Jaydev Goswami ki अद्भुत कथा — Transcript
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- 0:00अगर आज जगन्नाथ जी की कथा करनी है तो कुछ
- 0:03इंपॉर्टेंट
- 0:05पॉइंट्स हमें कवर करने हैं। जगन्नाथ जी की
- 0:08कथा तो अशेष है। कितनी सारी कहानियां है।
- 0:13सारे तो हम नहीं कंप्लीट कर सकते हैं।
- 0:16लेकिन जगन्नाथ जी के चरित्र के बारे में
- 0:19जब हम चर्चा करते हैं तो एक विशेष भक्त के
- 0:22बारे में तो चर्चा करनी ही चाहिए। नहीं तो
- 0:25यह कथा पूर्ण नहीं होती है। जिस तरह से हम
- 0:30जब श्री राम जी की कथा होती है तो हम लोग
- 0:33हनुमान जी के बारे में जरूर बात करते हैं।
- 0:36जब हम वामन देव की चर्चा करते हैं तो बलि
- 0:39महाराज की बात आती है। हम नरसिम देव की
- 0:41चर्चा करते हैं तो प्रह्लाद महाराज की बात
- 0:44जरूर आती है। हम अगर इस के बारे में बात
- 0:47करें तो प्रभुपाद जी के बारे में जरूर
- 0:49बोलना होता है। तो उसी तरह से अगर हम
- 0:54जगन्नाथ जी के बारे में बात करते हैं तो
- 0:56इस भक्त के बारे में बात करना बहुत जरूरी
- 0:59है और वह है जयदेव गोस्वामी क्या किया है
- 1:04जयदेव गोस्वामी ने गीत गोविंद का रचना की
- 1:08है और हम सब जानते हैं कि गीत गोविंद
- 1:11जगन्नाथ जी को कितना प्रिय था तो मैंने
- 1:14सोचा आज हम जयदेव गोस्वामी कौन थे उनका
- 1:18जन्म कहां हुआ और उनके उनके साथ हुए
- 1:22जगन्नाथ जी की अनेक लीलाओं के बारे में हम
- 1:24चर्चा करेंगे। जयदेव गोस्वामी हमारे लिए
- 1:28इसीलिए भी विशेष है क्योंकि चैतन्य
- 1:32चरितामृत में भी कृष्णदास कविराज गोस्वामी
- 1:35मध्य लीला के सेकंड चैप्टर में बताते हैं
- 1:37कैसे दिन रात दिन रात चैतन्य महाप्रभु
- 1:43चंदीदास के भजन विद्यापति के कृष्ण
- 1:47करुणामृतम बिल्व मंगल ठाकुर का और रामानंद
- 1:51राय का लिखा हुआ नाटक और जयदेव गोस्वामी
- 1:54का गीत गोविंद इसका बार-बार वे श्रवण करते
- 1:58थे। उन्हें बहुत अच्छा लगता था। तो इसलिए
- 2:01हमारे लिए और भी इंपॉर्टेंट है। लेकिन इस
- 2:04गीत गोविंद की विडंबना यह है कि हम गीत
- 2:09गोविंद को गा तो सकते हैं लेकिन गीत
- 2:12गोविंद समझने के लिए हमारे लेवल पर नहीं
- 2:14है। हम बहुत नीचे हैं। वो बहुत ही हायर
- 2:19लेवल पर है। बहुत ही उत्तम भक्तों के लिए
- 2:22है। तो इसीलिए आप देखोगे कि हम लोग कहीं
- 2:25भी गीत गोविंद के बारे में कोई प्रवचन
- 2:28नहीं होता है। उसकी डिटेल्स या उसको
- 2:30समझना। हालांकि हरि भक्ति विलास में कहा
- 2:34गया है कि विग्रह के सामने गीत गोविंद
- 2:36गाना चाहिए। लेकिन गीत गोविंद हम गा तो
- 2:39सकते हैं बट भक्त सिद्धांत सरस्वती ठाकुर
- 2:41श्रील प्रभुपाद जी ने वार्निंग दिया है कि
- 2:44उसके मीनिंग को समझने की कोशिश मत करो या
- 2:47उसके मीनिंग में जाओ ही मत। सिर्फ उसका
- 2:50पारायण कर सकते हैं। हम गा सकते हैं
- 2:52क्योंकि ठाकुर जी को बहुत पसंद है। अब
- 2:55क्यों हम नहीं गा सकते गीता गोविंद? उसके
- 2:58बारे में आगेआगे आएगा। पहले तो मैं बताना
- 3:01चाहती हूं जयदेव गोस्वामी जो है वो
- 3:04केंदु बिलव नाम के ग्राम में भोजदेव नाम
- 3:09के एक ब्राह्मण के घर में उनका जन्म होता
- 3:11है। उनकी माता का नाम है वामा देवी और
- 3:15इनके जन्म के बारे में भी बहुत सारे
- 3:19मत हैं। कोई कहते हैं कि वे दक्षिण भारत
- 3:22से हैं। कोई कहते हैं वे ओसा से है। कोई
- 3:25कहते हैं नहीं नहीं वह बंगाल से है। अब वह
- 3:28जहां से भी है हम यह मान के चलेंगे कि वह
- 3:31केंदु बिल्व नाम के ग्राम से है। भक्ति
- 3:34सिद्धांत सरस्वती ठाकुर भी कहीं कहे थे कि
- 3:36नहीं वह बंगाल से है
- 3:39क्योंकि लक्ष्मण सेन महाराज जिनके साथ
- 3:41उनका काफी नजदीक के संबंध थे वह लक्ष्मण
- 3:45सेन महाराज बंगाल के राजा थे। तो हम यह
- 3:47मानते हैं कि शायद उनका जन्म वहीं कहीं
- 3:50हुआ था।
- 3:51अब यह केंदुब बिल्व नाम ग्राम में उनका
- 3:54जन्म हुआ था जयदेव गोस्वामी का और उनके
- 3:58जीवन काल में सबसे ज्यादा अगर हम उनकी कथा
- 4:01सुनते हैं तो दो लोग का विशेष नाम आता है।
- 4:05एक उनकी पत्नी पद्मावती और दूसरा महाराज
- 4:08लक्ष्मण सेन। लक्ष्मण सेन के साथ उनका
- 4:11विशेष संबंध था। यह महाराज लक्ष्मण सेन की
- 4:15कहानी भी कहानी भी बहुत ही अद्भुत है
- 4:18क्योंकि यह जो महाराज है उनके वंश में कोई
- 4:23भक्त नहीं है। उनके जो पिताजी थे बलालसेन
- 4:28वे भी भक्त नहीं थे। और बलाल सेन के जो
- 4:31पिताजी और दादाजी थे वे भी भक्त नहीं थे।
- 4:36वे निराकार ब्रह्म में मानते थे। उन दिनों
- 4:38में बंगाल में बुद्धिज्म का बहुत बोलबाला
- 4:42था। तो सारे बुद्धम शरणम गच्छामि ये सब
- 4:46संघम शरणम गच्छामि करते रहते थे। तो बलाल
- 4:50सेन के जो दादा जी हैं उन्होंने थोड़ा सा
- 4:53स्टेप लिया। बुद्धिज्म को बंगाल से बाहर
- 4:55निकाला और उन्होंने वहां पे जो है
- 4:58अद्वैतवाद की स्थापना की। लेकिन वो भी जो
- 5:01है भगवान के साकार रूप में नहीं मानते थे।
- 5:04वो भी निर्विशेष ही थे। उसके बाद में जो
- 5:08बल्लाल सेन जब राजा बने तो वे भी जो है वह
- 5:11तो उससे भी गए गुजरे थे। निराकार ब्रह्म
- 5:13तो नहीं वे तांत्रिक विद्या में मानने लगे
- 5:16थे। तो वो तंत्र विद्या वगैरह करते थे। तो
- 5:19एक बार ऐसा हुआ कि लगातार चार महीने तक वो
- 5:22राज्य में वापस आए ही नहीं। सब उनको
- 5:24ढूंढते रहे कहां है? तो किसी ने कहा कि
- 5:27गंगा के उस किनारे वे तंत्रमंत्र कुछ कर
- 5:30रहे हैं। किसी ने कहा नहीं नहीं वह तपस्या
- 5:32कर रहे हैं। अब लक्ष्मण सेन तब छोटे थे।
- 5:36अब उनको तैरना बहुत अच्छा से आता था।
- 5:38उन्हें संगीत बहुत अच्छा से आता था।
- 5:39उन्हें शास्त्रों का भी बहुत ज्ञान था। ऑल
- 5:42टूगेदर एक बहुत अच्छे गुणों वाले
- 5:45कुमार थे वे युवराज थे। तो उन्होंने क्या
- 5:48किया? वो जब सब बता रहे थे कि गंगा के उस
- 5:51ओर वो कोई तपस्या कर रहे हैं तो वो गंगा
- 5:54में झाप लगाते हैं, गंगा में कूद जाते हैं
- 5:56और वो उस किनारे तक तैर के जाते हैं और
- 5:59ढूंढते हैं उनके पिताजी कहां है और तब वो
- 6:02देखते हैं कि उनके पिताजी तो जो है वे
- 6:05शराब वगैरह पीते हुए कुछ स्त्रियों के साथ
- 6:08वहां संग संग कर रहे हैं और कोई तांत्रिक
- 6:11विद्या का कोशिश कर रहे हैं। तब उनका मन
- 6:13बहुत खराब हो जाता है। वो फिर वापस तैर के
- 6:16आते हैं और उनके मंत्रियों को बोलते हैं
- 6:18कि आपको ऐसे राजा को नहीं मानना चाहिए। यह
- 6:21गलत रास्ते में है। तो फिर मंत्री भी जो
- 6:23है वह सब वहां जाते हैं और यह दृश्य को
- 6:25देखते हैं और बलाल सेन से बात करते हैं कि
- 6:28तुम गलत मार्ग में जा रहे हो। तो बलाल सेन
- 6:30बोलता है कि मुझे और राज्य में इंटरेस्ट
- 6:32नहीं है। अब किसको देंगे राज्य? वो क्या
- 6:34करेंगे? करो मैं तो यहीं रहूंगा। तो फिर
- 6:37यह मंत्री लोग जो है इनकी छोटी उम्र में
- 6:39ही लक्ष्मण सेन को राजा बना देते हैं। अब
- 6:42लक्ष्मण सेन जो है अपना परिपालन करना शुरू
- 6:45करते हैं। और वे जब काफी यंग थे तब एक दिन
- 6:49जो है वे घूमतेघूमते केंदु बिल्व ग्राम
- 6:52में पहुंच जाते हैं। अब इस केंदु बिल्व
- 6:55ग्राम में जयदेव गोस्वामी एक झाड़ के नीचे
- 6:58बैठे हुए भजन गा रहे हैं। उनका आवाज बहुत
- 7:01ही मीठा था और क्योंकि वह भगवान के शुद्ध
- 7:04भक्त थे। जब वे गाते तो सब रुक जाते। तो
- 7:08अब जब यह लक्ष्मण सेन राजा जो है शिकार कर
- 7:12रहे थे। सी वो भी एक भक्त ही थे। कुछ राजा
- 7:17कुछ शिकार इसलिए करते थे कि कभी-कभी जो
- 7:20जंगली जानवर वगैरह होते हैं जो गांव वालों
- 7:23को तंग करते हैं या उन्हें मुसीबत करते
- 7:26हैं तो वैसे जंगली जानवरों को राजा मारते
- 7:28थे। तो यह जब अपना धनुष निकालते हैं और
- 7:32बाण को मारते हैं। उन्होंने बाण केंद्रित
- 7:35किया था कोई और जगह पे लेकिन जब जयदेव
- 7:38गोस्वामी गाना शुरू करते हैं तो बाण वहां
- 7:41छोड़कर जयदेव गोस्वामी की तरफ जाता है। और
- 7:44बाण बाण में तो कोई जीव नहीं है। उसमें तो
- 7:48कोई प्राण नहीं है। फिर भी जयदेव गोस्वामी
- 7:51का गाना सुनते-सुनते वो नृत्य करने लगता
- 7:54है। तो ये सोचते हैं कि बाण को क्या हुआ?
- 7:56उस जगह क्यों भाग रहा है? तो फिर वह ऐसे
- 7:58करके वहां पहुंच जाते हैं और देखते हैं कि
- 8:00यहां तो एक अच्छा संत बैठे हैं। इतना
- 8:02सुंदर भजन कर रहे हैं। तो उनका भजन सुनने
- 8:05लगते हैं। और जयदेव गोस्वामी जितना बार
- 8:07भगवान का भजन करते बीच-बीच में क्या होता
- 8:09है? बेहोश हो जाएंगे। कृष्ण कृष्ण करते
- 8:11हुए। वहां पे आसपास में कोई थे नहीं।
- 8:14लक्ष्मण सेन महाराज ही थे तो उनके गोद में
- 8:16ही कृष्ण करते-करते गिर गए। अब लक्ष्मण
- 8:19सेन महाराज उनको हवा दे रहे थे। उनको ठीक
- 8:21कर रहे थे। पास में देखे छोटी सी कुटिया
- 8:23है तो वहां जाकर उनको लिटा दिया। अब उसने
- 8:26देखा आसपास में तो कोई है नहीं तो इस साधु
- 8:29को ऐसे छोड़कर कैसे चले जाए तो जब तक वह
- 8:31होश में नहीं आएगा मैं यहीं रहूंगा तो
- 8:33जैसे देखा कि वो होश में आ गए तो जयदेव
- 8:35गोस्वामी जब होश में आए तो उन्होंने पूछा
- 8:38कृष्ण कहां है
- 8:40अब इनको कुछ पता नहीं है तो बोला कृष्ण
- 8:43कौन है उस भी उनको माइंड में नहीं है होगा
- 8:46कोई उनका दोस्त वगैरह यहां तो कृष्ण नहीं
- 8:48है। तो जैसे ही जयदेव गोस्वामी ने सुना
- 8:51यहां तो कृष्ण नहीं है। वो फिर से मूर्छित
- 8:53हो गए। अब लक्ष्मण से बोला सोचा कि यह तो
- 8:56मेरा गलती हो गया। ऐसा नहीं बोलना चाहिए
- 8:58था। बोलना चाहिए था कृष्ण है। तो दूसरी
- 9:00बार जब वह मूर्छा से बाहर आए उन्होंने
- 9:02पूछा कृष्ण कहां है? जयदेव गोस्वामी ने
- 9:05बोला ये तो यही है। तो जयदेव गोस्वामी ने
- 9:08बोला कृष्ण यही है। फिर मूर्छित हो गए। अब
- 9:12इसको लगा ये तो बड़ी समस्या हो गई। कृष्ण
- 9:15है तो मूर्छित हो जाते हैं। कृष्ण नहीं है
- 9:17तो मूर्छित हो जाते। मैं तो यहीं बुरा फंस
- 9:20गया और आसपास में कोई है भी नहीं कि इसको
- 9:23मैं छोड़ के यहां पे चला जाऊं। तो लगातार
- 9:2610 दिन वहां पे जो है उन्होंने जयदेव
- 9:28गोस्वामी की सेवा की। जब उठते थोड़ा पानी
- 9:31पिलाते वो फिर बेहोश हो जाते। उसके बाद जब
- 9:34जयदेव गोस्वामी होश में आए तब उन्होंने
- 9:36लक्ष्मण सेन से बहुत सारी अच्छी-अच्छी
- 9:39बातें कही और उन्हें भगवान के बारे में
- 9:42बताया और लक्ष्मण सेन काफी कुछ सीखे और
- 9:45फिर वह अपने राज्य वापस चले गए। लेकिन
- 9:47राज्य में वापस जाने के बावजूद भी मैं
- 9:50उन्हें हमेशा जयदेव गोस्वामी की याद आती।
- 9:52तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना मैं उन्हें
- 9:54बोलूं कि मेरे साथ रहे मेरे राज्य में
- 9:56रहे। तो फिर जाते उन्हें इनवाइट करने के
- 9:58लिए कि आप आइए ना हमारे मेरे साथ रहिए। तो
- 10:02जयदेव गोस्वामी बोलते हैं मैं राजा के साथ
- 10:04तो नहीं रहूंगा। मैं यही ठीक हूं। मैं
- 10:06आनंद में हूं। मैं राजभवन में ऐसी
- 10:09बड़ी-बड़ी जगह रहना मुझे अच्छा नहीं लगता।
- 10:12तो फिर लक्ष्मण सेन एक ऑप्शन देते हैं।
- 10:16क्यों ना आप चंपा घाटी में रहिए जो चंपा
- 10:19घाटी अभी भी आप नवदीप मंडल परिक्रमा में
- 10:22जाओ तो आप उस जगह को देख सकते हो। बहुत
- 10:24सुंदर जगह है। बोलते आप चंपाघाटी में
- 10:26रहिए। तो क्यों चंपाघाटी में क्यों रहूं?
