Haryana Complete Course 2026 | History, Polity, Geography, Economy & Culture | UPSC/HPSC #dishantias — Transcript
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- 1:27हरियाणा
- 1:29जब भी इस राज्य का जिक्र आता है तो दिमाग
- 1:31में कई छवियां एक साथ उभरती हैं। अखाड़े
- 1:34की मिट्टी, ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट,
- 1:37खेतों में लहलहाती फसलें और दूसरी तरफ
- 1:40मिलेनियम सिटी गुरुग्राम की आसमान छूती
- 1:43इमारतें।
- 1:44बिल्कुल। और आज हमारे पास जो हाई स्टेक्स
- 1:47एकेडमिक डोजियर है मतलब जो दिशांत आईएएस
- 1:50के बेहद विस्तृत और प्रामाणिक नोट्स हैं
- 1:54वे इस राज्य की एक बिल्कुल अलग ही तस्वीर
- 1:57पेश करते हैं।
- 1:58हां। तो आज का हमारा मिशन सिर्फ इन पन्नों
- 2:01पर लिखे परीक्षा के तथ्यों को बांना नहीं
- 2:03है। हम इस सघन अध्ययन सामग्री को डिकोड
- 2:05करेंगे और इसके पीछे छिपी दिलचस्प
- 2:08कहानियों और भौगोलिक रहस्यों को बाहर
- 2:10निकालेंगे जो इसे ज्ञान का एक शानदार
- 2:12खजाना बनाते हैं।
- 2:13हम यहां जो सबसे दिलचस्प बात है वो यह है
- 2:17कि जब हम किसी राज्य को प्रतियोगी
- 2:20परीक्षाओं खासकर यूपीएससी या एचपीएससी के
- 2:23नजरिए से देखते हैं तो सिर्फ डाटा याद
- 2:26करना काफी नहीं होता। मतलब हमें उस जगह की
- 2:29पूरी पहचान समझनी होती है।
- 2:30राइट? एकदम सही। तथ्यों के साथ-साथ हमें
- 2:33उन ट्रैप्स या जालों को भी समझना होता है
- 2:36जहां अक्सर एस्पिरेंट्स गलतियां कर बैठते
- 2:39हैं। यह सिर्फ एक राज्य का भूगोल या
- 2:42इतिहास नहीं है बल्कि यह समझने की कोशिश
- 2:46है कि कैसे नदियां, सीमाएं, ऐतिहासिक
- 2:49युद्ध और आधुनिक नीतियां मिलकर एक संपूर्ण
- 2:53समाज का निर्माण करती हैं।
- 2:55तो चलिए सबसे बुनियादी लेकिन सबसे आकर्षक
- 2:57सवाल से ही इस चर्चा को शुरू करते हैं।
- 2:59नाम की उत्पत्ति यह हरियाणा नाम के पीछे
- 3:02की असल कहानी क्या है? देखिए नोट्स को
- 3:05खंगालने पर पता चलता है कि इसके नामकरण को
- 3:08लेकर कई दिलचस्प सिद्धांत हैं। मुख्य रूप
- 3:11से तीन अर्थ सामने आते हैं। पहला है हरि
- 3:15अयन जिसका अर्थ है भगवान विष्णु का निवास
- 3:19और यही सर्वाधिक मान्य भी है। दूसरा है हर
- 3:23अयन यानी भगवान शिव का निवास
- 3:26और तीसरा
- 3:27तो एक बहुत ही खूबसूरत प्राकृतिक चित्रण
- 3:29है हरी अरण का जिसका मतलब होता है हरा भरा
- 3:34जंगल मतलब एक ही नाम में आध्यात्म भी है
- 3:38और प्रकृति भी
- 3:39हां और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष में देखें तो
- 3:41यह नाम कोई नया नहीं है। ऋग्वेद में इसका
- 3:44स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इसके अलावा
- 3:47प्राचीन चाहमान अभिलेखों में भी यह नाम
- 3:49दर्ज है। यह तो इस बात का प्रमाण है कि
- 3:52जिस क्षेत्र को हम आज हरियाणा कहते हैं,
- 3:55उसकी सांस्कृतिक जड़े हजारों साल पुरानी
- 3:58है। यह 1966 में बना कोई नया राज्य भर
- 4:01नहीं है, बल्कि
- 4:02बल्कि एक प्राचीन सभ्यता का विस्तार है।
- 4:05और यहीं पे मैं सीरियस एस्पिरेंट्स के लिए
- 4:07एक बात जोड़ना चाहूंगी। रट रट के जो थक
- 4:09गए, वो प्रीलिम्स में ही अटक गए। कांसेप्ट
- 4:12जिसने पकड़ लिया, समझो उसने मेंस भी जकड़
- 4:15लिया। इसके लिए नामों के पीछे का कांसेप्ट
- 4:17समझना बहुत जरूरी है।
- 4:19क्या बात है? यह कांसेप्ट वाली बात
- 4:21बिल्कुल सटीक है। अब अगर गठन की बात करें
- 4:23तो 1 नवंबर 1966 को आधिकारिक स्थापना हुई।
- 4:27राजधानी चंडीगढ़ है और विधानमंडल एक
- 4:30सदनात्मक है जिसमें 90 सीटें हैं। लेकिन
- 4:34यहां नोट्स में एक बहुत ही हैरान करने
- 4:36वाला एग्जाम ट्रैप दिया गया है।
- 4:38हां पुरानी किताबों का वो ट्रैप बिल्कुल
- 4:41पुरानी किताबों में तो हरियाणा को
- 4:43क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का 21वां सबसे
- 4:46बड़ा राज्य बताया जाता था। तो क्या यह
- 4:48आंकड़ा बदल गया है?
- 4:50और यही वह जगह है जहां प्रीलिम्स अलर्ट
- 4:52दिमाग में बजना चाहिए। पुराने स्रोत 21वां
- 4:56स्थान ही बताते हैं। लेकिन जम्मू कश्मीर
- 4:58पुनर्गठन अधिनियम के बाद भारत के नक्शे
- 5:01में जो बदलाव आया उसने सब कुछ बदल दिया।
- 5:04क्योंकि जम्मू कश्मीर अब राज्य नहीं रहा।
- 5:06हां, वह अब केंद्र शासित प्रदेश है। इस एक
- 5:09राजनीतिक बदलाव के कारण राज्यों की सूची
- 5:12में हरियाणा क्षेत्रफल के मामले में 21वें
- 5:15स्थान से खिसक कर अब 20वें स्थान पर आ गया
- 5:18है। रैंकर्स फोकस हियर। यही वो छोटे-छोटे
- 5:21अपडेट्स हैं जो एग्जाम हॉल में एक नंबर से
- 5:24कट ऑफ पार करा देते हैं या फिर बाहर कर
- 5:26देते हैं।
- 5:27सच में यह तो ध्यान से निकल ही गया था।
- 5:30राज्य के प्रतीकों की तरफ बढ़ते हैं।
- 5:32राजकीय पशु ब्लैक बग है जिसका वैज्ञानिक
- 5:35नाम एंटिलोप सर्विसाप्रा है।
- 5:37और राजकीय पक्षी ब्लैक फ्रेंकुलिन यानी
- 5:40काला तीतर है। राजकीय वृक्ष पीपल है जिसे
- 5:44फाइकस रिलीजसा कहते हैं और राजकीय पुष्प
- 5:47कमल है।
- 5:48यह प्रतीक सिर्फ नाम भर नहीं लगते। ऐसा
- 5:51लगता है जैसे राज्य के पूरे इकोसिस्टम को
- 5:53समेटे हुए हो। एज वी टीच एट दिशांत आईएस
- 5:57राज्य के प्रतीक कभी भी रैंडम नहीं चुने
- 6:00जाते। वे वहां के पर्यावरण, संस्कृति और
- 6:03ऐतिहासिक निरंतरता का आईना होते हैं। पीपल
- 6:07का पेड़ भारतीय संस्कृति में हमेशा से
- 6:09पवित्र माना गया है। और हरियाणा जैसी
- 6:12वेदों की भूमि के लिए इससे बेहतर राजकीय
- 6:15वृक्ष क्या हो सकता है? कमल भी ज्ञान और
- 6:18पवित्रता का प्रतीक है। तो संस्कृति और
- 6:20इतिहास के बाद अब नक्शे का खेल शुरू करते
- 6:23हैं। भूगोल और सीमाओं को समझना हमेशा एक
- 6:25विजुअल अनुभव होता है।
- 6:27बिल्कुल इसे दिमाग में एक 3D मैप की तरह
- 6:30इमेजिन करना चाहिए।
- 6:31अगर नक्शे को दिमाग में लाएं तो हरियाणा
- 6:34उत्तर पश्चिमी भारत में स्थित है। इसका
- 6:36अक्षांशीय और देशांतरीय विस्तार लगभग 3°
- 6:39का है। नोट्स में इसके आकार को बहुभुज या
- 6:42डायमंड कहा गया है। लेकिन यह 3° का
- 6:45विस्तार
- 6:46इसका असल मतलब क्या है?
- 6:48बहुत ही शानदार सवाल है ये। अक्षांश और
- 6:50देशांतर का 3 डिग्री का विस्तार होने का
- 6:53मतलब है कि राज्य बहुत अधिक फैला हुआ नहीं
- 6:56है बल्कि एक कॉम्पैक्ट आकार में है। देखिए
- 6:591 डिग्री लगभग 111 कि.मी. के बराबर होती
- 7:02है।
- 7:03तो इसका मतलब है कि राज्य का विस्तार लगभग
- 7:05300 से 350 कि.मी. के दायरे में सिम हुआ
- 7:07है।
- 7:07एकदम सही। यही कारण है कि इसे एक बहुभुज
- 7:11या डायमंड शेप कहा जाता है। अब अगर सीमाओं
- 7:14की बात करें तो मैप को विजुअलाइज कीजिए।
- 7:16यह पांच राज्यों और दो केंद्र शासित
- 7:19प्रदेशों से घिरा है।
- 7:20वो पांच राज्य हैं हिमाचल प्रदेश,
- 7:22राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और
- 7:24पंजाब और दो केंद्र शासित प्रदेश हैं
- 7:27चंडीगढ़ और दिल्ली। लेकिन पांच राज्य
- 7:29नक्शे को सरसरी तौर पर देखने से तो ऐसा
- 7:32लगता है जैसे उत्तराखंड की सीमा हरियाणा
- 7:34से कहीं लगती ही नहीं है।
- 7:35और यही है हमारा अगला एग्जाम ट्रैप। जब हम
- 7:38पड़ोसी राज्यों की सूची देखते हैं तो कई
- 7:41स्टूडेंट्स उत्तराखंड को मिस कर देते हैं।
- 7:44सच्चाई यह है कि उत्तराखंड केवल एक ही
- 7:46जिले को छूता है और वो है यमुनानगर।
- 7:49और वो भी मात्र 11 कि.मी. के लिए। सोचिए
- 7:53सिर्फ 11 कि.मी. की यह सीमा कितनी आसानी
- 7:56से किसी को भी भ्रमित कर सकती है।
- 7:58बिल्कुल भ्रमित करती है। और इसी भ्रम को
- 8:00दूर करने के लिए मेरे पास एक और पंक्ति
- 8:03है। बॉर्डर के सवालों में अक्सर धोखा खा
- 8:06जाते हैं। 11 कि.मी. के फेर में
- 8:08अच्छे-अच्छे कट ऑफ से बाहर आ जाते हैं।
- 8:11बहुत खूब। यह 11 कि.मी. वाला फैक्ट तो अब
- 8:13कोई नहीं भूलेगा। यमुनानगर अपने आप में एक
- 8:16त्रिजंक्शन बनाता है। यह एकमात्र ऐसा जिला
- 8:19है जो तीन राज्यों की सीमाओं को छूता है।
- 8:22हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
- 8:26अगर कोई सिर्फ नक्शे को ऊपर ऊपर से देखकर
- 8:28परीक्षा देने जाए तो वो यह गलती जरूर
- 8:31करेगा।
- 8:31यह तो हुई बाहरी सीमाओं की बात। अगर राज्य
- 8:34के आंतरिक भूगोल में झांके तो एनसीआर का
- 8:37जो प्रभाव है वह बहुत भारी है। राज्य का
- 8:40लगभग 57% हिस्सा जिसमें 14 जिले शामिल
- 8:44हैं। एनसीआर के अंतर्गत आता है।
- 8:46अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड
- 8:48देयर टीम हम हमेशा इस बात पर जोर देते हैं
- 8:52कि एनसीआर का मतलब सिर्फ भूगोल नहीं है
- 8:55बल्कि अर्थव्यवस्था है। इसका मतलब तो यही
- 8:58हुआ कि राज्य की आधी से अधिक अर्थव्यवस्था
- 9:00और विकास नीतियां सीधे तौर पर दिल्ली के
- 9:02विस्तार से जुड़ी हुई हैं।
- 9:04शत प्रतिशत एनसीआर में आने का मतलब है
- 9:07बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल
- 9:09कॉरिडोर और रियलस्टेट का बूम। लेकिन इसके
- 9:12साथ ही हरियाणा के हृदय की बात करना भी
- 9:15जरूरी है।
- 9:15हरियाणा का हृदय यानी जींद जिला जो राज्य
- 9:19के बिल्कुल बीचों-बीच धड़कता है।
- 9:20हां, और यह अपनी सीमाएं सात अन्य जिलों के
- 9:24साथ साझा करता है। प्रशासनिक दृष्टि से यह
- 9:26बहुत महत्वपूर्ण है और यहीं एक और
- 9:29कांसेप्ट आता है भू आवेष्टित या लैंड
- 9:32लॉक्ड जिलों का।
- 9:33लैंड लॉक जिले वो होते हैं ना जिनकी सीमा
- 9:35किसी अन्य राज्य को नहीं छूती।
- 9:37बिल्कुल। ऐसे जिले जो पूरी तरह से राज्य
- 9:40के अंदर ही घिरे हुए हैं।
- 9:41तो इसमें रोहतक और चरखी दादरी आते हैं।
- 9:44यहां चरखी दादरी का नाम बहुत महत्वपूर्ण
- 9:46हो जाता है। क्योंकि यह नया जिला है। इससे
- 9:49पहले तो केवल रोहतक ही एकमात्र लैंड लॉर्ड
- 9:52जिला हुआ करता था।
- 9:53सही पकड़ा आपने। चरखी दादरी के बनने के
- 9:55बाद यह समीकरण बदल गया। पुरानी किताबों
- 9:59में आज भी सिर्फ रोहतक लिखा मिलता है और
- 10:01परीक्षार्थी वहीं गलती कर बैठते हैं।
- 10:04सीरियस एस्पिरेंट्स इस अपडेट को मार्क कर
- 10:06लें। भूगोल की इन उलझी हुई सीमाओं से बाहर
- 10:09निकलकर अगर हम यहां के शहरों की गलियों
- 10:11में जाएं तो वहां का इतिहास किसी टाइम
- 10:14मशीन में बैठने से कम नहीं है।
- 10:16इतिहास हमेशा से यूपीएससी का फेवरेट रहा
- 10:19है।
- 10:19प्राचीन नामों पर गौर करें तो गुरुग्राम
- 10:22जो आज मल्टीीनेशनल कंपनियों से भरा पड़ा
- 10:24है। असल में गुरु द्रोणाचार्य का गांव था
- 10:27गुरुग्राम। सोनीपत को सोनप्रस्थ या स्वर्ण
- 10:30नगरी और पानीपत को पांडुप्रस्थ कहा जाता
- 10:33था। यह नाम साफ-साफ बताते हैं कि महाभारत
- 10:37का पूरा महाकाव्य इसी धरती के इर्द-गिर्द
- 10:39बुना गया था। थानेसर का पुराना नाम
- 10:42स्थानीश्वर था और पलवल को अपेलवा कहा जाता
- 10:46था।
- 10:46प्रस्थ का अर्थ तो एक बसा हुआ स्थान या
- 10:48शहर होता है ना? हां, यह इतिहास के वो
- 10:51खजाने हैं, जो आज भी इन शहरों की नींव में
- 10:53दबे हुए हैं। इतिहास के पन्नों में जो शहर
- 10:56पुराने हैं, यूपीएससी के लिए वही सबसे
- 10:59बड़े खजाने हैं।
- 11:00और आज के समय में इन शहरों के जो उपनाम
- 11:02हैं, वे भी कितने दिलचस्प हैं। भिवानी को
- 11:05मिनी क्यूबा या बॉक्सिंग हब कहा जाता है।
- 11:08क्यूबा जो दुनिया भर में अपने बेहतरीन
- 11:10मुख्य बाजों के लिए जाना जाता है, वही
- 11:12रुतबा भारत में भिवानी का है। और अंबाला
- 11:15को विज्ञान नगरी कहा जाता है क्योंकि यहां
- 11:18वैज्ञानिक उपकरणों का बड़े पैमाने पर
- 11:20निर्माण होता है। पानीपत को बुनकरों का
- 11:22शहर कहा जाता है और फतेहाबाद को गुलाबी
- 11:25नगरी।
- 11:26इन उपनामों के पीछे वहां की स्थानीय
- 11:28अर्थव्यवस्था और संस्कृति छुपी है। जैसे
- 11:30पानीपत का हैंडलूम उद्योग आज विश्व
- 11:32प्रसिद्ध है। लेकिन इन शहरों को बसाया
- 11:35किसने? यह जानना भी उतना ही जरूरी है।
- 11:37बिल्कुल। हिसार और फतेहाबाद की स्थापना
- 11:40फिरोजशाह तुगलक ने की थी। अब मेंस
- 11:43पर्सपेक्टिव से सवाल यह उठता है कि क्यों?
- 11:46हम क्योंकि यह क्षेत्र मुल्तान से दिल्ली
- 11:48के रास्ते में पड़ता था।
- 11:50एकदम सही। यहां किलेबंदी करना रणनीतिक रूप
- 11:53से बहुत जरूरी था। फरीदाबाद की स्थापना
- 11:56सूफी संत शेख फरीद के नाम पर हुई थी और
- 11:58रेवाड़ी को राजा कर्मपाल ने बसाया था।
- 12:01इतिहास और शहरों से आगे बढ़कर अगर उन महान
- 12:05व्यक्तित्वों की बात करें जिन्होंने इस
- 12:07राज्य को आकार दिया तो कई बड़े नाम सामने
- 12:10आते हैं। पंडित नेकीराम शर्मा को हरियाणा
- 12:13केसरी कहा जाता है।
- 12:14चौधरी देवीलाल जिन्हें ताऊ या भारत की
- 12:17राजनीति का किंग मेकर कहा जाता है। चौधरी
- 12:20बंसीलाल जिन्हें लौह पुरुष और आधुनिक
- 12:23हरियाणा का निर्माता माना जाता है।
- 12:25और कला के क्षेत्र में पंडित जसराज जी
- 12:27जिन्हें स्वर सम्राट की उपाधि दी गई है।
- 12:30राजनीति की बात निकली है तो दिशांत आईएएस
- 12:32के नोट्स में एक और बहुत ही शानदार ट्रैप
- 12:35को स्पष्ट किया गया है। अक्सर लोग रोहतक
- 12:38को हरियाणा की राजनीतिक राजधानी कह देते
- 12:41हैं।
- 12:41क्योंकि रोहतक दशकों से राजनीतिक
- 12:43गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है।
- 12:45हां, लेकिन ध्यान रहे प्रशासनिक और
- 12:48आधिकारिक तौर पर चंडीगढ़ ही हरियाणा की
- 12:51एकमात्र राजधानी है। परीक्षा में अगर यह
- 12:54सवाल आता है तो भावनाओं में बहकर रोहतक को
- 12:57चुनना एक बड़ी भूल होगी। तथ्य और लोकप्रिय
- 13:00धारणा के बीच का यह अंतर समझना बहुत जरूरी
- 13:04है। भावनाओं की बात हो ही रही है तो अब एक
- 13:07ऐसे खंड की तरफ बढ़ते हैं जो दिखने में तो
- 13:10सिर्फ आंकड़ों का खेल लगता है लेकिन असल
- 13:13में यह समाज की सबसे गहरी सच्चाई बयान
- 13:16करता है।
- 13:16आप जनगणना 2011 की बात कर रहे हैं।
- 13:20जी। 2011 के अनुसार हरियाणा की कुल
- 13:22जनसंख्या लगभग 2.53 करोड़ थी और जनसंख्या
- 13:27घनत्व 573 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर
- 13:30था।
- 13:31यह आंकड़े आधार है लेकिन असली कहानी नोट्स
- 13:34के उस हिस्से में है जिसे उच्च और निम्न
- 13:37के विरोधाभास या हाईज एंड लोस पैराडॉक्स
- 13:40कहा गया है। एस्पिरेंट्स इस विश्लेषण को
- 13:43ध्यान से समझे। फरीदाबाद में जनसंख्या और
- 13:46जनसंख्या घनत्व दोनों सर्वाधिक हैं जो कि
- 13:49दिल्ली से सटे होने के कारण स्वाभाविक
- 13:51लगता है।
- 13:52लेकिन सबसे चौंकाने वाला विरोधाभास
- 13:55गुरुग्राम और मेवात यानी नूह के बीच है।
- 13:59डाटा और फैक्ट्स का यह कैसा जंजाल है
- 14:01मिलेनियम सिटी में भी लिंगानुपात का बुरा
- 14:04हाल है।
- 14:05बिल्कुल यही बात सबसे ज्यादा परेशान करने
- 14:08वाली है। गुरुग्राम अह जो कि मिलेनियम
- 14:10सिटी है जहां सबसे ज्यादा आईटी कंपनियां
- 14:13हैं जो आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा संपन्न
- 14:15है। वहां साक्षरता दर राज्य में सबसे अधिक
- 14:19है।
- 14:19लेकिन सबसे बड़ा झटका यह है कि उसी
- 14:22गुरुग्राम में राज्य का लिंगानुपात सबसे
- 14:25कम है।
- 14:25वहीं दूसरी तरफ मेवात है। वहां साक्षरता
- 14:28दर राज्य में सबसे कम है। लेकिन
- 14:29लिंगानुपात पूरे राज्य में सबसे अधिक है।
- 14:32ऐसा क्यों? विकास का मतलब तो समाज का
- 14:34बेहतर होना होना चाहिए ना। एज वी टीच एट
- 14:36दिशांत आईएएस, यही वह बिंदु है जहां
- 14:40समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र आपस में
- 14:42टकराते हैं और मेंस परीक्षा के लिए यह एक
- 14:45बेहतरीन केस स्टडी है।
- 14:47तो गुरुग्राम में शिक्षा और पैसा होने के
- 14:49बावजूद ऐसा क्यों हुआ?
- 14:50क्योंकि गुरुग्राम में शिक्षा है, पैसा
- 14:53है, लेकिन वहां ऐतिहासिक रूप से कन्या,
- 14:56भ्रूण, हत्या जैसी को प्रथाएं और महिलाओं
- 14:59के प्रति संकीर्ण सोच मौजूद थी। और पैसे
- 15:02के साथ तकनीक जैसे अल्ट्रासाउंड तक पहुंच
- 15:05आसान हो गई। इसका नतीजा यह हुआ कि
- 15:08लिंगानुपात निचले स्तर पर चला गया।
- 15:10मतलब सिर्फ किताबी पढ़ाई और पैसा आ जाने
- 15:14से सामाजिक सोच नहीं बदल जाती।
- 15:16बिल्कुल। दूसरी ओर मेवात आर्थिक रूप से
- 15:19पिछड़ा है। साक्षरता कम है। लेकिन वहां के
- 15:22सामाजिक ताने-बाने और सांस्कृतिक
- 15:24मान्यताओं के कारण लिंग चैन जैसी चीजों को
- 15:27बढ़ावा नहीं मिला। जिससे वहां बेटियों को
- 15:30जन्म देने की दर बेहतर रही।
- 15:32हां, 2011 में हरियाणा का कुल लिंगानुपात
- 15:35879 था जो उस समय सभी राज्यों में सबसे कम
- 15:39था। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए बाद
- 15:42में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे राष्ट्रीय
- 15:45अभियान की शुरुआत भी हरियाणा के पानीपत से
- 15:48ही की गई थी। यह विरोधाभास सचमुच आंखें
- 15:50खोलने वाला है। लेकिन दूसरी तरफ हरियाणा
- 15:53ने कई ऐसे कारनामे भी किए हैं जो पूरे देश
- 15:55के लिए मिसाल बने हैं।
- 15:56राज्य की प्रथम उपलब्धियों की लिस्ट काफी
- 15:59लंबी है।
- 16:001970 में 100% ग्रामीण विद्युतीकरण हासिल
- 16:03करने वाला यह भारत का पहला राज्य बना था।
- 16:061966 में राज्य बना और सिर्फ 4 साल में हर
- 16:10गांव तक बिजली।
- 16:11यह उस दौर की एक अविश्वसनीय प्रशासनिक
- 16:14उपलब्धि थी। अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल
- 16:17प्रकाश सर एंड देयर टीम हम समझाते हैं कि
- 16:20विकास को हमेशा समग्र रूप में देखना
- 16:22चाहिए। सिर्फ बिजली ही नहीं ट्रैक्टर
- 16:25उत्पादन में आज भी यह राज्य देश में प्रथम
- 16:27है।
- 16:28सभी गांव को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने
- 16:30वाला यह पहला राज्य बना और न्याय व्यवस्था
- 16:34को लोगों के दरवाजे तक ले जाने के लिए देश
- 16:36का पहला मोबाइल कोड भी मेवात में ही शुरू
- 16:38किया गया था। विकास के इतने सारे मोर्चों
- 16:40पर राज्य ने खुद को साबित किया है। अब जब
- 16:43हमने इतने सारे कांसेप्ट्स और फैक्ट्स को
- 16:45डिकोड कर लिया है तो क्यों ना एक बार
- 16:47ज्ञान का परीक्षण कर लिया जाए। बिलकुल।
- 16:50दिशांत आईएस के नोट्स में कुछ बहुत ही
- 16:52शानदार एमसीक्यू ड्रिल दिए गए हैं। आइए
- 16:53देखते हैं कि एलिमिनेशन तकनीक कैसे काम
- 16:55करती है।
- 16:56मान लीजिए परीक्षा में एक प्रश्न आता है
- 16:58जिसमें कथन दिया गया है। रोहतक और जींद
- 17:01हरियाणा के एकमात्र भू-आवेष्टित जिले हैं।
- 17:04अब हमें ऑप्शंस में से सही को चुनना है।
- 17:07अगर हम इस कथन को ध्यान से देखें तो हमें
- 17:09याद आएगा कि जींद हृदय है। वो सात जिलों
- 17:12को छूता है।
- 17:13तो वो लैंड लॉक कैसे हुआ? ऑप्शन देखकर जो
- 17:16घबरा गया समझो वह रेस से बाहर हो गया।
- 17:18एलिमिनेशन राउंड जिसने खेला उसी का बेड़ा
- 17:21पार हो गया।
- 17:22तो एलिमिनेशन लॉजिक से जींद वाला ऑप्शन
- 17:25तुरंत गलत हो जाता है। सही उत्तर होगा
- 17:27रोहतक और चरखी दादरी।
- 17:29एस्पिरेंट्स ध्यान दें। मैं सीधा उत्तर
- 17:32नहीं बता रही हूं। आपको कथन पढ़कर लॉजिक
- 17:35से गलत ऑप्शन को काटना है।
- 17:37और एक और सवाल जो अक्सर कंफ्यूज करता है।
- 17:39अगर पूछा जाए कि महाभारत काल में पानीपत
- 17:42का पुराना नाम क्या था? और ऑप्शंस में
- 17:44कन्नौज, शोनप्रस्थ, अपेलवा और पांडुप्रस्थ
- 17:47दिया हो।
- 17:48तो यहां भी हम लॉजिक लगाएंगे। शोनप्रस्थ
- 17:51तो सोनीपत है। अपेलवा पलवल है। कन्नौज
- 17:55उत्तर प्रदेश में है। तो बचा क्या?
- 17:57पांडुप्रस्थ यही सही उत्तर है। सीधे उत्तर
- 18:00पर कूदने के बजाय हमेशा ऑप्शंस को
- 18:03एलिमिनेट करना चाहिए।
- 18:04बिल्कुल। यह एलिमिनेशन की तकनीक हर
- 18:07परीक्षार्थी के लिए एक सुपर पावर की तरह
- 18:09है।
- 18:10इस चर्चा को समेटते हुए हम कह सकते हैं कि
- 18:12आज हमने जो यह विस्तृत अध्ययन सामग्री
- 18:15डिकोड की है वो हरियाणा के एक बहुत ही
- 18:17बहुआयामी रूप को हमारे सामने रखती है।
- 18:19हां, यह एक ऐसा राज्य है जहां एक तरफ वेद
- 18:22और पुराणों की गहरी ऐतिहासिक जड़े हैं।
- 18:26पानीपत और कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक मैदान
- 18:29हैं।
- 18:29तो वहीं दूसरी तरफ ट्रैक्टरों की
- 18:31गड़गड़ाहट और साइबर सिटी की चकाचौंध भी
- 18:33हैं। भूगोल के नक्शे पर भले ही यह 3
- 18:36डिग्री के विस्तार वाला एक छोटा सा बहुभुज
- 18:39आकार का राज्य हो लेकिन इसका आर्थिक,
- 18:42राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाव पूरे देश
- 18:45पर बहुत व्यापक है।
- 18:46बिल्कुल इस ज्ञानवर्धक और सघन विश्लेषण को
- 18:50खत्म करने से पहले हम एक अंतिम सवाल हवा
- 18:52में छोड़ना चाहते हैं।
- 18:53वही विरोधाभास वाला सवाल ना?
- 18:55हां, हमने विकास, साक्षरता और सामाजिक
- 18:57प्रगति के विरोधाभास पर गहराई से बात की।
- 19:00जो जिला शिक्षा और तकनीक में सबसे आगे है।
- 19:02वही एक समय लिंगानुपात के मामले में सबसे
- 19:05निचले स्तर पर था। तो सवाल यह है क्या
- 19:08तीव्र शहरीकरण और आर्थिक विकास हमेशा अपने
- 19:11साथ अनपेक्षित सामाजिक चुनौतियां लेकर आते
- 19:13हैं?
- 19:13यह बहुत ही क्रिटिकल सवाल है।
- 19:15क्या आधुनिक शिक्षा हमें सिर्फ साक्षर बना
- 19:18रही है? लेकिन हमारे सामाजिक और नैतिक
- 19:20मूल्यों को विकसित करने में कहीं पीछे छूट
- 19:22रही है? यह एक ऐसा विचारोत्तेजक सवाल है
- 19:25जिस पर सिर्फ एक सिविल सेवा के उम्मीदवार
- 19:27को ही नहीं बल्कि समाज के हर जागरूक
- 19:29व्यक्ति को सोचना चाहिए विकास की असली और
- 19:32संपूर्ण परिभाषा आखिर क्या है?
- 19:35इसी गहले और जरूरी सवाल के साथ हम आज के
- 19:37इस डीप ड्राइव को यहीं विराम देते हैं।
- 19:39चीजों के पीछे छिपे असली अर्थ और क्यों को
- 19:41तलाशते रहिए।
- 19:42दिस लेक्चर वाज़ बाय दिशांत आईएस।
- 19:45आज द डीप ड्राइव के इस विस्तृत विश्लेषण
- 19:48का विषय है हरियाणा का प्राचीन इतिहास।
- 19:50उसका नामकरण और स्रोत
- 19:52एकदम और इस डीप ड्राइव का आधार है दिशांत
- 19:56आईएएस और उनके मेंटर राहुल प्रकाश सर के
- 19:59विस्तृत और शोधपूर्ण नोट्स।
- 20:01सही कहा और हमारा मकसद यहां सिर्फ डेट्स
- 20:03या राजाओं के नाम रटना नहीं है।
- 20:06बिल्कुल नहीं। हमें कांसेप्ट को समझना है।
- 20:09हां। मतलब सोचिए कि डेढ़ करोड़ साल पुरानी
- 20:11एक खोपड़ी से लेकर सुदूर दक्षिण पूर्व
- 20:14एशिया के लाओस जैसे देश के शिलालेखों तक
- 20:16इस पूरे क्षेत्र का एक अद्भुत क्रमिक
- 20:18विकास हुआ है। इतिहास ना किसी बेहतरीन
- 20:21जासूस की डायरी की तरह होता है।
- 20:23जासूस की डायरी यह उपमा बहुत ही सटीक है।
- 20:25है ना? यहां बदला हुआ एक नाम, किसी सूखी
- 20:29हुई नदी का जिक्र या मिट्टी में दबा एक
- 20:31साधारण सा पत्थर भी एक बहुत बड़ा सुराग
- 20:34है। एक ऐसा सुराग जो अतीत के अनसुलझे
- 20:37रहस्यों के दरवाजे खुलता है।
- 20:38देखिए एक विश्लेषणात्मक नजरिए से देखें तो
- 20:41इतिहास सिर्फ पुरानी घटनाओं का संकलन नहीं
- 20:44है। यह सभ्यताओं के क्रमिक विकास, उनके
- 20:47पतन और उनके सर्वाइवल के पैटर्न्स को
- 20:51समझने का एक साइंस है। और जब हम किसी
- 20:54सिविल सेवा परीक्षा के दृष्टिकोण से सोचते
- 20:57हैं
- 20:57तो यह विषय एक बेहद मजबूत आधार तैयार करता
- 21:00है।
- 21:00एग्जैक्टली छोटी-छोटी बातें जैसे कि किसी
- 21:03पुरापाषाण स्थल पर मिला एक विशिष्ट हथियार
- 21:06या किसी विदेशी यात्री की किताब में दर्ज
- 21:08एक लोकल फसल का जिकरा एक गहरी ऐतिहासिक
- 21:12समझ पैदा करती हैं और यही कंसेप्चुअल
- 21:15क्लेरिटी वो एप्रोच है जो मेरिट लिस्ट में
- 21:17जगह दिलाती है।
- 21:18तो चलिए इस ऐतिहासिक टाइमलाइन को बिल्कुल
- 21:21शुरुआत से समझते हैं। नामांकरण का इतिहास
- 21:24वेदों से लेकर विद्वानों तक।
- 21:26हां, और ये सबसे कंफ्यूजिंग पार्ट होता है
- 21:28एस्पिरेंट्स के लिए।
- 21:30मुझे भी लगता है अगर हम समय के पहहिए को
- 21:32थोड़ा पीछे ले जाएं और सबसे पुराने
- 21:34संदर्भों को देखें तो नोट्स में बताया गया
- 21:37है कि ऋग्वेद में आठवें मंडल के 25वें
- 21:40सूक्त में इस क्षेत्र को राजत हरियाणा कहा
- 21:43गया है।
- 21:44जी राजत हरियाणा।
- 21:45और इसके बाद मनुस्मृति में आते हैं। जहां
- 21:47इसे ब्रह्मावर्त कहा गया है।
- 21:49यानी देवताओं की भूमि।
- 21:51बिल्कुल। और उत्तर वैदिक काल तक आते-आते
- 21:53यह ब्रह्मर्षि प्रदेश कहलाने लगा। एक ही
- 21:56जमीन लेकिन समय के साथ उसकी आध्यात्मिक और
- 21:58भौगोलिक पहचान कैसे बदल रही थी?
- 22:00और इसी बदलाव के बीच एग्जाम का एक बहुत ही
- 22:04शानदार सवाल बनता है। देखिए विद्वानों के
- 22:07अपने अलग-अलग मत हैं। जैसे डॉ. एचआर
- 22:10गुप्ता इसे आर्यना मानते हैं।
- 22:12आर्यों का घर।
- 22:13सही पकड़ा। जदुनाथ सरकार इसे हरियाल से
- 22:16जोड़ते हैं।
- 22:16हरियाली। जो कि चौतांग और सरस्वती जैसी
- 22:19नदियों की उपजाऊ घाटी को देखते हुए बहुत
- 22:22लॉजिकल भी लगता है। और वही महाराज कृष्ण
- 22:24इसे हरणा यानी लूटपाट से जोड़ते हैं।
- 22:28लेकिन सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क दिस यहां
- 22:31एक प्रीलिम्स अलर्ट है।
- 22:32हां राहुल सांकृत्यायन वाला ट्रैप
- 22:34एग्जैक्टली राहुल सांकृत्यायन जी ने इस
- 22:37क्षेत्र को एक विशिष्ट नाम दिया है।
- 22:39हरिधान्यक्य
- 22:41और अक्सर इसे महाभारत काल के नाम
- 22:43बहुधान्यक्य के साथ कंफ्यूज कर दिया जाता
- 22:46है। बिल्कुल बहुधान्यक्य का अर्थ है बहुत
- 22:48सारा अनाज जो महाभारत काल में इस क्षेत्र
- 22:51की कृषि समृद्धि को दर्शाता है। लेकिन
- 22:54हरिधान्यक के नाम राहुल सांकृत्यायन
- 22:57द्वारा दिया गया है।
- 22:58दोनों मिलतेजुलते लगते हैं ना सुनने में?
- 22:59हां, और परीक्षक अक्सर इन दोनों को आपस
- 23:02में बदलकर विकल्प बना देते हैं। नामों की
- 23:05इस भूल भुलाइयां में अक्सर एस्पिरेंट खो
- 23:07जाते हैं। जो बहुधान्य को हरिधान्य समझे
- 23:11उनके नंबर माइनस में गोते खाते हैं। इन
- 23:13दोनों के बीच का यह बारीक अंतर ही एग्जाम
- 23:16में नेगेटिव मार्किंग से बचाता है। और
- 23:18इसीलिए मेरी क्लास में मैं हमेशा एक बात
- 23:20कहती हूं।
- 23:21क्या? यूपीएससी के सफर में नाम वही बनाते
- 23:24हैं जो हरिधरा और बहुधान्यका का फर्क समझ
- 23:27पाते हैं।
- 23:28वाह क्या बात है। एक लाइट ह्यूमरस शायरी
- 23:32और फोकस सीधा मार्क्स पर। यह तो बहुत ही
- 23:34शानदार बात कही आपने।
- 23:36शुक्रिया। देखिए जब हम दिशांत आईएएस में
- 23:39पढ़ाते हैं तो हमारा मकसद यही होता है कि
- 23:42बर्डन कम हो और रिटेंशन ज्यादा हो। हो
- 23:44रिटेंशन से याद आया अगर हम मध्यकालीन और
- 23:47पौराणिक नाम देखें जहां हरि शब्द का
- 23:49प्रयोग हुआ है।
- 23:50जी हरि शब्द का जुड़ाव बहुत गहरा नजर आता
- 23:53है।
- 23:54दसवीं सदी में पुष्पदंत के महापुराण में
- 23:56पहली बार हरियाणो शब्द का प्रयोग हुआ। फिर
- 24:00जैन कवि विबुद्ध श्रीधर ने अपने ग्रंथ
- 24:02पशाानाचर में इसे हरियाणे लिखा है।
- 24:05और नौवीं सदी के स्कंदा पुराण को भी भूलना
- 24:08नहीं चाहिए। हां, वहां हरियाला शब्द का
- 24:10उपयोग किया गया है। मतलब मध्यकाल तक
- 24:13आते-आते यह क्षेत्र अपने वर्तमान नाम के
- 24:15बहुत करीब पहुंच चुका था।
- 24:17नाम हवा में नहीं बनता। उसका आधार वहां का
- 24:20भूगोल और नदियां होती हैं।
- 24:22तो चलिए इसी भूगोल के आधार पर साहित्यिक
- 24:26स्रोतों की बात करते हैं। नदियां, युद्ध
- 24:29और लाल चावल।
- 24:31हां, लाल चावल का जिक्र बहुत इंटरेस्टिंग
- 24:33है आगे चलकर। पहले वैदिक साहित्य देख लेते
- 24:35हैं। ऋग्वेद में सरस्वती, दृषद्वती और
- 24:39अपाया नदियों का स्पष्ट उल्लेख है।
- 24:40और यहां एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
- 24:43रैंकर्स फोकस हियर दशराज्ञ युद्ध यानी 10
- 24:47राजाओं का महान युद्ध।
- 24:49यह परुशनी नदी के तट पर लड़ा गया था ना
- 24:52जिसे आज हम रवि नदी के नाम से जानते हैं।
- 24:54सही जवाब। इसके अलावा ब्राह्मण ग्रंथों पर
- 24:57ध्यान दीजिए। आइतेरिया ब्राह्मण में इसे
- 25:00कुरु प्रदेश कहा गया है।
- 25:01और शतापथा ब्राह्मण में इस बात का स्पष्ट
- 25:03जिक्र है कि राजा कुरु के नाम पर ही इस
- 25:06क्षेत्र का नाम कुरुक्षेत्र पड़ा।
- 25:08राजा कुरु का जिक्र आते ही महाभारत और
- 25:10वामना पुराण को लिंक करना जरूरी हो जाता
- 25:13है। वामना पुराण में बताया गया है कि राजा
- 25:16कुरु ने कुरुक्षेत्र की भूमि में स्वयं हल
- 25:19चलाकर कृषि की शुरुआत की थी। और वहां सात
- 25:22वनों यानी फॉरेस्ट का उल्लेख भी है।
- 25:24जी सात वन और महाभारत का नकुल दिग्विजय
- 25:27पर्व तो पढ़ने लायक है। एक शानदार भौगोलिक
- 25:30नक्शा पेश करता है।
- 25:31उसमें रोहतक को रोहितिका कहा गया है।
- 25:33और सिरसा को
- 25:34सिरसा को शेरशात दर्शाया गया है।
- 25:38एक्सैक्टली और सिर्फ सनातन ग्रंथ ही नहीं
- 25:40इस क्षेत्र की महत्ता को बौद्ध और जैन
- 25:42साहित्यों ने भी बहुत गहराई से दर्ज किया
- 25:45है। परीक्षा में क्रॉस रिलीजन सोर्सेस पर
- 25:47बहुत सवाल आते हैं। जैसे दिव्यादान।
- 25:49हां, बौद्ध ग्रंथ दिव्यावदान बताता है कि
- 25:52अग्रोहा और रोहतक उस समय धर्म, संस्कृति
- 25:55और व्यापार के बहुत बड़े केंद्र थे। एक और
- 25:58बौद्ध ग्रंथ है पंप सुदानी। इसमें शायद
- 26:01स्वयं भगवान बुद्धा के रोहतक आने का जिक्र
- 26:04मिलता है।
- 26:04सही और जैन ग्रंथों की बात करें तो
- 26:07भद्रबाहु चरित अग्रोहा को एक प्रमुख जैन
- 26:10केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
- 26:12कथाकोश ग्रंथ पहली से तीसरी सदी के बीच के
- 26:15सामाजिक और धार्मिक जीवन का पूरा माइंड
- 26:18मैप हमारे सामने खोल कर रख देता है।
- 26:19यह सब पढ़कर मुझे लगता है कि इन किताबों
- 26:21में कितनी डिटेल्स छुपी है।
- 26:23किताबों में दबी इन्हीं बातों से कट ऑफ
- 26:26क्लियर होता है। वरना हिस्ट्री का सिलेबस
- 26:28तो हमेशा सीवियर होता है। हां, एक और
- 26:30बढ़िया शायरी। लेकिन इन भारतीय ग्रंथों के
- 26:33अलावा मुझे इस डायरी के वो पन्ने सबसे
- 26:35ज्यादा आकर्षक लगे जो विदेशियों ने लिखे
- 26:37हैं।
- 26:37विदेशी यात्रियों के वृतांत हमेशा से
- 26:40यूपीएससी के फेवरेट्स रहे हैं।
- 26:41इब्नबतूता जो मोरक्को से आया था उसने अपनी
- 26:45प्रसिद्ध किताब रेहला में सिरसा के
- 26:47प्रसिद्ध लाल चावल का जिक्र किया है। यह
- 26:49तथ्य सुनने में शायद साधारण लगे। लेकिन
- 26:52मैं सोच रहा था कि इसके पीछे की कहानी
- 26:53क्या है? एक विदेशी यात्री को यहां के
- 26:56चावल में ऐसा क्या दिखा कि उसने उसे अपनी
- 26:59किताब में अमर कर दिया।
- 27:01यही तो कॉनसेप्चुअल एनालिसिस है जो हम
- 27:03दिशांत आईएस में सिखाते हैं। देखिए
- 27:06इब्नबतूता के लाल चावल का जिक्र सिर्फ एक
- 27:08एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट का जिक्र नहीं है।
- 27:10तो और क्या है?
- 27:12यह बताता है कि 14वीं सदी में सिरसा कोई
- 27:15साधारण जगह नहीं थी। वहां का कृषि उत्पादन
- 27:18इतना उच्च कोटि का और स्पेसिफिक था कि एक
- 27:21ग्लोबल ट्रैवलर जिसने आधी दुनिया घूम ली
- 27:24थी वह भी उससे प्रभावित हुआ। यह उस समय के
- 27:27व्यापारिक मार्गों और हरियाणा की मजबूत
- 27:30कृषि अर्थव्यवस्था का सीधा प्रमाण है।
- 27:32कमाल है। एक लाल चावर और इतनी गहरी
- 27:35अर्थव्यवस्था की कहानी।
- 27:37बिल्कुल। इसी तरह अलबेरुरूनी ने अपनी
- 27:40किताबुल हिंद में थानेसर और उसके पवित्र
- 27:43ब्रह्म सरोवर का विस्तार से जिक्र किया है
- 27:46जो इसे एक प्रमुख तीर्थ स्थल प्रमाणित
- 27:48करता है।
- 27:49और मिहाज सिराज की तबकात नासरी में हांसी
- 27:53के भौगोलिक स्थिति का बहुत ही स्ट्रेटेजिक
- 27:56वर्णन मिलता है। हां एक मिलिट्री और
- 27:59स्ट्रेटेजिक पॉइंट के रूप में उभर कर आता
- 28:01है। इन साहित्यिक साक्ष्यों से निकलकर अब
- 28:03अगर हम जमीन में दबे ठोस सबूतों की तरफ
- 28:05बढ़े मेरा मतलब है पुरातात्विक साक्ष्य
- 28:08यानी आर्कियोलॉजिकल सोर्सेज और सिक्के।
- 28:11यह तो मेरा सबसे पसंदीदा हिस्सा है।
- 28:14स्टोंस एंड कॉइंस पत्थर और सिक्के झूठ
- 28:17नहीं बोलते।
- 28:18नोट्स का स्तंभ और शिलालेख वाला हिस्सा
- 28:20बहुत विस्तृत है। जैसे यमुनानगर से मिला
- 28:23टोपरा स्तंभ। इसे एक बहुत ही दुर्लभ
- 28:26पुरातात्विक खोज मानी जाती है।
- 28:27टोपरा स्तंभ इसीलिए अद्वितीय है क्योंकि
- 28:30यह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में एकमात्र
- 28:33ऐसा स्तंभ है जिस पर सम्राट अशोक के सभी
- 28:38सातों अभिलेख यानी सेवन एडिक्ट्स अंकित
- 28:41हैं।
- 28:41सातों एडिक्ट्स एक ही पिलर पर
- 28:44हां और सिर्फ अशोक ही नहीं बाद में चौहान
- 28:47वंश के राजा विग्रहराज चतुर्थ ने भी इस पर
- 28:50अपने लेख उत्कीर्ण करवाए हैं। लेकिन
- 28:53एग्जाम के नजरिए से एक और सवाल बनता है
- 28:56यहां।
- 28:56क्या?
- 28:56यह स्तंभ यमुनानगर से दिल्ली कैसे पहुंचा?
- 28:59अह फिरोजशाह तुगलक
- 29:01एग्जैक्टली फिरोजशाह तुगलक ने इसे टोपरा
- 29:05से उखड़वा कर दिल्ली में स्थापित करवाया
- 29:07था। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण ऐतिहासिक
- 29:10घटना है।
- 29:11शिलालेखों का तो जैसे पूरा नेटवर्क बिछा
- 29:13हुआ है। नोट्स में पवा के शिलालेख का
- 29:16जिक्र है जो प्रतिहार राजा भोज के समय का
- 29:18है।
- 29:19और इसमें क्या बताया गया है? इसमें बताया
- 29:21गया है कि पेहोवा घोड़ों के व्यापार का एक
- 29:24बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय केंद्र था।
- 29:26सोचो उस जमाने में इंटरनेशनल हॉर्स ट्रेड
- 29:29हो रहा है हरियाणा से। फिर सिरसा का
- 29:30शिलालेख है जो पशुपति संप्रदाय के एक शिव
- 29:33मंदिर के निर्माण की पुष्टि करता है और
- 29:36हिसार का गुजारी महल तो अपने आप में गजूबा
- 29:38है।
- 29:38हां वहां एक ही स्तंभ पर आठ अलग-अलग
- 29:41स्थानों से आने वाले तीर्थत्रियों के
- 29:43अभिलेख हैं।
- 29:44आठ अलग जगह के पिल्ग्रिम्स एक ही पिलर पर
- 29:47साइन करके गए हैं। कमाल है।
- 29:48ये सभी शिलालेख प्रमाणित करते हैं कि यह
- 29:50क्षेत्र हमेशा से लोगों की आवाजाही,
- 29:53व्यापार और तीर्थ यात्रा का एक प्रमुख
- 29:56संगम रहा है। लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा
- 29:58चौंकाने वाला साक्ष्य वो है जो भारत की
- 30:01सीमाओं से बहुत दूर मिला है।
- 30:03आप लाओस के शिलालेख की बात कर रही है ना?
- 30:06बिल्कुल।
- 30:06जब मैंने राहुल प्रकाश सर के नोट्स में यह
- 30:08पढ़ा कि दक्षिण पूर्व एशिया के देश लाओस
- 30:11में मिले एक शिलालेख में कुरुक्षेत्र की
- 30:14महिमा का वर्णन है तो मैं सच में हैरान रह
- 30:16गया। कहां हरियाणा और कहां लाओस। यह भारत
- 30:19की सॉफ्ट पावर और कल्चरल डिप्लोमेसी का
- 30:22हजारों साल पुराना सबूत है। यह दिखाता है
- 30:25कि उस दौरान भी कुरुक्षेत्र की पवित्रता
- 30:29की गूंज समुंदर पार तक थी।
- 30:31इसके अलावा राजस्थान के बिजोलिया शिलालेख
- 30:34का भी जिक्र है जो चौहान काल का है। उसमें
- 30:36हरियाणा को हरियातना कहा गया है।
- 30:39और लाडनूर शिलालेख में तो यह दावा किया
- 30:41गया है कि दिल्ली या दिल्ली का हरियाणा की
- 30:44राजधानी थी।
- 30:45यह सब डाटा एस्पिरेंट्स को याद रखना होगा।
- 30:47हां और अब आते हैं पुरातात्विक साक्ष्यों
- 30:50के दूसरे सबसे अहम हिस्से पर यानी मुद्रा
- 30:53शास्त्र या न्यूमिस्मैटिक्स। सिक्कों की
- 30:56बात करते हैं। सिक्कों की खान में छिपे
- 30:58हैं कई राज जो लोकेशंस को सही मैच करे उसी
- 31:02के सिर सजेगा एलबीएसएनए का ताज।
- 31:06एलबीएसएनए का ताज। वाह, सिक्कों के
- 31:08प्राप्ति स्थल वाकई अक्सर परीक्षाओं में
- 31:10सीधे पूछे जाते हैं।
- 31:11जी, लोकेशन मैचिंग इज अ क्लासिक यूपीसी
- 31:14ट्रैप। नोट्स में कुछ टेक्निकल शब्द हैं
- 31:17यहां पर जैसे कि सुग और अग्रोहा से आहट
- 31:20मुद्राएं मिली हैं और इसके ब्रैकेट में
- 31:23लिखा है पंचमार्क्ड कॉइंस। यह आहट
- 31:26मुद्राएं आखिर होती क्या हैं? मैं थोड़ा
- 31:28कंफ्यूज था इसमें।
- 31:29मैं एक्सप्लेन करती हूं। आहत का मतलब होता
- 31:32है चोट पहुंचाना। देखिए प्राचीन काल में
- 31:36जब धातु को पिघलाकर एक बिल्कुल परफेक्ट
- 31:39सांचे या मोल्ड में ढालने की टेक्निक पूरी
- 31:42तरह डेवलप नहीं हुई थी तो वह लोग क्या
- 31:44करते थे?
- 31:45क्या करते थे?
- 31:46चांदी या तांबे के एक चपटे टुकड़े पर किसी
- 31:49थप्पे यानी पंच से जोर से चोट मारकर उस पर
- 31:53कोई प्रतीक या चित्र उकेरा जाता था। इसी
- 31:56चोट या आहट की वजह से इन्हें आहत मुद्राएं
- 31:59कहते हैं।
- 32:00ओ तभी पंचमार्क
- 32:01एग्जैक्टली यह भारत के सबसे शुरुआती
- 32:05सिक्कों में से हैं और इनका सूघ व अग्रोहा
- 32:08से मिलना बताता है कि यहां ट्रेड एक्सचेंज
- 32:11बहुत पहले शुरू हो चुका था।
- 32:13यह तो बहुत ही विजुअल तरीका है इसे समझने
- 32:15का। सिक्कों के अन्य स्थानों को देखें तो
- 32:18खोखराकोट जो रोहतक में है, वहां से
- 32:20इंडोग्रीक सिक्के मिले हैं।
- 32:22सीरियस एस्पिरेंट्स ध्यान दें इस लोकेशन
- 32:24पर। खोखराकोट से इंडोग्रीक
- 32:26और मिताथल जो भिवानी में है वहां से कुषाण
- 32:29शासकों के सिक्के मिले हैं।
- 32:31बिल्कुल।
- 32:31और रोहतक से ही योध्या गण के सांचे या
- 32:34मोल्ड्स मिले हैं। जो यह इशारा करते हैं
- 32:37कि वहां कोई बड़ी तकल यानी मिंट रही होगी
- 32:40जहां सिक्के बनते थे।
- 32:42और मूर्तियों की बात करें तो पलवल, हाथिन
- 32:45और भड्डस से यक्षा यक्षिणी की मूर्तियां
- 32:48मिली हैं। फजीलपुर, सोनीपत से शेषशाही
- 32:51विष्णु की और अमीन कुरुक्षेत्र से
- 32:54सूर्यदेव की अद्भुत प्रतिमाएं प्राप्त हुई
- 32:56हैं।
- 32:56यहां मूर्तियों का मिलना सिर्फ आर्ट का
- 32:58डिस्प्ले नहीं है। है ना?
- 32:59एकदम सही सोच रहे हैं आप। यक्ष और यक्षिणी
- 33:03की मूर्तियां प्रकृति और धन के रक्षकों का
- 33:06प्रतीक हैं जो उस समय के लोक धर्म को
- 33:09दर्शाती हैं। वहीं शेषाशय विष्णु और
- 33:12सूर्यदेव की मूर्तियां यह बताती हैं कि
- 33:14समय के साथ यहां बड़े पौराणिक देवताओं की
- 33:17पूजा कितनी स्थापित हो चुकी थी। जैसा कि
- 33:20दिशांत आईएस में आप लोग पढ़ाते हैं कि हर
- 33:22चीज कनेक्टेड है।
- 33:23बिल्कुल जैसा कि राहुल प्रकाश सर और उनकी
- 33:26टीम इस बात पर जोर देते हैं कि इतिहास में
- 33:29कोई भी फैक्ट आइसोलेशन में नहीं पढ़ा जाना
- 33:31चाहिए। हर साक्ष्य तत्कालीन समाज और
- 33:34अर्थव्यवस्था का आईना होता है।
- 33:36पूरी तरह सहमत हूं इस बात से। अब चलिए
- 33:38थोड़ा और पीछे चलते हैं। पाषाण काल से
- 33:41प्री हड़प्पन तक यानी स्टोन एज से लेकर
- 33:43सिसवाल कल्चर तक। यह सबसे पुराना और सबसे
- 33:46फैसिनेटिंग दौर है।
- 33:47नोट्स में डॉक्टर गाय पिलगिम द्वारा
- 33:49पिंजोर यानी पंचकूला में खोजी गई एक
- 33:51खोपड़ी का वर्णन है। डेढ़ करोड़ साल
- 33:54पुरानी मानव खोपड़ी।
- 33:55लोअर पेलिथिक दौर की। हां, यह समझना बहुत
- 33:58दिलचस्प होगा कि इस एक खोपड़ी का मिलना
- 34:01हरियाणा के इतिहास के लिए क्या मायने रखता
- 34:03है।
- 34:04देखिए यह खोज हरियाणा को सीधे मानव विकास
- 34:06के प्रारंभिक नक्शे पर ला खड़ा करती है।
- 34:09डॉक्टर गाय पिलग्रम ने जब पिंजोर क्षेत्र
- 34:11में यह खोज की तो इसने साबित कर दिया कि
- 34:14शिवालिक की तलहटियों में डेढ़ करोड़ साल
- 34:16पहले भी मानवीय गतिविधियां थी। लोअर
- 34:19पेलिथिक का मतलब
- 34:20इसका मतलब है पाषाण युग का वो सबसे
- 34:22शुरुआती दौर जब इंसान ने पत्थरों को बहुत
- 34:25ही खुरदरे और बुनियादी औजारों के रूप में
- 34:27इस्तेमाल करना शुरू ही किया था। वो शिकारी
- 34:30था। भोजन इकट्ठा करता था। यह खोज बताती है
- 34:33कि यह क्षेत्र शुरू से ही जीवन के अनुकूल
- 34:36था।
- 34:36और यहीं जीवन धीरे-धीरे विकसित होकर
- 34:38बस्तियों का रूप लेने लगा। नोट्स में एक
- 34:41बहुत ही महत्वपूर्ण कल्चर का जिक्र है।
- 34:43सिसवाल संस्कृति जिसे प्री हड़प्पन या
- 34:46हड़प्पा पूर्व संस्कृति कहा गया है।
- 34:48यहां स्टूडेंट्स को समझना होगा कि हड़प्पा
- 34:51से पहले भी यहां लोग एक सिस्टमैटिक तरीके
- 34:54से रह रहे थे। यह वाकई हैरान करने वाला
- 34:57है।
- 34:57और यहां एक और प्रीलिम्स अलर्ट है। 1968
- 35:00में पंजाब विश्वविद्यालय के डॉक्टर सूरज
- 35:03भान ने हिसार से लगभग 26 कि.मी. दूर चौतंग
- 35:08नहर के किनारे इस सिसवल संस्कृति की खुदाई
- 35:11की थी।
- 35:121968 डॉ. सूरजभान चौतंग नहर। यह फैक्ट्स
- 35:17इंपॉर्टेंट है।
- 35:18बिल्कुल। और इस खुदाई में जो मिला वह
- 35:21इतिहास को समझने के लिए बहुत अहम है। यहां
- 35:24से तांबे का गंदा सा मिला है।
- 35:26गंदा सा यानी एक प्रकार की कुल्हाड़ी या
- 35:29ब्लेड।
- 35:30हां, अब तांबे के गंदासे का क्या अर्थ है?
- 35:33इसका सीधा सा मतलब है कि यह लोग सिर्फ
- 35:36पत्थरों पर निर्भर नहीं थे। वो धातु
- 35:38विज्ञान यानी मेटलर्जी की शुरुआत कर चुके
- 35:41थे। नोट्स में यहां के लोगों की प्रजाति
- 35:43और उनकी कला के बारे में भी कुछ विशिष्ट
- 35:46बातें लिखी हैं। नीगो ऑस्ट्रेलियन प्रजाति
- 35:48का जिक्र है और एक खास तरह के मृदभांड
- 35:51यानी पोटरी की बात कही गई है। काले रंग से
- 35:54चित्रित सफेद मृदभांड।
- 35:55जी पोटरी पोटरी ही किसी भी प्राचीन
- 35:58संस्कृति का सिग्नेचर होती है। काले रंग
- 36:01सेंगे हुए सफेद बर्तन यह दिखाते हैं कि
- 36:04उनके पास न केवल टेक्निकल नॉलेज था बल्कि
- 36:07एक एस्थेटिक यानी कलात्मक समझ भी विकसित
- 36:09हो चुकी थी। क्या इस कल्चर में भी फेजेस
- 36:12थे?
- 36:12सही पकड़ा। डॉक्टर सूरज भान ने इस
- 36:14संस्कृति को तीन स्तरों में बांटा है।
- 36:17पूर्व सिसवाल, मध्य सिसवाल और उत्तर
- 36:19सिसवाल।
- 36:20यानी अर्ली, मैच्योर और लेट सिसवाल।
- 36:23एग्जैक्टली यह विभाजन यह साबित करता है कि
- 36:26यह कोई रातोंरात बसी हुई या खत्म हो जाने
- 36:29वाली बस्ती नहीं थी बल्कि इसका एक निरंतर
- 36:32क्रमिक विकास हुआ जो बाद में आकर हड़प्पा
- 36:35सभ्यता की नींव बना। और जैसे कि हम दिशांत
- 36:38आईएएस में सिखाते हैं। इस कंटिन्यूटी को
- 36:41समझना ही हिस्ट्री का असली अध्ययन है।
- 36:43अब जब हमने पाषाण काल से लेकर मध्यकालीन
- 36:46साहित्य, सिक्कों और नामांकरण तक का इतना
- 36:49विस्तृत सफर तय कर लिया है तो यह जानना
- 36:51जरूरी है कि इस अथा ज्ञान को यूपीएससी
- 36:53परीक्षा के दबाव में कैसे उपयोग किया जाए।
- 36:56क्योंकि अक्सर एस्पिरेंट्स तथ्यों को लेकर
- 36:58वहां कंफ्यूज हो जाते हैं।
- 36:59तथ्यों के समंदर में जब लॉजिक की नाव चलती
- 37:02है। एलिमिनेशन की कला से ही प्री में बात
- 37:05बनती है।
- 37:05वाह! यह एलिमिनेशन टेक्निक की बात करें तो
- 37:08वो कैसे काम आती है इस चैप्टर में?
- 37:10देखिए एग्जाम ट्रैप को समझना जरूरी है।
- 37:12परीक्षक सीधे सवाल नहीं पूछता। चलिए एक
- 37:15एमसीक्यू रूल डिस्कस करते हैं यहां।
- 37:18हां बिल्कुल। मान लीजिए परीक्षा में एक
- 37:19सवाल आता है जहां तीन कथन दिए गए हैं।
- 37:22पहला कि ऋग्वेद में रजत हरियाणा कहा गया
- 37:25है
- 37:25जो कि हमने पढ़ा सही है।
- 37:27दूसरा कि मनुस्मृति में ब्रह्मावर्त कहा
- 37:30गया है।
- 37:30ये भी ठीक है।
- 37:31और तीसरा कथन दे दिया जाए कि राहुल
- 37:34संकृत्यायन ने इस क्षेत्र को बहुधान्यका
- 37:37कहा है। अब ऑप्शन होंगे वन एंड टू टू एंड
- 37:40थ्री एक्सट्रा।
- 37:41हां वही ट्रैप जो हमने पहले डिस्कस किया
- 37:43था।
- 37:44बिल्कुल। एक सामान्य विद्यार्थी शायद इस
- 37:46पूरे सवाल को देखकर घबरा जाए। लेकिन एक
- 37:49रैंकर, एक सीरियस एस्पिरेंट तुरंत उस
- 37:52तीसरे कथन को पकड़ेगा। उसे याद आएगा कि
- 37:54राहुल संकृत्यायन ने तो हरि धाम्यका कहा
- 37:57था। जबकि बहुधान्य का महाभारत का शब्द है।
- 38:00बस फिर गया। जैसे ही पता चला कि कथन तीन
- 38:03गलत है। वो उन सभी विकल्पों को एलिमिनेट
- 38:05कर देगा जिनमें तीन शामिल है और बिना पूरी
- 38:08तरह से बाकी दो रटे हुए भी वो सही उत्तर
- 38:10तक पहुंच जाएगा। एग्जैक्ट यूपीएससी स्टाइल
- 38:13एलिमिनेशन लॉजिक एक और आम एग्जाम ट्रैप्चर
- 38:17नोट्स में हाईलाइट किया गया है। वो
- 38:19सिक्कों की लोकेशनेशंस का है।
- 38:21मान लीजिए मैच द फॉलोइंग का सवाल आ जाए।
- 38:24जिसका आप जिक्र कर रही थी कि लोकेशन स्विच
- 38:26कर देते हैं।
- 38:27हां। परीक्षक क्या करेगा कि वो मिथाथल के
- 38:30सामने इंडोग्रीक सिक्के लिख देगा और खोखरा
- 38:33कोर्ट के सामने कुषाण सिक्के। और जो
- 38:35विद्यार्थी सिर्फ ऊपर ऊपर से पढ़कर गया वह
- 38:37सोचेगा कि दोनों ही नाम हरियाणा के हैं और
- 38:39दोनों ही सिक्के भी पड़े हुए लग रहे हैं
- 38:41तो शायद यह मैच सही है।
- 38:42लेकिन हमने अभी गहराई से विश्लेषण किया है
- 38:45कि इंडोग्रीक सिक्के खोखराकोट यानी रोहतक
- 38:48से मिले हैं। जबकि मिथाथल जो भिवानी में
- 38:51है वह कुषाण शासकों के सिक्कों का केंद्र
- 38:54था। इस तरह की तथ्यात्मक स्पष्टता ही आपको
- 38:57भीड़ से अलग करती है।
- 38:58और अगर साहित्यिक युग्मों यानी लिटरी पे्स
- 39:01की बात करें तो इबन बतूता के सामने लाल
- 39:04चावल, दिव्या वदान के सामने अग्रोहा और
- 39:07वामान पुराणा के सामने राजा कुरु द्वारा
- 39:09हल चलाना। यह सब अगर मैच द फॉलोइंग में आए
- 39:12तो आराम से सॉल्व हो जाएगा।
- 39:13बिल्कुल सही। दिशांत आईएस में हमारी यही
- 39:16कोशिश रहती है कि ज्ञान को मैकेनिकली रटने
- 39:19के बजाय उसे कहानी और लॉजिक के साथ इस तरह
- 39:22दिमाग में बैठाया जाए कि एग्जाम हॉल के
- 39:24प्रेशर में भी दिमाग बिल्कुल शार्प चले।
- 39:26तो इस डीप ड्राइव के अंत में आते हुए हम
- 39:29यह कह सकते हैं कि हरियाणा सही मायनों में
- 39:31सभ्यता का पालना यानी क्रिडल ऑफ
- 39:34सिविलाइजेशन रहा है।
- 39:35बेशक
- 39:36यह सिर्फ एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है।
- 39:38डेढ़ करोड़ साल पुराने पिंजौर के अवशेषों
- 39:40से लेकर सिसवाल के तांबे के गधा से ऋग्वेद
- 39:43के श्लोकों, इब्नबतूता की किताब और अशोका
- 39:46के टोपरा स्तंभ तक यह भूमि निरंतर मानवीय
- 39:49गतिविधि का एक धड़कता हुआ केंद्र रही है।
- 39:51नक्शा है जो हमें बताता है कि हम कहां से
- 39:54आए हैं। बिल्कुल और अगले डीप डाइव में हम
- 39:57इसी नक्शे को और आगे बढ़ाते हुए हड़प्पा
- 40:00स्थलों जैसे राखीगढ़ी और बनावली का भी ऐसा
- 40:03ही गहन विश्लेषण करेंगे।
- 40:04लेकिन उससे पहले
- 40:05हां समापन से पहले सुनने वालों के लिए मैं
- 40:08एक बहुत ही विचारणीय प्रश्न छोड़ना
- 40:10चाहूंगा। आज की हमारी इस चर्चा में दो
- 40:12बातें बड़ी खास थी।
- 40:13पहला
- 40:14लाओस जैसे दूरस्थ दक्षिण पूर्व एशियाई देश
- 40:17के शिलालेखों में कुरुक्षेत्र की महिमा का
- 40:19गुणगान
- 40:19और दूसरा वो पेहोवा वाला।
- 40:21हां। दूसरा पेहोवा में घोड़ों का बड़ा
- 40:23अंतरराष्ट्रीय व्यापार। यह सोचने पर मजबूर
- 40:25करता है कि आज से हजारों साल पहले जब
- 40:27हमारे पास ना तो इंटरनेट था ना कोई
- 40:30सेटेलाइट ना कोई आधुनिक संचार माध्यम तब
- 40:32इस क्षेत्र के लोगों का ग्लोबल नेटवर्क और
- 40:35कल्चरल डिप्लोमेसी कितनी मजबूत रही होगी।
- 40:37सही में सोचिए उस वक्त बिना किसी
- 40:39टेक्नोलॉजी के इतना बड़ा नेटवर्क
- 40:41क्या यह प्राचीन व्यापारिक मार्ग सिर्फ
- 40:44घोड़ों, चावल और भौतिक वस्तुओं का
- 40:46आदान-प्रदान कर रहे थे या फिर यह पूरी की
- 40:49पूरी सभ्यताओं, धार्मिक विचारों और जीवन
- 40:52दर्शन को दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने
- 40:55तक पहुंचाने वाले हाईवे थे। इस पर जरूर
- 40:58विचार कीजिएगा क्योंकि यूपीएससी ऐसी ही
- 41:00एनालिटिकल थॉट्स की मांग करता है।
- 41:03यह एक ऐसा विचार है जो इतिहास को देखने का
- 41:06हमारा पूरा नजरिया ही बदल देता है। इस पर
- 41:08सोचने के लिए वाकई बहुत कुछ है।
- 41:10दिस लेक्चर वास बाय दिशांत आईएएस।
- 41:13हिस्ट्री ऑफ हरियाणा। एंशिएंट
- 41:15सिविलाइजेशंस टू रिपब्लिक। हरियाणा का
- 41:18इतिहास प्राचीन सभ्यताओं से गणतंत्र तक।
- 41:21जो कि एक बहुत ही स्पष्ट प्रीलिम्स अलर्ट
- 41:25है एस्पिरेंट्स के लिए।
- 41:26बिल्कुल। एचएसएससी और यूपीएससी जैसी
- 41:29परीक्षाओं में जो क्रोनोलॉजिकल एवोल्यूशन
- 41:31है यानी कालक्रम
- 41:32उस पर सीधे सवाल बनते हैं।
- 41:34राइट?
- 41:35सिंधु घाटी सभ्यता जो 2500 से 1500 ईसा
- 41:38पूर्व थी। वहां से शुरुआत करते हुए वैदिक
- 41:41सभ्यता फिर महाभारत काल और अंतः
- 41:44मौर्योत्तर काल में गणतंत्रों के उदय तक
- 41:46की यह ऐतिहासिक यात्रा बेहद दिलचस्प है
- 41:49और परीक्षा के दृष्टिकोण से अति
- 41:51महत्वपूर्ण भी। देखिए इस कालक्रम को समझना
- 41:54केवल तिथियों को रटना नहीं है।
- 41:55हां रटने से तो बात नहीं बनेगी।
- 41:57बिल्कुल नहीं। मतलब सभ्यताओं के विकास और
- 42:00पतन के कारणों का गहराई से विश्लेषण करना
- 42:03है। सरस्वती नदी के शांत किनारों से जो
- 42:06कहानी शुरू होती है,
- 42:07वो आगे चलकर शक्तिशाली गणराज्यों के
- 42:10निर्माण तक जाती है।
- 42:11एक्जेक्टली। इतिहास में हर भौगोलिक बदलाव
- 42:14और हर युद्ध अपने पीछे एक ठोस कारण छोड़ता
- 42:18है। एक सीरियस एस्पिरेंट के लिए उन कारणों
- 42:22और परिणामों की निरंतरता को समझना ही असली
- 42:25तैयारी है।
- 42:26हम इतिहास की इसी उलझन और क्रोनोलॉजी के
- 42:29महत्व को देखकर एक बात याद आती है।
- 42:32सुनिएगा। तारीखें भूल जाते हैं अक्सर। यह
- 42:34कैसा इम्तिहान है। पर क्रोनोलॉजी का धागा
- 42:37जो पकड़ ले एस्पिरेंट उसी की असली उड़ान
- 42:39है।
- 42:39बहुत खूब। यह एक बहुत ही सटीक अवलोकन है।
- 42:42तो चलिए इस क्रोनोलॉजी के पहले अध्याय की
- 42:45ओर बढ़ते हैं। इंडस वैली सिविलाइजेशन इन
- 42:48हरियाणा
- 42:49जिसे मुख्य रूप से सरस्वती दृश्यती द्वाब
- 42:52क्षेत्र के संदर्भ में देखा जाता है।
- 42:53राइट? 2500 से 1500 ईसा पूर्व का यह
- 42:57कालखंड कांस्य युग यानी ब्रोंज़ एज का
- 43:00हिस्सा है। एक अहम सवाल जो अक्सर उठता है
- 43:03कि यह महान शहरी सभ्यता इन्हीं नदियों के
- 43:06किनारे क्यों फली फूली? हां, मुझे लगता है
- 43:08इसका सबसे बड़ा कारण भूगोल में छिपा है।
- 43:10बिल्कुल, इसका मुख्य कारण था कृषि के लिए
- 43:13उपजाऊ जलोढ़, मिट्टी और जल की प्रचुर
- 43:16उपलब्धता। इसका विकास दो स्पष्ट चरणों में
- 43:19देखा जा सकता है।
- 43:21पहला चरण सरस्वती और दृशद्वती नदी घाटी
- 43:24में।
- 43:24और दूसरा यमुना तथा साहिबी नदी घाटी
- 43:27क्षेत्र में। हां, जब सिंधु घाटी सभ्यता
- 43:30की बात होती है, तो बैकग्राउंड में दयाराम
- 43:33साहनी द्वारा की गई हड़प्पा की खोज का
- 43:35संदर्भ हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। यह एक
- 43:38बहुत जरूरी फाउंडेशन है।
- 43:39हम हरियाणा के पुरातात्विक स्थलों की सूची
- 43:42में सबसे पहला प्रमुख नाम बनावली का आता
- 43:45है।
- 43:45फतेहाबाद जिले में स्थित इस स्थल को द
- 43:48सिटी ऑफ द प्लाओ यानी हल का शहर कहा जाता
- 43:51है।
- 43:51बनावली का पुरातात्विक महत्व बहुत विशाल
- 43:54है। प्राचीन सरस्वती जिसे रंगोई नदी भी
- 43:57कहा जाता था के किनारे बसे इस स्थल की खोज
- 44:00197374 में आर एस बिष्ट यानी रविंद्र सिंह
- 44:04बिष्ट द्वारा की गई थी। और यहां से
- 44:05प्राप्त साक्ष्यों को अगर विजुअलाइज किया
- 44:08जाए तो
- 44:08तो हमें मिट्टी का हल यानी क्ले प्लाऊ
- 44:11मॉडल बैलगाड़ी के पियों के निशान जौ का
- 44:14विशाल ढेर
- 44:15बार्ले राइट हां बार्ले और अग्निवेदी यानी
- 44:19फायर ऑल्टर्स और धावन पात्र जिसे वॉश
- 44:22बेसिन कह सकते हैं वो मिलते हैं। यह
- 44:25साक्ष्य एक अत्यंत उन्नत और सुनियोजित
- 44:28कृषि आधारित शहरी समाज की ओर इशारा करते
- 44:31हैं। यहीं पर परीक्षाओं में एक बहुत बड़ा
- 44:33एग्जाम ट्रैप छिपा होता है।
- 44:35हम खिलौने वाला ट्रैप
- 44:37एक्सैक्टली बनावली से मिट्टी के हल का
- 44:39खिलौना यानी टॉय मॉडल मिला है। लेकिन अगर
- 44:42परीक्षा में जुते हुए खेत यानी प्लाउड
- 44:45फील्ड का साक्षी पूछा जाए
- 44:47तो वो राजस्थान के कालीबंगा से मिला है।
- 44:49बिल्कुल। इस बारीक अंतर को समझना बहुत
- 44:51जरूरी है क्योंकि आयोग अक्सर ऐसे ही
- 44:53विकल्पों से कंफ्यूज करता है। कैंडिडेट्स
- 44:56को इसमें बिल्कुल उलझना नहीं है।
- 44:57ऐसी स्पष्टता ही प्रारंभिक परीक्षा में
- 44:59सफलता दिलाती है। इसी कड़ी में अगला और
- 45:03सबसे महत्वपूर्ण स्थल है राखीगढ़ जो हिसार
- 45:06जिले में है।
- 45:07राखीगढ़
- 45:08हां इसे महज एक बस्ती नहीं बल्कि सिंधु
- 45:11सभ्यता की प्रोडेंशियल कैपिटल या प्रांतीय
- 45:15राजधानी माना जाता है। राखीगढ़ का दायरा
- 45:18मोहनजोदड़ो से भी बड़ा है।
- 45:20जो इसे भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा
- 45:23हड़प्पा स्थल बनाता है। राइट?
- 45:24बिल्कुल। नारनौंद तहसील में दृश्यदधति नदी
- 45:28के दाएं तट पर स्थित है यह। 1963 में डॉ.
- 45:32सूरजभान द्वारा खोजे गए।
- 45:33और बाद में 1997 से 2000 के बीच डॉ.
- 45:37अमरेंद्रनाथ द्वारा उत्खनित।
- 45:39हां, इस स्थल से कहीं चौंकाने वाले
- 45:41साक्ष्य मिले हैं। लेकिन यहां एक
- 45:43विश्लेषणात्मक प्रश्न उठता है। राखीगढ़ी
- 45:46में मिली 5000 वर्ष पुराने आभूषणों की
- 45:49फैक्ट्री हमें उस समय की अर्थव्यवस्था के
- 45:52बारे में क्या बताती है? अ यह एक बहुत ही
- 45:55शानदार बिंदु है। राखीगढ़ की आभूषण
- 45:58फैक्ट्री में लाजवर्थ मणि जिसे लैपिस
- 46:00लाजुली कहते हैं और कार्निलियन जैसे
- 46:03पत्थरों का उपयोग होता था।
- 46:04और लाजवर्थ मणि मुख्य रूप से अफगानिस्तान
- 46:08के बदखशा क्षेत्र से आती थी।
- 46:10राइट? यह स्पष्ट रूप से सिद्ध करता है कि
- 46:12राखींगड़ी कोई अलग-थलग बस्ती नहीं थी
- 46:14बल्कि मध्य एशिया तक फैले एक विशाल
- 46:17अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क का अहम
- 46:19हिस्सा थी। इसके अलावा यहां से एक प्रेमी
- 46:21जोड़े का कंकाल यानी लवर्स स्केलेटन और
- 46:25विशाल अनाज गोदाम भी मिले हैं।
- 46:28ग्रीनरीज
- 46:29हां जो उनकी सामाजिक और प्रशासनिक संरचना
- 46:32को दर्शाते हैं। 2012 में ग्लोबल हेरिटेज
- 46:35फंड ने इसे खतरे में पड़ी एशिया की 10
- 46:38विरासत स्थलों में शामिल किया था।
- 46:40यह एक बहुत जरूरी करंट रेलेवेंस है।
- 46:42बिल्कुल। एज वी टीच एट दिशांत आईएएस।
- 46:46ऐतिहासिक साक्ष्यों को हमेशा उनके आर्थिक
- 46:49और वर्तमान करंट अफेयर्स के महत्व से
- 46:51जोड़कर पढ़ना चाहिए। सही बात है। फतेहाबाद
- 46:54का भेड़ाना एक और ऐसा स्थल है
- 46:57जो हरियाणा में सबसे प्राचीन बस्ती यानी
- 47:00ओल्डेस्ट हैबिटेशन होने का गौरव रखता है।
- 47:02हम यहां से भी लाजवर्थ मनी और तंदूर के
- 47:06साक्ष्य मिले हैं।
- 47:07और इसके बाद फतेहाबाद का ही कुणाल स्थल
- 47:09आता है। रैंकर्स फोकस हियर कुणाल से राजा
- 47:12का मुकुट यानी रिंगल क्राउन और चांदी के
- 47:14दो मुकुट मिले हैं।
- 47:15साथ ही उल्टा वी आकार का बाणाग्र भी यहीं
- 47:18से मिला है। यह मुकुट यह दर्शाता है कि
- 47:20हड़प्पा सभ्यता में शायद किसी प्रकार की
- 47:23राजशाही या प्रारंभिक राज्य निर्माण की
- 47:25प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। अर्ली स्टेट
- 47:27फॉर्मेशन बिल्कुल। इसके साथ ही रोहतक का
- 47:30फरमाना जिसे दक्ष खेड़ा भी कहते हैं। अपने
- 47:3227 कमरों की नीव वाले मकान और एक बड़े
- 47:35कब्रिस्तान यानी ब्यूरियल ग्राउंड के लिए
- 47:37प्रसिद्ध है।
- 47:37इन पुरातात्विक गहराइयों को देखकर यही समझ
- 47:40आता है कि किसी भी बड़ी संरचना के लिए नीव
- 47:43का मजबूत होना कितना आवश्यक है।
- 47:46हम इसी मजबूत नीव के संदर्भ में एक और
- 47:49विचार सामने आता है। सिंधु घाटी की उन
- 47:52पक्की ईंटों सा अपना फाउंडेशन बनाना पड़ता
- 47:55है। रैंक यूं ही नहीं मिलती जनाब। खुद को
- 47:58भिड़ाना सा तपाना पड़ता है।
- 47:59बहुत खूब। अब इस कांस्य युगीन भौतिक
- 48:03सभ्यता से आगे बढ़कर हम उस काल में प्रवेश
- 48:06करते हैं जिसने भारतीय उपमहाद्वीप की
- 48:08वैचारिक और आध्यात्मिक नीव रखी। द महाभारत
- 48:12एरा।
- 48:13महाभारत का काल। भौतिक व्यापार से वैचारिक
- 48:15युद्ध तक का यह संक्रमण इतिहास का एक
- 48:17महत्वपूर्ण मोड़ है। कुरुक्षेत्र केवल एक
- 48:20युद्ध का मैदान नहीं था।
- 48:21यह धर्म क्षेत्र था।
- 48:23बिल्कुल। लगभग 900 ईसा पूर्व के आसपास
- 48:26माने जाने वाले इस महाकाव्य का संकलन
- 48:28महर्षि वेदव्यास ने सरस्वती नदी के किनारे
- 48:31किया था और इसका लेखन भगवान गणेश द्वारा
- 48:34किया गया था।
- 48:34इस महाकाव्य में द रूल ऑफ 18 यानी 18 का
- 48:39नियम एक बहुत ही रहस्यमई और दिलचस्प
- 48:42कांसेप्ट है।
- 48:43हम युद्ध 18 दिन चला।
- 48:46महाभारत में 18 पर्व हैं।
- 48:48गीता में 18 अध्याय हैं।
- 48:50और सेना भी 18 अक्षोहिणी थी। अक्षोहिणी
- 48:53सेना शब्द को थोड़ा डिकोड करना आवश्यक है
- 48:56एस्पिरेंट्स के लिए।
- 48:57हां, यह प्राचीन भारत में सेना के माप की
- 49:00एक विशाल इकाई थी जिसमें रथ, हाथी,
- 49:03घुड़सवार और पैदल सैनिकों का एक निश्चित
- 49:07अनुपात होता था।
- 49:08जो कि 1 अनुपात 1, अनुपात 3 अनुपात 5 था।
- 49:12एग्जैक्टली 18 अशोहिणी में से 11 कौरवों
- 49:16के पास और सात पांडवों के पास थी। इस
- 49:19युद्ध में प्रयोग किए गए शंखों का भी
- 49:21विशेष ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है।
- 49:24श्री कृष्ण का पांचजन्य और अर्जुन का
- 49:27देवदत्त शंख।
- 49:28युद्ध की जिओपॉलिटिक्स को समझना मेंस और
- 49:31प्रीलिम्स दोनों के लिए आवश्यक है।
- 49:33हम कुरुक्षेत्र के 48 कोस सर्किट को मैप
- 49:36पर विजुलाइज करना काफी मददगार होता है।
- 49:3848 कोस सर्किट हां इसके चार कोनों पर चार
- 49:41यक्षों की स्थिति मानी जाती है।
- 49:43जैसे तरंतुक अरंतुक
- 49:45राइट। जो इसके प्रहरी थे, उस समय कुरु
- 49:48साम्राज्य की दो प्रमुख राजधानियां थी,
- 49:50हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ।
- 49:52यहां एक ट्रैप अलर्ट को समझना जरूरी है।
- 49:55क्या कुरुक्षेत्र का 48 कोस का सर्किट ही
- 49:58महाभारत का एकमात्र केंद्र था?
- 50:00कई इतिहासकार कैथल को इसका वास्तविक
- 50:02केंद्र मानते हैं।
- 50:03क्योंकि इस 48 कोस परिधि का सबसे ज्यादा
- 50:07भौगोलिक क्षेत्र वर्तमान कैथल जिले में
- 50:09आता है।
- 50:10अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड
- 50:12देयर टीम ऐसे ही भौगोलिक और ऐतिहासिक
- 50:15ट्रैप्स पर विशेष जोर दिया जाता है ताकि
- 50:18एग्जाम हॉल में एस्पिरेंट्स को किसी भी
- 50:20प्रकार का कंफ्यूजन ना हो।
- 50:21महाभारत की बात हो और श्रीमद्भगवत गीता का
- 50:24जिक्र ना हो। यह संभव नहीं है।
- 50:26कुरुक्षेत्र के ज्योतिष में अक्षयव यानी
- 50:29बरगद के नीचे श्री कृष्ण का अर्जुन को
- 50:32दिया गया उपदेश महाभारत के भीष्म पर्व का
- 50:35हिस्सा है।
- 50:35जो लगभग 45 मिनट तक चला था। गीता के
- 50:39संदर्भ में एक त्वरित फैक्ट चेक भी आवश्यक
- 50:41है।
- 50:42कई बार सामान्य अध्ययन में सत्यमेव जयते
- 50:45और कर्मणीय वाधिकारस्ते मा फलेशु कदाचन के
- 50:49मूल स्रोतों को लेकर भ्रम पैदा हो जाता
- 50:51है।
- 50:52हां, यह स्पष्ट होना चाहिए कि सत्यमेव
- 50:54जयते मुंडको उपनिषद से लिया गया है।
- 50:57जबकि कर्म का यह महान सिद्धांत श्रीमद्
- 50:59भगवत गीता से आता है। हम कर्म योग के इस
- 51:02सिद्धांत को अगर आज की सिविल सेवा परीक्षा
- 51:05की तैयारी से जोड़ा जाए तो कट ऑफ की चिंता
- 51:08में जो डूबा वो ज्ञान का मोती का पाएगा।
- 51:10बस कर्म कर अपनी आंसर राइटिंग पर ओएमआर
- 51:13खुद तेरा भाग्य बताएगा।
- 51:14यह आज के संदर्भ में गीता का एकदम
- 51:17व्यवहारिक अनुवाद है। देखिए इतिहास को याद
- 51:20रखने का एक बेहतरीन तरीका प्राचीन पात्रों
- 51:23को आधुनिक शहरों से जोड़ना है।
- 51:25लिंकिंग बहुत जरूरी है।
- 51:26बिल्कुल। कर्ण के नाम से करनाल का नामकरण
- 51:29हुआ। जहां उन्होंने अपने कवच कुंडल दान
- 51:31किए थे। अमीन गांव जिसे अब अभिमन्युपुर
- 51:35कहा जाता है।
- 51:35वही स्थान है जहां चक्रव्यूह रचा गया था।
- 51:38राइट भीष्म पितामह से जुड़ा है बाणगंगा
- 51:41यानी नरकातारी तीर्थ जहां तीरों की शैया
- 51:44का प्रसंग आता है।
- 51:45और वनवास के दौरान पांडवों के रुकने का
- 51:47स्थान पंचकूला या पिंजौर माना जाता है।
- 51:49महाभारत के इस भीषण रक्तपात और महायुद्ध
- 51:52ने ना केवल भौगोलिक बल्कि गहरे वैचारिक और
- 51:56आध्यात्मिक प्रश्न भी खड़े किए। इसी
- 51:58वैचारिक मंथन और युद्ध के आघात के परिणाम
- 52:01स्वरूप हम देखते हैं कि बाद के काल में
- 52:03हरियाणा क्षेत्र में बौद्ध और जैन धर्म के
- 52:06शांतिवादी विचारों ने कैसे अपनी जड़े
- 52:07जमाई।
- 52:08बिल्कुल। बुद्धिज्म एंड जैनिज्म इन
- 52:10हरियाणा। मौर्य काल और उसके आसपास बौद्ध
- 52:13तथा जैन धर्म के स्मारकों का निर्माण इस
- 52:16क्षेत्र के सांस्कृतिक बदलाव का प्रतीक
- 52:18है।
- 52:19हम्म। उदाहरण के लिए यमुनानगर का टोपरा
- 52:22अभिलेख। यह मूल रूप से सम्राट अशोक द्वारा
- 52:24स्थापित एक स्तंभ था जिस पर सात अभिलेख
- 52:27अंकित थे जो उनके धम्म के संदेश को फैलाते
- 52:30थे।
- 52:30यह स्थान हिमालय की ओर जाने वाले एक
- 52:32प्रमुख व्यापारिक मार्ग पर था।
- 52:34राइट?
- 52:34हां, लेकिन बाद में मध्यकाल में फिरोज शाह
- 52:36तुगलक इसे उखाड़ कर दिल्ली ले गया।
- 52:38यमुनानगर में शुभ नामक स्थान है। जहां एक
- 52:41प्राचीन स्तूप में भगवान बुद्ध के समय के
- 52:45एक 12 वर्ष के बच्चे के नाखून और बाल रखे
- 52:48होने के साक्ष्य मिलते हैं।
- 52:50इसके अलावा हिसार का अग्रोहा बौद्ध और जैन
- 52:53धर्म का एक बेहद प्रमुख केंद्र बनकर उभरा।
- 52:56अग्रोहा के एक बड़े धार्मिक केंद्र बनने
- 52:58के पीछे एक मजबूत सामाजिक आर्थिक कारण था।
- 53:02यह क्षेत्र वैश्य यानी व्यापारी समुदाय का
- 53:06एक प्रमुख गढ़ था। और बौद्ध और जैन धर्म
- 53:08का अहिंसा का सिद्धांत व्यापार और वाणिज्य
- 53:11के लिए बहुत अनुकूल था क्योंकि इसमें
- 53:14महंगे कर्मकांडों और पशु बलि का अभाव था।
- 53:17इसलिए व्यापारी वर्ग ने इन धर्मों को भारी
- 53:20संरक्षण दिया। इसके अतिरिक्त यमुनानगर के
- 53:23जगाधरी में स्थित चनैती का स्तूप जो पक्की
- 53:26ईंटों से बना है
- 53:28बेग्ड ब्रिक्स से
- 53:29हां वो मौर्यकालीन वास्तुकला का एक
- 53:31उत्कृष्ट नमूना है।
- 53:33मौर्य साम्राज्य जैसे विशाल वटवृक्ष के
- 53:35पतन के बाद भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति
- 53:38में एक बड़ा बदलाव आता है। अ राइज ऑफ
- 53:40रिपब्लिक
- 53:41यानी मौर्योत्तर काल में गणराज्यों का उदय
- 53:45जब कोई केंद्रीय सत्ता गिरती है तो एक
- 53:47पावर वैक्यूम या शक्ति का शून्य पैदा होता
- 53:50है।
- 53:50और इसी वैक्यूम को भरते हुए हरियाणा
- 53:53क्षेत्र में चार प्रमुख गणराज्यों का उदय
- 53:56हुआ। योधे, कुणिंद, अग्र और अर्जुनायन। इन
- 54:01गणराज्यों के अस्तित्व को प्रमाणित करने
- 54:02वाले सोर्सेज यानी स्रोत बहुत महत्वपूर्ण
- 54:05हैं।
- 54:05इनका वर्णन महर्षि पाणिनि की व्याकरण
- 54:08पुस्तक अष्टाध्याय और पतंजलि के महाभाष्य
- 54:11में मिलता है।
- 54:12यह इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन
- 54:14साहित्य केवल व्याकरण या धर्म तक सीमित
- 54:17नहीं था।
- 54:18बल्कि वह तत्कालीन राजनीतिक भूगोल का भी
- 54:21सटीक वर्णन करता था। एज वी टीच एट दिशांत
- 54:24आईएएस प्राचीन इतिहास को समझने के लिए
- 54:27साहित्यिक स्रोतों और पुरातात्विक
- 54:30साक्ष्यों का मिलान करना सबसे आवश्यक कदम
- 54:33होता है।
- 54:33इन गणराज्यों में सबसे शक्तिशाली थे योधे
- 54:36गणराज्य द वॉरियर क्लान। इनका विस्तार नौ
- 54:39औरंगाबाद जो वर्तमान भिवानी और रोहतक के
- 54:42बीच का क्षेत्र है वहां तक था। और इनकी
- 54:44राजधानी प्रकृतनख थी जो वही नौ औरंगाबाद
- 54:47का क्षेत्र है। योधेयों की सबसे बड़ी
- 54:50विशेषता यह थी कि उन्होंने स्वयं को
- 54:52आयुजीवी की उपाधि दी थी।
- 54:55आयुधजीवी का शाब्दिक अर्थ है वे लोग जिनकी
- 54:58आजीविका का मुख्य साधन उनके हथियार या
- 55:01युद्ध कला हो। वेपंस एस लाइवलीहुड।
- 55:03वे मूलतः एक सैन्य समाज थे। उनका प्रतीक
- 55:06चिन्ह मोर था। पीकॉक।
- 55:09अब सोचने वाली बात यह है कि मोर ही क्यों?
- 55:11हम क्योंकि मोर भगवान कार्तिकेय यानी
- 55:14युद्ध के देवता का वाहन है जो एक योद्धा
- 55:17कबीले की मानसिकता के बिल्कुल अनुकूल है।
- 55:20प्रसिद्ध पुरातात्विक बीरबल साहनी ने
- 55:22रोहतक के खोखराकोट से इनके कई सिक्के खोजे
- 55:25थे। इन सिक्कों पर अंकित शब्द बहुत गहरी
- 55:29जानकारी देते हैं। इन पर योधे गणस्य जय
- 55:32यानी योधे गणराज्य की जय हो और योधे नाम
- 55:36बहुधान्य के लिखा मिलता है।
- 55:38बहुधान्य का अर्थ है अत्यधिक अनाज वाला
- 55:41क्षेत्र। यह स्पष्ट करता है कि वे केवल
- 55:43लड़ाके नहीं थे बल्कि एक बेहद समृद्ध कृषि
- 55:47अर्थव्यवस्था का भी संचालन कर रहे थे।
- 55:49देखिए योद्धाओं और एस्पिरेंट्स के जीवन
- 55:52में एक अद्भुत समानता होती है।
- 55:54बिल्कुल योद्धाओं के इसी जज्बे को देखकर
- 55:57कहा जा सकता है किताबों को ही अस्त्र बना
- 55:59लिया। रातों की नींद को यज्ञ में जला
- 56:02दिया। यह आयुधजीवी हैं आज के दौर के
- 56:05जिन्होंने यूपीएससी को ही अपना
- 56:06कुरुक्षेत्र बना लिया।
- 56:08शानदार तुलना है। अब अन्य गणराज्यों पर
- 56:11नजर डालते हैं। कुनिंद गणराज्य का विस्तार
- 56:13मुख्य रूप से अंबाला और यमुनानगर के
- 56:16पहाड़ी क्षेत्रों में था। इनके सबसे
- 56:18प्रतापी राजा अमोग भूति के नाम के सिक्के
- 56:20मिले हैं। जिन पर मृग यानी डियर का चित्र
- 56:23अंकित है।
- 56:24वहीं दूसरी ओर अग्र गणराज्य का क्षेत्र
- 56:27हिसार के अग्रोहा और बरवाला के आसपास था
- 56:31और इनकी राजधानी अग्रोधक थी। अग्रगणराज्य
- 56:34से जुड़ा एक अत्यंत रोचक तथ्य जो
- 56:36परीक्षाओं में कई बार दिखता है।
- 56:38यहां से एक संगीतमय ईंट म्यूजिक ब्रेक
- 56:41मिली है।
- 56:41हां, इस ईंट पर संगीत के सात सुर सा, रे,
- 56:45गा, मा, पा, धा, नी अंकित है।
- 56:48यह कोई साधारण खोज नहीं है। यह दर्शाता है
- 56:50कि यह गणराज्य केवल युद्ध या व्यापार तक
- 56:53सीमित नहीं था।
- 56:54बल्कि यहां सांस्कृतिक और कलात्मक
- 56:56परिष्कार भी उच्च स्तर का था। कल्चरल
- 56:58सोफेस्टिकेशन था। चौथा प्रमुख गणराज्य
- 57:02अर्जुनायन था जिनका प्रभाव महेंद्रगढ़ और
- 57:05राजस्थान के कुछ हिस्सों में था।
- 57:07यह स्वयं को पांडव अर्जुन का वंशज मानते
- 57:10थे। कुषाणों जैसे बाहरी आक्रमणकारियों को
- 57:14खदेड़ने के लिए अर्जुनायनों ने योधेयों के
- 57:17साथ एक मजबूत सैन्य गठबंधन किया था। हम
- 57:20एग्जाम अलोड के तौर पर यह जानना जरूरी है
- 57:23कि अर्जुनायन के सिक्कों पर द्विशब्द
- 57:26अंकित मिलता है।
- 57:27जिसका ऐतिहासिक अर्थ है योधेयों और
- 57:30अर्जुनायनों का राजनीतिक विलय।
- 57:32इतने शक्तिशाली होने के बावजूद इन
- 57:35स्वतंत्र गणराज्यों का अंत कैसे हुआ?
- 57:37इन गणराज्यों के पतन का कारण गुप्त
- 57:39साम्राज्य का उदय था। गुप्त सम्राट
- 57:42समुद्रगुप्त ने अपने साम्राज्य विस्तार के
- 57:45दौरान इन गणराज्यों की स्वतंत्रता समाप्त
- 57:48कर दी और इन्हें अपने अधीन कर लिया।
- 57:50सीरियस एस्पिरेंस मार्क ग्रिस इस घटना का
- 57:54स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण समुद्रगुप्त के
- 57:57दरबारी कवि हरिशेण द्वारा रचित प्रयाग
- 58:01प्रशस्ति यानी इलाहाबाद स्तंभ लेख में
- 58:04मिलता है।
- 58:04प्रशस्ति का अर्थ ही होता है राजा की
- 58:07प्रशंसा में लिखा गया लेख जिसमें
- 58:09समुद्रगुप्त की विजयों का विस्तृत वर्णन
- 58:11है। इतिहास के इन पन्नों को अलग-अलग रटने
- 58:15के बजाय चलिए एक 360 डिग्री एनालिसिस करते
- 58:18हैं और डॉट्स को कनेक्ट करते हैं। द
- 58:20हरियाणा लेगसी इसे एक 3D मॉडल या त्रिकोण
- 58:24के रूप में विजुअलाइज करना चाहिए।
- 58:25इस त्रिकोण का पहला आयाम है कृषि। बनावली
- 58:29के मिट्टी के हल से लेकर योधेयों के
- 58:31बहुधान्य क्षेत्र तक इस भूमि ने हमेशा से
- 58:35एक मजबूत कृषि अर्थव्यवस्था को पाला है।
- 58:38दूसरा आयाम है युद्ध। महाभारत के धर्म
- 58:41युद्ध से लेकर आयुजीवी योद्धाओं के शौर्य
- 58:44तक यह एक रणनीतिक रणभूमि रही है।
- 58:46और तीसरा आयाम है आध्यात्म। सरस्वती के तट
- 58:50पर वेदों की रिचाओं से लेकर गीता के दर्शन
- 58:53तक यहां विचारों का एक गहरा मंथन हुआ है।
- 58:56निष्कर्ष के तौर पर इन प्राचीन गणतांत्रिक
- 58:59व्यवस्थाओं को आज की आधुनिक पंचायती राज
- 59:01व्यवस्था का आदि रूप या प्रोटोटाइप कहा जा
- 59:04सकता है।
- 59:05सत्ता का विकेंद्रीकरण जो आज के लोकतंत्र
- 59:08की आत्मा है, उसके बीज इन प्राचीन
- 59:11गणराज्यों में देखे जा सकते हैं। अंडर द
- 59:13गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड देयर टीम
- 59:16मेंस परीक्षा के लिए इसी तरह का बहुआयामी
- 59:19और विश्लेषणात्मक माइंडसेट विकसित करने पर
- 59:22विशेष जोर दिया जाता है।
- 59:23विश्लेषण के बाद अब सीखी गई चीजों को
- 59:26परखने का समय है प्रीलिम्स प्रैक्टिस
- 59:28क्वेश्चंस।
- 59:29यूपीएससी स्टाइल के मल्टीपल चॉइस
- 59:31क्वेश्चंस यानी एमसीक्यूस को हल करने की
- 59:33जो तकनीक है एलिमिनेशन लॉजिक उस उसे समझना
- 59:36बहुत महत्वपूर्ण है।
- 59:38बिल्कुल। अगर परीक्षा में इंडस वैली
- 59:40साइट्स पर इस तरह का सवाल सामने आ जाए
- 59:42सुनिएगा। कथन एक बनावली से मिट्टी के
- 59:46हल्का मॉडल मिला है।
- 59:47कथन दो राखीगढ़ भारतीय उपमहाद्वीप में
- 59:51सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल है और कथन
- 59:54तीन सबसे पुराना मुकुट भिड़ाना से मिला
- 59:56है। अब यहां सीधा उत्तर ढूंढने के बजाय
- 59:59एलिमिनेशन तकनीक कैसे काम करेगी?
- 1:00:01कथनों का एक-एक करके विश्लेषण करते हैं।
- 1:00:04कथन एक बनावली को द सिटी ऑफ द प्लाओ कहा
- 1:00:07जाता है और वहां से हल का मॉडल मिला है।
- 1:00:10यह बिल्कुल सही है।
- 1:00:11कथन दो राखीगढ़ मोहनजोदड़ो से भी बड़ा है।
- 1:00:14यह भी सही है।
- 1:00:15अब कथन तीन पर आते हैं। हमने चर्चा की थी
- 1:00:18कि मुकुट का साक्षी कुनार से प्राप्त हुआ
- 1:00:20था।
- 1:00:20राइट? जबकि भिड़ाना अपनी सबसे प्राचीन
- 1:00:24बस्ती ओल्डेस्ट हैबिटेशन के लिए जाना जाता
- 1:00:27है। इसीलिए कथन तीन गलत है।
- 1:00:29जो एस्पिरेंट सिर्फ इतना याद रखेगा कि
- 1:00:31मुकुट कुनार में मिला था वो आसानी से गलत
- 1:00:34विकल्प को एलिमिनेट कर लेगा।
- 1:00:35बिल्कुल। चलिए दूसरे प्रश्न के कांसेप्ट
- 1:00:37को देखते हैं जो प्राचीन गणराज्यों पर
- 1:00:40आधारित है।
- 1:00:40कथन एक योधे गणराज्य का प्रतीक मोर था।
- 1:00:44कथन दो संगीत के सुर वाले सिक्के कुणिंद
- 1:00:46गणराज्य से मिले हैं। कथन तीन अग्र
- 1:00:49गणराज्य की राजधानी अग्रोदक थी।
- 1:00:51इस प्रश्न में एग्जामिनर का ट्रैप साफ
- 1:00:53दिखाई देता है।
- 1:00:54कैसे?
- 1:00:55देखिए योधे कार्तिकेय के उपासक थे। हां।
- 1:00:58इसलिए उनका प्रतीक मोर यानी कथन एक सही
- 1:01:01है। अग्र की राजधानी अग्रोदक कथन तीन भी
- 1:01:05सही है। लेकिन कथन दो एक क्लासिक ट्रैप
- 1:01:08है।
- 1:01:08संगीत के सुर?
- 1:01:09हां संगीत के सुर कुनिंद गणराज्य से नहीं
- 1:01:12बल्कि अग्र गणराज्य से मिले थे और वह भी
- 1:01:15सिक्कों पर नहीं बल्कि एक ईंट पर।
- 1:01:18आयोग इसी तरह शब्दों के हेरफेर से फंसाता
- 1:01:20है। एमसीक्यू में होने वाली इन्हीं
- 1:01:23गलतियों और उनसे मिलने वाली सीख पर एक बात
- 1:01:25याद रखनी चाहिए। मॉक टेस्ट में गलतियां कर
- 1:01:28लो। यही तो सीखने का दौर है। असली रणभूमि
- 1:01:31में तो बस सटीकता का ही शोर है।
- 1:01:33बहुत ही उम्दा बात। चलिए अब एक क्विक
- 1:01:35रिककैप करते हैं। आज के इस लेक्चर में
- 1:01:38हमने सरस्वती के किनारे पनपी सिंधु घाटी
- 1:01:40सभ्यता जैसे बनावली और राखी घड़ी से अपनी
- 1:01:44यात्रा शुरू की।
- 1:01:45उसके बाद कुरुक्षेत्र में लड़े गए महाभारत
- 1:01:47के धर्म युद्ध के कारणों और परिणामों को
- 1:01:49समझा। फिर मौर्य साम्राज्य के पतन से
- 1:01:51उत्पन्न हुए शक्ति के शून्य को भरते हुए
- 1:01:54योधे, कुनिंद और अग्र जैसे गणराज्यों
- 1:01:58और उनके सांस्कृतिक व रणनीतिक पहलुओं का
- 1:02:00360 डिग्री विश्लेषण किया।
- 1:02:02आज हमने प्राचीन साक्ष्यों पर विस्तार से
- 1:02:05चर्चा की। लेकिन इतिहास के पन्ने कभी पूरी
- 1:02:08तरह बंद नहीं होते। आज भी राखीगढ़ से मिले
- 1:02:11कंकालों के डीएनए सैंपल्स वैश्विक स्तर पर
- 1:02:13एक बड़ी बहस का विषय बने हुए हैं। क्या यह
- 1:02:16जेनेटिक साक्ष्य आर्यन माइग्रेशन थ्योरी
- 1:02:18से जुड़े पुराने दावों को पूरी तरह से पलट
- 1:02:21सकते हैं?
- 1:02:21क्या हम भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास को
- 1:02:24फिर से लिखने की कगार पर खड़े हैं?
