जिस गरीब भाई- बहु को जेठ ने निकाला घर से, उसी बहु ने बदली अपनी किस्मत। Hindi Kahani l Hindi Cartoon — Transcript
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- 0:00एक छोटे से गांव में सोनी अपने पति आकाश
- 0:02के साथ अपने जेठ और जेठानी के घर में रहती
- 0:05थी। सोनी के सास ससससुर इस दुनिया में
- 0:08नहीं थे। इसीलिए शादी के बाद से ही वह
- 0:11अपने पति आकाश के साथ उसके बड़े भाई और
- 0:14भाभी के परिवार में रह रही थी। सोनी बहुत
- 0:17सीधी सादी और समझदार लड़की थी। वह घर के
- 0:20सारे काम मन लगाकर करती थी। उसका पति आकाश
- 0:23दिल का अच्छा था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी
- 0:26परेशानी यह थी कि वह कोई काम टिक कर नहीं
- 0:29कर पाता था। आकाश रोज सुबह काम की तलाश
- 0:32में निकलता था। कभी वह गांव के खेतों में
- 0:35मजदूरी पूछता, कभी किसी दुकान पर काम
- 0:38मांगता और कभी गांव से बाहर [संगीत] जाकर
- 0:40काम ढूंढता। लेकिन कई बार उसे काम मिलता
- 0:43ही नहीं था। और अगर किसी जगह काम मिल भी
- 0:46जाता तो कुछ दिनों बाद किसी ना किसी वजह
- 0:49से वह [संगीत] काम छूट जाता। एक शाम आकाश
- 0:52थका हुआ घर लौटा। सोनी ने उसे देखते ही
- 0:55पूछा।
- 0:57क्या हुआ आकाश आज भी काम नहीं मिला?
- 1:00आकाश ने उदास होकर सिर हिलाया। काम तो
- 1:03मिला था सोनी।
- 1:04लेकिन मालिक ने कहा कि अभी मजदूर ज्यादा
- 1:06हैं इसलिए कल से आने की जरूरत नहीं है।
- 1:10सोनी ने उसे पानी देते हुए कहा,
- 1:12कोई बात नहीं। कल फिर कोशिश करना एक ना एक
- 1:16दिन अच्छा काम जरूर मिलेगा।
- 1:18आकाश ने सोनी की तरफ देखा और धीमे से बोला
- 1:22तुम हर बार मेरा हौसला बढ़ाती हो लेकिन
- 1:24मुझे खुद से शर्म आने लगी है। मैं
- 1:27तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर पा रहा।
- 1:30लेकिन घर में हर कोई सोने जितना धैर्य
- 1:32रखने वाला नहीं था। आकाश का बड़ा भाई यानी
- 1:36सोनी का जेठ रमेश मेहनती आदमी था। वह खेती
- 1:40और मजदूरी करके घर चलाता था। उसकी पत्नी
- 1:43कमला यानी सोनी की जेठानी भी घर के कामों
- 1:47में लगी रहती थी। शुरुआत में दोनों ने
- 1:49आकाश को कुछ नहीं कहा। उन्हें उम्मीद थी
- 1:52कि एक दिन आकाश को कोई अच्छा काम मिल
- 1:54जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया
- 1:57कमला की नाराजगी बढ़ती गई। एक दिन दोपहर
- 2:00में कमला ने गुस्से में सोनी से कहा,
- 2:03तुम्हारा पति आखिर कब तक घर पर बैठा
- 2:06रहेगा?
- 2:07जेठानी जी वो काम ढूंढने तो रोज जाता है
- 2:10बस काम मिल नहीं रहा।
- 2:12कमला ने ताना मारते हुए कहा
- 2:15काम नहीं मिल रहा या काम करने का मन नहीं
- 2:17है?
