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Lesson 1 | Intro to Arabic Alphabets | Lisan ul Quran Level 1 | Rawalpindi 2025 | Ustad Amir Sohail — Transcript

by Lisan ul Quran by Ustad Amir Sohail · 6,050 words · 838 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00हम
  2. 0:02हम
  3. 0:13[संगीत]
  4. 0:14अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू
  5. 0:16अल्हम्दुलिल्लाह रब आलमीन व सलातो सलाम
  6. 0:19अला अशरफ अंबिया व मुरसलीन नबीना मोहम्मदन
  7. 0:24वला आ वही अजमाई
  8. 0:28अम्माबाद
  9. 0:30आउज बिल्लाह शैत रजीम
  10. 0:33बिस्मिल्लाहिर्रहमाहीम
  11. 0:35अल्हम्दुलिल्लाह हद
  12. 0:38वमाला
  13. 0:40अनद्लाहजल
  14. 0:44फी सूरत कमर अरबा व कुरान जिक्र फहल
  15. 0:52मुर
  16. 0:55सदक्ला अज़म रब सदरी
  17. 1:03आमीन या रब आलमीन
  18. 1:06मोहतरम
  19. 1:07बुजुर्गों दोस्तों भाइयों और बहनों लसान
  20. 1:10कुरान कोर्स में मैं आप सबको खुशामदीद
  21. 1:15कहता हूं अपनी तरफ से भी और माइल की तरफ
  22. 1:18से भी और साथ ही मुबारकबाद भी पेश करता
  23. 1:23हूं।
  24. 1:25आने वाले मेहमानों को वेलकम तो किया जाता
  25. 1:27है। हम सब जानते हैं
  26. 1:30लेकिन मुबारकबाद क्यों पेश कर रहा हूं वो
  27. 1:35अच्छी तरह से जान लीजिएगा के आप वो खास
  28. 1:38लोग हैं
  29. 1:40जिन्हें अल्लाह ताला ने खुसूसी तौर पे
  30. 1:42यहां पर भेजा है ज़हन में रखिए क्योंकि
  31. 1:44बहुत सारे लोगों तक इस कोर्स की इतला
  32. 1:46पहुंची
  33. 1:47और उन्होंने इरादा भी किया क्योंकि कुरान
  34. 1:51मजीद की जुबान सीखना और उस जुबान को सीख
  35. 1:56कर कुरान मजीद को समझना
  36. 2:00सबका शौक भी है और जरूरत तो है ही है।
  37. 2:03बहुत से लोगों ने इरादा किया और कईयों ने
  38. 2:07तो फरी तौर पर रजिस्टर भी करवा दिया होगा
  39. 2:08अपने आपको लेकिन लेकिन जो फिजिकली यहां पर
  40. 2:12मौजूद है वो आप लोग हैं। तो इसलिए मैंने
  41. 2:13आपको खास तौर पे मुबारकबाद पेश किया है और
  42. 2:16मैं चाहूंगा कि उस पर हम अल्लाह ताला का
  43. 2:18पूरे शूर के साथ शुक्र अदा करें और अल्लाह
  44. 2:23का शुक्र हमने कैसे अदा करना है क्योंकि
  45. 2:26हमारा कोर्स लिसान कुरान है। कुरान की
  46. 2:29जुबान है। कुरान से रिलेटेड ही कोर्स है।
  47. 2:33तो कुरान से ही हम अल्लाह ताला का शुक्र
  48. 2:35अदा करने का तरीका सीखते हैं। कि अल्लाह
  49. 2:38ताला कुरान में शुक्र अदा करने का तरीका
  50. 2:41क्या सिखा रहा है? तो सूरत आराफ में
  51. 2:44अल्लाह ताला जिक्र फरमा रहे हैं कि जन्नती
  52. 2:46जन्नत में बैठे होंगे और जन्नत में बैठे
  53. 2:48हुए वो ये कह रहे होंगे कि
  54. 2:50अल्हम्दुलिल्लाहजा
  55. 2:52तमाम तारीफ तमाम शुक्र उस अल्लाह का जिसने
  56. 2:56हमें यहां तक पहुंचाया। वो ये नहीं कहेंगे
  57. 2:58कि हमने नमाज़ें पढ़ी थी। हमने रोज़ रखे थे।
  58. 3:00हमने नेक आमाल किए थे। तो जन्नत में तो
  59. 3:01हमने आना ही था। वो ये नहीं कहेंगे।
  60. 3:05वो यह नहीं कहेंगे कि जन्नत तो हम डिर्व
  61. 3:07करते थे। यह नहीं कहेंगे वो। वो कहेंगे कि
  62. 3:10अल्लाह का करम है। उसका शुक्र है कि उसने
  63. 3:13आज हमें यहां तक पहुंचा दिया। वमाला
  64. 3:17अनद्लाह
  65. 3:19और हम कभी भी यहां ना पहुंच पाते। अगर
  66. 3:22अल्लाह ही हमें यहां ना पहुंचाता।
  67. 3:27तो अल्लाह का शुक्र
  68. 3:31कैसे अदा करना है वो मैंने आपको जन्नतियों
  69. 3:34के अल्फाज़ के जरिए से बता दिया है। तो मैं
  70. 3:37चाहूंगा कि मैं भी और आप भी हम पूरे शूर
  71. 3:41के साथ यानी एक वो अंदाज होता है ना और
  72. 3:43मलसा जी अल्लाह का शुक्र है नहीं पूरे शूर
  73. 3:47के साथ अल्हम्दुलिल्लाह
  74. 3:51तमाम तारीफ तमाम शुक्र से अल्लाह की जिसने
  75. 3:53हमें यहां तक पहुंचाया वमा ना दियाला
  76. 3:57अनदान्लाह
  77. 3:59और हम कभी भी यहां ना पहुंच पाते अगर
  78. 4:01अल्लाह ही हमें यहां ना पहुंचाता कोर्स का
  79. 4:05नाम लिसान कुरान
  80. 4:08लिसानु कुरान दो लफज़ बोर्ड पर आपके सामने
  81. 4:12लिखे हुए हैं और
  82. 4:15दोनों अरबी के लफज़ हैं। अरबी के हवाले से
  83. 4:19हमारा पहला तारुफ तो ये है कि अरबी जुबान
  84. 4:22जो है बगैर हरकात के अलामात के होती नहीं
  85. 4:25है। तो मैं इन तमाम हुरूफ पर जो बोर्ड पर
  86. 4:29लिखे हुए हैं इन पे हरकात भी डालूंगा,
  87. 4:31अलामात भी डालूंगा इंशा्लाह ताला और उसी
  88. 4:33से हमारा इंशा्लाह ताला ये कोर्स जो है
  89. 4:34शुरू हो जाएगा। तो लिसान कुरान मैंने लिखा
  90. 4:38है जी आपके सामने लाम है उसके नीचे ज़ेर है
  91. 4:41सीन है उसके ऊपर ज़बर है उसके बाद अलिफ है
  92. 4:45नून के ऊपर आपको पेश नजर आएगी और उसके बाद
  93. 4:49एक अलिफ है और लाम जो है ये साकिन नजर
  94. 4:52आएगा काफ पेश है
  95. 4:56रा पे सुकून है और अलिफ पे खड़ी ज़बर है। यह
  96. 5:01सारी वो अलामात है जो अल्हम्दुलिल्लाह
  97. 5:03कुरान मजीद पढ़ने वाला हर शख्स इन अलामात
  98. 5:08से वाकिफ है। और अरबी जुबान की ये
  99. 5:12खूबसूरती है कि अरबी जुबान में हर लफ्ज़
