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Jumma Se Lekar Mangal Tak Biwi Se Milaap Kyun Zaroori Hai? | Mariyam status — Transcript

by Mariam 786 · 3,325 words · 395 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
  2. 0:02अस्सलाम वालेकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू।
  3. 0:05मेरी प्यारी बहनों और मेरे मोहतरम भाइयों
  4. 0:08जुम्मे से लेकर मंगल की रात तक हर हाल में
  5. 0:12बीवी से मिलाप क्यों जरूरी है? और बीवी को
  6. 0:16यह पांच बातें बताना क्यों जरूरी है? अगर
  7. 0:19ऐसा नहीं करोगे तो याद रखना अपनी आंखों के
  8. 0:23सामने अपने घर को तबाह होता देखोगे। मेरी
  9. 0:26प्यारी बहनों और मेरे इस्लामी भाइयों आज
  10. 0:29का बयान बेहद खास होने वाला है। अगर आज के
  11. 0:33बयान को आपने दिल की गहराइयों से ना सुना
  12. 0:36तो याद रखना आप अपने घर की तबाही अपनी
  13. 0:40आंखों से देखते रह जाएंगे। आज मैं आपके
  14. 0:43सामने एक ऐसी बात रखने जा रही हूं जिसे
  15. 0:47बहुत से शौहर मामूली समझकर नजरअंदाज कर
  16. 0:50देते हैं। लेकिन यही नजरअंदाजी
  17. 0:53आहिस्ता-आहिस्ता
  18. 0:54बीवी के दिल को तोड़ कर रख देती है।
  19. 0:57रिश्ते की बुनियाद को हिला देती है और घर
  20. 1:00के सुकून को खत्म कर देती है। आज के बयान
  21. 1:04का उनवान है कि जुम्मे से लेकर मंगल की
  22. 1:07रात तक हर हाल में बीवी से मिलाप क्यों
  23. 1:11जरूरी है? और बीवी से पांच बातें कहना
  24. 1:14क्यों जरूरी है? अगर ऐसा नहीं करोगे तो
  25. 1:17याद रखना घर की तबाही अपनी आंखों से देखते
  26. 1:21रह जाओगे। मेरे भाइयों सिर्फ जिस्म की बात
  27. 1:24नहीं ये हक की बात भी है। ये उस औरत के
  28. 1:28एहसास की बात है जब शौहर बीवी को मुसलसल
  29. 1:32नजरअंदाज करता है। जब बीवी के जज्बात को
  30. 1:36नहीं समझता। जब बीवी के जज्बात को मामूली
  31. 1:39समझकर टाल देता है तो फिर घर में खामोश
  32. 1:42फासले पैदा होने लगते हैं। बिस्तर एक होता
  33. 1:46है मगर दिल अलग-अलग हो जाते हैं। छत एक
  34. 1:49होती है मगर सुकून बिखर जाता है। दुनिया
  35. 1:52समझती है कि यह घर आबाद है। मगर हकीकत में
  36. 1:57अंदर ही अंदर रिश्ता कमजोर हो रहा होता
  37. 2:00है। इसलिए मेरे भाइयों आज का बयान मुकम्मल
  38. 2:03सुनना। क्योंकि आज मैं तुम्हें बताऊंगी कि
  39. 2:06जुम्मे से लेकर मंगल की रात तक बीवी से
  40. 2:09तनहाई में मिलाप और पांच नसीहतें करना
  41. 2:13क्यों जरूरी है। जरा सोचिए वो रात जो
  42. 2:16सुकून और मोहब्बत की रात बन सकती है। वो
  43. 2:19रात जो घर के अंदर बरकत, रहमत और कुर्बत
  44. 2:23का दरवाजा खोल सकती है। अगर उसी रात को आप
