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Lucent GK 2026 | Lucent History -2 | Lucent Samaanay Gyan 2026 | Lucent New Edition 2026 | SUNBIK — Transcript

by SUNBIK Classes · 25,939 words · 3,440 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपके अपने
  2. 0:02YouTube चैनल सनिक क्लासेस में। हम लोग
  3. 0:04देख रहे हैं लुसेंट सामान्य ज्ञान के न्यू
  4. 0:06एडिशन 2026 में दिया हुआ कंटेंट का मास्टर
  5. 0:09वीडियो जिसमें आज देखेंगे मध्यकालीन भारत।
  6. 0:12आप इसे जरूर देखिए। कम समय में रिवीजन कर
  7. 0:15सकते हैं और अगर आपके पास न्यू वाला एडिशन
  8. 0:17बुक नहीं है तो आपके पास जो पुराने हैं
  9. 0:20उससे मिलान कीजिए और जो इसमें ऐड किया गया
  10. 0:23है वह उसमें लिख लीजिए। तो आइए शुरू करते
  11. 0:26हैं। मध्यकालीन भारत। मध्यकालीन भारत में
  12. 0:29देखेंगे सबसे पहले 28वां चैप्टर भारत पर
  13. 0:32अरबों का आक्रमण क्या है? भारत पर अरबों
  14. 0:34का आक्रमण। मोहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व
  15. 0:37में अरबों ने भारत पर पहला सफल आक्रमण
  16. 0:40किया था। तो प्रश्न बनता है कि भारत पर
  17. 0:43पहला सफल आक्रमण किया किसके नेतृत्व में?
  18. 0:45तो मोहम्मद बिन कासिम के। अरबों ने सिंध
  19. 0:49पर 712 ईस्वी में विजय पाई थी। अरब अरब
  20. 0:53आक्रमण के समय सिंध पर किस राजा का शासन
  21. 0:55था? तो दाहिर का शासन था। क्या ताहिर का
  22. 0:58शासन था। भारत पर अरब वासियों के आक्रमण
  23. 1:01का मुख्य उद्देश्य क्या था? तो धन दौलत
  24. 1:03लूटना तथा इस्लाम धर्म का प्रसार प्रसार
  25. 1:06करना। अरब वासियों के आक्रमण का मुख्य
  26. 1:08उद्देश्य था कि धन दौलत यहां से लूट के ले
  27. 1:10जाना है और इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार
  28. 1:13करना है। यहां सिंध पर अरबों के विजय की
  29. 1:17ऐतिहासिक विवरण जो है चंचनामा लेखक जो है
  30. 1:20अज्ञात है चंचनामा का लेकिन चनामा नामक
  31. 1:22अरबी भाषा में लिखी पुस्तक से मिलती है।
  32. 1:25ये प्रश्न आता है कि चंचनामा जो है किस
  33. 1:27भाषा में लिखा गया है? अरबी में, फारसी
  34. 1:29में, उर्दू में। तो ये किस में लिखा गया
  35. 1:31है? यह अरबी में लिखा गया है। इस पुस्तक
  36. 1:34का फतहनामा ए सिंध या तारीख अल हिंदवल
  37. 1:37सिंध के नाम से भी जाना जाता है। यह
  38. 1:40पुस्तक चर्च नामक ब्राह्मण द्वारा सतह
  39. 1:43स्थापित करने से लेकर राजा दाहिर की हार
  40. 1:45तक के इतिहास का वर्णन करती है। चचनामा के
  41. 1:48अनुसार सिक्सवीं और सातवीं शताब्दी में
  42. 1:51सिंधु देश की राजधानी अरोड़ थी। क्या है?
  43. 1:54अरोड़ थी। सिंधु देश की राजधानी कहां थी?
  44. 1:56अरोड़ थी। चंचनामा का फारसी में अनुवाद
  45. 1:5913वीं शताब्दी में नसीरुद्दीन कुवाचा के
  46. 2:02काल में मोहम्मद अली बिन अबू बकर कुफी
  47. 2:05मोहम्मद अली बिन अबू बकर कुफी अली कुफी ने
  48. 2:08किया था चंचनामा का फारसी में अनुवाद। अब
  49. 2:12आइए जानते हैं महमूद गजनी के बारे में।
  50. 2:15932 ईस्वी में अल्पतगिन नामक एक तुर्क
  51. 2:19सरदार गजनी साम्राज्य की स्थापना की।
  52. 2:21अल्पतगिन नामक एक तुर्क सरदार जिसकी
  53. 2:24राजधानी जो है गजनी थी। अल्पतगिन की
  54. 2:27मृत्यु के पश्चात कुछ समय तक गजनी में
  55. 2:29प्रीतिगिन ने शासन किया। इसी के शासनकाल
  56. 2:33जो है इसी के शासनकाल 972 से 977 ईस्वी
  57. 2:36में सर्वप्रथम भारत पर जो है आक्रमण किया
  58. 2:39गया। प्रथम तुर्क आक्रमण के समय पंजाब में
  59. 2:42शाही वंश का शासक जयपाल जो है शासन कर रहा
  60. 2:45था। जयपाल जो है शासन कर रहा था। अल्पतगिन
  61. 2:48का गुलाम तथा दामाद सुबुकतगिन 977 ईस्वी
  62. 2:52में गजनी की गद्दी पर बैठा। अलबत गिन का
  63. 2:54गुलाम भी था और दामाद था। मुस्लिमों में
  64. 2:57अक्सर जो है वर्णन मिलेगा इतिहास में
  65. 2:59मध्यकालीन भारत में उसमें देखा जाता है कि
  66. 3:02जो गुलाम है वही जो है वो ज्यादातर के
  67. 3:04दामाद रहता है। तो दामाद सुबुक्तगीन जो है
  68. 3:07977 में गजनी की गद्दी पर बैठा। महमूद
  69. 3:10गजनी सुबुक्तगीन का पुत्र था। महमूद गजनी
  70. 3:13किसका पुत्र था? सुबुक्तगीन का पुत्र था।
  71. 3:16जिसका जन्म जो है 1 नवंबर 971 ईस्वी में
  72. 3:20हुआ था। अपने पिता के काल में महमूद गजनी
  73. 3:23खुरासान का शासक था। जब पिता के काल था तब
  74. 3:26जो है वो खुरासान का शासक था। महमूद गजनी
  75. 3:3027 वर्ष की अवस्था में 998 ईस्वी में जो
  76. 3:32है गद्दी पर बैठा। 998 ईस्वी में बगदाद के
  77. 3:35खलीफा अल आदिर बिल्लाह ने महमूद गजनी के
  78. 3:38पद को मान्यता प्रदान करते हुए उसे यमीन
  79. 3:41उद्दौला यमीन उद्दौला तथा यमीन उल मिल्लाह
  80. 3:45की जो है उपाधि दी। महमूद गजनी ने भारत पर
  81. 3:4917 बार आक्रमण किया था। कितने बार 17 बार
  82. 3:51आक्रमण किया? महमूद के भारतीय आक्रमण का
  83. 3:53वास्तविक उद्देश्य जो है धन की प्राप्ति
  84. 3:55था। क्या है? धन की प्राप्ति था। महमूद
  85. 3:58गजनी एक मूर्ति भंजक आक्रमणकारी था। जब भी
  86. 4:02यहां पर से आक्रमण करता था बहुत सारा जो
  87. 4:04है धन लूट कर ले जाता था और बहुत सारे
  88. 4:06मूर्ति को जो है वो खंड विखंड करके जाता
  89. 4:09था। इसलिए जो है गजनी का मूर्ति भंजक
  90. 4:12आक्रमणकारी के नाम से कहा जाने लगा।
  91. 4:14प्रसिद्ध हुआ। महमूद गजनवी ने भारत पर
  92. 4:17प्रथम आक्रमण 1000 ईस्वी में किया तथा
  93. 4:20पेशावर के कुछ भागों पर अधिकार करके वह
  94. 4:22अपने जो है देश लौट गया। महमूद गजनी ने
  95. 4:271001 ईस्वी में जो है वो शाही राजा जयपाल
  96. 4:30के विरुद्ध आक्रमण किया था। इसमें जयपाल
  97. 4:33की जो है पराजय हुई थी। महमूद गजनी ने जो
  98. 4:35है 108 ईस्वी में नगरकोट के विरुद्ध हमले
  99. 4:39को मृत्युवाद के विरुद्ध पहली महत्वपूर्ण
  100. 4:41जीत जो है बताई जाती है। महमूद गजनी ने
  101. 4:45थानेश्वर के चक्र स्वामिन थानेस्वर के
  102. 4:47चक्र स्वामिन की कास्य निर्मित आदम कद
  103. 4:50प्रतिमा को गजनी बेचकर रंगभूमि में रखवाया
  104. 4:54था। किसका? तो थानेस्वर के चक्र स्वामिन
  105. 4:57के। महमूद गजनी का सबसे चर्चित आक्रमण
  106. 5:001025 ईस्वी का है जो सोमनाथ मंदिर
  107. 5:02सौराष्ट्र पर हुआ था। 1025 ईस्वी में जो
  108. 5:05है सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था। इस
  109. 5:07मंदिर की लूट में उसे करीब 20 लाख दीार की
  110. 5:10संपत्ति हाथ लगी थी। सोमनाथ की रक्षा में
  111. 5:13सहायता करने के कारण अनिलवाड़ा के शासक पर
  112. 5:16महमूद ने आक्रमण किया था। सोमनाथ की रक्षा
  113. 5:19में सहायता करने के कारण अनिलवाड़ा के
  114. 5:21शासक पर महमूद ने जो है आक्रमण किया।
  115. 5:24सोमनाथ मंदिर लूट कर ले जाने के क्रम में
  116. 5:27महमूद पर जाटों ने आक्रमण किया था और कुछ
  117. 5:30संपत्ति लूट ली थी। तो कभी-कभी जो है
  118. 5:32प्रश्न आता है कि सोमनाथ मंदिर लूट कर ले
  119. 5:35जा रहा था महमूद गजनी। उस पर जो है कौन से
  120. 5:38कास्ट यानी जाटों ने जो है हमला किया था
  121. 5:41या किसने उसे जो है रोका था? तो वो है
  122. 5:44जाटों ने रोका था और कुछ संपत्ति जो है
  123. 5:46लूट ली थी। सोमनाथ भारत के 12 आदि
  124. 5:50ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। यह गुजरात
  125. 5:52में अरब सागर के तट पर है। 13 नवंबर 1947
  126. 5:55को सरदार वल्लभ भाई पटेल के द्वारा इसका
  127. 5:57पुनर्निर्माण शुरू करवाया गया। 11 मई 1951
  128. 6:01के दिन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के
  129. 6:02द्वारा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा जो है
  130. 6:05की गई। महमूद गजनवी का अंतिम भारतीय
  131. 6:08आक्रमण 1027 ईस्वी में जाटों के विरुद्ध
  132. 6:10था। महमूद गजनी की मृत्यु जो है 1030
  133. 6:13ईस्वी में हो गई। इसलिए जो है जाट जो है
  134. 6:16रोका था तो बाद में जो है 2 साल बाद जाटों
  135. 6:19के विरुद्ध जो है आक्रमण किया और उसके बाद
  136. 6:223 साल के बाद 1030 ईस्वी में जो है महमूद
  137. 6:24गजनी की मृत्यु हो गई। सुल्तान की उपाधि
  138. 6:27धारण करने वाला प्रथम शासक महमूद गजनी था।
  139. 6:30महमूद के सेना में सेबंद राय एवं तिलक
  140. 6:34जैसे हिंदू उच्च पदों पर आसीन थे। अलबरूनी
  141. 6:37फिरदौसी उतवी तथा फारूखी महमूद गजनी के
  142. 6:40दरबार में रहते थे। अलबरूनी फिरदौसी उतवी
  143. 6:43और फरारूकी महमूद गजनी के जो है दरबार में
  144. 6:46रहते थे। नेक्स्ट है मोहम्मद गौरी। क्या
  145. 6:49है? मोहम्मद गौरी। गौर महमूद गजनी के अधीन
  146. 6:53एक छोटा सा राज था। गौर महमूद गजनी के
  147. 6:56अधीन एक छोटा सा राज्य था। 1173 में
  148. 6:59शबुद्दीन मोहम्मद गौरी गौर का शासक बना।
  149. 7:03इसने जो है भारत पर पहला आक्रमण 1175
  150. 7:06ईस्वी में मुल्तान के विरुद्ध किया था।
  151. 7:08मुल्तान के विरुद्ध किया था। मोहम्मद गौरी
  152. 7:11का दूसरा आक्रमण 1178 ईस्वी में पाटन
  153. 7:14गुजरात पर हुआ। यहां का शासक भीम सकेड ने
  154. 7:16गौरी को बुरी तरह जो है परास्त किया।
  155. 7:19मोहम्मद गौरी भारत के विदित प्रदेशों पर
  156. 7:21शासन का भार अपने गुलाम सेनापतियों को
  157. 7:24सौंपते हुए जो है गजनी लौट गया। मोहम्मद
  158. 7:27गौरी की हत्या जो है 15 मार्च 1206 ईस्वी
  159. 7:31में जो है कर दी गई थी। इससे पहले जो है
  160. 7:33मोहम्मद गौरी द्वारा लड़ा गया प्रमुख
  161. 7:35युद्ध देख लेते हैं कि पहला जो है तराइन
  162. 7:37का प्रथम युद्ध काफी प्रसिद्ध है। 1191
  163. 7:40ईस्वी में लड़ा गया था। गौरी एवं
  164. 7:41पृथ्वीराज चौहान के बीच जिसमें चौहान विजय
  165. 7:44हुआ। प्रश्न कभी-कभी पूछा जाता है कि
  166. 7:46पृथ्वीराज चौहान क्या थे? पहला थे तो कि
  167. 7:48दूसरा के तीसरा तो पृथ्वीराज तृतीय थे
  168. 7:51जिन्हें पृथ्वीराज चौहान जो है कहा जाता
  169. 7:53था। तरायन का द्वितीय युद्ध हुआ 1192
  170. 7:56ईस्वी में गौरी एवं पृथ्वीराज चौहान में
  171. 7:59एक साल बाद ही हुआ है तराइन का द्वितीय
  172. 8:01युद्ध इसमें गौरी जो है विजय हुआ। चंदावर
  173. 8:04का युद्ध हुआ 1194 में गौरी एवं जयचंद के
  174. 8:07बीच गौरी जो है वो विजय हुआ। नोट में
  175. 8:10तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान
  176. 8:13का सेनापति जो था वो स्कंद था। क्या है?
  177. 8:15स्कंद था। अब आइए देखते हैं सल्तनत काल।
  178. 8:19क्या है? सल्तनत काल। इससे काफी ज्यादा जो
  179. 8:21है प्रश्न पूछा जाता है। सल्तनत काल में
  180. 8:24देखते हैं पहले गुलाम वंश। गुलाम वंश की
  181. 8:26स्थापना 1206 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक
  182. 8:29ने किया था। वह गौरी का गुलाम था। किसका
  183. 8:32गुलाम था? गौरी का गुलाम था कुतुबुद्दीन
  184. 8:34ऐबक। और कुतुबुद्दीन ऐबक ने गुलाम वंश की
  185. 8:37स्थापना किया 1206 ईस्वी में। गुलामों को
  186. 8:41फारसी में बंदगाह कहा जाता था तथा इन्हें
  187. 8:43सैनिक सेवा के लिए जो है खरीदा जाता था।
  188. 8:47मंगोल के बारे में थोड़ा जान लेते हैं कि
  189. 8:48मंगोल चीन के उत्तर में गोबी के रेगिस्तान
  190. 8:51के निवासी थे। वह एक घूमने फिरने वाले
  191. 8:53अर्धसभ्य जाति थी तथा उनका मुख पेशा
  192. 8:56घोड़ों और अन्य पशुओं का पालन करना था। वे
  193. 8:59बहुत गंदे रहते थे तथा सभी प्रकार का मांस
  194. 9:02खाते थे। उनमें स्त्री विषयक नैतिकता का
  195. 9:05सर्वथा सर्वथा जो है अभाव था। यद्यपि मां
  196. 9:08का सम्मान करते थे। वे विभिन्न कबीलों में
  197. 9:11बटे थे। उन्हीं कबीलों में से एक में 1163
  198. 9:15ईस्वी में तेमुचिन उर्फ़ चंगेज खान का
  199. 9:18जन्म हुआ। जिसे महान जो है चेंजिंग द
  200. 9:22ग्रेट और श्रापित द एक्यूरेसेस दोनों
  201. 9:25पुकारा गया। इसका पिता युसुगाई बहादुर था।
  202. 9:28क्या है? युसुगाई बहादुर था। किसके पिता?
  203. 9:30तो चंगेज खान का। अब आइए गुलाम वंश के आगे
  204. 9:34देखते हैं कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपना
  205. 9:35राज्याभिषेक 24 जून 1206 ईस्वी को किया
  206. 9:38था। कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपनी राजधानी
  207. 9:41लाहौर में बनाई थी। कहां? लाहौर में।
  208. 9:43कुतुब मीनार की नींव कुतुबुद्दीन ऐबक ने
  209. 9:45डाली थी। कुतुबुद्दीन ऐबक ने। दिल्ली का
  210. 9:48कुबत उल इस्लाम मस्जिद एवं अजमेर का ढाई
  211. 9:51दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद का निर्माण ऐबक
  212. 9:53ने करवाया था। कुतुबुद्दीन ऐबक को लाख
  213. 9:56बख्श यानी लाखों का दान देने वाला भी कहा
  214. 9:59जाता था। तो प्रश्न इससे कई बनता है कि
  215. 10:01कुतुब मीनार का नीव किसने डाला? दिल्ली का
  216. 10:04कुबत उल इस्लाम मस्जिद एवं अजमेर का ढाई
  217. 10:07दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद का निर्माण
  218. 10:09किसने करवाया? लाख बख्श किसे कहा जाता है?
  219. 10:12तो सभी का आंसर जो हो जाएगा कुतुबुद्दीन
  220. 10:15जाएगा। अब कुतुबुद्दीन ऐबक ने लगभग 1199
  221. 10:18में कुतुब मीनार का निर्माण करवाया। इस
  222. 10:21इमारत मीनार की पहली मंजिल का निर्माण
  223. 10:24कुतुबुद्दीन ऐबक ने तथा शेष मंजिलों का
  224. 10:26निर्माण 1229 के आसपास इल्तुतमिश द्वारा
  225. 10:29करवाया गया। उस समय उसकी ऊंचाई 225 फीट और
  226. 10:33चार मंजिल थी। क्या है? चार मंजिल थी। कब?
  227. 10:36जब इल्तुतमिश द्वारा पूरा करवाया गया था।
  228. 10:38तब कई वर्षों में यह इमारत आंधी, तूफान
  229. 10:40तथा भूकंप की वजह से क्षतिग्रस्त हो गई।
  230. 10:43समय-समय पर अलाउद्दीन खिलजी, मोहम्मद
  231. 10:45तुगलक, फिरोज शाह तुगलक तथा इब्राहिम लोदी
  232. 10:47ने इसकी मरम्मत करवाई। फिरोज शाह तुगलक के
  233. 10:50समय बिजली गिरने के कारण इसकी चौथी मंजिल
  234. 10:53नष्ट हो गई। जिसके कारण फिरज़ ने इसमें दो
  235. 10:56छोटी मंजिलें बनवा दी। जिससे इसमें पांच
  236. 10:59मंजिला हो गई और इसकी ऊंचाई 9 फीट बढ़कर
  237. 11:02234 फीट हो गई। कितना? 234 फीट। तो प्रश्न
  238. 11:05कभी पूछा जाता है कि कुतुब मीनार में
  239. 11:08कितने मंजिला है? तो कुतुब मीनार जो है
  240. 11:10पांच मंजिला है। लेकिन जब बना था उस समय
  241. 11:12इल्तुतमिश निर्माण कराया था तो चार मंजिला
  242. 11:15ही था। चलिए नेक्स्ट देखते हैं कि प्राचीन
  243. 11:18नालंदा विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने वाला
  244. 11:20एबक का सहायक सेनायक बख्तियार खिलजी था।
  245. 11:24प्राचीन जो नालंदा विश्वविद्यालय था
  246. 11:25शिक्षा का केंद्र था उसे ध्वस्त करने वाला
  247. 11:28जो है बख्तियार खिलजी वो ऐबक का सहायक
  248. 11:30सेना नायक था। ऐबक की मृत्यु 1210 ईस्वी
  249. 11:34में चौगान खेलते समय घोड़े से गिरकर हो
  250. 11:36गई। इसे लाहौर में दफनाया गया। ऐबक का
  251. 11:39उत्तराधिकारी आराम शाह हुआ जिसने 8 महीनों
  252. 11:42तक शासन किया। आराम शाह जो है आठ महीनों
  253. 11:44तक। आराम शाह की हत्या करके इल्तुतमिश जो
  254. 11:47है 1211 ईस्वी में दिल्ली की गद्दी पर
  255. 11:50बैठा। 121 में इल्तुतमिश तुर्क
  256. 11:53तुर्किस्तान का इल्लबरी तुर्क था। इलबर
  257. 11:56तुर्क था जो ऐबक का गुलाम एवं दामाद भी
  258. 11:59था। देखिए फिर ऐबक का जो गुलाम भी हुआ और
  259. 12:01दामाद भी था। ऐबक की मृत्यु के समय वह
  260. 12:03बदायूं का गवर्नर था। तो प्रश्न पूछा जाता
  261. 12:06है कि जब ऐबक की मृत्यु हुई थी उस समय
  262. 12:08इल्तुतमिश जो है कहां का गवर्नर था या जो
  263. 12:11है सुल्तान बनने से पहले वो कहां का
  264. 12:13गवर्नर था? इल्तुतमिश लाहौर से राजधानी को
  265. 12:16स्थानांतरित करके दिल्ली लाया। इसने हौज ए
  266. 12:19सुल्तानी अथवा राजा का तालाब का निर्माण
  267. 12:22दिल्ली ए कुना के निकट जो है करवाया था।
  268. 12:25इल्तुतमिश पहला शासक था जिसने 1229 ईस्वी
  269. 12:29में बगदाद के खलीफा से सुल्तान पद की
  270. 12:31वैधानिक स्वीकृति जो है वो प्राप्त की।
  271. 12:34इल्तुतमिश की मृत्यु अप्रैल 1236 ईस्वी
  272. 12:38में हो गई। चंगेज खान से बचने के लिए
  273. 12:41खारिज्म के सम्राट जलालुद्दीन को
  274. 12:43इल्तुतमिश ने अपने यहां शरण नहीं दी थी।
  275. 12:46जब चंगेज ख पीछा कर रहा था सम्राट
  276. 12:49जलालुद्दीन खारिज्म के सम्राट जलालुद्दीन
  277. 12:52को वो इल्तुतमिश के यहां जो है शरण मांगा
  278. 12:55था बचने के लिए लेकिन वो चंगेज खान के डर
  279. 12:58के कारण जो है वो शरण नहीं दिया। किसने
  280. 13:00नहीं दिया? इल्तुतमिश ने नहीं दिया।
  281. 13:02इल्तुतमिश [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  282. 13:03के बाद उसका पुत्र रुक्मुद्दीन फिरोज
  283. 13:05गद्दी पर बैठा। वह एक अयोग्य शासक था।
  284. 13:08इसके अल्पकालीन शासन पर उसकी मां जो है
  285. 13:11शाह तुर्कान छाई रही। मां शाह तुर्कान जो
  286. 13:13है छाई रही। किसकी? रुकनुद्दीन फिरोज के
  287. 13:16शासन के समय इल्तुतमिश के महत्वपूर्ण
  288. 13:19कार्य देख लेते हैं कि कुतुब मीनार के
  289. 13:20निर्माण को पूर्ण करवाया। सबसे पहले शुद्ध
  290. 13:23अरबी सिक्के जारी किए। चांदी का टंका एवं
  291. 13:25तांबा का जीतल इता प्रणाली चलाई। 40 गुलाम
  292. 13:29सरदारों का संगठन बनाया जो तुर्कान ए
  293. 13:32चिहलगानी के नाम से जाना गया। सर्वप्रथम
  294. 13:34दिल्ली के अमीरों का जो है वो क्या किया?
  295. 13:37दमन किया गया है। दमन किया। शाह तुर्कान
  296. 13:40के अवांछित प्रभाव से परेशान होकर तुर्की
  297. 13:43अमीरों ने रुकनुद्दीन को हटाकर रजिया को
  298. 13:46सिंहासन पर आसीन किया। इस प्रकार रजिया
  299. 13:49बेगम जो है प्रथम मुस्लिम महिला थी जिसने
  300. 13:52शासन की बगडोर संभाली। तो प्रश्न पूछा
  301. 13:54जाता है कि प्रथम मुस्लिम महिला कौन थी
  302. 13:56जिसने जो है दिल्ली सल्तनत की कमान
  303. 13:59संभाली? तो वह है रजिया बेगम। क्या है?
  304. 14:01रजिया बेगम। रजिया ने पर्दा प्रथा को
  305. 14:04त्याग कर वह पुरुषों की तरह चोगा यानी
  306. 14:07काबा एवं कुलाह टोपी पहनकर राज दरबार में
  307. 14:10खुले मुंह से जो है जाने लगी। रजिया ने
  308. 14:13मलिक जमालुद्दीन याकूद को अमीर या खुर
  309. 14:16अमीर या खुर घोड़े का सरदार जो है नियुक्त
  310. 14:19किया। गैर तुर्कों को समंत बनाने के रजिया
  311. 14:23के प्रयासों से तुर्की अमीर विरुद्ध हो गए
  312. 14:26और उसे बंदी बनाकर दिल्ली की गद्दी पर
  313. 14:28मुईजुद्दीन बहराम शाह को जो है बैठा दिया।
  314. 14:31क्या है? बैठा दिया। रजिया की शादी
  315. 14:34अल्तुनिया के साथ हुई। इससे शादी करने के
  316. 14:37बाद रजिया ने पुनः गद्दी प्राप्त करने का
  317. 14:39प्रयास किया। लेकिन वह असफल रही। रजिया की
  318. 14:43हत्या 13 अक्टूबर 1240 ईस्वी को डाकुओं के
  319. 14:46द्वारा कैथल के पास कर दी गई। 13 अक्टूबर
  320. 14:481240 में जो है डाकुओं के द्वारा कैथल के
  321. 14:51पास हत्या कर दी गई। रजिया की शादी किससे
  322. 14:53हुई थी? तो अल्तुनिया के साथ हुई थी।
  323. 14:55बहराम शाह को बंदी बनाकर उसकी हत्या मई
  324. 14:591242 ईस्वी में कर दी गई। उसके बाद दिल्ली
  325. 15:02का सुल्तान जो है अलाउद्दीन मसूद शाह बना।
  326. 15:05अलाउद्दीन मसूद शाह बना। बलबन ने षड्यंत्र
  327. 15:09के द्वारा 1246 ईस्वी में अलाउद्दीन मसूद
  328. 15:12शाह को सुल्तान के पद से हटाकर नसीरुद्दीन
  329. 15:15महमूद को सुल्तान बना दिया। बलबन ने
  330. 15:18षड्यंत्र के द्वारा 1246 ईस्वी में
  331. 15:20अलाउद्दीन मसूद शाह को सुल्तान के पद से
  332. 15:22हटाकर नसीरुद्दीन महमूद को सुल्तान बना
  333. 15:25दिया और उससे अपनी पुत्री का जो है विवाह
  334. 15:28कर दिया। किसने कर दिया? बलबन ने जो है
  335. 15:30अपनी पुत्री का विवाह किससे करवा दिया? तो
  336. 15:32नसीरुद्दीन महमूद से कर दिया। नसीरुद्दीन
  337. 15:36महमूद ऐसा सुल्तान था जो टोपी सीकर अपना
  338. 15:38जीवन निर्वाह करता था। तो ये काफी
  339. 15:40इंपॉर्टेंट प्रश्न है। यह भी जो है कई बार
  340. 15:42पूछा गया है। बलबन का वास्तविक नाम
  341. 15:45बहाउद्दीन था। वह इल्तुतमिश का गुलाम था।
  342. 15:47अब बलबन भी इल्तुतमिश का गुलाम था। देखिए
  343. 15:50मोहम्मद जो है कुतुबुद्दीन ऐबक मोहम्मद
  344. 15:52गौरी का गुलाम था। अब कुतुबुद्दीन ऐबक का
  345. 15:56गुलाम जो है इल्तुतमिश था। अब इल्तुतमिश
  346. 15:59जो है क्या है? बलबन का वास्तविक नाम
  347. 16:02बाउद्दीन था। वह इल्तुतमिश का गुलाम था।
  348. 16:03यानी इल्तुतमिश का गुलाम कौन हो गया? तो
  349. 16:05वो बलबन हो गया। तो इस तरह जो है गुलाम
  350. 16:07प्रथा चलता रहता था और ज्यादातर जो है
  351. 16:10अपना दामाद ही रहता था जो गुलाम रहता था।
  352. 16:13तुर्कान ए चिहलगानी का विनाश जो है बलबन
  353. 16:15ने किया था। तुर्कान ए चहलगानी क्या था जो
  354. 16:1840 जो है तुर्कों के सरदारों का जो है एक
  355. 16:21संगठन था जिसे इल्तुतमिश ने बनाया था।
  356. 16:24जिसे तुर्काने चहलगानी कहा जाता है। उसका
  357. 16:26विनाश बलबन ने किया था। बलबन
  358. 16:28[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  359. 16:281266 ईस्वी में गयासुद्दीन बलबन के नाम से
  360. 16:32दिल्ली की गद्दी पर बैठा। यह मंगोलों के
  361. 16:34आक्रमण से दिल्ली की रक्षा करने में जो है
  362. 16:37वो सफल रहा। किसने? बलबन। राज दरबार में
  363. 16:41सिजदा एवं पैबोस प्रथा की शुरुआत एवं
  364. 16:44फारसी रीति-रिवाज पर आधारित नबरोज फारसी
  365. 16:47साल का पहला दिन उत्सव का प्रारंभ जो है
  366. 16:49बलबन ने करवाया। अपने विरोधियों के प्रति
  367. 16:52बलबन ने कठोर लौह एवं रक्त की नीति का
  368. 16:55पालन किया। यह प्रश्न कई बार पूछा गया है
  369. 16:57कि सिजदा एवं पवस प्रथा की शुरुआत किसने
  370. 16:59की? लौह एवं रक्त की नीति का पालन किसने
  371. 17:02किया? तो सबका आंसर क्या हो जाएगा? तो वो
  372. 17:04हो जाएगा बलबन। क्या है? बलबन। नसीरुद्दीन
  373. 17:07महमूद ने बलबन को उल्लू खान। उल्लू खान की
  374. 17:10उपाधि प्रदान की। बलबन आखेट अभियान के
  375. 17:13बहाने अपनी सेना को लंबी दूरी तक कवायत
  376. 17:15कराकर दुरुस्त रखता था। आखेट जो है अभियान
  377. 17:19के बहाने अपनी सेना को लंबी दूरी तक कवायद
  378. 17:21कराकर दुरुस्त रखता था यानी फिट रखता था।
  379. 17:24बलबन के दरबार में फारसी के प्रसिद्ध कवि
  380. 17:27अमीर खुसरो एवं अमीर हसन रहते थे। अमीर
  381. 17:30खुसरो एवं अमीर हसन रहते थे। गुलाम वंश का
  382. 17:33जो है अंतिम शासक समुद समुद्दीन कैमूर था।
  383. 17:36क्या है? समुद्दीन कैमूर था। अब आइए उसके
  384. 17:39बाद गुलाम वंश के बाद आया दिल्ली सल्तनत
  385. 17:42में खिलजी वंश का। 1290 से 1320 ईस्वी तक
  386. 17:46राज किया लगभग जो है 30 साल गुलाम वंश के
  387. 17:49शासन को समाप्त कर 13 जून 1290 ईस्वी को
  388. 17:52जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने खिलजी वंश की
  389. 17:55स्थापना की इसने किला किलोखरी किलोखरी को
  390. 17:59अपनी राजधानी बनाया किलोखरी को राजधानी
  391. 18:02बनाया जलालुद्दीन की हत्या 1296 ईस्वी में
  392. 18:05उसके भतीजा बदमाद अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ा
  393. 18:09मानिकपुर यानी प्रयाग में कर दी 22
  394. 18:13अक्टूबर 1296
  395. 18:15में अलाउद्दीन दिल्ली का जो है सुल्तान
  396. 18:17बना। जलालुद्दीन की हत्या कर दिया कौन?
  397. 18:19उसका भतीजा बदामाद अलाउद्दीन। अलाउद्दीन
  398. 18:23का बचपन का नाम अली तथा गुरशास्त्र था।
  399. 18:26क्या है? गुर शास्त्र था।
  400. 18:30अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को नगद वेतन देने
  401. 18:33एवं स्थाई सेना की नीव रखने नीव रखी।
  402. 18:36दिल्ली के शासकों में अलाउद्दीन खिलजी के
  403. 18:38पास सबसे विशाल जो है अस्थाई सेना थी।
  404. 18:41थोड़ा जान लेते हैं अमीर खुसरो के बारे
  405. 18:43में। अमीर खुसरो का मूल नाम मोहम्मद हसन
  406. 18:46था। उसका जन्म पटियाली पश्चिम उत्तर
  407. 18:48प्रदेश में बदाई के पास 1252 ईस्वी में
  408. 18:51हुआ था। खुसरो प्रसिद्ध सूफी संत शेख
  409. 18:54निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे। खुसरो मीर
  410. 18:56खुसरो वह बलबन से लेकर मोहम्मद तुगलक तक
  411. 18:59दिल्ली सुल्तानों के दरबार में रहे।
  412. 19:01इन्हें ततीय हिंद यानी भारत का तोता के
  413. 19:04नाम से जाना जाता है। सितार एवं तबले के
  414. 19:07आविष्कार का श्रेय जो है अमीर खुसरो को ही
  415. 19:09दिया जाता है। इन्होंने ही भारतीय संगीत
  416. 19:12में कवाली गायन का प्रचलित जो है किया।
  417. 19:15साथ ही इन्हें कई प्रकार के आधुनिक रागों
  418. 19:17जैसे तिलक, साजगिरी, सरपदा आदि को प्रचलित
  419. 19:21करने का श्रेय प्राप्त है। इन्हें हिंदी,
  420. 19:23खड़ी बोली एवं गजलों की जनक भी कहा जाता
  421. 19:26है। इनकी रचना है दीवान। फारसी में
  422. 19:29कविताओं का संग्रह को दीवान नूह सिपदर एवं
  423. 19:32मसनबी देवबल रानी खिज्र खान दुखद प्रेम
  424. 19:34कथा है। अब आइए देखते हैं अलाउद्दीन के
  425. 19:38बारे में। तो घोड़ा दागने एवं सैनिकों का
  426. 19:40हुलिया लिखने की प्रथा की शुरुआत जो है
  427. 19:42अलाउद्दीन खिलजी ने की। अलाउद्दीन ने
  428. 19:45भू-राजस्व की दर जो है बढ़ाकर उपज का हाफ
  429. 19:48भाग कर दिया। आधा कर दिया। यानी जितना आप
  430. 19:50उपजाइएगा उसका आधा हम ले लेंगे। इसने खम्स
  431. 19:53लूट के धन में सुल्तान का हिस्सा 1/4 भाग
  432. 19:56के स्थान पर 3/4 भाग जो है वह कर दिया।
  433. 19:59इसने व्यापारियों में बेईमानी रोकने के
  434. 20:02लिए कम तोलने वाले व्यक्ति के शरीर से
  435. 20:04मांस काट लेने का आदेश दिया। इसने अपने
  436. 20:07शासनकाल में मूल्य नियंत्रण प्रणाली को
  437. 20:10दृढ़ता से लागू किया। मूल्य नियंत्रण
  438. 20:12प्रणाली को जिसको जो मर्जी है वह मूल्य
  439. 20:14निर्धारण नहीं कर सकता है। राजा के तरफ से
  440. 20:17ही निर्धारण होता था।
  441. 20:18[गला साफ़ करने की आवाज़]
  442. 20:19दक्षिण भारत की विजय के लिए अलाउद्दीन ने
  443. 20:21मलिक काफूर को भेजा था। मलिक काफूर को जो
  444. 20:24है वो भेजा था। जमीयत खाना मस्जिद अलाई
  445. 20:28दरवाजा सिरी का किला हजार खंभा महल का
  446. 20:31निर्माण जो है वो अलाउद्दीन ने करवाया था।
  447. 20:34क्या है? अल्लाउद्दीन ने करवाया था। अब
  448. 20:36मलिक काफूर को जो है हजार दीारी के नाम से
  449. 20:39भी जाना जाता है। क्या है? हजार दिनारी के
  450. 20:41नाम से जाना जाता है। क्योंकि हजार दीार
  451. 20:43देकर इसे जो है वह खरीदा गया था। नुसरत
  452. 20:46शाह के द्वारा जो है यह खरीदा गया था।
  453. 20:48अलाई दरवाजा को इस्लामी वास्तुकला का रत्न
  454. 20:52कहा जाता है। अलाई दरवाजा को इस्लामी
  455. 20:54वास्तुकला का रत्न जो है कहा जाता है।
  456. 20:57दैवीय अधिकार के सिद्धांत को अलाउद्दीन ने
  457. 20:59चलाया था। दैवी अधिकार के सिकंदर ए सानी
  458. 21:02की उपाधि से स्वयं को अलाउद्दीन खिलजी ने
  459. 21:05विभूषित किया था। सिकंदर ए सानी के जो है
  460. 21:08उपाधि से। बाजार नियंत्रण क्या है? बाजार
  461. 21:11नियंत्रण करने के लिए अलाउद्दीन खिलजी
  462. 21:13द्वारा बनाए जाने वाले नवीन पद क्रमानुसार
  463. 21:15क्या-क्या था? तो दीवान ए रियासत यह
  464. 21:18व्यापारियों पर नियंत्रण रखता था या बाजार
  465. 21:20नियंत्रण की पूरी व्यवस्था का संचालन करता
  466. 21:23था। सहना ए मंडी प्रत्येक बाजार में बाजार
  467. 21:26का अधीक्षक बरीद बाजार के अंदर घूमकर
  468. 21:29बाजार का निरीक्षण करता था। मुनियान व
  469. 21:31गुप्तचर गुप्त सूचना प्राप्त जो है वह
  470. 21:34करता था जिसे मुनियान व गुप्तचर कहा जाता
  471. 21:37था। अलाउद्दीन ने मालिक याकूब को दीवान
  472. 21:41रियासत नियुक्त किया था। मलिक याकूब को
  473. 21:44दीवान रियासत जो है नियुक्त किया था।
  474. 21:46अलाउद्दीन द्वारा नियुक्त परवाना नवीस
  475. 21:49नामक अधिकारी वस्तुओं के परमिट जारी करता
  476. 21:52था। परवाना नवीस नामक अधिकारी वस्तुओं के
  477. 21:55जो है परमिट जारी करता था। सहाना ए मंडी
  478. 21:58यह खदानों की बिक्री हेतु लाया जाता था।
  479. 22:01सराय-ए अदल यहां वस्त्र, शक्कर, जड़ी बूटी
  480. 22:04मेवा, दीपक का तेल व अन्य निर्मित वस्तुएं
  481. 22:06बिकने के लिए आती थी। अलाउद्दीन खिलजी की
  482. 22:09आर्थिक नीति की व्यापक जानकारी
  483. 22:12जियााउद्दीन बरनी की कृति तारीख फिरोजशाही
  484. 22:15से जो है वह मिलती है। खजा फतूह अमीर
  485. 22:19खुसरो रिहला इब्नब बतूता एवं फतूह असलातीन
  486. 22:24इस्लामी की कृति है। मूल नियंत्रण मूल्य
  487. 22:28नियंत्रण को सफल बनाने में मुहत शिव सेंसर
  488. 22:31एवं नाजिर नापतौल अधिकारी की महत्वपूर्ण
  489. 22:34भूमिका थी। नाजिर किसे कहा जाता था? नापतल
  490. 22:36अधिकारी को। राजस्व सुधारों के अंतर्गत
  491. 22:39अलाउद्दीन ने सर्वप्रथम मिल्क इनाम एवं बफ
  492. 22:42के अंतर्गत दी गई भूमि को वापस लेकर उसे
  493. 22:45खालसा भूमि में बदल दिया था। अलाउद्दीन
  494. 22:48खिलजी के द्वारा लगाए जाने वाले दो नवीन
  495. 22:50कर थे। चराई कर दुधारू पशुओं पर लगाया
  496. 22:53जाता था और गढ़ी कर घरों एवं झोपड़ी पर
  497. 22:56लगाया जाता था। अलाउद्दीन खिलजी के
  498. 23:00शासनकाल में 1297 से 1306 ईस्वी तक
  499. 23:03मंगोलों के छह आक्रमण हुए। प्रथम आक्रमण
  500. 23:061297 ईस्वी में कादर खान के नेतृत्व में
  501. 23:09दूसरा आक्रमण 1298 ईस्वी में सदी के
  502. 23:11नेतृत्व में तीसरा आक्रमण 1299 कुतुलुग
  503. 23:14ख्वाजा के नेतृत्व में चौथा आक्रमण 1303
  504. 23:17ईस्वी में तारगी के नेतृत्व में पांचवा
  505. 23:19आक्रमण 1305 ईस्वी में अली बेग और तार
  506. 23:22तारताक के नेतृत्व में एवं छठा आक्रमण
  507. 23:251306 ईस्वी में कवक एवं इकबालमंद के
  508. 23:28नेतृत्व में हुआ था। अलाउद्दीन खिलजी की
  509. 23:31मृत्यु जो है 5 जनवरी 1316 ईस्वी को हो
  510. 23:34गई। कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी 1316 ईस्वी
  511. 23:38को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। इसे नग्न
  512. 23:41स्त्री पुरुष की संगत पसंद थी। नग्न
  513. 23:44स्त्री पुरुष की संगत जो है पसंद थी।
  514. 23:47मुबारक खिलजी कभी-कभी राज दरबार में
  515. 23:50स्त्रियों का वस्त्र पहनकर आ जाता था।
  516. 23:52बरनी के अनुसार मुबारक कभी-कभी नग्न होकर
  517. 23:55दरबारियों के बीच दौड़ा करता था। कौन?
