अल्लाह ने इंसान को कैसे बनाया? | Hazrat Adam (A.S.) Story | How Allah Created Human| Hidayat-e-Islam — Transcript
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- 0:00जब इस दुनिया में इंसानों का नामोनिशान तक
- 0:02नहीं था। हर तरफ सिर्फ खामोशी थी। ना कोई
- 0:06जानवर ना कोई जिंदगी का निशान। उस वक्त एक
- 0:09दिन अल्लाह रब्बुल आलमीन ने अपने तमाम
- 0:12फरिश्तों को हुक्म दिया। ऐ मेरे फरिश्तों
- 0:16मेरे अर्श अज़म के करीब सब इकट्ठा हो जाओ।
- 0:20अल्लाह रब्बुल आलमीन का हुक्म मिलते ही
- 0:23बेहिसब फरिश्ते रोशनी की तरह चमकते हुए उस
- 0:26जगह हाजिर हो गए। तब अल्लाह ताला ने
- 0:29फरमाया मैं जमीन पर अपना एक नुमाइंदा
- 0:32भेजना चाहता हूं। यह सुनकर फरिश्ते हैरान
- 0:34हो गए। उनकी पेशानियों पर सवाल थे और
- 0:37दिलों में तज्जुब। उन्होंने अदब से अर्ज
- 0:40किया ऐ हमारे परवरदिगार क्या आप ऐसी मखलूक
- 0:44को जमीन पर भेजना चाहते हैं जो वहां फसाद
- 0:47करेगी, खून खराबा मचाएगी। हालांकि हम तो
- 0:50हर वक्त आपकी तस्बीह और इबादत में मशगूल
- 0:53रहते हैं। फिर नया खलीफा बनाने की क्या
- 0:55जरूरत है?
- 0:56[संगीत]
- 0:56उनकी बात सुनकर अल्लाह रब्बुल आलमीन ने
- 0:58फरमाया ए मेरे फरिश्तों मैं वह जानता हूं
- 1:02जो तुम नहीं जानते कौन मेरी इबादत करेगा
- 1:04और कौन नाफरमानी इसका इल्म सिर्फ मेरे पास
- 1:07है। मैंने तुमसे मशवरा नहीं मांगा सिर्फ
- 1:10बताया है। अल्लाह ताला की यह बात सुनते ही
- 1:13फरिश्तों के दिल कांप उठे। उन्होंने अपनी
- 1:16गलती महसूस की और फौरन तौबा कर लिया। फिर
- 1:19सजदे में गिरकर अल्लाह से माफी मांग ली।
- 1:22फिर अल्लाह ताला ने अपने चार अजीम
- 1:24फरिश्तों को बुलाया। हजरत जिब्राइल, हजरत
- 1:27मिखाइल, हजरत इसराफल और हजरत इजराइल
- 1:31अलैहिसलाम। हुक्म मिलते ही अल्लाह रब्बुल
- 1:34आलमीन की बारगाह में हाजिर हुए। सबसे पहले
- 1:38अल्लाह ने हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम को
- 1:40हुक्म दिया। ऐ जिब्राइल जमीन पर जाओ और
- 1:44वहां से एक मुट्ठी मिट्टी लेकर आओ जिससे
- 1:46मैं अपना खलीफा पैदा करूंगा। हजरत इजराइल
- 1:49अलैहिस्सलाम जमीन पर तशरीफ लाए और मिट्टी
- 1:52उठाने लगे। मगर मिट्टी रोने लगी। गिड़गिड़ा
- 1:56कर बोली ए जिब्राइल मुझे कहां ले जा रहे
- 1:59हो? जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने फरमाया मैं
- 2:02तुम्हें अल्लाह के पास ले जा रहा हूं। वो
- 2:04तुमसे एक ऐसी मखलूक पैदा करेंगे जो जमीन
- 2:07पर उनका नुमाइंदा होगी। यह सुनते ही
- 2:10मिट्टी और ज्यादा रोने लगी और बोली ऐ
- 2:12जिब्राइल मुझे मत ले जाओ। मुझसे जिन
- 2:15इंसानों को पैदा किया जाएगा वो अल्लाह की
- 2:18नाफरमानी करेंगे। फिर जब अल्लाह का अज़ाब
- 2:20उतरेगा तो मैं भी तो उनके जिस्म में
- 2:22रहूंगी। वह अज़ाब मुझे भी झेलना पड़ेगा और
- 2:26अल्लाह के अज़ाब को सहने की ताकत मेरे पास
- 2:28नहीं है। मेरी तरफ से अल्लाह से माफी मांग
- 2:31लेना। मिट्टी की यह दर्द भरी पुकार सुनकर
- 2:34हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम खाली हाथ वापस
