दो सौतेली बहनों का ससुराल। जिस बेटी को मां ने कभी नहीं अपनाया, उसी ने उसकी जिंदगी बचाई। Hindi Kahani — Transcript
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- 0:00एक छोटे से गांव में गौरी नाम की एक अनाथ
- 0:02लड़की रहती थी। उसके माता-पिता का कई साल
- 0:05पहले निधन हो चुका था। अब वह अपनी दादी
- 0:08कौशल्या, सौतेली मां, सरला और सौतेली बहन
- 0:12पल्लवी के साथ रहती थी। सरला और पल्लवी
- 0:15गौरी से बिल्कुल भी प्यार नहीं करती थी।
- 0:18वे उसे घर की बेटी नहीं बल्कि नौकरानी
- 0:21समझती थी। सुबह से लेकर देर रात तक घर का
- 0:24सारा काम उसी से करवाया जाता था। लेकिन इस
- 0:26घर में अगर कोई गौरी से सच्चा प्रेम करता
- 0:29था तो वह उसकी दादी कौशल्या थी। वे हमेशा
- 0:32उसे हिम्मत देती और समझाती कि एक दिन
- 0:35भगवान उसकी मेहनत का फल जरूर देंगे। एक
- 0:38सुबह ठीक 6:00 बजे सरला गुस्से में गौरी
- 0:40के कमरे में पहुंची और जोर-जोर से
- 0:42चिल्लाने लगी।
- 0:44अरे ओ कामचोर अभी तक सो रही है। घर में
- 0:47इतना काम पड़ा है और तुझे नींद आ रही है।
- 0:50पल्लवी उठेगी तो उसे गरमा गरम मां-भात
- 0:53चाहिए। जल्दी उठ और रसोई संभाल। गौरी घबरा
- 0:56कर उठ बैठी।
- 0:57मां मुझे माफ कर दीजिए। कल रात मेहमानों
- 1:00के जाने के बाद बर्तन धोते-धोते बहुत देर
- 1:03हो गई थी। इसलिए सुबह आंख नहीं खुली।
- 1:06उसी समय दादी कौशल्या वहां आ गई। अरे सरला
- 1:09अभी तो सुबह ही हुई है। बेचारी पूरी रात
- 1:12काम करती रही। थोड़ी देर और सो लेने देती
- 1:15तो क्या हो जाता? सरला गुस्से से बोली।
- 1:19[नाक से की जाने वाली आवाज़]
- 1:19अम्मा आप हमेशा इसी का पक्ष लेती हैं। इसी
- 1:22वजह से इसका हौसला बढ़ता जा रहा है।
- 1:24फिर उसने गौरी की तरफ उंगली दिखाते हुए
- 1:26कहा,
- 1:27जा जल्दी से मछली बना। याद रखना मसाले कम
- 1:31ज्यादा नहीं होने चाहिए।
- 1:32जी मां।
- 1:34गौरी बिना कुछ कहे काम में लग गई। उसने
- 1:37सबसे पहले पूरे घर में झाड़ू पोछा लगाया।
- 1:40फिर मछली साफ की। मसाले पीसे, प्याज और
- 1:43लहसुन कांटे और चूल्हा जलाकर बड़े मन से
- 1:46मां भात बनाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर
- 1:49में पूरे घर में स्वादिष्ट खाने की खुशबू
- 1:51फैल गई। दादी कौशल्या रसोई में आई।
- 1:54बेटी मैं तेरी मदद कर दूं?