  518. 23:57मुबारक खिलजी। मुबारक खान ने खलीफा की
  519. 24:00उपाधि धारण की थी। मुबारक के वजीर खुसरो
  520. 24:03ने 15 अप्रैल 1320 ईस्वी को इसकी हत्या कर
  521. 24:07दी और स्वयं दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
  522. 24:09मुबारक ए वजीर खुसरो खान ने। यानी टोटल जो
  523. 24:12है वो चार साल जो है वो राज किया कौन?
  524. 24:15मुबारक खिलजी।
  525. 24:17खुसरो खान ने पैगंबर के सेनापति की उपाधि
  526. 24:20धारण की। खुसरो खान ने पैगंबर के सेनापति
  527. 24:22की उपाधि धारण की। अब आइए तुगलक वंश जो
  528. 24:261320 से 1398 ईस्वी तक रहा। 5 सितंबर 1320
  529. 24:30ईस्वी को खुसरो खान को पराजित करके गाजी
  530. 24:33मलिक या तुगलक गाजी गयासुद्दीन तुगलक के
  531. 24:36नाम से 8 सितंबर 1320 ईस्वी को दिल्ली के
  532. 24:40सिंहासन पर बैठा। तुगलक गाजी गयासुद्दीन
  533. 24:44तुगलक गयासुद्दीन ने अलाउद्दीन के समय में
  534. 24:47लिए गए अमीरों की भूमि को पुनः जो है वो
  535. 24:50लौटा दिया। क्या है? लौटा दिया। इसने
  536. 24:53सिंचाई के लिए कुएं एवं नहरों का निर्माण
  537. 24:55करवाया। संभता नहरों के निर्माण करने वाला
  538. 24:58गयासुद्दीन जो है वह प्रथम शासक था।
  539. 25:01मोहम्मद बिन तुगलक द्वारा क्रियान्वित
  540. 25:03क्रमश चार योजनाएं कौन-कौन था? दब क्षेत्र
  541. 25:06में कर वृद्धि 1326 27 में राजधानी
  542. 25:08परिवर्तन 132627 सांकेतिक मुद्रा का
  543. 25:11प्रचलन 132930 खुरासान एवं कराचिल का
  544. 25:15अभियान जो है ये सब जो है चार क्रियान्वित
  545. 25:18जो है योजनाएं हैं। चलिए नेक्स्ट देखते
  546. 25:21हैं। गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के समीप
  547. 25:23स्थित पहाड़ियों पर तुगलकाबाद नाम का एक
  548. 25:25नया नगर स्थापित किया। रोमन शैली में
  549. 25:28निर्मित इस नगर में एक दुर्ग का निर्माण
  550. 25:30भी हुआ। इस दुर्ग को छप्पनकोट के नाम से
  551. 25:33भी जाना जाता है। छप्पनकोट गयासुद्दीन
  552. 25:36तुगलक की मृत्यु 1325 ईस्वी में बंगाल के
  553. 25:38अभियान से लौटते समय जूना खान द्वारा
  554. 25:41निर्मित लकड़ी के महल में दबकर हो गई।
  555. 25:43जूना खान द्वारा एक लकड़ी के महल निर्मित
  556. 25:46किया गया था। उसमें दबकर मृत्यु हो गई।
  557. 25:48गयासुद्दीन के बाद उलूक खान या जूना खान
  558. 25:52मोहम्मद बिन तुगलक के नाम से 1325 ईस्वी
  559. 25:55में दिल्ली के सिंहासन पर जो है वो बैठा।
  560. 25:58मध्यकालीन सभी सुल्तानों में मोहम्मद
  561. 26:01तुगलक सर्वाधिक शिक्षित विद्वान एवं योग्य
  562. 26:04जो है वो व्यक्ति था। मोहम्मद बिन तुगलक
  563. 26:08को अपनी सनक भरी योजनाओं, क्रूर कृतियों
  564. 26:11एवं दूसरे के सुखदख के प्रति उपेक्षा भाव
  565. 26:14रखने के कारण स्वप्नशील, पागल एवं रक्त
  566. 26:17पिपासु जो है कहा गया है। किसे? मोहम्मद
  567. 26:19बिन तुगलक को। मोहम्मद बिन तुगलक ने कृषि
  568. 26:23के विकास के लिए अमीर ए कोही। अमीर ए कोही
  569. 26:26नामक एक नवीन विभाग की जो है स्थापना की।
  570. 26:29मोहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली
  571. 26:31से देवगिरी में स्थानांतरित की और इसका
  572. 26:34नाम जो है दौलताबाद रखा। इबन बतूता के
  573. 26:37अनुसार दिल्ली के लोग सुल्तान मोहम्मद बिन
  574. 26:40तुगलक को अपमानजनक पत्र लिखा करते थे।
  575. 26:42जिससे परेशान होकर सुल्तान ने अपनी
  576. 26:45राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित
  577. 26:48करने का जो है वो निर्णय लिया। मोहम्मद
  578. 26:51बिन तुगलक अपने प्रत्येक मलिक के सम्मान
  579. 26:53में दो पोशाक दिया करता था। एक जाड़े में
  580. 26:57और दूसरा जो है गर्मी में। कहा जाता है कि
  581. 27:00डाक प्रबंधों के द्वारा मोहम्मद बिन तुगलक
  582. 27:02के लिए ताजे फल खुरासन से एवं पीने के लिए
  583. 27:05गंगाजल मंगवाया जाता था। सांकेतिक मुद्रा
  584. 27:09के अंतर्गत मोहम्मद बिन तुगलक ने कासा
  585. 27:11फरिश्ता के अनुसार तांबा बरणी के अनुसार
  586. 27:14धातुओं के सिक्के चलाए। जिनका मूल्य चांदी
  587. 27:17के रूप में टंका के बराबर होता था।
  588. 27:19एडवर्ड्स थॉमस ने मोहम्मद बिन तुगलक को
  589. 27:21प्रिंस ऑफ मनियर्स प्रिंस ऑफ मनियर्स की
  590. 27:25संज्ञा दी है। सांकेतिक मुद्रा का प्रयोग
  591. 27:28चीन के कुबई खान एवं ईरान के गजन खान नामक
  592. 27:31एक मंगोल शासक ने भी किया था। अफ्रीकी
  593. 27:35मोरक्को यात्री इबनबतूता लगभग जो है 1333
  594. 27:39ईस्वी में भारत आया। सुल्तान ने इसे
  595. 27:41दिल्ली का काजी नियुक्त किया। 1342 में
  596. 27:43सुल्तान ने इसे अपने राजदूत के रूप में जो
  597. 27:46है चीन भेजा। किसे? इबन बतूता को कहां के
  598. 27:49यात्री था? तो मोरक्को के यात्री था। इबन
  599. 27:52बतूता की पुस्तक रेहला में मोहम्मद तुगला
  600. 27:54के समय की घटनाओं का वर्णन है। इसने अपनी
  601. 27:57पुस्तक में विदेशी व्यापारियों के आवागमन,
  602. 28:00डाक चौकियों की स्थापना यानी डाक व्यवस्था
  603. 28:02एवं गुप्तचर व्यवस्था के बारे में लिखा
  604. 28:05है। इसके अनुसार भारतीय डाक व्यवस्था दो
  605. 28:07प्रकार के थे। अश्व डाक व्यवस्था जिसे
  606. 28:09उल्लू कहा जाता था। पैदल डाक व्यवस्था
  607. 28:12जिसे दावा कहा जाता था। इसने नगाड़ों की
  608. 28:15भारी ध्वनि के बीच एक स्त्री को सती होने
  609. 28:18के दृश्य का वर्णन किया है। इसके कथान
  610. 28:20अनुसार सती होने के लिए सुल्तान से अनुमति
  611. 28:23लेनी पड़ती थी। मोहम्मद तुगलक के समय जिया
  612. 28:26नकसबी पहला व्यक्ति था जिसने संस्कृत
  613. 28:29कथाओं की एक श्रृंखला का फारसी में अनुवाद
  614. 28:31किया था। इस पुस्तक का नाम तूतीनामा था।
  615. 28:34तूतीनामा था। जिसमें एक तोता एक ऐसी
  616. 28:37बिरहणी नायिका की कहानी सुनाता है जिसका
  617. 28:40पति यात्रा पर जो है गया है। मोहम्मद
  618. 28:43तुगलक ने जीन प्रभु सूरी जीन प्रभु सूरी
  619. 28:45नामक जैन साधु को अपने दरबार में बुलाकर
  620. 28:48सम्मान प्रदान किया था। मोहम्मद बिन तुगलक
  621. 28:51की मृत्यु 20 मार्च 1351 ईस्वी को सिंध
  622. 28:54जाते समय थट्टा के निकट गोडाल में हो गई।
  623. 28:57मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दक्षिण
  624. 29:00में हरिहर एवं बुक्का नामक दो भाइयों ने
  625. 29:02जो है 1336 ईस्वी में स्वतंत्र राज्य
  626. 29:05विजयनगर की जो है स्थापना की। महाराष्ट्र
  627. 29:09में अल्लाउद्दीन बहमन शाह ने 1347 ईस्वी
  628. 29:13में स्वतंत्र बहमनी राज्य की जो है
  629. 29:15स्थापना की। मोहम्मद बिन तुगलक के मृत्यु
  630. 29:18पर इतिहासकार बदायूं लिखता है कि अतः
  631. 29:21लोगों को उससे मुक्ति मिली और उसे लोगों
  632. 29:24से मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु पर
  633. 29:26इतिहासकार बदायूंनी लिखता है कि अतः लोगों
  634. 29:29को उससे मुक्ति मिली और उसे लोगों से
  635. 29:32मोहम्मद बिन तुगलक शेख अलाउद्दीन का शिष्य
  636. 29:35था। वह सल्तनत का पहला शासक शासक था जो
  637. 29:38अजमेर में शेख मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह
  638. 29:41और बहराइच में सलार मसूद गाजी के मकबरे
  639. 29:44में गया। मोहम्मद बिन तुगलक ने बदायूं में
  640. 29:48मीरन मुलहिम दिल्ली में शेख निजामुद्दीन
  641. 29:51औलिया मुल्तान में शेख रुकनुद्दीन अजुदन
  642. 29:55में शेख मुल्तान आदि संतों की कब्र पर
  643. 29:58मकबरे जो है बनवाए किसने? मोहम्मद बिन
  644. 30:00तुगलक ने। फिरोज शाह तुगलक का राज्याभिषेक
  645. 30:04थट्टा के नजदीक 20 मार्च 1351 को हुआ।
  646. 30:08पुनः फिरोज का राज्याभिषेक दिल्ली में
  647. 30:10अगस्त 1351 को हुआ। खलीफा द्वारा इसे
  648. 30:13कासिम अमीर अल मोमिन कासिम अमीर अल मोमिन
  649. 30:17की उपाधि दी गई। राजस्व व्यवस्था के
  650. 30:21अंतर्गत फिरोज ने अपने शासनकाल में 24
  651. 30:24कष्टदायक करों को समाप्त कर केवल चार कर
  652. 30:27खराज लगान खुमस युद्ध के लूट कमाल, जजिया
  653. 30:30एवं जकात को वसूल करने का आदेश दिया। वह
  654. 30:33ब्राह्मणों पर जजिया लागू करने वाला पहला
  655. 30:35मुसलमान शासक था। उसने एक नया कर सिंचाई
  656. 30:38कर भी लगाया जो उपज का 1/10 भाग था। फिरोज
  657. 30:43तुगलक ने पांच बड़ी नहरों का निर्माण
  658. 30:45करवाया तथा 300 नए नगरों की स्थापना की।
  659. 30:48इनमें हिसार, फिरोजाबाद, दिल्ली,
  660. 30:51फतेहाबाद, जौनपुर, फिरोजपुर प्रमुख है।
  661. 30:54इसके शासनकाल में खिजराबाद, खिजराबाद,
  662. 30:57टोपरा गांव एवं मेरठ से अशोक के दो
  663. 31:00स्तंभों को लाकर दिल्ली में स्थापित किया
  664. 31:02गया। टोपरा स्थित अशोक स्तंभ के परिवहन का
  665. 31:05चित्रित वर्णन सीरत ए फिरोजशाही लेखक जो
  666. 31:09है अज्ञात में जो है मिलता है। सीरत ए
  667. 31:11फिरोजशाही में सुल्तान फिरोज तुगलक ने
  668. 31:14अनाथ मुस्लिम महिलाओं विधवाओं एवं
  669. 31:16लड़कियों की सहायता के लिए एक नए विभाग
  670. 31:18दीवान खैरात की स्थापना की। दीवान खैरात
  671. 31:21की स्थापना की। सल्तनत कालीन सुल्तानों के
  672. 31:24शासनकाल में सबसे अधिक दासों की संख्या
  673. 31:27करीब जो है 18800 फिरोजशाह तुगलक के समय
  674. 31:31थी। दासों की देखभाल के लिए फिरोज ने एक
  675. 31:33नए विभाग दीवान बंदगान की स्थापना की।
  676. 31:36इसने सैन्य पदों को वंशानुगत जो है बना
  677. 31:39दिया। इसने अपनी आत्मकथा फतूहत ए
  678. 31:42फिरोजशाही फतूहत ए फिरोजशाही की जो है
  679. 31:45रचना की। इसने जियााउद्दीन बरनी एवं शम्स
  680. 31:48ए सिराज अफीम को अपना जो है संरक्षण
  681. 31:51प्रदान किया। फिरोज तुगलक के नागरकोट
  682. 31:55वर्तमान में कांगड़ा अभियान 1361 के दौरान
  683. 31:58ज्वालामुखी मंदिर के पुस्तकालय से संस्कृत
  684. 32:01के 1300 ग्रंथ प्राप्त हुए। उनमें से कुछ
  685. 32:03को लगभग 300 का फारसी भाषा में अनुवाद
  686. 32:06अजीजुद्दीन किरमानी नामक फारसी के विद्वान
  687. 32:09ने किया। संस्कृत में फारसी भाषा में
  688. 32:12अनुदित सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ दलायल ए
  689. 32:15फिरोज़ शाही थी जो दर्शन और नक्षत्र
  690. 32:17विज्ञान से संबंधित ग्रंथ था। दलायल ए
  691. 32:20फिरोज़ शाही। इसने चांदी एवं तांबे के
  692. 32:23मिश्रण से निर्मित सिक्के भारी संख्या में
  693. 32:25जारी करवाए जिसे अद्धा एवं बिख कहा जाता
  694. 32:28है। अद्धा एवं बिख कहा जाता था। फिरोज
  695. 32:32तुगलक की मृत्यु सितंबर 1388 ईस्वी में हो
  696. 32:35गई। फिरोज काल में निर्मित खान- जहां
  697. 32:38तेलंगाने के मकबरा की तुलना जेरूसलम में
  698. 32:41निर्मित उमर के मस्जिद से की जाती है।
  699. 32:44सुल्तान फिरोज तुगलक ने दिल्ली में कोटला
  700. 32:47फिरोजशाह दुर्ग का जो है निर्माण करवाया।
  701. 32:50तुगलक वंश का अंतिम शासक नसीरुद्दीन महमूद
  702. 32:53तुगलक था। इसका शासन दिल्ली से पालम तक ही
  703. 32:56रह गया। यह प्रश्न पूछा जाता है कि तुगलक
  704. 32:58वंश का अंतिम शासक नसीरुद्दीन महमूद तुगलक
  705. 33:00था और इसका शासन कहां से कहां तक रह गया?
  706. 33:02तो दिल्ली से पालम तक ही रह गया था। तैमूर
  707. 33:05लंग ने सुल्तान नसीरुद्दीन महमूद तुगलक के
  708. 33:08समय 1398 ईस्वी में दिल्ली पर जो है
  709. 33:10आक्रमण किया था। नसीरुद्दीन के समय ही
  710. 33:14मलिक कुसक मलिक कुसरशक कुर्वाधिपति की
  711. 33:18उपाधि धारण कर एक मलिक सरवर ने
  712. 33:20जौनपुर में एक स्वतंत्र राज्य की जो है
  713. 33:23स्थापना की। अब आइए देखते हैं सैयद वंश
  714. 33:261414 से लेकर 14519 ईस्वी तक राज किया।
  715. 33:29सैयद वंश का संस्थापक खिज्र खान था। इसने
  716. 33:32सुल्तान की उपाधि ना धारण कर अपने को रयत
  717. 33:35एआला की उपाधि से ही खुश रखा। खिज्र खान
  718. 33:38तैमूर लंका सेनापति था। भारत से लौटते समय
  719. 33:41तैमूर लंग ने खिज्र खान को मुल्तान, लाहौर
  720. 33:44एवं दिवालपुर का शासक नियुक्त किया। खिज्र
  721. 33:47खान नियमित रूप से तैमूर के पुत्र शाहरुख
  722. 33:50को कर भेजता था। खिज्र खान की मृत्यु 20
  723. 33:53मई 1421 ईस्वी को हो गई। खिज्र खान के
  724. 33:57पुत्र मुबारक खान ने शाह की उपाधि धारण की
  725. 34:00थी। शाह की उपाधि धारण की थी। याहिया बिन
  726. 34:04अहमद सरहिंदी को मुबारक शाह का संरक्षण
  727. 34:06प्राप्त था। इसकी पुस्तक तारीख मुबारक
  728. 34:09शाही में सैयद वंश के विषय में जानकारी
  729. 34:12मिलती है। यमुना के किनारे मुबारकाबाद की
  730. 34:15स्थापना मुबारक शाह ने की थी। मुबारक शाह
  731. 34:18ने की थी। सैयद वंश का अंतिम सुल्तान
  732. 34:21अल्लाउद्दीन आलम शाह था। अलाउद्दीन आलम
  733. 34:23शाह था। सैयद वंश का शासन करीब 37 वर्षों
  734. 34:26तक चला। कितना? 37 वर्षों तक जो है चला।
  735. 34:29अब आइए बात करते हैं लोदी वंश जो 1451 से
  736. 34:331526 ईस्वी तक चला। लोदी वंश का संस्थापक
  737. 34:37बहलोल लोदी था। वह 19 अप्रैल 1451 ईस्वी
  738. 34:40को बहलोल शाहगाजी की उपाधि से दिल्ली के
  739. 34:43सिंहासन पर बैठा। दिल्ली पर प्रथम अफगान
  740. 34:46राज्य की स्थापना का श्रेय जो है बहलोल
  741. 34:48लोदी को दिया जाता है। बहलोल लोदी ने
  742. 34:51बहलोल सिक्के का प्रचलन करवाया। वह अपने
  743. 34:54सरदारों को मकसद ए अली मकसद ए अली कहकर जो
  744. 34:57है पुकारता था। वह अपने सरदारों के खड़े
  745. 35:01रहने पर स्वयं भी खड़ा रहता था। किसने? तो
  746. 35:04बहलोल लोदी बहलोल लोदी का पुत्र निजाम खान
  747. 35:0717 जुलाई 1489 ईस्वी में सुल्तान सिकंदर
  748. 35:11शाह की उपाधि से दिल्ली के सिंहासन पर
  749. 35:13बैठा। 1504 ईस्वी में सिकंदर लोदी ने आगरा
  750. 35:16शहर की स्थापना की। सिकंदर लोदी ने आगरा
  751. 35:18शहर की स्थापना कब की? तो 1504 ईस्वी में।
  752. 35:21भूमि के लिए मापन के प्रमाणिक पैमाना गजे
  753. 35:24सिकंदरी का प्रचलन सिकंदर लोदी ने किया।
  754. 35:27गुलुरुखी शीर्षक से फारसी कविताएं लिखने
  755. 35:30वाला सुल्तान सिकंदर लोदी था। क्या है?
  756. 35:32सिकंदर लोदी था। सिकंदर लोदी ने आगरा को
  757. 35:35अपनी नई राजधानी बनाया। इसके आदेश पर
  758. 35:37संस्कृत के एक आयुर्वेद ग्रंथ का फारसी
  759. 35:40में फरहंगे सिकंदरी के नाम से अनुवाद हुआ।
  760. 35:43इसने नगरकोट के ज्वालामुखी मंदिर की
  761. 35:45मूर्ति को तोड़कर उसके टुकड़ों को कसाइयों
  762. 35:48की मांस तोलने के लिए दे दिया था। इसने
  763. 35:51मुसलमानों को ताजिया निकालने एवं मुसलमान
  764. 35:54स्त्रियों को पीरों तथा संतों के मजार पर
  765. 35:57जाने पर जो है प्रतिबंध लगा दिया। गले की
  766. 36:00बीमारी के कारण सिकंदर लोदी की मृत्यु 21
  767. 36:03नवंबर 1517 ईस्वी को हो गई। इसी दिन इसका
  768. 36:06पुत्र इब्राहिम इब्राहिम शाह की उपाधि से
  769. 36:08आगरा के सिंहासन पर बैठा। संभवतया दिल्ली
  770. 36:12के सुल्तानों में सिकंदर लोदी प्रथम
  771. 36:14सुल्तान था जो हिंदुओं के त्यौहारों
  772. 36:16मुख्यता होली में भाग लेता था। दिल्ली की
  773. 36:20मोठ मस्जिद सिकंदर लोदी के प्रधानमंत्री
  774. 36:22यानी वजीर मियां भोया ने 1505 ईस्वी में
  775. 36:26बनाई थी। दिल्ली की मोठ मस्जिद सिकंदर
  776. 36:28लोदी के प्रधानमंत्री मियां भैया ने 1505
  777. 36:31ईस्वी में बनवाई थी। 21 अप्रैल 1526 ईस्वी
  778. 36:35को पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम
  779. 36:37लोदी बाबर से हार गया। इस युद्ध में वह
  780. 36:40मारा गया। बाबर को भारत पर आक्रमण के लिए
  781. 36:43निमंत्रण पंजाब के शासक दौलत खान लोदी एवं
  782. 36:46इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान ने दिया
  783. 36:50था। सल्तनत कालीन शासन व्यवस्था देख लेते
  784. 36:53हैं। केंद्रीय प्रशासन के मुखिया जो है वह
  785. 36:56सुल्तान होता था। क्या है? सुल्तान। बलबम
  786. 36:58बलबन एवं अलाउद्दीन के समय अमीर जो है
  787. 37:01प्रभावहीन हो गए। अमीरों का महत्व
  788. 37:04चरमोत्कर्ष परश था। लोदी वंश के शासनकाल
  789. 37:07में। सल्तनत काल में मंत्री परिषद को
  790. 37:10मजलिस ए खलवत। मजलिस ए खलवत कहा गया।
  791. 37:13मजलिस ए खास में मजलिस ए खलवत की बैठक
  792. 37:17होती थी। बार-ए खास इसमें सुल्तान सभी
  793. 37:21दरबारियों, खानों, अमीरों, मालिकों और
  794. 37:23अन्य रईसियों को जो है बुलाता था। बार-ए
  795. 37:27आजम सुल्तान राजकीय कार्यों का अधिकांश
  796. 37:30भाग जो है पूरा करता था। सल्तनत काल में
  797. 37:33दीवान रियासत, धार्मिक मामलों, पवित्र
  798. 37:35स्थानों तथा योग विद्वानों और धर्म परायण
  799. 37:39लोगों को वजीफा देता था। इसका अध्यक्ष
  800. 37:42प्रमुख सदर होता था जो सदानतः प्रधान काजी
  801. 37:45होता था। या न्याय विभाग का भी अध्यक्ष जो
  802. 37:48है होता था। दीवान इंसा नामक विभाग राज्य
  803. 37:52के पत्राचार से संबंध जो है वो रखता था।
  804. 37:55क्या है? रखता था। अब मंत्री एवं उसके
  805. 37:58संबंधित विभाग देख लीजिए। काफी ज्यादा
  806. 37:59इससे पूछा जाता है। वजीर प्रधानमंत्री
  807. 38:02होता था। राजस्व विभाग का प्रमुख मुशरफ ए
  808. 38:04मुमालिक महालेखाकार प्रांतों एवं अन्य
  809. 38:08विभागों से प्राप्त आय एवं व्यय का लेखा
  810. 38:11जोखा रखता था। कौन? मुशरफ ए मुमालिक।
  811. 38:14मजमुआदर उधार दिए गए धन का हिसाब रखना
  812. 38:17खजीन कोषाध्यक्ष होता था खजीन आरिज ए
  813. 38:21मुमालिक दीवान अर्ज अथवा सैन विभाग का
  814. 38:24प्रमुख होता था आरिज ए मुमालिक सर्द उस
  815. 38:27सुदूर धर्म विभाग एवं दान विभाग का प्रमुख
  816. 38:31काजी उल कजात सुल्तान के बाद न्याय का
  817. 38:34सर्वोच्च अधिकारी बरीद ए मुमालिक गुपचर
  818. 38:38विभाग का प्रमुख अधिकारी वकील एदर सुल्तान
  819. 38:41की व्यक्तिगत सेवाओं की देखभाल दीवान
  820. 38:44खैरात दान विभाग दीवान बंदगान दास विभाग
  821. 38:48दीवान इस्तहाक पेंशन विभाग विभाग और बनाने
  822. 38:53वाला सुल्तान भी पूछा जाता है कि दीवान
  823. 38:55मुस्तक राज क्या है विध विभाग था
  824. 38:57अलाउद्दीन खिलजी ने बनाया था दीवाने को ही
  825. 39:01कृषि विभाग को कहा जाता था मोहम्मद बिन
  826. 39:03तुगलक ने बनवाया था दीवान-ए-असैन विभाग था
  827. 39:06बलबन ने बनवाया था दीवान बंदगान जो है
  828. 39:08फिरोजशाह तुगलक ने बनवाया था दीवान खैरात
  829. 39:12जो है फिरोज शाह तुगलक ने दीवान इस्तिहाक
  830. 39:15जो है वह भी फिरोज शाह तुगलक ने बनवाया
  831. 39:17था। साम्राज्य के विभिन्न भागों में चल
  832. 39:20रही गतिविधियों की पूर्ण जानकारी के लिए
  833. 39:22दूतों की नियुक्ति की जाती थी। यह दूत
  834. 39:24बरीद कहलाते थे। शासक के सबसे ज्यादा
  835. 39:27विश्वास पात्र लोग ही मुख बरीद के पद पर
  836. 39:30नियुक्त किए जाते थे। लोक निर्माण विभाग
  837. 39:33की स्थापना फिरोज तुगलक ने की थी। यह
  838. 39:35विभाग नहरों तथा सार्वजनिक भवनों का
  839. 39:37निर्माण जो है करता था। सल्तनत अनेक
  840. 39:40प्रांतों में बटा हुआ था जिसे इक्ता या
  841. 39:42सूबा कहा जाता था। यहां का शासन नायाब या
  842. 39:45बलि या मुक्ति द्वारा होता था। इक्ताओं को
  843. 39:49सिक्कों यानी जिलों में विभाजित किया गया
  844. 39:51था। जहां का प्रमुख अधिकारी सिकदार होता
  845. 39:53था जो एक सैनिक अधिकारी था। क्या है?
  846. 39:55सैनिक अधिकारी था। राजस्व कार्य व्यवस्था
  847. 39:58क्या था? उ्र। मुसलमानों से लिए जाने वाला
  848. 40:01भूमि कर। खराज गैर मुसलमानों से लिए जाने
  849. 40:04वाला भूमि कर। जकात क्या था? मुसलमानों पर
  850. 40:07धार्मिक कार्य। संपत्ति का 40वां हिस्सा
  851. 40:09जजिया क्या था? तो गैर मुसलमानों पर
  852. 40:11धार्मिक कर। नोट खमस या लूटे हुए धन खानों
  853. 40:15अथवा भूमि में गड़े हुए खजानों से प्राप्त
  854. 40:17संपत्ति का 1/5 भाग था। जिस पर सुल्तान का
  855. 40:20अधिकार था और शेष जो है 4/5 भाग पर उसके
  856. 40:23सैनिकों अथवा खजाने को प्राप्त करने वाले
  857. 40:25व्यक्ति का अधिकार होता था। परंतु फिरोज़
  858. 40:28तुगलक को छोड़कर अन्य सभी शासकों ने 4/5
  859. 40:31हिस्सा स्वयं अपने लिए रखा। सुल्तान
  860. 40:33सिकंदर लोदी ने गढ़े हुए खजानों में से
  861. 40:36कोई हिस्सा जो है नहीं लिया। क्या है?
  862. 40:38नहीं लिया। सिक्कों को परगनों में विभाजित
  863. 40:41किया गया था। आमिल परगने का मुख्य अधिकारी
  864. 40:44था और मुशरिफ लगान को निश्चित करने वाला
  865. 40:47अधिकारी था। एक शहर या 100वा 100 गांवों
  866. 40:51के शासन की देखरेख अमीर ए सदा नामक
  867. 40:54अधिकारी करता था। अमीर ए सदा। प्रशासन के
  868. 40:57सबसे छोटी इकाई ग्राम होता था। ग्राम में
  869. 41:00सबसे अधिक प्रभावशाली लोग खुद छोटे
  870. 41:02जमींदार और मुकदम मुखिया होते थे। ग्राम
  871. 41:05का एक पटवारी होता था। ग्राम का एक पटवारी
  872. 41:08होता था। सुल्तान की स्थाई सेना को खासखेल
  873. 41:12नाम दिया गया था। क्या है? खासखेल नाम
  874. 41:13दिया गया था। मंगोल सेना के वर्गीकरण की
  875. 41:18दशमलव प्रणाली को सल्तनत कालीन शैल
  876. 41:20व्यवस्था का आधार बनाया गया। मंगोल सेना
  877. 41:22के जो वर्गीकरण की दशमलव प्रणाली था उसी
  878. 41:25को सल्तनत कालीन सैन्य व्यवस्था का आधार
  879. 41:28बनाया गया था। सल्तनत काल में बारूद की
  880. 41:31सहायता से गोला फेंकने वाली मशीन को
  881. 41:33मांगलिक अथवा राद कहा जाता था। 10
  882. 41:38अश्वारोही बराबर एक सर एक खेल 10 सर एक
  883. 41:41खेल बराबर एक सिपा सलाहकार 10 सिपा
  884. 41:43सलाहकार बराबर एक अमीर 10 अमीर बराबर एक
  885. 41:46मलिक 10 मलिक बराबर एक खान होता था।
  886. 41:49अलाउद्दीन खिलजी ने इता प्रथा को समाप्त
  887. 41:52किया। इता प्रथा को समाप्त किसने किया?
  888. 41:54अलाउद्दीन खिलजी ने। इता प्रथा को दोबारा
  889. 41:57शुरुआत फिरोजशाह तुगलक ने की। सल्तनत काल
  890. 42:01में अच्छी नस्ल के घोड़े तुर्की, अरब एवं
  891. 42:03रूस से मंगाए जाते थे। हाथी जो है मुख्यतः
  892. 42:06बंगाल से मंगाए जाते थे। बंगाल से स्थान
  893. 42:09और प्रसिद्धि के कारण जैसे सरसों अच्छी
  894. 42:11किस्म के चावल के लिए अनहबाड़ा अनहिवाड़ा
  895. 42:14व्यापारियों का तीर्थ स्थल के रूप में
  896. 42:16सतगांव रेशमी रजाइयों के लिए सतगांव
  897. 42:18प्रसिद्ध था। आगरा नील उत्पादन के लिए
  898. 42:20प्रसिद्ध था और बनारस सोने चांदी एवं जड़ी
  899. 42:23काम के लिए जो है प्रसिद्ध था बनारस।
  900. 42:26[गला साफ़ करने की आवाज़] सल्तनत कालीन
  901. 42:27कानून शरीयत कुरान एवं हदीस पर आधारित था।
  902. 42:30जो सल्तनत कालीन कानून था वो शरीयत कुरान
  903. 42:33एवं हदीस पर आधारित था। मुस्लिम कानून के
  904. 42:36चार महत्वपूर्ण स्रोत थे। कुरान, हदीस,
  905. 42:39इज्मा व कयास। कुरान, हदीस, इज्मा व कयास।
  906. 42:44सुल्तान सप्ताह में दो बार दरबार में
  907. 42:46न्याय करने के लिए उपस्थित जो है होता था।
  908. 42:49सल्तनत काल में लगान निर्धारित करने की
  909. 42:52मिश्रित प्रणाली को मुक्ताई कहा गया।
  910. 42:54मुक्ताई कहा गया है। भूमि की नाप जो करने
  911. 42:58के बाद क्षेत्रफल के आधार पर लगान का
  912. 43:00निर्धारण मसाहत कहलाता था। मसाहत कहलाता
  913. 43:03था। इसकी शुरुआत अल्लाउद्दीन ने की है।
  914. 43:06पूर्णतः केंद्र के नियंत्रण में रहने वाली
  915. 43:09भूमि खालसा भूमि कहलाती थी। क्या कहलाती
  916. 43:11थी? खालसा भूमि कहलाती थी। अलाउद्दीन ने
  917. 43:14दान दी गई अधिकांश भूमि को छीनकर खालसा
  918. 43:16भूमि में परिवर्तित कर दिया। अलाउद्दीन ने
  919. 43:19दान दी गई अधिकांश भूमि को छीनकर खालसा
  920. 43:21भूमि में परिवर्तित कर दिया। सल्तनत कालीन
  921. 43:24मुद्रा व्यवस्था चांदी के टंके और तांबे
  922. 43:27के दरहम पर आधारित है। तांबे के दरहम पर
  923. 43:30देबल जो है सल्तनत काल में अंतरराष्ट्रीय
  924. 43:33बंदरगाह के रूप में प्रसिद्ध था। देबल जो
  925. 43:34है सल्तनत काल में अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह
  926. 43:36के रूप में प्रसिद्ध था। अब आइए देखते हैं
  927. 43:39अगला चैप्टर विजयनगर साम्राज्य। क्या है?
