YouTube2Text

बदमाश लक्कड़बग्घा और चालाक हिरण | Hyena story | Hindi kahaniya | Stories in Hindi | Animal stories — Transcript

by Dream Jungle · 2,636 words · 346 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:04जंगल में एक खूंखार लकड़बग्घा रहता था और
  2. 0:08उससे जंगल के सभी जानवर बहुत डरते थे।
  3. 0:11भैया अब यहां पर खड़ा रहना ठीक नहीं है।
  4. 0:13क्यों? अब क्या हो गया यहां पर? हमको
  5. 0:15थोड़ी देर ही तो हुई है।
  6. 0:17अरे आपको नहीं पता अब वो खूंखार लकड़बग्गा
  7. 0:19शिकार पर निकलने वाला है। अगर उसकी नजर हम
  8. 0:22पर पड़ गई तो यहीं पर चीर फाड़ कर खा
  9. 0:24जाएगा। और मैंने सुना है कि लकड़बग्गे
  10. 0:26शिकार को मारते नहीं है। उसको जिंदा ही
  11. 0:28खाने लग जाते हैं। जिससे शिकार को बहुत
  12. 0:30ज्यादा दर्द होता है।
  13. 0:33अरे हां, यह तुमने बहुत सही समय पर याद
  14. 0:35दिलाया। इससे पहले वो खूंखार लकड़बग्गा
  15. 0:38यहां पर आ जाए उससे पहले यहां से कलटी मार
  16. 0:40लेते हैं।
  17. 0:41डंकी और डियर वहां से कलटी मार गए।
  18. 0:47कुछ देर बाद वहां से वो खूंखार लकड़बग्घा
  19. 0:50गुजरा।
  20. 0:56काफी दूर से पैदल चलता हुआ आ रहा हूं।
  21. 1:00लेकिन मुझको रास्ते में एक भी जानवर नहीं
  22. 1:02मिला। क्या सारे जानवर इस जंगल को छोड़कर
  23. 1:05चले गए या फिर उनको मेरे बाहर निकलने का
  24. 1:08समय मालूम हो गया हो। जिस समय मैं बाहर
  25. 1:10निकलता हूं शायद वह ना निकलते हो। अब
  26. 1:13मुझको अपना जंगल आने का समय बदलना होगा।
  27. 1:19चलो मेरे बच्चों जल्दी-जल्दी चलो। इससे
  28. 1:22पहले दोपहर हो जाए और वह खूंखार लकड़बग्घा
  29. 1:25शिकार के लिए निकले। हमको दोपहर होने से
  30. 1:28पहले अपना भोजन लेकर घर लौटना होगा। पर
  31. 1:31मम्मा हम उस लकड़बग्घे से डरते क्यों हैं?
  32. 1:34वो इसलिए बेटा वो लकड़बग्घा बहुत जालिम और
  33. 1:37खूंखार शिकारी है। वो किसी पर दया नहीं
  34. 1:40करता। अगर उसको एक बार शिकार दिख गया तो
  35. 1:43वो उसको जिंदा ही फाड़ डालता है। इसीलिए
  36. 1:45मेरे बच्चों पूरा जंगल उस लकड़बग्घे से
  37. 1:48डरता है। इसीलिए दोपहर को कोई बाहर नहीं
  38. 1:51निकलता। पर मम्मा अगर लकड़बग्गा दोपहर की
  39. 1:54जगह सुबह शिकार पर निकल आया तो बेटा ऐसा
  40. 1:57कभी हुआ नहीं है। अगर ऐसा होगा तो जंगल
  41. 2:00में बहुत बड़ा संकट आ जाएगा। पर मम्मा
  42. 2:02संकट से लड़ने के लिए हमारे जंगल में राजा
  43. 2:05तो है ना। वो उस लकड़बग्घे का मुकाबला
  44. 2:07करेंगे। अरे बेटा पूरे जंगल में ऐसा कोई
  45. 2:11नहीं है जो उस लकड़बग्े से लोहा ले सके।
