Kartik Mahatmaya — Transcript
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- 0:00नाम पावनेभ्यो
- 0:03वैष्णवेभ्यो नमो नमः
- 0:07श्री गौरांग नित्यानंद
- 0:13श्री अद्वैत चंद्र
- 0:18गदाध श्रीवासादी
- 0:23गौर भक्त वृंद
- 0:26हरे कृष्ण हरे हरे कृष्ण
- 0:32कृष्ण कृष्ण हरे हरे
- 0:38हरे रामा हरे रामा
- 0:43रामा रामा हरे हरे
- 0:58[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 1:03जो भक्ति में काफी समय से हैं। आज का सत्र
- 1:06हमारे अन्य सत्रों की तरह उन्हीं के लिए
- 1:08है।
- 1:10इतने समय से नाम जप कर रहे हैं। कार्तिक
- 1:14मास रखने का प्रयत्न कर रहे हैं। धाम में
- 1:18आते हैं। तो जो जो चीज हम कर रहे हैं उनका
- 1:21महात्म यदि हमें सही रूप से मालूम होगा
- 1:24दीक्षा मंत्र कर रहे हैं उनका महात्म यदि
- 1:26हमें सही रूप से मालूम होगा वह कैसे करना
- 1:28चाहिए वह हमें मालूम होगा तो ही हम उसका
- 1:31सही लाभ उठा पाएंगे
- 1:34अन्यथा
- 1:36लाभ नहीं उठा पाएंगे जैसे कुछ समय पहले
- 1:40हमने ब्रजमंडल परिक्रमा में धाम तत्व के
- 1:42ऊपर बताया था तो मैं सम्यक विवरण था अब
- 1:47कभी भी धाम तत्व के बारे में सुनना समझना
- 1:51कुछ भी है एक बार सुनेंगे तो सब हमेशा
- 1:54हमेशा कोई भी संप्रदाय का सुन ले हमेशा
- 1:57हमेशा के लिए क्लियर हो जाएगा
- 2:08उसी प्रकार से दीक्षा मंत्र कैसे करने
- 2:11चाहिए मंत्र स्मरण क्या होता है कैसे उस
- 2:13पर भी सत्र विस्तार से लिया गया था यदि
- 2:16कभी भी इस विषय में जानने का उसको कहो तो
- 2:19हम एक बार सुन ले सब समझ आ सकता है। अभी
- 2:23जन्माष्टमी में हम नाम तत्व के ऊपर बताने
- 2:25वाले थे परंतु शायद नाम प्रभु की अभी अभी
- 2:28आप पर कृपा शायद नहीं होनी थी तो रह गया।
- 2:31देखिए कब हमने काफी समय
- 2:36जो भी वैदिक साहित्य हो सकता है। दुनिया
- 2:39जहान के पुराण वेद सबसे लेकर हमने सोचा था
- 2:44बताएंगे। पर देखिए कब कृपा होती है नाम
- 2:47प्रभु की पर कार्तिक भी उसी प्रकार से है।
- 2:50हम नाम भी सालों से ले रहे हैं। धाम भी
- 2:52सालों से आ रहे हैं। कार्तिक भी सालों से
- 2:55कर रहे हैं। पर कार्तिक में
- 3:00अ
- 3:01आई विल बी डिस्टर्ब इन पिंट ऑफ साइंस मी।
- 3:19कार्तिक का महात्म यदि हमें सही सम्यक रूप
- 3:22से विदित होगा तो हम उसको सही रूप से कर
- 3:25पाएंगे।
- 3:28मंत्र स्मरण के ऊपर तो हजारों लेक्चर
- 3:33YouTube इत्यादि पर देख सकते हैं। परंतु
- 3:36सम्यक विवरण एक भी जगह पर कहीं नहीं है।
- 3:40इसका लगेगा तो क्या हो गया? सम्यक नहीं है
- 3:42कुछ तो है ये वही है आधा हकीम ज्ञान वो
- 3:45मुर्दा जान ऐसा कुछ कहावत है कि भाई आधा
- 3:48अधूरा ज्ञान होता है दैट किल्स यू
- 3:50एक्चुअली सिमिलरली कार्तिका महत्व भी यदि
- 3:54हम इधर-उधर
- 3:56वास्तविक महापुरुष के मुख से नहीं सुनेंगे
- 3:58इधरउधर कहीं से भी सुन लेंगे तो फायदे के
- 4:01बजाय नुकसान होगा क्योंकि क्योंकि सम्यक
- 4:04विवरण तो है नहीं जब जब सम्यक रूप से है
- 4:07नहीं तो तो हमें एक पक्षीय
- 4:12समझ आएगा
- 4:14और सम्यक रूप से विवरण करने के शास्त्रों
- 4:16का सम्यक अध्ययन भी चाहिए। विविध पुराणों
- 4:19वेद पुराणों शास्त्रों का सम्यक अध्ययन
- 4:22इसके लिए समय देना होता है। यह नहीं कि वो
- 4:28कट एंड फेस से काम नहीं चलता है।
- 4:31तो आज आपके विशेष कृपा है। आपके ऊपर क्या
- 4:34हमारे मरने के बाद यह सत्र सुने जाएंगे
- 4:37क्योंकि इतना महत्वपूर्ण है और एक ही बार
- 4:39बोलना है हमने आपको पता है। कार्तिक हो
- 4:41चाहे धाम महात्म हो कुछ भी हो एक बार
- 4:43बोलेंगे सम्यक रूप से बताएंगे तो सबके लिए
- 4:46अभी भी आने वाले सालों के लिए भी ग
- 4:49संप्रदाय के लिए भी एकमात्र सत्र जो
- 4:51कार्तिक में सुना समझा जाएगा वो यही सत्र
- 4:53होगा तो हम प्रारंभ करेंगे स्कंद पुराण से
- 4:57स्कंद पुराण में श्री
- 5:01[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 5:04ऋषियों ने बोला श्री सूत जी महाराज से हम
- 5:07लोग कार्तिक मास का महात्म सुनना चाहते
- 5:09हैं।
- 5:11अच्छी बात है। तो उन्होंने क्या कहा? बेटा
- 5:17उन्होंने कहा
- 5:19अश
- 5:24[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 5:26सुजू ने बोला कि आपने जो प्रश्न किया है
- 5:28इसी को नारद जी ने ब्रह्मा जी से यह
- 5:31प्रश्न पूछा था। सोचो प्रश्न कितना
- 5:33महत्वपूर्ण है। पूछने वाला कौन? नारद मुनि
- 5:37जो कि सब कुछ जानते हैं।
- 5:39पूछ कैसे रहे हैं ब्रह्मा जी? तो प्रश्न
- 5:41कितना महत्वपूर्ण है? ऋषि जन पूछ रहे हैं
- 5:44सू जी महाराज से और ब्रह्मा जी से पूछा
- 5:48गया था नारद मुनि द्वारा। तो प्रश्न ही
- 5:50इतना महत्वपूर्ण है। जब बड़े व्यक्ति बात
- 5:52करते हैं तो बात बड़ी होती है हमेशा। बड़े
- 5:54व्यक्ति छोटी बात नहीं करते। तो इतने बड़े
- 5:57व्यक्ति बात करें नारद मुनि उन्होंने
- 6:00प्रश्न पूछ लिया। मतलब वो बहुत महत्वपूर्ण
- 6:02है। कि कार्तिक मास का महात्म बताएं। तो
- 6:06ब्रह्मा जी ने जब महात्म बताने प्रारंभ
- 6:09करने से पहले पहले क्या किया? उन्होंने
- 6:11भगवान श्री राधा कृष्ण का श्यामा श्याम का
- 6:14स्मरण किया।
- 6:16महात्म बताने से पहले स्मरण किया और और
- 6:19पुनः कहा नारद जी से बेटा।
- 6:23बड़ा सुंदर प्रश्न किया। यह प्रश्न समस्त
- 6:26लोकों का उद्धार करेगा।
- 6:29यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण है। इसका उत्तर
- 6:31इतना महत्वपूर्ण है कि उत्तर अच्छे रूप से
- 6:34जान के हम उद्धार हमारा तो छोड़िए पूरे
- 6:37लोक का उद्धार हो जाए तो हमारा कैसे नहीं
- 6:39होगा? तो ये प्रश्न का उत्तर जानना कितना
- 6:42महत्वपूर्ण है कि कार्तिक का महात्म क्या
- 6:45है?
- 6:47तो कार्तिका महात्मा मैं तुमसे कहता हूं
- 6:50या
- 6:52यह ब्रह्मा जी ने कहना शुरू किया कि
- 6:54कार्तिक मास जो है भगवान को सदा ही प्रिय
- 6:58है।
- 7:00यह मास भगवान को बहुत प्रिय है। जैसे कोई
- 7:04अमीर व्यक्ति के प्रिय बच्चे को या उसके
- 7:07पेट को थोड़ा दुलार कर दो कितना खुश हो
- 7:09जाता है। सब कोई लुटा देता है। क्यों?
- 7:11क्योंकि वह उसको प्रिय बेटा बेटी पोता
- 7:15प्रिय है। उसको यू यू कर दो तो उसी से वह
- 7:17खुश हो जाता है। तो कार्तिक मास भगवान को
- 7:20बहुत प्रिय है। समझे प्रिय क्या होता है?
- 7:24डियर भगवान को भी कुछ डियर होता है। हां
- 7:27मासों में भी कुछ डियर मंथ्स में भी कोई
- 7:29डियर मंथ होता है। वही कार्तिका मास डियर
- 7:33मंथ प्रिय केशव प्रिय दामोदर प्रिय
- 7:38अलग-अलग कार्तिकेय इस नाम बताए गए हैं।
- 7:41केशव प्रिय दामोदर प्रिय
- 7:45इस
- 7:46मास में कार्तिक मास में भगवान के
- 7:49उद्देश्य से जो कुछ किया जाता है जो कुछ
- 7:51पुण्य दान इत्यादि इत्यादि जप तपस्या
- 7:56स्नान जागरण
- 7:59वह उसका कभी नाश नहीं होता आप इस संसार
- 8:03में कुछ भी कर लो वह नाशवान है पर यदि
- 8:07कार्तिक में आप भगवत प्रीत्यार्थ कुछ करते
- 8:09हो उसका नाश होना संभव ही नहीं
- 8:11यह प्रथम बात बता रहे हैं। जो कर रहे हो
- 8:16यह अक्षय फल देने वाला है। अक्षय मतलब
- 8:19क्षय मतलब जिसका विनाश खत्म हो जाता है जो
- 8:23क्षय हो गया। खत्म हो गया। मेरे पैसे क्षय
- 8:24हो गए। मतलब अब नहीं है। अक्षय मतलब खत्म
- 8:28ही नहीं होंगे। यह जो इस समय जो सेवा
- 8:30तपस्या दान
- 8:32स्नान जप अध्ययन जो किया जाएगा उसका फल
- 8:35अक्षय है। उसे कोई मेट नहीं सकता।
- 8:42दिस इज द मोस्ट प्यूरिफायर ऑफ ऑल
- 8:44प्यूरिफायर्स कार्तिक मास। सबसे बड़ा
- 8:47प्यूरिफायर है यह। सबसे शुद्ध करने वाला।
- 8:51हृदय को शुद्ध करने वाला। द मोस्ट
- 8:54प्यूरिफायर ऑफ ऑल प्यूरिफायर्स।
- 8:57समस्त पावन पदार्थों में सबसे अधिक पावन
- 8:59है। ये
- 9:02जो कार्तिक मास रखता है भगवान के लिए एक
- 9:06तो देवी देवता और भगवान एक नहीं होते। ये
- 9:07समझना होगा। माता और ये सब भगवान नहीं है।
- 9:10ये सब देवी देवता हैं। तो देवी देवता जो
- 9:13है मनुष्य के निकट हो जाते हैं। कार्तिक
- 9:15मास आप रखते हो। निकट आपके देवी देवता हो
- 9:17जाते हैं।
- 9:21एक्चुअली हम तो कहीं पे भी चले जाएंगे
- 9:23क्योंकि आपको तो पता ही है।
- 9:49[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 9:55तो
- 10:00जो कार्तिक मास रख लगता है। अब ये देख पढ़
- 10:02के बताते तो और अच्छा से बताते। उसमें
- 10:11जो भक्त होता है उसका संग पाने के लिए
- 10:13देवता तरसते हैं। निकट होना तो बड़ी दूर
- 10:16की छोटी बात बताई हमने आपको। जो देवी
- 10:19देवता हैं वो तरसते हैं ऐसे भक्त का संग
- 10:23पाने के लिए जो कार्तिक मास करता है। कैन
- 10:25यू बिलीव इट? इससे समझ लो कि देवी देवता
- 10:28और भगवान में कितना भेद है। उनको प्रिय है
- 10:31शाम को तो आप देवता तरस से आपका संग कैसे
- 10:35मिलेगा? सोचो आपका संग करने के लिए देवी
- 10:37तरस है। कैन यू बिलीव इट? और आप उनके दो
- 10:39धोबत्ती कर रहे हो।
- 10:50इस इस मास में किया हुआ स्नान दान भोजन
- 10:53व्रत तिल धेनु स्वर्ण रजत भूमि आदि वस्त्र
- 10:56आदि
- 10:58जो कुछ भी दिया जाता है तप किया जाता है
- 11:01वह अक्षय फल होता है उसका उसका अंत नहीं
- 11:03है
- 11:06और इसमें अन्नदान का महत्व सबसे अधिक है
- 11:08जो कार्तिक में अन्नदान करता है उससे सारे
- 11:12पापों का सर्वथा नाश हो जाता है हमेशा
- 11:14हमेशा के लिए इतने पाप पाप करें हमारे
- 11:16अनंत जन्मों के पापों का नाश हो जाता है
- 11:19अन्नदान करने से
- 11:24पद स्कंद पुराण में बताया गया ना कार्तिको
- 11:26समो मासो ना कृतेन समम युगम ना वेद
- 11:30सदृश्यम शास्त्रम ना तीर्थम गंगया समम
- 11:33इसका माने है कि कार्तिक के समान कोई मास
- 11:37नहीं है सतयुग के समान कोई युग नहीं है
- 11:40वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है और
- 11:42गंगा जी के समान दूसरा कोई तीर्थ नहीं
- 11:45तो कार्तिक के समान कार्तिक ही है और कोई
- 11:48मास नहीं है।
- 11:52यह स्कंद पुराण में और वर्णन आता है
- 11:58कि
- 12:01जो व्रत अनुष्ठान करते हैं
- 12:05अन्य महीनों में उसका वर्णन किया है। भाई
- 12:09इसका यह फल होगा, यह फल होगा, यह फल होगा।
- 12:11पर जो कार्तिक मास में जो जो महात्म है
- 12:15उसका वर्णन करना ही संभव नहीं है। कार्तिक
- 12:17मास का वर्णन से पड़े हैं कार्तिक में जो
- 12:20क्योंकि अक्षय फल है ना इसका इनफाइनाइट का
- 12:23क्या वर्णन करोगे? इनफाइनाइट
- 12:26तो जो कार्तिक में जो भी भक्ति में कार्य
- 12:29किया उसका फल अनंत है।
- 12:33सीमा रहित है।
- 12:38महात्म वर्णन करना अति कठिन है। क्योंकि
- 12:41अन्य मासों में तो महात्म का ठीक है। 2 +
- 12:432 4 हो गया। अब 2 प्लस इनफिनिटी क्या कैसे
- 12:47कैलकुलेट करें? संभव नहीं है। इसलिए
- 12:49महात्म ही वर्णन नहीं करा जा सकता है।
- 12:53एक छोटी सी बात आपको बता रहे हैं। जैसे
- 12:55हमने आपको पहले ब्रज मंडल में भी बताया था
- 12:58परिक्रमा में कि एक बार जो वृंदावन आ जाए
- 13:01उसको श्री कृष्ण की प्राप्ति निश्चित
- 13:03होगी। एक बार भी आ जाए। अच्छा अगर वो
- 13:06कार्तिक में आए
- 13:09यही बता रहे हैं यह ग्रंथ है शीला रूप
- 13:11गोस्वामी पाद का श्री मथुरा महात्म्य
- 13:15श्लोक नंबर 220 है ये
- 13:19कार्तिकेय जन्म सदने केशवस्य
- 13:22चय नरह सृत प्रविष्टा श्री कृष्णम ते याती
- 13:29परम अव्ययम
- 13:32जो श्री कृष्ण की भूमि वृंदावन में
- 13:36कार्तिक केय महीने में एक बार भी आ जाते
- 13:40हैं। एक बार वह निश्चित रूप से कभी ना अंत
- 13:45होने वाले अनंत भगवान श्री कृष्ण की
- 13:47प्राप्ति कार्तिक में एक बार भी आ जाते
- 13:50हैं। और हम तो हर साल आते हैं
- 13:55और कुछ तो यहां रह ही रहे हैं।
- 13:58तो
- 14:00हम जाने हम पर कितनी विशेष कृपा हो रही
- 14:02है। हो चुकी है भगवान की। हम जानेंगे नहीं
- 14:06तो हम रोते-रोते अपना यह नहीं है वो नहीं
- 14:08[हंसी] है इतना कुछ है हमारे पास
- 14:37हम ड्यूटी के नाम पर अपने आप को कितना
- 14:39बेवकूफ बनाते हैं। हमने कितना सत्र दिया
- 14:42शायद ही किसी ने लाभ लिया हो। इस श्लोक से
- 14:44अगर लाभ लेना चाहे तो आपकी अपने ऊपर कृपा
- 14:47हो सकती है। 221 अगला श्लोक ही है। जिस
- 14:51व्यक्ति ने उठान एकादशी जो एक कार्तिक में
- 14:54रहती है
- 14:57वह भगवान के धाम वृंदावन मथुरा में बना ली
- 15:01तो
- 15:04लोके किंचित न विद्यते उसकी देयर आर नो ही
- 15:07हैज़ नो फदर फदर ड्यूटीज टू परफॉर्म आपने
- 15:10अगर एकादशीय रख ली आपकी कोई फदर ड्यूटी
- 15:12नहीं रह जाती खत्म जो आपके मान का गारवे
- 15:15था ना मेरी ये और वो ये एकादशीय रखी
- 15:18ड्यूटीज खत्म कौन बोल बोल रहे हैं जिनके
- 15:21आप मंत्र करते हो किनका मंत्र करते हो
- 15:23रूपम मंजरी ये रूप गोस्वामी है शास्त्र से
- 15:26बता रहे हैं
- 15:31कितनी बड़ी बात है क्या वर्णन करें
- 15:33कार्तिक मास का कार्तिक मास में ये वाली
- 15:36एकादशी यदि रख ली ब्रज में कोई ड्यूटी
- 15:39नहीं है
- 15:47और जो आपको सुनने में अच्छा लगता है वो
- 15:49श्लोक सुन
- 15:51कि यदि कोई
- 15:57एवं प्रदक्षिणम कृत्वा नवमी
- 16:00शुक्ल कोमोदिम शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन
- 16:05यदि कोई परिक्रमा करता है तो
- 16:10ब्रज की तो द एंटायर जो सर्वान कुलान
- 16:16एंटायर फैमिली पूरा कुल फैमिली नहीं कुल
- 16:20सर्वान कुलान
- 16:22समाधाय विष्णु लोक महते उसके पूरे परिवार
- 16:27का
- 16:28भगवान विष्णु के लोक में पूजन होता है।
- 16:34उस दिन नवमी के दिन यदि वृंदावन की
- 16:38परिक्रमा कर ली अक्षय नवमी सुना हुआ है?
- 16:42अभी आएगा 19 को 19 है 17 ही 19 है ऐसे 17
- 16:4717 19 है देख के बताएंगे तो यदि किसी ने
- 16:51परिक्रमा कर ली उसके पूरा परिवार विष्णु
- 16:53लोक पूजित होगा अब बताओ इसका वर्णन कर
- 16:55सकते अभी तो हमने प्रारंभ भी नहीं किया
- 16:56अभी तो ये हम पांच घंटे भी बोल सकते हैं
- 16:59रात तक बैठे रहेंगे हम कितना कुछ है बताने
- 17:03का
- 17:06[गहरी सांस लेने की आवाज़]
- 17:24बहुत कुछ है जैसे कि कार्तिक में बिना
- 17:26बिना मतलब रूल रेगुलेशंस नहीं भी पता है
- 17:29तो भी पूजा करते हो। यदि कार्तिक में
- 17:33तो भी कृष्ण की वास्तविक पूजा मानी जाती।
- 17:36शुद्ध पूजा
- 17:39कार्तिक सब बाकी महीनों में नहीं बाकी में
- 17:41सब सब लागू हो जाता है।
- 17:45और कई बार इतने भयंकर पाप हो जाते हैं
- 17:47जिसका एक ही परिणाम होता है मृत्युदंड।
- 17:50यदि वो भी किसी का हो तो उसका एक उसका भी
- 17:52एक अल्टरनेट है कि किसी बहुत खराब पाप
- 17:55किया। मृत्युदंड है। उसका अल्टरनेट क्या
- 17:57है? कि भगवान कृष्ण की वृंदावन मथुरा में
- 18:03कार्तिक मास में पूजन करो वह भी माफ हो
- 18:05जाएगा।
- 18:07यह कार्तिक महात्म का प्रारंभ ही नहीं कर
- 18:10रहे हैं अभी हम तो ही आप सुन रहे हैं।
- 18:22और जो है हरिद्वार और वैष्णो देवी और पता
- 18:25नहीं कहां-कहां जाते रहते हैं धक्के खाने
- 18:26के लिए। वो लिख रहे हैं किम यज्ञ किम
- 18:30तपोभरवा तीर्थ अन्य सेविता कार्तिक
- 18:34मथुराया चेद अर्चते राधिका प्रिय जो श्री
- 18:39कृष्ण राधा रानी के प्रिय हैं क्योंकि
- 18:41कार्तिक मास में उनकी अर्चन करते हैं तो
- 18:46कोई भी तपस्या करने की क्या जरूरत है कोई
- 18:48भी तीर्थ स्थली में जाने की जरूरत क्या है
- 18:51कोई भी तीर्थ स्थान में जाने की क्या
- 18:53जरूरत है
- 18:56पिताजी को पूजा कर रहे हो श्री कृष्ण की
- 18:59कहीं जाने की जरूरत नहीं कुछ करने की
- 19:01जरूरत जो करना था कर लिया तभी यह कर पा
- 19:04रहे हो आपको लगता है वृंदावन में बैठ के
- 19:06मजाक है या कार्तिक में बैठ के कथा सुन
- 19:08रहे हो पता नहीं क्या-क्या जन्मों में
- 19:10क्या-क्या करके आए हो तो अब यहां बैठ के
- 19:12कथा सुन रहे हो विश्व विश्वधारी कथा
- 19:17तो कार्तिक अभी हम कर रहे हैं आगे सब
- 19:20करेगा अब यह बताएंगे कि कार्तिक मास
- 19:26प्रारंभ कब होता है? कब प्रारंभ होता है?