  928. 43:41विजयनगर साम्राज्य। इससे एक प्रश्न जो है
  929. 43:43हर एक एग्जाम में जरूर पूछा जाता है।
  930. 43:45विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ईस्वी
  931. 43:48में हरिहर एवं बुक्का नामक दो भाइयों ने
  932. 43:50की थी। जो पांच भाइयों के परिवार के अंग
  933. 43:53थे। विजयनगर का शाब्दिक अर्थ होता है जीत
  934. 43:56का शहर। क्या है? जीत का शहर। हरिहर एवं
  935. 44:00बुक्का ने विजयनगर की स्थापना श्रृंगेरी
  936. 44:02शारदा पीठ के संत विद्या्य से आशीर्वाद
  937. 44:05प्राप्त कर की थी। हरिहर एवं बुक्का ने
  938. 44:08अपने पिता संगम के नाम पर संगम राजवंश की
  939. 44:11जो है स्थापना की। विजयनगर साम्राज्य की
  940. 44:14राजधानी हम्पी थी। विजयनगर साम्राज्य के
  941. 44:17खंडहर तुंगभद्रा नदी पर स्थित है। जो
  942. 44:19खंडहर है वह तुंगभद्रा नदी के पर स्थित
  943. 44:21है। संगम वंश के प्रमुख शासक था। पहले
  944. 44:24हरिहर बना 1336 से 1356 ईस्वी फिर बुक्का
  945. 44:27वन बना 1356 से 1377 हरिहर सेकंड बना 1377
  946. 44:31से 1404 फिर देवराय प्रथम बना 1406 से
  947. 44:351422 देवराज सेकंड बना 1422 से 1446
  948. 44:39मलिकार्जुन बना 1446 से 1465 अब बिरुपाल
  949. 44:42सेकंड बना 1465 से 1485 तक विजयनगर
  950. 44:47साम्राज्य की राजभाषा जो थी वो तेलुगु थी
  951. 44:50क्या थी तेलुगु थी हम्पी के भंगना वशेषों
  952. 44:53को कर्नल कोिन मैकेंजी ईस्ट इंडिया कंपनी
  953. 44:56के ब्रिटिश अधिकारी द्वारा प्रकाश में
  954. 44:58लाया गया। हम्पी के भगना बसेसों को हरिहर
  955. 45:01एवं बुक्का पहले बरंगल के काकतीय शासक
  956. 45:04प्रताप रुद्रदेव के संबंध थे। हरिहर एवं
  957. 45:06बुक्का विजयनगर साम्राज्य पर क्रमश निम्न
  958. 45:09वंशों ने शासन किया। पहले संगम किया फिर
  959. 45:12सलूब किया फिर तुलुब किया। फिर जो है
  960. 45:14अराबिडो वंश जो है शासन किया। बुक्का बन
  961. 45:18ने वेद मार्ग प्रतिष्ठापक की उपाधि धारण
  962. 45:20की। वेद मार्ग प्रतिस्थापक की उपाधि धारण
  963. 45:24की। हरियर सेकंड ने संगम शासकों में सबसे
  964. 45:27पहले महाराजा अधिराज की जो है उपाधि धारण
  965. 45:30की। इटली की यात्री निकोला कांटी निकोला
  966. 45:34कांटी विजयनगर की यात्रा पर देवराय प्रथम
  967. 45:37के शासनकाल में आया। इसने दास प्रथा के
  968. 45:39बारे में जो है विस्तृत वर्णन किया है।
  969. 45:42देवराय प्रथम ने तुंगभद्रा नदी पर एक बांध
  970. 45:45बनवाया ताकि जल की कमी दूर करने के लिए
  971. 45:47नगर में नहरे ला सके। सिंचाई के लिए उसने
  972. 45:49हरिंद्रा नदी पर भी बांध बनाया। हरिंद्रा
  973. 45:52नदी पर बांध बनाया। संगम वंश का सबसे
  974. 45:54प्रतापी राजा देवराय द्वितीय था। इसे
  975. 45:57इमाडी देवराय भी कहा जाता है। इमाडी
  976. 46:00देवराय भी कहा जाता है। अष्ट दिग्गज में
  977. 46:03शामिल कवि देख लेते हैं क्योंकि यह देवराय
  978. 46:06सेकंड द्वितीय के समय था कौन-कौन? तो अलस
  979. 46:08सनी पदन रचना मनु चरितम एवं हरि कथा सागर
  980. 46:14नंदी तिस्म था परिजात हरण रचना किए
  981. 46:16भट्टमूर्ति नर्स भूपालियम और हरिश्चंद्रन
  982. 46:20लोपाख्यानम
  983. 46:22धुरजति धुरजति के रचना कर धुरजति जो है
  984. 46:25किस चीज के रचना किए तो कल हस्ती महात्मय
  985. 46:29मल्लन जो है किए थे राजशेखर चरित्र
  986. 46:31अचुतराज रामचंद्र जो है वो किए थे सकल
  987. 46:34कथासार संग्रह एवं रामा भदुदम पिंगाली
  988. 46:39सूरत किए थे राघव पांड्य तेनाली रामकृष्णन
  989. 46:42जो है ये थे पांडुरंग महामय
  990. 46:46फारसी राजदूत अब्दुल रजाक देवराज सेकंड के
  991. 46:49शासनकाल में विजयनगर आया था इसके अनुसार
  992. 46:52विजयनगर में पुलिस वालों का वेतन वैश्यालय
  993. 46:55की आय से दी जाती थी। पुलिस वालों का वेतन
  994. 46:58वैश्यालय की आय से दी जाती थी। तेलुगु कवि
  995. 47:01तेलुगु कवि श्रीनाथ कुछ दिनों तक देवराज
  996. 47:04सेकंड के दरबार में रहे। इन्होंने राजा के
  997. 47:06दरबारी संस्कृत विद्वान दडिभट्ट दडि भट्ट
  998. 47:10को एक काव्य शास्त्रार्थ में पराजित किया
  999. 47:13था। जिसके कारण देवराज सेकंड ने इन्हें
  1000. 47:15कवि सार्वभौम कवियों के सम्राट की उपाधि
  1001. 47:18दी थी। फरिश्ता के अनुसार देवराज सेकंड ने
  1002. 47:22अपनी सेना में 2000 मुसलमानों की भर्ती
  1003. 47:24किया था एवं उन्हें जागीरें दी थी। एक
  1004. 47:27अभिलेख में देवराज सेकंड को जगबेटकर
  1005. 47:30जगबेटकर हाथियों का शिकारी कहा गया है।
  1006. 47:33देवराय सेकंड ने संस्कृत ग्रंथ महानाटक
  1007. 47:36सुधा निधि एवं ब्रह्मसूत्र पर जो है भाष्य
  1008. 47:40लिखा है। मल्लिकार्जुन को प्रौढ़ देवराय
  1009. 47:43भी कहा जाता है। मलिकार्जुन को प्रौढ़
  1010. 47:45देवराय भी कहा जाता है। सालुब नरसिंह ने
  1011. 47:49विजयनगर में दूसरे राजवंश सालू वंश को
  1012. 47:521485 से 1506 ईस्वी में स्थापना किया।
  1013. 47:55तुलुक वंश 1505 से 1565 ईस्वी की स्थापना
  1014. 47:58वीर नरसिंह ने की थी कि वीर नरसिंह ने की
  1015. 48:01थी। तेलुगु के पांच महाकाव्य कौन-कौन है?
  1016. 48:04अमुक्त माल्याद कृष्णदेव राय के द्वारा
  1017. 48:06लिखा गया है। रचना किया गया मनुचरितम
  1018. 48:09अलसनी पदन के द्वारा बसुचरित भट्ट मूर्ति
  1019. 48:12के द्वारा राघव पांडू जो है पिंगली सूरत
  1020. 48:17के द्वारा पांडुरंग महात्मय तेनाली
  1021. 48:19रामकृष्ण के द्वारा जो है रचना किया गया
  1022. 48:22है। तुलुक वंश का महान शासक कृष्णदेव राय
  1023. 48:25था। वह 8 अगस्त 1509 ईस्वी को शासक बना।
  1024. 48:29शालुक तिस्मा कृष्णदेव राय का योग मंत्री
  1025. 48:31एवं सेनापति था। बाबर ने अपनी आत्मकथा
  1026. 48:35बाबरनामा में कृष्णदेव राय को भारत का
  1027. 48:37सर्वाधिक शक्तिशाली जो है शासक बताया।
  1028. 48:39किसे? कृष्णदेव राय को। कृष्णदेव राय के
  1029. 48:43शासनकाल में पुर्तगाली यात्री डोमिनगोस
  1030. 48:46पेस विजयनगर आया था। इसने बिरपाच मंदिर के
  1031. 48:49सामने स्थित हम्पी बाजार में विभिन्न
  1032. 48:51प्रकार के उत्पादों का कारोबार होने के
  1033. 48:53कारण इसे विश्व में उत्कृष्ट उपलब्धता
  1034. 48:55वाला शहर कहा था। कृष्णदेव राय ने
  1035. 48:58पुर्तगालियों को भटकल में किला बनाने की
  1036. 49:01अनुमति जो है दी थी। कृष्णदेव राय के
  1037. 49:04दरबार में तेलुगु साहित्य के आठ
  1038. 49:06सर्वश्रेष्ठ कवि रहते थे जिन्हें
  1039. 49:07अष्टदिग्गज कहा जाता था। उनके रचनाकार भी
  1040. 49:10अभी देखे थे। अष्टदिग्गज तेलुगु कवियों
  1041. 49:12में अलसनी पद्य सर्व प्रमुख था। जो
  1042. 49:16संस्कृत एवं तेलुगु दोनों भाषाओं का
  1043. 49:18विद्वान था। इसे तेलुगु कविता का पितामह व
  1044. 49:21आंध्र कविता का पितामह की उपाधि प्राप्त
  1045. 49:24है। किसे? अलसनी पेद्यन को। उसके शासनकाल
  1046. 49:28को तेलुगु साहित्य का क्लासिक युग या
  1047. 49:30स्वर्ण युग जो है कहा गया है। कृष्णदेव
  1048. 49:34राय ने तेलुगु में अमुक्त माल्याद एवं
  1049. 49:36संस्कृत में जामवंती कल्याणम और उषा प्रणय
  1050. 49:40की रचना की। कृष्णदेव राय ने खुद सम्राट
  1051. 49:43ने विजयनगर साम्राज्य में नंदिनागढ़ लिपि
  1052. 49:46का प्रयोग होता था। नंदिनागढ़ लिपि का
  1053. 49:48प्रयोग होता था। नांगलपुर नामक नए नगर
  1054. 49:51हजारा मंदिर राम को समर्पित एवं विट्ठल
  1055. 49:54स्वामी मंदिर कृष्ण को समर्पित का निर्माण
  1056. 49:56कृष्णदेव राय ने करवाया था। इसके अतिरिक्त
  1057. 49:59जो है कृष्णदेव राय ने चितांबरम मंदिर
  1058. 50:02अंबार में पर्वती का मंदिर एवं कांचीपुरम
  1059. 50:04में बर्दराज एवं एक एकरनाथ मंदिर का
  1060. 50:08निर्माण जो है वो करवाया था। कृष्णदेव राय
  1061. 50:12क्या है? कृष्णदेव राय की मृत्यु 1528
  1062. 50:15ईस्वी में हो गई। कृष्णदेव राय ने आंध्र
  1063. 50:18भोज, अभिनव भोज एवं आंध्र पितामह आदि की
  1064. 50:20उपाधि जो है धारण की थी। कृष्णदेव राय के
  1065. 50:24राजगुरु का नाम व्यासराज था। जिन्हें
  1066. 50:26व्यासराज तीर्थ भी कहा जाता है। जब
  1067. 50:29कृष्णदेव राय कलिंग के खिलाफ युद्ध अभियान
  1068. 50:31पर गए थे तब व्यासराज ने कुछ समय के लिए
  1069. 50:34स्वयं विजयनगर के सिंहासन पर बैठकर राज का
  1070. 50:37कार्यभार संभाला था। इनके कहने पर ही
  1071. 50:40कृष्णदेव राय ने पूरे साम्राज्य में 732
  1072. 50:42हनुमान मंदिरों की स्थापना की थी। व्यास
  1073. 50:45राज ने न्याया मृत और तात्पर्य चंद्रिका
  1074. 50:48जैसे ग्रंथों की जो है रचना की। कृष्णदेव
  1075. 50:51राय की दो रानियां त्रुमला एवं चिंता देवी
  1076. 50:55थी। दो रानियां थी। कृष्णदेव राय ने विवाह
  1077. 50:57कर हटा दिया था। बाबर ने अपनी आत्मकथा में
  1078. 51:01कृष्णदेव राय को भारत का सबसे शक्तिशाली
  1079. 51:03शासक बताया था। तुलुप वंश का अंतिम शासक
  1080. 51:06सदाशिव था। क्या है? सदाशिव था। राक्षसी
  1081. 51:09तंगड़ी या तालीकोटा या बन्नी हट्टी का
  1082. 51:12युद्ध 23 जनवरी 1565 ईस्वी में हुआ। इसी
  1083. 51:15युद्ध के कारण विजयनगर का जो है पतन हुआ।
  1084. 51:18विजयनगर के विरुद्ध बने दक्षिण राज्यों के
  1085. 51:20संघ में शामिल था। बीजापुर, अहमदनगर,
  1086. 51:23गोलकुंडा एवं बीदर इस संयुक्त मोर्चे का
  1087. 51:26नेतृत्व अली आदिल शाह जो है कर रहा था।
  1088. 51:29तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर का नेतृत्व
  1089. 51:32राम राय कर रहा था। राम राय कर रहा था।
  1090. 51:34विजयनगर के राजाओं और भमनी के सुल्तानों
  1091. 51:36के हित तीन अलग-अलग क्षेत्रों में आपस में
  1092. 51:39टकराते थे। तुंगभदंद्रा के दआब में,
  1093. 51:42कृष्णा गोदावरी के कछार में और मराठवाड़ा
  1094. 51:45प्रदेश में तालीकोटा के युद्ध के बाद
  1095. 51:47सदाशिव ने तिरुमल के सहयोग से पेनुकोंडा
  1096. 51:51की राजधानी बनाकर शासन करना जो है प्रारंभ
  1097. 51:54किया। विजयनगर के चौथे राजवंश अराबीडू वंश
  1098. 51:58जो 1570 से 1672 ईस्वी तक रहा। की स्थापना
  1099. 52:01तिरुमल ने सदाशिव की सदाशिव को अपदस्त कर
  1100. 52:05पेनुकोंडा में किया। अराबीडू वंश का अंतिम
  1101. 52:08शासक रंग थर्ड था। क्या है? रंग थर्ड था।
  1102. 52:11अराबीडू शासक वेंकट सेकंड के शासनकाल में
  1103. 52:14ही बोडियार ने 1612 ईस्वी में मैसूर राज्य
  1104. 52:17की जो है स्थापना की थी। विजयनगर
  1105. 52:20साम्राज्य की प्रशासनिक इकाई का क्रम जो
  1106. 52:22है घटते हुए इस प्रकार था। प्रांत मंडल
  1107. 52:25कोटम या बलनाडू जिला नाडू मेलाग्राम 50
  1108. 52:29ग्राम का समूह उर उर मतलब ग्राम विजयनगर
  1109. 52:33राज्य छह प्रांतों में बंटा हुआ था जहां
  1110. 52:35प्रांतपति प्रधान होता था व अधिकांश राजा
  1111. 52:38के संबंधी जो है होते थे नांकार व्यवस्था
  1112. 52:43विजयनगर कालीन सेना नायों को नायक कहा
  1113. 52:45जाता था राजा नायों को वेतन के बदले अथवा
  1114. 52:49उनकी अधीनस्थ सेना के रखरखाव के लिए विशेष
  1115. 52:52भूखंड देता था जिसे अमरम कहा जाता था।
  1116. 52:54क्या अमरम कहा जाता था? अमरम भूमि का
  1117. 52:57उपयोग करने के कारण नायकों को अमरनायक भी
  1118. 53:00कहा जाता था। नायक अमरम भूमि से प्राप्त
  1119. 53:04आय के एक निश्चित अंश को प्रतिवर्ष राजा
  1120. 53:06को देते थे और युद्ध के अवसर पर राजा की
  1121. 53:10सहायता के लिए अपने पास एक निश्चित संख्या
  1122. 53:12में सैनिक भी रखते थे। नायकों का
  1123. 53:15स्थानांतरण नहीं होता था। नायिकों का
  1124. 53:17अधिकार धीरे-धीरे अपनी भूमियों पर पैतृक
  1125. 53:20हो गया था। 16वीं सदी के मध्य में नायकों
  1126. 53:23की संख्या 200 के लगभग हो गई थी। इनकी एक
  1127. 53:26विशेषता यह थी कि प्रांत पतियों
  1128. 53:28प्रांतपतियों की तुलना में वह अपने आंतरिक
  1129. 53:30शासन में अधिक जो है स्वतंत्र थे। अयंगर
  1130. 53:34व्यवस्था प्रशासन को सुचारू रूप से
  1131. 53:36संचालित करने के लिए प्रत्येक ग्राम को एक
  1132. 53:39स्वतंत्र इकाई के रूप में संगठित किया गया
  1133. 53:41था। इन ग्रामीण इकाइयों पर शासन हेतु 12
  1134. 53:45प्रशासकीय अधिकारियों की नियुक्ति की जाती
  1135. 53:47थी। जिनको सामूहिक रूप से अंगर कहा जाता
  1136. 53:50था। यह अवैतनिक होते थे। अवैतिक होते थे।
  1137. 53:54इनकी सेवाओं के बदले सरकार इन्हें पूर्णत
  1138. 53:56लगान मुक्त एवं कर मुक्त भूमि प्रदान करती
  1139. 53:58थी। इनका पद अनुवंशिक होता था। वह इस पद
  1140. 54:02को जो है बेच या गिरवी रख सकता था। ग्राम
  1141. 54:05स्तर की कोई भी संपत्ति इन अधिकारियों की
  1142. 54:07इजाजत के बगैर ना तो बेची जा सकती थी और
  1143. 54:10ना ही दान में दी जा सकती थी। विजयनगर आने
  1144. 54:14वाला प्रमुख विदेशी यात्री देख लेते हैं।
  1145. 54:16निकोलो कंटी इटली का था। 1420 ईस्वी में
  1146. 54:19आया। देवराय प्रथम के शासनकाल में। अब्दुल
  1147. 54:22रजाक फारस का था। 1442 में आया। देवराय
  1148. 54:25सेकंड के शासनकाल में। डोमिन पायस जो है
  1149. 54:27पुर्तगाल का था। 1515 ईस्वी में आया।
  1150. 54:30कृष्णदेव राय के शासनकाल में। बाराबोसा जो
  1151. 54:33आया पुर्तगाल का था। 1515 से 1516 ईस्वी
  1152. 54:36में। कृष्णदेव राय के दरबार में। नूनज नून
  1153. 54:39जो है पुर्तगाल का था। 1535 ईस्वी में
  1154. 54:42आया। अचुत राम के सरकार में जो है शासक के
  1155. 54:45समय करणिक नामक अंगर के पास जमीन के क्रय
  1156. 54:49विक्रय से संबंधित समस्त दस्तावेज होते
  1157. 54:51थे। विजयनगर साम्राज्य की आय का सबसे बड़ा
  1158. 54:54स्रोत लगान था। भू-राजस्व की दर उपज का
  1159. 54:571/6 भाग था। प्रशासन के सबसे छोटी इकाई
  1160. 55:01गांव होते थे। गांव के अधिकारियों के पद
  1161. 55:04पैतृक थे। सेंटियाबा सेंटियाबा गांव की आय
  1162. 55:08व्यय की देखभाल करता था। गांव के चौकीदार
  1163. 55:10को तलस पुकारते थे और बेग्रह गांव में
  1164. 55:13बेगार मजदूरी आदि का देखभाल करता था।
  1165. 55:17विवाह कर वर एवं वधू दोनों से लिया जाता
  1166. 55:20था। विधवा से विवाह करने वाले इस कर से
  1167. 55:22मुक्त थे। उमली उंबली ग्राम में विशेष
  1168. 55:25सेवाओं के बदले दी जाने वाली लगान मुक्त
  1169. 55:27भूमि की भूधारणा पद्धति थी उंबली। रथ
  1170. 55:30कोडगे युद्ध में शौर्य का प्रदर्शन करने
  1171. 55:33वाले मृत लोगों के परिवार को दी गई भूमि
  1172. 55:35को कहा जाता था। रत कोडगे कुटगी कुटगी
  1173. 55:39ब्रह्मान मंदिर या बड़े भूस्वामी जो स्वयं
  1174. 55:41कृषि नहीं करते थे किसानों को पट्टे पर
  1175. 55:43भूमि दे देते थे ऐसी भूमि को कुटगी कहा
  1176. 55:46जाता था क्या कुटगी कहा जाता था वे कृषक
  1177. 55:49मजदूर जो भूमि के क्रय विक्रय के साथ ही
  1178. 55:51हस्तांतरित हो जाते थे कुदी कहलाते थे
  1179. 55:54क्या है कुदी कहलाते थे युद्ध में वीरता
  1180. 55:56दिखाने वाले पुरुषों के लिए गंडपद्र नामक
  1181. 56:00पैर में धारण करने वाले कड़े को सम्मान का
  1182. 56:02प्रतीक माना जाता था कृष्णदेव राय के
  1183. 56:05दरबार में महिला अंगरक्षिकाओं का वर्णन
  1184. 56:07मिलता है। विजयनगर का सैन्य विभाग कदाचार
  1185. 56:10कहलाता था तथा इस विभाग का उच्च अधिकारी
  1186. 56:13दंडनायक या सेनापति होता था। टसाल विभाग
  1187. 56:17को जोरीखाना कहा जाता था। जोरीखाना कहा
  1188. 56:20जाता था। चेटियों की तरह व्यापार में
  1189. 56:23निपुण दस्तकार वर्ग के लोगों को वीर पंचाल
  1190. 56:26कहा जाता था। क्या है? वीर पंजाल कहा जाता
  1191. 56:28था। उत्तर भारत से दक्षिण भारत में आकर
  1192. 56:32बसे लोगों को बड़वा कहा जाता था। क्या कहा
  1193. 56:34जाता था? बड़वा कहा जाता था। विजयनगर में
  1194. 56:37दास प्रथा प्रचलित थी। मनुष्यों के क्रय
  1195. 56:40विक्रय को जो है बेसबग कहा जाता था। पर्दा
  1196. 56:44प्रथा का प्रचलन नहीं था। परंतु जो है सती
  1197. 56:47प्रथा स्वैच्छिक विद्यमान थी। बाल विवाह
  1198. 56:49समान प्रथा थी। क्या है? बाल विवाह जो है
  1199. 56:52वह समान प्रथा थी। मंदिरों में रहने वाले
  1200. 56:55स्त्रियों को देवदासी कहा जाता था। इनको
  1201. 56:57आजीविका के लिए भूमि या नियमित वेतन जो है
  1202. 57:00वह दिया जाता था। भूमि या नियमित जो है
  1203. 57:03वेतन दिया जाता था। विजयनगर के मंदिर
  1204. 57:07स्थापत्य की एक प्रमुख विशेषता कल्याण
  1205. 57:09मंडप एवं हजार स्तंभों वाले गोपुरम का
  1206. 57:12निर्माण था। कल्याण कल्याण मंडप में देवता
  1207. 57:15का विवाह समारोह मनाया जाता था। मंदिर के
  1208. 57:18साथ देवता की पत्नी हेतु अम्मान मंदिर का
  1209. 57:20भी निर्माण जो है वो होता था। तिरुपति
  1210. 57:23मंदिर क्या है? तिरुपति मंदिर में
  1211. 57:25कृष्णदेवराय एवं उसकी पत्नियां तिरुमल एवं
  1212. 57:28चिंता देवी तथा वेंकट प्रथम आदि की जो है
  1213. 57:31वह मूर्तियां हैं। महानवमी का त्यौहार जो
  1214. 57:35है विजयनगर का प्रमुख राज्यसत्सव था। यह
  1215. 57:38उत्सव देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए
  1216. 57:41था। विजयनगर काल की कन्नड़ कृतियों में
  1217. 57:44भीमक द्वारा रचित बास पुराण अत्यंत
  1218. 57:47प्रसिद्ध जो है प्रसिद्ध लिंगायत जो है
  1219. 57:49धर्म ग्रंथ है। मधुरा विजयम बुक्का प्रथम
  1220. 57:54के पुत्र कुमार कंपन की पत्नी गंगा देवी
  1221. 57:56की रचना है। मधुरा विजयम कृष्णदेव राय और
  1222. 57:59राम राय एक अच्छे संगीतज्ञ थे। लक्ष्मी
  1223. 58:02नारायण कृष्णदेव राय का दरबारी संगीतकार
  1224. 58:04था। उसने संगीत सूर्योदय नामक पुस्तक की
  1225. 58:07रचना की। संत विद्रण्य ने संगीत ग्रंथ
  1226. 58:10संगीत सार की रचना की। बीना विजयनगर
  1227. 58:13साम्राज्य का सर्वाधिक प्रसिद्ध और
  1228. 58:15लोकप्रिय जो है संगीतवाद था। विजयनगर की
  1229. 58:19जो है चित्रकला लिपाक्षी कला के नाम से
  1230. 58:22जानी जाती है। विजयनगर की चित्रकला
  1231. 58:24लिपाक्षी कला के नाम से जानी जाती है। इस
  1232. 58:27चित्रकला के विषय रामायण एवं महाभारत से
  1233. 58:29लिए गए हैं। विजयनगर में नृत्य और संगीत
  1234. 58:31को मिलाकर एक शैली विकसित हुई है जो
  1235. 58:34यक्षनी शैली के नाम से जानी जाती है।
  1236. 58:36विजयनगर का सर्वाधिक प्रसिद्ध सिक्का
  1237. 58:39स्वर्ण का बराह था। इसका वजन बामन ग्रेन
  1238. 58:42था जिसे विदेशी यात्रियों ने खून परदोस या
  1239. 58:45पगोड़ा के रूप में उल्लेखित किया है। सोने
  1240. 58:48के छोटे सिक्के को प्रताप तथा फन्नम कहा
  1241. 58:51जाता था। प्रताप 26 ग्रेन का तथा फन्नम
  1242. 58:545.5 ग्रेन का होता था। चांदी के जो है
  1243. 58:58छोटे सिक्कों को तार कहा जाता था। विजयनगर
  1244. 59:00के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में क्रूजेडो,
  1245. 59:03पुर्तगाली, दीनार, फारसी, फ्लोरिन और
  1246. 59:05डुकेड, इटली मुद्राएं जो है वो प्रचलित
  1247. 59:09थी। अगला चैप्टर देखते हैं। बहमनी राज
  1248. 59:11क्या है? बहमनी राज। मोहम्मद बिन तुगलक के
  1249. 59:14शासनकाल में 1347 ईस्वी में हसन गंगू ने
  1250. 59:17बहमनी राज की स्थापना की। वह अलाउद्दीन
  1251. 59:20हसन बहमन शाह के नाम से सिंहासन पर बैठा।
  1252. 59:23गुलबर्गा को अपनी राजधानी बनाया। इसकी
  1253. 59:25राजभाषा जो है मराठी थी। क्या है? मराठी
  1254. 59:28थी। इसने अपने साम्राज्य को चार प्रांतों
  1255. 59:30में गुलबर्गा, दौलताबाद, बरार एवं बिदर
  1256. 59:33में बांटा। इसकी मृत्यु 11 फरवरी 1358
  1257. 59:38ईस्वी को हो गई। अलाउद्दीन हसन के पश्चात
  1258. 59:42उसका पुत्र मोहम्मद शाह प्रथम सुल्तान
  1259. 59:44बना। इसके काल में ही सबसे पहले बारूद का
  1260. 59:47प्रयोग हुआ बुक्का के विरुद्ध हुआ था।
  1261. 59:50बहमनी वंश के प्रमुख शासक देख लीजिए।
  1262. 59:52मोहम्मद शाह 1358 से जो है 1375 तक
  1263. 59:56अलाउद्दीन मुजाहिद शाह 1375 से 1378 तक
  1264. 59:59दाऊद बंद 1378 मोहम्मद शाह सेकंड 1378 से
  1265. 1:00:031397 ताजुद्दीन फिरोज 1397 से 1422
  1266. 1:00:07शहाबुद्दीन अहमद बंद 1422 से 1436
  1267. 1:00:10अलाउद्दीन अहमद सेकंड 1436 से 1458
  1268. 1:00:14शमसुद्दीन मोहम्मद थर्ड 1463 से 1482 तक
  1269. 1:00:18जो है राज किया यह बहमनी वंश के प्रमुख
  1270. 1:00:21शासक था। भीमा नदी के तट पर फिरोजाबाद की
  1271. 1:00:24स्थापना ताजुउद्दीन फिरोज ने की थी। फिरोज
  1272. 1:00:28खगोल खगोलिकी को प्रोत्साहन देता था और
  1273. 1:00:31उसने दौलताबाद के पास एक वैधशाला बनाई थी।
  1274. 1:00:34फरिश्ता के अनुसार फिरोज फारसी, अरबी और
  1275. 1:00:36तुर्की के अतिरिक्त तेलुगु, कन्नड़ और
  1276. 1:00:39मराठी भाषा का भी ज्ञाता था। क्या है? इस
  1277. 1:00:42लगभग कई भाषाओं का ज्ञाता था। फिरोज़ शाह
  1278. 1:00:45बहमनी का सबसे बड़ा कार्य प्रशासन में
  1279. 1:00:48बड़े स्तर पर हिंदुओं को सम्मिलित करना
  1280. 1:00:50था। फिरोज शाह बहमनी का सबसे बड़ा कार्य
  1281. 1:00:53प्रशासन में बड़े स्तर पर हिंदुओं को
  1282. 1:00:55सम्मिलित करना था। चोल और दबोल इसके समय
  1283. 1:00:58के प्रमुख जो है बंदरगाह थे। चोल और दबोल
  1284. 1:01:01प्रांतपति तरफदार के विशेष विरुद्ध प्रांत
  1285. 1:01:05तरफ और विशेष विरुद्ध दौलताबाद मसनद एआली
  1286. 1:01:08बारात मजलिस एआली बिदर मजाम ए हुमायूं
  1287. 1:01:11गुलबर्गा मालिक नायब सिहाबुद्दीन अहमद
  1288. 1:01:16प्रथम ने अपनी राजधानी गुलबर्गा से हटाकर
  1289. 1:01:18बिदर में स्थापित की। इसने बिदर का नया
  1290. 1:01:21नाम मोहम्मदबाद रखा। मोहम्मद रखा। मोहम्मद
  1291. 1:01:26थर्ड के शासनकाल में ख्वाजा जहां ख्वाजा
  1292. 1:01:29जहां की उपाधि से महमूद गवाह ईरानी को
  1293. 1:01:31प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। मोहम्मद
  1294. 1:01:34थर्ड के आदेश पर 1482 में 70 वर्ष की
  1295. 1:01:37अवस्था में महमूद गवाह को फांसी दे दी गई।
  1296. 1:01:40महमूद गवाह को फांसी दे दी गई। महमूद गवा
  1297. 1:01:43ने बीदर में एक महाविद्यालय मदरसा की
  1298. 1:01:45स्थापना कराई। इसका भवन तिंजिला था। इसमें
  1299. 1:01:481000 अध्यापक और विद्यार्थी रह सकते थे।
  1300. 1:01:51उन्हें भोजन और कपड़ा भी राज्य की ओर से
  1301. 1:01:54मुफ्त दिया जाता था। रियाजुल इंसा नाम से
  1302. 1:01:57महमूद गवाह के पत्रों का संग्रह किया गया
  1303. 1:02:00है। रियाजुल इंसा के नाम से 1470 ईस्वी
  1304. 1:02:05में रूसी यात्री निकतन बहमनी साम्राज्य
  1305. 1:02:08बीदर की यात्रा पर आया। इस समय बहमनी राज
  1306. 1:02:11पर मोहम्मद थर्ड का शासन था। बीजापुर
  1307. 1:02:14गुलबर्गा तराफ सबसे महत्वपूर्ण में शामिल
  1308. 1:02:17था। कलीम उल्लाह बहमनी वंश का अंतिम अंतिम
  1309. 1:02:20शासक था। इसकी मृत्यु के समय बहमनी राज्य
  1310. 1:02:23पांच स्वतंत्र राज्यों में बट गया। इन
  1311. 1:02:25स्वतंत्र राज्यों से संबंधित विवरण जो है
  1312. 1:02:27इस प्रकार है। आइए देखते हैं। बीजापुर वंश
  1313. 1:02:30आदिल शाही संस्थापक युसुफ आदिल शाह 1489
  1314. 1:02:33में अहमदनगर निजाम शाही वंश मलिक अहमद
  1315. 1:02:37संस्थापक 1490 में बरार इमाद शाही वंश
  1316. 1:02:41फतेह उल्लाह इमाद शाह संस्थापक 1490 में
  1317. 1:02:44गोलकुंडा कुतुब शाही वंश कुली कुतुब शाह
  1318. 1:02:48जो है संस्थापक 1512 ईस्वी में बीदर बरीद
  1319. 1:02:52शाही वंश अमीर अली बरीद जो है संस्थापक
  1320. 1:02:551526 में मोहम्मद बन के मंत्री सैफुद्दीन
  1321. 1:02:59गौरी ने केंद्रीय शासन का कार्य कई
  1322. 1:03:01विभागों में बांटा और आठ मंत्रियों को
  1323. 1:03:04नियुक्त किया जो इस प्रकार थे आठ मंत्री
  1324. 1:03:07वकील ए सल्तनत दिल्ली के मलिक नायब के
  1325. 1:03:09समान वकील ए कुल मंत्रियों के कार्यों का
  1326. 1:03:12निरीक्षण वकील को छोड़कर अमीर ए जुमला
  1327. 1:03:14अर्थ विभाग का अध्यक्ष वजीर ए अशरफ विदेश
  1328. 1:03:18नीति एवं दरबार संबंधी कार्यों का
  1329. 1:03:19निष्पादन नाजिर व अर्थ विभाग से संबंधित
  1330. 1:03:23था पेशवा वकील ए सल्तनत का सहायक था
  1331. 1:03:26कोतवाल नगर का मुख्य पुलिस अधिकारी था।
  1332. 1:03:28सरदे ए जहां न्याय विभाग धर्म तथा दान
  1333. 1:03:31विभाग का अध्यक्ष था। सुल्तान के महल तथा
  1334. 1:03:35दरबार की सुरक्षा के लिए विशेष अंगरक्षक
  1335. 1:03:37सैनिक दल था जिसे शाख एक खेल कहा जाता था।
  1336. 1:03:41यह चार भागों या नौबत में विभाजित थे।
  1337. 1:03:43जिसके मुख्य अधिकारी सर ए नौबत होता था।
  1338. 1:03:46बीजापुर के शासक अली आदिल शाह को सूफी
  1339. 1:03:49कहते थे। अकबर से पहले उसने अपने दरबार
  1340. 1:03:52में कैथोलिक मिशनरियों को बुलाया था। उसने
  1341. 1:03:55अपने पुस्तकालय का अध्यक्ष प्रसिद्ध
  1342. 1:03:56संस्कृत विद्वान बामन पंडित को बनाया था।
  1343. 1:03:59उसके उत्तराधिकारियों ने संस्कृत एवं
  1344. 1:04:02मराठी भाषा को प्रश्रय देना जारी रखा था।
  1345. 1:04:06इब्राहिम आदिल शाह द्वितीय को अबला बाबा
  1346. 1:04:09या गरीबों का दोस्त कहा जाता था। उसने
  1347. 1:04:11किताब ए नौरस नाम की एक पुस्तक की रचना की
  1348. 1:04:14जिसमें गीतों को विभिन्न रागों में बांधकर
  1349. 1:04:16प्रस्तुत किया गया था। उसने नरसपुर नाम से
  1350. 1:04:19एक नई राजधानी बनाई। अपने व्यापक
  1351. 1:04:22दृष्टिकोण के कारण यह जगत गुरु कहलाता था।
  1352. 1:04:24उसने बिठोबा की उपासना के केंद्र पठारपुर
  1353. 1:04:28को भी अनुदान दिए। मोहम्मद कुली कुतुब शाह
  1354. 1:04:31ने 1591 92 ईस्वी में हैदराबाद के बीच में
  1355. 1:04:34चार मीनार बनवाई। मोहम्मद कुली कुतुब शाह
  1356. 1:04:37ने चार मीनार बनवाई। इसमें चारों दिशाओं
  1357. 1:04:39में चार ऊंचे मेहराब है जो चौ मंजिली हैं
  1358. 1:04:42और जिनमें से प्रत्येक ऊंचाई 48 मीटर है।
  1359. 1:04:45हैदराबाद शहर को कुली कुतुब शाह ने ही
  1360. 1:04:47बसाया था। कुली कुतुब शाह ने बसाया था।
  1361. 1:04:50इब्राहिम जो है रौजा एवं गोल गुंबज
  1362. 1:04:53बीजापुरी इमारतों में सबसे प्रसिद्ध है।
  1363. 1:04:55इब्राहिम रौजा व गोल गुंबज बीजापुरी
  1364. 1:04:57इमारतों में सबसे प्रसिद्ध है। इब्राहिम
  1365. 1:04:59रौजा इब्राहिम आदिल शाह का मकबरा है। 1680
  1366. 1:05:03में बनाए गए गोल गुंबज का गुंबद इतना
  1367. 1:05:05विशाल है कि जितना विशाल एकल गुंबद कभी
  1368. 1:05:07नहीं बनवाया गया। इसके सभी अनुपात संग गति
  1369. 1:05:11पर पूर्ण है। चारों कोणों पर बनी ऊंची और
  1370. 1:05:13गोलाकार मीनारों इसकी छवि को एक संतुलन
  1371. 1:05:16प्रदान करती है। कहा जाता है कि मुख्य
  1372. 1:05:18कक्ष के एक ओर से खुस-फुसाहट की आवाज जाए
  1373. 1:05:21तो उसे दूसरे छोर पर भी सुना जा सकता है।
  1374. 1:05:25अब आइए देखते हैं स्वतंत्र प्रांतीय राज
  1375. 1:05:27चैप्टर नंबर 34। सबसे पहले देखते हैं
  1376. 1:05:30जौनपुर। जौनपुर की स्थापना फिरोज़ शाह
  1377. 1:05:32तुगलक ने अपने भाई जूना खान या मोहम्मद
  1378. 1:05:35बिन तुगलक की स्मृति में की थी। जौनपुर
  1379. 1:05:38में स्वतंत्र सरकी राजवंश की स्थापना मलिक
  1380. 1:05:41सरवर ख्वाजा जहान ने की थी।
  1381. 1:05:45ख्वाजा जहान को मलिक उस सर्ग पूर्व का
  1382. 1:05:49स्वामी की उपाधि 1394 ईस्वी में फिरोज शाह
  1383. 1:05:52तुगलक के पुत्र सुल्तान महमूद ने दी थी।
  1384. 1:05:55जौनपुर के प्रमुख शासक थे मुबारक शाह 1399
  1385. 1:05:58से 1402 शमसुद्दीन इब्राहिम शाह 1402 से
  1386. 1:06:011436 ईस्वी महमूद शाह 1436 से 51 एवं
  1387. 1:06:05अंतिम शासक हुसैन शाह 1458 से 1500 ईस्वी
  1388. 1:06:08तक लगभग 75 वर्ष तक स्वतंत्र रहने के बाद
  1389. 1:06:11जौनपुर पर बहलोल लोदी ने कब्जा कर लिया।
  1390. 1:06:15सरकी शासन के अंतर्गत विशेषकर इब्राहिम
  1391. 1:06:17शाह के समय में जौनपुर में साहित्य एवं
  1392. 1:06:20स्थापत्य कला के क्षेत्र में हुए विकास के
  1393. 1:06:22कारण जौनपुर को भारत के सिराज भारत के
  1394. 1:06:25सिराज के नाम से जो है वो जाना गया। अटाला
  1395. 1:06:29देवी की मस्जिद का निर्माण 1408 ईस्वी में
  1396. 1:06:31सरकी सुल्तान इब्राहिम शाह द्वारा किया
  1397. 1:06:34गया था। अटाला देवी मस्जिद का निर्माण
  1398. 1:06:36कन्नौज के राजा विजय चंद्र द्वारा निर्मित
  1399. 1:06:38अटाला देवी के मंदिर को तोड़कर किया गया
  1400. 1:06:41था। अटाला देवी मस्जिद का। जामा मस्जिद का
  1401. 1:06:44निर्माण 1470 ईस्वी में हुसैन शाह सरकी के
  1402. 1:06:47द्वारा किया गया था। पीरबोधन नामक सूफी
  1403. 1:06:49संत इस काल का एक जो है महान संगीतकार था।
  1404. 1:06:53झजरी मस्जिद 1430 ईस्वी में इब्राहिम सरकी
  1405. 1:06:56के द्वारा लाल दरवाजा मस्जिद का निर्माण
  1406. 1:06:59मोहम्मद शाह के द्वारा 1450 ईस्वी में
