गुफा में रहने वाला गरीब परिवार | Hindi Story | Hindi Kahaniya | Moral Stories | Cartoon — Transcript
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- 0:26एक छोटे से गांव के किनारे घने जंगल के
- 0:29पास पास एक पुरानी और टूटी फूटी सी झोपड़ी
- 0:32थी। उस झोपड़ी में गरीब किसान धनिया अपनी
- 0:36बूढ़ी मां और बेटी गौरी के साथ रहता था।
- 0:40धनिया के पास बस कुछ छोटे-छोटे खेत थे।
- 0:43उन्हीं खेतों में मेहनत करके वह अपने
- 0:45परिवार का पेट पालता था। हर दिन सुबह सूरज
- 0:48निकलने से पहले ही धनिया उठ जाता। ठंडी
- 0:51हवा चल रही होती। आसमान में हल्की लालिमा
- 0:54होती और गांव के ज्यादातर लोग अभी गहरी
- 0:58नींद में होते। लेकिन धनिया अपने पुराने
- 1:01हल और बैलों को लेकर खेत की तरफ निकल
- 1:03पड़ता। दरवाजे पर खड़ी उसकी मां प्यार से
- 1:06कहती, बेटा धनिया थोड़ा आराम भी कर लिया
- 1:11कर। दिन रात इतनी मेहनत करते-करते तू बहुत
- 1:15थक जाता होगा। सुबह से शाम तक खेत में काम
- 1:19करता है। फिर भी चेहरे पर शिकन नहीं लाता।
- 1:22मुझे तेरी चिंता होती है बेटा। शरीर को भी
- 1:26थोड़ा आराम देना जरूरी होता है।
- 1:28मां, अगर मैं मेहनत नहीं करूंगा तो हमारे
- 1:31घर का चूल्हा कैसे चलेगा? हमारी जरूरतें
- 1:34कैसे पूरी होंगी? मुझे पता है मेहनत
- 1:37मुश्किल होती है लेकिन यही हमारी जिंदगी
- 1:39का सहारा है। जब तक मेरे हाथ पैर चल रहे
- 1:42हैं, मैं मेहनत करता रहूंगा ताकि आपको कभी
- 1:45किसी चीज की कमी महसूस ना हो। तभी उसकी
- 1:47बेटी गौरी दौड़ते हुए आती और कहती
- 1:51बाबा जल्दी वापस आना मैं आपका इंतजार
- 1:55करूंगी। देर मत करना मुझे अच्छा लगता है
- 1:58जब आप जल्दी घर आ जाते हैं। धनिया अपनी
- 2:00बेटी के सिर पर प्यार से हाथ फेरता और खेत
- 2:03की ओर चल पड़ता। दिनभर वह खेत में पसीना
- 2:06बहाता रहता। कभी तेज धूप, कभी अचानक
- 2:10बारिश। लेकिन धनिया मेहनत करना कभी नहीं
- 2:13छोड़ता। [संगीत] धनिया ने कभी हार नहीं
- 2:15मानी। वह हमेशा अपनी मां से कहता
- 2:18ईश्वर ने हमें मेहनत करने के लिए हाथ दिए
- 2:20हैं। अगर हम सच्चे दिल से मेहनत करते
- 2:22रहेंगे तो एक ना एक दिन हमारी किस्मत जरूर
- 2:24बदलेगी। ईश्वर मेहनत करने वालों को कभी
- 2:27खाली हाथ नहीं लौटाते।
- 2:29मां उसकी बात सुनकर चुपचाप भगवान से
- 2:32प्रार्थना करती।
- 2:40बाबा आज मैं जंगल के किनारे से कुछ
- 2:43लकड़ियां लेकर आई हूं ताकि घर के काम में
- 2:46थोड़ी मदद हो सके।
- 2:47अकेली गई थी बेटा जंगल के किनारे अकेले
- 2:51जाना ठीक नहीं होता। वहां खतरा भी हो सकता
- 2:53है।
- 2:54हां बाबा मैं अकेली ही गई थी। थोड़ा डर तो
- 2:58लगा था लेकिन मैंने हिम्मत रखी। आप ही तो
- 3:01कहते हो कि डर के आगे हिम्मत रखनी चाहिए।
- 3:04इसलिए मैं बहादुर बनकर गई।
- 3:06धनिया थोड़ा चिंतित हो गया क्योंकि गांव
- 3:08के लोग कहते थे कि जंगल के अंदर एक पुरानी
- 3:11गुफा है जहां रात के समय अजीब-अजीब आवाजें
- 3:14आती हैं। गांव वाले उस गुफा के पास जाने
- 3:17से डरते थे।
- 3:18बेटी जंगल के अंदर ज्यादा मत जाना। वहां
- 3:21एक रहस्यमई गुफा है। लोग कहते हैं वहां
- 3:24कुछ अजीब होता है। इसलिए उससे दूर ही
- 3:26रहना। धनिया भले ही गरीब था लेकिन उसकी
- 3:29मेहनत और ईमानदारी पूरे इलाके में मशहूर
- 3:32थी। उसके छोटे-छोटे खेतों में उगने वाली
- 3:35सब्जियां और अनाज हमेशा बहुत अच्छे होते
- 3:39थे। मिट्टी भी जैसे उसकी मेहनत को पहचानती
- 3:42थी। वह अपनी फसल में कभी कोई मिलावट नहीं
- 3:44करता था। ना कोई दवा जरूरत से ज्यादा
- 3:47डालता ना ही लालच में आकर अनाज में कुछ
- 3:50मिलाता। यही कारण था कि जब भी धनिया अपनी
- 3:54फसल लेकर बाजार जाता तो उसकी सब्जियां और
- 3:57अनाज पलक झपकते ही बिक जाते।
- 3:59अगर सच में शुद्ध और अच्छा अनाज चाहिए तो
- 4:02धनिया से ही लेना। उसका अनाज हमेशा साफ
- 4:05सुथरा और बढ़िया होता है। इसलिए गांव के
- 4:08लोग उसी पर भरोसा करते हैं।
- 4:10लेकिन धनिया कभी इसका फायदा उठाकर ज्यादा
- 4:12पैसे नहीं मांगता था। मेहनत का सही दाम
- 4:15मिल जाए वही मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।
- 4:18मैं ज्यादा दौलत या बड़ी-बड़ी चीजों की
- 4:21चाह नहीं रखता। बस इतना चाहता हूं कि दिन
- 4:24भर की मेहनत के बाद जो अनाज मैं उगाता
- 4:26हूं, उसका सही मूल्य मिल जाए। अगर मेरी
- 4:29मेहनत से मेरे घर का चूल्हा जल जाए और
- 4:32मेरे परिवार का पेट भर जाए तो मुझे लगता