- 19:31अब लोग अपने हिसाब से कर लेते हैं कई जगह
- 19:36संस्थाएं।
- 19:38यह ग्रंथ क्या लिखा हुआ है? कौन सा ग्रंथ
- 19:40है? हम यहीं से बता रहे हैं।
- 19:46आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी
- 19:49आती है उसी दिन आलस्य छोड़कर कार्तिक के
- 19:53उत्तम व्रतों का नियम ग्रहण करो। कब से?
- 19:57एकादशी से। हम लोग कब से करते हैं? एकादशी
- 20:01से। यह पद्म पुराण में बताया जा रहा है।
- 20:05पद्म पुराण
- 20:08इस पे क्या लिखा हुआ है?
- 20:11अब यहां से बता
- 20:15जो आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर
- 20:19कार्तिक शुक्ल एकादशी तक यानी कि एकादशी
- 20:22तक व्रत पालन करता है उसके ऊपर भगवान
- 20:25जनार्दन भगवान जनार्दन श्री कृष्ण प्रसन्न
- 20:28होते हैं। जो एकादशी से शुरू करता है
- 20:31एकादशी पर खत्म करता है ना कि पूर्णिमा से
- 20:32शुरू करके पूर्णिमा पर
- 20:36स्पष्ट बताया जा रहा है एकादशी से शुरू
- 20:38करके एकादशी से खत्म
- 20:42दूसरा
- 21:00आश्विन श्यामले पक्ष एकादश एकादश्याम
- 21:05उपोषित व्रतम ततु गहियात
- 21:09ये काफी लंबा श्लोक है मतलब फिर से वही है
- 21:12अश्विन शुक्ला एकादशी को एक महीने का
- 21:15मासोपवास व्रत ग्रहण करें और श्री कृष्ण
- 21:19भगवान की आराधना करें जो तो ये ऐसा करता
- 21:21है मुक्त हो जाता है। इत्यादि इत्यादि
- 21:23बताया गया। तो फिर से क्या बताया जा रहा
- 21:25है? कहां से प्रारंभ करना है? एकादशी से।
- 21:47एकादशी से प्रारंभ करना है। अब
- 21:51प्रारंभ करना कैसे है?
- 21:55उस पर थोड़ा डिटेल में आना है। पर प्रारंभ
- 21:57की एक श्लोक बता देते हैं आपको कि प्रारंभ
- 22:00करना कैसे है?
- 22:06व्रत का जब कार्तिक मास आता है जब हम व्रत
- 22:09रखते हैं तो एक संकल्प लेते हैं पहले सीधा
- 22:11व्रत नहीं रखते संकल्प लेते हैं पहले तो
- 22:14श्लोक है स्कंद पुराण का व्रत आरंभ का
- 22:17संकल्प इस मंत्र से बताया गया
- 22:21दामोदरम नमस्कृत
- 22:23कुर्यात संकल्पदित
- 22:27दामोदर नमस्ते
- 22:30सर्व पाप विनाशन
- 22:32सर्व पाप विनाश
- 22:35कार्तिकस वतम करत अनुज्ञम दातुम अरहसी
- 22:41निर्विघ्नम कुर देवेश आमासम पुरुषोत्तमा
- 22:47इसका मतलब है हे दामोदर हे सर्व पाप नाशन
- 22:51सर्व पाप विनाशन मैं कार्तिक व्रत करना
- 22:54चाहता हूं मुझे आज्ञा दीजिए इसे निर्विघ्न
- 22:58पूरा कराइए
- 23:00मुझे आज्ञा दीजिए कार्तिक मास जब प्रारंभ
- 23:03कर रहे हैं। इसको आज्ञा से किया जाता है।
- 23:05आज्ञा लेके आज्ञा लेके कि हां मैं कार्तिक
- 23:09क्या मैं कार्तिक मास प्रारंभ कर सकता
- 23:11हूं। आप कृपया करके आज्ञा दें और विघ्न
- 23:15निर्विघ्न हो विघ्न ना आए। मेरे कार्तिक
- 23:17जो मैं व्रत रखूंगा इसमें विघ्न ना आए।
- 23:40कार्तिक मास बताया कब प्रारंभ करना है। अब
- 23:43कैसे करना है यह मंत्र बताया। उसके अलावा
- 23:46पुनः
- 23:50दिस स्कंध
- 23:52स्कंद पुराण
- 23:56यहां बताया जा रहा है गुरु के आदेश देने
- 24:00पर
- 24:07उनके वचन का कभी उल्लंघन ना करें।
- 24:11आप कहेंगे आप क्या बात करें? आप कार्तिक
- 24:13मास की बात बता रहे हैं। अभी
- 24:16ये कार्तिक मास के महात्म में बताया जा
- 24:18रहा है।
- 24:21जो कि आप नहीं आप यही सुनेंगे धूप दीप कर
- 24:24लो, तुलसी कर लो, भोग लगा लो, यही अर्चन
- 24:26ये सुन लेंगे। पर शास्त्र बता क्या रहे
- 24:29कार्तिक मास के महात्म के अंदर
- 24:33गुरु के आदेश देने पर उनके वचन का कभी
- 24:36उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
- 24:41गुरु की प्रसन्नता से मनुष्य सब कुछ
- 24:43प्राप्त कर लेता है। यह कार्तिक में भूलना
- 24:45नहीं है। केवल धूप दीप से व्यक्ति प्राप्त
- 24:47नहीं करता भगवान कृष्ण को आनंद को या सब
- 24:52कुछ को गुरु की प्रसन्नता से जिससे गुरु
- 24:55प्रसन्न हो वह कार्य करें। उससे मनुष्य सब
- 24:59कुछ प्राप्त कर लेता है।
- 25:02इसलिए जो भगवान के भक्त हैं कार्तिक में
- 25:04सब प्रकार से प्रयत्न करके गुरु की सेवा
- 25:07करें।
- 25:09या 1000 प्रवचन जो YouTube में होंगे या
- 25:13गूगल वगैरह होंगे उसमें सुन लो पढ़ लो
- 25:15आपको यह पंक्ति नहीं मिलेगी कहीं कहीं पर
- 25:17भी नहीं मिलेगी
- 25:22थोड़ी बहुत बातें इधर उधर की बस सुन लिया
- 25:24वो कार्तिको सममसम ना गंगाया समम यही सब
- 25:28है यह सुनना बहुत खतरनाक है क्योंकि आपको
- 25:33वास्तविकता क्योंकि खुद भी अनभिज्ञ हो खुद
- 25:35को मालूम नहीं तो खुद तो कर नहीं रहे
- 25:37निश्चित है और जिसको बता रहे हो वह भी
- 25:39आपका भाई बनेगा
- 25:43घूमने वाला फालतू में
- 25:46तो सब प्रकार के प्रयत्न करके गुरु की
- 25:49सेवा करें। ऐसा करने से उसे भगवान की कृपा
- 25:53मोक्ष की प्राप्ति होती है। संसार से
- 25:55उद्धार हो जाता है।
- 25:57यह है एक स्थान पर
- 26:13अब देखिए हम कोई भी बात बोले ऐसा लग रहा
- 26:15है हम कथा सुना रहे हैं कहानी सुना रहे
- 26:16हैं हर बात में यहां से खोलो टाइम लगता है
- 26:19देखने में ना अब ये एक श्लोक है प्रविष्य
- 26:23वैष्णव यज्ञ तत्र अभ्य जनार्दनम गुर आज्ञा
- 26:28ततो लब्धवा कुर मासोपवासनम
- 26:33क्या शब्द स्पष्ट बोला गया? गुरुर आज्ञा
- 26:36ततो लब्धवा गुरु वैष्णवी दीक्षा लेकर
- 26:40दीक्षा लेनी चाहिए भक्त को भगवान की पूजा
- 26:43करना चाहिए उसके भीतर में गुरु की आज्ञा
- 26:47लेकर कार्तिक मास प्रारंभ करें कार्तिक
- 26:50मास रखना चाहिए व्रत ऐसे नहीं कि हमने पढ़
- 26:53लिया रख लिया नहीं आज्ञा लेकर पहले भगवान
- 26:55की आज्ञा लेनी है गुरु की आज्ञा लेनी है
- 26:57फिर रखना है
- 27:09[गला साफ़ करने की आवाज़]
- 27:17ये क्या लिखा हुआ है?
- 27:20मोटा अक्षर
- 27:22इसका पहला पंक्ति बता रहे हैं।
- 27:25सर्वप्रथम श्री गुरुदेव के श्री चरणों में
- 27:29भक्ति पूर्वक दंडवत करें और व्रत धारण
- 27:32करने की अनुमति लें।
- 27:34उनकी अशेष कृपा और आदेशावली। आदेशान मतलब
- 27:38इंस्ट्रशंस।
- 27:40आदेश आवली मतलब दीपावली क्या होती है?
- 27:43दीपों की पंक्ति दीप के बाद दीप के बाद
- 27:46दीप। तो गुरु की आज्ञा की पंक्ति लेनी
- 27:49चाहिए। गुरुदेव आदेशावली ग्रहण करने से
- 27:52व्रत पूरा अवश्य होगा। उनकी अनुमति लें।
- 27:56उनके अशेष कृपा पर निर्भर रहे और उनकी
- 27:58आदेशावली ग्रहण करने से व्रत निश्चित रूप
- 28:02से पूरा होगा। ऐसे हमें व्रत प्रारंभ करना
- 28:04है। यह विधि है कार्तिक मास व्रत करना।
- 29:19कार्तिक मास में राधा कृष्ण की उपासना तो
- 29:22करते ही हैं। यदि हम तुलसी के वृक्ष के
- 29:25समीप निकटस्थ
- 29:29यदि तुलसी वृक्ष के नीचे या निकटस्थ उनकी
- 29:32उपासना करेंगे तो ये जो ये करता है उसे
- 29:34जीवन मुक्त मानना चाहिए।
- 29:38कितना दुर्लभ है ये सुनने को मिल रहा है
- 29:40ये कितना दुर्लभ है। तुलसी वृक्ष के नीचे
- 29:43उपासना जीवन मुक्त मानना चाहिए।
- 29:53और यही स्कंद पुराण में हम कार्तिक मास का
- 29:56महात्म से बता रहे हैं और अन्यथा कहीं पर
- 29:58भी नहीं है। ये स्कंद पुराण में बताया जा
- 30:00रहा है कि वैष्णव महात्माओं की निंदा
- 30:04जो करता है
- 30:06वह मूढ़ व्यक्ति जो है अपने पितरों के साथ
- 30:11महार नर्क में गिरता है। जो महात्मा जनों
- 30:15की निंदा करता है और सुनने का भी सुनने
- 30:17वालों का भी वही फल होता है। मीट खाने
- 30:20वाले को तो पाप लगेगा। तो जो अनुमोदन कर
- 30:23रहा है, हेल्प कर रहा है, कुछ भी कर रहा
- 30:25है उसके कॉन्टेक्स्ट में तो उसको भी दंड
- 30:27मिलेगा। उसी प्रकार से महात्मा जनों की जो
- 30:30निंदा करते हैं, वो अपने पितरों के साथ
- 30:33पूर्वजों के साथ नर्क महारोरव नर्क में
- 30:35गिरते हैं।
- 30:37और
- 30:39ये देखो तो हमने टीका दी थी ना अभी अगली
- 30:42लाइन देखो। जो भगवान की और उनके भगवत
- 30:45भक्तों की निंदा सुनते वहां से दूर नहीं
- 30:46हटता। वह भक्त भगवान का प्रिय भक्त नहीं
- 30:49है।
- 30:51नहीं है।
- 30:54जो कार्तिक मास में
- 30:59भगवान विष्णु की परिक्रमा करता है।
- 31:03उसको पद पद पल अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त
- 31:06होता है।
- 31:09आप करते हो विष्णु की परिक्रमा
- 31:11किसकी करते हो?
- 31:22आपको सिर्फ उदाहरण के थोड़ा सा बता देते
- 31:24हैं। विष्णु सहस्त्र नाम सुना है आपने?
- 31:28उसमें विष्णु के भगवान विष्णु के 1000 नाम
- 31:31है।
- 31:32उनको तीन उनको तीन बार करो तो एक कृष्ण
- 31:36नाम का फल प्राप्त होता है। हजार नाम का
- 31:39इस प्रकार से है कि हजार विष्णु नाम का एक
- 31:42राम नाम का फल है। वो तीन बार करो तो एक
- 31:44कृष्ण नाम का फल प्राप्त होता है। तो
- 31:47विष्णु और कृष्ण में इतना भेद है। वो श्री
- 31:49कृष्ण जिनकी कृपा की याचना करते हैं वो है
- 31:52राधा रानी।
- 31:53वह राधा रानी जल रूप में राधा कुंड है और
- 31:56वह राधा कुंड की आपने परिक्रमा करी है तो
- 31:59जो विष्णु की परिक्रमा करने वाले को
- 32:01अश्वमेद यज्ञ मिलता है तो कृष्ण की
- 32:03परिक्रमा करने वाले को क्या मिलेगा और
- 32:05राधा रानी जो कि राधा कुंड है साक्षात
- 32:09जल रूप में राधा रानी उनके उसका क्या फल
- 32:12मिलेगा
- 32:14पद में अश्व यज्ञ तो विष्णु की परिक्रमा
- 32:16करने वालों को मिलता है तो राधा रानी की
- 32:18परिक्रमा करने को कौन से यज्ञ और कौन सी
- 32:21चीज का फल मिलेगा सोचना भी असंभव है।
- 32:24इसलिए कहा है ना कि अक्षय बुद्धि के परे
- 32:27वर्णन करना ही संभव नहीं है। अब विश्वास
- 32:30करो मैं अभी प्रारंभ नहीं कर पाया। मैं
- 32:32झुंगे में ऐसे बातें ऐसे आपको बता अनंत फल
- 32:35है
- 32:50जो हरि के परम प्रिय कार्तिक मास में
- 32:53नित्य गीता का पाठ करता है उसके पुण्य फल
- 32:57का वर्णन सैकड़ों वर्षों में भी नहीं किया
- 32:59जा सकता हम दो घंटे में क्या वर्ण वर्णन
- 33:01करेंगे सारे कार्तिक मास का वो कह रहे हैं
- 33:04कार्तिक मास में भगवत गीता यदि पढ़ लेते
- 33:06हो श्लोक कुछ उसका वर्णन करना सैकड़ों
- 33:09वर्षों में संभव है एक बात का
- 33:12गीता पाठम तू यह कुरयात की कार्तिके
- 33:17विष्णु वल्लभ तस पुण्य फलम वक्तम ना अलम
- 33:22वर्ष वर्ष शतेर अपि यही बताया है सैकड़ों
- 33:28वर्ष में भी वर्णन संभव नहीं
- 33:31भगवत गीता का जो पाठ करता है कार्तिक में
- 33:38और जो कार्तिकेय एकादशी को निराहार रहता
- 33:40है व्रत रखता है निराहार
- 33:46वो निश्चित रूप से पूर्व जन्म के पापों से
- 33:48मुक्त हो जाता है।
- 33:50तीन एकादशी
- 33:53अन्य एकादशी ना रखें। एकादशी पर निराहार
- 33:56रहने की चेष्टा कर सकते हैं। यदि चाहे तो
- 34:18भगवान विष्णु के समीप विष्णु के विष्णु
- 34:20मतलब भगवान भगवान कृष्ण के समीप उन्हीं के
- 34:24नामों और लीला कथाओं का गायन करें। यह
- 34:26बताया जा रहा है।
- 34:37कार्तिक में
- 34:39अनेक प्रकार के दान कर सकते हैं। वस्त्र
- 34:41रत्न कंबल ओढ़ने की रुईदार बिछावन यानी कि
- 34:46मैट्रेस
- 34:48जूता छाता भी दान करना चाहिए।
- 34:52कार्तिक में भूमि पर शयन करने वाले मनुष्य
- 34:58अपने युग युग के पापों का नाश कर डालते
- 35:00हैं। यदि युग युग के पापों का नाश करना है
- 35:02तो भूमि पर शयन कर सकते हैं। इससे युग युग
- 35:05के पाप नाश हो जाते हैं।
- 35:08युग युग के
- 35:13अब हम एक बात बताना चाहेंगे क्योंकि आप कई
- 35:16जगह पढ़ेंगे शास्त्र में कि भाई दान देना
- 35:19चाहिए तो फिर अगेन फिर से कंफ्यूजन हो
- 35:22जाता है कि भाई दान दें वो ब्राह्मण को दे
- 35:25पंडित जी को दे किसको दें यही हमारे
- 35:28कन्फ्यूजन हो जाता है तो इसलिए हमारा
- 35:31कन्फ्यूजन करने के लिए आज किनकी तिथि है
- 35:35श्री नरोत्तम दास ठाकुर प्रेम भक्ति महाजन
- 35:38जय ठाकुर नरोत्तम उन्होंने अपने प्रेम
- 35:40व्यक्ति चंद्रया ग्रंथ में बताया 41 श्लोक
- 35:42में 41 आप खुद पढ़ सकते हैं अन्य व्रत
- 35:45अन्य दान ना ही करो वस्तु ज्ञान अन्य सेवा
- 35:50अन्य देव पूजा किसी देवता की पूजा नहीं
- 35:52करनी
- 35:54अन्य किसी को दान नहीं देना तो अन्य दान
- 35:57के विषय में वह बता रहे हैं
- 36:09एकादशी के अलावा जन्माष्टमी रामनवमी जो
- 36:11हमारे बेसिक व्रत है गौर पूर्णिमा इसके
- 36:14अलावा कोई व्रत नहीं करना और दान जो है
- 36:19उसके बारे में भी ठाकुर महाशय बता रहे
- 36:21हैं।
- 36:26यह देख लीजिए क्या शब्द बोल रहे हैं। यदि
- 36:29कोई अनदास बाबा जी महाराज को गुरु रूप में
- 36:31लेते हैं तो उनके लिए तो यह बहुत
- 36:32महत्वपूर्ण है। श्री कृष्ण और वैष्णवों की
- 36:35प्रीति के अतिरिक्त अन्य उद्देश्य से किया
- 36:38हुआ दान अन्य दान है।
- 36:42या श्री कृष्ण को या उनके भक्तों को बस
- 36:46और किसी के भक्तों के नहीं या श्री कृष्ण
- 36:49या उनके भक्तों को जो दिया जाता है दान
- 36:51वही सही रूप से दान है। अन्यथा जो कहीं भी
- 36:54और दान दिया जाता है वह अन्य दान है। कहते
- 36:57हमें इतना शोक होता है। बड़े-बड़े जटाजूट
- 36:59धारी प्रवचन दे रहे हैं। शास्त्र खोलने का
- 37:02समय नहीं है। इतने बिजी हो तो प्रवचन में
- 37:04क्या दे रहे हो? गरीबों को बांट दो।
- 37:06गरीबों को दे दो।
- 37:09आपको कोई हमें बता सकते कौन से शास्त्र
- 37:11में यह बात बताई गई है। इससे विष्णु
- 37:12प्रसन्न होते हैं। भगवान ने क्या बोलते
- 37:15हैं? सभी मनुष्य को से मैं बहुत प्रसन्न
- 37:17होता हूं। बोलते हैं भगवान कहते हैं मेरे
- 37:20भक्त मुझे मेरे प्राणों से अधिक प्रिय है।
- 37:22यह थोड़ी बोलते सारे मनुष्य मुझे प्राणों
- 37:23से अधिक प्रिय है।
- 37:29सुनने में थोड़ी बहुत कड़वी लगती है। मीठी
- 37:31मीठी बातें तो यही है जो जो सुनते हो आप
- 37:35इधर उधर वो मीठी मीठी बातें हैं। ये बातें
- 37:37कड़वी लगती है। सत्य यही है और नौतम ठाकुर
- 37:41क्यों बता रहे हैं 116 इतने ही श्लोक है
- 37:44लगभग फिर भी एक श्लोक में अन्य दान बोल
- 37:46रहे नहीं देना चाहिए कहीं भी
- 37:50जो श्री कृष्ण या उनके
- 37:54संबंधित उनके वैष्णव हैं उनके अतिरिक्त
- 37:57कहीं भी दान दिया हुआ अन्य दान कहलाता है।
- 38:03अगली लाइन क्या बोल रहे हैं? इनसे श्री
- 38:05कृष्ण प्राप्ति की संभावना नहीं है। यह सब
- 38:07करने से क्योंकि आप जो कर रहे हो श्री
- 38:10कृष्ण से संबंधित तो है नहीं।
- 38:14भगवान की कामना से वैष्णव को दिया हुआ दान
- 38:17ही निर्गुण दान है। इसके फल स्वरूप श्री
- 38:20कृष्ण भक्ति प्राप्त होती है।
- 38:26हमें निजी रूप से कोई प्रॉब्लम नहीं है।
- 38:27जहां मर्जी कोई भी करे। यह तो सिर्फ हम
- 38:30शास्त्र की बात बता रहे हैं। यदि किसी को
- 38:32अच्छे लगते हैं तो ठीक है। नहीं अच्छे
- 38:34हमें कोई प्रॉब्लम नहीं है। हमें कोई
- 38:36समस्या नहीं है। आप बिल्कुल अपने मनमान
- 38:39तरीके से कर सकते हो। खुली छूट है। भगवान
- 38:43ने दिए तो हम कौन होते हैं रुकने वाले?
