Hazrat Ibrahim (A.S.) Aur Namrood Ki Beti Ka Waqia: Ek Sabak Amoz Kahani | Muslim Matters TV — Transcript
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- 0:00नमरूद की बेटी का ईमान अफरोज वाकया
- 0:03बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अस्सलाम वालेकुम
- 0:06रहमतुल्लाह व बरकातहू मैं हूं जमील अहमद
- 0:09जामी यकीनन तमाम तारीफें अल्लाह के लिए
- 0:13हैं हम उसी की तारीफ बयान करते हैं उसी से
- 0:16मदद के तलबगार हैं मैं गवाही देता हूं कि
- 0:19अल्लाह के सिवा कोई भी माबूद बरहक नहीं
- 0:23नाजरीन नमरूद दुनिया का वह वाहिद बादशाह
- 0:25था जिसने पूरी दुनिया पर हुकूमत की थी यह
- 0:29काफिर था और जिना ज्यादा था यह वह पहला
- 0:32शख्स था जिसने अपने सर पर ताज रखा था और
- 0:35खुल्लमखुल्ला खुदाई का दावा किया था नमरूद
- 0:38के दौर में हजरत इब्राहीम अलैहि सलाम
- 0:40माबूद से ब रिसालत हुए और हजरत इब्राहिम
- 0:43अल सलाम ने ही नमरूद के बुतों को तोड़ा
- 0:46जिसकी वजह से नमरूद ने हजरत इब्राहिम अल
- 0:49सलाम को आग में फेंका जब आग ब हुक्म खुदा
- 0:52हजरत इब्राहिम अल सलाम के लिए गुलजार बन
- 0:55गई तो उस वक्त चंद गिने-चुने लोगों में से
- 0:57नमरूद की बेटी भी आप पर ईमान ले आई जब
- 1:01नमरूद को इसकी खबर मिली तो उसने अपनी बेटी
- 1:03के साथ क्या किया और नमरूद की आग में हजरत
- 1:06इब्राहिम अल सलाम के साथ कौन से वाक्यात
- 1:08पेश आए यह आग कितने अरसे में तैयार की गई
- 1:12खुदा वंदे मुताल ने छिपकली को मारने का
- 1:14हुक्म क्यों दिया और मेंढक को मारने से
- 1:17मना क्यों फरमाया इसके साथ-साथ आपको नमरूद
- 1:21का अंजाम भी बताएंगे वीडियो में आगे चलने
- 1:23से पहले आपसे गुजारिश है कि वीडियो को
- 1:26स्किप किए बगैर आखिर तक जरूर देखिएगा और
- 1:29अगर आप आप हमारे चैनल पर नए हैं तो सबसे
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- 1:34नाजरीन नमरूद बड़े तनत का बादशाह था सबसे
- 1:38पहले इसने अपने सर पर ताज शाही रखा और
- 1:41खुदाई का दावा किया यह वलदमा था और इसकी
- 1:46मां ने जिना करा लिया था जिससे नमरूद पैदा
- 1:49हुआ था सल्तनत का कोई वारिस पैदा ना होगा
- 1:52तो बादशाहत खत्म हो जाएगी लेकिन यह लड़का
- 1:54बड़ा होकर बहुत इकबाल मंद हुआ और बहुत
- 1:58बड़ा बादशाह बन गया मशहूर है कि पूरी
- 2:01दुनिया की बादशाही सिर्फ चार ही शख्स को
- 2:03मिली जिनमें से दो मोमिन थे और दो काफिर
- 2:06हजरत सुलेमान अल सलाम और हजरत जुलकरनैन तो
- 2:09साहिबे ईमान थे और नमरूद बख्त नसर यह
- 2:12दोनों काफिर थे नमरूद ने अपनी सल्तनत भर
- 2:15में यह कानून नाफिया था कि उसने खुराक की
- 2:17तमाम चीजों को अपनी तहवील में ले लिया था
- 2:20सिर्फ उन्हीं लोगों को खुराक का सामान
- 2:21दिया करता था जो लोग उसकी खुदाई को तस्लीम
- 2:24करते थे चुनांचे एक मर्तबा हजरत इब्राहिम
- 2:27अल सलाम उसके दरबार में गल्ला लेने के लिए
- 2:29तशरीफ ले गए तो उस खबीस ने कहा कि पहले
- 2:32तुम मुझको अपना खुदा तस्लीम करो तभी मैं
- 2:34तुमको गल्ला दूंगा हजरत इब्राहिम अल सलाम
- 2:37ने भरे दरबार में अलल ऐलान फरमा दिया कि
- 2:40तू झूठ है और मैं सिर्फ एक खुदा का परस्त
- 2:43हूं जो वाद हू ला शरीक लहु है यह सुनकर
- 2:46नमरूद अपने आपे से बाहर हो गया और आपको
- 2:48दरबार से बाहर निकाल दिया और एक दाना भी
- 2:51नहीं दिया आप और आपके चंद
- 2:58मुताबिलिटी एक टीले के पास तशरीफ ले गए और
- 3:01थैले में रेत भर कर लाए और खुदा वंदे
- 3:04कुद्दूसी से दुआ मांगी तो वह रेत आटा बन
- 3:07गई और आपने उसको अपने
- 3:16मुताबिलिटी
- 3:18के साथ आग से बाहर निकल आए और अलल ऐलान
- 3:23नमरूद को झूठा कहकर खुदा ए वहदहू ला शरीक
- 3:26की तौहीद का चर्चा करने लगे नमरूद ने आपके
- 3:29कलमा हक से तंग आकर एक दिन आपको अपने
- 3:31दरबार में बुलाया और मुकाल मा ब सूरत
- 3:34मुनाजरा शुरू कर दिया नमरूद ऐ इब्राहीम
- 3:38बताओ तुम्हारा रब कौन है जिसकी इबादत की
- 3:40तुम लोगों को दावत दे रहे हो हजरत
- 3:43इब्राहिम ऐ नमरूद मेरा रब वही है जो लोगों
- 3:45को जलाता और मारता है नमरूद यह तो मैं भी
