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हवाला क्या है? | करोड़ों का पैसा बिना बैंक कैसे घूमता है? | Hawala Explained — Transcript

by NOIR FILES · 3,371 words · 449 segments · language hi · Watch on YouTube

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  1. 0:00मान लो तुम दिल्ली में बैठे हो और तुम्हें
  2. 0:02दुबई में किसी को ₹5 करोड़ भेजने हैं।
  3. 0:06बिना बैंक, बिना रिकॉर्ड, बिना टैक्स और
  4. 0:09सिर्फ 30 मिनट में। क्या यह मुमकिन है?
  5. 0:12है। और इसी सिस्टम का नाम है हवाला। लेकिन
  6. 0:16सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि हवाला क्या है?
  7. 0:19हवाला।
  8. 0:20सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह सिस्टम
  9. 0:22इतना पुराना, इतना बड़ा और इतना बदनाम है
  10. 0:26तो आज तक इसे पूरी तरह खत्म क्यों नहीं
  11. 0:28किया जा सका? हर साल दुनिया भर में अरबों
  12. 0:31डॉलर औपचारिक बैंकिंग सिस्टम के बाहर एक
  13. 0:34देश [संगीत] से दूसरे देश तक पहुंचते हैं।
  14. 0:37जांच एजेंसियां, सरकारें और बैंक सालों से
  15. 0:40इस नेटवर्क पर नजर रख रहे हैं। लेकिन फिर
  16. 0:44भी यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। आखिर
  17. 0:47क्यों? यही सवाल इस पूरी डॉक्यूमेंट्री की
  18. 0:50शुरुआत है। लेकिन इस कहानी को समझने के
  19. 0:52लिए हमें करीब 1000 साल पीछे जाना होगा।
  20. 0:56उस समय ना बैंक थे, ना इंटरनेट, ना मोबाइल
  21. 0:59और ना ही कोई डिजिटल [संगीत] पेमेंट
  22. 1:00सिस्टम। फिर भी भारत, अरब, फारस और मध्य
  23. 1:04एशिया के बीच बड़े स्तर पर व्यापार होता
  24. 1:06था। भारत [संगीत] से मसाले, रेशम, कपड़ा
  25. 1:09और कीमती पत्थर जाते थे। बदले में सोना,
  26. 1:12चांदी, [संगीत] घोड़े और दूसरी कीमती
  27. 1:15चीजें आती थी। हजारों किलोमीटर का सफर
  28. 1:18महीनों में पूरा होता था। लेकिन सबसे बड़ी
  29. 1:21समस्या सामान नहीं पैसा था। सोचो अगर किसी
  30. 1:25व्यापारी को दिल्ली से बगदाद तक लाखों
  31. 1:28रुपए [संगीत] लेकर जाना पड़े तो रास्ते
  32. 1:30में डकैत, लुटेरे, समुद्री हमले और युद्ध
  33. 1:33उसका सब कुछ खत्म कर सकते थे। अगर पैसा
  34. 1:37लूट लिया जाता तो पूरा व्यापार बर्बाद हो
  35. 1:40जाता। इसी समस्या ने एक ऐसे सिस्टम को
  36. 1:43जन्म दिया जिसने आने वाले सैकड़ों वर्षों
  37. 1:46तक दुनिया के व्यापार का तरीका बदल दिया।
  38. 1:49कुछ व्यापारियों ने फैसला किया कि हर बार
  39. 1:52नगदी लेकर सफर करने की जरूरत नहीं है। अगर
  40. 1:55दिल्ली में कोई भरोसेमंद व्यापारी रकम
  41. 1:58अपने पास रख ले तो दूसरे शहर में बैठा
  42. 2:01उसका साझेदार उतनी [संगीत] ही कीमत उस
  43. 2:03व्यक्ति को दे देगा जिसे पैसा चाहिए। यानी
  44. 2:07असली नगदी हर बार सीमा पार नहीं जाएगी।
  45. 2:10सिर्फ हिसाब बदलेगा। यही हवाला की शुरुआती
  46. 2:13सोर्स हुआ। इस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत
  47. 2:16पैसा नहीं बल्कि भरोसा था। [संगीत] कोई
  48. 2:18बैंक नहीं, कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं, कोई
  49. 2:21लिखित अनुबंध नहीं। सिर्फ सालों से बना
  50. 2:24विश्वास। यही कारण था कि व्यापारी इसे
  51. 2:27तेजी से अपनाने लगे। धीरे-धीरे यह [संगीत]
  52. 2:30व्यवस्था भारत से फारस, फारस से अरब और
  53. 2:33फिर दुनिया के कई व्यापारिक मार्गों तक
  54. 2:35फैल गई। इतिहासकार मानते हैं कि उस समय इस
  55. 2:39तरह की अनौपचारिक व्यवस्था [संगीत] ने