- 1:02:26यह एक ऐसा विचारणीय प्रश्न है जो आने वाले
- 1:02:28समय में इतिहास और विज्ञान के संगम को नई
- 1:02:31दिशा देगा। इस पर अपने स्तर पर विचार जरूर
- 1:02:34कीजिएगा और निरंतर पढ़ते रहिएगा। दिस
- 1:02:37लेक्चर वाज बाय दिशांत आईएस।
- 1:02:39छठी शताब्दी के अंत में जब विशाल गुप्ता
- 1:02:42साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढा रहा
- 1:02:44था, तब उसी के खंडारों पर एक नए राजवंश की
- 1:02:47नींव रखी जा रही थी। यह कहानी है उस दौर
- 1:02:50की जिसने उत्तर भारत की राजनीति को हमेशा
- 1:02:52के लिए बदल दिया। इस गहरे विश्लेषण में हम
- 1:02:56हरियाणा हर्ष से सुल्तानत तक उस ऐतिहासिक
- 1:02:59सफर को डिकोड करेंगे जहां से इतिहास
- 1:03:02प्रशासन और सांस्कृतिक विरासत के अहम
- 1:03:05पन्ने जुड़ते हैं।
- 1:03:06बिल्कुल और इस पूरी ऐतिहासिक यात्रा की
- 1:03:08गहराई को समझना सिविल सेवा परीक्षाओं
- 1:03:11विशेषकर यूपीएससी और स्टेट पीसीएस के लिए
- 1:03:14बहुत अनिवार्य शर्त है। देखिए यह महज
- 1:03:18राजाओं और उनके युद्धों की फहरिस्त नहीं
- 1:03:20है। यह एक ऐसा संक्रमण काल है जहां
- 1:03:23प्रशासनिक ढांचे विकसित हुए, नए व्यापारिक
- 1:03:26मार्ग बने और समाज ने एक गहरा सांस्कृतिक
- 1:03:29बदलाव देखा।
- 1:03:30प्रीलिम्स में यहां के कालाक्रम और
- 1:03:32प्राचीन शब्दावली पर सीधे प्रश्न बनते
- 1:03:34हैं। जबकि मेंस में इस क्षेत्र के
- 1:03:36भू-राजनैतिक महत्व का एक समग्र विश्लेषण
- 1:03:39अपेक्षित होता है। सही कहा। तो इस बदलाव
- 1:03:41का जो पहला गवाह बना वह था श्री कंथा
- 1:03:44जनापदा जिसे आज हम थानेसर या कुरुक्षेत्र
- 1:03:47के नाम से जानते हैं। यहीं पुष्यभूति वंश
- 1:03:50का उदय हुआ। अब अगर इसकी क्रोनोलॉजी या
- 1:03:53पीढ़ियों को एक फ्लो चार्ट की तरह देखा
- 1:03:55जाए तो शुरुआत होती है नर वर्धना से। उनके
- 1:03:58बाद आए राज्यवर्धना प्रखम। फिर आदित्य
- 1:04:01वर्धना और फिर आते हैं प्रभाकर वर्धना। हम
- 1:04:04और इस पूरी वंशावली में प्रभाकर वर्धना का
- 1:04:08स्थान सबसे अहम हो जाता है। एग्जाम के
- 1:04:11दृष्टिकोण से एस्पिरेंट्स को यह मार्क
- 1:04:13करना चाहिए कि प्रभाकर वर्धना ही इस वंश
- 1:04:16के प्रथम स्वतंत्र शासक थे। उन्होंने परम
- 1:04:20भट्टारका महाराजाधिराजा की भारीभरकम उपाधि
- 1:04:24धारण की थी। यह टाइटल अपने आप में इस बात
- 1:04:26का ऐलान था कि अब वह किसी के अधीन नहीं है
- 1:04:30और पूर्ण संप्रभुता उनके हाथ में है।
- 1:04:32हां और ऐसी भारीभरकम उपाधियां और तथ्य जो
- 1:04:36याद रख ले उसका प्रीलिम्स निकलना तय है।
- 1:04:38जैसे एक बात यहां एकदम फिट बैठती है।
- 1:04:41इतिहास के पन्नों की गहराई जो नाप गया
- 1:04:44समझो उसका प्रीलिम्स का बेड़ा पार हो गया।
- 1:04:46तो प्रभाकराव वर्धना के बाद गद्दी पर आए
- 1:04:49राज्यवर्धना द्वितीय लेकिन इस वंश को असली
- 1:04:51शिखर पर पहुंचाया सम्राट हर्षवर्धना ने।
- 1:04:54एकदम सही सम्राट हर्षावर्धना जिनका
- 1:04:57शासनकाल 606 से 647 ईसवी तक रहा। सोचिए
- 1:05:02मात्र 16 वर्ष की आयु में बड़े भाई की
- 1:05:05हत्या के बाद राजपाट संभालना और फिर उत्तर
- 1:05:08भारत का अंतिम महान हिंदू सम्राट कहलाना
- 1:05:11यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी। उनके कद का
- 1:05:14अंदाजा उनकी उपाधियों से लगाया जा सकता
- 1:05:16है। शिलादित्य यानी गुणों का सूर्य और
- 1:05:20सकलोत्तरा पथाननाथ जिसका अर्थ है पूरे
- 1:05:23उत्तर पथ का स्वामी।
- 1:05:25और इन उपाधियों के साथ-साथ उनकी एक बहुत
- 1:05:26बड़ी स्ट्रेटेजिक मूव भी थी। अपनी राजधानी
- 1:05:29को थानेसर से कन्नौज ले जाना।
- 1:05:31बिल्कुल। और मेंस के नजरिए से इस
- 1:05:34भू-राजनीतिक रणनीति का विश्लेषण बहुत
- 1:05:37जरूरी है। कन्नौज उस समय गंगा, यमुना, दआब
- 1:05:41के बिल्कुल केंद्र में स्थित था। यह वो
- 1:05:44उपजाऊ और समृद्ध क्षेत्र था, जहां से पूरे
- 1:05:47उत्तर भारत के व्यापारिक मार्गों और
- 1:05:50संसाधनों पर सीधा नियंत्रण स्थापित किया
- 1:05:52जा सकता था। राजधानी शिफ्ट करना सिर्फ जगह
- 1:05:55बदलना नहीं था। यह पावर का सेंट्रलाइजेशन
- 1:05:58था। लेकिन इतने बड़े और समृद्ध साम्राज्य
- 1:06:00को चलाने के लिए एक बेहद मजबूत प्रशासनिक
- 1:06:03ढांचे की भी जरूरत पड़ी होगी। अगर हम
- 1:06:06हर्षा के साम्राज्य की हायरार्की को ऊपर
- 1:06:08से नीचे के फ्लो चार्ट में तोड़ें तो सबसे
- 1:06:10बड़ी इकाई थी भुक्ति। इसको आज के प्रांत
- 1:06:14या स्टेट की तरह समझ सकते हैं। भुक्ति को
- 1:06:16फिर विषय यानी जिलों में बांटा गया था।
- 1:06:19हां। और विषया के नीचे आते थे पाथका जो कि
- 1:06:23तहसीलों के बराबर थे। और अंत में सबसे
- 1:06:26निचली इकाई थी ग्रामा यानी गांव। यह एक
- 1:06:30प्रॉपर स्टेप बाय स्टेप हायरार्की थी। अब
- 1:06:33इस विशाल ढांचे को प्रॉपर्ली चलाने के लिए
- 1:06:35विशिष्ट अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी।
- 1:06:38जैसे अवंती यह युद्ध और शांति के मंत्री
- 1:06:41की भूमिका में थे। सिंघनादा मुख्य सेनापति
- 1:06:45थे। कुंतला घोड़सवार सेना का नेतृत्व करते
- 1:06:48थे और हाथियों की सेना यानी हस्ती कोर के
- 1:06:51प्रमुख थे स्कंदा गुप्ता। यहां रुक कर एक
- 1:06:54चीज पॉइंट आउट करना चाहूंगा। एग्जाम में
- 1:06:56स्टूडेंट्स अक्सर एक ट्रैप में फंसते हैं।
- 1:06:59प्रशासन में महाशवालाधिकृता और बालाधिकृता
- 1:07:02जैसे मिलते जुलते पद थे। दोनों सुनने में
- 1:07:05एक जैसे लगते हैं।
- 1:07:06हां। और यहीं पर रेंकर्स और बाकी
- 1:07:10स्टूडेंट्स का अंतर दिखता है। यह एक
- 1:07:12सीरियस प्रीलिम्स अलर्ट है। इन शब्दों को
- 1:07:15अगर हम तोड़कर सोचें तो बलाधिकृता में बल
- 1:07:19शब्द है जो मुख्य रूप से पैदल सेना की
- 1:07:22शक्ति को दर्शाता है। जबकि महाशवा में
- 1:07:25अश्वा यानी घोड़ा छिपा है। तो लॉजिकल सी
- 1:07:29बात है कि महाशवा बलाधिकृता घुड़सवार सेना
- 1:07:32का सर्वोच्च कमांडर था। यह लॉजिकल
- 1:07:35डिकोडिंग एग्जाम हॉल में बहुत काम आती है।
- 1:07:37सही बात है।
- 1:07:38अब प्रशासन के बाद सीधे आते हैं
- 1:07:39अर्थव्यवस्था और राजस्व प्रणाली पर। किसी
- 1:07:42भी एंपायर को चलाने के लिए पैसा चाहिए। उस
- 1:07:44दौर में राज्य की आय का सबसे बड़ा स्रोत
- 1:07:47था भूमि कर। किसानों को अपनी उपज का छठा
- 1:07:50हिस्सा यानी वन सिक्स्थ पार्ट कर के रूप
- 1:07:52में देना होता था।
- 1:07:53बिल्कुल। इस पूरी कर प्रणाली को
- 1:07:56एस्पिरेंट्स एक ट्रायंगल इमेज की तरह
- 1:07:58विजुलाइज कर सकते हैं। इस ट्रायंगल के तीन
- 1:08:02मेन हिस्से थे। पहला था भागा जो कि सीधे
- 1:08:06तौर पर उपज का हिस्सा होता था। दूसरा था
- 1:08:09हिरण्य जो नकद या कैश के रूप में लिया
- 1:08:12जाने वाला कर था और तीसरा था बलि जो
- 1:08:16शुरुआत में एक तरह की स्वैच्छिक भेंट हुआ
- 1:08:19करती थी। पर बाद में यह भी रेवेन्यू का
- 1:08:22हिस्सा बन गई।
- 1:08:23तीन अलग-अलग तरह के टैक्स तो क्या उस दौर
- 1:08:26की आम जनता पर यह व्यवस्था भारी पड़ रही
- 1:08:28थी? इसका सबसे प्रमाणिक जवाब हमें चीनी
- 1:08:31यात्री शानजांग जिनको हम ह्यूएन सांग भी
- 1:08:35कहते हैं उनके वृतांत से मिलता है।
- 1:08:38शानजांग का क्लियरली यह ऑब्जरवेशन था कि
- 1:08:40हर्षा के काल में कर बहुत ही हल्के थे और
- 1:08:44सबसे बड़ी बात बेगार यानी बिना वेतन के
- 1:08:47जबरन श्रम करवाना लगभग ना के बराबर था।
- 1:08:51जैसा कि हम दिशांत आईएएस में पढ़ाते हैं।
- 1:08:54प्राचीन भारत के इस कर ध्यानशाचा और जन
- 1:08:57कल्याणकारी नीतियों को समझना मेंस के लिए
- 1:09:00बहुत जरूरी है। यह हर्षा के एक जन
- 1:09:03केंद्रित प्रशासक होने का बहुत बड़ा सबूत
- 1:09:05है।
- 1:09:06और जहां शांति और जन कल्याण होता है, वहीं
- 1:09:08साहित्य और कला अपने चरम पर होती है।
- 1:09:11हर्षा का दौर साहित्य और संस्कृति का
- 1:09:14स्वर्ण युग था। सम्राट हर्षा खुद एक बहुत
- 1:09:17ही उच्च कोटि के लेखक थे। रत्नावली,
- 1:09:19प्रियदर्शिका और नागानंदा। यह तीनों
- 1:09:22प्रसिद्ध संस्कृत नाटक हर्षा की ही लेखनी
- 1:09:25का हिस्सा हैं।
- 1:09:26हां। और यहां एनसीईआरटी पर्सपेक्टिव को ऐड
- 1:09:28करना बहुत जरूरी हो जाता है। स्टूडेंट्स
- 1:09:31को हर्षा और उनके दरबारी कवि बाना भट्टा
- 1:09:34की रचनाओं के बीच कभी कंफ्यूज नहीं होना
- 1:09:36चाहिए। बाना भट्टा ने हर्षा की जीवनी
- 1:09:39हर्षाचरिता और प्रसिद्ध ग्रंथ कदमबारी की
- 1:09:42रचना की थी। इसके अलावा यह काल ज्ञान के
- 1:09:45आदानप्रदान के लिए भी मशहूर है। वही
- 1:09:47शानजैंग जिनके बारे में हमने अभी बात की
- 1:09:50उन्होंने हर्षा के दरबार में आठ साल बिताए
- 1:09:53और नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण
- 1:09:55की।
- 1:09:55नालंदा का कनेक्शन एक बहुत डीप कल्चरल
- 1:09:57इंटीग्रेशन दिखाता है।
- 1:09:59बिल्कुल और सांस्कृतिक विरासत की बात करें
- 1:10:01तो हर्षा द्वारा प्रयाग में हर 5 साल में
- 1:10:04आयोजित होने वाली मोक्षा परिषद को नहीं
- 1:10:06भूलना चाहिए। यह एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य
- 1:10:10है। इस परिषद में हर्षा अपना पूरा संचित
- 1:10:13धन दान कर देते थे। यह उनकी असीम दानशीलता
- 1:10:16और धार्मिक सहिष्णुता दोनों का प्रतीक है।
- 1:10:19वाकई इतने महान कवि और लेखक थे उस दौर
- 1:10:23में। इसीलिए कहते हैं किताबों से दोस्ती
- 1:10:25कर लो ए मुसाफिर, यूपीएससी के इस सफर में
- 1:10:27यही बाना भट्टा काम आएंगे। खैर साहित्य और
- 1:10:30कला अपनी जगह है लेकिन एक सम्राट का काम
- 1:10:33राज्य का विस्तार करना भी होता है। हर्षा
- 1:10:35के सैन्य अभियान भी उतने ही मैसिव थे। अगर
- 1:10:38मैप को विजुलाइज करें तो पंजाब, कन्नौज,
- 1:10:40बंगाल और उड़ीसा तक उनकी विजय पताका फहरा
- 1:10:43रही थी।
- 1:10:44पर एक बात ध्यान रखनी होगी हर विजय रथ की
- 1:10:47एक भौगोलिक सीमा होती है। यहां पर एक बहुत
- 1:10:50बड़ा यूपीएससी ट्रैप छिपा है जिस पर
- 1:10:52सीरियस एस्पिरेंट्स को ध्यान केंद्रित
- 1:10:54करना चाहिए। जब हर्षा की सेनाएं विंध्या
- 1:10:57पर्वत को पार करके दक्षिण की ओर बढ़ी तो
- 1:11:00नर्मदा नदी के तट पर चालुक्य शासक पुला के
- 1:11:03शीन द्वितीय ने उन्हें करारी शिकस्त दी
- 1:11:06थी।
- 1:11:07यानी हर्षा अपराजित नहीं थे।
- 1:11:09नहीं बिल्कुल नहीं। और यह ऐतिहासिक और
- 1:11:11प्रमाणिक तथ्य हमें अहोले अभिलेख से मिलता
- 1:11:15है। यह इं्रिप्शन क्लियरली सिद्ध करता है
- 1:11:18कि हर्षा का सैन्य दबदबा विंध्या पर्वत के
- 1:11:21उत्तर तक ही सीमित रह गया था। दक्षिण भारत
- 1:11:24में उनका प्रभाव नहीं बन पाया।
- 1:11:26चलिए इस गहरे विश्लेषण के बाद अब एग्जाम
- 1:11:27मोड में आते हैं। एक प्रीलिम्स प्रैक्टिस
- 1:11:30क्वेश्चन सॉल्व करने की टेक्निक समझते हैं
- 1:11:31ताकि एलिमिनेशन लॉजिक क्लियर हो सके।
- 1:11:33पुष्यभूति वंश के संदर्भ में इन तीन कथनों
- 1:11:36पर गौर करते हैं। पहला प्रभाकरा वर्धना
- 1:11:38महाराजाधि राजा की उपाधि धारण करने वाले
- 1:11:40पहले शासक थे। दूसरा बाना भट्टा ने
- 1:11:43रत्नावली और प्रियदर्शिका की रचना की और
- 1:11:45तीसरा श्वेन जांग ने प्रशासन के लिए दिन
- 1:11:48को तीन भागों में विभाजित करने का उल्लेख
- 1:11:50किया है।
- 1:11:50कंप्लीटली क्लियर किया था कि रत्नावली और
- 1:11:52प्रियदर्शिका तो खुद सम्राट हर्षा ने लिखी
- 1:11:55थी बाना भट्टा ने नहीं। इसका सीधा सा मतलब
- 1:11:58है कि स्टेटमेंट टू पूरी तरह से गलत है।
- 1:12:00सही बात है।
- 1:12:01अब सोचिए एग्जाम हॉल में अगर दूसरा कथन
- 1:12:04गलत है तो जिन ऑप्शंस में टू दिया गया है
- 1:12:07वो अपने आप एलिमिनेट हो जाएंगे। बाना
- 1:12:09भट्टा की रचनाओं का डिस्टिंशन हमें मिल
- 1:12:11गया। अब एस्पिरेंट्स खुद लॉजिक लगाएं कि
- 1:12:14जब स्टेटमेंट टू हट गया तो उनके पास सही
- 1:12:16विकल्प क्या बचता है। इस प्रोसेस से
- 1:12:19एक्यूरेसी बढ़ती है।
- 1:12:20बिल्कुल। अब क्रोनोलॉजी में थोड़ा आगे
- 1:12:23बढ़ते हैं। हर्षा के महाप्रयाण के बाद
- 1:12:25उत्तर भारत में एक अचानक से राजनीतिक
- 1:12:28शून्यता आ गई।
- 1:12:29इस वैक्यूम को भरा गुर्जर प्रतिहारा और
- 1:12:32तोमर युग ने। प्रतिहारों के शासनकाल में
- 1:12:34हरियाणा का जो पेहोवा क्षेत्र है, वह एक
- 1:12:36बहुत बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में
- 1:12:38उभर गया।
- 1:12:39हां, और यह सिर्फ कहानी नहीं है। नौवीं
- 1:12:42शताब्दी का पेहोवा अभिलेख इस बात का ठोस
- 1:12:45प्रमाण है। यह इं्रिप्शन स्पष्ट रूप से
- 1:12:48घोड़ों के व्यापारियों के एक समूह का
- 1:12:50उल्लेख करता है जो यहां व्यापार करने आते
- 1:12:52थे। ट्रेड रूट के हिसाब से यह बहुत अहम
- 1:12:55लोकेशन थी। फिर 11वीं सदी के आसपास तोमर
- 1:12:58शासकों का राजनीतिक प्रभाव इस क्षेत्र में
- 1:13:00बढ़ा। तोमर विरासत में राजा अनंगपाल
- 1:13:03द्वितीय का नाम सेंट्रल पॉइंट है।
- 1:13:05उन्होंने दिल्ली का बसाई जिसे आज हम सब
- 1:13:08दिल्ली के नाम से जानते हैं। और उसी 11वीं
- 1:13:11सदी में उन्होंने सूरजकुंड का निर्माण भी
- 1:13:13करवाया
- 1:13:14जो कि आज भी अपनी कल्चरल हेरिटेज और मेला
- 1:13:18के लिए बहुत फेमस है। लेकिन इस आर्थिक
- 1:13:21समृद्धि और राजनैतिक उद्धव ने उत्तर
- 1:13:24पश्चिम के विदेशी आक्रमणकारियों का ध्यान
- 1:13:26भी अपनी ओर खींचा।
- 1:13:28यहां से शुरू होता है गजनवी आक्रमणों का
- 1:13:30दौर। अगर एक क्विक टाइमलाइन देखें 109
- 1:13:34ईसवी में महमूद गजनवी का थानेसर पर किया
- 1:13:37गया पहला हमला विफल रहा। पर वो वहां रुका
- 1:13:40नहीं। 10014 में उसने दोबारा धावा बोला और
- 1:13:43इस बार थानेसर की प्रसिद्ध चक्र स्वामी
- 1:13:46मूर्ति को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
- 1:13:48और यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। बाद
- 1:13:51में 1037 में गजनवी के उत्तराधिकारी मसूद
- 1:13:55ने हां पर भी कब्जा जमा लिया। अब यहां
- 1:13:58मेंस का पर्सपेक्टिव आएगा। इन आक्रमणों का
- 1:14:01मुख्य लक्ष्य सिर्फ द्रव्य या धन लूटना
- 1:14:04नहीं था। मूर्ति भंजन यानी आइकोनोक्लाज्म
- 1:14:08के जरिए वह आम जनमानस में एक मनोवैज्ञानिक
- 1:14:12खौफ पैदा करना चाहते थे ताकि अपनी सत्ता
- 1:14:15की धाग जम सके। एग्जाम अलर्ट के तहत यहां
- 1:14:18अलबरूनी की किताब किताबुल हिंद बहुत जरूरी
- 1:14:22हो जाती है। जिसमें थानेसर का विशेष
- 1:14:24उल्लेख है।
- 1:14:25सच में इतिहास को टेक्स्ट और टाइमलाइन को
- 1:14:28कनेक्ट करके ही डीपली समझा जा सकता है।
- 1:14:30बिल्कुल जैसा कि राहुल प्रकाश सर और उनकी
- 1:14:33टीम के मार्गदर्शन में हम हमेशा इस बात पर
- 1:14:35जोर देते हैं कि क्रोनोलॉजी और समकालीन
- 1:14:38साहित्य दोनों को एक साथ जोड़कर पढ़ा जाए।
- 1:14:41इसी अप्रोच से इतिहास की सही समझ विकसित
- 1:14:44होती है।
- 1:14:45एकदम। और इन खौफनाक आक्रमणों और इतने
- 1:14:48रक्तपात को देखकर दिमाग में बस एक ही
- 1:14:50शायरी आती है। महमूद की तलवारों में वो
- 1:14:53धार कहां जो एक सीरियस यूपीएससी एस्पिरेंट
- 1:14:56की कलम में होती है। खैर, 11वीं शताब्दी
- 1:14:59के अंत तक आते-आते सत्ता का गुरुत्वाकर्षण
- 1:15:01फिर बदला। इस बार चाहमाना यानी चौहान वंश
- 1:15:05ने तोमरों को हटाकर सत्ता की बागडोर हासिल
- 1:15:08कर ली। इस काल के सबसे धुरिया व्यक्तित्व
- 1:15:10थे पृथ्वीराज तृतीया जिनको इतिहास
- 1:15:13पृथ्वीराज चौहान के नाम से याद रखता है।
- 1:15:15चौहान वंश और पृथ्वीराज चौहान की जब भी
- 1:15:18बात आएगी उनकी किलेबंदी यानी
- 1:15:20फोर्टिफिकेशंस का जिक्र जरूर होगा। विदेशी
- 1:15:23आक्रमणों की पहली लहर को रोकने के लिए
- 1:15:25उन्होंने हासी में 80 गढ़ किले का पुनिर्न
- 1:15:28निर्माण करवाया। सुरक्षा के दृष्टिकोण से
- 1:15:31यह किला इतना अभेद्य था कि इसको तलवारों
- 1:15:34का किला भी कहा जाने लगा। इसके साथ ही
- 1:15:37गोहाना किले का निर्माण भी उनकी दूरदर्शी
- 1:15:40सैन्य सोच का ही हिस्सा था जो बेसिकली
- 1:15:43नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर्स को सिक्योर करने
- 1:15:45की एक रणनीति थी।
- 1:15:46पर इन मजबूत दीवारों और किलों के बावजूद
- 1:15:49तराइन के मैदानों में इतिहास ने एक
- 1:15:51बिल्कुल अलग ही करवट ली। तराइन के युद्ध
- 1:15:54जो हर इतिहास पढ़ने वाले की जुबान पर होते
- 1:15:56हैं। पहला युद्ध 1191 में लड़ा गया।
- 1:15:59जिसमें पृथ्वीराज चौहान की सेना ने
- 1:16:01मोहम्मद घोरी को बुरी तरह परास्त किया।
- 1:16:03यहां हासी के गोविंद राय की भूमिका बहुत
- 1:16:05विशेष है। उन्होंने अपनी असाधारण वीरता से
- 1:16:08घोरी को गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
- 1:16:11लेकिन अगले ही साल यानी 1192 का द्वितीय
- 1:16:14युद्ध एक पूरी तरह अलग परिणाम लेकर आया।
- 1:16:17हां, 1192 में घोरी एक बेहद बेहतर तैयारी
- 1:16:21के साथ वापस लौटा। उसकी घुड़सवार सेना
- 1:16:24बहुत तेज थी और उसके पास एक अचूक रणनीति
- 1:16:27थी। उसने राजपूत सेना की कमियों को बारीकी
- 1:16:30से पकड़ा और उनका फायदा उठाया। अब मेंस के
- 1:16:33पॉइंट ऑफ व्यू से इस युद्ध को सिर्फ एक
- 1:16:35सैन्य हार के रूप में नहीं देखा जाना
- 1:16:38चाहिए। यह वो डिसाइसिव पॉइंट था जिसने
- 1:16:41उत्तर भारत में मुस्लिम शासन की स्थापना
- 1:16:43का मार्ग हमेशा के लिए प्रशस्त कर दिया।
- 1:16:46पूरा राजनीतिक सत्ता का संतुलन पावर
- 1:16:48डायनामिक्स बदल चुकी थी।
- 1:16:50इस पावर शिफ्ट के बाद मध्यकालीन हरियाणा
- 1:16:53से जुड़ा एक और प्रीलिम्स प्रैक्टिस
- 1:16:54क्वेश्चन लेना बनता है। इन तीन
- 1:16:56स्टेटमेंट्स को देखिए। पहला पेोवा अभिलेख
- 1:16:59सुझाव देता है कि यह घोड़ों के व्यापार का
- 1:17:01केंद्र था। दूसरा, महमूद गजनवी ने थानेसर
- 1:17:04में चक्र स्वामी की मूर्ति को नष्ट कर
- 1:17:06दिया। और तीसरा, पृथ्वीराज चौहान ने हासी
- 1:17:09में आशीगढ़ किले का निर्माण किया।
- 1:17:11अभी हमने इन तीनों टॉपिक्स पर डिटेल्ड बात
- 1:17:13की है। तीनों का ऐतिहासिक संदर्भ एकदम
- 1:17:17क्लियर है। पहवा का हॉर्स ट्रेड, 10014
- 1:17:20में गजनवी का मूर्ति पर हमला और हांसी का
- 1:17:23तलवारों का किला यानी आसिगर। अब एलिमिनेशन
- 1:17:27मेथड का यूज करके ऑप्शंस को ध्यान से
- 1:17:29पढ़ें। आपको आसानी से क्लियर हो जाएगा कि
- 1:17:32इनमें से कौन-कौन से कथन परफेक्टली मैच कर
- 1:17:34रहे हैं हमारी क्रोनोलॉजी से।
- 1:17:36सही दिशा में सोचना ही आंसर्स निकालने का
- 1:17:38तरीका है। तो तराइन के निर्णायक युद्ध के
- 1:17:40बाद भारत में जिस नए शासन की स्थापना हुई
- 1:17:43इतिहास उसको गुलाम या ममलूक वंश के नाम से
- 1:17:46जानता है। कुतुबुद्दीन ऐबक इस वंश का पहला
- 1:17:50सुल्तान बना। जिसके बैकग्राउंड की बात
- 1:17:52करें तो वह एक ममलूक यानी सैन्य गुलाम था।
- 1:17:55अजयबक के बाद जब इल्तुतमिश गद्दी पर आया
- 1:17:58तब जाकर इस राज्य को एक वास्तविक संस्थागत
- 1:18:01रूप एक रियल इंस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क
- 1:18:03मिला। इल्तुतमिश के दो बड़े सुधार थे जो
- 1:18:06कि आर्थिक और प्रशासनिक दृष्टि से काफी
- 1:18:09क्रांतिकारी थे। पहला था एकता प्रणाली। इस
- 1:18:13व्यवस्था में अधिकारियों को उनकी सर्विसेज
- 1:18:15के लिए नकद वेतन की जगह भूमि का एक टुकड़ा
- 1:18:19जहां से वह भू-राजस्व वसूल कर सके आवंटित
- 1:18:22किया जाता था। और दूसरा सबसे बड़ा रिफॉर्म
- 1:18:24था मुद्रा प्रणाली यानी करेंसी सिस्टम।
- 1:18:27उसने चांदी का टंका और तांबे का जितन जारी
- 1:18:31किया।
- 1:18:31यह रिफॉर्म्स वाकई आगे चलकर पूरी सल्तनत
- 1:18:33की नींव बने। लेकिन इल्तुतमिश के बाद जब
- 1:18:36गद्दी पर उनकी बेटी रजिया सुल्तान बैठी तो
- 1:18:38राजनीति की बिसात अचानक पलट गई। सच ही कहा
- 1:18:41गया है कुर्सी की जंग में रजिया भी हार गई
- 1:18:43थी। बिना रिवीजन के तो अच्छे-अच्छे टॉपर्स
- 1:18:46भी मात खा जाते हैं। 1236 से 1240 ईस्वी
- 1:18:49तक का उनका पूरा सफर भयंकर विद्रोहों से
- 1:18:52भरा रहा।
- 1:18:52रजिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी
- 1:18:55चहलगानी। यह 40 अत्यंत प्रभावशाली तुर्क
- 1:18:59रईसों या अमीरों का एक गुट था। एक महिला
- 1:19:03शासक का आदेश मानना इनके मेल ईगो और
- 1:19:07राजनैतिक अहंकार के पूरी तरह खिलाफ था।
- 1:19:11रजिया का थय हरियाणा कनेक्शन बहुत डीप और
- 1:19:14दर्दनाक है। इन्हीं साजिशों के चलते 13th
- 1:19:18अक्टूबर 1240 को कैथल के पास रजिया की
- 1:19:22हत्या कर दी गई। एग्जाम में ध्यान रखना है
- 1:19:24कि कैथल में स्थित उनका मकबरा ऐतिहासिक
- 1:19:28रूप से बेहद प्रासंगिक है। बहुत से
- 1:19:30इतिहासकार इसे दक्षिण एशिया का पहला महिला
- 1:19:34स्मारक मानते हैं।
- 1:19:35रजिया की इस ट्रैजिकल हत्या के बाद सल्तनत
- 1:19:38में एक गहरा केस आ गया। इस राजनीतिक
- 1:19:41अस्थिरता और अराजकता को शांत करने के लिए
- 1:19:44एक ऐसे सुल्तान का उदय हुआ जिसने सीधे लॉ
- 1:19:48और रक्त की नीति पॉलिसी ऑफ आयरनलैंड ब्लड
- 1:19:51अपनाई। यह था गियासुद्दीन बलबन। हरियाणा
- 1:19:55में उस वक्त मेवातियों का विद्रोह बहुत
- 1:19:57ज्यादा उग्र था जिसे बलबन ने बेहद क्रूरता
- 1:20:00के साथ कुचल दिया।
- 1:20:01बलबान के इस प्रोसेस ऑफ पैसिफिकेशन को हम
- 1:20:04एक फ्लो चार्ट या स्टेप बाय स्टेप अप्रोच
- 1:20:06से समझ सकते हैं। सबसे पहले उसने
- 1:20:09विद्रोहियों के छिपने के ठिकानों को खत्म
- 1:20:12करने के लिए पूरे जंगल साफ करवाए। उसके
- 1:20:14बाद क्षेत्र पर सैन्य नियंत्रण रखने के
- 1:20:17लिए गुरुग्राम में गोपालगिरी किले का
- 1:20:20निर्माण करवाया और तीसरा स्टेप था पूरे
- 1:20:23इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के
- 1:20:25लिए जगह-जगह पुलिस चौकियां या थाने
- 1:20:28स्थापित करना। जैसा कि दिशांत आईएएस में
- 1:20:31हमारा फोकस रहता है। कांसेप्ट्स को ऐसे ही
- 1:20:33लॉजिकल स्टेप्स में ब्रेक करके पढ़ना
- 1:20:36चाहिए। बलबन ने 126 में सुल्तान बनने के
- 1:20:39बाद उस चहलगानी गुट की पावर को भी रूट से
- 1:20:42डिस्ट्रॉय कर दिया। जिसने रजिया का विरोध
- 1:20:45किया था।
- 1:20:45गुलाम वंश के पतन के बाद हरियाणा में
- 1:20:47खिलजी वंश का परचम लहराया। अलाउद्दीन
- 1:20:50खिलजी जिनका शासन 1296 से 1316 तक रहा। वो
- 1:20:54मुख्य रूप से अपने सख्त बाजार नियंत्रण और
- 1:20:56कठोर सैन्य सुधारों के लिए फेमस है।
- 1:20:58साथ ही साथ आर्किटेक्चर यानी स्थापत्य कला
- 1:21:01के लिहाज से भी इनका योगदान है। अलाउद्दीन
- 1:21:04खिलजी ने हासी में बारसी गेट का निर्माण
- 1:21:07करवाया था। मध्यकालीन वास्तुकला का यह एक
- 1:21:10उत्कृष्ट नमूना है जो उस समय के
- 1:21:13इंपॉर्टेंट मिलिट्री और ट्रेड रूट्स की
- 1:21:16सिक्योरिटी के लिए एक फर्टिफाइड गेट के
- 1:21:18रूप में डिजाइन किया गया था।
- 1:21:20खलजियों के बाद दिल्ली की गद्दी आई तुगलक
- 1:21:22वंश के हाथ में।
- 1:21:23हम
- 1:21:23जिसमें फिरोजशाह तुगलक को इतिहास एक
- 1:21:26निर्माता या बिल्डर के रूप में याद करता
- 1:21:28है।
- 1:21:28हां जी।
- 1:21:29हरियाणा में कई प्रमुख शहरों की स्थापना
- 1:21:31का क्रेडिट उन्हीं को जाता है। इसका भी एक
- 1:21:33क्लियर फ्लो चार्ट है।
- 1:21:34बिल्कुल। अगर ज्योग्राफी और स्ट्रेटजी
- 1:21:36दोनों को मिलाकर देखें तो फिरोज शाह ने
- 1:21:391351 में अपने पुत्र फतेह खान के नाम पर
- 1:21:43फतेहाबाद की स्थापना की। उसके बाद 1354
- 1:21:47में उन्होंने हिसार ए फिरोजा बसाया। यह
- 1:21:50नॉर्मल शहर नहीं था बल्कि एक बेहद
- 1:21:53सुरक्षित किला शहर यानी फोर्ट सिटी था।
- 1:21:56इसके अतिरिक्त सिरसा के पास हरनीखेरा का
- 1:21:59निर्माण भी उनके इन्हीं अर्बन कैंपेनेंस
- 1:22:02का एक हिस्सा था। शहरों के अलावा इनका
- 1:22:04इंटरेस्ट पब्लिक वर्क्स में बहुत था।
- 1:22:06वास्तुकला और नहर प्रणाली दोनों में इनका
- 1:22:08कंट्रीब्यूशन मैसिव है। हिसार का जो मशहूर
- 1:22:11गुजारी महल है, वह इसका डायरेक्ट प्रूफ
- 1:22:12है। रोचक बात यह है कि इसे पुराने मंदिरों
- 1:22:15के खंडरों से निकाले गए पत्थरों का उपयोग
- 1:22:17करके बनाया गया था और कृषि यानी
- 1:22:19एग्रीकल्चर और सिंचाई को सपोर्ट करने के
- 1:22:21लिए उन्होंने पश्चिमी यमुना नहर का
- 1:22:23निर्माण भी करवाया।
- 1:22:24नहरों का निर्माण डेफिनेटिवली एक पॉजिटिव
- 1:22:27और प्रोग्रेसिव स्टेप था। लेकिन यहां मेंस
- 1:22:29के कैंडिडेट्स के लिए एक बहुत बड़ा ट्रैप
- 1:22:32है। अक्सर स्टूडेंट सिर्फ वक्स देखकर
- 1:22:34फिरोज शाह को पूरी तरह से एक उदार या
- 1:22:37लिबरल शासक मान लेते हैं जो कि एक
- 1:22:39ऐतिहासिक भूल होगी। फिरोजशाह धार्मिक रूप
- 1:22:42से बेहद असहिष्णु यानी इनटोलरेंट था।
- 1:22:45गुहाना में हिंदू मंदिरों को अपवित्र करने
- 1:22:48की जो घटना है वह इस बात का प्रमाणिक सत्य
- 1:22:51है। अपना आंसर लिखते समय जब तक इस धार्मिक
- 1:22:54कट्टरता का उल्लेख ना हो तब तक शासन का एक
- 1:22:57बैलेंस्ड और होलिस्टिक इवैल्यूएशन नहीं
- 1:22:59माना जाएगा।
- 1:23:00यह पर्सपेक्टिव बहुत इंपॉर्टेंट है। इतने
- 1:23:02सारे फैक्ट्स आपस में कनेक्ट होती इतनी
- 1:23:05बारीकियां और लगातार बदलते राजवंश। असल
- 1:23:08में तैमूर के आक्रमण जैसा विशाल है यह
- 1:23:10सिलेबस। सही स्ट्रेटजी ना हो तो पूरा
- 1:23:12दिमाग लूट ले जाता है। और क्योंकि तैमूर
- 1:23:15का जिक्र हो ही गया है तो 1398 ईसवी में
- 1:23:18हुआ उसका आक्रमण भारतीय इतिहास का एक बेहद
- 1:23:20कालापन्ना है।
- 1:23:21सीरियस एस्पिरेंट्स इस टाइमलाइन को मार्क
- 1:23:24कर लें। तैमूर के प्रवेश और तबाही के इस
- 1:23:28राउट को मैप के थ्रू समझना और उंगलियों पर
- 1:23:31याद रखना जरूरी है। मध्य एशिया से आकर घगर
- 1:23:35नदी के रास्ते भारत में दाखिल होकर तैमूर
- 1:23:38का खूनी सफर शुरू होता है सिरसा से। वहां
- 1:23:41से वह फतेहाबाद बड़ा फिर टोहाना उसके बाद
- 1:23:44कैथल, वहां से पानीपत और अंत में उसने
- 1:23:48दिल्ली पर भयंकर कहर बरपाया। यह सिंपली एक
- 1:23:51मार्चिंग राउट नहीं था बल्कि उत्तर भारत
- 1:23:54के सबसे स्ट्रेटेजिक और प्रोस्परस
- 1:23:57व्यापारिक केंद्रों की बर्बादी का एक
- 1:23:59प्रॉपर ब्लूप्रिंट था।
- 1:24:00तो इस पूरी गहन चर्चा के बाद अब टाइम है
- 1:24:03एक 360 डिग्री विश्लेषण करने का। एक सवाल
- 1:24:06जो नेचुरली दिमाग में आता है कि आखिर ऐसा
- 1:24:08क्या था कि हरियाणा का क्षेत्र ही बार-बार
- 1:24:11उत्तर भारत या यूं कहें कि दिल्ली का
- 1:24:13प्रवेश द्वार बना रहा। हर कोई यहीं से
- 1:24:15क्यों आना चाहता था? देखिए, यह आज की इस
- 1:24:18क्लास का सबसे क्रूशियल एनालिटिकल पार्ट
- 1:24:21है। इसे तीन मुख्य स्तंभों पर यानी पिलर्स
- 1:24:24पर परखा जाना चाहिए। पहला राजनीतिक दृष्टि
- 1:24:28से यह क्षेत्र पुष्यभूति वुंज की पावर
- 1:24:31कैपिटल से लेकर सल्तनत काल के सबसे बड़े
- 1:24:33बैटल ग्राउंड्स तक का गवाह रहा। दूसरा
- 1:24:37सैन्य दृष्टि। तराइन के युद्धों ने पूरे
- 1:24:40भारत का फ्यूचर डिसाइड किया और 80 गढ़
- 1:24:42जैसे मजबूत किलों ने राउट्स को कंट्रोल
- 1:24:45किया। और तीसरा पिलर होगा आर्थिक।
- 1:24:47रोजशाह की बनाई नहरों ने इस इलाके को बहुत
- 1:24:50रिसोर्स रिच बना दिया था। लेकिन इन सबके
- 1:24:53ऊपर जो सबसे बड़ा फैक्टर है जहां मेनस की
- 1:24:56एक्चुअल इनसाइट छिपी है वो है यहां का
- 1:24:58समतल भूभाग यानी फ्लैट टरेन। यह फ्लैट
- 1:25:02ज्योग्राफी विशाल घुड़सवार सेनाओं के
- 1:25:05मूवमेंट्स और वॉर फॉरमेशंस के लिए अत्यंत
- 1:25:07आदर्श थी। और दिल्ली से इसकी फिजिकल
- 1:25:10प्रॉक्सिमिटी ने इसे लिटरली एक बारामासी
- 1:25:13युद्ध क्षेत्र बना दिया था। राहुल प्रकाश
- 1:25:16सर के निर्देशन में दीशांत आईएएस आपको इसी
- 1:25:19तरह की 360° एनालिटिकल अप्रोच सिखाता है
- 1:25:22ताकि फैक्ट्स रटने की जगह उनके पीछे काम
- 1:25:25कर रहा रियल साइंस समझ में आए। तो चलिए
- 1:25:27इसी एनालिटिकल माइंडसेट के साथ सुल्तानत
- 1:25:29काल से जुड़ा आखिरी प्रीलिम्स प्रैक्टिस
- 1:25:31क्वेश्चन सॉल्व करते हैं। कथन एक रजिया
- 1:25:34सुल्तान का मकबरा कैटल में स्थित है। कथन
- 1:25:37दो बलबन ने मेवाती विद्रोहियों को रोकने
- 1:25:40के लिए गोपालगिरी किले का निर्माण किया और
- 1:25:42कथन तीन फिरोजशाह तुगलक ने हिसार फिरोजा
- 1:25:45शहर की स्थापना की।
- 1:25:46हमारी अभी की डिटेल डिस्कशन के बाद इन
- 1:25:49तीनों स्टेटमेंट्स का परीक्षण करना
- 1:25:51स्टूडेंट्स के लिए अब बहुत सरल हो गया
- 1:25:53होगा। रजिया की हत्या का कैथल कनेक्शन,
- 1:25:56बलबन की पैसिफिकेशन पॉलिसी और उसमें
- 1:25:58गोपालगिरी किले की एग्जैक्ट भूमिका और
- 1:26:011354 में हिसार का फोर्ट सिटी के रूप में
- 1:26:04निर्माण। अब इन फैक्ट्स को लिंक कीजिए।
- 1:26:07एलिमिनेशन अप्रोच लगाइए और खुद डिसाइड
- 1:26:09कीजिए कि कौन से स्टेटमेंट्स हिस्टोरिकली
- 1:26:12वेरीफाई हो रहे हैं। सीधा आंसर रटने से
- 1:26:14बेहतर लॉजिक बिल्ड करना है।
- 1:26:16एक्सैक्टली। तो आज के इस डीप लाइव में
- 1:26:18हमने एक बहुत ही कॉम्प्रिहेंसिव टाइमलाइन
- 1:26:20को कवर किया। पुष्यभूति वंश के उदय और
- 1:26:23प्रभाकर वर्धना की सोवनिटी से बात शुरू
- 1:26:25करके हर्ष के एंपायर उसकी हायरार्की
- 1:26:28ऑफिसर्स और यूएन सैंग के ऑब्जरवेशंस को
- 1:26:30समझा। फिर हमने प्रतिहारों के हॉस्ट ट्रेड
- 1:26:33गजनवी के आक्रमण और चौहानों की किलेबंदी
- 1:26:36को ट्रेस किया और अंत में तराइन से होते
- 1:26:38हुए सल्तनत काल के रजिया, बलबन और
- 1:26:41फिरोजशाह के एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स पर
- 1:26:43बात की। और मेंस के पर्सपेक्टिव से इन सब
- 1:26:46फैक्ट्स का जो निचोड़ है वह क्षेत्र के
- 1:26:48भूराजनीतिक महत्व को एस्टैब्लिश करता है।
- 1:26:51कैसे फ्लैट टरेन ट्रेड रूट्स और
- 1:26:54एग्रीकल्चरल सरप्लस ने इस रीजन को एक
- 1:26:57शील्ड और बैटल ग्राउंड दोनों बना दिया।
- 1:27:00प्रीलिम्स के लिए यहां से कालाक्रम और
- 1:27:03स्पेसिफिक टर्म्स जैसे एकता, हिरण्य और
- 1:27:06बलाधिकृता सबसे ज्यादा स्कोरिंग पॉइंट्स
- 1:27:09हैं। इन डॉट्स को आपस में कनेक्ट करना ही
- 1:27:12सिलेक्शन का एक्चुअल राज है।
- 1:27:14सही बात है। इतिहास के ये इवेंट्स हमेशा
- 1:27:16हमें डीपर सोचने पर मजबूर करते हैं। जरा
- 1:27:19इमेजिन कीजिए अगर तराइन के दूसरे युद्ध
- 1:27:21में राजपूत सेना ने उन्हीं पुरानी
- 1:27:23टैक्टिक्स को रिपीट करने के बजाय घुड़सवार
- 1:27:26रणनीति में कोई नया एक्सपेरिमेंट किया
- 1:27:28होता तो क्या उत्तर भारत का इतिहास आज
- 1:27:30पूरी तरह अलग होता। इस एंगल पर अपने दिमाग
- 1:27:33को दौड़ाइए और अपनी प्रिपरेशन को और सॉलिड
- 1:27:35करते रहिए।
- 1:27:35दिस लेक्चर वाज़ बाय दिशांट आईएस।
- 1:27:38मध्यकालीन हरियाणा का इतिहास, तैमूर के
- 1:27:41खौफनाक आक्रमण से लेकर मुगलों के विशाल
- 1:27:44साम्राज्य के पतन तक की कहानी। आज के इस
- 1:27:46डीप ड्राइव का मुख्य विषय यहीं है और हम
- 1:27:49समझेंगे कि आखिर यह क्षेत्र हमेशा से
- 1:27:52दिल्ली का प्रवेश द्वार क्यों बना रहा।
- 1:27:54बिल्कुल और यह भी देखना बहुत दिलचस्प है
- 1:27:57कि कैसे लगातार युद्धों के मैदान के
- 1:27:59बीचों-बीच असूफी और भक्ति परंपराओं का एक
- 1:28:02अनूठा सांस्कृतिक संगम पनपा।
- 1:28:05सही कहा। इस पूरी चर्चा का आधार दिशांत
- 1:28:07आईएएस और उनके मार्गदर्शक राहुल प्रकाश सर
- 1:28:11द्वारा तैयार किए गए विस्तृत ऐतिहासिक
- 1:28:13नोट्स हैं। तो चलिए इसे परत दर परत समझते
- 1:28:16हैं।
- 1:28:17शुरुआत में यह समझना बहुत जरूरी है कि
- 1:28:19इतिहास सिर्फ तारीखों और युद्धों की सूची
- 1:28:23नहीं है। अगर हम इसे बड़े परिदृश्य से
- 1:28:26जोड़कर देखें तो समझ आता है कि हर आक्रमण
- 1:28:29या प्रशासनिक बदलाव के पीछे गहरे आर्थिक
- 1:28:32कारण थे। और यह क्षेत्र केवल तलवारों की
- 1:28:35गड़गड़ाहट का मैदान नहीं था बल्कि एक जटिल
- 1:28:38प्रशासनिक व्यवस्था का भी गवाह रहा है।
- 1:28:40हां मतलब इस क्षेत्र ने साम्राज्यों को
- 1:28:43बनते और बिगड़ते देखा है। घटनाओं को सिर्फ
- 1:28:46याद नहीं करना है एस्पिरेंट्स को। उनके
- 1:28:49पीछे के कारणों को समझना है।
- 1:28:51साम्राज्यों के बिगड़ने की जब बात आती है
- 1:28:53तो 1398 ईस्वी का जिक्र अनिवार्य हो जाता
- 1:28:57है। तैमूर लंग का वो विनाशकारी आक्रमण
- 1:29:00वो एक खौफनाक दौर था। ऐतिहासिक दस्तावेजों
- 1:29:03को देखने पर तैमूर का रास्ता बहुत स्पष्ट
- 1:29:06दिखाई देता है। वो रानिया और सिरसा से
- 1:29:08होते हुए फतेहाबाद और टोहाना पहुंचा।
- 1:29:11और फिर 3 दिसंबर 1398 को उसने पानीपत में
- 1:29:14दस्तक दी। ये कोई सामान्य सैन्य अभियान
- 1:29:16नहीं था बल्कि एक भयानक तरंगे आम था।
- 1:29:19बिल्कुल। सिरसा और फतेहाबाद में भयंकर
- 1:29:22तबाही मचाई गई। दस्तावेजों के अनुसार उस
- 1:29:25समय लगभग 1,600 मन अनाज लूट लिया गया था।
- 1:29:30इतनी बड़ी लूट ने तो स्थानीय अर्थव्यवस्था
- 1:29:32की पूरी तरह से कमर ही तोड़ दी होगी।
- 1:29:34एकदम सही। और इसी तबाही का असर यह हुआ कि
- 1:29:37पूरे उत्तर भारत में सत्ता का एक बड़ा
- 1:29:40खालीपन पैदा हो गया। दिल्ली सल्तनत अपने
- 1:29:43सबसे कमजोर दौर में पहुंच चुकी थी।
- 1:29:45इसी बीच अगर यूपीएससी की तैयारी के नजरिए
- 1:29:48से देखें तो एक बात याद आती है। किताबों
- 1:29:50के पन्नों से जो डर गया वो अफसर क्या
- 1:29:53बनेगा और जो इन उलझी तारीखों से ना गुजरा
- 1:29:56वो लबासना का सफर क्या तय करेगा। बहुत ही
- 1:29:59सटीक बात कही आपने। उसी राजनीतिक शून्यता
- 1:30:03को भरा खिज्र खान ने। खिज्र खान ने 1414
- 1:30:07ईसवी में सैयद वंश की नींव रखी। यहां एक
- 1:30:10एग्जाम अलॉट है जिसे सीरियस एस्पिरेंट्स
- 1:30:13को मार्क करना चाहिए।
- 1:30:14जी वो एग्जाम अलर्ट क्या है? खिज्र खान का
- 1:30:17मकबरा हरियारा के सोनीपत में स्थित है और
- 1:30:20इसे पठान शैली में बनाया गया है। आर्ट एंड
- 1:30:23कल्चर के नजरिए से यह बहुत महत्वपूर्ण है।
- 1:30:26यह वास्तुकला का संक्रमण काल था। लेकिन
- 1:30:29राजनीतिक संक्रमण का सबसे बड़ा धमाका अभी
- 1:30:32होना बाकी था। अप्रैल 1526 का पानीपत का
- 1:30:36प्रथम युद्ध।
- 1:30:37हां, बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच का वह
- 1:30:40ऐतिहासिक युद्ध। एक तरफ इब्राहिम लोदी की
- 1:30:43विशाल सेना थी और दूसरी तरफ बाबर की छोटी
- 1:30:46लेकिन बेहद अनुशासित सेना।
- 1:30:48बाबर की सैन्य रणनीतियों का विश्लेषण यहां
- 1:30:51बहुत आवश्यक है। उसने अराबा यानी
- 1:30:54बैलगाड़ियों को जंजीरों से बांधकर तोप
- 1:30:56खाने का एक शानदार ढांचा तैयार किया था।
- 1:30:59और इसके साथ ही तुलुगमा रणनीति अपनाई गई।
- 1:31:02तुलुग्मा दुश्मन को किनारों से घेर कर
- 1:31:04पीछे से वार करने की एक मारक फ्लेंकिंग
- 1:31:07रणनीति थी। लेकिन यहां एस्पिरेंट्स के लिए
- 1:31:10एक बहुत बड़ा ट्रैप है।
- 1:31:12ट्रैप मतलब किस तरह का ट्रैप?
- 1:31:14अक्सर ऐतिहासिक संदर्भों में बाबर के भारत
- 1:31:17पर आक्रमण का वर्ष 1525 और 1526 के बीच
- 1:31:21मिलाजुलाकर पेश किया जाता है। वास्तविक
- 1:31:24युद्ध 20 और 21 अप्रैल 1526 को लड़ा गया
- 1:31:28था। इस अंतर को समझना जरूरी है।
- 1:31:30एक बहुत ही बारीक पॉइंट है और युद्ध जीतने
- 1:31:33के बाद बाबर ने काबुल के निवासियों को
- 1:31:35चांदी के सिक्के भी बांटे थे। जिसके कारण
- 1:31:38उसे कलंदर की उपाधि मिली थी। है ना?
- 1:31:40बिल्कुल। कलंदर की उपाधि उसी उदारता का
- 1:31:43परिणाम थी। जैसा कि हम दिशांत आईएस में
- 1:31:46पढ़ाते हैं। फैक्ट्स को रटना नहीं है।
- 1:31:48उन्हें कहानी की तरह समझना है।
- 1:31:50विद्रोह का सामना करना पड़ा।
- 1:31:52एकदम सही। हिसार के क्षेत्र में हामिद खान
- 1:31:55ने तलवार उठाई। हालांकि बाद में उसे
- 1:31:58हुमायूं ने हरा दिया। मेवात में हसन खान
- 1:32:01मेवाती ने एक बहुत ही मजबूत प्रतिरोध खड़ा
- 1:32:03किया। और हसन खान मेवाती तो अंततः 1527 के
- 1:32:07खानवा के युद्ध में लड़ते हुए वीरगति को
- 1:32:09प्राप्त हुए थे। इसके बाद कैथल में मोहन
- 1:32:12सिंह मंडार ने भी 1530 में विद्रोह किया
- 1:32:14था।
- 1:32:15यह स्थानीय प्रतिरोध साबित करते हैं कि
- 1:32:17मुगलों की जड़े रातोंरात नहीं जमी थी। खुद
- 1:32:20बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुके बाबरी में
- 1:32:23इनकी ताकत को स्वीकारा है।
- 1:32:25हां, बाबर ने हसन खान मेवाती को सम्मान
- 1:32:28पूर्वक मेवात का राजा कहकर संबोधित किया
- 1:32:31है। यह एक विजेता द्वारा शत्रु को दिया
- 1:32:34गया दुर्लभ सम्मान है।
- 1:32:35इसी संघर्षपूर्ण दौर में एक ऐसा सूरी
- 1:32:37अंतराल आता है जिसने प्रशासनिक ढांचे की
- 1:32:40नई इबारत लिख दी। शेरशाह सूरी का काल।
- 1:32:44यह काफी कम लोग जानते हैं कि शेरशाह सूरी
- 1:32:46का बचपन हरियाणा के नारनौल में बीता था।
- 1:32:49उनके दादा इब्राहिम सूरी का मकबरा आज भी
- 1:32:51नारनौल में ही मौजूद है।
- 1:32:53सीरियस एस्पिरेंट्स ध्यान दें। माना कि
- 1:32:56दिल्ली दूर है और रास्ते में कांटे हजार
- 1:32:59हैं। पर जो एस्पिरेंट शेरशाह की तरह डटा
- 1:33:02रहे वही तो होनहार है। शेरशाह का 5 साल का
- 1:33:06शासनकाल एक मास्टर क्लास है।
- 1:33:09उन्होंने प्रशासन को कैसे बदला था?
- 1:33:11उन्होंने पूरे साम्राज्य को सुव्यवस्थित
- 1:33:13सरकारों में बांट दिया था। जो आज के जिला
- 1:33:16प्रशासन का शुरुआती रूप माना जा सकता है
- 1:33:19और अर्थव्यवस्था के लिए चांदी का रुपया
- 1:33:22शुरू किया।
- 1:33:22बुनियादी ढांचे में भी उनका बड़ा योगदान
- 1:33:24था। राहुल प्रकाश सर के मार्गदर्शन में
- 1:33:27तैयार नोट्स बताते हैं कि शेरशाह ने
- 1:33:29ग्रैंड ट्रंक रोड के किनारे सराय और
- 1:33:32मीनारें बनवाई।
- 1:33:33जी, एग्जाम अलर्ट के तौर पर याद रखें
- 1:33:36अकेले हरियाणा के क्षेत्र में ऐसी 88 कोस
- 1:33:39मीनारों का निर्माण करवाया गया था। यह एक
- 1:33:42सुरक्षित संचार नेटवर्क का हिस्सा थी। अब
- 1:33:45यहां बात सच में बहुत दिलचस्प हो जाती है।
- 1:33:48रेवाड़ी के बाजारों में शोरा और अनाज का
- 1:33:52व्यापार करने वाला एक साधारण व्यक्ति हेमु
- 1:33:55आदिल शाह का प्रधानमंत्री बन जाता है।
- 1:33:57हेमु जिन्हें हेमचंद्र भी कहा जाता है।
- 1:34:00उन्होंने लगातार 22 युद्ध जीते और दिल्ली
- 1:34:02के सिंहासन पर बैठकर विक्रमादित्य की
- 1:34:05उपाधि धारण की। यह मध्यकालीन इतिहास के
- 1:34:09सबसे शानदार उत्कर्षों में से एक है।
- 1:34:12लेकिन फिर आता है 5 नवंबर 1556 पानीपत का
- 1:34:16दूसरा युद्ध।
- 1:34:17हेमु और अकबर के सेनापति बैरम खान के बीच।
- 1:34:21हेमु अपने हाथी हवाई पर सवार होकर सेना का
- 1:34:24नेतृत्व कर रहे थे। पलड़ा हेमु का भारी
- 1:34:27था। लेकिन तभी एक भटका हुआ तीर सीधे हेमु
- 1:34:30की आंख में जा लगता है। उनके गिरते ही
- 1:34:32भगदड़ मच जाती है और जीती हुई बाजी मुगलों
- 1:34:36के पक्ष में चली जाती है।
- 1:34:37रिवीजन की कमी से अक्सर मेरिट लिस्ट छूट
- 1:34:40जाती है। जैसे एक तीर से हेमु की जीती
- 1:34:42बाजी पलट जाती है। एक छोटी सी चूक ने
- 1:34:45इतिहास बदल दिया।
- 1:34:47इस जीत के बाद मुगलों ने एक विस्तृत
- 1:34:49प्रशासनिक ढांचा तैयार किया। इस 360
- 1:34:52डिग्री पिरामिड ढांचे को समझना बहुत
- 1:34:54आवश्यक है।
- 1:34:55पिरामिड का ढांचा बहुत तार्किक था। सबसे
- 1:34:58ऊपर सूबा जिसका मुखिया सूबेदार। सूबे के
- 1:35:01नीचे सरकार जिसे फौजदार संभालता था। सरकार
- 1:35:05के नीचे परगना और सबसे नीचे ग्राम जिसका
- 1:35:09मुखिया मुकद्दम होता था।
- 1:35:11परगना स्तर के अधिकारियों को लेकर अक्सर
- 1:35:12भ्रांति होती है। दिशांत आईएएस के नोट्स
- 1:35:15में एक और ट्रैप का जिक्र है।
- 1:35:17बिल्कुल। शिकदार और मुंसिफ के बीच का
- 1:35:20अंतर। शिकदार का काम कानून और व्यवस्था
- 1:35:23बनाए रखना था। जबकि मुनसिफ का काम राजस्व
- 1:35:26वसूली और दीवानी न्याय से जुड़ा था।
- 1:35:29इन्हें आपस में मिलाना नहीं चाहिए।
- 1:35:31प्रशासन के इस ढांचे को ऊर्जा मिलती थी
- 1:35:33अर्थव्यवस्था से और उस समय अकबर के काल
- 1:35:36में टोडरमल ने धशाला प्रणाली लागू की थी।
- 1:35:38टोडरमल की दहशाला प्रणाली बहुत वैज्ञानिक
- 1:35:41थी। भूमि को चार हिस्सों में बांटा गया
- 1:35:43था। पहली श्रेणी पोलेज जिस पर सालाना खेती
- 1:35:47होती थी। और दूसरी पौती जिसे कम समय के
- 1:35:50लिए परती छोड़ दिया जाता था।
- 1:35:52यहां अक्सर भ्रम होता है। जो भूमि 3 से 4
- 1:35:55साल तक खाली रखी जाती थी उसे चाचर कहा
- 1:35:58जाता था और जो पांच या उससे अधिक सालों से
- 1:36:01खाली हो वो बंजर थी।
- 1:36:03मानक राजस्व दर उपज का एक तिहाली हिस्सा
- 1:36:06तय किया गया था। इस कृषि व्यवस्था के लिए
- 1:36:08सिंचाई के नवाचार भी महत्वपूर्ण थे।
- 1:36:11पश्चिमी यमुना नहर का विकास काफी रोचक है।
- 1:36:14मूल रूप से इसका निर्माण फिरोज शाह तुगलक
- 1:36:16ने करवाया था। फिर अकबर ने जीर्णोद्धार
- 1:36:19किया और शाहजहां ने इसे दिल्ली तक
- 1:36:21विस्तारित किया।
- 1:36:22और तकनीक के मोर्चे परर्शियन व्हील का
- 1:36:24इस्तेमाल शुरू हुआ जिसे रहट या साकिया कहा
- 1:36:27जाता था।
- 1:36:27जानवरों और गियर प्रणाली से चलने वाले इस
- 1:36:30पहिए में कुओं से पानी निकालकर सिंचाई को
- 1:36:33बहुत आसान कर दिया। इसने कृषि में सच में
- 1:36:35क्रांति ला दी। जैसे दिशांत आईएस और राहुल
- 1:36:38प्रकाश सर की टीम के नोट्स में भी जोर
- 1:36:40दिया गया है कि तकनीक का समाज पर गहरा
- 1:36:42प्रभाव पड़ता है।
- 1:36:43एकदम सही और इसी समाज का एक और खूबसूरत
- 1:36:46पहलू था सूफीवाद और भक्ति आंदोलन। इतने
- 1:36:50युद्धों के बीच भी यह सांस्कृतिक
- 1:36:52ताना-बाना मजबूत रहा।
- 1:36:53हासी में चिश्ती सिलसिले के बाबा फरीद ने
- 1:36:55प्रेम का संदेश फैलाया। पानीपत में बू अली
- 1:36:58शाह कलंदर की दरगाह सांप्रदायिक सौहार्द
- 1:37:01का केंद्र बनी। और थानेसर में शेख चिल्ली
- 1:37:04का मकबरा। दारा शिको के गुरु शेख चिल्ली
- 1:37:08का यह मकबरा वास्तुकला का अद्भुत नमूना
- 1:37:11है। एग्जाम अलर्ट इसे हरियाणा का ताजमहल
- 1:37:15कहा जाता है।
- 1:37:17सिलेबस का दरिया है और डूब के जाना है।
- 1:37:20आर्ट एंड कल्चर के फैक्ट्स को भाई किसने
- 1:37:22आसान माना है? भक्ति साहित्य भी पीछे नहीं
- 1:37:25था। फरीदाबाद के सीही में महान कवि सूरदास
- 1:37:29जन्मे जो अकबर के समकालीन थे।
- 1:37:31उन्होंने सूरसागर की रचना की। झज्जर के
- 1:37:34छुड़ानी में संत गरीब दास ने नई चेतना
- 1:37:38जगाई और 1543 में नारनोल में संत वीरभान
- 1:37:43ने सतनामी संप्रदाय की स्थापना की।
- 1:37:46सतनामी संप्रदाय के अनुयाई अपना सिर मुंडा
- 1:37:49कर रखते थे। इसलिए उन्हें मुंडिया भी कहा
- 1:37:52जाता था। स्मारकों की बात करें तो पानीपत
- 1:37:55की काबुली बाघ मस्जिद और नारनौल में बीरबल
- 1:37:58का छत्ता अपने स्थापत्य के लिए आज भी
- 1:38:01आकर्षण का केंद्र है।
- 1:38:03लेकिन मुगलों के अंतिम काल में औरंगजेब की
- 1:38:05कठोर नीतियों ने बड़े विद्रोहों को जन्म
- 1:38:08दिया। महान जाट विद्रोह इसका एक बड़ा
- 1:38:10उदाहरण है।
- 1:38:111669 में तिलपत के गोकुला का विद्रोह और
- 1:38:15फिर 1685 में राजाराम का सिंसिनी से
- 1:38:18विद्रोह। राजाराम ने तो सिकंदरा में अकबर
- 1:38:21के मकबरे को ही लूट लिया था।
- 1:38:23यह मुगल सत्ता के खौफ के खत्म होने का
- 1:38:25प्रतीक था और जाट शक्ति को चरम पर
- 1:38:27पहुंचाया महाराजा सूरजमल ने।
- 1:38:29केआर कानूंगो ने उन्हें जाट जनजाति का
- 1:38:32प्लेटो कहा है। पानीपत की तीसरी लड़ाई से
- 1:38:34पहले उन्होंने मराठों को गोरिल्ला युद्ध
- 1:38:37की सलाह दी थी जिसे मराठों ने नहीं माना।
- 1:38:40विद्रोहों की श्रंखला में सतनामी विद्रोही
- 1:38:42अहम है जो 1672 में नारनौल में एक सैनिक
- 1:38:45और किसान के विवाद से शुरू हुआ। उसके बाद
- 1:38:47बंदा सिंह बहादुर का उदय होता है।
- 1:38:50उन्होंने सोनीपत के सहरी खांडा को
- 1:38:53मुख्यालय बनाया और लोहगढ़ को राजधानी
- 1:38:55घोषित कर जमींदारी प्रथा समाप्त कर दी।
- 1:38:58किताबों से दोस्ती और रातों से जंग जो जीत
- 1:39:00जाएगा वही एक दिन लवासना की चौखट पर अपना
- 1:39:03नाम लिखवाएगा।
- 1:39:03इन विद्रोहों ने मुगलों को जजर कर दिया
- 1:39:05था। करनाल के मैदान में मोहम्मद शाह
- 1:39:08रंगीला की सेना की करारी हार हुई। नादिर
- 1:39:11शाह मयूर सिंहासन और कोहिनूर लूट ले गया।
- 1:39:14इसी करनाल के युद्ध में रेवाड़ी के अहीर
- 1:39:17शासक राव बालकृष्णन ने मुगलों की तरफ से
- 1:39:19लड़ते हुए शहादत दी थी। जो एक बहुत ही
- 1:39:21बहादुरी भरा कदम था।
- 1:39:23दिशांत आईएएस के इस डीप ड्राइव में एक
- 1:39:25बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा एमसीक्यू एनालिसिस
- 1:39:28का है। यह एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल खड़ा
- 1:39:31करता है।
- 1:39:31तो चलिए दिशांत आईएएस की स्लाइड में दिए
- 1:39:34गए एमसीक्यू को सुलझाते हैं। एलिमिनेशन
- 1:39:36लॉजिक का इस्तेमाल करते हुए।
- 1:39:37पहला स्टेटमेंट हसन खान मेवाती ने बाबर का
- 1:39:40साथ दिया था। अब एस्पिरेंट्स सोचे हमने
- 1:39:42अभी डिस्कस किया था कि उन्होंने किसका साथ
- 1:39:44दिया था।
- 1:39:45उन्होंने इब्राहिम लोधी का साथ दिया था।
- 1:39:47बाबर का नहीं तो यह स्टेटमेंट गलत हो जाता
- 1:39:49है।
- 1:39:49बिल्कुल। दूसरा स्टेटमेंट कहता है कि पोलज
- 1:39:52भूमि हमेशा जोती जाती है। जबकि तीन-चार
- 1:39:54साल खाली छोड़ी जाने वाली भूमि चाचर होती
- 1:39:57है। यह फेक्चुअली एकदम करेक्ट है।
- 1:40:00और तीसरा स्टेटमेंट है कि शेख चिल्ली का
- 1:40:02मकबरा पानीपत में है।
- 1:40:03यह एक क्लासिक यूपीएससी ट्रैप है। शेख
- 1:40:06चिल्ली का मकबरा जिसे हरियाणा का ताजमहल
- 1:40:09कहते हैं, वह थानेसर में है। पानीपत में
- 1:40:11नहीं। तो इस तरह एलिमिनेशन लॉजिक से आप
- 1:40:14सही विकल्प तक पहुंच सकते हैं।
- 1:40:16बेहतरीन विश्लेषण अगर मेंस के
- 1:40:18परिप्रेक्ष्य से देखें तो यह सभी तथ्य
- 1:40:20बताते हैं कि पानीपत और करनाल हमेशा
- 1:40:23रणनीतिक युद्ध के मैदान क्यों रहे?
- 1:40:25उत्तर पश्चिम से आने वाले आक्रांता और
- 1:40:27दिल्ली के बीच यही खुला मैदान था। जो इस
- 1:40:30पर नियंत्रण रखता, दिल्ली उसी की होती थी।
- 1:40:32साथ ही यह सूफी और भक्ति का सांस्कृतिक
- 1:40:35संगम भी रहा। विशांत आईएस का एक अंतिम
- 1:40:37संदेश है। लबासना का रास्ता तथ्यों की
- 1:40:40स्पष्टता से शुरू होता है। पुनरावृति करते
- 1:40:43रहें, संघर्ष करते रहें।
- 1:40:44इन सभी ऐतिहासिक दस्तावेजों को देखने के
- 1:40:46बाद सोचने वाली बात यह है कि सदियों पहले
- 1:40:49जो व्यापारिक और सैन्य मार्ग किसी
- 1:40:51साम्राज्य के उत्थान या पतन का कारण बनते
- 1:40:54थे। क्या आज के आधुनिक युग में भी
- 1:40:56बुनियादी ढांचे और इकोनॉमिक कॉरिडोरस के
- 1:40:59नजरिए से राजनीतिक सत्ता की चाबियां
- 1:41:01उन्हीं ऐतिहासिक भौगोलिक मार्गों पर
- 1:41:03निर्भर नहीं करती हैं?
- 1:41:05यह एक बहुत ही गिलान सवाल है जो हमें
- 1:41:07सोचने पर मजबूर करता है।
- 1:41:09दिस लेक्चर वाज़ बाय दिशांत आईएएस।
- 1:41:12बिल्कुल। और एक तरफ मुगलों का विशाल
- 1:41:14साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ठहरा रहा
- 1:41:16था और दूसरी तरफ मराठा अपनी सत्ता उत्तर
- 1:41:19भारत में स्थापित करने का प्रयास कर रहे
- 1:41:21थे। इन सबके बीच ब्रिटिश ईस्ट इंडिया
- 1:41:24कंपनी बहुत ही खामोशी से अपनी जड़े जमा
- 1:41:26रही थी। यह लेक्चर केवल कुछ युद्धों या
- 1:41:29संधियों का संकलन नहीं है बल्कि उस महान
- 1:41:31ज्वालामुखी की पृष्ठभूमि है जो 1857 में
- 1:41:34अंबाला से फटा था। सही बात है और सिविल
- 1:41:38सेवा परीक्षा के उम्मीदवारों के लिए यह
- 1:41:40समझना बहुत आवश्यक है कि यह पूरा कालखंड
- 1:41:44यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के
- 1:41:46दृष्टिकोण से कितना हाई यील्ड है। हम
- 1:41:49अक्सर राष्ट्रीय स्तर के इतिहास को पढ़ते
- 1:41:51हुए जो रीजनल डायनामिक्स हैं मतलब
- 1:41:53क्षेत्रीय शक्तियों के योगदान को नजरअंदाज
- 1:41:56कर देते हैं। हां, और 1857 की महान
- 1:41:59क्रांति में हरियाणा का जो अप्रतिम योगदान
- 1:42:02रहा है, और उससे पहले के 100 सालों में जो
- 1:42:05प्रशासनिक उथल-पुथल मची, उस पर सीधे
- 1:42:08कॉन्सेप्चुअल सवाल बनते हैं। आज हमारा
- 1:42:10उद्देश्य केवल क्या हुआ यह रटना नहीं है
- 1:42:13बल्कि क्यों हुआ इसके पीछे की भू राजनीति
- 1:42:16क्या थी इसका एक 360° विश्लेषण करना है
- 1:42:20ताकि प्रीलिम्स का कोई भी ट्रैप और मेंस
- 1:42:22का कोई भी विश्लेषणात्मक सवाल छात्रों से
- 1:42:25ना छूटे
- 1:42:26इतिहास के इस शून्य वैक्यूम यानी पॉलिटिकल
- 1:42:29वैक्यूम को समझने के लिए हमें सबसे पहले
- 1:42:32जाट शक्ति के उदय और रानी किशोरी के विषय
- 1:42:35पर गौर करना होगा। छात्रों अगर आप इस
- 1:42:38वैक्यूम को समझें तो जब केंद्र में मुगलों
- 1:42:40की पकड़ कमजोर हुई तो स्थानीय स्तर पर एक
- 1:42:43शून्यता आ गई।
- 1:42:44हम और इसी शून्यता को भरते हुए वल्लभगढ़
- 1:42:48का उदय हुआ। फ्लो चार्ट के पहले हिस्से
- 1:42:51में देखें तो चौधरी गोपाल सिंह ने इस
- 1:42:53क्षेत्र में अपने प्रभाव का विस्तार किया
- 1:42:56और किलाबंदी की शुरुआत की। यह केवल ईंट
- 1:42:59पत्थरों का निर्माण नहीं था बल्कि एक
- 1:43:01स्वतंत्र सत्ता की घोषणा बिल्कुल और इसी
- 1:43:04राजनीतिक विकास के क्रम में जब हम जाट
- 1:43:07शक्ति के चरम की बात करते हैं तो महाराजा
- 1:43:09सूरजमल का नाम इतिहास में सबसे ऊपर आता
- 1:43:12है। एस्पिरेंट्स को यहां ध्यान देना चाहिए
- 1:43:14कि महाराजा सूरजमल का मूल्यांकन करते हुए
- 1:43:17इतिहासकार उन्हें जाट जनजाति का प्लेटो
- 1:43:20यानी प्लेटो ऑफ द जाट ट्राइब कहते हैं।
- 1:43:22हां। और यूपीएससी अक्सर ऐसे विशेषणों के
- 1:43:26पीछे के तर्क पर सवाल पूछता है। उन्हें
- 1:43:28प्लेटो सिर्फ इसलिए नहीं कहा जाता कि वे
- 1:43:31अजय योद्धा थे। बल्कि इसलिए क्योंकि उनके
- 1:43:34पास एक कुशाग्र रणनीतिक दृष्टि थी। वे
- 1:43:37जानते थे कि गठजोड़ कब करना है और कब
- 1:43:39तटस्थ रहना है। इस कूटनीतिक सफलता के पीछे
- 1:43:43एक बहुत बड़ा स्तंभ रानी किशोरी का था।
- 1:43:46रानी किशोरी जो सूरजमल की पत्नी थी।
- 1:43:48उन्होंने केवल महल तक खुद को सीमित नहीं
- 1:43:50रखा। युद्ध के समय सैन्य रसद यानी
- 1:43:53मिलिट्री लॉजिस्टिक्स का पूरा प्रबंधन
- 1:43:55उनके हाथों में होता था।
- 1:43:56इस ऐतिहासिक तथ्यों को आज के भूगोल से
- 1:43:58जोड़ना भी जरूरी है। सीरियस एस्पिरेंट्स
- 1:44:01यहां एक प्रीलिम्स अलर्ट है।
- 1:44:02बिल्कुल। रानी किशोरी के इसी योगदान को
- 1:44:05दर्शाने वाला किशोरी महल आज भी होडल पलवल
- 1:44:08में स्थित है। इस लोकेशन को एस्पिरेंट्स
- 1:44:10अपने नोट्स में मार्क कर लें। एक शूयता
- 1:44:12में अपना साम्राज्य खड़ा करने की यह कहानी
- 1:44:15हमें यूपीएससी की तैयारी की याद दिलाती
- 1:44:17है। छात्रों किले सिर्फ पत्थरों से नहीं
- 1:44:20कूटनीति से बनते हैं। यूपीएससी के रण में
- 1:44:23वही टिकते हैं जो हर चाल को समझते हैं।
- 1:44:25बहुत खूब। और कूटनीति में जो नहीं संभल
- 1:44:28पाते उनका हश्र हमें पानीपत की तीसरी
- 1:44:30लड़ाई में देखने को मिलता है। छात्रों
- 1:44:331761 14 जनवरी इतिहास की दिशा मोड़ने वाली
- 1:44:36तारीख है। इसे याद रखने की एक आसान ट्रिक
- 1:44:38है। उत्तर भारत में इस दिन मकर सक्रांति
- 1:44:41का पर्व मनाया जाता है और यह महायुद्ध
- 1:44:43सदाशिव राव भा के नेतृत्व वाली मराठा सेना
- 1:44:46और अफगान आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली के
- 1:44:49बीच लड़ा गया था। मराठों की इस निर्णायक
- 1:44:51हार के कारणों का अगर हम विश्लेषण करें तो
- 1:44:54सबसे बड़ी विफलता रसद लाइनों यानी सप्लाई
- 1:44:57लाइंस का टूटना था।
- 1:44:59मराठा सेना अपने बेस यानी दक्कन से बहुत
- 1:45:02दूर थी और सबसे बड़ी रणनीतिक चूक यह थी कि
- 1:45:05उन्होंने अपने अहंकार या कूटनीतिक विफलता
- 1:45:08के कारण स्थानीय जाट और सिख शासकों का
- 1:45:11समर्थन खो दिया था। एक अनजान भौगोलिक
- 1:45:14क्षेत्र में बिना स्थानीय समर्थन के युद्ध
- 1:45:17लड़ना उनके लिए आत्मघाती साबित हुआ।
- 1:45:19एस्पिरेंट्स का ध्यान मैं यहां एक बहुत
- 1:45:21बड़े यूपीएससी ट्रैप की ओर खींचना
- 1:45:23चाहूंगा। परीक्षा हॉल के भारी दबाव में कई
- 1:45:26बार छात्र पानीपत की तीसरी लड़ाई को करनाल
- 1:45:29के युद्ध के साथ भ्रमित कर देते हैं जो
- 1:45:311739 में हुआ था।
- 1:45:32सही कहा। यह एक क्लासिक ट्रैप है। करनाल
- 1:45:35का युद्ध नादिर शाह और मुगल सम्राट
- 1:45:37मोहम्मद शाह के बीच हुआ था। दोनों युद्धों
- 1:45:40का भौगोलिक क्षेत्र आसपास है। लेकिन इनके
- 1:45:43वर्ष, युद्धत पक्ष और परिणाम बिल्कुल अलग
- 1:45:46हैं। पानीपत की इस भयानक हार के बाद पूरे
- 1:45:50उत्तर भारत में लगा कि मराठा शक्ति का
- 1:45:52हमेशा के लिए अंत हो गया है।
- 1:45:54लेकिन इतिहास खुद को दोहराता है और यहीं
- 1:45:56से मराठा पुनरुत्थान। महादाजी सिंधिया का
- 1:45:59युग शुरू होता है। 1789 से 1794 के बीच
- 1:46:03महादाजी सिंधिया ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति
- 1:46:06और सैन्य आधुनिकीकरण के दम पर दिल्ली और
- 1:46:09हरियाणा पर पुनः अपना वर्चस्व स्थापित कर
- 1:46:12लिया।
- 1:46:12प्रशासन को एक सुव्यवस्थित ढांचा देने के
- 1:46:15लिए उन्होंने सिंधिया के हरियाणा को चार
- 1:46:17मुख्य जिलों में विभाजित किया। इस
- 1:46:19प्रशासनिक विभाजन का लॉजिक समझना बहुत
- 1:46:21आवश्यक है। छात्रों दिल्ली जिला राजधानी
- 1:46:24क्षेत्र के रूप में सीधा नियंत्रण में था।
- 1:46:27उत्तर की सुरक्षा के लिए सोनीपत जिला,
- 1:46:29पश्चिम के रेगिस्तानी और सीमांत क्षेत्रों
- 1:46:32के लिए हिसार जिला और दक्षिण के सामरिक
- 1:46:34नियंत्रण के लिए नूह जिला बनाया गया।
- 1:46:36महाजी सिंधिया की कूटनीतिक और सैन्य ताकत
- 1:46:39का सबसे बड़ा प्रमाण था गुलाम कादिर के
- 1:46:42खूंखार विद्रोह को कुचलना जिसने दिल्ली की
- 1:46:45सत्ता को हिला कर रख दिया था। एज वी टीच
- 1:46:48एट दिशांत आईएस अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल
- 1:46:50प्रकाश सर एंड देयर कीम इतिहास को केवल
- 1:46:53राजाओं के युद्ध गाथाओं के रूप में नहीं
- 1:46:56बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं के क्रमिक
- 1:46:58विकास के रूप में पढ़ना चाहिए।
- 1:47:00बिल्कुल और इसी क्रमिक विकास में एक ऐसा
- 1:47:03अध्याय भी है जो किसी फिल्म की कहानी जैसा
- 1:47:06लगता है। जॉर्ज थॉमस जहाज साहब 1797 से
- 1:47:101802 का समय। 18वीं सदी के अंत में जब हर
- 1:47:15तरफ अराजकता थी, तब आयरलैंड के टिपरेरी से
- 1:47:18आया एक मामूली नाविक हरियाणा में अपनी
- 1:47:21स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर लेता है।
- 1:47:24स्थानीय लोग उन्हें जहाज साहब कहते थे। अब
- 1:47:26यह जहाज साहब प्रीलिम्स के लिए एक बड़ा
- 1:47:28यूपीएससी ट्रैप है। जॉर्ज थॉमस का नाम
- 1:47:31पढ़ते ही छात्रों का दिमाग सीधे ईस्ट
- 1:47:33इंडिया कंपनी की तरफ जाता है और वे उसे एक
- 1:47:35ब्रिटिश अधिकारी मान लेते हैं।
- 1:47:37यह एक भयंकर भूल है। वो एआईसी का अधिकारी
- 1:47:40नहीं बल्कि एक स्वतंत्र शासक यानी
- 1:47:43इंडिपेंडेंट रूलर था। उसने अपनी सत्ता का
- 1:47:46केंद्र यानी राजधानी हांसी को बनाया। वहां
- 1:47:50उसने एक टसाल मिंट स्थापित की। बंदूक
- 1:47:53बनाने की बाकायदा एक फाउंड्री लगाई और
- 1:47:56अपनी संप्रभुता दिखाने के लिए अपनी खुद की
- 1:47:59मुद्रा चलाई। जिसे इतिहास में सिक्का-ए
- 1:48:02साहब के नाम से जाना जाता है।
- 1:48:04एक अनजान व्यक्ति का सात समंदर पार से आकर
- 1:48:06अपना सिक्का चलाना वाकई यह केस स्टडी है।
- 1:48:09सात समंदर पार से आकर जिसने अनजान जमीन पर
- 1:48:12अपना सिक्का चलाया। उम्मीदवारों तुम भी
- 1:48:14अपनी मेहनत से वह मुकाम पाओ कि दुनिया कहे
- 1:48:16क्या खूब नाम कमाया।
- 1:48:18लेकिन की कोई सीमा नहीं होती। और यही थॉमस
- 1:48:22के पतन और बेगम समरू के उदय का कारण बनी।
- 1:48:26फ्लो चार्ट के माध्यम से इसके पतन को समझे
- 1:48:28छात्रों। थॉमस ने अपना विस्तार शुरू किया
- 1:48:31और जींद रियासत पर हमला कर दिया। इस एक
- 1:48:34कदम ने पूरे क्षेत्र के भू-राजनीतिक
- 1:48:36समीकरण बिगाड़ दिए।
- 1:48:38पटियाला के शासक सतर्क हो गए। मराठों को
- 1:48:40हस्तक्षेप करने का मौका मिल गया और अंततः
- 1:48:43फ्रांसीसी कमांडर पेरोन के नेतृत्व में
- 1:48:46मराठा सेना ने थॉमस को घेर लिया। 1801 में
- 1:48:49उसे हांसी में ही आत्मसमर्पण करना पड़ा।
- 1:48:52इसी उथल-पुथल वाले दौर में जहां बड़े-बड़े
- 1:48:55साम्राज्य ढह रहे थे, एक महिला शासक ने
- 1:48:58अपनी असाधारण कूटनीति से अपना वजूद कायम
- 1:49:00रखा। बेगम समरू। वो सरधना की शासक थी।
- 1:49:04लेकिन हरियाणा के झाड़सा जो वर्तमान
- 1:49:06गुड़गांव है। वहां उनकी एक बड़ी जागीर थी।
- 1:49:09एग्जाम फैक्ट के तौर पर एस्पिरेंट्स याद
- 1:49:11रखें कि उन्होंने गुड़गांव में एक शानदार
- 1:49:13महल का निर्माण कराया था। जो आज के समय
- 1:49:15में गुड़गांव का कलेक्टर कार्यालय है।
- 1:49:17बेगम समरू का इतिहास इस बात का प्रमाण है
- 1:49:20कि संक्रमण काल में केवल तलवार नहीं बल्कि
- 1:49:23कूटनीतिक संतुलन भी आपको बचा सकता है।
- 1:49:25इन स्थानीय संघर्षों के बीच अब एंट्री
- 1:49:28होती है उस औपनिवेशिक शक्ति की जिसने पूरे
- 1:49:31उपमहाद्वीप का नक्शा बदल दिया। ईस्ट
- 1:49:34इंडिया कंपनी का आगमन 1803।
- 1:49:37इसका कोर कांसेप्ट सुरजी अंजन गांव की
- 1:49:40संधि में छिपा है जो 30 दिसंबर 1803 को
- 1:49:43हुई। द्वितीय आंग्ल मराठा युद्ध में
- 1:49:46दौलतराव सिंधिया की हार के बाद यह संधि
- 1:49:48हुई और मराठों ने यमुना के पश्चिम का यह
- 1:49:51पूरा क्षेत्र अंग्रेजों को सौंप दिया।
- 1:49:53लेकिन एग्जाम अलर्ट यह है छात्रों कि
- 1:49:55अंग्रेजों ने 1803 में ही यहां अपना पूर्ण
- 1:49:58प्रशासनिक ढांचा लागू नहीं किया। उन्होंने
- 1:50:01शुरुआत में इस क्षेत्र की भारी उपेक्षा
- 1:50:03की।
- 1:50:03इसका कारण बहुत व्यवहारिक था। यहां भयंकर
- 1:50:06अराजकता यानी लॉलेसनेस थी। स्थानीय सरदार
- 1:50:10किसी की सत्ता मानने को तैयार नहीं थे।
- 1:50:12अंग्रेज नहीं चाहते थे कि उनका बहुमूल्य
- 1:50:15राजस्व और सैन्य बल इन स्थानीय कबीलों और
- 1:50:18सरदारों से लड़ने में बर्बाद हो।
- 1:50:20इस समस्या से निपटने के लिए अंग्रेजों ने
- 1:50:22एक बहुत ही चतुर ब्रिटिश प्रशासन नीति,
- 1:50:24दोहरी नीति या ड्यूल पॉलिसी इजाद की। बिना
- 1:50:27कोई स्लाइड पढ़े इस कांसेप्ट को समझे। इस
- 1:50:30पूरे क्षेत्र को दो अलग-अलग प्रशासनिक
- 1:50:31खांचों में बांट दिया गया। पहला असाइन
- 1:50:33टेरिटरी और दूसरा ट्रांसफर टेरिटरी।
- 1:50:35असाइंड टेरिटरी वो हिस्सा था जिसे
- 1:50:38अंग्रेजों ने सीधे अपने नियंत्रण में रखा।
- 1:50:40इस क्षेत्र का प्रशासन एक ब्रिटिश
- 1:50:42रेजिडेंट के माध्यम से चलाया जाता था।
- 1:50:45इसमें पानीपत, सोनीपत और नूह जैसे वे
- 1:50:48इलाके शामिल थे जो या तो रणनीतिक रूप से
- 1:50:51महत्वपूर्ण थे या जहां से अच्छा राजस्व
- 1:50:54प्राप्त होता था।
- 1:50:55ट्रांसफर टेरिटरी की कहानी थोड़ी अलग थी।
- 1:50:57अंग्रेजों ने इस क्षेत्र को उन वफादार
- 1:51:00स्थानीय सरदारों को सौंप दिया जिन्होंने
- 1:51:02युद्ध में उनका साथ दिया था। जैसे झज्जर,
- 1:51:04पटौदी और बहादुरगढ़ के सरदार। इसके पीछे
- 1:51:08की भूराजनीति को एस्पाइेंट्स गहराई से
- 1:51:10समझें।
- 1:51:11उत्तर में महाराजा रंजीत सिंह के नेतृत्व
- 1:51:13में सिख साम्राज्य तेजी से उभर रहा था।
- 1:51:16अंग्रेज इन रियासतों का इस्तेमाल सिख
- 1:51:19साम्राज्य और अपनी सीमाओं के बीच एक बफर
- 1:51:22के रूप में करना चाहते थे।
- 1:51:23जैसे-जैसे अंग्रेजों का नियंत्रण पुख्ता
- 1:51:25हुआ प्रशासनिक सुधार सामने आए। विशेषकर
- 1:51:281819 और 1833 के सुधार। 1819 में प्रशासन
- 1:51:33को अधिक सुचारू बनाने के लिए पूरे क्षेत्र
- 1:51:35को तीन डिवीजनों उत्तरी, केंद्रीय और
- 1:51:38दक्षिणी डिवीजन में बांट दिया गया।
- 1:51:40इसके बाद 1833 का चार्टर एक्ट आया जिसने
- 1:51:43प्रशासनिक मानचित्र को एक नई शक्ल दी।
- 1:51:46हरियाणा को उत्तर पश्चिमी प्रांत यानी
- 1:51:48नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंसेस का हिस्सा बना
- 1:51:50दिया गया और इसकी प्रशासनिक राजधानी आगरा
- 1:51:53निर्धारित की गई। रैंकर्स फोकस हियर यह एक
- 1:51:56की फैक्ट है कि यही प्रशासनिक व्यवस्था
- 1:51:581857 की महान क्रांति तक बिना किसी बड़े
- 1:52:00बदलाव के लागू रही। एस वी टीच एट दिशांत
- 1:52:03आईएस प्रशासन कभी स्थिर नहीं रहता। वह
- 1:52:06शासक वर्ग की तात्कालिक सुरक्षा और राजस्व
- 1:52:08जरूरतों के अनुसार खुद को ढालता है।
- 1:52:10और एक एस्पिरेंट के तौर पे आपको भी हर
- 1:52:12बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
- 1:52:14बिल्कुल। सिलेबस के बदलावों से डरकर कभी
- 1:52:16अपनी राह मत मोड़ना। प्रशासनिक सुधारों की
- 1:52:18तरह खुद को हर सांचे में ढालने से मत
- 1:52:20छोड़ना। जब प्रशासन अपनी जड़े मजबूत करता
- 1:52:23है तो संसाधनों का दोहन भी बढ़ता है। इसी
- 1:52:25आर्थिक और सामाजिक शोषण के खिलाफ पनपे
- 1:52:281857 से पूर्व के प्रारंभिक प्रतिरोध
- 1:52:31आंदोलन उम्मीदवारों को इन विद्रोहों को
- 1:52:33रटने के बजाय इन्हें एक टाइमलाइन और कारण
- 1:52:35के साथ जोड़ना चाहिए।
- 1:52:37आइए इसे जोड़ते हैं। टेबल के डाटा को
- 1:52:38एनालाइज करें छात्रों। 1818 में छछौली का
- 1:52:42विद्रोह हुआ जिसका नेतृत्व ज्योत सिंह ने
- 1:52:45किया। उसी वर्ष 1818 में रानिया में जाबिद
- 1:52:49खान के नेतृत्व में तलवारें खींची। 1824
- 1:52:52में किसानों का एक व्यापक विद्रोह हुआ
- 1:52:55जिसका नेतृत्व सूरजमल ने किया और इन सबसे
- 1:52:58पहले 1814 में जींद में प्रताप सिंह ने
- 1:53:02ब्रिटिश हस्तक्षेप के खिलाफ झंडा बुलंद
- 1:53:04किया था।
- 1:53:04इन सभी अलग-अलग विद्रोहों को जोड़ने वाली
- 1:53:07की इनसाइट क्या है? वो है ब्रिटिश
- 1:53:10भू-राजस्व नीतियां। उच्च भू-राजस्व यानी
- 1:53:14हाई लैंड रेवेन्यू की दमनकारी दरें और
- 1:53:17स्थानीय रियासतों के उत्तराधिकार व
- 1:53:20रीति-रिवाजों में अंग्रेजों का अनावश्यक
- 1:53:22हस्तक्षेप ही वो ईंधन था जिसने इन
- 1:53:25विद्रोहों को भड़काया।
- 1:53:26उत्तराधिकार में हस्तक्षेप का सबसे ज्वलंत
- 1:53:28उदाहरण हमें कैथल और लाडवा के विद्रोह में
- 1:53:31मिलता है। 1843 का कैथल विद्रोह इसलिए
- 1:53:34भड़का क्योंकि अंग्रेजों ने यहां व्यापगत
- 1:53:37का सिद्धांत यानी डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स का
- 1:53:39प्रयोग किया था। ध्यान दें छात्रों,
- 1:53:41डलहौजी के आधिकारिक रूप से इसे लागू करने
- 1:53:43से बहुत पहले ही इसका स्थानीय स्तर पर
- 1:53:46प्रयोग हो रहा था।
- 1:53:47कौड़ ने किया। इसी श्रृंखला में 1845 का
- 1:53:51लाडवा विद्रोह आता है। जिसका नेतृत्व अजीत
- 1:53:55सिंह ने किया। अंग्रेजों की प्रतिक्रिया
- 1:53:58बहुत क्रूर थी। उन्होंने इस विद्रोह को
- 1:54:01कुचल कर अजीत सिंह को गिरफ्तार किया और
- 1:54:04उन्हें सहारनपुर निर्वासित कर दिया। यह
- 1:54:06छोटे-छोटे विद्रोह दरअसल 1857 के उस बड़े
- 1:54:09भूकंप के पहले के झटके थे जिन्हें ब्रिटिश
- 1:54:12सरकार भांप नहीं पाई और अंततः वह दिन आ ही
- 1:54:14गया। 1857 अंबाला में विस्फोट।
- 1:54:17हम अक्सर इतिहास की किताबों में पढ़ते हैं
- 1:54:20कि क्रांति 10 मई को मेरठ से शुरू हुई।
- 1:54:23लेकिन छात्रों गहराई में जाएं तो दस पाक
- 1:54:26यानी विद्रोह की पहली चिंगारी 10 मई 1857
- 1:54:30की सुबह ही अंबाला छावनी की 60वीं नेटिव
- 1:54:33इनफेंट्री में सुलख चुकी थी। यह एक बहुत
- 1:54:35बड़ा यूपीएससी ट्रैप है। अंबाला का यह
- 1:54:38विद्रोह ब्रिटिश साम्राज्य की जड़े हिला
- 1:54:40सकता था। लेकिन श्याम सिंह नाम के एक
- 1:54:43गद्दार ने सिपाहियों की पूरी गुप्त योजना
- 1:54:47समय से पहले ही ब्रिटिश अधिकारियों को लीक
- 1:54:49कर दी।
- 1:54:50बगावत को दबाने की कोशिश हुई लेकिन चेतना
- 1:54:53जाग चुकी थी। जल्द ही यह आग गुड़गांव,
- 1:54:56रोहतक और हिसार के प्रशासनिक केंद्रों तक
- 1:54:59तेजी से फैल गई। इस क्रांति की सबसे बड़ी
- 1:55:02विशेषता थी हरियाणा भर में नेतृत्व का
- 1:55:05उभरना।
- 1:55:06इसे मैप के आधार पर याद करने की ट्रिक
- 1:55:08अपनाए एस्पिरेंट्स। पश्चिम में हिसार और
- 1:55:11हासी क्षेत्र की कमान शहजादा मोहम्मद अजीम
- 1:55:15ने संभाली। उत्तर पूर्व में पानीपत के
- 1:55:18भीतर इमाम अली कलंदर ने धार्मिक और
- 1:55:21सामाजिक लामबंदी की। मध्य क्षेत्र झज्जर
- 1:55:25में नवाब अब्दुल रहमान खान ने ब्रिटिश
- 1:55:27सत्ता को चुनौती दी और दक्षिण के मेवात
- 1:55:30इलाके में सदरुद्दीन जिन्हें सदर मेवाती
- 1:55:33भी कहा जाता है। उन्होंने किसानों और
- 1:55:35मेवों को एकजुट कर अंग्रेजों के लिए एक
- 1:55:38अभेद्य दीवार खड़ी कर दी।
- 1:55:40इन नायकों के अदम्य साहस को देखकर एक ही
- 1:55:43बात जहन में आती है। छात्रों क्रांति की
- 1:55:46वह आग जो अंबाला से उठी उसने पूरे सूबे को
- 1:55:49जगा दिया। उम्मीदवारों तुम्हारे भीतर का
- 1:55:53वो जज्बा ही है जिसने तुम्हें इस कठिन
- 1:55:55रास्ते पर चला दिया।
- 1:55:57इस क्रांति का सबसे निर्णायक और खूनी
- 1:56:00अध्याय था नारनौल का युद्ध जो 16 नवंबर
- 1:56:041857 को लड़ा गया। यह कोई छिटपुट विद्रोह
- 1:56:07नहीं था बल्कि दो संगठित सेनाओं का सीधा
- 1:56:11संघर्ष था। एक तरफ राव तुलाराम और शहजादा
- 1:56:14अजीम की संयुक्त देशभक्त सेना थी और दूसरी
- 1:56:17तरफ कर्नल जेरार्ड के नेतृत्व में भारी
- 1:56:20तोपखाने से लैस ब्रिटिश सेना।
- 1:56:23इस युद्ध का परिणाम भारतीय इतिहास के लिए
- 1:56:25दुखद रहा। हालांकि कर्नल जेरार्ड इस युद्ध
- 1:56:28में मारा गया लेकिन सैन्य रूप से
- 1:56:30अंग्रेजों की जीत हुई। राव तुलाराम को
- 1:56:33सामरिक वापसी करनी पड़ी और इसी के साथ
- 1:56:36हरियाणा में 1857 का संगठित प्रतिरोध
- 1:56:39समाप्त हो गया। अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल
- 1:56:42प्रकाश सर एंड देयर टीम वी ऑलवेज एम्फसाइज
- 1:56:44दैट बैटल्स लाइक नारनौल आर नॉट जस्ट डेट्स
- 1:56:48दे आर टर्निंग पॉइंट्स दैट क्लोज वन
- 1:56:50चैप्टर ऑफ हिस्ट्री एंड फोर्सबली ओपन
- 1:56:52अनदर।
- 1:56:53अब 1857 के एक बहुत ही जटिल और
- 1:56:56विश्लेषणात्मक पहलू पर आते हैं। रियासतों
- 1:56:59की भूमिका। एक तराजू की कल्पना करें
- 1:57:01छात्रों। 1857 में हरियाणा की रियासतें
- 1:57:05इसी तराजू के दो अलग-अलग पलों पर बैठी थी।
- 1:57:08एक पल्ले पर विद्रोही रियासतें थी जैसे
- 1:57:10झज्जर, वल्लभगढ़, फर्रुखानगर और दादरी।
- 1:57:14इन्होंने अपने राज्य की परवाह किए बिना
- 1:57:16आजादी का साथ दिया। और दूसरे पल्ले पर वे
- 1:57:20वफादार रियासतें थी। लॉयलिस्ट्स जिन्होंने
- 1:57:23अपने स्वार्थ के लिए अंग्रेजों का साथ
- 1:57:25दिया। जैसे जींद, पटियाला, नाभा, करनाल और
- 1:57:29लोहारू।
- 1:57:30जब क्रांति कुचली गई तो इसका प्रभाव भी
- 1:57:33इसी आधार पर तय हुआ। अंग्रेजों ने जीती
- 1:57:36हुई जमीन और नई उपाधियां देकर वफादार
- 1:57:39राज्यों को पुरस्कृत किया। जबकि विद्रोही
- 1:57:42सरदारों को दिल्ली के चांदनी चौक और अन्य
- 1:57:45स्थानों पर सरेआम फांसी दे दी गई।
- 1:57:48इस पूरी उथल-पुथल का अंतिम परिणाम था 1858
- 1:57:52का विलय। फरवरी 1858 में ब्रिटिश ताज ने
- 1:57:55सत्ता अपने हाथ में ली और हरियाणा को
- 1:57:58उत्तर पश्चिमी प्रांतों से काटकर पंजाब
- 1:58:00प्रांत में मिला दिया। इसके पीछे का फ्लो
- 1:58:03चार्ट लॉजिक समझना बहुत जरूरी है। यह विलय
- 1:58:06कोई प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं किया
- 1:58:08गया था। यह वास्तव में विद्रोह के लिए एक
- 1:58:11सजा थी। क्योंकि हरियाणा की जनता ने
- 1:58:14विद्रोह किया था और पंजाब के कुछ प्रमुख
- 1:58:17रियासतों ने अंग्रेजों का साथ दिया था
- 1:58:20इसलिए विद्रोही क्षेत्र को वफादार क्षेत्र
- 1:58:23के अधीन कर दिया गया। ब्रिटिश नीतियां
- 1:58:25दमनकारी हो गई और इस सजा के कारण हरियाणा
- 1:58:28में शिक्षा, रेलवे और बुनियादी विकास का
- 1:58:31एक लंबा ठहराव आ गया। लेकिन जहां राजनीतिक
- 1:58:35ठहराव आता है वहां अक्सर वैचारिक क्रांति
- 1:58:37जन्म लेती है।
- 1:58:38यही दौर था सामाजिक, धार्मिक जागृति, आर्य
- 1:58:42समाज का। 1878 में स्वामी दयानंद सरस्वती
- 1:58:46ने अंबाला का ऐतिहासिक दौरा किया। उनके
- 1:58:50विचारों ने उस सोए हुए समाज में नई ऊर्जा
- 1:58:53भर दी और 1880 में रेवाड़ी में आर्य समाज
- 1:58:57की पहली शाखा स्थापित की गई। गौशाला की
- 1:59:00स्थापना हुई।
- 1:59:01इसके अलावा आर्य समाज ने अस्पृश्यता और
- 1:59:04बाल विवाह जैसी उन गहरी सामाजिक बुराइयों
- 1:59:06पर भी सीधा प्रहार किया जो समाज को अंदर
- 1:59:09से खोखला कर रही थी। समाज सुधार का यह
- 1:59:12रास्ता बहुत कठिन होता है क्योंकि इसमें
- 1:59:14अपनों से ही वैचारिक लड़ाई लड़नी पड़ती
- 1:59:17है। समाज की बेड़ियों को तोड़ने के लिए
- 1:59:19पहले खुद के विचारों को आजाद करना होगा।
- 1:59:23सफलता की इस वेधि पर तुम्हें अपने हर डर
- 1:59:26को स्वाहा करना होगा।
- 1:59:28आर्य समाज की इस तेज लहर के समानांतर
- 1:59:30सनातन धर्म और अन्य आंदोलन भी अपनी जगह
- 1:59:33बना रहे थे। इसमें एक बड़ा नाम पंडित
- 1:59:35दीनदयाल शर्मा का है जो झज्जर से थे।
- 1:59:38उन्होंने 1886 में झज्जर में सनातन धर्म
- 1:59:41सभा की नींव रखी।
- 1:59:43पंडित दीनदयाल शर्मा का मुख्य योगदान यह
- 1:59:45था कि उन्होंने संस्कृत और हिंदी भाषा के
- 1:59:48प्रचार प्रसार को एक संस्थागत रूप दिया।
- 1:59:51उनका उद्देश्य आर्य समाज के तेजी से बढ़ते
- 1:59:54प्रभाव को संतुलित करना और सनातन परंपराओं
- 1:59:58का बौद्धिक बचाव करना था। यह वह समय था जब
- 2:00:01हरियाणा बंदूकों के बजाय विचारों के
- 2:00:04विमर्श का केंद्र बन रहा था। छात्रों अब
- 2:00:07समय है पूरे लेक्चर के 360 डिग्री
- 2:00:09विश्लेषण और मुख्य निष्कर्षों को समेटने
- 2:00:11का। हमने देखा कि कैसे हरियाणा 18वीं सदी
- 2:00:14में मुगल फिर मराठा और अंततः ब्रिटिश
- 2:00:17साम्राज्य के बीच एक संक्रमण क्षेत्र के
- 2:00:19रूप में संघर्ष करता रहा।
- 2:00:21और 1857 की क्रांति का सबसे बड़ा निष्कर्ष
- 2:00:24यह है कि यह 1857 से पहले के छोटे-छोटे
- 2:00:28सामंती विद्रोहों की तरह नहीं थी। यह एक
- 2:00:31वास्तविक जन आंदोलन मैस मूवमेंट था। इसमें
- 2:00:35किसान अपने हल छोड़कर, सैनिक अपनी बैरेक
- 2:00:38छोड़कर और स्थानीय शासक अपने महल छोड़कर
- 2:00:42एकजुट हुए थे।
- 2:00:43यहां जाते-जाते एस्पिरेंट्स के लिए एक
- 2:00:45अंतिम यूपीएससी ट्रैप अलर्ट है। परीक्षा
- 2:00:48में कभी भी 1857 के महानायक राव तुलाराम
- 2:00:52को बाद के दौर के आर्य समाज पर संरक्षक
- 2:00:56राव युधिष्ठिर के साथ भ्रमित ना करें।
- 2:00:59यूपीएससी अक्सर समान नामों का फायदा उठाता
- 2:01:02है।
- 2:01:03अब समय है सीखी गई बातों को कसौटी पर
- 2:01:06परखने का। हम सीधे यूपीएससी प्रीलिम्स
- 2:01:09एमसीक्यू कालक्रम क्रोनोलॉजी के एक प्रश्न
- 2:01:12की ओर बढ़ते हैं। प्रश्न ध्यान से सुने
- 2:01:15छात्रों। हरियाणा के इतिहास में
- 2:01:18निम्नलिखित लड़ाईयों पर विचार करें और
- 2:01:21उन्हें सही कालानुक्रमिक क्रम में
- 2:01:23व्यवस्थित करें। एक नारनौल का युद्ध, दो
- 2:01:27पानीपत की तीसरी लड़ाई, तीन करनाल का
- 2:01:31युद्ध।
- 2:01:31परीक्षा हॉल के दबाव में आपका दिमाग कैसे
- 2:01:34काम करना चाहिए? आइए देखते हैं। यहां
- 2:01:37एलिमिनेशन लॉजिक का प्रयोग करें। अभी हमने
- 2:01:40चर्चा की कि करनाल का युद्ध नादिर शाह के
- 2:01:43समय सबसे पहले 1739 में हुआ था। तो सूची
- 2:01:48में नंबर थ्री सबसे पहले आएगा। अब देखिए
- 2:01:51किस विकल्प में शुरुआत तीन से हो रही है।
- 2:01:54उसके बाद मराठों और अब्दाली के बीच पानीपत
- 2:01:57की तीसरी लड़ाई 1761 में हुई। यानी इसके
- 2:02:00बाद नंबर दो आएगा और अंत में 1857 की
- 2:02:04क्रांति का नारनोल युद्ध यानी नंबर एक। तो
- 2:02:07तार्किक रूप से आप सीधे 321 के सही क्रम
- 2:02:10तक पहुंच जाते हैं। बिना सीधा उत्तर रटे।
- 2:02:13शानदार तरीका। अब अगला प्रश्न यूपीएससी
- 2:02:16प्रीलिम्स एमसीक्यू व्यक्तित्व पर्सनालिटी
- 2:02:19से लेते हैं। 1857 की क्रांति के नेताओं
- 2:02:22को उनके संबंधित क्षेत्रों के साथ सुमेलित
- 2:02:24करना है। नेताओं की सूची है एक सदरुद्दीन
- 2:02:28दो इमाम अली कलंदर तीन गफूर अली।
- 2:02:31क्षेत्रों की सूची है आई पानीपत आईआई
- 2:02:35मेवात आईआई पलवल। मिलान वाले सवालों में
- 2:02:38अगर आपको एक या दो तथ्य भी पक्के याद हैं
- 2:02:41तो उत्तर निकल आता है। हमें स्पष्ट रूप से
- 2:02:43याद है कि सदरुद्दीन यानी सदर मेवाती ने
- 2:02:46मेवात में जबरदस्त नेतृत्व किया था तो वन
- 2:02:49का मिलान सीधे आईआई से होगा। इमाम अली
- 2:02:52कलंदर का जुड़ाव पानीपत से था तो टू का
- 2:02:55मिलान आई से होगा।
- 2:02:56अब अगर छात्रों को गफूर अली के बारे में
- 2:02:59नहीं पता है तो बची हुई लोकेशन पलवल यानी
- 2:03:02आई ही उनका क्षेत्र होगा। इस एलिमिनेशन के
- 2:03:05जरिए आप सही कूट का चयन कर सकते हैं।
- 2:03:08एक और बेहतरीन प्रश्न यूपीएससी प्रीलिम्स
- 2:03:10एमसीक्यू प्रशासन एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़ा
- 2:03:13है। जहां यूपीएससी अक्सर शब्दों का जाल
- 2:03:16बुनता है। निम्नलिखित कथनों पर विचार
- 2:03:19करें। एक 1858 में इस क्षेत्र को उत्तर
- 2:03:24पश्चिमी प्रांतों से हटाकर पंजाब में
- 2:03:26स्थानांतरित कर दिया गया था। दो असाइन
- 2:03:30टेरिटरी के अंतर्गत अंग्रेजों का इस
- 2:03:32क्षेत्र पर सीधा नियंत्रण था। तीन जॉर्ज
- 2:03:36थॉमस ने अपनी प्रशासनिक राजधानी करनाल में
- 2:03:39स्थापित की थी। उपरोक्त में से कितने कथन
- 2:03:42सही हैं?
- 2:03:43चलिए स्टेटमेंट्स को ब्रेक करते हैं।
- 2:03:44छात्रों। पहला कथन बिल्कुल सटीक है। 1858
- 2:03:48का पंजाब में विलय एक दंडात्मक उपाय था।
- 2:03:52दूसरा कथन भी सत्य है। असाइन टेरिटरी सीधे
- 2:03:55ब्रिटिश रेजिडेंट के अधीन थी ताकि राजस्व
- 2:03:58सुरक्षित रहे।
- 2:03:59इन तीसरे कथन को ध्यान से पढ़ें। क्या
- 2:04:02जॉर्ज थॉमस जहां साहब की राजधानी करनाल
- 2:04:05थी? नहीं। उसकी टकसाल और फाउंड्री हासी
- 2:04:09में थी। इसलिए तीसरा कथन गलत है। अतः दिए
- 2:04:13गए विकल्पों में से सिर्फ दो कथन सही हैं।
- 2:04:16एज वी टीच एट दिशांत आईएएस कैचिंग दी
- 2:04:19स्मॉल फक्चुअल ट्रैप्स इज द की टू
- 2:04:22क्लियरिंग प्रीलिम्स।
- 2:04:23प्रीलिम्स के बाद आइए मेंस वैल्यू एडिशन
- 2:04:25पर नजर डालते हैं। मुख्य परीक्षा के लिए
- 2:04:28एक बहुत ही संभावित विश्लेषणात्मक प्रश्न
- 2:04:30बन सकता है। 1803 से 1858 तक ब्रिटिश शासन
- 2:04:34के तहत हरियाणा के प्रशासनिक विकास का पता
- 2:04:36लगाएं। 1857 की क्रांति ने इस
- 2:04:39प्रक्षेपवक्र को कैसे प्रभावित किया?