- 10:29तो कहते हैं कि वहां बहुत सारे अलग-अलग
- 10:31साधु रहते हैं। इनकी चिंता यह थी कि
- 10:33घड़ी-घड़ी मूर्छित हो जाने से कोई तो रहे
- 10:35आसपास में। आप चंपा घाटी में रहिए। वहां
- 10:38आसपास में बहुत सारे साधु हैं और सुंदर
- 10:40रमणीय स्थल है। चंपाहाटी माने हाटी माने
- 10:43मार्केट। तो वहां बहुत ज्यादा चंपा के फूल
- 10:46उगते थे और वहां पर बेचते थे। तो बोलते आप
- 10:49वहां रहिए। आल्सो वो जगह बहुत ही
- 10:54अच्छी या तीर्थ मानी जाती है क्योंकि
- 10:56सत्ययुग में द्विजय वाणीनाथ को भगवान ने
- 11:00उधर दर्शन दिया था तो बोला आप वहां रहिए
- 11:03तो यह मान गए और वह चंपाघाटी में रहने लगे
- 11:06अब लक्ष्मण सेन अपने उसमें ये चंपाघाटी
- 11:09में अब थोड़ा दिन के बाद क्या हुआ जब यह
- 11:13भगवान का वहां चंपाघाटी में स्मरण कर रहे
- 11:15थे तो एक दिन चैतन्य महाप्रभु उन्हें वहां
- 11:18दर्शन देते हैं अब आप नोट करिए चैतन्य
- 11:22महाप्रभु का तब आविर्भाव नहीं हुआ था।
- 11:25जयदेव गोस्वामी तो चैतन्य महाप्रभु से 300
- 11:28साल पहले आए हैं। उसका मतलब चैतन्य
- 11:31महाप्रभु का अभी आविर्भाव होने वाला था।
- 11:34लेकिन उसके पहले ही उन्होंने क्या किया?
- 11:36इनको दर्शन दे दिया। अब ऐसा रूप तो कभी
- 11:39जयदेव गोस्वामी ने सुना ही नहीं है। इतने
- 11:42सुंदर मुखारविंद गौरांग रंग के और
- 11:46बड़े-बड़े हाथ इतने सुंदर गौरांग महाप्रभु
- 11:49का रूप बोला ऐसा सुंदर रूप तो मैंने आपका
- 11:51पहले कभी नहीं देखा। फिर ठाकुर जी उनको
- 11:53बताते कि मैं इसी रूप में आने वाला हूं।
- 11:56अभी कलयुग में इसी रूप में मैं आने वाला
- 11:58हूं और मैं इसी जगह में नवद्वीप में इस
- 12:01चंपाहाटी में मैं बहुत सारी लीलाएं करने
- 12:03वाला हूं। तो ये बहुत खुश हो जाते हैं कि
- 12:05मैं तो सही जगह पर आया हूं। जहां ठाकुर जी
- 12:07आने वाले हैं। लेकिन फिर गौरंग महाप्रभु
- 12:10बोलते हैं तुम ऐसा करो तुम जगन्नाथ पुरी
- 12:13चले जाओ। किस लिए जगन्नाथ पुरी चले जाओ?
- 12:16जब आप यहीं आने वाले हो मैं यहीं रहूंगा।
- 12:19चैतन्य महाप्रभु बोलते हैं नहीं तुम अब
- 12:21जगन्नाथ पुरी जाओ। वहां जगन्नाथ जी की
- 12:22सेवा करो। मैं वहां भी आने वाला हूं। मैं
- 12:25जगन्नाथ पुरी में भी रहूंगा। तुम उधर जाओ।
- 12:28तो उनकी इच्छा तो नहीं थी लेकिन जब ठाकुर
- 12:31जी का आदेश हुआ तो फिर वह चल पड़ते हैं।
- 12:34कितनी समझने वाली बात है यहां पे कि हमारा
- 12:39जीवन ठाकुर जी की योजनाओं के अनुसार चलना
- 12:43चाहिए। यह बहुत इंपॉर्टेंट है। हम हमारा
- 12:46जीवन हमारी योजनाओं के अनुसार चलाते हैं।
- 12:50और ठाकुर जी इतने चंचल है वो हर मिनट
- 12:54योजनाएं बदल देते हैं। कभी एकदम यू टर्न
- 12:57भी ले लेते हैं। हम समझ ही नहीं पाते कि
- 12:59अरे अभी सब कुछ तो ठीक ही चल रहा था। फिर
- 13:02सडनली सब ऐसे क्यों हो गया? तो यह चंचल है
- 13:05ना। कभी भी अपनी योजनाएं बदल लेते हैं।
- 13:08लेकिन वह जभी भी अपनी योजनाएं बदले हम
- 13:10उनकी योजना के अनुसार चलने के लिए तैयार
- 13:14रहे। यह है भक्त का जीवन। है ना? बहुत
- 13:16सारे लोग बोलते हैं माता जी हम हम लोग
- 13:20कितने अनफॉर्चूनेट है। जो लोग वृंदावन में
- 13:22रहते हैं वो लोग कितने लकी है। वो लोग
- 13:23ब्रजवासी है। वो लोग वृंदावन में रहते
- 13:26हैं। लेकिन ब्रजवासी का सही मतलब क्या है?
- 13:30ब्रज माने जो चीज मूव होती है। हिलना चलना
- 13:34उसको ब्रज बोलते हैं। ब्रजवासी माने वहां
- 13:37के लोग क्या करते हैं? चलते हैं। कैसे
- 13:40चलते हैं? कृष्ण की इच्छा के अनुसार चलते
- 13:43हैं। जहां अपना उनका कोई प्लान नहीं होता
- 13:46है। कृष्ण जैसे चलाते हैं, वह वैसे चल
- 13:49पड़ते हैं। इसलिए उनको ब्रजवासी कहा गया
- 13:51है ना। कृष्ण ने कहा इंद्र पूजा बंद करो
- 13:54तो बंद कर दिया। गोवर्धन पूजा करो तो
- 13:56गोवर्धन पूजा किया। आंखें बंद कर लो तो
- 13:59आंखें बंद कर ली। गोपाल ने। भगवान ने फिर
- 14:01क्या किया? सारी दवाग्नि मुंह में ले ली।
- 14:04तो हम अगर सही मायने में ब्रजवासी बनना
- 14:07चाहते हैं तो हमें क्या करना है? कृष्ण के
- 14:10योजनाओं के अनुसार हमें चलना है। कृष्ण
- 14:13क्या चाहते हैं? हमारी योजना नहीं, हमारी
- 14:15बुद्धि से नहीं। यहां पर जयदेव गोस्वामी
- 14:19चल पड़ते हैं और फिर वो जगन्नाथ जी के पास
- 14:22जो जगन्नाथ पुरी आ जाते हैं। अब जगन्नाथ
- 14:24पुरी में रोज जगन्नाथ जी का दर्शन कर रहे
- 14:27हैं और उनका जो प्रसिद्ध रचना है गीत
- 14:30गोविंद। गीत गोविंद बहुत विशाल रचना है।
- 14:34यह कोई एक दो भजन नहीं है। इसमें कम से कम
- 14:3724 भजन है। और जिस तरह से हमारे श्रीमद्
- 14:41भागवतम में जैसे स्कंद होते हैं ना वैसे
- 14:43इसमें भी 12 स्कंद है। स्कंद नहीं बोलते
- 14:46इसको ये लोग सर्ग बोलते हैं। 12 सर्ग है
- 14:48और 12 सर्ग में 24 अलग-अलग भजन है। और यह
- 14:53पूरी-पूरी रचना करने के लिए जयदेव
- 14:56गोस्वामी को अराउंड 10 साल लगे थे। मतलब
- 14:58एक ही साथ में उन्होंने कंप्लीट नहीं
- 15:00किया। जैसे-जैसे उनको वो लीलाएं दिखाई
- 15:03देती वैसे वैसे वे लीला लिखते जाते थे। तो
- 15:06अब जगन्नाथ पुरी पहुंच गए। अब यहां पे
- 15:09क्या हो रहा था? वे तो ब्रह्मचारी थे ना
- 15:11तो उनके लिए रसोई कौन बनाएगा? खाना ववाना
- 15:14कौन बनाएगा? तो जहां जो प्रसाद पड़ा है वह
- 15:17खा लेते हैं। तो जगन्नाथ पुरी में एक
- 15:19विशेष बात यह है कि प्रसाद को हमेशा
- 15:22पवित्र माना जाता है। अगर कुत्ता भी उस
- 15:25प्रसाद को छू ले तो उसके बाद में भी अगर
- 15:28वह प्रसाद बचा है तो कोई भी खाएगा। ऐसा
- 15:30नहीं बोलेगा कि नहीं ये तो किसी जानवर ने
- 15:32छू लिया है तो अब हम नहीं खा सकते। प्रसाद
- 15:33मतलब पवित्र। तो एक बार जगन्नाथ जी ने
- 15:36देखा कि जयदेव गोस्वामी बैठे हुए हैं।
- 15:38वहां छोटे से कुंड में जगन्नाथ जी का
- 15:41प्रसाद है तो वह भी खा रहे हैं। उसी में
- 15:43से एक कुत्ता भी खा रहा है।
- 15:45ठाकुर जी ने सोचा मुझे कुछ अरेंजमेंट करनी
- 15:48है इसके लिए। कोई इसका टेक केयर करें। अब
- 15:51कहानी यहां पर हम रोकते हैं। अब जाते हैं
- 15:54हम जयदेव गोस्वामी की पत्नी। उनका जन्म
- 15:58कैसे हुआ? तभी तो मिलेंगे ना दोनों। तो
- 16:00देव शर्मा नाम के एक ब्राह्मण थे और कहां
- 16:04से थे वो? आंध्र से थे। आंध्र प्रदेश से
- 16:08और उनको कोई बच्चा नहीं था। तो वे पतिप गए
- 16:12जगन्नाथ पुरी और जगन्नाथ पुरी का जो
- 16:15समुद्र है जैसे उसको महाददी कहते हैं। बे
- 16:18ऑफ बंगाल जो है उसको महाददी कहते हैं।
- 16:20अरेबियन सी को जो है पश्चिम नदी कहते हैं।
- 16:23अब इस महाददी जो ओशन है जो समुद्र है
- 16:28उसमें भी सबसे पवित्र स्थान समुद्र का है
- 16:32जगन्नाथ पुरी। मतलब समुद्र के पूरे किनारे
- 16:35पे या समुद्र में बहुत सारे अ तीर्थ स्थान
- 16:40है। लेकिन सबसे इंपॉर्टेंट है जगन्नाथ
- 16:42पुरी धाम। तो इसीलिए माना गया है शास्त्र
- 16:46में भी कि जब हम जगन्नाथ पुरी जाते हैं और
- 16:48वहां के समुद्र में अगर हम स्नान करते हैं
- 16:51तो उससे बड़ा तीर्थ कोई नहीं। अगर आप
- 16:53जगन्नाथ पुरी जाओ और अगर आप जगन्नाथ जी के
- 16:56दर्शन ना कर पाओ तो लेकिन जगन्नाथ जी के
- 16:58जो पूरी का जो समुद्र है अगर उसमें भी आप
- 17:01स्नान करो तो आपको सेम फल मिलता है तो ये
- 17:04दोनों वहां स्नान करने लगे स्नान कर रहे
- 17:07हैं फिर बाहर आ रहे हो फिर स्नान कर रहे
- 17:08फिर बाहर आ रहे हो तो वहां किसी पुजारी ने
- 17:10देखा बोला तुम क्या कर रहे हो पतिपत्नी मर
- 17:12जाओगे ठंड से नहा रहे हो फिर आ रहे हो फिर
- 17:15नहा रहे हो सुबह से मैं देख रहा हूं शाम
- 17:17हो गई तुमको चाहिए क्या नहीं हमको बच्चा
- 17:20चाहिए किसी ने बोला कि ऐसा करने से जो है
- 17:22भगवान भगवान ठाकुर जी का अनुग्रह हमारे पर
- 17:25होगा। फिर पुजारी ने बोला ऐसा नहीं तुम
- 17:27जाओ मंदिर में जाओ ठाकुर जी के लिए कोई
- 17:30भेंट ले जाओ और उनका दर्शन करके उनसे
- 17:32मांगो। तो फिर वह एक क्या करते हैं? एक
- 17:34पद्म का फूल कमल फूल ले जाते हैं। जगन्नाथ
- 17:37जी का दर्शन करते हैं। अब जगन्नाथ जी का
- 17:39दर्शन मतलब भीड़ वगैरह होती है। सोचते हैं
- 17:42जगन्नाथ जी ने हमारी बात सुनी या नहीं
- 17:43सुनी। तो वो क्या करते हैं? रात को मंदिर
- 17:46के बाहर ही दोनों लेट जाते हैं। अब रात को
- 17:50सपने में दोनों पतिपत्नी क्या देखते हैं?
- 17:53जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा और सुदर्शन चक्र
- 17:56विग्रह पूरा पूरा ऐसे चल के उनके पास आ
- 17:59रहा है। अब इमेजिन करिए कितना सुंदर दोनों
- 18:01पतिपत्नी को सेम सपना। जगन्नाथ जी ऐसे-से
- 18:04करके चल के आ रहे हैं। बोले तुमको क्या
- 18:06चाहिए? अभी दोनों बोलते हैं हमें बच्चा
- 18:08चाहिए। तो बलदेव पूछते हैं क्या चाहिए?