  56. 2:40अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बना दिया
  57. 2:43था। लेकिन समय के साथ हर अच्छी व्यवस्था
  58. 2:46की तरह इसका दूसरा चेहरा भी सामने आने
  59. 2:49लगा। राज बदले, साम्राज्य बदले, सरकारें
  60. 2:53बदली, बैंक आए, आधुनिक वित्तीय व्यवस्था
  61. 2:56आई। लेकिन हवाला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
  62. 2:59बल्कि कुछ लोगों ने इसी भरोसे वाले सिस्टम
  63. 3:02का इस्तेमाल कानून से बचने और पैसों को
  64. 3:05छिपाने के लिए करना शुरू कर दिया। यहीं से
  65. 3:09हवाला का नाम पहली बार विवादों में आने
  66. 3:11लगा। लेकिन एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए।
  67. 3:15हर अनौपचारिक लेनदेन हवाला नहीं [संगीत]
  68. 3:17होता और हर हवाला से जुड़ा आरोप सच साबित
  69. 3:21हो जाए यह भी जरूरी नहीं है। किसी भी जांच
  70. 3:24में शक नहीं सबूत सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण
  71. 3:27होता है। और यही बात आगे चलकर भारत के
  72. 3:30सबसे चर्चित हवाला मामलों में भी देखने को
  73. 3:33मिली। लेकिन उससे पहले सबसे बड़ा सवाल अभी
  74. 3:36भी बाकी है। अगर पैसा बैंक से गया ही नहीं
  75. 3:40तो आखिर दूसरे देश में पहुंचा कैसे? यही
  76. 3:44सवाल पूरी दुनिया [संगीत] की जांच
  77. 3:45एजेंसियों को सालों तक परेशान करता रहा।
  78. 3:48और इसी सवाल का जवाब इस कहानी का सबसे
  79. 3:51दिलचस्प हिस्सा है। अगले भाग में [संगीत]
  80. 3:53हम समझेंगे कि बिना बैंक और बिना पैसा
  81. 3:56भेजे आखिर करोड़ों रुपए एक देश से दूसरे
  82. 4:00[संगीत] देश तक कैसे पहुंच जाते थे। अब
  83. 4:03सबसे बड़ा सवाल शुरू होता है। अगर दिल्ली
  84. 4:06से पैसा बाहर गया ही नहीं तो दुबई में
  85. 4:08किसी के हाथ में वही रकम आई कैसे? यहीं से
  86. 4:11हवाला का असली खेल शुरू होता है। मान लो
  87. 4:15दिल्ली में एक व्यापारी है और दुबई में
  88. 4:17उसका पुराना बिजनेस पार्टनर। दोनों एक
  89. 4:20दूसरे को कई सालों से जानते हैं। दोनों के
  90. 4:23बीच इतना [संगीत] भरोसा है कि बिना किसी
  91. 4:25कागज और बिना किसी बैंक के भी करोड़ों
  92. 4:28रुपए का हिसाब चल सकता है। दिल्ली में एक
  93. 4:31आदमी उस व्यापारी को ₹5 करोड़ देता
  94. 4:34[संगीत] है। व्यापारी पैसा अपने पास रख
  95. 4:36लेता है। उसी समय वह अपने दुबई वाले
  96. 4:39साझेदार को सिर्फ एक कोड भेजता [संगीत]
  97. 4:42है। यह कोड किसी नंबर का हो सकता है। किसी
  98. 4:45शब्द का हो सकता है या किसी खास पहचान का।
  99. 4:49जब दुबई में वही व्यक्ति उस कोर्ट के साथ
  100. 4:51पहुंचता है तो वहां बैठा साझेदार अपने पास
  101. 4:55मौजूद रकम में से पूरे 5 करोड़ उसे दे
  102. 4:58देता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस
  103. 5:01पूरी प्रक्रिया में असली पैसा भारत से
  104. 5:04दुबई गया ही नहीं। सिर्फ जानकारी गई। पैसा
  105. 5:08पहले से ही वहां मौजूद था। अब सवाल उठता
  106. 5:11है कि [संगीत] दुबई वाले के पास यह पैसा
  107. 5:13आया कहां से? यही जगह है जहां लोग सबसे
  108. 5:17ज्यादा भ्रमित हो जाते हैं। हवाला कोई
  109. 5:19जादू नहीं है। यह हिसाब बराबर करने का
  110. 5:22सिस्टम है। हो सकता है किसी दूसरे
  111. 5:24व्यापारी ने पहले दुबई में पैसा जमा कराया
  112. 5:27हो। हो सकता है दोनों व्यापारियों के बीच
  113. 5:30पहले से करोड़ों रुपए का लेनदेन चल रहा
  114. 5:33हो। हो सकता है आयात और निर्यात के पुराने
  115. 5:37हिसाब इसी [संगीत] में एडजस्ट किए जा रहे
