Gujarat's Food Journey | Dabeli, Dhokla, Amul | Raja Rasoi Aur Anya Kahaniyaan Ep 11 | Epic TV — Transcript
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- 0:00[संगीत]
- 0:01लाइक, शेयर, सब्सक्राइब एंड क्लिक ऑन द
- 0:04बेल आइकॉन टू नेवर मिस एन अपडेट फ्रॉम
- 0:06एपिक।
- 0:10[संगीत]
- 0:22तपती धूप में यहां पारा भले ही 50 डिग्री
- 0:25पहुंच जाए
- 0:28मगर पतंगों की उड़ान फिर भी बुलंद है।
- 0:34रण भले ही श्वेत धारी हो मगर रंगों का
- 0:38परहेज इन लोगों की फितरत में नहीं है।
- 0:42गुजरात गढ़ है सभ्यता की विरासत का
- 0:48और इस धरती से जुड़े हैं कृष्ण, महावीर और
- 0:53गांधी जैसे महात्मा।
- 0:56गुजरात की इसी प्राकृतिक और सांस्कृतिक
- 0:58धरोहर ने तराशा यहां के खाने को जिसका
- 1:03स्वाद हर पल याद दिलाता है इस धरती की और
- 1:08वहां के लोगों की।
- 1:13[संगीत]
- 2:04हिंदुस्तान के पश्चिमी छोर पर स्थित
- 2:07गुजरात एक गुलदस्ता है यहां रहने वाले
- 2:10जाति और समुदायों का।
- 2:13जहां कच्छ के अपार और वीरान रेगिस्तान में
- 2:16रहते कबीले और डोले हैं। जैन और पारसी
- 2:20जैसे अल्पसंख्यक समुदाय और लाखों हिंदू और
- 2:23मुसलमान व्यापारी और कारीगर
- 2:26जो सदियों से गुजरात की संस्कृति को
- 2:29तराशते आ रहे हैं।
- 2:32और इन सभी समुदायों के खाने से मिल बनता
- 2:35है गुजरात का खाना जो यहां के लोगों की
- 2:38पहचान है।
- 2:41जो गुजरात का आज प्रांत हम लक्ष्य पर
- 2:43देखते हैं, उसकी भौगोलिक स्थिति कमोबेश एक
- 2:45सी है। मगर कुछ उसके हिस्से हैं जिनमें
- 2:47अंतर है और जिसका प्रभाव उसके खानपान पर
- 2:49पड़ा है। मसलन उत्तरी गुजरात का जो हिस्सा
- 2:52काठियावाड़ सौराष्ट्र वाला राजस्थान की
- 2:54सरहद को छूता है वो लगभग उसी तरह की सूखी
- 2:57बंजर भूमि है जिस तरह की राजस्थान की। अब
- 3:00अगर तटवर्ती इलाका आप देखें जो दमन द्वीप
- 3:03की तरफ खुलता है वो उसकी उसकी भौगोलिक
- 3:05प्रकृति और स्वभाव दूसरा है। कच्छ वाला जो
- 3:08रण है वो बिल्कुल ही मरुभूमि वाला इलाका
- 3:10हो जाता है। मगर जो हिस्सा भीतर की तरफ
- 3:13आता है मध्यवर्ती भारत की तरफ उसमें उपजाऊ
- 3:16जमीन है वहां खानपान में फर्क है। मगर
- 3:19कमोबेश एक साम्य आपको देखने को मिलता है
- 3:21कि कुल मिलाकर सांस्कृतिक कारणों से
- 3:23ऐतिहासिक कारणों से गुजरात का गुजरात की
- 3:26जो बहुसंख्यक जनता है वो शाकाहारी है। वो
- 3:28मांसाहार से परहेज उसका एक समुदाय नहीं
- 3:31करता है मुसलमानों का। मगर उसमें भी चलन
- 3:34उतना ज्यादा मांस का नहीं है जितना
- 3:35अन्यत्र आपको देखने को मिलता है। तो कुल
- 3:38मिलाकर इसे आप जैन धर्म का प्रभाव कहें।
- 3:41इसे आप एक गांधी के जन्म के सदियों पहले
- 3:44एक अहिंसा का स्वाभाविक रुझान माने। उसके
- 3:47दर्शन हमें गुजरात में होते हैं। यहां
- 3:49खाने में आपको जो मौसमी शाक भाजियां वो
- 3:52मिलेंगी। उनको बहुत ज्यादा तला भुना नहीं
- 3:55जाता है। मगर ज्यादा जोर यहां दालों पर
- 3:57है। बाजरे पर है, बाजरे की खिचड़ी पर है,
- 4:01दालों पर है और मिठास में है। जिन्हें हम
- 4:03अन्यत्र नमकीन व्यंजन कहते हैं। उसमें भी
- 4:06थोड़ा मतलब शक्कर की मात्रा आपको चखने को
- 4:09मिल जाती है। और सबसे मजेदार बात यह है कि
- 4:11जिसे हम नमक कहते हैं उसे ये लोग मीठू
- 4:13कहते हैं। तो मीठे के नाम पर आपको नमक
- 4:15खिलाया जाता है और नमकीन की शक्ल में जो
- 4:17आप खा रहे हैं उसमें आप मिठास महसूस कर
- 4:19रहे होते हैं और शाक भाजी की इफे
- 4:24गुजराती खाने का एक पहलू जो लगभग हर जगह
- 4:28देखा जा सकता है वो है इनका शाकाहारी खाने
- 4:32पे जोर
- 4:35गुजरात वेजिटेरियन स्टेट है इन अ वेरी
- 4:37स्ट्रांग फॉर्मेट काफी प्रडोमिनेंटली
- 4:39वेजिटेरियन है यहां तक कि आप अब
- 4:41रेस्टोरेंट चालू करेंगे और आप इधर लिखेंगे
- 4:43नॉनवेज
- 4:44तो देयर विल बी अ चांसेस दैट इन सर्टेन
- 4:46एरियाज इट विल नॉट वर्क। यानी कि लोग यह
- 4:49नहीं चाहते कि उसी प्लेट में जिसमें
- 4:50नॉनवेज सर्व होता है उसमें वेज सर्व हो।