  1407. 1:07:02किया गया था। चलिए दूसरा राज्य देखते हैं।
  1408. 1:07:04कश्मीर सुहादेव नामक एक हिंदू ने 1301
  1409. 1:07:07ईस्वी में कश्मीर में हिंदू राज की
  1410. 1:07:09स्थापना की थी। 13394-40 ईस्वी में कश्मीर
  1411. 1:07:13में शाहमीर के द्वारा प्रथम मुस्लिम वंश
  1412. 1:07:16की स्थापना की गई। कश्मीर का प्रथम
  1413. 1:07:18मुस्लिम शासक शाहमीर था जो शमसुद्दीन
  1414. 1:07:20शाहमीर के नाम से गद्दी पर बैठा। इसने
  1415. 1:07:23अपनी राजधानी इंद्रकोट में स्थापित की।
  1416. 1:07:27अल्लाउद्दीन ने राजधानी इंद्रकोट से हटाकर
  1417. 1:07:30अल्लाउद्दीन
  1418. 1:07:31दिनपुर श्रीनगर में स्थापित की। हिंदू
  1419. 1:07:34मंदिरों एवं मूर्तियों को तोड़ने का कारण
  1420. 1:07:36सुल्तान सिकंदर शाह 1389 से 1413 ईस्वी को
  1421. 1:07:41बुत सिकन कहा गया। उसने मार्तंड विश्व
  1422. 1:07:44ईशाना चक्रवर्त त्रिपुरेश्वर की मूर्तियों
  1423. 1:07:47को तोड़ दिया। सिकंदर ने कश्मीर की
  1424. 1:07:49बहुसंख्यक हिंदू प्रजा को इस्लाम स्वीकार
  1425. 1:07:52करने के लिए बाध्य किया और उसके समय बाहर
  1426. 1:07:54से बहुत बड़ी संख्या में मुसलमान कश्मीर
  1427. 1:07:57आए थे। 1420 ईस्वी में जैनुल आबदीन
  1428. 1:08:01सिंहासन पर बैठा। इसकी धार्मिक सहिष्णुता
  1429. 1:08:03के कारण इसे कश्मीर का अकबर कहा गया। इसने
  1430. 1:08:07जजिया हटा दिया गया। गोबद्ध निषेध कर दिया
  1431. 1:08:09और सती प्रथा पर भी प्रतिबंध हटा दिया।
  1432. 1:08:12जैनुल आबदीन के प्रशासन में अनेक जो है
  1433. 1:08:15हिंदुओं को उच्च पद प्राप्त थे। श्री भट्ट
  1434. 1:08:18उसका न्याय मंत्री और दरबारी चिकित्सक था।
  1435. 1:08:21बूलर झील स्थित जैना लंका इसके काल की
  1436. 1:08:24अभियांत्रिकी उन्नति का उत्कृष्ट नमूना
  1437. 1:08:27है। जैना लंका जैनुल आबदीन फारसी संस्कृत
  1438. 1:08:30कश्मीरी तिब्बती आदि भाषाओं का ज्ञाता था।
  1439. 1:08:33इसने महाभारत एवं राजतरंगिणी को फारसी में
  1440. 1:08:36अनुवाद करवाया। अब आइए देखते हैं बंगाल।
  1441. 1:08:40बंगाल इख्तियारुद्दीन मोहम्मद बिन
  1442. 1:08:43बख्तियार खिलजी ने बंगाल को दिल्ली सल्तनत
  1443. 1:08:45में मिलाया। गयासुद्दीन तुगलक ने बंगाल को
  1444. 1:08:49तीन भागों में बांटा। लखनऊ, उत्तर बंगाल,
  1445. 1:08:52सोनारगांव, पूर्वी बंगाल, सतगांव, दक्षिण
  1446. 1:08:55बंगाल। 1345 ईस्वी में हाजी इलियास बंगाल
  1447. 1:08:59के विभाजन को समाप्त कर शमसुद्दीन इलियास
  1448. 1:09:02शाह के नाम से बंगाल का शासक बना। पांडवा
  1449. 1:09:05में अदीना मस्जिद का निर्माण 1364 ईस्वी
  1450. 1:09:08में सुल्तान सिकंदर शाह ने करवाया था।
  1451. 1:09:11बंगाल का शासक गयासुद्दीन आजम शाह 1389 से
  1452. 1:09:151409 ईस्वी तक अपनी न्यायप्रियता के लिए
  1453. 1:09:17प्रसिद्ध था। बंगाल के शासक गयासुद्दीन
  1454. 1:09:20आजम शाह क्या है? गयासुद्दीन आजम शाह
  1455. 1:09:22अल्लाउद्दीन हुसैन शाह 1493 से 1518 ईस्वी
  1456. 1:09:26में राजधानी को पांडवा से गौड स्थानांतरित
  1457. 1:09:29किया। पांडवा से गौड जो है स्थानांतरित
  1458. 1:09:31किया। महाप्रभु चैतन्य अलाउद्दीन के
  1459. 1:09:34समकालीन थे। अलाउद्दीन ने सत्यपीर नामक
  1460. 1:09:37आंदोलन की शुरुआत की। मालाधर बसु ने
  1461. 1:09:40अलाउद्दीन के शासनकाल में ही श्री कृष्ण
  1462. 1:09:42विजय की रचना कर गुण राज खान की उपाधि
  1463. 1:09:45धारण की। इनके बेटे को सत्यराज खान की
  1464. 1:09:49उपाधि दी गई। नसीरुद्दीन नुसरत शाह ने गौड
  1465. 1:09:53में बड़ा सोना एवं कदम रसूल मस्जिद का जो
  1466. 1:09:56है निर्माण कराया। नसीरुद्दीन नुसरत शाह
  1467. 1:09:58ने गौड में बड़ा सोना एवं कदम रसूल मस्जिद
  1468. 1:10:01का निर्माण करवाया। मालवा देख लेते हैं।
  1469. 1:10:04दिलावर खान ने 1401 ईस्वी में मालवा को
  1470. 1:10:07स्वतंत्र घोषित किया। दिलावर का पुत्र अलब
  1471. 1:10:10खान हुसंग शाह की उपाधि धारण कर 1405
  1472. 1:10:14ईस्वी में मालवा का शासक बना। इसने अपनी
  1473. 1:10:17राजधानी को धारा से मांडू स्थानांतरित
  1474. 1:10:19किया। मालवा में खिलजी वंश की स्थापना
  1475. 1:10:22महमूद शाह ने की। गुजरात के शासक बहादुर
  1476. 1:10:25शाह ने महमूद शाह सेकंड को युद्ध में
  1477. 1:10:28परास्त कर उसकी हत्या कर दी और मालवा को
  1478. 1:10:30गुजरात में मिला लिया। मांडू के किले,
  1479. 1:10:34हिंडोला भवन या दरबार हॉल का निर्माण
  1480. 1:10:36कुसंग शाह ने करवाया था। इस किले में
  1481. 1:10:39सर्वाधिक महत्वपूर्ण है दिल्ली दरवाजा।
  1482. 1:10:41क्या है? दिल्ली दरवाजा। बाज बहादुर एवं
  1483. 1:10:44रूपमती का महल का निर्माण सुल्तान
  1484. 1:10:46नसीरुद्दीन शाह द्वारा करवाया गया था।
  1485. 1:10:49जहाज महल का निर्माण गयासुद्दीन खिलजी ने
  1486. 1:10:51मांडू में करवाया था। कुसक महल को महमूद
  1487. 1:10:54खिलजी ने फतेहाबाद नामक स्थान पर बनवाया
  1488. 1:10:57था कुसक महल को। अब देखते हैं नेक्स्ट
  1489. 1:11:00गुजरात। गुजरात के शासक राजा कर्ण को
  1490. 1:11:03पराजित कर अलाउद्दीन ने 1297 ईस्वी में
  1491. 1:11:06दिल्ली सल्तनत में मिला लिया था। 1391 में
  1492. 1:11:10मोहम्मद शाह तुगलक द्वारा नियुक्त गुजरात
  1493. 1:11:12का सूबेदार जफर खान ने सुल्तान मुजफ्फर
  1494. 1:11:15शाह मुजफ्फर शाह की उपाधि ग्रहण कर 1407
  1495. 1:11:18ईस्वी में गुजरात का स्वतंत्र सुल्तान
  1496. 1:11:20बना। गुजरात के प्रमुख शासक थे अहमद शाह
  1497. 1:11:231411 से 1452 ईस्वी तक महमूद शाह बेगड़ा
  1498. 1:11:271458 से 151 ईस्वी तक और बहादुर शाह 1526
  1499. 1:11:31से 1537 ईस्वी तक अहमद शाह ने असावल के
  1500. 1:11:35निकट साबरमती नदी के किनारे अहमदाबाद नामक
  1501. 1:11:38नगर बसाया और पाटन से राजधानी हटाकर
  1502. 1:11:41अहमदाबाद को राजधानी बनाया। गुजरात का
  1503. 1:11:44सबसे प्रसिद्ध शासक था महमूद बेगड़ा।
  1504. 1:11:46महमूद बेगड़ा था। महमूद बेगड़ा ने गिरनार
  1505. 1:11:50के निकट मुस्तफाबाद नामक नगर और चंपानेर
  1506. 1:11:53के निकट मोहम्मद नगर बसाया। महमूद बेगड़ा
  1507. 1:11:56सुल्तान सिकंदर लोदी का समकालीन तथा उसका
  1508. 1:12:00मित्र था। इसके शासनकाल में पहली बार
  1509. 1:12:02दिल्ली के शासक सिकंदर लोदी ने गुजरात के
  1510. 1:12:05शासक बेगड़ा को उपहार भेजे। बाराबोसा ने
  1511. 1:12:09मजहूद बेगड़ा को विष पुरुष कहा। बारबोसा
  1512. 1:12:12ने मजहूद बेगड़ा को विष पुरुष कहा है।
  1513. 1:12:15बारथोमा ने बेगड़ा के विषय में लिखा है कि
  1514. 1:12:18उसकी मूछ इतनी लंबी थी कि वह उन्हें अपने
  1515. 1:12:21सिर के पीछे बांधता था। उदयराज बेगड़ा का
  1516. 1:12:24दरबारी कवि था जिसने सुल्तान की प्रशंसा
  1517. 1:12:27में महमूद चरित नामक जो है पुस्तक लिखी
  1518. 1:12:30है। एक ब्राह्मण मलिक गोपी बेगड़ा का
  1519. 1:12:33मुख्यमंत्री था। हुमायूं से हार के बाद
  1520. 1:12:36बहादुर शाह ने दीप को पुर्तगालियों को
  1521. 1:12:38सौंप दिया। बहादुर शाह संगीत प्रेम था।
  1522. 1:12:41उसने संगीतज्ञ मंझू कलावंत को संरक्षण
  1523. 1:12:44प्रदान किया। 1611 ईस्वी में सिकंदर बिन
  1524. 1:12:48मोहम्मद मंजू द्वारा लिखी मिररात ए
  1525. 1:12:50सिकंदरी गुजरात के इतिहास को जफर खान
  1526. 1:12:53मुजफ्फर शाह फर्स्ट द्वारा मुस्लिम विजय
  1527. 1:12:55से मुजफ्फर शाह थर्ड 1591 की मृत्यु और
  1528. 1:12:59गुजरात में बाद की घटनाओं तक वर्णन देता
  1529. 1:13:01है। यह पुस्तक गुजरात के सामाजिक एवं
  1530. 1:13:04सांस्कृतिक जीवन का लेखाजोखा है। अब आइए
  1531. 1:13:08देखते हैं मेवाड़। अलाउद्दीन खिलजी ने
  1532. 1:13:101303 ईस्वी में मेवाड़ के गुहिलौत राजवंश
  1533. 1:13:14के रत्न सिंह को पराजित कर मेवाड़ को
  1534. 1:13:16दिल्ली सल्तनत में मिला लिया। अलाउद्दीन
  1535. 1:13:19खिलजी गुहिलौत वंश की एक शाखा सिसोदिया
  1536. 1:13:22वंश के हम्मीर देव ने मोहम्मद तुगलक को
  1537. 1:13:25हराकर पूरे मेवाड़ को जो है स्वतंत्र करा
  1538. 1:13:27लिया। राणा कुंभा ने 1448 ईस्वी में
  1539. 1:13:30चित्तौड़ में एक विजय स्तंभ की स्थापना
  1540. 1:13:33की। खानबा के युद्ध 1527 ईस्वी में राणा
  1541. 1:13:37सांगा एवं बाबा के बीच हुआ जिसमें बाबर जो
  1542. 1:13:40है विजय हुआ। 1576 ईस्वी में हल्दीघाटी का
  1543. 1:13:44युद्ध राणा प्रताप एवं अकबर के बीच हुआ
  1544. 1:13:46जिसमें अकबर जो है विजय हुआ। मेवाड़ की
  1545. 1:13:49राजधानी चित्तौड़गढ़ थी। जहांगीर ने
  1546. 1:13:52मेवाड़ को मुगल साम्राज्य में मिला लिया।
  1547. 1:13:54जहांगीर ने मेवाड़ को मुगल साम्राज्य में
  1548. 1:13:56मिला लिया। खान देश देख लेते हैं। तुगलक
  1549. 1:14:00वंश के पतन के समय फिरोज शाह तुगलक के
  1550. 1:14:02सूबेदार मलिक अहमद जो है फारूकी ने नर्मदा
  1551. 1:14:06एवं ताप्ती नदियों के बीच 1382 ईस्वी में
  1552. 1:14:09खान देश की स्थापना की। खान देश की
  1553. 1:14:12राजधानी बुरहानपुर थी। इसका सैनिक
  1554. 1:14:14मुख्यालय असीरगढ़ था। 1601 में अकबर ने
  1555. 1:14:18खान देश को मुगल साम्राज्य में जो है मिला
  1556. 1:14:20दिया 1601 में। अब आइए अगला चैप्टर देखते
  1557. 1:14:23हैं। 35वां सूफी आंदोलन। अबू हाशिम ने
  1558. 1:14:27सबसे पहले सूफी शब्द का प्रयोग किया था।
  1559. 1:14:29अबू हाशिम ने जो लोग सूफी संतों में शिष्य
  1560. 1:14:32शिष्यता ग्रहण करते थे उन्हें मुरीद कहा
  1561. 1:14:35जाता था। सूफी जिन आश्रमों में निवास करते
  1562. 1:14:38थे उन्हें खानकाह या मठ कहा जाता था।
  1563. 1:14:42सूफियों के धर्म संघ बासारा इस्लाम
  1564. 1:14:46सिद्धांत के समर्थक और बेसारा इस्लामी
  1565. 1:14:48सिद्धांत से बंधे नहीं में विभाजित थे।
  1566. 1:14:52ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने भारत में
  1567. 1:14:54चिश्ती सिलसिला की शुरुआत की। चिश्ती
  1568. 1:14:56सिलसिला का मुख्य केंद्र जो है वो अजमेर
  1569. 1:14:59था। क्या था? अजमेर था। चिश्ती सिलसिला के
  1570. 1:15:02कुछ अन्य महत्वपूर्ण संत थे निजामुद्दीन
  1571. 1:15:04औलिया, बाबा फरीद, बख्तियार काकी एवं शेख
  1572. 1:15:08बुरहानुद्दीन गरीब। बाबा फरीद बख्तियार
  1573. 1:15:11काकी के शिष्य थे। बख्तियार काकी के शिष्य
  1574. 1:15:15कौन थे? तो बाबा फरीद थे। बाबा फरीद की
  1575. 1:15:17रचनाएं गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल है।
  1576. 1:15:19बाबा फरीद की। बाबा फरीद के दो महत्वपूर्ण
  1577. 1:15:22शिष्य थे। निजामुद्दीन औलिया एवं
  1578. 1:15:24अलाउद्दीन साबिर। हजरत निजामुद्दीन औलिया
  1579. 1:15:28ने अपने जीवन काल में दिल्ली के सात
  1580. 1:15:30सुल्तानों का शासन देखा था। इनके प्रमुख
  1581. 1:15:32शिष्य थे शेख सलीम चिश्ती, अमीर खुसरो,
  1582. 1:15:36अमीर हसन, अमीर हसन देहलवी। अब यहां से
  1583. 1:15:40क्या निकल के आता है कि बख्तियार काकी के
  1584. 1:15:42शिष्य था बाबा फरीद। बाबा फरीद के शिष्य
  1585. 1:15:45था निजामुद्दीन औलिया और निजामुद्दीन
  1586. 1:15:47औलिया के जो शिष्य था वो अमीर खुसरो अमीर
  1587. 1:15:50हसन देहलवी था। शेख बुरहानुद्दीन गरीब ने
  1588. 1:15:551340 ईस्वी में दक्षिण भारत के क्षेत्रों
  1589. 1:15:57में चिश्ती संप्रदाय की शुरुआत की और
  1590. 1:15:59दौलताबाद को मुख्य केंद्र बनाया। सूफियों
  1591. 1:16:03के सुहरादी धर्म संघ या सिलसिला की
  1592. 1:16:06स्थापना शेख सिहाबुद्दीन उमर सुहरा बर्दी
  1593. 1:16:08ने की। किंतु 1262 ईस्वी में इसके सुदृढ़
  1594. 1:16:11संचालन का श्रेय शेख बदरुद्दीन जकारिया को
  1595. 1:16:14है। इन्होंने सिंध एवं मुल्तान को मुख्य
  1596. 1:16:17केंद्र बनाया। सुहरादी धर्म संघ के अन्य
  1597. 1:16:20प्रमुख संत थे जलालुद्दीन तबरीजी सैयद
  1598. 1:16:24सुरखजोश बुरहान आदि। सुरादी सिलसिला ने
  1599. 1:16:27राज्य के संरक्षण को स्वीकार किया था।
  1600. 1:16:29राज्य के संरक्षण को जो है स्वीकार किया
  1601. 1:16:32था। शेख अब्दुल्ला सतारी ने सतारी सिलसिले
  1602. 1:16:35की स्थापना की थी। इसका मुख्य केंद्र जो
  1603. 1:16:37है वो बिहार था। क्या है? बिहार था। कादरी
  1604. 1:16:40धर्म संघ या सिलसिला की स्थापना सैयद अबुल
  1605. 1:16:43कादिर अल जिलानी ने बगदाद में की थी। भारत
  1606. 1:16:47में इस सिलसिला के प्रवर्तक मोहम्मद गौस
  1607. 1:16:49थे। इस सिलसिले के अनुयाय गाने बजाने के
  1608. 1:16:52विरोधी थे। ये लोग सिया मत के विरुद्ध थे।
  1609. 1:16:55राजकुमार दारा शाहजहां का ज्यष्ठ पुत्र
  1610. 1:16:58कादरी सिलसिला के मुल्ला शाह का शिष्य था।
  1611. 1:17:01क्या है? मुल्ला शाह का शिष्य था।
  1612. 1:17:03नक्शबंदी धर्म संघ या सिलसिला की स्थापना
  1613. 1:17:07ख्वाजा उबेदुल्लाह ने की थी। भारत में इस
  1614. 1:17:09सिलसिला की स्थापना ख्वाजा बकी बिल्ला बकी
  1615. 1:17:13बिल्लाह ने जो है वो की थी। भारत में इसके
  1616. 1:17:16व्यापक जो है प्रचार का श्रेय बकी बिल्लाह
  1617. 1:17:19के शिष्य अकबर के समकालीन शेख अहमद
  1618. 1:17:21सरहिंदी को था। शेख अहमद जो है सरहिंदी को
  1619. 1:17:25था। फिरदौसी सुहराबादी सिलसिला की एक शाखा
  1620. 1:17:28थी। फिरदौसी जो है सुहराबादी सिलसिला के
  1621. 1:17:31एक जो है शाखा थी जिसका कार्य क्षेत्र
  1622. 1:17:34बिहार था। इस सिलसिले का शेख शरीफुद्दीन
  1623. 1:17:37याहिया ने लोकप्रिय बनाया। याहिया ख्वाजा
  1624. 1:17:40निजामुद्दीन के शिष्य थे। अब आइए देखते
  1625. 1:17:43हैं अगला चैप्टर भक्ति आंदोलन। क्या है?
  1626. 1:17:46भक्ति आंदोलन देखते हैं। छठी शताब्दी में
  1627. 1:17:50भक्ति आंदोलन की शुरुआत तमिल क्षेत्र से
  1628. 1:17:52हुई जो कर्नाटक और महाराष्ट्र में जो है
  1629. 1:17:54वो फैल गई। भक्ति आंदोलन का विकास 12
  1630. 1:17:58अलवार वैष्णव संतों और 63 नैनार शैव संतों
  1631. 1:18:02ने किया। शैव नैनार और वैष्णव अलवार
  1632. 1:18:04जैनियों और बौद्धों के अपरिग्रह को
  1633. 1:18:07अस्वीकार कर ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत
  1634. 1:18:09भक्ति को ही मुक्ति का मार्ग बताते थे।
  1635. 1:18:13अलबर शब्द का अर्थ है अंत ज्ञान रखने
  1636. 1:18:16वाला। यह व्यक्ति जो ईश्वरीय चिंतन में
  1637. 1:18:18पूर्णतः विलीन हो गया हो। अलबरों में
  1638. 1:18:22एकमात्र महिला साधवी अंडाल का नाम आता है।
  1639. 1:18:24किसका? अंडाल का नाम मिलता है जिसमें
  1640. 1:18:26भक्ति गीतों में कृष्ण कथाएं अधिक मिलती
  1641. 1:18:29है। शैव संत अपार ने पल्लव राजा महेंद्र
  1642. 1:18:32बर्मन को शैव धर्म स्वीकार करवाया था।
  1643. 1:18:36भक्ति कवि संतों का संत कहा जाता था।
  1644. 1:18:38भक्ति कवि संतों को संत कहा जाता था और
  1645. 1:18:41उनके दो समूह थे। प्रथम समूह वैष्णव संत
  1646. 1:18:44थे जो महाराष्ट्र में लोकप्रिय हुए। वे
  1647. 1:18:47भगवान बिठोबा के भक्त थे। बिठोबा पंथ के
  1648. 1:18:50संत और उनके अनुयाई बरकरी या तीर्थ यात्री
  1649. 1:18:53पंथ कहलाते थे। क्योंकि हर वर्ष पंडरपुर
  1650. 1:18:57की तीर्थ यात्रा पर जाते थे। पंडरपुर की
  1651. 1:18:59तीर्थ यात्रा पर जाते थे। दूसरा समूह
  1652. 1:19:01पंजाब एवं मध्य राजस्थान के हिंदी भाषी
  1653. 1:19:03क्षेत्रों में सक्रिय था और इसकी निर्गुण
  1654. 1:19:05भक्ति हर विशेषता से परे भगवान की भक्ति
  1655. 1:19:08में आस्था थी। भक्ति आंदोलन को दक्षिण
  1656. 1:19:12भारत से उत्तर भारत में रामानंद के द्वारा
  1657. 1:19:15लाया गया। भक्ति आंदोलन को दक्षिण भारत से
  1658. 1:19:17उत्तर भारत में रामानंद के द्वारा लाया
  1659. 1:19:19गया। बंगाल में कृष्ण भक्ति के प्रारंभिक
  1660. 1:19:22प्रतिपादकों में विद्या यापति ठाकुर और
  1661. 1:19:25चंडी दास थे। रामानंद की शिक्षा से दो
  1662. 1:19:28संप्रदायों का पारदुभाव हुआ। सगुण जो
  1663. 1:19:31पुनर्जन्म में विश्वास रखता था और निर्गुण
  1664. 1:19:33जो भगवान के निराकार रूप को पूजता था।
  1665. 1:19:37शगुन संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध
  1666. 1:19:39व्याख्याताओं में से तुलसीदास और नाभदास
  1667. 1:19:42जैसे राम भक्त और निमका निमकारार्क
  1668. 1:19:45बलवाचार्य चैतन्य सूरदास और मीराबाई जैसे
  1669. 1:19:48कृष्ण भक्त थे। निमकारार्क बलवाचार्य
  1670. 1:19:51चैतन्य सूरदास और मीराबाई जैसे कृष्ण भक्त
  1671. 1:19:54थे। निर्गुण संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध
  1672. 1:19:56प्रतिनिधि थे कबीर जिन्हें भावी उत्तर
  1673. 1:19:59भारतीय पंथों का आध्यात्मिक गुरु माना गया
  1674. 1:20:01है। शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन के विरोध
  1675. 1:20:05में दक्षिण में वैष्णव संतों द्वारा चार
  1676. 1:20:07मतों की स्थापना की गई थी। दक्षिण में
  1677. 1:20:10वैष्णव संतों द्वारा स्थापित चार मत श्री
  1678. 1:20:13संप्रदाय रामानुजाचार्य द्वारा विशिष्टा
  1679. 1:20:15दैतवाद ब्रह्म संप्रदाय माधवाचार्य द्वारा
  1680. 1:20:18दैतवाद रुद्र संप्रदाय विष्णु स्वामी
  1681. 1:20:21शुद्ध दैतवाद शंकादि संप्रदाय निमकाचार्य
  1682. 1:20:24दैतवाद दैतवाद
  1683. 1:20:26भक्ति आंदोलन के संत शंकराचार्य इनका जन्म
  1684. 1:20:301788 ईस्वी में केरल के कलाड़ी नामक गांव
  1685. 1:20:33में हुआ। इनके पिता का नाम शिव गुरु एवं
  1686. 1:20:36माता का नाम आर्यंबा था। अरंबा सन्यास की
  1687. 1:20:39दीक्षा इन्होंने गोविंद योगी से ली।
  1688. 1:20:41इन्होंने भारत के चारों कोनों में पीठों
  1689. 1:20:43की स्थापना की। दक्षिण में श्रृंगेरी,
  1690. 1:20:45चिकमंगलुरु, कर्नाटक में शारदा पीठ, पूरब
  1691. 1:20:48में पूरी उड़ीसा में गोवर्धन पीठ, उत्तर
  1692. 1:20:51में बद्रीनाथ, चमोली उत्तराखंड में,
  1693. 1:20:53ज्योतिष पीठ तथा पश्चिम में द्वारका,
  1694. 1:20:55जामगर, गुजरात में शारदा पीठ, कालिका पीठ,
  1695. 1:20:59चारों पीठों में सबसे पहले श्रृंगरी पीठ
  1696. 1:21:01की स्थापना हुई।
  1697. 1:21:04शंकराचार्य की मृत्यु 820 ईस्वी में हो
  1698. 1:21:06गई। शंकराचार्य ने बादरायन के ब्रह्मसूत्र
  1699. 1:21:09के आधार पर अपने सिद्धांत का जो है वो
  1700. 1:21:12प्रतिपादन किया और अपने दर्शन जो जीव
  1701. 1:21:15ब्रह्म की एकता के सिद्धांत पर आधारित है
  1702. 1:21:18को अदैतवाद एक्वतवाद
  1703. 1:21:20एकत्ववाद का नाम दिया। यह वेदांत की सबसे
  1704. 1:21:24पुरानी विचारधारा है। इस विचारधारा का
  1705. 1:21:26मुख्य सिद्धांत जीवन मुक्ति है। अर्थात यह
  1706. 1:21:29ऐसा विचार है कि इस जीवन में ही मोक्ष
  1707. 1:21:31प्राप्त किया जा सकता है। यह भारत के अन्य
  1708. 1:21:34दर्शनों के विपरीत है। अन्य दर्शनों का
  1709. 1:21:37मुख्य सिद्धांत विदेह मुक्त अर्थात मृत्यु
  1710. 1:21:39उपरांत मोच है। अद्वैत का लक्ष्य
  1711. 1:21:42आत्मज्ञान प्राप्त करना और आत्मा एवं
  1712. 1:21:44ब्रह्मा की पहचान की पूर्ण समझ जो है
  1713. 1:21:46प्राप्त करना है। आत्मा और ब्रह्मा के सही
  1714. 1:21:49ज्ञान से सभी दोहरी प्रवृत्तियां समाप्त
  1715. 1:21:51हो जाती है। अतम मोक्ष प्राप्त होता है।
  1716. 1:21:55यद्यपि शंकराचार्य शैव धर्म के अनुयाय थे।
  1717. 1:21:57तथापि उन्होंने पंचायतन पूजा का निरूपण
  1718. 1:22:00किया जिसमें शिव, विष्णु, विष्णु, शक्ति,
  1719. 1:22:03सूर्य एवं गणेश की पूजा का विधान था। अब
  1720. 1:22:06आइए जानते हैं रामानुजा चार्ज के बारे
  1721. 1:22:09में। 11वीं शताब्दी इन्होंने राम को अपना
  1722. 1:22:11आराध्य माना। इनका जन्म जो है 1017 ईस्वी
  1723. 1:22:15में मद्रास के निकट पंबर नामक स्थान पर
  1724. 1:22:18हुआ था। 1137 ईस्वी में इनकी मृत्यु हो
  1725. 1:22:21गई। रामानुज ने वेदांत में प्रशिक्षण अपने
  1726. 1:22:25गुरु कांचीपुरम के यादव प्रकाश से प्राप्त
  1727. 1:22:28किया था। इनके अनुसार मोक्ष प्राप्ति का
  1728. 1:22:31सर्वोत्तम साधन विष्णु के प्रति अनन्य
  1729. 1:22:33भक्ति भाव रखना है। भगवान विष्णु की कृपा
  1730. 1:22:36दृष्टि से भक्त उनके साथ एकाकार होने का
  1731. 1:22:39परमानंद प्राप्त कर सकता है। रामानुज ने
  1732. 1:22:42विशिष्टता दैतवाद के सिद्धांत का
  1733. 1:22:45प्रतिपादन किया। विशिष्टा दैतवाद के
  1734. 1:22:47सिद्धांत का प्रतिपादन किया। जिसके अनुसार
  1735. 1:22:49आत्मा परमात्मा से जुड़ने के बाद भी अपनी
  1736. 1:22:52अलग सत्ता बनाए रखती है। इनके सिद्धांत
  1737. 1:22:56में ने भक्ति की नई धारा को बहुत प्रेरित
  1738. 1:22:58किया जो परवर्ती काल में उत्तरी भारत में
  1739. 1:23:02विकसित हुई। रामानुजाचार्य के अनुसार
  1740. 1:23:04आत्मा एवं परमात्मा का संबंध चिंगारी व
  1741. 1:23:08अग्नि के संबंध जैसा है। रामानुज के
  1742. 1:23:10अनुयायियों को वैष्णव कहा जाता है।
  1743. 1:23:13शंकराचार्य का दृष्टिकोण था कि इनके
  1744. 1:23:15अनुसार ब्रह्मा निर्गुण है। इनके अनुसार
  1745. 1:23:17ज्ञान ही मुक्ति का मुख्य साधन है। लेकिन
  1746. 1:23:20रामानुज रामानुज का दृष्टिकोण था। इनके
  1747. 1:23:23अनुसार ब्रह्मा के कुछ गुण भी होते हैं।
  1748. 1:23:25इनके अनुसार श्रद्धा तथा समर्पण का अभ्यास
  1749. 1:23:27मुक्ति प्राप्ति का जो है साधन है।
  1750. 1:23:30रामानंद 1368 से 1468 ईस्वी तक रामानंद का
  1751. 1:23:34जन्म प्रयाग में हुआ था। इनकी शिक्षा
  1752. 1:23:36प्रयाग तथा वाराणसी में हुई। इन्होंने
  1753. 1:23:38अपना संप्रदाय सभी जातियों के लिए खोल
  1754. 1:23:40दिया। रामानुज की भांति इन्होंने भी भक्ति
  1755. 1:23:44को मोक्ष जो है एकमात्र साधन स्वीकार
  1756. 1:23:48किया। एक रामानुज अलग हैं। यह रामानंद है।
  1757. 1:23:51इन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम एवं सीता
  1758. 1:23:53की आराधना को समाज के समक्ष रखा। रामानंद
  1759. 1:23:56के 12 शिष्यों में दो स्त्रियां पद्मावती
  1760. 1:23:58एवं सुरसरी थी। इनके प्रमुख शिष्य थे
  1761. 1:24:02रैदास जो कि चमार थे। कबीर जो जुलाह थे,
  1762. 1:24:04धनना जो जाट थे, सेना जो नाई थे, पीपा जो
  1763. 1:24:07राजपूत थे, सधना जो कसाई थे। रामानंद पहले
  1764. 1:24:11भक्ति संत थे। जिन्होंने अपने संदेश के
  1765. 1:24:13प्रचार के लिए जो है वो हिंदी भाषा का
  1766. 1:24:16प्रयोग किया। अब आइए जानते हैं कबीर के
  1767. 1:24:20बारे में। 1398 से 1518 ईस्वी तक। कबीर का
  1768. 1:24:23जन्म वाराणसी में एक विधवा ब्राहणी के
  1769. 1:24:25गर्भ से लोक श्रुतियों के अनुसार हुआ था।
  1770. 1:24:28लोक लज्जा के भय से उसने नवजात शिशु को
  1771. 1:24:30वाराणसी में लहर लहरतारा के पास एक तालाब
  1772. 1:24:34के समीप छोड़ दिया। जुलाहा नीरू तथा उसकी
  1773. 1:24:37पत्नी नीमा इस नवजात शिशु को अपने घर ले
  1774. 1:24:40आए। इस बालाक का नाम कबीर रखा। कबीर की
  1775. 1:24:44शादी जो है लोई से हुई। लोई से हुई। उनके
  1776. 1:24:47दो बच्चे हुए और उनकी जिंदगी आम गृहस्थ
  1777. 1:24:50जैसी ही थी। इन्होंने राम रहीम, हजरत,
  1778. 1:24:53अल्लाह आदि को एक ही ईश्वर के अनेक रूप
  1779. 1:24:55माने। इन्होंने जाति प्रथा, धार्मिक
  1780. 1:24:58कर्मकांड, बाह्य आडंबर, मूर्ति पूजा, जप,
  1781. 1:25:01तप, अवतारवाद आदि का घोर विरोध करते हुए
  1782. 1:25:04एकेश्वरवाद में आस्था व्यक्त की एवं
  1783. 1:25:06निराकार ब्रह्म की उपासना को महत्व दिया।
  1784. 1:25:10कबीर मानते थे कि मानव की आत्मा का अंतिम
  1785. 1:25:13लक्ष्य ईश्वर से एकाकार होना है। निर्गुण
  1786. 1:25:16भक्ति धारा से जुड़े कबीर ऐसे प्रथम भक्त
  1787. 1:25:19थे जिन्होंने संत होने के बाद भी कुंता
  1788. 1:25:21गृहस्थ जीवन का निर्वाह किया। इसके अनुयाई
  1789. 1:25:25कबीर पंथी कहलाए। कबीर के उपदेश शब्द शब्द
  1790. 1:25:28सिखों के आदि ग्रंथ में संग्रहित है। कबीर
  1791. 1:25:31की वाणी का संग्रह जो है बीजक शिष्य
  1792. 1:25:33धर्मदास द्वारा संकलित है। बीजक में
  1793. 1:25:35संकलित है। नाम से प्रसिद्ध है।
  1794. 1:25:40बीजक में तीन भाग है। रमैयनी, शबद और
  1795. 1:25:43साखी। उनकी भाषा को सधुकड़ी कहा गया।
  1796. 1:25:46सधुकड़ी भाषा कहा गया है। इसमें ब्रज भाषा
  1797. 1:25:49अवधि एवं राजस्थानी भाषा के शब्द पाए जाते
  1798. 1:25:51हैं। कबीर दास की मृत्यु में मघर में हुई
  1799. 1:25:54है। कबीर दास की मृत्यु में मघर में हुई
  1800. 1:25:56है। कबीर के शिष्य धरनीदास ने छत्तीसगढ़
  1801. 1:25:58से कबीर पंथ की धर्मदासी शाखा की स्थापना
  1802. 1:26:01की। धरनीदास जन्म 1655 ईस्वी में सत्य
  1803. 1:26:04प्रकाश और प्रेम प्रकाश नामक जो है वो
  1804. 1:26:07पुस्तक लिखी। सत प्रकाश और प्रेम प्रकाश
  1805. 1:26:09नामक जो है वह पुस्तक लिखे। अब आइए देखते
  1806. 1:26:13हैं गुरु नानक क्या है? गुरु नानक। गुरु
  1807. 1:26:16नानक का जन्म 15 अप्रैल क्या है? 15
  1808. 1:26:18अप्रैल 1469
  1809. 1:26:21ईस्वी में रावी नदी के किनारे स्थित
  1810. 1:26:22तलवंडी नामक ग्राम में हुआ था जो वर्तमान
  1811. 1:26:25में ननकाना साहिब के नाम से विख्यात है।
  1812. 1:26:27ननकाना साहिब के नाम से विख्यात है।
  1813. 1:26:29वर्तमान में ननकाना साहिब पाकिस्तानी
  1814. 1:26:31पंजाब में है। सिख समुदाय गुरु नानक देव
  1815. 1:26:34जी का जन्म दिवस पारंपरिक रूप से कार्तिक
  1816. 1:26:36पूर्णिमा अक्टूबर नवंबर के दिन में मनाता
  1817. 1:26:39है जो अंग्रेजी कैलेंडर की तिथि से अलग
  1818. 1:26:41है। उनकी माता का नाम त्रिपता देवी तथा
  1819. 1:26:44पिता का नाम मेहता कालूराम था जो पटवारी
  1820. 1:26:47थे। पटवारी थे। बटाला के मूलराज खत्री की
  1821. 1:26:50बेटी सुलक्ष्मी से उनका विवाह हुआ जिससे
  1822. 1:26:54उन्हें दो पुत्र और दो पुत्रियां हुई।
  1823. 1:26:57उन्होंने देश का पांच बार चक्कर लगाया
  1824. 1:26:59जिसे उदासीष कहा जाता है। क्या है? उदासीष
  1825. 1:27:02कहा जाता है। उन्होंने कीर्तनों के माध्यम
  1826. 1:27:04से उपदेश दिए। वे काव्य रचना करते थे और
  1827. 1:27:07रबाब के संगीत के साथ गाया करते थे।
  1828. 1:27:09सारंगी सारंगी उनका स्वामी भक्ति शिष भाई
  1829. 1:27:12मर्दाना बजाया करता था। अपने जीवन के
  1830. 1:27:15अंतिम क्षणों में उन्होंने रावी नदी के
  1831. 1:27:17किनारे करतारपुर में अपना डेहरा यानी मठ
  1832. 1:27:20स्थापित किया। अपने जीवन काल में उन्होंने
  1833. 1:27:22आध्यात्मिक आधार पर अपने पुत्रों की जगह
  1834. 1:27:25अपने शिष्य भाई लहना शिष्य भाई लहना अंगद
  1835. 1:27:29को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। इनकी
  1836. 1:27:32मृत्यु 1539 ईस्वी में करतारपुर में हुई।
  1837. 1:27:35नानक ने सिख धर्म की स्थापना की। नानक
  1838. 1:27:38सूफी संत बाबा फरीद से प्रभावित थे और
  1839. 1:27:41उनसे मिलने पाकप्टन गए थे। नानक के प्रमुख
  1840. 1:27:45उपदेशों में एक ओंकार एक ईश्वर सत्य मेहनत
  1841. 1:27:48और सेवा का महत्व जो है वो शामिल है। अब
  1842. 1:27:52आइए जानते हैं चैतन्य स्वामी के बारे में।
  1843. 1:27:55चैतन्य का जन्म जो है 1486 ईस्वी में
  1844. 1:27:57नवदीप बंगाल के मायापुर गांव में हुआ था।
  1845. 1:28:00इनके पिता का नाम जगन्नाथ मिश्र एवं माता
  1846. 1:28:03का नाम सची देवी था। पाठशाला में चैतन्य
  1847. 1:28:05को निमाई पंडित या गौरांग कहा जाता था।
  1848. 1:28:09चैतन्य का वास्तविक नाम बसंवर था।
  1849. 1:28:11इन्होंने गोसाई संघ की स्थापना की और साथ
  1850. 1:28:13ही संकीर्तन प्रथा गायन की कीर्तन शैली को
  1851. 1:28:16जन्म दिया। 1510 ईस्वी में केशव भारती
  1852. 1:28:19नामक सन्यासी ने चैतन्य को सन्यास की
  1853. 1:28:22दीक्षा दी। सन्यासी बनने के बाद बंगाल
  1854. 1:28:25छोड़कर पूरी उड़ीसा चले गए। जहां उन्होंने
  1855. 1:28:27दो दशक तक भगवान जगन्नाथ की उपासना की।
  1856. 1:28:30इनकी मृत्यु 1533 ईस्वी में हो गई। इनके
  1857. 1:28:34दार्शनिक सिद्धांत को अनिचित्य भेदा
  1858. 1:28:36भेदाभेदवाद के नाम से जाना जाता है। इस
  1859. 1:28:40विचारधारा के बारे में माना जाता है कि यह
  1860. 1:28:42माधवाचार्य के कठोर द्वैत सिद्धांत और
  1861. 1:28:44रामानुज के विशिष्ट अद्वैत का एकीकरण है।
  1862. 1:28:48इस विचारधारा के अनुसार सर्वोच्च भगवान और
  1863. 1:28:50व्यक्तिगत आत्मा एक ही समय में एक और
  1864. 1:28:52भिन्न-भिन्न है। इसी दर्शन का अनुसरण जो
  1865. 1:28:57है करता है चैतन्य का अनिचित्य भेदा
  1866. 1:29:00भेदवाद विचारधारा का अनुयाय गोंडीय वैष्णव
  1867. 1:29:03है अंचित भेदाभेदवाद विचारधारा के अनुयाय
  1868. 1:29:06गोंडीय वैष्णव है श्रीमद् बलवाचार्य
  1869. 1:29:11श्रीमद् बलवाचार्य श्रीमद् बलवाचार्य का
  1870. 1:29:14जन्म 1479 ईस्वी में चंपारण वाराणसी में
  1871. 1:29:17हुआ था। इनके पिता का नाम लक्ष्मण भट्ट
  1872. 1:29:19तथा माता का नाम यलमगुरु था। क्या है?
