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हिन्दी भाषा पर इससे अच्छी कविता आजतक नहीं सुनी होगी, इस युवा कवि ने रोंगटे खड़े कर दिये | Ishan dev — Transcript

by Vishban Kavi Sammelan · 1,380 words · 173 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00यकीन मानिए आज का यह कार्यक्रम और आप जैसे
  2. 0:03साहित्य प्रेमी और देशभक्त श्रोता इस बात
  3. 0:06की गवाही दे रहे हैं इस बात को प्रमाणित
  4. 0:08कर रहे हैं कि देशभक्ति को कैसे सुना जाता
  5. 0:11है मैं चाहता हूं एक बार पीछे तक अपने लिए
  6. 0:13जोरदार तालियां बजाइए जिससे मैं अपनी आगे
  7. 0:15की बात को कह सक मुझसे कई लोग कहने लग गए
  8. 0:19ईशान कंप्यूटर आ गया ई आ गया अब यह
  9. 0:22देशभक्ति की और देशभक्ति की भावनाओं की
  10. 0:25बातों को कौन सुनता है लेकिन मैंने कहीं
  11. 0:27पर मंच पर टिप्पणी करी जो आदरणीय मफतलाल
  12. 0:29जी के चैनल पर काफी वायरल भी रही मैंने
  13. 0:32कहीं पर कहा मैं बताना चाहता हूं कि
  14. 0:34देशभक्ति कहां है और इसी कंप्यूटर और सी
  15. 0:37आई के युग में हमारे और आपके बीच में कहां
  16. 0:39पर से रहे पर मैं आपको बताना चाहता हूं आज
  17. 0:43के दौर में
  18. 0:44भी विश्व के खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ
  19. 0:47में जब भारत माता की किसी एक बेटी के साथ
  20. 0:50अन्याय होता है तो हमारी उस एक बहन का दुख
  21. 0:54140 करोड़ लोगों का आक्रोश बन जाता है उस
  22. 0:58आक्रोश का नाम देशभक्ति है
  23. 1:00मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट स्टेडियम
  24. 1:02में जब कोई भारतीय गेंदबाज किसी विदेशी
  25. 1:06बल्लेबाज का विकेट चटका है तो मेलबर्न
  26. 1:09ऑस्ट्रेलिया में विकेट चटकने की गूंज
  27. 1:11अलीगढ़ के घरों में बैठे हुए लोगों के
  28. 1:13दिलों में सुनाई देती है उस चटकन का नाम
  29. 1:16देशभक्ति है और तालियां उठाए यदि बात सही
  30. 1:19लगे तो अगली बात पर पूरा सदन दोनों हाथ
  31. 1:21खड़े कर कर उठाए जीवन की आपाधापी में इतने
  32. 1:24व्यस्त रहने वाले हम लोग यदि कहीं पर जड़
  33. 1:27गढ़ मन की धुन मात्र भी सुन लेते हैं तो
  34. 1:30सारा काम छोड़कर सावधान की मुद्रा में
  35. 1:32खड़े हो जाते हैं उस मुद्रा का नाम
  36. 1:34देशभक्ति है मैं तब
  37. 1:39देशभक्ति तो ओज छंद ही लिखने वाला देश
  38. 1:43धर्म का सूचक
  39. 1:46हूं बहुत-बहुत आभार चेतन जी कुछ देशभक्ति
  40. 1:50की पंक्तियों से सीधे-सीधे जोड़ता हूं फिर
  41. 1:51एक छोटी सी कविता और अपना स्थान लूंगा के
  42. 1:54ओज छंद ही लिखने वाला देश धर्म का सूचक
  43. 1:57हूं दिनकर जी की परम परा का सबसे छोटा
  44. 2:01दीपक हूं के ओज छंद ही लिखने वाला देश
  45. 2:05धर्म का सूचक हूं दिनकर जी की परंपरा का
  46. 2:09सबसे छोटा दीपक हूं लेकर अपने गीत छंद में
  47. 2:12देश जगाने निकला हूं नव भारत निर्माण हेतु
  48. 2:17कुछ स्वप्न सजाने निकला हूं भारत की गूंज
  49. 2:20युगों तक हो जब तक आकाश अनंत रहे धर्म
  50. 2:25युक्त माहौल बने हर मन के भीतर संत
  51. 2:30और हमारी शक्ति से परिचित ये दिग दिगंत
  52. 2:34रहे प्रगति पथ पर प्यारा भारत हो प्रलय
  53. 2:38काल पर्यंत
  54. 2:41रहे तो उन्नत विकास शक्ति
  55. 2:45संचय रफ्तार दो गुना बढ़ जाए कुछ
