YouTube2Text

नदी किनारे दो बहनों की खेती और ससुराल | Hindi Saas Bahu Kahani | Hindi Cartoon stories @SRTVCartoon — Transcript

by SR TV Cartoon · 4,820 words · 652 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:02नदी किनारे दो बहनों की खेती [संगीत] और
  2. 0:04ससुराल।
  3. 0:06नदी के दो किनारों पर रहती थी [संगीत] दो
  4. 0:08बहनें। एक के पास था बड़ा घर, बड़े खेत और
  5. 0:12हर सुख सुविधा। वहीं दूसरी के पास था छोटा
  6. 0:14सा घर, मिट्टी का चूल्हा और अपनों का
  7. 0:17प्यार। लेकिन दोनों बहनों के बीच इतनी
  8. 0:20कड़वाहट थी [संगीत] कि वे एक दूसरे का
  9. 0:22चेहरा देखना भी पसंद नहीं करती थी। क्या
  10. 0:24दोनों बहनें फिर से एक हो पाएंगी? [संगीत]
  11. 0:26जानने के लिए कहानी अंत तक जरूर देखिए।
  12. 0:29नदी के किनारे बसा था वह छोटा सा गांव।
  13. 0:31इसी गांव में दो बहनें रहती [संगीत] थी।
  14. 0:33प्रिया और नताशा। प्रिया बेहद शांत स्वभाव
  15. 0:36की थी। वहीं दूसरी तरफ [संगीत] नताशा
  16. 0:38बिल्कुल अलग। माता-पिता के गुजर जाने के
  17. 0:41बाद दोनों बहनों की जिम्मेदारी उनके मामा
  18. 0:43कमलेश और मामी सुनीता ने संभाली थी। लेकिन
  19. 0:46सुनीता का झुकाव हमेशा नताशा की तरफ ही
  20. 0:48रहा। वो नताशा को प्यार तो करती थी लेकिन
  21. 0:51उस प्यार के साथ-साथ उसके मन में प्रिया
  22. 0:53को लेकर जहर भी भरती रहती [संगीत] थी। एक
  23. 0:55शाम
  24. 0:59नताशा क्या बात है? आज तू इतनी चुप क्यों
  25. 1:02है? दीदी तुमसे एक बात पूछूं? हां पूछना।
  26. 1:05मुझसे पूछने में इतना क्यों सोच रही है?
  27. 1:08क्या सच में तुम्हें लगता है कि हम दोनों
  28. 1:10को इस घर में बराबर समझा जाता है? मुझे तो
  29. 1:13कभी ऐसा लगा नहीं। लेकिन तू क्यों पूछ रही
  30. 1:16है? मामी ने कहा कि तुम हमेशा अपने बारे
  31. 1:19में ही सोचती [संगीत] हो। आगे चलकर अगर घर
  32. 1:21में कोई चीज या जमीन का हिस्सा मिला तो
  33. 1:24तुम अपना हिस्सा ज्यादा मांगोगी।
  34. 1:27[संगीत]
  35. 1:27क्या मामी ने तुझे मेरे बारे में ऐसा कहा?
  36. 1:30हां। उन्होंने कहा कि मुझे अपने भविष्य के
  37. 1:33बारे में सोचना चाहिए। नताशा [संगीत] तू
  38. 1:35मेरी बहन है। मैं तेरा हक क्यों छीनूंगी?
  39. 1:39लेकिन मामी कहती है कि तुम बहुत सीधी बनती
  40. 1:41हो लेकिन हो नहीं। मैं तेरे सामने सीधी
  41. 1:44बनने की कोशिश नहीं करती। मैं बस तेरी
  42. 1:47बड़ी बहन हूं। दीदी फिर [संगीत] अगर कभी
  43. 1:50तुम्हें और मुझे एक चीज में से चुननी पड़े
  44. 1:54तो तो मैं तेरे लिए छोड़ दूंगी नताशा दीदी
  45. 1:58तुम हमेशा इतनी आसानी से बातें कैसे
  46. 2:00[संगीत] कर लेती हो जिंदगी इतनी भी आसान
  47. 2:02नहीं होती शायद नहीं है नताशा मुझे पता है
  48. 2:06लेकिन अगर हम रिश्तों में भी हिसाब करने
  49. 2:09लगेंगे [संगीत] तो जिंदगी और मुश्किल हो
  50. 2:11जाती है।
  51. 2:12फिर दोनों अपने घर की ओर चल पड़ी।
  52. 2:16उसी रात सुनीता [संगीत] ने नताशा को अपने
  53. 2:18कमरे में बुलाया। सुनीता ने धीमी आवाज में
  54. 2:20कुछ कहना शुरू किया।
  55. 2:21नताशा आज गांव से दो रिश्तों की बात आई
  56. 2:25है। दो रिश्ते मामी। हां, एक रिश्ता नदी
  57. 2:28के उस पार रहने वाले बड़े किसान परिवार से
  58. 2:31है। पक्का घर, अच्छी जमीन, बड़ा कारोबार
  59. 2:34और घर में किसी चीज की भी कमी नहीं है। और
  60. 2:37दूसरा और दूसरा साधारण परिवार का ही है।
  61. 2:41छोटा सा घर है, छोटी सी जमीन और घर के लोग
  62. 2:44खुद मेहनत करके ही गुजारा करते हैं। मामी,
  63. 2:47फिर तो मैं पहले वाला रिश्ता ही लूंगी
  64. 2:50अपने लिए। मैं भी यही चाहती हूं नताशा।
  65. 2:53आखिर मैंने तुझे अपनी बेटी की तरह पाला
  66. 2:55है। मैं चाहती हूं कि तेरी शादी ऐसी जगह
  67. 2:58हो जहां तुझे हर चीज के लिए तरसना ना
  68. 3:01पड़े।
  69. 3:02लेकिन तभी बाहर से प्रिया की आवाज आई।
  70. 3:04मामी खाना तैयार हो गया है। नताशा तू भी
  71. 3:07आजा। हां रख दे। वैसे प्रिया तेरे लिए भी
  72. 3:10एक रिश्ता आया है। क्या मेरे लिए रिश्ता?
