How Indians Mastered CIVIC SENSE (Sarcasm) — Transcript
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- 0:00अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो
- 0:02काफी तेजी से वायरल हो रही थी जिसमें एक
- 0:04फॉरेनर हिमाचल प्रदेश के एक वॉटरफॉल के
- 0:07पास कचरा साफ करते हुए नजर आ रहे थे और
- 0:10लोगों को भी ज्ञान बांट रहे थे कि ऐसे
- 0:12कचरा मत फैलाओ साफ सफाई रखा करो।
- 0:22और दूसरी तरफ एक इंडियन है जो फॉरेन में
- 0:24जाकर हम इंडियंस को यह समझाने की कोशिश कर
- 0:27रहे हैं कि क्या है यह फॉरेन। बस वही
- 0:29सड़कें, वही पानी, वही इमारतें। बस फर्क
- 0:32यह है कि ना यहां किसी ने गुटका थूका है,
- 0:34ना ही कचरा फैलाया है। चारों तरफ बस सफाई
- 0:37ही सफाई।
- 0:38क्या है फॉरेन? कुछ भी नहीं है फॉरेन में
- 0:41भाई। अगर यही चीज हम अपने यहां बनाना चाहे
- 0:44ना वो भी बन सकता है। बट थोड़ा सा सपोर्ट
- 0:46हमारी गवर्नमेंट का, कुछ लोगों का भी बहुत
- 0:48इंपॉर्टेंट है। क्यों? क्या दिख रहा है
- 0:49यहां पे? कुछ भी नहीं। क्या है? पेड़ पौधे
- 0:52तो हमारे यहां भी हैं। सब यहीं पे हैं।
- 0:54बिल्डिंग हमारे यहां पे भी है। नदियां
- 0:56हमारे यहां पे भी है। बस फर्क क्या पड़ता
- 0:58है? साफ सफाई का। जगह नहीं लगे हैं। ये
- 1:01लाल है तो लाल है। यहां पर किसी ने गुटखा
- 1:03पहन के उसको लाल नजर रख।
- 1:06आजकल जिसे देखो वो इंडिया की सिविक सेंस
- 1:09पर बात कर रहा है। स्पेशली फॉरेनर्स या तो
- 1:12इंटेंशनली या अनइटेंशनली इंडिया आते हैं
- 1:15और इंडिया की सिविक सेंस की धज्जियां उड़ा
- 1:17कर चले जाते हैं। आप यह वीडियो देखो।
- 1:20ओ
- 1:23पागल है
- 1:25ठीक है बच गए
- 1:30लाइफ एक्सपेक्ट इंडिया लाइक अबाउट 53
- 1:34वो कहते हैं ना कि अगर आप मौका दोगे तो
- 1:36लोग चौका तो मारेंगे ही तो बस इन फॉरेनर्स
- 1:38को भी इंडिया के लोगों का एक सबसे बड़ा
- 1:40लूप होल मिल चुका है और वो है लैक ऑफ
- 1:43सिविक सेंस और इसी वजह से एक रशियन लेडी
- 1:46ने तंग आकर ₹100 चार्जेस करना स्टार्ट कर
- 1:48दिए एक फोटो खिंचवाने के लिएम
- 1:57एक्शन
- 1:59कैमरा एक्शन
- 2:01बिकॉज़ कंटीन्यूसली लोग उसे परेशान कर रहे
- 2:04थे साथ में फोटो लेने के लिए और इन हरकतों
- 2:06से हमारे टूरिज्म पर भी बहुत इफेक्ट पड़ता
- 2:09है। और अगर टूरिज्म की बात की है तो अभी
- 2:11रिसेंटली एक पोलिश ब्लॉगर इंडिया आती है
- 2:13और ताजमहल देखने के बहाने उसने यमुना के
- 2:16आसपास फैली गंदगी और कचरे को दिखाते हुए
- 2:19कहा कि यह है रियल इंडिया।
- 2:23इंडिया।
- 2:26हम इंडियंस में सिविक सेंस की इतनी ज्यादा
- 2:28कमी है कि घर से निकलते ही हम यह भूल जाते
- 2:31हैं कि अगर हम कचरा फैला रहे हैं तो क्या