  100. 5:16के आखिर में भी कुछ ना कुछ होता है। तो
  101. 5:19आपको इस वक्त जो नून खाली नजर आ रहा है
  102. 5:20उसमें भी मैं कुछ डालूंगा और वो ज़ेर डाल
  103. 5:24रहा हूं। जी तो हमारे कोर्स का नाम है जी
  104. 5:26लिसानुल कुरान। लिसान कुरान जैसे मैंने
  105. 5:31कहा दो लफज़ हैं जी एक है लिसान एक है
  106. 5:33कुरान कुरान से आप सब वाकिफ है लिसान के
  107. 5:37माना होते हैं जी जुबान
  108. 5:41जुबान
  109. 5:43जिसे हम अंग्रेजी में टंग कहते हैं जो कि
  110. 5:47हमारा एक ऑर्गन है लेकिन यहां पर जो जुबान
  111. 5:50है ये लैंग्वेज के माना है मेरे ज़हन में
  112. 5:51रखिएगा तो लिसानु कुरान के माना है जी
  113. 5:54कुरान की जुबान लैंग्वेज ऑफ द कुरान। तो
  114. 6:00सबसे पहले तो आपको अपने कोर्स के नाम का
  115. 6:03पता होना चाहिए कि हमारे कोर्स का नाम
  116. 6:04क्या है? तो अल्हम्दुलिल्लाह कोर्स का नाम
  117. 6:06क्लियर हो गया जी। लिसानुल कुरान कुरान की
  118. 6:09जुबान लैंग्वेज ऑफ द कुरान। और इंशा्लाह
  119. 6:12ताला आप इस कोर्स में इस काबिल हो जाएंगे
  120. 6:16के ये जो कंस्ट्रक्शन आपके सामने आ रही है
  121. 6:18के कुरान की जुबान। यहां पर की के लिए कोई
  122. 6:21लफज़ नहीं है उर्दू वाला। वो की का लफज़
  123. 6:24कहां से आ रहा है? और फिर यहां पर नून पर
  124. 6:28पेश क्यों आई हुई है? जबकि कुरान में नून
  125. 6:32पर नून पर ज़ेर क्यों आई है? ये सारी चीजें
  126. 6:34इंशाल्लाह ताला आप इस क्लास में सीखेंगे
  127. 6:37और इस काबिल हो जाएंगे कि इंशा्लाह ताला
  128. 6:39इन 30 दिनों का जो ये कोर्स है इनमें यही
  129. 6:43अल्फाज़ एक मर्तबा फिर मैं आपके सामने
  130. 6:46बोर्ड पर लिखूंगा और आप उनको ना सिर्फ
  131. 6:50ट्रांसलेट करने के काबिल होंगे बल्कि
  132. 6:52ग्रामेटिकली एनालाइज करने के भी काबिल
  133. 6:54होंगे। इंशा्लाह ताला अल्लाह की तौफीक से
  134. 6:57तो आमतौर पे जब भी कोई कोर्स होता है तो
  135. 7:01तारुफ करवाया जाता है। कोर्स का तो करवाया
  136. 7:04ही जाता है। कोर्स करवाने वाले का भी
  137. 7:06तारुफ करवाया जाता है। तो मेरा तारुफ
  138. 7:13मैं अगर अपना तारुफ करवाना चाहूं तो
  139. 7:15मुख्तसर सा तारुफ ये है कि मैं कुरान मजीद
  140. 7:18का एक अदना सा तालब इल्म हूं।
  141. 7:21और मुझे वो बचपन के कुछ अल्फाज़ ज़हन में आ
  142. 7:24रहे हैं कि वो जो कहा था ना कि
  143. 7:30मेरी आवाज ही पहचान है। घर याद रहे तो
  144. 7:34मेरा काम ही जी है। ये है असल तारुफ।
  145. 7:39ये याद रहना चाहिए। नाम तो
  146. 7:43गुम जाएगा। जी नाम तो खत्म हो जाएगा। असल
  147. 7:48चीज है कि जो काम किया जा रहा है वो याद
  148. 7:51रहना चाहिए
  149. 7:54और दूसरा मेन तारुफ मेरा जो है वो बहुत
  150. 7:59जरूरी है वरना उसके बगैर क्लास आगे नहीं
  151. 8:02चलेगी और वो ये है कि मेरा ताल्लुक
  152. 8:04फैसलाबाद से है। यह तारुफ बहुत जरूरी था।
  153. 8:09वरना हो सकता है कि आप में से कुछ लोग
  154. 8:13माइंड भी कर जाए क्योंकि मैं जब पेशावर
  155. 8:16क्लास के लिए गया तो मुझे स्टूडेंट्स ने
  156. 8:20जो
  157. 8:21मुखिस स्टूडेंट्स थे दोस्त थे उन्होंने
  158. 8:25खुसूसी तौर पर कहा कि सर आप पेशावर जा रहे
  159. 8:27हैं। तो जरा ख्याल करना आप फैसला के हैं
  160. 8:31और फैसला ही आप जानते ही हैं। तो जरा
  161. 8:37ख्याल कीजिएगा ऐसा ना हो कि आप किसी खान
  162. 8:41साहब की शान में गुस्ताखी कर बैठे। मैंने
  163. 8:43कहा जी इंशा्लाह ताला पूरी कोशिश करूंगा।
  164. 8:45तो फिर मैंने पहले दिन ही क्लास में अतीक
  165. 8:47जो ऑडियंस थे उसमें से कहा मैंने कहा जी
  166. 8:50मुझे ये कहा गया खुसी तौर पे के हमारे खान
  167. 8:54भाई माइंड ना कर जाए तो जरा ख्याल कीजिएगा
  168. 8:57उनकी शान में गुस्ताखी ना हो जाए। तो फिर
  169. 8:59भी मैंने उनसे कहा मैंने कहा कि अगर आपकी
  170. 9:02शान में कोई गुस्ताखी हो गई तो आप मुझे
  171. 9:05माफ तो कर देंगे ना। तो उन्होंने कहा जी
  172. 9:07बिल्कुल
  173. 9:09माफ़ करने वाली जात तो अल्लाह की है। जी हम
  174. 9:12सिर्फ आपको वहां तक पहुंचा देंगे।
  175. 9:15तो मैं इसलिए जरूरी समझता था कि अपना
  176. 9:19तारुफ इस हवाले से कि एक तो हमारा काम और
  177. 9:24दूसरे ये कि मेरा ताल्लुक जिस शहर से है
  178. 9:26फैसलाबाद शहर है तो इंशा्लाह ताला आपको
  179. 9:30मैं इस क्लास में बोर नहीं होने दूंगा
  180. 9:32इंशा्लाह क्लियर जी तो लिसाल कुरान हमारा
  181. 9:35कोर्स है जी अल्लाह की तौफीक से हम यहां
  182. 9:38पर आए हैं
  183. 9:41अब उसकी तौफीक से आए हैं तो क्यों ना उसी
  184. 9:44से दुआ कर ले के अल्लाह हमारे लिए इस
  185. 9:47कोर्स को आसान कर देना।
  186. 9:50ये 30 दिन कहने को कुछ भी नहीं है। लेकिन
  187. 9:5430 दिन बहुत ज्यादा लग रहे होंगे यकीन
  188. 9:56माने। 30 दिन मुस्तकिल एक जगह पर आना फिर
  189. 10:01डेढ़ घंटे की क्लास लेना
  190. 10:05आसान काम नहीं है। ये मुमकिन उसी वक्त
  191. 10:09होगा जब अल्लाह की मदद शामिल हाल होगी।
  192. 10:12ज़हन में रखिए। तो हम अपने रब से उसी से
  193. 10:15दुआ करते हैं कि या अल्लाह आसान कर देना
