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सिर कटी | Headless Witch | Horror Stories | Chudail Ki Kahaniya | Bhoot Ki Kahaniya | Horror Comedy — Transcript

by Dream Stories TV Adventure · 1,856 words · 250 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:09[हंसी]
  2. 0:10एक गांव में एक चुड़ैल का कटा हुआ सिर
  3. 0:12अपने धड़ की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था।
  4. 0:20उसी गांव में सुमन और हरिया पति-पत्नी
  5. 0:23रहते थे। एक रात हरिया देर रात खेत से घर
  6. 0:26लौट रहा था। तभी उसका सामना उस कटे हुए
  7. 0:30सिर से हो गया।
  8. 0:32अरे मर गए रे इस कटे हुए सर के बारे में
  9. 0:36तो सिर्फ कहानियों में सुना था। ये तो सच
  10. 0:40में है।
  11. 0:41[हंसी]
  12. 0:47बहुत दिनों बाद कोई शिकार मिला है। आज
  13. 0:51तुझे खाकर अपनी भूख मिटाऊंगी।
  14. 0:53अरे चुड़ैल जी मुझे छोड़ दो। मेरी नईनई
  15. 0:57शादी हुई है।
  16. 0:59चुड़ैल उसकी एक नहीं सुनती और हरिया को
  17. 1:01अपने मुंह से पकड़ कर हवा
  18. 1:03[चीखने की आवाज़] में उठा लेती है।
  19. 1:05अरे मर गया रे आ अरे अरे ना बेटी चुड़ैल
  20. 1:10छोड़ दे मुझे। [चीखने की आवाज़] आ
  21. 1:13फिर चुड़ैल उसे उठाकर गांव से दूर जंगल की
  22. 1:16ओर ले जाने लगती है। हरिया जोर-जोर से
  23. 1:19चिल्लाने लगता [चीखने की आवाज़] है।
  24. 1:20अरे कोई मुझे बचाओ। अरे कोई है मेरी जान
  25. 1:24बचाओ। अरे कमबख्त गांव वालों सब घोड़े
  26. 1:28बेचकर सो गए क्या? कोई तो मेरी आवाज सुनो।
  27. 1:33अरे कोई है कोई है?
  28. 1:36हरिया की आवाज पूरे गांव में फैल जाती है।
  29. 1:40गांव वाले कटे हुए सिर को हरिया को ले
  30. 1:42जाते हुए देखते हैं। लेकिन किसी की हिम्मत
  31. 1:45नहीं होती उसके पीछे जाने की। तभी हरिया
  32. 1:48की पत्नी सुमन को भी शोर सुनाई देता है।
  33. 1:50वो भी अपने घर से बाहर निकल कर देखने लगती
  34. 1:53है। तभी उसकी नजर हरिया पर पड़ती है।
  35. 1:56अरे नहीं अजी आप हवा में कहां उड़ रहे हो?
  36. 1:58जी?