- 2:33ही फर्क पड़ता है। क्योंकि बाहर की
- 2:35सड़कें, इमारतें या कोई भी पब्लिक प्लेस
- 2:37हमारा थोड़ी ना है। वो तो सरकार की
- 2:39जिम्मेदारी है। अब चाहे वहां पर गुटखा
- 2:41थूको, कचरा फेंको, गंदगी फैलाओ क्या ही
- 2:43फर्क पड़ता है। क्योंकि हमारे अंदर सब कुछ
- 2:46चलता है वाला एटीट्यूड है। हम सोचते हैं
- 2:48कि हम ही क्यों करें? बाकी लोगों को भी
- 2:50करनी चाहिए। और इसी वजह से यही चैन
- 2:52कंटीन्यूअसली चलता रहता है और किसी को कोई
- 2:55फर्क नहीं पड़ता। हमारे यहां के लोगों के
- 2:57सिविक सेंस का एक अगर छोटा सा एग्जांपल
- 2:59देखना है तो किसी भी रेलवे स्टेशन चले जाओ
- 3:01और जब कोई ट्रेन आता है उसके बाद जब लोग
- 3:04एक दूसरे को धक्का मारते हुए कैसे उस
- 3:06ट्रेन पर चढ़ते हैं वो देखने लायक सीन
- 3:08होता है।
- 3:11क्या हाल हो गया यार।
- 3:13भाई बेचारे कैसे जाएंगे ये लोग? लेकिन वही
- 3:16अगर किसी मेट्रो स्टेशन चले जाओ तो वहां
- 3:18का सिचुएशन काफी बेहतर नजर आएगा क्योंकि
- 3:21वहां पर हमें वर्ल्ड क्लास फैसिलिटीज दी
- 3:23गई है। लेकिन फिर भी कुछ लोग वहां पर भी
- 3:25गंदगी फैलाने से रुकते नहीं है। मेट्रो के
- 3:28अंदर भी कुछ लोग अपने क्रिंज हरकतों से
- 3:30बाज नहीं आते। पब्लिक प्लेस को लोग
- 3:32प्राइवेट प्लेस समझकर जो मन चाहता है वो
- 3:34करते हैं। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो
- 3:36इंडियन रेलवेेज हर साल 1200 करोड़ खर्च
- 3:39करती है इन गुटखा के दाग धब्बों को रिमूव
- 3:41करने के लिए और यह सिर्फ इंडिया तक ही
- 3:43सीमित नहीं है। हम इंडियंस ने अपनी छाप
- 3:45ऐसी छोड़ी है कि फॉरेन कंट्रीज भी परेशान
- 3:48है। अब यूके को ही देख लो तो हर साल लाखों
- 3:51रुपए खर्च करता है इन गुटखा के स्टेंस को
- 3:53हटाने के लिए और वहां इस तरह के बोर्ड
- 3:55लगाए जाते हैं वो भी स्पेसिफिकली गुजराती
- 3:57लैंग्वेज में कि अगर आप गुटखा थूकते हो तो
- 3:59आप पर 13 हजार से ज्यादा रुपए फाइन लगाया
- 4:02जाएगा। हम इंडियंस में सिविक सेंस की इतनी
- 4:04कमी हो चुकी है कि जमीन पर तो छोड़ो हवा
- 4:07में भी यह अपना सिiिक सेंस का परचम लहरा
- 4:09रहे हैं। जी मैं बात कर रही हूं एक
- 4:11Instagram इन्फ्लुएंसरर की जो फ्लाइट में
- 4:13स्पीकर्स लेकर गए और वहां गाना बजाना शुरू
- 4:16कर दिया।
- 4:20बोला था ना भी गाने गाऊंगा।
- 4:22और कुछ लोगों की प्रॉब्लम यह भी है कि
- 4:24पब्लिक प्लेसेस में या पब्लिक ट्रांसपोर्ट
- 4:26में लाउडस्कर पे कॉल पर बात करेंगे या फिर
- 4:29फुल वॉल्यूम में YouTube या Instagram की
- 4:31वीडियोस देखते हैं जैसे कि वो अपने घर में
- 4:33बैठे हो। एंड सीरियसली इट्स वेरी
- 4:35इरिटेटिंग। अगर आप ट्रेन में या बस में