  46. 2:13और रही बात हमारे राजा की तो हमारे राजा
  47. 2:16भी उस लकड़बघे से थर-थर कांपते हैं। चलो
  48. 2:19बेटा अपना पेट तुम जल्दी-जल्दी भर लो। फिर
  49. 2:21हम दोपहर होने से पहले घर चले जाएंगे।
  50. 2:24और लकड़बग्घे ने अपना समय बदल दिया। अब वो
  51. 2:27दोपहर की बजाय सुबह जाने लगा।
  52. 2:30अरे यह क्या? मुझे तो यहां पर किसी बकरी
  53. 2:33की गंध आ रही है और ऐसा लग रहा है जैसे
  54. 2:35बकरी अपने परिवार के साथ में आई हो। अगर
  55. 2:38मेरी सूंघने की क्षमता सही निकलती है तो
  56. 2:41मुझको आज का भोजन मिल जाएगा।
  57. 2:43और उस बकरी की गंध लेते हुए वो लकड़बग्घा
  58. 2:46भी उसी ओर आ गया।
  59. 2:49तभी उसकी नजर बकरी के परिवार पर पड़ जाती
  60. 2:52है जो जंगल से घर की ओर लौट रहा था और
  61. 2:55लकड़बग्घा चुपचाप जाकर बकरी के एक बच्चे
  62. 2:58को शिकार बना लेता है।
  63. 3:05बकरी ने घर जाकर देखा तो उसका एक बच्चा
  64. 3:08उसके पास नहीं था।
  65. 3:11अरे मेरा एक बच्चा कहां चला गया? कहीं ऐसा
  66. 3:14तो नहीं है वो जंगल में ही रह गया हो।
  67. 3:16मैंने तो अपने बच्चे पर ध्यान ही नहीं
  68. 3:18दिया। कहीं किसी शिकारी ने उसको शिकार ना
  69. 3:20बना लिया हो। मुझको जल्दी जाना चाहिए।
  70. 3:22और बकरी ने जंगल में जाकर देखा तो खूंखार
  71. 3:26लकड़बग्घा उसके बच्चे को खा चुका था। हे
  72. 3:29भगवान इस खूंखार लकड़बग्घे ने तो मेरे
  73. 3:31बच्चे को खा लिया। अगर मैंने इसको कुछ
  74. 3:33बोला तो यह मुझको भी फाड़ कर खा जाएगा। एक
  75. 3:36काम करती हूं राजा के पास जाकर इसकी
  76. 3:39शिकायत करती हूं। वो इसको अच्छा सबक
  77. 3:41सिखाएंगे।
  78. 3:42और बकरी सीधे राजा के पास चली गई।
  79. 3:46महाराज मेरे साथ इंसाफ कीजिए। मुझे न्याय
  80. 3:49दीजिए महाराज।
  81. 3:50तुम्हारे साथ न्याय जरूर होगा। बताओ किसने
  82. 3:53अन्याय किया है तुम्हारे साथ? महाराज, एक
  83. 3:55लकड़बग्घे ने मेरे बच्चे को मार दिया और
  84. 3:58वह उसका मांस खा रहा है। आप उसको इतनी
  85. 4:00भयानक सजा दो कि वह दोबारा किसी के बच्चे
  86. 4:03को अपना शिकार ना बना सके।
  87. 4:05तुम चिंता मत करो। तुम्हारे साथ न्याय
  88. 4:07जरूर होगा। महामंत्री तुम शीघ्र जाओ और उस
  89. 4:10लकड़बग्े को हमारे दरबार में बुलाकर लाओ।
  90. 4:19क्यों बे लकड़बग्घे? तूने बकरी के बच्चे
  91. 4:21को अपना शिकार बनाया। क्यों बे मंत्री?
  92. 4:24इतना क्यों गला फाड़ रहा है तू? मैंने कौन
  93. 4:26से तेरे बच्चे को शिकार बनाया है? एक बकरी
  94. 4:29का ही तो बच्चा था। मुझे भूख लगी थी।
  95. 4:31मैंने पकड़ कर खा लिया। इसमें गलत क्या
  96. 4:33है?