- 1:57गौरी मुस्कुराई।
- 1:58नहीं दादी आप आराम कीजिए। आपकी तबीयत ठीक
- 2:02नहीं रहती। मैं सब संभाल लूंगी।
- 2:04थोड़ी देर बाद सारा खाना तैयार हो गया।
- 2:06उधर पल्लवी आराम से उठी। नहाई, अच्छे
- 2:10कपड़े पहने और सज संवर कर बाहर आई। सरला
- 2:13उसे देखकर बोली,
- 2:14"आज तो मेरी बेटी किसी राजकुमारी से कम
- 2:17नहीं लग रही।"
- 2:19मेरी राजकुमारी तो आज चांद से भी ज्यादा
- 2:21सुंदर लग रही है।
- 2:23पल्लवी मुस्कुराते हुए बोली
- 2:25मां बस भी कीजिए।
- 2:28[हंसी][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
- 2:29सरला ने तुरंत आवाज लगाई।
- 2:31गौरी जल्दी से खाना लेकर आ।
- 2:34गौरी चुपचाप दोनों के सामने खाना परोस कर
- 2:37खड़ी हो गई। पहला कौर खाते ही पल्लवी नाटक
- 2:40करने लगी। मां इस खाने में बिल्कुल स्वाद
- 2:42नहीं है। पता नहीं गौरी इतना खराब खाना
- 2:45कैसे बना लेती है।
- 2:46सरला भी तुरंत बोल पड़ी।
- 2:48सच कह रही है मेरी बेटी। इसे कोई काम ठीक
- 2:50से करना आता ही नहीं।
- 2:52असल में दोनों जानती थी कि खाना बहुत
- 2:54स्वादिष्ट बना था। फिर भी वे रोज की तरह
- 2:57गौरी को अपमानित करने का कोई मौका नहीं
- 2:59छोड़ती थी। गौरी ने कुछ नहीं कहा। वह
- 3:01चुपचाप रसोई [संगीत] में जाकर अपने लिए
- 3:03बचा हुआ सूखा खाना खाने लगी। दादी कौशल्या
- 3:07उसकी उदासी समझ रही थी। उन्होंने प्यार से
- 3:09उसके सिर पर हाथ फेरा। बेटी दुखी मत हो।
- 3:13भगवान सब देख रहा है। मेहनत और अच्छे
- 3:16संस्कार कभी व्यर्थ नहीं जाते। गौरी
- 3:18मुस्कुराने की कोशिश करते हुए बोली, दादी,
- 3:21मुझे आपकी बातों से ही हिम्मत मिलती है।
- 3:24दोपहर को पल्लवी अपनी सहेलियों के साथ नदी
- 3:26किनारे बैठी बातें कर रही थी। एक सहेली
- 3:29बोली पल्लवी तू तो पूरे गांव की सबसे
- 3:32सुंदर लड़की है। दूसरी सहेली ने कहा लेकिन
- 3:35तेरी बड़ी बहन गौरी भी तो बहुत सुंदर है।
- 3:37उसकी शादी कब होगी? यह सुनते ही पल्लवी का
- 3:40चेहरा उतर गया। उसकी बात मत करो। उससे कौन
- 3:44शादी करेगा? वह तो मेरे सामने कुछ भी नहीं
- 3:46है। उधर गांव की कुछ औरतें सरला के साथ
- 3:49बैठी थी। बातोंबातों में शादी की चर्चा
- 3:51शुरू हुई। सरला बहन मेरी नजर में गौरी के
- 3:55लिए एक बहुत अच्छा रिश्ता है। हां, लड़का
- 3:58बड़ा व्यापारी है और बहुत अच्छे परिवार से
- 4:01है।
- 4:02सरला के मन में लालच जाग गया। वह बाहर से
- 4:05मुस्कुरा कर बोली
- 4:06ठीक है बहन तुम उनसे बात कर लो।
- 4:10लेकिन मन ही मन उसने सोचा इतना अमीर लड़का
- 4:13मैं गौरी को क्यों दूं? शादी तो अपनी बेटी
- 4:15पल्लवी की ही करवाऊंगी। कुछ देर बाद वह
- 4:18खुशी-खुशी घर लौटी और पल्लवी को सारी बात
- 4:21बता दी। पल्लवी पहले तो नाराज हुई लेकिन
- 4:24जब सरला ने अपनी असली योजना बताई तो उसके
- 4:27चेहरे पर मुस्कान लौट आई।
- 4:29मैं लड़के वालों से कह दूंगी कि पल्लवी ही
- 4:32बड़ी बेटी है। गौरी का नाम कोई नहीं लेगा।
- 4:35पल्लवी खुशी से बोली
- 4:36वाह मां अब तो मैं अमीर घर की बहू बनकर
- 4:39रहूंगी।
- 4:40उसी रात सरला ने गौरी को बुलाकर कहा
- 4:43सुन कल लड़के वाले पल्लवी को देखने आ रहे
- 4:46हैं। घर में जरा भी गंदगी नहीं दिखनी
- 4:48चाहिए। खाना भी तू ही बनाएगी और याद रखना
- 4:50कि
- 4:50किसी के सामने यह मत कहना कि तू पल्लवी से
- 4:53बड़ी है। गौरी ने सिर झुका कर कहा मां
- 4:56जैसा आप कहेंगी वैसा ही होगा। सरला ने
- 5:00अगले दिन बनने वाले सभी व्यंजन गिनवा दिए।