- 3:49कर सकता हूं चुनांचे उस वक्त ने दो
- 3:51कैदियों को जेलखाना से दरबार में बुलवाया
- 3:54एक को मौत की सजा हो चुकी थी और दूसरा
- 3:56रिहा हो चुका था नमरूद ने फांसी पाने वाले
- 3:59को तो छोड़ दिया और बेकसूर को फांसी दे दी
- 4:02और बोला कि देख लो जो मुर्दा था मैंने
- 4:05उसको जला दिया और जो जिंदा था मैंने उसको
- 4:07मुर्दा कर दिया हजरत इब्राहीम अलैहि सलाम
- 4:10ने समझ लिया कि नमरूद बिल्कुल ही अहमक और
- 4:13निहायत ही घाम आदमी है जो जलाने और मारने
- 4:16का मतलब यह समझ बैठा इसलिए आपने उसके
- 4:19सामने एक दूसरी बहुत ही वाज और रोशन दलील
- 4:21पेश फरमाई चुनांचे आपने फरमाया ऐ नमरूद
- 4:25मेरा रब वही है जो सूरज को मशरिक से
- 4:27निकालता है अगर तू खुदा है तो एक दिन सूरज
- 4:30को मगरिब से निकाल दे हजरत इब्राहिम अल
- 4:33सलाम की दलील सुनकर नमरूद मबू और हैरान रह
- 4:36गया और कुछ भी ना बोल सका इस तरह यह
- 4:38मुनाजरा खत्म हो गया और हजरत इब्राहिम अल
- 4:41सलाम इस मुनाजरा में फता मंद होकर दरबार
- 4:44से बाहर तशरीफ लाए और तौहीद इलाही का वाज
- 4:47अलल ऐलान फरमाना शुरू कर दिया कुरान मजीद
- 4:50ने इस मनाजर की रू दद इन लफ्जों में बयान
- 4:53फरमाई कि ऐ महबूब क्या तुमने ना देखा था
- 4:57उसे जो इब्राहिम से झगड़ा उसके रब के बार
- 4:59में इस पर कि अल्लाह ने उसे बादशाही दी
- 5:02जबकि इब्राहीम ने कहा कि मेरा रब वह है कि
- 5:06जलाता है और मारता है बोला मैं जलाता और
- 5:09मारता हूं इब्राहिम ने फरमाया तो अल्लाह
- 5:13तो सूरज को लाता है पूरब से तू पश्चिम से
- 5:16ले आ तो होश उड़ गए काफिर के और अल्लाह
- 5:19राह नहीं दिखलाता जालिमों को हजरत
- 5:22इब्राहिम अल सलाम खुदा वंद की तौहीद के
- 5:24ऐलान पर पहाड़ की तरह कायम रहे ना कि
- 5:27नमरूद की बेशुमार फौजों से यब हुए ना उसके
- 5:30जुल्म और जबर से मूब हुए बल्कि उस जालिम
- 5:32ने आपको आग के शोलों में डलवा दिया उस
- 5:35वक्त भी आपके पाए अजमो इस्तकलाल में बाल
- 5:38बराबर लगज नहीं हुई और आप बराबर नारा एतदत
- 5:42करते रहे फिर उस बेरहम ने आप पर दाना पानी
- 5:45बंद कर दिया इस पर भी आपके अजमो
- 5:49इस्तकाम्या फिर उसने आपको मुनाजरा का
- 5:51चैलेंज दिया और दरबारे शाही में तलब किया
- 5:53ताकि शाही रोब और दाब दिखाकर आप अल सलाम
- 5:56को मरूफ कर दे लेकिन आपने बिल्कुल बेखौफ
- 5:59होकर मनाजर का चैलेंज कबूल फरमा लिया और
- 6:02दरबार शाही में पहुंचकर ऐसी मजबूत और दन
- 6:05दन शिकन दलील पेश फरमाई कि नमरूद के होश
- 6:07उठ गए और वह हक्का बक्का होकर लाजवाब और
- 6:10खामोश हो गया और भरे दरबार में उस कलमा हक
- 6:14की तजल्ली हो गई बिला आखिर हजरत इब्राहीम
- 6:16अलैहि सलाम की सदाकत और हक्का नियत का
- 6:18परचम सर बुलंद हो गया और नमरूद एक मच्छर
- 6:21जैसी हकीर मखलूक से हलाक कर दिया गया हजरत
- 6:25इब्राहिम अल सलाम को आग में फेंकने का
- 6:27वाकया मुफस्सिर ने इस तरह बयान किया है कि
- 6:30ईद के दिन कौम के लोगों ने हजरत इब्राहिम
- 6:32अल सलाम को भी शहर से बाहर मेले में चलने
- 6:35की दावत दी लेकिन उन्होंने तबीयत की खराबी
- 6:37का कहकर जाने से मजरत कर ली दरह कीक वह
- 6:40ऐसे ही मौके की तलाश में थे चुनांचे जब
- 6:43पूरी कौम मैले में शिरकत के लिए चली गई तो
- 6:45हजरत इब्राहीम अल सलाम एक कुल्हाड़ी में
- 6:48दाखिल हुए उनमें से अक्सर उनके बाप आजर के
- 6:51हाथों से तराशे हुए थे हजरत इब्राहिम
- 6:54अलैहि सलाम बड़े देवता के हैकल में चले गए
- 6:56कौम का सबसे मुकद्दस देवता बातिल खुदा का
- 6:59सरदार माना जाता था हजरत इब्राहिम अल सलाम
- 7:02ने देखा कि वहां मौजूद पत्थर और लकड़ी से
- 7:05बनाए गए देवताओं के सामने फल खानों और
- 7:08मिठाइयों के ख्वान रखे हुए थे जो लोगों ने
- 7:11चढ़ावे के तौर पर नजर किए थे हजरत
- 7:13इब्राहीम अल सलाम ने उन मूर्तियों को
- 7:15मुखातिब करके कहा यह सब तुम्हारे लिए रखा
- 7:17है तुम खाते क्यों नहीं हजरत इब्राहिम ने
- 7:19दोबारा फरमाया मैं तुमसे मुखातिब हूं तुम
- 7:22मेरी बात क्यों नहीं सुनते मेरी बात का
- 7:24जवाब क्यों नहीं देते हजरत इब्राहिम अल
- 7:26सलाम ने हथौड़े से उनको तोड़ दिया लेकिन
