How Did Ancient Humans Survive Deadly Winters? — Transcript
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- 0:00जरा सोचो रात के 2:00 बज रहे हैं। बाहर
- 0:02तापमान -30° तक गिर चुका है। हवा इतनी तेज
- 0:05है कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। और
- 0:07तुम्हारे पास ना कोई हीटर है, ना जैकेट,
- 0:09ना कोई घर। बस एक गुफा है। एक छोटी सी आग
- 0:11है और जानवर की खाल का एक टुकड़ा। अगर यह
- 0:13आग बुझ गई तो अगली सुबह तुम्हारा शरीर जम
- 0:16चुका होगा। यह कोई डरावनी कहानी नहीं।
- 0:18हजारों साल पहले हमारे पूर्वजों की रोज की
- 0:20जिंदगी थी। आइस एज के दौरान कई इलाकों में
- 0:22इंसान ऐसी ठंड में रहता था, जो आज के
- 0:25ज्यादातर इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो
- 0:27सकती थी। फिर भी वह बचे रहे। पीढ़ी दर
- 0:29पीढ़ी, बिना टेक्नोलॉजी, बिना फैक्ट्रियों
- 0:31और बिना बिजली के इंसानों ने आखिर उस
- 0:33बर्फीले दौर को हरा कैसे दिया? एक ऐसा
- 0:36बेबस जीव जिसके पास ना शेर जैसे नुकीले
- 0:38दांत हैं, ना भालू जैसी मोटी चमड़ी, ना
- 0:40रात में देखने वाली आंखें। कुदरत के नियम
- 0:42के हिसाब से इस मौसम में इंसान का टिक
- 0:45पाना बेहद मुश्किल होना चाहिए था। लेकिन
- 0:47इंसान मरा नहीं। वो जिंदा रहा। उसने बर्फ
- 0:49के तूफानों के बीच बच्चे पाले और हजारों
- 0:51सालों तक चले उस कठिन दौर को घुटनों पर ला
- 0:53दिया। तो सवाल यह है कि जब कुदरत ने हमें
- 0:55जरा सी ठंड में मर जाने वाली कमजोर बॉडी
- 0:58दी तो हमारे पूर्वजों ने उस जमा देने वाली
- 1:00बर्फ को हराया कैसे? सब सोचते हैं कि
- 1:02प्राचीन इंसान ठंड से बचने के लिए सीधे
- 1:05गुफाओं में घुस जाते होंगे। गुफाओं का
- 1:07इस्तेमाल तो होता था। पर सच यह है कि वह
- 1:09कोई मुफ्त का शेल्टर नहीं थी। कई गुफाओं
- 1:12के अंदर पहले से 400 से 500 किलो तक केव
- 1:15बियर यानी खूंखार गुफा भालू सो रहे होते
- 1:18थे। ठंड से बचने का मतलब था अपनी जान दांव
- 1:21पर लगाकर उस राक्षस से उसकी गुफा छीनना।
- 1:23इसलिए इंसानों ने गुफाओं की भीख मांगना
- 1:26छोड़ दिया। उन्होंने अपनी गुफाएं खुद
- 1:27बनाई। जिन बर्फीले मैदानों में दूर-दूर तक
- 1:30पेड़ जम चुके थे, वहां इंसानों ने
- 1:32विशालकाय मैम के कंकालों का इस्तेमाल
- 1:34किया। यूक्रेन की मेजरिच साइट पर लगभग 95
- 1:38मैम की हड्डियों से बना एक घर मिला है।
- 1:40मैम की भारी पसलियों से ढांचा बनाया गया
- 1:43और उनके ऊपर जानवरों की मोटी खालों को
- 1:45कसकर सी दिया गया और इस पूरे शेल्टर की
- 1:47धड़कन थी आग। यह आग जिंदगी और मौत के बीच
- 1:50की इकलौती पतली रेखा थी। कबीले का सबसे
- 1:52अहम काम था रात भर जागकर उस आग को जिंदा
- 1:55रखना। अगर किसी रात हवा के झोंके से आग
- 1:57बुझ गई तो सुबह उस शेल्टर में कोई इंसान
- 1:59जिंदा नहीं मिलता। सिर्फ बर्फ की मूरतें
- 2:01मिलती लेकिन शेल्टर में दुबक कर बैठने से
