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Kartik Mahatmaya — Transcript

by SRI GURUDEVAmedia · 17,452 words · 2,605 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00नाम पावनेभ्यो
  2. 0:03वैष्णवेभ्यो नमो नमः
  3. 0:07श्री गौरांग नित्यानंद
  4. 0:13श्री अद्वैत चंद्र
  5. 0:18गदाध श्रीवासादी
  6. 0:23गौर भक्त वृंद
  7. 0:26हरे कृष्ण हरे हरे कृष्ण
  8. 0:32कृष्ण कृष्ण हरे हरे
  9. 0:38हरे रामा हरे रामा
  10. 0:43रामा रामा हरे हरे
  11. 0:58[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  12. 1:03जो भक्ति में काफी समय से हैं। आज का सत्र
  13. 1:06हमारे अन्य सत्रों की तरह उन्हीं के लिए
  14. 1:08है।
  15. 1:10इतने समय से नाम जप कर रहे हैं। कार्तिक
  16. 1:14मास रखने का प्रयत्न कर रहे हैं। धाम में
  17. 1:18आते हैं। तो जो जो चीज हम कर रहे हैं उनका
  18. 1:21महात्म यदि हमें सही रूप से मालूम होगा
  19. 1:24दीक्षा मंत्र कर रहे हैं उनका महात्म यदि
  20. 1:26हमें सही रूप से मालूम होगा वह कैसे करना
  21. 1:28चाहिए वह हमें मालूम होगा तो ही हम उसका
  22. 1:31सही लाभ उठा पाएंगे
  23. 1:34अन्यथा
  24. 1:36लाभ नहीं उठा पाएंगे जैसे कुछ समय पहले
  25. 1:40हमने ब्रजमंडल परिक्रमा में धाम तत्व के
  26. 1:42ऊपर बताया था तो मैं सम्यक विवरण था अब
  27. 1:47कभी भी धाम तत्व के बारे में सुनना समझना
  28. 1:51कुछ भी है एक बार सुनेंगे तो सब हमेशा
  29. 1:54हमेशा कोई भी संप्रदाय का सुन ले हमेशा
  30. 1:57हमेशा के लिए क्लियर हो जाएगा
  31. 2:08उसी प्रकार से दीक्षा मंत्र कैसे करने
  32. 2:11चाहिए मंत्र स्मरण क्या होता है कैसे उस
  33. 2:13पर भी सत्र विस्तार से लिया गया था यदि
  34. 2:16कभी भी इस विषय में जानने का उसको कहो तो
  35. 2:19हम एक बार सुन ले सब समझ आ सकता है। अभी
  36. 2:23जन्माष्टमी में हम नाम तत्व के ऊपर बताने
  37. 2:25वाले थे परंतु शायद नाम प्रभु की अभी अभी
  38. 2:28आप पर कृपा शायद नहीं होनी थी तो रह गया।
  39. 2:31देखिए कब हमने काफी समय
  40. 2:36जो भी वैदिक साहित्य हो सकता है। दुनिया
  41. 2:39जहान के पुराण वेद सबसे लेकर हमने सोचा था
  42. 2:44बताएंगे। पर देखिए कब कृपा होती है नाम
  43. 2:47प्रभु की पर कार्तिक भी उसी प्रकार से है।
  44. 2:50हम नाम भी सालों से ले रहे हैं। धाम भी
  45. 2:52सालों से आ रहे हैं। कार्तिक भी सालों से
  46. 2:55कर रहे हैं। पर कार्तिक में
  47. 3:00अ
  48. 3:01आई विल बी डिस्टर्ब इन पिंट ऑफ साइंस मी।
  49. 3:19कार्तिक का महात्म यदि हमें सही सम्यक रूप
  50. 3:22से विदित होगा तो हम उसको सही रूप से कर
  51. 3:25पाएंगे।
  52. 3:28मंत्र स्मरण के ऊपर तो हजारों लेक्चर
  53. 3:33YouTube इत्यादि पर देख सकते हैं। परंतु
  54. 3:36सम्यक विवरण एक भी जगह पर कहीं नहीं है।
  55. 3:40इसका लगेगा तो क्या हो गया? सम्यक नहीं है
  56. 3:42कुछ तो है ये वही है आधा हकीम ज्ञान वो
  57. 3:45मुर्दा जान ऐसा कुछ कहावत है कि भाई आधा
  58. 3:48अधूरा ज्ञान होता है दैट किल्स यू
  59. 3:50एक्चुअली सिमिलरली कार्तिका महत्व भी यदि
  60. 3:54हम इधर-उधर
  61. 3:56वास्तविक महापुरुष के मुख से नहीं सुनेंगे
  62. 3:58इधरउधर कहीं से भी सुन लेंगे तो फायदे के
  63. 4:01बजाय नुकसान होगा क्योंकि क्योंकि सम्यक
  64. 4:04विवरण तो है नहीं जब जब सम्यक रूप से है
  65. 4:07नहीं तो तो हमें एक पक्षीय
  66. 4:12समझ आएगा
  67. 4:14और सम्यक रूप से विवरण करने के शास्त्रों
  68. 4:16का सम्यक अध्ययन भी चाहिए। विविध पुराणों
  69. 4:19वेद पुराणों शास्त्रों का सम्यक अध्ययन
  70. 4:22इसके लिए समय देना होता है। यह नहीं कि वो
  71. 4:28कट एंड फेस से काम नहीं चलता है।
  72. 4:31तो आज आपके विशेष कृपा है। आपके ऊपर क्या
  73. 4:34हमारे मरने के बाद यह सत्र सुने जाएंगे
  74. 4:37क्योंकि इतना महत्वपूर्ण है और एक ही बार
  75. 4:39बोलना है हमने आपको पता है। कार्तिक हो
  76. 4:41चाहे धाम महात्म हो कुछ भी हो एक बार
  77. 4:43बोलेंगे सम्यक रूप से बताएंगे तो सबके लिए
  78. 4:46अभी भी आने वाले सालों के लिए भी ग
  79. 4:49संप्रदाय के लिए भी एकमात्र सत्र जो
  80. 4:51कार्तिक में सुना समझा जाएगा वो यही सत्र
  81. 4:53होगा तो हम प्रारंभ करेंगे स्कंद पुराण से
  82. 4:57स्कंद पुराण में श्री
  83. 5:01[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  84. 5:04ऋषियों ने बोला श्री सूत जी महाराज से हम
  85. 5:07लोग कार्तिक मास का महात्म सुनना चाहते
  86. 5:09हैं।
  87. 5:11अच्छी बात है। तो उन्होंने क्या कहा? बेटा
  88. 5:17उन्होंने कहा
  89. 5:19अश
  90. 5:24[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  91. 5:26सुजू ने बोला कि आपने जो प्रश्न किया है
  92. 5:28इसी को नारद जी ने ब्रह्मा जी से यह
  93. 5:31प्रश्न पूछा था। सोचो प्रश्न कितना
  94. 5:33महत्वपूर्ण है। पूछने वाला कौन? नारद मुनि
  95. 5:37जो कि सब कुछ जानते हैं।
  96. 5:39पूछ कैसे रहे हैं ब्रह्मा जी? तो प्रश्न
  97. 5:41कितना महत्वपूर्ण है? ऋषि जन पूछ रहे हैं
  98. 5:44सू जी महाराज से और ब्रह्मा जी से पूछा
  99. 5:48गया था नारद मुनि द्वारा। तो प्रश्न ही
  100. 5:50इतना महत्वपूर्ण है। जब बड़े व्यक्ति बात
  101. 5:52करते हैं तो बात बड़ी होती है हमेशा। बड़े
  102. 5:54व्यक्ति छोटी बात नहीं करते। तो इतने बड़े
  103. 5:57व्यक्ति बात करें नारद मुनि उन्होंने
  104. 6:00प्रश्न पूछ लिया। मतलब वो बहुत महत्वपूर्ण
  105. 6:02है। कि कार्तिक मास का महात्म बताएं। तो
  106. 6:06ब्रह्मा जी ने जब महात्म बताने प्रारंभ
  107. 6:09करने से पहले पहले क्या किया? उन्होंने
  108. 6:11भगवान श्री राधा कृष्ण का श्यामा श्याम का
  109. 6:14स्मरण किया।
  110. 6:16महात्म बताने से पहले स्मरण किया और और
  111. 6:19पुनः कहा नारद जी से बेटा।
  112. 6:23बड़ा सुंदर प्रश्न किया। यह प्रश्न समस्त
  113. 6:26लोकों का उद्धार करेगा।
  114. 6:29यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण है। इसका उत्तर
  115. 6:31इतना महत्वपूर्ण है कि उत्तर अच्छे रूप से
  116. 6:34जान के हम उद्धार हमारा तो छोड़िए पूरे
  117. 6:37लोक का उद्धार हो जाए तो हमारा कैसे नहीं
  118. 6:39होगा? तो ये प्रश्न का उत्तर जानना कितना
  119. 6:42महत्वपूर्ण है कि कार्तिक का महात्म क्या
  120. 6:45है?
  121. 6:47तो कार्तिका महात्मा मैं तुमसे कहता हूं
  122. 6:50या
  123. 6:52यह ब्रह्मा जी ने कहना शुरू किया कि
  124. 6:54कार्तिक मास जो है भगवान को सदा ही प्रिय
  125. 6:58है।
  126. 7:00यह मास भगवान को बहुत प्रिय है। जैसे कोई
  127. 7:04अमीर व्यक्ति के प्रिय बच्चे को या उसके
  128. 7:07पेट को थोड़ा दुलार कर दो कितना खुश हो
  129. 7:09जाता है। सब कोई लुटा देता है। क्यों?
  130. 7:11क्योंकि वह उसको प्रिय बेटा बेटी पोता
  131. 7:15प्रिय है। उसको यू यू कर दो तो उसी से वह
  132. 7:17खुश हो जाता है। तो कार्तिक मास भगवान को
  133. 7:20बहुत प्रिय है। समझे प्रिय क्या होता है?
  134. 7:24डियर भगवान को भी कुछ डियर होता है। हां
  135. 7:27मासों में भी कुछ डियर मंथ्स में भी कोई
  136. 7:29डियर मंथ होता है। वही कार्तिका मास डियर
  137. 7:33मंथ प्रिय केशव प्रिय दामोदर प्रिय
  138. 7:38अलग-अलग कार्तिकेय इस नाम बताए गए हैं।
  139. 7:41केशव प्रिय दामोदर प्रिय
  140. 7:45इस
  141. 7:46मास में कार्तिक मास में भगवान के
  142. 7:49उद्देश्य से जो कुछ किया जाता है जो कुछ
  143. 7:51पुण्य दान इत्यादि इत्यादि जप तपस्या
  144. 7:56स्नान जागरण
  145. 7:59वह उसका कभी नाश नहीं होता आप इस संसार
  146. 8:03में कुछ भी कर लो वह नाशवान है पर यदि
  147. 8:07कार्तिक में आप भगवत प्रीत्यार्थ कुछ करते
  148. 8:09हो उसका नाश होना संभव ही नहीं
  149. 8:11यह प्रथम बात बता रहे हैं। जो कर रहे हो
  150. 8:16यह अक्षय फल देने वाला है। अक्षय मतलब
  151. 8:19क्षय मतलब जिसका विनाश खत्म हो जाता है जो
  152. 8:23क्षय हो गया। खत्म हो गया। मेरे पैसे क्षय
  153. 8:24हो गए। मतलब अब नहीं है। अक्षय मतलब खत्म
  154. 8:28ही नहीं होंगे। यह जो इस समय जो सेवा
  155. 8:30तपस्या दान
  156. 8:32स्नान जप अध्ययन जो किया जाएगा उसका फल
  157. 8:35अक्षय है। उसे कोई मेट नहीं सकता।
  158. 8:42दिस इज द मोस्ट प्यूरिफायर ऑफ ऑल
  159. 8:44प्यूरिफायर्स कार्तिक मास। सबसे बड़ा
  160. 8:47प्यूरिफायर है यह। सबसे शुद्ध करने वाला।
  161. 8:51हृदय को शुद्ध करने वाला। द मोस्ट
  162. 8:54प्यूरिफायर ऑफ ऑल प्यूरिफायर्स।
  163. 8:57समस्त पावन पदार्थों में सबसे अधिक पावन
  164. 8:59है। ये
  165. 9:02जो कार्तिक मास रखता है भगवान के लिए एक
  166. 9:06तो देवी देवता और भगवान एक नहीं होते। ये
  167. 9:07समझना होगा। माता और ये सब भगवान नहीं है।
  168. 9:10ये सब देवी देवता हैं। तो देवी देवता जो
  169. 9:13है मनुष्य के निकट हो जाते हैं। कार्तिक
  170. 9:15मास आप रखते हो। निकट आपके देवी देवता हो
  171. 9:17जाते हैं।
  172. 9:21एक्चुअली हम तो कहीं पे भी चले जाएंगे
  173. 9:23क्योंकि आपको तो पता ही है।
  174. 9:49[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  175. 9:55तो
  176. 10:00जो कार्तिक मास रख लगता है। अब ये देख पढ़
  177. 10:02के बताते तो और अच्छा से बताते। उसमें
  178. 10:11जो भक्त होता है उसका संग पाने के लिए
  179. 10:13देवता तरसते हैं। निकट होना तो बड़ी दूर
  180. 10:16की छोटी बात बताई हमने आपको। जो देवी
  181. 10:19देवता हैं वो तरसते हैं ऐसे भक्त का संग
  182. 10:23पाने के लिए जो कार्तिक मास करता है। कैन
  183. 10:25यू बिलीव इट? इससे समझ लो कि देवी देवता
  184. 10:28और भगवान में कितना भेद है। उनको प्रिय है
  185. 10:31शाम को तो आप देवता तरस से आपका संग कैसे
  186. 10:35मिलेगा? सोचो आपका संग करने के लिए देवी
  187. 10:37तरस है। कैन यू बिलीव इट? और आप उनके दो
  188. 10:39धोबत्ती कर रहे हो।
  189. 10:50इस इस मास में किया हुआ स्नान दान भोजन
  190. 10:53व्रत तिल धेनु स्वर्ण रजत भूमि आदि वस्त्र
  191. 10:56आदि
  192. 10:58जो कुछ भी दिया जाता है तप किया जाता है
  193. 11:01वह अक्षय फल होता है उसका उसका अंत नहीं
  194. 11:03है
  195. 11:06और इसमें अन्नदान का महत्व सबसे अधिक है
  196. 11:08जो कार्तिक में अन्नदान करता है उससे सारे
  197. 11:12पापों का सर्वथा नाश हो जाता है हमेशा
  198. 11:14हमेशा के लिए इतने पाप पाप करें हमारे
  199. 11:16अनंत जन्मों के पापों का नाश हो जाता है
  200. 11:19अन्नदान करने से
  201. 11:24पद स्कंद पुराण में बताया गया ना कार्तिको
  202. 11:26समो मासो ना कृतेन समम युगम ना वेद
  203. 11:30सदृश्यम शास्त्रम ना तीर्थम गंगया समम
  204. 11:33इसका माने है कि कार्तिक के समान कोई मास
  205. 11:37नहीं है सतयुग के समान कोई युग नहीं है
  206. 11:40वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है और
  207. 11:42गंगा जी के समान दूसरा कोई तीर्थ नहीं
  208. 11:45तो कार्तिक के समान कार्तिक ही है और कोई
  209. 11:48मास नहीं है।
  210. 11:52यह स्कंद पुराण में और वर्णन आता है
  211. 11:58कि
  212. 12:01जो व्रत अनुष्ठान करते हैं
  213. 12:05अन्य महीनों में उसका वर्णन किया है। भाई
  214. 12:09इसका यह फल होगा, यह फल होगा, यह फल होगा।
  215. 12:11पर जो कार्तिक मास में जो जो महात्म है
  216. 12:15उसका वर्णन करना ही संभव नहीं है। कार्तिक
  217. 12:17मास का वर्णन से पड़े हैं कार्तिक में जो
  218. 12:20क्योंकि अक्षय फल है ना इसका इनफाइनाइट का
  219. 12:23क्या वर्णन करोगे? इनफाइनाइट
  220. 12:26तो जो कार्तिक में जो भी भक्ति में कार्य
  221. 12:29किया उसका फल अनंत है।
  222. 12:33सीमा रहित है।
  223. 12:38महात्म वर्णन करना अति कठिन है। क्योंकि
  224. 12:41अन्य मासों में तो महात्म का ठीक है। 2 +
  225. 12:432 4 हो गया। अब 2 प्लस इनफिनिटी क्या कैसे
  226. 12:47कैलकुलेट करें? संभव नहीं है। इसलिए
  227. 12:49महात्म ही वर्णन नहीं करा जा सकता है।
  228. 12:53एक छोटी सी बात आपको बता रहे हैं। जैसे
  229. 12:55हमने आपको पहले ब्रज मंडल में भी बताया था
  230. 12:58परिक्रमा में कि एक बार जो वृंदावन आ जाए
  231. 13:01उसको श्री कृष्ण की प्राप्ति निश्चित
  232. 13:03होगी। एक बार भी आ जाए। अच्छा अगर वो
  233. 13:06कार्तिक में आए
  234. 13:09यही बता रहे हैं यह ग्रंथ है शीला रूप
  235. 13:11गोस्वामी पाद का श्री मथुरा महात्म्य
  236. 13:15श्लोक नंबर 220 है ये
  237. 13:19कार्तिकेय जन्म सदने केशवस्य
  238. 13:22चय नरह सृत प्रविष्टा श्री कृष्णम ते याती
  239. 13:29परम अव्ययम
  240. 13:32जो श्री कृष्ण की भूमि वृंदावन में
  241. 13:36कार्तिक केय महीने में एक बार भी आ जाते
  242. 13:40हैं। एक बार वह निश्चित रूप से कभी ना अंत
  243. 13:45होने वाले अनंत भगवान श्री कृष्ण की
  244. 13:47प्राप्ति कार्तिक में एक बार भी आ जाते
  245. 13:50हैं। और हम तो हर साल आते हैं
  246. 13:55और कुछ तो यहां रह ही रहे हैं।
  247. 13:58तो
  248. 14:00हम जाने हम पर कितनी विशेष कृपा हो रही
  249. 14:02है। हो चुकी है भगवान की। हम जानेंगे नहीं
  250. 14:06तो हम रोते-रोते अपना यह नहीं है वो नहीं
  251. 14:08[हंसी] है इतना कुछ है हमारे पास
  252. 14:37हम ड्यूटी के नाम पर अपने आप को कितना
  253. 14:39बेवकूफ बनाते हैं। हमने कितना सत्र दिया
  254. 14:42शायद ही किसी ने लाभ लिया हो। इस श्लोक से
  255. 14:44अगर लाभ लेना चाहे तो आपकी अपने ऊपर कृपा
  256. 14:47हो सकती है। 221 अगला श्लोक ही है। जिस
  257. 14:51व्यक्ति ने उठान एकादशी जो एक कार्तिक में
  258. 14:54रहती है
  259. 14:57वह भगवान के धाम वृंदावन मथुरा में बना ली
  260. 15:01तो
  261. 15:04लोके किंचित न विद्यते उसकी देयर आर नो ही
  262. 15:07हैज़ नो फदर फदर ड्यूटीज टू परफॉर्म आपने
  263. 15:10अगर एकादशीय रख ली आपकी कोई फदर ड्यूटी
  264. 15:12नहीं रह जाती खत्म जो आपके मान का गारवे
  265. 15:15था ना मेरी ये और वो ये एकादशीय रखी
  266. 15:18ड्यूटीज खत्म कौन बोल बोल रहे हैं जिनके
  267. 15:21आप मंत्र करते हो किनका मंत्र करते हो
  268. 15:23रूपम मंजरी ये रूप गोस्वामी है शास्त्र से
  269. 15:26बता रहे हैं
  270. 15:31कितनी बड़ी बात है क्या वर्णन करें
  271. 15:33कार्तिक मास का कार्तिक मास में ये वाली
  272. 15:36एकादशी यदि रख ली ब्रज में कोई ड्यूटी
  273. 15:39नहीं है
  274. 15:47और जो आपको सुनने में अच्छा लगता है वो
  275. 15:49श्लोक सुन
  276. 15:51कि यदि कोई
  277. 15:57एवं प्रदक्षिणम कृत्वा नवमी
  278. 16:00शुक्ल कोमोदिम शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन
  279. 16:05यदि कोई परिक्रमा करता है तो
  280. 16:10ब्रज की तो द एंटायर जो सर्वान कुलान
  281. 16:16एंटायर फैमिली पूरा कुल फैमिली नहीं कुल
  282. 16:20सर्वान कुलान
  283. 16:22समाधाय विष्णु लोक महते उसके पूरे परिवार
  284. 16:27का
  285. 16:28भगवान विष्णु के लोक में पूजन होता है।
  286. 16:34उस दिन नवमी के दिन यदि वृंदावन की
  287. 16:38परिक्रमा कर ली अक्षय नवमी सुना हुआ है?
  288. 16:42अभी आएगा 19 को 19 है 17 ही 19 है ऐसे 17
  289. 16:4717 19 है देख के बताएंगे तो यदि किसी ने
  290. 16:51परिक्रमा कर ली उसके पूरा परिवार विष्णु
  291. 16:53लोक पूजित होगा अब बताओ इसका वर्णन कर
  292. 16:55सकते अभी तो हमने प्रारंभ भी नहीं किया
  293. 16:56अभी तो ये हम पांच घंटे भी बोल सकते हैं
  294. 16:59रात तक बैठे रहेंगे हम कितना कुछ है बताने
  295. 17:03का
  296. 17:06[गहरी सांस लेने की आवाज़]
  297. 17:24बहुत कुछ है जैसे कि कार्तिक में बिना
  298. 17:26बिना मतलब रूल रेगुलेशंस नहीं भी पता है
  299. 17:29तो भी पूजा करते हो। यदि कार्तिक में
  300. 17:33तो भी कृष्ण की वास्तविक पूजा मानी जाती।
  301. 17:36शुद्ध पूजा
  302. 17:39कार्तिक सब बाकी महीनों में नहीं बाकी में
  303. 17:41सब सब लागू हो जाता है।
  304. 17:45और कई बार इतने भयंकर पाप हो जाते हैं
  305. 17:47जिसका एक ही परिणाम होता है मृत्युदंड।
  306. 17:50यदि वो भी किसी का हो तो उसका एक उसका भी
  307. 17:52एक अल्टरनेट है कि किसी बहुत खराब पाप
  308. 17:55किया। मृत्युदंड है। उसका अल्टरनेट क्या
  309. 17:57है? कि भगवान कृष्ण की वृंदावन मथुरा में
  310. 18:03कार्तिक मास में पूजन करो वह भी माफ हो
  311. 18:05जाएगा।
  312. 18:07यह कार्तिक महात्म का प्रारंभ ही नहीं कर
  313. 18:10रहे हैं अभी हम तो ही आप सुन रहे हैं।
  314. 18:22और जो है हरिद्वार और वैष्णो देवी और पता
  315. 18:25नहीं कहां-कहां जाते रहते हैं धक्के खाने
  316. 18:26के लिए। वो लिख रहे हैं किम यज्ञ किम
  317. 18:30तपोभरवा तीर्थ अन्य सेविता कार्तिक
  318. 18:34मथुराया चेद अर्चते राधिका प्रिय जो श्री
  319. 18:39कृष्ण राधा रानी के प्रिय हैं क्योंकि
  320. 18:41कार्तिक मास में उनकी अर्चन करते हैं तो
  321. 18:46कोई भी तपस्या करने की क्या जरूरत है कोई
  322. 18:48भी तीर्थ स्थली में जाने की जरूरत क्या है
  323. 18:51कोई भी तीर्थ स्थान में जाने की क्या
  324. 18:53जरूरत है
  325. 18:56पिताजी को पूजा कर रहे हो श्री कृष्ण की
  326. 18:59कहीं जाने की जरूरत नहीं कुछ करने की
  327. 19:01जरूरत जो करना था कर लिया तभी यह कर पा
  328. 19:04रहे हो आपको लगता है वृंदावन में बैठ के
  329. 19:06मजाक है या कार्तिक में बैठ के कथा सुन
  330. 19:08रहे हो पता नहीं क्या-क्या जन्मों में
  331. 19:10क्या-क्या करके आए हो तो अब यहां बैठ के
  332. 19:12कथा सुन रहे हो विश्व विश्वधारी कथा
  333. 19:17तो कार्तिक अभी हम कर रहे हैं आगे सब
  334. 19:20करेगा अब यह बताएंगे कि कार्तिक मास
  335. 19:26प्रारंभ कब होता है? कब प्रारंभ होता है?