- 38:45आपको पूर्ण छूट है। कहीं भी दान दे दो।
- 38:49शराबी को भी दे दो। चाहे हमारा क्या ले
- 38:52जाएगा कोई?
- 38:54हां। यदि शास्त्र की बात सुन रहे हो तो तो
- 38:57हम आपको बता रहे हैं।
- 38:59निजी रूप से कोई समस्या नहीं है। खुल के
- 39:02कहीं भी अनमा विद्यालय चले जाओ कोई कहीं
- 39:05भी हॉस्पिटल में चले जाओ कहीं भी दे दो
- 39:07हमें क्या हमें क्या समस्या है
- 39:19[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 39:21इस शास्त्र में बताया जा रहा है एकथा सर्व
- 39:24तीर्थानी सर्व यज्ञ य दक्षिणा कार्तिकस तू
- 39:28मासस कोटम अपिना ना अरहति संपूर्ण तीर्थों
- 39:33की यात्रा समस्त यज्ञ भी
- 39:37कार्तिक व्रत के बराबर नहीं हो सकते समता
- 39:40नहीं कर सकते क्या चीज समस्त तीर्थों की
- 39:43यात्रा
- 39:48नीलमणि कहां है अभी वृंदावन आए हो कितना
- 39:51मेहनत करनी पड़ी एक जगह एक बारी आने के
- 39:53लिए कितने महीनों से था प्रोग्राम
- 39:56क्या-क्या करना पड़ा पैसे कितने खर्च करने
- 39:58पड़े कि एक तीर्थ में आने का है तीर्थों
- 40:01के तो ये तो तीर्थों के पिताजी हैं
- 40:04वृंदावन पर फिर भी समझाने के लिए तो कितनी
- 40:07बारी कोई जा सकता है सीमित धन
- 40:12सीमित शक्ति
- 40:14कितनी बारी जा सकता है थोड़े से तीर्थों
- 40:16में चले जाए कभी कह रहे समस्त तीर्थ समस्त
- 40:18का म होता है टोटल अब तो शब्दों को ऐसे
- 40:20सुनते इससे कोई फर्क ही नहीं पड़ता आप लोग
- 40:22ऐसे डेड बॉडी की तरह सुन रहे हैं अरे जाओ
- 40:25भाई समस्त तीर्थ समस्त होता है ए वन टू
- 40:29थ्री फोर 5 6 7 8 9 1 लाख दो एक लाख चार
- 40:3311 लाख पांच एक करोड़ जितने तीर्थ हैं
- 40:37समस्त तीर्थों में यज्ञ यज्ञ कभी किया
- 40:40किसी ने कहां है वो राधा चरण कहां है
- 40:45हां यज्ञ किया था ना कितने पैसे लगे थे वो
- 40:48जो सब कलश हो वो सब तो कितने यज्ञ कर लो
- 40:52पैसे ही नहीं होते यज्ञ कहां से करेंगे हम
- 40:54लोग हम लोग आजकल के ना पैसे ना शक्ति ना
- 40:57कुछ समस्त एक वो बोल रहे शब्द सुनो समस्त
- 41:01तीर्थ समस्त यज्ञ एक यज्ञ करने में बैंक
- 41:04बैलेंस शून्य हो जाता है बड़े वाला यज्ञ
- 41:07हो जाए समस्त यज्ञ कर लो समस्त तीर्थ कर
- 41:09लो उसका
- 41:12और एक अगला अक्षर नहीं बोला था मैं
- 41:14दक्षिणा
- 41:15दक्षिणा भी उसी प्रकार की यज्ञ के अनुरूप
- 41:19तो भी कार्तिक समता नहीं कर सकते
- 41:23ये कार्तिक का महत्व है
- 41:27एकतः पुष्करे वास कुरुक्षेत्र हिमालय एकत
- 41:32कार्तिको मास सर्व पुण्यधिको मतः पुष्कर
- 41:37कुरुक्षेत्र हिमालय के निवास से निवास
- 41:40होता है वहां पर रहना कहां पुष्कर हिमालय
- 41:44कभी गए हो हिमालय फोटो में देखा होगा
- 41:48पुष्कर कुरुक्षेत्र हिमालय के निवास के
- 41:51पुण्य फल से भी कार्तिक का पुण्य फल अधिक
- 41:53है। वहां निवास करना घूम के नहीं आना
- 41:58निवास करना
- 42:01सुवर्ण मेरु तुल्यानी सर्वदानानी च एकतः
- 42:06एकतः कार्तिको व्स सर्वदा केशव प्रिय हे
- 42:10वत्स सुमेरु पर्वत अब आंखें खोलना श्लोक
- 42:14सुन के डेड बॉडी की तरह मत सुनना
- 42:19सुमेरु पर्वत तुल्य स्वर्ण दान आपकी भाषा
- 42:23में मतलब पहाड़ सोने का पहाड़
- 42:26सोने का जो झुमरा डालते हो 10 20 उसी में
- 42:30हालत खराब होती है खरीदने में झुमका क्या
- 42:32झुमका बोलते हैं उसको
- 42:35इयरिंग
- 42:39सुमेरू पर्वत तुल्य स्वर्ण दान भी केशव
- 42:41प्रिय कार्तिक वक्त के समान नहीं है। आपके
- 42:44पास कभी सुमेरू के समान गोल्ड लाएगा कोई
- 42:46गलतफहमी है किसी को
- 42:49आ भी जाएगा तो भी कार्तिक के समान उसका
- 42:51कोई मुकाबला नहीं है। यह कार्तिक मास का
- 42:55महात्म है। सुमेरू छोड़ो हम एक बिस्कुट के
- 42:58समान एक दो गोल्ड द नहीं कर सकते। मोबाइल
- 43:01के समान दो 200 400 ग्राम का मोबाइल होता
- 43:05होगा। उसके समान हम गो नहीं कर सकते।
- 43:08अच्छा कर लोगे तो भी क्या मिलेगा? खत्म
- 43:10होने वाला फल। ये अक्षय फल है। कार्तिक
- 43:13मास का फल अक्षय है।
- 43:24हुतम दत्तम तू विप्रेंद्र तपसय व तथा कृतम
- 43:32तद अक्षयंम फलम प्रोक्तम विष्णुना लोक
- 43:36साक्षणा इसका मतलब कार्तिक में हवन किया
- 43:39हुआ दान किया हुआ तप किया हुआ सब अविनाशी
- 43:43फल देता है कार्तिक
- 43:46ये समझ लो यह महासेल लगी हुई है कहते हैं
- 43:49बाय वन गेट वन फ्री नहीं बाय
- 43:53वन गेट 99 फ्री यह भी सस्ता बोल रहे हैं
- 43:56इसमें भी कोई काउंटिंग कर पा रहे हैं
- 43:58कार्तिक में तो काउंटिंग ही नहीं कर सकते
- 44:00हो आप इतना फल है कार्तिक का
- 44:13हे इसका अब श्लोक नहीं बोल रहे समय कम है
- 44:15जो कार्तिक में भगवान दामोदर के मंदिर में
- 44:18रात्रि
- 44:20रात्रि से लेकर सुबह तक जागरण करता है।
- 44:23उसे हजारों गोदान के समान फल मिलता है।
- 44:26जागरण रात को जो करता है। हजारों गोदान एक
- 44:30गाय पता है कितने की आती है? कभी खरीदा
- 44:34है? उसके बाद दो फिर पांच 10 50 100
- 44:42करना है या कितने की गाय थी वो मोबाइल
- 44:44में? तो उसके बाद क्या लिखा है? हजारों
- 44:48गोदान का फल सहस्त्र फलम
- 44:53के समान फल मिलता है।
- 44:55हम तो मतलब हमारे को तो मोबाइल का बिल पे
- 44:59करने के लिए सोचना पड़ता है और बिजली का
- 45:01बिल हम गौ दान करेंगे। सुमेरू पर्वत के
- 45:04सोने का दान हम ही करेंगे। बाकी
- 45:08₹ लाख की एक गाय सहस्रो कर लो फिर मतलब
- 45:11हमारे हमारे मतलब हमारे तो परे ही है
- 45:13निश्चित रूप से।
- 45:17हजारों गोदान चलो हमें क्या उससे ज्यादा
- 45:19मिल रहा है वैसे ही छोटी बात क्यों करें
- 45:24हजारों गोदान के समान फल मिलता है
- 45:31और सुने तुलसी दल पुष्पाण ये यशती
- 45:35जनार्दने कार्तिके सकलम वत्स पापम जन्म
- 45:39आयुतम दहेत जो सज्जन कार्तिक में भगवान पर
- 45:45तुलसी के दल चढ़ाता है। तुलसी के पत्ता
- 45:48हेव उसके हजारों जन्मों के समस्त पाप भस्म
- 45:51हो जाते हैं।
- 45:52तुलसी दल चढ़ाने से
- 45:58कार्तिक में तुलसी जी के दर्शन, स्पर्श,
- 46:01ध्यान, कीर्तन, नमन, स्तवन, आरोपण, सिंचन
- 46:04तथा नित्य पूजन करने वाला
- 46:08जो आराधना करता है वो हजारों करोड़ों अनंत
- 46:10युगों तक भगवान के धाम में वास करता है।
- 46:14तुलसी जी का महत्व इतना ज्यादा है कार्तिक
- 46:16में तो पूछिए ही मत
- 46:23सैकड़ों फिर वही बात हमारे फिर वो शब्द
- 46:25सुनना ध्यान से डेड बॉडी नहीं सुनेगी
- 46:28सैकड़ों यज्ञ एक यज्ञ कर राधा चरण एक तो
- 46:32हमारा व्यक्ति है जिसने करा है उसको पता
- 46:33है यज्ञ करना का मतलब क्या होता है
- 46:37सैकड़ों यज्ञ
- 46:39सैकड़ों तो हमारे पास रुपए भी नहीं है
- 46:43यज्ञ कहां से करेंगे
- 46:44एक का यज्ञ होता है कोई एक का तो सैकड़ों
- 46:49यज्ञ व अनेक रत्नों कभी रत्न पहना है
- 46:53महंगे वाला अनेक का मतलब होता है मैं नहीं
- 46:58सैकड़ों यज्ञ व अनेक रत्नों के दान खुद
- 47:01पहन नहीं सकते कभी जीवन में वो दान करने
- 47:05से जो पुण्य प्राप्त होता है कार्तिक
- 47:07कार्तिक में तुलसी दलों से भगवान की पूजा
- 47:10करने से वो प्राप्त हो जाता है
- 47:13सैकड़ों यज्ञ
- 47:15वह अनेक रत्नों का दान सिर्फ तुलसी दल
- 47:19आपको तुलसी छोटा लगता है
- 47:22एक भाई वो कथा थी मैं बोलूंगा आप लोग छोटे
- 47:27में समझ तराजू वाली कथा थी तुलसी पत्र
- 47:29डालने से वो कृष्ण का जैसे डाला रत्न
- 47:32वगैरह डाल रहे तो कृष्ण नीचे ही बैठे हैं
- 47:35तराजू में वही इनके सामान क्या ले आए एक
- 47:38तुलसी दल डाला कृष्ण ऊपर तुलसी दल नीचे यह
- 47:41है तुलसी दल की महिमा
- 47:46कार्तिक में भगवान के मंदिर की परिक्रमा
- 47:49है सब श्लोक पर समय नहीं है श्लोक बोलने
- 47:52टाइम चला जाए भगवान के मंदिर की परिक्रमा
- 47:55करने वाले को पग पग में अश्वमेद यज्ञ का
- 47:57फल प्राप्त होता है
- 48:00जो कार्तिक में भगवान के सम्मुख पदों का
- 48:02पदों को गाता हो बजाता हो नाचता हो नृत्य
- 48:07करना पदों का गान करना बजाना करताल मृदंग
- 48:14जो करता है उसको लभते चा अक्षयम पदम वो पद
- 48:19की प्राप्त होती है जिस जो क्षय नहीं होता
- 48:21क्या पद है वो भगवान की दासा भगवान की
- 48:24सेवा भगवान के धाम अक्षय पदम
- 48:31सभी पित्र हमारे जो पूर्वज हैं पित्र अब
- 48:34श्लोक बोले कि नहीं बोले क्या
- 48:39भविष्यति कुलेकम पित पित्र भक्त सुतो भूमि
- 48:44कार्तिके दीप दानेन यशति केशवम
- 48:48सभी पित एक पित नहीं सभी पितर ये याचना
- 48:53करते हैं आशा करते हैं यूं करके टकटकी
- 48:55लगाए खड़े हैं क्या कोई ऐसा हमारे खानदान
- 48:58में कुल में कोई ऐसा भक्त होगा जो कार्तिक
- 49:01में दीप दान दीप दान करके भगवान को
- 49:04संतुष्ट करे
- 49:06क्या कोई होगा मेरे कुल में
- 49:10जो कार्तिक में श्री कृष्ण को दीप दान
- 49:12करेगा। पितर आशा लगाए खड़े रहते हैं। उनके
- 49:15हमारे सबके पितों की आशा तो पूरी हो गई।
- 49:19कर ही रहे हैं सालों से। ये है महत्व।
- 49:25वो जो वो श्लोक मिल गया जो हम ढूंढ रहे थे
- 49:27ना आपको ये सुनो।
- 49:30भगवान के मंदिर को जो अब श्लोक लंबा है
- 49:34[हंसी] चलो श्लोक भी बड़ा सुंदर है दीप पं
- 49:38रचना सबा अंतरम हरे आगे नहीं पढ़ते भगवान
- 49:44के दीप पंक्तेश यानी दीपों की पंक्ति जो
- 49:47लगाता है भगवान के मंदिर को बाहर और भीतर
- 49:51मंदिर के बाहर और भीतर जो दीपों की पंक्ति
- 49:54से सजाता है उसको भगवान विष्णु के समान
- 49:58समझ समझा जाता है भगवान के समान ही उनके
- 50:02मंदिर में उनका उनका भक्त नहीं लगाएगा तो
- 50:04और कौन लगाएगा एक बात दूसरी बात अगला अगला
- 50:07श्लोक बहुत महत्वपूर्ण है कदा भविष्यत
- 50:11यमाकम संगम पूर्व कर्मण देवता कह रहे हैं
- 50:15देव लोग ऐसी प्रतीक्षा करते हैं हमारे
- 50:17पूर्व जन्म पूर्व कर्मों से
- 50:21ऐसा कब समय आएगा जब भगवान के मंदिर में
- 50:23दीपक लगाने वाला सज्जन हमारे समागम होगा
- 50:27हमें उसका संग मिल जाएगा जो भगवान के
- 50:29मंदिर में दीप लगाता है। देवता देव लोक
- 50:32में ये
- 50:34ऐसे याचना प्रतीक्षा करते हैं। करते रहे
- 50:38हैं। करते रहते हैं। ऐसे आप करते तो कब
- 50:41मैं अमीर रहूंगा?
- 50:44कब होती है वो प्रतीक्षा? खत्म ही नहीं
- 50:47होती। ऐसे देवताओं की प्रतीक्षा खत्म। कौन
- 50:50मिलेगा वो भक्त जो मंदिर में दीप लगाता
- 50:53है। ऐसे कभी ना खत्म होने वाली। जैसे काम
- 50:57होता है। काम
- 50:59कामस्ट
- 51:03कामाग नहींमाग
- 51:06सेंसुअल डिजायर्स वो कभी खत्म नहीं होते
- 51:08कब मैं इसको वैसे ही देवताओं के डिजायर
- 51:11खत्म कब मुझे वो समागम मिलेगा जो भक्त
- 51:14मंदिर में दीपों की पंक्ति लगाता है
- 51:39यह तो
- 51:42आपने सुना
- 51:44कि
- 51:47[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 51:48जो कार्तिक में व्रत करता है उसको यह फल
- 51:51मिलता है।
- 51:53अब जो कार्तिक का व्रत नहीं रखता उसका
- 51:56क्या हर्ष हर्ष होता है? यह भी तो शास्त्र
- 51:59बताएंगे ना कि भाई दूध पियोगे तो क्या लाभ
- 52:03है? यही बताएंगे डॉक्टर दूध नहीं पियोग
- 52:05क्या नुकसान? यही है नुकसान। कार्तिक फल
- 52:07करो क्या लाभ है? यही लाभ है। नहीं करोगे
- 52:09वो भी सुन लो।
- 52:11सप्त जन्म अर्जितम पुण्यम वृथा भवती नारदा
- 52:15भगवान कृष्ण नारद को बोल रहे हैं साक्षात
- 52:17कृष्ण बोल रहे हैं डायरेक्ट
- 52:20सप्त जन्म अर्जितम पुण्यम वृथा भवती नारदा
- 52:24सात जन्मों के लिए जो पुण्य है अकित्वा
- 52:27कार्तिकेय मासे वैष्णव व्रतम उत्तमम
- 52:31तो कार्तिक मास का जो वैष्णव के लिए उत्तम
- 52:33व्रत है जो उसका पालन नहीं करता चाहे
- 52:35हमारे पिताजी हो या आपके पिताजी हो कोई के
- 52:37पिताजी हो कोई के माताजी हो कोई के कोई हो
- 52:41जो नहीं करता
- 52:44सात जन्मों के पुण्य खत्म हो जाते हैं
- 52:46उसके सप्त इससे सरल संस्कृत मिलेगी सप्त
- 52:50जन्म अर्जितम पुण्यम वृथा भवती नाथा खत्म
- 52:54बेस्ट
- 52:55ये तो प्रारंभ है बच्चा अभी
- 52:59नियमेन बिना विप्रा कार्तिक यक्षिप नर
- 53:02कृष्ण परांग मुखातस यस उल्लभ
- 53:10जो कार्तिक का व्रत नहीं रखता आप यह सोचो
- 53:16एक छोटा बच्चा पैदा हुआ है उसकी मां उससे
- 53:20मुख हो जाए परांग मुख हो जाए उल्टा मुंह
- 53:21कर ले मैं तेरे को दूध नहीं पिलाऊंगा उसकी
- 53:22क्या गति है खत्म
- 53:26तो यह जो कार्तिक का व्रत नहीं लगता ये
- 53:28शब्द सुनिए कृष्ण परांग मुख तस कृष्ण उसके
- 53:32मुख उसकी तरफ मुंह फेर लेते हैं
- 53:34कार्तिक व्रत अगर नहीं रखा तो कृष्ण हमारे
- 53:36से मुंह फेर लेंगे
- 53:40कृष्ण मुंह फेर लेंगे। फिर हमारी क्या गति
- 53:43होगी या किसी की भी यह विचार का विषय है।
- 53:47हम
- 53:51अरे हम कहते हैं भाई अब कोई विशेष व्रत
- 53:54अरे दीप तो दिखा सकते हो।
- 53:57किसी के घर वालों भाई दीप तो दिखा दो
- 53:59कृष्ण भाई। इसमें कौन से तुम्हारे पैसे लग
- 54:00जाएंगे? 50 पैसे ही लगेंगे। उसमें क्या लग
- 54:04जाएगा तुम्हारा दीप दिखाने में? टीप दिखा
- 54:06दो और कुछ नहीं गिलास तो तुम्हारे घर में
- 54:09होगा भगवान का अपना ही गिलास होगा कोई तो
- 54:12गिलास होगा पानी कुछ तो पीते होगे ना और
- 54:14तुलसी का पत्ता पानी ठाकुर जी पी लो भाई
- 54:17इतना कोई मंत्र नहीं कोई कुछ नहीं इससे
- 54:20तुम्हारे कार्तिक व्रत हो गया मतलब इससे
- 54:22सर तुम्हें और क्या बताएं कुछ लगा? दीप
- 54:27पानी यह भी नहीं बोल रहे बिस्कुट लगाओ
- 54:28पांच पैसे का पार्ले जी भी नहीं बोल रहे
- 54:31बोले पानी फ्री का तुलसी पत्ता फ्री का
- 54:35लगा दो वो
- 54:39इतना ही समझा दो घर मम्मा अच्छा होता है
- 54:41पापा अच्छा होता है इतना ही समझा दो अच्छा
- 54:44बड़े अच्छा होता है
- 54:50हमारे
- 54:52बाबा ने भी जो आप प्रवचन जो है YouTube
- 54:55में आखरी
- 54:56और सुना कार्तिक जो श्लोक बोला है बाबा जी
- 54:58ने भी पद्म पुराण से ये
- 55:02सनातन गोस्वामी हरि भक्ति विलास में बताया
- 55:04है अवतन शिप यस्तु मासम दामोदरम प्रियम
- 55:10तिर्यक योति अति सर्वधर्म बहिष्कृता
- 55:14कि जो व्यक्ति कार्तिका मास में व्रत नहीं
- 55:18रखता है
- 55:20उसको पशु पक्षी कुत्ते गधे की योनि
- 55:24प्राप्त होती है उसके बाद मनुष्य तो बनेगा
- 55:25नहीं वो जो कार्तिक मास नहीं रखता। यह
- 55:28शास्त्र बोल रहे हैं। भाई किसी को दिक्कत
- 55:30हो तो हमारे से मत झगड़ा करो। हमारे प्रति
- 55:33मुस्कान रख लो। हम तो कोई गलत बात आपको
- 55:36बोल नहीं रहे हैं। हम तो पोस्टमैन है। भाई
- 55:39का संदेश है। भाई के लिए है। देने के लिए
- 55:43आए हैं। हम
- 55:45भाई बनके
- 55:48सर्व धर्म पर बहिष्कृता कोई धर्म के लिए
- 55:52वो योग्य ही नहीं रह जाता जो कार्तिक का
- 55:53व्रत नहीं। वो कोई योग्यता खो देता है वो
- 55:56सर्वधर्म सर्व स्पष्ट तो शब्द है सर्वधर्म
- 56:00बहिष्कृता सर्वधर्म से बहिष्कृत हो जाता
- 56:03है तिर्य की होती है वापन होती तिर्य की
- 56:05होती पशु पक्षी गधा सूअर ये सब योनि मिलती
- 56:08है उसके
- 56:10हम
- 56:48इतनी बातें तो बताई पर एक इतनी महत्वपूर्ण
- 56:51बात तो बताई नहीं जो अधिकांश लोग
- 56:56क्योंकि पता नहीं है तो अच्छा दामोदर मास
- 56:59से 99% भक्त क्या समझते हैं क्या है मतलब
- 57:02वो मास
- 57:04हां
- 57:06नहीं दीप दान तो सब ठीक है वो ये समझते
- 57:09हैं कि भाई यशोदा मैया ने रस्सी बांधी थी
- 57:13श्री कृष्ण को प्रेम के भक्त में बंधने
- 57:17बंध गए थे। तो क्या गौडिया वैष्णव भी ऐसे
- 57:19ही सोचते हैं?