- 4:34है कि मेरी मेहनत सफल हो गई। मेरे लिए
- 4:37सच्ची खुशी और सुकून इसी में है कि इंसान
- 4:40ईमानदारी से मेहनत करें और उसी मेहनत की
- 4:43कमाई से अपना जीवन चलाए।
- 4:44इसी वजह से गरीब लोग भी अक्सर उसी से
- 4:47सामान खरीदते थे। लेकिन गांव में एक बहुत
- 4:50बड़ा और अमीर व्यापारी था। उसका नाम था
- 4:54लालाचंद सेठ। लालाचंद सेठ पूरे इलाके में
- 4:57अनाज और सब्जियों का बड़ा व्यापार करता
- 5:00था। लेकिन वह अक्सर मुनाफे के लिए मिलावट
- 5:02भी कर देता था और चीजों को बहुत महंगे
- 5:05दामों में बेचता था। जब लोगों ने धनिया से
- 5:08सामान खरीदना शुरू किया तो सेठ का व्यापार
- 5:11थोड़ा कम होने लगा। यह बात उसे बिल्कुल
- 5:14पसंद नहीं आई।
- 5:18एक दिन बाजार में उसने धनिया को देखते ही
- 5:21ताना मारा। अरे धनिया तू किसान है या कोई
- 5:25संत हर बार इतना सस्ता माल बेच देता है
- 5:28इसलिए लोग तुझे हल्के में लेने लगे हैं।
- 5:31लेकिन याद रख इस बाजार में असली फैसला
- 5:34मेरा चलता है। अगर तू मेरे हिसाब से अनाज
- 5:37नहीं बेचेगा तो तेरा माल कोई नहीं
- 5:40खरीदेगा। फिर देखना तेरे घर का चूल्हा
- 5:43कैसे जलेगा। सेठ जी मैं तो बस इतना चाहता
- 5:46हूं कि मेरी मेहनत का सही दाम मिल जाए।
- 5:49[संगीत] मैंने दिन भर खेत में मेहनत की
- 5:51है। पसीना बहा है। अगर उस मेहनत का थोड़ा
- 5:54सा भी सही मूल्य मिल जाए तो मेरे लिए वही
- 5:56काफी है। मैं किसी को धोखा देकर या गलत
- 5:59तरीके से पैसा नहीं कमाना चाहता। मेहनत का
- 6:01सही दाम मिल जाए वही मेरे लिए बहुत बड़ी
- 6:04बात है। बहुत बड़ी-बड़ी बातें करने लगा है
- 6:06तू। सुन ले धनिया। इस बाजार में वही चलता
- 6:10है जो ताकतवर होता है। अगर तूने मेरी बात
- 6:12नहीं मानी तो मैं ऐसा हाल कर दूंगा कि
- 6:15तेरा अनाज बाजार में कोई नहीं खरीदेगा।
- 6:18फिर तू अपने घर बैठकर यही ईमानदारी की
- 6:21बातें करता रहना।
- 6:22बाजार में खड़े कुछ लोग यह सब सुन रहे थे।
- 6:25धनिया ने बस मुस्कुराकर अपनी फसल बेचनी
- 6:28जारी रखी। वह कभी किसी से झगड़ा नहीं करता
- 6:31था। लेकिन लालाचंद सेठ का गुस्सा दिन
- 6:34प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था। कभी वह धनिया
- 6:37को सबके सामने नीचा दिखाने की कोशिश करता।
- 6:40कभी उसे गरीबी का ताना देता। फिर भी धनिया
- 6:44के चेहरे पर कभी शिकायत नहीं आती। शाम को
- 6:47जब वह घर लौटता तो उसकी बेटी गौरी दौड़ कर
- 6:50आ जाती।
- 6:51बाबा आज बाजार कैसा रहा? क्या आज अनाज
- 6:56अच्छे दाम में बिका या फिर लोगों ने पहले
- 6:58की तरह मोलभाव किया?
- 7:00अच्छा रहा बेटी। भगवान की कृपा से आज लगभग
- 7:03सारा अनाज बिक गया। लोगों ने भरोसे से
- 7:06लिया और मेहनत का ठीक-ठाक दाम भी मिल गया।
- 7:08घर में कमाई भले ही कम थी, लेकिन उस छोटे
- 7:11से घर में सुकून और प्यार बहुत था। बूढ़ी
- 7:15मां, बेटी गौरी और धनिया तीनों साथ बैठकर
- 7:18सादा खाना खाते और बातें करते।
- 7:21बेटा ईमानदारी से कमाया हुआ थोड़ा सा धन
- 7:24भी बहुत सुख देता है। जब कमाई सच्चाई और
- 7:28मेहनत से होती है तो मन को सुकून मिलता है
- 7:31और इंसान चैन से जी पाता है।
- 7:34मां हमें जितना मिला है उसी में खुश रहना
- 7:37चाहिए। लालच करने से कभी सच्ची खुशी नहीं
- 7:40मिलती। लेकिन मेहनत और संतोष से जीवन आसान
- 7:43और सुखी बन जाता है।
- 7:44लेकिन उसे क्या पता था कि लालाचंद सेठ का
- 7:47जलता हुआ दिल अब धीरे-धीरे एक खतरनाक
- 7:50योजना बना रहा है। एक ऐसी योजना जो बहुत
- 7:53जल्द धनिया की जिंदगी को पूरी तरह बदलने
- 7:56वाली थी। लालाचंद सेठ की जलन अब इतनी बढ़
- 7:59चुकी थी कि उसने धनिया को बर्बाद करने की
- 8:01ठान ली। एक रात जब पूरा गांव सो रहा था।
- 8:05सेठ ने अपने आदमियों को चुपके से धनिया के
- 8:07खेत में भेज दिया। उन्होंने खेत में ऐसी
- 8:10दवा डाल दी जिससे पूरी फसल धीरे-धीरे खराब
- 8:13होने लगी।
- 8:21सुबह जब धनिया खेत पर पहुंचा तो उसकी
- 8:23आंखें फटी की फटी रह गई। हरी-भरी खड़ी फसल
- 8:26पीली पड़ चुकी थी। कई पौधे सूख गए थे। वह
- 8:30घुटनों के बल बैठ गया।
- 8:32हे ईश्वर यह क्या हो गया? कल तक तो मेरी
- 8:35फसल बिल्कुल हरीभरी थी। हर पौधा लहलहा रहा
- 8:38था। मैंने कितनी मेहनत से इस खेत को सींचा
- 8:41था। दिन रात इसकी देखभाल की थी। फिर अचानक
- 8:44एक ही रात में सब कुछ कैसे बदल गया। मेरी
- 8:47सारी मेहनत, मेरी सारी उम्मीदें क्या सब
- 8:50यूं ही खत्म हो जाएंगी?