  97. 4:34गलत और सही का फैसला करने वाला तू कौन
  98. 4:36होता है? गलत और सही का फैसला महाराज
  99. 4:38करेंगे। तुझको दरबार में मेरे साथ चलना
  100. 4:41होगा। चल मेरे साथ।
  101. 4:42महाराज कौन होते हैं मेरा फैसला करने
  102. 4:44वाले? जो ज्यादा ताकतवर होगा वह अपना
  103. 4:47फैसला स्वयं करेगा। जाओ मैं नहीं आता
  104. 4:50तुम्हारे साथ।
  105. 4:52अगर तू मेरे साथ नहीं आया तो मैं तुमको
  106. 4:55जिंदा या मुर्दा लेकर ही जाऊंगा और तुमको
  107. 4:57हर हाल में राजा के दरबार में जाना ही
  108. 4:59होगा। इसलिए अच्छा है कि तुम जिंदा ही
  109. 5:01चलो।
  110. 5:03मुझे लगता है मंत्री तुझको ही मुर्दा
  111. 5:05पहुंचाना पड़ेगा तेरे दरबार में। मैं नहीं
  112. 5:08चाहता कि राजा के साथ मेरा कोई झगड़ा हो।
  113. 5:10पर तुमने मुझे झगड़ा करने पर विवश कर दिया
  114. 5:13है। आज मैं तुझको ऐसा मजा चखाऊंगा। तू तो
  115. 5:16क्या जंगल का कोई भी जानवर मुझे बुलाने के
  116. 5:19लिए मेरे पास नहीं आएगा।
  117. 5:22और लकड़बग्े ने इतना कहकर महामंत्री के
  118. 5:25ऊपर हमला कर दिया
  119. 5:28और कुछ ही देर में महामंत्री को घायल कर
  120. 5:31दिया। महामंत्री वहां से अपनी जान बचाकर
  121. 5:34भाग गया।
  122. 5:37महाराज वो लकड़बग्गा सच में बहुत खूंखार
  123. 5:39है। उसने मेरे साथ आने से मना कर दिया और
  124. 5:41जब मैंने उसको जबरदस्ती लाने की कोशिश की
  125. 5:44तो उसने मुझको बहुत बुरे तरीके से घायल कर
  126. 5:46दिया और मैं बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचा
  127. 5:48कर आया हूं। मुझे नहीं लगता जंगल का कोई
  128. 5:50भी जानवर उसको पकड़ कर आपके पास ला पाएगा।
  129. 5:54कोई बात नहीं है महामंत्री। हम स्वयं
  130. 5:56जाएंगे उसके पास और उसको सजा भी देंगे।
  131. 5:58मेरी बात मानो महाराज। आप अकेले मत जाओ।
  132. 6:01आप अपनी सहायता के लिए किसी ताकतवर जानवर
  133. 6:03को ले जाओ। वो लकड़बग्गा सच में बहुत
  134. 6:05खूंखार है। कहीं वह आपके ऊपर भी हमला ना
  135. 6:07कर दे।
  136. 6:08हम जंगल के राजा हैं और हमसे ताकतवर जंगल
  137. 6:11में कोई दूसरा प्राणी नहीं है। हम उस
  138. 6:13लकड़बग्घे को अच्छा सबक सिखाएंगे और उसको
  139. 6:15कड़ी से कड़ी सजा देंगे। बस तुम हमारा
  140. 6:18इंतजार करो यहीं पर।
  141. 6:26और जंगल का राजा लकड़बग्घे के पास पहुंचा।
  142. 6:29लकड़बग्घा सोया हुआ था।
  143. 6:31यह लकड़बग्घा तो सोया हुआ है। इसको जगाना
  144. 6:34होगा क्योंकि हम सोते हुए को सजा नहीं दे
  145. 6:36सकते। अरे ओ लकड़बघ्घे अपनी जान की सलामती
  146. 6:39चाहता है तो सीधी तरह से हमारे राज दरबार
  147. 6:42में चल। वरना हम तुझको यहां से घसीट कर
  148. 6:44लेकर जाएंगे। मेरे पास आकर और मुझको ही
