इसमें जो
  7946. 5:38:08क्वेश्चन अगर एग्जाम में बन सकता है वो यह
  7947. 5:38:10बन सकता है कि भाई इनका विवाह किससे हुआ
  7948. 5:38:12था? तो झलकारी बाई का जो विवाह है रानी
  7949. 5:38:14लक्ष्मीबाई की सेना के एक सैनिक जिनका नाम
  7950. 5:38:17था पून सिंह कोहली से हुआ था। पून सिंह
  7951. 5:38:19कोहली इनके पति थे और पूरन भी बहुत ही
  7952. 5:38:22ज्यादा बहादुर था। वो राजा गंगाधर राव और
  7953. 5:38:25रानी लक्ष्मीबाई सेना रानी लक्ष्मीबाई की
  7954. 5:38:27सेना का एक महत्वपूर्ण सिपाही था। ठीक है?
  7955. 5:38:30वे लक्ष्मीबाई की हमल थी। और याद रखिएगा
  7956. 5:38:33आगे चलकर वो रानी लक्ष्मीबाई की एक महिला
  7957. 5:38:35रेजीमेंट थी जिस रेजीमेंट का नाम था महिला
  7958. 5:38:38शाखा जिसका नाम था दुर्गादल। तो दुर्गादल
  7959. 5:38:41की वो सेनापति थी। तो अगर आप इस स्लाइड
  7960. 5:38:43में देखेंगे तो ये चार चीजें आपके काम की
  7961. 5:38:45हैं। उनका बर्थ प्लेस कौन सा है? भोजला
  7962. 5:38:48गांव झांसी। उनके पिता का नाम सदोवर सिंह।
  7963. 5:38:51माता का नाम जमुना और याद रखिएगा उनके पति
  7964. 5:38:53का नाम क्या है? पून सिंह कोहली। और वह
  7965. 5:38:56महिला दुर्गा शाखा जो दल है उसकी सेनापति
  7966. 5:38:58थी। यानी रानी लक्ष्मी के द्वारा महिलाओं
  7967. 5:39:01का एक सैन्य संगठन बनाया गया था जिसका नाम
  7968. 5:39:03था दुर्गादल। उसकी वो सेनापति थी। लेकिन
  7969. 5:39:06यह रानी लक्ष्मी के पास पहुंचती कैसे हैं
  7970. 5:39:08और किस प्रकार जो है इनका योगदान रहता है
  7971. 5:39:11इसको हम एक कहानी के माध्यम से समझते हैं।
  7972. 5:39:14देखिए सबसे पहले झलकारी बाई जब बहुत छोटी
  7973. 5:39:17थी जो उनकी तो उनकी जो मां थी उनकी मृत्यु
  7974. 5:39:19हो गई थी। जब उनकी मां की मृत्यु हो गई तो
  7975. 5:39:22उनके जो पिता हैं उन्होंने ही उनको पाला
  7976. 5:39:24पोशा और उनको प्रारंभ से ही अच्छी शिक्षा
  7977. 5:39:26दी। वो बचपन से ही दृढ़ साहसी थी और लड़ने
  7978. 5:39:30में माहिर थी। ठीक है? उनके पिता ने उनको
  7979. 5:39:33एक लड़के की तरह पाला था। उन्हें
  7980. 5:39:35घुड़सवारी और हथियारों का प्रयोग करने में
  7981. 5:39:37प्रशिक्षित किया। यानी उन्हें हथियार
  7982. 5:39:39चलाने की शिक्षा, घुड़सवारी करने की
  7983. 5:39:41शिक्षा जो इन्हें उनके पिता से मिली और
  7984. 5:39:44क्योंकि वो उनकी माता का निधन हो गया था
  7985. 5:39:46तो उनके पिता ने उन्हें एक लड़के की तरह
  7986. 5:39:48पाला था। ठीक है? उन दिनों सामाजिक
  7987. 5:39:51परिस्थितियों के कारण उन्हें कई औपचारिक
  7988. 5:39:54कोई औपचारिक शिक्षा तो प्राप्त नहीं हुई।
  7989. 5:39:56मतलब ऑफिशियली हम नहीं कह सकते कि वह कहीं
  7990. 5:39:58बहुत ज्यादा एजुकेटेड थी। लेकिन उन्होंने
  7991. 5:40:01खुद को एक अच्छे योद्धा के रूप में विकसित
  7992. 5:40:03किया था। झलकारी बाई बचपन से ही बहुत
  7993. 5:40:06ज्यादा साहसी थी और दृढ़ प्रतिज्ञ मतलब एक
  7994. 5:40:09दृढ़ निश्चय लेने वाली महिला थी। बालिका
  7995. 5:40:11थी। याद रखिएगा झलकारी बाई घर के काम के
  7996. 5:40:14अलावा पशुओं का रखरखाव और जंगल से लकड़ी
  7997. 5:40:17इकट्ठा करने का काम भी करती थी। अब इसके
  7998. 5:40:20बाद देखिए थोड़ा सा कुछ और बातें के बारे
  7999. 5:40:22में हम लोग जानते हैं झलकारी बाई के बारे
  8000. 5:40:23में। एक बार जंगल में उनकी जो मुठभेड़ है
  8001. 5:40:26एक तेंदुए से हो गई और झलकारी बाई ने अपनी
  8002. 5:40:29कुल्हाड़ी से उस तेंदुए को मार डाला। तो
  8003. 5:40:31यह किस्सा जो है गांव में और लोगों के पास
  8004. 5:40:33भी गया होगा कि झलकारी बाई एक बहुत ही जो
  8005. 5:40:36है साहसी लड़की है जिसने कुल्हाड़ी से
  8006. 5:40:38तेंदुए के काट डाला। अब क्या होता है? ऐसे
  8007. 5:40:42ही एक किस्सा और है उनके जीवन का वो यह है
  8008. 5:40:44कि एक बार गांव में डाकुओं ने डकैती डाली
  8009. 5:40:47और एक व्यापारी के घर को लूटने के लिए आए।
  8010. 5:40:49तो जब डकैतों के एक गिरोह ने गांव के एक
  8011. 5:40:52व्यवसाई पर हमला किया तब झलकारी बाई ने
  8012. 5:40:54अपनी बहादुरी से उन्हें पीछे हटने पर क्या
  8013. 5:40:56कर दिया था? मजबूर कर दिया था। तो बचपन से
  8014. 5:40:59ही उनके ये बहादुरी के किस्से जो हैं
  8015. 5:41:01स्टार्ट होते हैं झलकारीबाई के। आगे क्या
  8016. 5:41:03होता है? उनकी इस बहादुरी से खुश होकर
  8017. 5:41:05गांव वालों ने उसका जो विवाह है यानी
  8018. 5:41:07झलकारी बाई का जो विवाह है लक्ष्मीबाई की
  8019. 5:41:09सेना के एक सैनिक पूनर सिंह कोहली से कर
  8020. 5:41:11दिया। याद रखिएगा ये कोहली समाज से
  8021. 5:41:13बिलॉन्ग करती थी। बहुत इंपॉर्टेंट है याद
  8022. 5:41:16रखिएगा। ठीक है? और पूरन भी बहुत बहादुर
  8023. 5:41:18था और पूरी सेना उसकी बहादुरी का लोहा
  8024. 5:41:21मानती थी। देखिएगा वो खुद साहसी हैं, दृढ़
  8025. 5:41:24निश्चयी हैं, बहादुर हैं और उनकी शादी भी
  8026. 5:41:27किससे हुई है? एक बहादुर सैनिक जिसका नाम
  8027. 5:41:29है पून सिंह कोहली जो राजा गंगाधर राव और
  8028. 5:41:32रानी लक्ष्मीबाई का क्या है? सिपाही है।
  8029. 5:41:34अब क्या होता है यहां से? जब वो अब आप
  8030. 5:41:37समझिए जब वो एक साधारण सिपाही की पत्नी थी
  8031. 5:41:40तो रानी से उनका अभी तक कोई संबंध स्थापित
  8032. 5:41:42नहीं हुआ है। यानी रानी लक्ष्मीबाई से अभी
  8033. 5:41:44उनकी मुलाकात नहीं हुई है। अब रानी
  8034. 5:41:46लक्ष्मीबाई से उनकी मुलाकात कैसे होती है
  8035. 5:41:47ये मैं आपको बताता हूं। एक बार गौरी पूजा
  8036. 5:41:50गौरी पूजा के अवसर पर झलकारी गांव की अन्य
  8037. 5:41:53महिलाओं के साथ महारानी को सम्मान देने
  8038. 5:41:57झांसी के किले में गई। वहीं रानी
  8039. 5:41:59लक्ष्मीबाई ने उनको देखा और देखकर वह अबाक
  8040. 5:42:02रह गई। अक का मतलब होता है आश्चर्यचकित।
  8041. 5:42:05क्या हुआ ऐसा? झलकारी बाई ने उन झलकारी
  8042. 5:42:09बाई गांव की महिलाओं के साथ रानी को
  8043. 5:42:10सम्मान देने के लिए जब मिलने गई तो रानी
  8044. 5:42:12ने जब उनको देखा तो अक रह गई। क्यों?
