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Jiddu Krishnamurthy (HINDI/हिंदी में) — Transcript

by SyllabuswithRohit · 56,997 words · 8,326 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:04टोटल
  2. 0:05फ्रीडम द एसेंशियल
  3. 0:09कृष्णमूर्ति एक ऐसी किताब है जो हमसे कहती
  4. 0:12है कि असली आजादी तब मिलती है जब हम अपने
  5. 0:15अंदर झांकते
  6. 0:16हैं। इसमें कृष्णमूर्ति के चुने हुए टॉक्स
  7. 0:21और लिखे गए विचार हैं जो उन्होंने अलग-अलग
  8. 0:25जगह पर लोगों से बात करते वक्त बोले थे।
  9. 0:30यह किताब बताती है कि सच्चाई का कोई
  10. 0:32रास्ता नहीं होता। कोई धर्म या गुरु हमें
  11. 0:36वहां नहीं ले जा
  12. 0:38सकता। हर इंसान को खुद अपने अंदर देखना
  13. 0:41होगा बिना किसी डर के, बिना किसी बिलीफ
  14. 0:45के। कृष्णमूर्ति कहते हैं कि हमें किसी भी
  15. 0:50ऑर्गेनाइजेशन, गुरु या सिस्टम पर
  16. 0:53डिपेंडेंट नहीं होना चाहिए। हमें खुद अपनी
  17. 0:57सोच से, अपने एक्शन से जीवन को समझना
  18. 1:00होगा।
  19. 1:02इस किताब में उन्होंने अर्ली टॉक्स, डेली
  20. 1:06लाइफ के
  21. 1:07प्रॉब्लम्स, बड़े सवाल और दुनिया के साथ
  22. 1:11हमारे रिश्ते के बारे में बात की
  23. 1:14है। हर पार्ट एक अलग एंगल से लाइफ को
  24. 1:18देखने का नजरिया देता
  25. 1:22है। कृष्णमूर्ति कहते हैं कि अगर हम डर,
  26. 1:27दुख और कंडीशनिंग से मुक्त हो जाए
  27. 1:32तो हम सच में जीना शुरू करते
  28. 1:35हैं। कृष्णमूर्ति के वर्ड्स सिंपल हैं,
  29. 1:40लेकिन उनका इंपैक्ट बहुत गहरा
  30. 1:43है। यह किताब उन लोगों के लिए है जो सच
  31. 1:47में फ्रीडम, लव और अंडरस्टैंडिंग को जीवन
  32. 1:51में लाना चाहते हैं बिना किसी शॉर्टकट के।
  33. 1:57आइए इस किताब को पेज बाय पेज समझने की
  34. 2:02कोशिश करते हैं।
  35. 2:04ट्रुथ इज अ पाथलेस
  36. 2:07लैंड। सच्चाई एक ऐसी जमीन है जिसका कोई
  37. 2:11रास्ता नहीं
  38. 2:14होता। ऑर्डर ऑफ द स्टार इन द ईस्ट 1911
  39. 2:18में बनाया गया था।
  40. 2:22ताकि दुनिया को बताया जा सके कि एक वर्ल्ड
  41. 2:24टीचर आने वाला
  42. 2:26है। कृष्णमूर्ति को उस ऑर्डर का हेड बनाया
  43. 2:30गया
  44. 2:30था। 2 अगस्त 1929
  45. 2:34को हॉलैंड के ओमेन में एक कैंप के पहले
  46. 2:39दिन कृष्णमूर्ति ने इस ऑर्डर को 3000
  47. 2:43लोगों के सामने खत्म कर
  48. 2:45दिया। यह स्पीच उसी दिन की है।
  49. 2:51आज सुबह हम ऑर्डर ऑफ द स्टेट के खात्मा के
  50. 2:54बारे में बात करने वाले
  51. 2:56हैं। कुछ लोग खुश होंगे कुछ
  52. 3:00उदास। पर यह ना तो खुशी की बात है ना गम
  53. 3:03की क्योंकि यह तो होना ही था। अब मैं
  54. 3:06बताता हूं
  55. 3:07क्यों। तुम्हें एक कहानी याद होगी। शैतान
  56. 3:12और उसका दोस्त सड़क पर चल रहे थे।
  57. 3:15उन्होंने देखा एक आदमी ने जमीन से कुछ
  58. 3:18उठाया देखा और अपनी जेब में रख लिया।
  59. 3:22दोस्त ने
  60. 3:24पूछा उसने क्या उठाया? शैतान बोला सच का
  61. 3:28एक टुकड़ा। दोस्त बोला यह तो तेरे लिए
  62. 3:32बुरी बात है। शैतान बोला, नहीं मैं उसे
  63. 3:36ऑर्गेनाइज करने दूंगा।
  64. 3:39मैं मानता हूं कि सच्चाई का कोई रास्ता
  65. 3:42नहीं होता और तुम मुझ तक किसी भी रास्ते,
  66. 3:45किसी भी धर्म या संप्रदाय के जरिए नहीं
  67. 3:48पहुंच सकते। यह मेरा दृष्टिकोण है और मैं
  68. 3:52इसे पूरी तरह और बिना किसी शर्त के मानता
  69. 3:56हूं। सच्चाई इनफिनिट है। अनंत बिना किसी
  70. 4:00कंडीशन के और किसी भी रास्ते से उस तक
  71. 4:03नहीं पहुंचा जा सकता।
  72. 4:06उसे ऑर्गेनाइज नहीं किया जा सकता और किसी
  73. 4:10भी ऑर्गेनाइजेशन को यह काम नहीं करना
  74. 4:12चाहिए कि वह लोगों को किसी पर्टिकुलर
  75. 4:16रास्ते पर ले जाए या मजबूर करें।
  76. 4:20अगर तुम इस बात को समझोगे तो तुम देखोगे
  77. 4:24कि किसी भी बिलीफ को ऑर्गेनाइज करना
  78. 4:26नामुमकिन है। बिलीफ एक पर्सनल चीज है और
  79. 4:31उसे ऑर्गेनाइज नहीं किया जा सकता और करना
  80. 4:34भी नहीं चाहिए।
  81. 4:37अगर तुम ऐसा करते हो तो वह बिलीफ मर जाता
  82. 4:40है, पत्थर बन जाता है। फिर वह एक क्रीड,
  83. 4:45एक संप्रदाय, एक धर्म बन जाता है जिसे
  84. 4:48दूसरों पर थोपा जाता है। और यह दुनिया भर
  85. 4:52में हो रहा
  86. 4:53है। सच्चाई को छोटा कर दिया जाता है और वह
  87. 4:57सिर्फ उन लोगों के लिए एक खेल बन जाता है
  88. 4:59जो कमजोर हैं या थोड़ी देर के लिए दुखी
  89. 5:03हैं।
  90. 5:06सच्चाई को नीचे नहीं लाया जा
  91. 5:09सकता। इंसान को खुद ऊपर चढ़ना पड़ता
  92. 5:13है। तुम पहाड़ की चोटी को घाटी में नहीं
  93. 5:16ला
  94. 5:17सकते। अगर तुम चोटी तक पहुंचना चाहते हो
  95. 5:21तो तुम्हें घाटी से गुजरना होगा। चढ़ाई
  96. 5:25चढ़नी होगी। बिना डरे खतरनाक किनारों से
  97. 5:29गुजरते
  98. 5:30हुए। तुम्हें सच्चाई तक चढ़ना पड़ेगा। वह
  99. 5:34तुम्हारे लिए नीचे नहीं आएगी और कोई उसके
  100. 5:37लिए रास्ता नहीं बना
  101. 5:40सकता। ऑर्गेनाइजेशंस सिर्फ बाहर से
  102. 5:43इंटरेस्ट जगाती हैं। पर वह इंटरेस्ट का
  103. 5:47कोई मतलब नहीं होता अगर वह अंदर से सच्चाई
  104. 5:50के लिए प्रेम से नहीं आई हो।
  105. 5:54ऑर्गेनाइजेशन सिर्फ एक फ्रेमवर्क बन जाता
  106. 5:56है जिसमें लोग अपने आप को फिट कर लेते
  107. 6:00हैं। फिर वे लोग सच्चाई या उस चोटी तक
  108. 6:04पहुंचने की कोशिश नहीं करते बल्कि वह
  109. 6:07सिर्फ एक कंफर्टेबल जगह ढूंढ लेते हैं
  110. 6:10जहां वह फिट हो सके और सोच लेते हैं कि
  111. 6:15ऑर्गेनाइजेशन उन्हें सच्चाई तक ले जाएगी।
  112. 6:20यही मेरा पहला रीजन है कि मुझे लगता है कि
  113. 6:24ऑर्डर ऑफ द स्टार को खत्म हो जाना चाहिए।
  114. 6:28फिर भी मुझे पता है कि तुम लोग नए ऑर्डर्स
  115. 6:32बना लोगे। नए ऑर्गेनाइजेशंस ज्वाइन करते
  116. 6:35रहोगे जो सच्चाई ढूंढने का ड्रामा करते
  117. 6:40हैं। मैं किसी भी स्पिरिचुअल ऑर्गेनाइजेशन
  118. 6:43का हिस्सा नहीं बनना चाहता। यह बात अच्छे
  119. 6:47से समझ लीजिए।
  120. 6:49हां, मैं किसी ऐसे ऑर्गेनाइजेशन का यूज
  121. 6:52करूंगा जो मुझे लंदन ले जा सके। फॉर
  122. 6:55एग्जांपल जैसे कि ट्रेन या पोस्ट या
  123. 6:59टेलीग्राम। यह सब मैकेनिकल चीजें हैं।
  124. 7:02इनका स्पिरिचुअल लाइफ से कोई लेना देना
  125. 7:05नहीं। मैं फिर से कहता हूं कोई भी
  126. 7:09ऑर्गेनाइजेशन इंसान को स्पिरिचुअलिटी तक
  127. 7:12नहीं ले जा सकती।
  128. 7:17अगर कोई ऑर्गेनाइजेशन स्पिरिचुअलिटी के
  129. 7:20लिए बनाई जाती है तो वह एक लाठी बन जाती
  130. 7:24है। एक कमजोरी, एक
  131. 7:27बंधन और वह इंसान को ग्रो करने से, अपनी
  132. 7:32असली पहचान ढूंढने से रोक देती
  133. 7:36है। जिसमें उसे खुद ही उस पूरी बिना
  134. 7:40शर्तों वाली सच्चाई तक पहुंचना होता
  135. 7:43है। यह मेरा दूसरा रीजन है कि बीइंग द हेड
  136. 7:48ऑफ द ऑर्डर मैंने इसे खत्म करने का डिसीजन
  137. 7:51लिया। कोई मुझे मजबूर नहीं कर रहा
  138. 7:55था। यह कोई बड़ा काम नहीं है क्योंकि मुझे
  139. 7:58फॉलोअर्स नहीं चाहिए। और मैं यह सच में कह
  140. 8:02रहा
  141. 8:03हूं। जिस मोमेंट तुम किसी को फॉलो करते
  142. 8:06हो, उस मोमेंट तुम सच्चाई का फॉलो करना
  143. 8:10छोड़ देते हो।
  144. 8:13मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम मेरी बात सुनते
  145. 8:15हो या नहीं। मुझे दुनिया में एक काम करना
  146. 8:19है और मैं उसी पर पूरी अटेंशन से फोकस कर
  147. 8:23रहा
  148. 8:24हूं। मेरा सिर्फ एक पर्पस है इंसान को
  149. 8:28आजाद
  150. 8:31करना। मैं उसे सभी पिंजरों से, सभी डर से
  151. 8:35छुड़ाना चाहता हूं।
  152. 8:37मुझे ना कोई नया धर्म बनाना है, ना कोई नई
  153. 8:41से शुरू करनी है, ना कोई थ्यरी या फिलॉसफी
  154. 8:45डेवलप करनी
  155. 8:46है। फिर तुम पूछोगे तो फिर तुम दुनिया भर
  156. 8:50में क्यों घूम-घूम के बोल रहे हो? मैं
  157. 8:54बताता हूं
  158. 8:55क्यों? ना मुझे फॉलोअर्स चाहिए। ना मुझे
  159. 9:00कोई स्पेशल डिसिप्लिन का ग्रुप चाहिए।
  160. 9:05इंसान कितना प्यार करता है खुद को अलग
  161. 9:07दिखाने से। चाहे वह कितना भी बेकार, बेकार
  162. 9:11और स्टूपिड क्यों ना
  163. 9:14हो। मैं उस बेकार डिफरेंशिएशन को बढ़ावा
  164. 9:18नहीं देना
  165. 9:20चाहता। मेरे पास कोई डिसाइपल नहीं है, कोई
  166. 9:24शिष्य नहीं है। ना जमीन पे, ना
  167. 9:27स्पिरिचुअलिटी की दुनिया में।
  168. 9:30ना तो मुझे पैसे का लालच है ना ही आराम की
  169. 9:33जिंदगी जीने की इच्छा खींचती
  170. 9:36है। अगर मुझे आराम से रहना होता तो मैं
  171. 9:41किसी कैंप में नहीं आता या किसी गीली ठंडी
  172. 9:44जगह में नहीं
  173. 9:46रहता। मैं सीधा बोल रहा हूं क्योंकि मैं
  174. 9:49चाहता हूं कि यह बात एक बार में ही क्लियर
  175. 9:52हो जाए। मुझे हर साल बच्चों जैसे बहस में
  176. 9:56नहीं पड़ना।
  177. 9:59एक न्यूज़ पेपर रिपोर्टर ने मुझे इंटरव्यू
  178. 10:02किया। उसने कहा कि इतने बड़े ऑर्गेनाइजेशन
  179. 10:06को तोड़ना एक बड़ा काम है जिसमें हजारों
  180. 10:09मेंबर्स
  181. 10:11थे। उसके लिए यह एक बड़ा काम था। क्योंकि
  182. 10:16उसने
  183. 10:17पूछा अब तुम क्या करोगे? कैसे
  184. 10:21जिओगे? तुम्हारे पास कोई फॉलोअर्स नहीं
  185. 10:23रहेंगे। लोग तुम्हारी बात नहीं सुनेंगे।
  186. 10:27अगर सिर्फ पांच लोग भी सुनने को तैयार
  187. 10:30हैं, जीने को तैयार हैं, जिनके चेहरे सच
  188. 10:34में एटरर्निटी की तरफ है, अनंत की तरफ तो
  189. 10:38वह काफी
  190. 10:39है। क्या फायदा हजारों का जो समझते ही
  191. 10:44नहीं।
  192. 10:46जो पूरी तरह पुरानी सोच में जम गए हैं। जो
  193. 10:51नए को चाहते ही नहीं, जो नए को सिर्फ अपने
  194. 10:55बेजान और बंद सोच के हिसाब से बदलना चाहते
  195. 11:00हैं। अगर मैं तेज
  196. 11:02बोलूं तो गलत मत समझना।
  197. 11:06यह दयालु ना होने की वजह से नहीं है। जैसे
  198. 11:09डॉक्टर ऑपरेशन करता है दर्द के
  199. 11:12बावजूद पर वह उसकी दया ही होती है। वैसे
  200. 11:17ही अगर मैं सीधा बोलता हूं तो वह असली
  201. 11:20प्रेम की वजह से है। नफरत की वजह से
  202. 11:25नहीं। जैसे मैंने पहले कहा मेरा सिर्फ एक
  203. 11:29ही मकसद है। इंसान को आजाद करना। उसे
  204. 11:34फ्रीडम की तरफ ले
  205. 11:36जाना, उसकी मदद करना ताकि वह सब बंधन तोड़
  206. 11:41सके। क्योंकि सिर्फ यही उसे सच्ची खुशी दे
  207. 11:46सकता है। बिना शर्तों वाली अपनी असली
  208. 11:49पहचान का एहसास दे सकता
  209. 11:53है। मैं खुद आजाद हूं। बिना किसी कंडीशन
  210. 11:57के पूरा ना थोड़ा ना आधा बल्कि पूरी
  211. 12:01सच्चाई जो हमेशा के लिए
  212. 12:04है। इसीलिए मैं चाहता हूं कि जो लोग मुझे
  213. 12:08समझना चाहते हैं वह भी आजाद
  214. 12:11हो। ना कि वह मुझे फॉलो करें। ना ही मुझे
  215. 12:16एक केज बनाएं जिसे बाद में रिलीजन या
  216. 12:19सेक्ट बना दिया जाए।
  217. 12:22उन्हें सब डर से आजाद होना चाहिए। धर्म का
  218. 12:26डर, मुक्ति का डर, स्पिरिचुअलिटी का डर,
  219. 12:30प्यार का डर, मौत का डर, जिंदगी का
  220. 12:34डर। जैसे एक आर्टिस्ट पेंटिंग करता है
  221. 12:38क्योंकि उससे उसमें खुशी मिलती
  222. 12:42है। वह उसका सेल्फ एक्सप्रेशन होता है।
  223. 12:46उसका सुख होता है। वैसे ही मैं यह सब कर
  224. 12:49रहा हूं। ना मुझे किसी से कुछ चाहिए ना
  225. 12:53मैं किसी के लिए कर रहा
  226. 12:57हूं। तुम लोग आदत डाल चुके हो अथॉरिटी की
  227. 13:02या उसके माहौल
  228. 13:04की। तुम सोचते हो कि कोई दूसरा अपनी कुछ
  229. 13:07अलग पावर्स के थ्रू
  230. 13:10एक चमत्कार करके तुम्हें एटरर्नल फ्रीडम
  231. 13:14के एरिया में ले जाएगा। जहां सिर्फ खुशी
  232. 13:18है। तुम्हारी पूरी जिंदगी की सोच इसी
  233. 13:22अथॉरिटी पर बेस्ड है। तुम तीन साल से मुझे
  234. 13:26सुन रहे हो बिना किसी बदलाव
  235. 13:29के। अब मेरी बात एनालाइज करो। सोचो ताकि
  236. 13:33तुम उसे डीपली समझ सको।
  237. 13:38जब तुम किसी अथॉरिटी को ढूंढते हो
  238. 13:40स्पिरिचुअलिटी के लिए तो तुम ऑटोमेटिकली
  239. 13:43एक ऑर्गेनाइजेशन क्रिएट करते हो उसके
  240. 13:48आसपास और जैसे तुम ऐसी ऑर्गेनाइजेशन बनाते
  241. 13:52हो जिसमें तुम्हारा मानना है कि वह
  242. 13:55तुम्हें स्पिरिचुअलिटी तक ले जाएगी। तुम
  243. 13:58खुद एक पिंजरे में एक केज में बंद हो जाते
  244. 14:02हो।
  245. 14:03अगर मैं खुल के बोल रहा हूं तो याद रखिए
  246. 14:08मैं ना क्रोध से ना कठोरता से ना किसी
  247. 14:11जज्बात में बोल रहा हूं बल्कि इसलिए बोल
  248. 14:14रहा हूं क्योंकि मैं चाहता हूं कि तुम
  249. 14:16मेरी बात को अच्छे से समझो।
  250. 14:20यही वजह है कि तुम यहां हो और अगर मैं
  251. 14:24साफ-साफ सीधे और अपना पॉइंट ऑफ व्यू ना
  252. 14:28बताऊं तो यह सब टाइम बर्बाद होगा।
  253. 14:34तुम 18 साल से इस इवेंट के लिए तैयारी कर
  254. 14:37रहे थे। वर्ल्ड टीचर के आने के लिए। 18
  255. 14:42साल से तुमने ऑर्गेनाइज किया। तुमने किसी
  256. 14:46ऐसे को ढूंढा जो तुम्हारे दिल और दिमाग
  257. 14:49में नई खुशी भर दे। तुम्हारी जिंदगी बदल
  258. 14:53दे। तुम्हें नया समझ
  259. 14:56दे। किसी ऐसे को जो तुम्हें एक नए लेवल तक
  260. 15:00ले जाए। नई होप दे, तुम्हें आजादी
  261. 15:04दे। और अब देखो क्या हो रहा
  262. 15:07है। अब खुद सोचो,
  263. 15:10समझो कि इस बिलीफ ने तुम में क्या बदलाव
  264. 15:14लाया
  265. 15:15है। बैज पहन लेने के सुपरफिशियल डिफरेंस
  266. 15:19से नहीं जो कि बेकार और हंसी की बात है।
  267. 15:24क्या इस बिलीफ ने तुम्हारी जिंदगी के सब
  268. 15:27बेकार चीजें हटा दी हैं?
  269. 15:30यही है असली तरीका जज करने का। तुम कैसे
  270. 15:35ज्यादा आजाद, ज्यादा गहरे, ज्यादा खतरनाक
  271. 15:38बन गए हो हर उस सोसाइटी के लिए जो
  272. 15:43झूठ और बेकार चीजों पर बनी
  273. 15:47है। इस ऑर्गेनाइजेशन के मेंबर्स में क्या
  274. 15:51असली बदलाव आया है?
  275. 15:56जैसे मैंने कहा तुम लोग 18 साल से मेरी
  276. 16:00तैयारी कर रहे हो। मुझे कोई फर्क नहीं
  277. 16:03पड़ता कि तुम मानते हो या नहीं कि मैं
  278. 16:05वर्ल्ड टीचर हूं। यह बात बिल्कुल भी
  279. 16:08इंपॉर्टेंट नहीं है। क्योंकि तुम मर्डर ऑफ
  280. 16:12द स्टार के मेंबर हो। तुमने अपना सपोर्ट,
  281. 16:16अपनी एनर्जी दी। यह मानते हुए कि
  282. 16:19कृष्णमूर्ति वर्ल्ड टीचर है। पूरी तरह से
  283. 16:23उन लोगों के लिए जो सच में खोज रहे हैं और
  284. 16:26आधेआधे उन लोगों के लिए जो अपनी आधी अधूरी
  285. 16:30सच्चाइयों में ही खुश
  286. 16:33हैं। तुम 18 साल से तैयारी कर रहे हो और
  287. 16:37देखो समझने में कितनी दिक्कत आ रही है।
  288. 16:40कितनी उलझन, कितनी बेकार बातें।
  289. 16:45तुम्हारे अंदर के बायस, तुम्हारे डर,
  290. 16:48तुम्हारे गुरु, तुम्हारे नए पुराने मंदिर
  291. 16:52यह सब मैं कहता हूं समझ के रास्ते में
  292. 16:57रुकावट
  293. 16:58है। मैं इसे और क्लियर नहीं बना सकता।
  294. 17:02मुझे नहीं चाहिए कि तुम मुझसे एग्री करो।
  295. 17:05मुझे नहीं चाहिए कि तुम मुझे फॉलो करो।
  296. 17:08मुझे चाहिए कि तुम मेरी बात को समझो।
  297. 17:13यह समझना जरूरी है क्योंकि तुम्हारा बिलीफ
  298. 17:16ने तुम्हें बदला नहीं है। सिर्फ और उलझा
  299. 17:19दिया है। क्योंकि तुम चीजें जैसी हैं वैसे
  300. 17:25देखना ही नहीं
  301. 17:27चाहते। तुम्हें चाहिए अपने नए
  302. 17:30भगवान। पुराने की जगह नए। पुराने धर्मों
  303. 17:34की जगह नए
  304. 17:35धर्म। नए तरीके पुराने के बदले सब के सब
  305. 17:39बेकार। रुकावट,
  306. 17:42लिमिटेशन, सहारा बन चुके
  307. 17:45हैं। पुराने स्पिरिचुअल डिफरेंसेस की जगह
  308. 17:49तुमने नए बना लिए हैं। पुरानी पूजा की जगह
  309. 17:53नए तरीके अपना लिए हैं। तुम अपनी
  310. 17:56स्पिरिचुअलिटी के लिए किसी और पर
  311. 17:58डिपेंडेंट हो। अपनी खुशी के लिए किसी और
  312. 18:03पे। अपने एनलाइटनमेंट के लिए किसी और पे।
  313. 18:08और तुमने 18 साल मेरी तैयारी की है। फिर
  314. 18:12भी जब मैं कहता हूं कि यह सब जरूरी नहीं
  315. 18:14है। जब मैं कहता हूं कि तुम्हें सब कुछ
  316. 18:18छोड़ के अपने अंदर देखना चाहिए। अपनी
  317. 18:21रोशनी के लिए, अपने ग्लोरी के लिए, अपने
  318. 18:24शुद्ध होने के लिए, अपने वजूद के लिए। तब
  319. 18:29भी कोई तैयार नहीं है यह करने के लिए।
  320. 18:34शायद कुछ लोग हो पर बहुत
  321. 18:37कम तो फिर ऑर्गेनाइजेशन का क्या
  322. 18:42मतलब? ऐसे झूठे लोग मुझे फॉलो करते हैं
  323. 18:47जिसे तुम सच्चाई का रूप कहते हो। उनको
  324. 18:50फॉलो करने का क्या
  325. 18:52मतलब? प्लीज याद रखिए मैं कुछ कड़वा या
  326. 18:57बुरा नहीं बोल रहा। लेकिन अब हम उस मोड़
  327. 19:00पर आ गए हैं।
  328. 19:02जहां हमें चीजें जैसी हैं वैसी देखनी ही
  329. 19:07पड़गी। मैंने पिछले साल ही कहा था कि मैं
  330. 19:10किसी तरह का कॉम्प्रोमाइज नहीं
  331. 19:13करूंगा। बहुत कम लोगों ने तब मेरी बात
  332. 19:17सुनी। इस साल मैंने सब कुछ बिल्कुल
  333. 19:20साफ-साफ कह दिया
  334. 19:23है। मुझे नहीं पता दुनिया भर में कितने
  335. 19:27हजार लोग जो ऑर्डर के मेंबर हैं।
  336. 19:3118 साल से मेरी तैयारी कर रहे
  337. 19:34थे। और अब जब वक्त आया है बिना शर्त के
  338. 19:39मेरी बात सुनने का तब कोई तैयार ही
  339. 19:43नहीं। तो फिर ऑर्गेनाइजेशन का क्या
  340. 19:48काम? जैसे मैंने पहले कहा मेरा मकसद है
  341. 19:52इंसान को पूरी तरह से आजाद करना। क्योंकि
  342. 19:56मैं मानता हूं कि असली स्पिरिचुअलिटी वही
  343. 19:59है जहां सेल्फ कभी बिगड़ता नहीं जो हमेशा
  344. 20:03रहता है। जहां रीजन और लव का परफेक्ट
  345. 20:08बैलेंस होता है।
  346. 20:11यही है असली बिना शर्त वाली सच्चाई जो
  347. 20:15जिंदगी खुद
  348. 20:18है। इसीलिए मैं इंसान को आजाद करना चाहता
  349. 20:22हूं।
  350. 20:24जैसे एक चिड़िया खुले आसमान में उड़ती है
  351. 20:27बिना बोझ बिना किसी पर निर्भर हुए फुल
  352. 20:31फ्रीडम में
  353. 20:33खुश और मैं जिसके लिए तुम 18 साल से
  354. 20:37तैयारी कर रहे हो अब कह रहा हूं कि
  355. 20:40तुम्हें इन सब चीजों से आजाद होना होगा
  356. 20:43अपनी उलझनों से अपने जालों
  357. 20:47से इसके लिए तुम्हें किसी स्पिरिचुअल
  358. 20:51बिलीफ वाले ऑर्गेनाइजेशन की जरूरत जरूरत
  359. 20:53नहीं
  360. 20:54है। क्या जरूरत है ऑर्गेनाइजेशन की? सिर्फ
  361. 20:58पांच या 10 लोगों के लिए जो समझ रहे हो?
  362. 21:02जो स्ट्रगल कर रहे हैं जिन्होंने सारी
  363. 21:06बेकार चीजें छोड़ दी
  364. 21:10हैं। और जो कमजोर लोग हैं उनके लिए भी कोई
  365. 21:14ऑर्गेनाइजेशन सच्चाई नहीं ढूंढ सकती।
  366. 21:18क्योंकि सच्चाई हर किसी के अंदर है। ना वह
  367. 21:21दूर है ना
  368. 21:23पास। वह तो हमेशा से वही
  369. 21:28है। ऑर्गेनाइजेशंस तुम्हें आजाद नहीं बना
  370. 21:33सकती। कोई भी बाहर का इंसान तुम्हें आजाद
  371. 21:37नहीं कर सकता। ना कोई ऑर्गेनाइज्ड पूजा ना
  372. 21:42किसी कॉज के लिए अपने आप को जला देना। ना
  373. 21:46ऑर्गेनाइजेशन
  374. 21:48बनाना ना किसी काम में खो जाना तुम्हें
  375. 21:51आजाद
  376. 21:53करेगा। तुम टाइप राइटर यूज करते हो लेटर
  377. 21:57लिखने के
  378. 21:59लिए। पर उसे मंदिर में रख के पूजा नहीं
  379. 22:03करते। पर जब तुम ऑर्गेनाइजेशंस को सबसे
  380. 22:07इंपॉर्टेंट बना लेते हो तो तुम वही कर रहे
  381. 22:10हो।
  382. 22:13इसमें कितने मेंबर्स हैं?
  383. 22:16यही पहला सवाल होता है जो हर न्यूज़ पेपर
  384. 22:20रिपोर्टर मुझसे पूछता
  385. 22:22है। तुम्हारे कितने फॉलोअर्स हैं। उनकी
  386. 22:25गिनती से ही हम जज करेंगे कि तुम यह कह
  387. 22:30रहे हो वह सच है या
  388. 22:33नहीं। मुझे नहीं पता कितने हैं। मुझे उससे
  389. 22:37कोई मतलब नहीं।
  390. 22:40जैसे मैंने कहा अगर सिर्फ एक भी आदमी सच
  391. 22:44में आजाद हो गया तो वही काफी
  392. 22:51है। फिर से तुम्हारे दिमाग में यह बैठ गया
  393. 22:55है कि सिर्फ कुछ लोगों के पास ही खुशी की
  394. 22:58किंगडम की चाबी होती
  395. 23:01है। किसी के पास नहीं
  396. 23:04है। किसी के पास यह चाबी रखने का हक नहीं
  397. 23:08है।
  398. 23:10वह चाबी तुम खुद हो और सिर्फ तुम्हारे
  399. 23:13अंदर के विकास, डेवलपमेंट, शुद्धि और कभी
  400. 23:19ना बिगड़ने वाला सेल्फ में ही है। वह
  401. 23:21हमेशा वाला
  402. 23:24किंगडम। तो अब तुम देख सकते हो कितना
  403. 23:27बेकार है। वह पूरा स्ट्रक्चर जो तुमने
  404. 23:30बनाया है।
  405. 23:32बार-बार बाहर मदद ढूंढना। दूसरों पर
  406. 23:36डिपेंडेंट रहना, खुशी के
  407. 23:39लिए, सुकून के लिए, अपनी ताकत के
  408. 23:46लिए, यह सब सिर्फ तुम्हारे अंदर मिल सकता
  409. 23:50है। तो फिर ऑर्गेनाइजेशन का क्या
  410. 23:55मतलब? तुम आदत डाल चुके हो सुनने की कि
  411. 24:00तुम कितना ग्रो किए हो। तुम्हारा
  412. 24:02स्पिरिचुअल लेवल क्या है?
  413. 24:05कितनी बचकानी बात
  414. 24:08है। तुम्हारे अंदर खूबसूरती है या नहीं?
  415. 24:12यह तुम्हारे अलावा और कौन बता सकता है।
  416. 24:16तुम खुद इनकरप्टेबल हो या नहीं यह सिर्फ
  417. 24:21तुम्हें ही पता हो सकता
  418. 24:23है। तुम इन बातों में सीरियस ही नहीं
  419. 24:27हो। तो फिर ऑर्गेनाइजेशन का क्या मतलब?
  420. 24:36लेकिन जो लोग सच में समझना चाहते हैं जो
  421. 24:40ढूंढ रहे हैं उस चीज को जो हमेशा से है ना
  422. 24:44जिसका कोई शुरू है ना
  423. 24:47अंत वो लोग मिलके चलेंगे ज्यादा गहराई
  424. 24:54से वह बनेंगे खतरा हर उस चीज के लिए जो
  425. 24:58बेकार है जो झूठी है जो सिर्फ एक शैडो है।
  426. 25:03और वह लोग फोकस
  427. 25:05करेंगे। वह बन जाएंगे एक
  428. 25:08आग क्योंकि उन्हें समझ आ गया
  429. 25:12है। ऐसा एक ग्रुप हमें बनाना होगा और यही
  430. 25:16मेरा पर्पस
  431. 25:18है। उस असली समझ की वजह से होगी असली
  432. 25:23दोस्ती। और उस असली दोस्ती की वजह से जो
  433. 25:26तुम्हें अभी तक मालूम नहीं होगा असली साथ
  434. 25:30देना। असली कोऑपरेशन हर एक
  435. 25:34का यह किसी अथॉरिटी की वजह से नहीं किसी
  436. 25:38सेल्वेशन के नाम पर नहीं किसी कॉज के लिए
  437. 25:41खुद को जला देने की वजह से नहीं बल्कि
  438. 25:45इसलिए क्योंकि तुमने सच में समझा है और अब
  439. 25:49तुम कैपेबल हो उस हमेशा की जिंदगी जीने
  440. 25:53के यह हर सुख हर सैक्रिफाइस से बड़ा
  441. 25:57है तो यह कुछ रीजंस हैं जिनकी वजह से 2
  442. 26:03साल सोचने के बाद मैंने यह डिसीजन
  443. 26:08लिया। यह कोई इंस्टेंट इंपल्स से नहीं
  444. 26:12हुआ। किसी ने मुझे इसके लिए मनाया
  445. 26:16नहीं। मैं ऐसे डिसीजंस में किसी और की बात
  446. 26:20नहीं
  447. 26:21मानता। 2 साल तक मैंने सोचा
  448. 26:25धीरे-धीरे ध्यान से पेशेंस के साथ
  449. 26:30और अब मैंने डिसाइड कर लिया है कि आर्डर
  450. 26:34को बंद कर दूं क्योंकि मैं इसका हेड
  451. 26:38हूं। तुम चाहो तो नए ऑर्गेनाइजेशंस बना
  452. 26:42सकते हो। किसी और का इंतजार कर सकते हो।
  453. 26:46मुझे उससे कोई मतलब
  454. 26:48नहीं। ना मुझे नए पिंजरे बनाने में
  455. 26:52इंटरेस्ट है। ना उन पिंजरों के नए
  456. 26:55डेकोरेशन में।
  457. 26:59पार्ट
  458. 27:01वन जिदू कृष्णमूर्ति का जन्म 1895 में
  459. 27:06इंडिया के मदने पल्ले नाम के एक सिंपल
  460. 27:10ब्राह्मण घर में हुआ
  461. 27:12था। जब वह 10 साल के थे तब उनकी मां का
  462. 27:16देहांत हो गया और बचपन में उनकी तबीयत
  463. 27:19खराब रहती थी। वह अक्सर बीमार रहते थे।
  464. 27:24जब उनके पिता ने सरकारी नौकरी से
  465. 27:26रिटायरमेंट लिया तब उन्होंने एनी बेसेंट
  466. 27:29से बात की जो इंटरनेशनल थियोसोफिकल
  467. 27:33सोसाइटी की प्रेसिडेंट
  468. 27:36थी कि वह उस ऑर्गेनाइजेशन में काम करें
  469. 27:40जिसमें वह कुछ सालों से मेंबर
  470. 27:43थे। कृष्णमूर्ति उस वक्त 14 साल के थे।
  471. 27:4814 और वह अपने तीन भाइयों और पिता के साथ
  472. 27:51मद्रास के थियोसोफिकल हेड क्वार्टर्स चले
  473. 27:55गए। मिसेज बेसेंट और कृष्णमूर्ति के बीच
  474. 27:59एक गहरा और प्यार भरा रिश्ता बन गया और
  475. 28:03उन्होंने कृष्णमूर्ति के लीगल गार्डियन
  476. 28:06बनने का जिम्मा ले लिया।
  477. 28:08थियोसोफिस्ट लोग एक वर्ल्ड टीचर का इंतजार
  478. 28:12कर रहे
  479. 28:13थे और उसकी तैयारी के लिए उन्होंने एक
  480. 28:16ग्रुप बनाया था जिसका नाम था ऑर्डर ऑफ द
  481. 28:20स्टार इन द
  482. 28:21ईस्ट जिसमें कृष्णमूर्ति को हेड बनाया
  483. 28:26गया। 1912 में कृष्णमूर्ति को ऑफिशियली
  484. 28:30वर्ल्ड टीचर घोषित किया गया।
  485. 28:33लेकिन 1929 में उन्होंने एक स्पिरिचुअल
  486. 28:37तरीके से बोल्ड स्पीच ट्रुथ इज अ पाथलेस
  487. 28:41लैंड के जरिए इस ऑर्डर को तोड़
  488. 28:45दिया। ऐसा करके उन्होंने जमीन, पैसा, पावर
  489. 28:51और हर तरह की अथॉरिटी या गुरु होने के
  490. 28:54क्लेम को छोड़ दिया।
  491. 28:59उसके बाद अपनी पूरी जिंदगी में
  492. 29:02कृष्णमूर्ति ने दुनिया भर में ट्रैवल किया
  493. 29:05और हर उस इंसान से बात की जो सुनना चाहता
  494. 29:08था। यूरोप, इंडिया, यूनाइटेड
  495. 29:12स्टेट्स, साउथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और
  496. 29:16न्यूजीलैंड
  497. 29:18में। हर बैकग्राउंड के हजारों लोग उनकी
  498. 29:21बातें सुनने आते
  499. 29:24थे। इस पार्ट में कृष्णमूर्ति के कुछ
  500. 29:28सिलेक्टेड टॉक्स दिए गए हैं जो 1930 के
  501. 29:33बीच में हुए थे। इसमें एक टॉक है जो
  502. 29:37मेक्सिको सिटी में हुआ था और एक सीरीज जो
  503. 29:421934 में उजाई कैलिफोर्निया में हुई थी।
  504. 29:46जहां कृष्णमूर्ति ने वर्ल्ड वॉर टू 1939
  505. 29:51से
  506. 29:521945 के साल भी बिताए।
  507. 29:57व्हाट आई वांट टू
  508. 30:01डू? तुम पूछ सकते हो तुम क्या करना चाहते
  509. 30:05हो? अगर तुम नहीं चाहते कि हम किसी
  510. 30:08सोसाइटी में शामिल हो या कोई थ्योरी मान
  511. 30:12ले तो फिर तुम क्या करना चाहते
  512. 30:16हो? मैं जो करना चाहता हूं वह यह है कि
  513. 30:20तुम एक व्यक्ति के रूप में दुख उलझन
  514. 30:25और टकराओ के इस दरिया को पार कर सको। पूरे
  515. 30:30और गहरे फुलफिलमेंट के
  516. 30:33रास्ते। यह फुलफिलमेंट ना तो अपने ईगो
  517. 30:37वाली सेल्फ एक्सप्रेशन से आता है ना ही
  518. 30:40जबरदस्ती या नकल
  519. 30:43से। ना ही किसी फैंसी फीलिंग या कंक्लूजन
  520. 30:47से बल्कि साफ सोचने से, समझदारी भरे एक्शन
  521. 30:52से।
  522. 30:53हम इस दुख के दरिया को पार
  523. 30:58करेंगे। एक असली रियलिटी है जो सिर्फ गहरे
  524. 31:01और सच्चे फुलफिलमेंट से ही समझ में आती
  525. 31:04है। इस फुलफिलमेंट की खूबसूरती और गहराई
  526. 31:08को समझने से पहले दिमाग को अपने पुराने
  527. 31:13बैकग्राउंड, ट्रेडिशन, आदत और बायस से
  528. 31:17आजाद करना होगा।
  529. 31:20जैसे अगर तुम किसी पर्टिकुलर पॉलिटिकल
  530. 31:22पार्टी से हो तो तुम हर पॉलिटिकल बात को
  531. 31:26उसी पार्टी के छोटी और लिमिटेड नजरिए से
  532. 31:30देखोगे। अगर तुम किसी रिलीजन में पले बड़े
  533. 31:34हो तो तुम जिंदगी को उस धर्म के
  534. 31:38अंधविश्वास और अंधेरे के चश्मे से देखोगे।
  535. 31:43यह बैकग्राउंड, यह ट्रेडिशन तुम्हें
  536. 31:46जिंदगी को पूरे तरीके से समझने से रोकता
  537. 31:50है। और इसी वजह से कंफ्यूजन और दुख होता
  538. 31:55है। मैं तुमसे हाथ जोड़ के कह रहा हूं कि
  539. 31:59मेरी बात ध्यान से सुनो। कम से कम इस घंटे
  540. 32:04के लिए अपने पुराने बैकग्राउंड, ट्रेडिशन
  541. 32:07और बायस से आजाद हो जाओ। और इंसान के
  542. 32:11प्रॉब्लम्स के बारे में सिंपल और सीधा
  543. 32:16सोचो। सच्चा क्रिटिकल होना मतलब हमेशा
  544. 32:20अपोज करना नहीं
  545. 32:22होता। ज्यादातर लोगों को सिर्फ अपोज करना
  546. 32:26सिखाया गया है। क्रिटिसाइज करना नहीं।
  547. 32:31जब कोई सिर्फ अपोज करता है तो अक्सर उसका
  548. 32:35मतलब होता है कि उसका कोई पर्सनल फायदा है
  549. 32:39जिसे वह बचाना चाहता
  550. 32:41है और यह सच्ची समझ वाली क्रिटिसिज्म नहीं
  551. 32:46होती। सच्ची क्रिटिसिज्म तब होती है जब
  552. 32:50तुम किसी वैल्यू के पूरे मतलब को समझने की
  553. 32:53कोशिश करते हो। बिना किसी सेल्फ डिफेंस
  554. 32:57के।
  555. 33:01पूरी दुनिया में हम देखते हैं एक्सट्रीम
  556. 33:04गरीबी और अमीरी। एक तरफ भरपूरता है और
  557. 33:08दूसरी तरफ
  558. 33:10भुखमरी। हम देखते हैं क्लास का भेद, जाति
  559. 33:14का नफरत, नेशनलिज्म की बेवकूफी और युद्ध
  560. 33:19की डरावनी
  561. 33:22हिंसा। एक इंसान दूसरे इंसान का शोषण कर
  562. 33:26लेता है। एक्सप्लइटेशन।
  563. 33:29धर्म अपने पर्सनल फायदे के लिए एक
  564. 33:32एक्सप्लइटेशन का जरिया बन गया है और इंसान
  565. 33:36को इंसान से अलग भी कर रहा
  566. 33:39है। चिंता है, कंफ्यूजन है, निराशा है,
  567. 33:44फ्रस्ट्रेशन
  568. 33:45है। हम यह सब देख रहे हैं। यह हमारी रोज
  569. 33:50की जिंदगी का हिस्सा
  570. 33:52है। इस दुख के चक्रव्यूह में फंसा हुआ
  571. 33:56आदमी अगर जरा भी सोचने वाला हो तो उसने यह
  572. 34:01जरूर सोचा होगा कि इन ह्यूमन प्रॉब्लम्स
  573. 34:04का स्यूशन क्या हो सकता
  574. 34:07है? या तो तुम इस दुनिया की गड़बड़ हालत
  575. 34:12से वाकिफ हो या फिर पूरी तरह सोए हुए हो।
  576. 34:16एक सपनों की दुनिया में जी रहे हो। एक
  577. 34:19इल्ल्यूजन
  578. 34:21में अगर तुम जाग रहे हो तो तुम जरूर इन
  579. 34:25प्रॉब्लम से जूझ रहे
  580. 34:27हो। इनका स्यूशन ढूंढने के चक्कर में कुछ
  581. 34:31लोग एक्सपर्ट्स के पास जाते हैं। उनकी
  582. 34:34आइडियाज और थरीज फॉलो करते हैं।
  583. 34:38धीरे-धीरे यह लोग एक अलग ग्रुप बन जाते
  584. 34:41हैं और फिर उनका कॉन्फ्लिक्ट हो जाता है
  585. 34:44दूसरे एक्सपर्ट्स और उनके ग्रुप से।
  586. 34:48और फिर एक व्यक्ति सिर्फ एक टूल बन जाता
  587. 34:51है किसी ग्रुप या एक्सपर्ट के हाथ
  588. 34:55में या फिर तुम कोई सिस्टम फॉलो करते हो
  589. 34:58जिसे अगर ध्यान से देखा जाए तो वह सिर्फ
  590. 35:01एक और तरीका बन जाता है व्यक्ति का
  591. 35:04एक्सप्लइटेशन करने का। व्यक्ति का
  592. 35:08शोषण। या तुम सोचते हो कि सारी हिंसा और
  593. 35:13हॉरर को बदलने के लिए एक मास मूवमेंट
  594. 35:16चाहिए। एक कलेक्टिव एक्शन।
  595. 35:19पर अगर तुम जो खुद एक मास का पार्ट हो
  596. 35:24अपना असली रोल ही नहीं समझते तो फिर यह
  597. 35:27मास यह भीड़ मूवमेंट सिर्फ एक फैंसी वर्ड
  598. 35:31बन के रह जाता
  599. 35:34है। एक सच्चा एक ट्रू कलेक्टिव एक्शन तभी
  600. 35:39हो सकता है जब तुम एक व्यक्ति के रूप में
  601. 35:43जो कि भीड़ का हिस्सा भी है जाग जाए और
  602. 35:46अपने एक्शन की पूरी जिम्मेदारी ले बिना
  603. 35:50किसी मजबूरी
  604. 35:51के प्लीज याद रखो मैं तुम्हें कोई ऐसी
  605. 35:56फिलॉसफी नहीं दे रहा हूं जिसे तुम
  606. 36:00अंधाधुंध फॉलो करो।
  607. 36:03मैं तो सिर्फ तुम्हारे अंदर एक डिजायर
  608. 36:06जगाना चाहता हूं। एक सच्ची और समझदारी
  609. 36:11वाली फुलफिलमेंट का। जो अकेली चीज है जो
  610. 36:15दुनिया में खुशी, ऑर्डर और पीस ला सकती
  611. 36:20है। दुनिया में असली और परमानेंट बदलाव
  612. 36:24तभी आएगा। प्यार और समझदारी का फुलफिलमेंट
  613. 36:28तभी होगा जब तुम जाग जाओगे।
  614. 36:32और अपने दिमाग में बनी हुई इल्ल्यूजंस के
  615. 36:35जाल से आजाद होने
  616. 36:37लगोगे जो तुमने खुद बनाई है डर के चलते।
  617. 36:44जब दिमाग इन सब रुकावट से आजाद हो जाता
  618. 36:47है। जब अंदर से गहरा अपना और अपने मर्जी
  619. 36:52से बदलाव आता है। तभी असली लंबे समय तक
  620. 36:55चलने वाला सच्चा कलेक्टिव एक्शन पॉसिबल
  621. 36:59है। जिसमें कोई जबरदस्ती नहीं
  622. 37:04होती। समझो कि मैं तुमसे एक व्यक्ति के
  623. 37:07रूप में बात कर रहा हूं। किसी ग्रुप या
  624. 37:10पार्टी से नहीं।
  625. 37:12अगर तुम अपनी पूरी जिम्मेदारी और अपने
  626. 37:15फुलफिलमेंट के लिए नहीं झांकते तो समाज
  627. 37:18में एक इंसान के रूप में तुम्हारा काम
  628. 37:21अधूरा छोटा रह जाएगा और इसी में छुपी है
  629. 37:26दुख की
  630. 37:28जड़ तो सवाल
  631. 37:30है कैसे हो सकती है यह गहरी और पर्सनल
  632. 37:37क्रांति अगर एक इंसान के अंदर यह सच्ची
  633. 37:41बच्ची अपनी मर्जी से होने वाली बदलाव आती
  634. 37:45है तो तुम सबके लिए एक सही माहौल बनाओगे
  635. 37:50बिना किसी जात या रेस के फर्क
  636. 37:53के फिर पूरी दुनिया एक ही इंसानी फैमिली
  637. 37:57बन
  638. 37:58जाएगी पर तुम कैसे
  639. 38:01जागोगे एक व्यक्ति के रूप में इस गहरी
  640. 38:05क्रांति के
  641. 38:07लिए अब जो मैं बोलने वाला हूं वह मुश्किल
  642. 38:10नहीं है सिंपल है और क्योंकि यह इतना
  643. 38:14सिंपल है। मुझे डर है तुम इसे इग्नोर कर
  644. 38:18दोगे। यह कहकर कि यह क्लियर या पावरफुल
  645. 38:22नहीं
  646. 38:23है। तुम जिसे पावरफुल कहते हो, जिसे
  647. 38:27पॉजिटिव कहते हो, वह होता है एक फिक्स
  648. 38:31प्लान का मिलना। बताया जाए कि एग्जजेक्टली
  649. 38:34क्या करना है।
  650. 38:38लेकिन अगर तुम खुद समझ पाओ कि क्या चीजें
  651. 38:41तुम्हारा सच्चा और गहरा फुलफिलमेंट रोकती
  652. 38:44हैं तो तुम किसी के फॉलोअर नहीं
  653. 38:48बनोगे और कोई तुम्हारा फायदा नहीं उठा
  654. 38:51पाएगा।
  655. 38:54किसी भी तरह का फॉलो करना तुम्हारे पूरे
  656. 38:57होने के अगेंस्ट
  657. 38:59है। इस गहरी क्रांति के लिए तुम्हें पूरी
  658. 39:02तरह अवेयर होना होगा उस स्ट्रक्चर का जो
  659. 39:06तुमने अपने आसपास बना लिया है। जिसमें अब
  660. 39:10तुम फंस चुके हो।
  661. 39:14मतलब हमारे पास कुछ वैल्यूस, कुछ
  662. 39:18आइडियल्स, कुछ बिलीव्स हैं जो एक जाल की
  663. 39:22तरह दिमाग को पकड़ के रखते
  664. 39:25हैं। और जब तुम उन सब का मतलब पूरी तरह
  665. 39:28समझने लगते हो तो तुम्हें दिखाई देगा कि
  666. 39:32यह सब कैसे बने।
  667. 39:36तुम जब तक फुल्ली और सच्चे तरीके से एक्शन
  668. 39:39नहीं ले सकते, जब तक तुम यह नहीं जानते कि
  669. 39:43तुम किस जेल में रह रहे हो और यह जेल कैसे
  670. 39:48बनी। और जब तुम इसे बिना किसी सेल्फ
  671. 39:51डिफेंस के देखोगे तब तुम खुद समझोगे इसका
  672. 39:55असल मतलब जो कोई दूसरा तुम्हें समझा नहीं
  673. 39:59सकता।
  674. 40:03तुम्हारी अपनी इंटेलिजेंस के जागने से
  675. 40:07तुम्हारे अपने दर्द के थ्रू तुम्हें
  676. 40:09मिलेगा सच्चा फुलफिलमेंट का
  677. 40:13रास्ता। हम सब अपने ईगो के थॉट और एक्शन
  678. 40:18के जरिए सिक्योरिटी और सर्टेनिटी ढूंढते
  679. 40:21हैं। बाहर भी और अंदर भी।
  680. 40:26अगर तुम अपनी सोच को ध्यान से देखोगे तो
  681. 40:30तुम्हें दिखेगा कि तुम अपने ईगो के लिए ही
  682. 40:32सेफ्टी और श्योरिटी ढूंढ रहे हो अंदर भी
  683. 40:36और बाहर
  684. 40:39भी। असल में
  685. 40:42लाइफ का ऐसा कोई फिक्स डिवीजन नहीं है
  686. 40:45जैसे ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव
  687. 40:47वर्ल्ड। मैं यह सिर्फ समझाने के लिए
  688. 40:51डिवाइड कर रहा
  689. 40:52हूं। बाहर के लेवल पर
  690. 40:55ईगो वाली सेफ्टी की यह खोज फैमिली के थ्रू
  691. 40:59दिखती
  692. 41:00है जो बन जाती है एक एक्सप्लइटेशन का
  693. 41:04सेंटर जो पोजीशन पर बेस्ड होती
  694. 41:08है। अगर तुम इसे ध्यान से
  695. 41:11देखो तो तुम पाओगे कि जिसे तुम फैमिली का
  696. 41:15प्यार कहते हो वह सिर्फ पोज़ेसिवनेस
  697. 41:21है। वही सेफ्टी की खोज फिर क्लास डिवाइड
  698. 41:26बन जाती है जो बदल जाती है नेशनलिज्म और
  699. 41:31इंपीरियलिज्म की बेवकूफी
  700. 41:35में जहां से नफरत जाति भेद और आखिर में
  701. 41:40युद्ध की हिंसा पैदा होती
  702. 41:43है। तो अपने ही ईगो वाले डिजायर्स के थ्रू
  703. 41:47हमने एक दुनिया बना दी है। नेशनलिटीज की,
  704. 41:52अलग-अलग गवर्नमेंट्स
  705. 41:55की। जिनका काम ही है वॉर की तैयारी करना
  706. 42:00और आदमी को आदमी के अगेंस्ट खड़ा
  707. 42:03करना। फिर आती है ईगो वाली सिक्योरिटी और
  708. 42:07श्योरिटी की तलाश धर्म के थ्रू।
  709. 42:12तुम खुशी-खुशी यह मानना पसंद करते हो कि
  710. 42:16किसी डिवाइन पावर ने यह ऑर्गेनाइज्ड
  711. 42:19बिलीव्स बनाए हैं जिन्हें तुम रिलीजन कहते
  712. 42:22हो।
  713. 42:25लेकिन असली में तुमने खुद ही यह रिलीजंस
  714. 42:28बनाए हैं अपनी सुविधा के
  715. 42:31लिए। सदियों के बाद यह सेक्रेट बन गए हैं
  716. 42:34और तुम अब इनके गुलाम बन चुके हो।
  717. 42:39कभी भी कोई आइडियल रिलीजन नहीं हो सकता।
  718. 42:43इसलिए चलो हम अपना वक्त इन पर बहस में
  719. 42:47बर्बाद ना
  720. 42:49करें। चलो हम देखें कि हमने रिलीजन कैसे
  721. 42:53बनाया और हम कैसे इनके स्लेव बन
  722. 42:57गए। अगर तुम इन रिलीजंस को वैसे ही देखो
  723. 43:01जैसे यह हैं बिना मेकअप के।
  724. 43:04तो तुम देखोगे कि यह सिर्फ ऑर्गेनाइज्ड
  725. 43:07बिलीफ का एक बिजनेस है जो इंसान को पकड़ता
  726. 43:12है, अलग करता है और उसे एक्सप्लइट करता
  727. 43:17है। जैसे तुम बाहर की दुनिया में
  728. 43:20सिक्योरिटी ढूंढते हो, वैसे ही तुम अंदर
  729. 43:24भी एक अलग तरह की सेफ्टी ढूंढते हो। जिसे
  730. 43:29तुम कहते हो इमोर्टिटी।
  731. 43:33तुम चाहते हो कि तुम्हारा ईगो मरने के बाद
  732. 43:36भी जिंदा रहे और इसी को तुम इमोर्टिटी का
  733. 43:42नाम देते
  734. 43:44हो। आगे आने वाले टॉक्स में मैं बताऊंगा
  735. 43:48कि मेरे लिए क्या है सच्ची
  736. 43:53इमोर्टिटी। तुम जब अपनी सिक्योरिटी ढूंढते
  737. 43:56हो तो उसी सर्च में डर पैदा होता है और
  738. 44:01फिर तुम खुद को किसी और के हवाले कर देते
  739. 44:05हो। जो तुमसे वादा करता है कि वह तुम्हें
  740. 44:08इमोर्टिटी
  741. 44:11देगा। इस डर के चलते तुम एक स्पिरिचुअल
  742. 44:14अथॉरिटी बना लेते हो।
  743. 44:17और इस अथॉरिटी को चलाने के लिए होते हैं
  744. 44:20पंडित जो तुम्हारा फायदा उठाते हैं।
  745. 44:24तुम्हारे बिलीव्स डॉग्मा और क्रीड के थ्रू
  746. 44:30शो दिखावा और शान शौकत के थ्रू जो दुनिया
  747. 44:36भर में रिलीजन के नाम से जानी जाती
  748. 44:40है। यह सब डर पर बेस्ड होता है।
  749. 44:45फियर चाहे तुम इसे गॉड का प्यार या ट्रुथ
  750. 44:49क्यों ना कहो।
  751. 44:52अगर तुम इसको ध्यान से समझदारी से देखो तो
  752. 44:56यह सिर्फ डर का रिजल्ट
  753. 44:58है और इसी वजह से यह इंसान के
  754. 45:01एक्सप्लइटेशन इंसान के शोषण का एक जरिया
  755. 45:05बन जाता
  756. 45:08है। तुम्हारी अपनी डिजायर के चलते
  757. 45:12इमोर्टिटी के लिए ईगो के सर्वाइव करने के
  758. 45:15लिए तुमने यह इल्लुजन खुद बनाया है जिसे
  759. 45:18तुम रिलीजन कहते हो।
  760. 45:21और तुम इसमें या तो कॉन्शियसली या
  761. 45:26अनकॉन्शियसली फंसे हुए
  762. 45:29हो या हो सकता है तुम किसी रिलीजन के
  763. 45:32मेंबर ना हो। लेकिन तुम किसी ऐसे ग्रुप या
  764. 45:36सेक्ट का हिस्सा हो जो एक सल रिवॉर्ड का
  765. 45:39प्रॉमिस करता हो। एक छुपा हुआ ईगो का
  766. 45:42बूस्ट मरने के बाद के लिए।
  767. 45:47या तुम किसी ग्रुप या सेट में भी नहीं हो।
  768. 45:51पर तुम्हारे अंदर एक छुपी हुई इच्छा हो
  769. 45:54सकती है अपने इमोर्टिटी को ढूंढने
  770. 45:57की। जब तक तुम्हारे अंदर किसी भी फॉर्म
  771. 46:00में सेल्फ कंटिन्यूस की डिजायर है तब तक
  772. 46:05डर होगा। और यह डर ही अथॉरिटी बनाता है।
  773. 46:10और फिर उससे पैदा होती है एक छुपी हुई
  774. 46:14हिंसा और
  775. 46:16बेवकूफी जो तुम्हें एक्सप्लइटेशन के लिए
  776. 46:19तैयार कर देती
  777. 46:21है। यह एक्सप्लॉयटेशन इतना सटल, इतना
  778. 46:25महीन, इतना रिफाइंड होता है कि आदमी उसे
  779. 46:30प्यार करने लगता है और उसे कहता है
  780. 46:33स्पिरिचुअल प्रोग्रेस या परफेक्शन की तरफ
  781. 46:38बढ़ना। अब तुम एक व्यक्ति के रूप में इस
  782. 46:42पूरे कॉम्प्लेक्स स्ट्रक्चर को समझना
  783. 46:45होगा।
  784. 46:49डर के सोर्स को देखना होगा।
  785. 46:52और उसे हटा देने के लिए तैयार रहना होगा।
  786. 46:56चाहे जो भी अंजाम
  787. 46:59हो। इसका मतलब है तुम्हें अपने अंदर से
  788. 47:02टकराना होगा एकिस्टिंग आइडियल्स और
  789. 47:05वैल्यूस
  790. 47:06से। और जब दिमाग झूठ से आजाद होता है। तभी
  791. 47:12तुम एक सही माहौल बना सकते हो सबके लिए।
  792. 47:17तुम्हारा पहला काम यह है कि तुम समझो कि
  793. 47:20तुम एक जेल में हो और फिर तुम देखो कि
  794. 47:24तुम्हारा अपना सोच हर वक्त उस जेल के
  795. 47:28वैल्यू से टकराव से बचने की कोशिश करता
  796. 47:31है।
  797. 47:33यही स्केप तुम्हें आइडियल्स देता है। जो
  798. 47:37चाहे कितने भी खूबसूरत क्यों ना लगते हो
  799. 47:41पर असली में वह भी एक इल्यूजन ही होते
  800. 47:44हैं।
  801. 47:47दिमाग की एक पुरानी चाल है आइडियल में भाग
  802. 47:52जाना। क्योंकि अगर वह भागता
  803. 47:55नहीं तो उसे डायरेक्टली उस जेल उस
  804. 47:59एनवायरमेंट से टकराना पड़ता।
  805. 48:03मतलब दिमाग एक इल्लुजन में भाग जाता है
  806. 48:06क्योंकि उसे पता है कि अगर वह सच्चाई से
  807. 48:10टकराएगा तो तकलीफ जरूर आएगी।
  808. 48:14जब वह जेल के वैल्यूस, मोरालिटी और रिलीजन
  809. 48:18को क्वेश्चन करेगा।
  810. 48:22इसलिए असली बात यह है कि तुम्हें टकराना
  811. 48:26होगा उन ट्रेडिशंस और वैल्यूस से जो
  812. 48:29सोसाइटी और धर्म ने तुम पर थोपी
  813. 48:34है। और तुम्हें आइडियल के थ्रू
  814. 48:37इंटेलेक्चुअली भागना नहीं
  815. 48:41है। जब तुम इन वैल्यूस को क्वेश्चन करना
  816. 48:44स्टार्ट करते हो तब तुम्हारे अंदर वह असली
  817. 48:48इंटेलिजेंस जागती है।
  818. 48:51जो अकेली चीज है जो इंसानी प्रॉब्लम्स का
  819. 48:54स्यूशन दे सकती
  820. 48:58है। जब तक दिमाग झूठी वैल्यूस में फंसा
  821. 49:02हुआ है तब तक कोई फुलफिलमेंट नहीं हो
  822. 49:06सकती।
  823. 49:08सिर्फ पूर्णता ही सच्चाई को दिखाती है।
  824. 49:12कंप्लीटनेस ही ट्रुथ को दिखाता है। जो है
  825. 49:17एटरर्नल लाइफ की मूवमेंट
  826. 49:23डेटेड अक्टूबर 20
  827. 49:261935 मेक्सिको
  828. 49:31सिटी। व्हाट आर यू सीकिंग? तुम क्या ढूंढ
  829. 49:36रहे
  830. 49:38हो? मेरा मकसद इन टॉक्स में तुम्हें कोई
  831. 49:41थिंकिंग का सिस्टम देना नहीं
  832. 49:44है। बल्कि तुम्हारे सोचने की शक्ति को
  833. 49:47जगाना है। और इसके लिए मैं कुछ बातें
  834. 49:51बोलूंगा। यह कोई फाइनल बातें नहीं होंगी।
  835. 49:56पर मैं चाहता हूं कि तुम इन्हें ध्यान से
  836. 50:00सोचो। जब तुम सोचोगे तो कई सवाल उठेंगे।
  837. 50:05अगर तुम मुझसे वह सवाल पूछो तो मैं उनका
  838. 50:08जवाब देने की कोशिश
  839. 50:10करूंगा और फिर हम और गहरा बात कर
  840. 50:14सकेंगे। मुझे सोचना पड़ता है तुम में से
  841. 50:18ज्यादा लोग यहां क्यों आए
  842. 50:20हो? शायद तुम कुछ ढूंढने आए हो लेकिन तुम
  843. 50:24क्या ढूंढ रहे हो? तुम इस सवाल का आसानी
  844. 50:28से जवाब नहीं दे सकते।
  845. 50:31क्योंकि तुम्हारा सर्च बार-बार बदलता रहता
  846. 50:35है। जो चीज तुम ढूंढ रहे हो, वह लगातार
  847. 50:38बदलती जा रही है। इसलिए तुम्हें सच में
  848. 50:42पता ही नहीं होता कि तुम क्या चाहते हो,
  849. 50:46क्या ढूंढ रहे हो।
  850. 50:49लेकिन तुमने एक आदत बना ली है। एक टीचर से
  851. 50:52दूसरे टीचर के पास जाने की, अलग-अलग
  852. 50:56सोसाइटीज, ऑर्गेनाइजेशंस जॉइ करने की,
  853. 50:59अलग-अलग सिस्टम्स फॉलो करने की।
  854. 51:03असल में तुम बस यह देख रहे हो कि तुम्हें
  855. 51:06सबसे ज्यादा सेटिस्फेक्शन या एक्साइटमेंट
  856. 51:10किस चीज से मिलती
  857. 51:12है। एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम एक टीचर से
  858. 51:16दूसरे टीचर के पास जाना तुम इस प्रोसेस को
  859. 51:19ट्रुथ की सर्च कहते
  860. 51:22हो। असल में तुम बस एक आईडिया से दूसरे
  861. 51:25आईडिया में जा रहे हो। एक थॉट सिस्टम से
  862. 51:28दूसरे में सब कुछ इकट्ठा करते जा रहे हो।
  863. 51:33उम्मीद में कि तुम लाइफ को समझ जाओगे।
  864. 51:36उसका मतलब पकड़ लोगे। उसकी स्ट्रगल्स को
  865. 51:39समझ लोगे और हर बार यह कहते हो कि हां अब
  866. 51:44मिला। पर मैं चाहता हूं कि जब मेरी बातें
  867. 51:48खत्म हो तो तुम यह ना कहो कि हां अब मुझे
  868. 51:52कुछ मिल गया। क्योंकि जिस मोमेंट तुम कह
  869. 51:56देते हो कि कुछ मिला उसी वक्त तुम खो जाते
  870. 52:00हो।
  871. 52:01वह एक एंकर बन जाता है जिसे दिमाग पकड़ के
  872. 52:04बैठ जाता है और फिर वह जो असली एटरर्नल
  873. 52:09मूवमेंट है वह रुक जाता है और ज्यादातर
  874. 52:13दिमाग एक क्लियर गोल ढूंढते हैं एक पक्की
  875. 52:17इच्छा के साथ कि मुझे कुछ पाना है और जब
  876. 52:22यह इच्छा बन जाती है तो तुम्हें कुछ मिलता
  877. 52:25जरूर है लेकिन वह जीता हुआ नहीं होता वह
  878. 52:29डेड होता है
  879. 52:30और फिर तुम उसे छोड़कर दूसरे के पीछे भाग
  880. 52:34जाते हो। और यह बार-बार छूने और छोड़ने का
  881. 52:38प्रोसेस तुम कहते हो विज़डम, एक्सपीरियंस
  882. 52:42या ट्रुथ का मिलना
  883. 52:45है। शायद तुम में से ज्यादा लोग इसी
  884. 52:49एटीट्यूड के साथ यहां आए हैं। चाहे
  885. 52:52तुम्हें पता हो या ना पता हो।
  886. 52:56तुम्हारा सोचना सिर्फ स्कीम्स और
  887. 52:58कंफर्मेशन ढूंढने में लग जाता है।
  888. 53:01मूवमेंट्स या ग्रुप्स ज्वाइन करने की
  889. 53:03इच्छा में। बिना इस बात को समझे कि जिंदगी
  890. 53:07के बेसिक ट्रुथ्स क्या है? जैसे मैंने
  891. 53:11कहा। मैं तुम्हें कोई आइडियल नहीं दे रहा
  892. 53:14जिसे तुम कॉपी
  893. 53:15करो। ना ही कोई गोल दे रहा हूं जिसे तुम
  894. 53:19ढूंढो। मेरा मकसद सिर्फ इतना है कि
  895. 53:22तुम्हारा दिमाग खुद ही इन चीजों से आजाद
  896. 53:25होने लगे जो हमने बनाई है और जिन्हें हमने
  897. 53:31बिना सोचे समझे सच मान लिया
  898. 53:35है। अब हर आदमी कोशिश करता है अपने
  899. 53:38एनवायरमेंट के प्रोडक्ट को इमोर्टल बनाने
  900. 53:41की।
  901. 53:42जो चीज तुम्हारे एनवायरमेंट का रिजल्ट है,
  902. 53:46तुम उसे ही इटरनल बनाने की कोशिश करते हो।
  903. 53:51तुम्हारे डर, उम्मीदें, चाहतें, लाइक्स,
  904. 53:55डिसलाइक्स जो तुम अपना टेंपरामेंट कहते
  905. 53:58हो, वह सब असल में सिर्फ एनवायरमेंट के
  906. 54:01रिजल्ट्स हैं। और इन्हीं सबका बंडल बन
  907. 54:05जाता है तुम्हारा आई, तुम्हारी
  908. 54:08कॉन्शियसनेस।
  909. 54:10क्या यह सच नहीं
  910. 54:13है? पूरा स्ट्रगल होता है इस आई और
  911. 54:16एनवायरमेंट के बीच। वह आई जिसे तुमने अपने
  912. 54:20दिमाग से पकड़ा हुआ है। वह एनवायरमेंट का
  913. 54:23ही रिजल्ट है। और स्ट्रगल चलता रहता है उस
  914. 54:27आई और एनवायरमेंट के कांस्टेंट बदलाव के
  915. 54:31बीच। तुम लगातार इस आई के लिए इमोर्टिटी
  916. 54:36ढूंढ रहे हो।
  917. 54:38आसान शब्दों में झूठ अपने आप को सच और
  918. 54:42एटरर्नल बनाना चाहता है। जब तुम
  919. 54:44एनवायरमेंट का असल मतलब समझ लेते हो तब
  920. 54:47कोई रिएक्शन नहीं
  921. 54:50होती और इसलिए कोई टकराव भी नहीं होता उस
  922. 54:54रिएक्शन और उसके क्रिएटर यानी एनवायरमेंट
  923. 54:57के बीच।
  924. 54:59तो यह जो इमोटिटी का ढूंढना है, यह जो
  925. 55:03सर्टेनिटी और लास्टिंग बनने की इच्छा है,
  926. 55:06तुम इसे कहते हो इवोल्यूशन का प्रोसेस।
  927. 55:10ट्रुथ या गॉड या लाइफ को समझने का
  928. 55:13प्रोसेस। और कोई भी जो तुम्हारी मदद करता
  929. 55:16है इस आई को इमोर्टल बनाने में, तुम उसे
  930. 55:20बना लेते हो अपना सेवियर, अपना गुरु, अपना
  931. 55:22मास्टर।
  932. 55:26तुम उसका सिस्टम फॉलो करते हो। कभी दिमाग
  933. 55:29से तो कभी बिना दिमाग
  934. 55:31लगाए। जब दिमाग लगाकर फॉलो करते हो तो तुम
  935. 55:35सोचते हो कि तुम स्मार्ट
  936. 55:37हो। क्योंकि तुम्हें लगता है कि वह
  937. 55:40तुम्हें इमोर्टिटी तक ले जाएगा।
  938. 55:45मतलब तुम चाहते हो कोई और तुम्हारे लिए उस
  939. 55:49रिएक्शन को इमोर्टल बना दे जो कि
  940. 55:52एनवायरमेंट का रिजल्ट है जो कि असली में
  941. 55:55झूठ है। इस झूठ को एटरर्नल बनाने की इच्छा
  942. 55:59से ही तुम रिलीजन बनाते हो। सोसाइटीज,
  943. 56:03पॉलिटिक्स, इकोनॉमिक सिस्टम्स, मोरल रूल्स
  944. 56:07बनाते हो। और ऐसे
  945. 56:08ही जब तुम एक सिस्टम बनाते हो किसी
  946. 56:11इंडिविजुअल को इमोर्टल बनाने के लिए तो उस
  947. 56:14प्रोसेस में तुम खुद खो जाते
  948. 56:17हो और फिर तुम उसी चीज से टकराते हो जो
  949. 56:21तुमने खुद बनाई होती
  950. 56:23है जो तुम्हारे अपने सिक्योरिटी की इच्छा
  951. 56:26से पैदा होती है और जिसे तुम इमोर्ट कह
  952. 56:30देते
  953. 56:33हो आफ्टर ऑल व्हाई शुड रिलीजंस एक्सिस्ट
  954. 56:37आखिर धर्मों का होना क्यों जरूरी
  955. 56:41है? रिलीजन एक सोच का डिवीजन बन गया है।
  956. 56:47यह ग्रो हुआ
  957. 56:49है। इसे बढ़ाया चढ़ाया गया
  958. 56:53है। और उसमें जान डाली गई है अलग-अलग
  959. 56:56बिलीव्स के
  960. 56:58थ्रू। क्योंकि तुम्हारे अंदर यह इच्छा है
  961. 57:02कि तुम रियलाइज करो कि तुम कुछ पाओ कि तुम
  962. 57:05अमर बन जाओ।
  963. 57:08और जो मोरल स्टैंडर्ड्स हैं, वह भी सिर्फ
  964. 57:11सोसाइटी ने बनाए हैं ताकि एक इंसान उसके
  965. 57:14कंट्रोल में रहे। मेरे लिए मोरालिटी को
  966. 57:19स्टैंडर्डाइज नहीं किया जा
  967. 57:23सकता। एक ही वक्त में मोरालिटी और
  968. 57:26स्टैंडर्ड्स दोनों नहीं हो सकते। सिर्फ
  969. 57:28इंटेलिजेंस हो सकती है जो ना तो स्टैंडर्ड
  970. 57:32है ना हो सकती है। पर इस पर हम आगे बात
  971. 57:38करेंगे। अब यह जो लगातार ढूंढने का
  972. 57:41प्रोसेस है खुशी का, सच का, रियलिटी का,
  973. 57:45हेल्थ का यह डिजायर हर एक के अंदर है।
  974. 57:49ताकि उसे सेफ्टी मिले, परमानेंस
  975. 57:54मिले। और इसी सर्च फॉर
  976. 57:58परमानेंस के अंदर होता है
  977. 58:01कॉन्फ्लिक्ट जो होता है एनवायरमेंट के
  978. 58:04रिजल्ट मतलब आई और खुद एनवायरमेंट के
  979. 58:07बीच। अब अगर तुम थोड़ा सोचो तो यह आई क्या
  980. 58:11है? जब तुम कहते हो मैं
  981. 58:16मेरा मेरा हाउस, मेरी वाइफ, मेरा चाइल्ड,
  982. 58:20मेरा प्यार, मेरा टेंपरामेंट वो सब क्या
  983. 58:24है?
  984. 58:25वह सिर्फ एनवायरमेंट का रिजल्ट
  985. 58:28है और उसी रिजल्ट आई और एनवायरमेंट के बीच
  986. 58:33ही कॉन्फ्लिक्ट होता
  987. 58:35है। कॉन्फ्लिक्ट सिर्फ और सिर्फ तभी हो
  988. 58:39सकता है जब दोनों तरफ झूठ
  989. 58:42हो। सच और झूठ के बीच कभी कॉन्फ्लिक्ट
  990. 58:46नहीं हो सकता। है ना?
  991. 58:49तो जो झूठ चीजों के बीच की टकराव होती है
  992. 58:54दो अलग-अलग लेवल्स ऑफ झूठ के
  993. 58:57बीच। तो यह जो स्ट्रगल तुम करते हो अपने
  994. 59:00और एनवायरमेंट के बीच जिसे तुम सच्चा
  995. 59:03स्ट्रगल कहते हो वह सच्चा नहीं है।
  996. 59:07तुम्हारे अंदर हर वक्त स्ट्रगल चल रहा है।
  997. 59:10तुम्हारे और तुम्हारे सराउंडिंग्स के बीच।
  998. 59:14तुम्हारे पति, तुम्हारी पत्नी, बच्चे,
  999. 59:18पड़ोसी, समाज, पॉलिटिकल ग्रुप्स सबके
  1000. 59:24बीच। और तुम सोच रहे हो कि यह बैटल
  1001. 59:28इंपॉर्टेंट है ताकि तुम खुशी, सच,
  1002. 59:31इमोर्टिटी या एक्सटसी पा सको। आसान शब्दों
  1003. 59:36में जिसे तुम ट्रुथ कहते हो वह सिर्फ एक
  1004. 59:39सेल्फ कॉन्शियस आई है जो हमेशा इमोर्टल
  1005. 59:43बनने की कोशिश में लगा रहता है और
  1006. 59:47एनवायरमेंट एक लगातार बदलती हुई झूठ है वो
  1007. 59:51मूवमेंट ऑफ फाल्स तुम्हारे लिए एनवायरमेंट
  1008. 59:54बन जाता है जिसे तुम प्रोग्रेस इवोल्यूशन
  1009. 59:58कहते
  1010. 59:59हो मेरे लिए खुशी सच या गॉड यह ये सब नहीं
  1011. 1:00:05मिलते आई से जो एक चेंजिंग एनवायरमेंट का
  1012. 1:00:08रिजल्ट
  1013. 1:00:11है। चलो एक और तरीके से समझाता
  1014. 1:00:15हूं। तुम सबको पता है कि तुम्हारे और
  1015. 1:00:18एनवायरमेंट के बीच कॉन्फ्लिक्ट है। तुम
  1016. 1:00:22सोचते हो अगर मैं एनवायरमेंट को हरा दूं
  1017. 1:00:25उसे कंट्रोल कर लूं तब मैं सच समझूंगा।
  1018. 1:00:30इसलिए कास्टेंट बैटल चलती रहती है
  1019. 1:00:33तुम्हारे और एनवायरमेंट के बीच। पर यह तुम
  1020. 1:00:37क्या हो? तुम भी तो सिर्फ एनवायरमेंट का
  1021. 1:00:40रिजल्ट हो। तो क्या कर रहे हो तुम? एक झूठ
  1022. 1:00:44चीज से दूसरी झूठ चीज से लड़ रहे हो। और
  1023. 1:00:48जब तक तुम एनवायरमेंट को समझ नहीं लेते तब
  1024. 1:00:50तक वह भी झूठ ही रहेगा।
  1025. 1:00:54तो वह एनवायरमेंट ही उस कॉन्शियसनेस को
  1026. 1:00:56बनाता है जिसे तुम आई कहते
  1027. 1:01:00हो जो हमेशा इमोर्टल बनने की कोशिश करता
  1028. 1:01:06है और उस आई को इमोर्टल बनाने के लिए तुम
  1029. 1:01:09बनाते हो रिलीजंस सिस्टम्स
  1030. 1:01:13फिलॉसफीस यह सब बंधन और बैरियर बन जाते
  1031. 1:01:18हैं। इसी वजह से हमेशा कॉन्फ्लिक्ट होता
  1032. 1:01:21है। आई और एनवायरमेंट के बीच और जैसे
  1033. 1:01:25मैंने
  1034. 1:01:26कहा सच और झूठ के बीच कभी कॉन्फ्लिक्ट
  1035. 1:01:30नहीं होता। सिर्फ दो झूठों के बीच होता
  1036. 1:01:34है।
  1037. 1:01:35लेकिन तुम्हारे दिमाग में यह बात बैठ गई
  1038. 1:01:38है कि यह स्ट्रगल आई और एनवायरमेंट के बीच
  1039. 1:01:42यही तुम्हें पावर, विडम, एटरर्निटी,
  1040. 1:01:46रियलिटी, ट्रुथ और हैप्पीनेस तक ले जाएगा।
  1041. 1:01:52पर असली बात यह है कि हमें अपना ध्यान
  1042. 1:01:55रखना चाहिए एनवायरमेंट
  1043. 1:01:58पर ना कि स्ट्रगल पे ना उसे कैसे जीतेंगे
  1044. 1:02:03ना उससे कैसे
  1045. 1:02:05भागेंगे अगर तुम एनवायरमेंट को क्वेश्चन
  1046. 1:02:08करो और उसका मतलब समझने की कोशिश करो तो
  1047. 1:02:12तुम उसकी असली वैल्यू समझोगे है
  1048. 1:02:15ना ज्यादा लोग तो बस भागने में लगे हैं
  1049. 1:02:19सरकमस्टेंससेस से सिचुएशन से एनवायरमेंट
  1050. 1:02:23से वो यह नहीं देख रहे कि इसका मीनिंग
  1051. 1:02:26क्या है? इसका कॉज क्या है? इसका सच क्या
  1052. 1:02:32है? जब तुम एनवायरमेंट का सच देखते हो तब
  1053. 1:02:36वह तुम्हारी लाइफ में एक बड़ा बदलाव लाता
  1054. 1:02:39है। एक कंप्लीट अपविवल एक पूरा आईडिया का
  1055. 1:02:44तूफान जिसमें ना अथॉरिटी होती है ना
  1056. 1:02:47इमिटेशन।
  1057. 1:02:50पर बहुत कम लोग तैयार हैं उस सच को देखने
  1058. 1:02:54के लिए क्योंकि उसका मतलब होता है चेंज एक
  1059. 1:02:58रियल डीप
  1060. 1:03:01रिवोल्यूशन और बहुत कम लोग बदलाव चाहते
  1061. 1:03:05हैं इसलिए ज्यादातर लोग सिर्फ एनवायरमेंट
  1062. 1:03:09से बचने में लगे होते
  1063. 1:03:11हैं। वह उससे छुपते हैं या नए
  1064. 1:03:14सब्स्टट्यूट्स ढूंढते
  1065. 1:03:16हैं। जैसे जीसस को हटाकर नए सेवियर बना
  1066. 1:03:20लेते हैं। पुराने टीचर्स की जगह नए टीचर्स
  1067. 1:03:24ले आते
  1068. 1:03:26हैं। पर यह कभी नहीं सोचते कि क्या उन्हें
  1069. 1:03:29किसी गाइड की जरूरत भी है या नहीं। अगर
  1070. 1:03:34सिर्फ यही पूछ लें तो वह काफी होगा। वही
  1071. 1:03:39तुम्हारे डिमांड का असली मतलब समझा देगा।
  1072. 1:03:44जहां भी तुम किसी सब्सीट्यूशन की तलाश
  1073. 1:03:46करते हो, वहां अथॉरिटी जरूर होती है। किसी
  1074. 1:03:51लीडर को फॉलो करना पड़ता है और इसलिए एक
  1075. 1:03:55इंसान सिर्फ एक छोटा सा पार्ट बन जाता है
  1076. 1:03:59सोसाइटी और रिलीजन के मशीन जैसे सिस्टम
  1077. 1:04:03का। अगर तुम ध्यान से
  1078. 1:04:05देखो तो तुम्हारी जो तलाश है वह सिर्फ
  1079. 1:04:10कंफर्ट, सिक्योरिटी और भागने का रास्ता
  1080. 1:04:14ढूंढने की तलाश
  1081. 1:04:16है। वह ना समझने की तलाश है ना सच की। वो
  1082. 1:04:21बस एक एस्केप
  1083. 1:04:23है। और इसलिए वह हर ऑब्सकल को जीतने की
  1084. 1:04:27कोशिश
  1085. 1:04:28है। पर जीतने का मतलब होता है बस एक चीज
  1086. 1:04:32के बदले दूसरी चीज रख
  1087. 1:04:34देना। और सब्सीट्यूशन में कभी भी समझ नहीं
  1088. 1:04:38होती।
  1089. 1:04:40लोग रिलीजन के थ्रू भागते हैं। उनके
  1090. 1:04:44रूल्स, मोरली स्टैंडर्ड्स, डर, अथॉरिटीज
  1091. 1:04:49के थ्रू। और लोग भागते हैं अपने सेल्फ
  1092. 1:04:52एक्सप्रेशन के नाम पर भी।
  1093. 1:04:57जो तुम सेल्फ एक्सप्रेशन कहते हो, जो
  1094. 1:05:00ज्यादातर लोग सेल्फ एक्सप्रेशन कहते हैं,
  1095. 1:05:04वह सिर्फ एनवायरमेंट के खिलाफ एक रिएक्शन
  1096. 1:05:06होता
  1097. 1:05:07है। अपने आप को एक्सप्रेस करने की कोशिश
  1098. 1:05:11होती है उस एनवायरमेंट के
  1099. 1:05:13अगेंस्ट। आर्ट के थ्रू, साइंस के थ्रू,
  1100. 1:05:16अलग-अलग एक्शंस के थ्रू।
  1101. 1:05:19मैं यहां उन असली और स्पॉनटेनियस
  1102. 1:05:21एक्सप्रेशनंस की बात नहीं कर रहा जो
  1103. 1:05:24ब्यूटी, आर्ट या साइंस से नेचुरली निकलते
  1104. 1:05:28हैं। वह तो अपने आप में पूरे होते
  1105. 1:05:32हैं। मैं उन लोगों की बात कर रहा हूं जो
  1106. 1:05:35इन चीजों का यूज करते हैं। सिर्फ अपने आप
  1107. 1:05:37को एक्सप्रेस करने के
  1108. 1:05:40लिए। एक रियल आर्टिस्ट अपने आर्ट को सेल्फ
  1109. 1:05:43एक्सप्रेशन कहकर शो नहीं करता। वह बस वह
  1110. 1:05:47चीज फील करता है और एक्सप्रेस करता
  1111. 1:05:50है। पर दुनिया में बहुत सारे फेक आर्टिस्ट
  1112. 1:05:54होते हैं। जैसे फेक स्पिरिचुअल लोग भी
  1113. 1:05:57होते हैं जो सिर्फ सेल्फ एक्सप्रेशन के
  1114. 1:06:00जरिए कुछ पाना चाहते
  1115. 1:06:02हैं। वो सेटिस्फेक्शन जो उन्हें उनके
  1116. 1:06:06एनवायरमेंट में नहीं मिल रहा।
  1117. 1:06:09इसी सर्च फॉर सिक्योरिटी और परमानेंसी के
  1118. 1:06:13चक्कर
  1119. 1:06:14में हमने बनाई है रिलीजंस जिसमें है
  1120. 1:06:18स्टूपिडिटी डिवाइड करना
  1121. 1:06:21एक्सप्लइटेशन और यह सब बन गए हैं एक भाग
  1122. 1:06:25जाने का रास्ता और यह एस्केप के रास्ते
  1123. 1:06:28इतने स्ट्रांग और इंपॉर्टेंट बन गए
  1124. 1:06:32हैं क्योंकि एनवायरमेंट से टकराना मतलब जो
  1125. 1:06:36कंडीशंस हमारे आसपास हैं उनसे डील
  1126. 1:06:39करना। उसमें लगता है बहुत बड़ा एक्शन
  1127. 1:06:42चाहिए। एक वेंटरी और पावरफुल
  1128. 1:06:47एक्शन। और बहुत कम लोग उसके लिए रेडी होते
  1129. 1:06:50हैं। उल्टा तुम एनवायरमेंट के फोर्स से ही
  1130. 1:06:54काम करने के लिए रेडी हो जाते हो।
  1131. 1:06:57जैसे अगर कोई आदमी डिप्रेशन के चलते अच्छा
  1132. 1:07:01और मोरल बन जाए तो तुम कहते हो क्या अच्छा
  1133. 1:07:05इंसान है। कितना बदल
  1134. 1:07:08गया। पर उस बदलाव का बेस भी एनवायरमेंट
  1135. 1:07:12है। और जब तक तुम राइटियस एक्शन के लिए
  1136. 1:07:17एनवायरमेंट पर डिपेंडेंट
  1137. 1:07:20हो। तब तक तुम्हें एस्केप चाहिए ही।
  1138. 1:07:24चाहे उसे रिलीजन बोलो या कुछ और
  1139. 1:07:29लेकिन जो सच्चा आर्टिस्ट होता है, जो
  1140. 1:07:32सच्चा स्पिरिचुअल होता है, उसकी
  1141. 1:07:34एक्सप्रेशन स्पॉनटेनियस होती है। और वह
  1142. 1:07:38काफी होती है, पूरी होती है, कंप्लीट होती
  1143. 1:07:42है। तो अब तुम क्या कर रहे हो? तुम्हारी
  1144. 1:07:47लाइफ में क्या हो रहा है? तुम क्या करने
  1145. 1:07:49की कोशिश में हो? तुम ढूंढ रहे हो पर क्या
  1146. 1:07:54ढूंढ रहे
  1147. 1:07:56हो? एक स्ट्रगल चल रहा है तुम्हारे और
  1148. 1:07:59कास्टेंटली बदलते एनवायरमेंट के
  1149. 1:08:02बीच। तुम ढूंढ रहे हो एक ऐसा रास्ता जिससे
  1150. 1:08:06तुम एनवायरमेंट को हरा सको।
  1151. 1:08:10ताकि तुम अपने आप को बना सको जो कि खुद
  1152. 1:08:13एनवायरमेंट का रिजल्ट
  1153. 1:08:15है। या हो सकता है कि तुम्हारा एनवायरमेंट
  1154. 1:08:19बार-बार तुम्हारे सेल्फ एक्सप्रेशन को
  1155. 1:08:22रोकता आया है। और इसी वजह से तुम नए तरीके
  1156. 1:08:26ढूंढते हो अपने आप को एक्सप्रेस करने के।
  1157. 1:08:30जैसे ह्यूमैनिटी की सेवा, इकोनॉमिक
  1158. 1:08:32सिस्टम्स और और भी बहाने।
  1159. 1:08:36हर किसी को यह समझना होगा कि वह असल में
  1160. 1:08:39क्या ढूंढ रहा है और अगर वह कुछ ढूंढ नहीं
  1161. 1:08:42रहा तो उसका मतलब है वह सेटिस्फाइड है और
  1162. 1:08:46डीके शुरू हो गया
  1163. 1:08:49है और अगर स्ट्रगल है तो इच्छा है उस
  1164. 1:08:53स्ट्रगल को जीतने की या उससे भागने की या
  1165. 1:08:57उस पर राज करने की पर जैसे मैंने
  1166. 1:09:01कहा कॉन्फ्लिक्ट सिर्फ तब होता है जब दो
  1167. 1:09:05झूठ टकराते हैं। एक तरफ वह आई जिसे तुम
  1168. 1:09:10रियल कहते हो जो मेरे लिए सिर्फ
  1169. 1:09:13एनवायरमेंट का रिजल्ट है और दूसरी तरफ खुद
  1170. 1:09:18एनवायरमेंट। अगर तुम्हारा दिमाग सिर्फ इस
  1171. 1:09:21स्ट्रगल को जीतने में लगा हुआ है तो तुम
  1172. 1:09:25सिर्फ झूठ को और बढ़ा रहे हो और इसलिए और
  1173. 1:09:29ज्यादा कॉन्फ्लिक्ट आएगा और ज्यादा दुख।
  1174. 1:09:34लेकिन अगर तुम एनवायरमेंट का असली मतलब
  1175. 1:09:36समझने लग जाओ जैसे पैसा, गरीबी,
  1176. 1:09:41एक्सप्लइटेशन, दबाव, जाति,
  1177. 1:09:44रिलीजन और मॉडर्न जिंदगी की सब बेकार
  1178. 1:09:48चीजें। अगर तुम इन्हें जीतने की नहीं
  1179. 1:09:51बल्कि समझने की कोशिश करो तो फिर आएगा
  1180. 1:09:54इंडिविजुअल एक्शन और एक कंप्लीट
  1181. 1:09:57रिवोल्यूशनरी बदलाव सोच में।
  1182. 1:10:03तब स्ट्रगल नहीं होगा। बस रोशनी अंधेरे को
  1183. 1:10:06मिटा
  1184. 1:10:07देगी। रोशनी और अंधेरे के बीच कभी
  1185. 1:10:11कॉन्फ्लिक्ट नहीं होता। सच और झूठ के बीच
  1186. 1:10:14कॉन्फ्लिक्ट नहीं होता।
  1187. 1:10:18कॉन्फ्लिक्ट सिर्फ तब होता है जब दो
  1188. 1:10:22अपोजिट्स टकराते हैं।
  1189. 1:10:27ओजाई
  1190. 1:10:29कैलिफोर्निया जून 16
  1191. 1:10:391934 द सिग्निफिकेंस ऑफ एनवायरमेंट।
  1192. 1:10:44एनवायरमेंट का असली
  1193. 1:10:48मतलब शायद तुम्हें याद हो कल मैंने बात की
  1194. 1:10:52थी कॉन्फ्लिक्ट के जन्म के बारे
  1195. 1:10:55में और कैसे दिमाग उसका स्यूशन ढूंढने
  1196. 1:10:58लगता
  1197. 1:11:00है हर सुबह मैं पूरी बात करना चाहता हूं
  1198. 1:11:05कॉन्फ्लिक्ट और डिसहार्मोनी के कांसेप्ट
  1199. 1:11:10पर और दिखाना चाहता हूं कि कितना इतना
  1200. 1:11:13बेकार है यह ट्राई करना कि दिमाग उसका
  1201. 1:11:16स्यूशन
  1202. 1:11:18ढूंढे क्योंकि सिर्फ स्यूशन ढूंढने से
  1203. 1:11:21कॉन्फ्लिक्ट खत्म नहीं
  1204. 1:11:24होता। जब तुम स्यूशन ढूंढते हो कोई रास्ता
  1205. 1:11:29कॉन्फ्लिक्ट को खत्म करने
  1206. 1:11:31का तो तुम सिर्फ एक नए आइडिया एक नई
  1207. 1:11:35थ्योरी को उस जगह पर ला रहे होते हो।
  1208. 1:11:40या तुम कॉन्फ्लिक्ट से पूरी तरह भाग जाते
  1209. 1:11:44हो। जब लोग अपने कॉन्फ्लिक्ट का स्यूशन
  1210. 1:11:47चाहते हैं तो वही करते हैं। अगर तुम ध्यान
  1211. 1:11:52से
  1212. 1:11:53देखो तो जब भी कॉन्फ्लिक्ट होता है तुम
  1213. 1:11:57तुरंत उसका स्यूशन ढूंढने लगते
  1214. 1:12:00हो। तुम उससे निकलने का रास्ता चाहते हो
  1215. 1:12:04और ज्यादातर केसेस में तुम्हें कोई रास्ता
  1216. 1:12:07मिल भी जाता है।
  1217. 1:12:10लेकिन तुमने कॉन्फ्लिक्ट सॉल्व नहीं किया
  1218. 1:12:15होता। तुमने बस उसे शिफ्ट कर दिया होता है
  1219. 1:12:20एक नए एनवायरमेंट नए कंडीशन के
  1220. 1:12:23थ्रू। और वह नए कंडीशन भी फिर नए
  1221. 1:12:27कॉन्फ्लिक्ट लाता
  1222. 1:12:29है। तो चलो इस पूरे कॉन्फ्लिक्ट की बात
  1223. 1:12:34करें। वह आता कहां से है और हम
  1224. 1:12:38उसका क्या कर सकते
  1225. 1:12:41हैं? अब कॉन्फ्लिक्ट एनवायरमेंट का रिजल्ट
  1226. 1:12:45है। है
  1227. 1:12:47ना? एक और तरीके से बोलो तो एनवायरमेंट
  1228. 1:12:51क्या होता
  1229. 1:12:53है? तुम एनवायरमेंट को कब महसूस करते हो?