  56. 2:49जिम्मेदारियां भी है हमारी के उन्नत विकास
  57. 2:53शक्ति संचय रफ्तार दो गुना बढ़
  58. 2:57जाए सकल विश्व में भारत का सत्कार 100
  59. 3:01गुना बढ़ जाए युवा हमारे आज यहां शेखर
  60. 3:05सुभाष के जैसे हो ऊंचा हो मस्तक माता का
  61. 3:09सत्कर्म हमारे ऐसे हो सिंघ के जैसा कर
  62. 3:13गर्जन हर कदम कदम दमदार चले संपूर्ण विश्व
  63. 3:17में अब फिर से भारत का ही अधिकार चले यह
  64. 3:22एक बार की बात नहीं अब तो यह बारंबार चले
  65. 3:27भारत माता के बेटों के पीछ ही संसार
  66. 3:33चले बहुत-बहुत आभार प्रणाम करता हूं आपको
  67. 3:37इसी क्रम में अगला बंद निवेदित करता हूं
  68. 3:39हिंदी दिवस के उपलक्ष में हम यहां पर हैं
  69. 3:42उसी पर एक एक विशेष बंद आपके कार्यक्रम की
  70. 3:45शीर्षक की सार्थकता पर रखना चाहता हूं कि
  71. 3:48हे सखे समय है उचित यही लग जाए विराम
  72. 3:54विवादों पर क्या सार है हम सबका हम सबकी
  73. 3:58कविताओं का के हे समय है उचित यही लग जाए
  74. 4:02विराम विवादों पर ऊंचे से ऊंचा महल सदा
  75. 4:06टिकता सुद्र बुन यादों पर हम करें तरक्की
  76. 4:10कितनी भी उठकर चाहे अंबर छूले लेकिन इतना
  77. 4:15भर याद रहे कि अपनी जड़ को भी ना भूले इस
  78. 4:19अंधी आधुनिकता की दौड़ में हमें हमेशा
  79. 4:23ध्यान रहे हो देश धर्म का पालन भी निज
  80. 4:27भाषा का सम्मान रहे हां भले हमारे कदमों
  81. 4:32के नीचे संपूर्ण जहान रहे लेकिन मन मंदिर
  82. 4:37में केवल हिंदी
  83. 4:39हिंदुस्तान वाह वाह
  84. 4:42वाह बहुत बहुत आभार आइए समय की अपनी
  85. 4:46सीमाएं हैं मुझे लगता है कि जिस विशेष
  86. 4:48कविता को सुनाने के लिए मैं माहौल बनाना
  87. 4:50चाह रहा था वह बन गया एक विशेष रचना रखना
  88. 4:53चाहता हूं मन तो कुछ और बनाकर सुनाने के
  89. 4:55लिए आया था लेकिन जब कार्यक्रम में सभी
  90. 4:58युवाओं की उपस्थित है मेरा एक मन है कि
  91. 5:01युवाओं के पक्ष में कविता को कहा जाए
  92. 5:03अक्सर आपने मंचों से युवाओं के विरोध में
  93. 5:06नकारात्मक बहुत सारी बातों को सुना होगा
  94. 5:09लेकिन हिंदी कवि सम्मेलन मंचों के और आपके
  95. 5:11आंगन के सबसे छोटे बेटे ने एक प्रयास किया
  96. 5:14कि युवाओं को लेकर कुछ सकारात्मक भी मंच
  97. 5:16से कहा जाए मैं सीधे-सीधे कविता को
  98. 5:18प्रारंभ करना चाहता हूं कि झंडा भारत का
  99. 5:21दुनिया में आपका बहुत स्नेह मिला लेकिन बस
  100. 5:24निवेदन है कि अगले बस दो से तीन मिनट पीछे
  101. 5:26तक के लोग एक बार पूरी ऊर्जा से जुड़ जाए
  102. 5:29मैं आपके मन की बात कर रहा हूं आपके हित
  103. 5:31की बात कर रहा हूं कि झंडा भारत का दुनिया
  104. 5:35में हमसे ही नित्य प्रबल होगा अगली पंक्ति
  105. 5:40कौन है हम और आप के झंडा भारत का दुनिया
  106. 5:45में हमसे ही नित्य प्रबल
  107. 5:49होगा हमसे ही श्रीमन आज हुआ है हमसे ही तो
  108. 5:53कल
  109. 5:56होगा अभी इतना समर्थन है अगले अंतिम पूरा
  110. 6:00सदन साथ आएगा इस विश्वास के साथ पढ़ रहा
  111. 6:02हूं कि झंडा भारत का दुनिया में हमसे ही
  112. 6:05नित्य प्रबल होगा हमसे ही श्रीमन आज हुआ
  113. 6:08है हमसे ही तो कल होगा एक बात ही कहता हूं
  114. 6:12जलते तपते सै राहों की हमसे ही शोभा बढ़ती
  115. 6:15है भारत की इन सीमाओं की ऊंचे हिम खंडों