  336. 19:31अब लोग अपने हिसाब से कर लेते हैं कई जगह
  337. 19:36संस्थाएं।
  338. 19:38यह ग्रंथ क्या लिखा हुआ है? कौन सा ग्रंथ
  339. 19:40है? हम यहीं से बता रहे हैं।
  340. 19:46आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी
  341. 19:49आती है उसी दिन आलस्य छोड़कर कार्तिक के
  342. 19:53उत्तम व्रतों का नियम ग्रहण करो। कब से?
  343. 19:57एकादशी से। हम लोग कब से करते हैं? एकादशी
  344. 20:01से। यह पद्म पुराण में बताया जा रहा है।
  345. 20:05पद्म पुराण
  346. 20:08इस पे क्या लिखा हुआ है?
  347. 20:11अब यहां से बता
  348. 20:15जो आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर
  349. 20:19कार्तिक शुक्ल एकादशी तक यानी कि एकादशी
  350. 20:22तक व्रत पालन करता है उसके ऊपर भगवान
  351. 20:25जनार्दन भगवान जनार्दन श्री कृष्ण प्रसन्न
  352. 20:28होते हैं। जो एकादशी से शुरू करता है
  353. 20:31एकादशी पर खत्म करता है ना कि पूर्णिमा से
  354. 20:32शुरू करके पूर्णिमा पर
  355. 20:36स्पष्ट बताया जा रहा है एकादशी से शुरू
  356. 20:38करके एकादशी से खत्म
  357. 20:42दूसरा
  358. 21:00आश्विन श्यामले पक्ष एकादश एकादश्याम
  359. 21:05उपोषित व्रतम ततु गहियात
  360. 21:09ये काफी लंबा श्लोक है मतलब फिर से वही है
  361. 21:12अश्विन शुक्ला एकादशी को एक महीने का
  362. 21:15मासोपवास व्रत ग्रहण करें और श्री कृष्ण
  363. 21:19भगवान की आराधना करें जो तो ये ऐसा करता
  364. 21:21है मुक्त हो जाता है। इत्यादि इत्यादि
  365. 21:23बताया गया। तो फिर से क्या बताया जा रहा
  366. 21:25है? कहां से प्रारंभ करना है? एकादशी से।
  367. 21:47एकादशी से प्रारंभ करना है। अब
  368. 21:51प्रारंभ करना कैसे है?
  369. 21:55उस पर थोड़ा डिटेल में आना है। पर प्रारंभ
  370. 21:57की एक श्लोक बता देते हैं आपको कि प्रारंभ
  371. 22:00करना कैसे है?
  372. 22:06व्रत का जब कार्तिक मास आता है जब हम व्रत
  373. 22:09रखते हैं तो एक संकल्प लेते हैं पहले सीधा
  374. 22:11व्रत नहीं रखते संकल्प लेते हैं पहले तो
  375. 22:14श्लोक है स्कंद पुराण का व्रत आरंभ का
  376. 22:17संकल्प इस मंत्र से बताया गया
  377. 22:21दामोदरम नमस्कृत
  378. 22:23कुर्यात संकल्पदित
  379. 22:27दामोदर नमस्ते
  380. 22:30सर्व पाप विनाशन
  381. 22:32सर्व पाप विनाश
  382. 22:35कार्तिकस वतम करत अनुज्ञम दातुम अरहसी
  383. 22:41निर्विघ्नम कुर देवेश आमासम पुरुषोत्तमा
  384. 22:47इसका मतलब है हे दामोदर हे सर्व पाप नाशन
  385. 22:51सर्व पाप विनाशन मैं कार्तिक व्रत करना
  386. 22:54चाहता हूं मुझे आज्ञा दीजिए इसे निर्विघ्न
  387. 22:58पूरा कराइए
  388. 23:00मुझे आज्ञा दीजिए कार्तिक मास जब प्रारंभ
  389. 23:03कर रहे हैं। इसको आज्ञा से किया जाता है।
  390. 23:05आज्ञा लेके आज्ञा लेके कि हां मैं कार्तिक
  391. 23:09क्या मैं कार्तिक मास प्रारंभ कर सकता
  392. 23:11हूं। आप कृपया करके आज्ञा दें और विघ्न
  393. 23:15निर्विघ्न हो विघ्न ना आए। मेरे कार्तिक
  394. 23:17जो मैं व्रत रखूंगा इसमें विघ्न ना आए।
  395. 23:40कार्तिक मास बताया कब प्रारंभ करना है। अब
  396. 23:43कैसे करना है यह मंत्र बताया। उसके अलावा
  397. 23:46पुनः
  398. 23:50दिस स्कंध
  399. 23:52स्कंद पुराण
  400. 23:56यहां बताया जा रहा है गुरु के आदेश देने
  401. 24:00पर
  402. 24:07उनके वचन का कभी उल्लंघन ना करें।
  403. 24:11आप कहेंगे आप क्या बात करें? आप कार्तिक
  404. 24:13मास की बात बता रहे हैं। अभी
  405. 24:16ये कार्तिक मास के महात्म में बताया जा
  406. 24:18रहा है।
  407. 24:21जो कि आप नहीं आप यही सुनेंगे धूप दीप कर
  408. 24:24लो, तुलसी कर लो, भोग लगा लो, यही अर्चन
  409. 24:26ये सुन लेंगे। पर शास्त्र बता क्या रहे
  410. 24:29कार्तिक मास के महात्म के अंदर
  411. 24:33गुरु के आदेश देने पर उनके वचन का कभी
  412. 24:36उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
  413. 24:41गुरु की प्रसन्नता से मनुष्य सब कुछ
  414. 24:43प्राप्त कर लेता है। यह कार्तिक में भूलना
  415. 24:45नहीं है। केवल धूप दीप से व्यक्ति प्राप्त
  416. 24:47नहीं करता भगवान कृष्ण को आनंद को या सब
  417. 24:52कुछ को गुरु की प्रसन्नता से जिससे गुरु
  418. 24:55प्रसन्न हो वह कार्य करें। उससे मनुष्य सब
  419. 24:59कुछ प्राप्त कर लेता है।
  420. 25:02इसलिए जो भगवान के भक्त हैं कार्तिक में
  421. 25:04सब प्रकार से प्रयत्न करके गुरु की सेवा
  422. 25:07करें।
  423. 25:09या 1000 प्रवचन जो YouTube में होंगे या
  424. 25:13गूगल वगैरह होंगे उसमें सुन लो पढ़ लो
  425. 25:15आपको यह पंक्ति नहीं मिलेगी कहीं कहीं पर
  426. 25:17भी नहीं मिलेगी
  427. 25:22थोड़ी बहुत बातें इधर उधर की बस सुन लिया
  428. 25:24वो कार्तिको सममसम ना गंगाया समम यही सब
  429. 25:28है यह सुनना बहुत खतरनाक है क्योंकि आपको
  430. 25:33वास्तविकता क्योंकि खुद भी अनभिज्ञ हो खुद
  431. 25:35को मालूम नहीं तो खुद तो कर नहीं रहे
  432. 25:37निश्चित है और जिसको बता रहे हो वह भी
  433. 25:39आपका भाई बनेगा
  434. 25:43घूमने वाला फालतू में
  435. 25:46तो सब प्रकार के प्रयत्न करके गुरु की
  436. 25:49सेवा करें। ऐसा करने से उसे भगवान की कृपा
  437. 25:53मोक्ष की प्राप्ति होती है। संसार से
  438. 25:55उद्धार हो जाता है।
  439. 25:57यह है एक स्थान पर
  440. 26:13अब देखिए हम कोई भी बात बोले ऐसा लग रहा
  441. 26:15है हम कथा सुना रहे हैं कहानी सुना रहे
  442. 26:16हैं हर बात में यहां से खोलो टाइम लगता है
  443. 26:19देखने में ना अब ये एक श्लोक है प्रविष्य
  444. 26:23वैष्णव यज्ञ तत्र अभ्य जनार्दनम गुर आज्ञा
  445. 26:28ततो लब्धवा कुर मासोपवासनम
  446. 26:33क्या शब्द स्पष्ट बोला गया? गुरुर आज्ञा
  447. 26:36ततो लब्धवा गुरु वैष्णवी दीक्षा लेकर
  448. 26:40दीक्षा लेनी चाहिए भक्त को भगवान की पूजा
  449. 26:43करना चाहिए उसके भीतर में गुरु की आज्ञा
  450. 26:47लेकर कार्तिक मास प्रारंभ करें कार्तिक
  451. 26:50मास रखना चाहिए व्रत ऐसे नहीं कि हमने पढ़
  452. 26:53लिया रख लिया नहीं आज्ञा लेकर पहले भगवान
  453. 26:55की आज्ञा लेनी है गुरु की आज्ञा लेनी है
  454. 26:57फिर रखना है
  455. 27:09[गला साफ़ करने की आवाज़]
  456. 27:17ये क्या लिखा हुआ है?
  457. 27:20मोटा अक्षर
  458. 27:22इसका पहला पंक्ति बता रहे हैं।
  459. 27:25सर्वप्रथम श्री गुरुदेव के श्री चरणों में
  460. 27:29भक्ति पूर्वक दंडवत करें और व्रत धारण
  461. 27:32करने की अनुमति लें।
  462. 27:34उनकी अशेष कृपा और आदेशावली। आदेशान मतलब
  463. 27:38इंस्ट्रशंस।
  464. 27:40आदेश आवली मतलब दीपावली क्या होती है?
  465. 27:43दीपों की पंक्ति दीप के बाद दीप के बाद
  466. 27:46दीप। तो गुरु की आज्ञा की पंक्ति लेनी
  467. 27:49चाहिए। गुरुदेव आदेशावली ग्रहण करने से
  468. 27:52व्रत पूरा अवश्य होगा। उनकी अनुमति लें।
  469. 27:56उनके अशेष कृपा पर निर्भर रहे और उनकी
  470. 27:58आदेशावली ग्रहण करने से व्रत निश्चित रूप
  471. 28:02से पूरा होगा। ऐसे हमें व्रत प्रारंभ करना
  472. 28:04है। यह विधि है कार्तिक मास व्रत करना।
  473. 29:19कार्तिक मास में राधा कृष्ण की उपासना तो
  474. 29:22करते ही हैं। यदि हम तुलसी के वृक्ष के
  475. 29:25समीप निकटस्थ
  476. 29:29यदि तुलसी वृक्ष के नीचे या निकटस्थ उनकी
  477. 29:32उपासना करेंगे तो ये जो ये करता है उसे
  478. 29:34जीवन मुक्त मानना चाहिए।
  479. 29:38कितना दुर्लभ है ये सुनने को मिल रहा है
  480. 29:40ये कितना दुर्लभ है। तुलसी वृक्ष के नीचे
  481. 29:43उपासना जीवन मुक्त मानना चाहिए।
  482. 29:53और यही स्कंद पुराण में हम कार्तिक मास का
  483. 29:56महात्म से बता रहे हैं और अन्यथा कहीं पर
  484. 29:58भी नहीं है। ये स्कंद पुराण में बताया जा
  485. 30:00रहा है कि वैष्णव महात्माओं की निंदा
  486. 30:04जो करता है
  487. 30:06वह मूढ़ व्यक्ति जो है अपने पितरों के साथ
  488. 30:11महार नर्क में गिरता है। जो महात्मा जनों
  489. 30:15की निंदा करता है और सुनने का भी सुनने
  490. 30:17वालों का भी वही फल होता है। मीट खाने
  491. 30:20वाले को तो पाप लगेगा। तो जो अनुमोदन कर
  492. 30:23रहा है, हेल्प कर रहा है, कुछ भी कर रहा
  493. 30:25है उसके कॉन्टेक्स्ट में तो उसको भी दंड
  494. 30:27मिलेगा। उसी प्रकार से महात्मा जनों की जो
  495. 30:30निंदा करते हैं, वो अपने पितरों के साथ
  496. 30:33पूर्वजों के साथ नर्क महारोरव नर्क में
  497. 30:35गिरते हैं।
  498. 30:37और
  499. 30:39ये देखो तो हमने टीका दी थी ना अभी अगली
  500. 30:42लाइन देखो। जो भगवान की और उनके भगवत
  501. 30:45भक्तों की निंदा सुनते वहां से दूर नहीं
  502. 30:46हटता। वह भक्त भगवान का प्रिय भक्त नहीं
  503. 30:49है।
  504. 30:51नहीं है।
  505. 30:54जो कार्तिक मास में
  506. 30:59भगवान विष्णु की परिक्रमा करता है।
  507. 31:03उसको पद पद पल अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त
  508. 31:06होता है।
  509. 31:09आप करते हो विष्णु की परिक्रमा
  510. 31:11किसकी करते हो?
  511. 31:22आपको सिर्फ उदाहरण के थोड़ा सा बता देते
  512. 31:24हैं। विष्णु सहस्त्र नाम सुना है आपने?
  513. 31:28उसमें विष्णु के भगवान विष्णु के 1000 नाम
  514. 31:31है।
  515. 31:32उनको तीन उनको तीन बार करो तो एक कृष्ण
  516. 31:36नाम का फल प्राप्त होता है। हजार नाम का
  517. 31:39इस प्रकार से है कि हजार विष्णु नाम का एक
  518. 31:42राम नाम का फल है। वो तीन बार करो तो एक
  519. 31:44कृष्ण नाम का फल प्राप्त होता है। तो
  520. 31:47विष्णु और कृष्ण में इतना भेद है। वो श्री
  521. 31:49कृष्ण जिनकी कृपा की याचना करते हैं वो है
  522. 31:52राधा रानी।
  523. 31:53वह राधा रानी जल रूप में राधा कुंड है और
  524. 31:56वह राधा कुंड की आपने परिक्रमा करी है तो
  525. 31:59जो विष्णु की परिक्रमा करने वाले को
  526. 32:01अश्वमेद यज्ञ मिलता है तो कृष्ण की
  527. 32:03परिक्रमा करने वाले को क्या मिलेगा और
  528. 32:05राधा रानी जो कि राधा कुंड है साक्षात
  529. 32:09जल रूप में राधा रानी उनके उसका क्या फल
  530. 32:12मिलेगा
  531. 32:14पद में अश्व यज्ञ तो विष्णु की परिक्रमा
  532. 32:16करने वालों को मिलता है तो राधा रानी की
  533. 32:18परिक्रमा करने को कौन से यज्ञ और कौन सी
  534. 32:21चीज का फल मिलेगा सोचना भी असंभव है।
  535. 32:24इसलिए कहा है ना कि अक्षय बुद्धि के परे
  536. 32:27वर्णन करना ही संभव नहीं है। अब विश्वास
  537. 32:30करो मैं अभी प्रारंभ नहीं कर पाया। मैं
  538. 32:32झुंगे में ऐसे बातें ऐसे आपको बता अनंत फल
  539. 32:35है
  540. 32:50जो हरि के परम प्रिय कार्तिक मास में
  541. 32:53नित्य गीता का पाठ करता है उसके पुण्य फल
  542. 32:57का वर्णन सैकड़ों वर्षों में भी नहीं किया
  543. 32:59जा सकता हम दो घंटे में क्या वर्ण वर्णन
  544. 33:01करेंगे सारे कार्तिक मास का वो कह रहे हैं
  545. 33:04कार्तिक मास में भगवत गीता यदि पढ़ लेते
  546. 33:06हो श्लोक कुछ उसका वर्णन करना सैकड़ों
  547. 33:09वर्षों में संभव है एक बात का
  548. 33:12गीता पाठम तू यह कुरयात की कार्तिके
  549. 33:17विष्णु वल्लभ तस पुण्य फलम वक्तम ना अलम
  550. 33:22वर्ष वर्ष शतेर अपि यही बताया है सैकड़ों
  551. 33:28वर्ष में भी वर्णन संभव नहीं
  552. 33:31भगवत गीता का जो पाठ करता है कार्तिक में
  553. 33:38और जो कार्तिकेय एकादशी को निराहार रहता
  554. 33:40है व्रत रखता है निराहार
  555. 33:46वो निश्चित रूप से पूर्व जन्म के पापों से
  556. 33:48मुक्त हो जाता है।
  557. 33:50तीन एकादशी
  558. 33:53अन्य एकादशी ना रखें। एकादशी पर निराहार
  559. 33:56रहने की चेष्टा कर सकते हैं। यदि चाहे तो
  560. 34:18भगवान विष्णु के समीप विष्णु के विष्णु
  561. 34:20मतलब भगवान भगवान कृष्ण के समीप उन्हीं के
  562. 34:24नामों और लीला कथाओं का गायन करें। यह
  563. 34:26बताया जा रहा है।
  564. 34:37कार्तिक में
  565. 34:39अनेक प्रकार के दान कर सकते हैं। वस्त्र
  566. 34:41रत्न कंबल ओढ़ने की रुईदार बिछावन यानी कि
  567. 34:46मैट्रेस
  568. 34:48जूता छाता भी दान करना चाहिए।
  569. 34:52कार्तिक में भूमि पर शयन करने वाले मनुष्य
  570. 34:58अपने युग युग के पापों का नाश कर डालते
  571. 35:00हैं। यदि युग युग के पापों का नाश करना है
  572. 35:02तो भूमि पर शयन कर सकते हैं। इससे युग युग
  573. 35:05के पाप नाश हो जाते हैं।
  574. 35:08युग युग के
  575. 35:13अब हम एक बात बताना चाहेंगे क्योंकि आप कई
  576. 35:16जगह पढ़ेंगे शास्त्र में कि भाई दान देना
  577. 35:19चाहिए तो फिर अगेन फिर से कंफ्यूजन हो
  578. 35:22जाता है कि भाई दान दें वो ब्राह्मण को दे
  579. 35:25पंडित जी को दे किसको दें यही हमारे
  580. 35:28कन्फ्यूजन हो जाता है तो इसलिए हमारा
  581. 35:31कन्फ्यूजन करने के लिए आज किनकी तिथि है
  582. 35:35श्री नरोत्तम दास ठाकुर प्रेम भक्ति महाजन
  583. 35:38जय ठाकुर नरोत्तम उन्होंने अपने प्रेम
  584. 35:40व्यक्ति चंद्रया ग्रंथ में बताया 41 श्लोक
  585. 35:42में 41 आप खुद पढ़ सकते हैं अन्य व्रत
  586. 35:45अन्य दान ना ही करो वस्तु ज्ञान अन्य सेवा
  587. 35:50अन्य देव पूजा किसी देवता की पूजा नहीं
  588. 35:52करनी
  589. 35:54अन्य किसी को दान नहीं देना तो अन्य दान
  590. 35:57के विषय में वह बता रहे हैं
  591. 36:09एकादशी के अलावा जन्माष्टमी रामनवमी जो
  592. 36:11हमारे बेसिक व्रत है गौर पूर्णिमा इसके
  593. 36:14अलावा कोई व्रत नहीं करना और दान जो है
  594. 36:19उसके बारे में भी ठाकुर महाशय बता रहे
  595. 36:21हैं।
  596. 36:26यह देख लीजिए क्या शब्द बोल रहे हैं। यदि
  597. 36:29कोई अनदास बाबा जी महाराज को गुरु रूप में
  598. 36:31लेते हैं तो उनके लिए तो यह बहुत
  599. 36:32महत्वपूर्ण है। श्री कृष्ण और वैष्णवों की
  600. 36:35प्रीति के अतिरिक्त अन्य उद्देश्य से किया
  601. 36:38हुआ दान अन्य दान है।
  602. 36:42या श्री कृष्ण को या उनके भक्तों को बस
  603. 36:46और किसी के भक्तों के नहीं या श्री कृष्ण
  604. 36:49या उनके भक्तों को जो दिया जाता है दान
  605. 36:51वही सही रूप से दान है। अन्यथा जो कहीं भी
  606. 36:54और दान दिया जाता है वह अन्य दान है। कहते
  607. 36:57हमें इतना शोक होता है। बड़े-बड़े जटाजूट
  608. 36:59धारी प्रवचन दे रहे हैं। शास्त्र खोलने का
  609. 37:02समय नहीं है। इतने बिजी हो तो प्रवचन में
  610. 37:04क्या दे रहे हो? गरीबों को बांट दो।
  611. 37:06गरीबों को दे दो।
  612. 37:09आपको कोई हमें बता सकते कौन से शास्त्र
  613. 37:11में यह बात बताई गई है। इससे विष्णु
  614. 37:12प्रसन्न होते हैं। भगवान ने क्या बोलते
  615. 37:15हैं? सभी मनुष्य को से मैं बहुत प्रसन्न
  616. 37:17होता हूं। बोलते हैं भगवान कहते हैं मेरे
  617. 37:20भक्त मुझे मेरे प्राणों से अधिक प्रिय है।
  618. 37:22यह थोड़ी बोलते सारे मनुष्य मुझे प्राणों
  619. 37:23से अधिक प्रिय है।
  620. 37:29सुनने में थोड़ी बहुत कड़वी लगती है। मीठी
  621. 37:31मीठी बातें तो यही है जो जो सुनते हो आप
  622. 37:35इधर उधर वो मीठी मीठी बातें हैं। ये बातें
  623. 37:37कड़वी लगती है। सत्य यही है और नौतम ठाकुर
  624. 37:41क्यों बता रहे हैं 116 इतने ही श्लोक है
  625. 37:44लगभग फिर भी एक श्लोक में अन्य दान बोल
  626. 37:46रहे नहीं देना चाहिए कहीं भी
  627. 37:50जो श्री कृष्ण या उनके
  628. 37:54संबंधित उनके वैष्णव हैं उनके अतिरिक्त
  629. 37:57कहीं भी दान दिया हुआ अन्य दान कहलाता है।
  630. 38:03अगली लाइन क्या बोल रहे हैं? इनसे श्री
  631. 38:05कृष्ण प्राप्ति की संभावना नहीं है। यह सब
  632. 38:07करने से क्योंकि आप जो कर रहे हो श्री
  633. 38:10कृष्ण से संबंधित तो है नहीं।
  634. 38:14भगवान की कामना से वैष्णव को दिया हुआ दान
  635. 38:17ही निर्गुण दान है। इसके फल स्वरूप श्री
  636. 38:20कृष्ण भक्ति प्राप्त होती है।
  637. 38:26हमें निजी रूप से कोई प्रॉब्लम नहीं है।
  638. 38:27जहां मर्जी कोई भी करे। यह तो सिर्फ हम
  639. 38:30शास्त्र की बात बता रहे हैं। यदि किसी को
  640. 38:32अच्छे लगते हैं तो ठीक है। नहीं अच्छे
  641. 38:34हमें कोई प्रॉब्लम नहीं है। हमें कोई
  642. 38:36समस्या नहीं है। आप बिल्कुल अपने मनमान
  643. 38:39तरीके से कर सकते हो। खुली छूट है। भगवान
  644. 38:43ने दिए तो हम कौन होते हैं रुकने वाले?
  645. 38:45आपको पूर्ण छूट है। कहीं भी दान दे दो।
  646. 38:49शराबी को भी दे दो। चाहे हमारा क्या ले
  647. 38:52जाएगा कोई?