  37. 1:59अरे नासिटी उड़ नहीं रहा हूं। दिख नहीं
  38. 2:03रहा है क्या? ये कमबख्त सिर कटी चुड़ैल
  39. 2:06मुझे उड़ा कर ले जा रही है। मुझे बचाओ।
  40. 2:11अरे कोई इनकी मदद करो। कोई तो इन्हें
  41. 2:13बचाओ। सुमन पूरे गांव से मदद मांगती है
  42. 2:16लेकिन कोई भी गांव वाला उसकी मदद नहीं
  43. 2:18करता। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि वह
  44. 2:21क्या करें। तभी सुमन की नजर पास खड़े भोला
  45. 2:24और पर पड़ी। दोनों एक पेड़ के पीछे
  46. 2:26छिपकर केवल अपनी गर्दन बाहर निकाल कर देख
  47. 2:30रहे थे।
  48. 2:30अरे भोलू भैया काका वहां छिप कर
  49. 2:33तमाशा क्यों देख रहे हो? जल्दी चलकर मेरे
  50. 2:35पति को बचाओ। बहन मैं जरूर चलता लेकिन आज
  51. 2:41सुबह से मेरे घुटने में बड़ा दर्द हो रहा
  52. 2:45है और मेरी आंखों से रात में साफ दिखाई
  53. 2:49नहीं देता। मुझे तो यह भी पता नहीं चल रहा
  54. 2:53है कि चुड़ैल कौन है और हरिया कौन है।
  55. 2:57सुमन ने पास पड़ा एक मोटा डंडा उठा लिया।
  56. 3:00अब तुम दोनों को साफ दिखाई देगा या इस
  57. 3:02डंडे से तुम्हारी आंखों का इलाज करूं।
  58. 3:04डंडा देखते ही भोला के घुटनों का दर्द और
  59. 3:08की आंखों की कमजोरी तुरंत ठीक हो
  60. 3:10गई।
  61. 3:11अरे अरे बहन अचानक मेरे घुटने ठीक हो गए।
  62. 3:16यह तो चमत्कार हो गया। मुझे भी सब साफ
  63. 3:20दिखाई देने लगा है। डंडे में बड़ी शक्ति
  64. 3:25है।
  65. 3:25उधर चुड़ैल हरिया को लेकर गांव से दूर
  66. 3:28जंगल की तरफ बढ़ती जा रही थी। हरिया
  67. 3:30लगातार हाथ चला रहा था। तभी उसका एक हाथ
  68. 3:34चुड़ैल की आंख पर लग गया। चुड़ैल दर्द से
  69. 3:37चीखी और उसने हरिया को जमीन पर पलट दिया।
  70. 3:40मूर्ख इंसान तूने मेरी आंख पर मारने की
  71. 3:42हिम्मत कैसे की?
  72. 3:44अरे चुड़ैल जी इसमें मेरी क्या गलती है?
  73. 3:48मुझे माफ कर दो।
  74. 3:50चुप रे। आज तेरे खून से मेरे धड़ पर लगा
  75. 3:53बंधन टूट जाएगा। फिर मेरा सिर और धड़
  76. 3:56दोबारा एक हो जाएंगे। आई तुम्हारा धड़ भी
  77. 4:00है।
  78. 4:00हां, कई वर्ष पहले एक तांत्रिक ने मेरा
  79. 4:03सिर काट कर मेरे धड़ से अलग कर दिया था।
  80. 4:06उसने मेरे धड़ को जंगल की पुरानी हवेली में
  81. 4:08कैद कर दिया। उस दरवाजे को कोई आत्मा नहीं
  82. 4:11खुल सकती। उसे केवल एक जीवित मनुष्य ही
  83. 4:14खोल सकता है। अब हरिया समझ गया कि चुड़ैल
  84. 4:17उसे खाने के लिए नहीं बल्कि हवेली का
  85. 4:19दरवाजा खुलवाने के लिए लेकर जा रही थी।
  86. 4:21उसने मन ही मन वहां से बचने की योजना
  87. 4:23बनानी शुरू कर दी। रास्ते में उसने चुपके
  88. 4:26से अपनी एक चप्पल नीचे गिरा दी। पीछे से
  89. 4:29सुमन भोला और उसका पीछा कर रहे थे।