- 8:52इतने में गांव के कुछ लोग भी खबर सुनकर
- 8:54वहां आ गए। वे भी खेत की हालत देखकर हैरान
- 8:57रह गए और आपस में बातें करने लगे।
- 9:00यह अचानक कैसे हो गया? कल शाम तक तो यह
- 9:03खेत बिल्कुल ठीक था। फसल भी बहुत अच्छी
- 9:06दिख रही थी। एक ही रात में इतने सारे पौधे
- 9:09कैसे सूख गए? कहीं किसी ने जानबूझकर तो
- 9:11कुछ नहीं किया।
- 9:12धनिया को समझते देर नहीं लगी कि यह किसी
- 9:15की साजिश है। उसे तुरंत लालाचंद सेठ का
- 9:18ख्याल आया।
- 9:19अगर यह सब सेठ का किया हुआ है तो मैं चुप
- 9:21नहीं बैठूंगा। मेरी मेहनत की फसल को इस
- 9:24तरह बर्बाद करना कोई छोटी बात नहीं है।
- 9:27मैंने दिन रात मेहनत करके इस खेत को सींचा
- 9:29था। हर पौधे को अपने बच्चे की तरह संभाला
- 9:32था। मैं पंचायत में जाकर न्याय मांगूंगा
- 9:35और सबके सामने सच रखूंगा ताकि जिसने भी यह
- 9:38अन्याय किया है उसे उसकी सजा मिल सके। यह
- 9:41बात धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गई। जब
- 9:44यह खबर लालाचंद सेठ तक पहुंची तो वह एक पल
- 9:48के लिए घबरा गया। लेकिन चालाक सेठ ने
- 9:50तुरंत एक नई और खतरनाक साजिश सोच ली। अगली
- 9:54सुबह वह खुद ही गांव की पंचायत में पहुंच
- 9:57गया। गांव के बड़े बुजुर्ग वहां बैठे थे।
- 10:00सेठ ने ऊंची आवाज में कहा, मुझे पंचायत से
- 10:04न्याय चाहिए। मेरे साथ बहुत बड़ा अन्याय
- 10:06हुआ है और मैं चाहता हूं कि गांव के सामने
- 10:09इस बात का फैसला हो। क्या बात है सेठ जी?
- 10:12आप इतने गुस्से और परेशानी में क्यों हैं?
- 10:14खुलकर बताइए कि आखिर मामला क्या है? मेरी
- 10:17सोने की अंगूठी चोरी हो गई है और मुझे
- 10:20पूरा शक है कि वह अंगूठी धनिया ने चुराई
- 10:23है। वही कल मेरे घर आया था। उसके बाद ही
- 10:25अंगूठी गायब हुई है।
- 10:27यह सुनते ही पंचायत में सन्नाटा छा गया।
- 10:30उसी समय किसी ने धनिया को बुला लिया।
- 10:32धनिया अपनी बूढ़ी मां और बेटी गौरी के साथ
- 10:35वहां पहुंचा।
- 10:36धनिया सेठ कह रहा है कि उसकी सोने की
- 10:39अंगूठी तुमने चुराई है। क्या यह सच है?
- 10:42पंचायत के सामने सच-सच बता दो ताकि सही
- 10:46फैसला हो सके।
- 10:47धनिया की आंखों में हैरानी और दुख दोनों
- 10:50साफ दिखाई दे रहे थे। इतने बड़े इल्जाम से
- 10:54उसका दिल टूट गया था। मुखिया जी मैं गरीब
- 10:57जरूर हूं लेकिन चोर नहीं हूं। मैंने किसी
- 11:00की अंगूठी नहीं चुराई। मैं मेहनत से कमाने
- 11:03वाला आदमी हूं। किसी की चीज पर बुरी नजर
- 11:06डालना तो दूर ऐसा सोच भी नहीं सकता।
- 11:09मेरा बेटा ऐसा काम कभी नहीं कर सकता।
- 11:12मैंने इसे हमेशा ईमानदारी और मेहनत की सीख
- 11:15दी है। यह किसी की चीज चुराने वाला नहीं
- 11:18है।
- 11:18अगर धनिया सच बोल रहा है तो फिर उसके घर
- 11:21की तलाशी ले ली जाए। पंचायत के सामने उसके
- 11:24घर को अच्छे से देख लिया जाए। अगर वहां
- 11:26मेरी अंगूठी नहीं मिली तो मैं भी मान
- 11:28जाऊंगा कि धनिया बेगुनाह है।
- 11:30पंचायत के लोग एक दूसरे का चेहरा देखने
- 11:33लगे। कुछ देर सोचने के बाद मुखिया ने कहा
- 11:36सच जानने का एक ही तरीका है। हम सब अभी
- 11:39धनिया के घर चलेंगे और वहां अच्छी तरह
- 11:42तलाशी ली जाएगी। पंचायत के सामने सब कुछ
- 11:45साफ हो जाएगा और फिर उसी के अनुसार फैसला
- 11:48किया जाएगा।
- 11:51पंचायत के कई लोग लालाचंद सेठ और गांव के
- 11:54कुछ और लोग धनिया के साथ उसके छोटे से घर
- 11:57की तरफ चल पड़े।
- 12:00धनिया की बूढ़ी मां और छोटी बेटी गौरी भी
- 12:03डरते-डरते उनके पीछे चल रही थी। धनिया का
- 12:07दिल बहुत तेज धड़क रहा था। उसे अपने ऊपर
- 12:10पूरा भरोसा था कि उसने कोई चोरी नहीं की।
- 12:13कुछ ही देर में [संगीत] सब लोग धनिया की
- 12:15झोपड़ी के सामने पहुंच गए। वह छोटी सी
- 12:18झोपड़ी थी। मिट्टी की दीवारें, ऊपर से
- 12:21घास-फूस की छत और अंदर बहुत कम सामान।
- 12:24धनिया, हमें तुम्हारे घर की तलाशी लेनी
- 12:27पड़ेगी। पंचायत के सामने सच जानना जरूरी
- 12:30है। तभी इस मामले का सही फैसला हो पाएगा।
- 12:33मुखिया जी, मुझे किसी तलाशी से कोई डर
- 12:36नहीं है। आप पूरे घर की तलाशी ले लीजिए।
- 12:39हर कोना देख लीजिए। मेरे पास छुपाने के
- 12:41लिए कुछ भी नहीं है। अगर आपको अंगूठी मिल
- 12:44जाए तो पंचायत जो भी ससा देगी मुझे मंजूर
- 12:47होगी। लेकिन मैं फिर भी यही कहूंगा कि
- 12:49मैंने कोई चोरी नहीं की है। मैंने किसी की
- 12:52चीज को हाथ तक नहीं लगाया। पंचायत के
- 12:55दो-तीन लोग झोपड़ी के अंदर गए। उन्होंने
- 12:58धीरे-धीरे हर जगह देखना शुरू किया। कभी
- 13:01पुराने बर्तन उठाकर देखते, कभी कोने में
- 13:04रखी टोकरी को उलटते, कभी खाट के नीचे
- 13:06झांकते। धनिया बाहर खड़ा सब देख रहा था।
- 13:10उसकी मां ईश्वर का नाम जप रही थी। कुछ देर
- 13:13तक तो कुछ भी नहीं मिला। धनिया के दिल में
- 13:15थोड़ी उम्मीद जागने लगी। लेकिन तभी एक
- 13:19आदमी ने अचानक जोर से आवाज लगाई।
- 13:21रुको यहां कुछ चमक रहा है। जरा देखो तो
- 13:24सही। अरे यह तो सोने की अंगूठी है।
- 13:30एक पल के लिए पूरा माहौल सन्न रह गया।
- 13:33देखा मैंने कहा था ना यही चूर है। अब सबके
- 13:37सामने सच आ गया। अंगूठी इसके ही घर से
- 13:39मिली है। नहीं, यह अंगूठी मेरी नहीं है।
- 13:42मैंने इसे कभी नहीं देखा। मुझ पर झूठा
- 13:45इल्जाम लगाया जा रहा है।
- 13:47यह झूठ है। मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता।
- 13:50किसी ने जानबूझकर हमारे घर में यह अंगूठी
- 13:53रखी है ताकि धनिया को बदनाम किया जा सके।
- 13:57लालाचंद सेठ के चेहरे पर तुरंत नकली
- 13:59हैरानी आ गई। लेकिन अब पंचायत के लोग एक
- 14:02दूसरे की तरफ देखने लगे। क्योंकि अंगूठी
- 14:05सच में धनिया के घर से मिली थी। अब तो
- 14:08सबूत भी मिल गया। ऐसे आदमी को हमारे गांव
- 14:10में रहने का कोई हक नहीं है। जो चोर है
- 14:13उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि दूसरे भी