- 2:37लौट आए और अल्लाह के दरबार में जाकर पूरी
- 2:40बात बयान कर दी। फिर अल्लाह ताला ने हजरत
- 2:43मिखाइल अलैहिस्सलाम को भेजा। वो भी जमीन
- 2:46पर तशरीफ लाए। मगर मिट्टी ने उसी दर्द से
- 2:49[संगीत] फरियाद की और मिखाइल अलैहिस्सलाम
- 2:52भी खाली हाथ लौट आए। इसी तरह हजरत इजराफील
- 2:56अलैहिस्सलाम भी जमीन पर तशरीफ लाए मगर
- 2:59मिट्टी [संगीत] की आह सुनकर उनका दिल भी
- 3:01पिघल गया और वह भी मिट्टी उठाए बिना ही
- 3:03लौट आए। तीनों फरिश्ते खाली हाथ [संगीत]
- 3:06वापस आ गए। आखिरकार अल्लाह रब्बुल आलमीन
- 3:09ने हजरत इजराइल अलैहिस्सलाम [संगीत]
- 3:12को जमीन पर भेजा। जब इजराइल अलैहिसलाम
- 3:15जमीन पर तशरीफ लाए तो मिट्टी ने फिर वही
- 3:18इल्तजा की और बोली ए इजराइल मुझे मत ले
- 3:21जाओ मुझे यहीं छोड़ दो लेकिन इजराइल
- 3:24अलैहिसलाम ने फरमाया ए मिट्टी मैं
- 3:27तुम्हारी बात पर लौट नहीं सकता क्योंकि
- 3:30मुझे अल्लाह का हुक्म मिला है और मैं अपने
- 3:32रब के हुक्म की खिलाफवर्जी कभी नहीं
- 3:35करूंगा यह कहकर उन्होंने मिट्टी उठाई और
- 3:37अल्लाह के दरबार में लौट आए अल्लाह ताला
- 3:40ने बहुत खुश होकर फरमाया ए इजराइल क्योंकि
- 3:43तुमने मेरा हुक्म पूरा किया। मैं तुम्हें
- 3:46एक खास जिम्मेदारी देता हूं। इंसानों की
- 3:49रूहें कब्ज करने की जिम्मेदारी। इजराइल
- 3:51अलैहिसलाम ने अर्ज किया ऐ अल्लाह जब मैं
- 3:56इंसानों की रूह निकालूंगा तो उनके घर वाले
- 3:58मुझसे नफरत करेंगे और मुझे ही इल्जाम
- 4:01देंगे। अल्लाह ताला ने फरमाया तुम फिक्र
- 4:04मत करो। हर मौत के लिए मैं अलग-अलग सबब
- 4:07बना दूंगा। कोई बीमारी से जाएगा, कोई
- 4:10हादसे से तो कोई बुढ़ापे से। लोग तुम्हें
- 4:13इल्जाम नहीं देंगे। यह सुनकर इजराइल
- 4:15अलैहिसलाम का दिल मुतमिन हो गया। और फिर
- 4:18फरिश्तों ने अल्लाह के हुक्म से उस मिट्टी
- 4:21को मक्का शरीफ [संगीत] के करीब एक पहाड़ी
- 4:23पर रख दिया। बरसात की बूंदों से वो मिट्टी
- 4:26भीगती रही। धूप से सूखती रही और यूं कई
- 4:29साल गुजर गए। आखिर अल्लाह की कुदरत से उसी
- 4:33मिट्टी से हजरत आदम अलैहिस्सलाम का पुतला
- 4:36बन गया। अल्लाह ने फरिश्तों को हुक्म दिया
- 4:39इस जिस्म को जन्नत में ले जाओ। फरिश्तों
- 4:42ने अदब से हुक्म माना और आदम अलैहिस्सलाम
- 4:46के जिस्म मुबारक को उठाकर जन्नत में ले गए
- 4:49और फिर लंबे अरसे तक वो जिस्म वहीं पड़ा
- 4:52रहा। बिना रूह के बिल्कुल बेजान। फरिश्ते
- 4:55उसके करीब आते और उसे गौर से देखकर कहते
- 4:59यही है वो जिस्म। यही होगा अल्लाह ताला का
- 5:02खलीफा जमीन पर। मगर फरिश्तों का सरदार
- 5:05आजाजील जो उस वक्त तक शैतान नहीं बना था।
- 5:09वो हमेशा हंसता, ताने मारता और आदम
- 5:12अलैहिस्सलाम के जिस्म का मजाक उड़ाता। वो
- 5:15सरदार था इसलिए कोई फरिश्ता उसे कुछ कहने
- 5:18की हिम्मत नहीं करता। फिर अल्लाह रब्बुल
- 5:20आलमीन ने अपने चारों अजीम फरिश्तों हजरत
- 5:24जिब्राइल, हजरत माखाइल, हजरत इजराफील और
- 5:27हजरत इजराइल [संगीत] अलैहिस्सलाम को
- 5:30बुलाया और फरमाया ऐ मेरे फरिश्तों तुम
- 5:34अर्श अज़म पर जाओ और वहां से आदम