- 7:28सिर्फ एक ब बु को रहने दिया और उस बुत के
- 7:31कांधे पर
- 7:32कुल्हाड़ी दे के बाद सुबह को जब नमरूद यों
- 7:35की वापसी हुई तो उन्होंने अपने बुत खाने
- 7:37में हशर का मंजर देखा उनके खुदाओं के हशर
- 7:39नश्र ने उनके पैरों तले जमीन निकाल दी इस
- 7:42वाक की कबर सबसे पहले नमरूद को दी गई
- 7:44नमरूद ने कहा कि जब किसी को देखा नहीं गया
- 7:47क्यों कर किसी को सजा दी जा सकती है इस पर
- 7:49उन लोगों ने जिन्होंने हजरत इब्राहिम अल
- 7:51सलाम को ही कहते हुए सुना था खुदा की कसम
- 7:53मैं तुम्हारे बुतों को ठीक कर दूंगा नमरूद
- 7:56से कहा कि काम सिर्फ इब्राहिम का है नमरूद
- 7:59ने ने कहा कि मैं सिर्फ तुम्हारे कहने पर
- 8:00सजा ना दूंगा जरूरत है कि उसको गिरफ्तार
- 8:03करके सरेआम लाया जाए चुनांचे उसने उनकी
- 8:07गिरफ्तारी का हुकुम दे दिया और हजरत
- 8:09इब्राहीम अल सलाम को गिरफ्तार करके नमरूद
- 8:12के दरबार में हाजिर किया गया दरबार लोगों
- 8:15से खचाखच भरा हुआ था हजरत इब्राहीम अल
- 8:18सलाम रोब और वकार के साथ दरबार में दाखिल
- 8:20हुए और शाही प्रोटोकॉल को नजरअंदाज करते
- 8:23हुए नमरूद के सामने जा खड़े हुए कुरान
- 8:26करीम में इस हवाले से फरमाया गया तर्जुमा
- 8:28कहने ल हमारे माबूद के साथ यह सुलूक किसने
- 8:31किया है बेशक वह तो जालिमों में से है
- 8:35लोगों ने कहा हमने एक नौजवान को उनका
- 8:38जिक्र करते हुए सुना है उसका नाम इब्राहिम
- 8:40है वह बोले कि उसे लोगों के सामने लाओ
- 8:43ताकि वह गवाह रहे जब इब्राहिम अल सलाम आए
- 8:46तो उनसे कहा क्या हमारे माबूद के साथ यह
- 8:48काम तूने किया है इब्राहिम अली सलाम ने
- 8:51कहा कि यह काम उस बड़े बुत ने किया होगा
- 8:53अगर यह बोलते हैं तो इनसे पूछ लो वह सर
- 8:56नीचा करके बोले तुम जानते हो कि यह बोल
- 8:59नहीं सकते सकते सूर अंबिया आयत 58 त 65
- 9:03हजरत इब्राहिम अल सलाम का यह अमल जहां
- 9:05साहिबे इदार लोगों और खुद नमरूद पर बिजली
- 9:08बनकर गिरा वहीं इस अमल से अवाम उ नास के
- 9:11दिलों में हजरत इब्राहीम अल सलाम की
- 9:12जुर्रत और हौसले की दाग बैठ गई मजहबी
- 9:16पेशवा हों ने पुर रोब आवाज में पूछा
- 9:18इब्राहिम हमारे बुतों की तौहीन किसने की
- 9:21है हजरत इब्राहिम ने जवाब दिया हथौड़ा
- 9:24बड़े बुत के कांधे पर है उससे पूछो यह सब
- 9:26किसने किया है पुजारी निदा मत और
- 9:28शर्मिंदगी से सर झुका के बोले इब्राहिम
- 9:31तुम खूब जानते हो कि पत्थर की मूर्तियां
- 9:33बोलती नहीं है हजरत इब्राहिम ने फरमाया जब
- 9:35यह बोलते नहीं हरकत नहीं कर सकते अपना
- 9:40दिफाई की उम्मीद क्यों रखते हो और नुकसान
- 9:43होने का अंदेशा क्यों करते हो तुम पर
- 9:45अफसोस है कि तुम कायनात के मालिक अल्लाह
- 9:47को छोड़कर झूठे माबूद को पूछते हो क्या
- 9:50तुम अकल शऊर नहीं रखते हजरत इब्राहिम अल
- 9:53सलाम की तकरीर बुत परस्तों के अकाद पर ऐसी
- 9:56कारी जर्ब थी कि नमरूद ने अपनी साख खुदाई
- 10:00को जमीन बोस होते हुए देख लिया नमरूद
- 10:02चालाक आदमी था उसने हजरत इब्राहिम अल सलाम
- 10:04से पूछा ऐ इब्राहिम तू अपने बाप दादा के
- 10:07दीन की मुखालफत क्यों करता है त उन
- 10:09मुकद्दस बुतों को माबूद मानने से क्यों
- 10:12मुनकर है हजरत इब्राहीम अल सलाम ने फरमाया
- 10:15अल्लाह ताला सारी कायनात के तन्हा मालिक
- 10:17हैं हम सब उसकी मखलूक हैं पत्थरों
- 10:20लकड़ियों से बनाए हुए बुत खुदा नहीं यह तो
- 10:22अपनी सलामती और हिफाजत के लिए भी दूसरों
- 10:24के मोहताज है परस्तिश के लायक वह हस्ती है
- 10:28जो किसी किस्म की तिज नहीं रखती और तमाम
- 10:31मखलूक उसकी मोहताज है यह सुनकर नमरूद बोला
- 10:34अगर मेरे अलावा कोई रब है तो उसका ऐसा
- 10:36वस्फ बयान कर जिसकी कुदरत मुझ में ना हो
- 10:39हजरत इब्राहीम अल सलाम ने फरमाया मेरा रब
- 10:41मौत और हयात पर कादिर है नमरूद बोला
- 10:43जिंदगी और मौत तो मेरे कब्ज कुदरत में भी
- 10:45है उसने एक कैदी को जिसकी मौत की सजा का
- 10:48हुक्म हो चुका था जान बख्शी कर दी और
- 10:51दरबार में मौजूद एक शख्स की गर्दन मारने
- 10:53का हुकम सादिर कर दिया हजरत इब्राहिम अल