  648. 38:54हां। यदि शास्त्र की बात सुन रहे हो तो तो
  649. 38:57हम आपको बता रहे हैं।
  650. 38:59निजी रूप से कोई समस्या नहीं है। खुल के
  651. 39:02कहीं भी अनमा विद्यालय चले जाओ कोई कहीं
  652. 39:05भी हॉस्पिटल में चले जाओ कहीं भी दे दो
  653. 39:07हमें क्या हमें क्या समस्या है
  654. 39:19[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  655. 39:21इस शास्त्र में बताया जा रहा है एकथा सर्व
  656. 39:24तीर्थानी सर्व यज्ञ य दक्षिणा कार्तिकस तू
  657. 39:28मासस कोटम अपिना ना अरहति संपूर्ण तीर्थों
  658. 39:33की यात्रा समस्त यज्ञ भी
  659. 39:37कार्तिक व्रत के बराबर नहीं हो सकते समता
  660. 39:40नहीं कर सकते क्या चीज समस्त तीर्थों की
  661. 39:43यात्रा
  662. 39:48नीलमणि कहां है अभी वृंदावन आए हो कितना
  663. 39:51मेहनत करनी पड़ी एक जगह एक बारी आने के
  664. 39:53लिए कितने महीनों से था प्रोग्राम
  665. 39:56क्या-क्या करना पड़ा पैसे कितने खर्च करने
  666. 39:58पड़े कि एक तीर्थ में आने का है तीर्थों
  667. 40:01के तो ये तो तीर्थों के पिताजी हैं
  668. 40:04वृंदावन पर फिर भी समझाने के लिए तो कितनी
  669. 40:07बारी कोई जा सकता है सीमित धन
  670. 40:12सीमित शक्ति
  671. 40:14कितनी बारी जा सकता है थोड़े से तीर्थों
  672. 40:16में चले जाए कभी कह रहे समस्त तीर्थ समस्त
  673. 40:18का म होता है टोटल अब तो शब्दों को ऐसे
  674. 40:20सुनते इससे कोई फर्क ही नहीं पड़ता आप लोग
  675. 40:22ऐसे डेड बॉडी की तरह सुन रहे हैं अरे जाओ
  676. 40:25भाई समस्त तीर्थ समस्त होता है ए वन टू
  677. 40:29थ्री फोर 5 6 7 8 9 1 लाख दो एक लाख चार
  678. 40:3311 लाख पांच एक करोड़ जितने तीर्थ हैं
  679. 40:37समस्त तीर्थों में यज्ञ यज्ञ कभी किया
  680. 40:40किसी ने कहां है वो राधा चरण कहां है
  681. 40:45हां यज्ञ किया था ना कितने पैसे लगे थे वो
  682. 40:48जो सब कलश हो वो सब तो कितने यज्ञ कर लो
  683. 40:52पैसे ही नहीं होते यज्ञ कहां से करेंगे हम
  684. 40:54लोग हम लोग आजकल के ना पैसे ना शक्ति ना
  685. 40:57कुछ समस्त एक वो बोल रहे शब्द सुनो समस्त
  686. 41:01तीर्थ समस्त यज्ञ एक यज्ञ करने में बैंक
  687. 41:04बैलेंस शून्य हो जाता है बड़े वाला यज्ञ
  688. 41:07हो जाए समस्त यज्ञ कर लो समस्त तीर्थ कर
  689. 41:09लो उसका
  690. 41:12और एक अगला अक्षर नहीं बोला था मैं
  691. 41:14दक्षिणा
  692. 41:15दक्षिणा भी उसी प्रकार की यज्ञ के अनुरूप
  693. 41:19तो भी कार्तिक समता नहीं कर सकते
  694. 41:23ये कार्तिक का महत्व है
  695. 41:27एकतः पुष्करे वास कुरुक्षेत्र हिमालय एकत
  696. 41:32कार्तिको मास सर्व पुण्यधिको मतः पुष्कर
  697. 41:37कुरुक्षेत्र हिमालय के निवास से निवास
  698. 41:40होता है वहां पर रहना कहां पुष्कर हिमालय
  699. 41:44कभी गए हो हिमालय फोटो में देखा होगा
  700. 41:48पुष्कर कुरुक्षेत्र हिमालय के निवास के
  701. 41:51पुण्य फल से भी कार्तिक का पुण्य फल अधिक
  702. 41:53है। वहां निवास करना घूम के नहीं आना
  703. 41:58निवास करना
  704. 42:01सुवर्ण मेरु तुल्यानी सर्वदानानी च एकतः
  705. 42:06एकतः कार्तिको व्स सर्वदा केशव प्रिय हे
  706. 42:10वत्स सुमेरु पर्वत अब आंखें खोलना श्लोक
  707. 42:14सुन के डेड बॉडी की तरह मत सुनना
  708. 42:19सुमेरु पर्वत तुल्य स्वर्ण दान आपकी भाषा
  709. 42:23में मतलब पहाड़ सोने का पहाड़
  710. 42:26सोने का जो झुमरा डालते हो 10 20 उसी में
  711. 42:30हालत खराब होती है खरीदने में झुमका क्या
  712. 42:32झुमका बोलते हैं उसको
  713. 42:35इयरिंग
  714. 42:39सुमेरू पर्वत तुल्य स्वर्ण दान भी केशव
  715. 42:41प्रिय कार्तिक वक्त के समान नहीं है। आपके
  716. 42:44पास कभी सुमेरू के समान गोल्ड लाएगा कोई
  717. 42:46गलतफहमी है किसी को
  718. 42:49आ भी जाएगा तो भी कार्तिक के समान उसका
  719. 42:51कोई मुकाबला नहीं है। यह कार्तिक मास का
  720. 42:55महात्म है। सुमेरू छोड़ो हम एक बिस्कुट के
  721. 42:58समान एक दो गोल्ड द नहीं कर सकते। मोबाइल
  722. 43:01के समान दो 200 400 ग्राम का मोबाइल होता
  723. 43:05होगा। उसके समान हम गो नहीं कर सकते।
  724. 43:08अच्छा कर लोगे तो भी क्या मिलेगा? खत्म
  725. 43:10होने वाला फल। ये अक्षय फल है। कार्तिक
  726. 43:13मास का फल अक्षय है।
  727. 43:24हुतम दत्तम तू विप्रेंद्र तपसय व तथा कृतम
  728. 43:32तद अक्षयंम फलम प्रोक्तम विष्णुना लोक
  729. 43:36साक्षणा इसका मतलब कार्तिक में हवन किया
  730. 43:39हुआ दान किया हुआ तप किया हुआ सब अविनाशी
  731. 43:43फल देता है कार्तिक
  732. 43:46ये समझ लो यह महासेल लगी हुई है कहते हैं
  733. 43:49बाय वन गेट वन फ्री नहीं बाय
  734. 43:53वन गेट 99 फ्री यह भी सस्ता बोल रहे हैं
  735. 43:56इसमें भी कोई काउंटिंग कर पा रहे हैं
  736. 43:58कार्तिक में तो काउंटिंग ही नहीं कर सकते
  737. 44:00हो आप इतना फल है कार्तिक का
  738. 44:13हे इसका अब श्लोक नहीं बोल रहे समय कम है
  739. 44:15जो कार्तिक में भगवान दामोदर के मंदिर में
  740. 44:18रात्रि
  741. 44:20रात्रि से लेकर सुबह तक जागरण करता है।
  742. 44:23उसे हजारों गोदान के समान फल मिलता है।
  743. 44:26जागरण रात को जो करता है। हजारों गोदान एक
  744. 44:30गाय पता है कितने की आती है? कभी खरीदा
  745. 44:34है? उसके बाद दो फिर पांच 10 50 100
  746. 44:42करना है या कितने की गाय थी वो मोबाइल
  747. 44:44में? तो उसके बाद क्या लिखा है? हजारों
  748. 44:48गोदान का फल सहस्त्र फलम
  749. 44:53के समान फल मिलता है।
  750. 44:55हम तो मतलब हमारे को तो मोबाइल का बिल पे
  751. 44:59करने के लिए सोचना पड़ता है और बिजली का
  752. 45:01बिल हम गौ दान करेंगे। सुमेरू पर्वत के
  753. 45:04सोने का दान हम ही करेंगे। बाकी
  754. 45:08₹ लाख की एक गाय सहस्रो कर लो फिर मतलब
  755. 45:11हमारे हमारे मतलब हमारे तो परे ही है
  756. 45:13निश्चित रूप से।
  757. 45:17हजारों गोदान चलो हमें क्या उससे ज्यादा
  758. 45:19मिल रहा है वैसे ही छोटी बात क्यों करें
  759. 45:24हजारों गोदान के समान फल मिलता है
  760. 45:31और सुने तुलसी दल पुष्पाण ये यशती
  761. 45:35जनार्दने कार्तिके सकलम वत्स पापम जन्म
  762. 45:39आयुतम दहेत जो सज्जन कार्तिक में भगवान पर
  763. 45:45तुलसी के दल चढ़ाता है। तुलसी के पत्ता
  764. 45:48हेव उसके हजारों जन्मों के समस्त पाप भस्म
  765. 45:51हो जाते हैं।
  766. 45:52तुलसी दल चढ़ाने से
  767. 45:58कार्तिक में तुलसी जी के दर्शन, स्पर्श,
  768. 46:01ध्यान, कीर्तन, नमन, स्तवन, आरोपण, सिंचन
  769. 46:04तथा नित्य पूजन करने वाला
  770. 46:08जो आराधना करता है वो हजारों करोड़ों अनंत
  771. 46:10युगों तक भगवान के धाम में वास करता है।
  772. 46:14तुलसी जी का महत्व इतना ज्यादा है कार्तिक
  773. 46:16में तो पूछिए ही मत
  774. 46:23सैकड़ों फिर वही बात हमारे फिर वो शब्द
  775. 46:25सुनना ध्यान से डेड बॉडी नहीं सुनेगी
  776. 46:28सैकड़ों यज्ञ एक यज्ञ कर राधा चरण एक तो
  777. 46:32हमारा व्यक्ति है जिसने करा है उसको पता
  778. 46:33है यज्ञ करना का मतलब क्या होता है
  779. 46:37सैकड़ों यज्ञ
  780. 46:39सैकड़ों तो हमारे पास रुपए भी नहीं है
  781. 46:43यज्ञ कहां से करेंगे
  782. 46:44एक का यज्ञ होता है कोई एक का तो सैकड़ों
  783. 46:49यज्ञ व अनेक रत्नों कभी रत्न पहना है
  784. 46:53महंगे वाला अनेक का मतलब होता है मैं नहीं
  785. 46:58सैकड़ों यज्ञ व अनेक रत्नों के दान खुद
  786. 47:01पहन नहीं सकते कभी जीवन में वो दान करने
  787. 47:05से जो पुण्य प्राप्त होता है कार्तिक
  788. 47:07कार्तिक में तुलसी दलों से भगवान की पूजा
  789. 47:10करने से वो प्राप्त हो जाता है
  790. 47:13सैकड़ों यज्ञ
  791. 47:15वह अनेक रत्नों का दान सिर्फ तुलसी दल
  792. 47:19आपको तुलसी छोटा लगता है
  793. 47:22एक भाई वो कथा थी मैं बोलूंगा आप लोग छोटे
  794. 47:27में समझ तराजू वाली कथा थी तुलसी पत्र
  795. 47:29डालने से वो कृष्ण का जैसे डाला रत्न
  796. 47:32वगैरह डाल रहे तो कृष्ण नीचे ही बैठे हैं
  797. 47:35तराजू में वही इनके सामान क्या ले आए एक
  798. 47:38तुलसी दल डाला कृष्ण ऊपर तुलसी दल नीचे यह
  799. 47:41है तुलसी दल की महिमा
  800. 47:46कार्तिक में भगवान के मंदिर की परिक्रमा
  801. 47:49है सब श्लोक पर समय नहीं है श्लोक बोलने
  802. 47:52टाइम चला जाए भगवान के मंदिर की परिक्रमा
  803. 47:55करने वाले को पग पग में अश्वमेद यज्ञ का
  804. 47:57फल प्राप्त होता है
  805. 48:00जो कार्तिक में भगवान के सम्मुख पदों का
  806. 48:02पदों को गाता हो बजाता हो नाचता हो नृत्य
  807. 48:07करना पदों का गान करना बजाना करताल मृदंग
  808. 48:14जो करता है उसको लभते चा अक्षयम पदम वो पद
  809. 48:19की प्राप्त होती है जिस जो क्षय नहीं होता
  810. 48:21क्या पद है वो भगवान की दासा भगवान की
  811. 48:24सेवा भगवान के धाम अक्षय पदम
  812. 48:31सभी पित्र हमारे जो पूर्वज हैं पित्र अब
  813. 48:34श्लोक बोले कि नहीं बोले क्या
  814. 48:39भविष्यति कुलेकम पित पित्र भक्त सुतो भूमि
  815. 48:44कार्तिके दीप दानेन यशति केशवम
  816. 48:48सभी पित एक पित नहीं सभी पितर ये याचना
  817. 48:53करते हैं आशा करते हैं यूं करके टकटकी
  818. 48:55लगाए खड़े हैं क्या कोई ऐसा हमारे खानदान
  819. 48:58में कुल में कोई ऐसा भक्त होगा जो कार्तिक
  820. 49:01में दीप दान दीप दान करके भगवान को
  821. 49:04संतुष्ट करे
  822. 49:06क्या कोई होगा मेरे कुल में
  823. 49:10जो कार्तिक में श्री कृष्ण को दीप दान
  824. 49:12करेगा। पितर आशा लगाए खड़े रहते हैं। उनके
  825. 49:15हमारे सबके पितों की आशा तो पूरी हो गई।
  826. 49:19कर ही रहे हैं सालों से। ये है महत्व।
  827. 49:25वो जो वो श्लोक मिल गया जो हम ढूंढ रहे थे
  828. 49:27ना आपको ये सुनो।
  829. 49:30भगवान के मंदिर को जो अब श्लोक लंबा है
  830. 49:34[हंसी] चलो श्लोक भी बड़ा सुंदर है दीप पं
  831. 49:38रचना सबा अंतरम हरे आगे नहीं पढ़ते भगवान
  832. 49:44के दीप पंक्तेश यानी दीपों की पंक्ति जो
  833. 49:47लगाता है भगवान के मंदिर को बाहर और भीतर
  834. 49:51मंदिर के बाहर और भीतर जो दीपों की पंक्ति
  835. 49:54से सजाता है उसको भगवान विष्णु के समान
  836. 49:58समझ समझा जाता है भगवान के समान ही उनके
  837. 50:02मंदिर में उनका उनका भक्त नहीं लगाएगा तो
  838. 50:04और कौन लगाएगा एक बात दूसरी बात अगला अगला
  839. 50:07श्लोक बहुत महत्वपूर्ण है कदा भविष्यत
  840. 50:11यमाकम संगम पूर्व कर्मण देवता कह रहे हैं
  841. 50:15देव लोग ऐसी प्रतीक्षा करते हैं हमारे
  842. 50:17पूर्व जन्म पूर्व कर्मों से
  843. 50:21ऐसा कब समय आएगा जब भगवान के मंदिर में
  844. 50:23दीपक लगाने वाला सज्जन हमारे समागम होगा
  845. 50:27हमें उसका संग मिल जाएगा जो भगवान के
  846. 50:29मंदिर में दीप लगाता है। देवता देव लोक
  847. 50:32में ये
  848. 50:34ऐसे याचना प्रतीक्षा करते हैं। करते रहे
  849. 50:38हैं। करते रहते हैं। ऐसे आप करते तो कब
  850. 50:41मैं अमीर रहूंगा?
  851. 50:44कब होती है वो प्रतीक्षा? खत्म ही नहीं
  852. 50:47होती। ऐसे देवताओं की प्रतीक्षा खत्म। कौन
  853. 50:50मिलेगा वो भक्त जो मंदिर में दीप लगाता
  854. 50:53है। ऐसे कभी ना खत्म होने वाली। जैसे काम
  855. 50:57होता है। काम
  856. 50:59कामस्ट
  857. 51:03कामाग नहींमाग
  858. 51:06सेंसुअल डिजायर्स वो कभी खत्म नहीं होते
  859. 51:08कब मैं इसको वैसे ही देवताओं के डिजायर
  860. 51:11खत्म कब मुझे वो समागम मिलेगा जो भक्त
  861. 51:14मंदिर में दीपों की पंक्ति लगाता है
  862. 51:39यह तो
  863. 51:42आपने सुना
  864. 51:44कि
  865. 51:47[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  866. 51:48जो कार्तिक में व्रत करता है उसको यह फल
  867. 51:51मिलता है।
  868. 51:53अब जो कार्तिक का व्रत नहीं रखता उसका
  869. 51:56क्या हर्ष हर्ष होता है? यह भी तो शास्त्र
  870. 51:59बताएंगे ना कि भाई दूध पियोगे तो क्या लाभ
  871. 52:03है? यही बताएंगे डॉक्टर दूध नहीं पियोग
  872. 52:05क्या नुकसान? यही है नुकसान। कार्तिक फल
  873. 52:07करो क्या लाभ है? यही लाभ है। नहीं करोगे
  874. 52:09वो भी सुन लो।
  875. 52:11सप्त जन्म अर्जितम पुण्यम वृथा भवती नारदा
  876. 52:15भगवान कृष्ण नारद को बोल रहे हैं साक्षात
  877. 52:17कृष्ण बोल रहे हैं डायरेक्ट
  878. 52:20सप्त जन्म अर्जितम पुण्यम वृथा भवती नारदा
  879. 52:24सात जन्मों के लिए जो पुण्य है अकित्वा
  880. 52:27कार्तिकेय मासे वैष्णव व्रतम उत्तमम
  881. 52:31तो कार्तिक मास का जो वैष्णव के लिए उत्तम
  882. 52:33व्रत है जो उसका पालन नहीं करता चाहे
  883. 52:35हमारे पिताजी हो या आपके पिताजी हो कोई के
  884. 52:37पिताजी हो कोई के माताजी हो कोई के कोई हो
  885. 52:41जो नहीं करता
  886. 52:44सात जन्मों के पुण्य खत्म हो जाते हैं
  887. 52:46उसके सप्त इससे सरल संस्कृत मिलेगी सप्त
  888. 52:50जन्म अर्जितम पुण्यम वृथा भवती नाथा खत्म
  889. 52:54बेस्ट
  890. 52:55ये तो प्रारंभ है बच्चा अभी
  891. 52:59नियमेन बिना विप्रा कार्तिक यक्षिप नर
  892. 53:02कृष्ण परांग मुखातस यस उल्लभ
  893. 53:10जो कार्तिक का व्रत नहीं रखता आप यह सोचो
  894. 53:16एक छोटा बच्चा पैदा हुआ है उसकी मां उससे
  895. 53:20मुख हो जाए परांग मुख हो जाए उल्टा मुंह
  896. 53:21कर ले मैं तेरे को दूध नहीं पिलाऊंगा उसकी
  897. 53:22क्या गति है खत्म
  898. 53:26तो यह जो कार्तिक का व्रत नहीं लगता ये
  899. 53:28शब्द सुनिए कृष्ण परांग मुख तस कृष्ण उसके
  900. 53:32मुख उसकी तरफ मुंह फेर लेते हैं
  901. 53:34कार्तिक व्रत अगर नहीं रखा तो कृष्ण हमारे
  902. 53:36से मुंह फेर लेंगे
  903. 53:40कृष्ण मुंह फेर लेंगे। फिर हमारी क्या गति
  904. 53:43होगी या किसी की भी यह विचार का विषय है।
  905. 53:47हम
  906. 53:51अरे हम कहते हैं भाई अब कोई विशेष व्रत
  907. 53:54अरे दीप तो दिखा सकते हो।
  908. 53:57किसी के घर वालों भाई दीप तो दिखा दो
  909. 53:59कृष्ण भाई। इसमें कौन से तुम्हारे पैसे लग
  910. 54:00जाएंगे? 50 पैसे ही लगेंगे। उसमें क्या लग
  911. 54:04जाएगा तुम्हारा दीप दिखाने में? टीप दिखा
  912. 54:06दो और कुछ नहीं गिलास तो तुम्हारे घर में
  913. 54:09होगा भगवान का अपना ही गिलास होगा कोई तो
  914. 54:12गिलास होगा पानी कुछ तो पीते होगे ना और
  915. 54:14तुलसी का पत्ता पानी ठाकुर जी पी लो भाई
  916. 54:17इतना कोई मंत्र नहीं कोई कुछ नहीं इससे
  917. 54:20तुम्हारे कार्तिक व्रत हो गया मतलब इससे
  918. 54:22सर तुम्हें और क्या बताएं कुछ लगा? दीप
  919. 54:27पानी यह भी नहीं बोल रहे बिस्कुट लगाओ
  920. 54:28पांच पैसे का पार्ले जी भी नहीं बोल रहे
  921. 54:31बोले पानी फ्री का तुलसी पत्ता फ्री का
  922. 54:35लगा दो वो
  923. 54:39इतना ही समझा दो घर मम्मा अच्छा होता है
  924. 54:41पापा अच्छा होता है इतना ही समझा दो अच्छा
  925. 54:44बड़े अच्छा होता है
  926. 54:50हमारे
  927. 54:52बाबा ने भी जो आप प्रवचन जो है YouTube
  928. 54:55में आखरी
  929. 54:56और सुना कार्तिक जो श्लोक बोला है बाबा जी
  930. 54:58ने भी पद्म पुराण से ये
  931. 55:02सनातन गोस्वामी हरि भक्ति विलास में बताया
  932. 55:04है अवतन शिप यस्तु मासम दामोदरम प्रियम
  933. 55:10तिर्यक योति अति सर्वधर्म बहिष्कृता
  934. 55:14कि जो व्यक्ति कार्तिका मास में व्रत नहीं
  935. 55:18रखता है
  936. 55:20उसको पशु पक्षी कुत्ते गधे की योनि
  937. 55:24प्राप्त होती है उसके बाद मनुष्य तो बनेगा
  938. 55:25नहीं वो जो कार्तिक मास नहीं रखता। यह
  939. 55:28शास्त्र बोल रहे हैं। भाई किसी को दिक्कत
  940. 55:30हो तो हमारे से मत झगड़ा करो। हमारे प्रति
  941. 55:33मुस्कान रख लो। हम तो कोई गलत बात आपको
  942. 55:36बोल नहीं रहे हैं। हम तो पोस्टमैन है। भाई
  943. 55:39का संदेश है। भाई के लिए है। देने के लिए
  944. 55:43आए हैं। हम
  945. 55:45भाई बनके
  946. 55:48सर्व धर्म पर बहिष्कृता कोई धर्म के लिए
  947. 55:52वो योग्य ही नहीं रह जाता जो कार्तिक का
  948. 55:53व्रत नहीं। वो कोई योग्यता खो देता है वो
  949. 55:56सर्वधर्म सर्व स्पष्ट तो शब्द है सर्वधर्म
  950. 56:00बहिष्कृता सर्वधर्म से बहिष्कृत हो जाता
  951. 56:03है तिर्य की होती है वापन होती तिर्य की
  952. 56:05होती पशु पक्षी गधा सूअर ये सब योनि मिलती
  953. 56:08है उसके
  954. 56:10हम
  955. 56:48इतनी बातें तो बताई पर एक इतनी महत्वपूर्ण
  956. 56:51बात तो बताई नहीं जो अधिकांश लोग
  957. 56:56क्योंकि पता नहीं है तो अच्छा दामोदर मास
  958. 56:59से 99% भक्त क्या समझते हैं क्या है मतलब
  959. 57:02वो मास
  960. 57:04हां
  961. 57:06नहीं दीप दान तो सब ठीक है वो ये समझते
  962. 57:09हैं कि भाई यशोदा मैया ने रस्सी बांधी थी
  963. 57:13श्री कृष्ण को प्रेम के भक्त में बंधने
  964. 57:17बंध गए थे। तो क्या गौडिया वैष्णव भी ऐसे
  965. 57:19ही सोचते हैं?