  8045. 5:42:15क्योंकि वो हूबहू रानी के जैसी दिखती थी।
  8046. 5:42:18ठीक है? क्योंकि झलकारी बिल्कुल रानी
  8047. 5:42:21लक्ष्मीबाई की तरह दिखती थी। दोनों के रूप
  8048. 5:42:23में अलौकिक समानता थी। ठीक है? तो ये पहली
  8049. 5:42:26चीज है कि वो समान दिखती थी। उनकी हमशक्कल
  8050. 5:42:28बन जाती हैं। अन्य औरतों से झलकारी बाई की
  8051. 5:42:31बहादुरी के किस्से सुनकर रानी लक्ष्मीबाई
  8052. 5:42:33ने उनसे बहुत ज्यादा प्रभावित हुई और रानी
  8053. 5:42:35ने झलकारी बाई को दुर्गा सेना में शामिल
  8054. 5:42:38करने का आदेश दिया। झलकारी ने यहां अन्य
  8055. 5:42:40महिलाओं के साथ बंदूक चलाना, तोप चलाना,
  8056. 5:42:44तलवारबाजी देखिएगा। देखो अब उनके कैरेक्टर
  8057. 5:42:48में किस तरीके से परिवर्तन हो रहा है।
  8058. 5:42:50बचपन से साहसी है, निडर है, दृढ़ निश्चयी
  8059. 5:42:53हैं। शादी होती है एक बहादुर सैनिक से
  8060. 5:42:55जिसका नाम है पून सिंह कोहली। पून सिंह
  8061. 5:42:57कोहली ने उन्हें और ज्यादा शिक्षित किया।
  8062. 5:42:59मतलब हथियारों में ट्रेंड किया, बंदूक
  8063. 5:43:02चलाना सिखाया, तोप चलाना सिखाया, तोप
  8064. 5:43:04चलाना वो यहां पे सीखेंगी। तो इस प्रकार
  8065. 5:43:06उनकी जो शिक्षा है हथियारों की वह और
  8066. 5:43:08ज़्यादा बेहतर होती जाती है और रानी
  8067. 5:43:10लक्ष्मी की जब वह दुर्गा दल में आती हैं
  8068. 5:43:12तो उन्होंने और ज्यादा प्रशिक्षण लिया तो
  8069. 5:43:14वो अब एक वेल ट्रेंड सैनिक बन जाती हैं।
  8070. 5:43:16सैनिक नहीं वो दुर्गा दल की जो हैं
  8071. 5:43:19सेनापति हैं। ठीक है? तो याद रखिए
  8072. 5:43:21उन्होंने क्या किया? महिलाओं के साथ बंदूक
  8073. 5:43:23चलाना, तोप चलाना और तलवारबाजी का
  8074. 5:43:25प्रशिक्षण किया। यही वो समय था जब झांसी
  8075. 5:43:27की सेना को किसी भी ब्रिटिश दुस्साहस का
  8076. 5:43:30सामना करने के लिए मजबूत बनाया जा रहा था।
  8077. 5:43:32यानी झांसी अपनी तैयारी कर रही थी। साइड
  8078. 5:43:35में आप एक पिक्चर दे सकते हैं। भारत सरकार
  8079. 5:43:37ने झलकारी बाई के सम्मान में एक टिकट जारी
  8080. 5:43:40किया था 2001 में। तो ये सारी जो एडिशनल
  8081. 5:43:42इंफॉर्मेशन है वो भी आपको याद रखना है।
  8082. 5:43:45पहले मैं आपको और थोड़ा सा किस्सा बता
  8083. 5:43:47दूं। अब देखिए स्वाधीनता संग्राम यानी
  8084. 5:43:501857 में उनकी क्या भूमिका रही है? ये हम
  8085. 5:43:54जानने जा रहे हैं। अब आप सबको पता है कि
  8086. 5:43:571853 में लॉर्ड डलहौजी के द्वारा झांसी जो
  8087. 5:44:01है उस पर कब्जा कर लिया था। झांसी को उसने
  8088. 5:44:05इसलिए ब्रिटिश कंपनी में मिला लिया यानी
  8089. 5:44:06ईस्ट इंडिया कंपनी में मिला लिया क्योंकि
  8090. 5:44:08झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो
  8091. 5:44:10चुकी थी और उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं
  8092. 5:44:13था। जब रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को
  8093. 5:44:15गोद लिया जिसका नाम दामोदर राव था तो
  8094. 5:44:17डलहौजी ने उसे मान्यता देने से मना कर
  8095. 5:44:19दिया और झांसी पे कब्जा कर लिया। पर इस
  8096. 5:44:21बात से रानी नाराज थी। 1857 के प्रारंभ
  8097. 5:44:25में जैसे ही क्रांति प्रारंभ होती है जून
  8098. 5:44:27का महीना था। कब? झांसी में जब विद्रोह
  8099. 5:44:30हुआ तब की बात कर रहा हूं मैं। तो लगभग 4
  8100. 5:44:32से 5 जून के मध्य जो है रानी लक्ष्मीबाई
  8101. 5:44:35ने ग्वाल जो झांसी का किला है उस पर क्या
  8102. 5:44:37कर लिया? अधिकार कर लिया। और जैसे ही
  8103. 5:44:39झांसी पर उन्होंने अधिकार कर लिया और
  8104. 5:44:40अंग्रेजों को बाहर खदेड़ दिया। तो पहले तो
  8105. 5:44:43झांसी का किला रानी के अधिकार में आ गया।
  8106. 5:44:45लेकिन बाद में अंग्रेजों ने दोबारा झांसी
  8107. 5:44:47के किले पर जब अधिकार किया तो रानी से
  8108. 5:44:49संघर्ष होता है। इसी संघर्ष को हम यहां
  8109. 5:44:51समझने वाले हैं। तो लॉर्ड डलहौजी की राज
  8110. 5:44:53झड़पने की नीति के चलते ब्रिटिश ने
  8111. 5:44:55निसंतान लक्ष्मीबाई को उनका उत्तराधिकारी
  8112. 5:44:58गोद लेने की अनुमति नहीं दी। याद रखिएगा
  8113. 5:45:00क्योंकि वे ऐसा करके राज्य को अपने
  8114. 5:45:02नियंत्रण में लाना चाहते थे। हालांकि
  8115. 5:45:04ब्रिटिश की इस कार्यवाही के विरोध में
  8116. 5:45:06रानी की सारी सेना और उसके सेना उनके जो
  8117. 5:45:08सेना नायक थे झांसी के लोग रानी के साथ
  8118. 5:45:10लामबंद हो गए और उन्होंने आत्म समर्पण
  8119. 5:45:13करने के बजाय अंग्रेजों से लड़ने का जो है
  8120. 5:45:16संकल्प उठा लिया। यह कहानी है।
  8121. 5:45:20बताइए यहां तक आपको समझ में आ गया? यह जो
  8122. 5:45:22झलकारी बाई की जो तस्वीर आप देख रहे हैं,
  8123. 5:45:24यह कहां मिलेगी हमको? यह मिलेगी झांसी
  8124. 5:45:27संग्रहालय में। झांसी जो म्यूजियम है,
  8125. 5:45:29संग्रहालय है, वहां पर रानी लक्ष्मीबाई और
  8126. 5:45:31झलकारी बाई के कई सारे चित्र और उनके से
  8127. 5:45:33जुड़ी हुई जो यादें हैं, उनको संग्रहित
  8128. 5:45:35करके रखा गया है। अब आगे का कहानी में
  8129. 5:45:38थोड़ा सा हम किस्से को समझते हैं। तो यहां
  8130. 5:45:41तक जो है आपको जो मेन-मेन बातें मैं
  8131. 5:45:42दोबारा एक बार रिपीट कर देता हूं। उनका
  8132. 5:45:44बर्थ प्लेस भोजला गांव पति का नाम क्या
  8133. 5:45:47है? याद रखिएगा पून सिंह कोहली और रानी
  8134. 5:45:49लक्ष्मीबाई के वो दुर्गा दल की जो है
  8135. 5:45:53सेनापति थी। ये मुख्य रूप से बातें थी।
  8136. 5:45:55हथियार चलाने में वो माहिर थी। ठीक है? ये
  8137. 5:45:57सारी चीजें हो जाती हैं। अब यहां पे जो
  8138. 5:45:59किस्सा जुड़ता है उसको मैं ऐसे ही सुनाना
  8139. 5:46:01चाहता हूं क्योंकि आगे की जो बात है उसका
  8140. 5:46:04कोई ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है। देखिए जब