  45. 2:27गफलत और लापरवाही में जाया कर दें तो फिर
  46. 2:30घर के अंदर फासले पैदा होने शुरू हो जाते
  47. 2:33हैं। मेरे मोहतरम भाइयों जब शौहर बीवी के
  48. 2:37हक को टालता रहता है। जब बीवी के एहसास को
  49. 2:41कल पर छोड़ता रहता है। जब मोहब्बत की जगह
  50. 2:44बेरुखी आ जाती है तो फिर शैतान को घर के
  51. 2:48अंदर रास्ता मिल जाता है। फिर बातबात पर
  52. 2:51झगड़ा होता है। छोटी सी बात तूफान बन जाती
  53. 2:55है और वो घर जहां मोहब्बत होनी चाहिए थी
  54. 2:58वहां खामोशी शिकायत और बेसकूनी डेरे डाल
  55. 3:02लेती है। ये वो हकीकत है जिसे जानकर दिल
  56. 3:06लरज उठता है। ये वो सच्चाई है जिसे सुनकर
  57. 3:09इंसान सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हमने
  58. 3:13अपनी नादानी, अपनी मशूफियत और अपनी गफलत
  59. 3:16से अपने ही घर का सुकून क्यों बर्बाद कर
  60. 3:20डाला। मेरी प्यारी बहनों और इस्लामी
  61. 3:22भाइयों सबसे पहले मैं आप लोगों को जुम्मे
  62. 3:25की फजीलत के बारे में बताती हूं क्योंकि
  63. 3:28जुम्मा कोई आम दिन नहीं ये मुसलमानों की
  64. 3:31ईद का दिन है। दुआ की कबूलियत का दिन है।
  65. 3:34गुसल पाकीजगी, दरूद शरीफ, नमाज, तौबा और
  66. 3:38रहमत का दिन है। जब जुम्मा इतना बाबरकत
  67. 3:42दिन है तो जुम्मे की रात से शुरू होने
  68. 3:46वाली घरेलू मोहब्बत मियां बीवी की कुर्बत
  69. 3:49और एक दूसरे के हक की अदायगी को भी मामूली
  70. 3:53मत समझो। आज मैं तुम्हें यही समझाने जा
  71. 3:56रही हूं कि जुम्मे से मंगल की रात तक शौहर
  72. 4:00का बीवी के हक से गाफिल रहना घर के लिए
  73. 4:04कितना खतरनाक बन सकता है। और इस गफलत का
  74. 4:07अंजाम किस तरह रिश्ते की बुनियादों को
  75. 4:09कमजोर कर देता है। मेरे मोहतरम भाइयों
  76. 4:12कहते हैं कि एक औरत हजरत अमीरुल मोमिनीन
  77. 4:15सैयदना उमरे फारूक की अदालत में पेश हुई।
  78. 4:18शिकवा भी साथ लाई शिकायत भी साथ लाई। कहने
  79. 4:22लगी हजरत माशा्लाह मेरा शौहर बहुत बड़ा
  80. 4:25इबादत गुजार है। दिन रात इबादत में मशरूफ
  81. 4:28रहता है। उसे दुनिया की कोई फिक्र नहीं।
  82. 4:31बस अल्लाह की याद में लगा रहता है। औरत की
  83. 4:34ये बात सुनकर हजरत उमरे फारूक के चेहरे का
  84. 4:37रंग बदल गया। दरबार में खामोशी छा गई और
  85. 4:41आपने फौरन हुक्म दिया जाओ इसके शौहर को
  86. 4:44मेरे पास लेकर आओ। दरबार में बैठे लोग
  87. 4:47हैरान रह गए कि औरत तो अपने शौहर की इबादत
  88. 4:51की तारीफ कर रही है। फिर हजरत उमर इस कदर
  89. 4:54जलाल में क्यों आ गए? किसी ने अदब से अर्ज
  90. 4:57किया हजरत वो तो बहुत बड़ा इबादत गुजार
  91. 5:00आदमी है। फिर आप क्यों नाराज हुए हैं?