- 2:04:41एक मेंटर के रूप में मैं एस्पिरेंट्स को
- 2:04:43इस उत्तर की सटीक संरचना समझाती हूं।
- 2:04:47इंट्रो में आप सीधे 1803 की सुरजी अंजन
- 2:04:51गांव की संधि से शुरुआत करेंगे जो ब्रिटिश
- 2:04:53नियंत्रण का कानूनी आधार थी। बॉडी में
- 2:04:57आपको प्रशासनिक विकास की क्रमिक सीढ़ियां
- 2:04:59दिखानी है। शुरुआती दोहरी नीति, उसके बाद
- 2:05:021819 का तीन डिवीजनों में स्पष्ट विभाजन
- 2:05:06और फिर 1833 के चार्टर एक्ट के तहत इसे
- 2:05:10उत्तर पश्चिमी प्रांत का हिस्सा बनाना।
- 2:05:12और कंक्लूजन में आपको 1857 के प्रभाव को
- 2:05:15दिखाना है कि कैसे विद्रोह के बाद एक
- 2:05:18दंडात्मक उपाय, प्यूनिटिव मेजर के रूप में
- 2:05:21इसे पंजाब के साथ मिला दिया गया। जिससे
- 2:05:23इसका स्वतंत्र और स्वाभाविक प्रशासनिक
- 2:05:26विकास अवरुद्ध हो गया।
- 2:05:28बहुत ही स्पष्ट और नंबर दिलाने वाली
- 2:05:30संरचना छात्रों डेप डव का हमारा आज का यह
- 2:05:33लेक्चर अपने अंतिम पड़ाव पर है। दिशांत
- 2:05:36आईएस की ओर से आप सभी सीरियस एस्पिरेंट्स
- 2:05:39के लिए एक ही मूल मंत्र है। रिवीजन इज द
- 2:05:42की टू सक्सेस। पुनरावृत्ति ही सफलता की
- 2:05:46कुंजी है। आज हमने जो भी ऐतिहासिक कड़ियां
- 2:05:48जोड़ी हैं, उन्हें बार-बार दोहराएं।
- 2:05:50यूपीएससी की इस यात्रा में कई बार ऐसा
- 2:05:53लगेगा कि सिलेबस का पहाड़ बहुत बड़ा है।
- 2:05:55लेकिन आपको रुकना नहीं है। कीप फाइटिंग
- 2:05:58फॉर योर ड्रीम। अपने लक्ष्य के प्रति पूरी
- 2:06:00ईमानदारी और दृढ़ निश्चय के साथ डटे रहें।
- 2:06:03जाने से पहले एक त्वरित 30 सेकंड का
- 2:06:05रिककैप हमने 18वीं सदी के उस राजनैतिक
- 2:06:09शून्य को देखा जिसमें मराठों और जाट शक्ति
- 2:06:12ने आकार लिया। जॉर्ज थॉमस जैसे आरिश नाविक
- 2:06:16को हासी का शासक बनते देखा। ब्रिटिश
- 2:06:18प्रशासन के दोहरी नीतियों को डिकोड किया
- 2:06:21और अंततः 1857 की उस महान क्रांति के
- 2:06:25नायकों के बलिदान को नमन किया जिसके
- 2:06:28परिणाम स्वरूप 1858 में हरियाणा का
- 2:06:31प्रशासनिक भूगोल पूरी तरह बदल दिया गया।
- 2:06:34दिस लेक्चर वाज़ बाय दिशांत आईएएस। हरियाणा
- 2:06:37के राष्ट्रीय आंदोलन और राज्य निर्माण का
- 2:06:40जो ये पूरा विषय है।
- 2:06:41हां। यह केवल कुछ तारीखों या मतलब
- 2:06:44ऐतिहासिक घटनाओं को रटने का विषय नहीं है।
- 2:06:47बिल्कुल नहीं।
- 2:06:47ये एक बहुत ही गंभीर और बहुआयामी विषय है।
- 2:06:50हां।
- 2:06:51अगर हम यूपीएससी या एचपीएससी जैसी उच्च
- 2:06:54स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं को देखें
- 2:06:56तो आज के इस गहन विश्लेषण में हम उस
- 2:06:59ऐतिहासिक सफर की परतों को खोलेंगे जो 1857
- 2:07:03की क्रांति के बाद शुरू होता है और 1966
- 2:07:06में एक स्वतंत्र राज्य के उदय तक जाता है।
- 2:07:09सही कहा आपने। देखिए उम्मीदवारों के लिए
- 2:07:11यह समझना बहुत जरूरी है कि मुख्य परीक्षा
- 2:07:14हो या प्रारंभिक परीक्षा
- 2:07:16इस खंड से सीधे विश्लेषणात्मक प्रश्न बनते
- 2:07:18हैं।
- 2:07:19बिल्कुल
- 2:07:19यह महज इतिहास का पन्ना नहीं है। यह एक
- 2:07:22पूरी सांस्कृतिक और राजनीतिक अस्मिता के
- 2:07:25निर्माण की गाथा है।
- 2:07:26एग्जैक्टली और इस विषय की जो गंभीरता है
- 2:07:29ना
- 2:07:30वो इसी बात में निहित है कि यह सिर्फ एक
- 2:07:33राज्य का इतिहास नहीं है। मतलब अगर आप इसे
- 2:07:36व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो ये पूरे
- 2:07:38भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक
- 2:07:40माइक्रोकाज्म है। एक सूक्ष्म रूप है।
- 2:07:43आज के इस विश्लेषण में हम सिर्फ सतही
- 2:07:46तथ्यों पर बात नहीं करेंगे। हम उन
- 2:07:49ऐतिहासिक साक्ष्यों, उन गहरे प्रशासनिक
- 2:07:52बदलावों का बारीकी से अध्ययन करेंगे
- 2:07:55जिन्होंने आधुनिक हरियाणा की नींव रखी।
- 2:07:58क्योंकि देखिए जब तक घटनाओं के पीछे के
- 2:08:01क्यू को उस कार्य कारण संबंध को डिकोड
- 2:08:04नहीं किया जाएगा मुख्य परीक्षा के उत्तरों
- 2:08:07में वो गहराई नहीं आ सकती जिसकी आयोग सीधे
- 2:08:10तौर पर अपेक्षा करता है।
- 2:08:12बिल्कुल तो इसी विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
- 2:08:15के साथ हरियाणा में कांग्रेस के उदय के
- 2:08:17कालक्रम का परीक्षण करते हैं। 1885 से
- 2:08:211905 के बीच का जो यह प्रारंभिक चरण है,
- 2:08:24यह बहुत क्रूशियल है।
- 2:08:25जी। कांग्रेस के शुरुआती विस्तार को अगर
- 2:08:27हम एक भौगोलिक प्रतिरूप के रूप में देखें
- 2:08:30तो यह बहुत ही सुविचारित था। सबसे पहले
- 2:08:321886 में अंबाना में इसकी शाखा स्थापित
- 2:08:35हुई। अब अंबाला ही क्यों? क्योंकि वो एक
- 2:08:37प्रमुख छावनी क्षेत्र था। संचार के साधन
- 2:08:40थे तो राजनीतिक चेतना का वहां पहले
- 2:08:42पहुंचना बहुत स्वाभाविक था।
- 2:08:44बिल्कुल स्वाभाविक था।
- 2:08:45और फिर इसके ठीक अगले वर्ष 1887 में हिसार
- 2:08:50में इसका विस्तार हुआ। और फिर 1888 में
- 2:08:54रोहतक में कांग्रेस ने वहां अपनी
- 2:08:56संगठनात्मक पकड़ मजबूत की। यह जो क्रमिक
- 2:08:59विस्तार है ना यह साफ दिखाता है कि
- 2:09:02राष्ट्रवाद की लहर किस तरह उत्तर पश्चिम
- 2:09:05की ओर गहरी जड़े जमा रही थी।
- 2:09:07सही कहा। और इस भौगोलिक विस्तार के पीछे
- 2:09:10का जो नेतृत्व है, जो मुख्य तथ्य हैं,
- 2:09:13उन्हें समझना बहुत जरूरी है। यहां एक नाम
- 2:09:16बहुत प्रमुखता से आता है बाबू मुरलीधर का।
- 2:09:20हम जिन्हें पंजाब के ग्रैंड ओल्ड मैन कहा
- 2:09:23जाता है।
- 2:09:24बिल्कुल बाबू मुरलीधर का योगदान सच में
- 2:09:27ऐतिहासिक है। जब 1885 में बॉम्बे में
- 2:09:31भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला
- 2:09:32ऐतिहासिक अधिवेशन हुआ था तो पूरे भारत से
- 2:09:3672 संस्थापक प्रतिनिधि वहां पहुंचे थे। और
- 2:09:39बाबू मुरलीधर उन 72 प्रतिनिधियों में से
- 2:09:42एक थे। क्या बात है
- 2:09:44इसका मतलब इसका ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व
- 2:09:47यह है कि हरियाणा क्षेत्र की राजनीतिक
- 2:09:50चेतना कांग्रेस के पहले ही दिन से
- 2:09:52राष्ट्रीय पटल पर मौजूद थी। बिल्कुल।
- 2:09:55मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से यह तथ्य इस
- 2:09:58क्षेत्र की प्रारंभिक राजनीतिक परिपक्वता
- 2:10:00को बहुत मजबूती से सिद्ध करता है।
- 2:10:03बिल्कुल सिद्ध करता है। और इतिहास के इन
- 2:10:05पन्नों की गहराई और उम्मीदवारों के लंबे
- 2:10:07संघर्ष को देखते हुए मुझे एक बात याद आ
- 2:10:09रही है। तारीखों के इस समंदर में जो गोते
- 2:10:12लगाते हैं वही इतिहास के पन्नों में अपनी
- 2:10:14जगह बनाते हैं। यूपीएससी की तपन भी उसी को
- 2:10:17निखारती है जो संघर्षों की आग में तप कर
- 2:10:19आते हैं।
- 2:10:20बहुत खूब। तो कांग्रेस की इसी प्रारंभिक
- 2:10:23नीम ने दरअसल उस उग्रवादी चरण के लिए जमीन
- 2:10:26तैयार की जिसे हम स्वदेशी और होम रूल
- 2:10:28आंदोलन के रूप में देखते हैं। 1905 के
- 2:10:31स्वदेशी आंदोलन में भी अगर देखें तो बाबू
- 2:10:34मुरलीधर ने स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार
- 2:10:36प्रसार और विदेशी कपड़ों की होली जलाने
- 2:10:38में एक बहुत ही केंद्रीय भूमिका निभाई थी।
- 2:10:40जी
- 2:10:40और इसके बाद जब होमरूल लीग का चरण आता है
- 2:10:43तो रोहतक और हिसार के क्षेत्रों में पंडित
- 2:10:46नेकीराम शर्मा ने इसका अत्यंत सफलतापूर्वक
- 2:10:48नेतृत्व किया। अब यहां मैं एक मिनट रुकना
- 2:10:51चाहूंगी। यहां सभी गंभीर उम्मीदवारों के
- 2:10:54लिए एक बहुत बड़ा एग्जाम ट्रैप है। एक
- 2:10:57बहुत बड़ी भ्रांति है जिसे स्पष्ट करना
- 2:11:00बहुत आवश्यक है।
- 2:11:01जी बताइए।
- 2:11:01प्रारंभिक परीक्षा में परीक्षक अक्सर ऐसे
- 2:11:04कथन सेट करते हैं जो यह दावा करते हैं कि
- 2:11:08हरियाणा में होमरूल आंदोलन निष्क्रिय था
- 2:11:11या उसका कोई खास प्रभाव नहीं था। हम यह
- 2:11:14बहुत आम गलतफहमी है।
- 2:11:16एग्जैक्टली और उम्मीदवारों को इससे बचना
- 2:11:18चाहिए। तथ्य यह है कि यह आंदोलन यहां पूरी
- 2:11:22तरह से सक्रिय था और बहुत जन उन्मुख था।
- 2:11:25पंडित नेकीराम शर्मा जो सीधे तौर पर
- 2:11:28लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के संपर्क में
- 2:11:31थे। वह इस क्षेत्र में एक व्यापक जन
- 2:11:33जागरूकता अभियान चला रहे थे। मतलब तिलक के
- 2:11:37उग्र और दृढ़ राष्ट्रवाद का जो सीधा
- 2:11:39प्रभाव है वो हरियाणा के होमरूल आंदोलन
- 2:11:42में आप स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।
- 2:11:44बिल्कुल स्पष्ट दिखता है और इसी राजनीतिक
- 2:11:48चेतना का जो अगला स्वाभाविक चरण है वो
- 2:11:51गांधीवादी युग में प्रवेश करता है।
- 2:11:53विशेषकर जो रेलेट एक्ट और पहली राजनीतिक
- 2:11:56गिरफ्तारी का जो पूरा घटनाक्रम है। जी
- 2:11:59इस पूरे घटनाक्रम को अगर हम एक क्रमिक
- 2:12:01फ्लो चार्ट के रूप में दिमाग में बैठाएं
- 2:12:03तो इतिहास की कड़ियां अपने आप जुड़ने लगती
- 2:12:06हैं। सबसे पहले केंद्र में ब्रिटिश सरकार
- 2:12:09रेलेट एक्ट पारित करती है जिसे बिना वकील,
- 2:12:12बिना अपील, बिना दलील का काला कानून कहा
- 2:12:15गया।
- 2:12:16हम्म। इसके विरोध में पूरे देश में लहर
- 2:12:18उठती है और इसी घटनाचक्र के बीच गांधी जी
- 2:12:21का हरियाणा में प्रवेश होता है और फिर 10
- 2:12:24अप्रैल को पलवल रेलवे स्टेशन पर उनकी
- 2:12:26ऐतिहासिक गिरफ्तारी होती है। इस गिरफ्तारी
- 2:12:29की खबर मतलब आग की तरह फैलती है और पूरे
- 2:12:32क्षेत्र में भयंकर विरोध प्रदर्शन भड़क
- 2:12:35उठते हैं।
- 2:12:35अब यहां इतिहास खंड का एक बहुत बड़ा
- 2:12:38प्रीलिम्स अलर्ट है। सीरियस एस्पिरेंट्स
- 2:12:41इस तथ्य को तुरंत मार्क करें। पलवल की यह
- 2:12:44घटना कोई साधारण गिरफ्तारी नहीं थी। भारत
- 2:12:47के भीतर महात्मा गांधी की पहली राजनीतिक
- 2:12:50गिरफ्तारी 10 अप्रैल 1919 को हरियाणा के
- 2:12:54पलवल रेलवे स्टेशन पर ही हुई थी।
- 2:12:56यह एक टर्निंग पॉइंट था।
- 2:12:58बिल्कुल। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास
- 2:13:00में यह एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट है।
- 2:13:03क्योंकि इसी घटना के बाद गांधी जी ने
- 2:13:05राष्ट्रीय स्तर पर जन आंदोलनों की एक नई
- 2:13:09और अधिक आक्रामक रूपरेखा तैयार की थी।
- 2:13:12परीक्षा में अक्सर स्थान, पलवल और तिथि को
- 2:13:15लेकर भ्रमित करने वाले विकल्प आते हैं।
- 2:13:18इसलिए यहां स्पष्टता अनिवार्य है।
- 2:13:20सही कहा। जन आंदोलनों की इसी रूपरेखा का
- 2:13:23जो अगला बड़ा स्वरूप था वो 1920 का असहयोग
- 2:13:26और खिलाफत आंदोलन था। अक्टूबर 1920 में
- 2:13:30पानीपत में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और
- 2:13:32रणनीतिक सम्मेलन आयोजित किया गया था।
- 2:13:34जिसका नेतृत्व स्वयं लाला लाजपत राय ने
- 2:13:37किया था।
- 2:13:37जी। यह वो दौर था जब समाज का हर वर्ग चाहे
- 2:13:40वह किसान हो, मजदूर हो या व्यापारी सब
- 2:13:43ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ लामबंद हो रहे थे।
- 2:13:45और इसी दौरान भिवानी और रोहतक के दौरों पर
- 2:13:47गांधी जी ने स्पष्ट शब्दों में ब्रिटिश
- 2:13:50सरकार को शैतानी सरकार की संज्ञा दी थी।
- 2:13:52यह शब्द शैतानी सरकार उस समय के जन आक्रोश
- 2:13:55को बहुत गहराई से दर्शाता है।
- 2:13:57इस बिंदु पर मुख्य परीक्षा के लिए एक मेंस
- 2:14:00वैल्यू एडिशन करना मैं अत्यंत आवश्यक
- 2:14:03समझती हूं। बिल्कुल मेंस के नजरिए से बहुत
- 2:14:05अहम है।
- 2:14:06देखिए अगर मुख्य परीक्षा में समाज धर्म और
- 2:14:09राष्ट्रवाद के अंतर संबंध पर कोई
- 2:14:11विश्लेषणात्मक प्रश्न आता है तो
- 2:14:13उम्मीदवारों को यह स्पष्ट रूप से लिखना
- 2:14:16चाहिए कि खिलाफत और असहयोग आंदोलन के
- 2:14:19दौरान हरियाणा में हिंदू मुस्लिम एकता
- 2:14:21अपने चरम पर थी। दोनों ही समुदायों ने
- 2:14:24अपने धार्मिक मतभेदों को दरकिनार किया और
- 2:14:27एक साथ इस शैतानी सरकार का विरोध किया।
- 2:14:30दिशांत आईएस में राहुल प्रकाश सर और उनकी
- 2:14:33टीम के मार्गदर्शन में हम हमेशा इस बात पर
- 2:14:36जोर देते हैं कि इतिहास को केवल अलग-अलग
- 2:14:39तिथियों के रूप में ना पढ़ा जाए। हम
- 2:14:41कनेक्ट करना जरूरी है।
- 2:14:42बिल्कुल उन सामाजिक ताने-बाने और
- 2:14:45सांप्रदायिक सौहार्द को समझा जाए जो उस
- 2:14:47समय बुने जा रहे थे क्योंकि यही वो समझ है
- 2:14:50जो एक औसत उत्तर को एक उत्कृष्ट उत्तर में
- 2:14:53बदलती है।
- 2:14:54यह बिल्कुल सटीक विश्लेषण है और यही
- 2:14:56सामाजिक तानाबाला और यही एकजुटता हमें
- 2:14:591930 के सविनय अवज्ञा और नमक सत्याग्रह
- 2:15:02में भी पूरी ताकत के साथ दिखाई देती है।
- 2:15:04जी
- 2:15:04जब दांडी के तट पर नमक कानून तोड़ा गया तो
- 2:15:07उसकी गूंज केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित
- 2:15:09नहीं रही। उसकी गूंज हरियाणा के मैदानी
- 2:15:12इलाकों में भी स्पष्ट रूप से सुनाई दी।
- 2:15:14रेवाड़ी, रोहताक और हिसार जैसे जो प्रमुख
- 2:15:16प्रशासनिक केंद्र थे, वहां प्रतीकात्मक
- 2:15:19रूप से नमक कानून का उल्लंघन किया गया। अब
- 2:15:21देखिए यह सिर्फ एक मुट्ठी नमक बनाने की
- 2:15:23बात नहीं थी।
- 2:15:24नहीं बिल्कुल नहीं।
- 2:15:25यह ब्रिटिश साम्राज्य की संप्रभुता को दी
- 2:15:28गई एक सीधी और खुली चुनौती थी। और सविनय
- 2:15:31अवज्ञा के इस व्यापक जन आंदोलन के बाद
- 2:15:34राष्ट्रवाद का एक अधिक अनुशासित स्वरूप
- 2:15:36सामने आता है। 1940 के व्यक्तिगत
- 2:15:39सत्याग्रह में।
- 2:15:40यहां रैंकर्स को विशेष रूप से फोकस करना
- 2:15:43चाहिए। पंडित नेकीराम शर्मा हरियाणा
- 2:15:46क्षेत्र से पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही बने
- 2:15:49थे। जो उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता को
- 2:15:52दिखाता है। इसके अलावा इस आंदोलन की सबसे
- 2:15:56सशक्त बात यह थी कि इसमें महिलाओं की
- 2:15:59भागीदारी अत्यधिक महत्वपूर्ण थी।
- 2:16:01महिलाओं का बाहर आना एक बड़ा बदलाव था।
- 2:16:03बिल्कुल। विशेष रूप से सिरसा की चांदबाई
- 2:16:07का नाम ऐतिहासिक दस्तावेजों में प्रमुखता
- 2:16:10से दर्ज है। महिलाओं का घर की चार दीवारी
- 2:16:13से निकलकर रूढ़ियों को तोड़ते हुए
- 2:16:15सत्याग्रह में शामिल होना यह केवल एक
- 2:16:17राजनीतिक घटना नहीं थी। यह गहरे सामाजिक
- 2:16:20बदलाव का प्रतीक था।
- 2:16:22इतने लंबे और अथक संघर्ष को देखकर तो यही
- 2:16:25लगता है कि प्रीलिम्स का सिलेबस हो या
- 2:16:27सत्याग्रह की राह खत्म होने का नाम ही
- 2:16:29नहीं लेती। पर जो टिका रहे इस रण में
- 2:16:32सफलता उसी के कदम में चूमती।
- 2:16:34बहुत सही कहा आपने। निरंतरता ही कुंजी है।
- 2:16:37खैर, इस राष्ट्रीय परिदृश्य के साथ-साथ जो
- 2:16:40एक क्षेत्रीय राजनीति है उसे समझना भी
- 2:16:42उतना ही आवश्यक है। अब हम एक 360°
- 2:16:44विश्लेषण की ओर रुख करते हैं जो 1923 की
- 2:16:47यूनियनिस्ट पार्टी से जुड़ा है।
- 2:16:49जी, यह बहुत महत्वपूर्ण टॉपिक है।
- 2:16:51इसकी मूल अवधारणा को समझना आवश्यक है। यह
- 2:16:54मुख्य रूप से किसानों, काश्तकारों और
- 2:16:56जमींदारों के आर्थिक हितों की रक्षा करने
- 2:16:58वाली पार्टी थी। इसकी सहस्थापना सर
- 2:17:00छोटूराम और फजले हुसैन ने मिलकर की थी।
- 2:17:03क्योंकि हरियाणा एक घोर कृषि प्रधान
- 2:17:04क्षेत्र था, इसलिए इस पार्टी का यहां की
- 2:17:07ग्रामीण राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा।
- 2:17:09यहां पर एक और यूपीएससी ट्रैप का अलार्म
- 2:17:12बजाना बहुत जरूरी है।
- 2:17:13हां, यहां अक्सर गलती होती है।
- 2:17:15बिल्कुल। प्रारंभिक परीक्षा में परीक्षक
- 2:17:17अक्सर यह भ्रम पैदा करने की कोशिश करते
- 2:17:20हैं कि फजलेल हुसैन के नाम के कारण
- 2:17:22यूनियनिस्ट पार्टी मुस्लिम लीग की तरह कोई
- 2:17:24धार्मिक या सांप्रदायिक पार्टी थी।
- 2:17:26उम्मीदवारों को पूरी तरह सचेत रहना चाहिए।
- 2:17:29यह पूरी तरह से एक धर्मनिरपेक्ष और वर्ग
- 2:17:32आधारित इकाई थी।
- 2:17:34इसका फोकस आर्थिक था।
- 2:17:35जी। इसका फोकस पूरी तरह से किसानों के
- 2:17:39आर्थिक हितों की रक्षा, कर्ज माफी और कृषि
- 2:17:42सुधारों पर था। इसके मंच पर हिंदू,
- 2:17:45मुस्लिम और सिख सभी समुदायों के जमींदार
- 2:17:48और किसान एक साथ खड़े थे। आर्थिक हितों ने
- 2:17:52यहां धार्मिक पहचान को पीछे छोड़ दिया था।
- 2:17:55क्षेत्रीय राजनीति से आगे बढ़कर जब
- 2:17:58राष्ट्रवाद का एक और उग्र और सैन्य रूप
- 2:18:01सामने आता है तो हमें आजाद हिंद फौज यानी
- 2:18:04आईएनए और प्रजामंडल आंदोलन को देखना होता
- 2:18:08है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आईएनए
- 2:18:11में हरियाणवी सैनिकों का बलिदान अभूतपूर्व
- 2:18:14रहा है।
- 2:18:14बिल्कुल। मेजर सूरजमल जैसे शूरवीरों ने
- 2:18:17आईएनए की अग्रिम पंक्तियों में प्रमुख
- 2:18:20भूमिका निभाई और इसके समानांतर ही एक और
- 2:18:23संघर्ष चल रहा था रियासतों के भीतर।
- 2:18:25ब्रिटिश भारत के बाहर जो देसी रियासतें
- 2:18:28थी, वहां लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए
- 2:18:30प्रजामंडल आंदोलन तेजी से जोर पकड़ रहा
- 2:18:33था। अब प्रजामंडल संघर्ष के इस फ्लो चार्ट
- 2:18:36को डिकोड करना परीक्षा के दृष्टिकोण से
- 2:18:39बहुत जरूरी है।
- 2:18:40उम्मीदवारों को यह समझना होगा कि यह
- 2:18:43आंदोलन सीधे ब्रिटिश शासन के खिलाफ नहीं
- 2:18:46था। बल्कि यह उन देश रियासतों में था जहां
- 2:18:50राजाओं या नवाबों का निरंकुश राज था। इस
- 2:18:54फ्लो चार्ट के क्रम में सबसे पहले लोहारू
- 2:18:56रियासत का नाम आता है। जहां नवाब
- 2:18:59अमीनुद्दीन के अत्याचारी शासन के खिलाफ
- 2:19:02जनता ने कड़ा संघर्ष किया।
- 2:19:04उसके बाद पटौदी
- 2:19:05जी। फिर पटौदी रियासत का नंबर आता है।
- 2:19:08जहां नवाब इफ्तिकार अली का शासन था और
- 2:19:11उसके बाद जींद रियासत जहां राजा रणबीर
- 2:19:14सिंह के खिलाफ जनता ने अपने बुनियादी और
- 2:19:17लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर
- 2:19:19मोर्चा खोला। रियासतों का यह क्रम और उनके
- 2:19:23तत्कालीन शासकों के नाम मैच द फॉलोइंग
- 2:19:26वाले प्रश्नों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण
- 2:19:28हैं।
- 2:19:28अब इस पूरे इतिहास के उस प्रशासनिक मोड़
- 2:19:30की बात करते हैं जिसे इतिहासकार अक्सर
- 2:19:331857 की सजा कहते हैं। 1857 के प्रथम
- 2:19:37स्वतंत्र संग्राम में हरियाणा के लोगों ने
- 2:19:40बहुत बढ़-चढ़कर और आक्रामक रूप से भाग
- 2:19:42लिया था।
- 2:19:43बिल्कुल। इसकी मूल अवधारणा यह है कि
- 2:19:45अंग्रेजों ने इस विद्रोह के निर्दयतापूर्ण
- 2:19:48दमन के बाद एक रणनीतिक सजा के तौर पर
- 2:19:51हरियाणा क्षेत्र की प्रशासनिक पहचान ही
- 2:19:54बदल दी। इसे उत्तर पश्चिमी प्रांत जिसे तब
- 2:19:57आगरा प्रेसिडेंसी कहा जाता था। वहां से
- 2:20:00अलग कर दिया गया और फरवरी 1858 में इसे
- 2:20:03पंजाब प्रांत में मिला दिया गया। यह महज
- 2:20:06एक भौगोलिक बदलाव नहीं था। यह एक बहुत
- 2:20:08बड़ा सांस्कृतिक विच्छेद था। इस प्रशासनिक
- 2:20:11विकास के पूरे फ्लो चार्ट का
- 2:20:13विश्लेषणात्मक विवरण समझना अत्यंत आवश्यक
- 2:20:16है क्योंकि असल में यहीं से राज्य निर्माण
- 2:20:19की कहानी शुरू होती है।
- 2:20:21जी
- 2:20:21देखिए 1803 में जब सुरजी अंजन गांव की
- 2:20:25ऐतिहासिक संधि हुई थी तब यह क्षेत्र मराठा
- 2:20:28शासन के नियंत्रण से निकलकर ब्रिटिश ईस्ट
- 2:20:31इंडिया कंपनी के अधीन आया था। शुरुआत में
- 2:20:33इसे बंगाल प्रेसिडेंसी का हिस्सा बनाया
- 2:20:36गया। उसके कुछ समय बाद प्रशासनिक सुविधा
- 2:20:39के लिए इसे उत्तर पश्चिमी प्रांत यानी
- 2:20:42आगरा प्रेसिडेंसी में डाल दिया गया।
- 2:20:44हम
- 2:20:44और अंततः 1858
- 2:20:47में उस विद्रोही भावना को हमेशा के लिए
- 2:20:51कुचलने और बाटो और राज करो की नीति के तहत
- 2:20:55इसे पंजाब के साथ जोड़ दिया गया। दिशांत
- 2:20:58आईएएस में जैसा हम पढ़ाते हैं। इस तरह के
- 2:21:01ऐतिहासिक बदलावों के पीछे की प्रशासनिक
- 2:21:04मंशा को समझना परीक्षा के लिए बहुत जरूरी
- 2:21:07है। अंग्रेजों का सीधा सा उद्देश्य पंजाब
- 2:21:10की वफादार रियासतों के प्रभाव से हरियाणा
- 2:21:14की विद्रोही चेतना को दबाना था।
- 2:21:16और इसी बेमेल प्रशासनिक विलय का परिणाम था
- 2:21:19कि भाषाई और सांस्कृतिक भिन्नताओं के कारण
- 2:21:21जल्द ही पृथक्करण की मांग उठने लगी। अलग
- 2:21:24राज्य की इन मांगों का जो कालक्रम है वह
- 2:21:26मुख्य रूप से 1925 से 1948 के बीच आकार
- 2:21:30लेता है।
- 2:21:30जी
- 2:21:31सबसे पहली आधिकारिक मांग 1925 में मुस्लिम
- 2:21:34लीग के दिल्ली अधिवेशन में पीरजादा
- 2:21:36मोहम्मद हुसैन द्वारा उठाई गई थी। उनका
- 2:21:39तर्क स्पष्ट था कि इस क्षेत्र का पंजाब से
- 2:21:41कोई प्राकृतिक मेल नहीं है। उसके बाद 1932
- 2:21:44में प्रमुख राष्ट्रवादी नेता देशबंधु
- 2:21:47गुप्ता ने भी पूरे तथ्यों के साथ हरियाणा
- 2:21:49को पंजाब से अलग करने की पुरजोर मांग रखी।
- 2:21:52लेकिन 1948 में आजादी के ठीक बाद यह मांग
- 2:21:55एक बिल्कुल नए राजनीतिक मोड़ पर आ गई जब
- 2:21:58मास्टर तारा सिंह ने पंजाबी सूबा की मांग
- 2:22:01कर दी।
- 2:22:02यह एक बहुत बड़ा शिफ्ट था।
- 2:22:03बिल्कुल। इसका राजनीतिक और रणनीतिक अर्थ
- 2:22:06यह था कि अब मांग केवल हरियाणा को अलग
- 2:22:09करने की नहीं थी बल्कि पंजाबी भाषी लोगों
- 2:22:12के लिए एक अलग सूबे की मांग जोर पकड़ रही
- 2:22:15थी। इसी मांग ने भविष्य में भाषा के आधार
- 2:22:18पर पंजाब के विभाजन और हरियाणा के एक अलग
- 2:22:21राज्य के रूप में उदय की ठोस रूपरेखा
- 2:22:24तैयार कर दी। यह एक ऐसा बिंदु था जहां से
- 2:22:27विभाजन अपरिहार्य हो गया था।
- 2:22:30भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं के लगातार
- 2:22:32बदलते और उलझते स्वरूप को देखकर यह व्यंग
- 2:22:35बिल्कुल सटीक बैठता है। रियासतों के
- 2:22:38बंटवारे से उलझा है यह यूपीएससी का ज्ञान।
- 2:22:41जितना समेटने की कोशिश हो उतना ही विस्तृत
- 2:22:44होता है यह इम्तिहान।
- 2:22:45सच में इसका कोई अंत नहीं है।
- 2:22:47बहरहाल आजाद भारत में इस बढ़ते भाषाई
- 2:22:49विवाद को सुलझाने के लिए 1 अक्टूबर 1949
- 2:22:53को सच्चर फार्मूला लाया गया। इस फार्मूले
- 2:22:55के तंत्र का मुख्य उद्देश्य तत्कालीन
- 2:22:58पंजाब प्रांत को भाषा के आधार पर दो
- 2:23:00स्पष्ट और अलग क्षेत्रों में विभाजित करना
- 2:23:03था। ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से
- 2:23:05चल सके।
- 2:23:06यहां एक बहुत स्पष्ट एग्जाम अलर्ट है।
- 2:23:08उम्मीदवारों को ध्यान देना चाहिए। जी
- 2:23:10उम्मीदवारों को इन दोनों क्षेत्रों की
- 2:23:12लिपि और भौगोलिक जानकारी होनी ही चाहिए।
- 2:23:15पहला था हिंदी क्षेत्र जिसकी आधिकारिक
- 2:23:18लिपि देवनागरी तय की गई। इस क्षेत्र में
- 2:23:21रोहतक, हिसार, गुड़गांव और करनाल जैसे
- 2:23:24हिंदी भाषी जिले शामिल थे।
- 2:23:26और दूसरा
- 2:23:27दूसरा था पंजाबी क्षेत्र जिसकी लिपि
- 2:23:30गुर्मुखी तय की गई। लेकिन विश्लेषण का
- 2:23:33मुख्य बिंदु यह जानना है कि यह फार्मूला
- 2:23:35बुरी तरह विफल क्यों हो गया। इसका मुख्य
- 2:23:38कारण जनता की तीव्र अस्वीकृति थी। दोनों
- 2:23:42ही क्षेत्रों के लोग इस थोपे गए भाषाई
- 2:23:44विभाजन और अनिवार्य भाषा की नीति से
- 2:23:47असंतुष्ट थे। हिंदी भाषी क्षेत्र के लोग
- 2:23:50पंजाबी को अनिवार्य रूप से पढ़ने को
- 2:23:52बिल्कुल तैयार नहीं थे।
- 2:23:54सचिव फार्मूले की इस स्पष्ट विफलता के बाद
- 2:23:571953 में राष्ट्रीय स्तर पर राज्य
- 2:24:00पुनर्गठन आयोग यानी फजल अली आयोग का गठन
- 2:24:03हुआ। हम
- 2:24:04हरियाणा के लोगों को इससे बहुत उम्मीदें
- 2:24:06थी। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस आयोग ने
- 2:24:09अलग हरियाणा राज्य की मांग को सिरे से
- 2:24:11खारिज कर दिया।
- 2:24:12हम
- 2:24:13उनका तर्क था कि इससे सीमावर्ती राज्य
- 2:24:16पंजाब की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर असर
- 2:24:19पड़ेगा।
- 2:24:19हम
- 2:24:20इसके बाद भाषाई तनाव को किसी तरह कम करने
- 2:24:22के लिए 1956 में क्षेत्रीय फार्मूला पेश
- 2:24:26किया गया।
- 2:24:26हम
- 2:24:27इसके तहत सातवें संविधान संशोधन के माध्यम
- 2:24:30से क्षेत्रीय समितियों का निर्माण किया
- 2:24:32गया। हम
- 2:24:33ताकि दोनों भाषाई समूहों को एक ही राज्य
- 2:24:35के भीतर कुछ प्रशासनिक स्वायता मिल सके।
- 2:24:39यहां इतिहास और राज्य व्यवस्था का एक बहुत
- 2:24:41ही महत्वपूर्ण यूपीएससी ट्रैप छिपा है। कई
- 2:24:45बार जल्दबाजी में उम्मीदवार यह मान लेते
- 2:24:47हैं कि राज्य पुनर्गठन आयोग यानी फजल अली
- 2:24:50आयोग की सिफारिश पर ही हरियाणा बना था।
- 2:24:53जो कि गलत है।
- 2:24:54बिल्कुल गलत और भ्रामक तथ्य है यह।
- 2:24:57रैंकर्स को यह बारीक अंतर हमेशा याद रखना
- 2:24:59चाहिए कि फजल अली आयोग ने वास्तव में
- 2:25:02पंजाब के विभाजन से साफ इंकार कर दिया था
- 2:25:05और हरियाणा के निर्माण का विरोध किया था।
- 2:25:081956 का क्षेत्रीय फार्मूला केवल एक काम
- 2:25:12चलाऊ समझौता था। कोई स्थाई समाधान नहीं और
- 2:25:15इसी वजह से यह भी जल्द ही अपना प्रभाव खो
- 2:25:18बैठा।
- 2:25:18और यही कारण था कि यह क्षेत्रीय फार्मूला
- 2:25:20लंबे समय तक टिक नहीं सका और आंदोलन उग्र
- 2:25:22हो गया। अब राज्य निर्माण के अंतिम चरण के
- 2:25:25फ्लो चार्ट को समझना बहुत आसान हो जाता
- 2:25:27है। जब 1960 के दशक में पंजाबी सूबा
- 2:25:30आंदोलन अपने चरम पर पहुंचा तो केंद्र
- 2:25:32सरकार दबाव में आई। 1965 में सरदार हुकुम
- 2:25:36सिंह संसदीय समिति का गठन किया गया।
- 2:25:38जी।
- 2:25:38इसी समिति की सिफारिश पर अप्रैल 1966 में
- 2:25:42एक सीमा आयोग यानी शाह आयोग बना। और इसी
- 2:25:45शाह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय
- 2:25:48संसद में पंजाब पुनर्गठन अधिनियम लाया गया
- 2:25:51और अंततः एक लंबे और जटिल संघर्ष के बाद 1
- 2:25:54नवंबर 1966 को स्वतंत्र हरियाणा राज्य का
- 2:25:58गठन हुआ।
- 2:25:58इस पूरी प्रक्रिया में शाह आयोग की भूमिका
- 2:26:02सबसे अहम और निर्णायक है। प्रारंभिक
- 2:26:06परीक्षा में इसके सदस्यों के नाम सीधे तौर
- 2:26:09पर पूछे जाते हैं।
- 2:26:10जी।
- 2:26:11इस तीन सदस्यय सीमा आयोग के अध्यक्ष थे
- 2:26:14सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेसी शाह और उनके
- 2:26:18साथ दो अन्य वरिष्ठ सदस्य थे श्री एस दत्त
- 2:26:22और श्री एमएम फिलिप। इस आयोग का जटिल काम
- 2:26:25यह तय करना था कि कौन सा हिंदी भाषी
- 2:26:28क्षेत्र नए राज्य हरियाणा में जाएगा और
- 2:26:31कौन सा पंजाबी भाषी क्षेत्र पंजाब में
- 2:26:34रहेगा और वह भी बिना किसी बड़े जन असंतोष
- 2:26:37के। इस 360 डिग्री विश्लेषण के अंतिम चरण
- 2:26:40में पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के कुछ
- 2:26:44प्रमुख प्रारंभिक तथ्यों को देखते हैं। यह
- 2:26:47केवल एक कानूनी दस्तावेज की सूची नहीं है
- 2:26:50बल्कि एक ऐतिहासिक विजय का प्रतीक है।
- 2:26:53भारतीय संसद द्वारा 18 सितंबर 1966 को यह
- 2:26:56अधिनियम पारित किया गया। जिसने राज्य के
- 2:26:59भौगोलिक और राजनीतिक स्वरूप को कानूनी
- 2:27:01मान्यता दी और इसी मजबूत कानूनी आधार पर 1
- 2:27:05नवंबर 1966 को हरियाणा की स्थापना हुई
- 2:27:08और इसके संवैधानिक दर्जे का महत्व भी कम
- 2:27:11नहीं है। हरियाणा 18वें संविधान संशोधन के
- 2:27:15माध्यम से भारतीय संघ के 17वें राज्य के
- 2:27:18रूप में अस्तित्व में आया। राहुल प्रकाश
- 2:27:21सर और उनकी टीम के दिशा निर्देशों के
- 2:27:23अनुसार जब हम राज्य व्यवस्था पढ़ाते हैं
- 2:27:26तो यह हमेशा बताते हैं कि ऐसे संवैधानिक
- 2:27:29संशोधन परीक्षा के रडार पर हमेशा रहते
- 2:27:32हैं।
- 2:27:32बिल्कुल रहते हैं।
- 2:27:33राज्य का क्रमांक और संशोधन का क्रमांक
- 2:27:36यानी 17वां राज्य और 18वां संशोधन। इन
- 2:27:40दोनों के बीच उम्मीदवारों को कभी भी
- 2:27:42भ्रमित नहीं होना चाहिए। यह एक सीधा तथ्य
- 2:27:45है जिसे कंठस्थ करना आवश्यक है।
- 2:27:48लेकिन राज्य निर्माण के इस जश्न के साथ एक
- 2:27:50बड़ा विवाद भी जन्म ले रहा था। चंडीगढ़
- 2:27:52विवाद जब शाह आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंपी
- 2:27:55तो आयोग के तीन में से दो सदस्यों यानी
- 2:27:58बहुमत के फैसले ने यह सिफारिश की थी कि
- 2:28:01चंडीगढ़ जो उस समय खरड़ तहसील का एक
- 2:28:04महत्वपूर्ण हिस्सा था। उसे हिंदी भाषी
- 2:28:06बहुलता और प्रशासनिक कारणों से सीधे तौर
- 2:28:09पर हरियाणा को दे दिया जाना चाहिए।
- 2:28:11हालांकि केंद्र सरकार का अंतिम निर्णय इस
- 2:28:14बहुमत की सिफारिश से बिल्कुल विपरीत था।
- 2:28:17पंजाब के बाहरी राजनीतिक विरोध और
- 2:28:19सीमावर्ती राज्य में अस्थिरता के डर को
- 2:28:22देखते हुए केंद्र सरकार ने शाह आयोग की उस
- 2:28:25बहुमत की सिफारिश को दरकिनार कर दिया।
- 2:28:28चंडीगढ़ को ना तो पूरी तरह से पंजाब को
- 2:28:31दिया गया और ना ही हरियाणा को। इसके बजाय
- 2:28:34एक मध्य मार्ग निकालते हुए इसे एक केंद्र
- 2:28:38शासित प्रदेश यानी यूटी बना दिया गया और
- 2:28:41दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी घोषित
- 2:28:43कर दिया गया। यह एक ऐसा राजनीतिक निर्णय
- 2:28:46था जो आज छ दशक बाद भी एक अनसुलझा मुद्दा
- 2:28:50बना हुआ है।
- 2:28:51इन जटिल सिफारिशों, आयोगों के फैसलों और
- 2:28:54केंद्र सरकार के उलटफेर पर यह बात बिल्कुल
- 2:28:56लागू होती है। चंडीगढ़ के विवाद सा उलझा
- 2:28:59है प्रीलिम्स के ऑप्शंस का खेल। लॉजिक और
- 2:29:01एलिमिनेशन ना हो तो अच्छे-अच्छों की छूट
- 2:29:03जाती है रेल।
- 2:29:04बहुत खूब। और एलिमिनेशन तो वैसे भी
- 2:29:07प्रीलिम्स का ब्रह्मास्त्र है।
- 2:29:08बिल्कुल। अब बात करते हैं जन्म के समय
- 2:29:11यानी 1 नवंबर 1966 को हरियाणा की स्थिति
- 2:29:14की। गठन के समय इस नए राज्य में केवल सात
- 2:29:17संस्थापक जिले थे। इन्हें याद रखने का एक
- 2:29:20बहुत ही सरल और प्रभावी सूत्र या निमोनिक
- 2:29:23है जी एच ए आर जेके में।
- 2:29:24यह बहुत काम का सूत्र है।
- 2:29:26जी।
- 2:29:28जी से गुरुग्राम, एच से हिसार, ए से
- 2:29:32अंबाला, आर से रोहतक, जे से जींद, के से
- 2:29:35करनाल और एम से महेंद्रगढ़। इस तरह के
- 2:29:39सूत्र परीक्षा के भारी दबाव में तथ्यों को
- 2:29:42याद रखने में बहुत मदद करते हैं।
- 2:29:46और इन भौगोलिक सीमाओं के साथ ही राज्य के
- 2:29:48प्रथम राजनीतिक नेतृत्व को जानना भी
- 2:29:50अनिवार्य है। राज्य के पहले मुख्यमंत्री
- 2:29:53बनने का गौरव पंडित भगवत दयाल शर्मा को
- 2:29:55प्राप्त हुआ। जिन्होंने राज्य के शुरुआती
- 2:29:58प्रशासन की एक बेहद चुनौतीपूर्ण नींव रखी।
- 2:30:01वहीं राज्य के पहले राज्यपाल के रूप में
- 2:30:03श्री धर्मवीरा ने कार्यभार संभाला। यह
- 2:30:06दोनों नाम हरियाणा के राजनीतिक और
- 2:30:08प्रशासनिक इतिहास के प्रस्थान बिंदु हैं
- 2:30:10और प्रारंभिक परीक्षा में सीधे तौर पर
- 2:30:13पूछे जाते हैं। अब समय है इस पूरे
- 2:30:16विश्लेषणात्मक ज्ञान को परीक्षा की कसौटी
- 2:30:18पर परखने का। यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा
- 2:30:21चुनौती के तहत पहले इतिहास का एक एमसीक्यू
- 2:30:24मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन सामने रखा जा रहा
- 2:30:26है। उम्मीदवारों द्वारा निम्नलिखित कथनों
- 2:30:29पर विचार किया जाना चाहिए। बाबू मुरलीधर
- 2:30:32ने 1886 में अंबाला में पहली कांग्रेस
- 2:30:35शाखा स्थापित की। भारत में गांधी की पहली
- 2:30:38राजनीतिक गिरफ्तारी पलवल में हुई थी।
- 2:30:40यूनियनिस्ट पार्टी भारतीय राष्ट्रीय
- 2:30:42कांग्रेस की एक शाखा थी।
- 2:30:44अब यहां उम्मीदवारों द्वारा एलिमिनेशन
- 2:30:46लॉजिक का बेहतरीन प्रयोग किया जाना चाहिए।
- 2:30:49यदि आज के विश्लेषण को ध्यान से सुना गया
- 2:30:51है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कथन एक पूरी
- 2:30:54तरह से ऐतिहासिक रूप से सत्य है। अंबाला
- 2:30:56ही कांग्रेस का पहला केंद्र था।
- 2:30:58जी। कथन दो भी शत प्रतिशत प्रमाणित है। 10
- 2:31:01अप्रैल को पलवल की घटना इतिहास में
- 2:31:03प्रमुखता से दर्ज है। लेकिन कथन तीन पर
- 2:31:06विचार करें। चर्चा में स्पष्ट रूप से
- 2:31:08बताया गया था कि यूनियनिस्ट पार्टी
- 2:31:10किसानों और जमींदारों की एक स्वतंत्र
- 2:31:13धर्मनिरपेक्ष पार्टी थी। इसका कांग्रेस से
- 2:31:16कोई संस्थागत संबंध नहीं था। बल्कि यह कई
- 2:31:18बार कांग्रेस के विरोध में खड़ी थी। इसलिए
- 2:31:21कथन तीन पूरी तरह गलत हो जाता है।
- 2:31:23तो एलिमिनेशन कैसे काम करेगा? जिस भी
- 2:31:25विकल्प में कथन तीन हो उसे हटा दें। इसी
- 2:31:29तर्क के आधार पर सही उत्तर तक आसानी से
- 2:31:31पहुंचा जा सकता है।
- 2:31:32बिल्कुल शानदार। अब राज व्यवस्था से जुड़ा
- 2:31:35एक और सवाल देखा जाए जहां गलत कथन ध्यान
- 2:31:38दें। इनकरेक्ट स्टेटमेंट की पहचान करनी
- 2:31:40है।
- 2:31:41सच्चर फार्मूला 1 अक्टूबर 1949 को लागू
- 2:31:44किया गया था।
- 2:31:45जेसी शाह आयोग के बहुमत ने चंडीगढ़ पंजाब
- 2:31:48को देने की सिफारिश की थी।
- 2:31:50हरियाणा भारत के 17वें राज्य के रूप में
- 2:31:52गठित किया गया था। पुनः यहां लॉजिक और
- 2:31:54तथ्यों की स्पष्टता का परीक्षण है। कथन एक
- 2:31:58में दी गई तिथि 1 अक्टूबर 1949 सच्चर
- 2:32:01फार्मूले के लिए बिल्कुल सटीक है। कथन तीन
- 2:32:04भी एक प्रमाणित तथ्य है कि हरियाणा 18वें
- 2:32:07संशोधन के तहत 17वां राज्य बना था। लेकिन
- 2:32:11कथन दो में भारी भ्रांति है।
- 2:32:12वो शाह आयोग वाला पॉइंट
- 2:32:14जी। जेसी शाह आयोग के बहुमत ने वास्तव में
- 2:32:18चंडीगढ़ को हरियाणा को देने की सिफारिश की
- 2:32:20थी ना कि पंजाब को। यह तो केंद्र सरकार थी
- 2:32:24जिसने इसे यूटी बनाया। अतः कथन दो
- 2:32:27तथ्यात्मक रूप से गलत है और प्रश्न में
- 2:32:30गलत कथन ही पूछा गया है। इस तरह के
- 2:32:33सूक्ष्म अंतर और कीवर्ड्स पर ध्यान देना
- 2:32:35ही परीक्षा में सफलता तय करता है।
- 2:32:37बहुत खूब। राजत्व के इस पूरी लंबी यात्रा
- 2:32:40के सारांश को अगर एक थ्री आयामी विजुअल
- 2:32:43फ्लो यानी 3D फ्लो में समेटा जाए तो यह
- 2:32:461858 से 1966 तक का एक महाकाव्य है।
- 2:32:50जी। इसकी शुरुआत होती है 1858 में एक
- 2:32:53क्रूर सजा के रूप में पंजाब में विलय से।
- 2:32:56उसके बाद 1920 के दशक में कांग्रेस और
- 2:32:58आर्य समाज के माध्यम से राष्ट्रवाद और
- 2:33:00राजनीतिक चेतना का जागरण होता है। फिर
- 2:33:021956 का क्षेत्रीय फार्मूला आता है जो एक
- 2:33:06अस्थाई और कमजोर समझौता था और अंततः दशकों
- 2:33:09के लंबे राजनीतिक और भाषाई संघर्ष के बाद
- 2:33:121966 में हरियाणा का गठन होता है जो इस
- 2:33:16क्षेत्र के लोगों की अपनी सांस्कृतिक
- 2:33:17पहचान की एक ऐतिहासिक विजय थी। बिल्कुल
- 2:33:20प्रीलिम्स और मेंस के प्रमुख टेक अवेज यही
- 2:33:23है कि घटनाक्रमों के पीछे के कारण आयोगों
- 2:33:27की वास्तविक सिफारिशें और महत्वपूर्ण
- 2:33:29व्यक्तित्वों के योगदान को विश्लेषणात्मक
- 2:33:32रूप से याद रखा जाए। हम
- 2:33:34लेकिन इस सत्र को समाप्त करने से पहले
- 2:33:37उम्मीदवारों के लिए एक अंतिम उत्तेजक
- 2:33:40विचार छोड़ना आवश्यक है। जरा सोचिए अगर
- 2:33:431857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने
- 2:33:46रणनीतिक सजा के तौर पर हरियाणा का पंजाब
- 2:33:49में विलयन नहीं किया होता बल्कि इसे आगरा
- 2:33:52प्रांत का ही हिस्सा रहने दिया होता तो
- 2:33:54क्या आज भारत के उत्तर पश्चिम का
- 2:33:56राजनीतिक, भौगोलिक और भाषाई स्वरूप पूरी
- 2:33:59तरह से अलग नहीं होता। क्या तब भी अलग
- 2:34:02हरियाणा की मांग उठती?
- 2:34:03यह सोचने वाली बात है।
- 2:34:05यह एक ऐसा गहरा विचार है जिस पर मुख्य
- 2:34:07परीक्षा के दृष्टिकोण से मनन किया जाना
- 2:34:09चाहिए।
- 2:34:09दिस लेक्चर वास बाय निशांत आईएस। सीधे आज
- 2:34:12के विषय पर आते हुए इस गहन विश्लेषण का
- 2:34:15मुख्य विषय है हरियाणा राज्य व्यवस्था और
- 2:34:19संविधान यानी हरियाणा स्टेट पॉलिटी एंड
- 2:34:22कॉन्स्टिट्यूशन। और आज हमारे पास जो स्रोत
- 2:34:24हैं जो अध्ययन सामग्री है वो दिशांत आईएएस
- 2:34:29और राहुल प्रकाश सर के मार्गदर्शन में
- 2:34:31तैयार की गई है।
- 2:34:32बिल्कुल और इस चर्चा का मिशन बहुत ही
- 2:34:34स्पष्ट है। हमें यह समझना है कि कैसे एक
- 2:34:37राज्य का गठन और उसकी पूरी राजनीतिक
- 2:34:40संरचना मतलब पिटी, यूपीएससी और एचपीएससी
- 2:34:44जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्यों
- 2:34:46और ट्रैप्स का खजाना बन सकती है।
- 2:34:48राइट? अक्सर जब हम पिटी पढ़ते हैं तो
- 2:34:51भारीभरकम शब्दों और आर्टिकल्स का बोझ हावी
- 2:34:54हो जाता है। लेकिन देशांत आईएस में जैसा
- 2:34:57कि हम पढ़ाते हैं, हमारा उद्देश्य हमेशा
- 2:35:00इन जटिल संवैधानिक प्रक्रियाओं को एक
- 2:35:02तार्किक कहानी के रूप में समझाना होता है।
- 2:35:05तो इसी तार्किक क्रम में राज्य के गठन से
- 2:35:08ही इस विश्लेषण को शुरू करना सबसे उचित
- 2:35:10होगा। 1 नवंबर 1966 को हरियाणा एक अलग
- 2:35:14राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
- 2:35:16हां। लेकिन यह प्रक्रिया कोई रातोंरात तो
- 2:35:19नहीं हुई थी। दिशांत आईएएस के जो नोट्स
- 2:35:22हैं, वो इस पूरी घटना को तीन बहुत ही
- 2:35:25क्रमिक चरणों में बांटते हैं जो एग्जाम के
- 2:35:28नजरिए से बहुत सॉलिड बेच देते हैं।
- 2:35:30हम मतलब सबसे पहले तो एक अलग राज्य की
- 2:35:33मांग उठी। एग्जैक्टली और फिर भाषाई और
- 2:35:37भौगोलिक सीमाओं को सुलझाने के लिए अप्रैल
- 2:35:401986 में न्यायमूर्ति जे सी शाह की
- 2:35:44अध्यक्षता में शाह आयोग का गठन किया गया।
- 2:35:47शाह कमीशन
- 2:35:48राइट।
- 2:35:49इस आयोग का मुख्य काम यही तय करना था कि
- 2:35:52पंजाब और हरियाणा के बीच बॉर्डर कहां
- 2:35:54खींची जाए और इसी की सिफारिशों के आधार पर
- 2:35:58सितंबर 1966 में संसद में पंजाब पुनर्गठन
- 2:36:02अधिनियम पारित हुआ। पंजाब रिऑर्गेनाइजेशन
- 2:36:04एक्ट
- 2:36:05बिल्कुल और इसी लंबी वैधानिक प्रक्रिया के
- 2:36:08बाद फाइनली 1 नवंबर 1966 को हरियाणा का
- 2:36:12गठन हुआ।
- 2:36:13यहां पर एक प्रीलिम्स अलर्ट सामने आता है
- 2:36:16जो इस अध्ययन सामग्री में बहुत ही स्पष्ट
- 2:36:18रूप से हाईलाइट किया गया है। हरियाणा
- 2:36:21भारतीय संघ का 17वां राज्य बना था। लेकिन
- 2:36:24इसकी स्थापना 18वें संविधान संशोधन के
- 2:36:26जरिए हुई थी। और यही वो एग्जाम ट्रैप है
- 2:36:29जहां अक्सर गलती होती है। एग्जाम के
- 2:36:31प्रेशर में 17 और 18 का यह जो डाटा है यह
- 2:36:34अक्सर एस्पिरेंट्स को कंफ्यूज कर देता है।
- 2:36:37इस भ्रम से बचने का सबसे अच्छा तरीका क्या
- 2:36:39है?
- 2:36:39देखिए इसका सबसे अच्छा तरीका इसके पीछे के
- 2:36:41लॉजिक को समझना है। संविधान में जब भी
- 2:36:44राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन होता है
- 2:36:46तो उसका एक विशेष विधाई महत्व होता है।
- 2:36:4918वा संशोधन स्पष्ट रूप से इस भाषाई
- 2:36:52पुनर्गठन को वैधानिक मान्यता देने के लिए
- 2:36:54था। राइट।
- 2:36:55और इससे पहले कि हम आगे बढ़े तैयारी करने
- 2:36:58वालों के लिए एक पंक्ति याद आती है।
- 2:37:00मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जो सिलेबस से
- 2:37:03नहीं घबराते और यूपीएससी वो चक्रव्यूह है
- 2:37:06जिसे बिना पिटी के नहीं भेद पाते।
- 2:37:09क्या बात है। बहुत ही सटीक। सीरियस
- 2:37:11एस्पिरेंट्स इस बात को मार्क करें कि
- 2:37:13राज्य का इतिहास केवल 1966 से शुरू नहीं
- 2:37:16होता है। अगर हम संविधान सभा यानी
- 2:37:18कॉन्स्टिट्यूएंट असेंबली की बात करें तो
- 2:37:21हरियाणा क्षेत्र से कुल नौ सदस्यों ने
- 2:37:23भारत का संविधान बनाने में भाग लिया था।
- 2:37:26नौ सदस्य
- 2:37:27मेंस परीक्षा में ऐसे हिस्टोरिकल फैक्ट्स
- 2:37:29उत्तर की क्वालिटी को बहुत बढ़ा देते हैं।
- 2:37:32बिल्कुल बढ़ाते हैं। जब उन नौ सदस्यों का
- 2:37:35जिक्र आता है तो चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा
- 2:37:37का नाम राजनीतिक इतिहास में एक बहुत ही
- 2:37:40अनूठा स्थान रखता है।
- 2:37:41हम
- 2:37:42वो ना केवल भारतीय संविधान पर हस्ताक्षर
- 2:37:45करने वाले सबसे कम उम्र के सदस्य थे
- 2:37:47बल्कि उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है जो
- 2:37:50बहुत रेयर है।
- 2:37:51आप सात अलग-अलग विधाई सदनों वाले रिकॉर्ड
- 2:37:54की बात कर रहे हैं ना? हां वो सात अलग-अलग
- 2:37:56हाउस के मेंबर रहने वाले एकमात्र व्यक्ति
- 2:37:59हैं।
- 2:37:59ये एक साधारण फैक्ट नहीं है। ये एक पूरे
- 2:38:02पॉलिटिकल एरा को रिप्रेजेंट करता है।
- 2:38:03उसी संविधान सभा में एक और अत्यंत
- 2:38:06महत्वपूर्ण नाम पंडित ठाकुरदास भार्गव का
- 2:38:09था। संविधान के निर्माण में उनका जो
- 2:38:12योगदान है वो किसी एक क्षेत्र तक लिमिटेड
- 2:38:14नहीं था। हम प्रस्तावना और डीपीएसपी के
- 2:38:17संदर्भ में
- 2:38:18कि उन्होंने ही प्रस्तावना को संविधान की
- 2:38:20आत्मा यानी सोल ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन कहकर
- 2:38:24संबोधित किया था।
- 2:38:25इससे पता चलता है कि उस समय के नेताओं की
- 2:38:27कॉन्स्टिट्यूशनल अंडरस्टैंडिंग कितनी डीप
- 2:38:29थी।
- 2:38:29बिल्कुल। तो इस मजबूत संवैधानिक नीव को
- 2:38:32समझने के बाद अब राज्य कार्यपालिका की ओर
- 2:38:34रुख करते हैं। किसी भी राज्य का संवैधानिक
- 2:38:36प्रमुख राज्यपाल होता है। आमतौर पर
- 2:38:39स्टूडेंट्स अनुच्छेदों को एक साथ रटने की
- 2:38:41कोशिश करते हैं।
- 2:38:42जो कि सबसे बड़ी गलती है।
- 2:38:45लेकिन राहुल प्रकाश सर और उनकी टीम के
- 2:38:47मार्गदर्शन में तैयार की गई सामग्री में
- 2:38:49अनुच्छेदों को उनके कार्यों के अनुसार
- 2:38:51डिवाइड किया गया है।
- 2:38:53जैसे शुरुआत अनुच्छेद 153 से होती है जो
- 2:38:56स्थापित करता है कि प्रत्येक राज्य का एक
- 2:38:58राज्यपाल होगा। देखिए अनुच्छेदों को एक
- 2:39:00साथ देखने के बजाय उनके पीछे की जो लिंक
- 2:39:04है उसे जोड़ना चाहिए। आर्टिकल 153 केवल पद
- 2:39:08की स्थापना करता है। इसके तुरंत बाद
- 2:39:11अनुच्छेद 154 आता है
- 2:39:14जो कार्यपालिका शक्ति की बात करता है।
- 2:39:16हां, वो स्पष्ट करता है कि राज्य की पूरी
- 2:39:19एग्जीक्यूटिव पावर उसी राज्यपाल में निहित
- 2:39:21होगी और फिर आर्टिकल 155 के तहत
- 2:39:24राष्ट्रपति द्वारा उनकी नियुक्ति होती है।
- 2:39:28लेकिन भारतीय संघीय ढांचे में राज्यपाल की
- 2:39:30भूमिका सबसे ज्यादा डिबेटेड रही है।
- 2:39:33क्योंकि इसकी एक दोहरी भूमिका होती है।
- 2:39:35ड्यूल रोल।
- 2:39:36राइट। एक और वह राज्य का संवैधानिक प्रमुख
- 2:39:39है और दूसरी ओर वह केंद्र सरकार के एक
- 2:39:42एजेंट या प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता
- 2:39:45है।
- 2:39:46और इसी प्रशासनिक आवश्यकता को देखते हुए
- 2:39:48सातवें संविधान संशोधन 1956 के तहत यह
- 2:39:52नियम बनाया गया कि एक ही व्यक्ति को दो या
- 2:39:55अधिक राज्यों का राज्यपाल भी नियुक्त किया
- 2:39:57जा सकता है।
- 2:39:58यह संशोधन भाषाई राज्यों के पुनर्गठन के
- 2:40:01समय बहुत ही ज्यादा क्रिटिकल साबित हुआ
- 2:40:03था। शायद इसी दोहरी भूमिका के कारण हमें
- 2:40:05हरियाणा के राज्यपालों के कार्यकालों में
- 2:40:07इतनी ज्यादा डायवर्सिटी देखने को मिलती
- 2:40:09है। जैसे राज्य के पहले राज्यपाल श्री
- 2:40:12धर्मवीर थे जिनका कार्यकाल मुश्किल से
- 2:40:14लगभग 10 महीने ही रहा।
- 2:40:16और दूसरी तरफ बी एन चक्रवर्ती जी का
- 2:40:18कार्यकाल सबसे लंबा रहा।
- 2:40:20हां। और ये एक हिस्टोरिकल फैक्ट है कि
- 2:40:22उनका पद पर रहते हुए ही निधन हुआ था। वहीं
- 2:40:24अगर हम शॉर्टेस्ट टर्म की बात करें तो ओपी
- 2:40:26वर्मा ऐसे राज्यपाल रहे जिनका कार्यकाल
- 2:40:29जुलाई 2004 में केवल कुछ ही दिनों का रहा।
- 2:40:32यह जो अस्थिरता है ना यह एक बहुत ही
- 2:40:34दिलचस्प कॉन्स्टिट्यूशनल सवाल खड़ा करती
- 2:40:37है और उस सवाल का सीधा जवाब हमें मिलता है
- 2:40:40अनुच्छेद 156 में।
- 2:40:42प्लेजर ऑफ द प्रेसिडेंट
- 2:40:43एग्जैक्टली इस अनुच्छेद के अनुसार
- 2:40:45राज्यपाल का कोई फिक्स टेन्योर नहीं होता।
- 2:40:48वो पूरी तरह से राष्ट्रपति के प्रसाद
- 2:40:50पर्यंत अपना पद धारण करता है।
- 2:40:53मतलब जब तक केंद्र सरकार चाहे
- 2:40:55हां इसका प्रैक्टिकल मतलब यही है कि
- 2:40:56केंद्र सरकार जब चाहे राष्ट्रपति के
- 2:40:59माध्यम से राज्यपाल को हटा सकती है या
- 2:41:01उसका ट्रांसफर कर सकती है।
- 2:41:03इस पावर डायनामिक्स पे एक व्यंग बिल्कुल
- 2:41:05सटीक बैठता है। अनुच्छेदों के भवर में
- 2:41:08अक्सर कश्तियां डूब जाती हैं। पर जो
- 2:41:11कांसेप्ट की पतवार थामे उसे हर लहर किनारा
- 2:41:14दे जाती है।
- 2:41:15क्या बात है बहुत खूब। और जहां यह
- 2:41:18राजनीतिक अस्थिरता अपनी पीक पर पहुंचती है
- 2:41:21ना, वहीं से अनुच्छेद 356 यानी प्रेसिडेंस
- 2:41:26रूल का रास्ता खुल जाता है।
- 2:41:27राष्ट्रपति शासन इसका इतिहास तो हरियाणा
- 2:41:30के संदर्भ में बहुत ही घटनापूर्ण रहा है।
- 2:41:32यह एक एग्जाम ट्रैप भी है कि राज्य गठन के
- 2:41:35ठीक एक साल बाद ही नवंबर 1967 में हरियाणा
- 2:41:39में पहला राष्ट्रपति शासन लग गया था।
- 2:41:41और यह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का समय
- 2:41:43था। यह राज्य के इतिहास का सबसे लंबी अवधि
- 2:41:47का राष्ट्रपति शासन साबित हुआ।
- 2:41:48इतनी जल्दी राष्ट्रपति शासन क्यों लग गया?
- 2:41:51इसके पीछे की बैकग्राउंड भी काफी
- 2:41:53इंटरेस्टिंग है।
- 2:41:54दिशांत आईएस में हम हमेशा इस बात पर जोर
- 2:41:56देते हैं कि हिस्टोरिकल कॉन्टेक्स्ट समझे
- 2:41:58बिना पॉलिटी अधूरी है। 1967 का वो दौर
- 2:42:02भारतीय राजनीति में आयाराम गया राम की
- 2:42:05संस्कृति के जन्म का दौर था।
- 2:42:07दलबदल की राजनीति
- 2:42:08बिल्कुल और इसकी शुरुआत इसी राज्य से हुई
- 2:42:11थी। इतनी भारी पॉलिटिकल इनस्टेबिलिटी थी
- 2:42:14कि केंद्र को इंटरफेयर करना पड़ा।
- 2:42:16अगर हम प्रेसिडेंट्स रूल के पूरे पैटर्न
- 2:42:18को एनालाइज करें तो हरियाणा में यह कुल
- 2:42:20तीन बार लागू हुआ है।
- 2:42:21पहला तो 1967 में हो गया।
- 2:42:23हां। दूसरा लगा अप्रैल 1977 में जब केंद्र
- 2:42:27में मोरारजी देसाई की सरकार थी। यह सबसे
- 2:42:29कम अवधि के लिए था। और तीसरा लगा अप्रैल
- 2:42:321991 में। प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव
- 2:42:35के समय। मतलब तीनों ही केसेस में या तो
- 2:42:38केंद्र में सत्ता परिवर्तन हुआ या राज्य
- 2:42:40में गठबंधन टूटा।
- 2:42:41राइट? सीधा असर राष्ट्रपति शासन के रूप
- 2:42:44में सामने आया। अब जब अनुच्छेद 356 लागू
- 2:42:47नहीं होता तब सत्ता का वास्तविक संचालन
- 2:42:50मुख्यमंत्री और उनकी मंत्री परिषद के
- 2:42:52हाथों में होता है।
- 2:42:53जिसके लिए अनुच्छेद 164 मुख्यमंत्री की
- 2:42:56नियुक्ति का प्रावधान करता है।
- 2:42:58लेकिन एग्जाम पॉइंट ऑफ व्यू से यहां
- 2:42:59डीफैक्टो हेड और डीजुरे हेड का अंतर समझना
- 2:43:02बहुत जरूरी हो जाता है। यह जो अंतर है ना
- 2:43:05यह हमारी पूरी पार्लियामेंट्री सिस्टम का
- 2:43:07बेस है। डेजुरे हेड यानी नाम मात्र का
- 2:43:11प्रमुख वो राज्यपाल है। सारे ऑर्डर्स उसी
- 2:43:14के नाम पर इशू होते हैं। लेकिन डिफेक्टो
- 2:43:17हेड यानी वास्तविक प्रमुख मुख्यमंत्री
- 2:43:19हैं।
- 2:43:20जो असल में उन शक्तियों का इस्तेमाल करते
- 2:43:22हैं।
- 2:43:22राइट? अब जब हम काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के
- 2:43:24गठन की बात करते हैं तो 91वां संविधान
- 2:43:27संशोधन जो 2003 में आया था उसका एनालिसिस
- 2:43:31बहुत जरूरी है।
- 2:43:32जंबो कैबिनेट्स को रोकने के लिए।
- 2:43:34एग्जैक्टली। पहले राज्यों में इतने बड़े
- 2:43:36मंत्रिमंडल बना दिए जाते थे कि सरकारी
- 2:43:39खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता था। सबको
- 2:43:42मंत्री पद देकर खुश करने की कोशिश होती
- 2:43:45थी। इस राजनीतिक तुष्टीरण को रोकने के लिए
- 2:43:4891वें संशोधन ने एक स्ट्रिक्ट मैथमेटिकल
- 2:43:51लिमिट तय कर दी।
- 2:43:5215% वाली लिमिट
- 2:43:53हां मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा
- 2:43:56सीटों के 15% से अधिक नहीं हो सकती।
- 2:43:59अगर इस गणित को हम हरियाणा पर लागू करें
- 2:44:01तो पिक्चर बिल्कुल क्लियर हो जाती है।
- 2:44:03राज्य की विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं।
- 2:44:0590 का 15% होता है 13 1/2 जिसे 14 तक
- 2:44:08सीमित किया गया है।
- 2:44:10राइट? तो इसका मतलब है कि मुख्यमंत्री को
- 2:44:12मिलाकर राज्य में अधिकतम 14 मंत्री ही हो
- 2:44:14सकते हैं। यह एक बहुत ही डायरेक्ट फैक्ट
- 2:44:16है जो प्रीलिम्स में स्टेटमेंट बेस्ड
- 2:44:18क्वेश्चंस में पूछा जाता है।
- 2:44:19और दिशांत आईएएस में पढ़ाते हुए हम हमेशा
- 2:44:22यह रूल फॉलो करते हैं कि फैक्ट्स को उनके
- 2:44:25पीछे के लॉजिक के साथ याद रखा जाए। अबकि
- 2:44:28मुख्यमंत्री पद की बात चल रही है तो इस
- 2:44:31राज्य का पॉलिटिकल इतिहास भी बहुत यूनिक
- 2:44:33है।
- 2:44:34जैसे पहले मुख्यमंत्री पंडित भगवत दयाल
- 2:44:36शर्मा बने। हां लेकिन समीकरण इतनी तेजी से
- 2:44:39बदले कि जल्द ही राव वीरेंद्र सिंह के रूप
- 2:44:42में राज्य को अपना पहला गैर कांग्रेसी
- 2:44:45मुख्यमंत्री मिल गया।
- 2:44:46सियासत की इसी तेजी पर एक और पंक्ति याद
- 2:44:48आती है। कुर्सियों का खेल भी अजब सियासत
- 2:44:51दिखाता है। जो कल तक था बाजीगर आज
- 2:44:54राष्ट्रपति शासन में नजर आता है।
- 2:44:56बहुत सही कहा आपने। और अगर हम कार्यकालों
- 2:44:58की बात करें तो दिनों की कुल अवधि के
- 2:45:01हिसाब से चौधरी भजन लाल का कार्यकाल सबसे
- 2:45:04लंबा रहा। और बंसीलाल जी सबसे कम उम्र में
- 2:45:07मुख्यमंत्री बने।
- 2:45:08राइट? और उन्हें आधुनिक हरियाणा का
- 2:45:10निर्माता भी कहा जाता है।
- 2:45:12क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर और 100%
- 2:45:14इलेक्ट्रिफिकेशन में उनका जो कंट्रीब्यूशन
- 2:45:16था वो हिस्टोरिकल था।
- 2:45:17बिल्कुल।
- 2:45:18इन सभी दिग्गजों के बीच ओम प्रकाश चौताला
- 2:45:20जी का नाम एक बहुत बड़े एग्जाम ट्रैप के
- 2:45:22रूप में उभरता है। सीरियस एस्पिरेंट्स
- 2:45:24ध्यान दें उन्होंने राज्य में सबसे अधिक
- 2:45:26बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।
- 2:45:28कुल पांच बार।
- 2:45:29हां, लेकिन ट्रैप यह है कि उनका कार्यकाल
- 2:45:32कभी भी कंटीन्यूअस नहीं रहा। यह फैक्ट साफ
- 2:45:34दिखाता है कि गठबंधन और समर्थन वापसी की
- 2:45:37राजनीति ने राज्य को कितना डायनामिक बनाए
- 2:45:40रखा है।
- 2:45:41और इस डायनेमि का मेन सेंटर राज्य की
- 2:45:43विधानसभा है।
- 2:45:43अगर हम कॉन्स्टिट्यूशनल एंगल से देखें तो
- 2:45:46हरियाणा की विधायिका एक सदनीय है यानी
- 2:45:49यूनिकमरल।
- 2:45:50इसका मतलब यहां केवल विधानसभा है। विधान
- 2:45:52परिषद नहीं है।
- 2:45:53राइट? और चंडीगढ़ स्थित इस विधानसभा भवन
- 2:45:56को विश्व प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ली कारबूजिए
- 2:45:59ने डिजाइन किया था। यह भी एक अच्छा
- 2:46:02फक्चुअल पॉइंट है।
- 2:46:03सीटों के विकास का जो क्रम है वो भी
- 2:46:04डेमोग्राफिक चेंज को दर्शाता है। 1966 में
- 2:46:07जब राज्य बना तो केवल 54 सीटें थी।
- 2:46:10फिर 1967 के परिसीमन यानी डिलिमिटेशन में
- 2:46:13यह संख्या 81 हो गई
- 2:46:15और 1977 में बढ़कर 90 हो गई जो आज तक कायम
- 2:46:18है।
- 2:46:18और यह संख्या 84 में संविधान संशोधन के
- 2:46:21तहत 2026 तक के लिए फ्रीज़ कर दी गई है।
- 2:46:24इस ऐतिहासिक विकास क्रम में गोल्डन फैक्ट
- 2:46:26है जिसे डिस्कस करना बहुत जरूरी है और वो
- 2:46:28है शन्नू देवी जी का नाम। बिल्कुल ये
- 2:46:30सिर्फ स्टेट लेवल का नहीं बल्कि नेशनल
- 2:46:32लेवल का फैक्ट है। शन्नू देवी न केवल
- 2:46:35हरियाणा विधानसभा की पहली अध्यक्ष थी
- 2:46:37बल्कि पूरे भारत में किसी भी राज्य
- 2:46:40विधानसभा की पहली महिला स्पीकर होने का
- 2:46:42गौरव उनके नाम है।
- 2:46:431966 के दौर में एक महिला का इस सर्वोच्च
- 2:46:46संवैधानिक पद पर पहुंचना वूमन एंपावरमेंट
- 2:46:49का एक बहुत बड़ा उदाहरण है।
- 2:46:50डेफिनेटली। और अगर हम पार्लियामेंट्री
- 2:46:52रिप्रेजेंटेशन की बात करें तो हरियाणा से
- 2:46:55लोकसभा में 10 सदस्य और राज्यसभा में पांच
- 2:46:59सदस्य चुने जाते हैं।
- 2:47:00एक क्रिटिकल एग्जाम पॉइंट यह है कि 1976
- 2:47:03से लोकसभा की ये 10 सीटें स्थिर हैं।
- 2:47:05और इन 10 में से अंबाला और सिरसा ये दो
- 2:47:09सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
- 2:47:12महिलाओं के राजनीतिक योगदान में यह राज्य
- 2:47:13हमेशा आगे रहा है। स्नेहलता राज्य की पहली
- 2:47:16महिला विधायक बनी।
- 2:47:17और चंद्रवती जी पहली महिला सांसद बनी।
- 2:47:20आपको याद होगा उन्होंने दिग्गज नेता चौधरी
- 2:47:23बंसीलाल को हराया था।
- 2:47:25हां और कुमारी शैलजा का नाम सर्वाधिक बार
- 2:47:27सांसद रहने वाली महिला के रूप में दर्ज
- 2:47:29है। वो चार बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा
- 2:47:32की सदस्य रही हैं।
- 2:47:33यह एक बहुत ही पॉजिटिव प्रोग्रेस है और
- 2:47:3513वीं विधानसभा का डाटा भी इसी प्रोग्रेस
- 2:47:38को सपोर्ट करता है जहां राज्य के इतिहास
- 2:47:40में सबसे ज्यादा 13 महिला विधायक चुनकर
- 2:47:44आए। अब विधानसभा के स्ट्रक्चर से आगे
- 2:47:46बढ़कर हम इलेक्टोरल मैप और रिजर्व्ड
- 2:47:48कॉन्स्टिट्यूएंसीज की बात करते हैं
- 2:47:50जो कि प्रीलिम्स के लिए बहुत ही स्कोरिंग
- 2:47:52एरिया है।
- 2:47:5390 विधानसभा सीटों में से 17 सीटें
- 2:47:55अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं।
- 2:47:58लेकिन राहुल प्रकाश सर की टीम हमेशा यह
- 2:48:00गाइड करती है कि एग्जाम हॉल में सही आंसर
- 2:48:02तक पहुंचने के लिए सिर्फ आरक्षित सीटों को
- 2:48:05रटना काफी नहीं है।
- 2:48:06यहीं पर एलिमिनेशन टेक्निक काम आती है।
- 2:48:09बजाय इसके कि हम यह रटें कि कौन सी 17
- 2:48:12सीटें आरक्षित हैं। कैंडिडेट्स के लिए यह
- 2:48:14याद रखना ज्यादा लॉजिकल है कि राज्य के
- 2:48:17पांच जिले ऐसे हैं जहां कोई भी विधानसभा
- 2:48:20सीट रिजर्व नहीं है।
- 2:48:21वो पांच जिले कौन से हैं?
- 2:48:23वो है महेंद्रगढ़, फरीदाबाद, पंचकूला, नूह
- 2:48:26और चरखी दादरी।
- 2:48:28मतलब अगर कोई क्वेश्चन आता है
- 2:48:30तो आप तुरंत ऑप्शंस एलिमिनेट कर सकते हैं।
- 2:48:32इसीलिए मैं कहती हूं प्रीलिम्स के जाल में
- 2:48:34अक्सर वही फंसते हैं जो एलिमिनेशन की ताकत
- 2:48:37को कम समझते हैं।
- 2:48:38बहुत सही। जब चार ऑप्शन सामने होते हैं,
- 2:48:40तो इन पांच जिलों के नाम से गलत ऑप्शंस को
- 2:48:43तुरंत बाहर किया जा सकता है।
- 2:48:44और इसके पैरेलल एक और बहुत बड़ा एग्जाम
- 2:48:46ट्रैप है झज्जर को लेकर। कर लेते हैं कि
- 2:48:49डिस्ट्रिक्ट हेड क्वार्टर है तो अनरिजर्व
- 2:48:52ही होगा और बस यहीं गलती हो जाती है।
- 2:48:54अब पॉलिटिकल लैंडस्केप की बात हो और रीजनल
- 2:48:56पार्टीज की चर्चा ना हो ऐसा तो हो नहीं
- 2:48:58सकता। क्षेत्रीय दलों ने इस राज्य की
- 2:49:00राजनीति को एक नई ही दिशा दी है।
- 2:49:02जैसे 1967 में राज्य गठन के कुछ ही समय
- 2:49:06बाद राव वीरेंद्र सिंह ने विशाल हरियाणा
- 2:49:09पार्टी की स्थापना की।
- 2:49:10यह राज्य की पहली रीजनल पार्टी थी।
- 2:49:12हां। और इसका इंपैक्ट इतना गहरा था कि गठन
- 2:49:15के महज 6 महीने के भीतर ही इस पार्टी का
- 2:49:18मुख्यमंत्री सत्ता में आ गया।
- 2:49:20उसके बाद 1991 में चौधरी बंसीलाल ने
- 2:49:22हरियाणा विकास पार्टी बनाई। और 1996 में
- 2:49:26चौधरी देवीलाल ने इंडियन नेशनल लोकदल यानी
- 2:49:29आईएलडी की नींव रखी।
- 2:49:31अगर हम इन सभी राजनीतिक और संवैधानिक
- 2:49:33पहलुओं को एक 360° एनालिसिस के फ्रेम में
- 2:49:35रखें तो कुछ बहुत यूनिक फीचर सामने आते
- 2:49:38हैं।
- 2:49:39जैसे कि यह राज्य पंजाब के साथ अपनी
- 2:49:42कैपिटल शेयर करता है चंडीगढ़।
- 2:49:44बिल्कुल।
- 2:49:44और दोनों राज्यों का हाई कोर्ट भी कॉमन
- 2:49:47है।
- 2:49:47प्रशासन में ट्रांसपेरेंसी के लिए
- 2:49:49लोकायुक्त अधिनियम लागू किया गया। और एक
- 2:49:52पॉइंट जिस पर हमने पहले भी हिंट किया था
- 2:49:54संविधान के आर्टिकल 169 में प्रोविजन होने
- 2:49:58के बावजूद हरियाणा ने विधान परिषद का गठन
- 2:50:01नहीं किया है।
- 2:50:02ये एक बहुत ही कॉन्शियस पॉलिटिकल और
- 2:50:04एडमिनिस्ट्रेटिव डिसीजन है।
- 2:50:05बिल्कुल। अब इन सभी फैक्ट्स और कांसेप्ट्स
- 2:50:07को एग्जाम में कैसे टेस्ट किया जाता है,
- 2:50:09यह समझना सबसे जरूरी है।
- 2:50:11दिशांत आईएएस के नोट्स में कुछ बहुत ही
- 2:50:14शानदार प्रीलिम्स एमसीक्यूस दिए गए हैं।
- 2:50:16जो सीधे तौर पर ट्रैप्स को पहचानने की
- 2:50:18एबिलिटी टेस्ट करते हैं।
- 2:50:19चलिए एक क्वेश्चन देखते हैं। मान लीजिए
- 2:50:22प्रश्न के स्टेटमेंट्स कुछ इस तरह हैं।
- 2:50:23पहला
- 2:50:24हरियाणा का गठन फजल अली आयोग की सिफारिश
- 2:50:27पर किया गया।
- 2:50:28दूसरा
- 2:50:28इसे 18वें संशोधन द्वारा स्थापित किया
- 2:50:32गया।
- 2:50:32और तीसरा
- 2:50:33यह 17वां राज्य बना। अब इसमें सही और गलत
- 2:50:35कैसे पहचाने?
- 2:50:36देखिए, एमसीक्यूस को सॉल्व करने का बेस
- 2:50:39सिर्फ मेमोरी नहीं होता, लॉजिकल एनालिसिस
- 2:50:42होता है। जैसे ही फजल अली आयोग का नाम आता
- 2:50:45है, एक अलर्ट एस्पिरेंट को तुरंत 1950 के
- 2:50:49दशक का स्टेट रिऑर्गेनाइजेशन याद आना
- 2:50:52चाहिए।
- 2:50:52जबकि हमने भी डिस्कस किया कि हरियाणा का
- 2:50:54गठन अप्रैल 1966 के शाह आयोग की सिफारिश
- 2:50:57पर हुआ था। एक्जेक्टली। इस एक इंफॉर्मेशन
- 2:50:59से पहला स्टेटमेंट गलत साबित हो जाता है
- 2:51:02और एलिमिनेशन के जरिए उन सभी ऑप्शंस को
- 2:51:05हटाया जा सकता है जिनमें स्टेटमेंट वन
- 2:51:07शामिल है।
- 2:51:08और बाकी बचे दोनों कथन कि 18वा संशोधन था
- 2:51:11और 17वां राज्य बना। ये दोनों
- 2:51:13कॉन्स्टिट्यूशनली बिल्कुल करेक्ट हैं।
- 2:51:15राइट। एक और बेहतरीन प्रैक्टिस क्वेश्चन
- 2:51:17है जो शन्नो देवी विधानसभा की वर्तमान 90
- 2:51:20सीटों और झज्जर जिले में आरक्षित सीटों की
- 2:51:23अनुपस्थिति के कथनों को मिलाकर बनाया गया
- 2:51:26है। इसमें सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
- 2:51:28इस क्वेश्चन में सबसे बड़ा ट्रैप है झज्जर
- 2:51:31वाला स्टेटमेंट। शन्नू देवी का भारत की
- 2:51:34पहली महिला स्पीकर होना और 1977 से 90
- 2:51:38सीटों का फ्रीज़ होना। यह दोनों स्टेटमेंट
- 2:51:40100% सही हैं।
- 2:51:42लेकिन झज्जर के बारे में यह कहना कि वहां
- 2:51:44कोई आरक्षित सीट नहीं है। यह गलत है।
- 2:51:46हां, जैसा हमने अभी एनालाइज किया झज्जर
- 2:51:48इकलौता जिला मुख्यालय है जो आरक्षित है।
- 2:51:51तो वो स्टेटमेंट गलत हो जाता है।
- 2:51:53एक और ऐसा ही ट्रैप प्रेसिडेंस रूल की
- 2:51:55काउंटिंग को लेकर आता है।
- 2:51:56हम अगर क्वेश्चन यह कहें कि राज्य में चार
- 2:52:00बार राष्ट्रपति शासन लगा और बी डी जत्ती
- 2:52:031977 में कार्यवाहक राष्ट्रपति थे। तो
- 2:52:06यहां हिस्ट्री की टाइमलाइन काम आती है।
- 2:52:081967 में पहला शासन लगा। 1977 में दूसरा
- 2:52:12लगा जब फकरुद्दीन अली अहमद जी के निधन के
- 2:52:14बाद बी डी जत्ती एक्टिंग प्रेसिडेंट थे।
- 2:52:17और तीसरा 1991 में लगा तो टोटल नंबर तीन
- 2:52:20है चार नहीं। इस तरह लॉजिकल एलिमिनेशन से
- 2:52:23सही आंसर तक बहुत आराम से पहुंचा जा सकता
- 2:52:26है।
- 2:52:26इस पूरे डीप ड्राइव और एमसीक्यूस के
- 2:52:28लॉजिकल ब्रेकडाउन के बाद अगर हम आज की
- 2:52:31चर्चा का एक कोर टेक अवे निकालें तो वो यह
- 2:52:34है कि राज्य व्यवस्था लोकतंत्र की संरक्षक
- 2:52:37है। पॉलिटे इज द गार्डियन ऑफ डेमोक्रेसी।
- 2:52:40बहुत सही बात। एक राज्य का गठन कैसे होता
- 2:52:44है? उसकी कार्यपालिका और विधायिका की
- 2:52:46लिमिट्स क्या है? और चुनावी राजनीति किस
- 2:52:50तरह से इन संवैधानिक ढांचों के भीतर काम
- 2:52:52करती है, यह सब समझना किसी भी यूपीएससी
- 2:52:55एस्पिरेंट के लिए मस्ट है।
- 2:52:57और इसीलिए आर्टिकल्स और इयर्स को सिर्फ
- 2:52:59रटने के बजाय उनके पीछे के रीज़ंस को समझना
- 2:53:02जरूरी है।
- 2:53:03जब आप यह समझ जाते हैं कि 91वें संशोधन ने
- 2:53:06मंत्रियों की संख्या क्यों घटाई? या
- 2:53:09आर्टिकल 156 गवर्नर के पद को अनसर्टेन
- 2:53:12क्यों बनाता है? तब पॉलिटी एक बोरिंग
- 2:53:15सब्जेक्ट नहीं रहता। वो एक अलाइव पॉलिटिकल
- 2:53:17साइंस बन जाता है।
- 2:53:18इसी कॉनंसेप्चुअल क्लेरिटी के साथ इस
- 2:53:21विश्लेषण को एक ऐसे थॉट प्रोवोकिंग सवाल
- 2:53:23पर छोड़ना सही होगा जो फ्यूचर की
- 2:53:25पॉलिटिक्स का हिंट देता है।
- 2:53:272026 के डीलिमिटेशन के बारे में।
- 2:53:29बिल्कुल। हरियाणा जैसे राज्य में जहां की
- 2:53:32राजनीति हमेशा इतनी डायनेमिक रही है। 2026
- 2:53:35के परिसीमन के बाद एक बहुत बड़ा बदलाव आने
- 2:53:38वाला है। जब 1971 की जनगणना के आधार पर तय
- 2:53:42की गई 90 सीटों की लिमिट खत्म होगी और नई
- 2:53:44डेमोग्राफी के अनुसार विधानसभा सीटों की
- 2:53:47संख्या 126 तक पहुंचने की संभावना है तब
- 2:53:50क्या होगा?
- 2:53:51यह एक बहुत बड़ा सवाल है।
- 2:53:52क्या यह जनसंख्यकीय बदलाव राज्य के
- 2:53:55राजनीतिक समीकरणों और जातीय गठबंधनों को
- 2:53:58पूरी तरह से पलट देगा? क्या यह नई और बड़ी
- 2:54:00असेंबली नए तरह के पॉलिटिकल डोमिनेंस और
- 2:54:02एडमिनिस्ट्रेटिव चैलेंजेस को जन्म देगी?
- 2:54:05तैयारी करने वालों को इस एंगल पर जरूर
- 2:54:07सोचना चाहिए क्योंकि मेंस के लिए यह एक
- 2:54:09बहुत स्ट्रांग प्रोबेबल क्वेश्चन है।
- 2:54:11इस विचारो तेजिक सवाल के साथ आज के इस डीप
- 2:54:14ड्राइव को हम यहीं विराम देते हैं।
- 2:54:16दिस लेक्चर वाज़ बाय दिशांत आईएएस।
- 2:54:19हरियाणा राज्य व्यवस्था और शासन
- 2:54:22कार्यपालिका से न्यायपालिका तक। आज का यह
- 2:54:26विषय केवल कुछ तथ्य नहीं है।
- 2:54:28बिल्कुल नहीं।
- 2:54:29यह एक पूरा का पूरा प्रशासनिक ढांचा है जो
- 2:54:32किसी भी राज्य को चलाता है।
- 2:54:34और इस विस्तृत चर्चा में उतरने से पहले
- 2:54:36हां, एक बहुत ही दिलचस्प 3D चित्र की
- 2:54:39कल्पना करते हैं।
- 2:54:40हम
- 2:54:41एक बेहद पारदर्शी और चमकदार कांच का बॉक्स
- 2:54:44है।
- 2:54:45हम
- 2:54:45और इस बॉक्स के बिल्कुल बीचोंबीच हरियाणा
- 2:54:48विधानसभा का एक 3D मॉडल रखा है
- 2:54:50जो रोशनी से नहाया हुआ है।
- 2:54:52बिल्कुल। और उसी के ठीक बगल में हवा में
- 2:54:55तैरता हुआ हरियाणा का एक सुनहरा नक्शा है
- 2:54:58हम
- 2:54:58जो राज्य के हर एक जिले हर एक प्रशासनिक
- 2:55:01रेखा को दर्शा रहा है।
- 2:55:03देखिए यह विजुअल वास्तव में हमारे आज के
- 2:55:05इस गहन विश्लेषण का मुख्य आधार है।
- 2:55:08हम
- 2:55:08एचपीएससी और यूपीएससी की तैयारी करने वाले
- 2:55:11गंभीर उम्मीदवारों के लिए मुख्यंत्रियों
- 2:55:14के ऐतिहासिक सफर से लेकर जो संवैधानिक
- 2:55:17निकाय हैं उनकी कार्यप्रणाली को समझना
- 2:55:20अत्यंत आवश्यक है। सही कहा
- 2:55:22समझेंगे
- 2:55:23ताकि परीक्षा भवन में कोई भी सवाल चौंका
- 2:55:26ना सके।
- 2:55:27तो इस राजनीतिक ढांचे की नीव को समझने के
- 2:55:29लिए मेरे सामने स्क्रीन पर एक फ्लो चार्ट
- 2:55:32है जो काफी ऐतिहासिक लग रहा है।
- 2:55:34हां ये कांग्रेस से दलबदल से शुरू होता
- 2:55:36है।
- 2:55:36डिफेक्शन से राइट?
- 2:55:37इसके बाद एक तीर विशाल हरियाणा पार्टी के
- 2:55:40संस्थापक की ओर जाता है और अंत में एक तीर
- 2:55:42प्रथम निर्वाचित सरकार की तरफ इशारा कर
- 2:55:44रहा है।
- 2:55:45ये पूरी यात्रा कैसे तय हुई? यह फ्लो
- 2:55:47चार्ट हरियाणा के राजनीतिक वास्तुकारों
- 2:55:49में से एक राव धीरेंद्र सिंह की कहानी
- 2:55:52बयां करता है।
- 2:55:53अच्छा।
- 2:55:53परीक्षा के नजरिए से उनके बारे में दो
- 2:55:55बातें बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए। वो
- 2:55:58राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री थे। लेकिन
- 2:56:00सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क दिस।
- 2:56:02हां ध्यान दें। जब परीक्षा में पहले
- 2:56:05निर्वाचित या फर्स्ट इेड मुख्यमंत्री का
- 2:56:08नाम पूछा जाता है
- 2:56:09जी।
- 2:56:09तो वहां राव वीरेंद्र सिंह का ही नाम आता
- 2:56:12है।
- 2:56:12मतलब पहले मुख्यमंत्री निर्वाचित नहीं थे।
- 2:56:14बिल्कुल। इसके अलावा वह पूरे राजनीतिक
- 2:56:17इतिहास में एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं
- 2:56:20जिन्होंने हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष
- 2:56:23यानी स्पीकर और मुख्यमंत्री दोनों ही
- 2:56:26शीर्ष पदों की जिम्मेदारी संभाली है।
- 2:56:29यह तो एक बहुत ही अनोखा रिकॉर्ड है और इसी
- 2:56:32ऐतिहासिक दौर से जुड़ा एक मुहावरा भी
- 2:56:34अक्सर सुनाई देता है।
- 2:56:35कौन सा?
- 2:56:36आया राम गया राम। क्या यह मुहावरा इसी
- 2:56:38दलबदल वाले दौर से निकला था? यह एक सीधा
- 2:56:41एग्जाम ट्रैप है।
- 2:56:42ट्रैप है।
- 2:56:43हां, जिसे बहुत से एस्पिरेंट्स सतही तौर
- 2:56:46पर पढ़कर छोड़ देते हैं। यह मुहावरा 1967
- 2:56:50के आसपास की उसी राजनैतिक उथल-पुथल के
- 2:56:53कारण अस्तित्व में आया था।
- 2:56:54जब विधायक पार्टियां बदल रहे थे।
- 2:56:56एग्जैक्टली, एक ही दिन में कई-कई बार
- 2:57:00पार्टियां बदल रहे थे। राजनीति विज्ञान के
- 2:57:03नजरिए से समझें तो यह भारतीय लोकतंत्र के
- 2:57:06उस नाजुक चरण को दर्शाता है जहां राजनीतिक
- 2:57:09अस्थिरता चरम पर थी
- 2:57:11हम
- 2:57:11और इसी दौड़ [गला साफ़ करने की आवाज़] ने
- 2:57:12आगे चलकर संविधान में दलबदल विरोधी कानून
- 2:57:16दसवीं अनुसूची
- 2:57:17हां 10थ शेड्यूल कि सख्त आवश्यकता की नींव
- 2:57:20रखी थी। इस राजनीतिक उठापटक और दलबदल के
- 2:57:23खेल को देखकर बस यही पंक्तियां याद आती
- 2:57:25हैं। कुर्सी की इस दौड़ में सब दांव लगाते
- 2:57:28हैं। यूपीएससी के चक्कर व्यू में रट्टे
- 2:57:30काम ना आते हैं।
- 2:57:31बहुत ही सटीक बात है। विश्लेषणात्मक समझ
- 2:57:34के बिना तथ्य अक्सर परीक्षा में धोखा दे
- 2:57:38जाते हैं।
- 2:57:38तो अब यहां एक बार चार्ट दिखाई दे रहा है
- 2:57:40जो मुख्यंत्रियों के कार्यकालों का
- 2:57:42रिकॉर्ड दिखाता है। हम्म इसमें जो सबसे
- 2:57:45छोटा बार है
- 2:57:46हां एक सबसे छोटा लाल रंग का बार है जो ओम
- 2:57:48प्रकाश चौटाला जी के केवल 6 दिन के
- 2:57:50कार्यकाल को दर्शाता है। ये वाकई हैरानी
- 2:57:53की बात है।
- 2:57:53छह दिन में सरकार का बनना और गिरना
- 2:57:56कि वो दौर ही गठबंधन और अस्थिरता का था।
- 2:57:59ये चार्ट उम्मीदवारों के लिए एक सीधा
- 2:58:01प्रीलिम्स अलर्ट है।
- 2:58:02अच्छा।
- 2:58:03ओम प्रकाश चौटाला जी के नाम सबसे कम समय
- 2:58:06मात्र छह दिन तक मुख्यमंत्री रहने का
- 2:58:08रिकॉर्ड तो है ही। हम्।
- 2:58:10लेकिन साथ ही सबसे अधिक बार यानी कुल पांच
- 2:58:13बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का
- 2:58:15रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है।
- 2:58:17पांच बार। और यह जो ऊंचे नीले बार हैं, यह
- 2:58:20किसके कार्यकाल को दर्शाते हैं?
- 2:58:21असली एग्जाम ट्रैप इन्हीं ऊंचे नीले बार
- 2:58:24में छिपा है।
- 2:58:25कैसे?
- 2:58:25जब परीक्षा में सबसे लंबे कार्यकाल का
- 2:58:27सवाल आता है तो अक्सर भजन लाल जी कुल
- 2:58:30दिनों की गणना के आधार पर और बंसीलाल जी
- 2:58:33के बीच विकल्प देकर उलझाया जाता है।
- 2:58:35तो विकल्पों को ध्यान से पढ़ना होगा।
- 2:58:37बिल्कुल। विकल्पों की भाषा को बहुत
- 2:58:39सावधानी से जांचना चाहिए और अगर सवाल यह
- 2:58:41पूछ ले कि सबसे लंबा लगातार कार्यकाल
- 2:58:44किसका रहा है?
- 2:58:45कंटिन्यूअस।
- 2:58:45हां, कंटीन्यूअस तो वहां उत्तर स्पष्ट रूप
- 2:58:48से भूपेंद्र सिंह हुड्डा होगा। शब्दों के
- 2:58:50हेरफेर से ही पूरे सवाल का अर्थ बदल जाता
- 2:58:53है।
- 2:58:54शब्दों का यह खेल वाकई खतरनाक हो सकता है।
- 2:58:57चलिए, आगे बढ़ते हैं। यहां हमारे सामने एक
- 2:58:59और दिलचस्प नक्शा है।
- 2:59:00हम्म।
- 2:59:01इस नक्शे में हरियाणा से तीन अलग-अलग तीर
- 2:59:04निकल रहे हैं। दो तीर दिल्ली की तरफ जा
- 2:59:06रहे हैं और तीसरा तीर उत्तर प्रदेश की तरफ
- 2:59:09इशारा कर रहा है।
- 2:59:10जी।
- 2:59:10क्या ये हरियाणा के राजनीतिक प्रभाव को
- 2:59:12दर्शा रहा है?
- 2:59:13बिल्कुल। यह नक्शा स्पष्ट रूप से हरियाणा
- 2:59:16की उस प्रतिभा को दर्शाता है जिसने राज्य
- 2:59:19की सीमाओं से बाहर जाकर राष्ट्रीय स्तर पर
- 2:59:22नेतृत्व की कमान संभाली है।
- 2:59:24उदाहरण के लिए
- 2:59:25सुषमा स्वराज जी का उदाहरण ले। वो 1998
- 2:59:28में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी
- 2:59:31और उनका गहरा संबंध हरियाणा से था।
- 2:59:33हम्म सही बात है।
- 2:59:34इसी तरह अरविंद केजरीवाल जो दिल्ली के
- 2:59:37मुख्यमंत्री बने उनका जन्म भी हरियाणा के
- 2:59:39भिवानी जिले के शिवानी में हुआ था। अच्छा
- 2:59:42और यूपी वाला तीर
- 2:59:43वह एक नाम है जो इतिहास के पन्नों में
- 2:59:46स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। सुचेता
- 2:59:49कृपलानी जी का।
- 2:59:50हां। वो केवल उत्तर प्रदेश की ही नहीं
- 2:59:53बल्कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी
- 2:59:56भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने
- 2:59:59का गौरव रखती हैं।
- 3:00:00यह दिखाता है कि कैसे एक राज्य की
- 3:00:02राजनीतिक समझ पूरे देश की दिशा तय कर सकती
- 3:00:04है। लेकिन इस पूरी राजनीतिक व्यवस्था को
- 3:00:06चलाने वाला इंजन क्या है?
- 3:00:08जैसा कि हम दिशांत आईएएस में पढ़ाते हैं।
- 3:00:10अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड
- 3:00:13देयर टीम। किसी भी राज्य के राजनीतिक
- 3:00:16चेहरों को जानने के साथ-साथ उसके
- 3:00:18संवैधानिक तंत्र को समझना सबसे ज्यादा अहम
- 3:00:21है।
- 3:00:21संवैधानिक तंत्र
- 3:00:23हां, अनुच्छेद 163 और 164 राज्य शासन की
- 3:00:27पूरी रीड है।
- 3:00:28हम
- 3:00:29अनुच्छेद 163 स्पष्ट करता है कि राज्यपाल
- 3:00:32को उनके कार्यों में सहायता और सलाह देने
- 3:00:35के लिए एक मंत्री परिषद होगी। और 164
- 3:00:39अनुच्छेद 164 मुख्यमंत्री और अन्य
- 3:00:42मंत्रियों की नियुक्ति का प्रावधान करता
- 3:00:44है।
- 3:00:44तो क्या मुख्यमंत्री अपनी मर्जी से कितने
- 3:00:46भी मंत्री बना सकते हैं? मतलब इसका कोई
- 3:00:48गणतीय नियम भी है?
- 3:00:49रैंकर्स फोकस हियर यहीं पर 91वां संविधान
- 3:00:53संशोधन 2003 में जो हुआ था, वह एक बहुत
- 3:00:57बड़ा बदलाव लेकर आया।
- 3:00:58क्या बदलाव था? इस संशोधन ने तय कर दिया
- 3:01:02कि किसी भी राज्य में मंत्रीपरिषद का आकार
- 3:01:05उस राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या
- 3:01:09के 15% से अधिक नहीं हो सकता।
- 3:01:1215%
- 3:01:12जी।
- 3:01:13तो अगर इसे हरियाणा के गणित पर लागू करें।
- 3:01:15विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं।
- 3:01:17हम
- 3:01:1890 का 15% होता है 13 1/2
- 3:01:21यानी 14
- 3:01:22एग्जैक्टली। जिसका मतलब है कि हरियाणा में
- 3:01:25अधिकतम 14 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं और
- 3:01:28छोटे राज्यों को ध्यान में रखते हुए
- 3:01:30न्यूनतम सीमा 12 मंत्रियों की तय की गई
- 3:01:33है।
- 3:01:34यह गणितीय प्रतिबंध व्यवस्था को संतुलित
- 3:01:36रखने के लिए बहुत जरूरी लगता है।
- 3:01:37हम
- 3:01:38वक्त का क्या है? 6 दिन में भी सरकार पलट
- 3:01:40जाती है। पर असली सफलता तो निरंतर मेहनत
- 3:01:43से ही आती है।
- 3:01:43तथ्य और तर्क का यह संतुलन ही सफलता की
- 3:01:47चाबी है।
- 3:01:47अब इसी मंत्री परिषद के काम करने के तरीके
- 3:01:50को एक 3D पिरामिड के जरिए देखते हैं।
- 3:01:52हम
- 3:01:53इस पिरामिड को स्पष्ट रूप से चार हिस्सों
- 3:01:56में बांटा गया है। सबसे ऊपरी सुनहरे
- 3:01:59हिस्से में कैबिनेट मंत्री हैं।
- 3:02:01जो सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
- 3:02:03उसके नीचे राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार
- 3:02:06हैं। फिर केवल राज्य मंत्री का स्तर है और
- 3:02:09सबसे नीचे उपमंत्री मौजूद है।
- 3:02:11यह पदानुक्रम शासन की जिम्मेदारियों को
- 3:02:14बांटता है। कैबिनेट मंत्री प्रमुख विभागों
- 3:02:17के अध्यक्ष होते हैं। लेकिन यहां एक बहुत
- 3:02:20बड़ा ट्रैप बुना जाता है और वह है संसदीय
- 3:02:23सचिव का पद।
- 3:02:24पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी क्या यह भी
- 3:02:27पिरामिड का कोई हिस्सा है? यही तो जाल है
- 3:02:30क्योंकि 91वें संशोधन ने मंत्रियों की
- 3:02:33संख्या 15% तक सीमित कर दी है। इसलिए कई
- 3:02:36बार सरकारें अपने विधायकों को खुश रखने के
- 3:02:39लिए
- 3:02:39उन्हें मंत्री तो बना नहीं सकती।
- 3:02:41तो उन्हें संसदीय सचिव नियुक्त कर देती
- 3:02:43हैं।
- 3:02:43अच्छा।
- 3:02:44इनकी नियुक्तियां सीधे मुख्यमंत्री द्वारा
- 3:02:46की जाती है और इन्हें मंत्री स्तर की
- 3:02:48सुविधाएं दी जाती हैं। लेकिन याद रखने
- 3:02:51वाली बात यह है कि इनका संविधान में कोई
- 3:02:53उल्लेख नहीं है।
- 3:02:55मतलब इनका कोई संवैधानिक दर्जा नहीं होता।
- 3:02:58बिल्कुल नहीं और तकनीकी रूप से यह मंत्री
- 3:03:00भी नहीं होते हैं। परीक्षा में अक्सर
- 3:03:02इन्हें मंत्रीपरिषद का हिस्सा मानकर सवाल
- 3:03:05फंसा दिया जाता है।
- 3:03:06यह तो सचमुच एक बहुत बड़ा लूप होल है। खैर
- 3:03:08कार्यपालिका के इस जटिल ढांचे को समझने के
- 3:03:11बाद अब न्यायपालिका की ऐतिहासिक यात्रा पर
- 3:03:14चलते हैं।
- 3:03:15हम
- 3:03:16यहां एक लंबी टाइमलाइन दी गई है जो 1919
- 3:03:19में लाहौर उच्च न्यायालय से शुरू होती है।
- 3:03:21जिसे लेटर्स पेटेंट के तहत स्थापित किया
- 3:03:24गया था।
- 3:03:24जी।
- 3:03:25ये लेटर्स पेटेंट क्या होता है? लेटर्स
- 3:03:27पेटेंट ब्रिटिश काल में ब्रिटिश राजशाही
- 3:03:29यानी क्राउन द्वारा जारी किया गया एक सीधा
- 3:03:33आदेश या विशेषाधिकार पत्र होता था।
- 3:03:35हम
- 3:03:36जिसके माध्यम से किसी भी महत्वपूर्ण
- 3:03:38संस्था या न्यायालय की आधिकारिक स्थापना
- 3:03:41की जाती थी। तो लाहौर उच्च न्यायालय की
- 3:03:44शुरुआत 1919 में वहीं से हुई।
- 3:03:46इसके बाद टाइमलाइन दिखाती है कि 1947 में
- 3:03:49विभाजन के समय अदालत को शिमला स्थानांतरित
- 3:03:52करना पड़ा।
- 3:03:52हां, क्योंकि लाहौर पाकिस्तान में चला गया
- 3:03:55था। इस 17 जनवरी 1955 को यह चंडीगढ़ आ गई
- 3:03:58हम
- 3:03:59और अंततः 1966 में संयुक्त उच्च न्यायालय
- 3:04:03बन गई।
- 3:04:04दिशांत आईएएस की कक्षाओं में हम हमेशा
- 3:04:06ऐतिहासिक मैपिंग पर बहुत जोर देते हैं। इस
- 3:04:10टाइमलाइन में एक बड़ा अलर्ट छुपा है।
- 3:04:12कैसा अलर्ट?
- 3:04:13चंडीगढ़ की जिस इमारत में आज ये उच्च
- 3:04:15न्यायालय स्थित है, वो केवल ईंट पत्थर का
- 3:04:18ढांचा नहीं है। इसका डिजाइन दुनिया के
- 3:04:20मशहूर आर्किटेक्ट ली कारबूजिए ने तैयार
- 3:04:24किया था। लीबूजी बहुत बड़ा नाम है।
- 3:04:26बिल्कुल वास्तुकला की इसी महानता और इसके
- 3:04:29ऐतिहासिक महत्व के कारण 2016 में इस इमारत
- 3:04:32को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा भी
- 3:04:35प्राप्त हुआ था।
- 3:04:36न्याय के इस मंदिर को जिन प्रमुख मुख्य
- 3:04:38न्यायाधीशों ने आकार दिया। उनमें सर
- 3:04:41शादीलाल का नाम प्रमुखता से स्क्रीन पर
- 3:04:43दिख रहा है। वो रेवाड़ी से ताल्लुक रखते
- 3:04:45थे। सर शादीलाल का नाम बहुत महत्वपूर्ण है
- 3:04:48क्योंकि वह 1920 में लाहौर उच्च न्यायालय
- 3:04:51के पहले भारतीय मुख्य न्यायाधीश बने थे।
- 3:04:54और स्वतंत्रता के समय
- 3:04:55स्वतंत्रता के समय यानी 1947 में
- 3:04:59न्यायमूर्ति रामलाल पहले सीजे बने।
- 3:05:02हम
- 3:05:02और जब 1966 में हरियाणा का अलग राज्य के
- 3:05:06रूप में गठन हुआ तब न्यायमूर्ति मेहर सिंह
- 3:05:10वहां के पहले मुख्य न्यायाधीश बने। इन सभी
- 3:05:13महान नामों के बीच एक नाम के अगले लाल रंग
- 3:05:16का अलर्ट मार्क है। न्यायमूर्ति वी
- 3:05:19रामस्वामी। ऐसा क्यों?
- 3:05:21यह एक बहुत बड़ा यूपीएससी अलर्ट है।
- 3:05:24न्यायमूर्ति वी रामस्वामी भारत के न्यायिक
- 3:05:27इतिहास के एकमात्र ऐसे न्यायाधीश हैं
- 3:05:30जिन्हें महाभियोग यानी इंपीचमेंट की
- 3:05:34कार्यवाही का सामना करना पड़ा था।
- 3:05:36उन पर महाभियोग चला था।
- 3:05:38हां। हालांकि संसद में मतदान के दौरान
- 3:05:41प्रस्ताव विफल हो गया था। लेकिन किसी भी
- 3:05:44न्यायाधीश पर महाभियोग चलना अपने आप में
- 3:05:47एक असाधारण घटना है।
- 3:05:49बिल्कुल।
- 3:05:50यह प्रक्रिया संविधान में इतनी जटिल
- 3:05:52जानबूझकर बनाई गई है ताकि न्यायपालिका की
- 3:05:56स्वतंत्रता बनी रहे और कोई भी न्यायाधीश
- 3:05:59बिना किसी डर के अपने फैसले सुना सके।
- 3:06:02न्यायपालिका की इसी गंभीरता और अनुच्छेदों
- 3:06:05के महत्व पर यह पंक्तियां याद आती हैं।
- 3:06:08अनुच्छेदों के समंदर में गोते जो लगाएगा
- 3:06:11पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी के जाल से वही
- 3:06:14बच पाएगा।
- 3:06:15यह समझ ही एक साधारण उम्मीदवार और एक टॉपर
- 3:06:18के बीच का अंतर तय करती है।
- 3:06:20इसी न्यायिक व्यवस्था के समानांतर राज्य
- 3:06:23का एक प्रथम विधि अधिकारी भी होता है।
- 3:06:26महाधिवक्ता यानी एडवोकेट जनरल
- 3:06:29जी। अनुच्छेद 165 के तहत इनका जिक्र है।
- 3:06:32सही है। और हरियाणा के इतिहास में पहले
- 3:06:35महाधिवक्ता बाबू आनंद स्वरूप थे।
- 3:06:37इनका मुख्य काम क्या होता है?
- 3:06:39राज्य सरकार को सभी कानूनी मामलों में
- 3:06:41सलाह देना और अदालतों में सरकार का पक्ष
- 3:06:44रखना इनका मुख्य काम होता है।
- 3:06:46इसी कानूनी व्यवस्था से जुड़ा एक और बिंदु
- 3:06:49यहां दिख रहा है। देश की पहली मोबाइल
- 3:06:51कोर्ट 4 अगस्त 2007 को हरियाणा के मेवात
- 3:06:55जिले के पन्हाना में इसे स्थापित किया गया
- 3:06:57था।
- 3:06:58हां। यह विचार कैसे आया?
- 3:07:00यह नवाचार तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश
- 3:07:03न्यायमूर्ति केजी बालकृष्णन के दिमाग की
- 3:07:05उपज थी। इसका उद्देश्य केवल एक बस में जज
- 3:07:09को बिठाना नहीं था।
- 3:07:10फिर क्या था?
- 3:07:11मेवात जिसे अब नूह कहते हैं। जैसे दूरदराज
- 3:07:14के इलाकों में जहां भौगोलिक और आर्थिक
- 3:07:17कारणों से लोग अदालतों तक नहीं पहुंच सकते
- 3:07:20थे, वहां न्याय प्रणाली को उनके दरवाजे तक
- 3:07:22ले जाना इसका मुख्य लक्ष्य था।
- 3:07:24न्याय आपके द्वार है।
- 3:07:26बिल्कुल। यह न्याय तक पहुंच की दिशा में
- 3:07:28एक बहुत ही क्रांतिकारी कदम था।
- 3:07:30यह सचमुच एक बेहतरीन पहल थी। चलिए अब
- 3:07:33राज्य के पूरे प्रशासनिक नक्शे को डिकोड
- 3:07:35करते हैं।
- 3:07:36हम
- 3:07:36पदानुक्रम कुछ इस तरह से है। पूरा राज्य
- 3:07:39छह मंडलों में बटा है यानी डिवीजंस में।
- 3:07:42फिर ये 22 जिलों में और फिर 94 तहसीलों
- 3:07:44में।
- 3:07:45जैसा कि हम दिशांत आईएएस में पढ़ाते हैं
- 3:07:47अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड
- 3:07:49देयर टीम। हम हमेशा प्रशासनिक मैपिंग पर
- 3:07:52जोर देते हैं। हम
- 3:07:53जब हम हरियाणा के इस प्रशासनिक नक्शे को
- 3:07:56देखते हैं तो पाते हैं कि सबसे बड़ा मंडल
- 3:07:58रोहतक है।
- 3:07:59क्योंकि इसमें जिलों की संख्या सर्वाधिक
- 3:08:01है।
- 3:08:02एक्सैक्टली। परीक्षा के लिहाज से यह तथ्य
- 3:08:04बहुत अहम है कि प्रशासन को और अधिक चुस्त
- 3:08:07दुरुस्त बनाने के लिए 2017 में दो नए मंडल
- 3:08:11जोड़े गए थे।
- 3:08:12कौन-कौन से?
- 3:08:13करनाल और फरीदाबाद।
- 3:08:15इसी प्रशासनिक ढांचे के साथ पुलिस
- 3:08:17व्यवस्था कैसे काम करती है? यहां तीन
- 3:08:19पुलिस आयुक्तालय यानी कमिश्नरेट्स और पांच
- 3:08:22पुलिस रेंजों का जिक्र है।
- 3:08:24बड़े शहरों में जहां अपराध की प्रकृति
- 3:08:27जटिल होती है, वहां पुलिस कमिश्नरेट
- 3:08:29सिस्टम लागू किया जाता है।
- 3:08:31हम
- 3:08:31हरियाणा में वर्तमान में गुरुग्राम,
- 3:08:33फरीदाबाद और पंचकूला में यह प्रणाली है।
- 3:08:36और यहां 22वें जिले के रूप में चरखी दादरी
- 3:08:38का नाम हाईलाइट किया गया है।
- 3:08:40यह एक महत्वपूर्ण अलर्ट है। चरखी दादरी को
- 3:08:43दिसंबर 2016 में भिवानी जिले से अलग करके
- 3:08:46बनाया गया था। अच्छा
- 3:08:48लोक सेवा आयोग हमेशा नए जिलों के गठन उनके
- 3:08:52भूगोल और उनके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से सवाल
- 3:08:55पूछता है।
- 3:08:56नक्शों और सीमाओं के इसी बदलाव पर यह
- 3:08:58शायरी बिल्कुल फिट बैठती है। मंजिलें
- 3:09:01उन्हीं को मिलती हैं जो नक्शे को दिल में
- 3:09:03बसाते हैं। नए जिलों की तरह वो अपना नया
- 3:09:05इतिहास बनाते हैं।
- 3:09:06नक्शे को समझना ही प्रशासन की पहली सीढ़ी
- 3:09:09है।
- 3:09:10प्रशासन को निष्पक्ष और सुचारू रूप से
- 3:09:12चलाने के लिए कुछ संवैधानिक संस्थाएं
- 3:09:15संरक्षक की भूमिका में होती हैं। हम
- 3:09:17यहां स्क्रीन पर दो प्रमुख संस्थाओं की
- 3:09:20तुलना की गई है। राज्य चुनाव आयोग जो कि
- 3:09:22अनुच्छेद 243 के तहत है और हरियाणा लोक
- 3:09:26सेवा आयोग यानी एचपीएससी अनुच्छेद 315
- 3:09:30रिमेंबर दिस यहां एक क्लासिक ट्रैप है
- 3:09:33जहां बहुत से छात्र अक्सर गलती कर बैठते
- 3:09:35हैं।
- 3:09:35क्या गलती?
- 3:09:36जब परीक्षा में पूछा जाता है कि राज्य
- 3:09:38विधानसभा के चुनाव कौन कराता है? तो छात्र
- 3:09:41अक्सर राज्य चुनाव आयोग पर टिक कर देते
- 3:09:43हैं।
- 3:09:43जबकि ऐसा नहीं है।
- 3:09:44बिल्कुल नहीं। राज्य चुनाव आयोग केवल
- 3:09:47पंचायत और नगर पालिका के चुनाव ही आयोजित
- 3:09:49कराता है।
- 3:09:50तो विधानसभा चुनाव
- 3:09:51विधानसभा चुनाव कराने की जिम्मेदारी भारत
- 3:09:53के चुनाव आयोग यानी ईसीआई की होती है।
- 3:09:56अच्छा ये एक बहुत बड़ा कंफ्यूजन पॉइंट है।
- 3:09:58हां। वहीं दूसरी ओर एचपीएससी जिसकी
- 3:10:01स्थापना 1 नवंबर 1966 को हुई थी। राज्य की
- 3:10:05सिविल सेवाओं के लिए अधिकारियों की भर्ती
- 3:10:07करता है।
- 3:10:07इन संवैधानिक निकायों के अलावा कुछ
- 3:10:10वैधानिक निकाय यानी स्टैच्यूटरी बॉडीज भी
- 3:10:12यहां सूचीबद्ध हैं।
- 3:10:14जी। जैसे लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और
- 3:10:17सेवा का अधिकार आयोग। यह निकाय आम नागरिक
- 3:10:21को कैसे ताकत देते हैं?
- 3:10:23लोकायुक्त जो 2002 अधिनियम के तहत है और
- 3:10:27जिसके पहले लोकायुक्त न्यायमूर्ति प्रीतम
- 3:10:30पाल थे। यह भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के
- 3:10:33लिए है।
- 3:10:33मानवाधिकार आयोग
- 3:10:34मानवाधिकार आयोग जो 2012 में बना और इसका
- 3:10:38मुख्यालय चंडीगढ़ में है। नागरिकों के
- 3:10:40अधिकारों की रक्षा करता है।
- 3:10:42और सेवा का अधिकार
- 3:10:43सेवा का अधिकार 2014 में आया और यह एक
- 3:10:46वास्तविक गेम चेंजर है।
- 3:10:48कैसे?