- 57:22हां तो सुन लीजिए फिर गौडिया वैष्णव
- 57:25कार्तिक व्रत क्यों रखते हैं? भाई इसलिए
- 57:27रखते हैं फॉर वरशिपिंग एंड प्लीजिंग राधा
- 57:30रानी। राधा रानी की अर्चन और प्रसन्नता के
- 57:34लिए रखते हैं। केवल गड या वैष्णव मतलब ही
- 57:36है केवल राधा रानी के लिए जीना और उनके
- 57:39लिए ही मरना। तो व्रत किसी और के लिए
- 57:41करेंगे।
- 57:46प्लीजिंग राधा रानी राधा रानी करुणामई है
- 57:49और एक मास ऐसा ऐसा
- 57:52है कार्तिक मास जिसमें अपनी सारी करुणा वो
- 57:54मास में रख देती है करुणामई अपनी करुणा
- 57:57कहीं रख दें और हमें पता चल जाए तो क्या
- 57:59करेंगे जैसे अमीर व्यक्ति है बिल गेट्स वो
- 58:01धन एक
- 58:06संदूक में रख दे संदूक बोलते हैं संदूक
- 58:08में रख दे तो अब हमारे को पता चल जाए तो
- 58:11हम फट जाएंगे संदूक खोलेंगे निकालेंगे उसी
- 58:13प्रकार से राधा रानी करुणा हम चाहते हैं।
- 58:15तो संदूक क्या है? कार्तिक मास
- 58:18तो राधा रानी का यह राधा रानी अधिष्ठात्री
- 58:22देवी है कार्तिक मास की। राधा रानी
- 58:25कार्तिका देवी बोला जाता है। रूप गोस्वामी
- 58:26कह रहे हैं कार्तिका देवी करुणामई राधा
- 58:30रानी और ऊपर से कार्तिक मास मतलब एक तो
- 58:33होता है सोना। एक होता है सोना सुहागा।
- 58:35करुणामई राधा रानी का कार्तिक मास। उसमें
- 58:39हम यही राधा रानी से यत्न करते हैं,
- 58:42प्रार्थना करते हैं कि हे राधा रानी आप
- 58:44अपने दिव्य करुणा हम पर बरसाए। अरे सब
- 58:47छोड़ो ये सब होता रहेगा। मेरी आवाज तो आ
- 58:49ही रही है।
- 58:50और हमारे इस महीने का लक्ष्य, जीवन का
- 58:54लक्ष्य, हर पल का लक्ष्य केवल क्या होना
- 58:57चाहिए? राधा कृपा कटाक्ष प्राप्त करना।
- 59:00कृष्ण कृपा कटाक्ष नहीं बोल रहे हम। राधा
- 59:03कृपा कटाक्ष प्राप्त करना।
- 59:07उनकी कृपा प्राप्त करना। एक बार करुणा से
- 59:10देख दो स्वामिनी एक बार एक और एक कृपा
- 59:13कटाक्ष [गला साफ़ करने की आवाज़] कर दो।
- 59:14एक बार अरे श्री कृष्ण भी तरसते हैं इस
- 59:18कृपा कटाक्ष के लिए। वो चाहते हैं। इतनी
- 59:19बड़ी वस्तु चाह रहे हैं जो हमें मिल सकती
- 59:22है कार्तिक मास से।
- 59:28स्तव माला में रूप गोस्वामी पाद भी बता
- 59:30रहे हैं राधा रानी को एक श्लोक में
- 59:32कार्तिका देवी और भक्ति रसाम सिंधु में
- 59:36कार्तिक व्रत को ऊर्जा व्रत भी बोला जाता
- 59:38है। ऊर्जा व्रत
- 59:41ऊर् मतलब शक्ति
- 59:44शक्तिपात करना एंपावरमेंट करना
- 59:48और शक्ति का स्रोत कौन है?
- 59:51राधा रानी उजेश्वरी
- 59:55ऊर्जा देने वाली कि ईश्वरी उजेश्वरी राधा
- 59:59राधा रानी कार्तिक की देवी हैं।
- 1:00:07हम भी श्रवण कर सकते हैं करते हैं जो
- 1:00:11यशोदा मैया ने
- 1:00:14श्री कृष्ण को बांधा था पर वो ज्यादा इतना
- 1:00:18घोड़ियों का केंद्र बिंदु नहीं होता कि
- 1:00:21यशोदा कृष्ण के मूर्ति ले आओ साथ में पूजा
- 1:00:23ये सब नहीं हां सुन सकते हैं हम
- 1:00:31राधा रानी को यशोदा मैया ने तो बांधा ही
- 1:00:33था। परंतु उसके अलावा भी
- 1:00:39जब श्री कृष्ण किशोरावस्था में थे तब की
- 1:00:42हम आपको घटना बता रहे हैं। यह घटना है
- 1:00:52भविष्य पुराण के उत्तरखंड में एक बार एक
- 1:00:56बार कार्तिक मास की पूर्णिमा को श्री
- 1:00:59कृष्ण जब मिलने आने आने वाले थे तो देरी
- 1:01:01से आए।
- 1:01:03लेट हो गए थे तो राधा रानी क्या हो गई
- 1:01:05मानिनी मान ग्रहण कर लिया नाराज हो गई
- 1:01:09हमारी भाषा में नाराज हो गई मान ग्रहण कर
- 1:01:12लिया मानिनी हो गई उनसे बात करने को राजी
- 1:01:16नहीं है
- 1:01:18तो राधा ने अपने भोए सी कौड़ी और अपना
- 1:01:22वस्त्र द्वारा निर्मित एक स्वर्ण जड़ित
- 1:01:24डोरी से श्री कृष्ण की कमर को बांध दिया
- 1:01:29जब कृष्ण को बांध दिया गया तो उसके बाद
- 1:01:34कृष्ण ने बहुत प्रकार से मीठी मीठी बातें
- 1:01:37करी चाटुकारिता करी एंज नहीं हैगा
- 1:01:42ऐसा नहीं है ऐसा हुआ वो दीपावली का और ये
- 1:01:48और मां ने रोक लिया और ये तुम समझती नहीं
- 1:01:51हो कैसे बताऊं इस प्रकार से बहुत मान किया
- 1:01:56चाटुकारिता करी
- 1:01:58और पूरा डिटेल सुनाई है कि ऐसा हुआ फिर
- 1:02:00उसके बाद मां ने ये किया उसके उसके बाद
- 1:02:02ऐसा फिर मेरे को ऐसे अब तुम बताओ एकदम से
- 1:02:05कैसे याद खुद बताओ
- 1:02:10हां पूरा उत्सव का विवरण सुनाया पूरा पूरा
- 1:02:15डिटेल में मीठे-मीठे शब्दों से राधा रानी
- 1:02:17को प्रसन्न किया बदले में
- 1:02:20राधा रानी ने दामोदर को मुक्त कर जो सबको
- 1:02:23मुक्त करते हैं उनको राधा रानी ने मुक्त
- 1:02:25किया बोलो राधा रानी की
- 1:02:27जय
- 1:02:29इसीलिए उनका नाम पड़ा निवी दामोदर
- 1:02:31नेवी दामोदर
- 1:02:35राधा रानी ने उन्हें बंधनों से मुक्त
- 1:02:37किया। हम इन नेवी दामोदर की उपासना करते
- 1:02:40हैं या सरल भाषा में दामोदर हमारे लिए
- 1:02:44दामोदर राधा दामोदर ही है हमेशा से और वही
- 1:02:47रहेंगे।
- 1:03:03उत्तराखंड भविष्य पुराण में कथा है। कोई
- 1:03:06पढ़ना चाहे तो देख सकते हैं। थोड़ी मेहनत
- 1:03:08करनी पड़ेगी। भविष्य पुराण ले आना पड़ेगा।
- 1:03:10उत्तराखंड खोलना पड़ेगा। उसके बाद या हमसे
- 1:03:13डायरेक्ट सुन लो।
- 1:03:16और राधा रानी का आठवां नाम है। रघुनाथ दास
- 1:03:18गोस्वामी ने नाम दिए राधा रानी के। उसमें
- 1:03:20आठवां नाम है कार्तिको कीर्तिश्वरी।
- 1:03:25शी इज अ क्वीन ऑफ द मंथ ऑफ कार्तिक।
- 1:03:28कार्तिक की ईश्वरी। क्वीन ऑफ द मंथ ऑफ
- 1:03:31कार्तिक
- 1:03:49ऊर्जेश्वरी
- 1:03:51ऊर्जा जैसा हमने बताया ऊर्जेश्वरी का मतलब
- 1:04:11हम सब हैफासड है तो जो हर इच्छा से जो
- 1:04:14सुनने को मिल गया वही मिल गया बस
- 1:04:23एक तो सबसे इंपॉर्टेंट बात तो अभी आ ही
- 1:04:25नहीं अब आएगा सबसे इंपॉर्टेंट
- 1:04:29चलिए
- 1:04:43कार्तिक मास में
- 1:04:46प्रातः काल
- 1:04:48स्नान और भगवान की पूजा करनी चाहिए। उस
- 1:04:53समय कथा श्रवण उत्तम माना गया है। कब उठना
- 1:04:56चाहिए कार्तिक में?
- 1:04:59प्रातः काल।
- 1:05:15हमारी तो थोड़ी नजर कमजोर है। जिसकी नजर
- 1:05:17थोड़ी ठीक है। संदीप नज़र ठीक है ना आपकी?
- 1:05:19यहीं से भी दिख जाएगा बस। क्या लिखा हुआ
- 1:05:21है? दूसरा पॉइंट।
- 1:05:26पढ़ो पढ़ो लाइन पढ़ो स्नान सूर्य
- 1:05:3136 मिनट पहले
- 1:05:32बस बस बस बस बस
- 1:05:35क्या बोला गया प्रातः स्नान कौन सा समय
- 1:05:37बताया गया है
- 1:05:40सूर्योदय से
- 1:05:423 घंटे 36 मिनट पहले बाद में नहीं सोचा
- 1:05:46सूर्योदय 6:30 है तो मैंने कब उठना है 7 8
- 1:05:4810 बजे उठ जाओ नहीं सूर्योदय से 3 घंटे 36
- 1:05:52मिनट पहले बताया गया स्नान करना
- 1:05:54तो कब हो गया मोटा-मोटा
- 1:05:57जैसे अभी 6:30 6:00 बजे का सूर्योदय होता
- 1:05:59है
- 1:06:01तो हमने फारसी में बोला हुआ है आपको इतने
- 1:06:03समय से आपको समझ नहीं आती बात
- 1:06:07कब से बोल रहे हैं
- 1:06:10यही टाइम है 6:00 बजे को 3:30 से कम करो
- 1:06:13बाकी 2:24 बनेगा फिर हम तो फिर भी 6 मिनट
- 1:06:17ज्यादा दे रहे थे
- 1:06:22अभी तो ये प्रारंभ है इसमें तो
- 1:06:26प्रातः काल उठ के भगवान की पूजा करनी
- 1:06:28चाहिए।
- 1:06:30उस समय कथा श्रवण उत्तम माना गया। हम क्या
- 1:06:32बोलते हैं? क्या करो? सुबह क्या करो? ये
- 1:06:34क्या बोले? स्नान कब करो?
- 1:06:372:30 बजे। और हम क्या बोलते हैं? स्नान के
- 1:06:39समय क्या करो?
- 1:06:43इसको यूज़ करो ना। इसको ये क्या बोल रहे
- 1:06:46हैं? उस समय कथा श्रवण उत्तम माना गया।
- 1:06:50यही तो बोल रहे हैं। हम बोलते अब यह कौन
- 1:06:54सा ग्रंथ है? बस अब मान लो हमारे लिए मान
- 1:06:58लो शास्त्र किसी के तो मान लो। बात तो एक
- 1:07:01ही है दोनों की।
- 1:07:08[गला साफ़ करने की आवाज़]
- 1:07:16सुबह उठना कितना महत्वपूर्ण है ये तो आपको
- 1:07:18बताया। अब देखिए एक श्लोक भी है स्पेशली
- 1:07:22इसी के लिए श्लोक है। कैन यू बिलीव इट?
- 1:07:35ये देखो ये किसी को भी श्लोक समझ आ जाएगा।
- 1:07:38इतनी इतना आसान संस्कृत है। कार्तिकेयम
- 1:07:42करिश्यामिने
- 1:07:44करना है। कार्तिकेयम
- 1:07:48करिश्यामिश्याम
- 1:07:51प्रातः स्नानम प्रातः स्नानम
- 1:07:54जनार्दन जनार्दना
- 1:07:56प्रीतार्थम
- 1:07:57प्रीतार्थम
- 1:07:58तव
- 1:07:59तव
- 1:08:00देवेश
- 1:08:01देवेश
- 1:08:02दामोदर
- 1:08:04दामोदर
- 1:08:04मयास
- 1:08:05मयास
- 1:08:06हे हे जनार्दन हे दामोदर आपकी प्रसन्नता
- 1:08:10के लिए मैं कार्तिक में प्रातः स्नान कर
- 1:08:14ये मत
- 1:08:15स्पष्ट बोल रहे हैं ये बोल के कर रहे हैं
- 1:08:18कार्तिक में करिश्याम करूंगा प्रातः
- 1:08:21स्नाने जनार्दन आपकी प्री लिखा हुआ है
- 1:08:23प्रीति अर्थम प्रीति अर्थम 2:30 बजे उठकर
- 1:08:28स्नान करूंगा आपकी प्रसन्नता के लिए हे
- 1:08:31दामोदर
- 1:08:33आज्ञा है शास्त्र भगवान की आज्ञा है अभी
- 1:08:36हम टॉपिक इसी टॉपिक पे हम हम लगे रहेंगे
- 1:08:39थोड़ी देर तक
- 1:08:41पहला पॉइंट क्या बोला
- 1:08:45सुबह उठकर स्नान करना है पूजा करनी करनी
- 1:08:46है और कथा श्रवण टाइम क्या था 2:30 अब
- 1:08:53क्या बताया गया है मंत्र कि मैं अब इसी
- 1:08:57टॉपिक पे चलेंगे सिर्फ हम
- 1:09:07ये कौन सा ग्रंथ है
- 1:09:09ये कौन सा है पद्म पुराण सेम चीज सोचो एक
- 1:09:13श्लोक जो स्कंद पुराण में भी सेम हो और
- 1:09:15पद्म पुराण उसे कितना महत्व होगा और ना
- 1:09:19किसी को स्कंद पुराण से लेना देना पद्म
- 1:09:21पुराण से और लेना देना दोनों की बात भी
- 1:09:23पकड़ लो ये तो कितनी विशेष बात है ये देखो
- 1:09:25फिर वही कार्तिकेय करिश्याम प्रातः स्नानम
- 1:09:29जनार्दन प्रीत्थ देव दामोदर मया स दोनों
- 1:09:34जगह ये श्लोक है दोनों जगह डिो सेम श्लोक
- 1:09:38है
- 1:09:52ये देखो
- 1:09:59श्री कृष्ण कहते हैं कि दो व्रत तो मुझे
- 1:10:01बहुत प्रिय है। एक एकादशी और एक कार्तिक
- 1:10:04और एक कार्तिक में एकादशी। तो उसका तो
- 1:10:06कहना ही क्या तो अगर हो सके तो व्यक्ति को
- 1:10:08निर्जला रखनी चाहिए और एक रात्रि जागरण
- 1:10:11करना चाहिए
- 1:10:13और
- 1:10:15कार्तिक के महीने में जो प्रातः काल स्नान
- 1:10:18करते हैं वो महापात की भी हो भयंकर पाप के
- 1:10:21तो भी मुक्त हो जाते हैं जो स्नान स्नान
- 1:10:23नहीं करते सोए रहते हैं तो उनकी किस्मत भी
- 1:10:26सोई रहती है
- 1:10:31और सुनिए जो मनुष्य कार्तिक में स्नान
- 1:10:35स्नान मतलब प्रात स्नान मतलब 12 बजे 11
- 1:10:38बजे 10 बजे 8:00 बजे 7:00 बजे स्नान नहीं
- 1:10:40स्नान मतलब सुबह स्नान कार्तिक में स्नान
- 1:10:44जागरण दीप दान और तुलसी वन का जो पालन
- 1:10:46करते हैं वो साक्षात विष्णु के स्वरूप है
- 1:10:48भगवान के स्वरूप हमको कई गुरु को भगवान के
- 1:10:51स्वरूप मानने में हमारे बुद्धि तर्क लगाती
- 1:10:53है अरे भक्त को भगवान का स्वरूप मानना
- 1:10:56चाहिए जो ये सब करते हैं गुरु में मनुष्य
- 1:10:58बुद्धि ला तो उसका सर्वनाश ही होता है ऐसे
- 1:11:04जो भगवान के मंदिर में कृष्ण मंदिर विष्णु
- 1:11:06मंदिर में झाड़ू देते हैं। स्वास्तिक आदि
- 1:11:08लगाते हैं। वो बनाते हो ना वो पाउडर वाली
- 1:11:11कहां है वो पाउडर बना लगाते हो ना आप लोग
- 1:11:15वो स्वास्तिक वगैरह निवेदन करते हैं।
- 1:11:18हम
- 1:11:21वो देवताओं के लिए वंदनीय हो जाते हैं।
- 1:11:24देवताओं के लिए वंदनीय और जो ये लोग अजन्म
- 1:11:28करते हैं उनका क्या कहना है? अजननी पूरा
- 1:11:31जीवन ही कार्तिक है। भाई सुबह उठ रहा जीवन
- 1:11:34ही कार्तिक है। पूरा
- 1:11:37उनका एक शब्द भी बोल रहे उनका तो कहना ही
- 1:11:39क्या है ये
- 1:11:43हां
- 1:11:55अब पानी अब स्नान तो करें और डिटेलिंग जान
- 1:11:58लेनी चाहिए स्नान के बारे में। गर्म जल की
- 1:12:00अपेक्षा ठंडे जल में स्नान करना 10 गुना
- 1:12:03पुण्य देता है।
- 1:12:05बस अभी नवंबर आ गई है। दिसंबर भी आएगी।
- 1:12:10ये तो कार्तिक की बात है। हम तो उसके बाद
- 1:12:12भी वही कह रहे हैं। वही अच्छी बात है।
- 1:12:1650 के तो हो ही गए हैं। हम कर सकते आप लोग
- 1:12:21अभी तो
- 1:12:28गर्म जल की अपेक्षा ठंडे जल में स्नान
- 1:12:30करना 10 गुना अधिक है। उससे 100 गुना अधिक
- 1:12:32होता है बाहरी कुएं में। उससे अधिक ये ये
- 1:12:35ये ये सिंधु कृष्णा वेणी यमुना सरस्वती
- 1:12:39उससे अधिक गोदावरी नर्मदा आगे आगे आगे आगे
- 1:12:43आगे आगे आगे आगे आगे जाते अंत में आता है
- 1:12:46कि बद्री आश्रम से अयोध्या श्रेष्ठ है।
- 1:12:49स्नान करने में अयोध्या से गंगा द्वार
- 1:12:51गंगा द्वार से कनखल कनखल से भी श्रेष्ठ है
- 1:12:53मथुरा यानी कि वृंदा क्योंकि कार्तिक में
- 1:12:55स्वयं वहां राधा कृष्ण स्नान करते हैं।
- 1:13:01हमारे लिए सारांश 2:30 बजे उठना है अपने
- 1:13:04घर में स्नान कर लेना है।
- 1:13:07वृंदावन में सुबह वृंदावन में कर लेना। ये
- 1:13:09सारांश अपने लिए ये ना हो कि हम गुणगांव
- 1:13:12सोए असली बात को भूल जाए। बोले वही बन
- 1:13:14जाए। बांके बिहारी लाल की
- 1:13:18ये सब नहीं चलेगा।
- 1:13:21भक्ति करनी है तो मेहनत करनी पड़ेगी।
- 1:13:23जितना डालोगे शक्कर उतना होगा मीठा।
- 1:13:27जितना गुड में ऐसे बोलते हैं ना हमारे
- 1:13:30पंजाबी लोग
- 1:13:34देखो फिर से वही स्कंद पुराण कार्तिक मास
- 1:13:37में जो भक्त प्रातः काल स्नान करके पवित्र
- 1:13:40हो कोमल दल से भगवान दामोदर की पूजा करता
- 1:13:43है वह निश्चित रूप से मोक्ष प्राप्त मोक्ष
- 1:13:45मतलब यहां भगवत प्राप्ति है मोक्ष प्राप्त
- 1:13:47करता
- 1:13:49सुबह उठना कार्तिक या कोई भी महीना अपने
- 1:13:52तो सारे कार्तिक है 12 महीने तो तुलसी दल
- 1:13:56से पूजन करना नहा के
- 1:14:05देखो आपके लिए देखो क्या करना पड़ता है
- 1:14:07मेरे को तो इससे कोई लेना देना नहीं आपको
- 1:14:08पता ही है आपके लिए बता रहे हैं सिर्फ
- 1:14:13अगेन इस कार्तिक मास में जो श्रेष्ठ
- 1:14:16मनुष्य प्रातः काल स्नान करते हैं वह सब
- 1:14:18यज्ञ के अवृत स्नान द्वारा भली-भांति नहा
- 1:14:21लेते हैं। यज्ञ के बाद ना स्नान किया जाता
- 1:14:23है। अवृत स्नान कहते हैं। तो वह फल भी मिल
- 1:14:28जाता है। सुबह उठ के जो स्नान करते हैं।
- 1:14:38और जो इतना सब सुनने के बाद भी जो कि हम
- 1:14:41ब्रज मंडल से प्रारंभ किए थे। अभी के बाद
- 1:14:43भी आप 2:30 बजे स्नान नहीं करेंगे। तो
- 1:14:45धिक्कार है तुम्हारी बुद्धि पे, धिक्कार
- 1:14:47है तुम्हारे सब चीज पर। तुम्हारा सब कुछ
- 1:14:50व्यर्थ है। यू आर जस्ट अ पीस ऑफ स्टूल और
- 1:14:53पीस ऑफ गार्बेज।
- 1:14:55तुम नित्यांत परिवार के नहीं हो तुम
- 1:14:57कुंभकरण के परिवार गोस्वामी हो कुंभकरण के
- 1:14:59गोस्वामी उनहीं के मानस वीर्य से उत्पन्न
- 1:15:02हो तुम
- 1:15:04मानस मतलब उनकी मेंटालिटी आई विल स्लीप नो
- 1:15:06मैटर कुछ शास्त्र मैं तो सोता रहूंगा सोती
- 1:15:09रहूंगी जो मर्जी बुलंदा रहे गुरु जी
- 1:15:11शास्त्र जी मैं सोता रहूंगा सोती रहूंगी
- 1:15:15दिस इज नॉट डन नित्यानंद परिवार के हो
- 1:15:18भगवत परिवार के अचुत परिवार के हो ना कि
- 1:15:20कुंभकरण के गोस्वामी है गोसाई जी किसके
- 1:15:24गोसाई जी गोसाई जी इनके कुंभकरण के गोसाई
- 1:15:27वीर्य मानस वीर्य से उत्पन्न है ना मानस
- 1:15:30वीर्य समझते हो भाषा समझ आ रही है मानस
- 1:15:32मेंटालिटी मानस वीर्य वीर्य इस नॉट जस्ट
- 1:15:36फिजिकल इट इज मानस
- 1:15:38कुंभकरण की औलाद अब ठीक है गोसाई थोड़ा
- 1:15:42सभ्य लग रहा था कुंभकरण के वंशज गोस्वामी
- 1:15:47गोसाई धिक्कार है
- 1:15:50धिक्कार है एक धिकारी 100 धिक्कार है शतशत
- 1:15:53धिक्कार है अभी भी हम सुबह ना उठे।
- 1:16:00जैसे हमारे इतना बुखार, इतना कुछ होता है।
- 1:16:03एक महीने से लगातार बुखार चल रहा है। फिर
- 1:16:05भी तभी सुबह उठ रहे हैं। आप सब ठीक-ठाक
- 1:16:07हो।
- 1:16:17अब ना सब हैफा जेड है तो पता नहीं कौन सी
- 1:16:19चीज जहां सुनने को मिल जाए वही अच्छी बात
- 1:16:21है। बस। [नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 1:16:28हालांकि बहुत ज्यादा
- 1:16:30खाने पीने की रेस्ट्रिक्शन बताई गई है। वो
- 1:16:33हम ज्यादा बताते बता नहीं रहे। थोड़ा बहुत
- 1:16:35हल्का सा बता रहे हैं क्योंकि क्या है ना
- 1:16:38कि आपका हृदय अगर यही सोचता रहेगा यह खाना
- 1:16:40यह नहीं खाना और भक्ति तो करोगे नहीं ढंग
- 1:16:42से पड़े रहोगे उसका कोई फायदा नहीं है तो
- 1:16:46जो थोड़ी बहुत चीजें जो काफी जगह बोली गई
- 1:16:49है वही बता रहे हैं उड़द नहीं खाएं शहद ना
- 1:16:52लें राजमा ना लें
- 1:16:56ये हम बता रहे हैं बाकी तो बहुत चीजें
- 1:16:59बहुत का मतलब है इतने कि आपके होश उड़
- 1:17:01जाएंगे और हम वो नहीं बोल
- 1:17:05सरल कचौड़ी उड़द
- 1:17:09राजमा शहद
- 1:17:15अन्नदान करना चाहिए
- 1:17:17वैष्णव पुरुषों के साथ वार्तालाप करनी
- 1:17:19चाहिए
- 1:17:29ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए यानी कि
- 1:17:32विवाहित हो तो अपने पत्नी पत्नी के साथ भी
- 1:17:35नहीं करना। अविवाहित हो तो किसी के साथ
- 1:17:38विचार ही नहीं बनना चाहिए। जो यह कर लेगा
- 1:17:40तो उसका तो सर्वनाश निश्चित है। इसको
- 1:17:43बताएंगे मायापुर में होलसेल में किसी दिन
- 1:17:45हमारी इच्छा है। पर जब भगवान ने प्रेरणा
- 1:17:50करी सोचा हुआ है बताने का। मायापुर में
- 1:17:52क्यों सोचा है वो भी हमको पता है। तो देखो
- 1:17:55हर इच्छा कब होएगी?