  90. 4:31सुमन बहन हमें कुछ दिखाई नहीं दे रहा।
  91. 4:35चुड़ैल ना जाने हरिया को किस दिशा में ले
  92. 4:38गई। हम
  93. 4:40तभी सुमन को रास्ते में हरिया की चप्पल
  94. 4:42दिखाई दी। यह उनकी चप्पल है। वो रास्ते
  95. 4:45में निशानी छोड़ते जा रहे हैं।
  96. 4:47हो सकता है चुड़ैल ने उसे खा लिया हो। और
  97. 4:51चप्पल पसंद ना आने के कारण फेंक दी हो।
  98. 4:56काका कोई भी अच्छी बात आपके मुंह से
  99. 4:58निकलती है या सारी जिंदगी डरावनी खबरें
  100. 5:00सुनाने की कसम खा रखी है? चुप हो
  101. 5:02गया। तीनों आगे बढ़े तो उन्हें पेड़ पर
  102. 5:04हरिया का गमछा भी मिल गया।
  103. 5:06लगता है चुड़ैल ने हरिया को खा लिया। पहले
  104. 5:10चप्पल मिली और अब गमछा मिला है।
  105. 5:14काका इसके आगे एक शब्द बोला तो चुड़ैल से
  106. 5:17पहले मैं आपको इसी जंगल में दफना दूंगी।
  107. 5:19तीनों जंगल के बीच पहुंचे ही थे कि अचानक
  108. 5:22पेड़ों के पीछे से किसी के मंत्र पढ़ने की
  109. 5:24आवाज आने लगी।
  110. 5:25काली शक्ति सामने आ मेरे आदेश से प्रकट हो
  111. 5:32जाओ।
  112. 5:33भोला और डर कर सुमन के पीछे छिप गए।
  113. 5:37अगले ही पल झाड़ियों के अंदर से गांव का
  114. 5:39तांत्रिक गजाधर बाहर निकला। उसके एक हाथ
  115. 5:42में झाड़ू और दूसरे हाथ में पीतल का लोटा
  116. 5:45था। मुझे अपनी दिव्य शक्ति से पता चल गया
  117. 5:49था कि गांव पर कोई बड़ा संकट आने वाला है।
  118. 5:54इसीलिए मैं चुड़ैल को पकड़ने आया हूं।
  119. 5:58आप यहां क्या कर रहे हैं? तभी पीछे से
  120. 6:00सरपंच रघुवीर भी वहां पहुंच गया।
  121. 6:02झूठ मत बोलो गजाधर। गांव में शोर सुनते ही
  122. 6:06तुम अपना घर छोड़कर जंगल में छिपने आ गए
  123. 6:09थे। मैं मैं छिप नहीं रहा था। मैं एकांत
  124. 6:14में बैठकर चक्की कट्टी कर रहा था। यह कोई
  125. 6:19साधारण चुड़ैल नहीं है। यह सिरकटी
  126. 6:23चंद्रमुखी है। बरसों पहले इसने काला जादू
  127. 6:27सीख कर गांव के यात्रियों को अपना शिकार
  128. 6:31बनाना शुरू कर दिया था। तब मेरे गुरु
  129. 6:35रुद्रनाथ ने एक अभिमंत्रित तलवार से इसका
  130. 6:39सिर फड़ से अलग कर दिया था।
  131. 6:43गजाधर बाबा इसका धड़ कहां है?
  132. 6:45जंगल की पुरानी हवेली में उसे मंत्रों से
  133. 6:49बांधकर लोहे के एक कमरे में कैद किया गया
  134. 6:53था। चुड़ैल अपने आप वो दरवाजा नहीं खोल
  135. 6:57सकती। यदि कोई जीवित व्यक्ति दरवाजा खोल
  136. 7:00दे और उसके खून की एक ऊंट धड़ पर गिर जाए
  137. 7:06तो सिर और धड़ दोबारा जुड़ जाएंगे।
  138. 7:11हम यदि दोनों जुड़ गए तो क्या होगा? फिर
  139. 7:15उसकी शक्तियां कई गुना बढ़ जाएंगी। उसके
  140. 7:19बाद उसे रोकना लगभग असंभव होगा।
  141. 7:24तो यहां खड़े होकर भाषण क्यों दे रहे हो?