- 14:16डरे। मैंने चोरी नहीं की। मुझ पर भरोसा
- 14:19कीजिए। मैं कभी किसी की चीज नहीं
- 14:21चुराऊंगा। यह सब झूठा इल्जाम है।
- 14:27लेकिन उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं था।
- 14:30गांव वाले लालाचंद की तरफ देखकर सिर हिला
- 14:32रहे थे और किसी ने धनिया की ओर ध्यान ही
- 14:35नहीं दिया। अगर आज ऐसे चोर को सजा नहीं
- 14:37मिली तो कल कोई भी आदमी चोरी करने लगेगा।
- 14:41गांव की शांति और नियमों की रक्षा के लिए
- 14:44मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। कोई भी
- 14:47ऐसा काम करे तो उसका अंजाम यही होना चाहिए
- 14:50ताकि बाकी लोग सबक सीखें। ऐसे आदमी को
- 14:53गांव से निकाल देना चाहिए। इसे यहां रहने
- 14:56का कोई हक नहीं। धनिया पंचायत के सामने यह
- 15:00मामला बहुत गंभीर है। तुम्हारे घर से
- 15:03अंगूठी मिली है और यही सबसे बड़ा सबूत
- 15:06माना जा रहा है। हमारे पास इसी आधार पर
- 15:09फैसला करना होगा। हमें सच जानना है और उसी
- 15:13अनुसार न्याय करना है। मैंने चोरी नहीं
- 15:16की। मुझ पर भरोसा कीजिए। मैं कभी किसी की
- 15:19चीज नहीं चुराऊंगा। यह सब झूठा इल्जाम है।
- 15:22मुखिया जी, मैं गरीब जरूर हूं, लेकिन चोर
- 15:25नहीं हूं। मैंने किसी की चीज हाथ नहीं
- 15:28लगाई। किसी ने जानबूझकर मुझे फंसाया है
- 15:31ताकि मुझे बदनाम किया जा सके।
- 15:33लेकिन पंचायत के कई लोग अब सेठ की बातों
- 15:36में आ चुके थे।
- 15:37ऐसे आदमी को गांव से निकाल देना चाहिए।
- 15:40इसे यहां रहने का कोई हक नहीं।
- 15:42मत करो ऐसा। हम कहां जाएंगे? हमारा तो यही
- 15:46एक घर है। यही हमारी जिंदगी है।
- 15:49पंचायत का निर्णय है कि धनिया को चोरी के
- 15:52अपराध में आज से इस गांव से निकाल दिया
- 15:55जाए। यह फैसला गांव की शांति और कानून के
- 15:58लिए लिया गया है।
- 16:00यह सुनते ही धनिया जैसे पत्थर का बन गया।
- 16:03उसकी मां की आंखों से आंसू बहने लगे। गौरी
- 16:06रोने लगी।
- 16:07धनिया तुम्हें आज ही इस गांव को छोड़ना
- 16:10होगा। अब से इस गांव में तुम्हारा कोई हक
- 16:13या अधिकार नहीं रहेगा। ना खेतों पर, ना
- 16:16पानी के स्रोतों पर, ना किसी भी गांव की
- 16:19किसी सुविधा पर। यह कठिन निर्णय है। लेकिन
- 16:22पंचायत के आदेश के मुताबिक इसे मानना ही
- 16:26पड़ेगा।
- 16:36यह सुनकर धनिया ने एक बार पूरे गांव की
- 16:39तरफ देखा। वह वही गांव था जहां उसने बचपन
- 16:42बिताया था। जहां उसके पिता रहते थे। जहां
- 16:46उसने अपने खेतों में दिन रात मेहनत की थी।
- 16:49लेकिन आज उसी गांव से उसे एक चोर समझकर
- 16:52निकाल दिया जा रहा था।
- 16:57लालाचंद सेठ दूर खड़ा यह सब देख रहा था।
- 17:01उसके चेहरे पर एक हल्की संतुष्टि भरी
- 17:03मुस्कान थी क्योंकि उसकी साजिश सफल हो
- 17:07चुकी थी।
- 17:10शाम होते-होते धनिया ने अपनी झोपड़ी से
- 17:13थोड़े बहुत सामान बांध लिए। उसकी मां और
- 17:16गौरी उसके साथ खड़ी थी। तीनों धीरे-धीरे
- 17:19गांव से बाहर निकलने लगे। सूरज ढल रहा था
- 17:23और सामने घना जंगल दिखाई दे रहा था।
- 17:26उन्हें नहीं पता था कि अब वे कहां जाएंगे।
- 17:30लेकिन किस्मत उन्हें धीरे-धीरे उसी जंगल
- 17:33की रहस्यमई गुफा की तरफ ले जा रही थी।
- 17:36जहां से उनकी जिंदगी की कहानी एक बिल्कुल
- 17:39नया मोड़ लेने वाली थी। तीनों दर-दर भटकते
- 17:43हुए जंगल के रास्तों पर चल रहे थे। कभी
- 17:46दूर से किसी पक्षी की आवाज आती, कभी
- 17:49झाड़ियों में कोई जानवर सरसराता।
- 17:52धनिया बार-बार पीछे मुड़कर गांव की तरफ
- 17:55देखता लेकिन अब वहां लौटने का कोई रास्ता
- 17:59नहीं था। उसके दिल में एक ही बात बार-बार
- 18:02चुभ रही थी। उसे गांव से निकाले जाने का
- 18:06उतना दुख नहीं था। जितना इस बात का था कि
- 18:09उस पर चोरी का झूठा इल्जाम लगा दिया गया
- 18:12था।
- 18:23मां गौरी हम कहां जाएंगे? हे ईश्वर मैंने
- 18:27कभी किसी का बुरा नहीं किया। किसी का
- 18:29अधिकार नहीं छीना। किसी को दुख नहीं दिया।
- 18:33फिर भी [संगीत] आज मुझे चोर समझ लिया गया।
- 18:36मेरी मेहनत और ईमानदारी पर शक किया गया।
- 18:39लेकिन मैं जानता हूं कि सच्चाई अंततः
- 18:41जीतती है और आपकी न्यायपूर्ण [संगीत]
- 18:43दृष्टि के सामने किसी का छल और अन्याय टिक
- 18:46नहीं सकता। उसकी आंखें भर आई लेकिन वह
- 18:50अपने आंसू अपनी मां और बेटी के सामने छुपा
- 18:54रहा था। तभी गौरी ने धीरे से कहा
- 18:57बाबा मुझे याद है जब मैं जंगल से लकड़ियां
- 19:01लेने आती थी तो रास्ते में एक बहुत बड़ा
- 19:04पेड़ है। उसका तना इतना चौड़ा है कि उसके
- 19:08नीचे हम लोग आराम से रात बिता सकते हैं।
- 19:10वहां थोड़ा सा खुला मैदान भी है।
- 19:13सच कह रही हो बेटी। इतना बड़ा पेड़ है कि
- 19:16हम सब वहां आराम से रात बिता सकते हैं।
- 19:18हां बाबा। वहां जमीन भी साफ है और
- 19:21सुरक्षित लगती है। अगर आप चाहें तो हम आज
- 19:25की रात वहीं रुक सकते हैं। मैं आपको
- 19:27रास्ता दिखा दूंगी।
- 19:29धनिया ने अपनी मां की तरफ देखा। बूढ़ी मां
- 19:32बहुत थक चुकी थी। बेटा अगर सच में ऐसा
- 19:36बड़ा और सुरक्षित पेड़ है तो वहीं चलकर
- 19:38थोड़ा आराम कर लेते हैं। रास्ते में थकान
- 19:41भी कम होगी और हम सब एक साथ ठहर कर रात
- 19:44गुजार सकते हैं।
- 19:47तीनों उसी दिशा में चल पड़े।
- 19:51कुछ देर बाद सच में उन्हें एक बहुत बड़ा
- 19:54और पुराना पेड़ दिखाई दिया। उसकी मोटी
- 19:58जड़े जमीन से बाहर निकली हुई थी और उसकी
- 20:01शाखाएं चारों तरफ फैली हुई थी। पेड़ इतना
- 20:04बड़ा था कि उसके नीचे काफी जगह खाली थी।
- 20:07धनिया ने चारों तरफ देखा। जंगल धीरे-धीरे
- 20:11अंधेरे में डूब रहा था।
- 20:13आज की रात हम यहीं रुकेंगे। यहां ठहरना
- 20:16सुरक्षित रहेगा और थोड़ी देर आराम भी हो
- 20:19जाएगा।
- 20:19बाबा आप और दादी यहीं आराम से बैठिए। मैं
- 20:23थोड़ी देर में वापस आती हूं।
- 20:25कहां जा रही हो बेटी? इतनी रात में?