  1230. 1:12:58सिर्फ तब जब तुम उससे टकराते हो या उसे
  1231. 1:13:02रेजिस्ट करते हो।
  1232. 1:13:05अगर तुम अपनी जिंदगी को देखो तो तुम पाओगे
  1233. 1:13:10कि कॉन्फ्लिक्ट बार-बार तुम्हारी लाइफ को
  1234. 1:13:12घुमाता है। उसे तोड़ता है। उसके शेप को
  1235. 1:13:16चेंज करता है। और
  1236. 1:13:20इंटेलिजेंस जो दिमाग और दिल का परफेक्ट
  1237. 1:13:23बैलेंस होता है, उसका तुम्हारी लाइफ में
  1238. 1:13:26कोई रोल ही नहीं बचा होता।
  1239. 1:13:29मतलब एनवायरमेंट बार-बार तुम्हारी लाइफ को
  1240. 1:13:33धक्का देता
  1241. 1:13:35है। उसे एक्शन में लाता है। उसे मोल्ड
  1242. 1:13:39करता
  1243. 1:13:40है। और इस चलते फिरते तोड़ने, मोड़ने,
  1244. 1:13:45घुमाने के प्रोसेस से ही कॉन्फ्लिक्ट पैदा
  1245. 1:13:48होता
  1246. 1:13:49है। तो जहां यह कास्टेंट कॉन्फ्लिक्ट होता
  1247. 1:13:53है, वहां इंटेलिजेंस हो ही नहीं सकती।
  1248. 1:13:58फिर भी हम सोच लेते हैं कि कॉन्फ्लिक्ट के
  1249. 1:14:01थ्रू ही हम इंटेलिजेंट
  1250. 1:14:04बनेंगे, फुलफिलमेंट पाएंगे और अल्टीमेट
  1251. 1:14:07हैप्पीनेस या एक्सटसी तक पहुंच
  1252. 1:14:12जाएंगे। पर कॉन्फ्लिक्ट इकट्ठा करके तुम
  1253. 1:14:15कभी समझदारी से जीना नहीं सीख सकते।
  1254. 1:14:20समझदारी से जीना तभी सीखोगे जब तुम उस
  1255. 1:14:24एनवायरमेंट को समझोगे जो कॉन्फ्लिक्ट
  1256. 1:14:27क्रिएट कर रहा
  1257. 1:14:29है और सिर्फ नए कंडीशंस लाके सब्सीट्यूशन
  1258. 1:14:33करके तुम कुछ सॉल्व नहीं कर रहे हो लेकिन
  1259. 1:14:38अगर तुम ऑब्जर्व
  1260. 1:14:40करो तो जब भी कॉन्फ्लिक्ट होता है दिमाग
  1261. 1:14:43तुरंत सब्सीट्यूशन ढूंढता है। हम कहते हैं
  1262. 1:14:47यह तो हेरिडिटी की वजह से है। यह इकोनॉमिक
  1263. 1:14:51प्रॉब्लम है या पास्ट का एनवायरमेंट
  1264. 1:14:54रिस्पांसिबल
  1265. 1:14:55है। या फिर हम कर्म, पुनर्जन्म या
  1266. 1:14:59इवोल्यूशन पर भरोसा करते
  1267. 1:15:02हैं। हम सिर्फ रीजन देते रहते हैं उस
  1268. 1:15:05कॉन्फ्लिक्ट के लिए जिसमें दिमाग फंसा हुआ
  1269. 1:15:09है। पर हम यह देखते ही नहीं कि
  1270. 1:15:12कॉन्फ्लिक्ट आया कहां से। मतलब
  1271. 1:15:16एनवायरमेंट का असली मतलब समझने की कोशिश
  1272. 1:15:19ही नहीं करते। तो कॉन्फ्लिक्ट सिर्फ तब तक
  1273. 1:15:23है जब तक एनवायरमेंट और आई के बीच रिएक्शन
  1274. 1:15:26है। यह आई भी तो एनवायरमेंट का रिजल्ट ही
  1275. 1:15:31है। एनवायरमेंट हो सकता है इकोनॉमिक या
  1276. 1:15:35सोशल कंडीशन, पॉलिटिक्स,
  1277. 1:15:39पड़ोसी और आई भी वहीं से बना
  1278. 1:15:43है। ज्यादा लोगों को इस कॉन्फ्लिक्ट का
  1279. 1:15:46पता ही नहीं होता।
  1280. 1:15:49जो आई बना है एनवायरमेंट के कारण और
  1281. 1:15:52एनवायरमेंट खुद दोनों के बीच चल रहा होता
  1282. 1:15:55है कास्टेंट
  1283. 1:15:58स्ट्रगल पर लोग इस कंटीन्यूअस फाइट को
  1284. 1:16:01महसूस ही नहीं करते सिर्फ कुछ ही लोग इस
  1285. 1:16:05टकराव डिसहार्मनी और स्ट्रगल को समझते
  1286. 1:16:08हैं। और वह भी तब जब दर्द बहुत गहरा हो
  1287. 1:16:13जाता है। है ना?
  1288. 1:16:17सिर्फ जब दर्द ज्यादा इंटेंस हो तभी
  1289. 1:16:20तुम्हें अपने अंदर का कॉन्फ्लिक्ट दिखाई
  1290. 1:16:22देता
  1291. 1:16:26है। पर जब तुम इस कॉन्फ्लिक्ट को महसूस
  1292. 1:16:30करते
  1293. 1:16:31हो जब तुम दर्द के उस गहरे मोमेंट में
  1294. 1:16:35फुल्ली अवेयर हो जाते हो तब ज्यादा लोग
  1295. 1:16:38तुरंत एक स्यूशन चाहते हैं। एक तुरंत
  1296. 1:16:41रिलीफ, एक तुरंत
  1297. 1:16:44आंसर। वह दर्द से बचने के लिए हर तरह के
  1298. 1:16:47एस्केप ढूंढने लगते हैं। जैसे रिलीजन,
  1299. 1:16:51एक्साइटमेंट, मीनिंगलेस
  1300. 1:16:54चीजें। और वह सब छुपी हुई स्केप के रास्ते
  1301. 1:16:58जो हमने बनाए हैं अपने आप को बचाने के
  1302. 1:17:01लिए।
  1303. 1:17:02दर्द तुम्हें इस कॉन्फ्लिक्ट के बारे में
  1304. 1:17:04जगाता
  1305. 1:17:06है। पर सिर्फ दर्द से तुम उस फुलफिलमेंट
  1306. 1:17:10तक नहीं पहुंचते।
  1307. 1:17:12क्योंकि दर्द सिर्फ दिमाग को ज्यादा शार्प
  1308. 1:17:16बनाता है। और जब दिमाग शार्प हो जाता है
  1309. 1:17:20तो वह सवाल करना शुरू करता
  1310. 1:17:23है अपने एनवायरमेंट से, अपनी कंडीशन से और
  1311. 1:17:29इसी क्वेश्चनिंग में इंटेलिजेंस कम करने
  1312. 1:17:32लगता
  1313. 1:17:33है। और सिर्फ वही इंटेलिजेंस तुम्हें ले
  1314. 1:17:37जा सकती है उस
  1315. 1:17:39फुलनेस उस लाइफ के सच्चे टेस्ट तक और दर्द
  1316. 1:17:43के असली मतलब तक।
  1317. 1:17:46इंटेलिजेंस तभी काम करती है जब दर्द इतना
  1318. 1:17:49गहरा हो जाता है कि दिमाग और दिल दोनों
  1319. 1:17:53भागना बंद कर देते
  1320. 1:17:55हैं। उन सब रास्ते से भागना बंद जो तुमने
  1321. 1:17:59बड़ी चालाकी से बनाए
  1322. 1:18:02हैं। जो दिखते हैं लॉजिकल, रियल, सच्चे।
  1323. 1:18:09अगर तुम बिना बायस के ध्यान से देखो तो
  1324. 1:18:13तुम देखोगे कि जब तक तुम भाग रहे हो तब तक
  1325. 1:18:18तुम कॉन्फ्लिक्ट का सामना नहीं कर
  1326. 1:18:20रहे और तब तक तुम्हारा दर्द सिर्फ
  1327. 1:18:24इग्नोरेंस को और बड़ा कर रहा है
  1328. 1:18:28मतलब जब तुम इन सब जाने पहचाने रास्ते से
  1329. 1:18:33भागना बंद कर देते हो तब उस दर्द के गहरे
  1330. 1:18:37मोमेंट में इंटेलिजेंस काम करना शुरू करती
  1331. 1:18:43है। प्लीज मैं तुम्हें कोई एग्जांपल
  1332. 1:18:47या सिमली नहीं देना
  1333. 1:18:50चाहता क्योंकि मैं चाहता हूं कि तुम खुद
  1334. 1:18:55सोचो। अगर मैं एग्जांपल दूं तो सारा सोचना
  1335. 1:19:00मैं ही कर लेता हूं और तुम सिर्फ सुनते
  1336. 1:19:02हो।
  1337. 1:19:04लेकिन अगर तुम सोचना शुरू करो जो मैं कह
  1338. 1:19:07रहा
  1339. 1:19:08हूं तो तुम देख पाओगे समझ पाओगे कि दिमाग
  1340. 1:19:14जो इतना आदत में पड़ चुका है सब्सीट्यूशन
  1341. 1:19:18अथॉरिटी और एस्केप की वह कभी भी उस गहरे
  1342. 1:19:22दर्द के पॉइंट तक नहीं
  1343. 1:19:24पहुंचता जहां इंटेलिजेंस को काम करना
  1344. 1:19:27पड़ता
  1345. 1:19:29है और सिर्फ तभी जब इंटेलिजेंस पूरी तरह
  1346. 1:19:33से काम करता है तभी कॉन्फ्लिक्ट के कॉज का
  1347. 1:19:37पूरा खात्मा हो सकता
  1348. 1:19:40है। जब तक हम एनवायरमेंट को समझते नहीं तब
  1349. 1:19:44तक कॉन्फ्लिक्ट हमेशा
  1350. 1:19:47रहेगा। एनवायरमेंट कॉन्फ्लिक्ट को जन्म
  1351. 1:19:50देता है। और जब तक हम एनवायरमेंट
  1352. 1:19:54कंडीशंस सराउंडिंग्स को समझे
  1353. 1:19:57बिना सिर्फ उनके लिए नए सब्सीट्यूट्स
  1354. 1:20:01ढूंढते हैं। तब तक हम एक कॉन्फ्लिक्ट से
  1355. 1:20:05भागकर दूसरे में जा रहे हैं।
  1356. 1:20:09लेकिन अगर उस गहरे दर्द के मोमेंट में
  1357. 1:20:13जहां कॉन्फ्लिक्ट अपने प्योर फॉर्म में
  1358. 1:20:16सामने आता
  1359. 1:20:18है। अगर उस मोमेंट में हम एनवायरमेंट को
  1360. 1:20:22क्वेश्चन करते हैं तो हम एनवायरमेंट की
  1361. 1:20:26असली वैल्यू समझने लगते हैं। और तब
  1362. 1:20:29इंटेलिजेंस नेचुरली काम करता
  1363. 1:20:33है। अब तक दिमाग ने खुद को कॉन्फ्लिक्ट,
  1364. 1:20:37एनवायरमेंट और एस्केप से जोड़ लिया था।
  1365. 1:20:41इसलिए दर्द भी लगातार चलता
  1366. 1:20:45रहा। तुम कहते हो मैं सफर कर रहा हूं।
  1367. 1:20:50लेकिन जब दर्द इतना गहरा हो जाता है कि
  1368. 1:20:53एस्केप का कोई रास्ता नहीं बचा। तभी दिमाग
  1369. 1:20:57खुद इंटेलिजेंस बन जाता
  1370. 1:20:59है। एक और सिंपल तरीके से बोलो।
  1371. 1:21:04तो जब तक हम स्यूशन ढूंढ रहे हैं,
  1372. 1:21:07सब्सीटशंस चाह रहे हैं, अथॉरिटी को फॉलो
  1373. 1:21:11कर रहे हैं कॉन्फ्लिक्ट के रीजन और उससे
  1374. 1:21:14बचने के लिए तब तक दिमाग किसी एक चीज से
  1375. 1:21:18चिपका रहता है।
  1376. 1:21:21लेकिन अगर दिमाग उस इंटेंस सफरिंग में हो
  1377. 1:21:24जहां हर एस्केप का रास्ता बंद हो चुका हो
  1378. 1:21:28तब इंटेलिजेंस अपने आप जाग जाती है। और
  1379. 1:21:32नेचुरली बिना फोर्स के काम करती
  1380. 1:21:37है। अगर तुम इस बात को खुद टेस्ट करो तो
  1381. 1:21:41तुम देखोगे कि मैं तुम्हें थ्यरी नहीं दे
  1382. 1:21:44रहा बल्कि एक ऐसी बात बताता हूं जिसे तुम
  1383. 1:21:48खुद यूज कर सकते हो। एक प्रैक्टिकल
  1384. 1:21:52बात तुम्हारे ऊपर बहुत सारे एनवायरमेंट्स
  1385. 1:21:55थोपे गए हैं। सोसाइटी, रिलीजन, इकोनॉमिक
  1386. 1:22:00कंडीशंस, सोशल डिवाइड, एक्सप्लइटेशन और
  1387. 1:22:04पॉलिटिक्स के थ्रू।
  1388. 1:22:08आई जो है तुम्हारे अंदर वह सब इसी फोर्स
  1389. 1:22:12और प्रेशर से बना है। और अब वही आई उस
  1390. 1:22:16एनवायरमेंट से लड़ रहा है। इसलिए
  1391. 1:22:18कॉन्फ्लिक्ट
  1392. 1:22:20है। नए एनवायरमेंट बनाने का कोई फायदा
  1393. 1:22:24नहीं। क्योंकि वही पुरानी चीज फिर से वापस
  1394. 1:22:28आएगी।
  1395. 1:22:30पर अगर उस कॉन्फ्लिक्ट के अंदर एक
  1396. 1:22:32कॉन्शियस दर्द हो और हमेशा कॉन्फ्लिक्ट
  1397. 1:22:36में दर्द होता ही है।
  1398. 1:22:41लेकिन इंसान उससे भाग जाता है और
  1399. 1:22:43सब्स्टट्यूट ढूंढने लगता
  1400. 1:22:45है। अगर उस इंटेंस दर्द के मोमेंट में तुम
  1401. 1:22:50सब्स्टट्यूट ढूंढना बंद कर दो और सच का
  1402. 1:22:53सामना करो। तो तुम देखोगे कि दिमाग जो
  1403. 1:22:58इंटेलिजेंस का टोटल होता है वह एनवायरमेंट
  1404. 1:23:01की असली वैल्यू को देखना शुरू करता
  1405. 1:23:05है और तब तुम समझोगे कि दिमाग कॉन्फ्लिक्ट
  1406. 1:23:09से फ्री हो गया है। उस गहरे दर्द के
  1407. 1:23:13मोमेंट में ही उसका अपना खात्मा छुपा होता
  1408. 1:23:16है। यही कॉन्फ्लिक्ट के कॉज को समझने का
  1409. 1:23:20असली रास्ता
  1410. 1:23:21है। एक बात और याद रखनी
  1411. 1:23:25चाहिए जो हम कहते हैं सौरों का इकट्ठा
  1412. 1:23:30होना वह इंटेंसिटी नहीं लाता ना ही सफरिंग
  1413. 1:23:34का बढ़ जाने से वह अपने आप खत्म होती है।
  1414. 1:23:38दर्द के वक्त दिमाग तभी शार्प होता है जब
  1415. 1:23:41वह भागना बंद कर देता है और जब तक दिमाग
  1416. 1:23:45भाग रहा है तब तक कोई कॉन्फ्लिक्ट उसे
  1417. 1:23:49जगाती नहीं।
  1418. 1:23:52क्योंकि एस्केप में कभी इंटेलिजेंस नहीं
  1419. 1:23:54होती। एक और शॉर्ट में बोलूं तो सब लोग
  1420. 1:23:58सफरिंग और क्फ्लिक्ट में फंसे हुए हैं। पर
  1421. 1:24:02ज्यादा लोगों को उसका पता ही नहीं। वह
  1422. 1:24:05सिर्फ स्यूशन, सब्स्टट्यूट और एस्केप ढूंढ
  1423. 1:24:08रहे हैं।
  1424. 1:24:11लेकिन अगर वह एस्केप ढूंढना बंद कर दें और
  1425. 1:24:14उस एनवायरमेंट को क्वेश्चन करना शुरू कर
  1426. 1:24:16दें जो कॉन्फ्लिक्ट ला रहा है तो दिमाग
  1427. 1:24:20शार्प हो जाता है, जिंदा हो जाता है,
  1428. 1:24:23इंटेलिजेंट हो जाता
  1429. 1:24:25है। उस इंटेंसिटी में ही दिमाग बन जाता है
  1430. 1:24:28इंटेलिजेंस।
  1431. 1:24:30और तब वह देख पाता है एनवायरमेंट की असली
  1432. 1:24:34वैल्यू और
  1433. 1:24:35मीनिंग जो कॉन्फ्लिक्ट को क्रिएट कर रहा
  1434. 1:24:39था। मुझे पता है आधे लोग यह बात नहीं समझे
  1435. 1:24:43होंगे लेकिन कोई बात
  1436. 1:24:46नहीं। तुम इतना कर सकते हो कि इस बात पे
  1437. 1:24:49सीरियसली सोचो। सच्चे दिल से सोचो और देखो
  1438. 1:24:55कि जो मैं कह रहा हूं वह सच है या नहीं।
  1439. 1:25:00लेकिन सोचने का मतलब यह नहीं कि तुम बस
  1440. 1:25:03दिमाग से घूमते रहो और बात को खत्म कर
  1441. 1:25:08दो। अगर तुम सच में समझना चाहते हो कि यह
  1442. 1:25:11बात सच है या नहीं तो तुम्हें इसे एक्शन
  1443. 1:25:16में लाना
  1444. 1:25:17होगा। और एक्शन में लाने के लिए तुम्हें
  1445. 1:25:20एनवायरमेंट को क्वेश्चन करना होगा।
  1446. 1:25:24मतलब अगर तुम कॉन्फ्लिक्ट में हो तो
  1447. 1:25:28तुम्हें नेचुरली अपने एनवायरमेंट को देखना
  1448. 1:25:30होगा।
  1449. 1:25:32लेकिन ज्यादा लोगों के दिमाग इतने उल्टे
  1450. 1:25:35हो गए हैं कि उन्हें पता ही नहीं कि वह
  1451. 1:25:37स्यूशन एस्केप और थरीज के पीछे भाग रहे
  1452. 1:25:42हैं। वह बिल्कुल परफेक्ट लॉजिक लगाते हैं।
  1453. 1:25:46पर वह लॉजिक भी बस एस्केप ढूंढने के लिए
  1454. 1:25:50होता है और उन्हें इसका पता भी नहीं
  1455. 1:25:54होता। तो अगर कॉन्फ्लिक्ट है और अगर तुम
  1456. 1:25:58उस कॉन्फ्लिक्ट का रीजन समझना चाहते हो
  1457. 1:26:01तो दिमाग को नेचुरली उसे ढूंढना होगा
  1458. 1:26:06शार्प थिंकिंग के
  1459. 1:26:07थ्रू और इसलिए तुम्हें क्वेश्चन करना
  1460. 1:26:11पड़ेगा उन सब चीजों को जो एनवायरमेंट ने
  1461. 1:26:15तुम्हारे आसपास रखा है जैसे तुम्हारा
  1462. 1:26:19परिवार तुम्हारे पड़ोसी तुम्हारा धर्म
  1463. 1:26:23तुम्हारी पॉलिटिकल
  1464. 1:26:26अथॉरिटी और जब तुम इन सबको क्वेश्चन करोगे
  1465. 1:26:29तब एनवायरमेंट के अगेंस्ट एक्शन
  1466. 1:26:32होगा। परिवार है, पड़ोसी है और स्टेट है।
  1467. 1:26:37और जब तुम उनका मतलब क्वेश्चन करते हो तब
  1468. 1:26:41तुम देखते हो कि इंटेलिजेंस एकदम नेचुरल
  1469. 1:26:44होती है। ना उसे सीखना पड़ता है ना बनाना
  1470. 1:26:49पड़ता
  1471. 1:26:50है। जब तुम अवेयर होते हो तो वही अवेयरनेस
  1472. 1:26:54इंटेलिजेंस का फूल बन जाती है।
  1473. 1:27:00सवाल करने
  1474. 1:27:02वाले आप कहते हैं कि आई एनवायरमेंट का
  1475. 1:27:05रिजल्ट है। क्या आपका मतलब है कि अगर
  1476. 1:27:08परफेक्ट एनवायरमेंट हो तो आई का
  1477. 1:27:11कॉन्शियसनेस डेवलप नहीं होगा। अगर हां तो
  1478. 1:27:14जो परफेक्ट फ्रीडम की बात आप करते हैं वह
  1479. 1:27:17सिर्फ सही एनवायरमेंट बनाने की बात बन
  1480. 1:27:19जाती है। क्या यह सही है?
  1481. 1:27:28रुको
  1482. 1:27:30जरा। क्या कभी परफेक्ट एनवायरमेंट हो सकता
  1483. 1:27:34है? नहीं हो
  1484. 1:27:36सकता। तो चलो इस बात को मिलके समझते हैं।
  1485. 1:27:39पूरा एक्सप्लोर करते हैं। एनवायरमेंट क्या
  1486. 1:27:43है? यह पूरा ह्यूमन स्ट्रक्चर बना है
  1487. 1:27:47इंसान के डर, चाह, उम्मीद, इच्छा और
  1488. 1:27:52सक्सेस से।
  1489. 1:27:54अब तुम एक परफेक्ट एनवायरमेंट नहीं बना
  1490. 1:27:57सकते क्योंकि हर आदमी अपनी इच्छा और सोच
  1491. 1:28:01के हिसाब से नए कंडीशंस क्रिएट करता रहता
  1492. 1:28:04है। लेकिन अगर तुम्हारा दिमाग इंटेलिजेंट
  1493. 1:28:07है तो तुम इन सब
  1494. 1:28:12झूठी एनवायरमेंट्स के पार देख सकते
  1495. 1:28:17हो। और इसलिए तुम आई के कॉन्शियसनेस से
  1496. 1:28:21फ्री हो जाते हो।
  1497. 1:28:24देखो आई कॉन्शियसनेस यानी मेरा
  1498. 1:28:29सोचना। वह एनवायरमेंट का रिजल्ट ही तो है।
  1499. 1:28:32है ना?
  1500. 1:28:35मुझे नहीं लगता इस बात पर ज्यादा डिस्कशन
  1501. 1:28:38की जरूरत
  1502. 1:28:39है क्योंकि यह बिल्कुल साफ है। अगर स्टेट
  1503. 1:28:44तुम्हें घर दे दे और तुम्हारी सब जरूरत की
  1504. 1:28:47चीजें दे दे तो मेरा घर वाली फीलिंग की
  1505. 1:28:51जरूरत नहीं होती। हो सकता है कोई और मेरा
  1506. 1:28:55का सेंस आए।
  1507. 1:28:58लेकिन अब हम यहां एक पर्टिकुलर चीज की बात
  1508. 1:29:01कर रहे हैं। अभी तुम्हारे केस में ऐसा
  1509. 1:29:04नहीं हुआ।
  1510. 1:29:06इसलिए मेरा का सेंस है, पोजेसिवनेस
  1511. 1:29:10है और यह एनवायरमेंट का रिजल्ट है। वो आई
  1512. 1:29:15सिर्फ एनवायरमेंट का झूठा रिएक्शन है।
  1513. 1:29:22लेकिन अगर दिमाग एनवायरमेंट को क्वेश्चन
  1514. 1:29:25करना शुरू करे तो फिर रिएक्शन ही नहीं
  1515. 1:29:28होता एनवायरमेंट के साथ।
  1516. 1:29:31इसलिए हमें यह सोचने की जरूरत नहीं है कि
  1517. 1:29:34कोई परफेक्ट एनवायरमेंट बन सकता है या
  1518. 1:29:38नहीं।
  1519. 1:29:40देखो परफेक्ट एनवायरमेंट होता क्या है? हर
  1520. 1:29:44आदमी तुम्हें अलग जवाब देगा। आर्टिस्ट कुछ
  1521. 1:29:47और बोलेगा, बिजनेसमैन कुछ और, एक्ट्रेस
  1522. 1:29:51कुछ
  1523. 1:29:52और। हर आदमी के लिए परफेक्ट एनवायरमेंट
  1524. 1:29:56वही है जो उसे सेटिसफाई करें।
  1525. 1:30:00जो उसके अंदर कॉन्फ्लिक्ट ना
  1526. 1:30:03बनाए। तो परफेक्ट एनवायरमेंट का मतलब ही
  1527. 1:30:06हर किसी के लिए अलग होता है। इसीलिए
  1528. 1:30:10परफेक्ट एनवायरमेंट पॉसिबल ही नहीं। लेकिन
  1529. 1:30:13अगर इंटेलिजेंस हो तो एनवायरमेंट की कोई
  1530. 1:30:17वैल्यू ही नहीं बची। क्योंकि इंटेलिजेंस
  1531. 1:30:20फिर फ्री होता है हर कंडीशन से। वह पूरी
  1532. 1:30:24तरह काम करता है। सवाल यह नहीं है कि हम
  1533. 1:30:28परफेक्ट एनवायरमेंट बना सकते हैं या नहीं।
  1534. 1:30:32सवाल यह है कि हम कैसे उस इंटेलिजेंस को
  1535. 1:30:36जगाएं जो एनवायरमेंट से बिल्कुल फ्री हो।
  1536. 1:30:40चाहे वह परफेक्ट हो या
  1537. 1:30:43इंपपरफेक्ट। मैं कहता हूं तुम इस
  1538. 1:30:46इंटेलिजेंस को तब जगा सकते हो जब तुम उस
  1539. 1:30:50एनवायरमेंट की पूरी वैल्यू को क्वेश्चन
  1540. 1:30:52करो। जिसमें तुम्हारा दिमाग फंसा हुआ
  1541. 1:30:57है। तब तुम देखोगे कि तुम किसी पर्टिकुलर
  1542. 1:31:01एनवायरमेंट से फ्री हो गए हो। क्योंकि अब
  1543. 1:31:04तुम इंटेलिजेंटली फंक्शन कर रहे हो।
  1544. 1:31:08एनवायरमेंट तुम्हें ट्विस्ट या शेप नहीं
  1545. 1:31:11कर रहा।
  1546. 1:31:16सवाल आप जो कह रहे हैं क्या आप सच में वही
  1547. 1:31:21मतलब निकाल रहे हैं जब मैं दुनिया में
  1548. 1:31:24इतनी बुराई देखता हूं तो मेरे अंदर एक
  1549. 1:31:27स्ट्रांग इच्छा होती है उसके खिलाफ लड़ने
  1550. 1:31:29की और उस दुख के खिलाफ जो वह इंसानों की
  1551. 1:31:32जिंदगी में लाती है इसका मतलब होता है
  1552. 1:31:35बड़ा
  1553. 1:31:38कॉन्फ्लिक्ट क्योंकि जब मैं हेल्प करता
  1554. 1:31:40हूं तो लोग मुझे फोर्सफुली अपोज करते हैं
  1555. 1:31:43तो फिर आप कैसे कह सकते
  1556. 1:31:45हैं कि सच और झूठ के बीच कोई कॉन्फ्लिक्ट
  1557. 1:31:49नहीं होता।
  1558. 1:31:56मैंने कल कहा था कि स्ट्रगल सिर्फ दो झूठ
  1559. 1:32:00चीजों के बीच होता
  1560. 1:32:03है। कॉन्फ्लिक्ट होता है एनवायरमेंट और
  1561. 1:32:06एनवायरमेंट के
  1562. 1:32:08रिजल्ट यानी आई के बीच और इन दोनों के बीच
  1563. 1:32:13आई ने बनाई है कई स्केप के रास्ते जिसे हम
  1564. 1:32:17कहते हैं वाइस गुडनेस मोरलिटी मोरलील
  1565. 1:32:22स्टैंडर्ड्स डर और और भी बहुत सारे
  1566. 1:32:27अपोजिट्स तो स्ट्रगल सिर्फ इन दोनों के
  1567. 1:32:30बीच होता है एनवायरमेंट के झूठे क्रिएशन
  1568. 1:32:34यानी आई और खुद एनवायरमेंट के बीच।
  1569. 1:32:40लेकिन सच और झूठ के बीच कभी स्ट्रगल नहीं
  1570. 1:32:43होता। यह बात तो बिल्कुल साफ है। है
  1571. 1:32:47ना? हो सकता है तुम्हें लोग बुरी तरीके से
  1572. 1:32:51अपोज करें। क्योंकि वह आदमी इग्नोरेंट है।
  1573. 1:32:56इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हें फाइट नहीं
  1574. 1:32:59करनी चाहिए। पर तुम यह मत समझना कि
  1575. 1:33:02तुम्हारा फाइट करना राइट है। देखो हर काम
  1576. 1:33:07का एक नेचुरल तरीका होता
  1577. 1:33:10है। एक स्पॉनटेनियस और मीठा तरीका बिना उस
  1578. 1:33:15अग्रेसिव वायलेंट मैं सही हूं के एटीट्यूड
  1579. 1:33:21के। सबसे पहले अगर तुम्हें फाइट करनी है
  1580. 1:33:25तो तुम्हें यह समझना होगा कि तुम किस चीज
  1581. 1:33:27से लड़ रहे हो।
  1582. 1:33:30इसका मतलब है तुम्हें बेसिक फंडामेंटल बात
  1583. 1:33:34समझनी होगी ना कि दो झूठ चीजों के बीच के
  1584. 1:33:38डिवाइड को।
  1585. 1:33:40अभी हम इतने ज्यादा कॉन्शियस हैं। इतने
  1586. 1:33:45अवेयर हैं इन झूठी चीजों के बीच के
  1587. 1:33:47डिफरेंस को, एनवायरमेंट और उसके रिजल्ट के
  1588. 1:33:51बीच कि हम उनसे लड़ते हैं। और इसलिए हम
  1589. 1:33:54रिफॉर्म चाहते हैं, बदलाव चाहते हैं।
  1590. 1:33:58लेकिन बिना पूरे इंसानी जिंदगी के
  1591. 1:34:01स्ट्रक्चर को बदले।
  1592. 1:34:04मतलब हम आई कॉन्शियसनेस को बचाए रखना
  1593. 1:34:08चाहते हैं जो कि एनवायरमेंट का एक झूठा
  1594. 1:34:12रिएक्शन है और फिर भी दुनिया को बदलना
  1595. 1:34:16चाहते हैं। सीधी बात यह है कि तुम चाहते
  1596. 1:34:20हो तुम्हारा अपना बैंक अकाउंट हो। अपनी
  1597. 1:34:23चीजें हो। तुम मेरा का फीलिंग रखना चाहते
  1598. 1:34:27हो। और फिर भी चाहते हो कि दुनिया ऐसी हो
  1599. 1:34:30जहां मेरा और तेरा का कांसेप्ट ही ना
  1600. 1:34:34हो। तो असली काम यह है देखना कि क्या तुम
  1601. 1:34:38बेसिक बात से डील कर रहे हो या सिर्फ ऊपर
  1602. 1:34:42ऊपर की बातों
  1603. 1:34:44से। मेरे लिए ऊपर ऊपर की बात तब तक रहेगी
  1604. 1:34:48जब तक तुम सिर्फ एनवायरमेंट को चेंज करके
  1605. 1:34:52कॉन्फ्लिक्ट को कम करने की सोच में हो।
  1606. 1:34:56मतलब तुम अभी भी आई को पकड़े हुए हो। पर
  1607. 1:35:00चाहते हो कि कंडीशंस ऐसे हो जाए कि वह आई
  1608. 1:35:04कॉन्फ्लिक्ट फील ना
  1609. 1:35:07करें। मैं इसे कहता हूं सुपरफिशियल
  1610. 1:35:12सोच। और इससे ही आता है सुपरफिशियल एक्शन।
  1611. 1:35:18लेकिन अगर तुम बेसिक लेवल पर
  1612. 1:35:20सोचो मतलब तुम खुद एनवायरमेंट के रिजल्ट
  1613. 1:35:23को यानी आई को क्वेश्चन
  1614. 1:35:26करो और इसलिए खुद एनवायरमेंट को क्वेश्चन
  1615. 1:35:29करो तो फिर तुम फंडामेंटली काम कर रहे हो
  1616. 1:35:34और वही काम रियल होता है लास्टिंग होता है
  1617. 1:35:38और उसमें एक आनंद होता है एक जॉय जो अभी
  1618. 1:35:42तुम नहीं जानते क्योंकि तुम बेसिक तरीके
  1619. 1:35:46से एक्ट करना करने से डरते
  1620. 1:35:49हो।
  1621. 1:35:52सवाल कल आपने कहा था कि एनवायरमेंट एक
  1622. 1:35:55झूठी मूवमेंट है। क्या आप नेचर के सब
  1623. 1:35:58क्रिएशन को भी एनवायरमेंट में इंक्लूड
  1624. 1:36:00करते हैं? जैसे ह्यूमन
  1625. 1:36:08फॉर्म। क्या एनवायरमेंट लगातार चेंज नहीं
  1626. 1:36:12होता? होता है ना? ज्यादा लोगों के लिए तो
  1627. 1:36:16नहीं होता क्योंकि चेंज का मतलब होता है
  1628. 1:36:19कास्टेंटली एडजस्ट करना और इसलिए दिमाग का
  1629. 1:36:24हमेशा अवेयर रहना।
  1630. 1:36:27पर ज्यादा लोग बस स्टेबल एनवायरमेंट में
  1631. 1:36:29जीना चाहते हैं। लेकिन एनवायरमेंट तो चल
  1632. 1:36:33ही रहा होता है क्योंकि वह आपके कंट्रोल
  1633. 1:36:37के बाहर है और जब तक आप उसका मतलब नहीं
  1634. 1:36:41समझते तब तक वह झूठा ही होता
  1635. 1:36:46है। क्या एनवायरमेंट में ह्यूमन फॉर्म्स
  1636. 1:36:49आते हैं? तो फिर तुम उन्हें नेचर से अलग
  1637. 1:36:52क्यों करते हो?
  1638. 1:36:54देखो हम नेचर से ज्यादा कंसर्न नहीं है
  1639. 1:36:59क्योंकि हमने उस पर लगभग कंट्रोल पा लिया
  1640. 1:37:02है।
  1641. 1:37:04लेकिन हमने जो ह्यूमन एनवायरमेंट बनाया है
  1642. 1:37:08उसे हम समझ नहीं पाए हैं।
  1643. 1:37:11सोचो इंसान और इंसान के बीच के रिलेशन को
  1644. 1:37:16और वह सब कंडीशन जो इंसान ने बनाई है
  1645. 1:37:20उन्हें हम अभी तक नहीं समझ पाए। चाहे हमने
  1646. 1:37:23साइंस से नेचर को काफी हद तक समझ लिया
  1647. 1:37:28हो तो हम उस एनवायरमेंट के स्टेबिलिटी से
  1648. 1:37:31कंसर्न नहीं है जो हम समझ गए
  1649. 1:37:35हैं क्योंकि जैसे ही तुम उसे समझ लेते
  1650. 1:37:41हो कॉन्फ्लिक्ट खत्म हो जाता है हम चाहते
  1651. 1:37:46हैं सिक्योरिटी इमोशनल और
  1652. 1:37:49मेंटल और जब तक वह सिक्योरिटी बनी रहती है
  1653. 1:37:53तब तक हम खुश रहते हैं। इसलिए हम कभी
  1654. 1:37:57एनवायरमेंट को क्वेश्चन ही नहीं करते।
  1655. 1:38:00इसलिए एनवायरमेंट का कांस्टेंट चेंज एक
  1656. 1:38:03झूठ बन जाता है जो हर एक के अंदर
  1657. 1:38:07डिस्टरबेंस क्रिएट करता
  1658. 1:38:11है। जब तक कॉन्फ्लिक्ट है इसका मतलब हमने
  1659. 1:38:15अपने आसपास की कंडीशंस को नहीं समझा है।
  1660. 1:38:19और जब तक हम एनवायरमेंट का मतलब नहीं
  1661. 1:38:22समझते तब तक वह मूवमेंट झूठा रहेगा।
  1662. 1:38:26और उसका असली मतलब सिर्फ तब समझ में आता
  1663. 1:38:29है जब दर्द बहुत गहरा हो जाता है और तुम
  1664. 1:38:34उस पेन में फुल्ली अवेयर हो जाते
  1665. 1:38:38हो।
  1666. 1:38:41सवाल मुझे बिल्कुल क्लियर है कि आई
  1667. 1:38:44कॉन्शियसनेस एनवायरमेंट का रिजल्ट है। पर
  1668. 1:38:47क्या आप नहीं देखते कि यह आई इस लाइफ में
  1669. 1:38:50फर्स्ट टाइम स्टार्ट नहीं हुआ।
  1670. 1:38:53आपके कहने से लगता है कि आई पास्ट में भी
  1671. 1:38:56था और फ्यूचर में भी
  1672. 1:39:01रहेगा। मुझे पता है तुम यह सवाल पुनर्जन्म
  1673. 1:39:05पर लाना चाहते हो।
  1674. 1:39:08लेकिन चलो इसे समझते
  1675. 1:39:10हैं। सबसे
  1676. 1:39:13पहले अगर तुम थोड़ा सोचो तो तुम मानोगे कि
  1677. 1:39:18आई एनवायरमेंट का रिजल्ट है। मेरे लिए यह
  1678. 1:39:22इंपॉर्टेंट नहीं है कि वह पास्ट
  1679. 1:39:24एनवायरमेंट हो या
  1680. 1:39:27प्रेजेंट। एनवायरमेंट हमेशा पास्ट का भी
  1681. 1:39:30होता
  1682. 1:39:31है। तुमने कुछ किया जो तुम समझ नहीं पाए।
  1683. 1:39:35कल तुमने कुछ किया जो तुमसे क्लियर नहीं
  1684. 1:39:38हुआ और जब तक तुम उसे समझते नहीं वह
  1685. 1:39:42तुम्हें फॉलो करता
  1686. 1:39:44रहेगा। तुम पास्ट एनवायरमेंट को सॉल्व
  1687. 1:39:47नहीं कर सकते। जब तक तुम प्रेजेंट में
  1688. 1:39:49पूरी तरह अवेयर नहीं हो तो पास्ट या
  1689. 1:39:53प्रेजेंट कंडीशन से दिमाग कितना भी बर्डन
  1690. 1:39:57हो फर्क नहीं पड़ता।
  1691. 1:40:01जो जरूरी है वह यह है कि तुम एनवायरमेंट
  1692. 1:40:04को समझो और तभी दिमाग कॉन्फ्लिक्ट से फ्री
  1693. 1:40:07हो जाता
  1694. 1:40:10है। कुछ लोग मानते हैं कि आई का जन्म बहुत
  1695. 1:40:14पुराने समय में हुआ था और वह आगे फ्यूचर
  1696. 1:40:17में भी चलता
  1697. 1:40:19रहेगा। मेरे लिए यह बात बिल्कुल बेकार है।
  1698. 1:40:23इसका कोई मतलब नहीं। मैं तुम्हें बताता
  1699. 1:40:26हूं क्यों।
  1700. 1:40:29अगर आई एनवायरमेंट का रिजल्ट है। अगर आई
  1701. 1:40:33सिर्फ कॉन्फ्लिक्ट का एसेंस
  1702. 1:40:36है तो दिमाग को यह देखना चाहिए कि कैसे उस
  1703. 1:40:40कॉन्फ्लिक्ट से फ्री हुआ जाए ना कि उस
  1704. 1:40:44कॉन्फ्लिक्ट को बनाए रखने का सोचना।
  1705. 1:40:48इसलिए यह इंपॉर्टेंट नहीं है कि पास्ट
  1706. 1:40:50एनवायरमेंट ने दिमाग को तोड़ दिया है या
  1707. 1:40:54प्रेजेंट उसे बिगाड़ रहा है या आई का जन्म
  1708. 1:40:58बहुत पहले हुआ
  1709. 1:41:01था। जो मैटर करता है वह यह है कि जब तुम
  1710. 1:41:06दर्द में होते हो जब तुम उस सफरिंग को
  1711. 1:41:10पूरी तरह से महसूस करते हो। उस इंटेंस
  1712. 1:41:13सफरिंग के मोमेंट में ही आई का खात्मा
  1713. 1:41:17होता है। यहीं से कर्म का आईडिया आता
  1714. 1:41:21है। तुम जानते हो कर्म का मतलब कि तुम आज
  1715. 1:41:26अपने पास्ट का बोझ ले जी रहे
  1716. 1:41:28हो। मतलब तुम पास्ट का एनवायरमेंट लेकर
  1717. 1:41:32प्रेजेंट में आए हो। और उस बर्डन के चलते
  1718. 1:41:35तुम फ्यूचर को कंट्रोल करते हो। फ्यूचर को
  1719. 1:41:38शेप देते हो।
  1720. 1:41:43अगर तुम थोड़ा सोचो तो यह बात ऑब्वियस है।
  1721. 1:41:46अगर तुम्हारा दिमाग पास्ट के कारण बिगड़
  1722. 1:41:50गया है तो नेचुरली तुम्हारा फ्यूचर भी
  1723. 1:41:52बिगड़ जाएगा। क्योंकि अगर तुमने कल के
  1724. 1:41:56एनवायरमेंट को नहीं समझा तो वह आज भी चलता
  1725. 1:42:00रहेगा। और अगर तुम आज को नहीं समझ पा रहे
  1726. 1:42:04हो तो कल को भी नहीं समझ पाओगे।
  1727. 1:42:08मतलब अगर तुमने किसी एनवायरमेंट या एक्शन
  1728. 1:42:11का पूरा मतलब नहीं देखा तो वह तुम्हारी आज
  1729. 1:42:16की सोच को बिगाड़ता
  1730. 1:42:19है। और आज का एक्शन फिर से कल को बिगाड़
  1731. 1:42:23देगा। इस तरह तुम एक वियस सर्कल में फंसे
  1732. 1:42:27जाते हो।
  1733. 1:42:30और इसी वजह से लोग कहते हैं रिब्थ या
  1734. 1:42:34यादों का
  1735. 1:42:35पुनर्जन्म या दिमाग का रिब्थ एनवायरमेंट
  1736. 1:42:39के थ्रू होता
  1737. 1:42:40है। पर मैं कहता हूं दिमाग पास्ट से फ्री
  1738. 1:42:44हो सकता है। पास्ट के एनवायरमेंट और
  1739. 1:42:48रुकावटों से आजाद हो सकता है और इसीलिए
  1740. 1:42:51तुम फ्यूचर से भी फ्री हो सकते हो क्योंकि
  1741. 1:42:55तब तुम प्रेजेंट में जिंदा हो।
  1742. 1:42:59पूरे स्ट्रेंथ के साथ इंटेंस तरीके से
  1743. 1:43:03एकदम अलाइव
  1744. 1:43:05होकर प्रेजेंट में ही एटरर्निटी छुपी है
  1745. 1:43:11और इसे समझने के लिए दिमाग को पास्ट के
  1746. 1:43:15बोझ से फ्री करना होगा और पास्ट से फ्री
  1747. 1:43:19होने के लिए तुम्हें प्रेजेंट को इंटेंसली
  1748. 1:43:23क्वेश्चन करना होगा ना कि यह सोचना होगा
  1749. 1:43:26कि आई फ्यूचर में कैसे
  1750. 1:43:30चलेगा उजाई
  1751. 1:43:34कैलिफोर्निया जून 17
  1752. 1:43:421934 अ डायनेमिक सोसाइटी एक जिंदा
  1753. 1:43:48समाज आज हम कुछ और सवालों के जवाब
  1754. 1:43:52देंगे
  1755. 1:43:54सवाल सेल्फ डिसिप्लिन और सप्रेशन में क्या
  1756. 1:43:58फर्क
  1757. 1:44:02है? मुझे नहीं लगता कि इन दोनों में
  1758. 1:44:05ज्यादा फर्क
  1759. 1:44:07है क्योंकि दोनों ही इंटेलिजेंस को मना
  1760. 1:44:10करते
  1761. 1:44:11हैं। सप्रेशन एक ज्यादा हार्ड फॉर्म है
  1762. 1:44:15सेल्फ डिसिप्लिन का। जो कि एक सल तरीका है
  1763. 1:44:20रिप्रेशन का।
  1764. 1:44:22मतलब सप्रेशन और सेल्फ डिसिप्लिन दोनों ही
  1765. 1:44:26सिर्फ एनवायरमेंट के हिसाब से एडजस्ट करने
  1766. 1:44:29की कोशिश
  1767. 1:44:30है। एक बड़ा विजिबल एडजस्टमेंट होता है
  1768. 1:44:35सप्रेशन और दूसरा थोड़ा सॉफ्ट फॉर्म में
  1769. 1:44:38होता है सेल्फ डिसिप्लिन।
  1770. 1:44:42दोनों का बेस डर होता है। सप्रेशन एक
  1771. 1:44:47ऑब्वियस डर पर बेस्ड होता है। और सेल्फ
  1772. 1:44:50डिसिप्लिन एक ऐसे डर से आता है जो या तो
  1773. 1:44:53कुछ खो देने का डर होता है या कुछ पाने की
  1774. 1:44:57इच्छा के थ्रू दिखता
  1775. 1:44:59है। जो तुम सेल्फ डिसिप्लिन कहते हो वह
  1776. 1:45:04सिर्फ एक ऐसे एनवायरमेंट के साथ एडजस्ट
  1777. 1:45:06करना है जिसे तुमने पूरी तरह से समझा
  1778. 1:45:09नहीं।
  1779. 1:45:11और जब एडजस्टमेंट बिना समझ के होती है तो
  1780. 1:45:15उसमें इंटेलिजेंस मर जाता
  1781. 1:45:18है। किसी को खुद को डिसिप्लिन करने की
  1782. 1:45:21जरूरत क्यों पड़ती है? क्या जरूरत है कि
  1783. 1:45:25कोई खुद को किसी पैटर्न के अनुसार ढालने
  1784. 1:45:28पर मजबूर करें।
  1785. 1:45:31लोग अलग-अलग स्कूल्स ऑफ डिसिप्लिन में
  1786. 1:45:33क्यों जाते
  1787. 1:45:34हैं? जो कहते हैं कि वह स्पिरिचुअलिटी तक
  1788. 1:45:38ले जाएंगे।
  1789. 1:45:41ज्यादा समझ देंगे या सोच को अनफोल्ड
  1790. 1:45:46करेंगे। तुम देखोगे कि जितना ज्यादा तुम
  1791. 1:45:49दिमाग को डिसिप्लिन करते हो उतना ही
  1792. 1:45:52ज्यादा उसकी लिमिट बन जाती
  1793. 1:45:55है। प्लीज इस बात को ध्यान से सोचना। बिना
  1794. 1:46:00किसी और बात को बीच में लाए।
  1795. 1:46:03यहां मैं सेल्फ डिसिप्लिन का मतलब वही ले
  1796. 1:46:05रहा हूं जो सवाल में है। मतलब खुद को एक
  1797. 1:46:09फिक्स पैटर्न के अनुसार
  1798. 1:46:13चलाना जो पहले से ही डिसाइड किया गया है।
  1799. 1:46:16जिसमें कुछ पाने की इच्छा होती है। पर
  1800. 1:46:20मेरे लिए यह पूरा
  1801. 1:46:23प्रोसेस जिसमें दिमाग को बार-बार एक सेट
  1802. 1:46:26पैटर्न में ट्विस्ट किया जाता है। वह आखिर
  1803. 1:46:29में दिमाग को तोड़ देता है।
  1804. 1:46:32जो दिमाग सच में इंटेलिजेंट होता है, वह
  1805. 1:46:35सेल्फ डिसिप्लिन से फ्री होता
  1806. 1:46:37है। क्योंकि इंटेलिजेंस का जन्म तभी होता
  1807. 1:46:41है जब तुम एनवायरमेंट को क्वेश्चन करते हो
  1808. 1:46:44और उसका असली मतलब समझते
  1809. 1:46:49हो। उस समझ में ही रियल एडजस्टमेंट होती
  1810. 1:46:53है ना कि किसी फिक्स पैटर्न या कंडीशन के
  1811. 1:46:56हिसाब से।
  1812. 1:46:58सोचो एक प्रिमिटिव आदमी को वह क्या करता
  1813. 1:47:01है? उसमें ना डिसिप्लिन होता है, ना
  1814. 1:47:04कंट्रोल, ना
  1815. 1:47:06सप्रेशन। वह जो चाहता है वह करता है।
  1816. 1:47:11लेकिन एक इंटेलिजेंट आदमी भी वही करता है
  1817. 1:47:14जो वह चाहता है। पर इंटेलिजेंस के
  1818. 1:47:17साथ। इंटेलिजेंस कभी सेल्फ डिसिप्लिन या
  1819. 1:47:21सप्रेशन से पैदा नहीं होती।
  1820. 1:47:25प्रिमिटिव आदमी सिर्फ अपनी इच्छा के पीछे
  1821. 1:47:28भागता
  1822. 1:47:29है। लेकिन इंटेलिजेंट आदमी डिजायर का मतलब
  1823. 1:47:33समझता है। वह कॉन्फ्लिक्ट को देखता है।
  1824. 1:47:37प्रिमिटिव आदमी नहीं देखता। वह बस डिजायर
  1825. 1:47:40के पीछे जाता है और दर्द और तकलीफ बनाता
  1826. 1:47:43है। इसलिए मेरे लिए सेल्फ डिसिप्लिन और
  1827. 1:47:47सप्रेशन दोनों सेम है। दोनों ही
  1828. 1:47:49इंटेलिजेंस को रोक देते हैं।
  1829. 1:47:53इस बात को अपनी लाइफ में टेस्ट करिए।
  1830. 1:47:56डिसिप्लिन और सेल्फ डिसिप्लिन को ले। उसे
  1831. 1:48:00तुरंत रिजेक्ट मत करिए। यह मत बोलिए कि
  1832. 1:48:03सेल्फ डिसिप्लिन होना जरूरी है। वरना
  1833. 1:48:06दुनिया में केओस हो
  1834. 1:48:08जाएगा। जैसे अभी दुनिया में केओस नहीं है।
  1835. 1:48:11और दूसरी
  1836. 1:48:13तरफ सिर्फ मेरे कहने से एग्री भी मत हो
  1837. 1:48:17जाओ। मैं तुमसे एक ऐसी बात कह रहा हूं
  1838. 1:48:20जिसका मैंने खुद अनुभव किया है। और जो
  1839. 1:48:23मैंने सच पाई
  1840. 1:48:25है। साइकोलॉजिकली मुझे यह सच लगता है
  1841. 1:48:29क्योंकि सेल्फ डिसिप्लिन का मतलब होता है
  1842. 1:48:31एक ऐसा दिमाग जो किसी एक थॉट, बिलीफ या
  1843. 1:48:35आइडियल से बंधा हुआ
  1844. 1:48:37है। एक ऐसा दिमाग जो किसी कंडीशन से बनता
  1845. 1:48:41है। जैसे एक जानवर को रस्सी से बांध दिया
  1846. 1:48:44जाए। वह सिर्फ उसी डिस्टेंस तक जा सकता
  1847. 1:48:48है। वही हालत होती है एक दिमाग की जो किसी
  1848. 1:48:51बिलीव से बंधा हुआ हो। वह दिमाग सिर्फ उस
  1849. 1:48:55लिमिटेशन के अंदर ही सोचता
  1850. 1:48:58है। इसलिए ऐसा दिमाग असल में सोच ही नहीं
  1851. 1:49:02सकता। वह सिर्फ लिमिटेड एडजस्टमेंट कर
  1852. 1:49:06सकता है उस रस्सी के रेंज के अंदर। पर ऐसा
  1853. 1:49:11दिमाग, ऐसा
  1854. 1:49:12दिल ना सच में सोच सकता है, ना महसूस कर
  1855. 1:49:16सकता है। दिमाग और दिल दोनों डिसिप्लिन से
  1856. 1:49:20टूट जाते हैं, बिगड़ जाते हैं। क्योंकि वह
  1857. 1:49:23थॉट और लव दोनों से इंकार करते हैं।
  1858. 1:49:27इसीलिए तुम्हें ऑब्जर्व करना होगा। खुद
  1859. 1:49:31देखना होगा कि तुम्हारा थॉट और फीलिंग
  1860. 1:49:33कैसे काम कर रहे हैं। बिना उन्हें किसी
  1861. 1:49:36डायरेक्शन में ले जाने की कोशिश
  1862. 1:49:40किए। सबसे पहले ले जाने से पहले यह समझो
  1863. 1:49:45कि वह कैसे काम कर रहे हैं। सोच और फीलिंग
  1864. 1:49:49को बदलने से पहले देखो कि वह चल कैसे रहे
  1865. 1:49:53हैं। और तुम देखोगे कि वह लगातार एडजस्ट
  1866. 1:49:56हो रहे हैं उस लिमिटेशन के अंदर।
  1867. 1:50:00जो डिजायर और उसके फुलफिलमेंट ने सेट की
  1868. 1:50:03है। अवेयरनेस में कभी कोई डिसिप्लिन नहीं
  1869. 1:50:07होता। चलो एक एग्जांपल लेते
  1870. 1:50:11हैं। मानो तुम क्लास माइंडेड हो। क्लास
  1871. 1:50:16कॉन्शियस हो। थोड़े स्नोबिश
  1872. 1:50:19हो। तुम्हें पता नहीं कि तुम स्नोबिश हो।
  1873. 1:50:22पर तुम यह जानना चाहते हो कि क्या तुम
  1874. 1:50:25वैसे हो या नहीं। तो तुम कैसे पता लगाओगे?
  1875. 1:50:30अपने थॉट्स और इमोशंस के प्रति अवेयर होकर
  1876. 1:50:33फिर क्या होता है? मानो तुमने जान लिया कि
  1877. 1:50:36तुम स्नोबिश हो तो उस समझने से एक
  1878. 1:50:40डिस्टरबेंस पैदा होती है। एक
  1879. 1:50:43कॉन्फ्लिक्ट और वही कॉन्फ्लिक्ट उस
  1880. 1:50:46स्नोबिशनेस को डिॉल्व कर देता
  1881. 1:50:50है। जबकि अगर तुम सिर्फ दिमाग को
  1882. 1:50:53डिसिप्लिन करते हो कि स्नोबिश ना हो तो
  1883. 1:50:57तुम एक नया कैरेक्टर डेवलप कर रहे हो जो
  1884. 1:51:00स्नोब के अपोजिट है। और क्योंकि वह
  1885. 1:51:04डेलीबेट है इसलिए वह भी झूठा और हार्मफुल
  1886. 1:51:07है। हमने अलग-अलग पैटर्न्स, गोल्स और
  1887. 1:51:11टूल्स बना लिए हैं। जिनको हम कॉन्शियसली
  1888. 1:51:14या अनकॉन्शियसली फॉलो करते
  1889. 1:51:18हैं। इसलिए हम अपने माइंड और हार्ट को
  1890. 1:51:21उनकी तरफ डिसिप्लिन करते हैं और तब
  1891. 1:51:25कंट्रोल और प्रोवर्जन जरूरी हो जाता है।
  1892. 1:51:30लेकिन अगर तुम उन कंडीशंस को क्वेश्चन
  1893. 1:51:32करना शुरू करो जो कॉन्फ्लिक्ट क्रिएट करते
  1894. 1:51:36हैं और इससे तुम्हारी इंटेलिजेंस जागती है
  1895. 1:51:40तो वह इंटेलिजेंस इतनी ज्यादा होती है कि
  1896. 1:51:42वह हमेशा मूव करती रहती है और इसलिए कभी
  1897. 1:51:47भी कोई फिक्स्ड पॉइंट नहीं बनता जहां
  1898. 1:51:50कॉन्फ्लिक्ट हो।
  1899. 1:51:54सवाल मान लें कि आई एनवायरमेंट के रिएक्शन
  1900. 1:51:58का बना हुआ
  1901. 1:52:00है तो कौन से मेथड से हम उसकी लिमिटेशन से
  1902. 1:52:04बाहर आ सकते हैं या कैसे हम रीओरिएंटेशन
  1903. 1:52:08का प्रोसेस शुरू करें ताकि दो झूठ चीजों
  1904. 1:52:12के बीच का कॉन्फ्लिक्ट ना हो।
  1905. 1:52:19सबसे पहले तुम मेथड ढूंढना चाहते हो
  1906. 1:52:22लिमिटेशन से बचने के लिए। पर
  1907. 1:52:26क्यों? क्या तुम्हें कभी लगा है कि तुम
  1908. 1:52:29हमेशा मेथड एक सिस्टम क्यों मांगते
  1909. 1:52:33हो? यह मेथड चाहने की इच्छा क्या दिखाती
  1910. 1:52:36है? हर मेथड चाहने का मतलब है एस्केप
  1911. 1:52:40चाहना। तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए
  1912. 1:52:42एक सिस्टम सेट कर दूं जिसे तुम फॉलो कर
  1913. 1:52:47सको। सीधी बात यह है कि तुम चाहते हो कोई
  1914. 1:52:50ऐसा सिस्टम हो जिसे तुम उन कंडीशंस पर
  1915. 1:52:54इंपोज कर सको जो कॉन्फ्लिक्ट क्रिएट कर
  1916. 1:52:57रही हैं।
  1917. 1:53:00ताकि तुम कॉन्फ्लिक्ट से बच जाओ।
  1918. 1:53:04मतलब तुम सिर्फ एक पैटर्न के हिसाब से खुद
  1919. 1:53:07को एडजस्ट करना चाहते हो ताकि कॉन्फ्लिक्ट
  1920. 1:53:10या एनवायरमेंट से बच जाओ। इसी इच्छा में
  1921. 1:53:13ही छुपी होती है मेथड की डिमांड। तुम
  1922. 1:53:17जानते हो जिंदगी कोई पल्मेनिज्म का कोर्स
  1923. 1:53:20नहीं है। मेथड मांगने का मतलब होता है
  1924. 1:53:23एस्केप चाहना। तुमने पूछा कि कैसे
  1925. 1:53:27रीओरिएंटेशन करें ताकि दो झूठ चीजों के
  1926. 1:53:30बीच बार-बार कॉन्फ्लिक्ट ना हो।
  1927. 1:53:33सबसे पहले क्या तुम्हें पता है कि तुम
  1928. 1:53:36कॉन्फ्लिक्ट में हो? पहले यह तो समझो या
  1929. 1:53:40फिर क्या तुम बस एक ऐसी जगह ढूंढना चाहते
  1930. 1:53:43हो जहां और कॉन्फ्लिक्ट ना
  1931. 1:53:46हो। तो यह डिसाइड करो क्या तुम एक सेफ जोन
  1932. 1:53:50चाहते हो एक ऐसी कंडीशन जहां कॉन्फ्लिक्ट
  1933. 1:53:53ना
  1934. 1:53:54हो। या तुम्हें यह भी नहीं पता कि तुम
  1935. 1:53:57कॉन्फ्लिक्ट में हो। अगर तुम्हें
  1936. 1:53:59कॉन्फ्लिक्ट का पता ही नहीं तो फिर तुम
  1937. 1:54:01सलूशन क्यों ढूंढ रहे हो? उस कंडीशन को
  1938. 1:54:05कॉन्फ्लिक्ट पैदा करने दो बिना तुम्हारे
  1939. 1:54:08उसमें इंटरफेयर किए और अगर तुम खुद से
  1940. 1:54:11आर्टिफिशियली कॉन्फ्लिक्ट क्रिएट कर रहे
  1941. 1:54:14हो तो सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हें डर है
  1942. 1:54:17कि तुम कुछ मिस कर रहे हो। जिंदगी तुम्हें
  1943. 1:54:21मिस नहीं करेगी। अगर तुम्हें लगता है ऐसा
  1944. 1:54:25हो रहा है तो कुछ गड़बड़ है तुम्हारे
  1945. 1:54:29अंदर। शायद तुम नॉर्मल नहीं हो। अगर तुम
  1946. 1:54:32सच में कॉन्फ्लिक्ट में हो तो तुम मुझसे
  1947. 1:54:35मेथड नहीं मांगोगे। अगर मैं तुम्हें मेथड
  1948. 1:54:38दूं तो तुम सिर्फ उस मेथड के हिसाब से खुद
  1949. 1:54:41को डिसिप्लिन करोगे। एक आइडियल एक पैटर्न
  1950. 1:54:45को कॉपी करोगे जो मैंने दिया। और इससे
  1951. 1:54:48तुम्हारी अपनी इंटेलिजेंस खत्म हो जाएगी।
  1952. 1:54:52लेकिन अगर तुम कॉन्फ्लिक्ट के प्रति अवेयर
  1953. 1:54:55हो तो उस अवेयरनेस में दर्द गहरा होता है
  1954. 1:54:58और उस इंटेंसिटी में ही तुम सफरिंग का
  1955. 1:55:01असली कॉज डिॉल्व कर
  1956. 1:55:04दोगे जो है एनवायरमेंट का समझ ना
  1957. 1:55:09होना। तुम जानते हो हमने नॉर्मल तरीके से
  1958. 1:55:13जीना ही भूल गए
  1959. 1:55:15हैं। सीधा सिंपल डायरेक्ट
  1960. 1:55:18तरीका वापस उस सिंपलीसिटी में जाने के लिए
  1961. 1:55:21तुम मेथड फॉलो नहीं कर सकते। तुम मशीन
  1962. 1:55:24बनके नहीं जी सकते।
  1963. 1:55:27लेकिन मुझे लगता है हम सब मेथड ढूंढते
  1964. 1:55:29हैं। क्योंकि हम सोचते हैं उनसे हमें
  1965. 1:55:33फुलनेस, स्टेबिलिटी और सेफ्टी मिलेगी।
  1966. 1:55:37पर मेरे लिए मेथड सिर्फ धीरे-धीरे सड़ने
  1967. 1:55:41का रास्ता
  1968. 1:55:42है और उनका रियल स्पिरिचुअलिटी से कोई
  1969. 1:55:45लेना देना
  1970. 1:55:47नहीं। स्पिरिचुअलिटी मतलब होता है
  1971. 1:55:50इंटेलिजेंस का
  1972. 1:55:54टोटल।
  1973. 1:55:56सवाल आप कहते हैं कि एक बड़े लेवल का
  1974. 1:55:59बदलाव जरूरी है इंसान की जिंदगी में। अगर
  1975. 1:56:02कोई आदमी अपने फैमिली या दोस्तों को तकलीफ
  1976. 1:56:04ना देने के लिए अपने आउटर एनवायरमेंट में
  1977. 1:56:07बदलाव नहीं लाना चाहता तो क्या अंदर का
  1978. 1:56:10बदलाव उसे कॉन्फ्लिक्ट से आजादी दे सकता
  1979. 1:56:16है? पहले यह
  1980. 1:56:19देखो। क्या तुम्हें भी नहीं लगता कि एक
  1981. 1:56:22बड़ा बदलाव जरूरी है इंसान की जिंदगी में
  1982. 1:56:26या तुम बस सेटिस्फाइड हो जैसे चीजें चल
  1983. 1:56:30रही हैं।
  1984. 1:56:32अपने प्रोग्रेस के आइडियाज, इवोल्यूशन,
  1985. 1:56:35सक्सेस की
  1986. 1:56:36चाह और कभी-कभी आने वाली खुशियों के
  1987. 1:56:41साथ जब तुम सच में सोचना शुरू करते हो, सच
  1988. 1:56:45में महसूस करना शुरू करते हो तो एक
  1989. 1:56:48स्ट्रांग इच्छा जागती है। एक बड़े बदलाव
  1990. 1:56:51की, एक टोटल चेंज की। अगर तुम्हें लगता है
  1991. 1:56:55कि यह जरूरी है तो फिर ना फैमिली रुकावट
  1992. 1:56:58बनेगी ना दोस्त।
  1993. 1:57:01तब ना अंदर का बदलाव होता है ना बाहर
  1994. 1:57:06का। सिर्फ बदलाव होता है। रिवोल्यूशन होती
  1995. 1:57:12है। लेकिन जैसे ही तुम कहते हो मैं अपने
  1996. 1:57:16परिवार को दुख नहीं देना चाहता। अपने
  1997. 1:57:19दोस्तों या किसी सिस्टम को हर्ट नहीं करना
  1998. 1:57:21चाहता। तब तुम्हें असली बदलाव की जरूरत
  1999. 1:57:24महसूस ही नहीं होती।
  2000. 1:57:27तुम सिर्फ एनवायरमेंट को चेंज करना चाहते
  2001. 1:57:30हो और यह सिर्फ लेजीनेस होती है जो एक और
  2002. 1:57:35झूठा एनवायरमेंट बनाती है और कॉन्फ्लिक्ट
  2003. 1:57:38को चलने देती
  2004. 1:57:40है। मुझे लगता है हम एक झूठा बहाना देते
  2005. 1:57:44हैं कि हमें अपने परिवार और दोस्तों को
  2006. 1:57:47हर्ट नहीं करना चाहिए।
  2007. 1:57:50पर जब तुम्हें कोई जरूरी काम करना होता
  2008. 1:57:54है तो तुम उसे कर लेते हो। चाहे फैमिली या
  2009. 1:57:58दोस्तों को बुरा लगे या नहीं। है
  2010. 1:58:02ना? तब तुम यह नहीं सोचते कि उन्हें दुख
  2011. 1:58:05होगा। वह तुम्हारे कंट्रोल से बाहर होता
  2012. 1:58:08है। तुम्हारा फील इतना स्ट्रांग होता है।
  2013. 1:58:12तुम्हारा सोचना इतना साफ होता है कि वह
  2014. 1:58:16तुम्हें फैमिली के दायरे, रिश्तों और
  2015. 1:58:18बंधनों से परे ले जाता है।
  2016. 1:58:22लेकिन तुम फैमिली, दोस्तों, आइडियल्स,
  2017. 1:58:25बिलीव्स,
  2018. 1:58:27ट्रेडिशंस और जो चीजें सोसाइटी ने बना रखी
  2019. 1:58:30हैं उन सबको तभी सोचना शुरू करते हो जब
  2020. 1:58:35तुम किसी सेफ्टी को पकड़े हुए होते
  2021. 1:58:38हो। जब तुम्हारे अंदर वह असली रिचनेस नहीं
  2022. 1:58:43होती। और तुम बाहर से स्टिमुलेशन लेकर
  2023. 1:58:46अंदर की रिचनेस बनाना चाहते हो।
  2024. 1:58:49पर अगर तुम्हें अपने दर्द का पूरा एहसास
  2025. 1:58:52हो जो कॉन्फ्लिक्ट के कारण आया हो तो तुम
  2026. 1:58:57किसी भी ऑर्थोडॉक्सी दोस्ती या फैमिली के
  2027. 1:59:01बंधन में नहीं
  2028. 1:59:02पड़ते। तुम सिर्फ यह समझना चाहते हो कि
  2029. 1:59:05दर्द या कारण क्या है?
  2030. 1:59:09तुम एनवायरमेंट का मतलब समझना चाहते हो जो
  2031. 1:59:12यह कॉन्फ्लिक्ट क्रिएट करता
  2032. 1:59:15है और तब वहां कोई पर्सनालिटी नहीं बची ना
  2033. 1:59:19ही आई का लिमिटेड थॉट होता
  2034. 1:59:22है लेकिन जब तक तुम उस आई को पकड़े रहते
  2035. 1:59:26हो तभी तुम्हें सोचना पड़ता है कि तुम
  2036. 1:59:28कितना आगे जा सकते हो और कहां रुकना
  2037. 1:59:31चाहिए।
  2038. 1:59:33सच या अंडरस्टैंडिंग का जो गॉड हेड है वह
  2039. 1:59:37तो नहीं मिलता जब तुम फैमिली ट्रेडिशन या
  2040. 1:59:40हैबिट से चिपके होते हो। वह तब मिलता है
  2041. 1:59:44जब तुम पूरी तरह से नंगे होते हो। अपनी
  2042. 1:59:46इच्छाओं, उम्मीदों और सिक्योरिटी से
  2043. 1:59:49बिल्कुल फ्री। और उस डायरेक्ट सिंपलीसिटी
  2044. 1:59:52में ही जिंदगी की असली रिचनेस होती
  2045. 1:59:57है।
  2046. 1:59:59सवाल क्या आप बता सकते हैं कि एनवायरमेंट
  2047. 2:00:03झूठा क्यों बन गया? ये सब प्रॉब्लम्स की
  2048. 2:00:05शुरुआत कहां से
  2049. 2:00:14हुई? तुम्हें क्या लगता है? एनवायरमेंट
  2050. 2:00:18किसने बनाया?
  2051. 2:00:20किसी चमत्कारी भगवान
  2052. 2:00:22ने जरा रुक जाओ सोचो किसने बनाया यह
  2053. 2:00:26एनवायरमेंट यह सोशल सिस्टम इकोनॉमिक और
  2054. 2:00:30रिलीजियस स्ट्रक्चर हमने तुमने और
  2055. 2:00:34मैंने हर एक इंसान ने थोड़ा-थोड़ा
  2056. 2:00:37कंट्रीब्यूट किया जब तक वह कलेक्टिव बन
  2057. 2:00:41गया और अब वही इंडिविजुअल जो इस कलेक्टिव
  2058. 2:00:44सिस्टम को बनाने का हिस्सा था वही उसमें
  2059. 2:00:47खो गया है।
  2060. 2:00:49क्योंकि वही अब उसका मोल्ड उसका
  2061. 2:00:51एनवायरमेंट बन चुका है। सिक्योरिटी की
  2062. 2:00:54इच्छा चाहे फाइनेंशियल हो, मोरल हो या
  2063. 2:00:59स्पिरिचुअल। उसके चक्कर में तुमने एक
  2064. 2:01:01कैपिटलिस्ट एनवायरमेंट बनाया जिसमें
  2065. 2:01:04नेशनलिटी है, क्लास डिवाइड है और
  2066. 2:01:07एक्सप्लइटेशन
  2067. 2:01:09है। इस सबको हमने बनाया है तुम और मैं। यह
  2068. 2:01:14कोई मिरेकल से नहीं हुआ।
  2069. 2:01:17और जब तक तुम सिक्योरिटी ढूंढते रहोगे तब
  2070. 2:01:20तक तुम फिर से एक नए
  2071. 2:01:23कैपिटलिस्ट पोजेसिव सिस्टम बना लोगे। बस
  2072. 2:01:27उसका रंग और लैंग्वेज थोड़ा अलग
  2073. 2:01:31होगा। तुम चाहे इस सिस्टम को हटा भी दो।
  2074. 2:01:35लेकिन जब तक
  2075. 2:01:37पोजेसिवनेस है तुम एक नए कैपिटलिस्ट
  2076. 2:01:40सिस्टम को जन्म दोगे। नए नाम, नए शब्दों
  2077. 2:01:44के साथ। रिलीजन के साथ भी यही
  2078. 2:01:48है। उनके बेकार के रिचुअल्स, एक्सप्लइटेशन
  2079. 2:01:52और डर के साथ। किसने बनाया यह सब? तुमने
  2080. 2:01:56और
  2081. 2:01:56मैंने। सदियों तक हमने इन्हें बनाया है।
  2082. 2:02:00और डर के कारण इनके आगे झुकते रहे हैं। यह
  2083. 2:02:04सब फॉल्स एनवायरमेंट हम इंसानों ने ही
  2084. 2:02:07बनाया
  2085. 2:02:08है। और अब हम उसके स्लेव बन गए हैं। और उस
  2086. 2:02:12झूठे कंडीशन ने ही पैदा किया है वह झूठा
  2087. 2:02:16सर्च फॉर सिक्योरिटी जिसे तुम आई कहते हो
  2088. 2:02:20और इसलिए हमेशा फाइट होती रहती है आई और
  2089. 2:02:25इस फॉल्स एनवायरमेंट के
  2090. 2:02:28बीच तुम यह जानना चाहते हो कि किसने यह
  2091. 2:02:32मिस
  2092. 2:02:33बनाया क्योंकि तुम चाहते हो कोई रिडीमर आए
  2093. 2:02:38जो तुम्हें इस मिस से निकाल के किसी नए
  2094. 2:02:41हेवन में ले जाए। अपने प्रजुडिस, उम्मीद,
  2095. 2:02:45डर और चाहत को पकड़े रखे हुए। तुमने ही
  2096. 2:02:49इंडिविजुअली इस एनवायरमेंट को बनाया है।
  2097. 2:02:53इसलिए तुम्हें ही इसे तोड़ना
  2098. 2:02:55पड़ेगा। तुम्हारा इंतजार करना कि कोई
  2099. 2:02:58सिस्टम आए और इसे हटा दे, वह सिर्फ
  2100. 2:03:01तुम्हें एक नए सिस्टम का स्लेव
  2101. 2:03:04बनाएगा। कम्युनिज्म आ जाए तो क्या होगा?
  2102. 2:03:07तुम नए शब्दों का यूज करोगे। लेकिन
  2103. 2:03:09तुम्हारे रिएक्शंस वही रहेंगे। बस स्टाइल
  2104. 2:03:12अलग होगा। इसीलिए मैंने पहले कहा था अगर
  2105. 2:03:16एनवायरमेंट तुम्हें किसी एक्शन के लिए
  2106. 2:03:18फोर्स कर रहा है तो वह एक्शन राइटियस नहीं
  2107. 2:03:22हो
  2108. 2:03:24सकता। रचियस एक्शन तब होता है जब वह
  2109. 2:03:27एनवायरमेंट को समझने से जन्मा हो। इसलिए
  2110. 2:03:31हमें इंडिविजुअली अवेयर बनना होगा। और जब
  2111. 2:03:34तुम अवेयर बनते हो तो इंडिविजुअली तुम कुछ
  2112. 2:03:39बहुत बड़ा क्रिएट करते
  2113. 2:03:41हो। एक ऐसी सोसाइटी जो सिर्फ किसी आइडियल
  2114. 2:03:44को पकड़ के नहीं बैठी होती और इसलिए सड़
  2115. 2:03:48जाती
  2116. 2:03:49है। बल्कि एक ऐसी सोसाइटी जो हमेशा मूव
  2117. 2:03:53करती रहती है। कभी रुकती नहीं, कभी खत्म
  2118. 2:03:56नहीं होती।
  2119. 2:03:58आज का इंसान एक गोल सेट करता है। उसके
  2120. 2:04:01पीछे भागता है और जब मिल जाता है तो
  2121. 2:04:04कोलैप्स कर जाता
  2122. 2:04:06है। वह हमेशा किसी गोल तक पहुंचना चाहता
  2123. 2:04:10है और फिर उसी स्टेज पर रुक जाता
  2124. 2:04:13है। जैसा आदमी होता है वैसे ही स्टेट भी
  2125. 2:04:17होती
  2126. 2:04:18है। स्टेट भी हमेशा किसी गोल तक पहुंचने
  2127. 2:04:22की कोशिश करती है। लेकिन मेरे लिए एक आदमी
  2128. 2:04:26को हमेशा मूवमेंट में रहना चाहिए।
  2129. 2:04:30हमेशा बन रहा हो ना कि किसी गोल के पीछे
  2130. 2:04:34भाग रहा हो। तभी जो सेल्फ एक्सप्रेशन है,
  2131. 2:04:37जो सोसाइटी है वह भी हमेशा मूव करती
  2132. 2:04:43रहेगी।
  2133. 2:04:45सवाल क्या आप मानते हैं कि कर्म एक
  2134. 2:04:48इंटरेक्शन है झूठे एनवायरमेंट और झूठ के
  2135. 2:04:51आय के बीच?
  2136. 2:04:56देखो कर्म एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब
  2137. 2:05:00होता है कुछ करना एक्शन लेना
  2138. 2:05:04काम और इसका मतलब होता है कॉज और इफेक्ट
  2139. 2:05:08भी अब कर्म क्या
  2140. 2:05:11है कर्म एक बंधन है वह रिएक्शन है जो
  2141. 2:05:15एनवायरमेंट से पैदा होता है जिसे दिमाग ने
  2142. 2:05:18समझा
  2143. 2:05:20नहीं जैसे मैंने कल समझा समझाने की कोशिश
  2144. 2:05:23की
  2145. 2:05:24थी। अगर हम किसी पर्टिकुलर कंडीशन को नहीं
  2146. 2:05:28समझते तो नेचुरली दिमाग उस कंडीशन का बोझ
  2147. 2:05:32उठाता है। उस समझने की कमी का बोझ।
  2148. 2:05:37और उसी कमी के साथ हम सोचते हैं, एक्ट
  2149. 2:05:41करते हैं और और ज्यादा बोझ बनाते
  2150. 2:05:45हैं और ज्यादा लिमिटेशंस क्रिएट करते हैं।
  2151. 2:05:50तो हमें यह समझना होगा कि यह समझने की कमी
  2152. 2:05:54आती कहां से
  2153. 2:05:56है? क्या चीज रोकती रही है किसी आदमी को
  2154. 2:06:00एनवायरमेंट का पूरा मतलब समझने से?