  92. 5:02हजरत उमरे फारूक ने फरमाया अब भी हकीकत
  93. 5:05खुल जाएगी। वजीर गया उस औरत के शौहर को
  94. 5:08तलाश किया और लाकर हजरत उमरे फारूक की
  95. 5:11अदालत में पेश कर दिया। हजरत उमरे फारूक
  96. 5:14ने जलाल में फरमाया अरे ओ शख्स तू खुद को
  97. 5:17बहुत बड़ा इबादत गुजार समझता है। ऐसी
  98. 5:20इबादत का क्या फायदा जिसमें तेरी बीवी का
  99. 5:23हक मार दिया जाए। आज तेरी बीवी मेरी अदालत
  100. 5:27में शिकवा लेकर आई है कि तू इबादत को तो
  101. 5:30वक्त देता है मगर बीवी को वक्त नहीं देता।
  102. 5:34याद रखना इबादत वही खूबसूरत है जो बंदों
  103. 5:38के हक को कुचल कर ना की जाए। कयामत के दिन
  104. 5:42अगर अल्लाह चाहे तो अपने हुकूक माफ फरमा
  105. 5:45सकता है। मगर बंदों के हक का मामला बहुत
  106. 5:48सख्त है। बीवी भी तेरे पास अल्लाह की
  107. 5:51अमानत है। इसका दिल भी हक रखता है। इसका
  108. 5:55वक्त भी हक रखता है। इसकी कुर्बत भी हक
  109. 5:58रखती है और इसकी तन्हाई का भी हिसाब होगा।
  110. 6:01जब नमाज का वक्त हो तो नमाज पढ़ो। जब फर्ज
  111. 6:05इबादत का वक्त हो तो फर्ज अदा कर। मगर नफल
  112. 6:08इबादत में ऐसा गर्क ना हो जा कि घर के
  113. 6:12अंदर बीवी का दिल टूटता रहे। यह सुनकर
  114. 6:15दरबार वाले चौंक गए और कहने लगे हजरत उमरे
  115. 6:18फारूक ने औरत को इस कदर गहराई से समझा और
  116. 6:22कैसा मजबूत फैसला सुनाया। मेरे भाइयों आज
  117. 6:26भी बहुत से लोग ऐसे हैं जो हर वक्त नमाजों
  118. 6:30में मशरूफ रहते हैं। इबादत में मशरूफ रहते
  119. 6:33हैं। कामकाज में मशरूफ रहते हैं। रोजी
  120. 6:36कमाने में मशरूफ रहते हैं। मगर अपनी बीवी
  121. 6:39को वक्त नहीं दे पाते। वो नादान नहीं
  122. 6:42जानते कि बीवी को सिर्फ खर्च नहीं देना
  123. 6:45चाहिए। बीवी को शौहर का वक्त भी चाहिए और
  124. 6:48शौहर की मोहब्बत चाहिए। शौहर की तवज्जो
  125. 6:51चाहिए और निकाह के बाद शौहर की कुर्बत भी
  126. 6:54चाहिए। मेरे भाइयों आज की खास बातें बताने
  127. 6:57से पहले पहले मैं आपको जुम्मे की फजीलत भी
  128. 7:00बताती हूं और फिर जुम्मे के दिन बीवी से
  129. 7:03मिलाप के फायदे भी बताऊंगी। रिवायतों में
  130. 7:05आता है कि जुम्मे के दिन ऐसे ऐसे मनाज़िर
  131. 7:10बरपा होते हैं जो इंसानी अकल से बालातर
  132. 7:13होते हैं। बताया जाता है कि जब जुम्मे का
  133. 7:16सूरज तलू होता है तो सात आसमानों के
  134. 7:19दरवाजे एक साथ खुल जाते हैं और फरिश्ते
  135. 7:22नूर के परों को फैलाकर जमीन की तरफ झुक
  136. 7:26जाते हैं। जैसे कोई अजीमो शान लश्कर
  137. 7:29इस्तकबाल के लिए सफ बस्ता हो। उसी दिन
  138. 7:33अल्लाह ताला समंदर की लहरों को एक खास
  139. 7:36हुक्म देता है कि अपनी आवाज को बदल लो और
  140. 7:39जिक्र इलाही के साथ बुलंद हो जाओ। इसलिए
  141. 7:42कहते हैं कि जुम्मे की सुबह अगर आप समंदर
  142. 7:46के किनारे खड़े हो तो पानी के बहाव में एक
  143. 7:49खास कैफियत महसूस होगी। जैसे कोई तस्बीह