  194. 10:18मुश्किल ना फरमाना
  195. 10:20क्योंकि ये शुरू होते ही ना मुश्किलात
  196. 10:22शुरू हो जाएगी ज़हन में रखिएगा क्योंकि
  197. 10:24आसान काम नहीं है यहां पर कोई और
  198. 10:27प्रोग्राम हो रहा होता ना तो यकीन माने
  199. 10:30बहुत आसान था सबके लिए आसान था आना भी
  200. 10:32आसान था उसको करना भी आसान था लेकिन ये
  201. 10:35आसान नहीं है ये इंशाल्लाह ताला आपको पता
  202. 10:37चलना शुरू हो जाएगा तो हमने अपने रब से
  203. 10:39दुआ करनी है के ऐ मेरे रब इसको आसान कर
  204. 10:43देना। इसको मुश्किल ना करना। और अब तेरी
  205. 10:46तौफीक से तेरे करम से हम यहां आ ही गए
  206. 10:49हैं। तो खैर से मुकम्मल फरमा देना। तो
  207. 10:54बहुत खूबसूरत दुआ है जी ये। ये दुआ मैं
  208. 10:56आपके सामने स्क्रीन पे लिखता हूं। बोर्ड
  209. 10:57पे लिखता हूं। आपको बैठे-बैठे दुआ याद हो
  210. 11:00जाएगी। मैंने तो खुसूसी आज इसका एतमाम
  211. 11:03किया है। आप भी इसका खुसूसी एतमाम करेंगे।
  212. 11:07इस क्लास के अलावा भी आपको इंशाल्लाह ताला
  213. 11:09मुख्तलिफ कामों में हेल्प करेगी।
  214. 11:11इंशा्लाह। ठीक है? और ये जो दुआ मैं
  215. 11:13लिखूंगा बोर्ड पे एक दिन आएगा इसका एक-एक
  216. 11:17लफज़ एक-एक लफज़ ना सिर्फ आप ट्रांसलेट
  217. 11:21करेंगे बल्कि ग्रामेटिकली एनालाइज भी
  218. 11:24करेंगे। ये ग्रामेटिकली मैं बार-बार इसलिए
  219. 11:26बोल रहा हूं कि एक बात अच्छी तरह से ज़हन
  220. 11:28में रख लीजिएगा कि ये जो कोर्स है
  221. 11:31कुरान की जुबान कुरान की जुबान या किसी भी
  222. 11:35जुबान को सीखने के जो तरीके होते हैं ना
  223. 11:38वो आमतौर पे दो तरीके होते हैं। जी। एक
  224. 11:40तरीका यह होता है कि आप उस जुबान के बोलने
  225. 11:42वालों में बचपन में ही या उम्र के किसी भी
  226. 11:45हिस्से में रहकर वह जुबान सीख सकते हैं।
  227. 11:47आप बचपन में ही सऊदी अरब चले जाते या किसी
  228. 11:51अरब कंट्री होते तो जब आप बोलने के काबिल
  229. 11:54होते तो आप जाहिर बात है अरबी बोल रहे
  230. 11:56होते हैं। ठीक है? या अगर आपको मुश के
  231. 11:59सिलसिले में तालीम के सिलसिले में किसी
  232. 12:01अरब कंट्री जाना पड़ता है तो तीन चार माह
  233. 12:05जाहिर बात है जब आपको कोई उर्दू बोलने
  234. 12:07वाला पंजाबी बोलने वाला नहीं मिलेगा तो
  235. 12:08आपको अरबी आ ही जाएगी। तो एक तरीका तो
  236. 12:11जुबान सीखने का ये होता है कि आप उन लोगों
  237. 12:13में रहना शुरू कर दें। आपको वो जुबान आ
  238. 12:15जाती है। दूसरा तरीका यह होता है कि आप उस
  239. 12:18जुबान
  240. 12:21को किसी सीखी हुई जुबान की मदद से जो
  241. 12:24जुबान आपको आती है। मसल आपको उर्दू आती
  242. 12:27है, कितनी आती है ये भी इंशा्लाह आज आपको
  243. 12:29पता चलना शुरू हो जाएगा। अंग्रेजी आपको
  244. 12:32आती है ये भी इंशा्लाह इस कोर्स में आपको
  245. 12:34पता चलना शुरू हो जाएगा। पंजाबी हमारी
  246. 12:36अपनी जुबान है। तो जो सीखी हुई जुबान है
  247. 12:38उसकी मदद से नई जुबान जो आप सीख रहे हैं
  248. 12:42उसके रूल्स उसके ग्रामर के जरिए आप उस
  249. 12:46जुबान को सीखें। ये जरा कहते हैं जी पढ़े
  250. 12:49लिखों का तरीका है। मुश्किल है। ग्रामर से
  251. 12:52वैसे ही हमारी जान जाती है। चाहे वो
  252. 12:53अंग्रेजी की हो चाहे उर्दू की तो हमने कभी
  253. 12:56पढ़ी नहीं। खैर तो अंग्रेजी की जितनी पढ़ी
  254. 12:58है वो आपको पता ही है। तो अरबी ग्रामर तो
  255. 13:00आमतौर पे स्टूडेंट समझते हैं शायद यहां पर
  256. 13:03कोई कुरान की तफसीर बताई जाएगी। कुरान का
  257. 13:05तर्जुमा सिखाया जाएगा या कुछ मुख्तलिफ
  258. 13:08बातें होंगी। तो ये टिपिकल कुरान की अरबी
  259. 13:13की ग्रामर की क्लासेस ज़हन में रखिएगा।
  260. 13:15लेकिन इंशा्लाह ताला इंशा्लाह ताला जिन
  261. 13:19लोगों ने
  262. 13:21इस कोर्स को थोड़ा सा भी देखा है वो
  263. 13:25इंशा्लाह ताला
  264. 13:27इसे एंजॉय करेंगे। ये मेरा आपसे वादा है।
  265. 13:30इंशाल्लाह ताला आप यहां बोर नहीं होंगे।
  266. 13:32ज़हन में रखिएगा। तो हम उर्दू, अंग्रेजी,
  267. 13:37पंजाबी की मदद से अरबी जुबान सीखने की
  268. 13:40कोशिश करेंगे। ग्रामर के जरिए। क्लियर हो
  269. 13:43गया जी? तो मैं दुआ की तरफ आता हूं। जी।
  270. 13:45दुआ बड़ी खूबसूरत दुआ है। दुआ का पहला
  271. 13:48लफ्ज़ है जी रब्बी। अब यहीं से आपको अरबी
  272. 13:51जुबान की वुसत पता चलनी शुरू हो जाएगी।
  273. 13:54लफ्ज़ आपके सामने बोर्ड पर लिखा हुआ है
  274. 13:56जी। एक रब। यानी अगर आप हरकात
  275. 14:00को ना इस्तेमाल करें तो लफज़ आपके सामने
  276. 14:02बोर्ड पर लिखा हुआ है। एक ही जिसका
  277. 14:05तर्जुमा मैं तीन अल्फाज़ में कर रहा हूं।
  278. 14:07अच्छी तरह से नोट कर लीजिएगा। ऐ मेरे रब
  279. 14:13रब्बी ऐ मेरे रब। ना आपको ऐ के लिए लफ्ज़
  280. 14:18नज़र आ रहा है। ना मेरे के लिए लफ्ज़ नज़र आ
  281. 14:21रहा है। सिर्फ आपको रब नज़र आ रहा है।
  282. 14:23लेकिन इंशाल्लाह ताला एक दिन आएगा। आप खुद
  283. 14:25बताएंगे कि जी ए कहां है? मेरे कहां है?