- 18:10बेटा या बेटी? तो बोलते जो भी हो लेकिन हम
- 18:14एक वादा करते हैं जो भी होगा बेटा या बेटी
- 18:19हम आपकी सेवा में लगा देंगे तो फिर बलदेव
- 18:23पूछते हैं अगर हमारी सेवा में लगा रहे तो
- 18:24तुमको चाहिए क्यों बोलते नहीं हमें एक
- 18:27आनंद बच्चे को बड़े करने का एक आनंद चाहिए
- 18:30उसके बाद जब सही उम्र हो जाएगी हम आपकी
- 18:33सेवा में अंकित कर देंगे और जब सपना खुलता
- 18:37है दोनों पतिपत्नी का बहुत खुश एक दूसरे
- 18:39से शेयर करते तुम्हें भी यही सपना आया
- 18:40मुझे भी यही सपना आया आया और फिर वहां से
- 18:43जो है और थोड़े तीर्थ में वह जाते हैं और
- 18:45फिर उनको बेटी का जन्म होता है। पद्मावती।
- 18:48अब यह पद्मावती नाम क्यों दिया? क्योंकि
- 18:50भगवान को पद्म दिया था और भगवान ने क्या
- 18:52किया? उनको सुंदर सी बेटी प्रदान की और
- 18:55पद्मावती राधा रानी का भी दूसरा नाम है।
- 18:58तो बेटी का नाम पद्मावती रखते हैं। अब ये
- 19:00पद्मावती क्योंकि जगन्नाथ जी का प्रसाद
- 19:02है। इतनी सुंदर और इतनी सुशील, इतनी
- 19:07गुणवती ऐसी कोई चीज नहीं है जो पद्मावती
- 19:10को नहीं आती। खाना बनाना बोलो एक्सपर्ट
- 19:12गाना बोलो एक्सपर्ट नाचना बोलो एक्सपर्ट
- 19:15और सुंदर स्वभाव स्त्री का जैसे स्वभाव
- 19:18होता है बहुत ही विनय कोई अहंकार नहीं तो
- 19:21बहुत खुश मां-बाप उनको बड़े कर रहे हैं।
- 19:24अब जब उसकी उम्र आ गई शादी की तब इनको याद
- 19:27आया कि हमें तो इनको जगन्नाथ जी को अंकित
- 19:29करना है तो ले गए जगन्नाथ जी के पास।
- 19:32देखिए कितनी सुंदर बात भगवान से जो
- 19:35प्रॉमिस किया पूरा किया
- 19:38तो ले गए जगन्नाथ जी के पास और बोला कि
- 19:41भाई आपको मैंने प्रॉमिस किया था तो यह रही
- 19:44मेरी बेटी अब आप जो करेंगे करिए हां सी
- 19:48वही अगर हमारे जीवन में ऐसा हो तो हम
- 19:51सोचेंगे कि वो तब की बात और थी अब कैसे हो
- 19:54सकता है प्रॉमिस फुलफिल करने में तो हम
- 19:56बहुत वीक है तो लेकिन यह एकदम बोले कि यह
- 20:01रहे आपको को जो प्रॉमिस किया था अब आप
- 20:03इसका क्या करेंगे करिए। अब उन दिनों में
- 20:05एक प्रथा थी देवी देवदासी की प्रथा।
- 20:08देवीदासी की प्रथा मतलब कुछ स्त्रियों की
- 20:11या कुछ लड़कियों की शादियां नहीं किया
- 20:13जाती थी। उनको भगवान की सेवा में अंकित
- 20:16किया जाता था। जगन्नाथ जी वहां पर बोले
- 20:18बोले नहीं नहीं तुम्हारी बेटी के लिए मेरा
- 20:20कोई दूसरा प्लान है। तो क्या प्लान है? ने
- 20:23बोला देखो तुम बाहर जाओ और वहां पर तुम
- 20:26देखोगे गली के उस पे तुम देखोगे जयदेव
- 20:29गोस्वामी नाम का एक भक्त है जो बहुत सुंदर
- 20:32गाता है भजन मेरा भजन गाता है तुम ऐसा करो
- 20:35तुम्हारी बेटी को उसको दे दो उससे तुम
- 20:38शादी करवा दो तो बोला ठीक है तो वो अपनी
- 20:41बेटी को ले गया सब जगह ढूंढ रहा है कौन है
- 20:44जयदेव गोस्वामी फिर देखा कोई एक साधु बैठा
- 20:47हुआ है भजन गा रहा है बोला तुम्हारा नाम
- 20:49जयदेव गोस्वामी है बोला हां मेरा नाम
- 20:51जयदेव है बोलिए बोला बोला, कुछ नहीं बधाई
- 20:53हो। तुम्हारी शादी हो गई है। यह तुम्हारी
- 20:55पत्नी है। मैं चला।
- 20:58बोला, "क्या, एक मिनट, हेलो, हेलो, एक
- 21:02मिनट। चले गए।" इसको वहां पर छोड़ के और
- 21:06यह प्रणाम कर रही है स्वामी। बोलते तुम
- 21:09एक्सक्यूज मी, मैं तुमको नहीं रख सकता।
- 21:11मेरे पास कुछ भी नहीं है। मैं कैसे मान
- 21:14लूं कि जगन्नाथ तुमको मेरे पास छोड़ने के
- 21:16लिए बोला, मेरे पास कुछ भी नहीं है। मेरे
- 21:17को रहने के लिए घर भी नहीं है मेरे पास।
- 21:19मैं तुमको कहां से रखूं? अब यह लड़की रोने
- 21:22लगी लेकिन फिर मैं कहां जाऊं? मैं तो किसी
- 21:24को नहीं जानती। मेरे पिताजी तो आपके पास
- 21:26ही छोड़ के गए। मैं तो आपके पास ही
- 21:27रहूंगी। अब जयदेव गोस्वामी ने सोचा ठीक है
- 21:31पूरा दिन जाने दो रात को भाग जाऊंगा। जब
- 21:35यह सो जाएगी रात को मैं भाग जाऊंगा। तब वो
- 21:38जहां जा रहे हो उसके पीछे पीछे वो लड़की आ
- 21:41रही है। उसको जा पता नहीं जाना कहां है।
- 21:43अब रात को जो है जयदेव गोस्वामी झाड़ के
- 21:45नीचे सो गई। लड़की भी सो गई। अब जयदेव
- 21:48गोस्वामी को तो एक्टिंग करनी थी सोने की
- 21:50लेकिन जगन्नाथ जी की लीला ऐसी हुई उनको सच
- 21:53में नींद लग गई और जब उनको नींद लग गई तब
- 21:56स्वप्न में जगन्नाथ जी बोले कि देखो जयदेव
- 22:00यह मेरी योजना है तुम्हारे लिए तुमको शायद
- 22:02ब्रह्मचारी बनना था लेकिन यह मेरी योजना
- 22:05है यह तुम्हारी सेवा करेगी यह तुम्हारे
- 22:07भजन में बाधा नहीं डालेगी बहुत अच्छी भक्त
- 22:11है वो तुम्हारी भक्ति जीवन में सहायता
- 22:14करेगी तुम इसे अपना लो फिर दूसरे दिन जब
- 22:17जयदेव गोस्वामी उठते हैं, वह उसे अपनी
- 22:19पत्नी के जैसे अपना लेते हैं। अब अकेले थे
- 22:22तब ठीक थे। अब पत्नी है तो अब सब कुछ
- 22:24चाहिए। सारी अरेंजमेंट्स चाहिए। तो अब
- 22:27बोचा अभी तो मुझे कुटिया बनानी पड़ेगी
- 22:28क्योंकि अब रहेंगे कहां? इसकी रक्षा करनी
- 22:30है। अब मेरे को बड़ी रिस्पांसिबिलिटी मिल
- 22:32गई। तो अब वो कुटिया बनाना शुरू किए। तो
- 22:36कुटिया बनाना मतलब क्या करना है ना? बमबूस
- 22:38लगाना है। उसके ऊपर में घास है, रस्सी
- 22:41बांधना है। तो वे सब करने लगे। तो ऊपर में
- 22:45वो रस्सी बांध रहे थे और नीचे से जो है
- 22:47उनकी पत्नी उनको रस्सी दे रही है, लकड़ी
- 22:50दे रही है। सब कुछ हो रहा है। तो थोड़ी
- 22:53देर के बाद जब वो बनाते बनाते बनाते जो छत
- 22:57होती है छत बनाते बनाते जब ऊपर आए तब जब
- 23:01नीचे जो होल होता है उसमें से उन्होंने
- 23:02देखा कि उनकी पत्नी तो खाना बना रही है।
- 23:05सोचा कि अगर यह खाना बना रही है तो मुझे
- 23:08लकड़ियां रस्सी कौन दे रहे हैं? तो फिर वो
- 23:11झुक के नीचे देखतेदे माधव कृष्ण खुद उनको
- 23:15लकड़ियां दे रहे हैं। तो बोला कि मैं
- 23:17इसीलिए शादी नहीं करना चाह रहा था। अभी
- 23:20आपकी सेवा मैं क्या करूंगा? आप मेरी सेवा
- 23:23करना शुरू कर दिया। और फिर छलांग लगा के
- 23:26नीचे उतरते हैं। बोलते हैं माधव आप मेरी
- 23:28सेवा मत करिए। तो फिर ऐसे करके जो है वह
- 23:32कैसे भी करके अपनी कुटिया खत्म करते हैं
- 23:34और दोनों वहां पर रहने लगते हैं। अब ठीक
- 23:38ही चल रहा है। यह गीत गोविंद की रचना करते
- 23:41हैं। गीत गोविंद का भजन लिखते रहते हैं और
- 23:44वह जो भी भजन में लिखते हैं उनकी पत्नी
- 23:48उसी भजन को नृत्य करके दिखाती है जगन्नाथ
- 23:51जी के सामने। तो बहुत सुंदर चल रहा है सब
- 23:54कुछ। अब एक दिन ऐसा होता है जैसे बहुत
- 23:58सारी अलग-अलग इसकी कथाएं एक प्रसिद्ध कथा
- 24:00मैं बताती हूं। एक दिन ऐसा होता है कि वे
- 24:05कुछ लिख रहे हैं। अब जब
- 24:08जयदेव गोस्वामी कुछ लिखते थे तो अपनी
- 24:11बुद्धि से नहीं लिखते थे। वो एक्चुअली
- 24:13देखते थे लीला होती हुई उन्हें दिखाई देता
- 24:16था और वो हंस पड़ते और फिर वो लीला को
- 24:19लिखते। अब आज उन्होंने देखा ऐसा अजीब
- 24:23उन्होंने देखा कि लीला में ऐसा है राधा
- 24:26रानी कृष्ण का इंतजार कर रही है। कृष्ण
- 24:29बहुत देरी से आते हैं और जब कृष्ण देरी से
- 24:32आते हैं तो राधा रानी जब उनके पास जाती है
- 24:36तब राधा रानी देखती है कृष्ण के चिन्ह पे
- 24:40यहां पे एक बिंदी लगी हुई है। तब राधा
- 24:43रानी बोलती है कि यह तो स्त्री की बिंदी
- 24:45है। तो तुम्हारे पे कैसे आई? तो कृष्ण ने
- 24:48बोला अच्छा नहीं तो मुझे पता नहीं कहां से
- 24:50आई। तो बोलते हैं कि नहीं नहीं तुम जरूर
- 24:52किसी और गोपी को मिलने के लिए गए हो। तो
- 24:54कृष्ण बोलते नहीं ऐसा कुछ है ही नहीं।
- 24:56मुझे पता नहीं कहां से आई। राधा रानी
- 24:58मानती नहीं है। रूठ के बैठ जाती है। तब
- 25:01कृष्ण सोच के बोलते हैं अच्छा अच्छा मुझे
- 25:03याद आया। मैं एक्चुअली तुम्हारे लिए फूल
- 25:05लेने गया था। वहां पे और भी गोपियां आई थी
- 25:08फूल लेने के लिए। तो अब सब साथ में मिलकर
- 25:10फूल चुन रहे हैं ना। तो कभी-कभी जैसे वो
- 25:13लोग फूल चुनते चुनते जो है उनकी बिंदी उड़
- 25:15के मुझ पर आ गई होगी। मेरे को पता ही नहीं
- 25:17यह बिंदी कहां से आई। राधा रानी ने बोला
- 25:20यह सारे बहाने छोड़ो। मुझे नई बात करनी है
- 25:23तुम्हारे साथ। तुम हमेशा मुझे चीट करते
- 25:25हो। अब कृष्ण ने इतना कुछ बोला राधा रानी
- 25:29इतना डांटी फिर भी अब तो कृष्ण ने सोचा अब
- 25:32तो लिमिट हो गया। मान ही नहीं रही है। अब
- 25:34करें तो क्या करें? अब उनका अल्टीमेट
- 25:36ब्रह्मास्त्र उन्होंने डाला। बोला देखो
- 25:38मैं तुमसे इतना प्यार करता हूं। तुम्हारे
- 25:41सिवाय मेरे मन में कोई है ही नहीं। ओ राधे
- 25:44मैं तुमसे रिक्वेस्ट करता हूं तुम्हारे जो
- 25:47पैर है तुम्हारे जो पाद पाद पद्म है तुम
- 25:50मेरे सिर पर रख दो तुम्हारे पैरों की धली
- 25:54मुझे चाहिए जब जयदेव गोस्वामी ने यह देखा
- 25:57तो एकदम एक मिनट के लिए ऐसे कैसे लिख सकता
- 26:00हूं यह तो गलत होगा भगवान जिसके पैरों की
- 26:04धली ब्रह्मा और
- 26:06शिव सारे साधु संत जिनके पैरों की धली के
- 26:10लिए तड़पते हैं वह राधा रानी से कह रहे
- 26:11हैं कि तुम्हारे पैर की धली और लोग इसको
- 26:14समझ पाएंगे कि नहीं समझ पाएंगे?
- 26:18साधारण लोग क्या समझेंगे? एक बॉलीवुड मूवी
- 26:21जैसा हीरो हीरोइन की बात समझेंगे। वो समझ
- 26:23ही नहीं पाएंगे इसका भाव। तो उन्होंने
- 26:26सोचा यह लिखना तो ठीक नहीं रहेगा। उसमें
- 26:29लाइन ऐसा था देह तव पाद पल्लव उदारम श्री
- 26:33राधे। श्री राधे तुम्हारा देह तुम दो क्या
- 26:37तव पाद पल्लव। तुम्हारे पाद पद्म मेरे सिर
- 26:40पर तुम रख दो राधे। तो सोचा यह लिखना ठीक
- 26:44नहीं होगा। तो उन्होंने छोड़ दिया लिखना।
- 26:47सोचा थोड़ा सा माइंड मैं पहले चेंज करता
- 26:49हूं। मैंने मुझे कुछ गलत दिखा क्या? मुझे
- 26:51ये लिखना चाहिए क्या? नहीं लिखना चाहिए।
- 26:54तो उन्होंने अपनी पत्नी को बोला कि देखो
- 26:56मैं ऐसा हूं। मैं नहा के आता हूं। नहा के
- 26:58आता हूं नदी में। आने के बाद जो है मैं
- 27:01लिखूंगा। पत्नी ने बोला ठीक है। वह चले गए
- 27:04नहाने के लिए। अब जयदेव गोस्वामी जभी भी
- 27:07नहाने के लिए जाते हैं कम से कम चारप घंटा
- 27:09लगता है क्योंकि वो जब नहाने के लिए
- 27:11जाएंगे वहां नदी को देखेंगे फिर नदी को
- 27:14देखेंगे तो बोलेंगे ये तो यमुना है फिर
- 27:16यमुना से उनको कृष्ण याद आएंगे फिर कृष्ण
- 27:18से वो कोई भजन गाएंगे फिर भजन गा के रोते
- 27:20हुए वहीं बैठ जाएंगे फिर कोई याद कराएगा
- 27:23आप नहाने के लिए आए अच्छा अच्छा मैं नहाने
- 27:25के लिए आया था ना हां हां ठीक है ठीक है
- 27:27ऐसा तो तीन-चार घंटे तो मिनिमम उनको लग
- 27:30जाता है उनकी पत्नी को भी आदत ही है अब
- 27:32तीन चार घंटे के बाद ही आएंगे लेकिन इस इस
- 27:34बार आधा घंटे में आ गए।
- 27:37दरवाजा नॉक किया। पत्नी ने खोला। बोला आप
- 27:40इतनी जल्दी आ गए। बोला हां आज मैं जल्दी
- 27:42नहा लिया। मुझे वो लिखना है ना। तो बहुत
- 27:44अच्छा। तो अपनी पत्नी ने बोला कि पहले
- 27:47प्रसाद ले लीजिए। ऑलरेडी देरी हो गई है।
- 27:49बोला ठीक है। तो उसने प्रसाद लिया। प्रसाद
- 27:51लेने के बाद में वो कमरे में गए। उन्होंने
- 27:53अपना लाइन लिखा और फिर वे सो गए। अब उनकी
- 27:56पत्नी की जो आदत थी। एक्चुअली यह हमारा
- 27:59भारतीय कल्चर है। कि पहले पति खाने के बाद
- 28:02ही जो है पत्नी खाती थी। पति को गुरु
- 28:04मानते थे। अब तो मुझे बोलने में ही डर
- 28:07लगता है। पिछली बार मैंने कुछ बोल दिया।
- 28:10इतने लोग तो गालियां देने लगे। मैंने इतना
- 28:13ही बोला था कि पति को नाम से नहीं बुलाते।
- 28:16उसमें तो मेरे को इतने लोग नेट पर डांट
- 28:19दिए। बोला अगर पति को नाम से नहीं बुला
- 28:22सकते तो पति को भी पत्नी को नाम से नहीं
- 28:25बुलाना चाहिए। मैंने बोला नमस्कार। मैं और
- 28:28बोलूं ही ना यह सारी बातें। तो अब यह है
- 28:30तो उस उन दिनों में ऐसा था। मैं किसी को
- 28:33भी नहीं बोल रही हूं ऐसा फॉलो करने के
- 28:35लिए। मेरे मुझे कोई गाली मत दीजिएगा।
- 28:38लेकिन जो भक्त लोग हैं ऐसा फॉलो करना ठीक
- 28:41रहेगा।
- 28:42तो पति के आने के बाद खाना चाहिए। तो पति
- 28:46ने खाना खा लिया तो वो खाने लगे। अब जब वो
- 28:49प्रसाद ले रही थी तब आए हमारे ओरिजिनल
- 28:53जयदेव गोस्वामी। उन्होंने दरवाजा खटखटाया।
- 28:58अब दरवाजा खटखटाया तो यह अब खाने में मस्त
- 29:01थी। तो देखा यूजली तो एक मिनट में जो है
- 29:03उठ के खोल देती है। तो उन्होंने खिड़की से
- 29:06देखा तो यह खाना खा रही है। जयदेव
- 29:09गोस्वामी ने बोला पागल तो नहीं हो गई?