- 2:18सोनी को यह बात बहुत बुरी लगी।
- 2:20ऐसा मत कहिए जेठानी जी। आकाश [संगीत] सच
- 2:23में मेहनत करना चाहता है।
- 2:25कमला ने कुछ नहीं कहा। लेकिन उसके मन में
- 2:27गुस्सा और बढ़ गया। कुछ दिनों बाद आकाश को
- 2:30गांव से थोड़ी दूर एक जगह मजदूरी का काम
- 2:33मिल गया। वह सुबह से शाम तक मेहनत करने
- 2:36लगा। सोनी भी बहुत खुश थी। उसे लगा कि अब
- 2:39धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। लेकिन कुछ ही
- 2:42दिनों बाद काम बंद हो गया। आकाश फिर खाली
- 2:45हाथ घर लौट आया। उस दिन कमला का धैर्य
- 2:47पूरी तरह टूट गया। वह आकाश के सामने आकर
- 2:50बोली, बस बहुत हो गया। हर कुछ दिनों में
- 2:53एक नया काम और फिर वही खाली हाथ घर वापसी।
- 2:57आखिर कब तक रमेश तुम्हारा और तुम्हारी
- 2:59पत्नी का खर्च उठाता रहेगा। आकाश चुपचाप
- 3:02खड़ा रहा। रमेश भी वहीं बैठा था। उसने
- 3:05गंभीर आवाज में कहा,
- 3:07"आकाश, कमला गलत नहीं कह रही। अब तुम्हें
- 3:10अपने पैरों पर खड़ा होना ही पड़ेगा।
- 3:13आकाश ने सिर झुका कर कहा,
- 3:15भैया, मैं कोशिश कर रहा हूं।
- 3:18कोशिश की बात अब बहुत हो चुकी। अगर तुम
- 3:20काम नहीं कर पा रहे हो तो कम से कम अपना
- 3:22अलग इंतजाम करो।"
- 3:25सोनी घबरा गई।
- 3:26जेठ जी, हम कहां जाएंगे? हमारे पास तो
- 3:30अपना कोई घर भी नहीं है।
- 3:32आकाश ने कुछ देर चुप [संगीत] रहने के बाद
- 3:34अपने बड़े भाई की तरफ देखा। उसके मन में
- 3:37पहली बार अपने हक की बात आई। उसने धीरे से
- 3:39कहा,
- 3:40भैया अगर मेरा भी इस घर और जमीन में
- 3:43हिस्सा है तो मुझे मेरा हिस्सा दे दीजिए।
- 3:45मैं सोनी को लेकर अलग रह लूंगा। मैं किसी
- 3:47के ऊपर बोझ बनकर नहीं रहना चाहता।
- 3:49रमेश का चेहरा अचानक बदल गया।
- 3:51कौन सा हिस्सा?
- 3:54भैया जो हिस्सा माता-पिता की जमीन जायदाद
- 3:56में मेरा बनता है। रमेश गुस्से में खड़ा
- 3:59हो गया।
- 4:01इस घर को मैंने संभाला है। जमीन की देखभाल
- 4:04मैंने की है। तुमने इसमें किया ही क्या
- 4:06है?
- 4:06आकाश ने शांत होकर कहा।
- 4:09भैया मैं आपका एहसान नहीं भूल रहा। लेकिन
- 4:12अगर मेरा हिस्सा है तो बस वही मांग रहा
- 4:15हूं।
- 4:15कमला ने तुरंत रमेश का साथ दिया।
- 4:18आपसे कह रही हूं। इन्हें कुछ मत दीजिए।
- 4:20अगर आज हिस्सा दे दिया तो कल पता नहीं
- 4:23क्या-क्या मांगेंगे।
- 4:25सोनी ने हाथ जोड़ते हुए कहा
- 4:27जेठ जी हम ज्यादा कुछ नहीं मांग रहे बस
- 4:30जितना हमारा हक है उतना दे दीजिए हम अपनी
- 4:33जिंदगी खुद शुरू कर लेंगे
- 4:36लेकिन रमेश ने साफ शब्दों में जवाब दिया
- 4:39तुम दोनों को यहां से कुछ नहीं मिलेगा
- 4:42आकाश ने दुखी होकर पूछा