  284. 14:28इस वक्त आप मुझपे एतमाद करते हुए इसका
  285. 14:31तर्जुमा जो है वो याद कर सकते हैं कि दुआ
  286. 14:34जब भी की जाएगी अल्लाह ताला से यानी दुआ
  287. 14:38के आगाज़ में जब भी आपको रब्बी का लफज़ मिल
  288. 14:40जाए ना रब्बी तो उसका तर्जुमा आपने तीन
  289. 14:43अल्फाज़ में करना है। उर्दू के तीन अल्फाज़
  290. 14:45में ऐ मेरे रब। अब वो ऐ और मेरे कहां है
  291. 14:51वो इंशा्लाह ताला 10 11 दिनों बाद आपको
  292. 14:53पता चल जाएगा कि जी ऐ कहां है और मेरे
  293. 14:55कहां है तो रब्बी ऐ मेरे रब
  294. 14:59यसिर
  295. 15:03यसिर तू आसान कर दे रब्बे यसिर दुआ का एक
  296. 15:08हिस्सा रब्बे यसिर ए मेरे रब आसान कर दे
  297. 15:12क्या आसान कर दे मेरा यहां पर आना आसान कर
  298. 15:15दे मेरा यहां पर डेढ़ घंटा बैठना आसान कर
  299. 15:19दे
  300. 15:21मेरा यहां पर
  301. 15:23चीजों को समझना आसान करते हैं।
  302. 15:27मेरा यहां से जाना भी आसान कर।
  303. 15:31सब तरह की आसानी मांग और सिर्फ अपने लिए
  304. 15:34नहीं जो पीछे आप छोड़ कर आए हैं या अल्लाह
  305. 15:37उसमें भी आसानी फरमा। यह ना हो के पीछे
  306. 15:40फोन आ रहे हो आपको कि जी ये हो गया वो हो
  307. 15:43गया आ जाए। सबके लिए हम अपने रब से दुआ कर
  308. 15:46रहे हैं। रब्बी यस ए मेरे रब तू आसान कर
  309. 15:49दे। आसानी के साथ साथ ही मुश्किल होगी। जी
  310. 15:54आपने कुरान मजीद की वो आयत सुनी है ना इन
  311. 15:57माल युसर।
  312. 16:00तो अगली
  313. 16:03दुआ जो इसी दुआ का हिस्सा है वो है वला
  314. 16:06तसिर।
  315. 16:15और तू मुश्किल ना फरमा।
  316. 16:19तो दुआ के तीन हिस्से होंगे। जी। दो
  317. 16:20हिस्से लिख दिए मैंने बोर्ड पे। रबी यस। ऐ
  318. 16:22मेरे रब आसान कर दे। वला तसिर और मुश्किल
  319. 16:26ना फरमा।
  320. 16:28आसानी
  321. 16:30ही रखना मुश्किल मेरे लिए ही हो सकती है।
  322. 16:34लेकिन तेरे लिए कोई मुश्किल नहीं है। तूने
  323. 16:37उस मुश्किल को भी जो मेरे लिए होगी उसको
  324. 16:39आसान कर। और तेरी तौफीक से तेरे फजलल से
  325. 16:42यहां पर आ ही गए हैं। तो वम
  326. 16:49मुकम्मल फरमा दे बिल खैर
  327. 16:56खैर के साथ तो बड़ी खूबसूरत दुआ है जी। यह
  328. 17:00आपको इस कोर्स के अलावा भी बहुत सारे
  329. 17:02कामों में हेल्प करेगी। रब्बी यसिर वला
  330. 17:05तसिर व
  331. 17:08बिल खैर तीन जुमले हैं जी रब्बी यसिर वला
  332. 17:12तसिर वत बिल खैर रब्बी यसिर वला तसिर व
  333. 17:18बिल खैर जी याद हो गई जरा बोल दे एक
  334. 17:21मर्तबा रब्बीर
  335. 17:23वला तसिर व बिल खैर तीन जुमलों की दुआ है
  336. 17:27जी रब्बी यसिर ऐ मेरे रब आसान कर दे वला
  337. 17:31तसिर और मुश्किल ना फरमा
  338. 17:33व तम बिल खैर और खैर के साथ मुकम्मल
  339. 17:38कंप्लीट कर दे इसको यानी 30 दिन ये पहाड़
  340. 17:42जैसे लग रहे होंगे लेकिन इंशा्लाह ताला
  341. 17:45दुआ का एतमाम करेंगे तो 30 दिन बहुत आसान
  342. 17:48हो जाएंगे आपके लिए इंशाल्लाह ताला मैं भी
  343. 17:50ये दुआ कर रहा हूं मैं भी करूंगा करता
  344. 17:53रहूंगा आपने भी ये दुआ जो है वो डेली करनी
  345. 17:56है और हम अपनी क्लास का आगाज डेली
  346. 17:59इंशाल्लाह ताला इस दुआ से किया करेंगे
  347. 18:01क्लियर हो गया
  348. 18:03ले जी लिसारुल कुरान
  349. 18:06कुरान की जुबान लैंग्वेज ऑफ द कुरान जी
  350. 18:10कुरान की जुबान कौन सी जुबान है जी
  351. 18:13जी
  352. 18:15जी माशा्लाह कुरान की जुबान जो है ये अरबी
  353. 18:18जुबान है। असल में हम समझते थे कुरान की
  354. 18:20जुबान जो है अरबी जुबान है। तो अरबी समझते
  355. 18:24रहे हमेशा इसलिए शायद आई नहीं कभी। लेकिन
  356. 18:28आज आपको पता चलेगा कि कुरान की जुबान जो
  357. 18:30है यह अरबी जुबान है। अरबी
  358. 18:33हम रा को साकिन करके पढ़ते हैं। अरबी
  359. 18:37जुबान अरबी नॉट अरबी अरबी कुरान की जुबान
  360. 18:42अरबी जुबान है। इसका फायदा क्या होगा? जब
  361. 18:45तक आपको अल्फाज़ की सही प्रोन्सिएशन नहीं
  362. 18:47पता होगी। अब अरबी का लज़ कुरान मजीद में
  363. 18:50बहुत जगह अल्लाह ताला ने इस्तेमाल फरमाया
  364. 18:52है। अब आप अरबी को अरबी अगर कहते रहेंगे
  365. 18:56तो कुरान मजीद पढ़ते जब भी वो लफज़ आएगा आप
  366. 18:58उसे अरबी करके पढ़ेंगे। और जब आप अरबी करके
  367. 19:02पढ़ेंगे अरबी को अरबी पढ़ेंगे तो जाहिर बात
  368. 19:06है वो कुरान के अल्फ़ाज़ सही तरह से अदा
  369. 19:08नहीं होंगे और जो अल्लाह ताला कहना चाह
  370. 19:10रहे होंगे वो आप नहीं कह पा रहे होंगे। तो
  371. 19:13कुरान मजीद की जुबान अरबी जुबान है। कुरान
  372. 19:18मजीद की जुबान अरबी जुबान कुरान मजीद के
  373. 19:21मानने वाले कुरान मजीद पर ईमान रखने वाले
  374. 19:25अक्सर लोगों की जुबान भी नहीं है।
  375. 19:29ऐसे ही है ना? यानी जितने भी मुसलमान है
  376. 19:31मुझे बताइए क्या सबकी जुबान अरबी जुबान
  377. 19:33है? नहीं। हम यहां क्यों आए हैं? हम इसलिए
  378. 19:36आए हैं कि हम अरबी जुबान सीखें और कुरान
  379. 19:40मजीद को डायरेक्ट समझने की कोशिश करें। एक
  380. 19:44बात अच्छी तरह से नोट कर लीजिएगा कि
  381. 19:46तर्जुमा जो है ट्रांसलेशन ये कभी भी किसी
  382. 19:50जुबान का नेम और बदल नहीं हो सकता।
  383. 19:52ट्रांसलेशन मींस टू एक्सप्रेस एन आईडिया
  384. 19:54फ्रॉम वन लैंग्वेज टू अनदर। बस एक बात एक
  385. 19:58जुबान में इस तरह कही जा सकती है तो दूसरी
  386. 20:00जुबान में इस तरह कहते एग्जैक्ट
  387. 20:04जो है वो आप ट्रांसलेशन से नताज नहीं
  388. 20:09निकाल सकते ये इंशा्लाह ताला आपको इस
  389. 20:11क्लास में ही पता चलना शुरू हो जाएगा
  390. 20:13अल्लाह की तौफीक से तो कुरान मजीद की
  391. 20:16जुबान अरबी जुबान है जो कि मेरी आपकी और
  392. 20:19कुरान मजीद के मानने वाले अक्सर लोगों की
  393. 20:22जुबान नहीं है और मेरा तरीकेकार हमेशा से
  394. 20:25ये रहा है कि मैं स्टूडेंट को हमेशा जीरो
  395. 20:28से उठाता हूं और कोशिश करता हूं कि उसे उस
  396. 20:32लेवल तक ले जाऊं। आपकी चाहे बेस जितनी
  397. 20:35मर्जी अच्छी है अरबी के हवाले से आपने
  398. 20:38अरबी ग्रामर के बहुत सारे कोर्सर्सेस किए
  399. 20:41हुए हैं। आपको तर्जुमा आता है। मुझे इससे
  400. 20:44कोई हर्ज नहीं है। मेरा मुखातिब वो