  2155. 2:06:04चाहे वह पास्ट हो या प्रेजेंट का
  2156. 2:06:07एनवायरमेंट और उस असली मतलब को समझने के
  2157. 2:06:10लिए दिमाग को बिल्कुल प्रजुडिस से फ्री
  2158. 2:06:13होना पड़ेगा। यह सबसे मुश्किल काम
  2159. 2:06:16है। अपने बायस, अपनी सोच, अपने ट्विस्ट से
  2160. 2:06:20सच में फ्री
  2161. 2:06:22होना। एनवायरमेंट को फ्रेश नजरिए से
  2162. 2:06:26देखना।
  2163. 2:06:27सीधे और क्लियर तरीके से इसमें बहुत
  2164. 2:06:30ज्यादा समझने की जरूरत होती है। ज्यादा
  2165. 2:06:33लोगों का दिमाग बायस्ड होता है। अपनी
  2166. 2:06:36वैनिटी के
  2167. 2:06:38चलते, दूसरों को इंप्रेस करने की चाहत के
  2168. 2:06:41चलते या सच तक पहुंचने की इच्छा के
  2169. 2:06:45चलते या एनवायरमेंट से भागने की इच्छा के
  2170. 2:06:49चलते या अपने कॉन्शियसनेस को बढ़ाने के
  2171. 2:06:52चलते जो वह स्पिरिचुअल नाम देते हैं या
  2172. 2:06:56अपने नेशनल प्राइड के चलते।
  2173. 2:07:00यह सब इच्छाएं दिमाग को रोकती हैं
  2174. 2:07:03एनवायरमेंट की असली वैल्यू को डायरेक्टली
  2175. 2:07:05देखने से और क्योंकि ज्यादा दिमाग बायस्ड
  2176. 2:07:10है इसलिए सबसे पहले इंसान को अपने
  2177. 2:07:13लिमिटेशंस का पता लगाना होता है और जैसे
  2178. 2:07:17ही तुम अवेयर होने लगते हो उस अवेयरनेस
  2179. 2:07:20में ही कॉन्फ्लिक्ट होता
  2180. 2:07:22है। जब तुम जानते हो कि तुम सच में अंदर
  2181. 2:07:26से एोगेंट हो या प्राउड हो।
  2182. 2:07:29तो उस घमंड को महसूस करते ही वह धीरे-धीरे
  2183. 2:07:33खत्म होने लगता
  2184. 2:07:35है क्योंकि तुम उसकी फुलिशनेस को देख पाते
  2185. 2:07:39हो।
  2186. 2:07:40लेकिन अगर तुम उसे सिर्फ छुपाते हो तो वह
  2187. 2:07:44और बीमारियां बनाता है और झूठे रिएक्शनंस
  2188. 2:07:48क्रिएट करता
  2189. 2:07:51है। तो हर मोमेंट को अभी के अभी जीने के
  2190. 2:07:55लिए बिना पास्ट या प्रेजेंट के बोझ के
  2191. 2:07:59बिना उस मेमोरी के जो समझने की कमी से बनी
  2192. 2:08:02हो। दिमाग को हर चीज से नए तरीके से मिलना
  2193. 2:08:06चाहिए।
  2194. 2:08:08अगर तुम सर्टेनिटी का बोझ ले जिंदगी को
  2195. 2:08:11फेस करते हो या नॉलेज के घमंड के साथ तो
  2196. 2:08:15वह डेंजरस है। क्योंकि नॉलेज भी सिर्फ
  2197. 2:08:19पास्ट की चीज है। पर जब तुम जिंदगी के पास
  2198. 2:08:22एक नए प्लान के साथ जाते हो तभी तुम समझ
  2199. 2:08:26पाते हो कि बिना कॉन्फ्लिक्ट के कैसे जीना
  2200. 2:08:29है। बिना लगातार स्ट्रगल के कैसे जीना
  2201. 2:08:33है। तब तुम जिंदगी के साथ दूर तक निकल
  2202. 2:08:37जाते हो एक बहने वाली लहर के
  2203. 2:08:43साथ उजाई कैलिफोर्निया जून 18
  2204. 2:08:531934 लिविंग इन
  2205. 2:08:57एक्ससी खुशी भरी जिंदगी
  2206. 2:09:02जीना मेरे लिए एक रियल िटी है। एक जिंदा
  2207. 2:09:06बड़ी सच्चाई
  2208. 2:09:08है और
  2209. 2:09:11उसे समझने के लिए सोच का बिल्कुल सिंपल
  2210. 2:09:14होना जरूरी
  2211. 2:09:16है। जो चीज सिंपल होती है वह बहुत गहरी
  2212. 2:09:19होती है। जो सिंपल होती है उसमें एक नरमी
  2213. 2:09:23एक नजाकत होती है। उसमें एक बड़ी
  2214. 2:09:27सर्टिलिटी होती है। एक इनफिनिट
  2215. 2:09:30सॉफ्टनेस। और अगर तुम शब्दों का यूज सिर्फ
  2216. 2:09:34एक तरीके के रूप में करते
  2217. 2:09:36हो उस नजाकत तक पहुंचने के
  2218. 2:09:43लिए। तो मुझे लगता है तुम वह बात समझ नहीं
  2219. 2:09:47पाओगे जो मैं कहना चाहता हूं।
  2220. 2:09:50पर अगर तुम शब्दों के मतलब को एक ब्रिज की
  2221. 2:09:53तरह यूज करो तो शब्द तुम्हारे लिए एक
  2222. 2:09:56इल्ल्यूजन नहीं बनेंगे जिसमें दिमाग खो
  2223. 2:09:59जाता
  2224. 2:10:01है। मैं कह रहा हूं कि यह एक जिंदा
  2225. 2:10:04रियलिटी है। चाहे तुम इसे गॉड बोलो, ट्रुथ
  2226. 2:10:08बोलो या जो चाहे वह
  2227. 2:10:12बोलो। और यह रियलिटी ढूंढने से नहीं
  2228. 2:10:15मिलती।
  2229. 2:10:17जहां भी सर्च होता है वहां हमेशा
  2230. 2:10:20कंट्रास्ट होता है, डलिटी होती
  2231. 2:10:24है। जब दिमाग कुछ ढूंढता है तो उसमें
  2232. 2:10:28हमेशा डिवाइड होती है, फर्क होता है। पर
  2233. 2:10:32इसका मतलब यह नहीं कि दिमाग को बस संतुष्ट
  2234. 2:10:35रहना चाहिए या रुक जाना चाहिए।
  2235. 2:10:39एक नरमी होती है, एक बैलेंस होता है। ना
  2236. 2:10:43वह सेटिस्फेक्शन होता है, ना वह लगातार
  2237. 2:10:46कोशिश जो किसी गोल को पाने के लिए होती
  2238. 2:10:51है। उस नजाकत भरे बैलेंस में ही
  2239. 2:10:54सिंपलीसिटी होती
  2240. 2:10:56है। यह वह सिंपलीसिटी नहीं है जिसमें
  2241. 2:10:59तुम्हारे पास बस कुछ कपड़े हो या कम सामान
  2242. 2:11:03हो। मैं उस सिंपलीसिटी की बात नहीं कर
  2243. 2:11:06रहा। मैं उस सिंपलीसिटी की बात कर रहा हूं
  2244. 2:11:10जो एक नजाकत भरी सोच से आती
  2245. 2:11:13है। जिसमें ना तो खोजने की इच्छा होती है
  2246. 2:11:17ना ही संतुष्टि होती है। जैसे मैंने कहा
  2247. 2:11:22सर्च का मतलब होता है डुअलिटी
  2248. 2:11:25फर्क। जहां डुएलिटी होती है वहां तुम किसी
  2249. 2:11:28एक साइड से चिपक जाते हो। और यहीं से
  2250. 2:11:32कंपल्शन पैदा होती है।
  2251. 2:11:37जब हम कहते हैं कि हम कुछ ढूंढ रहे
  2252. 2:11:40हैं तो इसका मतलब है कि हम कुछ रिजेक्ट कर
  2253. 2:11:44रहे हैं और उसके बदले एक सब्स्टट्यूट
  2254. 2:11:47चाहते हैं जो हमें सेटिस्फाई
  2255. 2:11:50करे और इसी प्रोसेस में डुअलिटी बन जाती
  2256. 2:11:54है और यह डुअलिटी कंपल्शन को जन्म देती
  2257. 2:11:58है।
  2258. 2:11:59यानी जब तुम एक चीज चूज़ करते हो तो तुम
  2259. 2:12:03दूसरी को हराने की कोशिश कर रहे हो। है
  2260. 2:12:06ना?
  2261. 2:12:08जब तुम कहते
  2262. 2:12:10हो कि तुम नए वैल्यू को डेवलप करना चाहते
  2263. 2:12:14हो तो वह बस उस पुरानी चीज को हराने का एक
  2264. 2:12:17तरीका होता है जिसमें दिमाग ऑलरेडी अटका
  2265. 2:12:21हुआ होता
  2266. 2:12:23है। यह चॉइस या तो किसी अट्रैक्शन से होती
  2267. 2:12:27है या किसी फियर के
  2268. 2:12:29चलते और यह अट्रैक्शन या फियर से जो
  2269. 2:12:33क्लिंग होती है वह माइंड पर इन्फ्लुएंस बन
  2270. 2:12:36जाती
  2271. 2:12:37है। और इन्फ्लुएंस का होना अंडरस्टैंडिंग
  2272. 2:12:41का ना होना होता है। इनफ्लुएंस तभी होती
  2273. 2:12:44है जब डिवाइड होती है। जैसे क्लास,
  2274. 2:12:48रिलीजन, जेंडर, नेशनलिटी के डिवाइड।
  2275. 2:12:54जब दिमाग कुछ हराने की कोशिश करता है तो
  2276. 2:12:57वह ऑटोमेटिकली डलिटी क्रिएट करता है और यह
  2277. 2:13:01डुअलिटी ही समझ को खत्म कर देती
  2278. 2:13:06है और सब डिवाइड्स क्रिएट करती है।
  2279. 2:13:11डुअलिटी दिमाग को इन्फ्लुएंस करती है।
  2280. 2:13:14इसलिए ऐसा दिमाग एनवायरमेंट या
  2281. 2:13:17कॉन्फ्लिक्ट के असली मीनिंग को नहीं समझ
  2282. 2:13:19सकता।
  2283. 2:13:21यह साइकोलॉजिकल इनफ्लुएंसेस बस एनवायरमेंट
  2284. 2:13:25के रिएक्शन होते हैं आई के सेंटर से जो
  2285. 2:13:29लाइक, डिसलाइक, ऑोजिट्स, एंटीथेसिस से
  2286. 2:13:33भरपूर होता है। और जहां यह ऑोजिट्स होते
  2287. 2:13:36हैं, वहां समझना पॉसिबल ही नहीं
  2288. 2:13:40होता। इसी डुअलिटी से होती है इनफ्लुएंसेस
  2289. 2:13:43की क्लासिफिकेशन अच्छी और बुरी।
  2290. 2:13:48जब तक दिमाग इनफ्लुएंस्ड होता है और
  2291. 2:13:51इनफ्लुएंस अट्रैक्शन ऑोजिट्स और कंट्रास्ट
  2292. 2:13:55से होती है तब तक लव इंटेलेक्ट सोसाइटी का
  2293. 2:13:59कंट्रोल या प्रेशर रहता
  2294. 2:14:02है और यह प्रेशर अंडरस्टैंडिंग के रास्ते
  2295. 2:14:05में रुकावट बनता
  2296. 2:14:07है जो समझ ब्यूटी ट्रुथ और लव का असली
  2297. 2:14:12फॉर्म होती
  2298. 2:14:13है। अब अगर तुम इस इनफ्लुएंस के प्रति
  2299. 2:14:16अवेयर हो जाओ तो तुम उसका कॉज समझ
  2300. 2:14:21पाओगे। ज्यादा लोग बस ऊपर ऊपर से अवेयर
  2301. 2:14:24होते हैं अंदर से
  2302. 2:14:27नहीं। सिर्फ जब अवेयरनेस दिमाग और इमोशन
  2303. 2:14:30के डीपेस्ट लेवल तक होती है तब तुम देख
  2304. 2:14:33पाते हो कि इन्फ्लुएंस कैसे डिवाइड करता
  2305. 2:14:36है और वह डिवाइड समझने को कैसे रोकता
  2306. 2:14:42है। सवाल
  2307. 2:14:45आपका टॉक सुनकर मेरी मेमोरी गायब हो गई
  2308. 2:14:48है। मुझे अपने बड़े-बड़े कर्ज याद ही
  2309. 2:14:50नहीं। मैं बहुत ब्लिसफुल फील कर रहा हूं।
  2310. 2:14:53क्या यह लिबरेशन
  2311. 2:14:57है? जिससे तुमने पैसे उधार लिए हैं उससे
  2312. 2:15:02पूछो। मुझे लगता है कुछ कंफ्यूजन हो गई है
  2313. 2:15:05मेमोरी को लेकर। मैंने जो कहा था
  2314. 2:15:08उसमें अगर तुम मेमोरी पर डिपेंड करते हो
  2315. 2:15:11अपने कंडक्ट अपनी लाइफ के एक्शंस के लिए
  2316. 2:15:14तो वो मेमोरी तुम्हारे एक्शन को स्लो
  2317. 2:15:17करेगी क्योंकि तब तुम्हारा एक्शन बस
  2318. 2:15:20कैलकुलेशन बन जाता है जिसमें ना
  2319. 2:15:24स्पॉनटेनिटी होती है ना रिचनेस ना लाइफ की
  2320. 2:15:28[संगीत]
  2321. 2:15:30फुलनेस इसका मतलब यह नहीं कि तुम अपना
  2322. 2:15:33कर्ज भूल जाओ तुम पास्ट को भूल नहीं सकते।
  2323. 2:15:38तुम उसे दिमाग से हटा नहीं सकते। यह
  2324. 2:15:40इंपॉसिबल है। वह सबकॉन्शियस में रहेगा ही।
  2325. 2:15:46पर अगर वह सबकॉन्शियस मेमोरी तुम्हें बिना
  2326. 2:15:49जाने इन्फ्लुएंस कर रही है। तुम्हारे
  2327. 2:15:51एक्शंस, तुम्हारा कंडक्ट, तुम्हारी लाइफ
  2328. 2:15:54की सोच को शेप दे रही है, तो वह
  2329. 2:15:57इन्फ्लुएंस और ज्यादा लिमिटेशन क्रिएट
  2330. 2:16:00करेगा। और तुम्हारी इंटेलिजेंस पे और बोझ
  2331. 2:16:04डालेगा।
  2332. 2:16:06जैसे मैंने अभी-अभी इंडिया से ट्रैवल किया
  2333. 2:16:09है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड गया। वहां
  2334. 2:16:13लोगों से मिला। नए आइडियाज देखे, नए सींस
  2335. 2:16:17देखे। मैं उन सबको भूल नहीं सकता। चाहे
  2336. 2:16:20उनकी यादें धीरे-धीरे फेड हो जाए।
  2337. 2:16:24पर अगर उन पुरानी चीजों का रिएक्शन
  2338. 2:16:27प्रेजेंट में इंटरफेयर करें तो वह मेरे
  2339. 2:16:29अंडरस्टैंडिंग को रोक सकता है। अगर मेरे
  2340. 2:16:33पास्ट के एक्सपीरियंसेस मुझे रोकते हैं
  2341. 2:16:36प्रेजेंट को फुल्ली जीने से तो मैं
  2342. 2:16:38प्रेजेंट में पूरी तरह से नहीं जी सकता।
  2343. 2:16:41मैं उस मोमेंट में डीपली नहीं जी सकता।
  2344. 2:16:46तुम पास्ट पर रिएक्ट करते हो क्योंकि
  2345. 2:16:49प्रेजेंट का कोई मतलब नहीं लगता या तुम
  2346. 2:16:52प्रेजेंट से बचना चाहते हो इसलिए तुम
  2347. 2:16:54पास्ट में लौट जाते हो और उस पुरानी यादों
  2348. 2:16:58के थ्रिल में जीते हो उस रिएक्शन में जो
  2349. 2:17:01मेमोरी से उभर कर आता है क्योंकि प्रेजेंट
  2350. 2:17:05तुम्हें कुछ खास नहीं लगता।
  2351. 2:17:09तो जब तुम कहते हो मेरी मेमोरी पूरी तरह
  2352. 2:17:12चली गई है तो मुझे लगता है तुम सिर्फ एक
  2353. 2:17:15ही जगह के लायक हो। तुम मेमोरी खो नहीं
  2354. 2:17:19सकते। पर अगर तुम पूरी तरह प्रेजेंट में
  2355. 2:17:22जीते हो उस मूवमेंट की पूरी गहराई में तो
  2356. 2:17:26तुम अवेयर हो जाते हो उन सबकॉन्शियस
  2357. 2:17:29मेमोरी की उलझनों से उस छुपी हुई आशाओं और
  2358. 2:17:33चाहतों से जो भर कर आती हैं और तुम्हारे
  2359. 2:17:38प्रेजेंट में इंटेलिजेंट तरीके से जीने से
  2360. 2:17:41रोकती हैं। अगर तुम इस बात के प्रति अवेयर
  2361. 2:17:45हो। अगर तुम उस रुकावट को गहराई से देख
  2362. 2:17:49पाते हो। सिर्फ ऊपर ऊपर से नहीं तो वह
  2363. 2:17:53छुपी हुई
  2364. 2:17:54मेमोरी जो कि समझने की कमी और अधूरे जीने
  2365. 2:17:58का नतीजा होती है, वह खत्म हो जाती है। और
  2366. 2:18:02तब तुम एनवायरमेंट के हर नई हलचल से हर
  2367. 2:18:06तेजी से आई सोच से नए तरीके से मिलते हो।
  2368. 2:18:13सवाल आप कहते हैं कि जब आदमी अपने आउटर और
  2369. 2:18:17इनर एनवायरमेंट को पूरी तरह समझता है तो
  2370. 2:18:20वह बॉन्डेज और दुख से फ्री हो जाता है। पर
  2371. 2:18:22अगर किसी इंसान का कोई अपना क्लोज पर्सन
  2372. 2:18:25मर जाए तो उसके दुख से कैसे फ्री हो सकते
  2373. 2:18:33हैं? इस केस में दुख का कॉज क्या है और
  2374. 2:18:38दुख होता क्या है?
  2375. 2:18:40क्या दुख सिर्फ एक झटका नहीं होता दिमाग
  2376. 2:18:43को जो उसे उसकी अपनी कमी का एहसास दिलाता
  2377. 2:18:48है। जब दिमाग को अपनी कमी दिखती है तभी तो
  2378. 2:18:52हम उसे दुख कहते हैं। मानो तुम अपने बेटे,
  2379. 2:18:56पति या पत्नी पर डिपेंड कर रहे थे। अपनी
  2380. 2:19:00उस कमी को पूरा करने के लिए।
  2381. 2:19:03जब वह पर्सन चला जाता है जिसे तुम प्यार
  2382. 2:19:06करते हो तो तुम्हें उस खालीपन का पूरा
  2383. 2:19:09एहसास होता है और उसी एहसास से दुख पैदा
  2384. 2:19:12होता है और तुम कहते हो मैंने किसी अपने
  2385. 2:19:16को खो
  2386. 2:19:18दिया तो मौत के बाद सबसे पहले होता है उस
  2387. 2:19:22खालीपन का पूरा
  2388. 2:19:25एहसास जिसे तुम अब तक अवॉइड करते आ रहे
  2389. 2:19:29थे इसीलिए जहां भी डिपेंड ेंडेंस होती है।
  2390. 2:19:33वहां खालीपन होता ही होता है। सरफेस पे सब
  2391. 2:19:37ठीक दिखे लेकिन अंदर से कमी होती है और
  2392. 2:19:40फिर होता है दुख और
  2393. 2:19:43तकलीफ। पर हम उस बात को मानना नहीं चाहते।
  2394. 2:19:47हम यह नहीं देखते कि यही असली कॉज है। तो
  2395. 2:19:52हम कहते हैं मैं अपने दोस्त, पति, पत्नी
  2396. 2:19:56या बच्चों को मिस करता हूं। इस दुख से
  2397. 2:20:00कैसे निकलूं?
  2398. 2:20:01इस लॉस को कैसे पार करूं?
  2399. 2:20:05पर हर ओवरकमिंग सिर्फ एक सब्सीट्यूशन होती
  2400. 2:20:08है। उसमें कोई समझ नहीं होती और इसीलिए
  2401. 2:20:12उससे और दुख आता है। चाहे तुम्हें थोड़ी
  2402. 2:20:16देर के लिए रिलीफ मिल जाए लेकिन वह बस
  2403. 2:20:19माइंड को सुला देता है। अगर तुम दुख को
  2404. 2:20:23जीतने की कोशिश नहीं
  2405. 2:20:25करते तो तुम मीडियम्स या साइंटिफिक
  2406. 2:20:29प्रूफ्स की तरफ जाते हो जो कहते हैं कि
  2407. 2:20:32डेथ के बाद भी जिंदगी चालू रहती
  2408. 2:20:36है। तो तुम निकालते हो अलग-अलग
  2409. 2:20:39रास्ते जिससे तुम्हें टेंपरेरी रिलीफ
  2410. 2:20:42मिलता है।
  2411. 2:20:45लेकिन अगर तुम जीतने की इच्छा ही छोड़ दो
  2412. 2:20:48और पूरी सच्चाई से समझने की इच्छा रखो कि
  2413. 2:20:51दुख और तकलीफ का असल कॉज क्या है तो तुम
  2414. 2:20:55पाओगे कि जब तक अंदर लोनलीनेस, शैलोनेस,
  2415. 2:21:00खालीपन या कमी है जो बाहर से दिखती है
  2416. 2:21:04डिपेंडेंस के रूप में तब तक पेन
  2417. 2:21:08रहेगा। और तुम उस कमी को भर नहीं सकते।
  2418. 2:21:12किसी ऑब्सकल को जीत के, किसी सब्सीट्यूशन
  2419. 2:21:15से या किसी से भाग
  2420. 2:21:19के यह सब बस दिमाग का एक स्मार्ट सा ट्रैप
  2421. 2:21:23है जो सिर्फ कुछ पाने के चक्कर में लगा
  2422. 2:21:25होता है। दुख सिर्फ एक हाई क्लेरिटी होती
  2423. 2:21:29है। थॉट और इमोशन की जो तुम्हें दिखाती है
  2424. 2:21:34चीजें जैसी हैं वह वाकई हैं।
  2425. 2:21:40लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम उसे
  2426. 2:21:42एक्सेप्ट कर लो या सरेंडर कर दो। जब तुम
  2427. 2:21:46चीजें देखते हो वैसे जैसे वह हैं ट्रुथ के
  2428. 2:21:50मिरर में जो कि इंटेलिजेंस है तो उसमें एक
  2429. 2:21:53जॉय होती है। एक एक्ससी होती है। उसमें ना
  2430. 2:21:57डुएलिटी होती है ना लॉस का एहसास ना ही
  2431. 2:22:01कोई
  2432. 2:22:03डिवीजन। मैं यह थ्योरेटिकल नहीं कह रहा
  2433. 2:22:06अगर तुम इस बात को सीरियसली समझो।
  2434. 2:22:10और मेमोरी वाले पहले क्वेश्चन के जवाब के
  2435. 2:22:12साथ
  2436. 2:22:13जोड़ो। तो तुम देखोगे कि मेमोरी ही ज्यादा
  2437. 2:22:17से ज्यादा डिपेंडेंस क्रिएट करती
  2438. 2:22:19है। तुम लगातार पास्ट की किसी इमोशनल याद
  2439. 2:22:23में जाते हो। जिसे तुम्हें एक रिएक्शन
  2440. 2:22:27मिलता है और वही रोकता है तुम्हारी
  2441. 2:22:30इंटेलिजेंस को प्रेजेंट में फुल्ली जीने
  2442. 2:22:36से। सवाल
  2443. 2:22:40क्या आप कुछ एडवाइस देंगे उस इंसान को जो
  2444. 2:22:42स्ट्रांग सेक्सुअल डिजायर से परेशान
  2445. 2:22:49है? जब जिंदगी का क्रिएटिव एक्सप्रेशन
  2446. 2:22:52नहीं होता तब हम सेक्स को ज्यादाेंस देने
  2447. 2:22:56लगते हैं। और वह एक बड़ी प्रॉब्लम बन जाता
  2448. 2:22:59है। तो सवाल यह नहीं कि मैं क्या एडवाइस
  2449. 2:23:03दूं या कैसे तुम पैशन या सेक्सुअल डिजायर
  2450. 2:23:06को कंट्रोल करो।
  2451. 2:23:08सवाल यह है कि कैसे तुम उस क्रिएटिव
  2452. 2:23:11लिविंग को रिलीज करो और सिर्फ सेक्स को
  2453. 2:23:14अलग ट्रीट ना करो। मतलब यह समझना कि लाइफ
  2454. 2:23:18का पूरा मतलब क्या है? उसका होलनेस उसकी
  2455. 2:23:22कंप्लीटनेस क्या
  2456. 2:23:26है? आज की मॉडर्न एजुकेशन, सरकमस्ट्ससेस
  2457. 2:23:30और एनवायरमेंट के थ्रू तुम्हें ऐसे काम
  2458. 2:23:32करने पड़ते हैं जो तुम्हें पसंद नहीं।
  2459. 2:23:35तुम्हें वह काम नफरत लगता है पर करना
  2460. 2:23:38पड़ता है क्योंकि तुम्हारे पास सही स्किल
  2461. 2:23:43सही ट्रेनिंग नहीं है। तुम्हारे काम में
  2462. 2:23:46तुम्हें रोका जा रहा है। सरकमस्ट्ससेस
  2463. 2:23:50कंडीशंस तुम्हें रोक रही हैं। अपने आप को
  2464. 2:23:54फंडामेंटली क्रिएटिवली एक्सप्रेस करने से।
  2465. 2:23:57इसलिए जरूरत पड़ती है किसी आउटलेट की।
  2466. 2:24:03और यही आउटलेट बन जाता है सेक्स का इशू या
  2467. 2:24:07ड्रिंक का प्रॉब्लम या कोई और बेकार सी
  2468. 2:24:09बात। और यह सभी आउटलेट्स प्रॉब्लम्स बन
  2469. 2:24:13जाती हैं या तुम्हारा इंटरेस्ट आर्टिस्टिक
  2470. 2:24:16हो सकता है। बहुत कम लोग सच में आर्टिस्ट
  2471. 2:24:20होते हैं। पर तुम्हारा उस तरफ रुझान हो
  2472. 2:24:23सकता है। लेकिन वह रुझान बार-बार ट्विस्ट
  2473. 2:24:26हो रहा होता है। रोक दिया जाता है, दबा
  2474. 2:24:29दिया जाता है। और तुम्हारे पास असली सेल्फ
  2475. 2:24:33एक्सप्रेशन का कोई रास्ता नहीं बचता।
  2476. 2:24:37तो फिर या तो सेक्स या कोई रिलीजियस
  2477. 2:24:41ऑब्सेशन ज्यादा इंपॉर्टेंट बन जाता है या
  2478. 2:24:45तुम्हारी एंबिशंस ही रोक दी जाती
  2479. 2:24:48हैं। काटी जाती हैं, बंद हो जाती हैं। और
  2480. 2:24:53फिर वही नेचुरल चीजें जो नॉर्मल होनी
  2481. 2:24:55चाहिए उन्हें ज्यादाेंस मिलने लगती
  2482. 2:24:59है। तो जब तक तुम अपने रिलीजियस,
  2483. 2:25:02पॉलिटिकल, इकोनॉमिक और सोशल डिजायर्स और
  2484. 2:25:06उनके ऑब्सकल्स को समझ नहीं लेते तब तक
  2485. 2:25:10जिंदगी की नेचुरल चीजें ही तुम्हारी लाइफ
  2486. 2:25:13में सबसे इंपॉर्टेंट बन जाती हैं। इसीलिए
  2487. 2:25:17लालच,
  2488. 2:25:18पोज़ेसिवनेस, सेक्स और जाति और सोसाइटी के
  2489. 2:25:22फर्क जैसे प्रॉब्लम्स गलत मायने और गलत
  2490. 2:25:25वैल्यू ले लेते हैं।
  2491. 2:25:29लेकिन अगर तुम जिंदगी को टुकड़ों में नहीं
  2492. 2:25:33पूरा का पूरा देखो समझो क्रिएटिवली
  2493. 2:25:37डेलीजेंटली तो तुम देखोगे कि यह सब
  2494. 2:25:39प्रॉब्लम्स जो दिमाग को कमजोर कर रहे हैं
  2495. 2:25:43और क्रिएटिव लाइफ को खत्म कर रहे हैं वह
  2496. 2:25:45सब खत्म हो जाते हैं और तब इंटेलिजेंस
  2497. 2:25:49नेचुरली काम करती है और उसमें होती है
  2498. 2:25:52खुशी मजा
  2499. 2:25:56एक्ससी सवाल
  2500. 2:26:01मुझे लगता था कि मैं आपकी बातें फॉलो कर
  2501. 2:26:03रहा हूं। पर मेरी लाइफ में कोई जॉय नहीं,
  2502. 2:26:06कोई एंथूजियाज्म नहीं। मेरी अवेयरनेस की
  2503. 2:26:10कोशिशों ने कंफ्यूजन दूर नहीं किया। ना ही
  2504. 2:26:13कोई चेंज लाया, ना ही एनर्जी। मेरी जिंदगी
  2505. 2:26:17का आज भी उतना ही कम मतलब है जितना जब
  2506. 2:26:20मैंने आपको पहली बार 7 साल पहले सुना था।
  2507. 2:26:23मुझ में क्या गलत है?
  2508. 2:26:31मुझे लगता है पहले तो पूछने वाले ने यह
  2509. 2:26:34समझा भी है या नहीं कि मैं कह क्या रहा
  2510. 2:26:40हूं। उसे एक्शन में लाने की कोशिश करने से
  2511. 2:26:44पहले और वैसे भी उसे मेरी बातों को एक्शन
  2512. 2:26:48में लाना ही क्यों
  2513. 2:26:51चाहिए? और मेरी बातें क्या है और वह मेरी
  2514. 2:26:55क्यों है?
  2515. 2:26:56मैं तुम्हें कोई रूल बुक नहीं दे रहा हूं।
  2516. 2:26:59ना कोई कोड, ना कोई सिस्टम जिसे तुम फॉलो
  2517. 2:27:02करो। मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि अगर
  2518. 2:27:06तुम्हें क्रिएटिवली, जॉयफुली,
  2519. 2:27:09इंटेलिजेंटली और फुल एनर्जी के साथ जीना
  2520. 2:27:13है, तो तुम्हारी इंटेलिजेंस को फ्री होना
  2521. 2:27:16पड़ेगा। वह इंटेलिजेंस रुक गई
  2522. 2:27:19है, बिखर गई है मेमोरी की वजह से। और यह
  2523. 2:27:23मैं पहले एक्सप्लेन कर चुका
  2524. 2:27:27हूं। जब तक तुम लगातार किसी गोल को पाने
  2525. 2:27:30की फाइट में हो, जब तक दिमाग किसी
  2526. 2:27:32इन्फ्लुएंस में है, तब तक डुअलिटी
  2527. 2:27:36रहेगी। और उसके साथ ही आएगा पेन, स्ट्रगल।
  2528. 2:27:42और जो हम ट्रुथ या रियलिटी ढूंढ रहे होते
  2529. 2:27:45हैं, वह बस उस पेन से भागने का तरीका होता
  2530. 2:27:49है। इसीलिए मैं कह रहा हूं यह जान लो कि
  2531. 2:27:54तुम्हारी मेहनत, तुम्हारा स्ट्रगल,
  2532. 2:27:56तुम्हारी पुरानी यादें यह सब तुम्हारी
  2533. 2:27:59इंटेलिजेंस को डिस्ट्रॉय कर रही
  2534. 2:28:02हैं। अवेयर होना मतलब सिर्फ ऊपर ऊपर से
  2535. 2:28:06कॉन्शियस होना नहीं।
  2536. 2:28:08बल्कि पूरे कॉन्शियसनेस की गहराई तक जाना।
  2537. 2:28:12जहां एक भी अनकॉन्शियस रिएक्शन छुपा ना
  2538. 2:28:15रहे। यह सब करने के लिए सोच
  2539. 2:28:18चाहिए। दिमाग और दिल दोनों का फुल अलर्ट
  2540. 2:28:22होना
  2541. 2:28:24चाहिए। ना कि ऐसा दिमाग जो भर गया हो
  2542. 2:28:28बिलीव्स, क्रेड्स और आइडियल
  2543. 2:28:31से। ज्यादा लोगों के दिमाग इन्हीं चीजों
  2544. 2:28:34का बोझ उठा रहे हैं।
  2545. 2:28:37और साथ में होती है किसी को फॉलो करने की
  2546. 2:28:41इच्छा। जब तुम्हें अपने ऊपर यह बोझ दिखे
  2547. 2:28:45तो यह मत कहना कि तुम्हें आइडियल्स नहीं
  2548. 2:28:48चाहिए, क्रीड्स नहीं चाहिए या फिर वही
  2549. 2:28:50पुराना लेक्चर रिपीट मत करना। क्योंकि
  2550. 2:28:54मुझे ऐसा होना चाहिए या नहीं होना चाहिए।
  2551. 2:28:57कहने से एक नया रूल बन जाता है। एक नई
  2552. 2:29:01बंदिश बस अवेयर हो जाओ। और उस अवेयरनेस की
  2553. 2:29:04इंटेंसिटी में उस जलती हुई आग
  2554. 2:29:08में एक ऐसा कॉन्फ्लिक्ट पैदा होगा जो खुद
  2555. 2:29:12ही उस रुकावट को खत्म कर
  2556. 2:29:15देगा। मैं जानता हूं कुछ लोग हर साल यहां
  2557. 2:29:18आते हैं और मैं हर साल कोशिश करता हूं इन
  2558. 2:29:22बातों को अलग तरीके से समझाने की।
  2559. 2:29:26पर मुझे लगता है उन लोगों के दिमाग
  2560. 2:29:30में सच्ची सोच बहुत कम है जो कहते हैं हम
  2561. 2:29:35आपको 7 साल से सुन रहे
  2562. 2:29:38हैं। मेरा मतलब सोच से यह नहीं कि सिर्फ
  2563. 2:29:42दिमागी रीजनिंग वह तो सिर्फ राख
  2564. 2:29:46है। मैं कह रहा हूं उस बैलेंस की बात जो
  2565. 2:29:49इमोशन और रीजन के बीच होता है। अफेक्शन और
  2566. 2:29:54थॉट के बीच होता है।
  2567. 2:29:56और वह बैलेंस ऑोजिट्स के कॉन्फ्लिक्ट से
  2568. 2:29:59अफेक्टेड नहीं
  2569. 2:30:00होता। पर अगर तुम्हारे पास ना तो सोचने की
  2570. 2:30:04क्लेरिटी है और ना महसूस करने की गहराई तो
  2571. 2:30:08तुम कैसे
  2572. 2:30:09जागोगे? कैसे वह बैलेंस पैदा होगा? कैसे
  2573. 2:30:13यह अलर्टनेस, यह अवेयरनेस
  2574. 2:30:17आएगी। फिर तो जिंदगी बेकार हो जाती है
  2575. 2:30:20फीकी बिना मतलब की।
  2576. 2:30:23तो सबसे पहली चीज जो तुम्हें करनी चाहिए
  2577. 2:30:26अगर मैं सजेस्ट करूं वह यह कि समझो तुम इस
  2578. 2:30:31तरीके से क्यों सोच रहे हो और इस तरीके से
  2579. 2:30:35क्यों फील कर रहे
  2580. 2:30:37हो अपनी सोच को बदलने की कोशिश मत करो।
  2581. 2:30:41अपने इमोशंस को एनालाइज मत करो। सिर्फ
  2582. 2:30:44अवेयर हो जाओ कि तुम ऐसा क्यों सोच रहे
  2583. 2:30:47हो। और तुम्हारा एक्शन किस मोटिव से आता
  2584. 2:30:51है। हां।
  2585. 2:30:53तुम एनालिसिस से कुछ समझ सकते हो पर वह
  2586. 2:30:56असली समझ नहीं होती। असली समझ तब आती है
  2587. 2:31:00जब तुम इंटेंसली अवेयर
  2588. 2:31:02हो। उस मोमेंट में जब तुम्हारा थॉट और
  2589. 2:31:06इमोशन काम कर रहे
  2590. 2:31:08हो। तब तुम उनकी सॉफ्टनेस उनकी डेलीिकसी
  2591. 2:31:12देख पाओगे। जब तक तुम्हारे अंदर मुझे ऐसा
  2592. 2:31:16करना चाहिए और यह नहीं करना चाहिए चलता
  2593. 2:31:20रहेगा तब तक तुम उस थॉट और इमोशन की तेजी
  2594. 2:31:24को नहीं पकड़
  2595. 2:31:26पाओगे और मुझे पूरा यकीन है तुम सब इसी
  2596. 2:31:30शुड और शुड नॉट वाले स्कूल में बड़े हुए
  2597. 2:31:34हो इसीलिए तुमने अपनी सोच और अपना फील
  2598. 2:31:38करना ही खत्म कर दिया है। तुम रूल्स
  2599. 2:31:42मेथड्स
  2600. 2:31:43और अपने टीचर्स के थ्रू बंधे हुए हो। तो
  2601. 2:31:48छोड़ो यह सब। मुझे करना चाहिए और नहीं
  2602. 2:31:51करना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि अब कुछ
  2603. 2:31:54भी चलता
  2604. 2:31:56है। बस अवेयर हो जाओ उस माइंड से जो हमेशा
  2605. 2:32:01कह रहा होता है मुझे करना है या नहीं करना
  2606. 2:32:04है। तब जैसे एक फूल सुबह खिलता है वैसे ही
  2607. 2:32:08इंटेलिजेंस खिलती है। वह होती है काम करती
  2608. 2:32:12है और समझ पैदा होती
  2609. 2:32:15है।
  2610. 2:32:19सवाल आर्टिस्ट को कई बार ऐसे इंसान के रूप
  2611. 2:32:23में देखा जाता है जिसके पास वह समझ होती
  2612. 2:32:26है जिसके बारे में आप बोलते हैं। कम से कम
  2613. 2:32:29जब वह क्रिएटिव काम कर रहा हो। पर अगर कोई
  2614. 2:32:32उसे डिस्टर्ब करे तो वह बहुत वायलेंटली
  2615. 2:32:35रिएक्ट करता है और कहता है यह तो मेरा
  2616. 2:32:37टेंपरामेंट है। लेकिन साफ दिख रहा है कि
  2617. 2:32:40वह उस मोमेंट में फुली नहीं जी रहा। तो
  2618. 2:32:44क्या उसने वाकई समझा है अगर वह इतनी आसानी
  2619. 2:32:47से अपने आई में लौट आता है?
  2620. 2:32:54तुम जिस इंसान को आर्टिस्ट कह रहे हो क्या
  2621. 2:32:57वह सिर्फ वह आदमी है जो कभी-कभी क्रिएटिव
  2622. 2:33:00होता है? अगर ऐसा है तो मेरे लिए वह
  2623. 2:33:03आर्टिस्ट नहीं है। जो आदमी कभी-कभी
  2624. 2:33:07क्रिएटिव इंपल्स में आता है और उस
  2625. 2:33:10क्रिएटिविटी को टेक्निक के जरिए एक्सप्रेस
  2626. 2:33:12करता है। तुम उसे आर्टिस्ट नहीं कह सकते।
  2627. 2:33:18मेरे लिए सच्चा आर्टिस्ट वह है जो पूरी
  2628. 2:33:21तरह जीता है। हार्मोनी में जीता
  2629. 2:33:25है। जो अपने आर्ट को अपनी लाइफ से अलग
  2630. 2:33:28नहीं करता। जिसकी पूरी जिंदगी ही एक
  2631. 2:33:30एक्सप्रेशन है। चाहे वह पेंटिंग हो,
  2632. 2:33:34म्यूजिक हो या उसका डे टू डे
  2633. 2:33:37बिहेवियर। जो अपने कैनवस, म्यूजिक या
  2634. 2:33:41स्टोन के काम को अपने रोज के जीवन से अलग
  2635. 2:33:45नहीं रखता। यह सब तभी मुमकिन है जब उसमें
  2636. 2:33:48हाईएस्ट इंटेलिजेंस हो। सबसे बड़ी
  2637. 2:33:51हार्मोनी
  2638. 2:33:53हो। मेरे लिए सच्चा आर्टिस्ट वह है जिसमें
  2639. 2:33:56यह हार्मोनी
  2640. 2:33:58हो। हो सकता है वह इसे कैनवस पर दिखाए या
  2641. 2:34:02बात करे या पेंट
  2642. 2:34:04करे। या हो सकता है वह कुछ भी एक्सप्रेस
  2643. 2:34:08ना करे। बस महसूस करे। पर यह सब तभी होता
  2644. 2:34:12है जब उसके अंदर एक डेलिकेट बैलेंस हो। एक
  2645. 2:34:16स्ट्रांग अवेयरनेस हो और तब उसका
  2646. 2:34:19एक्सप्रेशन उसकी डेली जिंदगी से अलग नहीं
  2647. 2:34:26होता। हो जाए कैलिफोर्निया जून 29
  2648. 2:34:391934 टू बी अ ट्रू ह्यूमन बीइंग
  2649. 2:34:45जो चीज हम खुशी या एक्ससी कहते
  2650. 2:34:49हैं मेरे लिए वह है क्रिएटिव
  2651. 2:34:54सोचना और क्रिएटिव सोचना मतलब है सोच
  2652. 2:34:57इमोशन और एक्शन को इनफिनिट
  2653. 2:35:01मूवमेंट यानी जब सोच जो कि इमोशन है जो कि
  2654. 2:35:06खुद एक्शन है जब वह फ्रीली चलती है बिना
  2655. 2:35:09किसी रोक-टोक के बिना किसी आईडिया के
  2656. 2:35:12प्रेशर
  2657. 2:35:15बिना किसी इनफ्लुएंस, बिना किसी हैबिट या
  2658. 2:35:18ट्रेडिशन के बैकग्राउंड से तब वह मूवमेंट
  2659. 2:35:21क्रिएटिव होता
  2660. 2:35:24है। जब तक सोच किसी फिक्स्ड आईडिया में
  2661. 2:35:27बंधी होती
  2662. 2:35:29है या सिर्फ बैकग्राउंड के हिसाब से
  2663. 2:35:33एडजस्ट होती है तब तक वह लिमिटेड होती है
  2664. 2:35:36और ऐसी सोच क्रिएटिव नहीं होती।
  2665. 2:35:40तो हर थॉटफुल इंसान का सवाल होता है कैसे
  2666. 2:35:44वह अपने अंदर यह क्रिएटिव सोच
  2667. 2:35:47जगाए क्योंकि जब यह क्रिएटिव सोच होती है
  2668. 2:35:51जो इनफिनिट मूवमेंट है तो वहां कोई
  2669. 2:35:55लिमिटेशन या कॉन्फ्लिक्ट हो ही नहीं
  2670. 2:35:59सकता और यह क्रिएटिव थिंकिंग किसी रिजल्ट
  2671. 2:36:03किसी अचीवमेंट के पीछे नहीं होती इसका कोई
  2672. 2:36:06एंड पॉइंट नहीं होता यह हमेशा चलती रहती
  2673. 2:36:10है।
  2674. 2:36:13लेकिन ज्यादातर दिमाग सक्सेस के पीछे
  2675. 2:36:16भागते हैं। गोल चाहते हैं। किसी चीज को
  2676. 2:36:20पाने के लिए खुद को डाल देते हैं एक मोल्ड
  2677. 2:36:24में।
  2678. 2:36:25और ऐसी सोच अपने आप को लिमिट कर लेती है।
  2679. 2:36:29पर अगर सोच बस समझने के लिए चलती रहे बिना
  2680. 2:36:33किसी गोल के तभी वह क्रिएटिव होती
  2681. 2:36:37है। जब सोच किसी इन्फ्लुएंस से एडजस्ट कर
  2682. 2:36:40रही होती है या किसी ट्रेडिशन के
  2683. 2:36:43बैकग्राउंड से चल रही होती है जिसे समझा
  2684. 2:36:46ही नहीं गया तो वह सोच क्रिएटिव नहीं
  2685. 2:36:49होती।
  2686. 2:36:51वह एक जानवर की तरह होती है जो रस्सी से
  2687. 2:36:54बंधा होता है। जब तक यह लिमिटेशन या
  2688. 2:36:58एडजस्टमेंट रहती है तब तक क्रिएटिव सोच जो
  2689. 2:37:02कि आजादी है आ ही नहीं सकती।
  2690. 2:37:07क्रिएटिव सोच कभी रिजल्ट नहीं ढूंढती
  2691. 2:37:10क्योंकि रिजल्ट या कलमिनेशन हमेशा रुकने
  2692. 2:37:14और चलने के बीच का आउटकम होता है। पर जब
  2693. 2:37:18कोई रिजल्ट ढूंढने की जरूरत ही नहीं होती
  2694. 2:37:21और सोच सिर्फ चलते रहती है तभी वह
  2695. 2:37:24क्रिएटिव होती
  2696. 2:37:26है। क्रिएटिव सोच में कोई डिवीजन नहीं
  2697. 2:37:30होता। जो सोच इमोशन और एक्शन के बीच
  2698. 2:37:34कॉन्फ्लिक्ट पैदा करें।
  2699. 2:37:38और यह डिवीजन तभी होती है जब तुम किसी गोल
  2700. 2:37:41को ढूंढ रहे होते हो या जब तुम्हें
  2701. 2:37:44सर्टेनिटी से सुकून मिल रहा होता
  2702. 2:37:47है। एक्शन भी वही मूवमेंट है जो सोच और
  2703. 2:37:51इमोशन के साथ होती है। और यह एक्शन ही
  2704. 2:37:55इंसान और सोसाइटी के बीच का रिश्ता है।
  2705. 2:38:00यही कंडक्ट है, काम है, कोऑपरेशन है। जिसे
  2706. 2:38:04हम फुलफिलमेंट कहते
  2707. 2:38:07हैं। जब दिमाग बिना किसी गोल के काम करता
  2708. 2:38:10है और क्रिएटिव तरीके से सोचता है तो वह
  2709. 2:38:14सोच ही एक्शन बन जाती है। जो इंडिविजुअल
  2710. 2:38:18और सोसाइटी के बीच का कनेक्शन बन जाती है।
  2711. 2:38:22अगर यह सोच क्लियर, सिंपल, डायरेक्ट,
  2712. 2:38:26स्पॉनटेनियस और डीप हो तो फिर इंडिविजुअल
  2713. 2:38:31और सोसाइटी के बीच कोई कॉन्फ्लिक्ट ही
  2714. 2:38:33नहीं
  2715. 2:38:35रहता। क्योंकि एक्शन खुद ही एक जीती जागती
  2716. 2:38:39क्रिएटिव मूवमेंट बन जाती है। इसीलिए मेरे
  2717. 2:38:43लिए सोचने का आर्ट नाम की कोई चीज नहीं
  2718. 2:38:47होती। सिर्फ क्रिएटिव सोच होती है। कोई
  2719. 2:38:51सोचने की टेक्निक नहीं होती। बस एक
  2720. 2:38:54स्पॉनटेनियस इंटेलिजेंट फंक्शन होता है।
  2721. 2:38:57जिसमें रीजन, इमोशन और एक्शन परफेक्टली
  2722. 2:39:01हार्मोनी में होते हैं। अलग नहीं जुड़े
  2723. 2:39:05हुए।
  2724. 2:39:09जब सोच और इमोशन किसी रिवॉर्ड, किसी
  2725. 2:39:12रिजल्ट के पीछे नहीं होते, तभी वह एक रियल
  2726. 2:39:16एक्सपेरिमेंट बन जाते हैं। है
  2727. 2:39:19ना? रियल एक्सपीरियंस में, रियल
  2728. 2:39:22एक्सपेरिमेंट में कोई रिजल्ट ढूंढना
  2729. 2:39:24पॉसिबल नहीं होता।
  2730. 2:39:27क्योंकि वह एक्सपेरिमेंट खुद क्रिएटिव सोच
  2731. 2:39:30का मूवमेंट होता
  2732. 2:39:32है। क्रिएटिव सोच के लिए दिमाग को
  2733. 2:39:35कास्टेंटली उस एनवायरमेंट से फ्री करना
  2734. 2:39:38पड़ता है जिससे वह टकराता है और वह
  2735. 2:39:41एनवायरमेंट है पास्ट।
  2736. 2:39:45जब दिमाग रिवॉर्ड के पीछे होता है या गोल
  2737. 2:39:48चस करता है तो वह स्टग्नेशन और कंफर्ट में
  2738. 2:39:52फंस जाता है और फिर उससे प्रैक्टिस चाहिए
  2739. 2:39:56होती है। डिसिप्लिन चाहिए होता है और यही
  2740. 2:40:00सब कॉन्फ्लिक्ट क्रिएट करता है।
  2741. 2:40:04लोग सोचते हैं कि किसी आईडिया को बार-बार
  2742. 2:40:06प्रैक्टिस करके वह क्रिएटिव सोच ला सकते
  2743. 2:40:09हैं। पर अगर तुम ध्यान से देखो तो
  2744. 2:40:12प्रैक्टिस सिर्फ डुएलिटी का रिजल्ट होती
  2745. 2:40:15है और जो एक्शन डुएलिटी से आता है वह
  2746. 2:40:18सिर्फ दिमाग और दिल के बीच का गैप बनाए
  2747. 2:40:21रखता
  2748. 2:40:22है। ऐसी एक्शन एक कैलकुलेटेड लॉजिकल सेल्फ
  2749. 2:40:26प्रोटेक्टिव कंक्लूजन बन जाती है। अगर तुम
  2750. 2:40:31डिसिप्लिन या सरकमस्टेंससेस के प्रेशर में
  2751. 2:40:34प्रैक्टिस कर रहे
  2752. 2:40:38हो तो वह सिर्फ एक चेंज है टुवर्ड किसी
  2753. 2:40:42एंड एक लिमिटेड सोच के अंदर का एक्शन तो
  2754. 2:40:47प्रैक्टिस से क्रिएटिव सोच नहीं आती।
  2755. 2:40:49क्रिएटिव सोच तब आती है जब दिमाग, इमोशन
  2756. 2:40:54और एक्शन एक हार्मोनी में होते
  2757. 2:40:56हैं। यानी अगर तुम किसी एक्शन में पूरी
  2758. 2:40:59तरह श्योर
  2759. 2:41:01हो बिना किसी रिवॉर्ड के पीछे
  2760. 2:41:05भागे तो वह एक्शन इंटेलिजेंस से आता है।
  2761. 2:41:10जो सब रुकावटें तोड़ देता है। जो दिमाग पर
  2762. 2:41:14समझ की कमी के कारण बनी होती है। जहां
  2763. 2:41:17दिमाग और दिल फियर में
  2764. 2:41:19समझ की कमी में या कंपलशन में फंसे होते
  2765. 2:41:23हैं। वहां सोच कभी भी सच में नहीं चलती और
  2766. 2:41:29उसकी हर एक्शन एक नई रुकावट खड़ी करती है।
  2767. 2:41:33इसीलिए सोच की पावर और छोटी होती रहती है।
  2768. 2:41:37पर अगर दिमाग खुद को फ्री करे,
  2769. 2:41:40सरकमस्ट्ससेस को समझने के रास्ते और उस
  2770. 2:41:43समझ से एक्शन करें तो वही एक्शन क्रिएटिव
  2771. 2:41:47सोच बन जाता
  2772. 2:41:49है।
  2773. 2:41:52सवाल क्या आप एवरीडे लाइफ में अवेयरनेस और
  2774. 2:41:56चॉइस का कोई प्रैक्टिकल एग्जांपल दे सकते
  2775. 2:41:58हैं?
  2776. 2:42:04अगर आपके कमरे में एक जहरीला सांप हो तो
  2777. 2:42:07क्या आप यह सवाल
  2778. 2:42:11पूछते? तब तो आप यह नहीं पूछते कि मैं
  2779. 2:42:15कैसे इंटेंसिवली अवेयर
  2780. 2:42:17रहूं। आप यह सवाल तभी पूछते हैं जब आपको
  2781. 2:42:21पक्का नहीं पता कि वहां कोई जहरीला सांप
  2782. 2:42:24है या तो आप उसे बिल्कुल अनजान हो।
  2783. 2:42:28या आप उसके साथ खेलना चाहते हो। उसके दर्द
  2784. 2:42:32और मजा दोनों का आनंद लेना चाहते हो।
  2785. 2:42:36प्लीज ध्यान से
  2786. 2:42:40सुनो। जब तक दिमाग दर्द और सुख दोनों में
  2787. 2:42:44फंसा है तब तक अवेयरनेस वो अलर्टनेस
  2788. 2:42:49पॉसिबल नहीं।
  2789. 2:42:51यानी जब एक एक्सपीरियंस आपको दर्द भी देता
  2790. 2:42:54है और सुख भी तो आप कुछ नहीं
  2791. 2:42:58करते। आप तभी कुछ करते हो जब दर्द सुख से
  2792. 2:43:02ज्यादा हो जाता
  2793. 2:43:03है। पर अगर सुख ज्यादा होता है तो आप कुछ
  2794. 2:43:07नहीं करते। क्योंकि तब कोई स्ट्रांग
  2795. 2:43:10कॉन्फ्लिक्ट नहीं
  2796. 2:43:12होता। एक्शन तभी होती है जब दर्द सुख से
  2797. 2:43:16ज्यादा तेज हो।
  2798. 2:43:19ज्यादा लोग पेन बढ़ाने का इंतजार करते
  2799. 2:43:22हैं। फिर एक्ट करते हैं और उसी टाइम वह
  2800. 2:43:25अवेयरनेस के तरीके ढूंढना चाहते हैं।
  2801. 2:43:28उन्हें कोई बता नहीं
  2802. 2:43:31सकता। वह बस दर्द के बढ़ने का इंतजार कर
  2803. 2:43:35रहे होते हैं। ताकि दर्द उन्हें एक्शन
  2804. 2:43:38लेने पर मजबूर
  2805. 2:43:41करें। और जब आप कंपल्शन में एक्ट करते हो
  2806. 2:43:45तो वहां इंटेलिजेंस नहीं होती। वह सिर्फ
  2807. 2:43:48एनवायरमेंट का प्रेशर होता है। इसीलिए जब
  2808. 2:43:52दिमाग स्टैगेंट हो जिसमें कोई टेंशननेस ना
  2809. 2:43:57हो तो और ज्यादा पेन और कॉन्फ्लिक्ट आता
  2810. 2:44:00है। मान लो पॉलिटिकल सिचुएशन को देखो।
  2811. 2:44:06जैसा लग रहा है कोई और वॉर आ सकती है। 2
  2812. 2:44:09साल में, 5 साल में, 10 साल में।
  2813. 2:44:13एक इंटेलिजेंट इंसान इसको पहले से देख
  2814. 2:44:16सकता है और एक्ट कर सकता है। पर जो इंसान
  2815. 2:44:19स्टैगेंट है, जो बस दर्द के आने का इंतजार
  2816. 2:44:23कर रहा है, वह केओस बढ़ने का इंतजार करता
  2817. 2:44:26है ताकि उसे कुछ करने का रीजन
  2818. 2:44:31मिले। तो उस वक्त उसकी इंटेलिजेंस काम ही
  2819. 2:44:34नहीं कर रही होती।
  2820. 2:44:37अवेयरनेस तभी होती है जब दिमाग और दिल
  2821. 2:44:40दोनों टाइट होते हैं। टेंशन में होते
  2822. 2:44:44हैं। मान लो तुम्हें दिखे कि पोजेसिवनेस
  2823. 2:44:48से तुम कभी कंप्लीट नहीं हो
  2824. 2:44:50सकते। जब तुम देखते हो कि अंदर की खालीपन
  2825. 2:44:55जो कि शैलोनेस है हमेशा किसी पर डिपेंडेंट
  2826. 2:44:59बनाता है और तुम्हें यह रियलाइज होता है
  2827. 2:45:02तो तुम्हारा दिमाग और दिल क्या करते हैं?
  2828. 2:45:06तुरंत क्रेविंग आती है उस खालीपन को फिल
  2829. 2:45:09करने की। पर अगर तुम उस रियलाइजेशन के बाद
  2830. 2:45:13भी सिर्फ एक्यूमुलेट करते जा रहे हो तो
  2831. 2:45:17तुम देखते हो कि एक्यूमुलेशन में कोई
  2832. 2:45:19क्रिएटिव सोच नहीं होती।
  2833. 2:45:22और फिर भी दिमाग वही कर रहा होता है।
  2834. 2:45:26इसीलिए जब तुम इस कंट्राडिक्शन को देखते
  2835. 2:45:29हो तभी एक कॉन्फ्लिक्ट पैदा होता है और वह
  2836. 2:45:33कॉन्फ्लिक्ट खुद ही एक्यूमुलेशन की वजह को
  2837. 2:45:37डिॉल्व कर देता
  2838. 2:45:40है।
  2839. 2:45:43सवाल अगर कोई स्टेट्समैन आपकी बात समझ जाए
  2840. 2:45:46तो वह इस समझ को पब्लिक अफेयर्स में कैसे
  2841. 2:45:49दिखाएं या फिर वह पॉलिटिक्स से ही हट
  2842. 2:45:56जाए। अगर उसने मेरी बात समझ ली होती तो वह
  2843. 2:46:00पॉलिटिक्स को लाइफ से अलग ना
  2844. 2:46:03समझता। और मुझे नहीं लगता उसे पॉलिटिक्स
  2845. 2:46:06से रिटायर होना चाहिए।
  2846. 2:46:09आज पॉलिटिक्स सिर्फ एक्सप्लइटेशन का टूल
  2847. 2:46:12बन गया है। पर अगर वह पूरी लाइफ को एक
  2848. 2:46:15यूनिट के रूप में देखे ना कि सिर्फ अपने
  2849. 2:46:18देश, अपनी कौम, अपने लोगों तक सीमित
  2850. 2:46:22रखे और इंसानी प्रॉब्लम्स को नेशनल नहीं
  2851. 2:46:26बल्कि वर्ल्ड प्रॉब्लम्स की तरह देखे ना
  2852. 2:46:29कि हिंदू, अमेरिकन या जर्मन
  2853. 2:46:32प्रॉब्लम्स तो अगर वह समझ जाए मेरी बात
  2854. 2:46:38तो वह पॉलिटिशियन नहीं एक सच्चा ह्यूमन
  2855. 2:46:41बीइंग बन
  2856. 2:46:42जाता। और मेरे लिए सबसे जरूरी बात वही है
  2857. 2:46:46इंसान बनना ना कि सिर्फ एक एक्सपर्ट या एक
  2858. 2:46:50एक्सप्लइटर।
  2859. 2:46:54प्रॉब्लम यह है कि हर एक्सपर्ट अपनेप
  2860. 2:46:56फील्ड में अटका हुआ है। पॉलिटिशियन सिर्फ
  2861. 2:47:00पॉलिटिक्स में, मोरलिस्ट सिर्फ मोरलिटी
  2862. 2:47:03में, स्पिरिचुअल गुरु सिर्फ स्पिरिचुअलिटी
  2863. 2:47:06में।
  2864. 2:47:11सब एक दूसरे को अलग करके देखते हैं। हमारी
  2865. 2:47:14सोसाइटी का पूरा स्ट्रक्चर इसी पर बना है।
  2866. 2:47:18और यह अलग-अलग एक्सपर्ट्स मिलके और ज्यादा
  2867. 2:47:21केस क्रिएट करते हैं। अगर हम एज ह्यूमन
  2868. 2:47:26बीइंग्स पॉलिटिक्स, रिलीजन, इकोनॉमिक्स और
  2869. 2:47:30सोशल लाइफ के बीच का कनेक्शन देख सकें। तो
  2870. 2:47:35हम
  2871. 2:47:37इंडिविजुअलिस्टिकली अलग सोच के काम नहीं
  2872. 2:47:41करते। इंडिया में करोड़ों भूखे
  2873. 2:47:45हैं। एक हिंदू नेशनलिस्ट कहता है पहले हम
  2874. 2:47:49नेशन बन जाए फिर भूख का स्यूशन
  2875. 2:47:52निकालेंगे। पर मेरे लिए सशन यह है कि हम
  2876. 2:47:56नेशनलिज्म को ही छोड़ दें। क्योंकि भूख एक
  2877. 2:48:00वर्ल्ड प्रॉब्लम
  2878. 2:48:01है। और आइसोलेशन से सिर्फ भूख और बढ़ती
  2879. 2:48:05है। तो अगर कोई पॉलिटिशियन सिर्फ
  2880. 2:48:07पॉलिटिक्स तक लिमिटेड रहे तो वह और ज्यादा
  2881. 2:48:11डिस्ट्रक्शन
  2882. 2:48:12करेगा। पर अगर वह लाइफ को एक होल के रूप
  2883. 2:48:16में देखे जिसमें कोई रेस, नेशनलिटी या
  2884. 2:48:20क्लास का फर्क ना हो तो फिर वह पॉलिटिशियन
  2885. 2:48:24नहीं एक सच्चा इंसान बन जाता है।
  2886. 2:48:32सवाल आपने कहा था कि अगर दो या तीन लोग
  2887. 2:48:36समझ जाए तो आप दुनिया बदल सकते हो। बहुत
  2888. 2:48:40लोग मानते हैं कि वह खुद समझते हैं और ऐसे
  2889. 2:48:42और लोग भी हैं जैसे कि आर्टिस्ट और
  2890. 2:48:45साइंटिस्ट। फिर भी दुनिया बदली नहीं।
  2891. 2:48:48प्लीज बताइए कि आप किस तरीके से दुनिया को
  2892. 2:48:52बदलते? क्या आप अभी दुनिया को बदल नहीं
  2893. 2:48:56रहे हो? धीरे-धीरे और सल तरीके से ही सही।
  2894. 2:48:59लेकिन फिर भी एक डेफिनेट तरीके
  2895. 2:49:01से अपने बोलने, जीने और जो इन्फ्लुएंस
  2896. 2:49:05आपका ह्यूमन थॉट पे आएगा आने वाले सालों
  2897. 2:49:08में उसके जरिए। क्या यही वह बदलाव है जो
  2898. 2:49:12आपने सोचा था या कुछ ऐसा जो तुरंत
  2899. 2:49:14पॉलिटिकल, इकोनॉमिक और रेशियल स्ट्रक्चर
  2900. 2:49:17को बदल दे।
  2901. 2:49:22मुझे लगता है मैंने कभी एक्शन के तुरंत
  2902. 2:49:25इफेक्ट के बारे में नहीं
  2903. 2:49:27सोचा। अगर कोई रिजल्ट सही और लंबे समय तक
  2904. 2:49:31चलने वाला होना चाहिए तो उसके पीछे गहरी
  2905. 2:49:35ऑब्जरवेशन, सोच और इंटेलिजेंस होनी
  2906. 2:49:39चाहिए। और बहुत कम लोग हैं जो क्रिएटिवली
  2907. 2:49:43सोचना चाहते हैं या इनफ्लुएंस और बायस से
  2908. 2:49:47फ्री होना चाहते हैं।
  2909. 2:49:50अगर आप इंडिविजुअली सोचना शुरू करो तो तभी
  2910. 2:49:54आप इंटेलिजेंटली कोऑपरेट कर सकते हो और जब
  2911. 2:49:58तक इंटेलिजेंस नहीं होती तब तक कोऑपरेशन
  2912. 2:50:01नहीं सिर्फ कंपल्शन होता है और वही केओस
  2913. 2:50:05का रीजन
  2914. 2:50:08है।
  2915. 2:50:11सवाल क्या एक आदमी अपने एक्शंस को कंट्रोल
  2916. 2:50:14कर सकता है? अगर हम एक टाइम पर अपने पास्ट
  2917. 2:50:16एक्सपीरियंस का टोटल हैं? और कोई
  2918. 2:50:19स्पिरिचुअल सेल्फ नहीं है तो क्या हम अपने
  2919. 2:50:22इन्हहेरिटेंस पास्ट ट्रेनिंग और जो
  2920. 2:50:24स्टिमुली हम पर काम कर रहे हैं उसके अलावा
  2921. 2:50:27किसी और तरीके से एक्ट कर सकते हैं अगर
  2922. 2:50:30हां तो फिजिकल प्रोसेस में चेंज कैसे आता
  2923. 2:50:33है और कौन करता
  2924. 2:50:40है? क्या एक आदमी अपने एक्शंस को कंट्रोल
  2925. 2:50:44कर सकता है? अगर उसने एनवायरमेंट को नहीं
  2926. 2:50:47समझा।
  2927. 2:50:49तो
  2928. 2:50:51नहीं तब वह सिर्फ एनवायरमेंट के प्रेशर
  2929. 2:50:54इनफ्लुएंस में एक्ट करता है और ऐसी एक्शन
  2930. 2:50:59एक्शन नहीं रिएक्शन होती है या सिर्फ
  2931. 2:51:02सेल्फ प्रोटेक्शन।
  2932. 2:51:05पर अगर एक आदमी एनवायरमेंट को समझना शुरू
  2933. 2:51:08करें, उसका पूरा सिग्निफिकेंस और वैल्यू
  2934. 2:51:11देखे तो फिर वह अपने एक्शंस का मालिक बन
  2935. 2:51:15जाता है। तब वह इंटेलिजेंट बन जाता है और
  2936. 2:51:18फिर चाहे कंडीशन कुछ भी हो वह हमेशा
  2937. 2:51:22इंटेलिजेंटली एक्ट करेगा।
  2938. 2:51:27अगर हम एक समय पर सिर्फ अपने पास्ट का
  2939. 2:51:29रिजल्ट हैं और स्पिरिचुअल सेल्फ नहीं है
  2940. 2:51:32तो क्या हम कोई और तरीका चूज़ कर सकते हैं
  2941. 2:51:35एक्ट करने
  2942. 2:51:37का? जो मैंने पहले कहा वह यहां भी अप्लाई
  2943. 2:51:40होता है। अगर आदमी सिर्फ पास्ट के बर्डन
  2944. 2:51:44से एक्ट करता
  2945. 2:51:46है। चाहे वह इंडिविजुअल हो या रेशियल
  2946. 2:51:51इनहेरिटेंस तो वह सिर्फ फियर का रिएक्शन
  2947. 2:51:54है।
  2948. 2:51:57पर अगर वह अपने सबकॉन्शियस को समझता है
  2949. 2:52:01यानी अपने पास्ट के एक्यूमुलेशन को तो वह
  2950. 2:52:05पास्ट से फ्री हो जाता है और जब वह पास्ट
  2951. 2:52:08से फ्री होता है तब वह एनवायरमेंट के
  2952. 2:52:11प्रेशर से भी फ्री होता
  2953. 2:52:13है। आखिर
  2954. 2:52:15में एनवायरमेंट प्रेजेंट का भी है और
  2955. 2:52:19पास्ट का भी।
  2956. 2:52:21इंसान प्रेजेंट को इसलिए नहीं समझ पाता
  2957. 2:52:24क्योंकि उसका दिमाग पास्ट के क्लाउड से
  2958. 2:52:26ढका होता है। और दिमाग को पास्ट के
  2959. 2:52:30अनकॉन्शियस हिंडरेंसेस से फ्री करने का
  2960. 2:52:33मतलब यह नहीं कि मेमोरी को पीछे धकेल दो।
  2961. 2:52:37बल्कि प्रेजेंट में फुली कॉन्शियस होना।
  2962. 2:52:41और जब तुम प्रेजेंट में पूरी तरह से
  2963. 2:52:43कॉन्शियस होते हो तो पास्ट के सारे
  2964. 2:52:46हिंडरेंससेस सरफेस पर आते हैं। और अगर तुम
  2965. 2:52:50अवेयर हो तो तुम उनका पूरा अर्थ देखते हो।
  2966. 2:52:55और इसी तरह तुम प्रेजेंट को समझ लेते हो।
  2967. 2:52:59अगर ऐसा है तो फिजिकल प्रोसेससेस में चेंज
  2968. 2:53:03कैसे आता है? जितना मुझे लगता है क्वेश्चन
  2969. 2:53:08यह पूछना चाह रहे हैं कि वह एक्शन जो
  2970. 2:53:11एनवायरमेंट से फोर्स होती है वह कैसे
  2971. 2:53:14बदलती
  2972. 2:53:16है? आदमी एक पर्टिकुलर तरीके से एक्ट करता
  2973. 2:53:19है क्योंकि एनवायरमेंट ने उसे मजबूर किया।
  2974. 2:53:23पर अगर वह एनवायरमेंट को इंटेलिजेंटली
  2975. 2:53:26समझे तो फिर कोई कंपलशन नहीं होती। वहां
  2976. 2:53:30अंडरस्टैंडिंग होती है और वही
  2977. 2:53:32अंडरस्टैंडिंग एक्शन बन जाती है।
  2978. 2:53:37सवाल मैं एक ऐसे वर्ल्ड में जीता हूं जहां
  2979. 2:53:40पॉलिटिकल, इकोनॉमिक और सोशल केओस है। लॉज़
  2980. 2:53:44और कन्वेंशंस मुझे रिस्ट्रिक्ट करते हैं।
  2981. 2:53:47जब मेरी डिजायर्स इन चीजों से टकराती है
  2982. 2:53:50तो मुझे या तो लॉ तोड़ना पड़ता है और उसके
  2983. 2:53:53कॉन्सिक्वेंसेस लेने पड़ते हैं या अपने
  2984. 2:53:56डिजायर्स को दबाना पड़ता
  2985. 2:53:58है। तो ऐसे वर्ल्ड में क्या सेल्फ
  2986. 2:54:01डिसिप्लिन से कोई एस्केप है?
  2987. 2:54:06सेल्फ डिसिप्लिन सिर्फ एनवायरमेंट के
  2988. 2:54:09एडजस्टमेंट का दूसरा नाम है जो
  2989. 2:54:12कॉन्फ्लिक्ट के थ्रू होता है।
  2990. 2:54:16यही मैं सेल्फ डिसिप्लिन बोलता
  2991. 2:54:20हूं। आपने एक पैटर्न या आइडियल बनाया है
  2992. 2:54:23जो एक कंपल्शन की तरह काम करता है और आप
  2993. 2:54:28अपने दिमाग को फोर्स करते हो उस पैटर्न
  2994. 2:54:30में फिट करने के लिए।
  2995. 2:54:34आप उसे मॉडिफाई करते हो, कंट्रोल करते हो
  2996. 2:54:38और ऐसा करने से क्या होता
  2997. 2:54:40है? आप अपनी क्रिएटिविटी को डिस्ट्रॉय कर
  2998. 2:54:44रहे हो। आप अपनी ट्रू अफेक्शन को दबा रहे
  2999. 2:54:48हो। पर अगर आप एनवायरमेंट को समझना शुरू
  3000. 2:54:51करो तो फिर ना कोई रिप्रेशन रहती है ना
  3001. 2:54:55सिर्फ एडजस्टमेंट जिसे आप सेल्फ डिसिप्लिन
  3002. 2:54:58कहते हो।
  3003. 2:55:00तो एनवायरमेंट को कैसे
  3004. 2:55:03समझें? उसका पूरा वैल्यू और मीनिंग कैसे
  3005. 2:55:06समझें? क्या चीज रोक रही है उसे देखने
  3006. 2:55:10में? सबसे पहले फियर,
  3007. 2:55:14डर। फियर ही प्रोटेक्शन या सिक्योरिटी
  3008. 2:55:17ढूंढने का रीजन है। चाहे वह फिजिकल हो,
  3009. 2:55:22स्पिरिचुअल, रिलीजियस या इमोशनल।
  3010. 2:55:27जब तक यह सर्च चालू है तब तक फियर भी
  3011. 2:55:31रहेगा और फियर एक वॉल बनाता है आपके माइंड
  3012. 2:55:35और एनवायरमेंट के बीच वही वॉल कॉन्फ्लिक्ट
  3013. 2:55:39क्रिएट करती है और जब तक आप सिर्फ
  3014. 2:55:42एडजस्टमेंट और मॉडिफिकेशन में लगे रहते हो
  3015. 2:55:45और फियर के रूट को नहीं समझते उसकी जड़ को
  3016. 2:55:50तब तक यह कॉन्फ्लिक्ट खत्म नहीं होगा।
  3017. 2:55:55जहां भी सिक्योरिटी, सर्टेनिटी या किसी
  3018. 2:55:59गोल की तलाश होती है, जो क्रिएटिव सोच को
  3019. 2:56:02रोकती है, वहां माइंड को एडजस्ट करना
  3020. 2:56:05पड़ता
  3021. 2:56:06है। जिसे हम सेल्फ डिसिप्लिन कहते हैं जो
  3022. 2:56:10बस एक कंपल्शन होता है। एक पैटर्न की नकल
  3023. 2:56:14होती है।
  3024. 2:56:16लेकिन जब माइंड देख लेता है कि चीजें जमा
  3025. 2:56:20करने या नॉलेज इकट्ठा करने में कोई
  3026. 2:56:23सिक्योरिटी होती ही नहीं तब माइंड फियर से
  3027. 2:56:26फ्री हो जाता
  3028. 2:56:27है। और जब फियर नहीं होती तो माइंड खुद ही
  3029. 2:56:31इंटेलिजेंस बन जाता है। और जो चीज
  3030. 2:56:35इंटेलिजेंस होती है, वह अपने आप को
  3031. 2:56:37डिसिप्लिन नहीं
  3032. 2:56:38करती। सेल्फ डिसिप्लिन सिर्फ वहां होती है
  3033. 2:56:42जहां इंटेलिजेंस नहीं होती। जहां
  3034. 2:56:44इंटेलिजेंस होती है वहां अंडरस्टैंडिंग
  3035. 2:56:48होती है जो फ्री होती है इनफ्लुएंस
  3036. 2:56:51कंट्रोल और डोमिनेशन
  3037. 2:56:55से।
  3038. 2:56:57सवाल अगर किसी इंसान के अंदर एब्स्ट्रैक्ट
  3039. 2:57:00आईडियाज समझने की एबिलिटी ही नहीं है तो
  3040. 2:57:03उसमें थॉट कैसे जगाया जा सकता है?
  3041. 2:57:08सिंपल है सफरिंग के प्रोसेस से या फिर
  3042. 2:57:13बार-बार के एक्सपीरियंस से।
  3043. 2:57:17लेकिन प्रॉब्लम यह है कि हमने अपने आसपास
  3044. 2:57:20इतने झूठे वैल्यूस का शेल्टर ले लिया है
  3045. 2:57:24कि हमने सोचना ही छोड़ दिया
  3046. 2:57:27है। और फिर हम पूछते हैं हमें क्या करना
  3047. 2:57:31चाहिए? सोच कैसे जगाएं?
  3048. 2:57:35हमने फिय्स को कल्टीवेट किया है और उन
  3049. 2:57:37फियर्स को वर्चूस और आइडियल्स का नाम दे
  3050. 2:57:40दिया
  3051. 2:57:41है। माइंड उन्हीं आइडियल्स के पीछे छुप
  3052. 2:57:45जाता है और एक्शन भी उसी शेल्टर से निकलता
  3053. 2:57:49है। इसलिए वह रियल थॉट या रियल एक्शन नहीं
  3054. 2:57:54होता। वह सिर्फ फियर से पैदा हुआ रिएक्शन
  3055. 2:57:57होता है जो माइंड को क्रिपल्ड कर देता
  3056. 2:58:01है। सोच कैसे जगाएं? कभी कोई बड़ी ट्रेजडी
  3057. 2:58:06जैसे किसी अपने की डेथ हो जाए या कोई
  3058. 2:58:09एक्सीडेंट हो या डिप्रेशन आए तो वह आपको
  3059. 2:58:12कॉन्फ्लिक्ट में डाल देते
  3060. 2:58:14हैं। बाहरी सरकमस्ट्ससेस आपको एक्ट करने
  3061. 2:58:18पर मजबूर करते हैं और जब आप कंपल्शन से
  3062. 2:58:21एक्ट करते हो तब रियल थॉट का अवेकनिंग
  3063. 2:58:24नहीं
  3064. 2:58:28होता। क्योंकि वह एक्शन भी फियर से होती
  3065. 2:58:31है। लेकिन अगर आप देख लें कि आप हर बार
  3066. 2:58:35किसी सिचुएशन के आने का इंतजार नहीं कर
  3067. 2:58:38सकते। तब आप शुरू करते हो उन्हीं सिचुएशंस
  3068. 2:58:41को देखना,
  3069. 2:58:43समझना। फिर आप उन्हीं एनवायरमेंट्स को
  3070. 2:58:46डीपली ऑब्जर्व करते हो। आप डिप्रेशन का
  3071. 2:58:49वेट नहीं करते कि वह आपको वर्चुअस बना दे।
  3072. 2:58:53बल्कि आप अपने माइंड को पोज़ेसिवनेस और
  3073. 2:58:56कंपलसशन से फ्री करते हो।
  3074. 2:59:01जो सिस्टम हमने बनाया है वह यह कहता है कि
  3075. 2:59:05पोजेस करना सही
  3076. 2:59:07है और जितना ज्यादा आपके पास है उतना ही
  3077. 2:59:11आप अच्छे
  3078. 2:59:13हैं। आपने खुद ही यह सिस्टम बनाया और आप
  3079. 2:59:18अब उस सिस्टम के स्लेव बन गए हैं। आप एक
  3080. 2:59:22दूसरा सिस्टम भी बना सकते हैं जो
  3081. 2:59:24पोज़ेसिवनेस पे बेस्ड ना हो। लेकिन वह नया
  3082. 2:59:28सिस्टम भी आपको फोर्स करेगा किसी नए तरीके
  3083. 2:59:32से जीने के लिए। जैसे यह सिस्टम करता है
  3084. 2:59:35तो फर्क क्या हुआ? कोई भी
  3085. 2:59:38नहीं। आप सिर्फ सरकमस्ट्ससेस या लॉ के
  3086. 2:59:42थ्रू किसी एक डायरेक्शन में धकेले जा रहे
  3087. 2:59:46हैं। इसीलिए वहां कोई क्रिएटिव थिंकिंग
  3088. 2:59:49नहीं होती।
  3089. 2:59:52लेकिन अगर इंटेलिजेंस फंक्शन करना शुरू कर
  3090. 2:59:55दे तो आप किसी भी सोसाइटी के स्लेव नहीं
  3091. 2:59:59बनोगे। चाहे वह पोजेसिव हो या नॉन
  3092. 3:00:03पोजेसिव। पर माइंड को फ्री करने के लिए
  3093. 3:00:06बहुत इंटेंसिटी चाहिए। एक कास्टेंट
  3094. 3:00:09अलर्टनेस चाहिए। एक ऑब्जरवेशन चाहिए जो
  3095. 3:00:13खुद ही कॉन्फ्लिक्ट क्रिएट करता है। यह
  3096. 3:00:16अलर्टनेस खुद ही एक डिस्टरबेंस लाता है और
  3097. 3:00:20जब वह क्राइसिस आती है वह कॉन्फ्लिक्ट
  3098. 3:00:22इंटेंस हो जाता
  3099. 3:00:24है। और अगर आप उसे एस्केप नहीं कर रहे हो
  3100. 3:00:29तो माइंड नई तरह सोचना शुरू करता है।
  3101. 3:00:33क्रिएटिव तरीके से सोचता है। और वही सोच
  3102. 3:00:38वही रियल थिंकिंग वही है
  3103. 3:00:43एटरर्निटी हो जाए कैलिफोर्निया जून 30
  3104. 3:00:48[संगीत]
  3105. 3:00:561934 बीइंग वनरेबल टू
  3106. 3:00:59ट्रुथ सच के लिए खुला हुआ होना
  3107. 3:01:05मुझे लगता है ज्यादातर लोग सुनने का अर्थ
  3108. 3:01:09भूल गए
  3109. 3:01:11हैं। वह अपने स्पेसिफिक प्रॉब्लम्स ले आते
  3110. 3:01:15हैं और सोचते हैं कि मेरी बात सुनके उनकी
  3111. 3:01:18प्रॉब्लम सॉल्व हो
  3112. 3:01:20जाएगी। मुझे लगता है ऐसा नहीं होगा।
  3113. 3:01:25लेकिन अगर आप सही तरीके से सुनना जाने तो
  3114. 3:01:29आप पूरे को समझना शुरू करेंगे और आपका
  3115. 3:01:33माइंड किसी एक स्पेसिफिक बात में उलझेगा
  3116. 3:01:38नहीं। तो अगर आप चाहे तो मैं यह सजेस्ट
  3117. 3:01:43करूं कि इस बात से कोई स्पेसिफिक स्यूशन
  3118. 3:01:46मत ढूंढिए या अपने दर्द का कोई तुरंत इलाज
  3119. 3:01:50मत चाहिए।
  3120. 3:01:53मैं आपकी मदद तभी कर सकता हूं या आप खुद
  3121. 3:01:56की मदद तभी कर सकते हैं जब आप नए तरीके से
  3122. 3:02:00सोचना शुरू करें
  3123. 3:02:03क्रिएटिवली। जिंदगी को अलग-अलग प्रॉब्लम्स
  3124. 3:02:06का जोड़ा मत
  3125. 3:02:09समझिए। उसे एक पूरे रूप में
  3126. 3:02:12देखिए। एक ऐसे माइंड के साथ जो सशंस के
  3127. 3:02:16प्रेशर से दबा हुआ ना हो।
  3128. 3:02:21अगर आप बिना बर्डन के सुनेंगे और एक पूरी
  3129. 3:02:25तस्वीर के नजरिए से
  3130. 3:02:27देखेंगे तो आपकी स्पेसिफिक प्रॉब्लम भी एक
  3131. 3:02:30नए तरीके से दिखने
  3132. 3:02:32लगेगी और हो सकता है तुरंत सॉल्व ना हो
  3133. 3:02:37लेकिन आप उसका असली रीजन देखने
  3134. 3:02:41लगेंगे नए तरीके से सोचने में दोबारा
  3135. 3:02:44सोचना सीखने में वो कॉन्फ्लिक्ट्स और
  3136. 3:02:48प्रॉब्लम्स डिोल्व होने लगेंग जो माइंड और
  3137. 3:02:52हार्ट को बर्डन करती
  3138. 3:02:55हैं। जिनसे हर तरह का पेन,
  3139. 3:02:58डिसहार्मोनी और सफरिंग पैदा होती
  3140. 3:03:02है। हर इंसान कुछ ना कुछ चाहता है। पर वह
  3141. 3:03:08चाह अलग-अलग होती है। उसके एनवायरमेंट,
  3142. 3:03:12टेंपरामेंट और अपब्रिंगिंग के हिसाब से।
  3143. 3:03:18अपने अपनी अपब्रिंगिंग रिलीजन, सोसाइटी और
  3144. 3:03:21इकोनमी के बेसिस पर कुछ ऑब्जेक्टिव्स सेट
  3145. 3:03:26कर लिए हैं। और अब उनके पीछे लगातार भाग
  3146. 3:03:30रहे हो।
  3147. 3:03:33और जब आपने एक ऑब्जेक्टिव बना लिया तो
  3148. 3:03:36नेचुरली कुछ स्पेशलिस्ट भी आते
  3149. 3:03:39हैं जो आपको उस गोल तक पहुंचाने के तरीके
  3150. 3:03:43बताते
  3151. 3:03:44हैं। इसलिए टेक्निक का परफेक्शन और
  3152. 3:03:49स्पेशलाइजेशन बस एक मींस बन जाता है आपके
  3153. 3:03:53एंड तक पहुंचने का।
  3154. 3:03:56और उस एंड को पाने के लिए जो आपने अपने
  3155. 3:04:00कंडीशनिंग के थ्रू सेट किया
  3156. 3:04:03है। आपको स्पेशलिस्ट की जरूरत पड़ती
  3157. 3:04:08है। तो आपका एक्शन खुद अपनी वैल्यू खो
  3158. 3:04:12देता
  3159. 3:04:13है। क्योंकि आप सिर्फ रिजल्ट चाहते हो ना
  3160. 3:04:17कि उस एक्शन में जो इंटेलिजेंस और
  3161. 3:04:20फुलफिलमेंट होती
  3162. 3:04:23है। जिंदगी एक मीडियम बन जाती
  3163. 3:04:27है। एक स्कूल जिसमें सिर्फ किसी गोल तक
  3164. 3:04:31पहुंचने की ट्रेनिंग होती
  3165. 3:04:34है। एक्शन सिर्फ एक जरिया बन जाता है। उस
  3166. 3:04:38ऑब्जेक्टिव तक जाने का जो आपने सोसाइटी और
  3167. 3:04:42कंडीशनिंग के थ्रू बना लिया
  3168. 3:04:45है। तो जिंदगी बन जाती है एक बड़ा
  3169. 3:04:48स्ट्रगल, एक कॉन्फ्लिक्ट ना कि एक
  3170. 3:04:52फुलफिलिंग और रिच
  3171. 3:04:56एक्सपीरियंस। और फिर आप पूछते हो जिंदगी
  3172. 3:04:59का एंड क्या है? जिंदगी का मकसद क्या
  3173. 3:05:03है? यह ज्यादातर लोगों के दिमाग में होता
  3174. 3:05:07है। हम क्यों जी रहे हैं? क्या गोल है?