- 4:45भैया आप मेरा हिस्सा भी नहीं देंगे
- 4:48रमेश ने गुस्से में कहा नहीं और अगर
- 4:52तुम्हें यहां रहना पसंद नहीं है तो अभी
- 4:54इसी वक्त यह घर छोड़ दो। सोनी की आंखों
- 4:57में आंसू आ गए। उसने बाहर देखा। सूरज ढल
- 5:00चुका था और गांव में अंधेरा उतरने लगा था।
- 5:03वह रोते हुए बोली,
- 5:05रात हो गई है। हम सुबह चले जाएंगे। आज रात
- 5:09हमें यहीं रहने दीजिए।
- 5:11लेकिन कमला ने दरवाजे की तरफ इशारा करते
- 5:13हुए कहा, नहीं आज ही जाना होगा। आकाश ने
- 5:17सोनी की तरफ देखा। फिर उसने चुपचाप अपना
- 5:20छोटा सा सामान उठाया। सोनी भी आंसू पोंछते
- 5:23हुए अपनी गठरी उठाने लगी। [संगीत]
- 5:25आधी रात होने वाली थी। जिस घर में सोनी ने
- 5:28इतने साल अपने परिवार की तरह रहकर सेवा की
- 5:31थी, उसी घर से आज उसे अपने पति के साथ
- 5:34बाहर निकाल दिया गया था। आकाश ने घर से
- 5:37बाहर निकलते हुए एक बार पीछे मुड़कर देखा।
- 5:40सोनी ने भी उस घर को आखिरी बार देखा। उसकी
- 5:43आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे। आकाश ने
- 5:46उसका हाथ पकड़ कर कहा,
- 5:48सोनी मुझे माफ कर देना। मैं तुम्हें वो
- 5:52जिंदगी नहीं दे पाया
- 5:53जिसकी तुम हकदार हो। सोनी ने आंसू भरी
- 5:56आंखों से उसकी ओर देखा और बोली
- 6:00आप मेरे [संगीत] साथ हैं यही मेरे लिए
- 6:02काफी है। हम दोनों मिलकर फिर से अपनी
- 6:04जिंदगी बनाएंगे।
- 6:06दोनों आधी रात के अंधेरे में गांव की
- 6:08सुनसान सड़क पर आगे बढ़ने लगे। आधी रात के
- 6:12अंधेरे में सोनी और आकाश बिना किसी मंजिल
- 6:14के गांव की पगडंडी पर आगे बढ़ते जा रहे
- 6:17थे। दोनों के पास ना रहने की जगह थी और ना
- 6:20ही खाने का [संगीत] कोई इंतजाम। कुछ दूर
- 6:22चलने के बाद सोनी के पैर थक कर रुक गए।
- 6:25उसने धीरे से कहा, "आकाश,
- 6:28अब मुझसे और नहीं चला जा रहा।"
- 6:31आकाश ने चारों तरफ देखा। थोड़ी ही दूर उसे
- 6:34एक बड़ा सा केले का पेड़ दिखाई दिया। उसके
- 6:36आसपास काफी बड़े-बड़े केले के पत्ते जमीन
- 6:39पर गिरे हुए थे। आकाश बोला
- 6:42सोनी आज की रात यहीं गुजार लेते हैं। सुबह
- 6:46होते ही आगे कुछ सोचेंगे।
- 6:48दोनों ने मिलकर केले के बड़े-बड़े पत्ते
- 6:50इकट्ठे किए। आकाश ने पेड़ के नीचे जगह साफ
- 6:53की और सोनी ने पत्तों को एक दूसरे के
- 6:56सहारे लगाकर छोटी सी झोपड़ी जैसी जगह बना
- 6:59दी। झोपड़ी बहुत छोटी और साधारण थी। लेकिन
- 7:02उस वक्त उनके लिए वही उनका घर था। सोनी ने
- 7:06पत्तों को जमीन पर बिछाया और दोनों उसी के
- 7:08ऊपर लेट गए। आकाश काफी देर तक जागता रहा।
- 7:12वह आसमान की तरफ देखते हुए सोच रहा था,