  73. 3:14दीदी तुम्हारा रिश्ता भी आया है। हां
  74. 3:17लेकिन तेरा परिवार साधारण है। छोटा सा घर
  75. 3:20और थोड़े से गरीब लोग हैं वो। मामी घर
  76. 3:23छोटा या बड़ा होने से फर्क नहीं पड़ता।
  77. 3:26लोग अच्छे होने चाहिए। लेकिन दीदी जिंदगी
  78. 3:29सिर्फ अच्छे लोगों से नहीं चलती। जरूरतें
  79. 3:32भी तो होती हैं। सही कह रही है प्रिया।
  80. 3:35इसलिए तू वही चुनना जो
  81. 3:37[संगीत]
  82. 3:37तुझे सच में अच्छा लगे।
  83. 3:39लेकिन वे इस बात से बेखबर थी कि उनकी
  84. 3:41जिंदगी की असली परीक्षा तो शादी के बाद
  85. 3:43शुरू होने वाली थी। कुछ ही हफ्तों में
  86. 3:45दोनों बहनों की शादी की तैयारियां शुरू हो
  87. 3:47गई। [संगीत] मामी सुनीता ने नताशा की शादी
  88. 3:49में महंगे कपड़े, गहने और हर जरूरी सामान
  89. 3:52का खूब इंतजाम किया। [संगीत] जबकि प्रिया
  90. 3:54के लिए उसने बस जरूरत भर की चीजें ही रखी।
  91. 3:57लेकिन प्रिया ने फिर भी मुस्कुराकर सब
  92. 3:59स्वीकार कर लिया और कोई शिकायत नहीं की।
  93. 4:01शादी के दिन दोनों बहनों का मंडप एक ही
  94. 4:04जगह लगाया गया। सारी रस्में पूरी हुई।
  95. 4:06नताशा अपना ध्यान रखना। दीदी मैं तो अपना
  96. 4:10ध्यान रख ही लूंगी। लेकिन सिर्फ अफसोस इस
  97. 4:13बात का ही है कि हम दोनों का ससुराल इतनी
  98. 4:15पास है। मुझे तुम्हें रोज देखना होगा। कोई
  99. 4:19बात नहीं। और हां अगर कभी कोई परेशानी हो
  100. 4:22तो मुझे जरूर बताना। मुझे क्या परेशानी
  101. 4:24होगी दीदी? मैं तो अपने बड़े से ससुराल
  102. 4:27में बड़े आराम से रहूंगी। तुम अपना देख
  103. 4:29लेना। बस तू खुश है। मेरे लिए वही काफी है
  104. 4:33नताशा।
  105. 4:33विदाई के बाद दोनों की गाड़ियां नदी के
  106. 4:36अलग-अलग किनारों की ओर निकल गई। नताशा जब
  107. 4:38अपने ससुराल पहुंची तो एक बहुत बड़े घर के
  108. 4:41सामने खड़े लोगों ने उसका भव्य स्वागत
  109. 4:43किया। उसे लगा कि [संगीत] उसने अपनी
  110. 4:44जिंदगी का बिल्कुल सही फैसला किया है।
  111. 4:46आओ बहू हमारे घर में तुम्हारा स्वागत है।
  112. 4:49आज से यह घर तुम्हारा भी है। धन्यवाद मां
  113. 4:52जी। घर तो बहुत सुंदर है। घर बड़ा है बहू।
  114. 4:56इसलिए जिम्मेदारियां भी बड़ी है।
  115. 4:58धीरे-धीरे सब समझ [संगीत] जाओगी। जी मां
  116. 5:01जी मैं पूरी कोशिश करूंगी। उधर प्रिया जब
  117. 5:04अपने नए ससुराल पहुंची तो उसके सामने एक
  118. 5:06छोटा सा मिट्टी पक्का घर था। बाहर कुछ
  119. 5:08बर्तन रखे [संगीत] थे। पास ही एक छोटी सी
  120. 5:10रसोई थी और घर के पीछे थोड़ी सी जमीन।
  121. 5:13लेकिन जैसे ही नए परिवार ने उसका पूरे दिल
  122. 5:15से स्वागत किया। प्रिया के मन का सारा डर
  123. 5:18पल भर में दूर हो गया।
  124. 5:19बहु घर छोटा है लेकिन तू इसे अपना समझ कर
  125. 5:23[संगीत] रहना। मां जी, घर कितना भी बड़ा
  126. 5:26है। इससे ज्यादा जरूरी यह है कि उसमें
  127. 5:29रहने वाले लोग कैसे हैं।
  128. 5:31बिल्कुल सही कहा बहू। और एक बात याद रखना
  129. 5:35यह काम किसी एक का नहीं होता। जरूरत पड़े
  130. 5:39तो हम सब मिलकर करेंगे।
  131. 5:42भाभी, पहले आप आराम कर लो, बाकी काम मैं
  132. 5:45संभाल लूंगी। नहीं गौरी, मैं भी मदद
  133. 5:48करूंगी। अब मैं भी तो इस घर का हिस्सा
  134. 5:50हूं।
  135. 5:50[संगीत]
  136. 5:50दूसरी तरफ नताशा अपने बड़े से कमरे में
  137. 5:52अकेली बैठी अपने नए जीवन के बारे में
  138. 5:55[संगीत] सोच रही थी। लेकिन तभी उसकी सास
  139. 5:57कमला ने कमरे में आकर उसे अगले दिन की
  140. 5:59भारी जिम्मेदारियां समझानी शुरू कर दी।
  141. 6:02बहू कल तुम्हारी पहली रसोई है। घर में कुछ
  142. 6:05मेहमान भी आएंगे। जी मां जी बताइए मैं
  143. 6:08क्या-क्या बनाऊं? तुम्हें रसोई अच्छी तरह
  144. 6:10से संभालनी होगी और हमारे यहां पहली रसोई
  145. 6:13में बहू अपने हाथ से ही खाना बनाती है। जी
  146. 6:16मां जी मैं कर लूंगी। और सिर्फ रसोई ही
  147. 6:19नहीं कुछ दिनों में तुम्हें खेत के हिसाब
  148. 6:21किताब और अनाज के भंडार की जानकारी भी
  149. 6:24लेनी होगी बहू।
  150. 6:26खेत का हिसाब भी हां तुम इस घर की बहू हो।
  151. 6:30धीरे-धीरे जिम्मेदारियां समझनी होंगी
  152. 6:32तुम्हें। और फिर सुबह होते ही सुधरप्रिया
  153. 6:35अपने छोटे से घर में मिट्टी के [संगीत]
  154. 6:37चूल्हे पर दाल चढ़ाती है। उसके पास महंगे
  155. 6:40मसाले या बड़ी रसोई तो नहीं थी [संगीत]
  156. 6:42लेकिन वो अपने प्यार, स्वाद और मेहनत से
  157. 6:44हर कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही थी।
  158. 6:47प्रिया बहू तू ज्यादा परेशान मत होना। घर
  159. 6:51में जितना सामान है उसी से कुछ बना लेना।
  160. 6:54मां जी आप चिंता मत कीजिए। [संगीत] कम
  161. 6:56सामान में भी अच्छा खाना बनाया जा सकता
  162. 6:58है। लाओ भाभी मैं तुम्हारी मदद कर देती
  163. 7:01हूं। ठीक है गौरी तुम सब्जियां काट दो मैं
  164. 7:04आटा लगा लेती हूं।
  165. 7:05दूसरी तरफ नताशा के घर में एक बहुत बड़ी
  166. 7:07रसोई थी। [संगीत] उसे कई तरह के पकवान
  167. 7:09बनाने थे और साथ ही सास ने घर के अनाज के
  168. 7:13भंडार की पूरी जिम्मेदारी [संगीत] भी उसी
  169. 7:15दिन उसके कंधों पर डाल दी थी। उधर नताशा
  170. 7:17की विशाल रसोई में कई तरह के पकवान बनने
  171. 7:20शुरू हो चुके थे। तभी उसकी सास की सख्त
  172. 7:22आवाज आई और उसने नताशा को अनाज के भंडार
  173. 7:25वाले कमरे में बुला लिया।
  174. 7:27नताशा यहां आओ। जी मां जी अभी आती हूं। यह
  175. 7:30पिछले महीने का गेहूं और चावल का हिसाब
  176. 7:33है। देखना है कि कितना अनाज निकला है और
  177. 7:35कितना बचा है। मां जी, अभी तो मैं खाना
  178. 7:38बना रही थी। क्या मैं यह काम बाद में कर
  179. 7:40दूं?