- 4:53आपको एसेंशियली वेजिटेबल्स ज्यादा मिलेंगे
- 4:56क्योंकि जैनिज्म का काफी प्रभाव है यहां
- 4:58पर।
- 5:00शाकाहारी भोजन शैली गुजरात में हमेशा से
- 5:04ही देखने को मिलती है। मूलतौर पर जैन धर्म
- 5:08के प्रभाव की वजह से जो खुद तकरीबन 3000
- 5:12साल से भी ज्यादा पुराना है।
- 5:16आज से ढाई हजार साल पहले भारत ने वो दौर
- 5:20देखा जब महावीर और गौतम बुद्ध दोनों का
- 5:24जन्म हिंदुस्तान की इस भूमि पर हुआ।
- 5:27साथ ही यह गहरी संभावना है कि उस दौर में
- 5:31हिंदुस्तान ही वह पहला देश था जहां
- 5:34शाकाहारी भोजन शैली का जन्म हुआ आज से कुछ
- 5:37ढाई हजार साल पहले
- 5:39[संगीत]
- 5:42और आज इस विचारधारा का सबसे गहरा असर
- 5:47गुजरात के खाने पर नजर आता है जहां की दो
- 5:50तिहाई जनता शाकाहारी है।
- 5:57जैन धर्म के साथ-साथ एक और परिस्थिति थी
- 6:01जिसने गुजरात के खाने को मूल तौर पर
- 6:04प्रभावित किया।
- 6:06यहां की भौगोलिक स्थिति
- 6:09जहां पंजाब, तमिलनाडु और बंगाल जैसे
- 6:12प्रदेश देश के खलिहान हैं। वहीं पश्चिम
- 6:16भारत में मारवाड़ और गुजरात का इलाका
- 6:19ज्यादातर वीरान और बंजर रहता है।
- 6:23गुजरात इस एसेंशियली अ टेंपपरेट सिटी
- 6:26कल्चर है। जहां पर आपको गर्मी ज्यादा
- 6:28मिलेगी। आपके वेजिटेशन होगा तो फोर्स
- 6:31वेजिटेशन होगा। जहां पानी आप देंगे तब
- 6:33जाके जमीन उपजाऊ होगी। एक जमाने में जो
- 6:36कच्छ का दरिया हुआ करता था आज सूख गया है।
- 6:38सो इट्स बिकम अ रन बिकम डेजर्ट। वैसे ही
- 6:41मोस्ट ऑफ द प्लेसेस हैव पानी में डिटेंशन
- 6:44कम है।
- 6:46चाहे कितनी ही कठोर परिस्थिति क्यों ना
- 6:48हो। मानव जाति ऐसी उत्तरजीवी है जो अपने
- 6:53पालन पोषण और जीविका का साधन निकाल ही
- 6:55लेती है।
- 7:02कच्छ में रहने वाले इंसान इस हुनर की जीती
- 7:06जागती मिसाल हैं।
- 7:09जहां कुछ ना उगता हो, मीलों तक सफेद बंजर
- 7:13जमीन बिछी हो कफ़न की तरह और पारा 50
- 7:17डिग्री छू जाए।
- 7:20यह लोग इन परिस्थितियों में भी जीवन की लौ
- 7:23जलाए रखते हैं और अपना पालन पोषण करते हैं
- 7:27व्यापार और मेहनत मजदूरी से।
- 7:33गुजरात की आबोहवा कुछ ऐसी है कि जो शुष्क
- 7:36ज्यादा है तटवर्ती इलाके को छोड़कर। तो
- 7:38उसे आजकल जो ओरल रिहाइड्रेशन के लिए चीजें
- 7:41कहते हैं कि थोड़ा नमक हो, थोड़ी खटास हो,
- 7:43थोड़ी मिठास हो। मुझे लगता है ये पारंपरिक
- 7:46रूप से इन्होंने अपने खाने में शामिल कर
- 7:48लिया है कि थोड़ा नमक है, थोड़ा चीनी है,
- 7:50थोड़ी खटास है। तो आपके शरीर में जो
- 7:52डिहाइड्रेशन होता है तो आपके नेचुरल
- 7:54साल्ट्स का जो है रिप्लेनिशमेंट होता रहता
- 7:56है।
- 7:58कच्छ के अंदरूनी इलाके में रहने वाले लोग
- 8:01आज भी आलू, प्याज की सब्जी और बाजरे का
- 8:04रोकड़ा खा अपना गुजारा करते हैं।
- 8:08देश भर के गांव, बीहड़ और देहात में गरीब
- 8:13से गरीब आदमी के खाने का आधार होती है
- 8:15रोटी और प्याज। यह प्याज वो जादुई हिस्सा
- 8:19है भारतीय खाने का जो हर एक कुजीन में, हर
- 8:23एक घर की रसोई और खाने में अपनी जगह बना
- 8:26ही लेता है।
- 8:30और इसमें कोई ताज्जुब की बात नहीं है कि
- 8:33प्याज के उत्पाद में भारत विश्व के पहले
- 8:36दो देशों में आता है।
- 8:39मगर यह प्याज असल में हिंदुस्तान की अपनी
- 8:42नहीं है। इसके इजाद का पहला सबूत मिलता है
- 8:46अफगानिस्तान में। जहां से यह सारी दुनिया
- 8:50में एक्सपोर्ट की जाती थी।
- 8:53आज से 4800 साल पहले मिस्र में भी प्याज
- 8:57की गुणवत्ता को माना गया।
- 9:01और पिरामिड्स में निकले अवशेषों से हमें
- 9:04यह भी पता चलता है कि इजिप्शन ममीज के लेप
- 9:07में प्याज का भी इस्तेमाल किया जाता था।
- 9:11[संगीत]
- 9:12मगर हिंदुस्तान में प्याज को हमारे
- 9:15रोजमर्रा के खाने में एक अतुलनीय स्थान
- 9:18मिला और कच्छ जैसे दूरदराज के इलाकों में
- 9:22भी यह यहां के खाने का एक अहम हिस्सा है।
- 9:34आलू प्याज की सूखी सब्जी के साथ कच्छी
- 9:36खाने में देखने को मिलती है टमाटर और सेब
- 9:40की सब्जी
- 9:42और जहां टमाटर भारत में सिर्फ 150 साल