- 5:02मटर पनीर, खीर, पूरी, पुलाव, सब्जी और
- 5:06मिठाई।
- 5:08गौरी ने सब ध्यान से सुन लिया और बोली,
- 5:10आप चिंता मत कीजिए मां। मैं सब कुछ समय पर
- 5:13तैयार कर दूंगी।
- 5:15लेकिन पल्लवी को फिर भी भरोसा नहीं था।
- 5:17रात को उसने सरला से कहा मां कहीं गौरी सो
- 5:21गई तो सारा काम बिगड़ जाएगा। सरला तुरंत
- 5:25गौरी के कमरे में पहुंची और उसे जगा दिया।
- 5:27आज तू पूरी रात नहीं सोएगी। अभी से सारी
- 5:30तैयारी शुरू कर दे। सुबह मेहमान जल्दी आ
- 5:33जाएंगे। गौरी ने बिना विरोध किए हामी भर
- 5:36दी। उस रात जब पूरा घर चैन से सो रहा था
- 5:39तब गौरी अकेली रसोई में बैठी सब्जियां काट
- 5:42रही थी। मसाले तैयार कर रही थी और सुबह के
- 5:45खाने की तैयारी में लगी हुई थी। पूरी रात
- 5:47जागकर गौरी ने रसोई का सारा काम पूरा
- 5:50किया। उसने खीर, मटर पनीर, पुलाव, सब्जी
- 5:54और रसगुल्ले तैयार कर दिए। बस मेहमानों के
- 5:57आने से पहले [संगीत] गरमागरम पूरिया तलनी
- 5:59बाकी थी। सुबह होते ही उसने पूरे घर की
- 6:02सफाई [संगीत] भी कर दी। आंगन से लेकर
- 6:04कमरों तक सब कुछ चमक उठा। इधर सरला पल्लवी
- 6:08के कमरे में गई।
- 6:09उठ जा मेरी राजकुमारी। आज तुझे देखने
- 6:11लड़के वाले आने वाले हैं। हम
- 6:14पल्लवी जल्दी से तैयार होने लगी। उसने
- 6:17सबसे सुंदर कपड़े पहने, गहने पहने और आईने
- 6:20के सामने खड़ी होकर खुद को निहारने लगी।
- 6:23सरला मुस्कुरा कर बोली
- 6:26आज तो मेरी बेटी किसी राजकुमारी से कम
- 6:29नहीं लग रही।
- 6:31थोड़ी ही देर बाद लड़के वाले घर पहुंच गए।
- 6:33उनका स्वागत बड़े आदर से किया गया। सरला
- 6:36ने मुस्कुराते हुए कहा, "आइए आइए। यही
- 6:40मेरी बड़ी बेटी पल्लवी है। संस्कारी है और
- 6:42घर के सारे काम भी जानती है। हम
- 6:45लड़के की मां ने पल्लवी से कुछ सवाल पूछे।
- 6:48बेटी तुम्हें खाना बनाना आता है?
- 6:51पल्लवी बिना झिंझक बोली
- 6:53जी मुझे हर तरह का खाना बनाना आता है। आज
- 6:56का पूरा भोजन भी मैंने ही बनाया है।
- 6:59यह सुनकर गौरी चुपचाप रसोई के दरवाजे पर
- 7:01खड़ी रह गई। उसने सच बताने की कोशिश भी
- 7:04नहीं की।
- 7:05बहन जी
- 7:05कुछ देर बाद सबने खाना खाया। लड़के की मां
- 7:08बोली बहन जी खाना बहुत स्वादिष्ट बना है।
- 7:11आपकी बेटी सच में बहुत गुणवान है। सरला मन
- 7:14ही मन मुस्कुराई। जिस मेहनत के लिए गौरी
- 7:17ने पूरी रात जागकर काम किया था उसकी सारी
- 7:19तारीफ पल्लवी ले गई। बातचीत आगे बढ़ी और
- 7:22दोनों परिवारों ने रिश्ता तय कर दिया।
- 7:25लड़के वाले खुशी-खुशी अपने घर लौट गए। घर
- 7:28में खुशी का माहौल था। लेकिन दादी कौशल्या
- 7:31के मन में एक ही चिंता थी। उन्होंने सोचा
- 7:34मेरी गौरी भी तो बड़ी हो गई है। उसके लिए
- 7:38भी कोई अच्छा घर मिलना चाहिए।
- 7:40अगले ही दिन दादी अपनी परिचित शांता के घर
- 7:43पहुंची। उन्होंने कहा बहन मेरी पोती गौरी
- 7:46बहुत सीधी और संस्कारी है। अगर कोई अच्छा
- 7:49रिश्ता हो तो जरूर बताना। शांता
- 7:51मुस्कुराई। संयोग से मुझे एक बहुत अच्छा
- 7:54परिवार पता है। लड़का अनाज मंडी का मालिक
- 7:57है। बहुत अच्छे लोग हैं। मैं आज ही उनसे
- 7:59बात करती हूं। यह सुनकर दादी की आंखों में
- 8:02खुशी आ गई। शाम को उन्होंने घर लौटकर सबको
- 8:05यह बात बताई। सरला और पल्लवी के चेहरे का
- 8:08रंग उड़ गया। पल्लवी गुस्से में बोली,
- 8:10मां, कहीं इसका रिश्ता मुझसे भी बड़े घर
- 8:13में हो गया तो?