  180. 7:40नहीं बहू, घर की जिम्मेदारियां सिर्फ रसोई
  181. 7:43तक सीमित नहीं होती। आज से तुम्हें
  182. 7:45थोड़ा-थोड़ा और भी काम समझना होगा।
  183. 7:48नताशा हिसाब किताब का रजिस्टर लेकर बैठ तो
  184. 7:50गई, लेकिन पुराने पन्नों पर लिखीवट
  185. 7:52बिल्कुल साफ नहीं थी। जब उसे कुछ समझ नहीं
  186. 7:55आया तो उसने बस अनुमान लगाकर कुछ आंकड़े
  187. 7:57लिख दिए और वापस रसोई की तरफ भाग गई।
  188. 8:00लेकिन तभी घर का एक मजदूर दौड़ता हुआ
  189. 8:03मालकिन गोदाम में खाद के सिर्फ आठ बोरे आए
  190. 8:06हैं। हिसाब में बराबर लिखे हैं।
  191. 8:09लेकिन मुझे तो रजिस्टर में 12 दिख रहे
  192. 8:11हैं।
  193. 8:12मुझे भी समझ नहीं आ रहा बहू जी।
  194. 8:15नताशा अभी तुम खाना संभालो। शाम को इस
  195. 8:19हिसाब को दोबारा देखेंगे।
  196. 8:20नताशा परेशान होकर वापस रसोई में गई। बहू
  197. 8:23खाना तो अच्छा था लेकिन साथ में तुम्हें
  198. 8:25बाकी जिम्मेदारियां भी संभालने की आदत
  199. 8:27डालनी होगी। जी मां जी मैं सीख जाऊंगी।
  200. 8:30नताशा बहू गलती से डरना मत लेकिन एक ही
  201. 8:34गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए।
  202. 8:36नताशा ने पहली बार महसूस किया कि संपत्ति
  203. 8:39जितनी ज्यादा हो उसे संभालने की चिंता भी
  204. 8:42उतनी ही ज्यादा होती है। दूसरी तरफ प्रिया
  205. 8:44के घर उसकी बनाई साधारण दाल, बाजरे की
  206. 8:47गरमा गरम रोटी और चटनी ने घर के हर सदस्य
  207. 8:50[संगीत] का दिल जीत लिया था। बहू आज तूने
  208. 8:53कम सामान में इतना अच्छा खाना बना दिया।
  209. 8:56बाबूजी खाना अच्छा तब लगता है जब सब मिलकर
  210. 9:00खुशी से खाएं। भाभी अब तो मुझे आपके हाथ
  211. 9:02का खाना रोज चाहिए। कोई बात नहीं गौरी अगर
  212. 9:06तुम मेरी मदद करोगी तो हम दोनों मिलकर
  213. 9:08बहुत अच्छा-अच्छा खाना बनाएंगे। [संगीत]
  214. 9:10अगले दिन हरिया ने अकेले नदी से पानी लाने
  215. 9:12की कोशिश की। मगर लगातार काम करने से वो
  216. 9:15बुरी तरह थक गया। अगर दो दिन में खेत तक
  217. 9:18पानी नहीं पहुंचा तो फसल कमजोर हो जाएगी।
  218. 9:22बाबूजी [संगीत] कोई रास्ता जरूर निकलेगा।
  219. 9:24हम नदी से पानी खेत तक लाने के लिए
  220. 9:27व्यवस्था जरूर कर लेंगे।
  221. 9:29और उसी समय नदी के दूसरे किनारे पर नताशा
  222. 9:31के ससुराल में [संगीत] खेत के एक हिस्से
  223. 9:33में भयानक क्यूरे लगने की खबर आई। मजदूरों
  224. 9:36को तुरंत कोई बड़ा [संगीत] फैसला लेना था।
  225. 9:38नताशा खेत का यह हिस्सा बचाना जरूरी है।
  226. 9:41मां जी, मैं मजदूरों से बात करती हूं। कोई
  227. 9:44रास्ता जरूर निकलेगा। अब दोनों बहनों के
  228. 9:46सामने पहली चुनौती थी। अगली सुबह प्रिया
  229. 9:49के सूखे खेत को पानी की सख्त जरूरत थी।
  230. 9:51बाबूजी अगर हम मिट्टी हटाकर यहां एक छोटी
  231. 9:54सी नाली बना दें तो पानी सीधे खेत के ऊपर
  232. 9:57वाले हिस्सों में आराम से जा सकता है।
  233. 9:59बात तो सही है बहू। लेकिन अकेले इतना काम
  234. 10:03करना आसान नहीं होगा।
  235. 10:05अकेले क्यों करेंगे? सब मिलकर करेंगे ना?