  8141. 5:46:07अह झांसी का जो किला था उस पर रानी
  8142. 5:46:09लक्ष्मी ने पहले अधिकार कर लिया। फिर जनरल
  8143. 5:46:12ह्यूरो जो कि एक अंग्रेज अधिकारी था जिसने
  8144. 5:46:14रानी लक्ष्मीबाई को झांसी के किले से बाहर
  8145. 5:46:16किया था। तो जब वह अपनी सेना लेकर आया तो
  8146. 5:46:19उस समय एक घटना घटती है कि रानी
  8147. 5:46:21लक्ष्मीबाई झांसी के किले में रहकर
  8148. 5:46:23अंग्रेजों से लड़ रही थी। संघर्ष कर रही
  8149. 5:46:25थी। तो जब झांसी पूरी तरीके से अंग्रेजों
  8150. 5:46:27से घिर गई तो जो झलकारी बाई जो उनकी हमशल
  8151. 5:46:31थी उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई से कहा कि आप
  8152. 5:46:33एक काम करिए आप अपने पुत्र को लेकर यहां
  8153. 5:46:36से चले जाइए और मैं आपके वेश में आपका रूप
  8154. 5:46:40धारण करके अंग्रेजों को क्या है भ्रमित कर
  8155. 5:46:42दूंगी कि रानी लक्ष्मीबाई तो इधर जा रही
  8156. 5:46:45हैं। आप उधर से निकल जाइए। तो इस प्रकार
  8157. 5:46:47रानी लक्ष्मीबाई अपने पुत्र के साथ जो है
  8158. 5:46:49झांसी का किला छोड़ देती हैं और झलकारी
  8159. 5:46:52बाई रानी लक्ष्मीबाई का वेश धारण करके जो
  8160. 5:46:54है अंग्रेजों को भ्रमित करती हैं। अब इसी
  8161. 5:46:57बीच यहां से दो किस्से इसलिए जुड़ते हैं।
  8162. 5:46:59इसमें मैं आपको दो किस्से बता रहा हूं।
  8163. 5:47:01पहला किस्सा तो यह है कि झांसी के किले को
  8164. 5:47:04जब अंग्रेज़ जीत नहीं पा रहे थे तो
  8165. 5:47:05उन्होंने षड्यंत्र करके एक जो व्यक्ति था
  8166. 5:47:08जो झांसी की ही सेना का व्यक्ति था उससे
  8167. 5:47:10जो है झांसी के किले का एक दरवाजा खुलवा
  8168. 5:47:12लिया। जिससे अंग्रेज आसानी से किले में
  8169. 5:47:14प्रवेश कर गए। और इस प्रकार जो झांसी का
  8170. 5:47:16किला है अंग्रेजों ने जीत लिया। अब दूसरा
  8171. 5:47:18इसमें प्रसंग यह है कि झलकारीबाई का क्या
  8172. 5:47:21हुआ? रानी लक्ष्मीबाई जो हैं झांसी से
  8173. 5:47:23निकल कर चली जाती हैं कालपी की तरफ और
  8174. 5:47:25कालपी के बाद वो ग्वालियर चली जाती हैं
  8175. 5:47:27जैसा आप सबको पता है। लेकिन इसके बाद
  8176. 5:47:29झलकारीबाई का क्या हुआ? इसको लेकर इतिहास
  8177. 5:47:31में अलग-अलग कहानियां मिलती हैं। कुछ
  8178. 5:47:33किवदंंतियां हैं जिसमें यह कहा जाता है कि
  8179. 5:47:36अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ कर फांसी दे दी।
  8180. 5:47:38कुछ किवदंतियां यह कहती हैं कि जब झलकारी
  8181. 5:47:41बाई को अंग्रेजों ने पकड़ा तो उनसे पूछा
  8182. 5:47:43कि वह कौन है? क्या है? तो उन्होंने निड
  8183. 5:47:45निडरता पूर्वक जो जवाब दिया इससे प्रभावित
  8184. 5:47:48होकर जो है जनरल हीरोज़ ने झलकारी बाई को
  8185. 5:47:51रिहा कर दिया था और वह काफी समय तक जीवित
  8186. 5:47:53रही। जिसमें एक और हमको किदंती ये मिलती
  8187. 5:47:55है कि वो रानी के साथ काल्पियो और कालपी
  8188. 5:47:58से होते हुए ग्वालियर जाती हैं और
  8189. 5:48:00ग्वालियर में अंग्रेजों से संघर्ष करते
  8190. 5:48:02हुए रानी लक्ष्मीबाई के साथ शहीद हो जाती
  8191. 5:48:04हैं। क्योंकि उनकी जो समाधि है वो हमें
  8192. 5:48:06ग्वालियर में देखने को मिलती है। रानी
  8193. 5:48:08लक्ष्मीबाई और झलकारीबाई दोनों की समाधि
  8194. 5:48:11ग्वालियर में है। तो मैं आपको दो बातें
  8195. 5:48:12आगे बताना चाहता हूं। अब देखिए क्या होता
  8196. 5:48:14है। जून में विद्रोह भड़का था। ठीक है?
  8197. 5:48:17याद रखना। तो ये डेट थोड़ा सा आप इसको
  8198. 5:48:19ध्यान दीजिएगा। 1857 के दौरान लक्ष्मीबाई
  8199. 5:48:23ने झांसी के किले के भीतर से अपनी सेना का
  8200. 5:48:25नेतृत्व किया और ब्रिटिश और उनके स्थानीय
  8201. 5:48:28सहयोगियों द्वारा किए गए हमलों को नाकाम
  8202. 5:48:30कर दिया। यानी अंग्रेजों से संघर्ष कर रही
  8203. 5:48:32हैं। उनके जो हमले उनको नाकाम कर दिया।
  8204. 5:48:35रानी के सेना नायकों में एक गद्दार है।
  8205. 5:48:38देखो इसका नाम है दूल्हेराव।
  8206. 5:48:40गद्दार। दूल्हेराव ने उसे धोखा दिया और
  8207. 5:48:43किले का एक संरक्षित द्वार ब्रिटिश सेना
  8208. 5:48:45के लिए खोल दिया। जब किले का पतन निश्चित
  8209. 5:48:47हो गया तो रानी के सेनापतियों और झलकारी
  8210. 5:48:50बाई ने उन्हें कुछ सैनिकों के साथ किला
  8211. 5:48:53छोड़कर भागने की सलाह दी और रानी अपने
  8212. 5:48:55घोड़े पर अपने कुछ विश्वस्त सैनिकों के
  8213. 5:48:57साथ झांसी के किले से निकल कर चली जाती
  8214. 5:49:00हैं। अब आगे क्या होता है? झलकारी बाई अब
  8215. 5:49:03यहां पर जो इनका जो किस्सा है वह बहुत
  8216. 5:49:05निर्णायक है। आप इसको ध्यान से सुने। जब
  8217. 5:49:08रानी चली जाती हैं तो किले की सुरक्षा दो
  8218. 5:49:11लोगों के पास है। एक इनका पति है झलकारी
  8219. 5:49:13बाई का जिसका नाम है पूरन सिंह कोहली जो
  8220. 5:49:15कि एक बहुत ही बहादुर सिपाही है। झलकारी
  8221. 5:49:18बाई का जो पति है पूरन किले की रक्षा करते
  8222. 5:49:20हुए शहीद हो गया। अब आप सोचिए झलकारी बाई
  8223. 5:49:23को जब पता चला होगा कि उनके जो पति हैं वो
  8224. 5:49:25लड़ते हुए शहीद हो गए तो उनके अंदर और
  8225. 5:49:27ज्यादा गुस्सा बढ़ जाता है और वह जो है
  8226. 5:49:30फुल एंड फाइनल यानी एक तरीके से अपने जान
  8227. 5:49:32को हथेली पर रखकर अंग्रेजों से संघर्ष
  8228. 5:49:34करने लगती हैं। ठीक है? झलकारी बाई ने
  8229. 5:49:36बजाय अपनी पति पति की मृत्यु का शोक मनाने
  8230. 5:49:39के लिए ब्रिटिश को धोखा देने का एक योजना
  8231. 5:49:41बनाई यानी अंग्रेजों को धोखा देने की और
  8232. 5:49:44जिससे कि धोखा क्यों देना चाहती हैं जिससे
  8233. 5:49:45कि रानी सुरक्षित दूर निकल जाए झलकारी बाई
  8234. 5:49:49ने रानी लक्ष्मीबाई की तरह कपड़े पहने
  8235. 5:49:51झांसी की सेना की कमान अपने हाथ में ली और
