M - Type Brain — Transcript
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- 0:00नमस्ते। अगर आप लाइफ टाइम यह चीजें सुनते
- 0:02आए हैं कि आपका एक काम पर फोकस नहीं होता
- 0:05है। आप चार दिन के लिए एक काम पकड़ते हो,
- 0:07फिर पांचव दिन छोड़ देते हो। बचपन से आपको
- 0:10यह कहा जा रहा है कि या आप खुद बच्चे हैं
- 0:12और अभी घर वालों के साथ ये प्रॉब्लम चल
- 0:14रही है आपकी कि आपका एक काम में मन नहीं
- 0:17लगता है और घरवाले जो है आपको ताने देते
- 0:19हैं या यह सिस्टम या ये सोसाइटी जो है यह
- 0:21क्वेश्चन मार्क आप पर डालती है कि आप एक
- 0:23काम पे फोकस नहीं करोगे तो बर्बाद हो
- 0:25जाओगे। लाइफ में कितने दिन ऐसे चलेगा कि
- 0:27आप चार दिन एक काम कर रहे हो, दो दिन
- 0:29दूसरा काम कर रहे हो, एक करियर चुनो। इतनी
- 0:31चीजें एक साथ कोई कैसे कर सकता है? और
- 0:33अंदर से आपको यह फील होने लग गया है कि
- 0:35आपके अंदर कुछ गड़बड़ है। तो आज का वीडियो
- 0:38स्पेशली आपके लिए है या आपके पेरेंट्स के
- 0:41लिए है या उन लोगों के लिए है। स्पेशली
- 0:43टीचर्स के लिए है। क्योंकि एक नई चीज
- 0:45साइकोलॉजी में मैं पढ़ रहा था। मुझे मिली
- 0:47तो मेरे को लगा कि आपसे शेयर करनी ही
- 0:49चाहिए। तो सबसे पहले अगर आप वो लोग हैं
- 0:51जिनको घर वाले इस तरह के ताने देते आए हैं
- 0:53कि भाई तुम एक काम नहीं कर रहे हो तुमने
- 0:5510 काम शुरू करके बीच में छोड़ दिए 11व
- 0:57काम में शुरू हो गए तो आप ब्रोकन नहीं है
- 1:00आप हो सकता है एक स्पेशल कैटेगरी में आते
- 1:03हो इस स्पेशल कैटेगरी को कहते हैं कैटेगरी
- 1:05एम एम टाइप का ब्रेन जो होता है एम मतलब
- 1:08मल्टी पोटेंशियलेट अभी मल्टीपोटेंशियल
- 1:11मल्टी पोटेंशियल मतलब बहुत सारी चीजें
- 1:13इनके अंदर करने की कैपेसिटी होती है तो
- 1:15अगले कुछ मिनट्स के अंदर हम बात करेंगे कि
- 1:17एम टाइप का ब्रेन अगर आपके पास है तो आप
- 1:20अपनी सेल्फ इमेज कैसे चेंज कर सकते हैं और
- 1:22एम टाइप का ब्रेन अगर आपके पास है तो कैसे
- 1:24आप दुनिया से अलग हो सकते हैं। जैसे ही
- 1:26मैंने बात करी दुनिया से अलग होने की तो
- 1:28मैं यहां पर बताना चाहूंगा कि दुनिया में
- 1:30लोग अपना रास्ता दो तरह से बनाते हैं। एक
- 1:33वो जो भरे पड़े हैं दुनिया में जिनको
- 1:34स्पेशलिस्ट कहा जाता है। स्पेशलिस्ट मतलब
- 1:36सब जानते हैं कि वो लोग जो एक रास्ता पकड़
- 1:39लेते हैं। उस एक ही रास्ते पे जीवन भर
- 1:41अपना जो है पूरा फोकस बनाए रखते हैं और
- 1:43उसी एक ही रास्ते पर चलते जाते हैं। ये
- 1:46होते हैं स्पेशलिस्ट। जैसे एक आदमी ने
- 1:4812th क्लास बायो से पास करी। फिर उस आदमी
- 1:51ने एमबीबीएस किया। एमबीबीएस के बाद उस
- 1:54आदमी ने एमडी किया या एमएस किया। उसके बाद
- 1:57वो और आगे चला गया। सुपर स्पेशलाइजेशन
- 1:59किया। उसके बाद उसने अपना हॉस्पिटल डाला।
- 2:01ये लोग जो होते हैं ये सक्सेस की गारंटी
- 2:03माने जाते हैं कि एक फील्ड पकड़ लिया। उस
- 2:05एक फील्ड के अंदर वो चले ही जा रहे हैं।
- 2:07अब सीधा रास्ता स्पेशलिस्ट बनने का रास्ता
- 2:10है। सब जानते हैं। एक ही फील्ड में डीप
- 2:12जाओ। इतना डीप जाओ। अगर माउंटेन है तो
- 2:14उसमें ऊंचाई तक जाओ। तो डीप जाना है तो
- 2:16इतना डीप जाओ कि अंत आ जाए उसका वहां तक
- 2:18चलते जाओ। दूसरा रास्ता जो है दूसरा
- 2:20रास्ता है मल्टीपोटेंशियलाइट रास्ता। अब
- 2:23ये जो मल्टीपोटेंशियलाइट रास्ता है ये
- 2:25बच्चे कैसे चलते हैं? ये बच्चे चलते हैं
- 2:27कि भाई चलते-चलते थोड़े दिन साइंस भी पढ़
- 2:28रहे हैं। फिर साइंस पढ़ते-पढ़ते कोई उनको
- 2:31किसी दिन म्यूजिक में इंटरेस्ट आ गया। वो
- 2:32म्यूजिक भी सीख रहे हैं। उनको दुनिया भी
- 2:34घूमना है। उनको वीडियो बनाने भी सीखने
- 2:37हैं। एडिटिंग भी सीखनी है। उनको कागज के
- 2:39जहाज बनाने में मजा आता है। उनको
- 2:40माइक्रोस्कोप से भी खेलना है। उनको ब्रश
- 2:42से भी खेलना है। मतलब ये इस बच्चे को जब
- 2:45भी कोई देखेगा तो वो कहेगा यार ये तो
- 2:46बर्बाद है इसकी तो लाइफ। लेकिन नहीं।
- 2:48साइंस कह रहा है ऐसा नहीं है। कि क्यों?
- 2:50कि ये जो बच्चा है हो सकता है ये बच्चा एम
- 2:54टाइप हो। और एम टाइप मतलब मैं बार-बार बोल
- 2:56रहा हूं मल्टी पोटेंशियलाइट हो। अब जो
- 2:58मल्टी पोटेंशियल लाइट है वो क्या होता है
- 3:00कि मल्टीपोटेंशियल वो होता है जो बहुत
- 3:03सारे जिसके इंटरेस्ट हो और एक से ज्यादा
- 3:05जगह पे उसका क्रिएटिव साइड जो है वो बहुत
- 3:08अच्छा दिखता हो। मतलब म्यूजिक हो सकता है,
- 3:09आर्ट हो सकता है, साइंस हो सकता है,
- 3:11टेक्नोलॉजी हो सकता है, हो सकता है वो
- 3:12बुक्स लिखता हो, कुछ भी करता हो। ठीक है?
