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How Real Banking Systems Work | Core Banking Explained | Real-World Banking System Series (Hindi) — Transcript

by hindi code class · 2,298 words · 315 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00हेलो दोस्तों, वेलकम बैक टू हिंदी कोड
  2. 0:02क्लास। आज से हम स्टार्ट कर रहे हैं एक
  3. 0:04बिल्कुल न्यू एंड सुपर एडवांस प्लेलिस्ट
  4. 0:08जो है रियल वर्ल्ड बैंकिंग सिस्टम
  5. 0:10डेवलपमेंट सीरीज। यह कोई नॉर्मल क्रेडिट
  6. 0:12प्रोजेक्ट नहीं होगा क्योंकि इसमें हम
  7. 0:14देखेंगे कि रियल बैंकिंग सिस्टम कैसे
  8. 0:16एक्चुअली में डेवलप किया जाता है, कैसे
  9. 0:18डिजाइन होता है एंड इसको किस तरह से जीरो
  10. 0:21से प्रोडक्शन लेवल तक बिल्ड किया जाता है।
  11. 0:23इसके अलावा इस सीरीज में हम यह भी समझेंगे
  12. 0:26कि जो एडवांस लेवल की बैंकिंग सिस्टम लेवल
  13. 0:29की सिक्योरिटी होती है वो कैसे इसमें
  14. 0:32इनेबल करते हैं, कैसे इंप्लीमेंट करते
  15. 0:34हैं। इसलिए अगर ट्रूली एंटप्राइज लेवल
  16. 0:37डेवलपमेंट आप सीखना चाह रहे हो या फिर
  17. 0:39फाइन टैग जैसे हाई रिस्पांसिबिलिटी सिस्टम
  18. 0:41पर काम करना चाह रहे हो तो ये प्लेलिस्ट
  19. 0:44आपके लिए बहुत यूज़फुल होने वाली है। तो
  20. 0:46इसको लास्ट तक जरूर देखें। सारे पार्ट्स
  21. 0:48सारे लेक्चर जरूर कवर करें। तो चलिए शुरू
  22. 0:51करते हैं। अब ये हमारा फर्स्ट लेक्चर है।
  23. 0:53इस वजह से हम इस लेक्चर में तो डायरेक्ट
  24. 0:55कोडिंग स्टार्ट नहीं कर सकते। बट ऐसा भी
  25. 0:58नहीं है कि मैं इसमें आपको बताने लग जाऊं
  26. 1:00कि बैंकिंग क्या होता है? इंटरनली यह कैसे
  27. 1:03काम करते हैं। सबको पता है आज के टाइम पे
  28. 1:06कि बैंकिंग कैसे काम करता है। क्योंकि आज
  29. 1:09के टाइम पे हर बंदा किसी ना किसी फॉर्म
  30. 1:11में बैंकिंग सर्विस को यूज़ कर रहा होता
  31. 1:13है। तो उसको पता होता है कि ट्रांजैक्शन
  32. 1:15क्या है? यूपीआई क्या है? अकाउंट्स क्या
  33. 1:18होते हैं? कौन-कौन सी बेसिक इंफॉर्मेशनेशन
  34. 1:20इनको देनी होती है। ये सारी बेसिक चीजें
  35. 1:23ऑलरेडी सबको पता होंगी। इसलिए इस सीरीज को
  36. 1:26स्टार्ट करने के लिए मैं एकदम स्टार्टिंग
  37. 1:28पॉइंट में आता हूं। डेवलपमेंट फेज के
  38. 1:30स्टार्टिंग पॉइंट में। तो जो डेवलपमेंट
  39. 1:32फेस का स्टार्टिंग पॉइंट होता है उसमें
  40. 1:34हमें यह पता करना होता है कि इस प्रोजेक्ट
  41. 1:37को बनाने के लिए कौन-कौन सी टेक्नोलॉजीस
