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India's Greatest Love Story | Main Tenu Phir Milangi - A Storytelling Special — Transcript

by Laksh maheshwari · 10,697 words · 1,416 segments · language hi · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:04हम सबकी जिंदगी में कुछ ऐसे नाम हैं जिन
  2. 0:07लोगों से हम मिलना चाहते हैं मरने से पहले
  3. 0:09कम से कम एक बार मेरी उस लिस्ट में सबसे
  4. 0:13ऊपर थे वो
  5. 0:16मगर यह हो ना सका
  6. 0:43मेरा नाम लक्ष्मी माहेश्वरी है। आप में से
  7. 0:45शायद कुछ लोग मुझे जानते हैं। बिकॉज़ एवरी
  8. 0:47शो हैज़ दिस कैटेगरी ऑफ़ पीपल हुम आई कॉल द
  9. 0:50टैग अलोंग्स। जिन्हें कुछ खास पता नहीं है
  10. 0:53मेरे बारे में। जिन्हें पकड़ कर खींच कर
  11. 0:55लाया जाता है। चलो तुम्हें कुछ दिखाते
  12. 0:56हैं। हां, वो कौन-कौन है जिन्हें कोई
  13. 0:59आईडिया नहीं है। रेज़ योर हैंड्स फॉर मी।
  14. 1:01शेम ऑन यू।
  15. 1:05जो नहीं जानते उनके लिए ऐसे शुरू करते
  16. 1:07हैं। मेरा नाम लक्ष माहेश्वरी है। मैं
  17. 1:09पेशे से कहानियां सुनाता हूं। कहानियां
  18. 1:11सुनना अच्छा लगता है।
  19. 1:14अगले एक सवा घंटे की इस कहानी में मैं
  20. 1:16आपसे कई सवाल पूछूंगा। जब भी कोई सवाल
  21. 1:18पूछूं तो आपको जवाब में कहना है हां।
  22. 1:22सिंपल है। बस उस हां का एक सुर है दैट यू
  23. 1:24गॉट टू मेंटेन। दैट गोस लाइक हां।
  24. 1:28तुम तो अच्छे हो यार।
  25. 1:30कहानियां सुनोगे?
  26. 1:32हां।
  27. 1:33जो कहानी आज आप सुनने आए हैं उसका नाम।
  28. 1:38देखो ये पता होना चाहिए
  29. 1:41जो खींच कर भी लाया है उसके साथ ऐसे मत आ
  30. 1:44जाओ।
  31. 1:46जरा पूछो कहां जा रहे हो?
  32. 1:50ये ऐसे आ गए हैं। कुछ बेहद खूबसूरत लोगों
  33. 1:53की कहानी है। पहला पूछता हूं। कितने लोग
  34. 1:55साहिर लुधियानवी साहब का नाम सुन चुके हैं
  35. 1:58आज से पहले।
  36. 1:59साहिर लुधियानवी इज़ वन ऑफ़ द फाइनेस्ट
  37. 2:02लिरिस्ट दिस कंट्री हैज़ एवर सीन। उन्होंने
  38. 2:04अपनी जिंदगी में 400 से ज्यादा गाने लिखे
  39. 2:06हैं। उनका नाम आप ना जानते हो। एक तो ये
  40. 2:09नाम ही साहिर शब्द का मतलब पता है आपको
  41. 2:10क्या होता है? साहिर का मतलब है जादूगर।
  42. 2:14शब्दों का जादूगर। अपने शब्दों से जो जादू
  43. 2:16किया करता था। लोगों के दिलो दिमाग पर छा
  44. 2:18जाया करता था। एक तिलिस्म की तरह है। उनका
  45. 2:21नाम आपने ना सुना हो लेकिन उनके लिखे गाने
  46. 2:24हम सबने सुने। एक दो गाने तुम गाओगे?
  47. 2:28मैं पल दो पल का शायर हूं। पल दो पल मेरी
  48. 2:35कहानी है। पल दो पल मेरी मस्ती है। पल दो
  49. 2:42पल मेरी जवानी है।
  50. 2:45मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया। मैं
  51. 2:51फिक्र को धुए में उड़ाता चला गया।
  52. 2:55एनी स्मोक इन द हाउस मेक सम नॉइज़ फॉर मी?
  53. 2:58छी
  54. 3:02के उड़े जब जब
  55. 3:05हाय
  56. 3:07जब
  57. 3:10दिलचियों
  58. 3:13का दिल
  59. 3:16कभी कभी
  60. 3:19मेरे दिल में ख्याल आता
  61. 3:24है
  62. 3:25अभी
  63. 3:33और एक गाना आपके लिए मैम इनकी तरफ से हां
  64. 3:37ए मेरी ज़हर ज
  65. 3:40तुझे मालूम नहीं तू अभी तक हंसी और जवाना
  66. 3:47तुझे कुर्बान मेरी जान मेरी जान
  67. 3:51शो कैंसिल
  68. 3:54एक घंटे सिर्फ गाने गाएंगे वन
  69. 3:56बैंड बनाएंगे 250 लोगों का। शादी का सीजन
  70. 4:00आ भी रहा है। यहां शादी पार्टी के आर्डर
  71. 4:02लिए जाते हैं। क्लप फॉर गाइस आर वंडरफुल
  72. 4:05वन।
  73. 4:10ये सारे गाने लिखने वाले।
  74. 4:13हां ये गेस करने के पैसे नहीं मिलेंगे।
  75. 4:16देखिए मेरा मानना है कि किसी भी शख्स की
  76. 4:18अगर आप कहानी जानना चाहते हैं तो सबसे
  77. 4:20पहले आपको उसकी परवरिश जानना जरूरी होता
  78. 4:22है। पहले 10-15 साल में आपके साथ जो जो हो
  79. 4:25जाता है ना वो कहीं ना कहीं ये तय कर देता
  80. 4:27है कि आप कैसे इंसान बनने वाले हैं।
  81. 4:2910-15% गुंजाइश बचती है बस बदलाव की। बाकी
  82. 4:31सब कुछ एंबेड हो चुका होता है। तो जरा
  83. 4:34कहानी की शुरुआत कर ही रहे हैं तो साहिर
  84. 4:36साहब के बचपन से करते हैं। करें
  85. 4:40शाबाश। साहिर साहब पैदा हुए 1921 में
  86. 4:44पंजाब के एक शहर में। कोई शहर का नाम गेस
  87. 4:46कर सकता है?
  88. 4:47लुधियाना।
  89. 4:49साहिल लुधियानावी पैदा हुए लुधियाना में
  90. 4:521921 में। बचपन में ही उनके मां और पिता
  91. 4:55अलग-अलग हो गए और उनकी मां उनको लेकर
  92. 4:58लाहौर आकर बस गई। तब सब
  93. 5:01अपना ही था।
  94. 5:04लेकिन ऐसा कहते हैं जब बचपन में ऐसा कोई
  95. 5:06घाव आप पर लग जाता है ना तो आपके अंदर के
  96. 5:08कलाकार को अपने आप हवा मिल जाया करती है।
  97. 5:10साहिर साहब के साथ भी वही हुआ। उन्होंने
  98. 5:12अपने आप को शब्दों में इतना डुबो दिया कि
  99. 5:14मात्र 24 साल की छोटी सी उम्र में उनकी
  100. 5:17पहली किताब रिलीज हो चुकी थी। पूरे देश
  101. 5:20में डंका बज चुका था कि एक नया शायर आया
  102. 5:22है साहिल लुधियानवी नाम का। किताब का नाम
  103. 5:25था तल्खियां।
  104. 5:27सब कुछ अच्छा चल ही रहा था कि फूट गया एक
  105. 5:29जोर का बम। कौन सा बम?
  106. 5:3347 का बम। उसके चितड़े ऐसे उड़े कि साहिर
  107. 5:36साहब को रिफ्यूजी की तरह अपनी मां के साथ
  108. 5:38आकर दिल्ली बसना पड़ा। दिल्ली की उस भागा
  109. 5:41दौड़ी में एक महीना रहे सिर्फ एक महीना और
  110. 5:43अपने दोस्तों को यह कहकर बंबई चले गए कि
  111. 5:46मुंबई को मेरी जरूरत है। जब वो मुंबई आए
  112. 5:50तो जिस घर में वो रहने लगे उसी बिल्डिंग
  113. 5:52में उनके घर के नीचे वाले फ्लैट में थोड़े
  114. 5:54समय बाद एक शख्स शिफ्ट हुए थे। आप में से
  115. 5:57शायद कुछ लोग उन्हें जानते हैं। हाउ मेनी
  116. 5:59ऑफ यू नो संपूर्ण सिंह कालरा रे योर
  117. 6:02हैंड्स? बस नाम है सिर्फ हाथ खड़े करने का
  118. 6:06कहा है? अच्छा कितने लोग संपूर्ण सिंह
  119. 6:08कालरा को बिल्कुल नहीं जानते हाथ खड़े करो
  120. 6:12कितनी जरूरत है तुम्हें मेरी पता है
  121. 6:16आप इस शख्स को इस नाम से ना जानते हो
  122. 6:19लेकिन जिस नाम से लिखते हैं इनका पेन नेम
  123. 6:22हम सब इन्हें जानते हैं और वो है
  124. 6:25गुलजार हाउ मेनी ऑफ यू राइट? आप में से
  125. 6:27कितने लोग लिखते हैं खुद के लिए ही सही।
  126. 6:30आपको लोगों को बहुत बढ़िया लगेगी ये बात।
  127. 6:32गुलजार साहब के लिए किसी ने इतना खूबसूरत
  128. 6:34कहा था कि मुश्किल भाषा में अच्छा लिखना
  129. 6:37एक आसान सा काम है। ध्यान से सुनना इस बात
  130. 6:40को। मुश्किल भाषा में अच्छा लिखना एक आसान
  131. 6:42काम है। मगर आसान भाषा में अच्छा लिखना
  132. 6:46बहुत मुश्किल है।
  133. 6:51और इस बात के महारथी हैं गुलजार साहब।
  134. 6:53एक-एक लाइनों में इतना कुछ कह जाते हैं।
  135. 6:55अब एक लाइन इनकी पढ़ी मैंने। कह रहे हैं
  136. 6:57मुस्कुराते बहुत हो तुम। जरा खुश भी रहा
  137. 6:59करो।
  138. 7:01क्या बात है।
  139. 7:07कह रहे हैं पिछली दफा जब तुम मेरे घर आई
  140. 7:09थी तुमने मेरे सिगरेट की डिबिया पर पौधे
  141. 7:12का एक स्केच बनाया था। आकर देखो उसमें फूल
  142. 7:14खिलाए।
  143. 7:18कह रहे हैं अगर आंसुओं की कीमत होती। अगर
  144. 7:21आंसुओं की कीमत होती तो कल रात वाला तकिया
  145. 7:24अरबों का होता।
  146. 7:31कुलदार साहब पे पूरा दो घंटे का शो करता
  147. 7:33हूं। मैन नॉट टुडे। आज हम उनके पड़ोसी पर
  148. 7:36हैं। साहिर साहब पर है। जो साहिर साहब को
  149. 7:39करीब से जानते हैं वो बताते हैं कि उन्हें
  150. 7:41जिंदगी में ना दो चीजों से सख्त नफरत थी।
  151. 7:44एक तन्हाई उन्हें अकेला रहना बिल्कुल पसंद
  152. 7:47नहीं था। हमेशा किसी ना किसी का साथ चाहते
  153. 7:49थे। और एक किताब में मैंने पढ़ा उन्हें
  154. 7:51खुद की शक्ल बिल्कुल पसंद नहीं थी। उनके
  155. 7:53घर में कोई आईना भी नहीं था। ऐसा शख्स
  156. 7:55अपने आप को शब्दों में ही डुबोएगा और क्या
  157. 7:57करेगा? सोच कर देखो उनकी जो पहली किताब
  158. 7:59तल्लखियां तल्खियां का मतलब ही होता है
  159. 8:01बिटरनेस। वो बिटरनेस उनके अंदर आ चुकी थी
  160. 8:04कड़वाहट। अब ऐसा ही शख्स है जो लिख सकता
  161. 8:07है कि कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया।
  162. 8:09बात निकली तो हर बात पे रोना आया। किसी और
  163. 8:13की खातिर यहां पे कौन ही रोता है दोस्त?
  164. 8:15सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया।
  165. 8:19पल दो पल।
  166. 8:21बेटा नहीं बजाना। कॉपीराइट?