- 20:28पास में कुछ फल वाले पेड़ हैं। मैं दादी
- 20:31के लिए ताजा और मीठे फल लेकर आती हूं।
- 20:34जल्दी आ जाऊंगी बाबा।
- 20:36धनिया कुछ कह पाता। उससे पहले ही गौरी पास
- 20:40की झाड़ियों की तरफ चली गई।
- 20:43थोड़ी देर बाद वह वापस लौटी। उसके हाथों
- 20:46में कुछ जंगली फल थे। उसने वह फल अपनी
- 20:49दादी के हाथ में रख दी।
- 20:51बेटी तू खुद खा ले। मुझे कोई फर्क नहीं
- 20:54पड़ेगा।
- 20:55पहले आप खाइए दादी। आप सबसे ज्यादा थकी
- 20:58हुई है। मैं तब तक इंतजार कर लूंगी। आपका
- 21:02पेट भरा होना जरूरी है।
- 21:05बाबा आप दुखी मत होइए। आपने कभी कुछ गलत
- 21:09नहीं किया। सब जानते हैं कि आप सच्चे और
- 21:12ईमानदार इंसान हैं। एक दिन जरूर आएगा जब
- 21:15सबको सच पता चल जाएगा और तब सभी लोग
- 21:18समझेंगे कि आप बेगुनाह हैं। अपनी बेटी यह
- 21:22बात सुनकर धनिया की आंखें भर आईं।
- 21:26बूढ़ी मां आसमान की तरफ देख रही थी। तारों
- 21:30से भरा आसमान जैसे उन्हें दिलासा दे रहा
- 21:32था। पेड़ के नीचे बैठे-बैठे काफी समय बीत
- 21:36चुका था। रात धीरे-धीरे गहरी होने लगी थी।
- 21:40आसमान में काले बादल गिर आए थे और ठंडी
- 21:43हवा चलने लगी थी।
- 21:50अचानक बिजली चमकी और कुछ ही पलों बाद तेज
- 21:53बारिश शुरू हो गई। पहले तो हल्की-हल्की
- 21:56बूंदे गिरने लगी। लेकिन देखते ही देखते
- 21:59बारिश बहुत तेज हो गई।
- 22:08पेड़ की घनी शाखाएं कुछ देर तक उन्हें
- 22:11बचाती रही। लेकिन जल्द ही पानी की बूंदे
- 22:15नीचे तक आने लगी। बूढ़ी मां कांपने लगी।
- 22:18गौरी भी अपने पिता के पास सिमट गई। धनिया
- 22:22ने चारों तरफ चिंतित होकर देखा। अगर ऐसे
- 22:25ही बारिश होती रही तो हम सब पूरी तरह भीग
- 22:28जाएंगे और तब बीमार पड़ने का डर भी रहेगा।
- 22:31हमें तुरंत कहीं ऐसा स्थान ढूंढना होगा
- 22:33जहां हम सिर छुपा सकें और थोड़ी देर के
- 22:36लिए सुरक्षित रह सकें।
- 22:37यह सोचकर धनिया तुरंत उठ खड़ा हुआ। वह
- 22:41बारिश में भीगते हुए आसपास जगह ढूंढने
- 22:44लगा। जंगल में अंधेरा था और हर तरफ पानी
- 22:48की आवाज गूंज रही थी।
- 22:55कुछ देर तक इधर-उधर देखने के बाद अचानक
- 22:58उसकी नजर थोड़ी दूर पहाड़ी के पास बने एक
- 23:01अंधेरे से मुंह पर पड़ी। वह ध्यान से
- 23:05देखने लगा। बारिश की चमकती बिजली में उसे
- 23:08साफ दिखाई दिया। वह एक गुफा थी।
- 23:14धनिया जल्दी से अपनी मां और गौरी के पास
- 23:17आया और बोला
- 23:18चलो। मुझे सामने एक गुफा दिखाई दे रही है।
- 23:21वहां जाकर हम बारिश से बच सकते हैं और
- 23:23थोड़ा आराम कर सकते हैं। जल्दी चलते हैं।
- 23:26बारिश तेज हो रही है।
- 23:28तीनों जल्दी-जल्दी उस तरफ चल पड़े। कुछ ही
- 23:31देर में
- 23:33वे उस गुफा के अंदर पहुंच गए। गुफा अंदर
- 23:36से काफी बड़ी थी। सबसे अच्छी बात यह थी कि
- 23:40गुफा के अंदर ना तो पानी टपक रहा था और ना
- 23:43ही तेज हवा आ रही थी। बाहर जोरदार बारिश
- 23:47हो रही थी। लेकिन गुफा के अंदर एक अजीब सी
- 23:51शांति थी। जैसे यह जगह उन्हें सुरक्षित
- 23:54रखने के लिए ही बनी हो। धनिया ने राहत की
- 23:57सांस ली।
- 23:58कम से कम आज की रात हम यहां आराम से गुजार
- 24:01सकते हैं।
- 24:02धीरे-धीरे थकान के कारण तीनों वहीं
- 24:04बैठते-बैठते सो गए।
- 24:11सुबह जब धनिया की आंख खुली तो बारिश रुक
- 24:14चुकी थी। गुफा के बाहर से हल्की धूप अंदर
- 24:17आ रही थी। पक्षियों की चहचहट फिर से जंगल
- 24:20में सुनाई देने लगी थी। धनिया उठकर बाहर
- 24:24गया और चारों तरफ देखा। जंगल हरियाली से
- 24:27चमक रहा था। वह कुछ देर चुप खड़ा रहा और
- 24:31सोचने लगा। फिर वह गुफा के अंदर वापस आया।
- 24:35उसकी मां और गौरी भी अब जाग चुकी थी।
- 24:38जब तक हमें रहने के लिए कोई और जगह नहीं
- 24:40मिल जाती, हम इसी गुफा में रहेंगे। बूढ़ी
- 24:43मां ने सहमति में सिर हिलाया। गौरी भी खुश
- 24:46हो गई।
- 24:47बाबा यह जगह तो अच्छी है। यहां हमें बारिश
- 24:51और हवा से भी डर नहीं लगेगा।
- 25:02दिन बीतने लगे।
- 25:06धीरे-धीरे गुफा ही धनिया उसकी मां और गौरी
- 25:10का नया घर बन गई। सुबह धनिया जंगल से
- 25:13लकड़ियां और फल लाता। गौरी गुफा के अंदर
- 25:16साफ सफाई करती और बूढ़ी मां पास बैठकर
- 25:19ईश्वर का नाम जपती रहती।
- 25:24गरीबी अभी भी थी लेकिन तीनों एक दूसरे के
- 25:28साथ होने से संतुष्ट थे।
- 25:36एक दिन सुबह गौरी गुफा के अंदर झाड़ू लगा
- 25:39रही थी। वह धीरे-धीरे गुफा के कोने-कोने
- 25:43की धूल साफ कर रही थी। झाड़ू लगाते लगाते
- 25:47वह गुफा के पीछे वाले हिस्से तक पहुंच गई।
- 25:50वहां पत्थरों के बीच कुछ अजीब सा दिखाई
- 25:53दिया। गौरी रुक गई। उसे लगा जैसे वहां कोई