  116. 5:40हो। यानी आखिर में दोनों लोग सिर्फ अपना
  117. 5:44बैलेंस बराबर करते हैं। इसी वजह से कई बार
  118. 5:47सीमा पार नगदी भेजने [संगीत] की जरूरत ही
  119. 5:49नहीं पड़ती। यही कारण है कि जांच
  120. 5:52एजेंसियों के लिए ऐसे नेटवर्क को समझना
  121. 5:55आसान नहीं होता। क्योंकि [संगीत] हर
  122. 5:57ट्रांजैक्शन बैंक रिकॉर्ड में दिखाई नहीं
  123. 6:00देता। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि
  124. 6:03हर ऐसा लेनदेन गैरकानूनी है। कई देशों
  125. 6:07[संगीत] में पुराने समय में व्यापारी इसी
  126. 6:09तरह भरोसे के आधार पर व्यापार करते थे।
  127. 6:12समस्या तब शुरू हुई [संगीत] जब कुछ लोगों
  128. 6:15ने इसी व्यवस्था का इस्तेमाल कानून से
  129. 6:17बचने के लिए करना शुरू किया। अगर किसी
  130. 6:20व्यक्ति के पास ऐसा पैसा हो जिसे वह
  131. 6:23बैंकिंग सिस्टम में नहीं दिखाना चाहता तो
  132. 6:26जांच एजेंसियां उसके पैसों के स्रोत को
  133. 6:29समझने की कोशिश करती हैं। इसी कारण हवाला
  134. 6:32का [संगीत] नाम कई आर्थिक अपराधों की जांच
  135. 6:35में सामने आता रहा है। लेकिन यहां एक बात
  136. 6:38बहुत जरूरी है। किसी व्यक्ति पर आरोप लगना
  137. 6:41और अदालत में उसका दोष साबित होना दोनों
  138. 6:44अलग बातें हैं। भारत सहित दुनिया के कई
  139. 6:48देशों में अदालतें [संगीत]
  140. 6:49सिर्फ आरोपों के आधार पर फैसला नहीं देती।
  141. 6:52जांच एजेंसियों को ठोस सबूत पेश करने
  142. 6:55पड़ते हैं। इसी वजह से कई चर्चित मामलों
  143. 6:58में लंबे समय तक जांच चली। लेकिन अदालत
  144. 7:02में वही बातें स्वीकार हुई जिन्हें कानूनी
  145. 7:04रूप से साबित किया जा सका। अब सोचो अगर
  146. 7:08पूरी व्यवस्था सिर्फ भरोसे पर चलती हो,
  147. 7:10कोई रसीद ना हो, कोई बैंक एंट्री ना
  148. 7:13[संगीत] हो और कोई आधिकारिक रिकॉर्ड ना
  149. 7:16मिले तो ऐसे नेटवर्क तक पहुंचना [संगीत]
  150. 7:19कितना मुश्किल होगा? यही कारण है कि
  151. 7:22फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट्स,
  152. 7:24इनफोर्समेंट एजेंसीज, टैक्स अथॉरिटीज और
  153. 7:27कई अंतरराष्ट्रीय [संगीत]
  154. 7:28संस्थाएं पैसे के पूरे रास्ते को समझने की
  155. 7:31कोशिश करती हैं। लेकिन कहानी अभी और बड़ी
  156. 7:35होने वाली है। क्योंकि भारत में एक ऐसा
  157. 7:37मामला सामने आया जिसने हवाला शब्द को पहली
  158. 7:40बार पूरे देश की सुर्खियों में ला दिया।
  159. 7:44कुछ डायरियां मिली। उनमें कई नाम लिखे थे।
  160. 7:47कई रकम दर्ज थी और फिर शुरू हुई भारत के
  161. 7:50सबसे चर्चित हवाला मामलों में से एक
  162. 7:53[संगीत] की जांच। अगले भाग में हम उसी केस
  163. 7:56की पूरी कहानी जानेंगे। साल 1991
  164. 8:00भारत आर्थिक बदलाव के द्वार से गुजर रहा
  165. 8:03था। [संगीत] देश में नई नीतियां लागू हो
  166. 8:05रही थी। विदेशी निवेश बढ़ रहा था और
  167. 8:08अर्थव्यवस्था एक नए रास्ते पर आगे बढ़ रही
  168. 8:11थी। लेकिन इसी दौरान एक ऐसी जांच [संगीत]
  169. 8:14शुरू हुई जिसने पूरे देश की राजनीति,
  170. 8:17मीडिया और जांच एजेंसियों को हिलाकर रख
  171. 8:19दिया। [संगीत] यही मामला बाद में जैन
  172. 8:22हवाला केस के नाम से जाना गया। कहानी की
  173. 8:25शुरुआत एक सामान्य जांच से हुई थी। जांच
  174. 8:28एजेंसियों ने कुछ लोगों के ठिकानों पर
  175. 8:30छापेमारी की। वहां से कुछ [संगीत]
  176. 8:33डायरियां, नोटबुक और कागज मिले। पहली नजर
  177. 8:36में वे साधारण रिकॉर्ड लग रहे थे। लेकिन