- 8:14सरला बोली,
- 8:15चिंता मत कर, मैं ऐसा कुछ नहीं होने
- 8:17दूंगी।
- 8:18अगले दिन दोपहर में एक बड़ी चमचमाती गाड़ी
- 8:20घर के सामने आकर रुकी। गांव वाले हैरान
- 8:23होकर देखने लगे। गाड़ी से एक सुसंस्कृत
- 8:26युवक और उसकी मां उतरे। सरला और पल्लवी
- 8:29उन्हें देखकर दंग रह गई। वे लोग पल्लवी के
- 8:32होने वाले ससुराल वालों से भी ज्यादा अमीर
- 8:35दिखाई दे रहे थे। दादी कौशल्या ने
- 8:37मुस्कुराकर कहा, आइए बहन जी, यही मेरी
- 8:40पोती गौरी है। गौरी साधारण कपड़ों में सिर
- 8:43झुकाए नम्रता से उनके सामने आई। उसके
- 8:47चेहरे पर बनावटीपन नहीं बल्कि सादगी और
- 8:50संस्कार साफ दिखाई दे रहे थे। लड़के की
- 8:52मां ने प्यार से पूछा,
- 8:54बेटी अगर शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़
- 8:57जाए तो क्या तुम सब संभाल लोगी?
- 8:59गौरी ने विनम्रता से उत्तर दिया।
- 9:01मां जी परिवार साथ हो तो हर जिम्मेदारी
- 9:05आसान हो जाती है।
- 9:06उन्होंने फिर पूछा।
- 9:08बेटी क्या तुम घर का काम करती हो?
- 9:11गौरी मुस्कुराई।
- 9:13जी मां जी जितना बन पड़ता है पूरे मन से
- 9:15करती हूं।
- 9:16उसकी बातें सुनकर लड़के और उसकी मां दोनों
- 9:19बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने एक दूसरे की
- 9:21ओर देखा और मुस्कुरा दिए। कुछ देर बातचीत
- 9:24करने के बाद लड़के की मां बोली
- 9:27हमें आपकी पोती [संगीत] बहुत पसंद आई।
- 9:29इसके संस्कार और व्यवहार ने हमारा दिल जीत
- 9:32लिया।
- 9:34दादी की खुशी का [संगीत] ठिकाना नहीं रहा।
- 9:36लेकिन फिर उन्होंने आगे कहा, "हम एक साल
- 9:38बाद शादी करना चाहेंगे।" "मेरा बेटा गांव
- 9:41में नई फैक्ट्री शुरू करने वाला है। पहले
- 9:43वह काम पूरा कर ले, फिर धूमधाम से शादी
- 9:46करेंगे।" दादी ने मुस्कुरा कर हामी भर दी।
- 9:49हमें कोई जल्दी नहीं है बेटा।
- 9:52रिश्ते भरोसे और सम्मान से बनते हैं। समय
- 9:56से नहीं। रिश्ता पक्का होते ही दादी ने
- 9:59भगवान का धन्यवाद किया। लेकिन दूसरी तरफ
- 10:02सरला और पल्लवी के दिल में जलन की आग भड़क
- 10:05उठी। रात को दोनों अपने कमरे में बैठी थी।
- 10:08पल्लवी गुस्से से बोली,
- 10:10मां, जिस गौरी को हमने हमेशा नौकरानी
- 10:13समझा, [संगीत] उसकी शादी मुझसे भी बड़े घर
- 10:15में कैसे हो सकती है?" सरला ने दांत
- 10:18भेंचते हुए कहा,
- 10:19जब तक कौशल्या इस घर में है, गौरी का कोई
- 10:22कुछ नहीं बिगाड़ सकता। पहले उन्हें कुछ
- 10:25दिनों के लिए यहां से दूर भेजना होगा।
- 10:28उसके बाद देखना मैं ऐसा खेल खेलूंगी कि यह
- 10:31रिश्ता अपने आप टूट जाएगा। दोनों मां बेटी
- 10:34ने एक नई साजिश रचनी शुरू कर दी। रात भर
- 10:37सरला और पल्लवी सो नहीं सकी। दोनों के मन
- 10:40में एक ही बात घूम रही थी। अगर गौरी की
- 10:43शादी उस अमीर परिवार में हो गई तो गांव भर
- 10:46में उसकी ही चर्चा होगी। पल्लवी गुस्से
- 10:48में बोली मां मैं यह कभी नहीं होने दूंगी।
- 10:52जिस लड़की को हमने हमेशा नौकरानी बनाकर
- 10:55रखा वही हमसे बड़ी किस्मत वाली कहलाए। यह
- 10:58मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती। सरला ने धीरे