  42. 1:39चाहिए। क्या-क्या प्रीरिक्वज़िट है।
  43. 1:42कौन-कौन से टूल यूज़ करेंगे एंड कौन-कौन से
  44. 1:44आर्किटेक्चर यूज़ होंगे इसमें। तो देखो,
  45. 1:47पहले हमारी रिक्वायरमेंट क्लियर होनी
  46. 1:49चाहिए। क्योंकि रिक्वायरमेंट जब क्लियर हो
  47. 1:51जाती है, तो उसके बाद हम यह डिसाइड कर
  48. 1:53पाते हैं कि कौन-कौन सी टेक्नोलॉजीस यूज़
  49. 1:56करनी है इस प्रोजेक्ट में। कौन-कौन से टूल
  50. 1:59यूज़ करेंगे। कौन सा आर्किटेक्चर यूज़
  51. 2:01करेंगे यह सब इसके बाद डिसाइड हो पाता है।
  52. 2:05तो हमें यहां पे जो डेवलप करना है वह एक
  53. 2:07रियल वर्ल्ड बैंकिंग सिस्टम है जो
  54. 2:09प्रोडक्शन लेवल हो, स्केलेबल हो एंड हाई
  55. 2:12सिक्योर हो। इसका मतलब है हमें इस तरह के
  56. 2:14एप्लीकेशन में स्ट्रांग बैक एंड रखना
  57. 2:16पड़ेगा। मतलब जो कोर बैंकिंग होगी वो बहुत
  58. 2:19ही स्ट्रांग रखनी पड़ेगी। इस वजह से हमें
  59. 2:21सारी लेटेस्ट एंड एडवांस फीचर एंड टूल की
  60. 2:25जरूरत है। तो सबसे पहले मैं यहां पे बात
  61. 2:27करता हूं बैक एंड की। तो बैक एंड के लिए
  62. 2:29हम जावा 21 यूज़ करेंगे क्योंकि बैंकिंग
  63. 2:32सिस्टम लॉन्ग टर्म सपोर्ट एंड
  64. 2:33स्केलेबिलिटी डिमांड करते हैं। इसके ऊपर
  65. 2:35होगा स्प्रिंग बूट थ्री या फोर। तो जो भी
  66. 2:38आपके सिस्टम में अवेलेबल है। थ्री है तो
  67. 2:40आप थ्री यूज़ कर लीजिए। फोर है तो फोर यूज़
  68. 2:43कर लीजिए। बट आपको यह ध्यान देना है कि
  69. 2:45कुछ चीजें फोर में चेंज हुई हैं। कुछ
  70. 2:47मेथड, कुछ टूल चेंज हुए हैं। तो अगर आप
  71. 2:51थ्री यूज़ कर रहे हो तो वह बेटर है क्योंकि
  72. 2:52वो स्टेलेबल वर्जन है और हर जगह सपोर्ट
  73. 2:55मिलता है उसका। हमें मल्टीपल सर्विस को
  74. 2:57कनेक्ट करने के लिए स्प्रिंग क्लाउड की
  75. 2:59जरूरत पड़ेगी। तो स्प्रिंग क्लाउड में आप
  76. 3:012024 यूज करेंगे। इसी तरह डेटाबेस
  77. 3:04इंटरेक्शन के लिए स्प्रिंग डाटा जेपीए
  78. 3:07प्लस हबरनेट का यूज़ होगा। सिक्योरिटी के
  79. 3:09लिए स्प्रिंग सिक्योरिटी सिक्स के साथ ओ
  80. 3:12ऑथ टू प्लस jwटी का यूज करेंगे। इसके
  81. 3:15अलावा ऑथेंटिकेशन के लिए स्प्रिंग
  82. 3:17ऑथेंटिकेशन सर्वर का यूज करेंगे जो कि
  83. 3:19किसी भी रियल बैंक लेवल ऑथराइजेशन जैसा
  84. 3:22काम करता है। ठीक? इसके बाद बात करते हैं
  85. 3:24आर्किटेक्चर की। तो रियल बैंकिंग सिस्टम
  86. 3:27कभी भी एक सिंगल मोनोलिथिक ऐप नहीं होता
  87. 3:30है। यहां पर हमेशा माइक्रो सर्विस
  88. 3:32आर्किटेक्चर ही यूज किया जाता है। जिसके