  1873. 1:29:22एलमगुरु था। इनका विवाह महालक्ष्मी के साथ
  1874. 1:29:24हुआ। इनके दो पुत्र थे गोपीनाथ जन्म 1511
  1875. 1:29:27ईस्वी में तथा विट्ठलनाथ जन्म 1516 ईस्वी
  1876. 1:29:30में था। इन्होंने गंगा यमुना संगम के समीप
  1877. 1:29:33अरैल नामक स्थान पर अपना निवास स्थान जो
  1878. 1:29:35है वह बनाया। बलवाचार्य ने भक्ति साधना पर
  1879. 1:29:39विशेष जोर दिया। इन्होंने भक्ति को मोक्ष
  1880. 1:29:41का साधन बताया। इनके अनुसार आत्मा और
  1881. 1:29:44परमात्मा भिन्न-भिन्न नहीं है। अपितु एक
  1882. 1:29:46हैं। इस विचारधारा के अनुय पुष्टि मार्ग
  1883. 1:29:49संप्रदाय से संबंधित है। इस मत के
  1884. 1:29:53अनुयायियों की प्रार्थना में नाथ द्वारा
  1885. 1:29:55राजस्थान स्थित श्रीनाथ जी मंदिर और आठ
  1886. 1:29:58कवियों की रचनाएं अष्टछाप मुख्य है।
  1887. 1:30:01सूरदास बलवाचार्य के शिष्य थे। सूरदास जो
  1888. 1:30:04है बलवाचार्य के शिष्य थे। विट्ठलनाथ को
  1889. 1:30:06अकबर ने गोकुल और जयतपुरा की जागीर प्रदान
  1890. 1:30:10की थी। विट्ठलनाथ को अब आइए देखते हैं
  1891. 1:30:13गोस्वामी तुलसीदास। इनका जन्म उत्तर
  1892. 1:30:16प्रदेश के बांदा जिले में राजापुर गांव
  1893. 1:30:18में 1532 ईस्वी में हुआ था। इनके पिता का
  1894. 1:30:21नाम आत्माराम दुबे एवं माता का नाम हुलसी
  1895. 1:30:24था। इन्होंने रामचरितमानस की रचना की।
  1896. 1:30:27इनकी मृत्यु 1623 ईस्वी में हुई थी।
  1897. 1:30:29तुलसीदास मुगल शासक अकबर एवं मेवाड़ के
  1898. 1:30:32शासक राणा प्रताप के जो है समकालीन थे।
  1899. 1:30:35धन्ना धन्ना का जन्म 1415 ईस्वी में एक
  1900. 1:30:38जाट परिवार में हुआ था। राजपूताना से
  1901. 1:30:40बनारस आकर ये रामानंद के शिष्य बन गए। कहा
  1902. 1:30:43जाता है कि इन्होंने भगवान की मूर्ति को
  1903. 1:30:45हटात भोजन कराया था। हटात भोजन कराया था।
  1904. 1:30:48मीराबाई क्या है? मीराबाई मीराबाई का जन्म
  1905. 1:30:511498 में मेड़ता जिले के चौकारी ग्राम में
  1906. 1:30:55हुआ था। इनके पिता का नाम रत्न सिंह राठौर
  1907. 1:30:57था। इनका विवाह 1516 ईस्वी में राणा सांगा
  1908. 1:31:00के बड़े पुत्र और युवराज भोजराज से हुआ
  1909. 1:31:02था। अपने पति की मृत्यु के उपरांत यह
  1910. 1:31:05पूर्णतः धर्म परायण जीवन व्यतीत करने लगे।
  1911. 1:31:07इन्होंने कृष्ण की उपासना प्रेमी एवं पति
  1912. 1:31:10के रूप में पति के रूप में की। इनके भक्ति
  1913. 1:31:12गीत मुख्यत ब्रज भाषा और आंशिक रूप से
  1914. 1:31:15राजस्थानी में लिखे गए हैं तथा इनकी कुछ
  1915. 1:31:17कविताएं राजस्थानी में भी है। इनकी मृत्यु
  1916. 1:31:201546 ईस्वी में द्वारका में हो गई। संत
  1917. 1:31:23रविदास क्या है? संत रविदास जी रैदास की
  1918. 1:31:26मीराबाई का गुरु माना जाता था। रैदास
  1919. 1:31:30रैदास जो है यह जाति से चमार थे। जाति से
  1920. 1:31:33चमार थे और बनारस के रहने वाले थे। यह
  1921. 1:31:35रामानंद के 12 शिष्यों में एक थे। इनके
  1922. 1:31:37पिता का नाम रघु तथा माता का नाम
  1923. 1:31:39घुरबिनिया था। यह जूता बनाकर जीभ को
  1924. 1:31:42पार्जन करते थे। इन्होंने रायदासीफ
  1925. 1:31:44संप्रदाय की स्थापना की। चित्तौड़ की रानी
  1926. 1:31:47झाली रैदास की शिष्या थी। रैदास के भी कुछ
  1927. 1:31:50गीत सिखों के प्रवित ग्रंथ गुरु ग्रंथ
  1928. 1:31:52साहिब में जो है वो शामिल है। दादू दयाल
  1929. 1:31:56यह कबीर के अनुयाई थे। इनका जन्म 1544
  1930. 1:31:59ईस्वी में अहमदाबाद में हुआ था। इनका
  1931. 1:32:01संबंध धुनिया जाति से था। सांभर में आकर
  1932. 1:32:04इन्होंने ब्रह्म संप्रदाय की स्थापना की।
  1933. 1:32:06अकबर ने धार्मिक चर्चा के लिए इन्हें एक
  1934. 1:32:08बार फतेहपुर सीकरी बुलाया था। इन्होंने
  1935. 1:32:11निपख नामक आंदोलन की शुरुआत की। इनकी
  1936. 1:32:13मृत्यु 1603 ईस्वी में हो गई। सुंदरदास
  1937. 1:32:171596 से 1689 ईस्वी में दादू के शिष्य थे।
  1938. 1:32:20सुंदरदास ने अपना ज्यादातर समय वाराणसी
  1939. 1:32:22में बिताया। दादू के कुछ अन्य शिष्यों का
  1940. 1:32:25जो नाम है वो है सांगानेर का रज्जब। 1567
  1941. 1:32:28से 1683 नारायणा बाजिद पठान आदि। शंकरदेव
  1942. 1:32:33क्या है? शंकरदेव 1449 से 1569 तक
  1943. 1:32:37इन्होंने भक्ति आंदोलन का प्रचार प्रसार
  1944. 1:32:39असम में किया। शंकरदेव ये चैतन्य के
  1945. 1:32:42समकालीन थे। इनका संदेश विष्णु या उनके
  1946. 1:32:44अवतार कृष्ण के प्रति पूर्ण निष्काम भक्ति
  1947. 1:32:47पर केंद्रित था। ये अकेले कृष्ण मार्गी
  1948. 1:32:50वैष्णव संत थे जो मूर्ति के रूप में कृष्ण
  1949. 1:32:52की पूजा के विरोधी थे। निर्गुण संप्रदाय
  1950. 1:32:55के कुछ अन्य संत थे। प्रयागराज के बाबा
  1951. 1:32:57मलूकदास 1574 से 1682 ईस्वी तक। दिल्ली के
  1952. 1:33:01यारी शाह जन्म 1668 बुल्ला शाहब बिहार के
  1953. 1:33:04दरिया साहब एवं पंजाब के जो है गरीब दास
  1954. 1:33:08अगला चैप्टर है मुगल साम्राज्य क्या है
  1955. 1:33:10मुगल साम्राज्य मुगल वंश का संस्थापक बाबर
  1956. 1:33:14तिमुरिड राजवंश के तिमुरिड राजवंश का
  1957. 1:33:17सदस्य था। तिमुरिडों ने इतिहास में दो
  1958. 1:33:20प्रसिद्ध साम्राज्य स्थापित किए थे। फारस
  1959. 1:33:23और मध्य एशिया में तिमुरिट साम्राज्य 1370
  1960. 1:33:26से 1507 तक और भारतीय उपमहाद्वीप में मुगल
  1961. 1:33:30साम्राज्य 1526 से 1500
  1962. 1:33:331857 तक 1526 से 1857 तक बाबर एवं उत्तर
  1963. 1:33:38भारतीय मुगल शासक तुर्क एवं सुन्नी
  1964. 1:33:40मुसलमान थे। तुर्क एवं सुन्नी मुसलमान थे।
  1965. 1:33:44बाबर ने मुगल वंश की स्थापना के साथ ही पद
  1966. 1:33:47पातशाही की स्थापना की। पद बादशाही की
  1967. 1:33:50स्थापना की जिसके तहत शासक को बादशाह कहा
  1968. 1:33:53जाता था। शासक को क्या है? बादशाह कहा
  1969. 1:33:56जाता था। अब आइए बाबर के बारे में जानते
  1970. 1:33:59हैं। जब 1526 ईस्वी से 1530 ईस्वी तक जो
  1971. 1:34:02है राज किया 4 साल तक। बाबर का जन्म फरवरी
  1972. 1:34:051483 ईस्वी में हुआ था। इसके पिता उमर शेख
  1973. 1:34:09मिर्जा फरगाना नामक छोटे राज्य के शासक
  1974. 1:34:12थे। फरगाना नामक छोटे राज्य के शासक थे।
  1975. 1:34:15बाबर फरगाना की गद्दी पर 8 जून 1494 ईस्वी
  1976. 1:34:19में बैठा। 1494 ईस्वी में बैठा। बाबर ने
  1977. 1:34:231507 ईस्वी में बादशाह की उपाधि धारण की
  1978. 1:34:26जिसे अब तक किसी तैमूर शासक ने धारण नहीं
  1979. 1:34:29की थी। बादशाह की जो है उपाधि धारण की
  1980. 1:34:32जिसे अब तक किसी तैमूर शासक ने धारण नहीं
  1981. 1:34:35की थी। बाबर के चार पुत्र थे। हुमायूं,
  1982. 1:34:38कामरान, अस्करी तथा हिंदाल। बाबर ने भारत
  1983. 1:34:43पर पांच बार आक्रमण किया। बाबर का भारत के
  1984. 1:34:47विरुद्ध किया गया प्रथम अभियान 1519 ईस्वी
  1985. 1:34:50में यूसुफजाई क्या है? युसुफजाई जाति के
  1986. 1:34:53विरुद्ध था। इस अभियान में बाबर ने बाजौर
  1987. 1:34:56और भेरा को अपने अधिकार में कर लिया।
  1988. 1:34:59पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने पहली
  1989. 1:35:02बार तुगलक
  1990. 1:35:04युद्ध नीति एवं तोपखाने का प्रयोग किया।
  1991. 1:35:06तुगलमा युद्ध नीति एवं तोपखाने
  1992. 1:35:08[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1993. 1:35:09का प्रयोग किया। उस्ताद अली और मुस्तफा
  1994. 1:35:12बाबर के दो प्रसिद्ध निशानेबाज थे। जिसने
  1995. 1:35:15पानीपत के प्रथम युद्ध में जो है भाग लिया
  1996. 1:35:18था। बाबर द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध देख
  1997. 1:35:21लेते हैं। बाबर चार साल तक जो है शासन
  1998. 1:35:23किया और चारों साल का जो है एक-एक युद्ध
  1999. 1:35:27किया। पानीपत की प्रथम युद्ध 21 अप्रैल
  2000. 1:35:291526 ईस्वी किया। इब्राहिम लोदी व बाबर के
  2001. 1:35:33बीच हुआ। बाबर विजय हुआ। दूसरा साल जो है
  2002. 1:35:361527 में 17 मार्च 1527 में खानवा का
  2003. 1:35:40युद्ध किया 15 17 मार्च 1527 में राणा
  2004. 1:35:43सांगा एवं बाबर के बीच बाबर जो है विजय
  2005. 1:35:46हुआ चंदरी का युद्ध 29 जनवरी 1528 को किया
  2006. 1:35:52मेदनी राय एवं बाबर के बीच इसमें बाबर जो
  2007. 1:35:54है वह विजय हुआ घाघरा का युद्ध 6 मई 1529
  2008. 1:35:59ईस्वी को किया अफगानों एवं बाबर के बीच
  2009. 1:36:01हुआ बाबर जो है विजय हुआ इब्राहिम लोदी
  2010. 1:36:06मध्यकाल का प्रथम शासक था जो युद्धस्थल
  2011. 1:36:08में मारा गया। इसके साथ उसका मित्र
  2012. 1:36:11ग्वालियर के राजा विक्रमजीत भी युद्ध स्थल
  2013. 1:36:14में मारा गया। इब्राहिम लोदी का मित्र कौन
  2014. 1:36:16था? ग्वालियर के राजा विक्रम विक्रमजीत वो
  2015. 1:36:18भी युद्ध स्थल में मारा गया। हुमायूं ने
  2016. 1:36:22कोहिनूर हीरा ग्वालियर के दिवंगत राजा
  2017. 1:36:24विक्रमजीत के परिवार से प्राप्त किया था।
  2018. 1:36:27हुमायूं ने। बाबर को अपनी उदारता के लिए
  2019. 1:36:30कलंदर की उपाधि दी गई। बाबर को अपनी
  2020. 1:36:33उदारता के लिए कलंदर की उपाधि दी गई। बाबर
  2021. 1:36:37ने मुसलमानों को तमगा नामक कर से मुक्त कर
  2022. 1:36:40दिया था। तमगा नामक कर से मुक्त कर दिया
  2023. 1:36:42था। खानवा युद्ध में बाबर ने राणा सांगा
  2024. 1:36:45के खिलाफ जिहाद का नारा दिया और युद्ध में
  2025. 1:36:49विजय के बाद गाजी की उपाधि धारण की। तो
  2026. 1:36:51प्रश्न पूछा जाता है कि जिहाद का नारा जो
  2027. 1:36:53है किस युद्ध में बाबर ने दिया? तो खानबा
  2028. 1:36:56युद्ध में। किसके खिलाफ? तो राणा सांगा के
  2029. 1:36:59खिलाफ। 30 जनवरी 1528 को जहर दे देने के
  2030. 1:37:02कारण राणा सांगा की जो है मृत्यु हो गई।
  2031. 1:37:06बाबर ने बंगाल के शासक नुसरत शाह के साथ 6
  2032. 1:37:09मई 1529 को एक दूसरे की संप्रभुता का
  2033. 1:37:12सम्मान करने का वादा करते हुए एक संधि की
  2034. 1:37:16जिसके अनुसार नुसरत शाह ने अफगान
  2035. 1:37:18विद्रोहियों को शरण ना देने का जो है वचन
  2036. 1:37:21दिया। करीब 48 वर्ष की आयु में 26 दिसंबर
  2037. 1:37:251530 ईस्वी को आगरा में बाबर की जो है
  2038. 1:37:29मृत्यु हो गई। प्रारंभ में बाबर के शव को
  2039. 1:37:32आगरा के आरामबाग में दफनाया गया। आगरा के
  2040. 1:37:35आरामबाग में दफनाया गया। बाद में काबुल
  2041. 1:37:37में उसके द्वारा चुने गए स्थान पर जो है
  2042. 1:37:39दफनाया गया। जब बाबरनामा पढ़ा गया उसमें
  2043. 1:37:42वो वर्णन किया था कि मुझे काबुल में
  2044. 1:37:45दफनाया जाए। मरने के बाद उसे काबुल में
  2045. 1:37:47उसके द्वारा चुने गए स्थान पर दफनाया गया।
  2046. 1:37:50बाबर की मातृभाषा तुर्की थी। क्या थी?
  2047. 1:37:53तुर्की थी। लेकिन वह अरबी और फारसी का भी
  2048. 1:37:56अच्छा ज्ञाता था। बाबर ने तुर्की भाषा में
  2049. 1:37:59अपनी आत्मकथा तजुक बाबरी यानी बाबरनामा की
  2050. 1:38:02रचना की। अपनी आत्मकथा में बाबर ने
  2051. 1:38:04औपचारिक बागों की योजनाओं और उनके बनाने
  2052. 1:38:08में अपनी रुचि का जो है वर्णन किया है।
  2053. 1:38:11अक्सर यह बाघ दीवार से घिरे होते थे तथा
  2054. 1:38:13कृत्रिम नहरों द्वारा चार भागों में
  2055. 1:38:15विभाजित आयताकार अहाते में स्थित थे। चार
  2056. 1:38:19समान हिस्सों में बटे होने के कारण यह चार
  2057. 1:38:21बाग कहलाते थे। क्या है? चार बाग कहलाते
  2058. 1:38:24थे। चार बाग बनाने की परंपरा की शुरुआत
  2059. 1:38:27अकबर के समय से हुई। क्या है? अकबर के समय
  2060. 1:38:30से हुई। तुजुके बाबरी या बाबरनामा का चार
  2061. 1:38:34बार फारसी में अनुवाद किया गया। प्रथम दो
  2062. 1:38:37अनुवाद हुमायूं के समय पयंदा खान और जैन
  2063. 1:38:41खान ने किया। तीसरा अनुवाद अकबर के समय
  2064. 1:38:45अब्दुल रहीम खान खान ने किया। अब्दुल रहीम
  2065. 1:38:48खान खाना ने किया। इसका चौथा फारसी अनुवाद
  2066. 1:38:51शाहजहां के काल में मीर अबू तलिब तुरबाती
  2067. 1:38:54मीर अली तलब तुरबाती ने किया। अंग्रेजी
  2068. 1:38:59में इसके तीन अनुवाद हुए। अंग्रेजी में
  2069. 1:39:01इसके तीन अनुवाद हुए। जॉन लीडन और विलियम
  2070. 1:39:04एस किंग 1826 ईस्वी में फारसी से अंग्रेजी
  2071. 1:39:08में इसका अनुवाद किया। किंग ने फारसी से
  2072. 1:39:11अंग्रेजी में अनुवाद किया। श्रीमती ए एस
  2073. 1:39:14बेबिज ने 1905 में मूल तुर्की भाषा से
  2074. 1:39:17अंग्रेजी में जो है अनुवाद किया।
  2075. 1:39:21बाबर को मुबईयान नामक पद शैली का भी
  2076. 1:39:24जन्मदाता माना जाता है। बाबर को मुबईयान
  2077. 1:39:27नामक पद शैली का भी जन्मदाता माना जाता
  2078. 1:39:30है। बाबर ने ईरानी शैली के चित्रकार बिजाद
  2079. 1:39:33तथा फारसी लिपि के खुशनबीस केलीग्राफर मीर
  2080. 1:39:37अली को भारत लाकर मुगल लघु चित्रों की
  2081. 1:39:40शुरुआत की। मुगल लघु चित्रों की शुरुआत
  2082. 1:39:42की। बाबर प्रसिद्ध नक्शबंदी सूफी ख्वाजा
  2083. 1:39:46उबैदुल्ला अहरार का अनुयाय था। बाबर का
  2084. 1:39:50उत्तराधिकारी जो है हुमायूं हुआ। क्या है?
  2085. 1:39:52हुमायूं हुआ। अब आइए देखते हैं हुमायूं के
  2086. 1:39:55बारे में। 1530 से 1556 ईस्वी तक जो है
  2087. 1:39:59शासन किया। नसीरुद्दीन हुमायूं 29 दिसंबर
  2088. 1:40:021530 ईस्वी को आगरा में 23 वर्ष की अवस्था
  2089. 1:40:06में सिंहासन पर बैठा। गद्दी पर बैठने से
  2090. 1:40:09पहले हुमायूं जो है बदखसा का सूबेदार था।
  2091. 1:40:11बदखसा का सूबेदार था। अपने पिता के
  2092. 1:40:15निर्देश के अनुसार हुमायूं ने अपने राज्य
  2093. 1:40:17का बंटवारा अपने भाइयों में कर दिया। इसने
  2094. 1:40:20कामरान को काबुल और कंधार दिया। मिर्जा
  2095. 1:40:24असरी को संभल दिया। क्या है? संभल दिया।
  2096. 1:40:27मिर्जा हिंदाल को अलवर व मेबाड़ की
  2097. 1:40:31जागीरें दी। अपने चचेरे भाई सुलेमान
  2098. 1:40:34मिर्जा को हुमायूं ने बदखसा प्रदेश दिया।
  2099. 1:40:36क्या है? बदखसा प्रदेश दिया। 1533 ईस्वी
  2100. 1:40:40में हुमायूं ने दीनपनाह नामक नए नगर की
  2101. 1:40:43स्थापना की। 1533 ईस्वी में हुमायूं ने
  2102. 1:40:46दीनपनाह नामक नए नगर की स्थापना की थी।
  2103. 1:40:50चौसा का युद्ध 25 जून 1539 ईस्वी में शेर
  2104. 1:40:54खान एवं हुमायूं के बीच हुआ चौसा युद्ध।
  2105. 1:40:57इस युद्ध में शेर खान विजय रहा। इसी युद्ध
  2106. 1:41:00के बाद शेर खान ने शेरशाह की पद जो है
  2107. 1:41:03पदवी ग्रहण कर ली। बिलग्राम या कन्नौज
  2108. 1:41:07युद्ध 17 मई 1540 ईस्वी में शेर खान एवं
  2109. 1:41:11हुमायूं के बीच हुआ। इस युद्ध में भी
  2110. 1:41:13हुमायूं पराजित हुआ। शेर खान ने आसानी से
  2111. 1:41:16आगरा एवं दिल्ली पर जो है कब्जा कर लिया।
  2112. 1:41:20बिलग्राम युद्ध के बाद हुमायूं सिंध चला
  2113. 1:41:23गया। जहां उसने 15 वर्षों तक घुमक्कड़ों
  2114. 1:41:25जैसा निर्वासित जीवन जो है व्यतीत किया।
  2115. 1:41:29निर्वासन के समय हुबायूं ने हिंदाल के
  2116. 1:41:31आध्यात्मिक गुरु अरस बासी सिया मीर बाबा
  2117. 1:41:35दोस्त उर्फ मीर अली अकबर जामी की पुत्री
  2118. 1:41:38हमीदा बानू बेगम से 29 अगस्त 1541 ईस्वी
  2119. 1:41:42को निकाह कर लिया। कालांतर में हमीदा सिंह
  2120. 1:41:45अकबर जैसे महान सम्राट का जन्म हुआ। हमीदा
  2121. 1:41:48सिंह अकबर जैसे महान सम्राट का जन्म हुआ।
  2122. 1:41:521555 ईस्वी में हुमायूं ने पंजाब के सूरी
  2123. 1:41:55शासक सिकंदर को पराजित कर पुनः दिल्ली की
  2124. 1:41:58गद्दी पर बैठा। पूरा जो है दिल्ली की
  2125. 1:42:00गद्दी पर बैठा। हुमायूं द्वारा लड़े गए
  2126. 1:42:03चार प्रमुख युद्धों का क्रम है। देवरा का
  2127. 1:42:05युद्ध 1531 ईस्वी में चौसा का युद्ध 1539,
  2128. 1:42:09बिलग्राम 1540 एवं सरहंद का युद्ध 1555
  2129. 1:42:13ईस्वी में लड़ा गया। 1 जनवरी 1556 ईस्वी
  2130. 1:42:17को दिनपनाह भवन में स्थित पुस्तकालय
  2131. 1:42:20शेरमंडल की सीढ़ियों से गिरने के कारण
  2132. 1:42:22हुमायूं की मृत्यु हो गई। 1 जनवरी 1556 को
  2133. 1:42:26हुमायूं के बारे में इतिहासकार लेनपुल ने
  2134. 1:42:29कहा है कि हुमायूं गिरते पड़ते इस जीवन से
  2135. 1:42:32मुक्त हो गया। ठीक उसी तरह जिस तरह तमाम
  2136. 1:42:35जिंदगी वह गिरते पड़ते चलते रहा। लेनप ने
  2137. 1:42:39कहा कि हुमायूं गिरते पड़ते इस जीवन से
  2138. 1:42:41मुक्त हो गया। ठीक उसी तरह जिस तरह तमाम
  2139. 1:42:43जिंदगी वह गिरते पड़ते चलता रहा था।
  2140. 1:42:46हुमायूंनामा की रचना गुलबदन बेगम ने की
  2141. 1:42:49थी। गुलबदन बेगम ने की थी हुमायूंनामा की
  2142. 1:42:51रचना। हुमायूं ज्योतिष में विश्वास करता
  2143. 1:42:53था। इसलिए इसने सप्ताह के सातों दिन सात
  2144. 1:42:56रंग के पोशाक रविवार को पीला सोमवार को
  2145. 1:43:00सफेद मंगलवार को लाल बुधवार को नीला या
  2146. 1:43:05बैगनी रंग गुरुवार को आसमानी या बादामी
  2147. 1:43:08रंग शुक्रवार को हरा एवं शनिवार को काला
  2148. 1:43:12धारण जो है वो करता था। हुमायूं ने दिल्ली
  2149. 1:43:16में हरम की औरतों के लिए मीना बाजार
  2150. 1:43:18प्रारंभ किया था। मीना बाजार प्रारंभ किया
  2151. 1:43:20था दिल्ली में हरम की औरतों के लिए। अब
  2152. 1:43:23आइए शेरशाह सूरी 1540 से 1545 ईस्वी तक
  2153. 1:43:27राज किए। सूर साम्राज्य का संस्थापक अफगान
  2154. 1:43:30वंशीय शेरशाह सूरी था। सूर साम्राज्य का
  2155. 1:43:33संस्थापक अफगान वंशीय शेरशाह सूरी था। डॉ.