  236. 10:07और भाभी मैं भी तुम्हारे साथ हूं।
  237. 10:10अब दोनों बहनों के सामने पहली चुनौती थी।
  238. 10:12[संगीत] अगली सुबह प्रिया के सूखे खेत को
  239. 10:14पानी की सख्त जरूरत थी। फिर क्या था?
  240. 10:17तीनों ने मिलकर काम संभाल लिया। प्रिया
  241. 10:19मिट्टी [संगीत] हटाती, गौरी किनारे मजबूत
  242. 10:21करती और हरिया नदी की तरफ पानी का रास्ता
  243. 10:24बनाता। कई घंटों की अटूट मेहनत के बाद
  244. 10:26आखिरकार नदी का पानी नाली से बहता हुआ
  245. 10:29धीरे-धीरे खेत की प्यास बुझाने लगा।
  246. 10:32देखिए बाबूजी पानी पहुंच गया।
  247. 10:35बहू तूने तो आज हमारा बहुत बड़ा काम आसान
  248. 10:39कर दिया। मैंने कुछ अकेले ने ही किया है।
  249. 10:41हम सब ने मिलकर किया है।
  250. 10:43उधर नदी के दूसरे किनारे नताशा को
  251. 10:45खेतीबाड़ी का कोई अनुभव नहीं था।
  252. 10:47नताशा तुम्हारे ससुर ने कहा है कि आज ही
  253. 10:50इसका इंतजाम करना होगा। मां जी मैं खेत
  254. 10:53में जाकर देखती हूं। बहू सिर्फ देखकर वापस
  255. 10:56मत आना। मजदूरों से बात करके फैसला भी
  256. 10:58करना होगा। जी मां जी।
  257. 11:01उसने जल्दबाजी में पुराने रजिस्टर देखकर
  258. 11:03एक दवा का नाम बता दिया और मजदूरों ने
  259. 11:05छिड़काव शुरू कर दिया। लेकिन कुछ ही घंटों
  260. 11:08बाद एक तजुर्बेकार बुजुर्ग मजदूर ने हाथ
  261. 11:11जोड़कर छिड़काव रुकवाया।
  262. 11:12बहू जी यह दवा फसल के लिए ज्यादा तेज है।
  263. 11:17मात्रा कम रखनी चाहिए।
  264. 11:19लेकिन रजिस्टर में तो यही लिखा है।
  265. 11:21रजिस्टर पुराना है बहू जी। इस बार मौसम
  266. 11:25अलग है।
  267. 11:28तो पहले क्यों नहीं बताया आप लोगों ने?
  268. 11:30हमने बताया था लेकिन हमें लगा आप घर वालों
  269. 11:34से पूछ कर आई हैं। लेकिन तब तक फसल का एक
  270. 11:38हिस्सा पूरी तरह खराब हो चुका था। शाम
  271. 11:40ढलते ढलते घर में सन्नाटा छा गया। नताशा
  272. 11:43को लगने लगा कि अब हर कोई उसी को दोष
  273. 11:45देगा। [संगीत]
  274. 11:46गलती हो गई बहू लेकिन उससे सीखना भी जरूरी
  275. 11:49है। मां जी मुझे माफ कर दीजिए। मुझे खेती
  276. 11:52की इतनी जानकारी नहीं थी। मानती हूं बहू।
  277. 11:55तुम्हें [संगीत] सब कुछ पहले दिन से आना
  278. 11:57जरूरी नहीं है। लेकिन अगली बार किसी
  279. 12:00अनुभवी व्यक्ति की बात जरूर सुन लेना।
  280. 12:02उसने सोचा कि भले ही प्रिया के पास साधन
  281. 12:04कम है लेकिन उसके पास एक [संगीत] ऐसा
  282. 12:06परिवार है जो हर मुश्किल में एक दूसरे का
  283. 12:09हाथ थाम कर खड़ा रहता है।
  284. 12:11मुझे लगता था यहां आकर मेरी जिंदगी आसान
  285. 12:13हो जाएगी।
  286. 12:14शाम होते-होते नदी में एक नई आफत आ खड़ी
  287. 12:17हुई। नदी का पानी अचानक बड़ी तेजी से
  288. 12:19बढ़ने लगा था।
  289. 12:20भाभी पानी बहुत तेज आ रहा है। नाली टूट
  290. 12:23जाएगी। सब लोग पीछे हटो। पहले देखना होगा
  291. 12:26कि पानी किस तरफ जा रहा है।
  292. 12:28बहू नदी का बहाव आज कुछ अलग लग रहा है।
  293. 12:32बाबू जी हमें खेत [संगीत] से जरूरी सामान
  294. 12:34अभी सुरक्षित जगह रखने चाहिए।
  295. 12:36अगली सुबह हरिया बार-बार घबराए हुए खेत की
  296. 12:38मेड [संगीत] देखने जा रहे थे।
  297. 12:40बहू आज खेत में पानी मत लगाना। नदी का
  298. 12:44बहाव बहुत तेज है।
  299. 12:46बाबूजी पहले खेत की मेड मजबूत कर लेते
  300. 12:48हैं। भाभी अगर पानी और बढ़ गया तो? तो हम
  301. 12:51पहले से ही तैयारी करेंगे। गोरी घबराने से
  302. 12:54अच्छा है कि जरूरी चीजों को सुरक्षित कर
  303. 12:56लें।
  304. 12:56वहीं दूसरी [संगीत] तरफ नताशा के ससुराल
  305. 12:59में भी हड़कंप मचा था। मां जी अगर पानी
  306. 13:01खेत तक आ गया तो हम क्या करेंगे? बहू सब
  307. 13:04कुछ तो नहीं बचा सकते। पहले अनाज और जरूरी
  308. 13:07कागज सुरक्षित करने होंगे और खेत खेत के
  309. 13:10लिए बहू मजदूर है लेकिन कागज और अनाज
  310. 13:13हमारे हाथ में है।
  311. 13:14प्रिया ने चूल्हे के लिए रखी सूखी
  312. 13:16लकड़ियां भी तुरंत चप्पड़ के नीचे पहुंचा
  313. 13:19दी। हड़िया उसकी इतनी समझदारी [संगीत]
  314. 13:21देखकर हैरान थे। उधर नताशा के घर में भी
  315. 13:24तैयारियां शुरू हो चुकी थी। घर बड़ा
  316. 13:26[संगीत] था और सामान बहुत ज्यादा था।
  317. 13:28नताशा को समझ ही नहीं आ रहा था कि पहले
  318. 13:30किस चीज को सुरक्षित किया जाए। उसी दौरान
  319. 13:33गांव का एक बुजुर्ग आदमी दोनों परिवारों
  320. 13:35के पास यह खबर लेकर पहुंचा।
  321. 13:37सब लोग सावधान रहना। ऊपर पहाड़ी इलाके में
  322. 13:41खूब बारिश हुई है। नदी का पानी अचानक बढ़
  323. 13:45सकता है।
  324. 13:46क्या गांव खाली करने की बात है?