- 3:15अब जो सीधे रास्ते पे जा रहा है वो
- 3:17कॉन्फिडेंस देता है घर वालों को। जो
- 3:19माउंटेन की तरफ जा रहा है, कॉन्फिडेंस
- 3:20देता है घर वालों को। क्योंकि उनको पता है
- 3:22या तो डॉक्टर बन जाएगा या इंजीनियर बन
- 3:24जाएगा, लॉयर बन सकता है, ये एक अच्छा टीचर
- 3:25बन सकता है, ये एक अच्छा सब्जेक्ट
- 3:26एक्सपर्ट बन सकता है। ये पीएचडी कर सकता
- 3:28है। पेरेंट्स जो है प्राउड फील करते हैं।
- 3:30मैट्रिमोनियल एड्स जो आते हैं वो इन्हीं
- 3:32के बेसिस पर लिखे जाते हैं कि भ बंदा ये
- 3:34करता है हमारा। दूसरे रास्ते की जिसकी मैं
- 3:37बात कर रहा हूं जो सीधा नहीं है जो घूम
- 3:38फिर के जा रहा है रास्ता। इसमें कर्व्स है
- 3:41बहुत सारे। रेलवे क्रॉसिंग आते हैं। ऐसे
- 3:42क्रॉसिंग है। आसपास में बिखरा पड़ा है।
- 3:44कहीं पे इनके रास्ते में गिटार आ रही है।
- 3:46कहीं पे माइक्रोस्कोप आ रहा है। कहीं पे
- 3:48बीच में गुनाहों का देवता आ रहा है। कहीं
- 3:50पे बीच में कुछ और आ गया। कहीं पे गजल
- 3:52सीखने लग गए। कहीं पे ये तबला सीखने लग
- 3:54गए। कहीं पे मूवी बनाना सीख रहे हैं। पूरी
- 3:57दुनिया की आर्ट से सीखना चाह रहे हैं। अब
- 3:59किसी से भी पूछा जाए तो वो क्या कहेगा कि
- 4:02पहला रास्ता चुनो। क्यों? क्योंकि इसमें
- 4:04प्रेडिक्टबिलिटी है। इसमें पता है कि
- 4:06सक्सेस के चांसेस ज्यादा है। लेकिन साइंस
- 4:10ने यह प्रूफ कर दिया है कि कुछ लोग ऐसे
- 4:12हैं जो जन्म से ही इस रास्ते के लिए बने
- 4:15हैं। और अगर इस रास्ते के लिए कोई बना है,
- 4:17नेचर ने उसको इस रास्ते के लिए बनाया है।
- 4:19तो इसका मतलब यह है कि उसके दिमाग की
- 4:21वायरिंग ही उस हिसाब से हुई है। उस आदमी
- 4:24को अगर आप इस रास्ते पर धकेलेंगे तो वो
- 4:26आदमी परेशान रहेगा जीवन भर। अब हमारी
- 4:28सोसाइटी की आदत क्या है? कि वायरिंग यह
- 4:30वाली हो या यह वाली हो तुम्हें तो ऐसे ही
- 4:33करना पड़ेगा। सक्सेस तभी मिलेगी जब तुम एक
- 4:35ही काम को ऐसे पकड़ के चलोगे। लेकिन नहीं
- 4:37ऐसा नहीं है। एक साइंटिस्ट है जिनका नाम
- 4:39है एमली वेपनिक। एमली वेपनिक।
- 4:47एमली वेपनिक ने सबसे पहले सामने आकर बात
- 4:50करी एम टाइप की मतलब मल्टी पोटेंशियलाइट
- 4:53की। मल्टी मतलब बहुत सारे पोटेंशियल मतलब
- 4:55क्षमताएं। उनके अंदर कैपेसिटी। एक ऐसा
- 4:58आदमी जिसके अंदर अलग-अलग डायरेक्शंस में
- 5:00काम करने की कैपेसिटी होती है और इनमें से
- 5:02ऐसा नहीं है कि वो किसी भी सेक्टर में आगे
- 5:05नहीं निकलने वाला है। अच्छा इनकी एक और
- 5:06चीज ये देखा जाता है कि अक्सर जो एम टाइप
- 5:09ब्रेन वाले लोग होते हैं उनके लाइफ में
- 5:13जैसे ही वो 40 की ऐज तक आते हैं तब तक
- 5:15किसी को ऐसे लगता है कि ठीक-ठाक चल रही है
- 5:17लाइफ इनकी। अब इनके बहुत सारे इंटरेस्ट
- 5:19होंगे। लोग सोचेंगे यार ये ये भी कर रहा
- 5:21है, ये भी कर रहा है, ये भी कर रहा है।
- 5:22एग्जांपल देंगे उसको कि उसका एग्जांपल ले
- 5:24देख उसने इंजीनियरिंग कर ली। उसका पैकेज
- 5:25लग गया। उसने एमबीबीएस कर उसने हॉस्पिटल
- 5:27डाल लिया। उसने एलएलबी कर ली। वो वकील बन
- 5:30गया। और ये जो है ये बहुत सारे काम कर रहा
- 5:32है। करते करते एकदम से ऐसा माना जाता है
- 5:35कि 40 की ऐज के आसपास आके इनका पीक होता
- 5:38है एम टाइप पर्सनालिटी का। और ये जो 40 की
- 5:40ऐज के पास जब ये लोग अपने पीक पर आते हैं
- 5:42तो जिन लोगों के एग्जांपल आप दिया करते
- 5:44थे। ये इतने कैपेबल हो जाते हैं कई बार कि
- 5:46उन लोगों को ये हायर करके अपने यहां पर
- 5:48काम देते हैं कि आओ मेरे यहां पे काम करो
- 5:50तुम। मैं तुम्हें काम देता हूं। तो रियल
- 5:52लाइफ एग्जांपल की बात अगर हम करें तो एक
- 5:54आते हैं लनार्डो द विंची। सुना होगा आपने
- 5:56लनार्डो द विंसी जो है अगर वो आज के टाइम
- 6:00में पैदा होते तो लनार्डो द विंसी को भी
- 6:02आज के करियर काउंसलर क्या बोलते कि बेटा
- 6:04या तो पेंटर बन जाओ या साइंटिस्ट बन जाओ
- 6:06या तो इंजीनियर बन जाओ या आर्किटेक्ट बन
- 6:09जाओ हम दो एक से ज्यादा फील्ड में कामयाब
- 6:11नहीं हो सकते लेकिन आप जानते हो अगर
- 6:13लनार्ड दो वेंची आज होते तो मोनालिसा
- 6:16थोड़ी मिलती हमको एनाटमी के डायग्राम
- 6:18थोड़ी मिलते जिनको आज भी एमबीबीएस की
- 6:19बुक्स के अंदर स्टडी किया जाता है हमको
- 6:21फ्लाइंग मशीन के डिजाइन थोड़ी मिलते जिनको
- 6:23स्पेस साइंस वाले साइंटिस्ट पढ़ते हैं
- 6:25रविंद्र नाथ टैगोर का एग्जांपल आप ले सकते
- 6:26हो। अगर वो सिर्फ पोएट होते तो जन गण मन
- 6:29तो मिल जाती अपने को लेकिन उन्होंने जो
- 6:31पेंटिंग्स बनाई उनका क्या होता? उन्होंने
- 6:32जो गाने लिखे उनका क्या होता? उन्होंने जो
- 6:34फिलोसफी की बातें की उनका क्या होता?
- 6:36उन्होंने एथिक्स पे जो लिखा उनका क्या
- 6:37होता? उन्होंने जो नवेल लिखे शांति निकेतन
- 6:40लिखा उसका क्या होता? तो इसका मतलब यह है
- 6:42ना कि जो चीजें की बात हम कर रहे हैं कि
- 6:44भाई हम जहां पर बात कर रहे हैं कि मल्टी
- 6:47पोटेंशियल लाइट जो है यह होना बुरा है या
- 6:50अच्छा है उसके एग्जांपल्स एक इंटरनेशनल और
- 6:52एक नेशनल लेवल का हमारे सामने है। अब हम
- 6:54आगे बात करते हैं थोड़ा सा डिटेल के अंदर
- 6:56कि जो मल्टी पोटेंशियलाइट है इनके ब्रेन
- 6:58की वायरिंग कैसे दूसरों से अलग होती है?