- 25:57पुरानी थैली पड़ी हो। उसने झुककर उसे
- 26:00उठाया। उस थैली के अंदर चमकते हुए सोने के
- 26:03सिक्के भरे हुए थे। गौरी घबराकर जोर से
- 26:07चिल्लाई। बाबा बाबा जल्दी आइए।
- 26:15क्या हुआ बेटी?
- 26:16गौरी ने कांपते हाथों से वह थैली अपने
- 26:19पिता को दिखाई। धनिया ने जब अंदर देखा तो
- 26:23वह भी कुछ पल के लिए हक्का-बक्का रह गया।
- 26:26थैली में सचमुच बहुत सारे सोने के सिक्के
- 26:29थे। बूढ़ी मां भी पास आ गई। लगता है भगवान
- 26:33ने हमारी सच्चाई और हमारे दुखों को देखकर
- 26:36हम पर दया की है। उसने हमें कठिन समय में
- 26:39सहारा दिया। हमारी मेहनत और ईमानदारी को
- 26:42महत्व दिया और अब हमें सुख, सुरक्षा और
- 26:46सम्मान मिला है। सच में उसकी कृपा से ही
- 26:49आज हमारा परिवार खुशहाल और सुरक्षित है।
- 26:53धनिया कुछ देर तक चुप खड़ा रहा। उसकी
- 26:56आंखों में आंसू आ गए। उसे लगा जैसे ईश्वर
- 27:00ने आखिरकार उसकी ईमानदारी का फल दे दिया
- 27:03हो।
- 27:04अब हमें इस जंगल में रहने की जरूरत नहीं
- 27:06है।
- 27:13कुछ ही दिनों में धनिया ने उन सिक्कों में
- 27:16से थोड़ा सा इस्तेमाल करके पास के एक
- 27:19दूसरे गांव में छोटा सा घर खरीद लिया। वह
- 27:22अपनी मां और गौरी के साथ वहां रहने लगा।
- 27:26धीरे-धीरे उसने फिर से छोटा सा खेत भी ले
- 27:29लिया और मेहनत करने लगा। अब उनकी जिंदगी
- 27:33पहले से कहीं बेहतर हो गई थी। घर में
- 27:36खुशहाली लौट आई थी। बूढ़ी मां अक्सर ईश्वर
- 27:40को धन्यवाद देती। लेकिन कुछ ही समय में
- 27:43धनिया के अमीर बनने की खबर दूर-दूर तक फैल
- 27:46गई। यह बात आखिरकार लालाचंद सेठ के कानों
- 27:50तक भी पहुंच गई। जब उसने सुना कि जिसे
- 27:54उसने गांव से निकलवा दिया था वही धनिया अब
- 27:57अमीर हो गया है तो वह एकदम हक्का बक्का रह
- 28:01गया। वह गुस्से और हैरानी से बोला।
- 28:04यह कैसे हो सकता है? वो गरीब किसान जिसने
- 28:08कभी किसी से कुछ नहीं लिया, इतना मेहनती
- 28:11और ईमानदार रहा, अब इतना अमीर कैसे बन
- 28:14गया, यह तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा।
- 28:17सेठ को जल्द ही पता चल गया कि धनिया को
- 28:19जंगल की गुफा में सोने के सिक्के मिले थे।
- 28:22यह सुनते ही लालाचंद सेठ की आंखों में
- 28:25लालच चमकने लगा।
- 28:27अगर सच में उस गुफा में सोने की सिक्कों
- 28:29की थैली मिली थी तो इसका मतलब यह है कि
- 28:32वहां और भी खजाने छुपे हुए हो सकते हैं।
- 28:35शायद वो गुफा किसी पुराने राजाओं या अमीर
- 28:38व्यक्तियों का खजाना रही हो। अगर मैं
- 28:41जल्दी ही वहां पहुंचूं और सारी चीजें खोज
- 28:44लूं तो मैं भी अमीर बन सकता हूं। हां, यही
- 28:47मौका है जो कभी दोबारा नहीं मिलेगा। इस
- 28:51बार मैं किसी को रोकने नहीं दूंगा और खुद
- 28:54ही सब कुछ अपने नाम कर लूंगा।
- 28:56लालच से भरा हुआ सेठ उसी समय जंगल की तरफ
- 28:59निकल पड़ा। वह जल्दी-जल्दी उस गुफा के पास
- 29:03पहुंचा जहां कभी धनिया रहा करता था। गुफा
- 29:07अब शांत और खाली थी। सेठ की आंखों में
- 29:10लालच साफ दिखाई दे रहा था। वह तेजी से
- 29:13गुफा के अंदर जाने लगा। उसे बस एक ही चीज
- 29:17चाहिए थी। खजाना। लेकिन उसे यह नहीं पता
- 29:20था कि लालच में उठाया गया उसका यह कदम।
- 29:24उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सबक बनने वाला
- 29:27है। वो मन ही मन सोच रहा था।
- 29:30अगर धनिया को यहां सोने के सिक्के मिले थे
- 29:33तो जरूर यहां और भी खजाना होगा।
- 29:36लालच में वह गुफा के अंदर और गहराई तक
- 29:39जाने लगा। कुछ देर बाद अचानक उसकी नजर एक
- 29:43पत्थर के पीछे पड़ी एक पुरानी थैली पर गई।
- 29:46सेठ जल्दी से वहां दौड़ा। उसने थैली उठाकर
- 29:49खोली और जैसे ही अंदर देखा उसकी आंखें चमक
- 29:54उठी। उस थैली में भी सोने के कई सिक्के
- 29:57भरे हुए थे। [हंसी]
- 29:59आज तो मेरी किस्मत खुल गई। आखिरकार मेहनत
- 30:03और भाग्य दोनों मेरे साथ हैं। अब मैं वही
- 30:06कर सकता हूं जो हमेशा चाहता था। इतना धन
- 30:10जमा करूं कि कोई मुझसे टक्कर भी ना ले
- 30:12सके।
- 30:13सेठ खुशी से हंस पड़ा। उसने जल्दी से वह
- 30:16थैली हाथ पर रख ली। अब वह गुफा से बाहर
- 30:20निकलने के लिए मुड़ा। लेकिन जैसे ही वह
- 30:22आगे बढ़ा, उसे अचानक एहसास हुआ कि उसे
- 30:26बाहर जाने का रास्ता समझ नहीं आ रहा था।
- 30:30गुफा के अंदर कई छोटे-छोटे रास्ते थे। सेठ
- 30:33एक रास्ते पर गया। फिर वापस लौटा। फिर
- 30:37दूसरे रास्ते पर गया। लेकिन हर रास्ता उसे
- 30:41फिर उसी जगह पर ले आता। धीरे-धीरे शाम
- 30:44होने लगी। सेठ घबराने लगा। वह तेजी से
- 30:48इधर-उधर भागने लगा। लेकिन उसे गुफा से