  325. 13:49अभी नहीं। लेकिन जरूरत का सामान तैयार
  326. 13:52रखना। दूसरी तरफ नताशा ने अपने घर में काम
  327. 13:55करने वाले लोगों से कहा कि वे खेत के
  328. 13:57निचले हिस्से की मेड को मजबूत करें।
  329. 14:00बहू जी पानी का दबाव ज्यादा हुआ तो यह
  330. 14:04मेड़ टूट सकती है।
  331. 14:06तो क्या किया जा सकता है?
  332. 14:08ऊपर से बोरी और लकड़ी का सहारा देना होगा।
  333. 14:12ठीक है। जितनी बोरियां चाहिए ले जाइए।
  334. 14:14नताशा ने पहली बार मजदूरों [संगीत]
  335. 14:16की बात पर भरोसा किया। शाम तक पानी का
  336. 14:18बहाव कुछ कम हुआ और दोनों परिवारों ने
  337. 14:21राहत की सांस ली। रात में प्रिया नदी के
  338. 14:23किनारे खड़ी होकर
  339. 14:24हे भगवान मेरी बहन और उसके परिवार को
  340. 14:27सुरक्षित रखना।
  341. 14:28नताशा ने पहली बार मन ही मन सोचा कि अगर
  342. 14:31सच में कोई बड़ी [संगीत] परेशानी आई तो
  343. 14:33क्या वह अपनी बहन के पास जाएगी? अगली सुबह
  344. 14:36नदी का पानी थोड़ा कम दिखाई दिया। गांव
  345. 14:38वालों ने राहत की सांस ली और लोगों को लगा
  346. 14:40कि अब खतरा टल गया है। प्रिया ने भी घर का
  347. 14:43काम सामान्य तरीके से शुरू कर दिया। नताशा
  348. 14:44[संगीत]
  349. 14:45ने भी अपने घर में खेत और अनाज की
  350. 14:47व्यवस्था दोबारा संभाल ली। लेकिन उसी
  351. 14:49दोपहर [संगीत] गांव के चौक पर अचानक एक
  352. 14:52सरकारी कर्मचारी पहुंचा।
  353. 14:55सभी लोग ध्यान से सुनिए। ऊपर से पानी
  354. 14:58छोड़े जाने की सूचना मिली है।
  355. 15:00कितना पानी आएगा साहब?
  356. 15:02अभी सही मात्रा बताना मुश्किल है। लेकिन
  357. 15:05नदी किनारे रहने वाले परिवार तैयार रहें।
  358. 15:09प्रिया ने अपने ससुराल वालों के साथ मिलकर
  359. 15:11सबसे पहले अनाज की बोरियां और जरूरी सामान
  360. 15:13घर की ऊंची जगह पर रखवा दिया। बाबू जी
  361. 15:16हमें ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना
  362. 15:18चाहिए। जरूरी सामान पहले ही अच्छे से
  363. 15:20सुरक्षित जगह पहुंचा देते हैं। भाभी क्या
  364. 15:23हमें भी गांव से बाहर चले जाना चाहिए? अभी
  365. 15:26सरकारी आदेश नहीं आया है गौरी लेकिन अगर
  366. 15:28पानी और बढ़ा तो हम यहां से निकल जाएंगे।
  367. 15:31उधर नताशा के ससुराल में भी अफरातफरी मचने
  368. 15:34लगी। बड़ा घर होने के कारण परिवार को लग
  369. 15:36रहा था कि वह पूरी तरह सुरक्षित हैं।
  370. 15:38[संगीत] लेकिन घर के पीछे बने खेतों में
  371. 15:40पानी बड़ी तेजी से घुस रहा था। नताशा को
  372. 15:43अचानक अपनी बहन प्रिया की चिंता सताने
  373. 15:45लगी।
  374. 15:45मां जी प्रिया का घर तो पास है बिल्कुल
  375. 15:47नदी के। अपनी चिंता कर बहू अगर पानी और
  376. 15:50बढ़ा तो हमारे खेत भी डूब जाएंगे। लेकिन
  377. 15:53मां जी हमें कम से कम उसे खबर तो करनी
  378. 15:56चाहिए ना। तुम्हारी बहन समझदार है। उसे
  379. 15:59पता होगा क्या करना है।
  380. 16:00उसने खिड़की से नदी की तरफ देखा और उसे
  381. 16:03प्रिया का वह छोटा सा घर याद आया जो नदी
  382. 16:05के बेहद करीब था। उसने पहली बार अपनी बहन
  383. 16:08को फोन करने का फैसला किया। लेकिन नदी
  384. 16:10किनारे नेटवर्क कमजोर होने के कारण फोन
  385. 16:12नहीं लगा। इधर प्रिया के घर के पास नदी का
  386. 16:15पानी खेत की मेड़ तक पहुंच चुका था। अचानक
  387. 16:17नदी का एक तेज बहाव मेड़ के एक हिस्से से
  388. 16:20टकराया और मिट्टी का बड़ा हिस्सा टूट कर
  389. 16:22बह गया।
  390. 16:23भाभी मेड़ टूट गई। सब लोग पीछे हटो। पानी
  391. 16:26के पास मत जाना।
  392. 16:27हां बहू आज नदी का पानी कुछ ज्यादा ही
  393. 16:31डरावना लग रहा है। अगर यहां से पानी अंदर
  394. 16:34आया तो पूरा खेत डूब जाएगा। फसल जाने का
  395. 16:38डर बाद में करेंगे। पहले अपनी जान जरूरी
  396. 16:41है।
  397. 16:41थोड़ी ही देर में पानी खेत के बड़े हिस्से
  398. 16:43में फैल गया। महीनों की मेहनत से उगाई गई
  399. 16:46फसल पानी में झुकने लगी। प्रिया कुछ पल
  400. 16:48उसे चुपचाप देखती रही। लेकिन उसने खुद को
  401. 16:50संभाला। उधर नताशा ने देखा कि उसके ससुर
  402. 16:53अपने पुराने कागज और खेतों के दस्तावेज
  403. 16:55[संगीत] एक संदूक में संभाल कर रख रहे
  404. 16:57हैं।
  405. 16:57पापा जी यह सब ऊपर रख दीजिए। नीचे पानी आ
  406. 17:00रहा है।