- 3:10:49इसने सत्ता का संतुलन बदल दिया है। अब एक
- 3:10:52नागरिक को अपना राशन कार्ड या निवास
- 3:10:54प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों
- 3:10:57के चक्कर नहीं काटने पड़ते। प्रशासन एक तय
- 3:11:00समय सीमा के भीतर यह सेवाएं देने के लिए
- 3:11:03कानूनी रूप से बाध्य है।
- 3:11:04यह तो सच में जवाबदेही का एक बेहतरीन
- 3:11:06उदाहरण है। तो अब तक हमने जो भी गहराई से
- 3:11:09समझा है, आइए उसे परखने के लिए एक दिमागी
- 3:11:11कसरत करते हैं।
- 3:11:12बिल्कुल।
- 3:11:13मान लीजिए मैं एक परीक्षक हूं और मुझे एक
- 3:11:15छात्र को फंसाने के लिए मुख्यमंत्री से
- 3:11:16जुड़ा एक एमसीक्यू बनाना है। मैं यह तीन
- 3:11:19कथन दूंगा।
- 3:11:20हम
- 3:11:20कथन एक पंडित भगवत दयाल शर्मा हरियाणा के
- 3:11:24पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री थे।
- 3:11:26ओके। कथन दो ओम प्रकाश चौटाला ने सबसे कम
- 3:11:29एकल कार्यकाल के लिए सीएम के रूप में
- 3:11:31कार्य किया और कथन तीन राव वीरेंद्र सिंह
- 3:11:34ने विशाल हरियाणा पार्टी की स्थापना की।
- 3:11:36अगर आप परीक्षक होते तो आपने बहुत ही
- 3:11:39चतुराई से पहला कथन बुना है।
- 3:11:41थैंक यू।
- 3:11:42ऐसे सवालों में एलिमिनेशन लॉजिक सबसे बड़ा
- 3:11:45हथियार होता है।
- 3:11:46कैसे काम करता है यह? अगर हम पहले कथन को
- 3:11:48ध्यान से देखें, तो यह एक बहुत बड़ा
- 3:11:51एग्जाम ट्रैप है। भगवत दयाल शर्मा जी
- 3:11:54राज्य के पहले मुख्यमंत्री जरूर थे, लेकिन
- 3:11:57वो मनोनीत थे यानी नॉमिनेटेड थे।
- 3:12:00निर्वाचित नहीं।
- 3:12:01निर्वाचित नहीं थे।
- 3:12:02नहीं। पहले निर्वाचित सीएम राव वीरेंद्र
- 3:12:05सिंह थे। इसलिए पहला कथन पूरी तरह से गलत
- 3:12:08हो जाता है
- 3:12:09और क्योंकि कथन दो और तीन ऐतिहासिक तथ्यों
- 3:12:12के आधार पर बिल्कुल सही है तो जिन
- 3:12:14विकल्पों में कथन एक मौजूद है उन्हें
- 3:12:17छात्र तुरंत हटा सकते हैं।
- 3:12:18बिल्कुल इस तरह सही उत्तर तक बिना किसी
- 3:12:22भ्रम के पहुंचा जा सकता है। भले ही आपको
- 3:12:25सभी तथ्यों की 100% जानकारी ना हो। इसी
- 3:12:29बौद्धिक कसरत के लिए कहा गया है। न्याय की
- 3:12:31इस चौखट पर फैसले बेमिसाल होते हैं और जो
- 3:12:35प्रीलिम्स ट्रैप समझ ले वही अफसर कमाल
- 3:12:38होते हैं।
- 3:12:38बहुत खूब।
- 3:12:39चलिए एक और चुनौती लेते हैं उच्च न्यायालय
- 3:12:41के बारे में।
- 3:12:42ठीक है।
- 3:12:42कथन एक इसे 1966 में चंडीगढ़ स्थानांतरित
- 3:12:46किया गया था। कथन दो सरस शादी लाल लाहौर
- 3:12:49उच्च न्यायालय के पहले भारतीय मुख्य
- 3:12:52न्यायाधीश थे और कथन तीन न्यायमूर्ति वी
- 3:12:55रामासवानी को महाभियोग की कारवाई का सामना
- 3:12:57करना पड़ा। जैसा कि दिशांत आईएएस में
- 3:13:00पढ़ाते हैं अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल
- 3:13:02प्रकाश सर एंड देयर टीम। टीम मॉक टेस्ट
- 3:13:05में ऐसे सवाल डिजाइन करती हैं जो तथ्यों
- 3:13:08की बहुत बारीक समझ की मांग करते हैं।
- 3:13:11हम
- 3:13:11अभी कुछ देर पहले ही हमने टाइमलाइन में
- 3:13:14चर्चा की थी कि अदालत को 1955 में ही
- 3:13:17चंडीगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया था।
- 3:13:201966 में नहीं।
- 3:13:211966 में तो केवल इसे एक संयुक्त उच्च
- 3:13:24न्यायालय का दर्जा मिला था। इसलिए पहला
- 3:13:27कथन गलत है
- 3:13:28और बाकी दो
- 3:13:29बाकी दोनों कथन ऐतिहासिक रूप से बिल्कुल
- 3:13:32सत्य हैं। इसी एलिमिनेशन तकनीक का प्रयोग
- 3:13:35करके सही उत्तर को आसानी से पहचाना जा
- 3:13:38सकता है।
- 3:13:39इस पूरी विस्तृत चर्चा के अंतिम हिस्से
- 3:13:41में मैं यहां एक 3D त्रिकोण मॉडल देख रहा
- 3:13:43हूं।
- 3:13:44ट्रायंगल मॉडल हां।
- 3:13:45इस त्रिकोण के तीन कोने हैं। शीर्ष पर
- 3:13:47कार्यपालिका है। एक तरफ विधायिका है और
- 3:13:50दूसरी तरफ न्यायपालिका है।
- 3:13:51हम
- 3:13:52यह त्रिकोण कैसे काम करता है? यह शासन का
- 3:13:54सबसे बेहतरीन चेक एंड बैलेंस मॉडल है।
- 3:13:57कार्यपालिका अपनी मनमानी नहीं कर सकती
- 3:14:00क्योंकि वह अनुच्छेद 164 के तहत सीधे तौर
- 3:14:03पर विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।
- 3:14:06और अगर कार्यपालिका या विधायिका कोई ऐसा
- 3:14:09कानून या आदेश पारित करती है जो
- 3:14:11असंवैधानिक है तो न्यायपालिका अनुच्छेद
- 3:14:14226 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते
- 3:14:17हुए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती
- 3:14:20है। मतलब कोई भी एक संस्था पूरी तरह से
- 3:14:22निरंकुश नहीं हो सकती।
- 3:14:24बिल्कुल और इसी त्रिकोणीय व्यवस्था के
- 3:14:27भीतर एचपीसी और लोकायुक्त जैसे निकाय काम
- 3:14:30करते हैं जो इस पूरे ढांचे में पारदर्शिता
- 3:14:33लाते हैं।
- 3:14:34तो आज के इस गहन विश्लेषण में हमने राव
- 3:14:37वीरेंद्र सिंह की पहली निर्वाचित सरकार से
- 3:14:39लेकर ओम प्रकाश चौटाला जी के छ दिन के
- 3:14:42कार्यकाल की बारीकियों को समझा। हम
- 3:14:44हमने उच्च न्यायालय के 1919 से लेकर
- 3:14:48यूनेस्को धरोहर बनने तक के सफर को देखा और
- 3:14:50यह भी समझा कि कैसे संसदीय सचिव जैसे पद
- 3:14:54और राज्य चुनाव आयोग से जुड़े सवाल
- 3:14:57परीक्षा में ट्रैप बन सकते हैं।
- 3:14:59शासन की यह व्यवस्था हमेशा विकसित होती
- 3:15:01रहती है। जाते-जाते गंभीर उम्मीदवारों के
- 3:15:04लिए एक विचार मंथन का बिंदु छोड़ना
- 3:15:06चाहूंगा।
- 3:15:07जी बिल्कुल। हमने देखा कि कैसे 2007 में
- 3:15:09मोबाइल कोड जैसे नवाचारों ने न्याय को
- 3:15:12समाज के निचले तबके तक सुलभ बनाया। तो जरा
- 3:15:15सोचने वाली बात है जब हम 1966 से आज तक के
- 3:15:19प्रशासनिक विकास को देखते हैं
- 3:15:21हम
- 3:15:22तो क्या भविष्य में तकनीक जैसे मोबाइल कोड
- 3:15:24का अगला चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस
- 3:15:28शासन के त्रिकोण को और अधिक पारदर्शी और
- 3:15:30त्वरित बना सकती हैं? यह तो मुख्य परीक्षा
- 3:15:32के लिए एक शानदार विचारणीय प्रश्न है।
- 3:15:34बिल्कुल। और अंत में जैसा कि राहुल प्रकाश
- 3:15:37सर हमेशा कहते हैं, सफलता छोटे-छोटे
- 3:15:40प्रयासों का योग है जिन्हें दिन रात
- 3:15:43दोहराया जाता है।
- 3:15:44इन्हीं विचारणीय प्रश्नों और प्रेरणा के
- 3:15:46साथ हम आज के इस बौद्धिक सफर को यहीं
- 3:15:48विराम देते हैं। मंजिल भी जिद्दी है,
- 3:15:51रास्ते भी जिद्दी हैं। देखते हैं कल क्या
- 3:15:55होगा क्योंकि हमारे हौसले भी जिद्दी हैं।
- 3:15:57दिस लेक्चर वास बाय दी आईएएस। हरियाणा
- 3:16:01सामान्य अध्ययन के उस हिस्से में गोता
- 3:16:03लगाते हैं जो मतलब अक्सर एक अच्छे खासे
- 3:16:06स्कोर को भी ऊपर नीचे कर सकता है। राज
- 3:16:08व्यवस्था भूगोल और अपवाह तंत्र यानी
- 3:16:12ड्रेनेज सिस्टम। बिल्कुल और आज हमारे पास
- 3:16:14दिशांत आईएएस और राहुल प्रकाश सर के
- 3:16:17मार्गदर्शन में तैयार किए गए कुछ बहुत ही
- 3:16:20शानदार और विस्तृत नोट्स हैं।
- 3:16:22हम्म और मकसद बिल्कुल साफ है इन भारीभरकम
- 3:16:25स्रोतों को डिकोड करना और वो नगेट्स
- 3:16:27निकालना जो परीक्षा के नजरिए से गेम चेंजर
- 3:16:30होते हैं।
- 3:16:30राइट? राज्य की प्रशासनिक मशीनरी कैसे काम
- 3:16:33करती है या फिर नदियां और पहाड़ वहां की
- 3:16:36पूरी इकॉनमी को कैसे दिशा देते हैं? ये
- 3:16:38मतलब सिर्फ रटने वाली चीजें नहीं है।
- 3:16:40हां, आधी तैयारी वैसी ही हो जाती है अगर
- 3:16:43इसके पीछे का लॉजिक समझ लिया जाए।
- 3:16:45एक्जेक्टली। कई बार बड़े-बड़े कांसेप्ट्स
- 3:16:47तो पढ़ लिए जाते हैं लेकिन वो छोटे-छोटे
- 3:16:49फैक्ट्स मिस हो जाते हैं जो एक प्रशासक के
- 3:16:51नजरिए से बहुत जरूरी हैं।
- 3:16:53सही कहा। मुझे इन नोट्स में पंचायती राज
- 3:16:55वाले सेक्शन से एक बहुत ही मजेदार लाइन
- 3:16:57मिली जो असल में एक एग्जाम ट्रैप की तरफ
- 3:17:00इशारा करती है।
- 3:17:01अच्छा वो कौन सी लाइन है? तारीखों के जाल
- 3:17:03में कुछ ऐसे उलझे हम नोटिफिकेशन और लागू
- 3:17:07होने के फर्क में सारा अटेम्प्ट गवा बैठे
- 3:17:10हम। ये 1994 के हरियाणा पंचायती राज
- 3:17:13अधिनियम की बात हो रही है ना?
- 3:17:14हां। और ये बहुत ही सटीक बात है। यह एक
- 3:17:17ऐसा ट्रैप है जहां अच्छे-अच्छे सीरियस
- 3:17:20एस्पिरेंट्स गलती कर बैठते हैं।
- 3:17:21तो मतलब ये विकास कैसे हुआ? ये पूरी
- 3:17:23टाइमलाइन क्या है?
- 3:17:24देखिए अगर हम पंचायती राज के विकास को
- 3:17:26देखें तो ये कोई एक दिन का काम नहीं था।
- 3:17:281952 के पंजाब ग्राम पंचायत अधिनियम से
- 3:17:32गाड़ी शुरू हुई।
- 3:17:33फिर 1961 के पंचायत समिति अधिनियम से होते
- 3:17:36हुए हम 1994 के उस ऐतिहासिक अधिनियम तक
- 3:17:40पहुंचे। यह वो समय था जब मुख्यमंत्री
- 3:17:42भजनलाल सत्ता में थे।
- 3:17:44तो वो तारीखों वाला ट्रैप क्या है? मैंने
- 3:17:46पढ़ा कि 21 अप्रैल को कुछ हुआ था और 22
- 3:17:47अप्रैल को कुछ और। रैंकर्स यहीं फोकस करते
- 3:17:50हैं। किसी भी कानून के पन्नों पर छपने
- 3:17:52यानी नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख और
- 3:17:55उसके असल में जमीन पर लागू होने की तारीख
- 3:17:58में फर्क होता है।
- 3:17:59अच्छा
- 3:17:591994 के इस अधिनियम का नोटिफिकेशन 21
- 3:18:03अप्रैल को आया था। लेकिन यह फोर्स में
- 3:18:06यानी लागू हुआ 22 अप्रैल को।
- 3:18:08तो परीक्षक ऑप्शंस में 21 अप्रैल जरूर
- 3:18:10देंगे।
- 3:18:11बिल्कुल। सिर्फ यह चेक करने के लिए कि
- 3:18:13गहराई से पढ़ा गया है या सिर्फ ऊपर ऊपर
- 3:18:15से। तो लागू होने की डेट 22 अप्रैल 1994
- 3:18:18ही दिमाग में फिक्स करनी है। इसके बाद जो
- 3:18:20स्ट्रक्चर बना है वो त्रिस्तरीय यानी थ्री
- 3:18:23टियर प्रणाली है।
- 3:18:24हां नोट्स में इसे एक पिरामिड की तरह
- 3:18:27समझाया गया है। सबसे ऊपर जिला परिषद बीच
- 3:18:30में पंचायत समिति और बेस में ग्राम
- 3:18:33पंचायत। हम
- 3:18:34जिला स्तर पर जिला परिषद है जिसका मुखिया
- 3:18:37चेयरमैन कहलाता है। ब्लॉक स्तर पर पंचायत
- 3:18:40समिति है वहां भी मुखिया चेयरमैन ही होता
- 3:18:42है।
- 3:18:42और जो इस पिरामिड का बेस है
- 3:18:44ग्राम पंचायत वहां मुखिया सरपंच होता है
- 3:18:47और यहां एक प्रीलिम्स अलर्ट है।
- 3:18:50ग्राम पंचायत के स्तर पर
- 3:18:51वो क्या एक ग्राम पंचायत में न्यूनतम छह
- 3:18:55और अधिकतम 20 पंच होने ही चाहिए। अच्छा 6
- 3:18:58से 20
- 3:18:59यह कोई गाइडलाइन नहीं है। यह एक सख्त
- 3:19:02मैंडेट है। आबादी बहुत कम है तब भी छह पंच
- 3:19:06तो चुनने ही होंगे। बहुत बड़ा गांव है तो
- 3:19:09भी 20 से ज्यादा पंच नहीं रख सकते।
- 3:19:12यह बहुत इंटरेस्टिंग है। चलिए इसी अधिनियम
- 3:19:15से जुड़े एक एमसीक्यू पर नजर डालते हैं जो
- 3:19:17नोट्स में दिया है।
- 3:19:18हां बताइए।
- 3:19:19इसमें तीन स्टेटमेंट्स हैं। पहला यह 22
- 3:19:21अप्रैल 1994 को लागू हुआ। दूसरा इसने
- 3:19:24राज्य में द्विस्तरीय यानी टू टियर सिस्टम
- 3:19:27बनाया और तीसरा इसका अध्याय 19 सरपंच के
- 3:19:30कर्तव्यों से जुड़ा है।
- 3:19:31देखिए यहां पर एलिमिनेशन लॉजिक बहुत काम
- 3:19:34आता है। अभी डिस्कस हुआ कि ये पिरामिड तीन
- 3:19:37स्तर का है।
- 3:19:38राइट?
- 3:19:38तो दूसरा स्टेटमेंट जो द्विस्तरीय कह रहा
- 3:19:40है वो तो सीधा-सीधा गलत हो गया।
- 3:19:42मतलब जिन भी ऑप्शंस में स्टेटमेंट टू है
- 3:19:44वो रेस से बाहर हो गए।
- 3:19:45एब्सोलुटली। और पहला स्टेटमेंट हम जानते
- 3:19:48हैं कि 22 अप्रैल वाला फैक्ट बिल्कुल सही
- 3:19:50है।
- 3:19:50और तीसरा स्टेटमेंट
- 3:19:51हां अधिनियम का अध्याय 19 विशेष रूप से
- 3:19:55सरपंच की ड्यूटीज को डिफाइन करता है।
- 3:19:57तो बिना सीधा जवाब बताए भी गलत स्टेटमेंट
- 3:20:00को बाहर कर दें तो सही कॉम्बिनेशन यानी
- 3:20:03केवल वन और थ्री तक पहुंचा जा सकता है।
- 3:20:05यह एलिमिनेशन वाली ट्रिक सच में लाइफ सेवर
- 3:20:08है।
- 3:20:08हम अब गांव से थोड़ा बाहर निकलते हैं और
- 3:20:11शहरों की बात करते हैं।
- 3:20:12शहरी स्थानीय निकाय यानी अर्बन लोकल
- 3:20:15बॉडीज। इसका क्लासिफिकेशन तो पूरी तरह से
- 3:20:18जनसंख्या पर बेस्ड है।
- 3:20:19हां, यह पूरी तरह से पपुलेशन का गेम है।
- 3:20:22इसे तीन कैटेगरीज में बांटा गया है।
- 3:20:24हम 3 लाख से ऊपर जनसंख्या है तो वहां
- 3:20:27बनेगा नगर निगम। 500 से 3 लाख के बीच है
- 3:20:30तो वहां नगर परिषद होगी और 500 से कम की
- 3:20:33आबादी है तो नगर पालिका काम करेगी। और
- 3:20:36दिशांत आईएएस में राहुल प्रकाश सर और उनकी
- 3:20:39टीम के मार्गदर्शन में हमेशा यह सिखाया
- 3:20:42जाता है कि करंट अफेयर्स और स्टैटिक पिटी
- 3:20:44को जोड़कर पढ़ना चाहिए।
- 3:20:46एकदम सही पॉइंट। इसी से जुड़ा एक बड़ा
- 3:20:48अपडेट है मानेसर के बारे में।
- 3:20:50वर्ष 2020 में मानेसर को हरियाणा का 11वां
- 3:20:53नगर निगम घोषित किया गया। हां, यह राज्य
- 3:20:55का सबसे नया नगर निगम है। प्रशासनिकी
- 3:20:59ढांचे में जब भी ऐसा नया बदलाव होता है,
- 3:21:01तो वह एग्जामिनर का फेवरेट टॉपिक बन जाता
- 3:21:04है।
- 3:21:04माने सर का इंडस्ट्रियल महत्व भी बहुत
- 3:21:06ज्यादा है। तो उसका नगर निगम बनना लॉजिकल
- 3:21:08भी लगता है।
- 3:21:09लेकिन पॉलिटी वाले हिस्से में एक और
- 3:21:11हिस्टोरिक अमेंडमेंट का जिक्र है। 2015 का
- 3:21:15शैक्षिक संशोधन।
- 3:21:16राजस्थान के बाद हरियाणा दूसरा ऐसा राज्य
- 3:21:18बना जिसने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए
- 3:21:21पढ़ाई की शर्त रख दी।
- 3:21:22यह सिर्फ एक नियम नहीं था। यह जमीनी स्तर
- 3:21:25पर एक बहुत बड़ा पॉलिटिकल शिफ्ट था।
- 3:21:27इसके क्राइटेरिया बहुत क्लियर थे। राइट?
- 3:21:29हां, जनरल कैटेगरी के लिए 10वीं पास होना
- 3:21:31अनिवार्य है। एससी कैटेगरी और महिलाओं के
- 3:21:33लिए यह शर्त आठवीं पास रखी गई।
- 3:21:35और एससी महिलाओं के लिए
- 3:21:36उनके लिए इसे पांचवी पास रखा गया।
- 3:21:38लेकिन एक सवाल दिमाग में आता है। भारत
- 3:21:40जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां चुनाव
- 3:21:43लड़ना सबका हक है, वहां ऐसी शर्तें क्यों
- 3:21:45लगाई गई? यह बहुत ही वैलिड डिबेट है।
- 3:21:48लेकिन अगर एक एडमिनिस्ट्रेटर के नजरिए से
- 3:21:50सोचा जाए तो एक सरपंच आज लाखों करोड़ों
- 3:21:54रुपए का बजट हैंडल कर रहा है।
- 3:21:56हम विकास कार्यों की रूपरेखा बनानी है।
- 3:21:58बिल पास करने हैं। हिसाब किताब रखना है।
- 3:22:01ऐसे में वित्तीय प्रबंधन और दस्तावेजीकरण
- 3:22:04की एक बेसिक समझ होना जरूरी है। यह
- 3:22:07अमेंडमेंट उसी एडमिनिस्ट्रेटिव एफिशिएंसी
- 3:22:10को लाने के लिए किया गया था।
- 3:22:11मेक सेंस। सिस्टम चलाना है तो बेसिक पढ़ाई
- 3:22:14तो आनी ही चाहिए। अब यह तो बात हो गई कि
- 3:22:16प्रशासन कैसे चलता है।
- 3:22:18लेकिन यह प्रशासन जिस जमीन पर चल रहा है,
- 3:22:20उसका भूगोल भी तो उतना ही पेचीदा है।
- 3:22:23और इसी बात पर एक और लाइट हार्टेड पंक्ति
- 3:22:25जो मुझे एक एस्पिरेंट के नोट्स में दिखी
- 3:22:26शिवालिक की ऊंचाइयों सा कट ऑफ का डर है।
- 3:22:29अरावली की तरह तब कर ही लबसना का सफर है।
- 3:22:33यह कट ऑफ का डर सच में शिवालिक जितना ही
- 3:22:35ऊंचा होता है।
- 3:22:36तो चलिए हरियाणा की स्थलाकृति और भूगोल को
- 3:22:39डिकोड करते हैं।
- 3:22:40अम हम हरियाणा के बुनियादी भौगोलिक
- 3:22:42विस्तार की बात करें। हम
- 3:22:44तो इसका अक्षांशीय विस्तार 27° 39 मिनट
- 3:22:49नॉर्थ से 30° 55 मिनट नॉर्थ है।
- 3:22:52और देशांतरीय विस्तार 74° 27 मिनट ईस्ट से
- 3:22:5677° 36 मिनट ईस्ट है।
- 3:22:59ये नंबर्स याद रखना थोड़ा मुश्किल है।
- 3:23:01लेकिन इसका जो कुल क्षेत्रफल है 44,212
- 3:23:05वर्ग कि.मी. वो याद रखना आसान है।
- 3:23:08पूरे भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का ये
- 3:23:11सिर्फ 1.34%
- 3:23:13है। लेकिन जो चीज मुझे सबसे ज्यादा
- 3:23:15फैसिनेट करती है वो है इसका भू आवेष्ठित
- 3:23:19यानी लैंड लॉक्ड होना। हां, यह इसकी सबसे
- 3:23:22बड़ी ज्योग्राफिकल आईडेंटिटी है।
- 3:23:24मतलब
- 3:23:24भू-आवेष्ठित यानी इसकी सीमाएं ना तो किसी
- 3:23:27अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से लगती हैं और ना
- 3:23:30ही इसके पास कोई समुद्र तट है। यह पूरी
- 3:23:33तरह से दूसरे भारतीय राज्यों से घिरा हुआ
- 3:23:35है।
- 3:23:36और इसी वजह से इसकी स्थलाकृति में एक अजीब
- 3:23:38सा संघर्ष देखने को मिलता है।
- 3:23:40उत्तर पूर्व और दक्षिण के बीच का
- 3:23:42कंट्रास्ट नॉर्थ ईस्ट में शिवालिक की
- 3:23:44पहाड़ियां हैं। इसे याद रखने के लिए हम पे
- 3:23:48यानी पी ए वाई का फार्मूला इस्तेमाल करते
- 3:23:50हैं। पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर।
- 3:23:53बिल्कुल। यह वो इलाका है जहां अच्छी खासी
- 3:23:56बारिश होती है और राज्य की कई प्रमुख
- 3:23:59नदियां यहीं से जन्म लेती है।
- 3:24:00और यहीं पर मोरनी हिल्स भी हैं जहां राज्य
- 3:24:03की सबसे ऊंची चोटी करो है।
- 3:24:06लेकिन वेट। इस करो चोटी की ऊंचाई को लेकर
- 3:24:09नोट्स में एक बहुत बड़ा एग्जाम ट्रैप
- 3:24:11मेंशन किया गया है।
- 3:24:12हां, दो अलग-अलग ऊंचाइयां दी गई हैं।
- 3:24:14सीरियस एस्पिरेंट्स इसे जरूर मार्क करें।
- 3:24:17सर्वे ऑफ इंडिया और जो एक्चुअल
- 3:24:19ज्योग्राफिकल डाटा है, उसके हिसाब से करो
- 3:24:22चोटी की ऊंचाई 1467 मीटर्स है।
- 3:24:25ओके। 1467
- 3:24:27लेकिन हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग यानी
- 3:24:30एचएससी अपनी ऑफिशियल आंसर की में इसे 1514
- 3:24:34मीटर मानता है।
- 3:24:35ओहो मतलब अगर एग्जाम में 1514 ऑप्शन में
- 3:24:38है तो उसी पर टिक करना है क्योंकि आयोग
- 3:24:41उसी को सच मानता है।
- 3:24:42बिल्कुल आपको वो जवाब देना है जो नंबर
- 3:24:44दिलाए। वहीं अगर राज्य के दक्षिण की तरफ
- 3:24:48जाएं तो वहां अरावली का विस्तार है।
- 3:24:50गुरुग्राम, मेवात और महेंद्रगढ़ के इलाकों
- 3:24:53में। शिवालिक के बिल्कुल उलट यह इलाका
- 3:24:56सूखा है, पथरीला है। असल में यह
- 3:24:59प्रायद्वीपीय पठार का ही हिस्सा है।
- 3:25:01प्रायद्वीपीय पठार मतलब जो सेंट्रल और
- 3:25:03साउथ इंडिया का पठारी हिस्सा है। अरावली
- 3:25:06उसी का एक एक्सटेंशन है जो हरियाणा तक
- 3:25:08पहुंच रहा है।
- 3:25:08एक्सैक्टली। और इस अरावली क्षेत्र की जो
- 3:25:11सबसे ऊंची चोटी हरियाणा में है वो है
- 3:25:14ढोंसी हिल जो नारनौल में स्थित है।
- 3:25:17नॉर्थ में बारिश वाली शिवालिक और साउथ में
- 3:25:20सूखी अरावली। और इन दोनों के बीच में जो
- 3:25:23मैदानी इलाका है उसका वर्गीकरण भी बहुत
- 3:25:25साइंटिफिक है।
- 3:25:26दिशांत आईएएस के नोट्स में बांगर और खादर
- 3:25:30के बीच का फर्क बहुत खूबसूरती से समझाया
- 3:25:32गया है।
- 3:25:33यह सोइल और एग्रीकल्चर के हिसाब से बहुत
- 3:25:35क्रिटिकल कांसेप्ट है।
- 3:25:36बांगर वो पुरानी जलोढ़ मिट्टी है जो ऊंचाई
- 3:25:39पर होती है। ऊंचाई पर होने के कारण यहां
- 3:25:42हर साल नदियों के बाढ़ का पानी नहीं पहुंच
- 3:25:44पाता।
- 3:25:45इसलिए यह थोड़ी कम उपजाऊ होती है। लेकिन
- 3:25:47यहां बाढ़ का खतरा भी नहीं रहता। और खादर
- 3:25:49इसका ठीक उल्टा है। नई जलोढ़ मिट्टी। यह
- 3:25:53नदियों के बिल्कुल करीब का निचला इलाका
- 3:25:56होता है।
- 3:25:56तो यह एरिया बहुत ज्यादा फर्टाइल होता है।
- 3:25:58और दिशांत आईएएस में राहुल प्रकाश सर के
- 3:26:01मार्गदर्शन में हमेशा ये एडवाइस दी जाती
- 3:26:03है कि इन मैदानों के स्थानीय नाम जरूर पता
- 3:26:06होने चाहिए। क्योंकि मैचिंग वाले क्वेश्चन
- 3:26:08यहीं से बनते हैं।
- 3:26:08जैसे मार्कंडा नदी जो बाढ़ के मैदान बनाती
- 3:26:11है उसे लोकली बेट कहा जाता है।
- 3:26:13और घग्गर नदी के बाढ़ के मैदानों को नैली
- 3:26:15कहा जाता है।
- 3:26:16बेट और नैली ये नाम बहुत यूनिक है।
- 3:26:19इसी तरह ज्योग्राफर डॉ. जसबीर सिंह की
- 3:26:22किताब एन एग्रीकल्चरल ज्योग्राफी ऑफ
- 3:26:24हरियाणा का भी जिक्र है।
- 3:26:25उन्होंने राज्य को आठ कृषि भौगोलिक भागों
- 3:26:28में बांटा है।
- 3:26:28और इसमें एक टर्म आया गिरीपाद या पीडमंट
- 3:26:32जलोढ़ मैदान।
- 3:26:33यह गिरीपाद क्या होता है? गिरीपाद को अगर
- 3:26:35तोड़ें तो गिरी मतलब पहाड़ और पाद मतलब पैर
- 3:26:38यानी पहाड़ों के बिल्कुल निचले हिस्से
- 3:26:40वाला मैदान जहां ढलान खत्म होती है और
- 3:26:43प्लेन शुरू होता है।
- 3:26:44अच्छा
- 3:26:44कालका और नारायणगढ़ के इलाकों में इस
- 3:26:47गिरीपाद मैदान को स्थानीय लोग घर कह के
- 3:26:50बुलाते हैं।
- 3:26:51अमेजिंग। अब अगर दूसरे एमसीक्यू की तरफ
- 3:26:53देखा जाए जो नोट्स में है तो उसमें यही
- 3:26:56मैचिंग करनी है।
- 3:26:57एक तरफ घग्गर के मैदान, गिरीपाद मैदान और
- 3:27:00अरावली की चोटी है।
- 3:27:01अब तो यह बहुत आसान हो गया। घगर का मैदान
- 3:27:04मतलब नेली, गिरिपाद मैदान मतलब घर और
- 3:27:08अरावली की सबसे ऊंची चोटी डोसी हिल।
- 3:27:11देखिए जब कांसेप्ट्स क्लियर होते हैं तो
- 3:27:13भारीभरकम एमसीक्यू भी सिर्फ एक सिंपल पजल
- 3:27:16बन जाते हैं।
- 3:27:17सच में मिट्टी और मैदानों की बात हो गई।
- 3:27:19अब बात करते हैं उस चीज की जो इन मैदानों
- 3:27:21को जिंदा रखती है। अपवाह तंत्र यानी
- 3:27:24नदियां।
- 3:27:25बिल्कुल। और यहां नदियों पर एक छोटी सी
- 3:27:27शायरी बनती है। यमुना सी बहती रहे निरंतर
- 3:27:30यह मेहनत हमारी। घग्गर की तरह सूखी ना
- 3:27:33पड़े बीच रास्ते में यह तैयारी।
- 3:27:35बहुत खूब। अपवाह तंत्र में यमुना का जो
- 3:27:37रुतबा है वह किसी और नदी का नहीं है।
- 3:27:40यह यमुनानगर के ताजेवाला या कालेसर वन
- 3:27:43क्षेत्र से एंट्री लेती है।
- 3:27:45सबसे बड़ा फैक्ट यह है कि यह हरियाणा और
- 3:27:47उत्तर प्रदेश के बीच लगभग 320 कि.मी. लंबी
- 3:27:51एक नेचुरल बाउंड्री बनाती है।
- 3:27:53और पलवल के हसनपुर से राज्य से बाहर निकल
- 3:27:56जाती है।
- 3:27:57इसे राज्य की एकमात्र सदानीरा यानी
- 3:28:00बारामासी नदी कहा जाता है जिसमें पूरे साल
- 3:28:04पानी रहता है। बाकी नदियां तो मौसमी है।
- 3:28:06बारिश हुई तो पानी आया वरना सूख गई।
- 3:28:09अब अगर हम उत्तरी नदियों को देखें तो
- 3:28:12घग्गर और सरस्वती सबसे प्रमुख है।
- 3:28:14घगर नदी हिमाचल प्रदेश के डकशाही से
- 3:28:17निकलती है।
- 3:28:18सिरसा में यह एक बहुत ही क्रिटिकल बैराज
- 3:28:20बनाती है। ओ टू बैराज जिसे विराज बंद भी
- 3:28:23कहते हैं।
- 3:28:23और फिर आगे जाके राजस्थान के हनुमानगढ़
- 3:28:26में विलुप्त हो जाती है।
- 3:28:27यहां एक बहुत ही इंटरेस्टिंग हिस्टोरिकल
- 3:28:29और ज्योग्राफिकल एग्जाम ट्रैप है।
- 3:28:31वो क्या? यही घगर नदी जब बॉर्डर पार करके
- 3:28:34पाकिस्तान में जाती है तो वहां इसे घग्गर
- 3:28:37नहीं कहते। वहां इसे हाकरा के नाम से जाना
- 3:28:39जाता है।
- 3:28:40यह वही हाकरा है जिसका जिक्र सिंधु घाटी
- 3:28:43सभ्यता में घग्गर हाकरा तंत्र के रूप में
- 3:28:46होता है।
- 3:28:47दूसरी तरफ सरस्वती नदी का उद्गम यमुनान
- 3:28:50नगर के आदिबद्री से माना जाता है।
- 3:28:52वेदों में इसका बहुत महत्व है और हाल ही
- 3:28:54में मुगला वाली में जो खुदाई हुई वहां
- 3:28:56इसके प्राचीन मार्ग के सबूत मिले हैं।
- 3:28:58ये इसे आर्ट एंड कल्चर और करंट अफेयर्स
- 3:29:00दोनों के लिए इंपॉर्टेंट बनाता है।
- 3:29:02इन बड़ी नदियों की कुछ ट्रिब्यूटरीज यानी
- 3:29:04सहायक नदियां भी तो हैं जैसे मार्कंडा और
- 3:29:06टांगरी। हां, मार्कंडा नदी जिसका पुराना
- 3:29:09नाम अरुणा था, यह पेहोवा के पास सनीसा झील
- 3:29:12में जाकर सरस्वती नदी में मिल जाती हैं।
- 3:29:14लेकिन जिस नदी पर रैंकर्स फोकस करते हैं
- 3:29:17वो है टांगरी। टांगरी में ऐसा क्या खास
- 3:29:19है?
- 3:29:19टांगरी एकमात्र ऐसी नदी है जिसका ओरिजिन
- 3:29:22यानी उद्गम हरियाणा के अंदर से ही होता है
- 3:29:25मोरनी हिल्स से। और यहां एक कंफ्यूजन रहता
- 3:29:28है कि टांगरी सीधे घगर में जाकर मिलती है।
- 3:29:30लेकिन नहीं यह एक एग्जाम ट्रैप है। टांगरी
- 3:29:33पहले मार्कंडा में मिलती है और फिर वो आगे
- 3:29:36जाकर अपना सफर तय करती हैं।
- 3:29:37अच्छा तो टांगरी से मार्कंडा और फिर
- 3:29:40सरस्वती यह फ्लो याद रखना है।
- 3:29:42अब अगर दक्षिण की तरफ जाएं अरावली तंत्र
- 3:29:45की नदियों पर वहां साहिबी नदी का बहुत नाम
- 3:29:48है।
- 3:29:48साहिबी नदी जयपुर की सेवर पहाड़ियों से
- 3:29:50निकलती है।
- 3:29:51यह रेवाड़ी से हरियाणा में आती है। मशहूर
- 3:29:54मसानी बैराज को पानी देती है।
- 3:29:56और माना जाता है कि आखिर में दिल्ली के
- 3:29:58नजफगढ़ नाले में जाकर मिल जाती है।
- 3:30:00और इसी साहिबी नदी में मेवात के इंदौर
- 3:30:03किले के पास से निकलने वाली इंदोरी नदी
- 3:30:06आकर मिलती है।
- 3:30:07इसके अलावा एक दोहन नदी भी है जो भृगु ऋषि
- 3:30:10की प्राचीन मान्यताओं से जुड़ी हुई है।
- 3:30:12अब इन नदियों के उद्गम स्थलों पर जो तीसरा
- 3:30:15एमसीक्यू है उसे देखते हैं। इसमें गलत
- 3:30:17युग्म पहचानना है। ऑप्शंस हैं, मार्कंडा
- 3:30:20और अरुणा, टांगरी और मोरनी हिल्स, और
- 3:30:23साहिबी और आदि बद्री।
- 3:30:25अगर पिछले 10 मिनट ध्यान से सुने गए हैं,
- 3:30:27तो एलिमिनेशन की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 3:30:30मार्कंडा का पुराना नाम अरुणा है। यह
- 3:30:32करेक्ट है। टांगरी मॉर्निंग हिल से निकलती
- 3:30:34है। यह भी करेक्ट है।
- 3:30:35लेकिन साहिबी और आदिबदरी वाला पेयर गलत
- 3:30:38है।
- 3:30:38आदि बद्री तो सरस्वती का उद्गम है। साहिबी
- 3:30:40तो जयपुर से आती है।
- 3:30:42बिल्कुल। इस तरह से अगर फ्लो चार्ट्स और
- 3:30:45मैप्स के थ्रू ड्रेनेज सिस्टम पढ़ा जाए
- 3:30:47जैसा दिशांत आईएस के नोट्स में दिया है तो
- 3:30:50यह फैक्ट्स रटने नहीं पड़ते।
- 3:30:52क्या बात है। तो चलिए आज जितना भी कुछ
- 3:30:54डिकोड हुआ है उसका एक 360° रिवीजन चीटशीट
- 3:30:57बना लेते हैं।
- 3:30:57सबसे पहले 1994 का पंचायत अधिनियम 21 को
- 3:31:02नोटिफाई हुआ लेकिन लागू 22 अप्रैल को हुआ।
- 3:31:04ग्राम पंचायत में कम से कम छह और ज्यादा
- 3:31:07से ज्यादा 20 पंच हो सकते हैं। मानेसर
- 3:31:102020 में 11वां नगर निगम बना।
- 3:31:122015 में पंचायत चुनाव के लिए पढ़ाई की
- 3:31:15शर्त अनिवार्य कर दी गई। भूगोल में देखा
- 3:31:18गया कि राज्य का क्षेत्रफल पूरे भारत का
- 3:31:201.34%
- 3:31:22है और यह एक भू अवेष्टित राज्य है।
- 3:31:25करोहर चोटी की ऊंचाई का विवाद एचएसएससी के
- 3:31:27अनुसार 1514 मीटर असल में 1467 मीटर याद
- 3:31:32रखना है।
- 3:31:33स्थानीय नामों में गिरीपाद को घर मार्कंडा
- 3:31:36के मैदानों को बेठ और घगर के मैदानों को
- 3:31:39नैली कहा जाता है।
- 3:31:40और नदियों में यमुना बारामासी है। घग्गर
- 3:31:43पाकिस्तान में हाकरा कहलाती है। और टांगरी
- 3:31:46एकमात्र नदी है जो हरियाणा यानी मॉरनी
- 3:31:49हिल्स से ही निकलती है।
- 3:31:50इस डीप ड्राइव में इतने सारे फैक्ट्स थे
- 3:31:53लेकिन जब डॉट्स को कनेक्ट किया जाता है तो
- 3:31:55सब समझ आने लगता है।
- 3:31:57मुझे दिशांत आईएएस के नोट्स की शुरुआत में
- 3:31:59लिखी एक बात बहुत अच्छी लगी। सफलता अंतिम
- 3:32:02नहीं है। असफलता घातक नहीं है। यह जारी
- 3:32:05रखने का साहस है जो मायने रखता है।
- 3:32:07यह साहस ही है जो एक एस्पिरेंट को अफसर
- 3:32:09बनाता है।
- 3:32:10और इस पूरी चर्चा के बाद एक थॉट छोड़ के
- 3:32:12जाना चाहूंगा।
- 3:32:13जरूर। हमने देखा कि हरियाणा की ज्योग्राफी
- 3:32:15कितनी एक्सट्रीम है। एक तरफ शिवालय की
- 3:32:17भारी बारिश, दूसरी तरफ अरावली का सूखा,
- 3:32:20कोई समंदर नहीं, कोई बड़ी लाइफ लाइन नहीं।
- 3:32:22फिर भी यह राज्य अपने पानी का, अपने खेतों
- 3:32:25का इतना शानदार मैनेजमेंट करता है।
- 3:32:27पंचायत स्तर पर 10वीं पास जैसी कड़ी
- 3:32:29शर्तें लागू करने का रिस्क लेता है। क्या
- 3:32:31ऐसा नहीं लगता कि जो यहां के लोगों का
- 3:32:33मशहूर, जुझारू, बेबाक और मुखर स्वभाव है,
- 3:32:36वह कहीं ना कहीं इसी कठोर भूगोल की देन
- 3:32:38है।
- 3:32:38जब जमीन इतनी सख्त होती है तो क्या वो
- 3:32:41इंसान के कल्चर और इसकी आत्मा को भी वैसा
- 3:32:44ही मजबूत नहीं बना देती।
- 3:32:45यह सोचने वाली बात है कि क्या भूगोल सिर्फ
- 3:32:48नक्शों तक सीमित है? या यह हमारा डीएनए तय
- 3:32:51करता है। एस्पिरेंट्स को इस पर जरूर सोचना
- 3:32:54चाहिए।
- 3:32:55दिस लेक्चर वास बाय दिशांत आईएएस।
- 3:32:58ज्योग्राफी ऑफ हरियाणा, वाटर, सोइल एंड
- 3:33:01एग्रीकल्चर,
- 3:33:02एचएसएससी, एचसीएस और यूपीएससी प्रारंभिक
- 3:33:05परीक्षा के लिए आज हम इसी विषय का एक बहुत
- 3:33:08ही व्यापक विश्लेषण करने वाले हैं।
- 3:33:10बिल्कुल।
- 3:33:11आज का हमारा यह सत्र केवल कुछ तथ्यों को
- 3:33:13रटने के बारे में नहीं है। हमारा मिशन है
- 3:33:15एक ऐसा एनालिटिकल फ्रेमवर्क तैयार करना
- 3:33:18जहां से हर साल सिविल सेवा परीक्षाओं में
- 3:33:20सीधे और कई बार बहुत ट्रिकी प्रश्न बनते
- 3:33:23हैं। जल, मृदा और कृषि। यह तीनों अलग-अलग
- 3:33:26विषय नहीं है।
- 3:33:27जी, यह एक ही इकोसिस्टम के तीन अटूट
- 3:33:30हिस्से हैं। सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क
- 3:33:32दिस। अगर किसी भी क्षेत्र की कृषि
- 3:33:34अर्थव्यवस्था को गहराई से समझना है, तो
- 3:33:36सबसे पहले वहां के मिट्टी की प्रकृति को
- 3:33:38समझना होगा। सही कहा आपने
- 3:33:40और उस मिट्टी का व्यवहार इस बात पे निर्भर
- 3:33:42करता है कि वहां जल की उपलब्धता कैसी है?
- 3:33:45जल निकासी की व्यवस्था कैसी है। मेंस
- 3:33:47परीक्षा में जब छात्र उत्तर लिखते हैं तो
- 3:33:50इन तीनों का यह इंटरलिंकिंग ही उनके जवाब
- 3:33:52को मतलब एक सामान्य छात्र के जवाब से अलग
- 3:33:55बनाता है।
- 3:33:56हां। और इसी इंटरलिंकिंग की शुरुआत होती
- 3:33:59है राज्य के जल स्रोतों से। तो चलिए सबसे
- 3:34:02पहले बात करते हैं मेजर लेकक्स ऑफ हरियाणा
- 3:34:04नेचुरल वर्सेस आर्टिफिशियल की।
- 3:34:07यह बहुत जरूरी टॉपिक है। छात्रों में
- 3:34:09अक्सर हरियाणा की झीलों को लेकर एक भ्रम
- 3:34:12रहता है। मुख्य रूप से इन्हें प्राकृतिक
- 3:34:14और कृत्रिम झीलों में बांटा जाता है।
- 3:34:16प्राकृतिक झीलों में दमदमा और कोटला का
- 3:34:19नाम सबसे ऊपर आता है। लेकिन
- 3:34:23यहां एक दिलचस्प विरोधाभास है।
- 3:34:25कैसा विरोधाभास? देखिए दमदमा झील 3000
- 3:34:28एकड़ यानी लगभग 12.14
- 3:34:32वर्ग किलोमीटर में फैली हरियाणा की सबसे
- 3:34:35बड़ी प्राकृतिक झील है। पर इसके बारे में
- 3:34:37कहा जाता है कि इसे 1919 में अंग्रेजों ने
- 3:34:41बनवाया था। तो फिर तो फिर यह प्राकृतिक
- 3:34:44कैसे हुई?
- 3:34:45यह बहुत ही विश्लेषणात्मक प्रश्न है।
- 3:34:48दरअसल यहां जो भौगोलिक संरचना थी या जो
- 3:34:51गड्ढा था वो पूरी तरह से प्राकृतिक था।
- 3:34:54अरावली की पहाड़ियों के बीच यह एक नेचुरल
- 3:34:57कैचमेंट एरिया था। जहां बारिश का पानी
- 3:35:00ढलान की वजह से अपने आप इकट्ठा होता था।
- 3:35:03अच्छा मतलब बेस प्राकृतिक था।
- 3:35:05बिल्कुल। अंग्रेजों ने 1919 में केवल एक
- 3:35:08कृत्रिम दीवार या कह लें एक बांध बनाकर उस
- 3:35:11प्राकृतिक जलभराव को एक स्थाई झील का रूप
- 3:35:15दे दिया। ताकि पानी बर्बाद ना हो। इसके
- 3:35:18विपरीत जब हम कृत्रिम झीलों की बात करते
- 3:35:21हैं।
- 3:35:21जैसे बड़खल या सुखना झील। हां, वहां का
- 3:35:25भूगोल अलग होता है। बरखल झील का निर्माण
- 3:35:281947 में सिंचाई के उद्देश्यों को पूरा
- 3:35:31करने के लिए किया गया था। वहां कोई बहुत
- 3:35:34बड़ा प्राकृतिक गड्ढा नहीं था बल्कि
- 3:35:37अरावली की पहाड़ियों को काटकर इंजीनियरिंग
- 3:35:40का इस्तेमाल करके पानी को रोका गया था।
- 3:35:42यानी अगर हम इसे बिना किसी चित्र के केवल
- 3:35:46अपने दिमाग में विजुअलाइज करें तो
- 3:35:48प्राकृतिक झीलें वह हैं जहां धरती ने खुद
- 3:35:50पानी को सहेजने के लिए एक कटोरा बना दिया
- 3:35:52है।
- 3:35:53जी
- 3:35:53और कृत्रिम झीलें वो हैं जहां इंसान ने
- 3:35:56पानी के रास्ते में एक मजबूत दीवार खड़ी
- 3:35:58करके उसे रोकने पर मजबूर कर दिया है।
- 3:36:00एकदम सटीक। और एस्पिरेंट्स पानी को रोकने
- 3:36:04का यह इंजीनियरिंग संघर्ष वैसा ही है जैसे
- 3:36:07परीक्षा के दिनों में अपने चंचल मन को रोक
- 3:36:10कर किताबों पर फोकस करना। इसी पर एक बात
- 3:36:13याद आती है। उबलते हुए पानी को जो बांध दे
- 3:36:17वही असली दीवार है। किताबों के समंदर में
- 3:36:20जो डूब कर भी तैर जाए उसी एस्पिरेंट की जय
- 3:36:23जयकार है।
- 3:36:24क्या बात है। फोकस ही सब कुछ है। अब इसी
- 3:36:28जल संरक्षण के अगले चरण यानी वेटलैंड्स
- 3:36:32एंड बर्थ सेंचुरीज की ओर चलते हैं। पानी
- 3:36:35जब एक उथले क्षेत्र में लंबे समय तक रुकता
- 3:36:38है तो वह एक बहुत ही समृद्ध इकोसिस्टम
- 3:36:41बनाता है।
- 3:36:42सुल्तानपुर झील इसका बेहतरीन उदाहरण है।
- 3:36:45बिल्कुल। गुरुग्राम में स्थित यह जगह केवल
- 3:36:48एक झील नहीं है बल्कि प्रवासी पक्षियों के
- 3:36:51लिए एक अंतरराष्ट्रीय शरण स्थली है।
- 3:36:53विशेषकर सर्दियों में आने वाले साइबेरियन
- 3:36:56सारस के लिए।
- 3:36:57हां। और यहां एक व्यक्ति का जिक्र करना
- 3:37:00बहुत जरूरी हो जाता है। पक्षी विज्ञानी
- 3:37:02पीटर जैक्सन।
- 3:37:03जी।
- 3:37:04यह सोचने वाली बात है कि एक विदेशी
- 3:37:06ऑनथोलॉजिस्ट के प्रयासों से हरियाणा के एक
- 3:37:09छोटे से हिस्से को वैश्विक मानचित्र पर
- 3:37:11इतनी बड़ी जगह मिल गई। लेकिन क्या
- 3:37:13सुल्तानपुर इकलौती ऐसी आदर्द्रभूमि है जिस
- 3:37:16पर एस्पिरेंट्स को ध्यान देना चाहिए?
- 3:37:18नहीं। इसके साथ ही झज्जर जिले में स्थित
- 3:37:21भिंडावास का भौगोलिक अध्ययन भी उतना ही
- 3:37:24क्रिटिकल है।
- 3:37:25भिंडावास हरियाणा की सबसे बड़ी आद्रभूमि
- 3:37:27है और दिलचस्प बात यह है कि यह एक मानव
- 3:37:31निर्मित संरचना है।
- 3:37:32मानव निर्मित जी।
- 3:37:33अब यहां ध्यान दें प्रीलिम्स अलर्ट वर्ष
- 3:37:362021 में सुल्तानपुर और भिंडावास दोनों को
- 3:37:40रामसर स्थल घोषित किया गया था। हम्
- 3:37:43यह तथ्य परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण
- 3:37:45है।
- 3:37:46एस वी टीच एट दिशांत आईएएस। किसी भी
- 3:37:48आद्रभूमि को रामसर का टैग मिलना केवल एक
- 3:37:51सर्टिफिकेट नहीं है। यह दर्शाता है कि उस
- 3:37:54इको सिस्टम का महत्व अब अंतरराष्ट्रीय
- 3:37:56स्तर का है। यूपीएससी हमेशा ऐसे अपग्रेडेड
- 3:37:59स्टेटस वाले लोकेशनेशंस को अपने सवालों
- 3:38:01में प्राथमिकता देता है।
- 3:38:03सही कहा। अब हम मैप रीडिंग के नजरिए से
- 3:38:06कुछ इंपॉर्टेंट लेकक्स एंड लोकेशनेशंस का
- 3:38:08भौगोलिक और ऐतिहासिक विश्लेषण करते हैं।
- 3:38:11परीक्षा में अक्सर उत्तर से दक्षिण या
- 3:38:13पूर्व से पश्चिम क्रोनोलॉजी पूछी जाती है।
- 3:38:16जी।
- 3:38:16सबसे पहले उत्तरी हिस्से में करनाल की
- 3:38:18कर्ण झील 17 एकड़ में फैली इस झील का सीधा
- 3:38:21संबंध महाभारत के दानवीर कर्ण से जोड़ा
- 3:38:24जाता है। इसके बाद मध्य भाग में रोहतक की
- 3:38:27तिलियार झील। जो रणनीतिक रूप से राष्ट्रीय
- 3:38:30राजमार्ग नाइन पर स्थित है जिसे हम पहले
- 3:38:33एनएच 10 कहते थे। और अगर हम ऐतिहासिक
- 3:38:36वास्तुकला की बात करें तो फरीदाबाद का
- 3:38:38सूरजकुंड एक अद्भुत संरचना है। 11वीं सदी
- 3:38:41में तोमर राजवंश के राजा सूरजपाल ने इसका
- 3:38:44निर्माण करवाया था।
- 3:38:45इसका आकार उगते सूर्य जैसा है जो उस समय
- 3:38:48के इंजीनियरों की जमतीय समझ को दर्शाता
- 3:38:51है।
- 3:38:51बिल्कुल। वहीं दूसरी तरफ हिसार में ब्लू
- 3:38:54बर्ड झील है जो हरियाणा की सबसे छोटी
- 3:38:56आर्द्रभूमि है। इसका विस्तार मात्र 12
- 3:38:59एकड़ है। रैंकर्स फोकस हियर एस्पिरेंट्स
- 3:39:02जब आप इन तथ्यों को याद करते हैं तो
- 3:39:04एक्सट्रीम पॉइंट्स को जरूर पकड़े।
- 3:39:06हां, सबसे बड़ी आद्रभूमि भिंडावास और सबसे
- 3:39:09छोटी ब्लू बर्ड। एग्जामिनर हमेशा इन्हीं
- 3:39:12एक्सट्रीम्स के बीच स्टेटमेंट बनाकर
- 3:39:14कंफ्यूज करने की कोशिश करता है।
- 3:39:17तो चलिए छात्रों इसी विश्लेषणात्मक क्षमता
- 3:39:20को टेस्ट करने के लिए प्रीलिम्स चैलेंज
- 3:39:22लेकक्स पर आते हैं। ध्यान से सुने तीन कथन
- 3:39:25है। कथन एक दमदमा हरियाणा की सबसे बड़ी
- 3:39:29प्राकृतिक झील है।
- 3:39:30जी। कथन दो सुल्तानपुर झील को वैश्विक
- 3:39:33पहचान दिलाने में पीटर जैक्सन का बड़ा
- 3:39:35योगदान है और कथन तीन भृंदाबाज झील
- 3:39:39फरीदाबाद जिले में स्थित है।
- 3:39:40आइए इस सवाल को एलिमिनेशन लॉजिक से डिकोड
- 3:39:43करते हैं। पहला कथन पूरी तरह सत्य है
- 3:39:46क्योंकि हमने गहराई से चर्चा की कि दमदमा
- 3:39:503000 एकड़ के साथ सबसे बड़ी प्राकृतिक झील
- 3:39:52है।
- 3:39:53दूसरा कथन भी ऐतिहासिक रूप से सही है।
- 3:39:56पीटर जैक्सन के प्रयासों को हमने अभी
- 3:39:58डिस्कस किया। अब तीसरे कथन पर आते हैं।
- 3:40:01भिंडावास फरीदाबाद में नहीं बल्कि झज्जर
- 3:40:04में है।
- 3:40:05हां, फरीदाबाद में तो हमने बड़खल और
- 3:40:06सुराजकुंड को पढ़ा था ना।
- 3:40:08तो इसका मतलब जहां-जहां कथन तीन शामिल है
- 3:40:10उन विकल्पों को हम तुरंत एलिमिनेट कर सकते
- 3:40:13हैं।
- 3:40:13अक्सर एग्जाम हॉल का प्रेशर इतना हावी
- 3:40:16होता है कि जो कल रात ही पढ़ा था वो
- 3:40:18विकल्पों के जाल में उलझ जाता है। इसलिए
- 3:40:20बार-बार रिवीजन जरूरी है।
- 3:40:22तथ्यों के इस भंवर में कई बार दिमाग भी खा
- 3:40:25जाता है मात। हम
- 3:40:26ऑप्शन ए और बी के चक्कर में भूल जाते हैं
- 3:40:29कल की ही बात।
- 3:40:30बहुत खूब। झीलों के बाद अब इवोल्यूशन ऑफ
- 3:40:33डैम्स एंड ब्राजेस पर आते हैं। मेंस
- 3:40:35परीक्षा में जल प्रबंधन पर सवाल आते हैं।
- 3:40:37इसलिए इसका कालानुक्रमिक विकास समझना
- 3:40:40अनिवार्य है।
- 3:40:40इसकी शुरुआत आठवीं सदी में फरीदाबाद के
- 3:40:43अनंगपुर बांध से होती है।
- 3:40:45तोमर राजवंश द्वारा निर्मित यह भारत का
- 3:40:48एकमात्र हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग ग्रेविटी
- 3:40:50बांध है।
- 3:40:50आठवीं सदी में हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग यह
- 3:40:54वाकई हैरान करने वाला है। इसके बाद अगर हम
- 3:40:56अंग्रेजों के समय में आए तो 1873 में
- 3:41:00यमुना नदी पर ताजेवाला बैराज का निर्माण
- 3:41:02हुआ।
- 3:41:02फिर 1875 76 में दादूपुर में सोम नदी पर
- 3:41:06पथराला बैराज बना।
- 3:41:07और ताजेवाला के पुराना हो जाने पर 1999
- 3:41:11में यमुनानगर में हथनीकुंड बैराज का
- 3:41:13निर्माण किया गया। जो 360 मीटर लंबा है।
- 3:41:17आधुनिक समय की बात करें तो 2008 में
- 3:41:20कौशल्या बांध बना। अब यहां एक ग्रेविटी
- 3:41:22बांध के मैकेनिज्म को समझना जरूरी है।
- 3:41:25एस्पिरेंट्स जरा इमेजिन करें पानी की एक
- 3:41:28विशाल दीवार को रोकने के लिए भारीभरकम
- 3:41:30कंक्रीट का ढांचा है। इसका पहला हिस्सा है
- 3:41:33वाटर रिजवायर जहां पानी जमा होता है।
- 3:41:36फिर डैम बॉडी जो मुख्य दीवार है।
- 3:41:39जी जो अपने ही गुरुत्वाकर्षण से पानी का
- 3:41:42दबाव झेलती है। नीचे पेन स्टॉक होता है।
- 3:41:45वह पाइप जिससे पानी टरबाइन तक जाता है और
- 3:41:48बाढ़ आने पर स्पिल वे से अतिरिक्त पानी
- 3:41:51निकाला जाता है। इन सबको अडिग रखती है
- 3:41:54इसकी मजबूत फाउंडेशन।
- 3:41:56अद्भुत इंजीनियरिंग लेकिन जल प्रबंधन केवल
- 3:41:59आधुनिक विज्ञान नहीं है। एंशिएंट वाटर
- 3:42:02स्ट्रक्चर्स बाउलीज एंड सरोवरर्स को देखें
- 3:42:04तो हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है।
- 3:42:06कुरुक्षेत्र का ब्रह्मसरोवर इसका जीता
- 3:42:08जागता प्रमाण है।
- 3:42:0911वीं शताब्दी में अलबरूनी ने अपने किताब
- 3:42:12उल हिंद में इसका वर्णन किया था।
- 3:42:14हां। और अबुल फजल ने इसे लघु महासागर कहा
- 3:42:16था। मुगल काल का एक और उदाहरण रोहतक के
- 3:42:19महम में स्थित शाहजहां की बावड़ी है।
- 3:42:221658-69
- 3:42:24में सैदु कलाल द्वारा निर्मित
- 3:42:26और फरारुख में गौस अली शाह भावड़ी जिसकी
- 3:42:30अष्टकोणीय वास्तुकला विशेष है।
- 3:42:33अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड
- 3:42:36देयर टीम हम क्लास में अक्सर चर्चा करते
- 3:42:38हैं कि कैसे यह संरचनाएं तत्कालीन समाज की
- 3:42:42भौगोलिक समझ दर्शाती हैं। हम्म।
- 3:42:44इमारतें तो पत्थरों से बनती है पर उनमें
- 3:42:47भी एक जान होती है। इतिहास के पन्नों में
- 3:42:50दर्ज हर बावड़ी की अपनी एक पहचान होती है।
- 3:42:53चलिए इसी समझ को प्रीलिम्स चैलेंज डैम्स
- 3:42:56एंड हिस्ट्री के जरिए परखते हैं। इस बार
- 3:42:58गलत कथन की पहचान करनी है। कथन एक अनंगपुर
- 3:43:02बांध फरीदाबाद में स्थित एक प्राचीन
- 3:43:04हाइड्रोलिक ग्रेविटी बांध है।
- 3:43:06जी।
- 3:43:07कथन दो। हथनीकुंड बैराज का निर्माण 1873
- 3:43:11में किया गया था। कथन तीन अलबरूनी ने अपनी
- 3:43:14किताबुल हिंद में ब्रह्मसरोवर का उल्लेख
- 3:43:17किया है।
- 3:43:17एस्पिरेंस एलिमिनेशन का नियम है टाइमलाइन
- 3:43:20चेक करना। कथन एक सत्य है। कथन तीन भी
- 3:43:23सत्य है। लेकिन कथन दो 1873 में तो ताजे
- 3:43:27वाला बैराज बना था। हथनीकुंड तो 1999 में
- 3:43:30बना। तो कथन दो गलत है। सटीक विश्लेषण। अब
- 3:43:34बढ़ते हैं आईआर आइग्रेशन फ्रेमवर्क।
- 3:43:37वेस्टर्न यमुना कैनाल की तरफ। पश्चिमी
- 3:43:40यमुना नहर हरियाणा की लाइफ लाइन है।
- 3:43:431355 ईस्वी में फिरोज शाह तुगलक ने इसे
- 3:43:46बनवाया था ताकि हिसार और फतेहाबाद तक पानी
- 3:43:49पहुंच सके। बाद में अकबर और अंग्रेजों ने
- 3:43:52इसका जीर्णोद्धार किया। आज के डाटा पर नजर
- 3:43:55डालें तो 51.12%
- 3:43:58क्षेत्र में ट्यूबवेल से सिंचाई होती है
- 3:44:00और 48.36%
- 3:44:03क्षेत्र नहरों पर निर्भर है। पश्चिमी
- 3:44:06यमुना नहर की कुल लंबाई 3226
- 3:44:09कि.मी. है।
- 3:44:10लेकिन यहां एक भौगोलिक अड़चन है। पश्चिमी
- 3:44:14यमुना नहर उत्तरी और पूर्वी हरियाणा तक तो
- 3:44:16ढलान से पहुंच जाती है। लेकिन दक्षिणी
- 3:44:19हरियाणा जैसे भिवानी, महेंद्रगढ़, वहां
- 3:44:22अरावली के कारण जमीन की ऊंचाई बढ़ती है।
- 3:44:25यहीं जन्म होता है लिफ्ट इरीगेशन स्कीम्स
- 3:44:28का।
- 3:44:28इसे विजुअलाइज करते हैं। लिफ्ट सिंचाई का
- 3:44:30मतलब है भारी पंपिंग स्टेशनों से पानी को
- 3:44:34ढलान के विपरीत ऊपर उठाना। दक्षिणी
- 3:44:36हरियाणा के लिए चार प्रमुख लिफ्ट नहरे
- 3:44:39हैं। जेएलएन नहर महेंद्रगढ़ के लिए लोहारू
- 3:44:42लिफ्ट नहर जिसे इंदिरा गांधी नहर कहते
- 3:44:45हैं। 225 कि.मी. लंबी है 70 कि.मी.
- 3:44:49ढलान के विपरीत पानी चढ़ाना मुश्किल है।
- 3:44:52एस्पिरेंट्स की यात्रा भी ऐसी ही है।
- 3:44:54हालातों की ढलान के खिलाफ जो चले वही
- 3:44:57लिफ्ट इरीगेशन का कमाल है। और जो हर
- 3:45:00मुश्किल से लड़कर ऊपर उठे वो एस्पिरेंट ही
- 3:45:02बेमिसाल है।
- 3:45:03बिल्कुल। अब बात करते हैं 360° एनालिसिस
- 3:45:06सतलुज यमुना लिंक की। भूगोल के हिसाब से
- 3:45:09एसवाईएल की कुल लंबाई 212 कि.मी. है। 121
- 3:45:14कि.मी. पंजाब में और 91 कि.मी. हरियाणा
- 3:45:17में।
- 3:45:1824 मार्च 1976 की अधिक सूचना से इसकी
- 3:45:21शुरुआत हुई थी। रावी ब्यास के पानी को
- 3:45:23साझा करने के लिए। लेकिन यहां एक एग्जाम
- 3:45:26ट्रैप है।
- 3:45:27कैसा ट्रैप? एग्जामिनर एसवाईएल की लंबाई
- 3:45:29को पश्चिमी यमुना नहर के साथ मिक्स कर
- 3:45:32देता है। एस्पिरेंट्स को याद रखना चाहिए
- 3:45:34कि एसवाईएल पूरी तरह चालू नहीं है।
- 3:45:36एज वी टीच एट दिशांत आईएस मेंस में आपको
- 3:45:40इसके विवाद पर राय रखनी होती है। पर
- 3:45:42प्रीलिम्स में सिर्फ कंक्रीट डाटा पूछा
- 3:45:44जाएगा।
- 3:45:44तो इसे प्रीलिम्स चैलेंज इरीगेशन
- 3:45:47प्रोजेक्ट से कंसोलिडेट करते हैं। मैच द
- 3:45:49फॉलोइंग का सवाल है। एक तरफ लिफ्ट ने नहरे
- 3:45:52हैं। लोहारू शिवानी जूई। दूसरी तरफ नाम है
- 3:45:55बी एन चक्रवर्ती, इंदिरा गांधी, बंसीलाल।
- 3:45:58मैचिंग सवालों में एलिमिनेशन बहुत काम आता
- 3:46:01है।
- 3:46:01लोहारू सबसे लंबी है। इंदिरा गांधी नहर।
- 3:46:04शिवानी को बीए एन चक्रवर्ती नहर कहते हैं
- 3:46:07और जूई नहर बंसीलाल जी के नाम पर है।
- 3:46:10क्रॉस मैचिंग से आप सही उत्तर निकाल सकते
- 3:46:12हैं।
- 3:46:12पानी खेतों तक पहुंच गया। अब आती है
- 3:46:15मिट्टी। सोइल क्लासिफिकेशन ऑफ हरियाणा पर
- 3:46:18चर्चा करते हैं। डॉक्टर जसबीर सिंह की
- 3:46:211976 की पुस्तक एग्रीकल्चरल ज्योग्राफी ऑफ
- 3:46:24हरियाणा के आधार पर छह श्रेणियां हैं।
- 3:46:27अत्यंत हल्की, रोसरी, मध्यम, भारी और
- 3:46:30चट्टानी मिट्टी। इसमें की फैक्ट है डाकर
- 3:46:33या सोलरू। जो थानेसर और फतेहाबाद में पाई
- 3:46:36जाने वाली कठोर चिकनी मिट्टी है। सूखने पर
- 3:46:39इसे जोतना बहुत मुश्किल होता है।
- 3:46:41मिट्टी से ही फसल का मिजाज तय होता है।
- 3:46:44बिल्कुल मजबूत हो मिट्टी अगर तो फसल भी
- 3:46:47शानदार होती है। नींव पक्की हो जिसकी जीत
- 3:46:50उसी की हर बार होती है। लेकिन आज मिट्टी
- 3:46:54के सामने संकट है। सोइल इरोजन एंड
- 3:46:57कंजर्वेशन आज का ज्वलंत विषय है। पश्चिमी
- 3:47:01और दक्षिणी हिस्से में शुष्क हवाओं से
- 3:47:04वायु अपरदन होता है।
- 3:47:06और उत्तर पूर्व में शिवालिक और गिरिप
- 3:47:09क्षेत्रों में तेज बारिश से जल अपरदन होता
- 3:47:12है। एक तीसरी समस्या है लवणता या
- 3:47:14क्षारीयता जिसे रेह या कलर कहते हैं।
- 3:47:17राज्य की 33% भूमि इससे प्रभावित है।
- 3:47:20एग्जाम अलर्ट एस्पिरेंट्स नोट करें।
- 3:47:23केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान
- 3:47:27यानी सीएसएसएसआरआई
- 3:47:30की स्थापना करनाल में 1969 में हुई थी।
- 3:47:33अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड द
- 3:47:36टीम हम बताते हैं कि संस्थान वहीं होते
- 3:47:38हैं जहां समस्या ज्यादा हो।
- 3:47:40चलिए प्रीलिम्स चैलेंज। सोइल रिसोर्सेज
- 3:47:43देखते हैं। कथन एक सोरू अत्यंत कठोर चिकनी
- 3:47:47मिट्टी है। कथन दो शिवालिक क्षेत्र में
- 3:47:50वायु अपरदन प्रमुख है। कथन तीन सीएसएसआरआई
- 3:47:55हिसार में है।
- 3:47:56विश्लेषण करें तो कथन एक सही है। कथन दो
- 3:48:00गलत है क्योंकि शिवालिक में जला अपवर्धन
- 3:48:02होता है। हवाओं से नहीं। कथन तीन भी गलत
- 3:48:05है। सीएसएसआरआई करनाल में है। हिसार में
- 3:48:08नहीं।
- 3:48:08बेहतरीन। अब आते हैं एग्रीकल्चरल प्रोफाइल
- 3:48:12द ब्रेड बास्केट पर। सिरसा जिला गेहूं और
- 3:48:15कपास में अग्रणी है। करनाल चावल के लिए और
- 3:48:19यमुनानगर गन्ने के लिए। और धान का कटोरा
- 3:48:23यह करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र और पानीपत का
- 3:48:25संयुक्त बेल्ट है।
- 3:48:26बासमती चावल के वैश्विक निर्यात में
- 3:48:29हरियाणा प्रथम स्थान पर है।
- 3:48:31किसान की तपस्या सफल हो जाती है। मेहनत के
- 3:48:35खेतों में जब पसीने से सिंचाई होती है,
- 3:48:37तभी जाकर सफलता की सबसे शानदार कटाई होती
- 3:48:40है।
- 3:48:40बहुत खूब। अब हॉर्टिकल्चर एंड इंडो इजराइल
- 3:48:44प्रोजेक्ट्स पर आते हैं। इजराइल की तकनीक
- 3:48:47से कई उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए
- 3:48:50हैं।
- 3:48:50सब्जियों के लिए करनाल के घरौंडा में,
- 3:48:52फलों के लिए सिरसा के मंजियाना में,
- 3:48:55उपोष्ण कटिबंधीय फलों के लिए कुरुक्षेत्र
- 3:48:57के लाडवा में और मधुमक्खी पालन के लिए
- 3:49:00रामनगर में। एग्जाम अलर्ट इन सबके लिए
- 3:49:04करनाल के अंजन थली में महाराणा प्रताप
- 3:49:07बागवानी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई
- 3:49:10है।
- 3:49:10उपज को बेचना भी जरूरी है। इसलिए
- 3:49:12एग्रीकल्चरल इंस्टीटशंस और मार्केटिंग पर
- 3:49:16ध्यान देना होगा। हाफेड राज्य का सबसे
- 3:49:18बड़ा सहकारी संघ है जो 1 नवंबर 1966 को
- 3:49:22बना। लाडवा एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी
- 3:49:25है। गन्नौर अंतरराष्ट्रीय मंडी है और
- 3:49:28पिंजौर सेब मंडी के लिए प्रसिद्ध है।
- 3:49:31आज का आखिरी प्रीलिम्स चैलेंज एग्रीकल्चर
- 3:49:34सॉल्व करते हैं। उत्कृष्टता केंद्रों का
- 3:49:36सही युग्म पहचानना है। एग्जामिनर घरौंडा
- 3:49:40और मंजियाना के बीच उलझाता है।
- 3:49:42बस इतनी क्लेरिटी रखें। घरौंडा में
- 3:49:45सब्जियों का केंद्र है। मंजियाना में फलों
- 3:49:47का केंद्र है। सिरसा सिट्रस फलों के लिए
- 3:49:50जाना जाता है। तो मंजियाना को फलों से
- 3:49:52लिंक करें। छात्रों अब समरी और की टेक
- 3:49:55अवेज देख लेते हैं।
- 3:49:56तीन मुख्य बातें हैं। जल, प्राकृतिक झीलें
- 3:49:59कम है। पश्चिमी यमुना नहर और लिफ्ट
- 3:50:02इरीगेशन पर निर्भरता है। मृदा अधिकतर बलुई
- 3:50:06दोमट है। पर रेह की चुनौती है। कृषि गेहूं
- 3:50:10चावल के साथ अब बागवानी पर फोकस है।
- 3:50:12छात्रों आज हमने जल, मृदा और कृषि का
- 3:50:15व्यापक विश्लेषण पूरा कर लिया। हमारा अगला
- 3:50:18विषय होगा एनिमल हस्बेंड्री ऑफ हरियाणा।
- 3:50:21लेकिन जाने से पहले हम लिफ्ट सिंचाई से
- 3:50:23धान उगाकर निर्यात कर रहे हैं। क्या यह
- 3:50:26वर्चुअल वाटर एक्सपोर्ट हमारे भूजल को उस
- 3:50:28स्तर पर नहीं धकेल रहा जहां से वापसी संभव
- 3:50:31नहीं? सोचिएगा जरूर कि क्या रोटी की टोकरी
- 3:50:34बने रहने की कीमत भविष्य के जल संकट से
- 3:50:36बड़ी है? दिस लेक्चर वाज़ बाय दी आईएएस।
- 3:50:40अगर हम हरियाणा के नक्शे को सिर्फ एक
- 3:50:44ज्योग्राफिकल मैप की तरह देखें ना, तो
- 3:50:46बहुत कुछ मिस हो जाएगा। मतलब असल में यह
- 3:50:48नक्शा गेहूं, धान, काले सोने और अब जो
- 3:50:52नीली क्रांति है उसका एक बहुत ही
- 3:50:54साइंटिफिक फ्लो चार्ट है।
- 3:50:56बिल्कुल। आज का हमारा पूरा फोकस इसी
- 3:50:58एग्रीकल्चरल इकॉनमी को डिकोड करने पर है।
- 3:51:01हरियाणा में कृषि और संबद्ध क्षेत्र हम उन
- 3:51:04सारी संस्थाओं, डाटा और ग्राउंड रियलिटीज
- 3:51:07को आज अनपैक करेंगे जो जो इस राज्य को देश
- 3:51:10का एग्री पावर हाउस बनाते हैं।
- 3:51:12और सिविल सेवा परीक्षा के नजरिए से चाहे
- 3:51:14वो यूपीएससी हो या एचसीएस उसके नजरिए से
- 3:51:18देखिए तो यह सिर्फ कुछ रटने वाले फैक्ट्स
- 3:51:20का कलेक्शन नहीं है। एक गंभीर उम्मीदवार
- 3:51:23के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि नीतियां
- 3:51:25इवॉल्व कैसे होती हैं।
- 3:51:27राइट।
- 3:51:27प्रीलिम्स में अक्सर एग्जामिनर डाटा और
- 3:51:30योजनाओं के बारीक क्लॉज़ के साथ खेलता है
- 3:51:32और मेंस में आपको इन्हीं फैक्ट्स का
- 3:51:34इस्तेमाल करके राज्य की प्रशासनिक
- 3:51:37चुनौतियों का विश्लेषण करना होता है।
- 3:51:39मतलब अप्रोच एनालिटिकल होनी चाहिए।
- 3:51:41एग्जैक्टली इसलिए आज हम जो भी डिस्कस
- 3:51:44करेंगे उसे एक मेंटर के तौर पर मेरी यही
- 3:51:46सलाह है कि आप सब उसे एक एडमिनिस्ट्रेटर
- 3:51:49के चश्मे से देखें। तो इसी
- 3:51:51एडमिनिस्ट्रेटिव चश्मे से शुरुआत करते हैं
- 3:51:54राज्य की प्रमुख कृषि एजेंसियों और उनकी
- 3:51:57संरचना से। अक्सर एस्पिरेंट्स इन संस्थाओं
- 3:52:00के नाम और उनके एस्टैब्लिशमेंट ईयर के
- 3:52:02जंगल में पूरी तरह खो जाते हैं। हाफेड हो
- 3:52:06गया, एचएसएमबी है, सीड कॉरपोरेशन है। इन
- 3:52:09सबको याद रखने का कोई लॉजिकल तरीका तो
- 3:52:11होना चाहिए ना?
- 3:52:11बिल्कुल है। और वो लॉजिक है क्रोनोलॉजी।
- 3:52:15इसे रैंडम डेट्स की तरह बिल्कुल मत देखिए।
- 3:52:18इसे एक राज्य की जरूरत के इवोल्यूशन की
- 3:52:21तरह समझिए। अब देखिए 1 नवंबर 1966 को
- 3:52:25हरियाणा बना।
- 3:52:26जी।
- 3:52:26एक नए राज्य में किसान के लिए सबसे पहली
- 3:52:29जरूरत क्या होगी?
- 3:52:30उसका माल बिकना चाहिए।
- 3:52:32बिल्कुल। उसका प्रोड्यूस मार्केट तक
- 3:52:34पहुंचना चाहिए। इसीलिए ठीक उसी दिन 1
- 3:52:38नवंबर 1966 को ही हैफेड यानी एचएएफीडी
- 3:52:43हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति और विपणन
- 3:52:46संघ की स्थापना हुई।
- 3:52:48ओके।
- 3:52:48इसका मेन काम था किसान को बाजार से कनेक्ट
- 3:52:51करना और एक प्रॉपर सप्लाई चेन बनाना।
- 3:52:54तो 1966 में हाफिड ने मार्केट एक्सेस दे
- 3:52:58दिया। लेकिन अ अगर एक नया मार्केट बन रहा
- 3:53:01है और कोई रूल्स ही ना हो तो मिडिलम और
- 3:53:04एक्सप्लइटेशन का खतरा तो हमेशा रहता है।
- 3:53:07क्या क्या इसी वजह से रेगुलेशन की जरूरत
- 3:53:09पड़ी?
- 3:53:10एक्सैक्टली आप बिल्कुल सही ट्रैक पर सोच
- 3:53:12रहे हैं। एक प्रॉपर स्ट्रक्चर या रेगुलेशन
- 3:53:15के बिना कोई भी मार्केट सस्टेन नहीं कर
- 3:53:17सकता। इसीलिए ठीक 3 साल बाद 1 अगस्त 1969
- 3:53:22को हरियाणा राज्य कृषि विपरण बोर्ड यानी
- 3:53:25एचएसएमबी
- 3:53:27बना। इसका हेड क्वार्टर पंचकूला में है।
- 3:53:29राइट?
- 3:53:29हां, मुख्यालय पंचकूला में है। मंडियों का
- 3:53:32निर्माण करना और वहां होने वाले व्यापार
- 3:53:34के नियम तय करना इसके जिम्मे आया। अब फ्लो
- 3:53:37चार्ट को देखिए। बाजार बन गया। नियम बन
- 3:53:40गए।
- 3:53:40सही।
- 3:53:40इसके बाद फोकस शिफ्ट हुआ प्रोडक्टिविटी
- 3:53:43पर। फसल बेहतर कैसे हो? इसके लिए 1974 में
- 3:53:47हरियाणा बीज विकास निगम यानी सीड
- 3:53:50कॉरपोरेशन पंचकूला में स्थापित हुआ ताकि
- 3:53:52किसानों को हाई क्वालिटी बीज मिल सके। यह
- 3:53:55एक बहुत ही प्रोग्रेसिव फ्लो चार्ट लग रहा
- 3:53:58है मुझे और मुझे याद आ रहा है कि 1974 में
- 3:54:01ही एक और बड़ी समस्या पर काम शुरू हुआ था
- 3:54:03जमीन की क्वालिटी।
- 3:54:04बिल्कुल।
- 3:54:05क्योंकि अगर जमीनी ही बंजर हो तो अच्छे
- 3:54:08बीज भी क्या ही कर लेंगे। इसलिए जो भूमि
- 3:54:10सुधार निगम है लैंड रिक्लेमेशन कॉर्प वो
- 3:54:13भी 1974 में ही बना।
- 3:54:15जी। मार्केट से लेकर मिट्टी सुधारने तक का
- 3:54:18यह जो पूरा सफर है वाकई लॉजिकल है। अब अगर
- 3:54:21हम इसी लॉजिक को हरियाणा की जमीन पर
- 3:54:23अप्लाई करें तो प्रमुख फसलों की जो
- 3:54:26क्षेत्रीय विशेषज्ञता है वो एक बहुत
- 3:54:28दिलचस्प पैटर्न दिखाती है। राज्य के
- 3:54:30अलग-अलग हिस्से अलग-अलग फसलों के हब हैं।
- 3:54:33और यह पैटर्न एग्जाम के लिए बहुत क्रूशियल
- 3:54:35है। सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क करें इस चीज
- 3:54:37को। जैसे सिरसा जिले को गेहूं का कटोरा या
- 3:54:41वीट बॉल कहा जाता है।
- 3:54:42क्योंकि वहां गेहूं का बंपर प्रोडक्शन
- 3:54:44होता है।
- 3:54:44हां। और दूसरी तरफ करनाल धान का कटोरा है।
- 3:54:47राइस बॉल। करनाल के बासमती राइस बेल्ट तो
- 3:54:50ग्लोबल लेवल पर अपनी एक्सपोर्ट क्वालिटी
- 3:54:52के लिए जानी जाती है।
- 3:54:53और बात सिर्फ गेहूं चावल तक सीमित नहीं है
- 3:54:55ना? अगर हम कैश क्रॉप्स या हॉर्टिकल्चर की
- 3:54:58तरफ देखें तो यमुनानगर अपनी हल्दी के
- 3:55:00उत्पादन के लिए डोमिनेट करता है।
- 3:55:02जी। और फरीदाबाद में ग्लडिओलस फूलों की
- 3:55:05बहुत ही शानदार खेती होती है जो सीधा
- 3:55:07दिल्ली के मार्केट को सर्व करती है।
- 3:55:09यहां मैं थोड़ा रुकना चाहूंगी क्योंकि यह
- 3:55:11एक यूपीएससी ट्रैप है। प्रीलिम्स अलर्ट।
- 3:55:15ओके।
- 3:55:15गंभीर उम्मीदवार इसे ध्यान से सुने।
- 3:55:18एग्जामिनर को पता है कि परीक्षा के प्रेशर
- 3:55:21में स्टूडेंट का दिमाग कैसे काम करता है।
- 3:55:24वो स्टेटमेंट्स में धान का कटोरा सिरसा को
- 3:55:27बता देंगे और गेहूं का हब करनाल को।
- 3:55:29ओह इंटरचेंज कर देंगे।
- 3:55:31बिल्कुल। यह बहुत ही बेसिक इंटरचेंज है।
- 3:55:34लेकिन प्रेशर में अच्छे-अच्छे रैंकर्स इस
- 3:55:37ट्रैप में फंस जाते हैं। इन दोनों रीजंस
- 3:55:39को लेकर कांसेप्ट एकदम क्लियर होना चाहिए।
- 3:55:42सिरसा मतलब गेहूं, करनाल मतलब धान।
- 3:55:45यू नो जिस तरह से एग्जामिनर सिरसा और
- 3:55:48करनाल को स्वाइप करके एस्पिरेंट्स के
- 3:55:50माइंड के साथ खेलता है। उस पर मुझे एक बात
- 3:55:51याद आ रही है।
- 3:55:52बताइए।
- 3:55:53सिलेबस का समंदर है और वक्त की नज़ाकत जो
- 3:55:56ट्रैप से बच गया उसी की है हुकूमत। बहुत
- 3:55:59सही बात है। और मेरिट लिस्ट में इसी
- 3:56:02हुकूमत को कायम करने के लिए सिर्फ फैक्ट्स
- 3:56:05रटना काफी नहीं है बल्कि फ्लैकशिप
- 3:56:08एग्रीकल्चरल स्कीम्स का डीप एनालिसिस
- 3:56:11चाहिए।
- 3:56:12बिल्कुल।
- 3:56:12जैसा कि हम दिशांत आईएएस में पढ़ाते हैं।
- 3:56:15सरकारी योजनाएं सिर्फ बजट एलोकेशन नहीं
- 3:56:18होती। वे किसी भी राज्य का विज़न
- 3:56:20डॉक्यूमेंट होती हैं। इसमें सबसे बड़ा गेम
- 3:56:23चेंजर है। मेरा पानी मेरी विरासत योजना।
- 3:56:26यह स्कीम 6 मई 2020 को ल्च हुई थी और अगर
- 3:56:29मैं सही हूं तो शूटर मनिका शोकंद इसकी
- 3:56:31ब्रांड एंबेसडर हैं।
- 3:56:32जी बिल्कुल सही।
- 3:56:33इसका ऑब्जेक्टिव सुनने में तो सीधा लगता
- 3:56:35है कि किसानों को धान की खेती छोड़कर
- 3:56:38मक्का या बाजरा जैसी वैकल्पिक फसलें उगाने
- 3:56:41के लिए ₹7000 प्रति एकड़ का इंसेंटिव
- 3:56:44देना। लेकिन इसका इंपैक्ट बहुत गहरा है
- 3:56:46ग्राउंड पर। मेंस के नजरिए से इसका
- 3:56:48बैकग्राउंड समझना जरूरी है। धान एक वाटर
- 3:56:51गजलिंग क्रॉप है। मतलब 1 किलो चावल उगाने
- 3:56:54में हजारों लीटर पानी लगता है।
- 3:56:56और हरियाणा में तो वैसे भी वाटर टेबल नीचे
- 3:56:58जा रहा है।
- 3:56:58एक्जेक्टली। हरियाणा के डार्क ज़ोंस में
- 3:57:01ग्राउंड वाटर लेवल बहुत खतरनाक स्थिति में
- 3:57:04पहुंच चुका है। तो यह सिर्फ एक
- 3:57:06एग्रीकल्चरल स्कीम नहीं है बल्कि एक
- 3:57:08अग्रेसिव वाटर कंजर्वेशन मॉडल है। अगर हम
- 3:57:11इसके फ्लो चार्ट को एक किसान की जर्नी की
- 3:57:13तरह समझे। हां,
- 3:57:14वो कैसे काम करता है? किसान सबसे पहले
- 3:57:16पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करता है। फिर
- 3:57:19वह रिस्क लेकर अपनी फसल बदलता है। धान की
- 3:57:22जगह कुछ और बोता है।
- 3:57:23जो कि एक बड़ा बिहेवियरल शिफ्ट है।
- 3:57:25बिल्कुल। इसके बाद एक स्ट्रिक्ट गवर्नमेंट
- 3:57:27वेरिफिकेशन होता है कि क्या वाकई धान की
- 3:57:30जगह कोई और फसल बोई गई है? जब यह
- 3:57:32वेरिफिकेशन पास हो जाता है तब जाकर ₹7000
- 3:57:36का डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर
- 3:57:38किसान के खाते में आता है।
- 3:57:40मतलब यह एक पूरी तरह से आउटकम बेस्ड
- 3:57:42अप्रोच है।
- 3:57:43इसके साथ ही एक और रिस्क मिटिगेशंस की
- 3:57:45मुझे याद आ रही है। भावांतर भरपाई योजना
- 3:57:48जो 1 जनवरी 2018 को आई थी।
- 3:57:50जी। हम अक्सर न्यूज़ में देखते हैं कि
- 3:57:53टमाटर या प्याज के दाम इतने गिर जाते हैं
- 3:57:55कि किसान फसल सड़क पर फेंकने को मजबूर हो
- 3:57:58जाते हैं। यह योजना उसी प्राइस डेफिसिट या
- 3:58:01मूल्य घाटे को कवर करती है ना।
- 3:58:03एग्जैक्टली भाव का जो अंतर है उसे भरपाई
- 3:58:06करना और इस तरह की विजनरी योजनाओं और हाई
- 3:58:10यील्ड के पीछे एक बहुत मजबूत रिसर्च
- 3:58:12बैकबोन होती है। हरियाणा में जब भी
- 3:58:14एग्रीकल्चर रिसर्च की बात होगी करनाल
- 3:58:17हमेशा सेंटर स्टेज पर रहेगा। यह हरियाणा
- 3:58:19का रिसर्च हब है।
- 3:58:21करनाल के इंस्टट्यूट्स की लिस्ट वाकई
- 3:58:23इंप्रेसिव है। 1969 में वहां केंद्रीय
- 3:58:25मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान बना जिसे
- 3:58:28सीएसएसआरआई कहते हैं।
- 3:58:30जी। फिर 1978 में गेहूं अनुसंधान निदेशालय
- 3:58:34यानी डीडब्ल्यूआर और आज वहां भारतीय गेहूं
- 3:58:38और जौ अनुसंधान संस्थान यानी
- 3:58:40आईआईडब्ल्यूबीआर भी मौजूद है।
- 3:58:42यहां एक और एग्जाम अलर्ट है। अपने इसी
- 3:58:45साइंटिफिक इकोसिस्टम और वेल प्लांट
- 3:58:47स्ट्रक्चर की वजह से करनाल को हरियाणा का
- 3:58:49पेरिस भी कहा जाता है।
- 3:58:50हरियाणा का पेरिस इंटरेस्टिंग। तो ज्यादा
- 3:58:53सिंचाई से मिट्टी में जो सेलेनिटी या
- 3:58:56लवणता बढ़ी वो एक बड़ा मुद्दा है।
- 3:58:59हां सोइल डिग्रेडेशन
- 3:59:00बिल्कुल उस सेलेनिटी का साइंटिफिक स्यूशन
- 3:59:03यही सीएसएसआरआई करनाल निकालता है।
- 3:59:05तो करनाल मिट्टी और बीज को मास्टर कर रहा
- 3:59:08है। लेकिन हरियाणा की रूरल इकॉनमी सिर्फ
- 3:59:11उस चीज पर डिपेंड नहीं है जो उस जमीन से
- 3:59:13उगती है बल्कि उस पर भी है जो उस जमीन पर
- 3:59:16चलती है।
- 3:59:17सही कहा। चलिए एनिमल हस्बेंडरी यानी श्वेत
- 3:59:20क्रांति की तरफ चलते हैं।
- 3:59:21अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड
- 3:59:23देयर टीम, हम हमेशा इस बात को हाईलाइट
- 3:59:26करते हैं कि हरियाणा में एग्रीकल्चर और
- 3:59:28एनिमल हस्बेंडरी एक दूसरे को सप्लीमेंट
- 3:59:31करते हैं और पशुपालन के सेक्टर में सबसे
- 3:59:34बड़ा आइकॉन है मुर्रा भैंस। मुर्रा भैंस
- 3:59:38जिसे प्यार से और पूरे हक से काला सोना
- 3:59:40यानी ब्लैक गोल्ड कहा जाता है। यह नस्ल
- 3:59:43मुख्य रूप से रोहतक, जींद और हिसार बेल्ट
- 3:59:46में डोमिनेट करती है।
- 3:59:47इस नस्ल की खासियत सिर्फ ज्यादा दूध देना
- 3:59:50नहीं है। इसकी एक्सट्रीम एंडोरेंस यानी
- 3:59:53असीम सहनशक्ति के वजह से इसे एशियन
- 3:59:57ट्रैक्टर का भी टाइटल मिला हुआ है।
- 3:59:59एशियन ट्रैक्टर
- 4:00:00जी। इसी मुर्रा के दम पर आज हरियाणा में
- 4:00:04प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 1098 ग्राम
- 4:00:08है। यह आंकड़ा पूरे देश में टॉप स्टेट्स
- 4:00:11में आता है।
- 4:00:121098 ग्राम प्रति व्यक्ति यह कोई छोटा
- 4:00:14अचीवमेंट नहीं है। इस काले सोने का क्रेज
- 4:00:16इतना है कि मुझे लगता है एस्पिरेंट्स भी
- 4:00:18इसे बहुत अच्छे से रिलेट कर सकते हैं।
- 4:00:20कैसे?
- 4:00:21किताबों से इश्क का रंग कुछ ऐसा चढ़ा है
- 4:00:24जैसे काला सोना देखकर हर एस्पिरेंट अड़ा
- 4:00:27है।
- 4:00:28बहुत खूब। यह डेडिकेशन एग्जाम क्रैक करने
- 4:00:31के लिए मस्ट है। अब देखिए जहां इतना
- 4:00:34प्रीमियम लाइफस्टॉक होगा वहां वर्ल्ड
- 4:00:36क्लास वेटरनरी रिसर्च भी तो चाहिए और यह
- 4:00:39रोल प्ले करता है राष्ट्रीय डेयरी
- 4:00:42अनुसंधान संस्थान यानी एनडीआरआई।
- 4:00:46एनडीआरआई का इवोल्यूशन एक परफेक्ट फ्लो
- 4:00:48चार्ट बनाता है। यह हमेशा से करनाल में
- 4:00:50नहीं था।
- 4:00:51जी।
- 4:00:511923 में इसकी शुरुआत बेंगलोर में हुई थी।
- 4:00:54जी। आजादी के बाद 1955 में इसे करनाल
- 4:00:57शिफ्ट किया गया और फाइनली 1989 में इसे
- 4:01:01डीम्ड यूनिवर्सिटी का स्टेटस मिला
- 4:01:03और इसके रिसर्च माइलस्टोंस ग्लोबल
- 4:01:05स्टैंडर्ड के हैं। भारत की पहली आईवीएफ
- 4:01:08भैंस प्रथम और पहली क्लोन भैंस गरिमा इसी
- 4:01:12एनडीआरआई की लैब से निकली हैं। करनाल के
- 4:01:15साथ-साथ हिसार भी वेटरनरी साइंस का एक
- 4:01:18बहुत बड़ा हब है।
- 4:01:19सही कहा। हिसार में 2010 में लाला लाजपत
- 4:01:22राय पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान
- 4:01:24विश्वविद्यालय इस्टैब्लिश हुआ जिसे
- 4:01:25एलयूवीएस कहते हैं।
- 4:01:27राइट। इसके अलावा हिसार में ही 1985 का
- 4:01:30केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान यानी
- 4:01:32सीआईआरबी और 1986 का राष्ट्रीय अश्व
- 4:01:36अनुसंधान केंद्र यानी एनआरसीई है जो
- 4:01:40घोड़ों पर रिसर्च करता है।
- 4:01:41और हिसार का एक ऐसा फैक्ट जो प्रीलिम्स के
- 4:01:43लिए बहुत इंपॉर्टेंट है वो यह कि यहां
- 4:01:46एशिया का सबसे बड़ा पशु फार्म लोकेटेड है।
- 4:01:49अब चूकि हम हिसार की बात कर रहे हैं तो
- 4:01:5120वीं पशुधन गणना जो 2019 में हुई थी उसके
- 4:01:54आंकड़ों को डिकोड करना बहुत जरूरी हो जाता
- 4:01:57है।
- 4:01:57अगर हम इन लाइव स्टॉक डाटा को एक 3D
- 4:02:00बारग्राफ की तरह इमेजिन करें अपने दिमाग
- 4:02:02में तो सबसे ऊंचा पिलर हिसार का ही बनता
- 4:02:05है। ओवरऑल सबसे ज्यादा पशुधन हिसार जिले
- 4:02:08में ही है।
- 4:02:08यहीं पर रैंकर्स फोकस एरिया आता है। यह
- 4:02:11क्लासिक यूपीएससी ट्रैप है।
- 4:02:13कैसा ट्रैप? देखिए, यह सच है कि ओवरऑल
- 4:02:16लाइफस्टॉक और सबसे ज्यादा भैंस हिसार में
- 4:02:18है। लेकिन एग्जामिनर पूछेगा, "इस सबसे
- 4:02:21ज्यादा गायें यानी कैटल्स कहां है? दिमाग
- 4:02:24तुरंत हिसार की तरफ भागेगा क्योंकि ओवरऑल
- 4:02:27वहां ज्यादा है। लेकिन सही उत्तर है
- 4:02:29सिरसा।
- 4:02:30ओहो, यह तो बहुत क्लोज ट्रैप है।
- 4:02:32बिल्कुल। और अगर थोड़ा ऑफ बीट सवाल आ जाए
- 4:02:34कि हाथी कहां है? तो पूरे हरियाणा में
- 4:02:37हाथी सिर्फ यमुनानगर में है और उनकी कुल
- 4:02:40गिनती सिर्फ चार है।
- 4:02:41सिर्फ चार हाथी यह डाटा का बहुत ही शार्प
- 4:02:43सेपरेशन है। सिरसा में गाय, हिसार में
- 4:02:46भैंस। क्या भेड़ बकरियों के डाटा में भी
- 4:02:48कोई ऐसा ही ट्रैप है जो एस्पिरेंट्स को
- 4:02:50फंसा सकता है? बिल्कुल है और स्टूडेंट्स
- 4:02:52अक्सल के मिक्स कर देते हैं। सबसे ज्यादा
- 4:02:55भेड़ें यानी शीप भिवानी में पाई जाती हैं।
- 4:02:58जबकि सबसे ज्यादा बकरियां या गोट्स सिरसा
- 4:03:01में हैं। एग्जाम में स्टेटमेंट्स अक्सर इन
- 4:03:04दोनों को क्रॉस मैच करके दिए जाते हैं।
- 4:03:07इसलिए इन्हें बिल्कुल भी आपस में इंटरचेंज
- 4:03:09ना करें।
- 4:03:10अब इतने बड़े पशुधन को सिक्योर करने के
- 4:03:13लिए स्टेट कुछ वेलफेयर स्कीम्स भी चलाता
- 4:03:15है। जैसे पशु किसान क्रेडिट कार्ड। यह
- 4:03:18बहुत दिलचस्प है कि पूरे भारत में यह
- 4:03:21स्कीम सबसे पहले 2019 में हरियाणा के
- 4:03:24भिवानी से ही लांच की गई थी।
- 4:03:25इसके साथ पशुधन बीमा योजना एक बहुत बड़ा
- 4:03:28रिस्क कवर देती है। सोचिए एक किसान के लिए
- 4:03:31उसकी भैंस ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है।
- 4:03:34जी बिल्कुल।
- 4:03:35इस योजना में बहुत ही नॉमिनल प्रीमियम है।
- 4:03:37बड़े पशुओं के लिए सिर्फ ₹100 और छोटे
- 4:03:40पशुओं के लिए ₹25। इसके अलावा राज्य में
- 4:03:442010 में गौ सेवा आयोग बना जिसका हेड
- 4:03:47क्वार्टर पंचकूला में है। जैसा कि हम
- 4:03:49दिशांत आईएस में पढ़ाते हैं। यह स्कीम
- 4:03:52सिर्फ चैरिटी नहीं है। यह रूरल इकॉनमी के
- 4:03:55लिए एक बहुत बड़ी फाइनेंशियल शील्ड है।
- 4:03:57और इन ट्रिकी स्कीम्स और डाटा को एग्जाम
- 4:04:01हॉल में रिकॉल करने के लिए एक ही चीज काम
- 4:04:03आती है। रिवीजन की कमी से अक्सर ऑप्शन रूठ
- 4:04:06जाते हैं। जो ट्रैप को समझ लें वही मेरिट
- 4:04:09में आते हैं। एब्सोलुटली रिवीजन ही की है।
- 4:04:12अब हम एक ऐसे सेक्टर की ओर शिफ्ट करते हैं
- 4:04:15जो ट्रेडिशनली हरियाणा की पहचान कभी नहीं
- 4:04:17रहा।
- 4:04:18आप फिशरीज की बात कर रही हैं?
- 4:04:20हां, हम बात कर रहे हैं मत्स्य पालन यानी
- 4:04:24नीली क्रांति की ब्लू रेवोल्यूशन।
- 4:04:26यह फैक्ट सच में सरप्राइजिंग है कि
- 4:04:28हरियाणा जैसा लैंड लॉक स्टेट जहां दूर-दूर
- 4:04:31तक कोई समंदर नहीं है, वो प्रति हेक्टेयर
- 4:04:34मछली उत्पादकता में पूरे इंडिया में सेकंड
- 4:04:36रैंक पर है। यह कैसे पॉसिबल हुआ? क्या वे
- 4:04:39कोई रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम यूज
- 4:04:41कर रहे हैं जिसे आरएस कहते हैं। जहां कम
- 4:04:44पानी को फिल्टर करके बार-बार इस्तेमाल
- 4:04:46किया जाता है?
- 4:04:47यही तो टेक्नोलॉजी का गेम है। लैंड लॉक
- 4:04:49होने की कमजोरी को साइंटिफिक अप्रोच से
- 4:04:52ताकत में बदला गया है। राज्य ने सेंटर ऑफ
- 4:04:55एक्सीलेंस बनाए हैं। सबसे क्लासिक केस
- 4:04:58स्टडी है भिवानी के गरवा की।
- 4:05:00गरवा में क्या खास है? वहां झीगा पालन
- 4:05:02यानी प्रॉन कल्चर का केंद्र है। भिवानी का
- 4:05:05जो खारा पानी कभी खेती के लिए एक अभिशाप
- 4:05:08माना जाता था। आज उसी खारे पानी का
- 4:05:11इस्तेमाल झीगा उत्पादन के लिए हो रहा है।
- 4:05:14इसके अलावा झज्जर में सजावटी मछली या
- 4:05:17ऑर्नामेंटल फिश हैचरी लगाई गई है जिसका
- 4:05:20कमर्शियल वैल्यू बहुत हाई होता है।
- 4:05:23अगर हम इसके फ्लो चार्ट को देखें तो यह एक
- 4:05:26इंटेंशनल पॉलिसी शिफ्ट लगता है। सबसे पहले
- 4:05:29सरकार ने इनलैंड पोंड्स यानी अंतरदेशीय
- 4:05:31तालाबों का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया।
- 4:05:33बिल्कुल। फिर आरएएस जैसी तकनीक को अपनाया
- 4:05:36टेक्नोलॉजी अडॉप्शन और उस अडॉप्शन का
- 4:05:39फाइनल रिजल्ट है उच्च उत्पादकता जिसने
- 4:05:42स्टेट को सेकंड रैंक दिलाई।
- 4:05:43इस ट्रांसफॉर्मेशन से हमें समझना चाहिए कि
- 4:05:46एग्रीकल्चरल डायवर्सिफिकेशन कैसे काम करता
- 4:05:49है। लेकिन इन सबके बीच हम एनवायरनमेंट को
- 4:05:52इग्नोर नहीं कर सकते। आईएसएफआर
- 4:05:562021 यानी इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट
- 4:05:59रिपोर्ट के आंकड़े वन आवरण की जो तस्वीर
- 4:06:02दिखाते हैं वो हरियाणा के लिए एक बड़ा
- 4:06:04चैलेंज है।
- 4:06:05डाटा वाकई अलार्मिंग है। हरियाणा का कुल
- 4:06:08फॉरेस्ट कवर सिर्फ 1603 स्क्वायर कि.मी.
- 4:06:12के आसपास है। यानी राज्य के टोटल
- 4:06:15ज्योग्राफिकल एरिया का सिर्फ 3.63%
- 4:06:19यह पूरे देश में सबसे कम है। और यहीं से
- 4:06:22प्रीलिम्स का एक और खतरनाक ट्रैप निकलता
- 4:06:25है। सीरियस एस्पिरेंट्स ध्यान दें।
- 4:06:27ओके।
- 4:06:27जब जिलों की रैंकिंग होती है तो क्षेत्रफल
- 4:06:30और प्रतिशत के हिसाब से टॉप और बॉटम जिले
- 4:06:33पूरी तरह बदल जाते हैं।
- 4:06:34वो कैसे?
- 4:06:35अगर एरिया के हिसाब से टॉप जिले पूछें तो
- 4:06:37क्रम है पंचकूला, फिर यमुनानगर और फिर
- 4:06:40गुरुग्राम। लेकिन अगर प्रतिशत के हिसाब से
- 4:06:43पूछें तो क्रम होगा पंचकूला, यमुनानगर और
- 4:06:46तीसरे नंबर पर फरीदाबाद।
- 4:06:48मतलब गुरुग्राम बाहर हो जाता है लिस्ट से?
- 4:06:50बिल्कुल। इसी तरह सबसे कम वन क्षेत्र की
- 4:06:53बात करें तो क्षेत्रफल में सबसे कम पलवल
- 4:06:55है लेकिन प्रतिशत में सबसे कम फतेहाबाद
- 4:06:58है।
- 4:06:58यह डिफरेंस एग्जाम के प्रेशर में बहुत
- 4:07:00आसानी से स्लिप हो सकता है। एरिया में
- 4:07:03पलवल मिनिमम परसेंटेज में फतेहाबाद। अगर
- 4:07:06वनों के प्रकार की बात करें तो हरियाणा के
- 4:07:08मैदानी इलाकों में मुख्य रूप से
- 4:07:10उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपातीय यानी
- 4:07:12ट्रॉपिकल ड्राई डेसीड्यूस जंगल मिलते हैं
- 4:07:15जो कम पानी में सर्वाइव करते हैं।
- 4:07:17जी। लेकिन जो शिवालिक रेंज है स्पेशली
- 4:07:19पंचकूला का पहाड़ी इलाका वहां उप
- 4:07:21उष्णकटिबंधीय पाइन या सबट्रॉपिकल पाइन
- 4:07:24फॉरेस्ट पाए जाते हैं।
- 4:07:25और इन्हीं जंगलों के इकोसिस्टम को बचाने
- 4:07:27के लिए कंजर्वेशन एफर्ट्स भी चल रहे हैं।
- 4:07:30पिंजोर का गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन
- 4:07:32केंद्र एशिया में अपने तरह का बहुत ही
- 4:07:35क्रिटिकल प्रोजेक्ट है। इसके अलावा गिरते
- 4:07:38फॉरेस्ट कवर को काउंटर करने के लिए 5 जून
- 4:07:412021 को एनवायरमेंट डे के मौके पर ऑक्सीवन
- 4:07:44योजना शुरू की गई ताकि ग्रीन कवर को पुश
- 4:07:47किया जा सके।
- 4:07:48थ्योरी और कांसेप्ट्स तो हमने बहुत डिटेल
- 4:07:50में डिकोड कर लिए। अब वक्त है प्रारंभिक
- 4:07:52अभ्यास का यानी प्रीलिम्स प्रैक्टिस।
- 4:07:54बिल्कुल। चलिए कुछ एमसीक्यूस देखते हैं।
- 4:08:36रूल सिंपल है। हम सीधे जवाब नहीं देंगे।
- 4:08:40हम एलिमिनेशन लॉजिक का इस्तेमाल करेंगे
- 4:08:42ताकि आप खुद सही ऑप्शन तक पहुंच सकें।
- 4:08:45यही अप्रोच एग्जाम हॉल में काम आती है।
- 4:08:47पहला सवाल लेते हैं मेरा पानी मेरी विरासत
- 4:08:51योजना के बारे में।
- 4:08:52यह योजना 2020 में धान की खेती को
- 4:08:54हतोत्साहित करने के लिए शुरू की गई।
- 4:08:56इसके तहत फसल बदलने पर ₹10,000 प्रति एकड़
- 4:09:00का प्रोत्साहन दिया जाता है।
- 4:09:01मनीषा शिवकंद इसकी ब्रांड एंबेसडर हैं।
- 4:09:04ओके। एलिमिनेशन शुरू करते हैं। कथन दो पर
- 4:09:07फोकस करते हैं। हमने अभी डिस्कस किया था
- 4:09:10कि सरकार का फिस्कल बर्डन और योजना का
- 4:09:13स्ट्रक्चर क्या है? क्या वो अमाउंट वाकई
- 4:09:15₹10,000 था?
- 4:09:16बिल्कुल नहीं वो अमाउंट ₹7,000 था। तो
- 4:09:19जैसे ही आप कथन दो को एलिमिनेट करते हैं,
- 4:09:21ऑप्शंस में से वो सारे विकल्प हट जाएंगे
- 4:09:24जिनमें दो शामिल हैं। और जो बचेगा वही
- 4:09:27आपका सही आंसर होगा।
- 4:09:28स्मार्ट लॉजिक। दूसरा सवाल देखते हैं।
- 4:09:31आपको गलत सुमेलित युग्म यानी इनकरेक्टली
- 4:09:34मैच्ड पेयर पहचानना है।
- 4:09:35इंडिया आरआई करनाल
- 4:09:36एनआरसीई हिसार।
- 4:09:38सीएसएसआर आईआई मृदा लवणता रोहतक
- 4:09:41सीआईआरबी बहस हिसार।
- 4:09:44अब यहां हरियाणा के पेरिस वाले कांसेप्ट
- 4:09:46को रिकॉल कीजिए। हमने बात की थी कि ज्यादा
- 4:09:48सिंचाई से मिट्टी में जो सेलेनिटी आई उस
- 4:09:51पर रिसर्च कहां हो रही है? क्या सीएसएसआर
- 4:09:53है? रोहतक में था?
- 4:09:54नहीं वो तो करनाल में था ना।
- 4:09:56एक्जेक्टली। वो करनाल के उस साइंटिफिक
- 4:09:58इकोसिस्टम का हिस्सा है जहां डीडब्ल्यूआर
- 4:10:01भी है। इस तरह के लिंकेज से आप तुरंत पकड़
- 4:10:04लेंगे कि ऑप्शन सी गलत मैच किया गया है।
- 4:10:07लास्ट क्वेश्चन 20वीं पशुधन गणना से सवाल
- 4:10:11है ओवरऑल सर्वाधिक पशुधन वाला जिला कौन सा
- 4:10:14है? ऑप्शंस हैं सिरसा, भिवानी, हिसार,
- 4:10:19जींद।
- 4:10:20यहां अपनी विजुअल मेमोरी को एक्टिवेट
- 4:10:22कीजिए। हमने उस 3D बारग्राफ को इमेजिन
- 4:10:24किया था। हमने एक ट्रैप भी डिस्कस किया था
- 4:10:27कि गाय सिरसा में ज्यादा हैं। लेकिन जब
- 4:10:30ओवरऑल टोटल लाइफस्टॉक या भैंसों की बात
- 4:10:32आती है तो उस ग्राफ का सबसे ऊंचा पिलर कौन
- 4:10:35से जिले का था?
- 4:10:36हिसार का पिलर सबसे ऊंचा था।
- 4:10:38बस उस लॉजिक को अप्लाई कीजिए। आंसर आपके
- 4:10:40सामने आ जाएगा। यह एलिमिनेशन टेक्निक और
- 4:10:43कांसेप्ट नेटवर्किंग ही प्रीलिम्स के
- 4:10:45बाउंसर सवालों को फेस करने का सही तरीका
- 4:10:48है।
- 4:10:48अगर मैं एक फैकल्टी के नजरिए से आज के इस
- 4:10:51पूरे सेशन का एक क्विक रिककैप दूं तो हमने
- 4:10:53बहुत सिस्टेटिकली चीजों को कवर किया है।
- 4:10:56हमने हाफेड 1966 से लेकर सीड कॉप 1974 तक
- 4:11:01एग्रीकल्चरल बॉडीज की क्रोनोलॉजी समझी।
- 4:11:03हमने सिरसा और करनाल के बीच के यूपीएससी
- 4:11:06ट्रैप को डिकोड किया। मेरा पानी मेरी
- 4:11:09विरासत योजना के पीछे के वाटर कंजर्वेशन
- 4:11:11लॉजिक को देखा।
- 4:11:12हिसार और कर्नवाल के रिसर्च इंस्टट्यूट्स
- 4:11:14को मैप किया।
- 4:11:15पशुधन गणना में सिरसा और हिसार के डाटा
- 4:11:18ट्रैप्स को समझा और फाइनली फॉरेस्ट कवर
- 4:11:21में एरिया बनाम परसेंटेज के फर्क को
- 4:11:23एनालाइज किया।
- 4:11:24यह सभी पॉइंट्स आपके प्रीलिम्स और मेंस के
- 4:11:26लिए हाई यील्ड टेक अवे हैं।
- 4:11:28इतने डीप एनालिसिस के बाद मुझे लगता है
- 4:11:30एग्री इकॉनमी का कोई भी डायमेंशन अछूता
- 4:11:32नहीं रहा। लेकिन सेशन क्लोज करने से पहले
- 4:11:35मैं चाहता हूं कि एस्पिरेंट्स की सोचने के
- 4:11:36लिए एक प्रोवोकेटिव थॉट छोड़ के जाएं।
- 4:11:39यह बहुत जरूरी है। आप सभी इस पर मेंस के
- 4:11:41नजरिए से ब्रेन स्टार्मिंग करें। हमने आज
- 4:11:44देखा कि हरियाणा एग्रीकल्चर और डेयरी
- 4:11:46प्रोडक्शन में एक अनडिस्प्यूटेड लीडर है।
- 4:11:49एक सक्सेस मॉडल है। बिल्कुल। लेकिन अगर हम
- 4:11:52मेरा पानी, मेरी विरासत की जरूरत और
- 4:11:54लगातार गिरते भूजल स्तर को एक साथ रखकर
- 4:11:58देखें तो एक बड़ा सवाल उठता है। भविष्य
- 4:12:01में जब क्लाइमेट चेंज अपने चरम पर होगा और
- 4:12:04वाटर क्राइसिस बढ़ेगा तब इस सक्सेस मॉडल
- 4:12:07को कैसे सस्टेन किया जाएगा?
- 4:12:08क्या हमारी आज की नीतियां कल के सूखे से
- 4:12:10लड़ने के लिए काफी है?
- 4:12:12इस पर गहराई से विचार कीजिएगा। इसी
- 4:12:14प्रोवोकेटिव सवाल और सेल्फ रिफ्लेक्शन के
- 4:12:16साथ हम आज की इस डीप ड्राइव को यहीं रोकते
- 4:12:19हैं। अपने कांसेप्ट्स को शार्प करते रहिए
- 4:12:21और ट्रैप से बचकर अपनी हुकूमत कायम कीजिए।
- 4:12:25दिस लेक्चर वास बाय दीशान आईएस।
- 4:12:27हरियाणा की जैव विविधता और औद्योगिक
- 4:12:29परिदृश्य। आज के इस डीप ड्राइव में हम ठीक
- 4:12:33इसी विरोधाभास और संतुलन को डिकोड करने
- 4:12:36वाले हैं। देशांत आईएएस और राहुल प्रकाश
- 4:12:39सर के मार्गदर्शन में तैयार की गई
- 4:12:41यूपीएससी सिविल सेवा अध्ययन सामग्री हमारे
- 4:12:44सामने है और इन नोट्स की गहराई सच में
- 4:12:48सोचने पर मजबूर करती है।
- 4:12:49हम बिल्कुल यह सिर्फ तथ्यों की कोई सूची
- 4:12:52नहीं है। हां मतलब यह समझने की एक चाबी है
- 4:12:55कि एक राज्य जिसके पास ना तो लोहे की
- 4:12:58खदानें हैं और ना ही कोयले के भंडार वो आज
- 4:13:01भारत के औद्योगिक पावर हाउस के रूप में
- 4:13:04कैसे खड़ा है?