  3175. 3:05:11आपको प्रेजेंट में जीना नहीं आता। इसलिए
  3176. 3:05:14आपको फ्यूचर का मकसद चाहिए।
  3177. 3:05:18लेकिन जो इंसान सच में फुलफिल करता है, वह
  3178. 3:05:22कभी भी एंड के बारे में नहीं पूछता
  3179. 3:05:25क्योंकि उसके लिए फुलफिलमेंट ही काफी होती
  3180. 3:05:28है।
  3181. 3:05:30लेकिन आप फुलफिलमेंट नहीं हो
  3182. 3:05:33पाते। आपको जीना नहीं आता डीपली, रिचली,
  3183. 3:05:38कंप्लीटली। इसलिए आप एक गोल ढूंढते हो।
  3184. 3:05:42आप सोचते हो अगर आपको एंड पता होगा तो आप
  3185. 3:05:46जिंदगी को उस गोल की तरफ ले जा सकते
  3186. 3:05:49हो और फिर आप लाइफ को एक मेजर बना लेते
  3187. 3:05:54हो। एक तरीका बनाते हो उस एंड तक पहुंचने
  3188. 3:05:59का। चाहे कॉन्शियसली हो या
  3189. 3:06:04अनकॉन्शियसली। आप पपस ढूंढना शुरू कर देते
  3190. 3:06:07हो।
  3191. 3:06:08और हर कोई आपको अपने हिसाब से आंसर देता
  3192. 3:06:12है। अगर आप किसी आर्टिस्ट से पूछो तो वह
  3193. 3:06:16बोलेगा लाइफ का मकसद है सेल्फ
  3194. 3:06:21एक्सप्रेशन। पेंटिंग, म्यूजिक या पोएट्री
  3195. 3:06:24के
  3196. 3:06:25थ्रू। इकोनॉमिस्ट बोलेगा लाइफ का मकसद है
  3197. 3:06:29काम करना। प्रोडक्शन
  3198. 3:06:33कोपरेशन एक ग्रुप में
  3199. 3:06:36जीना और रिलीजन वाला बोलेगा गॉड को ढूंढना
  3200. 3:06:40रियलाइज
  3201. 3:06:42करना उन रूल्स के अकॉर्डिंग जीना जो
  3202. 3:06:45टीचर्स और प्रॉफिट्स ने
  3203. 3:06:48बताए हर स्पेशलिस्ट आपको एक अलग आंसर देगा
  3204. 3:06:52और आप अपने टेंपरामेंट और इमेजिनेशन के
  3205. 3:06:57हिसाब से उन आंसर्स को अपना डोगमा बना
  3206. 3:07:02गेयल्स आपके लिए एक सेफ प्लेस बन जाते हैं
  3207. 3:07:06जिन्हें आप यूज करते हो प्रोटेक्शन के
  3208. 3:07:11लिए। इस दुनिया के केओस में आप उन
  3209. 3:07:15आइडियल्स के बेसिस पर अपनी एक्सपीरियंसेस
  3210. 3:07:18को मेजर करते हो और सिर्फ एनवायरमेंट के
  3211. 3:07:21पर्पस को समझने की कोशिश करते हो। बिना यह
  3212. 3:07:25समझे कि फुलफिलमेंट क्या है?
  3213. 3:07:30और जब आप पपस ढूंढने लगते हो अपनी
  3214. 3:07:33कंडीशनिंग के लेंस से तब आप लिविंग के
  3215. 3:07:37रियल कॉन्फ्लिक्ट से बच जाते हो। आप
  3216. 3:07:40अंडरस्टैंडिंग नहीं चाहते। आप बस एस्केप
  3217. 3:07:43चाहते हो।
  3218. 3:07:47हमने जिंदगी को अलग-अलग हिस्सों में बांट
  3219. 3:07:50दिया है। आइडियल्स, मकसद, मंजिलें, हासिल,
  3220. 3:07:55अंत और दूसरी तरफ परेशानी, टकराव, अशांति,
  3221. 3:08:02बेचैनी और तीसरी तरफ तुम खुद अपनी मैं
  3222. 3:08:07वाली सोच के साथ।
  3223. 3:08:12यानी जिंदगी के तीन टुकड़े कर दिए हैं।
  3224. 3:08:16तुम इस टकराव में फंसे हो। और इस टकराव,
  3225. 3:08:20इस दर्द, इस परेशानी से गुजरते हुए एक
  3226. 3:08:23मंजिल, एक मकसद की तरफ पढ़ रहे हो।
  3227. 3:08:27तुम इस परेशानी को चीरते हुए एक सेफ जगह
  3228. 3:08:31तक पहुंचना चाहते हो जिसे तुमने आइडियल या
  3229. 3:08:35गोल बना रखा
  3230. 3:08:38है। और यह आइडियल्स, यह गोल्स, यह
  3231. 3:08:43रिफ्यूज यह सब बनाए गए हैं इकोनॉमिक,
  3232. 3:08:46रिलीजियस और स्पिरिचुअल एक्सपर्ट्स के
  3233. 3:08:49जरिए।
  3234. 3:08:51तो तुम एक तरफ से गुजरते हो इस एनवायरमेंट
  3235. 3:08:54इस परेशानी से और दूसरी तरफ भाग रहे हो उन
  3236. 3:08:58गोल्स की तरफ जो तुम्हारे लिए सेफ जगह बन
  3237. 3:09:01चुके
  3238. 3:09:03हैं। तुम जिंदगी के मकसद के बारे में
  3239. 3:09:06इसलिए सोच रहे हो क्योंकि तुम प्रेजेंट
  3240. 3:09:08में इंटेलिजेंट नहीं हो पा रहे।
  3241. 3:09:12जो इंसान पूरी तरह एक्टिव है, सिर्फ बिजी
  3242. 3:09:15नहीं बल्कि इमोशनली और इंटेलिजेंटली जिंदा
  3243. 3:09:19है, वह ऑलरेडी फुलफिल हो चुका
  3244. 3:09:25है। इसलिए जिंदगी का कोई एंड या स्टार्ट
  3245. 3:09:29नहीं होता। जिंदगी एक कास्टेंट मूवमेंट है
  3246. 3:09:32क्रिएटिव थिंकिंग का।
  3247. 3:09:35और जो तुम प्रॉब्लम्स कहते हो वह तुम्हारे
  3248. 3:09:38उसी स्ट्रगल का रिजल्ट है जिसमें तुम एक
  3249. 3:09:41एंड तक पहुंचना चाहते
  3250. 3:09:44हो। तुम्हारी जिंदगी इसी में लगी है। कैसे
  3251. 3:09:48इस स्ट्रगल से निकला जाए? कैसे इसे जीता
  3252. 3:09:52जाए?
  3253. 3:09:53कैसे इसे डज किया
  3254. 3:09:57जाए? और इसी परफेक्ट एस्केप को तुम आइडियल
  3255. 3:10:00या पपस ऑफ लाइफ कह देते हो।
  3256. 3:10:05और जब तुम जीतने, भागने, पहुंचने की सोच
  3257. 3:10:08में हो तो नेचुरली तुम्हें सिस्टम्स
  3258. 3:10:11चाहिए, लीडर्स चाहिए, गुरुस
  3259. 3:10:15चाहिए। मेरे लिए यह सब एक्सप्लइटर्स
  3260. 3:10:19हैं। सिस्टम्स, उनके टीचर्स, उनका
  3261. 3:10:24कंपटीशन, उनका
  3262. 3:10:26चालाकपन, उनका प्रॉमिस देना और धोखा देना।
  3263. 3:10:30यह सब अलग-अलग सेक्स और कर्ट्स क्रिएट
  3264. 3:10:33करते
  3265. 3:10:33हैं। तुम अटेनमेंट चाहते हो, एक रिजल्ट
  3266. 3:10:37चाहते हो, लेकिन तुम खुद को मैं को नहीं
  3267. 3:10:41समझते। ना ही उस गोल को जो तुम चस कर रहे
  3268. 3:10:45हो कॉन्शियसली या
  3269. 3:10:49अनकॉन्शियसली। और जब तक तुम खुद को नहीं
  3270. 3:10:52देखते तब तक तुम दूसरों के छोटे गोल्स,
  3271. 3:10:56उनकी जेलसी, उनके रूल्स में फंसते रहोगे।
  3272. 3:11:00तुम सिर्फ उस स्ट्रगल को ले चलते हो ना कि
  3273. 3:11:03उस स्ट्रगल में तुम कौन हो और कैसे एक्ट
  3274. 3:11:06कर रहे
  3275. 3:11:08हो। मेरे लिए तो स्ट्रगल एंड और तुम यह सब
  3276. 3:11:12एक ही चीज है। यह अलग-अलग पार्ट्स तुमने
  3277. 3:11:16खुद बनाए हैं। और बनाए हैं गेन चाहने की
  3278. 3:11:20वजह से फायदे के
  3279. 3:11:23लिए। जिसका बेस है तुम्हारे अंदर की
  3280. 3:11:26खालीपन वाली फीलिंग।
  3281. 3:11:29जब तुम्हें लगता है तुम कुछ नहीं हो तो
  3282. 3:11:33तुम सोचना शुरू करते हो कैसे कुछ बन सकते
  3283. 3:11:38हो और वहीं से शुरू होती है यह
  3284. 3:11:42डिवीजन तुम और तुम्हारा गोल
  3285. 3:11:47लेकिन जब फुलफिलमेंट होता है तब ना एक्टर
  3286. 3:11:50बचा है ना एक्ट सिर्फ एक क्रिएटिव सोच का
  3287. 3:11:54फ्लो होता है जो किसी रिजल्ट की तलाश नहीं
  3288. 3:11:58करता बस कंटीन्यूसली जीता है और वही है
  3289. 3:12:03इमोर्टिटी।
  3290. 3:12:07लेकिन तुमने लाइफ को डिवाइड कर दिया है।
  3291. 3:12:09अब सोचो यह मैं यह एक्टर, यह ऑब्जर्वर, यह
  3292. 3:12:15कॉन्फ्लिक्ट का सेंटर है
  3293. 3:12:17क्या? यह सिर्फ एक लंबी मेमोरी का रोल है।
  3294. 3:12:21इस मैं में कुछ हाई पॉइंट्स होते हैं और
  3295. 3:12:24कुछ लो।
  3296. 3:12:26इन्हीं हाईज और लोस को तुम कहते हो
  3297. 3:12:29कॉम्प्लेक्सेस और इन्हीं से तुम एक्ट करते
  3298. 3:12:33हो। तुम्हारा माइंड जब अपनी कमी महसूस
  3299. 3:12:37करता
  3300. 3:12:38है तब गेन के पीछे भागता है और उसी से
  3301. 3:12:43होती है
  3302. 3:12:45डिवीजन। ऐसा माइंड एनवायरमेंट को समझ ही
  3303. 3:12:49नहीं सकता तो उसे रिलाई करना पड़ता है
  3304. 3:12:53मेमोरी पर।
  3305. 3:12:55मेमोरी सिर्फ एक कलेक्शन है एक्सपीरियंसेस
  3306. 3:12:59का जो तुम्हारे एकशंस को गाइड करता है एक
  3307. 3:13:02प्रीसेट गोल की तरफ और यह गोल क्या होता
  3308. 3:13:07है एक सेल्फ प्रोटेक्शन का एक
  3309. 3:13:10इल्लुजन जो तुमने आइडियल गॉड परफेक्शन या
  3310. 3:13:15ट्रुथ नाम दे दिया
  3311. 3:13:18है बिगिनिंग और एंड तुम और
  3312. 3:13:22गोल यह सब एक सेल्फ प्रोटेक्टिव माइंड के
  3313. 3:13:26बनाए हुए इल्लुजंस
  3314. 3:13:29हैं। मैंने बताया कैसे यह सेल्फ
  3315. 3:13:31प्रोटेक्टिव माइंड बनाता है। जब तुम्हें
  3316. 3:13:35अपने खालीपन का एहसास होता है तब तुम गेन
  3317. 3:13:39और अचीवमेंट के बारे में सोचना शुरू करते
  3318. 3:13:42हो और वही सोच डिवाइड कर देती है जिंदगी
  3319. 3:13:45को और लिमिट कर देती है तुम्हारे एकशंस
  3320. 3:13:50को तो एंड और तुम दोनों बन जाते हैं इस
  3321. 3:13:54सेल्फ प्रोटेक्टिव माइंड के
  3322. 3:13:57प्रोडक्ट और टर्मल कॉन्फ्लिक्ट
  3323. 3:14:01डिसहार्मोनी यह सब इसी सेल्फ प्रोटेक्शन
  3324. 3:14:04से पैदा होते हैं। चाहे स्पिरिचुअल हो या
  3325. 3:14:11इकोनॉमिक। स्पिरिचुअली और इकोनॉमिकली तुम
  3326. 3:14:14सिक्योरिटी ढूंढ रहे हो। क्योंकि तुम्हें
  3327. 3:14:17लगता है कि चीजों को जमा करके ही तुम्हें
  3328. 3:14:20समझ
  3329. 3:14:22मिलेगी। पूर्णता मिलेगी और तुम खुद को
  3330. 3:14:25पूरा महसूस करोगे।
  3331. 3:14:28इसीलिए चालू लोग चाहे स्पिरिचुअल हो या
  3332. 3:14:32इकोनॉमिक तुम्हारा फायदा उठाते हैं
  3333. 3:14:36क्योंकि दोनों को पावर चाहिए और वह सेल्फ
  3334. 3:14:39प्रोटेक्शन को बढ़ा चढ़ा के दिखाते
  3335. 3:14:44हैं हर माइंड एक जबरदस्त कोशिश कर रहा है
  3336. 3:14:48अपने आप को बचाने
  3337. 3:14:50की और जो अंत है जो रास्ता है और जो तुम
  3338. 3:14:55हो यह सब सिर्फ सिर्फ सेल्फ प्रोटेक्शन का
  3339. 3:14:58प्रोसेस
  3340. 3:15:00है। और जब यह सेल्फ प्रोटेक्शन का प्रोसेस
  3341. 3:15:03होता है तो सरकमस्ट्ससेस के साथ
  3342. 3:15:06कॉन्फ्लिक्ट होना ही है जो तुम सोसाइटी
  3343. 3:15:09कहते
  3344. 3:15:11हो। तुम खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हो।
  3345. 3:15:15ग्रुप समाज के खिलाफ।
  3346. 3:15:19पर इसका उल्टा सच नहीं है। यानी अगर तुम
  3347. 3:15:23अपने आप को प्रोटेक्ट करना छोड़ दोगे तो
  3348. 3:15:26इसका मतलब यह नहीं कि तुम खो जाओगे।
  3349. 3:15:30उल्टा अगर तुम अपने आप को प्रोटेक्ट कर
  3350. 3:15:34रहे हो अपनी कमी या सोच की वजह
  3351. 3:15:38से। तो तब तुम खुद को वाकई में खो दोगे।
  3352. 3:15:44लेकिन अगर तुम सिर्फ इसलिए सेल्फ
  3353. 3:15:46प्रोटेक्शन छोड़ते हो क्योंकि तुम सोच रहे
  3354. 3:15:49हो कि इस रास्ते से तुम्हें सच मिल जाएगा
  3355. 3:15:53तो यह भी एक और तरीका है प्रोटेक्ट करने
  3356. 3:15:57का। सदियों से जनरेशन के बाद जनरेशन हमने
  3357. 3:16:02एक चक्र बनाया है स्पिरिचुअल और इकोनॉमिक
  3358. 3:16:06सेल्फ प्रोटेक्शन का।
  3359. 3:16:09अब चलो पूछते हैं कि क्या स्पिरिचुअल या
  3360. 3:16:12इकोनॉमिक सेल्फ प्रोटेक्शन वाकई में रियल
  3361. 3:16:16है? शायद इकोनॉमिक लेवल पर तुम थोड़ा समय
  3362. 3:16:20के लिए सेल्फ प्रोटेक्शन दिखाते हो। जिसके
  3363. 3:16:23पास पैसा है, जो सुविधाओं से भरा हुआ है,
  3364. 3:16:28वह अक्सर अंदर से बहुत कमजोर होता है। और
  3365. 3:16:33सो कॉल्ड स्पिरिचुअल प्रोटेक्शन के पीछे
  3366. 3:16:36भागता है।
  3367. 3:16:40लेकिन सच यह है कि इकोनॉमिक सिक्योरिटी एक
  3368. 3:16:43इल्लुजन
  3369. 3:16:46है। पूरी दुनिया में डिप्रेशन, क्राइसिस,
  3370. 3:16:50वॉर और डिजास्टर ने दिखा दिया है कि कोई
  3371. 3:16:54इकोनॉमिक सिक्योरिटी नहीं होती।
  3372. 3:16:57तो हम स्पिरिचुअल सिक्योरिटी की तरफ भागे
  3373. 3:16:59जा रहे
  3374. 3:17:01हैं। पर मेरे लिए कोई सिक्योरिटी नहीं है।
  3375. 3:17:05ना स्पिरिचुअल ना इकोनॉमिक और ना ही कभी
  3376. 3:17:09हो सकती
  3377. 3:17:10है। मेरे लिए सिर्फ एक चीज है
  3378. 3:17:14विज़डम। जो समझ से आती है ना कि प्रोटेक्शन
  3379. 3:17:18से।
  3380. 3:17:20सेल्फ प्रोटेक्शन एक कमी से पैदा होता है
  3381. 3:17:23जिसमें ना कोई इंटेलिजेंस होती है ना
  3382. 3:17:26क्रिएटिव सोच सिर्फ टकराव होता है तुम और
  3383. 3:17:31सोसाइटी के बीच और वही चालू लोग तुम्हारा
  3384. 3:17:34फायदा उठाते
  3385. 3:17:37हैं। जब तक सेल्फ प्रोटेक्शन का पीछा चालू
  3386. 3:17:41है तब तक कॉन्फ्लिक्ट होगा और जब तक
  3387. 3:17:44कॉन्फ्लिक्ट है तब तक ना समझ है ना विडम।
  3388. 3:17:50और जब तक तुम्हारा एटीट्यूड यही है तब तक
  3389. 3:17:54तुम्हारा
  3390. 3:17:55सच स्पिरिचुअलिटी या गॉड का ढूंढना सिर्फ
  3391. 3:17:59एक और पावर या सिक्योरिटी का खेल
  3392. 3:18:04है। सिर्फ तब जब माइंड जो अपने बनाए हुए
  3393. 3:18:09प्रोटेक्शन की दीवारों के पीछे छुपा है।
  3394. 3:18:13जब वह खुद को उन दीवारों से आजाद करता है।
  3395. 3:18:16तभी वह सच की असली खूबसूरती को महसूस करता
  3396. 3:18:20है। यह दीवार तुम्हारे माइंड ने ही बनाई
  3397. 3:18:23है जो अपनी कमी को महसूस करके यह
  3398. 3:18:28प्रोटेक्शन खड़ी करता है और उसके पीछे छुप
  3399. 3:18:31जाता
  3400. 3:18:33है। यह दीवारें तुमने कॉन्शियसली या
  3401. 3:18:36अनकॉन्शियसली बनाई है और तुम्हारा माइंड
  3402. 3:18:41इनमें इतना बंध गया है कि हर एक्शन सिर्फ
  3403. 3:18:45और ज्यादा कॉन्फ्लिक्ट पैदा करता
  3404. 3:18:48है। तो सिर्फ तुम्हारे प्रॉब्लम्स का
  3405. 3:18:51स्यूशन ढूंढना तुम्हें नए प्रॉब्लम से
  3406. 3:18:54आजाद नहीं
  3407. 3:18:56करेगा। जब तक सेल्फ प्रोटेक्शन का सेंटर
  3408. 3:18:59जो कमी से पैदा हुआ है जब तक वह जिंदा है।
  3409. 3:19:05तब तक डिस्टरबेंस, दर्द और तकलीफ
  3410. 3:19:09चलेगी और तुम उस कमी को डिसिप्लिन करके
  3411. 3:19:13मिटा नहीं
  3412. 3:19:14सकते। तुम सोचते हो मैं अंदर से शैलो
  3413. 3:19:19हूं। कैसे इसे हटाऊं? मैं कहता हूं उसे
  3414. 3:19:23हटाने की कोशिश मत करो। यह सिर्फ एक
  3415. 3:19:26सब्सीट्यूशन बन जाता
  3416. 3:19:29है। सिर्फ अवेयर बनो। जांचो कि यह कमी
  3417. 3:19:33कहां से आई
  3418. 3:19:35है। तुम इसे जबरदस्ती मिटा नहीं सकते। ना
  3419. 3:19:39किसी आइडियल, डर या सुख के खेल में।
  3420. 3:19:46सिर्फ अवेयरनेस से ही तुम जान सकते हो कि
  3421. 3:19:49यह कमी का असली वजह क्या
  3422. 3:19:52है। जब तुम अपने एनवायरमेंट को ऑब्जर्व
  3423. 3:19:55करते हो और उसके अंदर छुपे हुए लेयर्स को
  3424. 3:19:59देखते हो तब तुम्हें समझ
  3425. 3:20:04आएगा कि सेल्फ प्रोटेक्शन कितना ट्रिकी और
  3426. 3:20:08सल होता
  3427. 3:20:10है। सेल्फ प्रोटेक्शन कमी का रिजल्ट है और
  3428. 3:20:15तुम्हारा माइंड सदियों से कंडीशनिंग में
  3429. 3:20:18बंधा हुआ है। तुम इसे डिसिप्लिन करके हटा
  3430. 3:20:22नहीं सकते। अगर किया तो तुम उन इमोशंस और
  3431. 3:20:27सोचो के झूठी सेफ्टी के लेयर्स को मिस कर
  3432. 3:20:30दोगे जिसके पीछे तुम्हारा माइंड छुपा हुआ
  3433. 3:20:35है। और उनको समझने के लिए तुम्हें बस
  3434. 3:20:38अवेयर होना पड़ेगा। अवेयरनेस का मतलब यह
  3435. 3:20:42नहीं कि तुम तुरंत कुछ बदल
  3436. 3:20:45दो। तुम्हारा माइंड आदत में है सब कुछ
  3437. 3:20:49मॉडिफाई करने का। जिसे तुम कहते हो
  3438. 3:20:52एडजस्टमेंट,
  3439. 3:20:53डिसिप्लिन, चेंज।
  3440. 3:20:58लेकिन अवेयरनेस में कोई मॉडिफिकेशन नहीं
  3441. 3:21:01होती। उसमें होती है सिर्फ
  3442. 3:21:04समझ पूरी तरीके से।
  3443. 3:21:08सिर्फ जब तुम इन प्रोटेक्शन की दीवारों को
  3444. 3:21:11अवेयरनेस की आग में जला देते हो बिना
  3445. 3:21:14मॉडिफाई किए बिना एडजस्ट किए तब तुम
  3446. 3:21:18एनवायरमेंट का असली मतलब समझ पाते हो उसके
  3447. 3:21:22छुपे हुए लेयर्स और कमियों के
  3448. 3:21:27साथ और तभी आता है वह सच वह एटरनल क्योंकि
  3449. 3:21:31उसमें कोई तुम नहीं रहता जो अपने आप को
  3450. 3:21:34प्रोटेक्ट कर रहा हो
  3451. 3:21:37जब तक यह सेल्फ प्रोटेक्टिव सेंटर जो तुम
  3452. 3:21:40मैं कहते हो जिंदा है तब तक कंफ्यूजन
  3453. 3:21:44होगा, डिस्टरबेंस होगा, कॉन्फ्लिक्ट
  3454. 3:21:49होगा। तुम इन ऑब्सकल्स को डिसिप्लिन से
  3455. 3:21:52सिस्टम फॉलो करके या किसी और को कॉपी करके
  3456. 3:21:56खत्म नहीं कर
  3457. 3:21:57सकते। तुम इन्हें सिर्फ तब समझ सकते हो जब
  3458. 3:22:01माइंड और दिल दोनों पूरी तरह अवेयर हो
  3459. 3:22:05जाए।
  3460. 3:22:07और तभी आता है एक आनंद, एक जीता हुआ ट्रुथ
  3461. 3:22:11का फ्लो जो ना कोई एंड है ना कोई
  3462. 3:22:15गोल। सिर्फ एक लगातार जिंदा रहने वाली
  3463. 3:22:19मूवमेंट
  3464. 3:22:21है। वह आनंद, वह एक्ससी जिसे बयां नहीं
  3465. 3:22:27किया जा सकता। क्योंकि जो चीज डिस्क्राइब
  3466. 3:22:31की जाए वह खत्म हो जाती
  3467. 3:22:34है। जब तक तुम सच के लिए व्नरेबल नहीं
  3468. 3:22:38होते तब तक ना एक्ससी है ना
  3469. 3:22:45इमोटिटी उजाई
  3470. 3:22:48कैलिफोर्निया जुलाई वन 19 34
  3471. 3:23:12पार्ट
  3472. 3:23:15टू इनाइट्स इन टू एवरीडे लाइफ।
  3473. 3:23:21इस पार्ट में कृष्णमूर्ति जी की कुछ लिखी
  3474. 3:23:24हुई बातें दी गई हैं जो तीन वॉल्यूम्स में
  3475. 3:23:27कमेंट्रीज ऑन लिविंग के नाम से पब्लिश हुई
  3476. 3:23:30हैं।
  3477. 3:23:32यहां उनकी लिखी बातें एजुकेशन और यंग
  3478. 3:23:35जनरेशन के बारे में भी हैं। एजुकेशन एंड द
  3479. 3:23:38सिग्निफिकेंस ऑफ लाइफ और लाइफ अहेड।
  3480. 3:23:43और फ्रीडम पर भी हैं। एक ऐसी किताब में
  3481. 3:23:46जिसका इंट्रोडक्शन एल्डस हगजली ने लिखा
  3482. 3:23:49था। द फर्स्ट एंड लास्ट
  3483. 3:23:53फ्रीडम। शायद सबसे पर्सनल और रिवलिंग
  3484. 3:23:56बातें उनकी जर्नल और कृष्णमूर्ति टू
  3485. 3:23:59हिमसेल्फ से ली गई हैं। जिसमें उन्होंने
  3486. 3:24:03अक्सर अपने टीचिंग्स के डीपेस्ट मिस्टिकल
  3487. 3:24:06सोर्सेस को टच किया
  3488. 3:24:10है। द फर्स्ट एंड लास्ट
  3489. 3:24:17फ्रीडम। एक दूसरे से बात करना चाहे हम एक
  3490. 3:24:20दूसरे को कितना भी अच्छे से जानते हो बहुत
  3491. 3:24:23मुश्किल होता
  3492. 3:24:24है। हो सकता है जो शब्द मैं यूज कर रहा
  3493. 3:24:28हूं उनका मतलब तुम्हारे लिए कुछ और हो।
  3494. 3:24:32समझ तब आता है जब तुम और मैं एक ही लेवल
  3495. 3:24:35पर एक ही वक्त पर मिलते
  3496. 3:24:38हैं। यह तभी होता है जब लोगों के बीच
  3497. 3:24:42सच्चा प्यार होता है। पतिप के बीच या
  3498. 3:24:45क्लोज दोस्तों के
  3499. 3:24:47बीच। वही होती है असली बातचीत।
  3500. 3:24:52तुरंत समझ तभी आता है जब हम एक ही लेवल पर
  3501. 3:24:56एक ही वक्त पर मिलते हैं। एक दूसरे से
  3502. 3:24:59आसानी से अच्छे से और क्लियर एक्शन के साथ
  3503. 3:25:04बात करना बहुत मुश्किल
  3504. 3:25:07है। मैं सिंपल वर्ड्स यूज कर रहा हूं।
  3505. 3:25:11टेक्निकल
  3506. 3:25:13नहीं क्योंकि मुझे नहीं लगता कि कोई भी
  3507. 3:25:16टेक्निकल तरीके हमारी मुश्किलें सॉल्व कर
  3508. 3:25:19सकते हैं।
  3509. 3:25:21इसलिए मैं साइकोलॉजी या साइंस के टेक्निकल
  3510. 3:25:24शब्द यूज नहीं करूंगा। मैंने ना साइकोलॉजी
  3511. 3:25:28की कोई बुक पढ़ी है ना रिलीजियस बुक्स। यह
  3512. 3:25:31मेरी किस्मत
  3513. 3:25:33है। मैं चाहता हूं कि हम डेली लाइफ में जो
  3514. 3:25:37सिंपल वर्ड्स यूज़ करते हैं, उन्हीं से
  3515. 3:25:40कुछ गहरा मतलब समझा सकूं।
  3516. 3:25:44लेकिन यह तभी पॉसिबल है जब तुम्हें सुनने
  3517. 3:25:47का तरीका आता हो। सुनने का भी एक आर्ट
  3518. 3:25:51होता
  3519. 3:25:52है। असली सुनने के लिए इंसान को अपने सारे
  3520. 3:25:56बायस, सोच और डेली थॉट्स साइड में रखने
  3521. 3:26:00पड़ते
  3522. 3:26:01हैं। जब तुम्हारा माइंड एक ओपन स्टेट में
  3523. 3:26:04होता है, तभी बात आसानी से समझ में आती
  3524. 3:26:10है। तुम तभी सुन रहे होते हो जब तुम्हारा
  3525. 3:26:13पूरा ध्यान किसी चीज पर होता है। लेकिन
  3526. 3:26:17अफसोस हम में से ज्यादा लोग एक स्क्रीन के
  3527. 3:26:21थ्रू सुनते हैं। वह स्क्रीन होती है हमारे
  3528. 3:26:24प्रिजुडिसिस
  3529. 3:26:26की। चाहे वह रिलीजियस हो या स्पिरिचुअल
  3530. 3:26:30साइकोलॉजिकल हो या साइंटिफिक।
  3531. 3:26:33या फिर हमारे डेली के टेंशन, चाहतें और डर
  3532. 3:26:38हो और यह सब चीजें एक स्क्रीन बन जाती हैं
  3533. 3:26:42और हम उसके पीछे से सुनते
  3534. 3:26:45हैं। इसलिए हम असल में सामने वाले को नहीं
  3535. 3:26:50सुनते। बल्कि अपने ही दिमाग की आवाज सुनते
  3536. 3:26:54हैं। अपने ट्रेनिंग, बायस, आदतें,
  3537. 3:26:58रेजिस्टेंस को साइड में रखना बहुत मुश्किल
  3538. 3:27:01होता है। और वर्बल बात के परे जाके ऐसे
  3539. 3:27:05सुनना कि तुरंत समझ में आए। यह हमारी सबसे
  3540. 3:27:08बड़ी प्रॉब्लम
  3541. 3:27:10है। अगर इस बातचीत के दौरान कोई बात
  3542. 3:27:14तुम्हारे बिलीफ या सोच के खिलाफ लगे तो बस
  3543. 3:27:17सुनो। रजिस्ट मत करो।
  3544. 3:27:20हो सकता है तुम सही हो और मैं गलत। लेकिन
  3545. 3:27:24अगर हम दोनों मिलकर सुनेंगे और सोचेंगे तो
  3546. 3:27:28हम सच को जान सकते
  3547. 3:27:30हैं। सच किसी और से तुम्हें नहीं मिल
  3548. 3:27:33सकता। तुम्हें खुद ही उसे ढूंढना पड़ता
  3549. 3:27:37है। और उसके लिए तुम्हारा माइंड एक ऐसे
  3550. 3:27:40स्टेट में होना चाहिए जहां तुम सीधा देख
  3551. 3:27:43सको।
  3552. 3:27:45सीधा देखना तब पॉसिबल नहीं होता जब अंदर
  3553. 3:27:48रेजिस्टेंस, सेफ्टी या प्रोटेक्शन
  3554. 3:27:53हो। समझ तब आता है जब हम जो हैं उससे
  3555. 3:27:56अवेयर हो
  3556. 3:27:58जाए। जो है जैसे है बिना उसे तोड़ मरोड़
  3557. 3:28:02के बिना उसे जज किए या जस्टिफाई किए।
  3558. 3:28:08उसे जानना ही विडम की शुरुआत
  3559. 3:28:11है। जब हम इंटरप्रेट करते हैं या अपने
  3560. 3:28:15बायस से सोचने लगते हैं तो हम सच से दूर
  3561. 3:28:18हो जाते हैं। यह बिल्कुल रिसर्च जैसे
  3562. 3:28:24है। किसी चीज को जानना हो जैसे वह वाकई है
  3563. 3:28:29तो रिसर्च चाहिए। तुम अपने मूड के हिसाब
  3564. 3:28:32से उसे समझ नहीं सकते। वैसे ही अगर हम देख
  3565. 3:28:36सकें, ऑब्जर्व कर सकें, सुन सकें, अवेयर
  3566. 3:28:40हो सके जो है बिल्कुल वैसे जैसे वह है तो
  3567. 3:28:44प्रॉब्लम खत्म हो जाती
  3568. 3:28:46है। और इसी बात को हम इन सब डिस्कोर्सेज
  3569. 3:28:50में करने वाले हैं। मैं तुम्हें सिर्फ यह
  3570. 3:28:53दिखाने वाला हूं क्या है ना कि अपने तरीके
  3571. 3:28:57से उसका मीनिंग बदलने वाला हूं।
  3572. 3:29:01और तुम्हें भी अपने बैकग्राउंड या
  3573. 3:29:03ट्रेनिंग के हिसाब से उसका मतलब नहीं
  3574. 3:29:05निकालना
  3575. 3:29:07चाहिए। क्या यह पॉसिबल नहीं है कि हम सब
  3576. 3:29:10चीजों को जैसे है वैसे ही देखें। वहीं से
  3577. 3:29:14तो समझ की शुरुआत होती है। जो है उसे
  3578. 3:29:18एक्सेप्ट करना, उसे जानना वही स्ट्रगल का
  3579. 3:29:22द एंड
  3580. 3:29:24है। अगर मुझे पता है कि मैं झूठा हूं और
  3581. 3:29:28मैं इस बात को मान लेता हूं तो स्ट्रगल
  3582. 3:29:31खत्म हो जाती
  3583. 3:29:33है। जो हम है उसे जानना उसे एक्सेप्ट करना
  3584. 3:29:38वही विज़डम का स्टार्ट है। वही समझ की
  3585. 3:29:41शुरुआत है जो तुम्हें टाइम से फ्री कर
  3586. 3:29:44देती है।
  3587. 3:29:47टाइम को ना कि घड़ी के टाइम को बल्कि
  3588. 3:29:50माइंड के साइकोलॉजिकल प्रोसेस के टाइम को
  3589. 3:29:54जब हम बीच में लाते हैं तो वह कंफ्यूजन और
  3590. 3:29:58डिस्ट्रक्शन क्रिएट करता
  3591. 3:30:01है। तो हम तभी समझ पाते हैं जो है जब हम
  3592. 3:30:06उसे बिना ब्लेम किए, बिना जस्टिफाई किए,
  3593. 3:30:09बिना उसमें अपने आप को डाले समझते
  3594. 3:30:12हैं। यह जान लेना कि इंसान किसी पर्टिकुलर
  3595. 3:30:15कंडीशन या स्टेट में है, खुद एक फ्रीडम का
  3596. 3:30:18प्रोसेस है।
  3597. 3:30:21लेकिन जो आदमी अपनी कंडीशन, अपनी स्ट्रगल
  3598. 3:30:24से अनजान है, वह कुछ और बनने की कोशिश
  3599. 3:30:27करता है और वही आदत बन जाती है।
  3600. 3:30:32तो
  3601. 3:30:33चलिए यह याद रखें कि हम यह देखना चाहते
  3602. 3:30:37हैं कि असल में क्या है। उस चीज को
  3603. 3:30:40ऑब्जर्व करना और वैसे ही देखना जैसे वह है
  3604. 3:30:43बिना किसी एंगल के बिना कोई मीनिंग दिए।
  3605. 3:30:48इसके लिए एक बहुत ही शार्प माइंड चाहिए और
  3606. 3:30:51एक सॉफ्ट हार्ट जो वैसे ही देख सके जैसे
  3607. 3:30:55चीजें हैं। क्योंकि जो है वह हमेशा बदल
  3608. 3:30:58रहा होता है। हमेशा एक नई शेप ले रहा होता
  3609. 3:31:03है। और अगर माइंड किसी बिलीफ या नॉलेज में
  3610. 3:31:06अटका होता है तो वह उस चेंज को फॉलो नहीं
  3611. 3:31:10कर
  3612. 3:31:11सकता। वह जो चल रहा है उसके साथ चल ही
  3613. 3:31:14नहीं सकता।
  3614. 3:31:16जो है वह कभी सेम नहीं
  3615. 3:31:19होता। वह हमेशा चल रहा होता है। अगर तुम
  3616. 3:31:22ध्यान से देखो तो पता
  3617. 3:31:25चलेगा। उसके साथ चलने के लिए तुम्हारा
  3618. 3:31:28माइंड फास्ट होना चाहिए। और तुम्हारा दिल
  3619. 3:31:32फ्लेक्सिबल होना
  3620. 3:31:35चाहिए। और अगर तुम्हारा माइंड स्टक है
  3621. 3:31:39बिलीफ में, किसी सोच में, किसी आइडेंटिटी
  3622. 3:31:42में और तुम्हारा दिल सूख गया है,
  3623. 3:31:46तो तुम उसको फास्ट फॉलो नहीं कर
  3624. 3:31:50सकते। मुझे लगता है ज्यादा बात किए बिना
  3625. 3:31:54यह क्लियर है कि हर जगह इंडिविजुअल और
  3626. 3:31:56ग्रुप लेवल पर कंफ्यूजन पेन और केओस है।
  3627. 3:32:00सिर्फ इंडिया में नहीं पूरे वर्ल्ड में।
  3628. 3:32:04चीन, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी हर जगह
  3629. 3:32:07दुख और कंफ्यूजन बढ़ रहा है। यह सिर्फ
  3630. 3:32:11नेशनल नहीं, यह सिर्फ यहां का नहीं, यह हर
  3631. 3:32:14जगह का
  3632. 3:32:15है। बहुत इंटेंस सफरिंग है। और यह सिर्फ
  3633. 3:32:19पर्सनल नहीं बल्कि कलेक्टिव भी है। यह एक
  3634. 3:32:23ग्लोबल ट्रेजडी
  3635. 3:32:26है। और इसे सिर्फ एक मैप के कलर्ड एरिया
  3636. 3:32:30तक लिमिट करना बेकार है। क्योंकि अगर हम
  3637. 3:32:33ऐसा करेंगे तो हम इस वर्ल्ड वाइड और
  3638. 3:32:36पर्सनल पेन का रियल मीनिंग नहीं समझ
  3639. 3:32:40पाएंगे। इस कंफ्यूजन को देखते हुए आज
  3640. 3:32:43हमारी रिस्पांस क्या है? हम कैसे रिएक्ट
  3641. 3:32:47करते हैं? दुख है पॉलिटिकल, सोशल,
  3642. 3:32:52रिलीजियस। हमारा पूरा साइकोलॉजिकल बीइंग
  3643. 3:32:55कंफ्यूज्ड है। और सब
  3644. 3:32:57लीडर्स पॉलिटिकल और रिलीजियस फेल हो चुके
  3645. 3:33:01हैं।
  3646. 3:33:02सब बुक्स का मतलब खत्म हो गया है। चाहे
  3647. 3:33:06तुम भगवत गीता पढ़ लो या बाइबल या लेटेस्ट
  3648. 3:33:10पॉलिटिक्स या साइकोलॉजी की
  3649. 3:33:12बुक। तुम देखोगे कि उनमें से सच की वह बात
  3650. 3:33:16चली गई है। वह सिर्फ शब्द बन गए
  3651. 3:33:20हैं। तुम खुद जो उन वर्ड्स को रिपीट करते
  3652. 3:33:24हो, कंफ्यूज्ड हो और श्योर नहीं हो।
  3653. 3:33:29और सिर्फ वर्ड्स रिपीट करने से कुछ नहीं
  3654. 3:33:32होता। इसलिए वह वर्ड्स और बुक्स का कोई
  3655. 3:33:35वैल्यू नहीं रह गया। मतलब अगर तुम बाइबल
  3656. 3:33:39या मार्क्स या भगवत गीता कोट करते हो और
  3657. 3:33:43तुम खुद ही अनशोर हो, कंफ्यूज्ड हो तो
  3658. 3:33:47तुम्हारा रिपीट करना झूठ बन जाता है।
  3659. 3:33:50क्योंकि जो लिखा है वह सिर्फ प्रोपेगेंडा
  3660. 3:33:53बन जाता है और प्रोपेगेंडा कभी सच नहीं
  3661. 3:33:56होता।
  3662. 3:33:58तो जब तुम रिपीट करते हो तो तुम अपनी खुद
  3663. 3:34:01की स्टेट को समझना बंद कर देते
  3664. 3:34:04हो। तुम सिर्फ अथॉरिटी के शब्दों से अपनी
  3665. 3:34:07कंफ्यूजन को छुपा रहे हो।
  3666. 3:34:11लेकिन हम यह करने नहीं आए
  3667. 3:34:14हैं। हम इस कंफ्यूजन को समझने आए हैं। ना
  3668. 3:34:18कि कोटेशन से
  3669. 3:34:21छुपाने। तो तुम्हारा रिस्पांस क्या है?
  3670. 3:34:24तुम इस केओस इस कंफ्यूजन इस अनसर्टेन
  3671. 3:34:28जिंदगी को कैसे देखते
  3672. 3:34:31हो? इसे महसूस करो। जैसे मैं बात कर रहा
  3673. 3:34:35हूं। मेरे शब्द फॉलो मत
  3674. 3:34:38करो। अपने अंदर चल रहे थॉट को फॉलो
  3675. 3:34:43करो। ज्यादातर लोग सिर्फ स्पेक्टेटर्स बन
  3676. 3:34:46गए हैं। गेम का हिस्सा नहीं
  3677. 3:34:49बनते। हम बुक्स पढ़ते हैं लेकिन कभी लिखते
  3678. 3:34:52नहीं।
  3679. 3:34:54यह हमारी आदत बन गई है। सिर्फ देखते
  3680. 3:34:58रहना। फुटबॉल गेम हो या पॉलिटिकल स्पीच।
  3681. 3:35:03हम सिर्फ बाहर खड़े रहते
  3682. 3:35:05हैं और अपना क्रिएटिव पावर खो चुके
  3683. 3:35:09हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि अब हम
  3684. 3:35:13अब्सॉर्ब करें, हिस्सा बने। लेकिन अगर तुम
  3685. 3:35:16सिर्फ देख रहे हो, सिर्फ स्पेक्टेटर हो।
  3686. 3:35:21तो तुम इस डिस्कोर्स का रियल मीनिंग खो
  3687. 3:35:24दोगे क्योंकि मैं तुम्हें ऐसी इंफॉर्मेशन
  3688. 3:35:27नहीं देने वाला जो इनसाइक्लोपीडिया में
  3689. 3:35:30मिल
  3690. 3:35:31जाए। हम यह कोशिश कर रहे हैं कि एक दूसरे
  3691. 3:35:34के थॉट्स को फॉलो करें जितना गहरा हो सके।
  3692. 3:35:38अपने फीलिंग्स के सिग्नल्स और रिएक्शंस को
  3693. 3:35:41समझें।
  3694. 3:35:43तो प्लीज यह देखो कि तुम्हारा खुद का
  3695. 3:35:46रिस्पांस क्या है इस पेन के लिए ना कि
  3696. 3:35:50किसी और के शब्दों
  3697. 3:35:52का। तुम्हारा रिस्पांस इनडिफरेंट है अगर
  3698. 3:35:55तुम इस सफरिंग इस केओस से फायदा ले रहे
  3699. 3:35:58हो। चाहे वह इकोनॉमिक हो, सोशल हो,
  3700. 3:36:02पॉलिटिकल हो या
  3701. 3:36:06साइकोलॉजिकल। इसलिए तुम्हें कोई प्रॉब्लम
  3702. 3:36:09नहीं होती। कि अगर यह केओस चलता
  3703. 3:36:11रहे जितनी ज्यादा दिक्कत होती है दुनिया
  3704. 3:36:14में जितना ज्यादा केओस होता है उतना ही
  3705. 3:36:18ज्यादा इंसान सिक्योरिटी ढूंढता है तुमने
  3706. 3:36:22नोटिस किया है
  3707. 3:36:24ना जब दुनिया में हर तरफ कंफ्यूजन होती है
  3708. 3:36:28माइंड में भी और हर तरीके
  3709. 3:36:31से तो तुम अपने आप को किसी ना किसी
  3710. 3:36:34सिक्योरिटी में बंद कर लेते हो या तो बैंक
  3711. 3:36:37अकाउंट वाली सिक्योरिटी या किसी
  3712. 3:36:39आईडियोलॉजी
  3713. 3:36:41वाली या तुम प्रेयर की तरफ जाते हो, मंदिर
  3714. 3:36:45जाते हो जो असल में दुनिया में जो हो रहा
  3715. 3:36:49है उससे भागना
  3716. 3:36:52है और भी ज्यादा सेट्स बन रहे हैं और
  3717. 3:36:55नए-नए इज्म्स हर जगह निकल रहे हैं।
  3718. 3:37:00क्योंकि जितनी ज्यादा कंफ्यूजन होती है,
  3719. 3:37:02उतनी ही ज्यादा तुम्हें एक लीडर चाहिए
  3720. 3:37:04होता
  3721. 3:37:06है। कोई जो तुम्हें इस मिस से बाहर
  3722. 3:37:09निकाले। इसलिए तुम रिलीजियस बुक्स की तरफ
  3723. 3:37:13जाते हो या किसी नए टीचर की तरफ या किसी
  3724. 3:37:17सिस्टम के हिसाब से एक्ट करते हो जो
  3725. 3:37:20प्रॉब्लम सॉल्व करता हुआ लगता है। लेफ्ट
  3726. 3:37:23का हो या राइट का।
  3727. 3:37:26यही एग्जजेक्टली हो रहा
  3728. 3:37:28है। जब तुम्हें कंफ्यूजन का असली रियलिटी
  3729. 3:37:32का पता चलता है तो तुम तुरंत उससे भागने
  3730. 3:37:35लगते हो।
  3731. 3:37:37वह सेक्स जो तुम्हें सफरिंग का स्यूशन
  3732. 3:37:40देने का सिस्टम देते हैं। इकोनॉमिक, सोशल
  3733. 3:37:44या रिलीजियस वह सबसे खतरनाक
  3734. 3:37:47है। क्योंकि तब सिस्टम इंपॉर्टेंट हो जाता
  3735. 3:37:50है इंसान
  3736. 3:37:52नहीं। चाहे वह रिलीजियस सिस्टम हो या
  3737. 3:37:55लेफ्ट का हो या राइट
  3738. 3:37:57का। सिस्टम इंपॉर्टेंट हो जाता है।
  3739. 3:38:01फिलॉसफी आईडिया इंपॉर्टेंट हो जाता है और
  3740. 3:38:04इंसान नहीं। और आईडिया के लिए, आईडियोलॉजी
  3741. 3:38:07के लिए तुम पूरी इंसानियत को सैक्रिफाइस
  3742. 3:38:11करने के लिए रेडी हो जाते हो। और यही
  3743. 3:38:14दुनिया में हो रहा
  3744. 3:38:16है। यह सिर्फ मेरा इंटरप्रिटेशन नहीं है।
  3745. 3:38:19अगर तुम ऑब्जर्व करो तो तुम देखोगे कि
  3746. 3:38:22एग्जजेक्टली यही हो रहा
  3747. 3:38:24है। सिस्टम इंपॉर्टेंट हो गया है।
  3748. 3:38:29इसलिए जब सिस्टम इंपॉर्टेंट हो जाता है तो
  3749. 3:38:32इंसान तुम और मैं
  3750. 3:38:35हमारा कोई मतलब नहीं रहता। और जो सिस्टम
  3751. 3:38:39को कंट्रोल करते हैं रिलीजियस हो या सोशल
  3752. 3:38:43लेफ्ट के हो या राइट के वह पावर ले लेते
  3753. 3:38:47हैं। अथॉरिटी बन जाते हैं और तुम
  3754. 3:38:51इंडिविजुअल को सैक्रिफाइस कर देते हैं।
  3755. 3:38:55यही एग्जैक्टली हो रहा
  3756. 3:38:57है। अब यह सोचो कि इस कंफ्यूजन इस पेन का
  3757. 3:39:01कारण क्या है?
  3758. 3:39:04यह पेन कैसे आया? यह सफरिंग सिर्फ अंदर से
  3759. 3:39:07नहीं, बाहर भी। यह डर और वॉर का
  3760. 3:39:11खौफ। जो थर्ड वर्ल्ड वॉर आ रही है, इसका
  3761. 3:39:15कारण क्या
  3762. 3:39:18है? यह क्लियरली दिखाता है कि सारी मोरल
  3763. 3:39:22स्पिरिचुअल वैल्यूस खत्म हो गई हैं। और
  3764. 3:39:26सिर्फ सेंसुअल वैल्यूस का हीेंस रह गया
  3765. 3:39:29है।
  3766. 3:39:32वह चीजें जो हाथ से या दिमाग से बनी है।
  3767. 3:39:36जब हमारे पास कोई और वैल्यू नहीं रहती
  3768. 3:39:38सिवाय चीजों की वैल्यू के जो सेंसेस से
  3769. 3:39:42आती हैं या दिमाग या हाथ या मशीन से तो
  3770. 3:39:46क्या होता
  3771. 3:39:48है? जितना ज्यादा हम चीजों की सेंसुअल
  3772. 3:39:51वैल्यू कोेंस देते हैं, उतना ही ज्यादा
  3773. 3:39:55कंफ्यूजन बढ़ती है। है ना?
  3774. 3:39:58फिर से कह रहा हूं यह मेरी थ्यरी नहीं
  3775. 3:40:02है। तुम्हें कोई बुक कोट करने की जरूरत
  3776. 3:40:05नहीं है यह समझने के लिए कि तुम्हारी
  3777. 3:40:08वैल्यूस, तुम्हारा पैसा, तुम्हारा सोशल और
  3778. 3:40:11इकोनॉमिक लाइफ सब चीजों पर बेस्ड है। जो
  3779. 3:40:15हाथ या दिमाग से बनी
  3780. 3:40:18है। तो हम जीते हैं, काम करते हैं और पूरा
  3781. 3:40:22एकिस्टेंस एक सेंसुअल वैल्यू में डूब गया
  3782. 3:40:25है। इसका मतलब चीजें इंपॉर्टेंट हो गई
  3783. 3:40:29हैं। जो चीजें माइंड से बनी है, हाथ से
  3784. 3:40:33बनी है, मशीन से बनी है, वही इंपॉर्टेंट
  3785. 3:40:36हो गई
  3786. 3:40:37हैं। और जब चीजें इंपॉर्टेंट हो जाती हैं,
  3787. 3:40:40तो बिलीव सबसे ज्यादा सिग्निफिकेंट बन
  3788. 3:40:43जाता है। और यही दुनिया में हो रहा है। है
  3789. 3:40:47ना?
  3790. 3:40:49तो सेंसेस की वैल्यू को ज्यादा और
  3791. 3:40:52ज्यादाेंस देना ही कंफ्यूजन का रीजन बन
  3792. 3:40:55जाता है। और जब कंफ्यूजन होती है तो हम
  3793. 3:41:00उससे भागने की कोशिश करते हैं अलग-अलग
  3794. 3:41:03तरीकों से। चाहे वह रिलीजियस हो, इकोनॉमिक
  3795. 3:41:07हो, सोशल
  3796. 3:41:08हो या एंबिशन के थ्रू, पावर के थ्रू या
  3797. 3:41:12रियलिटी ढूंढने के थ्रू।
  3798. 3:41:16लेकिन जो रियल है वह पास ही होता है। उसे
  3799. 3:41:19ढूंढने की जरूरत
  3800. 3:41:20नहीं। और जो आदमी सच ढूंढता है वह उसे कभी
  3801. 3:41:26नहीं पाता। सच वही है जो है और इसी में
  3802. 3:41:30उसकी ब्यूटी है।
  3803. 3:41:34लेकिन जैसे ही तुम उसे सोचने लगते हो,
  3804. 3:41:36जैसे ही तुम उसके पीछे भागते हो, तुम
  3805. 3:41:39स्ट्रगल करने लगते हो। और जो आदमी स्ट्रगल
  3806. 3:41:43करता है वह समझ नहीं सकता। इसलिए हमें
  3807. 3:41:47शांत रहना चाहिए, देखना चाहिए, पैसिवली
  3808. 3:41:50अवेयर रहना चाहिए।
  3809. 3:41:53हम देखते हैं कि हमारा जीना हमारी एक्शन
  3810. 3:41:57हमेशा डिस्ट्रक्शन के एरिया में होती है।
  3811. 3:42:00सो के एरिया में होती है। जैसे एक वेव
  3812. 3:42:04कन्फ्यूजन और केओस हमेशा हमें ले लेते
  3813. 3:42:09हैं। जिंदगी के कंफ्यूजन में कोई गैप
  3814. 3:42:13नहीं। जो भी हम आज कर रहे हैं, वह केस की
  3815. 3:42:17तरफ ले जाता है। वह सोरो और अनहैपीनेस की
  3816. 3:42:20तरफ ले जाता है।
  3817. 3:42:22अपनी खुद की लाइफ देख लो। तुम्हें दिखेगा
  3818. 3:42:26कि हमारा जीना हमेशा सौरों के किनारे होता
  3819. 3:42:29है। हमारी जॉब, हमारी सोशल एक्टिविटी,
  3820. 3:42:32हमारा पॉलिटिक्स।
  3821. 3:42:35नेशंस का मिलना और वॉर का रोकना सब कुछ और
  3822. 3:42:40वॉर ले आता
  3823. 3:42:42है। लिविंग के पीछे हमेशा डिस्ट्रक्शन
  3824. 3:42:45छुपा होता है। जो भी हम करते हैं वह डेथ
  3825. 3:42:49की तरफ जाता है। यही सच में हो रहा है।
  3826. 3:42:53क्या हम इस मिजरी को तुरंत रोक सकते हैं?
  3827. 3:42:56बिना हमेशा कंफ्यूजन और सोरो के वेव में
  3828. 3:42:59फंसे हुए जीते रहें।
  3829. 3:43:04बुद्ध या क्राइस्ट जैसे बड़े टीचर्स आए।
  3830. 3:43:07उन्होंने फेथ को एक्सेप्ट किया। शायद खुद
  3831. 3:43:09को कंफ्यूजन और सोरो से फ्री कर लिया।
  3832. 3:43:14लेकिन उन्होंने सोरो को कभी रोका नहीं।
  3833. 3:43:16उन्होंने कंफ्यूजन को कभी खत्म नहीं किया।
  3834. 3:43:19कंफ्यूजन चलता रहा। सो चलता रहा। अगर तुम
  3835. 3:43:24यह सोशल और इकोनॉमिक कंफ्यूजन, यह केओस,
  3836. 3:43:27यह मिरी देखकर अपने आप को सो कॉल्ड
  3837. 3:43:30रिलीजियस लाइफ में ले जाते हो और दुनिया
  3838. 3:43:33को छोड़ देते हो तो तुम्हें लगता है कि
  3839. 3:43:36तुम इन ग्रेट टीचर्स का हिस्सा बन गए हो।
  3840. 3:43:40लेकिन दुनिया वैसे ही चलती रहती है अपने
  3841. 3:43:43केओस, मिजरी और डिस्ट्रक्शन के साथ।
  3842. 3:43:46अमीरों और गरीबों का हमेशा का सफरिंग।
  3843. 3:43:51तो हमारा प्रॉब्लम तुम्हारा और मेरा यह है
  3844. 3:43:54कि क्या हम इस मिजरी से तुरंत बाहर आ सकते
  3845. 3:43:59हैं? अगर तुम दुनिया में रहकर भी सिस्टम
  3846. 3:44:02का हिस्सा बनने से इनकार करते
  3847. 3:44:06हो तो तुम दूसरों की मदद करोगे इस केओस से
  3848. 3:44:10निकलने में। कल नहीं
  3849. 3:44:12आज वही तो असली प्रॉब्लम
  3850. 3:44:15है। वॉर आने वाली है और भी डिस्ट्रक्टिव
  3851. 3:44:19और भी खौफनाक फॉर्म
  3852. 3:44:22में। हमें लगता है हम इसे रोक नहीं सकते
  3853. 3:44:26क्योंकि यह इशूज़ बहुत स्ट्रांग और बहुत
  3854. 3:44:28क्लोज है।
  3855. 3:44:31लेकिन तुम और मैं यह कंफ्यूजन और मिजरी को
  3856. 3:44:34तुरंत देख सकते हैं। है ना? हमें उन्हें
  3857. 3:44:37देखना होगा।
  3858. 3:44:39तभी हम किसी और में भी सच का वही समझ जगा
  3859. 3:44:42सकते
  3860. 3:44:44हैं। मतलब क्या तुम तुरंत फ्री हो सकते
  3861. 3:44:48हो? क्योंकि वही एक रास्ता है मिजरी से
  3862. 3:44:50बाहर आने
  3863. 3:44:52का। परसेप्शन सिर्फ प्रेजेंट में होता है।
  3864. 3:44:56लेकिन अगर तुम कहते हो मैं कल करूंगा तो
  3865. 3:44:59कंफ्यूजन का वेव तुम्हें ले जाता है और
  3866. 3:45:02तुम हमेशा कंफ्यूजन में उलझे रहते हो।
  3867. 3:45:06अब क्या यह पॉसिबल है कि तुम ऐसे स्टेट
  3868. 3:45:08में आ जाओ जहां तुम सच को तुरंत देख लो और
  3869. 3:45:12इस कंफ्यूजन का एंड हो
  3870. 3:45:15जाए। मैं कहता हूं कि यह पॉसिबल है और यही
  3871. 3:45:19एक रास्ता है। मैं कहता हूं कि यह हो सकता
  3872. 3:45:22है और होना चाहिए।
  3873. 3:45:25यह कोई मान लेना या बिलीफ पर बेस्ड नहीं
  3874. 3:45:29है। इस एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी रिवोल्यूशन को
  3875. 3:45:33लाना जो यह नहीं है कि कैपिटलिस्ट को हटा
  3876. 3:45:37के किसी और ग्रुप को लाओ।
  3877. 3:45:40यह जो असली ट्रांसफॉर्मेशन है, जो एक
  3878. 3:45:43सच्ची रिवोल्यूशन है, वही प्रॉब्लम
  3879. 3:45:47है। जो नॉर्मल रिवोल्यूशन कहते हैं, वह
  3880. 3:45:50सिर्फ राइट को थोड़ा मॉडिफाई करके लेफ्ट
  3881. 3:45:54बनाना होता है। लेफ्ट भी असल में राइट का
  3882. 3:45:57ही कंटीन्यूएशन होता है। थोड़ा अलग फॉर्म
  3883. 3:46:00या डिग्री में।
  3884. 3:46:04अगर राइट सेंसफुल वैल्यूस पर बेस्ड है तो
  3885. 3:46:07लेफ्ट भी वही सेंसुल वैल्यूस रखता है।
  3886. 3:46:11सिर्फ थोड़ा एक्सप्रेशन अलग होता है।
  3887. 3:46:15इसलिए सच्ची रिवोल्यूशन तभी हो सकती है जब
  3888. 3:46:18तुम इंडिविजुअल अपने रिलेशन में अवेयर हो
  3889. 3:46:23जाओ। जो तुम अपने रिलेशन में हो अपनी
  3890. 3:46:26वाइफ, अपने चाइल्ड, अपने बॉस, अपने नेबर
  3891. 3:46:30के साथ वही सोसाइटी है।
  3892. 3:46:33सोसाइटी अपने आप में कुछ नहीं
  3893. 3:46:35है। सोसाइटी वही है जो तुम और मैं अपने
  3894. 3:46:39रिलेशन से बनाते
  3895. 3:46:40हैं। यह हमारे अंदर के साइकोलॉजिकल
  3896. 3:46:44स्टेट्स का आउटर प्रोजेक्शन है। तो अगर
  3897. 3:46:47तुम और मैं खुद को नहीं समझते तो सिर्फ
  3898. 3:46:51आउटर वर्ल्ड को बदलना जो कि अंदर का
  3899. 3:46:54रिफ्लेक्शन है उसका कोई मतलब नहीं बनता।
  3900. 3:46:58मतलब सोसाइटी में कोई रियल बदलाव तब तक
  3901. 3:47:02नहीं हो सकता जब तक मैं अपने रिलेशन में
  3902. 3:47:04खुद को नहीं समझता।
  3903. 3:47:07अगर मैं अपने रिलेशन में कंफ्यूज्ड हूं तो
  3904. 3:47:11मैं एक ऐसी सोसाइटी बनाता हूं जो मेरे
  3905. 3:47:14जैसे ही कंफ्यूज्ड
  3906. 3:47:15है। यह एक सिंपल फैक्ट है जिसको हम डिस्कस
  3907. 3:47:19कर सकते
  3908. 3:47:21हैं। हम डिस्कस कर सकते हैं कि सोसाइटी ने
  3909. 3:47:25मुझे बनाया या मैंने सोसाइटी को
  3910. 3:47:28बनाया। तो क्या यह क्लियर फैक्ट नहीं है
  3911. 3:47:31कि मैं अपने रिलेशन में जो हूं वही
  3912. 3:47:34सोसाइटी बनाता हूं। और बिना खुद को डीपली
  3913. 3:47:38बदले सोसाइटी के फंक्शन को बदलना पॉसिबल
  3914. 3:47:41ही नहीं
  3915. 3:47:43है। जब हम किसी सिस्टम से सोसाइटी को
  3916. 3:47:47बदलने की कोशिश करते हैं तो हम असल सवाल
  3917. 3:47:50से भाग रहे होते हैं। क्योंकि सिस्टम कभी
  3918. 3:47:54इंसान को नहीं बदल सकता। इंसान ही सिस्टम
  3919. 3:47:57को बदलता है। यह हिस्ट्री भी दिखाती
  3920. 3:48:01है। जब तक मैं तुम्हारे साथ अपने रिलेशन
  3921. 3:48:04में खुद को नहीं समझता तब तक मैं ही केओस,
  3922. 3:48:09मिजरी, डिस्ट्रक्शन, फियर और ब्रूटलिटी का
  3923. 3:48:13रीजन
  3924. 3:48:15हूं। खुद को समझना टाइम का मैटर नहीं है।
  3925. 3:48:18मैं अभी के अभी खुद को समझ सकता हूं। अगर
  3926. 3:48:21मैं कहता हूं मैं कल समझूंगा तो मैं केओस
  3927. 3:48:25और मिजरी को ला रहा
  3928. 3:48:27हूं। मेरा एक्शन डिस्ट्रक्टिव हो जाता है।
  3929. 3:48:31जब मैं कहता हूं मैं
  3930. 3:48:34समझूंगा। तो मैं टाइम ले आता हूं और
  3931. 3:48:36कंफ्यूजन और डिस्ट्रक्शन के वेव में फंस
  3932. 3:48:39जाता
  3933. 3:48:42हूं। समझना अभी होता है। कल नहीं। कल उनके
  3934. 3:48:47लिए होता है जो आलसी हैं। जो स्लो हैं। जो
  3935. 3:48:51इंटरेस्टेड नहीं
  3936. 3:48:53है। जब तुम किसी चीज में इंटरेस्टेड होते
  3937. 3:48:56हो तो तुम तुरंत उसमें लग जाते हो। तुरंत
  3938. 3:49:00समझ आता है। तुरंत बदलाव होता है। अगर तुम
  3939. 3:49:04अभी नहीं बदलते तो तुम कभी नहीं बदलोगे।
  3940. 3:49:07क्योंकि जो कल बदलाव होता है, वह सिर्फ
  3941. 3:49:10थोड़ा चेंज होता है। वह असली
  3942. 3:49:13ट्रांसफॉर्मेशन नहीं होता।
  3943. 3:49:16असली ट्रांसफॉर्मेशन सिर्फ तुरंत होता है।
  3944. 3:49:19रिवोल्यूशन अभी होती है। कल नहीं। जब यह
  3945. 3:49:23होता है तो तुम्हारे पास कोई प्रॉब्लम
  3946. 3:49:26नहीं बचा होता। क्योंकि सेल्फ खुद के बारे
  3947. 3:49:30में चिंता करना छोड़ देता
  3948. 3:49:34है। फिर तुम डिस्ट्रक्शन के वेव के परे
  3949. 3:49:37चले जाते हो।
  3950. 3:49:49एंबिशन बच्चा पूरी रात रोता रहा और बेचारी
  3951. 3:49:53मां उसे चुप कराने की पूरी कोशिश करती
  3952. 3:49:56रही। उसने गाना गाया, डांटा भी प्यार से
  3953. 3:50:00गोद में उठाया, झुलाया लेकिन कुछ काम नहीं
  3954. 3:50:05आया। शायद बच्चे के दांत निकल रहे थे और
  3955. 3:50:08पूरी फैमिली के लिए रात बहुत थकने वाली
  3956. 3:50:11थी।
  3957. 3:50:13लेकिन अब अंधेरा पेड़ों के पार से हटा जा
  3958. 3:50:16रहा
  3959. 3:50:17था और आखिर में बच्चा चुप हो
  3960. 3:50:20गया। जैसे-जैसे आसमान हल्का होता गया एक
  3961. 3:50:24अजीब सी शांति छा
  3962. 3:50:27गई। लंबे पेड़ों की शाखाएं साफ दिख रही
  3963. 3:50:31थी। पतली और नंगी।
  3964. 3:50:34एक बच्चा चिल्लाया, एक कुत्ता भौका, एक
  3965. 3:50:37ट्रक गुजरा और एक नया दिन शुरू हो गया।
  3966. 3:50:42थोड़ी देर बाद मां बच्चे को ले बाहर आई
  3967. 3:50:45ध्यान से लपेट के और रोड पर से गुजरते हुए
  3968. 3:50:49गांव के आगे तक चली गई। जहां वह बस का वेट
  3969. 3:50:54कर रही
  3970. 3:50:54थी। लगता था वह उसे डॉक्टर के पास ले जा
  3971. 3:50:58रही थी। वह रात भर जागने के बाद बहुत थकी
  3972. 3:51:01और उदास लग रही
  3973. 3:51:03थी। लेकिन बच्चा गहरी नींद में सो रहा था।
  3974. 3:51:07थोड़ी ही देर में सूरज पेड़ों के ऊपर आ
  3975. 3:51:10गया और हरी घास ओस में चमकने
  3976. 3:51:15लगी। दूर एक ट्रेन की सीटी बजी और दूर के
  3977. 3:51:20पहाड़ ठंडे और छाया से भरे
  3978. 3:51:23लगे। एक बड़ा सा पंछी जोर से उड़ा।
  3979. 3:51:28क्योंकि हमने उसका आशियाना डिस्टर्ब कर
  3980. 3:51:31दिया था। लगता है हम बहुत अचानक वहां आ
  3981. 3:51:35गए। इसलिए उसे अपने अंडे पत्तों से ढकने
  3982. 3:51:39का टाइम ही नहीं मिला। वहां एक दर्जन से
  3983. 3:51:43ज्यादा अंडे थे। भले ही वह खुले थे, लेकिन
  3984. 3:51:46मुश्किल से दिख रहे
  3985. 3:51:48थे। उसने उन्हें इतनी सफाई से छुपा दिया
  3986. 3:51:52था और अब वह दूर एक पेड़ से हमें देख रही
  3987. 3:51:55थी।
  3988. 3:51:56कुछ दिन बाद हमने उस मां को उसके बच्चों
  3989. 3:52:00के साथ देखा और घोंसला खाली
  3990. 3:52:03था। रास्ता ठंडा और थोड़ा अंधेरा था जो
  3991. 3:52:07गीले जंगल से होकर दूर के पहाड़ों तक जाता
  3992. 3:52:11था और वेटल के फूल खिले हुए
  3993. 3:52:14थे। कुछ दिन पहले जोर की बारिश हुई थी और
  3994. 3:52:18जमीन नरम और भीगी थी। छोटे आलू के खेत थे
  3995. 3:52:23और नीचे घाटी में एक शहर
  3996. 3:52:26था। दिन बहुत खूबसूरत और सुनहरा था।
  3997. 3:52:30पहाड़ी के पार रास्ता वापस घर की तरफ जाता
  3998. 3:52:33था। वो बहुत स्मार्ट थी। उसने लेटेस्ट बुक
  3999. 3:52:38पढ़ी थी। लेटेस्ट प्लेस देखे थे। और एक नई
  4000. 3:52:42फिलॉसफी के क्रेज के बारे में वेल इनफॉर्म
  4001. 3:52:45थी।
  4002. 3:52:46उसका एनालिसिस हुआ था और उसने साइकोलॉजी
  4003. 3:52:49भी काफी पढ़ी थी क्योंकि उसे उसका
  4004. 3:52:52लैंग्वेज अच्छी तरह आता
  4005. 3:52:54था। वह सब इंपॉर्टेंट लोगों से मिलने की
  4006. 3:52:57कोशिश करती थी और कैजुअली किसी के साथ
  4007. 3:53:00यहां आ गई थी। वह आसानी से बात करती थी और
  4008. 3:53:04अपने वर्ड्स को स्टाइल से बोलती थी। वह
  4009. 3:53:08शादीशुदा थी। लेकिन उसके कोई बच्चे नहीं
  4010. 3:53:11थे।
  4011. 3:53:13और लगता था यह सब अब उसके पीछे छूट गया
  4012. 3:53:16है। और अब वह एक नई जर्नी पर थी। लगता था
  4013. 3:53:19वह अमीर
  4014. 3:53:21थी क्योंकि उसके आसपास एक अलग ही रिच
  4015. 3:53:25लोगों वाली वाइफ थी। उसने सीधा पूछा आप इस
  4016. 3:53:28टाइम पर दुनिया की हेल्प कैसे कर रहे
  4017. 3:53:31हो? लगता था यह उसका फिक्स्ड सवाल था। फिर
  4018. 3:53:35उसने और भी इंटरेस्ट से वार फ्रोकने
  4019. 3:53:38कम्युनिज्म के इफेक्ट्स और इंसान के
  4020. 3:53:41फ्यूचर के बारे में
  4021. 3:53:43पूछा। क्या वॉर्स बढ़ते डिजास्टर्स और पेन
  4022. 3:53:47हमारी डेली लाइफ का ही रिजल्ट नहीं है?
  4023. 3:53:51क्या हम सब इंडिविजुअली इस क्राइसिस के
  4024. 3:53:54लिए जिम्मेदार नहीं है। फ्यूचर प्रेजेंट
  4025. 3:53:57में ही है। अगर प्रेजेंट का समझ नहीं है
  4026. 3:54:01तो फ्यूचर अलग कैसे होगा?
  4027. 3:54:04लेकिन क्या तुम नहीं सोचती कि हर एक इंसान
  4028. 3:54:06इस कॉन्फ्लिक्ट और कंफ्यूजन का हिस्सा
  4029. 3:54:09है? हो सकता है।
  4030. 3:54:12लेकिन इस रिस्पांसिबिलिटी को मान लेने से
  4031. 3:54:15क्या होता
  4032. 3:54:16है? मेरे छोटे से एक्शन का क्या वैल्यू है
  4033. 3:54:19इस बड़े डिस्ट्रक्शन के बीच? मेरा थॉट
  4034. 3:54:23दुनिया की स्टूपिडिटी को कैसे बदल सकता
  4035. 3:54:25है?
  4036. 3:54:26जो दुनिया में हो रहा है वह टोटली
  4037. 3:54:28स्टूपिडिटी है और मेरी इंटेलिजेंस उसे
  4038. 3:54:32चेंज नहीं कर सकती। और सोचो कितना टाइम
  4039. 3:54:37लगेगा इंडिविजुअल एक्शन को दुनिया पर
  4040. 3:54:39इंपैक्ट डालने में। क्या दुनिया तुमसे अलग
  4041. 3:54:42है? क्या सोसाइटी का स्ट्रक्चर हम जैसे
  4042. 3:54:46लोगों ने नहीं बनाया? अगर स्ट्रक्चर को
  4043. 3:54:49डीपली बदलना है तो क्या तुम्हें और मुझे
  4044. 3:54:53खुद को डीपली चेंज नहीं करना
  4045. 3:54:56चाहिए? अगर वैल्यूस का असली बदलाव चाहिए
  4046. 3:54:59तो वह हमसे ही स्टार्ट होना चाहिए। है
  4047. 3:55:03ना? आज के क्राइसिस में हेल्प करने के लिए
  4048. 3:55:07क्या हमें एक नई आईडियोलॉजी चाहिए? एक नया
  4049. 3:55:10इकोनॉमिक प्लान। यह हमें पहले अपने अंदर
  4050. 3:55:14के कॉन्फ्लिक्ट और कंफ्यूजन को समझना
  4051. 3:55:16चाहिए। जो ही दुनिया का प्रोजेक्शन
  4052. 3:55:21है। क्या नए आईडियोलॉजी इंसान और इंसान के
  4053. 3:55:25बीच यूनिटी ला सकते
  4054. 3:55:27हैं? क्या बिलीव्स इंसान को एक दूसरे के
  4055. 3:55:30अगेंस्ट नहीं करते?
  4056. 3:55:32क्या हमें अपने आइडियोलॉजिकल वाल्स हटा के
  4057. 3:55:35अपने प्रॉब्लम्स को बिना बायस डायरेक्टली
  4058. 3:55:38नहीं देखना
  4059. 3:55:40चाहिए? हम कभी भी अपने प्रॉब्लम से
  4060. 3:55:43डायरेक्ट रिलेशन में नहीं होते। हमेशा
  4061. 3:55:46किसी ना किसी बिलीफ या फार्मूला के थ्रू
  4062. 3:55:48देखते
  4063. 3:55:50हैं। प्रॉब्लम्स तभी सॉल्व होती हैं जब हम
  4064. 3:55:53उसे डायरेक्टली फेस टू फेस होते हैं।
  4065. 3:55:57प्रॉब्लम हमें डिवाइड नहीं करती। हमारे
  4066. 3:56:00उसके बारे में जो आईडियाज होते हैं, वह
  4067. 3:56:03अलग करते
  4068. 3:56:04हैं। प्रॉब्लम हमें एक साथ लाती है। लेकिन
  4069. 3:56:09आइडियाज हमें अलग कर देते
  4070. 3:56:11हैं। अगर मैं पूछूं तुम इतनी कंसर्न क्यों
  4071. 3:56:15हो इस क्राइसिस के बारे में?
  4072. 3:56:18ओ मुझे नहीं पता। मैं इतना दुख देखती हूं।
  4073. 3:56:21इतनी मिजरी और लगता है कुछ तो करना चाहिए।
  4074. 3:56:25क्या तुम वाकई कंसर्न हो या सिर्फ कुछ
  4075. 3:56:28करने का एंबिशन
  4076. 3:56:30है? जब आप ऐसे कहते हैं तो शायद मैं
  4077. 3:56:33एंबिशियस हूं कुछ ऐसा करने के लिए जिसमें
  4078. 3:56:36मैं सक्सेसफुल हो जाऊं।
  4079. 3:56:41बहुत कम लोग होते हैं जो अपने सोचने में
  4080. 3:56:44सच्चे होते हैं। हम सक्सेसफुल बनना चाहते
  4081. 3:56:47हैं या तो सीधा अपने लिए या उस आइडियल के
  4082. 3:56:52लिए जिसे हमने अपने आप को जोड़ रखा
  4083. 3:56:55है। वह आइडियल हमारा अपना ही बनाया हुआ
  4084. 3:56:58होता है। वह हमारे माइंड का प्रोडक्ट होता
  4085. 3:57:02है और हमारा माइंड एक्सपीरियंस करता है
  4086. 3:57:06अपनी कंडीशनिंग के हिसाब से।
  4087. 3:57:09इन्हीं अपने ही बनाए प्रोजेक्शंस के लिए
  4088. 3:57:12हम काम करते हैं। मेहनत करते हैं, मर जाते
  4089. 3:57:17हैं। नेशनलिज्म भी गॉड की वरशिप की तरह
  4090. 3:57:21सिर्फ अपने आप को बड़ा बनाने का एक तरीका
  4091. 3:57:24है। असली में या आईडिया के लेवल पे
  4092. 3:57:28इंपॉर्टेंट बस हम खुद होते
  4093. 3:57:31हैं। ना कि वह डिस्ट्रक्शन या मिजरी जो चल
  4094. 3:57:35रही होती है। हम वाकई कुछ करना नहीं चाहते
  4095. 3:57:38इस क्राइसिस के बारे में। यह सिर्फ एक नया
  4096. 3:57:42टॉपिक बन गया है स्मार्ट लोगों के लिए या
  4097. 3:57:45उन लोगों के लिए जो सोशली एक्टिव हैं या
  4098. 3:57:48आइडियलिस्ट
  4099. 3:57:50हैं। हम एंबिशियस क्यों होते हैं? अगर हम
  4100. 3:57:54एंबिशियस ना होते तो दुनिया में कुछ होता
  4101. 3:57:57ही नहीं। अगर हम एंबिशियस ना
  4102. 3:58:00होते तो आज भी घोड़ों के गाड़ियों में घूम
  4103. 3:58:04रहे होते। एंबिशन का दूसरा नाम प्रोग्रेस
  4104. 3:58:07है। प्रोग्रेस के बिना हम सड़ जाते, खत्म
  4105. 3:58:12हो
  4106. 3:58:13जाते। दुनिया में काम तो हो रहा है लेकिन
  4107. 3:58:17साथ ही हम वॉर्स और पेन भी पैदा कर रहे
  4108. 3:58:20हैं। क्या एंबिशन ही प्रोग्रेस
  4109. 3:58:24है? अभी हम प्रोग्रेस की बात नहीं कर रहे।
  4110. 3:58:27सिर्फ एंबिशन की बात कर रहे हैं। हम
  4111. 3:58:30एंबिशियस क्यों होते हैं?
  4112. 3:58:32हम सक्सेसफुल क्यों बनना चाहते हैं? किसी
  4113. 3:58:36बनने की कोशिश क्यों करते
  4114. 3:58:38हैं? सुपीरियर बनने के लिए इतना स्ट्रगल
  4115. 3:58:42क्यों? इतनी मेहनत क्यों अपने आप को प्रूफ
  4116. 3:58:45करने के लिए? चाहे सीधा हो या किसी
  4117. 3:58:48आईडियोलॉजी या स्टेट के थ्रू।
  4118. 3:58:52क्या यह सिर्फ असरशन ही हमारे कॉन्फ्लिक्ट
  4119. 3:58:55और कंफ्यूजन की जड़ नहीं है? अगर एंबिशन
  4120. 3:58:59ना हो तो क्या हम खत्म हो
  4121. 3:59:02जाएंगे? क्या बिना
  4122. 3:59:05एंबिशियस हुए हम फिजिकली सर्वाइव नहीं कर
  4123. 3:59:09सकते? कौन सर्वाइव करना चाहता है बिना
  4124. 3:59:12सक्सेस के बिना रिकॉग्निशन
  4125. 3:59:14के? क्या यह सक्सेस चाहने की इच्छा? यह
  4126. 3:59:18क्लैप्स चाहने का
  4127. 3:59:19क्रेज अंदर और बाहर दोनों जगह कॉन्फ्लिक्ट
  4128. 3:59:23नहीं
  4129. 3:59:24लाता। क्या एंबिशन से फ्री होने का मतलब
  4130. 3:59:27होता है सड़
  4131. 3:59:29जाना? क्या बिना कॉन्फ्लिक्ट के जीना मतलब
  4132. 3:59:32रुक जाना है? हम अपने आप को ड्रग्स दे
  4133. 3:59:36सकते हैं बिलीफ से, डॉक्टाइन से और कहेंगे
  4134. 3:59:40कि अब कोई डीप कॉन्फ्लिक्ट नहीं
  4135. 3:59:42है। ज्यादा लोगों के लिए कोई ना कोई
  4136. 3:59:45एक्टिविटी ही एक नशा है। ऑब्वियस है। ऐसी
  4137. 3:59:49स्टेट सड़ने वाली होती है। बिखरती है।
  4138. 3:59:54लेकिन जब हम फॉल्स को फॉल्स के रूप में
  4139. 3:59:57देखते हैं, क्या उससे मौत आ जाती
  4140. 4:00:01है। यह समझना कि एंबिशन किसी भी फॉर्म में
  4141. 4:00:05चाहे खुशी के लिए हो, गॉड के लिए या
  4142. 4:00:08सक्सेस के लिए। अंदर और बाहर दोनों जगह
  4143. 4:00:11कॉन्फ्लिक्ट लाता है। इसका मतलब यह नहीं
  4144. 4:00:15कि लाइफ या एक्शन का एंड हो गया। हम
  4145. 4:00:18एंबिशियस क्यों होते
  4146. 4:00:23हैं। अगर मैं कुछ अचीव करने की कोशिश में
  4147. 4:00:26बिजी ना रहूं तो बोर हो जाऊंगी। पहले मैं
  4148. 4:00:28अपने हस्बैंड के लिए एंबिशियस थी और आप
  4149. 4:00:32कहेंगे कि वह मेरे लिए ही था। हस्बैंड के
  4150. 4:00:35थ्रू। अब मैं खुद के लिए एंबिशियस हूं। एक
  4151. 4:00:37आईडिया के थ्रू। मैंने कभी एंबिशन के बारे
  4152. 4:00:40में सोचा नहीं। बस हमेशा एंबिशियस रही
  4153. 4:00:46हूं। हम इतने स्मार्ट और एंबिशियस क्यों
  4154. 4:00:49होते
  4155. 4:00:50हैं? क्या एंबिशन एक तरीका नहीं होता जो
  4156. 4:00:55है उसे भागने का?
  4157. 4:00:57क्या यह स्मार्टनेस असल में स्टूपिडिटी
  4158. 4:01:00नहीं है? जो हम
  4159. 4:01:02हैं। हम इतने डरे हुए क्यों होते हैं? जो
  4160. 4:01:06है उससे क्या फायदा भाग के जाने
  4161. 4:01:11का? जब जो हम हैं वह तो वहीं का वहीं रहता
  4162. 4:01:15है। हो सकता है हम एस्केप कर लें।
  4163. 4:01:20लेकिन जो हम हैं वह फिर भी वहां होता है
  4164. 4:01:23और वह कॉन्फ्लिक्ट और मिजरी पैदा करता है।
  4165. 4:01:27हम इतने डरे हुए क्यों हैं? अपनी लोनलीनेस
  4166. 4:01:31से, अपने खालीपन
  4167. 4:01:34से जो भी एक्टिविटी होती है जो है उससे
  4168. 4:01:37दूर भागने के लिए वह सोरो और क्लैश ले आती
  4169. 4:01:41है। कॉन्फ्लिक्ट का मतलब ही होता है जो है
  4170. 4:01:46उसका इंकार या उससे
  4171. 4:01:48भागना। और कोई कॉन्फ्लिक्ट होता ही नहीं।
  4172. 4:01:53हमारे कॉन्फ्लिक्ट्स इतने कॉम्प्लेक्स और
  4173. 4:01:55इंपॉसिबल इसलिए बन जाते हैं क्योंकि हम जो
  4174. 4:01:59है उससे डायरेक्टली फेस नहीं करते। जो है
  4175. 4:02:03उसमें कोई कॉम्प्लेक्सिटी नहीं होती।
  4176. 4:02:06कॉम्प्लेक्सिटी सिर्फ उन सब रास्तों में
  4177. 4:02:09होती है जिनसे हम उससे भाग रहे होते
  4178. 4:02:19हैं। द इंडिविजुअल एंड द
  4179. 4:02:23आइडियल। इंडिया में हमारी जिंदगी टूट चुकी
  4180. 4:02:26है। हम फिर से कुछ बनाना चाहते हैं। लेकिन
  4181. 4:02:28समझ नहीं आता शुरुआत कहां से करें। मुझे
  4182. 4:02:32मास एक्शन कीेंस भी दिखती है और उसके
  4183. 4:02:34डेंजर्स भी। मैं नॉन वायलेंस के आइडियल को
  4184. 4:02:37फॉलो करता आया हूं। लेकिन फिर भी खून बहता
  4185. 4:02:40रहा। लोग दुख भोगते रहे। पार्टीशन के बाद
  4186. 4:02:44इस देश के हाथ खून सेंगे हुए हैं। और अब
  4187. 4:02:47हम आर्मी बिल्ड कर रहे हैं। हम नॉन
  4188. 4:02:50वायलेंस की बात करते हैं। लेकिन वॉर की
  4189. 4:02:52तैयारी करते हैं। मैं भी पॉलिटिकल लीडर्स
  4190. 4:02:55की तरह कंफ्यूज्ड हूं। जब मैं जेल में था,
  4191. 4:02:59मैंने काफी किताबें पढ़ी। लेकिन मुझे अपनी
  4192. 4:03:01पोजीशन क्लियर करने में वो मदद नहीं कर
  4193. 4:03:05पाई। क्या हम एक-एक करके बात करें और
  4194. 4:03:09थोड़ा गहरा जाए? सबसे पहले आप इंडिविजुअल
  4195. 4:03:11पर ज्यादा जोर देते हैं लेकिन क्या
  4196. 4:03:13कलेक्टिव एक्शन जरूरी नहीं है?