- 7:00तो सबसे पहले तो यह समझो कि यह जो एक से
- 7:03ज्यादा सेक्टर में इंटरेस्ट लेने वाले लोग
- 7:05होते हैं इनकी जर्नी तीन स्टेज में होती
- 7:07है। तीन स्टेज के अंदर चलती है। इनकी लाइफ
- 7:09की पहली स्टेज जो है वो होती है स्कैनर।
- 7:12स्कैनर क्या होता है? जैसे स्कैन करते हैं
- 7:14ना हर चीज को। ठीक है? वैसे होता है
- 7:16स्कैनर। तो अब ये क्या है? स्कैनर बारबारा
- 7:19शेर नाम के एक थे। उन्होंने सबसे पहले ये
- 7:22स्कैनर जो थे उनकी एक बुक है बड़ी फेमस
- 7:24रिफ्यूज टू चूज़। उस बुक के अंदर उन्होंने
- 7:27ये काम में लिया है ये टर्म। स्कैनर क्या
- 7:29होता है? स्कैनर वो बच्चा है। अच्छा अक्सर
- 7:32स्कैनर पर्सनालिटी जो है यह 20 की ऐज से
- 7:34पहले दिखने लग जाती है कि इसके अंदर
- 7:36स्कैनर पर्सनालिटी के गुण है। और स्कैनर
- 7:38वाले बच्चे जो है उनके घर वालों से बहुत
- 7:39झगड़े होते हैं। स्कैनर वो बच्चा है जो
- 7:41क्यूरियस है। हर चीज उसको जाननी है। हर
- 7:45चीज उसके हाथ में हो सकता है कभी
- 7:47टेलीिस्कोप आ जाए तो उसको स्पेस सीखना है।
- 7:49किसी दिन माइक्रोस्कोप आ गया उसको
- 7:50माइक्रोबायोलॉजी सीखनी है। उसको हिस्ट्री
- 7:53भी पढ़नी है। उसको पेंटिंग भी सीखनी है।
- 7:55उसको कोडिंग भी सीखनी है। उसको किताबें भी
- 7:57पढ़नी है। उसको हर चीज मतलब वो क्या कर
- 7:59रहा है? वो स्कैन कर रहा है इस दुनिया को।
- 8:00इसलिए उसको कहते हैं स्कैनर। उसका कोई एक
- 8:02स्पेसिफिक गोल नहीं है। उसको लर्निंग
- 8:04चाहिए, एक्सप्लोरेशन चाहिए। उनके उसके
- 8:07दिमाग को किक मिलती है इस चीज से। नईनई
- 8:09चीजें उसको सीखनी है। इन बच्चों के
- 8:11पेरेंट्स हमेशा दुखी रहते हैं। इन बच्चों
- 8:12के पेरेंट्स कहते हैं इसका फोकस ही नहीं
- 8:14है। इनके टीचर्स जो है वो पेरेंट्स को
- 8:16बुला के मीटिंग के अंदर बोलते हैं कि ये
- 8:17बच्चा स्कैटर्ड है। एक जगह अगर ये फोकस कर
- 8:20ले तो ये कुछ भी कर जाएगा। बट रियलिटी
- 8:21क्या है? रियलिटी ये है इस बच्चे की ब्रेन
- 8:24की वायरिंग उसके अंदर एक मैप बना रही है।
- 8:27यह जो मैप है यह मैप ऐसे है जैसे मैप पे
- 8:30हम लोकेशन पिन करते हैं। ऐसे उस बच्चे का
- 8:32जो ब्रेन है उस ब्रेन के अंदर लोकेशनेशंस
- 8:35को पिन कर रहा है दिमाग। ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे
- 8:38मतलब ये उसकी लाइफ में तैयार होने की पहली
- 8:41स्टेज रेडी हो रही है। जिसको हम कह रहे
- 8:43हैं स्कैनर। अब जो स्कैनर है वो बहुत सारी
- 8:45चीजों से इंटरेक्ट करेगा। इंटरेक्ट करता
- 8:47जाएगा, करता जाएगा, करता जाएगा। साथ में
- 8:49लर्निंग भी हो रही है। कुछ चीजें सीखता जा
- 8:51रहा है, सीखता जा रहा है। तो उसके ब्रेन
- 8:53के कई सारे हिस्से अलग-अलग काम के लिए जो
- 8:55बने हैं वो डेवलप होते जाएंगे। अब जब ये
- 8:58डेवलप होते जाएंगे तो कॉर्पस केसम और
- 9:00दूसरे पार्ट्स जो है वो जब कनेक्शन अपना
- 9:02दिखाना शुरू करेंगे। न्यूरॉन्स की फायरिंग
- 9:03जब अपना असर दिखाना शुरू करेगी और हमारे
- 9:05ब्रेन की सबसे बड़ी पावर जिसको
- 9:07न्यूरोप्लास्टिसिटी बोलते हैं।
- 9:08न्यूरोइलास्टिसिटी बोलते हैं वो जब अपना
- 9:11काम करना शुरू करेगी तब इन लोगों की आती
- 9:12है स्टेज टू। अब मैंने क्यों कहा था कि 40
- 9:15के आसपास यह अपने पीक पर होते हैं कि 20
- 9:17से 30 के बीच में या 30 से 40 के बीच में
- 9:20कहीं भी यह मल्टीपोटेंशियल एट जो है उसको
- 9:23टच करना शुरू कर देते हैं। अब ये
- 9:25मल्टीपोटेंशियल एट क्या होता है कि इस
- 9:27आदमी ने एक से ज्यादा फील्ड एक्सप्लोर
- 9:30किए। अब ये जो एक से ज्यादा फील्ड उसने
- 9:32एक्सप्लोर किए थोड़ा थोड़ा थोड़ा थोड़ा सब
- 9:34सीखता गया। लेकिन होगा क्या कि अब जो है
- 9:36स्कैनर जो कैपेसिटी थी उसके अंदर कोई भी
- 9:39एक से ज्यादा फील्ड के अंदर अब उसके
- 9:41स्पाइक आने लग जाते हैं। अब तक थी
- 9:43क्यूरियोसिटी मतलब उसको जानना था। यहां
- 9:46स्टेज वन जो थी दैट वाज़ क्यूरियोसिटी की
- 9:49स्टेज। अब वो कैपेसिटी की स्टेज में एंटर
- 9:53कर गया है। मतलब पहले क्यूरियस था। अब वो
- 9:55कैपेसिटी कैरी कर रहा है। मतलब यहां पर उस
- 9:58आदमी को यह पता था कि मैं नहीं जानता।
- 10:00यहां उस आदमी को पता लग गया कि बहुत सी
- 10:02चीजें हैं जो मैं जानने लग गया हूं। अब
- 10:05यहां हो सकता है वो 10 फील्ड को एक्सप्लोर
- 10:07कर रहा था। अब 10 से हो सकता है घट के तीन
- 10:10ही रह जाए। बट ये जो तीन फील्ड है इसके
- 10:12इंटरेस्ट के इन तीन फील्ड के अंदर याद
- 10:15रखिएगा बाकी के सात फील्ड जो उसने
- 10:17एक्सप्लोर किए वो एक्सपीरियंस और वो जज्बा
- 10:19जो है वो भी इसकी हेल्प करेगा। हो सकता है
- 10:22ये जो स्पाइक की बात मैं कर रहा हूं ये
- 10:23आर्ट्स के अंदर आए। हो सकता है ये स्पाइक
- 10:25जो है ये साइंस के अंदर आए। हो सकता है
- 10:27टेक्नोलॉजी में आए। मतलब सेम क्यूरियोसिटी
- 10:29रहेगी। बट अब एकदम शार्पनेस आ जाएगी। उसके
- 10:32आईडिया जो है वो क्लियर होने शुरू हो
- 10:34जाएंगे। रिस्चरर्स जो है वो इसको इस तरह
- 10:36से क्लेरिफाई करते हैं कि भाई अब क्या हुआ
- 10:38है? इसने पिक करना शुरू किया है कि मेरे
- 10:40को इन तीन फील्ड के अंदर घुसना है। अब
- 10:43क्या होता है कि अब इससे अगली स्टेज जो
- 10:45आती है ये स्टेज वन थी। अब आई स्टेज टू और
- 10:48अब ये दुनिया पे राज करना शुरू करेंगे। अब
- 10:51आएगी इनकी स्टेज थ्री। स्टेज थ्री जो है
- 10:53यह पॉलीमैथ स्टेज होती है। पॉलीमेथ स्टेज
- 10:56जो है यह अप्रोक्समेटली ऐसा कहते हैं 40
- 10:58के आसपास या 40 के बाद आना शुरू होती है।
- 11:01अब ये जैसे ही यहां पर पहुंचेंगे तो होगा
- 11:03क्या? तो पॉलीमैथ स्टेज जो है ये वो स्टेज
- 11:05है जिसमें ये कह सकते हैं कि अब एक्चुअल
- 11:08में अचीवमेंट्स दिखनी शुरू हो जाएंगी। अब
- 11:10इनकी एक्सपर्टीज एक से ज्यादा फील्ड में
- 11:12दिखनी शुरू हो जाएंगी। आप नाम लेना शुरू
- 11:14करें। आप गूगल करके देखें लनार्डो द विंसी
- 11:16मैं हमेशा कहता हूं बेंजामिन फ्रैंकलिन की
- 11:18बात आप कर सकते हैं डॉक्टर एपीजे अब्दुल
