Karwa Chauth Vrat Katha 2026 | करवा चौथ की कहानी | करवा चौथ व्रत कथा | Karwa Chauth Ki Kahani 2026 — Transcript
Full transcript
- 0:01[संगीत]
- 0:05नमस्कार मैं रश्मि आप सभी का एक बार फिर
- 0:09से स्वागत करती हूं हमारे चैनल [संगीत]
- 0:12भक्ति ज्ञान में आप सभी को करवा चौथ की
- 0:16हार्दिक शुभकामनाएं। आइए आज मिलकर सुनते
- 0:19हैं करवा चौथ की व्रत कथा। एक [संगीत] बार
- 0:23की बात है एक साहूकार था। उसके सात बेटे
- 0:27और एक बेटी थी। सात भाइयों की इकलौती बहन
- 0:32होने के कारण वो सबकी बहुत लाडली थी। उसके
- 0:36भाई उससे इतना प्रेम करते कि उसकी आंखों
- 0:39में आंसू देखना भी उनसे सहन नहीं होता।
- 0:42समय बीतने लगा। उनकी बहन का विवाह हो गया।
- 0:46उसके विवाह के बाद समय बीतने लगा। एक
- 0:49[संगीत] बार करवा चौथ आया और करवा चौथ के
- 0:53मौके पर वह अपने मायके आई हुई थी। उसने
- 0:57अपनी भाबियों के साथ अपने पति की लंबी आयु
- 1:01और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से करवा
- 1:05चौथ का व्रत रखा। सुबह से ही उसने अन्न और
- 1:09जल ग्रहण नहीं किया था। अब दिन चढ़ने लगा।
- 1:13सूरज ढलने लगा और अब भूख प्यास से वह
- 1:17व्याकुल होने लगी।
- 1:19[संगीत]
- 1:20लेकिन उसने मन में निश्चय कर लिया था कि
- 1:23वो चंद्रमा को अर्घ देने के बाद ही व्रत
- 1:26खोलेगी। शाम होते-होते वो भूख प्यास से
- 1:30व्याकुल हो गई। उसके चेहरे की चमक फीकी
- 1:33पड़ने लगी और वो बार-बार आकाश की ओर देखकर
- 1:38चांद का इंतजार करने लगी। अब जब उसके भाई
- 1:42घर आए उन्होंने अपनी प्यारी बहन को ऐसी
- 1:45दशा में देखा तो उनसे सहन नहीं हुआ।
- 1:49उन्होंने कहा आओ हमारे साथ कुछ खा लो।
- 1:53लेकिन वो बोली आज मैं चंद्रमा को अर्घ दिए
- 1:57बिना भोजन नहीं कर सकती। चंद्रमा के दर्शन
- 2:01के बाद ही मैं अपना व्रत खोलूंगी। तब उसके
- 2:05भाइयों ने एक उपाय सोचा और अपनी पत्नियों
- 2:08से सब कह दिया। इसके बाद उनमें से एक भाई
- 2:12एक ऊंचे स्थान पर गया और वहां अग्नि जलाकर
- 2:16इस तरह रोशनी कर दी कि दूर से चंद्रमा
- 2:19होने जैसा दिखाई दे। इसके बाद उन्होंने
- 2:23कहा देखो चांद निकल आया है। अब तुम पूजा
- 2:27करके अपना व्रत खोल लो। चलनी से वो रोशनी
- 2:31देखकर उसे लगा सचमुच चांद निकल आया। उसने
- 2:35अपनी भाबियों से कहा भाभी देखो चांद निकल
- 2:39आया है। आप भी अर्घ देकर भोजन कर लो। ननद
- 2:44की बात सुनकर भाबियां बोली बाईसा यह तो
- 2:47आपका चांद है। हमारा चांद आने में तो अभी
- 2:51बहुत समय है। वो लड़की भूख से व्याकुल थी।
- 2:55कुछ समझ नहीं पाई। उसी अग्नि को चांद
- 2:58समझकर अर्घ देकर भोजन करने बैठ गई। जैसे
- 3:02ही उसने पहला घास खाया, उसे छींक आ गई।
- 3:07दूसरा घास खाते ही उसमें बाल निकल आया और
- 3:11तीसरा घास अभी खाने ही वाली थी कि उसके
- 3:14ससुराल से बुलावा आ गया कि उसका पति बीमार
- 3:18है और वह जिस भी हालत में हो तुरंत अपने