  8236. 5:49:54जिसके बाद वह किले के बाहर निकलकर ब्रिटिश
  8237. 5:49:56जनरल ह्यूरो ये हरोज का नाम है कि शिविर
  8238. 5:49:59में उससे मिलने पहुंची और शिविर में
  8239. 5:50:01पहुंचने पर उसने चिल्लाकर कहा कि वह जनरल
  8240. 5:50:04हरोज़ से मिलना चाहती आती है और इससे
  8241. 5:50:07सुनकर अंग्रेज सैनिक प्रसन्न थे कि ना
  8242. 5:50:09सिर्फ उन्होंने झांसी के किले पे कब्जा कर
  8243. 5:50:11लिया बल्कि जीवित जो है रानी को भी पकड़
  8244. 5:50:14लिया।
  8245. 5:50:15जनरल हररोज़ ने उस समय उसे रानी ही समझ रहा
  8246. 5:50:18था ने झलकारीबाई से पूछा कि उसके साथ क्या
  8247. 5:50:21किया जाए? तो उसने जो है दृढ़ता के साथ
  8248. 5:50:23कहा कि मुझे फांसी दो। जनरल हिरोज़ झलकारी
  8249. 5:50:26बाई के साहस और उसके नेतृत्व क्षमता से
  8250. 5:50:29बहुत प्रभावित हुआ और झलकारी बाई को रिहा
  8251. 5:50:31कर दिया। देखिए कुछ लोग कहते हैं कुछ
  8252. 5:50:34लोगों का कहना है कि उसने झलकारी बाई को
  8253. 5:50:35रिहा कर दिया था और बाद में झलकारी बाई
  8254. 5:50:37कुछ समय तक जीवित रही। लेकिन अन्य
  8255. 5:50:39किवदंतियां ये कहती हैं कोई यह कहता है कि
  8256. 5:50:42उन्हें फांसी दे दी गई अंग्रेजों द्वारा
  8257. 5:50:43और कोई यह कहता है कि वो रानी लक्ष्मीबाई
  8258. 5:50:46के साथ लड़ते हुए ग्वालियर में शहीद हो
  8259. 5:50:47गई। तो ये अलग-अलग हैं। जैसे कि बुंदेलखंड
  8260. 5:50:50की विवदती है बुंदेलखंड में कि झलकारी बाई
  8261. 5:50:52के इस उत्तर से जनरल हीरोज़ दंग रह गया और
  8262. 5:50:54उसने कहा कि यदि भारत की 1% महिलाएं भी
  8263. 5:50:57उसके जैसी साहसी होती तो ब्रिटिश को जल्दी
  8264. 5:50:59ही भारत छोड़ना होगा। ऐसा हम लोगों को
  8265. 5:51:02सुनने को मिलता है। लास्ट सेंटेंस है। आइए
  8266. 5:51:05इस पे चर्चा करते हैं और इसको खत्म करते
  8267. 5:51:08हैं। देखिए क्या है लास्ट? आप ये जो
  8268. 5:51:10तस्वीर देख रहे हैं वो है ग्वालियर में।
  8269. 5:51:13ठीक है? तो अगर आपसे क्वेश्चन यह पूछा
  8270. 5:51:15जाता है कि रानी लक्ष्मीबाई की समाधि कहां
  8271. 5:51:18पर है या झलकारी बाई की समाधि कहां पर है?
  8272. 5:51:21तो आपका आंसर होगा ग्वालियर। रानी
  8273. 5:51:23लक्ष्मीबाई की भी समाधि ग्वालियर में है।
  8274. 5:51:24यह है झलकारीबाई की तस्वीर। ऐसे ही एक
  8275. 5:51:27तस्वीर एक मूर्ति जो है रानी लक्ष्मीबाई
  8276. 5:51:29की लगी हुई है जिसमें वो हाथ में तलवार और
  8277. 5:51:31उनका घोड़ा जो है उसके पैर हवा में हैं।
  8278. 5:51:34तो वो रानी लक्ष्मीबाई की समाधि भी
  8279. 5:51:35ग्वालियर में है और झलकारी बाई का भी आप
  8280. 5:51:37देखिए घोड़े के पैर हवा में हैं। जब किसी
  8281. 5:51:40योद्धा को इस तरीके से दिखाया जाता है कि
  8282. 5:51:42उसके घोड़े के जो पैर हैं वो हवा में हो।
  8283. 5:51:44हाथ में तलवार हो जिसका मतलब होता है कि
  8284. 5:51:46वह युद्ध में लड़ते हुए शहीद हुआ है। तो
  8285. 5:51:48रानी लक्ष्मीबाई के साथ झलकारी बाई
  8286. 5:51:51ग्वालियर में शहीद हो जाती हैं। ग्वालियर
  8287. 5:51:53में घुड़सवार के रूप में झलकारी बाई की ये
  8288. 5:51:55प्रतिमा लगी हुई है। 8 फुट ऊंची ये
  8289. 5:51:57प्रतिमा है जो ग्वालियर में आपको देखने को
  8290. 5:51:59मिलती है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने
  8291. 5:52:02झलकारीबाई की बहादुरी को इस प्रकार
  8292. 5:52:05पंक्तिबद्ध किया था। यानी हमारे जो महान
  8293. 5:52:08साहित्यकार हैं राष्ट्रकवि मैथिलीशरण
  8294. 5:52:10गुप्त उन्होंने झलकारी बाई की वीरता पर
  8295. 5:52:12कुछ लाइनें कहीं। उन्होंने कहा कि जाकर रण
  8296. 5:52:15में ललकारी थी। वह तो झांसी की झलकारी थी।
  8297. 5:52:19गोरों से लड़ना सीखा गई है। इतिहास में
  8298. 5:52:22झलक रही वह भारत की ही नारी थी। तो ये
  8299. 5:52:25झलकारी बाई के लिए राष्ट्रकवि मैथिलीशरण
  8300. 5:52:27गुप्त ने कहा। हालांकि जो समय के
  8301. 5:52:29मुख्यधारा के इतिहासकार थे उन्होंने
  8302. 5:52:31झलकारी बाई को ज्यादा महत्व नहीं दिया।
  8303. 5:52:33लेकिन बाद के जो आधुनिक लेखक थे उन्होंने
  8304. 5:52:35झलकारी बाई के ऊपर बहुत सारी टिप्पणियां
  8305. 5:52:38की है। बहुत कुछ लिखा है जिसकी वजह से आज
  8306. 5:52:39हम झलकारी बाई की बात कर रहे हैं। भारत
  8307. 5:52:42सरकार ने 22 जुलाई 2001 में झलकारी बाई के
  8308. 5:52:45नाम सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया
  8309. 5:52:47था। और एक और बात बता दूं झलकारी बाई केवल
  8310. 5:52:50मध्य प्रदेश में ही नहीं उत्तर प्रदेश में
  8311. 5:52:52राजस्थान में और कई अन्य राज्यों में भी
  8312. 5:52:55सम्मानित हैं। उनके नाम की प्रतिमाएं और
  8313. 5:52:57स्मारक भारत के कई राज्यों में बने हैं।
  8314. 5:52:59जैसे कि उनकी प्रतिमा और एक स्मारक अजमेर।
  8315. 5:53:02अजमेर कहां है? राजस्थान में। ठीक है?
  8316. 5:53:04अजमेर में है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा
  8317. 5:53:06उनकी एक प्रतिमा आगरा में स्थापित की गई
  8318. 5:53:08है और साथ ही उनके नाम से लखनऊ में एक
  8319. 5:53:11अस्पताल यानी एक धर्मार चिकित्सालय भी
  8320. 5:53:14शुरू किया गया है। तो तीन स्टेट हैं।
  8321. 5:53:16राजस्थान, उत्तर प्रदेश और एमपी में उनकी
  8322. 5:53:18कई स्थानों पर प्रतिमाएं बनी है। आगरा में
  8323. 5:53:21उनकी प्रतिमा लगभग ऐसी ही बनी है।
  8324. 5:53:23ग्वालियर में उनकी प्रतिमा है। ठीक है? और
  8325. 5:53:25यूपी में भी प्रतिमा है और राजस्थान में
  8326. 5:53:27भी प्रतिमा है। तो यह थी हमारी झलकारी बाई
  8327. 5:53:30जो रानी लक्ष्मीबाई की एक छाया के रूप में
  8328. 5:53:33पहचानी जाती हैं। झलकारी बाई रानी
  8329. 5:53:36लक्ष्मीबाई की क्या थी? हमसल थी और उनके
  8330. 5:53:38जो दल है उनकी जो महिला सेना थी जिसका नाम
  8331. 5:53:41था दुर्गा दल उसकी जो है वो क्या थी?