- 5:37अलैहिस्सलाम की रूह लेकर आओ। फिर उसे उनके
- 5:40जिस्म में दाखिल कर दो। अल्लाह रब्बुल
- 5:43आलमीन का हुक्म [संगीत] मिलते ही चारों
- 5:45फरिश्ते अर्श अज़म की तरफ रवाना हो गए।
- 5:48उन्होंने आदम अलहसलाम की मुबारक रूह को
- 5:50कीमती हीरे जवाहरात से सजे एक खूबसूरत
- 5:53[संगीत] प्याले में रखा और अदब के साथ
- 5:55उनके जिस्म के पास ले आए। उस वक्त आसमान
- 5:58के तमाम फरिश्ते खुशी से झूम उठे। हर तरफ
- 6:01नूर ही नूर था। सब मिलकर उस पाक मौके में
- 6:04शरीक हुए। लेकिन वही अजाजील जो बाद में
- 6:07इब्लीस बना। अल्लाह के इस फैसले से
- 6:10बिल्कुल खुश नहीं था। उसके दिल में
- 6:12तकब्बुर की चिंगारी सुलगने लगी थी। फिर
- 6:14अल्लाह ताला ने हुक्म दिया ऐ आदम अब रूह
- 6:18तेरे जिस्म में दाखिल हो जाए और बस उसी
- 6:21लम्हे आदम अलैहिस्सलाम की रूह उनके जिस्म
- 6:24मुबारक में दाखिल कर दी गई जैसे ही रूह ने
- 6:27जिस्म को छुआ उनके अंग अंग में जान दौड़
- 6:30गई उनकी आंखें खुली हाथपांव हिले और जिस्म
- 6:34जिंदा [संगीत] हो गया धीरे-धीरे वो उठकर
- 6:37बैठ गए और उनकी जुबान से पहली सदा निकली
- 6:41अल्हम्दुलिल्लाह
- 6:42यह लफज़ सुनकर अल्लाह रब्बुल आलमीन बहुत
- 6:45खुश हुए। आदम अलहि्स सलाम ने अपनी पहली
- 6:48नेमत मिलने पर शुक्र अदा करने के लिए दो
- 6:51रकात नमाज अदा की। जब उनकी नमाज मुकम्मल
- 6:54हुई तो हीरे जवाहर और सोने चांदी से सजा
- 6:57एक खूबसूरत तख्त लाया गया। अल्लाह के
- 7:00हुक्म से हजरत आदम अलैहिस्सलाम उस तख्त पर
- 7:04बैठ गए। और फरिश्ते चारों तरफ इज्जत और
- 7:07मोहब्बत से झुके हुए थे। फिर अल्लाह ताला
- 7:09ने फरमाया ऐ मेरे फरिश्तों आदम को इज्जत
- 7:13दो और उन्हें सजदा करो। अल्लाह का हुक्म
- 7:16मिलते ही करोड़ों फरिश्ते सजदे में गिर
- 7:19पड़े। हर तरफ नूर का सैलाब फैल गया। जब
- 7:22फरिश्तों ने सजदे से सिर उठाया [संगीत] तो
- 7:25देखा सिर्फ अजाजील खड़ा रह गया। बाकी सब
- 7:28आदम अलैहिस्सलाम को सजदा कर चुके थे। मगर
- 7:31अजाजील के चेहरे पर नफरत और घमंड साफ झलक
- 7:34रहा था। तब अल्लाह ताला ने अजाजील की तरफ
- 7:37रुख करके फरमाया ऐ अजाजील तूने मेरा हुक्म
- 7:41क्यों नहीं माना? अजाजील ने घमंड भरे लहजे
- 7:44में कहा आपने आदम को मिट्टी से पैदा किया
- 7:47और मुझे आग से बनाया। आग की फितरत तो ऊपर
- 7:50उठने की है और मिट्टी की फितरत नीचे गिरने
- 7:53की। तो अगर किसी को सजदा करना चाहिए तो
- 7:56आदम को मुझे करना चाहिए। अजाजील की यह बात
- 7:59सुनकर अल्लाह रब्बुल आलमीन का गजब भड़क
- 8:02उठा। अल्लाह ने फरमाया ए नाफरमान तू यहां
- 8:06से निकल जा। तूने मेरा हुक्म नहीं माना।
- 8:09आज से तू हमेशा के लिए लानत और सज्जा का
- 8:12हकदार बन गया। बस उसी वक्त जो कभी
- 8:15फरिश्तों का सरदार था वो लानत के साथ
- 8:17इब्लीस और शैतान बन गया। जब उसे जन्नत से
- 8:21निकाला गया तो वह रोने लगा और कहने लगा ऐ
- 8:24अल्लाह मैंने कितने अरसे तक तेरी इबादत की
- 8:27है। फरिश्तों को सिखाया है। तेरी खिदमत की
- 8:31है तो तेरी रहमत से कुछ मांगना चाहता हूं।
- 8:34मेरी इल्तजा कुबूल कर ले। अल्लाह ताला ने