  149. 6:47धमकी दे रहे हो। तुमको अपनी जान की परवाह
  150. 6:50नहीं है क्या शेर सिंह? तुमको क्या लगा
  151. 6:52मैं सोया हुआ हूं। तुम नहीं जानते मैं
  152. 6:54जंगल का सबसे ताकतवर जानवर हूं। मैं नींद
  153. 6:57में भी सचेत रहता हूं। यह तो बहुत अच्छी
  154. 7:00बात है कि तुम नींद में भी सचेत रहते हो।
  155. 7:02मैं चाहता हूं तुम जागते हुए भी सचेत रहो
  156. 7:04और तुम्हें हमेशा यह याद रहे कि हमारे
  157. 7:06जंगल में रहना है तो तुमको हमारे बनाए
  158. 7:08नियमों का पालन करना होगा। तुम आज से किसी
  159. 7:11भी जानवर का शिकार नहीं करोगे और ना किसी
  160. 7:13के बच्चे को अपना शिकार बनाओगे। समझे
  161. 7:15लकड़बग्घा? मैं तुम्हारे बनाए हुए किसी भी
  162. 7:18नियम को नहीं मानूंगा और वैसे भी जंगल का
  163. 7:21उसूल होता है। जो ताकतवर रहेगा वह अपने
  164. 7:23नियम स्वयं बनाएगा। इसीलिए मुझको तुम्हारे
  165. 7:26नियमों को मानने की आवश्यकता नहीं है। इस
  166. 7:29समय मुझसे ताकतवर जानवर जंगल में दूसरा
  167. 7:31कोई नहीं है। और मेरी एक सलाह है। तुम
  168. 7:34अपने नियम अपने पास रखो और मुझे अकेला
  169. 7:37छोड़ दो। वरना तुम्हारा अंजाम भी वही होगा
  170. 7:40जो तुम्हारे मंत्री का हुआ है।
  171. 7:43लकड़बघ्घे की बात सुनकर शेर की हवा निकल
  172. 7:46गई लेकिन वो राजा था। उसने हिम्मत दिखाई
  173. 7:49और लकड़बग्घे को अंतिम चेतावनी दे डाली।
  174. 7:52आज फैसला हो ही जाए कि जंगल का कौन ताकतवर
  175. 7:55जानवर है। अगर तू आज मेरे साथ नहीं गया तो
  176. 7:58मैं तुझको मार डालूंगा और तुझको जिंदा या
  177. 8:01मुर्दा अपने दरबार में अवश्य लेकर जाऊंगा।
  178. 8:04तो हो जाए मुकाबला फिर जिस तरीके से मैंने
  179. 8:07तेरे मंत्री को मारा है उससे भी भयानक
  180. 8:09तरीके से मैं तुझे मारूंगा
  181. 8:17[चीखने की आवाज़]
  182. 8:21और दोनों ने एक दूसरे के ऊपर हमला कर
  183. 8:24दिया। लकड़बघा बहुत खूंखार था और शेर सिंह
  184. 8:27वहां से अपनी जान बचाकर भाग गया।
  185. 8:31अगर दोबारा मेरे पास आया तो तुझे जान से
  186. 8:34मार दूंगा। होगा तू राजा अपने वहां का।
  187. 8:37लेकिन इस जंगल का सबसे ताकतवर जानवर मैं
  188. 8:39हूं। इसीलिए खुद का फैसला मैं खुद ही
  189. 8:42करूंगा।
  190. 8:42क्या हुआ महाराज? आपकी हालत को देखकर तो
  191. 8:44लग रहा है कि लकड़बग्गे ने आपको भी अच्छे
  192. 8:46तरीके से रगड़ दिया है।
  193. 8:49हां, तुमने बिल्कुल ठीक कहा था महामंत्री।
  194. 8:51वो लकड़बग्गा सच में बहुत ज्यादा ताकतवर
  195. 8:54और खतरनाक है। उससे मैं तो क्या मेरे जैसे
  196. 8:57दो शेर मिलकर भी उसका मुकाबला नहीं कर
  197. 8:59सकते। मुझे लगता है अब जंगल में लकड़बग्घा
  198. 9:01अपनी मनमानी करेगा और वह जंगल के प्रत्येक
  199. 9:04जानवर को अपना शिकार बना लेगा।