- 11:01से कहा, जब तक तेरी दादी कौशल्या इस घर
- 11:04में है, कोई भी हमारी बात पर विश्वास नहीं
- 11:06करेगा। पहले उन्हें कुछ दिनों के लिए यहां
- 11:09से भेजना होगा। उसके बाद गौरी का रिश्ता
- 11:11तोड़ना बहुत आसान होगा। अगली सुबह गांव का
- 11:14डाकिया घर के बाहर आया और एक चिट्ठी देकर
- 11:16चला गया। सरला ने चिट्ठी पढ़ी तो उसके
- 11:19चेहरे पर मुस्कान फैल गई। चिट्ठी कौशल्या
- 11:21के मायके की थी। उसमें उनके भतीजे की शादी
- 11:24का निमंत्रण था और कुछ दिन वहीं रुकने का
- 11:27आग्रह भी किया गया था। सरला तुरंत कौशल्या
- 11:30के पास गई।
- 11:32आपके भतीजे की शादी है। उन्होंने आपको कुछ
- 11:35दिन वहीं रुकने के लिए भी बुलाया है।
- 11:37आपको जरूर जाना चाहिए। इतने साल बाद
- 11:40रिश्तेदारों से भी मुलाकात हो जाएगी।
- 11:42कौशल्या असमंजस में थी। लेकिन गौरी यहां
- 11:45अकेली रह जाएगी। उसका ध्यान कौन रखेगा?
- 11:48सरला मीठी आवाज में बोली।
- 11:50लेकिन गौरी यहां अकेली रह जाएगी। उसका
- 11:53ध्यान कौन रखेगा? आप बिल्कुल चिंता मत
- 11:55कीजिए अम्मा जी। जब तक आप लौटेंगी, मैं
- 11:58मैं गौरी का पूरा ध्यान रखूंगी। गौरी भी
- 12:00दादी के पास आई।
- 12:02दादी, आप निश्चिंत होकर जाइए। मैं अपना
- 12:04पूरा ध्यान रखूंगी। कौशल्या ने गौरी को
- 12:08गले लगा लिया। अपना ध्यान रखना बेटी। अगर
- 12:10कोई परेशानी हो तो मुझे तुरंत खबर भेजना।
- 12:14अगले दिन कौशल्या अपने रिश्तेदारों के
- 12:16यहां चली गई। दादी के जाते ही सरला और
- 12:18पल्लवी के चेहरे पर शातिर मुस्कान आ गई।
- 12:21पल्लवी बोली, अब कोई हमारा रास्ता रोकने
- 12:24वाला नहीं है। कुछ देर बाद वह अपनी एक
- 12:27सहेली को लेकर उस अमीर परिवार के घर पहुंच
- 12:30गई। लड़के की मां आंगन में बैठी थी।
- 12:33पल्लवी ने नम्रता से कहा,
- 12:34मां जी, मैं आपसे एक जरूरी बात कहना चाहती
- 12:37हूं।
- 12:38उन्होंने मुस्कुराकर उसे बैठने को कहा।
- 12:40पल्लवी ने धीरे-धीरे झूठ बोलना शुरू किया।
- 12:44मैं किसी की बुराई नहीं करना चाहती। लेकिन
- 12:47गौरी सबके सामने जितनी सीधी बनती है, असल
- 12:50में वैसी बिल्कुल [संगीत] नहीं है।
- 12:53उसे घर का काम ठीक से नहीं आता। वह गांव
- 12:56में इधर-उधर घूमती रहती है और लोगों से
- 12:59उलझती भी रहती है। लड़के की मां हैरानी से
- 13:02उसकी बातें सुनती रही। लेकिन हमें तो वह
- 13:04बहुत संस्कारी लगी थी। पल्लवी बोली, यही
- 13:07तो उसकी चालाकी है। सबके सामने भोली बन
- 13:10जाती है। बाद में आपको पछताना ना पड़े
- 13:12इसलिए मैंने सच बता दिया। यह कहकर वह वहां
- 13:15से चली गई। लड़के की मां के मन में शंका
- 13:18पैदा हो गई। उन्होंने बिना देर किए उसी
- 13:21दिन गौरी के घर जाने का फैसला किया। उधर
- 13:23गौरी रोज की तरह घर का काम कर रही थी। तभी
- 13:26आंगन में किसी की तेज आवाज सुनाई दी। कोई
- 13:30है घर में? गौरी बाहर आई तो सामने लड़के
- 13:33की मां खड़ी थी। उन्होंने गुस्से में कहा,
- 13:35"हम्हें पता चल गया है कि तुम वैसी नहीं
- 13:38हो जैसी दिखाई देती हो।"
- 13:40गौरी की आंखों में आंसू आ गए।
- 13:42मां जी, किसी ने आपको गलत बात बताई है।