- 8:37फरमाया क्या चाहता है तू? शैतान बोला ऐ
- 8:41मालिक मुझे कयामत [संगीत] तक की जिंदगी
- 8:43अता कर दीजिए। अल्लाह ने फरमाया ठीक है।
- 8:46तुझे कयामत तक की जिंदगी दे दी जाएगी। फिर
- 8:49शैतान ने कहा ए मालिक आज जिस बनी आदम की
- 8:53वजह से मैं जन्नत से निकाला गया उनके
- 8:55जिस्म उनकी रगों में मैं दाखिल हो सकूं यह
- 8:59ताकत मुझे अता कर दीजिए अल्लाह ताला ने
- 9:01फरमाया तुझे यह ताकत दी जाती है लेकिन सुन
- 9:05ले ऐ शैतान तू मेरे बंदों को धोखा दे सकता
- 9:09है उन्हें गुनाहों में गिरा सकता है लेकिन
- 9:12अगर मेरा कोई बंदा तौबा करेगा तो मैं उसके
- 9:15तमाम गुनाह माफ कर दूंगा और मेरे खास
- 9:18बंदों को तू कभी नुकसान नहीं पहुंचा
- 9:20पाएगा। और फिर शैतान को लानत देकर जन्नत
- 9:23से निकाल दिया गया। इसके बाद अल्लाह के
- 9:26हुक्म से हजरत आदम अलैहिस्सलाम का तख्त
- 9:29जन्नतुल फिरदौस में ले जाया गया। वहां आदम
- 9:32अलैहिस्सलाम को पूरी आजादी दी गई कि वो
- 9:35[संगीत] जन्नत की तमाम नेमतों का लुत्फ
- 9:37उठाएं, घूमे फिरे, खाएं, पिए। मगर आदम
- 9:41अलैहिस्सलाम का दिल किसी चीज की तरफ नहीं
- 9:43झुका। वो तनहा बैठे इबादत करते रहते। उनके
- 9:47चेहरे पर एक गहरी उदासी थी। अल्लाह ताला
- 9:50को आदम अलैहिस्सलाम की यह हालत मालूम हुई।
- 9:53तो उन्होंने हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम को
- 9:56आदम अलैहिस्सलाम के पास भेजा। जिब्राइल
- 9:59अलैहिस्सलाम उनके पास तशरीफ लाए और
- 10:02मुस्कुरा कर बोले ऐ आदम जन्नत तुम्हें
- 10:05कैसी लग रही है? इस पर हजरत आदम अलह सलाम
- 10:08ने जवाब दिया ऐ जिब्राइल यहां सब कुछ
- 10:11अच्छा है चारों तरफ सुकून और नेमतें हैं।
- 10:14हर चीज काबिले तारीफ है। लेकिन दिल में एक
- 10:17अजीब सी कमी महसूस होती है जिसे मैं बयान
- 10:20भी नहीं कर पा रहा। जिब्राइल अलैहिस्सलाम
- 10:23मुस्कुराए और बोले हां आदम मैं जानता हूं
- 10:26अल्लाह ने मुझे इसी मकसद से भेजा है।
- 10:29फिक्र मत करो बहुत जल्द तुम्हारी यह कमी
- 10:32पूरी कर दी जाएगी। यह कहकर हजरत जिब्राइल
- 10:35अलैहिस्सलाम वापस लौट गए। और फिर अगले दिन
- 10:38फजर की अजान से पहले जब आदम अलैहिस्सलाम
- 10:42नींद की हल्की आगोश में थे। उसी वक्त
- 10:44[संगीत] हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम अल्लाह
- 10:47के हुक्म से उनके पास तशरीफ लाए। उन्होंने
- 10:50बड़े अदब से हजरत आदम अलैहिस्सलाम की बाई
- 10:53पसली से एक हड्डी निकाली। [संगीत] उस पर
- 10:56गोश्त और चमड़ा चढ़ाया। फिर उसमें नूरानी
- 10:59सांस फूंक दी। और यूं एक नई तखलीक का आगाज
- 11:03हुआ। फौरन वो हड्डी नूर में डूबने लगी।
- 11:06थोड़ी ही देर में उसने एक हसीन औरत का रूप
- 11:09ले लिया जिसके चेहरे से ऐसी रोशनी फूट रही
- 11:12थी जैसे पूरा जन्नत उस नूर से जगमगा उठा
- 11:16हो। हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम मुस्कुराए
- 11:19और हजरत आदम अलैहिस्सलाम के पास आकर धीरे
- 11:22से बोले ए आदम उठिए। आदम अलैहिस्सलाम
- 11:26जागे। उनकी नजर सामने पड़ी और वह हैरान रह
- 11:30गए। उनके सामने एक ऐसी हसीन पाक और नूरानी