  200. 9:06लेकिन महाराज यह तो बहुत गलत बात है। आप
  201. 9:08इस जंगल के राजा हो और सभी जानवर आपके
  202. 9:11बनाए हुए फैसले को मानते हैं। फिर यह
  203. 9:12लकड़बग्गा किस खेत की मूली है? क्यों ना
  204. 9:14हम दोनों एक साथ उसका मुकाबला करें। चाहे
  205. 9:17फिर हम पूरी तरीके से क्यों ना मर जाएं या
  206. 9:19फिर उस लकड़बग्गे को मार देंगे।
  207. 9:20नहीं, उस लकड़बग्े के हाथों से मरने से
  208. 9:23अच्छा है हम कुछ और तरकीब निकाले। तुम एक
  209. 9:25काम करो तुम डियर को बुलाकर लाओ। अब वही
  210. 9:28समस्या का कुछ हल निकालेगा।
  211. 9:35और मंत्री डियर के पास पहुंचा और उसको
  212. 9:38जंगल की पूरी सच्चाई बता दी और डियर को
  213. 9:41अपने साथ ले आया।
  214. 9:47डियर, तुम आ गए? हमको तुम्हारा बहुत
  215. 9:49बेसब्री से इंतजार था। तुमको तो महामंत्री
  216. 9:52ने बता दिया होगा कि मुझको और महामंत्री
  217. 9:54दोनों को उस लकड़बग्घे ने बुरी तरीके से
  218. 9:56पीटा है। अगर हम भाग कर नहीं आते तो वह
  219. 9:59हमको मार देता।
  220. 10:00हां, मुझे महामंत्री ने सब कुछ बता दिया
  221. 10:03है। अब सवाल यह होता है कि जंगल का कौन सा
  222. 10:05प्राणी है जो उसको अच्छा सबक सिखा सके और
  223. 10:08उसको इस जंगल से बाहर निकाल सके।
  224. 10:10हां, तो अब तुम एक अच्छा सा उपाय बताओ
  225. 10:12जिससे हम उस लकड़बग्े से छुटकारा पा सके।
  226. 10:15आप चिंता मत करो महाराज। वो लकड़बग्गा कल
  227. 10:17इस जंगल में दिखाई नहीं देगा। और डियर
  228. 10:19वहां से चला गया।
  229. 10:26लकड़बघ्घा एक पेड़ के नीचे बैठा था।
  230. 10:29अरे आज शिकार खुद चलकर मेरे पास आ रहा है।
  231. 10:32बहुत दिन हो गए हैं हिरण का मांस नहीं
  232. 10:35खाया। आज तो मैं इस हिरण की दावत
  233. 10:37उड़ाऊंगा। [हंसी]
  234. 10:41अरे लकड़बग्गे भाई तुम यहां पर बैठे हो और
  235. 10:44मैं तुमको पूरे जंगल में पागलों की तरह
  236. 10:46ढूंढ रहा था। मुझे तुमको एक खुशखबरी देनी
  237. 10:48तू यहां पर खुद चलकर आ गया है। इससे
  238. 10:51ज्यादा खुशखबरी और क्या होगी? मुझे आज
  239. 10:53बैठे-बैठे ही खाना मिल गया। अब मैं तुझको
  240. 10:56चीर फाड़ कर खा जाऊंगा। हा अरे वह सब तो
  241. 11:00बाद की बात है। मैं कौन सा यहां से भागे
  242. 11:02जा रहा हूं। मैं तो अपने आप को भाग्यशाली
  243. 11:04मानता हूं कि आप जैसा ताकतवर प्राणी मुझे
  244. 11:07अपना शिकार बनाएगा। मुझे तो इस बात का भय
  245. 11:09लग रहा था कि कहीं कोई बाघ या भेड़िया
  246. 11:11मुझे अपना शिकार ना बना ले। क्योंकि मैं
  247. 11:13उन बुजदिलों का भोजन नहीं बनना चाहता। पर
  248. 11:15मैं आपके लिए एक अच्छी खबर लेकर आया हूं
  249. 11:17लकड़बग्ग भाई।
  250. 11:18जल्दी बता फिर क्या है वह अच्छी खबर?