- 11:20कलाम की बात आप कर सकते हैं और आपको बहुत
- 11:22सारे एग्जांपल मिल जाए रविंद्र नाथ टैगोर
- 11:24की बात कर सकते हैं ये सब पॉलीमैप थे यहां
- 11:26पे ये फार्मूला अपने को दिमाग में याद
- 11:27रखना है कि स्कैनर जो है वो मल्टी
- 11:30पोटेंशियलेट को डिस्कवर करता है स्कैनर जब
- 11:32बहुत सारी चीजों को स्कैन करता है तो वो
- 11:34बनता है मल्टीपोटेंशियलाइट मल्टी
- 11:36पोटेंशियलाइट जब डिस्कवर करता है तब वो
- 11:38बनता है पॉलीमैथ और पॉलीमैथ जो है वो जाके
- 11:41डिलीवर करता है सोसाइटी को तो इसको ऐसे कह
- 11:43सकते कि स्कैनर स्टेज जो है वो डिस्कवरी
- 11:46की स्टेज है। यहां पर उसने डिस्कवर किया
- 11:48है कि क्या मेरे को चाहिए। मल्टी
- 11:50पोटेंशियल एड जो है ये डेवलपमेंट की स्टेज
- 11:52है और पॉलीमथ जो है ये डिलीवर की स्टेज
- 11:54है। तो एम टाइप के लोग जो है उनका ब्रेन
- 11:56तीन तरह से चल रहा है। सबसे पहले स्कैनर
- 11:59स्टेज है। स्कैनर स्टेज जो है वो डिस्कवर
- 12:02करने की स्टेज है। हो सकता है 10 सेक्टर,
- 12:04आठ सेक्टर, 50 सेक्टर वो डिस्कवर कर रहा
- 12:06हो कि मेरे को क्या पसंद है। उन्होंने तय
- 12:08कर लिया कि हमें यह पसंद है। तो यह जो है
- 12:10यह आगे जाकर डेवलप हो जाएंगे। मल्टी
- 12:14पोटेंशियलाइट में मल्टी पोटेंशियलाइट जो
- 12:16है उनकी बात जब हम कर रहे हैं तो उस टाइम
- 12:18उन्होंने क्या किया? उन्होंने डेवलप करना
- 12:20शुरू कर दिया। मतलब यह जो 10 फील्ड पकड़े
- 12:22थे इसमें से कोई से तीन फील्ड पकड़े और
- 12:25इनके अंदर ये ग्रोथ करना शुरू कर देंगे।
- 12:27फिर उससे आगे जो है यही बनते हैं पॉलीमैथ।
- 12:30अब पॉलीमैथ जो है ये सोसाइटी को करते हैं
- 12:32डिलीवर। अब जब यह सोसाइटी को डिलीवर करने
- 12:35पर आते हैं तो याद रखना इनके पास फेम आता
- 12:38है। इनका बहुत बड़ा नेम होता है और जिसकी
- 12:41आप बात करते हैं पैसा वो तो इनके आगे पीछे
- 12:44घूमता है। ऐसा आज तक की स्टडीज कहती हैं।
- 12:47अब जैसे ही आप पॉलीमैथ की बात करते हो
- 12:49जैसे ही आप आगे निकलने लगते हो इससे कि भ
- 12:51इस लेवल पर अगर आ गए तो आपको एक और चीज
- 12:53पता होनी चाहिए कि इनमें से कोई भी चीज
- 12:56हमारे ब्रेन की एक्टिविटी के बिना तो हो
- 12:58नहीं सकती। और इसमें किसका रोल होता है?
- 13:01तो आपको याद रखना है कि वही खिलाड़ी है
- 13:04यहां भी डोपामिन। अब कोई आदमी कैसे स्कैनर
- 13:08से मल्टीपोटेंशियल मल्टीपोटेंशियलाइट से
- 13:12पॉलीमैथ के अंदर जाएगा। तो इसके पीछे सबसे
- 13:15बड़ा जो रीजन है वो है डोपामिन। अब हम सब
- 13:18जानते हैं नहीं जानते तो एक लाइन में सीख
- 13:20लीजिए कि डोपामिन क्या है? जब भी हम कुछ
- 13:23अच्छा करते हैं, हमारे ब्रेन की
- 13:25केमिस्ट्री है। जब भी हमें कुछ अच्छा लगता
- 13:27है, उस टाइम डोपामिन की वजह से ही हमें
- 13:29अच्छा लगता है। अगर आपको आज तक लगता है कि
- 13:31मल्टी पोटेंशियलिटी जो है वो बस एक हैबिट
- 13:34है और आप इसको ब्रेक कर सकते हैं तो आपके
- 13:37लिए हैरानी वाली बातें इस स्लाइड के अंदर
- 13:39छुपी हुई है। आपके ब्रेन की केमिस्ट्री ही
- 13:41अलग है। जो लोग एम टाइप पैदा हुए हैं उनका
- 13:44डोपामिन अलग तरह से काम करता है। डोपामिन
- 13:47सब में सेम है। सब में न्यूरोट ट्रांसमीटर
- 13:49है। डोपामिन सब में काम सेम है। बट यहां
- 13:51पर क्या है? डोपामिन जो है वो काम करता है
- 13:53एक तरह से नोवेल्टी सीकिंग केमिकल।
- 13:56नोवेल्टी सीकिंग का मतलब कि कुछ नया चाहिए
- 13:58इन लोगों को। जब कोई नई चीज मिलती है, जब
- 14:00कुछ नया सीखते हैं तो इन लोगों के दिमाग
- 14:02में डोपामिन की फायरिंग होती है। अब एक
- 14:05बच्चा है उस बच्चे को रोज सेम सब्जेक्ट
- 14:08पढ़ने में खुशी मिलती है। दूसरा बच्चा है
- 14:11उसने एक सब्जेक्ट सीखा। उसके बाद उसको कुछ
- 14:14नया चाहिए। भाई रीजन इसके पीछे रीजन ये
- 14:16नहीं है कि ये बच्चा लापरवाह है। दूसरे
- 14:18वाला बच्चा जो है इसके दिमाग की
- 14:20केमिस्ट्री अलग है। इसके दिमाग की वायरिंग
- 14:22अलग है। वेल्डिंग करके जब ऊपर वाले ने
- 14:24बनाया था तो उसको बोल के भेजा था कि तेरे
- 14:26को एम टाइप पर्सनालिटी बना के भेज रहा
- 14:29हूं। तेरे को वहां जाके दुनिया में ये जो
- 14:31यही वो लोग होते हैं एम टाइप वाले ही। आगे
- 14:33मैंने जॉब का भी बताया है इसके अंदर। आगे
- 14:35एक स्लाइड है उसके अंदर मैं ये भी बताऊंगा
- 14:37कि इन लोगों को कभी भी वो नौकरी नहीं
- 14:39पकड़नी चाहिए जो सुबह से शाम एक ही जैसे
- 14:41काम वाली नौकरी है। उठ के मर जाएंगे ये
- 14:43अगर इनको ये नौकरी पकड़ा दी तो इन लोगों के
- 14:45लिए अलग-अलग तरह के जॉब एडवाइसेस हैं। तो
- 14:47एम टाइप ब्रेन भगवान ने स्पेशल बना के
- 14:50भेजा है। और अगर स्पेशल बना के भेजा है तो
- 14:52उनका डोपामिन रिलीज कब होगा? उनका डोपामिन
- 14:55रिलीज तब होगा जब उनको कुछ अलग मिलेगा।
- 14:57जैसे 2024 में नेचर कम्युनिकेशन बायोलॉजी
- 15:01में एक लैंडमार्क रिसर्च पब्लिश हुई थी।
- 15:03उसके अंदर रिसर्च के अंदर इन्होंने क्या
- 15:05बोला है? उस रिसर्च के अंदर इन्होंने बोला
- 15:07है कि जो डोपामिन कनेक्शन है डायवर्जेंट
- 15:11थिंकिंग जो है उसके साथ सीधा सीधा कनेक्शन
- 15:14ये है कि जितने नई तरह की चीजें ये लोग
- 15:16सीखते हैं वो चीजें उतना ही उनके अंदर
- 15:19डोपामिन बढ़ाती है। और कमाल की बात बाद
- 15:21में यह पता लगा कि इन लोगों के अंदर जीन
- 15:24ही बाकियों से अलग है। दिस इज एसोसिएटेड
- 15:27विद डोपामिन बट इनका डोपामिन नोवेल्टी सीख
- 15:30करता है। इस बच्चे का डोपामिन तब आ रहा है
- 15:32जब सेम चीज बार-बार कर रहा है। इसमें
- 15:34डोपामिन तब आ रहा है जब उसको नया कुछ मिल
- 15:36रहा है। और ये नया कुछ कैसे मिल रहा है?
- 15:38तो ये कह रहे हैं कि इसके जींस ही अलग है।
- 15:40जींस का मतलब ये बच्चा ही अलग है। बाकियों
- 15:43के जैसा है ही नहीं। और हम क्या कर रहे
- 15:44हैं? लगे हुए हैं सबको एक जैसा बनाने के
- 15:47अंदर। इस बच्चे को डांटने में लगे हुए हैं
- 15:48कि तू एक ही एक काम क्यों नहीं करता है?