  407. 17:00हां बहू तुम भी अपना जरूरी सामान ले आओ।
  408. 17:04मैं पहले ही नौकरों और मजदूरों को बाहर
  409. 17:06सुरक्षित जगह बेच देती हूं।
  410. 17:08लेकिन बहू तुम खुद भी सुरक्षित रहना।
  411. 17:11सरकारी [संगीत] कर्मचारी दोबारा गांव में
  412. 17:13पहुंचे।
  413. 17:14नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सभी
  414. 17:17परिवार तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंच
  415. 17:20जाएं।
  416. 17:21बहू अब हमें निकलना चाहिए।
  417. 17:24बाबूजी लेकिन पहले मांजी और गोरी को लेकर
  418. 17:26चलते हैं।
  419. 17:27प्रिया ने घर से सिर्फ जरूरी कपड़े, थोड़ा
  420. 17:29अनाज और दवाइयां उठाई। उसने अपनी रसोई की
  421. 17:32तरफ आखिरी बार देखा। वही मिट्टी [संगीत]
  422. 17:34का चूल्हा जिस पर उसने अपनी पहली रसोई
  423. 17:36बनाई थी, अब पानी के खतरे में था। दूसरी
  424. 17:39तरफ नताशा के परिवार [संगीत] ने भी घर की
  425. 17:41ऊपरी मंजिल पर जाने का फैसला किया।
  426. 17:43सब लोग ऊपर आ जाइए। नीचे रहना अब सुरक्षित
  427. 17:46नहीं है। बहू क्या पानी घर [संगीत] के
  428. 17:48अंदर भी आ जाएगा? मुझे नहीं पता मां जी।
  429. 17:51लेकिन हमें सबसे पहले खराब स्थिति के लिए
  430. 17:53तैयार रहना होगा।
  431. 17:55नताशा को पहली बार अपनी बहन के लिए गहरा
  432. 17:57डर महसूस हुआ। उसने खिड़की से बाहर देखा।
  433. 18:00नदी का पानी [संगीत] अब पहले से कहीं
  434. 18:02ज्यादा फैल चुका था। उधर प्रिया अपने
  435. 18:04परिवार के साथ सुरक्षित जगह की ओर पहुंच
  436. 18:06चुकी थी। प्रिया के मन में बार-बार अपनी
  437. 18:08बहन का ख्याल [संगीत] आ रहा था। गांव के
  438. 18:10कई परिवार नदी की तेज धार में फंसे थे।
  439. 18:12प्रिया ने [संगीत] बिना अपनी सुरक्षा की
  440. 18:14परवाह किए बचाव दल की नाव में बैठकर नदी
  441. 18:17के बीच जाने का फैसला किया। अगर कोई नाव
  442. 18:19या बचाव दल उधर जा रहा है तो मुझे भी साथ
  443. 18:22जाना है।
  444. 18:23बहू वहां जाना बहुत खतरनाक है।
  445. 18:26बाबूजी मुझे पता है लेकिन अगर वहां कोई
  446. 18:29अपना फंसा है तो मैं यहां चुपचाप नहीं बैठ
  447. 18:31सकती।
  448. 18:32उधर नताशा अपने ससुराल [संगीत] की ऊपरी
  449. 18:34मंजिल पर घिरी खड़ी थी। बड़ा घर अब उनके
  450. 18:37लिए कैद बन [संगीत] चुका था। साहब नदी के
  451. 18:39उस पार बहुत सारे घर हैं। वहां लोग फंसे
  452. 18:42हुए हैं।
  453. 18:43हम जानते हैं लेकिन पानी का बहाव बहुत तेज
  454. 18:47है। पहले जिन लोगों की हालत सबसे ज्यादा
  455. 18:49गंभीर है, उन्हें निकालना होगा।
  456. 18:52मुझे उस इलाके का अच्छे से पता है। मैं
  457. 18:54आपको बता सकती हूं कौन सा रास्ता सुरक्षित
  458. 18:57है।
  459. 18:57ठीक है। लेकिन नाव में बिना जरूरत खड़ी मत
  460. 19:00होना। यह बहुत खतरनाक है।
  461. 19:02उधर नताशा अपने ससुराल [संगीत] की ऊपरी
  462. 19:04मंजिल पर घिरी खड़ी थी। नताशा बहू पानी
  463. 19:07इतना ऊपर कैसे आ गया? मां जी घबराइए मत।
  464. 19:10हम ऊपर हैं। बचाव दल जरूर आ जाएगा।
  465. 19:13बाहर का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है।
  466. 19:18हम सब साथ हैं। जब तक मदद नहीं आती कोई भी
  467. 19:21नीचे नहीं जाएगा। वो लोग यहां तक आ भी
  468. 19:24पाएंगे क्या बहू? मां जी हम हार नहीं
  469. 19:26मानेंगे। कोई ना कोई रास्ता जरूर निकलेगा।
  470. 19:29साहब उस बड़े घर की तरफ चलिए। वहां लोग
  471. 19:32फंसे हुए हैं।
  472. 19:33उस तरफ पानी बहुत तेज है। सीधे जाना
  473. 19:36मुश्किल होगा।
  474. 19:37तो पीछे के रास्ते से ले लीजिए। वहां खेत
  475. 19:39के पास पानी बहुत कम होता है।
  476. 19:42तुम्हें पूरा भरोसा है?
  477. 19:44हां मैं उस इलाके को अच्छे [संगीत] से
  478. 19:45जानती हूं।
  479. 19:46तभी दूर से नाव आई।
  480. 19:48नताशा कौन? दीदी तुम यहां क्यों आई हो?
  481. 19:52तुम्हें लेने आई हूं। नताशा जल्दी करो।
  482. 19:55लेकिन यहां बहुत खतरा है। तुम वापस चली
  483. 19:57जाओ। तू मेरी बहन है। तुझे यहां छोड़कर
  484. 20:00मैं वापस नहीं [संगीत] जा सकती।
  485. 20:01सब लोग नीचे बैठो। नाव को संतुलित रखना
  486. 20:04होगा।
  487. 20:05लेकिन तेज बहाव के कारण आगे ना बढ़ सकी।
  488. 20:07नताशा का दिल बैठ गया।
  489. 20:09साहब क्या हम इन्हें अभी नहीं निकाल सकते?