  144. 7:53पढ़ रहा हो। उसी दिन का एक और हैरतंगेज
  145. 7:56राज ये है कि जन्नत के दरख्तों से खुशबू
  146. 8:00के बादल जमीन की तरफ भेजे जाते हैं और वो
  147. 8:03बादल इन घरों पर ठहरते हैं जिन घरों में
  148. 8:07कुरान की तिलावत और दरूद की महफिलें होती
  149. 8:10हैं। जबकि वो इन घरों को छोड़ देते हैं
  150. 8:13जिनमें गफलत और गुनाह का माहौल होता है।
  151. 8:16बाज रिवायत में आता है कि जुम्मे के दिन
  152. 8:19मुर्दों को कब्रों में खासतौर पर सुकून
  153. 8:22दिया जाता है। उन पर अज़ाब की शिद्दत हल्की
  154. 8:25कर दी जाती है और वह अपने अहलेखाना को
  155. 8:28आमाल करते हुए देखते हैं। उनके आमाल को
  156. 8:30देखते हैं। अगर तो खैर देखें फिर वो खुश
  157. 8:33हो जाते हैं। और अगर शर्त देखते हैं तो
  158. 8:35फिर अफसोस करते हैं। और एक और हैरानक बात
  159. 8:38ये है कि जुम्मे की घड़ी ऐसी घड़ी है
  160. 8:42जिसमें जमीन के नीचे छुपे हुए राज भी
  161. 8:45अल्लाह की बारगाह में पेश कर दिए जाते
  162. 8:47हैं। यानी सिर्फ इंसान की दुआएं नहीं
  163. 8:50बल्कि जमीन के अंदर दबी हुई हर आवाज, हर
  164. 8:53दर्द और हर फरियाद रब्बुल आलमीन तक
  165. 8:56पहुंचती है। ये वो राज हैं जो आम लोगों को
  166. 9:00नहीं मालूम। लेकिन हकीकत ये है कि जुम्मे
  167. 9:03का दिन महज एक दिन नहीं बल्कि एक अजीम
  168. 9:06कायनाती निजाम है जो इंसान की तकदीर के
  169. 9:10धारे को बदलने की ताकत रखता है। प्यारी
  170. 9:13बहनों और मेरे इस्लामी भाइयों जुम्मे की
  171. 9:15फजीलत के बारे में आपने तो जान ही लिया
  172. 9:17होगा कि ये दिन कितनी अजीम अहमियत रखता
  173. 9:20है। अब मैं आपको इसी जुम्मे की मियां बीवी
  174. 9:23के लिए फज़लत के बारे में बताऊंगी। यह दिन
  175. 9:27सिर्फ नमाज, दुआ और जिक्र का दिन नहीं
  176. 9:29बल्कि मियां बीवी के रिश्ते के लिए भी
  177. 9:32रहमतों और बरकतों से भरा हुआ है। जुम्मा
  178. 9:35वो दिन है जब अल्लाह ताला शौहर और बीवी के
  179. 9:39दिलों में एक खास सुकून और मोहब्बत डाल
  180. 9:42देता है। अगर वो दोनों उस दिन एक दूसरे के
  181. 9:45साथ खुश इखलाकी बरतें, नरमी इख्तियार करें
  182. 9:48और एक दूसरे के हक अदा करें तो यह इनके
  183. 9:52लिए इबादत बन जाता है। मेरे मोहतरम
  184. 9:55भाइयों, जुम्मे के दिन मियां बीवी को सबसे
  185. 9:57पहले यह करना चाहिए कि एक दूसरे के साथ
  186. 10:00खुश-इकलाकी के साथ पेश आए। शौहर अपनी बीवी
  187. 10:04को हदिया दे। ख्वा मामूली सा ही क्यों ना
  188. 10:07हो और बीवी शौहर के लिए दिल से दुआएं
  189. 10:09करें। क्योंकि रिवायत में आता है कि
  190. 10:12जुम्मे के दिन की दुआएं जल्द कबूल होती
  191. 10:14हैं। इसी दिन मियां बीवी का एक दूसरे के
  192. 10:17लिए मुस्कुराना, एक दूसरे की खिदमत करना
  193. 10:20और मोहब्बत के चंद जुमले कहना भी सदका बन
  194. 10:23जाता है। ये दिन मियां बीवी के जिस्मानी
  195. 10:26ताल्लुक के लिए भी खास फज़लत रखता है।