- 15:50तो ब्रेन की बात जब मैं कर रहा हूं तो
- 15:52हमें यह भी पता होना चाहिए कि ब्रेन के
- 15:54अंदर अलग-अलग रीजन है। अलग-अलग एरियाज हैं
- 15:58जो इस डोपामिन या मल्टीपोटेंशियलाइट
- 16:00बिहेवियर से रिलेटेड होते हैं। इसमें
- 16:02इनवॉल्वड होते हैं। जैसे प्रीफ्रंटल
- 16:05कॉर्टेक्स होता है। प्रीफ्रंटल अब
- 16:07प्रीफ्रंटल [नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 16:08कॉेक्स जो होता है यहां पे माथे के पीछे
- 16:10होता है। ये इसको हम बोल सकते हैं हमारे
- 16:12दिमाग का ये सीईओ है। अब ये क्या करता है?
- 16:15ये सीईओ एक तरह से मान के चलिए कि हमारे
- 16:17ब्रेन के जितने भी एग्जीक्यूटिव फंक्शनंस
- 16:19होते हैं पोल से रिलेटेड चीजें होती हैं
- 16:21वो सारी चीजें प्रीफ्रंटल कॉेक्स देखता
- 16:23है। फिर अब जो मल्टीपोटेंशियलाइट लोग होते
- 16:25हैं उनके अंदर क्या होता है? मल्टी
- 16:27पोटेंशियलाइट में स्पेशल टाइप से ये
- 16:29प्रोग्राम्ड होता है कि मल्टीपल गोल्स जो
- 16:32है उनको एक साथ ट्रैक कर सकता है। तो जो
- 16:35नॉर्मल बच्चा है ये भी नॉर्मल है। ऐसा
- 16:37नहीं कि एबनॉर्मल है। जो नॉर्मल बच्चा है
- 16:39जिसकी सोसाइटी को आदत है उसका ब्रेन एक ही
- 16:42गोल को फोकस करके उसी को ट्रैक कर सकता
- 16:44है। मल्टीपोटेंशियलाइट या एम टाइप ब्रेन
- 16:46जो है वो एक से ज्यादा गोल फिक्स करेगा और
- 16:49उन सबको उसका ब्रेन अलग-अलग ट्रैक करता
- 16:52है। ऐसा स्टडीज में पाया गया है। फिर उसके
- 16:54बाद एक होता है एंटीरियर सिंगुलेट
- 16:56कॉर्टेक्स एसीसी। एसीसी जो है बड़ा कमाल
- 16:59का है। एसीसी का काम क्या है कि दो डिसीजन
- 17:02लेने हैं। उन दोनों के बीच में स्विच
- 17:04कराने का काम करता है। तो एक तरह का ये
- 17:06बटन है। तो जैसे आप मैथ्स में कोई
- 17:08प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं और एक फार्मूला
- 17:10काम लेना है। दूसरा फार्मूला काम लेना है।
- 17:12तो एसीसी की हेल्प से आप फाइंड आउट करते
- 17:14हैं कौन से वाला फार्मूला कहां पे काम आना
- 17:16चाहिए। यह काम एसीसी का है। ऐसा देखा गया
- 17:19है कि एंटीरियर सिंगुलेट कॉेक्स जो है ये
- 17:23एक टास्क से दूसरे टास्क में स्विच करते
- 17:25टाइम जो एक स्मूथ वे बनाता है
- 17:27मल्टीपोटेंशियलाइट लोग जो होते हैं उनके
- 17:29अंदर ये हाइपर एक्टिव होता है। अब होता
- 17:31क्या है कि 5 मिनट के अंदर ये लोग टॉपिक
- 17:33चेंज कर सकते हैं बिना कंफ्यूज हुए। हो
- 17:35सकता है ये आपसे हिस्ट्री की बात कर रहे
- 17:37हो। अगले पांच मिनट बाद ये साइंस की बात
- 17:39करनी शुरू कर दें आपसे। यह
- 17:40मल्टीपोटेंशियलाइट होने का एक बहुत बड़ा
- 17:42सबूत है। फिर उसके बाद आता है तीसरे नंबर
- 17:45पर पेसल गेंग्लिया। तो देखो पेसल
- 17:48गेंग्लिया जो है ये डोपामिन का घर होता
- 17:50है। ये रिवॉर्ड प्रोसेसिंग यहीं से होती
- 17:53है। रिवॉर्ड प्रोसेसिंग का मतलब जब
- 17:55मल्टीपोटेंशियलाइट को कुछ नया सीखने को
- 17:57मिलता है तो वहां से खूब सारा डोपामिन
- 17:59निकलता है। इसके बेसल गैंगिया से ऐसे भरभर
- 18:02के फवारे निकलते हैं डोपामिन के। तो इसको
- 18:04अच्छा लगता है। तो यह हर नई चीज जो सीखता
- 18:07है वही इसके लिए नशा बन जाता है। कोई शराब
- 18:09का नशा करता है, कोई कुछ करता है। इनको
- 18:11नई-नई चीजें सीखने का नशा होता है। और
- 18:13इनको इस बात की परवाह ही नहीं होती है कि
- 18:16इनकी लाइफ के अंदर इसका क्या असर होगा।
- 18:18लोग इनसे पूछते हैं इसको देख के हमें
- 18:20टेंशन हो जाती है। कई मां-बाप होते हैं
- 18:22ऐसे वो कहते हैं इसको तो टेंशन है नहीं।
- 18:24हमें इसको देख के टेंशन होती है। इतना
- 18:25मस्त क्यों रहता है ये? चार दिन ये पढ़
- 18:27रहा है, पांच दिन ये पढ़ रहा है। आपका
- 18:29बच्चा हो सकता है एम टाइप पर्सनालिटी हो।
- 18:31फिर उसके बाद में एक आता है डिफॉल्ट मोड
- 18:34नेटवर्क। डिफॉल्ट मोड मैंने आपको पहले भी
- 18:36बताया था एक बार जब मैंने स्क्रॉलिंग वाली
- 18:38बात करी थी। डिफॉल्ट मोड क्या होता है? कि
- 18:40ये वो टाइम है जिस टाइम आपका ब्रेन जो है
- 18:43वो अलग ही लेवल पे आइडलाइज करता है चीजों
- 18:46को। डिफॉल्ट मोड नेटवर्क हमारे ब्रेन का
- 18:48माइंड वंडरिंग जो होती है इसका मैजिक है।
- 18:51ये सबसे फैसनेटिंग चीज है। ठीक है?