  89. 3:34साथ ही डोमेन ड्राइव डिजाइन का यूज किया
  90. 3:36जाता है। जिससे बिजनेस लॉजिक क्लियर एंड
  91. 3:39अंडरस्टेबल रहे। इसके अलावा कोड क्वालिटी
  92. 3:42के लिए हेक्सागोनल आर्किटेक्चर एंड रियल
  93. 3:45टाइम बैंकिंग नीड्स के लिए इवेंट ड्रिवन
  94. 3:47आर्किटेक्चर का यूज करेंगे। अब यहां पर जो
  95. 3:50मैंने मोनोलिथिक एंड माइक्रो सर्विस की
  96. 3:52बात की है या फिर डोमेन ड्रिवन डिजाइन या
  97. 3:54इवेंट ड्रिवन आर्किटेक्चर की बात की है।
  98. 3:57तो इसको मैं किसी और थ्योरिकल लेक्चर में
  99. 3:59कवर करूंगा। अभी यहां पर बस आप इतना समझिए
  100. 4:03कि हमें इस प्रोजेक्ट को स्टार्ट करने के
  101. 4:05लिए प्रीरिक्विजिट क्या-क्या है। ठीक? अब
  102. 4:08बात करते हैं कम्युनिकेशन की। तो
  103. 4:10एक्सटर्नल वर्ड के साथ कम्युनिकेट करने के
  104. 4:12लिए रेस्ट एपीआई के साथ ओपन एपीआई का यूज
  105. 4:15करेंगे। जिससे एपीआई वेल डॉक्यूमेंटेड एंड
  106. 4:18टेस्टेबल रहेंगी। इसके अलावा अगर आप
  107. 4:20इंटरनल कम्युनिकेशन की बात कर रहे हो मतलब
  108. 4:23सर्वर टू सर्वर कम्युनिकेशन की बात कर रहे
  109. 4:25हो तो वहां पर रेस्ट का यूज करना ठीक
  110. 4:27अप्रोच नहीं मानी जाती है। इस वजह से इस
  111. 4:30प्रोजेक्ट में यहां पर हम यूज़ करेंगे
  112. 4:31जीआरपीसी का। इसके साथ ही जब बात आती है
  113. 4:34ट्रांजैक्शंस की, नोटिफिकेशंस की, ऑडिट की
  114. 4:38तो इसके लिए हम यूज़ करेंगे Apache काफ का।
  115. 4:41ठीक? अब अगर बात करें डेटाबेस की तो
  116. 4:44डेटाबेस लेयर बैंकिंग सिस्टम के लिए सबसे
  117. 4:46ज्यादा सेंसिटिव पार्ट होता है। इस वजह से
  118. 4:48कोर ट्रांजैक्शनल डाटा के लिए हम यूज
  119. 4:51करेंगे पोस्ट ग्रे एसक्यूएल क्योंकि यह एक
  120. 4:53ऐसा डेटाबेस है जो स्ट्रांग कंसिस्टेंसी
  121. 4:55एंड रिलायबिलिटी देता है। इसके साथ ही
  122. 4:58लॉक्स स्टेटमेंट्स एंड ऑडिट ट्रायल जैसे
  123. 5:01अनस्ट्रक्चरर्ड डेटा के लिए मोंग डेवी का
  124. 5:03यूज़ करेंगे। इसके अलावा हमें यहां पर
  125. 5:05परफॉर्मेंस का भी ध्यान रखना है। तो
  126. 5:08परफॉर्मेंस के लिए रेडिश का यूज करेंगे जो
  127. 5:10कैशिंग ओटीपी स्टोरेज एंड रेट लिमिटिंग के
  128. 5:14लिए बेस्ट माना जाता है। इसके अलावा हम
  129. 5:16फ्लाईवे भी यूज़ करेंगे जो मोस्टली कंपनी
  130. 5:18इग्नोर कर देती है। बट बैंकिंग एप्लीकेशन
  131. 5:21में यह मैंडेटरी होता है। रिकमेंडेड होता
  132. 5:23है कि अगर बैंक चाहती है कि उसके
  133. 5:26एप्लीकेशन में वर्जनिंग एंड माइग्रेशन
  134. 5:28प्रॉपर्ली मैनेज रहे तो फ्लाई वे का यूज़