  196. 10:29जुम्मे की रात अगर मियां बीवी एक दूसरे के
  197. 10:31करीब आए तो यह ताल्लुक महज ख्वाहिश पूरी
  198. 10:35करने का जरिया नहीं रहता बल्कि रहमत का
  199. 10:38सबब बन जाता है। बताया गया है कि जुम्मे
  200. 10:41की रात मियां बीवी का मिलाप औलाद के लिए
  201. 10:44नेक नसीब का जरिया बनता है। क्योंकि इस
  202. 10:47दिन पैदा होने वाली नस्ल में अल्लाह बरकत
  203. 10:49रखता है। मेरी प्यारी बहनों आज के मुआशरे
  204. 10:52में मियां बीवी के दरमियान दूरियां बढ़ती
  205. 10:55जा रही हैं। छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते
  206. 10:58टूटने लगते हैं। लेकिन अगर वो जुम्मे के
  207. 11:00दिन को अपनी जिंदगी का नया आगाज बना लें।
  208. 11:03एक दूसरे के दिलों को खुश करें। कड़वाहट
  209. 11:06को खत्म करें और मोहब्बत के पुल बांधे तो
  210. 11:10यकीन जानिए कि उनका घर सुकून का गहवारा बन
  211. 11:13जाएगा। जुम्मा मियां बीवी के लिए सिर्फ
  212. 11:16इबादत का दिन नहीं बल्कि रिश्ते को मजबूत
  213. 11:19करने का जरिया भी है। और जो इस मौके को
  214. 11:23गफलत में जाया करे वो अपनी जिंदगी की सबसे
  215. 11:26कीमती नेमत से महरूम हो जाता है। मेरी
  216. 11:29प्यारी बहनों और मेरे इस्लामी भाइयों
  217. 11:32जुम्मे का दिन अल्लाह ताला ने बरकतों और
  218. 11:35रहमतों से भरा हुआ है। और इस दिन की फज़लत
  219. 11:39मियां बीवी के ताल्लुकात में भी नजर आती
  220. 11:42है। ये दिन सिर्फ इबादत और दुआ का नहीं
  221. 11:45बल्कि मियां बीवी के रिश्ते को मजबूत करने
  222. 11:48और मोहब्बत को गहरा करने का भी बेहतरीन
  223. 11:51मौका है। हमारे अकाबरीन ने लिखा है कि
  224. 11:54जुम्मे की रात या दिन मियां बीवी का एक
  225. 11:58दूसरे के करीब आना महज ख्वाहिश पूरी करना
  226. 12:01नहीं बल्कि एक नेकी भी है। जिस पर अल्लाह
  227. 12:04ताला खुश होता है और फरिश्ते रहमत की
  228. 12:07दुआएं करते हैं। जुम्मे के दिन मियां बीवी
  229. 12:10को सबसे पहले तहारत का एहतमाम करना चाहिए।
  230. 12:13यानी गुसल, सफाई और खुशबू इस्तेमाल करना।
  231. 12:17शौहर अपनी बीवी के लिए अच्छे कपड़े पहने।
  232. 12:20नरम अल्फाज़ कहे और बीवी अपने शौहर के लिए
  233. 12:23ज़बो ज़ीनत इख्तियार करें। ताकि दोनों का
  234. 12:26दिल एक दूसरे की तरफ मायल हो। इस दिन का
  235. 12:30मिलाप, मोहब्बत, नरमी और सुकून के साथ
  236. 12:33होना चाहिए। सख्ती या गुस्से के साथ नहीं।
  237. 12:36क्योंकि ये रात असल में एक दूसरे के दिल
  238. 12:39को खुश करने का जरिया है। रिवायतों में
  239. 12:41आता है कि जुम्मे की रात अगर मियां बीवी
  240. 12:44का मिलाप हो तो इससे जो औलाद पैदा होती है
  241. 12:48उसमें खैरो और बरकत ज्यादा होती है और वो
  242. 12:51नेक नसीब साबित होती है। इसलिए ये ताल्लुक
  243. 12:55महज जिस्मानी नहीं बल्कि रूहानी और बरकत
  244. 12:58वाला है। आज के मुआशरे में मियां बीवी के