- 18:54डिफॉल्ट मोड नेटवर्क तब एक्टिव होता है जब
- 18:56आप कुछ कर नहीं रहे होते हो। फॉर एग्जांपल
- 18:58आप शावर चल रहा है। आप नहा रहे हो। ठीक
- 19:00है? अब आप नहा रहे हो तो उस टाइम नहाने को
- 19:02एंजॉय कर रहे हो। तो कई बार देखा होगा कि
- 19:05नहाते टाइम आपका दिमाग कुछ चीजें एकदम से
- 19:07ले आता है। अब जो मल्टी पोटेंशियलाइट जो
- 19:10होते हैं एम टाइप लोग होते हैं उनको सबसे
- 19:12ज्यादा आइडियाज तब आएंगे जब वो नहा रहे
- 19:13हैं। तो ये लोग नहाते टाइम या वाशरूम में
- 19:16बैठे हैं, फ्रेश होने गए हैं। वहां पे
- 19:19टॉयलेट में पॉट सीट पे बैठे-बैठे ये लोग
- 19:2150 तरह के आइडियाज इनके दिमाग में आते
- 19:23हैं। ये मल्टी पोटेंशियल लाइट। अब ये
- 19:24मल्टी पोटेंशियल लाइट को मोबाइल फोन चलाने
- 19:26वालों से कंफ्यूज नहीं करना है। तो इनके
- 19:28थॉट्स जो होते हैं वो बहुत बार शावर थॉट्स
- 19:30होते हैं। या फिर बहुत बार ऐसे होते हैं
- 19:32रात को 2:00 बजे आंख खुल गई। उस टाइम
- 19:33दिमाग के अंदर आ रहा है। ये इनके पॉज
- 19:35पॉइंट्स होते हैं। फिर उसके बाद पांचवे
- 19:37नंबर पे ब्रेन के अंदर मिला है
- 19:38फ्रंटोपेराइटल कंट्रोल नेटवर्क।
- 19:40फ्रंटोपरेटर पेट्रोल नेटवर्क जो है यह वो
- 19:43है मतलब आपके पास 10 आईडियाज है उन 10
- 19:45आईडियाज में से एक आईडिया को कौन सा
- 19:47आईडिया अच्छा है कौन सा नहीं है उसको
- 19:49इवैलुएट करने का काम करता है तो अब जो
- 19:51मल्टी पोटेंशियलाइट होते हैं उनके अंदर ये
- 19:53औरों से ज्यादा काम करता है तो ये क्या कर
- 19:55सकते हैं ये एक से ज्यादा चीजों को कनेक्ट
- 19:58करके देख सकते हैं आम आदमी उनको मिस कर
- 20:01जाएगा इनको पैटर्न लिखते हैं मैं फिर कह
- 20:03रहा हूं आम आदमी इनको मिस कर जाएगा इनको
- 20:05पैटर्न लिखते हैं तो इसके बाद से साइंस ने
- 20:07कहना शुरू किया कि भाई जो थिंकिंग है ये
- 20:09दो तरह तरह की हो सकती है। एक वो थिंकिंग
- 20:12जो है आप हमेशा से करते आ रहे हो कि जिसको
- 20:15आप कहते हो कि वर्टिकल थिंकिंग। वर्टिकल
- 20:18थिंकिंग का मतलब कि आपने एक चीज पकड़ ली
- 20:21और उस एक चीज पे ही आप काम किए जा रहे हो।
- 20:23जैसे मैंने बताया था कि माउंटेन के एक ही
- 20:25एक एक ही एक रास्ते पे चले जा रहे हैं। तो
- 20:27जो आम आदमी है वो ये वाला रास्ता पकड़ता
- 20:30है। तो उसमें वो क्या करता है कि वो फैक्ट
- 20:32पढ़ता है। फैक्ट पढ़ता है। फिर उससे आंसर
- 20:34निकालता है। फिर फैक्ट पढ़ता है। फिर आंसर
- 20:36निकालता है। लाइक दिस और ये वर्टिकल वे
- 20:38में चलता है। वर्टिकल मतलब ये एक ही एक
- 20:40फील्ड एक ही एक फील्ड पकड़ लिया। उसके
- 20:41अंदर चलता है। क्योंकि ये एक ही एक दिशा
- 20:44में चल रहे हैं। तो इनको कन्वर्जेंट कह
- 20:45देते हैं। जो दूसरे वालों की बात मैं कर
- 20:48रहा हूं। एम टाइप पर्सनालिटी की बात कर
- 20:50रहा हूं। उनके अंदर जो थिंकिंग होती है वो
- 20:51होती है डायवर्जेंट थिंकिंग। इन लोगों के
- 20:54लिए हो सकता है इनकी किताब ही इनकी दुनिया
- 20:56हो। इन लोगों के लिए हो सकता है किताब से
- 20:58ज्यादा मजेदार चीज इंद्रधनुष देखना हो।
- 21:01किताब से ज्यादा मजेदार चीज बाहर जाकर
- 21:03गार्डन में बैठना हो। किताब से ज्यादा मजे
- 21:05इनको आते हो किसी और काम में। तो इनके साथ
- 21:07क्या होता है? इनके दिमाग में जब क्वेश्चन
- 21:08आता है तो उससे रिलेटेड आइडियाज आते हैं।
- 21:11आइडियाज आते हैं, आइडियाज आते हैं।
- 21:12आइडियाज आते हैं। तो ये जो डायवर्जेंट
- 21:14थिंकिंग और कन्वर्जेंट थिंकिंग है इन
- 21:16दोनों को अगर मिला दें तो तब बन के आते
- 21:19हैं एम टाइप में वो लोग जिनकी क्रिएटिविटी
- 21:22मैं कह रहा था कि बहुत हाई होती है। पीक
- 21:24हाई होता है इनका। तो ये क्या करते हैं?
- 21:26ये लॉजिक भी यूज करते हैं और ये लोग
- 21:28इमेजिनेशन भी यूज करते हैं। और ऐसा देखा
- 21:30गया है कि यही वो लोग होते हैं जो आउट ऑफ
- 21:34द बॉक्स जाके सोचते हैं। फिर आगे हम बात
- 21:36करें सबसे इंपॉर्टेंट चीज कि क्या आप या
- 21:40आप एम टाइप पर्सनालिटी हैं? और अगर एम
- 21:43टाइप पर्सनालिटी हैं तो कैसे पता लगेगा कि
- 21:45भ आप एम टाइप है या नहीं है? तो इसके लिए
- 21:48सिंपल सी बात आती है कि एम टाइप है या
- 21:50नहीं? इसके लिए एक टेस्ट है एक तरह का। वो
- 21:52टेस्ट क्या है कि टोटल सेवन चीजें दी गई
- 21:55हैं। सबसे पहली चीज क्या है कि इंटेंस
- 21:58इंटेलेक्चुअल क्यूरियोसिटी कि आपका मन है
- 22:01कि मेरे को ये भी सीखना है, ये भी सीखना
- 22:03है, ये भी सीखना है, ये भी सीखना है, ये
- 22:05भी सीखना है। ये बहुत पावरफुल एक संकेत
- 22:07माना गया है। नहीं तो होता क्या है? आदमी
- 22:09को एक चीज में मजा आता है बस उसी को सीखता
- 22:10जाता है। दूसरे नंबर पर एम टाइप
- 22:12पर्सनालिटी वाले जो होते हैं उनकी रैपिड
- 22:14लर्निंग एबिलिटी होती है। जिस चीज में
- 22:16उनका इंटरेस्ट है उसको वो यूं सीख लेंगे।
- 22:19नहीं हो और जिसमें इंटरेस्ट नहीं है सारी
- 22:21दुनिया उनके पीछे पड़ जाए उनको आप सिखा
- 22:23नहीं सकते। फिर उसके बाद तीसरे नंबर पर
- 22:25आता है हाई सेंसिटिविटी। ये जो होते हैं
- 22:28इनके अंदर इमोशनल इंटेलेक्चुअल सेंसरी ये
- 22:32सारी की सारी चीजें जो है ये हाई होती है।
- 22:34बहुत हाईली सेंसिबल होते हैं ये लोग। ठीक
- 22:36है? इनको चीजें पता लगती है। चौथा
- 22:38इंपॉर्टेंट सिम्टम है कि पैटर्न कि इनको
- 22:41चीजों में पैटर्न दिखते हैं। ये वो लोग
- 22:43होते हैं जिनको पता होता है कि ऐसा होगा।
- 22:45कई बार ये अपने दोस्तों को बता के भी रखते
- 22:47हैं कि देख लेना इसके साथ यह होगा या किसी
- 22:49के साथ यह होता है तो यह जानते हैं कि
- 22:51मेरे को पता था यह होगा। रीजन इनका दिमाग
- 22:53पैटर्न को नोटिस करता है कि ऐसे ऐसे
- 22:55पैटर्न चलता है चीजों का। फिर उसके बाद
- 22:57पांचवा एनालिसिस पैरालाइसिस ये बहुत
- 23:01इंपॉर्टेंट चीज है। ये इनका एक नेगेटिव
- 23:03होता है। नेगेटिव क्या होता है कि एक
- 23:05रिसर्च हुई थी डेब्रोवक्स की। डेब्रोवाकस
- 23:08की रिसर्च ने ये कहा कि क्योंकि इनको एक
- 23:11से ज्यादा फील्ड आते हैं क्योंकि इनको एक
- 23:13से ज्यादा चीजों में इंटरेस्ट होता है तो
- 23:14ये लोग डिसीजन नहीं ले पाते हैं। ये एक
- 23:16नेगेटिव इनके साथ होता है कि एक डिसीजन
- 23:18नहीं ले पाते। दूसरी तरफ एक आदमी है जो एक
- 23:21ही काम कर रहा है तो उसका तो डिसीजन
- 23:22ऑलरेडी फिक्स है कि उसको तो वही करना है
- 23:24लाइफ में। फिर उसके बाद बोर्डम विदस्टरी
- 23:27एक ही काम बहुत लंबे टाइम तक नहीं कर
- 23:30सकते। ये लोग एक ही काम को बहुत लंबे टाइम
- 23:32तक नहीं कर सकते। तो कोई चीज मेंस्ट इनको
- 23:35नहीं चाहिए। इनको सीखना है। इन जैसे ही
- 23:37सीख लिया उसके बाद और आगे इनको उसके अंदर
- 23:39उस्ताद नहीं बनना है। बस ठीक है। मेरे को
- 23:41बाजा बजाना सीखना था। मैंने सीख लिया। बस
- 23:43अपने को गिटार पे एक धुन आनी चाहिए। बात
- 23:45खत्म। अपन ने गिटार सीख ली। आगे चलो। ये
- 23:47वो वाले लोग नहीं है जो कोई कहे कि मैं 19
- 23:49साल से गिटार सीख रहा हूं। अभी तक मैं ही
- 23:52नहीं सीख पाया। नहीं। ये वो नहीं होते। एम
- 23:54टाइप आर डिफरेंट। ये छठा। और सातवां जो है
- 23:57परफेक्शनिज्म पैराडॉक्स। इनके अंदर क्या
- 24:00होता है कि जो इनके स्टैंडर्ड्स होते हैं
- 24:03वो हाई होते हैं। तो ये क्या करते हैं?