- 1:18:00हम सोचते हैं करवाते तो वही है।
- 1:18:16हां यह हम देख रहे थे मिलन जैसे प्रारंभ
- 1:18:18में भी बताया था अभी फिर से बता रहे हैं
- 1:18:21कि आश्विन पुक्ष यह जो एकादशी पर भगवान को
- 1:18:24नमस्कार करके उनसे कार्तिक कार्तिक व्रत
- 1:18:27करने की आज्ञा प्राप्त भगवान से गुरु से
- 1:18:30या भगवान से दोनों से आज्ञा लेके
- 1:18:34आदेशावली के अनुसार मनमाना नहीं
- 1:19:25गाजर वैसे हींग भी नहीं लेनी चाहिए हींग
- 1:19:30[गला साफ़ करने की आवाज़]
- 1:19:31व्हाट इज मस्टर्ड ऑयल?
- 1:19:35हम तो नहीं खा लेते ना।
- 1:19:38ये भी मना किया गया कार्तिक ने।
- 1:19:48और अष्टकम वगैरह करने चाहिए। राधिका
- 1:19:51अष्टकम दामोदर अष्टकम
- 1:19:56गुरु अष्टकम नित्यानंद अष्टकम ये सब करना
- 1:20:00चाहिए अध्ययन बढ़ाना चाहिए
- 1:20:04जप बढ़ा सकते हैं मंत्र बढ़ा सकते हैं
- 1:20:08परिक्रमा बढ़ा कर सकते हैं या बढ़ा सकते
- 1:20:10हैं अर्चन कर सकते हैं या बढ़ा अर्चन एवन
- 1:20:13क्वालिटी का कर सकते हैं बेस्ट से बेस्ट
- 1:20:14बना के भोग लगाएं बेस्ट से बेस्ट वो बनाएं
- 1:20:18जो हम और हमारे परिवार में कोई नहीं खाएगा
- 1:20:20इसको बोला जाता है निष्काम सेवा क्योंकि
- 1:20:23जब बैक ड्रॉप में आपके बनाने के यही होता
- 1:20:25है मैं नहीं खाऊंगी ना गुड़िया न देगी
- 1:20:29वो सारा चौपट हो गया गुड्डा गुड़िया सबको
- 1:20:32छोड़ दिया सारे गुड्डों को सिर्फ भगवान के
- 1:20:36पास उसके बाद ईश्वर जाने किसके पास जाएगा
- 1:20:39परिवार के अलावा ये निश्चित है कि उनके
- 1:20:42पास नहीं जाएगा तब तो होगी निष्काम सेवा
- 1:20:45नहीं तो वही सोच के बना रहे हैं अंदर से
- 1:20:48पता है ये तो बेटे को को पसंद है ये तो
- 1:20:51महाराज जी को कति जी महाराज को पसंद है
- 1:20:55ना बनाओ बढ़िया पर उनके लिए सिर्फ
- 1:21:03यह लिखा हुआ है कि बिफोर स्टार्टिंग
- 1:21:05कार्तिक व्रत यू शुड वरशिप स्पिरिचुअल
- 1:21:07मास्टर एंड टेक ह ब्लेसिंग्स फॉर सक्सेस
- 1:21:11आशीर्वाद लेके
- 1:21:13फिर कार्तिक व्रत का प्रारंभ करना चाहिए
- 1:21:31अब जो कार्तिक व्रत रखते हैं और जो नहीं
- 1:21:34रखते उनमें क्या-क्या फल का भेद आता है?
- 1:21:37वो क्या बता रहे हैं कि यह पद्म पुराण में
- 1:21:41बताया गया है
- 1:21:44इंद्र आदि देवता ध्यान दीजिएगा। इंद्र आदि
- 1:21:48देवता जो हैं वह भगवान की आज्ञा से
- 1:21:51प्रेरित होकर जो कार्तिक व्रत रखता है
- 1:21:54उसकी रक्षा करते रहते हैं। बॉडीगार्ड कौन
- 1:21:57है बॉडीगार्ड?
- 1:21:59इंद्रा आदि देवता आज्ञा किसने दी है? श्री
- 1:22:02कृष्ण भगवान ने। वो उनकी रक्षा करते हैं।
- 1:22:04निरंतर रक्षा करते हैं। निरंतर कैसे रक्षा
- 1:22:08करते हैं? जैसे सेवक राजा की रक्षा करता
- 1:22:10है।
- 1:22:12राजा कौन हुआ? जो कार्तिक व्रत रख रहा है।
- 1:22:16सेवक कौन हुआ? इंद्रा आदि देवता जिनका
- 1:22:19वेदों में पहला मंत्र है। वेदों का प्रथम
- 1:22:21मंत्र इंद्र देवता के लिए है। वो रक्षा
- 1:22:24करते हैं सेवक की तरह। किसकी? जो कार्तिक
- 1:22:26का व्रत लगता है।
- 1:22:33जहां
- 1:22:35वैष्ण ये कार्तिक मास इत्यादि का अनुष्ठान
- 1:22:38करने वाले भक्त निवास करते हैं। जहां वो
- 1:22:41रहते हैं वहां भूत पिशाच आदि नहीं रह
- 1:22:44सकते।
- 1:22:46नहीं रह सकते।
- 1:22:49यह तो हुआ जो
- 1:22:53एक और बता देते हैं जो रात्रि में भगवान
- 1:22:56वासुदेव के समक्ष जागरण करते हैं उनके
- 1:23:00चरित्रों का पाठ करके
- 1:23:03पाठ करते हैं वैष्णव पुरुषों का के साथ
- 1:23:05में और अपनी मनमानी बातें नहीं करते
- 1:23:08उन्हें प्रतिदिन कोटि तीर्थों के सेवन के
- 1:23:11समान पुण्य प्राप्त होता है। क्या क्या
- 1:23:14क्या क्या क्या
- 1:23:17यह कि जागरण करते हैं भगवान के वार्ता
- 1:23:20करते हैं कथा करते हैं रात्रि में और अपनी
- 1:23:23मनमानी बातें नहीं करते उन्हें प्रतिदिन
- 1:23:26कोटि तीर्थों के सेवन के समान पुण्य
- 1:23:28प्राप्त होता है अभी हमने 20 साल पहले
- 1:23:31सत्र दिया था वो YouTube में आप लोगों ने
- 1:23:33डाला था बाद में इच्छा पूर्ति आनंद पूर्ति
- 1:23:35नहीं है और हमारा क्या है अभी भी सिर्फ एक
- 1:23:38ही हमारा आनंद का स्रोत है मेरी मनमानी हो
- 1:23:40जाए बस हजार प्रवचन सुन लिए लाखों चरण िंग
- 1:23:43सुन ली 50ों किताबें पढ़ ली अंत क्या है
- 1:23:46मेरी मनमानी हो तो मैं सुखी हूं वो कह रहे
- 1:23:49मनमानी जो नहीं करता उसको प्रतिदिन कोटि
- 1:23:53तीर्थों के तीर्थों के सेवन का फल मिलता
- 1:23:55है जब तक ये मनमानी को सुख मानना बंद नहीं
- 1:23:58करोगे कल्पना को ना मैं मन ना मैं
- 1:24:02इंद्रियां ना इंद्र का भोग मन बोलता है
- 1:24:04इंद्रियों इंद्र का भोग दे दो तुम्हें सुख
- 1:24:06तुम मान जाते हो इस बात को इतने सालों से
- 1:24:08भक्ति करते हो कार्तिक मास कर रहे हो तभी
- 1:24:11तो कोई फल नहीं मिलता
- 1:24:13समझ आया क्यों नहीं मिलता मेन मेन जो खटी
- 1:24:16है था नहीं वो जो बोट मैन वो बोले मैं
- 1:24:21खूटा चप्पू चला रहा हूं पूरा रात से कहां
- 1:24:25पहुंचा है कहीं नहीं वहीं पे ही हूं क्यों
- 1:24:27खटा नहीं खोला था हमारा खटा क्या है
- 1:24:30मनमानी मेरी मनमानी हो जाए तो मैं खुश हो
- 1:24:33जाऊंगा मतलब मेरी मनमानी हो तो मुझे कृष्ण
- 1:24:35मिल जाएंगे कैन यू बिलीव इट मन अच्छा मान
- 1:24:38लो मेरी मनमानी तो ये हो सकती है ना कि
- 1:24:40मैं लंदन लंदन घूमने जाऊं या मेरी मनमानी
- 1:24:44हो सकती है। मैं जींस पट पहनू कंपनी का
- 1:24:47ब्रांड का तो मतलब मैं जींस पट पहनू मुझे
- 1:24:50कृष्ण मिल जाएंगे। कोई सेंस है इस बात की।
- 1:24:53मैं लंदन जाऊंगा कृष्ण मिलेंगे। अच्छा
- 1:24:56वहां जो उनको मिले होंगे या कृष्ण लंदन
- 1:24:59वालों को अमेरिका वालों को
- 1:25:03वो रहते हैं उनको नहीं मिले। तुम्हें मिल
- 1:25:04जाएंगे जाके। क्या इल्लुजन है? क्या
- 1:25:06कल्पना है जो मनमानी नहीं करेगा उसे
- 1:25:11प्रतिदिन कोटि तीर्थों का सेवन के समान फल
- 1:25:13मिलेगा आई समझ में बात कुछ आया कुछ आया
- 1:25:16कुछ समझ
- 1:25:17कब से हटाएंगे अपने जीवन से मनमानी करने
- 1:25:20को मेरा मन नहीं मानता मैं नहीं कर रहा
- 1:25:22मैं नहीं कर रहा क्यों मेरा मन नहीं मानता
- 1:25:25तुम्हारे मन क्या भगवान है वो माने ना
- 1:25:27माने उससे फर्क क्या पड़ता है
- 1:25:30तुम 24 घंटे मन को मनाने में लगे हुए हो
- 1:25:33जैसे उसे भगवत आनंद मिल कृष्ण मिल जाएंगे
- 1:25:38मनमानी करना जब बंद करोगे तब कोटि तीर्थों
- 1:25:42का फल बिना कुछ किए मिलेगा। बिना कुछ किए।
- 1:25:44इसलिए महात्मा जी कमरे में बैठे हैं। कहीं
- 1:25:47नहीं जाते। क्यों नहीं जाते?
- 1:25:50और कोटि तीर्थों का फल रोज मिल रहा है।
- 1:25:52क्या करके? कुछ ना करके।
- 1:25:56बंद मानी बंद ऐ बना दे। कह देता ना एक बार
- 1:26:01हैं मामा पंजाबी कह देता एक बार
- 1:26:08वो दूसरी मैं नहीं मानी
- 1:26:10दोनों एक से धुरंधर
- 1:26:13तो [नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 1:26:14जो मनमानी बातें नहीं करता नहीं करता नहीं
- 1:26:17करता उसे प्रतिदिन कोटि तीर्थों के सेवन
- 1:26:20के समान पुलने मिलता है
- 1:26:23यह करना बंद करोगे तो भक्ति का शुभारंभ
- 1:26:27होगा चैप्टर वन स्टार्ट्स। नहीं तो 20
- 1:26:31साल, 25 साल, 30 साल से माला फेर रहे हैं।
- 1:26:34कार्तिक कर रहे हैं। यह मंत्र कर रहे हैं।
- 1:26:37वो धूप दीप सारी दुनिया जहान कर लिया। अंत
- 1:26:40क्या है? दुखीराम महाराज की जय हो।
- 1:26:42दुखीराम महाराज इसलिए हो क्योंकि आपका
- 1:26:45कांसेप्ट अभी भी सुख का यही है। कृष्ण
- 1:26:48प्राप्ति आनंद प्राप्ति नहीं मान रहे। मान
- 1:26:50रहे हो। मेरी मनमानी हो जाए। बस क्या मैं
- 1:26:53बोल देता ओ करना पॉसिबल है
- 1:26:57तो
- 1:26:58ठेंकू ठेंगू कुछ नहीं मिलेगा फिर ठेंको
- 1:27:02ठेंगा यू विल नेवर गेट एनीथिंग
- 1:27:08संपूर्ण व्रतों और तीर्थों दानों से जो फल
- 1:27:10मिलता है वह इस कार्तिक व्रत का विधि
- 1:27:13पूर्व पार करने से करोड़ गुना होकर मिलता
- 1:27:15है। आई समझ बात आई समझ बात आया कुछ
- 1:27:22डेड बॉडी को छोड़ो जीवित व्यक्ति सुने
- 1:27:24दोबारा सुने
- 1:27:26संपूर्ण
- 1:27:28यानी कि सारे सारे मतलब जो हम व्रत जानते
- 1:27:31हैं और जो नहीं जानते हम जानते ही कितने
- 1:27:34हैं संतोषी माता और थर्सडे और मंगल और
- 1:27:37शुक्र शनि ये चार छह व्रत तो जानते हैं
- 1:27:39हमारी अकल तो हमको पता ही है शास्त्रों
- 1:27:41में पढ़े हो तो व्रत कृष् व्रत सुना है
- 1:27:43कभी
- 1:27:46ये क्या होता है? है कि तो अनगिनत व्रत है
- 1:27:51तो वो सारे करने का हां समस्त व्रतों
- 1:27:56तीर्थों नाम सुने तीर्थों के गंगा जमुना
- 1:27:59इतना ही चार उंगली में आ जाएंगे हमारे
- 1:28:02सारे तीर्थ उंगली में नहीं आते करोड़ों
- 1:28:05में तीर्थ है सारे व्रतों सारे तीर्थों और
- 1:28:10दानों से जो फल मिलता है उसको एक करोड़
- 1:28:13गुना गुना कर दो तब भी कार्तिक का फल जो
- 1:28:15है वह पलड़ा भारी है एक बराबर नहीं एक
- 1:28:20सारे सम हम तीर्थ जाएंगे हमारा ना रुझान
- 1:28:24ना हमारा पैसा
- 1:28:27और हम यही करते रहे और फल क्या मिलेगा
- 1:28:30कमरे में बैठकर दीप दान कर दिया कहीं नहीं
- 1:28:32गए मनमानी नहीं करी दीप दान कर दिया तुलसी
- 1:28:36दल चढ़ा दिया ये नहीं कि पैसे हैं तो लंदन
- 1:28:39जा रहे हैं पैसे नहीं तो नैनीताल घूमने जा
- 1:28:41रहे हैं ऐसा नहीं होता ऐसा नहीं होता गोवा
- 1:28:45जा रहे हैं नैनीताल जा रहे हैं हैसियत के
- 1:28:48अनुसार
- 1:28:51ऐसे करके ऐसा ही मिलेगा भगवान क्या होंगे
- 1:28:53परांग मुखी
- 1:28:56मनमानी करना तो बंद करना पड़ेगा बच्चा
- 1:29:04[गहरी सांस लेने की आवाज़]
- 1:29:07जो कार्तिक व्रत
- 1:29:10करता है भगवान की भक्ति में तत्पर होता है
- 1:29:13जो उसके देह में स्थित पाप होते हैं ना
- 1:29:15पाप हमारे देह में जो पाप है वो कांप उठते
- 1:29:19हैं और आपस में कहने लगते हैं ये तो
- 1:29:22कार्तिक का व्रत करने लग गए अब हम कहां
- 1:29:24जाएंगे ये पद्म पुराण बता रहे है नो टीका
- 1:29:27जस्ट प्योर रीडिंग
- 1:29:33पाप आप वार्तालाप करते हैं। अरे ये तो
- 1:29:36कार्तिका व्रत कर रहा है। अब हम कहां
- 1:29:37जाएंगे?