  966. 57:22हां तो सुन लीजिए फिर गौडिया वैष्णव
  967. 57:25कार्तिक व्रत क्यों रखते हैं? भाई इसलिए
  968. 57:27रखते हैं फॉर वरशिपिंग एंड प्लीजिंग राधा
  969. 57:30रानी। राधा रानी की अर्चन और प्रसन्नता के
  970. 57:34लिए रखते हैं। केवल गड या वैष्णव मतलब ही
  971. 57:36है केवल राधा रानी के लिए जीना और उनके
  972. 57:39लिए ही मरना। तो व्रत किसी और के लिए
  973. 57:41करेंगे।
  974. 57:46प्लीजिंग राधा रानी राधा रानी करुणामई है
  975. 57:49और एक मास ऐसा ऐसा
  976. 57:52है कार्तिक मास जिसमें अपनी सारी करुणा वो
  977. 57:54मास में रख देती है करुणामई अपनी करुणा
  978. 57:57कहीं रख दें और हमें पता चल जाए तो क्या
  979. 57:59करेंगे जैसे अमीर व्यक्ति है बिल गेट्स वो
  980. 58:01धन एक
  981. 58:06संदूक में रख दे संदूक बोलते हैं संदूक
  982. 58:08में रख दे तो अब हमारे को पता चल जाए तो
  983. 58:11हम फट जाएंगे संदूक खोलेंगे निकालेंगे उसी
  984. 58:13प्रकार से राधा रानी करुणा हम चाहते हैं।
  985. 58:15तो संदूक क्या है? कार्तिक मास
  986. 58:18तो राधा रानी का यह राधा रानी अधिष्ठात्री
  987. 58:22देवी है कार्तिक मास की। राधा रानी
  988. 58:25कार्तिका देवी बोला जाता है। रूप गोस्वामी
  989. 58:26कह रहे हैं कार्तिका देवी करुणामई राधा
  990. 58:30रानी और ऊपर से कार्तिक मास मतलब एक तो
  991. 58:33होता है सोना। एक होता है सोना सुहागा।
  992. 58:35करुणामई राधा रानी का कार्तिक मास। उसमें
  993. 58:39हम यही राधा रानी से यत्न करते हैं,
  994. 58:42प्रार्थना करते हैं कि हे राधा रानी आप
  995. 58:44अपने दिव्य करुणा हम पर बरसाए। अरे सब
  996. 58:47छोड़ो ये सब होता रहेगा। मेरी आवाज तो आ
  997. 58:49ही रही है।
  998. 58:50और हमारे इस महीने का लक्ष्य, जीवन का
  999. 58:54लक्ष्य, हर पल का लक्ष्य केवल क्या होना
  1000. 58:57चाहिए? राधा कृपा कटाक्ष प्राप्त करना।
  1001. 59:00कृष्ण कृपा कटाक्ष नहीं बोल रहे हम। राधा
  1002. 59:03कृपा कटाक्ष प्राप्त करना।
  1003. 59:07उनकी कृपा प्राप्त करना। एक बार करुणा से
  1004. 59:10देख दो स्वामिनी एक बार एक और एक कृपा
  1005. 59:13कटाक्ष [गला साफ़ करने की आवाज़] कर दो।
  1006. 59:14एक बार अरे श्री कृष्ण भी तरसते हैं इस
  1007. 59:18कृपा कटाक्ष के लिए। वो चाहते हैं। इतनी
  1008. 59:19बड़ी वस्तु चाह रहे हैं जो हमें मिल सकती
  1009. 59:22है कार्तिक मास से।
  1010. 59:28स्तव माला में रूप गोस्वामी पाद भी बता
  1011. 59:30रहे हैं राधा रानी को एक श्लोक में
  1012. 59:32कार्तिका देवी और भक्ति रसाम सिंधु में
  1013. 59:36कार्तिक व्रत को ऊर्जा व्रत भी बोला जाता
  1014. 59:38है। ऊर्जा व्रत
  1015. 59:41ऊर् मतलब शक्ति
  1016. 59:44शक्तिपात करना एंपावरमेंट करना
  1017. 59:48और शक्ति का स्रोत कौन है?
  1018. 59:51राधा रानी उजेश्वरी
  1019. 59:55ऊर्जा देने वाली कि ईश्वरी उजेश्वरी राधा
  1020. 59:59राधा रानी कार्तिक की देवी हैं।
  1021. 1:00:07हम भी श्रवण कर सकते हैं करते हैं जो
  1022. 1:00:11यशोदा मैया ने
  1023. 1:00:14श्री कृष्ण को बांधा था पर वो ज्यादा इतना
  1024. 1:00:18घोड़ियों का केंद्र बिंदु नहीं होता कि
  1025. 1:00:21यशोदा कृष्ण के मूर्ति ले आओ साथ में पूजा
  1026. 1:00:23ये सब नहीं हां सुन सकते हैं हम
  1027. 1:00:31राधा रानी को यशोदा मैया ने तो बांधा ही
  1028. 1:00:33था। परंतु उसके अलावा भी
  1029. 1:00:39जब श्री कृष्ण किशोरावस्था में थे तब की
  1030. 1:00:42हम आपको घटना बता रहे हैं। यह घटना है
  1031. 1:00:52भविष्य पुराण के उत्तरखंड में एक बार एक
  1032. 1:00:56बार कार्तिक मास की पूर्णिमा को श्री
  1033. 1:00:59कृष्ण जब मिलने आने आने वाले थे तो देरी
  1034. 1:01:01से आए।
  1035. 1:01:03लेट हो गए थे तो राधा रानी क्या हो गई
  1036. 1:01:05मानिनी मान ग्रहण कर लिया नाराज हो गई
  1037. 1:01:09हमारी भाषा में नाराज हो गई मान ग्रहण कर
  1038. 1:01:12लिया मानिनी हो गई उनसे बात करने को राजी
  1039. 1:01:16नहीं है
  1040. 1:01:18तो राधा ने अपने भोए सी कौड़ी और अपना
  1041. 1:01:22वस्त्र द्वारा निर्मित एक स्वर्ण जड़ित
  1042. 1:01:24डोरी से श्री कृष्ण की कमर को बांध दिया
  1043. 1:01:29जब कृष्ण को बांध दिया गया तो उसके बाद
  1044. 1:01:34कृष्ण ने बहुत प्रकार से मीठी मीठी बातें
  1045. 1:01:37करी चाटुकारिता करी एंज नहीं हैगा
  1046. 1:01:42ऐसा नहीं है ऐसा हुआ वो दीपावली का और ये
  1047. 1:01:48और मां ने रोक लिया और ये तुम समझती नहीं
  1048. 1:01:51हो कैसे बताऊं इस प्रकार से बहुत मान किया
  1049. 1:01:56चाटुकारिता करी
  1050. 1:01:58और पूरा डिटेल सुनाई है कि ऐसा हुआ फिर
  1051. 1:02:00उसके बाद मां ने ये किया उसके उसके बाद
  1052. 1:02:02ऐसा फिर मेरे को ऐसे अब तुम बताओ एकदम से
  1053. 1:02:05कैसे याद खुद बताओ
  1054. 1:02:10हां पूरा उत्सव का विवरण सुनाया पूरा पूरा
  1055. 1:02:15डिटेल में मीठे-मीठे शब्दों से राधा रानी
  1056. 1:02:17को प्रसन्न किया बदले में
  1057. 1:02:20राधा रानी ने दामोदर को मुक्त कर जो सबको
  1058. 1:02:23मुक्त करते हैं उनको राधा रानी ने मुक्त
  1059. 1:02:25किया बोलो राधा रानी की
  1060. 1:02:27जय
  1061. 1:02:29इसीलिए उनका नाम पड़ा निवी दामोदर
  1062. 1:02:31नेवी दामोदर
  1063. 1:02:35राधा रानी ने उन्हें बंधनों से मुक्त
  1064. 1:02:37किया। हम इन नेवी दामोदर की उपासना करते
  1065. 1:02:40हैं या सरल भाषा में दामोदर हमारे लिए
  1066. 1:02:44दामोदर राधा दामोदर ही है हमेशा से और वही
  1067. 1:02:47रहेंगे।
  1068. 1:03:03उत्तराखंड भविष्य पुराण में कथा है। कोई
  1069. 1:03:06पढ़ना चाहे तो देख सकते हैं। थोड़ी मेहनत
  1070. 1:03:08करनी पड़ेगी। भविष्य पुराण ले आना पड़ेगा।
  1071. 1:03:10उत्तराखंड खोलना पड़ेगा। उसके बाद या हमसे
  1072. 1:03:13डायरेक्ट सुन लो।
  1073. 1:03:16और राधा रानी का आठवां नाम है। रघुनाथ दास
  1074. 1:03:18गोस्वामी ने नाम दिए राधा रानी के। उसमें
  1075. 1:03:20आठवां नाम है कार्तिको कीर्तिश्वरी।
  1076. 1:03:25शी इज अ क्वीन ऑफ द मंथ ऑफ कार्तिक।
  1077. 1:03:28कार्तिक की ईश्वरी। क्वीन ऑफ द मंथ ऑफ
  1078. 1:03:31कार्तिक
  1079. 1:03:49ऊर्जेश्वरी
  1080. 1:03:51ऊर्जा जैसा हमने बताया ऊर्जेश्वरी का मतलब
  1081. 1:04:11हम सब हैफासड है तो जो हर इच्छा से जो
  1082. 1:04:14सुनने को मिल गया वही मिल गया बस
  1083. 1:04:23एक तो सबसे इंपॉर्टेंट बात तो अभी आ ही
  1084. 1:04:25नहीं अब आएगा सबसे इंपॉर्टेंट
  1085. 1:04:29चलिए
  1086. 1:04:43कार्तिक मास में
  1087. 1:04:46प्रातः काल
  1088. 1:04:48स्नान और भगवान की पूजा करनी चाहिए। उस
  1089. 1:04:53समय कथा श्रवण उत्तम माना गया है। कब उठना
  1090. 1:04:56चाहिए कार्तिक में?
  1091. 1:04:59प्रातः काल।
  1092. 1:05:15हमारी तो थोड़ी नजर कमजोर है। जिसकी नजर
  1093. 1:05:17थोड़ी ठीक है। संदीप नज़र ठीक है ना आपकी?
  1094. 1:05:19यहीं से भी दिख जाएगा बस। क्या लिखा हुआ
  1095. 1:05:21है? दूसरा पॉइंट।
  1096. 1:05:26पढ़ो पढ़ो लाइन पढ़ो स्नान सूर्य
  1097. 1:05:3136 मिनट पहले
  1098. 1:05:32बस बस बस बस बस
  1099. 1:05:35क्या बोला गया प्रातः स्नान कौन सा समय
  1100. 1:05:37बताया गया है
  1101. 1:05:40सूर्योदय से
  1102. 1:05:423 घंटे 36 मिनट पहले बाद में नहीं सोचा
  1103. 1:05:46सूर्योदय 6:30 है तो मैंने कब उठना है 7 8
  1104. 1:05:4810 बजे उठ जाओ नहीं सूर्योदय से 3 घंटे 36
  1105. 1:05:52मिनट पहले बताया गया स्नान करना
  1106. 1:05:54तो कब हो गया मोटा-मोटा
  1107. 1:05:57जैसे अभी 6:30 6:00 बजे का सूर्योदय होता
  1108. 1:05:59है
  1109. 1:06:01तो हमने फारसी में बोला हुआ है आपको इतने
  1110. 1:06:03समय से आपको समझ नहीं आती बात
  1111. 1:06:07कब से बोल रहे हैं
  1112. 1:06:10यही टाइम है 6:00 बजे को 3:30 से कम करो
  1113. 1:06:13बाकी 2:24 बनेगा फिर हम तो फिर भी 6 मिनट
  1114. 1:06:17ज्यादा दे रहे थे
  1115. 1:06:22अभी तो ये प्रारंभ है इसमें तो
  1116. 1:06:26प्रातः काल उठ के भगवान की पूजा करनी
  1117. 1:06:28चाहिए।
  1118. 1:06:30उस समय कथा श्रवण उत्तम माना गया। हम क्या
  1119. 1:06:32बोलते हैं? क्या करो? सुबह क्या करो? ये
  1120. 1:06:34क्या बोले? स्नान कब करो?
  1121. 1:06:372:30 बजे। और हम क्या बोलते हैं? स्नान के
  1122. 1:06:39समय क्या करो?
  1123. 1:06:43इसको यूज़ करो ना। इसको ये क्या बोल रहे
  1124. 1:06:46हैं? उस समय कथा श्रवण उत्तम माना गया।
  1125. 1:06:50यही तो बोल रहे हैं। हम बोलते अब यह कौन
  1126. 1:06:54सा ग्रंथ है? बस अब मान लो हमारे लिए मान
  1127. 1:06:58लो शास्त्र किसी के तो मान लो। बात तो एक
  1128. 1:07:01ही है दोनों की।
  1129. 1:07:08[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1130. 1:07:16सुबह उठना कितना महत्वपूर्ण है ये तो आपको
  1131. 1:07:18बताया। अब देखिए एक श्लोक भी है स्पेशली
  1132. 1:07:22इसी के लिए श्लोक है। कैन यू बिलीव इट?
  1133. 1:07:35ये देखो ये किसी को भी श्लोक समझ आ जाएगा।
  1134. 1:07:38इतनी इतना आसान संस्कृत है। कार्तिकेयम
  1135. 1:07:42करिश्यामिने
  1136. 1:07:44करना है। कार्तिकेयम
  1137. 1:07:48करिश्यामिश्याम
  1138. 1:07:51प्रातः स्नानम प्रातः स्नानम
  1139. 1:07:54जनार्दन जनार्दना
  1140. 1:07:56प्रीतार्थम
  1141. 1:07:57प्रीतार्थम
  1142. 1:07:58तव
  1143. 1:07:59तव
  1144. 1:08:00देवेश
  1145. 1:08:01देवेश
  1146. 1:08:02दामोदर
  1147. 1:08:04दामोदर
  1148. 1:08:04मयास
  1149. 1:08:05मयास
  1150. 1:08:06हे हे जनार्दन हे दामोदर आपकी प्रसन्नता
  1151. 1:08:10के लिए मैं कार्तिक में प्रातः स्नान कर
  1152. 1:08:14ये मत
  1153. 1:08:15स्पष्ट बोल रहे हैं ये बोल के कर रहे हैं
  1154. 1:08:18कार्तिक में करिश्याम करूंगा प्रातः
  1155. 1:08:21स्नाने जनार्दन आपकी प्री लिखा हुआ है
  1156. 1:08:23प्रीति अर्थम प्रीति अर्थम 2:30 बजे उठकर
  1157. 1:08:28स्नान करूंगा आपकी प्रसन्नता के लिए हे
  1158. 1:08:31दामोदर
  1159. 1:08:33आज्ञा है शास्त्र भगवान की आज्ञा है अभी
  1160. 1:08:36हम टॉपिक इसी टॉपिक पे हम हम लगे रहेंगे
  1161. 1:08:39थोड़ी देर तक
  1162. 1:08:41पहला पॉइंट क्या बोला
  1163. 1:08:45सुबह उठकर स्नान करना है पूजा करनी करनी
  1164. 1:08:46है और कथा श्रवण टाइम क्या था 2:30 अब
  1165. 1:08:53क्या बताया गया है मंत्र कि मैं अब इसी
  1166. 1:08:57टॉपिक पे चलेंगे सिर्फ हम
  1167. 1:09:07ये कौन सा ग्रंथ है
  1168. 1:09:09ये कौन सा है पद्म पुराण सेम चीज सोचो एक
  1169. 1:09:13श्लोक जो स्कंद पुराण में भी सेम हो और
  1170. 1:09:15पद्म पुराण उसे कितना महत्व होगा और ना
  1171. 1:09:19किसी को स्कंद पुराण से लेना देना पद्म
  1172. 1:09:21पुराण से और लेना देना दोनों की बात भी
  1173. 1:09:23पकड़ लो ये तो कितनी विशेष बात है ये देखो
  1174. 1:09:25फिर वही कार्तिकेय करिश्याम प्रातः स्नानम
  1175. 1:09:29जनार्दन प्रीत्थ देव दामोदर मया स दोनों
  1176. 1:09:34जगह ये श्लोक है दोनों जगह डिो सेम श्लोक
  1177. 1:09:38है
  1178. 1:09:52ये देखो
  1179. 1:09:59श्री कृष्ण कहते हैं कि दो व्रत तो मुझे
  1180. 1:10:01बहुत प्रिय है। एक एकादशी और एक कार्तिक
  1181. 1:10:04और एक कार्तिक में एकादशी। तो उसका तो
  1182. 1:10:06कहना ही क्या तो अगर हो सके तो व्यक्ति को
  1183. 1:10:08निर्जला रखनी चाहिए और एक रात्रि जागरण
  1184. 1:10:11करना चाहिए
  1185. 1:10:13और
  1186. 1:10:15कार्तिक के महीने में जो प्रातः काल स्नान
  1187. 1:10:18करते हैं वो महापात की भी हो भयंकर पाप के
  1188. 1:10:21तो भी मुक्त हो जाते हैं जो स्नान स्नान
  1189. 1:10:23नहीं करते सोए रहते हैं तो उनकी किस्मत भी
  1190. 1:10:26सोई रहती है
  1191. 1:10:31और सुनिए जो मनुष्य कार्तिक में स्नान
  1192. 1:10:35स्नान मतलब प्रात स्नान मतलब 12 बजे 11
  1193. 1:10:38बजे 10 बजे 8:00 बजे 7:00 बजे स्नान नहीं
  1194. 1:10:40स्नान मतलब सुबह स्नान कार्तिक में स्नान
  1195. 1:10:44जागरण दीप दान और तुलसी वन का जो पालन
  1196. 1:10:46करते हैं वो साक्षात विष्णु के स्वरूप है
  1197. 1:10:48भगवान के स्वरूप हमको कई गुरु को भगवान के
  1198. 1:10:51स्वरूप मानने में हमारे बुद्धि तर्क लगाती
  1199. 1:10:53है अरे भक्त को भगवान का स्वरूप मानना
  1200. 1:10:56चाहिए जो ये सब करते हैं गुरु में मनुष्य
  1201. 1:10:58बुद्धि ला तो उसका सर्वनाश ही होता है ऐसे
  1202. 1:11:04जो भगवान के मंदिर में कृष्ण मंदिर विष्णु
  1203. 1:11:06मंदिर में झाड़ू देते हैं। स्वास्तिक आदि
  1204. 1:11:08लगाते हैं। वो बनाते हो ना वो पाउडर वाली
  1205. 1:11:11कहां है वो पाउडर बना लगाते हो ना आप लोग
  1206. 1:11:15वो स्वास्तिक वगैरह निवेदन करते हैं।
  1207. 1:11:18हम
  1208. 1:11:21वो देवताओं के लिए वंदनीय हो जाते हैं।
  1209. 1:11:24देवताओं के लिए वंदनीय और जो ये लोग अजन्म
  1210. 1:11:28करते हैं उनका क्या कहना है? अजननी पूरा
  1211. 1:11:31जीवन ही कार्तिक है। भाई सुबह उठ रहा जीवन
  1212. 1:11:34ही कार्तिक है। पूरा
  1213. 1:11:37उनका एक शब्द भी बोल रहे उनका तो कहना ही
  1214. 1:11:39क्या है ये
  1215. 1:11:43हां
  1216. 1:11:55अब पानी अब स्नान तो करें और डिटेलिंग जान
  1217. 1:11:58लेनी चाहिए स्नान के बारे में। गर्म जल की
  1218. 1:12:00अपेक्षा ठंडे जल में स्नान करना 10 गुना
  1219. 1:12:03पुण्य देता है।
  1220. 1:12:05बस अभी नवंबर आ गई है। दिसंबर भी आएगी।
  1221. 1:12:10ये तो कार्तिक की बात है। हम तो उसके बाद
  1222. 1:12:12भी वही कह रहे हैं। वही अच्छी बात है।
  1223. 1:12:1650 के तो हो ही गए हैं। हम कर सकते आप लोग
  1224. 1:12:21अभी तो
  1225. 1:12:28गर्म जल की अपेक्षा ठंडे जल में स्नान
  1226. 1:12:30करना 10 गुना अधिक है। उससे 100 गुना अधिक
  1227. 1:12:32होता है बाहरी कुएं में। उससे अधिक ये ये
  1228. 1:12:35ये ये सिंधु कृष्णा वेणी यमुना सरस्वती
  1229. 1:12:39उससे अधिक गोदावरी नर्मदा आगे आगे आगे आगे
  1230. 1:12:43आगे आगे आगे आगे आगे जाते अंत में आता है
  1231. 1:12:46कि बद्री आश्रम से अयोध्या श्रेष्ठ है।
  1232. 1:12:49स्नान करने में अयोध्या से गंगा द्वार
  1233. 1:12:51गंगा द्वार से कनखल कनखल से भी श्रेष्ठ है
  1234. 1:12:53मथुरा यानी कि वृंदा क्योंकि कार्तिक में
  1235. 1:12:55स्वयं वहां राधा कृष्ण स्नान करते हैं।
  1236. 1:13:01हमारे लिए सारांश 2:30 बजे उठना है अपने
  1237. 1:13:04घर में स्नान कर लेना है।
  1238. 1:13:07वृंदावन में सुबह वृंदावन में कर लेना। ये
  1239. 1:13:09सारांश अपने लिए ये ना हो कि हम गुणगांव
  1240. 1:13:12सोए असली बात को भूल जाए। बोले वही बन
  1241. 1:13:14जाए। बांके बिहारी लाल की
  1242. 1:13:18ये सब नहीं चलेगा।
  1243. 1:13:21भक्ति करनी है तो मेहनत करनी पड़ेगी।
  1244. 1:13:23जितना डालोगे शक्कर उतना होगा मीठा।
  1245. 1:13:27जितना गुड में ऐसे बोलते हैं ना हमारे
  1246. 1:13:30पंजाबी लोग
  1247. 1:13:34देखो फिर से वही स्कंद पुराण कार्तिक मास
  1248. 1:13:37में जो भक्त प्रातः काल स्नान करके पवित्र
  1249. 1:13:40हो कोमल दल से भगवान दामोदर की पूजा करता
  1250. 1:13:43है वह निश्चित रूप से मोक्ष प्राप्त मोक्ष
  1251. 1:13:45मतलब यहां भगवत प्राप्ति है मोक्ष प्राप्त
  1252. 1:13:47करता
  1253. 1:13:49सुबह उठना कार्तिक या कोई भी महीना अपने
  1254. 1:13:52तो सारे कार्तिक है 12 महीने तो तुलसी दल
  1255. 1:13:56से पूजन करना नहा के
  1256. 1:14:05देखो आपके लिए देखो क्या करना पड़ता है
  1257. 1:14:07मेरे को तो इससे कोई लेना देना नहीं आपको
  1258. 1:14:08पता ही है आपके लिए बता रहे हैं सिर्फ
  1259. 1:14:13अगेन इस कार्तिक मास में जो श्रेष्ठ
  1260. 1:14:16मनुष्य प्रातः काल स्नान करते हैं वह सब
  1261. 1:14:18यज्ञ के अवृत स्नान द्वारा भली-भांति नहा
  1262. 1:14:21लेते हैं। यज्ञ के बाद ना स्नान किया जाता
  1263. 1:14:23है। अवृत स्नान कहते हैं। तो वह फल भी मिल
  1264. 1:14:28जाता है। सुबह उठ के जो स्नान करते हैं।
  1265. 1:14:38और जो इतना सब सुनने के बाद भी जो कि हम
  1266. 1:14:41ब्रज मंडल से प्रारंभ किए थे। अभी के बाद
  1267. 1:14:43भी आप 2:30 बजे स्नान नहीं करेंगे। तो
  1268. 1:14:45धिक्कार है तुम्हारी बुद्धि पे, धिक्कार
  1269. 1:14:47है तुम्हारे सब चीज पर। तुम्हारा सब कुछ
  1270. 1:14:50व्यर्थ है। यू आर जस्ट अ पीस ऑफ स्टूल और
  1271. 1:14:53पीस ऑफ गार्बेज।
  1272. 1:14:55तुम नित्यांत परिवार के नहीं हो तुम
  1273. 1:14:57कुंभकरण के परिवार गोस्वामी हो कुंभकरण के
  1274. 1:14:59गोस्वामी उनहीं के मानस वीर्य से उत्पन्न
  1275. 1:15:02हो तुम
  1276. 1:15:04मानस मतलब उनकी मेंटालिटी आई विल स्लीप नो
  1277. 1:15:06मैटर कुछ शास्त्र मैं तो सोता रहूंगा सोती
  1278. 1:15:09रहूंगी जो मर्जी बुलंदा रहे गुरु जी
  1279. 1:15:11शास्त्र जी मैं सोता रहूंगा सोती रहूंगी
  1280. 1:15:15दिस इज नॉट डन नित्यानंद परिवार के हो
  1281. 1:15:18भगवत परिवार के अचुत परिवार के हो ना कि
  1282. 1:15:20कुंभकरण के गोस्वामी है गोसाई जी किसके
  1283. 1:15:24गोसाई जी गोसाई जी इनके कुंभकरण के गोसाई
  1284. 1:15:27वीर्य मानस वीर्य से उत्पन्न है ना मानस
  1285. 1:15:30वीर्य समझते हो भाषा समझ आ रही है मानस
  1286. 1:15:32मेंटालिटी मानस वीर्य वीर्य इस नॉट जस्ट
  1287. 1:15:36फिजिकल इट इज मानस
  1288. 1:15:38कुंभकरण की औलाद अब ठीक है गोसाई थोड़ा
  1289. 1:15:42सभ्य लग रहा था कुंभकरण के वंशज गोस्वामी
  1290. 1:15:47गोसाई धिक्कार है
  1291. 1:15:50धिक्कार है एक धिकारी 100 धिक्कार है शतशत
  1292. 1:15:53धिक्कार है अभी भी हम सुबह ना उठे।
  1293. 1:16:00जैसे हमारे इतना बुखार, इतना कुछ होता है।
  1294. 1:16:03एक महीने से लगातार बुखार चल रहा है। फिर
  1295. 1:16:05भी तभी सुबह उठ रहे हैं। आप सब ठीक-ठाक
  1296. 1:16:07हो।
  1297. 1:16:17अब ना सब हैफा जेड है तो पता नहीं कौन सी
  1298. 1:16:19चीज जहां सुनने को मिल जाए वही अच्छी बात
  1299. 1:16:21है। बस। [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  1300. 1:16:28हालांकि बहुत ज्यादा
  1301. 1:16:30खाने पीने की रेस्ट्रिक्शन बताई गई है। वो
  1302. 1:16:33हम ज्यादा बताते बता नहीं रहे। थोड़ा बहुत
  1303. 1:16:35हल्का सा बता रहे हैं क्योंकि क्या है ना
  1304. 1:16:38कि आपका हृदय अगर यही सोचता रहेगा यह खाना
  1305. 1:16:40यह नहीं खाना और भक्ति तो करोगे नहीं ढंग
  1306. 1:16:42से पड़े रहोगे उसका कोई फायदा नहीं है तो
  1307. 1:16:46जो थोड़ी बहुत चीजें जो काफी जगह बोली गई
  1308. 1:16:49है वही बता रहे हैं उड़द नहीं खाएं शहद ना
  1309. 1:16:52लें राजमा ना लें
  1310. 1:16:56ये हम बता रहे हैं बाकी तो बहुत चीजें
  1311. 1:16:59बहुत का मतलब है इतने कि आपके होश उड़
  1312. 1:17:01जाएंगे और हम वो नहीं बोल
  1313. 1:17:05सरल कचौड़ी उड़द
  1314. 1:17:09राजमा शहद
  1315. 1:17:15अन्नदान करना चाहिए
  1316. 1:17:17वैष्णव पुरुषों के साथ वार्तालाप करनी
  1317. 1:17:19चाहिए
  1318. 1:17:29ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए यानी कि
  1319. 1:17:32विवाहित हो तो अपने पत्नी पत्नी के साथ भी
  1320. 1:17:35नहीं करना। अविवाहित हो तो किसी के साथ
  1321. 1:17:38विचार ही नहीं बनना चाहिए। जो यह कर लेगा
  1322. 1:17:40तो उसका तो सर्वनाश निश्चित है। इसको
  1323. 1:17:43बताएंगे मायापुर में होलसेल में किसी दिन
  1324. 1:17:45हमारी इच्छा है। पर जब भगवान ने प्रेरणा
  1325. 1:17:50करी सोचा हुआ है बताने का। मायापुर में
  1326. 1:17:52क्यों सोचा है वो भी हमको पता है। तो देखो
  1327. 1:17:55हर इच्छा कब होएगी?