  490. 20:12अभी नहीं। पानी बहुत तेज है। हमें थोड़ा
  491. 20:15इंतजार करना पड़ेगा।
  492. 20:17लेकिन घर में पानी लगातार बढ़ रहा है।
  493. 20:20दीदी अगर तुम वापस चली जाओगी तो शायद
  494. 20:22तुम्हारी जान बच जाएगी। ऐसी बात दोबारा मत
  495. 20:25करना नताशा। मैंने तुम्हारे साथ बहुत बुरा
  496. 20:28किया है दीदी। उसका हिसाब हम बाद में
  497. 20:30करेंगे। पहले बस अपनी जान बचानी है अभी।
  498. 20:34अचानक प्रिया की नाव दूसरी दिशा से उस तरफ
  499. 20:36पड़ी। खिड़की पर लहराता नताशा का लाल
  500. 20:38दुपट्टा देख प्रिया की आंखें भर आई। जिस
  501. 20:41बहन को वह अपने खिलाफ समझती थी, वही
  502. 20:43प्रिया आज अपनी जान जोखिम में डालकर उसे
  503. 20:46बचाने आई थी। तभी नदी में बहता एक बड़ा
  504. 20:48लट्ठा नाव से टकराया। प्रिया संतुलन खोकर
  505. 20:51पानी में गिरते-गिरते बची।
  506. 20:53सब लोग सावधान रहना। नाव पीछे करो।
  507. 20:57दीदी मैं ठीक हूं नताशा। तुम घबराना मत।
  508. 21:00हम दूसरी तरफ से आ रहे हैं। नताशा बहू
  509. 21:03पानी अब [संगीत] सीढ़ियों तक पहुंच गया
  510. 21:05है।
  511. 21:06मां जी आप सब छत के बीच में आ जाइए।
  512. 21:08किनारे पर मत जाना। बहू क्या तुम्हारी बहन
  513. 21:11प्रिया वापस आएगी? हां मां जी वो जरूर
  514. 21:14आएगी। मैं जानती हूं दीदी को।
  515. 21:16नाविक ने रास्ता बदला।
  516. 21:18दीदी आप आ गए। भगवान का शुक्र है।
  517. 21:22पहले बुजुर्ग और महिलाएं नाव में आएंगी।
  518. 21:25बाकी लोग उसके बाद
  519. 21:27सब लोग तैयार रहिए। हमें जल्दी से निकलना
  520. 21:30होगा।
  521. 21:30और प्रिया छत पर चढ़कर सबसे पहले अपनी सास
  522. 21:33जैसी बुजुर्ग कमला और फिर नताशा को सेफ
  523. 21:35नाव में ले आई। नताशा का बड़ा बंगला और
  524. 21:38खेत पानी में डूब चुके थे। उसने पछतावे
  525. 21:40में सिर झुका लिया। प्रिया ने प्यार से
  526. 21:42उसका हाथ थाम लिया।
  527. 21:44बहू तुमने हमारे लिए इतना क्यों किया? अभी
  528. 21:47बातें करने का समय नहीं है मांझी। पहले आप
  529. 21:49अच्छे से सुरक्षित जगह पर चले जाइए। जब
  530. 21:52मामी कहती थी कि तुम मेरा [संगीत] हक छीन
  531. 21:54लोगी। मैंने उनकी बातें मान ली दीदी। जब
  532. 21:57तुम मेरी मदद करती थी तो मुझे लगता था कि
  533. 21:59तुम दिखावा कर रही हो। जब तुम मेरे लिए
  534. 22:02परेशान होती थी तो मुझे ऐसा लगता था कि
  535. 22:04तुम अच्छा बनने का सिर्फ नाटक करती हो।
  536. 22:07लेकिन आज जब मेरी पूरी दुनिया पानी में
  537. 22:09डूब रही थी। तुम मुझे बचाने आ गई। क्यों
  538. 22:12नहीं आऊंगी नताशा? तू मेरी बहन है। मैं
  539. 22:15तुझे ऐसी हालत में अकेला नहीं छोड़ सकती।
  540. 22:18दीदी मैंने सोचा था कि बड़ा घर होने से
  541. 22:20जिंदगी भी अच्छी हो जाती है। घर बड़ा हो
  542. 22:23या छोटा नताशा उसमें रहने वाले लोगों के
  543. 22:26दिल बड़े होने चाहिए। तुम्हें पता है
  544. 22:28दीदी? तुम्हारे छोटे से घर में जो अपनापन
  545. 22:31था वो मेरे इतने बड़े घर में कभी [संगीत]
  546. 22:33नहीं था। नताशा बहू आज तुमने साबित कर
  547. 22:36दिया है कि रिश्ते खून से नहीं निभाने से
  548. 22:39बनते हैं। [संगीत] कोई बात नहीं मां जी।
  549. 22:42चलो अब हम सब सुरक्षित हैं।
  550. 22:44नताशा मुझे भी तुमसे माफी मांगनी है। मैं
  551. 22:48तुम्हारी बातों को समझने के बजाय हमेशा घर
  552. 22:51वालों की बात मानता रहा।
  553. 22:53अश्विन जी मुझे अभी किसी बात की कोई
  554. 22:55शिकायत नहीं करनी। बस मैं चाहती हूं कि हम
  555. 22:58सब मिलकर दोबारा से एक नई शुरुआत करें।
  556. 23:01अगली सुबह राहत शिविर में दोनों बहने साथ
  557. 23:03बैठी थी। तभी गांव के बुजुर्ग शंकर प्रसाद
  558. 23:06एक पुराना बक्सा लेकर वहां पहुंचे। बक्से
  559. 23:08में उनके दिवंगत पिता का पत्र और वसीयत
  560. 23:10थी। क्या यहां प्रिया और नताशा नाम की दो
  561. 23:14बहनें हैं?
  562. 23:15हां, हम दोनों यहीं पर हैं। पर आप कौन
  563. 23:18हैं?
  564. 23:19मेरा नाम शंकर प्रसाद है। मैं कई साल पहले
  565. 23:23तुम्हारे पिता के साथ काम करता था।
  566. 23:26हमारे पिताजी को आप जानते थे?