- 9:44पुराना है। बेसन से बने इस सेव का पहला
- 9:48जिक्र हमें 12वीं सदी की पुस्तक मनसोलासा
- 9:52में मिलता है।
- 9:54मगर इतिहासकारों के हिसाब से सेब
- 9:57हिंदुस्तान के खाने में इससे भी ज्यादा
- 9:59पुराना है। और इसका इजाद गुजरात का ही
- 10:03माना जाता है।
- 10:10पश्चिमी भारत में लगभग हर सब्जी खाई जाती
- 10:13है बाजरा के रोटले के साथ। जो यहां के
- 10:17सबसे प्राचीन अनाज में से एक है। रोटला
- 10:21यानी एक मोटी रोटी। माना जाता है कि बाजरा
- 10:25भारत पहुंचा आज से 4000 साल पहले अफ्रीका
- 10:29से।
- 10:31कच्छ के खाने की बात करें तो यह मान लेना
- 10:34गलत होगा कि यह फीका और मामूली खाना है।
- 10:38यहां बनी खिचड़ी जिसे गुजरात में लजीजा
- 10:40कहते हैं अपने जायके के लिए हमेशा से
- 10:43मशहूर रही है।
- 10:48हमें यह भी पता चलता है कि यह लज़जा मुगल
- 10:52बादशाह जहांगीर की पसंदीदा डिश थी। जब वह
- 10:56मीट से परहेज करते थे।
- 11:01कच्ची खाने की यह थाली इस बात की मिसाल है
- 11:04कि इंसान के संकल्प और दृढ़ता के आगे
- 11:08मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति अपना सर
- 11:11झुकाती है।
- 11:14कच्ची थाली में खाने को मिलती हैं सेब,
- 11:17टमाटर की सब्जी, आलू की सब्जी, लजीजा,
- 11:21बाजरे की रोटी और मौसमी सब्जियां।
- 11:25रंगों और कला के प्रेमी कच्छ के इन लोगों
- 11:28ने
- 11:29भारत के खाने को एक और तोहफा दिया जो आज
- 11:32गोवा से लेकर गुजरात तक करोड़ों लोगों का
- 11:36पसंदीदा स्नैक फूड बन चुका है।
- 11:41गुजराती में दाबेली का अर्थ होता है दबा
- 11:44हुआ यानी प्रेस्ट। टमाटर आलू का मिक्सचर
- 11:48अनार और मूंगफली को बन में स्टफ कर तैयार
- 11:51होती है यह बर्गर नुमा डिश। और इसकी इजात
- 11:55कच्छ के मांडवी शहर में हुई। 1960 के
- 11:58आसपास
- 12:00जब केशव जी गाभा नाम का एक शख्स इसे यहां
- 12:04बेचा करता था एक आने के भाव से। कई दशकों
- 12:08बाद दाबेली का दाम भले ही बढ़ गया हो मगर
- 12:12इसका चटक स्वाद आज भी बरकरार है।
- 12:18गुजरात का खाना कच्छ के रण की ही तरह अपार
- 12:22है। जहां एक तरफ सूखे और अकाल से जूझते
- 12:25कच्छ के लोग हैं। वहीं देखने को मिलता है
- 12:29काठियावाड़ और सौराष्ट्र का खाना।
- 12:34[संगीत]
- 12:36सौराष्ट्र गुजरात का एक ऐसा हिस्सा है
- 12:38जिसके खाने की अपनी अलग पहचान है और वो
- 12:41अलग पहचान क्या है कि वहां आपको बाजरे का
- 12:44महत्व सबसे ज्यादा नजर आता है। वहां के
- 12:46खाने में तीखापन है। मसाले थोड़े तेज हैं।
- 12:49मिर्च का इस्तेमाल आम से ज्यादा होता है।
- 12:51और सब्जियों में फिर मसाले का तीखापन
- 12:54बढ़ाने के लिए सेव आदि डाल दी जाती है। आप
- 12:56सेव टमाटर की सब्जी खा सकते हैं। आप भरे
- 12:58हुए सांभर या मिर्च के तले हुए पकोड़े खा
- 13:01सकते हैं। सारे खाने में एक ग्रेड ऊपर
- 13:05आपको मिर्च और मसाला गुजरात के दूसरे
- 13:07हिस्सों से देखने को मिलता है। मुझे लगता
- 13:09है इसका एक कारण ये है कि जिस इलाके में
- 13:11बाजरे पर ज्यादा जोर होता है उसको
- 13:14स्वादिष्ट बनाने के लिए आपको मसाला मिलाना
- 13:17ही पड़ता है और तीखा करना पड़ता है। और
- 13:19यदि आप मौसमी सब्जियों का इस्तेमाल कम कर
- 13:21रहे हैं जिनका कुदरती स्वाद है और बेसन या
- 13:24दाल का प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं तो उसमें
- 13:26भी खाने में जायका बदलने के लिए आपको
- 13:28मसाले बदलने की जरूरत है। कभी आप हींग का
- 13:30पुट देते हैं। कभी आप काली मिर्च बढ़ा
- 13:32देते हैं, कहीं जीरा आप बढ़ा देते हैं तो
- 13:34कहीं फिर आप खटास बढ़ा देते हैं। नमकीन से
- 13:38लेके तीखे, खट्टे और मीठे तक इन सब
- 13:42स्वादों का एक संकलित जायका मिलता है
- 13:45पारंपरिक गुजराती थाली में। जो आज गुजराती
- 13:50क्वज़न की राजदूत बन गई है। और गुजराती
- 13:54थाली में खाने को मिलता है कठोर,
- 13:58दाल, कढ़ी। खिचड़ी, खीर, मौसमी सब्जियां
- 14:04और बाजरे की रोटी।
- 14:08अभी गुजरात की बात करो तो क्या है गुजरात?