- 30:51बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा था।
- 30:54पहला दिन बीत गया। दूसरे दिन भी सेठ उसी
- 30:57गुफा में भटकता रहा। उसके पास खाने को कुछ
- 31:00नहीं था। प्यास और डर से उसकी हालत खराब
- 31:04होने लगी। तीसरा दिन भी गुजर गया। अब सेठ
- 31:08पूरी तरह थक चुका था।
- 31:12वह एक पत्थर के सहारे बैठ गया। उसके मन
- 31:15में अचानक एक ख्याल आया। वह धीरे-धीरे खुद
- 31:19से बोलने लगा।
- 31:20शायद यही मेरे लालच की सजा है। मैंने
- 31:24सिर्फ अपना फायदा सोचा और दूसरों की परवाह
- 31:27नहीं की। अब यह सोना मेरे हाथों में है,
- 31:30लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे यह मुझे बंधक
- 31:33बना रहा है। शायद जब तक मैं इसे पकड़े
- 31:36रहूंगा तब तक मैं इस गुफा से बाहर नहीं
- 31:39निकल पाऊंगा। यह खजाना मेरे लिए वरदान
- 31:42नहीं बल्कि एक फंदा बन गया है। और अब मुझे
- 31:45इसका सामना करना ही पड़ेगा। कुछ पल सोचने
- 31:49के बाद उसने वह सोने की थैली जमीन पर रख
- 31:52दी। फिर धीरे-धीरे पीछे मुड़ा और बिना उस
- 31:56थैली को उठाए तेजी से आगे बढ़ने लगा। कुछ
- 32:00ही देर बाद अचानक उसे दूर से हल्की रोशनी
- 32:03दिखाई दी। वह उसी दिशा में भागा और कुछ
- 32:06पलों बाद वह गुफा के बाहर पहुंच गया। ताजी
- 32:10हवा उसके चेहरे से टकराई। सेठ जमीन पर बैठ
- 32:14गया और जोर-जोर से सांस लेने लगा। उसकी
- 32:18जान में जान आ गई थी।
- 32:20लेकिन उसी समय उसके दिल में भारी पछतावा
- 32:23भी होने लगा। वह सोचने लगा अगर मैंने लालच
- 32:28में आकर धनिया के साथ गलत नहीं किया होता
- 32:30तो आज मुझे यह दिन नहीं देखना पड़ता। अगर
- 32:34मैंने उसकी मेहनत और ईमानदारी का सम्मान
- 32:37किया होता। उसे गांव से नहीं निकाला होता
- 32:40तो शायद मैं आज इस गुफा में फंसा नहीं
- 32:42होता। मेरी अपनी लालच और अधूरी चालाकियों
- 32:46ने मुझे यहां तक पहुंचाया है। अब समझ आया
- 32:49कि दूसरों के अधिकारों की चोरी करके कोई
- 32:52कभी सच्ची खुशी या अमीरी हासिल नहीं कर
- 32:55सकता।
- 32:57अब उसे समझ आ चुका था कि लालच इंसान को
- 33:00अंधा बना देता है और कभी-कभी वही लालच
- 33:04इंसान को ऐसी मुसीबत में डाल देता है जहां
- 33:07से निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है।
- 33:10लालाचंद सेठ धीरे-धीरे गांव की तरफ लौटने
- 33:12लगा। लेकिन इस बार उसके मन में खजाने का
- 33:16लालच नहीं बल्कि अपनी गलती का पछतावा था।
- 33:20कुछ समय बाद पूरे गांव में धीरे-धीरे यह
- 33:23बात फैल गई कि धनिया पर लगाया गया चोरी का
- 33:26इल्जाम झूठा था। गांव के कुछ पुराने
- 33:30बुजुर्ग और लोग जिन्होंने सब देखा था। अब
- 33:33मुखर होकर कहने लगे, धनिया तो हमेशा
- 33:37ईमानदार और मेहनती रहा है। उसने कभी किसी
- 33:40का फायदा नहीं लिया। हमेशा अपने पसीने की
- 33:44कमाई से घर चलाया। हमें यह नहीं भूलना
- 33:47चाहिए कि सच्चाई और ईमानदारी ही असली ताकत
- 33:51है। अब समय है कि हम उसका सम्मान वापस
- 33:54दें। उसे सही जगह और उसका हक लौटाएं।
- 33:58जिसने भी उसके साथ अन्याय किया उसे समझना
- 34:02चाहिए कि सच का सामना करना ही पड़ता है।
- 34:06इस बात का पता पंचायत तक पहुंच गया। सभी
- 34:09सरपंच और पंचायत के लोग जिन्होंने पहले
- 34:12फैसला सुनाया था। अब खुद जाकर हालात की
- 34:16जांच करना चाहते थे। एक दिन गांव के मुख्य
- 34:19सरपंच अपने कुछ भरोसेमंद आदमियों के साथ
- 34:23पास के गांव में जाकर धनिया के नए घर
- 34:26पहुंचे। वे [संगीत] चाहते थे कि धनिया को
- 34:28वापस गांव बुलाया जाए और उसे उसका सही
- 34:31सम्मान लौटाया जाए।
- 34:33धनिया हम जानते हैं कि तुम्हारे साथ बहुत
- 34:36बड़ा अन्याय हुआ है। हमने अब सब कुछ देखा
- 34:39और समझा है। कृपया गांव लौट आओ। हम
- 34:42तुम्हें सम्मान देंगे। तुम्हारा हक वापस
- 34:45करेंगे और सभी अपनी गलतियां मानेंगे।
- 34:49तुम्हारे बिना यह गांव अधूरा है।
- 34:52लेकिन धनिया ने शांत और दृढ़ स्वर में
- 34:54जवाब दिया।
- 34:55मुखिया जी मैं आभारी हूं कि आप सच को
- 34:58जानने और मेरे पक्ष में खड़े होने आए।
- 35:01लेकिन मैं अभी इस गांव को नहीं छोड़ सकता।
- 35:03यह गांव ही वह जगह है जिसने मुझे मदद दी।
- 35:06मुझे यहां सम्मान दिया और मेरी मां और
- 35:08बेटी के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बनाया।
- 35:11यहां की मिट्टी, यहां के लोग और यहां की
- 35:14मेहनत मुझे जोड़ती है। जब तक मैं यहां
- 35:16हूं, मैं इस गांव को नहीं छोडूंगा और अपनी
- 35:19मेहनत और ईमानदारी से इसे और भी बेहतर
- 35:21बनाने की कोशिश करूंगा।
- 35:25धनिया की यह बात सुनकर सरपंच कुछ पल के