- 29:11मेरे मेरे को खिलाए बिना खा लिया। तो वो
- 29:15और भी जोर-जोर से खटखटा रही है। अब
- 29:18उन्होंने उनकी पत्नी ने दरवाजा खोला।
- 29:20दरवाजा खोलने से वो चक्कर खा गई। बोले आप
- 29:23बाहर कैसे आ गए? तो इमीडिएटली जो है उसको
- 29:26लगा कुछ तो प्रॉब्लम है कोई अजनबी है।
- 29:29इमीडिएटली दरवाजा उसने बंद कर दिया। जयदेव
- 29:31गोस्वामी ने बोला कि तुम यह क्या कर रही
- 29:32हो? दरवाजा खोलो। आप कौन है? तो फिर वो
- 29:36खिड़की के पास से आए। बोला तुम ऐसा क्यों
- 29:38कर रही हो? दरवाजा क्यों नहीं खोल रही हो?
- 29:40बोले मुझे समझ में नहीं आया आप तो एक
- 29:42मिनट। तो वो फिर अंदर भागी। अंदर भागी
- 29:45कमरा खोला देखा वहां पे। हमारे ठाकुर जी
- 29:48सो रहे है। जयदेव गोस्वामी के रूप में जो
- 29:49आए थे। वो सो रहे हैं। फिर बाहर आई।
- 29:52खिड़की से देखी। कि फिर जयदेव गोस्वामी
- 29:53उसको समझ में नहीं आ रहा दोद यहां कहां से
- 29:56आ गए। अब वो दरवाजा नहीं खोल रही है।
- 29:58जयदेव गोस्वामी खिड़की के बाहर से बोल रहे
- 30:00हैं कि लोग देख रहे हैं तुम दरवाजा नहीं
- 30:04खोल रही हो कब से क्या सोचेंगे दरवाजा
- 30:06खोलो। अब ये बोल रहे कि आप कौन है? अब
- 30:10जयदेव गोस्वामी ने बोला कि कहीं तुमने
- 30:11मेरा रचना पढ़ ली क्या? पहले तो लोग सोचते
- 30:14थे कि मैं बावला हो गया। मुझे लगता है तुम
- 30:16बावरी हो गई हो। ऐसा क्वेश्चन क्यों पूछ
- 30:19रही हो? मैं हूं तुम्हारा पति दरवाजा
- 30:20खोलो। लोग देख रहे हैं मुझ पे हंस रहे हैं
- 30:22दरवाजा खोलो। इसने सोचा ठीक है पहले
- 30:25दरवाजा तो खोलते हैं। दरवाजा खोला फिर से
- 30:27बंद करके इनको बिठाया। बोला आप कौन है?
- 30:29फिर उसको बोला एक मिनट इधर आइए मेरे साथ।
- 30:32उसको ले गई अंदर में। अंदर का जब दरवाजा
- 30:35खोला इस बार ठाकुर जी गायब। अब यह सब जगह
- 30:38ढूंढ रही है। पलंग के नीचे, पलंग के पीछे,
- 30:41दरवाजे के पीछे। उसका पति बोल रहे तुम
- 30:44क्या ढूंढ रही हो?
- 30:47बोला मैं आपको ढूंढ रही हूं। बोला क्या?
- 30:51मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूं और तुम मुझे
- 30:53ढूंढ रहे हो। तुम पागल हो गई हो। बैठो
- 30:55थोड़ा आराम से। तो मैं आपको कैसे बताऊं
- 30:58अभी तो आप आए आपने खाना खाया। आप कमरे में
- 31:02गए आपने कुछ लिखा। जयदेव गोस्वामी ने बोला
- 31:06एक मिनट। चुप रहो। तो जय देव गोस्वामी ने
- 31:08इमीडिएटली खोला। कहां है? उनके जो पत्ते
- 31:10जिस पर वो लिखते थे। तब उन्होंने खोला वो
- 31:12पत्ता। तब देखा कि जो लाइन वो लिखने के
- 31:15लिए डर रहे थे ठाकुर जी ने खुद वो लाइन
- 31:18लिख दी। देह तब पाद पल्लव उदार
- 31:22श्री राधे तब जयदेव उस समय क्या हुआ
- 31:25पद्मावती बोल के वो अब पद्मावती को तो आदत
- 31:28ही था जब पद्मावती बोले तो पद्मावती बुला
- 31:32रहे हैं पद्मावती मतलब अभी वो बेहोश होने
- 31:34वाले वो तकिया लेकर रेडी है यस प्रभु आई
- 31:37एम रेडी अभी गिर गए उसकी गोद में तकिया
- 31:41वकिया लगा दिया उसको हवा दे रही है आदत हो
- 31:43गई अब उसकी पत्नी थी तो उनको तो पता ही है
- 31:46वो जब पद्मावती बोलते मतलब गिरने वाली है
- 31:48अभी तब बोला थोड़ी देर के बाद भी जब उनको
- 31:51होश आया तब बोले कि किसने लिखा तुमको समझ
- 31:55में आया कुछ बात किसने लिखा किसने लिखा
- 31:59होगा कोई मैजिशियन तब वो एकदम उठ गए बोलते
- 32:02वही तो वही बात राधा रानी ने कृष्ण के लिए
- 32:05बोली थी कृष्ण एक मैजिशियन है साइड हटो
- 32:07चलो मुझे और लिखना है लिखने लगे तो ऐसे
- 32:11इतनी सुंदर-सुंदर कहानियां है कैसे गीत
- 32:15गोविंद भगवान को इतना प्रिय था वो खुद खुद
- 32:18ही जो है दिखा देते थे लीला वो जो चाहते
- 32:22थे कि जयदेव गोस्वामी लिखे तो एक बार
- 32:26जयदेव गोस्वामी को ऐसा ख्याल आया कि मैं
- 32:28लिख तो रहा हूं लेकिन अगर यह जगन्नाथ जी
- 32:32को ऑफर करें अगर उनके सी गीत गोविंद है
- 32:35क्या गीत गोविंद इस सॉन्ग ऑफ सेपरेशन राधा
- 32:39रानी को कृष्ण को राधा रानी के लिए जो
- 32:42विरह राधा रानी को कृष्ण के लिए जो विरह
- 32:45विरह का गीत है वो तो उन्होंने सोचा कि
- 32:48जगन्नाथ जी का रूप क्या है? द्वारकाधीश
- 32:52कृष्ण जो राधा रानी के विरह में रो रहे
- 32:54हैं वह जगन्नाथ है। तो अगर उनको यह गीत
- 32:58गोविंद के जो वर्ष है उनको अर्पण किए जाए
- 33:01तो वह कितने खुश होंगे? तो सोचा कि पर ये
- 33:05मैं पत्ते-वत्ते अगर जगन्नाथ जी को लगा
- 33:07दूंगी तो उनको चोट लगेगी। तो मैं ऐसा करता
- 33:09हूं ये पूरा गीत गोविंद एक कपड़े में लिख
- 33:12देता हूं। इस कपड़े में लिखने के बाद वह
- 33:14कपड़ा जो है ठाकुर जी को शाल के जैसे ओढ़ा
- 33:17देंगे। अच्छा है। वह अपने गांव गए केंदु
- 33:20बिलवा वहां पर कुछ दर्जियों को पकड़ा।
- 33:22बोला मैं बोलूंगा आप लोग उसको जो है वीव
- 33:26करते हैं ना व्यूअर्स जो है उसको आप छापते
- 33:28रहो। बोला ठीक है। बहुत सुंदर से चल रहा
- 33:30है काम। वो बोल रहे हैं और ये लोग सब जो
- 33:33है उसका सिलाई कर रहे हैं। वीविंग कर रहे
- 33:35हैं। सारे गीत गोविंद के जो अलग-अलग
- 33:37वर्सेस है वो सारे कपड़े में होता जा रहा
- 33:39है। मैंने सुना था सात सात आठ पूरी-पूरी
- 33:43साड़ियां लग गई वो सारे गीत गोविंद के
- 33:46वर्सेस लिखने में तो वो लिखते जा रहे हैं।
- 33:48अब उस बीच में गीत गोविंद में जो वर्ष
- 33:52नहीं था जो था ही नहीं श्लोक ऐसा कोई
- 33:55श्लोक जयदेव गोस्वामी के मुंह से निकल
- 33:57गया। शायद ठाकुर जी की प्रेरणा थी। अब वो
- 34:00श्लोक का मतलब यह था कि कंस के जो दुश्मन
- 34:04है माने कृष्ण कंसारप संसारम कंस के जो
- 34:10दुश्मन है कृष्ण उनका हृदय राधा रानी के
- 34:14प्रेम से ऐसा बंधा हुआ है कि 60 करोड़
- 34:19गोपियों को रास करते हुए छोड़ के वे राधा
- 34:22रानी के लिए पीछे चले गए राधा रानी को
- 34:26खोजने के लिए चले गए इतनी है महिमा हमारी
- 34:29राधा रानी की 60 करोड़ गोपियों को छोड़
- 34:33दिए रास में ठाकुर जी राधा रानी के पीछे
- 34:35पीछे चले गए ऐसी है हमारी राधा रानी अब
- 34:39जयदेव गोस्वामी यह शब्द आधा पूरा करते हुए
- 34:43फिर से मूर्छित हो गए दर्जी लोगों को तो
- 34:46आदत ही था जभी वो मूर्छा होते हैं टी
- 34:48ब्रेक वो थोड़ा मूर्छा के बाद में आएंगे
- 34:51तब थोड़ा तब तक थोड़ा चायवा पी लो फिर वो
- 34:53उठ जाएंगे अब इस बार वो ब्रेक ले रहे कि
- 34:56ये तो मूर्छित है उठेंगे तब देखा कि कोई
- 34:58और जो है गीत गोविंद गाता हुआ उधर आ रहा
- 35:01है बहुत सुंदर तरीके से तो बोला अरे रे
- 35:03तुम इधर आओ अभी तक तो यह गीत गोविंद के
- 35:06छपा भी नहीं है किसी को पता भी नहीं है
- 35:08तुमको कहां से पता चल गया कितना सुंदर तुम
- 35:10गा रहे हो बोलते ये क्या बड़ी बात है मेरे
- 35:13को इसके बाद में क्या लिखना है वो भी पता
- 35:14है तो तुम कैसे पता है तो सब जानता हूं सब
- 35:18जानने का मतलब क्या है बोलता नहीं नहीं
- 35:20ऐसा कुछ नहीं है एक्चुअली मैं जयदेव
- 35:22गोस्वामी का बड़ा भाई हूं मेरा नाम
- 35:23कृष्णदेव है जयदेव का बड़ा भाई कृष्णदेव
- 35:26बोलता है अच्छा बहुत अच्छा तो फिर हमारा
- 35:28काम जल्दी हो क्योंकि ये भाई साहब तो घड़ी
- 35:30घड़ी मूर्छित हो जाते हैं। हमारा काम रुक
- 35:33गया। आप बोलो हम फटाफट कर लेते हैं। अब
- 35:35कृष्ण देव गाने लगे। इसके बाद ये इसके बाद
- 35:38ये इसके बाद ये पूरा कंप्लीट हो गया गीत
- 35:42गोविंद और उसके बाद जब वो लास्ट में कर
- 35:44रहे तब ये उठ गए। अब बोले अरे ये उठ गए उठ
- 35:46गए तब तक हमारे कृष्णदेव गायब। अब जयदेव
- 35:50गोस्वामी बोले अच्छा तो कहां थे हम लोग?
- 35:52नहीं कहां थे? नहीं हो गया। हो गया मतलब
- 35:56मेरी रचना है। मेरे और मेरी पत्नी के
- 35:58सिवाय किसी को पता भी नहीं है यह रचना। तो
- 36:01नहीं नहीं वो आपके बड़े भाई आए थे। कौन
- 36:03बड़ा भाई? मेरा कोई बड़ा भाई नहीं है इस
- 36:05दुनिया में। नहीं आपके बड़े भाई आए थे ना
- 36:07कृष्णदेव उन्होंने सब बता दिया। फिर जयदेव
- 36:09गोस्वामी बोले अच्छा अच्छा तो ठाकुर जी
- 36:11आकर खुद ही डिक्टेट करके चले गए। अब जयदेव
- 36:14गोस्वामी सोच रहे मैंने बना तो लिया सब।
- 36:17लेकिन अब परमिशन कहां से मिलेगी? ठाकुर जी
- 36:20जगन्नाथ जी को कुछ भी ऑफर करना है तो राजा
- 36:22की परमिशन मिलनी चाहिए। अब उस दिन जगन्नाथ
- 36:26जी ने क्या किया? राजा के सपने में आ गए।
- 36:28राजा को बोला कि मेरा भक्त जयदेव जो है
- 36:32मेरे लिए गीत गोविंद के सारे श्लोक वगैरह
- 36:35जो है एक साड़ी में वीव कर रहा है। तुम
- 36:38उसको लेकर आओ। मुझे तो वही पहनना है। मैं
- 36:40तो वही पहनूंगा। फिर जो है राजा केंदु
- 36:43बिल्व गांव में उसको ढूंढते-ढूंढते आते
- 36:45हैं कि कहां है जयदेव? और फिर बोलते कि
- 36:48हमको जगन्नाथ जी ने भेजा है लाओ दो
- 36:50तुम्हारी वो जो साड़ियां तुमने बनाई है दे
- 36:52दो जयदेव गोस्वामी बहुत ही खुश अब वो सारी
- 36:55साड़ियों को पालकी में बाजे गाजे के साथ
- 36:59एकदम सब कीर्तन करते करते हुए ले जाते हैं
- 37:02जगन्नाथ पुरी और फिर वहां पर भगवान को रोज
- 37:04रात को जो है उसको गीत गोविंद लिखा हुआ को
- 37:07ओढ़ा देते
- 37:09अब वहां के जो राजा थे पॉलिटिशियन वो लोग
- 37:12तो भक्त थे अब एक दिन राजा आए मंगल आरती
- 37:17मंगल आरती में देखा कि ठाकुर जी पूरे फटे
- 37:21हुए कपड़ों में मट्टी धूल एकदम राजा एकदम
- 37:26सरप्राइज क्योंकि पूरी में जो है स्पेशली
- 37:30रात का जो दर्शन होता है 12:00 बजे का
- 37:33बड़ा श्रृंगार बोलते हैं वो बहुत सुंदर
- 37:35करते हैं। इस बार हम जब पूरी गए थे हमको
- 37:37पुजारी ने बताया था कि आप लोग रात के
- 37:3912:00 बजे के दर्शन में आओ। लेकिन हम जा
- 37:41नहीं पाए हम लोग। तो वो स्पेशली पुजारी
- 37:44बता रहा था कि रात को 12:00 बजे जो
- 37:46श्रृंगार होता है पूरा दिन में ऐसा
- 37:48श्रृंगार नहीं होता जो रात को 12:00 बजे
- 37:51बहुत सुंदर फूलों से सजाते हैं। उल्टा है
- 37:54ना किसी को भी सुबह सजाते हैं। सुबह
- 37:56दर्शनार्थी में सजाते हैं। रात को सोने के
- 37:59टाइम पे क्यों सजाते हैं? नहीं उसके पीछे
- 38:01कारण यह है कि रात को जाते हैं ना रासलीला
- 38:04करने के लिए सारे गर्लफ्रेंड्स को मिलने
- 38:06के लिए इसलिए अच्छा से सजाते हैं। नहीं
- 38:08सजाया तो डांट लगाएंगे पुजारी को। मुझे
- 38:11मिलना है 60 करोड़ गोपियां खड़ी है। एकदम
- 38:14परफ्यूम डाल के एकदम बढ़िया से सजाते हैं।
- 38:17तो इसलिए रात का जो 12:00 बजे का सजना
- 38:19होता है। एकदम बढ़िया से सजा के उनको रखते
- 38:22हैं। तो अब मंगल आरती में तो सुबह आप
- 38:24देखोगे तो अच्छे लगेंगे। लेकिन इस बार देख
- 38:26रहे हैं फटे फूटे कपड़े राजा ने पुजारी को
- 38:28बुलाया तुम्हारा माथा खराब हो गया क्या
- 38:31किया तुमने पूरा धुला मट्टी फटे हुए कपड़े
- 38:34पुजारी एकदम पूरा शिवर हो रहा है मेरा
- 38:36विश्वास करें मैंने कुछ नहीं किया जैसे
- 38:39हमेशा बड़ा श्रृंगार होता है वैसा ही बड़ा
- 38:41श्रृंगार हो रहा मुझे पता नहीं कहां से ये
- 38:43फूलवूल सब निकल गए अब राजा ने बोला कि मैं
- 38:47ये बात को मानता नहीं हूं उस पुजारी को जो
- 38:50है कारागार में डाल दिया कि तुम कहीं तो
- 38:52तुम्हारी केयरलेसनेस हुई है। अब उस दिन
- 38:55रात को राजा के सपने में जगन्नाथ जी आए।
- 38:58अब यह बात सुनने में आपको आश्चर्य नहीं