- 14:11वेस्टर्न रीजन ऑफ इंडिया। 1963 तक तो
- 14:16महाराष्ट्र और गुजरात एक ही थे। और जब कब
- 14:18गुजरात कब फिनिश होता है? और राजस्थान कब
- 14:20शुरू होता है? और गुजरात कब फिनिश होता
- 14:23है? और मध्य प्रदेश कब शुरू होता है? और
- 14:25गुजरात के अंदर भी सौराष्ट्र कब शुरू होता
- 14:27है? कच्छ कब शुरू होता है? सिंध कब शुरू
- 14:29होता है? ये सब दीज़ आर ऑल वेरी फ्लूइड। तो
- 14:32देयर इज़ ऑब्वियसली गोइंग टू बी इंटीग्रेशन
- 14:35ऑफ ऑल द रीजंस। और हर रीजन के कुज़न में
- 14:38स्पेशलिटी ये होती है कि वो जगह की
- 14:42वेदर वो जगह की अवेलेबिलिटी ऑफ़ आइटम्स
- 14:45उसके ऊपर वहां की स्पेशलिटी बनती है। तो
- 14:48गुजराती थाली इज़ अ मीटिंग ऑफ़ ऑल दीज़
- 14:51कल्चरर्स ऑफ़ दिस रीजन वेयर अ पर्सन कैन
- 14:54एक्सपीरियंस
- 14:56अ टेस्ट ऑफ वेस्टर्न रीजन ऑफ़ इंडिया। आई
- 14:59वुड से
- 15:01आपको यह जान शायद हैरानी हो कि आज से करीब
- 15:064000 साल पहले वैदिक काल के दौरान थाली एक
- 15:10भगोना हुआ करता था जिसमें चावल उबाले जाते
- 15:14थे और समय के साथ यह नाम इस चपटे बर्तन को
- 15:18मिला जिसे हम आज थाली के नाम से जानते
- 15:21हैं।
- 15:24कोई अगर पूछे कि गुजराती थाली में इतने
- 15:28सारे आइटम्स क्यों हैं? 25 30 आइटम्स
- 15:32क्यों हैं? इसका मतलब नहीं है की दे आर
- 15:35चॉइसेस। वो सब चीजें ऐसी बैलेंस में है कि
- 15:41दे डोंट दे कॉम्प्लीमेंट ईच अदर। दे डोंट
- 15:44सप्लीमेंट ईच अदर।
- 15:48इट्स लाइक डिफरेंट नोट्स ऑफ़ अ सिमफोनी।
- 15:53डिफरेंट प्लेयर्स इन एन ऑर्केस्ट्रा हु ईच
- 15:56हैज़ अ रोल टू प्ले। सो इवन इन व्हाइल
- 15:59ईटिंग अ थाली द पर्सन एक्सपीरियंसिंग
- 16:03बिकम्स लाइक अ कंडक्टर एंड इट इज़ अप टू
- 16:05हिम कि किसको हाई करें, किसको लो करें,
- 16:07कौन से टेक्सचर को बढ़ाए, किसको कम करें।
- 16:10और वो एक-एक मॉर्सल खा के डिसाइड कर सकता
- 16:13है ही कैन
- 16:15डिसाइड ऑन एग्जैक्टली व्हाट ही वांट्स
- 16:18जस्ट बाय अमाउंट ही डिप्स इट इंटू द दाल
- 16:21और डिप्स इट इंटू द चटनी और डिप्स इट इंटू
- 16:23द पिकल। तो ये चीज़ इज़ वेरी स्पेशल अबाउट अ
- 16:29द फॉर्मेट ऑफ़ अ थाली व्हिच इज़ नॉट
- 16:31एक्सपीरियंसेबल इन अ थ्री कोर्स मील बिकॉज़
- 16:34इच वन विल हैव टेस्ट द सेम मील।
- 16:37सो दिस इज अ यूनिक थिंग अबाउट ईटिंग थाली
- 16:42गुजराती थाली
- 16:44और एक ही थाली में कई सारे व्यंजन इकट्ठे
- 16:48परोस के खाने का रिवाज तो घरेलू है।
- 16:51रेस्टोरेंट्स में थाली कल्चर की शुरुआत
- 16:54हुई हाल फिलहाल में जब एक नियमित और तय
- 16:58दाम में खाना मिलने लगा।
- 17:02तो जो गुजराती थाली है उसका विज्ञापन
- 17:05सिर्फ आपको यह बात का भरोसा दिला रहा है
- 17:07कि उसमें लहसुन प्याज कब होगा। उसमें
- 17:09मांसाहारी तत्व कोई नहीं होंगे। उसमें
- 17:11खाने में थोड़ी मिठास भी होगी। वो कुछ
- 17:13उसमें काठियावाड़ का होगा। कुछ सूरत का
- 17:15होगा, कुछ अहमदाबाद का होगा। मगर आपको घर
- 17:18के जैसे ज़ायके की याद आ जाएगी। देखिए मुझे
- 17:21लगता है कि गुजराती थाली खाने वाला और
- 17:24बेचने वाला और पकाने वाला तीनों एक ही
- 17:27मानसिकता के शिकार हैं। उनको लगता है कि
- 17:29पैसा भरपूर वसूल होना चाहिए। अगर मैंने
- 17:31₹20 ₹25 की थाली दी है तो कम से कम उसमें
- 17:34एक सब्जी फ्लावर की हो, एक सब्जी शिमला
- 17:36मिर्च की हो, एक थोड़ा कढ़ी खाने को मिल
- 17:38जाए, थोड़ा खिचड़ी हो, एक आध थेपला हो,
- 17:41दो-तीन रोटली हो और थोड़ा फिर कुछ मिठास
- 17:43मुंह में आ जाए, तो कहना ही क्या है? थोड़ा
- 17:45गुड़केरी का अचार हो, थोड़ा चंद बूंदे हो,
- 17:47घी की हो, तो गिनती पूरी हो जाए आइटम्स
