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How to Stop Getting Attached Too Fast (Without Becoming Cold or Emotionless) (Ep #29) — Transcript

by Anshuman Joshi · 3,426 words · 443 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00द रीज़न यू गेट अटैच्ड टू फास्ट इज़ नॉट
  2. 0:02बिकॉज़ यू फील टू मच। इट्स बिकॉज़ यू डोंट
  3. 0:05फील इनफ इनसाइड योरसेल्फ व्हेन यू आर
  4. 0:07अलोन। तुम अपने इमोशंस को डेप्थ का नाम
  5. 0:09देते हो। बट असल में वो तुम्हारे खालीपन
  6. 0:11को कवर करने के लिए एक शॉर्टकट होता है।
  7. 0:13जब कोई थोड़ा सा तुम्हें अटेंशन देता है।
  8. 0:15थोड़ी सी तुम्हारी बात सुनता है तो
  9. 0:17तुम्हारा दिमाग ऑटोमेटिकली उसे सेफ्टी
  10. 0:19डिक्लेअर कर देता है। यहां पे तुम चूज़
  11. 0:20नहीं करते हो। बल्कि जहां से भी तुम्हें
  12. 0:22रिलीफ मिल रहा होता है तुम उसे ही गैब कर
  13. 0:24लेते हो। और रिलीफ हमेशा जल्दी चिपकता है।
  14. 0:26क्योंकि इसका काम सोचना नहीं होता। इसका
  15. 0:28काम होता है कि तुम्हारे पेन को सिर्फ
  16. 0:30टेंपरेरी म्यूट कर दे। अब यहां पर
  17. 0:32तुम्हारी अटैचमेंट कनेक्शन नहीं है। यह
  18. 0:34तुम्हारी एनस्थीसिया बन चुकी है। तुम्हें
  19. 0:35लगता है कि तुम इमोशनली अवेलेबल हो। जबकि
  20. 0:38असलियत में तुम इमोशनली हंग्री हो। पर एक
  21. 0:40भूखे इंसान के खाने को लेकर प्रेफरेंस
  22. 0:42नहीं होती कि मुझे यह चाहिए या फिर यह
  23. 0:44चाहिए। उसे जो मिलता है वो खा लेता है।
  24. 0:46इसी तरह हम लोगों को बिना समझे उन पे
  25. 0:48इन्वेस्ट कर देते हैं। तुम अपनी स्पीड को
  26. 0:50पैशन बोल देते हो। बट असल में यह इंपेशेंस
  27. 0:53है जो तुम्हारे खालीपन से पैदा हुआ है।
  28. 0:55तुम धीरे-धीरे अटैच होना अफोर्ड ही नहीं
  29. 0:57कर सकते क्योंकि धीरे करने पर तुम्हें खुद
  30. 0:59के साथ भी बैठना पड़ेगा और खुद के साथ
  31. 1:01बैठना तुम्हारा सबसे बड़ा नाइट मेयर है।
  32. 1:03तुम अपने अटैचमेंट को प्यार बोलकर
  33. 1:05जस्टिफाई कर देते हो ताकि तुम्हें अपनी
  34. 1:06डिपेंडेंसी एक्सेप्ट ना करनी पड़े।
  35. 1:08क्योंकि अगर तुम यह एक्सेप्ट कर लो कि तुम
  36. 1:10अटैच हो रहे हो क्योंकि तुम इनसिक्योर हो
  37. 1:12तो फिर तुम्हें अपने आप की
  38. 1:13रिस्पांसिबिलिटी लेनी पड़ेगी। इसीलिए
  39. 1:15तुम्हारा ईगो बोलता है कि आई जस्ट लव
  40. 1:17डीपली। डीप नहीं हो तुम। तुम बाउंड्री लेस
  41. 1:19हो। और बाउंड्री लेस होना कोई वर्चू नहीं
  42. 1:21होता। यह सिर्फ इमोशनल कन्फ्यूजन होता है।
  43. 1:23जहां बाउंड्रीज नहीं होती, वहां
  44. 1:25इंडिविजुअलिटी भी धीरे-धीरे मरने लगती है।
  45. 1:27तुम्हारा दिमाग प्रेडिक्टबिलिटी को सेफ
  46. 1:29समझता है। जब भी कोई जाना पहचाना इमोशनल
  47. 1:31पैटर्न दिखता है, तुम सीधा उसके ऊपर कूद
  48. 1:33पड़ते हो। चाहे वो पैटर्न टॉक्सिक हो,
  49. 1:35चाहे वो इनकंसिस्टेंट हो, पर क्योंकि वो
  50. 1:37पहले से जाना पहचाना है, तो तुम्हारा
  51. 1:39नर्वस सिस्टम उसे घर जैसा फील करवाता है।
  52. 1:41तुम फ्यूचर का रिस्क नहीं देखते हो। तुम
  53. 1:43अपने पास्ट के कंफर्ट को चस कर रहे होते
  54. 1:45हो। और फिर इसी को लोग किस्मत, केमिस्ट्री