  2156. 1:43:36के आर कानूनो के अनुसार हरियाणा प्रांत के
  2157. 1:43:39नारनौर महेंद्रगढ़ स्थान पर इब्राहिम के
  2158. 1:43:43पुत्र हसन के घर वर्ष 1486 में शेरशाह का
  2159. 1:43:47जन्म हुआ था। परमात्मा शरण का विचार है कि
  2160. 1:43:50शेरशाह का जन्म वर्ष जो है 1472 ईस्वी में
  2161. 1:43:55हुआ था। इनके बचपन का नाम फरीद खान था। यह
  2162. 1:43:58सूर वंश से संबंधित थे। इनके पिता हसन खान
  2163. 1:44:02जौनपुर राज के अंतर्गत सासाराम के जमींदार
  2164. 1:44:04थे। जौनपुर राज के अंतर्गत सासाराम के जो
  2165. 1:44:07है वो जमींदार थे। फरीद ने एक शेर को
  2166. 1:44:11तलवार के एक ही बार से मार दिया था। उसकी
  2167. 1:44:14इस बहादुरी से प्रसन्न होकर बिहार के
  2168. 1:44:16अफगान शासक सुल्तान मोहम्मद बहार खलुहानी
  2169. 1:44:20सुल्तान मोहम्मद बहार खलोहानी ने उसे शेर
  2170. 1:44:23खान की उपाधि जो है प्रदान की थी। शेरशाह
  2171. 1:44:26बिलग्राम युद्ध 1540 ईस्वी के बाद दिल्ली
  2172. 1:44:29की गद्दी पर बैठा। शेरशाह की मृत्यु
  2173. 1:44:32कालिंजर के किले को जीतने के क्रम में 22
  2174. 1:44:35मई 1545 ईस्वी को हो गई। मृत्यु के समय वह
  2175. 1:44:39उक्का नामक अग्निस्त्र चला रहा था।
  2176. 1:44:41कालिंजर का शासक कीर सिंह था। इससे प्रश्न
  2177. 1:44:44बनता है कि शेरशाह की मृत्यु किस युद्ध के
  2178. 1:44:46समय हुआ? तो कालिंजर के किले जीतने के
  2179. 1:44:49क्रम में हुआ। और कौन सा अग्नस्त्र चला
  2180. 1:44:52रहा था मृत्यु के समय? तो वह हुक्का नामक
  2181. 1:44:55जो है अग्नस्त्र चला रहा था। कलिंजर का
  2182. 1:44:57शासक कौन था? तो कीरत सिंह था। हिंद तथा
  2183. 1:45:00ईरानी वास्तुकला के समन्वय का प्रथम
  2184. 1:45:03उदाहरण है। शेरशाह का मकबरा जिसे सासाराम
  2185. 1:45:06में झील के बीच ऊंचे टीले पर जो है
  2186. 1:45:08निर्मित किया गया है। रोहतासगढ़ किला किला
  2187. 1:45:12एक कोहना दिल्ली नामक मस्जिद का निर्माण
  2188. 1:45:14शेरशाह के द्वारा किया गया था। शेरशाह ने
  2189. 1:45:17रोहतासगढ़ के दुर्ग एवं कन्नौज के स्थान
  2190. 1:45:20पर शेरसुर नामक जो है नगर बसाया। शेरशाह
  2191. 1:45:24का उत्तराधिकारी उसका पुत्र इस्लाम शाह
  2192. 1:45:26था। क्या है? इस्लाम शाह था। शेरशाह ने
  2193. 1:45:29भूमि की माप के लिए 32 अंक वाला सिकंदरी
  2194. 1:45:32गज एवं सन की डंडी का प्रयोग किया। शेरशाह
  2195. 1:45:36के समय पैदावर का लगभग 1/3 भाग सरकार लगान
  2196. 1:45:39के रूप में वसूल जो है करती थी। शेरशाह ने
  2197. 1:45:43सोने के सिक्के अशरफ चांदी का रुपया 178
  2198. 1:45:47ग्रेन तथा तांबे का दाम 380 ग्रेन नामक जो
  2199. 1:45:50है सिक्के चलाए थे। चांदी का रुपया
  2200. 1:45:53सर्वप्रथम शेरशाह ने जारी किया और चांदी
  2201. 1:45:56के रुपए तांबे के दाम का विनिमय अनुपात
  2202. 1:45:591:64 का था। शेरशाह के समय तांबे के अन्य
  2203. 1:46:03सिक्के थे अधोला, पावला, दमड़ी एवं जीतल।
  2204. 1:46:08अधोला, पावला, दमड़ी एवं जीतल। कबूलियत
  2205. 1:46:12एवं पट्टा प्रथा की शुरुआत शेरशाह ने की।
  2206. 1:46:15कबूलियत एवं पट्टा प्रथा की शुरुआत शेरशाह
  2207. 1:46:18ने की। शेरशाह ने 1541 ईस्वी में
  2208. 1:46:21पाटलिपुत्र को पटना के नाम से पुनः
  2209. 1:46:24स्थापित किया। इसने ग्रैंड ट्रैक रोड की
  2210. 1:46:26मरम्मत करवाई। डाक प्रथा का प्रचलन शेरशाह
  2211. 1:46:29के द्वारा ही किया गया। डाक प्रथा का
  2212. 1:46:32प्रचलन जो है वह शेरशाह के द्वारा ही जो
  2213. 1:46:34है किया गया। मलिक मोहम्मद जायसी शेरशाह
  2214. 1:46:37के समकालीन था। मलिक मोहम्मद जायसी शेरशाह
  2215. 1:46:40के जो है समकालीन थे। अब आइए देखते हैं
  2216. 1:46:44अकबर के बारे में 1556 से 1605 ईस्वी तक।
  2217. 1:46:48सम्राट अकबर का जन्म 15 अक्टूबर 1542
  2218. 1:46:52ईस्वी को हमीदा बानू बेगम के गर्भ से
  2219. 1:46:54अमरकोट के राणा वीरसाल के महल में हुआ।
  2220. 1:46:58अमरकोट के राणा वीरसाल के महल में हुआ।
  2221. 1:47:01अकबर के बचपन का नाम जलाल था। उसका
  2222. 1:47:04राज्याभिषेक 14 फरवरी 1556 ईस्वी को पंजाब
  2223. 1:47:08के कलानौर नामक स्थान पे हुआ। पंजाब के
  2224. 1:47:11कलानौर नामक स्थान पर हुआ। अकबर के
  2225. 1:47:14समकालीन शासक कौन-कौन थे? रानी एलिजाबेथ
  2226. 1:47:171558 से 1603 ईस्वी तक इंग्लैंड की रानी
  2227. 1:47:20शाह अब्बास 1588 से 1629 ईस्वी तक ईरान के
  2228. 1:47:25जार इवानफोर बेसिल बेसिल येबिच 1530 से
  2229. 1:47:301584 ईस्वी तक रूस के जार इवानफोर बेसिल
  2230. 1:47:34येबीच इवान दी टेरिबेल नाम से कुख्यात था
  2231. 1:47:37इवान द टेरिबेल नाम से कुख्यात था अकबर का
  2232. 1:47:41शिक्षक अब्दुल लतीफ ईरानी विद्वान था अकबर
  2233. 1:47:44का शिक्षक अब्दुल लतीफ ईरानी विद्वान था।
  2234. 1:47:48वह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर बादशाही गाजी
  2235. 1:47:51की उपाधि से राज सिंहासन पर बैठा।
  2236. 1:47:53जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर बादशाह गाजी की
  2237. 1:47:56उपाधि से राज सिंहासन पर बैठा। बैरम खान
  2238. 1:48:00सिया मताबी 1556 से 1560 ईस्वी तक अकबर का
  2239. 1:48:06संरक्षक रहा। वह बदखसा का निवासी था। उसे
  2240. 1:48:10प्यार से खानी बाबा कहा जाता था। बैराम
  2241. 1:48:13खान जो था वह अकबर का संरक्षक था और बदखसा
  2242. 1:48:16का निवासी था। उसे प्यार से खानी बाबा कहा
  2243. 1:48:19जाता था। पानीपत की जो दूसरी लड़ाई 15
  2244. 1:48:22नवंबर 1556 ईस्वी को अकबर और हेमु के बीच
  2245. 1:48:26हुई थी। इस युद्ध में अकबर की विजय हुई
  2246. 1:48:29थी। 31 जनवरी 1561 ईस्वी को मक्का के
  2247. 1:48:32तीर्थ यात्रा के दौरान पाटन नामक स्थान पर
  2248. 1:48:35मुबारक खान नामक युवक ने बैरम खान की
  2249. 1:48:38हत्या कर दी। मुबारक खान नामक युवक ने
  2250. 1:48:40बैरम खान की हत्या कर दी। मई 1562 में
  2251. 1:48:44अकबर ने हरम दल से अपने को पूर्णता मुक्त
  2252. 1:48:47कर दिया। हरम दल से अपने को पूर्णता जो है
  2253. 1:48:50मुक्त कर लिया। हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून
  2254. 1:48:541576 ईस्वी को मेवाड़ के शासक महाराणा
  2255. 1:48:57प्रताप एवं अकबर के बीच हुआ। इस युद्ध में
  2256. 1:49:01अकबर जो है विजय हुआ। इस युद्ध में मुगल
  2257. 1:49:04सेना का नेतृत्व जो है मानसिंह एवं आसफ
  2258. 1:49:07खान ने किया था। अकबर का सेनापति मानसी
  2259. 1:49:10था। मानसी आमेर बाद में जयपुर के कछवाहा
  2260. 1:49:14राजवंश के शासक था। मानसी आमेर के कछवाहा
  2261. 1:49:18राजवंश के जो है वो शासक थे। हल्दीघाटी
  2262. 1:49:22युद्ध के समय कुंभलगढ़ राणा प्रताप की
  2263. 1:49:24राजधानी थी। कुंभलगढ़ राणा प्रताप की
  2264. 1:49:26राजधानी थी। रानी राणा की ओर से इस युद्ध
  2265. 1:49:30में हाकिम खानसुर हाकिम खानसुर के नेतृत्व
  2266. 1:49:33में एक अफगान फौजी टुकड़ी एवं भीलों की एक
  2267. 1:49:36छोटी सी सेना ने भाग लिया था। महाराणा
  2268. 1:49:40प्रताप की मृत्यु 19 जनवरी 1597 ईस्वी में
  2269. 1:49:43एक सख्त धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते समय
  2270. 1:49:47अंदरूनी चोट लग जाने के कारण हो गई।
  2271. 1:49:50हल्दीघाटी के युद्ध के बाद राणा प्रताप ने
  2272. 1:49:52डूंगरपुर के निकट चाबड़ में नई राजधानी
  2273. 1:49:55बनाई। महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम जो
  2274. 1:49:58है चेतक एवं हाथी का नाम जो है राम प्रसाद
  2275. 1:50:01था। हाथी का नाम राम प्रसाद था। दीन इलाही
  2276. 1:50:04धर्म का प्रधान पुरोहित अकबर था। दीन
  2277. 1:50:06इलाही धर्म का प्रधान पुरोहित कौन था?
  2278. 1:50:09अकबर था। दीन इलाही धर्म स्वीकार करने
  2279. 1:50:12वाला प्रथम एवं अंतिम हिंदू शासक जो है
  2280. 1:50:14राजा बीरबल था। महेश दास नामक ब्राह्मण को
  2281. 1:50:18राजा बीरबल की पदवी दी गई थी जो हमेशा
  2282. 1:50:21अकबर के साथ रहता था। तो प्रश्न पूछा जाता
  2283. 1:50:24है कि बीरबल का जो है वास्तविक नाम क्या
  2284. 1:50:26था? तो महेश दास था। क्या है? महेश दास था
  2285. 1:50:29और वो जो है दीन इलाही धर्म स्वीकार करने
  2286. 1:50:32वाला प्रथम एवं अंतिम हिंदू था। अकबर ने
  2287. 1:50:36जैन धर्म के जैनाचार्य हरि विजय सूरी हरि
  2288. 1:50:39विजय सूरी को जगतगुरु की उपाधि जो है
  2289. 1:50:42प्रदान की थी। अकबर ने शाही दरबार में एक
  2290. 1:50:45अनुष्ठान के रूप में सूर्योपासना शुरू
  2291. 1:50:48करवाई थी। शाही दरबार में राजस्व प्राप्ति
  2292. 1:50:52की जब्ती प्रणाली अकबर के शासनकाल में
  2293. 1:50:55प्रचलित थी। अकबर के दीवान राजा टोडरमल
  2294. 1:50:59खत्री जाति ने 18 1580 ईस्वी में दहसाला
  2295. 1:51:04बंदोबस्त व्यवस्था जो है लागू की। गुजरात
  2296. 1:51:07विजय के दौरान अकबर सर्वप्रथम
  2297. 1:51:08पुर्तगालियों से मिला और यहीं से उसने
  2298. 1:51:11सर्वप्रथम समुद्र को जो है देखा। तो
  2299. 1:51:13प्रश्न आता है कि अकबर ने समुद्र कब देखा?
  2300. 1:51:16तो गुजरात विजय के दौरान देखा। गुजरात
  2301. 1:51:18अभियान को इतिहासकार स्मिथ ने संसार के
  2302. 1:51:21इतिहास का सर्वाधिक जो है द्रुतगामी
  2303. 1:51:24आक्रमण कहा है। अकबर के दरबार के प्रसिद्ध
  2304. 1:51:27चित्रकार थे अब्दुल समद। अब्दुल समद जो है
  2305. 1:51:30अकबर के दरबार के प्रसिद्ध चित्रकार थे और
  2306. 1:51:32अकबर के दरबार का प्रसिद्ध संगीतकार जो है
  2307. 1:51:35वो तानसेन था। क्या है? तानसेन था। दसवंत
  2308. 1:51:38एवं बसावन अकबर के दरबार के चित्रकार थे।
  2309. 1:51:41दसवंत एवं बसावन अकबर के दरबार के जो है
  2310. 1:51:44चित्रकार थे। अकबर के शासनकाल के प्रमुख
  2311. 1:51:49गायक तानसेन बाज बहादुर बाबा रामदास एवं
  2312. 1:51:52बैजू बाबरा थे। संगीत सम्राट तानसेन का
  2313. 1:51:56जन्म 1506 ईस्वी में ग्वालियर में एक
  2314. 1:51:58ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनका असली
  2315. 1:52:02नाम रामतनु पांडे था। रामतनु पांडे था। यह
  2316. 1:52:05जो है द्रुपद गायन शैली का महान संगीतकार
  2317. 1:52:09था। यह जो है बीन बजाते थे। इनकी प्रमुख
  2318. 1:52:12कृतियां थी मियां की टोड़ी। क्या है?
  2319. 1:52:15मियां की टोड़ी। मियां का मलहार मियां का
  2320. 1:52:18सारंग दरबारी कान्हारा आदि कंठा भरण वाणी
  2321. 1:52:23विलास कंठा भवरण वाणी विलास की उपाधि अकबर
  2322. 1:52:25ने तानसेन को दी थी। तानसेन की कौन सी
  2323. 1:52:28उपाधि दी थी? तो कंठावरण वाणी विलास
  2324. 1:52:30तानसेन अकबर के दरबार में आने से पूर्व
  2325. 1:52:32रीवा के राजा रामचंद्र के राजाश्रय में
  2326. 1:52:36थे। अकबर के दरबार में आने से पूर्व रीवा
  2327. 1:52:38के राजा रामचंद्र के राजाश्रय में थे।
  2328. 1:52:41तानसेन के गुरु हरिदास थे। क्या है?
  2329. 1:52:43हरिदास थे। अकबर द्वारा जीते गए प्रदेश
  2330. 1:52:46देख लेते हैं। मालवा शासक बाज बहादुर 1561
  2331. 1:52:50में मुगल सेनापति आदम खान पीर मोहम्मद
  2332. 1:52:53चुनार के समय अफगानों का शासन था 154ार पर
  2333. 1:52:56अफगानों का शासन था 1562 में अब्दुल्ला
  2334. 1:52:59खान मुगल सेनापति था। आमेर आमेर के शासक
  2335. 1:53:02भारमल 1562 में स्वेच्छा से अधीनता
  2336. 1:53:05स्वीकारी मेड़ता मेड़ता के शासक जयमल 1562
  2337. 1:53:09में सरफुद्दीन जो है मुगल सेनापति
  2338. 1:53:12गोंडवाना के शासक था वीर नारायण एवं
  2339. 1:53:14दुर्गावती 1564 में आसफ खान के द्वारा जो
  2340. 1:53:18है यह जीता गया मेवाड़ मेवाड़ उदय सिंह
  2341. 1:53:22एवं राणा प्रताप उदय सिंह एवं राणा प्रताप
  2342. 1:53:24शासक था उदय सिंह 1568 में स्वयं अकबर और
  2343. 1:53:29राणा प्रताप 1576 में मानसी एवं आसफ खान
  2344. 1:53:32के द्वारा जीता गया। रणथंबौर
  2345. 1:53:35सूरज नहाड़ा सूरज नहाड़ा जो है शासन शासक
  2346. 1:53:39था 1569 में भगवान दास एवं अकबर के द्वारा
  2347. 1:53:42जो है जीता गया। कालिंजर कालिंजर के शासक
  2348. 1:53:46रामचंद्र था 1569 में मजनू खान काकशाह के
  2349. 1:53:49द्वारा जो है यह जीता गया। सेनापति था
  2350. 1:53:52मुगल सेनापति। मारवाड़ के राव चंद्रसेन
  2351. 1:53:541570 में स्वेच्छा स्वाधीनता स्वीकार की।
  2352. 1:53:57जैसलमेर के राजा रावल हरिराय 1570 में
  2353. 1:54:00स्वेच्छा स्वाधीनता स्वीकारी। बीकानेर
  2354. 1:54:03बीकानेर कल्याणमल 1570 ईस्वी में स्वेच्छा
  2355. 1:54:06स्वाधीनता स्वीकार की। गुजरात जफ्फर खान
  2356. 1:54:09थर्ड 1571 ईस्वी में सम्राट अकबर के
  2357. 1:54:12द्वारा जो है जीता गया। बिहार व बंगाल
  2358. 1:54:15दाऊद खान जो है शासन कर रहा था 1574 से 76
  2359. 1:54:19में। मुनीम खान खानाखाना के द्वारा जीता
  2360. 1:54:22गया। काबुल हकीम मिर्जा का शासन था 1581
  2361. 1:54:26में। मानसी एवं अकबर के द्वारा कश्मीर के
  2362. 1:54:28शासक था युसुफ याकूब खान 1586 में भगवान
  2363. 1:54:32दास ब कासिम खान के द्वारा उड़ीसा के शासक
  2364. 1:54:36था निसार खान 1592 में मानसिंह सेनापति था
  2365. 1:54:39सिंध सिंध जो है के राजा जानी बेग था 1593
  2366. 1:54:43में अब्दुल रहीम खाना खान जो है मुगल
  2367. 1:54:45सेनापति था बलूचिस्तान बलस्तान के राजा था
  2368. 1:54:48पन्नी अफगान 1595 में मीर मासूम के द्वारा
  2369. 1:54:51जो है जीता गया कंधार कंधार मुजफ्फर हुसैन
  2370. 1:54:551595 में मुगल सेनापति था शाहबेग क्या है?
  2371. 1:54:59शाह बेग था। दक्षिण भारत की अगर हम बात
  2372. 1:55:02करें तो खानदेश पर शासक था अली खान 1591
  2373. 1:55:05में स्वेच्छा से अधीनता स्वीकारी।
  2374. 1:55:07दौलताबाद के शासक था चांद बीवी 1599 में
  2375. 1:55:11मुराद अब्दुल रहीम खानखाना अबुल फजल अकबर
  2376. 1:55:14ये सब जो है मुगल के तरफ से लड़े थे।
  2377. 1:55:17अहमदनगर अहमदनगर के शासक बहादुर शाह चांदी
  2378. 1:55:20भी 1600 ईस्वी में असीरगढ़ असीरगढ़ के जो
  2379. 1:55:23शासक मीरन बहादुर 1601 में अकबर या अकबर
  2380. 1:55:26का अंतिम अभियान था असीरगढ़ प्रश्न आता है
  2381. 1:55:30कि अकबर का अंतिम अभियान कहां था तो
  2382. 1:55:32असीरगढ़ था अकबर के कुछ महत्वपूर्ण कार्य
  2383. 1:55:35और वर्ष देख लीजिए काफी इंपॉर्टेंट है दास
  2384. 1:55:38प्रथा का अंत 1562 ईस्वी में अकबर को हरम
  2385. 1:55:41दल से मुक्ति 1562 में तीर्थ यात्रा कर
  2386. 1:55:45समाप्त किया 1563 में जजिया कर समाप्त
  2387. 1:55:47किया 1564 में फतेहपुर सीकरी की स्थापना
  2388. 1:55:51एवं राजधानी को आगरा से फतेहपुर सीकरी का
  2389. 1:55:53स्थानांतरण 1571 ईस्वी में इबादतखाने की
  2390. 1:55:57स्थापना 1575
  2391. 1:55:59ईस्वी में इबादतखाने में सभी धर्मों के
  2392. 1:56:01लोगों का प्रवेश की अनुमति 1578 ईस्वी में
  2393. 1:56:05मजहर की घोषणा जो है 1579 में दीन इलाही
  2394. 1:56:09की स्थापना कई बार यह प्रश्न पूछा जाता है
  2395. 1:56:111582 ईस्वी में इलाही संवत की शुरुआत 1583
  2396. 1:56:17ईस्वी में किया था। इलाही संवत की शुरुआत।
  2397. 1:56:20राजधानी लाहौर स्थानांतरित 1585 ईस्वी में
  2398. 1:56:24किया। अकबर के काल में स्वामी हरिदास भी
  2399. 1:56:27एक महान संगीतज्ञ थे। यह वृंदावन में रहकर
  2400. 1:56:30भगवान की उपासना करते थे। एक मत के अनुसार
  2401. 1:56:33हरिदास तानसेन के गुरु थे। जबकि कुछ
  2402. 1:56:36विद्वान हरिदास एवं तानसेन दोनों को
  2403. 1:56:39मानसिंह तोमर का शिष्य जो है बतलाते हैं।
  2404. 1:56:42यह भी प्रचलित है कि हरिदास का गाना सुनने
  2405. 1:56:44के लिए अकबर को उनकी कुटिया पर जाना पड़ा
  2406. 1:56:47क्योंकि इन्होंने अकबर के दरबार में जाने
  2407. 1:56:50से मना कर दिया था। इनका कहना था कि वह
  2408. 1:56:53केवल अपने भगवान के लिए ही गाते हैं।
  2409. 1:56:55दरबार से उनका कोई सरोकार नहीं है। दरबार
  2410. 1:56:58से उनका कोई सरोकार नहीं है। दास्तान ए
  2411. 1:57:02अमीर हमजा हमजानामा प्रसिद्ध अरबी
  2412. 1:57:05महाकाव्य के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह
  2413. 1:57:07मुगल चित्रशाला की सबसे पहली अत्यंत
  2414. 1:57:10महत्वपूर्ण कृति है। हमजानामा दस्ताने
  2415. 1:57:13अमीर हमजा। इसमें हजरत मोहम्मद साहब के
  2416. 1:57:17चाचा अमीर हमजा के वीरता पूर्ण कारनामों
  2417. 1:57:20का चित्रित संग्रह है। इस पांडुलिपि का
  2418. 1:57:23चित्रण मीर सैयद अली परवेक्षक और अब्दुल
  2419. 1:57:26समद के नेतृत्व में ग्वालियर, गुजरात,
  2420. 1:57:28लाहौर, कश्मीर तथा मालवा आदि से बुलाए गए
  2421. 1:57:31लगभग 100 चित्रकारों के एक समूह ने जो है
  2422. 1:57:34किया है। हमजानामा
  2423. 1:57:35[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  2424. 1:57:35को चित्रित करने का कार्य हुमायूं के काल
  2425. 1:57:38में प्रारंभ हुआ और अकबर के काल में पूर्ण
  2426. 1:57:40हुआ। इस कार्य को पूरा करने में 15 वर्ष
  2427. 1:57:43लगे। इसे अंतिम रूप से चित्रित करने का
  2428. 1:57:46कार्य अब्दुल समद ने किया। इसके चित्र को
  2429. 1:57:49चित्रपट कहा गया। चित्रपट कहा गया। अकबर
  2430. 1:57:54के शासन प्रणाली की प्रमुख विशेषता
  2431. 1:57:56मनसबदारी प्रथा थी। क्या है? मनसबदारी
  2432. 1:57:59प्रथा थी। अकबर के समकालीन प्रसिद्ध सूफी
  2433. 1:58:02संत शेख सलीम चिश्ती से। सलीम चिश्ती थे।
  2434. 1:58:05अकबर की मृत्यु 16 अक्टूबर 1605 ईस्वी को
  2435. 1:58:08हुई। इसे आगरा के निकट सिकंदरा में दफनाया
  2436. 1:58:11गया। 16 अक्टूबर 1605 ईस्वी को हुई और इसे
  2437. 1:58:13आगरा के निकट सिकंदरा में जो है दफनाया
  2438. 1:58:16गया। स्थापत्य कला के क्षेत्र में अकबर की
  2439. 1:58:19महत्वपूर्ण कृतियां हैं। दिल्ली में
  2440. 1:58:21हुमायूं का मकबरा, आगरा का लाल किला,
  2441. 1:58:24फतेहपुर सिकरी में शाही महल, दीवान खास
  2442. 1:58:28पंचमहल, बुलंद दरवाजा, जोधाबाई का महल,
  2443. 1:58:32इबादतखाना, इलाहाबाद का किला और लाहौर का
  2444. 1:58:37किला। यह सब जो है स्थापत्य कला के
  2445. 1:58:39क्षेत्र में अकबर की महत्वपूर्ण कृतियां
  2446. 1:58:41हैं। अकबर के दरबार को सुशोभित करने वाले
  2447. 1:58:43नौ रत्न थे। कितने रत्न थे? नौ रत्न थे।
  2448. 1:58:47अबू फजल 1551 से 1602 फैजी 1547 से 1595
  2449. 1:58:52तानसेन बीरबल 1528 से 1583 टोडरमल राजा
  2450. 1:58:57मानसिंह अब्दुल रहीम खाने खान फकीर
  2451. 1:59:00अजीउद्दीन मुल्ला दो प्याजा। कौन-कौन सात
  2452. 1:59:03रत्न नवरत्न थे? अबुल फजल फैजी तानसेन
  2453. 1:59:06बीरबल टोडरमल राजा मानसी अब्दुल रहीम खान
  2454. 1:59:09ए खाना फकीर अजीउद्दीन मुल्ला दो प्याजा
  2455. 1:59:13अबुल फजल का बड़ा भाई फैजी अकबर के दरबार
  2456. 1:59:16में राजकवि के पद पर आसीन था। अबुल फजल का
  2457. 1:59:19बड़ा भाई फैजी इसने भास्करराचार्य की
  2458. 1:59:22पुस्तक लीलावती का फारसी में अनुवाद किया।
  2459. 1:59:25इसे फारसी काव्य का मास्टर माना जाता था।
  2460. 1:59:27इसे फारसी काव्य का मास्टर माना जाता था।
  2461. 1:59:31अबुल फजल ने अकबरनामा ग्रंथ की रचना की।
  2462. 1:59:34वह दीन इलाही धर्म का मुख्य पुरोहित था।
  2463. 1:59:36अबुल फजल जो है दीन इलाही का धर्म का
  2464. 1:59:40मुख्य पुरोहित था। अकबर ने भगवान दास आमेर
  2465. 1:59:44के राजा भारमाल के पुत्र को अमीर उल उमरा
  2466. 1:59:47की उपाधि दी। अमीर उल उमरा की उपाधि दी।
  2467. 1:59:51युसुफ जाइयों के विद्रोह को दबाने के
  2468. 1:59:53दौरान जो है बीरबल की हत्या हो गई। 1602
  2469. 1:59:56ईस्वी में सलीम जहांगीर के निर्देश पर
  2470. 1:59:58दक्षिण से आगरा की ओर आ रहे अबुल फजल को
  2471. 2:00:02रास्ते में वीर सिंह बुंदेला वीर सिंह
  2472. 2:00:05बुंदेला नामक सरदार ने जो है वो हत्या कर
  2473. 2:00:08दी किसे अबुल फजल को मुगल सम्राट अकबर ने
  2474. 2:00:12अनुवाद विभाग की स्थापना की। नकीब खान
  2475. 2:00:16अब्दुल कादिर बदायूं तथा शेख सुल्तान ने
  2476. 2:00:19रामायण एवं महाभारत का फारसी अनुवाद किया
  2477. 2:00:22व महाभारत का नाम रजमनामा युद्धों का
  2478. 2:00:24पुस्तक रखा। रजमनामा युद्धों का पुस्तक
  2479. 2:00:27रखा। पंचतंत्र का फारसी भाषा में अनुवाद
  2480. 2:00:31अबुल फजल ने अनवर एस सदा सदात नाम से तथा
  2481. 2:00:35मौलाना हुसैन फैज ने यार ए दानिश नाम से
  2482. 2:00:39किया। हाजी इब्राहिम सरहदी ने अथर्व बेद
  2483. 2:00:42का मुल्ला शाह मोहम्मद ने राज तरंगणी का
  2484. 2:00:45अब्दुल रहीम खाना खान ने तजुके बाबरी का व
  2485. 2:00:48फैजी ने लीलावती का फारसी में अनुवाद किया
  2486. 2:00:52फैजी ने नल दमयंती सूरदास द्वारा रचित कथा
  2487. 2:00:55का फारसी में अनुवाद कर उसका नाम सहेली
  2488. 2:00:58रखा जो है नल दमयंती का नाम क्या रखा
  2489. 2:01:01सहेली रखा भागवत पुराण का अनुवाद फारसी
  2490. 2:01:04में टोडरमल ने किया अब्दुल कादिर बदायु ने
  2491. 2:01:08सिंहासन बत्तीसी का अनुवाद फारसी में
  2492. 2:01:10किया। ज्योतिष के प्रसिद्ध ग्रंथ तजक बत
  2493. 2:01:14तुजुक का फारसी में अनुवाद जहान ए जफर नाम
  2494. 2:01:17से मोहम्मद खान गुजराती ने किया। मोहम्मद
  2495. 2:01:19खान गुजराती ने किया। पंचतंत्र का अरबी
  2496. 2:01:23भाषा में अनुवाद कलीला व दिमना कहलाता है।
  2497. 2:01:26कलीला व दिमना कहलाता है। निजामुद्दीन
  2498. 2:01:29पानीपत ने रामायण के परिशिष्ट के रूप में
  2499. 2:01:33योग वशिष्ठ वेदांतिक दर्शन पर एक ग्रंथ का
  2500. 2:01:36फारसी में अनुवाद किया। अकबर के काल को
  2501. 2:01:40हिंदी साहित्य का स्वर्ण काल कहा जाता है।
  2502. 2:01:42अकबर के काल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण
  2503. 2:01:44काल कहा जाता है। अकबर ने बीरबल को कवि
  2504. 2:01:48प्रिय एवं नरहरी को महापात्र की उपाधि
  2505. 2:01:52प्रदान की। बुलंद दरवाजा का निर्माण अकबर
  2506. 2:01:55ने गुजरात विजय के उपलक्ष में करवाया था।
  2507. 2:01:57बुलंद दरवाजा का निर्माण अकबर ने गुजरात
  2508. 2:01:59विजय के उपलक्ष में करवाया था। चार बाग
  2509. 2:02:03बनाने की परंपरा अकबर के समय शुरू हुई।
  2510. 2:02:05अकबर के समय शुरू हुई। अकबर ने सीरी कलम
  2511. 2:02:09की उपाधि अब्दुल समद अब्दुल समद को एवं
  2512. 2:02:11जड़ी कलम की उपाधि मोहम्मद हुसैन कश्मीरी
  2513. 2:02:14को दिया। श्री कलम की उपाधि अब्दुल समद को
  2514. 2:02:17और जड़ी कलम की उपाधि मोहम्मद हुसैन
  2515. 2:02:19कश्मीरी को दिया। मुगलों की राजकीय भाषा
  2516. 2:02:22जो है फारसी थी। क्या है? फारसी थी। अकबर
  2517. 2:02:25नकारा यानी नगाड़ा नामक वाद्य यंत्र जो है
  2518. 2:02:28बजाता था। मुगल मुद्रा व्यवस्था के
  2519. 2:02:31सुव्यवस्थित रूप प्रदान करने का श्रेय
  2520. 2:02:33अकबर को प्राप्त है। उसके एक सिक्के पर
  2521. 2:02:36कलमे की जगह अल्लाह ओ अकबर अल्लाह ओ अकबर
  2522. 2:02:40जले जलालहु तथा दूसरी ओर टसाल का नाम
  2523. 2:02:44अंकित था। उसके चांदी के एक अन्य सिक्के
  2524. 2:02:48के एक भाग पर धनुर्धारी राम और राम के
  2525. 2:02:51पीछे सीता की प्रतिमाएं अंकित है और ऊपर
  2526. 2:02:54राम सिम रामसिम शब्द जो है अंकित है। अकबर
  2527. 2:02:58ने असीरगढ़ के विजय की स्मृति में अपने
  2528. 2:03:01सिक्कों पर बाज की आकृति अंकित कराई है।
  2529. 2:03:03बाज की आकृति अंकित कराई है। करवाई है। अब
  2530. 2:03:07आइए देखते हैं जहांगीर के बारे में 1605
  2531. 2:03:10से 1627 ईस्वी तक जो है राज किया। अकबर का
  2532. 2:03:14उत्तराधिकारी सलीम हुआ जो 24 अक्टूबर 1605
  2533. 2:03:17को नूरुद्दीन मोहम्मद जहांगीर बादशाही
  2534. 2:03:20गाजी नूरुद्दीन मोहम्मद जहांगीर बादशाही
  2535. 2:03:24गाजी की उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा।
  2536. 2:03:27जहांगीर का जन्म 30 अगस्त 1569 ईस्वी में
  2537. 2:03:30हुआ था। 30 अगस्त 1569 ईस्वी में हुआ था।
  2538. 2:03:34अकबर ने अपने पुत्र का नाम सलीम सूफी संत
  2539. 2:03:36शेख सलीम चिश्ती के नाम पर रखा। अकबर ने
  2540. 2:03:39अपने पुत्र का नाम सलीम सूफी संत शेख सलीम
  2541. 2:03:42चिश्ती के नाम पर रखा। जहांगीर को न्याय
  2542. 2:03:46की जंजीर के लिए याद किया जाता है। यह
  2543. 2:03:49जंजीर सोने की बनी थी जो आगरा के किले के
  2544. 2:03:52शाहबुर एवं यमुना तट पर स्थित पत्थर के
  2545. 2:03:56खंभों में लगवाई हुई थी। क्या है? लगवाई
  2546. 2:03:58हुई थी। जहांगीर द्वारा शुरू की गई तजुके
  2547. 2:04:02जहांगीरी नामक आत्मकथा का पूरा करने का
  2548. 2:04:04श्रेय मौत बिंद ख मौत बिंद खान को है।
  2549. 2:04:08जहांगीर के सबसे बड़े पुत्र खुसरो ने 1606
  2550. 2:04:11ईस्वी में अपने पिता के विरुद्ध विद्रोह
  2551. 2:04:13कर दिया। खुसरो और जहांगीर की सेना के बीच
  2552. 2:04:16जो है युद्ध जालंधर के निकट भरावल नामक
  2553. 2:04:19मैदान में हुआ। खुसरो को पकड़ कर कैद में
  2554. 2:04:22डाल दिया गया। खुसरो को पकड़कर कैद में
  2555. 2:04:25डाल दिया गया। खुसरो की सहायता देने के
  2556. 2:04:27कारण जहांगीर ने सिखों के पांचव गुरु
  2557. 2:04:30अर्जुन देव को फांसी दिलवा दी। खुसरो गुरु
  2558. 2:04:34से गोइंत बाल में मिला था। खुसरो की
  2559. 2:04:37सहायता देने के कारण जहांगीर ने सिखों के
  2560. 2:04:39पांचवें गुरु जो है अर्जुन देव को फांसी
  2561. 2:04:41दिलवा दी। खुसरो जो है गुरु से गोविंद बाल
  2562. 2:04:45में मिला था। अहमदनगर के वजीर मलिक अंबर
  2563. 2:04:49के विरुद्ध सफलता से खुश होकर जहांगीर ने
  2564. 2:04:52खुर्रम को शाहजहां की उपाधि प्रदान की।
  2565. 2:04:54खुर्रम को शाहजहां की उपाधि जो है प्रदान
  2566. 2:04:57की।
  2567. 2:04:581622 ईस्वी में कंधार मुगलों के हाथ से
  2568. 2:05:02निकल गया। शाह अब्बास ने इस पर जो है
  2569. 2:05:04अधिकार कर लिया। क्या है? अधिकार कर लिया।
  2570. 2:05:07नूरजहां
  2571. 2:05:09ईरानी निवासी मिर्जा गयास बेग की पुत्री
  2572. 2:05:12नूरजहां का वास्तविक नाम मेहरू निसा था।
  2573. 2:05:161594 में नूरजहां का विवाह अलीकुली बेग से
  2574. 2:05:19संपन्न हुआ। अलीकुली बेग से संपन्न हुआ।
  2575. 2:05:22जहांगीर ने एक शेर मारने के कारण अली कुली
  2576. 2:05:25बेग को शेर अफगान शेर अफगान की उपाधि
  2577. 2:05:27प्रदान की। 1607 में शेर अफगान की मृत्यु
  2578. 2:05:31के बाद मेहरू निशा अकबर की विधवा सलीमा
  2579. 2:05:35बेगम की सेवा में नियुक्त हुई। मेहरू निशा
  2580. 2:05:37अकबर की विधवा सलीमा बेगम की सेवा में
  2581. 2:05:40नियुक्त हुई। सर्वप्रथम जहांगीर ने नवरोज
  2582. 2:05:43त्यौहार के अवसर पर मेहरू निसा को देखा और
  2583. 2:05:46उसके सौंदर्य पर मुग्ध होकर जहांगीर ने मई
  2584. 2:05:49161
  2585. 2:05:51में उससे विवाह कर लिया। विवाह के पश्चात
  2586. 2:05:54जहांगीर ने उसे नूर महल एवं नूरजहां की
  2587. 2:05:57उपाधि प्रदान की। नूरजहां के सम्मान में
  2588. 2:06:00जहांगीर ने चांदी के सिक्के जारी किए।
  2589. 2:06:02नूरजहां के सम्मान में चांदी के सिक्के जो
  2590. 2:06:04है जारी किए। जहांगीर क्या है? जहांगीर ने
  2591. 2:06:09गयास बेग को शाही दीवान बनाया एवं इतमाद
  2592. 2:06:12उद्दौला इतमाद उद्दौला की उपाधि दी।
  2593. 2:06:15जहांगीर के शासनकाल में ईरानियों को उच्च
  2594. 2:06:18पद प्राप्त हुए। ईरानियों को उच्च पद
  2595. 2:06:20प्राप्त हुए। लाडली बेगम शेर अफगान एवं
  2596. 2:06:23मेहरू निसा की पुत्री थी। जिसकी शादी
  2597. 2:06:26जहांगीर के पुत्र शहरियार के साथ हुई थी।
  2598. 2:06:29नूरजहां की मां असमत बेगम ने गुलाब से
  2599. 2:06:32इत्र निकालने की विधि खोजी थी। जिसे रोगन
  2600. 2:06:35एवं जहांगीर जो है कहा गया। रोगन एवं
  2601. 2:06:38जहांगीर कहा गया। महावत खान ने झेलम नदी
  2602. 2:06:42के तट पर 1626 ईस्वी में जहांगीर, नूरजहां
  2603. 2:06:46एवं उसके भाई असफ खान को बंदी बना लिया
  2604. 2:06:49था। जहांगीर के पांच पुत्र थे। खुसरो,
  2605. 2:06:53परवेज, खुर्रम, शहरियार और जहांदार। क्या
  2606. 2:06:57है? जहांदार। 28 अक्टूबर 1627 को भीमबार
  2607. 2:07:01नामक स्थान पर जहांगीर की मृत्यु हो गई।
  2608. 2:07:03उसे शहादरा लाहौर में रावी नदी के किनारे
  2609. 2:07:06जो है दफनाया गया। मुगल चित्रकला अपने
  2610. 2:07:09चरमत्कर्ष पर जहांगीर के शासनकाल में
  2611. 2:07:12पहुंची। जहांगीर के दरबार के प्रमुख
  2612. 2:07:14चित्रकार थे आगा रजा, अबुल हसन, मोहम्मद
  2613. 2:07:18नासिर, मोहम्मद मुराद, उस्ताद मंसूर, बिसन
  2614. 2:07:23दास, मनोहर एवं गोवर्धन, फारूक बेग, दौलत।
  2615. 2:07:27जहांगीर ने आगा राजा के नेतृत्व में आगरा
  2616. 2:07:30में एक चित्रणशाला की स्थापना की।
  2617. 2:07:32चित्रणशाला की स्थापना की। मुगल शासकों
  2618. 2:07:36में सर्वप्रथम जहांगीर ने ही राजा को
  2619. 2:07:38आकृति युक्त सिक्के जारी किया। इसके समय
  2620. 2:07:41निसार चांदी का सिक्का था जो रुपए के
  2621. 2:07:43चौथाई के बराबर होता था। उस्ताद मंसूर एवं
  2622. 2:07:48अबुल हसन को जहांगीर ने क्रमश नादिर अल उस
  2623. 2:07:52एवं नादिर उल जमा की उपाधि प्रदान की।
  2624. 2:07:55इसने संस्कृत के कवि जगन्नाथ को पंडित राज
  2625. 2:07:58की उपाधि दी। जहांगीर ने अपनी आत्मकथा में
  2626. 2:08:01लिखा कि कोई भी चित्र चाहे वह किसी मृतक
  2627. 2:08:04व्यक्ति या जीवित व्यक्ति द्वारा बनाया
  2628. 2:08:06गया हो मैं देखते ही तुरंत बता सकता हूं
  2629. 2:08:09यह किस चित्रकार की जो है कृति है। यदि
  2630. 2:08:12किसी चेहरे पर आंख किसी एक चित्रकार ने
  2631. 2:08:14भों किसी और ने बनाई हो तो भी यह जान लेता
  2632. 2:08:17हूं कि आंख किसने और भ जो है किसने बनाई
  2633. 2:08:21है। जहांगीर के समय को चित्रकला का
  2634. 2:08:24स्वर्णकाल कहा जाता है। चित्रकला का
  2635. 2:08:26स्वर्णकाल कहा जाता है। इतमाद उद्दौला का
  2636. 2:08:30मकबरा 1626 ईस्वी में नूरजहां बेगम ने
  2637. 2:08:33बनवाया। मुगल कालीन वास्तुकला के अंतर्गत
  2638. 2:08:35निर्मित यह प्रथम ऐसी इमारत है जो पूर्ण
  2639. 2:08:38रूप से बेदाग सफेद संगमरमर से निर्मित है।
  2640. 2:08:42सर्वप्रथम इसी इमारत में पित्रादुरा नामक
  2641. 2:08:44जड़ाऊ काम किया गया था। पितरादुरा इतमाद
  2642. 2:08:48उद्दौला के मकबरा में अशोक के कौसंबी
  2643. 2:08:51स्तंभ वर्तमान में प्रयाग पर समुद्रगुप्त
  2644. 2:08:54की प्रयाग प्रशस्ति तथा जहांगीर का लेख
  2645. 2:08:57उत्कीर्ण है। जहांगीर के मकबरा का निर्माण
  2646. 2:09:00नूरजहां ने करवाया था। नूरजहां ने करवाया
  2647. 2:09:02था। जहांगीर के शासनकाल में कैप्टन हॉकिंस
  2648. 2:09:06प्रथम अंग्रेज सर टॉमस रो, विलियम फिंच
  2649. 2:09:08एवं एडवर्ड टेरी जैसे यूरोपीय यात्री आए
  2650. 2:09:11थे। भारत में तंबाकू की खेती सर्वप्रथम
  2651. 2:09:14जहांगीर के शासनकाल में प्रारंभ हुई थी।
  2652. 2:09:17पुर्तगालियों द्वारा सर्वप्रथम 1605 ईस्वी
  2653. 2:09:19में दक्षिण में तंबाकू की खेती प्रारंभ
  2654. 2:09:21किया गया। लेकिन इसे पुर्तगालियों ने 1604
  2655. 2:09:24में अकबर के शासन के समय ब्राजील से लाए
  2656. 2:09:27थे। 1620 में जहांगीर के समय मराठे पहली
  2657. 2:09:30बार मुगलों की सेवा में आए थे। 1620 ईस्वी
  2658. 2:09:33में जहांगीर के समय मराठे पहली बार मुगलों
  2659. 2:09:35की सेवा में आए थे। अब आइए देखते हैं
  2660. 2:09:38शाहजहां 1627 से 1657 तक जहांगीर के बाद
  2661. 2:09:42सिंहासन पर जो है शाहजहां बैठा। कौन बैठा?