- 17:50की। वैल्यू फॉर मनी वाला जो कांसेप्ट
- 17:52गुजरात के दिमाग में है वो इसका प्रदर्शन
- 17:54करता है।
- 17:56अब चाहे यह थाली पैसा वसूली के कारण मशहूर
- 17:59हुई हो या लोगों को एक ही थाल में अनेक
- 18:03स्वाद देने के लिए। गुजराती थाली की कहानी
- 18:07अधूरी है जब तक जिक्र ना हो गुजराती कढ़ी
- 18:10का। बेसन और दही से तैयार की जाने वाली यह
- 18:14कढ़ी देश के हर प्रांत में अलग-अलग तरह से
- 18:18बनती है। जैसे कि मराठी कढ़ी, सिंधी कढ़ी,
- 18:23गुजराती कढ़ी या पंजाबी कढ़ी। मगर इस डिश
- 18:27की इजाद गुजरात की ही मानी जाती है और
- 18:31इसका पहला जिक्र भी 800 साल पुरानी
- 18:34गुजराती पुस्तक विमल प्रबंधा में हमें
- 18:37मिलता है।
- 18:39गुजराती थाली का मुख्य किरदार यह कढ़ी
- 18:42अपने खट्टे मीठे स्वाद से आज सिर्फ गुजरात
- 18:46ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान का दिल जीत
- 18:49चुकी है।
- 18:53[संगीत]
- 19:04शाकाहारी खाने पर जोर देने वाली गुजराती
- 19:06क्वज़ीन पंजाबी और साउथ इंडियन की ही तरह
- 19:10धीरे-धीरे अपने कदरदार बना रही है गुजरात
- 19:13के बाहर भी।
- 19:16और इस क्वजीन को लेके लोगों के मन में एक
- 19:19गलतफहमी हमेशा से रहती है कि गुजराती खाना
- 19:23सिर्फ मीठा होता है।
- 19:27[संगीत]
- 19:29बहुत ही बड़ा परसेप्शन है। कोई भी साइड
- 19:31मुझे गुजराती का फूड स्वीट होता है। वेल
- 19:34आई स्ट्रांगली वांट टू डिस्पेल द नोशन।
- 19:37एक्सेप्ट कंटिन्यूइंग द फैक्ट दैट गुजराती
- 19:38आर वैरी स्वीट पीपल। अक्रॉस द ग्लोब यू
- 19:41फाइंड एनीवेयर गुजराती हंसते खेलते
- 19:42खुशमजाज लोग हैं। वो स्वीट लोग हैं। मगर
- 19:45किसी भी एंगल से उनका फूड कंप्लीटली स्वीट
- 19:48नहीं होता। यस हिस्टोरिकली देयर वाज़ अ
- 19:51रीज़न व्हाई दिस फूड वाज़ स्वीट जिसमें
- 19:54मिठास की जरूरत हुआ करती थी। यदि आपको याद
- 19:56हो तो लाइक यू रियलाइज़ कि पहले इतना
- 19:59ज्यादा फिजिकल एक्सिशन ज्यादा हुआ करता था
- 20:01हमारा। हम मजदूरी ज्यादा करते थे। हमारी
- 20:03हर चीज़ में आपको एक जगह से दूसरी जगह जाना
- 20:05है। आप चल के जाते थे। देयर वर मोड्स ऑफ़
- 20:08ट्रांसपोर्टेशन वाज़ लेस। लॉट ऑफ़ फिजिकल
- 20:10एक्सर्शन। नाउ टेंपरेट क्लाइमेट होने से
- 20:12गर्मी ज्यादा होती थी जिसके कारण सैप हो
- 20:14जाती थी एनर्जी। तो एनर्जी रिवाइव करने के
- 20:16लिए बहुत सिंपल तरीके से गुड़ और पानी देते
- 20:19थे। अब किसी के भी घर में जाइए। चाहे ये
- 20:21गुजरात हो, चाहे महाराष्ट्र हो, कहीं भी
- 20:23गुड़ पानी वाज़ द बेसिक थिंग। गुड़ का टुकड़ा
- 20:25देंगे और पानी देंगे। आप पीजिए। आप रिजविट
- 20:27हो जाते हैं। अब वो हर वक्त गुड़ पानी हर
- 20:30के बाद दे नहीं सकते हैं। अब आदमी काम
- 20:32करके आएगा तो उसको कहीं ना कहीं वो एनर्जी
- 20:35वापस रिप्रिजर्व करनी है। तो खाने में दाल
- 20:37में कहीं जहां पर मिक्स हो सके वैसी चीजों
- 20:39में गुड़ डालते थे। अब गुड़ के डालने से
- 20:42एनर्जी रिमेन कंटिन्यू प्रिजर्विंग। अब वो
- 20:45एक हैबिट लग गई, टेस्ट लग गया। अब लोगों
- 20:47को पसंद आने लगा। अब गुजराती है तो अपना
- 20:49जहां पर भी जाएगा वो गुजरात बसाएगा। तो
- 20:52थोड़े से दाल में थोड़ी-थोड़ी सब्जियों
- 20:54में स्पेसिफिक सब्जियों में स्वीट डालेगा।
- 20:56अब परसेप्शन तो ऐसा बना है कि रोटी भी
- 20:58स्वीट होती है, चावल भी स्वीट होता है,
- 20:59उसका सब कुछ स्वीट होता है। प्रैक्टिकली
- 21:01पॉसिबल नहीं है।
- 21:04शरीर में ग्लूकोज बनाए रखने की वजह से
- 21:07गुजरातियों ने दाल में गुड़ डालना शुरू
- 21:10किया और यह परंपरा यहां आज भी चलती आ रही
