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How Glass Is Made From Sand: The Complete 1500°C Factory Process Explained — Transcript

by Maloomatistan · 1,828 words · 219 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00नाजरीन, हम 150 कि.मी. फी घंटा की रफ्तार
  2. 0:03से मोटरवे पर गाड़ी चलाते हैं। हमारे और
  3. 0:07तूफानी हवाओं के दरमियान सिर्फ एक शफाफ
  4. 0:10ढाल होती है। क्या आपने कभी सोचा है कि
  5. 0:13जिस चीज पर हम अपनी जान का इतना भरोसा
  6. 0:15करते हैं वो आखिर बनी किस चीज से है? शायद
  7. 0:19आपको यकीन ना आए। यह मजबूत ढाल, फलकबोस
  8. 0:22इमारतों की खिड़कियां और आपके मोबाइल की
  9. 0:25यह चमकदार स्क्रीन यह सब सिर्फ मामूली रेत
  10. 0:29से बने हैं। जी हां, बिल्कुल वही रेत जो
  11. 0:32मुट्ठी में बंद करें तो फौरन फिसल जाती
  12. 0:35है। तो फिर यह बिखरने वाली रेत इतनी ठोस
  13. 0:38और शफाफ कैसे बन जाती है कि हम उस पर अपनी
  14. 0:41हिफाजत छोड़ देते हैं। क्या आप जानते हैं
  15. 0:44कि उसके पीछे आग का कितना खौफनाक अमल छुपा
  16. 0:48है? हम सब ने कभी ना कभी रेत को हाथों में
  17. 0:52जरूर उठाया होगा। आप उसे जोर से मुट्ठी
  18. 0:54में दबाते हैं और वो खामोशी से उंगलियों
  19. 0:57के दरमियान से फिसल जाती है। यह रेत की
  20. 1:00फितरत है बिखर जाना। लेकिन फिर एक ऐसा
  21. 1:04कमाल जो अक्ल को दंग कर देता है। बिखरने
  22. 1:07वाली यही मामूली रेत एक ऐसी चट्टान बन
  23. 1:11जाती है जिसके आर-पार देखा जा सकता है। यह
  24. 1:14कोई सीधा साधा अमल नहीं कि बस रेत को आग
  25. 1:17में डाला और शीशा बन गया। बिल्कुल नहीं।
  26. 1:20उसके पीछे एक ऐसा खौफनाक सफर है जिस पर
  27. 1:24यकीन करना मुश्किल है। रेत को एक ऐसे
  28. 1:27दहकते हुए जहन्नुम से गुजरना पड़ता है
  29. 1:30जहां लोहा भी पानी की तरह बहने लगे। आज
  30. 1:33जानेंगे कि आम सी मिट्टी कैसे एक मजबूत और
  31. 1:37शफाफ ढाल बन जाती है। आखिर इसके पीछे क्या
  32. 1:40राज है। आइए इस दिलचस्प सफर का आगाज करते
  33. 1:44हैं। दोस्तों आप सोच रहे होंगे कि रेत को
  34. 1:48भट्टी में डाला और शीशा तैयार हो गया।
  35. 1:51लेकिन ऐसा नहीं है। रेत को शीशे में बदलने
  36. 1:54के लिए उसे बहुत ज्यादा गर्म करना पड़ता
  37. 1:56है। और अगर हम सिर्फ रेत को गर्म करें तो
  38. 1:59उसके लिए बेहद ज्यादा हरारत चाहिए होगी।
  39. 2:03तो फिर शीशा बनाने का यह काम आसान कैसे
  40. 2:06होता है?