- 10:56सलाम ने नमरूद से कहा कायनात का हर जर्रा
- 10:58मेरे रब का म ताज है सूरज उसके हुकुम से
- 11:01हर रोज मशरिक से निकलता है और मगरिब में
- 11:03डूब जाता है तू सूरज को मगरिब से निकाल कर
- 11:06दिखा मजहबी पेशवा और बादशाह के अकाय की
- 11:09तकज ने एवान नमरूद में दराने डाल दी अरबाब
- 11:13इक्दर्म
- 11:14हमारे देवता की तौहीन का मुरत किब हुआ है
- 11:17और बाप दादा के मजहब को झुठला है उसकी सजा
- 11:20यह है कि उसे आग में फेंक दिया जाए बुतों
- 11:22को तोड़ने का अमल नमरूद समेत पूरी कौम के
- 11:24लिए ना काबिले माफी जुर्म था लिहाजा फैसला
- 11:27किया गया कि हरत इब्राहीम अल सलाम को आग
- 11:30में डाल दिया जाए ताकि आइंदा किसी को
- 11:32बुतों की बेहुरमति करने की हिम्मत ना हो
- 11:35चुनांचे पूरी कौम लकड़ियां जमा करने के
- 11:37अमल में मसरूफ हो गई यहां तक कि अगर कोई
- 11:40बीमार पड़ जाता या किसी का कोई काम ना
- 11:42होता तो वह मन्नत मानता कि अगर मुझे शिफा
- 11:44हो गई या मेरा काम मुकम्मल हो गया तो मैं
- 11:46इब्राहिम अल सलाम को जलाने के लिए
- 11:48लकड़ियों का गट्ठा दूंगा एक मुद्दत तक कौम
- 11:51लकड़ियां जमा करती रही जब लकड़ियों का
- 11:54पहाड़ खड़ा हो गया तो एक बहुत गहरी खंदक
- 11:57खो दी गई लकड़ियों के के उस ढेर को उसमें
- 12:00डाला गया अजाब उल कसाय अजाब उल कसास
- 12:04अल्लामा अब्दुल वाहिद बिन मोहम्मद अल
- 12:06मुफ्ती सफा नंबर 87 में है कि नमरूद ने
- 12:09उनको गिरफ्तार करके एक लोहे वाले तंदूर
- 12:11में बंद करा दिया और उसमें भरपूर आग जलवा
- 12:14दी काफी देर के बाद जब उन्हें बरामद किया
- 12:16तो जैसे कि वह तैसे थे यानी उनको कोई गजन
- 12:20उस आग से ना पहुंचे नमरूद ने हुक्म दिया
- 12:23इन् कैद खाने में बंद कर दिया जाए उनको
- 12:25खत्म करने का कोई और हल तलाश किया जाए
- 12:27चुनांचे एक रिवा त की बिना पर 40 दिन और
- 12:30एक रिवायत की बिना पर सात साल कैद में रखा
- 12:33और उस दौरान उन्होने नजरे आतिश करने का
- 12:35फैसला किया ब रिवायत मारिज नबूवत नमरूद ने
- 12:38बा मकाम कूसा जो कूफा में है एक चार
- 12:41दीवारी तैयार करवाई जिसकी लंबाई चार फरस
- 12:45और चौड़ाई चार फर सख थी उसकी बुलंदी 100
- 12:47गज थी और ब रिवायत रोज तुल सफा उसकी लंबाई
- 12:5160 गज चौड़ाई 40 गज और बुलंदी बी गज थी जब
- 12:55चार दीवारी मुकम्मल हो गई तो उसने हुकुम
- 12:57दिया कि इसे अच्छी जल वाली लकड़ियों से भर
- 13:00दिया जाए चुनांचे उसे लकड़ियों से पूर कर
- 13:02दिया गया एक रिवायत में कि यह चार दीवारी
- 13:05एक माह में पूर की गई और चारों तरफ वह
- 13:08जलने लगी जब उसके शोले भड़के तो उन्होंने
- 13:11मीलों यह आलम पैदा कर दिया कि कोई करीब ना
- 13:13जा सकता था कोई परिंदा फाए बाला तक उस पर
- 13:16से गुजर ना सकता था तिब में है कि आग को
- 13:19भड़काने में दो साल लगे थे उसमें यह भी है
- 13:22कि चार दीवारी के बाहर भी लकड़ियां जमा की
- 13:24गई थी आग तो रोशन कर दी गई लेकिन अब कोई
- 13:27रास्ता ऐसा ना था कि हजरत इब्राम अल सलाम
- 13:30को आग में डाला जा सके क्योंकि करीब कोई
- 13:32नहीं जा सकता था लोग इसी तरदूत और मशवरे
- 13:35में थे कि शैतान ने उन्हें मंजनी बनाने का
- 13:37मशवरा दिया और बनाने की तरकीब बताई जब
- 13:40मंजनी तैयार हो गई तो उसने उसमें पहले एक
- 13:43बड़ा पत्थर रखकर फेंका जब तजुर्बे ने बता
- 13:46दिया कि मंजनी ठीक बन गई है और काम ठीक कर
- 13:49रही है तो हजरत इब्राहिम अल सलाम के हाथ
- 13:51पांव बांधे गए और गले में भी तौके आहीन
- 13:53डाला गया फिर मंजनी में बिठाकर उन्हें
- 13:55फेंका गया एक रिवायत में कि जब हाथ पांव
- 13:58बांधे गए इब्राहीम अल सलाम ने बारगाह खुदा
- 14:01वंदी में हाथ उठाकर कहा ला इलाहा इल्ला
- 14:04अंता सुभान का रब्बुल आलमीन लकल हमद वलकल
- 14:08मुल्क ला इलाहा इल्ला अंत
- 14:13सुभानकल्लाहम्मा
- 14:25हमें अल्लाह ही काफी है और वो बेहतरीन
- 14:28कारसाज है हजरत अबू हुरैर रजि अल्लाह
- 14:30अन्हो से मरब है कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु
- 14:33अलैहि वा वसल्लम ने फरमाया कि जब हजरत