- 35:29लिए चुप रह गए। फिर उन्होंने धीरे-धीरे
- 35:32सिर झुकाया और स्वीकार किया। धनिया हम
- 35:35तुम्हारे फैसले का पूरी तरह सम्मान करते
- 35:38हैं। तुम्हारे फैसले में तुम्हारी समझदारी
- 35:41और धैर्य झलकता है और इस बार हमें यह भी
- 35:45सुनिश्चित करना होगा कि लानाचंद सेठ को
- 35:48उसके किए का उचित दंड दिया जाए ताकि वह और
- 35:52किसी के साथ ऐसा अन्याय ना कर सके और सबको
- 35:55यह संदेश मिले कि जो भी ईमानदारी और मेहनत
- 35:58के रास्ते पर चलता है उसका हक कभी दबाया
- 36:02नहीं जा सकता।
- 36:07गांव लौटकर पंचायत ने फैसला सुनाया।
- 36:11लालाचंद सेठ को जुर्माने के रूप में दंडित
- 36:14किया गया और उसे गांव से हमेशा के लिए
- 36:17निकाल दिया गया।
- 36:22सब लोग इस फैसले से संतुष्ट हुए। अब धनिया
- 36:26के नाम पर फिर से सम्मान और भरोसा लौट
- 36:28आया। गांव के लोग खुश थे कि सच्चाई हमेशा
- 36:32जीतती है।
- 36:42धनिया की मां और गौरी भी अपने बेटे और
- 36:44पिता के गौरव से खुश थी। धनिया अब अपने
- 36:47गांव में सुरक्षित और सम्मानित रह सकता
- 36:50था। वह जानता था कि ईमानदारी और मेहनत का
- 36:53फल देर से सही लेकिन निश्चित रूप से मिलता
- 36:57है। गौरी अपने पिता की ओर देखकर मुस्कुराई
- 37:00और बोली
- 37:00बाबा देखो सच की जीत हमेशा होती है। चाहे
- 37:04कितनी भी मुश्किलें आई सच्चाई और ईमानदारी
- 37:08का मार्ग कभी खाली नहीं जाता। मुझे लगता
- 37:11है कि हम सब ने यह सच में महसूस किया।
- 37:14हां बेटी और यही सीख हमें हमेशा याद रखनी
- 37:17चाहिए। ईमानदारी, मेहनत और सच्चाई का
- 37:20मार्ग ही असली ताकत है। अगर हम इसे अपनाएं
- 37:23तो कोई भी चुनौती हमें नहीं हरा सकती। यही
- 37:26रास्ता हमें सही मंजिल तक ले जाता है।
- 37:30और इस तरह धनिया, उसकी मां और गौरी ने
- 37:35अपने नए घर में खुशी-खुशी जीवन बिताना
- 37:37शुरू किया। साथ ही गांव में उनका सम्मान
- 37:41और प्यार हमेशा बरकरार रहा।
- 37:51धनिया, उसकी मां और गौरी अब अपने छोटे से
- 37:54घर में सुरक्षित और खुशहाल जीवन बिता रहे
- 37:58थे। घर में चारों तरफ हल्की धूप और
- 38:01हरियाली की खुशबू थी।
- 38:03बाबा देखो अब हमारे पास अपना घर है और हम
- 38:07पूरी तरह सुरक्षित हैं। मैं बहुत खुश हूं
- 38:11कि हम सब साथ हैं और अब डर नहीं लगता। हां
- 38:14बेटी यह सब तुम्हारी हिम्मत, समझदारी और
- 38:17सच्चाई की वजह से संभव हुआ। हमारा घर अब
- 38:20सिर्फ ईंट पत्थर का नहीं रह गया है। यह
- 38:22प्यार, विश्वास और ईमानदारी का घर बन गया
- 38:25है। यहां हर कोना हमारी मेहनत और अच्छाई
- 38:28की गवाही देता है।
- 38:29बेटा, तुमने हमेशा मेहनत और ईमानदारी को
- 38:32चुना। आज यही हमें सबसे बड़ी खुशियां दे
- 38:36रही हैं। तुम्हारे कारण हमारा परिवार
- 38:38सुरक्षित और खुशहाल है।
- 38:40गौरी याद रखना किसी भी मुश्किल में डरना
- 38:43नहीं हमेशा सच का साथ देना और नेक दिल
- 38:46रहना यही हमें सही रास्ता दिखाता है और हर
- 38:49संकट में हमारी मदद करता है।
- 38:52हां बाबा मैं हमेशा सच और ईमानदारी का
- 38:55मार्ग चुनूंगी। हम सब मिलकर इस घर को
- 38:58खुशियों, प्यार और सुरक्षा का घर बनाए
- 39:01रखेंगे। आज हमारे घर में सिर्फ सुख और
- 39:05प्यार है। अब हम कभी किसी झूठ, लालच या डर
- 39:09से परेशान नहीं होंगे। हमारी मेहनत,
- 39:12सच्चाई और हिम्मत हमें हमेशा मजबूत बनाए
- 39:16रखेगी। घर के चारों कोनों में खुशियों की
- 39:19गूंज थी। खिड़कियों से हल्की हवा आती और
- 39:23पक्षियों की चहचहाट घर में संगीत की तरह
- 39:26गूंजती। गौरी अपने पिता के पास बैठकर
- 39:29मुस्कुरा रही थी। धनिया अपने खेत और घर की
- 39:32ओर देखकर संतोष महसूस कर रहा था और उसकी
- 39:36मां दोनों के बीच बैठकर शांत और गर्वित
- 39:40थी। अब उनके जीवन में सच्चाई, मेहनत और
- 39:43ईमानदारी का फल हर रोज दिखाई देता था। और
- 39:47यह घर हमेशा खुशियों और प्यार से भरा
- 39:50रहता। धनिया ने साबित कर दिया कि सच्चाई
- 39:54और ईमानदारी कभी हारती नहीं। समय चाहे
- 39:57जितना कठिन क्यों ना हो, अंत में जीत
- 40:00हमेशा सच की ही होती है। आपको यह कहानी
- 40:03कैसी लगी कमेंट करके बताइए। धनिया के नाम
- 40:06दो प्यारी सी लाइंस जरूर लिखें।
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This page contains the full transcript of गुफा में रहने वाला गरीब परिवार | Hindi Story | Hindi Kahaniya | Moral Stories | Cartoon by Kahaniya Tv, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,993 words across 762 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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