- 4:37ट्रैवल किए होंगे तो आपने भी यह
- 4:39एक्सपीरियंस जरूर किया होगा। और इसी बात
- 4:41पर एक इंडियन ट्रैवलर ने अबू धाबी
- 4:43एयरपोर्ट पर दूसरे इंडियन ट्रैवलर के बारे
- 4:46में बात करते हुए कहा कि कुछ इंडियंस में
- 4:48सिविक सेंस की इतनी कमी है कि लोगों को
- 4:50पता ही नहीं है कि कहां पर कैसे बात करना
- 4:53है। कितने जोर से बात करना है। आप यह
- 4:55वीडियो देखिए।
- 4:57सिटींग्स
- 4:59एट अबू धाबी एटलीमेंट
- 5:02टू लोअर दिस। ही स्पीकिंग एक्सट्रीमली
- 5:05लाउडली। वी हैव ज़ीरो सिविक सेंस और पब्लिक
- 5:09स्पेन।
- 5:10हमारे यहां ट्रैफिक रूल्स ब्रेक करना,
- 5:12ओवरस्पीडिंग करना इन सब चीजों पर चालान
- 5:15काटा जाता है। लेकिन फिर भी लोगों को फर्क
- 5:17नहीं पड़ता। और आजकल के जो ये जजी हैं वो
- 5:20तो अलग ही पैरेलल वर्ल्ड में जी रहे हैं।
- 5:22अगर उनके हाथ में कम उम्र में ही बाइक या
- 5:24गाड़ी लग गई फिर तो वो किसी की नहीं
- 5:26सुनते। आए दिन आप एक्सीडेंट्स के ट्रैफिक
- 5:28रूल्स ब्रेक करने के गाड़ी के ओवरस्पीडिंग
- 5:31की खबरें सुनते होंगे और अभी हाल ही में
- 5:32एक न्यूज़ काफी लाइमलाइट में आया जब जम्मू
- 5:35में एक Thar ने ओवर स्पीडिंग करते हुए एक
- 5:37अंकल को टक्कर मारी। उस वक्त अंकल का लक
- 5:40अच्छा था कि वो उठकर खड़े हो गए और खुद को
- 5:42संभालने की कोशिश ही कर रहे थे कि वो Thar
- 5:45एक बार फिर से रिवर्स आकर उन्हें ऐसा
- 5:47टक्कर मारती है जिसकी वजह से उनका ब्रेन
- 5:49हैमरेज हो गया और आज वह जिंदगी मौत से लड़
- 5:52रहे हैं। और उस Thar चलाने वाले लड़के की
- 5:54उम्र पता है कितनी थी? सिर्फ 20 साल।
- 5:56इंडिया में हर 3 मिनट में एक डेथ होती है
- 5:59सिर्फ रोड एक्सीडेंट्स की वजह से। और 2023
- 6:02की ही बात करें तो 1,7,20,000 लोगों की
- 6:05मौत सड़क दुर्घटना में हुई। जिसमें 54,000
- 6:07लोग हेलमेट ना पहनने की वजह से और 16,000
- 6:10लोग सीट बेल्ट ना लगाने की वजह से अपनी
- 6:12जिंदगी से हाथ धो बैठे। 2 अक्टूबर 2014 को
- 6:16हमारे देश में स्वच्छ भारत अभियान को
- 6:18इंट्रोड्यूस किया गया और इस कैंपेन का मेन
- 6:20मकसद था कि 2 अक्टूबर 2019 तक इंडिया को
- 6:23क्लीन बना दिया जाए। 2025 चल रहा है।
- 6:26लेकिन आज भी लोगों को हाइजीन और
- 6:27क्लीनलीनेस क्या होता है इसके बारे में
- 6:29ढंग से पता ही नहीं है। कहीं पर भी चॉकलेट
- 6:32खाया उसका रैपर फेंक दिया। चलती गाड़ी हो
- 6:34या ट्रेन हो बस कचरा उठाओ और खिड़की से
- 6:36बाहर फेंको। सरकार साफ कर देगी हमें क्या
- 6:39ही फर्क पड़ता है।
- 6:39सारा कूड़ा बाहर फेंक दे ट्रैक पे।
- 6:44ऐसे बाहर फेंका तो कौन
- 6:46ये देखो
- 6:52लेकिन इसका रिजल्ट ये होता है कि इंडिया