  8332. 5:53:43सेनापति थी। मुझे उम्मीद है कि आप लोगों
  8333. 5:53:45को ये जो सीरीज है वो बहुत पसंद आ रही
  8334. 5:53:48होगी। इस सीरीज में काफी अभी लेक्चर हो
  8335. 5:53:50चुके हैं जिसमें हम लोगों ने मध्य प्रदेश
  8336. 5:53:52की वीर और वीरांगनाओं के बारे में चर्चा
  8337. 5:53:54की है और मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को
  8338. 5:53:56ये सीरीज बहुत पसंद आएगी। इसके साथ-साथ
  8339. 5:53:58मैं एक और इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन आप लोगों
  8340. 5:54:00को देना चाहता हूं। वो इंफॉर्मेशन यह है
  8341. 5:54:03कि अभी 21 जुलाई यानी आज 21 जुलाई को
  8342. 5:54:07स्टडी आईक्यू एक नया कोर्स स्टार्ट कर रहा
  8343. 5:54:09है और यह कोर्स है मध्य प्रदेश स्टेट
  8344. 5:54:12पीसीएस आरंभ 6.0 अगर आप चाहते हैं कि आपकी
  8345. 5:54:16एमबीबीएससी की तैयारी बेहतर बने और उसे एक
  8346. 5:54:18सही दिशा मिले तो आप आरंभ 6.0 के साथ
  8347. 5:54:21तैयारी कर सकते हैं। इसमें प्रीलिम्स,
  8348. 5:54:23मेंस और इंटरव्यू इन सभी के कोर्सेज़ इन
  8349. 5:54:26सभी की पूरी तैयारी यानी प्री और मेंस और
  8350. 5:54:28इंटरव्यू की कंप्लीट तैयारी इसमें आपको
  8351. 5:54:30करवाई जाएगी। इसकी जो फीस है वो वैसे
  8352. 5:54:33₹18,999 है। अगर आप मेरा कोड यूज़ करते हैं
  8353. 5:54:36Har लाइव तो यह आपको केवल और केवल मात्र
  8354. 5:54:39मिलेगा ₹1,999
  8355. 5:54:41में। इस कोर्स में आपको बहुत सारे फीचर्स
  8356. 5:54:43मिलने वाले हैं। जैसे कि 1100 घंटों की
  8357. 5:54:46लाइव क्लासेस है। मेंस याद रखिएगा। डेली
  8358. 5:54:49मेंस आंसर राइटिंग है। डेली मेंस का जो
  8359. 5:54:51टॉपिक पढ़ाया जाएगा उसका क्वेश्चन आपको
  8360. 5:54:52दिया जाता है। इसके साथ-साथ एक मेंटर आपको
  8361. 5:54:55मिलेगा जो आपकी तैयारी में हर समय आपको
  8362. 5:54:57हेल्प करेगा। जब भी आपको कोई डाउट है अपने
  8363. 5:54:59मेंटर से पूछ सकते हैं। और सबसे
  8364. 5:55:01इंपॉर्टेंट फीचर इस कोर्स का यह है कि यदि
  8365. 5:55:03आप प्री क्वालीफाई कर लेते हैं। यदि आप
  8366. 5:55:06प्री क्वालीफाई कर लेते हैं, तो आपकी 100%
  8367. 5:55:08फीस रिफंड की जाएगी। ठीक है? 2 ईयर की
  8368. 5:55:11कोर्स वैलिडिटी है। एनसीआरटी का रिकॉर्डेड
  8369. 5:55:14कोर्स है। सब कुछ इसमें आपको मिलने वाला
  8370. 5:55:16है। मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को जो कुछ
  8371. 5:55:19भी मैंने झलकारी बाई के बारे में बताया
  8372. 5:55:21आपको पसंद आया होगा। मैं आप लोगों से बस
  8373. 5:55:24एक और बात कह रहा हूं कि आप लोग कमेंट
  8374. 5:55:26सेक्शन में बताइएगा इस वीडियो को देखने के
  8375. 5:55:28बाद कि आपको और किन वीर वीरांगनाओं के
  8376. 5:55:30बारे में आपको इंफॉर्मेशन चाहिए। किन वीर
  8377. 5:55:33वीरांगनाओं के बारे में आप जो है वीडियो
  8378. 5:55:35चाहते हैं? जितने ज्यादा कमेंट्स जिस पर
  8379. 5:55:38भी आएंगे उसी का वीडियो आप लोगों को
  8380. 5:55:40नेक्स्ट सेशन में मिलेगा। नेक्स्ट टॉपिक
  8381. 5:55:42में हम उन्हीं की चर्चा करेंगे। तो आज के
  8382. 5:55:44सेशन को यहीं समाप्त करते हैं। जय हिंद।
  8383. 5:55:46थैंक यू।
  8384. 5:55:55नमस्कार दोस्तों, मैं हरी सिंह राजपूत आप
  8385. 5:55:57सभी का एमपीपीएससी स्टडी आईक्यू पर
  8386. 5:55:59बहुत-बहुत स्वागत करता हूं। उम्मीद है आप
  8387. 5:56:01सभी लोग अच्छे होंगे और मन लगाकर पढ़ रहे
  8388. 5:56:03होंगे। तो दोस्तों हमारी सीरीज मध्य
  8389. 5:56:05प्रदेश के वीरों का इतिहास में आज हम बात
  8390. 5:56:08करने वाले हैं मध्य प्रदेश के एक और महान
  8391. 5:56:11आदिवासी वीर योद्धा जिनका नाम था सीताराम
  8392. 5:56:14कमर। दोस्तों सीताराम कमर भी निमाड़
  8393. 5:56:17क्षेत्र में 1857 की क्रांति में अपना
  8394. 5:56:20योगदान देते हैं और उन्हीं बलिदानी
  8395. 5:56:23क्रांतिकारियों में शामिल होते हैं
  8396. 5:56:25जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपना
  8397. 5:56:27सर्वस्व न्योछावर किया। तो आइए हम बात
  8398. 5:56:30करते हैं वीर सीताराम कंवर जी के बारे
  8399. 5:56:33में। तो सबसे पहले हम बात करेंगे कि जो
  8400. 5:56:35सीताराम जी कंवर थे वो कहां से बिलोंग
  8401. 5:56:38करते थे और इनकी क्या स्टोरी रही है। तो
  8402. 5:56:4010 मिनट में आप अच्छे से इनके बारे में
  8403. 5:56:43एग्जाम ओरिएंटेड और पूरी की पूरी
  8404. 5:56:44इंफॉर्मेशन सुन लीजिएगा। सबसे पहली बात जो
  8405. 5:56:47हमारे सीताराम जी कंवर हैं वो निमाड़
  8406. 5:56:50क्षेत्र में एक डिस्ट्रिक्ट है निवाड़ का
  8407. 5:56:52जिसका नाम है खरगोन। तो खरगोन डिस्ट्रिक्ट
  8408. 5:56:55का एक गांव था जिसका नाम था डंग गांव। यह
  8409. 5:56:58इसलिए याद रखना है क्योंकि इसी गांव में
  8410. 5:57:01जहां पर उनका जन्म हुआ था इसी गांव में
  8411. 5:57:03उनकी समाधि है। यानी इसी गांव में वह
  8412. 5:57:05अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए शहीद हो
  8413. 5:57:07जाएंगे। तो वीर क्रांतिकारी सीताराम कंवर
  8414. 5:57:11का जो जन्म स्थान है वो निवाड़ क्षेत्र
  8415. 5:57:12में खरगोन जिले के डंग गांव में था। अब
  8416. 5:57:16इसके बाद क्या होता है कि वो जैसे ही बड़े
  8417. 5:57:19होते हैं तो वो लड़ने में माहिर थे। ठीक
  8418. 5:57:22है? एक वीर योद्धा थे। तो उन्होंने क्या
  8419. 5:57:24किया था कि गोंडवाना राज्य के जो राजा थे
  8420. 5:57:27गोंडवाना राज्य के उस समय के जो राजा थे
  8421. 5:57:30जिनका जबलपुर केंद्र था और अगर आपको याद
  8422. 5:57:32हो 1857 की क्रांति में राजा शंकर शाह
  8423. 5:57:35वहां के राजा थे गोंडवाना के जो रानी
  8424. 5:57:38दुर्गावती के वंशज थे। तो सीताराम वीर
  8425. 5:57:41कंवर जो है उनके यहां पर जाते हैं और उनके
  8426. 5:57:44यहां पर गुप्तचर विभाग के प्रमुख हो जाते
  8427. 5:57:46हैं। दैट मींस कि जो राजा शंकर शाह है
  8428. 5:57:49यानी जो गोंड राजा थे जबलपुर के उन्होंने
  8429. 5:57:52अपना गुप्तचर विभाग का प्रमुख किसे बनाया?