  135. 5:31करना चाहिए। इस वजह से हम भी इस प्रोजेक्ट
  136. 5:33में फ्लाईवे का यूज़ करेंगे। ठीक? अब जैसा
  137. 5:36कि आपको पता है कि माइक्रो सर्विस को
  138. 5:38मैनेज करने के लिए एपीआई गेटवे एंड सर्विस
  139. 5:40रजिस्ट्री का यूज़ किया जाता है। मतलब
  140. 5:42सर्विस डिस्कवरी का यूज़ होता है। इस वजह
  141. 5:44से हम भी अपने प्रोजेक्ट में एज अ सिंगल
  142. 5:47एंट्री पॉइंट स्प्रिंग क्लाउड गेटवे का
  143. 5:49यूज कर लेंगे। एंड सर्विस को डायनेमिकली
  144. 5:52डिस्कवर करने के लिए यूरे का या कंसोल का
  145. 5:55यूज करेंगे। इसके अलावा हमें एप्लीकेशन के
  146. 5:57फेलियर से भी बचना पड़ेगा। जिसके लिए हम
  147. 6:00रेिलियंस 4J का यूज़ करेंगे जिससे हमें
  148. 6:02सर्किट ब्रेकर रीट्राई या फॉलबक जैसे
  149. 6:05पैटर्न मिल जाते हैं। अब बात करते हैं हम
  150. 6:07सिक्योरिटी की जिसके लिए एप्लीकेशन में हम
  151. 6:10यूज़ करेंगे ओथ टू प्लस JWT बेस्ड
  152. 6:13ऑथेंटिकेशन। इसके अलावा टू एफए ओटीपी
  153. 6:16फ्लोस रोल बेस्ड परमिशन बेस्ड इस तरह के
  154. 6:19काफी सारे कंट्रोल इंप्लीमेंट करेंगे।
  155. 6:21इसके साथ ही एडवांस लेवल पर एपीआई कीज़
  156. 6:24प्लस एमटीएलएस भी यूज करेंगे जो कि एक
  157. 6:26रियल बैंक के इंटरनल सिक्योर कम्युनिकेशन
  158. 6:29में यूज होता है। ठीक? अब इसके बाद बात
  159. 6:32करते हैं मॉनिटरिंग की। तो ऑब्जर्बिलिटी
  160. 6:34के लिए ईएल के स्टक का यूज करेंगे।
  161. 6:37मैट्रिक्स के लिए प्रोमेथीसिस एंड
  162. 6:39डिस्ट्रीब्यूटिव ट्रेिंग के लिए
  163. 6:41माइक्रोमीटर प्लस ओपन टेलीमेट्री का यूज़
  164. 6:43किया जाएगा। मतलब इन्हीं सारी चीजों को
  165. 6:45मिला के एक रियल बैंक एप्लीकेशन में
  166. 6:48मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाता है। तो
  167. 6:51उसी तरह से हम भी ये सारी चीजें यूज़
  168. 6:53करेंगे। ठीक? अब इसके बाद लास्ट में हम
  169. 6:55यूज़ करेंगे डेव ऊप्स डिप्लॉयमेंट एंड
  170. 6:58फ्रंट एंड का जिसमें डिप्लॉयमेंट के लिए
  171. 7:00डॉकर एंड क्यूबनेट का यूज़ करेंगे। ऑटोमेशन
  172. 7:03के लिए गेट Hub एक्शनंस का यूज़ करेंगे।
  173. 7:05एंड क्लाउड पर्सक्टिव के लिए एडब्ल्यूएस
  174. 7:08या जीसीपी को कॉनसेप्चुअल लेवल पर कवर
  175. 7:11करेंगे। इसके बाद प्रोजेक्ट के लिए फ्रंट
  176. 7:13एंड ऑप्शनल होगा। मतलब इसको लास्ट में
  177. 7:15डिसाइड करेंगे कि हमें फ्रंट एंड बनाना है
  178. 7:18या नहीं बनाना है। बट अगर फ्रंट एंड में
  179. 7:20काम किया तो हम रिएक्ट प्लस टाइप
  180. 7:22स्क्रिप्ट का यूज करेंगे। इसके अलावा JWT