- 7:14मैं अपनी पत्नी को कहां ले आया? ना घर है,
- 7:18ना काम और ना ही कोई सहारा। सोनी ने उसका
- 7:21हाथ पकड़ लिया। ज्यादा मत सोचिए। सुबह कुछ
- 7:24ना कुछ रास्ता जरूर निकलेगा। कुछ देर बाद
- 7:28दोनों उसी छोटी सी झोपड़ी में सो गए। सुबह
- 7:31पक्षियों की चहचहाट से सोने की आंख खुली।
- 7:34सूरज की हल्की रोशनी केले के पत्तों से
- 7:37बनी झोपड़ी के अंदर आ रही थी। सोनी उठी और
- 7:40बाहर आकर चारों तरफ देखने लगी। जंगल और
- 7:42पेड़ों से घिरी वह जगह सुनसान थी। लेकिन
- 7:45प्रकृति बहुत खूबसूरत लग रही थी। आकाश भी
- 7:49उठकर बाहर आ गया। सोनी ने उसे देखते हुए
- 7:52कहा।
- 7:54आकाश आप आज फिर काम ढूंढने जाइए।
- 7:57आकाश ने चिंतित होकर पूछा।
- 8:00और तुम
- 8:02सोनी ने मुस्कुरा कर कहा,
- 8:04मैं यहीं आसपास के जंगल में जाऊंगी। देखती
- 8:07हूं कुछ खाने के लिए मिल जाए और झोपड़ी को
- 8:10थोड़ा अच्छा बनाने के लिए भी कुछ सामान
- 8:12मिल जाए।
- 8:13आकाश बोला, लेकिन जंगल में अकेली मत जाना।
- 8:18मैं ज्यादा दूर नहीं जाऊंगी। आप बस काम
- 8:20ढूंढकर जल्दी वापस आ जाइए।
- 8:22आकाश ने सिर हिलाया और काम की तलाश में
- 8:25गांव की ओर निकल गया। आकाश के जाने के बाद
- 8:28सोनी जंगल की तरफ चल पड़ी। थोड़ी दूर जाने
- 8:31पर उसे जंगल के बीच बहुत सारे बांस के
- 8:34पेड़ दिखाई दिए। सोनी की आंखों में उम्मीद
- 8:36जाग उठी वो सोचने लगी
- 8:40इन बांसों से तो हमारी झोपड़ी को काफी
- 8:42मजबूत बनाया जा सकता है।
- 8:46सोनी ने कुछ सूखे और गिरे हुए बांस इकट्ठे
- 8:49किए। फिर उसे पास ही कुछ जंगली फल दिखाई
- 8:52दिए। उसने कुछ फल तोड़े। थोड़ा आगे बढ़ी
- 8:55तो उसे कुछ खाने लायक हरी सब्जियां भी मिल
- 8:58गई। सोनी ने जितना उठा सकती थी उतना सामान
- 9:01इकट्ठा किया और वापस अपनी झोपड़ी की ओर चल
- 9:04पड़ी। झोपड़ी के पास पहुंचकर उसने बांस एक
- 9:07तरफ रखे और फल सब्जियां साफ करने लगी। फिर
- 9:11उसने सूखी लकड़ियां इकट्ठी करके छोटी सी
- 9:13आग जलाई और उन्हीं सब्जियों से साधारण सा
- 9:16खाना बनाने लगी। कुछ देर बाद झोपड़ी के
- 9:19[संगीत] पास से खाने की खुशबू आने लगी।
- 9:21सोनी ने मन ही मन सोचा आज हमारे पास कुछ
- 9:24नहीं है। लेकिन अगर मेहनत करूंगी तो
- 9:27धीरे-धीरे सब कुछ जुटा लूंगी। उसने खाना
- 9:29तैयार किया और आकाश का इंतजार करने लगी।
- 9:32शाम होने लगी। सूरज ढलने लगा और जंगल में
- 9:35धीरे-धीरे अंधेरा उतरने लगा। तभी दूर से
- 9:38आकाश आता हुआ दिखाई दिया। सोनी तुरंत उठकर
- 9:41उसकी तरफ गई। लेकिन आकाश के हाथ खाली थे।
- 9:44उसका चेहरा उदास था। सोनी समझ गई कि आज भी
- 9:47उसे काम नहीं मिला। उसने धीरे से पूछा। हम
- 9:51क्या हुआ आकाश?