- 21:13है।
- 21:16दाल वो ऑलराउंडर है इंडियन कुजीन की
- 21:18लाइनअप का जो हर प्रांत और जिले के खाने
- 21:22का हिस्सा है। और गुजरात में भी इसका
- 21:25भरपूर इस्तेमाल किया जाता है।
- 21:29इन टर्म्स ऑफ प्रोटीन
- 21:31वेजिटेरियन में सिर्फ दाली पल्स ही ऐसी
- 21:34चीज है जिसमें ज्यादा प्रोटीन है। दैट
- 21:36आल्सो यू कैन नॉट कंपेयर टू नॉन
- 21:38वेजिटेरियन फूड और एग्स यू कैन नॉट
- 21:40कंपेयर। बट इट्स द ओनली मेन सोर्स ऑफ़
- 21:44प्रोटीन।
- 21:45तो
- 21:47जो पल्स की दाल होती है, हम सब पल्स की
- 21:50दाल बनाते हैं। सिर्फ मूंग की नहीं, सबकी
- 21:53होती है। मिक्स भी होती है। दैट्स अ वेरी
- 21:56इंपॉर्टेंट पार्ट ऑफ द गुजराती फूड। कुछ
- 21:58भी अगर नहीं हो और सिर्फ दाल और चावल हो
- 22:02या दाल और रोटी हो तो भी वो बैलेंस्ड मील
- 22:05फुल मील हो सकता है। एक सब्जी थोड़ी ले
- 22:07लो।
- 22:09तो फ्रॉम द पुरेस्ट हाउसहोल्ड टू द
- 22:11रिचेस्ट हाउसहोल्ड दाल इज द स्टेबल थिंग।
- 22:15दालों का सबसे ज्यादा उत्पादन और खपत भारत
- 22:18में ही होता है। और करीब 5000 साल पुरानी
- 22:23सिंधु घाटी सभ्यता में निकले अवशेषों से
- 22:26हमें यह भी पता चलता है कि उस समय भी दाल
- 22:29काफी प्रचलित थी और गुजरात के लोगों का एक
- 22:34दाल की तरफ कुछ खास झुकाव है। चने की दाल
- 22:38या बंगाल ग्राम। मुख्य आधार है गुजराती
- 22:42स्नैक्स का। मगर यह दाल भारत की अपनी नहीं
- 22:46है। इसका विकास हुआ टर्की के आसपास के
- 22:49इलाकों में आज से कुछ 6000 साल पहले। और
- 22:53हिंदुस्तान में इस दाल के इस्तेमाल का
- 22:56पहला सबूत मिलता है आज से 3000 साल पहले
- 22:59लिखे यजुर्वेद में।
- 23:02चने का सबसे पहले पहले जिक्र हमें मिलता
- 23:04है वैदिक काल में गेहूं के साथ-साथ गद्दुम
- 23:06और चणक। तो जो चढ़ कहलाता था वो चना है और
- 23:09भारतीयों के प्राचीनतम भोजन में से एक
- 23:11माना जा सकता है हजारों साल पुराना।
- 23:13गुजरातियों ने इस चने की दाल को पीस बेसन
- 23:16के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया जिसकी
- 23:19वजह से इजाद हुआ कई लोकप्रिय स्नैक डिशेस
- 23:23का। गुजरात के खाने में बेसन हर जगह आपको
- 23:26देखने को मिलता है और बेसन की जितनी
- 23:28किस्में आपके सामने परोसी जाती हैं, वह
- 23:30लगभग आपको बावरा कर देती हैं। कहीं बेसन
- 23:32से कढ़ी बनती है। कहीं बेसन आपको सांभरिया
- 23:35पकोड़ों को तलने के लिए इस्तेमाल होता है।
- 23:37कहीं फाड़रा होता है, कहीं खाकरा होता है,
- 23:39कहीं घाटिया होता है, कहीं सेब होती है,
- 23:41वो भावनगरी हो या किसी और प्रकार की हो और
- 23:44कहीं बेसन आपके सामने बेसन के रूप में भी
- 23:46प्रकट होता है।
- 23:49गुजरात में जन्मी एक स्नैक डिश जो आज सारे
- 23:54विश्व में मशहूर है वो है ढोकला। नमकीन
- 23:58स्पोंज केक जैसी ये डिश गुजरात के अलग-अलग
- 24:02शहरों में अलग-अलग ढंग और रंग से बनती है।
- 24:07वैसे तो ढोकला कई प्रकार का होता है पर
- 24:10सबसे लोकप्रिय है पीले रंग का खमन ढोकला।
- 24:14बेसन से जो व्यंजन गुजरात में बनाए जाते
- 24:16हैं, वह जगह-जगह बदलते रहते हैं। आपको
- 24:19अहमदाबाद में या बड़ौदा में जो ढोकला
- 24:21मिलेगा, खबर ढोकला या रस वाला ढोकला, वो
- 24:24सूरत के लोचे से बिल्कुल फर्क होगा। सूरत
- 24:26में आम आदमी लोचा उत ही शौक से खाएगा
- 24:28जितने शौक से वो ढोकला खाता है। और ढोकले
- 24:30के जायके में भी थोड़ा-थोड़ा फर्क होगा।
- 24:32तो ये मुझे लगता है जानबूझकर जो खाने में
- 24:35फर्क आता है वो थोड़ा बावर्ची भी दिखाना
- 24:37चाहता है कि इनोवेशन क्या है कि मेरे हाथ
- 24:39में इंप्रोवाइजेशन क्या है?