  401. 20:48स्टूडेंट है जिसे अरबी की अलिफ बे भी नहीं
  402. 20:52आती।
  403. 20:53तो मैंने जी अलिफ वे से सिखाना है आपको।
  404. 20:56ओके जी। तो इसलिए जिनको तो थोड़ी बहुत
  405. 21:00अरबी आती है वो उस अरबी को जरा रोक के
  406. 21:02बैठेंगे क्योंकि
  407. 21:05मैंने उस स्टूडेंट को
  408. 21:09खिताब करना है जिसे अरबी की अलिफ में भी
  409. 21:12नहीं आती। तो हम स्टार्ट करेंगे जी अलिफ
  410. 21:15में से। ओके जी।
  411. 21:18क्योंकि किसी भी जुबान को आप सीखना चाहते
  412. 21:20हैं तो उस जुबान के जो अल्फाबेट है वो
  413. 21:24जानने जरूरी है। जब तक आपको अल्फाबेट का
  414. 21:26नहीं पता आप आगे चल ही नहीं सकते। क्लियर
  415. 21:30हो गया जी? तो लिसानु कुरान कुरान की
  416. 21:33जुबान अरबी जुबान के जो अल्फाबेट्स हैं
  417. 21:38जिन्हें हम उर्दू में और तरीका फिर ज़हन
  418. 21:40में रखिएगा कि हमने उर्दू अंग्रेजी पंजाबी
  419. 21:44की मदद से अरबी सीखनी है। तो रेफरेंसेस
  420. 21:47मैं आपको इन्हीं जुबानों की दिया करूंगा
  421. 21:49कि अंग्रेजी में अल्फाबेट का लफज़ इस्तेमाल
  422. 21:52मैंने किया है। उर्दू में हम हुरूफ तहजी
  423. 21:55पढ़ते थे। आपको याद होगा जिन्होंने उर्दू
  424. 21:57पढ़ी हुई है माशा्लाह सब नहीं पढ़ी हुई है
  425. 21:59तो हुफ तहजी हम उन्हें कहते थे तो अरबी
  426. 22:02में अल्फाबेट्स या हुफ तहजी जो है ना उनको
  427. 22:07हुफुल हिजा कहते हैं जी
  428. 22:11हुफुल हिजा
  429. 22:16हुफुल हिजा
  430. 22:19हुरूफुल हिजा
  431. 22:21आपके लिए कोई लाजमी नहीं है कि आप इन्हें
  432. 22:23हुरूफ हिजा ही कहें आप इन्हें हुरूफ तहजी
  433. 22:26भी कह सकते हैं। आप इन्हें अल्फाबेट्स भी
  434. 22:28कह सकते हैं। आपके लिए कोई लाजिम नहीं है
  435. 22:31कि जी आप लाजमी ये लफज़ याद करें कि जी ये
  436. 22:33नया लफज़ हम कैसे याद करेंगे। कोई जरूरी
  437. 22:35नहीं है। बस आपको मैं बता रहा हूं कि आपको
  438. 22:37मैं अरबी के अल्फाबेट सिखा रहा हूं। अच्छा
  439. 22:41जी माशा्लाह अंग्रेजी बचपन से हम पढ़ रहे
  440. 22:43हैं। अब कुछ सवालात मैं आपसे लूंगा फिर
  441. 22:45उसके बाद आगे चलूंगा। मुझे बताइए अंग्रेजी
  442. 22:47बचपन से पढ़ रहे हैं। बचपन में हमें बताया
  443. 22:49गया था कि जो अल्फाबेट्स हैं इनकी तादाद
  444. 22:53आप सबको मालूम होगी। ऐसे ही है ना? क्या
  445. 22:57तादाद है जी अंग्रेजी के अल्फाबेट्स की?
  446. 23:00कितनी है जी? 26
  447. 23:0126
  448. 23:0226 पक्की बात है ना? माशा्लाह
  449. 23:06उर्दू के जो हुफेजी हैं।
  450. 23:09उनकी तादाद किसको पता है?
  451. 23:13अब देखिए आप आवाज उस कॉन्फिडेंस वाली नहीं
  452. 23:15आई है ना सवालिया आवाज आई है जी या इलाफी
  453. 23:21आवाज आएगी
  454. 23:23यानी अंग्रेजी के अल्फाबेट्स जो मैंने
  455. 23:26पूछा फौरन आवाज आई जी 26 बड़े कॉन्फिडेंस
  456. 23:30के साथ 26 कोई इलाफ नहीं
  457. 23:34लेकिन उर्दू जो मेरी और आपकी जुबान है
  458. 23:36कौमी जुबान है उसके हुरूफ तहजी अल्फाबेट्स
  459. 23:41कितने कितने हैं?
  460. 23:44देखिए मुख्तलिफ हो रहे हैं। मुख्तलिफ हो
  461. 23:47रहे हैं और एग्जैक्ट भी नहीं है। सही भी
  462. 23:49नहीं है। तो यहीं से हमें थोड़ा सा अंदाजा
  463. 23:52करना चाहिए कि जो मेरी और आपकी जुबान है
  464. 23:54कौमी जुबान है उसके
  465. 23:58हुरूफ तहजी की एग्जैक्ट तादाद हमें नहीं
  466. 24:02मालूम। कोई कह रहा है 26, कोई कह रहा है
  467. 24:0528, कोई कह रहा है 29। तो यह आपका पहला
  468. 24:08टास्क है जी लिसान कुरान की तरफ से कि आज
  469. 24:10आपने घर जाना है जब तो सर्च करना है कि
  470. 24:13उर्दू के आपकी जुबान के आपकी कौमी जुबान
  471. 24:17के हुरूफ तहजी जो है वो कितने ओके जी
  472. 24:20क्योंकि अंग्रेजी हमारी जुबान नहीं है
  473. 24:22लेकिन हमें अल्हम्दुल्लाह उसके अल्फाबेट्स
  474. 24:25तादाद भी पता है और सारे हुरूफ भी पता है
  475. 24:28सही है ना मैं अगर आपसे सुनूं ए बी सी तो
  476. 24:30आप मुझे
  477. 24:32बड़ी के साथ छोटी भी सुना देंगे इंशा्लाह
  478. 24:34ताला ऐसे ही है ना सारी सुना देंगे। लेकिन
  479. 24:38अगर मैं आपसे सुनना चाहूं अलिफ बे तो शायद
  480. 24:41आप में से कोई पूरे अलिफ बे भी ना सुना
  481. 24:43सके। तो बहाल चले जी हुफुल हिजा अब अरबी
  482. 24:47जुबान के जो हुरूफुल हिजा है अल्फाबेट है
  483. 24:50या हुफ ताजी इनकी तादाद मैं आपको बताऊंगा।
  484. 24:52ठीक है? आपने नहीं बतानी अगर आपको पता भी
  485. 24:54है तो आपने बस सुनना है क्योंकि मैं फिर
  486. 24:58बता दूं कि मेरा मुखातिब
  487. 25:01वो स्टूडेंट है जिसको अरबी की अलिफ बे
  488. 25:05नहीं आती मैं उसी से मुखातिब हूं ज़हन में
  489. 25:07रखिएगा तो मैं आपके सामने अरबी के जो
  490. 25:11हुफुल हिजा है हुफ तहजी हैं अल्फाबेट्स
  491. 25:15हैं वो एक खास तरतीब लिखूंगा बोर्ड पे जब
  492. 25:19वह
  493. 25:20तरतीब के सात हुरूफ मुकम्मल हो जाएंगे तो
  494. 25:24तादाद आपको एग्जैक्ट एक सेकंड में पता चल
  495. 25:27जाएगी। ठीक? मज़ की बात ये है कि मैं जितने
  496. 25:31भी हुरूफ लिखूंगा ना बोर्ड पे हर हर्फ
  497. 25:35उर्दू बोलने, उर्दू पढ़ने,
  498. 25:39उर्दू लिखने वाला उससे वाकिफ होगा। हर
  499. 25:42हर्फ तो आपने उसे उर्दू में पढ़ना है।
  500. 25:45मैंने आपको बताना है कि इसको अब हमने अरबी
  501. 25:48में कैसे पढ़ना है। तो जितने हुरूफ होंगे
  502. 25:51उनमें से कई हुरूफ तो बिल्कुल आप उसी तरह
  503. 25:54पढ़ेंगे जिस तरह उर्दू में पढ़ते हैं। हां
  504. 25:56कुछ हुरूफ जो है उनकी प्रोनंसिएशन थोड़ी
  505. 25:58डिफरेंट होगी। वो डिफरेंट
  506. 26:02किस रूल पर होगी वो मैं आपको इंशाल्लाह
  507. 26:06बता दूंगा। तो आप माशा्लाह पहला काम तो ये
  508. 26:08करेंगे ना कि आज अरबी के हरूफ हिजा यहां
  509. 26:10से सीख के उठेंगे। जी तो पहला हर्फ़ जो है
  510. 26:14वो आप सबका जाना पहचाना हर्फ है जी अलिफ।
  511. 26:18उर्दू में भी अलिफ है। अरबी में भी इसको
  512. 26:21अलिफ ही पढ़ा जाता है। लिसानुल कुरान में
  513. 26:26सीन के बाद जो आपको नजर आ रहा है ये अलिफ
  514. 26:28है।
  515. 26:31उसके बाद ये आपको नजर आ रहा है ये अलिफ
  516. 26:34है। ये आपको अलिफ नजर आ रहा है। ठीक है?