- 9:53आकाश ने कोई जवाब नहीं दिया। वह चुपचाप
- 9:56झोपड़ी के पास आकर बैठ गया। कुछ पल बाद
- 9:58उसने उदास आवाज में कहा।
- 10:02आज भी काम नहीं मिला सोनी। जहां भी जाता
- 10:05हूं लोग यही कहते हैं कि अभी मजदूर की
- 10:07जरूरत नहीं है।
- 10:10सोनी ने उसके सामने खाना रखते हुए कहा।
- 10:13कोई बात नहीं। पहले खाना खाइए। आज मैंने
- 10:16जंगल से फल और सब्जियां [संगीत] ढूंढकर
- 10:18खाना बनाया है।
- 10:20आकाश ने खाने की तरफ देखा। फिर उसने सोने
- 10:23की तरफ देखा और [संगीत] उसकी आंखों में
- 10:25आंसू आ गए।
- 10:26तुम मेरे साथ इतना सब सह रही हो और मैं
- 10:29तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं कर पा रहा।
- 10:33सोनी ने उसका हाथ पकड़ लिया। आज हमारे पास
- 10:36घर नहीं है, पैसे नहीं है लेकिन हम दोनों
- 10:39साथ हैं। और जब तक हम साथ हैं, हम मेहनत
- 10:42करके सब कुछ दोबारा बना सकते हैं।
- 10:44आकाश ने सोनी का हाथ कसकर पकड़ लिया।
- 10:46दोनों ने उसी छोटी सी केले के पत्तों वाली
- 10:49झोपड़ी में बैठकर खाना खाया। अगली सुबह
- 10:52आकाश फिर काम की तलाश में गांव की ओर निकल
- 10:55गया। आकाश के जाते ही सोनी जंगल की तरफ
- 10:57चली गई। वहां उसे कई सारे बांस दिखाई दिए।
- 11:00सोनी ने कुछ बांस काटकर इकट्ठे किए और
- 11:03उन्हें अपनी झोपड़ी के पास ले आई। सोनी को
- 11:06बचपन से ही बांस से टोकरियां बनाने का
- 11:08हुनर आता था। उसने बांस की पतली-पतली
- 11:11पट्टियां बनाई और उन्हें बड़ी सफाई से
- 11:13बुनने लगी। कुछ ही घंटों में उसके हाथों
- 11:15[संगीत] से एक सुंदर टोकरी तैयार हो गई।
- 11:18फिर उसने दूसरी बनाई। फिर
- 11:20[संगीत]
- 11:20तीसरी। शाम तक सोनी ने कई सुंदर और मजबूत
- 11:24टोकरियां बना ली। हम
- 11:25शाम को आकाश वापस आया तो हमेशा की तरह
- 11:28उसके हाथ खाली थे और चेहरे पर उदासी थी।
- 11:31सोनी ने उसकी तरफ देखकर कहा
- 11:34आकाश जब तक आपको काम नहीं मिलता मैं खाली
- 11:37नहीं बैठूंगी। मुझे बांस की टोकरियां
- 11:40बनानी आती हैं। कल मैं पास के गांव के
- 11:42बाजार में जाकर इन्हें बेचूंगी। [संगीत]
- 11:44आकाश ने सोनी को रोकते हुए कहा।
- 11:47लेकिन तुम अकेली कैसे बेचोगी?
- 11:50मैं कर लूंगी। आप बस अपना काम ढूंढते
- 11:52रहिए। हम दोनों मिलकर कुछ ना कुछ जरूर
- 11:55करेंगे।
- 11:56आकाश ने कुछ नहीं कहा। उसने सोनी की बात
- 11:59मान ली। अगली सुबह सोनी ने अपनी बनाई हुई
- 12:02आठ सुंदर टोकरियां एक साथ रखी और उन्हें
- 12:06लेकर पास के गांव के छोटे से बाजार की ओर
- 12:08निकल पड़ी। वहां पहुंचकर उसने बाजार के एक
- 12:11किनारे अपनी टोकरियां सजा दी और चुपचाप
- 12:14ग्राहकों का इंतजार करने लगी। सोनी अपने
- 12:17सामने आठ सुंदर टोकरियां सजाकर बाजार में
- 12:20बैठी थी। वह आने जाने वाले लोगों को
- 12:23उम्मीद भरी नजरों से देख रही थी। कुछ देर
- 12:26बाद एक बुजुर्ग आदमी उसकी दुकान के पास
- 12:28आकर रुका। उसने टोकरियों को ध्यान से देखा
- 12:31और पूछा,
- 12:32बेटी यह टोकरी कितने की है?
- 12:35बाबा एक टोकरी ₹120 की है।
- 12:39₹120?