- 24:41समोसे के बाद कोई स्नैक अगर हिंदुस्तान
- 24:45में सबसे लोकप्रिय है तो वो है यह ढोकला।
- 24:49मगर इस ढोकले की उम्र तो समोसे से ज्यादा
- 24:52है। जहां समोसा दिल्ली में इजाद हुआ 13वीं
- 24:57सदी के आसपास। ढोकले का पहला जिक्र हमें
- 25:0011वीं सदी के गुजराती जैन ग्रंथों में भी
- 25:03मिलता है। और पिछले हजार सालों में इस
- 25:07ढोकले को बनाने की विधि में ज्यादा फर्क
- 25:10नहीं आया।
- 25:12बेसन, दही, खमीर और सरसों के बीज से बनने
- 25:16वाला यह ढोकला स्वादिष्ट तो है ही साथ में
- 25:20काफी सेहतमंद भी माना जाता है। क्योंकि यह
- 25:24तला नहीं बल्कि स्टीम किया जाता है। इस
- 25:28ढोकले के साथ एक पूरा तरकश है गुजराती
- 25:31स्नैक्स का जिन्हें फरसान और नाश्तों की
- 25:35श्रेणी में बांटा जाता है। और इनमें फरसान
- 25:38वो स्नैक्स होते हैं जिनकी शेलफ लाइफ
- 25:41ज्यादा नहीं होती और इन्हें स्नैक्स की
- 25:44तरह या खाने के साथ खाया जाता है। जैसे कि
- 25:49ढोकला, तली हुई कचौड़ी और भजिया या खमड़।
- 25:56[संगीत]
- 25:57दूसरी ओर नाश्तों की फेहरिस्त में आते हैं
- 26:01फाफड़ा, गाठिया, सेब और चूड़ा जो लंबे सफर
- 26:06पे यात्रियों और व्यापारियों के काम आते
- 26:09थे।
- 26:11कमर्शियली इन गुजरातीज़ हैव ट्रेडेड आउट
- 26:14गॉन आउट ऑफ द कंट्री और आउट ऑफ गुजरात एंड
- 26:16एंड बीन टू वेरियस प्लेसेस जहां पर उनको
- 26:19दिनों तक वॉच करना पड़ता था, घूमना फिरना
- 26:21पड़ता था और प्लस वहां के ट्रेडिंग
- 26:24कम्युनिटी से कनेक्ट करना पड़ता था। तो
- 26:26फ़ूड उसी हिसाब से डिराइव हुआ है दो तरीके
- 26:28से। एक तो एक्सपोर्ट एंड इंपोर्ट।
- 26:30एक्सपोर्ट फ्रॉम द पर्स्पेक्टिव कि जब भी
- 26:32वो लोग घूमने जाते थे साइड में फूड ले
- 26:34जाते थे। सो सारा का सारा फ़ूड तला तल के
- 26:38ले जाते जिसके नाम प्रिजर्वेशन वाज़ अ
- 26:39कीवर्ड। आपको जो भी चीज खानी है आज आज आप
- 26:43कोई भी दुकान में जाइए आपको चवाना मिलेगा।
- 26:46आपको मिक्सचर मिलेगा, तली हुई बूंदी
- 26:49मिलेगी, तली हुई भाखर वड़ी मिलेगी, आपको
- 26:52तली हुई पापड़ियां मिलेगी। सब कुछ तला हुआ
- 26:56मिलेगा। बिकॉज़ वो सारे स्नैक्स लंबे तक
- 26:58चलते थे।
- 27:08एक प्याले दूध में चीनी घुलने से जो मिठास
- 27:12बनती है कुछ वैसे ही गुजरात की सांस्कृतिक
- 27:16धरोहर में घुला पारसियों का समुदाय जो
- 27:21पिछले 1200 साल से यहां रहता है अपने धर्म
- 27:24और तहजीब की हिफाजत करते हुए
- 27:32गुजरात की जो खानपान की विरासत है। उसमें
- 27:34एक अनमोल रतन पारसी खाने वाला है। बहुत कम
- 27:38लोगों को यह बात याद रह गई है कि जो पारसी
- 27:39समुदाय है वो आज से सैकड़ों साल पहले फारस
- 27:42से यहां आया। ये अग्नि के उपासक थे और जब
- 27:46ईरान में पूरा धर्म परिवर्तन हो गया और
- 27:48इस्लाम ने अपनी जड़े जमानी शुरू कर दी। तो
- 27:50ये जो अग्नि के उपासक थे, यह वहां से शरण
- 27:53लेने के लिए हिंदुस्तान में आ गए। जब यह
- 27:55शरणार्थी के रूप में गुजरात पहुंचे, तो
- 27:57यहां के राजा के मन में आशंका थी कि
- 27:59विदेशी यहां आ जाएंगे, तो हमारे समाज के
- 28:01संतुलन को ख़राब कर देंगे। तो जो पारसियों
- 28:03का मुखिया था उसने राजा से कहा कि एक मुझे
- 28:05प्याला दीजिए। उसमें दूध भर के रखा। उसमें
- 28:08उसने एक चम्मच शक्कर डाली। उसे हिला दिया
- 28:10और कहा देखिए जिस तरह से शक्कर दूध के
- 28:13प्याले में मिलकर दूध को मीठा बनाती है
- 28:15उसी तरह हम जब आपकी रियासत में आएंगे और
- 28:17शरणार्थी के रूप में रहेंगे तो हम अपने
- 28:19गुणों से आपके समाज को संपन्न करेंगे और
- 28:22किसी भी तरह की खराबी यहां नहीं आने
- 28:23देंगे।
- 28:25गुजरात आ बसे इन पारसियों ने शहर-शहर घूम
- 28:30अपनी जिंदगी और समाज को पुनस्थापित किया
- 28:33और हिंदुस्तानी संस्कृति पर अपनी छाप
- 28:35छोड़ी। वहां पर जब सेटल हुए तब करना क्या
- 28:40धंधा तो उनका बेसिक ईरान से जो आया था वो
- 28:45एग्रीकल्चर में एक्सपर्टीज थी फ्रूट्स की
- 28:48खेती करने में। तो साउथ गुजरात में देखो
- 28:52तो आज भी 1300 1400 साल के बाद जो
- 28:56बड़ी-बड़ी वाड़ियां है फ्रूट की वो पारसी
- 28:59ईरानी और जोराशस की है।