  2662. 2:09:45शाहजहां बैठा। जोधपुर के शासक मोटा राजा
  2663. 2:09:48उदय सिंह की पुत्री जगत गोसाई के गर्भ से
  2664. 2:09:525 जनवरी 1592 ईस्वी को खुर्रम शाहजहां का
  2665. 2:09:55जन्म लाहौर में हुआ था। 1612 ईस्वी में
  2666. 2:09:58खुर्रम का विवाह आसफ खान की पुत्री
  2667. 2:10:01अर्जुमंद बानो बेगम अर्जुमंद बानो बेगम से
  2668. 2:10:04हुआ। जिसे शाहजहां ने मलिका ए जमानी की
  2669. 2:10:07उपाधि प्रदान की। मलिका ए जमानी की उपाधि
  2670. 2:10:09प्रदान की। 7 जून 1631 ईस्वी में प्रसव
  2671. 2:10:13पीड़ा के कारण जो है वो उसकी मृत्यु हो
  2672. 2:10:16गई। किसका? अर्जुमन बानो बेगम का। 4 फरवरी
  2673. 2:10:201628 ईस्वी को शाहजहां जो है आगरा में
  2674. 2:10:24अबुल मुजफ्फर शाहबुद्दीन मोहम्मद साहिब
  2675. 2:10:27किरण एस सानी की उपाधि प्राप्त कर सिंहासन
  2676. 2:10:30पर बैठा। चार 4 जनवरी 4 फरवरी 1628 ईस्वी
  2677. 2:10:35को शाहजहां आगरा में अबुल मुजफ्फर
  2678. 2:10:37शाहबुद्दीन मोहम्मद साहिब किरण एसानी की
  2679. 2:10:40उपाधि प्राप्त कर जो है सिंहासन पर बैठा।
  2680. 2:10:43शाहजहां ने आसफ खान को वजीर पद एवं महावत
  2681. 2:10:47खान को खानखाना की उपाधि प्रदान की। इसने
  2682. 2:10:50नूरजहां को ₹ लाख प्रतिवर्ष की पेंशन देकर
  2683. 2:10:54लाहौर जाने दिया। जहां 1645 ईस्वी में
  2684. 2:10:57उसकी मृत्यु हो गई। अपनी बेगम मुमताज महल
  2685. 2:11:00की याद में शाहजहां ने ताजमहल का निर्माण
  2686. 2:11:03आगरा में उसकी कब्र के ऊपर करवाया। उस्ताद
  2687. 2:11:06ईसा ने ताजमहल के रूपरेखा तैयार की थी।
  2688. 2:11:09उस्ताद ईसा ने ताजमहल का निर्माण करने
  2689. 2:11:12वाला मुख्य स्थापत्य कलाकार था उस्ताद
  2690. 2:11:14अहमद लहरी था। उस्ताद अहमद लाहौरी था।
  2691. 2:11:18मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहां ने
  2692. 2:11:20करवाया था। इसका मुख्य कलाकार बेबादल खान
  2693. 2:11:23था। बेबादल खान था। बादशाह के सिंहासन के
  2694. 2:11:26पीछे पित्रास के जड़ाऊ काम की एक श्रृंखला
  2695. 2:11:29बनाई गई थी। जिससे पौराणिक यूनानी देवता
  2696. 2:11:33आर्फियस को बिना बजाते हुए चित्रित किया
  2697. 2:11:36गया था। आर्फियस को बिना बजाते हुए
  2698. 2:11:37चित्रित किया गया है। पित्रादुरा क्या तो
  2699. 2:11:40जब संगमरमर या बलुआ पत्थर में नक्काशी किए
  2700. 2:11:43गए खुदाई में रखे गए रंगीन सख्त पत्थर
  2701. 2:11:46सुंदर अलंकृत पैटर्न बनाते हैं उसे ही
  2702. 2:11:50पितरादुरा कहा जाता है। शाहजहां के
  2703. 2:11:53शासनकाल को स्थापत्य कला का स्वर्ण युग
  2704. 2:11:56स्थापत्य कला का स्वर्ण युग कहा जाता है।
  2705. 2:11:58शाहजहां द्वारा बनाए गए प्रमुख इमारतें
  2706. 2:12:00हैं। दिल्ली का लाल किला, दीवान-ए-आम,
  2707. 2:12:04दीवान-ए-खास,
  2708. 2:12:05दिल्ली का जामा मस्जिद, आगरा का मोती
  2709. 2:12:08मस्जिद, ताजमहल एवं लाहौर किला स्थित शीश
  2710. 2:12:12महल आदि है। हुमायूं ने मकबरा को ताजमहल
  2711. 2:12:18का पूर्ववर्ती माना जाता है। हुमायूं के
  2712. 2:12:20मकबरा को ताजमहल का पूर्ववर्ती माना जाता
  2713. 2:12:23है। शाहजहां ने 1632 ईस्वी में अहमदनगर को
  2714. 2:12:27मुगल साम्राज्य में मिला लिया। शाहजहां ने
  2715. 2:12:291632 में अहमदनगर को मुगल साम्राज्य में
  2716. 2:12:32मिला लिया। शाहजहां ने 1638 ईस्वी में
  2717. 2:12:35अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली लाने के
  2718. 2:12:38लिए यमुना नदी के दाहिने तट पर
  2719. 2:12:40शाहजहानाबाद की जो है नींव डाली। आगरा के
  2720. 2:12:44जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहां की पुत्री
  2721. 2:12:46जहां आरा ने करवाई व आगरे की मोती मस्जिद
  2722. 2:12:49का निर्माण शाहजहां ने किया था। आगरा के
  2723. 2:12:52जो जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहां के
  2724. 2:12:54पुत्री जहां आरा ने किया और आगरा की मोती
  2725. 2:12:56मस्जिद का निर्माण जो है शाहजहां ने किया
  2726. 2:12:59था। शाहजहां के दरबार के प्रमुख चित्रकार
  2727. 2:13:02मोहम्मद फकीर व मीर हाशिम थे। वे प्रमुख
  2728. 2:13:06संस्कृत कवि बंसीधर मिश्र एवं हरिनारायण
  2729. 2:13:10मिश्र थे। शाहजहां ने संगीतज्ञ लाल खान को
  2730. 2:13:14गुण समंदर की उपाधि एवं संगीतज्ञ जगन्नाथ
  2731. 2:13:18जो हिंदी का कवि भी था वो महाकविराय एवं
  2732. 2:13:21पंडित राज की उपाधि से सम्मानित किया।
  2733. 2:13:24पंडित जगन्नाथ की रचनाएं रस गंगाधर भामिनी
  2734. 2:13:28विलास एवं गंगा लहरी पीयूष लहरी है।
  2735. 2:13:31कौन-कौन से पंडित रथ की उपाधि से सम्मानित
  2736. 2:13:33किया? पंडित जगन्नाथ की रचनाएं कौन-कौन
  2737. 2:13:35है? रस गंगाधर, भामिनी विलास एवं गंगा
  2738. 2:13:38लहरी। शाहजहां ने फारसी के कवि अबू जालिह
  2739. 2:13:42कलीम को राजकवि नियुक्त किया था। अबू
  2740. 2:13:45जालिह कलीम को राजकवि नियुक्त किया था।
  2741. 2:13:48कलीम की प्रसिद्ध रचना साकीनामा है। क्या
  2742. 2:13:50है? साकीनामा है। शाहजहां के पुत्रों में
  2743. 2:13:54दारा शिको सर्वाधिक विद्वान था। इसने भगवत
  2744. 2:13:57गीता योग वशिष्ठ उपनिषद एवं रामायण का
  2745. 2:14:00अनुवाद फारसी में करवाया। इसने सर ए अकबर
  2746. 2:14:05महान रहस्य नाम के नाम से उपनिषदों का
  2747. 2:14:08अनुवाद करवाया था। दारा शिकोह कादरी
  2748. 2:14:11सिलसिले के मुल्ला शाह बदखसी का शिष्य था।
  2749. 2:14:14दारा शिकोह जो है कादरी सिलसिले के मुल्ला
  2750. 2:14:17शाह बदखसी का शिष्य था। फ्रांसवा बर्नियर
  2751. 2:14:20दारा शिकोह का चिकित्सक था। फ्रांसवा
  2752. 2:14:23बर्नियर दारा शिकोह का चिकित्सक था।
  2753. 2:14:25शाहजहां की पुत्री जहां आरा ने शेख
  2754. 2:14:28मोइनुद्दीन चिश्ती की जीवनी मुनिस अल अरबा
  2755. 2:14:32नाम से लिखी। जहां आरा जहां आरा मुल्ला
  2756. 2:14:36शाह बदखसी की शिष्या थी। इसने भी कादरी
  2757. 2:14:39सूफी सिलसिले में दीक्षा ली। कादरी सूफी
  2758. 2:14:42सिलसिले में दीक्षा ली थी। शाहजहां ने
  2759. 2:14:46दिल्ली में एक कॉलेज का निर्माण एवं दारुल
  2760. 2:14:49बक्का नामक कॉलेज की मरम्मत कराई। दिल्ली
  2761. 2:14:52में कॉलेज का निर्माण एवं दारुल बक्का
  2762. 2:14:54नामक कॉलेज की मरम्मत कराई। सितंबर 1657
  2763. 2:14:58ईस्वी में शाहजहां के गंभीर रूप से बीमार
  2764. 2:15:00पड़ने और मृत्यु का अपवाह फैलने के कारण
  2765. 2:15:03उसके पुत्रों के बीच उत्तराधिकार का युद्ध
  2766. 2:15:05प्रारंभ हुआ। उस समय सूजा बंगाल, मुराद,
  2767. 2:15:09गुजरात और औरंगजेब जो है दक्कन में था। 15
  2768. 2:15:12अप्रैल 1658 ईस्वी में दारा एवं औरंगजेब
  2769. 2:15:16के बीच धर्मट का युद्ध हुआ। धर्मट का
  2770. 2:15:18युद्ध हुआ। इस युद्ध में दारा की जो है
  2771. 2:15:20पराजय हुई। सामूगढ़ का युद्ध 29 मई 1658
  2772. 2:15:26ईस्वी को दारा एवं औरंगजेब के बीच हुआ। इस
  2773. 2:15:29युद्ध में भी दारा की हार हुई।
  2774. 2:15:31उत्तराधिकार का अंतिम युद्ध देवराई की
  2775. 2:15:33घाटी में मार्च जो है 1659 को हुआ। इस
  2776. 2:15:37युद्ध में दारा को पराजित होने पर उसे
  2777. 2:15:39इस्लाम धर्म की अवहेलना करने के अपराध में
  2778. 2:15:4230 अगस्त 1659 ईस्वी को हत्या कर दी गई।
  2779. 2:15:45दारा शिकोह ने अपना निर्वासित जीवन अलवर
  2780. 2:15:48राजस्थान के कंकबाड़ी किला में बिताया। इस
  2781. 2:15:51किला का निर्माण जय सिंह सेकंड ने किया
  2782. 2:15:53था। जय सिंह सेकंड ने किया था। शाह बुलंद
  2783. 2:15:57इकबाल किंग ऑफ लॉफ्टी फॉर ट्यूम के रूप
  2784. 2:16:00में दारा शिकोह जो है जाना जाता है। शाह
  2785. 2:16:02बुलंद इकबाल के रूप में दारा शिकोह जाना
  2786. 2:16:05जाता है। 8 जून 1658 को औरंगजेब ने
  2787. 2:16:09शाहजहां को बंदी बना लिया। आगरा के किले
  2788. 2:16:12में अपने कैदी जीवन के आठवें वर्ष अर्थात
  2789. 2:16:1422 जनवरी 1666 को 74 वर्ष की अवस्था में
  2790. 2:16:18शाहजहां का जो है मृत्यु हो गई। शाहजहां
  2791. 2:16:20के शासनकाल में आए विदेशी यात्री थे
  2792. 2:16:23निकोलो मनूची इटली के पीटर मुंडी इटली के
  2793. 2:16:27जैन बेप्टिस्ट ट्रेवर्नियर फ्रांस के
  2794. 2:16:30फ्रांसिस बर्नियर फ्रांस के जॉन फ्रायर
  2795. 2:16:33जॉन लेट जो आया था इंग्लैंड के अब बात
  2796. 2:16:37करते हैं औरंगजेब के 1658 से 1707 ईस्वी
  2797. 2:16:42औरंगजेब का जन्म 24 अक्टूबर 1618 ईस्वी को
  2798. 2:16:45दोहाद गुजरात नामक स्थान पर हुआ था
  2799. 2:16:48औरंगजेब के बचपन का अधिकांश समय नूरजहां
  2800. 2:16:51के पास बीता। नूरजहां के पास 18 मई 1637
  2801. 2:16:55को फारस के राजघराने के दिलराज बानो बेगम
  2802. 2:16:59फारस के राजघराने की दिलराज बानो बेगम के
  2803. 2:17:02साथ औरंगजेब का जो है निकाह हुआ। आगरा पर
  2804. 2:17:05कब्जा कर जल्दबाजी में औरंगजेब ने अपना
  2805. 2:17:08राज्य अभिषेक अबुल मुजफ्फर मोइद्दीन
  2806. 2:17:11मोहम्मद औरंगजेब बहादुर आलमगीर बादशाह
  2807. 2:17:14गाजी अबुल मुजफ्फर मुुद्दीन मोहम्मद
  2808. 2:17:16औरंगजेब बहादुर आलमगीर बादशाह गाजी की
  2809. 2:17:19उपाधि से 31 जुलाई 1658 को करवाया। देवराई
  2810. 2:17:24के युद्ध में सफल होने के बाद 15 मई 1659
  2811. 2:17:27को औरंगजेब ने दिल्ली में प्रवेश किया और
  2812. 2:17:30शाहजहां के शानदार महल में 5 जून 1659 को
  2813. 2:17:33दूसरी बार राज्याभिषेक करवाया। तो प्रश्न
  2814. 2:17:35पूछता है कि किस मुगल शासक का जो है
  2815. 2:17:38राज्याभिषेक दो बार हुआ तो आप उसे टिक
  2816. 2:17:41लगाइएगा औरंगजेब क्या है? औरंगजेब औरंगजेब
  2817. 2:17:44के गुरु थे मीर मोहम्मद हकीम। मीर मोहम्मद
  2818. 2:17:47हकीम। औरंगजेब सुन्नी धर्म को मानता था।
  2819. 2:17:50उसे जिंदा पीर कहा जाता था। जय सिंह एवं
  2820. 2:17:53शिवाजी के बीच पुरंदर की संधि जो है 22
  2821. 2:17:56जून 1665 ईस्वी को संपन्न हुई। मई 1666 को
  2822. 2:18:01आगरा के किले के दीवान एआम में औरंगजेब के
  2823. 2:18:04समस्त शिवाजी उपस्थित हुए। यहां शिवाजी को
  2824. 2:18:07कैद कर जयपुर भवन में रखा गया। इस्लाम
  2825. 2:18:10नहीं स्वीकार करने के कारण सिखों के नौवें
  2826. 2:18:12गुरु गुरु तेग बहादुर की हत्या औरंगजेब ने
  2827. 2:18:151675 ईस्वी में दिल्ली में करवा दी थी।
  2828. 2:18:19औरंगजेब ने 1679 ईस्वी में जजिया कर को जो
  2829. 2:18:22है पुनः लागू किया। जजिया कर को पुनः लागू
  2830. 2:18:25किया। अब जजिया कर है क्या? यह गैर
  2831. 2:18:27मुस्लिमों से लिए जाने वाला कर था। किंतु
  2832. 2:18:29ब्राह्मण, संत, वृद्ध, निर्धन, पागल,
  2833. 2:18:31अल्पव्यस वस्त्रियों से यह नहीं लिया जाता
  2834. 2:18:34था। भारत में सर्वप्रथम मीर कासिम ने 712
  2835. 2:18:38ईस्वी में सिंध विजय के बाद जजिया की
  2836. 2:18:40वसूली प्रारंभ की। फिरोज तुगलक ने
  2837. 2:18:42ब्राह्मणों से भी जजिया वसूल किया। मुगल
  2838. 2:18:46काल में बाबर एवं हुमायूं के काल में
  2839. 2:18:48जजिया प्रचलित थी। किंतु अकबर ने 1564
  2840. 2:18:51ईस्वी में इसे बंद कर दिया था। औरंगजेब ने
  2841. 2:18:531679 में सर्वप्रथम मारवाड़ में जजिया की
  2842. 2:18:56वसूली का आदेश दिया। तत्पश्चात राज्य के
  2843. 2:18:59अन्य भागों में वसूला जाने लगा। जजिया का
  2844. 2:19:02अंतिम रूप से समाप्ति मोहम्मद शाह के समय
  2845. 2:19:05जो है 1720 ईस्वी में हुआ। क्या है? 1720
  2846. 2:19:08ईस्वी में हुआ। औरंगजेब ने बीवी का मकबरा
  2847. 2:19:11का निर्माण 1679 ईस्वी में औरंगाबाद
  2848. 2:19:15महाराष्ट्र में करवाया। औरंगजेब के समय
  2849. 2:19:17हुए जाट विद्रोह का नेतृत्व गोकुला एवं
  2850. 2:19:20राजा राम ने किया था। 1669 ईस्वी में
  2851. 2:19:23तिलपत की लड़ाई में जाट परास्त हुए। गोकुल
  2852. 2:19:26की मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बावजूद
  2853. 2:19:28जाटों ने 1685 ईस्वी में राजाराम के
  2854. 2:19:31नेतृत्व में पुनः विद्रोह किया। इन जाटों
  2855. 2:19:33ने सिकंदरा में स्थित अकबर के मकबरे को भी
  2856. 2:19:36लूटा। भरतपुर राजवंश की नीव औरंगजेब के
  2857. 2:19:38शासनकाल में जाट नेता एवं राजा राम का
  2858. 2:19:42भतीजा चुरामन ने जो है डाली। 1686 ईस्वी
  2859. 2:19:46में बीजापुर एवं 1687 ईस्वी में गोलकुंडा
  2860. 2:19:49को औरंगजेब ने मुगल साम्राज्य में मिला
  2861. 2:19:52लिया। मदना एवं अकना नामक ब्राह्मणों का
  2862. 2:19:56संबंध गोलकुंडा के शासक अबुल हसन से था।
  2863. 2:19:58क्या है? अबुल हसन से था। औरंगजेब के समय
  2864. 2:20:02हिंदू मनसबदारों की संख्या लगभग 337 थी।
  2865. 2:20:05जो अन्य मुगल सम्राटों की तुलना में अधिक
  2866. 2:20:07थी। औरंगजेब सर्वाधिक हिंदू अधिकारियों की
  2867. 2:20:10नियुक्ति करने वाला मुगल सम्राट था।
  2868. 2:20:13औरंगजेब का पुत्र अकबर ने दुर्गादास के
  2869. 2:20:16बहकावे में आकर अपने पिता के खिलाफ जो है
  2870. 2:20:19विद्रोह किया। औरंगजेब ने कुरान को अपने
  2871. 2:20:22शासन का आधार बनाया। इसने सिक्के पर कलमा
  2872. 2:20:25खुदवाना, नबरोज का त्यौहार मनाना, भांग की
  2873. 2:20:28खेती करना, गाना बजाना, झरोखा दर्शन,
  2874. 2:20:31तुलादान प्रथा। इस प्रथा में सम्राट को
  2875. 2:20:34उसके जन्मदिन पर सोने, चांदी तथा अन्य
  2876. 2:20:36वस्तुओं से तोलने की प्रथा थी। हिंदू
  2877. 2:20:39राजाओं के माथे पर अपने हाथ से तिलक लगाना
  2878. 2:20:41जिसे अकबर ने प्रारंभ किया था। सती, प्रथा
  2879. 2:20:44आदि पर जो है यह सब पे प्रतिबंध लगा दिया।
  2880. 2:20:48वेश्याओं को शादी करने अथवा देश छोड़ देने
  2881. 2:20:50के आदेश दिए और दरबार में होली, दिवाली
  2882. 2:20:53आदि त्यौहार मनाने जो है वो बंद कर दिए।
  2883. 2:20:57औरंगजेब ने दरबार में संगीत पर पाबंदी लगा
  2884. 2:21:00दी तथा सरकारी संगीतज्ञों को अवकाश दे
  2885. 2:21:02दिया गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत पर
  2886. 2:21:05फारसी में सबसे अधिक पुस्तकें औरंगजेब के
  2887. 2:21:08ही शासनकाल में लिखी गई। औरंगजेब स्वयं
  2888. 2:21:10बीना बजाने में जो है वह दक्ष था। औरंगजेब
  2889. 2:21:14ने 9 अप्रैल 1669 ईस्वी में हिंदू मंदिरों
  2890. 2:21:17को तोड़ने का आदेश दिया। इसके शासनकाल में
  2891. 2:21:20तोड़े गए प्रमुख मंदिरों में पाटन का
  2892. 2:21:22सोमनाथ का मंदिर, बनारस का विश्वनाथ
  2893. 2:21:25मंदिर, वीर सिंह देव द्वारा जहांगीर काल
  2894. 2:21:28में मथुरा में निर्मित केशवदेवराय मंदिर
  2895. 2:21:31थे। औरंगजेब की मृत्यु 20 फरवरी 1707
  2896. 2:21:34ईस्वी को हुई। इसे खुलदताबाद खुलदाबाद
  2897. 2:21:37खुलदाबाद जो अब रोजा कहलाता है में दफनाया
  2898. 2:21:41गया। औरंगजेब के समय सूबों की संख्या
  2899. 2:21:43कितनी थी? सूबों की संख्या जो है 21 थी।
  2900. 2:21:47औरंगजेब दारुल हर्ब काफिरों का देश को
  2901. 2:21:49दारुल इस्लाम इस्लाम का देश में परिवर्तित
  2902. 2:21:52करने को अपना महत्वपूर्ण लक्ष्य मानता था।
  2903. 2:21:55औरंगजेब के शासनकाल में मुगल सेना में
  2904. 2:21:58सर्वाधिक जो है हिंदू सेनापति थे। क्या
  2905. 2:22:00है? हिंदू सेनापति थे। फ्रांसीसी यात्री
  2906. 2:22:03फ्रंकोइस बर्नियर दारा शिकोह के चिकित्सक
  2907. 2:22:06थे। दारा शिकोह के चिकित्सक थे। अब आइए
  2908. 2:22:09देखते हैं मुगल शासन व्यवस्था।
  2909. 2:22:12मंत्रीपरिषद को बिजारत कहा जाता था।
  2910. 2:22:14बिजारत बाबर के शासनकाल में वजीर पद जो है
  2911. 2:22:17काफी महत्वपूर्ण था। सम्राट के बाद शासन
  2912. 2:22:20के कार्यों को संचालित करने वाले सबसे
  2913. 2:22:22महत्वपूर्ण अधिकारी वकील था। जिसके
  2914. 2:22:25कर्तव्यों को अकबर ने दीवान मीर बख्शी,
  2915. 2:22:28सद्र उस सद्र व मीर संबंध में विभाजित कर
  2916. 2:22:31दिया। औरंगजेब के समय में असद खान ने
  2917. 2:22:34सर्वाधिक 31 वर्षों तक दीवान के पद पर
  2918. 2:22:36कार्य किया। मीर बख्शी द्वारा सरखत नाम के
  2919. 2:22:40पद पर हस्ताक्षर के बाद ही सेना को हर
  2920. 2:22:43महीने वेतन जो है मिल पाता था। जब कभी
  2921. 2:22:46सर्द न्याय विभाग के प्रमुख का कार्य करता
  2922. 2:22:49था तब उसे काजी कहा जाता था। लगानहीन भूमि
  2923. 2:22:54मदद एवं मास का निरीक्षण सर्द करता था।
  2924. 2:22:58सम्राट के घरेलू विभागों का प्रधान मीर
  2925. 2:23:00समा कहलाता था। मीर समा सूचना एवं गुप्तचर
  2926. 2:23:04विभाग का प्रधान दरोगा ए डाक चौकी दरोगा ए
  2927. 2:23:07डाक चौकी कहलाता था। शरीयत के प्रतिकूल
  2928. 2:23:11कार्य करने वालों को रोकना आम जनता के
  2929. 2:23:13दुष्ट चरित्रता से बचाने का कार्य मुहतसीब
  2930. 2:23:16नामक अधिकारी जो है करता था। प्रशासन की
  2931. 2:23:19दृष्टि से मुगल साम्राज्य का बंटवारा
  2932. 2:23:21सूबों में सूबों का सरकार में सरकार का
  2933. 2:23:24परगना या महाल में महाल का जिला या दस्तूर
  2934. 2:23:29में और दस्तूर ग्राम में बटे थे। प्रशासन
  2935. 2:23:33की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी जिसे मावदा या
  2936. 2:23:36दीह कहते थे। मावदा के अंतर्गत छोटी-छोटी
  2937. 2:23:39बस्तियों को नागला कहा जाता था। नागला कहा
  2938. 2:23:42जाता था। शाहजहां के शासनकाल में सरकार
  2939. 2:23:45एवं परगना के मध्य चकला नाम की एक नई इकाई
  2940. 2:23:48की स्थापना जो है की गई थी। मुगल काल के
  2941. 2:23:51प्रमुख अधिकारी एवं कार्य देख लेते हैं।
  2942. 2:23:53सूबेदार कार्य क्या था? प्रांतों में
  2943. 2:23:55शांति स्थापित करना। प्रांत कार्यकारिणी
  2944. 2:23:57का प्रधान होता था। दीवान प्रांतीय राजस्व
  2945. 2:24:00का प्रधान। सीधे शाही दीवान के प्रति
  2946. 2:24:02जवाबदेह था। बख्शी प्रांतीय सैन्य प्रधान।
  2947. 2:24:06फौजदार जिले का प्रधान फौजी अधिकारी आमिल
  2948. 2:24:08या अमलगुजार जिले का प्रमुख राजस्व
  2949. 2:24:11अधिकारी कोतवाल नगर प्रधान सिकदार परगने
  2950. 2:24:15का प्रमुख अधिकारी आमिल ग्राम के कृषकों
  2951. 2:24:17से प्रत्यक्ष संबंध बनाना एवं लगान
  2952. 2:24:19निर्धारित जो है वो करना है। भूमिर के
  2953. 2:24:23विभाजन के आधार पर मुगल साम्राज्य की
  2954. 2:24:25समस्त भूमि तीन वर्गों में विभाजित है।
  2955. 2:24:28खालसा भूमि प्रत्यक्ष रूप से बादशाह के
  2956. 2:24:30नियंत्रण में जागीर भूमि तनख्वाह के बदले
  2957. 2:24:32दी जाने वाली भूमि सयूरगल
  2958. 2:24:34[नाक से की जाने वाली आवाज़] या मदद ए मास
  2959. 2:24:36अनुदान में दी गई लगानहीन भूमि इसे मिल्क
  2960. 2:24:39भी कहा जाता था क्या है मिल्क भी कहा जाता
  2961. 2:24:42था [नाक से की जाने वाली आवाज़] शेरशाह
  2962. 2:24:43द्वारा भू-राजस्व हेतु अपनाई जाने वाली
  2963. 2:24:45पद्धति राई का उपयोग अकबर ने भी किया था
  2964. 2:24:49अकबर के द्वारा करोरी नामक अधिकारी की
  2965. 2:24:52नियुक्ति 1573 ईस्वी में की गई थी। इसे
  2966. 2:24:54अपने क्षेत्र से 1 करोड़ दाम वसूल जो है
  2967. 2:24:56करना होता था। कुछ भूमि के बारे में जान
  2968. 2:24:59लेते हैं। पोलज नियमित रूप से खेती वर्ष
  2969. 2:25:02में दो बार फसल पोलज में प्रति एक या दो
  2970. 2:25:05वर्ष के अंतराल पर खेती होती थी। चाचर तीन
  2971. 2:25:07से चार वर्ष के अंतराल पर खेती होती थी।
  2972. 2:25:09अब बंजर खेती योग भूमि नहीं इस पर लगान
  2973. 2:25:11नहीं वसूला जाता था बंजर पे। 1580 ईस्वी
  2974. 2:25:15में अकबर ने दहशाला नाम की नवीन कर
  2975. 2:25:17प्रणाली प्रारंभ की। इस व्यवस्था को
  2976. 2:25:19टोडरमल बंदोबस्त भी कहा जाता है। इस
  2977. 2:25:22व्यवस्था के अंतर्गत भूमि को चार भागों
  2978. 2:25:24में जो है विभाजित किया गया है। पोलज,
  2979. 2:25:26प्रति चाचर और बंजर। 157071 ईस्वी में
  2980. 2:25:30टोडरमल ने खालसा भूमि पर राजस्व की नवीन
  2981. 2:25:33प्रणाली जपती प्रारंभ की। इसमें कर
  2982. 2:25:35निर्धारण की दो श्रेणी थी। एक को तकसीस
  2983. 2:25:38एवं दूसरे को तहसील कहते थे। औरंगजेब ने
  2984. 2:25:41अपने शासनकाल में नस्क प्रणाली को अपनाया
  2985. 2:25:44और भू-राजस्व की राशि को उपज का आधा कर
  2986. 2:25:47दिया। मुगल काल में कृषक तीन वर्गों में
  2987. 2:25:50विभाजित थे। खुद कास्त यह किसान उसी गांव
  2988. 2:25:52की भूमि पर खेती करते थे जहां के थे। जहां
  2989. 2:25:55के वह निवासी थे। पाही कास्त यह दूसरे
  2990. 2:25:58गांव जाकर कृषि कार्य करते थे। मुजारियन
  2991. 2:26:01खुदकास्त कृषकों से भूमि किराए पर लेकर
  2992. 2:26:03कृषि कार्य जो है वो करते थे। मुगल काल
  2993. 2:26:07में नील उत्पादन के प्रसिद्ध केंद्र था
  2994. 2:26:09आगरा। भरतपुर के बयाना तथा गुजरात में
  2995. 2:26:12सरखेज थे। सबसे उत्तम प्रकार का नील बयाना
  2996. 2:26:15क्षेत्र एवं सरखेज में पैदा होता था। अफीम
  2997. 2:26:18मुख्यत मालवा एवं बिहार में होता था। अफीम
  2998. 2:26:21सोरा उत्पादन का प्रमुख केंद्र जो है
  2999. 2:26:23बिहार था। कपड़ा उद्योग के अंतर्गत ददनी
  3000. 2:26:26प्रथा का प्रचलन था। इसका तात्पर्य
  3001. 2:26:28कारीगरों को अग्रिम भुगतान से था। उत्तम
  3002. 2:26:31श्रेणी का उंगूनी वस्त्र और साल कश्मीर
  3003. 2:26:33तथा लाहौर में तैयार होता था। मुगल काल
  3004. 2:26:37में रुपया की सर्वाधिक ढलाई औरंगजेब के
  3005. 2:26:40समय में हुई। आना सिक्के का प्रचलन
  3006. 2:26:42शाहजहां ने करवाया। आना सिक्के का प्रचलन
  3007. 2:26:45शाहजहां ने करवाया। जहांगीर ने अपने समय
  3008. 2:26:48में सिक्कों पर अपनी आकृति बनवाई। साथ ही
  3009. 2:26:50उस पर अपना एवं नौजहां का नाम जो है अंकित
  3010. 2:26:53करवाया।
  3011. 2:26:55मुगल कालीन लगान वसूल करने की व्यवस्थाएं
  3012. 2:26:57हैं। गल्ला बख्श। इसमें फसल का कुछ बक्श
  3013. 2:27:00सरकार द्वारा ले लिया जाता था। नसक क्या
  3014. 2:27:02है? तो इसमें खड़ी फसल के आधार पर लगान का
  3015. 2:27:04अनुमान लगाकर फसल कटने पर उसे ले लिया
  3016. 2:27:06जाता था। यह व्यवस्था बंगाल में थी। नस
  3017. 2:27:09जबती इसमें बोई गई फसल के आधार पर लगान का
  3018. 2:27:12निश्चय किया जाता था जो नगद लिया जाता था।
  3019. 2:27:16सबसे बड़ा सिक्का संस सोना का था। स्वर्ण
  3020. 2:27:18का सबसे प्रचलित सिक्का इलाही था। मुगल
  3021. 2:27:21कालीन सिक्के देख लेते हैं। मुहर यह मुगल
  3022. 2:27:24काल का सर्वाधिक प्रचलित सोने का सिक्का
  3023. 2:27:26था। संस अकबर द्वारा चला गया सबसे बड़ा
  3024. 2:27:28सोने का सिक्का था। यह 101 तोले का था।
  3025. 2:27:31इलाही यह सोने का गोल आकार का सिक्का था।
  3026. 2:27:33रहस या गोल एवं चौकोर दोनों तरह के सोने
  3027. 2:27:36का सिक्का था। या 5 तोले का था। आत्मा 25
  3028. 2:27:40तोले का सोने का सिक्का विनाश 20 तोले का
  3029. 2:27:42सोने का सिक्का रुपया चांदी का सिक्का
  3030. 2:27:44जलाली चांदी का सिक्का दरब चरण चंदन दहकल
  3031. 2:27:49बस सूखे सभी चांदी के जो है वो सिक्के थे।
  3032. 2:27:53मुगल कालीन क्या है? मुगल कालीन
  3033. 2:27:55अर्थव्यवस्था का आधार चांदी का रुपया था।
  3034. 2:27:57दस्तक व्यवसाय परमिट था। दैनिक लेनदेन के
  3035. 2:28:01लिए तांबे के दाम का प्रयोग होता था। ₹1
  3036. 2:28:03में 40 दाम होते थे। मुगल सेना जो है चार
  3037. 2:28:06भागों में विभक्त थी। कौन-कौन? पैदल सेना,
  3038. 2:28:08घुड़सवार सेना, तोपखाना और हाथी सेना।
  3039. 2:28:12मुगल कालीन सैन्य व्यवस्था पूर्णतः
  3040. 2:28:14मनसबदारी प्रथा पर आधारित थी। इसे अकबर ने
  3041. 2:28:17प्रारंभ किया था। 10 से 500 तक के मनसब
  3042. 2:28:20प्राप्त करने वाले मनसबदार, 500 से 2500
  3043. 2:28:22तक मंसब प्राप्त करने वाले उमरा एवं 2500
  3044. 2:28:25से ऊपर तक मंसब प्राप्त करने वाले अमीर
  3045. 2:28:27एआम जो है कहलाते थे। जात से व्यक्ति के
  3046. 2:28:31वेतन एवं प्रतिष्ठा का ज्ञान होता था।
  3047. 2:28:34सवार पद से घुड़सवार दस्तों की संख्या का
  3048. 2:28:36ज्ञान होता था। अकबर के शासनकाल में 29
  3049. 2:28:39ऐसे मनसबदार थे जो 5000 जात की पदवी के
  3050. 2:28:42थे। औरंगजेब के शासनकाल तक ऐसे मनसबदारों
  3051. 2:28:45की संख्या जो है 79 थी। क्या है? 79।