  167. 8:24तो आज वो गाने कौन गाएगा? मैं पल दो पल का
  168. 8:29शायर हूं। पल दो पल मेरी कहानी है। पल दो
  169. 8:36पल मेरी हस्ती है। पल दो पल मेरी जवानी
  170. 8:42है।
  171. 8:43ये था सिक्के का एक पहलू। अब कहानी है
  172. 8:46प्रेम कहानी है तो दूसरी भी तो कोई होंगी
  173. 8:48ना। सिक्के के दूसरे पहलू की तरफ चलते
  174. 8:50हैं। उस शख्सियत की तरफ चलते हैं। मेरे
  175. 8:53हिसाब से मेरा सच में मानना है कि वो शख्स
  176. 8:55अभागा है जिसने नाम आज तक कभी ना सुना हो
  177. 8:57और वो नाम है
  178. 8:59अमृता प्रीतम।
  179. 9:01अमृता प्रीतम। पंजाबी भाषा की पहली
  180. 9:04पोएटिस्ट कहा जाता है अमृता जी को। थोड़ी
  181. 9:06परवरिश इनकी भी जान लीजिए। पैदा हुई 1919
  182. 9:09में पंजाब के गुजरावाला में। अमृता पैदा
  183. 9:11अमृत हुई थी। उनका नाम अमृत कौर था। अमृता
  184. 9:15बाद में पड़ा है। बचपन से ही इस प्यारी सी
  185. 9:17बिटिया को अपने लिखे भजन गाने का
  186. 9:19गुरुद्वारे में जाकर खुद अपने लिखे भजन
  187. 9:22गाने का बड़ा शौक था। और लोगों को देखकर
  188. 9:24इतना अच्छा लगता था कि इतनी प्यारी सी
  189. 9:25बिटिया आती है और खुद के लिखे भजन गाती
  190. 9:27है। लेकिन बचपन में उनके एक मौसी ने उनसे
  191. 9:30कह दिया कि ऊपर वाला छोटे बच्चों की
  192. 9:33प्रार्थना है। बड़ी जल्दी सुन लिया करता
  193. 9:35है। तो जब एक दफा उनकी मां बीमार हुई।
  194. 9:39इतनी बीमार हुई कि डॉक्टर्स ने हाथ खड़े
  195. 9:41कर दिए तो अमृता गुरुद्वारे जाकर बैठ गई
  196. 9:44कि अब जब तक मेरी मां को ठीक नहीं कर दोगे
  197. 9:47ना मैं यहां से उठूंगी भी नहीं मां तो
  198. 9:50नहीं बची भगवान को कुछ और मंसूर था लेकिन
  199. 9:53अमृता का भगवान पर से विश्वास उसी दिन से
  200. 9:56हमेशा हमेशा के लिए उठ गया अपने पिता को
  201. 9:58साफ मना कर दिया कि आइंदा ना मैं कभी
  202. 10:00गुरुद्वारे जाऊंगी और ना ही कोई भजन
  203. 10:03लिखूंगी। कुछ समय बाद पिताजी भी चल नहीं
  204. 10:07बसे। चल दिए जिसे हम सन्यास कहते हैं। एक
  205. 10:10दफा उठे और जंगलों की तरफ निकल गए। फिर
  206. 10:13कभी किसी को दिखे ही नहीं। उसी रात उसी
  207. 10:16रात अमृता प्रीतम ने दो लाइनें लिखी थी।
  208. 10:18उन्होंने लिखा कि मेरी जिंदगी एक रात थी।
  209. 10:21मैं जागती रही। किस्मत को नींद आ गई। बहुत
  210. 10:26अकेले हो गए। मात्र 16 साल की छोटी सी
  211. 10:30उम्र में उनकी शादी करा दी गई प्रीतम सिंह
  212. 10:32से और वो बन गए अमृता प्रीतम। मगर फिर
  213. 10:37फूटा बम वही वाला बम। देखो यार ऑल ऑफ अस
  214. 10:42सिंग हियर राइट नाउ आर टू यंग टू
  215. 10:44अंडरस्टैंड कि 47 कितना खराब समय था।
  216. 10:47अमृता जी, साहिर साहब, गुलजार साहब सब उधर
  217. 10:49से इधर आए थे। इनकी राइटिंग में आपको वो
  218. 10:51दर्द देखने को मिलता है। गुलजार साहब की
  219. 10:54किताबों में मैंने पढ़ा। वो लिखते हैं कि
  220. 10:56मैंने उन दिनों रोडों पर लाशें कटती देखी
  221. 10:58हैं। उनका खून बहते सूख जाते हुए देखा है।
  222. 11:02और कई महीनों बाद लोगों को आकर वो खून
  223. 11:05कुरेत कुरेद कर निकालते हुए भी देखा है।
  224. 11:07जब इतना कुछ आप देख लो तो हमेशा के लिए
  225. 11:09ज़हन में घर नहीं कर जाएगा। बुरे सपने
  226. 11:11आएंगे जिंदगी भर के लिए। लाइट मैस आएंगे।
  227. 11:14उस समय सिख औरतों पर इतना अत्याचार हो रहा
  228. 11:16था कि अमृता प्रीतम ने सिख औरतों के लिए
  229. 11:18कविता लिखी थी कि अखा आज वारिस शाह नू।
  230. 11:22वारिस शाह का नाम सुना है आप लोगों ने?
  231. 11:24बारिश शाह एक पंजाबी पोएट थे जिन्होंने
  232. 11:26हीर रंझा की कहानी लिखी थी हीर के पॉइंट
  233. 11:29ऑफ व्यू से कि कैसे समाज एक औरत का नजरिया
  234. 11:32नजरअंदाज ही कर दिया करता है। तो जब सिख
  235. 11:34औरतों पर अत्याचार हो रहा था तो अमृता ने
  236. 11:36वारिस शाह से गुहार की अपनी कविता में है
  237. 11:38खड़ी पंजाबी में अगर कहो तो चारछह लाइन
  238. 11:42हिंदी में सुना दूंगा।
  239. 11:45अब इतना कह ही रहे हो तो ठीक है।
  240. 11:49अमृता लिखती है कि आज कहती हूं वारिस शाह
  241. 11:51से कि अपनी कब्र में से बोलो और इश्क की
  242. 11:55उस किताब का एक नया पन्ना खोलो। जब पंजाब
  243. 11:59की एक बेटी रोई थी। तुमने इतनी लंबी
  244. 12:02दास्तान लिख दी। आज पंजाब की लाखों
  245. 12:04बेटियां रो रही हैं। सब तुमसे कह रही हैं
  246. 12:06कि दर्दों के दोस्त पंजाब की ये हालत
  247. 12:09देखो। चौपाले लाशों से अटा पड़ा है। चेनाब
  248. 12:12लहू से भरा पड़ा है। और किसी ने पांचों
  249. 12:14दरियाओं में जहर घोल दिया है। और अब यही
  250. 12:17जहरीला पानी आने वाली नस्लों को सींच रहा
  251. 12:20है। आज कहती हूं वारिस शाह से कि अपनी
  252. 12:23कब्र में से फोड़ लो। कहते हैं उस जमाने
  253. 12:26में ये कविता हर दूसरे शख्स की जेब में
  254. 12:28मिल जाया करती थी। दोनों वहां हिंदुस्तान
  255. 12:30और पाकिस्तान दोनों का बहुत सारा प्यार और
  256. 12:33बहुत सारी नफरत दोनों अमृता को मिली। उनसे
  257. 12:36पूछो तो वह कहती थी कि जो लोग मुझसे नफरत
  258. 12:39करते हैं ना वह मुझसे आज तक कभी मिले ही
  259. 12:42नहीं। बहुत बेबाक थी अपनी बातों में
  260. 12:44अमृता। उनके नाम से प्रीतम तो कभी नहीं
  261. 12:47गया मगर उनका प्रीतम सिंह से साथ 1960 में
  262. 12:51छूट गया। अब जो मैं बात आपको बताने जा रहा
  263. 12:53हूं ना ये सुनकर आपके अंदर की पेट्रियरकी
  264. 12:55जाग सकती है। तो सुलाए रखना।
  265. 13:00क्योंकि हम सिर्फ सुना रहे हैं। ये सब हो
  266. 13:02पहले चुका है। जब अमृता ने अपने पति को
  267. 13:05छोड़ा तब उनके दो बच्चे हो चुके थे। उसके
  268. 13:09बावजूद उन्हें लगता था कि उनकी जिंदगी
  269. 13:11उनसे कुछ और चाहती है। वो सिर्फ यह करने
  270. 13:13के लिए पैदा नहीं हुई है। और वो एक समय
  271. 13:16उठी और अपने रास्ते अकेले चल रही। लाइक द
  272. 13:19फर्स्ट इंडिपेंडेंट वुमेन। यह काम आज की
  273. 13:22महिला के लिए भी करना बहुत मुश्किल है। आप
  274. 13:25जानते हैं मैं क्या कह रहा हूं। ये 1960
  275. 13:2765 में कर चुकी थी वो। लोग क्या कहेंगे,
  276. 13:29कितनी बातें बनाई जाएंगी, कितनी निंदा
  277. 13:31होगी, इन बातों की परवाह किए बिना चल दी
  278. 13:33वो क्योंकि उनके ज़हन में ना एक आवाज पड़
  279. 13:37चुकी थी। प्रीत नगर के एक मुशायरे में
  280. 13:40उन्होंने शेर पढ़ते हुए सुन लिया था।
  281. 13:41किसे?
  282. 13:44भाई जैसे ही उनकी आवाज अंदर पड़ी, तो
  283. 13:46अमृता कहती है, "मुझे ऐसा लगा जैसे, जैसे
  284. 13:48शक से मेरा पिछले जन्म का कोई नाता है।"
  285. 13:52यह उसके लफ्जों का जादू था या उसकी खामोश
  286. 13:54नजरों का, मेरे ऊपर एक तिलिस्म सा हावी हो
  287. 13:56गया। जादू सा और कुछ तो नहीं जानती लेकिन
  288. 14:00इतना कह सकती हूं कि उस रात मेरे मन की
  289. 14:02मिट्टी में किसी ने इश्क का बीज बो दिया
  290. 14:05था।
  291. 14:09बेपनाह मोहब्बत हो गई उन्हें। धीरे-धीरे
  292. 14:12साहिर भी उनसे प्यार करने लगे थे। अमृता
  293. 14:14अपनी किताब में बताती है कि उन दिनों
  294. 14:16अक्सर साहिर मेरे घर आया करते थे और आकर
  295. 14:19चुपचाप एक कुर्सी पर बैठ जाते थे। कुछ
  296. 14:23नहीं कहते थे वो बस चुपचाप बैठे रहते।
  297. 14:26मुझे ऐसा लगता जैसे मेरी ही खामोशी में से
  298. 14:28निकला एक टुकड़ा सामने आकर बैठ गया है।
  299. 14:35जैसे मेरी ही खामोशी में से निकला एक
  300. 14:37टुकड़ा सामने आकर बैठ गया है। कुछ नहीं
  301. 14:39कहता था वो। बस घंटों में न जाने कितनी
  302. 14:44सिगरेट पे सिगरेट पिया करता।
  303. 14:47फिर आधी सिगरेट रागधानी में बुझाता और
  304. 14:49चुपचाप उठकर वहां से चला जाता। सोच कर
  305. 14:52देखो दो प्यार करने वाले एक कमरे में बैठे
  306. 14:54हैं। किसी ने एक शब्द तक नहीं कहा। एक
  307. 14:56वर्ड भी नहीं आया। लेकिन उसके बाद भी कोई
  308. 14:59डिसकंफर्ट नहीं है। सुकून है, शांति है।
  309. 15:03वो कहती है वो उठकर तो चला जाता था। मैं
  310. 15:05उसे रोकना चाहती थी। उसका हाथ पकड़ना
  311. 15:07चाहती थी। कितना कुछ कहना चाहती थी लेकिन
  312. 15:10संस्कारों ने वो दूरियां कभी तय ही नहीं
  313. 15:12होने दी। लेकिन हां उसके जाने के बाद वो
  314. 15:15जो सिगरेट के टुकड़े छोड़कर जाया करता था
  315. 15:17मैं वो संभाल कर रख लिया करती थी। अलमारी
  316. 15:20में छुपा देती थी मैं। अकेले में एकांत
  317. 15:22में जब आसपास और कोई नहीं होता था तब उन
  318. 15:26सिगरेट के टुकड़ों को अपनी उंगलियों के
  319. 15:28बीच लेती। ऐसा लगता है जैसे साहिर की
  320. 15:31उंगलियां मुझे छू रही हैं। उन टुकड़ों को
  321. 15:33जलाती थी तो उसके धुएं में मुझे साहिर का
  322. 15:36चेहरा दिखाई दिया करता था। इनफैक्ट अमृता
  323. 15:38प्रीतम ने साहिर साहब की सिगरेट के ऊपर न
  324. 15:40जाने कितनी कविताएं लिख दी। चार लाइन
  325. 15:43सुनोगे।
  326. 15:45अमृता लिख रही है साहिर की सिगरेट के ऊपर।
  327. 15:47कहती हुई कि ये आग की बात है। किसकी?
  328. 15:51ये आग की बात है जो तूने मुझे सुनाई थी।
  329. 15:54ये जिंदगी की वो सिगरेट है जो तूने कभी
  330. 15:57सुलगाई थी। जिंदगी का अब गम नहीं बस इस आग
  331. 16:01को संभाल ले और मैं तेरे हाथ की खैर
  332. 16:03मांगती हूं। तू एक सिगरेट और जला ले।
  333. 16:10साहिर वो सिगरेट जलाते चले गए। हर फिक्र
  334. 16:13को धुएं में
  335. 16:15उड़ाए।
  336. 16:16मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया। हर
  337. 16:22जिक्र को धुए में उड़ाता चला गया।
  338. 16:27टंग टंग टंगियों
  339. 16:31का जश्न मनाता चला गया।
  340. 16:35हर फिक्र को धुएं में उड़ा।
  341. 16:39सबको दिख गया नाचते हुए। क्लप फॉर देवानंद
  342. 16:43साहब। वाह
  343. 16:47बस अब इन दोनों का प्रेम धीरे-धीरे परवान
  344. 16:51चढ़ने लगा था। अमृता दिल्ली में रहती थी
  345. 16:53और साहिर मुंबई आ चुके थे। जब कभी अमृता
  346. 16:56साहिर के शहर आती तो साहिर एक बड़ी सी
  347. 16:58दावत देते। अपने सारे दोस्तों को बुलाते
  348. 17:00और सबको मिलवाते कि ये
  349. 17:06अमृता है। जब कोई ऐसे रिकग्निशन दे दे दिल
  350. 17:09को कितना अच्छा लगता है ना। उस समय साहिर
  351. 17:11साहब ने एक कविता लिखी जिसका नाम था
  352. 17:14ताजमहल। लोग कहते हैं वो पूरी कविता अमृता
  353. 17:16जी को ध्यान में रख के लिखी गई थी।
  354. 17:18इनफैक्ट साहिर साहब ने एक बड़ी सी फ्रेम
  355. 17:20में वो कविता डलवाकर अमृता को भेंट भी की।
  356. 17:23मरते दम तक अमृता जी की दीवार पर वो कविता
  357. 17:26लटकी हुई थी। ताजमहल पढ़ी है किसी ने?
  358. 17:30सुनोगे?