- 2:04पेट नहीं भरता था और बाहर निकलते ही इंसान
- 2:06के हाथ में सबसे बड़ा हथियार कोई भाला या
- 2:08कुल्हाड़ी नहीं बल्कि एक बेहद छोटी सी चीज
- 2:11थी जो किसी भी हथियार से ज्यादा कारगर
- 2:13साबित हुई। लोग कहते हैं कि इंसान की सबसे
- 2:16बड़ी खोज पहिया थी। लेकिन इस जमती दुनिया
- 2:18में इंसान को जिस एक चीज ने बचाया वो थी
- 2:21हड्डी की सुई। जरा सोचो जब तक इंसान सिर्फ
- 2:24जानवरों की खाल को अपने शरीर पर ढीला ढाला
- 2:27लपेटता था। बर्फीली हवा खाल के बीच के
- 2:29छेदों से घुसकर पूरे जिस्म को अंदर तक जमा
- 2:32देती थी। लेकिन जब इंसान ने हड्डी को
- 2:34पत्थरों पर घिसकर एक पतली सुई बनाई और
- 2:37जानवरों की आंतों व नसों से धागा निकाला
- 2:39तो खेल पूरी तरह पलट गया। 400 साल से भी
- 2:42पुरानी हड्डी की सुइयां आज भी खुदाई में
- 2:45मिली हैं। रूस की सुंगीर साइट पर करीब 300
- 2:48साल पुरानी कब्रों में सिले हुए कपड़ों के
- 2:50निशान मिले हैं। जिन पर हाथी दांत के
- 2:51हजारों मोती तक टंके थे। पर कपड़ों की
- 2:54असली कहानी इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली
- 2:56है। उन्होंने कपड़ों की पूरी साइंस समझ ली
- 2:58थी। शरीर से सटती हुई अंदर की खाल मुलायम
- 3:01होती थी जो पसीने को सोख ले और बाहर की
- 3:03खाल मोटी और घने बालों वाली जो बर्फीले
- 3:06तूफान को बाहर ही रोक दे। बर्फ से टकराकर
- 3:08आंखें अंधी कर देने वाली रोशनी से बचने के
- 3:10लिए उन्होंने हड्डी व लकड़ी में पतली
- 3:13झिड़ी काटकर स्नो गगल्स तक बनाए। जिस
- 3:15कबीले के पास अच्छे कपड़े सिलने का हुनर
- 3:18था, उनके बच्चे जिंदा बचते थे। जो नहीं
- 3:20जानते थे उनकी पूरी नस्ल बर्फ में जमकर
- 3:22खत्म हो जाती थी। यानी एक सुई का फर्क
- 3:25पूरे वंश के बचने और हमेशा के लिए मिट
- 3:27जाने का फर्क था। लेकिन शेल्टर और कपड़ों
- 3:30के बाद सबसे बड़ा दानव अभी भी बाहर खड़ा
- 3:32था। भूख सर्दियों में सारे पेड़, फल,
- 3:35पत्तियां बर्फ के नीचे दबकर सड़ चुके थे।
- 3:37पेट भरने का सिर्फ एक ही जरिया था। मांस
- 3:39और फैट। वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक
- 3:42उस जमती ठंड में इंसान का शरीर रोज 4000
- 3:45से 5000 कैलोरीज तक जला सकता था। और वह
- 3:48कैलोरीज सिर्फ विशालकाय जानवरों के शिकार
- 3:50से मिल सकती थी। और यहीं आता है वह
- 3:52चौंकाने वाला सच। एक अकेला मैम पूरे कबीले
- 3:55को महीनों तक का खाना दे सकता था। यानी एक
- 3:57कामयाब शिकार और पूरा कबीला एक और सर्दी
- 4:00जी जाता। पर बर्फ में शिकार करना किसी
- 4:02खौफनाक मंजर जैसा था। और शिकारी का सबसे
- 4:04बड़ा दुश्मन था उसका अपना पसीना। जी हां,
- 4:07आइस एज में पसीना बहने का मतलब था सीधा
- 4:10खतरा। अगर शिकार के पीछे भागते वक्त
- 4:12तुम्हारी बॉडी पसीने से भीग गई तो जैसे ही
- 4:14तुम रुकोगे वह पसीना तुम्हारी खाल पर ही
- 4:17बर्फ बनकर जम जाएगा और कुछ ही मिनटों में
- 4:19हाइपोथर्मिया से तुम्हारी जान ले लेगा।