  245. 13:01दरमियान मोहब्बत कम हो रही है। तलख कलामी
  246. 13:04ज्यादा हो गई है। लेकिन जुम्मे का दिन
  247. 13:07मौका देता है कि दोनों एक दूसरे के लिए
  248. 13:10मुस्कुराहट बने। एक दूसरे के दिल का बोझ
  249. 13:13हल्का करें। और ये ताल्लुक इस नियत से
  250. 13:15कायम करें कि ये अल्लाह की रजा और नस्ल की
  251. 13:19पाकीजगी का सबब बने। याद रखें जुम्मे के
  252. 13:22दिन मियां बीवी का ताल्लुक सुकून का जरिया
  253. 13:25भी है। इबादत का दर्जा भी रखता है और
  254. 13:28जन्नत के रास्ते को आसान करने वाला भी है।
  255. 13:31मेरी प्यारी बहनों आइए मैं आपको एक हैरानक
  256. 13:34हिकायत सुनाती हूं जो शायद आपने पहले कभी
  257. 13:38ना सुनी हो। कहते हैं कि एक बस्ती में एक
  258. 13:41खुशहाल घराना आबाद था। शौहर नेक नमाजी था।
  259. 13:44बीवी निहायत वफादार थी। लेकिन दोनों दोनों
  260. 13:48के दरमियान एक खामोश सा फासला था। जुम्मे
  261. 13:52की रात आती तो सारा गांव चिरागा सा हो
  262. 13:55जाता। लोग गुसल करते, खुशबू लगाते, कुरान
  263. 13:59पढ़ते और मियां बीवी एक दूसरे के करीब
  264. 14:02होकर मोहब्बत और सुकून के लम्हात बांटते।
  265. 14:06लेकिन ये जो जोड़ा था, यह बहुत ही अजीब
  266. 14:08था। शौहर हर जुम्मे यह कहकर सो जाता कि
  267. 14:11मैं थका हुआ हूं। और बीवी अपने दिल में
  268. 14:14गहरा दुख लेकर आंसू पंछ लेती। एक रात का
  269. 14:18मंजर बहुत बड़ा हैरात हैरतंगेज था। हैरानक
  270. 14:21था। गांव की फिजा में नूरानी सुकून फैला
  271. 14:24हुआ था। हर घर से कुरान की तिलावत की
  272. 14:27आवाजें आ रही थी। लेकिन इस घर में खामोशी
  273. 14:30छाई हुई थी। अचानक बीवी ने ख्वाब में देखा
  274. 14:34कि उनके घर की छत पर से रोशनी के फ़रिश्ते
  275. 14:37उतरने लगे और वो हर कमरे में गए। लेकिन जब
  276. 14:40बीवी के कमरे में पहुंचे तो वापस पलट गए।
  277. 14:43बीवी घबरा गई और पूछा ए फरिश्तों तुम
  278. 14:46हमारे घर में क्यों नहीं रुके? तो जवाब
  279. 14:48मिला क्योंकि जुम्मे की रात तुम दोनों के
  280. 14:51दरमियान वो बरकत वाला ताल्लुक कायम नहीं
  281. 14:54हुआ जिसके सबब अल्लाह अपनी खास रहमत नाजिल
  282. 14:57करता है। ये सुनकर बीवी का दिल दहल गया।
  283. 15:01सुबह उसने शौहर से कहा, मैंने ख्वाब में
  284. 15:03वो कुछ देखा है जो मेरी रूह को हला गया। ए
  285. 15:07मेरे शौहर तुमने गफलत की वजह से हमें
  286. 15:10अल्लाह की रहमत से महरूम कर दिया। शौहर
  287. 15:12हंस कर टाल गया। लेकिन चंद हफ्तों बाद
  288. 15:15उसके कारोबार में घाटा होना शुरू हुआ। घर
  289. 15:18में बीमारियां बढ़ने लगी और सुकून की जगह
  290. 15:21नहूसत ने डेरे डाल दिए। उस वक्त उसे याद
  291. 15:24आया कि शायद ये सब उस गफलत का ही नतीजा है
  292. 15:28जो वो जुम्मे की रात करता रहा। मेरी
  293. 15:30प्यारी बहनों ये हिकायत हमें सबक देती है
  294. 15:33कि जुम्मे की रात मियां बीवी का मिलाप
  295. 15:36सिर्फ ख्वाहिश पूरी करने के लिए नहीं