  4197. 4:03:24इंडिविजुअल असल में कलेक्टिव ही होता है
  4198. 4:03:27और सोसाइटी इंडिविजुअल का ही क्रिएशन
  4199. 4:03:31है। इंडिविजुअल और सोसाइटी एक दूसरे से
  4200. 4:03:34जुड़े हुए हैं। है ना? वह अलग नहीं
  4201. 4:03:39होते। इंडिविजुअल ही सोसाइटी का स्ट्रक्चर
  4202. 4:03:43बनाता है। और सोसाइटी या एनवायरमेंट
  4203. 4:03:46इंडिविजुअल को शेप करता है।
  4204. 4:03:51चाहे एनवायरमेंट इंडिविजुअल को कंडीशन
  4205. 4:03:53करता है लेकिन वह हमेशा अपने आप को फ्री
  4206. 4:03:56कर सकता है। अपने पास्ट से अलग हो सकता
  4207. 4:04:01है। इंडिविजुअल खुद ही वह एनवायरमेंट
  4208. 4:04:04बनाता है जिसका वह बाद में गुलाम बन जाता
  4209. 4:04:07है। लेकिन उसके पास यह पावर भी होती है कि
  4210. 4:04:12वह उससे अलग हो जाए और एक नया एनवायरमेंट
  4211. 4:04:15क्रिएट करें।
  4212. 4:04:19जो उसके माइंड या स्पिरिट को डल ना
  4213. 4:04:23करें। इंडिविजुअल सिर्फ तभी इंपॉर्टेंट है
  4214. 4:04:26जब उसमें अपने कंडीशनिंग से फ्री होने की
  4215. 4:04:29कैपेसिटी हो और रियलिटी को समझने का
  4216. 4:04:34जज्बा। अगर इंडिविजुअल सिर्फ अपनी
  4217. 4:04:37कंडीशनिंग में ही रूथलेस बना रहे तो वह
  4218. 4:04:41ऐसी सोसाइटी बनाता है जो वायलेंस और हेट
  4219. 4:04:45रेट पर बेस्ड होती है।
  4220. 4:04:48इंडिविजुअल सिर्फ रिलेशन में ही एक्सिस्ट
  4221. 4:04:51करता है। वरना उसका कोई मतलब नहीं।
  4222. 4:04:56और इसी रिलेशन को ना समझने की कोशिश से
  4223. 4:05:00कॉन्फ्लिक्ट और कंफ्यूजन पैदा हो रहा
  4224. 4:05:03है। अगर इंडिविजुअल अपने रिलेशन को समझता
  4225. 4:05:07ही नहीं लोगों से, प्रॉपर्टी से, आइडियाज
  4226. 4:05:11या बिलीफ
  4227. 4:05:12से तो उस पर कोई भी कलेक्टिव या पैटर्न
  4228. 4:05:15थोपना उसके असली गोल को ही खत्म कर देता
  4229. 4:05:20है। एक नया पैटर्न लागू करने के लिए मास
  4230. 4:05:23एक्शन चाहिए होती है। लेकिन वह नया पैटर्न
  4231. 4:05:27कुछ सिलेक्टेड इंडिविजुअल्स का ही
  4232. 4:05:29इन्वेंशन होता
  4233. 4:05:31है। और मास सिर्फ नए स्लोगंस नए
  4234. 4:05:35प्रॉमिससेस से हिप्नोटाइज हो जाता
  4235. 4:05:39है। मास वही पुराना मास रहता है। वही भीड़
  4236. 4:05:44सिर्फ नए रूलर्स होते हैं। नए शब्द, नए
  4237. 4:05:48प्रीस्ट, नए रूल्स।
  4238. 4:05:52यह मास तुम और मैं ही है। यह भीड़ यह
  4239. 4:05:56इंडिविजुअल का ही ग्रुप
  4240. 4:05:59है। मास एक फेक नाम है। जिसे लीडर्स और
  4241. 4:06:03पॉलिटिशियंस अपने बेनिफिट के लिए यूज करते
  4242. 4:06:07हैं। थोड़े लोग ही मास को एक्शन में डालते
  4243. 4:06:10हैं। वॉर में भेजते हैं। और यह थोड़े लोग
  4244. 4:06:14ही मास की डिजायर्स और अर्ज को दिखाते
  4245. 4:06:19हैं। असली इंपॉर्टेंट चीज है इंडिविजुअल
  4246. 4:06:22का ट्रांसफॉर्मेशन। लेकिन किसी पैटर्न के
  4247. 4:06:26थ्रू नहीं।
  4248. 4:06:28पैटर्न्स हमेशा कंडीशन करते हैं और एक
  4249. 4:06:31कंडीशन इंसान हमेशा अंदर से कॉन्फ्लिक्टेड
  4250. 4:06:35होता है और इसलिए सोसाइटी से
  4251. 4:06:39भी एक ओल्ड पैटर्न को नए पैटर्न से
  4252. 4:06:42रिप्लेस करना आसान है।
  4253. 4:06:46लेकिन इंडिविजुअल को खुद का हर कंडीशनिंग
  4254. 4:06:49से फ्री करना एक अलग ही लेवल की बात है।
  4255. 4:06:58इसमें बहुत केयरफुल और डीप सोच चाहिए।
  4256. 4:07:00लेकिन मुझे लगता है मैं थोड़ा समझने लगा
  4257. 4:07:03हूं। आप इंडिविजुअल पर जोर देते हो। लेकिन
  4258. 4:07:08ऐसे नहीं जैसे वह सोसाइटी में अलग ही
  4259. 4:07:10अगेंस्ट हो। अब दूसरी बात मैं हमेशा एक
  4260. 4:07:14आइडियल के लिए काम करता रहा हूं। और मुझे
  4261. 4:07:16समझ नहीं आता कि आप उसका इंकार क्यों करते
  4262. 4:07:19हैं। क्या आप इस इशू को थोड़ा और
  4263. 4:07:21एक्सप्लेन करेंगे।
  4264. 4:07:30हमारी आज की मोरलिटी पास्ट या फ्यूचर पर
  4265. 4:07:33बेस्ड है। या तो ट्रेडिशन पे या जो होना
  4266. 4:07:37चाहिए उस
  4267. 4:07:39पे। जो होना चाहिए वही आइडियल होता है। जो
  4268. 4:07:44पास्ट के अगेंस्ट होता है। यानी फ्यूचर और
  4269. 4:07:48पास्ट में कॉन्फ्लिक्ट।
  4270. 4:07:52नॉन वायलेंस एक आइडियल है जो होना चाहिए
  4271. 4:07:55और जो था वह वायलेंस
  4272. 4:07:58था। जो था वही प्रोजेक्ट करता है जो होना
  4273. 4:08:01चाहिए। आइडियल हमारा खुद का बना हुआ होता
  4274. 4:08:05है। वह अपने ऑोजिट से ही निकला होता
  4275. 4:08:10है। ऑोजिट अपने ऑोजिट का पार्ट ही होता
  4276. 4:08:14है। जब माइंड वायलेंट होता है तो वह उसका
  4277. 4:08:18ऑोजिट बनाता है। नॉन वायलेंस का
  4278. 4:08:23आइडियल। कहा जाता है कि आइडियल अपने ऑोजिट
  4279. 4:08:27को खत्म करता है। लेकिन क्या वह करता है?
  4280. 4:08:31क्या आइडियल एक तरीका नहीं होता जो था या
  4281. 4:08:35जो है उससे भागने का?
  4282. 4:08:40एक्चुअल और आइडियल के बीच का कॉन्फ्लिक्ट
  4283. 4:08:43सिर्फ एक्चुअल को समझने से बचने का एक
  4284. 4:08:46तरीका होता है और यह कॉन्फ्लिक्ट एक नया
  4285. 4:08:49प्रॉब्लम ले आता है जो प्रेजेंट प्रॉब्लम
  4286. 4:08:52को छुपा देता
  4287. 4:08:54है। आइडियल एक रिस्पेक्टफुल एस्केप होता
  4288. 4:08:57है जो है
  4289. 4:08:59उससे नॉन वायलेंस का आइडियल जैसे कलेक्टिव
  4290. 4:09:03यूटोपिया एक फिक्शन है। आइडियल जो होना
  4291. 4:09:07चाहिए। हमें हेल्प करता है उस चीज से दूर
  4292. 4:09:10भागने में जो सच में
  4293. 4:09:13है। आइडियल के पीछे भागना मतलब रिवॉर्ड को
  4294. 4:09:17ढूंढना। हो सकता है तुम दुनिया के रिवॉर्ड
  4295. 4:09:20को बेकार और बर्बर समझो और उसको छोड़ दो।
  4296. 4:09:25जो वैसे वैसे है भी।
  4297. 4:09:30लेकिन आइडियल के पीछे तुम्हारा भागना एक
  4298. 4:09:32और लेवल का रिवॉर्ड ढूंढना है जो उतना ही
  4299. 4:09:35बेकार है।
  4300. 4:09:38आइडियल एक कंपनसेशन है। एक फेक स्टेट है
  4301. 4:09:42जो माइंड ने खुद बना लिया
  4302. 4:09:45है। जब माइंड वायलेंट होता है, अलग होता
  4303. 4:09:49है, सिर्फ अपने लिए होता है तो एक सुकून
  4304. 4:09:52देने वाला झूठा सपना बनाता है। जिसे वह
  4305. 4:09:56आइडियल कहता है, यूटोपिया कहता है, फ्यूचर
  4306. 4:09:59कहता है और उसके पीछे भागता रहता
  4307. 4:10:03है। यही भागना खुद कॉन्फ्लिक्ट है। लेकिन
  4308. 4:10:07इसमें एक मजा भी होता है। जो एक्चुअल से
  4309. 4:10:12भागने का तरीका बन जाता
  4310. 4:10:15है। आइडियल जो होना चाहिए किसी भी तरह से
  4311. 4:10:19जो है उसे समझने में हेल्प नहीं करता
  4312. 4:10:23बल्कि उसे समझने से रोकता
  4313. 4:10:30है। क्या आप कहना चाहते हैं कि हमारे
  4314. 4:10:33लीडर्स और टीचर्स गलत थे जो आइडियल को
  4315. 4:10:36प्रमोट करते
  4316. 4:10:37रहे। आपको क्या लगता है? अगर मैं आपकी बात
  4317. 4:10:41सही समझ रहा हूं
  4318. 4:10:45तो
  4319. 4:10:48प्लीज बात किसी और की बात समझने की नहीं
  4320. 4:10:51है। बात यह है कि सच क्या है? वह खुद
  4321. 4:10:56ढूंढना। सच कोई ओपिनियन नहीं होता।
  4322. 4:11:00सच किसी टीचर या लीडर पर डिपेंड नहीं
  4323. 4:11:03करता।
  4324. 4:11:05ओपिनियंस को तोलने से सच नहीं
  4325. 4:11:08मिलता बल्कि वह सच को देखने से रोकता
  4326. 4:11:13है। यह तो आइडियल एक फेक चीज है जो अपने
  4327. 4:11:16ऑोजिट को अपने अंदर रखता है या फिर नहीं
  4328. 4:11:22है। इसमें दो रास्ते
  4329. 4:11:25हैं। यह किसी टीचर पर डिपेंड नहीं करता।
  4330. 4:11:29तुम्हें खुद ही इसकी सच्चाई देखनी पड़ेगी।
  4331. 4:11:34अगर आइडियल झूठा है तो मेरी पूरी सोच पलट
  4332. 4:11:36जाएगी। क्या आप कहना चाहते हैं कि आइडियल
  4333. 4:11:39के पीछे भागना बिल्कुल बेकार
  4334. 4:11:45है? यह एक बेकार की फाइट है। एक सुकून
  4335. 4:11:49देने वाला सेल्फ चीटिंग है। है ना?
  4336. 4:11:56यह बात सुनकर हिला देने वाली है। लेकिन
  4337. 4:11:58मुझे मानना पड़ रहा है कि यह सही है। हमने
  4338. 4:12:01इतनी सारी चीजें बिना सोचे समझे मान ली है
  4339. 4:12:04कि कभी हाथ में जो है उसे ढंग से देखा ही
  4340. 4:12:07नहीं। हमने खुद को ही धोखा दिया है और जो
  4341. 4:12:10आप कह रहे हैं। वह मेरी पूरी सोच और एक्शन
  4342. 4:12:14के स्ट्रक्चर के हिला देती है। यह
  4343. 4:12:17एजुकेशन, जिंदगी जीने का तरीका, काम करने
  4344. 4:12:20का ढंग सब कुछ बदल देगा। मुझे लगता है मैं
  4345. 4:12:24समझ पा रहा हूं एक ऐसे माइंड का मतलब जो
  4346. 4:12:27आइडियल से जो होना चाहिए उससे फ्री हो।
  4347. 4:12:30ऐसे माइंड के लिए एक्शन का मतलब बिल्कुल
  4348. 4:12:33अलग होता है जो हम अब देते हैं। कंपनसेटरी
  4349. 4:12:37एक्शन एक्शन नहीं होती। वह सिर्फ रिएक्शन
  4350. 4:12:40होती है और हम उसी पे फक्र करते हैं।
  4351. 4:12:45लेकिन अगर आइडियल ही नहीं हो तो जो है
  4352. 4:12:47उसके साथ कैसे डील करें या जो हो चुका है
  4353. 4:12:51उसके साथ
  4354. 4:12:57कैसे जो है उसे समझना तभी पॉसिबल है जब
  4355. 4:13:01माइंड से आइडियल जो होना चाहिए हट जाता
  4356. 4:13:06है। मतलब
  4357. 4:13:08जब झूठ को झूठ के रूप में देख पाते हैं,
  4358. 4:13:11जो होना चाहिए, वह भी एक तरह का नहीं होना
  4359. 4:13:15चाहिए है। जब तक माइंड एक्चुअल के पास
  4360. 4:13:19पॉजिटिव या नेगेटिव कंपनसेशन के साथ जाता
  4361. 4:13:22है, तब तक एक्चुअल को समझना पॉसिबल
  4362. 4:13:27नहीं। एक्चुअल को समझने के लिए तुम्हारा
  4363. 4:13:30उसके साथ डायरेक्ट कनेक्शन होना चाहिए।
  4364. 4:13:35तुम्हारा रिश्ता उससे आइडियल के स्क्रीन
  4365. 4:13:38के थ्रू नहीं हो
  4366. 4:13:40सकता। ना पास्ट के ना ट्रेडिशन के ना
  4367. 4:13:44एक्सपीरियंस
  4368. 4:13:45के। गलत तरीके से फ्री होना ही असली
  4369. 4:13:49प्रॉब्लम है। इसका मतलब है कंडीशनिंग को
  4370. 4:13:52समझना जो कि माइंड है। प्रॉब्लम खुद माइंड
  4371. 4:13:57है। ना कि उसके बनाए हुए प्रॉब्लम्स।
  4372. 4:14:03माइंड के बनाए प्रॉब्लम्स को सॉल्व करना
  4373. 4:14:05सिर्फ इफेक्ट्स को पैच करना है जो और
  4374. 4:14:09ज्यादा कंफ्यूजन और इल्ल्यूजन लाता
  4375. 4:14:14है। माइंड को कैसे समझा जाए थोड़ा इस पर
  4376. 4:14:22बताइए। माइंड का रास्ता ही जिंदगी का
  4377. 4:14:25रास्ता है। ना कि आइडियल जिंदगी बल्कि
  4378. 4:14:28असली जिंदगी जो दर्द और सुख
  4379. 4:14:32धोखा और क्लेरिटी गुरूर और झूठी
  4380. 4:14:35ह्यूमिलिटी से भरी
  4381. 4:14:37है। माइंड को समझना मतलब डिजायर और फियर
  4382. 4:14:42को
  4383. 4:14:45देखना। प्लीज यह सब थोड़ा ज्यादा हो रहा
  4384. 4:14:48है मेरे लिए। मैं अपने माइंड को कैसे
  4385. 4:14:50समझूं? जरा बताइए।
  4386. 4:14:56माइंड को जानना है तो क्या तुम्हें उसके
  4387. 4:14:59एक्टिविटी को ऑब्जर्व नहीं करना
  4388. 4:15:02चाहिए? माइंड सिर्फ एक्सपीरियंस ही है।
  4389. 4:15:05सिर्फ अभी का नहीं बल्कि सब जमा हुआ
  4390. 4:15:09भी। माइंड पास्ट का प्रेजेंट पर रिएक्शन
  4391. 4:15:12है जो फ्यूचर बनाता
  4392. 4:15:15है। माइंड के पूरे प्रोसेस को समझना
  4393. 4:15:20होगा। मुझे कहां से शुरू करना चाहिए?
  4394. 4:15:27वहीं से जहां से शुरू हो सकता है
  4395. 4:15:32रिलेशनशिप। रिलेशनशिप ही जिंदगी है। होना
  4396. 4:15:36मतलब रिलेट
  4397. 4:15:38करना। सिर्फ रिलेशनशिप के मिरर में ही
  4398. 4:15:41माइंड को समझा जा सकता है। और तुम्हें उस
  4399. 4:15:44मिरर में अपने आप को देखना शुरू करना
  4400. 4:15:47होगा।
  4401. 4:15:51क्या आप कहना चाहते हैं कि मेरी वाइफ के
  4402. 4:15:53साथ नेबर के साथ जो रिश्ता है वहीं से
  4403. 4:15:56शुरू करूं? क्या यह प्रोसेस बहुत लिमिटेड
  4404. 4:15:59नहीं है?
  4405. 4:16:06जो छोटा या लिमिटेड दिखता है अगर ठीक से
  4406. 4:16:09देखा जाए तो वही गहरा दिखता है। यह एक
  4407. 4:16:14फनेल की तरह है जो नैरो होती है वह वाइड
  4408. 4:16:17में खुल जाती है। जब बिना जज किए काम
  4409. 4:16:22शांति से देखा जाए तो लिमिटेड भी लिमिटलेस
  4410. 4:16:26को दिखाता
  4411. 4:16:28है। वैसे
  4412. 4:16:30भी रिवर जब स्टार्ट होती है तब छोटी सी
  4413. 4:16:34धारा होती है जिस पर कोई ध्यान नहीं
  4414. 4:16:40देता तो मुझे खुद से और अपने आसपास के
  4415. 4:16:43रिश्तों से ही शुरू करना
  4416. 4:16:46होगा
  4417. 4:16:48बिल्कुल रिलेशनशिप कभी छोटी नहीं
  4418. 4:16:53होती चाहे एक के साथ हो या सबके
  4419. 4:16:56साथ रिलेशनशिप एक कॉम्प्लेक्स प्रोसेस
  4420. 4:17:01है। तुम इसे छोटी सोच से अप्रोच कर सकते
  4421. 4:17:04हो या ओपन हार्ट से भी और यह अप्रोच माइंड
  4422. 4:17:09के स्टेट पर डिपेंड करता है। अगर तुम खुद
  4423. 4:17:13से शुरू नहीं करते तो और कहां से
  4424. 4:17:17करोगे? चाहे तुम किसी आउटर चीज से भी शुरू
  4425. 4:17:20करो। तुम्हारा उससे भी रिलेशन होता ही है
  4426. 4:17:25और माइंड उसका सेंटर होता है।
  4427. 4:17:28चाहे पास से शुरू करो या दूर से तुम हमेशा
  4428. 4:17:33वहीं होते हो। अगर तुम खुद को नहीं समझते
  4429. 4:17:37तो जो भी करोगे वह कंफ्यूजन और दुख ही
  4430. 4:17:41लाएगा। शुरुआत ही अंत
  4431. 4:17:46है। मैं बहुत दूर-दूर भटक चुका हूं। मैंने
  4432. 4:17:49बहुत कुछ देखा है, किया है। हंसा भी हूं,
  4433. 4:17:52रोया भी जैसे सब करते हैं और फिर भी मुझे
  4434. 4:17:56वापस खुद के पास ही आना पड़ा। मैं उस
  4435. 4:17:59सन्यासी की तरह हूं जो ट्रुथ की तलाश में
  4436. 4:18:01निकल
  4437. 4:18:04पड़ा। सालों तक टीचर से टीचर तक घूमता रहा
  4438. 4:18:07और हर कोई अलग रास्ता बताता
  4439. 4:18:10रहा। आखिर में थक कर जब घर वापस आया तो
  4440. 4:18:14देखा कि जो हीरा ढूंढ रहा था वह तो उसके
  4441. 4:18:16अपने घर में ही था। मुझे अब समझ आता है कि
  4442. 4:18:19हम कितने बेवकूफ हैं। जो पूरी दुनिया में
  4443. 4:18:22वह सुकून ढूंढते हैं जो सिर्फ अपने दिल
  4444. 4:18:25में मिलता है। जब माइंड अपनी एक्टिविटी से
  4445. 4:18:28साफ हो जाता है। आप बिल्कुल सही कह रहे
  4446. 4:18:30हैं। मैं वहीं से शुरू करता हूं जहां से
  4447. 4:18:33छोड़ा था। मैं वहीं से शुरू करता हूं जो
  4448. 4:18:37मैं
  4449. 4:18:42हूं। फियर एंड एस्केप।
  4450. 4:18:49हमें स्टडी क्लाइम कर रहे हैं। लेकिन कोई
  4451. 4:18:52मूवमेंट महसूस नहीं हो रही थी। नीचे एक
  4452. 4:18:56बड़ा सा बादलों का समंदर था सफेद और चमकता
  4453. 4:18:59हुआ। लहरों के लहरों जैसे जितना आंखों से
  4454. 4:19:03देखा जा
  4455. 4:19:04सके। वो बादल इतने सॉलिड और भुलाने वाले
  4456. 4:19:08लग रहे थे। कभी-कभी जब हम ज्यादा हाइट पर
  4457. 4:19:11पहुंचते और सर्कल में ऊपर
  4458. 4:19:14बढ़ते तो इस चमकदार झाग में कुछ ब्रेक्स
  4459. 4:19:18दिखते और काफी नीचे हरी जमीन नजर आती।
  4460. 4:19:23ऊपर एक साफ नीला आसमान था। ठंडी विंटर
  4461. 4:19:28वाली। नरम और बिना किसी लिमिट के। बर्फ से
  4462. 4:19:32ढके बड़े-बड़े पहाड़ों की एक लंबी रेंज
  4463. 4:19:34नॉर्थ से साउथ तक फैली थी।
  4464. 4:19:38जो सूरज की रोशनी में चमक रही थी। यह
  4465. 4:19:40पहाड़ 14,000 फीट से ऊपर थे।
  4466. 4:19:45लेकिन हम उनसे भी ज्यादा ऊपर आ गए थे और
  4467. 4:19:47अभी भी ऊपर जा रहे थे। यह पीक्स पहचान
  4468. 4:19:52वाली थी और बहुत पास और शांत लग रही
  4469. 4:19:55थी। जो ज्यादा ऊंची पीक्स थी वह नॉर्थ में
  4470. 4:19:59थी और हम साउथ की तरफ निकल गए थे। क्योंकि
  4471. 4:20:0320,000 फीट की हाइट मिल चुकी थी। मेरे बगल
  4472. 4:20:06में जो पैसेंजर था, वह बहुत बात करने वाला
  4473. 4:20:09निकला। उसे यह पहाड़ पहचान में नहीं थे और
  4474. 4:20:14जब हम ऊपर जा रहे थे, तब वह सो रहा था।
  4475. 4:20:17लेकिन अब वह जाग गया था और बात करने को
  4476. 4:20:20तैयार था। लगता था वह पहली बार किसी काम
  4477. 4:20:23से बाहर जा रहा
  4478. 4:20:24था। उसके काफी इंटरेस्ट थे। और वह उनके
  4479. 4:20:29बारे में नॉलेज के साथ बात कर रहा था। अब
  4480. 4:20:32समुंदर हमारे नीचे था। अंधेरा और
  4481. 4:20:36दूर और यहां वहां कुछ शिप्स दिख रही थी।
  4482. 4:20:40विंग्स में जरा भी हिलाव नहीं था और हम
  4483. 4:20:44कोस्ट के साथ एक के बाद एक रोशन टाउन के
  4484. 4:20:47ऊपर से जा रहे
  4485. 4:20:49थे। वह कह रहा था कि बिना फियर के जीना
  4486. 4:20:52कितना मुश्किल होता
  4487. 4:20:55है। खासतौर पे किसी क्रश का नहीं।
  4488. 4:21:00बल्कि जिंदगी के छोटे बड़े एक्सीडेंट्स का
  4489. 4:21:03वह शादीशुदा था, बच्चे थे और हर वक्त एक
  4490. 4:21:07डर था। सिर्फ फ्यूचर का नहीं बल्कि हर चीज
  4491. 4:21:11का। यह एक ऐसा डर था जिसका कोई एक
  4492. 4:21:14ऑब्जेक्ट नहीं था और जबकि वह सक्सेसफुल
  4493. 4:21:17था। फिर भी यह फियर उसकी जिंदगी को थका
  4494. 4:21:20देने वाला और पेनफुल बना देता
  4495. 4:21:23था। वह हमेशा थोड़ा एशियस रहता था। लेकिन
  4496. 4:21:27अब यह फियर बहुत ज्यादा हो गया था और उसके
  4497. 4:21:30सपने भी डरावने होते थे। उसकी वाइफ उसके
  4498. 4:21:35डर के बारे में जानती थी लेकिन उसके
  4499. 4:21:37सीरियस होने का उसे अंदाजा नहीं
  4500. 4:21:41था। फियर किसी भी चीज के रिलेशन में ही
  4501. 4:21:44होता है। अगर वह बस एक आईडिया हो तो वह
  4502. 4:21:48सिर्फ एक वर्ड है और वर्ड असली फियर नहीं
  4503. 4:21:51होता। क्या तुम्हें पता है तुम किस चीज से
  4504. 4:21:54डरते हो?
  4505. 4:21:56मुझे कभी क्लियर नहीं हो पाया कि मैं किस
  4506. 4:21:59चीज से डरता
  4507. 4:22:00हूं। मेरे सपने भी बहुत वेग होते हैं।
  4508. 4:22:03लेकिन उनमें हमेशा फियर होता है। मैं
  4509. 4:22:05फ्रेंड्स और डॉक्टर से बात कर चुका हूं।
  4510. 4:22:08लेकिन उन्होंने या तो मजाक में उड़ा दिया
  4511. 4:22:10या कोई हेल्प नहीं की। यह फियर हमेशा मुझे
  4512. 4:22:13स्लिप करता रहा। और मैं इस गंदी चीज से
  4513. 4:22:17फ्री होना चाहता
  4514. 4:22:21हूं। क्या तुम वाकई फ्री होना चाहते हो या
  4515. 4:22:24बस? यह एक लाइन
  4516. 4:22:28है। मैं कैजुअली बोलता लग सकता हूं, लेकिन
  4517. 4:22:31मैं बहुत कुछ दे सकता हूं इस फियर से
  4518. 4:22:33छुटकारा पाने के लिए। मैं ज्यादा रिलीजियस
  4519. 4:22:36नहीं हूं।
  4520. 4:22:38लेकिन अजीब बात है कि मैंने प्रे भी किया
  4521. 4:22:40है कि यह फियर चला जाए। जब मैं अपने काम
  4522. 4:22:44में या किसी गेम में बिजी होता हूं तो यह
  4523. 4:22:47कभी-कभी चला जाता है। लेकिन जैसे कोई
  4524. 4:22:49मॉन्सर यह हमेशा वेट करता है और थोड़ी देर
  4525. 4:22:53में फिर मेरे साथी बन जाता
  4526. 4:22:56है। क्या तुम्हें अभी वह फियर महसूस हो
  4527. 4:23:01रहा है? क्या तुम अवेयर हो कि वह यहीं
  4528. 4:23:04कहीं है? क्या वह फियर कॉन्शियस है या
  4529. 4:23:09हिडन? मैं उसे महसूस कर सकता हूं। लेकिन
  4530. 4:23:12मुझे नहीं पता वह कॉन्शियस है या
  4531. 4:23:15अनकॉन्शियस। क्या तुम उसे दूर महसूस करते
  4532. 4:23:19हो या
  4533. 4:23:20पास? स्पेस या डिस्टेंस में नहीं फीलिंग
  4534. 4:23:23के रूप
  4535. 4:23:25में। जब मैं उसे महसूस करता हूं तो वह
  4536. 4:23:28काफी पास लगता है। लेकिन इसका मतलब क्या
  4537. 4:23:30है?
  4538. 4:23:32फियर सिर्फ किसी के रिलेशन में आता है। वह
  4539. 4:23:36चीज तुम्हारा परिवार हो सकती है। तुम्हारा
  4540. 4:23:39काम या फ्यूचर का टेंशन या डेथ क्या
  4541. 4:23:43तुम्हें डेथ का डर है? ज्यादा नहीं। लेकिन
  4542. 4:23:46मैं चाहता हूं मेरी डेथ जल्दी हो ना कि
  4543. 4:23:49लंबी और पेनफुल। मुझे नहीं लगता कि यह डर
  4544. 4:23:52मेरी फैमिली की वजह से है और ना ही मेरी
  4545. 4:23:54जॉब की वजह से।
  4546. 4:23:58तो फिर यह डर सरफेस लेवल के रिश्तों से
  4547. 4:24:00ज्यादा डीप कहीं चीज से आ रहा
  4548. 4:24:04है। हो सकता है कोई और बताए कि क्या है?
  4549. 4:24:09लेकिन अगर तुम खुद ढूंढ पाओ तो उसका
  4550. 4:24:11मीनिंग बहुत ज्यादा
  4551. 4:24:13होगा। तुम सुपरफिशियल रिलेशनशिप से क्यों
  4552. 4:24:16नहीं डरते?
  4553. 4:24:20मैं और मेरी वाइफ एक दूसरे से प्यार करते
  4554. 4:24:22हैं। उसके लिए कोई और आदमी सोचना भी
  4555. 4:24:25मुश्किल है और मुझे भी औरत में इंटरेस्ट
  4556. 4:24:27नहीं। हम एक दूसरे में पूरी तरह से
  4557. 4:24:30कंप्लीट फील करते हैं। बच्चों को ले थोड़ा
  4558. 4:24:33टेंशन रहता है। जो हो सकता है वह करते
  4559. 4:24:36हैं। लेकिन इस इकोनॉमिक मिस में हम उनको
  4560. 4:24:39फाइनेंशियल सिक्योरिटी नहीं दे सकते। वह
  4561. 4:24:42अपने दम पर ही कुछ करेंगे। मेरी जॉब भी
  4562. 4:24:44काफी सिक्योर है। लेकिन नेचुरली मेरी वाइफ
  4563. 4:24:47के साथ कुछ हो जाए इसका डर रहता
  4564. 4:24:50है। तो तुम अपने डीपर रिलेशनशिप को लेके
  4565. 4:24:54श्योर हो। तुम इतने श्योर क्यों
  4566. 4:24:58हो? मुझे पता नहीं लेकिन मैं हूं। कुछ
  4567. 4:25:01चीजें तो मान लेनी पड़ती है। है
  4568. 4:25:04ना? बात यह नहीं है। चलो इसमें थोड़ा और
  4569. 4:25:08घुसे।
  4570. 4:25:11तुम अपने क्लोज रिलेशनशिप को ले इतने
  4571. 4:25:13श्योर क्यों
  4572. 4:25:15हो? जब तुम कहते हो कि तुम और तुम्हारी
  4573. 4:25:18वाइफ एक दूसरे में कंप्लीटनेस फील करते
  4574. 4:25:21हैं। इसका क्या मतलब
  4575. 4:25:24है? हम एक दूसरे में खुशी पाते हैं। साथ
  4576. 4:25:28समझना और वैसे ही सब। अंदर से देखा जाए तो
  4577. 4:25:32हम एक दूसरे पर डिपेंड करते हैं। अगर हम
  4578. 4:25:35दोनों में से किसी को कुछ हो जाए तो बहुत
  4579. 4:25:38बड़ा झटका लगेगा। इस सेंस में हम
  4580. 4:25:40डिपेंडेंट
  4581. 4:25:42हैं। डिपेंडेंट का मतलब क्या
  4582. 4:25:45है? तुम्हारा मतलब है कि उसके बिना तुम खो
  4583. 4:25:49जाओगे। पूरी तरह अकेला महसूस करोगे। है
  4584. 4:25:54ना? वह भी वही महसूस करेगी। तो तुम दोनों
  4585. 4:25:59एक दूसरे पर डिपेंडेंट हो। लेकिन इसमें
  4586. 4:26:02गलत क्या है?
  4587. 4:26:06हम ना तो उसे कंडेम कर रहे हैं ना जज
  4588. 4:26:09सिर्फ पूछ रहे
  4589. 4:26:11हैं। क्या तुम सच में इस सब में जाना
  4590. 4:26:14चाहते हो? पक्का चाहते हो? ठीक है। तो चलो
  4591. 4:26:19आगे बढ़ते
  4592. 4:26:21हैं। अगर तुम्हारी वाइफ ना हो तो तुम
  4593. 4:26:24अकेला महसूस करोगे। अंदर से खो जाओगे। तो
  4594. 4:26:28वह तुम्हारे लिए एसेंशियल है। है ना?
  4595. 4:26:32तुम उसके ऊपर अपनी खुशी के लिए डिपेंड
  4596. 4:26:35करते हो और इसी डिपेंडेंस को तुम प्यार
  4597. 4:26:38कहते हो। तुम अकेला होने से डरते
  4598. 4:26:42हो। वह हमेशा वहां होती है तुम्हारे
  4599. 4:26:45अकेलेपन को छुपाने के लिए। जैसे तुम भी
  4600. 4:26:49उसके अकेलेपन को छुपाते हो।
  4601. 4:26:52लेकिन वह अकेलापन तो फिर भी वहां होता है।
  4602. 4:26:55है ना?
  4603. 4:26:57हम एक दूसरे को यूज करते हैं अपने अकेलेपन
  4604. 4:27:00को छुपाने के
  4605. 4:27:02लिए। हम उससे भाग जाते हैं कई तरीकों से।
  4606. 4:27:06अलग-अलग टाइप के रिलेशनशिप्स के थ्रू और
  4607. 4:27:10हर ऐसा रिलेशनशिप एक डिपेंडेंस बन जाता
  4608. 4:27:13है। मैं रेडियो सुनता हूं क्योंकि मुझे
  4609. 4:27:17म्यूजिक खुशी देता है। मुझे मेरे आप से
  4610. 4:27:21दूर ले जाता है। बुक्स और नॉलेज भी एक
  4611. 4:27:25एस्केप है खुद से। और इन सब चीजों पर हम
  4612. 4:27:28डिपेंड करते
  4613. 4:27:31हैं। मैं खुद से क्यों ना भागूं? मुझ में
  4614. 4:27:34कुछ भी प्राउड होने लायक नहीं है। और जब
  4615. 4:27:37मैं अपनी वाइफ के साथ आइडेंटिफाई करता हूं
  4616. 4:27:39जो मुझसे काफी अच्छी है तो मैं खुद से दूर
  4617. 4:27:42हो जाता
  4618. 4:27:43हूं।
  4619. 4:27:46हां, ज्यादातर लोग खुद से भागते हैं।
  4620. 4:27:50लेकिन जब तुम खुद से भागते हो तो तुम
  4621. 4:27:52डिपेंडेंट बन जाते हो।
  4622. 4:27:55जितना ज्यादा डर होता है जो है उससे उतना
  4623. 4:27:59ही ज्यादा डिपेंडेंस बढ़ती है और एस्केप
  4624. 4:28:02और जरूरी हो जाता है। वाइफ, बुक, रेडियो
  4625. 4:28:08यह सब बहुत इंपॉर्टेंट बन जाते
  4626. 4:28:11हैं। एस्केप सबसे बड़ा वैल्यू बन जाता है।
  4627. 4:28:15मैं अपनी वाइफ को यूज़ करता हूं अपने आप
  4628. 4:28:18से भागने के लिए तो मैं उसके साथ अटैच हो
  4629. 4:28:21जाता हूं।
  4630. 4:28:23मुझे उसे पाना है। उसे खोना नहीं है और
  4631. 4:28:27उसे भी पसंद है कि उसे पाया जाए क्योंकि
  4632. 4:28:31वह भी मुझे यूज कर रही है। दोनों में एक
  4633. 4:28:35कॉमन नीड है भागने की और हम एक दूसरे का
  4634. 4:28:39यूज करते हैं। इस यूज करने को ही हम प्यार
  4635. 4:28:42कहते
  4636. 4:28:43हैं। तुम्हें जो तुम हो वह पसंद नहीं।
  4637. 4:28:47इसलिए तुम खुद से जो है उससे भाग जाते हो।
  4638. 4:28:52यह काफी क्लियर है। मैं इसमें कुछ समझ पा
  4639. 4:28:55रहा हूं। यह बात कुछ सेंस बनाती है।
  4640. 4:28:58लेकिन हम भागते क्यों
  4641. 4:29:01हैं? वह किस चीज से भाग रहे होते
  4642. 4:29:06हैं? अपने ही अकेलेपन से, अपने ही खालीपन
  4643. 4:29:11से, जो तुम हो
  4644. 4:29:14उससे अगर तुम भाग जाते हो बिना देखे कि
  4645. 4:29:17क्या है तो तुम उसे समझ नहीं सकते।
  4646. 4:29:22तो पहले भागना बंद करना होगा। तभी तुम खुद
  4647. 4:29:26को वैसे देख सकते हो जैसे तुम हो।
  4648. 4:29:29लेकिन अगर तुम हमेशा जज करते हो, पसंद या
  4649. 4:29:34नफरत करते हो तो तुम जो है उसे ऑब्जर्व
  4650. 4:29:37नहीं कर सकते। तुम उसे अकेलापन कहते हो और
  4651. 4:29:42उसे भाग जाते हो। और जो है उससे भागने का
  4652. 4:29:46प्रोसेस ही डर
  4653. 4:29:48है। तुम इस अकेलेपन इस खालीपन से डरते हो
  4654. 4:29:53और डिपेंडेंस उसका कवर बन जाता
  4655. 4:29:56है। तो डर कांस्टेंट रहता है। जब तक तुम
  4656. 4:30:01जो है उससे भागते हो। डर रहता
  4657. 4:30:05है। किसी चीज से पूरी तरह आइडेंटिफाई हो
  4658. 4:30:08जाना। चाहे वह इंसान हो या आइडिया। यह भी
  4659. 4:30:12फाइनल एस्केप का गारंटी नहीं है क्योंकि
  4660. 4:30:16यह डर बैकग्राउंड में हमेशा होता है। वह
  4661. 4:30:19सपनों के थ्रू आ जाता है। जब
  4662. 4:30:22आइडेंटिफिकेशन में ब्रेक होती है और ब्रेक
  4663. 4:30:25तो हमेशा होती है जब तक हम मेंटली बैलेंस
  4664. 4:30:30ना हो।
  4665. 4:30:33तो मेरा फियर मेरी खुद की खालीपन से मेरी
  4666. 4:30:36कमी से आता है। मुझे यह समझ आ गया और यह
  4667. 4:30:40सच है। लेकिन मैं इसके साथ क्या
  4668. 4:30:42करूं? तुम कुछ भी नहीं कर सकते। जो भी तुम
  4669. 4:30:46करोगे वह सिर्फ एक और भागने की एक्टिविटी
  4670. 4:30:49होगी। यही सबसे इंपॉर्टेंट बात समझनी है।
  4671. 4:30:54तब तुम देख पाओगे कि तुम उस खालीपन से अलग
  4672. 4:30:57नहीं हो। तुम वही हो।
  4673. 4:31:00ऑब्जर्वर ही ऑब्जर्व एम्प्टीनेस
  4674. 4:31:04है। अगर तुम और आगे जाते हो तो उसे
  4675. 4:31:10अकेलापन कहना भी खत्म हो जाता है। जो नाम
  4676. 4:31:14दिया गया था वह रुक जाता है। और अगर तुम
  4677. 4:31:17और आगे जाते हो जो कि थोड़ा मुश्किल है।
  4678. 4:31:21तो जो चीज अकेलेपन के नाम से जानी जाती थी
  4679. 4:31:24वह खत्म हो जाती है। अकेलापन, खालीपन,
  4680. 4:31:29सोचने वाला और सोच यह सब खत्म हो जाता है।
  4681. 4:31:34और सिर्फ तभी डर का अंत होता
  4682. 4:31:38है। तो फिर प्यार क्या
  4683. 4:31:42है? प्यार आइडेंटिफिकेशन नहीं है। यह किसी
  4684. 4:31:46को लेकर सोचना नहीं है। जब प्यार होता है
  4685. 4:31:50तो तुम उसके बारे में नहीं सोचते।
  4686. 4:31:53तुम तभी सोचते हो जब प्यार चला जाता है।
  4687. 4:31:57जब तुम और तुम्हारे प्यार का ऑब्जेक्ट के
  4688. 4:32:00बीच डिस्टेंस आ जाता है। जब डायरेक्ट
  4689. 4:32:03कनेक्शन होता है तो कोई सोच नहीं होती।
  4690. 4:32:07कोई इमेज नहीं होती, कोई याद नहीं होती।
  4691. 4:32:11जब कनेक्शन टूट जाता है तब सोच और
  4692. 4:32:14इमेजिनेशन स्टार्ट होती
  4693. 4:32:17है। प्यार माइंड का पार्ट नहीं है। माइंड
  4694. 4:32:22बनाता है जेलसी का
  4695. 4:32:24धुआ पोज़ेस करने का, याद करने
  4696. 4:32:28का कल के लिए लॉन्गिंग का, दुख और चिंता
  4697. 4:32:32का। और यह सब मिलके उस फ्लेम को दबा देते
  4698. 4:32:36हैं उस आग को।
  4699. 4:32:40जब यह धुआ नहीं होता तभी आग तभी फ्लेम
  4700. 4:32:43होती है। दोनों एक साथ नहीं रह
  4701. 4:32:47सकते। सोचना कि दोनों एक साथ हो सकते हैं।
  4702. 4:32:51सिर्फ एक विश है, एक
  4703. 4:32:53इच्छा और विश माइंड का प्रोजेक्शन होती है
  4704. 4:32:58और माइंड का थॉट कभी प्यार नहीं होता।
  4705. 4:33:11टाइम एंड
  4706. 4:33:15ट्रांसफॉर्मेशन। मैं थोड़ा सा टाइम के
  4707. 4:33:17बारे में बात करना चाहता
  4708. 4:33:20हूं। क्योंकि मुझे लगता है जो टाइमलेस है,
  4709. 4:33:23जो सच है, उसकी असली ब्यूटी, उसका असली
  4710. 4:33:27मीनिंग तभी फील किया जा सकता है जब हम
  4711. 4:33:31टाइम के पूरे प्रोसेस को समझ लें।
  4712. 4:33:36आखिर हम सब अपनेप तरीके से खुशी एक रिचनेस
  4713. 4:33:41फील करने की कोशिश कर रहे
  4714. 4:33:43हैं। श्योरली एक ऐसी जिंदगी जो मीनिंगफुल
  4715. 4:33:47हो जिसमें ट्रू हैप्पीनेस हो वो टाइम की
  4716. 4:33:51नहीं होती।
  4717. 4:33:54जैसे प्यार वैसे ही असली जिंदगी टाइमलेस
  4718. 4:33:57होती
  4719. 4:33:58है। और जो टाइमलेस है उसको समझने के लिए
  4720. 4:34:02हमें टाइम के थ्रू नहीं जाना
  4721. 4:34:06चाहिए। बल्कि पहले टाइम को समझना
  4722. 4:34:10चाहिए। हमें टाइम को एक टूल की तरह यूज़
  4723. 4:34:13नहीं करना चाहिए जो हमें टाइमलेस तक ले
  4724. 4:34:17जाए।
  4725. 4:34:20लेकिन हम ज्यादातर जिंदगी इसी में लगा
  4726. 4:34:22देते
  4727. 4:34:23हैं। टाइमलेस चीज को समझने के लिए टाइम का
  4728. 4:34:27यूज करते
  4729. 4:34:28हुए। इसलिए यह समझना जरूरी है कि हम टाइम
  4730. 4:34:33से क्या मतलब लेते
  4731. 4:34:35हैं। क्योंकि मुझे लगता है कि टाइम से
  4732. 4:34:38फ्री होना पॉसिबल है।
  4733. 4:34:41टाइम को पूरे तरीके से समझना इंपॉर्टेंट
  4734. 4:34:43है। सिर्फ थोड़ा-थोड़ा नहीं।
  4735. 4:34:47यह सोचना इंटरेस्टिंग है कि हमारी जिंदगी
  4736. 4:34:50ज्यादातर टाइम में ही बीतती है।
  4737. 4:34:55लेकिन टाइम का मतलब यहां मिनट्स, हावर्स,
  4738. 4:35:00डेज, इयर्स नहीं बल्कि साइकोलॉजिकल मेमोरी
  4739. 4:35:06है। हम टाइम के अकॉर्डिंग जीते हैं। हम
  4740. 4:35:10टाइम का रिजल्ट
  4741. 4:35:12है। हमारा माइंड बहुत सारे कल के दिनों का
  4742. 4:35:16प्रोडक्ट है और प्रेजेंट सिर्फ पास्ट का
  4743. 4:35:20फ्यूचर की तरफ जाना
  4744. 4:35:22है। हमारा माइंड, हमारी एक्टिविटी, हमारा
  4745. 4:35:26होना सब टाइम पर बेस्ड
  4746. 4:35:29है। बिना टाइम के हम सोच भी नहीं सकते
  4747. 4:35:33क्योंकि सोच टाइम का रिजल्ट है। सोच कल के
  4748. 4:35:38एक्सपीरियंसेस का प्रोडक्ट है। और बिना
  4749. 4:35:41मेमोरी के कोई थॉट होता ही नहीं। मेमोरी
  4750. 4:35:45ही टाइम है।
  4751. 4:35:48टाइम दो तरीके का होता है। एक
  4752. 4:35:51क्रोनोलॉजिकल और दूसरा
  4753. 4:35:55साइकोलॉजिकल। एक होता है कल का समय घड़ी
  4754. 4:35:58के हिसाब से। और दूसरा होता है कल की
  4755. 4:36:03मेमोरी के हिसाब
  4756. 4:36:05से। तुम क्रोनोलॉजिकल टाइम को रिजेक्ट
  4757. 4:36:08नहीं कर सकते।
  4758. 4:36:11वह तो बेकार
  4759. 4:36:13होगा। तुम अपनी ट्रेन मिस कर दोगे।
  4760. 4:36:18लेकिन क्या क्रोनोलॉजिकल टाइम के अलावा भी
  4761. 4:36:21कोई और टाइम होता है? हां, कल तो था ही।
  4762. 4:36:27लेकिन क्या वैसे भी टाइम होता है जैसे
  4763. 4:36:30माइंड सोचता
  4764. 4:36:31है। क्या माइंड के अलावा टाइम होता है?
  4765. 4:36:36शोरली साइकोलॉजिकल टाइम माइंड का प्रोडक्ट
  4766. 4:36:39है। बिना थॉट के टाइम होता ही नहीं
  4767. 4:36:43क्योंकि टाइम तो सिर्फ मेमोरी है। कल का
  4768. 4:36:47एक्सपीरियंस प्लस आज का एक्सपीरियंस
  4769. 4:36:50इक्वल्स कल की सोच।
  4770. 4:36:54यानी कल जो फील किया उसका रिएक्शन आज और
  4771. 4:36:58उसी से फ्यूचर बनता
  4772. 4:37:01है। यह सब थॉट का प्रोसेस है। माइंड का
  4773. 4:37:05पाथ
  4774. 4:37:06है। यह थॉट प्रोसेस ही साइकोलॉजिकल
  4775. 4:37:10प्रोग्रेस बनाता है टाइम के
  4776. 4:37:13थ्रू। लेकिन क्या यह वाकई रियल है?
  4777. 4:37:18जैसे क्रोनोलॉजिकल टाइम रियल है। और क्या
  4778. 4:37:22हम इस माइंड वाले टाइम को यूज करके एटरनल
  4779. 4:37:26टाइमलेस को समझ सकते
  4780. 4:37:30हैं? जैसे मैंने कहा हैप्पीनेस कल की नहीं
  4781. 4:37:36होती। हैप्पीनेस टाइम का प्रोडक्ट नहीं
  4782. 4:37:39होती। हैप्पीनेस हमेशा भी होती है। एक
  4783. 4:37:44टाइमलेस स्टेट होती है। पता नहीं तुमने
  4784. 4:37:47नोटिस किया या
  4785. 4:37:51नहीं। जब तुम्हें रियल जॉय मिलता है एक
  4786. 4:37:54क्रिएटिव
  4787. 4:37:56एक्ससी जैसे ब्राइट बादलों के बीच में
  4788. 4:38:00अंधेरा। तो उस मोमेंट में कोई टाइम नहीं
  4789. 4:38:04होता। सिर्फ प्रेजेंट होता
  4790. 4:38:07है। जब माइंड उस मोमेंट के बाद आता है तो
  4791. 4:38:12वह याद करता है और चाहता है कि यह मोमेंट
  4792. 4:38:15चलता रहे।
  4793. 4:38:17फिर वह और और कलेक्ट करता है और टाइम
  4794. 4:38:22क्रिएट करता
  4795. 4:38:24है तो टाइम और से बनता है।
  4796. 4:38:28टाइम पोजेस करने से बनता है और टाइम डी
  4797. 4:38:32अटैचमेंट से भी बनता
  4798. 4:38:34है। जो कि फिर भी माइंड की पोजीशन ही है।
  4799. 4:38:39इसलिए सिर्फ माइंड को टाइम में डिसिप्लिन
  4800. 4:38:42करना। थॉट को टाइम के फ्रेमवर्क में डालना
  4801. 4:38:46जो कि मेमोरी है वह टाइमलेस चीज को कभी
  4802. 4:38:49नहीं
  4803. 4:38:51दिखाता। क्या ट्रांसफॉर्मेशन टाइम का मैटर
  4804. 4:38:56है? ज्यादातर लोगों का मानना है कि
  4805. 4:38:59ट्रांसफॉर्मेशन के लिए टाइम चाहिए।
  4806. 4:39:02मैं जो
  4807. 4:39:03हूं उसे बदल के जो मुझे होना चाहिए उसके
  4808. 4:39:08बीच टाइम लगता है। मैं ग्रीडी हूं और
  4809. 4:39:12ग्रीड से कंफ्यूजन, नफरत, कॉन्फ्लिक्ट और
  4810. 4:39:17पेन आता
  4811. 4:39:18है। और इस ग्रीड को हटाकर नॉन ग्रीडी बनने
  4812. 4:39:22के लिए हम सोच लेते हैं कि टाइम चाहिए।
  4813. 4:39:26यानी
  4814. 4:39:28टाइम को एक तरीके के इवोल्यूशन का रास्ता
  4815. 4:39:31समझा जाता
  4816. 4:39:33है। जिसमें हम कुछ और बन जाते
  4817. 4:39:37हैं। प्रॉब्लम यह है इंसान वायलेंट है,
  4818. 4:39:42ग्रीडी
  4819. 4:39:43है, जेलस है, एंग्री है, बुरा है या बहुत
  4820. 4:39:48पैशनेट
  4821. 4:39:50है। क्या जो है उसको बदलने के लिए टाइम
  4822. 4:39:54जरूरी है?
  4823. 4:39:56सबसे पहले हम बदलना क्यों चाहते हैं?
  4824. 4:40:00क्योंकि जो हम हैं वह हमें पसंद नहीं। वह
  4825. 4:40:03कॉन्फ्लिक्ट लाता है, डिस्टरबेंस लाता
  4826. 4:40:07है। और उस स्टेट को डिसलाइक करके हम कुछ
  4827. 4:40:10और चाहते
  4828. 4:40:13हैं। कुछ
  4829. 4:40:15बेटर, नोबल, आइडियल।
  4830. 4:40:19तो हम ट्रांसफॉर्मेशन चाहते हैं क्योंकि
  4831. 4:40:22हम दर्द, तकलीफ और कॉन्फ्लिक्ट महसूस करते
  4832. 4:40:26हैं।
  4833. 4:40:28लेकिन क्या कॉन्फ्लिक्ट टाइम से खत्म होता
  4834. 4:40:31है? अगर तुम कहते हो कि टाइम से
  4835. 4:40:34कॉन्फ्लिक्ट खत्म
  4836. 4:40:36होगा। तो तुम अभी भी कॉन्फ्लिक्ट में हो।
  4837. 4:40:41हो सकता है तुम कहो कि 20 दिन लगेंगे या
  4838. 4:40:4520 साल खुद को बदलने के लिए।
  4839. 4:40:49लेकिन अब तक तो तुम अभी भी कॉन्फ्लिक्ट
  4840. 4:40:52में ही हो। और इसलिए टाइम ट्रांसफॉर्मेशन
  4841. 4:40:56नहीं लाता।
  4842. 4:40:58जब हम टाइम का यूज करते हैं किसी
  4843. 4:41:01क्वालिटी,
  4844. 4:41:03वर्चू या एक स्पेशल स्टेट को पाने के लिए
  4845. 4:41:07तो हम सिर्फ जो है उससे भाग रहे होते हैं
  4846. 4:41:11या उसे डिले कर रहे होते
  4847. 4:41:14हैं। और मुझे लगता है यह पॉइंट समझना बहुत
  4848. 4:41:18जरूरी है। लालच या वायलेंस पेन लाती है।
  4849. 4:41:24डिस्टरबेंस लाती है हमारे रिलेशंस में। और
  4850. 4:41:28वही सोसाइटी
  4851. 4:41:29है। और जब हम इस डिस्टरबेंस को महसूस करते
  4852. 4:41:33हैं जिसे हम ग्रीड या वायलेंस कहते हैं तो
  4853. 4:41:38हम सोचते हैं मैं इसे टाइम के साथ निकल
  4854. 4:41:43जाऊंगा। मैं नॉन वायलेंस प्रैक्टिस
  4855. 4:41:46करूंगा। नॉन एनवी प्रैक्टिस करूंगा। मैं
  4856. 4:41:49पीस प्रैक्टिस करूंगा।
  4857. 4:41:54तुम नॉन वायलेंस इसलिए प्रैक्टिस करना
  4858. 4:41:57चाहते हो क्योंकि वायलेंस डिस्टरबेंस है,
  4859. 4:42:00कॉन्फ्लिक्ट है और तुम सोचते हो कि टाइम
  4860. 4:42:04के साथ तुम नॉन वायलेंस पा जाओगे और
  4861. 4:42:07कॉन्फ्लिक्ट खत्म हो जाएगा।
  4862. 4:42:11लेकिन असली में क्या हो रहा है? तुम अभी
  4863. 4:42:15कॉन्फ्लिक्ट में हो और तुम एक ऐसे स्टेट
  4864. 4:42:18को पाना चाहते हो जहां कॉन्फ्लिक्ट ना हो।
  4865. 4:42:22क्या वह कॉन्फ्लिक्ट फ्री स्टेट टाइम का
  4866. 4:42:25रिजल्ट हो सकता है? साफ साफ है कि
  4867. 4:42:30नहीं? क्योंकि जब तक तुम नॉन वायलेंस
  4868. 4:42:34हासिल करने की कोशिश कर रहे हो, तुम
  4869. 4:42:36वायलेंट हो और इसलिए कॉन्फ्लिक्ट में
  4870. 4:42:41हो। हमारी प्रॉब्लम यह है क्या
  4871. 4:42:44कॉन्फ्लिक्ट डिस्टरबेंस को किसी भी टाइम
  4872. 4:42:47पीरियड में खत्म किया जा सकता है? चाहे वह
  4873. 4:42:50दिन हो, साल हो या पूरी
  4874. 4:42:55जिंदगी। जब तुम कहते हो मैं नॉन वायलेंस
  4875. 4:42:59प्रैक्टिस करने जा रहा हूं। तो यही दिखाता
  4876. 4:43:02है कि तुम कॉन्फ्लिक्ट में हो। है
  4877. 4:43:05ना? तुम प्रैक्टिस तभी करते हो जब तुम
  4878. 4:43:08किसी चीज का रेजिस्टेंस कर रहे हो।
  4879. 4:43:12और तुम कहते हो कि कॉन्फ्लिक्ट से निकलने
  4880. 4:43:15के लिए रेजिस्टेंस जरूरी है और उसके लिए
  4881. 4:43:19टाइम चाहिए।
  4882. 4:43:22लेकिन यह जो रेजिस्टेंस है वह खुद एक तरह
  4883. 4:43:25का कॉन्फ्लिक्ट है। तुम अपनी एनर्जी
  4884. 4:43:29कॉन्फ्लिक्ट से लड़ने में लगा रहे
  4885. 4:43:31हो। जैसे ग्रीड, एनवी, वायलेंस के
  4886. 4:43:35अगेंस्ट।
  4887. 4:43:37लेकिन तुम्हारा माइंड अभी भी कॉन्फ्लिक्ट
  4888. 4:43:40में है।
  4889. 4:43:41इसलिए यह देखना इंपॉर्टेंट है कि टाइम पर
  4890. 4:43:45डिपेंड करना एक फॉल्स प्रोसेस है। और जब
  4891. 4:43:49तुम इस फॉल्स को देखते
  4892. 4:43:52हो तो तुम वही हो जाते हो जो तुम हो। एक
  4893. 4:43:56साइकोलॉजिकल डिस्टरबेंस जो खुद वायलेंस
  4894. 4:44:02है। किसी भी चीज को समझने के लिए क्या
  4895. 4:44:06चाहिए होता है? एक शांत माइंड है ना?
  4896. 4:44:11एक ऐसा माइंड जो जेनुइनली समझना चाहता है,
  4897. 4:44:15वह माइंड एक्सक्लूसिव नहीं होता। ना ही वह
  4898. 4:44:18कंसंट्रेट करने की कोशिश करता
  4899. 4:44:21है क्योंकि वह भी एक रेजिस्टेंस ही होता
  4900. 4:44:26है। अगर मैं सच में कुछ समझना चाहता हूं
  4901. 4:44:30तो मेरे माइंड में तुरंत शांति आ जाती
  4902. 4:44:34है। जब तुम म्यूजिक सुनते हो, तुम्हारा
  4903. 4:44:38माइंड इधर-उधर भटकता नहीं। तुम सुन रहे
  4904. 4:44:42होते
  4905. 4:44:43हो। वैसे ही जब तुम कॉन्फ्लिक्ट को समझना
  4906. 4:44:46चाहते हो तो तुम टाइम पर डिपेंड ही नहीं
  4907. 4:44:50करते। तुम सिर्फ जो है उसके सामने खड़े
  4908. 4:44:54होते हो जो है वह है कॉन्फ्लिक्ट।
  4909. 4:44:58और तुरंत ही माइंड में शांति आ जाती है।
  4910. 4:45:01एक स्टिलनेस आ जाती
  4911. 4:45:03है। जब तुम टाइम पर डिपेंड करना छोड़ देते
  4912. 4:45:07हो एज अ वे टू ट्रांसफॉर्म व्हाट
  4913. 4:45:11इज। क्योंकि तुम देख लेते हो कि वह
  4914. 4:45:14प्रोसेस झूठ है। तो तुम फेस करते हो जो
  4915. 4:45:18है और जैसे ही तुम्हें इंटरेस्ट होता है
  4916. 4:45:21समझने में तुम्हारा माइंड नेचुरली शांत हो
  4917. 4:45:26जाता है।
  4918. 4:45:28इस अलर्ट और पैसिव स्टेट में
  4919. 4:45:30अंडरस्टैंडिंग होती
  4920. 4:45:32है। जब तक माइंड कॉन्फ्लिक्ट में है,
  4921. 4:45:35ब्लेम करता है, रेजिस्ट करता है, जज करता
  4922. 4:45:40है, तब तक समझ नहीं हो सकती। अगर मैं
  4923. 4:45:46तुम्हें समझना चाहता हूं तो मुझे तुम्हें
  4924. 4:45:51जज नहीं करना चाहिए। यह ऑब्वियस
  4925. 4:45:54है। वह शांत माइंड वह स्टिल माइंड ही रियल
  4926. 4:46:00ट्रांसफॉर्मेशन लाता
  4927. 4:46:03है। जब माइंड रेिस्ट नहीं करता भागता नहीं
  4928. 4:46:08ना ही जो है उसे ब्लेम करता है बल्कि
  4929. 4:46:12सिर्फ पैसिवली अवेयर होता है तो अगर तुम
  4930. 4:46:16इस प्रॉब्लम में गहरा जाते हो तो उस
  4931. 4:46:20पैसिविटी में ट्रांसफॉर्मेशन हो जाता
  4932. 4:46:24है रिवोल्यूशन सिर्फ अभी पॉसिबल है फ्यूचर
  4933. 4:46:28में
  4934. 4:46:29नहीं नया जीवन सिर्फ आज हो सकता है कल
  4935. 4:46:32नहीं
  4936. 4:46:34अगर तुम मेरी बात पर थोड़ा एक्सपेरिमेंट
  4937. 4:46:37करोगे तो तुम देखोगे कि तुरंत एक नई ताजगी
  4938. 4:46:41आ जाती
  4939. 4:46:42है। एक फ्रेशनेस का एहसास होता
  4940. 4:46:46है। क्योंकि जब माइंड को समझने की इच्छा
  4941. 4:46:49होती है, विश होती है, जब उसमें सच में
  4942. 4:46:53इंटरेस्ट होता है, तो वह हमेशा शांत होता
  4943. 4:46:58है। हमारी सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि
  4944. 4:47:03हमारे पास समझने की असली इच्छा नहीं
  4945. 4:47:06होती क्योंकि हमें डर होता है कि अगर हमने
  4946. 4:47:10समझ लिया तो शायद हमारी जिंदगी में कोई
  4947. 4:47:14बड़ा बदलाव आ
  4948. 4:47:16जाए और इसी वजह से हम रेजिस्ट करते
  4949. 4:47:20हैं यह हमारा डिफेंस सिस्टम
  4950. 4:47:24है जो तब एक्टिव हो जाता है जब हम टाइम या
  4951. 4:47:28आइडियल का यूज करते हैं। ग्रेजुअल
  4952. 4:47:32ट्रांसफॉर्मेशन के लिए।
  4953. 4:47:35इसलिए नई शुरुआत सिर्फ प्रेजेंट में
  4954. 4:47:38पॉसिबल है। फ्यूचर में नहीं, कल में नहीं।
  4955. 4:47:43जो इंसान टाइम पर डिपेंड करता है खुशी
  4956. 4:47:46पाने के लिए या ट्रुथ या गॉड रियलाइज करने
  4957. 4:47:50के लिए वह खुद को धोखा दे रहा है। वह
  4958. 4:47:54अंधेरे में जी रहा है और इसलिए
  4959. 4:47:56कॉन्फ्लिक्ट में
  4960. 4:47:58भी जो यह देख लेता है कि टाइम हमारी
  4961. 4:48:02प्रॉब्लम का सशन नहीं है और इसलिए वह
  4962. 4:48:05फॉल्स से फ्री हो जाता है।
  4963. 4:48:10ऐसे लोग नेचुरली समझने की इच्छा रखते हैं।
  4964. 4:48:14इसलिए उनका माइंड खुद ब खुद शांत हो जाता
  4965. 4:48:17है। बिना किसी फोर्स के बिना किसी
  4966. 4:48:21प्रैक्टिस
  4967. 4:48:23के। जब माइंड स्टिल होता है बिल्कुल शांत।
  4968. 4:48:28ना किसी आंसर की तलाश में ना किसी स्यूशन
  4969. 4:48:31के पीछे ना रेिस्ट करता है ना भागता है
  4970. 4:48:36सिर्फ तभी रियल ट्रांसफॉर्मेशन होती है
  4971. 4:48:39क्योंकि तब माइंड सच को देखने लायक होता
  4972. 4:48:43है और सिर्फ सच ही तुम्हें आजाद करता है
  4973. 4:48:48तुम्हारा फ्री होने का एफर्ट नहीं
  4974. 4:48:59सोरो फ्रॉम सेल्फ
  4975. 4:49:03पिटी। इस समय इस गर्म मौसम में यहां बसंत
  4976. 4:49:08का मौसम था। धूप हल्की थी। क्योंकि नॉर्थ
  4977. 4:49:12से एक ठंडी हवा आ रही थी। जहां पहाड़ों पर
  4978. 4:49:16नई बर्फ पड़ी थी।
  4979. 4:49:19सड़क के पास एक पेड़ था जो एक हफ्ते पहले
  4980. 4:49:22तक बिल्कुल नंगा था। अब नए हरे पत्तों से
  4981. 4:49:27भरा था जो धूप में चमक रहे थे। नए पत्ते
  4982. 4:49:31बहुत नरम थे। बहुत
  4983. 4:49:35नाजुक। बहुत छोटे थे। माइंड धरती और नीले
  4984. 4:49:41आसमान के इस बड़े स्पेस में।
  4985. 4:49:46फिर भी कुछ ही देर में वह पूरे थॉट स्पेस
  4986. 4:49:49को भर देते हैं।
  4987. 4:49:51थोड़ा आगे एक फूलों वाला पेड़ था जिसमें
  4988. 4:49:55कोई पत्ते नहीं
  4989. 4:49:58थे। सिर्फ फूल ही फूल थे। हवा ने उनके
  4990. 4:50:02पंखुड़ियां जमीन पर गिरा दी
  4991. 4:50:04थी। और कुछ बच्चे उनमें बैठे
  4992. 4:50:08थे। वह शॉफ्स और सर्वेंट्स के बच्चे थे।
  4993. 4:50:13वह कभी स्कूल नहीं जाएंगे। वह हमेशा इस
  4994. 4:50:16दुनिया के गरीब लोग
  4995. 4:50:19रहेंगे। लेकिन सड़क के किनारे गिरे हुए
  4996. 4:50:22फूलों के बीच वो बच्चे धरती का हिस्सा लग
  4997. 4:50:26रहे
  4998. 4:50:27थे। उन्होंने एक अजनबी को अपने बीच बैठे
  4999. 4:50:31देखा तो वह हैरान हो गए। अचानक चुप हो गए।
  5000. 4:50:36फूलों से खेलना बंद कर दिया। और कुछ
  5001. 4:50:40सेकंड्स के लिए वह बिल्कुल मूर्तियों जैसे
  5002. 4:50:43हो गए।
  5003. 4:50:45लेकिन उनकी आंखों में जिंदा क्यूरियोसिटी
  5004. 4:50:47थी, फ्रेंडलीनेस थी और थोड़ा डर भी
  5005. 4:50:51था। सड़क के पास एक छोटी सी गार्डन थी।
  5006. 4:50:56जिसमें बहुत सारे चमकदार फूल
  5007. 4:50:59थे। उस गार्डन के एक पेड़ के पत्तों में
  5008. 4:51:02एक कौवा धूप से बचा हुआ था। उसकी पूरी
  5009. 4:51:06बॉडी ब्रांच पर थी।
  5010. 4:51:09उसके पंजों को फिदर्स ने ढग रखा था। वह
  5011. 4:51:13बोल रहा था या दूसरे कौवों को वह जवाब दे
  5012. 4:51:16रहा था। और 10 मिनट में उसके पांच छह
  5013. 4:51:20अलग-अलग आवाजें थी। शायद और भी ज्यादा थी।
  5014. 4:51:25लेकिन अब वह कुछ नोट्स में खुश था। वह
  5015. 4:51:28बिल्कुल काला था। उसकी गर्दन ग्रे थी।
  5016. 4:51:32उसकी आंखें अलग थी जो कभी रुकती नहीं थी।
  5017. 4:51:36और उसकी चोंच तेज और सख्त
  5018. 4:51:39थी। वह पूरी तरह रेस्ट में था। फिर भी
  5019. 4:51:43पूरा जिंदा लग रहा
  5020. 4:51:46था। बहुत अजीब था कि माइंड उस बर्ड के साथ
  5021. 4:51:49पूरा था। वह बर्ड को ऑब्जर्व नहीं कर रहा
  5022. 4:51:52था। लेकिन उसने हर डिटेल ले ली थी। माइंड
  5023. 4:51:57बर्ड नहीं बना था। क्योंकि कोई
  5024. 4:52:00आइडेंटिफिकेशन नहीं थी। वह बर्ड के साथ
  5025. 4:52:02था। उसकी आंखों और तेज चोंच के
  5026. 4:52:07साथ जैसे समुंदर मछली के साथ होता है। वह
  5027. 4:52:11बर्ड के साथ था।
  5028. 4:52:14लेकिन उसके पार भी जा रहा
  5029. 4:52:16था। कौवे का शार्प, एग्रेसिव और डरा हुआ
  5030. 4:52:21माइंड उसी माइंड का हिस्सा
  5031. 4:52:24था। जो समुंदर और टाइम के पार भी जाता है।
  5032. 4:52:28यह माइंड बहुत बड़ा था, लिमिटलेस था।
  5033. 4:52:33किसी माप में नहीं आता था और फिर भी उस
  5034. 4:52:38काले कौवे की आंखों की हल्की सी मूवमेंट
  5035. 4:52:41को फील कर रहा था जो नए चमकते पत्तों के
  5036. 4:52:45बीच छुपा
  5037. 4:52:47था। वह गिरे हुए फूलों को भी महसूस कर रहा
  5038. 4:52:51था।
  5039. 4:52:53लेकिन उसका कोई फोकस नहीं था।
  5040. 4:52:59ना ही कोई पॉइंट जहां से वह देख रहा
  5041. 4:53:03हो। स्पेस के ऑोजिट जिसमें हमेशा कुछ होता
  5042. 4:53:07है जैसे धूल, धरती या
  5043. 4:53:11आसमान। यह माइंड बिल्कुल खाली था। और खाली
  5044. 4:53:15होने की वजह से वह बिना किसी रीजन के पूरा
  5045. 4:53:18अटेंशन दे सकता था।
  5046. 4:53:22उसका अटेंशन ना
  5047. 4:53:25रूट से आता था ना ब्रांच
  5048. 4:53:27से। सारी एनर्जी उस काली शांति में
  5049. 4:53:31थी। वह एनर्जी वह नहीं थी जो किसी इंटेंशन
  5050. 4:53:35से बनाई जाती है और प्रेशर हटते ही खत्म
  5051. 4:53:38हो जाती है। वह एनर्जी थी एक नई शुरुआत
  5052. 4:53:43की। वह लाइफ थी जिसका कोई एंड टाइम में
  5053. 4:53:47नहीं था। कुछ लोग इकट्ठा हुए थे। और जैसे
  5054. 4:53:51ही कोई अपना प्रॉब्लम
  5055. 4:53:53बताया बाकी लोग उसे समझाते और अपने
  5056. 4:53:56एक्सपीरियंस से कंपेयर करते
  5057. 4:54:01लेकिन स्वरों को कंपेयर नहीं किया जा
  5058. 4:54:03सकता। कंपैरिजन से सेल्फ पिटी पैदा होता
  5059. 4:54:06है और फिर प्रॉब्लम्स बढ़ती
  5060. 4:54:10हैं। दुख का सामना सीधा करना चाहिए। यह
  5061. 4:54:14सोच के नहीं कि तुम्हारा दुख किसी और से
  5062. 4:54:17ज्यादा
  5063. 4:54:18है। अब सब चुप थे और फिर एक इंसान ने
  5064. 4:54:21बोलना शुरू
  5065. 4:54:23किया। मेरी मां कुछ साल पहले गुजर गई। अभी
  5066. 4:54:27हाल ही में मेरे पापा भी चले गए और मैं
  5067. 4:54:30गिल्ट से भरा हूं। वह अच्छे पापा थे। और
  5068. 4:54:35मुझे वह सब होना चाहिए था जो मैं नहीं
  5069. 4:54:38था। हमारे विचार अलग थे। हमारी लाइफ का
  5070. 4:54:42तरीका अलग था और इस वजह से हम दूर हो गए।
  5071. 4:54:45वह रिलीजियस थे। लेकिन मेरी रिलीजियस
  5072. 4:54:49फीलिंग इतनी ऑब्वियस नहीं थी। हमारे बीच
  5073. 4:54:52रिलेशन अक्सर टाइट था लेकिन एक रिलेशन था।
  5074. 4:54:56और अब जब वह चले गए हैं तो मैं दर्द में
  5075. 4:54:59हूं। मेरा सोरो सिर्फ गिल्ट नहीं है बल्कि
  5076. 4:55:03अकेला छोड़े जाने का भी एहसास है। मैंने
  5077. 4:55:07ऐसे सोरो पहले कभी महसूस नहीं किया। और यह
  5078. 4:55:11काफी गहरा है। मैं क्या करूं? मैं कैसे
  5079. 4:55:15इसे
  5080. 4:55:22निकालूं? क्या मैं पूछ सकता हूं? क्या तुम
  5081. 4:55:26अपने पापा के लिए दर्द महसूस कर रहे हो?
  5082. 4:55:29या तुम्हारा दुख इसलिए है क्योंकि वह
  5083. 4:55:31रिलेशन अब नहीं रहा जिसके तुम आदत डाल
  5084. 4:55:35चुके थे।
  5085. 4:55:38मैं समझा नहीं आप क्या कह रहे
  5086. 4:55:42हो। क्या तुम इसलिए दर्द महसूस कर रहे हो
  5087. 4:55:46क्योंकि तुम्हारे पापा चले गए या इसलिए
  5088. 4:55:50क्योंकि तुम्हें अकेला महसूस हो रहा
  5089. 4:55:53है। मुझे सिर्फ इतना पता है कि मैं दुख
  5090. 4:55:56में हूं और मैं इससे भागना चाहता हूं।
  5091. 4:56:00मुझे वाकई समझ नहीं आ रहा आप क्या कहना
  5092. 4:56:03चाहते हैं। थोड़ा ठीक से एक्सप्लेन करिए
  5093. 4:56:10प्लीज। यह काफी सिंपल है। है
  5094. 4:56:13ना? या तो तुम अपने पापा के लिए दर्द
  5095. 4:56:16महसूस कर रहे हो जैसे उन्हें जिंदा रहना
  5096. 4:56:20पसंद था। और जब वह नहीं रहे तो तुम इसलिए
  5097. 4:56:24दुख में हो क्योंकि एक ऐसा रिलेशन खत्म हो
  5098. 4:56:27गया जो तुम्हारे लिए बहुत मायने रखता था
  5099. 4:56:31और अब तुम्हें अकेलापन महसूस हो रहा
  5100. 4:56:35है। तो कौन सा है? तुम दुख में हो। शायद
  5101. 4:56:40अपने पापा के लिए नहीं बल्कि इसलिए
  5102. 4:56:43क्योंकि तुम अकेला महसूस कर रहे
  5103. 4:56:45हो। और तुम्हारा दुख सेल्फ पिटी से आता
  5104. 4:56:49है।
  5105. 4:56:52अकेलापन एक्सजेक्टली होता क्या
  5106. 4:56:57है? क्या तुमने कभी अकेला महसूस नहीं
  5107. 4:57:01किया? हां, मैंने अक्सर अकेला चलना पसंद
  5108. 4:57:04किया है। मैं हॉलिडेज में लंबी वॉक्स पर
  5109. 4:57:07अकेला जाता
  5110. 4:57:11हूं। क्या अकेलापन फील करना और अकेला चलना
  5111. 4:57:17जैसे किसी वॉक पर एक ही बात है।
  5112. 4:57:21अगर दोनों में फर्क है तो मुझे नहीं लगता
  5113. 4:57:23कि मैं समझता हूं अकेलेपन का
  5114. 4:57:29मतलब। लगता है हम किसी भी चीज का मतलब
  5115. 4:57:32नहीं जानते। बस शब्द ही जानते हैं। किसी
  5116. 4:57:35ने
  5117. 4:57:40कहा क्या तुमने कभी खुद से अकेलापन फील
  5118. 4:57:44किया है? जैसे कोई दांत में दर्द महसूस
  5119. 4:57:47होता है।
  5120. 4:57:50जब हम अकेलेपन की बात करते हैं, क्या हम
  5121. 4:57:54उसका दर्द एक्चुअल महसूस करते हैं या बस
  5122. 4:57:58एक शब्द का यूज करते हैं किसी ऐसी चीज के
  5123. 4:58:01लिए जो हमने कभी डायरेक्टली महसूस ही नहीं
  5124. 4:58:06की। क्या हम वाकई सफर कर रहे होते हैं या
  5125. 4:58:11बस सोच रहे होते हैं कि हम सफर कर रहे
  5126. 4:58:14हैं?
  5127. 4:58:18मैं जानना चाहता हूं कि अकेलापन क्या होता
  5128. 4:58:24है। तुम्हारा मतलब है तुम उसका
  5129. 4:58:27डिस्क्रिप्शन चाहते
  5130. 4:58:29हो। यह एक एक्सपीरियंस है
  5131. 4:58:32जिसमें हम पूरी तरह अलग महसूस करते हैं।
  5132. 4:58:37ऐसा लगता है जैसे किसी पर भी भरोसा नहीं
  5133. 4:58:40किया जा सकता। हर रिलेशन से कटा
  5134. 4:58:44हुआ जो मैं है, ईगो है, सेल्फ है, वह अपनी
  5135. 4:58:50नेचर में ही हमेशा अपने आसपास एक वॉल
  5136. 4:58:53बनाता रहता
  5137. 4:58:55है। और उसकी हर एक्टिविटी अलग करने वाली
  5138. 4:58:59होती है। जब वह अपने इस अलगपन को महसूस
  5139. 4:59:04करता है तो वह अपने आप को किसी वर्चुअ गॉड
  5140. 4:59:09प्रॉपर्टी इंसान कंट्री या आइडियोलॉजी से
  5141. 4:59:13जोड़ लेता है।
  5142. 4:59:17लेकिन यह आइडेंटिफिकेशन भी आइसोलेशन का ही
  5143. 4:59:20हिस्सा होता है।
  5144. 4:59:23यानी हम हर पॉसिबल तरीके से इस अकेलेपन के
  5145. 4:59:27पेन से भाग जाते हैं।
  5146. 4:59:30और इसलिए हम कभी उसे डायरेक्टली फील ही
  5147. 4:59:33नहीं
  5148. 4:59:35करते। जैसे किसी कोने पर कुछ डर लगता है
  5149. 4:59:39और हम कभी उस डर का सामना नहीं
  5150. 4:59:43करते। कभी नहीं देखते वह चीज क्या है। बस
  5151. 4:59:47हमेशा भागते रहते हैं और किसी ना किसी में
  5152. 4:59:52छुप जाते
  5153. 4:59:53हैं। जो और ज्यादा फियर पैदा करता है।
  5154. 4:59:59क्या तुमने कभी ऐसा अकेलापन महसूस किया है
  5155. 5:00:03जिसमें तुम सबसे अलग बिल्कुल कट गए हो
  5156. 5:00:09सबसे मुझे बिल्कुल समझ नहीं आ रहा आप क्या
  5157. 5:00:12कह रहे
  5158. 5:00:15हैं तो अगर मैं
  5159. 5:00:18पूछूं क्या तुम वाकई जानते हो दुख होता
  5160. 5:00:22क्या
  5161. 5:00:22है क्या तुम दुख को वैसे महसूस करते हो
  5162. 5:00:26जैसे कोई दांत का दर्द होता है। जब दांत
  5163. 5:00:30दर्द करता है, तुम तुरंत एक्शन लेते हो।
  5164. 5:00:34डेंटिस्ट के पास जाते हो।
  5165. 5:00:37लेकिन जब दुख होता है तो तुम उससे भाग
  5166. 5:00:40जाते हो। एक्सप्लेनेशन, बिलीव, ड्रिंक
  5167. 5:00:45वगैरह के
  5168. 5:00:46जरिए। तुम कुछ करते हो।
  5169. 5:00:50लेकिन वह एक्शन दुख से आजादी देने वाला
  5170. 5:00:53एक्शन नहीं होता। है ना?
  5171. 5:00:57मुझे नहीं पता क्या करना है। इसलिए मैं
  5172. 5:00:59यहां
  5173. 5:01:02हूं। पर जब तक तुम्हें पता ना हो दुख असल
  5174. 5:01:06में है
  5175. 5:01:07क्या? तब तक तुम क्या करोगे? कैसे पता
  5176. 5:01:13चलेगा? क्या तुमने बस दुख के बारे में एक
  5177. 5:01:17आईडिया एक जजमेंट बना लिया है? जो भाग
  5178. 5:01:21जाना, जज करना, डर या सब दुख को एक्चुअल
  5179. 5:01:26महसूस करने से रोकता
  5180. 5:01:30है। जब दांत दर्द करता है तो तुम कोई
  5181. 5:01:35आईडिया या ओपिनियन नहीं
  5182. 5:01:37बनाते। तुम बस फील करते हो और कुछ करते
  5183. 5:01:41हो।
  5184. 5:01:43लेकिन यहां कोई एक्शन ही नहीं है। ना
  5185. 5:01:45तुरंत ना बाद का।
  5186. 5:01:49क्योंकि तुम वाकई दर्द महसूस नहीं कर रहे।
  5187. 5:01:53दुख महसूस करने और समझने के लिए तुम्हें
  5188. 5:01:57उसे देखना
  5189. 5:01:59पड़ेगा। उसे भागना नहीं
  5190. 5:02:03होगा। मेरे पापा अब कभी वापस नहीं आएंगे।
  5191. 5:02:07इसलिए मुझे दुख हो रहा है। मैं क्या करूं
  5192. 5:02:09कि दुख के पार जा सकूं।
  5193. 5:02:16हम इसलिए दुख महसूस करते हैं क्योंकि हम
  5194. 5:02:18दुख की सच्चाई को नहीं
  5195. 5:02:21देखते। जो फैक्ट है और जो हमने उसके बारे
  5196. 5:02:25में सोचा है वह दोनों अलग होते हैं। और
  5197. 5:02:29अलग डायरेक्शंस में ले जाते हैं अगर मैं
  5198. 5:02:33पूछूं। क्या तुम सच में दुख के फैक्ट को
  5199. 5:02:36देख रहे हो या सिर्फ दुख के आईडिया को?
  5200. 5:02:41आप मेरे सवाल का जवाब नहीं दे रहे। सर मैं
  5201. 5:02:44क्या
  5202. 5:02:48करूं? तुम दुख से भागना चाहते हो या दुख
  5203. 5:02:52से आजाद होना चाहते हो।
  5204. 5:02:54अगर तुम सिर्फ भागना चाहते हो तो एक पिल,
  5205. 5:02:58एक
  5206. 5:02:58बिलीफ, एक एक्सप्लेनेशन या कोई
  5207. 5:03:01डिस्ट्रक्शन मदद कर सकता है।
  5208. 5:03:05लेकिन उसका रिजल्ट हमेशा होता है
  5209. 5:03:08डिपेंडेंसी, फियर वगैरह।
  5210. 5:03:12लेकिन अगर तुम वाकई दुख से फ्री होना
  5211. 5:03:14चाहते हो तो तुम्हें भागना बंद करना
  5212. 5:03:18होगा और उसे बिना जज किए, बिना चॉइस के
  5213. 5:03:21देखना होगा।
  5214. 5:03:27तुम्हें उसे ऑब्जर्व करना होगा। उसे समझना
  5215. 5:03:31होगा। उसके हर कोने को जानना होगा। तभी
  5216. 5:03:35तुम उससे डोगे नहीं। और सेल्फ पिटी का जहर
  5217. 5:03:40भी खत्म हो जाएगा।
  5218. 5:03:43जब दुख को समझ जाते हो तो उससे आजादी
  5219. 5:03:46मिलती है। दुख को समझने के लिए उसका
  5220. 5:03:49एक्चुअल एक्सपीरियंस होना चाहिए ना कि बस
  5221. 5:03:54शब्दों में सोची गई कोई
  5222. 5:03:57कहानी। क्या मैं एक सवाल पूछ सकता हूं? एक
  5223. 5:04:02दूसरे ने
  5224. 5:04:03कहा अपनी रोज की जिंदगी कैसे जीनी चाहिए?
  5225. 5:04:10जैसे तुम सिर्फ उस एक दिन के लिए जी रहे
  5226. 5:04:13हो। उस एक घंटे के
  5227. 5:04:16लिए
  5228. 5:04:19कैसे? अगर तुम्हारे पास सिर्फ एक घंटा
  5229. 5:04:22होता जीने के लिए तो तुम क्या
  5230. 5:04:26करते? वाकई मुझे नहीं पता। उसने चिंता में
  5231. 5:04:34कहा क्या तुम अपने जरूरी काम ठीक नहीं
  5232. 5:04:38करते अपने पेपर व्हील
  5233. 5:04:41वगैरह क्या तुम अपने परिवार और दोस्तों को
  5234. 5:04:44नहीं
  5235. 5:04:48बुलाते उनसे माफी नहीं मांगते जिसे तुमने
  5236. 5:04:51हर्ट किया हो और उन्हें माफ नहीं करते
  5237. 5:04:54जिन्होंने तुम्हें हर्ट किया हो क्या तुम
  5238. 5:04:57अपने माइंड के थॉट थॉट्स,
  5239. 5:05:01डिजायर्स और दुनिया से पूरी तरह छूट नहीं
  5240. 5:05:04जाते। और अगर यह एक घंटे के लिए हो सकता
  5241. 5:05:09तो फिर बाकी दिनों और सालों के लिए भी हो
  5242. 5:05:13सकता
  5243. 5:05:15है। क्या यह वाकई पॉसिबल है सर?