  1328. 1:18:00हम सोचते हैं करवाते तो वही है।
  1329. 1:18:16हां यह हम देख रहे थे मिलन जैसे प्रारंभ
  1330. 1:18:18में भी बताया था अभी फिर से बता रहे हैं
  1331. 1:18:21कि आश्विन पुक्ष यह जो एकादशी पर भगवान को
  1332. 1:18:24नमस्कार करके उनसे कार्तिक कार्तिक व्रत
  1333. 1:18:27करने की आज्ञा प्राप्त भगवान से गुरु से
  1334. 1:18:30या भगवान से दोनों से आज्ञा लेके
  1335. 1:18:34आदेशावली के अनुसार मनमाना नहीं
  1336. 1:19:25गाजर वैसे हींग भी नहीं लेनी चाहिए हींग
  1337. 1:19:30[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1338. 1:19:31व्हाट इज मस्टर्ड ऑयल?
  1339. 1:19:35हम तो नहीं खा लेते ना।
  1340. 1:19:38ये भी मना किया गया कार्तिक ने।
  1341. 1:19:48और अष्टकम वगैरह करने चाहिए। राधिका
  1342. 1:19:51अष्टकम दामोदर अष्टकम
  1343. 1:19:56गुरु अष्टकम नित्यानंद अष्टकम ये सब करना
  1344. 1:20:00चाहिए अध्ययन बढ़ाना चाहिए
  1345. 1:20:04जप बढ़ा सकते हैं मंत्र बढ़ा सकते हैं
  1346. 1:20:08परिक्रमा बढ़ा कर सकते हैं या बढ़ा सकते
  1347. 1:20:10हैं अर्चन कर सकते हैं या बढ़ा अर्चन एवन
  1348. 1:20:13क्वालिटी का कर सकते हैं बेस्ट से बेस्ट
  1349. 1:20:14बना के भोग लगाएं बेस्ट से बेस्ट वो बनाएं
  1350. 1:20:18जो हम और हमारे परिवार में कोई नहीं खाएगा
  1351. 1:20:20इसको बोला जाता है निष्काम सेवा क्योंकि
  1352. 1:20:23जब बैक ड्रॉप में आपके बनाने के यही होता
  1353. 1:20:25है मैं नहीं खाऊंगी ना गुड़िया न देगी
  1354. 1:20:29वो सारा चौपट हो गया गुड्डा गुड़िया सबको
  1355. 1:20:32छोड़ दिया सारे गुड्डों को सिर्फ भगवान के
  1356. 1:20:36पास उसके बाद ईश्वर जाने किसके पास जाएगा
  1357. 1:20:39परिवार के अलावा ये निश्चित है कि उनके
  1358. 1:20:42पास नहीं जाएगा तब तो होगी निष्काम सेवा
  1359. 1:20:45नहीं तो वही सोच के बना रहे हैं अंदर से
  1360. 1:20:48पता है ये तो बेटे को को पसंद है ये तो
  1361. 1:20:51महाराज जी को कति जी महाराज को पसंद है
  1362. 1:20:55ना बनाओ बढ़िया पर उनके लिए सिर्फ
  1363. 1:21:03यह लिखा हुआ है कि बिफोर स्टार्टिंग
  1364. 1:21:05कार्तिक व्रत यू शुड वरशिप स्पिरिचुअल
  1365. 1:21:07मास्टर एंड टेक ह ब्लेसिंग्स फॉर सक्सेस
  1366. 1:21:11आशीर्वाद लेके
  1367. 1:21:13फिर कार्तिक व्रत का प्रारंभ करना चाहिए
  1368. 1:21:31अब जो कार्तिक व्रत रखते हैं और जो नहीं
  1369. 1:21:34रखते उनमें क्या-क्या फल का भेद आता है?
  1370. 1:21:37वो क्या बता रहे हैं कि यह पद्म पुराण में
  1371. 1:21:41बताया गया है
  1372. 1:21:44इंद्र आदि देवता ध्यान दीजिएगा। इंद्र आदि
  1373. 1:21:48देवता जो हैं वह भगवान की आज्ञा से
  1374. 1:21:51प्रेरित होकर जो कार्तिक व्रत रखता है
  1375. 1:21:54उसकी रक्षा करते रहते हैं। बॉडीगार्ड कौन
  1376. 1:21:57है बॉडीगार्ड?
  1377. 1:21:59इंद्रा आदि देवता आज्ञा किसने दी है? श्री
  1378. 1:22:02कृष्ण भगवान ने। वो उनकी रक्षा करते हैं।
  1379. 1:22:04निरंतर रक्षा करते हैं। निरंतर कैसे रक्षा
  1380. 1:22:08करते हैं? जैसे सेवक राजा की रक्षा करता
  1381. 1:22:10है।
  1382. 1:22:12राजा कौन हुआ? जो कार्तिक व्रत रख रहा है।
  1383. 1:22:16सेवक कौन हुआ? इंद्रा आदि देवता जिनका
  1384. 1:22:19वेदों में पहला मंत्र है। वेदों का प्रथम
  1385. 1:22:21मंत्र इंद्र देवता के लिए है। वो रक्षा
  1386. 1:22:24करते हैं सेवक की तरह। किसकी? जो कार्तिक
  1387. 1:22:26का व्रत लगता है।
  1388. 1:22:33जहां
  1389. 1:22:35वैष्ण ये कार्तिक मास इत्यादि का अनुष्ठान
  1390. 1:22:38करने वाले भक्त निवास करते हैं। जहां वो
  1391. 1:22:41रहते हैं वहां भूत पिशाच आदि नहीं रह
  1392. 1:22:44सकते।
  1393. 1:22:46नहीं रह सकते।
  1394. 1:22:49यह तो हुआ जो
  1395. 1:22:53एक और बता देते हैं जो रात्रि में भगवान
  1396. 1:22:56वासुदेव के समक्ष जागरण करते हैं उनके
  1397. 1:23:00चरित्रों का पाठ करके
  1398. 1:23:03पाठ करते हैं वैष्णव पुरुषों का के साथ
  1399. 1:23:05में और अपनी मनमानी बातें नहीं करते
  1400. 1:23:08उन्हें प्रतिदिन कोटि तीर्थों के सेवन के
  1401. 1:23:11समान पुण्य प्राप्त होता है। क्या क्या
  1402. 1:23:14क्या क्या क्या
  1403. 1:23:17यह कि जागरण करते हैं भगवान के वार्ता
  1404. 1:23:20करते हैं कथा करते हैं रात्रि में और अपनी
  1405. 1:23:23मनमानी बातें नहीं करते उन्हें प्रतिदिन
  1406. 1:23:26कोटि तीर्थों के सेवन के समान पुण्य
  1407. 1:23:28प्राप्त होता है अभी हमने 20 साल पहले
  1408. 1:23:31सत्र दिया था वो YouTube में आप लोगों ने
  1409. 1:23:33डाला था बाद में इच्छा पूर्ति आनंद पूर्ति
  1410. 1:23:35नहीं है और हमारा क्या है अभी भी सिर्फ एक
  1411. 1:23:38ही हमारा आनंद का स्रोत है मेरी मनमानी हो
  1412. 1:23:40जाए बस हजार प्रवचन सुन लिए लाखों चरण िंग
  1413. 1:23:43सुन ली 50ों किताबें पढ़ ली अंत क्या है
  1414. 1:23:46मेरी मनमानी हो तो मैं सुखी हूं वो कह रहे
  1415. 1:23:49मनमानी जो नहीं करता उसको प्रतिदिन कोटि
  1416. 1:23:53तीर्थों के तीर्थों के सेवन का फल मिलता
  1417. 1:23:55है जब तक ये मनमानी को सुख मानना बंद नहीं
  1418. 1:23:58करोगे कल्पना को ना मैं मन ना मैं
  1419. 1:24:02इंद्रियां ना इंद्र का भोग मन बोलता है
  1420. 1:24:04इंद्रियों इंद्र का भोग दे दो तुम्हें सुख
  1421. 1:24:06तुम मान जाते हो इस बात को इतने सालों से
  1422. 1:24:08भक्ति करते हो कार्तिक मास कर रहे हो तभी
  1423. 1:24:11तो कोई फल नहीं मिलता
  1424. 1:24:13समझ आया क्यों नहीं मिलता मेन मेन जो खटी
  1425. 1:24:16है था नहीं वो जो बोट मैन वो बोले मैं
  1426. 1:24:21खूटा चप्पू चला रहा हूं पूरा रात से कहां
  1427. 1:24:25पहुंचा है कहीं नहीं वहीं पे ही हूं क्यों
  1428. 1:24:27खटा नहीं खोला था हमारा खटा क्या है
  1429. 1:24:30मनमानी मेरी मनमानी हो जाए तो मैं खुश हो
  1430. 1:24:33जाऊंगा मतलब मेरी मनमानी हो तो मुझे कृष्ण
  1431. 1:24:35मिल जाएंगे कैन यू बिलीव इट मन अच्छा मान
  1432. 1:24:38लो मेरी मनमानी तो ये हो सकती है ना कि
  1433. 1:24:40मैं लंदन लंदन घूमने जाऊं या मेरी मनमानी
  1434. 1:24:44हो सकती है। मैं जींस पट पहनू कंपनी का
  1435. 1:24:47ब्रांड का तो मतलब मैं जींस पट पहनू मुझे
  1436. 1:24:50कृष्ण मिल जाएंगे। कोई सेंस है इस बात की।
  1437. 1:24:53मैं लंदन जाऊंगा कृष्ण मिलेंगे। अच्छा
  1438. 1:24:56वहां जो उनको मिले होंगे या कृष्ण लंदन
  1439. 1:24:59वालों को अमेरिका वालों को
  1440. 1:25:03वो रहते हैं उनको नहीं मिले। तुम्हें मिल
  1441. 1:25:04जाएंगे जाके। क्या इल्लुजन है? क्या
  1442. 1:25:06कल्पना है जो मनमानी नहीं करेगा उसे
  1443. 1:25:11प्रतिदिन कोटि तीर्थों का सेवन के समान फल
  1444. 1:25:13मिलेगा आई समझ में बात कुछ आया कुछ आया
  1445. 1:25:16कुछ समझ
  1446. 1:25:17कब से हटाएंगे अपने जीवन से मनमानी करने
  1447. 1:25:20को मेरा मन नहीं मानता मैं नहीं कर रहा
  1448. 1:25:22मैं नहीं कर रहा क्यों मेरा मन नहीं मानता
  1449. 1:25:25तुम्हारे मन क्या भगवान है वो माने ना
  1450. 1:25:27माने उससे फर्क क्या पड़ता है
  1451. 1:25:30तुम 24 घंटे मन को मनाने में लगे हुए हो
  1452. 1:25:33जैसे उसे भगवत आनंद मिल कृष्ण मिल जाएंगे
  1453. 1:25:38मनमानी करना जब बंद करोगे तब कोटि तीर्थों
  1454. 1:25:42का फल बिना कुछ किए मिलेगा। बिना कुछ किए।
  1455. 1:25:44इसलिए महात्मा जी कमरे में बैठे हैं। कहीं
  1456. 1:25:47नहीं जाते। क्यों नहीं जाते?
  1457. 1:25:50और कोटि तीर्थों का फल रोज मिल रहा है।
  1458. 1:25:52क्या करके? कुछ ना करके।
  1459. 1:25:56बंद मानी बंद ऐ बना दे। कह देता ना एक बार
  1460. 1:26:01हैं मामा पंजाबी कह देता एक बार
  1461. 1:26:08वो दूसरी मैं नहीं मानी
  1462. 1:26:10दोनों एक से धुरंधर
  1463. 1:26:13तो [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  1464. 1:26:14जो मनमानी बातें नहीं करता नहीं करता नहीं
  1465. 1:26:17करता उसे प्रतिदिन कोटि तीर्थों के सेवन
  1466. 1:26:20के समान पुलने मिलता है
  1467. 1:26:23यह करना बंद करोगे तो भक्ति का शुभारंभ
  1468. 1:26:27होगा चैप्टर वन स्टार्ट्स। नहीं तो 20
  1469. 1:26:31साल, 25 साल, 30 साल से माला फेर रहे हैं।
  1470. 1:26:34कार्तिक कर रहे हैं। यह मंत्र कर रहे हैं।
  1471. 1:26:37वो धूप दीप सारी दुनिया जहान कर लिया। अंत
  1472. 1:26:40क्या है? दुखीराम महाराज की जय हो।
  1473. 1:26:42दुखीराम महाराज इसलिए हो क्योंकि आपका
  1474. 1:26:45कांसेप्ट अभी भी सुख का यही है। कृष्ण
  1475. 1:26:48प्राप्ति आनंद प्राप्ति नहीं मान रहे। मान
  1476. 1:26:50रहे हो। मेरी मनमानी हो जाए। बस क्या मैं
  1477. 1:26:53बोल देता ओ करना पॉसिबल है
  1478. 1:26:57तो
  1479. 1:26:58ठेंकू ठेंगू कुछ नहीं मिलेगा फिर ठेंको
  1480. 1:27:02ठेंगा यू विल नेवर गेट एनीथिंग
  1481. 1:27:08संपूर्ण व्रतों और तीर्थों दानों से जो फल
  1482. 1:27:10मिलता है वह इस कार्तिक व्रत का विधि
  1483. 1:27:13पूर्व पार करने से करोड़ गुना होकर मिलता
  1484. 1:27:15है। आई समझ बात आई समझ बात आया कुछ
  1485. 1:27:22डेड बॉडी को छोड़ो जीवित व्यक्ति सुने
  1486. 1:27:24दोबारा सुने
  1487. 1:27:26संपूर्ण
  1488. 1:27:28यानी कि सारे सारे मतलब जो हम व्रत जानते
  1489. 1:27:31हैं और जो नहीं जानते हम जानते ही कितने
  1490. 1:27:34हैं संतोषी माता और थर्सडे और मंगल और
  1491. 1:27:37शुक्र शनि ये चार छह व्रत तो जानते हैं
  1492. 1:27:39हमारी अकल तो हमको पता ही है शास्त्रों
  1493. 1:27:41में पढ़े हो तो व्रत कृष् व्रत सुना है
  1494. 1:27:43कभी
  1495. 1:27:46ये क्या होता है? है कि तो अनगिनत व्रत है
  1496. 1:27:51तो वो सारे करने का हां समस्त व्रतों
  1497. 1:27:56तीर्थों नाम सुने तीर्थों के गंगा जमुना
  1498. 1:27:59इतना ही चार उंगली में आ जाएंगे हमारे
  1499. 1:28:02सारे तीर्थ उंगली में नहीं आते करोड़ों
  1500. 1:28:05में तीर्थ है सारे व्रतों सारे तीर्थों और
  1501. 1:28:10दानों से जो फल मिलता है उसको एक करोड़
  1502. 1:28:13गुना गुना कर दो तब भी कार्तिक का फल जो
  1503. 1:28:15है वह पलड़ा भारी है एक बराबर नहीं एक
  1504. 1:28:20सारे सम हम तीर्थ जाएंगे हमारा ना रुझान
  1505. 1:28:24ना हमारा पैसा
  1506. 1:28:27और हम यही करते रहे और फल क्या मिलेगा
  1507. 1:28:30कमरे में बैठकर दीप दान कर दिया कहीं नहीं
  1508. 1:28:32गए मनमानी नहीं करी दीप दान कर दिया तुलसी
  1509. 1:28:36दल चढ़ा दिया ये नहीं कि पैसे हैं तो लंदन
  1510. 1:28:39जा रहे हैं पैसे नहीं तो नैनीताल घूमने जा
  1511. 1:28:41रहे हैं ऐसा नहीं होता ऐसा नहीं होता गोवा
  1512. 1:28:45जा रहे हैं नैनीताल जा रहे हैं हैसियत के
  1513. 1:28:48अनुसार
  1514. 1:28:51ऐसे करके ऐसा ही मिलेगा भगवान क्या होंगे
  1515. 1:28:53परांग मुखी
  1516. 1:28:56मनमानी करना तो बंद करना पड़ेगा बच्चा
  1517. 1:29:04[गहरी सांस लेने की आवाज़]
  1518. 1:29:07जो कार्तिक व्रत
  1519. 1:29:10करता है भगवान की भक्ति में तत्पर होता है
  1520. 1:29:13जो उसके देह में स्थित पाप होते हैं ना
  1521. 1:29:15पाप हमारे देह में जो पाप है वो कांप उठते
  1522. 1:29:19हैं और आपस में कहने लगते हैं ये तो
  1523. 1:29:22कार्तिक का व्रत करने लग गए अब हम कहां
  1524. 1:29:24जाएंगे ये पद्म पुराण बता रहे है नो टीका
  1525. 1:29:27जस्ट प्योर रीडिंग
  1526. 1:29:33पाप आप वार्तालाप करते हैं। अरे ये तो
  1527. 1:29:36कार्तिका व्रत कर रहा है। अब हम कहां
  1528. 1:29:37जाएंगे?
  1529. 1:29:43जो कार्तिक व्रत के नियमों का को भक्ति
  1530. 1:29:46पूर्वक सुनता है जैसे आप सुन रहे हो जो
  1531. 1:29:47इनका वर्णन करता है जैसे हम वर्णन कर रहे
  1532. 1:29:49हैं वह दोनों ही उत्तम व्रत करने का फल
  1533. 1:29:54पाते हैं सुनने वाला बोलने वाला और उनका
  1534. 1:29:57दर्शन करने से मनुष्य के पापों का नाश हो
  1535. 1:30:00जाता है। जो कार्तिक व्रत का करते हैं
  1536. 1:30:05उनका दर्शन यदि कोई कर ले जो बोलते हैं
  1537. 1:30:07सुनते हैं उनका दर्शन कर ले तो दूसरे
  1538. 1:30:09व्यक्ति के उसके नपाप नाश नहीं होंगे
  1539. 1:30:12विचार का विषय दूसरों के पाप नाश करने की
  1540. 1:30:15मशीन बन जाता है वो व्यक्ति कहीं तो जाएगा
  1541. 1:30:18तो दर्शन हो जाएंगे उसके किसी को तो
  1542. 1:30:23यह असीम फल मिल जाएगा कि पापों का नाश हो
  1543. 1:30:27जाएगा पापों के साथ भक्ति में मन नहीं
  1544. 1:30:28लगता और क्या कारण है
  1545. 1:30:42देखो भाई हम कहीं पे भी जा रहे हैं तो इट
  1546. 1:30:45कैन बी हैप्पेड
  1547. 1:30:49अच्छा हम बात किस विषय की कर रहे हैं अभी
  1548. 1:30:51पूरे समय से अभी पूरे इतनी देर से कार्तिक
  1549. 1:30:56मास की और एक हमने
  1550. 1:30:59महाराज जी के यहां पे बोला था साकरण दोष
  1551. 1:31:01करके मायापुर में भी बोला था वैसे क्या
  1552. 1:31:03होता है
  1553. 1:31:06किसी के साथ बैठने वाला आगे
  1554. 1:31:09तो ये कार्तिक मास के बारे में बात हो रही
  1555. 1:31:11है और भगवान कृष्ण बोल रहे हैं क्या लिखा
  1556. 1:31:15हुआ है ये
  1557. 1:31:23भगवान श्री कृष्ण कहते हैं इतनी सी बात
  1558. 1:31:26भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जिनके आप
  1559. 1:31:27दामोदर मास कर रहे हो राधा रानी नहीं कि
  1560. 1:31:31जो भक्ति में कार्य करने वाले लोग होते
  1561. 1:31:34हैं उनके साथ दर्शन करना स्पर्श करना यानी
  1562. 1:31:36कि भक्तों के संग से उनके स्पर्श से उनके
  1563. 1:31:39साथ बात करके उनकी भक्ति का एक छठा अंश
  1564. 1:31:42हमारे को मिल जाता है वन बाय सिक्स
  1565. 1:31:45उनके दर्शन से उनके स्पर्श से उनसे वार्ता
  1566. 1:31:50करके तो इसलिए केवल भक्तों का संग करना
  1567. 1:31:52चाहिए जो संसारी है जो कृष्ण भक्त नहीं है
  1568. 1:31:54उनका संग नहीं करें साथ बैठ के आपकी भक्ति
  1569. 1:31:56नाश होगी उनके पापों का भी एक लेना पड़ेगा
  1570. 1:31:59आपको
  1571. 1:32:01चाहे आपके रिश्तेदार हो चाहे परिवार वाले
  1572. 1:32:03हो
  1573. 1:32:06और भक्तों का संग होगा तो बिना कुछ किए
  1574. 1:32:09कमरे में बैठे थे पता नहीं क्या कुट्टी
  1575. 1:32:12घुमा दी गुरु जी गुरुजी नहीं इतने सब कुछ
  1576. 1:32:15है और शुद्ध विषोधारी कथा है बिना हेतु के
  1577. 1:32:21हम
  1578. 1:32:23अनच्छा से प्राप्त बिना इच्छा के प्राप्त
  1579. 1:32:25हो जाता है ये पुण्य सिर दर्शन से संग से
  1580. 1:32:28स्पर्श से श्रवण से
  1581. 1:32:34कहां पे बताई जा रही है बात कार्तिक मास
  1582. 1:32:37के महत्व में तो कार्तिक मास में तो हमें
  1583. 1:32:40वैसे ही किसी का संग नहीं करना चाहिए गलत
  1584. 1:32:41व्यक्तियों का अभक्तों का नहीं तो जन्मों
  1585. 1:32:45जन्मों तक हमारी खराब आते नहीं जाएंगी जब
  1586. 1:32:47भक्तों के साथ हो क्या खराब बात आते कैसे
  1587. 1:32:49रहेंग बताओ
  1588. 1:32:52कोई भी भक्त के साथ रह रहे हो खराब बात
  1589. 1:32:53कैसे रहेंगे बात ही नहीं कर पाओगे आप उनसे
  1590. 1:32:55नहीं तो इसलिए तपस्या ये है कि भक्तों के
  1591. 1:32:57संग में रहना
  1592. 1:33:00अकेले रहेंगे तो माया में ही हो 100% और
  1593. 1:33:03जो नॉन डिवोटीज के साथ हो तो भी माया में
  1594. 1:33:06ही हो गलत हो गलत चल रहे हो सिर्फ जब तक
  1595. 1:33:08फिजिकली भक्तों के साथ नहीं हो समझ लो
  1596. 1:33:10बिल्कुल गलत चल रहे हो हमारा कुछ नहीं
  1597. 1:33:12होने क्योंकि अगर भक्तों के साथ किसी के
  1598. 1:33:15साथ तो हमारी तरह तो नहीं हो कबरे में
  1599. 1:33:16बैठे हो किसी के साथ हो तो वो बस पाप वो
  1600. 1:33:201/6 उनका चढ़ता रहेगा कौन बोल रहे हैं
  1601. 1:33:24श्री कृष्ण डायरेक्ट और आप हैरान हो
  1602. 1:33:27जाएंगे अब आप कहेंगे टाइम इतना नहीं है।
  1603. 1:33:29सेम चीज जो है ये बोल रहे हैं कौन से
  1604. 1:33:32स्कंद? सेम चीज पादु पुराण में भी श्री
  1605. 1:33:34कृष्ण बोल रहे हैं। इसी बात को अब कह 436
  1606. 1:33:37पेज है। ये देखो 436 जो था
  1607. 1:33:52देवदान का कुछ नहीं बताया ना हमने अभी।
  1608. 1:33:55इतने महत्वपूर्ण टॉपिक्स हैं।
  1609. 1:33:58देखो भाई हफाड चलेगा क्योंकि इतना कुछ है
  1610. 1:34:11कुछ तो बताया
  1611. 1:34:24जो भगवान को दीप दान करता है
  1612. 1:34:28जिसने भगवान को दीपद किया श्लोक है अब
  1613. 1:34:31क्या
  1614. 1:34:33अश्व अश्वमेध मेधस्तु तस किम उसको अश्वमेद
  1615. 1:34:37आदि यज्ञ करने की आवश्यकता नहीं है भाई
  1616. 1:34:40हमारे तो क्षमता भी नहीं है आवश्यकता है
  1617. 1:34:42वो भी सही और हमारे में क्षमता ही नहीं हम
  1618. 1:34:44अश्वमेद यज्ञ कौन है अश्वमेद यज्ञ करेगा
  1619. 1:34:46बताना आप में से वो कह दीप दान कर लिया तो
  1620. 1:34:49उसे जरूरत ही नहीं है
  1621. 1:34:52जिसने कार्तिक में भगवान को दीप दान कर
  1622. 1:34:55दिया उसने समस्त यज्ञ यज्ञ और तीर्थों को
  1623. 1:34:57कर लिया है। फिर वही बात कौन से क्या कर
  1624. 1:34:59लिया है?