  181. 7:25बेस्ड लॉग इन एंड एक प्रॉपर बैंकिंग
  182. 7:28डैशबोर्ड यूआई डिज़ भी करने का ट्राई
  183. 7:30करेंगे। जिससे आप एक एंड टू एंड रियल
  184. 7:32एप्लीकेशन सिस्टम बिल्ड होते देख पाओगे।
  185. 7:34ठीक? तो ये थी सारी टेक्नोलॉजीस एंड टूल
  186. 7:37जो हम पूरे बैंकिंग सिस्टम डेवलपमेंट में
  187. 7:40यूज करने वाले हैं। अब नेक्स्ट स्टेप में
  188. 7:42हमें इसका फ्लो समझना चाहिए। मतलब पहले
  189. 7:44हमने रिक्वायरमेंट क्लियर कर ली एंड
  190. 7:46रिक्वायरमेंट के हिसाब से हमने
  191. 7:48टेक्नोलॉजीस एंड टूल्स को भी चूज़ कर लिया।
  192. 7:51कौन-कौन से टेक्नोलॉजीस कौन-कौन से
  193. 7:53स्ट्रक्चर यूज़ करने वाले हैं ये भी हमने
  194. 7:56डिसाइड कर लिया। अब तीसरे नंबर पे आता है
  195. 7:58फ्लो को देखना। मतलब जब हम एप्लीकेशन
  196. 8:01बिल्ड करेंगे तो उसका फ्लो क्या होगा? अब
  197. 8:03इस तरह के हाई लेवल बैंकिंग सिस्टम
  198. 8:05आर्किटेक्चर फ्लो को समझने के लिए हमें
  199. 8:08इसको बिल्कुल जीरो से स्टार्ट करना
  200. 8:10पड़ेगा। तो फ्लो की शुरुआत करते हैं फ्रंट
  201. 8:12एंड लेयर से जिसमें बैंकिंग वेब ऐप या
  202. 8:15मोबाइल ऐप के थ्रू मतलब जो हम रिएक्ट प्लस
  203. 8:18टाइप स्क्रिप्ट के थ्रू डिजाइन करेंगे
  204. 8:20उसके थ्रू यूजर लॉगिन करता है। इसके बाद
  205. 8:23बैलेंस चेक करता है या फंड ट्रांसफर करता
  206. 8:25है। कुछ भी करता है सारी चीजों के लिए JWT
  207. 8:28टोकन अटैच होगा जो यूजर की आइडेंटिटी एंड
  208. 8:32परमिशंस को रिप्रेजेंट करेगा। इसके बाद यह
  209. 8:34फ्रंट एंड की रिक्वेस्ट एपीआई गेटवे पर
  210. 8:37आती है जो पूरे बैंकिंग सिस्टम का एक
  211. 8:39सिंगल एंट्री पॉइंट होता है। इसके बाद
  212. 8:42गेटवे यहां पर ऑथेंटिकेशन ऑथराइजेशन, रेट
  213. 8:45लिमिटिंग, रिक्वेस्ट वैलिडेशन एंड लॉगिन
  214. 8:48जैसे क्रॉस कटिंग कंसर्न हैंडल करता है।
  215. 8:51जिस वजह से अगर JWT इनवैलिड है या यूजर के
  216. 8:55पास रिक्वायर्ड परमिशन नहीं है तो
  217. 8:57रिक्वेस्ट यहां पर रिजेक्ट हो जाती है।
  218. 9:00इसके अलावा गेटवे यह भी डिसाइड करता है कि
  219. 9:02रिक्वेस्ट कौन से बैक एंड सर्विस को राउट
  220. 9:04होगी। अब एपीआई के बाद रिक्वेस्ट सर्विस
  221. 9:07डिस्कवरी के थ्रू माइक्रो सर्विस तक
  222. 9:09जाएगी। जैसे अकाउंट सर्विस, ट्रांजैक्शन
  223. 9:12सर्विस, यूजर सर्विस ऐसी काफी सारी सर्विज
  224. 9:15होंगी। जिनमें से रिक्वायर्ड सर्विस तक
  225. 9:17जाएगी। अब यहां पर सर्विस टू सर्विस
  226. 9:19कम्युनिकेशन की भी जरूरत पड़ सकती है।