  517. 26:39लेकिन ये वाला अलिफ और ये वाला अलिफ इस पे
  518. 26:43आपको कुछ नजर नहीं आ रहा। ये वाला अलिफ जो
  519. 26:45है इसके ऊपर आपको एक छोटा अलिफ नजर आ रहा
  520. 26:47है। ये सारी चीज़ इंशा्लाह ताला मैं आपको
  521. 26:49सिखाऊंगा। ठीक है? फिर एक बात ज़हन में
  522. 26:52रखते हुए कि मुझे नहीं पता आपको कितनी आती
  523. 26:54है अरबी। मुझे यही पता है कि आपको बिल्कुल
  524. 26:57नहीं आती अरबी। ओके जी। तो पहला लेटर है
  525. 27:00जी अलिफ। दूसरा लेटर जो है उर्दू में हम
  526. 27:05इसे कहते हैं बे।
  527. 27:07उर्दू में हम इसे कहते हैं बे। लेकिन अरबी
  528. 27:11में आपने इसको बे नहीं कहना। लिसान कुरान
  529. 27:13कोर्स में जब भी ये लेटर आपके सामने आएगा
  530. 27:15आपने इसे बे नहीं कहना आपने इसे कहना है
  531. 27:17बा आपने इसे कहना है बा
  532. 27:20और अगर आप नूरानी कायदे अगर बचपन में आपने
  533. 27:23पढ़े हो ना तो आपको याद आ जाएगा कि वो बे
  534. 27:26के ऊपर ना एक बा लिख भी देते थे है ना कि
  535. 27:28इसको पढ़ना आपने बा है। लेकिन मैं आपको
  536. 27:31उसूल बता देता हूं तो आपको फिर
  537. 27:36उसकी जरूरत ही नहीं रहेगी इंशाल्लाह ताला।
  538. 27:37उसूल अलिफ को हमने अलिफ ही पढ़ा है। उर्दू
  539. 27:41में भी अलिफ है, अरबी में भी अलिफ़ है। बे
  540. 27:44को हमने अरबी में बा कहना है।
  541. 27:48बे को क्या कहना है? बा। उसूल नोट कर लें।
  542. 27:50उसूल ये है कि उर्दू में आप जिस भी लेटर
  543. 27:55को पढ़ रहे हैं ना, आपने अलिफ पढ़ा, आपने बे
  544. 27:58पढ़ा।
  545. 28:00बे जब मैंने पढ़ा है उर्दू में, तो बे के
  546. 28:02आखिर में मैंने ए की आवाज निकाली है। जी।
  547. 28:06बे
  548. 28:08ए बे ए ए बे
  549. 28:14ए की आवाज आ गई ना अलिफ जब मैंने पढ़ा तो
  550. 28:17ए की आवाज नहीं आई। अलिफ नो ए बे ए अलिफ
  551. 28:24नो ए बे ए तो सिंपल सा उसूल है जी। जिस
  552. 28:31लेटर के आखिर में आपको उर्दू में ए की
  553. 28:34आवाज सुनाई दे ना उसको आपने आ की आवाज के
  554. 28:37साथ पढ़ना है। सिंपल सा उसूल क्या करना है
  555. 28:40बताएं जरा साथ-साथ आप इंगेज होंगे तो बात
  556. 28:43बनेगी। क्या करना है?
  557. 28:46एक ही आवाज जिस लेटर के आखिर में आपको
  558. 28:50उर्दू में पढ़ते हुए सुनाई देगी उसको आपने
  559. 28:54अरबी में कैसे प्रोनाउंस करना है?
  560. 28:57आ की आवाज के साथ। तो अलिफ अलिफ ही पढ़ना
  561. 29:01है बे बा अब मैंने आपको कुछ नहीं बताना
  562. 29:06लेटर मैंने आपके सामने लिखना है और आपने
  563. 29:08पहले उसे उर्दू में पढ़ना है हल्का सा और
  564. 29:11फिर ऊंची आवाज में आपने उसे अरबी में
  565. 29:14प्रोनाउंस कर देना है। तो तीसरा लेटर है
  566. 29:16जी
  567. 29:19जी
  568. 29:21ते था
  569. 29:22ता अलिफ बा ता
  570. 29:29जी
  571. 29:31से सा अलिफ बा ता सा
  572. 29:40जी
  573. 29:41जी
  574. 29:41जीम जा
  575. 29:44जा पढ़ना है
  576. 29:46क्यों नहीं पढ़ना जी जा
  577. 29:48ए नहीं है तो जीम अरबी में भी जी ओके जी
  578. 29:54अलिफ बा ता ज़म
  579. 30:01ख
  580. 30:02हा
  581. 30:04हा
  582. 30:10ख
  583. 30:14कितने हो गए
  584. 30:16कितने लेटर्स हो गए जी
  585. 30:18सात हो गए बस ये सातसात लेटर्स की कुछ
  586. 30:21लाइनें मैंने आपके सामने लिखनी है सातसात
  587. 30:24लेटर्स की लाइनें सात सात लेटर्स की
  588. 30:27लाइनें मैंने आपके सामने लिखनी है और एंड
  589. 30:30पर जब मैं खत्म कर दूंगा तो आप सात को उन
  590. 30:32लाइन के नंबर से मल्टीप्लाई करेंगे आपको
  591. 30:35लेटर्स की तादाद मिल जाएगी इंशा्लाह ताला
  592. 30:36ठीक है ना तो एक दफा पढ़ते हैं जी अलिफ
  593. 30:40बा
  594. 30:41ता
  595. 30:42ता जीम
  596. 30:44ह
  597. 30:45खा
  598. 30:47नेक्स्ट लेटर है जी
  599. 30:50दाल उर्दू में भी दाल अरबी में भी दाल
  600. 30:57दाल
  601. 30:59दाल
  602. 31:03रे
  603. 31:04रा
  604. 31:10से
  605. 31:11सा
  606. 31:18सा
  607. 31:19नोसा सीन
  608. 31:25शीन
  609. 31:30स्वाद
  610. 31:32हो गए जी सात और हो गए 14 हो गए एक दफा
  611. 31:36पढ़ते हैं जरा
  612. 31:37अलिफ
  613. 31:38पा
  614. 31:40ता सा जीम ह
  615. 31:45दाल दाल
  616. 31:48सा सी शी
  617. 31:51माशा्लाह
  618. 31:53अगला लेटर जो है ना इसका बड़ा मसला है।
  619. 31:58हमेशा से आज भी इसकी प्रोनंसिएशन सबसे
  620. 32:03मुश्किल है। सबसे मुश्किल प्रोसेसिएशन जो
  621. 32:05है इस लेटर के जो मैं लिखने लगा हूं और वह
  622. 32:08लेटर है जी
  623. 32:13वाद
  624. 32:16वद
  625. 32:18वाद
  626. 32:20ये ना कोई कहता है जी ज़द है। कोई कहता है
  627. 32:23जी नहीं दाद है। इस चक्कर में रहे हैं तो
  628. 32:27इसकी प्रसि सबसे मुश्किल है। अगर आप तजवीज