- 6:54में हर साल 62 मिलियन टन्स कचरा जनरेट
- 6:57होता है। जिसमें से आधा भी प्रॉपर्ली
- 6:59कलेक्ट नहीं हो पाता। अब देखो ये सिविक
- 7:01सेंस एक्चुअल में होता क्या है? सिविक
- 7:03सेंस का मतलब होता है सोशल एथिक्स यानी
- 7:05सोसाइटी के प्रति हमारी बेसिक
- 7:07रिस्पांसिबिलिटी और रिस्पेक्ट फॉर पब्लिक
- 7:09स्पेसेस। इमेजिन कि आप अपने घर को साफ
- 7:12रखते हैं वैसे ही दिल से अपनी सड़क,
- 7:14पार्क, बस, ट्रेन को भी अपना मानना दैट
- 7:17सिविक सेंस। अब देखो, इसके बाद सबसे बड़ा
- 7:19सवाल ही आता है कि व्हाई डू वी लैक सिविक
- 7:22सेंस? लेकिन आपसे रिक्वेस्ट है कि यह
- 7:24पार्ट पूरा जरूर देखना क्योंकि सबसे
- 7:26इंपॉर्टेंट बातें मैं आगे ही करने वाली
- 7:28हूं। बचपन से ही स्कूल्स में हमें सिविक्स
- 7:30पढ़ाया तो जाता है पर बस किताब तक ही
- 7:32सीमित रहता है। प्रैक्टिकल सिविक्स सेंस
- 7:35सिखाया ही नहीं जाता। हमारे सिलेबस में
- 7:37देश के संविधान की बातें होंगी। आर्टिकल
- 7:3951 ए ऑफ कॉन्स्टिट्यूशन फंडामेंटल ड्यूटीज
- 7:42के बारे में बात करता है। लेकिन रोड पर
- 7:44कूड़ा ना फेंको या पब्लिक प्रॉपर्टी को
- 7:46डैमेज ना करो। ये बेसिक चीजें कोई सिखाता
- 7:49ही नहीं है। स्कूल्स में भी हम एक-द दिन
- 7:51क्लीनलीनेस डे मनाकर रह जाते हैं। जबकि
- 7:53जापान जैसी कंट्रीज में बच्चे क्लासरूम
- 7:56साफ करते हैं एज अ पार्ट ऑफ स्कूलिंग ताकि
- 7:58उनमें शुरू से ही रिस्पांसिबिलिटी आए। और
- 8:00हमारे यहां क्या होता है? नौकर साफ कर
- 8:02देगा, सफाई वाला आकर कचरा ले जाएगा
- 8:04एटसेट्रा। सो, हमारे अंदर सिविक ड्यूटीज
- 8:07की हैबिट आती ही नहीं है। और इसका रिजल्ट
- 8:09यह होता है कि बड़े होकर भी लोग बिना सोचे
- 8:11समझे गंदगी फैलाते हैं क्योंकि सेंस ऑफ
- 8:14ओनरशिप डेवलप हुआ ही नहीं होता है कभी। एक
- 8:16और बड़ी वजह है माइंडसेट की प्रॉब्लम।
- 8:18ब्रिटिश कॉलोनियल रूल ने हमें सिखाया था
- 8:20कि पब्लिक प्रॉपर्टी जो होती है वह सरकार
- 8:22की है। जनता की नहीं। आज भी कहीं ना कहीं
- 8:25वही सोच हमारे अंदर है कि पब्लिक
- 8:26प्रॉपर्टी को हम अपना मानते ही नहीं है।
- 8:29बिहेवियरल साइंस में इसको एंडमेंट इफेक्ट
- 8:31बोलते हैं। यानी जब तक कोई चीज अपना नहीं
- 8:33लगता, हम उसका वैल्यू नहीं करते हैं।
- 8:35इंडिया में लोग सड़क, पार्क, रेस्ट रूम को
- 8:38अपना नहीं समझते। सो दे मिसयूज इट। और
- 8:40हमारे यहां पुअर इनफोर्समेंट ऑफ लॉस की
- 8:42वजह से भी लोगों में या एडमिनिस्ट्रेशन
- 8:45में सीरियसनेस है ही नहीं। कानून तो है,
- 8:47स्पिटिंग और लिटरिंग पर फाइन तो है,
- 8:49ट्रैफिक रूल्स भी हैं पर इनफोर्समेंट ढंग
- 8:52से है ही नहीं। जैसे हमारे यहां ट्रैफिक