  178. 8:39जब [संगीत] अधिकारियों ने उन्हें ध्यान से
  179. 8:41पढ़ा तो उनमें कई नाम, कुछ कोर्ट और बड़ी
  180. 8:46रकम दर्ज दिखाई दी। यही वह पल था जब मामला
  181. 8:50अचानक राष्ट्रीय स्तर की खबर बन गया।
  182. 8:53मीडिया में चर्चा शुरू हो गई कि क्या इन
  183. 8:55डायरियों में लिखे नाम सिर्फ व्यापारिक
  184. 8:58रिकॉर्ड हैं या फिर किसी बड़े गुप्त
  185. 9:00वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा।
  186. 9:03जांच आगे बढ़ी। कई लोगों से पूछताछ
  187. 9:06[संगीत] हुई। कई जगह छापेमारी की गई। देश
  188. 9:09की बड़ी राजनीतिक हस्तियों के नाम भी
  189. 9:12मीडिया में चर्चा का विषय बनने लगे। लेकिन
  190. 9:15[संगीत] यहीं से इस केस का सबसे
  191. 9:17महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होता है। क्या
  192. 9:20किसी डायरी में लिखा हुआ नाम अपने आप में
  193. 9:23सबूत माना जा सकता है? क्या सिर्फ किसी
  194. 9:26नोटबुक में रकम लिख देने से कोई व्यक्ति
  195. 9:28दोषी साबित हो जाता है? अदालत ने इस सवाल
  196. 9:32को बहुत गंभीरता से देखा। जांच एजेंसियों
  197. 9:35को सिर्फ नाम या नोटबुक नहीं बल्कि ऐसे
  198. 9:38सबूत चाहिए थे जो यह साबित कर सके कि
  199. 9:41वास्तव में [संगीत] कोई अवैध लेनदेन हुआ
  200. 9:44था। यही कारण था कि यह मामला वर्षों तक
  201. 9:47अदालतों में चलता रहा। इस केस ने भारत की
  202. 9:50[संगीत] जांच व्यवस्था पर भी बड़ा प्रभाव
  203. 9:52डाला। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों
  204. 9:56[संगीत] की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण
  205. 9:58टिप्पणियां की। इसके बाद कई मामलों में
  206. 10:01जांच प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित बनाने
  207. 10:04पर जोर दिया गया। लेकिन आम लोगों के मन
  208. 10:07[संगीत] में एक सवाल अब भी बना रहा। अगर
  209. 10:10डायरियों में इतने नाम थे तो [संगीत] आखिर
  210. 10:12सच्चाई क्या थी? क्या वास्तव में इतना
  211. 10:15बड़ा हवाला नेटवर्क चल रहा था? या फिर कई
  212. 10:18बातें सिर्फ संदेह के दायरे में थी। यही
  213. 10:22वजह है कि [संगीत] आज भी जैन हवाला केस का
  214. 10:25नाम भारत के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों
  215. 10:27में लिया जाता है। इस पूरे मामले ने एक
  216. 10:30बात जरूर साबित कर दी कि आर्थिक अपराधों
  217. 10:33की जांच [संगीत] केवल अफवाहों या आरोपों
  218. 10:36के आधार पर नहीं की जा सकती। अदालत में
  219. 10:39वही बात टिकती है जिसे कानूनी रूप से
  220. 10:41प्रमाणित किया [संगीत] जा सके। लेकिन
  221. 10:43हवाला की कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
  222. 10:47क्योंकि इसी दौरान दुनिया का ध्यान एक और
  223. 10:50जगह पर जा रहा था। दुबई, सोने का [संगीत]
  224. 10:53व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कारोबार और ऐसे
  225. 10:56नेटवर्क जो कई देशों को एक साथ जोड़ते थे।
  226. 10:59जांच एजेंसियां [संगीत] अब सिर्फ भारत के
  227. 11:02भीतर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय लेनदेन पर
  228. 11:04भी नजर रखने लगी थी। यहीं से हवाला केवल
  229. 11:08भारत की कहानी नहीं रहा। बल्कि एक वैश्विक
  230. 11:11आर्थिक जांच का विषय बन गया। आखिर दुबई का
  231. 11:14नाम बार-बार ऐसे मामलों में क्यों सामने
  232. 11:17आता था? क्या इसकी वजह वहां का व्यापार
  233. 11:20था? वहां की भौगोलिक स्थिति थी या कुछ और?