- 4:13:04एग्जैक्टली और यह समझना हर गंभीर
- 4:13:07एस्पिरेंट के लिए बहुत जरूरी है कि
- 4:13:09यूपीएससी केवल सत ही जानकारी नहीं मांगता।
- 4:13:11दिशांत आईएएस में हम अक्सर यह कहते हैं कि
- 4:13:14मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के लिए एक
- 4:13:16विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण विकसित करना ही
- 4:13:18सफलता का मूल मंत्र है।
- 4:13:20सही कहा। आज का हमारा मिशन एकदम स्पष्ट
- 4:13:23है। इन नोट्स में छिपे महत्वपूर्ण
- 4:13:25कांसेप्ट्स को समझना और एग्जामिनर के
- 4:13:28बिछाए जो एग्जाम ट्रैप्स होते हैं उन्हें
- 4:13:31पहचानना।
- 4:13:31और साथ ही इस बेमिसाल विकास मॉडल के पीछे
- 4:13:35के क्यों और कैसे का विश्लेषण करना। जब
- 4:13:38हरियाणा की बात आती है तो एक तरफ कंक्रीट
- 4:13:41के विशाल जंगल और हजारों हेक्टेयर में
- 4:13:43फैले विशेष आर्थिक क्षेत्र दिखते हैं और
- 4:13:46दूसरी तरफ संरक्षित वन्य जीव क्षेत्र। यह
- 4:13:49संतुलन कैसे काम कर रहा है? यह एक बहुत ही
- 4:13:52शानदार केस स्टडी है।
- 4:13:53तो चलिए संरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क के
- 4:13:55बुनियादी ढांचे से ही शुरुआत करते हैं।
- 4:13:58अगर राज्य के संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क पर
- 4:14:00नजर डाली जाए तो नॉर्थ्स एक बहुत ही
- 4:14:03स्पष्ट वर्गीकरण देते हैं। राज्य में दो
- 4:14:06राष्ट्रीय उद्यान यानी नेशनल पार्कक्स
- 4:14:08हैं। आठ वन्यजीव अभयारण्य हैं और दो
- 4:14:11संरक्षण रिजर्व है।
- 4:14:12देखिए इन आंकड़ों को तो कोई भी रट सकता
- 4:14:14है। लेकिन असली सवाल यह है कि इनके बीच
- 4:14:18तकलीकी अंतर क्या है? हां, एक आम धारणा यह
- 4:14:22होती है कि सब बस जंगल के अलग-अलग नाम
- 4:14:24हैं।
- 4:14:25और यहीं पर सबसे बड़ी गलती होती है। गंभीर
- 4:14:27एस्पिरेंट्स इसे मार्क करें। आपको पता
- 4:14:30होना चाहिए कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम
- 4:14:32के तहत इन श्रेणियों में इंसानी दखल
- 4:14:35अंदाजी का स्तर अलग-अलग होता है।
- 4:14:37मतलब नियम अलग होते हैं।
- 4:14:39बिल्कुल। राष्ट्रीय उद्यान या नेशनल पार्क
- 4:14:42में नियम सबसे सख्त होते हैं। वहां चराई
- 4:14:45या लकड़ी बिनने जैसी किसी भी मानवीय
- 4:14:47गतिविधि की अनुमति नहीं होती। वहीं वन्य
- 4:14:50जीव अभ्यारण्य में स्थानीय लोगों को सीमित
- 4:14:53अधिकार मिलते हैं। जैसे मवेशी चराना
- 4:14:55बशर्ते उससे वन्य जीवों को नुकसान ना हो।
- 4:14:58और जब कम्युनिटी रिजर्व की बात आती है तो
- 4:15:00वहां स्थानीय समुदाय संरक्षण में एक
- 4:15:03सक्रिय भागीदार होता है। यह अंतर समझना
- 4:15:05वाकई जरूरी है। अब अगर इन दो राष्ट्रीय
- 4:15:08उद्यानों की बात करें तो पहला नाम आता है
- 4:15:11सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान का जो
- 4:15:13गुरुग्राम में स्थित है।
- 4:15:14हम इसके इतिहास पर गौर करें तो 1971 में
- 4:15:19डॉ. सलीम अली जिन्हें बर्ड मैन ऑफ इंडिया
- 4:15:22भी कहा जाता है।
- 4:15:23उनके अथक प्रयासों से इसे अभयारण्य का
- 4:15:26दर्जा मिला था। और बाद में 5 जुलाई 1991
- 4:15:30को इसे राष्ट्रीय उद्यान में अपग्रेड कर
- 4:15:32दिया गया।
- 4:15:32मैंने नोट्स में एक और दिलचस्प बात पढ़ी
- 4:15:35कि पीटर जैक्सन नाम के प्रकृतिवादी ने इस
- 4:15:39स्थान की खोज की थी। हम्म।
- 4:15:40और यह जगह मुख्य रूप से साइबेरियन, सारस
- 4:15:43जैसे प्रवासी पक्षियों के लिए विश्व
- 4:15:46प्रसिद्ध है।
- 4:15:47सही पॉइंट है। और यहीं से हमारा पहला
- 4:15:49प्रीलिम्स अलर्ट सामने आता है। जब हम
- 4:15:51दूसरे राष्ट्रीय उद्यान की बात करते हैं
- 4:15:52जो कालेसर है और यमुनानगर में है तो इसे
- 4:15:55दिसंबर 2003 में स्थापित किया गया था।
- 4:15:57इसका कुल क्षेत्रफल 4682.32
- 4:16:00हेक्टेयर है और यह राज्य का सबसे बड़ा
- 4:16:03राष्ट्रीय उद्यान है।
- 4:16:04और ये अपने घने साल के पेड़ों के लिए जाना
- 4:16:06जाता है ना।
- 4:16:07एक्साक्ट्ली। साल के पेड़, लाल जंगली
- 4:16:09मुर्गा यानी रेड जंगल फाउल और भौकने वाले
- 4:16:11हिरण के लिए जाना जाता है। इसका नाम इसके
- 4:16:13अंदर स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर के नाम
- 4:16:15पर पड़ा है। लेकिन दिशांत आईएस की कक्षाओं
- 4:16:18में हम हमेशा एक एग्जाम ट्रैप के प्रति
- 4:16:20आगाह करते हैं।
- 4:16:21वो अबूशहर वाला ट्रैप।
- 4:16:22बिल्कुल। अक्सर सवालों में पूछा जाता है
- 4:16:24कि हरियाणा का सबसे बड़ा अभयारण्य कौन सा
- 4:16:27है? और छात्र जल्दबाजी में अबूशर पर टिक
- 4:16:29लगाकर यह मान लेते हैं कि वह एक नेशनल
- 4:16:31पार्क है।
- 4:16:32जबकि वो सिरसा स्थित अबूशहर का क्षेत्रफल
- 4:16:3511530 हेक्टेयर है जो कालेसर से कई गुना
- 4:16:39बड़ा है।
- 4:16:40यही तो ट्रैप है। ध्यान रहे अबूशहर एक
- 4:16:44राष्ट्रीय उद्यान नहीं है। यह एक क्लासिक
- 4:16:46ट्रैप है। आकार में विशाल होने का मतलब यह
- 4:16:49नहीं है कि उसे सर्वोच्च संरक्षण का दर्जा
- 4:16:52प्राप्त हो।
- 4:16:53और अबूशहर के बारे में एक और महत्वपूर्ण
- 4:16:55तथ्य यह है कि 2018 में इसे सामुदायिक
- 4:16:58रिजर्व का दर्जा दे दिया गया था।
- 4:17:00मतलब अब वहां स्थानीय लोग भी जमीन के
- 4:17:03प्रबंधन और संरक्षण का हिस्सा हैं। जिससे
- 4:17:06मानव वन्य जीव संघर्ष को कम किया जा सके।
- 4:17:08सटीक विश्लेषण और अगर वन्य जीव अभयारण्यों
- 4:17:12में ध्रुव्यय तुलना यानी एक्सट्रीम्स को
- 4:17:14देखा जाए तो एक छोर पर अबूशहर है 11,000
- 4:17:17से ज्यादा हेक्टेयर के साथ और दूसरे छोर
- 4:17:20पर कुरुक्षेत्र का छिलछिला अभयारण्य है
- 4:17:23जो सिया गांव के पास मात्र 29 हेक्टेयर
- 4:17:26में सिमटा हुआ है।
- 4:17:27सिर्फ 29 हेक्टेयर यह तो किसी बड़ी
- 4:17:30हाउसिंग सोसाइटी से भी छोटा हुआ। यह
- 4:17:33आंकड़ा अपने आप में सोचने पर मजबूर करता
- 4:17:35है कि वन्य जीवों के लिए जगह कितनी
- 4:17:38सिकुड़ती जा रही है।
- 4:17:39और इसके अलावा कुछ अन्य प्रमुख अभयारण्यों
- 4:17:42का जिक्र भी नोट्स में है। जैसे झज्जर का
- 4:17:44भिंडावास जो अपनी सुंदर प्राकृतिक झील के
- 4:17:47लिए जाना जाता है। इसकी स्थापना 2009 में
- 4:17:50हुई थी।
- 4:17:51रेवाड़ी का नाहर अभयारण्य भी है जो कभी
- 4:17:54दुजाना के नवाब का चरागाह हुआ करता था। और
- 4:17:57पंचकूला का वीर शिकारगढ़ और हां गुरुग्राम
- 4:18:00और फरीदाबाद की सीमा पर स्थित असोला भाटी
- 4:18:03को एक पर्यावरण संवेदी क्षेत्र घोषित किया
- 4:18:06गया है जो अरावली की पहाड़ियों को
- 4:18:08अंधाधुंध खनन और निर्माण से बचाने के लिए
- 4:18:11एक बहुत अहम कदम है।
- 4:18:12अरावली का संरक्षण तो वैसे भी बहुत
- 4:18:14क्रिटिकल मुद्दा है।
- 4:18:16बिल्कुल यहां मुझे यूपीएससी की तैयारी से
- 4:18:18जुड़ी एक बात याद आती है। एक छोटी सी
- 4:18:20शायरी है। प्रीलिम्स के चक्रव्यूह में
- 4:18:22अक्सर वही फंसते हैं जो कांसेप्ट छोड़कर
- 4:18:25सिर्फ फैक्ट्स रटते हैं।
- 4:18:26क्या बात है बहुत सटीक।
- 4:18:28तो इसी कांसेप्ट को आगे बढ़ाते हुए राहुल
- 4:18:30प्रकाश सर और उनकी टीम के मार्गदर्शन में
- 4:18:33तैयार किए गए इन नोट्स के अगले हिस्से पर
- 4:18:35चलते हैं जो है संरक्षण रिजर्व। कैथल और
- 4:18:38कुरुक्षेत्र में फैला सरस्वती रिजर्व इसका
- 4:18:41एक बेहतरीन उदाहरण है। इसे सोनसर जंगल के
- 4:18:45नाम से भी जाना जाता है। 2022 में 73वां
- 4:18:49राज्य वन महोत्सव यहीं आयोजित किया गया
- 4:18:51था। और दूसरा रिजर्व जींद में बीरबारा है
- 4:18:55जो 419 हेक्टेयर में फैला है।
- 4:18:56अब जैव विविधता को बचाने का काम सिर्फ
- 4:19:00जंगलों को सुरक्षित घोषित करने तक सीमित
- 4:19:02नहीं है। कई प्रजातियां ऐसी हैं जिनकी
- 4:19:05आबादी इतनी गिर चुकी है कि उन्हें सक्रिय
- 4:19:08रूप से बचाने की जरूरत है।
- 4:19:10और यहीं से प्रजनन केंद्र यानी ब्रीडिंग
- 4:19:13सेंटर्स तस्वीर में आते हैं। नोट्स में एक
- 4:19:15बहुत ही रोचक पैटर्न देखने को मिलता है।
- 4:19:17हां, मैंने देखा कि हर लुप्तप्राय प्रजाति
- 4:19:20के लिए एक विशिष्ट केंद्र बनाया गया है।
- 4:19:22जैसे गिद्धों के लिए पिंजौर में प्रजनन
- 4:19:25केंद्र है।
- 4:19:25और यह कोई आम केंद्र नहीं है बल्कि पूरे
- 4:19:28एशिया में अपनी तरह का पहला केंद्र है।
- 4:19:30वो डाइक्लोफिनाइक दवा के कारण गिद्धों की
- 4:19:32जो सामूहिक मौतें हुई, उसके बाद यह कदम
- 4:19:34उठाना बेहद जरूरी था।
- 4:19:36बिल्कुल। इसके अलावा चिंकारा के लिए
- 4:19:38भिवानी के कैरू में, मगरमच्छ के लिए
- 4:19:41कुरुक्षेत्र के भौर सैदान में और तीतर के
- 4:19:44लिए पंचकूला के मोरनी में प्रजनन केंद्र
- 4:19:47हैं।
- 4:19:48रेवाड़ी के झाबुआ में मोर और चिंकारा
- 4:19:51दोनों के लिए संयुक्त केंद्र स्थापित किया
- 4:19:53गया है।
- 4:19:54यहां गंभीर एस्पिरेंट्स को एक और एग्जाम
- 4:19:56ट्रैप नोट करना चाहिए। अगर परीक्षा में
- 4:19:58डियर पार्क के बारे में पूछा जाए तो वह
- 4:20:00हिसार में स्थित है जिसकी स्थापना 19771
- 4:20:04में हुई थी और एक छोटा पार्क महम में भी
- 4:20:06है रोहतक में। लेकिन अगर प्रश्न स्पष्ट
- 4:20:09रूप से हिरण प्रजनन केंद्र के बारे में हो
- 4:20:12तो उसका सही उत्तर कैरू होगा जो भिवानी
- 4:20:14में है। पार्क जो आमतौर पर पर्यटन और
- 4:20:17सामान्य जागरूकता के लिए होता है और
- 4:20:19प्रजनन केंद्र जो वैज्ञानिक संरक्षण के
- 4:20:22लिए होता है। इनके बीच यह तकनीकी अंतर
- 4:20:24परीक्षा के दबाव में अक्सर नजरअंदाज हो
- 4:20:26जाता है।
- 4:20:27यह एक बहुत ही बारीक लेकिन महत्वपूर्ण
- 4:20:29अंतर है। और जब हम पारिस्थितिकी की बात कर
- 4:20:32रहे हैं तो वनस्पतियों को कैसे भूल सकते
- 4:20:35हैं?
- 4:20:35बिल्कुल नहीं भूल सकते। हरियाणा में 59 से
- 4:20:3861 के करीब हर्बल पार्क हैं।
- 4:20:40सबसे ज्यादा हर्बल पार्क रेवाड़ी और
- 4:20:42महेंद्रगढ़ जिले में है। राज्य का सबसे
- 4:20:45पहला हर्बल पार्क 2001 में यमुनानगर में
- 4:20:48स्थापित किया गया था जिसका नाम देवीलाल
- 4:20:51हर्बल पार्क है।
- 4:20:52लेकिन जो चीज सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है
- 4:20:54वो है मोरनी हिल्स में पतंजलि के सहयोग से
- 4:20:57विकसित किया जा रहा वर्ल्ड हर्बल फॉरेस्ट।
- 4:20:59यह सिर्फ वनस्पतियों को बचाने की पहल नहीं
- 4:21:02है बल्कि इकोरिज्म और आयुर्वेद आधारित
- 4:21:04अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का एक मास्टर
- 4:21:07स्ट्रोक भी लगता है।
- 4:21:08सही कहा। पर्यावरण संरक्षण को जब
- 4:21:10अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया जाता है तो
- 4:21:12उसके सफल होने की संभावना कई गुना बढ़
- 4:21:14जाती है और अर्थव्यवस्था की इसी कड़ी को
- 4:21:16पकड़ते हुए दिशांत आईएस के नोट्स हमें उस
- 4:21:19आश्चर्यजनक औद्योगिक मॉडल की ओर ले जाते
- 4:21:21हैं जो हरियाणा को देश में सबसे अलग खड़ा
- 4:21:23करता है।
- 4:21:24यह सच में एक बड़ा विरोधाभास है क्योंकि
- 4:21:27राज्य में कोई
- 4:21:28कोई उल्लेखनीय खनिज संपदा नहीं है।
- 4:21:30एग्जैक्टली ना तो झारखंड की तरह कोयले की
- 4:21:32खदानें हैं और ना ही ओसा की तरह लोहे के
- 4:21:35भंडार। फिर भी यह राज्य आज एक औद्योगिक
- 4:21:38पावर हाउस है। यह कैसे संभव हुआ?
- 4:21:40इस पहेली का जवाब है भूगोल और नीतियां।
- 4:21:44इसका सबसे बड़ा कारण दिल्ली यानी
- 4:21:46राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से इसकी निकटता
- 4:21:48है। लेकिन सिर्फ निकटता ही सब कुछ नहीं
- 4:21:51होती।
- 4:21:51तो फिर मुख्य वजह क्या है?
- 4:21:53हरियाणा ने अपने मजबूत कृषि आधार का
- 4:21:55बेहतरीन इस्तेमाल किया। उस कृषि अधिशेष को
- 4:21:58खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण के हब में
- 4:22:01बदला और फिर लॉजिस्टिक्स और बेहतरीन
- 4:22:03इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए सेवा क्षेत्र को
- 4:22:06मजबूत किया। इसके पीछे के आंकड़े सच में
- 4:22:08हैरान करने वाले हैं। पूरे भारत की 50%
- 4:22:11यात्री कारें, 60% मोटरसाइकिलें और 50%
- 4:22:16ट्रैक्टर अकेले हरियाणा में बनते हैं।
- 4:22:19यह कोई छोटा योगदान नहीं है। जब कृषि आधार
- 4:22:22मजबूत होता है तो स्वाभाविक रूप से बड़ी
- 4:22:24वैश्विक कंपनियां वहां अपना बेस बनाती
- 4:22:26हैं।
- 4:22:26जैसे पानीपत के समालाखा में 1992 से nसle
- 4:22:30इंडिया का प्लांट है। जहां मैगी और किटकैट
- 4:22:32बनती है।
- 4:22:33मानेसर में परफेक्ट टी वैनमेले का प्लांट
- 4:22:35है। मेंटोज़ के लिए और सोनीपत में ग्लैक्सो
- 4:22:38स्मिथ क्लाइन का प्लांट रहा है जो
- 4:22:40हॉर्लिक्स का बहुत बड़ा केंद्र था।
- 4:22:42बिल्कुल दिशांत आईएएस में राहुल प्रकाश सर
- 4:22:45अक्सर समझाते हैं कि किसी शहर का इतिहास
- 4:22:48और उसका भूगोल उसकी आधुनिक अर्थव्यवस्था
- 4:22:51को कैसे आकार देता है।
- 4:22:53बिल्कुल पानीपत का ही उदाहरण लीजिए। नोट्स
- 4:22:56इसे ड्यूल हब या द ड्यूल हब कहते हैं। यह
- 4:23:00एक अद्भुत और विचारोत्तेजक विरोधाभास है।
- 4:23:03एक तरफ यह बुनकरों का शहर है। पीढ़ियों से
- 4:23:06चला आ रहा पारंपरिक हथकरघा उद्योग यहां की
- 4:23:08आत्मा है जो आज भी भारतीय सशस्त्र बलों को
- 4:23:11कंबल की आपूर्ति करता है
- 4:23:13जो कि एक श्रम गहन और पारंपरिक क्षेत्र
- 4:23:16है।
- 4:23:16हां लेकिन उसी शहर के दूसरे हिस्से में
- 4:23:191998 में स्थापित आईओसीएल पानीपत रिफाइनरी
- 4:23:22है। यह दक्षिण एशिया में दूसरी सबसे बड़ी
- 4:23:24रिफाइनरी है और पेट्रोकेमिकल्स का एक
- 4:23:27विशाल आधुनिक और पूंजी गहन केंद्र है। एक
- 4:23:29ही शहर में हस्तकला का धीमापन और रिफाइनरी
- 4:23:32की खतरनाक आधुनिकता। यह सह अस्तित्व
- 4:23:36पानीपत को एक ड्यूल हब बनाता है।
- 4:23:38और यह सोचने वाली बात है कि कैसे एक ही
- 4:23:40शहर दो अलग-अलग सदियों को एक साथ जी रहा
- 4:23:42है।
- 4:23:42पीछे की कहानी भी दिलचस्प है। 1980 के दशक
- 4:23:46की शुरुआत में Maruti Suzuki ने गुरुग्राम
- 4:23:49को चुना जो उस वक्त लगभग एक बंजर इलाका
- 4:23:53था। लेकिन दिल्ली के सत्ता केंद्र और
- 4:23:55एयरपोर्ट से नजदीकी ने इसे एक आदर्श स्थान
- 4:23:58बना दिया।
- 4:23:591983 में वहां से शुरुआत हुई और फिर 2007
- 4:24:03में मानेसर तक इसका विस्तार हुआ। इसी तर्ज
- 4:24:07पर हीरो मोटोकॉप ने गुरुग्राम और रेवाड़ी
- 4:24:10के धारूहेड़ा बेल्ट में अपना दबदबा बनाया।
- 4:24:13फरीदाबाद एस्कॉर्ट्स जैसी कंपनियों के साथ
- 4:24:16ट्रैक्टर और भारी इंजीनियरिंग का केंद्र
- 4:24:18बन गया। यहां विकास और भूगोल का जो संगम
- 4:24:21है उस पर एक और लाइन याद आ रही है।
- 4:24:23किताबों के पन्नों में जो उलझ गया वह
- 4:24:26सिर्फ फैक्ट्स गिनाएगा। जिसने इस भूगोल और
- 4:24:28इकॉनमी को जोड़ा वही असली रैंक लाएगा।
- 4:24:31बहुत खूब। और अगर सूचना प्रौद्योगिकी की
- 4:24:34बात करें तो 1997 में टीसीएस और जेनपैक्ट
- 4:24:38के गुरुग्राम आने के बाद से इस इलाके ने
- 4:24:41पीछे मुड़कर नहीं देखा है।
- 4:24:43साइबर सिटी की गगनचुंबी इमारतें इस बदलाव
- 4:24:45की गवाह हैं। लेकिन मेरी नजर में सबसे
- 4:24:48दिलचस्प कहानी अंबाला की है। अंबाला को
- 4:24:51विज्ञान नगरी या साइंस सिटी कहा जाता है।
- 4:24:53नोट्स के अनुसार भारत के 40% वैज्ञानिक
- 4:24:56उपकरणों का निर्माण अकेले अंबाला में होता
- 4:24:58है। चाहे वह स्कूलों के माइक्रोस्कोप्स हो
- 4:25:01या एडवांस लैब के उपकरण। ब्रिटिश काल से
- 4:25:03ही वहां कुशल, ग्लास ब्लोअर्स और मैकेनिक
- 4:25:06मौजूद थे और उसी ऐतिहासिक कौशल ने अंबाला
- 4:25:08को आज यह मुकाम दिलाया है।
- 4:25:10और बाकी शहरों की भी अपनी एक विशिष्ट
- 4:25:12औद्योगिक पहचान है। यमुनानगर कागज और चीनी
- 4:25:15के लिए जाना जाता है। बिल्ट पेपर मिल और
- 4:25:18सरस्वती शुगर मिल यह दोनों उद्योग सीधे
- 4:25:21तौर पर जंगल और कृषि से जुड़े हैं।
- 4:25:23रेवाड़ी [गला साफ़ करने की आवाज़] को पीतल
- 4:25:24नगरी कहा जाता है और यह अपनी पारंपरिक
- 4:25:26तीला जूती के लिए भी मशहूर है। सोनीपत में
- 4:25:29एटलस साइकिल का एक बहुत बड़ा नाम था और
- 4:25:31हालांकि वह 2018 में बंद हो गई लेकिन आज
- 4:25:34भी याकूल जैसी कंपनियों के साथ यह एक बड़ा
- 4:25:37औद्योगिक क्षेत्र है।
- 4:25:38फरीदाबाद को इंजीनियरिंग रेफ्रिजरेटर्स और
- 4:25:41बाटा जूतों के लिए जाना जाता है।
- 4:25:43यहां एक बार फिर प्रीलिम्स अलर्ट देना
- 4:25:45चाहूंगा। कभी भी पीतल नगरी जो रेवाड़ी है
- 4:25:49और बुनकरों के शहर जो पानीपत है उनके बीच
- 4:25:52भ्रमित नहीं होना है। यह दोनों अलग-अलग
- 4:25:54चीजें हैं।
- 4:25:54और जब हम आईटी एक्सपोर्ट की बात करते हैं
- 4:25:56तो एक ऐसा तथ्य सामने आता है जो
- 4:25:58अच्छे-अच्छों को हैरान कर दे। आर्थिक
- 4:26:01अंतर्दृष्टि यह बताती है कि कर्नाटक और
- 4:26:04तेलंगाना के बाद हरियाणा भारत का तीसरा
- 4:26:07सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर निर्यातक है।
- 4:26:09यह सच में एक माइंड ब्लोइंग फैक्ट है
- 4:26:11क्योंकि जब हम आईटी और सॉफ्टवेयर की बात
- 4:26:14करते हैं तो दिमाग में सबसे पहले दक्षिण
- 4:26:16भारत के शहरी आते हैं।
- 4:26:18हरियाणा का नंबर तीन पर होना यह साबित
- 4:26:21करता है कि एनसीआर ने किस स्तर का सर्विस
- 4:26:23हब तैयार किया है। लेकिन यह सब रातोंरात
- 4:26:26या बिना किसी योजना के नहीं हुआ।
- 4:26:28बिल्कुल नहीं। नीतियां और बुनियादी ढांचा
- 4:26:30किसी भी औद्योगिक सफलता की रीड होते हैं।
- 4:26:338 मार्च 1967 को पंचकूला मुख्यालय के साथ
- 4:26:37एचएसआईआईडीसी
- 4:26:39की स्थापना हुई थी।
- 4:26:40हरियाणा राज्य औद्योगिक और अवसरचना विकास
- 4:26:43निगम
- 4:26:44हम
- 4:26:45इसका उद्देश्य उद्योगों के लिए जमीन और
- 4:26:48सुविधाएं विकसित करना था और हरियाणा का
- 4:26:50पहला औद्योगिक स्टेट सोनीपत के राई में
- 4:26:53स्थापित किया गया था। ग्रामो उद्योग को
- 4:26:55बढ़ावा देने के लिए 1969 में हरियाणा खादी
- 4:26:59एवं ग्राम उद्योग बोर्ड भी बना
- 4:27:01और इन एजेंसियों को एक आधुनिक दिशा देने
- 4:27:04के लिए उद्यम प्रोत्साहन नीति 2015 लागू
- 4:27:07की गई। इसका मुख्य फोकस मेक इन हरियाणा और
- 4:27:10ई ऑफ डूइंग बिजनेस पर था।
- 4:27:12दिशांत आईएएस के नोट्स इस नीति के चार
- 4:27:15मुख्य स्तंभों पर जोर देते हैं। आधारभूत
- 4:27:18ढांचा, वित्त कौशल और प्रक्रिया। एक गंभीर
- 4:27:21छात्र को यह समझना चाहिए कि इस नीति में
- 4:27:24एमएसएमई यानी सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम
- 4:27:27के लिए ₹1000 करोड़ का एक विशेष फंड क्यों
- 4:27:30शामिल किया गया?
- 4:27:31क्योंकि बड़े उद्योग जीडीपी बढ़ाते हैं।
- 4:27:33लेकिन असल रोजगार एमएसएमई सेक्टर से ही
- 4:27:36पैदा होता है।
- 4:27:37बिल्कुल सही। स्थानीय स्तर पर पलायन को
- 4:27:39रोकने और निचले स्तर के औद्योगीकरण के लिए
- 4:27:42यह फंड एक लाइफलाइन की तरह है।
- 4:27:44रोजगार और निवेश की बात हो रही है तो
- 4:27:47विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी सेज का जिकराना
- 4:27:50स्वाभाविक है।
- 4:27:50आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 28 सेज
- 4:27:54स्वीकृत हैं। जिनमें से 20 अधिसूचित हैं
- 4:27:56और सात पूरी तरह से परिचालन में हैं।
- 4:27:59झज्जर में Reliance का मल्टीप्रक्ट सेज
- 4:28:01राज्य का सबसे बड़ा सेज है।
- 4:28:03गुरुग्राम में डीएलएफ का सेज है। इसके
- 4:28:06अलावा कुछ विशिष्ट औद्योगिक पार्क भी
- 4:28:09विकसित किए गए हैं जो किसी एक खास उद्योग
- 4:28:12पर केंद्रित हैं।
- 4:28:13जैसे गुरुग्राम के उद्योग विहार में जेम
- 4:28:16एंड ज्वेलरी पार्क, खरखौदा और मानेसर में
- 4:28:19लेदर पार्क और झज्जर के बहादुरगढ़ में
- 4:28:21फुटवेयर पार्क। एक ही जगह पर एक ही तरह के
- 4:28:24उद्योग होने से सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स
- 4:28:26में भारी बचत होती है।
- 4:28:27इस पूरी चर्चा के बाद असली चुनौती यह है
- 4:28:30कि इस ज्ञान को परीक्षा के माहौल में कैसे
- 4:28:34लागू किया जाए। जैसा कि राहुल प्रकाश सर
- 4:28:36हमेशा कहते हैं कि जो कुछ भी पढ़ा है उसकी
- 4:28:38परख करना बहुत जरूरी है। निरंतरता ही
- 4:28:41कुंजी है। इसलिए नोट्स के अंत में जो
- 4:28:43यूपीएससी प्रीलिम्स चैलेंज दिया गया है
- 4:28:45उसका विश्लेषण करना आवश्यक है। एक और शेर
- 4:28:48अर्ज है। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जो
- 4:28:51रातों की नींदें गवाते हैं। और एलिमिनेशन
- 4:28:54लॉजिक वही लगाते हैं जो हर ट्रैप को
- 4:28:56पहचानते हैं।
- 4:28:57तो चलिए इसी लॉजिक के साथ वन्य जीव से
- 4:29:00जुड़े पहले एमसीक्यू को हल करने का प्रयास
- 4:29:03करते हैं। प्रश्न है कालेसर राष्ट्रीय
- 4:29:06उद्यान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर
- 4:29:09विचार करें। कथन एक यह हरियाणा का सबसे
- 4:29:13बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।
- 4:29:15ठीक है।
- 4:29:15कथन दो यह लाल जंगली मुर्गे के लिए
- 4:29:18प्रसिद्ध है और कथन तीन यमुना नदी इसकी
- 4:29:22पूर्वी सीमा से होकर बहती है।
- 4:29:24अब एक टॉपर इसे कैसे हल करेगा? सीधा उत्तर
- 4:29:27रटने के बजाय एलिमिनेशन लॉजिक का प्रयोग
- 4:29:29करना चाहिए। हमने अभी विस्तार से चर्चा की
- 4:29:32थी कि कालेसर का क्षेत्रफल 4682.32
- 4:29:35हेक्टेयर है और क्योंकि सुल्तानपुर आकार
- 4:29:38में छोटा है और अबू शहर राष्ट्रीय उद्यान
- 4:29:41की श्रेणी में ही नहीं आता इसलिए कथन एक
- 4:29:44तार्किक रूप से एकदम सही है।
- 4:29:46कथन दो भी सटीक है क्योंकि कालेसर विशेष
- 4:29:49रूप से साल के पेड़ों और लाल जंगली मुर्गे
- 4:29:51के संरक्षण के लिए जाना जाता है।
- 4:29:53अब आते हैं कथन तीन पर। यहां मैप रीडिंग
- 4:29:56यानी भूगोल का ज्ञान काम आता है। अगर
- 4:29:59हरियाणा के नक्शे पर नजर डाली जाए तो
- 4:30:02यमुना नदी यमुनानगर जिले में कालेसर के
- 4:30:04पास से ही राज्य में प्रवेश करती है और
- 4:30:07उत्तर प्रदेश के साथ एक प्राकृतिक पूर्वी
- 4:30:09सीमा बनाती है। इस लॉजिक से दिए गए तीनों
- 4:30:13कथन मजबूत और सही प्रतीत होते हैं।
- 4:30:15जब आप तथ्यों को भूगोल के साथ जोड़कर
- 4:30:18देखते हैं तो कांसेप्ट एकदम साफ हो जाता
- 4:30:20है। अब दूसरे चैलेंज की तरफ बढ़ते हैं जो
- 4:30:23उद्योग पर आधारित है। इसमें औद्योगिक
- 4:30:25क्लस्टर्स का मिलान करना है।
- 4:30:27सूची एक में शहर दिए गए हैं। एक पानीपत,
- 4:30:31दो अंबाला, तीन यमुनानगर और सूची दो में
- 4:30:34विशेषताएं हैं। ए साइंस सिटी, बी
- 4:30:37पेट्रोकेमिकल्स, सी पेपर सिटी।
- 4:30:40इस तरह के मिलान वाले प्रश्नों में
- 4:30:42एग्जामिनर अक्सर एक ट्रैप छोड़ता है।
- 4:30:44लेकिन इसे हल करने की ट्रिक यह है कि सबसे
- 4:30:47आसान कड़ी को सबसे पहले पकड़ा जाए। हमने
- 4:30:49अंबाला के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष में पढ़ा
- 4:30:52कि वहां 40% वैज्ञानिक उपकरण बनते हैं तो
- 4:30:56स्पष्ट रूप से अंबाला साइंस सिटी के साथ
- 4:30:58मैच होगा।
- 4:30:59फिर पानीपत की बात करें तो वह ड्यूल हब है
- 4:31:02जहां आईओसीएल रिफाइनरी स्थित है। इसलिए यह
- 4:31:05पेट्रोकेमिकल्स के साथ जुड़ जाएगा।
- 4:31:07और अंत में यमुनानगर जहां शिवालिक की
- 4:31:10तलहटी से मिलने वाले कच्चे माल के कारण
- 4:31:12बिल्ट पेपर मिल स्थापित हैं। वह स्वाभाविक
- 4:31:15रूप से पेपर सिटी से मैच करेगा। जब लॉजिक
- 4:31:18लगाकर कड़ी से कड़ी जोड़ी जाती है तो
- 4:31:21विकल्पों में सही उत्तर अपने आप उभर कर
- 4:31:23सामने आ जाता है। कभी भी सीधे ऑप्शंस देख
- 4:31:26के घबराना नहीं चाहिए। यह लॉजिक एग्जाम
- 4:31:28हॉल के उस भारी दबाव में बहुत काम आता है।
- 4:31:32तो चलिए आज के इस पूरे विश्लेषण का एक
- 4:31:34संक्षिप्त रिककैप कर लेते हैं।
- 4:31:36आज हमने देखा कि कैसे हरियाणा ने बिना
- 4:31:38प्राकृतिक खनिजों के सिर्फ अपनी रणनीतिक,
- 4:31:41भौगोलिक स्थिति और उद्यम प्रोत्साहन नीति
- 4:31:442015 जैसी मजबूत नीतियों का लाभ उठाते हुए
- 4:31:47भारी औद्योगीकरण किया है।
- 4:31:49वह ऑटोमोबाइल और सॉफ्टवेयर निर्यात में
- 4:31:51अग्रणी बन चुका है। हमने पानीपत के हथकर्ग
- 4:31:55से लेकर गुरुग्राम के साइबर सिटी तक के
- 4:31:58सफर को डिकोड किया। लेकिन इस अंधाधुंध
- 4:32:00विकास के बीच राज्य ने आठ वन्य जीव,
- 4:32:03अभयारण्यों, दो राष्ट्रीय उद्यानों और
- 4:32:06गिद्ध व चिंकारा जैसे विभिन्न प्रजनन
- 4:32:09केंद्रों के माध्यम से अपनी जैव विविधता
- 4:32:11को भी संरक्षित करने का एक ढांचा तैयार
- 4:32:14किया है।
- 4:32:14यही संतुलन प्रशासन का असली लक्ष्य है।
- 4:32:18लेकिन इस चर्चा के अंत में एक बहुत ही
- 4:32:20गंभीर और उत्तेजक सवाल जन्म लेता है जिस
- 4:32:24पर हर उस व्यक्ति को विचार करना चाहिए जो
- 4:32:26सिस्टम का हिस्सा बनना चाहता है। विकास की
- 4:32:29इस तेल रफ्तार में जहां एक तरफ झज्जर और
- 4:32:32गुरुग्राम जैसे इलाकों में हजारों
- 4:32:34हेक्टेयर के विशाल मल्टी प्रोडक्ट सेज
- 4:32:37कंक्रीट का जाल बिछा रहे हैं और दूसरी तरफ
- 4:32:40हमारे पास कुरुक्षेत्र में छिलछिला जैसा
- 4:32:42मात्र 29 हेक्टेयर का छोटा सा पारिस्थितिक
- 4:32:45तंत्र बचा है।
- 4:32:46क्या भविष्य में विकास के यह कंक्रीट के
- 4:32:49जंगल असली जंगलों को पूरी तरह निगल
- 4:32:52जाएंगे? आर्थिक प्रगति की भूख और
- 4:32:54पारिस्थितिकी के संरक्षण के बीच का यह जो
- 4:32:57अत्यंत नाजुक संतुलन है, आखिर यह कब तक और
- 4:33:00कैसे बना रहेगा?
- 4:33:01यह निश्चित रूप से एक ऐसा सवाल है जो
- 4:33:03सिर्फ किताबी नहीं है बल्कि हमारे भविष्य
- 4:33:05से जुड़ा है।
- 4:33:06दिस लेक्चर वास बाय दिशांत आईएएस। आज की
- 4:33:09हमारी यह पूरी चर्चा और यह गहन विश्लेषण
- 4:33:12दिशांत आईएएस और राहुल प्रकाश सर के
- 4:33:16मार्गदर्शन में तैयार की गई बेहतरीन
- 4:33:18अध्ययन सामग्री पर आधारित थी। इस डीप
- 4:33:21ड्राइव में बस इतना ही।
- 4:33:23रिसोर्सेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर।
- 4:33:26आज की इस गहरी चर्चा का विषय एक ऐसे राज्य
- 4:33:29के इर्द-गिर्द घूमता है जिसने कृषि से
- 4:33:32लेकर आधुनिक उद्योग तक का सफर बहुत ही कम
- 4:33:34समय में तय किया है। आज हम बात करेंगे
- 4:33:37हरियाणा के संसाधनों और बुनियादी ढांचे
- 4:33:40की।
- 4:33:40बिल्कुल। और इसमें भी विशेष रूप से जो
- 4:33:44खनिज संपदा है, ऊर्जा क्षेत्र है और
- 4:33:46परिवहन प्रणाली इन तीनों का हम एक बहुत ही
- 4:33:49गहन विश्लेषण करने वाले हैं।
- 4:33:51सही कहा। देखिए अक्सर राज्य की
- 4:33:53अर्थव्यवस्था को पढ़ते समय छात्र सिर्फ
- 4:33:56आंकड़ों पर ध्यान देते हैं। लेकिन अगर हम
- 4:33:59खनिज ऊर्जा और परिवहन इन प्रमुख स्तंभों
- 4:34:02के पीछे के भूगोल को डिकोड करें, तो पूरी
- 4:34:05तस्वीर ही बदल जाती है।
- 4:34:06जी हां। एक होलिस्टिक व्यू यानी समग्र
- 4:34:10दृष्टिकोण होना बहुत जरूरी है। स्क्रीन पर
- 4:34:13जो मैप दिख रहा है जरा उसकी कल्पना कीजिए।
- 4:34:15एक ऐसा मैप जिसमें पावर प्लांट, नेशनल
- 4:34:18हाईवे, एक्सप्रेसवे और माइनिंग ज़ोंस सब एक
- 4:34:22साथ गुंधे हुए हैं।
- 4:34:23एग्जैक्टली। और जो भी छात्र हमें सुन रहे
- 4:34:26हैं, सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क दिस। किसी
- 4:34:29भी राज्य की अर्थव्यवस्था का सही
- 4:34:31मूल्यांकन इन चार पिलर्स को समझे बिना
- 4:34:34अधूरा है।
- 4:34:35बिल्कुल अधूरा है। जब आपको मेंस में
- 4:34:37औद्योगिक विकास पर उत्तर लिखना हो तो इसी
- 4:34:40इंटरलिंकिंग की जरूरत पड़ेगी और प्रीलिम्स
- 4:34:42में तो खैर इन्हीं भौगोलिक स्थानों से
- 4:34:44सीधे सवाल बनते हैं। तो आज का मिशन यही है
- 4:34:46कि इस पूरे इकोसिस्टम को हम गहराई से
- 4:34:49समझें।
- 4:34:49द अरावली कनेक्शन। तो चलिए इस इकोसिस्टम
- 4:34:53की नींव से शुरू करते हैं जो असल में जमीन
- 4:34:55के नीचे दबी है। खनिज वितरण दक्षिण
- 4:34:58हरियाणा का भूगोल बहुत दिलचस्प है।
- 4:35:01बहुत दिलचस्प है। अगर आप इस 3D ब्लॉक
- 4:35:04डायग्राम को डिकोड करें जो हमारे दिमाग
- 4:35:07में है तो अरावली की पहाड़ियां दक्षिण
- 4:35:10हरियाणा में एक दीवार की तरह खड़ी दिखाई
- 4:35:12देती हैं।
- 4:35:13बिल्कुल और यही पहाड़ियां एक मिनरल रिजोन
- 4:35:16यानी खनिज समृद्ध क्षेत्र का निर्माण करती
- 4:35:18हैं। डायग्राम में आप देख सकते हैं कि
- 4:35:20कैसे क्वाडजाइट, ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर
- 4:35:23की परतें बिछी हुई हैं।
- 4:35:24जी। और इन्हीं परतों के बीच तांबे और लौह
- 4:35:27अयस्क यानी आयरन ओर की परतें भी दबी हुई
- 4:35:30हैं। अरावली दुनिया की सबसे पुरानी वलित
- 4:35:34पर्वत शृंगलाओं में से एक है ना, तो इसका
- 4:35:36असर तो दिखेगा ही।
- 4:35:38और यहीं पर आता है एक बहुत बड़ा प्रीलिम्स
- 4:35:42अलर्ट। जब भी दक्षिण हरियाणा की इस बेल्ट
- 4:35:46का जिक्र आता है तो महेंद्रगढ़ जिले का
- 4:35:49नाम सबसे ऊपर उभर कर आता है।
- 4:35:51सही कहा आपने। छात्रों को यह बिल्कुल
- 4:35:53स्पष्ट होना चाहिए कि महेंद्रगढ़ को ही
- 4:35:56हरियाणा में खनिजों का शहर या सिटी ऑफ
- 4:35:58मिनरल्स कहा जाता है।
- 4:36:00बिल्कुल। और महेंद्रगढ़ के अलावा एक और
- 4:36:02एग्जाम अलर्ट है भिवानी जिले की तोशाम
- 4:36:05पहाड़ियां। हम तोशाम की पहाड़ियां विशेष
- 4:36:09रूप से ग्रेनाइट और उससे संबंधित खनिजों
- 4:36:11के लिए प्रसिद्ध है। आग्नेय चट्टानों का
- 4:36:14मिलना यह साबित करता है कि यहां कभी
- 4:36:16ज्वालामुखी गतिविधि रही होगी।
- 4:36:18क्या बात है? यह भूगोल बहुत ही सटीक है।
- 4:36:21और [नाक से की जाने वाली आवाज़] इसी मजबूत
- 4:36:22भूगोल को देखते हुए मुझे एक पंक्ति याद आ
- 4:36:24रही है। अरावली के पत्थरों से मजबूत करनी
- 4:36:27है अपनी तैयारी। तोशाम की पहाड़ियों से
- 4:36:30ऊंची करनी है उड़ान हमारी।
- 4:36:32बहुत खूब। और यह मजबूती वैचारिक स्पष्टता
- 4:36:35में भी दिखनी चाहिए। अब अगर इन प्रमुख
- 4:36:38खनिजों को हम उनके सटीक स्थानों के साथ
- 4:36:40जोड़कर देखें तो सबसे पहले स्लेट पत्थर का
- 4:36:43नाम आता है।
- 4:36:44जी स्लेट पत्थर और इसके लिए रेवाड़ी का
- 4:36:48कुंड क्षेत्र अपनी स्लेट के लिए विश्व
- 4:36:50स्तर पर जाना जाता है।
- 4:36:52बिल्कुल यह कोई साधारण पत्थर नहीं है।
- 4:36:54मतलब कुंड की स्लेट का इस्तेमाल सदियों से
- 4:36:57होता आ रहा है और इसका निर्यात तो
- 4:36:59अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक किया गया है। और
- 4:37:02अगर हम लौह अयस्क यानी आयरन ओर की बात
- 4:37:05करें, तो जैसा कि हमने महेंद्रगढ़ के
- 4:37:07अरावली कनेक्शन में समझा, यह सीधा उसी
- 4:37:09बेल्ट में केंद्रित है।
- 4:37:10जी। लेकिन यहां एक सवाल उठता है जो बहुत
- 4:37:13से छात्रों को कंफ्यूज करता है। जब
- 4:37:15परीक्षा में चूना पत्थर और संगमरमर के
- 4:37:18बारे में पूछा जाता है, तो अक्सर एक भ्रम
- 4:37:21की स्थिति बन जाती है।
- 4:37:22अ बिल्कुल। और रैंकर्स फोकस हियर। यह एक
- 4:37:26क्लासिक यूपीएससी ट्रैप है। एग्जामिनर
- 4:37:29हमेशा चूना पत्थर और संगमरमर यानी मार्बल
- 4:37:32के बीच के इस बारीक अंतर का फायदा उठाता
- 4:37:34है।
- 4:37:35सही कहा। देखिए रोहतक में जो प्रचुर
- 4:37:38मात्रा में मिलता है वह चूना या कंकड़ है।
- 4:37:41इसका रूप भुरभुरा होता है और यह मुख्य रूप
- 4:37:44से सीमेंट उद्योग के काम आता है।
- 4:37:46एग्जैक्टली। इसके विपरीत महेंद्रगढ़ में
- 4:37:48जो मिलता है वह कायांतरित रूप है यानी
- 4:37:51संगमरमर या कैलसाइट। तो छात्रों को इन
- 4:37:54दोनों के बीच कंफ्यूज नहीं होना है।
- 4:37:56यूनिक मिनरल्स एंड स्पेसिफिक ट्रेट्स
- 4:37:59हम इन आम खनिजों के अलावा कुछ ऐसे पत्थर
- 4:38:02भी हैं जो अपने आप में एक भौगोलिक अजूबा
- 4:38:05हैं।
- 4:38:05अजूबा क्या यह संभव है कि कोई पत्थर लचीला
- 4:38:10हो और हिल सके?
- 4:38:12सुनने में अजीब लगता है ना? लेकिन चरकी
- 4:38:14दादरी के कल्याणा गांव में एक ऐसा ही
- 4:38:16अनूठा खनिज पाया जाता है जिसे हिलना पत्थर
- 4:38:20या फ्लेक्सिबल सैंड स्टोन कहा जाता है।
- 4:38:22जी इसे डांसिंग स्टोन भी कहते हैं। पूरे
- 4:38:26भारत में यह अपने आप में एक दुर्लभ
- 4:38:29भौगोलिक घटना है।
- 4:38:30बिल्कुल इसके कणों के बीच की सूक्ष्म
- 4:38:33संरचना कुछ इस तरह की है कि यह पत्थर मुड़
- 4:38:36सकता है। हालांकि इसका कोई बहुत बड़ा
- 4:38:38औद्योगिक उपयोग नहीं है। लेकिन प्रीलिम्स
- 4:38:40के लिए यह बहुत खास है। और अगर औद्योगिक
- 4:38:43महत्व के खनिजों को देखें तो क्वार्ड्स या
- 4:38:46सिलिका का बहुत बड़ा उपयोग है। यह मुख्य
- 4:38:49रूप से महेंद्रगढ़ और गुरुग्राम में पाया
- 4:38:52जाता है। सही कहा और यह कांच उद्योग का
- 4:38:55आधार है। इसी तरह चाइना क्ले यानी चीनी
- 4:38:58मिट्टी जो सिकंदरपुर, गुरुग्राम और
- 4:39:01फरीदाबाद में पाई जाती है।
- 4:39:03वो सेरेमिक उद्योग के लिए बहुत प्रासंगिक
- 4:39:06है। अब देखिए खनिजों को जमीन से निकालने
- 4:39:08और उनसे उद्योग चलाने के लिए जिस ताकत की
- 4:39:11जरूरत होती है
- 4:39:12वो है ऊर्जा।
- 4:39:13बिल्कुल। और हरियाणा के ऊर्जा क्षेत्र का
- 4:39:15विकास किसी क्रमिक चमत्कार से कम नहीं
- 4:39:18लगता।
- 4:39:18अगर हम क्रोनोलॉजी देखें
- 4:39:20तो 3 मई 1967 यानी 1967 में हरियाणा राज्य
- 4:39:25बिजली बोर्ड या एचएससीबी की स्थापना हुई
- 4:39:27थी।
- 4:39:28जी। लेकिन जैसे-जैसे मांग बढ़ी तो 1999
- 4:39:32आते-आते वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाने
- 4:39:34के लिए इसे दो हिस्सों में बांट दिया गया।
- 4:39:37हां, यूएचबीएन यानी उत्तर हरियाणा बिजली
- 4:39:40वितरण निगम और डीएचबीएन दक्षिण हरियाणा
- 4:39:44बिजली वितरण निगम।
- 4:39:45एज वी टीचर दिशांत आईएएस अंडर द गाइडेंस
- 4:39:47ऑफ़ राहुल प्रकाश सर, एंड देयर टीम
- 4:39:50ऐतिहासिक माइलस्टोनस को हमेशा क्रोनोलॉजी
- 4:39:52में याद रखना चाहिए। चाहिए
- 4:39:53बहुत से पॉइंट है और इसी क्रोनोलॉजी में
- 4:39:56एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि छिपी है।
- 4:39:58बिल्कुल 1970 में हरियाणा 100% ग्रामीण
- 4:40:03विद्युतीकरण यानी रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन
- 4:40:06प्राप्त करने वाला भारत का पहला राज्य बना
- 4:40:09था।
- 4:40:09यह बहुत बड़ी बात थी। मतलब एक राज्य 1966
- 4:40:13में बनता है और मात्र 4 साल के भीतर हर
- 4:40:16गांव तक बिजली के तार पहुंचा दिए जाते
- 4:40:19हैं। इसके पीछे के प्रशासनिक प्रयास वाकई
- 4:40:21काबिले तारीफ थे। हम और इतनी बड़ी मांग को
- 4:40:24पूरा करने के लिए विशाल बिजली संयंत्रों
- 4:40:27की भी आवश्यकता थी।
- 4:40:29सही कहा। अगर हम प्रमुख थर्मल पावर
- 4:40:31प्रोजेक्ट्स का तुलनात्मक विश्लेषण करें
- 4:40:33तो सबसे पुराना पानीपत थर्मल प्लांट है।
- 4:40:36इसे ताऊ देवीलाल प्लांट भी कहा जाता है।
- 4:40:39जी। और इसकी क्षमता 1367.80
- 4:40:42मेगावाट है। इसके बाद यमुनानगर का दीनबंधु
- 4:40:47छोटूराम प्लांट आता है जिसकी क्षमता 600
- 4:40:50मेगावाट है।
- 4:40:51और दीनबंधुंध छोटूराम प्लांट की एक बहुत
- 4:40:53ही खास बात है। यह निजी हाथों में सौंपी
- 4:40:55गई राज्य की पहली परियोजना एग्जैक्टली
- 4:40:59इसके अलावा हिसार के खेदार में स्थित
- 4:41:02राजीव गांधी थर्मल प्लांट का उल्लेख करना
- 4:41:04भी जरूरी है जो 1200 मेगावाट बिजली पैदा
- 4:41:08करता है।
- 4:41:08और दिलचस्प बात यह है कि इस राजीव गांधी
- 4:41:11थर्मल प्लांट के लिए कोयला कहां से आता
- 4:41:13है? दूर उड़ीसा के महानदी कोल फील्ड से।
- 4:41:16यह सोच याद रखना जरूरी है।
- 4:41:18बिल्कुल। और यहां एक एग्जाम अलर्ट है।
- 4:41:20इन सभी में सबसे विशाल परियोजना कौन सी
- 4:41:23है? हम
- 4:41:24इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्लांट जो
- 4:41:27झज्जर में है।
- 4:41:28जी 1500 मेगावाट यानी 500 मेगावाट की तीन
- 4:41:32इकाइयों के साथ यह सबसे बड़ा है।
- 4:41:34तो छात्रों बल्ब सी चमक चाहिए अगर रिजल्ट
- 4:41:37के दिन तो सुपरथर्मल प्लांट सी एनर्जी
- 4:41:40जलानी पड़ेगी। रात दिन न्यूक्लियर एंड
- 4:41:43रिन्यूएबल एनर्जी।
- 4:41:44क्या बात है बहुत खूब। लेकिन देखिए कोयले
- 4:41:46पर निर्भरता की अपनी सीमाएं हैं।
- 4:41:48बिल्कुल है और इसी कारण से अब एक बड़ा
- 4:41:51शिफ्ट देखने को मिल रहा है।
- 4:41:53फतेहाबाद के गोरखपुर में एक विशाल परमाणु
- 4:41:56संयंत्र यानी न्यूक्लियर प्लांट स्थापित
- 4:41:59किया गया है।
- 4:42:00जी और इसकी क्षमता देखिए। 700 मेगावाट की
- 4:42:03चार इकाइयां मतलब कुल 2800 मेगावाट का
- 4:42:05विस्तृत प्रोजेक्ट। यह तो पूरा गेम ही बदल
- 4:42:08देगा।
- 4:42:08सही कहा। थर्मल से ग्रीन एनर्जी की ओर यह
- 4:42:12शिफ्ट बहुत अहम है और अगर हम इसके
- 4:42:14जिओपॉलिटिकल महत्व को समझे तो गुरुग्राम
- 4:42:18में इंटरनेशनल सोलर अलायंस यानी आईएसए का
- 4:42:21मुख्यालय होना कोई छोटी बात नहीं है।
- 4:42:23बिल्कुल नहीं। यह दिखाता है कि हरियाणा
- 4:42:25सौर ऊर्जा में भी लीड कर रहा है। इसके साथ
- 4:42:28ही घरेलू सौर प्रणालियों को बढ़ावा देने
- 4:42:30के लिए मनोहर ज्योति योजना जैसी पहल भी की
- 4:42:33गई है।
- 4:42:33हम और इन सभी परियोजनाओं का संचालन करने
- 4:42:37वाली जो नोडल एजेंसी है वो है हरेडा यानी
- 4:42:40एचएआरईडीए।
- 4:42:42मुख्य परीक्षा में इस शिफ्ट पर सवाल बन
- 4:42:45सकता है।
- 4:42:45रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क। अब उस बुनियादी
- 4:42:48ढांचे पर आते हैं जो इन उद्योगों और ऊर्जा
- 4:42:51को जोड़ता है। सड़क परिवहन नेटवर्क।
- 4:42:54सड़क परिवहन के पदानुक्रम को समझना बहुत
- 4:42:56जरूरी है। एक फ्लो चार्ट की तरह सोचिए।
- 4:42:59जी। सबसे ऊपर एनएचएआई जो राष्ट्रीय
- 4:43:02राजमार्ग बनाता है। फिर पीडब्ल्यूडी जो
- 4:43:04राज्य राजमार्गों को संभालता है और उसके
- 4:43:07बाद जिला और ग्रामीण सड़कें आती हैं।
- 4:43:09और अगर हम कुल सड़क लंबाई का डाटा देखें
- 4:43:12तो यह लगभग 26995
- 4:43:1626995
- 4:43:19कि.मी. है।
- 4:43:20है जो छात्रों को समझना चाहिए। रोड
- 4:43:23डेंसिटी यानी सड़क घनत्व।
- 4:43:25रिमेंबर दिस। ये बहुत इंपॉर्टेंट है।
- 4:43:28राज्य में पक्की सड़कों का सबसे अधिक
- 4:43:30घनत्व अंबाला में है और सबसे कम जींद में
- 4:43:34है।
- 4:43:34और इसका भौगोलिक कारण भी स्पष्ट है।
- 4:43:36अंबाला एक ऐतिहासिक व्यापारिक और सैन्य
- 4:43:39छावनी क्षेत्र रहा है। अह इसलिए वहां
- 4:43:41इंफ्रास्ट्रक्चर का घनत्व स्वाभाविक रूप
- 4:43:43से ज्यादा है कि नेशनल हाईवेज।
- 4:43:46हम्म। अब अगर हम हरियाणा के मैप को
- 4:43:48विजुअलाइज करें और प्रमुख हाईवेज को देखें
- 4:43:51तो बहुत सी चीजें स्पष्ट हो जाती हैं।
- 4:43:53बिल्कुल। सबसे लंबा नेशनल हाईवे एनएच न है
- 4:43:56जिसे पहले एनएच 10 कहा जाता था। यह सिरसा
- 4:43:59से शुरू होकर बहादुरगढ़ को जोड़ता है।
- 4:44:01और सबसे छोटा नेशनल हाईवे
- 4:44:03वो है एनएच 148 ए जो मात्र 5 कि.मी. लंबा
- 4:44:07है और गुरुग्राम से दिल्ली के बीच है।
- 4:44:10इसके साथ ही एक ऐसा हाईवे भी है जो
- 4:44:12सर्वाधिक जिलों से गुजरता है। एनएच 44
- 4:44:15जिसे पुराना एनएच वन कहते थे। यह राज्य के
- 4:44:19सात जिलों से होकर गुजरता है। एज वी टीच
- 4:44:21एट दिशांत आईएस अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल
- 4:44:24प्रकाश सर एंड देयर टीम मैप रीडिंग आपकी
- 4:44:28प्रीलिम्स की नैया पार लगा सकती है। तो
- 4:44:30मैप्स को इग्नोर मत कीजिए।
- 4:44:32बिल्कुल।
- 4:44:33द एक्सप्रेसवे रिंग केएमपी एंड केजीपी।
- 4:44:36सही बात है। और जब मैप की बात हो रही है
- 4:44:38तो दिल्ली के चारों ओर बने एक्सप्रेसवे
- 4:44:41रिंग के डायग्राम को समझना बहुत जरूरी है।
- 4:44:43हम इस रिंग के दो प्रमुख हिस्से हैं। एक
- 4:44:46है पश्चिमी हिस्सा और दूसरा पूर्वी
- 4:44:49हिस्सा।
- 4:44:49बिल्कुल। पश्चिमी हिस्सा है केएमपी यानी
- 4:44:52कुंडली मानेसर पलवल एक्सप्रेसवे जो 135.6
- 4:44:56कि.मी. लंबा है और पूर्वी हिस्सा है
- 4:44:59केजीपी कुंडली गाजियाबाद पलवल। इन दोनों
- 4:45:02की कनेक्टिविटी कमाल की है। इस केएमपी को
- 4:45:06वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे भी कहा
- 4:45:08जाता है। और इसका सबसे बड़ा फायदा क्या
- 4:45:11है?
- 4:45:12इसका सबसे बड़ा फायदा है दिल्ली को
- 4:45:14डीकंजेस्ट करना। मतलब भारी वाहन अब दिल्ली
- 4:45:17के बाहर से ही निकल जाते हैं।
- 4:45:18बिल्कुल। इससे प्रदूषण और ट्रैफिक दोनों
- 4:45:21में कमी आई है।
- 4:45:22तो इसी रफ्तार पर एक बात कहना चाहूंगा।
- 4:45:24सिलेबस का सफर लंबा है एनएच न की तरह। पर
- 4:45:28रिवीजन की स्पीड होनी चाहिए केएमपी
- 4:45:30एक्सप्रेसवे की तरह।
- 4:45:32हरियाणा स्टेट ट्रांसपोर्ट सर्विज।
- 4:45:34बहुत सही। और स्पीड की बात हो तो राज्य की
- 4:45:37अपनी परिवहन सेवाओं को कैसे भूल सकते हैं?
- 4:45:40हरियाणा राज्य परिवहन की ऐतिहासिक शुरुआत
- 4:45:43की बात करें तो पहला बस डिपो 1950 में
- 4:45:46गुरुग्राम में स्थापित किया गया था। जी
- 4:45:49और आज इसके बेड़े में कई तरह की बसें हैं
- 4:45:52जैसे हरियाणा गौरव जो आम आदमी की बस है
- 4:45:56किफायती और सुलभ
- 4:45:58और दूसरी तरफ है हरियाणा उदय यह एक सीएनजी
- 4:46:00बस सेवा है जिसे बढ़ते प्रदूषण को देखते
- 4:46:04हुए विशेष रूप से गुरुग्राम में शुरू किया
- 4:46:06गया था। इन दोनों की विशेषताओं का अंतर
- 4:46:08स्पष्ट होना चाहिए।
- 4:46:09बिल्कुल। और इतनी बड़ी परिवहन व्यवस्था को
- 4:46:12चलाने के लिए 1987 में गुरुग्राम में
- 4:46:16मुख्य इंजीनियरिंग निगम यानी एचआरईसी की
- 4:46:20स्थापना की गई थी जो इनका रखरखाव देखता
- 4:46:23है। हिस्टोरिकल रूट्स।
- 4:46:25चलिए अब सड़कों से पटरियों की ओर चलते
- 4:46:27हैं। रेलवे नेटवर्क की ऐतिहासिक
- 4:46:29क्रोनोलॉजी बहुत रोचक है। हम 1873 में
- 4:46:34हरियाणा में पहली ट्रेन चली थी। यह दिल्ली
- 4:46:36से रेवाड़ी के बीच चली थी और यह भाप इंजन
- 4:46:39का दौर था।
- 4:46:40बिल्कुल। और फिर 1891 से 1904 के बीच
- 4:46:45दिल्ली से बठिंडा और आगरा लाइनों का
- 4:46:48विस्तार हुआ।
- 4:46:48यहां एक एग्जाम अलर्ट है। रेवाड़ी हरियाणा
- 4:46:51का सबसे पुराना और सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन
- 4:46:53है। यह छह अलग-अलग दिशाओं को जोड़ता है।
- 4:46:56और इसके पीछे एक सामरिक और व्यापारिक कारण
- 4:46:59भी था। अंग्रेजों के जमाने से ही यह
- 4:47:01दिल्ली और राजपूताना के बीच का मुख्य
- 4:47:04प्रवेश द्वार था।
- 4:47:05सही कहा। एक और रोचक तथ्य यह है कि पहली
- 4:47:09सीएनजी यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस ट्रेन
- 4:47:13इसी मार्ग पर रोहतक और रेवाड़ी के बीच चली
- 4:47:16थी।
- 4:47:16मॉडर्न रेल एंड मेट्रो एक्सपेंशन।
- 4:47:18भाप इंजन से सीएनजी और अब आधुनिक परिवहन
- 4:47:22विस्तार।
- 4:47:22पहली मेट्रो 21 जून 2010 को हरियाणा में
- 4:47:26पहुंची। यानी गुरुग्राम में।
- 4:47:28जी। और 2013 में गुरुग्राम में ही निजी
- 4:47:31रूप से संचालित रैपिड मेट्रो की शुरुआत
- 4:47:33हुई। इन दोनों का अंतर छात्रों को समझना
- 4:47:35चाहिए।
- 4:47:36है जो सोनीपत के बरही यानी ग्नौर क्षेत्र
- 4:47:39में स्थापित की गई है। इसका बहुत बड़ा
- 4:47:42औद्योगिक महत्व है।
- 4:47:44और भविष्य के लिहाज से देखें तो
- 4:47:46प्रस्तावित ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर गेम चेंजर
- 4:47:48है। यह सोहना और मानेसर के रास्ते पलवल को
- 4:47:52सीधे सोनीपत से जोड़ेगा। मतलब जो काम
- 4:47:55केएमपी एक्सप्रेसवे सड़कों के लिए कर रहा
- 4:47:58है
- 4:47:59वही काम यह कॉरिडोर माल ढुलाई के लिए
- 4:48:01करेगा। एग्जैक्टली। अब जमीन से आसमान की
- 4:48:04बात कर लेते हैं। सिविल एिएशन
- 4:48:05इंफ्रास्ट्रक्चर।
- 4:48:06हिसार हवाई अड्डे का विकास बहुत तेजी से
- 4:48:09हो रहा है। महाराजा अग्रसेन अंतरराष्ट्रीय
- 4:48:12हवाई अड्डे को सिर्फ उड़ानों के लिए नहीं
- 4:48:15बल्कि एक इंटीग्रेटेड एिएशन हब या एकीकृत
- 4:48:19उड्डन हब के रूप में विकसित किया जा रहा
- 4:48:22है।
- 4:48:22एस वी टीच अट दिशांत आईएएस अंडर द गाइडेंस
- 4:48:25ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड देयर टीम।
- 4:48:27इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ही किसी स्टेट
- 4:48:29की असली पावर है।
- 4:48:30चंडीगढ़ तक पहली एयर टैक्सी सेवा शुरू की
- 4:48:33गई थी।
- 4:48:33हम और इस सेक्टर में ट्रेनिंग के लिए
- 4:48:36हरियाणा नागरिक उड्डन संस्थान यानी
- 4:48:38एचआईसीए के तीन प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र
- 4:48:41हैं। हिसार, पिंजौर और करनाल में।
- 4:48:43द बिग पिक्चर।
- 4:48:44अब समय है सभी डॉट्स को कलेक्ट करने का।
- 4:48:47एक 360 डिग्री एनालिसिस यानी बिग पिक्चर
- 4:48:50देखने का।
- 4:48:50जी। मेंस परीक्षा के दृष्टिकोण से यह बहुत
- 4:48:53काम आएगा। देखिए केएमपी और केजीपी
- 4:48:56एक्सप्रेसवे प्लस हिसार का एिएशन हब और
- 4:48:59प्लस रेल फ्रेट कॉरिडोर।
- 4:49:01बिल्कुल जब इन सबको मिला दें तो समझ आता
- 4:49:04है कि हरियाणा उत्तर भारत का लॉजिस्टिक्स
- 4:49:06हब कैसे बन रहा है।
- 4:49:07और दूसरी तरफ ऊर्जा क्षेत्र में देखिए
- 4:49:09थर्मल से ग्रीन एनर्जी यानी सौर और परमाणु
- 4:49:12की ओर बदलाव हो रहा है।
- 4:49:14लेकिन यहां एक ट्रैप बॉक्स है टीआरएपी। इस
- 4:49:17पर बहुत अधिक जोर देना जरूरी है।
- 4:49:19बिल्कुल। छात्रों को चेतावनी है कि
- 4:49:22टाइमलाइंस को आपस में मिक्स ना करें। पहली
- 4:49:24ट्रेन 1873 में भाप से चली, पहली सीएनजी
- 4:49:28ट्रेन रोहतक से चली और पहली मेट्रो
- 4:49:31गुरुग्राम में आई।
- 4:49:32एग्जामिनर अक्सर इन तीनों को शफल करके
- 4:49:35फंसाने की कोशिश करता है।
- 4:49:36तो इसे एकदम क्लियर रखें।
- 4:49:38मिनरल्स।
- 4:49:39चलिए, इसी पर कुछ प्रीलिम्स चैलेंज हो
- 4:49:42जाए। पहला एमसीक्यू मिनरल्स से।
- 4:49:44तो प्रश्न सुनिए। स्टेटमेंट वन महेंद्रगढ़
- 4:49:47को सिटी ऑफ मिनरल्स कहा जाता है।
- 4:49:50स्टेटमेंट टू हिलना पत्थर रोहतक जिले में
- 4:49:53पाया जाता है।
- 4:49:54अब यहां एलिमिनेशन लॉजिक लगाना है। सीधा
- 4:49:57उत्तर मत सोचिए। हमने चर्चा की थी कि
- 4:49:59महेंद्रगढ़ खनिजों का शहर है। तो पहला
- 4:50:02स्टेटमेंट कैसा लग रहा है?
- 4:50:03और हिलना पत्थर याद कीजिए क्या वो रोहतक
- 4:50:06में था? वो तो कल्याणा गांव में है ना?
- 4:50:09बिल्कुल। तो सोचिए स्टेटमेंट टू सही होगा
- 4:50:12या गलत? खुद सही विकल्प ए, बी, सी या डी
- 4:50:15तक पहुंचने की कोशिश कीजिए।
- 4:50:17ऑप्शंस देखकर दिमाग का चक्कर ना खाना।
- 4:50:19एलिमिनेशन लॉजिक का इंजन हमेशा चालू रखना।
- 4:50:22एनर्जी सेक्टर।
- 4:50:23बहुत बढ़िया। अब दूसरा चैलेंज ऊर्जा
- 4:50:25क्षेत्र से। यह एक मैच द फॉलोइंग प्रश्न
- 4:50:28है।
- 4:50:28जी। आपको इन पावर प्लांट्स को उनके
- 4:50:30स्थानों से मिलाना है। राजीव गांधी थर्मल,
- 4:50:33दीन बंधु छोटूराम और गोरखपुर न्यूक्लियर
- 4:50:36प्लांट। और स्थान है यमुनानगर, हिसार,
- 4:50:39फतेहाबाद। अब यहां भी आपको पूरा रटने की
- 4:50:42जरूरत नहीं है।
- 4:50:43बिल्कुल नहीं। एक हिंट देती हूं। गोरखपुर
- 4:50:46प्लांट अभी नया बन रहा है ना न्यूक्लियर
- 4:50:48वाला उसे फतेहाबाद से कनेक्ट करके देखिए।
- 4:50:51जैसे ही आप इस एक या दो सही मिलान को पकड़
- 4:50:54लेंगे आप बाकी ऑप्शंस को एलिमिनेट कर सकते
- 4:50:56हैं।
- 4:50:57ट्रांसपोर्ट फर्स्ट्स
- 4:50:58हम्म। अब तीसरा चैलेंज ट्रांसपोर्ट फर्स्ट
- 4:51:00पर।
- 4:51:01प्रश्न है। इनमें से कौन सा कथन इनकरेक्ट
- 4:51:04यानी गलत है?
- 4:51:05सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क दिस। कथन है
- 4:51:08पहला हरियाणा में पहली ट्रेन 1873 में
- 4:51:12चली। दूसरा पहली एयर टैक्सी गुरुग्राम से
- 4:51:16चंडीगढ़ के लिए शुरू की गई और तीसरा
- 4:51:19रेवाड़ी सबसे बड़ा जंक्शन है।
- 4:51:21अब जरा ध्यान दीजिए। एयर टैक्सी वाले
- 4:51:23स्टेटमेंट पर आइए। क्या एयर टैक्सी हिसार
- 4:51:25से शुरू हुई थी या गुरुग्राम से?
- 4:51:27यहीं पर एग्जामिनर खेलता है। एलिमिनेशन के
- 4:51:30जरिए गलत कथन पहचानने की कला आपको आनी
- 4:51:33चाहिए।
- 4:51:33द पाथ्स टू सक्सेस। हम तो सफलता का रास्ता
- 4:51:37क्या है? स्क्रीन पर दिए गए इस कोटेशन को
- 4:51:39देखिए और मानचित्रों में महारत हासिल
- 4:51:42करें।
- 4:51:42बिल्कुल और प्रीलिम्स के लिए विशेष रूप से
- 4:51:45जो हमने ट्रैप बॉक्स डिस्कस किया है उसका
- 4:51:47बार-बार रिवीजन करें।
- 4:51:48आउट्रो तो चलिए आज की इस चर्चा को समेटते
- 4:51:52हैं।
- 4:51:53आज के लेक्चर का अगर क्विक रिककैप दें तो
- 4:51:55हमने महेंद्रगढ़ के खनिज महत्व को समझा।
- 4:51:58थर्मल से न्यूक्लियर एनर्जी के ट्रांजिशन
- 4:52:00को देखा और परिवहन के प्रमुख माइलस्टोनस
- 4:52:02को डिकोड किया। जी और मेंस और प्रीलिम्स
- 4:52:05के लिए जो टेक अवेज हैं वह एकदम स्पष्ट
- 4:52:07होने चाहिए। अंत में हम छात्रों के लिए एक
- 4:52:10विचारणीय प्रश्न छोड़ना चाहेंगे।
- 4:52:13सोचिए अगर पर्यावरणीय चिंताओं के कारण
- 4:52:17अरावली का खनन पूरी तरह बंद हो जाए तो
- 4:52:20हरियाणा की अर्थव्यवस्था पर विशेषकर
- 4:52:23निर्माण क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- 4:52:25दिस लेक्चर वास बाय दीशांत आईएएस। आज के
- 4:52:29इस डीप ड्राइव में हमारा सीधा फोकस
- 4:52:31हरियाणा की शिक्षा, स्वास्थ्य और
- 4:52:34अर्थव्यवस्था के 360° कवरेज पर है। यह
- 4:52:37एनालिसिस विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के
- 4:52:40लिए डिजाइन किया गया है जो लोक सेवा आयोग
- 4:52:42की परीक्षाओं की गहराई और उनके बदलते
- 4:52:45पैटर्न को डिकोड करना चाहते हैं। आज जो
- 4:52:47सोर्सेज हम इस्तेमाल कर रहे हैं, वह सीधे
- 4:52:50एनसीईआरटी और आधिकारिक आर्थिक सर्वेक्षण
- 4:52:52डाटा से लिए गए हैं। अक्सर होता क्या है
- 4:52:55कि बाजार की सामग्री में तथ्यों का भटकाव
- 4:52:58होता है। लेकिन जब बात आधिकारिक
- 4:52:59दस्तावेजों की आती है तो वही तैयारी का
- 4:53:02सबसे प्रमाणिक आधार बनते हैं।
- 4:53:04देखिए यह बिल्कुल सही दिशा है। एक मेंटर
- 4:53:06के नजरिए से अगर बात की जाए तो हवाहवाई
- 4:53:09बातों से ऐसी परीक्षाएं पास नहीं होती।
- 4:53:11हमारी यह पूरी चर्चा इन्हीं ठोस आधिकारिक
- 4:53:14दस्तावेजों के इर्द-गिर्द रहेगी। अब यहां
- 4:53:17एक बहुत बड़ा एग्जाम अलर्ट में शुरुआत में
- 4:53:19ही दे दूं। राज्य स्तरीय परीक्षाओं के
- 4:53:22पेपर्स का अगर आप विश्लेषण करें तो
- 4:53:23विश्वविद्यालयों की क्रोनोलॉजी यानी उनका
- 4:53:26कालक्रम और विभिन्न बोर्डों के स्थापना
- 4:53:28वर्षों पर सीधे सवाल आते हैं।
- 4:53:30हां और तथ्यों को सिर्फ रटना काफी नहीं
- 4:53:32है।
- 4:53:33बिल्कुल।
- 4:53:33उनके पीछे के ऐतिहासिक क्रम को समझना ही
- 4:53:37एक गंभीर एस्पिरेंट की असली पहचान है।
- 4:53:40सही कहा। और ये क्रोनोलॉजी समझना वाकई
- 4:53:43मतलब एक अच्छी खासी दिमागी कसरत है।
- 4:53:45इसी पर मुझे एक बात याद आ रही है। तारीखों
- 4:53:48के जाल में जो ना उलझे जनाब उसी के सिर
- 4:53:51सजता है लबासना का ख्वाब।
- 4:53:54क्या बात है बहुत खूब।
- 4:53:56शुक्रिया। तो चलिए इसी के साथ सबसे पहले
- 4:53:59साक्षरता परिदृश्य पर आते हैं। 1966 बनाम
- 4:54:02वर्तमान। हम
- 4:54:041966 से लेकर आज तक के जो साक्षरता के
- 4:54:07आंकड़े हैं वह किसी राज्य के विकास की
- 4:54:10पूरी कहानी बयां करते हैं। जब हरियाणा बना
- 4:54:13था तब साक्षरता दर मात्र 19.92%
- 4:54:17थी
- 4:54:18और 2011 की जनगणना आते-आते यह छलांग लगाकर
- 4:54:2176.64%
- 4:54:24पर पहुंच गई। हम्म।
- 4:54:25यह सिर्फ एक नंबर नहीं है। यह एक कृषि
- 4:54:27प्रधान समाज के आधुनिकीकरण का ग्राफ है।
- 4:54:31जी। और इस ग्राफ का मेंस के दृष्टिकोण से
- 4:54:34विश्लेषण करना बहुत ज्यादा जरूरी है। अगर
- 4:54:36हम 2011 के 76.64%
- 4:54:39वाले डाटा को गहराई से खंगालें तो पुरुष
- 4:54:42साक्षरता 85.40%
- 4:54:45और महिला साक्षरता 66.80%
- 4:54:48नजर आती है। अब यहां ध्यान देने वाली बात
- 4:54:50क्या है? इन दोनों के बीच का जो गैप है
- 4:54:53लगभग 18 से 19% का अंतर
- 4:54:56एग्जैक्टली और यही अंतर नीति निर्माताओं
- 4:54:58के लिए असली चुनौती रहा है। मेंस के आंसर
- 4:55:01राइटिंग में यह गैप बहुत वजन डालता है।
- 4:55:03इसके अलावा 2001 से 2011 के दशक में
- 4:55:06साक्षरता दर में 8.70%
- 4:55:09की जो ग्रोथ हुई है, वह दिखाती है कि
- 4:55:11सामाजिक सशक्तिकरण की नीतियां जमीन पर काम
- 4:55:14कर रही थी। निबंध के पेपर में इस दृश्य की
- 4:55:16वृद्धि का रेफरेंस देना एक बहुत मजबूत
- 4:55:18तर्क बनाता है।
- 4:55:19यह बहुत ही दिलचस्प एंगल है और साक्षरता
- 4:55:22में इस उछाल के पीछे मुझे लगता है शिक्षा
- 4:55:25क्षेत्र के नवाचारों का बड़ा हाथ है। जैसे
- 4:55:28अगर स्कूली शिक्षा की बात करें तो 20056
- 4:55:31में एजूसेट परियोजना शुरू की गई थी। उस
- 4:55:34दौर में सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में
- 4:55:36सेटेलाइट से शिक्षा पहुंचाना यह एक बेहद
- 4:55:39क्रांतिकारी कदम था।
- 4:55:40बिल्कुल था।
- 4:55:41और सबसे अहम बात यह है कि हरियाणा इस
- 4:55:45उपग्रह आधारित मॉडल को लॉन्च करने वाला
- 4:55:48देश का पहला राज्य था।
- 4:55:50हां और नवाचार की इसी कड़ी में 2006-7 का
- 4:55:53साल भी एक माइलस्टोन है। इसी साल हरियाणा
- 4:55:56विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने सेमेस्टर
- 4:55:58प्रणाली की शुरुआत की थी। स्कूली स्तर पर
- 4:56:01पूरे भारत में इसे अपनाने वाला हरियाणा
- 4:56:03पहला राज्य बना था। लेकिन यहां पर एक बहुत
- 4:56:07बड़ा यूपीएससी ट्रैप है।
- 4:56:08वो क्या? अक्सर परीक्षाओं में आरोही मॉडल
- 4:56:11स्कूल का नाम देकर यह कंफ्यूजन पैदा किया
- 4:56:14जाता है कि यह स्कूल पूरे राज्य में या
- 4:56:16सिर्फ शहरी क्षेत्रों में है। सीरियस
- 4:56:19एस्पिरेंट्स इस बात को मार्क कर लें। यह
- 4:56:21एक जाल है। आरोही मॉडल स्कूल विशेष रूप से
- 4:56:24केवल 36 शैक्षिक रूप से पिछड़े खंडों के
- 4:56:27लिए हैं। यानी एजुकेशनली बैकवर्ड ब्लॉक्स
- 4:56:30के लिए ताकि वहां क्वालिटी एजुकेशन पहुंच
- 4:56:32सके।
- 4:56:33बहुत ही इंपॉर्टेंट डिस्टिंशन है यह। जैसा
- 4:56:36कि हम दिशांत आईएएस में पढ़ाते हैं।
- 4:56:38प्रारंभिक परीक्षा के लिए राज्यों की ऐसी
- 4:56:41प्रथम पहलों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
- 4:56:44आयोग हमेशा यह चेक करता है कि उम्मीदवार
- 4:56:47को नीतियों के भौगोलिक विस्तार की समझ है
- 4:56:50या नहीं।
- 4:56:51जी हां। और स्कूली शिक्षा की नींव पर ही
- 4:56:54उच्च शिक्षा की इमारत खड़ी होती है। तो अब
- 4:56:57राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों का
- 4:56:59ऐतिहासिक कालक्रम यानी क्रोनोलॉजी समझना
- 4:57:01अनिवार्य हो जाता है।
- 4:57:02तो क्रोनोलॉजी वाले सेक्शन पर चलते हैं।
- 4:57:04प्रमुख विश्वविद्यालय, कालक्रम और तथ्य।
- 4:57:081956 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की
- 4:57:11नींव रखी गई। उद्घाटन किया था तत्कालीन
- 4:57:14राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने। पर
- 4:57:17इसका सबसे रोचक पहलू यह है कि इसकी शुरुआत
- 4:57:20किसी साइंस या इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से
- 4:57:22नहीं हुई थी।
- 4:57:23जी हां, यह केवल संस्कृत विभाग के साथ
- 4:57:26शुरू हुआ था।
- 4:57:27बिल्कुल। राज्य बनने से भी एक दशक पहले
- 4:57:30भारत की प्राचीन जड़ों को शिक्षा से
- 4:57:32जोड़ने का यह कितना दूरदर्शी कदम था।
- 4:57:35सही कहा। और कुरुक्षेत्र के बाद
- 4:57:38क्रोनोलॉजी में अगला बड़ा नाम आता है 1970
- 4:57:41में स्थापित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि
- 4:57:43विश्वविद्यालय यानी एचएयू हिसार। यहां एक
- 4:57:47फैक्ट मेंस के लिए बहुत काम आता है। यह
- 4:57:48मूल रूप से पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का
- 4:57:51ही हिस्सा था। राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था
- 4:57:53को खड़ा करने में इसका बड़ा योगदान है।
- 4:57:56इसके बाद 1976 में महर्षि दयानंद
- 4:57:58विश्वविद्यालय एमडीयू रोहतक बना।
- 4:58:01हां। पर शुरुआत में इसे एमडीयू नहीं सिर्फ
- 4:58:04रोहतक विश्वविद्यालय कहा जाता था। है ना?
- 4:58:06एग्जैक्टली। यह छोटे-छोटे नाम के बदलाव ही
- 4:58:09एग्जाम में कंफ्यूज करते हैं।
- 4:58:11और यह तारीखें याद रखना तो मतलब एक अलग ही
- 4:58:14संघर्ष है। इतिहास के यह साल भी क्या खूब
- 4:58:18सताते हैं। रटो रात भर और सुबह दिमाग से
- 4:58:20उड़ जाते हैं।
- 4:58:21हां, पर रैंकर्स इन्हीं सालों को अपनी
- 4:58:24ताकत बनाते हैं। खैर, इन पारंपरिक
- 4:58:27विश्वविद्यालयों के अलावा राज्य में कुछ
- 4:58:29बहुत ही विशिष्ट और तकनीकी विश्वविद्यालय
- 4:58:31भी हैं।
- 4:58:31हां, वो हमारा अगला टॉपिक है विशिष्ट और
- 4:58:34तकनीकी विश्वविद्यालय। जैसे दुधौला जो
- 4:58:37पलवल में है वहां भारत का पहला कौशल
- 4:58:40विश्वविद्यालय विश्वकर्मा कौशल
- 4:58:42विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है और इसी
- 4:58:45तरह सोनीपत के खानपुर कला में उत्तर भारत
- 4:58:48का पहला महिला विश्वविद्यालय भगत फूल सिंह
- 4:58:51महिला विश्वविद्यालय है।
- 4:58:52देखिए ये जो विशिष्ट संस्थान है ना ये एक
- 4:58:55बड़े नीतिगत बदलाव का संकेत है। इनके साथ
- 4:58:58ही हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय का
- 4:58:59जिक्र करना भी जरूरी है। केंद्रीय
- 4:59:01विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 के तहत
- 4:59:04महेंद्रगढ़ के जाट पाली में यह स्थापित
- 4:59:06हुआ। अब यहां एक और गंभीर एग्जाम अलर्ट।
- 4:59:08जी बताइए।
- 4:59:09बहुत सी पुरानी अध्ययन सामग्री में
- 4:59:11फरीदाबाद के वएमसी विश्वविद्यालय का नाम
- 4:59:13अभी भी पुराना ही छपा है। लेकिन आधिकारिक
- 4:59:15तौर पर अब इसका नाम जेसी बोस विज्ञान एवं
- 4:59:18प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हो चुका है।
- 4:59:20अपडेटेड रहना ही इस एग्जाम की सबसे पहली
- 4:59:22शर्त है।
- 4:59:23शानदार फैक्ट चेक। अब अगर शिक्षा क्षेत्र
- 4:59:26का हम एक 360 डिग्री विश्लेषण करें जो
- 4:59:30हमारा अगला टॉपिक है तो कुछ वैधानिक और
- 4:59:33संवैधानिक पहलू सामने आते हैं जैसे आरटीई
- 4:59:37हरियाणा में शिक्षा का अधिकार नियम 3 जून
- 4:59:402011 को अधिसूचित किए गए थे
- 4:59:42और मेंस के लिए अगर हम इसमें वैल्यू एडिशन
- 4:59:44करें तो इन सभी संस्थानों और नीतियों का
- 4:59:47एक ही क्रक्स निकलता है वो है सामान्य
- 4:59:50शिक्षा से रोजगार क्षमता यानी
- 4:59:52एंप्लॉयबिलिटी की ओर एक स्पष्ट बदलाव
- 4:59:55विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय इसी बदलाव
- 4:59:58का सबसे बड़ा उदाहरण है। सरकार अब सिर्फ
- 5:00:00डिग्रियां नहीं बांट रही मार्केट की
- 5:00:02डिमांड के हिसाब से स्किल दे रही है।
- 5:00:04हम
- 5:00:05और एक तथ्य जहां अक्सर गलती होती है वो है
- 5:00:07राजीव गांधी एजुकेशन सिटी की लोकेशन। लोग
- 5:00:10इसे गुड़गांव या रोहतक मान लेते हैं। जबकि
- 5:00:13यह सोनीपत की कुंडली में स्थित है।
- 5:00:15राहुल प्रकाश सर और उनकी टीम के
- 5:00:17मार्गदर्शन में हम हमेशा फैक्ट्स को मेंस
- 5:00:20के कांसेप्ट से जोड़ने पर जोर देते हैं।
- 5:00:22क्योंकि तथ्यों का यही जुड़ाव एक
- 5:00:25एडमिनिस्ट्रेटिव नजरिया देता है।
- 5:00:27बिल्कुल।
- 5:00:27तो शिक्षा के बाद अब चलते हैं राज्य के
- 5:00:30दूसरे सबसे बड़े स्तंभ पर स्वास्थ्य
- 5:00:34अवसरचना पदानुक्रम। हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर
- 5:00:36की इस हायरार्की को एक पिरामिड की तरह
- 5:00:39देखा जा सकता है। सबसे नीचे यानी बेस लेवल
- 5:00:42पर उप केंद्र काम करते हैं। उसके एक लेवल
- 5:00:45ऊपर 409 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
- 5:00:49यानी पीएचसी। हां पीएचसी और उनके ऊपर 123
- 5:00:53सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी सीएचसी
- 5:00:56हैं और इस पिरामिड के एकदम टॉप पर 22
- 5:00:59नागरिक अस्पताल या सिविल हॉस्पिटल्स हैं।
- 5:01:02यह पूरा फ्लो चार्ट बहुत लॉजिकल है और इस
- 5:01:04हायरार्की के साथ एक बेहद इंपॉर्टेंट
- 5:01:06पॉलिसी नोट जुड़ा है। हरियाणा देश का वो
- 5:01:09पहला राज्य है जिसने शहरी मलिन बस्तियों
- 5:01:12यानी अर्बन स्लम्स के लिए एक राज्यव्यापी
- 5:01:14स्वास्थ्य मिशन शुरू किया है। मेंस में जब
- 5:01:17शहरी प्रशासन या समावेशी विकास पर सवाल आए
- 5:01:20तो इसे सीधे एक केस स्टडी की तरह इस्तेमाल
- 5:01:22करना चाहिए।
- 5:01:23बहुत ही वैलिड पॉइंट है ये।
- 5:01:24वैसे देखा जाए तो सफलता की सीढ़ी भी इन
- 5:01:26अस्पतालों सी है। पीएचसी से शुरू होकर
- 5:01:28सिविल तक की कहानी सी है।
- 5:01:30बहुत खूब। हर कदम पर एक नया चैलेंज।
- 5:01:33बिल्कुल। अब इसी से जुड़ा हमारा अगला
- 5:01:36टॉपिक है प्रमुख स्वास्थ्य कल्याण
- 5:01:38योजनाएं। हाल ही में आयुष्मान भारत चिरायु
- 5:01:41हरियाणा योजना बहुत चर्चा में रही है।
- 5:01:452023-24 के बजट में इसका विस्तार किया गया
- 5:01:48और अब ₹ लाख तक की आय वाले परिवारों को भी
- 5:01:52इसमें शामिल कर लिया गया है।
- 5:01:53और नई योजनाओं के साथ कुछ पुरानी योजनाओं
- 5:01:55का बेस भी बहुत मजबूत है। जैसे 2010 की
- 5:01:58इंदिरा बाल स्वास्थ्य योजना जो 18 वर्ष तक
- 5:02:01के बच्चों को मुफ्त इलाज देती है। और 2014
- 5:02:04की मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना। लेकिन
- 5:02:07जो फैक्ट सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है वो यह
- 5:02:09है कि हरियाणा उच्च जोखिम गर्भावस्था
- 5:02:12प्रबंधन नीति लागू करने वाला पहला राज्य
- 5:02:14बना
- 5:02:14जो 2020 में आई जी, मैटरनल और इनफेंट
- 5:02:18मोटैलिटी रेट को कंट्रोल करने के लिए यह
- 5:02:20डाटा ड्रिवन पॉलिसी एक मास्टर स्ट्रोक है।
- 5:02:22इसके बाद मेडिकल एजुकेशन और आयुष पर आते
- 5:02:25हैं। कुरुक्षेत्र में दुनिया का पहला आयुष
- 5:02:28विश्वविद्यालय श्री कृष्ण आयुष
- 5:02:31विश्वविद्यालय
- 5:02:322018 में स्थापित हुआ और करनाल का कल्पना
- 5:02:35चावला मेडिकल कॉलेज भी आधुनिक चिकित्सा का
- 5:02:38बड़ा केंद्र बन गया है। जी और राज्य में
- 5:02:41राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की उपस्थिति
- 5:02:44जैसे एम्स झज्जर के बाड़सा में एम्स काम कर
- 5:02:47रहा है। जबकि रेवाड़ी के मनेठी में यह
- 5:02:49प्रस्तावित है। अब यहां एक बहुत बड़ा
- 5:02:51यूपीएससी ट्रैप है फरीदाबाद के गोल्ड
- 5:02:54फील्ड मेडिकल कॉलेज को लेकर।
- 5:02:55इसमें क्या कंफ्यूजन होता है? अक्सर
- 5:02:57एस्पिरेंट्स इसे प्राइवेट मान लेते हैं।
- 5:02:59लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस कॉलेज
- 5:03:01का सरकार द्वारा अधिग्रह यानी टेकओवर कर
- 5:03:03लिया गया है।
- 5:03:04अच्छा तो जैसा कि हम दिशांत आईएएस में
- 5:03:06पढ़ाते हैं। प्रस्तावित और स्थापित या
- 5:03:09अधिग्रहित संस्थानों के बीच का यह बारीक
- 5:03:12अंतर एलिमिनेशन तकनीक में बहुत काम आता
- 5:03:14है।
- 5:03:15बिल्कुल आता है।
- 5:03:16तो मानव संसाधन के बाद अब अर्थव्यवस्था की
- 5:03:19तरफ रुख करते हैं। हमारा अगला टॉपिक
- 5:03:21हैफेड। शीर्ष सहकारी संस्था। हाफेड का जो
- 5:03:26पदानुक्रम है वह भी एक फ्लो चार्ट की तरह
- 5:03:28है। सबसे ऊपर चेयरमैन, उनके नीचे एमडी और
- 5:03:32फिर जिला स्तर पर कार्यालय। इसकी स्थापना
- 5:03:35हरियाणा गठन के दिन ही यानी 1 नवंबर 1966
- 5:03:39को हुई थी और इसका मुख्यालय पंचकूला में
- 5:03:41है।
- 5:03:41कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में हैफेड का
- 5:03:44रोल बहुत बड़ा है। यह कृषि उपज खरीद के
- 5:03:46लिए सबसे बड़ा सहकारी संघ है और इसके जो
- 5:03:49कैटल फीड प्लांट्स हैं, वह रोहतक और सिरसा
- 5:03:52के सत्ताखेड़ा में है।
- 5:03:53प्रीलिम्स के लिए एक और एग्जाम अलर्ट है।
- 5:03:55इसके जो भी कंज्यूमर प्रोडक्ट्स आते हैं,
- 5:03:58वह सिर्फ और सिर्फ हाफेड ब्रांड के नाम से
- 5:04:00ही बेचे जाते हैं। मतलब यह डाटा तो अपने
- 5:04:02आप में एक खुराक है। हैफेड का चारा जैसे
- 5:04:05पशुओं को भाए, सटीक डाटा का यह चारा
- 5:04:08एस्पिरेंट्स का रैंक बढ़ाए।
- 5:04:09सही बात है। इसके बाद आते हैं वित्तीय और
- 5:04:12औद्योगिक बोर्ड पर। हरियाणा वित्त निगम
- 5:04:15एचएफसी की स्थापना 1 अप्रैल 1967 को हुई
- 5:04:19थी। इसका उद्देश्य लघु और मध्यम उद्योगों
- 5:04:22को लोन देना है।
- 5:04:23हां, लेकिन यहां ध्यान रहे कि यह राज्य
- 5:04:26वित्तीय निगम अधिनियम 1951 के तहत काम
- 5:04:28करता है। इसके साथ ही हरियाणा खादी एवं
- 5:04:31ग्राम उद्योग बोर्ड जो 1969 में बना उसका
- 5:04:34रोल भी अहम है। इसके पहले अध्यक्ष चौधरी
- 5:04:37देवीलाल थे और इसका मेन फोकस खादी और
- 5:04:40ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देना है। हम और
- 5:04:43बड़े उद्योगों के लिए जो हमारा अगला टॉपिक
- 5:04:45है एचएसआईआईडीसी
- 5:04:48और सेज विकास 1967 में बना एचएसआईआईडीसी
- 5:04:53इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नोडल
- 5:04:55एजेंसी है जैसे आईएमटी मानेसर
- 5:04:58और सेज यानी स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन अधिनियम
- 5:05:00का टाइमलाइन समझना बहुत जरूरी है। 2005
- 5:05:03में यह पास हुआ और 2006 में नोटिफाई हुआ।
- 5:05:05इसका जो अप्रूवल फ्लो चार्ट है वह मेंस के
- 5:05:07लिए बहुत काम का है। बोर्ड ऑफ अप्रूवल
- 5:05:09केंद्र के पास है जबकि यूनिट अप्रूवल
- 5:05:11कमेटी राज्य के पास।
- 5:05:12राहुल प्रकाश सर और उनकी टीम के
- 5:05:14मार्गदर्शन में हम समझते हैं कि केंद्र
- 5:05:17राज्य के बीच ऐसी शक्तियों का विभाजन मेंस
- 5:05:20परीक्षा का एक प्रमुख विषय है।
- 5:05:21बिल्कुल। अब इन आर्थिक निकायों का 360°
- 5:05:25विश्लेषण करते हैं। जैसे एचएफसी का
- 5:05:28वैधानिक स्पष्टीकरण हमने देखा कि वो 1951
- 5:05:31के केंद्रीय अधिनियम से बना और केएमपी
- 5:05:34एक्सप्रेसवे का इंफ्रास्ट्रक्चर भी
- 5:05:36एचएसआईआईडीसी
- 5:05:38के सहयोग से बना। यहां पर एक बहुत ही
- 5:05:41खतरनाक यूपीएससी ट्रैप है। एग्जाम के
- 5:05:44प्रेशर में बच्चे हेफेड और एचएसआईआईडीसी
- 5:05:47को एक जैसा मान लेते हैं। देखिए हेफेड एक
- 5:05:50सहकारी समिति है। कोऑपरेटिव सोसाइटी
- 5:05:52जबकि एचएसआईआईडीसी
- 5:05:54एक निगम है। 100% सरकारी स्वामित्व वाला
- 5:05:58कॉरपोरेशन। इन दोनों के बीच कभी कंफ्यूज
- 5:06:01नहीं होना है।
- 5:06:02यह ट्रैप्स वाकई कातिल होते हैं।
- 5:06:04एग्जामिनर के जाल भी बड़े शातिर होते हैं।
- 5:06:07सीधे दिखने वाले सवाल ही अक्सर कातिल होते
- 5:06:10हैं।
- 5:06:10जी।
- 5:06:11तो चलिए अब इसी एलिमिनेशन तकनीक को टेस्ट
- 5:06:13करने के लिए प्रारंभिक परीक्षा का एक
- 5:06:16प्रश्न लेते हैं। शिक्षा क्षेत्र से।
- 5:06:18मैं कथन पढ़ रही हूं।
- 5:06:19कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का उद्घाटन डॉ.
- 5:06:22राजेंद्र प्रसाद ने किया। विश्वकर्मा कौशल
- 5:06:25विश्वविद्यालय हिसार में स्थित है।
- 5:06:26राजीव गांधी एजुकेशन सिटी सोनीपत में है।
- 5:06:30अब विकल्प है।
- 5:06:30अब विकल्प है। ए केवल एक और तीन सही हैं।
- 5:06:34अब विकल्प है।
- 5:06:35बी केवल दो सही है।
- 5:06:37अब विकल्प है।
- 5:06:38सी सभी सही हैं।
- 5:06:40अब विकल्प है।
- 5:06:41डी इनमें से कोई नहीं। पहला कौशल
- 5:06:44विश्वविद्यालय यानी विश्वकर्मा कौशल
- 5:06:46विश्वविद्यालय दुधोला में है और दुधोला
- 5:06:49पलवल में है। हिसार में नहीं। तो कथन दो
- 5:06:52तथ्यात्मक रूप से गलत हो गया। हम
- 5:06:55अब ऑप्शंस देखिए। जिस भी ऑप्शन में कथन दो
- 5:06:58है उसे हटा दीजिए। बचे हुए कथनों को हमारी
- 5:07:02चर्चा से जोड़कर देखिए। आप लॉजिकली सही
- 5:07:05ऑप्शन तक पहुंच जाएंगे।
- 5:07:06बिल्कुल। अब अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक और
- 5:07:08प्रीलिम्स मॉक क्वेश्चन लेते हैं। हैफिड
- 5:07:10के बारे में कथन है।
- 5:07:11इसकी स्थापना 1 नवंबर 1966 को हुई। यह
- 5:07:15सबसे बड़ी शीर्ष सहकारी संस्था है।
- 5:07:17इसका मुख्यालय चंडीगढ़ में है।
- 5:07:19ए केवल एक सही है। बी केवल एक और दो सही
- 5:07:23है। सी सभी कथन सही है। डी केवल तीन सही
- 5:07:26है।
- 5:07:27इसमें भी वही लॉजिक लगेगा। पहला और दूसरा
- 5:07:30कथन हमने देखा कि बिल्कुल सही है। लेकिन
- 5:07:34तीसरे कथन में एक छोटा सा कैच है।फिड का
- 5:07:37मुख्यालय पंचकूला में है। चंडीगढ़ में
- 5:07:39नहीं। इस छोटी सी भौगोलिक गलती को पकड़ते
- 5:07:42ही कथन तीन खारज हो जाता है और सही जवाब
- 5:07:45खुद ब खुद सामने आ जाएगा।
- 5:07:46यह अभ्यास दिखाता है कि तथ्यों को रटना और
- 5:07:49उन्हें प्रेशर में अप्लाई करना दोनों अलग
- 5:07:51बातें हैं।
- 5:07:52एकदम सटीक बात है। अगर इस पूरे डीप ड्राइव
- 5:07:55का एक क्विक रिककैप करें तो प्रीलिम्स के
- 5:07:57लिए टेक अवे यह है कि सभी योजनाओं और
- 5:08:00बोर्ड्स की स्थापना को क्रोनोलॉजी में
- 5:08:02दोहराएं और मेंस के लिए एंप्लॉयबिलिटी
- 5:08:05वाले शिफ्ट और हेल्थ हायरार्की को समावेशी
- 5:08:08विकास से जोड़कर आंसर राइटिंग की
- 5:08:10प्रैक्टिस करें।
- 5:08:10बहुत ही ज्ञानवर्धक चर्चा रही। जाते-जाते
- 5:08:13तैयारी करने वालों के लिए एक गहरा विचार।
- 5:08:15सफलता छोटे-छोटे प्रयासों का योग है
- 5:08:18जिन्हें दिन रात दोहराया जाता है। इसी
- 5:08:20विचार के साथ अपना आत्म मूल्यांकन करते
- 5:08:22रहें।
- 5:08:22दिस लेक्चर वास बाय दिशांत आईएएस।
- 5:08:25आज के इस गहन विश्लेषण का विषय है
- 5:08:29हरियाणा, कला, संस्कृति और वास्तुकला।
- 5:08:32अक्सर सिविल सेवा की तैयारी में इतिहास को
- 5:08:36केवल शासकों या युद्धों के नजरिए से देखा
- 5:08:39जाता है
- 5:08:40जो कि एक बहुत ही सीमित नजरिया है।
- 5:08:42बिल्कुल लेकिन किसी भी क्षेत्र के सामाजिक
- 5:08:45और आर्थिक यथार्थ की असली कहानी उसकी
- 5:08:48ईंटों, नक्काशियों और लोक कलाओं में दर्ज
- 5:08:52होती है। आज हम वास्तुकला और संस्कृति की
- 5:08:55उन्हीं परतों का विस्तार से विश्लेषण
- 5:08:57करेंगे। और यह विषय अम एचसीएस और यूपीएससी
- 5:09:01जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत रणनीतिक
- 5:09:03महत्व रखता है। यह लेक्चर एनसीईआरटी और
- 5:09:06मानक संदर्भ ग्रंथों पर आधारित एक विस्तृत
- 5:09:09अध्ययन है।
- 5:09:10तो उद्देश्य केवल तथ्यों की सूची तैयार
- 5:09:13करना नहीं है।
- 5:09:14एकदम नहीं। हमें वास्तुकला के विकास,
- 5:09:17भौगोलिक कारणों और उन ट्रैप्स को डिकोड
- 5:09:20करना है जो अक्सर प्रारंभिक परीक्षा में
- 5:09:22पूछे जाते हैं। एक भावी प्रशासक के नजरिए
- 5:09:25से यह विश्लेषण मेंस के उत्तर लेखन में भी
- 5:09:27गहराई लाएगा। तो चलिए इसे डिकोड करते हैं
- 5:09:31और वास्तुकला के कालानुक्रमिक वर्गीकरण से
- 5:09:34इस विश्लेषण की शुरुआत करते हैं। नजर आता
- 5:09:37है।
- 5:09:37पहला प्राचीन काल जहां विशाल हवेलियों,
- 5:09:39गहरी बावड़ियों और नागर शैली से प्रभावित
- 5:09:42मंदिरों के अवशेष मिलते हैं।
- 5:09:43सही कहा और उसके बाद आता है मध्यकालीन
- 5:09:46वास्तुकला का दौर। इस पर दिल्ली सल्तनत और
- 5:09:49मुगल शैली का गहरा प्रभाव है। विशेषकर
- 5:09:52गुंबदों और मेहराबों के उपयोग में। और
- 5:09:54अंततः आधुनिक या ब्रिटिश काल जिसने भारतीय
- 5:09:57परिदृश्य में औपनिवेशक या अह कोरोनियल
- 5:10:00शैली को जन्म दिया।
- 5:10:01इस त्रिपक्षीय वर्गीकरण को समझना
- 5:10:03प्रीलिम्स के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता
- 5:10:06है और यहीं पर एस्पिरेंट्स के लिए एक
- 5:10:08प्रीलिम्स अलर्ट है।
- 5:10:09हां, सबसे पुरानी हवेली का तथ्य।
- 5:10:12बिल्कुल। वास्तुकला के इस ऐतिहासिक क्रम
- 5:10:14में अगर यह प्रश्न सामने आए कि हरियाणा की
- 5:10:18सबसे पुरानी हवेली का निर्माण किसने और
- 5:10:21कहां करवाया था? तो ध्यान रहे यह हवेली
- 5:10:24फतेहाबाद में स्थित है
- 5:10:26और इसका निर्माण फिरोजशाह तुगलक ने करवाया
- 5:10:28था।
- 5:10:28सीरियस एस्पिरेंस मार्क दिस। यह केवल एक
- 5:10:32तथ्य नहीं है। यह दर्शाता है कि तुगलक
- 5:10:35वास्तुकला अपनी सादगी और ढलवा दीवारों
- 5:10:39जिन्हें हम बैटर्ड वाल्स कहते हैं, उसके
- 5:10:42लिए जानी जाती थी।
- 5:10:43यह भव्यता से ज्यादा मजबूती पर केंद्रित
- 5:10:45थी। मजबूती और सादगी के उस दौर से आगे
- 5:10:48बढ़कर अगर हम मध्यकालीन रत्नों की नजाकत
- 5:10:52को देखें तो कुरुक्षेत्र के थानेसर में
- 5:10:55स्थित शेख चिल्ली का मकबरा एक बेजोड़
- 5:10:58उदाहरण प्रस्तुत करता है।
- 5:11:00जिसे हरियाणा का ताजमहल भी कहा जाता है।
- 5:11:02जी मुगल राजकुमार दारा शिकोह का अपने
- 5:11:06आध्यात्मिक गुरु शेख चिल्ली के प्रति जो
- 5:11:08सम्मान था वह इस इमारत के हर पत्थर में
- 5:11:11झलकता है। दाराशिको का सूफीवाद की ओर
- 5:11:14झुकाव सर्वविदित है
- 5:11:16और यह मकबरा उसी वैचारिक उदारता का
- 5:11:18वास्तुकात्मक प्रतीक है।
- 5:11:20तकनीकी दृष्टिकोण से इसका विश्लेषण करें
- 5:11:23तो यह पूरी तरह से फारसी शैली मतलब
- 5:11:26पर्शियन स्टाइल का उत्कृष्ट नमूना है।
- 5:11:28इसमें हल्के रंग के बलुआ पत्थर और सफेद
- 5:11:30संगमरमर का इस्तेमाल हुआ है।
- 5:11:32हां, बफ सैंड स्टोन और मार्बल का जो
- 5:11:35संतुलन साधा गया है, वह इसे उस दौर की
- 5:11:38अन्य इमारतों से अलग करता है। मुख्य
- 5:11:40परीक्षा के लिए यहां एक एग्जाम अलर्ट है।
- 5:11:43डेविड रॉस का वो प्रसिद्ध कोर्ट राइट?
- 5:11:45बिल्कुल। प्रसिद्ध इतिहासकार डेविड रॉस ने
- 5:11:47इस संरचना के बारे में लिखा था कि यह भारत
- 5:11:50की सबसे सुंदर इमारतों में से एक है। जब
- 5:11:53भी मुगल काल की क्षेत्रीय वास्तुकला पर
- 5:11:55उत्तर लिखा जाए तो इस तरह के प्रामाणिक
- 5:11:58उद्धहरण उत्तर को अधिक वजनदार बनाते हैं।
- 5:12:00फारसी शैली की इस नज़ाकत से अलग मध्यकाल
- 5:12:03में कुछ ऐसी इमारतें भी हैं जो अपनी
- 5:12:05निर्माण सामग्री और पृष्ठभूमि के कारण
- 5:12:07विशिष्ट हैं। जैसे हिसार का गुजरी महल।
- 5:12:10फिरोज शाह तुगलक द्वारा अपनी प्रेमिका
- 5:12:13गुजरी के लिए बनवाया गया यह महल
- 5:12:15और यह इसलिए खास है क्योंकि इसके निर्माण
- 5:12:17में अग्रोहा से लाए गए काले पत्थरों का
- 5:12:19इस्तेमाल हुआ था। उस दौर के मैदानी इलाके
- 5:12:21में काले पत्थर की इमारत एक स्पष्ट शक्ति
- 5:12:24प्रदर्शन भी था।
- 5:12:24इसी तरह नारनौल का जल महल है जिसे 1591
- 5:12:29में शाह कुली खान ने बनवाया था। एक
- 5:12:32कृत्रिम तालाब के बीचों-बीच स्थित यह महल
- 5:12:36वास्तुकला और क्लाइमेट कंट्रोल का बेहतरीन
- 5:12:39सामंजस्य है।
- 5:12:40लेकिन इन ऐतिहासिक इमारतों के बीच अक्सर
- 5:12:42आयोग एक बहुत ही सूक्ष्म ट्रैप बिछाता है।
- 5:12:45हां, यह एक बड़ा एग्जाम ट्रैप है।
- 5:12:47परीक्षाओं में इब्राहिम लोदी का मकबरा और
- 5:12:50इब्राहिम खान का मकबरा इन दोनों को लेकर
- 5:12:53अक्सर भ्रम की स्थिति पैदा की जाती है। इस
- 5:12:56अंतर को तार्किक रूप से समझना होगा।
- 5:12:59इब्राहिम लोदी दिल्ली सल्तनत का अंतिम
- 5:13:01शासक था
- 5:13:02जो 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में
- 5:13:05मारा गया। इसलिए उसका मकबरा पानीपत में
- 5:13:08है।
- 5:13:08दूसरी ओर इब्राहिम खान शेरशाह सूरी के
- 5:13:11दादा थे।
- 5:13:11और उनका मकबरा नारनौल में स्थित है। जिसे
- 5:13:14स्वयं शेरशाह सूरी ने बनवाया था। यह दोनों
- 5:13:17शासक अलग हैं। उनका कालखंड अलग है और
- 5:13:20वास्तुकला की शैली भी भिन्न है।
- 5:13:22इतिहास के इन्हीं उलझे हुए धागों और
- 5:13:25परीक्षा के चक्रव्यूह को देखते हुए एक बात
- 5:13:28ज़हन में आती है। सुनिएगा।
- 5:13:30जी।
- 5:13:30इतिहास के इन मकबरों में दफन है कई राज।
- 5:13:34जो एस्पिरेंट्स इन्हें एक समझें उनका गलत
- 5:13:37होगा अंदाज।
- 5:13:38हम प्रीलिम्स के ट्रैप्स से जो बच गया वही
- 5:13:41तो मेंस की कॉपी में रचेगा नया इतिहास।
- 5:13:44बहुत खूब। यह पंक्तियां एस्पिरेंट्स को
- 5:13:47सतर्क करने के लिए काफी हैं। अब हम
- 5:13:49धार्मिक और जल वास्तुकला के खंड का
- 5:13:52विश्लेषण करते हैं।
- 5:13:53ऐतिहासिक मस्जिदों की श्रेणी में पानीपत
- 5:13:56की काबूदी बाग मस्जिद एक वाटर शेड मूवमेंट
- 5:13:58का प्रतिनिधित्व करती है।
- 5:14:001526 में इब्राहिम लोदी को हराने के बाद
- 5:14:03बाबर ने इसे अपनी जीत के स्मारक के रूप
- 5:14:06में निर्मित करवाया था। और इस मस्जिद
- 5:14:08परिसर में एक विशेष चबूतरा-ए फतेह मुबारक
- 5:14:11है जो सीधे तौर पर मुगल साम्राज्य की
- 5:14:14स्थापना की घोषणा का प्रतीक है।
- 5:14:16मुगलों से पूर्व तुगलक काल की धार्मिक
- 5:14:18इमारता में हिसार की लाट की मस्जिद एक
- 5:14:21दुर्लभ वास्तुकला प्रयोग है।
- 5:14:23फिरोज शाह तुगलक द्वारा निर्मित इस मस्जिद
- 5:14:25की संरचना ऐलाकार की है।
- 5:14:27जिसे पारंपरिक वर्गाकार या आयताकार
- 5:14:29मस्जिदों से बिल्कुल अलग करती है। लेकिन
- 5:14:32धार्मिक वास्तुकला सिर्फ इस्लामी इमारतों
- 5:14:34तक सीमित नहीं है। कैथल के कलायत में
- 5:14:37स्थित ईंटों के मंदिर भारतीय मंदिर
- 5:14:39वास्तुकला के अध्ययन में एक अहम पड़ाव
- 5:14:42हैं।
- 5:14:42कलायत के मंदिरों पर अगर हम रुके तो यहां
- 5:14:45एक वैचारिक विश्लेषण की आवश्यकता है। यह
- 5:14:48मंदिर गुर्जर प्रतिहार शैली के हैं।
- 5:14:50और ट्रैप यह है कि अमूमन प्रतिहार कालीन
- 5:14:52मंदिर भारी पत्थरों को तराश कर बनाए जाते
- 5:14:55थे। लेकिन कलायत के यह मंदिर पूरी तरह से
- 5:14:58पकी हुई ईंटों से निर्मित हैं। ऐसा क्यों?