  1625. 1:35:02समस्त ऑल ऑल यज्ञ ऑल तीर्थ कर लिया जिसने
  1626. 1:35:06दीप दान कर लिया। और जो पहले ही बताया
  1627. 1:35:09पंक्तियां दीप की लगाता है मंदिर में।
  1628. 1:35:12उसका इंतजार तो देवता करते हैं प्रतीक्षा
  1629. 1:35:14कि कब समागम होगा उससे।
  1630. 1:35:28गीता बोल बहुत
  1631. 1:35:43हम
  1632. 1:35:50[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  1633. 1:35:55मेरु गिरी मेरु पर्वत के समान मेरु मतलब
  1634. 1:35:58समझ लो हमारे इसलिए हिमालय से बड़ा इतने
  1635. 1:36:01पाप जो है हमारे उसके समान जो पाप है
  1636. 1:36:03हमारे असंख्य पाप निष्फल हो जाते हैं जो
  1637. 1:36:07कार्तिक मास में दीपदान करते हैं।
  1638. 1:36:11असंख्य पाप नष्ट हो जाते हैं।
  1639. 1:36:15जो केशव भगवान के सन्मुख दीपद करते हैं
  1640. 1:36:18उनको दूसरे जन्म में भूमंडल का धन मिलता
  1641. 1:36:21है और बहुत कीर्ति कमाता है। संसारी अगर
  1642. 1:36:25चाहेगा तो
  1643. 1:36:31शतशत यज्ञ करने के बाद सेवा करने के बाद
  1644. 1:36:34भी इतना पुण्य अर्जित नहीं होता। शतशत
  1645. 1:36:36मतलब कई 100 सेवाएं करने के बाद यज्ञ करने
  1646. 1:36:40इतना पुण्य नहीं होता जितना दीप दान करके
  1647. 1:36:43होता है।
  1648. 1:36:49कोई सर्व तरह के पापों से भी युक्त है।
  1649. 1:36:51आपके खानदान में कोई महापापी भी है। किसी
  1650. 1:36:53तरीके से भी उन्हें यदि ऐसे नर भी कार्तिक
  1651. 1:36:57मास में दीपद कर ले तो वो निसंदेह पवित्र
  1652. 1:37:00हो जाते हैं। महापापी
  1653. 1:37:03बोला मेरे लिए कर ले। कर ले एक बार कर गए
  1654. 1:37:07ना तो निसंदेह पवित्र हो जाते हैं।
  1655. 1:37:14कार्तिक मास में हरि के सन्मुख दीपदान
  1656. 1:37:17करने सारे पाप ध्वंस हो जाते हैं।
  1657. 1:37:20त्रिभुवन में पाप क्षय करने का इससे सरल
  1658. 1:37:22उपाय नहीं है। पाप के लिए बड़ी चक्की करनी
  1659. 1:37:27पड़ती है। बट अगर दीपदान करते इससे सरल
  1660. 1:37:30उपाय नहीं है पाप नाश करने का। दीप दान कर
  1661. 1:37:33ले। यहां के बच्चे अच्छे हैं। अभी
  1662. 1:37:34छोटे-छोटे बच्चे हैं यहां भक्तों के वो
  1663. 1:37:36शुरू से दीप दान करें। कितनी अच्छी बात
  1664. 1:37:38है। शुरू से ही कर।
  1665. 1:37:44जो हरि के मंदिरों में दीप दान करते हैं
  1666. 1:37:46उनको भगवान का नित्य पद भगवान की सेवा
  1667. 1:37:49भगवत धाम की प्राप्ति हो।
  1668. 1:38:02जो मंदिर में दीप दान नहीं करते हैं वह वह
  1669. 1:38:04वैष्णव मूर्ख की श्रेणी में आती है जो दीप
  1670. 1:38:08दान नहीं करते
  1671. 1:38:18ज्यादा से ज्यादा वैष्णव सेवा ज्यादा से
  1672. 1:38:20ज्यादा नाम दीप दान तुलसी सेवा और सुबह
  1673. 1:38:24उठना श्रवण करना
  1674. 1:38:26हमने बताया जो आपको लगता है जरूरी वो
  1675. 1:38:28श्रवण करो जरूरी
  1676. 1:39:20जो किसी आपत्ति में फंसा हो कि मतलब बहुत
  1677. 1:39:23बीमार हो या उसप कोई पाइप वाइप लगे हो
  1678. 1:39:25हॉस्पिटल में हो तो आपत्ति में फंस जाने
  1679. 1:39:28के कारण नहाने के लिए जल ना पा सके या
  1680. 1:39:32रोगी होने के कारण स्नान ना कर सके भगवान
  1681. 1:39:36भगवान का नाम विष्णु का कृष्ण का नाम लेके
  1682. 1:39:39और नाम लेके मार्जन हो जाता है आप कर सकते
  1683. 1:39:41हो फिर उसके बाद अगर आप रोगी भी हो ऐसा
  1684. 1:39:44नहीं कि स्नान करने की जरूरत है तो आप
  1685. 1:39:46भगवान का नाम लेते हो अपवित्रो पवित्रोवा
  1686. 1:39:49सर्वम गदवा यह स्मरे पुंडिका स बा अभ्यंत
  1687. 1:39:55सुच श्री विष्णु श्री विष्णु श्री विष्णु
  1688. 1:39:58ये मंत्र है इसके बिना भी हो जाएगा कृष्ण
  1689. 1:40:00कृष्ण कृष्ण बोलोगे ऐसा नहीं कि मैं सुबह
  1690. 1:40:02ठंड लग रही है कृष्ण कृष्ण बोल लूं हो गया
  1691. 1:40:04मेरा स्नान तुम्हारे को पाप लगेगा डंडे
  1692. 1:40:07पड़ेंगे तुम्हें आलसी इसलिए बोला कि आलस
  1693. 1:40:09से त्याग के भक्ति करो प्रारंभ में बताया
  1694. 1:40:12था तुम कहो मेरा भी श्री विष्णु श्री
  1695. 1:40:14विष्णु कृष्णा कृष्णा राधा राधा मैं तो
  1696. 1:40:16राधा राधा कर रहा हूं तीन बार नहीं 11
  1697. 1:40:18राधा कर राधा राधा राधा राधा राधा और 11
  1698. 1:40:21डंडे पड़ेंगे उसके बाद हां आपत्ति में
  1699. 1:40:25बोला गया है पद्म पुराण क्या बता आपत्ति
  1700. 1:40:27में यदि तुम हो बीमार हो कोई पाइप लगा है,
  1701. 1:40:30कोई ब्रीथिंग प्रॉब्लम है, कोई भी हो सकती
  1702. 1:40:33है, प्लस कुछ भी हो सकता है।
  1703. 1:40:37वो भगवान विष्णु का नाम लेके मार्जन कर
  1704. 1:40:39ले।
  1705. 1:41:04जीव गोस्वामी जी बता रहे हैं
  1706. 1:41:07कि श्री कृष्ण की पूजा यदि मथुरा वृंदावन
  1707. 1:41:10और कार्तिक में की जाए तो कोई बिल्कुल
  1708. 1:41:13अनक्वालिफाइड क्यों ना हो बिल्कुल उसमें
  1709. 1:41:15कोई योग्यता ही नहीं है भक्ति की बिल्कुल
  1710. 1:41:17भी कोई योग्यता नहीं है उसके बारे में
  1711. 1:41:19क्या बता रहे उसको भी भगवान के भाव प्रेम
  1712. 1:41:22भाव की प्राप्ति हो जाती।
  1713. 1:41:24यह श्लोक बता रहे हैं वह कार्तिक संग में
  1714. 1:41:27पूजनम घटते तद योग्यता विरहित योग्यता
  1715. 1:41:32विरहित योग्यता नहीं है उसमें अभी वस्तु
  1716. 1:41:36प्रभावत प्राप्त भाव भाव शब्द बोला गया है
  1717. 1:41:41भाव भक्ति प्राप्त हो जाती है जो कार्तिक
  1718. 1:41:43में श्री कृष्ण की पूजा करता है
  1719. 1:41:44अनक्वालिफाइड
  1720. 1:41:46योग्यता विरहतेन योग्यता नहीं है उसमें
  1721. 1:41:49फिर भी प्राप्ति वो होती है जो योग्य को
  1722. 1:41:52होती है यह है कार्तिक की शक्ति या धाम की
  1723. 1:41:54शक्ति
  1724. 1:42:10जैसे कार्तिक में जो आज जो आप व्यास पूजा
  1725. 1:42:15के पास में एकादशी आती है लगभग आषाढ़ के
  1726. 1:42:19शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है उस दिन
  1727. 1:42:22शंखासुर दैत्य दैत्य को मारा गया था। तो
  1728. 1:42:24उस दिन से प्रारंभ करके भगवान चार मास तक
  1729. 1:42:27चार महीने तक शीर समुद्र में शयन करते
  1730. 1:42:30हैं। सोते हैं। चतुर्मास बोलते हैं ना। सो
  1731. 1:42:32मतलब है भगवान सो रहे हैं चार महीने और वो
  1732. 1:42:35उठते कौन से हैं? एकादशी को जो आएगी ना जो
  1733. 1:42:38एकादशी है हमारा व्रत पाल उस एकादशी को
  1734. 1:42:41उठते हैं। कार्तिक शुक्ला एकादशी को जगते
  1735. 1:42:44हैं।
  1736. 1:42:45इस कारण से वैष्णवों को निमन अंकित मंत्र
  1737. 1:42:50का उच्चारण करके भगवान को जगाना चाहिए।
  1738. 1:42:52वैष्णव है तो भगवान को जगाना चाहिए। यह
  1739. 1:42:55बताया जा रहा है स्कंद पुराण में उतष्िष्ट
  1740. 1:42:59गोविंद उतष्ट गरुड़ ध्वजा उत्तमकांत
  1741. 1:43:05त्रैलोक्य मंगलम कुरु हे गोविंद उठिए उठिए
  1742. 1:43:11हे गरुड़ ध्वज उठिए हे कमलाकांत निद्रा का
  1743. 1:43:16त्याग कर तीनों लोकों का मंगल करिए
  1744. 1:43:22सर्व त्रैलोक्य मंगल कुरु यह मंत्र बोल
  1745. 1:43:27सकते हैं। एकादशी
  1746. 1:43:29कह रहे हैं बोलना चाहिए
  1747. 1:43:32वो केवल प्रसाद पाना चाहिए। बिना भोग लगे
  1748. 1:43:35कभी भी नहीं कुछ पाना चाहिए। यह नियम होना
  1749. 1:43:37चाहिए। ये नहीं कि ट्रेन में जा रहे हैं
  1750. 1:43:38तो ऐसे ही खा रहे हैं। कुछ इधर-उधर का या
  1751. 1:43:42बस से जा रहे हैं, ट्रेन से जा रहे हैं।
  1752. 1:43:43कोई नहीं ऐवे तो चल रहा है। कुछ नहीं चल
  1753. 1:43:46रहा।
  1754. 1:43:47नथिंग वर्क्स।
  1755. 1:44:03और जो व्रत नहीं रखते हैं
  1756. 1:44:08उनके लिए जो कार्तिक का व्रत नहीं उनका
  1757. 1:44:11वेद पुराण आदि पढ़ना पढ़ाना व्यर्थ है।
  1758. 1:44:14उनका व्यर्थ है। कोई भी वेद पुराण पढ़ना
  1759. 1:44:17सब व्यर्थ है। जो व्रत नहीं रखते इसमें
  1760. 1:44:19बहुत डिटेल में है।
  1761. 1:44:40और भी नित्य मंगला आरती का दर्शन कर सकते
  1762. 1:44:42हैं जो कर या घर में कर सकते हैं मंगला
  1763. 1:44:46नित्य हरि कथा श्रवण करें प्रातः स्नान
  1764. 1:44:48नित्य सिर्फ प्रसाद नित्य भक्तों का संग
  1765. 1:44:51दीप दान माला संख्या जप तुलसी अर्चन वंदना
  1766. 1:44:55परिक्रमा स्तुति पाठ ये सब करना चाहिए
  1767. 1:44:58दामोदर अष्टकम
  1768. 1:45:06ये हम ढूंढ रहे थे जो कार्तिका व्रत नहीं
  1769. 1:45:08रखते
  1770. 1:45:12स्कंद पुराण ब्रह्मा नारद संवाद
  1771. 1:45:16जो कार्तिक में धर्म अनुष्ठान ना करें तो
  1772. 1:45:19उसको मात्र हत्या पितृ हत्या तुल्य पाप
  1773. 1:45:21लगता है। अपनी मां का कत्ल करना पिता के
  1774. 1:45:24कत्ल करने का समान पाप लगता है। जो
  1775. 1:45:26कार्तिका व्रत नहीं
  1776. 1:45:29जो शादीशुदा हैं उनको भी ब्रह्मचर्य करना
  1777. 1:45:32चाहिए। जो विवाहित नहीं है ऑफिसों में है।
  1778. 1:45:34बड़ा ध्यान रखना चाहिए। आजकल के जो समाज
  1779. 1:45:36में ये मत सोचना उसके तीन गर्लफ्रेंड है
  1780. 1:45:39मेरी एक हो गए तो क्या हो गया? उसको 300
  1781. 1:45:41बार नरक में जाना। तुमको भी 100 बार तुमको
  1782. 1:45:42तो और हजार बार जाना पड़े। तुम तो वैष्णव
  1783. 1:45:44हो।
  1784. 1:45:46वो तो पुलिस वाले ने गलत काम किया। उसको
  1785. 1:45:48ज्यादा डंडा पड़ना चाहिए ना। तो वो जानते
  1786. 1:45:50थे कानून।
  1787. 1:45:52हां।
  1788. 1:45:54कार्तिक मास में व्रत ना रखने से ब्राह्मण
  1789. 1:45:57हत्या, गौ हत्या, स्वर्ण चोरी के समान पाप
  1790. 1:46:01लगता है।
  1791. 1:46:03जैसे एकादशी हम लोग कब कब रखते हैं? सारी
  1792. 1:46:06रखते हैं। उसी के समान कार्तिक मास में
  1793. 1:46:09नित्यत्व है। जैसे एकादशी का नित्यत्व है।
  1794. 1:46:12कार्तिक मास का भी नित्यत्व है। गृहस्ती
  1795. 1:46:15यदि कार्तिक मास में व्रत ना करे तो उससे
  1796. 1:46:17किए हुए सारे इष्ट और पूर्व कर्म पहले के
  1797. 1:46:21कर्म में निष्फल हो जाते हैं। जो पहले
  1798. 1:46:23आपने अच्छे काम किए ना आज तक वो भी सारे
  1799. 1:46:25अंडा जीरो हो जाते हैं। जब भगवान ही पराग
  1800. 1:46:28मुख हो गए।
  1801. 1:46:30ये भगवान ने ही मुंह फेर लिया ऐसे व्यक्ति
  1802. 1:46:32से। कार्तिक इतना बड़ा महीना है कि भगवान
  1803. 1:46:34मुंह फेर लेते हैं जो नहीं रखता।
  1804. 1:46:48कार्तिक मास में व्रत ना करने से उस
  1805. 1:46:51व्यक्ति का दिया हुआ दान जप बोला मैं जप
  1806. 1:46:53तो करता हूं पर कार्तिक नहीं रखता। उसका
  1807. 1:46:56दान उसका किया हुआ दान जप और समस्त तपस्या
  1808. 1:46:58आदि निष्फल हो जाता है। स्पष्ट स्कंद
  1809. 1:47:01पुराण बता रहे हैं स्पष्ट निष्फल हो जाता
  1810. 1:47:03है।
  1811. 1:47:34हाउ लॉन्ग आई वास टेकिंग
  1812. 1:47:40लेट्स कॉल थोड़ा सा और करते
  1813. 1:47:52जो कार तुलसी के बारे में बताएंगे जो
  1814. 1:47:55कार्तिक में
  1815. 1:47:59तुलसी दल चढ़ा के एक लाख तुलसी दल चढ़ा के
  1816. 1:48:01भगवान विष्णु की पूजा करता है उसको एक-एक
  1817. 1:48:04दल पर मुक्ता दान करने का फल प्राप्त होता
  1818. 1:48:06है। मुक्ता पता है ज्वेलरी अगर किसी को
  1819. 1:48:08नॉलेज हो थोड़ी मुक्ता
  1820. 1:48:10कभी कभी विचार करना खरीदते का तो आपकी
  1821. 1:48:13पुश्ते बिक जाएंगी तो
  1822. 1:48:17वो हर तुलसी दल अर्पण करने पे वो ओरिजिनल
  1823. 1:48:23वो तो सस्ते तो वीर बाजार में मिल जाते
  1824. 1:48:25हैं मुक्ता सोम बाजार वीर बाजार वो तो
  1825. 1:48:28कहीं पे भी मिल जाए वो वाले नहीं कह रहे
  1826. 1:48:29असली वाले कह रहे हैं सोम बाजार मुक्ता
  1827. 1:48:38नहीं हम तो घर में मेरे तो जो है मेड कर
  1828. 1:48:42बेटी भी पहनती है मुक्ता की तुम्हारी मेड
  1829. 1:48:45उसको छोड़ो तुम भी नहीं पहन सकते
  1830. 1:48:50जो मनुष्य कार्तिक में तुलसी जी के जड़ के
  1831. 1:48:53समीप श्री हरि का पूजन करता है जो हम दीपद
  1832. 1:48:56करते हैं श्री तुलसी जी के जड़ के समीप वह
  1833. 1:48:59इस श्लोक में संपूर्ण भोगों का उपभोग करता
  1834. 1:49:02है खुश होगे कितना संपूर्ण संपूर्ण भोग और
  1835. 1:49:05अंत में भगवान के धाम चला जाता है। ये हुई
  1836. 1:49:07ना बात। ये आपने गुरु जी बढ़िया बात बताई
  1837. 1:49:09है। सबसे बढ़िया बात अपने आखरी में बताई
  1838. 1:49:11है।
  1839. 1:49:12यही तो सुनने के लिए इंतजार कर रहे थे।
  1840. 1:49:15कोई भोग अब लूप होल बता दो हमारे को। इस
  1841. 1:49:19श्लोक में संपूर्ण फिर वही संपूर्ण
  1842. 1:49:23[हंसी][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
  1843. 1:49:23संपूर्ण भोग भोग करके अंत में बैकुंठ धाम
  1844. 1:49:26हमें चाहिए नहीं भोग। अंदर से यह निकलना
  1845. 1:49:28चाहिए। मेरे को तो केवल आप चाहिए। जब तक
  1846. 1:49:31यह नहीं कह रहे तो हम भक्त ही नहीं है तो
  1847. 1:49:33केवल भक्तों के भगवान की प्राप्ति होती
  1848. 1:49:35है। अन्य अभिलाषिता शून्यम
  1849. 1:49:40आई हैव टू करेक्ट योल्स क्योंकि हमारे
  1850. 1:49:42खोपड़ी कितने खराब है तो मेरे से अधिक कौन
  1851. 1:49:44जानता है एकदम प्रफुल्लित हो जाते हैं
  1852. 1:49:48बातें सुनते ही समस्त भोगों का उपभोग करके
  1853. 1:49:52अच्छा आई कैन कंटिन्यू
  1854. 1:49:55अंत में वैकुंठ धाम तो मिलना ही है तो बीज
  1855. 1:49:58को क्यों खराब करूं अपने
  1856. 1:50:00[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1857. 1:50:01इसे कहते हैं नाम के बल पर पाप करना सुना
  1858. 1:50:03है नाम की एक वस्तु भी होती है यही इसी
  1859. 1:50:09[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1860. 1:50:16[गहरी सांस लेने की आवाज़]
  1861. 1:50:20ये बहुत अच्छा है। ये हमारे यहां विनोद के
  1862. 1:50:22यहां पे है पर और किसी के यहां नहीं है।
  1863. 1:50:24पर फिर भी अच्छा है।
  1864. 1:50:26अ जिसके घर में तुलसी वन है, वह घर महा वह
  1865. 1:50:34घर तीर्थ स्वरूप है।
  1866. 1:50:37वहां यमराज के दूत नहीं आते। कोई भी
  1867. 1:50:40मृत्यु हो जाए किसी की भी। यमराज नहीं आ
  1868. 1:50:42सकते। प्रश्न ही नहीं उठता। तुलसी का वन
  1869. 1:50:46सदा सब पापों का नाश करने वाला है।
  1870. 1:50:51जो श्रेष्ठ मनुष्य तुलसी का बगीचा लगाते
  1871. 1:50:53हैं, वह यमराज को नहीं देखते।
  1872. 1:50:58और बात हम गंगा के स्नान करने जाते हैं।
  1873. 1:51:01यहां सुनिए स्कंद पुराण क्या कह रहा है?