- 1:29:43जो कार्तिक व्रत के नियमों का को भक्ति
- 1:29:46पूर्वक सुनता है जैसे आप सुन रहे हो जो
- 1:29:47इनका वर्णन करता है जैसे हम वर्णन कर रहे
- 1:29:49हैं वह दोनों ही उत्तम व्रत करने का फल
- 1:29:54पाते हैं सुनने वाला बोलने वाला और उनका
- 1:29:57दर्शन करने से मनुष्य के पापों का नाश हो
- 1:30:00जाता है। जो कार्तिक व्रत का करते हैं
- 1:30:05उनका दर्शन यदि कोई कर ले जो बोलते हैं
- 1:30:07सुनते हैं उनका दर्शन कर ले तो दूसरे
- 1:30:09व्यक्ति के उसके नपाप नाश नहीं होंगे
- 1:30:12विचार का विषय दूसरों के पाप नाश करने की
- 1:30:15मशीन बन जाता है वो व्यक्ति कहीं तो जाएगा
- 1:30:18तो दर्शन हो जाएंगे उसके किसी को तो
- 1:30:23यह असीम फल मिल जाएगा कि पापों का नाश हो
- 1:30:27जाएगा पापों के साथ भक्ति में मन नहीं
- 1:30:28लगता और क्या कारण है
- 1:30:42देखो भाई हम कहीं पे भी जा रहे हैं तो इट
- 1:30:45कैन बी हैप्पेड
- 1:30:49अच्छा हम बात किस विषय की कर रहे हैं अभी
- 1:30:51पूरे समय से अभी पूरे इतनी देर से कार्तिक
- 1:30:56मास की और एक हमने
- 1:30:59महाराज जी के यहां पे बोला था साकरण दोष
- 1:31:01करके मायापुर में भी बोला था वैसे क्या
- 1:31:03होता है
- 1:31:06किसी के साथ बैठने वाला आगे
- 1:31:09तो ये कार्तिक मास के बारे में बात हो रही
- 1:31:11है और भगवान कृष्ण बोल रहे हैं क्या लिखा
- 1:31:15हुआ है ये
- 1:31:23भगवान श्री कृष्ण कहते हैं इतनी सी बात
- 1:31:26भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जिनके आप
- 1:31:27दामोदर मास कर रहे हो राधा रानी नहीं कि
- 1:31:31जो भक्ति में कार्य करने वाले लोग होते
- 1:31:34हैं उनके साथ दर्शन करना स्पर्श करना यानी
- 1:31:36कि भक्तों के संग से उनके स्पर्श से उनके
- 1:31:39साथ बात करके उनकी भक्ति का एक छठा अंश
- 1:31:42हमारे को मिल जाता है वन बाय सिक्स
- 1:31:45उनके दर्शन से उनके स्पर्श से उनसे वार्ता
- 1:31:50करके तो इसलिए केवल भक्तों का संग करना
- 1:31:52चाहिए जो संसारी है जो कृष्ण भक्त नहीं है
- 1:31:54उनका संग नहीं करें साथ बैठ के आपकी भक्ति
- 1:31:56नाश होगी उनके पापों का भी एक लेना पड़ेगा
- 1:31:59आपको
- 1:32:01चाहे आपके रिश्तेदार हो चाहे परिवार वाले
- 1:32:03हो
- 1:32:06और भक्तों का संग होगा तो बिना कुछ किए
- 1:32:09कमरे में बैठे थे पता नहीं क्या कुट्टी
- 1:32:12घुमा दी गुरु जी गुरुजी नहीं इतने सब कुछ
- 1:32:15है और शुद्ध विषोधारी कथा है बिना हेतु के
- 1:32:21हम
- 1:32:23अनच्छा से प्राप्त बिना इच्छा के प्राप्त
- 1:32:25हो जाता है ये पुण्य सिर दर्शन से संग से
- 1:32:28स्पर्श से श्रवण से
- 1:32:34कहां पे बताई जा रही है बात कार्तिक मास
- 1:32:37के महत्व में तो कार्तिक मास में तो हमें
- 1:32:40वैसे ही किसी का संग नहीं करना चाहिए गलत
- 1:32:41व्यक्तियों का अभक्तों का नहीं तो जन्मों
- 1:32:45जन्मों तक हमारी खराब आते नहीं जाएंगी जब
- 1:32:47भक्तों के साथ हो क्या खराब बात आते कैसे
- 1:32:49रहेंग बताओ
- 1:32:52कोई भी भक्त के साथ रह रहे हो खराब बात
- 1:32:53कैसे रहेंगे बात ही नहीं कर पाओगे आप उनसे
- 1:32:55नहीं तो इसलिए तपस्या ये है कि भक्तों के
- 1:32:57संग में रहना
- 1:33:00अकेले रहेंगे तो माया में ही हो 100% और
- 1:33:03जो नॉन डिवोटीज के साथ हो तो भी माया में
- 1:33:06ही हो गलत हो गलत चल रहे हो सिर्फ जब तक
- 1:33:08फिजिकली भक्तों के साथ नहीं हो समझ लो
- 1:33:10बिल्कुल गलत चल रहे हो हमारा कुछ नहीं
- 1:33:12होने क्योंकि अगर भक्तों के साथ किसी के
- 1:33:15साथ तो हमारी तरह तो नहीं हो कबरे में
- 1:33:16बैठे हो किसी के साथ हो तो वो बस पाप वो
- 1:33:201/6 उनका चढ़ता रहेगा कौन बोल रहे हैं
- 1:33:24श्री कृष्ण डायरेक्ट और आप हैरान हो
- 1:33:27जाएंगे अब आप कहेंगे टाइम इतना नहीं है।
- 1:33:29सेम चीज जो है ये बोल रहे हैं कौन से
- 1:33:32स्कंद? सेम चीज पादु पुराण में भी श्री
- 1:33:34कृष्ण बोल रहे हैं। इसी बात को अब कह 436
- 1:33:37पेज है। ये देखो 436 जो था
- 1:33:52देवदान का कुछ नहीं बताया ना हमने अभी।
- 1:33:55इतने महत्वपूर्ण टॉपिक्स हैं।
- 1:33:58देखो भाई हफाड चलेगा क्योंकि इतना कुछ है
- 1:34:11कुछ तो बताया
- 1:34:24जो भगवान को दीप दान करता है
- 1:34:28जिसने भगवान को दीपद किया श्लोक है अब
- 1:34:31क्या
- 1:34:33अश्व अश्वमेध मेधस्तु तस किम उसको अश्वमेद
- 1:34:37आदि यज्ञ करने की आवश्यकता नहीं है भाई
- 1:34:40हमारे तो क्षमता भी नहीं है आवश्यकता है
- 1:34:42वो भी सही और हमारे में क्षमता ही नहीं हम
- 1:34:44अश्वमेद यज्ञ कौन है अश्वमेद यज्ञ करेगा
- 1:34:46बताना आप में से वो कह दीप दान कर लिया तो
- 1:34:49उसे जरूरत ही नहीं है
- 1:34:52जिसने कार्तिक में भगवान को दीप दान कर
- 1:34:55दिया उसने समस्त यज्ञ यज्ञ और तीर्थों को
- 1:34:57कर लिया है। फिर वही बात कौन से क्या कर
- 1:34:59लिया है?
- 1:35:02समस्त ऑल ऑल यज्ञ ऑल तीर्थ कर लिया जिसने
- 1:35:06दीप दान कर लिया। और जो पहले ही बताया
- 1:35:09पंक्तियां दीप की लगाता है मंदिर में।
- 1:35:12उसका इंतजार तो देवता करते हैं प्रतीक्षा
- 1:35:14कि कब समागम होगा उससे।
- 1:35:28गीता बोल बहुत
- 1:35:43हम
- 1:35:50[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 1:35:55मेरु गिरी मेरु पर्वत के समान मेरु मतलब
- 1:35:58समझ लो हमारे इसलिए हिमालय से बड़ा इतने
- 1:36:01पाप जो है हमारे उसके समान जो पाप है
- 1:36:03हमारे असंख्य पाप निष्फल हो जाते हैं जो
- 1:36:07कार्तिक मास में दीपदान करते हैं।
- 1:36:11असंख्य पाप नष्ट हो जाते हैं।
- 1:36:15जो केशव भगवान के सन्मुख दीपद करते हैं
- 1:36:18उनको दूसरे जन्म में भूमंडल का धन मिलता
- 1:36:21है और बहुत कीर्ति कमाता है। संसारी अगर
- 1:36:25चाहेगा तो
- 1:36:31शतशत यज्ञ करने के बाद सेवा करने के बाद
- 1:36:34भी इतना पुण्य अर्जित नहीं होता। शतशत
- 1:36:36मतलब कई 100 सेवाएं करने के बाद यज्ञ करने
- 1:36:40इतना पुण्य नहीं होता जितना दीप दान करके
- 1:36:43होता है।
- 1:36:49कोई सर्व तरह के पापों से भी युक्त है।
- 1:36:51आपके खानदान में कोई महापापी भी है। किसी
- 1:36:53तरीके से भी उन्हें यदि ऐसे नर भी कार्तिक
- 1:36:57मास में दीपद कर ले तो वो निसंदेह पवित्र
- 1:37:00हो जाते हैं। महापापी
- 1:37:03बोला मेरे लिए कर ले। कर ले एक बार कर गए
- 1:37:07ना तो निसंदेह पवित्र हो जाते हैं।
- 1:37:14कार्तिक मास में हरि के सन्मुख दीपदान
- 1:37:17करने सारे पाप ध्वंस हो जाते हैं।
- 1:37:20त्रिभुवन में पाप क्षय करने का इससे सरल
- 1:37:22उपाय नहीं है। पाप के लिए बड़ी चक्की करनी
- 1:37:27पड़ती है। बट अगर दीपदान करते इससे सरल
- 1:37:30उपाय नहीं है पाप नाश करने का। दीप दान कर
- 1:37:33ले। यहां के बच्चे अच्छे हैं। अभी
- 1:37:34छोटे-छोटे बच्चे हैं यहां भक्तों के वो
- 1:37:36शुरू से दीप दान करें। कितनी अच्छी बात
- 1:37:38है। शुरू से ही कर।
- 1:37:44जो हरि के मंदिरों में दीप दान करते हैं
- 1:37:46उनको भगवान का नित्य पद भगवान की सेवा
- 1:37:49भगवत धाम की प्राप्ति हो।
- 1:38:02जो मंदिर में दीप दान नहीं करते हैं वह वह
- 1:38:04वैष्णव मूर्ख की श्रेणी में आती है जो दीप
- 1:38:08दान नहीं करते
- 1:38:18ज्यादा से ज्यादा वैष्णव सेवा ज्यादा से
- 1:38:20ज्यादा नाम दीप दान तुलसी सेवा और सुबह
- 1:38:24उठना श्रवण करना
- 1:38:26हमने बताया जो आपको लगता है जरूरी वो
- 1:38:28श्रवण करो जरूरी
- 1:39:20जो किसी आपत्ति में फंसा हो कि मतलब बहुत
- 1:39:23बीमार हो या उसप कोई पाइप वाइप लगे हो
- 1:39:25हॉस्पिटल में हो तो आपत्ति में फंस जाने
- 1:39:28के कारण नहाने के लिए जल ना पा सके या
- 1:39:32रोगी होने के कारण स्नान ना कर सके भगवान
- 1:39:36भगवान का नाम विष्णु का कृष्ण का नाम लेके
- 1:39:39और नाम लेके मार्जन हो जाता है आप कर सकते
- 1:39:41हो फिर उसके बाद अगर आप रोगी भी हो ऐसा
- 1:39:44नहीं कि स्नान करने की जरूरत है तो आप
- 1:39:46भगवान का नाम लेते हो अपवित्रो पवित्रोवा
- 1:39:49सर्वम गदवा यह स्मरे पुंडिका स बा अभ्यंत
- 1:39:55सुच श्री विष्णु श्री विष्णु श्री विष्णु
- 1:39:58ये मंत्र है इसके बिना भी हो जाएगा कृष्ण
- 1:40:00कृष्ण कृष्ण बोलोगे ऐसा नहीं कि मैं सुबह
- 1:40:02ठंड लग रही है कृष्ण कृष्ण बोल लूं हो गया
- 1:40:04मेरा स्नान तुम्हारे को पाप लगेगा डंडे
- 1:40:07पड़ेंगे तुम्हें आलसी इसलिए बोला कि आलस
- 1:40:09से त्याग के भक्ति करो प्रारंभ में बताया
- 1:40:12था तुम कहो मेरा भी श्री विष्णु श्री
- 1:40:14विष्णु कृष्णा कृष्णा राधा राधा मैं तो
- 1:40:16राधा राधा कर रहा हूं तीन बार नहीं 11
- 1:40:18राधा कर राधा राधा राधा राधा राधा और 11
- 1:40:21डंडे पड़ेंगे उसके बाद हां आपत्ति में
- 1:40:25बोला गया है पद्म पुराण क्या बता आपत्ति
- 1:40:27में यदि तुम हो बीमार हो कोई पाइप लगा है,
- 1:40:30कोई ब्रीथिंग प्रॉब्लम है, कोई भी हो सकती
- 1:40:33है, प्लस कुछ भी हो सकता है।
- 1:40:37वो भगवान विष्णु का नाम लेके मार्जन कर
- 1:40:39ले।
- 1:41:04जीव गोस्वामी जी बता रहे हैं
- 1:41:07कि श्री कृष्ण की पूजा यदि मथुरा वृंदावन
- 1:41:10और कार्तिक में की जाए तो कोई बिल्कुल
- 1:41:13अनक्वालिफाइड क्यों ना हो बिल्कुल उसमें
- 1:41:15कोई योग्यता ही नहीं है भक्ति की बिल्कुल
- 1:41:17भी कोई योग्यता नहीं है उसके बारे में
- 1:41:19क्या बता रहे उसको भी भगवान के भाव प्रेम
- 1:41:22भाव की प्राप्ति हो जाती।
- 1:41:24यह श्लोक बता रहे हैं वह कार्तिक संग में
- 1:41:27पूजनम घटते तद योग्यता विरहित योग्यता
- 1:41:32विरहित योग्यता नहीं है उसमें अभी वस्तु
- 1:41:36प्रभावत प्राप्त भाव भाव शब्द बोला गया है
- 1:41:41भाव भक्ति प्राप्त हो जाती है जो कार्तिक
- 1:41:43में श्री कृष्ण की पूजा करता है
- 1:41:44अनक्वालिफाइड
- 1:41:46योग्यता विरहतेन योग्यता नहीं है उसमें
- 1:41:49फिर भी प्राप्ति वो होती है जो योग्य को
- 1:41:52होती है यह है कार्तिक की शक्ति या धाम की
- 1:41:54शक्ति
- 1:42:10जैसे कार्तिक में जो आज जो आप व्यास पूजा
- 1:42:15के पास में एकादशी आती है लगभग आषाढ़ के
- 1:42:19शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है उस दिन
- 1:42:22शंखासुर दैत्य दैत्य को मारा गया था। तो
- 1:42:24उस दिन से प्रारंभ करके भगवान चार मास तक
- 1:42:27चार महीने तक शीर समुद्र में शयन करते
- 1:42:30हैं। सोते हैं। चतुर्मास बोलते हैं ना। सो
- 1:42:32मतलब है भगवान सो रहे हैं चार महीने और वो
- 1:42:35उठते कौन से हैं? एकादशी को जो आएगी ना जो
- 1:42:38एकादशी है हमारा व्रत पाल उस एकादशी को
- 1:42:41उठते हैं। कार्तिक शुक्ला एकादशी को जगते
- 1:42:44हैं।
- 1:42:45इस कारण से वैष्णवों को निमन अंकित मंत्र
- 1:42:50का उच्चारण करके भगवान को जगाना चाहिए।
- 1:42:52वैष्णव है तो भगवान को जगाना चाहिए। यह
- 1:42:55बताया जा रहा है स्कंद पुराण में उतष्िष्ट
- 1:42:59गोविंद उतष्ट गरुड़ ध्वजा उत्तमकांत
- 1:43:05त्रैलोक्य मंगलम कुरु हे गोविंद उठिए उठिए
- 1:43:11हे गरुड़ ध्वज उठिए हे कमलाकांत निद्रा का
- 1:43:16त्याग कर तीनों लोकों का मंगल करिए
- 1:43:22सर्व त्रैलोक्य मंगल कुरु यह मंत्र बोल
- 1:43:27सकते हैं। एकादशी
- 1:43:29कह रहे हैं बोलना चाहिए
- 1:43:32वो केवल प्रसाद पाना चाहिए। बिना भोग लगे
- 1:43:35कभी भी नहीं कुछ पाना चाहिए। यह नियम होना
- 1:43:37चाहिए। ये नहीं कि ट्रेन में जा रहे हैं
- 1:43:38तो ऐसे ही खा रहे हैं। कुछ इधर-उधर का या
- 1:43:42बस से जा रहे हैं, ट्रेन से जा रहे हैं।
- 1:43:43कोई नहीं ऐवे तो चल रहा है। कुछ नहीं चल
- 1:43:46रहा।
- 1:43:47नथिंग वर्क्स।
- 1:44:03और जो व्रत नहीं रखते हैं
- 1:44:08उनके लिए जो कार्तिक का व्रत नहीं उनका
- 1:44:11वेद पुराण आदि पढ़ना पढ़ाना व्यर्थ है।
- 1:44:14उनका व्यर्थ है। कोई भी वेद पुराण पढ़ना
- 1:44:17सब व्यर्थ है। जो व्रत नहीं रखते इसमें
- 1:44:19बहुत डिटेल में है।
- 1:44:40और भी नित्य मंगला आरती का दर्शन कर सकते
- 1:44:42हैं जो कर या घर में कर सकते हैं मंगला
- 1:44:46नित्य हरि कथा श्रवण करें प्रातः स्नान
- 1:44:48नित्य सिर्फ प्रसाद नित्य भक्तों का संग
- 1:44:51दीप दान माला संख्या जप तुलसी अर्चन वंदना
- 1:44:55परिक्रमा स्तुति पाठ ये सब करना चाहिए
- 1:44:58दामोदर अष्टकम
- 1:45:06ये हम ढूंढ रहे थे जो कार्तिका व्रत नहीं
- 1:45:08रखते
- 1:45:12स्कंद पुराण ब्रह्मा नारद संवाद
- 1:45:16जो कार्तिक में धर्म अनुष्ठान ना करें तो
- 1:45:19उसको मात्र हत्या पितृ हत्या तुल्य पाप
- 1:45:21लगता है। अपनी मां का कत्ल करना पिता के
- 1:45:24कत्ल करने का समान पाप लगता है। जो
- 1:45:26कार्तिका व्रत नहीं
- 1:45:29जो शादीशुदा हैं उनको भी ब्रह्मचर्य करना
- 1:45:32चाहिए। जो विवाहित नहीं है ऑफिसों में है।
- 1:45:34बड़ा ध्यान रखना चाहिए। आजकल के जो समाज
- 1:45:36में ये मत सोचना उसके तीन गर्लफ्रेंड है
- 1:45:39मेरी एक हो गए तो क्या हो गया? उसको 300
- 1:45:41बार नरक में जाना। तुमको भी 100 बार तुमको
- 1:45:42तो और हजार बार जाना पड़े। तुम तो वैष्णव
- 1:45:44हो।
- 1:45:46वो तो पुलिस वाले ने गलत काम किया। उसको
- 1:45:48ज्यादा डंडा पड़ना चाहिए ना। तो वो जानते
- 1:45:50थे कानून।
- 1:45:52हां।
- 1:45:54कार्तिक मास में व्रत ना रखने से ब्राह्मण
- 1:45:57हत्या, गौ हत्या, स्वर्ण चोरी के समान पाप
- 1:46:01लगता है।
- 1:46:03जैसे एकादशी हम लोग कब कब रखते हैं? सारी
- 1:46:06रखते हैं। उसी के समान कार्तिक मास में
- 1:46:09नित्यत्व है। जैसे एकादशी का नित्यत्व है।
- 1:46:12कार्तिक मास का भी नित्यत्व है। गृहस्ती
- 1:46:15यदि कार्तिक मास में व्रत ना करे तो उससे
- 1:46:17किए हुए सारे इष्ट और पूर्व कर्म पहले के
- 1:46:21कर्म में निष्फल हो जाते हैं। जो पहले
- 1:46:23आपने अच्छे काम किए ना आज तक वो भी सारे
- 1:46:25अंडा जीरो हो जाते हैं। जब भगवान ही पराग
- 1:46:28मुख हो गए।
- 1:46:30ये भगवान ने ही मुंह फेर लिया ऐसे व्यक्ति
- 1:46:32से। कार्तिक इतना बड़ा महीना है कि भगवान
- 1:46:34मुंह फेर लेते हैं जो नहीं रखता।
- 1:46:48कार्तिक मास में व्रत ना करने से उस
- 1:46:51व्यक्ति का दिया हुआ दान जप बोला मैं जप
- 1:46:53तो करता हूं पर कार्तिक नहीं रखता। उसका
- 1:46:56दान उसका किया हुआ दान जप और समस्त तपस्या
- 1:46:58आदि निष्फल हो जाता है। स्पष्ट स्कंद
- 1:47:01पुराण बता रहे हैं स्पष्ट निष्फल हो जाता
- 1:47:03है।
- 1:47:34हाउ लॉन्ग आई वास टेकिंग
- 1:47:40लेट्स कॉल थोड़ा सा और करते
- 1:47:52जो कार तुलसी के बारे में बताएंगे जो
- 1:47:55कार्तिक में
- 1:47:59तुलसी दल चढ़ा के एक लाख तुलसी दल चढ़ा के
- 1:48:01भगवान विष्णु की पूजा करता है उसको एक-एक
- 1:48:04दल पर मुक्ता दान करने का फल प्राप्त होता
- 1:48:06है। मुक्ता पता है ज्वेलरी अगर किसी को
- 1:48:08नॉलेज हो थोड़ी मुक्ता
- 1:48:10कभी कभी विचार करना खरीदते का तो आपकी
- 1:48:13पुश्ते बिक जाएंगी तो
- 1:48:17वो हर तुलसी दल अर्पण करने पे वो ओरिजिनल
- 1:48:23वो तो सस्ते तो वीर बाजार में मिल जाते
- 1:48:25हैं मुक्ता सोम बाजार वीर बाजार वो तो
- 1:48:28कहीं पे भी मिल जाए वो वाले नहीं कह रहे
- 1:48:29असली वाले कह रहे हैं सोम बाजार मुक्ता
- 1:48:38नहीं हम तो घर में मेरे तो जो है मेड कर
- 1:48:42बेटी भी पहनती है मुक्ता की तुम्हारी मेड
- 1:48:45उसको छोड़ो तुम भी नहीं पहन सकते
- 1:48:50जो मनुष्य कार्तिक में तुलसी जी के जड़ के
- 1:48:53समीप श्री हरि का पूजन करता है जो हम दीपद
- 1:48:56करते हैं श्री तुलसी जी के जड़ के समीप वह
- 1:48:59इस श्लोक में संपूर्ण भोगों का उपभोग करता
- 1:49:02है खुश होगे कितना संपूर्ण संपूर्ण भोग और
- 1:49:05अंत में भगवान के धाम चला जाता है। ये हुई
- 1:49:07ना बात। ये आपने गुरु जी बढ़िया बात बताई
- 1:49:09है। सबसे बढ़िया बात अपने आखरी में बताई
- 1:49:11है।
- 1:49:12यही तो सुनने के लिए इंतजार कर रहे थे।
- 1:49:15कोई भोग अब लूप होल बता दो हमारे को। इस
- 1:49:19श्लोक में संपूर्ण फिर वही संपूर्ण
- 1:49:23[हंसी][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
- 1:49:23संपूर्ण भोग भोग करके अंत में बैकुंठ धाम
- 1:49:26हमें चाहिए नहीं भोग। अंदर से यह निकलना
- 1:49:28चाहिए। मेरे को तो केवल आप चाहिए। जब तक
- 1:49:31यह नहीं कह रहे तो हम भक्त ही नहीं है तो
- 1:49:33केवल भक्तों के भगवान की प्राप्ति होती
- 1:49:35है। अन्य अभिलाषिता शून्यम
- 1:49:40आई हैव टू करेक्ट योल्स क्योंकि हमारे
- 1:49:42खोपड़ी कितने खराब है तो मेरे से अधिक कौन
- 1:49:44जानता है एकदम प्रफुल्लित हो जाते हैं
- 1:49:48बातें सुनते ही समस्त भोगों का उपभोग करके
- 1:49:52अच्छा आई कैन कंटिन्यू
- 1:49:55अंत में वैकुंठ धाम तो मिलना ही है तो बीज
- 1:49:58को क्यों खराब करूं अपने
- 1:50:00[गला साफ़ करने की आवाज़]
- 1:50:01इसे कहते हैं नाम के बल पर पाप करना सुना
- 1:50:03है नाम की एक वस्तु भी होती है यही इसी
- 1:50:09[गला साफ़ करने की आवाज़]
- 1:50:16[गहरी सांस लेने की आवाज़]
- 1:50:20ये बहुत अच्छा है। ये हमारे यहां विनोद के
- 1:50:22यहां पे है पर और किसी के यहां नहीं है।
- 1:50:24पर फिर भी अच्छा है।
- 1:50:26अ जिसके घर में तुलसी वन है, वह घर महा वह
- 1:50:34घर तीर्थ स्वरूप है।
- 1:50:37वहां यमराज के दूत नहीं आते। कोई भी
- 1:50:40मृत्यु हो जाए किसी की भी। यमराज नहीं आ
- 1:50:42सकते। प्रश्न ही नहीं उठता। तुलसी का वन
- 1:50:46सदा सब पापों का नाश करने वाला है।
- 1:50:51जो श्रेष्ठ मनुष्य तुलसी का बगीचा लगाते
- 1:50:53हैं, वह यमराज को नहीं देखते।
- 1:50:58और बात हम गंगा के स्नान करने जाते हैं।
- 1:51:01यहां सुनिए स्कंद पुराण क्या कह रहा है?