- 39:00लगना चाहिए क्योंकि उन दिनों में जो राजा
- 39:03थे पूरी के वो इतने अच्छे भक्त थे। बहुत
- 39:06बार जगन्नाथ जी उनके सपने में आते हैं। हर
- 39:09चीज उनको बताते हैं। कोई बड़ी बात नहीं
- 39:11है। राजा के सपने में जगन्नाथ जी आए और
- 39:13उनको बताया कि भाई पुजारी की कोई गलती
- 39:16नहीं है। रोज के जैसे मेरा बड़ा श्रृंगार
- 39:19किया था। लेकिन पद्मा नाम की एक लड़की है
- 39:23दूर एक गांव में जो रोज रात को बगुन का जो
- 39:28ये होता है गार्डन होता है उसमें बगुन
- 39:31तोड़ने जाती है रात को और जब वो बगुन
- 39:34तोड़ने जाती है तो वो गीत गोविंद गाती है
- 39:37और मुझे तो गीत गोविंद सुनना बहुत अच्छा
- 39:39लगता है तो मैं उसके पीछे पीछे चला जाता
- 39:41हूं लेकिन मेरे शरीर से जो चंदन और अग्रू
- 39:45की सुगंध आती है ना वो घड़ी घड़ी पीछे
- 39:48देखती है कि कोई मेरे पीछे आ रहा है क्या
- 39:49इतनी सुंदर सुगंध कहां से आ रही है और
- 39:51कभी-कभी मेरा छाया देख लेती है तो इसलिए
- 39:54मैं क्या करता हूं वो जितना बार पीछे
- 39:56देखते हैं मैं छुप जाता हूं अब मैं जब छुप
- 39:58जाता हूं ना तो वहां बहुत ज्यादा कांटे
- 40:00हैं वो कांटों से मेरा कपड़ा जो है फट
- 40:03जाता है और जब तक कि मैं उसके पीछे पीछे
- 40:06पूरा गीत गोविंद सुनूंगा सुबह-सुबह पुजारी
- 40:09यहां पर शंख बजा देता है अब उसने शंख
- 40:12बजाया और अगर मैं नहीं हूं ऑल्टर में तो
- 40:14सबको चिंता हो जाएगी इसलिए मैं भागता
- 40:16भागता पहुंचता हूं कभी-कभी गिर जाता हूं
- 40:18तो लग जाती है ना पे इसलिए सब मट्टीमट्टी
- 40:21हो गया हमें।
- 40:23राजा ने बोला आप ऐसे मत जाइए ठाकुर जी
- 40:26आपको जो चाहिए मैं यही अरेंजमेंट करूंगा।
- 40:29तो जगन्नाथ जी बोले मुझे तो उसी से सुनना
- 40:31है। मैं तो पद्मा से ही सुनूंगा। वो जितनी
- 40:34भक्ति से गीत गोविंद गाती है मैं तो उसी
- 40:36से सुनूंगा। अब राजा ने बोला ठीक है हम
- 40:38ढूंढते हैं वो पद्मा कहां है। अब वो पूरे
- 40:41राज्य में ढूंढे वो पद्मा कहां है वो
- 40:43लड़की जो गीत गोविंद गाती है और फिर ढूंढ
- 40:46के उसके पूरे परिवार को जगन्नाथ पुरी में
- 40:49ले आए। बोले आपको राजा सब कुछ देगा रहने
- 40:53की जगह खाना पीना सब कुछ नहीं करना है। बस
- 40:56रोज रात को आपकी बेटी जो है पद्मा उसको
- 40:59जगन्नाथ जी के पास भेजो। वो गीत गोविंद
- 41:01गाएगी और जगन्नाथ जी सुनेंगे।
- 41:04समझ में आ रहा है ना कि जयदेव गोस्वामी
- 41:07द्वारा रचना की गई यह गीत गोविंद भगवान को
- 41:10कितना प्रिय था। बहुत ही प्रिय था भगवान
- 41:14को। अब एक कलयुग की मैं कहानी बताऊं
- 41:17रीसेंट कहानी।
- 41:20बहुत वर्ष पहले
- 41:22एक धनी आदमी रहता था पूरी में और उसके घर
- 41:26में जो है चोरी हो गई। अब जब चोरी हुई तो
- 41:30चोरों ने जो चार चोर थे उन्होंने सब कुछ
- 41:32चोरी कर लिया। अब उसके साथ-साथ उसके घर
- 41:36में शालिग्राम की शिला थी। वो भी चोरी कर
- 41:40ली। अब यह तो सब डकैत लोग हैं। इनको भक्ति
- 41:43शास्त्र ऐसा कुछ तो उनको पता रहता नहीं
- 41:45है। अब चोरी करने के बाद जब सब कुछ वो लोग
- 41:48डिवाइड कर रहे थे। तुम इतना ले लो। यह
- 41:50तुम्हारा यह तुम्हारा तब शालिग्राम शिला
- 41:53को देख के ये लोग बोलने लगे इस पत्थर का
- 41:55क्या करें? ये तो कोई काम का नहीं लगता।
- 41:57ना हीरा है ना चांदी है ना मोती है क्या
- 41:59है ये अब एक दूसरे को डज करने लगे तुम रख
- 42:03लो तुम रख लो बोले मैं क्यों रखूं तुम रख
- 42:05लो कोई रखना नहीं चाहता इस पत्थर का करें
- 42:07क्या करें अब एक उसमें समझदार था बोला
- 42:10छोड़ो इसको बेच के आते हैं कुछ तो पैसा
- 42:12मिलेगा अब वो लोग गए एक अपना दिल पे हाथ
- 42:17रख लेना सुनने में अच्छा नहीं लगेगा अब वो
- 42:20लोग गए एक मोची के पास बोला तुम लोगे इसको
- 42:22काला पत्थर तुमको काम में आ जाए मोची ने
- 42:24देखा ठीक है इससे घिस के पॉलिश करने अगले
- 42:27काम में आएगा। बोला कितना दोगे? ठीक है।
- 42:29₹10 दूंगा। ₹10 दिया उसने ले लिया। उसका
- 42:33काम क्या है? जूतों को पॉलिश करना। अब
- 42:36वहां पे एक ब्राह्मण आ गया। अब वो
- 42:38ब्राह्मण जब अपना जूता पॉलिश करवा रहा था
- 42:40वो गीत गोविंद गा रहा था।
- 42:43गीता गोविंद का जो मंगलाचरण है शीत कम
- 42:47सुना ये शीत कमला कुच मंडल है ध्रुत कुंडल
- 42:55है
- 42:56ये फर्स्ट लाइन जो है उसकी गा रहा है कलित
- 43:00ललित वनमाला
- 43:04जय जय देव हरे
- 43:10देव हरे
- 43:14शता कमला कुमला
- 43:18है
- 43:20दता कुंडला है
- 43:25कलित ललित वनमाला
- 43:30जय जय देव हरे
- 43:36हे देव हरे
- 43:39अब ये मोची बहुत स्मार्ट
- 43:41उसने इमीडिएटली वो लाइन सीख ली। बहुत
- 43:43सुंदर लाइन है। अब वो क्या करता है? जितना
- 43:45बार भी किसी का शूज जूता पॉलिश करता है बस
- 43:48वो यही गाते रहता है। जय जय देवा हरे। अब
- 43:53एक दिन एक ब्राह्मण वहां पहुंचा जिसने
- 43:56थोड़ा करीब से देखा ए तुम क्या कर रहे हो?
- 43:59वो क्या है वो? मुझे क्या पता एक पत्थर
- 44:01किसी ने दिया। बोला अरे ये पत्थर नहीं है।
- 44:04ये तो शालिग्राम की शिला है। तुम क्या कर
- 44:05रहे हो? ये छोड़ो छोड़ो पहले मेरे को दे
- 44:07दो। मैं क्यों दे दूं? मैंने खरीदा है।
- 44:09मैं कितने में खरीदा? बोलते नहीं तुम
- 44:11कितना दाम दोगे? बोला तुम जितना बोले बोला
- 44:13ठीक है मैंने 10 में खरीदा। तुम ₹20 दे दो
- 44:14मैं दे दूंगा। बोला 20 नहीं है लो 50 लो।
- 44:17मेरे को पहले वो दे दो शालिग्राम। उसने
- 44:18फटाफट से वो शालिग्राम शिला लिया। घर गया
- 44:21सब गंगा से दही दूध पंचामृत से अभिषेक
- 44:23किया। रोने लगा रोने लगा। वो ठाकुर जी
- 44:26कैसे-कैसे आपके साथ हो जाता है। अब
- 44:27कहां-कहां पहुंच जाते हो आप? और फिर उसको
- 44:30वहां पे जो है भगवान का अभिषेक किया।
- 44:32पुरुष सूक्त श्रीसूक्त रोज ऑफरिंग इतना
- 44:35सुंदर से भगवान का सेवा करने लगा।
- 44:38चारप दिन के बाद में चारप दिन के बाद
- 44:41भगवान उसके सपने में आए। बोला एक्सक्यूज
- 44:44मी इफ यू डोंट माइंड मेरे को मोची के पास
- 44:46वापस दे दोगे क्या?
- 44:49बोला क्या? बोला नहीं वो गीत गोविंद गाता
- 44:53है। तुम नहीं गाते हो। वो गीत गोविंद गाता
- 44:56है। तुम नहीं गाते हो गीत गोविंद। उसको तो
- 44:58चक्कर आ गया। बोला नहीं मैं गाऊंगा। मेरे
- 45:02पास रहिए। इफ यू डोंट माइंड मैं गा सकता
- 45:04हूं क्या? बोला कोई भी गाओ बस गीत गोविंद
- 45:06गाओ। वो गीत गोविंद बहुत अच्छा गाता था।
- 45:08वो मतलब आपको जो पॉलिश करता है मतलब वो सब
- 45:09मुझे चलेगा। मेरे को गीत गोविंद चाहिए। तब
- 45:12से वो बोले लगा ठीक है मैं सुबह दोपहर शाम
- 45:14में रोज गीत गोविंद गाऊंगा। आप मेरे पास
- 45:16ही रहिए। तो अब समझ में आया ना ठाकुर जी
- 45:19के लिए गीत गोविंद वो मोची के पास जाकर
- 45:22रहने के लिए भी तैयार थे। इमेजिन करिए ये
- 45:25जयदेव गोस्वामी कितने शुद्ध भक्त होंगे।
- 45:28जिनकी रचना पर ठाकुर जी का इतना प्यार है।
- 45:32उसकी की हुई रचना पर इतना प्यार है। तो
- 45:35फिर इस तरह से जयदेव गोस्वामी की काफी
- 45:38कहानियां है। एक बार जयदेव गोस्वामी का जो
- 45:43भजन है सुन के लक्ष्मण सेन बहुत खुश हो
- 45:47जाते हैं। खुश हो के क्या करते हैं? उनको
- 45:49सोना चांदी बहुत सारी मोहरे सारे जो बुलक
- 45:52कार्ड्स होते हैं ना उसमें भर-भर के तो सब
- 45:56लेते हुए वो जा रहे। एक्चुअली वह तो
- 45:58वैरागी है। उसके पीछे वो बुलक कार्ड्स भेज
- 46:01दिया तो वह देख भी नहीं रहा है। अपना चला
- 46:02जा रहा है। तो उसके गांव जब वो वापस जा
- 46:05रहे हैं तो कुछ रास्ते में जो डकैत जो
- 46:09होते हैं डाकू वगैरह डाकू लोग देखते हैं
- 46:11अरे ये तो बहुत ज्यादा पैसा वैसा लेके जा
- 46:13रहा है। तो एकदम वो लोग आके जो उसको अटैक
- 46:15करते हैं। अब जयदेव गोस्वामी बोलता है
- 46:18इतना मेहनत करने का जरूरत नहीं। सब कुछ ले
- 46:20लो। मेरे को तो नहीं चाहिए। वो आप इतना
- 46:23जैसे वो दिखाते हैं ना बॉलीवुड मूवी में
- 46:25हैंड्स अप उतना सब करने का जगह ले लो जो
- 46:27चाहिए ले लो मैं चला अपना मेरे को भजन ये
- 46:30लोग फटाफट सब कुछ ले लिए एक चोर के मन में
- 46:33बात आई ये अभी तो बोल रहा है कि सब ले लो
- 46:37शायद यह भी इसका कोई प्लान है क्योंकि
- 46:39राजा का बहुत फेवरेट है अगर जा के राजा को
- 46:42हमारा नाम कंप्लेन कर दिया कि हमने चोरी
- 46:44किया तो प्रॉब्लम होगा चलो इसको मार डालते
- 46:46हैं जयदेव गोसन को पीछे से पकड़ा दोनों
- 46:49हाथ काटे
- 46:51और कुएं में फेंक के चले गए। अब दोनों हाथ
- 46:55जब काट दिए तब जयदेव गोस्वामी देखा जब हाथ
- 46:59कट जाते हैं तो कैसा होता है आपको समझ में
- 47:01आता है ना जब हाथ काट देते हैं तो कैसा
- 47:03लगता है? उसको जगन्नाथ जी का रूप याद आ
- 47:05गया। जगन्नाथ जी का दोनों हाथ वो मूर्छित
- 47:08हो गया। रोते-रोते जगन्नाथ जगन्नाथ बोलते
- 47:11हुए। अब कुएं में उसको डाल दिया था। जब
- 47:14उसको होश आया वो जितना बार होश आता अपने
- 47:17हाथ देखता फिर जगन्नाथ को याद करता और गीत
- 47:19गोविंद गाता। अब एक दिन बहुत दिनों के बाद
- 47:22लक्ष्मण सेन राजा उसी जगह से गुजर रहे थे।
- 47:26देखा इतना सुंदर मधुर आवाज कहां से आ रहा
- 47:29है? तो ढूंढतेढूंढते गए। बोला राजा यहां
- 47:31तो एक खाली कुआं है। पानी भी नहीं है। सब
- 47:34ने झुक के देखा तो अंदर में जयदेव
- 47:36गोस्वामी। अब राजा ने उसको जल्दी-जल्दी से
- 47:39बाहर किया और अपने महल में ले गए। वहां
- 47:41सारी चिकित्सा वगैरह करवाई। उनकी पत्नी
- 47:44पद्मावती को भी खबर दी। उनको भी वहां पे
- 47:46बुला लिया। अब दोनों वहां रहने लगे। राजा
- 47:50को एक बात की खुशी थी कि मैंने बहुत बार
- 47:52बोला था मेरे साथ राजभवन में रहो लेकिन यह
- 47:54कभी नहीं रहे। अब इस सिचुएशन की वजह से
- 47:57मुझे चांस मिला उनकी सेवा करने के लिए। तो
- 48:00उनके साथ रहने लगे।
- 48:02अब उनको राजपुरोहित घोषित किया गया। उनको
- 48:05राजपुरोहित बना दिया। अब वो जैसे बोलते
- 48:07वैसे करते। अब राजा ने बहुत बार बोला कि
- 48:09आप तो ठाकुर जी के इतने शुद्ध भक्त हैं।
- 48:11अगर आप मांगो कि ठाकुर जी मुझे मेरे हाथ
- 48:14वापस चाहिए। भगवान ऐसे ही दे दे। आप क्यों
- 48:16नहीं मांगते? मुझे तो कोई विशेष उपयोग
- 48:19नहीं लगता हाथ का। भगवान को तो मन से याद
- 48:22करना है। मुंह से गाना मेरे हाथ का मेरे
- 48:23को क्या करना? मेरे को नहीं चाहिए। अब
- 48:27राजपुरोहित थे तो राजा को गाइड करते थे।
- 48:30क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए। तो
- 48:32एक दिन जयदेव गोस्वामी ने बोला देखो
- 48:34एकादशी का अगर तुम्हें पूरा-पूरा फल
- 48:38प्राप्त करना है तो द्वादशी के दिन
- 48:40ब्राह्मणों को दान करो ब्राह्मणों को भोजन
- 48:42कराओ तो तुम्हारा एकादशी का फल मिलेगा तो
- 48:45उसने लक्ष्मण सेन ने सबको बुला दिया कि
- 48:48मेरे राज्य में जितने भी ब्राह्मण हैं सब
- 48:50आइए सबको मैं आज दान दूंगा अब वो जो चार
- 48:54डाकू थे जिन्होंने जयदेव गोस्वामी का हाथ
- 48:56काट दिया था बोला अरे बहुत अच्छी बात है
- 48:58राजा खुद देने वाले हैं तो बन गए ब्राह्मण
- 49:00पहन लिया ब्राह्मण थ्रेड बैन गए ब्राह्मण
- 49:02और उस चेंज करके लाइन में लग गए दान के
- 49:05लिए। अब जब दान दे रहे हैं तो जयदेव
- 49:08गोस्वामी यहां बैठे हैं। पास में लक्ष्मण