  251. 11:20तुमने कभी ऑमलेट खाया है अंडे का जो खासकर
  252. 11:23मुर्गी के अंडे से बनता है?
  253. 11:24नहीं मैंने तो वो तो कभी नहीं खाया। क्या
  254. 11:27ऐसा भी कोई ऑमलेट बनता है क्या मुर्गी के
  255. 11:30अंडे से?
  256. 11:30हां, बनता है और वह खाने में बहुत स्वाद
  257. 11:32होता है। अगर तुमको अंडे का ऑमलेट खाना है
  258. 11:35तो तुमको कल दोपहर को हाथी के पास आना
  259. 11:37होगा। और उसी के पास मुर्गी ने अंडे रखे
  260. 11:39हैं। अगर तुम हाथी के पास से अंडे ले लो
  261. 11:42तो तुम जंगल के पहले जानवर बन जाओगे जिसने
  262. 11:44अंडे से ऑमलेट बनाकर खाया है। और जब भी
  263. 11:46अंडे का ऑमलेट कोई बनाएगा तो तुम्हारा
  264. 11:48जिक्र जरूर किया जाएगा।
  265. 11:51हां हिरण भाई मैं जरूर अंडे का ऑमलेट
  266. 11:54बनाकर खाऊंगा। चाहे कुछ भी हो जाए। कल उस
  267. 11:57हाथी से अंडे लेकर ही आऊंगा और ऑमलेट
  268. 12:00बनाकर खाऊंगा।
  269. 12:01और हिरण वहां से चला गया।
  270. 12:08और जाकर मुर्गी के पास पहुंचा।
  271. 12:10अरे मुर्गी बहन तुमको पता है आज तुम पर
  272. 12:13बहुत बड़ा खतरा आने वाला है।
  273. 12:14हे भगवान खतरा मैं तो बहुत छोटी सी हूं।
  274. 12:18भला मैं इतने बड़े खतरे का सामना कैसे कर
  275. 12:21पाऊंगी? वैसे क्या है वो खतरा?
  276. 12:23वो खतरा है एक लकड़बग्घा जो तुम्हारे
  277. 12:25अंडों पर अपनी नजर गड़ाए हुए है और वो
  278. 12:27तुम्हारे अंडों से ऑमलेट बनाकर खाने वाला
  279. 12:29है। अगर तुम अपने अंडों को बचाना चाहती हो
  280. 12:31तो तुम यहां से भाग जाओ। लेकिन हिरन भाई
  281. 12:34मैं उस लकड़बग्घे से कब तक भाग सकती हूं।
  282. 12:37वो एक ना एक दिन मुझको और मेरे अंडों को
  283. 12:39खा ही जाएगा। अब आप ही मुझको कोई उपाय
  284. 12:42बताओ जिससे मैं अपने अंडों को उस
  285. 12:44लकड़बग्घे से बचा सकूं।
  286. 12:46तो तुम एक काम करो तुम हाथी दादा के पास
  287. 12:48चले जाओ। कोई भी जानवर हाथी दादा से पंगा
  288. 12:50लेना नहीं चाहता। अगर तुम उनके पास अपने
  289. 12:52अंडे रख दो फिर लकड़बग्घा तो क्या उसका
  290. 12:55बाप भी वहां से अंडे नहीं ले सकता।
  291. 12:57ठीक है हिरन भाई। मैं आज ही अपने अंडे
  292. 12:59हाथी दादा के पास रख आती हूं।
  293. 13:02और मुर्गी हाथी दादा के पास जाकर अंडे रख
  294. 13:06देती है। [संगीत]
  295. 13:09हाथी दादा आप मेरे अंडों को अपने पास रख
  296. 13:12लो। एक लकड़बग्घा मेरे अंडों को खाना
  297. 13:15चाहता है। क्या आप मेरी मदद नहीं करोगे?