  296. 15:39बल्कि अल्लाह की रहमत को अपने घर में
  297. 15:41उतारने का जरिया है। जो लोग इस रात की
  298. 15:44बरकत से महरूम रहते हैं वो समझ लें कि वो
  299. 15:48सिर्फ अपनी बीवी का दिल नहीं तोड़ते बल्कि
  300. 15:51अपने नसीब के चिराग खुद बजा देते हैं। याद
  301. 15:55रखें जुम्मे की रात गफलत बरतना जिंदगी के
  302. 15:58सुकून को ज़वाल में बदल देता है। लेकिन जो
  303. 16:01इसे रहमत का जरिया बना ले उसके घर में
  304. 16:04सुकून मोहब्बत और बरकत हमेशा कायम रहती
  305. 16:08है। मेरी प्यारी बहनों यहां पर मैं आप
  306. 16:10लोगों को एक और हिकायत सुनाती हूं जो दिल
  307. 16:13को हिला देने वाली है और जिंदगी बदल देने
  308. 16:16वाली है। कहते हैं कि एक बस्ती में एक
  309. 16:19बुजुर्ग औरत रहती थी जिसके शौहर का इंतकाल
  310. 16:23हो चुका था। उसके तीन बेटे थे। सब
  311. 16:25तंदुरुस्त थे, ताकतवर थे और खुशहाल थे।
  312. 16:29लेकिन हैरत की बात यह थी कि उसके घर में
  313. 16:31हमेशा नहूसत, बीमारी और झगड़े रहते थे।
  314. 16:35गांव वाले हैरान थे कि इतने बड़े घराने
  315. 16:38में सुकून क्यों नहीं है। एक दिन एक
  316. 16:41अल्लाह वाला उस बस्ती में आया। उसने कहा,
  317. 16:43"मुझे इस घर की छत पर एक खौफनाक साया
  318. 16:46दिखाई देता है।" और वो साया उस वक्त तक
  319. 16:49नहीं हटेगा जब तक तुम सच ना बता दो। बूढ़ी
  320. 16:54मां ने आख भरी और कहा मेरे बेटों ने कभी
  321. 16:57भी जुम्मे की रात को अहमियत नहीं दी। जिसे
  322. 17:00अल्लाह ताला ने मियां बीवी के दरमियान
  323. 17:02मोहब्बत और सुकून के लिए बनाया है। वो
  324. 17:05हमेशा कहते हैं कि ये मामूली बात है। ये
  325. 17:08कोई इबादत नहीं। इस लापरवाही ने हमारे
  326. 17:11नसीब से सुकून छीन लिया है। अल्लाह वाले
  327. 17:14ने कहा ऐ औरत तुम्हारे बेटे नहीं जानते कि
  328. 17:18जुम्मे की रात अगर शौहर और बीवी एक दूसरे
  329. 17:22के करीब ना आए तो ये रिश्ता कमजोर हो जाता
  330. 17:25है। और जब रिश्ता कमजोर हो तो रहमत के
  331. 17:28फरिश्ते घर के दरवाजे पर रुक जाते हैं।
  332. 17:31अंदर नहीं आते। फिर उस अल्लाह वाले ने
  333. 17:34सबको तनबीह की। जान लो जुम्मे की रात का
  334. 17:37ताल्लुक दरअसल जमीन पर रहमत के उतरने का
  335. 17:41एक दरवाजा है। जो शख्स इस दरवाजे को खोलता
  336. 17:45है उसके नसीब में सुकून लिख दिया जाता है।
  337. 17:48और जो इसे बंद कर देता है उसके नसीब में
  338. 17:51नहूसत और ज़वाल लिख दिया जाता है। ये सुनकर
  339. 17:55तीनों बेटों के दिल कांप गए। वो अपनी गफलत
  340. 17:58पर रोए और फिर तौबा की। उस दिन के बाद
  341. 18:01उनके घरों में झगड़े खत्म हो गए।
  342. 18:04बीमारियां छूट गई और रिज़्क में बरकत आ गई।
  343. 18:08मेरी प्यारी बहनों, यह हिकायत हमें यह सबक
  344. 18:11देती है कि मियां बीवी का रिश्ता सिर्फ
  345. 18:13दुनियावी सुकून के लिए नहीं बल्कि ये
  346. 18:16अल्लाह की रहमत को खींचने का जरिया है।