  55. 1:47या कनेक्शन बोल देते हैं। पर असल में यह
  56. 1:49सिर्फ कंडीशनिंग है जो तुम्हारे सामने एक
  57. 1:51ऐसा इल्ल्यूजन क्रिएट करती है कि तुम अपनी
  58. 1:53कॉन्शियस चॉइस ले रहे हो। तुम्हें मानना
  59. 1:55नहीं चाहते बट सच यही है कि फास्ट
  60. 1:57अटैचमेंट तुम्हें पावरफुल नहीं बल्कि
  61. 1:59प्रेडिक्टेबल बनाता है। तुम इतने रिडेबल
  62. 2:01बन जाते हो कि सामने वाला इंसान बिना कुछ
  63. 2:03एफर्ट किए भी तुम्हारे इमोशनल बटंस को
  64. 2:05दबाना सीख लेता है। और जब फिर यह कंट्रोल
  65. 2:07शिफ्ट होता है तो तुम उसे किस्मत बोल देते
  66. 2:09हो। पर तुम यह नहीं देखते हो कि तुमने खुद
  67. 2:11उसको अपना कंट्रोल दिया है। तुमने अपनी
  68. 2:13इमोशनल इन्वेस्टमेंट का रेट इतना लो कर
  69. 2:15दिया है कि कोई भी थोड़ा सा एफर्ट दिखाते
  70. 2:17ही उसमें एंट्री ले लेता है। तुम्हें
  71. 2:19तुम्हारा पेन यूनिक लगता है और इसी वजह से
  72. 2:21तुम अपने पैटर्न्स को क्वेश्चन नहीं करते।
  73. 2:23मैं ऐसा ही हूं बोल के तुम अपनी ग्रोथ को
  74. 2:25फ्रीज़ कर देते हो। तुम अपनी अटैचमेंट को
  75. 2:27पर्सनालिटी बना लेते हो ताकि तुम्हें उसे
  76. 2:29चेंज ना करना पड़े। क्योंकि अगर तुम चेंज
  77. 2:31करोगे तो तुम्हें यह मानना पड़ेगा कि तुम
  78. 2:33गलत थे और हमारे ईगो के लिए गलत होना पेन
  79. 2:35से भी ज्यादा डेंजरस होता है। इसलिए
  80. 2:37तुम्हारा ईगो तुम्हारे पेन को ही तुम्हारा
  81. 2:39हीरो बना देता है। तुम्हें लगता है कि अगर
  82. 2:41तुम अटैच नहीं हुए तो तुम कोल्ड हो जाओगे,
  83. 2:43रूड हो जाओगे। पर असल में तुम सिर्फ
  84. 2:44कंफ्यूज्ड हो। रूड होने का मतलब है अपने
  85. 2:46इमोशंस को सप्रेस करना और धीरे होने का
  86. 2:49मतलब है अपने इमोशंस को ऑब्जर्व करना। तुम
  87. 2:51दोनों को सेम बकेट में डाल देते हो ताकि
  88. 2:53तुम्हें धीरे ना होना पड़े। धीरे चलने में
  89. 2:55पेशेंस चाहिए होता है और वह पेशेंस तब आता
  90. 2:57है जब तुम्हें तुम्हारी लाइफ में कोई
  91. 2:59अर्जेंसी ना हो। तुम्हारी अर्जेंसी किसी
  92. 3:01और से नहीं तुम्हारे अनफिनिश्ड सेल्फ से
  93. 3:03आती है। तुम्हारा फास्ट अटैचमेंट एक तरह
  94. 3:05का कॉन्ट्रैक्ट होता है जिसमें तुम चुपचाप
  95. 3:07सामने वाले को यह बता देते हो कि प्लीज
  96. 3:09मुझे मत छोड़ना। और जब सामने वाले को बिना
  97. 3:11कुछ भी इतने एफर्ट्स किए इतनी पावर मिल
  98. 3:13जाती है तो फिर इमंबैलेंस क्रिएट होता है।
  99. 3:14तुम फिर एक्सपेक्ट करते हो कि तुम्हें
  100. 3:16रिस्पेक्ट मिलेगी। पर इज्जत कभी भी मांग
  101. 3:18के नहीं मिलती। फिर तुम बोलते हो कि लोग
  102. 3:20बदल गए। पर असल में तुमने ही उन्हें अपने
  103. 3:22पेडिस्टल पर चढ़ा रखा है। और पेडिस्टल पर
  104. 3:24रखा इंसान इंसान नहीं रहता। वो फिर भगवान
  105. 3:26बन जाता है। तुम बार-बार उसी टाइप के
  106. 3:28लोगों से अटैच होते हो और फिर बोलते हो कि
  107. 3:30मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है? यह
  108. 3:32विक्टिम मेंटालिटी तुम्हें थोड़ी देर के
  109. 3:33लिए इनोसेंट फील करवाती है। पर यह इनोसेंस
  110. 3:36कभी भी तुम्हें पावरफुल नहीं बनने देती।
  111. 3:38क्योंकि जब तक तुम अपने आप को विक्टिम