- 1:51:02नर्मदा का दर्शन, गंगा का स्नान और तुलसी
- 1:51:06वन का संसर्ग तुलसी वन में रहना ये तीनों
- 1:51:09एक समान कहे गए हैं। तो जो घर में तुलसी
- 1:51:12हो तो वो रोज गंगा स्नान और रोज ही सब कुछ
- 1:51:15कर रहा है।
- 1:51:30ऐसा होता है जो तुलसी के जो जो मिट्टी जो
- 1:51:34होता है उसको उससे जो तिलक अगर कोई करता
- 1:51:36है अगर उसको भगवान की विशेष कृपा मिलती
- 1:51:39है। एक बात बताओ तुलसी वन देवी है।
- 1:51:44समाज में मतलब वन देवी के चरण में जो
- 1:51:46प्रांत में जो उससे यह फल प्राप्त होती है
- 1:51:48तो हम कहां का तिलक लगाते हैं
- 1:51:52जिनकी अर्चना वो करती हैं
- 1:51:56और जो राधा सिर्फ उन्हीं का है क्या कृष्ण
- 1:52:00का भी है राधा रानी का भी है गोपियां भी
- 1:52:03है उन सब का कमांड तिलक इसके तिलक के कोई
- 1:52:07इसके तिलक लगाने के बाद कुछ बच जाता है
- 1:52:09कुछ
- 1:52:11राधा कृष्ण का तिलक लगाते हो अपने को
- 1:52:13कितना भाग्य भाग्यवान समझना चाहिए। मैंने
- 1:52:14राधा कुंड की रज का तिलक लगाया। ठाकुर
- 1:52:17मेरे पर कितने रिजवार हैं।
- 1:52:20वो तिलक लगाने का मौका देते हैं रोज।
- 1:52:24सो अरे मैं राधा रानी का राधा रानी चरण
- 1:52:26धोली लगा रहा हूं। राधा राधा कुंड का
- 1:52:28तिलक। वाह।
- 1:52:47तुलसी कार्तिक महात्मा में यह बताया जा
- 1:52:49रहा है महत्वपूर्ण बात है जो इग्नोर नहीं
- 1:52:51करनी चाहिए ये सोचो मत कि हम राग मार्ग पे
- 1:52:53हैं और कुछ भी राग मार्ग मनमानी कर ले कह
- 1:52:57रहे हैं द्वादशी को जो तुलसी दल
- 1:53:05द्वादशी
- 1:53:06को तुलसी दल और तोड़ता है वह अत्यंत
- 1:53:09निंदित नरको में पड़ता है तो द्वादशी का
- 1:53:11दिन तुलसी के दलों को नहीं तोड़ना चाहिए।
- 1:53:14केवल एक दिन द्वादशी संडे मंडे को छोड़ो।
- 1:53:17संडे नहीं कह रहे तो रविवार है। रविवार
- 1:53:19नहीं सारे वार ओके हैं। और रविवार भी सब
- 1:53:22ओके वार है। बस द्वादशी नहीं होने चाहिए।
- 1:53:25भिन्न प्रकार के नरको में जाते हैं। यदि
- 1:53:27द्वादशिक हो। यह पद्म पुराण बता रहा है।
- 1:53:42जो भगवान के श्री अंगों से उतारी हुई
- 1:53:44प्रसादी जैसे अभी राधा में जो प्रसादी फूल
- 1:53:48माला तुलसी जो भी होता है या अभोग भी
- 1:53:50लगाते हो या चरण में तुलसी डालते हो ठाकुर
- 1:53:53जी के तो जो या कपड़ा होता है उनका जो
- 1:53:57ठाकुर जी के अंगों से उतनी प्रसाद स्वरूप
- 1:53:59तुलसी को मुख में मस्तक पर या शरीर पर
- 1:54:03धारण करता है या भगवान के निर्माल्यों से
- 1:54:05अपने अंग पर मार्जन करता है वो संपूर्ण
- 1:54:08रोगों और पापों से मुक्त हो जाता है।
- 1:54:11आप कहोगे भाई मेरे तो इतने रोग है। मेरे
- 1:54:14तो किडनी खराब है। मेरे तो नसों की
- 1:54:16प्रॉब्लम है। मेरे तो बैक क्या होती है?
- 1:54:18अर्थराइट
- 1:54:21बैक के झुकने वाली भी एक होती है ना।
- 1:54:23स्पॉन्डिलाइटिस मैं मैं तो रोग मैं तो
- 1:54:26तुलसी का रोज ही करता हूं। रोगों का मतलब
- 1:54:29है सबसे बड़ा रोग कि मेरा किससे संबंध है
- 1:54:30और यह संसार में सुख है। यह सबसे बड़ा रोग
- 1:54:33है।
- 1:54:34यह रोग से मुक्त होगे तो भगवत प्राप्ति
- 1:54:36हो। ये रोग से मुक्त हो कभी भगवत
- 1:54:37प्राप्ति। मेरा किससे संबंध है भगवान के
- 1:54:39अलावा? नहीं हो सकती भगवत। इतना हम बोल
- 1:54:41रहे हैं सालों से। नहीं समझ आ रही बात। और
- 1:54:44संसार में सुख है। नहीं समझ आ रही बात।
- 1:54:46अभी भी लगे। ये रोग दूर होगा।
- 1:54:50यही उद्धव जी ने बोला था। मुझे चिंता नहीं
- 1:54:52है आपकी प्रसादी प्रसादी वस्तु से तो सब
- 1:54:54हो जाएगा कल्याण कैसे होगा यह रोग है यह
- 1:54:58समझना यह रोग है मैं किसी को अपना मानना
- 1:55:00किसी वस्तु में सुख मानना जो है नहीं
- 1:55:03कृष्ण सुख है ना तो कोई वस्तु सुख कैसे हो
- 1:55:05सकती है सारे शास्त्र गलत हो जाएंगे तो
- 1:55:13[गला साफ़ करने की आवाज़]
- 1:55:27कार्तिक मास आने पर रौरव नर्क में पड़े
- 1:55:30हुए पित्र पितृ भी चिल्लाते हैं। जो रौरव
- 1:55:32नर्क में पड़े हो वो पितृ भी चिल्लाते
- 1:55:34हैं। क्या हमारे वंश में ऐसा कोई भाग्यवान
- 1:55:36होगा जो हमारा उद्धार करेगा। कार्तिक मास
- 1:55:39का कितना इंतजार करते हैं सब लोग? हम
- 1:55:42इंतजार नहीं करते। रोरा और नर्क में पड़े
- 1:55:45हुए जो पुत्र हैं उनसे पूछो वो इंतजार कर
- 1:55:46रहे हैं। क्या हमारे कुल में ऐसा कोई
- 1:55:48आएगा?
- 1:55:50सब नजर लगा के देख रहे हैं। क्या कोई
- 1:55:52आएगा? क्या कोई आएगा?
- 1:56:05दो घंटे से ज्यादा तो नहीं होना चाहिए।
- 1:56:07खत्म तो होगा नहीं कभी बट मैं थोड़ा सा
- 1:56:09फटाफट करके।
- 1:56:25देखिए
- 1:56:28विश्वामित्र जी बोले कार्तिक मास सब
- 1:56:32महीनों में शेष बताया गया है। उसमें जो
- 1:56:35कर्म किया जाता है वह बरगद बीज के भांति
- 1:56:37बढ़ता है। बरगद का बीज देखते हो कैसे
- 1:56:39बढ़ता है।
- 1:56:40तो जो कर्म किया जाता है उसमें बरगद के
- 1:56:42बीज के भांति बढ़ता है। जो कार्तिक मास
- 1:56:46में स्नान दान और पूजन करके ब्राह्मण भोजन
- 1:56:49ब्राह्मण भोजन हमारा क्या मतलब है हरि
- 1:56:51गुरु वैष्णव हमारा दान भोजन जो भी कुछ है
- 1:56:56हरि गुरु वैष्णव खत्म हरि गुरु वैष्णव हरि
- 1:56:58गुरु वैष्णव जो कार्तिक मास में स्नान दान
- 1:57:01पूजन करके ब्राह्मण भोजन मतलब हरि गुरु
- 1:57:03वैष्णव भोजन कराता है उसका वह पुण्य अक्षय
- 1:57:06फल देने वाला होता है अक्षय फल
- 1:57:10वैष्णव सेवा को बढ़ाना चाहिए। जिसके नहीं
- 1:57:13है उसे स्टार्ट तो करनी चाहिए। तो हां
- 1:57:17अक्षय फल देने वाला होता है।
- 1:57:24जब हमारा हमने व्रत रखा तो त्रुटि भी हो
- 1:57:27सकती है।
- 1:57:29है ना? तो त्रुटि का भी यहां पर बताया गया
- 1:57:33है। बड़ी कृपा करके शास्त्र बता रहे हैं।
- 1:57:56पद्म पुराण
- 1:58:05ये देखिए
- 1:58:35एक तो तो हमको भगवान से प्रार्थना करनी है
- 1:58:38वतिन कार्तिके मासी स्नातस
- 1:58:42विधि वनमम ग्रहण ग्रहणघ्यम मया दत्तम
- 1:58:47राध्या सहितो हरे भगवान मैं कार्तिक मास
- 1:58:51में स्नान का व्रत लेकर तो स्नान का व्रत
- 1:58:53ले उठना है सुबह 2:30 बजे ऐसा नहीं मनन कर
- 1:58:56रहे हैं उठना है उठना नहीं है असली में
- 1:58:58मनन ही चले जा रहा है इसके मनन का फायदा
- 1:59:00क्या है मनन होता है जो एग्जीक्यूशन के
- 1:59:02लिए किया जाता है ना कि खो शेख चिल्ली के
- 1:59:05लिए बनने के लिए किया जाता है। ऐसा करना
- 1:59:07चाहिए तो करो ना भाई। मनन तो सीडी है
- 1:59:12एग्जीक्यूशन करने के लिए। मनन है मतलब वो
- 1:59:14चीज जिससे एग्जीक्यूशन की जाए। नहीं तो
- 1:59:16मनन में कोई मतलब नहीं है। एग्जीक्यूशन
- 1:59:19करने के लिए जिस चीज को मैं बार-बार अपने
- 1:59:20मन में दोहराता हूं उसको मनन कहते हैं।
- 1:59:22एग्जीक्यूशन करने के लिए।
- 1:59:26कार्तिक मास में स्नान का व्रत लेकर
- 1:59:28विधिपूर्वक स्नान कर चुका हूं। मेरे दे इस
- 1:59:30अर्घे को आप राधिका जी के साथ स्वीकार
- 1:59:32करें। राधा रानी के साथ। अब जो पाप वगैरह
- 1:59:36हमसे त्रुटियां रह गई है वह इसमें बताया
- 1:59:37गया क्या समाधान है
- 1:59:45विष्णु आज्ञा मनु प्राप्त्य कार्तिक व
- 1:59:49कार्तिक व्रत कारणात शमंतु देवास्ते सर्वे
- 1:59:52माम पुनंतु सवा सवा इसका माने है विष्णु
- 1:59:56की भगवान की आज्ञा प्राप्त करके कार्तिक
- 1:59:59व्रत करने के कारण यदि मुझसे कोई त्रुटि
- 2:00:02हो जाए तो उसके समस्त देवता मुझे क्षमा
- 2:00:06करें तथा इंद्र आदि देवता मुझे पवित्र
- 2:00:08करें।
- 2:00:09क्षमा करें तो क्षमा मांगे
- 2:00:26और जो ये बात जो कहीं पे भी नहीं
- 2:00:29पता नहीं क्यों नहीं बताई जाती बियों्ड
- 2:00:33बिय्ड मी क्यों नहीं बताई जाती मालूम नहीं
- 2:00:36है क्या है कार्तिक के प्रमुख पांच चीजों
- 2:00:40में से एक चीज है उद्यापन करना कार्तिक
- 2:00:43पूरा हो गया उसका उद्यापन करना
- 2:00:46उद्यापन मतलब होता है पूर्ति हो गया ना
- 2:00:48एकादशी के दिन हो गया वो भी तो करा जाना
- 2:00:52कोई स्टार्ट कर एकादशी रखी अगर तो पालन
- 2:00:55उद्यापन करते हैं ना कि भाई इतने समय के
- 2:00:57बीच में हमने चावल खा लिया या कुछ कर लिया
- 2:01:01तो उसी प्रकार से एकादशी का पालन यह स्कंद
- 2:01:06पुराण
- 2:01:08कार्तिक में भगवान की प्रसन्नता के लिए
- 2:01:10धर्म का अनुष्ठान करना चाहिए। मास व्रत की
- 2:01:13समाप्ति होने पर
- 2:01:15व्रत की पूर्णता के लिए श्रेष्ठ ब्राह्मण
- 2:01:18को दान देना चाहिए। श्रेष्ठ ब्राह्मण मतलब
- 2:01:20हरि गुरु वैष्णव को दान देना चाहिए।
- 2:01:57यहां बाद में बताने वाला पॉइंट है इसलिए
- 2:01:59उद्याप फिर भी इसमें अभी लिखा है तो कहीं
- 2:02:01स्किप ना हो जाए। व्रत में जो स्थित हुआ
- 2:02:03पुरुष हो यदि उद्यापन करने की विधि में
- 2:02:06असमर्थ हो तो भी व्रत की समाप्ति के बाद
- 2:02:11अगर असमर्थ हो तब बता रहे हैं कि समाप्ति
- 2:02:13के बाद उसे ब्राह्मणों को भोजन कराना
- 2:02:15चाहिए। मतलब अगर असमर्थ है तो
- 2:02:19अगर असमर्थ है तो ब्राह्मणों को भोजन
- 2:02:21ब्राह्मणों का प्लुरल में कराना चाहिए।
- 2:02:24यानी कि वैष्णवों को हमारे को दूसरा अन्य
- 2:02:27व्रत अन्नदान वो नहीं 41 श्लोक हमेशा
- 2:02:30पढ़िएगा सोचो हम ब्राह्मण ढूंढने चले गए
- 2:02:33हो गया तुम्हारा इसलिए ना हर समय
- 2:02:36मार्गदर्शन की जरूरत है क्योंकि समय तो
- 2:02:38फिर हम नहीं पाएंगे
- 2:02:51ये स्कंद पुराण से था एवं पद्म पुराण से
- 2:02:54बता रहे हैं।
- 2:03:05इसमें भी वही बात है। जो हमने बताया था ना
- 2:03:07जो आपत्ति में फंसा है व्यक्ति बीमार है।
- 2:03:11प्लस्टर लगा हुआ है। पाइप लगे उसको क्या
- 2:03:13करना चाहिए?