- 49:10सेन है और दान दे रहे हैं। जब ज्यादा पास
- 49:13में आ गए तब डाकू ने देखा अरे यह तो वही
- 49:16है जिसका हाथ हमने काट दिया। अरे अब तो
- 49:19फंस गए। अब तो वो बता देगा राजा को कि ये
- 49:21लोग ही है जो मेरा हाथ काट रहे हैं। अब
- 49:24एस्केप होने का भी कोई चांस नहीं है। वो
- 49:26लोग हिल रहे तो सैनिक बोल रहे हैं सीधे
- 49:28खड़े रहो। प्रॉब्लम क्या है? सीधे खड़े
- 49:29रहो तुम्हारा बीमारी आएगी। कहां जा रहे
- 49:31हो? अब सीधे खड़े हैं डर डर के डर डर के
- 49:33जब लक्ष्मण सेन के पास आ गए तब जयदेव
- 49:36गोस्वामी की नजर उन पर पड़ गई उन चारों पे
- 49:38तो उन्होंने हंस के लक्ष्मण सेन को कहा यह
- 49:41मेरे विशेष है। सबको जितना दिया उससे 100
- 49:45गुण ज्यादा इनको दे दो। लक्ष्मण सेन ने
- 49:48बोला ठीक है आप जैसे बोलो। तो उनको 100
- 49:51गुण ज्यादा दिया। अब लक्ष्मण सेन को जयदेव
- 49:55गोस्वामी ने बोला दान भी ज्यादा देना और
- 49:58एक काम करना जंगल में डाकू बहुत होते हैं
- 50:01ना कोई उन्हें अटैक ना करे इसलिए साथ में
- 50:04सिपाही भी भेज देना थोड़ा सा सेफली उनको
- 50:06जो है घर तक पहुंचा देना लक्ष्मण सेन ने
- 50:09बोला ठीक है अब उनको सब कुछ जितना दान
- 50:12दिया था सारे बुलक कार्ड्स में डाला सब
- 50:14सिपाही वगैरह उनको एस्कॉट करके ले जा रहे
- 50:17हैं जब थोड़ा सा डीप जंगल में चले गए तब
- 50:20एक सिपाही ने ऐसे ही बातें करते-करते पूछा
- 50:23ये तुम्हारा कोई जान पहचान वाला है क्या
- 50:25जयदेव गोस्वामी सबको तो कम कम दिया तुम
- 50:27लोग को बहुत ज्यादा दिया क्या क्या है तुम
- 50:29लोग कोई अब डकैत वो लोग जो डाकू लोग हैं
- 50:32सोच रहे क्या बोले तो बोला हां हां हमारे
- 50:35जान पहचान का है एक्चुअली पहले वो भी डाकू
- 50:38ही था हमारे साथ ये सब डकैती के काम करता
- 50:41था अब जाके राजा का बड़ा पुरोहित बन के
- 50:44बैठ गया है अब उसको डर लग गया कि कहीं
- 50:46उसकी पुरानी वाली बात हम राजा को बता ना
- 50:49दे इसलिए हमारे मुंह चुप करने के लिए उसने
- 50:52हमको ज्यादा दान दिया। लेकिन वह था पहले
- 50:56एक डकैत। अब धरती माता जो होती है उनको
- 51:01सबसे ज्यादा वजन कब लगता है? जब कोई भक्त
- 51:05की निंदा करते तो उनको सहन नहीं होता है।
- 51:08तो धरती माता का इतना आक्रोश हुआ। वहां के
- 51:12वहां जंगल में धरती फट गई। ये चारों के
- 51:15चारों अंदर।
- 51:17सैनिक लोग डर गए। यह तो क्या हो गया यहां
- 51:19पे। वो भागे फिर से महल की ओर कि देखिए
- 51:22राजा ऐसेसे हो गया। राजा को भी समझ में
- 51:24नहीं आया। राजा जयदेव गोस्वामी की तरफ देख
- 51:27रहा है कि भ शायद उनके कोई होंगे उनको दुख
- 51:29लगेगा। फिर जयदेव गोस्वामी ने पूरा वृतांत
- 51:32बताया कि भाई ऐसा कुछ नहीं है। यह लोग जो
- 51:34है डाकू थे। इन्होंने मेरा हाथ काटा था।
- 51:38फिर सिपाही बताते हैं कि कैसे आपके बारे
- 51:40में निंदा कर रहे थे। तो फिर लक्ष्मण से
- 51:42इनको समझ में आता है कि क्योंकि शुद्ध
- 51:44भक्त की निंदा कर रहे थे। धरती माता ने
- 51:46उनको गल लिया। अब राजा के साथ वो लोग रहते
- 51:50थे तो जयदेव गोस्वामी की जो पत्नी थी
- 51:52पद्मावती साधारण महिलाएं महिलाओं के साथ
- 51:55ही एसोसिएशन करना है तो वह राजा की पत्नी
- 51:57के साथ में ही उठना था बैठना खाना करती
- 52:00थी। एक दिन राजा की पत्नी ने एक बात बोल
- 52:03दी। राजा की पत्नी ने बोला कि देखिए कुछ
- 52:07दिनों पहले मेरे भाई का देहांत हो गया।
- 52:12अब आप देखिए मेरी भाभी जो है कितनी महान
- 52:16पतिव्रता नारी है। जब मेरे भाई का देहांत
- 52:20हो गया तो मेरी भाभी बिना झिझक के सती बन
- 52:24गई। आग के अंदर में उसने प्रवेश कर लिया।
- 52:27अपने पति के साथ वो चिता में प्रवेश कर
- 52:29लिया। ऐसी होती है पतिव्रति पतिव्रता
- 52:33नारियां ऐसी होती है।
- 52:36पद्मावती ने बोला ये क्या पतिव्रता नारी
- 52:39है?
- 52:40आग की क्यों जरूरत पड़ी उसको मरने के लिए?
- 52:44सच में पतिव्रता नारी होती ना तो जैसे
- 52:47उसको पता चलता है कि उसका पति नहीं रहा
- 52:49वहां के वहां प्राण छोड़ देगी। आग की क्या
- 52:51जरूरत है? ऐसी होती है पतिव्रता नारी। अब
- 52:55रानी को थोड़ा सा यह आया अच्छा बहुत बड़ी
- 52:57बातें कर रही है। उसको चेक करते हैं। ये
- 52:59कितनी पतिव्रता नारी है। तो एक दिन क्या
- 53:02हुआ? राजा के साथ में जयदेव गोस्वामी कहीं
- 53:04बाहर गए थे। अब उन दिनों में शिकार पे
- 53:07जाना जो है कॉमन होता था। क्रूर प्राणियों
- 53:10को जो है राजा मार देते थे। तो वो लोग
- 53:12शिकार पे चले गए। अब इन्होंने सारा ड्रामा
- 53:14किया। रानी ने बोला अपनी सब दासियों को
- 53:17तुम लोग ऐसा एक्टिंग करो भाग-भाग के आओ।
- 53:19बोलो जयदेव गोस्वामी मर गए। अब ये लोग
- 53:21पूरा एक्टिंग करते हुए आए भागे। अरे
- 53:24पद्मावती आपको क्या बोले? आपके पति मर गए।
- 53:27राजा के साथ शिकार कर रहे करने के लिए गए
- 53:30थे। किसी क्रूर प्राणी ने उनको खा लिया।
- 53:33अब जैसे पद्मावती ने यह बात सुनी। क्या वो
- 53:36नहीं रहे? सीधा नीचे जमीन पर अब रुई लगा
- 53:40के देखा कोई प्राण नहीं है। निष्प्राण साथ
- 53:43ही साथ प्राण त्याग कर दिया। अब रानी को
- 53:46डर लगा अब जब राजा वापस आएगा जयदेव
- 53:50गोस्वामी वापस आएंगे। मैं क्या बोलूंगी कि
- 53:53सिर्फ छोटे बच्चों वाला काम किया ना मैंने
- 53:55ऐसा टेस्ट करना। अब जब राजा और जयदेव
- 53:57गोस्वामी वापस आते हैं। उनको यह सब खबर
- 53:59मिलती है कि रानी ने उसका टेस्ट लिया और
- 54:01यह सब हो गया। राजा को इतना गुस्सा आया
- 54:04बोला ऐसा पवित्र भक्त की पत्नी को तुम ऐसा
- 54:07टेस्ट करोगी। अब राजा ने तलवार लिया और
- 54:10उसका गला काटने के लिए भागा। अपनी पत्नी
- 54:13का गला काटने के लिए भागा। अब जब उसकी
- 54:16पत्नी का गला काटने के लिए भागा जयदेव
- 54:18गोस्वामी को आज तक कभी डिजायर नहीं था कि
- 54:21मेरे हाथ होने चाहिए। उसको उस मिनट के लिए
- 54:23लगा ठाकुर जी मुझे हाथ होते ना तो मैं बचा
- 54:26लेता इसको। मेरे पास हाथ क्यों नहीं है।
- 54:28अब भगवान तो वेट ही कर रहे थे कि कब
- 54:30मांगोगे तुम? अरे दिया हाथ दिया मांगा तो
- 54:34भगवान जो है उद्धव के उद्धव गीता में क्या
- 54:37बोलते हैं ठाकुर जी तो ऐसे वेट ही करते
- 54:39रहते शुद्ध भक्त के पीछे एक बार तो कुछ
- 54:41मांगो एक बार तो कुछ मांगो ठाकुर जी खुश
- 54:44मांगा तो इसने लो तुमको दे दिया हाथ अब
- 54:46जैसे उसके हाथ आ गए उसने राजा को रोक दिया
- 54:50बोला नहीं नहीं आप अब ऐसा मत करिए आपकी
- 54:52पत्नी को मत मारिए अब जयदेव गोस्वामी जो
- 54:55है जोर से चिल्लाए थे ना राजा रुक जाओ अब
- 54:58जैसे उन्होंने जोर से चिल्लाया राजा रुक
- 55:00जाओ उनकी जो पत्नी जिनका मृत्यु शरीर वहां
- 55:02पड़ा था वो फिर से सजीवन हो गई। बोले
- 55:05प्रभु आप आ गए मैं भी आ गई।
- 55:10[प्रशंसा] आप आ गए मैं भी आ गई।
- 55:13बहुत सुंदर एक पवित्र रिश्ता था दोनों का।
- 55:17तो फिर जयदेव गोस्वामी अपनी पत्नी से कहते
- 55:20हैं कि अब यहां रहना ठीक नहीं होगा। हम
- 55:23चलते हैं। हमारे गांव हम वापस चलते हैं।
- 55:26फिर लक्ष्मण सेन महाराज को बहुत दुख लगता
- 55:28है। अपनी पत्नी को बहुत कोसते हैं कि एक
- 55:30शुद्ध भक्त का साथ हमें मिल रहा था। लेकिन
- 55:33तुम्हारे बचपने की वजह से अब वो हमें छोड़
- 55:35के चले गए। अब जयदेव गोस्वामी का अपने
- 55:41स्पेशल एक विग्रह थे। नाम जानते हैं राधा
- 55:45माधव। हम जब जयपुर गए थे। हमने दर्शन किया
- 55:48गए थे ना जयपुर कनक वृंदावन वहां पर जयदेव
- 55:51गोस्वामी के जो विग्रह है अब इसकी भी बहुत
- 55:53सुंदर कथा है कैसे जयदेव गोस्वामी का जो
- 55:57गांव था केंदु बिलवा कभी-कभी वहां से
- 56:00थोड़ा सा दूर उनको चल के जाना पड़ता था
- 56:02नहाने के लिए अब जब वो थोड़े से वृद्ध हो
- 56:05गए तो उतना चलना उनके लिए मुश्किल होता था
- 56:08गंगा में जाकर स्नान करते थे अब उन्होंने
- 56:11वहां जाना छोड़ दिया कहीं और घर के पास की
- 56:14नदी में स्नान करने लगे अब गंगा सोचती है
- 56:16कि ऐसे ऐसे शुद्ध भक्त मेरे पानी में
- 56:19स्नान नहीं करेंगे तो कैसे चलेगा? तो गंगा
- 56:21आ गई उनके घर के पास और अभी भी आप जाओ
- 56:24केंदु बिल गांव में आप देख सकते हो पास
- 56:26में ही और फिर वहां पर वो स्नान करते थे।
- 56:28तो एक दिन अजय नदी में वे स्नान कर रहे
- 56:31थे। जब वे स्नान करके जो है पूजा करते थे
- 56:35तो देखा कि पैर के पास कुछ छुआ है। तो ये
- 56:38क्या है? क्या है? देखा तो राधा माधव का
- 56:41विग्रह माधव थे उनके हाथ में। और फिर तब
- 56:44से जयदेव गोस्वामी जो है राधा माधव की
- 56:46पूजा करने लगे। कुछ जगहों में ऐसा भी लिखा
- 56:49है कि वह राधा माधव को ले वृंदावन गए थे
- 56:53और वहां पर केसी घाट के पास में राधा माधव
- 56:55की पूजा करते थे और कुछ दिनों बाद वे वापस
- 56:59अपने गांव चले गए। लेकिन यह जो राधा माधव
- 57:01के विग्रह है उनको जयपुर के राजा ने
- 57:04वृंदावन से ले गए और जयपुर में उनका मंदिर
- 57:08बनाया। तो अभी भी जयदेव गोस्वामी के जो
- 57:12ओरिजिनल विग्रह है आप उसका दर्शन कर सकते
- 57:15हो। आप वृंदा जयपुर जाओ उसको गुप्त
- 57:18वृंदावन बोलते हैं ना जयपुर को क्योंकि
- 57:20सारे गोस्वामी लोग की ओरिजिनल डिटेल्स
- 57:23जयपुर में है और वृंदावन में प्रतिभ
- 57:25विग्रह है। तो यह कनक वृंदावन जगह का नाम
- 57:28है। वहां आप जयदेव गोस्वामी के विग्रह को
- 57:31देख सकते हो। तो ऐसे बहुत ही सुंदर-सुंदर
- 57:35कहानियां है जयदेव गोस्वामी की। स्पेशली
- 57:38उनकी रचना की गई हुई गीत गोविंद का बहुत
- 57:41महत्व है। आज के दिन में भी अगर आप
- 57:43जगन्नाथ पुरी में कोई अपना जीवन भगवान को
- 57:46जगन्नाथ जी को समर्पण करना चाहे तो उनको
- 57:50गीत गोविंद लिखा हुआ कपड़ा उनके सिर पर
- 57:52बांधते हैं। जैसे हमारी दीक्षा होती है ना
- 57:54जैसे हमारी गौ संप्रदाय में दीक्षा होती
- 57:56है तो हमको नाम दिया जाता है। वैसे वहां
- 57:58पर गीत गोविंद लिखा हुआ कपड़ा उनके सिर पर
- 58:00बांधा जाता है। जो जगन्नाथ जी को अपना
- 58:02जीवन अंकित करते हैं। तो गीत गोविंद का एक
- 58:05विशेष महत्व है। एक बार यह गीत गोविंद का
- 58:10बुक डिस्ट्रीब्यूशन भी बहुत अच्छा होता
- 58:12था। लक्ष्मण सेन महाराज क्योंकि जयदेव
- 58:14गोस्वामी को वह बहुत प्यार करते थे और
- 58:16गीता गोविंद रचना का उन्होंने बहुत सारे
- 58:19ब्राह्मणों को बिठा के इसकी कॉपीज बनवाई
- 58:23थी और सब जगह उसका डिस्ट्रीब्यूशन होता था
- 58:26हर घर में और लक्ष्मण सेन महाराज और बंगाल
- 58:30के थे और पूरी के महाराज जो गजपति महाराज
- 58:34और साउथ इंडिया के गंगा चोला ये तीनों ही
- 58:37बहुत अच्छे वैष्णव थे और वे इतना
- 58:41एग्रेसिवली प्रचार विचार करते थे। मैंने
- 58:44सुना कि लक्ष्मण सेन महाराज तो हमेशा
- 58:47तलवार लेकर रेडी रहते थे। अगर कोई कृष्ण
- 58:49को जगन्नाथ को नहीं मानता तो मारने के लिए
- 58:52तैयार। बस मतलब सबको भगवान को कृष्ण को
- 58:55मानना है। एकदम पक्के भक्त थे। मतलब ऐसा
- 58:58नहीं वो हिंसा करते थे। मतलब उनको अवकाश
- 59:00देते थे कि आप भगवान के बारे में लेकिन जो
- 59:02एकदम नास्तिक लोग हैं उनको वो वार्निंग
- 59:06देते थे। उनको मारते थे। तो उन्होंने क्या
- 59:09किया था? गीत गोविंद के बहुत सारे कॉपीज
- 59:11बना के उन्होंने सब जगह सबको