- 12:42बहुत ज्यादा दाम है बेटी। अगर ₹80 में
- 12:44दोगी तो मैं पांच टोकरियां खरीद लूंगा।
- 12:47ठीक है बाबा।
- 12:50बुजुर्ग आदमी ने तुरंत पांच टोकरियां खरीद
- 12:52ली। सोने की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे
- 12:55उम्मीद नहीं थी कि पहले ही ग्राहक से इतनी
- 12:57टोकरियां बिक जाएंगी। इसके बाद धीरे-धीरे
- 13:00दूसरे ग्राहक भी उसकी टोकरियां खरीदने
- 13:02लगे। कुछ ही देर में उसकी सारी आठों
- 13:04टोकरियां बिक गई। सोनी ने अपनी कमाई संभाल
- 13:07कर रखी और खुशी-खुशी घर की ओर चल पड़ी।
- 13:10रास्ते में अचानक उसे आकाश दिखाई दिया। वह
- 13:13भी काम की तलाश से वापस लौट रहा था। सोनी
- 13:16को देखते ही आकाश ने पूछा
- 13:19सोनी
- 13:20आज तुम्हारी सारी टोकरियां बिक गई।
- 13:23सोनी खुशी से मुस्कुराते हुए बोली
- 13:25हां आकाश सारी टोकरियां बिक गई। एक
- 13:29बुजुर्ग बाबा ने तो पांच टोकरियां एक साथ
- 13:31खरीद ली।
- 13:32हम्म।
- 13:32आकाश भी बहुत खुश हुआ। उसने मुस्कुरा कर
- 13:35कहा।
- 13:36देखा सोनी तुम्हारी मेहनत रंग लाई। तुम
- 13:39अच्छे से अपना काम करो और मैं भी अपना काम
- 13:42ढूंढता रहूंगा। एक दिन हम अपना घर जरूर
- 13:44बनाएंगे। दोनों खुशी-खुशी अपनी छोटी सी
- 13:47झोपड़ी की ओर चल पड़े। घर पहुंचकर सोनी ने
- 13:50थोड़ा खाना बनाया। दोनों
- 13:51[नाक से की जाने वाली आवाज़] ने साथ बैठकर
- 13:53खाना खाया। उस रात दोनों के मन में पहली
- 13:55बार आने वाले कल को लेकर थोड़ी उम्मीद थी।
- 13:58केले के पत्तों की उस छोटी सी झोपड़ी
- 14:01[संगीत] में दोनों चैन से सो गए। अगली
- 14:03सुबह सोनी फिर जंगल की ओर चली गई। उसने
- 14:06कुछ बांस इकट्ठे किए और उन्हें अपनी
- 14:08झोपड़ी के पास ले आई। वह बांस की
- 14:10पतली-पतली पट्टियां बनाकर उन्हें बड़ी
- 14:12सफाई से बुनने लगी। इस बार सोनी ने अपनी
- 14:15टोकरियों को और भी सुंदर बनाने का फैसला
- 14:17किया। उसने कुछ टोकरियों पर प्राकृतिक
- 14:20रंगों से सुंदर डिजाइन बनाए। उसकी मेहनत
- 14:23से टोकरियां पहले से भी ज्यादा आकर्षक
- 14:25लगने लगी। काफी मेहनत के बाद सोनी ने 10
- 14:27सुंदर टोकरियां तैयार की और उन्हें लेकर
- 14:30पास के गांव के बाजार में पहुंच गई। वह
- 14:32अपनी टोकरियां सजाकर [संगीत] बैठी ही थी
- 14:34कि वही बुजुर्ग आदमी वहां आ गया जिसने
- 14:37पिछली बार उसकी पांच टोकरियां खरीदी थी।
- 14:40आदमी ने आते ही कहा, बेटी, आज मुझे
- 14:42तुम्हारी 50 टोकरियां चाहिए।
- 14:44मैं बैलगाड़ी भी लेकर आया हूं। पिछली बार
- 14:47तुम्हारी सारी टोकरियां हाथों हाथ बिक गई।
- 14:49शहर में मेरी बहुत बड़ी दुकान है।
- 14:52सोनी ने थोड़ा झिझकते हुए कहा,
- 14:54बाबा, आज तो मेरे पास सिर्फ 10 ही
- 14:57टोकरियां हैं।