  234. 11:24अगले भाग में हम इसी रहस्य को समझेंगे और
  235. 11:27जानेंगे कि कैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार,
  236. 11:30सोने का कारोबार और पैसों का प्रवाह जांच
  237. 11:34एजेंसियों के लिए सबसे [संगीत] बड़ी
  238. 11:36चुनौती बन गया। अब कहानी भारत से हजारों
  239. 11:40किलोमीटर दूर पहुंचती है। दुबई। एक ऐसा
  240. 11:43शहर [संगीत] जो दुनिया के सबसे बड़े
  241. 11:45व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता है।
  242. 11:48यहां हर दिन अरबों डॉलर का कारोबार होता
  243. 11:50है। सोना, हीरे, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनें
  244. 11:54और दुनिया भर से आने वाला आयात, निर्यात।
  245. 11:57भारत के लाखों व्यापारी वर्षों से दुबई
  246. 11:59[संगीत] के साथ व्यापार करते आए हैं।
  247. 12:02इसलिए जब भी किसी बड़े आर्थिक मामले की
  248. 12:05जांच होती है, जांच एजेंसियां
  249. 12:08अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े रिकॉर्ड
  250. 12:10को [संगीत] भी ध्यान से देखती हैं।
  251. 12:13लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है।
  252. 12:16दुबई में व्यापार होना गैरकानूनी नहीं है।
  253. 12:19विदेश में पैसा भेजना भी अपने आप में
  254. 12:21अपराध नहीं है। अगर सब कुछ कानून और
  255. 12:24बैंकिंग नियमों के अनुसार हो तो यह पूरी
  256. 12:27तरह वैध प्रक्रिया है। [संगीत]
  257. 12:29समस्या तब पैदा होती है जब किसी लेनदेन को
  258. 12:32जानबूझकर छिपाया जाए। गलत जानकारी दी जाए
  259. 12:35या पैसों का वास्तविक स्रोत छुपाने की
  260. 12:38कोशिश की जाए। यहीं से एक नया शब्द सामने
  261. 12:41आता है। ट्रेड बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग यानी
  262. 12:45व्यापार के नाम पर पैसों की गलत हेरफेर।
  263. 12:48मान लो किसी सामान की असली कीमत ₹1 लाख
  264. 12:52है। लेकिन कागजों में उसे ₹ लाख दिखाया
  265. 12:55गया या फिर 10 लाख की जगह सिर्फ 2 लाख
  266. 12:58लिखा गया। ऐसी स्थिति में जांच एजेंसियां
  267. 13:01यह समझने की कोशिश करती हैं कि बाकी रकम
  268. 13:04आखिर गई कहां? क्या यह सिर्फ व्यापारिक
  269. 13:07गलती थी या किसी बड़े वित्तीय खेल का
  270. 13:10हिस्सा? इसी वजह से दुनिया भर की
  271. 13:12फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट्स, कस्टम्स
  272. 13:15डिपार्टमेंट्स और टैक्स अथॉरिटीज
  273. 13:18बड़े आयात निर्यात के आंकड़ों का लगातार
  274. 13:21विश्लेषण करती हैं। आज आधुनिक तकनीक की
  275. 13:24मदद से हजारों संदिग्ध ट्रांजैक्शन को एक
  276. 13:27साथ ट्रैक किया जाता है। लेकिन फिर भी हर
  277. 13:30मामला पकड़ में आ जाए। ऐसा संभव नहीं
  278. 13:33होता। यही कारण है कि आर्थिक अपराधों की
  279. 13:36जांच केवल बैंक रिकॉर्ड देखकर पूरी नहीं
  280. 13:39होती। जांच अधिकारी व्यापारिक दस्तावेज,
  281. 13:43टैक्स रिकॉर्ड, कंपनी की बैलेंस शीट, आयात
  282. 13:46निर्यात के कागजात और कई अन्य स्रोतों की
  283. 13:49भी जांच करते हैं। कई मामलों में अलग-अलग
  284. 13:52देशों की एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।
  285. 13:55ताकि पूरे वित्तीय नेटवर्क को समझा जा
  286. 13:58सके। लेकिन हवाला का नाम केवल व्यापार तक