  5244. 5:05:20ट्राई करो। तुम खुद जान जाओगे।
  5245. 5:05:30एजुकेशन एंड द सिग्निफिकेंस ऑफ
  5246. 5:05:34लाइफ। एजुकेशन और लाइफ का
  5247. 5:05:40मीनिंग। जब कोई दुनिया घूमता है तो उसे यह
  5248. 5:05:44समझ में आता है कि इंसान का नेचर हर जगह
  5249. 5:05:48लगभग सेम ही होता है। चाहे इंडिया हो या
  5250. 5:05:52अमेरिका, यूरोप हो या ऑस्ट्रेलिया।
  5251. 5:05:56यह बात कॉलेजेस और यूनिवर्सिटीज में और भी
  5252. 5:05:59ज्यादा क्लियर होती
  5253. 5:06:01है। हम लोग एक ही तरह के इंसान बना रहे
  5254. 5:06:05हैं। जैसे किसी मशीन से निकल रहे
  5255. 5:06:08हो। जिसका मेन गोल होता है सिर्फ सिक्योर
  5256. 5:06:12फील करना। किसी बड़े आदमी बनने की कोशिश
  5257. 5:06:16करना या बिना ज्यादा सोचे समझे लाइफ का
  5258. 5:06:20मजा लेना।
  5259. 5:06:24नॉर्मल एजुकेशन इंडिपेंडेंट सोचना बहुत
  5260. 5:06:27मुश्किल बना देता
  5261. 5:06:28है। सबके जैसे रहना एवरेज बनाता
  5262. 5:06:32है। ग्रुप से अलग होना या अपने एनवायरमेंट
  5263. 5:06:36के अगेंस्ट जाना आसान नहीं होता। और जब तक
  5264. 5:06:40हम सक्सेस की पूजा करते हैं, यह और भी
  5265. 5:06:43रिस्की हो जाता
  5266. 5:06:46है। सक्सेस पाने का प्रेशर चाहे वह पैसा
  5267. 5:06:50हो या स्पिरिचुअल चीजें। या अंदर या बाहर
  5268. 5:06:54का सिक्योरिटी चाहिए हो या सिर्फ कंफर्ट
  5269. 5:06:57चाहिए। यह सब मिलकर इंसान के अंदर की
  5270. 5:07:00डिसटिसफेक्शन को दबा देते हैं।
  5271. 5:07:04स्पॉनटेनिटी को खत्म कर देते हैं और डर
  5272. 5:07:07पैदा करते हैं। और यह डर ही यह फियर ही
  5273. 5:07:11लाइफ को समझने वाली ट्रू इंटेलिजेंस को
  5274. 5:07:14ब्लॉक करता
  5275. 5:07:16है। जैसेजैसे उम्र बढ़ती है, माइंड और दिल
  5276. 5:07:21दोनों डल होने लगते हैं।
  5277. 5:07:27कंफर्ट ढूंढते-ढूंढते हम लाइफ में एक ऐसी
  5278. 5:07:29जगह सेटल हो जाते हैं जहां कम से कम टेंशन
  5279. 5:07:33हो। और फिर हम उस कंफर्ट ज़ोन से बाहर
  5280. 5:07:36निकलने से डरते हैं।
  5281. 5:07:40लाइफ का डर, स्ट्रगल का डर, नए
  5282. 5:07:43एक्सपीरियंस का डर हमारे अंदर की एडवेंचर
  5283. 5:07:46वाली फीलिंग को मार देता
  5284. 5:07:49है। हमारी पूरी अपब्रिंगिंग और एजुकेशन ने
  5285. 5:07:52हमें अपने पड़ोसी से अलग होने से डरा दिया
  5286. 5:07:55है।
  5287. 5:07:57सोसाइटी के सेट रोल के अगेंस्ट सोचने से
  5288. 5:08:00रोका है। अथॉरिटी और ट्रेडिशन का झूठा
  5289. 5:08:03रिस्पेक्ट सिखा दिया है।
  5290. 5:08:07लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ लोग ऐसे भी
  5291. 5:08:10होते हैं जो जेनुइनली इंटरेस्टेड होते
  5292. 5:08:13हैं। जो इंसानी प्रॉब्लम्स को बिना किसी
  5293. 5:08:17बायस के समझना चाहते हैं। ना राइट के ना
  5294. 5:08:20लेफ्ट के।
  5295. 5:08:23पर ज्यादातर लोगों में ना तो असली
  5296. 5:08:26डिसटिस्फेक्शन होता है ना ही कोई रिबेलियन
  5297. 5:08:30का जज्बा।
  5298. 5:08:32जब हम बिना समझे सिर्फ अपने एनवायरमेंट के
  5299. 5:08:35अकॉर्डिंग चलने लगते
  5300. 5:08:37हैं तो अगर हमारे अंदर थोड़ा बहुत रिवोल्ट
  5301. 5:08:40था भी वह धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और
  5302. 5:08:45लाइफ की रिस्पांसिबिलिटी उसे पूरी तरह मार
  5303. 5:08:49देती
  5304. 5:08:50है। रिवोल्ट दो तरह का होता है। एक होता
  5305. 5:08:54है वायलेंट
  5306. 5:08:56रिवोल्ट जो सिर्फ एक रिएक्शन होता है बिना
  5307. 5:08:59समझे सिस्टम के
  5308. 5:09:01अगेंस्ट और दूसरा होता है डीप साइकोलॉजिकल
  5309. 5:09:05रिवोल्ट जो इंटेलिजेंस से आता
  5310. 5:09:09है बहुत लोग पुराने रूल्स के अगेंस्ट जाते
  5311. 5:09:13हैं पर फिर नए रूल्स में ही फंस जाते
  5312. 5:09:16हैं और नए इल्लुजंस और हिडन सेल्फ
  5313. 5:09:20इंटेलिजेंस में उलझ जाते हैं।
  5314. 5:09:25अक्सर ऐसा होता है कि हम एक ग्रुप या
  5315. 5:09:27आइडियल से अलग होते हैं और किसी नए ग्रुप
  5316. 5:09:31या नए आइडियल से जुड़ जाते
  5317. 5:09:34हैं और फिर एक नया थॉट पैटर्न बन जाता है
  5318. 5:09:39जिसके अगेंस्ट हमें फिर रिवोल्ट करना
  5319. 5:09:42पड़ता
  5320. 5:09:43है यह रिएक्शन सिर्फ अपोजिशन लाता है और
  5321. 5:09:47हर रिफॉर्म को फिर एक और रिफॉर्म चाहिए
  5322. 5:09:51होता है।
  5323. 5:09:54लेकिन एक इंटेलिजेंट रिवोल्ट होता है जो
  5324. 5:09:56रिएक्शन नहीं होता जो सेल्फ नॉलेज से आता
  5325. 5:10:01है अपने थॉट्स और फीलिंग्स को समझने
  5326. 5:10:05से जब हम हर एक्सपीरियंस का सामना
  5327. 5:10:09डायरेक्टली करते हैं और उसे अवॉइड नहीं
  5328. 5:10:12करते तभी हमारी इंटेलिजेंस पूरी तरह जागी
  5329. 5:10:16रहती
  5330. 5:10:18है और फुली जागी हुई इंटेलिजेंस ही
  5331. 5:10:21इंट्यूशन होती है जो लाइफ में असली गाइड
  5332. 5:10:24होती है। अब सवाल यह है लाइफ का असली
  5333. 5:10:29मीनिंग क्या है? हम किसके लिए जी रहे हैं?
  5334. 5:10:34हम किस लिए जी रहे हैं? किस लिए स्ट्रगल
  5335. 5:10:37कर रहे
  5336. 5:10:38हैं? अगर हम सिर्फ इसलिए एजुकेटेड हो रहे
  5337. 5:10:42हैं कि एक अच्छी जॉब
  5338. 5:10:45मिले या किसी से ज्यादा एफिशिएंट हो जाए
  5339. 5:10:48या और लोगों पर कंट्रोल मिले। तो हमारी
  5340. 5:10:52लाइफ सिर्फ सरफेस पर रहेगी अंदर से
  5341. 5:10:56खाली। अगर एजुकेशन सिर्फ यह बना रही है कि
  5342. 5:11:00हम साइंटिस्ट बन जाए, स्कॉलर बन जाए,
  5343. 5:11:04बुक्स के एडिक्ट या नॉलेज के स्लेव बन
  5344. 5:11:07जाए, तो हम दुनिया के डिस्ट्रक्शन और
  5345. 5:11:11मिजरी में कंट्रीब्यूट कर रहे
  5346. 5:11:16हैं। चाहे लाइफ का मीनिंग कितना भी डीप और
  5347. 5:11:20बड़ा हो।
  5348. 5:11:21अगर हम उसे कभी डिस्कवर ही नहीं करते तो
  5349. 5:11:26हमारी एजुकेशन का क्या
  5350. 5:11:28फायदा? चाहे हम कितने भी एजुकेटेड हो जाए।
  5351. 5:11:32अगर हमारे थॉट्स और फीलिंग्स का डीप
  5352. 5:11:35इंटीग्रेशन नहीं होता तो हमारी लाइफ
  5353. 5:11:39इनकंप्लीट कंट्राडिक्टरी और डर से भरी
  5354. 5:11:43रहेगी। और जब तक एजुकेशन हमें लाइफ को एक
  5355. 5:11:47इंटीग्रेटेड नजरिया से देखना नहीं सिखाती
  5356. 5:11:50तब तक उसका कोई खास मीनिंग नहीं
  5357. 5:11:56होता। आज की सिविलाइजेशन में हमने लाइफ को
  5358. 5:11:59इतने पार्ट्स में डिवाइड कर दिया है कि
  5359. 5:12:02एजुकेशन का मतलब सिर्फ एक पर्टिकुलर स्किल
  5360. 5:12:06या प्रोफेशन तक ही रह गया
  5361. 5:12:09है। एजुकेशन का काम था इंसान की पूरी
  5362. 5:12:12इंटेलिजेंस
  5363. 5:12:14जगाना। पर अब यह सिर्फ एक सेट पैटर्न फॉलो
  5364. 5:12:18करना सिखाता है।
  5365. 5:12:21और इसे इंसान खुद को एक कंप्लीट प्रोसेस
  5366. 5:12:24के रूप में समझने से चूक जाता
  5367. 5:12:28है। जब हम लाइफ के प्रॉब्लम्स को अलग-अलग
  5368. 5:12:31कैटेगरीज में डिवाइड करके सॉल्व करने की
  5369. 5:12:34कोशिश करते हैं तो यह प्रूव करता है कि
  5370. 5:12:37हमने लाइफ को ट्रूली समझा ही
  5371. 5:12:41नहीं। इंसान अलग-अलग पार्ट से बना होता
  5372. 5:12:44है। पर अगर हम बस इन डिफरेंसेस पर ही फोकस
  5373. 5:12:48करें और एक फिक्स टाइप बनाने का प्रेशर
  5374. 5:12:52डालें तो लाइफ में बहुत कंफ्यूजन और
  5375. 5:12:56कंट्राडिक्शन आ जाते
  5376. 5:12:59हैं। एजुकेशन का काम यह होना चाहिए कि यह
  5377. 5:13:03अलग-अलग पार्ट्स को जोड़ के एक बनाएं
  5378. 5:13:06क्योंकि बिना इंटीग्रेशन के लाइफ सिर्फ
  5379. 5:13:10कॉन्फ्लिक्ट्स और दुखों का सिलसिला बन
  5380. 5:13:13जाती
  5381. 5:13:14है। अगर हम लॉयर्स बन भी जाते हैं पर बस
  5382. 5:13:18केसेस को बढ़ाते रहते हैं तो उसका क्या
  5383. 5:13:22फायदा? अगर नॉलेज होते हुए भी हम
  5384. 5:13:25कंफ्यूज्ड ही रहते हैं तो वह किस काम
  5385. 5:13:29की? अगर हमारे पास टेक्निकल और
  5386. 5:13:32इंडस्ट्रियल पावर है पर हम उसे एक दूसरे
  5387. 5:13:37को खत्म करने में लगा रहे हैं तो उसका
  5388. 5:13:39क्या मतलब?
  5389. 5:13:42अगर हमारी लाइफ सिर्फ वायलेंस और दर्द
  5390. 5:13:45लाती है तो जीने का मतलब क्या
  5391. 5:13:48है? चाहे हमारे पास पैसे हो या पैसे कमाने
  5392. 5:13:52की
  5393. 5:13:53एबिलिटी। चाहे हमारे पास प्लेजर्स हो या
  5394. 5:13:57रिलीजंस का सपोर्ट। फिर भी हम कास्टेंट
  5395. 5:14:01कॉन्फ्लिक्ट में ही
  5396. 5:14:03है। हमें पर्सनल और इंडिविजुअल में फर्क
  5397. 5:14:06समझना होगा।
  5398. 5:14:09पर्सनल चीजें एक्सीडेंट होती हैं। और
  5399. 5:14:12एक्सीडेंटल से मेरा मतलब है कि हम कहां
  5400. 5:14:16पैदा हुए, किस एनवायरमेंट में बड़े हुए
  5401. 5:14:19जिसमें नेशनलिज्म,
  5402. 5:14:22सुपरस्टिशंस, क्लास का फर्क और बायसेस
  5403. 5:14:25होते
  5404. 5:14:27हैं। पर्सनली एक्सीडेंटल चीजें टेंपरेरी
  5405. 5:14:31होती हैं। चाहे वह टेंपरेरी पूरी लाइफ
  5406. 5:14:34क्यों ना चले।
  5407. 5:14:36और क्योंकि आज की एजुकेशन सिस्टम पर्सनल
  5408. 5:14:40एक्सीडेंटल और मोमेंटरी चीजों पर बेस्ड है
  5409. 5:14:44तो यह सोच को बिगाड़ देती है और सेल्फ
  5410. 5:14:48डिफेंसिव डर सिखाती
  5411. 5:14:51है। हम सबको एजुकेशन और एनवायरमेंट ने यह
  5412. 5:14:54सिखाया है कि सिर्फ अपने बेनिफिट और
  5413. 5:14:58सिक्योरिटी के लिए जियो और सिर्फ अपने लिए
  5414. 5:15:01लड़ाई करो, फाइट करो।
  5415. 5:15:04चाहे हम इस बात को अच्छे शब्दों में छुपा
  5416. 5:15:07भी
  5417. 5:15:08लें। पर सच यह है कि हमें एक ऐसे सिस्टम
  5418. 5:15:12के लिए ट्रेन किया गया है जो एक्सप्लइटेशन
  5419. 5:15:15और डर पर बेस्ड
  5420. 5:15:18है। ऐसी ट्रेनिंग से कंफ्यूजन और दर्द ही
  5421. 5:15:22मिलता है क्योंकि यह हर इंसान के अंदर
  5422. 5:15:25साइकोलॉजिकल वाल्स बना देती है। जो उसे
  5423. 5:15:29दूसरों से अलग और दूर रखता है।
  5424. 5:15:34एजुकेशन सिर्फ माइंड को ट्रेन करना नहीं
  5425. 5:15:37होता।
  5426. 5:15:38ट्रेनिंग सिर्फ एफिशिएंसी लाती है।
  5427. 5:15:40कंप्लीटनेस
  5428. 5:15:43नहीं। एक माइंड जो सिर्फ ट्रेन हुआ है, वह
  5429. 5:15:46पास्ट का एक्सटेंशन होता है। और ऐसा माइंड
  5430. 5:15:50कभी कुछ नया नहीं जान
  5431. 5:15:52सकता। इसलिए अगर हमें सही एजुकेशन समझना
  5432. 5:15:56है तो हमें लाइफ का फुल मीनिंग एक्सप्लोर
  5433. 5:16:00करना पड़ेगा।
  5434. 5:16:02ज्यादातर लोगों के लिए लाइफ का मीनिंग
  5435. 5:16:05इंपॉर्टेंट ही नहीं होता और हमारी एजुकेशन
  5436. 5:16:09सिर्फ सेकेंडरी वैल्यूस पर फोकस करती है
  5437. 5:16:13जो हमें बस किसी एक फील्ड का एक्सपर्ट
  5438. 5:16:16बनाती है। चाहे नॉलेज और एफिशिएंसी जरूरी
  5439. 5:16:22हो। पर अगर हम सिर्फ उन पर फोकस करें तो
  5440. 5:16:26उससे
  5441. 5:16:27कॉन्फ्लिक्ट और कंफ्यूजन ही बढ़ता है।
  5442. 5:16:32एक एफिशिएंसी होती है जो लव से आती है
  5443. 5:16:36प्यार से जो एंबिशन वाली एफिशिएंसी से
  5444. 5:16:40काफी ज्यादा पावरफुल होती है और बिना लव
  5445. 5:16:44के जो लाइफ को एक जोड़ने वाला
  5446. 5:16:47अंडरस्टैंडिंग देता है एफिशिएंसी सिर्फ
  5447. 5:16:51रूथलेसनेस पैदा करती
  5448. 5:16:53है क्या यह सब दुनिया में हो नहीं
  5449. 5:16:57रहा आज की एजुकेशन इंडस्ट्रियलाइजेशन और
  5450. 5:17:00वॉर के लिए बनी है। इसका मेन गोल बस
  5451. 5:17:04एफिशिएंसी बनाना है। और हम सब इस रूथलेस
  5452. 5:17:09कंपटीशन और डिस्ट्रक्शन की मशीन में फंस
  5453. 5:17:13गए
  5454. 5:17:14हैं। अगर एजुकेशन वॉर तक ले जाती
  5455. 5:17:18है। अगर यह सिखाती है कि या तो मारो या
  5456. 5:17:22मार दिए जाओ तो क्या यह पूरी तरह फेल नहीं
  5457. 5:17:26होगी?
  5458. 5:17:28अगर हमें सही एजुकेशन देनी है तो हमें
  5459. 5:17:32पहले लाइफ का फुल मीनिंग समझना
  5460. 5:17:35होगा और उसके लिए हमें सोचना आना चाहिए
  5461. 5:17:40डायरेक्टली और ट्रूली।
  5462. 5:17:43एक कंसिस्टेंट थिंकर असल में थॉटलेस होता
  5463. 5:17:46है क्योंकि वह बस एक पैटर्न फॉलो करता है।
  5464. 5:17:51वह बस फ्रेजेस रिपीट करता है और एक ही
  5465. 5:17:53लाइन में सोचता है।
  5466. 5:17:57लाइफ को अब्स्ट्रैक्ट या थ्यरी में समझना
  5467. 5:17:59पॉसिबल नहीं है। लाइफ को समझने का मतलब है
  5468. 5:18:03खुद को समझना।
  5469. 5:18:05और वही एजुकेशन का स्टार्टिंग और एंडिंग
  5470. 5:18:08पॉइंट
  5471. 5:18:09है। एजुकेशन सिर्फ नॉलेज इकट्ठा करना नहीं
  5472. 5:18:13है या फैक्ट्स को लिंक करना नहीं है। यह
  5473. 5:18:17लाइफ के पूरे मीनिंग को देखना है। पर पूरे
  5474. 5:18:21को कभी पार्ट के थ्रू नहीं समझा जा सकता।
  5475. 5:18:25और यही काम गवर्नमेंट्स, ऑर्गेनाइज
  5476. 5:18:29रिलीजंस और ऑथरिटेरियन पार्टीज करने की
  5477. 5:18:33कोशिश कर रही
  5478. 5:18:36हैं। एजुकेशन का काम यह है कि वह ऐसे
  5479. 5:18:39इंसान बनाए जो अंदर से एक हो। और इसलिए
  5480. 5:18:43इंटेलिजेंट हो।
  5481. 5:18:46हम डिग्रीज ले सकते हैं। मशीनंस की तरह
  5482. 5:18:49एफिशिएंट बन सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह
  5483. 5:18:53नहीं कि हम इंटेलिजेंट
  5484. 5:18:55हैं। इंटेलिजेंस सिर्फ इंफॉर्मेशन नहीं
  5485. 5:18:58होती। यह बुक्स से नहीं मिलती। ना ही यह
  5486. 5:19:02स्मार्ट, सेल्फ डिफेंस या एग्रेसिव बोलने
  5487. 5:19:05से आती
  5488. 5:19:06है। जो इंसान ने पढ़ाई नहीं की हो, वह भी
  5489. 5:19:10किसी पढ़े लिखे से ज्यादा इंटेलिजेंट हो
  5490. 5:19:13सकता है।
  5491. 5:19:15हमने एग्जाम्स और डिग्रीज को इंटेलिजेंस
  5492. 5:19:18का स्केल बना दिया
  5493. 5:19:20है। और ऐसे क्लेवर माइंड्स डेवलप किए हैं
  5494. 5:19:24जो रियल ह्यूमन इश्यूज से बच जाते
  5495. 5:19:28हैं। इंटेलिजेंस का मतलब है असली चीज को
  5496. 5:19:31देख पाना। जो वाकई में है उसे
  5497. 5:19:35समझना। और इस एबिलिटी को जगाना। अपने अंदर
  5498. 5:19:39भी और दूसरों में भी यही एजुकेशन है।
  5499. 5:19:44एजुकेशन हमें ऐसे वैल्यू्यूज ढूंढने में
  5500. 5:19:47हेल्प करें जो हमेशा रहेंगे।
  5501. 5:19:51ताकि हम सिर्फ स्लोगंस रिपीट ना करें या
  5502. 5:19:54फार्मूलास को पकड़ के ना बैठे
  5503. 5:19:57रह। यह हमें अपने नेशनल और सोशल वॉल्स को
  5504. 5:20:01तोड़ने में हेल्प करें। ना कि उन्हें और
  5505. 5:20:04स्ट्रांग बनाए क्योंकि यही वॉल्स इंसान को
  5506. 5:20:08इंसान से अलग करती
  5507. 5:20:10हैं। पर अफसोस
  5508. 5:20:13आज की एजुकेशन सिस्टम हमें ओबिडिएंट मशीन
  5509. 5:20:17जैसे और अंदर से बिल्कुल बेजान बना रही
  5510. 5:20:21है। यह हमारा दिमाग तो चालू करती है लेकिन
  5511. 5:20:25दिल और क्रिएटिविटी को मार देती
  5512. 5:20:29है। जब तक लाइफ को समझने वाली एक डीप
  5513. 5:20:32अंडरस्टैंडिंग नहीं होती तब तक हमारे
  5514. 5:20:36पर्सनल और ग्रुप के प्रॉब्लम्स और बड़े
  5515. 5:20:39होते जाएंगे।
  5516. 5:20:42एजुकेशन का मकसद सिर्फ स्कॉलर्स,
  5517. 5:20:46टेक्नशियंस या जॉब ढूंढने वाले लोग बनाना
  5518. 5:20:50नहीं है। बल्कि ऐसे इंसान बनाना है जो डर
  5519. 5:20:54से फ्री हो।
  5520. 5:20:56क्योंकि सिर्फ ऐसे ही इंसान के बीच रियल
  5521. 5:21:00पीस पॉसिबल
  5522. 5:21:03है। जब हम खुद को समझने लगते हैं तभी फियर
  5523. 5:21:07खत्म होता
  5524. 5:21:09है। अगर किसी इंसान को हर मोमेंट लाइफ से
  5525. 5:21:14डील करना है। उसके कॉम्प्लेक्स
  5526. 5:21:17प्रॉब्लम्स, दुख और सडन डिमांड्स का सामना
  5527. 5:21:20करना है तो उसका माइंड सॉफ्ट होना
  5528. 5:21:24चाहिए और थरीज या फिक्स सोच से फ्री होना
  5529. 5:21:30चाहिए। एजुकेशन का काम यह नहीं होना चाहिए
  5530. 5:21:34कि इंसान सोसाइटी के अकॉर्डिंग चले या
  5531. 5:21:37चुपचाप एडजस्ट हो जाए।
  5532. 5:21:40बल्कि वह उसे हेल्प करें कि वह असली
  5533. 5:21:43वैल्यूस खुद डिस्कवर करें।
  5534. 5:21:47जो बिना बायस के एक्सप्लोरेशन और सेल्फ
  5535. 5:21:51अवेयरनेस से मिलती
  5536. 5:21:53है। जब खुद को समझना नहीं होता तब सेल्फ
  5537. 5:21:57एक्सप्रेशन सिर्फ ईगो बन जाता
  5538. 5:22:00है। जिसमें सिर्फ अग्रेशन और एंबिशन वाला
  5539. 5:22:04कॉन्फ्लिक्ट होता
  5540. 5:22:06है। एजुकेशन को यह एबिलिटी जगानी चाहिए कि
  5541. 5:22:10इंसान सेल्फ अवेयर हो ना कि सिर्फ अपनी
  5542. 5:22:14फीलिंग्स दिखाकर खुश हो
  5543. 5:22:17जाए। पढ़ाई का क्या फायदा? अगर जीतेजीते
  5544. 5:22:21हम खुद को ही बर्बाद कर रहे
  5545. 5:22:24हैं। जब एक के बाद एक डेंजरस वॉर्स हो रहे
  5546. 5:22:27हैं तो यह साफ है कि हम अपने बच्चों को
  5547. 5:22:31गलत तरीके से बड़ा कर रहे
  5548. 5:22:33हैं। मुझे लगता है हम सबको यह बात पता है।
  5549. 5:22:38पर हम समझ नहीं पा रहे कि इसे कैसे हैंडल
  5550. 5:22:43करें। चाहे सिस्टम एजुकेशन का हो या
  5551. 5:22:47पॉलिटिक्स का। वह मैजिक से चेंज नहीं
  5552. 5:22:51होता। वह तभी बदलेगा जब हम खुद डीपली
  5553. 5:22:55बदलेंगे। सिस्टम से पहले इंसान इंपॉर्टेंट
  5554. 5:22:59है। और जब तक इंसान खुद को पूरी तरह नहीं
  5555. 5:23:03समझता तब तक कोई भी सिस्टम चाहे लेफ्ट का
  5556. 5:23:08हो या राइट का दुनिया में
  5557. 5:23:11पीस और ऑर्डर नहीं ला सकता।
  5558. 5:23:25लाइफ
  5559. 5:23:29अहेड मुझे लगता है कि एक बिल्कुल अलग तरह
  5560. 5:23:32की मोरालिटी
  5561. 5:23:34बिहेवियर और ऐसी एक्शन जो पूरी लाइफ
  5562. 5:23:37प्रोसेस को समझने से आए। अब हमारे दुनिया
  5563. 5:23:41के इतने सारे प्रॉब्लम्स के बीच बहुत
  5564. 5:23:44जरूरी हो गई है।
  5565. 5:23:47हम इन प्रॉब्लम्स को पॉलिटिकल और
  5566. 5:23:50ऑर्गेनाइजेशनल मेथड से सॉल्व करने की
  5567. 5:23:53कोशिश करते
  5568. 5:23:54हैं। इकोनॉमिक चेंजेस और अलग-अलग
  5569. 5:23:58रिफॉर्म्स के
  5570. 5:24:00थ्रू। पर यह सब इंसानी लाइफ के
  5571. 5:24:03कॉम्प्लिकेटेड प्रॉब्लम्स का परमानेंट
  5572. 5:24:05स्यूशन नहीं दे सकते। चाहे यह थोड़ा
  5573. 5:24:09टेंपरेरी रिलीफ दे भी दे।
  5574. 5:24:12हर रिफॉर्म चाहे कितना भी बड़ा और
  5575. 5:24:15स्ट्रांग लगे आखिर में सिर्फ और कंफ्यूजन
  5576. 5:24:19लाता है और नए रिफॉर्म्स की डिमांड पैदा
  5577. 5:24:22करता है। बिना इंसान के पूरे बीइंग को
  5578. 5:24:26समझे। रिफॉर्म्स सिर्फ और रिफॉर्म्स की
  5579. 5:24:31नीड बन जाते
  5580. 5:24:33हैं। रिफॉर्म का कोई एंड नहीं होता और इस
  5581. 5:24:37तरीके से कोई बेसिक स्यूशन भी नहीं मिलता।
  5582. 5:24:41पॉलिटिकल, इकोनॉमिक या सोशल रिवोलशंस भी
  5583. 5:24:45स्यूशन नहीं है क्योंकि इन्होंने सिर्फ नए
  5584. 5:24:49टनीस बनाए
  5585. 5:24:52हैं। यह पावर को एक ग्रुप से लेकर दूसरे
  5586. 5:24:55ग्रुप को दे दिया है। ऐसे रिवोलशंस कभी भी
  5587. 5:24:59कंफ्यूजन और कॉन्फ्लिक्ट का स्यूशन नहीं
  5588. 5:25:02बन पाए
  5589. 5:25:04हैं। पर एक रिवोल्यूशन होती है जो बिल्कुल
  5590. 5:25:07अलग होती
  5591. 5:25:08है। और अगर हमें अपने लाइफ के नॉनस्टॉप
  5592. 5:25:12टेंशनंस,
  5593. 5:25:14कॉन्फ्लिक्ट्स और फ्रस्ट्रेशन से बाहर
  5594. 5:25:17निकलना है तो यह रिवोल्यूशन होना जरूरी
  5595. 5:25:21है। यह रिवोल्यूशन थरी और आइडियाज से नहीं
  5596. 5:25:25बल्कि माइंड के अंदर एक स्ट्रांग बदलाव से
  5597. 5:25:28स्टार्ट होती
  5598. 5:25:29है। ऐसा बदलाव सिर्फ सही एजुकेशन से और
  5599. 5:25:34पूरे इंसान के डेवलपमेंट से आता
  5600. 5:25:37है। यह रिवोल्यूशन पूरे माइंड में होनी
  5601. 5:25:41चाहिए। सिर्फ थॉट्स में
  5602. 5:25:43नहीं। थॉट तो सिर्फ एक रिजल्ट होता है।
  5603. 5:25:46सोर्स नहीं। हमें रिजल्ट को थोड़ा-थोड़ा
  5604. 5:25:50बदलने के बजाय सोर्स को पूरा चेंज करना
  5605. 5:25:54होगा। अभी हम सिर्फ रिजल्ट से खेल रहे
  5606. 5:25:58हैं। सिर्फ सिम्टम्स से। हम कोई रियल चेंज
  5607. 5:26:02नहीं ला
  5608. 5:26:03रहे। ना ही पुराने तरीके की सोच को उखाड़
  5609. 5:26:07रहे हैं। ना ही माइंड को ट्रेडिशंस और
  5610. 5:26:10हैबिट से फ्री कर रहे
  5611. 5:26:12हैं। और यह रियल चेंज तभी आएगा जब सही
  5612. 5:26:16एजुकेशन
  5613. 5:26:18मिलेगा। माइंड का काम होता है सवाल करना
  5614. 5:26:21और
  5615. 5:26:22सीखना। सीखने का मतलब सिर्फ याद रखना या
  5616. 5:26:26नॉलेज इकट्ठा करना नहीं है। बल्कि साफ-साफ
  5617. 5:26:31और सेनली सोचने की एबिलिटी डेवलप करना है।
  5618. 5:26:35बिना किसी इल्लुजन के।
  5619. 5:26:38और फैक्ट से शुरू करना है ना कि बिलीव्स
  5620. 5:26:42या आइडियल
  5621. 5:26:44से। जहां सोच पहले से बनी हुई रिजल्ट हो
  5622. 5:26:48वहां लर्निंग पॉसिबल नहीं होती। सिर्फ
  5623. 5:26:52इंफॉर्मेशन ले लेना या नॉलेज कलेक्ट कर
  5624. 5:26:55लेना। यह लर्निंग नहीं
  5625. 5:26:58होती। लर्निंग का मतलब होता है समझने का
  5626. 5:27:02प्यार और किसी काम को उसके लिए करने का
  5627. 5:27:05प्यार। लर्निंग तभी होती है जब कोई
  5628. 5:27:09जबरदस्ती ना
  5629. 5:27:10हो। और जबरदस्ती कई फॉर्म्स में होती है।
  5630. 5:27:15है ना? जैसे इनफ्लुएंस से, अटैचमेंट से,
  5631. 5:27:19धमकी से या किसी हिडन रिवॉर्ड या स्वीट
  5632. 5:27:24एनकरेजमेंट से।
  5633. 5:27:27ज्यादा लोग सोचते हैं कि कंपैरिजन से
  5634. 5:27:29लर्निंग होती है पर असल में उल्टा होता
  5635. 5:27:33है। कंपैरिजन सिर्फ फ्रस्ट्रेशन लाता है
  5636. 5:27:37और सिर्फ जेलसी बढ़ाता है जिसको हम
  5637. 5:27:40कंपटीशन बोलते
  5638. 5:27:42हैं। बाकी सब पर्सुएशन जैसे कंपैरिजन भी
  5639. 5:27:46लर्निंग को रोकती है और डर पैदा करती है।
  5640. 5:27:51एंबिशन भी डर पैदा करता
  5641. 5:27:54है। एंबिशन चाहे पर्सनल हो या ग्रुप के
  5642. 5:27:58नाम पर हो हमेशा एंटीसोशल होता
  5643. 5:28:02है। रिलेशनशिप में जो अच्छे एंबिशन होते
  5644. 5:28:06हैं वह भी अंदर से डिस्ट्रक्टिव ही होते
  5645. 5:28:09हैं। एक अच्छे माइंड का डेवलप होना जरूरी
  5646. 5:28:13है। ऐसा माइंड जो लाइफ के हर इशू से पूरी
  5647. 5:28:17तरह डील कर सके।
  5648. 5:28:19और उनसे भाग के खुद से
  5649. 5:28:22कंट्राडिक्टरी,
  5650. 5:28:23फ्रस्ट्रेटेड, बिटर या सिकल ना बन
  5651. 5:28:28जाए। और यह भी जरूरी है कि माइंड को अपने
  5652. 5:28:32ही कंडीशनिंग, मोटिव्स और गोल्स का पता
  5653. 5:28:35हो।
  5654. 5:28:37जब एक अच्छे माइंड का डेवलपमेंट
  5655. 5:28:39इंपॉर्टेंट है तो कैसे पढ़ाया जाता है यह
  5656. 5:28:44भी बहुत इंपॉर्टेंट हो जाता
  5657. 5:28:46है। माइंड का फुल डेवलपमेंट होना चाहिए।
  5658. 5:28:49सिर्फ नॉलेज देना ही काफी नहीं
  5659. 5:28:52है। पढ़ाते टाइम टीचर को डिस्कशन ओपन रखना
  5660. 5:28:56चाहिए। और स्टूडेंट्स को इनकरेज करना
  5661. 5:28:59चाहिए कि वह खुद से सोचे और सवाल
  5662. 5:29:03करें। मैं सब जानता हूं। यह वाली अथॉरिटी
  5663. 5:29:07का लर्निंग में कोई काम नहीं होता।
  5664. 5:29:11टीचर और स्टूडेंट दोनों एक स्पेशल
  5665. 5:29:13रिलेशनशिप के थ्रू एक दूसरे से सीख रहे
  5666. 5:29:16होते हैं। पर इसका मतलब यह नहीं कि टीचर
  5667. 5:29:20सोचने की क्लेरिटी को इग्नोर करें।
  5668. 5:29:25हमारी सोच में, हमारी थिंकिंग में ऑर्डर
  5669. 5:29:28सिर्फ तब आता है जब फ्रीडम होती है। और जब
  5670. 5:29:32टीचर यह समझता है कि इंटेलिजेंस को ग्रो
  5671. 5:29:35करने के लिए फ्रीडम जरूरी
  5672. 5:29:39है। इसका मतलब यह नहीं कि जो मन में आए वह
  5673. 5:29:43करो या बस उल्टा सोचो।
  5674. 5:29:47यह वाली फ्रीडम मतलब स्टूडेंट को यह समझने
  5675. 5:29:50में हेल्प करना कि उनके अपने अजेस और
  5676. 5:29:54मोटिव्स क्या
  5677. 5:29:56हैं
  5678. 5:29:58जो उनके रोज के थॉट्स और एक्शन से सामने
  5679. 5:30:02आते
  5680. 5:30:05हैं। एक डिसिप्लिन माइंड कभी फ्री माइंड
  5681. 5:30:09नहीं होता और ना ही वह माइंड जो अपनी
  5682. 5:30:12डिजायर को दबा चुका हो। कभी फ्री हो सकता
  5683. 5:30:15है।
  5684. 5:30:18सिर्फ डिजायर के पूरे प्रोसेस को समझने से
  5685. 5:30:21ही माइंड फ्री हो सकता है।
  5686. 5:30:24डिसिप्लिन हमेशा माइंड को एक फिक्स थॉट या
  5687. 5:30:29बिलीफ के सिस्टम के अंदर ही चलने देती है।
  5688. 5:30:32है
  5689. 5:30:34ना? और ऐसा माइंड कभी इंटेलिजेंट नहीं हो
  5690. 5:30:38सकता।
  5691. 5:30:40डिसिप्लिन सिर्फ अथॉरिटी के सामने झुकना
  5692. 5:30:43सिखाता है। यह माइंड को सिर्फ सोसाइटी के
  5693. 5:30:47सिस्टम में काम करने लायक बनाता है।
  5694. 5:30:51लेकिन उस इंटेलिजेंस को नहीं जगाता जो
  5695. 5:30:53अपने आप में एक कैपेसिटी होती
  5696. 5:30:57है। जो माइंड सिर्फ मेमोरी के थ्रू
  5697. 5:31:00कैपेसिटी डेवलप करता है। वह मॉडर्न
  5698. 5:31:03कंप्यूटर की तरह होता है। जो बहुत
  5699. 5:31:06एक्यूरेट और फास्ट काम करता है। पर आखिर
  5700. 5:31:10में सिर्फ एक मशीन ही होता
  5701. 5:31:13है। अथॉरिटी माइंड को किसी स्पेसिफिक
  5702. 5:31:16डायरेक्शन में सोचने के लिए फोर्स कर सकती
  5703. 5:31:19है। पर जब सोच किसी फिक्स्ड लाइन या पहले
  5704. 5:31:24से डिसाइडेड आईडिया पर बेस हो तो वह सोचना
  5705. 5:31:27नहीं होता। वह सिर्फ एक मशीन की तरह काम
  5706. 5:31:31करना होता है जो बिना सोचे
  5707. 5:31:35डिसटिसफेक्शन, फ्रस्ट्रेशन और दुख पैदा
  5708. 5:31:39करता
  5709. 5:31:40है। हम हर इंसान का टोटल डेवलपमेंट चाहते
  5710. 5:31:44हैं उसे यह हेल्प करना चाहते हैं कि वह
  5711. 5:31:48अपनी हाईएस्ट और डीपेस्ट कैपेसिटी तक
  5712. 5:31:51पहुंच सके।
  5713. 5:31:53ना कि कोई ऐसी कैपेसिटी जिसे टीचर ने एक
  5714. 5:31:56कासेप्ट या आइडियल बना रखा
  5715. 5:31:59हो। कंपैरिजन का कोई भी मूड इंडिविजुअल के
  5716. 5:32:03फुल ग्रोथ को रोक सकता
  5717. 5:32:06है। चाहे वह एक साइंटिस्ट बनने वाला हो या
  5718. 5:32:09एक
  5719. 5:32:11गार्डनर। गार्डनर की फुल कैपेसिटी और
  5720. 5:32:15साइंटिस्ट की फुल कैपेसिटी बराबर होती है
  5721. 5:32:18जब तक कंपैरिजन नहीं होता।
  5722. 5:32:22पर जब कंपैरिजन आता है तो फिर छोटी बड़ी
  5723. 5:32:26सोच, जेलसी और कॉन्फ्लिक्ट शुरू हो जाता
  5724. 5:32:30है। जैसे सोरो को कंपेयर नहीं किया जा
  5725. 5:32:33सकता वैसे ही लव को भी नहीं। सोरो बस सोरो
  5726. 5:32:39होता है। लव बस लव होता है। चाहे वह किसी
  5727. 5:32:43अमीर में हो या गरीब में।
  5728. 5:32:47जब हर इंडिविजुअल अपनी पूरी कैपेसिटी तक
  5729. 5:32:50ग्रो करता है तो एक इक्वल सोसाइटी बनती
  5730. 5:32:55है। आज जो सोशल स्ट्रगल चल रहा है
  5731. 5:32:58इक्वलिटी लाने के लिए चाहे वह इकोनॉमिक
  5732. 5:33:01लेवल पर हो या स्पिरिचुअल उसका कोई रियल
  5733. 5:33:04मतलब नहीं होता।
  5734. 5:33:08सोशल रिफॉर्म्स जो इक्वलिटीस्टब्लिश करना
  5735. 5:33:12चाहते हैं, वह नए तरह की एंटी सोशल
  5736. 5:33:15प्रॉब्लम्स क्रिएट कर देते हैं। पर जब सही
  5737. 5:33:18एजुकेशन मिलती है, तो फिर किसी रिफॉर्म की
  5738. 5:33:22जरूरत ही नहीं
  5739. 5:33:23पड़ती। क्योंकि एनवी और कैपेसिटी कंपैरिजन
  5740. 5:33:28खत्म हो जाता है।
  5741. 5:33:31यहां हमें फंक्शन और स्टेटस के बीच फर्क
  5742. 5:33:34समझना होगा।
  5743. 5:33:36स्टेटस जिसमें इमोशन और पावर का प्राइड
  5744. 5:33:39होता है। सिर्फ तब बनता है जब फंक्शनंस को
  5745. 5:33:44हाई या लो बनाकर कंपेयर किया जाता
  5746. 5:33:48है। जब हर इंसान अपनी पूरी कैपेसिटी में
  5747. 5:33:51खेलता है। तब फंक्शन का कोई कंपैरिजन नहीं
  5748. 5:33:56होता। सिर्फ एक एक्सप्रेशन होता है जैसे
  5749. 5:34:00कोई टीचर, प्राइम मिनिस्टर या
  5750. 5:34:03गार्डनर और तब स्टेटस अपना जेलसी वाला
  5751. 5:34:07पोइजन खो देता
  5752. 5:34:09है। आज फंक्शनल या टेक्निकल कैपेसिटी को
  5753. 5:34:13डिग्री के नाम से पहचाना जाता है। पर अगर
  5754. 5:34:17हम सच में एक इंसान का टोटल डेवलपमेंट
  5755. 5:34:19चाहते हैं तो हमारी सोच टोटली अलग होनी
  5756. 5:34:23चाहिए।
  5757. 5:34:25जिस इंसान के पास कैपेसिटी होती है, वह
  5758. 5:34:28डिग्री ले भी सकता है या नहीं भी, जैसे
  5759. 5:34:32उसकी
  5760. 5:34:33मर्जी। पर वह अपने अंदर की असली एबिलिटी
  5761. 5:34:36को जानता होगा जो डिग्री से बंधी नहीं
  5762. 5:34:39होती।
  5763. 5:34:41और उस एबिलिटी का एक्सप्रेशन वह सेल्फ
  5764. 5:34:44सेंटर्ड कॉन्फिडेंस नहीं बनाता जो सिर्फ
  5765. 5:34:47टेक्निकल कैपेसिटी से आता
  5766. 5:34:50है। ऐसा कॉन्फिडेंस हमेशा कंपैरिजन पर
  5767. 5:34:54बेस्ड होता है। इसलिए एंटीसोशल होता
  5768. 5:34:59है। कंपैरिजन कभी-कभी यूज़फुल हो सकता है
  5769. 5:35:03प्रैक्टिकल रीज़ंस के लिए।
  5770. 5:35:05लेकिन टीचर का काम नहीं है कि वह अपने
  5771. 5:35:08स्टूडेंट्स की कैपेसिटीज को कंपेयर करें
  5772. 5:35:11और किसी को ज्यादा या कम वैल्यू दें।
  5773. 5:35:15क्योंकि हम इंडिविजुअल का टोटल डेवलपमेंट
  5774. 5:35:18चाहते हैं। इसलिए स्टार्टिंग में स्टूडेंट
  5775. 5:35:22को अपने सब्जेक्ट्स खुद चूज करने नहीं दिए
  5776. 5:35:25[संगीत]
  5777. 5:35:27जाते क्योंकि उसका चॉइस मूड बायस या आसानी
  5778. 5:35:32के बेसिस पर हो सकता है या सिर्फ किसी
  5779. 5:35:34इमीडिएट नीड के हिसाब से।
  5780. 5:35:38पर अगर उसे हेल्प मिले कि वह खुद अपनी
  5781. 5:35:40असली एबिलिटी डिस्कवर करे तो वह नेचुरली
  5782. 5:35:44ऐसे सब्जेक्ट्स चूस करेगा जिसमें वह अपनी
  5783. 5:35:47कैपेसिटी को पूरी तरह एक्सप्रेस कर
  5784. 5:35:50सके। अगर स्टूडेंट को स्टार्टिंग से ही
  5785. 5:35:54लाइफ को एक होल के रूप में देखना सिखाया
  5786. 5:35:56जाए जिसमें
  5787. 5:35:59साइकोलॉजिकल, इमोशनल और इंटेलेक्चुअल
  5788. 5:36:01प्रॉब्लम्स हो तो वह लाइफ से डर नहीं
  5789. 5:36:05खाएगा।
  5790. 5:36:07इंटेलिजेंस का मतलब है लाइफ को एक होल के
  5791. 5:36:10रूप में
  5792. 5:36:11समझना और स्टूडेंट्स को ग्रेड्स या
  5793. 5:36:14मार्क्स देना इंटेलिजेंस की गारंटी नहीं
  5794. 5:36:18होती बल्कि यह इंसान की डिग्निटी को
  5795. 5:36:21गिराता है। यह कंपैरिजन वैली वैल्यू
  5796. 5:36:24सिस्टम माइंड को डैमेज करती है। इसका मतलब
  5797. 5:36:28यह नहीं कि टीचर स्टूडेंट का प्रोग्रेस
  5798. 5:36:31ऑब्जर्व ना करें या रिकॉर्ड ना करें।
  5799. 5:36:35पेरेंट्स ऑब्वियसली अपने बच्चों का
  5800. 5:36:38प्रोग्रेस जानना चाहते हैं और वह रिपोर्ट
  5801. 5:36:41मांगेंगे।
  5802. 5:36:43पर अगर उन्हें यह समझ नहीं होता कि टीचर
  5803. 5:36:46क्या करने की कोशिश कर रहा है तो वह
  5804. 5:36:49रिपोर्ट एक प्रेशर का टूल बन जाती है
  5805. 5:36:52जिससे वह अपने डिजायर्ड रिजल्ट्स लेना
  5806. 5:36:55चाहते हैं और इस प्रोसेस में टीचर की
  5807. 5:36:59मेहनत बर्बाद हो जाती
  5808. 5:37:02है। पेरेंट्स को यह समझना चाहिए कि स्कूल
  5809. 5:37:06किस टाइप की एजुकेशन देना चाहते हैं।
  5810. 5:37:10ज्यादातर पेरेंट्स इतना देख के ही खुश हो
  5811. 5:37:12जाते हैं कि उनका बच्चा कोई डिग्री ले रहा
  5812. 5:37:15है जो उसके फ्यूचर का पैसा सिक्योर
  5813. 5:37:19करेगा। बहुत कम पेरेंट्स इससे ज्यादा
  5814. 5:37:23सोचते हैं। हां, वह चाहते हैं कि उनका
  5815. 5:37:27बच्चा खुश रहे। पर इस वेग विष के आगे वह
  5816. 5:37:32उसके टोटल डेवलपमेंट पर ध्यान नहीं देते।
  5817. 5:37:36ज्यादातर पेरेंट्स सिर्फ यही चाहते हैं कि
  5818. 5:37:39उनके बच्चे का करियर सक्सेसफुल हो। इसलिए
  5819. 5:37:44वह या तो डरा के या प्यार से फोर्स करके
  5820. 5:37:47उन्हें नॉलेज लेने पर मजबूर करते
  5821. 5:37:51हैं। और फिर बुक सबसे इंपॉर्टेंट बन जाती
  5822. 5:37:55है। और साथ में बस मेमोरी का यूज होता है।
  5823. 5:37:59सिर्फ रिपीट करना होता है बिना रियल
  5824. 5:38:02थिंकिंग के।
  5825. 5:38:05शायद टीचर के लिए सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह
  5826. 5:38:08होती है कि पेरेंट्स डीप और वाइड एजुकेशन
  5827. 5:38:11में इंटरेस्टेड ही नहीं
  5828. 5:38:13होते। ज्यादातर पेरेंट्स बस इतना चाहते
  5829. 5:38:17हैं कि उनके बच्चे कुछ सुपरफिशियल नॉलेज
  5830. 5:38:22ले लें ताकि उन्हें एक रिस्पेक्टेबल
  5831. 5:38:24पोजीशन मिल जाए इस करप्ट सोसाइटी में।
  5832. 5:38:29इसलिए टीचर को सिर्फ बच्चों को सही तरीके
  5833. 5:38:32से पढ़ाना ही नहीं होता बल्कि यह भी देखना
  5834. 5:38:36पड़ता है कि पेरेंट्स स्कूल के अच्छे काम
  5835. 5:38:40को खराब ना कर
  5836. 5:38:42दें। असल में स्कूल और घर दोनों को मिलके
  5837. 5:38:46एक टीम की तरह काम करना चाहिए और कभी भी
  5838. 5:38:50एक दूसरे के अपोजिट नहीं होना चाहिए।
  5839. 5:38:54जहां पेरेंट्स कुछ और चाहते हैं और टीचर
  5840. 5:38:57कुछ और कर रहे
  5841. 5:38:59हो। यह बहुत इंपॉर्टेंट है कि पेरेंट्स को
  5842. 5:39:03क्लियरली पता हो टीचर क्या कर रहा है और
  5843. 5:39:07वह अपने बच्चों के टोटल डेवलपमेंट में दिल
  5844. 5:39:10से इंटरेस्टेड
  5845. 5:39:13हो। पेरेंट्स की रिस्पांसिबिलिटी भी उतनी
  5846. 5:39:16बड़ी है जितनी टीचर्स की जिनका काम पहले
  5847. 5:39:19से ही काफी हैवी है।
  5848. 5:39:23बच्चे का फुल डेवलपमेंट तभी पॉसिबल है जब
  5849. 5:39:27टीचर, स्टूडेंट और पेरेंट्स के बीच सही
  5850. 5:39:30रिलेशनशिप
  5851. 5:39:32हो। क्योंकि टीचर हर बार पेरेंट्स की हर
  5852. 5:39:37डिमांड या मूड के अकॉर्डिंग नहीं चल
  5853. 5:39:39सकता। इसलिए जरूरी है कि पेरेंट्स टीचर को
  5854. 5:39:44समझें और उसके साथ मिलके काम करें। ना कि
  5855. 5:39:48अपने बच्चे के अंदर कॉन्फ्लिक्ट और
  5856. 5:39:51कंफ्यूजन पैदा
  5857. 5:39:57करें। बच्चे के अंदर जो नेचुरल
  5858. 5:39:59क्यूरियोसिटी होती है, जो सीखने की चाह
  5859. 5:40:03होती है, वह स्टार्टिंग से ही होती है और
  5860. 5:40:08इसे स्मार्ट तरीके से हमेशा एनकरेज करना
  5861. 5:40:11चाहिए ताकि यह स्ट्रांग रहे और बिगड़े
  5862. 5:40:13नहीं।
  5863. 5:40:15और धीरे-धीरे बच्चा अलग-अलग सब्जेक्ट्स
  5864. 5:40:18में इंटरेस्ट लेने
  5865. 5:40:20लगे। अगर यह सीखने का जज्बा हमेशा सपोर्ट
  5866. 5:40:24किया जाए तो फिर मैथ्स, ज्योग्राफी,
  5867. 5:40:28हिस्ट्री, साइंस या कोई भी सब्जेक्ट ना
  5868. 5:40:32बच्चे के लिए प्रॉब्लम बनेगा ना टीचर के
  5869. 5:40:36लिए। जब एनवायरमेंट में प्यार और थॉटफुल
  5870. 5:40:40केयर होती है तब लर्निंग आसान हो जाती है।
  5871. 5:40:45इमोशनल, खुलेपन और सेंसिटिविटी तभी आती है
  5872. 5:40:49जब स्टूडेंट अपने टीचर के साथ सिक्योर फील
  5873. 5:40:52करता
  5874. 5:40:54है। रिलेशनशिप में सिक्योर फील करना
  5875. 5:40:57बच्चों की एक बेसिक नीड होती
  5876. 5:40:59है। सिक्योर होने की फीलिंग और डिपेंडेंट
  5877. 5:41:03होने की फीलिंग अलग-अलग होती
  5878. 5:41:06हैं। ज्यादातर टीचर्स जान के या बिना जाने
  5879. 5:41:11डिपेंडेंसी डेवलप करते हैं। और उसी
  5880. 5:41:14प्रोसेस में डर को भी इनकरेज करते
  5881. 5:41:18हैं। जो सेम काम पेरेंट्स भी करते हैं।
  5882. 5:41:22कभी प्यार से, कभी गुस्से
  5883. 5:41:24से। बच्चे में डिपेंडेंसी तब आती है जब
  5884. 5:41:28पेरेंट्स और टीचर्स उसे बताते हैं कि उसे
  5885. 5:41:31क्या बनना चाहिए और क्या करना चाहिए।
  5886. 5:41:36जहां डिपेंडेंसी होती है वहां हमेशा डर
  5887. 5:41:39छुपा होता है और यह डर बच्चे को मजबूर
  5888. 5:41:43करता है कि वह ब्लाइंडली माने सब कुछ
  5889. 5:41:47एक्सेप्ट करे बिना सोच समझ के अपने बड़े
  5890. 5:41:51लोगों के रूल्स और
  5891. 5:41:54ऑर्डर्स जब एटमॉस्फियर डिपेंडेंट बन जाता
  5892. 5:41:57है तब सेंसिटिविटी मर जाती है। पर जब
  5893. 5:42:01बच्चा जानता और महसूस करता है कि वह सेफ
  5894. 5:42:04है तो उसके इमोशंस नेचुरली ग्रो करते हैं
  5895. 5:42:08और डर उसे रोकता नहीं
  5896. 5:42:11है। बच्चे का यह सिक्योर फील करना
  5897. 5:42:14इनसिक्योरिटी का ऑोजिट नहीं
  5898. 5:42:18होता। यह होता है एक रिलैक्स्ड फील चाहे
  5899. 5:42:22घर में हो या स्कूल में कि वह जो है वही
  5900. 5:42:26बन सकता है बिना किसी फोर्स के।
  5901. 5:42:30कि वह ट्री पर चढ़ सकता है और अगर गिर भी
  5902. 5:42:33जाए तो कोई डांटेगा
  5903. 5:42:36नहीं। यह सिक्योर फील तभी आता है जब
  5904. 5:42:39पेरेंट्स और टीचर्स दोनों उसके टोटल वेल
  5905. 5:42:42बीइंग को ले सीरियसली कंसर्न होते
  5906. 5:42:46हैं। स्कूल में यह बहुत जरूरी है कि बच्चा
  5907. 5:42:49फर्स्ट डे से ही रिलैक्स्ड फील करें। अंदर
  5908. 5:42:52से बिल्कुल सेफ महसूस
  5909. 5:42:55करें। यह पहला इंप्रेशन बहुत इंपॉर्टेंट
  5910. 5:42:58होता है।
  5911. 5:43:00लेकिन अगर टीचर अलग-अलग तरीके से बच्चे का
  5912. 5:43:03ट्रस्ट जीतने की कोशिश करता है और उसे सब
  5913. 5:43:06कुछ अपनी मर्जी से करने देता है तो वह
  5914. 5:43:10सिर्फ डिपेंडेंसी डेवलप कर रहा
  5915. 5:43:15है। वह बच्चे को यह फील नहीं करा रहा कि
  5916. 5:43:18वह ऐसे जगह में है जहां लोग उसके टोटल वेल
  5917. 5:43:22बीइंग के लिए जेनुइनली कंसर्न
  5918. 5:43:27है। जब बच्चा इस नए ट्रस्ट वाले रिलेशनशिप
  5919. 5:43:30को एक्सपीरियंस करता है जो शायद उसने पहले
  5920. 5:43:34कभी महसूस नहीं किया हो तो वह नेचुरली
  5921. 5:43:38कम्युनिकेशन में ओपन हो जाता है और बड़े
  5922. 5:43:41लोग उसके लिए कोई डेंजर नहीं लगते।
  5923. 5:43:45जो बच्चा सेफ फील करता है, वह अपने तरीके
  5924. 5:43:48से नेचुरली रिस्पेक्ट एक्सप्रेस करता है
  5925. 5:43:51जो लर्निंग के लिए जरूरी होती है। यह
  5926. 5:43:55रिस्पेक्ट किसी अथॉरिटी या फियर से नहीं
  5927. 5:44:00होती। जब उससे सिक्योर फील्ड होता है तो
  5928. 5:44:04उसका बिहेवियर टीचर के फोर्स से नहीं
  5929. 5:44:06होता। वह लर्निंग का एक हिस्सा बन जाता है
  5930. 5:44:11क्योंकि उसका टीचर के साथ रिलेशनशिप
  5931. 5:44:13सिक्योर होता है। इसलिए वह नेचुरली
  5932. 5:44:17कंसीडरेट बन जाता है और सिर्फ इसी सेफ
  5933. 5:44:21एटमॉस्फियर में इमोशंस खुल के डेवलप हो
  5934. 5:44:25सकते
  5935. 5:44:26हैं। जब बच्चा रिलैक्स्ड होता है, सेफ फील
  5936. 5:44:30करता है। जब वह जो चाहता है वह करता है।
  5937. 5:44:34पर उसी प्रोसेस में वह यह समझता है कि
  5938. 5:44:36क्या सही है। और फिर उसका बिहेवियर ना
  5939. 5:44:40किसी रेजिस्टेंस से आता है, ना जििद से ना
  5940. 5:44:44दबाई हुई फीलिंग से। ना किसी एक पल के
  5941. 5:44:47इंपल्सिव फीलिंग
  5942. 5:44:50से। सेंसिटिविटी का मतलब होता है हर चीज
  5943. 5:44:53के लिए सेंसिटिव होना। प्लांट्स के लिए,
  5944. 5:44:57एनिमल्स के लिए, ट्रीज, स्काई, रिवर के
  5945. 5:45:01पानी और एक उड़ते हुए बर्ड के
  5946. 5:45:07लिए और साथ ही अपने आसपास के लोगों के मूड
  5947. 5:45:12के लिए भी और एक स्ट्रेंजर के लिए जो
  5948. 5:45:15सिर्फ पास जा रहा
  5949. 5:45:17हो। यह सेंसिटिविटी एक नेचुरल सेल्फिशनेस
  5950. 5:45:21से फ्री रिस्पांस लाती है।
  5951. 5:45:25जो ही असली मोरलिटी और रियल बिहेवियर होता
  5952. 5:45:29है। जब बच्चा सेंसिटिव होता है तब उसका
  5953. 5:45:33बिहेवियर ओपन होता
  5954. 5:45:36है। सीक्रेटिव नहीं और फिर टीचर का एक
  5955. 5:45:40सिंपल सजेशन भी वह आसानी से एक्सेप्ट कर
  5956. 5:45:44लेता है बिना किसी फ्रिक्शन के।
  5957. 5:45:48जब हम एक इंसान के टोटल डेवलपमेंट की बात
  5958. 5:45:52करते हैं तो हमें उसके इमोशनल अर्ज को
  5959. 5:45:55समझना पड़ता है क्योंकि यह रीजनिंग से
  5960. 5:45:58ज्यादा स्ट्रांग होते
  5961. 5:46:00हैं। हमें इमोशनल कैपेसिटी को ग्रो करना
  5962. 5:46:04चाहिए ना कि उसे
  5963. 5:46:07दबाना। जब हम इमोशनल और इंटेलेक्चुअल
  5964. 5:46:10दोनों इश्यूज को समझने लगते हैं तब हम
  5965. 5:46:14उनसे बिना डरे डील कर सकते हैं।
  5966. 5:46:18अगर इंसान का टोटल डेवलपमेंट चाहिए तो
  5967. 5:46:21अकेलापन यानी सॉलिट्यूड जरूरी हो जाता है।
  5968. 5:46:26क्योंकि यह सेंसिटिविटी को बढ़ाता
  5969. 5:46:29है। इंसान को यह जानना चाहिए कि अकेला
  5970. 5:46:33होना क्या होता है? मेडिटेट करना क्या
  5971. 5:46:36होता है? और मरना क्या होता है? और इन सब
  5972. 5:46:41चीजों का असली मतलब तभी समझ में आता है जब
  5973. 5:46:44उन्हें खुद एक्सप्लोर किया जाए।
  5974. 5:46:48यह चीजें सिखाई नहीं जा सकती। इनके मीनिंग
  5975. 5:46:51को सिर्फ फील करके समझा जा सकता
  5976. 5:46:54है। कोई पॉइंटर दिया जा सकता है, लेकिन
  5977. 5:46:58पॉइंटर से सीखना अकेला होने या मेडिटेट
  5978. 5:47:02करने का एक्चुअल एक्सपीरियंस नहीं
  5979. 5:47:05होता। सॉलीट्यूड या मेडिटेशन का असली
  5980. 5:47:08एक्सपीरियंस तभी होता है जब माइंड
  5981. 5:47:11इंक्वायरी मोड में हो।
  5982. 5:47:14सिर्फ एक इंक्वायरी वाला माइंड ही रियल
  5983. 5:47:17लर्निंग कर सकता है। पर जब इंक्वायरी को
  5984. 5:47:21पुराने नॉलेज या किसी और के एक्सपीरियंस
  5985. 5:47:24या अथॉरिटी से दबा दिया जाता है तो
  5986. 5:47:27लर्निंग सिर्फ इमिटेशन बन जाती है। और
  5987. 5:47:31इमिटेशन इंसान को सिर्फ रिपीट करना सिखाता
  5988. 5:47:34है बिना किसी रियल फील के।
  5989. 5:47:39टीचिंग का मतलब सिर्फ इंफॉर्मेशन देना
  5990. 5:47:42नहीं होता बल्कि एक ऐसे माइंड को डेवलप
  5991. 5:47:45करना होता है जो हमेशा सवाल करता रहे।
  5992. 5:47:50ऐसा माइंड रिलीजन के रियल मीनिंग तक पहुंच
  5993. 5:47:53सकता है ना कि बस मंदिर और रिचुअल्स वाले
  5994. 5:47:58रिलीजन को एक्सेप्ट करता
  5995. 5:48:01है। गॉड ट्रुथ या जो भी नाम दो उसे
  5996. 5:48:06ढूंढना ना कि बस बिलीव्स और डोगमास को मान
  5997. 5:48:09लेना। यही असली रिलीजन
  5998. 5:48:12है। जैसे स्टूडेंट हर दिन ब्रश करता है,
  5999. 5:48:16नहाता है, नई चीजें सीखता है, वैसे ही
  6000. 5:48:20उससे रोज थोड़ा अकेला या दूसरों के साथ
  6001. 5:48:25चुप बैठना भी
  6002. 5:48:27चाहिए। यह सॉलीट्यूड किसी इंस्ट्रक्शन से
  6003. 5:48:30नहीं लाया जा सकता। ना ही किसी ट्रेडिशन
  6004. 5:48:33के प्रेशर से। ना ही उन लोगों के
  6005. 5:48:36इनफ्लुएंस से जो खुद अकेला रहना नहीं
  6006. 5:48:39जानते पर दूसरों से साइलेंस एक्सपेक्ट
  6007. 5:48:42करते
  6008. 5:48:44हैं। सॉलिट्यूड माइंड को एक मिरर की तरह
  6009. 5:48:47अपने आप को क्लियरली देखने में हेल्प करता
  6010. 5:48:50है और एंबिशन के पीछे भागने से निकालता
  6011. 5:48:55है। उसके सारे कन्फ्यूजन, डर और
  6012. 5:48:59फ्रस्ट्रेशन के
  6013. 5:49:02साथ सॉलिट्यूड माइंड को एक ऐसी स्टेबिलिटी
  6014. 5:49:05देता है जो टाइम के हिसाब से मेजर नहीं की
  6015. 5:49:08जा सकती। ऐसी क्लेरिटी ऑफ माइंड ही रियल
  6016. 5:49:12कैरेक्टर होता है। जहां कैरेक्टर नहीं
  6017. 5:49:15होता वहां सेल्फ कंट्राडिक्शन होता
  6018. 5:49:19है। सेंसिटिविटी होना मतलब लव करना। लव
  6019. 5:49:24शब्द लव नहीं
  6020. 5:49:27होता। और लव को गॉड और इंसान के लव में
  6021. 5:49:30डिवाइड नहीं किया जा सकता। ना ही यह मेजर
  6022. 5:49:34किया जा सकता है कि किसी एक का लव ज्यादा
  6023. 5:49:37है या कम।
  6024. 5:49:40लव खुद को पूरी तरह देता है। जैसे एक
  6025. 5:49:43फ्लावर अपना फ्रेगरेंस देता है। पर हम
  6026. 5:49:47हमेशा रिलेशनशिप में लव को मेजर करते हैं
  6027. 5:49:50और इसी वजह से उसे खत्म कर देते
  6028. 5:49:55हैं। लव किसी रिफॉर्मर या सोशल वर्कर की
  6029. 5:49:59चीज नहीं होती। यह कोई पॉलिटिकल टूल भी
  6030. 5:50:02नहीं होता जिससे एक्शन क्रिएट किया जाए।
  6031. 5:50:06जब पॉलिटिशियन और रिफॉर्मर लव की बात करते
  6032. 5:50:10हैं तो वह सिर्फ वर्ड यूज करते हैं। असली
  6033. 5:50:12लव को छूते भी नहीं। क्योंकि लव कभी भी
  6034. 5:50:16किसी गोल को अचीव करने के लिए यूज नहीं
  6035. 5:50:19किया जा सकता। ना अभी के लिए ना फ्यूचर के
  6036. 5:50:24लिए। लव पूरे अर्थ का होता है ना कि किसी
  6037. 5:50:28एक फील्ड या फॉरेस्ट
  6038. 5:50:30का। असली लव किसी रिलीजन के अंदर बंधा
  6039. 5:50:33नहीं होता। और जब ऑर्गेनाइज रिलीजंस लव का
  6040. 5:50:38यूज करते हैं तो वह लव वहां खत्म हो जाता
  6041. 5:50:42है। सोसाइटी रिलीजंस और अथॉरिटेरियन
  6042. 5:50:48गवर्नमेंट्स जो अपने काम में लगातार बिजी
  6043. 5:50:51होते हैं, वह बिना जाने उस लव को
  6044. 5:50:54डिस्ट्रॉय कर देते हैं। जो एक्शन में पैशन
  6045. 5:50:57बन जाता
  6046. 5:50:59है। इंसान के टोटल डेवलपमेंट के लिए जो
  6047. 5:51:03सही एजुकेशन से होता है, लव की क्वालिटी
  6048. 5:51:07को शुरू से ही नरिश और सस्टेन करना पड़ता
  6049. 5:51:11है। लव कोई इमोशनल ड्रामा या डिवोशन नहीं
  6050. 5:51:15होता। यह डेथ जितना स्ट्रांग होता है। लव
  6051. 5:51:20नॉलेज से नहीं मिलता।
  6052. 5:51:23और जो माइंड सिर्फ नॉलेज के पीछे भागता है
  6053. 5:51:26बिना लव के वह रूथलेस बन जाता है और सिर्फ
  6054. 5:51:30एफिशिएंसी के लिए काम करता
  6055. 5:51:33है। इसलिए टीचर को शुरू से ही लव की
  6056. 5:51:37क्वालिटी को समझना चाहिए। जिसमें होती है
  6057. 5:51:41ह्यूमिलिटी,
  6058. 5:51:43जेंटलनेस, कंसीडरेशन, पेशेंस और करसी।
  6059. 5:51:49मेस्टी और करसी नेचुरली होते हैं एक सही
  6060. 5:51:53एजुकेटेड इंसान में। वह सबके साथ काइंड
  6061. 5:51:57होता है।
  6062. 5:51:58दयालु एनिमल्स और प्लांट्स के साथ भी और
  6063. 5:52:02यह उसके बिहेवियर और बात करने के तरीके
  6064. 5:52:05में दिखता
  6065. 5:52:07है। लव की क्वालिटी पर फोकस करने से माइंड
  6066. 5:52:11अपनी
  6067. 5:52:12एंबिशन, ग्रीड और पोजीशन वाली सोच से फ्री
  6068. 5:52:16हो जाता है।
  6069. 5:52:20क्या लव में एक ऐसी फाइन सेंस नहीं होती
  6070. 5:52:24जो रिस्पेक्ट और गुड टेस्ट में एक्सप्रेस
  6071. 5:52:27होती
  6072. 5:52:29है? क्या यह माइंड को प्यूरिफाई नहीं करता
  6073. 5:52:33जो अदर वाइज प्राइड को और स्ट्रांग बना
  6074. 5:52:36देता? रिफाइनमेंट एक नेचुरल चीज होती है
  6075. 5:52:40जब लव होता है। यह कोई सेल्फ कंट्रोल या
  6076. 5:52:44आउटसाइड प्रेशर का रिजल्ट नहीं होती।
  6077. 5:52:49जब लॉ को समझ होती है तब सेक्स और ह्यूमन
  6078. 5:52:54रिलेशनशिप्स के कॉम्प्लेक्स इश्यूज को हम
  6079. 5:52:58ठीक तरह से हैंडल कर सकते हैं ना कि
  6080. 5:53:00एक्साइटमेंट और डर के
  6081. 5:53:03साथ। जो टीचर इंसान के टोटल डेवलपमेंट को
  6082. 5:53:07सबसे इंपॉर्टेंट मानता है, उसको सेक्सुअल
  6083. 5:53:11अर्ज की रियलिटी को समझना चाहिए। क्योंकि
  6084. 5:53:14यह लाइफ का बड़ा पार्ट होती
  6085. 5:53:17है और उसे शुरू से ही बच्चों की
  6086. 5:53:21क्यूरियोसिटी को बिना किसी वियर्ड
  6087. 5:53:24इंटरेस्ट के हैंडल करना आना चाहिए।
  6088. 5:53:28सिर्फ बायोलॉजिकल फैक्ट्स बताना। जब बच्चे
  6089. 5:53:31बड़े हो रहे होते हैं और अगर उसमें लव की
  6090. 5:53:35क्वालिटी नहीं होती तो वह सिर्फ लस्ट तक
  6091. 5:53:38पहुंच सकता है। लव माइंड को इविल से क्लीन
  6092. 5:53:43करता
  6093. 5:53:44है। अगर टीचर के पास लव और अंडरस्टैंडिंग
  6094. 5:53:47नहीं है तो लड़के लड़कियों को अलग करना
  6095. 5:53:51चाहे वायर लगा के हो या रूल्स से सिर्फ
  6096. 5:53:54उनकी क्यूरियोसिटी बढ़ाता है।
  6097. 5:53:57और वह पैशन को सिर्फ एक फिजिकल
  6098. 5:54:00सेटिस्फेक्शन बना देता
  6099. 5:54:02है। इसलिए यह जरूरी है कि लड़के लड़कियों
  6100. 5:54:06को सही तरीके से साथ पढ़ाया जाए। लव की
  6101. 5:54:10क्वालिटी हाथों से कुछ करने में भी दिखती
  6102. 5:54:14है। जैसे गार्डनिंग, कारपेंट्री, पेंटिंग,
  6103. 5:54:19हैंडीक्राफ्ट्स। और सेंसेस के थ्रू भी
  6104. 5:54:22जैसे ट्रीज देखना, माउंटेंस देखना।
  6105. 5:54:26अर्थ की ब्यूटी और लोगों के बनाए हुए
  6106. 5:54:29पावर्टी को महसूस
  6107. 5:54:33करना और म्यूजिक
  6108. 5:54:35सुनना। बर्ड्स के गाने और फ्लावरिंग वाटर
  6109. 5:54:40की साउंड को
  6110. 5:54:42सुनना। हम सिर्फ माइंड को ट्रेन करने और
  6111. 5:54:45इमोशनल सेंसिटिविटी जगाने में ही नहीं लगे
  6112. 5:54:50हैं। हमें बॉडी के बैलेंस डेवलपमेंट पर भी
  6113. 5:54:54ध्यान देना होगा।
  6114. 5:54:58क्योंकि अगर बॉडी हेल्दी और एनर्जेटिक
  6115. 5:55:01नहीं होगी तो वह सोच को डिस्टोर्ट करेगी
  6116. 5:55:05और इनसेंसिटिविटी लाएगी। यह इतना ऑब्वियस
  6117. 5:55:10है कि इस पर ज्यादा बोलने की जरूरत
  6118. 5:55:13नहीं। बॉडी हेल्दी होनी चाहिए। उसको सही
  6119. 5:55:17फूड मिलना चाहिए और प्रॉपर स्लीप भी।
  6120. 5:55:21अगर सेंसेस एक्टिव नहीं होंगे तो बॉडी
  6121. 5:55:24इंसान के टोटल डेवलपमेंट में रुकावट बन
  6122. 5:55:28जाएगी। बॉडी के मूवमेंट्स ग्रेसफुल होने
  6123. 5:55:32चाहिए और मसल्स का बैलेंस होना चाहिए।
  6124. 5:55:36इसके लिए एक्सरसाइज, डांसिंग और गेम्स
  6125. 5:55:39जरूरी
  6126. 5:55:41हैं। जो बॉडी साफ नहीं होती, जो स्लोपी
  6127. 5:55:45होती है और पॉश्चर लूस होता है, वह माइंड
  6128. 5:55:49और इमोशंस की सेंसिटिविटी को खत्म कर देता
  6129. 5:55:53है। बॉडी सिर्फ माइंड का टूल नहीं होती।
  6130. 5:55:57बॉडी, इमोशंस और माइंड मिलकर पूरा इंसान
  6131. 5:56:01बनाते
  6132. 5:56:02हैं। और जब तक यह तीन एक साथ हार्मोनी में
  6133. 5:56:06नहीं जीते, कॉन्फ्लिक्ट हमेशा होगा।
  6134. 5:56:11और कॉन्फ्लिक्ट से सेंसिटिविटी खत्म हो
  6135. 5:56:13जाती
  6136. 5:56:15है। माइंड अगर बॉडी को डोमिनेट करता है और
  6137. 5:56:19सेंसेस को सप्रेस करता है तो बॉडी
  6138. 5:56:23इनसेंसिटिव हो जाती है और ऐसी बॉडी माइंड
  6139. 5:56:28के फुल फ्लाइट में रुकावट बन जाती
  6140. 5:56:31है। बॉडी को टॉर्चर करना कभी भी डीप
  6141. 5:56:35कॉन्शियसनेस तक पहुंचने में मदद नहीं
  6142. 5:56:37करता। क्योंकि यह तभी पॉसिबल है जब माइंड,
  6143. 5:56:42इमोशंस और बॉडी एक दूसरे के साथ
  6144. 5:56:46कॉन्फ्लिक्ट में ना हो। बल्कि नेचुरल
  6145. 5:56:49यूनिटी में हो। बिना किसी कासेप्ट, बिलीफ
  6146. 5:56:54या आइडियल के प्रेशर के।
  6147. 5:56:59माइंड को ग्रो करते वक्त हमें फोकस
  6148. 5:57:01कंसंट्रेशन पर नहीं अटेंशन पर करना
  6149. 5:57:05चाहिए। कंसंट्रेशन मतलब माइंड को जबरदस्ती
  6150. 5:57:09एक पॉइंट पर लाना जबकि अटेंशन किसी
  6151. 5:57:12बाउंड्री में बंद ही नहीं होती।
  6152. 5:57:16कंसंट्रेशन में माइंड हमेशा एक लिमिट के
  6153. 5:57:19अंदर ही चलता है। लेकिन जब हम माइंड को
  6154. 5:57:23पूरी तरह समझना चाहते हैं तो सिर्फ
  6155. 5:57:26कंसंट्रेशन एक रुकावट बन जाता
  6156. 5:57:29है। अटेंशन बिना लिमिट के होता है। नॉलेज
  6157. 5:57:33की बाउंड्रीज के
  6158. 5:57:35बाहर। नॉलेज कंसंट्रेशन से आता है और उसका
  6159. 5:57:39एक्सटेंशन भी उसी बाउंड्री के अंदर ही
  6160. 5:57:43होता है।
  6161. 5:57:46अटेंशन के स्टेट में माइंड नॉलेज का यूज
  6162. 5:57:49करता है जो कि कंसंट्रेशन का रिजल्ट होता
  6163. 5:57:52है।
  6164. 5:57:53लेकिन पार्ट कभी भी होल नहीं होता और
  6165. 5:57:58पार्ट्स को जोड़ने से भी पूरा नहीं समझा
  6166. 5:58:01जा
  6167. 5:58:02सकता। नॉलेज जो कि कंसंट्रेशन का रिजल्ट
  6168. 5:58:06है, वह कभी भी उस चीज को समझा नहीं सकता
  6169. 5:58:10जो मेजर के बाहर है।
  6170. 5:58:14पूरा माइंड कभी भी एक कंसंट्रेटेड माइंड
  6171. 5:58:17के लिमिट में नहीं आता। इसलिए अटेंशन सबसे
  6172. 5:58:22इंपॉर्टेंट होता है। लेकिन यह कंसंट्रेशन
  6173. 5:58:25वाली मेहनत से नहीं
  6174. 5:58:27आता। अटेंशन एक ऐसा स्टेट होता है जहां
  6175. 5:58:31माइंड हमेशा सीख रहा होता है। बिना किसी
  6176. 5:58:35सेंटर के जहां नॉलेज इकट्ठा हो रही
  6177. 5:58:38हो। जब माइंड सिर्फ अपने ऊपर कंसंट्रेटेड
  6178. 5:58:42होता है।
  6179. 5:58:43तो वह नॉलेज का यूज अपने आप को बढ़ाने के
  6180. 5:58:47लिए करता है और ऐसी एक्टिविटी सेल्फ
  6181. 5:58:51कंट्राडिक्टरी और एंटीसोशल हो जाती
  6182. 5:58:55है। असली लर्निंग सिर्फ उसी अटेंशन के
  6183. 5:58:58स्टेट में होती है जहां कोई आउटर या इनर
  6184. 5:59:02प्रेशर नहीं
  6185. 5:59:03होता। राइट थिंकिंग तभी आती है जब माइंड,
  6186. 5:59:08ट्रेडिशन और मेमोरी का स्लेव नहीं
  6187. 5:59:11होता। अटेंशन ही वह स्पेस बनाता है जहां
  6188. 5:59:15साइलेंस आता है और वही साइलेंस क्रिएशन का
  6189. 5:59:19दरवाजा खोलता
  6190. 5:59:20है। इसीलिए अटेंशन सबसे इंपॉर्टेंट होता
  6191. 5:59:25है। नॉलेज फंक्शन लेवल पर जरूरी होता है
  6192. 5:59:29माइंड को ग्रो करने के लिए पर वह एंड गोल
  6193. 5:59:32नहीं होना
  6194. 5:59:34चाहिए। हम सिर्फ एक स्किल का डेवलपमेंट
  6195. 5:59:37नहीं चाहते। ना सिर्फ मैथमेटिशियन का,
  6196. 5:59:41साइंटिस्ट का, म्यूजिशियन का। हम स्टूडेंट
  6197. 5:59:44के फुल ह्यूमन बीइंग बनने का डेवलपमेंट
  6198. 5:59:47चाहते
  6199. 5:59:49हैं। अटेंशन का स्टेट कैसे लाएं? यह
  6200. 5:59:53अटेंशन किसी पर्सुएशन,
  6201. 5:59:56कंपैरिजन, रिवॉर्ड या पनिशमेंट से नहीं
  6202. 5:59:59आता।
  6203. 6:00:00यह सब कोजन के फॉर्म होते
  6204. 6:00:03हैं। अटेंशन का स्टार्ट होता है जब फियर
  6205. 6:00:08डर खत्म होता
  6206. 6:00:12है। जब तक सक्सेस पाने की अर्ज रहती है,
  6207. 6:00:16उम्मीद रहती है तब तक डर रहता है और उसके
  6208. 6:00:21साथ-साथ फ्रस्ट्रेशन और कंट्राडिक्शन भी।
  6209. 6:00:26आप कंसंट्रेशन सिखा सकते हो लेकिन अटेंशन
  6210. 6:00:30सिखाया नहीं जा सकता। जैसे कि डर से आजादी
  6211. 6:00:34भी सिखाई नहीं जा सकती।
  6212. 6:00:37पर हम यह देख सकते हैं कि डर का रीजन क्या
  6213. 6:00:41है और जब हम उस रीजन को समझते हैं तो डर
  6214. 6:00:46खुद खत्म हो जाता
  6215. 6:00:48है। इसलिए अटेंशन नेचुरली आता है जब
  6216. 6:00:53स्टूडेंट के अराउंड एक वेल बीइंग का
  6217. 6:00:55एटमॉस्फियर होता है। जब उसे सेफ फील होता
  6218. 6:01:00है, रिलैक्स्ड लगता है और उसके आसपास लव
  6219. 6:01:04से आई डिसइंटस्टेड एक्शन होती
  6220. 6:01:07है। लव कभी कंपेयर नहीं करता इसलिए एनवी
  6221. 6:01:12और बनने की टॉर्चर वाली फीलिंग खत्म हो
  6222. 6:01:15जाती
  6223. 6:01:16है। जो जनरल डिसटिस्फेक्शन सबको होती है।
  6224. 6:01:20चाहे यंग हो या
  6225. 6:01:22ओल्ड वह जल्दी ही किसी ना किसी
  6226. 6:01:25सेटिस्फेक्शन में बदल जाती है और माइंड सो
  6227. 6:01:29जाता
  6228. 6:01:30है। दुख के टाइम वह डिसटिस्फेक्शन दोबारा
  6229. 6:01:34जागती है। पर माइंड फिर किसी कंफर्ट में
  6230. 6:01:38चला जाता
  6231. 6:01:40है। यह डिसटिस्फेक्शन और कंफर्ट का चक्कर
  6232. 6:01:45माइंड को पकड़ के रखता है। दर्द से जो
  6233. 6:01:48बार-बार जागना होता है, वह भी
  6234. 6:01:52डिसटिस्फेक्शन का हिस्सा है।
  6235. 6:01:56डिसंटेंट इंक्वायरी का रास्ता है। पर
  6236. 6:01:59इंक्वायरी तब नहीं होती जब माइंड ट्रेडिशन
  6237. 6:02:03और आइडियल से बंधा
  6238. 6:02:06हो। इंक्वायरी ही अटेंशन का फ्लेम होती
  6239. 6:02:09है।
  6240. 6:02:11डिंटेंट का मतलब है वह स्टेट जहां माइंड
  6241. 6:02:15जो है उसे क्लियरली देखता है और हमेशा नए
  6242. 6:02:19को ढूंढता है।
  6243. 6:02:22डिस्कंटेंट का मतलब
  6244. 6:02:25है जो कुछ है उसके लिमिटेशंस के परे जाना।
  6245. 6:02:30अगर तुम डिस्कंटेंट को चुप करने का तरीका
  6246. 6:02:34ढूंढते हो तो तुम अपने सेल्फ सेंटर्ड
  6247. 6:02:37एक्टिविटी और सोसाइटी की लिमिटेशंस को
  6248. 6:02:41एक्सेप्ट कर लेते हो।
  6249. 6:02:44डिस्कंटेंट एक ऐसी फ्लेम है जो
  6250. 6:02:46सेटिस्फेक्शन के बेकार लेयर्स को जला देती
  6251. 6:02:49है।
  6252. 6:02:51लेकिन ज्यादातर लोग इसे खत्म करने की
  6253. 6:02:54कोशिश करते
  6254. 6:02:55हैं। फिर यह डिस्कंटेंट और ज्यादा के पीछे
  6255. 6:02:59भागना बन जाता
  6256. 6:03:01है। बड़ा घर, अच्छी कार और वैसे सब।
  6257. 6:03:07जो एनवी के फील्ड में आता
  6258. 6:03:10है और एनवी ही ऐसे डिसंटेंट को जिंदा रखता
  6259. 6:03:17है। पर मैं उस डिस्कंटेंट की बात कर रहा
  6260. 6:03:21हूं जिसमें ना एनवी होती है ना
  6261. 6:03:24ग्रीड ना और ज्यादा चाहिए होता है ना ही
  6262. 6:03:28सेटिस्फेक्शन का डिजायर होता
  6263. 6:03:31है। यह डिस्कंटेंट एक प्योर स्टेट होती है
  6264. 6:03:36जो हर इंसान में होती
  6265. 6:03:38है। अगर इसे रॉन्ग एजुकेशन, जल्दी मिलने
  6266. 6:03:42वाले कंफर्ट, एंबिशन या किसी आइडियल के
  6267. 6:03:46चेस से मार ना दिया हो।
  6268. 6:03:51जब हम रियल डिस्कंटेंट को समझ लेते हैं तो
  6269. 6:03:55हमें दिखता है कि अटेंशन भी इसी बर्निंग
  6270. 6:03:59फ्लेम का हिस्सा
  6271. 6:04:01है जो छोटी सोच को जला के खत्म कर देता है
  6272. 6:04:05और माइंड को फ्री कर देता है उस सेल्फ
  6273. 6:04:09सेंटर्ड चेज और सेटिस्फेक्शन के लिमिटेशन
  6274. 6:04:13से।
  6275. 6:04:16इसलिए अटेंशन तब आता है जब इंक्वायरी किसी