- 14:58क्या? मैं इतनी दूर से तुम्हारे लिए आया
- 15:00हूं। तुम ऐसा करो, घर जाओ और बाकी
- 15:02टोकरियां लेकर आओ।
- 15:04सोनी यह सुनकर थोड़ी शर्मिंदा हो गई। उसने
- 15:07धीरे से कहा,
- 15:08"बा घर तो हमारा एक छोटी सी झोपड़ी है।
- 15:12उसमें मैं और मेरे पति रहते हैं। मेरे पास
- 15:14अभी और टोकरियां नहीं है।
- 15:17बुजुर्ग आदमी कुछ पल चुप रहा। सोनी ने फिर
- 15:20कहा, [संगीत]
- 15:22"आप मुझे 5 दिन का समय दीजिए। मैं मेहनत
- 15:24करके आपके लिए 50 टोकरियां बना दूंगी।"
- 15:27बुजुर्ग आदमी ने सिर हिलाते हुए कहा,
- 15:305 दिन इंतजार करना मेरे लिए मुश्किल है।
- 15:32एक काम करो। तुम मेरे शहर वाले दुकान पर
- 15:35ही टोकरियां बनाया करो। मैं तुम्हें हर
- 15:37टोकरी के हिसाब से पैसे दूंगा।
- 15:39वहां तुम्हें बांस और बाकी सामान भी मिल
- 15:42जाएगा। सोनी ने यह बात सुनी तो सोच में
- 15:44पड़ गई। उसे पहली बार लगा कि शायद उसकी
- 15:47मेहनत से उसकी जिंदगी बदल सकती है। उसने
- 15:49विनम्रता से कहा।
- 15:51बाबा मैं इस बारे में अपने पति से बात कर
- 15:54लूं। [संगीत] मैं आपको कल बता दूंगी।
- 15:56बुजुर्ग आदमी ने कहा,
- 15:58ठीक है बेटी। कल मुझे अपना जवाब जरूर
- 16:00देना। वह अपनी बैलगाड़ी लेकर वहां से चला
- 16:04गया। सोनी दूर जाती हुई बैलगाड़ी को देखती
- 16:06रही। अगली शाम सोनी अपनी झोपड़ी में लौटकर
- 16:10आकाश को उस बुजुर्ग आदमी की सारी बात
- 16:12बताने लगी। सोनी ने कहा,
- 16:14आकाश उन्होंने शहर में अपनी दुकान पर ही
- 16:17टोकरियां बनाने का काम दिया है। अगर हम
- 16:19वहां चले जाएं तो हमारे पास काम भी रहेगा
- 16:22और रहने की चिंता भी नहीं होगी।
- 16:24आकाश ने कुछ देर सोचा। फिर मुस्कुरा कर
- 16:27बोला। सोनी तुमने हमेशा मुश्किल समय में
- 16:30मेरा साथ दिया [संगीत] है। मुझे लगता है
- 16:32हमें यह मौका जरूर अपनाना चाहिए। मैं भी
- 16:35वहां कोई काम सीखकर मेहनत [संगीत] करूंगा।
- 16:38सोनी खुशी से मुस्कुरा दी। अगली सुबह
- 16:40दोनों अपना थोड़ा सा सामान लेकर शहर के
- 16:43लिए निकल पड़े। जब
- 16:44[नाक से की जाने वाली आवाज़] वे बुजुर्ग
- 16:44आदमी की दुकान पर पहुंचे तो वह उन्हें
- 16:46देखकर बहुत खुश हुआ। उसने दोनों को अंदर
- 16:49बुलाया और कहा, "आओ बेटी, आओ बेटा। अब
- 16:53तुम्हें काम के लिए इधर-उधर भटकने भटकने
- 16:56की जरूरत नहीं है। उसने सोनी को टोकरियां
- 16:58बनाने की जगह दिखाई और आकाश को दुकान के
- 17:01दूसरे काम समझाए। फिर बुजुर्ग आदमी ने
- 17:04कहा,
- 17:05यहां तुम्हें बांस की टकरियां व्यवस्थित
- 17:07करनी होंगी। तुम दोनों चाहो तो मेरे घर
- 17:10में ही रह सकते हो।
- 17:12सोनी ने संकोच से पूछा।
- 17:14लेकिन बाबा हम आपके घर में कैसे रह सकते
- 17:16हैं?