  227. 9:21जिसके लिए मैंने बताया था कि हम इस
  228. 9:23प्रोजेक्ट में यूरेurka या कंसोल का यूज
  229. 9:25करेंगे जो डायनेमिक सर्विस लोकेशन लेता
  230. 9:27है। जिससे सिस्टम हाई फ्लैक्सिबल हो जाता
  231. 9:30है। स्केलिंग एंड रीडप्लॉयमेंट का टाइम भी
  232. 9:33बचता है क्योंकि हमें बार-बार प्रोजेक्ट
  233. 9:35को रिस्टार्ट नहीं करना पड़ता। कोई भी
  234. 9:37कॉन्फ़िगरेशन चेंज नहीं करनी पड़ती है
  235. 9:39बार-बार। इस वजह से एप्लीकेशन की
  236. 9:41परफॉर्मेंस भी हाई होती है। अब रिक्वेस्ट
  237. 9:44जब किसी स्पेसिफिक माइक्रो सर्विस में
  238. 9:46एंटर करती है तो कंट्रोलर लेयर रिक्वेस्ट
  239. 9:48को रिसीव करता है एंड उसे डोमेन या
  240. 9:51एप्लीकेशन लेयर तक फॉरवर्ड करता है। एंड
  241. 9:54यहीं से ही एक्चुअल बिजनेस प्रोसेसिंग
  242. 9:56स्टार्ट हो जाता है। जहां पर डोमेन ड्रिवन
  243. 9:59डिज़ बेस्ड डोमेन मॉडल्स अप्लाई होते हैं।
  244. 10:02एंड इसी को बोला जाता है ट्रिपल डी बेस्ड
  245. 10:04मॉडल। आप इसे ऐसे समझो कि मान लो कोई यूजर
  246. 10:07फंड ट्रांसफर कर रहा है तो उस केस में
  247. 10:10ट्रांजैक्शन एग्रीगेट वैलिडेट करता है कि
  248. 10:13सफिशिएंट बैलेंस है इस अकाउंट में या नहीं
  249. 10:16है। डेली लिमिट क्रॉस तो नहीं हुई है एंड
  250. 10:19रेगुलेटरी रूल फॉलो हो रहे हैं या नहीं हो
  251. 10:21रहे हैं। अब बिजनेस रूल्स के एग्जीक्यूट
  252. 10:24होने के बाद डेटा पर्सिस्टेंस का काम होता
  253. 10:26है। मतलब यहां पर रिपोजिटरी एंड
  254. 10:29इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर काम करता है। जिसके
  255. 10:32लिए मैं पहले ही क्लियर कर चुका हूं कि जो
  256. 10:34कोर बैंकिंग डाटा होगा वह पोस्ट ग्रे
  257. 10:36एसक्यूएल में स्टोर होगा एंड ऑडिट लॉक्स
  258. 10:39के लिए मोंगो डीवी का यूज़ किया जाएगा।
  259. 10:42इसके साथ ही फ्रीक्वेंटली यूज़्ड डेटा को
  260. 10:44रेडिश में कैश किया जाएगा। इसके अलावा
  261. 10:46मैंने बताया था कि यहां पर हम वर्जनिंग
  262. 10:49कंट्रोल भी करेंगे जिसके लिए फ्लाई वे का
  263. 10:51यूज करेंगे जिससे स्कैम चेंज सेफ एंड
  264. 10:54ट्रेसेबल रहते हैं। अब इसके बाद जैसे ही
  265. 10:56कोई इंपॉर्टेंट एक्शन कंप्लीट होता है
  266. 10:59जैसे ट्रांजैक्शन सक्सेस या फेल तो आपको
  267. 11:02पता ही है कि यह इवेंट्स असिंक्रोनस होते
  268. 11:04हैं जिससे दूसरी सर्विज जैसे नोटिफिकेशन
  269. 11:07सर्विस, ऑडिट सर्विस या फंड डिडक्शन
  270. 11:10सर्विस इनको इंडिपेंडेंटली कंज्यूम करती