  359. 17:33शाहिर साहब लिख रहे हैं कि अनगिनत लोगों
  360. 17:34ने इस दुनिया में मोहब्बत की है। बात सही
  361. 17:37है। हम सभी ने तो की है। इंपॉर्टेंट सवाल
  362. 17:40है। एक सेकंड अगर आपको वाकई जिंदगी में
  363. 17:43कभी ना कभी किसी ना किसी से सच्ची मोहब्बत
  364. 17:45हुई है तो हाथ खड़े करो। अच्छा कपल में आए
  365. 17:49हो तो कर लो।
  366. 17:52बाद में बहुत दिक्कत हो जाती है। मैंने एक
  367. 17:55शो में पूछा राइट साइड में एक हस्बैंड
  368. 17:57वाइफ बैठे थे। वाइफ ने हाथ खड़ा किया।
  369. 17:59स्पिंडल नहीं किया।
  370. 18:02ऐसी उड़ती हुई कोहनी देखी है मैंने।
  371. 18:06जाहिर कह रहे हैं अनगिनत लोगों ने इस
  372. 18:08दुनिया में मोहब्बत की है। कौन कहता है कि
  373. 18:10सादिक ना थे जज्बे उनके लेकिन उनकी
  374. 18:13मोहब्बत के लिए ना कोई ताश हीर का सम्मान
  375. 18:16क्योंकि वो भी मेरी तरह मुफलिस थे। ऊपर से
  376. 18:19गया ना?
  377. 18:20समझा? साहिर कह रहे हैं देखो मोहब्बत हर
  378. 18:23कोई करता है। लेकिन हर किसी की मोहब्बत को
  379. 18:26शाहजहां जितना रुतबा तो नहीं मिलता। पता
  380. 18:29है क्यों? क्योंकि गरीब हो तुम। मैं नहीं
  381. 18:32कह रहा।
  382. 18:34साहिर कह गए। खैर शाहजहां के कंपैरिजन में
  383. 18:38तो हम सब गरीब ही है ना यार। फिर वो पलटते
  384. 18:40हैं ताजमहल की तरफ और देखकर कहते हैं ये
  385. 18:42चमनजार, ये जमुना का किनारा, ये महल, ये
  386. 18:45दरो दीवार, ये ताक, एक शहंशाह ने दौलत का
  387. 18:49सहारा लेकर, हम गरीबों की मोहब्बत का
  388. 18:51उड़ाया है मजाक।
  389. 18:54सोच कर देखो तो ताजमहल हर आशिक के मुंह पे
  390. 18:57एक थप्पड़ है। मैंने बना दिया। तू बना के
  391. 19:00दिखा।
  392. 19:02मेरे एक शो में फ्रंट रो में ना एक
  393. 19:04एल्डर्ली कपल बैठे थे। 70 प्लस होंगे
  394. 19:06ईजीली। तो मैंने उनसे पूछ लिया। मैंने कहा
  395. 19:08सर आपको मौका मिले तो आप मैम के लिए
  396. 19:10बनाएंगे ताजमहल। वो स्टिक के साथ आए थे।
  397. 19:13पहले तो खड़े हुए फिर कहे जीजी बिल्कुल
  398. 19:15बनाएंगे। मरे तो सही।
  399. 19:23वो अंकल उसके बाद कभी दिखे नहीं मुझे।
  400. 19:28वहीं दूसरी तरफ अमृता जी की लिखी एक कविता
  401. 19:31सुनहरे को साहित्य अवार्ड से नवाजा गया।
  402. 19:33जब इंटरव्यूअर्स उनका इंटरव्यू लेने आए तो
  403. 19:35यू नो रिपोर्टर्स कैसे होते हैं? थोड़ी
  404. 19:36टांग खिंचाई करते हैं तो उन्होंने पूछ
  405. 19:38लिया कहीं आपने भी एक कविता साह के लिए तो
  406. 19:40नहीं लिखी। अमृता कहती है जिसके लिए लिखी
  407. 19:43है उसने अभी तक पढ़ी नहीं। अब पूरी दुनिया
  408. 19:45भी पढ़ ले। तो मुझे उससे क्या कहने लगे कि
  409. 19:48ठीक है मैम कल ना न्यूज़पेपर में आपकी
  410. 19:50फोटो चाहिए होगी तो आप पेन पेपर पे लिखने
  411. 19:53की एक्टिंग कीजिए हम आपकी फोटो लेकर चले
  412. 19:56जाएंगे अमृता ने पेन उठाया पेपर उठाए
  413. 19:59लिखना शुरू फोटोग्राफर्स कब के फोटो-वोटो
  414. 20:03लेकर घर चले गए वो लिखती रहीं आठ पन्ने भर
  415. 20:07दिए उन्होंने फ्रंट एंड बैक हर पन्ने पे
  416. 20:10हर कोने पे सिर्फ एक शब्द लिखा था
  417. 20:13साहिर साहिर साहिर साहिर साहिल इतनी
  418. 20:17मोहब्बत दोनों एक दूसरे से करने लगे थे।
  419. 20:19मगर वो कहते हैं ना हर अच्छी मोहब्बत को
  420. 20:21किसी ना किसी की नजर लग जाती है। यहां भी
  421. 20:25लग गई किसकी? साहिर की मां की।
  422. 20:33दिस इज ऑन यू। हां। इसमें मेरा कोई हाथ
  423. 20:35नहीं है।
  424. 20:38लेट मी रिफ्रेज़।
  425. 20:40यहां भी नजर लग गई साहिर की मां सरदर बेगम
  426. 20:43की।
  427. 20:45उन्हें अमृता बिल्कुल पसंद नहीं थी। सोचो
  428. 20:47ना कैसे होती? डिवोर्सी हैं। दो बच्चों की
  429. 20:49मां है। छोड़कर आई हैं और अब कह रही है
  430. 20:51साहिर से शादी करनी है। साफ मना कर दिया
  431. 20:53उन्होंने। अब आप साहिर साहब की परवरिश
  432. 20:55जानते हैं तो ये बात समझ पाएंगे कि अपनी
  433. 20:57मां के खिलाफ तो वो जा ही नहीं सकते थे।
  434. 20:59अकेले पालपस के कितनी मुश्किलों के साथ
  435. 21:01उन्होंने बड़ा किया था। मां का हुकुम
  436. 21:03पत्थर की लकीर ना चाहते हुए भी साहिर साहब
  437. 21:07ने अमृता से अपनी दूरियां जरा बढ़ा ली।
  438. 21:10दोनों का दिल टूटा था। जब प्यार खत्म करना
  439. 21:14पड़ता है तो दिल दोनों का टूटता है। इसी
  440. 21:17मानसिकता में साहिर साहब ने वो शेर लिखा
  441. 21:19था जो सुना पड़ा आप सबने हैं लेकिन समझ अब
  442. 21:22पाएंगे कि वो अमृता के लिए था। कहो तो
  443. 21:25सुना दूं।
  444. 21:27साहिर कह रहे हैं कि जिस अफसाने को अंजाम
  445. 21:30तक पहुंचाना हो नामुमकिन।
  446. 21:34कि जिस अफसाने को अंजाम तक पहुंचाना हो
  447. 21:37नामुमकिन उसे खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना
  448. 21:41अच्छा। चलो चलो
  449. 21:44अजनबी बन जाए हम दोनों क्या बात है यार
  450. 21:47किस-किस को अपना एक से याद आ गया
  451. 21:51आखिर दोनों अपनी जिंदगी के उस फेज में आ
  452. 21:54चुके थे जिसे आज की जनरेशन बड़े प्यार से
  453. 21:58ब्रेकअप कहती है बैंगलोर में थोड़ा पॉज ले
  454. 22:02लिया एक मोहतरमा खड़ी होकर चिल्ला दी
  455. 22:04सिचुएशन शिप
  456. 22:08जब दिल टूटता है आप दोनों अलग हो जाते हो
  457. 22:11तो बहुत रोना आता है। ऐसा लगता है किसी ने
  458. 22:14दिल पकड़ कर निचोड़ दिया है। सिर्फ खराब
  459. 22:16सा ही लग रहा होता है हर समय हर दफा।
  460. 22:19यूजुअली ऐसे समय के लिए लड़कियां अपने पास
  461. 22:21एक दो दोस्त रखती हैं। अबे
  462. 22:27इसलिए रखती है कि बीच में बड़ा मन करेगा
  463. 22:29मेरा उसे फोन करने का। तो कुछ भी हो जाए
  464. 22:31मुझे फ़।
  465. 22:33जिन लोगों को इस बात पे हंसी आती है। ये
  466. 22:35वही लोग होते हैं जिन्हें रखा जाता है।
  467. 22:38तुम बैठो यहां पे।
  468. 22:41अनफॉर्चूनेटली अमृता प्रीतम के पास ऐसा
  469. 22:43कोई दोस्त
  470. 22:44था।
  471. 22:45कुछ हफ्ते रुकी वो। फिर एक आता है ना अ
  472. 22:48क्रैक इन द आर्मर। मन करता है कि यार आज
  473. 22:50तो कॉल
  474. 22:52एसडी पीसीओ का जमाना था। भागी भागी पहुंच
  475. 22:54गई शाम को पीसीओ। फोन उठाया और नंबर डायल
  476. 22:57करने लगी।
  477. 22:59आखिरी नंबर डायल करती। उसके पहले उनकी नजर
  478. 23:02पड़ी बगल में रखी ब्लिस मैगजीन पर। जिसमें
  479. 23:05खबर छपी थी साहिर साहब के अफेयर के बारे
  480. 23:09में। इतने हफ्ते में उनकी जिंदगी में कोई
  481. 23:12और महिला आ भी चुकी थी। तब की एक बड़ी
  482. 23:15फेमस प्लेबैक सिंगर थी सुधा मल्होत्रा।
  483. 23:17देखो मैंने तो मैगज़ीन नहीं देखी। पर यू नो
  484. 23:19हाउ रिपोर्टर्स ऐसा ही कुछ लिखा होगा कि
  485. 23:21अमृता आउट। सुधा इन।
  486. 23:24दिल टूट गया अमृता का। कॉल किए बिना
  487. 23:27रिसीवर वापस नीचे रखा और घर को लौट गई।
  488. 23:31मैं सोचता हूं कभी-कभी उस शाम अगर वो कॉल
  489. 23:33हो गया होता। तो क्या हालात कुछ और हो
  490. 23:36सकते थे? व्हाट इफ वाली सिचुएशन है? अमृता
  491. 23:40कहती थी कि मैंने तुझसे टूट के प्यार किया
  492. 23:42है। क्या तूने भी मुझसे उतना ही प्यार
  493. 23:44किया है? क्योंकि उन्हें लगता था कि साहिर
  494. 23:46उन्हें भुला चुके हैं। लेकिन साहिर खुद
  495. 23:48उन्हें कभी भुला ही नहीं पाए। वो लिखते थे
  496. 23:51कि तुम मुझे भूल भी जाओ तो यह हक है तेरा
  497. 23:54कि तुम मुझे भूल भी जाओ। तो यह हक है
  498. 23:57तुम्हें। मेरी बात और है। मैंने तो सच्ची
  499. 24:00मोहब्बत की है।
  500. 24:06साहिर कहते हैं उन दिनों मैं अक्सर
  501. 24:08तुम्हारे घर के बगल वाली पान की दुकान पर
  502. 24:10जाकर खड़ा हो जाता था और घंटों तुम्हारी
  503. 24:13खिड़की की तरफ बस घूरता रहता था। हाथ में
  504. 24:16एक सोडे का गिलास, एक सिगरेट नहीं तो एक
  505. 24:18बीड़ी लेकर बस घंटों वहीं खड़ा हूं मैं।
  506. 24:20लेकिन तुम कभी दिखी नहीं। ये हरकत हम सबने
  507. 24:22कभी ना कभी की है।
  508. 24:27आप अभी करते हुए आ रहे हो। मुझे ऐसा लग
  509. 24:29रहा है।
  510. 24:31ये हरकत का क्या मतलब है देखिए हमें हम
  511. 24:33खड़े हैं यहां। हमें जाना है यहां। उसका घर
  512. 24:37यहां है।
  513. 24:40सबने की है हरकतें? अच्छा इस
  514. 24:44चलो एक बार इस हरकत के लिए ताली बजा लो
  515. 24:45यार। खुश रहो।
  516. 24:49ताहिर साहब कह रहे हैं 6 महीने जाता रहा।
  517. 24:52तुम कभी दिखे ही नहीं। थका हार के
  518. 24:54उन्होंने जाना भी छोड़ दिया। देखो कोई भी
  519. 24:57रिश्ता ना चल पाने का सबसे बड़ा रीजन
  520. 25:00कम्युनिकेशन होता है। आप अपनी बातों को
  521. 25:02अपने एहसासों को ढंग से सामने बयां नहीं
  522. 25:04कर पाते। इन दोनों का तो काम और पेशा ही
  523. 25:06वही था। अपनी बातों को लिखना एक्सप्रेस
  524. 25:09करना। अमृता कहती थी कि हम दोनों के बीच
  525. 25:12दो बहुत बड़ी दीवारें थी। एक तो खामोशी की
  526. 25:16जो मरते दम तक कभी गई ही नहीं। और दूसरी
  527. 25:20भाषा की। क्योंकि मैं पंजाबी में लिखती थी
  528. 25:23और साहिर उर्दू में लिखा करते थे। इसीलिए
  529. 25:25हम दोनों के दिल की बातें एक दूसरे तक कभी
  530. 25:28पहुंच ही नहीं पाए। हर किसी का प्यार
  531. 25:31मुकम्मल हो जरूरी नहीं है। और इसी समय इसी
  532. 25:34मानसिकता में साहिर साहब ने वो गाना तब
  533. 25:37लिखा जो तब के लोगों के लिए ब्रेकअप एंथम
  534. 25:40माना जाता था। सुनोगे?
  535. 25:42हां।
  536. 25:44गाओगे?