- 17:17बेटी मेरा अपना कोई नहीं है। मैं इस शहर
- 17:20में अकेला रहता हूं। ना मेरे आगे कोई है
- 17:23ना पीछे। अगर तुम दोनों दोनों मेरे साथ
- 17:25रहोगे तो शायद यह घर भी घर जैसा लगने
- 17:28लगेगा। आकाश और सोनी की आंखें नम हो गई।
- 17:31दोनों ने उसकी बात स्वीकार कर ली। उस दिन
- 17:34से सोनी वहीं बैठकर सुंदर-सुंदर टकरियां
- 17:36बनाने लगी। आकाश भी दुकान के काम में हाथ
- 17:39बटाने लगा। सोनी की बनाई रंग बिरंगी और
- 17:42सुंदर डिजाइन वाली टकरियां शहर में बहुत
- 17:44पसंद की जाने लगी। [संगीत] धीरे-धीरे
- 17:46दुकान पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी और
- 17:49दुकान की कमाई भी पहले से कहीं ज्यादा
- 17:51होने लगी। कुछ समय बाद बुजुर्ग आदमी ने
- 17:53[संगीत] सोनी और आकाश से कहा, "तुम दोनों
- 17:56अब मेरे लिए सिर्फ काम करने वाले नहीं हो।
- 18:00तुम मेरे परिवार का हिस्सा हो।" सोनी की
- 18:03आंखों में आंसू आ गए। आकाश ने हाथ जोड़कर
- 18:06कहा, बाबा आपने उस समय हमारा साथ दिया जब
- 18:10हमारे अपने लोगों ने हमें आधी रात को घर
- 18:12से निकाल दिया था। हम आपका यह
- 18:13[गला साफ़ करने की आवाज़] एहसान जिंदगी भर
- 18:15नहीं भूलेंगे। समय बीतता गया। सोनी और
- 18:18आकाश उसी घर में बुजुर्ग आदमी के साथ
- 18:20परिवार की तरह रहने लगे। दुकान में भी अब
- 18:23तीनों मिलकर काम करते थे। जिस सोनी और
- 18:26आकाश के पास कभी अपना घर तक नहीं था। आज
- 18:29उनके पास रहने के लिए सुरक्षित [संगीत] घर
- 18:31करने के लिए सम्मानजनक काम और एक ऐसा
- 18:34परिवार था जिसने उन्हें बिना किसी स्वार्थ
- 18:36के अपना लिया था। सोनी अक्सर उस बुजुर्ग
- 18:39आदमी से कहती
- 18:41बाबा अगर उस दिन आपने हमारी टकरियां नहीं
- 18:44खरीदी होती तो शायद हमारी जिंदगी कभी नहीं
- 18:47बदलती।
- 18:48बुजुर्ग आदमी मुस्कुरा कर कहता
- 18:51बेटी मैंने तुम्हें मौका दिया था लेकिन
- 18:54अपनी जिंदगी तुम दोनों ने अपनी मेहनत से
- 18:57मेहनत से बदली है।
- 18:59आकाश भी मुस्कुराता और सोनी की तरफ देखकर
- 19:01कहता
- 19:02सोनी तुमने मुश्किल वक्त में हार नहीं
- 19:05मानी। तुम्हारी मेहनत ने हमारी [संगीत]
- 19:06पूरी जिंदगी बदल दी।
- 19:09और इस तरह सोनी और आकाश ने साबित कर दिया
- 19:11कि मुश्किल समय कितना भी बड़ा क्यों ना हो
- 19:14अगर इंसान मेहनत और हिम्मत से आगे बढ़ता
- 19:17रहे तो एक दिन उसकी जिंदगी जरूर बदलती
- 19:19[संगीत] है। दोस्तों, आपको हमारी आज की
- 19:21कहानी कैसी लगी? कमेंट में जरूर बताएं।
- 19:24वीडियो पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक कर
- 19:27हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें।
- 19:33[घंटी की आवाज़]
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This page contains the full transcript of जिस गरीब भाई- बहु को जेठ ने निकाला घर से, उसी बहु ने बदली अपनी किस्मत। Hindi Kahani l Hindi Cartoon by Mastii ki duniya , generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,307 words across 449 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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