  271. 11:12रहती हैं। इस अप्रोच के थ्रू कोर
  272. 11:14ट्रांजैक्शनल फ्लो फास्ट रहता है एंड साइड
  273. 11:18इफ़ेक्ट्स भी लूजली कपल्ड रहते हैं जो कि
  274. 11:20हाई स्केल बैंक के लिए आइडल माने जाते
  275. 11:22हैं। अब इन सभी स्टेप के पैरेलल एक और
  276. 11:26फंक्शनैलिटी हमारी चलती रहती है जो हर
  277. 11:28रिक्वेस्ट का ट्रेस ओपनर टेलीमेट्री के
  278. 11:31थ्रू जनरेट करता है। मैट्रिक्स प्रोमोथियस
  279. 11:33कलेक्ट करता है। एंड लॉक्स ईएल के स्टक
  280. 11:36में सेंट्रलाइज्ड होते रहते हैं। ठीक? अब
  281. 11:39आते हैं डिप्लॉयमेंट फेज में। तो सारी
  282. 11:41सर्विज डॉकर कंटेनर में पैकेज होती हैं
  283. 11:44एंड क्यूब नेट पर रन की जाती हैं। अब
  284. 11:46क्यूब ऑटो स्केलिंग, सेल्फ हीलिंग एंड
  285. 11:49रोलिंग डिप्लॉयमेंट प्रोवाइड करता है
  286. 11:51जिससे बैंकिंग सिस्टम हाई अवेलेबिलिटी के
  287. 11:54साथ 24/7 रन होता रहता है। इसके अलावा
  288. 11:57सीआईसीडी पाइपलाइन ऑटोमेटिकली कोड बिल्ड,
  289. 12:00टेस्ट एंड डिप्लॉय करती है। जिससे जो
  290. 12:03ह्यूमन एरर पॉसिबिलिटी होती है वो कम हो
  291. 12:05जाती है। ठीक है? इसके बाद लास्ट में जब
  292. 12:08पूरा फ्लो सक्सेसफुली कंप्लीट हो जाता है
  293. 12:10तो रिस्पांस वापस एपीआई गेटवे के थ्रू
  294. 12:13फ्रंट एंड को फॉरवर्ड कर दिया जाता है एंड
  295. 12:15यूजर को इंस्टेंट फीडबैक मिल जाता है।
  296. 12:18जैसे ट्रांजैक्शन सक्सेस मैसेज या अपडेटेड
  297. 12:21बैलेंस कुछ भी जो भी उसने एक्शन परफॉर्म
  298. 12:24किया होता है उसके अकॉर्डिंग उसे रिस्पांस
  299. 12:26मिल जाता है। अब यही वो एक्चुअल फ्लो है
  300. 12:29जिसके थ्रू एक हाई लेवल बैंकिंग एप्लीकेशन
  301. 12:31को सिक्योर स्केलेबल एंड इंडस्ट्री ग्रेड
  302. 12:34एप्लीकेशन बनाया जाता है। ठीक? तो, अब
  303. 12:36आपको क्लियर हो गया होगा कि जो हमें
  304. 12:39प्रोजेक्ट बनाना है एंड जो एक्चुअल
  305. 12:41बैंकिंग प्रोजेक्ट होते हैं, वह किस तरह
  306. 12:43से काम करते हैं। हम किस तरह से काम
  307. 12:45करेंगे, कौन-कौन सी टेक्नोलॉजीस यूज़
  308. 12:47करेंगे? डिज़ाइन क्या होगा? फ्लो कैसे काम
  309. 12:50करेगा? ये सारी चीजें आपको क्लियर हो गई
  310. 12:52होंगी। अब अगर इस सीरीज को आप कंटिन्यू
  311. 12:55करना चाह रहे हो, तो इस लेक्चर को लाइक
  312. 12:57करिए। एंड अगर अभी तक चैनल को सब्सक्राइब
  313. 12:59नहीं किया तो चैनल को भी सब्सक्राइब कर
  314. 13:01लें। अब हम मिलते हैं नेक्स्ट लेक्चर में।
  315. 13:03थैंक यू।

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