- 13:45मैंने कभी कोई गलत काम नहीं किया।
- 13:48लेकिन उन्होंने उसकी एक भी बात नहीं सुनी।
- 13:51हम अपने बेटे की शादी तुमसे नहीं करेंगे।
- 13:53आज से यह रिश्ता खत्म।
- 13:59इतना कहकर वे वहां से चली गई। गौरी वहीं
- 14:01खड़ी रह गई। उसकी आंखों से [संगीत] आंसू
- 14:04रुक ही नहीं रहे थे। उसी समय सरला बाहर
- 14:06आई। उसने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा,
- 14:09आखिर तेरी असलियत [संगीत] सबके सामने आ ही
- 14:12गई।
- 14:12पल्लवी भी मुस्कुराते हुए बोली,
- 14:14"अब कौन करेगा तुझसे शादी?" हर कोई तेरी
- 14:17असलियत जान चुका है।
- 14:21गौरी रोते हुए बोली मां मैंने कोई गलती
- 14:24नहीं की। एक बार दादी लौट आई फिर सब सच
- 14:27पता चल जाएगा। लेकिन सरला ने उसकी एक ना
- 14:30सुनी। अब इस घर में वही होगा जो मैं
- 14:32चाहूंगी। मैंने फैसला कर लिया है कि तेरी
- 14:35शादी जल्दी से जल्दी कर दूंगी। गौरी ने
- 14:38हाथ जोड़ ली।
- 14:39मां
- 14:40बस दादी के लौट आने तक रुक जाइए। सब सच
- 14:44सामने आ जाएगा।
- 14:47सरला ने सख्त आवाज में कहा। अब कोई इंतजार
- 14:50नहीं होगा। कुछ ही दिनों में सरला ने गौरी
- 14:53की शादी एक गरीब लेकिन मेहनती मजदूर युवक
- 14:56से तय कर दी। उधर पल्लवी की शादी भी उसी
- 14:59अमीर व्यापारी के घर में धूमधाम से हो गई।
- 15:02दोनों बहनें अपने-अपने ससुराल चली गई।
- 15:04गौरी ने मन में दुख जरूर रखा लेकिन उसने
- 15:07अपने पति और नए परिवार को पूरे दिल से
- 15:10अपना लिया। कुछ ही दिनों में गौरी और
- 15:12पल्लवी अपनी-अपनी नई जिंदगी [संगीत] में
- 15:14रम गई। पल्लवी का ससुराल बहुत अमीर था।
- 15:17बड़ा सा बंगला, नौकर चाकर और हर तरह की
- 15:20सुख सुविधा [संगीत] देखकर उसे अपने घमंड
- 15:23पर और भी भरोसा हो गया। वह अक्सर अपनी मां
- 15:26सरला को फोन करके कहती
- 15:27मां यहां मुझे कोई [संगीत] काम नहीं करना
- 15:30पड़ता। सब लोग मेरी सेवा करते हैं।
- 15:33सच कहूं तो अब मुझे गांव की याद भी नहीं
- 15:35आती। सरला उसकी बातें सुनकर खुश हो जाती।
- 15:39उधर गौरी का ससुराल साधारण था। उसका पति
- 15:42मेहनत मजदूरी करके घर चलाता था। घर में
- 15:45ज्यादा पैसे नहीं थे लेकिन वहां सभी लोग
- 15:47एक दूसरे का सम्मान करते थे। गौरी भी पूरे
- 15:50मन से घर का काम करती। अपने पति का साथ
- 15:53देती और सबका आदर करती। उसका पति भी हर
- 15:56बात में उसका साथ देता था।
- 15:58पहले पानी पी लीजिए फिर आराम से खाना
- 16:00खाइए।
- 16:02तुम्हारा साथ हर थकान दूर कर देता है।
- 16:05एक दिन उसने गौरी से कहा हमारे पास दौलत
- 16:07भले ही कम हो लेकिन मेहनत और ईमानदारी कभी
- 16:10हमें गरीब नहीं रहने देगी। गौरी मुस्कुरा
- 16:13कर बोली मुझे बस आपका साथ चाहिए। बाकी सब
- 16:16भगवान पर छोड़ दीजिए। समय बीतता गया। इधर
- 16:20गांव में सरला बिल्कुल अकेली रह गई थी।
- 16:23पहले गौरी घर का सारा काम करती थी। लेकिन
- 16:26अब उसके जाने के बाद सरला को हर काम खुद
- 16:29करना पड़ रहा था। धीरे-धीरे उसकी तबीयत
- 16:31बिगड़ने लगी। कमजोरी इतनी बढ़ गई कि वह
- 16:34ठीक से खाना भी नहीं बना पाती थी। एक दिन
- 16:37पड़ोसन शांता उसे मिलने आई। सरला को