  567. 23:29बहुत अच्छी तरह। और आज मैं तुम्हारे पिता
  568. 23:32की एक अमानत तुम्हें देने आया हूं।
  569. 23:36पत्र से पता चला कि उनके पिता ने दोनों के
  570. 23:38लिए जमीन छोड़ी थी। लेकिन उनकी मौत के बाद
  571. 23:41कागजों में हेरफेर करके किसी और ने कब्जा
  572. 23:44कर लिया था।
  573. 23:45यह पापा का है। पापा की ही लिखावट है ये।
  574. 23:48हां, उन्होंने मुझे इसे सुरक्षित रखने के
  575. 23:52लिए दिया था।
  576. 23:54लेकिन इतने सालों तक आपने हमें इसे क्यों
  577. 23:56नहीं दिया?
  578. 23:56क्योंकि तुम्हारे पिता ने कहा था कि इसे
  579. 24:00तभी देना जब तुम दोनों अपने पैरों पर खड़ी
  580. 24:03हो जाओ और एक दूसरे का साथ देना सीखो।
  581. 24:08दीदी पापा ने हमारे बारे में इतना सब कुछ
  582. 24:10सोच लिया था। हां नताशा शायद उन्हें पता
  583. 24:13था कि एक दिन हम दोनों के बीच गलतफहमियां
  584. 24:16आ सकती हैं।
  585. 24:18तुम्हारे पिता ने यह भी कहा था कि संपत्ति
  586. 24:21से ज्यादा जरूरी तुम्हारा रिश्ता है।
  587. 24:26लेकिन दीदी इसमें मेरी जमीन का हिस्सा तो
  588. 24:28बहुत कम है और मेरा हिस्सा भी बुरा नहीं
  589. 24:31है।
  590. 24:31यही वजह है कि मैं आज तुम्हारे पास आया
  591. 24:35हूं।
  592. 24:37मुझे पता है यह जरूर मामा और मामी ने ही
  593. 24:40किया होगा।
  594. 24:41मैं किसी पर बिना सबूत आरोप नहीं लगाना
  595. 24:44चाहता। लेकिन पुराने रिकॉर्ड में उनके
  596. 24:47हस्ताक्षर जरूर हैं।
  597. 24:50अगर उन्होंने किया है तो हमें इसका सच
  598. 24:52पूरा पता करना होगा।
  599. 24:53तुम दोनों को एक पुराने रिकॉर्ड ऑफिस जाना
  600. 24:57होगा। वहां तुम्हारे पिता की जमीन के सारे
  601. 25:00दस्तावेज मिल सकते हैं।
  602. 25:03यह खबर उनके मामामी तक पहुंची तो मामी
  603. 25:05सुनीता के चेहरे का रंग उड़ गया। जिस झूठ
  604. 25:08से उसने इतने साल दोनों बहनों को बांटे
  605. 25:10रखा था अब उसका भांडा फूटने वाला था।
  606. 25:13[संगीत]
  607. 25:13अगर उन दोनों को सारे कागज मिल गए तो
  608. 25:15हमारा क्या होगा?
  609. 25:16घबराने की जरूरत नहीं है। [संगीत] इतने
  610. 25:19सालों से हमने सब संभाल कर रखा है।
  611. 25:22लेकिन अब दोनों बहनें एक हो गई हैं। पहले
  612. 25:25जैसी बात नहीं रही। बहुत कोशिश करी है
  613. 25:28मैंने उन दोनों में फूट डालने की ताकि
  614. 25:30हमारा राज ही रहे लेकिन अब तो मुझे डर
  615. 25:33लगने लग गया है।
  616. 25:35इसीलिए हमें उससे पहले कुछ करना होगा।
  617. 25:38रिकॉर्ड ऑफिस पहुंचकर दस्तावेजों की जांच
  618. 25:41हुई तो सच सामने आ गया। दोनों बहनों ने
  619. 25:43अपने मामा-मामी को माफ कर दिया और कानूनी
  620. 25:46रूप से पिता की जमीन और हक [संगीत] वापस
  621. 25:48पा लिया। शाम को दोनों बहनों ने नदी
  622. 25:50किनारे साथ मिलकर चूल्हा जलाया। प्रिया ने
  623. 25:52आटा गधा। नताशा ने सब्जियां काटी और दोनों
  624. 25:55की हंसी से किनारा गूंज उठा।
  625. 25:57दीदी यह नदी हमारे बीच में कितनी दूरियां
  626. 26:00लेकर आई थी ना? [संगीत] नहीं नताशा नदी ने
  627. 26:03हमें अलग नहीं किया। लोगों की बातें और
  628. 26:06हमारी गलतफहमियों ने हमें अलग किया था।
  629. 26:08[संगीत] अब चाहे जो भी हो जाए दीदी मैं
  630. 26:11तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगी। मैं तुम्हें
  631. 26:13छोड़ने दूंगी तब नाना दाशा। दीदी [संगीत]
  632. 26:16आपको याद है? मैंने एक बार कहा था कि मुझे
  633. 26:19तुम्हें अपने ससुराल के पास देखकर दुख
  634. 26:21होगा। मुझे उस बात पर अफसोस है दीदी। याद
  635. 26:25है नताशा? सब याद है। आज लगता है कि अगर
  636. 26:28हमारे घर इतने पास नहीं होते तो शायद मैं
  637. 26:31तुम्हें कभी समझ ही नहीं पाती। कोई बात
  638. 26:33नहीं नताशा। [संगीत] कभी-कभी जिंदगी हमें
  639. 26:36वही जगह दे देती है जहां हमें सबसे ज्यादा
  640. 26:39सीखना होता है।
  641. 26:40जिस नदी ने कभी उन्हें दूर किया था, आज
  642. 26:43उसी के किनारे दोनों साथ खड़ी थी। वे समझ
  643. 26:46चुकी थी कि मकान छोटा हो या बड़ा, अपनों
  644. 26:48के प्यार और [संगीत] सच्चे रिश्ते से बड़ा
  645. 26:50कुछ नहीं होता। दोस्तों दौलत खोकर फिर
  646. 26:53कमाई जा सकती [संगीत] है। लेकिन अपनों का
  647. 26:55साथ खो जाए तो वापस पाना आसान नहीं होता।
  648. 26:58अगर आप प्रिया की जगह होते तो क्या नताशा
  649. 27:00को माफ कर पाते? अपनी राय कमेंट्स में
  650. 27:02जरूर [संगीत] बताइए।
  651. 27:14[संगीत]
  652. 27:19[संगीत]

About this transcript

This page contains the full transcript of नदी किनारे दो बहनों की खेती और ससुराल | Hindi Saas Bahu Kahani | Hindi Cartoon stories @SRTVCartoon by SR TV Cartoon, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 4,820 words across 652 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

What you can do with it

Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.

Free YouTube transcript tool

YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.