  537. 25:45हां।
  538. 25:46जाने वो कैसे
  539. 25:50लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला
  540. 25:58हमने तो जब गलिया मांगी
  541. 26:03कांटों का हार मिला
  542. 26:09जाने वो कैसे
  543. 26:12लोग थे जिनके प्यार भाई को प्यार मिला।
  544. 26:18क्या सुर में गाया है यार।
  545. 26:21सो गुड।
  546. 26:26अमृता जी के दिल के बिखरे टुकड़े हर तरफ
  547. 26:28पड़े रहते थे। बहुत अकेला फील होता है यार
  548. 26:31जब दिल टूटता है ना। लेकिन तब उनके दिल के
  549. 26:35बिखरे टुकड़े समेटने आए। हमारी कहानी के
  550. 26:39असल हीरो। ये कहानी साहिर साहब की नहीं
  551. 26:42है। ये कहानी अमृता की भी नहीं है। ये
  552. 26:44कहानी इस तीसरे शख्स की है जिससे मैं अब
  553. 26:46आपको मिलवाने जा रहा हूं। अगर आपको प्यार
  554. 26:49से प्यार है, आपको प्रेम से इतना सा भी
  555. 26:51प्रेम है, मोहब्बत से जरा सी भी मोहब्बत
  556. 26:53है ना तो अगले 15 मिनट के अंदर-अंदर ये
  557. 26:55शख्स आपके रोल मॉडल बन चुके होंगे।
  558. 27:01मेरे हिसाब से पिछली पूरी शताब्दी में,
  559. 27:04पिछली पूरी सेंचुरी में, इस शक से ज्यादा
  560. 27:07शिद्दत वाला प्यार साला किसी ने किया ही
  561. 27:09नहीं। नाम एक साथ लेकर देखेंगे हम। यस।
  562. 27:12इंद्रजीत सिंह एम्ब्रोस।
  563. 27:15इंद्रजीत सिंह एम्ब्रोस
  564. 27:18एम्ब्रोस
  565. 27:19पेशे से पेंटर थे और अमृता से बेपनाह
  566. 27:22मोहब्बत करते थे। उम्र में उनसे सात साल
  567. 27:25छोटे थे। कभी मिले भी नहीं है आज तक। फेस
  568. 27:28टू फेस खड़े भी नहीं हुए। उसके बावजूद
  569. 27:30मोहब्बत करते थे। पूछो कैसे?
  570. 27:33ये वो जमाना था जब आपको लोगों की लिखावट
  571. 27:35से इश्क हो जाया करता था। उन्होंने अमिता
  572. 27:38की लिखी शायरियां, किताबें, आर्टिकल्स
  573. 27:40इतना पढ़ा कि उनसे मोहब्बत कर चुके थे।
  574. 27:431960 में जब अमिता अपने पति से अलग हुई ना
  575. 27:45तो उन्होंने एक किताब में एक फिक्शनल
  576. 27:47कैरेक्टर का जिक्र किया। डॉक्टर देव बोल
  577. 27:50के देखो।
  578. 27:51डॉक्टर देव।
  579. 27:52उन्होंने लिखा कि कोई अगर मेरा आइडियल
  580. 27:54पार्टनर होगा ना, तो वो डॉक्टर देव जैसा
  581. 27:56होगा।
  582. 27:59इमरोज़ ने पढ़ लिया।
  583. 28:04बड़ी मुश्किल से अमृता जी का लैंडलाइन नंबर
  584. 28:06जुगाड़ लिया। लगाया फ़
  585. 28:09अमिता ने फ़ उठाया। हां जी। कौन बोल रहा
  586. 28:12है?
  587. 28:12डॉक्टर देव।
  588. 28:13डॉक्टर देव।
  589. 28:16कौन?
  590. 28:19ऐसे शख्स के सामने अभी अमृता खड़ी थी। ये
  591. 28:21कहती हुई कि मेरी अगली किताब आ रही है।
  592. 28:23उसका कवर डिजाइन करना है। आप कर देंगे।
  593. 28:26देखो मैं तो वहां नहीं था। पर आई एम श्योर
  594. 28:28इम्रोज़ की हालत थोड़ी होगी कि
  595. 28:31कब-कभी नहीं छूट जाती। ऊपर से नीचे तक।
  596. 28:34बकायदा इम्ब्रोज़ ने कवर डिजाइन किया। कवर
  597. 28:36के रंग खूबसूरत थे। उसे डिजाइन करने वाले
  598. 28:39का दिल उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत था।
  599. 28:42दिल्ली के ईस्ट पटेल नगर में इम्रोज रहते
  600. 28:44थे और वेस्ट पटेल नगर में अमृता रहती थी।
  601. 28:47हर रोज अमृता बस स्टॉप पर आती थी। बस का
  602. 28:50इंतजार करती थी। उन्हें ऑल इंडिया रेडियो
  603. 28:52जाना होता था नौकरी करने के लिए। और हर
  604. 28:53रोज बस स्टॉप के थोड़ा सा दूर एक खंभे के
  605. 28:56पीछे छुप कर एमरोज उन्हें घूरा करते थे।
  606. 29:00हंसो मत। इसे स्टॉकिंग कहते हैं
  607. 29:04और करनी बिल्कुल नहीं चाहिए।
  608. 29:08इम्रोस को बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था कि
  609. 29:09अमृता को हर दिन बस से जाना पड़ता है।
  610. 29:11सोचो ना आप किसी से मोहब्बत करते हो। उसे
  611. 29:13हर दिन अगर बस से धक्के खाकर जाना पड़े
  612. 29:15अच्छा लगेगा क्या? तो बकायदा 6 महीना एक
  613. 29:18एक रुपया इकठ्ठा करके इम्रोज़ ने एक स्कूटर
  614. 29:22ले लिया। और पहुंच गए कि यू नो यू नो।
  615. 29:28पहुंच गए कि आइए आपको कहीं छोड़ देते हैं।
  616. 29:31उनका सिलसिला शुरू हर दिन अमृता को पिक
  617. 29:33करते ऑल इंडिया रेडियो छोड़ते वहां से
  618. 29:35वापस पिक करते वापस घर छोड़ते। उनकी
  619. 29:38बढ़िया चल रही थी। यू नो अभी कुछ दिनों
  620. 29:40पहले मैंने यही पूरे किस्से का एक छोटा सा
  621. 29:42वीडियो बनाकर Instagram पे शेयर किया। हर
  622. 29:45तीसरा कमेंट था। भाई 6-छ महीना एक एक
  623. 29:47रुपया इकट्ठा करो तो 180 होते हैं।
  624. 29:52लॉजिक है इस बात का।
  625. 29:57इनफैक्ट ही वोंट बिलीव इम्रोज बताते हैं
  626. 29:59कि वो हर दिन उन्हें पिक करके छोड़ते तो
  627. 30:01रहते थे। अमृता जो जानती है कि ये स्कूटर
  628. 30:04चलाने वाला शख्स उनसे कितनी मोहब्बत करता
  629. 30:06है। उन्हीं की स्कूटर के पीछे बैठे अपनी
  630. 30:08उंगलियों से उन्हीं की पीठ के ऊपर कुछ
  631. 30:10लिखा करती थी।
  632. 30:13अमृता अपनी उंगलियों से इम्रोस की पीठ पर
  633. 30:17साहिर लिखती थी और इम्रोस को इस बात से
  634. 30:20कोई जलन नहीं थी। इतनी सी भी जलन नहीं थी।
  635. 30:24असल प्यार में जलन की कोई जगह होती नहीं
  636. 30:27है दोस्त वो बुल्ले शाह साहब का कलाम है
  637. 30:29ना कि जहर वे पित्ता
  638. 30:32जहर वे के पित्ता ते की पिता इश्क सोच के
  639. 30:36कि ते दिल दे के दिल लैन दी आस रखी ध्यान
  640. 30:41से सुनना दिल देके दिल लैन दी आस रखी ओ
  641. 30:45बुनिया प्यार भी लालच नाल ते की
  642. 30:55अगर किसी को प्यार करके आपने वो प्यार चाह
  643. 30:58लिया, मांग लिया तो फिर वो प्यार बचा
  644. 31:00क्या? तब तो ट्रांजैक्शन हो गया ना, सौदा
  645. 31:03हो गया। और यहां हम इम्रोस की बात कर रहे
  646. 31:05हैं। द एपिटमी ऑफ़ लव। अमृता को भी इम्रोज़
  647. 31:08का साथ पसंद तो आने लगा था लेकिन दूध का
  648. 31:10जला छाछ भी।
  649. 31:13उनका पॉइंट था कि देखो जहां शादी हुई वहां
  650. 31:16प्यार नहीं हुआ। जहां प्यार हुआ वहां शादी
  651. 31:18नहीं हुई। तो उन्होंने मुझसे साफ कह दिया
  652. 31:20कि देखो शादीवादी हमारे बस की बात नहीं
  653. 31:22है।
  654. 31:24वास लाइक ओके
  655. 31:27तब जाकर आखिरकार शुरू हुआ आजाद भारत का
  656. 31:32पहला
  657. 31:34लिव इन रिलेशनशिप।
  658. 31:42देखो अनफॉर्चूनेटली आज भी भारत देश में
  659. 31:44लिविन को बहुत ऊंची नजरों से देखा जाता
  660. 31:46है। मैं बात 1960 65 की कर रहा हूं। वो
  661. 31:48दोनों बिना शादी किए एक छत के नीचे रहने
  662. 31:51लगे। लोग क्या कहेंगे, कितनी बातें बनाई
  663. 31:53जाएंगी, कितनी निंदा होगी, इन बातों की
  664. 31:55परवाह किए बिना रहते थे। सच कहूं तो खुश
  665. 31:58रहते थे। जो लोग उन्हें जानते हैं, वो
  666. 32:00बताते हैं कि दोनों के कमरे अलग-अलग थे।
  667. 32:03लेकिन दोनों के कमरों के दरवाजे हमेशा
  668. 32:05खुले रहते थे। सिर्फ सिंबॉलिक है कि आप एक
  669. 32:08दूसरे के लिए हमेशा अवेलेबल हैं।
  670. 32:11इनकी जिंदगी बढ़िया चल ही रही थी कि इसी
  671. 32:13बीच
  672. 32:15साहिर साहब ने अमृता जी को कॉल कर दिया।
  673. 32:20अमृता ने फोन उठाया। कहा जी कहिए साहिर ने
  674. 32:24कहा तुम्हारे शहर आया हूं। मिलने आओगी।
  675. 32:29जरा एक सेकंड अपने-अपने एक्सेस को फिर से
  676. 32:31इमेजिन कर ही लो।
  677. 32:33देखो चाहे रिलेशनशिप कितना भी खराब रहा हो
  678. 32:36वो आपके शहर में हो या आप उनके शहर में हो
  679. 32:38एक दफा मिलने का मन तो करता है ना जस्ट
  680. 32:40फॉर द ओल्ड टाइम सेक अमृता ने कहा जी जी
  681. 32:42बिल्कुल आऊंगी अमृता गई
  682. 32:45एमरोस को भी साथ ले गई
  683. 32:49सोचो बकायदा वहां पे कोई टेबल लगी होगी
  684. 32:51जिसपे तीनों बैठे हैं साहिर अमृता इम्रोस
  685. 32:55लाइक अ परफेक्ट
  686. 32:59इसी बीच में साहिर साहब ने नीचे से एक
  687. 33:01शराब की बोतल निकाली
  688. 33:02तीनों के लिए एक-एक पैगवार।
  689. 33:05अमृता इम्रोज ने अपनी शराब छुई तक नहीं।
  690. 33:09कुछ समय बाद उठे और उठकर वहां से चल दिया।
  691. 33:12साहिर उन्हें रोकना चाहते थे। जाने नहीं
  692. 33:14देना चाहते थे। कितना कुछ कहना चाहते थे
  693. 33:17लेकिन कुछ ना कर सके ना इमोज थे साथ में।
  694. 33:18चुपचाप बैठे रहे और जाने दिया। रात भर
  695. 33:21शराब पे शराब पीते रहे। नशे में धुत रात
  696. 33:24को 11 11:30 बजे अमृता के लैंडलाइन पे कॉल
  697. 33:27किया। ड्रंक डायल था वो।
  698. 33:31फ़ की घंटी बजी और फ़ उठाया एम्ब्रोज़ ने।
  699. 33:36हां जी देता हूं।
  700. 33:40जो दिल टूटा होगा उस शख्स का उस समय
  701. 33:44अमृता आई फोन पर कहा जी कहिए। साहिर ने
  702. 33:47कहा तुम्हारे जाने के बाद एक नज़्म लिखी
  703. 33:49है। सुनोगी? मैं तुमसे पूछ रहा हूं।
  704. 33:52सुनोगे?
  705. 33:54साहिर ने लिखा कि महफिल से उठ जाने वालों।
  706. 33:58अभी-अभी महफिल से उठ के गए थे ना? महफिल
  707. 34:00से उठ जाने वालों तुम लोगों पर क्या
  708. 34:02इल्जाम तुम आबाद घरों के वासी मैं आवारा
  709. 34:06और बदनाम मेरे साथी मेरे साथी ये खाली जाम
  710. 34:10ये खाली जाम ये खाली जाम बाद में यही नज़्म
  711. 34:14दूज का चांद नाम की फिल्म में यूज़ भी की
  712. 34:16गई लेकिन ये पूरा शराब का किस्सा मैंने
  713. 34:19आपको सुनाया क्यों बहुत ध्यान से सुनना
  714. 34:21मेरी बात मेरा मानना है पर्सनली जस्ट माय
  715. 34:24बिलीफ कि उस रात साहिर साहब ने एक नज़्म और
  716. 34:28लिखी थी मेरा दिल यह बात मानने से इंकार
  717. 34:31करता है कि यह नज़्म उस रात के अलावा कभी
  718. 34:33भी लिखी गई हो। कोई प्रूफ मुझे मिला नहीं
  719. 34:35कहीं पर भी। बस बिलीफ है। पता है कौन सी?