  41. 2:07यही वो दिलचस्प अमल है जहां कीमिया का
  42. 2:10कमाल सामने आता है। रेत को आसानी से
  43. 2:13पिघलाने के लिए उसमें एक खास चीज मिलाई
  44. 2:16जाती है। उसे सोडा ऐश कहते हैं। यह वो
  45. 2:19जादुई पाउडर है जो रेत को फौरन पिघलने में
  46. 2:22मदद देता है। लेकिन एक मसला है। रेत और
  47. 2:26सोडा मिलकर जो शीशा बनाते हैं वो पानी में
  48. 2:29घुल सकता है। क्या आप ऐसी खिड़की चाहेंगे
  49. 2:32जो बारिश होते ही गायब हो जाए? जाहिर है
  50. 2:35नहीं। इसीलिए उसमें चूना पत्थर मिलाया
  51. 2:38जाता है। यह चूना पत्थर उस शीशे को वह
  52. 2:42ताकत देता है कि वह सालों साल हर तूफान का
  53. 2:45मुकाबला करें। लेकिन ठहरिए इस कहानी में
  54. 2:48सबसे चौंका देने वाली चीज तो अभी बाकी है।
  55. 2:51जरा सोचें। क्या मरा हुआ शीशा दोबारा
  56. 2:55जिंदा हो सकता है? फैक्ट्री वाले एक ऐसा
  57. 2:58काम करते हैं जो आमतौर पर हमें नहीं बताया
  58. 3:01जाता। वो पुराना, टूटा हुआ और जायाशुदा
  59. 3:05शीशा उस नए मिक्सचर में मिला देते हैं।
  60. 3:08उसे कल्ट कहते हैं। यह टूटा हुआ शीशा इस
  61. 3:11पूरे मिक्सचर में एक नई जान डाल देता है।
  62. 3:15यह ना सिर्फ आग को बचाता है बल्कि नए शीशे
  63. 3:18को और भी शानदार बना देता है। अब इस
  64. 3:21मिक्सचर को एक ऐसी देव हैकल भट्टी में
  65. 3:24डाला जाता है जिसे अगर हम आग का जहन्नुम
  66. 3:27कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। यह कोई आम
  67. 3:30भट्टी नहीं है। इसके अंदर का दर्जा हरारत
  68. 3:341500 डिग्री सेंटीग्रेड की आखिरी हदों को
  69. 3:37छू रहा होता है। जरा एक लम्हे के लिए
  70. 3:39सोचिए। 1500 डिग्री यह इतनी खौफनाक और
  71. 3:44दहकती हुई आग है कि अगर इसमें लोहे के
  72. 3:47बड़े-बड़े ब्लॉक भी फेंक दिए जाएं तो वह
  73. 3:49भी अपना वजूद खोकर पानी की तरह बहने लगे।
  74. 3:53जब रेत और पत्थरों का यह मिक्सचर भट्टी की
  75. 3:56तेज आग में डाला जाता है तो शदीद गर्मी से
  76. 3:59यह आहिस्ता-आहिस्ता पिघलने लगता है। जो
  77. 4:03रेत पहले आसानी से उंगलियों के दरमियान से
  78. 4:05निकल जाती थी वो अब उस गर्मी में पिघल कर
  79. 4:08एक नई शक्ल इख्तियार करने लगती है। और फिर
  80. 4:11वो हैरतंगेज लम्हा आता है जब यह सूखी रेत
  81. 4:15एक चमकते हुए इंतहाई गाढ़े और उबलते हुए
  82. 4:19लावे में बदल जाती है। बिल्कुल ऐसे जैसे
  83. 4:22आतिश फिशा से आग की कोई नदी बह रही हो।
  84. 4:26मगर रुकिए। काम अभी खत्म नहीं हुआ। उस
  85. 4:29उबलते हुए लावे में एक बहुत बड़ा खतरा
  86. 4:32छुपा है। उसके अंदर लाखों छोटे-छोटे गैस
  87. 4:36के बुलबुले होते हैं। अगर उस पिघले हुए
  88. 4:38शीशे को उसी हालत में आगे भेज दिया जाए,
  89. 4:41तो तैयार होने वाला शीशा इंतहाई कमजोर
  90. 4:44होगा। उसमें धब्बे होंगे और वह जरा सी चोट
  91. 4:47लगने से चिकनाचोर हो जाएगा। उस खराबी को
  92. 4:50खत्म करने के लिए उस लावे को एक खास वक्त
  93. 4:53तक उसी आग में मजीद तपाया जाता है।
  94. 4:56आहिस्ता-आहिस्ता वो सारे बुलबुले ऊपर सतह
  95. 4:59पर आकर खत्म हो जाते हैं। अब यह उबलता हुआ
  96. 5:02मादा आहिस्ता-आहिस्ता हमार और चमकदार होने
  97. 5:06लगता है। जो मिट्टी पहले जमीन पर बिखरी
  98. 5:09हुई थी, वो शदीद गर्मी में पिघल कर एक
  99. 5:12गाढ़े शफाफ माये में बदल चुकी होती है। अब
  100. 5:15यहां एक बड़ा मसला है। हमारे पास एक
  101. 5:18इंतहाई गर्म और शहद जैसा गाढ़ा पिघला हुआ
  102. 5:22मादा है। लेकिन उसे एक बिल्कुल हमार, सीधी
  103. 5:25और शफाफ शीशे की चादर में कैसे बदला जाए?
  104. 5:29क्या कोई बहुत बड़ी मशीन उसे ऊपर से दबाती
  105. 5:32है? या कोई इंसान उसे हाथों से सीधा करता
  106. 5:35है। 1500 डिग्री के उस उबलते हुए मादे को
  107. 5:38तो छूना भी नामुमकिन है। उसके करीब जाना
  108. 5:41भी जान से खेलने के बराबर है। तो फिर यह
  109. 5:44शीशा इतना सीधा और हमार बनता कैसे है?