- 11:34हस्ती खड़ी थी जिनका चेहरा चांद से ज्यादा
- 11:36[संगीत] रोशन था। जिनकी आंखों में सुकून
- 11:39और रहमत की चमक थी और जिन्हें देखकर दिल
- 11:42में अजीब सी राहत और मोहब्बत [संगीत]
- 11:44उतरती थी। आदम अलैहिस्सलाम उन्हें देखते
- 11:47ही रह गए। तब जिब्राइल अलहसलाम ने फरमाया
- 11:50ए आदम यह हैं आपकी हमसफर आपकी जिंदगी की
- 11:54साथी बीबी हव्वा अलैहिस्सलाम
- 11:57यह सुनते ही आदम अलैहिस्सलाम के चेहरे पर
- 12:00मुस्कुराहट फैल गई दिल का वो खालीपन जो
- 12:03बरसों से था वो [संगीत] पल भर में मिट गया
- 12:06उनके दिल में खुशी की लहर दौड़ गई ऐसी
- 12:09खुशी जो लफ्जों में बयान नहीं की जा सकती
- 12:11थी तफसीरों में आता है कि दुनिया की सारी
- 12:14औरतों में जिसे अल्लाह ताला ने सबसे
- 12:17ज्यादा हुस्न अता किया वो थी बीबी हव्वा
- 12:21अलैहिस्सलाम। आदम अलैहिस्सलाम देर तक
- 12:24उन्हें देखकर अल्लाह का शुक्र अदा करते
- 12:27रहे। धीरे-धीरे वो उनके करीब जाने लगे।
- 12:30मगर जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने अदब से
- 12:33उन्हें रोक लिया और फरमाया ऐ आदम निकाह
- 12:37किए बिना आपके लिए उनके करीब जाना जायज
- 12:39नहीं। पहले आप अल्लाह ताला के दरबार में
- 12:42अपने निकाह की दुआ कीजिए। आदम अलैहिस्सलाम
- 12:45ने सर झुका लिया और वैसा ही किया जैसा
- 12:48हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने फरमाया था।
- 12:52उन्होंने अल्लाह ताला की बारगाह में बीबी
- 12:55हव्वा अलैहिस्सलाम से निकाह के लिए दुआ
- 12:57फरमाई। अल्लाह ताला ने उनकी दुआ कबूल
- 13:00फरमाई और इरशाद फरमाया ऐ आदम मैंने
- 13:03तुम्हारा और हव्वा का निकाह मुकम्मल कर
- 13:05दिया है। अब तुम अपनी बीवी का मेहर अदा
- 13:08करो। आदम अलहसलाम ने अदब से पूछा ऐ मेरे
- 13:11रब यह मेहर क्या होता है? अल्लाह ताला ने
- 13:14इरशाद फरमाया ऐ आदम तुम्हारे निकाह का
- 13:18माहर यह होगा कि तुम मेरे प्यारे हबीब
- 13:21हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम पर
- 13:25कुछ मर्तबा दरूद भेजो। आदम अलैहिसलाम का
- 13:29दिल मोहब्बत से लबरेज हो गया। उन्होंने
- 13:31सिर झुका कर अर्ज किया लब्बैक या रब्बी।
- 13:35फिर उन्होंने पूरे इश्क और खुलूस के साथ
- 13:37हुजूर सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम पर कई
- 13:41मर्तबा दद शरीफ भेजा। उसी के साथ पहला
- 13:44निकाह मुकम्मल हुआ जो इंसानी इतिहास का
- 13:47पहला और सबसे पाक निकाह था। अल्लाह ताला
- 13:50ने हजरत आदम और हव्वा अलैहिस्सलाम को खुशी
- 13:54और सुकून के साथ जन्नत में रहने की इजाजत
- 13:57दी। और फरमाया ऐ आदम सुन लो जन्नत की सारी
- 14:01नेमतें तुम्हारे और हव्वा के लिए हैं। जो
- 14:03चाहो खाओ पियो और इन रहमतों का लुत्फ
- 14:06उठाओ। लेकिन इस एक पेड़ के पास मत जाना और
- 14:10इसके फल को कभी मत खाना। तफसीरों में आता
- 14:14है कि वो पेड़ गेहूं का पेड़ था। हजरत आदम
- 14:18और हव्वा अलैहिसलाम जन्नत में सुकून और
- 14:21मोहब्बत के साथ रहने लगे। हर तरफ नेमतें
- 14:24थी। हर तरफ रहमत का साया था। लेकिन उधर