- 5:15:01जैसे कि हम दिशांत आईएएस में पढ़ाते हैं।
- 5:15:04किसी भी क्षेत्र की वास्तुकला वहां के
- 5:15:06भूगोल की मोहताज होती है।
- 5:15:07बिल्कुल।
- 5:15:08हरियाणा के इस मैदानी भाग में पत्थर आसानी
- 5:15:10से उपलब्ध नहीं थे। इसलिए यहां के
- 5:15:12शिल्पकारों ने स्थानीय मिट्टी को पकाकर
- 5:15:15ईंटों से ही नागर शैली के शिखरों का
- 5:15:17निर्माण किया। यह मानव संसाधन का भूगोल के
- 5:15:20साथ एक बेहतरीन अनुकूलन है।
- 5:15:22वास्तुकला और स्थानीय जरूरतों के इस
- 5:15:24अनुकूलन का सबसे व्यावहारिक रूप जल
- 5:15:27संरक्षण वास्तुकला यानी बावड़ियों में
- 5:15:29देखने को मिलता है। महम की शाहजहां की
- 5:15:32बावड़ी केवल एक जल स्रोत नहीं थी।
- 5:15:34बल्कि यह ईंट और कंकड़ से बना एक सामाजिक
- 5:15:38केंद्र था।
- 5:15:39इसे स्वर्ग का झरना कहा जाता था। जिसमें
- 5:15:41सीढ़ियों के साथ-साथ यात्रियों के विश्राम
- 5:15:43के लिए गैलरियां बनी थी। और अगर जल
- 5:15:46वास्तुकला की बात हो तो नारनौल जिसे
- 5:15:49बावड़ियों का शहर कहा जाता है। अपनी
- 5:15:51अलीजान की बावड़ी के लिए विशेष स्थान रखता
- 5:15:54है।
- 5:15:54बावड़ियों का यह कांसेप्ट जल प्रबंधन का
- 5:15:57उत्कृष्ट उदाहरण है।
- 5:15:58इसी संदर्भ में एक की फैक्ट को शेख चिल्ली
- 5:16:01के मकबरे से भी जोड़कर देखना चाहिए। हमने
- 5:16:04उस मकबरे की बात की थी जिसके प्रवेश द्वार
- 5:16:06पर एक विशाल टैंक है।
- 5:16:08हां जो प्रथम दृष्ट्या केवल सजावट या वजू
- 5:16:11के लिए लग सकता है।
- 5:16:12प्रार्थना से पूर्व हाथ मुंह धोने के लिए
- 5:16:14जी लेकिन इंजीनियरिंग के नजरिए से इसका
- 5:16:17मुख्य कार्य इमारत की नींव को वाटर
- 5:16:21स्टेबिलिटी यानी जल स्थिरता प्रदान करना
- 5:16:23था ताकि बलुआ पत्थर की नींव मजबूत रहे। यह
- 5:16:26मध्यकालीन भारत की वैज्ञानिक सोच का
- 5:16:29प्रमाण है।
- 5:16:30मध्यकालीन वैज्ञानिक सोच से निकलकर जब हम
- 5:16:32आधुनिक या औपनिवेशिक वास्तुकला के दौर में
- 5:16:35आते हैं तो एक अलग ही परिदृश्य सामने आता
- 5:16:38है। 1806 में स्थापित करनाल छावनी ब्रिटिश
- 5:16:41सैन्य वास्तुकला का एक प्रारंभिक रूप है।
- 5:16:44इसके अलावा अंबाला का सेंट पॉल्स चर्च
- 5:16:47वास्तुकला की एक बहुत ही विशिष्ट अर्धगथिक
- 5:16:50स्टाइल जिसे हम सेमीग स्टाइल कहते हैं।
- 5:16:53उसका प्रतिनिधित्व करता है। नुकीले मेहराब
- 5:16:56और आसमान छूती छतें गोथिक शैली की पहचान
- 5:16:59है।
- 5:16:59और 1965 के भारतपाक युद्ध में बमबारी का
- 5:17:03शिकार होने के बावजूद इसकी बची हुई
- 5:17:06दीवारें आज भी औपनिवेशिक निर्माण की
- 5:17:09मजबूती को दर्शाती है।
- 5:17:10औपनिवेशिक दौर का एक और महत्वपूर्ण
- 5:17:12निर्माण करनाल का एक्टोनी हाउस है।
- 5:17:15यह इमारत विशुद्ध रूप से ब्रिटिश नहीं है।
- 5:17:18यह भारतीय और यूरोपीय वास्तुकला का एक
- 5:17:21मिश्रित रूप है। अंग्रेजों ने जल्द ही समझ
- 5:17:25लिया था कि यूरोपीय डिजाइन भारतीय
- 5:17:27गर्मियों के लिए उपयुक्त नहीं है।
- 5:17:29इसलिए उन्होंने ऊंचे बरामदे और क्रॉस
- 5:17:32वेंटिलेशन जैसी भारतीय तकनीकों को अपनी
- 5:17:34इमारतों में शामिल करना शुरू किया।
- 5:17:36वास्तुकला की इन इमारतों से परे मूर्तिकला
- 5:17:39के विकास को समझना भी उतना ही आवश्यक है।
- 5:17:42मूर्तिकला के विकास को हम एक स्पष्ट फ्लो
- 5:17:44चार्ट के माध्यम से तीन चरणों में देख
- 5:17:47सकते हैं।
- 5:17:47इस फ्लो चार्ट का पहला चरण शुंग और कुषाण
- 5:17:50काल का है। इस दौर की मूर्तियों में मथुरा
- 5:17:53कला शैली का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता
- 5:17:55है।
- 5:17:55जिसमें मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर का
- 5:17:58उपयोग हुआ। रोहतक और पलवल इस चरण के
- 5:18:01प्रमुख केंद्र रहे। इसके बाद आता है दूसरा
- 5:18:04चरण जिसे भारतीय कला का स्वर्ण युग यानी
- 5:18:06गुप्त काल कहा जाता है।
- 5:18:08इस दौर की मूर्तियां आध्यात्मिक शांति,
- 5:18:10परिष्कृत शारीरिक अनुपात और शांत भावों के
- 5:18:14लिए जानी जाती हैं।
- 5:18:15और मूर्तिक कला के विकास का तीसरा चरण
- 5:18:17यानी मध्यकाल जो तोमर और प्रतिहार शासकों
- 5:18:20का समय था। एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाता
- 5:18:22है।
- 5:18:22व्हाट इज फैसनेटिंग हियर इज कि गुप्त काल
- 5:18:25के यथार्थवाद और सादगी का स्थान इस तीसरे
- 5:18:29चरण में भारी अलंकरण ने ले लिया।
- 5:18:32मूर्तियां सजीव कम और सजावटी अधिक होने
- 5:18:36लगी।
- 5:18:36एस्पिरेंट्स को इस विकास क्रम के साथ-साथ
- 5:18:38कुछ प्रमुख मूर्तियों के प्राप्ति स्थलों
- 5:18:40का तार्किक मिलान याद रखना चाहिए। जैसे
- 5:18:43पलवल, हथीन और फरीदाबाद से यक्ष यक्षिणी
- 5:18:47की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। जो
- 5:18:49तत्कालीन समाज के लोक विश्वासों को
- 5:18:51दर्शाती हैं।
- 5:18:52मूर्तियों की इसी श्रृंखला में फाजिलपुर
- 5:18:54जो सोनीपत में है। वहां से प्राप्त शेष
- 5:18:57शैया विष्णु की मूर्ति और अग्रोहा से
- 5:19:00प्राप्त सूर्यदेव की मूर्ति अत्यंत
- 5:19:02महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य हैं।
- 5:19:04जो गुप्त काल के दौरान हरियाणा में वैष्णव
- 5:19:07और सौर संप्रदायों की उपस्थिति को पुष्ट
- 5:19:10करते हैं। पत्थरों की इस ठोस दुनिया से
- 5:19:12अगर हम कला के अधिक जीवंत और कोमल पहलू की
- 5:19:14ओर मुड़े तो हरियाणा की चित्रकला, कढ़ाई
- 5:19:17और हस्तशिल्प का एक समृद्ध कैनवास सामने
- 5:19:20आता है।
- 5:19:21चित्रकला में यहां हवेलियों के भित्ति
- 5:19:23चित्रों की एक लंबी परंपरा रही है।
- 5:19:25जिन्हें म्यूरल्स भी कहा जाता है। लेकिन
- 5:19:28मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा दोनों
- 5:19:30के लिए एक विशिष्ट तथ्य अस्थल बोहर के
- 5:19:33चित्रों से जुड़ा है। अस्थल बोहर के
- 5:19:35भित्ति चित्र राजपूत शैली से गहरे
- 5:19:37प्रभावित हैं। राहुल प्रकाश सर और उनकी
- 5:19:40टीम के मार्गदर्शन में हम हमेशा इस बात पर
- 5:19:42जोर देते हैं कि कला शैलियों का यह अंतर
- 5:19:45संबंध ही यूपीएससी के प्रश्नों का मूल
- 5:19:48आधार होता है।
- 5:19:49और जब कला के अंतर संबंध की बात आती है तो
- 5:19:52पंजाब और हरियाणा की साझी विरासत फुलकारी
- 5:19:54का उल्लेख अनिवार्य हो जाता है।
- 5:19:56फुलकारी सिर्फ एक कढ़ाई नहीं बल्कि
- 5:19:58ग्रामीण समाज के सामाजिक ताने-बाने का
- 5:20:01हिस्सा है। परीक्षा के दृष्टिकोण से इसके
- 5:20:04तीन मुख्य प्रकारों का वर्गीकरण समझना
- 5:20:06आवश्यक है। पहला प्रकार बाघ है जिसमें
- 5:20:09पूरे कपड़े को इतनी सघन ज्यातीय कढ़ाई से
- 5:20:12ढक दिया जाता है कि मूल कपड़ा दिखाई ही
- 5:20:14नहीं देता। फुलकारी का दूसरा प्रकार चौप
- 5:20:17है जो विशुद्ध रूप से एक भावनात्मक और
- 5:20:20सामाजिक प्रतीक है।
- 5:20:21यह विवाह के अवसर पर नानी या दादी द्वारा
- 5:20:24वधू को भेंट की जाने वाली एक विशेष शॉल
- 5:20:26है।
- 5:20:27और तीसरा प्रकार नीलक है जिसमें विशेष रूप
- 5:20:30से नीले रंग की पृष्ठभूमि वाले कपड़े पर
- 5:20:33पीले या लाल रेशमी धागों से कढ़ाई की जाती
- 5:20:37है। यह रंगों का विरोधाभास इस कला की
- 5:20:40तकनीकी समझ को दर्शाता है। अगर हस्तशिल्प
- 5:20:43को भारत के आर्थिक मानचित्र पर रखा जाए तो
- 5:20:46हरियाणा के कई जिले एमएसएमई सेक्टर के
- 5:20:49बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
- 5:20:51बिल्कुल पानीपत इसका सबसे सशक्त उदाहरण है
- 5:20:55जिसे बुनकरों का शहर कहा जाता है। यहां का
- 5:20:58हथकर्ग उद्योग पीढ़ियों का कौशल है।
- 5:21:00इसी तरह रेवाड़ी अपने पीतल के बर्तनों और
- 5:21:03तिल्ला जूती के लिए विख्यात है। जिसमें
- 5:21:05सोने चांदी के तारों की बारीक कढ़ाई की
- 5:21:08जाती है। झज्जर की सुराहिया अपनी विशेष
- 5:21:11बनावट के कारण प्राकृतिक रूप से पानी को
- 5:21:14ठंडा रखने के लिए पूरे उत्तर भारत में
- 5:21:16प्रसिद्ध है। कुरुक्षेत्र के टेराकोटा
- 5:21:19शिल्प की मजबूती और सौंदर्य भी इसी
- 5:21:21ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा है।
- 5:21:24क्रीड़ है जो ग्रामीण आजीविका को सहारा
- 5:21:26देती है। कला और अर्थव्यवस्था के इसी संगम
- 5:21:29पर मुझे लगता है कि उम्मीदवारों को विषय
- 5:21:32की गहराई को समझना चाहिए।
- 5:21:33एक शायरी के माध्यम से
- 5:21:35बिल्कुल। किताबों के समंदर में जो डूब
- 5:21:38जाएगा वही तो कट ऑफ का किनारा पाएगा। जो
- 5:21:41कला इतिहास और अर्थशास्त्र के ट्रैप को
- 5:21:43समझ गया वही तो कल को बेहतरीन प्रशासक
- 5:21:46कहलाएगा। बहुत सटीक। यह पंक्तियां विषय के
- 5:21:49इंटरडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण को बहुत सटीकता
- 5:21:52से स्पष्ट करती हैं। वास्तुकला और कला से
- 5:21:54आगे बढ़ते हुए अब हम हरियाणा के उस सामरिक
- 5:21:57इतिहास का विश्लेषण करते हैं जो यहां के
- 5:21:59ऐतिहासिक किलों में दर्ज है।
- 5:22:01हासी का असीगढ़ किला एक अत्यंत महत्वपूर्ण
- 5:22:03सामरिक संरचना है। 12वीं शताब्दी में
- 5:22:06पृथ्वीराज चौहान द्वारा निर्मित इस किले
- 5:22:08को तलवार का किला भी कहा जाता था।
- 5:22:10क्योंकि यह हथियार निर्माण का एक प्रमुख
- 5:22:12केंद्र था। बाद में 18वीं शताब्दी के अंत
- 5:22:15में आरिश मूल के शासक जॉर्ज थॉमस ने इसे
- 5:22:18अपनी राजधानी बनाया।
- 5:22:19असीगढ़ किले से जुड़ा एक बहुत ही क्लासिक
- 5:22:22एग्जाम ट्रैप है जहां परीक्षक अक्सर
- 5:22:24उम्मीदवारों को भ्रमित करते हैं।
- 5:22:26किले का मूल निर्माण पृथ्वीराज चौहान ने
- 5:22:29करवाया था। लेकिन इस किले का जो विशाल
- 5:22:31बड़ा दरवाजा है यानी मेन गेट वो पृथ्वीराज
- 5:22:35चौहान की वास्तुकला नहीं है।
- 5:22:37इसका निर्माण बाद में दिल्ली सल्तनत के
- 5:22:40शासक अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था।
- 5:22:42ऐतिहासिक स्मारकों में अलग-अलग कालखंडों
- 5:22:45में हुए इन परिवर्तनों को स्पष्ट रूप से
- 5:22:47याद रखना चाहिए।
- 5:22:48हरियाणा की रक्षा वास्तुकला में कुछ अन्य
- 5:22:51किलों का भी अपना सामरिक महत्व रहा है।
- 5:22:53महेंद्रगढ़ का कानोड़ किला जिसका निर्माण
- 5:22:56मराठा शासक तात्या टोपे ने करवाया था। बाद
- 5:22:59में पटियाला रियासत के अधीन आ गया। सवाई
- 5:23:02माधव सिंह द्वारा बनवाया गया माधवगढ़ का
- 5:23:04किला राजपूत सैन्य वास्तुकला का हिस्सा
- 5:23:06है।
- 5:23:07इसी तरह नारनौल में बीरबल का छत्ता है
- 5:23:10जिसे राय रायन मुकुंद दास का छत्ता भी
- 5:23:13कहते हैं। यह अपनी भूल भुलैया जैसी भूमिगत
- 5:23:16संरचनाओं के लिए जाना जाता है।
- 5:23:18बल्लभगढ़ के नाहर सिंह किले का भी विशेष
- 5:23:20उल्लेख होना चाहिए जिसे राजा बलराम सिंह
- 5:23:22ने बनवाया था और इसे दिल्ली का लोहद द्वार
- 5:23:25कहा जाता था। इसी तरह फर्रुख नगर का किला
- 5:23:27अपने दिल्ली दरवाजा के लिए प्रसिद्ध है।
- 5:23:30यह सभी के लिए इस बात का प्रमाण है कि
- 5:23:32हरियाणा हमेशा से दिल्ली की सत्ता के लिए
- 5:23:35एक बफर जोन या रक्षा पंक्ति रहा है।
- 5:23:38इतिहास के इन बिखरे हुए साक्ष्यों को
- 5:23:40सहेजने का कार्य संग्रहालय करते हैं।
- 5:23:42कुरुक्षेत्र का श्री कृष्ण संग्रहालय
- 5:23:44राज्य के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक
- 5:23:47है जो 1987 में स्थापित हुआ था।
- 5:23:49कुरुक्षेत्र में ही स्थित पैनोरामा और
- 5:23:52विज्ञान केंद्र महाभारत युद्ध को केवल एक
- 5:23:55महाकाव्य के रूप में नहीं बल्कि उसके पीछे
- 5:23:58के खगोल शास्त्र और विज्ञान के दृष्टिकोण
- 5:24:01से प्रस्तुत करता है।
- 5:24:02पानीपत संग्रहालय जो शहर के सामरिक इतिहास
- 5:24:05को समर्पित है। मुख्य रूप से पानीपत की
- 5:24:07तीन ऐतिहासिक लड़ाईयों के साक्ष्यों को
- 5:24:09संजोए हुए है।
- 5:24:10पुरातात्विक स्थलों में हिसार का राखीगढ़ी
- 5:24:14जो अब सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा
- 5:24:16स्थल माना जाता है। भारतीय उपमहाद्वीप के
- 5:24:20इतिहास को फिर से लिखने का माद्दा रखता
- 5:24:22है।
- 5:24:23संग्रहालयों के संदर्भ में रैंकर्स को एक
- 5:24:25की फैक्ट पर फोकस करना चाहिए।
- 5:24:26रैंकर्स फोकस हियर। राज्य में इन सभी
- 5:24:30पुरातात्विक संपदाओं के संरक्षण के लिए
- 5:24:32हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का
- 5:24:35गठन वर्ष 1972 में किया गया था। सीधे
- 5:24:39तथ्यात्मक प्रश्नों में यह वर्ष एक
- 5:24:42निर्णायक विकल्प बन सकता है।
- 5:24:44तो इस सबका क्या मतलब है? इतनी सारी
- 5:24:46इमारतें, कलारूप और ऐतिहासिक तथ्य एक
- 5:24:49सिविल सेवा उम्मीदवार के रूप में इनका
- 5:24:51समग्र विश्लेषण कैसे किया जाए?
- 5:24:53इसे ही हम 360 डिग्री विश्लेषण कहते हैं।
- 5:24:56आप वास्तुकला को केवल ईंट पत्थर के ढांचे
- 5:24:59के रूप में नहीं देख सकते।
- 5:25:00कॉन्स्टिट्यूशनल एंगल से देखें तो भारतीय
- 5:25:02संविधान का अनुच्छेद 49 यह स्पष्ट करता है
- 5:25:05कि राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, कलात्मक
- 5:25:07या ऐतिहासिक स्थानों की रक्षा करना राज्य
- 5:25:10का कर्तव्य है।
- 5:25:11मुख्य परीक्षा के निष्कर्ष के रूप में
- 5:25:13उम्मीदवारों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि
- 5:25:16हरियाणा की वास्तुकला एक समन्वित मिश्रण
- 5:25:19है। एक सिंक्रेटिक ब्लेंड है। यहां
- 5:25:22इस्लामी गुंबदों और हिंदू अलंकरण का जो
- 5:25:24राजपूत मुगल शैली का स्वरूप दिखता है, वह
- 5:25:28भारत की सामासिक संस्कृति का बेहतरीन
- 5:25:30उदाहरण है।
- 5:25:31इस 360 डिग्री समझ का परीक्षण करने के लिए
- 5:25:34अब हम यूपीएससी स्टाइल एमसीक्यू रूल की ओर
- 5:25:37बढ़ते हैं।
- 5:25:38यहां तीन प्रारंभिक परीक्षा की चुनौतियां
- 5:25:40प्रस्तुत हैं। चुनौती एक, निम्नलिखित
- 5:25:43कथनों पर विचार करें। कथन एक शेख चिल्ली
- 5:25:46का मकबरा वास्तुकला की पठान शैली में
- 5:25:49निर्मित है। कथन दो चौप एक प्रकार की शॉल
- 5:25:52है जो शादी के दौरान नानी द्वारा भेंट की
- 5:25:55जाती है। कथन तीन असीगढ़ किले का निर्माण
- 5:25:59मूल रूप से जॉर्ज थॉमस ने करवाया था।
- 5:26:02एलिमिनेशन लॉजिक का उपयोग करते हुए इसे
- 5:26:05डिकोड करते हैं। कथन एक का विश्लेषण करें।
- 5:26:08हमने स्पष्ट रूप से चर्चा की थी कि शेख
- 5:26:11चिल्ली का मकबरा हल्के बलुआ पत्थर और
- 5:26:13संगमरमर से बनी एक विशुद्ध फारसी शैली की
- 5:26:16इमारत है ना कि पठान शैली की। अतः कथन एक
- 5:26:20गलत है।
- 5:26:20कथन तीन पर आए। असीरगढ़ किले का मूल
- 5:26:23निर्माण 12वीं शताब्दी में पृथ्वीराज
- 5:26:25चौहान ने करवाया था। जॉर्ज थॉमस ने तो
- 5:26:2718वीं सदी के अंत में इसे अपनी राजधानी
- 5:26:29बनाया था। अतः कथन तीन भी तथ्यात्मक रूप
- 5:26:32से गलत है।
- 5:26:33अब बचता है कथन दो जो बिल्कुल सही है। चोप
- 5:26:37विवाह के अवसर पर दी जाने वाली फुलकारी का
- 5:26:39एक भावनात्मक रूप है। इस प्रकार केवल कथन
- 5:26:43दो सही है।
- 5:26:44दूसरी चुनौती वास्तुकला और स्थानों के
- 5:26:46सटीक मिलान की है। सूची एक में स्थान है
- 5:26:49एक गुजरी महल, दो जलमल, तीन माधवगढ़ का
- 5:26:54किला। और सूची दो में जिले हैं ए
- 5:26:57महेंद्रगढ़, बी हिसार, सी नारनौल।
- 5:27:00यह मिलान भौगोलिक और ऐतिहासिक तर्क पर
- 5:27:03आधारित है। गुजरी महल जिसके लिए अग्रोहा
- 5:27:07से काले पत्थर लाए गए थे। हिसार में
- 5:27:09फिरोज़ शाह द्वारा बनवाया गया यानी वन बी।
- 5:27:13जल महल जो अपनी शीतलता के लिए एक कृत्रिम
- 5:27:15तालाब के बीच बना है। नारनौल में है यानी
- 5:27:182 सी
- 5:27:19और माधवगढ़ का किला जो जयपुर के सवाई माधव
- 5:27:23सिंह की सैन्य वास्तुकला है। महेंद्रगढ़
- 5:27:25में स्थित है। यानी 3a तार्किक रूप से सही
- 5:27:29क्रम वन बी 2 सी3A होगा।
- 5:27:32और अंतिम चुनौती हरियाणा के हस्तशिल्प और
- 5:27:35अर्थव्यवस्था को जोड़ती है? प्रश्न है
- 5:27:38हरियाणा का कौन सा शहर अपनी बेहतरीन
- 5:27:40हतकरघा परंपरा के कारण बुनकरों के शहर के
- 5:27:44रूप में प्रसिद्ध है? विकल्प हैं रेवाड़ी,
- 5:27:47पानीपत, अंबाला या करनाल।
- 5:27:50इस प्रश्न को हल करने के लिए राज्य के
- 5:27:52औद्योगिक वर्गीकरण को याद करें। रेवाड़ी
- 5:27:55पीतल उद्योग और तिल्ला जूती के लिए जाना
- 5:27:58जाता है। अंबाला अपने
- 5:27:59[गला साफ़ करने की आवाज़] वैज्ञानिक
- 5:28:00उपकरणों के लिए प्रसिद्ध है। साइंस सिटी
- 5:28:02है।
- 5:28:02यह पानीपत ही है जो ऐतिहासिक युद्धों की
- 5:28:05भूमि होने के साथ-साथ पीढ़ियों से अपने
- 5:28:08हथकर्घा और कालीन उद्योग के लिए बुनकरों
- 5:28:11के शहर के रूप में विश्व विख्यात है। इस
- 5:28:14विस्तृत चर्चा के बाद अगर आज के इस पूरे
- 5:28:17विश्लेषण का एक क्रिस्प रिकैप किया जाए तो
- 5:28:20हमने देखा कि कैसे प्राचीन काल की सादी
- 5:28:23हवेलियों से लेकर मध्यकाल के फारसी रत्नों
- 5:28:26और गुजरी महल की मजबूत दीवारों ने हरियाणा
- 5:28:29की पहचान गढ़ी।
- 5:28:30हमने कलायत के ईंट के मंदिरों की भौगोलिक
- 5:28:32मजबूरी और अंबाला के सेंट पॉल चर्च के
- 5:28:35औपनिवेशिक अर्धगोथिक रूप को समझा। इसके
- 5:28:38अलावा मूर्तिकला के विकास, फुलकारी के
- 5:28:41प्रकारों और असीगढ़ किले जैसे ऐतिहासिक
- 5:28:44स्मारकों से जुड़े ट्रैप्स का भी गहन
- 5:28:47अध्ययन किया।
- 5:28:47अंत में अगर हम इस पूरे विषय को एक व्यापक
- 5:28:50समकालीन संदर्भ से जोड़ें तो आज के तेजी
- 5:28:53से होते शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
- 5:28:56के दौर में एक बड़ा सवाल खड़ा होता है।
- 5:28:58हम अपने इन गुमनाम ऐतिहासिक स्मारकों के
- 5:29:01संरक्षण और आधुनिक विकास के बीच एक स्थाई
- 5:29:04संतुलन कैसे बना सकते हैं? हम्म।
- 5:29:06क्या स्मार्ट सिटीज के इस दौर में हम इन
- 5:29:08हेरिटेज सिटीज की मूल आत्मा को बचा
- 5:29:11पाएंगे?
- 5:29:12यह एक अत्यंत प्रासंगिक और विचारोत्तेजक
- 5:29:15प्रश्न है। उम्मीदवारों को इस कंजर्वेशन
- 5:29:17वर्सेस डेवलपमेंट के संतुलन पर अपने तर्क
- 5:29:20विकसित करने चाहिए क्योंकि इंटरव्यू बोर्ड
- 5:29:22में यही विश्लेषणात्मक सोच उन्हें दूसरों
- 5:29:24से अलग साबित करेगी।
- 5:29:25बिल्कुल। और इसी विचार के साथ हम आज का यह
- 5:29:28विश्लेषण समाप्त करते हैं।
- 5:29:30दिस लेक्चर वाज़ बाय दिशांत आईएस हरियाणा
- 5:29:32सामान्य ज्ञान, कला और संस्कृति। आज के इस
- 5:29:36डीप ड्राइव लेक्चर में एस्पिरेंट्स हम
- 5:29:38राज्य के इतिहास, विरासत, प्रमुख मेले,
- 5:29:41त्यौहार और वास्तुकला का गहराई से
- 5:29:43विश्लेषण करने वाले हैं। कला और संस्कृति
- 5:29:46किसी भी राज्य के क्रमिक विकास का दर्पण
- 5:29:49होती है और हरियाणा के संदर्भ में यह
- 5:29:52अध्ययन इसलिए भी अनिवार्य हो जाता है
- 5:29:54क्योंकि इस क्षेत्र ने सिंधु घाटी सभ्यता
- 5:29:56से लेकर महाभारत और फिर आधुनिक काल तक के
- 5:29:59ऐतिहासिक परिवर्तनों को अपने भीतर समेटा
- 5:30:01है। जी बिलकुल। और इस सांस्कृतिक यात्रा
- 5:30:06को समझने के लिए अगर हम उन प्रतीकों पर
- 5:30:08गौर करें जो हमारी इस विरासत को दर्शाते
- 5:30:11हैं। जैसे स्क्रीन पर दिख रहे इस विज़ुअल
- 5:30:14को ही ले लीजिए। इसमें एक पारंपरिक ढोल,
- 5:30:17किसी भव्य मंदिर का शिखर और ग्रामीण
- 5:30:20परिवेश का हिस्सा रहा एक हुक्का दिख रहा
- 5:30:22है। मतलब यह मात्र कुछ वस्तुएं नहीं है।
- 5:30:25यह हरियाणा की गहरी जड़ों की कहानी कहते
- 5:30:28हैं।
- 5:30:28सही कहा। और अगर हम इन्हें डिकोड करें तो
- 5:30:31ढोल उस ग्रामीण उल्लास और कृषि प्रधान
- 5:30:34समाज के जोश का प्रतीक है जो हर फसल के
- 5:30:37कटने पर गूंजता है। एग्जैक्टली और जो
- 5:30:39मंदिर का शिखर है वह कुरुक्षेत्र और
- 5:30:42पेहोवा जैसी प्राचीन आध्यात्मिक भूमियों
- 5:30:45की ओर इशारा करता है जहां से ज्ञान की
- 5:30:48धारा बही और वह जो हुक्का है वो उस
- 5:30:51पारंपरिक पंचायत व्यवस्था और सामाजिक
- 5:30:54ताने-बाने को दर्शाता है जो आज भी चौपालों
- 5:30:57पर नीतिगत चर्चाओं का केंद्र बनता है।
- 5:30:59बिल्कुल और इसी सामाजिक ताने-बाने और
- 5:31:02इतिहास को करीब से जानने का सबसे
- 5:31:04प्रामाणिक माध्यम होते हैं हमारे
- 5:31:05संग्रहालय। मतलब हरियाणा के प्रमुख
- 5:31:08संग्रहालयों के अध्ययन से यह स्पष्ट होता
- 5:31:10है कि कैसे इस राज्य ने अपने गौरवशाली
- 5:31:12अतीत को सहेज कर रखा है। चलिए पानीपत
- 5:31:15संग्रहालय से इस चर्चा को आगे बढ़ाते हैं।
- 5:31:17हां देखिए ऐतिहासिक और पुरातात्विक
- 5:31:20दृष्टिकोण से पानीपत संग्रहालय की स्थापना
- 5:31:23वर्ष 2000 में हुई थी। पानीपत केवल एक शहर
- 5:31:26नहीं है एस्पिरेंट्स बल्कि भारतीय इतिहास
- 5:31:29का वह निर्णायक युद्ध का मैदान है जहां
- 5:31:32सल्तनतों और साम्राज्यों के भाग्य का
- 5:31:35फैसला हुआ। इसलिए यह संग्रहालय पूरी तरह
- 5:31:38से पुरातत्व, ऐतिहासिक हथियारों और उन
- 5:31:41युद्धों की स्मृतियों को समर्पित है।
- 5:31:43पूर्ति करता है।
- 5:31:44जी। इसका मूल लक्ष्य भगवान कृष्ण के जीवन,
- 5:31:48महाभारत के दार्शनिक आदर्शों और गीता के
- 5:31:51संदेश को कलाकृतियों के माध्यम से जीवंत
- 5:31:54करना है। और इन दोनों के अतिरिक्त एक और
- 5:31:57महत्वपूर्ण केंद्र है। कुरुक्षेत्र
- 5:32:00विश्वविद्यालय के भीतर स्थित हस्तलेख या
- 5:32:03मैनुस्क्रिप्ट संग्रहालय।
- 5:32:04हां। पंडित स्थानुदत्त शर्मा जी के
- 5:32:06प्रयासों से स्थापित यह संग्रहालय इसलिए
- 5:32:09खास है क्योंकि यहां प्राचीन पांडुलिपियों
- 5:32:11का वो दुर्लभ संग्रह मौजूद है जो हमारे
- 5:32:14बौद्धिक इतिहास का प्रमाणिक मतलब एक बहुत
- 5:32:17बड़ा प्रमाण है।
- 5:32:18सही कहा और एस्पिरेंट्स इन संग्रहालयों के
- 5:32:21स्थापना वर्ष अक्सर परीक्षाओं में कालक्रम
- 5:32:25यानी क्रोनोलॉजी के रूप में पूछ लिए जाते
- 5:32:27हैं। तो एक तार्किक संरचना एक फ्लो चार्ट
- 5:32:30को दिमाग में बैठाना आवश्यक है। बिल्कुल।
- 5:32:33नीचे दिए गए इस टाइमलाइन फ्लो चार्ट को
- 5:32:36देखिए। सबसे पहले 1987 में श्री कृष्ण
- 5:32:39संग्रहालय की नींव रखी गई। उसके बाद 2000
- 5:32:42में पानीपत संग्रहालय अस्तित्व में आया और
- 5:32:44यह यात्रा आगे बढ़ते हुए कल्पना चावला
- 5:32:47तारामंडल जैसे आधुनिक विज्ञान केंद्रों तक
- 5:32:49पहुंचती है।
- 5:32:50यहां एस्पिरेंट्स के लिए एक सीधा
- 5:32:52प्रीलिम्स अलर्ट है। परीक्षणों में अक्सर
- 5:32:55गुलजारी लाल नंदा संग्रहालय को लेकर एक
- 5:32:58विशेष कथन पूछा जाता है। ध्यान दें यह
- 5:33:01राज्य का पहला व्यक्तिगत यानी पर्सनल
- 5:33:04संग्रहालय है।
- 5:33:04यह बहुत जरूरी पॉइंट है। सामान्य
- 5:33:07संग्रहालयों और किसी एक व्यक्ति के जीवन,
- 5:33:10उनके आदर्शों और उनकी वस्तुओं पर केंद्रित
- 5:33:12इस व्यक्तिगत संग्रहालय के बीच का ये अंतर
- 5:33:15स्टेट पीसीएस में एक निर्णायक तथ्य बन
- 5:33:18सकता है।
- 5:33:18जी और इतिहास को सहेजने की इस बात पर
- 5:33:22उम्मीदवारों के उस संघर्ष का भी जिक्र हो
- 5:33:24जाए जो वो खुद इतिहास रचने के लिए कर रहे
- 5:33:27हैं।
- 5:33:28बिल्कुल। तो एस्पिरेंट्स आपके लिए यह
- 5:33:30पंक्तियां हैं। सिलेबस के पन्नों में जो
- 5:33:33सदियों का इतिहास दबा है, एस्पिरेंट्स की
- 5:33:36रातों में वही एक नया सवेरा बना है।
- 5:33:39म्यूजियम सी खामोश भले लगे यह तैयारी की
- 5:33:42दुनिया पर हर एक फैक्ट में सफलता का कोई
- 5:33:45राज छुपा है।
- 5:33:46बहुत खूब। चलिए इसी गहरे विचार के साथ
- 5:33:49पुरातात्विक और विशिष्ट संग्रहालयों की ओर
- 5:33:52बढ़ते हैं। जब हम सिंधु घाटी सभ्यता की
- 5:33:55बात करते हैं तो हिसार जिले का राखीगढ़ एक
- 5:33:58वैश्विक स्तर का स्थल बन चुका है। जी और
- 5:34:01इसी महत्ता को देखते हुए यहां ₹5 करोड़
- 5:34:04रुपए की लागत से एक अत्याधुनिक राज्य
- 5:34:06स्तरीय संग्रहालय का निर्माण किया गया है
- 5:34:08जो हमारी 5000 वर्ष पुरानी नगरीय सभ्यता
- 5:34:11के रहस्यों को उजागर करता है और इसी हिसार
- 5:34:15में एक और बेहद दिलचस्प ऐतिहासिक इमारत है
- 5:34:18जहाज कोठी
- 5:34:19जहाज कोठी का नाम सुनते ही अक्सर
- 5:34:21कैंडिडेट्स के मन में यह सवाल उठता है कि
- 5:34:24हिसार जैसे सूखे और जमीनी इलाके में जहाज
- 5:34:27का क्या संदर्भ है
- 5:34:28यही इसका सबसे रोचक पहलू है। इसका निर्माण
- 5:34:311796 में जॉर्ज थॉमस द्वारा किया गया था।
- 5:34:34एग्जैक्टली जॉर्ज थॉमस एक आयरिश नाविक था
- 5:34:37जो बाद में एक भाड़े का सैनिक बना और उसने
- 5:34:40हासी हिसार क्षेत्र में अपना एक स्वतंत्र
- 5:34:43राज्य स्थापित कर लिया था। उसने अपने रहने
- 5:34:46के लिए जो इमारत बनवाई उसकी वास्तुकला एक
- 5:34:49समुद्री जहाज जैसी दिखती थी। इसलिए
- 5:34:51स्थानीय लोगों ने इसे जहाज कोठी कहना शुरू
- 5:34:54कर दिया। आज यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय
- 5:34:57संग्रहालय भी है।
- 5:34:58और विरासत को सहेजने का एक और अद्भुत
- 5:35:00उदाहरण रेवाड़ी स्टीम लोको शेड है। विजुअल
- 5:35:03में जो पुरानी भाप की ट्रेन या स्टीम इंजन
- 5:35:05आप देख रहे हैं वो हमारी स्मृतियों का
- 5:35:07हिस्सा है। उसे यहीं संरक्षित किया गया
- 5:35:09है।
- 5:35:10हां, जब भारत में भाप के इंजनों का युग
- 5:35:13समाप्त हुआ, तब रेलवे के उस गौरवशाली
- 5:35:15इतिहास और उसकी धड़कन को जीवित रखने के
- 5:35:18लिए इस लोको शेड को एक हेरिटेज म्यूजियम
- 5:35:21का रूप दिया गया। अब यहां एक बहुत ही
- 5:35:23गंभीर एग्जाम ट्रैप मौजूद है जिस पर
- 5:35:25छात्रों को ध्यान देना अनिवार्य है। सैन्य
- 5:35:28इतिहास से जुड़े दो अलग-अलग मेमोरियल
- 5:35:30अक्सर भ्रम पैदा करते हैं।
- 5:35:31जी अंबाला का वॉर हीरोज़ मेमोरियल और
- 5:35:34रेवाड़ी का रेजांगला वॉर मेमोरियल।
- 5:35:37बिल्कुल। रेजांगला का सीधा संबंध 1962 के
- 5:35:40भारत चीन युद्ध में अहीरवाल क्षेत्र के
- 5:35:42सैनिकों के उस अदम्य साहस से है जिसकी
- 5:35:45मिसाल दुनिया भर में दी जाती है और यह
- 5:35:47रेवाड़ी में स्थित है। इन दोनों स्मारकों
- 5:35:49के भौगोलिक और ऐतिहासिक संदर्भों को आपको
- 5:35:52अलग-अलग याद रखना चाहिए। स्मारकों से
- 5:35:54निकलकर अब समाज की उस जीवंत परंपरा की ओर
- 5:35:57चलते हैं जो ऋतुओं और बंधनों के त्यौहारों
- 5:36:00से बनती है। विजुअल में जो सजे हुए झूले
- 5:36:03दिख रहे हैं। सावन के महीने में पेड़ों पर
- 5:36:05डाले गए यह झूले केवल मनोरंजन का साधन
- 5:36:08नहीं है।
- 5:36:09सही कहा बल्कि यह मानसून के आगमन और
- 5:36:11चिलचिलाती गर्मी से मिली राहत के स्वागत
- 5:36:13का एक सांस्कृतिक प्रतीक हैं। तीज का
- 5:36:16त्यौहार इसी मानसून के उल्लास का चरम है।
- 5:36:18जी। इस अवसर पर एक विशेष सामाजिक परंपरा
- 5:36:21निभाई जाती है। जहां लड़कियों को उनके
- 5:36:24माता-पिता द्वारा कोथली नामक उपहार भेजा
- 5:36:27जाता है। इसके अलावा रक्षाबंधन जिसे
- 5:36:30हरियाणा के कुछ हिस्सों में सलोनी भी कहा
- 5:36:33जाता है। श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाने
- 5:36:35वाला एक और प्रमुख त्यौहार है।
- 5:36:38और एक और अत्यंत वैज्ञानिक और पारंपरिक
- 5:36:41त्यौहार है सीली सातें या जिसे बांसोड़ा
- 5:36:44भी कहते हैं। बांसोड़ा में शीतला माता की
- 5:36:47पूजा होती है और बासी भोजन मुख्य रूप से
- 5:36:50बासी चावल ग्रहण किया जाता है।
- 5:36:53इसके पीछे का जो वैज्ञानिक आधार है वो यह
- 5:36:56माना जाता है कि यह त्यौहार ऋतु परिवर्तन
- 5:36:59के समय आता है जब तापमान बदलने के कारण
- 5:37:02भोजन के खराब होने और बीमारियों के फैलने
- 5:37:05का खतरा सबसे अधिक होता है।
- 5:37:07बिल्कुल और इस सांस्कृतिक अध्ययन में एक
- 5:37:10की फैक्ट को स्पष्ट करना जरूरी है। हमने
- 5:37:13कोथली का जिक्र किया जो माता-पिता अपनी
- 5:37:16बेटी को देते हैं। लेकिन तीथ से ठीक पहले
- 5:37:18ससुराल वालों द्वारा बहू को जो विशेष
- 5:37:21उपहार भेजा जाता है उसे सिंधारा कहते हैं।
- 5:37:24बहुत महत्वपूर्ण अंतर है यह। मुख्य
- 5:37:26परीक्षा में जब आप हरियाणवी समाज में
- 5:37:28महिलाओं की स्थिति और पारिवारिक संबंधों
- 5:37:31पर उत्तर लिखते हैं तो ऐसे सूक्ष्म
- 5:37:33सांस्कृतिक विवरण आपके उत्तर को एक अलग
- 5:37:36गहराई प्रदान करते हैं।
- 5:37:38अब ऋतुओं के इन त्योहारों के बाद धार्मिक
- 5:37:40और कृषि त्यौहारों का चक्कर आता है। चैत्र
- 5:37:43माह में गणगौर का आयोजन होता है जिसमें
- 5:37:45देवी गौरी यानी पार्वती माता और भगवान शिव
- 5:37:48की उपासना की जाती है।
- 5:37:50हां, यह मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं का
- 5:37:53त्यौहार है। वहीं भाद्रपद महीने के कृष्ण
- 5:37:56पक्ष के नौवें दिन गुगा नवमी मनाई जाती
- 5:37:59है। गुगा पीर को सांपों का रक्षक देवता
- 5:38:02माना जाता है। और कृषि प्रधान समाज में
- 5:38:05जहां किसान का अधिकतर समय खेतों में बीतता
- 5:38:07है, वहां सांपों और प्रकृति के अन्य जीवों
- 5:38:10के साथ सह अस्तित्व का यह एक बेहतरीन
- 5:38:12उदाहरण है।
- 5:38:13जब कृषि की बात हो तो 13 अप्रैल को मनाए
- 5:38:17जाने वाले बैसाखी को कैसे भुलाया जा सकता
- 5:38:19है। यह त्यौहार उत्तर भारत में रबी की फसल
- 5:38:23पकने और कटाई शुरू होने का संकेत है। और
- 5:38:26इसके साथ ही 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी
- 5:38:30द्वारा खालसा पंथ की स्थापना का ऐतिहासिक
- 5:38:32संदर्भ भी इसी दिन से जुड़ा है। इसके
- 5:38:35अतिरिक्त भाद्रपद माह की कृष्ण अष्टमी को
- 5:38:38जन्माष्टमी मनाई जाती है। जिसे हरियाणा के
- 5:38:41ठेट ग्रामीण अंचल में जांटी के नाम से भी
- 5:38:43पुकारा जाता है।
- 5:38:44रैंकर्स फोकस हियर। स्लाइड के नीचे दिए गए
- 5:38:48इस फ्लो चार्ट के कालक्रम को यूपीएससी
- 5:38:51प्रीलिम्स के नजरिए से समझना बहुत जरूरी
- 5:38:54है। इन त्योहारों को याद रखने के लिए
- 5:38:56क्रोनोलॉजी का एक स्पष्ट तार्किक प्रवाह
- 5:38:59दिमाग में होना चाहिए। बिल्कुल वर्ष की
- 5:39:01शुरुआत होली के रंगों से होती है। उसके
- 5:39:03बाद चैत्र माह में गणगौर आता है। फिर
- 5:39:06अप्रैल में बैसाखी की फसल कटती है। इसके
- 5:39:08बाद सावन की फवारों के साथ तीज मनाई जाती
- 5:39:10है और अंत में भाद्रपद माह में गुगगा नवमी
- 5:39:14का आयोजन होता है। यह अनुक्रम अक्सर मिलान
- 5:39:17करने वाले प्रश्नों में पूछा जाता है।
- 5:39:18त्योहारों के इसी सामाजिक एकत्रीकरण का एक
- 5:39:22बड़ा रूप हमें मेलों में देखने को मिलता
- 5:39:24है। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और सांस्कृतिक
- 5:39:26मेलों की श्रेणी में फरीदाबाद का सूरजकुंड
- 5:39:30शिल्प मेला सबसे अग्रणी है।
- 5:39:32जी हर साल फरवरी में आयोजित होने वाला यह
- 5:39:35मेला पूरे भारत और भागीदार देशों के
- 5:39:37हस्तशिल्प, हतकरगा और सांस्कृतिक विरासत
- 5:39:40का एक महाकुंभ है।
- 5:39:42इसके अलावा भल्लमगढ़ के नहार सिंह पैलेस
- 5:39:45में नवंबर के महीने में कार्तिक
- 5:39:48सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किया जाता है। इस
- 5:39:51उत्सव का मुख्य उद्देश्य विलुप्त हो रही
- 5:39:53मार्शल आर्ट विधाओं और लोक कलाओं को एक
- 5:39:57मंच प्रदान करना है।
- 5:39:58और गुरुग्राम का मसानी मेला शीतला माता के
- 5:40:01सम्मान में लगता है। जिनके बारे में
- 5:40:03ऐतिहासिक मान्यता है कि वे चेचक जैसी
- 5:40:06बीमारियों से रक्षा करती हैं।
- 5:40:07सूरजकुण मेले के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण
- 5:40:10एग्जाम अलर्ट है कि इस मेले की शुरुआत
- 5:40:131987 में हुई थी और तब से यह प्रतिवर्ष
- 5:40:16आयोजित किया जा रहा है। इसका स्थापना वर्ष
- 5:40:19स्टेटमेंट्स में अक्सर भ्रमित करने के लिए
- 5:40:21दिया जाता है।
- 5:40:22एज वी टीच एट दिशांत आईएस इस तरह के
- 5:40:25सांस्कृतिक आयोजनों का अध्ययन केवल
- 5:40:27प्रीलिम्स के लिए तथ्य रटना नहीं है।
- 5:40:29मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से यह समझना
- 5:40:32आवश्यक है कि कैसे यह मेले भारत के
- 5:40:34विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक एकीकरण
- 5:40:37को मजबूत करते हैं।
- 5:40:38बिल्कुल। एक प्रशासक के रूप में आपको समाज
- 5:40:41को जोड़ने वाले इन धागों की पहचान होनी
- 5:40:44चाहिए। और कैंडिडेट्स की इस निरंतर मेहनत
- 5:40:46और मेलों के इस विस्तृत परिदृश्य को
- 5:40:48जोड़ती हुई एक बात सूरजकुंड के रंगों सा
- 5:40:51यह सिलेबस भी है बहुत गहरा। हर फैक्ट पर
- 5:40:54लगाना पड़ता है बारीकी का कड़ा पहरा।
- 5:40:56मेहनत के इस मेले में जो खुद को तपाएगा
- 5:40:59वही एस्पिरेंट का लाल बहादुर शास्त्री
- 5:41:01एकेडमी जाएगा।
- 5:41:02बहुत ही उम्दा। इस संकल्प के साथ अब
- 5:41:04हरियाणा के भौगोलिक नक्शे के जरिए जिलेवार
- 5:41:07महत्वपूर्ण मेलों का विश्लेषण करते हैं।
- 5:41:10विजुअल में दिख रहे हरियाणा के मैप और
- 5:41:12लोकेशन पिंस को देखिए। जब हम मानचित्र पर
- 5:41:15स्थानों को चिन्हित करके अध्ययन करते हैं
- 5:41:17तो वे लंबे समय तक स्मृति में बने रहते
- 5:41:19हैं।
- 5:41:20सही कहा। कैथल जिले में फरल गांव है जहां
- 5:41:23फलगू मेले का एक बड़ा आयोजन होता है और
- 5:41:25इसी जिले में पुंडरक मेला भी अपनी विशिष्ट
- 5:41:28पहचान रखता है।
- 5:41:29यमुनानगर जिले की बात करें तो वहां
- 5:41:31कार्तिक माह में कपाल मोचन या जिसे गोपाल
- 5:41:35मोचन भी कहा जाता है। उस ऐतिहासिक मेले
- 5:41:38में लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुड़ते
- 5:41:40हैं।
- 5:41:40महेंद्रगढ़ जिले का ढोसी मेला अत्यंत
- 5:41:43प्राचीन और पौराणिक पृष्ठभूमि वाला है।
- 5:41:45इसका संबंध चवन ऋषि और बाबा बिलाईनाथ से
- 5:41:48है। यह वही तपोभूमि है जिसे आयुर्वेद के
- 5:41:52प्रसिद्ध चवनप्राश की उत्पत्ति से जोड़ा
- 5:41:54जाता है।
- 5:41:55और वहीं रोहतक में फरवरी मार्च के दौरान
- 5:41:58बाबा मस्तनाथ मेला लगता है जो नाथ
- 5:42:01संप्रदाय की सुदीर्घ परंपरा और उनके
- 5:42:03आध्यात्मिक प्रभाव को दर्शाता है।
- 5:42:05मेलों की इस हलचल से निकलकर जब हम हरियाणा
- 5:42:08के लोक संगीत की तरफ मुड़ते हैं तो हमें
- 5:42:10एक बहुत ही स्पष्ट, जोरदार और मिट्टी की
- 5:42:14सुगंध से भरा हुआ स्वर सुनाई देता है। जी,
- 5:42:16हरियाणवी संगीत की विशेषता यही है कि
- 5:42:19इसमें कोई कृत्रिमता नहीं है। यह सीधा है।
- 5:42:22इसमें एक प्रकार का देहातीपन और खुलापन है
- 5:42:25जो यहां के लोगों के स्वभाव से मेल खाता
- 5:42:27है। इसे मोटे तौर पर हम दो श्रेणियों में
- 5:42:30रख सकते हैं। संस्कार गीत और मौसमी गीत।
- 5:42:32विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कारों पर गाए
- 5:42:35जाने वाले गीतों को बनड़ा बनड़ी कहा जाता
- 5:42:38है। जब परिवार में बच्चे का जन्म होता है
- 5:42:41तो उस खुशी को व्यक्त करने के लिए जच्चा
- 5:42:44या पीलिया गीत गाए जाते हैं। ऋतुओं के
- 5:42:46आधार पर देखें तो फाल्गुन के महीने में
- 5:42:49फागग और वर्षा ऋतु के दौरान सावन के गीतों
- 5:42:52की गूंज हर गांव में सुनाई देती है। इसके
- 5:42:56अलावा मंगलवार को गाए जाने वाले विशेष
- 5:42:59जकड़ी गीतों का उल्लेख करना भी बहुत जरूरी
- 5:43:01है जो आमतौर पर महिलाओं द्वारा गाए जाते
- 5:43:04हैं।
- 5:43:04रैंकर्स फोकस हियर यहां एस्पिरेंट्स को इस
- 5:43:07की फैक्ट पर ध्यान देना चाहिए कि हरियाणवी
- 5:43:10लोक संगीत कौरवी बोली से अत्यधिक प्रभावित
- 5:43:13है।
- 5:43:14बिल्कुल कौरवी जो प्राचीन कुरु जनपद के
- 5:43:17क्षेत्रों में बोली जाती थी। अपनी खड़ी और
- 5:43:20स्पष्ट ध्वनियों के लिए जानी जाती है। इसी
- 5:43:23बोली ने हरियाणवी संगीत को वो ताकत और
- 5:43:26लठमार मिठास दी है जो इसे अन्य राज्यों के
- 5:43:29संगीत से अलग घड़ी करती है।
- 5:43:31और जहां संगीत है वहां वाद्य यंत्रों की
- 5:43:34भूमिका सबसे अहम हो जाती है। फ्लो चार्ट
- 5:43:36को तीन हिस्सों में तोड़कर समझते हैं।
- 5:43:39वाद्य यंत्रों को उनकी बनावट और ध्वनि
- 5:43:41उत्पन्न करने के तरीके के आधार पर तीन
- 5:43:43वैज्ञानिक श्रेणियों में बांटा जाता है।
- 5:43:45पहला है तंतु या स्ट्रिंग वाद्य जिनमें
- 5:43:48ध्वनि तारों के कंपन से पैदा होती है।
- 5:43:51जैसे एक तारा और सारंगी। दूसरा है सुशीर
- 5:43:55या विंड वाद्य जिन्हें हवा या फूंक से
- 5:43:58बजाया जाता है। जैसे सपेरों की बीन,
- 5:44:01बांसुरी और शहनाई।
- 5:44:02और तीसरा है अवन या पकशन वाद्य। जिन पर
- 5:44:06आघात या थाप देकर लय पैदा की जाती है।
- 5:44:09विजुअल में दिख रहा ढोल, डेरू और नगाड़ा
- 5:44:12इसी अवनद श्रेणी में आते हैं।
- 5:44:14अब यहां अवनध वाद्य यंत्रों में एक बहुत
- 5:44:18बड़ा ट्रैप छिपा है जिसके प्रति मैं
- 5:44:20कैंडिडेट्स को आगाह करना चाहूंगी। डेरू को
- 5:44:23लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। हां अक्सर
- 5:44:26इसमें गलती होती है। डेरू डमरू का ही एक
- 5:44:29रूप है जिसे आम के पेड़ की लकड़ी या किसी
- 5:44:31अन्य मजबूत लकड़ी के खोल पर चमड़ा मड़कर
- 5:44:34बनाया जाता है।
- 5:44:35लेकिन मुख्य अंतर यह है कि डमरू को हाथ की
- 5:44:38कलाई घुमाकर बजाया जाता है। जबकि डेरू को
- 5:44:41बजाने के लिए विशेष डंडियों यानी स्टिक्स
- 5:44:44का प्रयोग होता है। परीक्षा में ऐसे ही
- 5:44:47तकनीकी अंतर कथन आधारित प्रश्नों का रूप
- 5:44:50ले लेते हैं। इन बारीकियों और वाद्य
- 5:44:52यंत्रों की इसी ताल पर यूपीएससी के
- 5:44:54अनुशासन को साधने की एक कोशिश। सारंगी के
- 5:44:58तारों से उलझी है यह पॉलिटी और इकॉनमी।
- 5:45:01बीन की धुन पर नाचे सवाल यह है कैसी
- 5:45:04विडंबना। डेरू की ताल सा जिस दिन तेरा
- 5:45:07कांसेप्ट बच जाएगा, प्रीलिम्स के
- 5:45:09चक्रव्यूह को तू आसानी से भेज जाएगा।
- 5:45:11क्या बात है? इस मजबूत कांसेप्ट के साथ अब
- 5:45:14लोक नृत्यों के वर्गीकरण को समझते हैं। हम
- 5:45:18देख सकते हैं कि हरियाणवी नृत्य यहां की
- 5:45:20कृषि जीवन शैली और सैन्य इतिहास को कैसे
- 5:45:23दर्शाते हैं।
- 5:45:24बिल्कुल हरियाणा के नृत्य कोई दरबार में
- 5:45:26विकसित हुई कला नहीं है बल्कि यह सीधे तौर
- 5:45:30पर यहां की कठोर कृषि जीवन शैली और
- 5:45:32ऐतिहासिक मार्शल परंपराओं की उपज हैं।
- 5:45:35खेतों में काम करने की शारीरिक ऊर्जा और
- 5:45:38युद्ध के मैदान का उत्साह दोनों इन
- 5:45:40नृत्यों में झलकते हैं। टो चार्ट के तीनों
- 5:45:42भागों का फारित्व अवलोकन करें तो इन्हें
- 5:45:44तीन स्पष्ट श्रेणियों में बांटा जा सकता
- 5:45:47है। महिलाओं द्वारा किए जाने वाले नृत्य
- 5:45:49जैसे लूर, खोरिया, घूमर, पुरुषों के नृत्य
- 5:45:53जैसे धमाल, डफ, गुगा, सांग और मिश्रित
- 5:45:58नृत्य जैसे फागग, रतवाई, मंजीरा जहां
- 5:46:01दोनों की भागीदारी होती है।
- 5:46:03महिलाओं के नृत्यों का गहराई से विश्लेषण
- 5:46:05करें तो इनका सामाजिक संदर्भ बहुत गहरा
- 5:46:08है। लूर नृत्य मुख्य रूप से होली के अवसर
- 5:46:11पर बांगर क्षेत्र में किया जाता है।
- 5:46:12जी यह नृत्य एक प्रश्न उत्तर प्रारूप में
- 5:46:16होता है जो इसे एक वैचारिक स्वरूप देता
- 5:46:18है। इसमें पुरुषों की उपस्थिति पूरी तरह
- 5:46:21से वर्जित होती है।
- 5:46:22दूसरा महत्वपूर्ण नृत्य है खुरिया। यह उस
- 5:46:25समय किया जाता है जब विवाह के दौरान
- 5:46:27दूल्हे की बारात घर से विदा हो जाती है और
- 5:46:29पीछे से घर की महिलाएं स्वांग रचती हैं और
- 5:46:32यह नृत्य करती हैं।
- 5:46:33अघूमन नृत्य की बात करें तो यह राजस्थान
- 5:46:36की सीमा से सटे इलाकों में अधिक लोकप्रिय
- 5:46:38है। जहां महिलाएं घेरा बनाकर पारंपरिक
- 5:46:41आभूषणों और वेशभूषा में नृत्य करती हैं।
- 5:46:44विजुअल में जो पारंपरिक आभूषण दिख रहे
- 5:46:46हैं, वह इसी का हिस्सा हैं।
- 5:46:48यहां एक एग्जाम अलर्ट है जिसे याद रखना
- 5:46:50जरूरी है। बांगर बोली में लूर शब्द का
- 5:46:52शाब्दिक अर्थ ही लड़की होता है।
- 5:46:55एक्जेक्टली इस शब्द की उत्पत्ति ही स्पष्ट
- 5:46:57कर देती है कि नृत्य केवल महिलाओं के लिए
- 5:46:59क्यों आरक्षित है।
- 5:47:00अब पुरुषों के नृत्यों की तरफ चलें तो
- 5:47:02इसमें सबसे प्राचीन और ऊर्जावान रूप धमाल
- 5:47:04का है।
- 5:47:05महेंद्रगढ़ और झज्जर के क्षेत्रों में ही
- 5:47:07अत्यधिक लोकप्रिय है।
- 5:47:08और ऐतिहासिक रूप से माना जाता है कि इसकी
- 5:47:10जड़े महाभारत काल से जुड़ी हुई हैं। यह
- 5:47:12नृत्य योद्धाओं के उल्लास का प्रतीक है।
- 5:47:14वसंत ऋतु में जब फसल पक कर कटने को तैयार
- 5:47:17होती है, तब किसानों द्वारा डफ नृत्य किया
- 5:47:20जाता है। विजुअल में दिख रहे डफ वाद्य
- 5:47:22यंत्र का इसमें प्रमुखता से प्रयोग होता
- 5:47:24है। एक और अत्यंत आध्यात्मिक और
- 5:47:27मनोवैज्ञानिक रूप से भिन्न नृत्य है गुगा
- 5:47:30नृत्य। इसमें गुगा पीर के भक्त जिन्हें
- 5:47:33भगत कहा जाता है। धार्मिक आवेश में आकर
- 5:47:37लोहे की जंजीरों या छड़ी से स्वयं को
- 5:47:40पीटते हुए यह नृत्य करते हैं। यह आस्था की
- 5:47:43उस चरम अवस्था को दर्शाता है जहां शारीरिक
- 5:47:46कष्ट महसूस नहीं होता।
- 5:47:48धमान नृत्य के बारे में यह की फैक्ट
- 5:47:51जोड़ना भी जरूरी है कि यह आमतौर पर चांदनी
- 5:47:54रातों में खुले मैदानों में किया जाता है।
- 5:47:56यह प्रकृति और खुलेपन के साथ हरियाणवी
- 5:47:58जनमानस के जुड़ाव को दिखाता है। अंडर द
- 5:48:00गाइडेंस ऑफ़ राहुल प्रकाश सर एंड द टीम। हम
- 5:48:03हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि कला को
- 5:48:06समाजशास्त्र से जोड़कर पढ़ें। खुले
- 5:48:09मैदानों में चांदनी रात के नीचे किया जाने
- 5:48:11वाला नृत्य या फसल कटाई पर बजने वाला डफ
- 5:48:15यह सब एक कृषि प्रधान राज्य की आर्थिक और
- 5:48:18सामाजिक खुशहाली के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
- 5:48:20बिल्कुल सही। इसी सामाजिक विस्तार में
- 5:48:23मेवात क्षेत्र के नृत्यों और मिश्रित
- 5:48:26रूपों को भी शामिल करना आवश्यक है। नूह और
- 5:48:30फिरोजपुर झिरका के क्षेत्रों में रतवाई
- 5:48:32नृत्य बहुत प्रचलित है जिसे विशेष रूप से
- 5:48:35वर्षा ऋतु के आगमन पर किया जाता है।
- 5:48:38मंजीरा नृत्य में पीतल के बड़े मंजीरों को
- 5:48:41नगाड़ों की भारी थाप के साथ बजाया जाता
- 5:48:44है। विजुअल में आप इस पीतल के मंजीरे को
- 5:48:46देख सकते हैं। यह पुरुष महिला दोनों का
- 5:48:49मिश्रित नृत्य है।
- 5:48:51इसी प्रकार फाल्गुन माह में किया जाने
- 5:48:53वाला फागग नृत्य भी पुरुषों और महिलाओं
- 5:48:56दोनों के द्वारा उल्लास पूर्वक किया जाता
- 5:48:58है।
- 5:48:59मुख्य परीक्षा की लंबी लेखन प्रक्रिया और
- 5:49:01सफलता व एकाग्रता पर एक हल्कीफुल्की शायरी
- 5:49:05हो जाए। मंजीरे की थाप पर जैसे सुर और ताल
- 5:49:08मिल जाते हैं। मेंस के उत्तर में जब तथ्य
- 5:49:12और विचार जुड़ जाते हैं। रतवाई सी बरसेगी
- 5:49:15सफलता। बस तू धैर्य बनाए रख। यही संघर्ष
- 5:49:19के पन्ने कल तेरा मुकद्दर सजाते हैं।
- 5:49:22बहुत खूब। इस धैर्य और वैचारिक स्पष्टता
- 5:49:25के साथ अब वास्तुकला और कुरुक्षेत्र के
- 5:49:28मंदिरों के ऐतिहासिक महत्व की ओर कदम
- 5:49:31बढ़ाते हैं। कुरुक्षेत्र केवल एक
- 5:49:33युद्धभूमि नहीं बल्कि आध्यात्मिक
- 5:49:35वास्तुकला का केंद्र भी है।
- 5:49:37जी। यहां का स्थानेश्वर महादेव मंदिर
- 5:49:40भगवान शिव को समर्पित है। ऐसी पौराणिक
- 5:49:43मान्यता है कि महाभारत के विनाशकारी युद्ध
- 5:49:46से पूर्व पांडवों ने विजय प्राप्ति के लिए
- 5:49:48इसी स्थान पर भगवान शिव की आराधना की थी
- 5:49:51और बाद में इस मंदिर का पुनर्निर्माण
- 5:49:53मराठा सेनापति सदाशिव राव भा द्वारा
- 5:49:56करवाया गया था जो हरियाणा पर मराठा प्रभाव
- 5:49:58को भी दर्शाता है।
- 5:49:59कुरुक्षेत्र में ही भद्रकाली या देवी कूप
- 5:50:02मंदिर स्थित है। जिसे पूरे भारत में फैले
- 5:50:0551 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
- 5:50:08तंत्र और शक्ति उपासना की परंपरा के
- 5:50:10अनुसार यहां देवी सती का दाहिना टखना गिरा
- 5:50:13था। और आधुनिक वास्तुकला की बात करें तो
- 5:50:161955 में जुगल किशोर बिरला जी द्वारा
- 5:50:19बनवाया गया बिरला मंदिर अपनी भव्यता के
- 5:50:22लिए जाना जाता है। विजुअन में सफेद मंदिर
- 5:50:24के शिखर का जो संदर्भ है वो यही है।
- 5:50:26इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि
- 5:50:29इसकी दीवारों पर भगवत गीता के श्लोक पूरी
- 5:50:33तरह से उकेरे गए हैं।
- 5:50:34स्थानेश्वर मंदिर के संदर्भ में एक अत्यंत
- 5:50:37महत्वपूर्ण एग्जाम अलर्ट है जो लोक
- 5:50:39मान्यताओं से जुड़ा है। यह ऐतिहासिक और
- 5:50:42सामाजिक विश्वास है कि मंदिर से जुड़े
- 5:50:45स्थानेश्वर टैंक के पानी से स्नान करने पर
- 5:50:47कुष्ठ रोग यानी लेप्रोसी के इलाज की
- 5:50:50मान्यता है। यह तथ्य कला और संस्कृति के
- 5:50:53साथ-साथ राज्य की सामाजिक मान्यताओं के
- 5:50:55अंतर्गत सीधे पूछा जा सकता है।
- 5:50:57राज्य के महत्वपूर्ण मंदिरों की बात करें
- 5:51:00तो गुरुग्राम का शीतला माता मंदिर
- 5:51:03राजस्थानी स्थापत्य कला से प्रभावित है।
- 5:51:06यह मंदिर गुरु द्रोणाचार्य की पत्नी कृपि
- 5:51:09से संबंधित है। जिन्हें ही शीतला माता के
- 5:51:12रूप में पूजा जाता है।
- 5:51:13पंचकूला के मनीमाजरा क्षेत्र में मनसा
- 5:51:16देवी मंदिर स्थापित है। भिवानी में
- 5:51:18भिवेश्वर मंदिर एक अत्यंत प्राचीन गौरी
- 5:51:21शंकर मंदिर है। भिवानी शहर में ऐसे अनेक
- 5:51:24मंदिरों की उपस्थिति के कारण ही इसे
- 5:51:26हरियाणा की छोटी काशी कहा जाता है।
- 5:51:28इसके अतिरिक्त हिसार जिले में स्थित
- 5:51:30अग्रोहा धाम महाराजा अग्रसेन के आदर्शों
- 5:51:34और महालक्ष्मी की उपासना का एक भव्य
- 5:51:37केंद्र है। विजुअल में जलते हुए दिए का
- 5:51:41अर्थ इसी शांति और ज्ञान से जुड़ता है।
- 5:51:44पूरे सिलेबस को अलग-अलग पढ़ने के बाद अब
- 5:51:46समय है एक 360° विश्लेषण का जहां हम इन
- 5:51:49सभी कड़ियों का सांस्कृतिक संश्लेषण करते
- 5:51:51हैं।
- 5:51:52बिल्कुल स्क्रीन पर दिख रहे इस जिगसो पज़ल
- 5:51:55के विजुअल को समझते हुए अगर हम देखें तो
- 5:51:58कला और संस्कृति किसी जिगसो पज़ल की तरह
- 5:52:01ही है। हरियाणा की यह तस्वीर कुरुक्षेत्र
- 5:52:04जैसी वैदिक जड़ों और हरित क्रांति व लोक
- 5:52:08नृत्यों के कृषि जोश के अद्भुत मिश्रण से
- 5:52:11बनती है।
- 5:52:11इस पजल को तर्क से हल करते हैं। महाभारत
- 5:52:14का स्थानेश्वर मंदिर से जुड़ाव और धमाल
- 5:52:16नृत्य की उत्पत्ति दोनों का सिरा एक है।
- 5:52:19ऋतुओं का चक्र कैसे संस्कृति को चलाता है।
- 5:52:22सावन आता है तो मानसून का स्वागत तीज से
- 5:52:24होता है। ती जाती है तो कोथली की परंपरा
- 5:52:27निभाई जाती है और इसी प्राकृतिक उल्लास
- 5:52:29में सावन के लोक लोकगीत गाए जाते हैं।
- 5:52:31सब एक ही व्यवस्था के अलग-अलग रूप है।
- 5:52:34यहां उम्मीदवारों को एक बहुत बड़े ट्रैप
- 5:52:37से सतर्क रहने की चेतावनी दूंगी। सांझी को
- 5:52:41लेकर यह भ्रांति होती है कि यह केवल एक
- 5:52:44त्यौहार है।
- 5:52:45हां, यह बहुत कॉमन गलती है। सांझी मुख्य
- 5:52:49रूप से मिट्टी और गोबर से दीवार पर बनाई
- 5:52:51जाने वाली एक लोक कला है। जिसे नवरात्रों
- 5:52:54के दौरान पूजा जाता है। इसे केवल त्यौहार
- 5:52:56समझने की भूल ना करें।
- 5:52:58ज्ञान की इसी संश्लेषण और टुकड़ों को
- 5:53:01जोड़ने की कला पर एक मेंटा स्टाइल शायरी।
- 5:53:04अलग-अलग फैक्ट्स की यह कैसी अजब पहेली है।
- 5:53:08महाभारत से लेकर आठ तक यह नॉलेज की हवेली
- 5:53:12है। जिगो पजल सा है यूपीएससी। इसे लॉजिक
- 5:53:16से सुलझाना है। हर एक ट्रैप से बचकर हमें
- 5:53:20बस सही विकल्प तक जाना है।
- 5:53:22चलिए इसी लॉजिक और विकल्पों तक पहुंचने की
- 5:53:25कला का परीक्षण करते हैं। प्रारंभिक
- 5:53:27परीक्षा अभ्यास प्रश्न एक को देखते हैं।
- 5:53:29संग्रहालयों से संबंधित तीन कथन दिए गए
- 5:53:31हैं।
- 5:53:32श्री कृष्ण संग्रहालय कुरुक्षेत्र में है
- 5:53:34और सबसे बड़ा है।
- 5:53:35वार हीरोज़ मेमोरियल रेवाड़ी में है।
- 5:53:38गुलजारी लाल नंदा राज्य का पहला व्यक्तिगत
- 5:53:40संग्रहालय है।
- 5:53:41एस्पिरेंट्स एलिमिनेशन लॉजिक लागू करें।
- 5:53:44याद करें हमने चर्चा के दौरान वॉर हीरोज़
- 5:53:47मेमोरियल और रेजांगला वॉर मेमोरियल के बीच
- 5:53:50के ट्रैप को कैसे स्पष्ट किया था। अंबाला
- 5:53:52और रेवाड़ी के संदर्भ में कौन सा स्मारक
- 5:53:54कहां था? मैं सही विकल्प नहीं बताऊंगी। आप
- 5:53:57स्वयं उत्तर तक पहुंचे।
- 5:53:59बिल्कुल। छात्रों को खुद सोचना चाहिए। अब
- 5:54:02प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न दो पर
- 5:54:04आते हैं जो संस्कृति से जुड़ा है।
- 5:54:07होली के दौरान लूर नृत्य पुरुष और महिला
- 5:54:10दोनों करते हैं।
- 5:54:10धमाल नृत्य की जड़े महाभारत काल में है।
- 5:54:13सूरजकुंड शिल्प मेला प्रतिवर्ष फरवरी में
- 5:54:16होता है।
- 5:54:16यहां भी एलिमिनेशन की रणनीति का इस्तेमाल
- 5:54:19करें। लूर शब्द के उस शाब्दिक अर्थ को याद
- 5:54:23करें जो हमने बांगर बोली के संदर्भ में
- 5:54:26बताया था। उसमें पुरुषों के वर्जित होने
- 5:54:28का नियम याद करें। यहां भी हम सही विकल्प
- 5:54:31बिल्कुल नहीं बताएंगे।
- 5:54:32एस वी टीच एट दिशा आईएस एमसीक्यू सॉल्विंग
- 5:54:35अप्रोच यही होती है। आपको यह देखना होता
- 5:54:37है कि कौन सा स्टेटमेंट स्पष्ट रूप से गलत
- 5:54:40है।
- 5:54:40आज के इस विस्तृत विश्लेषण के बाद हम अपनी
- 5:54:44चर्चा के अंतिम पड़ाव पर हैं। देशा में
- 5:54:47देश हरियाणा विषय पर आते हुए इस सुनहरे
- 5:54:50नक्शे को देखें। हरियाणा का यह भौगोलिक और
- 5:54:53सांस्कृतिक विस्तार आज के इस पूरे विमर्श
- 5:54:56में झलकता है।
- 5:54:57और प्रसिद्ध पंक्ति कैसे भूल सकते हैं? जो
- 5:55:00दूध दही का खाना वो है मेरा हरियाणा। आज
- 5:55:03के सत्र में एस्पिरेंट्स के लिए एक क्विक
- 5:55:05रिककैप दें। तो हमने पानीपत और राखीगढ़ी
- 5:55:08संग्रहालयों, बांसोड़ा और तीज जैसे
- 5:55:11त्योहारों, सूरजकुंड मेलों, कौरवी बोली के
- 5:55:15लोकगीत, डेरू वाद्य यंत्र की बारीकियों और
- 5:55:18लूर व धमाल नृत्यों का समग्र अध्ययन किया।
- 5:55:21एस्पिरेंट्स मुख्य परीक्षा के लिए एक
- 5:55:23विचारणीय बिंदु अपने जेहन में बैठा लें।
- 5:55:25एक भावी प्रशासक के रूप में इन तथ्यों को
- 5:55:28जानना ही पर्याप्त नहीं है। इस बहुमूल्य
- 5:55:31सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना आपका
- 5:55:33दायित्व है।
- 5:55:35प्रिजर्विंग दिस हेरिटेज इज आवर ड्यूटी।
- 5:55:37दिस लेक्चर वास बाय निशांत आईएएस। आज के
- 5:55:41इस विस्तृत और बेहद महत्वपूर्ण विश्लेषण
- 5:55:44में सीधे प्रवेश करते हैं। आज का हमारा
- 5:55:47विषय है हरियाणा, कला, संस्कृति और
- 5:55:50पर्यटन। आमतौर पर जब हम हरियाणा के बारे
- 5:55:53में सोचते हैं तो हमारे दिमाग में सीधा
- 5:55:56खेती या फिर पानीपत के युद्ध आते हैं।
- 5:55:58बिल्कुल। और यहीं पर एक बहुत बड़ी चूक हो
- 5:56:01जाती है। एस्पिरेंट्स को समझना होगा कि यह
- 5:56:03राज्य सिर्फ कृषि या युद्धों का मैदान
- 5:56:06नहीं है। इसका जो सांस्कृतिक मानचित्र है
- 5:56:08वो बहुत गहरा है। यूपीएससी और एचपीएससी की
- 5:56:11दृष्टि से यह मेंस वैल्यू एडिशन और
- 5:56:13प्रीलिम्स अलर्ट का एक खजाना है।
- 5:56:16हम और यह केवल तथ्यों को रटने का विषय
- 5:56:18नहीं है।
- 5:56:19एकदम नहीं। यह उस कालखंड की वास्तुकला और
- 5:56:22धार्मिक सहिष्णता को समझने का विषय है।
- 5:56:24तो अगर हम इसके सांस्कृतिक मानचित्र पर
- 5:56:26नजर डालें तो अ मुख्य रूप से चार भौगोलिक
- 5:56:30और सांस्कृतिक केंद्र उभर कर आते हैं।
- 5:56:33कुरुक्षेत्र, हिसार, गुरुग्राम और पानीपत।
- 5:56:37सही कहा और इन केंद्रों को हम चार मुख्य
- 5:56:40स्तंभों में बांट सकते हैं। पहला है
- 5:56:42धार्मिक स्थल जिसमें मंदिर, गुरुद्वारे,
- 5:56:45मस्जिद आते हैं। दूसरा वास्तुकला जैसे
- 5:56:48किले, मकबरे, हवेलियां। तीसरा तीर्थ स्थल,
- 5:56:52जैसे सरोवर या 48 कोस की परिक्रमा। और
- 5:56:55चौथा है आधुनिक पर्यटन। मतलब ये चार
- 5:56:57पिलर्स हैं।
- 5:56:58बिल्कुल। सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क दिस
- 5:57:01क्योंकि आगे का पूरा विश्लेषण इन्हीं चार
- 5:57:03स्तंभों पर आधारित होगा।
- 5:57:05तो चलिए सबसे पहले धार्मिक स्थलों से शुरू
- 5:57:07करते हैं। प्रमुख मंदिरों की बात करें तो
- 5:57:11गुरुग्राम का शीतला माता मंदिर दस्तावेजों
- 5:57:14में बहुत प्रसिद्ध है। यह द्रोणाचार्य की
- 5:57:17पत्नी कृपि को समर्पित है और
- 5:57:21इन्हें चेचक यानी स्मॉल पॉक्स की देवी के
- 5:57:24रूप में भी पूजा जाता है।
- 5:57:25हां। और इसके बाद जींद के भूतेश्वर मंदिर
- 5:57:28का जिक्र आता है जिसे रघुवीर सिंह ने
- 5:57:30बनवाया था और यह भगवान शिव को समर्पित है।
- 5:57:33लेकिन अगर हम सीधे तौर पर महाभारत की बात
- 5:57:36करें तो थानेसर का थानेश्वर महादेव मंदिर
- 5:57:40बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसा माना
- 5:57:42जाता है कि यह सीधे तौर पर पांडवों की जीत
- 5:57:45के आशीर्वाद से जुड़ा हुआ है।
- 5:57:47हम युद्ध से ठीक पहले की गई शिव आराधना का
- 5:57:50यह प्रतीक है।
- 5:57:51बिल्कुल और इसी सफर पे एक छोटी सी बात याद
- 5:57:54आ रही है। किताबों के पन्नों में उलझा है
- 5:57:56ख्वाबों का सफर। यूपीएससी का रास्ता है
- 5:57:59आसान नहीं है डगर। पर आर्ट एंड कल्चर का
- 5:58:02यह यान बनाएगा तुम्हें एक दिन असली अवसर।
- 5:58:05क्या बात है बहुत खूब। यह सच में एक लंबी
- 5:58:09डगर है और सही मार्गदर्शन बहुत जरूरी है।
- 5:58:11अब कुरुक्षेत्र के मंदिरों की बात करते
- 5:58:13हैं जिनमें एक अलग ही रहस्य और दिव्यता
- 5:58:16है।
- 5:58:16हां, बिरला मंदिर का जिक्र बहुत दिलचस्प
- 5:58:19है। इसकी दीवारों पर भगवत गीता के पूरे
- 5:58:21श्लोक उकेरे गए हैं और भद्रकारी मंदिर
- 5:58:24भारत के 51 शक्ति पीठों में से एक प्रमुख
- 5:58:27पीठ है।
- 5:58:28और लक्ष्मीारायण मंदिर का निर्माण गिरी
- 5:58:30संप्रदाय द्वारा किया गया था। हम्।
- 5:58:32अब यहां पर ना एक बहुत बड़ा एग्जाम ट्रैप
- 5:58:34है। रैंकर्स फोकस हियर। अक्सर छात्र
- 5:58:37स्थानेश्वर जो कि थानेस्वर का मंदिर है,
- 5:58:39उसे सर्वेश्वर के साथ भ्रमित कर देते हैं
- 5:58:41जो कि ब्रह्मसरोवर है।
- 5:58:43शब्दों के इस जाल में बिल्कुल नहीं फंसना
- 5:58:45है।
- 5:58:45दोनों के संदर्भ एकदम अलग है।
- 5:58:46एकदम सही। कुछ अद्वितीय मंदिर भी हैं जो
- 5:58:49सीधे इतिहास से जुड़े हैं। जैसे कैथल का
- 5:58:5311 रुद्री शिव मंदिर। वो स्थान है जहां
- 5:58:56युधिष्ठिर ने नवग्रह कुंड की स्थापना की
- 5:58:59और पानीपत का देवी कालाब शिव मंदिर पानीपत
- 5:59:02की तीसरी लड़ाई के बाद मराठा सरदार मंगल
- 5:59:05रघुनाथ द्वारा बनवाया गया था। रेवाड़ी का
- 5:59:08घंटेश्वर मंदिर सनातन धर्म के देवताओं की
- 5:59:11मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।
- 5:59:12एज वी टीच दिशांत आईएएस अंडर द गाइडेंस ऑफ
- 5:59:15राहुल प्रकाश सर एंड देयर टीम इतिहास और
- 5:59:18संस्कृति का जो यह अंतर संबंध है ना यह
- 5:59:20यूपीएससी का सबसे पसंदीदा क्षेत्र है।
- 5:59:23बिल्कुल। चलिए अब एक यूपीएससी स्तर का
- 5:59:26अभ्यास प्रश्न देखते हैं। एस्पिरेंट्स
- 5:59:28ध्यान दें। प्रश्न हरियाणा के मंदिरों के
- 5:59:31संबंध में तीन कथनों पर विचार करने को
- 5:59:33कहता है। कथन एक भूतेश्वर मंदिर गुरुग्राम
- 5:59:36में स्थित है। कथन दो बिरला मंदिर की
- 5:59:39दीवारों पर भगवत गीता के श्लोक हैं और कथन
- 5:59:42तीन देवी तालाब मंदिर पानीपत की तीसरी
- 5:59:45लड़ाई की जीत के उपलक्ष में बना था।
- 5:59:47अब यहां एलिमिनेशन लॉजिक का प्रयोग कैसे
- 5:59:49करें? अगर एस्पिरेंट्स को याद हो कि
- 5:59:52भूतेश्वर मंदिर जींद में है तो पहला कथन
- 5:59:55तो वैसे ही गलत हो जाता है।
- 5:59:57हम
- 5:59:57और देवी तालाब मंदिर का निर्माण तो हुआ था
- 6:00:00लेकिन क्या वो जीत के उपलक्ष में था?
- 6:00:01मराठों का पानीपत की तीसरी लड़ाई में क्या
- 6:00:04परिणाम रहा यह सोचकर विकल्पों का विश्लेषण
- 6:00:07करें। उत्तर आप खुद सोचिए।
- 6:00:10चलिए अब आगे बढ़ते हैं सिख विरासत की तरफ।
- 6:00:14हरियाणा की सिख विरासत अत्यंत समृद्ध है।
- 6:00:17राज्य में कुल 72 ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं
- 6:00:20और यहां एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है
- 6:00:23जो मेंस के लिए बहुत जरूरी है।
- 6:00:25हम आप एचएसजीपीसी की बात कर रहे हैं ना?
- 6:00:28हां बिल्कुल। इनका प्रबंधन एसजीपीसी से
- 6:00:31हटाकर एचएसजीपीसी यानी हरियाणा सिख
- 6:00:34गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी को सौंप दिया
- 6:00:36गया। इसकी समय रेखा पढ़ना काफी दिलचस्प
- 6:00:39है।
- 6:00:39महत्वपूर्ण है। एचएसजीपीसी की स्थापना 11
- 6:00:42जुलाई 2014 को हुई और इसका मुख्यालय
- 6:00:44कुरुक्षेत्र में है। साल 2000 में इसकी
- 6:00:47मांग उठी। 2014 में अधिनियम पारित हुआ और
- 6:00:50अंततः 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने इसकी
- 6:00:53वैधता पर अपनी मोहर लगाई। इतिहास की
- 6:00:55तारीखें भूल जाने का डर लगता है। हर दूसरा
- 6:00:58गुरुद्वारा मंजी साहिब सा लगता है।
- 6:01:01पर रिवीजन की आग में जो तपता है वही
- 6:01:03लबासना की सीढ़ियां चढ़ता है।
- 6:01:06बहुत उम्दा और ये मंजी साहिब वाला जो
- 6:01:08पॉइंट आपने छेड़ा है ना यह क्लासिक
- 6:01:10प्रीलिम्स अलर्ट है।
- 6:01:11सच में? क्योंकि मंजी साहिब नाम से तीन
- 6:01:14अलग-अलग गुरुद्वारे हैं और यह काफी भ्रमित
- 6:01:17कर सकता है। अंबाला का मंजी साहिब गुरु
- 6:01:20हरगोविंद और गुरु हर राय से संबंधित है।
- 6:01:23और करनाल का मंजी साहिब गुरु नानक देव जी
- 6:01:25की पहली यात्रा से जुड़ा है।
- 6:01:26जबकि रोहतक के लाखन माजरा का मंजी साहिब
- 6:01:30गुरु तेग बहादुर से संबंधित है। जहां वे
- 6:01:33अपनी शहादत से पहले 13 दिन रुके थे।
- 6:01:35स्थानों और गुरुओं का यह मिलान परीक्षा
- 6:01:38में उलझा सकता है।
- 6:01:39और कुछ गुरुद्वारे वीरता और युद्ध के
- 6:01:42इतिहास की गवाही देते हैं। यमुनानगर का
- 6:01:45गुरुद्वारा कपाल मोचन वो स्थान है जहां
- 6:01:48गुरु गोविंद सिंह ने 1687 में भंगानी की
- 6:01:51लड़ाई के बाद अपने शस्त्र धोए थे। पंचकूला
- 6:01:54का नाडा साहिब गुरुद्वारा घगर नदी के
- 6:01:57किनारे स्थित है।
- 6:01:58अंबाला का पंचोखरा साहिब गुरु हर कृष्ण
- 6:02:00साहिब को समर्पित है। लेकिन इन सब में जो
- 6:02:03सबसे अद्वितीय है वो है कैथल का टोपियों
- 6:02:06वाला गुरुद्वारा। हां, यहां रामायण और
- 6:02:09ग्रंथ साहिब दोनों एक साथ पढ़े जाते हैं।
- 6:02:12यह समन्वित संस्कृति का एक जीता जागता
- 6:02:14उदाहरण है।
- 6:02:14एज वी टीच एट दिशांत आईएस, ऐसी अनूठी
- 6:02:17सांस्कृतिक समन्वय की जगह हमेशा यूपीएससी
- 6:02:20के रडार पर होती हैं।
- 6:02:21तो इसी पर एक और अभ्यास प्रश्न हो जाए।
- 6:02:23बिल्कुल। कथन एक गुरुद्वारा कपाल मोचन
- 6:02:27यमुनानगर में है। कथन दो गुरु तेग बहादुर
- 6:02:30लाखन माजरा मंजी साहिब में 13 दिन रुके
- 6:02:33थे। और कथन तीन एचएसजीपीसी का मुख्यालय
- 6:02:36अंबाला में है।
- 6:02:37लॉजिक का प्रयोग करें एस्पिरेंट। हमने अभी
- 6:02:40पढ़ा कि एचएसजीपीसी का मुख्यालय
- 6:02:42कुरुक्षेत्र में है। अंबाला में नहीं।
- 6:02:44हम तो इस आधार पर एलिमिनेशन करें और सही
- 6:02:48विकल्प तक पहुंचे। अब वास्तुकला की ओर
- 6:02:51बढ़ते हैं। विशेषकर मुगल और सल्तनत
- 6:02:53वास्तुकला।
- 6:02:54पानीपत की काबुली बाग मस्जिद बाबर द्वारा
- 6:02:57इब्राहिम लोधी पर जीत यानी पानीपत की पहली
- 6:03:00लड़ाई की याद में बनवाई गई थी।
- 6:03:02वहीं इब्राहिम लोदी का मकबरा एक ऊंचे
- 6:03:05चबूतरे पर पठान शैली में बना है। हिसार की
- 6:03:08लाट की मस्जिद फ़िरोज़ शाह तुगलक के महल
- 6:03:10परिसर का हिस्सा है।
- 6:03:11बाबर की जीत और लोदी की हार किताबों में
- 6:03:15छुपा है सदियों का सार। प्रीलिम्स के इस
- 6:03:18चक्रव्यूह में सही फैक्ट ही है सबसे
- 6:03:21धारदार तलवार।
- 6:03:22बहुत सही। अब वास्तुकला में एक एग्जाम
- 6:03:24अलर्ट बॉक्स की बात करते हैं। थानेसर में
- 6:03:26स्थित शेख चिल्ली का मकबरा।
- 6:03:29हां हां। इसका महत्व इतना है कि इसे
- 6:03:31हरियाणा का ताजमहल कहा जाता है। डेविड रॉस
- 6:03:34ने तो इसे ताजमहल के बाद दूसरी सबसे
- 6:03:37खूबसूरत इमारत बताया था।
- 6:03:39और यह अब्दुल रहीम यानी शेख चिल्ली का
- 6:03:41मकबरा है जो दारा शिकोह के आध्यात्मिक
- 6:03:44गुरु थे। सूफी दरगाहों की बात करें तो
- 6:03:47पानीपत के ब अरिशा कलंदर जो अमीर खुसरो के
- 6:03:50समकालीन थे। उनकी दरगाह बहुत प्रसिद्ध है।
- 6:03:52सोनीपत की मामा भांजा दरगाह जहां इमाम
- 6:03:56नसीरुद्दीन और उनके भतीजे इब्राहिम की
- 6:03:58मजार है। वो सांप्रदायिक सौहार्द का एक
- 6:04:01बेहतरीन प्रतीक है।
- 6:04:02और शाबाद के नौ गजा पीर की कब्र 27 फीट
- 6:04:05लंबी है। जहां एक अनोखी परंपरा के तहत
- 6:04:08दीवार घड़ियां चढ़ाई जाती हैं।
- 6:04:09अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड
- 6:04:11देयर टीम, हम हमेशा इस बात पर जोर देते
- 6:04:14हैं कि ऐसी आउट ऑफ द बॉक्स परंपराएं
- 6:04:17परीक्षा में सीधा सवाल बन सकती हैं।
- 6:04:20बिल्कुल किलों और महलों के निर्माणकर्ताओं
- 6:04:22का मिलान याद रखना भी बहुत आवश्यक है।
- 6:04:24फिरोजशाह तुगलक ने हिसार में गुजरी महल
- 6:04:27बनवाया जिसमें काले पत्थरों का प्रयोग हुआ
- 6:04:29था और यह उनकी प्रेमिका गुजरी के लिए था।
- 6:04:31शाहजहां के समय में नारनौल में जलमल बना
- 6:04:35और महान राजा पृथ्वीराज चौहान का नाम हासी
- 6:04:38के असीड किले से जुड़ा है।
- 6:04:40औपनिवेशिक और हवेली वास्तुकला भी पीछे
- 6:04:42नहीं है। करनाल का कंटोनमेंट चर्च टावर 35
- 6:04:45मीटर ऊंचा है और 35 कि.मी. दूर से ही
- 6:04:47दिखाई देता है।
- 6:04:48झज्जर की सेठानी की हवेली अपने उत्कृष्ट
- 6:04:51भित्ति चित्रों यानी फ्रेस्कोस के लिए
- 6:04:53जानी जाती है।
- 6:04:54और नारनौल का चोर गुंबद बहुत दिलचस्प है।
- 6:04:57जिसे नारनौल का साइन बोर्ड भी कहा जाता
- 6:05:00है। हवेलियों के भित्ति चित्र और गुंबद के
- 6:05:02निशान, हर एक पत्थर में बसी है इतिहास की
- 6:05:06जान। रिवीजन करते रहो मेरे दोस्त। यही
- 6:05:09बनाएगी तुम्हें सिविल सर्वेंट महान।
- 6:05:11चलिए इस उत्साह के साथ वास्तुकरा पर एक
- 6:05:14बहुत दिलचस्प एमसीक्यू देखते हैं।
- 6:05:16बताइए।
- 6:05:17कथन एक शेख चिल्ली का मकबरा पानीपत में
- 6:05:20है। कथन दो गुजरी महल का निर्माण फिरोजशाह
- 6:05:23तुगलक ने काले पत्थरों से किया। और कथन
- 6:05:26तीन काबुली बाग मस्जिद पानीपत की पहली
- 6:05:29लड़ाई की याद दिलाती है।
- 6:05:30तो एस्पिरेंट्स शेख चिल्ली का मकबरा कहां
- 6:05:33है? थानेसर में। तो पहला कथन वैसे ही गलत
- 6:05:36है। बाकी दो कथनों की सत्यता की जांच करें
- 6:05:39और एलिमिनेशन विधि से विकल्पों का चयन
- 6:05:42करें।
- 6:05:42अब आगे बढ़ते हैं पवित्र जलाशयों की तरफ
- 6:05:44यानी हरियाणा के सरोवर। कुरुक्षेत्र का
- 6:05:48ब्रह्म सरोवर इतना ऐतिहासिक है कि इसका
- 6:05:50उल्लेख अलबरूनी की पुस्तक किताबुल हिंद
- 6:05:53में मिलता है।
- 6:05:54ज्योतिष सर वो स्थान है जहां एक बरगद के
- 6:05:56पेड़ के नीचे भगवत गीता का जन्म हुआ और
- 6:06:00सन्नेहित सरोवर को सात सरस्वती नदियों का
- 6:06:03संगम माना जाता है। सीरियस एस्पिरेंट्स
- 6:06:06मार्क दिस सरोवरों की यह त्रई परीक्षा के
- 6:06:09लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
- 6:06:10और हरियाणा केवल सरोवरों की नहीं बल्कि
- 6:06:13ऋषियों की तपोस्थली भी है। इनका मिलान
- 6:06:16देखें, तो चवन ऋषि का संबंध नारनौल्स की
- 6:06:19ढोसी पहाड़ी से है।
- 6:06:21जो कि दिलचस्प रूप से एक विलुप्त
- 6:06:23ज्वालामुखी है।
- 6:06:24बिल्कुल। और कपिल मुनि का संबंध कैथल के
- 6:06:27कलायत से, पराशर ऋषि का करनाल के बहलोलपुर
- 6:06:31से और जमदागिनी ऋषि का संबंध हिसार की
- 6:06:34राखीगढ़ से है।
- 6:06:35एज वी टीच एट दिशांत आईएस स्थानों और
- 6:06:37ऋषियों की यह मैपिंग प्रीलिम्स में मैच द
- 6:06:40फॉलोइंग के रूप में अक्सर पूछी जा सकती
- 6:06:41है।
- 6:06:42अब इस प्राचीन इतिहास से आधुनिक पर्यटन
- 6:06:44नीति की ओर चलते हैं।
- 6:06:45आधुनिक परिप्रेक्ष में हरियाणा पर्यटन
- 6:06:47नीति का आदर्श वाक्य है कम हॉलिडे विद अस।
- 6:06:502008 की पर्यटन नीति ने फार्म टूरिज्म और
- 6:06:53गोल्फ टूरिज्म जैसी नई अवधारणाओं की
- 6:06:55शुरुआत की
- 6:06:56और इसके ब्रांड एंबेसडर धर्मेंद्र और हेमा
- 6:06:58मालिनी हैं।
- 6:06:59पर्यटन परिसरों की बात करें तो प्रकृति को
- 6:07:01बढ़ावा देने के लिए हरियाणा पर्यटन ने
- 6:07:04अपने परिसरों का नाम पक्षियों पर रखे हैं।
- 6:07:07जैसे समालखा जो पानीपत में है वहां ब्लू
- 6:07:10जे है। पानीपत शहर में स्काई लाख,
- 6:07:13कुरुक्षेत्र के पीपली में पैराकीट और
- 6:07:16फरीदाबाद में मैगपाई। उड़ान भरनी है तो इन
- 6:07:20पक्षियों से सीखो। यूपीएससी का आसमान
- 6:07:22तुम्हारा है। बस खुद पर यकीन रखो। मैगपाई
- 6:07:26और पैराकीट के नाम रट लो जनाब। प्रीलिम्स
- 6:07:28के पेपर में यही लाएंगे इंकलाब। क्या बात
- 6:07:31है और मेलों और त्यौहारों की बात करें तो
- 6:07:33वह हरियाणा की सांस्कृतिक जीवंतता दिखाते
- 6:07:36हैं। फरीदाबाद का सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय
- 6:07:39शिल्प मेला हर साल 1 से 15 फरवरी तक लगता
- 6:07:43है।
- 6:07:43जून जुलाई में पिंजौर के यादवेंद्र गार्डन
- 6:07:46जिसे मुगल गार्डन भी कहते हैं। वहां आम
- 6:07:48महोत्सव होता है और कुरुक्षेत्र का गीता
- 6:07:50महोत्सव अब एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का
- 6:07:53उत्सव बन चुका है।
- 6:07:54तो इसी पर पर्यटक परिसरों का एक मिलान
- 6:07:57प्रश्न हो जाए। सूची एक में है ब्लू जे,
- 6:08:00यादवेंद्र गार्डन और स्काईलार्क। सूची दो
- 6:08:04में है पानीपत, समालखा और पिंजौर।
- 6:08:07तो ब्लू जे समालखा से जुड़ता है यादवेंद्र
- 6:08:10गार्डन पिंजौर से और स्काईक पानीपत से। इस
- 6:08:14तर्क के साथ सही विकल्प को एलिमिनेट करके
- 6:08:16खोजें। अब कुरुक्षेत्र के चारों ओर एक
- 6:08:18पवित्र परिक्रमा घेरे की बात करते हैं
- 6:08:20जिसे 48 कोस परिक्रमा कहते हैं।
- 6:08:23और यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि
- 6:08:26इसका विस्तार केवल कुरुक्षेत्र तक सीमित
- 6:08:28नहीं है। यह कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल,
- 6:08:31जींद और पानीपत जिलों को कवर करता है और
- 6:08:34इसमें लगभग 134 तीर्थ स्थल शामिल हैं।
- 6:08:37अंत में अगर हम मुख्य परीक्षा के लिए एक
- 6:08:39कोर आर्गुमेंट निकालें तो हरियाणा सिर्फ
- 6:08:42एक युद्ध का मैदान नहीं है।
- 6:08:44बिल्कुल नहीं। यह वैदिक सभ्यता का पालना
- 6:08:47है। सूफी और सिख संस्कृतियों का संगम है
- 6:08:50और आज आधुनिक इको पर्यटन का केंद्र बन रहा
- 6:08:53है।
- 6:08:53इसी सांस्कृतिक संश्लेषण के दृष्टिकोण से
- 6:08:55ही एस्पिरेंट्स को अपने मेंस के उत्तर
- 6:08:57लिखने चाहिए।
- 6:08:58एस्पिरेंट्स आज हमने हरियाणा के मंदिरों,
- 6:09:01गुरुद्वारों, वास्तुकला, सरोवरों और
- 6:09:04पर्यटन नीतियों का गहराई से विश्लेषण
- 6:09:06किया। प्रीलिम्स के लिए मंजी साहिब जैसे
- 6:09:09ट्रप्स और मेंस के लिए सांस्कृतिक समन्वय
- 6:09:12के बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- 6:09:15अंत में एक विचार जो हम आपको आगे की खोज
- 6:09:18के लिए छोड़ रहे हैं। सोचिए जिस भूमि पर
- 6:09:21महाभारत जैसा विनाशकारी युद्ध हुआ। वहीं
- 6:09:25सूफीवाद और सिख गुरुओं ने शांति और समन्वय
- 6:09:28के सबसे बड़े उदाहरण कैसे स्थापित किए?
- 6:09:31क्या भूगोल संस्कृति को आकार देता है या
- 6:09:34संस्कृति भूगोल की पहचान बदल देती है? इस
- 6:09:36पर विचार करें।
- 6:09:38दिस लेक्चर वास बाय द शांत आईएस। सुरक्षित
- 6:09:40रहें, पढ़ते रहें और अपना रिवीजन करते
- 6:09:43रहें। आज की इस विस्तृत चर्चा का विषय है
- 6:09:47हरियाणा की कला और संस्कृति परंपरा से
- 6:09:51आधुनिकता तक। हम इस विषय की गहराई में
- 6:09:54जाने के लिए हमारे पास जो स्त्रोत हैं वे
- 6:09:57दिशांत आईआईएस और राहुल प्रकाश सर के
- 6:10:00मार्गदर्शन में तैयार की गई एक अत्यंत
- 6:10:03विस्तृत अध्ययन सामग्री पर आधारित है।
- 6:10:05बिल्कुल और देखिए हमारा आज का मिशन केवल
- 6:10:08परीक्षा के लिए तथ्यों को रटना नहीं है।
- 6:10:10हां, यह चर्चा उन सभी जिज्ञासुओं के लिए
- 6:10:12है जो किसी राज्य की गहरी सांस्कृतिक
- 6:10:15जड़ों, दिलचस्प लोकमान्यताओं और उस
- 6:10:18ऐतिहासिक कला को समझना चाहते हैं जिसने आज
- 6:10:21का आधुनिक रूप लिया है।
- 6:10:22सही कहा आपने। हम इस सामग्री से कुछ सबसे
- 6:10:25बेहतरीन एग्जाम ट्रैप्स और ज्ञान के वो
- 6:10:28मोती निकालेंगे जो किसी को भी हैरत में
- 6:10:31डाल सकते हैं।
- 6:10:32इस अध्ययन सामग्री की सबसे खास बात मुझे
- 6:10:34यही लगी कि यह तथ्यों के साथ-साथ परंपराओं
- 6:10:37का मनोवैज्ञानिक और सामाजिक आधार भी बहुत
- 6:10:39स्पष्ट तरीके से समझाती है। एग्जैक्टली
- 6:10:42क्योंकि कला और संस्कृति कोई स्थिर चीज
- 6:10:45नहीं है। जब हम किसी राज्य की संस्कृति का
- 6:10:48360° विश्लेषण करते हैं, तो हमें उस समाज
- 6:10:52की सोच, उनके डर, उनकी उम्मीदों और उनके
- 6:10:56मनोरंजन के तरीकों का असली खाका मिलता है।
- 6:10:59मतलब हर रीति-रिवाज के पीछे एक ठोस वजह
- 6:11:01छुपी होती है ना?
- 6:11:02हां। और राहुल प्रकाश सर और उनकी टीम के
- 6:11:05मार्गदर्शन में तैयार किए गए इन नोट्स से
- 6:11:08यही बात उभर कर सामने आती है।
- 6:11:10तो नोट्स की शुरुआत में ही लोक विश्वास और
- 6:11:13शकुन अपशकुन का जो जिक्र किया गया है वो
- 6:11:15बहुत ध्यान खींचता है। हर समाज की तरह
- 6:11:18हरियाणा की संस्कृति में भी कुछ खास
- 6:11:20घटनाओं को शोभिका अशुभ माना जाता है।
- 6:11:22बिल्कुल शतकुण शास्त्र हर संस्कृति का एक
- 6:11:25अभिन्न अंग रहा है। जैसे स्रोत में उदाहरण
- 6:11:28दिया गया है कि अगर कोई व्यक्ति यात्रा पर
- 6:11:30निकल रहा है और उसे ब्राह्मण कन्या के
- 6:11:33दर्शन हो जाए या कोई गाय अपने बछड़े को
- 6:11:36दूध पिलाती हुई दिख जाए तो इसे एक बहुत ही
- 6:11:38बेहतरीन शकुन माना जाता है।
- 6:11:40हां और इसके विपरीत भी कई मान्यताएं हैं।
- 6:11:42वही यात्रा पर निकलते वक्त किसी का छींक
- 6:11:46देना, पीछे से टोक देना या बिल्ली का
- 6:11:49रास्ता काट जाना अब शकुन की श्रेणी में
- 6:11:51आता है। मैंने यह भी पढ़ा कि सोना खोना या
- 6:11:54आग लगने को भी बुरे शगुन के रूप में देखा
- 6:11:56जाता है। आखिर सदियों पुरानी इन मान्यताओं
- 6:11:59का आधार क्या है?
- 6:12:01देखिए अगर हम इसे गहराई से समझे तो यह
- 6:12:03मान्यताएं असल में इंसानी मनोविज्ञान और
- 6:12:06हमारे पूर्वजों के पैटर्न रिकग्निशन का
- 6:12:08हिस्सा है।
- 6:12:09पैटर्न रिकग्निशन मतलब वो चीजों को
- 6:12:11ऑब्जर्व करते थे।
- 6:12:12हां, प्राचीन काल में हमारे पूर्वजों ने
- 6:12:15अपने आसपास के माहौल, प्रकृति और जानवरों
- 6:12:19के व्यवहार को देखकर कुछ नियम बनाए थे। हम
- 6:12:21जैसे कौवे का बोलना मेहमान के आने का सूचक
- 6:12:25माना जाता है।
- 6:12:26अच्छा
- 6:12:26क्योंकि अतीत में पक्षियों के व्यवहार में
- 6:12:29अचानक आए बदलाव को अक्सर किसी बाहरी
- 6:12:31व्यक्ति की आहट से जोड़ा जाता था।
- 6:12:33बिल्कुल सही पकड़े। यह एक तरह का सर्वाइवल
- 6:12:36मैकेनिज्म था जो धीरे-धीरे लोक विश्वास
- 6:12:38में बदल गया।
- 6:12:39जैसा कि हम दिशांत आईएस में पढ़ाते हैं।
- 6:12:42संस्कृति को रटना नहीं है। उसे डिकोड करना
- 6:12:45है।
- 6:12:45हम [गला साफ़ करने की आवाज़] मैंने नोट्स
- 6:12:47में एक और बहुत अजीब बात पढ़ी। शारीरिक
- 6:12:49शकुन का भी अलग ही विज्ञान है। आंख फड़कने
- 6:12:53वाली बात तो बहुत आम है। लेकिन क्या सच
- 6:12:56में लिंग के आधार पर आंख पड़कने का शकुन
- 6:12:58बदल जाता है?
- 6:12:59इसमें कोई दो राय नहीं है। और यहीं पर वो
- 6:13:02छोटी-छोटी बातें आती हैं जिन पर परीक्षा
- 6:13:04बनाने वालों की नजर होती है।
- 6:13:06तो असल में नियम क्या है? दिशांत आईएस के
- 6:13:08नोट्स में यह स्पष्ट है कि पुरुषों के लिए
- 6:13:11दाई आंख यानी राइट आई का फड़कना शुभ माना
- 6:13:14जाता है। जबकि महिलाओं के लिए बाई आंख
- 6:13:17यानी लेफ्ट आई का फड़कना शुभ होता है।
- 6:13:19कमाल है। यह मान्यताएं इतनी गहराई से
- 6:13:21हमारी मानसिकता में बैठी हैं कि आज के
- 6:13:24आधुनिक युग में भी लोग इन पर गौर करते
- 6:13:26हैं।
- 6:13:26हां और यहां पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण
- 6:13:29प्रीलिम्स अलर्ट आता है जिसे समझना सीरियस
- 6:13:32एस्पिरेंट्स के लिए जरूरी है।
- 6:13:33वो हिरण वाला ट्रैप राइट?
- 6:13:35एक्जेक्टली। आमतौर पर लोग मानते हैं कि
- 6:13:38अगर कोई जानवर रास्ता काट जाए तो वह हमेशा
- 6:13:40अपशकुन होता है। लेकिन हिरण के मामले में
- 6:13:44ऐसा नहीं है।
- 6:13:45दिशा यहां बहुत मायने रखती है ना?
- 6:13:47बिल्कुल। अगर हिरण बाएं से दाहिनी तरफ
- 6:13:50मतलब लेफ्ट टू राइट निकलता है तो वो एक
- 6:13:53शुभ संकेत है।
- 6:13:54और अगर वही हिरण दाएं से बाएं जाए तो? तो
- 6:13:56वह अपशकुन हो जाता है। अक्सर छात्र सिर्फ
- 6:14:00हिरन का रास्ता काटना पढ़कर उसे अपशकुन
- 6:14:02मान लेते हैं और माइनस मार्किंग का शिकार
- 6:14:05हो जाते हैं। सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क
- 6:14:07दिस।
- 6:14:09दिशा का यह खेल तो सच में हैरान करने वाला
- 6:14:11है। और इसी बात पर मुझे एक पंक्ति याद आ
- 6:14:14रही है। रास्ते में बिल्ली रास्ता काटे तो
- 6:14:16लोग रुक जाते हैं। और यहां यूपीएससी का
- 6:14:18सिलेबस रास्ता काटे तो एस्पिरेंट्स छलांग
- 6:14:20लगा जाते हैं।
- 6:14:21क्या बात है? यह पंक्ति आज की चर्चा के
- 6:14:24संदर्भ में बहुत सटीक बैठती है।
- 6:14:26चलिए मान्यताओं की इस रहस्यमई दुनिया से
- 6:14:29निकलकर अब मनोरंजन के उस स्वरूप की बात
- 6:14:31करते हैं जो कभी समाज की धड़कन हुआ करता
- 6:14:33था। हरियाणा का लोकनाट्य जिसे सांग कहा
- 6:14:36जाता है।
- 6:14:37सांग का इतिहास बहुत ही समृद्ध और दिलचस्प
- 6:14:39है।
- 6:14:40सांग का जो स्वरूप स्त्रोत में बताया गया
- 6:14:42है वो बंद कमरों वाले थिएटर से एकदम अलग
- 6:14:45है। एक खुला मंच कोई भारीभरकम पर्दा नहीं।
- 6:14:49लकड़ी के तख्तों को जोड़कर बनाया गया
- 6:14:51स्टेज और उसी पर संगीत, नृत्य और अभिनय का
- 6:14:54एक जीवंत प्रदर्शन।
- 6:14:56यह जो ओपन स्टेज या खुले मंच की अवधारणा
- 6:14:59है यह सीधे तौर पर जनता से जुड़ने का एक
- 6:15:03माध्यम थी।
- 6:15:03इसकी शुरुआत कब हुई थी?
- 6:15:05लगभग 1730 ईस्वी में मेरठ के किशनल भाट को
- 6:15:10सांग का जनक माना जाता है। उनके बाद
- 6:15:13बंसीलाल और अली बख्श जैसे दिग्गजों ने इस
- 6:15:16लोक रंगमंच की नींव मजबूत की। हां अली
- 6:15:19बख्श को तो लोक रंग मंच का पितामह भी कहा
- 6:15:21जाता है।
- 6:15:21बिल्कुल लेकिन सांग का जो स्वर्ण युग
- 6:15:24कहलाया वो तब शुरू हुआ जब पंडित दीपचंद
- 6:15:27बहमन और पंडित लक्ष्मीचंद जैसे महारथियों
- 6:15:30ने इस विधा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
- 6:15:33पंडित दीपचंद बहमन का नाम पढ़ते ही एक बात
- 6:15:36बहुत प्रभावित करती है। स्त्रोत में
- 6:15:38उन्हें हरियाणा का शेक्सपियर और हरियाणा
- 6:15:40का कालिदास जैसी उपाधियों से नवाजा गया
- 6:15:42है।
- 6:15:43जी और सोनीपत के शेरीखांडा के रहने वाले
- 6:15:46दीपच जी के बारे में एक ऐतिहासिक तथ्य यह
- 6:15:50भी है कि प्रथम विश्व युद्ध के समय
- 6:15:52उन्होंने अपने सांग के जरिए युवाओं को
- 6:15:55ब्रिटिश सेना में भर्ती होने के लिए
- 6:15:57प्रेरित किया था।
- 6:15:58यह तो बहुत ही अनोखा इस्तेमाल था कला का।
- 6:16:01इसके पीछे का ऐतिहासिक संदर्भ समझना बहुत
- 6:16:03जरूरी है। कला कभी भी समाज के हालात से
- 6:16:06अछूती नहीं रहती। उस दौर में कला का
- 6:16:09इस्तेमाल एक मास कम्युनिकेशन टूल के रूप
- 6:16:12में किया गया था। दीपचंद जी ने साबित किया
- 6:16:14कि सांग सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है
- 6:16:17बल्कि समाज की दिशा तय करने की ताकत रखता
- 6:16:20है।
- 6:16:21राहुल प्रकाश सर के मार्गदर्शन में तैयार
- 6:16:23इस मॉड्यूल में यह बात बहुत अच्छी तरह से
- 6:16:25समझाई गई है। लेकिन अगर हम स्वर्ण युग के
- 6:16:28सबसे बड़े स्तंभ की बात करें तो वह नाम है
- 6:16:31पंडित लक्ष्मीचंद।
- 6:16:32हां, जिन्हें सूर्य कवि, संगीत सम्राट और
- 6:16:36सूफी दर्शन की मीरा कहा जाता है।
- 6:16:39उनके गुरु का नाम मानसिंह था। यह तो नोट्स
- 6:16:41में है, लेकिन यहां जो सबसे बड़ा आहा
- 6:16:43मोमेंट मुझे लगा, वह उनकी शिक्षा को लेकर
- 6:16:46था।
- 6:16:46आप उनके निरक्षर होने की बात कर रहे हैं
- 6:16:48ना?