  112. 3:40मानोगे, तुम अपने पैटर्न्स को ऑब्जर्व
  113. 3:41नहीं करोगे। तुम्हारा दिमाग सच नहीं
  114. 3:43चाहता। वह बस रिलीफ चाहता है और रिलीफ के
  115. 3:46लिए सबसे पहले रिस्पांसिबिलिटी को
  116. 3:47सैक्रिफाइस किया जाता है। तुम इमोशनल
  117. 3:49इंटेंसिटी को इंटिमेसी समझ लेते हो। अगर
  118. 3:51थोड़ी डीप बातें हो गई, अगर पूरी रात
  119. 3:53बातें चल गई। अगर थोड़ा सा ट्रोमा शेयर कर
  120. 3:56दिया तो तुम यह क्लियर कर देते हो,
  121. 3:57डिक्लेअ कर देते हो कि भाई कनेक्शन हो गया
  122. 3:59है। पर इंटिमेसी टाइम मांगती है,
  123. 4:01कंसिस्टेंसी मांगती है, बिहेवियर,
  124. 4:03ऑब्जरवेशन मांगती है। तुम शॉर्टकट्स लेते
  125. 4:05हो और फिर बोलते हो कि रास्ता खराब है।
  126. 4:07तुम्हें लगता है कि दुनिया खोखली है। पर
  127. 4:09असल में तुम इंपेशेंट हो। तुम्हारी
  128. 4:11अटैचमेंट तुम्हें स्पेशल फील करवाती है।
  129. 4:13तुम सोचते हो कि मेरे जैसा तो कोई है ही
  130. 4:15नहीं। मैं ज्यादा फील करता हूं, ज्यादा
  131. 4:17इन्वेस्ट करता हूं। ये सुपीरियरिटी सेटल
  132. 4:19होती है बट डेंजरस भी होती है। क्योंकि जब
  133. 4:20तुम अपने पेन को स्पेशल बना लेते हो तो
  134. 4:22तुम उसे छोड़ने का रीजन भी खो देते हो।
  135. 4:24आखिर स्पेशल चीज को कौन छोड़ता है? इसीलिए
  136. 4:27तुम अनकॉन्शियसली अपने उस पेन को प्रिजर्व
  137. 4:29करते हो। तुम बोलते हो कि मैं इमोशनली ओपन
  138. 4:31हूं। पर ऐसा कुछ नहीं होता है। जो भी आता
  139. 4:33है तुम उसे अंदर घुसने देते हो और फिर जब
  140. 4:35केओस होता है तो बोलते हो कि यह दुनिया
  141. 4:37अनसेफ है। यह दुनिया अनसेफ नहीं है। अनसेफ
  142. 4:39बाउंड्रीज होती है। अब एक बात ध्यान से
  143. 4:41सुनना। बाउंड्रीज लैक ऑफ लव नहीं होती है।
  144. 4:44प्यार की कमी नहीं होती है बाउंड्रीज।
  145. 4:46बाउंड्रीज लैक ऑफ सेल्फ रिस्पेक्ट का इलाज
  146. 4:48होती है। पर सेल्फ रिस्पेक्ट के लिए पहले
  147. 4:50सेल्फ को फील करना पड़ता है। जो तुम अवॉइड
  148. 4:53कर रहे हो। तुम्हारा अटैचमेंट तुम्हारे
  149. 4:54खुद के लिए एक डिस्ट्रैक्शन है। जब तुम
  150. 4:56किसी और में खो जाते हो तो तुम्हें अपनी
  151. 4:58खुद की डायरेक्शन, अपनी खुद कीकृति फेस
  152. 5:00नहीं करनी पड़ती। इसीलिए तुम्हें अटैचमेंट
  153. 5:02बहुत प्यारा लगता है क्योंकि वो तुम्हें
  154. 5:04मिरर नहीं तुम्हें एक स्क्रीन देता है और
  155. 5:06स्क्रीन पे जो चल रहा होता है तुम उसे ही
  156. 5:08रियलिटी मान लेते हो। क्योंकि यह तो हम सब
  157. 5:09जानते हैं कि रियलिटी से ज्यादा कंफर्टेबल
  158. 5:11हमें इल्यूजन लगता है। अब जो भी चीजें
  159. 5:13मैंने अभी तक आपको बताई आप बहुत रिलेट कर
  160. 5:15रहे होंगे क्योंकि यह सारे हमारे माइंड के
  161. 5:17पैटर्न होते हैं और इन्हीं पैटर्न को और
  162. 5:19क्लियर करने के लिए मैंने आप सबके लिए एक
  163. 5:21ई-बुक लिखी है जिसका नाम है बिहाइंड द
  164. 5:24डार्क और इसमें मैंने अटैचमेंट को एक
  165. 5:26रोमांस के लेंस से नहीं देखा है बल्कि
  166. 5:28सर्वाइवल के लेंस से देखा है। अब आप इस
  167. 5:29सोच से मत जाना कि उस ई बुक में आपको
  168. 5:31सॉल्यूशन मिलेंगे। उसमें आपको सिर्फ मिरर
  169. 5:34मिलेगा क्योंकि जब तक तुम अपने आप को