- 3:22ससुराल पहुंच जाए। अब उसे विदा करने के
- 3:25लिए उसकी मां बक्से में से कपड़े निकालने
- 3:28लगी तो सारे कपड़े काले-काले ही निकलने
- 3:32लगे। मां ने दूसरा बक्सा खोला तो सारे
- 3:36कपड़े सफेद निकलने लगे। बेटी बोली मां सब
- 3:40रहने दो। मैं ऐसे ही चली जाती हूं। अब
- 3:44उसकी मां घबरा गई। वह अपनी बेटी से बोली
- 3:48बेटी रास्ते में जो छोटा बड़ा सब मिले
- 3:51सबके पैर पड़ती जाना जो बूढ़ सुहागन होने
- 3:55का आशीर्वाद दे तो वहीं अपने पल्ले में
- 3:58गांठ बांध लेना। बेटी बोली ठीक है मां और
- 4:02वो अपने ससुराल के लिए निकल गई। रास्ते
- 4:06में उसे जो मिला वो सबके पांव छूती गई। सब
- 4:10ने आशीर्वाद दिया सुखी रहो। पीियर का सुख
- 4:14देखो। खुश रहो। ऐसा करते-करते वो अपने
- 4:19ससुराल पहुंच गई। ससुराल के दरवाजे पर
- 4:22उसकी छोटी सी ननद खेल रही थी। जब उसने
- 4:26उसके पांव छुए तो वह बोली, सदा सौभाग्यवती
- 4:30रहो, पुत्रवती रहो, बूढ़ सुहागन हो। यह
- 4:34सुनते ही उसने अपने पल्ले से गांठ बांध
- 4:38ली। घर में अंदर आ गई तो देखा उसका पति तो
- 4:43मरा हुआ जमीन पर लेटा था और उसे ले जाने
- 4:46की तैयारी हो रही थी। वो यह देखकर बहुत
- 4:50रोई बहुत चिल्लाई। जैसे ही उसे ले जाने
- 4:54लगे रोती चिल्लाती बोली मैं इन्हें ले
- 4:57जाने नहीं दूंगी। फिर भी जब कोई नहीं माना
- 5:01तो वह बोली मैं भी साथ जाऊंगी। नहीं मानी
- 5:05तो सब बोले चलो इसे भी साथ ले चलो। जब पति
- 5:10को जलाने का समय आया तो वह बोली मैं
- 5:13इन्हें जलाने नहीं दूंगी। सब बोले पहले तो
- 5:17पति को खा गई अब उसकी मिट्टी भी खराब कर
- 5:21रही है। लेकिन वो नहीं मानी। गांव के और
- 5:25परिवार के सभी लोगों ने निर्णय लिया कि
- 5:28इसे यहीं रहने दो। इसके लिए एक झोपड़ी
- 5:32बनवा दो। सबने ऐसा ही किया। उसके लिए वह
- 5:36झोपड़ी बनवा दी। अब वो अपने पति को लेकर
- 5:40उसी झोपड़ी में रहने लगी। अब वो पति की
- 5:43साफ सफाई करती उसके पास ही बैठी रहती।
- 5:47उसकी छोटी ननद दिन में दो बार आकर उसे
- 5:51खाना दे जाती। अब वो हर चौथ का व्रत रखती।
- 5:56चांद को अर्घ देती। ज्योति दिखाती। शोत
- 6:00माता प्रकट होती कहती कर वो ले कर वो ले
- 6:04भाइयों की प्यारी बहन करो ले घनी बुखारी
- 6:08कर वो ले और वो चौथ माता से अपने पति के
- 6:12प्राण मांगती पर चौथ माता उसे कहती
- 6:15[संगीत]
- 6:16जब हमसे बड़ी चौथ आएगी तो उससे अपने पति
- 6:20के प्राण मांगना ऐसे कहते कहते सभी चौथ आ
- 6:24गई और सभी यही कहकर चली गई अश्विन [संगीत]
- 6:28की चौथ बोली बोली तुझसे कार्तिक की चौथ
- 6:32करवा चौथ नाराज है। वो ही तेरा सुहाग लौट
- 6:35आएंगी। जब वो आएंगी तो तू उनका व्रत रखना।
- 6:40सारा सामान तैयार रखना। रोली, कुमकुम,
- 6:44टीका, सिंदूर, मेहंदी सब कुछ तैयार रखना।
- 6:48करवा भी रखना और उसके पैर मत छोड़ना। उसे
- 6:52जाने मत देना। जब करवा चौथ आने वाली हुई
- 6:56तो उसने अपनी छोटी ननद से पूरे श्रृंगार