- 59:13डिस्ट्रीब्यूट करते थे। अब एक दिन ऐसा हुआ
- 59:16कि उनके कोर्ट में जयदेव गोस्वामी बैठे
- 59:19हैं। बहुत सारे साधु लोग बैठे हुए हैं और
- 59:22गीत गोविंद में से वो एक पर्टिकुलर
- 59:27सॉन्ग है। एक गीत गोविंद में से एक
- 59:29पर्टिकुलर सॉन्ग है प्रिय चारू शीला।
- 59:32प्रिय चारु शीला वो गीत गोविंद का 19th
- 59:35सॉन्ग है। 24 सॉन्ग्स में से 19th सॉन्ग
- 59:37है। तो प्रिय चारु शीला गीत गा रहे थे और
- 59:40उसी में वो लाइन आती है। देहित तव पाद
- 59:43पद्म उदार ये जो देहित तव पाद पद्म राधा
- 59:45रानी को जो बोला है उस गाने में ही वो आती
- 59:47है। अब जब वो गा रहे हैं सारे सुन रहे वाह
- 59:50वाह कितनी सुंदर है आपकी रचना कितनी सुंदर
- 59:53है। जब उस लाइन पे आ गए ना जहां पे राधा
- 59:56रानी को अब रिक्वेस्ट करेंगे कि तुम्हारे
- 59:58पैर दे दो। जय देखने सोचा कि ये लोग जो
- 1:00:01यहां सब बैठे हुए हैं ये लोग अप्रिशिएट
- 1:00:03करेंगे कि नहीं उस लाइन को गलत मतलब
- 1:00:05निकालेंगे क्यों ना मैं इस लाइन को स्किप
- 1:00:07करके आगे बढ़ जाऊं तो उन्होंने क्या किया
- 1:00:08वो लाइन को स्किप करके आगे बढ़ गए अब उनको
- 1:00:11क्या पता है उनकी तो रचना है नहीं तो वो
- 1:00:13लोग अच्छा अच्छा बहुत सुंदर बहुत सुंदर अब
- 1:00:15उस सभा में एक बूढ़ा आदमी बैठा था वो
- 1:00:19बूढ़ा आदमी जोर-जोर से चिल्लाने लगा ये एक
- 1:00:21चीटर है ये एक चीटर है ये एक चीटर है अब
- 1:00:24लक्ष्मण सिंह ने बोला कौन है कौन ऐसा बोल
- 1:00:26रहा है जयदेव गोस्वामी बारे में क्या तुम
- 1:00:27क्या बोलना चाह रहे हो नहीं नहीं ये एक
- 1:00:29चीटर है। इसने सबको चीट किया है। क्या चीट
- 1:00:32किया? बोला आप उसको ही पूछो उसने क्या चीट
- 1:00:34किया है? उसकी रचना में से उसने दो लाइन
- 1:00:38नहीं गाई है। उसका मतलब रचना में कुछ तो
- 1:00:40भूल है। मैं तो बोलूं ऐसे लोगों का
- 1:00:43शास्त्र पढ़ना नहीं चाहिए। इसको डालो गंगा
- 1:00:46में। उसको डालो गंगा में बहा दो। वो पकड़
- 1:00:48के क्या करता है? गंगा में फेंक देता है।
- 1:00:51अब जब वो गंगा में फेंक देता है लक्ष्मण
- 1:00:54सेन महाराज को इतना बहुत सारी कॉपियां है
- 1:00:56ऐसा नहीं है पर उसको गुस्सा आता है कि कौन
- 1:00:58ऐसा अपमान कर रहा है तो लक्ष्मण सेन
- 1:01:00महाराज क्या करते हैं एकदम तलवार लेकर
- 1:01:02उसको मारने के लिए जाते हैं और जयदेव
- 1:01:04गोस्वामी बोलते हैं एक मिनट एक मिनट वो
- 1:01:06झूठ नहीं बोल रहा है वो सच बोल रहा है
- 1:01:08मैंने ऐसा किया है मैंने दो लाइन बीच में
- 1:01:10नहीं गाई है अब जब ये सब चल रहा है वहां
- 1:01:13क्या हो रहा है जो गीत गोविंद को गंगा में
- 1:01:15फेंक दिया था वो गंगा के बहाव के विपरीत
- 1:01:19उल्टी दिशा में तैरता हुआ वापस आ रहा है
- 1:01:21और वह सब देख के साधु लोग एकदम ओहो उसका
- 1:01:25मतलब गंगा माता ने भी इस शास्त्र को जो है
- 1:01:28स्वीकार कर लिया है। तो अब क्या हो गया
- 1:01:30जयदेव गोस्वामी का लिखा हुआ गीत गोविंद को
- 1:01:33और भी मान मिलने लगा। अरे वाह ये तो बहुत
- 1:01:35है तो गंगा ने भी इसको मान लिया है। और
- 1:01:38फिर तब तक लक्ष्मण सेन बोलते हैं कि वो
- 1:01:40बूढ़ा गया कहां जिसने ये सब काम किया।
- 1:01:42बूढ़ा गायब
- 1:01:44कौन था वो बूढ़ा? जगन्नाथ जी जानबूझ के कि
- 1:01:48अरे सब देखो इसकी गीत गोविंद की वैल्यू
- 1:01:51क्या है। अब बहुत सालों बाद लक्ष्मण सेन
- 1:01:57महाराज जब नहीं रहे जयदेव गोस्वामी भी
- 1:01:59नहीं रहे। उनका गीत गोविंद तो प्रचलन है।
- 1:02:02तो नए महाराज जब आए लक्ष्मण सेन के बेटे
- 1:02:07पुरुषोत्तम देव तो उन्होंने सोचा कि अरे
- 1:02:09इतना बचपन से सुनता हूं गीत गोविंद
- 1:02:12जगन्नाथ जी को बहुत पसंद है। लेकिन वो
- 1:02:15जयदेव गोस्वामी का है। मैं अपना गीत
- 1:02:17गोविंद लिखूंगा। न्यू एकदम अलग से अभिनव
- 1:02:22गीत गोविंद नया। तो उन्होंने क्या किया?
- 1:02:25अभिनव गीत गोविंद लिखा। और पुजारी पुजारी
- 1:02:28लोगों को बोला ये लो मेरा अभिनव गीत
- 1:02:30गोविंद जाकर जगन्नाथ जी को दो। बहुत सुंदर
- 1:02:32लिखा है। अब पुजारी लोग राजा को कैसे मना
- 1:02:35किए कि ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि इतने
- 1:02:37सालों से हम लोग जयदेव गोस्वामी का ही गीत
- 1:02:39गोविंद रखते हैं। अब पुजारी लोगों ने क्या
- 1:02:41किया? रात को सोने से पहले जयदेव गोस्वामी
- 1:02:44का गीत गोविंद रखा वहां पे और यह नया
- 1:02:46अभिनव गीत गोविंद वहां पर रखा। दरवाजा बंद
- 1:02:48कर दिया।
- 1:02:49दूसरे दिन सुबह जब जाकर खोला तो जो जयदेव
- 1:02:53गोस्वामी का गीत गोविंद था वह जगन्नाथ जी
- 1:02:55के हृदय के पास में रखा हुआ है और अभिनव
- 1:02:59गीत गोविंद के सारे टुकड़े-टुकड़े करके सब
- 1:03:01जगह पड़े हुए हैं। अब ये लोगों ने पूरा
- 1:03:04वहां पे ऑल्टर साफ किया और राजा को जाकर
- 1:03:06विनय विनम्र भाव से बोला कि आपका अभिनव
- 1:03:09गीत गोविंद तो भगवान ने एक्सेप्ट नहीं
- 1:03:11किया। अब इसने सोचा ठीक है अगर मेरा गीत
- 1:03:14गोविंद भगवान ने एक्सेप्ट नहीं किया तो अब
- 1:03:16जी के क्या करें? मर जाना ही ठीक रहेगा।
- 1:03:18जब मेरा सर्विस ही भगवान ने एक्सेप्ट नहीं
- 1:03:20किया। मैंने भी तो प्रेम से लिखा था। अब
- 1:03:23वो चले गए समुद्र के अंदर। बोला मैं अब
- 1:03:25डूब जाऊंगा। मुझे और जीना ही नहीं है। अब
- 1:03:27जैसे वो समुद्र के अंदर अंदर-अंदर जाने
- 1:03:30लगे। जगन्नाथ जी वहां पे खुद आया उसको
- 1:03:32बाहर निकाला। बोला आगे तुम मर जाओगे। पूरी
- 1:03:34का कोई राजा नहीं है। पूरी को देखेगा कौन?
- 1:03:37तुम ऐसे मत करो। बोलता नहीं मेरे को मेरे
- 1:03:40को जीना है। सी इमेजिन करिए उन दिनों में
- 1:03:42राजाओं का जगन्नाथ जी के साथ का रिश्ता
- 1:03:44देखिए। जगन्नाथ जी के साथ भी कंडीशन। बोले
- 1:03:48तुमने आपने तो मेरा माना नहीं मेरा गीत
- 1:03:50गोविंद तो आपने एक्सेप्ट नहीं किया तो फिर
- 1:03:51मैं क्यों आपका यह पूरी आप ही चला लो आपका
- 1:03:54पूरी प्रदेश आप ही चला लो मैं गया वो अंदर
- 1:03:57जा रहा है भगवान बाहर निकल रहे हैं वो
- 1:03:58अंदर जा रहा है ठाकुर जी ने बोला एक मिनट
- 1:04:00चलो एक एग्रीमेंट करते हैं पूरा-पूरा नहीं
- 1:04:04लूंगा थोड़ा लूंगा तो चलेगा चलेगा चलेगा
- 1:04:07थोड़ा लेने से भी चलेगा बोला ठीक है फिर
- 1:04:09तुम्हारा ये जो अभिनव गीत गोविंद है मैं
- 1:04:11उसमें से 12 श्लोक लूंगा बस यही ट्रीटी
- 1:04:14बोला हां ठीक है चलो निकलो बाहर फिर वो
- 1:04:16बाहर निकला निकला अब खुश। अब वह 12 श्लोक
- 1:04:20अभिनव गीत गोविंद के जयदेव गोस्वामी के
- 1:04:22गीत गोविंद के साथ मिला दिया। अब हमें पता
- 1:04:26नहीं है वो 12 श्लोक कौन से हैं क्योंकि
- 1:04:29वो मिक्स हो गया है। तो कौन सा पुरुषोत्तम
- 1:04:33देव महाराज का था उसमें से 12 श्लोक हमें
- 1:04:36पता नहीं। लेकिन ऑल टुगेदर वो सब जयदेव
- 1:04:38गोस्वामी के गीत गोविंद जैसा ही माना जाता
- 1:04:41है। तो ऐसा
- 1:04:44गीत गोविंद का जयदेव गोस्वामी ने बहुत
- 1:04:46प्रचार किया। वह और अपनी पत्नी के साथ
- 1:04:48जाते थे और जिस तरह से जैसे हम लोग को इस
- 1:04:51में एक ये है बुक डिस्ट्रीब्यूशन का हम
- 1:04:53लोग कितना एग्रेसिवली वैसे वह भी जो उन
- 1:04:55दिनों में गीत गोविंद का प्रचार बहुत
- 1:04:57एग्रेसिवली कर रहे थे। राइट फ्रॉम कश्मीर
- 1:05:00से ले कन्याकुमारी मध्य प्रदेश ऐसा कोई
- 1:05:03जगह नहीं है जहां पर उन्होंने गीत गोविंद
- 1:05:05का प्रचार नहीं किया। वे सब जगह जाते गीत
- 1:05:08गोविंद की कॉपियां डिस्ट्रीब्यूट करते
- 1:05:10उनके बारे में बताते और पद्मावती जो है वो
- 1:05:13नृत्य करके गीत गोविंद की प्रस्तुति करती
- 1:05:17और ऑल ओवर और इसीलिए अगर आज के दिन में भी
- 1:05:19आप देखो तो बहुत सारे साउथ इंडियन टेंपल
- 1:05:22में भी गीत गोविंद गाया जाता है। गीत
- 1:05:25गोविंद गाया जाता है। मैंने सुना था कि वे
- 1:05:27सारे ओनली वैष्णव मंदिर में जाते थे।
- 1:05:29जयदेव गोस्वामी और पद्मावती और वहां पर
- 1:05:32गीत गोविंद का प्रचार करते थे। लेकिन साउथ
- 1:05:34इंडिया में जो मीनाक्षी मंदिर है वह
- 1:05:35मीनाक्षी देवी खुद वहां पे जयदेव गोस्वामी
- 1:05:39और पद्मावती को रिक्वेस्ट करने गई थी कि
- 1:05:41मेरे मंदिर में भी आओ। यहां भी तुम इसका
- 1:05:43जो है प्रचार करो। तो इसलिए हम देखें तो
- 1:05:46काफी आप देखो पूरे भारतवर्ष में ऐसे बहुत
- 1:05:49सारे मंदिर हैं जहां पे रात को ठाकुर जी
- 1:05:51को सुलाते समय जो है गीत गोविंद गाया जाता
- 1:05:55है। तो ऐसा बहुत सारी अद्भुत कथाएं हैं।
- 1:06:01गीत गोविंद बहुत ही सुंदर भजन है। इस तरह
- 1:06:05से गीत गोविंद का बहुत प्रचार हुआ और
- 1:06:09जयदेव गोस्वामी के शरीर छोड़ने के बारे
- 1:06:12में तो बहुत सारी अलग-अलग बातें कही जाती
- 1:06:15है। कोई कहते हैं कि वृंदावन में उन्होंने
- 1:06:17शरीर छोड़ दिया। कोई कहते हैं कि नहीं
- 1:06:19नहीं उन्होंने जगन्नाथ पुरी में शरीर
- 1:06:21छोड़ा। कोई कहते हैं कि उन्होंने अपने
- 1:06:23गांव में ही केंदु बेलवा में शरीर छोड़ा।
- 1:06:26लेकिन भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर कहते
- 1:06:27हैं कि नहीं जगन्नाथ पुरी में गीत गोविंद
- 1:06:30गाते हुए उन्होंने अपना शरीर छोड़ा।
- 1:06:34और जैसे कि मैं बता रही थी कि गीत गोविंद
- 1:06:36की विशेषता यह है कि इट इज ए सॉन्ग ऑफ
- 1:06:40सेपरेशन
- 1:06:42और उसमें जो लीलाएं बताई गई है राधा रानी
- 1:06:46जब कृष्ण के विरह में होती है तो उनके
- 1:06:49विचार क्या है क्या होता है और
- 1:06:54लक्ष्मण सेन महाराज के महाराज के जो कोट
- 1:06:57था सभा थी उसमें रोज गाया जाता था और कुछ
- 1:07:00लोग उनके सभा में ऐसे भी थे जो
- 1:07:03जयदेव गोस्वामी से ईर्ष्या करते थे और वो
- 1:07:06सोचते थे कि शायद वो अच्छा से गाता है ना
- 1:07:08इसलिए लक्ष्मण सेन को बहुत पसंद है
- 1:07:09क्योंकि लक्ष्मण सेन महाराज को संगीत पसंद
- 1:07:12है तो इसलिए वो कभी-कभी क्या करते थे कुछ
- 1:07:14अच्छे संगीतकार को लेके आ जाते थे कि इसको
- 1:07:17हम लेके आएंगे ना तो जयदेव गोस्वामी से
- 1:07:19उनका माइंड थोड़ा सा हटेगा तो अलग-अलग
- 1:07:23संगीतकार तो एक बार उनकी सभा में कोई अपनी
- 1:07:27बहू को लेकर आ गया था बोला मेरे बहू बहुत
- 1:07:30अच्छा गाना गाती है और आप एक बार उनसे
- 1:07:32सुनिए है। अब लक्ष्मण सेन तो डिवोटी है।
- 1:07:34उन्हें संगीत से या कोई स्पेशलाइज्ड
- 1:07:38क्लासिकल म्यूजिक से कोई विशेष प्रेम नहीं
- 1:07:40था। उन्हें तो जिस गाने में कृष्ण का नाम
- 1:07:42आए वही गाना उसको पसंद था। लेकिन जब यह
- 1:07:46लाए हैं तो बोला ठीक है गाओ। अब सच में यह
- 1:07:48इतनी सुंदर गायिका थी और जब वो गाने लगी
- 1:07:53सबके होश उड़ गए। और जब उसका गाना खत्म
- 1:07:58हुआ तब कोई आदमी बहुत भागते हुए आया।
- 1:08:01घबराया हुआ। बोला मैं बर्बाद हो गया। तो
- 1:08:04फिर लक्ष्मण सिंह ने बोला क्या हुआ? बहुत
- 1:08:06अच्छे राजा थे। वह भी अपने सिंहासन से
- 1:08:08उतरे। बोला क्या हुआ? क्या हुआ? बोला कि
- 1:08:10आपकी सभा से जो सुंदर गाना निकल रहा था
- 1:08:15उसके वजह से क्या हुआ? बोलता है मेरी जो
- 1:08:19बहू जो कुएं में गई थी पानी लेने के लिए।
- 1:08:23अब पानी लेने के लिए क्या करना पड़ता है?