  629. 32:30सीखते हो तो आपको बताया जाता है कि जी ये
  630. 32:32जो जुबान का जुबान की जो है नुकर है उसको
  631. 32:35आपने दाड़ों के पिछले सिरे से लगाना है तो
  632. 32:39यह कोई आवाज निकलती है व ना ये दाल की
  633. 32:42आवाज है ना ये जोए की आवाज है ये दरमियानी
  634. 32:46आवाज है सबसे मुश्किल आवाज है और इस आवाज
  635. 32:49को सिर्फ इसकी आवाज जो है ना सिर्फ अरब ही
  636. 32:52निकाल सकता है ज़हन में रखें मैं और आप
  637. 32:54नहीं निकाल सकते तो हम एडवांटेज लेंगे
  638. 32:57इसका ठीक है ना क्यों लेंगे हमारी जुबान
  639. 33:00नहीं है हमारे फैसला में एक जगह है जी मैं
  640. 33:05उस जगह का नाम बोलता हूं आप के सामने
  641. 33:08अरब को कहें कि वो जगह उसका नाम सही निकाल
  642. 33:12के दिखा दे हम भी ये बोलेंगे उस जगह का
  643. 33:14नाम है जी खुरया वाला
  644. 33:19हैदराबाद की बड़ी मशहूर जगह है जी खुरया
  645. 33:23वाला अगर अरब खुर वाला बोल देगा ना तो हम
  646. 33:27भी बोल देंगे इंशा्लाह तो ये एडवांटेज हम
  647. 33:30थोड़ा सा लेंगे हमारी जुबान नहीं है नहीं
  648. 33:32निकलती सीधी सी बात है। ठीक है? तो इसे आप
  649. 33:36जो भी निकाले
  650. 33:38ये ज़हन में रखते हुए निकालिएगा कि ये ना
  651. 33:41तो दाल है ना ये जो है। ठीक है ना? ये
  652. 33:46दरमियानी आवाज़ है। वाद और अगर आप
  653. 33:48प्रैक्टिस करना चाहते हैं तो किसी अरब
  654. 33:50कारी को सुना करें।
  655. 33:53वो आपको इंशाल्लाह ताला निकाल के दिखाएगा।
  656. 33:55बस वो आप उसे एंजॉय कर सकते हैं। बाकी
  657. 33:58निकाल फिर भी नहीं सकते आप बाहर। जी। उसके
  658. 34:02बाद अगला लेटर है जीए
  659. 34:07तो
  660. 34:08ता
  661. 34:14ये था ता ये है त्वा थोड़ा सा इसे जरा गोल
  662. 34:17कर देना है त्वा ता त्वा ता ता ता त्वा अब
  663. 34:22अब ये तजवीद की क्लास नहीं है ज़हन में
  664. 34:24रखिएगा कि मैं आपको प्रोनंसिएशन सिखाऊं
  665. 34:26सारी कैसे करनी है वरना तो फिर नहीं होगा
  666. 34:28मैं सिर्फ थोड़े-थोड़े पॉइंट्स जो है आपको
  667. 34:30इंशाल्लाह इस क्लास में आपको सब कुछ
  668. 34:31मिलेगा जी तजवीद भी मिलेगी आपको ग्रामर तो
  669. 34:33मिलेगी ही मिलेगी आपको तफसीर भी मिलेगी
  670. 34:36आपको इंशा्लाह ताला बहुत कुछ मिलेगा
  671. 34:38इंशा्लाह ताला अल्लाह की तौफीक से और आपको
  672. 34:41अंदाजा होना शुरू हो गया होगा के वो चीजें
  673. 34:44जो शायद आपने सारी जिंदगी ना सीखी हो वो
  674. 34:47आपको आज से पता चलनी शुरू हो गई होंगी
  675. 34:50बचपन से नूरानी कायदा आपने पढ़ा है मुझे
  676. 34:52बताइए कभी आपके कारी ने बताया आपको कि इस
  677. 34:55लेटर को ऐसे क्यों पढ़ना है आज अल्लाह की
  678. 34:58तौफीक से इस कुरान कोर्स की बरकत से आपको
  679. 35:01पता चल रहा है कि इन हुरूफ को इस तरह
  680. 35:04पढ़ने का उसूल क्या है? सही है ना? वरना
  681. 35:08सिंपल वो लिख देते हैं जी बस ऐसे पढ़ना है
  682. 35:10इसको। उनके ऊपर हम लिख देते हैं। बा भी
  683. 35:12लिख देते हैं, ता भी लिख देते हैं। ता भी
  684. 35:14लिख देते हैं। बस जो लिखे हुए हैं उनको
  685. 35:16ऐसे पढ़ना है। इनको ऐसे पढ़ना है और बस
  686. 35:18पढ़ना ही पढ़ना है। तो ता के बाद है जी
  687. 35:23जो ज
  688. 35:26नेक्स्ट लेटर है जी ऐन।
  689. 35:31गन
  690. 35:34हां जी फ
  691. 35:38उसके बाद नेक्स्ट लेटर है जी
  692. 35:40कौफ
  693. 35:44कौफ ठीक है बस ये थोड़े से लेटर्स हैं जो
  694. 35:48तंग करते हैं और इसमें बहुत टाइम लगवाते
  695. 35:51हैं लेकिन जरूरी है जाहिर बात है कुरान
  696. 35:54मजीद को उसी तरह पढ़ना जिस तरह अरबी के
  697. 35:58लेटर्स पढ़ा जाता है। यह जरूरी है। वरना
  698. 36:01मीनिंग्स बदलने का डर होता है, खतशा होता
  699. 36:06है। लेकिन हमें एडवांटेज ये होगा कि हमारी
  700. 36:09क्योंकि जुबान नहीं है तो हम इंशाल्लाह
  701. 36:11ताला कुछ ना कुछ
  702. 36:13से ले लेंगे रियायत वरना जिसे आता हो वो
  703. 36:18ना पढ़े वो फिर गलत होगा। ठीक है जी। तो
  704. 36:21कितने हो गए जी जरा बता सकते हैं।
  705. 36:2321 माशा्लाह आपने गिने नहीं आपने सात को
  706. 36:26तीन से मल्टीप्लाई कर लिया। ओके जी।
  707. 36:28नेक्स्ट लेटर है
  708. 36:31काफ। सिंपल काफ जो है हमारा वो काफ था।
  709. 36:34काफ ये है काफ।
  710. 36:38जी लाम
  711. 36:41मीम
  712. 36:44नून।
  713. 36:48हां जी। आपके मुंह से निकल रहा था।
  714. 36:51वाओ। ठीक है। और अब क्या मुंह से निकला?
  715. 36:54हां।
  716. 36:56सही। तो नॉट वाओ हाय
  717. 37:00हा
  718. 37:02अब आप कहेंगे जी वाओ ठीक वाओ अब वाओ आया
  719. 37:11और लास्ट लेटर
  720. 37:14या
  721. 37:14ये
  722. 37:16या ले जी ये आपके लेटर्स हैं। रूफुल हिजा
  723. 37:19है। कितने हो गए?