  116. 6:19से लेकर गहरी गहरी सी नदियों तक हमको ना
  117. 6:23भुला पाएंगी यह सदिया भी सदियों सदियों तक
  118. 6:27हम मजबूत नीव के पत्थर है प्रगति की यच
  119. 6:31इमारत के अब आप गर्व से कह सकते हैं कि हम
  120. 6:36युवान है भारत
  121. 6:40के और अभी हम अलीगढ़ ज्ञान महाविद्यालय के
  122. 6:45कार्यक्रम में उपस्थित हैं लेकिन यदि इस
  123. 6:47बंद की अंतिम पंक्ति पर बिना पासपोर्ट और
  124. 6:50बिना वीजा के आपको इंग्लैंड पहुंचा दूं तो
  125. 6:52आपका समर्थन मिले और पीछे तक की तालियां
  126. 6:54यदि एक साथ आ गई तो मैं समझूंगा कि सभी
  127. 6:57इंग्लैंड पहुंच गए कि कभी कानंद बने
  128. 7:00दुनिया को पाठ पढ़ाया था जीवन जीने का
  129. 7:04दर्शन कवि दिनकर बन सिखलाया था यदि गए फौज
  130. 7:07में तो जाकर शत्रु का पलपल काल बने संगीत
  131. 7:11जगत में हम ही नेहा कक्कड़ के सुरताल बने
  132. 7:14भारत को सुद्र करने की हम पर चढ़ गई
  133. 7:17खुमारी है यूपीएससी आईआईटी हर जगह पर गूज
  134. 7:22हमारी है साहित्य जगत में वन कुमार जन
  135. 7:25मानस के विश्वास बने मैदानों में सूर्य
  136. 7:28कुमार ीख दिव्य प्रकाश बने हम जिस स्थान
  137. 7:32पर जाते हैं उसके जनक बन जाते हैं राजनीति
  138. 7:37में आ जाए तो ऋषि सुनक बन जाते
  139. 7:41हैं और बहुत-बहुत धन्यवाद मैं अंतिम बंद
  140. 7:45आप सभी के बीच में निवेदित करता हूं बहुत
  141. 7:47स्नेह मिला आप सभी का लेकिन अंतिम बंद को
  142. 7:50पढ़ने से पहले केवल आपसे एक छोटा सा
  143. 7:52निवेदन करना चाहता हूं मेरे हिस्से की जो
  144. 7:54तालियां थी उसी दोगनी आपने मुझे दे दी
  145. 7:57उसके लिए आपका आभार लेकिन अब बंद की अंतिम
  146. 8:00पंक्ति पर जिस व्यक्ति का नाम आए जिस युवा
  147. 8:03का नाम आए जिस अमर बलिदानी का नाम आए जिस
  148. 8:05युवा क्रांतिकारी का नाम आए उस व्यक्ति के
  149. 8:08प्रति उस अमर बलिदानी के प्रति उस
  150. 8:10क्रांतिकारी के प्रति यदि आपके अंदर
  151. 8:12सम्मान का भाव हो तो फिर अंत पंक्ति पर
  152. 8:15भारत माता की जयघोष के साथ हिंदी कवि
  153. 8:17सम्मेलन मंचों के और अपने आंगन के सबसे
  154. 8:20छोटे बेटे को विदा कीजिएगा यदि आपके अंदर
  155. 8:22सम्मान का भाव हो जिस व्यक्ति का अंतिम
  156. 8:24पंक्ति पर नाम आए मैं सीधे-सीधे पंक्तियां
  157. 8:26निवेदित करता हूं कि आरोप लगाए हम पर भी
  158. 8:30यह नौजवान नाकारा हैं के आरोप लगाए हम पर
  159. 8:33भी यह नौजवान नाकारा है आपस में लड़ते
  160. 8:36रहते अनपढ गवारा आवारा है यह कभी नहीं हो
  161. 8:39पाएंगे वैज्ञानिक दृष्टि से विकसित लेकिन
  162. 8:42मैं आज बता दूंगा उन स्वयम घोषित
  163. 8:44विद्वानों को बुद्धि और सामर्थ्य नापने
  164. 8:47वाले सब पैमानों को हां यह सौभाग्य हमारा
  165. 8:51है आजाद देश में जन्म लिया जितना शेखर
  166. 8:56शुभास झेले उतना संघर्ष भी नहीं नहीं किया
  167. 9:00लेकिन कोई कायर ना समझे हम हर जवाब तन करर
  168. 9:05देंगे यदि वतन मांगेगा कुर्बानी तो भगत
  169. 9:09सिंह बन कर देंगे एक बार पूरा सतन दोनों
  170. 9:13हाथ आकाश की ओर उठाकर भारत माता की जय
  171. 9:17भारत माता की जय
  172. 9:20वंदे वंदे बहुत बहुत
  173. 9:24[प्रशंसा]

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