  720. 34:39अभी ना जाओ छोड़कर
  721. 34:44ये दिल अभी भरा नहीं। अभी अभी तो आए हो।
  722. 34:53बहार बनके जाए।
  723. 34:59जरा महक तो रे ये दिल जरा महक तो रे ये
  724. 35:08शाम ढल तो ले जरा
  725. 35:14ये शाम ढल तो ले जरा ये दिल संभल तो ले
  726. 35:22जरा मैं थोड़ी देर जी लूं
  727. 35:28नशे के पीू
  728. 35:33नशे के घूट भी तो अभी तो कुछ कहा नहीं अभी
  729. 35:43तो कुछ सुना नहीं बुरा ना मानो बात का ये
  730. 35:51प्यार है मिला नहीं अभी ना जाओ छोड़कर
  731. 36:00ये दिल अभी भरा नहीं
  732. 36:09सच में ऐसा नहीं लग रहा है गाना उसी रात
  733. 36:11लिखा गया होगा बाय द वे आई हैव रन दिस
  734. 36:14सॉन्ग फॉर ऑल ऑफ यू आज से पहले ना जाने
  735. 36:17किसको याद करके तुम्हें गाना सुनते थे अब
  736. 36:20जब सुनोगे तुम्हें टेबल दिखेगी
  737. 36:23तीनों बैठे हुए दिखेंगे
  738. 36:25गुजरात को भी शराब के ग्लास दिखेंगे।
  739. 36:31अभी ना कुछ दिनों पहले एक किताब में मुझे
  740. 36:34इतना खूबसूरत सा किस्सा मिला। सुनोगे
  741. 36:38बेहद प्यारा है। मजा आ जाएगा। सो इम्रोस
  742. 36:41पेंटर थे। पेंटिंग के साथ-साथ बहुत सारी
  743. 36:43कैलीग्राफी भी किया करते थे। सभी लोग
  744. 36:45जानते हैं कैलग्राफी क्या होती है? लिखते
  745. 36:47हैं। तो इम्रोज़ के एक दोस्त लाहौर से उनसे
  746. 36:50मिलने आए। तब इम्रोज़ और अमृता एक साथ में
  747. 36:52रहना शुरू कर चुके थे। तब तक अमृता जी की
  748. 36:55रसीदी टिकट भी रिलीज हो चुकी थी। तो
  749. 36:56उन्होंने अपने और साहिर के रिश्ते के बारे
  750. 36:59में सभी को बता दिया था। सभी कुछ जग जाहिर
  751. 37:01था। तो जब उनके दोस्त आए तो इम्रोज़ अपनी
  752. 37:04सारी पेंटिंग्स उन्हें दिखा रहे थे। ये
  753. 37:06पेंटिंग है। ये पेंटिंग है। कैलग्राफी की
  754. 37:08बारी आई तो एक आखिरी कैनवस पे इम्रोज़ ने
  755. 37:11अपने हाथों से साहिर लिखा हुआ था।
  756. 37:15जैसे ही अमृता इधर-उधर हुई, वो पूछ पड़ा।
  757. 37:17अब दोस्त कह रहा, "भाई, तू पागल है क्या?"
  758. 37:20तू जानता नहीं है?
  759. 37:22और तू साहिर लिख रहा है। रोज़ कहते हैं वो
  760. 37:25तो कैनवस है पगले। साहिर का नाम तो मेरी
  761. 37:27पीठ पर लिखा हुआ है।
  762. 37:32इसी बीच में एक दफा रिपोर्टर्स ने अमृता
  763. 37:34जी को फिर घेर लिया। उनसे कहा कि देखिए
  764. 37:37मैम आप कहती हैं आप प्यार साहिर से करती
  765. 37:39हैं लेकिन रहती अमरोज के साथ है। ये क्या
  766. 37:42बात है? अमृता ने जो जवाब दिया ना मैं फैन
  767. 37:45हो गया उनका। अमृता कहती है सुनिए साहिर
  768. 37:48मेरे लिए खुला आसमान है।
  769. 37:51साहिद मेरे लिए खुला आसमान है और इम्रोज़
  770. 37:55मेरे घर की छत है।
  771. 38:02छत होती आसमान के नीचे ही है और उस छत के
  772. 38:05नीचे मैं रिपोर्टर्स चुप वापस कर। वहीं
  773. 38:09दूसरी तरफ साहिर साहब ने कई महीनों तक
  774. 38:11अपने आप को पूरी तरीके से शराब में झोंक
  775. 38:13दिया था। एक बारी का किस्सा आया। उनके एक
  776. 38:15दोस्त जयदीप वो भी लिरिसिस्ट थे। उनसे
  777. 38:17मिलने गए तो साहिर साहब तो नशे में थे।
  778. 38:19अंदर जाकर देखा तो पूरा घर अस्त-व्यस्त
  779. 38:21है। धूल ही धूल। एक टेबल है उस पर कप रखा
  780. 38:24है। कप के अंदर बाहर हर जगह धूल थी। तो
  781. 38:26जयदीप ने हाथ बढ़ाया कि लाइए मैं इसे धो
  782. 38:28देता हूं। साफ कर देता हूं। हाथ बढ़ाया और
  783. 38:30साहिर चिल्ला दिए। छूना भी मत।
  784. 38:34आखिरी दफा जब अमृता मेरे घर आई थी।
  785. 38:36उन्होंने इसी कप में चाय पी थी। वैसा का
  786. 38:39वैसा उसी जगह रखा हुआ है। इनफैक्ट लोग
  787. 38:41बताते हैं कि उन दिनों अगर आप साहिर साहब
  788. 38:43के पास कोई गाना लिखवाने के लिए जाएं तो
  789. 38:46वो बाहर से ही पूछ लेते थे।
  790. 38:48सिचुएशन क्या है?
  791. 38:50अगर हैप्पी गाना चाहिए तो हट।
  792. 38:54कुछ दिन यहां पर सिर्फ सैड सॉन्ग्स लिखे
  793. 38:56जाएंगे।
  794. 38:57इसी बीच साहिल साहब ने वो कविता लिखी थी
  795. 39:01जो बाद में चल के गाना भी बनी जो सुनी
  796. 39:03पढ़ी लिखी आप सबने हैं। लेकिन समझ अब
  797. 39:05पाएंगे कि वो अमृता के लिए थी।
  798. 39:08कभी-कभी मेरे दिल में
  799. 39:12कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है कि
  800. 39:15जिंदगी कि जिंदगी तेरे जुल्फों की नरम
  801. 39:18छांव में गुजरने पाती तो शादाब हो भी सकती
  802. 39:22थी। ये रंजनम की स्याही जो दिल पर छाई है
  803. 39:26तेरी नजरों की शआओं में खो भी सकती थी मगर
  804. 39:30यह हो ना सका। मगर यह हो ना सका और अब यह
  805. 39:34आलम है कि तू नहीं तेरा गम नहीं तेरी
  806. 39:38जुस्तजू भी नहीं गुजर रही है जिंदगी ऐसे
  807. 39:41जैसे किसी के सहारे की आरजू भी नहीं ना
  808. 39:45कोई राह है ना कोई मंजिल है और ना ही
  809. 39:48रोशनी का कोई सुराग अंधेरों में भटक रहा
  810. 39:50हूं मैं इन्हीं अंधेरों का होकर ना रह
  811. 39:52जाऊं मेरे हम नफस मगर यूं ही बोल के देखो
  812. 39:55मगर
  813. 39:56यूं ही
  814. 39:57कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है
  815. 40:00कभी-कभी मेरे दिल में
  816. 40:07सब
  817. 40:10मेरे दिल में
  818. 40:14आता
  819. 40:16है
  820. 40:18कैसे तुझको बनाया
  821. 40:22गया है मेरे
  822. 40:25लिए
  823. 40:27तू अब से पहले सितारों ों में बस रही
  824. 40:34थी
  825. 40:37तुझे जमीन पे बुलाया
  826. 40:41गया है मेरे
  827. 40:44लिए
  828. 40:46कभी कभी
  829. 40:49मेरे दिल में ख्याल आता
  830. 40:55है
  831. 40:58आप जानते हैं इन दोनों के बीच अमृता और
  832. 41:00इम्रोज़ साहब के बीच भी सबसे खूबसूरत चीज
  833. 41:02वही थी। खामोशी। ये लोग भी ज्यादा बातें
  834. 41:06नहीं किया करते थे। लोग बताते हैं कि
  835. 41:07अमृता को रात भर जाग के लिखने का शौक था
  836. 41:10और इम्ब्रोज़ को सुबह जल्दी उठकर पेंटिंग
  837. 41:12करने का शौक था। तो जब रात में अमृता लिख
  838. 41:14रही होती बीच-रात को अपने कमरे में अलार्म
  839. 41:17लगा के इम्ब्रोज़ उठते। किचन में जाते। एक
  840. 41:20कप चाय की प्याली बनाते और बिना आवाज के
  841. 41:22धीरे से अमृता के कमरे में खसका के जाकर
  842. 41:26वापस सो जाते। कुछ नहीं कहा उन्होंने।
  843. 41:29वहीं दूसरी तरफ सुबह होने के बाद अमृता
  844. 41:31सोने नहीं जाती थी। वो गार्डन में बैठी एक
  845. 41:34टक एम्ब्रोस को बस पेंटिंग करते हुए देखती
  846. 41:36रहती थी। बट कभी तो आता है ना जब समय पासा
  847. 41:40फेंकता है जब हमारे हाथ में कुछ नहीं
  848. 41:42होता। ऐसी सिचुएशन हुई। एम्रोस को फोन आया
  849. 41:45बंबई से पिक्चरों में काम करने का न्योता
  850. 41:48आया। छोटा-मोटा भी नहीं। कॉल गुरुदत्त
  851. 41:51साहब का था। गुरुदत्त फैन इन द हाउस मेक्स
  852. 41:54सम नॉइज़ फॉर मी। कम ऑन।
  853. 41:57तो गुरु साहब ने बुलावा भेजा इम्रोज को
  854. 41:59पिक्चरों में काम करने के लिए। इम्रोज़
  855. 42:01जाना नहीं चाहते थे। इम्रोज़ अमृता को
  856. 42:03छोड़कर कहीं भी कभी भी जाना नहीं चाहते
  857. 42:05थे। मगर अमृता ने बहुत पुश किया।
  858. 42:07प्रोत्साहन दिया कि जिंदगी में ऐसे मौके
  859. 42:09बार-बार नहीं आते। तुम्हें जाना चाहिए।
  860. 42:11दिल पर पत्थर रखकर आखिरकार एमरोज़ चल। अब
  861. 42:15मेरे एक सवाल का जवाब दो। जब दो लोग एक छत
  862. 42:18के नीचे इतने सालों से रह रहे हो। एक
  863. 42:20दूसरे की इतनी आदत हो चुकी हो। तो फिर
  864. 42:22एकदम से अगर अलग-अलग होना पड़े तो फिजिकली
  865. 42:24और मेंटली दोनों चीजें अफेक्ट हो जाएंगी
  866. 42:26ना। हो गई। अगले ही दिन अमृता बीमार पड़
  867. 42:30गई। लेकिन जब बंबई से एम्ब्रोज ट्रंक कॉल
  868. 42:32किया करते तो अपनी आवाज से अमृता पता नहीं
  869. 42:35चलने देती थी कि वो बीमार है। मगर आप अगर
  870. 42:38किसी से इतना जुड़े हो वो कुछ कहे ना कहे
  871. 42:43पता चल जाता है। इम्रोज भाग गए। चौथे दिन
  872. 42:47अपने सारे काम को मारी लात पकड़ी ट्रेन
  873. 42:49वापस दिल्ली। हाथ पकड़ा अमृता का और कहा
  874. 42:53कि बस अब मैं मरते दम तक तुम्हें छोड़कर
  875. 42:57कहीं नहीं जाऊंगा। एक गहरी सांस लो ऑल ऑफ
  876. 42:59यू टेक अ डीप ब्रेक।
  877. 43:01हम सब जिंदगी में एक वही शख्स नहीं खोज
  878. 43:03रहे जो हमारा हाथ पकड़ कर हमसे बस ये कह
  879. 43:06दे कि अब मैं मरते दम तक तुम्हें छोड़कर
  880. 43:09कहीं नहीं जाऊंगा। अमृता को उनके वो शख्स
  881. 43:13इम्रोज मिल चुके थे। उनकी जिंदगी बढ़िया
  882. 43:16चलती कि 1980 में फिर एक कॉल आया। बड़े
  883. 43:20कॉल आते थे उस समय मैं बता रहा हूं।
  884. 43:241980 में कॉल आया। अमृता ने कॉल उठाया और
  885. 43:27उन्हें एक बड़ी दुखद घटना के बारे में पता
  886. 43:29चला कि साहिर साहब
  887. 43:33चल बस।
  888. 43:35अमृता कहती है जैसे ही मैंने वो खबर सुनी
  889. 43:37मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे अंदर का एक बड़ा
  890. 43:39सा हिस्सा मर गया हो। और उन्होंने अपने आप
  891. 43:42को एक कमरे में बंद कर लिया और एक छोटा सा
  892. 43:44किस्सा लिखा। अमृता लिखती है कि याद है
  893. 43:47साहिर एक दफा तुम और मैं एक मुशायरे में
  894. 43:50गए थे जहां गलती से तुम्हारे नाम का नेम
  895. 43:54टैग मेरे पास आ गया था और मेरे नाम का नेम
  896. 43:57टैग तुम्हारे पास चला गया था।
  897. 44:00शायद जब मौत लेने आई होगी तब भी ऐसा ही
  898. 44:03हुआ होगा।
  899. 44:05वो लेने तो मुझे आई थी लेकिन धोखे से
  900. 44:08तुम्हें लेकर चली गई।
  901. 44:10अपनी बात को इतनी सहजता सरलता से कहने का
  902. 44:13हुनर जो साहिर साहब में था उनके बाद शायद
  903. 44:15ही किसी में आया है वो 400 से ज्यादा गाने
  904. 44:18लिखने वाले जाने कितनी किताबें शेरो शायरी
  905. 44:20कविताएं लिखने वाले द फेवरेट लिरिसिस्ट ऑफ़
  906. 44:23दिस कंट्री साहिर लुधियावी अब नहीं रहे थे
  907. 44:27लेकिन साहिर साहब ने अपनी मौत पर अफसोस
  908. 44:30करने का हक किसी को दिया ही नहीं पूछो
  909. 44:34कैसे
  910. 44:37मुझसे पहले कितने शायर आए और आकर चले गए।
  911. 44:46कुछ आ भरकर लौट गए। कुछ नगने गाकर चले गए।
  912. 44:55वो भी एक पल का किस्सा थे। मैं भी एक पल
  913. 45:01का किस्सा हूं। कल तुमसे जुदा हो जाऊंगा।
  914. 45:07जो आज तुम्हारा हिस्सा हूं क्योंकि
  915. 45:12मैं पल दो पल का शायर हूं। पल दो पल मेरी
  916. 45:18कहानी है। पल दो पल मेरी हस्ती है। पल दो
  917. 45:25पल मेरी जवानी है।
  918. 45:30अब जा चुके हैं।
  919. 45:34चलो अब साहिल साहब की मौत की बात निकली
  920. 45:36है। तो रिसेंटली
  921. 45:38एक किस्सा मुझे और मिला। सुनोगे तो जोर से
  922. 45:40कहो।
  923. 45:43ये किस्सा पहले सिर्फ बाततूनी था। लोग
  924. 45:46कहते थे कि ऐसा हुआ था। रिसेंटली मैं एक
  925. 45:48शख्स जादू को जानते हैं आप?