  170. 5:35क्लियरली समझोगे ही नहीं तब तक तुम
  171. 5:37सॉल्यूशन नहीं निकाल पाओगे। अभी थोड़े
  172. 5:39टाइम पहले कोरोना गया है तो जब तक किसी को
  173. 5:40पता ही नहीं था कि उसके कोरोना है तब तक
  174. 5:42वो उसे नॉर्मल खांसी जुकाम समझ के उसका
  175. 5:44इलाज करता रहता था और एट द एंड सिचुएशन और
  176. 5:47वर्स हो जाती थी। उसी तरह अगर आपको पता ही
  177. 5:49नहीं रहेगा कि आपकी परेशानी कहां आ रही है
  178. 5:51तो टेंपरेरी सॉल्यूशन देने से सरफेस लेवल
  179. 5:53सॉल्यूशन देने से कुछ भी नहीं होगा।
  180. 5:55इसीलिए इस ई-बुक में मैंने आपको आपका
  181. 5:57पैटर्न दिखाया है कि जो भी आप करते हैं
  182. 5:59उसके पीछे कौन सा पैटर्न आपका इनफोर्स हो
  183. 6:01रहा है। आई रेकमेंड यू कि आप उसे जरूर
  184. 6:03पढ़िए। सो अगर आप उसे पढ़ना चाहते हैं तो
  185. 6:05डिस्क्रिप्शन और पिन कमेंट में आपको उसकी
  186. 6:07लिंक मिल जाएगी। तुम यह नहीं देखते कि
  187. 6:08फास्ट अटैचमेंट तुम्हारी पेसिंग को
  188. 6:10डिस्ट्रॉय कर देता है। तुम फ्यूचर का लोड
  189. 6:12प्रेजेंट में डाल देते हो। तुम अपनी
  190. 6:14एक्सपेक्टेशंस को रियलिटी से पहले ले आते
  191. 6:16हो। और फिर जब रियलिटी कैचअप नहीं करती है
  192. 6:18तो तुम उसे हार्ट ब्रेक बोल देते हो। पर
  193. 6:20हार्ट ब्रेक तब होता है जब कुछ टूटता है।
  194. 6:22यहां पे तो कुछ बना ही नहीं था। सिर्फ
  195. 6:24इमेजिन किया गया था। तुम अपने दर्द को एक
  196. 6:26प्रूफ की तरह यूज़ करते हो कि मैंने सच में
  197. 6:28फील किया था। पर फीलिंग का होना और फीलिंग
  198. 6:30पे कंट्रोल होना दोनों बहुत अलग-अलग चीजें
  199. 6:32होती है। तुम कंट्रोल को मैनपुलेशन समझते
  200. 6:35हो। इसीलिए तुम अपने इमोशंस को खुला छोड़
  201. 6:37देते हो और खुली चीजें हमेशा घूमती रहती
  202. 6:39है। कभी भी स्टेबल नहीं रहती। स्टेबिलिटी
  203. 6:41तुम्हें बोरिंग लगती है क्योंकि तुम हाई
  204. 6:43के एडिक्ट हो चुके हो। तुम्हें लगता है कि
  205. 6:45अगर तुम अटैच नहीं हुए तो तुम मिस आउट कर
  206. 6:47जाओगे। जैसे प्यार एक ट्रेन है जो एक बार
  207. 6:49अगर छूट गई तो वापस नहीं आएगी। और यह
  208. 6:51स्केसिटी माइंडसेट तुम्हें इधर-उधर फुदकने
  209. 6:53पर मजबूर करता है। तुम देखते नहीं हो कि
  210. 6:56जिस ट्रेन में तुम बैठ रहे हो, वह कहां पे
  211. 6:57जाकर रुकेगी। बस तुम चढ़ जाते हो। और फिर
  212. 7:00जब गलत स्टेशन आता है, तो तुम उसे किस्मत
  213. 7:02बोल देते हो। तुम इमोशनल ऑनेस्टी के नाम
  214. 7:04पर सब कुछ टेबल पर रख देते हो। तुम्हें
  215. 7:06लगता है कि ट्रांसपेरेंसी से कनेक्शन
  216. 7:07बनेगा। अब तुम पहले दिन ही अगर अपना आर्मर
  217. 7:10नीचे गिरा दोगे तो तुम्हें चोट तो लगेगी।
  218. 7:12तुम अपने अकेलेपन को एक्सेप्ट करने के
  219. 7:13बजाय उसे आउटसोर्स कर देते हो। तुम सामने
  220. 7:16वाले को साइलेंटली बोल देते हो कि मुझे
  221. 7:18कंप्लीट कर दो। यह सेंटेंस वैसे कभी बोला
  222. 7:20नहीं जाता है बट यह तुम्हारी एनर्जी में
  223. 7:21फील हो जाता है। और फिर जब लोग तुम्हें
  224. 7:23कंप्लीट नहीं कर पाते हैं तो तुम बोलते हो
  225. 7:25कि लोग ही अनरिलायबल है। पर कोई तुम्हारी