- 16:41बिस्तर पर देखकर वह घबरा गई।
- 16:43बहन पल्लवी को बुला लो। ऐसे समय में बेटी
- 16:46ही सबसे बड़ा सहारा होती है।
- 16:48सरला को भी यही ठीक लगा। उसने तुरंत
- 16:51पल्लवी को फोन लगाया।
- 16:53बेटी मेरी तबीयत बहुत खराब है।
- 16:57अगर हो सके तो कुछ दिनों के लिए आ जा।
- 17:00या मुझे अपने पास बुला लें। पल्लवी कुछ पल
- 17:03चुप रही। फिर बोली
- 17:05मां अभी आना मेरे लिए मुश्किल है। आप दवा
- 17:09[संगीत] ले लीजिए।
- 17:10हम सब ठीक हो जाएगा। इतना कहकर [संगीत]
- 17:13उसने फोन काट दिया। सरला काफी देर तक
- 17:16मोबाइल हाथ में लिए बैठी रही। उसकी आंखों
- 17:19से आंसू बहने लगे। उसे पहली बार एहसास हुआ
- 17:22कि जिस बेटी के लिए उसने पूरी जिंदगी सब
- 17:24कुछ किया वही आज उसके सबसे मुश्किल समय
- 17:27में साथ छोड़ गई। काफी देर सोचने के बाद
- 17:30उसने हिम्मत जुटाई और गौरी का नंबर
- 17:33मिलाया। फोन उठते ही गौरी बोली
- 17:35प्रणाम मां कैसी हैं आप?
- 17:37सरला रोते हुए बोली बेटी मेरी तबीयत बहुत
- 17:41खराब है। मुझे समझ नहीं आ रहा क्या करूं।
- 17:44गौरी ने एक पल भी देर नहीं की।
- 17:46मां मां आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए। मैं
- 17:49अभी आपके पास आती हूं।
- 17:51उसने अपने पति को सारी बात बताई। [संगीत]
- 17:54मां बहुत बीमार है।
- 17:58मैं उन्हें लेने जाना चाहती हूं। [संगीत]
- 18:01गौरी के पति ने तुरंत कहा।
- 18:03जरूर जाओ। यह घर जितना मेरा है उतना ही
- 18:07तुम्हारा भी है। मां [संगीत] का पूरा इलाज
- 18:11यहीं होगा।
- 18:12गौरी तुरंत गांव पहुंची। उसने देखा कि
- 18:15सरला बहुत कमजोर हो चुकी थी। वह दौड़ कर
- 18:17उनके पास गई और उनका हाथ पकड़ लिया। मां
- 18:21अब आप अकेली नहीं है। चलिए मेरे साथ चलिए।
- 18:24सरला की आंखों से आंसू निकल पड़े।
- 18:27बेटी मैंने तेरे [संगीत] साथ बहुत अन्याय
- 18:30किया। फिर भी तू मुझे लेने आ गई। हम
- 18:34गौरी [नाक से की जाने वाली आवाज़] ने
- 18:34प्यार से कहा [संगीत]
- 18:36पुरानी बातें भूल जाइए इस समय आपका ठीक
- 18:38होना सबसे जरूरी है। गौरी उन्हें अपने घर
- 18:41ले आई। वह समय पर दवा देती, अच्छा खाना
- 18:44[संगीत] बनाती और दिन रात उनकी सेवा करती।
- 18:47गौरी का पति भी उनका पूरा सम्मान करता।
- 18:49कुछ ही हफ्तों [संगीत] में सरला पहले से
- 18:51काफी स्वस्थ हो गई। अब उन्हें अपनी
- 18:53गलतियों का गहरा एहसास होने लगा। एक दिन
- 18:56उन्होंने गौरी का हाथ पकड़ कर कहा,
- 18:59मैंने हमेशा तेरे साथ [संगीत] भेदभाव
- 19:01किया। तेरी खुशियां भी छीन ली। अगर हो सके
- 19:05तो मुझे [संगीत] माफ कर दे बेटी।
- 19:08गौरी मुस्कुराई।
- 19:10मां परिवार में माफी से बड़ा कोई रिश्ता
- 19:13नहीं होता। जो बीत गया उसे भूल जाइए।
- 19:17सरला की आंखें फिर भर आई। उन्हें समझ आ
- 19:20गया था कि सच्ची अमीरी धन से नहीं बल्कि
- 19:23अच्छे संस्कार और बड़े दिल से होती है।
- 19:25कुछ दिन बीत गए। सरला पूरी तरह स्वस्थ हो
- 19:28चुकी थी। एक दिन पल्लवी अपनी मां से मिलने
- 19:31के लिए गांव पहुंची। उसके हाथों [संगीत]
- 19:33में महंगे कपड़े, मिठाइयां और कई उपहार