- 6:16:48एक्सैक्टली दिशांत आईएस के नोट्स में यह
- 6:16:51स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि
- 6:16:53इतने बड़े साहित्यकार जिन्होंने द्रोपदी
- 6:16:55चीरहरण और सत्यवान सावित्री सहित 25 से
- 6:16:58अधिक सांग रचे, वह पूरी तरह से अनपढ़
- 6:17:01हैरानी की बात तो यह है कि एक व्यक्ति
- 6:17:04जिसने कभी औपचारिक शिक्षा नहीं ली, आज
- 6:17:07उसके रचे गए साहित्य पर बड़े-बड़े
- 6:17:09विश्वविद्यालयों में शोध किए जाते हैं।
- 6:17:12उनका ज्ञान श्रुति, अवलोकन और गहरे जीवन
- 6:17:15अनुभव पर आधारित था। यही चीज उन्हें महान
- 6:17:18बनाती है
- 6:17:19और यही तथ्य परीक्षाओं के लिए एक बेहतरीन
- 6:17:21एग्जाम ट्रैप बनता है। रैंकर्स फोकस हियर
- 6:17:25जब स्टेटमेंट बेस्ड सवाल आता है कि पंडित
- 6:17:28लक्ष्मीचंद संस्कृत साहित्य में उच्च
- 6:17:30शिक्षित थे तो ज्यादातर लोग उनके
- 6:17:33साहित्यिक योगदान को देखकर इस कथन को सही
- 6:17:36मान लेते हैं। लेकिन उनकी शिक्षा औपचारिक
- 6:17:39नहीं थी।
- 6:17:39इसके साथ ही हमें दयाचंद मायना का भी
- 6:17:41उल्लेख करना चाहिए। श्रोत में उन पर एक
- 6:17:44विशेष एग्जाम अलर्ट है।
- 6:17:45हां, दयाचंद मायना को हरियाणा का जॉन
- 6:17:48मिल्टन कहा जाता है। लेकिन उससे भी बड़ी
- 6:17:51बात यह है कि वे एकमात्र हरियाणवी कवि
- 6:17:54हैं। जिन्हें राष्ट्रीय कवि का दर्जा
- 6:17:56प्राप्त है।
- 6:17:57यह सच में गर्व करने वाली बात है और संगीत
- 6:17:59की बात हो तो पंडित जसराज जी का जिक्र तो
- 6:18:02बनता है।
- 6:18:03बिल्कुल। पीली मंदोरी में जन्मे और मेवाती
- 6:18:06घराने से ताल्लुक रखने वाले पंडित जसराज
- 6:18:08जी। आपको पता है उनके नाम पर अंतरिक्ष में
- 6:18:12एक शूद्र ग्रह यानी एस्टेरॉइड का नाम रखा
- 6:18:14गया है। इसी बात पर एक और अर्ज किया है।
- 6:18:17किताबों के पन्नों में जो ना मिला वो
- 6:18:19तजुर्बों के मंच पर गा गया। एक अनपढ़ कवि
- 6:18:22पढ़े लिखों को जिंदगी का फलसफा सिखा गया।
- 6:18:25वाह बहुत खूब। यह लक्ष्मीचंद जी के जीवन
- 6:18:27का बिल्कुल सही सार है।
- 6:18:29सांग के उन लकड़ी के तख्तों से लेकर
- 6:18:31अंतरिक्ष के शूद्र ग्रह तक की यह यात्रा
- 6:18:34हमें एक और बड़े पर्दे की ओर ले जाती है
- 6:18:36और वो है सिनेमा। पारंपरिक थिएटर से
- 6:18:39सिल्वर स्क्रीन तक का बदलाव कैसा रहा?
- 6:18:41मैंने पढ़ा है कि इसमें भी कई प्रथम होने
- 6:18:43के दावे हैं जो भ्रम पैदा करते हैं।
- 6:18:45देखिए दीशांत आईएएस में हम अक्सर यह कहते
- 6:18:48हैं कि प्रथम शब्द के साथ जुड़े हुए
- 6:18:50विशेषणों पर बहुत ध्यान देना चाहिए।
- 6:18:52जैसे कि पहली फिल्म कौन सी थी?
- 6:18:541968 में आई धरती। हरियाणा की पहली फिल्म
- 6:18:58थी। लेकिन यह असल में एक शॉर्ट फिल्म या
- 6:19:01डॉक्यूमेंट्री थी। इसके बाद 1974 में
- 6:19:04हरफूल सिंह जाट जुलानी आई जो पहली रंगीन
- 6:19:07फिल्म थी।
- 6:19:08मतलब यह दोनों सफल फिल्मों की कैटेगरी में
- 6:19:10नहीं आती।
- 6:19:11एक्जेक्टली परीक्षा में अक्सर छात्र पहली
- 6:19:13फिल्म और पहली सफल फिल्म के बीच उलझ जाते
- 6:19:16हैं। पहली सफल फिल्म का खिताब 1983 में आई
- 6:19:20बहू रानी को जाता है।
- 6:19:22लेकिन जिस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के सारे
- 6:19:24रिकॉर्ड तोड़ दिए वो थी 1984 की चंद्राबल।
- 6:19:28जयंत प्रभाकर द्वारा निर्देशित और देवी
- 6:19:31शंकर प्रभाकर द्वारा लिखित इस फिल्म ने तो
- 6:19:34जैसे तहलका ही मचा दिया था।
- 6:19:36चंद्रावल तो एक सांस्कृतिक घटना थी।
- 6:19:38जा सकता है कि इसने यूपी, दिल्ली और
- 6:19:40राजस्थान में अपार सफलता हासिल की और सबसे
- 6:19:43मजेदार तथ्य यह है कि इस फिल्म ने अपनी
- 6:19:46पूरी निर्माण लागत सिर्फ और सिर्फ
- 6:19:48फरीदाबाद के एक गगन सिनेमा हॉल से ही वसूल
- 6:19:50कर ली थी। इस फिल्म की ऐतिहासिक सफलता के
- 6:19:53पीछे का कारण यह था कि दर्शकों को पहली
- 6:19:56बार अपनी ही भाषा, अपने ही पहनावे और अपनी
- 6:20:00ही संस्कृति की एक भव्य प्रस्तुति बड़े
- 6:20:02पर्दे पर देखने को मिली थी। जेपी कौशिक का
- 6:20:05संगीत सीधे लोगों के दिलों में उतर गया
- 6:20:08था। आज भी बॉलीवुड में ऐसे कई नाम हैं
- 6:20:11जिनकी जड़े इसी संस्कृति से जुड़ी हैं।
- 6:20:13सतीश कौशिक, सुनील दत्त, जूही चावला,
- 6:20:16रणदीप हुड्डा, सोनू निगम और मल्लिका
- 6:20:18शेरावत जैसी हस्तियां दर्शाती हैं कि यहां
- 6:20:21की मिट्टी में अभिनय और कला किस कदर रची
- 6:20:23बसी है।
- 6:20:24बिल्कुल इन सभी ने राष्ट्रीय और
- 6:20:26अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई
- 6:20:29है।
- 6:20:29इन कलाकारों और फिल्मों के सफर को देखकर
- 6:20:32लगता है कि चंद्रावल की तरह अपना भी एक
- 6:20:34दिन बॉक्स ऑफिस हिट आएगा। बस यह प्रीलिम्स
- 6:20:37का जाल एक बार सही से कट जाएगा। हां हां
- 6:20:40एस्पिरेंट्स की यही सबसे बड़ी दुआ होती
- 6:20:42है।
- 6:20:42चंद्रावल जैसी फिल्मों की बात हो तो उस
- 6:20:45दौर की वेशभूषा का जिक्र आना स्वाभाविक
- 6:20:47है। कपड़े सिर्फ तन ढकने के लिए नहीं होते
- 6:20:49वे समाज की पहचान होते हैं।
- 6:20:51अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर हमने
- 6:20:54इस मॉड्यूल में वेशभूषा को बहुत ही
- 6:20:57विस्तार से कवर किया है।
- 6:20:58जैसे पुरुषों की वेशभूषा में सबसे अहम
- 6:21:01खंडवा या पगड़ी है जो मान और सम्मान का
- 6:21:04प्रतीक है। सर्दियों में ओढ़ी जाने वाली
- 6:21:06सूती चादर को दोहर या खेस कहा जाता है।
- 6:21:09वहीं एक पुराना दरबारी ढंग का लंबा ऊपरी
- 6:21:12वस्त्र अंगरखा कहलाता है।
- 6:21:14और महिलाओं की वेशभूषा तो और भी ज्यादा
- 6:21:17विविधता से भरी है।
- 6:21:18हां, महिलाओं की वेशभूषा में दामन का
- 6:21:21जिक्र सबसे प्रमुखता से आता है जिसे
- 6:21:23लोकप्रिय रूप से 52 गज का घाघरा कहा जाता
- 6:21:26है। इसके साथ ही एक विशेष ओढ़नी का उल्लेख
- 6:21:29है पीलिया। यह किस खास मौके पर पहनी जाती
- 6:21:32है? पीलिया केवल एक वस्त्र नहीं बल्कि एक
- 6:21:35सामाजिक उद्घोषणा है।
- 6:21:36उद्घोषणा वो कैसे?
- 6:21:38दिशांत आईएस के मॉड्यूल के मुताबिक लाल
- 6:21:40किनारे वाली यह खास पीले रंग की ओढ़नी
- 6:21:43किसी आम दिन नहीं पहनी जाती। इसे विशेष
- 6:21:47रूप से लड़के के जन्म पर उपहार स्वरूप
- 6:21:49दिया जाता है। यह उन रीति-रिवाजों का
- 6:21:51हिस्सा है जो परिवार में नए सदस्य के आने
- 6:21:54की खुशी को सामाजिक मान्यता देते हैं।
- 6:21:57कपड़ों के साथ-साथ आभूषणों की भी एक लंबी
- 6:21:59और दिलचस्प सूची है। माथे पर सुहाग के
- 6:22:02प्रतीक के रूप में बोरला पहना जाता है।
- 6:22:04गले में मोहन माला और झालरा जैसे भारी
- 6:22:07आभूषण होते हैं।
- 6:22:08लेकिन इसमें भी कुछ बहुत ही अनोखे आभूषण
- 6:22:11हैं।
- 6:22:11हां, मुझे सबसे अनोखा आभूषण लगा आरसी। यह
- 6:22:14अंगूठे में पहनने जाने वाली एक अंगूठी है
- 6:22:16जिसमें एक छोटा सा शीशा लगा होता है।
- 6:22:19पुराने जमाने में महिलाओं के लिए यह एक
- 6:22:21पोर्टेबल मिरर की तरह काम करता होगा।
- 6:22:23बिल्कुल और इसमें एक और दिलचस्प पहलू यह
- 6:22:25है कि कुछ आभूषणों के नाम इतने भ्रामक
- 6:22:29होते हैं कि वो सीधे एग्जाम ट्रैप बन जाते
- 6:22:31हैं।
- 6:22:31अच्छा, ऐसे कौन से नाम है?
- 6:22:33गले और छाती के आभूषणों में एक नाम आता
- 6:22:36है, हंसली। यह एक भारी ठोस रिंग होती है
- 6:22:41जो असल में कॉलर बोन रक्षक की तरह काम
- 6:22:43करती है। लेकिन सबसे बड़ा ट्रैप है आंवला।
- 6:22:47आंवला अगर किसी से आंवला के बारे में पूछा
- 6:22:49जाए तो ज़हन में सबसे पहले एक खट्टा फल आता
- 6:22:52है।
- 6:22:52एक्सैक्टली सेहत के लिए फायदेमंद फल और
- 6:22:56इसी मानवीय प्रवृत्ति का फायदा एग्जामिनर
- 6:22:58उठाते हैं।
- 6:22:59तो हरियाणा की संस्कृति में मामला क्या
- 6:23:00है? हरियाणा की संस्कृति और आभूषणों के
- 6:23:03संदर्भ में आंवला कोई फल नहीं है बल्कि यह
- 6:23:06पैरों में पहना जाने वाला नाव के आकार का
- 6:23:10यानी बोट शेप्ड एक भारी चांदी का आभूषण
- 6:23:13है।
- 6:23:13बाप रे ये तो सच में बहुत कंफ्यूजिंग है।
- 6:23:16इसके अलावा पैरों में कड़ी, घुंघू वाली
- 6:23:18रमझोल या पाजेब और विवाह के प्रतीक के रूप
- 6:23:22में पैर की उंगली में बिछिया पहनी जाती
- 6:23:24है। राहुल प्रकाश सर और उनकी टीम के
- 6:23:27मार्गदर्शन में तैयार इस मॉड्यूल में
- 6:23:29स्पष्ट हिदायत दी गई है कि ऐसे भ्रामक
- 6:23:32शब्दों को विशेष रूप से याद रखा जाए।
- 6:23:34यह आंवला वाला ट्रैप तो बहुत खतरनाक था।
- 6:23:37गले में पहनने चले थे आंवला। एग्जामिनर ने
- 6:23:39पैरों में पहना दिया। यह दिशांत आईएएस की
- 6:23:42क्लास ना होती तो माइनस मार्किंग ने रुला
- 6:23:44दिया।
- 6:23:44यह हुई ना बात। रिमेंबर दिस। जो चीज जितनी
- 6:23:48आसान लगती है यूपीएससी में वो उतनी ही
- 6:23:50ट्रिकी हो सकती है।
- 6:23:52सही कहा। अब वेशभूषा और आभूषणों से सजे इन
- 6:23:54लोगों के जीवन चक्र में जो रीति-रिवाज आते
- 6:23:56हैं वे भी बहुत मायने रखते हैं। जन्म के
- 6:23:58छठे दिन मनाए जाने वाले उत्सव को छठी कहते
- 6:24:01हैं और पुत्र जन्म के बाद कुएं की जो
- 6:24:03विशेष पूजा की जाती है उसे कुआं पूजन कहा
- 6:24:06जाता है।
- 6:24:06और विवाह के रीति रिवाजों का भी अपना एक
- 6:24:08अलग ही महत्व है।
- 6:24:09हां, विवाह के रीति रिवाजों में एक रस्म
- 6:24:11है बनवारा जिसमें शादी से पहले दाल पीसी
- 6:24:14जाती है। लेकिन सबसे ज्यादा ऊर्जावान और
- 6:24:16दिलचस्प रस्म मुझे खोरिया लगी। खौरिया
- 6:24:19केवल एक नृत्य नहीं है। यह एक तरह से
- 6:24:22महिलाओं की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का
- 6:24:24प्रतीक है।
- 6:24:25वो कैसे? देखिए जब घर के सारे पुरुष बारात
- 6:24:28लेकर चले जाते हैं तब घर पर पीछे से
- 6:24:30महिलाएं इकट्ठा होती हैं। उस एकांत और
- 6:24:33सुरक्षित माहौल में वे हंसी मजाक करती
- 6:24:36हैं। स्वांग रचती हैं और यह खोरिया नृत्य
- 6:24:39करती हैं। समाजशास्त्रीय नजरिए से देखें
- 6:24:41तो यह महिलाओं के लिए अपनी रोजमर्रा की
- 6:24:44बंदिशों से बाहर निकल कर आजादी से अपनी
- 6:24:47खुशी जाहिर करने का एक मंच था। इन सभी
- 6:24:49तथ्यों को जानने के बाद जब मैं स्रोत के
- 6:24:51अंत में दिए गए एमसीक्यू यानी अभ्यास
- 6:24:53प्रश्नों को देखता हूं तो चीजें बहुत
- 6:24:54आसानी से सुलझ जाती हैं।
- 6:24:56दिशांत आईएएस में हम एमसीक्यूस को हल करने
- 6:24:59के लिए एलिमिनेशन लॉजिक पर बहुत जोर देते
- 6:25:01हैं। चलिए इसे यहां लागू करके देखते हैं।
- 6:25:04बिल्कुल एक उदाहरण लेते हैं।
- 6:25:05अगर प्रश्न में एक स्टेटमेंट है सांग
- 6:25:07थिएटर के जनक पंडित लक्ष्मीचंद संस्कृत
- 6:25:10साहित्य में उच्च शिक्षित थे।
- 6:25:11अब हमारे विश्लेषण से हम जानते हैं कि
- 6:25:13लक्ष्मीचंद निरक्षर थे और सांग के जनक
- 6:25:16किशन लाल भाट थे। एक्जैक्टली। इसलिए यह
- 6:25:18कथन सीधे तौर पर एलिमिनेट हो जाता है। एक
- 6:25:21और प्रश्न बन सकता है। हरियाणा की प्रथम
- 6:25:23फिल्म चंद्रावल थी।
- 6:25:25यहां फिर से एलिमिनेशन लॉजिक काम आएगा।
- 6:25:27चंद्रावल सबसे सफल फिल्म थी। लेकिन प्रथम
- 6:25:30फिल्म तो धरती थी। और सबसे बड़ा ट्रैप
- 6:25:33आंवला गले का एक प्रसिद्ध आभूषण है।
- 6:25:36अभी हमने चर्चा की कि आंवला पैरों में
- 6:25:39पहना जाने वाला आभूषण है। इस तरह
- 6:25:41एलिमिनेशन तकनीक से हम सही उत्तर तक पहुंच
- 6:25:44सकते हैं।
- 6:25:45यही यूपीएससी क्लियर करने का असली राज है।
- 6:25:48तो आज की इस गहन चर्चा में हमने लोक
- 6:25:51विश्वासों की मनोवैज्ञानिक जड़ों से लेकर
- 6:25:54सांग के खुले मंच चंद्रावल के बॉक्स ऑफिस
- 6:25:57रिकॉर्ड 52 गज के दामन और पैरों में पहने
- 6:26:00जाने वाले आंवला तक का शानदार सफर तय
- 6:26:03किया। एक क्विक रिककैप के तौर पर
- 6:26:06एस्पिरेंट्स को यह ध्यान रखना है कि
- 6:26:08प्रीलिम्स के लिए शगुन की दिशा, सांग के
- 6:26:11जनक और आभूषणों के नाम बहुत महत्वपूर्ण है
- 6:26:15और मेंस के नजरिए से देखें तो सांग का मास
- 6:26:18कम्युनिकेशन टूल होना और खोरिया नृत्य का
- 6:26:21समाजशास्त्रीय महत्व बहुत जरूरी है।
- 6:26:24बहुत ही शानदार विश्लेषण। दिशांत आईएएस के
- 6:26:26इस मॉड्यूल के अंत में लिखी गई एक पंक्ति
- 6:26:28इस पूरी चर्चा का बेहतरीन सार प्रस्तुत
- 6:26:31करती है। कल्चर इज द आर्ट ऑफ लिविंग
- 6:26:34डीपली। यानी संस्कृति गहराई से जीने की
- 6:26:37कला है। यह सारी जानकारी केवल प्रीलिम्स
- 6:26:40या मेंस पास करने के लिए नहीं है। यह समाज
- 6:26:42[नाक से की जाने वाली आवाज़] के ताने-बाने
- 6:26:43को, उसकी जड़ों को और उस कला को समझने के
- 6:26:46लिए है जिसने पीढ़ियों को एक साथ बांध कर
- 6:26:48रखा है।
- 6:26:49चर्चा को समाप्त करने से पहले श्रोताओं के
- 6:26:51लिए एक विचार छोड़ने का समय आ गया है। जरा
- 6:26:54सोचिए आज के इस डिजिटल युग में हम जो रोज
- 6:26:57नए-नए मीम्स बना रहे हैं। इंटरनेट
- 6:26:59ट्रेंड्स चला रहे हैं। क्या वह हमारे समय
- 6:27:01के आधुनिक सांग या लोक विश्वास नहीं है?
- 6:27:04क्या यह मीम्स वही काम नहीं कर रहे हैं जो
- 6:27:06कभी खुले मंच पर कलाकार किया करते थे?
- 6:27:08समाज पर कटाक्ष और मनोरंजन और क्या आज से
- 6:27:11ठीक 100 साल बाद कोई जिज्ञासु इंसान किसी
- 6:27:15नई तकनीक या माध्यम के जरिए हमारी आज की
- 6:27:17इस डिजिटल संस्कृति का इसी तरह गहराई से
- 6:27:20विश्लेषण नहीं कर रहा होगा। सोचिएगा जरूर।
- 6:27:22दिस लेक्चर वास बाय दिशांत आईएस।
- 6:27:25बेहतरीन। मिलते हैं अगले गहरे विश्लेषण
- 6:27:27में।
- 6:27:28यूपीएससी और एचसीएस सिलेबस के इस गहन
- 6:27:31अध्ययन में आज हम सीधे हरियाणा की कला,
- 6:27:34संस्कृति और साहित्य पर आते हैं।
- 6:27:36देखिए ये एक ऐसा सेक्शन है जहां
- 6:27:37एस्पिरेंट्स थोड़ा घबराते हैं।
- 6:27:39हां बिल्कुल।
- 6:27:40उन्हें लगता है कि बस फैक्ट्स रटने होंगे।
- 6:27:42और आज की इस कॉम्प्रिहेंसिव कवरेज मास्टर
- 6:27:44क्लास में हम इसको अलग ढंग से डिकोड
- 6:27:46करेंगे।
- 6:27:47एक्सैक्टली। सिर्फ लिस्ट नहीं बनाएंगे।
- 6:27:49नहीं। क्योंकि अगर हम सामाजिक विकास को
- 6:27:51समझ लें तो साहित्य और संस्कृति के सवाल
- 6:27:53एग्जाम में खुद हल होने लगते हैं।
- 6:27:55हम्-mित समाज को समझने के लिए सबसे पहले
- 6:27:57सामाजिक संरचना और जनसांख्यिकीय यानी सोशल
- 6:28:01स्ट्रक्चर एंड डेमोग्राफीस की बात करते
- 6:28:03हैं।
- 6:28:04हां हां यहां 2011 की जनगणना का डाटा बहुत
- 6:28:06क्लियर तस्वीर दिखाता है।
- 6:28:08राइट और अगर हम एससी पॉपुलेशन की बात करें
- 6:28:11तो हरियाणा पूरे भारत में पांचवें स्थान
- 6:28:13पर है।
- 6:28:14हम बिल्कुल। राज्य की कुल जनसंख्या में यह
- 6:28:16हिस्सा लगभग 20.2% है और इस डाटा को थोड़ा
- 6:28:20और डीपली देखना पड़ेगा।
- 6:28:21ब्लॉक लेवल पर।
- 6:28:22हां, जो बैकवर्ड क्लासेस का वर्गीकरण है
- 6:28:25उसे फ्लो चार्ट की तरह समझें। एक है ब्लॉक
- 6:28:28ए
- 6:28:28जिसमें धनक आते हैं।
- 6:28:30सही कहा। और दूसरा है ब्लॉक बी जिसमें
- 6:28:33चमार जाति शामिल है।
- 6:28:35हम
- 6:28:35और यहां पर एक बड़ा एग्जाम अलर्ट है
- 6:28:38एस्पिरेंट्स के लिए।
- 6:28:39वो 50% वाला आंकड़ा।
- 6:28:41बिल्कुल। अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या
- 6:28:44का लगभग 50.8%
- 6:28:47हिस्सा अकेले चमार जाति का है।
- 6:28:50प्रीलिम्स की स्टेटमेंट्स में ऐसे ही
- 6:28:51फैक्ट्स उलझा देते हैं।
- 6:28:53हां क्योंकि स्टूडेंट्स अक्सर इस लेवल तक
- 6:28:55डाटा को क्लासिफाई नहीं करते।
- 6:28:56अब इसी सामाजिक संरचना से जुड़ी हुई कुछ
- 6:28:59पुरानी प्रथाएं हैं। रीति-रिवाज, विवाह और
- 6:29:01मृत्यु के सेक्शन में चलते हैं।
- 6:29:03देखिए करेवा प्रथा का जिक्र यहां बहुत
- 6:29:05जरूरी हो जाता है।
- 6:29:06जो कि विधवा पुनर्विवाह की एक रस्म है।
- 6:29:08राइट? यह मूल रूप से कृषि प्रधान समाज में
- 6:29:11आर्थिक सुरक्षा के लिए शुरू हुई थी।
- 6:29:14और एक दूसरी रस्म है पल्ला लगाना।
- 6:29:16हां, जो पति की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने
- 6:29:19का एक परंपरागत तरीका है।
- 6:29:21विवाह की रस्मों का भी एक पूरा क्रम होता
- 6:29:23है। उसे कैसे याद रखें?
- 6:29:25इसको एक स्टेप बाय स्टेप फ्लो चार्ट में
- 6:29:27सेट करते हैं। सबसे पहले क्या होता है?
- 6:29:30सगाई?
- 6:29:30बिल्कुल। सगाई के बाद अगली स्टेज आती है
- 6:29:33बान। यानी तेल की रस्म जो शुद्धिकरण की
- 6:29:37शुरुआत है।
- 6:29:38फिर उसके बाद बारात का आगमन होता है
- 6:29:41और अंत में तोरण मारने की रस्म होती है जो
- 6:29:44हरियाणा के सैन्य इतिहास को दर्शाती है।
- 6:29:46पर यहां एक यूपीएससी ट्रैप भी तो है।
- 6:29:49हां, बहुत बड़ा ट्रैप है एक शब्द को लेकर।
- 6:29:52काज।
- 6:29:53एक्जैक्टली। एग्जामिनर अक्सर काज को विवाह
- 6:29:56या खुशी के समारोह से जोड़कर सवाल बनाता
- 6:29:58है।
- 6:29:59जबकि काज का सीधा संबंध मृत्यु भोज से है।
- 6:30:02विवाह से इसका कोई लेना देना नहीं है।
- 6:30:03इसी उलझन पर एक शायरी फिर बैठती है यहां
- 6:30:06इरशाद और अस्मो की इन पुरानी किताबों में
- 6:30:08अक्सर सब उलझ जाते हैं।
- 6:30:10लेकिन वही पहुंचते हैं जो काज और बाण का
- 6:30:13असली फर्क समझ पाते हैं।
- 6:30:15बहुत खूब। अब इस समाज के पहनावे पर आते
- 6:30:18हैं। परंपरागत परिधान पुरुष और महिलाएं।
- 6:30:21कपड़े सिर्फ पहनावा नहीं होते। वो मौसम और
- 6:30:24मेहनत को दिखाते हैं।
- 6:30:25जैसे महिलाओं के लिए दमन बहुत ही मुख्य
- 6:30:28पहनावा रहा है।
- 6:30:30जो टखने तक लंबा और काफी भारी स्कर्ट होता
- 6:30:32है। खेती में काम करने के लिए बहुत
- 6:30:34प्रैक्टिकल था यह।
- 6:30:35और पुरुषों के परिधान में पगड़ियों का
- 6:30:37वर्गीकरण बहुत क्लियर होना चाहिए।
- 6:30:39सबसे पहले तो खांदवा है।
- 6:30:41जो सिर्फ कपड़ा नहीं है। परिवार के सम्मान
- 6:30:43का प्रतीक है।
- 6:30:44उसके बाद आती है पगड़ी
- 6:30:45जो मारवाड़ी शैली की होती है और तीसरा है
- 6:30:48साफा। जो सैन्य या मिलिट्री स्टाइल में
- 6:30:50बंधा जाता है।
- 6:30:51राइट? और यहां पर एक शब्द है जहां रैंकर्स
- 6:30:54फोकसिया वाला ट्रिगर लगता है।
- 6:30:56पिलिया के बारे में।
- 6:30:57जी हां, पिलिया यह एक पीले रंग का दुपट्टा
- 6:31:00होता है।
- 6:31:01जिसे मां बनने के बाद खासकर पुत्र जन्म पर
- 6:31:04ओढ़ा जाता है।
- 6:31:05एग्जाम में ऑकेजंस और परिधान को मैच करने
- 6:31:08वाले क्वेश्चंस में यह पॉइंट हमेशा आता
- 6:31:11है।
- 6:31:11अब परिधान की बात हुई है तो परंपरागत
- 6:31:13आभूषण कैसे छूट सकते हैं? शरीर के अलग-अलग
- 6:31:16अंगों के आभूषण देख लेते हैं।
- 6:31:18सर के लिए पुरली या कोका पहना जाता है।
- 6:31:21कानों की बात करें तो वहां बुझाली पहनी
- 6:31:24जाती है।
- 6:31:24और पैरों के लिए काफी भारी कड़ी होती हैं।
- 6:31:26जिन्हें छलकारे भी कहते हैं।
- 6:31:28पर इस लिस्ट में एक बहुत ट्रिकी आभूषण है।
- 6:31:31इस पर एग्जाम अलर्ट है।
- 6:31:33चौक?
- 6:31:34हां, चौक। बहुत से एस्पिरेंट्स पिछले
- 6:31:37पेपर्स में यही गलती कर चुके हैं। उन्हें
- 6:31:39लगता है यह गले का आभूषण है।
- 6:31:41जबकि चौक सर पर पहने जाने वाला आभूषण है।
- 6:31:44नेगेटिव मार्किंग से बचना है तो ऐसी छोटी
- 6:31:47डिटेल्स ध्यान रखनी होंगी।
- 6:31:49बिल्कुल। अब संस्कृति का सबसे जीवंत
- 6:31:51हिस्सा देखते हैं हरियाणवी भाषा का विकास।
- 6:31:54हम भाषा की जब बात आती है तो पहली चीज
- 6:31:57लिपि है।
- 6:31:58हरियाणवी की अपनी कोई अलग लिपि नहीं है।
- 6:32:00इसे देवनागरी में ही लिखा जाता है।
- 6:32:02और इसकी भाषाई वंशावली बहुत तार्किक है।
- 6:32:05चलिए इसका ट्री फ्लो चार्ट बनाते हैं।
- 6:32:07शुरुआत कहां से होती है?
- 6:32:08सबसे ऊपर है इंडो आर्यन भाषा परिवार।
- 6:32:11वहां से ये संस्कृत में आती है।
- 6:32:13राइट? संस्कृत से आगे बढ़कर यह शौरसेनी
- 6:32:16अपभ्रंश बनती है।
- 6:32:17फिर वहां से पश्चिमी हिंदी का रूप लेती है
- 6:32:19और अंततः हरियाणवी भाषा के रूप में विकसित
- 6:32:22होती है।
- 6:32:22इसमें एक नाम डॉक्टर ग्रियसन का बहुत आता
- 6:32:25है।
- 6:32:26उन्होंने ही हरियाणवी को बंगारू नाम दिया
- 6:32:28था। यह फैक्ट याद रखना है।
- 6:32:30एज वी टीच एट दिशांत आईएएस हर विषय की जड़
- 6:32:33तक जाना जरूरी है। बिना बैकग्राउंड समझे
- 6:32:35साहित्य समझ नहीं आएगा। और चकि बंगारू का
- 6:32:38जिक्र हो ही गया है तो हरियाणा की प्रमुख
- 6:32:40बोलियां और उनका मैप देख लेते हैं।
- 6:32:42इसको दिशाओं के हिसाब से बांटना सबसे आसान
- 6:32:45रहेगा।
- 6:32:45हां तो उत्तर की तरफ अगर देखें तो कौरवी
- 6:32:48का प्रभाव है।
- 6:32:49फिर थोड़ा मध्य में आते हैं। रोहतक, जींद,
- 6:32:51हिसार की बेल्ट।
- 6:32:52यहां मुख्य रूप से बंगारू बोली जाती है।
- 6:32:55दक्षिण में क्या स्थिति है? दक्षिण में
- 6:32:57मेवात और महेंद्रगढ़ की बेल्ट है। जहां
- 6:32:59मेवाती और अहिरवती का दबदबा है।
- 6:33:01और पश्चिम में
- 6:33:02राजस्थान बॉर्डर के पास बागरी बोली जाती
- 6:33:05है। इसके अलावा जो पूर्वी बॉर्डर है
- 6:33:07फरीदाबाद, पलवल वहां ब्रज भाषा मिलती है।
- 6:33:10बोलियों का यह मैप तो सच में बहुत विविध
- 6:33:12है। इसी विविधता पर एक बात याद आती है।
- 6:33:14सुनाइए।
- 6:33:15कौरवी से लेकर बागरी तक हर बोली में एक
- 6:33:17अलग ही रवानी है। यूपीएससी का सिलेबस
- 6:33:20समुंदर है और हरियाणवी बोलियों की अपनी ही
- 6:33:22कहानी है।
- 6:33:23हम बहुत बढ़िया। चलिए अब इस भाषा और समाज
- 6:33:27के एक और पहलू पर चलते हैं। शकुन और
- 6:33:30अंधविश्वास।
- 6:33:32प्राचीन काल से लोग प्रकृति से ही भविष्य
- 6:33:34पढ़ते थे।
- 6:33:35जैसे हिरण या मैकपाई पक्षी का दिखना।
- 6:33:38जिसे अच्छा शकुन माना जाता है।
- 6:33:39और दिन में कौवे का बोलना बुरा शगुन होता
- 6:33:42है।
- 6:33:42इसमें चीखने को लेकर एक बड़ा ट्रैप है ना?
- 6:33:45हां। यह एक यूपीएससी ट्रैप है। जहां
- 6:33:48एग्जाम सेट करने वाला बहुत बारीक अंतर
- 6:33:51पूछता है।
- 6:33:52कि एक बार छींकना तो बुरा शकुन है।
- 6:33:54पर अगर लगातार दो बार छींक आ जाए तो वह
- 6:33:56बुरा नहीं माना जाता।
- 6:33:57स्टेटमेंट्स में इसी एक और दो बार के
- 6:33:59लॉजिक को घुमा कर पूछते हैं।
- 6:34:01इसलिए फोकस हमेशा शार्प होना चाहिए। शार्प
- 6:34:04फोकस के साथ अब लोक ज्ञान, मुहावरे और
- 6:34:07लोकोक्तियां देखते हैं।
- 6:34:08हरियाणवी मुहावरे सीधे प्रैक्टिकल लाइफ से
- 6:34:11जुड़े हैं।
- 6:34:11जैसे चिलम भरना
- 6:34:12जिसका एग्जैक्ट अर्थ है किसी की खुशामद या
- 6:34:16साइको फैंसी करना।
- 6:34:17एक और है थाली बैठी नान काटे।
- 6:34:20मतलब जब कोई व्यक्ति बिल्कुल निरुपयोगी या
- 6:34:22फालतू काम कर रहा हो।
- 6:34:24और आदित्य खेलना।
- 6:34:25इसका इस्तेमाल प्यास लगने के संदर्भ में
- 6:34:27होता है। पर यहां एक एग्जामिलर जरूर लिख
- 6:34:30लें।
- 6:34:30वो एक हांडी वाला मुहावरा।
- 6:34:32हां। एक हांडी में दो पेट करना।
- 6:34:34इसका क्या अर्थ है?
- 6:34:35इसका अर्थ है पक्षपात पूर्ण व्यवहार या
- 6:34:38बायस्ड बिहेवियर।
- 6:34:39तो इसे मेंस में कैसे यूज करें?
- 6:34:41देखिए जब मेंस में एथिक्स या सोसाइटी का
- 6:34:44आंसर लिख रहे हो वहां डिस्क्रिमिनेशन
- 6:34:46पॉइंट आउट करने के लिए यह लोकोक्ति बहुत
- 6:34:49इंपैक्ट डालती है।
- 6:34:50बहुत प्रैक्टिकल अप्रोच है ये। अब इसी
- 6:34:52अप्रोच के साथ प्राचीन और नाथ साहित्य का
- 6:34:54एनालिसिस करते हैं।
- 6:34:55साहित्य में सबसे पहला नाम चौरंगीनाथ का
- 6:34:58आता है।
- 6:34:58जिन्हें हरियाणा में हिंदी का प्रथम गद्य
- 6:35:01लेखक माना जाता है।
- 6:35:02और महर्षि वेदव्यास ने सरस्वती नदी के तट
- 6:35:05पर ही महाभारत रची थी। यह एक बड़ा
- 6:35:08हिस्टोरिकल फैक्ट है।
- 6:35:09नाथ परंपरा का विकास क्रम भी पूछा जाता
- 6:35:11है।
- 6:35:12इसकी लिनिय जैसे चलती है। सबसे पहले
- 6:35:14आदिनाथ
- 6:35:15फिर उनसे ज्ञान गया मत्सेंद्रनाथ के पास।
- 6:35:17उसके बाद गोरखनाथ आते हैं
- 6:35:19और वहां से चौरंगीनाथ आगे बढ़ते हैं।
- 6:35:22यस। यह क्रोनोलॉजी क्वेश्चंस के लिए बेस्ट
- 6:35:25मैपिंग है।
- 6:35:26नाथ साहित्य के बाद सूफी और संत परंपरा का
- 6:35:29दौर शुरू होता है।
- 6:35:29इस दौर में शेख मोहम्मद तुर्क का नाम सबसे
- 6:35:32ऊपर है।
- 6:35:33जो हरियाणा के पहले सूफी संत थे।
- 6:35:34और उनके बाद संत गरीब दास आते हैं जिनका
- 6:35:37जन्म 1717 में झज्जर में हुआ।
- 6:35:40उन्होंने हिंगुल की रचना की थी।
- 6:35:42यहां हमें युगों की तुलना करनी पड़ेगी। की
- 6:35:44यानी 13वीं शताब्दी का सूफी युग जिसके
- 6:35:46चेहरे शेख तुर्क है
- 6:35:48और 18वीं शताब्दी का संत युग जिसमें गरीब
- 6:35:51दास और नित्यानंद जैसे संत हैं।
- 6:35:53दोनों युगों का अपना अलग ही प्रभाव था
- 6:35:55समाज पर।
- 6:35:56अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड
- 6:35:58देयर टीम हम हमेशा ऐसी तुलनात्मक स्टडी पर
- 6:36:02जोर देते हैं।
- 6:36:03क्योंकि फैक्ट्स तो सब याद करते हैं।
- 6:36:05ट्रेंड समझना जरूरी है।
- 6:36:06बिल्कुल।
- 6:36:07वैसे इस संत परंपरा के स्ट्रगल को देखकर
- 6:36:10एक एस्पिरेंट के स्ट्रगल की याद आ गई।
- 6:36:12हां, शायरी बन गई क्या? हां सुनिए सूफी और
- 6:36:15संतों की वाणी में भी जिंदगी का फलसफा छपा
- 6:36:18है। एक एस्पिरेंट की रातों की मेहनत में
- 6:36:20ही तो लवसना का रास्ता लिखा है।
- 6:36:22बहुत सटीक। अब 360 डिग्री विश्लेषण
- 6:36:25साहित्य के प्रथम की तरफ बढ़ते हैं।
- 6:36:27सबसे पहले फैक्ट्स देख लेते हैं।
- 6:36:29हरियाणा का पहला उपन्यास झाड़ू फेरी था।
- 6:36:32जिसे राजाराम शास्त्री ने लिखा था।
- 6:36:34और पहली कहानी थी लड़की की बहादुरी।
- 6:36:37इसके रचनाकार माधव प्रसाद मिश्रा थे।
- 6:36:39इन सब का एक क्रोनोलॉजिकल विकास है ना।
- 6:36:41हां। देखिए समाज में सबसे पहले छोटी कथाएं
- 6:36:44प्रचलित होती हैं यानी फर्स्ट स्टोरी।
- 6:36:46फिर वो बड़ी होती हैं, विस्तृत होती हैं।
- 6:36:48राइट? तब जाकर वो उपन्यास या फर्स्ट नवेल
- 6:36:51का रूप लेती हैं।
- 6:36:52और आखिर में उन्हें मंच पर लाने के लिए
- 6:36:54नाटक का रूप दिया जाता है।
- 6:36:56बिल्कुल। क्रोनोलॉजी याद रहेगी तो रटना
- 6:36:58नहीं पड़ेगा।
- 6:36:59अब इसी क्रम में आधुनिक उपन्यासकार और
- 6:37:01नाटककार की एंट्री होती है।
- 6:37:02मोहन चोपड़ा का नाम इस दौर में बहुत बड़ा
- 6:37:04है।
- 6:37:05उनके उपन्यास, टूटा हुआ आदमी और बाहें
- 6:37:07बहुत फेमस हुए। और नाटकों में स्वदेश दीपक
- 6:37:10का कोर्ट मार्शल
- 6:37:11जिसने सामाजिक यथार्थ को स्टेज पर ला दिया
- 6:37:13था।
- 6:37:13यहां पर सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क टेस्ट
- 6:37:15एग्जाम में ऑथर टू वर्क मैपिंग पूछी
- 6:37:18जाएगी।
- 6:37:18इसको लिस्ट आउट कर लेते हैं।
- 6:37:19हां, राजाराम शास्त्री को मैच करें ईख की
- 6:37:22खेती के साथ।
- 6:37:23मोहन चोपड़ा का संबंध सुबह से पहले से है।
- 6:37:25और स्वदेश दीपक की रचना जलता हुआ रथ है।
- 6:37:28यह मैपिंग सीधे-सीधे ऑप्शंस एलिमिनेट करने
- 6:37:31में मदद करेगी। अब थोड़ा उर्दू साहित्य और
- 6:37:33कविता पर फोकस करते हैं।
- 6:37:34हरियाणा में उर्दू का काफी स्ट्रांग बेस
- 6:37:36रहा है। खासकर अल्ताफ हुसैन हाली का
- 6:37:39योगदान।
- 6:37:40उनका जन्म पानीपत में हुआ था। उनकी लेगसी
- 6:37:42इतनी बड़ी है कि उनके नाम पर हाली
- 6:37:45पुरस्कार दिया जाता है।
- 6:37:46उनकी लेगसी को फ्लो चार्ट में इस तरह याद
- 6:37:50रखें। पहला पॉइंट वो मिर्जा गालिब के
- 6:37:53शिष्य थे। दूसरा [गला साफ़ करने की आवाज़]
- 6:37:54पॉइंट उनका जन्म स्थान पानीपत है
- 6:37:57और तीसरा उनकी सबसे बड़ी रचना मुसद्दस
- 6:38:00हाली है।
- 6:38:01यहां एक बहुत जरूरी की फैक्ट भी है जो
- 6:38:04अक्सर छूट जाता है।
- 6:38:05हां उर्दू के पहले राज्यक अनूपचंद आफताब
- 6:38:09थे।
- 6:38:10लोग अक्सर हाली पर टिक लगा देते हैं जो कि
- 6:38:12गलत हो जाएगा।
- 6:38:13अब साहित्य से आगे बढ़कर सामाजिक जागरूकता
- 6:38:16के एक नए टूल को देखते हैं।
- 6:38:18यानी हरियाणा में पत्रकारिता का इतिहास।
- 6:38:201885 में जियालाल जैन ने पहला हिंदी
- 6:38:24समाचार पत्र शुरू किया
- 6:38:26जिसका नाम था जैन प्रकाश
- 6:38:28और उसके बाद राष्ट्रीय आंदोलन के टाइम पर
- 6:38:30एक बड़ा अखबार आया
- 6:38:321930 में श्रीराम शर्मा द्वारा हरियाणा
- 6:38:35तिलक
- 6:38:35यह उर्दू और हिंदी दोनों में निकलता था
- 6:38:38इसकी टाइमलाइन कैसे बनेगी टाइमलाइन को चार
- 6:38:41हिस्सों में याद रखें 1885 में जैन प्रकाश
- 6:38:46फिर 1916 में जाट गजेट
- 6:38:49उसके बाद 1930 में हरियाणा तिलक
- 6:38:52और फाइनली 1936 में ग्राम सेवक
- 6:38:55मॉडर्न हिस्ट्री के क्वेश्चंस इस
- 6:38:57क्रिनोलॉजी से आसानी से हल हो जाते हैं।
- 6:38:59वहां हल होते हैं पर पढ़ते-पढ़ते
- 6:39:01स्टूडेंट्स का हाल बेहाल हो कर लेते हैं।
- 6:39:03क्यों फिर से शायरी?
- 6:39:04हां बिल्कुल। अखबारों के इन पुराने पन्नों
- 6:39:07में जो इतिहास दर्ज हो गया उसे रटते-रटते
- 6:39:09एस्पिरेंट का करंट अफेयर्स ही मर्ज हो
- 6:39:11गया।
- 6:39:11हम थोड़ी नींद तो उठती है सिलेबस देखकर।
- 6:39:14पर चलिए साहित्यिक अकादमियां और पत्रिकाएं
- 6:39:17देख लेते हैं।
- 6:39:18इन एकेडमीज का क्या रिलेशन है?
- 6:39:20देखिए हरियाणा में हर भाषा की अकादमी अपनी
- 6:39:23एक स्पेशल पत्रिका निकालती है।
- 6:39:25और यह डायरेक्ट मैच तो फॉलोइंग में आता
- 6:39:27है।
- 6:39:27यस प्रीलिम्स अलर्ट है ये। हरियाणा
- 6:39:30साहित्य अकाडमी निकालती है हरिगंधा।
- 6:39:33संस्कृत एकेडमी की पत्रिका का नाम
- 6:39:35हरिप्रभा है।
- 6:39:36और उर्दू एकेडमी निकालती है जमुना तट। एज
- 6:39:39वी टीच इट दिशांत आईएस ऐसी सॉलिड मैपिंग
- 6:39:42से ही एलिमिनेशन टेक्निक फेल प्रूफ बनती
- 6:39:45है।
- 6:39:45एक्जेक्टली एक मैच भी पकड़ लिया तो आंसर
- 6:39:48निकल आता है।
- 6:39:48इन एकेडमीज द्वारा दिए जाने वाले प्रमुख
- 6:39:50साहित्यिक पुरस्कार भी समझ लेते हैं।
- 6:39:52हरियाणा साहित्य रत्ना में ₹ाई लाख दिए
- 6:39:55जाते हैं।
- 6:39:56और सबसे सर्वोच्च पुरस्कार है सुर सम्मान
- 6:39:59जिसमें 5 लाख मिलते हैं।
- 6:40:00इसके अलावा उर्दू साहित्य के लिए हाली
- 6:40:02पुरस्कार है जिसकी बात हमने अभी की।
- 6:40:05इसकी हायरार्की क्या होगी? अवार्ड
- 6:40:07हायरार्की में सबसे ऊपर विशेष योगदान वाले
- 6:40:09आते हैं। जैसे साहित्य साधना।
- 6:40:11उसके बाद विशिष्ट कार्य के लिए सुर सम्मान
- 6:40:14मिलता है।
- 6:40:14और फिर महिला रचनाकारों को बढ़ावा देने के
- 6:40:17लिए श्रेष्ठ महिला जैसे पुरस्कार।
- 6:40:19अब वक्त आ गया आज की पढ़ाई को टेस्ट करने
- 6:40:21का। प्रीलिम्स ड्रिल साहित्य से शुरू करते
- 6:40:23हैं।
- 6:40:24चलिए देखते हैं एलिमिनेशन टेक्निक काम आती
- 6:40:28है या नहीं।
- 6:40:28पहला प्रश्न हरियाणा के पहले उपन्यास के
- 6:40:31संबंध में कथनों पर विचार करें। हम्
- 6:40:34कथन एक, यह राजाराम शास्त्री द्वारा लिखा
- 6:40:36गया था। कथन दो, उपन्यास का शीर्षक झाड़ू
- 6:40:40फेरी है।
- 6:40:40और तीसरा,
- 6:40:41कथन तीन, यह 17वी शताब्दी में लिखा गया
- 6:40:44था।
- 6:40:44यहां सीधे आंसर ढूंढने की बजाय ऑप्शंस
- 6:40:48देखते हैं।
- 6:40:48बिल्कुल। कथन एक और दो तो परफेक्टली मैच
- 6:40:51कर रहे हैं।
- 6:40:52पर कथन तीन में 17वीं शताब्दी लिखा है।
- 6:40:55हमने अभी क्रोनोलॉजी में समझा था कि
- 6:40:57उपन्यास आधुनिक काल की विधा है।
- 6:40:59तो यह इतना पुराना नहीं हो सकता। इसलिए
- 6:41:02तीसरा कथन गलत हो जाता है।
- 6:41:04तो सही विकल्प होगा केवल दो कथन सही हैं।
- 6:41:07बिल्कुल सटीक।
- 6:41:08अब प्रीलिम्स ड्रिल बोलियां देखते हैं।
- 6:41:10यहां भी तीन कथन है।
- 6:41:11ओके।
- 6:41:11कथन एक बांगू सबसे अधिक बोली जाने वाली
- 6:41:15बोली है। कथन दो अहिरवाती महेंद्रगढ़
- 6:41:18क्षेत्र में बोली जाती है।
- 6:41:20हम
- 6:41:20कथन तीन हरियाणवी लिपि गुरुमुखी है।
- 6:41:23देखिए यहां सीधा एग्जाम ट्रैप रखा गया है।
- 6:41:26पहले दो कथन तो ज्योग्राफिकल मैप से
- 6:41:29वेरीफाई हो जाते हैं।
- 6:41:30हां। बांगरू मध्य में और अहिरवाती दक्षिण
- 6:41:33में। पर तीसरा कथन लिपि वाला बिल्कुल गलत
- 6:41:36है। क्योंकि हमने शुरू में बात की थी कि
- 6:41:39हरियाणवी देवनागरी में लिखी जाती है।
- 6:41:41तो इसका आंसर भी यही होगा कि केवल दो कथन
- 6:41:43सही है।
- 6:41:44राइट। एग्जामिनर के ट्रैप्स ऐसे ही
- 6:41:46कंफ्यूज करते हैं।
- 6:41:47इसीलिए मैं कहता हूं एग्जामिनर के ट्रैप
- 6:41:50इतने हसीन होते हैं एक लिपि के शब्द से ही
- 6:41:53पूरे आंसर के मायने बदल जाते हैं।
- 6:41:54सही बात है। चलिए आखिरी प्रीलिम्स ड्रिल
- 6:41:57पत्रकारिता की तरफ बढ़ते हैं।
- 6:41:59ये हरियाणा तिलक के बारे में है।
- 6:42:01कथन क्या है?
- 6:42:02एक इसे श्रीराम शर्मा ने शुरू किया। दो यह
- 6:42:06हिंदी और उर्दू में प्रकाशित हुआ था। तीन
- 6:42:10इसे 1930 में लांच किया गया। अब यहां
- 6:42:13लॉजिक लगाएं तो हमने टाइमलाइन में इन
- 6:42:16तीनों फैक्ट्स को एक ही जगह मैप किया था।
- 6:42:18श्री राम शर्मा, बाइलिंगुअल पब्लिकेशन और
- 6:42:21साल 1930।
- 6:42:23यानी यहां पर तीनों कथन पूरी तरह से
- 6:42:25तथ्यात्मक और सत्य हैं। ऑल स्टेटमेंट्स आर
- 6:42:29करेक्ट।
- 6:42:29एक्सीलेंट। अब आते हैं द टॉपर समरी पर।
- 6:42:32एक क्विक रिककैप दे दीजिए।
- 6:42:34स्टूडेंट्स अपने क्लिपबोर्ड पर नोट करें।
- 6:42:36पहला उपन्यास झाड़ू फेरी। पहला पेपर जैन
- 6:42:39प्रकाश।
- 6:42:40राइट? मुख्य बोली बांगू है और एससी
- 6:42:43जनसंख्या 20.2% के साथ हरियाणा पांचवें
- 6:42:47रैंक पर है।
- 6:42:48और इस पूरी डीप ड्राइव को मेंस के पॉइंट
- 6:42:50ऑफ व्यू से एक सिंगल कोट में ऐसे लिखा जा
- 6:42:52सकता है।
- 6:42:53जी
- 6:42:53हरियाणवी साहित्य इसकी कृषि, धैर्य और
- 6:42:57सैन्य इतिहास का दर्पण है।
- 6:42:59यह बहुत ही पावरफुल स्टेटमेंट है। आगे
- 6:43:01आंसर्स में कोट करने के लिए।
- 6:43:03बिल्कुल।
- 6:43:03एस्पिरेंट्स के लिए एक और अहम सलाह। सतत
- 6:43:06पुनरीक्षण ही सफलता की कुंजी है।
- 6:43:07कंसिस्टेंट रिवीजन इज द की। अगले मॉड्यूल
- 6:43:11में हम हरियाणा का भूगोल डिटेल में कवर
- 6:43:14करेंगे।
- 6:43:14दिस लेक्चर वास बाय दशांत आईएस।
- 6:43:16दिस लेक्चर वास बाय दशांत आईएस। आज का यह
- 6:43:19गहन विश्लेषण सीधे उस राज्य की मिट्टी से
- 6:43:22जुड़ा है जो भारत को साहित्य के पन्नों
- 6:43:25पर, युद्ध के मैदानों में और ओलंपिक के
- 6:43:28पोडियम पर एक अलग ही पहचान देता है। जी
- 6:43:31हां, हरियाणा राज्य। और आज जो अध्ययन
- 6:43:33सामग्री हमारी मेज पर है वह दिशांत आईएएस
- 6:43:36और मेंटर राहुल प्रकाश सर तथा उनकी टीम के
- 6:43:39मार्गदर्शन में तैयार किए गए अत्यंत शोध
- 6:43:42परक नोट्स हैं।
- 6:43:42हमारा मिशन केवल कुछ तथ्यों को रटना नहीं
- 6:43:45है बल्कि यह डिकोड करना है कि कैसे एक
- 6:43:48भौगोलिक रूप से छोटा सा राज्य भारतीय सेना
- 6:43:52में 10% सैनिकों का योगदान देता है।
- 6:43:55वैश्विक खेलों में भारत का नेतृत्व करता
- 6:43:57है और अपनी प्राचीन जड़ों को सींचे हुए
- 6:44:00है। देखिए जो भी जिज्ञासु एस्पिरेंट्स इस
- 6:44:03चर्चा को सुन रहे हैं उनके लिए विशेष रूप
- 6:44:05से डिजाइन किया गया है। हम उन एग्जाम
- 6:44:07ट्रैप्स यानी परीक्षा में फंसाने वाला
- 6:44:10सवालों को उजागर करेंगे जो ओएमआर शीट पर
- 6:44:12नेगेटिव मार्किंग का कारण बनते हैं।
- 6:44:14हम सिविल सेवा परीक्षाओं में जो प्रश्न
- 6:44:17आते हैं वे सतही ज्ञान की नहीं बल्कि
- 6:44:20कांसेप्ट्स की स्पष्टता की मांग करते हैं।
- 6:44:23सही कहा ना मैंने?
- 6:44:24बिल्कुल। और दिशांत आईएस के इस सोर्स
- 6:44:27मटेरियल में वह तमाम बारीकियां मौजूद हैं
- 6:44:30जो एक साधारण उत्तर और रैंक लाने वाले
- 6:44:33उत्तर के बीच सीधा अंतर पैदा करती हैं।
- 6:44:35तो चलिए सबसे पहले साहित्य और सांस्कृतिक
- 6:44:38धरोहर के विषय को खोलते हैं। सामग्री की
- 6:44:41शुरुआत हरियाणा साहित्य अकाडमी से होती है
- 6:44:44जिसकी स्थापना जुलाई 1970 में हुई थी।
- 6:44:47मुख्यालय पंचकूला में है।
- 6:44:49लेकिन यहां एक प्रशासनिक तथ्य है जो अक्सर
- 6:44:51चौंका देता है। नोट्स स्पष्ट करते हैं कि
- 6:44:54राज्य के मुख्यमंत्री इस अकाडमी के पदेन
- 6:44:57अध्यक्ष यानी एक्स ऑफिसियो प्रेसिडेंट
- 6:45:00होते हैं।
- 6:45:00आमतौर पर तो साहित्य के क्षेत्र में किसी
- 6:45:03बड़े लेखक को ऐसे पदों पर देखा जाता है।
- 6:45:05तो इसके पीछे क्या कारण हो सकता है?
- 6:45:08यह एक बहुत ही शानदार प्रशासनिक संरचना
- 6:45:10है। एक्स ऑफिसियो का अर्थ है कि जो भी
- 6:45:13व्यक्ति मुख्यमंत्री होगा वह स्वतः ही
- 6:45:15अध्यक्ष बन जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि राज्य
- 6:45:18की सांस्कृतिक नीतियों को सीधे सरकार के
- 6:45:21सर्वोच्च स्तर से समर्थन मिल सके।
- 6:45:23और यहीं पर परीक्षकों का सबसे पसंदीदा
- 6:45:25एग्जाम ट्रैप आता है।
- 6:45:27हम पत्रिकाओं के नाम को लेकर। हां,
- 6:45:30एस्पिरेंट्स को यह समझना चाहिए कि साहित्य
- 6:45:33अकादमी की मुख्य मासिक पत्रिका का नाम
- 6:45:35हरिगंधा है। परीक्षा में अक्सर विकल्प के
- 6:45:38तौर पर कथा समय या सप्तसिंधु दे दिया जाता
- 6:45:42है।
- 6:45:42जो कि बहुत ही कंफ्यूजिंग है। सामग्री में
- 6:45:45साफ लिखा है कि कथा समय वास्तव में
- 6:45:47हरियाणा ग्रंथ अकादमी की पत्रिका है और
- 6:45:50सप्तसिंधु भाषा विभाग से जुड़ी है।
- 6:45:53एक्सैक्टली और दिशांत आईएएस की कक्षाओं
- 6:45:56में हम लगातार इसी एलिमिनेशन पर जोर देते
- 6:45:58हैं। इसी बात पर एक छोटी सी पंक्ति याद आ
- 6:46:00रही है सीरियस एस्पिरेंट्स के लिए।
- 6:46:02अरे वाह! बिल्कुल सुनाइए।
- 6:46:04तथ्यों के समंदर में जो कांसेप्ट की नाव
- 6:46:07चलाएगा ओएमआर शीट के हर ट्रैप से वही बच
- 6:46:11कर आएगा।
- 6:46:11क्या बात है और प्रगतिशील कदमों की बात
- 6:46:14करें तो साहित्य अकादमी ही वो पहली संस्था
- 6:46:16थी जिसने पत्रिकाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण
- 6:46:19को बढ़ावा दिया था। सर
- 6:46:20और जैसा कि राहुल प्रकाश सर हमेशा कहते
- 6:46:23हैं सिर्फ संस्थाओं के नाम काफी नहीं है।
- 6:46:26उनके वित्तीय अपडेट्स भी ट्रैक करने होते
- 6:46:28हैं।
- 6:46:28साहित्य के पुरस्कारों को ही ले लीजिए।
- 6:46:31सबसे बड़ा सम्मान सूर सम्मान है और नोट्स
- 6:46:35में एक बहुत बड़ा प्रीलिम्स अलर्ट है इसके
- 6:46:38लिए। हां, पुरानी किताबों में इसकी
- 6:46:40पुरस्कार राशि आज भी ₹1.5 लाख लिखी है।
- 6:46:42लेकिन वर्तमान में इसे बढ़ाकर ₹5 लाख कर
- 6:46:45दिया गया है।
- 6:46:46जो स्टूडेंट्स खुद को अपडेट नहीं रखते, वह
- 6:46:48सीधा इस जाल में फंसते हैं। अन्य
- 6:46:51पुरस्कारों में हरियाणा साहित्य रत्न और
- 6:46:54माधव प्रसाद मिश्र सम्मान दोनों की राशि
- 6:46:57ढाई ढाई लाख रुपए है।
- 6:46:59अब अगर हम सांस्कृतिक प्रतीकों पर आए तो
- 6:47:01बाबू बालूमुकुंद गुप्त का नाम ऐतिहासिक
- 6:47:03है। गुड़ियानी रेवाड़ी से आने वाले गुपजी
- 6:47:05को हिंदी व्यंग का जनक माना जाता है।
- 6:47:08उनकी कृति शिव शंभू के चिट्ठे जो लॉर्ड
- 6:47:11कर्जन की नीतियों पर एक तीखा प्रहार थी।
- 6:47:14बिल्कुल और कला की इस चर्चा में संगीत को
- 6:47:16कैसे भूल सकते हैं? मेवाती घराने के पंडित
- 6:47:18जसराज जिनका जन्म पीली मंदोरी में हुआ था।
- 6:47:22उनकी कला इतनी पारलौकिक थी कि नासा ने
- 6:47:252006 में एक छोटे ग्रहे का नाम पंडित
- 6:47:28जसराज 2006 वीपी32 रखा था। एक छोटे से
- 6:47:33गांव से ब्रह्मांड तक की यह यात्रा अद्भुत
- 6:47:36है। अब साहित्य से आगे बढ़ते हुए शौर्य
- 6:47:38इतिहास और महापुरुषों के हमारे अगले
- 6:47:41सेक्शन पर आते हैं।
- 6:47:42यहां एक आंकड़ा है जो हैरान करता है। भारत
- 6:47:45के कुल क्षेत्रफल का मुश्किल से 1.3%
- 6:47:49होने के बावजूद यह राज्य भारतीय सेना में
- 6:47:52लगभग 10% सैनिकों का योगदान देता है।
- 6:47:54यह कोई संयोग नहीं है। यह विक्टोरिया
- 6:47:57क्रॉस की उस विरासत का हिस्सा है जिसे
- 6:47:59ब्रिटिश काल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार
- 6:48:01माना जाता था।
- 6:48:02जैसे रिसालदार बदलू सिंह जिन्होंने सितंबर
- 6:48:051918 में प्रथम विश्व युद्ध में जॉर्डन
- 6:48:08वैली में अदम्य साहस दिखाते हुए पहला वीसी
- 6:48:11जीता था।
- 6:48:11और उसके बाद 1941 में इरिट्रिया में
- 6:48:14सूबेदार फ्रिजपाल राम और द्वितीय विश्व
- 6:48:16युद्ध में बर्मा मोर्चे पर उमराव सिंह ने
- 6:48:18यह सम्मान प्राप्त किया। स्वतंत्र भारत की
- 6:48:21बात करें तो परमवीर चक्र का नाम सबसे ऊपर
- 6:48:23आता है।
- 6:48:24जी हां, 1971 के भारतपाक युद्ध के नायक
- 6:48:27थ्री ग्रेनेडियस के मेजर होशियार सिंह जो
- 6:48:30सिसाना सोनीपत से आते हैं। वह आज तक राज्य
- 6:48:32से परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले एकमात्र
- 6:48:35व्यक्ति हैं।
- 6:48:35कद पुरस्कार राशि को लेकर राज्य सरकार
- 6:48:39परमवीर चक्र के लिए ₹2 करोड़ देती है।
- 6:48:42ट्रैप यह है कि एस्पिरेंट्स को युद्ध काल
- 6:48:44यानी वॉर टाइम और शांति काल यानी पीस टाइम
- 6:48:47के पुरस्कारों का अंतर पता होना चाहिए।
- 6:48:49शांति काल के सर्वोच्च सम्मान अशोक चक्र
- 6:48:52के लिए 1 करोड़ मिलते हैं।
- 6:48:53अक्सर प्रश्न घुमाकर पूछा जाता है और
- 6:48:56विकल्प कंफ्यूज करते हैं।
- 6:48:58इसी पर दिशांत आईएस के स्टाइल में एक और
- 6:49:00विचार आता है। पीस टाइम और वॉर टाइम का जो
- 6:49:03रखे सटीक हिसाब रैंकर्स के लिस्ट में वही
- 6:49:06लाएगा इंकलाब।
- 6:49:07बहुत खूब। यह शौर्य परंपरा 1857 के प्रथम
- 6:49:11स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी है। बल्लभगढ़
- 6:49:14के शासक राजा नाहर सिंह जिन्हें 1858 में
- 6:49:17चांदनी चौक पर फांसी दी गई।
- 6:49:20रेवाड़ी के राव तुलाराम जिन्होंने नारनौल
- 6:49:22में नेतृत्व किया और 1863 में काबुल में
- 6:49:25अंतिम सांस ली।
- 6:49:26और हिसार को अपनी राजनीति का केंद्र बनाने
- 6:49:28वाले पंजाब केसरी लाला लाजपत राय। इन
- 6:49:32ऐतिहासिक नायकों के साथ आधुनिक कृषि
- 6:49:34परिदृश्य को आकार देने वाले सर छोटूराम का
- 6:49:37जिक्र बहुत जरूरी है। गढ़ी सांपला रोहतक
- 6:49:39में जन्मे सर छोटूराम की यात्रा बड़ी
- 6:49:41दिलचस्प है। 1916 में कांग्रेस फिर 1923
- 6:49:45में यूनियनिस्ट पार्टी और 1924 में
- 6:49:48उन्होंने जमींदारा लीग की स्थापना की।
- 6:49:50नोट्स में एक शानदार विजुअल या माइंड मैप
- 6:49:53की तरह समझाया गया है कि कैसे भाखड़ा बांध
- 6:49:56परियोजना की मूल अवधारणा का श्रेय सर
- 6:49:59छोटूराम को ही जाता है।
- 6:50:00उन्होंने समझ लिया था कि केवल भूमि सुधार
- 6:50:02से काम नहीं चलेगा। सिंचाई का ढांचा
- 6:50:05चाहिए। यह प्रशासनिक दूरदर्शिता है जिसे
- 6:50:07हम दिशांत आईएएस में बहुत गहराई से
- 6:50:09एनालाइज करते हैं।
- 6:50:10और आधुनिक प्रतीकों में कल्पना चावला का
- 6:50:13नाम है। करनाल में जन्मी भारत की पहली
- 6:50:15महिला जो अंतरिक्ष में गई। यहां राहुल
- 6:50:18प्रकाश सर की टीम ने एक बहुत ही ट्रिकी
- 6:50:19यूपीएससी ट्रैप पकड़ा है। जन्मतिथि का
- 6:50:22ट्रैप।
- 6:50:22हां, वास्तविक जन्मतिथि 17 मार्च 1962 है।
- 6:50:26लेकिन प्रमाण पत्र पर यह 1 जुलाई 1961
- 6:50:30दर्ज है।
- 6:50:31और आयोग आधिकारिक रिकॉर्ड्स को ही मानता
- 6:50:33है। इसलिए 1 जुलाई 1961 को ही सही उत्तर
- 6:50:36मानना है। सीरियस एस्पिरेंट्स इसे स्टार
- 6:50:38मार्क कर लें।
- 6:50:39अब इस डीप ड्राइव के सबसे रोमांचक हिस्से
- 6:50:42की ओर चलते हैं। यानी खेलों में इस राज्य
- 6:50:45का दबदबा। एक 360 डिग्री एनालिसिस का सवाल
- 6:50:48है कि यह राज्य खेलों में इतना आगे क्यों
- 6:50:51है? इसके तीन मुख्य पिलर्स हैं जिन्हें
- 6:50:54विजुअलाइज करना बहुत आसान है।
- 6:50:56पहला पिलर है खानपान जिसे दो दही का खाना
- 6:50:59कहते हैं जो शुद्ध देसी आहार है।
- 6:51:02दूसरा पिलर है नौकरी की सुरक्षा।
- 6:51:04अंतरराष्ट्रीय मेडल लाओ और सीधे डीएसपी या
- 6:51:07ग्रुप ए की नौकरी पाओ। इससे आर्थिक डर
- 6:51:09खत्म हो जाता है।
- 6:51:10और तीसरा पिलर है ग्रामीण खेल संस्कृति,
- 6:51:14दंगल और कबड्डी की परंपरा जहां खेल
- 6:51:16प्रतिष्ठा का विषय है।
- 6:51:18इन तीनों को मिलाकर ही 12 जनवरी 2015 की
- 6:51:20खेल नीति बनी जिसका सीधा मोटो है पदक लाओ
- 6:51:24पद पाओ।
- 6:51:24और जो नकद पुरस्कार हैं वह भी बहुत बड़े
- 6:51:27हैं। ओलंपिक स्वर्ण पर 6 करोड़, रजत पर 4
- 6:51:30करोड़ और कांसे पर ₹.5 करोड़।
- 6:51:33एशियाई खेलों में 3 करोड़ और राष्ट्रमंडल
- 6:51:35में ₹1.5 करोड़। इस भारीभरकम राशि पर भी
- 6:51:38आयोग सीधे सवाल बनाता है।
- 6:51:40और एक सवाल स्टेडियम्स के लोकेशन से आता
- 6:51:42है।
- 6:51:43हां, यह एक क्लासिक ट्रैप है। नहार सिंह
- 6:51:45स्टेडियम क्रिकेट का मैदान है जो फरीदाबाद
- 6:51:47में है। इसे रेवाड़ी के नहर सिंह वन्यजीव
- 6:51:49अभयारण्य के साथ मिक्स नहीं करना है।
- 6:51:52अंबाला छावनी में वॉर हीरोज़ मेमोरियल है
- 6:51:55और भिवानी को तो भारी संख्या में
- 6:51:57मुक्केबाजों के कारण मिनी क्यूबा कहा जाता
- 6:51:59है।
- 6:52:00मुक्केबाजी एकेडमी रोहतक में है। इसी बात
- 6:52:02पर मुझे एथलीट्स की मेहनत और एस्पिरेंट्स
- 6:52:04की तैयारी को जोड़ते हुए कुछ पंक्तियां
- 6:52:06याद आ रही हैं।
- 6:52:06बिल्कुल हम सुनना चाहेंगे।
- 6:52:08ग्राउंड में जो पसीना बहाएगा ओलंपिक का
- 6:52:10गोल्ड वही लाएगा और किताबों में जो खुद को
- 6:52:13खपाएगा लबासना का गेट वही पार कर पाएगा।
- 6:52:16बहुत ही प्रेरणादायक और जब गोल्ड की बात
- 6:52:18हो रही है तो द गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा को
- 6:52:21कैसे भूल सकते हैं? पानीपत के खंडरा गांव
- 6:52:23से आने वाले नीरज। लेकिन एग्जाम हॉल में
- 6:52:25भावनाओं से ज्यादा आंकड़ों की जरूरत होती
- 6:52:27है। दूरी के आंकड़े टोक्यो 2020 का गोल्ड
- 6:52:3087.58 मीटर्स के थ्रो से आया था।
- 6:52:33और पेरिस 2024 का रजत पदक 89.45
- 6:52:37मीटर्स से।
- 6:52:38यह दशमलव वाले आंकड़े सीधे विकल्पों में
- 6:52:40आते हैं। इसके अलावा चैंपियंस की एक पूरी
- 6:52:42गैलेक्सी है। विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया,
- 6:52:45योगेश्वर दत्त और पूरी फोगाट बहनें।
- 6:52:48निशानेबाजी में मनु भाकर जिन्होंने पेरिस
- 6:52:512024 में दो क्स से जीतकर कीर्तिमान
- 6:52:54स्थापित किया और 2008 में मुक्केबाजी में
- 6:52:58विजेंद्र सिंह का पहला ओलंपिक पदक
- 6:53:00यह सब जानना शानदार है लेकिन देशांत आईएस
- 6:53:03के मेथड के अनुसार ज्ञान तब तक अधूरा है
- 6:53:06जब तक उसे टेस्ट ना किया जाए।
- 6:53:07तो आइए अध्ययन सामग्री में दिए गए
- 6:53:10यूपीएससी स्टाइल के बहुविकल्पीय प्रश्नों
- 6:53:12यानी एमसीक्यूस का विश्लेषण करते हैं।
- 6:53:15हम पहला प्रश्न साहित्य से है। तीन कथन
- 6:53:18हैं। कथन एक हरियाणा साहित्य अकादमी की
- 6:53:21स्थापना जुलाई 1970 में हुई थी।
- 6:53:24हम दूसरा है इस अकादमी की मुख्य पत्रिका
- 6:53:27कथा समय है।
- 6:53:28और कथन तीन राज्य के मुख्यमंत्री इसके
- 6:53:31अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
- 6:53:33अब एलिमिनेशन लॉजिक लगाइए।
- 6:53:35हमने अभी चर्चा की थी कि स्थापना 1970 में
- 6:53:37हुई और मुख्यमंत्री अध्यक्ष होते हैं। तो
- 6:53:40पहला और तीसरा तो सही लग रहा है।
- 6:53:42लेकिन दूसरा कथन कथा समय ग्रंथ अकादमी की
- 6:53:46पत्रिका है। साहित्य अकादमी की पत्रिका तो
- 6:53:48हरिगंधा है। कौन सा ऑप्शन चुनना है जहां
- 6:53:51सिर्फ दो कथन सही माने गए हो।
- 6:53:53बिल्कुल कभी भी सीधे उत्तर पर नहीं कूदना
- 6:53:55चाहिए। अब दूसरा प्रश्न देखते हैं ये
- 6:53:57इतिहास से है।
- 6:53:58कथन एक राजा नाहर सिंह बल्लभगढ़ के शासक
- 6:54:02थे। कथन दो सर छोटूराम ने 1924 में
- 6:54:06जमींदारा लीग की स्थापना की थी। और कथन
- 6:54:09तीन मेजर होशियार सिंह राज्य से एकमात्र
- 6:54:13परमवीर चक्र विजेता हैं।
- 6:54:15यह तीनों ही बातें बहुत स्पष्ट रूप से
- 6:54:17नोट्स में कवर की गई हैं।
- 6:54:18हां, नहर सिंह का संबंध बल्लभगढ़ से है।
- 6:54:21छोटूराम जी ने 1924 में ही लीग बनाई थी और
- 6:54:24मेजर होशियार सिंह वास्तव में एकमात्र
- 6:54:26परमवीर चक्र विजेता हैं।
- 6:54:28तो इस प्रश्न में लॉजिक बहुत साफ है कि
- 6:54:30सभी कथन अपनी जगह बिल्कुल सत्य है।
- 6:54:33अब आते हैं आखिरी प्रश्न पर जो खेल
- 6:54:35नीतियों पर आधारित है। कथन एक राज्य की
- 6:54:38खेल नीति के तहत ओलंपिक स्वर्ण पदक
- 6:54:40विजेताओं को ₹6 करोड़ नकद दिए जाते हैं।
- 6:54:43कथन दो नाहर सिंह स्टेडियम अंबाला में
- 6:54:46स्थित है और कथन तीन नीरज चोपड़ा का
- 6:54:48टोक्यो ओलंपिक का स्वर्ण जीतने वाला थ्रो
- 6:54:5187.58
- 6:54:52मीटर था।
- 6:54:53यहां मुझे वो स्टेडियम वाला अलर्ट याद आ
- 6:54:56रहा है। अंबाला में तो वॉर हीरो स्टेडियम
- 6:54:58है ना?
- 6:54:59बिल्कुल सही पकड़ा आपने। नारसिंह स्टेडियम
- 6:55:01फरीदाबाद में है। तो कथन दो एलिमिनेट हो
- 6:55:04जाता है
- 6:55:04और बाकी के दोनों कथन 6 करोड़ की राशि और
- 6:55:0887.58 मीटर का थ्रो एकदम सटीक है।
- 6:55:11तो यहां भी एस्पिरेंट्स को वही विकल्प
- 6:55:12चुनना होगा जो केवल दो कथनों को सही
- 6:55:15ठहराता हो।
- 6:55:16यह एलिमिनेशन की कला ही परीक्षा कक्ष के
- 6:55:19दबाव में काम आती है।
- 6:55:20जाते-जाते एक आखिरी पंक्ति एमसीक्यू
- 6:55:22सॉल्विंग के लिए। बिना सोचे जो हर विकल्प
- 6:55:25को सही मान बैठेगा वो अपनी रैंक किसी और
- 6:55:28के नाम कर बैठेगा। एलिमिनेशन का जो चलाएगा
- 6:55:31तीर वही बदलेगा ओएमआर शीट की तकदीर।
- 6:55:34बहुत ही शानदार। तो आज के इस डीप डाइव में
- 6:55:37हमने देखा कि कैसे यह राज्य अपनी गहरी
- 6:55:39सांस्कृतिक जड़ों, अदम में सैन्य वीरता और
- 6:55:42दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से उत्कृष्टता
- 6:55:45हासिल कर रहा है।
- 6:55:46साहित्य के डिजिटलीकरण से लेकर 1857 के
- 6:55:49बलिदानियों और पेरिस ओलंपिक के पोडियम तक
- 6:55:52यह पूरा सफर एस्पिरेंट्स के लिए तथ्यों और
- 6:55:55कांसेप्ट्स का खजाना है।
- 6:55:56लेकिन दिशांत आईएस की स्लाइड का अंतिम
- 6:55:58विचार मत भूलिएगा। पुनरावृत्ति सफलता की
- 6:56:02कुंजी है। रिवीजन इज द की टू सक्सेस। बिना
- 6:56:05नियमित रिवीजन के दशमलव के आंकड़े और
- 6:56:08पत्रिकाओं के नाम परीक्षा तक धुंधले पड़
- 6:56:10जाएंगे।
- 6:56:10बिल्कुल और इस चर्चा को समाप्त करने से
- 6:56:13पहले मैं श्रोताओं को एक उत्तेजक विचार के
- 6:56:15साथ छोड़ना चाहूंगी। आज हमने जिस पदक लाओ
- 6:56:18पद पाओ मॉडल और देसी खेल संस्कृति को
- 6:56:21समझा।
- 6:56:22जरा सोचिए अगर पूरे भारत में राष्ट्रीय
- 6:56:25स्तर पर इसी प्रतिबद्धता के साथ यह मॉडल
- 6:56:28लागू कर दिया जाए तो क्या भविष्य के
- 6:56:30ओलंपिक खेलों में भारत की स्थिति पूरी तरह
- 6:56:32से बदल नहीं जाएगी? यह एक ऐसा सवाल है जिस
- 6:56:35पर हर भावी प्रशासक को विचार करना चाहिए।
- 6:56:38सीखते रहिए, खुद को अपडेट रखिए और गहराई
- 6:56:40में उतरते रहिए।
- 6:56:42दिस लेक्चर वाज़ बाय दिशांत आईएस। यूपीएससी
- 6:56:45और एचसीएस की तैयारी कर रहे एस्पिरेंट्स
- 6:56:47के लिए गवर्नेंस, स्टेट पॉलिसी और रीजनल
- 6:56:50डेवलपमेंट के मॉडल्स को समझना। मेंस
- 6:56:53परीक्षा का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है।
- 6:56:56आज का हमारा विषय है हरियाणा, स्पोर्ट्स,
- 6:56:58पावर हाउस एवं कल्याणकारी राज्य। जब बात
- 6:57:01एक ऐसे राज्य की हो जिसने ना केवल कुश्ती
- 6:57:04के अखाड़े में ग्लोबल लेवल पर भारत का
- 6:57:06दबदबा बनाया है बल्कि रूरल लेवल पर सोशल
- 6:57:09वेलफेयर के नए मानक भी स्थापित किए हैं तो
- 6:57:11यह एक बहुत ही डीप और एनालिटिकल केस स्टडी
- 6:57:14बन जाती है।
- 6:57:15बिल्कुल और यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह
- 6:57:18सिलेबस का कोई साधारण हिस्सा नहीं है।
- 6:57:21जहां हम सिर्फ फैक्ट्स और फिगर्स याद कर
- 6:57:23लें। यह स्ट्रिक्टली स्पोर्ट्स
- 6:57:26पर्सनालिटीज और स्कीम्स का एक टारगेटेड
- 6:57:29एनालिसिस है। सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क
- 6:57:32दिस। मेंस एग्जामिनेशन में जब गवर्नेंस,
- 6:57:35वुमेन एंपावरमेंट या स्टेट पॉलिसी के
- 6:57:38सक्सेसफुल एग्जांपल्स देने की मांग होती
- 6:57:40है, तो हरियाणा का यह ड्यूल मॉडल एक
- 6:57:43प्रमाणिक केस स्टडी के रूप में काम आता
- 6:57:45है।
- 6:57:46सही कहा। और इस पूरी पॉलिसी फ्रेमवर्क को
- 6:57:48समझने के लिए सबसे पहले हमें 360°
- 6:57:50एनालिसिस देखना होगा। दिस बोथ्स इकोसिस्टम
- 6:57:53एक राज्य में अचानक से इतने मेडल्स नहीं
- 6:57:55आते। अगर इस पूरे फ्लो चार्ट को एक कहानी
- 6:57:57की तरह देखा जाए तो शुरुआत होती है टैलेंट
- 6:58:00स्काउटिंग से यानी प्रतिभा की खोज। इसका
- 6:58:02सीधा सा लॉजिक है कैच देम यंग। जब छोटी
- 6:58:05उम्र में ही ग्रास रूट लेवल पर एथलेटिक
- 6:58:06क्षमताओं को पकड़ लिया जाता है तो उन्हें
- 6:58:08सही दिशा देना आसान हो जाता है।
- 6:58:10हां और इस टैलेंट स्काउटिंग के बाद जो
- 6:58:13दूसरा चरण आता है ना वही इस राज्य की सबसे
- 6:58:16बड़ी ताकत है। प्रतिभा मिलने के बाद
- 6:58:18उन्हें सीधे हाई कैश इंसेंटिव्स दिए जाते
- 6:58:21हैं और रैंकर्स फोकस ईयर यह कैश
- 6:58:24इंसेंटिव्स पूरे भारत में सर्वाधिक हैं।
- 6:58:27कैश के साथ मिलती है जॉब सिक्योरिटी। जहां
- 6:58:30मेडल जीतने पर सीधे ग्रुप ए, बी या सी
- 6:58:33पोस्ट्स पर नियुक्ति होती है। मतलब जब
- 6:58:36खिलाड़ी का आर्थिक और भविष्य का डर खत्म
- 6:58:38हो जाता है तब जाके ओलंपिक और कॉमनवेल्थ
- 6:58:41लेवल का गौरव हासिल होता है।
- 6:58:43यही वो मॉडल है जो सफलता की गारंटी बनता
- 6:58:45है और प्रीलिम्स अलर्ट के तौर पर
- 6:58:47एस्पिरेंट्स को खेलो हरियाणा गेम्स को
- 6:58:50जरूर नोट करना चाहिए। यह बिल्कुल खेलो
- 6:58:52इंडिया की तर्ज पर 2021 में शुरू किया गया
- 6:58:55था ताकि स्टेट लेवल पर ही कंपटीशन का एक
- 6:58:57मजबूत बेस बन सके और इन्हीं बातों पर एक
- 6:59:00विचार ध्यान में आता है। मंजिलें उन्हीं
- 6:59:02को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती
- 6:59:04है। केवल पंखों से कुछ नहीं होता। हौसलों
- 6:59:07से उड़ान होती है। और जब बात हौसलों की हो
- 6:59:10तो हरियाणा के खिलाड़ियों की अलग ही पहचान
- 6:59:12होती है।
- 6:59:13क्या बात है? और इसी हौसले को जब हम
- 6:59:16चेहरों के साथ जोड़ते हैं तो सबसे पहले
- 6:59:18सामने आती है रेसलिंग क्वींस द फोगार्ट
- 6:59:21एंड मालिक लेगसी। महिला कुश्ती में साक्षी
- 6:59:24मलिक का आगमन एक ऐतिहासिक घटना थी।
- 6:59:27एस्पिरेंट्स को क्लियर होना चाहिए कि
- 6:59:29साक्षी मलिक ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली
- 6:59:32भारतीय महिला पहलवान हैं। रियो 2016 में
- 6:59:35उन्होंने ब्रोंज़ जीता था। रोहतक के छोटे
- 6:59:37से गांव मोखरा से ओलंपिक पोडियम तक यह सफर
- 6:59:41असाधारण है।
- 6:59:42असाधारण सफर तो गीता फोगाट का भी है। 2010
- 6:59:45कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली
- 6:59:47पहली भारतीय महिला पहलवान उन्होंने तो
- 6:59:49महिला कुश्ती का पूरा नैरेटिव ही बदल दिया
- 6:59:51था।
- 6:59:521 मिनट। यहां पर एक एग्जामिनर ट्रैप है।
- 6:59:54एग्जामिनर अक्सर गीता फोगाट और विनेश
- 6:59:58फोगाट के उपलब्धियों में कंफ्यूजन क्रिएट
- 7:00:00करके स्टेटमेंट्स बनाता है। एस्पिरेंट्स
- 7:00:02को कंफ्यूज नहीं होना है। विनेश फोगाट
- 7:00:05कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स दोनों में गोल्ड
- 7:00:08जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान है।
- 7:00:11एलिमिनेशन टेक्निक्स लगाते वक्त ऐसे बारीक
- 7:00:14ट्रैप्स ही आपका स्कोर डिसाइड करते हैं।
- 7:00:17यह बहुत जरूरी डिस्टिंशन था। अब महिलाओं
- 7:00:19के इस वर्चस्व के बाद रेसलिंग टाइटंस यानी
- 7:00:22पुरुष वर्ग की बात करें तो तीन दिग्गज हैं
- 7:00:25जो लगातार ग्लोबल स्टेज पर डोमिनेट कर रहे
- 7:00:27हैं। बजरंग पूुनिया जिन्होंने झज्जर से
- 7:00:30निकलकर टोक्यो ओलंपिक में 65 केg कैटेगरी
- 7:00:33में ब्रोंज़ जीता। उसी टोक्यो ओलंपिक में
- 7:00:36सोनीपत के रवि दहिया ने 57 केजी में
- 7:00:38सिल्वर अपने नाम किया। और इससे पहले लंदन
- 7:00:41ओलंपिक 2012 में योगेश्वर दत्त का ब्रोंज
- 7:00:44तो हम सब जानते ही हैं।
- 7:00:45इन मॉडर्न दिग्गजों के साथ हमें एक
- 7:00:47हिस्टोरिकल फैक्ट भी कवर करना है जो अक्सर
- 7:00:49छूट जाता है। मास्टर चंदगीराम जिन्हें
- 7:00:53हिंद केसरी और भारत केसरी के नाम से जाना
- 7:00:55जाता है। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि
- 7:00:58सिर्फ उनके मेडल्स नहीं थे। सोशियोलॉजी और
- 7:01:01सोसाइटी के पेपर के लिए यह पॉइंट नोट
- 7:01:03कीजिए कि उन्होंने अपनी बेटियों सोनिका और
- 7:01:06दीपिका को पहलवानी में उतारा था। एक
- 7:01:09पेट्रियाार्कल सोसाइटी में यह सोशल
- 7:01:11रिफॉर्म का एक बेहद शक्तिशाली उदाहरण है।
- 7:01:14एकदम सटीक विश्लेषण। अब कुश्ती के अखाड़े
- 7:01:17से थोड़ा आगे बढ़ते हैं बॉक्सिंग ब्रिगेड
- 7:01:19की तरफ। ओलंपिक मेडल जीतने वाले पहले
- 7:01:22भारतीय मुक्केबाज विजेंद्र सिंह भिवानी से
- 7:01:24ही आते हैं। बीजिंग 2008 में उनका ब्रोंज़
- 7:01:27और फिर 2009 में खेल रत्न इसने भारतीय
- 7:01:30बॉक्सिंग में रेवोल्यूशन ला दिया था। उनके
- 7:01:33अलावा रोहतक के अमित पंघाल ने एशियन गेम्स
- 7:01:362018 में गोल्ड और 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप
- 7:01:39में सिल्वर जीता। मनोज कुमार ने 2010
- 7:01:42कॉमनव्थ में गोल्ड लाया था। अब यहां
- 7:01:45एस्पिरेंट्स के लिए एक और प्रीलिम्स अलर्ट
- 7:01:47है। भिवानी से लगातार निकलने वाले इन
- 7:01:50वर्ल्ड क्लास बॉक्सेस की वजह से ही इसे
- 7:01:52इंटरनेशनल लेवल पर मिनी क्यूबा कहा जाता
- 7:01:55है। क्यूबा बॉक्सिंग का ग्लोबल पावर हाउस
- 7:01:59है। एज वी टीच एट दिशांत आईएस रीजनल
- 7:02:02ज्योग्राफिकल और सोशियोइकोनॉमिक फैक्टर्स
- 7:02:05खेलों में बहुत बड़ा रोल प्ले करते हैं।
- 7:02:08किसी क्षेत्र का शारीरिक श्रम, वहां की
- 7:02:10डाइट और लोकल हीरोज़ यह सब मिलकर एक
- 7:02:13चैंपियन प्रोड्यूसिंग इकोसिस्टम बनाते
- 7:02:15हैं।
- 7:02:16यह इकोसिस्टम ही है जो इन खिलाड़ियों को
- 7:02:18आगे बढ़ाता है।
- 7:02:19बिल्कुल और इसी पर मैं यही कहूंगी किताबों
- 7:02:22से उलझकर ही प्रीलिम्स की राह निकलेगी।
- 7:02:25बिना मेहनत के यारों ना कोई भी चाह
- 7:02:27निकलेगी। यह भिवानी के मुक्के बताते हैं
- 7:02:30हमें। पसीना जो बहेगा तो जीत की अथाह
- 7:02:33निकलेगी।
- 7:02:34बहुत खूब। अब कांटेक्ट स्पोर्ट से ट्रैक
- 7:02:37एंड फील करो करते हैं। एथलेटिक्स द गोल्डन
- 7:02:39आर्म।
- 7:02:40जब हम गोल्डन आर्म बोलते हैं तो सीधे
- 7:02:42पानीपत के नीरज चोपड़ा का नाम आता है।
- 7:02:45टोक्यो ओलंपिक 2020 जहां उन्होंने जैवलिन
- 7:02:48थ्रो में 87.58 मेकर का थ्रो किया। एशियन
- 7:02:51गेम्स 2018 और कॉमनवेल्थ 2018 सब जगह
- 7:02:54गोल्ड। उनके अलावा डिस्कस थ्रोअर सीमा
- 7:02:57एंटेल जो सोनीपत से हैं। उन्होंने 2006 से
- 7:03:012018 तक लगातार कई कॉमनव्थ गेम्स में
- 7:03:03मेडल्स जीतकर कंसिस्टेंसी की एक नई मिसाल
- 7:03:06कायम की है।
- 7:03:07अब देखिए एनालिटिकल पॉइंट ऑफ व्यू से यह
- 7:03:09समझना जरूरी है कि ट्रैक एंड फील्ड जहां
- 7:03:13भारत हमेशा से पिछड़ता था, वहां अब एक ही
- 7:03:16स्टेट से ऐसी वर्ल्ड क्लास टैलेंट निकल
- 7:03:19रही है। यह स्टेट के स्पोर्ट्स
- 7:03:21इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट स्काउटिंग का
- 7:03:23सीधा रिजल्ट है। फिर क्रिकेट लेजेंड्स की
- 7:03:25बात करें तो हरियाणा हरिकिन कपिल देव 1983
- 7:03:29वर्ल्ड कप विनिंग कैप्टन। 2002 में उन्हें
- 7:03:32इंडियन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी का सम्मान
- 7:03:34मिला और उनकी ऑटोबायोग्राफी है क्रिकेट
- 7:03:37माय स्टाइल। मॉडर्न एरा में युजवेंद्र
- 7:03:40चाहल जो जिन से आते हैं उनका चेस प्लेयर
- 7:03:42से क्रिकेटर बनने का सफर और रोहतक की
- 7:03:45शेफाली वर्मा जो तीनों फॉर्मेट्स में
- 7:03:47खेलने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय हैं।
- 7:03:50स्पोर्ट्स का बैंडविड्थ सच में बहुत ब्रॉड
- 7:03:52है यहां पर। और अगर हम हॉकी द ड्रैग
- 7:03:54फ्लिकर्स वाले सेगमेंट में जाएं तो
- 7:03:56कुरुक्षेत्र से आने वाली रानी रमपाल 2010
- 7:04:00के वर्ल्ड कप में वह सिर्फ 15 साल की सबसे
- 7:04:02कम उम्र की खिलाड़ी थी और 2020 में राजीव
- 7:04:05गांधी खेल रत्न से सम्मानित हुई। फिर
- 7:04:07सिरसा की सविता पूनिया जिन्हें उनकी
- 7:04:09गोलकीपिंग के लिए द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया
- 7:04:11कहा जाता है। और ऑफ कोर्स संदीप सिंह
- 7:04:14जिन्हें हम फ्लिकर सिंह कहते हैं।
- 7:04:15हां और यहां पर रिमेंबर दिस छात्रों को
- 7:04:18शाहबाद मार्कंडा का नाम याद रखना है। इसे
- 7:04:21हरियाणा में हॉकी की नर्सरी कहा जाता है।
- 7:04:24एक छोटा सा टाउन लेकिन इसने देश को
- 7:04:26अनगिनित इंटरनेशनल हॉकी प्लेयर्स दिए हैं।
- 7:04:29यही तो ब्यूटी है इस रीजन की। सिलेबस का
- 7:04:31पहाड़ देखकर जो डर जाए वह एस्पिरेंट कैसा
- 7:04:34और जो शाहबाद की मिट्टी से ना निकले वह
- 7:04:36हॉकी का टैलेंट कैसा और यह टैलेंट सिर्फ
- 7:04:38ग्राउंड पर नहीं पहाड़ों पर भी दिखता है।
- 7:04:40माउंटेनियरिंग कॉनकरिंग एवरेस्ट की जब हम
- 7:04:43चर्चा करते हैं तो रेवाड़ी की संतोष यादव
- 7:04:45पूरी दुनिया की पहली महिला हैं जिन्होंने
- 7:04:471992 और 1993 यानी दो बार माउंट एवरेस्ट
- 7:04:51पर चढ़ाई की। अनीता कुंडू हिसार से हैं और
- 7:04:54वह पहली भारतीय महिला हैं जिन्होंने नेपाल
- 7:04:56और चीन दोनों तरफ से एवरेस्ट फतह किया है।
- 7:04:58माउंटेनियरिंग में एक प्रीलिम्स अलर्ट और
- 7:05:01ऐड कर लीजिए हिसार की शिवांगी पाठक। 2018
- 7:05:04में वो एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे कम
- 7:05:07उम्र की भारतीय महिला बनी सिर्फ 16 साल की
- 7:05:10उम्र में। यह स्ट्रांग विल पावर का सबसे
- 7:05:12बड़ा प्रमाण है।
- 7:05:13और स्ट्रांग विल पावर का एक और रूप हमें
- 7:05:16पैरालंपिक्स डिटरमिनेशन ओवर डिसेबिलिटी
- 7:05:18सेक्शन में दिखता है। सोनीपत के भैंसवाल
- 7:05:21की दीपा मलिक पैरालंपिक्स में मेडल जीतने
- 7:05:24वाली पहली भारतीय महिला हैं। उन्होंने
- 7:05:26रियो 2016 में शॉर्टपुट में सिल्वर जीता
- 7:05:29और आज वह पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया की
- 7:05:31अध्यक्ष भी हैं। टोक्यो पैरालंपिक्स 2020
- 7:05:34की चर्चा करें तो सोनीपत के ही सुमित
- 7:05:37अंतिल ने जैवलिन थ्रो में वर्ल्ड रिकॉर्ड
- 7:05:39तोड़ते हुए गोल्ड जीता और फरीदाबाद के
- 7:05:42मनीष नारवाल ने शूटिंग में गोल्ड हासिल
- 7:05:45किया। अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर
- 7:05:48एंड देयर टीम हम क्लास में बार-बार
- 7:05:50एम्फसाइज करते हैं कि यह सिर्फ फैक्ट्स
- 7:05:53नहीं है। एस्पिरेंट्स इन एग्जांपल्स को
- 7:05:55एथिक्स के पेपर में एस्स पेपर में रॉल्व
- 7:05:58और डिटरमिनेशन दिखाने के लिए बहुत
- 7:06:00इफेक्टिवली यूज कर सकते हैं।
- 7:06:02सही दिशा दी आपने एस्पिरेंट्स को। अब इस
- 7:06:04फोर्स इकोसिस्टम के आखिरी पिलर स्पोर्ट्स
- 7:06:06अवार्ड्स एंड इंसेंटिव्स को ब्रेकडाउन
- 7:06:08करते हैं। स्टेट का हाईएस्ट स्पोर्ट्स
- 7:06:10अवार्ड है भीम अवार्ड। इसमें आउटस्टैंडिंग
- 7:06:13प्लेयर्स को ₹5 लाख का कैश प्राइस और
- 7:06:16₹5,000 का मंथली ऑनरेियम दिया जाता है।
- 7:06:18रैंकर्स फोकस हियर मैंने पहले भी कहा था
- 7:06:22कि कैश रिवॉर्ड्स हाईएस्ट हैं। लेकिन डाटा
- 7:06:24देखिए ओलंपिक गोल्ड के लिए ₹6 करोड़,
- 7:06:27एशियन गेम्स गोल्ड के लिए ₹3 करोड़ और
- 7:06:30कॉमनव्थ गोल्ड के लिए ₹1.5 करोड़। यह बेस
- 7:06:34है उस फाइनेंसियल सिक्योरिटी का जिसकी वजह
- 7:06:37से खिलाड़ी अपना 100% दे पाते हैं। मेहनत
- 7:06:40की स्याही से जो अपनी किस्मत लिखते हैं
- 7:06:42वही भीम अवार्ड और सिलेक्शन लिस्ट में
- 7:06:45दिखते हैं।
- 7:06:45क्या खूबसूरत बात कही आपने। पर देखिए एक
- 7:06:48राज्य सिर्फ स्पोर्ट से पूरा नहीं होता।
- 7:06:51अब हम अपने डिस्कशन के अगले पड़ाव सेक्शन
- 7:06:54टू द वेलफेयर स्टेट पर मूव करते हैं। खेल
- 7:06:58से आगे बढ़कर एक ट्रू वेलफेयर स्टेट वो है
- 7:07:00जो सामाजिक सुरक्षा, किसान कल्याण और
- 7:07:03महिला सशक्तिकरण पर बराबर ध्यान दें।
- 7:07:05बिल्कुल। इस ट्रांजिशन को समझना मेंस के
- 7:07:08लिए बहुत क्रूशियल है। सोशल सिक्योरिटी
- 7:07:11ओल्ड एज सम्मान अलाउंस से शुरू करते हैं।
- 7:07:141987 में चौधरी देवीलाल जी ने इसे ल्च
- 7:07:17किया था और किसानों या मजदूरों के लिए ऐसी
- 7:07:20स्कीम लाने वाला यह पहला राज्य था।
- 7:07:22प्रीलिम्स अलर्ट नए अपडेट्स के अनुसार यह
- 7:07:25अलाउंस अब बढ़कर ₹3000 प्रति माह हो गया
- 7:07:28है। एलिजिबिलिटी 60 इयर्स प्लस है और इनकम
- 7:07:31लिमिट लागू होती है। सबसे बड़ा गवर्नेंस
- 7:07:34रिफॉर्म यह है कि इसको अब परिवार पहचान
- 7:07:37पत्र यानी पीपीपी से लिंक कर दिया गया है
- 7:07:39जिससे सारी लीकेज खत्म हो गई है।
- 7:07:42वुमेन एंपावरमेंट गर्ल चाइल्ड स्कीम्स
- 7:07:44वाला हिस्सा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दो
- 7:07:46स्कीम्स यहां स्टैंड आउट करती हैं। पहली
- 7:07:48लाडली योजना जो 15 अगस्त 2005 को आई।
- 7:07:52ध्यान दीजिएगा यह दूसरी बेटी के लिए है। 5
- 7:07:55साल तक ₹5000 हर साल दिए जाते हैं और यह
- 7:07:58पैसा 18 साल की उम्र तक लॉक रहता है। और
- 7:08:01दूसरी स्कीम है आपकी बेटी हमारी बेटी जो 8
- 7:08:04मार्च 2015 को आई। इसका क्लियर ऑब्जेक्ट
- 7:08:07है फीमेल फर्टिसाइड यानी कन्या भ्रूण
- 7:08:09हत्या को रोकना। इसमें एससी या बीपीएल
- 7:08:12फैमिली में बेटी पैदा होने पर सीधे
- 7:08:14₹21,000 जमा कर दिए जाते हैं।
- 7:08:16यह डेमोग्राफिक ट्रांजिशन का एक लाइव
- 7:08:19एग्जांपल है। कैसे फाइनेंशियल पॉलिसी से
- 7:08:22सेक्स रेशो को इंप्रूव किया जाता है। इसी
- 7:08:24कड़ी में विवाह शगुन योजना आती है जो
- 7:08:27बीपीएल, एससी और विडो फैमिलीज की बेटियों
- 7:08:29की शादी पर फाइनेंसियल सपोर्ट देती है।
- 7:08:32लेकिन यहां एक बहुत ट्रिकी एग्जाम ट्रैप
- 7:08:34है।
- 7:08:34हां, अमाउंट सेम नहीं है। एग्जैक्टली
- 7:08:36एग्जामिनर स्टेटमेंट्स में लिखेगा कि हर
- 7:08:39फैमिली को ₹71,000 मिलते हैं। गलत। सबसे
- 7:08:43हाईएस्ट अमाउंट यानी ₹71,000
- 7:08:46सिर्फ एससी और डीनोटिफाइड ट्राइब्स की
- 7:08:50बीपीएल फैमिलीज़ के लिए है। जनरल बीपीएल और
- 7:08:53बैकवर्ड क्लासेस के लिए यह अमाउंट ₹31,000
- 7:08:57है। जहां कुछ स्पेसिफिक क्राइटेरिया
- 7:08:59अप्लाई होते हैं। तो एस्पिरेंट्स को
- 7:09:01ब्लाइंड रीडिंग से बचना है।
- 7:09:03योजनाओं के चक्रव्यूह में अक्सर एस्पिरेंट
- 7:09:05घिर जाते हैं। जो ट्रैप अलर्ट को समझ लें
- 7:09:07वही प्रीलिम्स पार कर जाते हैं। एज वी टीच
- 7:09:10एट दशांत आईएस हर स्कीम के माइन्यूट
- 7:09:13डिटेल्स और एक्सेप्शनंस को आइडेंटिफाई
- 7:09:14करना ही प्रीलिम्स क्लियर करने की की है।
- 7:09:17अब आते हैं फार्मर वेलफेयर प्राइस एंड
- 7:09:19वाटर सेक्शन पर। भावांतर भरपाई योजना एक
- 7:09:22बहुत ही इनोवेटिव मॉडल है। अगर मार्केट
- 7:09:25प्राइस प्रोटेक्टेड प्राइस से नीचे चला
- 7:09:26जाए तो डिफरेंस यानी भावांतर को सरकार
- 7:09:29कंपनसेट करती है। खासकर सब्जियों और फलों
- 7:09:32के लिए। और वाटर कंजर्वेशन के लिए जो मेरा
- 7:09:35पानी मेरी विरासत स्कीम है उसका फ्लो
- 7:09:38चार्ट क्लियर रखिए अपने नोट्स में। पहला
- 7:09:40स्टेप किसान पैडी यानी धान उगाते हैं जो
- 7:09:44बहुत पानी पीता है। दूसरा स्टेप सरकार
- 7:09:47उन्हें अल्टरनेटिव क्रॉप्स जैसे मक्का या
- 7:09:51दालों पर स्विच करने को कहती है और तीसरा
- 7:09:53स्टेप जो किसान स्विच करते हैं उन्हें
- 7:09:56₹7000 प्रति एकड़ का इंसेंटिव मिलता है।
- 7:10:00यह एग्रीकल्चरल डायवर्सिफिकेशन की परफेक्ट
- 7:10:03स्टेट पॉलिसी है।
- 7:10:04फिर रूरल डेवलपमेंट का एक और बड़ा पिलर है
- 7:10:06महारां जगमग गांव। इसे 1 जुलाई 2015 को
- 7:10:10कुरुक्षेत्र से लांच किया गया। इसका ब्रॉड
- 7:10:12ऑब्जेक्टिव था गांव के घरेलू कंज्यूमर्स
- 7:10:14को 24 घंटे बिजली देना। आज लगभग 5700 से
- 7:10:18ज्यादा गांव इसके अंदर कवर हो चुके हैं।
- 7:10:20लेकिन इसके पीछे का एडमिनिस्ट्रेटिव लॉजिक
- 7:10:22क्या है?
- 7:10:22उसका लॉजिक एक केयर ऑपरेशनल फ्लो चार्ट पर
- 7:10:26बेस्ड है। सबसे पहले होता है फीडर सेपरेशन
- 7:10:29यानी खेत की बिजली और घर की बिजली की लाइन
- 7:10:32अलग करना। फिर हर घर में मीटर इंस्टॉलेशन
- 7:10:36होता है। जब मीटर लग जाते हैं तो
- 7:10:38इलेक्ट्रिसिटी चोरी रुकती है जिससे लाइन
- 7:10:41लॉस कम होता है और तभी 24/7 बिजली सप्लाई
- 7:10:45फाइनेंशियली वायबल हो पाती है। कैंडिडेट्स
- 7:10:48को यह इंप्लीमेंटेशन लॉजिक लिखना आना
- 7:10:51चाहिए।
- 7:10:52डिजिटल गवर्नेंस परिवार पहचान पत्र यानी
- 7:10:55पीपीपी ने इस पूरे एग्जीक्यूशन मैकेनिज्म
- 7:10:58को स्ट्रीमलाइन कर दिया है। यह एक एट
- 7:11:01डिजिट की यूनिक फैमिली आईडी है जिसे
- 7:11:03ऑफिशियली 2020 में लॉन्च किया गया था।
- 7:11:06इसने पूरे सिस्टम को फंडामेंटली पेपरलेस
- 7:11:09बना दिया है।
- 7:11:09पेपरलेस के साथ-साथ फेसलेस भी बना दिया
- 7:11:12है। जब डाटा वेरीिफाइड होता है तो स्कीम्स
- 7:11:16का ऑटोमेटिक सिलेक्शन होता है। राशन कार्ड
- 7:11:18या पेंशन बनवाने के लिए दफ्तर नहीं जाना
- 7:11:21पड़ता। करप्शन अपने आप कम हो जाता है।
- 7:11:25डिजिटल इंडिया के दौर में अब हर डाटा का
- 7:11:27हिसाब है। बिना पढ़े जो एग्जाम देने जाए
- 7:11:30वह तो बस एक ख्वाब है।
- 7:11:32अब बिल्कुल नए दौर की चुनौतियों यानी
- 7:11:34एनवायरमेंट सेक्शन पर नजर डालते हैं।
- 7:11:36ऑक्सीवन और प्राणवायु देवता। प्राणवायु
- 7:11:39देवता पेंशन योजना अपने आप में एक यूनिक
- 7:11:41कांसेप्ट है। 75 साल से पुराने पेड़ों के
- 7:11:44मेंटेनेंस के लिए सरकार ₹00 की एनुअल
- 7:11:47पेंशन देती है। यह फिगर्स अब रिवाइज होते
- 7:11:50रहते हैं और ऑक्सीवन योजना 5 जून 2021 को
- 7:11:53एनवायरमेंट डे पर ल्च हुई जिसका टारगेट है
- 7:11:56पंचायत की जमीन पर छोटे फॉरेस्ट क्रिएट
- 7:11:58करना ताकि ऑक्सीजन लेवल मेंटेन रहे।
- 7:12:00इमरजेंसी रिस्पांस एंड हेल्थ में डायल 112
- 7:12:04यानी ईआरएसएस जिसे 12 जुलाई 2021 को
- 7:12:08पंचकूला से शुरू किया गया। इसने पुलिस
- 7:12:11फायर और एंबुलेंस को एक प्लेटफार्म पर ला
- 7:12:14दिया है जिसका टारगेटेड रिस्पांस टाइम 15
- 7:12:17से 20 मिनट है और हेल्थ इंश्योरेंस के लिए
- 7:12:20आयुष्मान भारत का विस्तार करके चिरायु
- 7:12:23हरियाणा लाया गया ताकि इनकम लिमिट बढ़ाकर
- 7:12:26ज्यादा फैमिलीज को कवर किया जा सके। अंडर
- 7:12:29द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड देयर
- 7:12:31टीम। हम क्लास में यही एफसाइज करते हैं कि
- 7:12:34स्कीम्स का बेसलाइन स्ट्रक्चर वही रहता
- 7:12:36है। सिर्फ स्टेट मॉडिफायर्स चेंज होते हैं
- 7:12:39जिन्हें हमें करंट अफेयर्स से लिंक करना
- 7:12:41होता है।
- 7:12:42अब टेस्ट करते हैं कि एस्पिरेंट्स ने आपसी
- 7:12:44चर्चा को कितना रिटेन किया। प्रीलिम्स
- 7:12:46चैलेंज स्पोर्ट्स का पहला सवाल। ध्यान से
- 7:12:48सुनिए। भीम अवार्ड के संबंध में कथनों पर
- 7:12:51विचार करें। कथन एक यह हरियाणा का
- 7:12:53सर्वोच्च खेल पुरस्कार है। कथन दो
- 7:12:56पुरस्कार विजेता को ₹5 लाख का नकद
- 7:12:58पुरस्कार दिया जाता है। विकल्प हैं ए केवल
- 7:13:01एक, बी केवल दो, सी एक और दो दोनों, डी ना
- 7:13:06तो एक और ना ही दो।
- 7:13:07हमने एमसीक्यू रूल तय किया था। डायरेक्ट
- 7:13:10आंसर नहीं एलिमिनेशन लॉजिक। तो जब हमने
- 7:13:13स्पोर्ट्स अवार्ड्स डिस्कस किए थे तो
- 7:13:15क्लियर था कि भीम अवार्ड ही पिनिकल है। द
- 7:13:18हाईएस्ट स्टेट अवार्ड। मतलब कथन एक सही
- 7:13:21डायरेक्शन में है। और फाइनेंशियल
- 7:13:23ब्रेकडाउन में हमने डिस्टिंक्टली देखा था
- 7:13:25कि 5 लाख कैश के साथ 5000 मंथली होनरेरियम
- 7:13:29मिलता है। यानी नकद पुरस्कार वाला फैक्ट
- 7:13:31भी मैच कर रहा है। अब एस्पिरेंट्स को
- 7:13:34इवैल्यूएट करना है कि जब दोनों बेसिक
- 7:13:36फैक्ट्स हमारे डिस्कशन से वैलिडेट हो गए
- 7:13:39हैं तो ऑप्शंस में क्या चुना जाएगा? लॉजिक
- 7:13:42सिंपल है।
- 7:13:42दूसरा चैलेंज है प्रीलिम्स चैलेंज।
- 7:13:45स्कीम्स महारा गांव जगमग गांव योजना के
- 7:13:48संबंध में कौन सा कथन सही है? कथन एक 1
- 7:13:51जुलाई 2015 को लांच हुई। कथन दो हिसार
- 7:13:55जिले से शुरू की गई। कथन तीन इसका
- 7:13:57ऑब्जेक्टिव 24 आवर पावर सप्लाई है। विकल्प
- 7:14:01ए एक और दो, बी दो और तीन, सी एक और तीन
- 7:14:06या डी सभी सही हैं।
- 7:14:09इसमें एग्जामिनर ज्योग्राफी और टाइमलाइन
- 7:14:12दोनों पर अटैक कर रहा है। डेट 1 जुलाई
- 7:14:162015 हमने डिस्कस की थी। यह बेस लाइन है।
- 7:14:19ऑब्जेक्टिव भी फ्लो चार्ट बनाकर समझाया था
- 7:14:22कि 24 आवर्स सप्लाई कैसे देनी है। लेकिन
- 7:14:25कथन दो में ट्रैप है। हमने फोकस किया था
- 7:14:28कि यह कुरुक्षेत्र से फ्लैग ऑफ हुई थी।
- 7:14:31हिसार यहां पर एग्जामिनर का ट्रैप है।
- 7:14:34जैसे ही एस्पिरेंट्स इस फैक्ट को पकड़ेंगे
- 7:14:37और कथन दो को एलिमिनेट करेंगे तो ऑप्शन ए,
- 7:14:40बी और डी तीनों में से कथन दो हट जाएगा।
- 7:14:44इस प्रोसेस से सही विकल्प खुद सामने आ
- 7:14:47जाता है।
- 7:14:48सही टेक्निक। अब पूरे विश्लेषण को वे
- 7:14:51फॉरवर्ड द हरियाणा मॉडल के रूप में वाइंड
- 7:14:53अप करते हैं।
- 7:14:54इस पूरे मॉडल को हम सिनर्जी का नाम दे
- 7:14:56सकते हैं। स्पोर्ट्स एक तरफ यूथ एनर्जी को
- 7:14:59पॉजिटिव डायरेक्शन दे रहा है। ओलंपिक
- 7:15:01मेडल्स देश का रुतबा बढ़ा रहे हैं। और
- 7:15:04दूसरी तरफ वेलफेयर स्टेट मॉडल पीपीपी और
- 7:15:07डिजिटल गवर्नेंस के थ्रू इंक्लूसिव ग्रोथ
- 7:15:10ला रहा है। यानी अ स्टेट दैट प्लेस टुगेदर
- 7:15:13एंड ग्रोस टुगेदर। यही इस मॉडल का क्रक्स
- 7:15:16है जिसे एस्पिरेंट्स को मेंस के कंक्लूजन
- 7:15:18में प्रयोग करना चाहिए।
- 7:15:20खेलों के मैदान से लेकर योजनाओं के राज तक
- 7:15:23हरियाणा का यह मॉडल गूंजेगा हर आवास तक।
- 7:15:27एस्पिरेंट्स भी अपनी तैयारी में यही
- 7:15:29अनुशासन लाएं। एलबीएसएनए की राह में एक
- 7:15:33कदम और बढ़ाएं। तो छात्रों आज इस सेशन में
- 7:15:36हमने टैलेंट स्काउटिंग से लेकर महारां,
- 7:15:39जगमग गांव और पीबीबी जैसे पॉलिसीज तक एक
- 7:15:42360 डिग्री डीप ड्राइव ली है।
- 7:15:44और छात्रों के लिए छोड़ते जा रहे हैं एक
- 7:15:46थॉट प्रोवोकिंग क्वेश्चन। अगर भारत के
- 7:15:49दूसरे राज्य भी इसी तरह का गांव लेवल का
- 7:15:52स्पोर्ट्स इंसेंटिव स्ट्रक्चर और
- 7:15:55ट्रांसपेरेंट डिजिटल वेलफेयर मॉडल
- 7:15:57इंप्लीमेंट कर लें। तो क्या अगले ओलंपिक
- 7:16:00में भारत मेडल टैली के टॉप 10 में अपनी
- 7:16:03स्थाई जगह बना सकता है? इस पर विचार कीजिए
- 7:16:07और अपने मेंस आंसर्स में इंटीग्रेट कीजिए।
- 7:16:10दिस लेक्चर वास बाय दीशांत आईएएस। मानसिक
- 7:16:13पटल पर एक चित्र उकेरते हैं। कल्पना कीजिए
- 7:16:16कि हरियाणा के एक विशाल नक्शे पर एक बड़ा
- 7:16:18सा मैग्नीिफाइंग ग्लास रखा हुआ है और इस
- 7:16:21नक्शे के ठीक नीचे कुछ भारी भरकम किताबें
- 7:16:24रखी हैं। जिन पर स्पष्ट रूप से लिखा है
- 7:16:27हरियाणा सामान्य ज्ञान, गवर्नेंस,
- 7:16:30डिस्ट्रिक्ट्स और इकॉनमी।
- 7:16:31यह बहुत ही पावरफुल विजुअल है।
- 7:16:33बिल्कुल। और यह केवल एक दृश्य नहीं है। यह
- 7:16:36सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का एक बहुत
- 7:16:38ही स्पष्ट संकेत है। यह बताता है कि
- 7:16:41परीक्षा में अब केवल सतह पर तैरने से काम
- 7:16:44नहीं चलेगा। गहराइयों में उतर कर
- 7:16:46कल्याणकारी योजनाओं की नब्ज़ पकड़नी होगी।
- 7:16:49हमें 360 डिग्री जिला विश्लेषण करना होगा
- 7:16:52और सबसे महत्वपूर्ण बात प्रारंभिक परीक्षा
- 7:16:55के उन तथ्यों और जाल का सूक्ष्म परीक्षण
- 7:16:58करना होगा जहां परीक्षक अक्सर उम्मीदवारों
- 7:17:01को फंसाते हैं।
- 7:17:02देखिए यह एक बहुत ही सटीक अवलोकन है। एक
- 7:17:05सामान्य एस्पिरेंट और एक टॉपर के बीच का
- 7:17:07जो अंतर है ना वह इसी गहराई से तय होता
- 7:17:10है। तथ्यों को बिना संदर्भ के रट देने से
- 7:17:12सफलता नहीं मिलती। क्या क्यों और कैसे
- 7:17:15स्त्रीआयामी विश्लेषण का होना बहुत ही
- 7:17:18जरूरी है। एक मेंटर के तौर पर हमेशा यही
- 7:17:21सलाह दी जाती है कि रैंक हासिल करने वाले
- 7:17:23छात्र केवल यह नहीं पढ़ते कि कोई योजना
- 7:17:26क्या है? वह यह भी डिकोड करते हैं कि उसका
- 7:17:28प्रशासन, समाज और राज्य की अर्थव्यवस्था
- 7:17:31पर क्या दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। रैंकर्स
- 7:17:33फोकस हियर। हमें इसी विश्लेषणात्मक
- 7:17:36दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना है।
- 7:17:37और इसी विश्लेषणात्मक सफर की शुरुआत करते
- 7:17:40हुए मुझे कुछ पंक्तियां याद आ रही हैं।
- 7:17:43किताबों के इस गहरे समंदर में गोते लगाना
- 7:17:46है। सतह पर तैरने वालों को मोतियां कहां
- 7:17:48मिलती हैं? जो डूबकर मोतियों की परख कर ले
- 7:17:51वही तो लबासना की राहें चुनती हैं।
- 7:17:54बहुत खूब बहुत ही सटीक बात कही आपने।
- 7:17:57शुक्रिया। तो इसी सोच के साथ सबसे पहले
- 7:18:01राज्य की अर्थव्यवस्था की रीड यानी कृषि
- 7:18:04और मुआवजा योजनाओं की मुख्य अवधारणा पर
- 7:18:07ध्यान केंद्रित करते हैं। यहां सबसे
- 7:18:10प्रमुख नाम भावांतर भरपाई योजना का उभर कर
- 7:18:14आता है। इसका मूल उद्देश्य किसानों की उपज
- 7:18:17के लिए एक उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।
- 7:18:20इस योजना की गहराई को समझने के लिए ना एक
- 7:18:23और विजुअल की कल्पना करते हैं। एक किसान
- 7:18:25है जिसके हाथ में सोने की ढाल है। अब ये
- 7:18:28कोई साधारण ढाल नहीं है। बाजार की
- 7:18:30अस्थिरता और कृषि उत्पादों के मूल्यों में
- 7:18:33अचानक आने वाली गिरावट के जोखिम से
- 7:18:35सुरक्षा का यह एक मजबूत प्रतीक है।
- 7:18:38यानी एक तरह का सेफ्टी नेट है।
- 7:18:40एग्जैक्टली। जब बाजार मूल्य सरकार द्वारा
- 7:18:43तय किए गए संरक्षित मूल्य से नीचे गिर
- 7:18:45जाता है तो यह भावांतर यानी भाव का जो
- 7:18:48अंतर है वह सरकार द्वारा भरपाई के रूप में
- 7:18:51किसान को दिया जाता है। यह योजना किसान को
- 7:18:54घाटे के दुचक्र से बचाती है। अब यहां
- 7:18:57प्रीलिम्स अलर्ट हैं सभी के लिए। इस योजना
- 7:18:59में प्रीमियम की दरें अलग-अलग निर्धारित
- 7:19:02हैं। खरीफ फसलों के लिए यह प्रीमियम 2%
- 7:19:04है। वाणिज्यिक या फलोद्यानी यानी
- 7:19:07हॉर्टिकल्चर फसलों के लिए यह दर 5% है और
- 7:19:10रबी फसलों के लिए 1.5% है। परीक्षक अक्सर
- 7:19:14इन प्रतिशतों को आपस में बदलकर कथनों वाले
- 7:19:16प्रश्न बनाते हैं।
- 7:19:17तो यहां एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है।
- 7:19:20वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए दर 5%
- 7:19:23क्यों रखी गई है? जबकि रबी के लिए मात्र
- 7:19:261.5% है। मतलब क्या इसके पीछे फसलों की
- 7:19:29प्रकृति का कोई लॉजिक है?