  298. 13:17मैं सबसे कमजोर पक्षी हूं जो उड़ भी नहीं
  299. 13:20सकती। भला मैं अपने अंडों की रक्षा कैसे
  300. 13:23कर पाऊंगी हाथी दादा। आप मेरे अंडों की
  301. 13:25रक्षा करना।
  302. 13:27तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो। तुम्हारे
  303. 13:28अंडे मेरे पास सुरक्षित रहेंगे। आने दो उस
  304. 13:31लकड़बग्गे को। अगर मैंने उसके दांत नहीं
  305. 13:33तोड़े तो मेरा नाम भी हाथी दादा नहीं। अरे
  306. 13:36यह दोपहर भी तो नहीं हो रही। आज तो मुझको
  307. 13:39दोपहर का बहुत बेसब्री से इंतजार है। हिरण
  308. 13:42भाई ने बताया था कि अंडे का ऑमलेट खाने
  309. 13:44वाला मैं पहला जानवर बनूंगा और जब भी अंडे
  310. 13:47का ऑमलेट बनेगा तो मेरा जिक्र जरूर होगा।
  311. 13:50अब बस दोपहर हो जाए फिर मैं अंडे का ऑमलेट
  312. 13:53खाऊंगा।
  313. 13:53फिर कुछ समय बाद दोपहर हो गया। और
  314. 13:56लकड़बघ्घा हाथी के पास चला गया अंडे लेने
  315. 13:59के लिए।
  316. 14:01[चीखने की आवाज़]
  317. 14:02अरे ओ हाथी चल उस मुर्गी के अंडों को मुझे
  318. 14:05दे दे और मुझको उनका ऑमलेट बनाकर खाने दे।
  319. 14:08मुझे पहले ही पता था तू यहां पर अपने दांत
  320. 14:10तुड़वाने के लिए जरूर आएगा। इसीलिए मैंने
  321. 14:12पहले ही तेरा बंदोबस्त कर दिया था। तुझको
  322. 14:15एक मासूम अबला मुर्गी के अंडों को खाते
  323. 14:17हुए शर्म नहीं आती? अगर कोई तेरे बच्चों
  324. 14:20को मार कर खाए तो तुझे कैसा लगेगा? अरे
  325. 14:22मैं यहां पर तेरा प्रवचन सुनने के लिए
  326. 14:24नहीं आया। शायद तू नहीं जानता कि मुझसे
  327. 14:27जंगल का राजा भी दहशत खाता है। मैं अभी
  328. 14:30तुझको अपने ताकतवर जबड़े और नुकीले दांतों
  329. 14:32का कमाल दिखाता हूं और अभी तेरी सूंड को
  330. 14:35काट कर अलग करता हूं।
  331. 14:36और जैसे ही लकड़बग्घा हाथी दादा की सूंड
  332. 14:39की तरफ बढा
  333. 14:41तो हाथी दादा ने उसको जोरदार एक टक्कर मार
  334. 14:44दी जिससे लकड़बग्घे के होश उड़ गए।
  335. 14:49अरे बाप रे इसने तो एक ही बार में मुझको
  336. 14:51अधमरा कर दिया। अगर मैं दोबारा इसके पास
  337. 14:54गया तो यह मुझको मार डालेगा और गलती से
  338. 14:57इसने मेरे ऊपर अपना पैर रख दिया तो मेरा
  339. 14:59कचुंबर ही निकल जाएगा। इससे पहले कि यह
  340. 15:02मुझे मार डाले मैं यहां से भाग जाता हूं।
  341. 15:07[संगीत]
  342. 15:10अरे भागता कहां है कायर? अगर दोबारा तू
  343. 15:13मुझको इस जंगल में दिखा, तो मैं तेरा खून
  344. 15:15पी जाऊंगा।
  345. 15:16अरे वाह, मेरी तरकीब काम कर गई। सांप भी
  346. 15:19मर गया और लाठी भी नहीं टूटी।

About this transcript

This page contains the full transcript of बदमाश लक्कड़बग्घा और चालाक हिरण | Hyena story | Hindi kahaniya | Stories in Hindi | Animal stories by Dream Jungle , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 2,636 words across 346 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

What you can do with it

Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.

Free YouTube transcript tool

YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.