  287. 14:01सीमित नहीं रहा। समय के साथ ब्लैक मनी,
  288. 14:05टैक्स चोरी और दूसरे आर्थिक अपराधों की
  289. 14:07जांच में भी यह शब्द बार-बार सामने आने
  290. 14:10लगा। हालांकि हर बार हवाला साबित हो जाए
  291. 14:13[संगीत] ऐसा नहीं होता। जांच का उद्देश्य
  292. 14:16केवल शक करना नहीं बल्कि तथ्यों तक
  293. 14:18पहुंचना होता है। आज दुनिया पहले जैसी
  294. 14:21नहीं रही। यूपीआई, एनईएफटी, आरटीजीएस,
  295. 14:25Swift और डिजिटल बैंकिंग ने पैसों के
  296. 14:28लेनदेन का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। अब
  297. 14:31अधिकतर वैद ट्रांजैक्शन कुछ सेकंड में
  298. 14:34रिकॉर्ड के साथ पूरे हो जाते हैं। लेकिन
  299. 14:37जितनी तेजी से तकनीक आगे बढ़ी [संगीत] है,
  300. 14:39उतनी ही तेजी से जांच एजेंसियों ने भी
  301. 14:42अपने तरीके बदले हैं। आर्टिफिशियल
  302. 14:44इंटेलिजेंस, डाटा एनालिटिक्स, सस्िशियस
  303. 14:48ट्रांजैक्शन रिपोर्ट्स और इंटरनेशनल
  304. 14:50इंफॉर्मेशन शेयरिंग जैसी तकनीकों ने
  305. 14:53आर्थिक अपराधों की जांच को पहले से कहीं
  306. 14:56अधिक मजबूत बना दिया है। फिर भी एक सवाल
  307. 15:00अब भी बाकी है। अगर आज इतनी आधुनिक तकनीक
  308. 15:03मौजूद है तो क्या हवाला पूरी तरह खत्म हो
  309. 15:06चुका है या फिर यह केवल अपना रूप बदल चुका
  310. 15:10है? इसी सवाल का जवाब इस डॉक्यूमेंट्री के
  311. 15:13अंतिम भाग में मिलेगा। जहां हम समझेंगे कि
  312. 15:16आज के समय में जांच एजेंसियां ऐसे नेटवर्क
  313. 15:20से कैसे निपटती हैं और आखिर इस पूरी कहानी
  314. 15:23से हमें क्या सीख मिलती है। अब सवाल है
  315. 15:26क्या हवाला आज भी मौजूद है? इसका जवाब
  316. 15:29इतना आसान नहीं है। आज दुनिया पूरी तरह
  317. 15:32बदल चुकी है। लगभग हर वैध ट्रांजैक्शन
  318. 15:35बैंकिंग सिस्टम से होकर गुजरता है।
  319. 15:37यूपीआई, आईएमपीएस, एनईएफटी, आरटीजीएस
  320. 15:42और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Swift जैसे
  321. 15:45सिस्टम ने पैसों के लेनदेन को पहले से
  322. 15:48कहीं अधिक पारदर्शी बना दिया है। अब किसी
  323. 15:51भी बड़े वित्तीय ट्रांजैक्शन का डिजिटल
  324. 15:54रिकॉर्ड तैयार होता है। यही कारण है कि
  325. 15:58जांच एजेंसियों के लिए संदिग्ध गतिविधियों
  326. 16:00को पहचानना पहले की तुलना में आसान हो गया
  327. 16:03है। लेकिन आर्थिक अपराध भी समय के साथ
  328. 16:06बदलते रहते हैं। पहले जहां नकदी सबसे बड़ा
  329. 16:10माध्यम थी वहीं अब डिजिटल डाटा, शेल
  330. 16:13कंपनियां, फर्जी इनवॉइस, बेनामी लेनदेन और
  331. 16:17जटिल वित्तीय संरचनाएं जांच का हिस्सा बन
  332. 16:19चुकी हैं। इसलिए आज की [संगीत] जांच केवल
  333. 16:22नकदी तक सीमित नहीं रहती बल्कि पूरे
  334. 16:25वित्तीय नेटवर्क को समझने की कोशिश की
  335. 16:28जाती है। भारत में एनफोर्समेंट
  336. 16:30डायरेक्टेट, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट,
  337. 16:33डायरेक्टेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस,
  338. 16:35[संगीत]
  339. 16:36फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट और कई अन्य
  340. 16:39एजेंसियां, संदिग्ध आर्थिक मामलों की जांच
  341. 16:42करती हैं। इसके अलावा दुनिया के कई देश एक