- 7:19:30बिल्कुल लॉजिक है। और यही वो
- 7:19:32विश्लेषणात्मक कड़ी है जिसे परीक्षा भवन
- 7:19:35में याद रखना चाहिए। देखिए बागवानी और
- 7:19:38वाणिज्यिक फसलें अत्यधिक जोखिम वाली होती
- 7:19:40हैं। वे जल्दी खराब होती हैं और बाजार में
- 7:19:43उनके दाम बहुत तेजी से ऊपर नीचे होते हैं।
- 7:19:46तो जोखिम अधिक होने के कारण उनका प्रीमियम
- 7:19:485% है। जबकि रबी फसलें जैसे गेहूं हो गया।
- 7:19:52यह मौसम के प्रति थोड़ी अधिक स्थिर होती
- 7:19:54हैं। इसलिए उनका प्रीमियम मात्र 1.5% है।
- 7:19:59जब छात्र स्तर को समझ लेते हैं तो वे
- 7:20:01परीक्षा में रवि और बागवानी के प्रतिशत के
- 7:20:04बीच कभी कंफ्यूज नहीं होते। यह तार्किक
- 7:20:06जुड़ाव वाकई तथ्यों को याद रखने का एक
- 7:20:08बेहतरीन तरीका है। अब कृषि क्षेत्र की इस
- 7:20:11सुरक्षा छत्रे से निकलकर अगर हम समाज के
- 7:20:14सबसे हाशिये पर खड़े वर्ग की बात करें तो
- 7:20:16सामाजिक सुरक्षा का एक नया वैचारिक चित्र
- 7:20:19सामने आता है। एक वॉलेट की कल्पना कीजिए
- 7:20:22जिसमें कुछ सिक्के सुरक्षित रखे जा रहे
- 7:20:24हैं। यह विजुअल हमें हरियाणा की विधुर
- 7:20:27पेंशन योजना की ओर ले जाता है।
- 7:20:29भारत के सामाजिक सुरक्षा इतिहास में यह एक
- 7:20:31मील का पत्थर है और एग्जाम अलर्ट है यहां
- 7:20:34पर। हम
- 7:20:34परीक्षा के लिहाज से यह तथ्य अत्यंत
- 7:20:37महत्वपूर्ण है कि हरियाणा पूरे देश का
- 7:20:39पहला ऐसा राज्य है जिसने विधों के लिए
- 7:20:42यानी विडोर्स के लिए पेंशन योजना शुरू की
- 7:20:46है। इसके तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के
- 7:20:48विद्रोहों को ₹1800 प्रतिमाह की पेंशन दी
- 7:20:51जाती है।
- 7:20:52और पहला राज्य होने के कारण यह सीधे तौर
- 7:20:54पर एक पोटेंशियल क्वेश्चन बन जाता है।
- 7:20:57100% सामाजिक सुरक्षा का दायरा आमतौर पर
- 7:21:00विधवाओं तक सीमित रहता है। लेकिन एक
- 7:21:02कल्याणकारी राज्य द्वारा बुजुर्ग पुरुषों
- 7:21:05के अकेलेपन और आर्थिक निर्भरता को पहचानना
- 7:21:08एक बहुत ही परिपक्व नीतिगत कदम है। इसी के
- 7:21:11समानांतर एक और योजना है। असंगठित क्षेत्र
- 7:21:14के मजदूरों को भी सुरक्षा घेरे में लाने
- 7:21:16के लिए 5 मार्च 2019 को श्रम योगी मानधन
- 7:21:20योजना शुरू की गई थी। इन दोनों योजनाओं का
- 7:21:22एक साथ अध्ययन करने पर हमें पता चलता है
- 7:21:25कि राज्य की नीतियां किस प्रकार एक
- 7:21:27वेलफेयर स्टेट के संवैधानिक लक्ष्य को
- 7:21:29पूरा कर रही हैं।
- 7:21:30बिल्कुल सही कहा और अमेतियों के प्रभाव और
- 7:21:33सरकारी प्रक्रियाओं की अपनी एक लंबी समय
- 7:21:36अवधि होती है जिसे देखकर अक्सर
- 7:21:38एस्पिरेंट्स की जर्नी याद आ जाती है।
- 7:21:40कैलेंडर के पन्ने पलटतेपलटते कई साल गुजर
- 7:21:43जाते हैं। प्रशासन के इस धीमी आंच में जो
- 7:21:46अडिग रहे वही तो निखर पाते हैं।
- 7:21:49क्या बात है? धैर्य ही सबसे बड़ी कुंजी है
- 7:21:52इस परीक्षा में।
- 7:21:53जी। अब इसी कल्याणकारी ढांचे में आगे
- 7:21:56बढ़ते हुए महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा की
- 7:21:59उस टाइमलाइन का विश्लेषण करते हैं। इसे हम
- 7:22:02एक ग्रेजुएशन कैप और सुरक्षा ढाल के
- 7:22:05प्रतीक से समझ सकते हैं। यह टाइमलाइन 22
- 7:22:08जनवरी 2015 को आपकी बेटी हमारी बेटी योजना
- 7:22:12से शुरू होती है। फिर 13 अप्रैल 2017 को
- 7:22:15ऑपरेशन दुर्गा का रूप लेती है और डिजिटल
- 7:22:19युग में प्रवेश करते हुए दुर्गा शक्ति ऐप
- 7:22:22तक पहुंचती है। और इस टाइमलाइन का हर एक
- 7:22:24पड़ाव हरियाणा के जनसंख्य के इतिहास को
- 7:22:26बदलने का एक गंभीर प्रयास है। आपकी बेटी
- 7:22:30हमारी बेटी योजना के तहत 22 जनवरी 2015 या
- 7:22:33उसके बाद जन्मी पहली बेटी के जन्म पर
- 7:22:36राज्य द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की
- 7:22:39जाती है। विशेषकर एससी और बीपीएल परिवारों
- 7:22:42में यह केवल एक आर्थिक मजद नहीं है बल्कि
- 7:22:45कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और राज्य के
- 7:22:47गिरते लिंगानुपात को सुधारने का एक
- 7:22:49संस्थागत प्रयास है। और इसी विषय में एक
- 7:22:51बहुत ही गंभीर यूपीएससी ट्रैप भी है जहां
- 7:22:54कैंडिडेट्स को सतर्क रहना आवश्यक है।
- 7:22:56जी हां, सीरियस एस्पिरेंट्स मार्क दिस।
- 7:22:59परीक्षक अक्सर ऑपरेशन दुर्गा और दुर्गा
- 7:23:02शक्ति ऐप के बीच भ्रम पैदा करने वाले
- 7:23:05विकल्प देते हैं। यह एकदम स्पष्ट होना
- 7:23:07चाहिए कि ऑपरेशन दुर्गा एक फिजिकल महिला
- 7:23:10सुरक्षा अभियान है। इसमें पुलिस की विशेष
- 7:23:13टीमें सार्वजनिक स्थानों पर मंचलों पर
- 7:23:15नकेल कसती हैं। इसके ठीक विपरीत दुर्गा
- 7:23:18शक्ति ऐप एक डिजिटल इंटरफेस है। यह एक
- 7:23:22पैनिकिक बटन की तरह है जिसे महिलाएं
- 7:23:24आपातकालीन स्थिति में तुरंत पुलिस सहायता
- 7:23:26के लिए अपने स्मार्टफोन में इस्तेमाल करती
- 7:23:28हैं। उद्देश्य एक है, लेकिन उनका माध्यम
- 7:23:31बिल्कुल अलग है।
- 7:23:33और यह अंतर मेंस परीक्षा में महिला
- 7:23:35सुरक्षा पर उत्तर लिखते समय भी बहुत काम आ
- 7:23:37सकता है। जहां फिजिकल पुलिसिंग और डिजिटल
- 7:23:40सुरक्षा के समन्वय का बेहतरीन उदाहरण दिया
- 7:23:43जा सकता है। चलिए योजनाओं और नीतियों के
- 7:23:45इस महासागर से निकलकर अब हम हरियाणा के
- 7:23:48जिला परिदृश्य यानी जिलों की विशिष्ट
- 7:23:51पहचान का गहराई से विश्लेषण करते हैं।
- 7:23:54डिस्ट्रिक्ट प्रोफाइलिंग बहुत जरूरी
- 7:23:55हिस्सा है सिलेबस का। बिल्कुल शुरुआत
- 7:23:57अंबाला से करते हैं। अपने मानसिक पटल पर
- 7:24:00एक माइक्रोस्कोप और एक फाइटर जेट की छवि
- 7:24:03लाइए। अंबाला को साइंस सिटी और मिक्सी
- 7:24:06सिटी के नाम से जाना जाता है।
- 7:24:07अंबाला की यह पहचान महज किताबी नहीं है।
- 7:24:10भारत के कुल वैज्ञानिक उपकरणों का लगभग
- 7:24:1335% उत्पादन अकेले अंबाला में होता है।
- 7:24:16देश भर की प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल होने
- 7:24:18वाले माइक्रोस्कोप इसी शहर की देन है।
- 7:24:20और जो फाइटर जेट का विजुअल है वह इसके
- 7:24:23रणनीतिक और सैन्य महत्व को उजागर करता है।
- 7:24:26एकदम सही। 1843 में अंबाला छावनी की
- 7:24:29स्थापना हुई थी। इसके पीछे का भौगोलिक और
- 7:24:32ऐतिहासिक कारण बहुत दिलचस्प है। ब्रिटिश
- 7:24:34काल में छावनी पहले करनाल में स्थापित की
- 7:24:37गई थी। लेकिन वहां मलेरिया की भयंकर
- 7:24:40महामारी फैल गई थी। तो एक सुरक्षित और
- 7:24:42रणनीतिक विकल्प के तौर पर इसे अंबाला
- 7:24:44स्थानांतरित करना पड़ा।
- 7:24:46यानी हेल्थ क्राइसिस की वजह से मिलिट्री
- 7:24:48शिफ्टिंग हुई।
- 7:24:49जी। और इतिहास की बात करें तो 1857 की
- 7:24:53क्रांति की सबसे पहली चिंगारी हरियाणा में
- 7:24:56इसी अंबाला से सुलगी थी। इसके अतिरिक्त एक
- 7:24:59प्रीलिम्स फैक्ट है जो आधुनिक इतिहास के
- 7:25:01लिहाज से बहुत अहम है। महात्मा गांधी के
- 7:25:04हत्यारे नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर 1949
- 7:25:08को अंबाला सेंट्रल जेल में ही फांसी दी गई
- 7:25:10थी। इतिहास की गहराइयों और विज्ञान के इस
- 7:25:13अनूठे संगम को देखकर यही ख्याल आता है।
- 7:25:17तथ्यों की इस भूल भुलैया में अक्सर दिमाग
- 7:25:19चकराता है। जो माइक्रोस्कोप सी नजर रखे
- 7:25:22वही असली रास्ता पाता है।
- 7:25:24बहुत बढ़िया। माइक्रोस्कोपिक विज़न ही
- 7:25:26चाहिए इस एग्जाम को क्लियर करने के लिए।
- 7:25:28अंबाला की इस वैज्ञानिक और ऐतिहासिक जमीन
- 7:25:31से उठकर अब एक ऐसे जिले की ओर रुख करते
- 7:25:34हैं जिसकी पहचान विरोधाभासों और विविधताओं
- 7:25:36से भरी है। हम बात कर रहे हैं भिवानी की।
- 7:25:40इसकी पहचान को बॉक्सिंग ग्लव्स और अनगिनत
- 7:25:42मंदिरों के शिखरों के रूप में देखा जा
- 7:25:44सकता है। इसे मिनी क्यूबा मंदिरों का शहर
- 7:25:47और युद्ध नायकों का शहर जैसी अनेक
- 7:25:50उपाधियां प्राप्त है।
- 7:25:51भिवानी की यह विविधता ही इसे लोक सेवा
- 7:25:54आयोगों का पसंदीदा विषय बनाती है। मिनी
- 7:25:57क्यूबा की उपाधि इसे यहां से निकलने वाले
- 7:26:00अंतरराष्ट्रीय स्तर के शानदार मुक्केबाजों
- 7:26:02के कारण मिली है। लेकिन यहां एक बहुत बड़ा
- 7:26:05कंट्रास्ट ट्रैप है जो अच्छे-अच्छे
- 7:26:07उम्मीदवारों को उलझा देता है। भिवानी को
- 7:26:11छोटी काशी कहा जाता है जिसका कारण है यहां
- 7:26:14मंदिरों की भारी अधिकता।
- 7:26:16लेकिन एक और जिला है जिसे छोटी काशी कहा
- 7:26:19जाता है।
- 7:26:20बिल्कुल। इसके ठीक विपरीत हरियाणा के ही
- 7:26:22कैथल जिले को भी छोटी काशी कहा जाता है।
- 7:26:25लेकिन वहां इसका कारण मंदिर नहीं बल्कि
- 7:26:28पुराणों में वर्णित नवग्रह कुंडों की
- 7:26:30उपस्थिति है। परीक्षा में यह बारीक अंतर
- 7:26:33ही सही और गलत उत्तर के बीच की रेखा
- 7:26:35खींचता है। अगर हम अर्थव्यवस्था के पहलू
- 7:26:38को जोड़ें, तो 1937 में स्थापित भिवानी
- 7:26:41टेक्सटाइल मिल और 1943 में बना टिट्स यानी
- 7:26:45टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल
- 7:26:46एंड साइंसेस इसे एक प्रमुख वस्त्र केंद्र
- 7:26:49के रूप में स्थापित करते हैं।
- 7:26:50एज वी टीच बिशान बायस ऐसे सूक्ष्म वैचारिक
- 7:26:54अंतर और कंट्रास्ट ही परीक्षा में रैंक का
- 7:26:57निर्धारण करते हैं। सामान्य अध्ययन को
- 7:27:00गहराई से तभी समझा जा सकता है जब हम इन
- 7:27:03बारीक रेखाओं को पहचाने। बिल्कुल अंडर द
- 7:27:06गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर एंड देयर टीम
- 7:27:08हमारा पूरा ध्यान इसी बात पर रहता है कि
- 7:27:11छात्र केवल सूचनाओं का संग्रह ना करें
- 7:27:13बल्कि सूचनाओं के बीच के अंतर और उनके
- 7:27:16पीछे के कारणों का विश्लेषण करना सीखें।
- 7:27:18इसी विश्लेषणात्मक क्रम में अब हरियाणा के
- 7:27:21सबसे नए जिले यानी चरखी दादरी के गठन की
- 7:27:25क्रोनोलॉजी को समझते हैं। यहां एक कैलेंडर
- 7:27:28और सीमेंट की बोरी की छवि प्रासंगिक है।
- 7:27:31इसके गठन की प्रक्रिया 18 सितंबर 2016 को
- 7:27:34घोषणा के साथ शुरू हुई। फिर 18 अक्टूबर को
- 7:27:38कैबिनेट से मंजूरी मिली। 16 नवंबर को
- 7:27:41आधिकारिक अधिसूचना जारी हुई और अंततः 1
- 7:27:44दिसंबर 2016 को इसका विधिवत गठन हुआ। क्या
- 7:27:48इस क्रोनोलॉजी का इतना विस्तृत अध्ययन
- 7:27:50वास्तव में आवश्यक है?
- 7:27:52प्रशासनिक नजरिए से यह बेहद जरूरी है।
- 7:27:55राज्य लोक सेवा आयोग अक्सर प्रशासन की
- 7:27:58कार्यप्रणाली को परखने के लिए यह देखते
- 7:28:00हैं कि क्या उम्मीदवार घोषणा यानी
- 7:28:03अनाउंसमेंट और आधिकारिक अधिसूचना यानी
- 7:28:06नोटिफिकेशन के बीच के कानूनी अंतर को
- 7:28:08समझता है या नहीं। इसके अलावा चरकी दादरी
- 7:28:11के साथ दो बेहद महत्वपूर्ण तथ्य जुड़े
- 7:28:14हैं।
- 7:28:14कौन से हैं वह तथ्य? पहला एक त्रासदी है
- 7:28:181996 में कजाकिस्तान और सऊदी एयरलाइंस के
- 7:28:21विमानों के बीच जो भीषण मिड एयर दुर्घटना
- 7:28:23हुई थी वो इसी जिले के आसमान में हुई थी।
- 7:28:27दूसरा इसके औद्योगिक इतिहास से जुड़ा है।
- 7:28:30डालमिया सीमेंट फैक्ट्री। इसकी स्थापना
- 7:28:321939 में जर्मन इंजीनियरों के सहयोग से की
- 7:28:36गई थी। जिसने इस पूरे क्षेत्र की औद्योगिक
- 7:28:39नीव रखी
- 7:28:40और किसी भी ढांचे की मजबूती उसकी नींव पर
- 7:28:43ही निर्भर करती है। नींव जितनी मजबूत हो
- 7:28:47इमारत का कद उतना ही विशाल होता है। रातों
- 7:28:51की खामोश मेहनत से ही मुकद्दर का फैसला
- 7:28:54होता है।
- 7:28:54बहुत ही प्रेरक पंक्तियां हैं ये। चरखी
- 7:28:57दादरी के औद्योगिक इतिहास को समझने के बाद
- 7:29:00अब हरियाणा की औद्योगिक राजधानी फरीदाबाद
- 7:29:04की ओर दृष्टि डालते हैं। यहां जनसंख्यकी
- 7:29:07यानी डेमोग्राफी से जुड़ा एक डेमोग्राफी
- 7:29:10अलर्ट है। कल्पना कीजिए विशाल गिय्स और एक
- 7:29:13ट्रैक्टर की। फरीदाबाद की जनसंख्या और
- 7:29:16उसका जनसंख्या घनत्व दोनों ही राज्य में
- 7:29:19सबसे अधिक है।
- 7:29:20और यह उच्च जनसंख्या घनत्व कोई संयोग नहीं
- 7:29:23है बल्कि सीधे तौर पर इसके औद्योगिक विकास
- 7:29:25का परिणाम है। जहां उद्योग पनपते हैं वहां
- 7:29:27रोजगार की तलाश में माइग्रेशन होता है।
- 7:29:29फरीदाबाद के प्रमुख उद्योगों में मेहंदी
- 7:29:31उत्पादन, एस्कॉट्स ट्रैक्टर का निर्माण और
- 7:29:33कैल्विनेटर रेफ्रिजरेटर शामिल हैं। यह वही
- 7:29:36आर्थिक पहिए हैं जो राज्य की प्रगति को
- 7:29:38रफ्तार देते हैं। और अगर सांस्कृतिक और
- 7:29:40ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो फरीदाबाद
- 7:29:43का सूरजकुंड अत्यंत प्रसिद्ध है।
- 7:29:45जी इसका निर्माण तोमर वंश के शासक राजा
- 7:29:47सूरजपाल ने करवाया था जिसे सूर्यकुंड के
- 7:29:50नाम से भी जाना जाता है। खेल परिदृश्य में
- 7:29:52देखें तो 1981 में बना अंतरराष्ट्रीय
- 7:29:54क्रिकेट स्थल नाहर सिंह स्टेडियम भी इसी
- 7:29:57जिले की शान है।
- 7:29:58फरीदाबाद के इन कारखानों और भीड़भाड़ से
- 7:30:00निकलकर अब हम हरियाणा की गुलाबी नगरी यानी
- 7:30:04फतेहाबाद के शांत लेकिन रणनीतिक माहौल में
- 7:30:07चलते हैं। फतेहाबाद का इतिहास बताता है कि
- 7:30:10इसकी स्थापना 1352 ईसवी में फिरोजशाह
- 7:30:14तुगलक ने की थी और इसका नाम अपने पुत्र
- 7:30:17फतेह खान के नाम पर रखा था।
- 7:30:19इतिहास से इतर आज के समय में फतेहाबाद का
- 7:30:22नाम सुनते ही दिमाग में स्ट्रेटेजिक एसेट
- 7:30:24का विचार आना चाहिए। एक परमाणु के प्रतीक
- 7:30:26चिन्ह यानी एटम सिंबल की कल्पना करें।
- 7:30:28फतेहाबाद में गोरखपुर परमाणु ऊर्जा
- 7:30:31संयंत्र स्थित है जो उत्तर भारत की ऊर्जा
- 7:30:33सुरक्षा का एक प्रमुख स्तंभ है। इसकी कुल
- 7:30:35क्षमता 2800 मेगावाट है जिसमें 700
- 7:30:38मेगावाट की चार इकाइयां शामिल हैं।
- 7:30:40यह तो बहुत ही महत्वपूर्ण आधुनिक पहलू हो
- 7:30:42गया और इसकी प्राचीन धरोहरें भी कम
- 7:30:44दिलचस्प नहीं है।
- 7:30:46बिल्कुल नहीं। यदि हम इसकी प्राचीन
- 7:30:48धरोहरों की परतों को उधेड़े तो सिंधु घाटी
- 7:30:50सभ्यता का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल बनावली
- 7:30:54इसी जिले में मौजूद है। साथ ही मध्यकालीन
- 7:30:57इतिहास का एक अहम हिस्सा हुमायूं की
- 7:31:00मस्जिद भी यहीं स्थित है। जहां से मुगल
- 7:31:03बादशाह हुमायूं का एक ऐतिहासिक अभिलेख
- 7:31:05प्राप्त हुआ है।
- 7:31:06इतनी विशाल ऊर्जा और इतिहास के इस लंबे
- 7:31:09सफर को देखकर स्वाभाविक रूप से प्रेरणा
- 7:31:12मिलती है। थकान जब हावी हो तो हौसलों का
- 7:31:15रिएक्टर जला लेना। इस लंबे सफर में अपनी
- 7:31:18ऊर्जा को बस कम ना होने देना।
- 7:31:20बहुत ही शानदार कनेक्ट किया आपने ऊर्जा के
- 7:31:22रिएक्टर को मोटिवेशन से। इसी ऊर्जा के साथ
- 7:31:25अब हम राज्य की आर्थिक शक्ति के केंद्र
- 7:31:28मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में प्रवेश करते
- 7:31:31हैं। गगनचुंबी इमारतों और सोलर पैनल के
- 7:31:34दृश्य के साथ एक एग्जाम अलर्ट है। एक तथ्य
- 7:31:37जो अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है। 12
- 7:31:39अप्रैल 2016 को इस जिले का नाम आधिकारिक
- 7:31:43तौर पर गुड़गांव से बदलकर गुरुग्राम कर
- 7:31:46दिया गया था। कुर गुरुग्राम की पहचान केवल
- 7:31:48हरियाणा तक सीमित नहीं है। यह वैश्विक पटल
- 7:31:51पर भारत का प्रतिनिधित्व करता है। यहां
- 7:31:54इंटरनेशनल सोलर अलायंस यानी आईएसए का
- 7:31:58मुख्यालय स्थित है। जलवायु परिवर्तन से
- 7:32:00निपटने की दिशा में भारत के नेतृत्व का यह
- 7:32:03सबसे बड़ा प्रमाण है।
- 7:32:05और इसके आर्थिक कायाकल्प की शुरुआत कैसे
- 7:32:08हुई?
- 7:32:08इसकी शुरुआत मुख्य रूप से 1981 में
- 7:32:11स्थापित Maruti Suzuki प्लांट से हुई थी।
- 7:32:14जिसने इस क्षेत्र को एक ऑटोमोबाइल और
- 7:32:17कॉर्पोरेट हब में बदल दिया। लेकिन देखिए
- 7:32:20गगनचुंबी इमारतों के बीच यह शहर अपनी
- 7:32:23सांस्कृतिक जड़ों से भी गहराई से जुड़ा
- 7:32:25है। यहां का शीतला माता मंदिर पूरे उत्तर
- 7:32:28भारत की आस्था का केंद्र है। जिसके
- 7:32:31व्यवस्थित प्रबंधन के लिए 1991 में एक
- 7:32:34विशेष बोर्ड का गठन किया गया था। आधुनिकता
- 7:32:37और इतिहास का एक और बेजोड़ उदाहरण हमारा
- 7:32:40अगला जिला खिसार है जिसे इस्पात नगरी या
- 7:32:43स्टील सिटी के रूप में खाती प्राप्त है।
- 7:32:46इसके विजुअल्स में पिघले हुए इस्पात के
- 7:32:49साथ हड़प्पा काल के मिट्टी के बर्तन देखे
- 7:32:52जा सकते हैं। 1354 ईसवी में फिरोजशाह
- 7:32:56तुगलक ने इसे खिसारे फिरोजा के रूप में
- 7:32:58बसाया था। हिसार का पुरातात्विक महत्व
- 7:33:01विश्वस्तरीय है। सिंधु घाटी सभ्यता का
- 7:33:04सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्थल राखीगढ़ इसी
- 7:33:07जिले में स्थित है जिसे वर्तमान में एक
- 7:33:09प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पुरातात्विक पर्यटन
- 7:33:12स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- 7:33:13और वास्तुकला के लिहाज से गुजरी महल भी तो
- 7:33:16यहीं है।
- 7:33:16बिल्कुल फिरोजशाह तुगलक द्वारा अपनी
- 7:33:19प्रेमिका के लिए बनवाया गया गुजरी महल
- 7:33:21वास्तुकला की एक नायाब धरोहर है। वहीं अगर
- 7:33:24हम आधुनिक कृषि विज्ञान की बात करें तो
- 7:33:261985 में यहां स्थापित सीआईआरबी यानी
- 7:33:30केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान पशुपालन
- 7:33:33और डेयरी क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान
- 7:33:35दे रहा है।
- 7:33:36एस वी टीच एट दिशांत आईएएस इतिहास को केवल
- 7:33:39पुराने खंडरों के रूप में नहीं बल्कि
- 7:33:42वर्तमान के भौगोलिक संदर्भ में पढ़ना
- 7:33:44चाहिए।
- 7:33:44सही कहा। अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश
- 7:33:47सर एंड देयर टीम, हम ऐतिहासिक मैपिंग पर
- 7:33:50विशेष जोर देते हैं। यूपीएससी अब केवल यह
- 7:33:53नहीं पूछता कि कोई प्राचीन स्थल किस राज्य
- 7:33:55में है बल्कि वह इसके आधुनिक, भौगोलिक और
- 7:33:58आर्थिक महत्व को जोड़कर विश्लेषणात्मक
- 7:34:01प्रश्न बनाता है।
- 7:34:01और जो एस्पिरेंट इस विश्लेषण की भट्टी में
- 7:34:04तपता है, उसके लिए यह पंक्तियां बिल्कुल
- 7:34:08सटीक बैठती हैं। आग में तपकर ही लोहे को
- 7:34:11फौलाद का आकार मिलता है। संघर्षों की भठी
- 7:34:14में जलकर ही हर एस्पिरेंट निखरता है।
- 7:34:17एकदम परफेक्ट एनालॉजी है।
- 7:34:18जिलों के इस विस्तृत अध्ययन के बाद अब समय
- 7:34:21है इन सभी आंकड़ों को एक साथ रखकर 360°
- 7:34:25अंतर जिला तुलना करने का। अगर हम जनसंख्या
- 7:34:29घनत्व का बार चार्ट देखें तो फरीदाबाद का
- 7:34:32ग्राफ सबसे ऊपर नजर आता है। लेकिन यहीं पर
- 7:34:35एक बेहद जटिल अवधारणा जन्म लेती है जिसे
- 7:34:38पैराडॉक्स ट्रैप या विरोधाभास जाल कहा जा
- 7:34:40सकता है।
- 7:34:41इस गुरुग्राम विरोधाभास को बहुत ही
- 7:34:43गंभीरता से समझने की जरूरत है। मेंस
- 7:34:46परीक्षा के लिए यह एक शानदार केस स्टडी
- 7:34:49है। गुरुग्राम वह जिला है जहां राज्य में
- 7:34:52साक्षरता दर सबसे अधिक है। बहुराष्ट्रीय
- 7:34:55कंपनियों के कारण प्रति व्यक्ति आय
- 7:34:56सर्वोच्च है और जीवन स्तर आधुनिक है।
- 7:35:00लेकिन जब हम लिंगानुपात यानी सेक्स रेश्यो
- 7:35:02के आंकड़े देखते हैं तो यह जिला राज्य में
- 7:35:05सबसे निचले पायदानों पर नजर आता है।
- 7:35:07यह तो सच में बहुत बड़ा कंट्रास्ट है।
- 7:35:09जी। और इसके ठीक विपरीत फतेहाबाद जैसे
- 7:35:11जिले को देखिए। आर्थिक रूप से भले ही
- 7:35:14फतेहाबाद में गुरुग्राम जैसी गगनचुंबी
- 7:35:16इमारतें ना हो लेकिन वहां का लिंगानुपात
- 7:35:19902 है जो राज्य में दूसरा सर्वोच्च है।
- 7:35:21यह विरोधाभास हमें सोचने पर मजबूर करता है
- 7:35:24कि क्या केवल ऊंची इमारतें और उच्च
- 7:35:27साक्षरता दर सामाजिक न्याय या लैंगिक
- 7:35:29समानता की गारंटी दे सकते हैं?
- 7:35:31क्या पितृसत्तात्मक सोच समाज के आर्थिक
- 7:35:34रूप से संपन्न होने के बाद भी गहराई तक
- 7:35:36जड़े जमाए हुए हैं?
- 7:35:37बिल्कुल। या फिर इसमें गुरुग्राम में
- 7:35:39रोजगार के लिए आने वाले पुरुष प्रवासियों
- 7:35:42की बड़ी संख्या का भी कोई योगदान है। यह
- 7:35:44वह विश्लेषणात्मक गहराई है जिसकी उम्मीद
- 7:35:46आयोग एक भावी प्रशासन से करता है।
- 7:35:48यह विरोधाभास वास्तव में झकझोड़ने वाला है
- 7:35:51और यह स्पष्ट करता है कि आर्थिक विकास और
- 7:35:53सामाजिक विकास हमेशा समानांतर नहीं चलते।
- 7:35:57चलिए अब इस पूरी गहन चर्चा के आधार पर हम
- 7:36:00प्रारंभिक परीक्षा के अभ्यास प्रश्नों की
- 7:36:02ओर बढ़ते हैं ताकि यह देखा जा सके कि इस
- 7:36:04ज्ञान का उपयोग परीक्षा हॉल के दबाव में
- 7:36:06कैसे किया जाए। एमसीक्यू प्रैक्टिस बहुत
- 7:36:08जरूरी है।
- 7:36:09तो पहला प्रश्न कल्याणकारी योजनाओं पर
- 7:36:12आधारित है। प्रश्न है भावांतर भरपाई योजना
- 7:36:15के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार
- 7:36:18करें। कथन एक यह किसानों की उपज के लिए
- 7:36:21उचित मूल्य सुनिश्चित करती है। कथन दो
- 7:36:25खरीफ फसलों के लिए किसान 5% प्रीमियम का
- 7:36:28भुगतान करते हैं। कथन तीन इसमें बागवानी
- 7:36:31फसलें भी शामिल हैं। उपलब्ध विकल्प है ए
- 7:36:35केवल एक और तीन सही है। बी केवल दो सही
- 7:36:39है। सी सभी कथन सही है या डी कोई भी कथन
- 7:36:43सही नहीं है। इस तरह के प्रश्नों में सीधा
- 7:36:45उत्तर खोजने के बजाय एलिमिनेशन तकनीक का
- 7:36:48प्रयोग करना चाहिए। यह तकनीक परीक्षा हॉल
- 7:36:50में ब्रह्मास्त्र का काम करती है। आइए कथन
- 7:36:54एक का विश्लेषण करते हैं। हमने चर्चा की
- 7:36:56थी कि इस योजना का विजुअल सोने की ढाल है
- 7:37:00जिसका अर्थ ही किसानों को मूल्य गिरने के
- 7:37:02जोखिम से बचाना और उचित मूल्य सुनिश्चित
- 7:37:05करना है। अतः कथन एक पूरी तरह से सत्य है।
- 7:37:08अब कथन दो पर आते हैं। इसमें कहा गया है
- 7:37:11कि खरीफ फसलों के लिए 5% प्रीमियम है। और
- 7:37:15यहीं पर हमें रुक कर अपने पूर्व विश्लेषण
- 7:37:17को याद करना होगा। हमने स्पष्ट रूप से
- 7:37:20पढ़ा था कि उच्च जोखिम वाली बागवानी फसलों
- 7:37:22के लिए प्रीमियम 5% है। जबकि खरीफ के लिए
- 7:37:25यह केवल 2% और रबी के लिए 1.5% है।
- 7:37:29परीक्षक ने जानबूझकर यहां डाटा का हेरफेर
- 7:37:32किया है। इसका मतलब कथन दो गलत है।
- 7:37:34और जैसे ही यह तय होता है कि कथन दो गलत
- 7:37:37है, विकल्पों में से बी और सी स्वत ही
- 7:37:39खारिज हो जाते हैं।
- 7:37:40एग्जैक्टली। अब कथन तीन को देखते हैं।
- 7:37:43क्या इसमें बागवानी फसलें शामिल हैं?
- 7:37:45बिल्कुल। और उन्हीं का प्रीमियम 5% है।
- 7:37:48अतः कथन तीन भी सही है। इस तार्किक
- 7:37:51प्रक्रिया से गुजरने के बाद स्पष्ट हो
- 7:37:53जाता है कि केवल कथन एक और तीन सही है जो
- 7:37:56हमें विकल्प ए तक ले जाता है।
- 7:37:58यह तार्किक प्रक्रिया ना केवल सटीकता
- 7:38:00बढ़ाती है बल्कि नेगेटिव मार्किंग से भी
- 7:38:02बचाती है। इसी कला को सलाम करते हुए
- 7:38:05विकल्पों के इस मायाजाल में एग्जामिनर
- 7:38:08बहुत भरमाता है। जो एलिमिनेशन की कला सीख
- 7:38:11ले वह हर चक्रव्यूह तोड़ जाता है। बहुत ही
- 7:38:14उम्दा एलिमिनेशन सच में एक चक्रव्यूह
- 7:38:17तोड़ने की कला है।
- 7:38:18अब दूसरे अभ्यास प्रश्न की ओर बढ़ते हैं
- 7:38:21जो जिला इतिहास की बारीकियों पर आधारित
- 7:38:24है। प्रश्न है हिसार और फतेहाबाद के संबंध
- 7:38:27में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें। कथन
- 7:38:30एक दोनों शहरों की स्थापना फिरोज शाह
- 7:38:33तुगलक ने की थी। कथन दो, फतेहाबाद को
- 7:38:36हरियाणा की गुलाबी नगरी के रूप में जाना
- 7:38:38जाता है। कथन तीन गुजरी महल फतेहाबाद में
- 7:38:42स्थित है।
- 7:38:43यहां भी उसी तार्किक विश्लेषण का प्रयोग
- 7:38:44करेंगे। कथन एक पर विचार करें। इतिहास के
- 7:38:47पन्नों में दर्ज है कि 1354 में हिसार ए
- 7:38:50फिरोजा और 1352 में अपने पुत्र फतेह खान
- 7:38:53के नाम पर फतेहाबाद की स्थापना फिरोजशाह
- 7:38:56तुगलक ने ही की थी। यह कथन पूर्णतया सत्य
- 7:38:58है।
- 7:38:58कथन दो, फतेहाबाद को गुलाबी नगरी कहा जाता
- 7:39:02है। यह तथ्य हमने इसके पहचान के रूप में
- 7:39:04पढ़ा है। अतः यह भी सत्य है।
- 7:39:06अब आते हैं कथन तीन पर। गुजरी महल
- 7:39:09फतेहाबाद में है। यहां दिमाग की घंटी बजनी
- 7:39:11चाहिए। गुजरी महल वास्तुकला का वह नायाब
- 7:39:14नमूना है जिसे फिरोज शाह ने अपनी प्रेमिका
- 7:39:17के लिए बनवाया था। लेकिन यह इस्पात नगरी
- 7:39:19हिसार में स्थित है ना कि फतेहाबाद में।
- 7:39:22इसलिए कथन तीन तथ्यात्मक रूप से गलत है।
- 7:39:24इस आधार पर जिस भी विकल्प में कथन तीन
- 7:39:28शामिल है उसे हटा दें। आपके पास सही उत्तर
- 7:39:31के रूप में केवल कथन एक और दो बचेंगे। यही
- 7:39:35वह सूक्ष्म ध्यान है जो परीक्षा में
- 7:39:38आवश्यक है।
- 7:39:39बिल्कुल। आज के इस विस्तृत और
- 7:39:41विश्लेषणात्मक सत्र में हमने कई परतों को
- 7:39:45खोला है। हमने कृषि में भावांतर भरपाई और
- 7:39:48सामाजिक सुरक्षा में विधुर पेंशन जैसी
- 7:39:51अनूठी योजनाओं के तकनीकी पहलुओं को समझा।
- 7:39:54इसके बाद राज्य के छह प्रमुख जिलों,
- 7:39:57अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, फरीदाबाद,
- 7:40:01फतेहाबाद, गुरुग्राम और हिसार के
- 7:40:04ऐतिहासिक, भौगोलिक और औद्योगिक महत्व का
- 7:40:08सूक्ष्म परीक्षण किया।
- 7:40:09और हमने गुरुग्राम विरोधाभास के माध्यम से
- 7:40:11आर्थिक और सामाजिक विकास के बीच की खाई का
- 7:40:14विश्लेषण किया और अंत में एमसीक्यू
- 7:40:17एलिमिनेशन तकनीक का अभ्यास कर इस पूरे
- 7:40:19ज्ञान को परीक्षा के लिए प्रासंगिक बनाया।
- 7:40:21प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों ही
- 7:40:24दृष्टिकोण से यह एक संपूर्ण विश्लेषण रहा
- 7:40:27है।
- 7:40:27अंत में एक वैचारिक प्रश्न के साथ इस
- 7:40:30चर्चा को विराम देना उचित होगा। सोचिए जो
- 7:40:33राज्य खेल के मैदानों में दुनिया भर में
- 7:40:35अपना परचम लहरा रहा है। कृषि में देश का
- 7:40:37पेट भर रहा है और आर्थिक रूप से इतनी
- 7:40:40मजबूत राजधानी रखता है। वहां साक्षरता और
- 7:40:43आर्थिक संपन्नता के बावजूद लिंगानुपात का
- 7:40:45यह विरोधाभास हमारी सामाजिक संरचना की किस
- 7:40:48गहरी खामी को उजागर करता है? क्या शिक्षा
- 7:40:51केवल अक्षर ज्ञान बनकर रह गई है या वह
- 7:40:54सामाजिक चेतना जगाने में विफल रही है? इस
- 7:40:56प्रश्न पर गहन विचार करें क्योंकि एक
- 7:40:58[नाक से की जाने वाली आवाज़] बेहतरीन
- 7:40:58प्रशासक बनने की नीव इसी वैचारिक मंथन पर
- 7:41:01टिकी है।
- 7:41:02दिस लेक्चर वाज़ बाय दिशांत आईए। आज की इस
- 7:41:05विस्तृत चर्चा में हम एक बेहद दिलचस्प और
- 7:41:09रणनीतिक विषय की गहराई में जाने वाले हैं।
- 7:41:11हमारे सामने जो स्रोत है वह कोई कोई आम
- 7:41:14स्टडी मटेरियल नहीं है। यह असल में दिशांत
- 7:41:16आईएएस और मेंटर राहुल प्रकाश सर की टीम
- 7:41:19द्वारा तैयार की गई एक पूरी रणनीतिक
- 7:41:20प्रस्तुति है। जिसका शीर्षक है हरियाणा
- 7:41:23जिला दर्शन भाग एक।
- 7:41:25बिल्कुल। और इस चर्चा का मिशन भी बहुत
- 7:41:29स्पष्ट है। हम सिर्फ तथ्यों की कोई लिस्ट
- 7:41:32नहीं पढ़ने वाले हैं। हम उस हिडन नॉलेज को
- 7:41:35डिकोड करेंगे जो अक्सर किताबों के पन्नों
- 7:41:39में कहीं खो जाता है।
- 7:41:40हम सही कहा।
- 7:41:41एक सीरियस एस्पिरेंट को ये समझना ही होता
- 7:41:43है कि कैसे कैसे किसी जगह का भूगोल यानी
- 7:41:47उसकी ज्योग्राफिक लोकेशन उसके पूरे इतिहास
- 7:41:50की स्क्रिप्ट लिखती है।
- 7:41:51और फिर वही इतिहास आगे चलकर उसकी
- 7:41:53अर्थव्यवस्था को आकार देता है। और सबसे
- 7:41:56जरूरी बात हम उन ट्रैप्स को पहचानेंगे जो
- 7:42:00एग्जामिनर अक्सर सेट करते हैं।
- 7:42:02तो चलिए सीधा विषय पर यानी दी स्ट्रेटेजिक
- 7:42:04मैप स्ट्रेटजी पर आते हैं। यह कांसेप्ट
- 7:42:08मुझे काफी इंटरेस्टिंग लगा। अक्सर माना
- 7:42:10जाता है कि नक्शा सिर्फ रटने के लिए होता
- 7:42:12है कि भाई कौन सा शहर कहां है।
- 7:42:15देखिए जैसा कि दिशांत आईएएस में हम हमेशा
- 7:42:18सिखाते हैं। नक्शा केवल आउटलाइन या रेखाएं
- 7:42:22नहीं होता। लोकेशन ही डेस्टिनी तय करती
- 7:42:24है। किसी भी स्थान की भौगोलिक स्थिति ही
- 7:42:27उसकी ऐतिहासिक भूमिका तय करती है।
- 7:42:30मतलब वो आगे चलकर एक इकोनॉमिक हब बनेगा या
- 7:42:33नहीं यह सब भूगोल से तय होता है।
- 7:42:35एकदम सही। उदाहरण के लिए एक एग्जाम अलर्ट
- 7:42:38पर ध्यान दिया जाना चाहिए। नूह जिले का
- 7:42:41फिरोजपुर झिरका इलाका। अगर इसे मैप पर
- 7:42:45देखा जाए तो पता चलता है कि यह तीन तरफ से
- 7:42:48राजस्थान से घिरा हुआ है।
- 7:42:50तो तीन तरफ से घिरे होने का सीधा मतलब है
- 7:42:52कि यह एक बहुत ही क्रिटिकल बॉर्डर टाउन
- 7:42:54है।
- 7:42:55बिल्कुल एक रैंक ओरिएंटेड एस्पिरेंट सिर्फ
- 7:42:58यह रटकर नहीं बैठेगा। वो सोचेगा कि अ अगर
- 7:43:02यह तीन तरफ से दूसरे राज्य से घिरा है तो
- 7:43:05इसका रणनीतिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक
- 7:43:08महत्व क्या होगा? एग्जामिनर इन्हीं
- 7:43:11लोकेशनेशंस पर सवाल बनाते हैं।
- 7:43:13हम दैट मेक्स सो मच सेंस। मतलब रट्टा
- 7:43:16मारने से काम नहीं चलेगा। नक्शे को
- 7:43:18विजुअलाइज करना पड़ेगा। इसी बात पर
- 7:43:21यूपीएससी की तैयारी पर एक लाइन याद आ रही
- 7:43:23है।
- 7:43:24बताइए।
- 7:43:25किताबों के पन्नों में जो सिर्फ शहर
- 7:43:27तलाशते रह गए। प्रीलिम्स के चक्रव्यूह में
- 7:43:29ही वह उलझ कर रह गए। असली सिकंदर तो वो
- 7:43:32एस्पिरेंट्स हैं जो नक्शे की लकीरों में
- 7:43:34भूगोल का मर्म समझ गए।
- 7:43:36बहुत खूब। और इसी मर्म को समझने के लिए अब
- 7:43:40कुरुक्षेत्र चलना होगा। कुरुक्षेत्र यानी
- 7:43:43धर्म की भूमि। जब भी द लैंड ऑफ धर्मा या
- 7:43:46कुरुक्षेत्र का जिक्र आता है ना तो दिमाग
- 7:43:48में सबसे पहले महाभारत का युद्ध आता है।
- 7:43:50श्रोत में इसे पार्कों का शहर भी कहा गया
- 7:43:52है।
- 7:43:52हम
- 7:43:53मैंने यह भी देखा कि यहां एशिया का सबसे
- 7:43:54बड़ा मानव निर्मित तालाब ब्रह्म सरोवर है
- 7:43:57और शेख चिल्ली का मकबरा भी है जिसे
- 7:43:59हरियाणा का ताजमहल कहते हैं। लेकिन
- 7:44:03एक चीज मुझे थोड़ा कंफ्यूज कर रही है।
- 7:44:05इसकी पूरी टाइमलाइन को कैसे समझा जाए?
- 7:44:07कैच यहीं पर है। देखिए कुरुक्षेत्र का
- 7:44:10विकास कोई रातोंरात नहीं हुआ था। इसका एक
- 7:44:13पूरा इवोल्यूशन फ्लो चार्ट है।
- 7:44:15अच्छा।
- 7:44:16हां। सबसे पहले आता है वैदिक काल जहां से
- 7:44:20इसकी नींव पड़ी और आर्यों का प्रभाव दिखा।
- 7:44:23फिर आता है महाभारत का महाकाव्य काल जिसने
- 7:44:26इसे धर्मक्षेत्र बनाया और आज यह एक मॉडर्न
- 7:44:30पिल्ग्रिमेज यानी आधुनिक तीर्थ शहर बन
- 7:44:33चुका है। लेकिन यहां एग्जामिनर का एक
- 7:44:36क्लासिक ट्रैप है। सीरियस एस्पिरेंट्स को
- 7:44:39इसे मार्क कर लेना चाहिए। ट्रैप हम किस
- 7:44:42तरह का ट्रैप?
- 7:44:43ज्यादातर स्टूडेंट्स सोचते हैं किकि
- 7:44:45ब्रह्म सरोवर इतना विशाल है और इतना
- 7:44:48प्रसिद्ध है तो भगवान कृष्ण ने अर्जुन को
- 7:44:51गीता का उपदेश वहीं दिया होगा।
- 7:44:53हां, लॉजिकल तो यही लगता है।
- 7:44:55लेकिन यह गलत है। गीता का उपदेश ज्योति सर
- 7:44:58में दिया गया था ना कि ब्रह्म सरोवर में।
- 7:45:01एग्जाम हॉल के उस भारी दबाव में यह छोटा
- 7:45:04सा डिस्टिंशन बहुत भारी पड़ता है।
- 7:45:06ओ यह तो पूरा नजरिया ही बदल देता है। मैं
- 7:45:10भी शायद ब्रह्मसरोवर ही टिक कर देता। खैर
- 7:45:12अगर कुरुक्षेत्र विचारधारा और धर्म के
- 7:45:15युद्ध का केंद्र था तो फिजिकल और पॉलिटिकल
- 7:45:18बैटल्स मतलब जो असली लड़ाईयां थी वो कहां
- 7:45:21लड़ी जा रही थी?
- 7:45:22यह हमें सीधा पानीपत की ओर ले जाता है।
- 7:45:24पानीपत बुनकरों और युद्धों का शहर। हम
- 7:45:28पानीपत का मतलब ही है भारत के इतिहास को
- 7:45:30पूरी तरह से पलट देने वाली तीन निर्णायक
- 7:45:33लड़ाईयां।
- 7:45:34बिल्कुल दिल्ली के इतने करीब होने के कारण
- 7:45:37जो कोई भी उत्तर पश्चिम से आता था उसे
- 7:45:39दिल्ली फतेह करने के लिए पानीपत के मैदान
- 7:45:42से ही गुजरना पड़ता था।
- 7:45:43जैसे 1526 में बाबर बनाम इब्राहिम लोदी की
- 7:45:47पहली लड़ाई।
- 7:45:47सही।
- 7:45:48और फिर 1556 में अकबर
- 7:45:51जिनका नेतृत्व बैरम खान कर रहे थे। और
- 7:45:54हेमु के बीच दूसरी लड़ाई। और आखिर में
- 7:45:571761 में मराठों और अहमद शाह अब्दाली के
- 7:45:59बीच तीसरी लड़ाई।
- 7:46:01लेकिन एक बात बताइए नोट्स में लिखा है कि
- 7:46:04आज पानीपत शडीयान और पचरंगा अचार का बहुत
- 7:46:07बड़ा इकोनॉमिक हब है। ये ये शडीयान आखिर
- 7:46:10होता क्या है? और इसका उन भयंकर युद्धों
- 7:46:13से क्या कनेक्शन है?
- 7:46:14ये एक बहुत ही शानदार विश्लेषणात्मक बिंदु
- 7:46:16है। देखिए शोडीयान का मतलब है रिसाइकल्ड
- 7:46:19यान। पुराने कपड़ों या ऊन को प्रोसेस करके
- 7:46:22नया धागा बनाना।
- 7:46:23ओके। जब कोई जगह बार-बार युद्धों से
- 7:46:26उजड़ती है तो वहां संसाधनों की भारी कमी
- 7:46:29हो जाती है। ऐसे में जो कुछ भी उपलब्ध है
- 7:46:32उसे रिसाइकल करने की एक सर्वाइवल संस्कृति
- 7:46:35पनपती है।
- 7:46:36वाओ मतलब जो एक मजबूरी थी। हां आज वही
- 7:46:40सर्वाइवल स्किल एक मल्टी मिलियन डॉलर
- 7:46:42टेक्सटाइल इंडस्ट्री बन चुकी है।
- 7:46:44क्या बात है। युद्ध के मैदान से
- 7:46:45रिसाइक्लिंग के ग्लोबल हब तक का सफर और
- 7:46:50मैंने पढ़ा कि बाबर ने यहां काबुली बाग
- 7:46:53मस्जिद बनवाई थी। इतने खूनखराबे के बीच
- 7:46:56मस्जिद बनवाना। क्या यह सिर्फ एक धार्मिक
- 7:46:59कदम था? अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश
- 7:47:02सर एंड देर टीम हम इस बात पर बहुत जोर
- 7:47:05देते हैं कि ऐसे कदम हमेशा रणनीतिक होते
- 7:47:08हैं। बाबर अपनी जीत को सिर्फ एक मिलिट्री
- 7:47:11विक्ट्री नहीं बल्कि एक स्थाई पॉलिटिकल
- 7:47:13स्टेटमेंट बनाना चाहता था। काबुली बाग
- 7:47:16मस्जिद उसी सत्ता की स्थापना का प्रतीक
- 7:47:18थी। तो लड़ाईयों के उस मैदान से निकलकर अब
- 7:47:21थोड़ी शांति और हरियाली की तरफ चलते हैं।
- 7:47:24करनाल जिसे हरियाणा का पेरिस कहा जाता है।
- 7:47:27हम
- 7:47:27अब पेरिस तो फैशन और रोमांस के लिए जाना
- 7:47:30जाता है। पर करनाल में ऐसा क्या है?
- 7:47:32करनाल की तुलना पेरिस से इसके मॉडर्न
- 7:47:35आर्किटेक्चर, सुनियोजित लेआउट और साफ सफाई
- 7:47:38के कारण की जाती है। लेकिन इसका असली
- 7:47:40महत्व इसके इंस्टिट्यूशन और एग्रीकल्चर
- 7:47:43में है।
- 7:47:44जैसे कि एनडीआरआई
- 7:47:46बिल्कुल। 1955 में यहां एनडीआरआई यानी
- 7:47:50राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान स्थापित
- 7:47:53हुआ। यह लिबर्टी शूज का हब है और प्रसिद्ध
- 7:47:56कर्ण झील भी यहीं है।
- 7:47:58और इतिहास के नजरिए से देखें तो
- 7:48:00ऐतिहासिक रूप से 1739 का करनाल युद्ध बहुत
- 7:48:04फेमस है। जहां नादिर शाह ने मुगल बादशाह
- 7:48:07मोहम्मद शाह रंगीला को बुरी तरह हराया था।
- 7:48:10मुझे मेंस पर्सपेक्टिव से यहां एक टर्म
- 7:48:12बहुत इंटरेस्टिंग लगा। करनाल को धान का
- 7:48:15कटोरा या राइस बल क्यों कहते हैं? क्या
- 7:48:17सिर्फ यहां चावल उगाए जाते हैं? इसलिए
- 7:48:20सिर्फ उगाने के कारण नहीं बल्कि ग्लोबल
- 7:48:22लेवल पर एक्सपोर्ट करने के कारण करनाल का
- 7:48:25बासमती चावल पूरी दुनिया में जाता है।
- 7:48:28यहां की दोमट मिट्टी और यमुना नदी का जो
- 7:48:30ज्योग्राफिक एडवांटेज है वो इसे एक
- 7:48:32एक्सपोर्ट हब बनाता है।
- 7:48:34हम
- 7:48:35नादिर शाह की लूट से लेकर आज बासमती के
- 7:48:38ग्लोबल एक्सपोर्ट तक करनाल ने खुद की
- 7:48:40इकॉनमी को पूरी तरह से ट्रांसफॉर्म कर
- 7:48:43लिया है।
- 7:48:43एक एस्पिरेंट की जिंदगी भी तो कुछ ऐसी ही
- 7:48:46होती है ना। तैयारी के सफर में जो नादिर
- 7:48:49शाहसी हार झेल जाते हैं, वही एक दिन
- 7:48:51रिजल्ट के करनाल में बासमती से महक जाते
- 7:48:54हैं।
- 7:48:54एकदम सही। अब अगर एग्रीकल्चर से कल्चर की
- 7:48:58तरफ शिफ्ट करें, तो कैथल का नाम आता है।
- 7:49:00यह स्थान हनुमान जी की जन्मस्थली के रूप
- 7:49:02में भी जाना जाता है जिसे कपिल स्थल कहते
- 7:49:05हैं।
- 7:49:06लेकिन कैथल को छोटी काशी क्यों कहते हैं?
- 7:49:09मैंने तो सुना था कि भिवानी को छोटी काशी
- 7:49:11कहा जाता है। क्या नोट्स में कोई टाइपो
- 7:49:13है?
- 7:49:13सीरियस एस्पिरेंट्स इसे तुरंत मार्क कर
- 7:49:16लें। यह टाइपो नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा एक
- 7:49:18जैम ट्रैप है।
- 7:49:19अच्छा।
- 7:49:20जी हां, कैथल और भिवानी दोनों को ही छोटी
- 7:49:23काशी कहा जाता है। लेकिन इसके पीछे के
- 7:49:25कारण बिल्कुल अलग है।
- 7:49:27वो कैसे?
- 7:49:27कैथल को यह उपाधि वहां स्थित नवग्रह
- 7:49:31कुंडों की वजह से मिली है। जिनका संबंध
- 7:49:33महाभारत काल से है। जबकि भिवानी को वहां
- 7:49:37मौजूद सैकड़ों मंदिरों के कारण छोटी काशी
- 7:49:40कहते हैं।
- 7:49:40मतलब अगर सवाल में नवग्रह कुंड लिखा है तो
- 7:49:43उत्तर कैथल ही होगा। बिल्कुल और कैथल का
- 7:49:46एक हिस्टोरिकल सिग्निफिकेंस रजिया सुल्तान
- 7:49:49से भी है। भारत की पहली महिला मुस्लिम
- 7:49:51शासक रजिया सुल्तान का मकबरा कैथल में ही
- 7:49:54है।
- 7:49:55हम जब वो भाग रही थी तो कैथल के पास ही
- 7:49:57उनकी हत्या कर दी गई थी।
- 7:49:58सही कहा। यह मध्यकालीन इतिहास का एक बहुत
- 7:50:01बड़ा टर्निंग पॉइंट था।
- 7:50:02इतिहास के यह पन्ने हमें हिसार की तरफ भी
- 7:50:04ले जाते हैं। जिसे स्टील एंड मैग्नेट सिटी
- 7:50:08कहा जाता है। इसकी स्थापना फिरोजशाह तुगलक
- 7:50:10ने 1354 में की थी।
- 7:50:12सही कहा। और हिसार सिर्फ मिडिवल हिस्ट्री
- 7:50:15के लिए नहीं बल्कि एंशिएंट हिस्ट्री के
- 7:50:17लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। यहां राखीगढ़ी
- 7:50:20है जो सिंधु घाटी सभ्यता यानी इंडस वैली
- 7:50:23सिविलाइजेशन का भारत में सबसे बड़ा साइट
- 7:50:26है।
- 7:50:26ये राखीगढ़ तो न्यूज़ में भी बहुत रहता
- 7:50:28है। लेकिन तुगलक काल के कॉन्टेक्स्ट में
- 7:50:30एक गुजरी महल का भी जिक्र है नोट्स में।
- 7:50:33यह भी एक क्लासिक ट्रैप है। फिरोजशाह ने
- 7:50:35गुजरी महल अपनी एक प्रेमिका के लिए बनवाया
- 7:50:38था। ट्रैप यह है कि कई बार स्टूडेंट्स इसे
- 7:50:40एक अलग इंडिपेंडेंट मोन्यूमेंट मान लेते
- 7:50:42हैं।
- 7:50:43तो यह अलग नहीं है?
- 7:50:44नहीं, यह हिसार किले के कॉम्प्लेक्स के
- 7:50:46ठीक अंदर ही स्थित है।
- 7:50:48और मॉडर्न कॉन्टेक्स्ट में यहां केंद्रीय
- 7:50:50भैंस अनुसंधान संस्थान यानी सीआईआर भी है।
- 7:50:54मतलब इतिहास और एग्रीकल्चरल रिसर्च दोनों
- 7:50:56साथ-साथ चल रहे हैं।
- 7:50:57बिल्कुल। जैसा कि दिशांत आईएस में हम
- 7:51:00हमेशा मैप की लेयर्स को डिकोड करते हैं।
- 7:51:03आइए रोहतक के एक बहुत ही विशेष
- 7:51:05ज्योग्राफिक फैक्ट को देखते हैं। रोहतक एक
- 7:51:08लैंड लॉक्ड जिला है।
- 7:51:09मतलब यह किसी भी अन्य राज्य के साथ अपनी
- 7:51:11सीमा साझा नहीं करता।
- 7:51:12एकदम सही।
- 7:51:14तो यह हरियाणा के बिल्कुल बीचों-बीच है।
- 7:51:16शायद इसीलिए यह शिक्षा और राजनीति का इतना
- 7:51:19बड़ा केंद्र बन पाया। लॉजिक बिल्कुल सही
- 7:51:21है। जब कोई क्षेत्र बॉर्डर की चिंताओं और
- 7:51:24बाहरी आक्रमणों से अपेक्षाकृत सुरक्षित
- 7:51:27होता है तो वहां ट्रेड, एजुकेशन और कल्चर
- 7:51:30पर ज्यादा फोकस किया जा सकता है।
- 7:51:33हम मेक सेंस।
- 7:51:34अगर इसके हिस्टोरिकल फ्लो चार्ट को देखा
- 7:51:36जाए तो रोहतक के खोखराकोट इलाके में
- 7:51:40इंडोग्रीक सिक्के मिले हैं। इसका सीधा
- 7:51:43मतलब है कि यह प्राचीन काल में एक बहुत
- 7:51:46बड़ा ट्रेड सेंटर था। और आज यह एशिया के
- 7:51:48सबसे बड़े कपड़ा बाजार, शोरी मार्केट और
- 7:51:51सर्दियों में अपनी रेवड़ी गज्जक के लिए
- 7:51:53फेमस है। मतलब ट्रेड की लेगसी आज भी
- 7:51:56कंटिन्यू कर रही है। खोखराकोट के सिक्कों
- 7:51:58सा जो अपना मूल्य पहचानते हैं वही
- 7:52:00एस्पिरेंट्स रोहतक के बाजारों सा हर मौसम
- 7:52:02में छा जाते हैं।
- 7:52:03बहुत खूब। अब रोहतक के पास ही है जींद।
- 7:52:07जिसे हरियाणा का दिल कहा जाता है।
- 7:52:09दिल इसलिए क्योंकि यह मैप के बिल्कुल
- 7:52:11सेंटर में है। मैंने देखा कि यह सबसे
- 7:52:14ज्यादा यानी सात जिलों के बॉर्डर को टच
- 7:52:16करता है।
- 7:52:17हां, लेकिन इसके पीछे का इनसाइड समझना
- 7:52:19जरूरी है। जो जिला सात अलग-अलग जिलों को
- 7:52:23टच करता है, उसका लॉजिस्टिक्स और
- 7:52:25कनेक्टिविटी नेटवर्क सबसे मजबूत होगा।
- 7:52:28हम
- 7:52:28यही कारण है कि हरियाणा का पहला मिल्क
- 7:52:30प्लांट, वीटा मिल्क प्लांट जींद में ही
- 7:52:33क्यों स्थापित किया गया था? मुझे लगा शायद
- 7:52:35इसलिए क्योंकि वहां मुर्रा भैंस बहुत पाई
- 7:52:36जाती है।
- 7:52:37मुर्रा भैंस जिसे काला सोना भी कहते हैं
- 7:52:39उसका होना एक कारण जरूर है।
- 7:52:42लेकिन सबसे बड़ा विश्लेषणात्मक कारण है
- 7:52:44इसका सेंट्रलाइज लोकेशन।
- 7:52:46अच्छा ताकि सप्लाई चेन आसान हो।
- 7:52:48बिल्कुल। यहां से सात जिलों में दूध का
- 7:52:50डिस्ट्रीब्यूशन सबसे आसान और तेज था।
- 7:52:52भूगोल ने एक बार फिर अर्थव्यवस्था का
- 7:52:54रास्ता तय किया।
- 7:52:55इसके अलावा यहां पांडु पिंडारा नाम का एक
- 7:52:58बहुत बड़ा धार्मिक स्थल है।
- 7:52:59जहां महाभारत काल में पांडवों ने पिंडदान
- 7:53:02किया था। तो अब चलते हैं महेंद्रगढ़ की
- 7:53:04तरफ। यह मिनरल हब यानी खनिजों का केंद्र
- 7:53:08है। लेकिन
- 7:53:10यहां मैंने एक बहुत अजीब चीज नोटिस की।
- 7:53:13इसका मुख्यालय महेंद्रगढ़ शहर में नहीं
- 7:53:15है।
- 7:53:15एक्जेक्टली महेंद्रगढ़ इकलौता ऐसा जिला है
- 7:53:18जिसका हेड क्वार्टर नरनौल में है।
- 7:53:21हम्म।
- 7:53:21और क्योंकि हेड क्वार्टर नरनौल में है तो
- 7:53:24प्रशासन और पावर का सेंटर भी वही रहा। यही
- 7:53:27कारण है कि एग्जाम का एक और ट्रैप यहां
- 7:53:29बनता है। ऐतिहासिक जलमल महेंद्रगढ़ शहर
- 7:53:33में नहीं बल्कि नरनौल में है।
- 7:53:35और यहां की जो डोसी की पहाड़ी है उसका चवन
- 7:53:39ऋषि से क्या संबंध है?
- 7:53:40डोसी की पहाड़ी वह स्थान है जहां चवन ऋषि
- 7:53:43ने तपस्या की थी। और इन्हीं के नाम पर
- 7:53:46चवनप्राश का नाम पड़ा। इसके साथ ही यह
- 7:53:48पूरा क्षेत्र संगमरमर, स्लेट और लौह अयस्क
- 7:53:52यानी आयरन ओर जैसे खनिजों से समृद्ध है।
- 7:53:55महेंद्रगढ़ से आगे बढ़े तो रेवाड़ी आता
- 7:53:57है। पीतल नगरी और अहिरवाल का लंदन। यहां
- 7:54:00दुनिया का सबसे पुराना चालू भाप इंजन फेरी
- 7:54:03क्वीन भी रखा है।
- 7:54:04अंडर द गाइडेंस ऑफ राहुल प्रकाश सर। अक्सर
- 7:54:07क्लास में एक नामकरण के फ्लो चार्ट के
- 7:54:09जरिए से समझाया जाता है। राजा कर्मपाल ने
- 7:54:13रेवाड़ी की स्थापना की थी। हम
- 7:54:15और इसका नाम बलराम जी की पत्नी रेवती के
- 7:54:18नाम पर रखा गया था जो समय के साथ रेवाड़ी
- 7:54:20बन गया। और एक बहुत बड़ा हिस्टोरिकल फैक्ट
- 7:54:24यह है कि हेमु जिसने पानीपत की दूसरी
- 7:54:27लड़ाई लड़ी थी और विक्रमादित्य की उपाधि
- 7:54:30ली थी वो भी रेवाड़ी का ही रहने वाला था।
- 7:54:32मतलब एक साधारण व्यापारी दिल्ली के तख्त
- 7:54:34तक पहुंच गया। जी, यह तो अह यूपीएससी
- 7:54:37एस्पिरेंट्स के लिए अल्टीमेट मोटिवेशन है।
- 7:54:39नमक बेचकर भी जो दिल्ली के तख्त के ख्वाब
- 7:54:42सजाते हैं, हेमु की तरह वही इतिहास के
- 7:54:44पन्नों में विक्रमादित्य कहलाते हैं।
- 7:54:47बिल्कुल। अब अगर प्रशासन और पावर की बात
- 7:54:49हो ही रही है तो हमें हरियाणा की
- 7:54:51एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल पंचकूला को देखना
- 7:54:54होगा। हम
- 7:54:55यहां मॉरनी हिल्स में हरियाणा की सबसे
- 7:54:57ऊंची चोटी करो है। इसके अलावा मुगल शैली
- 7:55:01में बना पिंजौर गार्डन और एशिया का सबसे
- 7:55:04बड़ा कैक्टस गार्डन भी यहीं है।
- 7:55:06लेकिन इसे एडमिनिस्ट्रेटिव कैपिटल क्यों
- 7:55:09कहा जाता है? एग्जाम अलर्ट क्योंकि
- 7:55:11एचएसएससी यानी हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग
- 7:55:15और एचपीएससी हरियाणा लोक सेवा आयोग दोनों
- 7:55:18के हेड क्वार्टर्स पंचकूला में ही स्थित
- 7:55:21है। जो भी एस्पिरेंट स्टेट एग्जाम क्रैक
- 7:55:23करेगा उसकी प्रशासनिक शुरुआत यहीं से
- 7:55:26होगी। तो पंचकूला से सीधे मेवात या जिसे
- 7:55:30अब नूह कहते हैं और पलवल की तरफ चलते हैं।
- 7:55:33नूह का सेक्स रेशियो यानी लिंगानुपात
- 7:55:36हरियाणा में सबसे उच्चतम है। यहां कोटला
- 7:55:39झील है। लेकिन मुझे एक बात समझ नहीं आई।
- 7:55:43यहां भारत का पहला मोबाइल कोर्ट यानी चल
- 7:55:46न्यायालय क्यों स्थापित किया गया? इसे ऐसे
- 7:55:49समझा जा सकता है। नूह एक बहुत ही रूरल
- 7:55:52इलाका रहा है। लोगों के लिए न्याय के लिए
- 7:55:55दूर शहरों की अदालतों तक जाना आर्थिक रूप
- 7:55:58से संभव नहीं था। इसलिए यह कांसेप्ट ल्च
- 7:56:01किया गया कि अगर लोग कोर्ट तक नहीं आ सकते
- 7:56:04तो कोर्ट एक बस में बैठकर लोगों के गांव
- 7:56:07तक जाएगा। यह ज्योग्राफिकल चैलेंज का एक
- 7:56:10बेहतरीन लीगल स्यूशन था।
- 7:56:12दैट्स अ ब्रिलियंट पॉलिसी इनोवेशन। और
- 7:56:15पलवल का क्या महत्व है? पलवल को कॉटन सिटी
- 7:56:18और शुगर सिटी कहते हैं। लेकिन इसका सबसे
- 7:56:20बड़ा हिस्टोरिकल लैंडमार्क यह है कि 1919
- 7:56:24में रोलेट एक्ट के विरोध के दौरान महात्मा
- 7:56:27गांधी की हरियाणा में पहली गिरफ्तारी पलवल
- 7:56:31रेलवे स्टेशन पर ही हुई थी। हमारे सफर का
- 7:56:33आखिरी जिला है झज्जर जिसे शहीदों का शहर
- 7:56:37कहा जाता है। यहां का भिंडावास पक्षी
- 7:56:39अभयारण्य अपनी सुंदरता के लिए फेमस है और
- 7:56:43बारसा में भारत का सबसे बड़ा कैंसर
- 7:56:45संस्थान भी बन रहा है।
- 7:56:47यहां एक प्रीलिम सूचक है। रैंकर्स हमेशा
- 7:56:50इन पर फोकस करते हैं। नोट्स साफ कहते हैं
- 7:56:52कि झज्जर सैनिकों का बहुत बड़ा हब है।
- 7:56:56इसलिए इसे शहीदों का शहर कहते हैं। हम
- 7:56:59लेकिन अगर सवाल आए कि हरियाणा का पहला
- 7:57:02सैनिक स्कूल कहां खुला था? तो वह कुंजपुरा
- 7:57:05करनाल में था। इन दोनों फैक्ट्स को कभी
- 7:57:08मिक्स नहीं करना चाहिए।
- 7:57:10कुंजपुरा की नीव और झज्जर का जज्बा जो
- 7:57:12पहचान ले कसम से यूपीएससी का वो कोई भी
- 7:57:16ट्रैप आसानी से फलांग ले।
- 7:57:18बहुत अच्छे।
- 7:57:19शानदार। तो अब एक क्विक 360° रिककैप करते
- 7:57:23हैं उन उपनामों का जो हमने आज देखे।
- 7:57:25बुनकरों का शहर पानीपत, हरियाणा का पेरिस
- 7:57:29करनाल, गुलाबी नगरी फतेहाबाद, पीतल नगरी
- 7:57:32रेवाड़ी, इस्पात नगरी हिसार और हरियाणा का
- 7:57:35दिल जींद।
- 7:57:37और यहां एक आखिरी ट्रैप याद रखें। पार्कों
- 7:57:39का शहर कुरुक्षेत्र है। इसे पंचकूला की
- 7:57:42नैनो सिटी वाले उपनाम से बिल्कुल कंफ्यूज
- 7:57:45नहीं करना है। एग्जाम हॉल के भारी दबाव
- 7:57:48में यह मिलते जुलते नाम बहुत गलतियां
- 7:57:50करवाते हैं।
- 7:57:51अब आते हैं सबसे थ्रिलिंग पार्ट पर।
- 7:57:53यूपीएससी प्रीलिम्स चैलेंज। हमारे पास दो
- 7:57:56एमसीक्यूस हैं। पहला इतिहास से है। तीन
- 7:57:59स्टेटमेंट दिए गए हैं। पहला पानीपत की
- 7:58:01तीसरी लड़ाई अहमद शाह अब्दाली और मराठों
- 7:58:04के बीच लड़ी गई थी। दूसरा नादिर शाह ने
- 7:58:06करनाल के युद्ध में मोहम्मद शाह रंगीला को
- 7:58:08हराया। तीसरा पानीपत की दूसरी लड़ाई में
- 7:58:11बाबर ने हेमु को हराया था। इसको कैसे टैकल
- 7:58:14करें?
- 7:58:14ऐसे सवालों में हमेशा एलिमिनेशन लॉजिक का
- 7:58:18इस्तेमाल करना चाहिए। पहली स्टेटमेंट एकदम
- 7:58:21सही है। 1761 में मराठों और अब्जाली की ही
- 7:58:24टक्कर हुई थी। दूसरी स्टेटमेंट भी सही है।
- 7:58:271739 का करनाल का युद्ध नादिरशाह और
- 7:58:30रंगीला के बीच हुआ था। अब तीसरी स्टेटमेंट
- 7:58:32देखिए।
- 7:58:33पानीपत की दूसरी लड़ाई 1556 में हुई थी।
- 7:58:36बिल्कुल, हमने अपनी स्लाइड में देखा था कि
- 7:58:38यह लड़ाई अकबर जिनका नेतृत्व बैरम खान कर
- 7:58:42रहे थे और हेमु के बीच हुई थी। बाबर तो
- 7:58:44पहली लड़ाई यानी 1526 में था। तो तीसरी
- 7:58:47स्टेटमेंट गलत है।
- 7:58:48सही कहा। इसलिए अब ऑप्शंस में जहां भी
- 7:58:52स्टेटमेंट थ्री है उसे एलिमिनेट कर देना
- 7:58:54चाहिए। जो बचेगा वही लॉजिकल आंसर होगा।
- 7:58:57ब्रिलियंट मतलब सिर्फ फैक्ट्स नहीं कॉमन
- 7:59:00सेंस और टाइमलाइन की भी जरूरत है।
- 7:59:02बिल्कुल।
- 7:59:03दूसरा सवाल ज्योग्राफी और कल्चर से है।
- 7:59:05पहला महेंद्रगढ़ एकमात्र ऐसा जिला है
- 7:59:08जिसका मुख्यालय नारनौल में है। दूसरा
- 7:59:11मोबाइल कोड सिस्टम सबसे पहले मेवात यानी
- 7:59:14नूंह में स्थापित किया गया था। तीसरा
- 7:59:17नवग्रह कुंडों की उपस्थिति के कारण कैथल
- 7:59:20को छोटी काशी कहा जाता है।
- 7:59:21यह तीनों वो ट्रैप्स हैं जिन्हें हमने आज
- 7:59:25डिकोड किया है। मुख्यालय नारनौल में है
- 7:59:28बिल्कुल सही।
- 7:59:28हम्म।
- 7:59:29मोबाइल कोड नूह में आया यह भी सही। और
- 7:59:32नवग्रह कुंड कैथल में है। जबकि भिवानी में
- 7:59:35मंदिर है। यह भी पूरी तरह सही है। क्योंकि
- 7:59:38तीनों स्टेटमेंट हमारे एनालिसिस से मैच
- 7:59:40करते हैं। तो उम्मीदवारों को वो विकल्प
- 7:59:42चुनना चाहिए जो इन तीनों को सही ठहराता
- 7:59:45हो।
- 7:59:46तो एग्जाम से ठीक पहले का यह ट्रैप ज़ोन
- 7:59:48रिवीजन फ्लो चार्ट बहुत क्रिटिकल है।
- 7:59:50बिल्कुल। तीन चीजें हमेशा याद रखनी चाहिए।
- 7:59:53महेंद्रगढ़ का मतलब यह नहीं कि हेड
- 7:59:55क्वार्टर वहीं है। वह नारनौल में है। छोटी
- 7:59:58काशी के मामले में कैथल के नवग्रह कुंड और
- 8:00:01भिवानी के मंदिर का फर्क याद रखें और
- 8:00:04करनाल का युद्ध जो 1739 में हुआ था इसे
- 8:00:07तराइन के 1191 या 1192 के युद्ध से मिक्स
- 8:00:12ना करें। इन छोटी चीजों पर ही सिलेक्शन
- 8:00:14टिका होता है।
- 8:00:15तो आज की चर्चा का निष्कर्ष क्या निकलता
- 8:00:18है? पूरे स्रोत का और दिशांत आईएस की इस
- 8:00:20कार्यप्रणाली का लब्बोलुआ यही है कि भूगोल
- 8:00:24भाग्य को परिभाषित करता है। ज्योग्राफी
- 8:00:26डिफाइन डेस्टिनी। परीक्षा में महारत हासिल
- 8:00:29करने के लिए मानचित्र में महारत हासिल
- 8:00:31करनी होगी। उम्मीदवारों को लाल बक्से यानी
- 8:00:34रेड बॉक्सेस में दिए गए ट्रैप्स और समय
- 8:00:37रेखा को बार-बार दोहराना चाहिए। इस
- 8:00:39उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री के लिए पूरा
- 8:00:41श्रेय दिशांत आईएस और उनके मेंटर राहुल
- 8:00:44प्रकाश सर को जाता है। जाते-जाते जरा
- 8:00:47कल्पना की जाए कि किसी स्थान के स्थानीय
- 8:00:49इतिहास या अर्थव्यवस्था का कितना हिस्सा
- 8:00:52सिर्फ इस बात से तय हुआ है कि सदियों पहले
- 8:00:55कोई नदी कहां बहती थी या कोई सीमा कहां
- 8:00:58खींची गई थी?
- 8:00:59हम बहुत गहरा सवाल है।
- 8:01:01अगर कोई भी अपने आसपास के नक्शे को कल
- 8:01:03सुबह इस नए नजरिए से देखने की कोशिश करे
- 8:01:06तो बहुत कुछ नया समझ आएगा। दिस लेक्चर वास
- 8:01:09बाय दशांट आईएएस।
- 8:01:10हरियाणा के मानचित्र को जब हम प्रशासनिक
- 8:01:14और भौगोलिक नजरिए से देखते हैं तो यह
- 8:01:16सिर्फ जिलों का एक समूह नहीं लगता।
- 8:01:19बिल्कुल नहीं।
- 8:01:19यह सदियों पुरानी सभ्यताओं और बदलती
- 8:01:22अर्थव्यवस्थाओं का एक जीवंत दस्तावेज है।
- 8:01:25जी।
- 8:01:25राज्य सिविल सेवाओं और यूपीएससी के लिए आज
- 8:01:28का हमारा फोकस चार विशिष्ट क्षेत्रों पर
- 8:01:30है।
- 8:01:31जी। पश्चिम में विशाल क्षेत्रफल वाला
- 8:01:33सिरसा, मध्य पूर्व में तीव्र औद्योगीकरण
- 8:01:36का प्रतीक सोनीपत, पूर्व में प्राकृतिक
- 8:01:39संसाधनों से भरा यमुनानगर और इन सबके
- 8:01:41केंद्र में
- 8:01:42आधुनिक वास्तुकला की मिसाल चंडीगढ़।
- 8:01:45एक्सैक्टली
- 8:01:45देखिए यह एक बहुत ही रणनीतिक चुनाव है।
- 8:01:49सिविल सेवा परीक्षाओं के बदलते पैटर्न को
- 8:01:51अगर हम समझें तो इन जिलों को केवल नक्शे
- 8:01:54पर रटने से काम नहीं चलेगा।
- 8:01:55बिल्कुल नहीं चलेगा।
- 8:01:56इसे एक प्रीलिम्स अलर्ट की तरह लें। एक
- 8:01:59जिले के इतिहास, उसकी अर्थव्यवस्था और
- 8:02:02उसके भूगोल के बीच के अंतर्निहित संबंधों
- 8:02:05को पहचानना अनिवार्य है।
- 8:02:07जिसे हम कनेक्टिंग द डॉट्स कहते हैं।
- 8:02:10जी हां, यही वो विश्लेषणात्मक कला है जो
- 8:02:13एक सीरियस एस्पिरेंट को मेरिट लिस्ट के
- 8:02:15शीर्ष तक ले जाती है। तथ्य कभी हवा में
- 8:02:18नहीं तैरते।
- 8:02:19उनकी गहरी जड़े होती हैं।
- 8:02:21सही कहा। जब हम सिरसा की सूखी धरती से
- 8:02:24लेकर चंडीगढ़ की सुनियोजित सड़कों तक का
- 8:02:26सफर तय करते हैं, तो हम वास्तव में
- 8:02:29प्रशासन की विकास यात्रा को डिकोड कर रहे
- 8:02:32होते हैं।
- 8:02:32जड़ों की बात करें तो पश्चिम में अ सिरसा
- 8:02:36का विस्तार केवल इसके भौगोलिक क्षेत्र में
- 8:02:39नहीं बल्कि समय के पन्नों में भी बहुत
- 8:02:41गहरा है।
- 8:02:42बिल्कुल। ऐतिहासिक स्रोतों को देखते हुए
- 8:02:44एक बहुत ही दिलचस्प नाम सामने आता है। हम
- 8:02:47सैरिशक
- 8:02:48पहली नजर में यह नाम थोड़ा रहस्यमई लगता
- 8:02:51है।
- 8:02:51रहस्यमई भी है और परीक्षा के दृष्टिकोण से
- 8:02:54एक गोल्ड माइन भी।
- 8:02:55इसके प्राचीन साक्ष्य क्या कहते हैं?
- 8:02:57प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित नाम हमेशा
- 8:03:00से ही प्रीलिम्स में मैच द फॉलोइंग वाले
- 8:03:02प्रश्नों का पसंदीदा हिस्सा रहे हैं।
- 8:03:04सैरशक का प्रामाणिक उल्लेख हमें महाभारत
- 8:03:07के श्लोकों में मिलता है।
- 8:03:09पाणिनि की महान रचना अष्टाध्याय में भी तो
- 8:03:12है।
- 8:03:12हां और प्रसिद्ध बौद्ध ग्रंथ दिव्यावदान
- 8:03:16में भी इस नामकरण के पीछे की कहानी भी
- 8:03:19रोचक है। इस क्षेत्र में शरीश यानी
- 8:03:22अल्बेजिया लेबेक के पेड़ों की अत्यधिक
- 8:03:26बहुतायत हुआ करती थी।
- 8:03:27जिसके कारण इसे यह नाम मिला।
- 8:03:29एग्जैक्टली इतिहास के विकास की टाइमलाइन
- 8:03:32को अगर हम तार्किक रूप से समझें तो यह
- 8:03:34यात्रा प्राचीन सैरीश से शुरू होती है।
- 8:03:38उसके बाद
- 8:03:381357 ईसवी में राजा सारस द्वारा इसे
- 8:03:42सरस्वती नगर के रूप में नई पहचान दी गई।
- 8:03:46और समय के साथ अपभ्रंश होते-होते यह
- 8:03:49आधुनिक सिरसा बन गया।
- 8:03:50खैर, इसी बात पर एक अर्ज किया है। इतिहास
- 8:03:53की तारीखों में जो उलझ कर रह जाते हैं,
- 8:03:55असल में वही प्रीलिम्स के चक्रव्यूह में
- 8:03:57फंस जाते हैं।
- 8:03:58बहुत खूब। क्रोनोलॉजी ही वो धागा है जो
- 8:04:01बिखरे हुए मोतियों को एक माला में पिरोता
- 8:04:03है।
- 8:04:04अगर हम सिरसा के भूगोल और जनसंख्यकी पर
- 8:04:06नजर डालें तो 4277
- 8:04:09कि.मी. के विशाल आकार के साथ यह क्षेत्रफल
- 8:04:11की दृष्टि से पूरे हरियाणा का सबसे बड़ा
- 8:04:14जिला है।
- 8:04:14जी। इसे संतों की नगरी और वन नगरी जैसे
- 8:04:18उपनामों से भी जाना जाता है। इतने बड़े
- 8:04:20आकार को देखकर पहली नजर में लगता है कि
- 8:04:22यहां आबादी भी उसी भारी अनुपात में निवास
- 8:04:25करती होगी।
- 8:04:26और ठीक यहीं पर एग्जामिनर अपना सबसे
- 8:04:29खतरनाक एग्जाम ट्रैक बिछाता है।
- 8:04:31कैसे?
- 8:04:32अक्सर छात्र मानकर चलते हैं कि जिस जिले
- 8:04:34का क्षेत्रफल सबसे बड़ा है, वहां की
- 8:04:37जनसंख्या घनत्व भी सबसे अधिक होगा।
- 8:04:39हम्म।
- 8:04:40लेकिन सिरसा के मामले में यह धारणा पलट
- 8:04:42जाती है।
- 8:04:42इसका घनत्व तो सबसे कम है ना? जी हां,
- 8:04:44पूरे हरियाणा में सबसे कम मात्र 303
- 8:04:48व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।
- 8:04:50इसका कारण इसकी भौगोलिक संरचना में छिपा
- 8:04:52है।
- 8:04:52यह एक अर्ध शुष्क क्षेत्र है जहां
- 8:04:54बड़े-बड़े कृषि ज्योत मौजूद है।
- 8:04:56और ये एनसीआर के शहरी दबाव से भी काफी दूर
- 8:04:59है।
- 8:04:59बिल्कुल। परीक्षा में कथन आधारित प्रश्नों
- 8:05:02में बड़े क्षेत्रफल को अधिक घनत्व समझने
- 8:05:04की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। रैंकर्स
- 8:05:07हमेशा इन बारीकियों पर फोकस करते हैं।
- 8:05:09सिरसा की अर्थव्यवस्था और कृषि की बात
- 8:05:12करें हम
- 8:05:13तो इसका प्रदर्शन शानदार है।
- 8:05:16हम
- 8:05:16यह गेहूं, कपास, चना, सरसों और विशेष रूप
- 8:05:20से किन्नू जैसे खट्टे फलों के उत्पादन में
- 8:05:23शीर्ष पर है।
- 8:05:24घगर नदी और भाखड़ा नहर प्रणाली इसकी
- 8:05:26सिंचाई की रीड है।
- 8:05:28लेकिन मुझे जो सबसे अधिक विश्लेषणात्मक
- 8:05:30लगा
- 8:05:30वो है इसका कृषि प्रोफाइल फ्लो चार्ट। एक
- 8:05:33तरफ यह कपास हब है। और दूसरी तरफ मंजियाना
- 8:05:38परियोजना के तहत खट्टे फलों का उत्पादन हो
- 8:05:41रहा है।
- 8:05:41यह सीधे तौर पर आर्थिक भूगोल का
- 8:05:44व्यावहारिक सिद्धांत है।
- 8:05:45यह दोनों चीजें अर्थव्यवस्था को कैसे आकार
- 8:05:47दे रही हैं?
- 8:05:48देखिए जब किसी क्षेत्र में कपास की
- 8:05:50प्रचुरता होती है तो वह वहां एक विशाल
- 8:05:53टेक्सटाइल क्षमता को जन्म देता है।
- 8:05:55इसी क्षमता को भुनाने के लिए प्रस्तावित
- 8:05:58टेक्सटाइल पार्क और फूड पार्क स्थापित किए
- 8:06:00जा रहे हैं।
- 8:06:00सही कहा। कृषि उपज को औद्योगिक उत्पादन से
- 8:06:04जोड़ना ही आधुनिक अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
- 8:06:06है। जैसा कि हम दिशांत आईएएस में पढ़ाते
- 8:06:09हैं। आर्थिक भूगोल को हमेशा उद्योगों के
- 8:06:12स्थानीयकरण के सिद्धांतों से जोड़कर देखना
- 8:06:14चाहिए। राहुल प्रकाश सर और उनकी टीम के
- 8:06:16मार्गदर्शन में हम
- 8:06:17हमेशा यही प्रयास रहता है कि उम्मीदवार
- 8:06:19समझे कि कच्चा माल कैसे औद्योगिक क्लस्टर
- 8:06:22की मजबूत नीव रखता है।
- 8:06:23जी
- 8:06:24सिरसा के इतिहास में कुछ और भी दिलचस्प
- 8:06:26पड़ाव हैं। 14वीं शताब्दी में राय बीरू
- 8:06:28द्वारा स्थापित ऐतिहासिक रानिया का मूल
- 8:06:31नाम रजबपुर हुआ करता था।
- 8:06:33और एलनाबाद का पुराना नाम खड़ियल था।
- 8:06:36जिसे बाद में ब्रिटिश अधिकारी डीसी ओलिवर
- 8:06:38की पत्नी एललेना के सम्मान में बदलकर
- 8:06:40एलेनाबाद कर दिया गया। 1948 में शाह
- 8:06:43मस्ताना द्वारा स्थापित डेरा सच्चा सौदा
- 8:06:46और चोर मार की लड़ाई भी सिरसा के इतिहास
- 8:06:50का महत्वपूर्ण अध्याय हैं।
- 8:06:52ये छोटे तथ्य मुख्य परीक्षाओं के लिए बेहद
- 8:06:54महत्वपूर्ण है।
- 8:06:55बिल्कुल स्थानीय इतिहास और ब्रिटिश कालीन
- 8:06:58नामकरण पर अक्सर सीधे सवाल बनते हैं।
- 8:07:00सामरिक महत्ता को नजरअंदाज करना भारी पड़
- 8:07:03सकता है।
- 8:07:03हां।
- 8:07:04छोटी सी लड़ाई भी इतिहास का रुख बदल देती
- 8:07:07है।
- 8:07:07और एक छोटी सी गलती यूपीएससी में रैंक बदल
- 8:07:10देती है।
- 8:07:10बिल्कुल सटीक।
- 8:07:11पश्चिम के शुष्क क्षेत्र से निकलकर अब हम
- 8:07:14मध्य पूर्व की ओर रुख करते हैं और बात
- 8:07:15करते हैं सोनीपत की।
- 8:07:17इसका इतिहास तो महाभारत काल से जुड़ता है।
- 8:07:21हां, इसे स्वर्णप्रस्थ कहा जाता था। सोने
- 8:07:24का शहर।
- 8:07:24उन पांच ऐतिहासिक गांवों में से एक जिनकी
- 8:07:28मांग पांडवों ने शांति प्रस्ताव के दौरान
- 8:07:30की थी। यही वह सांस्कृतिक निरंतरता है जो
- 8:07:33इस क्षेत्र को विशेष बनाती है। सोनीपत के
- 8:07:36विकास क्रम के फ्लो चार्ट को समझना बहुत
- 8:07:38दिलचस्प है।
- 8:07:39यह यात्रा स्वर्णप्रस्थ से शुरू होती है।
- 8:07:42फिर यह क्षेत्र अर्जुन के वंशज राजा सोनी
- 8:07:45के प्रभाव में आया।
- 8:07:47और उन्हीं के नाम पर इसकी पहचान स्थापित
- 8:07:49हुई।
- 8:07:49और अंततः 22 दिसंबर 1972 को इसे रोहतक
- 8:07:54जिले से अलग करके एक स्वतंत्र जिले का
- 8:07:56दर्जा प्राप्त हुआ। आज के परिदृश्य में
- 8:07:59सोनीपत की पहचान इसके उपनामों, एजुकेशन
- 8:08:02सिटी और साइकिल सिटी से होती है।
- 8:08:04कृषि के मोर्चे पर यह भारत में मशरूम
- 8:08:06उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।
- 8:08:08उद्योगों की बात करें तो 1951 में स्थापित
- 8:08:11एटलस साइकिल और मुरथल के हरियाणा ब्रेवरीज
- 8:08:14यहां का मुख्य हिस्सा रहे हैं।
- 8:08:16यहां पर सीरियस एस्पिरेंट्स के लिए एक
- 8:08:18बहुत बड़ा एग्जाम अलर्ट छिपा है।
- 8:08:19वो क्या?
- 8:08:20देश की पहली अत्याधुनिक आंगनबाड़ी सोनीपत
- 8:08:23के हसनपुर में स्थापित की गई थी। अब इसे
- 8:08:26सिर्फ प्रीलिम्स के तथ्य की तरह मत देखिए।
- 8:08:28इसे मेंस के पेपर से जोड़ना चाहिए।
- 8:08:30बिल्कुल। इसे मेंस के सोशल जस्टिस और
- 8:08:33गवर्नेंस पेपर से सीधे जोड़ा जा सकता है।
- 8:08:36यह जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सुधारों की एक
- 8:08:39बेहतरीन केस स्टडी है।
- 8:08:40एक भावी प्रशासक को ऐसे ही उदाहरणों का
- 8:08:42प्रयोग करना चाहिए।
- 8:08:43जी।
- 8:08:44सांस्कृतिक विरासत की दृष्टि से सोनीपत
- 8:08:47अत्यंत समृद्ध नजर आता है। यहां ख्वाजा
- 8:08:50खिज्र का मकबरा इब्राहिम लोदी के समय में
- 8:08:52बनवाया गया था। यह लाल बलुआ पत्थर और कंकर
- 8:08:55से निर्मित वास्तुकला का नायाब नमूना है।
- 8:08:58सांप्रदायिक सौशाारद्र का प्रतीक मामा
- 8:09:00भांजा दरगाह भी यही है जो इमाम नसीरुद्दीन
- 8:09:03और उनके भांजे इब्राहिम को समर्पित है।
- 8:09:05दर्शाता है।
- 8:09:06और हां मुरथल जिसे ढाबों का शहर कहा जाता
- 8:09:09है उसका जिक्र किए बिना बात अधूरी रहेगी।
- 8:09:11वास्तुकला और मेलों से जुड़े यह तथ्य आर्ट
- 8:09:14एंड कल्चर के लिए बहुत प्रासंगिक हैं।
- 8:09:17वास्तुकला केवल पत्थरों का ढांचा नहीं
- 8:09:19होती है। वह समय की राजनीतिक और आर्थिक
- 8:09:21स्थिति का दर्पण होती है। ढाबों के पराठों
- 8:09:24में जो सुकून मिलता है वो मेंस का सिलेबस
- 8:09:26खत्म होने के बाद ही मिलता है।
- 8:09:28यही वो सुकून है जो लंबी तैयारी के दौरान
- 8:09:31मानसिक संतुलन बनाए रखता है।
- 8:09:33इन ढाबों से आगे बढ़ते हुए हमारी अगली
- 8:09:35मंजिल है पेपर सिटी यानी यमुनानगर। इसका
- 8:09:37पुराना नाम अब्दुल्लापुर हुआ करता था।
- 8:09:39भौगोलिक दृष्टि से इसका महत्व इसलिए है
- 8:09:42क्योंकि यह हरियाणा में यमुना नदी का
- 8:09:45प्रवेश द्वार है
- 8:09:46जो ताजेवाला नामक स्थान से राज्य में
- 8:09:48प्रवेश करती है।
- 8:09:49औद्योगिक दृष्टि से इसकी पहचान 1929 में
- 8:09:52स्थापित बिल्ट पेपर मिल से है जिसके कारण
- 8:09:55इसे पेपर सिटी का दर्जा मिला।
- 8:09:58लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है यहां की
- 8:10:00जल प्रणाली।
- 8:10:01जल प्रणाली के फ्लो चार्ट को तार्किक रूप
- 8:10:04से समझें। यमुना नदी पहले ताजेवाला से
- 8:10:07प्रवेश करती है।
- 8:10:08नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए
- 8:10:10हतनीकुंड बैराज का निर्माण किया गया है।
- 8:10:13और ठीक यहीं से पश्चिमी और पूर्वी यमुना
- 8:10:15नहरे निकाली गई हैं जो राज्य की कृषि
- 8:10:18अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा हैं।
- 8:10:20जल प्रबंधन मुख्य परीक्षा का अत्यंत
- 8:10:23महत्वपूर्ण विषय है।
- 8:10:24बिल्कुल।
- 8:10:24यमुनानगर का ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं
- 8:10:27है। अशोक का प्रसिद्ध टोपरा अभिलेख यहीं
- 8:10:29पाया गया था।
- 8:10:30जिसे बाद में फिरोजशाह तुगलक द्वारा
- 8:10:33दिल्ली ले जाया गया। यहां चनेटी का स्तूप
- 8:10:35भी स्थित है जिसका वर्णन चीनी यात्री हविन
- 8:10:38सांग ने किया था। यह जगादरी से मात्र 3
- 8:10:41किमी दूर है।
- 8:10:42जगादरी को बर्तन नगरी के नाम से भी जाना
- 8:10:45जाता है।
- 8:10:46टोपरा अभिलेख का स्थानांतरण मध्यकालीन
- 8:10:48इतिहास की प्रतीकात्मक घटना है।
- 8:10:50फिरोजशाह तुगलक का यह कदम ऐतिहासिक
- 8:10:52धरोहरों के प्रति राजनीतिक दृष्टिकोण
- 8:10:55दर्शाता है। मेंस में इस पर सवाल बन सकता
- 8:10:58है कि मध्यकालीन शासक प्राचीन प्रतीकों का
- 8:11:02उपयोग सत्ता को वैध ठहराने के लिए कैसे
- 8:11:04करते थे? प्राकृति और वन्य जीवों के
- 8:11:07संदर्भ में यमुनानगर की संपदा बहुत समृद्ध
- 8:11:10है। 2003 में घोषित कलेसर राष्ट्रीय
- 8:11:13उद्यान यहां की शान है।
- 8:11:15यह उद्यान ऊंचे साल के पेड़ों और विशेष
- 8:11:18रूप से लाल जंगली मुर्गों के लिए प्रसिद्ध
- 8:11:20है।
- 8:11:211947 से पहले यह क्षेत्र एक प्रमुख लकड़ी
- 8:11:24बाजार के रूप में अपनी धाक रखता था।
- 8:11:26पर्यावरण और पारिस्थितिकी के लिए कलेसर का
- 8:11:29महत्व बहुत ज्यादा है। लाल जंगली मुर्गे
- 8:11:32जैसी प्रजातियां प्रीलिम्स में सीधे पूछी
- 8:11:34जाती हैं।
- 8:11:35यहां एक और बड़ा एग्जाम ट्रैप है।
- 8:11:37जी। अक्सर छात्र पुराने ताजेवाला बैराज और
- 8:11:40नए हथनीकुंड बैराज के बीच उलझ जाते हैं।
- 8:11:44आधुनिक हथनीकुंड बैराज ने ही पुराने ताजे
- 8:11:46वाला बैराज की जगह ली है।
- 8:11:48दोनों को एक ही समय काल का मानने की गलती
- 8:11:50ना करें। पुराने बैराजों को जो नया समझ
- 8:11:53लेते हैं, वह एग्जाम हॉल में अपना ही
- 8:11:54नुकसान कर लेते हैं।
- 8:11:55अंतर करना आना चाहिए।
- 8:11:57राहुल प्रकाश सर और उनकी टीम के
- 8:11:59मार्गदर्शन में यह स्पष्टता दी जाती है।
- 8:12:01बिल्कुल। इन ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से
- 8:12:04विविध जिलों के बाद जब हम एक अलग शहरी
- 8:12:07ढांचे की ओर रुख करते हैं तो चंडीगढ़ नजर
- 8:12:10आता है।
- 8:12:10इसे नियोजित शहर कहा जाता है।
- 8:12:13भारत के विभाजन के बाद एक नई राजधानी की
- 8:12:16आवश्यकता ने इस शहर को जन्म दिया। इसकी
- 8:12:19नींव 1952 में रखी गई थी
- 8:12:21और इसके मुख्य वास्तुकार फ्रांस के ली
- 8:12:24कारबोजिए थे।
- 8:12:25इस शहर का सबसे प्रमुख प्रतीक चिन्ह खुला
- 8:12:28हाथ स्मारक है जो शांति और सुलह का
- 8:12:30दार्शनिक संदेश देता है।
- 8:12:32चंडीगढ़ का शहरी नियोजन मेंस के पेपर के
- 8:12:35लिए उत्कृष्ट उदाहरण है।
- 8:12:36ली कारबूजिए द्वारा परिकल्पित शहर की
- 8:12:39एनाटमी के फ्लो चार्ट को गहराई से समझे।
- 8:12:42उन्होंने शहर को एक जीवित मानव शरीर की
- 8:12:44तरह डिजाइन किया। इस शरीर का सिर कैपिटल
- 8:12:47कॉम्प्लेक्स है। जहां से प्रशासन संचालित
- 8:12:50होता है।
- 8:12:50शहर का दिल सिटी सेंटर यानी सेक्टर 17 है।
- 8:12:55शहर के फेफड़े, लेजर वैली और इसके हरित
- 8:12:58क्षेत्र हैं जो शहर को सांस लेने देते
- 8:13:01हैं।
- 8:13:01और संचार तंत्र या नसें यहां की सेवनवी
- 8:13:05सड़कें हैं जो यातायात को प्रवाहित करती
- 8:13:08हैं।
- 8:13:08चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं भविष्य के
- 8:13:11शहरीकरण का एक विज़ है। चंडीगढ़ के प्रशासन
- 8:13:14और जनसंख्यकी के आंकड़े भी ध्यान देने
- 8:13:16योग्य हैं। 1 नवंबर 1966 से यह एक केंद्र
- 8:13:20शासित प्रदेश है।
- 8:13:22यहां की साक्षरता दर कुल 86.05%
- 8:13:26है। पुरुष साक्षरता 89.99%
- 8:13:31और महिला साक्षरता 81.19%
- 8:13:35है।
- 8:13:35यह उच्च साक्षरता इसके सर्विस सेक्टर को
- 8:13:37गति प्रदान करती है। यहां पॉलिटी के नजरिए
- 8:13:40से एक महत्वपूर्ण एग्जाम अलर्ट है।
- 8:13:43वो क्या? चंडीगढ़ का प्रशासनिक ढांचा अन्य
- 8:13:46केंद्र शासित प्रदेशों से भिन्न है। यहां
- 8:13:49का प्रशासक अलग से नियुक्त नहीं होता
- 8:13:52बल्कि अपदेन रूप से पंजाब का राज्यपाल ही
- 8:13:55प्रशासक होता है।
- 8:13:56यह तो एक विशेष प्रशासनिक अपवाद है।
- 8:14:00जैसा कि हम दिशांत आईएएस में पढ़ाते हैं।
- 8:14:02पॉलिटी में ऐसे अपवाद ही परीक्षा में सीधे
- 8:14:05प्रश्न बनकर आते हैं।
- 8:14:07अब तक की गई विस्तृत चर्चा का एक 360
- 8:14:10डिग्री तुलनात्मक विश्लेषण कर लेते हैं।
- 8:14:12सिरसा क्षेत्रफल में सबसे विशाल ऐतिहासिक
- 8:14:16नाम सेरिष्क अर्थव्यवस्था कपास व गेहूं पर
- 8:14:20आधारित
- 8:14:20सोनीपत शिक्षा केंद्र प्राचीन नाम
- 8:14:24स्वर्णप्रस्थ साइकिल उद्योग व मशरूम
- 8:14:27उत्पादन के लिए जाना जाता है। यमुनान नगर
- 8:14:30नदी के प्रवेश द्वार पुराना नाम
- 8:14:33अब्दुल्लापुर कागज व चीनी का उद्योग
- 8:14:36प्रमुख
- 8:14:37और अंत में चंडीगढ़ केंद्र शासित राजधानी
- 8:14:40जिसे सिटी ब्यूटीफुल कहा जाता है।
- 8:14:43चार जिलों का यह सफर जो दिमाग में बैठा
- 8:14:45लेगा एलिमिनेशन राउंड में वह सबका खेल बना
- 8:14:48देगा। तुलनात्मक अध्ययन से ही चीजें लंबे
- 8:14:51समय तक स्मृति में रहती हैं।
- 8:14:52आइए अब अपनी एमसीक्यू चुनौती की ओर बढ़ते
- 8:14:55हैं। पहला प्रश्न इतिहास और प्राचीन नामों
- 8:14:59से जुड़ा है।
- 8:14:59जी
- 8:15:00मान लीजिए आपके सामने तीन युग्म है। पहला
- 8:15:03सिरसा के सामने सैरिशिक, दूसरा सोनीपत के
- 8:15:08सामने स्वर्णप्रस्थ और तीसरा यमुनानगर के
- 8:15:12सामने अब्दुल्लापुर। क्या यह सही सुमेलित
- 8:15:15हैं? आइए इसके लॉजिक को डिकोड करते हैं।
- 8:15:17पहला युग्म सिरसा और सैरिशिक बिल्कुल सटीक
- 8:15:21है। इसका प्रमाण हमने अष्टाध्यायी और
- 8:15:23दिव्यावदान में देखा। दूसरा युग्म सोनीपत
- 8:15:26और स्वर्णप्रस्थ भी पूरी तरह सही है
- 8:15:29जो पांडवों द्वारा मांगे गए पांच गांवों
- 8:15:31की कथा से जुड़ा है।
- 8:15:33तीसरा युग्म यमुनानगर और अब्दुल्लापुर भी
- 8:15:36ऐतिहासिक रूप से सत्य है क्योंकि यहां
- 8:15:39तीनों युग्म सही हैं। एलिमिनेशन लॉजिक से
- 8:15:42हम कह सकते हैं कि सभी तीन युग्म सही हैं।
- 8:15:46यही ब्रह्मास्त्र परीक्षा कक्ष के दबाव
- 8:15:48में काम आता है। हमारी दूसरी एमसीक्यू
- 8:15:50चुनौती अर्थव्यवस्था और उद्योग से संबंधित
- 8:15:53है। इसमें हमें गलत कथन पहचानना है।
- 8:15:55कथन है ए सोनीपत भारत में मशरूम का सबसे
- 8:15:59बड़ा उत्पादक है। बी बिल्ट पेपर मिल की
- 8:16:02स्थापना 1929 में यमुनानगर में हुई थी। सी
- 8:16:06सिरसा का जनसंख्या घनत्व हरियाणा में सबसे
- 8:16:08अधिक है। डी एटलस साइकिल का संबंध सोनीपत
- 8:16:12जिले से है।
- 8:16:12यहां वही एग्जाम ट्रैप काम कर रहा है। कथन
- 8:16:16ए बी और डी तथ्यात्मक रूप से सत्य है।
- 8:16:20लेकिन कथन सी कहता है कि सिरसा का
- 8:16:22जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है।
- 8:16:25जबकि हमने अ विश्लेषण किया था कि सिरसा का
- 8:16:29क्षेत्रफल बड़ा है लेकिन जनसंख्या घनत्व
- 8:16:33राज्य में सबसे कम है। मात्र 303
- 8:16:36इसलिए गलत कथन सी है। अंतिम एमसीक्यू
- 8:16:39चुनौती चंडीगढ़ पर केंद्रित है। तीन कथनों
- 8:16:43पर विचार करें। एक, यह 1966 में एक केंद्र
- 8:16:47शासित प्रदेश बना। दो ली कारबूजे के
- 8:16:50डिजाइन का सिर सिटी सेंटर का प्रतिनिधित्व
- 8:16:53करता है।
- 8:16:54थ्री यहां का प्रशासक पंजाब का राज्यपाल
- 8:16:58होता है।
- 8:16:58पहला और तीसरा कथन पूर्णतः सत्य है।
- 8:17:01लेकिन कथन दो एक क्लासिक ट्रैप है।
- 8:17:04एनाटॉमी के अनुसार शहर का सिर कैपिटल
- 8:17:07कॉम्प्लेक्स है। जबकि सिटी सेंटर शहर का
- 8:17:10दिल है।
- 8:17:11इसलिए कथन दो गलत है। सही उत्तर केवल एक
- 8:17:14और तीन होगा। वैचानिक बारीकी ही एक सीरियस
- 8:17:17एस्पिरेंट को भीड़ से अलग करती है।
- 8:17:20सारांश की ओर बढ़े तो हमने पश्चिम में
- 8:17:23सिरसा के विशाल क्षेत्रफल से शुरुआत की।
- 8:17:25पूर्व में यमुनानगर में नदी के प्रवेश और
- 8:17:28वन संसाधनों को समझा।
- 8:17:30मध्य पूर्व में सोनीपत के स्वर्ण इतिहास
- 8:17:33और उद्योग का विश्लेषण किया
- 8:17:35और राजधानी चंडीगढ़ के शहरी नियोजन को
- 8:17:37डिकोड किया। आपका सबसे बड़ा टेक अवे यही
- 8:17:40होना चाहिए कि सफलता तथ्यों को रटने से
- 8:17:43नहीं मिलती। जब आप सिरसा के भूगोल को उसकी
- 8:17:47अर्थव्यवस्था से जोड़ते हैं तो आप
- 8:17:50विश्लेषण कर रहे होते हैं। यही कनेक्टिंग
- 8:17:52द डॉट्स की कला है।
- 8:17:53आज के सत्र का समापन एक प्रोकेगेटिव विचार
- 8:17:56के साथ करते हैं। सोचिए अगर चंडीगढ़ जैसे
- 8:17:59नियोजित शहर का एनाटॉमी मॉडल भारत के अन्य
- 8:18:02तेजी से बढ़ते शहरों में लागू किया जाए तो
- 8:18:05क्या शहरीकरण की चुनौतियां कम हो सकती
- 8:18:07हैं? यह मेंस परीक्षा के जीएस पेपर वन के
- 8:18:10लिए एक अत्यंत मजबूत आधार है।
- 8:18:12क्या हर बढ़ते शहर का अपना एक स्पष्ट हृदय
- 8:18:14और सांस लेने के लिए फेफड़े नहीं होने
- 8:18:16चाहिए? एक भावी प्रशासक के रूप में इस पर
- 8:18:19जरूर मंथन करें।
- 8:18:20बिल्कुल।
- 8:18:20दिस लेक्चर वास बाय दिशांत आईएएस। हरियाणा
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This page contains the full transcript of Haryana Complete Course 2026 | History, Polity, Geography, Economy & Culture | UPSC/HPSC #dishantias by DISHANT IAS, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 81,440 words across 12,047 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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