  110. 5:48यहीं से शीशा बनाने का असल तरीका शुरू
  111. 5:50होता है। इस तरीके को फ्लोट ग्लास प्रोसेस
  112. 5:54कहते हैं। यह एक ऐसी टेक्निक है जिसकी मदद
  113. 5:57से गर्म और पिघले हुए शीशे को बिल्कुल
  114. 6:00हमार और साफ चादर में बदला जाता है।
  115. 6:03फैक्ट्री के अंदर एक बहुत बड़ा टैंक मौजूद
  116. 6:06होता है और उस टैंक के अंदर पानी नहीं
  117. 6:09बल्कि पिघली हुई टिन धात की एक खतरनाक नदी
  118. 6:12बह रही होती है। जैसे ही गर्म पिघला हुआ
  119. 6:16शीशा उस टैंक में डाला जाता है तो एक
  120. 6:18हैरतंगेज अमल शुरू होता है। शीशा टिन में
  121. 6:22डूबने के बजाय उसकी सतह पर फैलने लगता है।
  122. 6:25बिल्कुल ऐसे जैसे पानी पर तेल फैल जाता
  123. 6:28है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शीशा और
  124. 6:31टिन दोनों का भारीपन अलग-अलग होता है। जरा
  125. 6:35उस मंजर का तसवुर करें। नीचे चांदी की तरह
  126. 6:38चमकता हुआ पिघला टिन है और उसके ऊपर गर्म
  127. 6:42पिघला हुआ शीशा तैर रहा है। जैसे-जैसे
  128. 6:45शीशा टिन की सतह पर फैलता है, कशिश सकल की
  129. 6:49वजह से उसकी सतह खुद ब खुद हमार होने लगती
  130. 6:52है। यहां किसी मशीन के दबाव की कोई जरूरत
  131. 6:55नहीं पड़ती। फितरत का उसूल उसे खुद-ब खुद
  132. 6:58इतनी नफासत से हमार करता है कि उसकी मोटाई
  133. 7:02हर तरफ से बिल्कुल एक जैसी हो जाती है। अब
  134. 7:05रेत पिघलकर एक लंबी चमकदार और शफाफ शीशे
  135. 7:09की चादर बन चुकी है। लेकिन खतरा अभी टला
  136. 7:13नहीं है। यह शीशा अभी भी आग की तरह गर्म
  137. 7:16है। क्या आप जानते हैं कि अगर उस खोलते
  138. 7:19हुए शीशे पर फौरन ठंडी हवा लग जाए या उसे
  139. 7:22अचानक ठंडा कर दिया जाए तो क्या होगा? यह
  140. 7:25एक जोरदार धमाके से फट जाएगा। उसके अंदर
  141. 7:29इतना जबरदस्त दबाव और खिंचाव पैदा होगा कि
  142. 7:32यह अपने ही बोझ से चिकनाचोर हो जाएगा।
  143. 7:35इसीलिए उसे एक लंबी सुरंग जैसी मशीन से
  144. 7:38गुजारा जाता है। आप उसे शीशे का आईसीयू भी
  145. 7:41कह सकते हैं। यहां शीशे को
  146. 7:44आहिस्ता-आहिस्ता ठंडा किया जाता है ताकि
  147. 7:46उसके अंदर का सारा दबाव खत्म हो जाए और वो
  148. 7:50मजबूत बन जाए। शीशा तो ठंडा हो गया लेकिन
  149. 7:53क्या यह आपके घरों तक पहुंचने के लिए
  150. 7:56तैयार है? बिल्कुल नहीं। अब उसका सबसे
  151. 7:59कड़ा इम्तिहान शुरू होता है। इंसान की
  152. 8:02आंखें नहीं बल्कि जदीद तरीन कैमरे और
  153. 8:05कंप्यूटर स्कैनर्स उसके कोने-कोने को चेक
  154. 8:08करते हैं। क्या शीशे में सुई की नोक जितना
  155. 8:11भी बुलबुला है या कहीं हल्की सी खराश तो
  156. 8:14नहीं? अगर मशीन को जरा सा भी नक्श नजर आए
  157. 8:17तो वह उस जगह को निशान लगा देती है। फिर
  158. 8:20कंप्यूटराइज्ड कटर बड़ी नफासत से उस पर
  159. 8:23लकीरें खींचते हैं और उसे बिल्कुल परफेक्ट
  160. 8:26साइज में काट देते हैं। क्या आप समझते हैं
  161. 8:29कि खिड़कियों और गाड़ियों में लगने के बाद
  162. 8:31शीशे का सफर खत्म हो जाता है? नहीं। बल्कि
  163. 8:35उसके बाद उसकी एक नई और हैरानक कहानी शुरू
  164. 8:39होती है। हम रोजाना शीशे का इस्तेमाल करते
  165. 8:42हैं। लेकिन हर शीशा एक जैसा नहीं होता।