  226. 7:27जगह तुम्हारी लाइफ नहीं जी सकता है। चाहे
  227. 7:29तुम कितना भी ज्यादा अटैच हो जाओ या फिर
  228. 7:31सामने वाला इंसान कितना भी अच्छा हो।
  229. 7:32तुम्हारी फास्ट अटैचमेंट एक अनकॉन्शियस
  230. 7:34डील है जिसमें तुम अपनी ग्रोथ को साइड में
  231. 7:36रख देते हो। पोज़ कर देते हो। तुम अपना
  232. 7:38काम, अपनी ग्रोथ, अपना डिसिप्लिन सब कुछ
  233. 7:40साइड में रख देते हो। यह बोल के कि
  234. 7:42रिलेशनशिपेंट है। पर रिलेशनशिप तब टॉक्सिक
  235. 7:44हो जाता है जब यह तुम्हारी ग्रोथ के
  236. 7:46अगेंस्ट जाने लगे। बट तुम इसे इग्नोर करते
  237. 7:48हो क्योंकि अटैचमेंट में सैक्रिफाइस को
  238. 7:50वर्चू कहा जाता है। तुम अपने अटैचमेंट को
  239. 7:52जस्टिफाई करते हो यह बोल के कि मैं
  240. 7:54जेन्युइन हूं। बट जेनुइननेस का मतलब यह
  241. 7:56नहीं होता है कि तुम अपने नर्वस सिस्टम को
  242. 7:58बिना ट्रेनिंग के ड्राइव करने दो।
  243. 7:59जेन्युइननेस का मतलब होता है अवेयरनेस के
  244. 8:02साथ रिएक्ट करना। तुम अवेयरनेस को स्किप
  245. 8:04कर देते हो और रिएक्शन को ऑनेस्टी बोल
  246. 8:06देते हो। रिएक्शन फास्ट होता है और
  247. 8:07अवेयरनेस स्लो होती है और तुम स्लो होने
  248. 8:09से डरते हो क्योंकि उसमें सब कुछ साफ-साफ
  249. 8:12दिखने लग जाता है। रियलिटी यह है कि तुम
  250. 8:13इसलिए अटैच हो रहे हो क्योंकि तुम उस
  251. 8:15साइलेंस को टोलरेट नहीं कर पाते जहां
  252. 8:17तुम्हें अपनी रियलिटी फेस करनी पड़ती है।
  253. 8:19साइलेंस में कोई तालियां नहीं होती, कोई
  254. 8:21वैलिडेशन नहीं होती। वहां पर सिर्फ तुम और
  255. 8:23तुम्हारी लाइफ के अनआर्ड क्वेश्चंस होते
  256. 8:25हैं। और इस टाइम पर तुम किसी और के
  257. 8:27प्रेजेंस को पेन किलर की तरह यूज़ करते
  258. 8:29हो। बिना यह सोचे कि पेन किलर सिम्टम को
  259. 8:31हटाता है। डिजीज को नहीं। फिर जैसे ही
  260. 8:33इफेक्ट खत्म होता है तुम वापस उसी जगह पर
  261. 8:35आकर खड़े हो जाते हो। बट इस बार तुम थोड़े
  262. 8:37ज्यादा थके हुए होते हो, थोड़े ज्यादा
  263. 8:39डिपेंडेंट होते हो और थोड़े ज्यादा कन्वस
  264. 8:41हो चुके होते हो कि प्रॉब्लम दुनिया में
  265. 8:43है। ना कि उस जगह में जहां तुम अभी खड़े
  266. 8:45हो और जहां से तुम देखना शुरू भी नहीं कर
  267. 8:47पा रहे हो। क्योंकि तुम्हारा दिमाग अभी भी
  268. 8:49वही सोच रहा है कि अगर अगला इंसान थोड़ा
  269. 8:51ज्यादा समझदार और मैच्योर होगा तो शायद
  270. 8:53चीजें सही हो जाएगी। अगर तुम्हें फास्ट
  271. 8:55अटैचमेंट को कम करना है तो तुम्हें सबसे
  272. 8:57पहला झूठ तोलना पड़ेगा। तुम इमोशनल नहीं
  273. 8:59हो। तुम इमोशनली अनरेगुलेटेड हो। और
  274. 9:02रेगुलेशन का मतलब फीलिंग्स को मारना नहीं
  275. 9:04होता। रेगुलेशन का मतलब होता है रिएक्शन
  276. 9:06और एक्शन के बीच में स्पेस बनाना।
  277. 9:08तुम्हारी प्रॉब्लम फीलिंग्स का होना नहीं
  278. 9:10है। तुम्हारी प्रॉब्लम यह है कि तुम अपनी
  279. 9:12फीलिंग्स को डिसीजन मेकिंग अथॉरिटी दे
  280. 9:14देते हो। जब तक फीलिंग्स ड्राइवर सीट पर
  281. 9:16बैठी रहेगी। तुम किसी भी इंसान के साथ
  282. 9:18क्रैश करते रहोगे। तुम्हें धीरे होना
  283. 9:20सीखना पड़ेगा बिना इसको गलत समझे। क्योंकि