  926. 45:51जावेद।
  927. 45:51थैंक यू वेरी मच। हैदराबाद में पूछा कहते
  928. 45:53कोई मिल गया।
  929. 45:57हुआ कुछ यूं कि जादू यानी जावेद अख्तर
  930. 45:59साहब जब स्ट्रगल किया करते थे। तब वो
  931. 46:01साहिर साहब के घर में कई बार रहे। साहिर
  932. 46:04साहब उनके मेंटर की तरह थे। फादर फिगर थे।
  933. 46:06बहुत कुछ सीखते थे वो साहिर साहब से। एक
  934. 46:08बारी का वाक्या आया कि जावेद साहब सुबह सो
  935. 46:10रहे थे और साहिद साहब अपने काम पर जाने से
  936. 46:12पहले उनके तकिए के बगल में ₹200 रखकर चल
  937. 46:17दिए। उस समय ₹200 बहुत बड़ी रकम थी। मतलब
  938. 46:20महीना भर निकल जाए जावेद साहब का। वो उठे
  939. 46:22और समझ गए कि ये किसने किया है। उन्होंने
  940. 46:25₹200 यूज़ किए। किस्मत पलटी? एंड देन ही
  941. 46:27बिकम द लेजेंड्री मिस्टर जावेद अख्तार।
  942. 46:31मगर हर कभी जब महफिलों में मुलाकात हो
  943. 46:33जाती तो साहिर ऐसे टांग खिंचाई में पूछ
  944. 46:36देते। मेरे ₹200 कब देगा? जावेद कहते हैं
  945. 46:40नहीं दूंगा। साहिर कहते है लेकर तो
  946. 46:42रहूंगा। यू नो ₹200 किसी के लिए बड़ी रकम
  947. 46:45नहीं है। बट जस्ट अ हैप्पी बंटर कट टू
  948. 46:481980।
  949. 46:50जब साहिर साहब ने अपना शरीर छोड़ा तो सबसे
  950. 46:54पहला कॉल जावेद साहब के पास गया था।
  951. 46:57टैक्सी पकड़ कर जावेद साहब आए। टैक्सी
  952. 46:59वाले की मदद से साहिर साहब का शरीर टैक्सी
  953. 47:02में रखा और अपने घर लेकर आए। सारे लास्ट
  954. 47:05राइड्स किए और जूह के कब्रिस्तान में जाकर
  955. 47:07उन्हें दफना दिया गया। जब सब खत्म करके
  956. 47:09जावेद साहब अपने घर जाने लगे तो टैक्सी
  957. 47:11वाले ने कहा साहब मेरा भाड़ा कितना हुआ
  958. 47:13है?
  959. 47:14200
  960. 47:14₹200
  961. 47:16199 नहीं 200 भी नहीं ₹200
  962. 47:21नहीं दूंगा लेकर तो रहूंगा।
  963. 47:24जातेजाते भी वो ₹200 लेकर चले गए। टू द
  964. 47:28बिगेस्ट स्टोरी टेलर देयर इज टाइम। गिव इट
  965. 47:30अप एंजॉय।
  966. 47:37अमृता और इम्रोज़ नई सदी में कदम रख रहे
  967. 47:41थे। 2000 का समय आ चुका था। अभी की बात
  968. 47:43है। इम्रोज़ का साथ अमृता को हर दिन नया और
  969. 47:46ताजा तो बना रहा था मगर शरीर तो बूढ़ा होने
  970. 47:48लगा था ना। बीमारियों ने घेर लिया था
  971. 47:50अमृता। बहुत फ्रजाइल सी हो गई थी अमृता।
  972. 47:53फिर एक दफा अमृता को वही गिल्ट काटा। उनका
  973. 47:55पॉइंट था कि ये शख्स उनसे उम्र में 7 साल
  974. 47:57छोटा है। मैंने इसे कोई नाम नहीं दिया।
  975. 48:00बताया नहीं कि ये मेरा है कौन ना कभी शादी
  976. 48:02की। बस ये साथ में रहता है और एज अ
  977. 48:04पार्टनर की तरह रहता है और बहुत मोहब्बत
  978. 48:06करता है। तो एक दफा जब अमृता ने उन्हें
  979. 48:08बुलाया था तब कहा था कि यार इम्रोज़ तुम
  980. 48:10अभी जवान हो। बहुत सारे अनुभव, बहुत सारे
  981. 48:13एक्सपीरियंसेस तुम्हारा इंतजार कर रहे
  982. 48:14हैं। जाओ पूरी दुनिया घूमो। इम्रोज़ उसी
  983. 48:17समय खड़े हो गए। और अमृता के चार चक्कर
  984. 48:20लगाए थे।
  985. 48:22लो घूम ली दुनिया चार बार। क्या करेगा ऐसे
  986. 48:26शख्स का कोई?
  987. 48:28वहीं 2005 के आसपास अमृता ने उनको एक दफा
  988. 48:30फिर बुलाया और फिर उनके अंदर वही गिल्ट
  989. 48:32था। तो अमृता ने उनसे कहा था कि इम्रोज़
  990. 48:35तुम मुझे शाम के समय क्यों मिले?
  991. 48:39तुम मुझे शाम के समय क्यों मिले? अब तो
  992. 48:42जिंदगी का सफर खत्म होने वाला है। मिलना
  993. 48:44ही था तो जिंदगी की दोपहर में मिलते। देखो
  994. 48:48मैं तो वहां नहीं था। पर शायद बदले में
  995. 48:50इम्रोज उनसे तभी कह दिया करते होंगे कि ए
  996. 48:53मेरी ज़हर ज तुझे मासूम नहीं तू अभी ऐसी और
  997. 49:00है
  998. 49:02तुझे कुर्बान मेरी जान मेरी जान
  999. 49:07खूबसूरत
  1000. 49:12अनफॉर्चुनेटली 2005 में अमृता प्रीतम भी
  1001. 49:18चली गई
  1002. 49:20वादे के मुताबिक उनकी आखिरी सांस तक उनका
  1003. 49:23हाथ पकड़े रोज वहीं बैठे हुए थे। जो वादा
  1004. 49:26किया वो
  1005. 49:28आइरोनिकली ये गाना लिखने वाले भी शाहिर ही
  1006. 49:30थे।
  1007. 49:31फोटो भी है इंटरनेट पे। लाल गांव में
  1008. 49:33अमृता जी लेटी हुई है और सफेद कुर्ता
  1009. 49:35पजामा पहने इम्रोज़ उनका हाथ पकड़े वहीं
  1010. 49:37बैठे हुए हैं। इनफैक्ट अमृता जी ने जाने
  1011. 49:40से करीब साल भर पहले शायद उनकी जिंदगी की
  1012. 49:42एक आखिरी कविता लिखी थी। इम्रोस के लिए
  1013. 49:45लिखी थी। उनका सबसे फेमस काम वही माना
  1014. 49:48जाता है। आज भी दुनिया में लोग अमृता को
  1015. 49:50इसी कविता के कारण ज्यादा याद रखते हैं।
  1016. 49:53एंड फॉर्चूनेटली हमारे शो का भी वही नाम
  1017. 49:55है।
  1018. 49:58सुनोगे? मना करोगे तो भी सुनाऊंगा।
  1019. 50:01समझ लो पिछले 45 मिनट में जो पूरी कहानी
  1020. 50:04मैंने आपको सुनाई है वो सिर्फ इसलिए सुनाई
  1021. 50:06है ताकि अब मैं आपको ये कविता सुना सकूं।
  1022. 50:09अब आप ये समझ पाएंगे कि इम्रोस के लिए
  1023. 50:11लिखी गई थी। इसमें भी वही है काश जो पूरा
  1024. 50:16नहीं हो पाया ना वो टीस है बस इसीलिए मरने
  1025. 50:19से पहले अमृता कह रही है कि मेरे साथी
  1026. 50:21मेरे राही मैं तेनु
  1027. 50:25कित्थे किस तरह नहीं पता शायद तेरे तखयु
  1028. 50:30दी चिनक बनके तेरे विचारों की चिंगारी
  1029. 50:33बनके इमेजिनेशन बनके शायद तेरे तखयु दी
  1030. 50:36चिनक बनके तेरे कैनवास से उतरा पेंटर थे
  1031. 50:40ना शायद तेरे तखुल दी चिनक बनके तेरे
  1032. 50:43कैनवास पे उतरांगी या खोरे कैनवास होते एक
  1033. 50:47रहस्यमई लकीर बनके खामोश तेनु तकदी रवांगी
  1034. 50:52जा खरे सूरज दी लौ बनके तेरे रंगा विच
  1035. 50:55घुलांगी
  1036. 50:57रंगादि बावा विच बैठ के तेनु एक टकलांगी
  1037. 51:02किथे किस तरह नहीं पता पर मैं तेनु फिर
  1038. 51:07मिलांगी जा चश्मा बनी होवांगी जा जि
  1039. 51:10झरनेदा पानी उड़दा
  1040. 51:12पानी दिया बूदा तेरे पिंडे मला
  1041. 51:17एक ठंडक चाई बनके तेरी छाती दे नाल लगांगे
  1042. 51:22मैं और कुछ नहीं जानिया पर एना जानिया कि
  1043. 51:25वक्त जो भी करेगा एक जन्म मेरे नाल तू
  1044. 51:29रहेगा
  1045. 51:36मैं और कुछ नहीं जान पर एना जानिया कि
  1046. 51:39वक्त जो भी करेगा एक जन्म मेरे नाल तू
  1047. 51:42रहेगा ऐ जिस्म मुख है ता सब कुछ मुखा है।
  1048. 51:45जिस्म खत्म होता है तो सब खत्म हो जाता
  1049. 51:47है। ऐ जिस मुखदा है ता सब कुछ मुखा है। पर
  1050. 51:50चेत्या दे दागे कायनात की कणा ने अमृता कह
  1051. 51:55रही है तुम्हारी यादें हैं जो इस सृष्टि
  1052. 51:57के कपड़े को बनाए हुए हैं। जिसे हम
  1053. 51:59रियलिटी कहते हैं। अगर ये यादें नहीं तो
  1054. 52:01दुनिया है ही नहीं। चेत धागे कायनात की
  1055. 52:04कणा ने मैं उन कणु चुनांगी
  1056. 52:08धाग नुंगी।
  1057. 52:11किथे किस तरह नहीं पता।
  1058. 52:15फिर मैं तेनु फिर मिलांगे। मैं तेनु
  1059. 52:30यूजुअली शो के इस टाइम पे जब मैं आता हूं
  1060. 52:31तो मैं लोगों को बताता हूं कि 1980 में
  1061. 52:33साहिर गए थे। 2005 में अमृता जी गई थी।
  1062. 52:37इम्रोज हैं।
  1063. 52:39किसी से इतनी शिद्दत से प्यार करने वाला
  1064. 52:41शख्स हम लोगों के बीच अब भी रहता है।
  1065. 52:45था अभी-अभी
  1066. 52:4822 दिसंबर 2023 को 98 इयर्स ओल्ड इंद्रजीत
  1067. 52:53सिंह एम्ब्रोस चल से। 2005 से अकेले रहे
  1068. 52:57हो? उनसे लोग पूछते थे कि आप बिना अमृता
  1069. 52:59के कैसे रह पा रहे हो? वो कहते थे अमृता
  1070. 53:01ने शरीर छोड़ा है। मेरा साथ नहीं छोड़ा।
  1071. 53:05वो अभी भी मेरे साथ ही है। इनफैक्ट एक
  1072. 53:08डॉक्यूमेंट्री देखी मैंने हॉस वाला वो घर
  1073. 53:10जिसमें दोनों रहा करते थे। आज भी उस पूरे
  1074. 53:13घर की किसी दीवार का 1 इंच का ऐसा कोई
  1075. 53:15कोना नहीं है जहां अमृता की कोई तस्वीर ना
  1076. 53:17लटकी हो। इतनी मोहब्बत करता था ये शख्स।
  1077. 53:20मेरे लिए ये पूरी कहानी के बाद ना जैसे
  1078. 53:22अनकंडीशनल लव की डेफिनेशन एम्ब्रोस हो गए
  1079. 53:24हैं यार। और क्या होता है अनकंडीशनल लव?