  6276. 6:04:20सेल्फ बेनिफिट या सेटिस्फेक्शन पर बेस्ड
  6277. 6:04:23नहीं
  6278. 6:04:24होती। यह अटेंशन बच्चे में स्टार्टिंग से
  6279. 6:04:28ग्रो करना चाहिए।
  6280. 6:04:31तुम देखोगे कि जब लव होता है जो
  6281. 6:04:34ह्यूमिलिटी,
  6282. 6:04:36करसी, पेशेंस और जेंटलनेस के थ्रू
  6283. 6:04:40एक्सप्रेस होता है तो तुम उन वॉल से फ्री
  6284. 6:04:44हो जाते हो जो
  6285. 6:04:47इनसेंसिटिविटी ने खड़ी की होती है। और तब
  6286. 6:04:51तुम एक छोटी एज से ही बच्चे में अटेंशन का
  6287. 6:04:55यह स्टेट लाने में मदद करते हो।
  6288. 6:04:59अटेंशन कोई ऐसी चीज नहीं है जो सिखाई जाए।
  6289. 6:05:03लेकिन आप स्टूडेंट के अंदर उसे जगा सकते
  6290. 6:05:07हो। जब आप उसके अराउंड ऐसा प्रेशर क्रिएट
  6291. 6:05:11ना करो जो उसके अंदर कंट्राडिक्शन वाली
  6292. 6:05:14लाइफ पैदा करता
  6293. 6:05:16है। तब उसकी अटेंशन किसी भी मूवमेंट किसी
  6294. 6:05:20भी सब्जेक्ट पर नेचुरली आ सकती है और यह
  6295. 6:05:25वह नैरो कंसंट्रेशन नहीं होती।
  6296. 6:05:28जो किसी रिजल्ट या अचीवमेंट के प्रेशर से
  6297. 6:05:32आती
  6298. 6:05:33है। जो जनरेशन इस तरीके से एजुकेट होती
  6299. 6:05:37है, वह ग्रीट और डर से फ्री होती है। जो
  6300. 6:05:41उनके पेरेंट्स और सोसाइटी से उन्हें
  6301. 6:05:44साइकोलॉजिकल रूप में मिलता
  6302. 6:05:47है। और क्योंकि उन्हें ऐसे एजुकेट किया
  6303. 6:05:51गया होता है। वह प्रॉपर्टी के इनहेरिटेंस
  6304. 6:05:54पर डिपेंड नहीं रहेंगे।
  6305. 6:05:57इनहेरिटेंस असली इंडिपेंडेंस को डिस्ट्रॉय
  6306. 6:06:00करता है और इंटेलिजेंस को लिमिट करता
  6307. 6:06:03है क्योंकि यह एक फेक सिक्योरिटी का
  6308. 6:06:07फीलिंग देता है। एक ऐसी सेल्फ कॉन्फिडेंस
  6309. 6:06:10देता है जिसका कोई बेस नहीं होता और माइंड
  6310. 6:06:14में अंधेरा भर देता है जहां कुछ नया ग्रो
  6311. 6:06:18नहीं कर सकता।
  6312. 6:06:23लेकिन जो जनरेशन इस टोटली अलग तरीके से
  6313. 6:06:25एजुकेट होती है वह एक नई सोसाइटी बनाएगी
  6314. 6:06:29क्योंकि उनके पास वह इंटेलिजेंस होती है
  6315. 6:06:33जो डर से बंधी हुई नहीं
  6316. 6:06:36होती क्योंकि एजुकेशन टीचर्स और पेरेंट्स
  6317. 6:06:40दोनों की रिस्पांसिबिलिटी है तो हमें साथ
  6318. 6:06:44काम करने का आर्ट सीखना होगा और यह तभी
  6319. 6:06:49पॉसिबल है जब हर एक इंसान इंसान सच को
  6320. 6:06:52साफ-साफ देखता
  6321. 6:06:54हो। सच का देखना ही हमें एक साथ लाता है
  6322. 6:06:58ना कि ओपिनियन, बिलीफ या थ्यरी।
  6323. 6:07:04कांसेप्ट और फैक्ट में बहुत बड़ा फर्क
  6324. 6:07:06होता है। कांसेप्ट हमें टेंपरेरीली साथ ला
  6325. 6:07:11सकता है। लेकिन अगर हम सिर्फ किसी बिलीफ
  6326. 6:07:15के बेसिस पर काम कर रहे हैं तो अलग होने
  6327. 6:07:18का चांस हमेशा
  6328. 6:07:21रहेगा। अगर हर कोई सच को क्लियरली देखता
  6329. 6:07:25है तो डिटेल्स पर डिसए्रीमेंट हो सकती है
  6330. 6:07:28लेकिन अलग होने की जरूरत नहीं होती।
  6331. 6:07:33सिर्फ बेवकूफ ही छोटी बातों पर अलग होते
  6332. 6:07:36हैं। जब सब लोग सच को क्लियरली देखते हैं
  6333. 6:07:41तो डिटेल कभी भी झगड़े का रीजन नहीं बनता।
  6334. 6:07:46ज्यादातर लोग अथॉरिटी के रूल्स के
  6335. 6:07:48अकॉर्डिंग काम करने की आदत में होते हैं।
  6336. 6:07:52हम एक कासेप्ट के लिए या एक आइडियल को पुश
  6337. 6:07:56करने के लिए मिलके काम करते हैं। और इसमें
  6338. 6:07:59हमें बिलीव
  6339. 6:08:01पर्सुएशन प्रोपेगेंडा लगता
  6340. 6:08:04है। पर कासेप्ट या आइडियल के लिए काम करना
  6341. 6:08:08और उस सच को एक्शन में लाना जो हमने खुद
  6342. 6:08:12देखा हो। यह दोनों बिल्कुल अलग चीजें
  6343. 6:08:16हैं। जब हम किसी अथॉरिटी के अंडर काम करते
  6344. 6:08:20हैं, चाहे वह एक आईडिया हो या एक आदमी हो
  6345. 6:08:24जो उस आईडिया को रिप्रेजेंट करता हो, तो
  6346. 6:08:27यह रियल कोऑपरेशन नहीं होता।
  6347. 6:08:33एक स्ट्रांग अथॉरिटी जो ज्यादा जानता है
  6348. 6:08:37या जिसका पर्सनालिटी पावरफुल होता है वह
  6349. 6:08:41दूसरों को फोर्स या सर्टली इनफ्लुएंस कर
  6350. 6:08:44सकता है अपने सो कॉल्ड आइडियल के लिए काम
  6351. 6:08:49करने को।
  6352. 6:08:51लेकिन यह अलर्ट और जिंदा लोगों का साथ
  6353. 6:08:54मिलकर काम करना नहीं होता।
  6354. 6:08:57जब हर एक इंसान किसी इशू की सच्चाई को खुद
  6355. 6:09:01समझता है तब सबका वह सेम अंडरस्टैंडिंग एक
  6356. 6:09:06एक्शन बन जाती है और वही रियल कोऑपरेशन
  6357. 6:09:09होती
  6358. 6:09:10है। जो इंसान इसलिए कोऑपरेट करता है
  6359. 6:09:14क्योंकि उसने सच को सच झूठ को झूठ और झूठ
  6360. 6:09:18के अंदर छुपी सच्चाई को देखा
  6361. 6:09:22है। वह यह भी जानता है कि कब कोऑपरेट नहीं
  6362. 6:09:26करना है और यह भी उतना ही इंपॉर्टेंट
  6363. 6:09:30है। अगर हर एक इंसान एजुकेशन में एक बेसिक
  6364. 6:09:34बदलाव की जरूरत को समझ जाए और उस सच को
  6365. 6:09:39साफ-साफ देखे जो हम डिस्कस कर रहे हैं। तो
  6366. 6:09:42हम बिना किसी प्रेशर के मिलके काम करेंगे।
  6367. 6:09:47प्रेशर तब होता है जब कोई इंसान एक पॉइंट
  6368. 6:09:50पर अटक जाता है और हिलने को तैयार नहीं
  6369. 6:09:56होता। जब कोई सिर्फ एक आईडिया से कन्विंस
  6370. 6:10:00होता है या अपनी ओपिनियन में अटका होता है
  6371. 6:10:03तब ऑोजिशन पैदा होता है और फिर उसे या
  6372. 6:10:08दूसरों को पर्सुएट करना पड़ता है।
  6373. 6:10:10इनफ्लुएंस करना पड़ता है या फोर्स करना
  6374. 6:10:14पड़ता है अलग सोचने के लिए।
  6375. 6:10:17पर ऐसी सिचुएशन कभी भी नहीं होगी जब हर
  6376. 6:10:21इंसान उस बात की सच्चाई खुद देखता हो।
  6377. 6:10:25लेकिन अगर हम सच को नहीं देखते और सिर्फ
  6378. 6:10:28वर्ड्स या रीजनिंग पर बेस करके एक्शन लेते
  6379. 6:10:31हैं तो फिर कॉन्फ्लिक्ट एग्रीमेंट
  6380. 6:10:36डिसए्रीमेंट सब होगा और सब बेकार एफर्ट बन
  6381. 6:10:40जाता
  6382. 6:10:42है हमें मिलके काम करना बहुत जरूरी है और
  6383. 6:10:47यह बिल्कुल ऐसे है जैसे हम एक घर बना रहे
  6384. 6:10:50हो।
  6385. 6:10:51अगर कुछ लोग बना रहे हैं और कुछ तोड़ रहे
  6386. 6:10:54हैं तो घर कभी नहीं
  6387. 6:10:56बनेगा। इसलिए हमें हर एक को क्लियरली
  6388. 6:11:00समझना होगा कि हम कैसी एजुकेशन चाहते हैं
  6389. 6:11:05जो एक ऐसी जनरेशन तैयार करें जो लाइफ के
  6390. 6:11:09सारे प्रॉब्लम्स को एक होल के रूप में समझ
  6391. 6:11:12सके ना कि अलग-अलग पार्ट्स में।
  6392. 6:11:18ऐसे रियल कोपरेटिव वे में काम करने के लिए
  6393. 6:11:21हमें बार-बार मिलना होगा और ध्यान रखना
  6394. 6:11:24होगा कि हम डिटेल्स में ना अटक
  6395. 6:11:29जाए। जो लोग सीरियसली सही एजुकेशन लाना
  6396. 6:11:32चाहते
  6397. 6:11:33हैं उनकी रिस्पांसिबिलिटी सिर्फ यह नहीं
  6398. 6:11:37है कि वह जो समझे हैं उसे एक्शन में लाएं।
  6399. 6:11:43बल्कि दूसरों को भी उस अंडरस्टैंडिंग तक
  6400. 6:11:46पहुंचने में मदद करें।
  6401. 6:11:49टीचिंग सबसे नोबल प्रोफेशन है। अगर इसे
  6402. 6:11:53प्रोफेशन बोला भी जाए। यह एक आर्ट है जो
  6403. 6:11:57सिर्फ दिमाग से नहीं बल्कि इनफिनिट पेशेंस
  6404. 6:12:01और लॉ से होता
  6405. 6:12:03है। असली एजुकेशन का मतलब होता है हर चीज
  6406. 6:12:07के साथ अपना रिलेशनशिप समझना। पैसे के
  6407. 6:12:12साथ, प्रॉपर्टी के साथ, लोगों के साथ और
  6408. 6:12:17नेचर के
  6409. 6:12:18साथ हमारी पूरी लाइफ के फील्ड
  6410. 6:12:23में ब्यूटी समझने का एक हिस्सा है। लेकिन
  6411. 6:12:27ब्यूटी सिर्फ प्रोपोशन, फॉर्म,
  6412. 6:12:31टेस्ट और बिहेवियर तक सीमित नहीं
  6413. 6:12:34है। ब्यूटी वह स्टेट होती है जहां माइंड
  6414. 6:12:38ने सेल्फ के सेंटर को छोड़ दिया होता है।
  6415. 6:12:41सिंपलीसिटी के पैशन
  6416. 6:12:45में सिंपलीसिटी का कोई एंड नहीं होता। और
  6417. 6:12:49सिंपलीसिटी तभी होती है जब एक ऐसी
  6418. 6:12:52ऑस्टेरिटी हो जो किसी कैलकुलेट की गई
  6419. 6:12:55डिसिप्लिन या सेल्फ डिनायल से ना आई हो।
  6420. 6:13:01यह ऑस्टेरिटी होती है सेल्फ
  6421. 6:13:04अबेंडनमेंट जो सिर्फ लव से पॉसिबल होती
  6422. 6:13:08है। जब हमारे पास लव नहीं होता तब हम एक
  6423. 6:13:12ऐसी सिविलाइजेशन बनाते हैं जहां सिर्फ
  6424. 6:13:15फॉर्म की ब्यूटी ढूंढी जाती
  6425. 6:13:19है। पर उसके अंदर की वाइटिलिटी और सेल्फ
  6426. 6:13:23अबेंडनमेंट की सिंपलीसिटी नहीं होती।
  6427. 6:13:27जब हम गुड वर्क्स, आइडियल्स या बिलीव्स के
  6428. 6:13:30नाम पर अपने आप को सैक्रिफाइस करते हैं तो
  6429. 6:13:34वह भी सेल्फ अबेंडनमेंट नहीं होता।
  6430. 6:13:39यह सब एक्टिविटीज बाहर से सेल्फलेस लगती
  6431. 6:13:43हैं। लेकिन अंदर से सेल्फ अलग-अलग नाम के
  6432. 6:13:47पीछे छुपा होता
  6433. 6:13:49है। सिर्फ एक इनोसेंट माइंड ही अननोन को
  6434. 6:13:52एक्सप्लोर कर सकता है। लेकिन वह इनोसेंस
  6435. 6:13:56जो कैलकुलेट की गई हो जो सिर्फ एक मक के
  6436. 6:14:00कपड़े पहनने या लायन क्लॉथ में छुपी हो।
  6437. 6:14:04वह असली सेल्फ अबेंडनमेंट का पैशन नहीं
  6438. 6:14:07होती।
  6439. 6:14:09जहां से कटसी, जेंटलनेस, हमिलिटी, पेशेंस
  6440. 6:14:13निकलते हैं जो लव के एक्सप्रेशनंस होते
  6441. 6:14:18हैं। ज्यादातर लोग ब्यूटी को सिर्फ उस चीज
  6442. 6:14:22में देखते हैं जो बनाई गई हो या जोड़ी गई
  6443. 6:14:25हो। जैसे ह्यूमन फॉर्म या एक
  6444. 6:14:29टेंपल। हम कहते हैं एक ट्री, एक हाउस या
  6445. 6:14:33एक कर्व लेती रिवर सुंदर है।
  6446. 6:14:38और फिर हम कंपैरिजन के थ्रू जानते हैं कि
  6447. 6:14:41अगली क्या होता है। कम से कम हम सोचते हैं
  6448. 6:14:45कि जानते
  6449. 6:14:46हैं। पर क्या ब्यूटी कंपेयर की जा सकती
  6450. 6:14:50है? क्या ब्यूटी सिर्फ वही होती है जो
  6451. 6:14:53सामने दिखे।
  6452. 6:14:58हम किसी पिक्चर, पोएम या फेस को ब्यूटीफुल
  6453. 6:15:02कहते हैं। क्योंकि हम ऑलरेडी जानते हैं
  6454. 6:15:04ब्यूटी क्या होती है? जो हमें सिखाया गया
  6455. 6:15:08होता है या जो हमें फमिलियर लगता
  6456. 6:15:12है पर क्या ब्यूटी कंपैरिजन के साथ खत्म
  6457. 6:15:16नहीं हो
  6458. 6:15:17जाती? क्या ब्यूटी सिर्फ नोन चीज से मिलती
  6459. 6:15:21पहचान होती है? यह एक ऐसी स्टेट होती है
  6460. 6:15:24जिसमें फॉर्म हो भी सकता है और नहीं भी।
  6461. 6:15:32हम हमेशा ब्यूटी के पीछे भागते हैं और
  6462. 6:15:35अगली चीजों से बचना चाहते हैं और यह एक
  6463. 6:15:39तरफ भागना और दूसरी तरफ से दूर भागना
  6464. 6:15:42अल्टीमेटली इनसेंसिटिविटी पैदा करता
  6465. 6:15:46है। अगर हमें ब्यूटी को समझना है या महसूस
  6466. 6:15:50करना है तो हमें ब्यूटीफुल और अगली दोनों
  6467. 6:15:54के लिए सेंसिटिव होना पड़ेगा।
  6468. 6:15:58एक फीलिंग ना ब्यूटीफुल होती है ना अगली
  6469. 6:16:01वह बस एक फीलिंग होती है
  6470. 6:16:05लेकिन हम उसे अपने रिलीजियस और सोशल
  6471. 6:16:08कंडीशनिंग के थ्रू देखते हैं और उसको लेबल
  6472. 6:16:12दे देते हैं अच्छी फीलिंग बुरी
  6473. 6:16:16फीलिंग और फिर उसे डिस्ट कर देते हैं या
  6474. 6:16:20डिस्ट्रॉय कर देते
  6475. 6:16:23हैं। जब फीलिंग को कोई लेबल नहीं दिया
  6476. 6:16:26जाता तो वह पूरे तरीके से इंटेंस रहती है
  6477. 6:16:30और यही पैशनेट इंटेंसिटी जरूरी होती है उस
  6478. 6:16:35चीज को समझने के लिए जो ना अगली होती है
  6479. 6:16:39ना ऑब्वियस
  6480. 6:16:42ब्यूटी जो चीज सबसे इंपॉर्टेंट है वह है
  6481. 6:16:46सस्टेंड
  6482. 6:16:47फीलिंग ऐसा पैशन जो सिर्फ अपने प्लेजर का
  6483. 6:16:51लस्ट नहीं होता
  6484. 6:16:54यही पैशन ब्यूटी क्रिएट करता है और
  6485. 6:16:58क्योंकि वह किसी से कंपेयर नहीं हो सकता।
  6486. 6:17:01इसका कोई ऑोजिट भी नहीं
  6487. 6:17:04होता। अगर हमें इंसान का टोटल विकास लाना
  6488. 6:17:08है टोटल
  6489. 6:17:10डेवलपमेंट तो हमें कॉन्शियस माइंड के
  6490. 6:17:13साथ-साथ अनकॉन्शियस माइंड को भी समझना
  6491. 6:17:16पड़ेगा।
  6492. 6:17:18सिर्फ कॉन्शियस माइंड को एजुकेट करना बिना
  6493. 6:17:21अनकॉन्शियस को समझे ह्यूमन लाइफ में
  6494. 6:17:24कंट्राडिक्शन लाता है जिसमें फ्रस्ट्रेशन
  6495. 6:17:28और मिजरी होती
  6496. 6:17:30है। हिडन माइंड सुपरफिशियल से ज्यादा
  6497. 6:17:34पावरफुल होता
  6498. 6:17:36है। ज्यादातर टीचर्स सिर्फ इंफॉर्मेशन या
  6499. 6:17:40नॉलेज देने में लगे होते हैं सुपरफिशियल
  6500. 6:17:43माइंड को
  6501. 6:17:45ताकि वह जॉब ले सके और सोसाइटी में एडजस्ट
  6502. 6:17:48हो
  6503. 6:17:49सके। इसलिए हिडन माइंड तक कभी बात पहुंचती
  6504. 6:17:53ही नहीं।
  6505. 6:17:55जो एजुकेशन कहलाता है, वह सिर्फ एक नॉलेज
  6506. 6:17:58का लेयर चढ़ा देता है और टेक्निक सिखाता
  6507. 6:18:03है और थोड़ी सी एबिलिटी देता है
  6508. 6:18:06एनवायरमेंट के साथ एडजस्ट होने
  6509. 6:18:09की। हिडन माइंड सुपरफिशियल माइंड से काफी
  6510. 6:18:13ज्यादा पावरफुल होता है। चाहे सुपरफिशियल
  6511. 6:18:17माइंड कितना भी एजुकेटेड हो या एडजस्ट
  6512. 6:18:20करने के कैपेबल हो।
  6513. 6:18:23और यह हिडन माइंड कोई मिस्टीरियस चीज नहीं
  6514. 6:18:26है। हिडन या अनकॉन्शियस माइंड पुरानी
  6515. 6:18:29रेशियल यानी जाति की यादों का स्टोर हाउस
  6516. 6:18:33होता
  6517. 6:18:36है। हमारे पास्ट
  6518. 6:18:40का रिलीजन सुपरस्टिशन सिंबल्स किसी रेस के
  6519. 6:18:45अजीब
  6520. 6:18:46ट्रेडिशंस होली और नॉन होली लिटरेचर का
  6521. 6:18:50इन्फ्लुएंस एस्पिरेशंस फ्रस्टेशंस हैबिट्स
  6522. 6:18:55और अलग-अलग तरह के
  6523. 6:18:57फूड यह सब अनकॉन्शियस माइंड में बसे होते
  6524. 6:19:02हैं। छुपी और खुली डिजायर्स, उनके पीछे के
  6525. 6:19:06मोटिव्स, होप्स, फिय्स, दुख और
  6526. 6:19:11सुख और बिलीव्स जो सिक्योरिटी की जरूरत से
  6527. 6:19:15बनते हैं जो अलग-अलग फॉर्म्स में
  6528. 6:19:17एक्सप्रेस होते
  6529. 6:19:20हैं। यह सब हिडन माइंड में होते हैं। हिडन
  6530. 6:19:25माइंड के पास यह पुराने पास्ट को रखने की
  6531. 6:19:29एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी पावर होती है और
  6532. 6:19:31फ्यूचर को इनफ्लुएंस करने की भी कैपेसिटी
  6533. 6:19:34होती
  6534. 6:19:35है। इन सबकी झलक सुपरफिशियल माइंड को
  6535. 6:19:39ड्रीम्स या अलग-अलग तरीकों से मिलती है।
  6536. 6:19:43जब वह पूरा बिजी नहीं होता डेली चीजों
  6537. 6:19:46में।
  6538. 6:19:48हिडन माइंड ना कोई सेक्रेट चीज है ना ही
  6539. 6:19:51उससे डरने की जरूरत है और ना ही उसे बाहर
  6540. 6:19:54निकालने के लिए किसी स्पेशलिस्ट की जरूरत
  6541. 6:19:58होती है।
  6542. 6:20:00लेकिन क्योंकि हिडन माइंड इतना पावरफुल
  6543. 6:20:03होता है। सुपरफिशियल माइंड उसे अपनी मर्जी
  6544. 6:20:06से हैंडल नहीं कर सकता।
  6545. 6:20:09सुपरफिशियल माइंड अपने हिडन पार्ट के आगे
  6546. 6:20:12काफी कमजोर होता है। चाहे वह कितनी भी
  6547. 6:20:16कोशिश करें डोमिनेट करने की या उसे
  6548. 6:20:20कंट्रोल करने की सोशल नीड्स के चक्कर में।
  6549. 6:20:24वह सिर्फ सरफेस को छू पाता
  6550. 6:20:27है। इस वजह से सुपरफिशियल और हिडन के बीच
  6551. 6:20:31में एक गैप बन जाता है। एक कंट्राडिक्शन।
  6552. 6:20:36हम डिसिप्लिन, प्रैक्टिसेस या रूल्स के
  6553. 6:20:39थ्रू इस गैप को भरने की कोशिश करते हैं।
  6554. 6:20:42लेकिन यह गैप ऐसे भर नहीं
  6555. 6:20:46सकता। कॉन्शियस माइंड सिर्फ प्रेजेंट
  6556. 6:20:49मोमेंट में बिजी होता है। जबकि अनकॉन्शियस
  6557. 6:20:53माइंड पे कई सेंचुरीज का वेट होता है। और
  6558. 6:20:58उसे किसी छोटी इमीडिएट नीड से नहीं बदला
  6559. 6:21:01जा सकता।
  6560. 6:21:03अनकॉन्शियस में डीप टाइम की क्वालिटी होती
  6561. 6:21:07है और कॉन्शियस माइंड जो रिसेंट कल्चर से
  6562. 6:21:11भरा होता है वह इसे हैंडल नहीं कर सकता
  6563. 6:21:14अपनी अर्जेंसी के
  6564. 6:21:17थ्रू। अगर सेल्फ कंट्राडिक्शन को खत्म
  6565. 6:21:20करना है तो सुपरफिशियल माइंड को यह फैक्ट
  6566. 6:21:23समझना होगा और उससे साइलेंट होना होगा।
  6567. 6:21:28इसका मतलब यह नहीं कि हिडन के अर्ज को
  6568. 6:21:31खुला छोड़ दिया
  6569. 6:21:34जाए। जब सुपरफिशियल और हिडन के बीच
  6570. 6:21:37रेजिस्टेंस नहीं होती तब हिडन जो टाइम के
  6571. 6:21:41पेशेंस के साथ होता है इमीडिएट पे फोर्स
  6572. 6:21:44नहीं
  6573. 6:21:45करता। हिडन जो अनएक्स्लो और समझा नहीं गया
  6574. 6:21:49होता और सुपरफिशियल जो एजुकेटेड होता है।
  6575. 6:21:53प्रेजेंट मोमेंट के चैलेंजेस से टकराते
  6576. 6:21:56हैं।
  6577. 6:21:58सुपरफिशियल रिस्पांस दे सकता है। लेकिन
  6578. 6:22:02क्योंकि दोनों के बीच कंट्राडिक्शन होती
  6579. 6:22:04है। कोई भी एक्सपीरियंस जो सुपरफिशियल
  6580. 6:22:08करता है, वह कॉन्फ्लिक्ट को और बढ़ा देता
  6581. 6:22:13है। यह और एक्सपीरियंस पैदा करता है और
  6582. 6:22:16पास्ट और प्रेजेंट के बीच के गैप को बढ़ा
  6583. 6:22:19जाता
  6584. 6:22:21है। सुपरफिशियल माइंड जब आउटर एक्सपीरियंस
  6585. 6:22:25करता है मिना इनर हिडन को समझे तो यह
  6586. 6:22:29सिर्फ और ज्यादा कॉन्फ्लिक्ट पैदा करता
  6587. 6:22:32है। एक्सपीरियंस माइंड को फ्री नहीं करता
  6588. 6:22:36ना ही उसे रिच बनाता है जैसे हम सोचते
  6589. 6:22:40हैं। जब तक एक्सपीरियंस सिर्फ
  6590. 6:22:43एक्सपीरियंसर को स्ट्रांग बनाता है तब तक
  6591. 6:22:46कॉन्फ्लिक्ट रहता
  6592. 6:22:48है। कंडीशन माइंड जब एक्सपीरियंस करता है
  6593. 6:22:53तो वह सिर्फ अपनी कंडीशनिंग को स्ट्रांग
  6594. 6:22:56करता है और कंट्राडिक्शन और मिजरी को बनाए
  6595. 6:23:00रखता
  6596. 6:23:01है। सिर्फ वही माइंड जो अपने पूरे
  6597. 6:23:04स्ट्रक्चर को समझने के कैपेबल होता है
  6598. 6:23:08उसके लिए ही एक्सपीरियंस फ्री करने वाला
  6599. 6:23:10फैक्टर बन सकता
  6600. 6:23:12है। जब एक बार हिडन माइंड की पावर और
  6601. 6:23:16लेयर्स को समझ लिया जाता है तब डिटेल्स को
  6602. 6:23:20वाइजली और इंटेलिजेंटली देखा जा सकता
  6603. 6:23:24है। सबसे जरूरी चीज है हिडन माइंड को
  6604. 6:23:28समझना ना कि सुपरफिशियल माइंड को सिर्फ
  6605. 6:23:31नॉलेज देना। चाहे वह नॉलेज कितना भी
  6606. 6:23:35यूज़फुल
  6607. 6:23:36हो। हिडन माइंड को समझने से पूरा माइंड
  6608. 6:23:40कॉन्फ्लिक्ट से फ्री हो जाता है और तभी
  6609. 6:23:43रियल इंटेलिजेंस पॉसिबल होती
  6610. 6:23:48है। हमें सुपरफिशियल माइंड को जो डेली
  6611. 6:23:52लाइफ में रहता है उसकी फुल पावर जगानी
  6612. 6:23:55चाहिए और साथ ही हिडन माइंड को भी समझना
  6613. 6:24:01चाहिए। हिडन माइंड को समझने से एक टोटल
  6614. 6:24:05लिविंग होती है। जहां सेल्फ कंट्राडिक्शन
  6615. 6:24:08और उसके दुख सुख के साइकिल खत्म हो जाते
  6616. 6:24:11हैं।
  6617. 6:24:13हिडन माइंड को पहचानना और उसके काम को
  6618. 6:24:16देखना जरूरी है।
  6619. 6:24:18लेकिन उसमें ही अटक जाना या उसे ज्यादाेंस
  6620. 6:24:23देना भी गलत
  6621. 6:24:24है। सिर्फ जब माइंड सुपरफिशियल और हिडन
  6622. 6:24:28दोनों को समझता है। तभी वह अपने लिमिटेशंस
  6623. 6:24:32के परे जा सकता है और उस ब्लिस को डिस्कवर
  6624. 6:24:36कर सकता है जो टाइम का हिस्सा नहीं होती।
  6625. 6:24:51अगर तुम खुद को जानना सिर्फ इसलिए जरूरी
  6626. 6:24:55समझते हो क्योंकि मैंने या किसी और ने
  6627. 6:24:57बोला है तो मुझे डर है कि हमारे बीच का हर
  6628. 6:25:02तरह का कनेक्शन यहीं खत्म हो जाता है।
  6629. 6:25:09लेकिन अगर हम दोनों मान लें कि खुद को
  6630. 6:25:12समझना बहुत इंपॉर्टेंट है तो फिर हमारा
  6631. 6:25:16रिश्ता कुछ और हो जाता है। फिर हम साथ में
  6632. 6:25:21खुशी से ध्यान से और समझदारी से एक्सप्लोर
  6633. 6:25:25कर सकते
  6634. 6:25:26हैं। मैं तुम्हारा ट्रस्ट नहीं
  6635. 6:25:30मांगता। मैं अपने आप को किसी अथॉरिटी के
  6636. 6:25:33रूप में नहीं रख रहा। मेरे पास तुम्हें
  6637. 6:25:36सिखाने के लिए कुछ नहीं है। ना कोई नई
  6638. 6:25:40फिलॉसफी, ना कोई नया
  6639. 6:25:43सिस्टम, ना कोई नया रास्ता रियलिटी तक।
  6640. 6:25:47वैसे भी सच तक कोई रास्ता होता ही नहीं।
  6641. 6:25:52हर तरीके की अथॉरिटी स्पेशली थॉट और
  6642. 6:25:56अंडरस्टैंडिंग के फील्ड में सबसे
  6643. 6:25:59डिस्ट्रक्टिव और बुरी चीज होती है।
  6644. 6:26:03लीडर्स अपने फॉलोअर्स को बर्बाद कर देते
  6645. 6:26:06हैं और फॉलोअर्स अपने लीडर्स को। तुम्हें
  6646. 6:26:10खुद का टीचर और खुद का डिसाइपल बनना
  6647. 6:26:13पड़ेगा। तुम्हें हर वह चीज क्वेश्चन करनी
  6648. 6:26:16पड़ेगी जो इंसान ने वैलुएबल या नेसेसरी
  6649. 6:26:19मानी है।
  6650. 6:26:21अगर तुम किसी को फॉलो नहीं करते तो
  6651. 6:26:24तुम्हें बहुत अकेला लगता है। तुम अकेले ही
  6652. 6:26:29रहो। तुम्हें अकेला होने का डर क्यों लगता
  6653. 6:26:33है? क्योंकि तुम खुद के सामने आ जाते हो।
  6654. 6:26:37जैसे तुम हो और तुम्हें लगता है तुम खाली
  6655. 6:26:40हो, बुरे हो, बेवकूफ हो, बेचारे हो,
  6656. 6:26:45गिल्टी हो और छोटी सोच वाले हो।
  6657. 6:26:50एक दूसरे हाथ का पुराना इंसान इस सच को
  6658. 6:26:54देखो भागो मत।
  6659. 6:26:57जब भी तुम भागते हो तभी डर शुरू होता
  6660. 6:27:03है। जब हम अपने आप को समझने की कोशिश करते
  6661. 6:27:07हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हम दुनिया से
  6662. 6:27:11अलग हो जा रहे हैं। यह कोई गलत प्रोसेस
  6663. 6:27:14नहीं
  6664. 6:27:16है। पूरे वर्ल्ड के लोग वही डेली
  6665. 6:27:19प्रॉब्लम्स में फंसे होते हैं जिसमें हम
  6666. 6:27:23हैं। तो जब हम खुद को समझने की कोशिश करते
  6667. 6:27:27हैं तो हम पागल नहीं बन
  6668. 6:27:30रहे क्योंकि इंडिविजुअल और कलेक्टिव में
  6669. 6:27:33कोई फर्क नहीं है। यह एक सच है। मैं वैसे
  6670. 6:27:38ही दुनिया बनाता हूं जैसे मैं हूं। तो चलो
  6671. 6:27:42हम इस पार्ट और होल के बीच के फाइट में
  6672. 6:27:46गुम ना हो जाए।
  6673. 6:27:48मुझे अपने पूरे सेल्फ के फील्ड को देखना
  6674. 6:27:51पड़ेगा जो कि इंडिविजुअल और सोसाइटी का
  6675. 6:27:54कॉन्शियसनेस है। सिर्फ
  6676. 6:27:57तब जब माइंड इन दोनों के पार चला जाता
  6677. 6:28:02है। तभी मैं अपने लिए एक ऐसी रोशनी बन
  6678. 6:28:05सकता हूं जो कभी बुझती नहीं। तो हम खुद को
  6679. 6:28:10समझना कहां से शुरू करें? यह मैं हूं।
  6680. 6:28:15और मैं कैसे अपने आप को स्टडी करूं? कैसे
  6681. 6:28:19ऑब्जर्व
  6682. 6:28:22करूं? कैसे देखूं कि अंदर क्या हो रहा है।
  6683. 6:28:26मैं अपने आप को सिर्फ रिलेशनशिप में ही
  6684. 6:28:29ऑब्जर्व कर सकता हूं। क्योंकि जिंदगी पूरी
  6685. 6:28:32रिलेशनशिप ही
  6686. 6:28:35है। किसी कोने में बैठ के मेडिटेट करने से
  6687. 6:28:39कोई फायदा नहीं। मैं अकेला तो रह ही नहीं
  6688. 6:28:42सकता।
  6689. 6:28:44मैं तभी एक्सिस्ट करता हूं जब मैं लोगों,
  6690. 6:28:47चीजों और आइडियाज से रिलेट करता हूं। और
  6691. 6:28:52जब मैं अपने इन रिश्तों को समझने लगता हूं
  6692. 6:28:55तभी मैं खुद को समझने लगता हूं। बाकी सब
  6693. 6:28:59अंडरस्टैंडिंग सिर्फ सोच
  6694. 6:29:02है। और मैं खुद को सोच के रूप में समझ
  6695. 6:29:06नहीं
  6696. 6:29:08सकता। मैं कोई एब्स्ट्रैक्ट चीज नहीं हूं।
  6697. 6:29:12इसलिए मुझे खुद को वैसे ही देखना होगा
  6698. 6:29:15जैसे मैं
  6699. 6:29:16हूं ना कि वैसे जैसे मैं बनना चाहता हूं।
  6700. 6:29:22समझना कोई माइंड का इंटेलेक्चुअल काम नहीं
  6701. 6:29:25है। खुद के बारे में नॉलेज जमा करना और
  6702. 6:29:28खुद को समझना यह दोनों अलग चीजें
  6703. 6:29:32हैं। जो भी नॉलेज तुम खुद के बारे में जमा
  6704. 6:29:36करते हो, वह हमेशा पास्ट की होती है। और
  6705. 6:29:40एक माइंड जो पास्ट से भरा होता है, वह दुख
  6706. 6:29:43भरा माइंड होता है। खुद को समझना वैसा
  6707. 6:29:46नहीं
  6708. 6:29:47है। जैसे लैंग्वेज या साइन सीखना जिसमें
  6709. 6:29:52तुम्हें चीजें याद रखनी पड़ती हैं।
  6710. 6:29:55लेकिन साइकोलॉजिकल फील्ड में खुद के बारे
  6711. 6:29:58में सीखना हमेशा प्रेजेंट में होता है और
  6712. 6:30:02नॉलेज सिर्फ पास्ट होती है। और क्योंकि हम
  6713. 6:30:07ज्यादातर पास्ट में जीते हैं और उससे ही
  6714. 6:30:11खुश
  6715. 6:30:12हैं। इसलिए नॉलेज को हम बहुत इंपॉर्टेंट
  6716. 6:30:15समझने लगते हैं। इस वजह से हम क्लेवर
  6717. 6:30:19इंटेलिजेंट लोगों की पूजा करते हैं। लेकिन
  6718. 6:30:22अगर तुम हर वक्त सीख रहे हो हर मिनट
  6719. 6:30:25देखकर, सुनकर करके और महसूस करके तो तुम
  6720. 6:30:30पाओगे कि सीखना एक कंटीन्यूअस मूवमेंट है।
  6721. 6:30:34जिसमें पास्ट का कोई रोल नहीं होता।
  6722. 6:30:39अगर तुम कहते हो कि मैं धीरे-धीरे
  6723. 6:30:41सीखूंगा, थोड़ा थोड़ा ऐड करते जाऊंगा, तो
  6724. 6:30:45तुम अभी के अपने आप को नहीं देख रहे बल्कि
  6725. 6:30:49पास्ट के नॉलेज के फिल्टर से देख रहे
  6726. 6:30:52हो। सीखने के लिए बहुत सेंसिटिविटी चाहिए
  6727. 6:30:56और कोई भी सेंसिटिविटी नहीं हो सकती।
  6728. 6:31:00जब पास्ट का आईडिया प्रेजेंट को कंट्रोल
  6729. 6:31:03करता
  6730. 6:31:04है तब माइंड क्विक फ्लेक्सिबल अलर्ट नहीं
  6731. 6:31:10रहता। हम में से ज्यादा लोग फिजिकली भी
  6732. 6:31:14सेंसिटिव नहीं है। हम ज्यादा खा लेते हैं।
  6733. 6:31:17अच्छी डाइट की परवाह नहीं करते। ज्यादा
  6734. 6:31:20स्मोक और ड्रिंक करते हैं और अपने बॉडी को
  6735. 6:31:23डल और इनसेंसिटिव बना लेते
  6736. 6:31:26हैं। जब बॉडी ही डल हो जाती है तो माइंड
  6737. 6:31:30अलर्ट क्लियर कैसे
  6738. 6:31:34बनेगा? हो सकता है तुम कुछ पर्सनल चीजों
  6739. 6:31:37के लिए सेंसिटिव हो।
  6740. 6:31:39लेकिन जिंदगी के हर एस्पेक्ट के लिए पूरी
  6741. 6:31:43तरह सेंसिटिव होने के लिए बॉडी और माइंड
  6742. 6:31:46में अलगपन नहीं चाहिए होता।
  6743. 6:31:51यह एक पूरी मूवमेंट होती
  6744. 6:31:54है। किसी भी चीज को समझने के लिए तुम्हें
  6745. 6:31:58उसके साथ रहना पड़ता है। उसको ऑब्जर्व
  6746. 6:32:01करना पड़ता
  6747. 6:32:02है। उसके हर हिस्सा, उसकी नेचर, उसकी
  6748. 6:32:06स्ट्रक्चर, उसके मूवमेंट को जानना पड़ता
  6749. 6:32:10है। क्या तुमने कभी अपने साथ रहकर देखने
  6750. 6:32:14की कोशिश की है? अगर किया है तो तुम
  6751. 6:32:18देखोगे कि तुम्हारा सेल्फ कोई रूखी सूखी
  6752. 6:32:22चीज नहीं है। वह एक जिंदा चीज है हर वक्त
  6753. 6:32:26नहीं। और एक जिंदा चीज के साथ रहने के लिए
  6754. 6:32:30तुम्हारा माइंड भी जिंदा होना चाहिए।
  6755. 6:32:33और माइंड जिंदा तब तक नहीं होता जब वह
  6756. 6:32:37ओपिनियंस,
  6757. 6:32:39जजमेंट्स और वैल्यू्यूज में फंसा होता
  6758. 6:32:43है। अपने माइंड और दिल की मूवमेंट को
  6759. 6:32:46देखने के लिए, अपने पूरे बीइंग को देखने
  6760. 6:32:50के लिए तुम्हारा माइंड फ्री होना चाहिए।
  6761. 6:32:56ना कि वह जो एग्री करता हो या
  6762. 6:33:00डिसए्री ना जो साइड्स ले आर्गुमेंट्स में
  6763. 6:33:04ना ही बस वर्ड्स पर
  6764. 6:33:06झगड़े बल्कि ऐसा माइंड चाहिए जो समझने की
  6765. 6:33:10इच्छा से देखे और यह करना मुश्किल होता
  6766. 6:33:15है। क्योंकि हम में से ज्यादा लोग खुद को
  6767. 6:33:18देखना या सुनना भूल गए हैं। वैसे ही जैसे
  6768. 6:33:23हम एक नदी की खूबसूरती देखना भूल गए हैं
  6769. 6:33:26या पेड़ों के बीच से गुजरती हवा को सुनना
  6770. 6:33:29भूल गए
  6771. 6:33:30हैं। जब हम किसी चीज को कंडेम या जस्टिफाई
  6772. 6:33:35करते हैं तब हम क्लियर नहीं देख सकते।
  6773. 6:33:41और जब हमारा माइंड लगातार बोलता रहता है
  6774. 6:33:44तब भी हम देख नहीं सकते जो
  6775. 6:33:47है हम सिर्फ वह देखते हैं जो हमने अपने
  6776. 6:33:50बारे में इमेजिन किया होता है। हर एक
  6777. 6:33:54इंसान के पास एक इमेज होती है कि वह क्या
  6778. 6:33:58है या क्या होना चाहिए और वही इमेज वही
  6779. 6:34:02फोटो हमें वैसे देखने से रोकती है जैसे हम
  6780. 6:34:06वाकई
  6781. 6:34:08हैं। दुनिया की सबसे मुश्किल चीजों में से
  6782. 6:34:11एक है किसी भी चीज को सिंपल तरीकों से
  6783. 6:34:16देखना। हमारा माइंड बहुत कॉम्प्लेक्स हो
  6784. 6:34:19गया है और हमने सिंपलीसिटी का टच खो दिया
  6785. 6:34:23है। मैं यह सिंपलीसिटी कपड़ों या खाने में
  6786. 6:34:28नहीं कह रहा। सिर्फ लायन क्लॉथ पहनना या
  6787. 6:34:32फास्टिंग करके रिकॉर्ड तोड़ना यह सब बचपना
  6788. 6:34:36है जो संत करते हैं। मैं उस सिंपलीसिटी की
  6789. 6:34:40बात कर रहा हूं जो बिना डरे सीधा देख
  6790. 6:34:45सके। जो खुद को वैसे देख सके जैसे हम हैं।
  6791. 6:34:49बिना किसी झूठ के बिना भाग जाने
  6792. 6:34:53के। अगर हम झूठ बोलते हैं तो कह पाएं। हां
  6793. 6:34:58मैंने झूठ बोला ना कि उसे छुपाएं या उससे
  6794. 6:35:02भाग
  6795. 6:35:03जाए और खुद को समझने के लिए बहुत ज्यादा
  6796. 6:35:06ह्यूमिलिटी चाहिए। अगर तुम शुरू ही यह कह
  6797. 6:35:10के करते हो कि मैं खुद को जानता हूं तो
  6798. 6:35:14तुमने खुद को सीखना तुरंत बंद कर दिया। और
  6799. 6:35:18अगर तुम कहते हो कि मेरे बारे में क्या ही
  6800. 6:35:22सीखना है। मैं तो सिर्फ यादों, आइडियाज
  6801. 6:35:27एक्सपीरियंसेस और ट्रेडिशंस का बंडल
  6802. 6:35:31हो तो तुमने सीखना फिर से बंद कर
  6803. 6:35:36दिया। जब भी तुम कुछ अचीव कर लेते हो तो
  6804. 6:35:40तुम्हारे अंदर इनोसेंस और ह्यूमिलिटी खत्म
  6805. 6:35:43हो जाती
  6806. 6:35:45है। जैसे ही तुम कंक्लूजन ले लेते हो या
  6807. 6:35:49नॉलेज के थ्रू देखना शुरू करते हो तुम
  6808. 6:35:52खत्म हो जाते हो।
  6809. 6:35:54क्योंकि फिर तुम हर जिंदा चीज को पुरानी
  6810. 6:35:58नजर से देखते हो।
  6811. 6:36:00लेकिन अगर तुम्हारे पास कोई बेस नहीं है,
  6812. 6:36:04कोई सर्टेनिटी नहीं है, कोई अचीवमेंट नहीं
  6813. 6:36:07है तो तुम फ्री हो।
  6814. 6:36:12देखने के लिए, सीखने के लिए और जब तुम
  6815. 6:36:16फ्रीडम से देखते हो तो हर बार चीज नई होती
  6816. 6:36:20है। एक ओवर कॉन्फिडेंट आदमी अंदर से मर
  6817. 6:36:24चुका होता है। लेकिन हम कैसे फ्री होकर
  6818. 6:36:27देखें और सीखें। जब हमारा माइंड जन्म से
  6819. 6:36:32लेकर मौत तक एक कल्चर के
  6820. 6:36:35पैटर्न मैं के पैटर्न में बना होता
  6821. 6:36:38है। सदियों से हम
  6822. 6:36:41नेशनलिटी, कास्ट, क्लास, ट्रेडिशन,
  6823. 6:36:45रिलीजन, लैंग्वेज, एजुकेशन, लिटरेचर,
  6824. 6:36:50आर्ट, कस्टम्स,
  6825. 6:36:52प्रोपेगेंडा, इकोनॉमिक
  6826. 6:36:55प्रेशर, खाने, मौसम, परिवार, दोस्तों,
  6827. 6:37:01एक्सपीरियंसेस और हर पॉसिबल इन्फ्लुएंस से
  6828. 6:37:04कंडीशन होते आए हैं। इसलिए हम हर प्रॉब्लम
  6829. 6:37:09को अपने कंडीशनिंग के थ्रू ही देखते
  6830. 6:37:14हैं। क्या तुम्हें पता है कि तुम कंडीशंड
  6831. 6:37:18हो? यह पहला सवाल है जो तुम्हें खुद से
  6832. 6:37:21पूछना
  6833. 6:37:23चाहिए। ना कि यह कैसे फ्री हो कंडीशनिंग
  6834. 6:37:28से। हो सकता है तुम कभी फ्री ना हो। और
  6835. 6:37:32अगर तुम कहते हो मुझे फ्री होना ही है।
  6836. 6:37:37तो तुम किसी और कंडीशनिंग के ट्रैप में
  6837. 6:37:40फंस जाते हो। तो क्या तुम अवेयर हो कि तुम
  6838. 6:37:43कंडीशंड हो?
  6839. 6:37:46क्या तुम्हें पता है कि जब तुम एक ट्री को
  6840. 6:37:49देखते हो और कहते हो यह ओक ट्री है या यह
  6841. 6:37:54बरगद का पेड़ है तो वह नाम जो कि नॉलेज है
  6842. 6:37:59तुम्हारे और ट्री के बीच आ जाती
  6843. 6:38:02है उस ट्री को वाकई महसूस करने के लिए
  6844. 6:38:06तुम्हें उसे हाथ लगाना पड़ता है और उस नाम
  6845. 6:38:10का कोई काम
  6846. 6:38:12नहीं तुम्हें कैसे पता चलता चलता है कि
  6847. 6:38:15तुम कंडीशंड हो। कौन बताता है
  6848. 6:38:19तुम्हें? जैसे तुम्हें भूख कैसे लगती है
  6849. 6:38:23ना कि थरी के रूप में बल्कि वाकई महसूस
  6850. 6:38:28करके। वैसे ही तुम्हें कैसे पता चलता है
  6851. 6:38:31कि तुम कंडीशंड
  6852. 6:38:33हो? क्या वह तुम्हारे रिएक्शन से समझ आता
  6853. 6:38:36है? जब कोई चैलेंज आता
  6854. 6:38:40है, तुम हर चैलेंज का रिस्पांस देते हो
  6855. 6:38:44अपनी कंडीशनिंग के हिसाब से।
  6856. 6:38:47और क्योंकि तुम्हारी कंडीशनिंग अधूरी है
  6857. 6:38:50तो तुम्हारा रिस्पांस भी हमेशा अधूरा ही
  6858. 6:38:54होता
  6859. 6:38:57है। जब तुम इस बात को महसूस करते हो तो
  6860. 6:39:01क्या जाति, धर्म और कल्चर का यह कंडीशनिंग
  6861. 6:39:04तुम्हें एक कैद जैसा लगता
  6862. 6:39:07है। सिर्फ एक कंडीशनिंग लो। जैसे
  6863. 6:39:14नेशनलिटी और उसको सीरियसली पूरी तरह महसूस
  6864. 6:39:18करो और देखो क्या तुम्हें उसमें मजा आता
  6865. 6:39:22है या तुम उसके खिलाफ हो जाते हो और अगर
  6866. 6:39:26तुम उसके खिलाफ हो जाते हो तो क्या तुम हर
  6867. 6:39:30कंडीशनिंग से निकलना चाहते हो अगर तुम
  6868. 6:39:34अपने कंडीशनिंग से खुश हो तो ऑब्वियसली
  6869. 6:39:38तुम कुछ नहीं करोगे
  6870. 6:39:41लेकिन अगर तुम खुश नहीं हो तो जैसे ही तुम
  6871. 6:39:44अवेयर होते हो तुम्हें समझ आता है कि तुम
  6872. 6:39:47कभी भी कुछ भी उसके बिना नहीं करते कभी भी
  6873. 6:39:52नहीं और इसलिए तुम हमेशा पास्ट में जी रहे
  6874. 6:39:57होते
  6875. 6:39:59हो मृत चीजों के
  6876. 6:40:03साथ तुम तभी देख पाते हो कि तुम कंडीशन हो
  6877. 6:40:07जब प्लेजर के कंटिन्यू होने में या पेन से
  6878. 6:40:12बचने में कॉन्फ्लिक्ट होता
  6879. 6:40:16है। अगर सब कुछ तुम्हारे आसपास परफेक्ट
  6880. 6:40:19हो, तुम्हारी वाइफ तुमसे प्यार करती हो,
  6881. 6:40:22तुम उससे प्यार करते हो। अच्छा घर हो,
  6882. 6:40:26अच्छे बच्चे हो, पैसा हो, तो तुम्हें अपने
  6883. 6:40:30कंडीशनिंग का बिल्कुल भी पता नहीं चलता।
  6884. 6:40:33लेकिन जैसे ही कोई डिस्टरबेंस होती है
  6885. 6:40:37जैसे वाइफ किसी और की तरफ देखती है या
  6886. 6:40:41पैसा चला जाता है या वॉर का डर हो या कोई
  6887. 6:40:45और पेन या एंग्जायटी हो तब तुम्हें समझ
  6888. 6:40:48आता है कि तुम कंडीशंड हो।
  6889. 6:40:52जब तुम किसी भी डिस्टरबेंस से लड़ते हो या
  6890. 6:40:56किसी बाहर या अंदर के खतरे से अपने आप को
  6891. 6:40:59बचाते हो तब तुम्हें पता चलता है कि तुम
  6892. 6:41:03कंडीशंड
  6893. 6:41:05हो और क्योंकि ज्यादातर लोग ज्यादातर वक्त
  6894. 6:41:09डिस्टर्बड रहते हैं। चाहे ऊपर ऊपर से हो
  6895. 6:41:12या अंदर से।
  6896. 6:41:15यही डिस्टरबेंस दिखाती है कि हम कंडीशंड
  6897. 6:41:20हैं। जब तक एक जानवर को प्यार मिलता रहता
  6898. 6:41:23है, वह अच्छा रिएक्ट करता है। लेकिन जैसे
  6899. 6:41:26ही उसे गुस्सा दिलाया जाता है, उसकी पूरी
  6900. 6:41:31वायलेंस बाहर आ जाती
  6901. 6:41:33है। हम जिंदगी, पॉलिटिक्स, इकोनमी, दुनिया
  6902. 6:41:38की हॉरर, ब्रूटलिटी, दुख और अपने अंदर के
  6903. 6:41:43दुख से डिस्टर्ब रहते
  6904. 6:41:47हैं। और तब हमें समझ आता है कि हम कितने
  6905. 6:41:51छोटी सोच में, कंडीशनिंग में फंसे हुए
  6906. 6:41:54हैं। तो अब हम क्या करें?
  6907. 6:42:00क्या उस डिस्टरबेंस को एक्सेप्ट करके उसके
  6908. 6:42:03साथ
  6909. 6:42:05जिए जैसे ज्यादातर लोग करते
  6910. 6:42:08हैं। जैसे कोई पीठ का दर्द हो जाए और हम
  6911. 6:42:12उसके साथ जीना सीख
  6912. 6:42:15जाए। क्या हम बस सह
  6913. 6:42:18लें? हम सब में एक आदत होती है हर चीज सह
  6914. 6:42:22लेने
  6915. 6:42:23की। उसे नॉर्मल मानने की और ब्लेम करने
  6916. 6:42:27की। सरकमस्टेंससेस
  6917. 6:42:30पर काश सब कुछ ठीक होता तो मैं अलग होता।
  6918. 6:42:35हम कहते हैं या मुझे एक मौका दो मैं अपने
  6919. 6:42:39आप को पूरा कर
  6920. 6:42:41लूंगा या मैं इस पूरी नाइंसाफी से डूबा
  6921. 6:42:45हुआ
  6922. 6:42:47हूं। हम हमेशा अपने दुख का ब्लेम किसी और
  6923. 6:42:50पर डाल देते हैं या एनवायरमेंट या
  6924. 6:42:53इकोनॉमिक हालत पे।
  6925. 6:42:57अगर कोई डिस्टरबेंस को सह लेता है तो इसका
  6926. 6:43:01मतलब है उसका माइंड डल हो गया है। जैसे
  6927. 6:43:04कोई इतनी खूबसूरती देख चुका हो कि अब वह
  6928. 6:43:08नोटिस ही नहीं करता। वह बेपरवाह हो जाता
  6929. 6:43:11है, हार्ड हो जाता है। उसका माइंड और भी
  6930. 6:43:15ज्यादा डल हो जाता
  6931. 6:43:18है। और अगर हम डिस्टरबेंस सह नहीं पाते तो
  6932. 6:43:22हम उसे भागने लगते
  6933. 6:43:25हैं। कोई ड्रग लेके किसी पॉलिटिकल ग्रुप
  6934. 6:43:29में जाके चिल्ला के लिख के फुटबॉल मैच देख
  6935. 6:43:34के मंदिर या चर्च
  6936. 6:43:36जाके या किसी और तरीके के मजे ढूंढ
  6937. 6:43:40के हम एक्चुअल फैक्ट से भाग क्यों जाते
  6938. 6:43:43हैं? हम डेथ से डरते
  6939. 6:43:47हैं। मान लो बस एग्जांपल के
  6940. 6:43:51लिए तो हम हर तरह की थ्यरी होप्स, बिलीव्स
  6941. 6:43:57बना लेते हैं ताकि डेथ को छुपा सके।
  6942. 6:44:01लेकिन फैक्ट फिर भी वही होता
  6943. 6:44:05है। किसी फैक्ट को समझने के लिए हमें उसे
  6944. 6:44:09देखना पड़ता है। उसे भागना नहीं पड़ता।
  6945. 6:44:14ज्यादातर लोग जिंदगी से भी डरते हैं और
  6946. 6:44:18मरने से
  6947. 6:44:20भी। हम अपने परिवार के लिए डरते हैं। लोग
  6948. 6:44:24क्या सोचेंगे उससे डरते हैं। अपनी जॉब,
  6949. 6:44:27अपनी सिक्योरिटी खो देने से डरते हैं। और
  6950. 6:44:31हजारों और चीजों से डरते
  6951. 6:44:34हैं। सिंपल बात यह है कि हम डरते हैं। यह
  6952. 6:44:38नहीं कि हम इस या उससे डरते हैं।
  6953. 6:44:43अब हम उस फैक्ट का सामना क्यों नहीं कर
  6954. 6:44:46पाते? तुम किसी फैक्ट का सामना सिर्फ
  6955. 6:44:49प्रेजेंट में ही कर सकते हो। और अगर
  6956. 6:44:53तुम उसे कभी प्रेजेंट में ही आने नहीं
  6957. 6:44:57देते। क्योंकि तुम हमेशा उसे भाग रहे हो
  6958. 6:45:00तो तुम कभी सामना नहीं कर सकते।
  6959. 6:45:05और क्योंकि हमने एस्केप का इतना बड़ा
  6960. 6:45:07नेटवर्क बना रखा है। हम एस्केप करना ही
  6961. 6:45:10हैबिट बना चुके हैं। अगर तुम थोड़े भी
  6962. 6:45:14सेंसिटिव हो, थोड़े भी सीरियस हो, तो तुम
  6963. 6:45:18सिर्फ अपने कंडीशनिंग को नहीं देखोगे
  6964. 6:45:21बल्कि यह भी देखोगे कि इसका रिजल्ट कितना
  6965. 6:45:25डेंजरस है। यह कितनी हेट रेड और ब्रूटलिटी
  6966. 6:45:29लाता है। तो फिर अगर तुम देखते हो
  6967. 6:45:32कंडीशनिंग का डेंजर तो तुम एक्शन क्यों
  6968. 6:45:35नहीं लेते? क्या तुम आलसी
  6969. 6:45:39हो? आलसी मतलब जिसमें एनर्जी नहीं है।
  6970. 6:45:42लेकिन अगर तुम्हारे सामने कोई तुरंत
  6971. 6:45:45फिजिकल डेंजर हो जैसे रास्ते में सांप हो
  6972. 6:45:49या खाई हो या आग हो तो तुम्हारे पास तुरंत
  6973. 6:45:53एनर्जी आ जाती
  6974. 6:45:55है। तो कंडीशनिंग का डेंजर देखकर तुम मे
  6975. 6:45:59क्यों नहीं करते?
  6976. 6:46:00अगर तुम देखते हो कि नेशनलिज्म तुम्हारी
  6977. 6:46:04खुद की सिक्योरिटी के लिए खतरा है तो क्या
  6978. 6:46:07तुम कुछ नहीं करते? आंसर यह है तुम देखते
  6979. 6:46:11ही
  6980. 6:46:13नहीं। हो सकता है तुम सोच के एनालाइज करके
  6981. 6:46:17यह समझते हो कि नेशनलिज्म सिर्फ
  6982. 6:46:20डिस्ट्रक्शन लाता
  6983. 6:46:22है। लेकिन उसमें कोई इमोशनल फील नहीं
  6984. 6:46:25होती।
  6985. 6:46:27सिर्फ जब इमोशनल फील होती है तभी तुम
  6986. 6:46:30एक्शन लेते
  6987. 6:46:31हो। अगर तुम कंडीशनिंग के डेंजर को सिर्फ
  6988. 6:46:34आईडिया के रूप में देखते हो तो तुम कभी
  6989. 6:46:37कुछ नहीं करोगे।
  6990. 6:46:40जब डेंजर सिर्फ एक आईडिया होता है तो
  6991. 6:46:43आईडिया और एक्शन के बीच कॉन्फ्लिक्ट होता
  6992. 6:46:47है और वही कॉन्फ्लिक्ट तुम्हारी एनर्जी
  6993. 6:46:50छीन लेता
  6994. 6:46:52है। सिर्फ तभी तुम कुछ करते हो जब तुम
  6995. 6:46:56कंडीशनिंग को तुरंत देखते हो। जैसे तुम एक
  6996. 6:47:01खाई को देखते हो।
  6997. 6:47:03तो देखना ही एक्शन
  6998. 6:47:05है। ज्यादातर लोग जिंदगी से बिना ध्यान
  6999. 6:47:09दिए गुजर जाते हैं। बस एनवायरमेंट के
  7000. 6:47:12हिसाब से रिएक्ट करते हैं। जहां उनका पालन
  7001. 6:47:17पोषण हुआ है
  7002. 6:47:18और यह रिएक्शन और ज्यादा बॉन्डेज बनाता
  7003. 6:47:22है। बंधन और कंडीशनिंग बढ़ाता है।
  7004. 6:47:27लेकिन जैसे ही तुम अपना पूरा अटेंशन
  7005. 6:47:30कंडीशनिंग पर देते हो
  7006. 6:47:33तुम देखोगे कि तुम पास्ट से बिल्कुल फ्री
  7007. 6:47:36हो गए हो। वह अपने आप गिर जाता
  7008. 6:47:40है। पिछली बार हमने कहा था कि जॉय प्लेजर
  7009. 6:47:44से बिल्कुल अलग होती है। तो चलो देखते हैं
  7010. 6:47:47प्लेजर में क्या होता है। और क्या ऐसी
  7011. 6:47:51दुनिया में जीना पॉसिबल है जहां प्लेजर ना
  7012. 6:47:54हो। लेकिन एक जबरदस्त जॉय हो, ब्लिस हो।
  7013. 6:48:01हम सब किसी ना किसी तरीके से प्लेजर के
  7014. 6:48:04पीछे भाग रहे
  7015. 6:48:06हैं। चाहे वह इंटेलेक्चुअल हो, सेंस हो या
  7016. 6:48:13कल्चरल। रिफॉर्म करने का प्लेजर, दूसरों
  7017. 6:48:17को कहने का प्लेजर कि क्या करना चाहिए?
  7018. 6:48:21सोसाइटी के बुरे काम ठीक करने का प्लेजर,
  7019. 6:48:25अच्छा काम करने का प्लेजर, ज्यादा नॉलेज
  7020. 6:48:28का, ज्यादा फिजिकल सेटिस्फेक्शन का,
  7021. 6:48:31ज्यादा एक्सपीरियंस का, ज्यादा लाइफ को
  7022. 6:48:34समझने का
  7023. 6:48:36प्लेजर और माइंड के सब चालाक क्लेवर
  7024. 6:48:41खेल। और लास्ट में सबसे बड़ा प्लेजर है
  7025. 6:48:45गॉड को पाना।
  7026. 6:48:49प्लेजर ही सोसाइटी का स्ट्रक्चर है। बचपन
  7027. 6:48:52से लेकर डेथ तक हम छुप के चालाक तरीके से
  7028. 6:48:58या क्लियरली प्लेजर को ढूंढते रहते हैं।
  7029. 6:49:02तो जो भी तुम्हारा प्लेजर का फॉर्म हो यह
  7030. 6:49:05बहुत जरूरी है कि तुम उसे क्लियरली समझो।
  7031. 6:49:11क्योंकि वही तुम्हारी जिंदगी को शेप करता
  7032. 6:49:15है। इसलिए हमें प्लेजर को बहुत पास से,
  7033. 6:49:19बहुत क्लोज से, बहुत सॉफ्टली और केयरफुली
  7034. 6:49:22देखना चाहिए।
  7035. 6:49:24क्योंकि प्लेजर को ढूंढना और फिर उससे
  7036. 6:49:28पलना और चलना जिंदगी की बेसिक नीड बन चुकी
  7037. 6:49:33है और उसके बिना जीवन बोरिंग बेकार अकेला
  7038. 6:49:38और मीनिंगलेस लगता
  7039. 6:49:41है। तुम पूछ सकते हो तो फिर जिंदगी को
  7040. 6:49:45प्लेजर से ही क्यों ना चलने दें?
  7041. 6:49:48सिंपल रीजन यह है कि प्लेजर के साथ पेन,
  7042. 6:49:52फ्रस्ट्रेशन, दुख और डर आता
  7043. 6:49:56है और डर से वायलेंस भी निकलता
  7044. 6:50:00है। अगर तुम ऐसे ही जीना चाहते हो तो वैसे
  7045. 6:50:04ही जियो।
  7046. 6:50:06दुनिया वैसे भी वैसे ही जी रही है।
  7047. 6:50:11लेकिन अगर तुम दुख से फ्री होना चाहते हो
  7048. 6:50:14तो तुम्हें प्लेजर के पूरे स्ट्रक्चर को
  7049. 6:50:16समझना
  7050. 6:50:17पड़ेगा। प्लेजर को समझने का मतलब यह नहीं
  7051. 6:50:21कि उसे रिजेक्ट करना है। हम उसे ना गलत कह
  7052. 6:50:25रहे हैं ना सही।
  7053. 6:50:28लेकिन अगर तुम उसका पीछा करते हो तो आंखें
  7054. 6:50:31खोल के करो। यह जानकर कि एक माइंड जो
  7055. 6:50:35हमेशा प्लेजर ढूंढती है उसके साथ पेन भी
  7056. 6:50:40आता है। दोनों अलग नहीं हो
  7057. 6:50:46सकते। चाहे हम प्लेजर के पीछे भागे और पेन
  7058. 6:50:50से भागने की कोशिश
  7059. 6:50:53करें। अब यह माइंड हमेशा प्लेजर क्यों
  7060. 6:50:56मांगता है?
  7061. 6:50:59क्यों हम अच्छे और गंदे दोनों काम प्लेजर
  7062. 6:51:02के साथ करते
  7063. 6:51:04हैं? क्यों हम प्लेजर की पतली सी डोर पर
  7064. 6:51:07सैक्रिफाइस करते हैं? सफर करते हैं?
  7065. 6:51:11प्लेजर है
  7066. 6:51:13क्या? और यह कैसे आता
  7067. 6:51:16है? क्या तुमने कभी यह क्वेश्चंस खुद से
  7068. 6:51:20पूछे हैं? और उनके आंसर्स को एंड तक फॉलो
  7069. 6:51:23किया
  7070. 6:51:24है? प्लेजर चार स्टेप से आता है।
  7071. 6:51:28देखना, सेंसेशन आना, कांटेक्ट होना और
  7072. 6:51:32डिजायर
  7073. 6:51:33होना। मान लो मैंने एक खूबसूरत कार देखी।
  7074. 6:51:37मुझे देखकर एक सेंसेशन आता
  7075. 6:51:40है। फिर मैं उसे टच करता हूं या इमेजिन
  7076. 6:51:43करता हूं और फिर आता है उस कार को पाने का
  7077. 6:51:48डिजायर। उसे शो ऑफ करने का डिजायर।
  7078. 6:51:53या मैं देखता हूं एक सुंदर बादल या एक
  7079. 6:51:56पहाड़ नीले आसमान के नीचे या एक नया पत्ता
  7080. 6:52:00जो बसंत में निकला है या एक गहरी घाटी जो
  7081. 6:52:04खूबसूरती से भरी है या एक खूबसूरत
  7082. 6:52:08सनसेट या एक चेहरा जो इंटेलिजेंट है जिंदा
  7083. 6:52:12है सेल्फ कॉन्शियस नहीं है और इसलिए वह
  7084. 6:52:16चेहरा वाकई सुंदर
  7085. 6:52:18है मैं इन चीजों को पूरे डिलाइट के साथ
  7086. 6:52:22देखता देखता हूं और जब मैं ऑब्जर्व करता
  7087. 6:52:24हूं तो कोई ऑब्जर्वर होता ही नहीं। सिर्फ
  7088. 6:52:28वह खूबसूरती होती है जैसे
  7089. 6:52:33प्यार। एक मोमेंट के लिए मैं पूरा गायब हो
  7090. 6:52:36जाता हूं। अपनी प्रॉब्लम्स, ए्जायटीज और
  7091. 6:52:40दुख के
  7092. 6:52:42साथ। सिर्फ वो मैजिकल मोमेंट होता है। मैं
  7093. 6:52:46उस मोमेंट को जॉय के साथ देख सकता हूं।
  7094. 6:52:50और अगले मोमेंट भूल भी सकता हूं या फिर
  7095. 6:52:54माइंड बीच में आ जाता है और प्रॉब्लम वहीं
  7096. 6:52:57से शुरू होती
  7097. 6:52:59है। मेरा माइंड सोचता है कि यह कितना
  7098. 6:53:02सुंदर था। फिर कहता है मुझे यह फिर से
  7099. 6:53:06देखना है। सोच शुरू करता है कंपेयर करना,
  7100. 6:53:10जज
  7101. 6:53:12करना। और सोच कहती है मुझे यह कल फिर
  7102. 6:53:17चाहिए।
  7103. 6:53:19एक सेकंड की डिलाइट को रिपीट करने का
  7104. 6:53:22प्रोसेस सोच के थ्रू चालू हो जाता
  7105. 6:53:26है। सेक्सुअल डिजायर के साथ भी वही होता
  7106. 6:53:29है या किसी और डिजायर के साथ।
  7107. 6:53:34डिजायर में कोई गलती नहीं है। रिएक्ट करना
  7108. 6:53:37बिल्कुल नॉर्मल है। अगर कोई पिन मुझे चुभे
  7109. 6:53:41तो मैं रिएक्ट
  7110. 6:53:43करूंगा। जब तक मैं पैरालाइज्ड ना हो जाऊं।
  7111. 6:53:47लेकिन फिर थॉट आती है और वह उस डिलाइट को
  7112. 6:53:51चबाने लगती
  7113. 6:53:53है और उसे प्लेजर में बदल देती है। थॉट उस
  7114. 6:53:58एक्सपीरियंस को रिपीट करना चाहती है और
  7115. 6:54:01जितना ज्यादा रिपीट करते हैं वह उतना
  7116. 6:54:04ज्यादा मैकेनिकल बन जाता
  7117. 6:54:06है। जितना तुम सोचते हो उस मोमेंट के बारे
  7118. 6:54:10में उतना ही थॉट प्लेजर को और स्ट्रांग
  7119. 6:54:13बना देता
  7120. 6:54:15है। तो थॉट ही डिजायर के जरिए प्लेजर को
  7121. 6:54:18क्रिएट करता है। उसको चलाता है और उसको
  7122. 6:54:23कंटिन्यू रखता है। और इस तरह एक नेचुरल
  7123. 6:54:28डिजायर को थॉट डिस्टोर्ट कर देता है।
  7124. 6:54:32थॉट उसे मेमोरी बना देता है। और मेमोरी को
  7125. 6:54:36फिर सोचसच कर और बड़ा किया जाता है।
  7126. 6:54:41हां, मेमोरी का अपना जगह होता है। कुछ
  7127. 6:54:46लेवल पर जरूरी होती
  7128. 6:54:49है। रोज की जिंदगी में बिना मेमोरी के काम
  7129. 6:54:53नहीं
  7130. 6:54:53चलेगा। उसके अपने एरिया में मेमोरी को
  7131. 6:54:56एफिशिएंट होना चाहिए।
  7132. 6:54:59लेकिन एक ऐसा स्टेट ऑफ माइंड भी होता है
  7133. 6:55:02जहां मेमोरी की जगह बहुत कम होती है। एक
  7134. 6:55:06माइंड जो मेमोरी से बंधा हुआ नहीं है वही
  7135. 6:55:10असली फ्रीडम को जानता
  7136. 6:55:12है। क्या तुमने कभी नोटिस किया है जब तुम
  7137. 6:55:17किसी चीज को पूरे दिल से पूरी तरह से फील
  7138. 6:55:20करते हो तो उसमें मेमोरी बहुत कम होती है।
  7139. 6:55:25सिर्फ तभी मेमोरी बनती है जब तुम किसी
  7140. 6:55:28चैलेंज का पूरे बीइंग के साथ जवाब नहीं
  7141. 6:55:32देते। तब कॉन्फ्लिक्ट होता है, स्ट्रगल
  7142. 6:55:36होती है और वही कंफ्यूजन, प्लेजर या पेन
  7143. 6:55:41लाती है। और स्ट्रगल ही मेमोरी पैदा करता
  7144. 6:55:46है। वह मेमोरी फिर और भी मेमोरीज से
  7145. 6:55:49जुड़ती रहती है और वही मेमोरीज रिस्पांस
  7146. 6:55:53बन जाती है।
  7147. 6:55:55जो कुछ भी मेमोरी का रिजल्ट होता है, वह
  7148. 6:55:59पुराना होता है और इसलिए कभी फ्री नहीं
  7149. 6:56:02होता। फ्रीडम ऑफ थॉट जैसी कोई चीज होती ही
  7150. 6:56:06नहीं। यह एकदम बेकार बात है। थॉट कभी नई
  7151. 6:56:11नहीं
  7152. 6:56:12होती। क्योंकि थॉट मेमोरी, एक्सपीरियंस और
  7153. 6:56:17नॉलेज का रिएक्शन होती है।
  7154. 6:56:20थॉट क्योंकि वह पुरानी होती है।
  7155. 6:56:24तुमने जो चीज एक मोमेंट के लिए डिलाइट के
  7156. 6:56:28साथ देखी थी उसे भी पुराना बना देती
  7157. 6:56:32है। तुम प्लेजर हमेशा पुरानी चीज से पाते
  7158. 6:56:36हो कभी नए से नहीं। नए में टाइम होता ही
  7159. 6:56:41नहीं। तो अगर तुम हर चीज को ऐसे देख सको
  7160. 6:56:44कि प्लेजर उसमें घुस ना पाए। एक चेहरा, एक
  7161. 6:56:48चिड़िया,
  7162. 6:56:50एक रंग, धूप में चमकते पानी की
  7163. 6:56:55चादर या कुछ भी जो तुम्हें खुशी देता हो।
  7164. 6:56:59अगर तुम उसे ऐसे देख सको कि तुम्हें उस
  7165. 6:57:02एक्सपीरियंस को दोबारा चाहिए ही ना हो तो
  7166. 6:57:06ना दर्द होगा, ना डर होगा और एक जबरदस्त
  7167. 6:57:11जॉय होगा।
  7168. 6:57:14जब तुम प्लेजर को रिपीट करने की कोशिश
  7169. 6:57:17करते हो तभी वह पेन बन जाता है। अपने अंदर
  7170. 6:57:21देखो
  7171. 6:57:23इसको जब तुम प्लेजर को दोबारा चाहते हो तो
  7172. 6:57:27दर्द आता ही
  7173. 6:57:29है। क्योंकि वह वैसे होता ही नहीं जैसे कल
  7174. 6:57:33था। तुम स्ट्रगल करते हो उसी डिलाइट को
  7175. 6:57:37पाने के लिए। ना सिर्फ अपने सेंस के लिए
  7176. 6:57:40बल्कि माइंड के अंदर के उस सेम फील के
  7177. 6:57:44लिए। और जब तुम्हें वह नहीं मिलता तो तुम
  7178. 6:57:48हर्ट फील करते हो, डिसपॉइंट होते हो। क्या
  7179. 6:57:52तुमने देखा
  7180. 6:57:53है? जब तुमसे छोटी सी प्लेजर छीन ली जाती
  7181. 6:57:57है तो क्या होता है?
  7182. 6:58:00जब तुम्हें वह नहीं मिलता जो तुम चाहते हो
  7183. 6:58:04तो तुम एशियस हो जाते हो, जेलस होते हो,
  7184. 6:58:08हेटफुल बन जाते
  7185. 6:58:10हो। जब तुम्हें ड्रिंक, स्मोक, सेक्स या
  7186. 6:58:15जो भी चाहिए था वह नहीं मिलता तो तुम्हारे
  7187. 6:58:18अंदर कितनी फाइट होती है। यह सब डर की ही
  7188. 6:58:23फॉर्म है। है ना?
  7189. 6:58:26डर इस बात का कि तुम्हें वह नहीं मिलेगा
  7190. 6:58:29जो तुम चाहते हो या जो तुम्हारे पास है वह
  7191. 6:58:33खो जाएगा। जब कोई बिलीफ या आईडियोलॉजी
  7192. 6:58:37जिसे तुमने सालों तक पकड़ रखा था। जब वह
  7193. 6:58:41तुमसे छीन ली जाती है चाहे लॉजिक से या
  7194. 6:58:44जिंदगी के किसी झटके से तो क्या तुम्हें
  7195. 6:58:48अकेला खड़े रहने से डर नहीं
  7196. 6:58:51लगता? वह बिलीफ तुम्हें प्लेजर देता था।
  7197. 6:58:54सेटिस्फेक्शन देता था और जब वह चला जाता
  7198. 6:58:58है तो तुम खाली महसूस करते
  7199. 6:59:01हो और फिर तुम तुरंत किसी नए प्लेजर नए
  7200. 6:59:05बिलीफ को ढूंढने लगते
  7201. 6:59:09हो। मुझे लगता है यह सब बहुत सिंपल है और
  7202. 6:59:13क्योंकि यह सिंपल है। हम इस सिंपलीसिटी को
  7203. 6:59:16देखते ही नहीं।
  7204. 6:59:19हमें हर चीज को कॉम्प्लेक्स बनाना अच्छा
  7205. 6:59:21लगता है। जब तुम्हारी वाइफ तुमसे दूर हो
  7206. 6:59:25जाती है तो क्या तुम जेलस नहीं होते? क्या
  7207. 6:59:28तुम गुस्सा नहीं होते? क्या तुम उस आदमी
  7208. 6:59:32से नफरत नहीं करते जिसकी तरफ वह अट्रैक्ट
  7209. 6:59:35हो गई है? और यह सब क्या है? बस डर ही तो
  7210. 6:59:39है कि तुम कुछ खो दोगे जो तुम्हें प्लेजर
  7211. 6:59:43देता था। कंपैनियनशिप सिक्योरिटी
  7212. 6:59:48और पोजीशन का
  7213. 6:59:50सुकून। तो अगर तुम समझ जाओ कि जहां प्लेजर
  7214. 6:59:54का चीज होता है, जहां प्लेजर की दौड़ होती
  7215. 6:59:57है, वहां पेन, वहां दर्द भी होता
  7216. 7:00:02है। तो अगर तुम ऐसे जीना चाहते हो तो
  7217. 7:00:05जियो। लेकिन बस ऐसे ही उसमें मत गिर जाओ।
  7218. 7:00:10लेकिन अगर तुम प्लेजर खत्म करना चाहते हो
  7219. 7:00:13जो पेन को भी खत्म करेगा तो तुम्हें पूरे
  7220. 7:00:16अटेंशन के साथ पूरे प्लेजर के स्ट्रक्चर
  7221. 7:00:20को देखना
  7222. 7:00:21होगा उसे मक्स और सन्यासी की तरह काट देना
  7223. 7:00:26नहीं जो सोचते हैं कि औरत देखना पाप है।
  7224. 7:00:31और इस सोच में अपनी समझने की एनर्जी को ही
  7225. 7:00:34मार देते
  7226. 7:00:36हैं। बल्कि प्लेजर का पूरा मीनिंग और
  7227. 7:00:39गहराई से
  7228. 7:00:40समझना। तभी तुम्हें जिंदगी में एक जबरदस्त
  7229. 7:00:45जॉय
  7230. 7:00:47मिलेगा। तुम जॉय के बारे में सोच नहीं
  7231. 7:00:50सकते। जॉय एक तुरंत होने वाली चीज है और
  7232. 7:00:54उसके बारे में सोचकर तुम उसे प्लेजर बना
  7233. 7:00:57देते हो। प्रेजेंट में जीना मतलब है
  7234. 7:01:01ब्यूटी को तुरंत देखना और उसमें से प्लेजर
  7235. 7:01:04चाहना नहीं।
  7236. 7:01:07डर, प्लेजर, दुख, सोच और
  7237. 7:01:12वायलेंस यह सब एक दूसरे से जुड़े हुए
  7238. 7:01:16हैं। ज्यादातर लोग वायलेंस में ही प्लेजर
  7239. 7:01:20लेते हैं। किसी से नफरत करके, किसी जात या
  7240. 7:01:23ग्रुप से गुस्सा
  7241. 7:01:25होकर। दूसरों के खिलाफ फीलिंग्स रखकर।
  7242. 7:01:29लेकिन एक ऐसे माइंड स्टेट में जहां
  7243. 7:01:32वायलेंस बिल्कुल खत्म हो चुकी हो। वहां एक
  7244. 7:01:36अलग ही जॉय होता
  7245. 7:01:38है जो वायलेंस के प्लेजर से बहुत अलग होती
  7246. 7:01:41है जिसमें कॉन्फ्लिक्ट, नफरत और डर होता
  7247. 7:01:45है। क्या हम वायलेंस के बिल्कुल रूट तक जा
  7248. 7:01:49सकते हैं और उसे फ्री हो सकते
  7249. 7:01:51हैं। नहीं तो हम हमेशा एक दूसरे से लड़ते
  7250. 7:01:56रहेंगे। अगर तुम्हें ऐसे ही जीना है और
  7251. 7:02:00लगता है ज्यादातर लोग ऐसे ही जीते हैं तो
  7252. 7:02:03चलते रहो।
  7253. 7:02:05लेकिन अगर तुम कहते हो वायलेंस कभी खत्म
  7254. 7:02:10ही नहीं हो सकती तो तुमने खुद को ब्लॉक कर
  7255. 7:02:13लिया है और हमारे बीच कोई बात नहीं हो
  7256. 7:02:18सकती। लेकिन अगर तुम कहते हो कि शायद जीने
  7257. 7:02:22का कोई और तरीका हो सकता
  7258. 7:02:25है तो हम एक दूसरे से बात कर सकते हैं। तो
  7259. 7:02:29चलो हम मिलकर देखें।
  7260. 7:02:33जो लोग कम्युनिकेट कर सकते हैं। क्या यह
  7261. 7:02:36पॉसिबल है कि हर तरीके की वायलेंस को अपने
  7262. 7:02:40अंदर से बिल्कुल खत्म किया जाए और फिर भी
  7263. 7:02:44इस डरावनी ब्रूटल दुनिया में जिया
  7264. 7:02:48जाए। मुझे लगता है यह पॉसिबल है। मैं नहीं
  7265. 7:02:53चाहता कि मेरे अंदर नफरत, जेलसी, ए्जायटी
  7266. 7:02:57या डर का एक भी झटका हो।
  7267. 7:03:01मैं पूरी तरह शांति में जीना चाहता हूं।
  7268. 7:03:04इसका मतलब यह नहीं कि मैं मरना चाहता हूं।
  7269. 7:03:08मैं इस खूबसूरत जमीन पर जीना चाहता हूं।
  7270. 7:03:12जो इतनी फुल है, इतनी रिच है, इतनी
  7271. 7:03:15ब्यूटीफुल है। मैं पेड़, फूल, नदियां,
  7272. 7:03:20खेत और औरतें, लड़के, लड़कियां देखना
  7273. 7:03:24चाहता हूं। और साथ ही
  7274. 7:03:27साथ पूरी तरह अपने अंदर और दुनिया के साथ
  7275. 7:03:31शांति में जीना चाहता हूं तो मैं क्या
  7276. 7:03:36करूं। अगर हम समझ जाए कि वायलेंस को कैसे
  7277. 7:03:40देखा जाए ना सिर्फ बाहर सोसाइटी में जैसे
  7278. 7:03:44वॉर, दंगे, जाति और क्लास की लड़ाई बल्कि
  7279. 7:03:49अपने अंदर
  7280. 7:03:50भी तो शायद हम इससे परे जा पाएंगे।
  7281. 7:03:55यह एक बहुत कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम है।
  7282. 7:03:58हजारों सालों से इंसान वायलेंट रहा है।
  7283. 7:04:02रिलीजंस ने उसे कंट्रोल करने की कोशिश की
  7284. 7:04:05है पूरी दुनिया में लेकिन कोई भी
  7285. 7:04:08सक्सेसफुल नहीं
  7286. 7:04:10हुआ। तो अगर हमें इस सवाल में घुसना है तो
  7287. 7:04:14मुझे लगता है कि हमें बहुत सीरियस होना
  7288. 7:04:17पड़ेगा। क्योंकि यह हमें एक बिल्कुल अलग
  7289. 7:04:20दुनिया में ले जाएगा।
  7290. 7:04:22लेकिन अगर हम बस इस पर सोच विचार करके मजा
  7291. 7:04:27लेना चाहते हैं तो हम दूर तक नहीं जा
  7292. 7:04:34पाएंगे। तुम्हें लग सकता है कि तुम तो इस
  7293. 7:04:37प्रॉब्लम को ले सीरियस हो। लेकिन जब तक
  7294. 7:04:41दुनिया के और लोग सीरियस नहीं है और कुछ
  7295. 7:04:44करना नहीं चाहते तो तुम्हारे कुछ करने का
  7296. 7:04:48क्या फायदा?