- 14:35इब्राहीम अल सलाम को आग में डाला गया तो
- 14:37उन्होंने कहा ऐ मेरे अल्लाह तू आसमान में
- 14:40तन्हा और जमीन में तेरी इबादत करने वाला
- 14:43तन्हा है एक रिवायत में कि उसी दौरान
- 14:45आसमान के मजज फरिश्ते बारगाह
- 14:48[संगीत]
- 14:49खुदाबख्श
- 14:56आतिश किया जा रहा है हमारे मालिक तो उनको
- 14:59को बचाने के लिए हमको हुकम दे हुकम हुआ
- 15:01जाओ अगर इब्राहीम तुम्हारी मदद कबूल कर ले
- 15:04तो बेशक तुम उनकी इमदाद करो वो फरिश्ते
- 15:07जमीन पर नाजिल हुए और हजरत इब्राहीम अलैहि
- 15:09सलाम की खिदमत में मदद करने की ख्वाहिश की
- 15:11हजरत इब्राहिम अलैहि सलाम ने इमदाद कबूल
- 15:13करने से इंकार कर दिया फिर वो फरिश्ते आए
- 15:16जो हवा और पानी पर मुता है फरिश्ता हवा ने
- 15:18कहा कि आप कहें तो हम आंधी के जरिए इसहाक
- 15:21को मुंतशिर कर दें आपने फरमाया मैं मौका
- 15:23इम्तिहान में हूं मुझे तुम्हारी इमदाद की
- 15:26जरूरत नहीं है फिर पानी वाला फरिश्ता आगे
- 15:28बढ़ा और उसने भी कहा कि अगर आप कहे तो
- 15:30पानी बरसाक आप को बुझा दूं इरशाद हुआ
- 15:33जरूरत नहीं है अल गर्ज हजरत इब्राहीम अल
- 15:35सलाम को मंजनी में रखकर फेंका गया वह हवा
- 15:38में उलट पलटते जा रहे थे कि हजत जिब्रील
- 15:40अल सलाम ने बढ़कर इस्तकबाल किया और उनसे
- 15:43मुलाकात करके कहा इब्राहिम तुम्हें कोई
- 15:45हाजत है फरमाया बेशक है लेकिन तुमसे नहीं
- 15:49फिर हजरत जिब्राईल अल सलाम ने कहा कि
- 15:51अच्छा मालिक ही की तरफ रुजू करो कहा सवाल
- 15:55की जरूरत नहीं हमारे हाल का उसे इल्म होना
- 15:58ही काफी है मुख्तसर यह कि हजरत इब्राहिम
- 16:00अल सलाम भड़कते हुए शोलों में पहुंचे फिर
- 16:03नीचे की तरफ आग के दरमियान वारिद हुए
- 16:05फरमाने बारी ताला आग को पहुंच चुका था ऐ
- 16:09आग सलामती के साथ इब्राहिम के लिए ठंडी हो
- 16:11जा आग गुले गुलजार बन गई फूलों की कसरत हो
- 16:14गई सिद्दीका बयान है कि फरिश्तों ने हजरत
- 16:17इब्राहीम अल सलाम को जमीन पर बिठा दिया
- 16:19उनके बैठते ही उनके करीब चश्मा जारी हो
- 16:21गया गुलाब और नर्जश के फूल खिल गए एक
- 16:24रिवायत में हजत इब्राहीम अल सलाम जूं ही
- 16:26वसत आग में पहुंचे हजरत जिब्रील अल सलाम
- 16:29ने फौरन बलूल का एक तख्त बिछाकर उस पर
- 16:31उन्हें बिठाया उनके तख्त पर बैठते ही
- 16:34चश्मा ए आब जारी हुआ और गिर्द गिर्द फूलों
- 16:36के दरख्त नुमाया हो गए एक रिवायत में कि
- 16:39जली हुई लकड़ियों के बाकी हिस्से को जो
- 16:41जलने से रह गया था उसे हजरत जिब्रील अल
- 16:43सलाम ने जमीन में नसर कर दिया और उससे हरे
- 16:46भरे दरख्त पैदा हो गए जिनमें ताजे फूल लगे
- 16:48हुए थे उसी दौरान में नमरूद ने अपने मीनार
- 16:51पर जाकर इब्राहिम अल सलाम की तरफ जो निगाह
- 16:54की तो उन्हें जन्नत नुमा गुलजार में बैठा
- 16:56हुआ देखा उसे ख्याल था कि वह जल भुन करर
- 16:58राख हो गए होंगे जब उसने उन्हें इस हाल
- 17:00में देखा तो बहुत हैरान हुआ और उसके दिल
- 17:03में ख्याल पैदा हो गया कि आपको यह आग नहीं
- 17:05जला सकी और आप सही और सालिम बरामद होंगे
- 17:09तो लाजन मेरे लिए और ज्यादा मुजर साबित
- 17:11होंगे यही कुछ सोचकर उसने अपने कार कोनों
- 17:14को हुकम दिया कि मंजनी के जरिए से
- 17:16इब्राहिम पर पत्थर फेंके जाए चुनांचे
- 17:19बड़े-बड़े पत्थर उस राख में फेंके गए वो
- 17:21पत्थर ब रिवायत अजाब उल कस सफा नंबर 88 एक
- 17:25मकाम पर हवा में जमा हो गए और ब हुक्मे
- 17:28खुदा बादलों की सूरत इख्तियार करके बरसने
- 17:31लगे जिसके नतीजे में उस हिस्से के अलावा
- 17:33जो गुलजार बना हुआ था जिस कदर भी आग इस
- 17:36तवील चार दीवारी में थी सब बुझ गई अल्लामा
- 17:40मस्जिद तहरीर फरमाते हैं कि दुनिया में
- 17:42सबसे पहले जो मंजनी बनाई गई थी वह वही थी
- 17:45जिसमें रखकर हजरत इब्राहिम अल सलाम को आग
- 17:47में डाला गया य मंजनी मकाम कूसा में जो
- 17:51कूफा के एक गांव कंजारा में वाक शैतान के
- 17:54हाथों बनी थी उन्होंने हयातुल कुलूब के
- 17:56सफा नंबर 90 में तहरीर फरमाया कि हजरत
- 17:59इब्राहीम अल सलाम को जब हाथ पांव बांधकर