- 24:05बहुत बार इनकंप्लीट फील करते हैं। अंदर से
- 24:08ऐसे फील होता है कि मेरे अंदर कुछ कमी है।
- 24:11तो ये सात सिम्टम है। ऐसा माना गया है कि
- 24:13सात में से पांच या इससे ज्यादा अगर किसी
- 24:16के अंदर आते हैं तो देयर आर चांसेस कि वो
- 24:19एम टाइप के जो है पर्सनालिटी वाले हो।
- 24:22मल्टीपोटेंशियलाइज पर्सनालिटी टाइप के लोग
- 24:25हो वो। ठीक है? अब इनके कुछ एग्जांपल्स की
- 24:28बात हम करते हैं। तो जैसे ही हम एग्जांपल
- 24:30की बात करते हैं तो बड़े फेमस फेमस लोगों
- 24:32के सामने आपके एग्जांपल मिल जाएंगे। ठीक
- 24:34है? बहुत सारे लोग हैं ऐसे। जैसे ही आप
- 24:36जाओगे कि भ इतने बड़े-बड़े लोगों की फोटो
- 24:39यहां पर लगा रखी है। जैसे लार्ड द विंसी
- 24:41की बात हमने कर ली कि लन द विंसी जो है
- 24:43इन्होंने बहुत कुछ किया है। ठीक है? फिर
- 24:45उसके बाद आप देखें यहां पे अल्बर्ट
- 24:46आइंस्टाइन। अब अल्बर्ट आइंस्टाइन जो है
- 24:48उन्होंने अपनी लाइफ में क्या नहीं किया?
- 24:50अल्बर्ट आइंस्टाइन जो थे उन्होंने खुद
- 24:52बोला था कि भ इट इज नॉट दैट आई एम सो
- 24:55स्मार्ट। आई एम जस्ट स्टे विद प्रॉब्लम्स
- 24:57लगर। कि मैं बहुत ज्यादा स्मार्ट नहीं
- 24:59हूं। मैं बस एक प्रॉब्लम आती है तो उसके
- 25:01अंदर घुसा रहता हूं। घुसा रहता हूं। ठीक
- 25:03है? उनका दिमाग जो है कनेक्शंस बनाया करता
- 25:05था। अब अल्बर्ट आइंस्टाइन जो है वो इतना
- 25:07आगे क्यों निकल गए? क्योंकि उनके अंदर
- 25:09दोनों चीजें हैं। डायवर्ज थिंकिंग भी है
- 25:11और उनके अंदर जो उन्होंने एक पे फोकस करना
- 25:14भी सीख लिया जो मैंने बताया था कि दोनों
- 25:15वाला इनके अंदर मिलता है आपको। अब अल्बर्ट
- 25:18आइंस्टाइन को यहां क्यों डाला? तो अल्बर्ट
- 25:19आइंस्टाइन की लाइफ आप देखेंगे तो अल्बर्ट
- 25:21आइंस्टाइन जो है फिलॉसफर भी है। अल्बर्ट
- 25:23आइंस्टाइन वायलिन भी बजाते थे। अल्बर्ट
- 25:24आइंस्टाइन फिजिक्स भी पढ़ते थे। अल्बर्ट
- 25:26आइंस्टाइन जो है उनके और 10 शौक आपको मिल
- 25:28जाएंगे। सेम इस केस विद लुइस पाश्चर ऐसी
- 25:31ही लाइफ मिलेगी स्टीव जॉब्स की। ऐसी लाइफ
- 25:33मिलेगी गैलीलियो की बेंजामिन फ्रैंकलिन
- 25:35कहां बेंजामिन फ्रैंकलिन इलेक्ट्रिसिटी की
- 25:37स्टडी कर रहे थे कि आसमान से बिजली कैसे
- 25:39गिरती है? इन्हीं बेंजामिन फ्रैंकलिन ने
- 25:41आगे जाके जो यूएसए है उसकी आजादी की लड़ाई
- 25:45के अंदर पार्टिसिपेट किया है। यही
- 25:46बेंजामिन फ्रैंकलिन जो है पॉलिटिकल
- 25:48आईडियोलॉजी के अंदर इनको पढ़ा जाता है
- 25:49बहुत जगह पर। तो ऐसे एक दो नहीं बहुत सारे
- 25:52एग्जांपल आपको मिल जाएंगे जहां लोगों ने
- 25:54एक से ज्यादा फील्ड के अंदर जो है हासिल
- 25:57किया है कुछ ना कुछ। ठीक है? तो जो
- 25:58मल्टीपोटेंशियलाइट होते हैं उनके साथ एक
- 26:00प्रॉब्लम आ सकती है अगर वो लोगों को फॉलो
- 26:03करें तो उसका रीजन क्या है? देखो दुनिया
- 26:05कैसे चलती है? दुनिया कहती है अल्बर्ट
- 26:07आइंस्टाइन वाली है कि लोग जज करेंगे एक
- 26:10मछली को कहेंगे कि तेरे को पेड़ पे चढ़ना
- 26:12नहीं आता इसलिए तेरा जीना बेकार है।
- 26:14अल्बर्ट आइंस्टाइन कहते हैं कि बीच-बीच
- 26:16में ट्रेंड आएंगे। ये ट्रेंड कैसे आएंगे
- 26:17कि जो पेड़ पे चढ़ना जानता है उसके लिए
- 26:19लोग तालियां बजाएंगे। रीज़न उस टाइम ज्यादा
- 26:21लोग पेड़ पे चढ़ रहे होंगे। उस टाइम पे
- 26:23मछली को डिप्रेशन में मार देंगे कि देख
- 26:25तेरे को पेड़ पे चढ़ना नहीं आता। ठीक है?