- 1:08:24आप बकेट को नीचे डालो। उसके बाद में पानी
- 1:08:27लो। बोलते मेरी बहू ने क्या किया? बच्चे
- 1:08:30को नीचे फेंका। बकेट को गोद में ले लिया।
- 1:08:33उतना सुंदर यह गा रही थी। तो अब मैं क्या
- 1:08:36करूं? मैं तो बर्बाद हो गया। अब लक्ष्मण
- 1:08:39सेन ने फिर जयदेव गोस्वामी की तरफ देखा।
- 1:08:41बोला अब क्या किया जाए? तब जयदेव गोस्वामी
- 1:08:44ने जो है अपने दशावतार स्तोत्र से ये
- 1:08:46गाया।
- 1:08:48केशव दता मीन शरीरा
- 1:08:53जय जगदीश हरे
- 1:08:58जय जगदीश
- 1:09:00हरे
- 1:09:03जय जगदीश
- 1:09:05हरे सब भजन में लीन हो गए सभा में और फिर
- 1:09:09जयदेव गोस्वामी ने उसके बीच में वो गाना
- 1:09:11रोका और बोला निकल गया बच्चा कुएं से बाहर
- 1:09:14जाकर ले लो बोला क्या बोला हां निकल गया
- 1:09:17बच्चा बच्चा जाके ले लो। अब वो जो लेडी थी
- 1:09:21जो बहुत सुंदर गा रही थी उसका नाम था
- 1:09:22विद्युतपुरा।
- 1:09:24तो वो भी शॉक हो गई और सब वहां गए उस स्थल
- 1:09:26में और देखा सच में वो बच्चा बाहर में
- 1:09:28कुवैत से बाहर में आकर बैठा है। अब
- 1:09:30लक्ष्मण सेन महाराज बहुत सरप्राइज हो गए।
- 1:09:33तो जयदेव गोस्वामी ने बोला कि मैंने भगवान
- 1:09:35को प्रार्थना की हे केशवधता मीन शरीरा
- 1:09:38भगवान आपने मीन शरीर में क्या किया था?
- 1:09:40मीन शरीरा माने मत्स्य रूप में फिश
- 1:09:43इंकार्नेशन में क्या किया था? सारे वेद को
- 1:09:46भगवान ने रक्षा की थी एकदम बच्चे के जैसे
- 1:09:49किससे रक्षा की थी? प्रलयन नदी से रक्षा
- 1:09:52की थी। तो मैंने इसीलिए भगवान को
- 1:09:54प्रार्थना किया कि जिस तरह से प्रलय नदी
- 1:09:56से आपने उन शास्त्रों की उन वेदों की
- 1:09:58रक्षा की वैसे इस शिशु की भी आप रक्षा
- 1:10:00करिए। तो फिर तब से इन लोगों ने होप छोड़
- 1:10:02दिया कि अरे हां हम कितने भी बड़े
- 1:10:05संगीतकार को लेकर आ जाए जयदेव गोस्वामी के
- 1:10:08साथ कोई नहीं फाड़ सकता। फिर थोड़े दिन के
- 1:10:10बाद में फिर भूल गए वो विद्युतपुरा के साथ
- 1:10:12क्या हुआ था। फिर किसी और को ले आ गए ओसा
- 1:10:14से। उनका नाम था मिश्रा। अब मिश्रा को ले
- 1:10:17आ गए हम। अब मिश्रा जी थोड़ा पानवान खाते
- 1:10:20थे। उसको देख के ही लक्ष्मण सेन को मतलब
- 1:10:22इसको क्यों ले आ गए? नहीं नहीं ये बहुत
- 1:10:24अच्छा गाते हैं। और ये जब गाते हैं तब जो
- 1:10:27पत्ते होते हैं झाड़ के ऊपर से वो गिर जाते
- 1:10:30हैं। आग लग जाती है, बारिश हो जाती है। तो
- 1:10:32ठीक है गाओ। गाने लगे। अब उन दिनों में
- 1:10:37किसी को जस्टिस करना है तो उसके लिए सभा
- 1:10:39अलग होती है। जब गाना वगैरह एंजॉय करना है
- 1:10:42राजा का तो अलग सा कोटियार्ड होता है जहां
- 1:10:44पे वो बैठते हैं। अपनी रानियां भी सुनती
- 1:10:47है। वो लेटे हुए जो है गाना सुनते हैं। तो
- 1:10:49अब लक्ष्मण सेन राजा लेटे हुए हैं।
- 1:10:51रानियां भी बैठी है। सब बैठे हैं और
- 1:10:53मिश्रा जी ने गाना शुरू किया और सच में
- 1:10:55उसका गाना इतना पावरफुल था कि वहां पे
- 1:10:59जितने भी पत्ते थे वो सारे झाड़ से खर गए।
- 1:11:03और खरे ही नहीं उसके गाना में एक ऐसा
- 1:11:06हेजिटेशन था कि वहां पे जो हवा थी वो हवा
- 1:11:09में आग लग गई और सारे जो पत्ते गिर गए सब
- 1:11:12में आग लग गई और जब मिश्रा जी उठे तो सारी
- 1:11:15आग बंद कर दी। अब सारे उसको जो है क्लैप्स
- 1:11:18क्लैप्स क्लैप्स कितना सुंदर ये किया। तो
- 1:11:21अब लक्ष्मण सेन महाराज ने बोला कि संगीत
- 1:11:24से कोई चीज डिस्ट्रॉय करने में कोई बड़ी
- 1:11:26बात नहीं है। कुछ क्रिएट करो तो बड़ी बात
- 1:11:29है। फिर जयदेव गोस्वामी की तरफ देखा। फिर
- 1:11:31जयदेव गोस्वामी ने अपना गीत गोविंद शुरू
- 1:11:33किया। अब उन्होंने गीत गोविंद में से एक
- 1:11:35ऐसा गीत चुना जिसमें लिखा हुआ था कि राधा
- 1:11:39रानी एक दिन कुंज में बैठी है और कृष्ण का
- 1:11:43इंतजार कर रही है। कृष्ण अभी तक आए नहीं
- 1:11:46है। क्योंकि वो आए नहीं है तो पिछले दिन
- 1:11:48जब कृष्ण से मिली थी तब क्या-क्या हुआ
- 1:11:51उसको याद कर रही थी। अब याद करते-करते
- 1:11:54उसको एक बात याद आई कि जब रात को जब रास
- 1:11:57लीला होती है तो रास लीला में जो मधुर
- 1:12:01भगवान जो बना बजाते हैं वेनु वेनु के साथ
- 1:12:03में स्टेप मैच होने चाहिए तो सारे गोपियों
- 1:12:07का स्टेप मैच हो रहा था लेकिन राधा रानी
- 1:12:09का स्टेप मैच नहीं हुआ नहीं हुआ तो ठाकुर
- 1:12:12जी ने अपने दोनों दोनों सुंदर नेत्र से
- 1:12:14राधा रानी की तरफ ऐसा देखा मतलब मतलब कि
- 1:12:18ये क्या है तुमने सही से स्टेप क्यों नहीं
- 1:12:20लिया ये गलत स्टेप हो रहा है तो राधा राधा
- 1:12:22रानी ये सारी बातें सोच-सच के मन में हंस
- 1:12:24रही थी कि मैंने गलत स्टेप लिया। मतलब ऐसा
- 1:12:27लिखा हुआ है गीत गोविंद में। जयदेव
- 1:12:28गोस्वामी जो देख रहे लीला को और ठाकुर जी
- 1:12:30मेरे तरफ देख रहे थे कि ये स्टेप तो सही
- 1:12:32नहीं है। और ऐसे सोचते-सचते पहले तो दुख
- 1:12:35कर रही थी कि कृष्ण अभी तक आए नहीं। और
- 1:12:38फिर जब कृष्ण की ये मीठी सी बात याद आ गई।
- 1:12:40तो हंसते-हंसते खुशी से जब राधा रानी वहां
- 1:12:44पे जितने पेड़ वगैरह है उसके तरफ देखना
- 1:12:46शुरू करती है तो सारे पेड़ों में नए-नए
- 1:12:49पत्ते खिलना शुरू हो जाते हैं। सारे
- 1:12:51पेड़ों में फल आ जाते हैं। सारे पेड़ में
- 1:12:53बड़े-बड़े फूल उगना शुरू हो जाते हैं।
- 1:12:55जहां-जहां राधा रानी देखती है वहां वहां
- 1:12:57फूल उग जाते हैं। तो यह पर्टिकुलर
- 1:12:59इंसिडेंट गीत गोविंद में एक गाने में
- 1:13:02जयदेव गोस्वामी ने लिखा था और वह वहां पर
- 1:13:04गाने लगते हैं और जैसे वह वहां पर गाने
- 1:13:07लगते हैं लक्ष्मण सेन महाराज की सभा में
- 1:13:09जहां-जहां वो पत्ते गिर गए थे सब वहां
- 1:13:11नए-नए पत्ते फूल सब आने लगता है और फिर
- 1:13:14लक्ष्मण सेन बोलते हैं यह है ये है ऐसा
- 1:13:16भक्ति भक्ति गीत जहां पर ठाकुर जी को अगर
- 1:13:19हम याद करें तो सब कुछ जीवन में शुभ होता
- 1:13:22है। सही बात है ना जब हम गाना गाते हैं तो
- 1:13:26हमारी आवाज कितनी मधुर है या हम कितने
- 1:13:31ट्यून जानते हैं उससे ठाकुर जी को कोई
- 1:13:34फर्क नहीं पड़ता। वो कितने गंधर्व वहां पर
- 1:13:37भगवान के लिए गाते रहते हैं। हम कितना
- 1:13:39सुंदर गाते हैं वो इंपॉर्टेंट नहीं है। हम
- 1:13:42कितना भाव से गाते हैं। ठाकुर जी हमारा
- 1:13:45भाव देखते हैं। कितना इंपॉर्टेंट है। और
- 1:13:49अगर हम हमारे अंदर में जाग के देखें तो हम
- 1:13:52जितना बार भी गाते हैं 50% ऑफ द टाइम
- 1:13:55दूसरे क्या सोचेंगे? कि मैंने कैसे गाया
- 1:13:58वो माइंड में हमेशा रहता है। तो इसीलिए हम
- 1:14:01एक एग्जांपल मैं दे रही हूं कि जैसे कोई
- 1:14:03क्राउड देखेंगे तो हमें माइक लेना बहुत
- 1:14:05अच्छा लगता है। अभी गाएंगे। अब दोपहर को
- 1:14:07जब मंदिर बंद रहता है वन टू फोर मैंने कभी
- 1:14:10नहीं देखा कोई बैठ के गाता है। एक्चुअली
- 1:14:12अब गा किसके लिए रहे हो? वो तो वन टू फोर
- 1:14:15भी वो वहीं बैठे हैं। शाम को भी वही बैठे
- 1:14:17हैं। सुबह भी वही बैठे हैं। उनके लिए गाना
- 1:14:19है तो एकांत में भी गा सकते हो। गाना हमें
- 1:14:22उनके लिए नहीं है। गाना हमें दूसरों के
- 1:14:24लिए है। इसलिए क्राउड हो तो हमारी गाणी
- 1:14:26बहुत अच्छी बदल जाती है। एकांत में हो तो
- 1:14:29हम कोई गानावाना नहीं गाते। तो यहां इस
- 1:14:32पूरे वृतांत से सबसे सुंदर बात टेक होम
- 1:14:36बात है कि भगवान का भजन करें तो उसमें भाव
- 1:14:41होना चाहिए। भगवान भाव के प्यासे हैं। गीत
- 1:14:45गोविंद में जयदेव गोस्वामी का भाव था जो
- 1:14:47भगवान को इतना उनकी तरफ खींचता था। जहां
- 1:14:51कोई गीत गोविंद गाते तो भगवान चल पड़ते।
- 1:14:54तो यह हमारा एक टेक होम लेसन है। भाव
- 1:14:58ग्राही जनार्धना भगवान भाव के भूखे हैं।
- 1:15:02तो यहीं पे एंड करूंगी। हम यह छोटा सा भजन
- 1:15:05गा के यहीं पर एंड करेंगे। और उसके बाद रथ
- 1:15:09यात्रा की कुछ अनाउंसमेंट्स मुझे करना है।
- 1:15:11शीत कमला कुच मंडलाए
- 1:15:17धित कुंडलाए
- 1:15:21शीत कमला कुच मंडलाए
- 1:15:27धित कुंडल
- 1:15:31कलित ललित वनमाला
- 1:15:35जय जय देव हरे
- 1:15:42देव हरे
- 1:15:46कलित ललित वन माला
- 1:15:50जय जय देव हरे
- 1:15:57देव हरे
- 1:16:00सब साथ में गाए दीन मणि मंडल मंदनाए
- 1:16:07भव कंदन
- 1:16:12मुनि जन मानस
- 1:16:15हंसा
- 1:16:17जय जय देव हरे
- 1:16:24देव हरे
- 1:16:28कालिया विषध
- 1:16:31गमजनाए
- 1:16:34जन रजनाए
- 1:16:39यदुकुल नलिन दिनेश
- 1:16:44जय जय देव हरे
- 1:16:49हे
- 1:16:51देव हरे
- 1:16:55मधुम
- 1:16:56नरक विनाशय
- 1:17:01गरुड़ासनाए
- 1:17:06सुर कुल के निदाना
- 1:17:11जय जय देव हरे
- 1:17:18देव हरे
- 1:17:22अमल कमल दल लोचनाए
- 1:17:29भव मोचनाए
- 1:17:34त्रिभुवन
- 1:17:35भुवन निधान
- 1:17:38जय जय देव हरे
- 1:17:46देव हरे
- 1:17:50जनक सुताकृत
- 1:17:53भूषण
- 1:17:56जित दूषण
- 1:18:01समरस समीत दस कांत जय जय देव हरे
- 1:18:13देव हरे
- 1:18:17अभिनव जल धर सुंदर
- 1:18:22ये धितम मंडल
- 1:18:26ये
- 1:18:28श्री मुख चंद्र चकोर
- 1:18:33जय जय देव हरे
- 1:18:41देव हरे
- 1:18:44तव चरणम
- 1:18:47प्रणतावयमे
- 1:18:50इति भावय
- 1:18:55कुरु कुशुलम
- 1:18:57प्रणतेशु
- 1:19:00जय जय जय देवा हरे
- 1:19:08देवा हरे
- 1:19:11श्री जय देव कावे
- 1:19:15दमय
- 1:19:17कुरते मुदामे
- 1:19:21मंगल उज्जवल गीतम
- 1:19:26जय जय देव हरे
- 1:19:33देवा हरे
- 1:19:36गीत गोविंद की
- 1:19:38श्रील जयदेव गोस्वामी की श्रील प्रभुपाद
- 1:19:42की
- 1:19:43हरे कृष्णा थैंक यू वेरी मच
- 1:19:45सब कृष्णा
- 1:19:47कृष्णा
- 1:19:49कृष्णा [संगीत]
- 1:19:51लगे
- 1:19:53सब कृष्णा
- 1:19:56कृष्णा [संगीत]
- 1:19:58कृष्णा
- 1:20:00लगे
- 1:20:02सब कृष्णा
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This page contains the full transcript of Jaydev Goswami ki अद्भुत कथा by Nitaisevini Mataji Hindi [Official], generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 13,731 words across 1,688 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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