  284. 9:22धीरे होने का मतलब इंटरेस्ट का कम होना
  285. 9:24नहीं होता। धीरे होने का मतलब होता है
  286. 9:26डाटा कलेक्ट करना। तुम लोगों के वर्ड्स पर
  287. 9:28नहीं बल्कि उनके पैटर्न्स पर इन्वेस्ट
  288. 9:30करना सीखो। जो तुम्हें फास्टफास्ट चीजें
  289. 9:32फील करवाता है वह फास्ट ही छोड़ के भी चला
  290. 9:34जाता है। और जो तुम्हें पेशेंस सिखाता है
  291. 9:36वही तुम्हें रियलिटी दिखाता है। तुम
  292. 9:37पेशेंस को बोडम बोल के रिजेक्ट कर देते
  293. 9:39हो। इसीलिए तुम बार-बार इमोशनल रोलर
  294. 9:42कोस्टर पर चढ़ते रहते हो। तुम्हें अपने
  295. 9:43सिस्टम को ही समझाना पड़ेगा कि
  296. 9:45एक्साइटमेंट सेफ्टी नहीं होती है। सेफ्टी
  297. 9:47बोरिंग होती है क्योंकि अब तुम्हारा
  298. 9:48सिस्टम केओस का है। एडिक्ट बन चुका है। जब
  299. 9:50कोई स्टेबल होता है तो तुम्हें वो स्पार्क
  300. 9:52नहीं मिलता है और तुम उसे ऐसे बोल देते हो
  301. 9:54कि वह केमिस्ट्री नहीं है हम में। और जब
  302. 9:56तक तुम इस मिसलेबलिंग को दूर नहीं करोगे
  303. 9:58तब तक तुम हेल्दी रिलेशनशिप से भागते
  304. 10:00रहोगे। तुम्हारा सॉल्यूशन किसी और के
  305. 10:02बिहेवियर में नहीं तुम्हारे रिस्पांस डिले
  306. 10:04में है। जब भी तुम्हें किसी से इंस्टेंटली
  307. 10:06कनेक्ट फील हो उसी मोमेंट में तुम्हारा
  308. 10:08टेस्ट शुरू हो जाता है। अगर तुम रुक जाते
  309. 10:10हो अगर तुम रिएक्ट नहीं करते। अगर तुम उस
  310. 10:12अर्ज को पास होने देते हो तो तुम अपने उस
  311. 10:14पैटर्न को ब्रेक कर देते हो। पर अगर तुम
  312. 10:16उस पर कूद पड़ते हो तो तुम बस अपने पैटर्न
  313. 10:18को रिपीट कर रहे हो। हीलिंग ड्रामेटिक
  314. 10:20नहीं होती। हीलिंग बोरिंग डिसीजंस का नाम
  315. 10:22होता है। तुम्हें अपनी इमोशनल सप्लाई खुद
  316. 10:24जनरेट करनी पड़ेगी। जब तक तुम्हारा दिन
  317. 10:26खाली है, तुम किसी और के फिलर बनोगे। जब
  318. 10:28तक तुम्हारी बॉडी नेगलेक्टेड है, तुम किसी
  319. 10:30और के टच पर डिपेंडेंट रहोगे। जब तक
  320. 10:32तुम्हारा काम वीक है, तुम किसी और की
  321. 10:35वैलिडेशन पे जिओगे। अटैचमेंट कम तब होती
  322. 10:37है जब तुम्हारी लाइफ हैवी होती है। हल्की
  323. 10:39लाइफ वाले लोग ज्यादा चिपकते हैं। तुम्हें
  324. 10:41अपने अकेलेपन को रोमांटिक बनाना बंद करना
  325. 10:43पड़ेगा। अकेलापन यह प्रूफ नहीं है कि तुम
  326. 10:45डीप हो। अकेलापन यह सिग्नल है कि तुम्हारा
  327. 10:48सिस्टम कनेक्शन के लिए डेस्पिरेट हो गया
  328. 10:50है। और डेस्पिरेशन हमेशा तुम्हें वीक
  329. 10:52बारगेनिंग पोजीशन में डाल देती है। जब तुम
  330. 10:54डेस्पिरेट नहीं होते तब तुम चूज़ करते हो।
  331. 10:56पर जब तुम डेस्पिरेट होते हो फिर तुम
  332. 10:58सिर्फ सेटल करते हो और फिर उसे किस्मत बोल
  333. 11:00देते हो। तुम्हारा काम यह नहीं है कि तुम
  334. 11:02अपनी अटैचमेंट को फोर्सफुली रोको।
  335. 11:04तुम्हारा काम यह है कि तुम अपनी पेस को
  336. 11:06कंट्रोल करो। पेस का मतलब होता है इमोशनल
  337. 11:08इन्वेस्टमेंट को स्टेजेस में रखना। पहले
  338. 11:10ऑब्जर्व फिर टेस्ट और फिर ट्रस्ट। तुम इस
  339. 11:13ऑर्डर को उल्टा कर देते हो। तुम पहले