- 4:21इसलिए इंसानों ने अपनी ताकत से ज्यादा
- 4:23अपने दिमाग का इस्तेमाल किया। वह मैमथ या
- 4:25रेंडियर के पूरे झुंड को घेर कर उन्हें
- 4:27बर्फ की गहरी खाइयों या दलदल की तरफ धकेल
- 4:30देते थे। जब वह भारीभरकम जानवर बर्फ में
- 4:32फंस जाते तब दूर से भाले फेंक कर उनका
- 4:35शिकार किया जाता था। शिकार के बाद शुरू
- 4:37होती थी उस मांस को बचाकर रखने की जंग।
- 4:39कोई फ्रिज नहीं था पर पूरी दुनिया ही एक
- 4:41फ्रीजर थी। इंसान शायद मांस को सुखाकर
- 4:44उसमें जानवर की चर्बी और जंगली बेरीज
- 4:46मिलाकर एक ऐसा सुपर फूड बनाते थे जो लंबे
- 4:48समय तक खराब नहीं होता था और वह चर्बी
- 4:50पिघलाकर पत्थर के दिए भी जलाए जाते थे
- 4:53जिससे उस अंधेरे शेल्टर में रोशनी और
- 4:55गर्मी दोनों बनी रहती थी। लेकिन इन सब
- 4:57पत्थरों, खालों और हथियारों से परे एक ऐसी
- 5:00चीज थी जिसने इंसान को उस मुश्किल दौर में
- 5:03मानसिक रूप से टूटने नहीं दिया। वह थी
- 5:05इंसानी साथ और एक दूसरे का भरोसा। जरा उस
- 5:08माहौल को महसूस करो। बाहर हफ्तों से तूफान
- 5:10चल रहा है। एक छोटे से शेल्टर में 15 से
- 5:1320 लोग एक साथ एक ही आग के पास सिमट कर
- 5:15बैठे हैं। ऐसे में इंसान सिर्फ एक ही चीज
- 5:18से गर्म रह सकता था। एक दूसरे की बॉडी हीट
- 5:20से रात को सोने के लिए पूरा कबीला एक साथ
- 5:22बिल्कुल सटकर सोता था। बच्चे और बूढ़े
- 5:25हमेशा घेरे के बीच में होते थे ताकि बाहर
- 5:27की जानलेवा ठंड उन तक ना पहुंचे। अगर
- 5:29कबीले में किसी का पैर टूट जाता तो इस
- 5:31बर्फीली दुनिया में वह अकेले एक दिन भी
- 5:33नहीं बच सकता था। पर पुरातात्विकों को ऐसे
- 5:36कई कंकाल मिले हैं जो अपाहिज होने के
- 5:38बावजूद सालों जिंदा रहे। इसका मतलब
- 5:40इंसानों ने अपने कमजोर साथियों को मरने के
- 5:43लिए नहीं छोड़ा। जिसके पास खाना होता वह
- 5:45बांटता था। जो शिकार नहीं कर सकता था वह
- 5:47कपड़े सिलता था या आग की रखवाली करता था।
- 5:50और जब लंबी कठिन रातें खत्म होने का नाम
- 5:52नहीं लेती थी तो लोग उसी आग के पास बैठकर
- 5:55कहानियां सुनाते थे। वह एक दूसरे की आंखों
- 5:57में देखकर यकीन दिलाते थे कि सूरज फिर
- 5:59निकलेगा बर्फ पिघलेगी और हरा मैदान वापस
- 6:02आएगा। इंसान सिर्फ अपने शरीर की वजह से उस
- 6:05ठंड में नहीं जीता। वह अपनी उम्मीद और
- 6:07अपनी कम्युनिटी के दम पर जीता। आज जब हम
- 6:09अपने गर्म कमरों में बैठकर रिमोट से हीटर
- 6:11ऑन करते हैं तो हम भूल जाते हैं कि हमारी
- 6:14नसों में बहने वाला खून उन्हीं जांबाज
- 6:16सर्वाइवर्स का है। हम उन वीरों के बच्चे
- 6:19हैं जिन्होंने -30 तक गिरती ठंड में बिना
- 6:21किसी आधुनिक टेक्नोलॉजी के सिर्फ एक हड्डी
- 6:24की सुई, थोड़ी सी आग और कभी ना हार मानने
- 6:26वाले जज्बे से उस पूरे द्वार को हरा दिया
- 6:28था। अगर वह उस रात हार मान लेते तो आज
- 6:30हमारा और तुम्हारा कोई वजूद ही नहीं होता।
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