  142. 7:26जल्दी चलकर मेरे पति को बचाओ। सभी लोग
  143. 7:29निशानों का पीछा करते हुए पुरानी हवेली की
  144. 7:31तरफ चल पड़े। उधर चुड़ैल हरिया को लेकर
  145. 7:34खंडहर बन चुकी हवेली में पहुंच गई। हवेली
  146. 7:37के अंदर चारों तरफ जमीन पर टूटी हुई
  147. 7:39हड्डियां बिखरी पड़ी थी। सामने लोहे का एक
  148. 7:41बड़ा दरवाजा था जिस पर लाल रंग के कई
  149. 7:44तांत्रिक निशान बने हुए थे। दरवाजे के
  150. 7:46पीछे से किसी के नाखून रगड़ने की भयानक
  151. 7:49आवाज आ रही थी।
  152. 7:56चुड़ैल ने हरिया को दरवाजे के सामने पटक
  153. 7:59दिया।
  154. 8:01आ
  155. 8:04अरे पड़ गया रे आ [चीखने की आवाज़]
  156. 8:08जल्दी से ये दरवाजा खोल।
  157. 8:11चुड़ैल जी दरवाजा बहुत पुराना है। पहले
  158. 8:15किसी बढ़ई को बुलाना पड़ेगा। वो इसे तेल
  159. 8:19लगाएगा फिर आराम से दरवाजा खुल जाएगा।
  160. 8:22मुझे मूर्ख बनाने की कोशिश मत कर। कुंडी
  161. 8:25पकड़ और दरवाजा खोल। यदि तूने दरवाजा नहीं
  162. 8:28खोला तो मैं अभी तेरी गर्दन तोड़ दूंगी।
  163. 8:30हरिया मजबूर होकर दरवाजे के पास गया। जैसे
  164. 8:34ही उसने लोहे की कुंडी को हाथ लगाया,
  165. 8:36दरवाजे पर बने तांत्रिक निशान चमकने लगे।
  166. 8:39दरवाजे के पीछे कैद धड़ जोर-जोर से
  167. 8:42दीवारों पर टक्कर मारने लगा।
  168. 8:47हरिया ने जानबूझकर कुंडी को उल्टी दिशा
  169. 8:50में खींचना शुरू कर दिया। मूर्ख कुंडी ऊपर
  170. 8:53उठानी या नीचे नहीं दबानी।
  171. 8:55मुझे क्या पता हमारे घर का दरवाजा तो लात
  172. 9:00मारने से खुलता है। [हंसी]
  173. 9:03चुड़ैल गुस्से में उसके पास आई और अपने
  174. 9:05दांतों से उसकी बाह पर हमला कर दिया। उसके
  175. 9:08हाथ पर हल्की सी खरोच आ गई। खून की एक
  176. 9:11बूंद जमीन पर पड़ गई। खून गिरते ही लोहे
  177. 9:13के दरवाजे की जंजीर अपने आप टूट गई।
  178. 9:16अरे मर गए रे। ये दरवाजा तो बिना तेल लगाए
  179. 9:21ही खुल गया।
  180. 9:22दरवाजा धीरे-धीरे खुलने लगा।
  181. 9:27[हंसी]
  182. 9:30उसके पीछे लाल साड़ी पहना हुआ चुड़ैल का
  183. 9:32धड़ खड़ा था। [हंसी]
  184. 9:37धड़ बाहर आया और हवा में उड़ते सिर की तरफ
  185. 9:40बढ़ने लगा। चुड़ैल जोर-जोर से हंसने लगी।
  186. 9:44[हंसी]
  187. 9:47अब मुझे कोई नहीं रोक सकता। रुक जा नास
  188. 9:50मिट्टी। मेरे पति को हाथ लगाया तो तेरा
  189. 9:52बचा हुआ धड़ भी अलग करके गांव में बिखेर
  190. 9:54दूंगी। सुमन, गजाधर, सरपंच, भोला और
  191. 9:58हवेली के अंदर पहुंच गए। हरिया सुमन को
  192. 10:00देखते ही उसके पीछे छिप गया। [हंसी]
  193. 10:04सुमन
  194. 10:05आज पहली बार तुम्हें देखकर बहुत खुशी हुई
  195. 10:10है। घर पहुंचने दे। आधी रात तक खेत में
  196. 10:13घूमने का कारण पूछूंगी तो सारी खुशी बाहर
  197. 10:15आ जाएगी। चुड़ैल का सिर अपने धड़ से केवल