  340. 11:15ट्रस्ट करते हो, फिर ऑब्जर्व करते हो, तो
  341. 11:17फिर जब सब कुछ डैमेज हो चुका होता है,
  342. 11:19उसके बाद टेस्ट करते हो। यह ऑर्डर सही
  343. 11:21होता है, तो अटैचमेंट नेचुरली बैलेंस रहती
  344. 11:23है। तुम्हें यह भी एक्सेप्ट करना पड़ेगा
  345. 11:24कि तुम्हारा आई फील टू मच। एक्चुअल में
  346. 11:27तुम्हारा आई डोंट टोलरेट अनसर्टेनिटी का
  347. 11:29कवर पेज है। तुम सर्टेनिटी चाहते हो,
  348. 11:31क्लेरिटी चाहते हो, लेबल्स चाहते हो
  349. 11:33क्योंकि अनसर्टेनिटी तुम्हें एशियस बना
  350. 11:35देती है। और इस ए्जायटी से बचने के लिए
  351. 11:37तुम अटैचमेंट को अपना शॉर्टकट बना लेते
  352. 11:39हो। जब तक तुम अनसर्टेनिटी के साथ रहना
  353. 11:41नहीं सीखोगे, तुम किसी भी इमोशनल डिसीजन
  354. 11:43में इमैच्योर बने रहोगे। तुम्हारा ईगो
  355. 11:45तुम्हें बोलता है कि तुम अलग हो। इसलिए
  356. 11:47नॉर्मल रूल्स तुम पे अप्लाई नहीं होते। पर
  357. 11:49साइकोलॉजी में ईगो नहीं चलता है। जो
  358. 11:51पैटर्न तुम रिपीट कर रहे हो वो यूनिक नहीं
  359. 11:53है। वो प्रेडिक्टेबल है और प्रेडिक्टेबल
  360. 11:55चीजों को चेंज किया जा सकता है। अगर तुम
  361. 11:57अपनी सफरिंग से वो स्पेशल वाला टैग हटा
  362. 11:59दो। जब तुम ये एक्सेप्ट करते हो कि तुम
  363. 12:01कंडीशंड हो। तभी तुम उस कंडीशन से बाहर
  364. 12:03निकलते हो। तुम्हें इमोशनल ऑनेस्टी और
  365. 12:05इमोशनल डंपिंग का डिफरेंस समझना पड़ेगा।
  366. 12:08जिसको मैंने डिटेल में मेरी ई-बुक में
  367. 12:09एक्सप्लेन किया है। सब कुछ शेयर कर देना
  368. 12:11करेज नहीं होता। टाइमिंग के बिना
  369. 12:13वलनेरेबिलिटी स्टूपिडिटी होती है। जो
  370. 12:15इंसान तुम्हारी लाइफ में कंसिस्टेंसी
  371. 12:17प्रूव नहीं कर पाया उसके सामने तुम अपना
  372. 12:19ट्रोमा शेयर मत करो। क्योंकि फिर तुम
  373. 12:21बोलोगे कि लोग मिसयूज करते हैं। पर मिसयूज
  374. 12:23करने के लिए मटेरियल तो तुमने खुद
  375. 12:25प्रोवाइड किया है। तुम्हारी अटैचमेंट तब
  376. 12:26कम होती है जब तुम्हारी सेल्फ रेस्पेक्ट
  377. 12:28सिर्फ मोरल नहीं बल्कि इमोशनल भी होती है।
  378. 12:30तुम बोलते तो हो कि आई रेस्पेक्ट मसेल्फ।
  379. 12:33पर तुम्हारे एक्शंस इससे टोटली अपोजिट
  380. 12:35होते हैं। तुम लेट रिप्लाई को टोलरेट करते
  381. 12:37हो। मिक्स सिग्नल को एक्सक्यूज देते हो।
  382. 12:39एफर्ट्स का इमंबैलेंस इग्नोर करते हो।
  383. 12:41सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम ऑलरेडी इन्वेस्ट
  384. 12:43कर चुके हो। इन्वेस्टमेंट के बाद
  385. 12:44स्टैंडर्ड्स का गिरना सेल्फ एस्पेक्ट नहीं
  386. 12:46होता। तुम्हें यह भी एक्सेप्ट करना पड़ेगा
  387. 12:48कि कभी-कभी अटैचमेंट को छोड़ना काफी बुरा
  388. 12:50लगेगा। क्योंकि तुम किसी इंसान को नहीं
  389. 12:52छोड़ रहे हो। तुम अपनी फेंटसी को छोड़ रहे
  390. 12:54हो। फेंटसी का मरना पेनफुल होता है। बट
  391. 12:56फेंटसी के साथ जीना काफी महंगा पड़ता है।
  392. 12:58तुम हर बार फेंटसी को चूज़ कर कर रियलिटी
  393. 13:01को विलेन बना देते हो। जब तक तुम रियलिटी
  394. 13:03को चूज़ नहीं करोगे, तुम सेफ नहीं हो।
  395. 13:04तुम्हारी इमोशनल इंडिपेंडेंस तब आती है जब