  8430. 5:57:55सीताराम कमर को बनाया। अब सीताराम कमर अभी
  8431. 5:57:58जो है गोंडवाना राज्य में नौकरी कर रहे
  8432. 5:58:00थे। अच्छा उसके पीछे एक कारण भी है। ये जो
  8433. 5:58:03कमर वर्ड आता है वो गोंडों से रिलेट करता
  8434. 5:58:06है। ठीक है? यानी यह गोंड समुदाय से रिलेट
  8435. 5:58:09करता है। तो इसीलिए शायद इसीलिए संभवत जो
  8436. 5:58:11है वह गोंडवाना राज्य में नौकरी करते थे।
  8437. 5:58:14अब क्या हुआ कि 1857 की क्रांति के दौरान
  8438. 5:58:17जबलपुर के जो गोंड शासक थे राजा शंकर शाह
  8439. 5:58:20और रघुनाथ शाह उन्हें अंग्रेजों ने तोप से
  8440. 5:58:22उड़ा दिया। तो क्या होता है कि लेकिन
  8441. 5:58:25सितंबर 20 सितंबर को ऐसा हुआ था। 20
  8442. 5:58:28सितंबर 1858 में अंग्रेजों ने गोंडवाना का
  8443. 5:58:31दमन कर दिया और वीर शंकर शाह और उनके जो
  8444. 5:58:34पुत्र थे रघुनाथ शाह को उन्हें तोप के
  8445. 5:58:36मुंह के तोप के मुंह पर बांधकर उड़ा दिया।
  8446. 5:58:39तो होता क्या है कि जो हमारे वीर सीताराम
  8447. 5:58:42कंवर होते हैं वो गोंडवाना राज्य को
  8448. 5:58:44छोड़कर अब आ जाते हैं निवाड़ में। देखिए
  8449. 5:58:47गोंडवाना राज्य के दमन के बाद वीर सीताराम
  8450. 5:58:49कंवर अपनी टोली के साथ निवाड़ आ गए और
  8451. 5:58:52यहां उन्होंने होलकर राज्य में पदाधिकारी
  8452. 5:58:54वनवासियों से संपर्क किया और 1857 की
  8453. 5:58:57क्रांति के भूमिगत नायकों से संपर्क किया
  8454. 5:59:00और वनवासियों की टुकड़ी तैयार की। तो इस
  8455. 5:59:03प्रकार उन्होंने निर्माण क्षेत्र में अपनी
  8456. 5:59:05एक सेना का निर्माण किया। देखिए मैं आपको
  8457. 5:59:08इसमें तो पढ़ के बता ही दूंगा लेकिन मैं
  8458. 5:59:10चाहता हूं कि आपको मैं यहां पर एक
  8459. 5:59:14इंपॉर्टेंट इंफॉर्मेशन अपने तरीके से दूं
  8460. 5:59:16जिससे आप आपको बेहतर तरीके से समझने में
  8461. 5:59:20हेल्प मिले। देखिए चल क्या रहा है यहां पर
  8462. 5:59:23सिचुएशन कुछ ऐसी है आपको बताता हूं। देखिए
  8463. 5:59:26यह रहे हमारे सीताराम कंवर। तो जैसे मैंने
  8464. 5:59:29आपको बताया कि सीताराम कंवर जो है
  8465. 5:59:32उन्होंने सबसे पहले इनका जो जन्म स्थान है
  8466. 5:59:34वह क्या है? इनका जन्म स्थान है निमाड़ का
  8467. 5:59:37खरगोन डिस्ट्रिक्ट और खरगोन डिस्ट्रिक्ट
  8468. 5:59:40में एक जगह थी जिसका नाम था डंग गांव। ठीक
  8469. 5:59:43है? यानी जो डंग गांव है यह याद रखना
  8470. 5:59:46इंपॉर्टेंट है। डंग गांव और कहां पड़ता
  8471. 5:59:48है? खरगोन। यहां पर इनका जन्म होता है। और
  8472. 5:59:50आगे चलकर यह क्या करते हैं? गोंडवाना के
  8473. 5:59:53राजा जो थे गोंडवाना के शासक शंकर शाह के
  8474. 5:59:56यहां यह नौकरी करते हैं। तो गोंडवाना के
  8475. 5:59:59शासक का नाम क्या है? शंकर शाह। और शंकर
  8476. 6:00:02शाह के ये कौन है? तो याद रखिएगा ये संकर
  8477. 6:00:05शाह जो थे उन संकर शाह के ये गुप्तचर
  8478. 6:00:08विभाग के प्रमुख बनाए गए। लेकिन क्या होता
  8479. 6:00:11है कि जो संघर्ष शाह होते हैं उनको क्या
  8480. 6:00:13किया जाता है? अंग्रेजों द्वारा उन्हें
  8481. 6:00:15तोप से उड़ा दिया गया और इसी वजह से यह
  8482. 6:00:18क्या करते हैं? गोंडवाना राज्य को छोड़कर
  8483. 6:00:21वापस अपने निमाड़ राज्य में आ जाते हैं।
  8484. 6:00:24ठीक है? तो इस तरीके से जो मेनमेन बातें
  8485. 6:00:26हैं, वह आप याद रख सकते हैं इनके बारे
  8486. 6:00:29में। अब होता क्या है? जब यह निवाड़ में
  8487. 6:00:32आए। याद रखिएगा ध्यान से। निमाड़ में आते
  8488. 6:00:35हैं तो निवाड़ मतलब इनका जो जन्मभूमि थी
  8489. 6:00:38वापस से लौट आए और इनकी कर्मभूमि अभी कहां
  8490. 6:00:40थी? गोंडवाना। तो जब ये निवाड़ में लौट कर
  8491. 6:00:42आए तो इन्होंने क्या किया? यहां के जो
  8492. 6:00:45आदिवासी वीर थे आदिवासियों
  8493. 6:00:49से मिलकर आदिवासियों की एक टोली बनाई।
  8494. 6:00:52टोली समझते हैं आप? यानी एक सेना का
  8495. 6:00:54निर्माण किया। एक टोली का निर्माण किया और
  8496. 6:00:57इसमें कई वीर आदिवासी योद्धाओं को शामिल
  8497. 6:01:00किया। इसमें इनके एक सबसे बड़े सहयोगी हैं
  8498. 6:01:02और मैं चाहता हूं कि उनके बारे में हम
  8499. 6:01:04अगले लेक्चर में बात करेंगे। उनका काफी
  8500. 6:01:07डिटेल में उनकी बात करेंगे। उनका नाम है
  8501. 6:01:09रघुनाथ मंडलोई जी। क्योंकि रघुनाथ मंडलोई
  8502. 6:01:14जी जो हैं याद रखिएगा
  8503. 6:01:17मंडलोई उनके प्रमुख सहयोगी थे। यानी जब इस
  8504. 6:01:21क्षेत्र में उन्होंने अपनी टोली यानी सेना
  8505. 6:01:23बनाई तो इनके जो प्रमुख सहयोगी बनते हैं
  8506. 6:01:26वह कौन बनते हैं? वीर रघुनाथ मंडलोई जी।
  8507. 6:01:30अब वीर जो रघुनाथ मंडलोई जी हैं वो क्या
  8508. 6:01:32करते हैं? मैं आपको बताना चाहूंगा कि यह
  8509. 6:01:34जो वीर रघुनाथ मंडलोई जी हैं उन्होंने
  8510. 6:01:36इनका साथ दिया और इस क्षेत्र में एक बड़ी
  8511. 6:01:38सेना का निर्माण इन लोगों ने कर लिया और
  8512. 6:01:411857 की क्रांति याद रखिएगा 1857 की जो
  8513. 6:01:45क्रांति इस समय चल रही थी। इस क्रांति में
  8514. 6:01:48इन्होंने अपना योगदान दिया। अब होता क्या
  8515. 6:01:51है कि जैसे ही ब्रिटिश सरकार को यानी ईस्ट
  8516. 6:01:55इंडिया कंपनी को यह खबर लगी कि सीताराम
  8517. 6:01:59कमर और रघुनाथ मंडलोई जैसे वीर योद्धा
  8518. 6:02:02निमाड़ में एक्टिव हो गए हैं। अब याद रखिए
  8519. 6:02:05निमाड़ में यह वो दौर था जहां भीमा नायक,