  724. 37:22कितने हो गए जी? 28
  725. 37:2528
  726. 37:2728
  727. 37:28तादाद आपको मिल गई जी हुफुल की एक दफा पढ़
  728. 37:31दे शाबाश अलिफ
  729. 37:34ब
  730. 37:35ता
  731. 37:37सा
  732. 37:38जीम
  733. 37:39ह
  734. 37:40ख
  735. 37:42दाल
  736. 37:43दाल र
  737. 37:46सी शी ओ वन
  738. 37:55वन व
  739. 37:59लू
  740. 38:03व
  741. 38:05या
  742. 38:06माशा्लाह अब जो आपके ज़हन में कुछ सवालात
  743. 38:08पैदा हो रहे हैं ना उनके जवाब मैंने देने
  744. 38:10हैं। सवाल नंबर एक कि ये हा वाव की जगह
  745. 38:14क्यों चला गया? वाऊ हा की जगह क्यों आ
  746. 38:16गया? एक नंबर दो।
  747. 38:22मैंने आपको बताया कि अरबी के हुरूफुल हिजा
  748. 38:25की तादाद 28 है। और इस पे उलमा का
  749. 38:29इत्तेफाक है।
  750. 38:32लेकिन आपको इन लेटर्स में एक इंतहाई मशहूर
  751. 38:36लेटर नजर नहीं आ रहा।
  752. 38:38जो कि आपको बोर्ड पर लिखा हुआ भी नजर आ
  753. 38:40रहा है लेकिन इन लेटर्स में नहीं है। वह
  754. 38:43लेटर पहचान सकते हैं। कौन सा है?
  755. 38:45हमजा माशा्लाह माशा्लाह ज़हीन लोग हैं आप।
  756. 38:48ठीक है? अब ये जो सवालात पैदा हुए हैं ना
  757. 38:50इनके जवाब देने लगा हूं। सवाल नंबर एक कि
  758. 38:54इनकी जगह क्यों तब्दील की है मैंने? ये जो
  759. 38:57तरतीब मैंने आपके सामने रखी है ना ये
  760. 38:58डिक्शनरी की तरतीब है ज्यादा।
  761. 39:02आप किसी भी जुबान के लिए
  762. 39:05डिक्शनरी यूज करते हैं। अंग्रेजी की
  763. 39:07डिक्शनरी जब आप यूज करते हैं तो बताइए
  764. 39:09कैसे देखते हैं डिक्शनरी को? अल्फाबेटिकली
  765. 39:12देखते हैं ना। अगर आपको
  766. 39:15ए बी सी की तरतीब नहीं पता। आप डिक्शनरी
  767. 39:18नहीं कंसीड कर सकते। उर्दू की डिक्शनरी
  768. 39:20आपने कंसीड करनी है तो आपको अलिफ बे
  769. 39:23की तरतीब पता होनी चाहिए। तो अरबी की
  770. 39:26डिक्शनरी अगर आपने देखनी है ना तो आपको
  771. 39:29अरबी के जो अल्फाबेट है हुफ उनकी तरतीब
  772. 39:33पता होनी चाहिए। तो डिक्शनरी की तरतीब ये
  773. 39:36है जी उस डिक्शनरी में ये वाओ और या जो है
  774. 39:44ये आपको इकट्ठे नजर आएंगे। उसकी वजह नोट
  775. 39:47कर लीजिए। उसकी वजह ये है कि ये व और या
  776. 39:49जो है ना ये दो ऐसे लेटर्स हैं जो लफज़ में
  777. 39:54लफज़ में एक दूसरे की जगह ले लेते हैं।
  778. 39:59यानी
  779. 40:01लफज़ के असल हिज्जे में वाव होती है। लेकिन
  780. 40:04जब अब वो लफज़ बनता है तो वाव की जगह या
  781. 40:06लिख दी जाती है। लफज़ के असल स्पेलिंग्स
  782. 40:09में या होती है। लेकिन जब वो लफ्ज लिखा
  783. 40:14जाता है या बोला जाता है तो या की जगह वाऊ
  784. 40:16लिखी जाती है। तो ये वाऊ और या एक दूसरे
  785. 40:18में तब्दील होते रहते हैं। इसीलिए
  786. 40:21डिक्शनरी वालों ने वाव और या के वर्ड्स
  787. 40:24सारे एक जगह पे इकट्ठे कर दिए। ताकि आपको
  788. 40:27बीच में हा जो है वो तंग ना करे। कि पहले
  789. 40:30आप वो का लफ्ज़ देखें। फिर उसके बाद आप हा
  790. 40:32के
  791. 40:34जो है वो गुजारें और फिर या के लफ्जों की
  792. 40:37तरफ जाएं। उन्होंने कहा व या के इकट्ठे रख
  793. 40:39दो। तो एक सवाल का जवाब तो आपको मैंने दे
  794. 40:41दिया जी कि ये तरतीब जो है ये डिक्शनरी की
  795. 40:44तरतीब है। बाकी अगर आप याद करने में वैसे
  796. 40:48बोलने में नून के बाद वाओ बोल दें तो कोई
  797. 40:51ऐसा गुनाह नहीं होगा। आपको ज़हन में
  798. 40:54रखिएगा। कोई ऐसी परेशानी वाली बात नहीं
  799. 40:56है। ये जस्ट एक तरतीब मैंने आपके सामने
  800. 40:58लिखी है। अब जो दूसरा सवाल है कि इन हुरूफ
  801. 41:02में जिनकी तादाद मैंने फिक्स बता दी आपको
  802. 41:0528 है और यह भी बता दिया कि इसमें उलमा का
  803. 41:07इत्तेफाक है। इसमें आपको हमजा नजर नहीं आ
  804. 41:10रहा। ऐसे ही है ना? हमजा क्यों नजर नहीं आ
  805. 41:13रहा? मैं टाइम देखता हूं। जी टाइम हो गया
  806. 41:16है हमारा। तो हमजा क्यों नजर नहीं आ रहा?
  807. 41:20ये हम इंशाल्लाह ब्रेक के बाद जानने की
  808. 41:22कोशिश करेंगे के ये हमजा इन लेटर्स में
  809. 41:26शामिल है या नहीं है। अगर नहीं है तो
  810. 41:31क्यों नहीं है।
  811. 41:33और अगर
  812. 41:35मैंने नहीं लिखा हुआ
  813. 41:38तो
  814. 41:40क्या वजह है इन सारी
  815. 41:44बातों का इन सारे सवालों का जवाब आप
  816. 41:47देखेंगे जी ब्रेक के बाद ठीक है ना
  817. 41:49माशा्लाह आप मीडिया में बैठे होते हैं तो
  818. 41:50आप बहुत अहम बात जो है आपको ब्रेक के बाद
  819. 41:52मिलती है तो इंशाल्लाह ताला इस कोर्स में
  820. 41:54भी आपको बहुत सारी बातें जो है वो ब्रेक
  821. 41:57के बाद मिलेंग मैं मुख्तसर दोहरा देता हूं
  822. 41:59जी लिसान कुरान कोर्स का आगाज हमने कर
  823. 42:01दिया है हमारे कोर्स का नाम लिसान कुरान
  824. 42:04है जिसके माना है कुरान की जुबान लैंग्वेज
  825. 42:07ऑफ द कुरान। और कुरान की जुबान कौन सी
  826. 42:10जुबान है? अरबी जुबान है। और अरबी जुबान
  827. 42:13हमने सीखनी शुरू की है हुफुल हिजा से।
  828. 42:16हुरूफ हिजा की तादाद हमारे सामने आ गई है
  829. 42:18जो कि 28 है। इन हुरूफुल हिजा में से एक
  830. 42:22हर्फ भी ऐसा नहीं है जो हम उर्दू बोलने
  831. 42:25पढ़ने लिखने वाले नहीं जानते।
  832. 42:29कुछ हुरूफ की प्रोनंसिएशन उर्दू के हरूफ
  833. 42:31से मुख्तलिफ है। उसका उसूल भी मैंने आपको
  834. 42:34बता दिया है। और अब जो सवाल पैदा हुआ कि
  835. 42:37जी हमजा क्यों नहीं शामिल किया? इस पे हम
  836. 42:39इंशा्लाह ब्रेक के बाद बात करेंगे। सुभान
  837. 42:41अल्लाह विका अशद इलाहा इल्ला अता अस्तफिर
  838. 42:45का वत शुक्रिया।

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