- 14:27शैतान को जन्नत से निकाल दिया गया था। वो
- 14:30बाहर बैठा हर पल इसी फिक्र में डूबा रहता।
- 14:33कैसे मैं आदम और हव्वा को बर्बाद कर दूं।
- 14:36उसने अपने पुराने इल्म और दुआएं याद की।
- 14:39वो वही वजीफे और इसमें आजम पढ़ने लगा
- 14:42जिनसे [संगीत] वह जन्नत के दरवाजे तक
- 14:44पहुंच सके। आखिरकार उसकी चाले कामयाब हो
- 14:47गई। वह जन्नत के दरवाजे के करीब पहुंच
- 14:49गया। वहां उसने देखा जन्नत की दीवार पर एक
- 14:52मोर बैठा है। मोर ने उसे देखा और पूछा तू
- 14:56कौन है? शैतान बोला, "मैं एक फरिश्ता
- 14:59हूं।" फिर मोर ने उससे पूछा, तो तू यहां
- 15:02क्या चाहता है? शैतान ने चालाकी से कहा,
- 15:05"मैं जन्नत में दाखिल होना चाहता हूं।"
- 15:08मोर ने जवाब दिया, हजरत आदम अलैहिस्सलाम
- 15:12यहां मौजूद हैं। इसलिए किसी और को [संगीत]
- 15:14अंदर जाने की इजाजत नहीं।" शैतान
- 15:16मक्कारियों से मुस्कुराया और बोला, भाई
- 15:19मोर मुझ पर रहम करो। अगर तुम मेरी मदद
- 15:22करोगे तो मैं तुम्हें ऐसी दुआएं सिखाऊंगा
- 15:25जो पढ़ने के बाद तुम कभी बूढ़े नहीं
- 15:27होंगे। कभी मरोगे नहीं और जन्नत से कभी
- 15:30बाहर नहीं निकाले जाओगे। मोर थोड़ा झिझका
- 15:33मगर शैतान ने अपनी मीठी आवाज में इसमें
- 15:36आजम पढ़ना शुरू किया। उसकी आवाज में ऐसा
- 15:40असर था कि मोर का दिल पिघल [संगीत] गया।
- 15:43मोर ने उसकी बात मान ली और उसे जन्नत के
- 15:45दरवाजे तक पहुंचा दिया। वहां एक बड़ा सांप
- 15:48पहरेदारी कर रहा था। मोर ने सारी बात सांप
- 15:51को बताई। सांप ने शैतान से पूछा, तू कौन
- 15:55है? शैतान ने फिर झूठ बोला, "मैं फरिश्ता
- 15:58हूं। मैं अर्श अजीम के नीचे रहा करता था।
- 16:01वहीं मैंने एक ऐसा इसमें आजम सीखा जिसे
- 16:04पढ़ो तो हर मुराद पूरी हो जाती है। सांप
- 16:07की आंखों में लालच चमक उठा। और उसने कहा
- 16:10वो दुआ मुझे भी सिखा दो। शैतान ने
- 16:13मुस्कुराकर कहा जरूर सिखाऊंगा मगर मेरी एक
- 16:17शर्त है सांप ने पूछा कौन सी शर्त? तो
- 16:21शैतान बोला शर्त यह है कि तुम मुझे जन्नत
- 16:24के अंदर दाखिल करा दो। सांप ने लंबी सांस
- 16:27ली और कहा आदम अलैहिस्सलाम के रहते
- 16:31[संगीत] किसी को अंदर ले जाने की इजाजत
- 16:32नहीं है। यह मुमकिन नहीं। और यहीं से
- 16:35शैतान की सबसे खतरनाक चाल शुरू हुई। एक
- 16:39ऐसी [संगीत] चाल जिसने इंसानियत की कहानी
- 16:41का रुख बदल दिया। शैतान की मक्कारी वहीं
- 16:44खत्म नहीं हुई। वो अब एक और चाल चलने वाला
- 16:46था। ऐसी चाल जिससे इंसानियत का पहला
- 16:50इम्तिहान शुरू होना था। शैतान ने सांप की
- 16:52आंखों में देखते हुए चालाकी से कहा। अगर
- 16:55तुम चाहो तो मैं तुम्हारे मुंह के अंदर
- 16:57चला जाऊं। इस तरह तुम जन्नत में भी रहोगे
- 17:00और अल्लाह का हुक्म भी नहीं टूटेगा। सांप
- 17:03ने कुछ पल सोचा। फिर बोला अगर ऐसा हो सके
- 17:07तो ठीक है। उसे शैतान की यह दलील पसंद आई।
- 17:10उसने अपना मुंह खोल दिया [संगीत] और शैतान
- 17:13उसके अंदर दाखिल हो गया। फिर शैतान ने
- 17:15कहा, "ए सांप, अब मुझे बीबी हव्वा
- 17:18अलैहिस्सलाम के पास ले चलो।" सांप ने सिर