- 18:01मंजनी में रखा तो उनके चाचा आजर जो हुकूमत
- 18:05नमरूद का वजीर था हजरत इब्राहिम अ सलाम के
- 18:07पास आया और उनके रुख और उनके रुख मुबारक
- 18:10पर एक तमाचा मारकर कहा अब भी अपनी हरकत से
- 18:12बाज आा और नमरूद की खुदाई को तस्लीम कर ले
- 18:15हजरत इब्राहीम अल सलाम ने फरमाया जो खुदा
- 18:17है खुदाई उसी की तस्लीम की जाएगी और उसी
- 18:20की तस्लीम शुदा है यह ना खुदा है ना इसकी
- 18:22खुदाई मानी जा सकती
- 18:25है एक हदीस में है कि हजरत इब्राहीम अल
- 18:27सलाम के लिए आग ठंड हुई तो उसका असर तीन
- 18:30दिन तक दुनिया की तमाम आग पर रहा और उसमें
- 18:33ठंडक आ गई थी उलमा फरमाते हैं कि अगर
- 18:36अल्लाह ताला ठंडी के साथ सलामती वाली ना
- 18:39कहता तो उस आग की ठंडक हजरत इब्राहिम अल
- 18:43सलाम के लिए ना काबिले बर्दाश्त होती
- 18:45बहरहाल यह एक बड़ा मोजा है जो आसमान से
- 18:47बातें करती हुई दहकती भड़कती आग के
- 18:50गुलेगुलजार बन जाने की सूरत में हजरत
- 18:52इब्राहीम अल सलाम के लिए अल्लाह की मसयत
- 18:55से जाहिर हुआ और इस तरह अल्लाह ने अपने
- 18:57नबी को मुशरिकीन की शैतानी साजिशों से
- 19:00महफूज फरमाया अल्लामा इब्ने कसीर कसल
- 19:03अंबिया में तहरीर करते हैं कि इब्ने
- 19:05अब्बास रजि अल्लाह अनहम और सईद बिन
- 19:09मुसब्बर
- 19:12साने वाला फरिश्ता सख्त इस्तरा और परेशानी
- 19:16के आलम में कह रहा था कि कब मुझे हुकुम
- 19:18मिले कि मैं मूसलाधार बारिश बरसा हं लेकिन
- 19:21अल्लाह का हुकम उसकी सोच से भी ज्यादा
- 19:22बर्क रफ्तार था और अल्लाह ने खुद ही आग को
- 19:25हुकम फरमा दिया उन नाजुक लम्हा में हजरत
- 19:28जिब्रील अल सलाम उनके साथ थे और आप अलैहि
- 19:30सलाम की जबीन अथर पेशानी से पसीना पहुच
- 19:33रहे थे उस पसीने के अलावा कोई और तकलीफ
- 19:35आपको नहीं पहुंची हजरत काब बिन अखबार रजि
- 19:38अल्लाह अन्हो बयान फरमाते हैं कि जिस रोज
- 19:40हजरत इब्राहिम अलैहि सलाम को आतिशे नमरूद
- 19:42के सुपुर्द किया गया उस रोज आग से तपिश और
- 19:45गरमाइल कर दी गई थी जिसकी बिना पर ना
- 19:48लोगों के चूल्हे गर्म हो सके और ना ही आग
- 19:51से कोई काम लिया जा सका हजरत काब रजि
- 19:53अल्लाह अन्हो ने मजीद फरमाया कि उस रोज आग
- 19:55ने हजरत इब्राहिम अलैहि सलाम से बंधी हुई
- 19:57रस्सी के अलावा कुछ और ना जलाया हजरत सादी
- 20:01रहमतुल्लाह अल फरमाते हैं कि हजरत
- 20:02इब्राहीम अल सलाम के साथ साया करने वाला
- 20:05फरिश्ता भी था और एक मिल तक साया ठंडक और
- 20:07सलामती थी और सरसब्ज बाग गुलो गुलजार बन
- 20:11गया था जबकि आसपास आग अपने शोलों शरार के
- 20:14साथ भड़क रही थी और लोग हजरत इब्राहिम अल
- 20:17सलाम की तरफ देख रहे थे सुभान अल्लाह हजरत
- 20:20अबू हुरैरा रजि अल्लाह अन्हो से मरब है कि
- 20:23हजरत इब्राहिम अल सलाम के वालिद के कहे
- 20:25हुए कलमा में सबसे अच्छे कलमा वह हैं जो
- 20:27आजर ने अपने बेटे को आग के अंदर इस हालत
- 20:30में देखते हुए कहे जिसका तर्जुमा है ऐ
- 20:33इब्राहिम तेरा परवरदिगार बेहतरीन
- 20:35परवरदिगार है इब्ने असकर रहमतुल्ला अल
- 20:38हजरत अक्रमा रजि अल्लाह अन्हो से रिवायत
- 20:40करते हैं कि हजरत इब्राहीम अल सलाम की
- 20:42वालिदा ने जब अपने लखते जिगर को गुल
- 20:44गुलजार में यूं मुतमइन देखा तो पुकारा ऐ
- 20:47मेरे बेटे मैं भी तेरे पास आना चाहती हूं
- 20:50अल्लाह से दुआ कर कि तेरे इर्दगिर्द की आग
- 20:52की हरारत से मुझे निजात दे तो हजरत
- 20:55इब्राहिम अलैहि सलाम ने अर्ज किया जी
- 20:57अम्मा फिर आपकी वालिदा हजरत इब्राहिम अल
- 20:59सलाम की जानिब चली और आग ने उन्हें कुछ ना
- 21:01कहा फिर बेटे के पास पहुंचकर बेटे को गले
- 21:04लगाया और बोसा देकर वापस लौटा आई हजरत
- 21:07मिन्हाल बिन उमरो से मरब है फरमाते हैं कि
- 21:10मुझे खबर पहुंची कि हजरत इब्राहिम अलैहि
- 21:12सलाम वहां गुलो गुलजार में 40 से 50 दिन
- 21:14ठहरे उन्होंने फरमाया कि दिनों और रातों
- 21:17में मैंने उससे अच्छी जिंदगी नहीं गुजारी
- 21:20और मेरी तमन्ना रही कि मेरी तमाम जिंदगी
- 21:22इसी तरह की हो जाए कुफा और मुशरिकीन हजरत