  342. 16:45दूसरे के साथ वित्तीय जानकारी सांझा करते
  343. 16:48हैं ताकि सीमा पार होने वाले संदिग्ध
  344. 16:51लेनदेन की पहचान की जा सके। यही कारण है
  345. 16:55कि आज किसी भी बड़े आर्थिक अपराध में
  346. 16:57सिर्फ एक देश नहीं बल्कि कई देशों की
  347. 17:00एजेंसियां एक साथ काम [संगीत] करती हैं।
  348. 17:03लेकिन यहां एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए।
  349. 17:05हर बड़ी नकद रकम हवाला नहीं होती। हर
  350. 17:09अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर भी गैरकानूनी नहीं
  351. 17:12होता और हर आरोप अदालत में साबित हो जाए
  352. 17:15ऐसा भी जरूरी नहीं है। कानून हमेशा सबूत
  353. 17:18मांगता है। यही वजह है कि किसी भी मामले
  354. 17:21में अंतिम फैसला अदालत ही करती है। हवाला
  355. 17:25की पूरी कहानी हमें एक बहुत बड़ी सीख देती
  356. 17:28है। कोई भी वित्तीय व्यवस्था चाहे कितनी
  357. 17:31ही मजबूत क्यों ना हो अगर कुछ लोग कानून
  358. 17:34से बचने की कोशिश करेंगे तो जांच
  359. 17:37एजेंसियों को भी लगातार अपने तरीके बदलने
  360. 17:40पड़ेंगे। यही कारण है कि आज आर्टिफिशियल
  361. 17:44इंटेलिजेंस, डाटा एनालिटिक्स, रिस्क
  362. 17:46प्रोफाइलिंग और इंटरनेशनल फाइनेंशियल
  363. 17:49मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का
  364. 17:51इस्तेमाल किया जा रहा है। अब सिर्फ पैसा
  365. 17:54नहीं बल्कि उसके पीछे छिपे पूरे नेटवर्क
  366. 17:57को समझने की कोशिश की जाती है। यही वजह है
  367. 18:00कि हवाला केवल एक शब्द नहीं है। यह
  368. 18:03इतिहास, व्यापार, भरोसे, कानून और आर्थिक
  369. 18:07अपराधों की जांच से जुड़ा एक जटिल विषय
  370. 18:10है। हजार साल पहले जिस व्यवस्था की शुरुआत
  371. 18:13व्यापार को आसान बनाने के लिए हुई थी वही
  372. 18:16समय के साथ कई विवादों का हिस्सा बन गई।
  373. 18:20लेकिन इतिहास का हर अध्याय हमें यही
  374. 18:22सिखाता है कि तकनीक बदल सकती है, तरीके
  375. 18:25बदल सकते हैं, कानून बदल सकते हैं। लेकिन
  376. 18:29सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कभी नहीं
  377. 18:31रुकती। अब मैं तुमसे एक सवाल [संगीत]
  378. 18:33पूछना चाहता हूं। अगर तुम्हें सिर्फ एक
  379. 18:36डायरी मिले जिसमें कुछ नाम, कुछ नंबर और
  380. 18:39कुछ रकम लिखी हो तो क्या तुम सिर्फ उसी के
  381. 18:42आधार पर किसी को दोषी मान लोगे? या फिर
  382. 18:46ठोस सबूत मिलने तक इंतजार करोगे? अपना
  383. 18:49जवाब कमेंट में जरूर बताना। अगर तुम्हें
  384. 18:52ऐसी टू डी क्राइम डॉक्यूमेंट्री पसंद आई
  385. 18:54हो तो वीडियो को लाइक करो, चैनल को
  386. 18:57सब्सक्राइब करो और अगली डॉक्यूमेंट्री का
  387. 18:59इंतजार करो। क्योंकि अगली बार हम भारत के
  388. 19:03एक और ऐसे रहस्य की कहानी लेकर आएंगे
  389. 19:06जिसने पूरे देश को चौंका दिया। तो आखिर इस
  390. 19:09पूरी कहानी का निष्कर्ष क्या है? क्या
  391. 19:12हवाला एक रहस्यमई मशीन है जो मिनटों में
  392. 19:15पैसा गायब कर देती है? नहीं। क्या हर बड़ा
  393. 19:18कैश ट्रांजैक्शन हवाला होता है? नहीं।
  394. 19:21क्या हर हवाला से जुड़ा आरोप सच साबित
  395. 19:24होता है? इसका जवाब भी नहीं है क्योंकि