  1874. 1:51:02नर्मदा का दर्शन, गंगा का स्नान और तुलसी
  1875. 1:51:06वन का संसर्ग तुलसी वन में रहना ये तीनों
  1876. 1:51:09एक समान कहे गए हैं। तो जो घर में तुलसी
  1877. 1:51:12हो तो वो रोज गंगा स्नान और रोज ही सब कुछ
  1878. 1:51:15कर रहा है।
  1879. 1:51:30ऐसा होता है जो तुलसी के जो जो मिट्टी जो
  1880. 1:51:34होता है उसको उससे जो तिलक अगर कोई करता
  1881. 1:51:36है अगर उसको भगवान की विशेष कृपा मिलती
  1882. 1:51:39है। एक बात बताओ तुलसी वन देवी है।
  1883. 1:51:44समाज में मतलब वन देवी के चरण में जो
  1884. 1:51:46प्रांत में जो उससे यह फल प्राप्त होती है
  1885. 1:51:48तो हम कहां का तिलक लगाते हैं
  1886. 1:51:52जिनकी अर्चना वो करती हैं
  1887. 1:51:56और जो राधा सिर्फ उन्हीं का है क्या कृष्ण
  1888. 1:52:00का भी है राधा रानी का भी है गोपियां भी
  1889. 1:52:03है उन सब का कमांड तिलक इसके तिलक के कोई
  1890. 1:52:07इसके तिलक लगाने के बाद कुछ बच जाता है
  1891. 1:52:09कुछ
  1892. 1:52:11राधा कृष्ण का तिलक लगाते हो अपने को
  1893. 1:52:13कितना भाग्य भाग्यवान समझना चाहिए। मैंने
  1894. 1:52:14राधा कुंड की रज का तिलक लगाया। ठाकुर
  1895. 1:52:17मेरे पर कितने रिजवार हैं।
  1896. 1:52:20वो तिलक लगाने का मौका देते हैं रोज।
  1897. 1:52:24सो अरे मैं राधा रानी का राधा रानी चरण
  1898. 1:52:26धोली लगा रहा हूं। राधा राधा कुंड का
  1899. 1:52:28तिलक। वाह।
  1900. 1:52:47तुलसी कार्तिक महात्मा में यह बताया जा
  1901. 1:52:49रहा है महत्वपूर्ण बात है जो इग्नोर नहीं
  1902. 1:52:51करनी चाहिए ये सोचो मत कि हम राग मार्ग पे
  1903. 1:52:53हैं और कुछ भी राग मार्ग मनमानी कर ले कह
  1904. 1:52:57रहे हैं द्वादशी को जो तुलसी दल
  1905. 1:53:05द्वादशी
  1906. 1:53:06को तुलसी दल और तोड़ता है वह अत्यंत
  1907. 1:53:09निंदित नरको में पड़ता है तो द्वादशी का
  1908. 1:53:11दिन तुलसी के दलों को नहीं तोड़ना चाहिए।
  1909. 1:53:14केवल एक दिन द्वादशी संडे मंडे को छोड़ो।
  1910. 1:53:17संडे नहीं कह रहे तो रविवार है। रविवार
  1911. 1:53:19नहीं सारे वार ओके हैं। और रविवार भी सब
  1912. 1:53:22ओके वार है। बस द्वादशी नहीं होने चाहिए।
  1913. 1:53:25भिन्न प्रकार के नरको में जाते हैं। यदि
  1914. 1:53:27द्वादशिक हो। यह पद्म पुराण बता रहा है।
  1915. 1:53:42जो भगवान के श्री अंगों से उतारी हुई
  1916. 1:53:44प्रसादी जैसे अभी राधा में जो प्रसादी फूल
  1917. 1:53:48माला तुलसी जो भी होता है या अभोग भी
  1918. 1:53:50लगाते हो या चरण में तुलसी डालते हो ठाकुर
  1919. 1:53:53जी के तो जो या कपड़ा होता है उनका जो
  1920. 1:53:57ठाकुर जी के अंगों से उतनी प्रसाद स्वरूप
  1921. 1:53:59तुलसी को मुख में मस्तक पर या शरीर पर
  1922. 1:54:03धारण करता है या भगवान के निर्माल्यों से
  1923. 1:54:05अपने अंग पर मार्जन करता है वो संपूर्ण
  1924. 1:54:08रोगों और पापों से मुक्त हो जाता है।
  1925. 1:54:11आप कहोगे भाई मेरे तो इतने रोग है। मेरे
  1926. 1:54:14तो किडनी खराब है। मेरे तो नसों की
  1927. 1:54:16प्रॉब्लम है। मेरे तो बैक क्या होती है?
  1928. 1:54:18अर्थराइट
  1929. 1:54:21बैक के झुकने वाली भी एक होती है ना।
  1930. 1:54:23स्पॉन्डिलाइटिस मैं मैं तो रोग मैं तो
  1931. 1:54:26तुलसी का रोज ही करता हूं। रोगों का मतलब
  1932. 1:54:29है सबसे बड़ा रोग कि मेरा किससे संबंध है
  1933. 1:54:30और यह संसार में सुख है। यह सबसे बड़ा रोग
  1934. 1:54:33है।
  1935. 1:54:34यह रोग से मुक्त होगे तो भगवत प्राप्ति
  1936. 1:54:36हो। ये रोग से मुक्त हो कभी भगवत
  1937. 1:54:37प्राप्ति। मेरा किससे संबंध है भगवान के
  1938. 1:54:39अलावा? नहीं हो सकती भगवत। इतना हम बोल
  1939. 1:54:41रहे हैं सालों से। नहीं समझ आ रही बात। और
  1940. 1:54:44संसार में सुख है। नहीं समझ आ रही बात।
  1941. 1:54:46अभी भी लगे। ये रोग दूर होगा।
  1942. 1:54:50यही उद्धव जी ने बोला था। मुझे चिंता नहीं
  1943. 1:54:52है आपकी प्रसादी प्रसादी वस्तु से तो सब
  1944. 1:54:54हो जाएगा कल्याण कैसे होगा यह रोग है यह
  1945. 1:54:58समझना यह रोग है मैं किसी को अपना मानना
  1946. 1:55:00किसी वस्तु में सुख मानना जो है नहीं
  1947. 1:55:03कृष्ण सुख है ना तो कोई वस्तु सुख कैसे हो
  1948. 1:55:05सकती है सारे शास्त्र गलत हो जाएंगे तो
  1949. 1:55:13[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1950. 1:55:27कार्तिक मास आने पर रौरव नर्क में पड़े
  1951. 1:55:30हुए पित्र पितृ भी चिल्लाते हैं। जो रौरव
  1952. 1:55:32नर्क में पड़े हो वो पितृ भी चिल्लाते
  1953. 1:55:34हैं। क्या हमारे वंश में ऐसा कोई भाग्यवान
  1954. 1:55:36होगा जो हमारा उद्धार करेगा। कार्तिक मास
  1955. 1:55:39का कितना इंतजार करते हैं सब लोग? हम
  1956. 1:55:42इंतजार नहीं करते। रोरा और नर्क में पड़े
  1957. 1:55:45हुए जो पुत्र हैं उनसे पूछो वो इंतजार कर
  1958. 1:55:46रहे हैं। क्या हमारे कुल में ऐसा कोई
  1959. 1:55:48आएगा?
  1960. 1:55:50सब नजर लगा के देख रहे हैं। क्या कोई
  1961. 1:55:52आएगा? क्या कोई आएगा?
  1962. 1:56:05दो घंटे से ज्यादा तो नहीं होना चाहिए।
  1963. 1:56:07खत्म तो होगा नहीं कभी बट मैं थोड़ा सा
  1964. 1:56:09फटाफट करके।
  1965. 1:56:25देखिए
  1966. 1:56:28विश्वामित्र जी बोले कार्तिक मास सब
  1967. 1:56:32महीनों में शेष बताया गया है। उसमें जो
  1968. 1:56:35कर्म किया जाता है वह बरगद बीज के भांति
  1969. 1:56:37बढ़ता है। बरगद का बीज देखते हो कैसे
  1970. 1:56:39बढ़ता है।
  1971. 1:56:40तो जो कर्म किया जाता है उसमें बरगद के
  1972. 1:56:42बीज के भांति बढ़ता है। जो कार्तिक मास
  1973. 1:56:46में स्नान दान और पूजन करके ब्राह्मण भोजन
  1974. 1:56:49ब्राह्मण भोजन हमारा क्या मतलब है हरि
  1975. 1:56:51गुरु वैष्णव हमारा दान भोजन जो भी कुछ है
  1976. 1:56:56हरि गुरु वैष्णव खत्म हरि गुरु वैष्णव हरि
  1977. 1:56:58गुरु वैष्णव जो कार्तिक मास में स्नान दान
  1978. 1:57:01पूजन करके ब्राह्मण भोजन मतलब हरि गुरु
  1979. 1:57:03वैष्णव भोजन कराता है उसका वह पुण्य अक्षय
  1980. 1:57:06फल देने वाला होता है अक्षय फल
  1981. 1:57:10वैष्णव सेवा को बढ़ाना चाहिए। जिसके नहीं
  1982. 1:57:13है उसे स्टार्ट तो करनी चाहिए। तो हां
  1983. 1:57:17अक्षय फल देने वाला होता है।
  1984. 1:57:24जब हमारा हमने व्रत रखा तो त्रुटि भी हो
  1985. 1:57:27सकती है।
  1986. 1:57:29है ना? तो त्रुटि का भी यहां पर बताया गया
  1987. 1:57:33है। बड़ी कृपा करके शास्त्र बता रहे हैं।
  1988. 1:57:56पद्म पुराण
  1989. 1:58:05ये देखिए
  1990. 1:58:35एक तो तो हमको भगवान से प्रार्थना करनी है
  1991. 1:58:38वतिन कार्तिके मासी स्नातस
  1992. 1:58:42विधि वनमम ग्रहण ग्रहणघ्यम मया दत्तम
  1993. 1:58:47राध्या सहितो हरे भगवान मैं कार्तिक मास
  1994. 1:58:51में स्नान का व्रत लेकर तो स्नान का व्रत
  1995. 1:58:53ले उठना है सुबह 2:30 बजे ऐसा नहीं मनन कर
  1996. 1:58:56रहे हैं उठना है उठना नहीं है असली में
  1997. 1:58:58मनन ही चले जा रहा है इसके मनन का फायदा
  1998. 1:59:00क्या है मनन होता है जो एग्जीक्यूशन के
  1999. 1:59:02लिए किया जाता है ना कि खो शेख चिल्ली के
  2000. 1:59:05लिए बनने के लिए किया जाता है। ऐसा करना
  2001. 1:59:07चाहिए तो करो ना भाई। मनन तो सीडी है
  2002. 1:59:12एग्जीक्यूशन करने के लिए। मनन है मतलब वो
  2003. 1:59:14चीज जिससे एग्जीक्यूशन की जाए। नहीं तो
  2004. 1:59:16मनन में कोई मतलब नहीं है। एग्जीक्यूशन
  2005. 1:59:19करने के लिए जिस चीज को मैं बार-बार अपने
  2006. 1:59:20मन में दोहराता हूं उसको मनन कहते हैं।
  2007. 1:59:22एग्जीक्यूशन करने के लिए।
  2008. 1:59:26कार्तिक मास में स्नान का व्रत लेकर
  2009. 1:59:28विधिपूर्वक स्नान कर चुका हूं। मेरे दे इस
  2010. 1:59:30अर्घे को आप राधिका जी के साथ स्वीकार
  2011. 1:59:32करें। राधा रानी के साथ। अब जो पाप वगैरह
  2012. 1:59:36हमसे त्रुटियां रह गई है वह इसमें बताया
  2013. 1:59:37गया क्या समाधान है
  2014. 1:59:45विष्णु आज्ञा मनु प्राप्त्य कार्तिक व
  2015. 1:59:49कार्तिक व्रत कारणात शमंतु देवास्ते सर्वे
  2016. 1:59:52माम पुनंतु सवा सवा इसका माने है विष्णु
  2017. 1:59:56की भगवान की आज्ञा प्राप्त करके कार्तिक
  2018. 1:59:59व्रत करने के कारण यदि मुझसे कोई त्रुटि
  2019. 2:00:02हो जाए तो उसके समस्त देवता मुझे क्षमा
  2020. 2:00:06करें तथा इंद्र आदि देवता मुझे पवित्र
  2021. 2:00:08करें।
  2022. 2:00:09क्षमा करें तो क्षमा मांगे
  2023. 2:00:26और जो ये बात जो कहीं पे भी नहीं
  2024. 2:00:29पता नहीं क्यों नहीं बताई जाती बियों्ड
  2025. 2:00:33बिय्ड मी क्यों नहीं बताई जाती मालूम नहीं
  2026. 2:00:36है क्या है कार्तिक के प्रमुख पांच चीजों
  2027. 2:00:40में से एक चीज है उद्यापन करना कार्तिक
  2028. 2:00:43पूरा हो गया उसका उद्यापन करना
  2029. 2:00:46उद्यापन मतलब होता है पूर्ति हो गया ना
  2030. 2:00:48एकादशी के दिन हो गया वो भी तो करा जाना
  2031. 2:00:52कोई स्टार्ट कर एकादशी रखी अगर तो पालन
  2032. 2:00:55उद्यापन करते हैं ना कि भाई इतने समय के
  2033. 2:00:57बीच में हमने चावल खा लिया या कुछ कर लिया
  2034. 2:01:01तो उसी प्रकार से एकादशी का पालन यह स्कंद
  2035. 2:01:06पुराण
  2036. 2:01:08कार्तिक में भगवान की प्रसन्नता के लिए
  2037. 2:01:10धर्म का अनुष्ठान करना चाहिए। मास व्रत की
  2038. 2:01:13समाप्ति होने पर
  2039. 2:01:15व्रत की पूर्णता के लिए श्रेष्ठ ब्राह्मण
  2040. 2:01:18को दान देना चाहिए। श्रेष्ठ ब्राह्मण मतलब
  2041. 2:01:20हरि गुरु वैष्णव को दान देना चाहिए।
  2042. 2:01:57यहां बाद में बताने वाला पॉइंट है इसलिए
  2043. 2:01:59उद्याप फिर भी इसमें अभी लिखा है तो कहीं
  2044. 2:02:01स्किप ना हो जाए। व्रत में जो स्थित हुआ
  2045. 2:02:03पुरुष हो यदि उद्यापन करने की विधि में
  2046. 2:02:06असमर्थ हो तो भी व्रत की समाप्ति के बाद
  2047. 2:02:11अगर असमर्थ हो तब बता रहे हैं कि समाप्ति
  2048. 2:02:13के बाद उसे ब्राह्मणों को भोजन कराना
  2049. 2:02:15चाहिए। मतलब अगर असमर्थ है तो
  2050. 2:02:19अगर असमर्थ है तो ब्राह्मणों को भोजन
  2051. 2:02:21ब्राह्मणों का प्लुरल में कराना चाहिए।
  2052. 2:02:24यानी कि वैष्णवों को हमारे को दूसरा अन्य
  2053. 2:02:27व्रत अन्नदान वो नहीं 41 श्लोक हमेशा
  2054. 2:02:30पढ़िएगा सोचो हम ब्राह्मण ढूंढने चले गए
  2055. 2:02:33हो गया तुम्हारा इसलिए ना हर समय
  2056. 2:02:36मार्गदर्शन की जरूरत है क्योंकि समय तो
  2057. 2:02:38फिर हम नहीं पाएंगे
  2058. 2:02:51ये स्कंद पुराण से था एवं पद्म पुराण से
  2059. 2:02:54बता रहे हैं।
  2060. 2:03:05इसमें भी वही बात है। जो हमने बताया था ना
  2061. 2:03:07जो आपत्ति में फंसा है व्यक्ति बीमार है।
  2062. 2:03:11प्लस्टर लगा हुआ है। पाइप लगे उसको क्या
  2063. 2:03:13करना चाहिए?
  2064. 2:03:16भगवान नाम से अपना मार्जन करना। उसी अगली
  2065. 2:03:18पंक्ति बता रहे हैं।
  2066. 2:03:20वो विष्णु का नाम लेकर मार्जन कर ले। अगली
  2067. 2:03:23पंक्ति बता रहे हैं। जो कार्तिक व्रत के
  2068. 2:03:25पालन करने में प्रवृत्त होकर उसका उद्यापन
  2069. 2:03:28करने में समर्थ ना हो। मतलब समर्थ ना हो
  2070. 2:03:32उसको क्या करना चाहिए? मतलब जो आपत्ति में
  2071. 2:03:34असमर्थ है उसे चाहिए कि अपने व्रत की
  2072. 2:03:36पूर्ति के लिए यथाशक्ति ब्राह्मणों को
  2073. 2:03:38भोजन कराए। जब असमर्थ हो तो ये करवाना है।
  2074. 2:03:42समर्थ हो तो जो करे वो व्यक्ति करे।
  2075. 2:03:44असमर्थ में भी ब्राह्मणों को भोजन करवाना
  2076. 2:03:46ये अह निर्देश है।
  2077. 2:03:49आगे बताएं।
  2078. 2:04:11कार्तिक शुक्ला द्वादशी जो हमारी एकादशी
  2079. 2:04:14के बाद जो द्वादशी पड़ती है उसमें
  2080. 2:04:18चतुर्मास या कार्तिक मास की व्रत की पूर्ण
  2081. 2:04:20आहुति होती है। व्रत के अंदर आहुति होती
  2082. 2:04:22है। जैसे यज्ञ करते आहुति दी जाती है। तो
  2083. 2:04:25कार्तिक व्रत की आहुति इस इस दिन प्रातः
  2084. 2:04:28गुरु पूजन करके
  2085. 2:04:31विशेष रूप से गुरु पूजन करके भगवान की
  2086. 2:04:33विशेष पूजा करें पाशी को
  2087. 2:04:38और वैष्णव व ब्राह्मणों को भी भोजन व दान
  2088. 2:04:40दे दक्षिणा से संतुष्ट करें।
  2089. 2:04:44इस व्रत की समाप्ति
  2090. 2:04:47पर व्रत करने वाले जैसे यह व्रत की
  2091. 2:04:50समाप्ति है तो व्रत कर रहे सभी वैष्णव एक
  2092. 2:04:53साथ मिलकर भी प्रीति भोज कर सकते हैं।
  2093. 2:04:57टूगेदर
  2094. 2:04:58लास्ट कार्तिक लास्ट एकाशी ऑफ द कार्तिक
  2095. 2:05:01डिवोटी कैन स टगेदर एट नाइट कैन डू जागरण
  2096. 2:05:05देन कैन ब्रिंग फूड स्टफ व्हाटएवर वन विश
  2097. 2:05:08टू एंड इन द मॉर्निंग डू बेस्ट ऑफ द पूजा
  2098. 2:05:13तुलसी एंड व्हाटएवर यू विश टू कुक एंड सात
  2099. 2:05:17प्रीति भोज जो वस्तु भेंट दक्षिणा करना
  2100. 2:05:20चाहता है वो कर सकते हैं। प्रभु का स्मरण
  2101. 2:05:24करते हुए प्रसाद ग्रहण कर व्रत का समापन
  2102. 2:05:26करें।
  2103. 2:06:29[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  2104. 2:06:49जैसे मैंने पहले ही बताया था सर्वप्रथम
  2105. 2:06:51श्री गुरुदेव के चरणों में भक्ति पूर्वक
  2106. 2:06:53दंड दंडवत करें और व्रत धारण करने की
  2107. 2:06:56अनुमति ले और आदेशावली के अनुसार व्रत को
  2108. 2:07:01पूर्ण करने की कोशिश करें। संकल्प ले
  2109. 2:07:06और
  2110. 2:07:08हो सके तो बाल वगैरह ना कटवाएं कार्तिक
  2111. 2:07:11में
  2112. 2:07:13हो सके तो
  2113. 2:07:16ब्यूटीिफिकेशन के लिए ना जाए। अगर संभव हो
  2114. 2:07:19सके तो पार्लर वगैरह
  2115. 2:07:23गुरुदेव के चरण में रोजाना दंडवत करें।
  2116. 2:07:27गुरु सेवा करें।
  2117. 2:07:29दंडवत गिन के कर सकते हैं। कोई भगवान को
  2118. 2:07:32गुरु को 5 11 21 51 108 जितना हो कार्तिक
  2119. 2:07:36में कर सकते हैं। रोज प्रणिपातेन
  2120. 2:08:08कार्तिक में सत्संग का विशेष लाभ है। सेवा
  2121. 2:08:12का, भक्ति कार्यों का विशेष लाभ है। पर
  2122. 2:08:15यदि धाम में रह रहे तो आप यह समझे कि
  2123. 2:08:17हमारे दृष्टिकोण में हमने पहले भी बताया
  2124. 2:08:18था कुछ समय पहले भी कि 99% सत्संग होता
  2125. 2:08:21है। कंठीधारी तिलक धारों का भी पूछो क्यों
  2126. 2:08:25इसलिए
  2127. 2:08:27संग केवल दो व्यक्तियों को करना चाहिए। या
  2128. 2:08:29तो कोई व्यक्ति 10 15 घंटे एकांत भजन करने
  2129. 2:08:33की शक्ति रखता हो एकांत एकांत या तो उनका
  2130. 2:08:36संग प्राप्त हो जाए करुणा से उनकी करुणा
  2131. 2:08:38से या पक्का गुरु ज्ञानगत में के अलावा
  2132. 2:08:42बिल्कुल नहीं चलता हो
  2133. 2:08:45और जो 99% से ज्यादा भक्त वह दोनों के
  2134. 2:08:47अलावा ही होते हैं। ना वह 15 घंटे भजन
  2135. 2:08:50करने की क्षमता रखते हैं ना गुरु के आगे
  2136. 2:08:52मन मन जहां मन गए माज बरसाना गए आज हो गए
  2137. 2:08:56आज यहां गए आज यहां गया ये किया उनका
  2138. 2:08:58सत्संग है हमारे अंदर भी हो गई गुरु की
  2139. 2:09:01प्रसन्नता के लिए तो हम कार्य नहीं कर रहे
  2140. 2:09:04कार्तिक में वो चीज चली जाती है यस
  2141. 2:09:05प्रसादा भगवत प्रसादो उनकी कृपा से ही
  2142. 2:09:08भगवान की कृपा मिलती है उसमें विशेष विशेष
  2143. 2:09:11उनकी प्रसन्नता कार्य करें तो जो खुद ही
  2144. 2:09:14इस चीज से रहित है वो उसका संके हमारे
  2145. 2:09:16अंदर क्या कीटाणु आएंगे उसी के कीटाणु
  2146. 2:09:19आएंगे जो कुछ भजन से रहित है। एकांत बैठना
  2147. 2:09:23खिलवाड़ समझते हो मजाक समझते हो जिससे जो
  2148. 2:09:26स्वच्छ है भीतर से और एकांत रह लिया उसे
  2149. 2:09:28सब कुछ प्राप्त कर चुके ऑलरेडी होना नहीं
  2150. 2:09:30है प्राप्त हो चुका है
  2151. 2:09:33तो इसलिए धाम में तो 99% तो आपको इसी
  2152. 2:09:37प्रकार से ही मिलेगा चाहे धाम हो चाहे
  2153. 2:09:39दिल्ली हो कहीं भी हो पूरे पृथ्वी के ऊपर
  2154. 2:09:42हां तो दे बिल्कुल असंत संग है और
  2155. 2:09:46हमारे एक यहां संत है राधाकुंड में 86
  2156. 2:09:49इयर्स के हैं 86 वो भी हमारे तीन दिन चार
  2157. 2:09:52पांच दिन पहले हम उन्हें मिले थे वो बोल
  2158. 2:09:54रहे थे कहते आप देख रहे हो राधा कुंड में
  2159. 2:09:56ये भक्ति नहीं होती है जो हम देखते हैं
  2160. 2:09:59हमें वो भक्ति लगती है और क्या करें ऑप्शन
  2161. 2:10:01क्या है जीव के पास जो देखेगा उसे वही
  2162. 2:10:04भक्ति ये नहीं होती 86 साल के बुजुर्ग बोल
  2163. 2:10:06रहे हैं
  2164. 2:10:08वही हम आपको दूसरी भाषा में बोल रहे हैं
  2165. 2:10:10भक्ति दो प्रकार से या तो एकांत में बैठे
  2166. 2:10:12व्यक्ति वो व्यक्ति कर रहे है या गुरु के
  2167. 2:10:15मार्ग से बिल्कुल ना चले वो जैसे माता या
  2168. 2:10:19इस प्रकार के अदर वाइज तो आप तो सब बाकी
  2169. 2:10:22बाकी जो सब असत्संग की कैटेगरी में ही आता
  2170. 2:10:24है
  2171. 2:10:28और यह जैसे सत्संग हमारी भक्ति को रोपित
  2172. 2:10:30करता है मतलब पुष्ट करता है असत्संग
  2173. 2:10:33डिस्ट्रॉय करता हमने कितनों की भक्ति
  2174. 2:10:34कार्तिक में चौपट होते हुए देखी हुई
  2175. 2:10:36[हंसी] है ऐसा तो करे और असत्संग इतना
  2176. 2:10:39भयंकर ना गुरु अनुग गुरु सेवा गुरु संता
  2177. 2:10:42कोई एकांत कोई चीज बस घूमना डोलना खाना
  2178. 2:10:45पीना और निंदा बस यही सब
  2179. 2:10:51जैसे हमारे स्टॉल डिवोटीज हैं। कितने साल
  2180. 2:10:53101 साल से हैं स्टॉल लगा रहे हैं। यह
  2181. 2:10:57होता है लक्ष्मण रेखा उससे बाहर नहीं जा
  2182. 2:10:59रहे तो सुरक्षित जाओ बाहर उसके बाद सब
  2183. 2:11:03खत्म जो जो गुरु जी ने बता दिया ये
  2184. 2:11:06उपदेशावली
  2185. 2:11:08दीपावली उसके अनुसार क्या है तो लक्ष्मण
  2186. 2:11:11रेखा के अंतर है सेफ एंड साउंड और चलो
  2187. 2:11:14सेवा कोई निधिवंत चले और इधर चले उधर चल
  2188. 2:11:16तो बस और वहां पे एक से ग्रेट सोर्स का
  2189. 2:11:22मेल मिलाप एक्चुअली ये लोग को जरूरत भी
  2190. 2:11:25नहीं है हम बताएं ना क्योंकि ये इतना देख
  2191. 2:11:27चुके हैं क्या मतलब स्टॉल सेवा देखते रहते
  2192. 2:11:30हैं भिन्न-भिन्न प्रकार के प्राणियों को
  2193. 2:11:34मत खुद भी मतलब जो सबसे बढ़िया स्टॉल सेवा
  2194. 2:11:38के हैं वो इतने अनुभव कर चुके हैं ग्रेट
  2195. 2:11:41सोल्स कि उनके इच्छा ही नहीं करती कहीं
  2196. 2:11:43जाने की
  2197. 2:11:46कोई संप्रदाय हो ये दो ही चीजें लागू
  2198. 2:11:49होंगी किनका संग करना या तो एकांतिक भजन
  2199. 2:11:52में 15 एक घंटे रोज का और यह नहीं कि तीन
  2200. 2:11:56दिन से 15 घंटे
  2201. 2:11:58चार दिन 15 घंटे ऐसे कर नहीं
  2202. 2:12:01लॉन्ग टाइम से या फिर गुरु के आज्ञा के
  2203. 2:12:03अनुसार
  2204. 2:12:05उसके अलावा सब असत्संग की कैटेगरी में आता
  2205. 2:12:07है
  2206. 2:12:14और जैसे बताया आपको राधा कुंड के संत कह
  2207. 2:12:16रहे हैं 86 साल के ये देख रहे हो ना ये
  2208. 2:12:18भक्ति नहीं है और दूसरा हमारा अभी जब हम
  2209. 2:12:20आप लोगों को ले जब 2018 से पहले बाबा के
  2210. 2:12:24पास जाते
  2211. 2:12:25तो बाबा ना हमारे साथ थोड़ा संबंध तो आपको
  2212. 2:12:28पता ही है नजदीकियात बाबा कहां गया ये नाम
  2213. 2:12:32लेके बोलते थे कहां गया सच्ची वो ये इनके
  2214. 2:12:36बाबा एक बार कभी खुश नहीं हुए थे
  2215. 2:12:39एक बार सब बताते ना आगे एक बार ये बहुत
  2216. 2:12:43बड़े व्यक्ति हैं इस समय वो तो उनके पास
  2217. 2:12:45हम बैठे थे आप लोगों को ले उनके पास वो
  2218. 2:12:49क्या बताएगा इसको बाबा ऐसे
  2219. 2:12:54तो बास नेवर हैप्पी विद द काइंड ऑफ
  2220. 2:12:56एनवायरमेंट प्रवेेंट इफ यू आर गेटिंग माय
  2221. 2:12:59पॉइंट द एनवायरमेंट प्रवेट इज नॉट वेरी
  2222. 2:13:03कंडसिव
  2223. 2:13:06वही 86 ईयर ओल्ड महात्मा भी बता रहे हैं
  2224. 2:13:08या देख रहे हो ना ये भक्ति नहीं होती
  2225. 2:13:12एक्चुअली बात भी क्या कहो आप लोग यही तो
  2226. 2:13:15अब देख के तो समझोगे ये भक्ति है देखने
  2227. 2:13:18वाली चीज में वो है नहीं सही तो समझोगे
  2228. 2:13:21कैसे
  2229. 2:13:23हमने समझा दिया अगर आ जाए समय ये दो बातें
  2230. 2:13:27या एकांतिक भजनंदी हो कोई कम से कम 15
  2231. 2:13:30घंटे रोज का सदियों लॉन्ग टाइम से या गुरु
  2232. 2:13:34की आज्ञा पे ही चलने वाला इसके अलावा सारा
  2233. 2:13:38सोप तिलक कंठीधारी संग इस असत
  2234. 2:13:41कार्तिक मास के बारे में बताना कुछ भी
  2235. 2:13:43करना अरे यही तो बोला हरि कथा सुनना इसमें
  2236. 2:13:45क्या गलत है चलो हमारी हर कथा सुनने चलते
  2237. 2:13:47हैं
  2238. 2:13:49कोई गलत बात है
  2239. 2:13:52तो गुरुदेव के उपदेशावली का क्या होगा?