  1080. 53:26जो सिर्फ देना जानता है, बदले में कुछ
  1081. 53:28चाहता, कुछ मांगता नहीं है। वही तो है एम
  1082. 53:30रोज देते चले गए जिंदगी भर कभी कुछ नहीं
  1083. 53:33चाहा, कभी कुछ नहीं मांगा। वही है असल
  1084. 53:35प्यार। बाकी सब मिथ्या है।
  1085. 53:43हम सबकी जिंदगी में ना एक इनविज़िबल सी
  1086. 53:45लिस्ट है। कुछ लोगों के नामों की जिनसे हम
  1087. 53:47मिलना चाहते हैं। मरने से पहले कम से कम
  1088. 53:50एक बार। आए कुछ नाम आए साहब।
  1089. 53:54मेरी उस लिस्ट में सबसे ऊपर थे एम्ब्रोस
  1090. 54:00मगर यह हो ना सका। अब मैं आपको बताता हूं
  1091. 54:04कि कहानी मेरे लिए इतनी ज्यादा पर्सनल और
  1092. 54:06इंपॉर्टेंट क्यों और कैसे हो गई। मैं अपनी
  1093. 54:09जिंदगी का पहला बड़ा शो करने जा रहा था 23
  1094. 54:13दिसंबर 2023 को। बॉम्बे में ऑडिटोरियम में
  1095. 54:17और यही कहानी सुना रहा था। और एक दिन पहले
  1096. 54:20खबर आई कि इम्रोज साहब
  1097. 54:24मुझे लोगों ने डीएम्स किए। जैसे आपको मौका
  1098. 54:26मिला है उन्हें श्रद्धांजलि देने का। मैं
  1099. 54:28दिल से बता रहा हूं आज 3 साल में 450 से
  1100. 54:30ज्यादा शोज़ कर चुका हूं मैं। लेकिन कभी
  1101. 54:32स्टेज पर रोया नहीं हूं मैं।
  1102. 54:35एक्सेप्ट दैट नाइट। आई कुडंट यार कंट्रोल।
  1103. 54:38आई जस्ट कुड नॉट कंट्रोल। मुझे बादलों के
  1104. 54:41बीच वो टेबल लगी दिखी जिसपे अमृता बैठी थी
  1105. 54:44और अब जाकर इम्ब्रोज़ ने उन्हें ज्वाइन कर
  1106. 54:46लिया था। साहिर नहीं है।
  1107. 54:50वो खंभे के पीछे हाथ में सिगरेट लिए घूर
  1108. 54:52रहा है बस।
  1109. 54:54मगर आखिरकार वो दोनों एक हो गए थे। इम्रोज़
  1110. 54:58जैसा प्यार नहीं करता अब कोई। मैंने पूरा
  1111. 55:01शो बनाया सिर्फ तीन सवालों की वजह से है।
  1112. 55:04जो सवाल अब मैं आपसे पूछने जा रहा हूं।
  1113. 55:05प्लीज सच्चाई से जवाब देना। झूठ बोलकर तो
  1114. 55:08क्या ही कर लूंगा यहां। पहला सवाल उसका
  1115. 55:11जवाब मुझे सबका पता है। ना भी दोगे तो
  1116. 55:13चलेगा। कितने लोगों को अपनी जिंदगी में
  1117. 55:16इम्रोज़ जैसा कोई प्रेम करने वाला चाहिए?
  1118. 55:19आई नो।
  1119. 55:21सबके अंदर चार-चार हाथ उठाए हैं। हां, वी
  1120. 55:23वांट वी वांट।
  1121. 55:25सेकंड क्वेश्चन सबसेेंट है। कितने लोगों
  1122. 55:28की जिंदगी में एम्ब्रोज़ जैसा प्यार करने
  1123. 55:31वाला कोई है?
  1124. 55:331 2 3 4 5 तो बहुत खुशनसीब हैं आप। इतना
  1125. 55:38प्यार करने वाला इतनी आसानी से मिलता नहीं
  1126. 55:40है।
  1127. 55:43तीसरा सवाल कितने लोग जिंदगी में किसी ना
  1128. 55:47किसी के लिए इम्रोस हैं?
  1129. 55:51बहुत बढ़िया। हैं कुछ चार छह आठ लोग तो वो
  1130. 55:53भी हैं। अगर वाकई ये बात सत्य है तो बहुत
  1131. 55:55प्यारे लोग हैं। आप एक बारी इनके लिए
  1132. 55:57डाली।
  1133. 56:01अब आप ये आयरनली देख रहे हो। ये विडंबना
  1134. 56:03है और कुछ भी नहीं कि पहले सवाल को अगर
  1135. 56:05लेकर चलें तो एम्ब्रोस चाहिए सबको। कोई
  1136. 56:08नहीं।
  1137. 56:08मगर एम्ब्रोज़ बनना कोई नहीं चाहता। अब खुद
  1138. 56:12सोचो अगर एम्ब्रोज़ बनेंगे नहीं तो लोगों
  1139. 56:14को एम्ब्रोज़ मिलेंगे कैसे? इस कहानी से और
  1140. 56:17कुछ लेकर जाओ ना जाओ बस इतना सा ले जाना
  1141. 56:19कि जिंदगी में तुम्हें तुम्हारा एम्ब्रोज़
  1142. 56:21मिले ना मिले। तुम किसी के एम्ज़ बन जाना।
  1143. 56:29मेरा काम कहानी का श्रृंगार है। सत्य
  1144. 56:32नहीं। लेकिन सत्य कहीं छूट जा रहा था।
  1145. 56:37तो सिर्फ आप लोगों के लिए कुछ समय पहले
  1146. 56:39आगे एक छोटी सी कहानी और ऐड की है मैंने
  1147. 56:41जो आपको वाकई इस कहानी के पीछे का जो असल
  1148. 56:43सत्य है मूल सत्य है वो छूट ना जाए वो
  1149. 56:46बताती है। कहो तो खत्म कर सकते हैं। कहो
  1150. 56:48तो सुना देता हूं।
  1151. 56:51ये पूरा ऐड करने का रीज़न थे वो सेकंड
  1152. 56:53क्वेश्चन वाले लोग। जिनसे जब मैंने पूछा
  1153. 56:56ना कि आपकी जिंदगी में इम्रोज जैसा कोई
  1154. 56:57प्रेम करने वाला है? 810 हाथ खड़े हुए थे
  1155. 56:59बस। सॉरी फॉर द लैंग्वेज पर बाकी सब अंधे
  1156. 57:03हो तुम।
  1157. 57:05तुम्हारी जिंदगी में एम्ब्रोज़ जैसा प्रेम
  1158. 57:07करने वाला एक नहीं एक से कहीं ज्यादा लोग
  1159. 57:09हैं।
  1160. 57:11तुम्हारे घर में बैठे हैं अभी। बस हमारा
  1161. 57:13ध्यान उस तरफ कभी जाता नहीं है ना। हमारे
  1162. 57:15लिए प्यार वही होता है। हस्बैंड वाइफ
  1163. 57:17वाला, गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड वाला। इम्रोज़
  1164. 57:19तो वो इम्रोज़ है जो सिर्फ देना जानता है।
  1165. 57:21कुछ चाहता नहीं है, कुछ मांगता नहीं है।
  1166. 57:27इम्रोज़ जैसी मोहब्बत करने वाले लोग आपके
  1167. 57:29घरों में अभी आपका इंतजार कर रहे हैं। एक
  1168. 57:32दो से भी ज्यादा होते हैं वो लोग। छोड़ो
  1169. 57:35ना। क्यों बता रहा हूं? मेरा काम तो
  1170. 57:37कहानियां सुनाना है। कहानी सुनोगे?
  1171. 57:40इस कहानी के लिए मैं आपको एक जंगल में ले
  1172. 57:42जाना चाहता हूं। बहुत साल पहले एक जंगल
  1173. 57:45था। था। उस जंगल के बीचोंबीच एक विशाल सा
  1174. 57:47वृक्ष खड़ा था। वृक्ष समझते हैं?
  1175. 57:51एक बड़ा सा पेड़ था। उसकी शाखाएं आसमान
  1176. 57:53में ऐसी फैली थी जैसे जंगल का सम्राट हो।
  1177. 57:56उस पर फल लगते, पक्षी आते, फूल लगते,
  1178. 57:58तितलियां मंडराती। दिखने में बड़ा खूबसूरत
  1179. 58:01सा पेड़ था। उस पेड़ के नीचे हर रोज एक
  1180. 58:05छोटा सा बच्चा खेलने आता था। उस बड़े से
  1181. 58:09पेड़ को उस छोटे से बच्चे से प्रेम हो
  1182. 58:13गया। प्यार, इश्क, लव, मोहब्बत। व्हाट इज
  1183. 58:16ऑोजिट ऑफ लव?
  1184. 58:20थिंक अबाउट इट। कैन हेट एवर बी ऑोजिट ऑफ़
  1185. 58:22लव?
  1186. 58:23क्या प्यार का उल्टा नफरत हो सकती है?
  1187. 58:25बेहतर वर्ड है इनडिफरेंस। या तो आप किसी
  1188. 58:29से मोहब्बत करते हो या आपको फर्क भी नहीं
  1189. 58:31पड़ता कि साला वो जिंदा है या मर जाए। अब
  1190. 58:33जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूं ना
  1191. 58:35वो कहानी मुझे इससे भी एक स्टेप ऊपर लेकर
  1192. 58:37आई। वो कहानी बताती है कि प्यार का उल्टा
  1193. 58:40सिर्फ एक ही चीज हो सकती है।
  1194. 58:43अहंकार
  1195. 58:46जहां प्यार है वहां अहंकार आ ही नहीं
  1196. 58:49सकता। और जहां अहंकार आ जाए वहां प्यार की
  1197. 58:51कोई जगह नहीं। तो प्यार का उल्टा क्या?
  1198. 58:54अहंकार
  1199. 58:55ईगो। अब कहानी की तरफ चलते हैं। उस बड़े से
  1200. 58:59पेड़ को उस छोटे से बच्चे से प्रेम हो गया।
  1201. 59:04बड़ों को छोटों से प्रेम हो सकता है।
  1202. 59:06बसर्ते उन्हें पता ना हो कि वो बड़े हैं।
  1203. 59:08पेड़ नहीं जानता था वो बड़ा है, बच्चा छोटा
  1204. 59:10है। प्रेम है यार। हो गया। वहीं दूसरी तरफ
  1205. 59:13अहंकार। अहंकार हमेशा अपनों से बड़ों से
  1206. 59:17प्रेम करना चाहता है। जो दिखने में बेहतर
  1207. 59:19हो, औधे में बड़ा हो, पैसों में ज्यादा
  1208. 59:21हो, हम उससे प्यार करेंगे। मगर असल प्रेम
  1209. 59:23तो जहां दिल लग जाए वहां हो जाता है। पेड़
  1210. 59:27को बच्चे से हो गया। बच्चा हर दिन पेड़ के
  1211. 59:29ऊपर चढ़ता, उसकी शाखाओं से झूलता, उसके फल
  1212. 59:32तोड़ कर खाता, कुछ कच्चे फल टूट जाते, कुछ
  1213. 59:34शाखाएं टूट जाती। क्या पेड़ दुखी होता?
  1214. 59:38खुशी से नाच रहा होता कि वो आया तो सही वो
  1215. 59:41मेरे साथ तो है बहुत है लेकिन समय बढ़ता
  1216. 59:46चला गया अब वो बच्चा बड़ा होता चला गया अब
  1217. 59:49उसमें महत्वाकांक्षाएं आ गई थी उसे
  1218. 59:51परीक्षाएं पास करनी थी दोस्तों को जीतना
  1219. 59:53था तो वो कभी-कभी आ पाता और कभी-कभी नहीं
  1220. 59:56आ पाता। जब नहीं आ पाता तो पेड़ बड़ा उदास
  1221. 59:59हो जाता। देखो प्रेम की एक यही उदासी है
  1222. 1:00:02कि वो जब बांट नहीं पाता ना वो उदास हो
  1223. 1:00:06जाता है। बस उसे कोई बांटने वाला मिल जाए
  1224. 1:00:08जिसे वो सारा प्रेम दिखा दे दे। एक दफा वो
  1225. 1:00:11बच्चा जो थोड़ा सा बड़ा हो गया था वहां से
  1226. 1:00:13गुजरता था तो पेड़ ने अपने पत्तों की आवाज
  1227. 1:00:15करके उसे बुलाया आओ आओ मैं तुम्हारी राह
  1228. 1:00:18तकता हूं। ये गया और कहने लगा क्यों आऊं
  1229. 1:00:23मैं तुम्हारे पास? क्या है तुम्हारे पास
  1230. 1:00:25मुझे देने के लिए? अहंकार पूछता है
  1231. 1:00:28तुम्हारे पास क्या है कि मैं आऊं? मगर
  1232. 1:00:30बताओ प्रेम का कोई पर्पस होता है क्या?
  1233. 1:00:32प्रेम का कोई रीजन होता है क्या? वो तो
  1234. 1:00:35निष्प्रयोजन होता है, पर्पसलेस होता है।
  1235. 1:00:37उसने कहा मेरे पास समय नहीं है इन चीजों
  1236. 1:00:39के लिए। मुझे अभी पैसा कमाना है, धन कमाना
  1237. 1:00:41है। पैसे दे सकते हो?
  1238. 1:00:43पेड़ ने कहा पैसे।
  1239. 1:00:46ये तो तुम इंसानों की बनाई चीजें हैं। जिस
  1240. 1:00:48दिन हम पेड़ों ने भी पैसे बना लिए, उस दिन
  1241. 1:00:50तुम्हें हम मंदिरों में राम-राम करते
  1242. 1:00:51दिखेंगे।
  1243. 1:00:53लेकिन तुम्हें पैसे ही चाहिए ना, तो एक
  1244. 1:00:54काम करो।
  1245. 1:00:59मेरे सारे फल तोड़ लो। ये बाजार में ले
  1246. 1:01:02जाकर बेच देना। तुम्हें बड़ा अच्छा पैसा
  1247. 1:01:04मिल जाएगा। बच्चे को आईडिया अच्छा लगा।
  1248. 1:01:07बड़ी सी टोकरी ले आया। सारे फल तोड़ लिए।
  1249. 1:01:09टोकरी में भरे और चल दिया। पलट के धन्यवाद
  1250. 1:01:12तक नहीं किया। क्या पेड़ दुखी था?
  1251. 1:01:16बहुत खुश था कि कम से कम वो आया तो सही।
  1252. 1:01:19वो पेड़ अभी भी बस प्रतीक्षा कर रहा है।
  1253. 1:01:21इंतजार कि अब कब आएगा वो। अब कब आएगा?