- 2:03:16भगवान नाम से अपना मार्जन करना। उसी अगली
- 2:03:18पंक्ति बता रहे हैं।
- 2:03:20वो विष्णु का नाम लेकर मार्जन कर ले। अगली
- 2:03:23पंक्ति बता रहे हैं। जो कार्तिक व्रत के
- 2:03:25पालन करने में प्रवृत्त होकर उसका उद्यापन
- 2:03:28करने में समर्थ ना हो। मतलब समर्थ ना हो
- 2:03:32उसको क्या करना चाहिए? मतलब जो आपत्ति में
- 2:03:34असमर्थ है उसे चाहिए कि अपने व्रत की
- 2:03:36पूर्ति के लिए यथाशक्ति ब्राह्मणों को
- 2:03:38भोजन कराए। जब असमर्थ हो तो ये करवाना है।
- 2:03:42समर्थ हो तो जो करे वो व्यक्ति करे।
- 2:03:44असमर्थ में भी ब्राह्मणों को भोजन करवाना
- 2:03:46ये अह निर्देश है।
- 2:03:49आगे बताएं।
- 2:04:11कार्तिक शुक्ला द्वादशी जो हमारी एकादशी
- 2:04:14के बाद जो द्वादशी पड़ती है उसमें
- 2:04:18चतुर्मास या कार्तिक मास की व्रत की पूर्ण
- 2:04:20आहुति होती है। व्रत के अंदर आहुति होती
- 2:04:22है। जैसे यज्ञ करते आहुति दी जाती है। तो
- 2:04:25कार्तिक व्रत की आहुति इस इस दिन प्रातः
- 2:04:28गुरु पूजन करके
- 2:04:31विशेष रूप से गुरु पूजन करके भगवान की
- 2:04:33विशेष पूजा करें पाशी को
- 2:04:38और वैष्णव व ब्राह्मणों को भी भोजन व दान
- 2:04:40दे दक्षिणा से संतुष्ट करें।
- 2:04:44इस व्रत की समाप्ति
- 2:04:47पर व्रत करने वाले जैसे यह व्रत की
- 2:04:50समाप्ति है तो व्रत कर रहे सभी वैष्णव एक
- 2:04:53साथ मिलकर भी प्रीति भोज कर सकते हैं।
- 2:04:57टूगेदर
- 2:04:58लास्ट कार्तिक लास्ट एकाशी ऑफ द कार्तिक
- 2:05:01डिवोटी कैन स टगेदर एट नाइट कैन डू जागरण
- 2:05:05देन कैन ब्रिंग फूड स्टफ व्हाटएवर वन विश
- 2:05:08टू एंड इन द मॉर्निंग डू बेस्ट ऑफ द पूजा
- 2:05:13तुलसी एंड व्हाटएवर यू विश टू कुक एंड सात
- 2:05:17प्रीति भोज जो वस्तु भेंट दक्षिणा करना
- 2:05:20चाहता है वो कर सकते हैं। प्रभु का स्मरण
- 2:05:24करते हुए प्रसाद ग्रहण कर व्रत का समापन
- 2:05:26करें।
- 2:06:29[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 2:06:49जैसे मैंने पहले ही बताया था सर्वप्रथम
- 2:06:51श्री गुरुदेव के चरणों में भक्ति पूर्वक
- 2:06:53दंड दंडवत करें और व्रत धारण करने की
- 2:06:56अनुमति ले और आदेशावली के अनुसार व्रत को
- 2:07:01पूर्ण करने की कोशिश करें। संकल्प ले
- 2:07:06और
- 2:07:08हो सके तो बाल वगैरह ना कटवाएं कार्तिक
- 2:07:11में
- 2:07:13हो सके तो
- 2:07:16ब्यूटीिफिकेशन के लिए ना जाए। अगर संभव हो
- 2:07:19सके तो पार्लर वगैरह
- 2:07:23गुरुदेव के चरण में रोजाना दंडवत करें।
- 2:07:27गुरु सेवा करें।
- 2:07:29दंडवत गिन के कर सकते हैं। कोई भगवान को
- 2:07:32गुरु को 5 11 21 51 108 जितना हो कार्तिक
- 2:07:36में कर सकते हैं। रोज प्रणिपातेन
- 2:08:08कार्तिक में सत्संग का विशेष लाभ है। सेवा
- 2:08:12का, भक्ति कार्यों का विशेष लाभ है। पर
- 2:08:15यदि धाम में रह रहे तो आप यह समझे कि
- 2:08:17हमारे दृष्टिकोण में हमने पहले भी बताया
- 2:08:18था कुछ समय पहले भी कि 99% सत्संग होता
- 2:08:21है। कंठीधारी तिलक धारों का भी पूछो क्यों
- 2:08:25इसलिए
- 2:08:27संग केवल दो व्यक्तियों को करना चाहिए। या
- 2:08:29तो कोई व्यक्ति 10 15 घंटे एकांत भजन करने
- 2:08:33की शक्ति रखता हो एकांत एकांत या तो उनका
- 2:08:36संग प्राप्त हो जाए करुणा से उनकी करुणा
- 2:08:38से या पक्का गुरु ज्ञानगत में के अलावा
- 2:08:42बिल्कुल नहीं चलता हो
- 2:08:45और जो 99% से ज्यादा भक्त वह दोनों के
- 2:08:47अलावा ही होते हैं। ना वह 15 घंटे भजन
- 2:08:50करने की क्षमता रखते हैं ना गुरु के आगे
- 2:08:52मन मन जहां मन गए माज बरसाना गए आज हो गए
- 2:08:56आज यहां गए आज यहां गया ये किया उनका
- 2:08:58सत्संग है हमारे अंदर भी हो गई गुरु की
- 2:09:01प्रसन्नता के लिए तो हम कार्य नहीं कर रहे
- 2:09:04कार्तिक में वो चीज चली जाती है यस
- 2:09:05प्रसादा भगवत प्रसादो उनकी कृपा से ही
- 2:09:08भगवान की कृपा मिलती है उसमें विशेष विशेष
- 2:09:11उनकी प्रसन्नता कार्य करें तो जो खुद ही
- 2:09:14इस चीज से रहित है वो उसका संके हमारे
- 2:09:16अंदर क्या कीटाणु आएंगे उसी के कीटाणु
- 2:09:19आएंगे जो कुछ भजन से रहित है। एकांत बैठना
- 2:09:23खिलवाड़ समझते हो मजाक समझते हो जिससे जो
- 2:09:26स्वच्छ है भीतर से और एकांत रह लिया उसे
- 2:09:28सब कुछ प्राप्त कर चुके ऑलरेडी होना नहीं
- 2:09:30है प्राप्त हो चुका है
- 2:09:33तो इसलिए धाम में तो 99% तो आपको इसी
- 2:09:37प्रकार से ही मिलेगा चाहे धाम हो चाहे
- 2:09:39दिल्ली हो कहीं भी हो पूरे पृथ्वी के ऊपर
- 2:09:42हां तो दे बिल्कुल असंत संग है और
- 2:09:46हमारे एक यहां संत है राधाकुंड में 86
- 2:09:49इयर्स के हैं 86 वो भी हमारे तीन दिन चार
- 2:09:52पांच दिन पहले हम उन्हें मिले थे वो बोल
- 2:09:54रहे थे कहते आप देख रहे हो राधा कुंड में
- 2:09:56ये भक्ति नहीं होती है जो हम देखते हैं
- 2:09:59हमें वो भक्ति लगती है और क्या करें ऑप्शन
- 2:10:01क्या है जीव के पास जो देखेगा उसे वही
- 2:10:04भक्ति ये नहीं होती 86 साल के बुजुर्ग बोल
- 2:10:06रहे हैं
- 2:10:08वही हम आपको दूसरी भाषा में बोल रहे हैं
- 2:10:10भक्ति दो प्रकार से या तो एकांत में बैठे
- 2:10:12व्यक्ति वो व्यक्ति कर रहे है या गुरु के
- 2:10:15मार्ग से बिल्कुल ना चले वो जैसे माता या
- 2:10:19इस प्रकार के अदर वाइज तो आप तो सब बाकी
- 2:10:22बाकी जो सब असत्संग की कैटेगरी में ही आता
- 2:10:24है
- 2:10:28और यह जैसे सत्संग हमारी भक्ति को रोपित
- 2:10:30करता है मतलब पुष्ट करता है असत्संग
- 2:10:33डिस्ट्रॉय करता हमने कितनों की भक्ति
- 2:10:34कार्तिक में चौपट होते हुए देखी हुई
- 2:10:36[हंसी] है ऐसा तो करे और असत्संग इतना
- 2:10:39भयंकर ना गुरु अनुग गुरु सेवा गुरु संता
- 2:10:42कोई एकांत कोई चीज बस घूमना डोलना खाना
- 2:10:45पीना और निंदा बस यही सब
- 2:10:51जैसे हमारे स्टॉल डिवोटीज हैं। कितने साल
- 2:10:53101 साल से हैं स्टॉल लगा रहे हैं। यह
- 2:10:57होता है लक्ष्मण रेखा उससे बाहर नहीं जा
- 2:10:59रहे तो सुरक्षित जाओ बाहर उसके बाद सब
- 2:11:03खत्म जो जो गुरु जी ने बता दिया ये
- 2:11:06उपदेशावली
- 2:11:08दीपावली उसके अनुसार क्या है तो लक्ष्मण
- 2:11:11रेखा के अंतर है सेफ एंड साउंड और चलो
- 2:11:14सेवा कोई निधिवंत चले और इधर चले उधर चल
- 2:11:16तो बस और वहां पे एक से ग्रेट सोर्स का
- 2:11:22मेल मिलाप एक्चुअली ये लोग को जरूरत भी
- 2:11:25नहीं है हम बताएं ना क्योंकि ये इतना देख
- 2:11:27चुके हैं क्या मतलब स्टॉल सेवा देखते रहते
- 2:11:30हैं भिन्न-भिन्न प्रकार के प्राणियों को
- 2:11:34मत खुद भी मतलब जो सबसे बढ़िया स्टॉल सेवा
- 2:11:38के हैं वो इतने अनुभव कर चुके हैं ग्रेट
- 2:11:41सोल्स कि उनके इच्छा ही नहीं करती कहीं
- 2:11:43जाने की
- 2:11:46कोई संप्रदाय हो ये दो ही चीजें लागू
- 2:11:49होंगी किनका संग करना या तो एकांतिक भजन
- 2:11:52में 15 एक घंटे रोज का और यह नहीं कि तीन
- 2:11:56दिन से 15 घंटे
- 2:11:58चार दिन 15 घंटे ऐसे कर नहीं
- 2:12:01लॉन्ग टाइम से या फिर गुरु के आज्ञा के
- 2:12:03अनुसार
- 2:12:05उसके अलावा सब असत्संग की कैटेगरी में आता
- 2:12:07है
- 2:12:14और जैसे बताया आपको राधा कुंड के संत कह
- 2:12:16रहे हैं 86 साल के ये देख रहे हो ना ये
- 2:12:18भक्ति नहीं है और दूसरा हमारा अभी जब हम
- 2:12:20आप लोगों को ले जब 2018 से पहले बाबा के
- 2:12:24पास जाते
- 2:12:25तो बाबा ना हमारे साथ थोड़ा संबंध तो आपको
- 2:12:28पता ही है नजदीकियात बाबा कहां गया ये नाम
- 2:12:32लेके बोलते थे कहां गया सच्ची वो ये इनके
- 2:12:36बाबा एक बार कभी खुश नहीं हुए थे
- 2:12:39एक बार सब बताते ना आगे एक बार ये बहुत
- 2:12:43बड़े व्यक्ति हैं इस समय वो तो उनके पास
- 2:12:45हम बैठे थे आप लोगों को ले उनके पास वो
- 2:12:49क्या बताएगा इसको बाबा ऐसे
- 2:12:54तो बास नेवर हैप्पी विद द काइंड ऑफ
- 2:12:56एनवायरमेंट प्रवेेंट इफ यू आर गेटिंग माय
- 2:12:59पॉइंट द एनवायरमेंट प्रवेट इज नॉट वेरी
- 2:13:03कंडसिव
- 2:13:06वही 86 ईयर ओल्ड महात्मा भी बता रहे हैं
- 2:13:08या देख रहे हो ना ये भक्ति नहीं होती
- 2:13:12एक्चुअली बात भी क्या कहो आप लोग यही तो
- 2:13:15अब देख के तो समझोगे ये भक्ति है देखने
- 2:13:18वाली चीज में वो है नहीं सही तो समझोगे
- 2:13:21कैसे
- 2:13:23हमने समझा दिया अगर आ जाए समय ये दो बातें
- 2:13:27या एकांतिक भजनंदी हो कोई कम से कम 15
- 2:13:30घंटे रोज का सदियों लॉन्ग टाइम से या गुरु
- 2:13:34की आज्ञा पे ही चलने वाला इसके अलावा सारा
- 2:13:38सोप तिलक कंठीधारी संग इस असत
- 2:13:41कार्तिक मास के बारे में बताना कुछ भी
- 2:13:43करना अरे यही तो बोला हरि कथा सुनना इसमें
- 2:13:45क्या गलत है चलो हमारी हर कथा सुनने चलते
- 2:13:47हैं
- 2:13:49कोई गलत बात है
- 2:13:52तो गुरुदेव के उपदेशावली का क्या होगा?
- 2:13:54उनकी प्रसन्नता का क्या है? और यह तुम्हें
- 2:13:56क्या पता क्या सही है? क्या बोला जा रहा
- 2:13:58है।
- 2:13:59तुम्हें क्या पता वक्ता की क्या स्थिति
- 2:14:01है?
- 2:14:09हे गोपाल
- 2:14:11राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:14:15हे गोपाल
- 2:14:18राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:14:21हे गोपाल
- 2:14:24राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:14:27हे गोपाल
- 2:14:30राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:14:33कृष्ण गोविंद [गाना गाने की आवाज़]
- 2:14:35गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:14:39कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:14:45कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:14:49गोविंदा [गाना गाने की आवाज़]
- 2:14:50कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:14:55गोविंदा
- 2:14:56हे गोपाल
- 2:14:58राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:15:02हे गोपाल
- 2:15:04राधे राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:15:07हे गोपाल
- 2:15:10राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:15:13हे गोपाल
- 2:15:15राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:15:19कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:15:24कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:15:29गोविंद
- 2:15:30कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:15:34गोविंदा
- 2:15:36कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:15:40गोविंदा
- 2:15:41हे गोपाल
- 2:15:43राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:15:47हे गोपाल
- 2:15:49राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:15:52हे गोपाल
- 2:15:54राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:15:58हे गोपाल
- 2:16:00राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:16:03कृष्णा कृष्ण गोविंद गोविंदा कृष्णा
- 2:16:06गोविंद गोविंदा
- 2:16:08कृष्ण गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंदा
- 2:16:14कृष्णा [हंसी] गोविंद गोविंदा कृष्ण
- 2:16:17गोविंद गोविंदा
- 2:16:19कृष्णा गोविंदा गोविंदा कृष्ण गोविंद
- 2:16:23गोविंदा
- 2:16:24हे गोपाल [गाना गाने की आवाज़] राधे
- 2:16:26कृष्णा गोविंदा गोविंदा
- 2:16:29हे गोपाल
- 2:16:31राधे कृष्णा गोविंदा गोविंदा
- 2:16:34हे गोपाल
- 2:16:36राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
- 2:16:39हे गोपाल
- 2:16:41राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:16:44कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:16:48गोविंदा
- 2:16:49कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:16:53गोविंदा
- 2:16:54कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:16:58गोविंदा
- 2:16:59कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा कृष्णा
- 2:17:02गोविंद गोविंदा
- 2:17:04हे गोपाल राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:17:09हे गोपाल
- 2:17:11राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:17:14हे गोपाल
- 2:17:16राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:17:19हे गोपाल
- 2:17:21राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:17:24कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:17:28गोविंदा
- 2:17:29कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:17:32[खांसने की आवाज़]
- 2:17:33[हंसी] गोविंदा
- 2:17:34कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:17:39गोविंदा
- 2:17:40कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:17:46गोविंदा
- 2:17:47कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:17:52गोविंदा
- 2:17:53कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:17:58गोविंदा
- 2:17:59हे गोपाल
- 2:18:02राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:18:06हे गोपाल
- 2:18:08राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:18:12हे गोपाल
- 2:18:14राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:18:18हे गोपाल
- 2:18:20राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:18:24कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:18:29गोविंद
- 2:18:31કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
- 2:18:37કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
- 2:18:43કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ गोविंद गोविंदा
- 2:18:49हे गोपाल
- 2:18:51राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:18:55हे गोपाल [गहरी सांस लेने की आवाज़]
- 2:18:57राधे कृष्णा गोविंद ગોવિંદ ગોવિંદ
- 2:19:01હે ગોપાલ
- 2:19:04રાધે કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
- 2:19:07હે ગોપાલ
- 2:19:10રાધે કૃષ્ણ ગોવિંદ गोविंद
- 2:19:13कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:19:18गोविंदा
- 2:19:20कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:19:24गोविंदा
- 2:19:25कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा कृष्णा
- 2:19:29गोविंद गोविंद
- 2:19:31कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:19:36गोविंद
- 2:19:37हे गोपाल
- 2:19:40राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:19:43हे गोपाल
- 2:19:46राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:19:49कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:19:54गोविंद
- 2:19:55कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:20:00गोविंद
- 2:20:01कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:20:07कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:20:13हे गोपाल
- 2:20:15राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:20:19हे गोपाल
- 2:20:21राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:20:25हे गोपाल
- 2:20:27राधे राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
- 2:20:31हे गोपाल
- 2:20:33राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:20:37कृष्ण गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:20:43कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:20:49कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:20:53गोविंद
- 2:20:55कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:20:58कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:21:01हे गोपाल
- 2:21:03राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:21:07हे गोपाल
- 2:21:09राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:21:12हे गोपाल
- 2:21:15राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:21:18हे गोपाल
- 2:21:21राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:21:24कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:21:27कृष्ण गोविंद गोविंदा
- 2:21:30कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:21:36कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:21:41गोविंदा
- 2:21:42कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:21:46गोविंदा
- 2:21:48हे गोपाल
- 2:21:50राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
- 2:21:54हे गोपाल
- 2:21:56राधे राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:21:59हे गोपाल
- 2:22:02राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:22:05हे गोपाल
- 2:22:07राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:22:11कृष्ण गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:22:17कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:22:23कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:22:26કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
- 2:22:29કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
- 2:22:34હે ગોપાલ
- 2:22:36राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:22:40हे गोपाल
- 2:22:42राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
- 2:22:46हे गोपाल
- 2:22:48राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
- 2:22:52हे गोपाल
- 2:22:54राधे कृष्णा कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:22:57कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:23:02गोविंद
- 2:23:05कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण
- 2:23:09गोविंद
- 2:23:10कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:23:14गोविंद गोविंद
- 2:23:16कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:23:21गोविंद
- 2:23:22गोपाल
- 2:23:24राधे राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:23:28हे गोपाल
- 2:23:30राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:23:33हे गोपाल
- 2:23:35राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:23:38हे गोपाल
- 2:23:41राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:23:44कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:23:49गोविंद
- 2:23:50कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:23:54गोविंदा कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा
- 2:23:59गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:24:04कृष्णा गोविंद गोविंद गोपाल
- 2:24:09राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:24:13हे गोपाल
- 2:24:15राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:24:18हे गोपाल
- 2:24:20राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:24:24हे गोपाल
- 2:24:26राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
- 2:24:30कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:24:34गोविंदा
- 2:24:35कृष्णा गोविंद [गाना गाने की आवाज़]
- 2:24:37गोविंदा कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:24:41कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:24:46गोविंदा
- 2:24:47कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:24:51गोविंद हे गोपाल
- 2:24:55राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:24:58हे गोपाल
- 2:25:00राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:25:04हे गोपाल
- 2:25:06राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:25:10हे गोपाल
- 2:25:12राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:25:16कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:25:21कृष्णा गोविंद ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ
- 2:25:26ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ
- 2:25:32ગોવિંદ
- 2:25:33कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद
- 2:25:37गोविंदा
- 2:25:38हे गोपाल
- 2:25:41राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
- 2:25:44हे गोपाल
- 2:25:46राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:25:50हे गोपाल
- 2:25:52રાધે કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
- 2:25:56હે ગોપાલ
- 2:25:58राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
- 2:26:02कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:26:05[संगीत]
- 2:26:06गोविंदा
- 2:26:07कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:26:12गोविंद
- 2:26:13कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
- 2:26:18गोविंद
- 2:26:19कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
- 2:26:23गोविंदा
- 2:26:25गोपाल
- 2:26:27राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
- 2:26:30गोपाल
- 2:26:32राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
- 2:26:38श्याम की
- 2:26:39जय
- 2:26:40वृंदावन धाम की
- 2:26:41जय
- 2:26:43की
- 2:26:43जय
- 2:27:01बोलो मेरे सतगुरु देव महाराज की
- 2:27:04जय
- 2:27:11नहीं
- 2:27:54करना चाहूंगा
- 2:27:57जैसे
- 2:28:12एवरीबडी इज़ नॉट अवेयर प्रोबेब्ली एवरीबडी
- 2:28:14इज़ नॉट अवेयर नो टीचर
- 2:28:17नॉट अवेयर ओके
- 2:28:57सबको अगर
- 2:29:41हरि बोल
- 2:29:43सब बहुत सौभाग्यशाली है कि आज इस कार्तिक
- 2:29:46मास में श्री गुरुदेव के समक्ष हमें इस
- 2:29:49दिव्य घटना को विटनेस करने का मौका मिल
- 2:29:52रहा है। जैसा कि श्री गुरुदेव के बहुमूल्य
- 2:29:55जेम्स जो कि ग्रंथ के फॉर्म में हम सबके
- 2:29:58पास है। हिंदी, इंग्लिश, बंग और कौन सी
- 2:30:01लैंग्वेज में है?
- 2:30:03फ्रेंच में
- 2:30:05और
- 2:30:07तो आज जैसे कि आपने देखा कि हम लोग गए थे
- 2:30:10बालाजी के आश्रम में और वहां पर भी
- 2:30:12ग्रंथों को रिवील किया। उनकी पूजन हुई। तो
- 2:30:15अब समय है उन ग्रंथों को रिवील करने का कि
- 2:30:18वो कौन सी लैंग्वेज में है और कौन-कौन से
- 2:30:21ग्रंथ है तो
- 2:30:27हरि बोल [प्रशंसा]
- 2:30:30हरि बोल [हौसला बढ़ाने की आवाज़]
- 2:30:43कार्तिक की पागल मेला वृंदावन धाम श्री
- 2:30:48गुरुदेव की कृपा से गौर हरि का भजन हर जगह
- 2:30:52गूंजेगा
- 2:30:57गुरुदेव के श्री चरणों से मिली भक्ति का
- 2:31:00प्रकाश दो ग्रंथों में समाया है
- 2:31:03सिद्धांतों का दिव्य स्वास
- 2:31:07प्रथम ग्रंथ गौर भजन की महिमा कैन नॉट
- 2:31:11बिकम अ मंजरी विदाउट डीप गौर भजन का दिव्य
- 2:31:14उपदेश
- 2:31:16गौर भजन की गहराई मंजरी भाव का उपदेश
- 2:31:21पहले अंग्रेजी हिंदी बंगाली फिर रूसी
- 2:31:25फ्रेंच और अब जर्मन भाषाओं में विस्तार छ
- 2:31:29भाषाओं में गौर भक्ति की महिमा पहुंचेगी
- 2:31:32देश विदेश अपार
- 2:31:36और अब एक अनमोल आश्चर्य एक ऐसा उपहार
- 2:31:39जिसकी किसी को खबर नहीं गुरुदेव की इस
- 2:31:42कृपा कि की कोई सीमा नहीं
- 2:31:45हरि बोल
- 2:31:48प्रिय गॉड वैष्णवा अब फ्रेंच में आया पहली
- 2:31:51विदेशी भाषा में भक्ति का दीप जगमगाया
- 2:31:57भाषाएं भिन सही पर भक्ति का भाव एक गुरु
- 2:32:00चरणों में प्रेम ही है जीवन का विवेक में
- 2:32:03फैलेगा गौर्य सिद्धांतों का सार
- 2:32:05हरि बोल
- 2:32:07जय जय श्री राधे जय गौर हरि श्री गुरुदेव
- 2:32:10की जय श्री वृंदावन धाम की जय
- 2:32:14[प्रशंसा]
- 2:32:15बाय गुरुदेव्स मर्सी लेट श्री गौरांग
- 2:32:18ग्लोरी शाइन बी अ गियर वैष्णव इन फ्रेंच अ
- 2:32:22गिफ्ट ऑफ ग्रेस डिवाइन गॉड भजन इन जर्मन
- 2:32:26लेट से डिवोशन फ्लो मेता बाउंडलेस मर्सी
- 2:32:30इन एवरी अवेकन एंड ग्रो
- 2:32:42राधे राधे
- 2:32:45राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
- 2:32:49राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
- 2:32:54राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
- 2:32:58राधे राधे राधे राधे
- 2:33:02अब हम रिक्वेस्ट करेंगे श्री गुरुदेव अपने
- 2:33:05ग्रंथ रिवी
- 2:33:08ये ग्रंथ है
- 2:33:14हरि
- 2:33:20[संगीत]
- 2:33:22जय
- 2:33:24श्री राम [संगीत]
- 2:33:27की
- 2:33:33जय
- 2:33:41गोरा गोरा गोरा
- 2:33:44गोरा गोरा गोरा गोरा [संगीत]
- 2:33:48गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
- 2:33:57गोरा गोरा गोरा
- 2:34:01गोरा हरि बोल
- 2:34:07गोरा
- 2:34:09गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
- 2:34:29हमी और भजन के नाम से जानते हैं। अब ये
- 2:34:33हिंदी इंग्लिश रशियन मिल रही है। अब ये
- 2:34:36जर्मन में भी
- 2:34:38फ्रेंच में भी [हंसी] है सॉरी भाषा में भी
- 2:34:41है और इस का नाम है मन कान के मंजरी भर
- 2:34:55रा
- 2:35:15[हंसी]
- 2:35:34वैष्णव जय श्री गुरुदेव
- 2:35:39[हौसला बढ़ाने की आवाज़]
- 2:35:44वैष्णव हमारे समक्ष रशिया
- 2:35:48में भी है। [हंसी]
- 2:36:03गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
- 2:36:07गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
- 2:36:12गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
- 2:36:17गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
- 2:36:21गोरा
- 2:36:23जय जय श्री गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव
- 2:36:29जय गुरुदेव
- 2:36:30जय जय गुरुदेव
- 2:36:33गुरुदेव
- 2:36:35गुरुदेव जय गुरुदेव जय जय गुरुदेव जय
- 2:36:40गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय जय
- 2:36:46गुरुदेव
- 2:36:48गुरुदेव
- 2:36:49गुरुदेव
- 2:36:51जय गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
- 2:36:55गुरुदेव
- 2:36:56गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
- 2:37:01गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
- 2:37:06गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
- 2:37:10गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
- 2:37:16गुरुदेव की जय
- 2:37:29स्टार्ट
- 2:37:42अपने
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This page contains the full transcript of Kartik Mahatmaya by SRI GURUDEVAmedia, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 17,452 words across 2,605 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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