  166. 8:45जैसे गाड़ी की विंड स्क्रीन और घर की
  167. 8:48खिड़की का शीशा अलग-अलग होता है। कुछ
  168. 8:50शीशों को आग में तपाकर और फिर तेजी से
  169. 8:53ठंडा करके लोहे जैसा मजबूत बनाया जाता है
  170. 8:57जिसे हम टपर्ड ग्लास कहते हैं। और कुछ को
  171. 9:00प्लास्टिक की तहों के दरमियान रखा जाता है
  172. 9:03ताकि वो टूटने के बाद बिखरे नहीं। यही
  173. 9:06टेक्निक गोलियों तक को रोक लेती है। पर
  174. 9:09आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन की स्क्रीन
  175. 9:12उसकी मजबूती तो एक अलग ही साइंस है। लेकिन
  176. 9:15उस कहानी की सबसे हैरानक बात तो अब आएगी।
  177. 9:19शीशा कभी खत्म नहीं होता। यह हमेशा बाकी
  178. 9:22रहता है। जब कोई बोतल या खिड़की टूटती है
  179. 9:26तो हमें लगता है उसका सफर खत्म हो गया।
  180. 9:29मगर हकीकत में वहीं से उसकी दूसरी जिंदगी
  181. 9:32का आगाज होता है। उस कचरे को दोबारा
  182. 9:35फैक्ट्री लाया जाता है। उसे रंग और किस्म
  183. 9:38के हिसाब से इंतहाई एहतियात से अलग करते
  184. 9:42हैं। छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं और फिर
  185. 9:45दोबारा उसी भट्टी में डाल देते हैं। यहां
  186. 9:48यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि हर तरह के
  187. 9:51शीशे को एक साथ नहीं मिलाया जा सकता। वरना
  188. 9:54नया बनने वाला शीशा खराब हो जाएगा। यह
  189. 9:58टूटा हुआ शीशा दोबारा गर्म भट्टी में जाता
  190. 10:00है और पिघल कर एक नई शक्ल इख्तियार कर
  191. 10:03लेता है। आज जो टुकड़ा किसी पुरानी बोतल
  192. 10:06का हिस्सा है। कल वो किसी बड़ी इमारत की
  193. 10:09खिड़की बन जाए यानी शीशे का सफर कभी खत्म
  194. 10:12नहीं होता। यह बस बार-बार अपनी शक्ल बदलता
  195. 10:16रहता है। अब जरा पीछे मुड़कर देखें। जो
  196. 10:19चीज हमें इतनी आम लगती है, उसके पीछे
  197. 10:22कितनी बड़ी और सनसनीखेज दुनिया छुपी है।
  198. 10:26हम रोज खिड़की से बाहर देखते हैं। शीशे के
  199. 10:28गिलास में पानी पीते हैं और मोबाइल की
  200. 10:31स्क्रीन पर उंगलियां चलाते हैं। लेकिन हम
  201. 10:33कभी यह नहीं सोचते कि इन सबके पीछे क्या
  202. 10:37कहानी है। यह सिर्फ एक आर-पार नजर आने
  203. 10:40वाला माद्दा नहीं है। यह फिजिक्स,
  204. 10:42केमिस्ट्री और इंसान की इस जुनूनी मेहनत
  205. 10:45का एक ऐसा शाहकार है जिसे हम रोज अपनी
  206. 10:48आंखों के सामने देखते हैं। तो अगली बार जब
  207. 10:52आप किसी खिड़की के शीशे को छुएं या अपने
  208. 10:54मोबाइल की स्क्रीन की तरफ देखें तो एक
  209. 10:57लम्हे के लिए जरूर सोचिएगा कि जिस चीज को
  210. 11:00हम इतनी मामूली समझते हैं उसे बनने के लिए
  211. 11:03शदीद आग, पिघले हुए शीशे की नदियों और
  212. 11:07बड़ी-बड़ी मशीनों से गुजरना पड़ा है। यही
  213. 11:10तो साइंस की सबसे खूबसूरत बात है। जो चीज
  214. 11:13बजाहिर बिल्कुल सीधी और आम सी लगती है
  215. 11:16उसके अंदर एक पूरा जादुई सफर छुपा होता
  216. 11:20है। अगर आज का यह हैरतंगेज सफर आपको पसंद
  217. 11:23आया है तो इस वीडियो को लाइक जरूर कीजिएगा
  218. 11:26और हां चैनल को सब्सक्राइब करना मत
  219. 11:29भूलिएगा।

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