- 8:54लॉज़ पेपर पे तो बहुत स्ट्रिक्ट है, लेकिन
- 8:56ग्राउंड पे हर कोई तोड़ता है। क्योंकि कोई
- 8:58जवाबदेही नहीं है और काफी जगह 200, 400
- 9:00देकर लोग छुटकारा पा लेते हैं। लेकिन क्या
- 9:02इन सबके बावजूद यह पॉसिबल नहीं है कि
- 9:04इंडिया में लोगों के अंदर सिविक सेंस लाया
- 9:07जाए? कुछ एग्जांपल से समझते हैं। जैसे
- 9:09मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की बात करें तो
- 9:112017 के पहले तक इंदौर बस एक एवरेज सिटी
- 9:15था। एक्चुअली 2016 में इंदौर की रैंक 25th
- 9:18थी स्वच्छता सर्वेक्षण में। लेकिन 2017 से
- 9:21लेकर आज तक लगातार आठ सालों से इंदौर
- 9:23इंडिया का नंबर वन क्लीनेस्ट सिटी रहा है।
- 9:26हर गली में डस्टबिन हर घर से डोर टू डोर
- 9:28कूड़ा कलेक्शन 8500 प्लस सैनिटेशन वर्कर
- 9:32दिन रात मेहनत करते हैं। सुबह-सुबह सड़कों
- 9:34पर पानी से धुलाई होती है और कचरे के
- 9:36ट्रक्स एक स्पेशल जिंगल बजाते हैं। इंदौर
- 9:39हो गया नंबर वन।
- 9:41[प्रशंसा]
- 9:45है
- 9:48[प्रशंसा]
- 9:50जिसे सुनकर लोग अपने सेग्रगेटेड कूड़ा
- 9:53लेकर बाहर निकलते हैं। यह सारा वेस्ट
- 9:55कंपोस्ट और फ्यूल में कन्वर्ट होता है जो
- 9:58फार्म्स और सिटी बसेस में यूज़ होता है।
- 10:00मोस्टेंटली इंदौर वालों के अंदर सिविक
- 10:03प्राइड आ चुका है कि उन्हें अपना सिटी
- 10:05क्लीन रखना है एट एनी कॉस्ट। उसी तरह एक
- 10:08एग्जांपल सेट किया था केरला ने। यहां के
- 10:11लोगों ने 2018 के डिवास्टेटिंग फ्लड्स के
- 10:13वक्त जो डिसिप्लिन और पेशेंस दिखाया वो
- 10:16पूरे देश के लिए एग्जांपल है। मल्लपुरम
- 10:18डिस्ट्रिक्ट में फ्लड के बाद एक पेट्रोल
- 10:20पंप खुला। फ्यूल लेने के लिए 5 कि.मी.
- 10:23लंबी लाइन लग गई गाड़ियों की। बट गेस
- 10:26व्हाट? इतनी लंबी लाइन के बावजूद भी ना
- 10:28कोई ओवरटेक, ना किसी ने कोई हंगामा किया।
- 10:31सो इट्स अप टू अस। देश को कोई गवर्नमेंट
- 10:33या लीडर अकेले नहीं बदल सकता। 140 करोड़
- 10:36लोग मिलकर बदलेंगे तभी बदलेगा। सो स्प्रेड
- 10:39दिस वीडियो एज मच एस पॉसिबल क्योंकि सारे
- 10:41जहां से अच्छा हिंदुस्तान सिर्फ बोलने से
- 10:43ही नहीं जब हम अपनी भी सिविक ड्यूटीज फॉलो
- 10:46करेंगे तभी कुछ पॉसिबल है। वीडियो अच्छा
- 10:48लगा हो तो आप कमेंट जरूर करना और 95% लोग
- 10:51वीडियो तो देख लेते हैं बट सब्सक्राइब
- 10:53नहीं करते। सो प्लीज सब्सक्राइब बिकॉज़ एक
- 10:56वीडियो बनाने में काफी मेहनत लगता है। एंड
- 10:58आपके लिए यह बिल्कुल फ्री है। और आगे अभी
- 11:01बहुत सारे इंपॉर्टेंट इशूज़ पर वीडियो आने
- 11:03वाले हैं। इसलिए ऐसे ही सपोर्ट करते रहें।
- 11:06थैंक यू सो मच।
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