  198. 10:18कुछ ही दूरी पर था। गजाधर ने तुरंत काला
  199. 10:20धागा मंत्र पढ़ते हुए दोनों के बीच फेंक
  200. 10:22दिया। काले धागे की वजह से उसका धड़ वहीं
  201. 10:25रुक गया।
  202. 10:26जब तक ये मंत्र वाला धागा इनके बीच है।
  203. 10:30सिर अपने धड़ से नहीं जुड़ सकता।
  204. 10:33तभी धड़ ने गजा की गर्दन पकड़ कर उसे हवा
  205. 10:36में उठा लिया।
  206. 10:37कोई मुझे नीचे उतारो। मेरी सांस बंद हो
  207. 10:40रही है।
  208. 10:42सुमन ने पास पड़ी लकड़ी उठाकर धड़ के हाथ
  209. 10:44पर जोर से मारी। गजाधर जमीन पर गिर पड़ा।
  210. 10:47गजाधर ने जल्दी से अपने झोले से एक बड़ी
  211. 10:50कांच की बोतल निकाली।
  212. 10:51हमें इस सिर को इस बोतल में कैद करना
  213. 10:55होगा। सूरज निकलने तक सिर और थड़ अलग रहे
  214. 10:59तो दोनों हमेशा के लिए नष्ट हो जाएंगे।
  215. 11:02गजाधर ने मंत्र पढ़ना शुरू किया। चुड़ैल
  216. 11:05का सिर उनकी तरफ तेजी से बढ़ा। सभी लोग
  217. 11:08इधर-उधर भागने लगे। उसी समय सुमन की नजर
  218. 11:11कोने में रखे अनाज के एक बड़े लोहे के
  219. 11:14ड्रम पर पड़ी। उसने हरिया और सरपंच को
  220. 11:16इशारा किया। हरिया ने जमीन से एक लाल
  221. 11:19कपड़ा उठाया और उसे हवा में लहराते हुए
  222. 11:22चुड़ैल के सिर से कहा,
  223. 11:24अरे चुड़ैल, अपना सिर बचाना है तो मुझे
  224. 11:28पकड़ कर दिखा।
  225. 11:30चुड़ैल हरिया की तरफ झपटी। हरिया कपड़ा
  226. 11:34लेकर लोहे के ड्रम की तरफ भागा। जैसे ही
  227. 11:36चुड़ैल का सिर उसके पास पहुंचा, हरिया
  228. 11:39नीचे झुक गया। चुड़ैल का सिर सीधा ड्रम के
  229. 11:42अंदर जा गिरा। सुमन ने तुरंत ड्रम का
  230. 11:44ढक्कन बंद कर दिया और उसके ऊपर बैठ गई।
  231. 11:47मुझे बाहर निकालो। मैं तुम सबको जिंदा
  232. 11:50नहीं छोडूंगी।
  233. 11:51उधर चुड़ैल का धड़ बेकाबू होकर सुमन की
  234. 11:53तरफ बढ़ा। गजाधर ने हवन की राख उसकी तरफ
  235. 11:57फेंकी। राख पड़ते [संगीत] ही धड़ कुछ पल
  236. 11:59के लिए रुक गया।
  237. 12:00जल्दी से इसके हाथ पैर बांधो। यह राख अधिक
  238. 12:05देर तक इसे नहीं रोक पाएगी।
  239. 12:08सरपंच भोला और हरिया ने पास पड़ी लोहे की
  240. 12:10जंजीर उठाई और उस धड़ को जंजीर से बांध
  241. 12:13दिया। तभी चुड़ैल ने अंदर से जोरदार टक्कर
  242. 12:16मारकर ढक्कन उड़ा दिया। उसका सिर ड्रम से
  243. 12:19बाहर निकल कर तेजी से अपने धड़ की तरफ
  244. 12:22बढ़ने लगा। तभी सूरज की पहली किरण
  245. 12:28और सीधे चुड़ैल के धड़ पर पड़ी। सूरज की
  246. 12:31रोशनी तेज होते ही दोनों आग की लपटों
  247. 12:33[संगीत] से घिर गए। कुछ ही पलों में उसका
  248. 12:35सिर और धड़ राख बनकर जमीन पर बिखर गए। उस
  249. 12:39दिन के बाद से गांव में सब खुशी-खुशी रहने
  250. 12:42लगे।

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