  396. 13:07तुम किसी के जाने से ज्यादा डरते नहीं हो।
  397. 13:09और यह स्ट्रेंज Instagram पे चलने वाले
  398. 13:10मोटिवेशनल कोट से नहीं आती है। यह तब आती
  399. 13:13है जब तुम्हारा दिन मीनिंगफुल होता है। जब
  400. 13:14तुमने अपनी लाइफ का वजन उठाया हो। जब किसी
  401. 13:17का मैसेज बोनस होता है ऑक्सीजन ने और जब
  402. 13:19कोई इंसान ऑक्सीजन बन जाता है तो वो पावर
  403. 13:22इमंबैलेंस क्रिएट करता है। तुम्हारा काम
  404. 13:24यह नहीं है कि तुम किसी से अटैच ही ना हो।
  405. 13:26तुम्हारा काम यह है कि तुम अपने आप से
  406. 13:28इतना अटैच हो जाओ कि कोई तुम्हारी जगह ना
  407. 13:30ले पाए। जब तुम खुद के साथ स्टेबल होते हो
  408. 13:32तो तुम्हारा रिलेशनशिप एडिशन बनता है
  409. 13:34रिप्लेसमेंट में और रिप्लेसमेंट वाले
  410. 13:36रिलेशनशिप हमेशा खत्म होते हैं। तुम्हारा
  411. 13:38सॉल्यूशन किसी एक ट्रिक में नहीं है।
  412. 13:39तुम्हारा सॉल्यूशन रेपटीशन को तोड़ने में
  413. 13:41है। हर बार जब तुम अपनी अर्थ पर एक्ट नहीं
  414. 13:43करते हो, तुम अपने ब्रेन को नए सिग्नल्स
  415. 13:45देते हो। हर बार जब तुम पोज़ करते हो, तुम
  416. 13:47अपनी पावर को रिक्लेम करते हो। और यह
  417. 13:49ग्लैमरस नहीं होता। इसीलिए ज्यादातर लोग
  418. 13:51फेल हो जाते हैं। तुम एंड में यह नोटिस
  419. 13:53करोगे कि तुम रड नहीं बने हो। तुम क्लियर
  420. 13:55बन गए हो। तुम दूर नहीं हुए हो। तुम
  421. 13:57सेलेक्टिव हो गए हो। तुम इमोशन लेस नहीं
  422. 13:59हुए हो। तुम लेस डेस्पिरेट हो गए हो। और
  423. 14:01डेस्पिरेशन के जाते ही अटैचमेंट अपनी जगह
  424. 14:04पर आ जाता है। अब जब यह शिफ्ट होगा
  425. 14:05तुम्हें एक अजीब सा खालीपन फील होगा जैसे
  426. 14:08कुछ छूट गया है। क्योंकि असल में कुछ छूट
  427. 14:10तो गया है। तुम्हारा पुराना पैटर्न,
  428. 14:12तुम्हारा ड्रामा ड्रिवन सेल्फ, तुम्हारा
  429. 14:13वो हिस्सा जो हमेशा किसी और के थ्रू जीना
  430. 14:16चाहता था। और जब यह हिस्सा धीरे-धीरे चुप
  431. 14:18होने लगता है। तुम अपनी लाइफ में पहली बार
  432. 14:20यह नोटिस करोगे कि साइलेंस सिर्फ खाली
  433. 14:22नहीं होती। साइलेंस एक टेस्ट होती है और
  434. 14:24इसी टेस्ट में या तो तुम वापस भाग जाओगे
  435. 14:26किसी नए अटैचमेंट की तरफ या फिर पहली बार
  436. 14:29रुक कर तुम एक्चुअल में देखोगे कि इस
  437. 14:30साइलेंस में तुम हो को। अगर यह वीडियो
  438. 14:32रिलेटेबल और वैल्यूुएबल लगा तो इसे लाइक
  439. 14:34करके चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए और अगर
  440. 14:36आप ई-बुक लेना चाहते हैं तो डिस्क्रिप्शन
  441. 14:38और पिन कमेंट में उसकी लिंक दी हुई है।
  442. 14:40मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। थैंक यू
  443. 14:41वेरी मच।

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This page contains the full transcript of How to Stop Getting Attached Too Fast (Without Becoming Cold or Emotionless) (Ep #29) by Anshuman Joshi, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,426 words across 443 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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