  7297. 7:04:52मुझे फर्क नहीं पड़ता वह सीरियस हैं या
  7298. 7:04:55नहीं। मैं खुद सीरियस हूं। बस वही काफी
  7299. 7:04:59है। मैं अपने भाई का रक्षक नहीं
  7300. 7:05:05हूं। मैं एक इंसान के रूप में इस वायलेंस
  7301. 7:05:09के सवाल को ले अंदर से स्ट्रांग महसूस
  7302. 7:05:11करता हूं। और मैं यह देखूंगा कि मैं खुद
  7303. 7:05:15वायलेंट ना रहूं।
  7304. 7:05:18लेकिन मैं तुम्हें यह किसी और को नहीं कह
  7305. 7:05:21सकता कि वायलेंट मत बनो। उसका कोई मतलब
  7306. 7:05:25नहीं जब तक तुम खुद नहीं
  7307. 7:05:29चाहते। तो अगर तुम खुद रियली इस वायलेंस
  7308. 7:05:34के प्रॉब्लम को समझना चाहते हो तो चलो हम
  7309. 7:05:38इस सफर को साथ में एक्सप्लोर करते हैं। यह
  7310. 7:05:42वायलेंस का प्रॉब्लम बाहर है या यहां है?
  7311. 7:05:46तुम इस प्रॉब्लम को दुनिया में सॉल्व करना
  7312. 7:05:49चाहते हो या तुम इस क्वेश्चन को खुद के
  7313. 7:05:52अंदर देखना चाहते हो? अगर तुम अपने अंदर
  7314. 7:05:55से फ्री हो वायलेंस से तो फिर सवाल आता है
  7315. 7:05:59मैं कैसे जीूं एक ऐसी दुनिया में जो
  7316. 7:06:03वायलेंस, ग्रीड, लालच, जेलसी और ब्रूटलिटी
  7317. 7:06:09से भरी है। क्या मैं बर्बाद नहीं हो
  7318. 7:06:12जाऊंगा?
  7319. 7:06:13यह सवाल हमेशा पूछा जाता है। लेकिन जब तुम
  7320. 7:06:17ऐसा सवाल पूछते हो तो मुझे लगता है तुम
  7321. 7:06:20वाकई में पीसफुल नहीं जी
  7322. 7:06:24रहे। अगर तुम रियली पीसफुली जीते हो तो
  7323. 7:06:28तुम्हें कोई प्रॉब्लम ही नहीं होती।
  7324. 7:06:31तुम्हें शायद जेल भेज दिया जाए क्योंकि
  7325. 7:06:34तुम आर्मी जॉइ करने से मना करते हो या
  7326. 7:06:37तुम्हें मार दिया जाए क्योंकि तुम फाइट
  7327. 7:06:40करने से इंकार करते हो।
  7328. 7:06:42लेकिन वह प्रॉब्लम नहीं है। तुम बस मार
  7329. 7:06:45दिए
  7330. 7:06:46जाओगे। यह बात समझना बहुत जरूरी है। हम
  7331. 7:06:50वायलेंस को समझने की कोशिश कर रहे हैं एक
  7332. 7:06:53फैक्ट के रूप में ना कि एक आईडिया के रूप
  7333. 7:06:58में। एक फैक्ट जो एक इंसान के अंदर होता
  7334. 7:07:01है और वह इंसान मैं खुद हूं। और इस
  7335. 7:07:05प्रॉब्लम को समझने के लिए मैं खुद के
  7336. 7:07:07सामने बिल्कुल ओपन होना पड़ेगा।
  7337. 7:07:12मुझे खुद को खुद के सामने एक्सपोज करना
  7338. 7:07:15पड़ेगा तुम्हारे सामने नहीं क्योंकि शायद
  7339. 7:07:18तुम इंटरेस्टेड ही ना हो।
  7340. 7:07:22लेकिन मुझे अपने माइंड को ऐसे स्टेट में
  7341. 7:07:24रखना पड़ेगा जहां मैं इस चीज को एंड तक
  7342. 7:07:27देखना चाहूं और कहीं भी रुक ना जाऊं। अब
  7343. 7:07:31मुझे यह बात क्लियर होनी चाहिए कि मैं एक
  7344. 7:07:34वायलेंट इंसान हूं।
  7345. 7:07:38मैंने वायलेंस फील किया है। गुस्से में,
  7346. 7:07:41अपनी सेक्सुअल वांट्स में, नफरत में,
  7347. 7:07:45दुश्मनी बनाने में, जेलसी में और और भी
  7348. 7:07:49चीजों में मैंने इसे महसूस किया है। मैं
  7349. 7:07:52इसे जानता हूं और मैं खुद से कहता हूं।
  7350. 7:07:56मैं इस पूरे प्रॉब्लम को समझना चाहता हूं।
  7351. 7:08:00ना सिर्फ उस हिस्से को जो वॉर में दिखाई
  7352. 7:08:03देता है बल्कि उस अग्रेशन को भी जो इंसान
  7353. 7:08:06में है जो एनिमल्स में भी होता है और
  7354. 7:08:09जिसका मैं भी एक हिस्सा
  7355. 7:08:12हूं। वायलेंस सिर्फ किसी को मार देना नहीं
  7356. 7:08:15होता। वायलेंस तब भी होती है जब हम किसी
  7357. 7:08:20को तीखी बात कह देते हैं। जब हम हाथ से
  7358. 7:08:24किसी को हटाने का इशारा करते
  7359. 7:08:26हैं। जब हम डर के मारे किसी बात को मान
  7360. 7:08:30लेते हैं तो वायलेंस सिर्फ गॉड सोसाइटी या
  7361. 7:08:35कंट्री के नाम पर की गई बड़े लेवल की
  7362. 7:08:38क्लीन नहीं है। वायलेंस बहुत छोटा भी होता
  7363. 7:08:43है। बहुत गहरी होती है और हम उसी गहराई
  7364. 7:08:48में जाने की कोशिश कर रहे
  7365. 7:08:51हैं। जब तुम अपने आप को हिंदू, मुस्लिम,
  7366. 7:08:55क्रिश्चियन,
  7367. 7:08:57यूरोपियन या कुछ और कहते
  7368. 7:09:00हो तो तुम वायलेंट हो जाते हो। समझ रहे हो
  7369. 7:09:05यह वायलेंट क्यों है? क्योंकि तुम खुद को
  7370. 7:09:08बाकी इंसानियत से अलग कर रहे हो।
  7371. 7:09:12जब तुम बिलीफ, नेशन या ट्रेडिशन के जरिए
  7372. 7:09:15खुद को अलग करते हो तो वह वायलेंस पैदा
  7373. 7:09:19करता
  7374. 7:09:21है। तो जो आदमी वायलेंस को समझना चाहता है
  7375. 7:09:25वह किसी कंट्री, रिलीजन, पॉलिटिकल पार्टी
  7376. 7:09:29या किसी भी पार्शियल सिस्टम का हिस्सा
  7377. 7:09:32नहीं होता।
  7378. 7:09:34वह इंसानियत को पूरी तरह समझने में
  7379. 7:09:36इंटरेस्टेड होता है। अब वायलेंस को ले दो
  7380. 7:09:41प्राइमरी स्कूल ऑफ थॉट होते हैं। एक कहता
  7381. 7:09:44है वायलेंस इंसान की नेचर में होती है। और
  7382. 7:09:49दूसरा कहता है वायलेंस सोसाइटी और कल्चर
  7383. 7:09:53की वजह से होती है।
  7384. 7:09:56लेकिन हम यह डिसाइड करने नहीं आए कि हम
  7385. 7:09:58किस स्कूल में हैं। इसका कोई मतलब नहीं।
  7386. 7:10:03जो इंपॉर्टेंट है वह यह फैक्ट है कि हम
  7387. 7:10:06वायलेंट है ना कि इस वायलेंस का रीजन क्या
  7388. 7:10:11है? वायलेंस का सबसे कॉमन रूप होता है
  7389. 7:10:15गुस्सा। जब मेरी बीवी या बहन पर अटैक होता
  7390. 7:10:19है तो मैं कहता हूं कि मैं सही वजह से
  7391. 7:10:21गुस्सा हूं।
  7392. 7:10:23जब मेरे देश पर अटैक होता है, मेरे
  7393. 7:10:25आइडियाज पर, मेरे प्रिंसिपल्स पर, मेरे
  7394. 7:10:28तरीके पर, तब भी मैं कहता हूं मैं सही
  7395. 7:10:33हूं। मैं तब भी गुस्सा होता हूं जब मेरी
  7396. 7:10:36आदतें या मेरी छोटी सोच पर कोई वॉर करता
  7397. 7:10:40है। जब कोई मेरी बात का मजाक उड़ाता है या
  7398. 7:10:44मुझे इंसल्ट करता है, मैं गुस्सा हो जाता
  7399. 7:10:46हूं।
  7400. 7:10:48या अगर कोई मेरी बीवी को ले जाता है और
  7401. 7:10:51मैं जेलस हो जाता हूं तो उस जेलसी को भी
  7402. 7:10:55सही माना जाता है क्योंकि वह मेरी
  7403. 7:10:57प्रॉपर्टी थी और यह सारा गुस्सा मोरल तौर
  7404. 7:11:02पर जस्टिफाई किया जाता है। अपने देश के
  7405. 7:11:06लिए किसी को मारना भी जस्टिफाई किया जाता
  7406. 7:11:09है। तो जब हम गुस्से की बात करते हैं जो
  7407. 7:11:12कि वायलेंस का पार्ट
  7408. 7:11:15है तो क्या हम उसे राइटियस और अनराइचियस
  7409. 7:11:20में डिवाइड करके देखते हैं सही और गलत में
  7410. 7:11:24अपने एनवायरमेंट और सोच के हिसाब
  7411. 7:11:27से या हम बस गुस्से को गुस्सा ही देखते
  7412. 7:11:30हैं क्या कभी कोई सही गुस्सा होता है या
  7413. 7:11:35सिर्फ गुस्सा ही होता
  7414. 7:11:37है कोई अच्छा इनफ्लु
  7415. 7:11:40या बेकार इनफ्लुएंस नहीं होता। सिर्फ
  7416. 7:11:42इनफ्लुएंस होता है। लेकिन जब कोई
  7417. 7:11:45इनफ्लुएंस मुझे सूट नहीं करता तो मैं कहता
  7418. 7:11:48हूं कि वह बुरा है। वह बेकार
  7419. 7:11:53है। जब तुम अपने परिवार, अपने देश, एक
  7420. 7:11:57झंडे के टुकड़े, एक बिलीफ, एक आईडिया, एक
  7421. 7:12:00डोगमा, किसी चीज को प्रोटेक्ट करते हो तो
  7422. 7:12:04वह प्रोटेक्शन खुद एक इंडिकेशन है गुस्से
  7423. 7:12:07का।
  7424. 7:12:10तो क्या तुम गुस्से को बिना किसी
  7425. 7:12:12एक्सप्लेनेशन के देख सकते हो? बिना यह
  7426. 7:12:15सोचे कि मुझे
  7427. 7:12:17अपना सामान बचाना
  7428. 7:12:21था या मैं ठीक था गुस्सा होने में या मैं
  7429. 7:12:26कितना बेवकूफ था गुस्सा होकर? क्या तुम
  7430. 7:12:29गुस्से को एक अलग एंटिटी की तरह देख सकते
  7431. 7:12:32हो? बिल्कुल ऑब्जेक्टिव तरीके से। ना उसका
  7432. 7:12:36सपोर्ट करते हुए ना उसको रिजेक्ट करते
  7433. 7:12:39हुए क्या तुम कर सकते
  7434. 7:12:43हो? क्या मैं तुम्हें देख सकता हूं? जब
  7435. 7:12:47मैं तुमसे नफरत करता हूं या सोचता हूं कि
  7436. 7:12:50तुम बहुत अच्छे हो। मैं तुम्हें तभी देख
  7437. 7:12:54सकता हूं जब मैं तुम्हें एक ऐसे नजरिए से
  7438. 7:12:56देखता हूं जिसमें ना प्यार हो ना नफरत।
  7439. 7:13:01अब क्या मैं गुस्से को भी वैसे ही देख
  7440. 7:13:04सकता हूं? इसका मतलब यह है कि मैं उस
  7441. 7:13:08प्रॉब्लम के लिए ओपन हूं। उसको रोक नहीं
  7442. 7:13:11रहा
  7443. 7:13:12हूं। मैं इस अजीब सी चीज को बिना रिएक्शन
  7444. 7:13:16के ऑब्जर्व कर रहा हूं। गुस्से को बिना
  7445. 7:13:19फीलिंग के देखना बहुत मुश्किल है। क्योंकि
  7446. 7:13:22वह मेरा ही एक पार्ट है।
  7447. 7:13:26लेकिन मैं कोशिश यही कर रहा हूं। यहां मैं
  7448. 7:13:29हूं एक वायलेंट इंसान। चाहे मैं काले रंग
  7449. 7:13:34का हूं, भूरा, गोरा या
  7450. 7:13:37बैंगनी। मुझे इस बात से मतलब नहीं कि यह
  7451. 7:13:40वायलेंस मैंने अपने जींस से ली है या
  7452. 7:13:43सोसाइटी ने मुझ में डाली है। मुझे सिर्फ
  7453. 7:13:47इस बात से मतलब है कि क्या मैं इससे फ्री
  7454. 7:13:50हो सकता हूं या नहीं।
  7455. 7:13:54वायलेंस से फ्री होना मेरे लिए सबसे
  7456. 7:13:56इंपॉर्टेंट है। यह मेरे लिए सेक्स, खाना
  7457. 7:14:00या पोजीशन से भी ज्यादा इंपॉर्टेंट
  7458. 7:14:04है। क्यों यह चीज मुझे अंदर से खराब कर
  7459. 7:14:07रही है? यह मुझे बर्बाद कर रही है। दुनिया
  7460. 7:14:11को भी और मैं इसे समझना चाहता
  7461. 7:14:15हूं। इसके पार जाना चाहता हूं। मैं महसूस
  7462. 7:14:19करता हूं कि दुनिया में जितनी भी वायलेंस
  7463. 7:14:22और गुस्सा है उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं।
  7464. 7:14:26मैं महसूस करता हूं यह सिर्फ शब्द नहीं
  7465. 7:14:29है। और मैं खुद से कहता
  7466. 7:14:32हूं मैं तभी कुछ कर सकता हूं जब मैं खुद
  7467. 7:14:36गुस्से के पार हो
  7468. 7:14:38जाऊं। वायलेंस के पार, नेशनलिटी के पार।
  7469. 7:14:42और यह जो फीलिंग है कि मुझे अपने अंदर की
  7470. 7:14:46वायलेंस को समझना है। यह मुझे एक जबरदस्त
  7471. 7:14:49एनर्जी और पैशन देती है सच जानने के लिए।
  7472. 7:14:54लेकिन वायलेंस के पार जाने के लिए मैं उसे
  7473. 7:14:57दबा नहीं
  7474. 7:14:59सकता। मैं उसे इग्नोर नहीं कर सकता। मैं
  7475. 7:15:02यह नहीं कह सकता कि यह मेरा हिस्सा है और
  7476. 7:15:07क्या? या मुझे यह नहीं चाहिए। मुझे उसे
  7477. 7:15:11देखना पड़ेगा। उसे स्टडी करना
  7478. 7:15:14पड़ेगा। उसे बहुत क्लोज से समझना पड़ेगा।
  7479. 7:15:18और मैं तभी क्लोज हो सकता हूं जब मैं उसे
  7480. 7:15:21ना जज करूं ना जस्टिफाई।
  7481. 7:15:25लेकिन हम हमेशा जज या जस्टिफाई करते हैं।
  7482. 7:15:29इसलिए मैं कह रहा हूं अभी के लिए जज करना
  7483. 7:15:32और जस्टिफाई करना बंद करो। अब अगर तुम
  7484. 7:15:36वायलेंस खत्म करना चाहते हो। अगर तुम वॉर
  7485. 7:15:40खत्म करना चाहते हो तो तुम इसमें कितना
  7486. 7:15:44अपना दिल और दिमाग लगाते हो। क्या यह
  7487. 7:15:47तुम्हारे लिए इंपॉर्टेंट है कि तुम्हारे
  7488. 7:15:49बच्चे मार दिए जाते हैं। तुम्हारे बेटे
  7489. 7:15:53आर्मी में भेजे जाते हैं जहां उनके साथ
  7490. 7:15:55जुल्म होता
  7491. 7:15:57है। क्या तुम्हें फर्क पड़ता है? अगर यह
  7492. 7:16:01तुम्हें छू भी नहीं रही तो फिर क्या चीज
  7493. 7:16:04तुम्हारे लिए मैटर करती है? अपना पैसा,
  7494. 7:16:07पार्टी,
  7495. 7:16:09ड्रग्स। क्या तुम नहीं देखते कि तुम्हारे
  7496. 7:16:12अंदर की यह वायलेंस तुम्हारे बच्चों को
  7497. 7:16:14बर्बाद कर रही
  7498. 7:16:16है? या तुम इसे सिर्फ एक थ्यरी समझ रहे
  7499. 7:16:19हो। ठीक है? अगर तुम इंटरेस्टेड हो तो
  7500. 7:16:23अपना पूरा दिल और दिमाग इसमें लगा दो और
  7501. 7:16:25जानने की कोशिश
  7502. 7:16:27करो। बस ऐसे पीछे मत बैठो और बोलो। अच्छा
  7503. 7:16:32हमें सब कुछ समझाओ।
  7504. 7:16:34मैं तुम्हें यह पॉइंट आउट कर रहा हूं कि
  7505. 7:16:37तुम गुस्से को या वायलेंस को तब तक नहीं
  7506. 7:16:40देख सकते जब तक तुम उसे जज करते हो या
  7507. 7:16:45जस्टिफाई करते
  7508. 7:16:47हो। और जब तक तुम्हारे लिए यह एक बर्निंग
  7509. 7:16:51प्रॉब्लम नहीं है, तुम उन दोनों चीजों को
  7510. 7:16:53छोड़ ही नहीं सकते। तो सबसे पहले तुम्हें
  7511. 7:16:57सीखना होगा। तुम्हें सीखना होगा कि गुस्से
  7512. 7:17:00को कैसे देखा जाए। अपने हस्बैंड, अपने
  7513. 7:17:03वाइफ, अपने बच्चों को कैसे देखा
  7514. 7:17:07जाए? तुम्हें पॉलिटिशियन को सुनना होगा और
  7515. 7:17:10यह भी समझना होगा कि तुम ऑब्जेक्टिव क्यों
  7516. 7:17:13नहीं हो सकते। तुम क्यों जज करते हो? तुम
  7517. 7:17:16क्यों जस्टिफाई करते हो। तुम्हें यह सीखना
  7518. 7:17:20पड़ेगा कि जज करना और जस्टिफाई करना
  7519. 7:17:25तुम्हारे सोशल स्ट्रक्चर का हिस्सा
  7520. 7:17:28है। तुम्हारे कंडीशनिंग का रिजल्ट है।
  7521. 7:17:31चाहे तुम जर्मन हो, इंडियन हो, नेग्रो हो
  7522. 7:17:35या अमेरिकन जो भी हो और यह कंडीशनिंग
  7523. 7:17:39तुम्हारा माइंड स्लो और डल बना देती
  7524. 7:17:44है। सीखने के लिए कुछ असली और गहरा समझने
  7525. 7:17:48के लिए तुम्हारे पास इतनी कैपेसिटी होनी
  7526. 7:17:51चाहिए कि तुम उस चीज में गहरा जा
  7527. 7:17:54सको। अगर तुम्हारा टूल ब्लंट
  7528. 7:17:59है दिमाग डल है तो तुम गहरा जा ही नहीं
  7529. 7:18:04सकते। तो जो हम कर रहे हैं वह है अपने
  7530. 7:18:07दिमाग को तेज बनाना।
  7531. 7:18:10वह दिमाग जो हर वक्त जस्टिफाई करता है,
  7532. 7:18:13कंडेम करता है और इसी वजह से डल हो गया
  7533. 7:18:18है। तुम तभी गहरा जा सकते हो जब तुम्हारा
  7534. 7:18:22दिमाग एक सुई की तरह तेज हो और हीरे की
  7535. 7:18:25तरह स्ट्रांग
  7536. 7:18:27हो। सिर्फ पीछे बैठ के यह पूछना कि मुझे
  7537. 7:18:31ऐसा दिमाग कैसे मिलेगा किसी काम का नहीं।
  7538. 7:18:35तुम्हें उस दिमाग की वैसे ही भूख होनी
  7539. 7:18:38चाहिए
  7540. 7:18:40जैसे खाने
  7541. 7:18:43की। और अगर तुम्हें वाकई चाहिए तो तुम्हें
  7542. 7:18:47यह देखना पड़ेगा कि तुम्हारा दिमाग डल
  7543. 7:18:50क्यों है? वह डल इसलिए है क्योंकि उसने
  7544. 7:18:53खुद के आसपास एक दीवाल बना ली है जो कि
  7545. 7:18:57कंडेमिनेशन और जस्टिफिकेशन का हिस्सा है।
  7546. 7:19:01अगर दिमाग इन चीजों से फ्री हो जाए तो तुम
  7547. 7:19:04देख सकते हो, पढ़ सकते हो, गहरा जा सकते
  7548. 7:19:08हो। और हो सकता है तुम पूरे प्रॉब्लम को
  7549. 7:19:11एकदम क्लियरली समझ जाओ।
  7550. 7:19:14चलो अब वापस उस मेन मुद्दे पर आते
  7551. 7:19:18हैं। क्या अपने अंदर से वायलेंस को पूरी
  7552. 7:19:21तरह मिटा पाना मुमकिन
  7553. 7:19:24है? यह भी एक तरह की वायलेंस है जब हम
  7554. 7:19:28कहते हैं तुम बदले नहीं। तुम क्यों नहीं
  7555. 7:19:31बदले? मैं ऐसा नहीं कह रहा
  7556. 7:19:34हूं। मेरा तुम्हें कुछ भी प्रूफ करना
  7557. 7:19:37इंपॉर्टेंट नहीं है। यह तुम्हारी लाइफ है।
  7558. 7:19:40मेरी नहीं। तुम कैसे जीते हो? यह तुम्हारा
  7559. 7:19:44काम है। मैं सिर्फ यह पूछ रहा
  7560. 7:19:47हूं क्या एक इंसान जो किसी भी सोसाइटी में
  7561. 7:19:51साइकोलॉजिकली जी रहा है, क्या वह अपने
  7562. 7:19:54अंदर से वायलेंस को हटा सकता है? अगर हां,
  7563. 7:19:58तो यह प्रोसेस ही एक नए जीने का तरीका ला
  7564. 7:20:01सकता है। हम में से ज्यादा लोगों ने
  7565. 7:20:05वायलेंस को एक नॉर्मल लाइफ का हिस्सा मान
  7566. 7:20:07लिया है। दो भयानक वर्ल्ड वॉारर्स ने हमें
  7567. 7:20:11कुछ नहीं सिखाया।
  7568. 7:20:15सिर्फ यह सिखाया कि इंसानों के बीच और भी
  7569. 7:20:18ज्यादा दीवार कैसे बनाई जाए। लेकिन अगर हम
  7570. 7:20:21में से कुछ लोग वायलेंस से छुटकारा पाना
  7571. 7:20:25चाहते हैं तो यह कैसे
  7572. 7:20:30होगा? मुझे नहीं लगता कि कोई एनालिसिस
  7573. 7:20:33चाहे हम खुद करें या किसी प्रोफेशनल से
  7574. 7:20:36करवाएं। कुछ खास हेल्प करेगा।
  7575. 7:20:40शायद थोड़ा सा हम बदल जाए, थोड़ा शांत हो
  7576. 7:20:43जाए, थोड़ा प्यार बढ़ जाए,
  7577. 7:20:48लेकिन इससे पूरी तस्वीर नहीं मिलेगी।
  7578. 7:20:51लेकिन एनालिसिस का प्रोसेस भी जरूरी है।
  7579. 7:20:55क्योंकि इस प्रोसेस में तुम्हारा दिमाग
  7580. 7:20:57एकदम शार्प बन जाता है और यह शार्पनेस, यह
  7581. 7:21:02अटेंशन, यह सीरियसनेस ही है जो तुम्हें
  7582. 7:21:05एकदम साफ नजर दे सकती है।
  7583. 7:21:09ज्यादा लोग एक ही नजर में पूरी बात नहीं
  7584. 7:21:12देख पाते। लेकिन क्लेरिटी तभी आती है जब
  7585. 7:21:15तुम डिटेल्स को देखते हो और फिर एक छलांग
  7586. 7:21:18मारते हो। कुछ लोगों ने नॉन वायलेंस का
  7587. 7:21:22कांसेप्ट बनाया ताकि वायलेंस से छुटकारा
  7588. 7:21:26मिले। लेकिन नॉन वायलेंस भी एक आइडियल है।
  7589. 7:21:30और जब तक हम आइडियल के साथ जीते हैं तब तक
  7590. 7:21:34हम असली चीज से दूर हैं। हमें कितने ही
  7591. 7:21:38आइडियल्स मिल चुके हैं। सभी होली बुक्सों
  7592. 7:21:41से भरे पड़े हैं। लेकिन हम अभी भी वायलेंट
  7593. 7:21:45ही
  7594. 7:21:47है। तो क्यों ना वायलेंस को सीधा देखें और
  7595. 7:21:51नॉन वायलेंस शब्द को भूल जाए।
  7596. 7:21:54अगर तुम्हें असली को समझना है तो तुम्हें
  7597. 7:21:57अपना पूरा ध्यान पूरी एनर्जी उसमें लगानी
  7598. 7:21:59पड़ेगी और जब तक तुम आइडियल वर्ल्ड बना
  7599. 7:22:02लेते
  7600. 7:22:04हो तो तुम्हारा ध्यान भटक जाता है तो क्या
  7601. 7:22:09तुम आइडियल को कंप्लीटली हटा सकते
  7602. 7:22:12हो? जो आदमी वाकई सीरियस है जो सच या
  7603. 7:22:16प्यार समझना चाहता है उसके पास कोई
  7604. 7:22:19कांसेप्ट नहीं होता। वह सिर्फ जो है उसी
  7605. 7:22:23में जीता
  7606. 7:22:24है। अपने गुस्से को समझने के लिए तुम्हें
  7607. 7:22:27उस पर कोई जजमेंट नहीं देना होगा। क्योंकि
  7608. 7:22:31जैसे ही तुम उसका ऑोजिट सोचते हो तुम उसे
  7609. 7:22:34कंडेम करते हो और फिर तुम उसे वैसे देख ही
  7610. 7:22:38नहीं सकते जैसे वह
  7611. 7:22:41है। जब तुम कहते हो तुम किसी से नफरत करते
  7612. 7:22:44हो तो वह एक फैक्ट है। चाहे वह सुनने में
  7613. 7:22:48बुरा लगे। अगर तुम उसे ध्यान से देखोगे,
  7614. 7:22:52गहरा जाओगे तो वह खत्म हो जाएगा।
  7615. 7:22:56लेकिन अगर तुम कहते हो मुझे नफरत नहीं
  7616. 7:22:59करनी चाहिए। मुझे अपने दिल में प्यार रखना
  7617. 7:23:02चाहिए। तो तुम एक झूठी दुनिया में जी रहे
  7618. 7:23:05हो। जहां डबल स्टैंडर्ड्स होते हैं। पूरी
  7619. 7:23:11तरह प्योर मोमेंट में जीना। मतलब जो है
  7620. 7:23:14उसी में जीना।
  7621. 7:23:16बिना किसी कंडमिनेशन के, बिना किसी
  7622. 7:23:19जस्टिफिकेशन
  7623. 7:23:21के और तब तुम उसे पूरी तरह समझ जाते हो और
  7624. 7:23:26वह समझ लेना ही उसका अंत
  7625. 7:23:29है। उसका
  7626. 7:23:31एंड जब तुम क्लियरली देख लेते हो तो
  7627. 7:23:35प्रॉब्लम सॉल्व हो जाती है। लेकिन क्या
  7628. 7:23:37तुम वायलेंस का चेहरा क्लियरली देख सकते
  7629. 7:23:40हो? सिर्फ बाहर का नहीं अंदर का भी। और
  7630. 7:23:43इसका मतलब यह है कि तुम अंदर से पूरी तरह
  7631. 7:23:47फ्री हो जाते हो वायलेंस
  7632. 7:23:49से क्योंकि तुमने कोई आईडियोलॉजी एक्सेप्ट
  7633. 7:23:53ही नहीं की जिसके जरिए तुम उससे छुटकारा
  7634. 7:23:57पाते। यह बहुत गहरी मेडिटेशन मांगता है।
  7635. 7:24:01सिर्फ शब्दों का हां ना
  7636. 7:24:05नहीं। अभी तुमने एक सीरीज ऑफ स्टेटमेंट्स
  7637. 7:24:08पढ़ लिए हैं। लेकिन क्या तुमने वाकई समझा
  7638. 7:24:11है?
  7639. 7:24:12तुम्हारा कंडीशन माइंड, तुम्हारी जीने की
  7640. 7:24:16आदतें, तुम्हारा पूरा सोशल स्ट्रक्चर
  7641. 7:24:20तुम्हें रोकता है फैक्ट को देखने से और
  7642. 7:24:23तुरंत फ्री होने से। तुम कहते हो मैं इस
  7643. 7:24:26पर सोचूंगा। देखूंगा कि क्या वायलेंस से
  7644. 7:24:30फ्री होना पॉसिबल है या नहीं। मैं ट्राई
  7645. 7:24:34करूंगा। यह सबसे खतरनाक बात है। मैं ट्राई
  7646. 7:24:39करूंगा। कोई ट्राई नहीं होता। या तो तुम
  7647. 7:24:42करते हो या नहीं
  7648. 7:24:44करते। जब घर जल रहा हो तब तुम यह नहीं
  7649. 7:24:48देखते। चलो सोच के देखते हैं किलॉजी से
  7650. 7:24:52पानी डाला
  7651. 7:24:54जाए। घर जल रहा है तुम्हारा दुनिया का और
  7652. 7:24:58तुम कहते हो मैं सोचता हूं कौन सी थ्योरी
  7653. 7:25:01बेस्ट है आग बुझाने के लिए। जब घर में आग
  7654. 7:25:04लगी हो तो तुम पानी
  7655. 7:25:07लाए आदमी के बालों का रंग नहीं पूछते।
  7656. 7:25:11अगर हम सच में ट्रुथ तक पहुंचना चाहते हैं
  7657. 7:25:15तो ना तो दबाने की तकलीफें और ना ही किसी
  7658. 7:25:19पैटर्न में फिट होने वाली कठोर डिसिप्लिन
  7659. 7:25:22हमें वहां ली जा सकती है।
  7660. 7:25:25ट्रुथ तक तभी पहुंचा जा सकता है सच तक।
  7661. 7:25:29तभी पहुंचा जा सकता है जब दिमाग बिल्कुल
  7662. 7:25:32आजाद हो बिना किसी तोड़ो के।
  7663. 7:25:36लेकिन सबसे पहले यह पूछना चाहिए कि क्या
  7664. 7:25:39हम वाकई आजाद होना चाहते
  7665. 7:25:43हैं। जब हम आजादी की बात करते हैं तो क्या
  7666. 7:25:46हम पूरी आजादी की बात कर रहे हैं या सिर्फ
  7667. 7:25:50उन चीजों से आजादी चाहते हैं जो हमें
  7668. 7:25:52तकलीफ देती हैं जो अच्छी नहीं
  7669. 7:25:56लगती। हम अपने दर्दनाक और बुरे यादों से
  7670. 7:25:59तो छुटकारा चाहते हैं लेकिन अपने मजेदार
  7671. 7:26:03सुखद आइडियाज, फार्मूलाज और रिश्ते रखना
  7672. 7:26:07चाहते हैं।
  7673. 7:26:10लेकिन सिर्फ एक को रखना और दूसरे से
  7674. 7:26:13छुटकारा पाना मुमकिन नहीं। क्योंकि जैसे
  7675. 7:26:16हमने देखा सुख और दुख अलग नहीं
  7676. 7:26:20होते। तो हर एक को यह फैसला लेना है कि
  7677. 7:26:24क्या वह पूरी तरह आजाद होना चाहता है या
  7678. 7:26:27नहीं? अगर हां, तो हमें आजादी के स्वभाव
  7679. 7:26:32और ढांचे को समझना होगा।
  7680. 7:26:36क्या यह आजादी होती है जब तुम किसी चीज से
  7681. 7:26:39आजाद हो जाते हो जैसे दर्द से या किसी
  7682. 7:26:42चिंता से या क्या आजादी एक अलग ही चीज है
  7683. 7:26:47मान लो तुम जलन से आजाद हो गए
  7684. 7:26:51लेकिन क्या यह आजादी एक रिएक्शन नहीं है
  7685. 7:26:54और अगर रिएक्शन है तो क्या यह सच में
  7686. 7:26:56आजादी
  7687. 7:26:57है? तुम किसी डॉग्मा से आजाद हो सकते हो।
  7688. 7:27:01उसे एनालाइज करके या बस उससे निकल के
  7689. 7:27:07लेकिन उस आजादी के पीछे का मोटिव एक और
  7690. 7:27:09रिएक्शन बन जाता है। शायद तुम इसलिए आजाद
  7691. 7:27:13हुए हो क्योंकि वह डॉग्मा अब ट्रेंड ही
  7692. 7:27:15नहीं रहा या कन्वीनिएंट नहीं
  7693. 7:27:19था या तुम नेशनलिज्म से आजाद हो गए हो
  7694. 7:27:22क्योंकि तुम इंटरनेशनलिज्म में विश्वास
  7695. 7:27:25रखते हो या तुम्हें लगता है कि आज की
  7696. 7:27:28इकॉनमी में नेशनलिस्टिक सोच का कोई मतलब
  7697. 7:27:32नहीं।
  7698. 7:27:33तुम उसे आराम से साइड में कर देते
  7699. 7:27:36हो या तुम किसी स्पिरिचुअल या पॉलिटिकल
  7700. 7:27:40लीडर के खिलाफ हो गए हो जो तुम्हें
  7701. 7:27:43डिसिप्लिन या रिवोल्ट के जरिए आजादी देने
  7702. 7:27:45का वादा करता है
  7703. 7:27:48लेकिन क्या यह सब रैशनलिज्म या लॉजिकल
  7704. 7:27:51कंक्लूजन का किसी भी असली आजादी से लेना
  7705. 7:27:54देना है अगर तुम कहते हो कि तुम किसी चीज
  7706. 7:27:58से आजाद हो तो यह सिर्फ एक रिएक्शन है
  7707. 7:28:03जो फिर एक और रिएक्शन बन जाता है और फिर
  7708. 7:28:07एक और कंफर्मिटी बनाता
  7709. 7:28:10है और एक और डोमिनेशन का फॉर्म ले लेता
  7710. 7:28:14है। ऐसे तुम एक रिएक्शन के चैन में फंसे
  7711. 7:28:18रहते हो और हर एक रिएक्शन को आजादी मान
  7712. 7:28:21लेते हो। लेकिन यह आजादी नहीं है। यह
  7713. 7:28:25सिर्फ एक मॉडिफाइड पास्ट का कंटिन्यूएशन
  7714. 7:28:28है जिसे दिमाग छोड़ता नहीं।
  7715. 7:28:32आज की यंग जनरेशन जैसे हर जमाने के यंग
  7716. 7:28:36लोग सोसाइटी के खिलाफ रिवोल्ट में है और
  7717. 7:28:40यह अपने आप में अच्छी बात है लेकिन
  7718. 7:28:43रिवोल्ट आजादी नहीं है क्योंकि जब तुम
  7719. 7:28:46रिवोल्ट करते हो तो वह एक रिएक्शन होता है
  7720. 7:28:49और वह रिएक्शन अपना खुद का पैटर्न बनाता
  7721. 7:28:52है और तुम उस पैटर्न में फिर से फंस जाते
  7722. 7:28:56हो। तुम्हें लगता है कि यह कुछ नया है।
  7723. 7:29:01लेकिन यह वही पुराना है एक नए शेप
  7724. 7:29:04में। कोई भी सोशल या पॉलिटिकल रिवोल्ट
  7725. 7:29:08आखिर में वही पुरानी बोरवा मेंटालिटी ले
  7726. 7:29:12आता
  7727. 7:29:15है। आजादी तभी आती है जब तुम देखते हो और
  7728. 7:29:18एक्शन लेते हो। कभी भी रिवोल्ट के जरिए
  7729. 7:29:21नहीं। वह देखना ही एक्शन है और वह एक्शन
  7730. 7:29:25उठाना ही तुरंत होता है जितना किसी डेंजर
  7731. 7:29:29को देखकर रिएक्ट
  7732. 7:29:31करना। तब ना तो तुम सोचते हो ना डिस्कशन
  7733. 7:29:36करते हो ना रुकते हो।
  7734. 7:29:39डेंजर ही तुमसे एक्शन करवाता है। इसलिए
  7735. 7:29:42देखना ही एक्शन है और एक्शन ही आजादी है।
  7736. 7:29:46आजादी एक माइंड स्टेट है। किसी चीज से
  7737. 7:29:49आजादी नहीं। बल्कि एक ऐसी फीलिंग जो हर
  7738. 7:29:52चीज पर डाउट कर सके, हर चीज को क्वेश्चन
  7739. 7:29:55कर
  7740. 7:29:56सके। जो इतनी इंटेंस हो, एक्टिव हो कि हर
  7741. 7:30:01तरह की डिपेंडेंस, स्लेवरी, कनंफर्मिटी और
  7742. 7:30:05एक्सेप्टेंस को छोड़
  7743. 7:30:06दे। ऐसी आजादी का मतलब है बिल्कुल अकेला
  7744. 7:30:10होना। लेकिन क्या एक ऐसा
  7745. 7:30:13दिमाग जो पूरे एनवायरमेंट और अपने
  7746. 7:30:16टेंडेंसीज पर डिपेंडेंट रहा हो। कभी उस
  7747. 7:30:19पूरी आजादी को पा सकता है जिसमें अकेलापन
  7748. 7:30:22हो। जिसमें ना कोई लीडर हो ना ट्रेडिशन ना
  7749. 7:30:28अथॉरिटी। यह अकेलापन एक अंदर की स्टेट है
  7750. 7:30:32जो किसी स्टिमुलस किसी नॉलेज पर डिपेंडेंट
  7751. 7:30:35नहीं है। और ना ही किसी एक्सपीरियंस या
  7752. 7:30:39कंक्लूजन का नतीजा है। हम में से ज्यादातर
  7753. 7:30:43लोग अंदर से कभी अकेले नहीं होते।
  7754. 7:30:45आइसोलेशन और अकेलेपन में फर्क
  7755. 7:30:51है। हम सब जानते हैं आइसोलेशन क्या होता
  7756. 7:30:54है? खुद के चारों ओर दीवार बनाना ताकि कोई
  7757. 7:30:58हर्ट ना करे। वनरेबल ना फील हो या
  7758. 7:31:03डिअचमेंट को कल्टीवेट करना जो एक और तरह
  7759. 7:31:06का दर्द है। या किसी ड्रीमी आईडियोलॉजी के
  7760. 7:31:10आईवरी टावर में जीना। लेकिन अकेलापन एक
  7761. 7:31:15बिल्कुल अलग चीज है।
  7762. 7:31:18अलोननेस। तुम कभी अकेले नहीं होते क्योंकि
  7763. 7:31:21तुम पूरी यादों, कंडीशनिंग और कल के
  7764. 7:31:24मटरिंग से भरे होते
  7765. 7:31:26हो। तुम्हारा दिमाग कभी भी उस सारी बकवास
  7766. 7:31:30से साफ नहीं होता। जो उसने इकट्ठा कर रखी
  7767. 7:31:34हैं। अकेलापन चाहिए तो तुम्हें पास्ट से
  7768. 7:31:37मरना होगा।
  7769. 7:31:39जब तुम अकेले होते हो बिल्कुल अकेले ना
  7770. 7:31:42किसी फैमिली से ना किसी कंट्री से ना किसी
  7771. 7:31:46कल्चर ना किसी कॉन्टिनेंट से जुड़े
  7772. 7:31:49हुए तो एक आउटसाइडर होने का फीलिंग आता
  7773. 7:31:53है। जो इंसान इस तरीके से अकेला होता है
  7774. 7:31:55वह इनोसेंट होता है और वही इनोसेंस दिमाग
  7775. 7:32:00को दुख से आजाद करता
  7776. 7:32:02है। हम अपने साथ ले चलते हैं हजारों लोगों
  7777. 7:32:06की बातें और अपने सब मिसफॉर्चूंस की
  7778. 7:32:10यादें उस सबको पूरी तरह छोड़ देना मतलब
  7779. 7:32:14अकेला
  7780. 7:32:15होना और जो दिमाग अकेला होता है वह सिर्फ
  7781. 7:32:18इनोसेंट ही नहीं बल्कि यंग भी होता है ना
  7782. 7:32:23उम्र के सेंस में ना समय के बल्कि हर वक्त
  7783. 7:32:26यंग इनोसेंट और
  7784. 7:32:29जिंदा और सिर्फ ऐसा दिमाग ही वह देख सकता
  7785. 7:32:32है जो सच है वह जो किसी शब्द से नापा नहीं
  7786. 7:32:36जा सकता
  7787. 7:32:39इस अकेलेपन में तुम यह समझना शुरू करते हो
  7788. 7:32:42कि जिंदगी क्या है? खुद के साथ जीना जैसे
  7789. 7:32:45तुम वाकई हो। ना कि जैसे तुम्हें लगता है
  7790. 7:32:49कि तुम्हें होना चाहिए या जैसे तुम पहले
  7791. 7:32:52थे। देखो क्या तुम खुद को देख सकते हो
  7792. 7:32:57बिना झूठी मोस्टी के, बिना किसी डर के,
  7793. 7:33:00बिना किसी जस्टिफिकेशन या कंडेमिनेशन के।
  7794. 7:33:05सिर्फ वैसे ही जीना जैसे तुम
  7795. 7:33:08हो। जब तुम किसी चीज के साथ गहरा रिश्ता
  7796. 7:33:12बना लेते हो तभी उसे समझना शुरू करते हो।
  7797. 7:33:16लेकिन जैसे ही तुम उसकी आदत डाल जाते
  7798. 7:33:19हो। जैसे अपनी चिंता या जलन या जो भी
  7799. 7:33:24हो तो तुम उसके साथ जी नहीं रहे होते।
  7800. 7:33:29जैसे अगर तुम किसी नदी के पास रहते हो तो
  7801. 7:33:32कुछ दिन बाद उसके पानी की आवाज सुनाई देना
  7802. 7:33:36बंद हो जाती है। या अगर तुम्हारे कमरे में
  7803. 7:33:39कोई तस्वीर है जो तुम रोज देखते हो तो एक
  7804. 7:33:43हफ्ते बाद तुम उसे देखना बंद कर देते हो।
  7805. 7:33:46पहाड़ों, घाटियों, पेड़ों के साथ भी ऐसा
  7806. 7:33:50ही होता
  7807. 7:33:51है। तुम्हारे फैमिली, पति, पत्नी के साथ
  7808. 7:33:55भी।
  7809. 7:33:57लेकिन अगर तुम जलन, चिंता, ईर्ष्या जैसी
  7810. 7:34:01किसी चीज के साथ जीते हो तो तुम्हें कभी
  7811. 7:34:04उसकी आदत नहीं पड़नी
  7812. 7:34:06चाहिए। कभी उसे एक्सेप्ट नहीं करना
  7813. 7:34:11चाहिए। तुम्हें उसकी देखभाल करनी होगी।
  7814. 7:34:14जैसे एक नई लगाई गई पेड़ की करते हो। उसे
  7815. 7:34:18सूरज से तूफानों से बचाते हो। तुम्हें
  7816. 7:34:22उसकी देखभाल करनी चाहिए ना कि उसे कंडेम
  7817. 7:34:26या
  7818. 7:34:27जस्टिफाई। और जब तुम उसकी देखभाल करते हो,
  7819. 7:34:31तुम उसे प्यार करना शुरू करते हो। जब तुम
  7820. 7:34:35उसकी परवाह करते हो, तुम प्यार करना सीख
  7821. 7:34:38रहे हो। यह नहीं कि तुम ईर्ष्या या चिंता
  7822. 7:34:43से प्यार कर रहे हो। जैसे कई लोग करते
  7823. 7:34:46हैं। बल्कि तुम सिर्फ ऑब्जर्व कर रहे हो।
  7824. 7:34:49ध्यान से देख रहे हो। तो क्या तुम और मैं
  7825. 7:34:54जी सकते हैं वैसे जैसे हम वाकई
  7826. 7:34:58हैं। जानते हुए कि हम बोर हैं,
  7827. 7:35:03ईर्षालु हैं, डरे हुए हैं। समझते हैं कि
  7828. 7:35:08हम में प्यार भरा है जबकि नहीं
  7829. 7:35:12है। आसानी से हर्ट हो जाते हैं। आसानी से
  7830. 7:35:15खुश हो जाते हैं। क्या हम इस सब के साथ जी
  7831. 7:35:19सकते हैं? ना उसे एक्सेप्ट करते हुए ना ही
  7832. 7:35:23उसे इंकार करते हुए सिर्फ देखते हुए बिना
  7833. 7:35:27डिप्रेसिव या ओवरली हैप्पी
  7834. 7:35:29हुए। अब चलो एक और सवाल पूछते हैं। क्या
  7835. 7:35:33यह आजादी यह अकेलापन जो हमारे अंदर के
  7836. 7:35:36स्ट्रक्चर से मिलने का रास्ता है? क्या यह
  7837. 7:35:39टाइम के थ्रू मिलता है? मतलब क्या आजादी
  7838. 7:35:43ग्रेजुअली मिलती है? बिल्कुल नहीं।
  7839. 7:35:47क्योंकि जैसे ही तुम टाइम इंट्रोड्यूस
  7840. 7:35:49करते हो, तुम अपने आप को और ज्यादा बंधन
  7841. 7:35:53में बांध देते
  7842. 7:35:54हो। तुम धीरे-धीरे आजाद नहीं हो सकते। यह
  7843. 7:35:58टाइम का खेल नहीं है। अगला सवाल क्या तुम
  7844. 7:36:01उस आजादी को महसूस कर सकते हो? अगर तुम
  7845. 7:36:04कहते हो मैं आजाद हूं तो तुम आजाद नहीं
  7846. 7:36:08हो। जैसे कोई बोले मैं खुश हूं।
  7847. 7:36:13उस मोमेंट वह खुशी याद बन गई कुछ जो जा
  7848. 7:36:18चुकी है। आजादी सिर्फ तब आती है जब तुम
  7849. 7:36:22नेचुरली उस पर आते हो ना कि चाहने, मांगने
  7850. 7:36:26या तरसने
  7851. 7:36:30से। और तुम उसे उस तस्वीर के जरिए भी नहीं
  7852. 7:36:34पा सकते जो तुमने अपने दिमाग में उसकी
  7853. 7:36:37बनाई है आजादी पाने के लिए।
  7854. 7:36:41दिमाग को सीखना होगा। कैसे देखना है
  7855. 7:36:44जिंदगी को जो एक बड़ा सा चलती रहती हलचल
  7856. 7:36:48है बिना टाइम के बंधन के क्योंकि आजादी
  7857. 7:36:52कॉन्शियसनेस के फील्ड के परे होती
  7858. 7:36:56है। रिश्तों में सुरक्षा चाहना ही दुख और
  7859. 7:37:00डर का कारण बन जाता है। यह सुरक्षा ढूंढना
  7860. 7:37:04ही इनसिक्योरिटी को बुलाता है। क्या तुमने
  7861. 7:37:08कभी किसी रिश्ते में सुरक्षा पाई है कभी?
  7862. 7:37:13ज्यादातर लोग चाहते हैं कि किसी से प्यार
  7863. 7:37:16करें और उनसे प्यार किया जाए।
  7864. 7:37:19लेकिन क्या यह प्यार होता है जब हर कोई
  7865. 7:37:22अपनी ही सुरक्षा अपना ही रास्ता ढूंढ रहा
  7866. 7:37:25होता
  7867. 7:37:26है। हमें प्यार नहीं मिलता क्योंकि हम
  7868. 7:37:29प्यार करना जानते ही नहीं। प्यार क्या है?
  7869. 7:37:35यह शब्द इतना भर गया है, इतना बिगड़ चुका
  7870. 7:37:38है कि मुझे इससे कहना भी अच्छा नहीं लगता।
  7871. 7:37:42हर कोई प्यार की बात करता है। हर मैगजीन,
  7872. 7:37:45न्यूज़पेपर, मिशनरी बस प्यार प्यार
  7873. 7:37:49प्यार। मैं अपने देश से प्यार करता हूं।
  7874. 7:37:52अपने राजा से, किसी किताब से, उस पहाड़
  7875. 7:37:56से, मजे से, अपनी बीवी से और भगवान से भी।
  7876. 7:38:00क्या प्यार एक आईडिया है? अगर है तो उसे
  7877. 7:38:04कल्टीवेट किया जा सकता है। नरिश किया जा
  7878. 7:38:07सकता है। घुमा फिरा के बदला जा सकता
  7879. 7:38:10है। जब तुम कहते हो मैं भगवान से प्यार
  7880. 7:38:14करता हूं तो इसका मतलब होता है कि तुम
  7881. 7:38:17अपने ही दिमाग के प्रोजेक्शन से प्यार कर
  7882. 7:38:20रहे हो। तुम्हारा खुद का
  7883. 7:38:22इमेज। जो तुमने रिस्पेक्टेबल और होली का
  7884. 7:38:26रूप दे दिया है। तो कहना मैं भगवान से
  7885. 7:38:30प्यार करता हूं। एकदम बकवास है। जब तुम
  7886. 7:38:33भगवान को पूजते हो, तुम अपने आप को पूज
  7887. 7:38:37रहे हो और यह प्यार नहीं होता। क्योंकि हम
  7888. 7:38:41इस इंसानी चीज जिसे प्यार कहते हैं, इसको
  7889. 7:38:44समझ नहीं
  7890. 7:38:46पाते। तो हम भाग जाते हैं उससे
  7891. 7:38:49अब्स्ट्रक्शंस में। शायद प्यार ही एक
  7892. 7:38:52आखिरी स्यूशन हो इंसान के सब प्रॉब्लम्स,
  7893. 7:38:56तकलीफों और मुश्किलों का।
  7894. 7:39:00तो फिर हम कैसे जानेंगे कि प्यार क्या है?
  7895. 7:39:03सिर्फ डिफाइन
  7896. 7:39:06करके। चर्च ने एक तरीके से डिफाइन किया।
  7897. 7:39:09सोसाइटी ने दूसरे तरीके से और हर तरह के
  7898. 7:39:12ट्विस्ट और टर्न दिए हैं। किसी को पूछना,
  7899. 7:39:17किसी के साथ सोना, इमोशनल एक्सचेंज,
  7900. 7:39:21कंपैनियनशिप। क्या यही प्यार है?
  7901. 7:39:26यही नॉर्म बना हुआ है। यही पैटर्न और यह
  7902. 7:39:30इतना पर्सनल, सेंसुअल और लिमिटेड हो गया
  7903. 7:39:34है कि धार्मिक लोग कहते हैं प्यार कुछ और
  7904. 7:39:38होना चाहिए।
  7905. 7:39:40उनके हिसाब से इंसानी प्यार में प्लेजर,
  7906. 7:39:44कंपटीशन, जलन, पोजेस करना, कंट्रोल
  7907. 7:39:48करना और दूसरे के सोच में दखल देना होता
  7908. 7:39:53है। और जब वह यह सब देखते हैं तो कहते हैं
  7909. 7:39:57कि प्यार का एक दूसरा वर्जन होना चाहिए।
  7910. 7:40:01डिवाइन, खूबसूरत, अनट जो करप्ट ना हो।
  7911. 7:40:07दुनिया भर में जो लोग अपने आप को होली
  7912. 7:40:10कहते हैं पवित्र उन्होंने हमेशा यह कहा है
  7913. 7:40:14कि औरत को देखना गलत
  7914. 7:40:17है। वह कहते हैं कि तुम भगवान के करीब
  7915. 7:40:20नहीं जा सकते अगर तुम सेक्स में इनवॉल्व
  7916. 7:40:22हो। इसलिए वह सेक्स को साइड में रख देते
  7917. 7:40:25हैं।
  7918. 7:40:27लेकिन अंदर से वह उसी में उलझे होते हैं।
  7919. 7:40:31लेकिन जब वह सेक्सुअलिटी को डिनाई करते
  7920. 7:40:33हैं तो जैसे वह अपनी आंखें बंद कर लेते
  7921. 7:40:37हैं। अपनी जुबान काट लेते हैं। क्योंकि वह
  7922. 7:40:41पूरी जमीन की खूबसूरती को ही इंकार कर
  7923. 7:40:44देते
  7924. 7:40:45हैं। उन्होंने अपने दिल और दिमाग को भूखा
  7925. 7:40:49मार दिया है। वह सूखे हुए इंसान बन गए
  7926. 7:40:53हैं। उन्होंने ब्यूटी को ही जोड़ दिया है
  7927. 7:40:56औरत से और ब्यूटी को निकाल बाहर किया
  7928. 7:41:00है। क्या प्यार को सेक्रेड और प्रोफेन
  7929. 7:41:05ह्यूमन और डिवाइन में बांटा जा सकता है या
  7930. 7:41:08सिर्फ प्यार होता है? क्या प्यार सिर्फ एक
  7931. 7:41:12के लिए होता है? सबके लिए नहीं। अगर मैं
  7932. 7:41:15कहता हूं मैं तुमसे प्यार करता हूं। तो
  7933. 7:41:19क्या इसका मतलब है कि मैं दूसरों से प्यार
  7934. 7:41:21नहीं करता? क्या प्यार पर्सनल होता है या
  7935. 7:41:25इंपर्सनल? मोरल होता है या
  7936. 7:41:29इमोरल? फैमिली तक सीमित होता है या उसके
  7937. 7:41:32बाहर भी? अगर तुम इंसानियत से प्यार करते
  7938. 7:41:35हो तो क्या तुम किसी एक से प्यार कर सकते
  7939. 7:41:39हो? क्या प्यार एक सेंटीमेंट है? क्या
  7940. 7:41:42प्यार एक इमोशन है? क्या प्यार प्लेजर और
  7941. 7:41:45डिजायर है? यह सारे सवाल दिखाते हैं कि
  7942. 7:41:50हमारे पास प्यार को लेकर पहले से ही सोची
  7943. 7:41:54समझी सोच
  7944. 7:41:57है कि प्यार कैसा होना चाहिए या नहीं होना
  7945. 7:42:01चाहिए। एक पैटर्न एक कोड जो हमारे कल्चर
  7946. 7:42:05ने बनाया
  7947. 7:42:07है। तो अगर हमें प्यार को समझना है तो
  7948. 7:42:11सबसे पहले हमें उस पर छाई हुई सदियों की
  7949. 7:42:15धूल हटानी
  7950. 7:42:16पड़ेगी। सारे आइडियल्स और आईडियोलॉजीस
  7951. 7:42:20हटानी पड़ेंगी। किसी भी चीज को क्या होना
  7952. 7:42:23चाहिए और क्या है में बांटना।
  7953. 7:42:27सबसे ज्यादा धोखेबाज तरीका है जिंदगी को
  7954. 7:42:30समझने का। अब मैं कैसे समझूं कि यह आग
  7955. 7:42:35जिसे हम प्यार कहते हैं। यह फ्लेम यह क्या
  7956. 7:42:39है? सिर्फ किसी को एक्सप्रेस करने की बात
  7957. 7:42:43नहीं हो रही बल्कि यह अपने आप में क्या
  7958. 7:42:46है?
  7959. 7:42:48सबसे पहले मैं वह सब इंकार करता हूं जो
  7960. 7:42:50चर्च ने, सोसाइटी ने, पेरेंट्स ने,
  7961. 7:42:53दोस्तों ने, हर किताब ने, हर आदमी ने
  7962. 7:42:56प्यार के बारे में कहा
  7963. 7:42:58है। क्योंकि मैं खुद जानना चाहता हूं कि
  7964. 7:43:02यह क्या है?
  7965. 7:43:04यह एक बहुत बड़ा सवाल है जो पूरी इंसानियत
  7966. 7:43:07से जुड़ा है। हजार तरीकों से इसे डिफाइन
  7967. 7:43:11किया गया है और मैं खुद भी किसी पैटर्न
  7968. 7:43:14में फंसा हुआ हूं जो मुझे इस वक्त अच्छा
  7969. 7:43:17लग रहा है या प्लेजर दे रहा है। तो क्या
  7970. 7:43:22मुझे अगर मैं इसे समझना चाहता हूं अपने
  7971. 7:43:27ही तरफदारियों से आजाद नहीं होना चाहिए।
  7972. 7:43:31मैं कंफ्यूज्ड हूं।
  7973. 7:43:34अपनी ही इच्छाओं में फंसा हुआ हूं। तो मैं
  7974. 7:43:38कहता
  7975. 7:43:39हूं अपने कंफ्यूजन को साफ करो शायद तुम
  7976. 7:43:43जान सको कि प्यार क्या है उस चीज के जरिए
  7977. 7:43:46जो प्यार नहीं है। सरकार कहती है अपने देश
  7978. 7:43:50के लिए मार डालो। क्योंकि तुम अपने देश से
  7979. 7:43:53प्यार करते हो। क्या यह प्यार
  7980. 7:43:57है? धर्म कहता है भगवान से प्यार के लिए
  7981. 7:44:01सेक्स छोड़ दो। क्या यह प्यार है? क्या
  7982. 7:44:05प्यार डिजायर है? ना मत
  7983. 7:44:10कहो। ज्यादातर लोगों के लिए प्यार डिजायर
  7984. 7:44:13के साथ होता है जो प्लेजर देता है सेंसेस
  7985. 7:44:17के
  7986. 7:44:17जरिए। सेक्स के कनेक्शन और उसके पूरे
  7987. 7:44:21एक्सपीरियंस में मैं सेक्स के अगेंस्ट
  7988. 7:44:24नहीं हूं।
  7989. 7:44:26लेकिन देखो इसमें क्या छुपा है। जो सेक्स
  7990. 7:44:30तुम्हें एक मोमेंट के लिए देता है वह है
  7991. 7:44:33अपने आप से पूरा खत्म हो जाना। फिर तुम
  7992. 7:44:36फिर से अपने पुराने हलचल के साथ लौट आते
  7993. 7:44:39हो। इसलिए तुम चाहते हो उस मोमेंट को
  7994. 7:44:43बार-बार रिपीट करना जिसमें कोई वरी नहीं
  7995. 7:44:46होती। कोई प्रॉब्लम नहीं होती। कोई मैं
  7996. 7:44:50नहीं होता।
  7997. 7:44:53तुम कहते हो तुम अपनी बीवी से प्यार करते
  7998. 7:44:55हो। उस प्यार में सेक्स का प्लेजर भी होता
  7999. 7:44:59है। यह सुकून भी होता है कि कोई तुम्हारे
  8000. 7:45:02बच्चों का ध्यान रखे, खाना बनाए। तुम उस
  8001. 7:45:06पर डिपेंड करते हो। उसने तुम्हें अपना तन
  8002. 7:45:10दिया, अपने इमोशंस, अपना
  8003. 7:45:13सपोर्ट, एक फीलिंग ऑफ
  8004. 7:45:16सिक्योरिटी। फिर वह तुमसे अलग हो जाती है
  8005. 7:45:19या वह बोर हो जाती है या किसी और के पास
  8006. 7:45:22चली जाती है और तुम्हारा पूरा इमोशनल
  8007. 7:45:25बैलेंस हिल जाता
  8008. 7:45:27है और यह जो डिस्टरबेंस है जो तुम्हें
  8009. 7:45:31पसंद नहीं उसे कहते हो तुम जेलसी इसमें
  8010. 7:45:35दर्द होता है, चिंता होती है, गुस्सा होता
  8011. 7:45:38है, हेट होती
  8012. 7:45:40है। तो असल में तुम कह रहे हो जब तक तुम
  8013. 7:45:45मेरी हो मैं तुमसे प्यार करता हूं लेकिन
  8014. 7:45:48जैसे ही तुम मेरी नहीं रही मैं तुमसे नफरत
  8015. 7:45:51करता
  8016. 7:45:52हूं। जब तक तुम मेरी डिजायर्स को पूरा कर
  8017. 7:45:56रही हो चाहे वह सेक्स हो या कुछ और तब तक
  8018. 7:46:00मैं तुमसे प्यार करता हूं। लेकिन जैसे ही
  8019. 7:46:03तुम यह देना बंद करती हो मुझे तुम पसंद
  8020. 7:46:07नहीं।
  8021. 7:46:09तो तुम दोनों के बीच में एगोनिज्म आता है,
  8022. 7:46:13सेपरेशन होती है और जब तुम दूसरे से अलग
  8023. 7:46:16महसूस करते हो तो वहां प्यार नहीं होता।
  8024. 7:46:22लेकिन अगर तुम अपनी बीवी के साथ जी सको
  8025. 7:46:25बिना थॉट के यह सारी कंट्राडिक्टरी
  8026. 7:46:28स्टेट्स क्रिएट किए यह एंडलेस
  8027. 7:46:31झगड़े तो शायद शायद तुम जानो कि प्यार
  8028. 7:46:36क्या है।
  8029. 7:46:39तब तुम पूरी तरह आजाद हो जाते हो और वह
  8030. 7:46:42भी।
  8031. 7:46:45लेकिन अगर तुम उस पर अपने प्लेजर के लिए
  8032. 7:46:47डिपेंडेंट हो तो तुम उसके स्लेव हो। तो जब
  8033. 7:46:51प्यार होता है वहां फ्रीडम होनी चाहिए। ना
  8034. 7:46:54सिर्फ दूसरे से बल्कि खुद से भी। यह मेरा
  8035. 7:46:58है। मैं तुमसे इमोशनल नरिशमेंट लेता हूं।
  8036. 7:47:03मैं तुम पर डिपेंड करता हूं।
  8037. 7:47:06इन सब में ए्जायटी, फियर, जेलसी, गिल्ट
  8038. 7:47:10हमेशा होती है। और जब तक डर है तब तक
  8039. 7:47:15प्यार नहीं हो
  8040. 7:47:17सकता। एक दुख से भरा हुआ दिमाग कभी नहीं
  8041. 7:47:21जान सकता कि प्यार क्या
  8042. 7:47:24है। सेंटीमेंटालिटी और इमोशनलिज्म का
  8043. 7:47:27प्यार से कोई लेना देना
  8044. 7:47:30नहीं। प्यार का प्लेजर और डिजायर से कोई
  8045. 7:47:34रिश्ता नहीं। प्यार थॉट का रिजल्ट नहीं है
  8046. 7:47:37क्योंकि थॉट तो पास्ट
  8047. 7:47:39है। थॉट प्यार को ग्रो नहीं कर सकता।
  8048. 7:47:43प्यार में जेलसी नहीं होती क्योंकि जेलसी
  8049. 7:47:46पास्ट से आती
  8050. 7:47:48है। प्यार हमेशा एक्टिव होता है। प्रेजेंट
  8051. 7:47:51में होता
  8052. 7:47:52है। यह नहीं होता मैं प्यार करूंगा या मैं
  8053. 7:47:56प्यार कर चुका
  8054. 7:47:58हूं। अगर तुम्हें प्यार का एहसास है तो
  8055. 7:48:01तुम किसी का पीछा नहीं करते। प्यार किसी
  8056. 7:48:04की बात नहीं
  8057. 7:48:06मानता। जब तुम प्यार करते हो तो वहां ना
  8058. 7:48:09रिस्पेक्ट होती है ना
  8059. 7:48:12डिसरिस्पेक्ट। क्या तुम जानते हो असली में
  8060. 7:48:15किसी से प्यार करना क्या होता है? बिना
  8061. 7:48:17नफरत के, बिना जलन के, बिना गुस्से के।
  8062. 7:48:22बिना यह चाहे कि वह क्या करें या क्या
  8063. 7:48:25सोचे, बिना उसको दोष दिए, बिना किसी से
  8064. 7:48:29कंपेयर किए। क्या तुम जानते हो इसका मतलब
  8065. 7:48:32क्या
  8066. 7:48:33है? जहां प्यार होता है क्या वहां
  8067. 7:48:36कंपैरिजन होती
  8068. 7:48:39है? जब तुम किसी से अपने पूरे दिल से,
  8069. 7:48:42पूरे दिमाग से, पूरे जिस्म से, अपने पूरे
  8070. 7:48:45होने के साथ प्यार करते हो तो क्या वहां
  8071. 7:48:48कंपैरिजन होती
  8072. 7:48:51है? जब तुम अपने आप को पूरी तरह उस प्यार
  8073. 7:48:54में खो देते हो तब कोई दूसरा होता ही
  8074. 7:48:57नहीं। क्या प्यार में जिम्मेदारी और फर्ज
  8075. 7:49:00होता है? और क्या प्यार इन शब्दों का यूज
  8076. 7:49:03करता
  8077. 7:49:03है? क्या तुम कोई काम फर्ज समझ के करते
  8078. 7:49:07हो? क्या उसमें प्यार होता है? फर्ज में
  8079. 7:49:11प्यार नहीं
  8080. 7:49:13होता। फर्ज का जो स्ट्रक्चर है जिसमें
  8081. 7:49:16इंसान फंसा हुआ है, वही उसको बर्बाद कर
  8082. 7:49:19रहा
  8083. 7:49:21है। जब तक तुम किसी काम को इसलिए कर रहे
  8084. 7:49:24हो क्योंकि वह तुम्हारा फर्ज है। तब तक
  8085. 7:49:28तुम उससे प्यार नहीं
  8086. 7:49:30करते। जहां प्यार होता है, वहां ना फर्ज
  8087. 7:49:33होता है, ना
  8088. 7:49:36जिम्मेदारी। ज्यादातर मां-बाप सोचते हैं
  8089. 7:49:39कि वह अपने बच्चों के लिए जिम्मेदार है।
  8090. 7:49:43और उनकी यह जिम्मेदारी का मतलब होता है
  8091. 7:49:45उनको बताना कि क्या करना चाहिए और क्या
  8092. 7:49:49नहीं। क्या बनना चाहिए और क्या नहीं बनना
  8093. 7:49:52चाहिए।
  8094. 7:49:55मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चों का
  8095. 7:49:57सोसाइटी में एक सिक्योर पोजीशन हो। जो वह
  8096. 7:50:01जिम्मेदारी कहते हैं उस रिस्पेक्टेबिलिटी
  8097. 7:50:04का पार्ट है जिसको वह पूछते
  8098. 7:50:07हैं। और मुझे लगता है जहां
  8099. 7:50:10रिस्पेक्टेबिलिटी होती है, वहां कोई ऑर्डर
  8100. 7:50:12नहीं होता।
  8101. 7:50:14वह सिर्फ एक परफेक्ट बोरजवा बनने की कोशिश
  8102. 7:50:17में लगे होते
  8103. 7:50:20हैं। जब वह अपने बच्चों को सोसाइटी में
  8104. 7:50:23फिट करने के लिए तैयार करते हैं तो वह
  8105. 7:50:27वॉर, कॉन्फ्लिक्ट और ब्रूटलिटी को बनाए
  8106. 7:50:30रखते
  8107. 7:50:31हैं। क्या तुम इसे केयर और प्यार कहते हो?
  8108. 7:50:36असली केयर करना मतलब वैसे ही केयर करना
  8109. 7:50:39जैसे तुम किसी पेड़ या पौधे के लिए करते
  8110. 7:50:42हो।
  8111. 7:50:43उसे पानी देना, उसकी जरूरत समझना, कौन सी
  8112. 7:50:47मिट्टी उसके लिए बेस्ट है यह
  8113. 7:50:49देखना। उसे सॉफ्टनेस और प्यार से देखभाल
  8114. 7:50:53करना।
  8115. 7:50:54लेकिन जब तुम अपने बच्चों को सोसाइटी के
  8116. 7:50:57लिए तैयार करते हो तो तुम उन्हें मरने के
  8117. 7:51:00लिए तैयार कर रहे हो। अगर तुम अपने बच्चों
  8118. 7:51:03से प्यार करते तो दुनिया में कोई वॉर नहीं
  8119. 7:51:06होती।
  8120. 7:51:08जब तुम किसी अपने को खो देते हो जिसे तुम
  8121. 7:51:11प्यार करते हो तुम आंसू बहाते हो क्या वह
  8122. 7:51:15आंसू तुम्हारे लिए होते हैं या उसके लिए
  8123. 7:51:17जो मर
  8124. 7:51:19गया क्या तुम खुद के लिए रो रहे हो या
  8125. 7:51:22किसी और के लिए क्या तुमने कभी किसी और के
  8126. 7:51:26लिए रोया
  8127. 7:51:27है क्या तुमने कभी अपने उस बेटे के लिए
  8128. 7:51:31रोया है जो बैटल फील्ड में मारा
  8129. 7:51:34गया तुमने रोया तो जरूर लेकिन क्या वह
  8130. 7:51:38आंसू सेल्फ पिटी से आए या इसलिए कि एक
  8131. 7:51:42इंसान मार दिया
  8132. 7:51:44गया। अगर तुमने सेल्फ पिटी से रोए तो यह
  8133. 7:51:48उसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि तुम सिर्फ
  8134. 7:51:52अपने बारे में सोच रहे
  8135. 7:51:54हो। अगर तुम इसलिए रो रहे हो कि तुमने
  8136. 7:51:58जिसमें इतना प्यार इन्वेस्ट किया था वह
  8137. 7:52:00चला गया तो वह प्यार सच में था ही नहीं।
  8138. 7:52:05तुम रोते हो क्योंकि तुम अकेला महसूस करते
  8139. 7:52:08हो क्योंकि तुम्हें छोड़ दिया गया है
  8140. 7:52:12क्योंकि अब तुम पावरफुल नहीं
  8141. 7:52:14रहे। अगर तुम इस बात को समझ जाओ मतलब उसे
  8142. 7:52:19डायरेक्टली छू लो जैसे तुम किसी पेड़,
  8143. 7:52:22पिलर या हाथ को छूते हो। तो तुम देखोगे कि
  8144. 7:52:26सोरो खुद बनाई हुई चीज है। सोरो को थॉट ने
  8145. 7:52:31बनाया है। दुख को विचारों ने बनाया है। सो
  8146. 7:52:36टाइम का रिजल्ट है।
  8147. 7:52:39तीन साल पहले मेरा भाई था। अब वह मर गया।
  8148. 7:52:42अब मैं अकेला हूं। दर्द में हूं। किसी से
  8149. 7:52:45कंफर्ट या साथ नहीं मिल रहा। और यह मेरी
  8150. 7:52:49आंखों में आंसू लाता है। यह सब तुम अपने
  8151. 7:52:53अंदर देख सकते हो। अगर तुम ऑब्जर्व करो।
  8152. 7:52:56तुम इसे एक नजर में पूरी तरह देख सकते हो।
  8153. 7:53:00एनालिसिस में टाइम बर्बाद किए बिना।
  8154. 7:53:04तुम एक मोमेंट में देख सकते हो इस छोटी सी
  8155. 7:53:07चीज का पूरा स्ट्रक्चर जिसे मैं कहते
  8156. 7:53:12हैं। मेरे आंसू, मेरी फैमिली, मेरा देश,
  8157. 7:53:16मेरी बिलीफ, मेरा धर्म, यह सारी
  8158. 7:53:20बदसूरती, यह सब तुम्हारे अंदर है। जब तुम
  8159. 7:53:24इसे दिल से देखते हो ना केवल दिमाग से जब
  8160. 7:53:28तुम इसे अपने दिल की गहराइयों से देखते
  8161. 7:53:31हो तब तुम्हारे पास वह चाबी होती है जो इस
  8162. 7:53:37दुख को इस सोरो को खत्म करती
  8163. 7:53:42है। यह दुख और प्यार एक साथ नहीं चल सकते।
  8164. 7:53:47यह सोरो और प्यार एक साथ नहीं चल सकते।
  8165. 7:53:51लेकिन क्रिश्चियन दुनिया ने सफरिंग को
  8166. 7:53:53आइडियलाइज कर दिया है। उसे क्रॉस पर लटका
  8167. 7:53:57दिया और उसकी पूजा की। ऐसे जैसे तुम
  8168. 7:54:00सफरिंग से सिर्फ एक ही दरवाजे से निकल
  8169. 7:54:03सकते
  8170. 7:54:05हो। और यह पूरी रिलीजियस सोसाइटी की
  8171. 7:54:09एक्सप्लइटिंग स्ट्रक्चर है। तो जब तुम
  8172. 7:54:12पूछते हो कि प्यार क्या है? हो सकता है
  8173. 7:54:15तुम जवाब देखने से डर रहे हो। हो सकता है
  8174. 7:54:19उसका मतलब हो पूरी जिंदगी का हिल
  8175. 7:54:22जाना। हो सकता है तुम्हारा परिवार टूट
  8176. 7:54:26जाए। शायद तुम्हें पता चले कि तुम अपने
  8177. 7:54:29पति या पत्नी या बच्चों से प्यार नहीं
  8178. 7:54:32करते। करते हो
  8179. 7:54:35क्या? शायद तुम्हें अपना बनाया हुआ घर
  8180. 7:54:38तोड़ना पड़े। शायद तुम कभी वापस मंदिर ना
  8181. 7:54:42जा पाओ।
  8182. 7:54:44लेकिन अगर तुम फिर भी सच में जानना चाहते
  8183. 7:54:46हो तो तुम देखोगे कि डर प्यार नहीं
  8184. 7:54:53है। जलन प्यार नहीं
  8185. 7:54:57है। अपना समझना या कब्जा करना या हावी
  8186. 7:55:01होना प्यार नहीं है। जिम्मेदारी और फर्ज
  8187. 7:55:05प्यार नहीं है। खुद पर दया प्यार नहीं है।
  8188. 7:55:08नफरत मिलने का दर्द प्यार नहीं
  8189. 7:55:10है। प्यार नफरत का उल्टा नहीं है। जैसे कि
  8190. 7:55:15ह्यूमिलिटी घमंड का उल्टा नहीं
  8191. 7:55:18है। तो अगर तुम इन सबको मिटा पाओ जोर लगा
  8192. 7:55:22के नहीं। पर जैसे बारिश पत्ते से पुराने
  8193. 7:55:26धूल को धो डालती है। शायद तब तुम इस अजीब
  8194. 7:55:30से फूल को देख पाओ। जिसका इंसान हमेशा से
  8195. 7:55:34भूखा रहा है। अगर तुम्हारे पास प्यार नहीं
  8196. 7:55:38है सिर्फ थोड़ा सा नहीं पर पूरी भरपूरता
  8197. 7:55:42से। अगर तुम मुझसे भरे हुए नहीं हो तो
  8198. 7:55:45दुनिया तबाह हो
  8199. 7:55:47जाएगी। तुम दिमाग से जानते हो कि इंसान का
  8200. 7:55:50एक होना जरूरी है और प्यार ही इकलौता
  8201. 7:55:53रास्ता है। लेकिन कौन तुम्हें प्यार करना
  8202. 7:55:56सिखाएगा?
  8203. 7:55:58क्या कोई अथॉरिटी, कोई मेथड, कोई सिस्टम
  8204. 7:56:01तुम्हें प्यार करना सिखा सकता
  8205. 7:56:03है? अगर कोई तुम्हें सिखा रहा है तो वह
  8206. 7:56:07प्यार नहीं है। क्या तुम कह सकते हो कि
  8207. 7:56:11मैं प्यार की प्रैक्टिस
  8208. 7:56:14करूंगा? मैं रोज बैठूंगा और प्यार के बारे
  8209. 7:56:17में सोचूंगा। मैं प्रैक्टिस करूंगा कि मैं
  8210. 7:56:20और ज्यादा दयालु और नरम बनूं। और अपने आप
  8211. 7:56:23को दूसरों पर ध्यान देने के लिए मजबूर
  8212. 7:56:26करूंगा।
  8213. 7:56:30क्या तुम कहना चाहते हो कि तुम डिसिप्लिन
  8214. 7:56:32या विल पावर से प्यार कर सकते हो? जब तुम
  8215. 7:56:36डिसिप्लिन और विल लगाते हो प्यार करने के
  8216. 7:56:38लिए तो प्यार खिड़की से बाहर चला जाता है।
  8217. 7:56:42किसी मेथड या सिस्टम को फॉलो करके तुम
  8218. 7:56:45ज्यादा चतुर या दयालु बन सकते हो या नॉन
  8219. 7:56:49वायलेंस का स्टेट पा सकते हो। लेकिन उसका
  8220. 7:56:53प्यार से कोई लेना देना नहीं होता।
  8221. 7:56:56इस टूटे फूटे प्यासे रेगिस्तान जैसे
  8222. 7:56:59दुनिया में प्यार नहीं है क्योंकि प्लेजर
  8223. 7:57:02और डिजायर सबसे बड़ा रोल निभाते हैं।
  8224. 7:57:06लेकिन बिना प्यार के तुम्हारी रोज की
  8225. 7:57:09जिंदगी का कोई मतलब
  8226. 7:57:11नहीं। और प्यार तब तक नहीं हो सकता जब तक
  8227. 7:57:15उसके साथ ब्यूटी नहीं हो। ब्यूटी कोई चीज
  8228. 7:57:20देखने वाली नहीं होती। ना कोई सुंदर पेड़,
  8229. 7:57:23ना पेंटिंग, ना बिल्डिंग, ना सुंदर
  8230. 7:57:26औरत। ब्यूटी तब होती है जब तुम्हारा दिल
  8231. 7:57:30और दिमाग जानते हो कि प्यार क्या
  8232. 7:57:33है। बिना प्यार और ब्यूटी के कोई वर्चू
  8233. 7:57:37नहीं होती। और तुम अच्छी तरह जानते हो कि
  8234. 7:57:40चाहे तुम सोसाइटी सुधारो, गरीबों को
  8235. 7:57:44खिलाओ। तुम सिर्फ और दुख और परेशानी पैदा
  8236. 7:57:48करोगे। क्योंकि बिना प्यार के तुम्हारे
  8237. 7:57:51दिल और दिमाग के अंदर सिर्फ बदसूरती और
  8238. 7:57:54गरीबी होती है।
  8239. 7:57:58लेकिन जब प्यार और ब्यूटी होती है तो जो
  8240. 7:58:00कुछ भी तुम करते हो वह सही होता है। जो
  8241. 7:58:04कुछ भी तुम करते हो उसमें एक तरह का आर्डर
  8242. 7:58:06होता है। अगर तुम जानते हो कैसे प्यार
  8243. 7:58:10करना है। तो तुम जो चाहो वह कर सकते हो
  8244. 7:58:14क्योंकि वह हर प्रॉब्लम का हल
  8245. 7:58:16है। तो हम इस पॉइंट पर पहुंचते हैं। क्या
  8246. 7:58:21दिमाग प्यार तक पहुंच सकता है बिना किसी
  8247. 7:58:23डिसिप्लिन
  8248. 7:58:26के? बिना किसी सोच के, बिना किसी फोर्स
  8249. 7:58:30के, बिना किसी किताब, गुरु या लीडर के
  8250. 7:58:34वैसे ही जैसे एक सुंदर सनसेट को देखा जाता
  8251. 7:58:38है। मुझे लगता है सिर्फ एक चीज जरूरी है
  8252. 7:58:41और वह है बिना किसी मोटिव के पैशन।
  8253. 7:58:46ऐसा पैशन जो किसी कमिटमेंट या लगाव का
  8254. 7:58:49नतीजा नहीं हो। एक जो लस्ट ना
  8255. 7:58:53हो। एक आदमी जो पैशन नहीं जानता वह कभी
  8256. 7:58:57प्यार नहीं जान सकता। क्योंकि प्यार तभी
  8257. 7:59:00आता है जब तुम पूरी तरह खुद को छोड़ देते
  8258. 7:59:03हो। एक माइंड जो ढूंढ रहा है वह पैशनेट
  8259. 7:59:06नहीं होता और प्यार तभी मिलता है जब तुम
  8260. 7:59:10उसे बिना ढूंढे पाते हो।
  8261. 7:59:14जब वह बिना किसी एफर्ट या एक्सपीरियंस के
  8262. 7:59:16सामने आता
  8263. 7:59:19है। ऐसा प्यार वक्त का हिस्सा नहीं होता।
  8264. 7:59:23ऐसा प्यार पर्सनल भी होता है और इंपर्सनल
  8265. 7:59:26भी। एक भी होता है और अनेक
  8266. 7:59:30भी। जैसे एक फूल में खुशबू होती है। तुम
  8267. 7:59:34उसे सूंघ सकते हो या इग्नोर कर सकते हो।
  8268. 7:59:39वह फूल सबके लिए होता है और उसके लिए भी
  8269. 7:59:42जो उसे गहराई से महसूस करता है, प्यार से
  8270. 7:59:45देखता है। चाहे कोई गार्डन के पास हो या
  8271. 7:59:49दूर फूल के लिए सब एक जैसे हैं क्योंकि वह
  8272. 7:59:53पूरी तरह खुशबू से भरा हुआ होता है। और
  8273. 7:59:57सबके साथ उस खुशबू को बांट रहा होता
  8274. 8:00:02है। प्यार एक नई ताजा जिंदा चीज होती है।
  8275. 8:00:07उसका कोई कल नहीं होता। कोई आने वाला कल
  8276. 8:00:10नहीं होता। वह सोच के हंगामे से परे होता
  8277. 8:00:15है। सिर्फ एक मासूम माइंड ही जानता है
  8278. 8:00:19प्यार क्या होता है और एक मासूम माइंड
  8279. 8:00:22दुनिया में रह सकता है जो खुद मासूम नहीं
  8280. 8:00:27है। इस अजीब चीज को पाने के लिए जिसको
  8281. 8:00:30इंसान हमेशा ढूंढता रहा है। सैक्रिफाइस
  8282. 8:00:33करके, वरशिप करके, रिश्तों में, सेक्स
  8283. 8:00:37में, प्लेजर और पेन में यह तभी मुमकिन है
  8284. 8:00:41जब थॉट खुद को समझता
  8285. 8:00:44है और नेचुरली खत्म हो जाता है। तब प्यार
  8286. 8:00:49का कोई ऑोजिट नहीं होता। तब प्यार में कोई
  8287. 8:00:52कॉन्फ्लिक्ट नहीं
  8288. 8:00:53होता। तुम पूछ सकते हो अगर मुझे ऐसा प्यार
  8289. 8:00:57मिलता है तो मेरा क्या होगा? मेरी पत्नी,
  8290. 8:01:01मेरे बच्चे, मेरी फैमिली का उनको तो
  8291. 8:01:04सिक्योरिटी
  8292. 8:01:07चाहिए। जब तुम ऐसा सवाल पूछते हो तो इसका
  8293. 8:01:10मतलब तुम कभी थॉट के फील्ड के बाहर गए ही
  8294. 8:01:14नहीं
  8295. 8:01:15हो। जब तुम एक बार उस फील्ड के बाहर चले
  8296. 8:01:18जाते हो तो तुम कभी ऐसा सवाल पूछते ही
  8297. 8:01:21नहीं। क्योंकि तब तुम जानते हो प्यार क्या
  8298. 8:01:25है। इसलिए कोई थॉट नहीं होता और इसलिए कोई
  8299. 8:01:30टाइम नहीं
  8300. 8:01:31होता। हो सकता है जब तुम यह सब सुनो और
  8301. 8:01:35जादू जैसा महसूस करो। लेकिन असल में थॉट
  8302. 8:01:39और टाइम के परे जाने का मतलब है दुख। सो
  8303. 8:01:44के परे
  8304. 8:01:45जाना। और तब तुम जागते हो कि एक अलग
  8305. 8:01:49डायमेंशन है जिसका नाम है प्यार।
  8306. 8:01:54लेकिन तुम नहीं जानते कैसे उस अजीब सोर्स
  8307. 8:01:56तक पहुंचना है तो तुम क्या करते हो अगर
  8308. 8:02:01तुम्हें नहीं पता क्या करना है तो तुम कुछ
  8309. 8:02:04भी नहीं करते है ना बिल्कुल कुछ
  8310. 8:02:08नहीं और तब तुम्हारे अंदर पूरी तरह से एक
  8311. 8:02:12सन्नाटा होता है समझ रहे हो इसका मतलब
  8312. 8:02:16इसका मतलब है तुम ना ढूंढ रहे हो ना चाह
  8313. 8:02:20रहे हो ना पीछा कर रहे हो। कोई सेंटर ही
  8314. 8:02:23नहीं होता तुम्हारे अंदर और
  8315. 8:02:26तब वहां होता है
  8316. 8:02:32प्यार। अब तक हमने इस एपिसोड में लगभग दो
  8317. 8:02:36पार्ट को कवर किया है। बाकी की बुक मेरे
  8318. 8:02:40अनुमान से करीब 6 घंटे की और है। जिसको
  8319. 8:02:44अगर समय मिलेगा तो फिर कभी कवर करने की
  8320. 8:02:46कोशिश करूंगा। कब पता नहीं।
  8321. 8:02:51आज के लिए बस इतना ही। हम फिर मिलेंगे
  8322. 8:02:54आपसे एक नए एपिसोड में एक नए टॉपिक के
  8323. 8:02:57साथ। मेरा नाम है रोहित और आप सुन रहे थे
  8324. 8:03:00सिलेबस वि रोहित। धन्यवाद।
  8325. 8:03:32ओम
  8326. 8:03:46ओम

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