  396. 19:27किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में फैसला
  397. 19:30सबूतों के आधार पर होता है। अफवाहों के
  398. 19:33आधार पर नहीं। लेकिन एक बात जरूर सच है।
  399. 19:37हवाला ने दुनिया को यह दिखाया कि भरोसे पर
  400. 19:40चलने वाली व्यवस्था कितनी ताकतवर हो सकती
  401. 19:43है। जिस सिस्टम की शुरुआत व्यापारियों की
  402. 19:45सुरक्षा के लिए हुई थी, वही समय के साथ
  403. 19:49आर्थिक अपराधों की जांच का सबसे चर्चित
  404. 19:51विषय बन गया। यही वजह है कि आज दुनिया भर
  405. 19:55की सरकारें और वित्तीय संस्थाएं हर
  406. 19:58संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखती हैं। बैंकिंग
  407. 20:01नियम लगातार [संगीत] सख्त किए जाते हैं।
  408. 20:04अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जाता है और नई
  409. 20:07तकनीकों का इस्तेमाल करके पैसों के पूरे
  410. 20:10रास्ते को समझने की कोशिश की जाती है। आज
  411. 20:14अगर कोई वैध तरीके से विदेश पैसा भेजना
  412. 20:16चाहता है तो उसके लिए बैंक, अधिकृत चैनल
  413. 20:20और कानूनी प्रक्रियाएं मौजूद हैं। यही
  414. 20:22सुरक्षित और सही रास्ता है। कानून से बाहर
  415. 20:26किसी भी वित्तीय गतिविधि का जोखिम बहुत
  416. 20:28बड़ा हो सकता है। इसीलिए जांच एजेंसियां
  417. 20:32हमेशा लोगों को अधिकृत बैंकिंग सिस्टम का
  418. 20:35ही इस्तेमाल करने की सलाह देती हैं। इस
  419. 20:37डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य किसी गैरकानूनी
  420. 20:40तरीके को सिखाना नहीं था। बल्कि यही
  421. 20:43समझाना था कि इतिहास में एक व्यापारिक
  422. 20:46व्यवस्था कैसे बनी। समय के साथ उसका
  423. 20:49इस्तेमाल किन-किन संदर्भों में हुआ और
  424. 20:51क्यों आज भी आर्थिक अपराधों की जांच में
  425. 20:54उसका नाम चर्चा का विषय [संगीत] बन जाता
  426. 20:57है। इतिहास को समझना जरूरी है क्योंकि वही
  427. 21:00हमें वर्तमान की जटिलताओं को समझने में
  428. 21:02मदद करता है। अब सोचो अगर हजार साल पहले
  429. 21:06इंटरनेट नहीं था। बैंक नहीं थे और फिर भी
  430. 21:10व्यापारी पूरी दुनिया में कारोबार कर रहे
  431. 21:12थे तो इंसान की सबसे बड़ी ताकत क्या थी?
  432. 21:15पैसा या भरोसा शायद जवाब भरोसा है क्योंकि
  433. 21:20किसी भी व्यवस्था की नींव आखिरकार विश्वास
  434. 21:23पर ही टिकती है। जब विश्वास का सही
  435. 21:25इस्तेमाल होता है तो व्यापार बढ़ता है और
  436. 21:29जब उसी विश्वास का गलत इस्तेमाल होता है
  437. 21:31तो कानून और जांच एजेंसियों की भूमिका
  438. 21:34शुरू होती है। यही हवाला की असली कहानी
  439. 21:37है। यह सिर्फ पैसों की कहानी नहीं यह
  440. 21:40भरोसे, व्यापार, कानून, जांच और इंसानी
  441. 21:44सोच की कहानी है। अगर तुम्हें यह
  442. 21:46डॉक्यूमेंट्री पसंद आई हो, तो वीडियो को
  443. 21:49लाइक जरूर करना। चैनल को सब्सक्राइब करना
  444. 21:52और कमेंट में बताना कि अगली टू डी
  445. 21:54डॉक्यूमेंट्री किस विषय पर देखना चाहते
  446. 21:57हो। अगली बार हम एक और ऐसे रहस्य की परतें
  447. 22:01खोलेंगे, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर
  448. 22:04दिया। [संगीत]
  449. 22:04तब तक के लिए धन्यवाद।

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