  3052. 2:28:48जहांगीर ने सवार पद में दो अस्पा एवं सिंह
  3053. 2:28:51अस्पा की व्यवस्था की। सर्वप्रथम यह पद
  3054. 2:28:54महावत खान को जो है वो दिया गया।
  3055. 2:28:56मनसबदारों के अलावा खुद मुगल शहंशाह भी
  3056. 2:29:00फुटकर घुड़सवार रखते थे। जिन्हें अहदी कहा
  3057. 2:29:03जाता था। अहदियों को भद्र घुड़सवार कहा
  3058. 2:29:06गया है और उनके वेतन दूसरे घुड़सवारों से
  3059. 2:29:08काफी ज्यादा जो है होते थे। यह बहुत ही
  3060. 2:29:11विश्वस्तर सैन्य दल के सदस्य होते थे।
  3061. 2:29:14उनकी भर्ती स्वाएं सहंसाह शहंशाह किया
  3062. 2:29:17करते थे। उनकी हाजिरी लेने के लिए अलग
  3063. 2:29:19अधिकारी होते थे। अहदी पांच-प घोड़े भी
  3064. 2:29:21रखते थे। लेकिन कुछ ऐसे आदी भी थे जिन में
  3065. 2:29:24से दो एक ही घोड़े थे। हिस्सेदारी करते
  3066. 2:29:27थे। अहदियों के कर्तव्य बहुमुखी होते थे।
  3067. 2:29:30शाही कार्यालय के अधिकतर मुंशी दरबार के
  3068. 2:29:32चित्रकार और शाही कारखाने के फोरमैन इसी
  3069. 2:29:35सैन दल से चुने जाते थे। अगला चैप्टर
  3070. 2:29:38देखते हैं। मराठों का उत्कर्ष और ये आखिरी
  3071. 2:29:41जो है चैप्टर है मध्यकालीन भारत में से।
  3072. 2:29:44मराठा साम्राज्य का संस्थापक छत्रपति
  3073. 2:29:46शिवाजी थे। शिवाजी का जन्म 6 अप्रैल 1627
  3074. 2:29:50ईस्वी में शिवनेर दुर्ग ज्नार के समीप में
  3075. 2:29:53हुआ था। छत्रपति शिवाजी के पिता शाहजी
  3076. 2:29:56भोसले व माता जो है जीजाबाई थे। शाहजी
  3077. 2:29:58भोसले पिता थे और माता जीजाबाई थे। शाहजी
  3078. 2:30:01भोसले की दूसरी पत्नी का नाम तुकाबाई
  3079. 2:30:03मोहिते थे। तुकाबाई मोहिते था। छत्रपति
  3080. 2:30:07शिवाजी महाराज के गुरु कुंडदेव थे। क्या
  3081. 2:30:09है? कुंडदेव थे। आध्यात्मिक क्षेत्र में
  3082. 2:30:11शिवाजी के आचरण पर गुरु रामदास का जो है
  3083. 2:30:14काफी प्रभाव था। छत्रपति शिवाजी का विवाह
  3084. 2:30:17साईं बाई निंबालकर से 1640 ईस्वी में हुआ।
  3085. 2:30:22शाहजी ने छत्रपति शिवाजी को पूना की जागीर
  3086. 2:30:25प्रदान कर स्वयं बीजापुर रियासत में नौकरी
  3087. 2:30:29कर ली। अपने सैन अभियान के अंतर्गत 1644
  3088. 2:30:32ईस्वी में छत्रपति शिवाजी ने सर्वप्रथम
  3089. 2:30:35बीजापुर के तोरण नामक पहाड़ी किले पर
  3090. 2:30:38अधिकार किया। 1656 में छत्रपति ईस्वी में
  3091. 2:30:41छत्रपति शिवाजी ने रायगढ़ को अपनी राजधानी
  3092. 2:30:44बनाया। रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया।
  3093. 2:30:47छत्रपति शिवाजी को राजा की उपाधि औरंगजेब
  3094. 2:30:50ने दी औरंगजेब ने दी थी। बीजापुर के
  3095. 2:30:52सुल्तान ने अपने योग्य सेनापति अफजल खान
  3096. 2:30:55को सितंबर 1659 ईस्वी में शिवाजी को
  3097. 2:30:58पराजित करने के लिए भेजा। शिवाजी ने 10
  3098. 2:31:01नवंबर 1659 को अफजल खान की हत्या कर दी।
  3099. 2:31:05छत्रपति शिवाजी ने सूरत को 1664 ईस्वी में
  3100. 2:31:09एवं 1670 ईस्वी में लूटा। शिवाजी ने सूरत
  3101. 2:31:12को 1664 एवं 1670 ईस्वी में लूटा। पुरंदर
  3102. 2:31:16की संधि 1665 ईस्वी में महाराजा जय सिंह
  3103. 2:31:19एवं छत्रपति शिवाजी के मध्य संपन्न हुई।
  3104. 2:31:22उस समय मनूची भी वहां जो है उपस्थित था।
  3105. 2:31:25शिवाजी को औरंगजेब ने मई 1666 ईस्वी में
  3106. 2:31:28जयपुर भवन में कैद कर लिया। जहां से वह 16
  3107. 2:31:32अगस्त 1666 ईस्वी में भाग निकले। 1672
  3108. 2:31:36ईस्वी में शिवाजी ने पन्हाला दुर्ग को
  3109. 2:31:38बीजापुर से छीना। पन्हाला दुर्ग को
  3110. 2:31:40बीजापुर से छीना। 5 जून 1674 ईस्वी को
  3111. 2:31:44शिवाजी ने रायगढ़ में वाराणसी काशी के
  3112. 2:31:47प्रसिद्ध विद्वान श्री गंगाभट्ट द्वारा
  3113. 2:31:49अपना राज्याभिषेक करवाया। मूल रूप से
  3114. 2:31:52गंगाभट्ट महाराष्ट्र का एक सम्मानित
  3115. 2:31:54ब्राह्मण था जो लंबे समय से वाराणसी में
  3116. 2:31:57रह रहा था। कर्नाटक अभियान 1676 से 78
  3117. 2:32:01ईस्वी में छत्रपति शिवाजी का अंतिम अभियान
  3118. 2:32:03था। इन्होंने 1678 में जिंजी का किला
  3119. 2:32:07विजित किया जो उनकी अंतिम जो है विजय थी।
  3120. 2:32:10जिंजी का किला। मात्र 53 वर्ष की आयु में
  3121. 2:32:133 अप्रैल 1680 ईस्वी को शिवाजी की मृत्यु
  3122. 2:32:15हो गई। इनका अंतिम संस्कार राजाराम दूसरी
  3123. 2:32:18पत्नी सोया सोएराबाई का पुत्र ने संपन्न
  3124. 2:32:21किया। इनकी मृत्यु के समय संभाजी पन्हाला
  3125. 2:32:24के किले में कैद थे। संभाजी पन्हाला के
  3126. 2:32:26किले में कैद थे। नोट में देखते हैं कि
  3127. 2:32:28छत्रपति शिवाजी महाराज के पास तीन
  3128. 2:32:30प्रसिद्ध तलवारें थी। भवानी, जगदंबा और
  3129. 2:32:34तलूजा। भवानी तलवार शिवाजी की पसंदीदा
  3130. 2:32:37तलवार थी। जगदंबा तलवार वर्तमान में लंदन
  3131. 2:32:40में है और तलूजा तलवार सिंधु दुर्ग किले
  3132. 2:32:42में है। छत्रपति शिवाजी के मंत्रिमंडल को
  3133. 2:32:46अष्ट प्रधान कहा जाता था। अष्टप्रधान में
  3134. 2:32:49पेशवा का पद सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं
  3135. 2:32:51सम्मान का होता था। शिवाजी ने दरबार में
  3136. 2:32:54मराठी को भाषा के रूप में प्रयोग किया।
  3137. 2:32:57छत्रपति शिवाजी के सेना तीन महत्वपूर्ण
  3138. 2:33:00भागों में विभक्त थी। पागा सेना नियमित
  3139. 2:33:02घुड़सवार सैनिक सिलदार अस्थाई घुड़सवार
  3140. 2:33:05सैनिक पैदल मतलब पैदल सेना छत्रपति शिवाजी
  3141. 2:33:09को जो है तोपे अंग्रेजों ने प्रदान की थी
  3142. 2:33:12क्या है तोपे जो है अंग्रेजों ने प्रदान
  3143. 2:33:14किया द गैजेटियर ऑफ इंडिया इतनाइतना में
  3144. 2:33:17कुछ अंश स्रोतों से छत्रपति शिवाजी का
  3145. 2:33:19जन्म 19 फरवरी जो है 1630 जो है बताया गया
  3146. 2:33:23है मराठा मराठा राज्य के अंतर्गत दो
  3147. 2:33:26प्रकार के क्षेत्र होते थे स्वराज जो
  3148. 2:33:28क्षेत्र प्रत्यक्ष मराठों के नियंत्रण में
  3149. 2:33:31थे। उन्हें स्वराज क्षेत्र कहा जाता था।
  3150. 2:33:33दूसरा मुग्धई मुगधई मुल्क एक कदीम यह वह
  3151. 2:33:37क्षेत्र था जिसमें वे चौथ एवं सरदेशमुखी
  3152. 2:33:40वसूल करते थे। क्या था? तो चौथ एवं
  3153. 2:33:43सरदेशमुखी स्वराज से नहीं लिए जाते थे
  3154. 2:33:46बल्कि उन जगहों से लिए जाते थे जहां मुगल
  3155. 2:33:48या दखनी राजाओं का शासन था। चौथ भू-राजस्व
  3156. 2:33:51का एक चौथाई था जो मराठों के उस क्षेत्र
  3157. 2:33:53पर आक्रमण नहीं करने के लिए दिया जाता था।
  3158. 2:33:56और सरदेशमुखी 10% का अतिरिक्त अधिक अभिधि
  3159. 2:33:59भार था जो उस क्षेत्र से लिया जाता था जो
  3160. 2:34:02मुगलों के अधीन था पर मराठा उस पर जो है
  3161. 2:34:04दावा करते थे। महाराष्ट्र के प्रमुख संत
  3162. 2:34:08कौन-कौन हुए? ज्ञानदेव या ज्ञानेश्वर 1275
  3163. 2:34:11से 1296 ईस्वी महाराष्ट्र में भक्ति
  3164. 2:34:14आंदोलन के जनक मराठी भाषा और साहित्य के
  3165. 2:34:16संस्थापक ज्ञानदेव या ज्ञानेश्वर भगवत
  3166. 2:34:19गीता पर भावार्थ दीपिका नामक गृह टीका
  3167. 2:34:21लिखे। इसे समान रूप से ज्ञानेश्वरी के नाम
  3168. 2:34:24से जाना जाता है। बरकरी संप्रदाय के जो है
  3169. 2:34:27प्रवर्तक थे कौन? ज्ञानदेव या ज्ञानेश्वर।
  3170. 2:34:30नामदेव 1270 से 1350 ईस्वी इनके आराध्य
  3171. 2:34:34देव पंडरपुर के बिठोबा या विठ्ठल थे।
  3172. 2:34:38बरकरी संप्रदाय के विकास में इनकी प्रमुख
  3173. 2:34:40जो है भूमिका थी। उन्होंने अनेक नेक भक्ति
  3174. 2:34:43परक मराठी गीतों की रचना की जो अभंगों के
  3175. 2:34:45रूप में प्रचलित है। मराठी के अलावे
  3176. 2:34:48उन्होंने ब्रज भाषा और खड़ी बोली में
  3177. 2:34:50गीतों की रचना की। नामदेव का सगुण एवं
  3178. 2:34:53निर्गुण संतों के बीच की कड़ी माना जाता
  3179. 2:34:56है। इनमें कुछ पद गुरु ग्रंथ साहिब में
  3180. 2:34:58संकलित है। मुखबानी नामक पुस्तक में इनकी
  3181. 2:35:01रचनाएं संग्रहित है। मुखबानी क्या है?
  3182. 2:35:03मुखबवानी। एकनाथ 1533 से 1599 ईस्वी तक
  3183. 2:35:08इन्होंने रामायण पर भावार्थ रामायण नामक
  3184. 2:35:10टीका लिखी। तुकाराम 1598 से 1650 ईस्वी
  3185. 2:35:14इन्होंने भक्ति परक कविताएं लिखी जिन्हें
  3186. 2:35:16अभंग कहा जाता है। यह अभंग भक्ति परक
  3187. 2:35:19काव्य के ज्योति पुंज है। रामदास 1608 से
  3188. 2:35:221681 ईस्वी महाराष्ट्र के अंतिम महान संत
  3189. 2:35:25कवि 10 बोध उनकी रचनाओं और उपदेशों का
  3190. 2:35:27संकलन है। इसमें उन्होंने कर्म दर्शन का
  3191. 2:35:30उपदेश दिया। इन्होंने महाराष्ट्र में
  3192. 2:35:32भगवान राम की पूजा को लोकप्रिय बनाया।
  3193. 2:35:35आनंद भवन भुवन नामक अपने पुस्तक में
  3194. 2:35:37रामदास जी ने जातिगत भेदभाव से मुक्ति
  3195. 2:35:40स्त्रियों की दशा में सुधार आदि विषयों पर
  3196. 2:35:43अपने सद विचार जो है व्यक्त किए हैं। नोट
  3197. 2:35:46में महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन मुख्यता
  3198. 2:35:48दो संप्रदायों में विभक्त था। बरकरी
  3199. 2:35:51संप्रदाय अर्थात बिठोबा पंथ कृष्ण को
  3200. 2:35:53मानने वाले का पंथ जैसे ज्ञानदेव, नामदेव,
  3201. 2:35:56तुकाराम सब बरकरी संप्रदाय के थे। धरकरी
  3202. 2:35:58संप्रदाय अर्थात रामपंथ के रामदास थे।
  3203. 2:36:01सरंजाबी प्रथा का संबंध मराठा भू-राजस्व
  3204. 2:36:04व्यवस्था से है। अष्ट प्रधान में कौन-कौन
  3205. 2:36:07था? तो पेशवा प्रधानमंत्री राज्य का
  3206. 2:36:09प्रशासन एवं मत व्यवस्था की देखरेख सरिया
  3207. 2:36:12नौबत सेनापति, सैन्य प्रधान, अमात, राजस्व
  3208. 2:36:14मंत्री, आय व्यय का लेखाजोखा रखता था।
  3209. 2:36:17वाक्यान्न, सूचना, गुप्तचर व संधि, विग्रह
  3210. 2:36:19के विभागों का अध्यक्ष, चिटनीस राजकीय
  3211. 2:36:22पत्रों को पढ़कर उसकी भाषा शैली को देखना।
  3212. 2:36:24सुमंत जो है विदेश मंत्री पंडित राव
  3213. 2:36:27धार्मिक कार्यों के लिए तिथि का निर्धारण
  3214. 2:36:28न्यायाधीश न्याय विभाग का प्रधान होता था।
  3215. 2:36:33शिवाजी की कर व्यवस्था मलिक अंबर की कर
  3216. 2:36:35व्यवस्था पर आधारित थी। शिवाजी ने रस्सी
  3217. 2:36:38द्वारा माप की व्यवस्था के स्थान पर काठी
  3218. 2:36:40एवं मानक छड़ी के प्रयोग को आरंभ किया।
  3219. 2:36:43शिवाजी ने 1679 में अन्ना जी दत्तों
  3220. 2:36:45द्वारा व्यापक भूमि सर्वेक्षण जो है
  3221. 2:36:47करवाया। शिवाजी के समय कुल उपज का 33% भाग
  3222. 2:36:50राजस्व के रूप में वसूला जाता था जो बढ़कर
  3223. 2:36:5340% हो गया था। शिवाजी ने मुगल व्यापारी
  3224. 2:36:56केंद्र सूरत को दो बार 1664 एवं 1670
  3225. 2:37:00ईस्वी में जो है लूटा था सूरत को। छत्रपति
  3226. 2:37:03शिवाजी के उत्तराधिकारी देख लेते हैं।
  3227. 2:37:05छत्रपति शिवाजी का उत्तराधिकारी संभाजी
  3228. 2:37:07थे। संभाजी ने उज्जैन के हिंदी एवं
  3229. 2:37:10संस्कृत के प्रखंड विद्वान कवि कलश को
  3230. 2:37:13अपना जो है सलाहकार नियुक्त किया।
  3231. 2:37:16मार्च 1689 ईस्वी को मुगल सेनापति मख मखरब
  3232. 2:37:21खान ने संगमेश्वर में छिपे हुए संभाजी एवं
  3233. 2:37:24कवि कलश को गिरफ्तार कर लिया और उसकी
  3234. 2:37:26हत्या कर दी। संभाजी के बाद 1689 ईस्वी
  3235. 2:37:30में राजाराम को नए छत्रपति के रूप में
  3236. 2:37:32राज्याभिषेक किया गया। राजा राम ने अपनी
  3237. 2:37:35दूसरी राजधानी सतारा को बनाया।
  3238. 2:37:38छत्रपति शिवाजी के किले की सुरक्षा के लिए
  3239. 2:37:40नियुक्त अधिकारी था हवलदार। किले की
  3240. 2:37:42आंतरिक व्यवस्था की देखरेख सरनो सरेनौबथ
  3241. 2:37:45किले की सेना का नेतृत्व सबनिस किले की
  3242. 2:37:48अर्थव्यवस्था पत्र व्यवहार एवं भंडार की
  3243. 2:37:50देखरेख राजाराम मुगलों से संघर्ष करता हुआ
  3244. 2:37:532 मार्च 1700 ईस्वी में मारा गया। राजाराम
  3245. 2:37:56की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी
  3246. 2:37:58ताराबाई अपने चार वर्षीय पुत्र शिवाजी
  3247. 2:38:00सेकंड का राज्याभिषेक करवाकर मराठा
  3248. 2:38:03साम्राज्य के बस्ताविक जो है संरक्षिका बन
  3249. 2:38:05गई। कौन बन गई? ताराबाई। शिवाजी सेकंड का
  3250. 2:38:08राज्याभिषेक कराकर। 1707 में औरंगजेब की
  3251. 2:38:11मृत्यु के बाद संभाजी के पुत्र शाहू जो
  3252. 2:38:13औरंगजेब के कब्जे में था भोपाल के निकट के
  3253. 2:38:15मुगल शिविर से वापस महाराष्ट्र आया। साहू
  3254. 2:38:18एवं ताराबाई के बीच 1707 में खेड़ा का
  3255. 2:38:21युद्ध हुआ जिसमें साहू विजय हुआ। साहू ने
  3256. 2:38:2422 जनवरी 1708 ईस्वी को सतारा में अपना
  3257. 2:38:26राज्याभिषेक करवाया। सतारा में साहू के
  3258. 2:38:29नेतृत्व में नवीन मराठा साम्राज्यवाद के
  3259. 2:38:31प्रवर्तक पेशवा लोग थे जो साहू के पैतृक
  3260. 2:38:34प्रधानमंत्री थे। पेशवा पद पहले पेशवा के
  3261. 2:38:37साथ ही वंशानुगत हो गया था। पेशवा पुणे
  3262. 2:38:40में रहता था। कहां? पुणे में रहता था।
  3263. 2:38:421713 ईस्वी में साहू ने बालाजी विश्वनाथ
  3264. 2:38:45को पेशवा बनाया। इनकी मृत्यु 1720 ईस्वी
  3265. 2:38:48में हुई। इसके बाद पेशवा बाजीराव प्रथम
  3266. 2:38:50हुए। पेशवा जो है बाजीराव प्रथम हुए।
  3267. 2:38:53पेशवा बाजीराव प्रथम ने मुगल साम्राज्य की
  3268. 2:38:56साम्राज्य की कमजोर हो रही स्थिति को
  3269. 2:38:58फायदा उठाने के लिए शाहू को उत्साहित करते
  3270. 2:39:00हुए कहा कि आओ हम इस पुराने ब्रिज के
  3271. 2:39:02खोखले तने पर प्रहार करें। सखाएं तो स्वयं
  3272. 2:39:04गिर जाएगी। हमारे प्रयत्नों से मराठा
  3273. 2:39:07पताका कृष्णा नदी से अटक तक फहराने लगेगी।
  3274. 2:39:10उत्तर में साहू ने कहा निश्चित रूप से ही
  3275. 2:39:12आप इसे हिमालय के पार गाड़ देंगे। निसंदेह
  3276. 2:39:15आप योग्य पिता के जो है योग्य पुत्र हैं।
  3277. 2:39:18पालखेड़ा का युद्ध 7 मार्च 1728 ईस्वी में
  3278. 2:39:21बाजीराव प्रथम एवं निजामुल मुल्क के बीच
  3279. 2:39:24हुआ। जिसमें निजाम की हार हुई। निजाम के
  3280. 2:39:26साथ मुंगी सिवा गांव की संधि हुई। निजाम
  3281. 2:39:29के साथ मुंगी सिवा गांव की संधि हुई।
  3282. 2:39:32दिल्ली पर आक्रमण करने वाला प्रथम पेशवा
  3283. 2:39:35बाजीराव प्रथम था। जिसने 29 मार्च 1737 को
  3284. 2:39:38दिल्ली पर धावा बोला था। उस समय मुगल
  3285. 2:39:41बादशाह मोहम्मद शाह दिल्ली छोड़ने के लिए
  3286. 2:39:43तैयार हो गया था। अंग्रेज मराठा संघर्ष के
  3287. 2:39:46अंतर्गत होने वाली प्रमुख संधियां देख
  3288. 2:39:48लेते हैं। कई बार जो है यह प्रश्न पूछा
  3289. 2:39:50जाता है। देख लेते हैं फटाफट। बारना की
  3290. 2:39:53संधि 1731 में संगोला की संधि 1750 सूरत
  3291. 2:39:56की संधि 1775 पुरंदर की संधि 1776 बड़गांव
  3292. 2:40:00का संधि 1779 सालावाई की संधि 1782 बसीन
  3293. 2:40:04की संधि 1802 देवगांव की संधि 1803 सुरजी
  3294. 2:40:08अर्जुन गांव की संधि 1803 राजापुर घाट की
  3295. 2:40:10संधि 1804 नागपुर की संधि 1816 ग्वालियर
  3296. 2:40:14की संधि 1817 पूना की संधि 1817 और मसौर
  3297. 2:40:17की संधि 1888 ये सभी जो है वो अंग्रेज
  3298. 2:40:20मराठा संघर्ष के अंतर्गत होने वाली संधि
  3299. 2:40:22संधियां थी। बाजीराव प्रथम मस्तानी नामक
  3300. 2:40:25महिला से संबंध होने के कारण जो है चर्चित
  3301. 2:40:28रहा था। 1740 ईस्वी में बाजीराव प्रथम की
  3302. 2:40:31जो है मृत्यु हो गई। बाजीराव प्रथम की
  3303. 2:40:33मृत्यु के बाद बालाजी बाजीराव 1740 ईस्वी
  3304. 2:40:36में जो है वो पेशवा बना। बारना की संधि
  3305. 2:40:40में यह व्यवस्था की गई कि संभाजी सेकंड
  3306. 2:40:42राजाराम की दूसरी पत्नी से उत्पन्न पुत्र
  3307. 2:40:44मराठा राज्य के दक्षिणी भाग पर जिसकी
  3308. 2:40:46राजधानी कोल्हापुर थी शासन करें तथा
  3309. 2:40:49उत्तरी भाग जिसकी राजधानी सतारा थी साहू
  3310. 2:40:53शासन करें। संगोला की संधि बालाजी बाजीराव
  3311. 2:40:56और राजाराम सेकंड के बीच हुई। इसके अनुसार
  3312. 2:40:58मराठा संगठन का वास्तविक नेता पेशवा बन
  3313. 2:41:01गया। सूरत की संधि के अनुसार अंग्रेजों ने
  3314. 2:41:04रघुनाथ राव को सैनिक सहायता देना स्वीकार
  3315. 2:41:06किया तथा युद्ध में विजय के उपरांत उसे
  3316. 2:41:09पेशवा बनाने का भी वचन दिया। बालाजी
  3317. 2:41:12बाजीराव को नाना साहेब के नाम से भी जाना
  3318. 2:41:14जाता था। नाना साहेब के नाम से भी जाना
  3319. 2:41:17जाता था। झलक की संधि हैदराबाद के निजाब
  3320. 2:41:20एवं बालाजी बाजीराव के मध्य हुई। बालाजी
  3321. 2:41:23बाजीराव के समय ही पानीपत के तृतीय युद्ध
  3322. 2:41:2714 जनवरी 1761 ईस्वी को हुआ जिसमें मराठों
  3323. 2:41:29की हार हुई। इस हार को नहीं सह पाने के
  3324. 2:41:33कारण बालाजी की मृत्यु 1761 ईस्वी में हो
  3325. 2:41:36गई। माधव राम नारायण प्रथम 1761 ईस्वी में
  3326. 2:41:40पेशवा बना। इसने मराठों की खोई हुई
  3327. 2:41:42प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करने का जो है
  3328. 2:41:44प्रयास किया। माधव राम ने ईस्ट इंडिया
  3329. 2:41:47कंपनी की पेंशन पर रह रहे मुगल बादशाह शाह
  3330. 2:41:49आलम द्वितीय को पुनः दिल्ली की गद्दी पर
  3331. 2:41:51बैठाया। मुगल बादशाह अब मराठों का जो है
  3332. 2:41:54पेंशन भोगी बन गया। पेशवा नारायण राव 1772
  3333. 2:41:58से 73 ईस्वी की हत्या उसके चाचा रघुनाथ
  3334. 2:42:00राव के द्वारा कर दी गई। पेशवा माधव राम
  3335. 2:42:04नारायण सेकंड की अल्पायु के कारण मराठा
  3336. 2:42:06राज की देखरेख 12 भाई सभा नाम की 12
  3337. 2:42:09सदस्यों की एक परिषद करती थी। इस परिषद के
  3338. 2:42:12दो महत्वपूर्ण सदस्य थे। महादजी सिंधिया
  3339. 2:42:14नाना फडनवीस। नाना फडनवीस का मूल नाम
  3340. 2:42:17बालाजी जनार्दन भानु था। अंग्रेज जेम्स
  3341. 2:42:20ग्रैंड डफ ने इन्हें मराठों का मैकाबेली
  3342. 2:42:23कहा। अंग्रेज जेम्स ग्र डफ ने इन्हें
  3343. 2:42:26मराठों का मै्याब बेली कहा कि नाना फडन
  3344. 2:42:28बीस को। अंतिम पेशवा राघोबा का पुत्र
  3345. 2:42:31बाजीराव सेकंड था जो अंग्रेजों की सहायता
  3346. 2:42:34से पेशवा बना था। मराठों के पतन में
  3347. 2:42:36सर्वाधिक योगदान इसी का था। यह सहायक संधि
  3348. 2:42:39स्वीकार करने वाला प्रथम मराठा सरदार था।
  3349. 2:42:421776 ईस्वी में पुरंदर की सद संधि हुई।
  3350. 2:42:46इसके तहत कंपनी ने रघुनाथ राव के समर्थन
  3351. 2:42:48को वापस ले लिया। प्रथम आंग्ल मराठा युद्ध
  3352. 2:42:51प्रथम युद्ध 1782 ईस्वी में सारबाही संधि
  3353. 2:42:54के साथ जो है वह खत्म हुआ। द्वितीय आंग्ल
  3354. 2:42:58मराठा युद्ध 1803 से 1805 ईस्वी में हुआ।
  3355. 2:43:01इसमें भोसले एवं सिंधिया की पराजय हुई तथा
  3356. 2:43:03अंग्रेजों से दो पृथक संधियां जो है करनी
  3357. 2:43:06पड़ी। देवगांव की संधि। यह संधि 17 दिसंबर
  3358. 2:43:091803 को रघुजी भोसले और अंग्रेजों के बीच
  3359. 2:43:12हुई। द्वितीय मराठा युद्ध के दौरान अरगांव
  3360. 2:43:15की लड़ाई नवंबर 1803 में अंग्रेजों ने
  3361. 2:43:17रघुजी भोसले को पराजित किया था। उसी के
  3362. 2:43:19फलस्वरूप यह संधि हुई। इस संधि के अनुसार
  3363. 2:43:22भोसले ने अंग्रेजों को बालासोर सहित कटक
  3364. 2:43:24का प्रांत तथा बर्धा नदी के पश्चिम का
  3365. 2:43:26अपना सारा राज्य जो है वो सौंप दिया।
  3366. 2:43:30सुरजी अर्जन गांव की संधि यह संधि 30
  3367. 2:43:32दिसंबर 1803 को दौलतारा सिंधिया एवं
  3368. 2:43:35अंग्रेजों के बीच हुआ। इसके अनुसार
  3369. 2:43:37उन्होंने अंग्रेजों को गंगा और यमुना के
  3370. 2:43:38बीच को अपना सारा राज तथा जयपुर, जोधपुर
  3371. 2:43:41एवं गोहद के राजपूत राज्यों के उत्तर के
  3372. 2:43:44अपने किले और राज दे दिए। पश्चिम में उसने
  3373. 2:43:46अंग्रेजों को अहमदनगर भ भड़ौच तथा अजिंटा
  3374. 2:43:50की पहाड़ियों के पश्चिमी पश्चिम का अपना
  3375. 2:43:53सारा राज्य जो है सौंप दिया। मदसौर की
  3376. 2:43:56संधि 6 जनवरी 1818 को हुआ। होलकर एवं
  3377. 2:43:59अंग्रेजों के बीच मदसौर की संधि हुई। इसके
  3378. 2:44:01अनुसार उसने राजपूत राज्यों पर सभी दावे
  3379. 2:44:04छोड़ दिए। नर्मदा के दक्षिण के सभी जिले
  3380. 2:44:06अंग्रेजों को जो है वो सौंप दिए। तृतीय
  3381. 2:44:10आंग्ल मराठा युद्ध 1817-19 में हुआ। इस
  3382. 2:44:13युद्ध के बाद मराठा शक्ति और पेशवा के
  3383. 2:44:15वंशानुगत पद को समाप्त कर दिया गया। पेशवा
  3384. 2:44:19बाजीराव सेकंड ने कोरेगाम एवं एस्टी के
  3385. 2:44:22युद्ध में हारने के बाद मेलकम के सम्मुख
  3386. 2:44:25आत्मसमर्पण कर दिया। परिणाम स्वरूप दोनों
  3387. 2:44:27के बीच पुणे की संधि 13 जून 1817 ईस्वी को
  3388. 2:44:30हो गई। अंग्रेजों ने पेशवा के पद को
  3389. 2:44:33समाप्त कर बाजीराव सेकंड को पुणे से हटाकर
  3390. 2:44:35कानपुर के निकट जो है बिट्ठूर में पेंशन
  3391. 2:44:38पर जीने के लिए भेज दिया। जहां 1853 ईस्वी
  3392. 2:44:42में इसकी मृत्यु हो गई। किसके? बाजीराव
  3393. 2:44:44सकेन के। अब आइए मराठा प्रशासन देख लेते
  3394. 2:44:47हैं। पुणे में स्थित पेशवा का सचिवालय
  3395. 2:44:49मराठा प्रशासन का केंद्र था जिसे हजूर
  3396. 2:44:52दफ्तर कहते थे। मराठा राज्य में सूबे को
  3397. 2:44:55प्रांत तरफ तथा अथवा परगने को महल कहते
  3398. 2:44:58थे। बड़े प्रांत सर सूबेदार के अधीन होते
  3399. 2:45:01थे। इसके अधीनस्थ मामलतादार होते थे जो
  3400. 2:45:03सीधे केंद्रीय दफ्तर को ब्यौरा देते थे।
  3401. 2:45:06देशमुख तथा देश पांडे अन्य जिलाधिकारी थे
  3402. 2:45:09जो मामलतादार पर नियंत्रण के रूप में
  3403. 2:45:12कार्य करते थे। कारकुन नामक जिले का
  3404. 2:45:15अधिकारी विशेष घटनाओं की सूचना सीधे
  3405. 2:45:17केंद्र को देता था। महल का मुख्य
  3406. 2:45:20कार्यकर्ता हवलदार होता था तथा मजूमदार और
  3407. 2:45:23फडनवीस उसकी सहायता करते थे। ग्राम का
  3408. 2:45:26मुख्य अधिकारी पटेल होता था जो कर संबंधी
  3409. 2:45:29न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य करता था।
  3410. 2:45:31पटेल के नीचे कुलकर्णी होता था जो ग्राम
  3411. 2:45:33की भूमि का लेखा रखता था। कुलकर्णी के
  3412. 2:45:37नीचे चौगुले होता था जो पटेल की सहायता
  3413. 2:45:39करता था तथा कुलकर्णी के लेखे की देखभाल
  3414. 2:45:42करता था। पोतदार सिक्कों के निर्धारित भार
  3415. 2:45:45तथा धातु की शुद्धता की जांच करता था।
  3416. 2:45:47इसके अतिरिक्त ग्राम 12 बलूटे शिल्पी और
  3417. 2:45:5012 अलूटे सेवक जो है होते थे। 12 बलूटे 12
  3418. 2:45:53अलूटे होते थे। कोतवाल नगर का मुख्य
  3419. 2:45:56प्रशासक था। गांव में चौकीदार जागला
  3420. 2:45:58अपराधियों के पता लगाने का काम करता था।
  3421. 2:46:01अस्थाई भू भूस्वामित्व प्राप्त लोग
  3422. 2:46:04मिराजदार कहलाते मिरासदार कहलाते थे।
  3423. 2:46:06बटाईदार भूस्वामी उपरीस कहलाते थे। उपरीस
  3424. 2:46:09कहलाते थे। सिंधिया, ग्वालियर, होलकर,
  3425. 2:46:12इंदौर, गायवाड़, बड़ौदा, भोसले, नागपुर
  3426. 2:46:14पेशवा जो है पुणे में रहता था। पेशे में
  3427. 2:46:17क्या है? पेशे में लुटेरे, पिंडारी, पाल
  3428. 2:46:19पट्टी नामक कर वसूल करने के बदले में
  3429. 2:46:22मराठा सेना के प्रत्येक अभियान में उनके
  3430. 2:46:24साथ जाते थे। अपने लूट के माल में से वे
  3431. 2:46:26सरकार को 25% हिस्सा देते थे। मराठा
  3432. 2:46:30साम्राज्य के अंतिम छत्रपति शाहजी अप्पा
  3433. 2:46:33साहेब थे। शाहजी अब्बास साहब थे। यह था
  3434. 2:46:35मध्यकालीन भारत का। अगला वीडियो में हम
  3435. 2:46:38लेकर आएंगे आधुनिक भारत पूरी तरह एक ही
  3436. 2:46:41मास्टर वीडियो में। तब तक हमारे चैनल पर
  3437. 2:46:43बने रह। अगर आप सब्सक्राइब नहीं किए हैं
  3438. 2:46:45तो सब्सक्राइब जरूर कीजिए। इस चैनल पर
  3439. 2:46:47पूरे लुसेंट का न्यू एडिशन शुरू से अंत तक
  3440. 2:46:50जो है खत्म किया जाएगा। धन्यवाद।

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