  347. 18:18जुम्मे की रात को गफलत से गुजार देना अपने
  348. 18:21घर की जड़ों को खुद काटने के बराबर है।
  349. 18:25लेकिन जो इस रात की कदर करता है, उसका घर
  350. 18:28जन्नत का नमूना बन जाता है। मेरी प्यारी
  351. 18:30बहनों, आज के मुआशरे की सबसे बड़ी कमजोरी
  352. 18:34यह है कि हम जुम्मे के दिन को सिर्फ एक
  353. 18:37छुट्टी या आराम का दिन समझने लगे हैं।
  354. 18:39हालांकि ये वो दिन है जिसकी एक-एक घड़ी
  355. 18:43तकदीर बदलने की ताकत रखती है। आज घरों में
  356. 18:46जुम्मे की तैयारी सिर्फ नए कपड़ों तक
  357. 18:49महदूद हो गई है। बाजारों की रौनकें
  358. 18:52मस्जिदों से ज्यादा बढ़ गई है। और मियां
  359. 18:55बीवी के रिश्ते में जुम्मे की रात का
  360. 18:57तकद्दुस खत्म कर दिया गया है। यह वो गफलत
  361. 19:00है जो रहमत के दरवाजे बंद कर देती है और
  362. 19:03नूसत के बादल घरों पर छा देती है। हैरत की
  363. 19:07बात ये है कि लोग बड़े-बड़े गुनाहों से
  364. 19:10डरते हैं। लेकिन जुम्मे की रात के हक जाया
  365. 19:13करने को मामूली समझते हैं। हकीकत ये है कि
  366. 19:17यही मामूली लगने वाला गुनाह घरों से सुकून
  367. 19:20खींच लेता है। औलाद को नाफरमान बना देता
  368. 19:23है और रिज़्क की बरकत को खत्म कर देता है।
  369. 19:26मेरे भाइयों, सोचो अगर एक रात की गफ़लत से
  370. 19:30फरिश्ते घर में ना आए तो साल भर की
  371. 19:34इबादतें कैसे असर दिखा सकती हैं। मेरी
  372. 19:37प्यारी बहनों और मेरे मोहतरम भाइयों,
  373. 19:39अल्लाह ताला कयामत के दिन ऐसे लोगों को
  374. 19:42कभी माफ़ नहीं करेगा जो जुम्मे की रात को
  375. 19:45गफलत में गुजार देते हैं। जो अपने रिश्ते
  376. 19:48के तकद्दुस को पामाल करते हैं। और जो इस
  377. 19:50मुबारक रात को शैतानी वसवसों के हवाले कर
  378. 19:54देते हैं। उस दिन ना दौलत काम आएगी, ना
  379. 19:57दुनियावी इज्जत और ना ही झूठे बहाने। वहां
  380. 20:00सिर्फ वही कामयाब होगा जिसने जुम्मे के
  381. 20:03दिन और रात को इज्जत दी। जिसने इसे इबादत,
  382. 20:06दुआ और मियां बीवी के रिश्ते को मजबूत
  383. 20:09करने का जरिया बनाया। तो मेरी प्यारी
  384. 20:11बहनों, आज ही अपने दिलों को झांक कर देखो।
  385. 20:15अगर तुम्हारे घरों में नूसत है, सुकून
  386. 20:18खत्म है और दुआएं रुकी हुई हैं, तो जान लो
  387. 20:21यह गफलत का नतीजा है। जुम्मे की रात को
  388. 20:23अल्लाह ने बरकत का दरवाजा बनाया है। इसलिए
  389. 20:26अब फैसला आपके हाथ में है कि आप इस दरवाजे
  390. 20:30को खोलते हैं या हमेशा के लिए बंद कर देते
  391. 20:33हैं। तो प्यारी बहनों, मैं दुआ करती हूं
  392. 20:35कि अल्लाह ताला हमारे घरों को सुकून, बरकत
  393. 20:38और रहमतों से भर दे। हमारे दिलों को नूर
  394. 20:41अता करे और हमारे रिज़्क में बेहसाब इजाफा
  395. 20:44फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।

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