  2240. 2:13:54उनकी प्रसन्नता का क्या है? और यह तुम्हें
  2241. 2:13:56क्या पता क्या सही है? क्या बोला जा रहा
  2242. 2:13:58है।
  2243. 2:13:59तुम्हें क्या पता वक्ता की क्या स्थिति
  2244. 2:14:01है?
  2245. 2:14:09हे गोपाल
  2246. 2:14:11राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2247. 2:14:15हे गोपाल
  2248. 2:14:18राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2249. 2:14:21हे गोपाल
  2250. 2:14:24राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2251. 2:14:27हे गोपाल
  2252. 2:14:30राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2253. 2:14:33कृष्ण गोविंद [गाना गाने की आवाज़]
  2254. 2:14:35गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2255. 2:14:39कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2256. 2:14:45कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2257. 2:14:49गोविंदा [गाना गाने की आवाज़]
  2258. 2:14:50कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2259. 2:14:55गोविंदा
  2260. 2:14:56हे गोपाल
  2261. 2:14:58राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2262. 2:15:02हे गोपाल
  2263. 2:15:04राधे राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
  2264. 2:15:07हे गोपाल
  2265. 2:15:10राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2266. 2:15:13हे गोपाल
  2267. 2:15:15राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2268. 2:15:19कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2269. 2:15:24कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2270. 2:15:29गोविंद
  2271. 2:15:30कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2272. 2:15:34गोविंदा
  2273. 2:15:36कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2274. 2:15:40गोविंदा
  2275. 2:15:41हे गोपाल
  2276. 2:15:43राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2277. 2:15:47हे गोपाल
  2278. 2:15:49राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2279. 2:15:52हे गोपाल
  2280. 2:15:54राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
  2281. 2:15:58हे गोपाल
  2282. 2:16:00राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
  2283. 2:16:03कृष्णा कृष्ण गोविंद गोविंदा कृष्णा
  2284. 2:16:06गोविंद गोविंदा
  2285. 2:16:08कृष्ण गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंदा
  2286. 2:16:14कृष्णा [हंसी] गोविंद गोविंदा कृष्ण
  2287. 2:16:17गोविंद गोविंदा
  2288. 2:16:19कृष्णा गोविंदा गोविंदा कृष्ण गोविंद
  2289. 2:16:23गोविंदा
  2290. 2:16:24हे गोपाल [गाना गाने की आवाज़] राधे
  2291. 2:16:26कृष्णा गोविंदा गोविंदा
  2292. 2:16:29हे गोपाल
  2293. 2:16:31राधे कृष्णा गोविंदा गोविंदा
  2294. 2:16:34हे गोपाल
  2295. 2:16:36राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
  2296. 2:16:39हे गोपाल
  2297. 2:16:41राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2298. 2:16:44कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2299. 2:16:48गोविंदा
  2300. 2:16:49कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2301. 2:16:53गोविंदा
  2302. 2:16:54कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2303. 2:16:58गोविंदा
  2304. 2:16:59कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा कृष्णा
  2305. 2:17:02गोविंद गोविंदा
  2306. 2:17:04हे गोपाल राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2307. 2:17:09हे गोपाल
  2308. 2:17:11राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2309. 2:17:14हे गोपाल
  2310. 2:17:16राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2311. 2:17:19हे गोपाल
  2312. 2:17:21राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2313. 2:17:24कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2314. 2:17:28गोविंदा
  2315. 2:17:29कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2316. 2:17:32[खांसने की आवाज़]
  2317. 2:17:33[हंसी] गोविंदा
  2318. 2:17:34कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2319. 2:17:39गोविंदा
  2320. 2:17:40कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2321. 2:17:46गोविंदा
  2322. 2:17:47कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2323. 2:17:52गोविंदा
  2324. 2:17:53कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2325. 2:17:58गोविंदा
  2326. 2:17:59हे गोपाल
  2327. 2:18:02राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2328. 2:18:06हे गोपाल
  2329. 2:18:08राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2330. 2:18:12हे गोपाल
  2331. 2:18:14राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2332. 2:18:18हे गोपाल
  2333. 2:18:20राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2334. 2:18:24कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2335. 2:18:29गोविंद
  2336. 2:18:31કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
  2337. 2:18:37કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
  2338. 2:18:43કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ गोविंद गोविंदा
  2339. 2:18:49हे गोपाल
  2340. 2:18:51राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2341. 2:18:55हे गोपाल [गहरी सांस लेने की आवाज़]
  2342. 2:18:57राधे कृष्णा गोविंद ગોવિંદ ગોવિંદ
  2343. 2:19:01હે ગોપાલ
  2344. 2:19:04રાધે કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
  2345. 2:19:07હે ગોપાલ
  2346. 2:19:10રાધે કૃષ્ણ ગોવિંદ गोविंद
  2347. 2:19:13कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2348. 2:19:18गोविंदा
  2349. 2:19:20कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2350. 2:19:24गोविंदा
  2351. 2:19:25कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा कृष्णा
  2352. 2:19:29गोविंद गोविंद
  2353. 2:19:31कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2354. 2:19:36गोविंद
  2355. 2:19:37हे गोपाल
  2356. 2:19:40राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2357. 2:19:43हे गोपाल
  2358. 2:19:46राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2359. 2:19:49कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2360. 2:19:54गोविंद
  2361. 2:19:55कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2362. 2:20:00गोविंद
  2363. 2:20:01कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2364. 2:20:07कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2365. 2:20:13हे गोपाल
  2366. 2:20:15राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2367. 2:20:19हे गोपाल
  2368. 2:20:21राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2369. 2:20:25हे गोपाल
  2370. 2:20:27राधे राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
  2371. 2:20:31हे गोपाल
  2372. 2:20:33राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2373. 2:20:37कृष्ण गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2374. 2:20:43कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2375. 2:20:49कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2376. 2:20:53गोविंद
  2377. 2:20:55कृष्णा गोविंद गोविंद
  2378. 2:20:58कृष्ण गोविंद गोविंद
  2379. 2:21:01हे गोपाल
  2380. 2:21:03राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2381. 2:21:07हे गोपाल
  2382. 2:21:09राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2383. 2:21:12हे गोपाल
  2384. 2:21:15राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2385. 2:21:18हे गोपाल
  2386. 2:21:21राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2387. 2:21:24कृष्णा गोविंद गोविंद
  2388. 2:21:27कृष्ण गोविंद गोविंदा
  2389. 2:21:30कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2390. 2:21:36कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2391. 2:21:41गोविंदा
  2392. 2:21:42कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2393. 2:21:46गोविंदा
  2394. 2:21:48हे गोपाल
  2395. 2:21:50राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
  2396. 2:21:54हे गोपाल
  2397. 2:21:56राधे राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2398. 2:21:59हे गोपाल
  2399. 2:22:02राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2400. 2:22:05हे गोपाल
  2401. 2:22:07राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2402. 2:22:11कृष्ण गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2403. 2:22:17कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2404. 2:22:23कृष्णा गोविंद गोविंद
  2405. 2:22:26કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
  2406. 2:22:29કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
  2407. 2:22:34હે ગોપાલ
  2408. 2:22:36राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2409. 2:22:40हे गोपाल
  2410. 2:22:42राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
  2411. 2:22:46हे गोपाल
  2412. 2:22:48राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
  2413. 2:22:52हे गोपाल
  2414. 2:22:54राधे कृष्णा कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2415. 2:22:57कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2416. 2:23:02गोविंद
  2417. 2:23:05कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण
  2418. 2:23:09गोविंद
  2419. 2:23:10कृष्णा गोविंद गोविंद
  2420. 2:23:14गोविंद गोविंद
  2421. 2:23:16कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2422. 2:23:21गोविंद
  2423. 2:23:22गोपाल
  2424. 2:23:24राधे राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2425. 2:23:28हे गोपाल
  2426. 2:23:30राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2427. 2:23:33हे गोपाल
  2428. 2:23:35राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2429. 2:23:38हे गोपाल
  2430. 2:23:41राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
  2431. 2:23:44कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2432. 2:23:49गोविंद
  2433. 2:23:50कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2434. 2:23:54गोविंदा कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा
  2435. 2:23:59गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद गोविंद
  2436. 2:24:04कृष्णा गोविंद गोविंद गोपाल
  2437. 2:24:09राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2438. 2:24:13हे गोपाल
  2439. 2:24:15राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2440. 2:24:18हे गोपाल
  2441. 2:24:20राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
  2442. 2:24:24हे गोपाल
  2443. 2:24:26राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
  2444. 2:24:30कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2445. 2:24:34गोविंदा
  2446. 2:24:35कृष्णा गोविंद [गाना गाने की आवाज़]
  2447. 2:24:37गोविंदा कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2448. 2:24:41कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2449. 2:24:46गोविंदा
  2450. 2:24:47कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2451. 2:24:51गोविंद हे गोपाल
  2452. 2:24:55राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2453. 2:24:58हे गोपाल
  2454. 2:25:00राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2455. 2:25:04हे गोपाल
  2456. 2:25:06राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2457. 2:25:10हे गोपाल
  2458. 2:25:12राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2459. 2:25:16कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद गोविंद
  2460. 2:25:21कृष्णा गोविंद ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ
  2461. 2:25:26ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ કૃષ્ણ ગોવિંદ
  2462. 2:25:32ગોવિંદ
  2463. 2:25:33कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्ण गोविंद
  2464. 2:25:37गोविंदा
  2465. 2:25:38हे गोपाल
  2466. 2:25:41राधे कृष्ण गोविंद गोविंदा
  2467. 2:25:44हे गोपाल
  2468. 2:25:46राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2469. 2:25:50हे गोपाल
  2470. 2:25:52રાધે કૃષ્ણ ગોવિંદ ગોવિંદ
  2471. 2:25:56હે ગોપાલ
  2472. 2:25:58राधे कृष्ण गोविंद गोविंद
  2473. 2:26:02कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2474. 2:26:05[संगीत]
  2475. 2:26:06गोविंदा
  2476. 2:26:07कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2477. 2:26:12गोविंद
  2478. 2:26:13कृष्णा गोविंद गोविंद कृष्णा गोविंद
  2479. 2:26:18गोविंद
  2480. 2:26:19कृष्णा गोविंद गोविंदा कृष्णा गोविंद
  2481. 2:26:23गोविंदा
  2482. 2:26:25गोपाल
  2483. 2:26:27राधे कृष्णा गोविंद गोविंदा
  2484. 2:26:30गोपाल
  2485. 2:26:32राधे कृष्णा गोविंद गोविंद
  2486. 2:26:38श्याम की
  2487. 2:26:39जय
  2488. 2:26:40वृंदावन धाम की
  2489. 2:26:41जय
  2490. 2:26:43की
  2491. 2:26:43जय
  2492. 2:27:01बोलो मेरे सतगुरु देव महाराज की
  2493. 2:27:04जय
  2494. 2:27:11नहीं
  2495. 2:27:54करना चाहूंगा
  2496. 2:27:57जैसे
  2497. 2:28:12एवरीबडी इज़ नॉट अवेयर प्रोबेब्ली एवरीबडी
  2498. 2:28:14इज़ नॉट अवेयर नो टीचर
  2499. 2:28:17नॉट अवेयर ओके
  2500. 2:28:57सबको अगर
  2501. 2:29:41हरि बोल
  2502. 2:29:43सब बहुत सौभाग्यशाली है कि आज इस कार्तिक
  2503. 2:29:46मास में श्री गुरुदेव के समक्ष हमें इस
  2504. 2:29:49दिव्य घटना को विटनेस करने का मौका मिल
  2505. 2:29:52रहा है। जैसा कि श्री गुरुदेव के बहुमूल्य
  2506. 2:29:55जेम्स जो कि ग्रंथ के फॉर्म में हम सबके
  2507. 2:29:58पास है। हिंदी, इंग्लिश, बंग और कौन सी
  2508. 2:30:01लैंग्वेज में है?
  2509. 2:30:03फ्रेंच में
  2510. 2:30:05और
  2511. 2:30:07तो आज जैसे कि आपने देखा कि हम लोग गए थे
  2512. 2:30:10बालाजी के आश्रम में और वहां पर भी
  2513. 2:30:12ग्रंथों को रिवील किया। उनकी पूजन हुई। तो
  2514. 2:30:15अब समय है उन ग्रंथों को रिवील करने का कि
  2515. 2:30:18वो कौन सी लैंग्वेज में है और कौन-कौन से
  2516. 2:30:21ग्रंथ है तो
  2517. 2:30:27हरि बोल [प्रशंसा]
  2518. 2:30:30हरि बोल [हौसला बढ़ाने की आवाज़]
  2519. 2:30:43कार्तिक की पागल मेला वृंदावन धाम श्री
  2520. 2:30:48गुरुदेव की कृपा से गौर हरि का भजन हर जगह
  2521. 2:30:52गूंजेगा
  2522. 2:30:57गुरुदेव के श्री चरणों से मिली भक्ति का
  2523. 2:31:00प्रकाश दो ग्रंथों में समाया है
  2524. 2:31:03सिद्धांतों का दिव्य स्वास
  2525. 2:31:07प्रथम ग्रंथ गौर भजन की महिमा कैन नॉट
  2526. 2:31:11बिकम अ मंजरी विदाउट डीप गौर भजन का दिव्य
  2527. 2:31:14उपदेश
  2528. 2:31:16गौर भजन की गहराई मंजरी भाव का उपदेश
  2529. 2:31:21पहले अंग्रेजी हिंदी बंगाली फिर रूसी
  2530. 2:31:25फ्रेंच और अब जर्मन भाषाओं में विस्तार छ
  2531. 2:31:29भाषाओं में गौर भक्ति की महिमा पहुंचेगी
  2532. 2:31:32देश विदेश अपार
  2533. 2:31:36और अब एक अनमोल आश्चर्य एक ऐसा उपहार
  2534. 2:31:39जिसकी किसी को खबर नहीं गुरुदेव की इस
  2535. 2:31:42कृपा कि की कोई सीमा नहीं
  2536. 2:31:45हरि बोल
  2537. 2:31:48प्रिय गॉड वैष्णवा अब फ्रेंच में आया पहली
  2538. 2:31:51विदेशी भाषा में भक्ति का दीप जगमगाया
  2539. 2:31:57भाषाएं भिन सही पर भक्ति का भाव एक गुरु
  2540. 2:32:00चरणों में प्रेम ही है जीवन का विवेक में
  2541. 2:32:03फैलेगा गौर्य सिद्धांतों का सार
  2542. 2:32:05हरि बोल
  2543. 2:32:07जय जय श्री राधे जय गौर हरि श्री गुरुदेव
  2544. 2:32:10की जय श्री वृंदावन धाम की जय
  2545. 2:32:14[प्रशंसा]
  2546. 2:32:15बाय गुरुदेव्स मर्सी लेट श्री गौरांग
  2547. 2:32:18ग्लोरी शाइन बी अ गियर वैष्णव इन फ्रेंच अ
  2548. 2:32:22गिफ्ट ऑफ ग्रेस डिवाइन गॉड भजन इन जर्मन
  2549. 2:32:26लेट से डिवोशन फ्लो मेता बाउंडलेस मर्सी
  2550. 2:32:30इन एवरी अवेकन एंड ग्रो
  2551. 2:32:42राधे राधे
  2552. 2:32:45राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
  2553. 2:32:49राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
  2554. 2:32:54राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे
  2555. 2:32:58राधे राधे राधे राधे
  2556. 2:33:02अब हम रिक्वेस्ट करेंगे श्री गुरुदेव अपने
  2557. 2:33:05ग्रंथ रिवी
  2558. 2:33:08ये ग्रंथ है
  2559. 2:33:14हरि
  2560. 2:33:20[संगीत]
  2561. 2:33:22जय
  2562. 2:33:24श्री राम [संगीत]
  2563. 2:33:27की
  2564. 2:33:33जय
  2565. 2:33:41गोरा गोरा गोरा
  2566. 2:33:44गोरा गोरा गोरा गोरा [संगीत]
  2567. 2:33:48गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
  2568. 2:33:57गोरा गोरा गोरा
  2569. 2:34:01गोरा हरि बोल
  2570. 2:34:07गोरा
  2571. 2:34:09गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
  2572. 2:34:29हमी और भजन के नाम से जानते हैं। अब ये
  2573. 2:34:33हिंदी इंग्लिश रशियन मिल रही है। अब ये
  2574. 2:34:36जर्मन में भी
  2575. 2:34:38फ्रेंच में भी [हंसी] है सॉरी भाषा में भी
  2576. 2:34:41है और इस का नाम है मन कान के मंजरी भर
  2577. 2:34:55रा
  2578. 2:35:15[हंसी]
  2579. 2:35:34वैष्णव जय श्री गुरुदेव
  2580. 2:35:39[हौसला बढ़ाने की आवाज़]
  2581. 2:35:44वैष्णव हमारे समक्ष रशिया
  2582. 2:35:48में भी है। [हंसी]
  2583. 2:36:03गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
  2584. 2:36:07गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
  2585. 2:36:12गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
  2586. 2:36:17गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा गोरा
  2587. 2:36:21गोरा
  2588. 2:36:23जय जय श्री गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव
  2589. 2:36:29जय गुरुदेव
  2590. 2:36:30जय जय गुरुदेव
  2591. 2:36:33गुरुदेव
  2592. 2:36:35गुरुदेव जय गुरुदेव जय जय गुरुदेव जय
  2593. 2:36:40गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय जय
  2594. 2:36:46गुरुदेव
  2595. 2:36:48गुरुदेव
  2596. 2:36:49गुरुदेव
  2597. 2:36:51जय गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
  2598. 2:36:55गुरुदेव
  2599. 2:36:56गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
  2600. 2:37:01गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
  2601. 2:37:06गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
  2602. 2:37:10गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव गुरुदेव
  2603. 2:37:16गुरुदेव की जय
  2604. 2:37:29स्टार्ट
  2605. 2:37:42अपने

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This page contains the full transcript of Kartik Mahatmaya by SRI GURUDEVAmedia, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 17,452 words across 2,605 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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