- 21:25इब्राहीम अल सलाम से इंतकाम लेना चाहते थे
- 21:27मगर जलील रुसवा हो गए बुलंद होना चाहा
- 21:30लेकिन पस्त खार हो गए गालिब होना चाहा मगर
- 21:33मगलू हो गए कसल अंबिया अल्लामा इब्ने कसीर
- 21:37सफा 168 169 शायर मशरिक हजरत अल्लामा
- 21:42इकबाल रहमतुल्ला अल ने हजरत इब्राहीम अल
- 21:44सलाम के इश्क हकीकी को बड़े खूबसूरत अंदाज
- 21:46में पेश किया है फरमाते हैं बे खतर कूद
- 21:50पड़ा आतिशे नमरूद में इश्क अकल है महब
- 21:53तमाशा ए लबे बाम अभी हजरत इब्राहिम अल
- 21:56सलाम को आग में फेंके जाने का वा
- 21:59और इसमें छिपकली का किरदार जिसके बारे में
- 22:01तारीख की किताबों में मखन ने लिखा है कि
- 22:04जब नमरूद ने हजरत इब्राहीम अल सलाम को
- 22:06अल्लाह रब्बुल इज्जत की वहदा नियत की दावत
- 22:08देने पर आग में डालने का हुकम दिया तो उस
- 22:11वक्त यह वाकया कुर्र अर्श का एक कर्ब नाक
- 22:13सानेहा था जिसका जिक्र इंसानों के अलावा
- 22:16चरि परिन जिन्नो इन सबके दरमियान हुआ इस
- 22:19मौके पर एक रिवायत के मुताबिक जब चटी और
- 22:21छिपकली के दरमियान इस वाकए का जिक्र हुआ
- 22:23तो चटी ने हजरत इब्राहिम अल सलाम की
- 22:26हिमायत की जबकि छिपकली इने नमरूद की तरफ
- 22:28दा ी की थी एक और रिवायत के मुताबिक जब
- 22:31हजरत इब्राहिम अल सलाम को आग में डाल दिया
- 22:33गया इस मौके पर छोटे परिंदे भी अपनी इस्ता
- 22:36के मुताबिक अपनी चोंच में पानी भर के उस
- 22:38आग में डाल रहे थे ताकि यह आग हजरत
- 22:40इब्राहिम अल सलाम के लिए ठंडी हो सके इसी
- 22:43मौके पर यही छिपकली थी जोस आग को अपनी
- 22:45फूको से मजीद भड़काने की कोशिश कर रही थी
- 22:48एक और रिवायत के मुताबिक एक बार एक सहाबी
- 22:51फकी बिन मुगरा रजि अल्लाह अन्हो की आजाद
- 22:54करदाई गुलाम औरत जब बीबी आयशा रजि अल्लाहु
- 22:57अन्हा के घर गई
- 22:59तो उन्होंने वहां एक नेजा पड़ा हुआ देखा
- 23:01उन्होंने बीबी आयशा रजि अल्लाह अन्हा से
- 23:03दरयाफ्त किया कि इसका क्या मकसद है तो
- 23:06उन्होंने जवाब दिया कि यह छिपकली को मारने
- 23:08के लिए है क्योंकि हुजूर अकरम सल्लल्लाहु
- 23:10अलैहि वा वसल्लम ने बताया है कि जब सारे
- 23:13जानवर हत इब्राहीम अल सलाम को बचाने की
- 23:15कोशिश कर रहे थे तब यह छिपकली वाहिद जानवर
- 23:18थी जिसने आग को भड़काने की कोशिश की थी
- 23:21हजरत फातिहा बिन मुगरा की आजाद करदा लौंडी
- 23:24साहिबा से रिवायत है कि सैयदा आयशा रजि
- 23:27अल्लाह अन्हा के पास एक नेजा हुआ करता था
- 23:29मैंने उनसे पूछा कि आप इससे क्या काब लेती
- 23:32हैं फरमाया कि हम इससे छिपकलियों मारते
- 23:35हैं क्योंकि हमें अल्लाह के नबी
- 23:36सल्लल्लाहु अलैहि वा वसल्लम ने बताया है
- 23:39कि जब हजरत इब्राहिम अल सलाम को आग में
- 23:41डाला गया तो जमीन के सब जानवर आग बुझाने
- 23:44में मसरूफ थे सिवाय छिपकली के वह आग को
- 23:47तेज करने के लिए फूंके मारती थी चुनांचे
- 23:49रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम
- 23:51ने उसे मारने का हुकुम दिया है सुनन बी
- 23:55माजा हदीस नंबर
- 23:573231 सुन उन्होंने मसनद अहमद हदीस नंबर
- 24:006504 नाजरीन हजरत इब्राहिम अल सलाम को जब
- 24:03आग में डाला गया तो आप अल सलाम की उम्र 16
- 24:06या 20 साल थी आप अल सलाम कितनी मुद्दत तक
- 24:09आग में रहे इस सिलसिले में तीन अकबाल हैं
- 24:12बाज मुफस्सिर कहते हैं कि आप सात दिन तक
- 24:14आग में रहे मोखन का बयान है कि आतिश नमरूद
- 24:17के गुलजार बनने के वाकत और उसके दीगर
- 24:19हालात देखकर हजरत लूत अल सलाम और जनाब
- 24:23सारा ने ईमान जाहिर किया और नमरूद की बेटी
- 24:26राजा भी ईमान लाई हजरत लूत अल सलाम हजरत
- 24:29इब्राहिम अल सलाम के चचा जाद भाई थे और
- 24:31जनाब सारा चचा जाद बहन थी नमरूद की बेटी
- 24:34के ईमान लाने के मुतालिक अल्लामा अब्दुल
- 24:37वाहिद बिन मोहम्मद अल मुफ्ती ब हवाला
- 24:39मारिज उल नबूवत में लिखते हैं कि नमरूद की
- 24:42बेटी राजा बड़ी जीरक और होशियार लड़की थी
- 24:45उसने जब हजरत इब्राहीम अलैहि सलाम के आग
- 24:47में डाले जाने को देखा तो बड़े इसरार से
- 24:49अपने वालिद को इस बात पर राजी किया कि उसे