- 19:35थे। जैसे ही वह घर पहुंची, वहां ताला लगा
- 19:38देखकर घबरा गई। उसने तुरंत पड़ोस में रहने
- 19:41वाली शांता चाची से पूछा, चाची मां कहां
- 19:45है? शांता ने कहा,
- 19:47बेटी, जब तुम्हारी मां बहुत बीमार थी, तब
- 19:50[गला साफ़ करने की आवाज़] उन्हें गौरी
- 19:50अपने साथ ले गई थी। उसी ने उनकी दिनरा
- 19:53सेवा की। अब वे उसी के घर पर हैं। यह
- 19:56सुनते ही पल्लवी के चेहरे का रंग उड़ गया।
- 19:58वह बिना देर किए गौरी के घर पहुंच गई। घर
- 20:01के अंदर पहुंचते ही उसने देखा कि सरला
- 20:03[संगीत] आराम से बैठी थी। गौरी उनके लिए
- 20:06दवा और खाना लेकर आ रही थी। पल्लवी खुशी
- 20:09से बोली
- 20:10मां अब आप बिल्कुल ठीक लग रही हैं। देखिए
- 20:13मैं आपके लिए कितने सारे तोहफे लाई हूं।
- 20:15सरला ने शांत स्वर में कहा।
- 20:18जब मुझे [संगीत] तुम्हारी सबसे ज्यादा
- 20:19जरूरत थी। और तुमने मुझे अकेला छोड़ दिया।
- 20:24लेकिन जिस गौरी को मैंने हमेशा दुख दिए,
- 20:27उसी ने बिना कुछ सोचे मेरी सेवा की।
- 20:29पल्लवी की आंखों से आंसू बहने लगे। वह
- 20:32गौरी के सामने हाथ जोड़कर बोली, बहन,
- 20:34मैंने हमेशा तुमसे जलन की। तुम्हें नीचा
- 20:37दिखाया, तुम्हारा हक छीना और तुम्हारे साथ
- 20:40बहुत गलत किया। लेकिन तुमने कभी बदला नहीं
- 20:43लिया। मुझे माफ कर दो। गौरी ने तुरंत उसका
- 20:46हाथ पकड़ लिया। पल्लवी रिश्ते नफरत से
- 20:49नहीं प्यार और माफी से मजबूत होते हैं।
- 20:52अगर तुम्हें अपनी गलती का एहसास हो गया है
- 20:55तो मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई शिकायत
- 20:56नहीं है। इतने में दादी कौशल्या भी अपने
- 20:59रिश्तेदारों के यहां से वापस आ गई।
- 21:01उन्होंने पूरे परिवार को एक साथ देखा तो
- 21:03उनकी आंखें खुशी से भर आई। उन्होंने गौरी
- 21:06को गले लगाया और कहा। मुझे हमेशा विश्वास
- 21:10था कि एक दिन सच और अच्छे संस्कार की जीत
- 21:12जरूर होगी। सरला ने कौशल्या के सामने सिर
- 21:16झुका लिया।
- 21:17मैंने गौरी के साथ बहुत अन्याय [संगीत]
- 21:18किया। लेकिन इसने मुझे माफ करके यह सिखा
- 21:21दिया कि सच्चा इंसान वही होता है जो बुराई
- 21:23का जवाब भी अच्छाई से दें।
- 21:26उस दिन के बाद चारों ने पुराने गिले शिकवे
- 21:28भुला दिए। सरला ने गौरी को अपनी बेटी का
- 21:31पूरा अधिकार [संगीत] दिया और पल्लवी ने भी
- 21:33उसे दिल से अपनी बड़ी बहन मान लिया। अब उस
- 21:36परिवार में नफरत की जगह प्यार, घमंड की
- 21:39जगह अपनापन और झूठ की [संगीत] जगह विश्वास
- 21:41ने ले ली थी। दोस्तों अगर आपको हमारी आज
- 21:44की कहानी कैसी लगी कमेंट में जरूर बताएं
- 21:47और हमारी वीडियो पसंद आई हो तो हमारे
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This page contains the full transcript of दो सौतेली बहनों का ससुराल। जिस बेटी को मां ने कभी नहीं अपनाया, उसी ने उसकी जिंदगी बचाई। Hindi Kahani by Mastii ki duniya , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,709 words across 497 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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