  8520. 6:02:07खाज्या नायक, बिरजू नायक और टंट्या वीर
  8521. 6:02:10जैसे योद्धा थे। लेकिन वो सब अपने-अपने
  8522. 6:02:12क्षेत्रों में एक्टिव थे और उनमें से कुछ
  8523. 6:02:14का दमन कर दिया गया था और उनके दमन के
  8524. 6:02:17पश्चात निमाड़ क्षेत्र में विद्रोह की जो
  8525. 6:02:19चिंगारी है, विद्रोह की जो आग है, वो दो
  8526. 6:02:22योद्धाओं ने जलाई। एक का नाम सीताराम कमर
  8527. 6:02:24है और एक का नाम है रघुनाथ मंडलोई। मैं
  8528. 6:02:27बात करूंगा नेक्स्ट लेक्चर में रघुनाथ
  8529. 6:02:28मंडलोई जी की। अब क्या होता है? वायसराॉय
  8530. 6:02:32ने एक मेजर को इन लोगों को पकड़ने के लिए
  8531. 6:02:34भेजा जिसका नाम था मेजर कीटिंग। देखिए
  8532. 6:02:37मेजर कीटिंग का जिक्र बार-बार आएगा। मेजर
  8533. 6:02:39कीटिंग क्या करता है? अपनी दो सैन्य
  8534. 6:02:42टुकड़ी ले जाकर निमाड़ में जो इनका एरिया
  8535. 6:02:44होता है, इसको घेर लेता है। ध्यान देना इस
  8536. 6:02:47बात को और यहां से साउथ में नागपुर से
  8537. 6:02:50थोड़ी सी मदद मांगता है और नागपुर से एक
  8538. 6:02:53सैन्य टुकड़ी अलग आती है। तो इनका जो गांव
  8539. 6:02:56होता है जिसका नाम क्या है? डंग गांव। तो
  8540. 6:02:58यहां पर जो डंग गांव था मैं इस डंग गांव
  8541. 6:03:01का जिक्र कर देता हूं। इस डंग गांव को तीन
  8542. 6:03:04ओर से जो है घेर लिया गया।
  8543. 6:03:07दो सेनाएं
  8544. 6:03:09कीटिंग के नेतृत्व में और एक सेना जो का
  8545. 6:03:11किसके नेतृत्व में जाती है तो नागपुर की
  8546. 6:03:14सेना की टुकड़ी थी तो इन लोगों ने जो है
  8547. 6:03:16डंग गांव को घेर लिया। रात को जब अंधेरे
  8548. 6:03:19में इस गांव को घेरा गया तो जो हमारे वीर
  8549. 6:03:22हमारे जो जनजातीय वीर योद्धा थे आदिवासी
  8550. 6:03:25योद्धा थे वो अभी तैयार नहीं थे और
  8551. 6:03:27सुबह-सुबह जो है लड़ाई हो जाती है। अब आप
  8552. 6:03:30सभी जानते हैं कि आखिरकार 1857 की क्रांति
  8553. 6:03:33में हमारे जो वीर योद्धा थे वह क्यों
  8554. 6:03:34हारे? क्योंकि उनके पास परंपरागत तीर,
  8555. 6:03:37तलवार, भाले, लाठी, डंडे थे। वहीं
  8556. 6:03:40अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार थे।
  8557. 6:03:42अंग्रेजों के पास हर चीज उत्तम प्रवृत्ति
  8558. 6:03:44की थी। तो जब इस डंग गांव में मुठभेड़
  8559. 6:03:47होती है तो इस मुठभेड़ में 78 जो हमारे
  8560. 6:03:52आदिवासी योद्धा हैं वो शहीद हो जाते हैं।
  8561. 6:03:55और इन्हीं 78
  8562. 6:03:58योद्धाओं में एक योद्धा थे जिनका नाम था
  8563. 6:04:01वीर सीताराम कमर। यानी वीर सीताराम कंवर
  8564. 6:04:04का जो है डंग गांव में ही जब लड़ाई हुई
  8565. 6:04:06संघर्ष हुआ तो उनका सर काट दिया गया। उनका
  8566. 6:04:09सर काटकर जो है क्या है? पूरे गांव में उस
  8567. 6:04:11सर को ले जाकर घुमाया गया एक तलवार पे
  8568. 6:04:13लटका कर जिससे कि गांव में दहशत का माहौल
  8569. 6:04:16बनाया जा सके। और जो दूसरे क्रांतिकारी
  8570. 6:04:19हमारे रघुनाथ मंडली इन्हें खरगोन के जो
  8571. 6:04:21प्रसिद्ध बीजागढ़ फोर्ट है वहां पर
  8572. 6:04:23गिरफ्तार किया था इसी मेजर कीटिंग ने। तो
  8573. 6:04:26हम इस बात को बस याद रखना है कि सीताराम
  8574. 6:04:29कमर का क्या योगदान है? एग्जाम से रिलेटेड
  8575. 6:04:32क्या तथ्य हो सकते हैं? कहां से बिलॉन्ग
  8576. 6:04:34करते थे? राजा शंकर शाह से इनका क्या
  8577. 6:04:37संबंध था? और कहां पर इनकी मुठभेड़ होती
  8578. 6:04:40है? तो आई होप इतना अभी मैंने आप लोगों को
  8579. 6:04:42जब बताया तो आपको समझ में आ गया होगा। आगे
  8580. 6:04:45की स्लाइड भी मैं आप लोगों को बता देता
  8581. 6:04:47हूं। देखिए इसमें लिखा हुआ है कि इसकी
  8582. 6:04:50सूचना जैसे ही यह निमाड़ में आते हैं तो
  8583. 6:04:52इसकी सूचना अंग्रेजों को लग गई थी और यह
  8584. 6:04:54भी माना जाता है कि गोंडवाना के दमन के
  8585. 6:04:56साथ ही अंग्रेजों ने अंग्रेजों की नजर वीर
  8586. 6:04:59सीताराम कमर पर थी। उनके हर मूवमेंट पर
  8587. 6:05:01अंग्रेजों की नजर थी। इसीलिए गोंडवाना के
  8588. 6:05:04दमन के साथ कीटिंग को निमाड़ रवाना किया
  8589. 6:05:07गया। यानी मेजर कीटिंग एक बड़ी सेना लेकर
  8590. 6:05:09निमाड़ आता है। वीर सीताराम कमर के दमन के
  8591. 6:05:12लिए अंग्रेजों ने तीन ओर से घेरा था। दो
  8592. 6:05:16टुकड़ियां तो कीटिंग के साथ आई और तीसरी
  8593. 6:05:18टुकड़ी नागपुर से आई जिसका कैंप बैतूल में
  8594. 6:05:21था जो नागपुर वाली टुकड़ी थी। अब कीटिंग
  8595. 6:05:24ने इस समय वायसराय को एक लेटर लिखा था।
  8596. 6:05:26उससे पता चलता है हमें कि क्या कहानी रही
  8597. 6:05:28होगी। कीटिंग ने वायसराय को वीर सीताराम
  8598. 6:05:30कमर का मूवमेंट लिखा था और सूचना दी थी कि
  8599. 6:05:33वह सीताराम कमर और विद्रोहियों को समाप्त
  8600. 6:05:36करने दो टुकड़ियों के साथ डंग जा रहा है।
  8601. 6:05:39इस पत्र में कीटिंग ने अंग्रेजी सेना में
  8602. 6:05:42दो टुकड़ियों के नायक यानी जो उनके कमांडर
  8603. 6:05:44थे उनको बदलने की बात कही थी और इन दोनों
  8604. 6:05:47टुकड़ियों के नए नायकों के नाम थे। एक का
  8605. 6:05:49नाम था फरज अली और एक का नाम था दिलेर
  8606. 6:05:52खान। यह एक्चुअली में उसे होलकर सेना से
  8607. 6:05:54मिले थे। तो थोड़ा सा इंपॉर्टेंट है। फरज
  8608. 6:05:57अली और दिलेर खान थे। इन लोगों ने जाकर
  8609. 6:05:59क्या किया? डंग गांव को घेर लिया। ठीक है?