- 26:26अब फिर चाहे हाथी है, चाहे शेर है, सबको
- 26:29ऐसे ही नापती है दुनिया। तो फिश
- 26:30क्लाइंबिंग ट्री प्रॉब्लम बोलते हैं इसको।
- 26:32अल्बर्ट आइंस्टाइन कहते हैं कि हर आदमी
- 26:33जीनियस है दुनिया का। लेकिन उसको तुम नाप
- 26:36कैसे रहे हो? अब जो एम टाइप का बच्चा है
- 26:38वो बच्चा पैदा हुआ है 50 काम हैंडल करने
- 26:41के लिए। उसको तुम कह रहे हो कि तूने टॉप
- 26:43नहीं किया क्लास के अंदर। उसको आंसर आते
- 26:45हैं बट हो सकता है एक्साइटमेंट ही नहीं हो
- 26:47उसमें वो आंसर देने वाला। ठीक है? ऐसे ही
- 26:49दूसरे नंबर पे आप जब बात करेंगे तो हम
- 26:52क्या करते हैं? हम एक चीज बना के रखते हैं
- 26:54कि भाई आपको इस लेवल पर परफॉर्म करना है।
- 26:57हम पूरी दुनिया को नापते हैं एक ही चीज से
- 26:59जिसको कहते हैं स्कूल के टेस्ट। जो स्कूल
- 27:01के टेस्ट में अच्छा कर गया वो दुनिया पे
- 27:04राज करेगा। लेकिन ऐसा देखा गया है कि
- 27:06जरूरी नहीं कि स्कूल के टेस्ट में जो टॉप
- 27:08करे वो आदमी लाइफ में भी टॉप कर जाए। हो
- 27:11सकता है अच्छी जॉब मिल जाए लेकिन अच्छी
- 27:13जॉब मिलना और अच्छा पैसा कमाना। जरूरी
- 27:15नहीं कि सक्सेस की गारंटी हो। बहुत सारे
- 27:17लोग ऐसे होते हैं जो बाद में स्ट्रगल कर
- 27:19रहे हैं इस बात से कि यार मैं इस जॉब में
- 27:21आया क्यों? रीजन हो सकता है आपकी वायरिंग
- 27:23एम टाइप रही हो और आप वर्टिकल वाले केस के
- 27:26अंदर घुस गए और एक ही एक चीज करते करते
- 27:27जिंदगी निकाल दी हो। ठीक है? अब इन लोगों
- 27:30के साथ एम टाइप वालों को अगर आप डाल दोगे
- 27:32उस सिस्टम में जो सिस्टम सिर्फ एक ही तरह
- 27:34की चीज कराता है। तो सबसे पहली चीज हो
- 27:36सकता है उनके साथ ये हो कि जीवन भर इस पेन
- 27:39में रहे कि यार मुझे ये सीखना था ये सीखना
- 27:40था। मेरे को डॉक्टरी की पढ़ाई करनी थी। ये
- 27:42नहीं कर पाया। मेरे को ये वो उस चीज के
- 27:44अंदर हो सकता है स्ट्रेस में लाइफ टाइम
- 27:46अंदर से घिरे रहे वो। दूसरे नंबर पर हो
- 27:48सकता है सोसाइटी जो है वो यह कहे इनको
- 27:51लाइफ टाइम कि एक चीज पकड़ लो बस एक चीज पर
- 27:53पकड़ो और यह जो है इनको लगे कि यार मेरा
- 27:55क्या कसूर है तो ये बच्चे जो है अंदर से
- 27:57टूटा हुआ फील करते हैं उस वजह से फिर
- 28:00तीसरे नंबर पे इनके साथ एकिस्टेंशियल
- 28:01क्वेश्चन आने लग जाते हैं एकिस्टेंशियल
- 28:03क्वेश्चन मतलब ये बच्चा कहता है यार मेरी
- 28:05खुद की मर्जी नहीं है क्या कोई और एक्चुअल
- 28:07में ये एम टाइप ब्रेन है और ये इस बात से
- 28:09स्ट्रगल कर रहा है कि यार मेरा एक चीज पे
- 28:11फोकस नहीं है इसका मतलब ये मेरी कमी है
- 28:13इसको ये पता ही नहीं है कि इसके ब्रेन में
- 28:15बेसल गेंग्लिया जो है वो डोपाम देता ही तब
- 28:17है जब कुछ नया सीखता है और एक बेसिक लेवल
- 28:19तक सीखने के बाद इसका ब्रेन स्विच कर देता
- 28:21है। फिर उसके बाद ये लोग जो है यह
- 28:23इंपोस्टर सिंड्रोम के शिकार हो जाते हैं।
- 28:25इंपोस्टर सिंड्रोम का मतलब आदमी को ऐसे
- 28:28लगने लग जाता है कि वो जहां पहुंचा है
- 28:30उसके काबिल वो है नहीं। आदमी अपनी
- 28:32काबिलियत को जो है उससे कम आंकने लग जाता
- 28:35है। तो एम टाइप वाले जो बच्चे हैं उनके
- 28:37साथ डील करते टाइम स्पेशल ध्यान रखना
- 28:39चाहिए होता है। फिर अपन आगे बात करें तो
- 28:43जब भी कभी एम टाइप वाले बच्चे से बात करें
- 28:45तो आपको ये चीज ध्यान रखनी है कि कभी भी
- 28:48ये बातें नहीं कहनी है कि बच्चे को ये
- 28:49नहीं कहना है कि तुम एक चीज पे फोकस क्यों
- 28:51नहीं कर पाते हो? बजाय इसके बच्चे से ये
- 28:53पूछना है कि यार बताओ आजकल तुम्हारा मन
- 28:56किस चीज में लग रहा है भाई? बताओ क्या सीख
- 28:58रहे हो? बच्चे का एकदम मूड चेंज हो जाएगा।
- 29:00उसको लगेगा यस नाउ पेरेंट्स आर टॉकिंग विद
- 29:02मी इन माय लैंग्वेज। फिर दूसरे नंबर पर
- 29:05आपके दोस्त जो है उन्होंने अपना-अपना काम
- 29:08कर लिया है। आप कहां घूम रहे हो? वो देखो
- 29:09वो कहां पहुंच गया? वो कहां पहुंच गया?
- 29:11तूने लाइफ में क्या किया है? नेवर कंपेयर
- 29:13एम टाइप चाइल्ड विद अदर चाइल्ड। ठीक है?
- 29:16अब क्यों? तो उसकी बजाय ऐसे कह सकते हो कि
- 29:18भाई देखो आई एम नोटिसिंग दैट यू आर
- 29:21कनेक्टिंग आइडियाज फ्रॉम डिफरेंट एरियाज।
- 29:23दैट्स वैल्यूुएबल कि बेटा मैं एक चीज
- 29:25नोटिस कर रहा हूं कि उसने हो सकता है एक
- 29:27एग्जाम क्रैक करके कॉलेज में एडमिशन ले
- 29:29लिया हो। उसने हो सकता है कहीं सिलेक्शन
- 29:30ले लिया हो। बट आपके अंदर एक कैपेसिटी है
- 29:32जो उसके अंदर नहीं है। आप अलग-अलग सेक्टर
- 29:35की चीजों को कनेक्ट करना शुरू कर गए हो।
- 29:36इसका मतलब आप लाइफ में कुछ अच्छा करोगे।
- 29:38फिर उसके बाद बच्चों को ये कभी नहीं बोलना
- 29:41है कि एक करियर बनाओ उठाओ और उसी पर फोकस
- 29:43करो। नहीं अगर एम टाइप बच्चा है तो उसको
- 29:45बोलो कि बेटा आप एक काम करो अपने इंटरेस्ट
- 29:47जो है आपको जिस चीज में इंटरेस्ट आता है
- 29:49उसके अंदर घुसने की कोशिश करो। फिर यू आर
- 29:52वेस्टिंग योर पोटेंशियल कि तुम अपना
- 29:53पोटेंशियल नष्ट कर रहे हो। कैसे कि तुमने
- 29:55पहले ये किया फिर ये किया फिर ये किया फिर
- 29:57ये किया। तुम्हें अगर यही करना था तो ये
- 30:00डिग्री क्यों करी थी? तुम अगर यही करना
- 30:01चाहते थे तो इसकी पढ़ाई क्यों करी थी? ऐसी
- 30:03बातें कभी भी एम टाइप पर्सनालिटी के साथ
- 30:05नहीं करनी है। मैं फिर कह रहा हूं एम टाइप
- 30:08वाला जिस दिन राइज करना शुरू करेगा। जिन
- 30:10लोगों के एग्जांपल आप देते हो उन लोगों को
- 30:12किराए पर रखेगा वो अपने यहां पे काम करने
- 30:14के लिए कि मैं मैं देता हूं सैलरी इनको।
- 30:16मेरे यहां काम करते हैं लोग जिनका
- 30:17एग्जांपल देते हो। ठीक है? अब इस बच्चे को
- 30:19क्या बोलना है? उसको बोलना है योर
- 30:21क्यूरियोसिटी इज योर सुपर पावर। कि बेटा
- 30:23तुम्हारी सबसे अच्छी चीज क्या है? कि तुम
- 30:25सीखना चाहते हो और जो सीखना चाहता है वो
- 30:27अपने आप लाइफ में आगे निकल जाता है। तो ये
- 30:29बात हुई कि एम टाइप पर्सनालिटी जो है वो
- 30:32किस तरह से काम करती है। अब अपन इससे अगले
- 30:35सेशन में बात करेंगे कि एम टाइप वाले जो
- 30:37बच्चे हैं उनके लिए कौन-कौन से करियर
- 30:39सूटेबल होते हैं। लेकिन आपको नीचे ये
- 30:42बताना पड़ेगा कमेंट में कि आप में से कोई
- 30:44एम टाइप है क्या? या आपके साथ कभी ऐसा हुआ
- 30:46है क्या कि एम टाइप थे और सोसाइटी ने
- 30:48प्रेशर में आके कोई और रास्ता पकड़ लिया
- 30:50या ये जो सात मैंने बताए थे इनमें से
- 30:52कितने स्कोर आपके अंदर मिल रहे हैं? अगर
- 30:54कुछ नया सीखा तो जरूर बताना। है ना? आपके
- 30:57कमेंट्स के बेसिस पर ही इसका अगला पार्ट
- 30:59हम लेकर के आएंगे। होपफुली आपको मजा आया
- 31:02होगा। स्टे हैप्पी, स्टे ब्लेस। लव यू ऑल।
- 31:04नमस्ते।
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