  1254. 1:01:24प्रेम निरंतर प्रतीक्षा का नाम है बस
  1255. 1:01:27लेकिन अहंकार को सब कुछ चाहिए अभी इसी
  1256. 1:01:30वक्त यहीं पर
  1257. 1:01:32वो बच्चा थोड़ा बड़ा हो चुका था प्रॉड
  1258. 1:01:34आदमी बन चुका था एक दफा वहां से गुजरता था
  1259. 1:01:36तो पेड़ ने फिर अपने पत्तों की आवाज की
  1260. 1:01:37उसे बुलाया आओ आओ आओ मैं तुम्हारी राह
  1261. 1:01:40तकता हूं या गया और कहने लगा छोड़ो ये
  1262. 1:01:42बचपन की बातें फिजूल की बात हम जितना उम्र
  1263. 1:01:46में बड़े होते चले जाते हैं ना प्रेम के
  1264. 1:01:48पास आने की सुविधा उतनी ही कम होती चली
  1265. 1:01:51जाती है उसने कहा छोड़ो ये फिजूल की बातें
  1266. 1:01:54हैं। मेरे पास समय नहीं है। मुझे अभी घर
  1267. 1:01:56बनाना है। मकान बनाना है। घर दे सकते हो।
  1268. 1:02:00पेड़ ने कहा घर हम तो खुले आसमान के नीचे
  1269. 1:02:04रहते हैं। तुम्हें अगर घर चाहिए तो एक काम
  1270. 1:02:07करो।
  1271. 1:02:10मेरी सारी शाखाएं, ये लकड़ियां ये सब काट
  1272. 1:02:13लो। इसे तुम अपना घर बना लेना। बच्चे को
  1273. 1:02:17आईडिया अच्छा लगा। गया बड़ी सी आरी ले आया
  1274. 1:02:19और देखते ही देखते उसकी सारी शाखाएं काट
  1275. 1:02:21दी। अब इतना सा ठूंड भर बचा था पेड़ पास
  1276. 1:02:24और कुछ भी नहीं। पत्ते भी नहीं अब उसके
  1277. 1:02:26पास कि आवाज करके बुलाएगा कैसे? सारी
  1278. 1:02:29लकड़ी ली और बच्चा तो चल गया। पलट के
  1279. 1:02:32धन्यवाद तक नहीं किया। क्या पेड़ दुखी था?
  1280. 1:02:36बड़ा खुश था। प्रेम टूट कर भी आनंदित ही
  1281. 1:02:39होता है। लेकिन अहंकार सिर्फ तोड़ कर खुश
  1282. 1:02:43होता है। चला गया। इतना सा ठूक बचा है। बस
  1283. 1:02:47बहुत समय और बीत गया। अब ये बच्चा भी
  1284. 1:02:50बूढ़ा हो चुका था। एक बार यह खुद पेड़ के
  1285. 1:02:52पास गया। तो जैसे ही पेड़ के पास गया पेड़
  1286. 1:02:54ने पूछ लिया हां बताओ मैं तुम्हारे लिए और
  1287. 1:02:56क्या कर सकता हूं? वो भी जानता है बिना
  1288. 1:02:59काम के तो यह आएगा नहीं। लेकिन क्या पेड़
  1289. 1:03:01के सवाल में सरकाज्म या व्यंग है? प्यार
  1290. 1:03:04है, इनोसेंस है। हां बताओ मैं तुम्हारे
  1291. 1:03:06लिए और क्या कर सकता हूं? बूढ़े ने कहा,
  1292. 1:03:08"मुझे अभी दूर देश जाना है, धन कमाने है,
  1293. 1:03:10एक नाव चाहिए, नाव दे सकते हो?
  1294. 1:03:15मुझे और काट लो।"
  1295. 1:03:18कारी लाया इतना सा ठूठ बचाया पेड़ का बस
  1296. 1:03:21उस लकड़ी से एक नाव बनाई नाव में बैठकर
  1297. 1:03:23जाने लगा तो पेड़ चिल्ला दिया सुनो
  1298. 1:03:27हो सके तो जल्दी वापस आ जाना
  1299. 1:03:30तुम आसपास नहीं होते तो दिल बड़ा घबराता
  1300. 1:03:33है उदास हो जाता है हां ठीक है करके वो
  1301. 1:03:37नाव में बैठकर चला गया वो इतना सा ठूठ है
  1302. 1:03:40पेड़ का बस जंगल के बीचोंबीच अकेला
  1303. 1:03:43बूढ़ा सा मरने के करीब सिर्फ इस उम्मीद
  1304. 1:03:46में है कि कम से कम कोई खबर ला दे कि वो
  1305. 1:03:48ठीक तो है। वो भी जानता है पलट कर तो वापस
  1306. 1:03:50कभी नहीं आएगा। अब बस कोई खबर ला दे कि वो
  1307. 1:03:53ठीक तो है। कहीं उसकी नाव पलट तो नहीं गई।
  1308. 1:03:55कहीं उसे कुछ हो तो नहीं गया। इतना भी कोई
  1309. 1:03:57बता दे तो मैं खुशी-खुशी मर जाऊं।
  1310. 1:04:01कहानी खत्म।
  1311. 1:04:04यहां बैठा हर शख्स वो बच्चा है और वो पेड़
  1312. 1:04:07हमारे एम्ब्रोज है।
  1313. 1:04:09जिंदगी भर हमें सिर्फ देते रहते हैं, देते
  1314. 1:04:12रहते हैं, देते रहते हैं। बदले में कुछ
  1315. 1:04:13चाहते, कुछ मांगते नहीं है। पर हम गुस्से
  1316. 1:04:16में कितना बदतमीज हो जाते हैं।
  1317. 1:04:20ऐसी-ऐसी चीजें कह देते हैं हम रोजों से जो
  1318. 1:04:22सोचना भी खराब है। समझ गए आप किसकी बातें
  1319. 1:04:25कर रहा हूं मैं? सालों तक की उस परवरिश को
  1320. 1:04:28हम भूल जाते हैं। था जिसने बोलना सिखाया
  1321. 1:04:32अब हम उसी को चुप कराते हैं। कितने चाव से
  1322. 1:04:35सिखाई थी उन्होंने हमें गिनती। अब उन्हीं
  1323. 1:04:38की गलतियां गिनकर हम उन्हीं को सुनाते
  1324. 1:04:40हैं। सोते नहीं थे तब तक जब तक हम नहीं
  1325. 1:04:43सोते। आज फिर से हमारी वजह से वो सो नहीं
  1326. 1:04:46पाते हैं।
  1327. 1:04:49बचपन में हम तो लिपट जाते थे हक समझ कर जब
  1328. 1:04:51जी चाहे। बचपन यार हम तो लिपट जाते थे हक
  1329. 1:04:55समझ कर जब जी चाहे अब उनका मन करता है तो
  1330. 1:04:58हम कितना कतराते हैं और हमारे दिए घाव बसा
  1331. 1:05:02लेते हैं अपने सीने में मगर हमारी
  1332. 1:05:04अच्छाइयां सबको कितने गर्व से बताते हैं
  1333. 1:05:10देर अभी भी नहीं हुई ना बदल जाते हैं गलती
  1334. 1:05:15किसी की भी हो हाथ जोड़कर हम उन्हें मनाते
  1335. 1:05:18हैं पलकों पर बिठाते हैं सीने से लगाते
  1336. 1:05:20हैं जितनी मोहब्बत वो इम्ब्रोस तुमसे करते
  1337. 1:05:21हैं मेरा वादा मेरा दावा है तुमसे पूरे
  1338. 1:05:24जीवन में उतना प्यार तुमसे साला और कोई कर
  1339. 1:05:26ही नहीं सकता।
  1340. 1:05:30फैक्ट है
  1341. 1:05:33बट आई नो आई नो आई नो वो कहानी पेड़ वाली
  1342. 1:05:37अच्छी नहीं थी ना
  1343. 1:05:40खराब थी। एंडिंग खराब थी। कोई बात नहीं।
  1344. 1:05:45अपनी कहानी है। एंड बदल देते हैं।
  1345. 1:05:50वो बूढ़ा नाव लेकर वापस आता है। उसी ठूठ
  1346. 1:05:53के ऊपर जाकर बैठता है और कहता है कि माफ
  1347. 1:05:56करना मैं तुम्हारा प्यार कभी समझ नहीं
  1348. 1:05:58पाया। कहते हैं उस बूढ़े ने उसी ठूंठ के
  1349. 1:06:01ऊपर अपना दम तोड़ दिया और उसकी चिता उसी
  1350. 1:06:04लकड़ी पर रखकर जला रही। अब ठीक है।
  1351. 1:06:10ये
  1352. 1:06:11मेरी एंडिंग है। ये मेरी कहानी की एंडिंग
  1353. 1:06:14है। आपकी कहानी का अंत आपकी कहानी की
  1354. 1:06:17एंडिंग क्या होगी? ये आप आज तय करेंगे जब
  1355. 1:06:21आप यहां से जाएंगे। अगर यहां से जाने के
  1356. 1:06:24बाद किसी एक दो ने भी अपने-अपने
  1357. 1:06:25अम्ब्रोजों को आज गले लगा लिया तो काम
  1358. 1:06:27नहीं हो गया यहीं पर। लेकिन आज भी जब हमसे
  1359. 1:06:29वो कुछ पूछते हैं, कुछ चाहते हैं, कुछ
  1360. 1:06:31मांगते हैं। हमारे पास जवाब वही है पैटर्न
  1361. 1:06:33वाइज। क्या समय नहीं है हमारे पास? एक
  1362. 1:06:36गहरी सांस लो।
  1363. 1:06:39यहां बैठा हर शख्स एवरेजली अपनी आधी से
  1364. 1:06:42ज्यादा जिंदगी जी चुका है। और ऑनेस्टली
  1365. 1:06:44कोविड के बाद अब कोई भरोसा तो देखो है
  1366. 1:06:46नहीं। तो ऑनेस्टली स्पीकिंग समय नहीं है
  1367. 1:06:49अब हमारे पास। तो अपनी इस भागादौड़ी की
  1368. 1:06:53जिंदगी में से ढूंढ-ढूंढ के समय निकालो।
  1369. 1:06:55समय निकालो ऐसे बैठ जाने के लिए। समय
  1370. 1:06:59निकालो खो जाने के लिए, कहीं बह जाने के
  1371. 1:07:02लिए।
  1372. 1:07:03समय निकालो चांद के लिए, सुबह के लिए, घर
  1373. 1:07:06के लिए, हर अगर मगर के लिए, समय निकालो
  1374. 1:07:11आंखें बंद करने के लिए, महसूस करने के
  1375. 1:07:14लिए, गला फाड़ कर हंसने के लिए और दिल खोल
  1376. 1:07:17कर रोने के लिए, समय निकालो इकरार के लिए,
  1377. 1:07:20इजहार के लिए, बार-बार होने वाले उस एक ही
  1378. 1:07:23प्यार के लिए, रूठने के लिए, मनाने के
  1379. 1:07:26लिए, साथ मिलकर घर सजाने के लिए। समय
  1380. 1:07:30निकालो एक अच्छी किताब के लिए। पन्नों के
  1381. 1:07:33बीच पड़े उस गुलाब के लिए सालों से ढूंढ
  1382. 1:07:35रहे हो जिसे अपने उस एक जवाब के लिए समय
  1383. 1:07:39निकालो समय निकालो अपने बचपन वाले ख्वाब
  1384. 1:07:42के लिए अपने आप के लिए और कुछ नहीं तो एक
  1385. 1:07:47दिन बिना वजह यूं ही मुस्कुरा दो कैसे
  1386. 1:07:51करके देखो अच्छा लगता है एवरीवन
  1387. 1:07:55समय निकालो अपने बचपन वाले ख्वाब के लिए
  1388. 1:07:57अपने आप के लिए और कुछ नहीं तो एक दिन
  1389. 1:08:00बिना वजह यूं ही मुस्कुरा दो अपने मां-बाप
  1390. 1:08:03के लिए समय निकालो।
  1391. 1:08:12समय निकालो वरना समय
  1392. 1:08:15निकल जाएगा।
  1393. 1:08:16निकल जाएगा और हम यहीं बैठे रह जाएंगे। आप
  1394. 1:08:20सब ने समय निकाला है आज आकर ये बातें
  1395. 1:08:22सुनने के लिए। तो मेरी दुआ है दिल से आप
  1396. 1:08:24सभी के लिए कि आपको आपके एम्ब्रोज मिल
  1397. 1:08:27जाएं। आप अपने एम्ब्रोजों को समझ जाओ। आप
  1398. 1:08:29अपने अमरोजों को दिल से लगा लो और उनके
  1399. 1:08:31प्रति अपना प्रेम उन्हें हर दिन बताते
  1400. 1:08:33रहो। क्योंकि ध्यान रखना कभी गलती से अगर
  1401. 1:08:36वो रिग्रेट वो मलाल बीच में आ गया तो आप
  1402. 1:08:38भी अमृता की तरह यही कहते रह जाएंगे कि
  1403. 1:08:41मेरे साथी मेरे राही मैं तेनु
  1404. 1:08:44मैं तेनु
  1405. 1:08:46मैं तेनु
  1406. 1:08:48थैंक यू लेडी एंड जेंटलमैन
  1407. 1:09:34ये सारे के सारे किस्से कहानियां सब
  1408. 1:09:36किताबों से आई हैं। सुनी-सुनाई बातों से
  1409. 1:09:39बोलचाल से आई हैं। अब इसमें फंस के मत रह
  1410. 1:09:41जाना कि यह तब नहीं तब हुआ था। इसने नहीं
  1411. 1:09:45उसने कहा था। ऐसे नहीं वैसे बोला था।
  1412. 1:09:48प्लीज इन बातों से अपना ध्यान हटाना। इस
  1413. 1:09:51कहानी को अपने अंदर संभालना और अपनेपने
  1414. 1:09:54इम्रोजों को गले जरूर लगाना।
  1415. 1:10:08हम
  1416. 1:10:35हम

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