- 6:59और सुहाग का सारा सामान मंगवा लिया और
- 7:02करवे भी मंगवाए। ननद ने सब आकर घर पर
- 7:06बताया। मां भाभी तो यह सब मंगवा रही है।
- 7:10सास ने सोचा जो मांगती है दे आओ। अब
- 7:14साहूकार की बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा।
- 7:18चांद निकलने पर अर्घ दिया। चौथ माता की
- 7:22चोत करी। जब चौथ माता प्रकट हुई तो बोली
- 7:26करवो ले कर वो ले भाइयों की प्यारी बहन
- 7:29करवो ले दिन में चांद उगाने वाली करवो ले
- 7:34बहुत भूखी कर वो ले तब उसने उनके पैर पकड़
- 7:38लिए और बोली माता मेरा सुहाग वापस करो।
- 7:43चौथ माता बोली तू तो बड़ी भूखी है। सात
- 7:47भाइयों की प्यारी बहन है। तुझे सुहाग से
- 7:50क्या काम? तब वो बोली नहीं माता नहीं मैं
- 7:55आपके पैर तब तक नहीं छोडूंगी जब तक आप
- 7:58मेरा सुहाग वापस नहीं करती। चौथ माता उससे
- 8:02सुहाग का सामान मांगने लगी। वो बोली ला
- 8:06सिंदूर दे मेहंदी दे। एक-एक करके उसने
- 8:10माता को 16 श्रृंगार का पूरा सामान दे
- 8:13दिया। माता बोली, लगता है तुझे कोई पढ़ा
- 8:16के गया है। वो बोली, नहीं माता मुझे कौन
- 8:20सिखाएगा? चौथ माता ने अपनी आंखों से काजल
- 8:24निकाला, [संगीत] नाखूनों से मेहंदी
- 8:26निकाली, मांग से सिंदूर निकाला और चिटकी
- 8:30उंगली का छींटा दिया। उसका पति जीवित हो
- 8:33गया। चौथ माता जाते-जाते उसकी झोपड़ी पर
- 8:37लात मार गई जिससे उसकी झोपड़ी महल में बदल
- 8:42गई। अब जब छोटी ननद खाना लेकर आई तो देखा
- 8:46भाभी की झोपड़ी की जगह तो महल खड़ा है। वो
- 8:50ननद को देखते ही दौड़ी और उसके पास आई।
- 8:54बोली देखो बाईसा आपका भाई वापस आ गया। घर
- 8:59जाओ और सासू जी से कहो गाजेबाजे के साथ
- 9:03हमें लेने आए। अब ननद दौड़ी-दौड़ी मां के
- 9:06पास जाकर बोली मां मां भाई जिंदा हो गया।
- 9:10मां बोली लगता है उस भाभी के साथ तेरा भी
- 9:14दिमाग खराब हो गया। ननंद बोली नहीं मां
- 9:18मैंने देखा है। भाई सच में जिंदा हो गया।
- 9:22भाभी ने गाजेबाजे के साथ बुलाया है। अब सब
- 9:26घर वाले ढोल बाजे के साथ अपने बेटे को
- 9:29लेने पहुंचे। बेटे को जिंदा देखकर [संगीत]
- 9:32सास बहू के पैर छूने लगी और बहू सास के
- 9:36पैर छूने लगी। वो बोली देखो मां आपका बेटा
- 9:41वापस आ गया। सास बोली मैंने तो साल भर
- 9:44पहले ही इसे भेज दिया था। वो तो तू ही थी
- 9:48जो इसे वापस लेकर आई है। हे चौत माता जैसे
- 9:53साहूकार की बेटी के साथ पहले किया वैसे
- 9:56किसी के साथ मत करना और बाद में जैसे उसे
- 10:00सुहाग दिया वैसे सबको देना। सब पर अपनी
- 10:03कृपा बनाना। जय चौथ माता। तो यह थी आज की
- 10:08व्रत कथा। आपको आज की यह कथा [संगीत] कैसी
- 10:11लगी? कमेंट करके जरूर बताएं। वीडियो अच्छी
- 10:15लगी हो तो लाइक करें, शेयर करें और अभी तक
- 10:18मेरे चैनल भक्ति ज्ञान को सब्सक्राइब ना
- 10:21किया हो तो सब्सक्राइब करना ना भूलें।
- 10:24धन्यवाद।
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