- 17:21झुकाया और जन्नत की रहमतों के बीच से
- 17:23गुजरते हुए शैतान को अपने मुंह में लेकर
- 17:26बीबी हव्वा अलैहिस्सलाम के पास पहुंच गया।
- 17:29वहां पहुंचते ही शैतान ने रोना और
- 17:32चिल्लाना शुरू कर दिया। उसकी सिसकियां
- 17:34इतनी तेज थी कि जन्नत की हूरें और गिलमान
- 17:37भी जमा हो गए। बीबी हव्वा अलैहिस्सलाम ने
- 17:40हैरानी से पूछा ऐ अजनबी तुम क्यों रो रहे
- 17:44हो? शैतान ने झूठी मासूमियत से कहा मैं
- 17:47तुम्हारे अंजाम को सोच कर रो रहा हूं।
- 17:49शैतान की बात सुनकर बीबी हव्वा
- 17:52अलैहिस्सलाम चौंक गई और बोली हमारा अंजाम
- 17:56क्यों क्या होने वाला है? तो शैतान बोला
- 18:00अल्लाह ताला बहुत जल्द तुम्हें और
- 18:02तुम्हारे शौहर हजरत आदम अलैहिस्सलाम को
- 18:06जन्नत से निकालकर जमीन पर भेज देंगे।
- 18:09मैंने यह बात अर्श अजीम पर लिखी हुई देखी
- 18:11है और बस इसी गम में रो रहा हूं। बीबी
- 18:15हव्वा अलैहिसलाम के चेहरे पर परेशानी उतर
- 18:18आई। उन्होंने नरमी से कहा, "तुम्हारी बात
- 18:21सच है? यह मैं कैसे जानू?" शैतान ने फौरन
- 18:25अपने झूठ को मजबूत करने के लिए बोला। अगर
- 18:27मैं झूठ बोल रहा हूं तो अल्लाह और तमाम
- 18:30फरिश्तों की लानत मुझ पर हो। उसने अल्लाह
- 18:33के नाम की कसम खाई और शैतान की इन बातों
- 18:36से बीबी हव्वा अलैहिस्सलाम का दिल पिघल
- 18:39गया। उन्होंने कांपती आवाज में कहा अगर यह
- 18:42सच है तो क्या जमीन पर उतारे जाने से बचने
- 18:45का कोई रास्ता है? कोई तरीका जिससे हम
- 18:48हमेशा यहीं रह सकें? नहीं। मैं जरूर कुबूल
- 18:52करूंगी। बस मुझे बताओ वो रास्ता क्या है?
- 18:55शैतान ने अब अपनी असली बात जाहिर की। देखो
- 18:58वो जो पेड़ है जिससे तुम्हें दूर रहने का
- 19:01हुक्म दिया गया था। अगर तुम उसका फल खा लो
- 19:05तो तुम हमेशा हमेशा के लिए जन्नत में
- 19:07रहोगी। कभी भी तुम्हें यहां से निकाला
- 19:10नहीं जाएगा। बीबी हव्वा अलैहिसलाम के दिल
- 19:13में [संगीत] एक लम्हे को ख्याल आया। क्या
- 19:16सच में? फिर शैतान ने कहा, लेकिन अगर
- 19:20तुमने वह फल नहीं खाया, तो जल्द ही
- 19:22तुम्हें और तुम्हारे शौहर को जमीन पर भेज
- 19:25दिया जाएगा। हमेशा के लिए। शैतान के यह
- 19:28अल्फाज बीबी हव्वा अलैहिस्सलाम के दिल में
- 19:31उतर गए। वो सोच में पड़ गई और धीरे-धीरे
- 19:34उस गेहूं के पेड़ की तरफ बढ़ने लगी।
- 19:37उन्होंने पेड़ के करीब जाकर एक फल तोड़ा।
- 19:40थोड़ी देर उसे देखा और फिर उस फल का एक
- 19:42कौर ले लिया। वो फल मीठा था। मगर जैसे ही
- 19:46उन्होंने खाया जन्नत की हवाएं ठहर गई। फिर
- 19:49उन्होंने उस फल का आधा हिस्सा लिया और
- 19:52हजरत आदम अलैहिस्सलाम के पास पहुंच गई।
- 19:56नरमी और मोहब्बत भरे लहजे में बोली ए आदम
- 19:59आप भी इसे खा लीजिए। [संगीत] आदम
- 20:02अलैहिस्सलाम ने सादगी और मासूमियत से
- 20:04हव्वा की बात मान ली और उस फल को खा लिया।
- 20:07बस उसी लम्हे उनके जिस्म [संगीत] से जन्नत
- 20:10के नूरानी कपड़े उतर गए। उनसे उठने वाली
- 20:13वो प्यारी सी खुशबू भी गायब हो गई। उनकी
- 20:16आंखों में शर्म, डर और पछतावे की परछाई