  8610. 6:06:02तो डंग गांव को रात में घेर लिया गया।
  8611. 6:06:04मुकाबला जो है शुरू हो गया और रात को जब
  8612. 6:06:08घेरा सुबह-सुबह लड़ाई शुरू हुई। तो देखिए
  8613. 6:06:11क्या होता है। वह डेट जिसमें इतिहास दर्ज
  8614. 6:06:15है। 9 अक्टूबर 1858 की दिन था। जब 78
  8615. 6:06:19क्रांतिकारियों के द्वारा अपना बलिदान
  8616. 6:06:22दिया गया। उनके बाद अंग्रेजों ने डंग गांव
  8617. 6:06:24सहित आसपास के अनेक जो गांव थे उनमें
  8618. 6:06:27सर्चिंग शुरू की और गांव खेतों जंगलों में
  8619. 6:06:29आग लगाना शुरू कर दी। जहां जो दिखा उसे
  8620. 6:06:32मौत के घाट उतार दिया। अंग्रेजों ने इस
  8621. 6:06:34क्षेत्र में सामूहिक अत्याचार किए और गांव
  8622. 6:06:37के गांव उजाड़े। जो क्रांतिकारी नहीं थे
  8623. 6:06:39उन्हें भी नहीं छोड़ा। यह डंग गांव
  8624. 6:06:41अंग्रेजों के अत्याचार का शिकार इसलिए हुआ
  8625. 6:06:44था क्योंकि वीर सीताराम कंवर का जन्म इसी
  8626. 6:06:46डंग गांव में हुआ था। उनके नेतृत्व में ही
  8627. 6:06:49वनवासियों की टुकड़ी ने अंग्रेजी फौज से
  8628. 6:06:52मुकाबला किया था और इस संघर्ष में 20
  8629. 6:06:54क्रांतिकारी मुकाबला करते हुए बलिदान हो
  8630. 6:06:56गए। वीर सीताराम कमर का बलिदान होते ही
  8631. 6:06:59शेष क्रांतिकारी बंदी बना लिए गए और इन
  8632. 6:07:02बंदियों की संख्या 58 थी जिन्हें कैंप में
  8633. 6:07:04ले जाकर तोप से उड़ा दिया गया। इस तरह
  8634. 6:07:07संघर्ष में कुल 78 बलिदान हो जाते हैं।
  8635. 6:07:11कहने का तात्पर्य यह है कि वीर सीताराम
  8636. 6:07:14कमर मध्य प्रदेश के उन वीर योद्धाओं में
  8637. 6:07:17शामिल है जिन्होंने 1857 की क्रांति में
  8638. 6:07:20अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और इनका जो
  8639. 6:07:24संबंध है वह निमाड़ के खरगोन जिले के डंग
  8640. 6:07:27गांव से है। लेकिन इनका जो संबंध है वह
  8641. 6:07:30गोंडवाना रियासत के राजा शंकर शाह से भी
  8642. 6:07:32है। यह आपको याद रखना है क्योंकि अब मैं
  8643. 6:07:35आपको बता रहा हूं कि कमर शब्द का क्या
  8644. 6:07:37अर्थ है और आखिरकार क्यों हमने यह इसको
  8645. 6:07:40वहां पे कनेक्ट किया था। तो देखिए यह आगे
  8646. 6:07:42की कहानी लिखी है कि उनका सर काटकर जो है
  8647. 6:07:45तलवार से लटका कर पूरे क्षेत्र में फैलाया
  8648. 6:07:47गया जिससे कि वहां पर दहशत का माहौल बनाया
  8649. 6:07:50जा सके। देखिए शहीद सीताराम जो कंवर है
  8650. 6:07:53इनकी जो जयंती है इनका जो बलिदान दिवस है
  8651. 6:07:56वो 9 अक्टूबर को मनाया जाता है। याद
  8652. 6:07:58रखिएगा 9 अक्टूबर 1858 को इनकी जो है
  8653. 6:08:01मृत्यु हुई थी। ठीक है? यह आप याद रखेंगे
  8654. 6:08:04क्योंकि उसके बाद जो है 16 अक्टूबर को
  8655. 6:08:07उसने एक पत्र लिखा था कीटिंग ने। तो इसका
  8656. 6:08:09जिक्र किया गया है कि 16 अक्टूबर 58 को एक
  8657. 6:08:11उसने पत्र लिखा था और उसमें उसने कहा था
  8658. 6:08:14क्या कहा था?
  8659. 6:08:16कि मेजर कीटिंग ने अंग्रेज गवर्नर को लिखा
  8660. 6:08:18कि जिसमें उसने 78 का तो आंकड़ा दिया था।
  8661. 6:08:21उसने बताया था मेजर कीटिंग ने कि इस
  8662. 6:08:23क्षेत्र में हमने 78 लोगों को मार डाला और
  8663. 6:08:25लिखा कि गांव में कॉम्बिंग ऑपरेशन कर दिया
  8664. 6:08:27गया है। अब कोई विद्रोही ना बचा है। यह
  8665. 6:08:30पत्र 16 अक्टूबर 1858 का है। तब अंग्रेजों
  8666. 6:08:33की तलाश अभियान में यह कॉम्बिंग ऑपरेशन
  8667. 6:08:36शब्द प्रचलित था। कॉम्बिंग ऑपरेशन का मतलब
  8668. 6:08:39क्या होता है? जिस तरह कंघी से सिर में
  8669. 6:08:41जुएं की तलाशी की जाती है, वैसे ही उस समय
  8670. 6:08:44सेना विद्रोहियों की तलाशी करती थी। ठीक
  8671. 6:08:47है? आई होप सीताराम कमर के बारे में जो
  8672. 6:08:50मेन बातें थी वो आपको समझ में आ गई होंगी।
  8673. 6:08:53देखिए गोंडवाना और महाकशल प्रदेश आपने
  8674. 6:08:56सुना महाकशल इनके क्या मतलब है? इसके बारे
  8675. 6:08:59में थोड़ा सा बताया गया है। देखिए
  8676. 6:09:02आज भले प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से
  8677. 6:09:05छत्तीसगढ़ पृथक प्रांत हो गया है लेकिन एक
  8678. 6:09:08टाइम था कि जब छत्तीसगढ़ का जो हिस्सा है
  8679. 6:09:10वो मध्य प्रदेश में आता था उस पूरे
  8680. 6:09:11क्षेत्र को गोंडवाना कहते थे। लेकिन एक
  8681. 6:09:14समय मालवा का निमाड़ ठीक है। क्षेत्र
  8682. 6:09:16महाकौशल और छत्तीसगढ़ का एक ही साम्राज्य
  8683. 6:09:19रहा करता था और इसे बोलचाल की भाषा में
  8684. 6:09:21गोंडवाना कहते थे। बेसिकली गोंडवाना एक
  8685. 6:09:23बहुत बड़ा एरिया था जहां पर गोंड जनजाति
  8686. 6:09:26का शासन था। जबकि ऐतिहासिक दृष्टि से इसका
  8687. 6:09:29जो नाम है महाकौशल हुआ करता था जो भगवान
  8688. 6:09:32राम से इसका कनेक्शन है। इस राज्य की
  8689. 6:09:35राजकुमारी कौशल्या थी जो मर्यादा
  8690. 6:09:37पुरुषोत्तम राम जी की माता रही और उनकी
  8691. 6:09:40जन्मस्थली अब छत्तीसगढ़ में है। यानी जो
  8692. 6:09:42कौशल प्रदेश है वह अब छत्तीसगढ़ में है।
  8693. 6:09:44पहले यह हमारा मध्य प्रदेश का भाग भी कौशल
  8694. 6:09:47प्रदेश का हिस्सा था। आगे लिखा है कि अंचल
  8695. 6:09:50में गॉड वनवासी रहते हैं जिनका उपनाम कमर
  8696. 6:09:53है। अब इस शब्द से आप अंदाजा लगा लीजिएगा
  8697. 6:09:56या कनेक्ट कर लीजिएगा कि इनका संबंध जो है
  8698. 6:09:58गोंडवाना रियासत से क्यों था? गोंड राजा
  8699. 6:10:01संघर्ष शाह से क्यों था? क्योंकि गोंड
  8700. 6:10:03वनवासी जो हैं उनका एक उपनाम कमर है और आज
  8701. 6:10:06भी कमर उपनाम के वनवासी जबलपुर मंडला
  8702. 6:10:08छत्तीसगढ़ निर्माण क्षेत्र में मिलते हैं।
  8703. 6:10:10इनका आंतरिक संगठन ज्ञान और वीरता का भाव
  8704. 6:10:12अद्भुत होता है और हर युग के विदेशी
  8705. 6:10:15आक्रांताओं का मुकाबला इस समाज ने सदैव
  8706. 6:10:17साहस और वीरता से किया है। इंदौर के होलकर
  8707. 6:10:20राज्य में भी अधिकांश मैदानी प्रधान के पद
  8708. 6:10:23कमर और वीरों के पास ही रहते थे। आई होप
  8709. 6:10:27जो जानकारी आपको सीताराम कंवर जी के बारे
  8710. 6:10:30में दी गई है आपको अच्छी लगी होगी और आप
  8711. 6:10:33लोगों को यह जो मध्य प्रदेश के वीरों का
  8712. 6:10:35इतिहास जो सीरीज है उसमें आप हर दिन एक नए
  8713. 6:10:38वीर योद्धा के बारे में जानते हैं और इससे
  8714. 6:10:40आप अपने एग्जाम में भी इस जानकारी का
  8715. 6:10:42सदुपयोग कर पाएंगे। तो इसी के साथ इस सेशन
  8716. 6:10:45को मैं यहीं समाप्त करता हूं। कल फिर
  8717. 6:10:47मिलेंगे एक महत्वपूर्ण वीर योद्धा के साथ
  8718. 6:10:50और चर्चा करेंगे आगे। तब तक के लिए जय
  8719. 6:10:53हिंद। थैंक यू।

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