- 24:52उस मीनार पर जाने की इजाजत दी जाए जिस पर
- 24:54सब लोग बैठकर हजरत इब्राहिम अल सलाम को
- 24:56देख रहे हैं चुनांचे नमरूद ने इजाजत दे दी
- 24:59और वह उस मीनार पर जा पहुंची वहां पहुंचकर
- 25:02उसने हालात देखे उसे देखकर बड़ा ताज्जुब
- 25:04हुआ कि आग गुले गुलजार बन गई और बलोर का
- 25:07तख्त उनके लिए लाया गया है उसने बे साख
- 25:09आवाज दी ऐ इब्राहिम मैं यह क्या देख रही
- 25:12हूं ऐ इब्राहिम यह हालात क्यों कर पैदा
- 25:14हुए खुदा ने उसकी आवाज हत इब्राहीम अल
- 25:17सलाम तक पहुंचा दी हजरत इब्राहिम अल सलाम
- 25:19ने जवाब दिया जिसके दिल में अल्लाह की
- 25:21मारफ हो उसे आग जला नहीं सकती उसने कहा कि
- 25:24क्या मुझे इजाजत है कि मैं आग में आप तक आ
- 25:27जाऊं आपने ने फरमाया तू कलमा पढ़ ले तो
- 25:30हमारे पास आ सकती है उसने कलमा पढ़ा और
- 25:33चुपके से उतर कर हजरत इब्राहिम अलैहि सलाम
- 25:35के पास जा पहुंची जब आग के करीब पहुंची
- 25:38उसे आग के किसी हिस्से ना नुकसान ना
- 25:40पहुंचाया और व हजरत इब्राहीम अल सलाम तक
- 25:42जा पहुंची वहां पहुंचकर उसने अपने ईमान की
- 25:45तजी की और वापस अपने घर बाप के पास चली गई
- 25:49नमरूद को जब अपनी बेटी के ईमान लाने का
- 25:51वाकया मालूम हुआ तो वह आग बगुला हो गया और
- 25:53अपनी बेटी से कहने लगा कि तौबा कर उसने
- 25:56इंकार किया फिर उसने जिद्द की और डराया
- 25:59मगर उसने परवाह नाना की नमरूद जब उसे
- 26:01समझाने से आजिज हो गया तो उसने अपनी बेटी
- 26:03को जल्लादों के हवाले कर दिया जल्लादों ने
- 26:06उसे धूप में लिटा करर उसके हाथ और पांव
- 26:08में मेखे ठोक दी इधर जल्लादों ने उसे सजा
- 26:10दी इधर खुदा वंदे ताला ने हजरत जिब्राइल
- 26:13अलसलाम को हुकम दिया कि मेरी कनीज को वहां
- 26:16से तंदुरुस्त करके इब्राहिम तक पहुंचा दो
- 26:18यह वाकया हजरत इब्राहीम अलैहि सलाम के आग
- 26:20से निकलने के बाद का है हजरत जिब्रील अल
- 26:23सलाम ने नमरूद की बेटी राजा को हजरत
- 26:25इब्राहिम अल सलाम की खिदमत में पहुंचा
- 26:27दिया चुनांचे वो उन्हीं के पास रही बिलार
- 26:30उन्होंने उसकी शादी अपने एक फर्जंद मदन के
- 26:33साथ कर दी जो कि सारा हाजरा के इलावा कतरा
- 26:37बीवी से था फिर खुदा ने उसे यह इज्जत दी
- 26:39कि उसके सिलसिला रहम में बहुत से अंबिया
- 26:41को पैदा किया बेशक यह दीन इस्लाम का हुस्न
- 26:44है कि जो भी उसकी आगोश में आ गया उसकी
- 26:46दुनिया और आखिरत दोनों संभर गई हजरत
- 26:49इब्राहीम अल सलाम के असवा ए हसना से लमाए
- 26:53हक को सबक लेना चाहिए कि बातिल परस्तों के
- 26:56मुकाबले में हर किस्म के खौफ और हिरास और
- 26:58तकाली से बे नियाज होकर आखिरी दम तक डटे
- 27:02रहना चाहिए और यह ईमान और यकीन रखना चाहिए
- 27:05कि जरूर जरूर नुसरत खुदा वंदी हमारी इमदाद
- 27:09और दस्तगिरी फरमाए गी और
- 27:27बिलखिरिया त यह है कि आपके अवाए हसना पर
- 27:29अमल करने वाले जरूर जरूर कामयाबी से हम
- 27:33किनार होंगे नाजरीन यह थी हमारी आज की
- 27:36वीडियो हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी
- 27:38आज की यह वीडियो जरूर पसंद आई होगी अगर
- 27:41आपको हमारी आज की यह वीडियो पसंद आई है तो
- 27:43आपसे गुजारिश करते हैं कि आप हमारे चैनल
- 27:45को जरूर सब्सक्राइब कर लें और साथ ही लगे
- 27:48बेल के बटन को भी प्रेस कर लें ताकि आपके
- 27:50पास हमारी आने वाली मजीद मालूमात वीडियोस
- 27:53का नोटिफिकेशन
- 27:55बरवै के साथ-साथ हमारी वीडियोस को लाइक भी
- 27:57करें और अपनी कीमती राय का इजहार कमेंट्स
- 28:00में जरूर करें कमेंट्स में आप अपने सवालात
- 28:02भी हम तक पहुंचा सकते हैं अल्लाह ताला
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This page contains the full transcript of Hazrat Ibrahim (A.S.) Aur Namrood Ki Beti Ka Waqia: Ek Sabak Amoz Kahani | Muslim Matters TV by Muslim Matters TV, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,124 words across 613 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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