- 20:19उतर आई। दोनों को अपनी गलती का एहसास हुआ।
- 20:22दिल गहरे अफसोस और तौबा की कसक से भर गया।
- 20:25अल्लाह रब्बुल आलमीन को उनका यह अमल पसंद
- 20:28ना आया। और फिर फरिश्तों को हुक्म हुआ।
- 20:31जाओ आदम और हव्वा को जन्नत से नीचे उतार
- 20:34दो और उन्हें जमीन पर भेज दो। हुक्म मिलते
- 20:37ही हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम अपने दूसरे
- 20:41फरिश्तों के साथ हाजिर हुए और उन्होंने
- 20:43हजरत आदम और बीबी हव्वा अलैहिस्सलाम
- 20:45[संगीत] को जन्नत से निकालकर जमीन पर उतार
- 20:48दिया। जन्नत की फिजाओं में गहरा सन्नाटा
- 20:51फैल गया। कायनात का पहला मर्द और पहली औरत
- 20:54[संगीत] अब जमीन की ओर रवाना हो चुके थे।
- 20:56तो प्यारे दोस्तों यहीं से शुरू होती है
- 20:59इंसान की असली कहानी। वो कहानी जिसमें
- 21:02इम्तिहान, तौबा, रहमत और मोहब्बत सब कुछ
- 21:05है। अल्लाह ताला ने हजरत आदम अलैहिस्सलाम
- 21:09और हव्वा अलैहिस्सलाम को ना सिर्फ दुनिया
- 21:12का पहला जोड़ा बनाया बल्कि इंसानियत की
- 21:14पहली सीख भी दी। गलती हो जाए तो तौबा करो
- 21:18क्योंकि रहमत का दरवाजा हमेशा खुला है।
- 21:21हजरत आदम और हव्वा अलैहिस्सलाम जब जमीन पर
- 21:24उतारे गए तो दोनों एक दूसरे से जुदा कर
- 21:27दिए गए। आदम अलैहिस्सलाम [संगीत] सरंद नाम
- 21:29की पहाड़ी पर और हव्वा अलैहिस्सलाम जद्दा
- 21:32के इलाके में ठहराई गई। दोनों के दिल में
- 21:35सिर्फ एक ही दर्द था। अल्लाह की नाफरमानी
- 21:38का अफसोस। वो दिन रात [संगीत] रोते रहे,
- 21:41तौबा करते रहे और अल्लाह से रहमत की
- 21:43गुजारिश करते रहे। कई सालों तक यह सिलसिला
- 21:46चलता रहा। यहां तक कि अल्लाह रब्बुल आलमीन
- 21:50ने उनकी तौबा कबूल [संगीत] कर ली। अल्लाह
- 21:52ने फरमाया ऐ आदम ऐ हव्वा मैंने तुम्हें
- 21:56माफ कर दिया। अब तुम दोनों एक दूसरे से
- 21:59मिल जाओ। फिर अल्लाह के [संगीत] हुक्म से
- 22:01वो दोनों एक जगह मिले। वो मुलाकात इतनी
- 22:04पाक और रूहानी थी कि उसी से इंसानियत
- 22:07[संगीत]
- 22:07की नई शुरुआत हुई। कुछ वक्त बाद अल्लाह की
- 22:10रहमत से उनकी औलादें पैदा होना शुरू हुई।
- 22:13और इसी तरह इंसानियत की शुरुआत [संगीत]
- 22:15हुई। हर तरफ जिंदगी, रहमत और मोहब्बत का
- 22:18सिलसिला शुरू हुआ। यही थी उस सफर की पहली
- 22:21कहानी जहां गलती भी थी, तौबा भी थी और
- 22:24रहमत भी। अल्लाह ताला ने दिखा दिया कि जो
- 22:28भी बंदा सच्चे दिल से तौबा करता है, उसके
- 22:30लिए रहमत का दरवाजा कभी बंद नहीं होता।
- 22:33प्यारे दोस्तों, अगर आपको यह वीडियो पसंद
- 22:36आई हो, तो इसे लाइक करें। अपने दोस्तों और
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This page contains the full transcript of अल्लाह ने इंसान को कैसे बनाया? | Hazrat Adam (A.S.) Story | How Allah Created Human| Hidayat-e-Islam by Hidayat-e-Islam, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,617 words across 459 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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