- 29:04गुजरात की सरजमी को गले लगा पारसियों के
- 29:08अल्पसंख्यक समुदाय ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपने
- 29:12अस्तित्व और संस्कृति को महफूज़ रखा अपने
- 29:15खाने में।
- 29:17द पारसी क्वज़न इज कंप्लीटली डिफरेंट फ्रॉम
- 29:20द गुजराती क्वज़न। देयर हैज़ बीन नो मजर और
- 29:23फ्यूज़ एस सच। हमारे मसाले अलग हैं। और जो
- 29:27ईरान से ट्रेडिशनल ईरान का ट्रेडिशनल खाना
- 29:30जो है वो चावल है। मटन, चंक्स ऑफ मटन,
- 29:36कबाब्स,
- 29:38ड्राई फ्रूट और फ्रूट जो ईरान में बहुत
- 29:41उपलब्ध थे। तो वही हमारे क्वज़न में आए। अब
- 29:45यहां आने के बाद भी
- 29:48हमारा मसाला भी कंप्लीटली अलग होता है।
- 29:50गुजराती टेस्ट से तेल का बहुत कम वापराश
- 29:54ज्यादा घी का यूज और मसाला जो है अदरक
- 29:59लहसुन विनेगर
- 30:02ड्राई फ्रूट फ्लेवर्स ऑल दैट कंबाइन इनू
- 30:06आवर कुकिंग एंड एव्री सॉर्ट ऑफ़ वेजिटेबल
- 30:10आई मीन इट साउंड्स अनबिलीवेबल बट द पारसी
- 30:14हैज़ अडॉप्टेड एव्री वेजिटेबल टू इंक्लूड
- 30:16मटन इन इट
- 30:19शाक सब्जी गोश्त, चावल और दाल के इसी
- 30:23तालमेल से बनता है पारसी धनसाग जो इनकी
- 30:27सबसे मशहूर डिश है।
- 30:29नाउ थिंग्स लाइक देयर इज़ अ थिंग कॉल्ड धन
- 30:31साग। नाउ दैट इज़ अ
- 30:35सॉर्ट ऑफ़ फ्राइड राइस
- 30:38एंड अ दाल व्हिच कंसिस्ट ऑफ़ फोर टाइप्स ऑफ़
- 30:42दाल। मसूर, मूंग, हरद एंड चना। ऑल दैट दाल
- 30:47प्लस थिंग्स लाइक भाजी वो भी उसमें वो
- 30:52उसको पीस के उसके अंदर डाल के और उसमें
- 30:56मटन या चिकन पकाते हैं अब ये हमारी
- 31:00बिल्कुल स्टैंडर्ड नेशनल डिश है पास इसकी
- 31:03संडे आफ्टरनून को ये दानसाग आप खा लिया
- 31:05फिर आप कुछ कर नहीं सकते आप सो जाना बहुत
- 31:10धनसाग बनाने का मूल आधार और इसके
- 31:14इंग्रेडिएंट्स अरब डिश हरीश से काफी मिलते
- 31:18जुलते हैं। मगर इस डिश का पूरी तरह से
- 31:21विकास 13वीं सदी के बाद ही हुआ। जब पारसी
- 31:26समुदाय भारत आया और धनसाख में यहां की
- 31:30स्थानीय सब्जियां डलने लगी।
- 31:36[संगीत]
- 31:47गुजरात की धरती जो पूरी तरह रंगी थी जैन
- 31:51धर्म के शाकाहारी प्रभाव से गवाह बनी कई
- 31:55नायाब नॉनवेज डिशेस की जो पारसी क्वजीन का
- 31:59हिस्सा थी
- 32:01और खासतौर से तटवर्ती इलाके में रहने की
- 32:04वजह से पारसी क्वज़न में मछली के सेवन का
- 32:08महत्वपूर्ण पूर्ण स्थान है।
- 32:13[संगीत]
- 32:14फिश का क्यों प्रडोमिनेंस है हमारे खाने
- 32:18में? हम सी कोस्ट के के ऊपर आके ठहर रुक
- 32:22गए पहले और वहीं हमारा प्रोस्पर हुए।
- 32:26हमारी फार्मिंग लैंड भी वहीं थी। तो
- 32:28नेचुरली दी फिश प्लेज़ अ वेरी इंपॉर्टेंट
- 32:32रोल इन आवर क्वज़न। नॉट ओनली इन आवर कुजीन
- 32:36बट इवन इन आवर ऑस्पिशियस ओकेशंस एंड एव्री
- 32:40मेजर फंक्शन लाइक अ थ्रेड सेरेमनी और अ
- 32:43वेडिंग फिश इज ऑलवेज अ पार्ट ऑफ इट।
- 32:48पात्राानी मच्छी यानी पत्ते वाली मच्छी एक
- 32:53सरल डिश है पारसी क्वज़न की।
- 32:56जिस पर मछुआरों के समुदाय का प्रभाव देखा
- 32:59जा सकता है।
- 33:01इस डिश में नारियल, अदरक, लहसुन, नींबू,
- 33:06धनिए और हरी मिर्च का लेप बना मछली पे
- 33:09लगाया जाता है। और फिर केले के पत्ते में
- 33:13लपेट इसे पकाया जाता है।
- 33:17और यह डिश भी भारत पहुंची पारसियों के
- 33:20साथ। आज से कुछ 1200 साल पहले
- 33:24और इसे बनाने की विधि में कुछ ज्यादा
- 33:27बदलाव नहीं आया।
- 33:30और अगर आप किसी पारसी से पूछें कि पहले
- 33:33मुर्गी आई या अंडा तो वो अंडा ही कहेगा।
- 33:37क्योंकि अंडे का जितना इस्तेमाल पारसी
- 33:39क्वज़न में देखने को मिलता है वो शायद ही
- 33:42किसी और क्वज़न में हो।
- 33:45वी आर ग्रेट एग ईटर्स
- 33:49टू द एक्सटेंट दैट
- 33:51पारसी ब्रेकफास्ट
- 33:53इन अ फार्म फैमिली से और अ प्रोस्परस
- 33:57फैमिली इन सूरत और नवसारी और व्हाटएवर वुड
- 34:00इंक्लूड एग आप जो लारी में ऑमलेट खाते हैं
- 34:04वो ओरिजिनली पारसी घर से ही आया हुआ है वो
- 34:07बिकॉज़ उसमें प्याज होता है, टमाटर होता
- 34:10है, हरा धनिया होता है और हरा मिर्च होता
- 34:12है। एंड जो हमारे घर में ऑमलेट बनता है
- 34:16उसमें एक अदरक लहसुन का इतना टेस्ट भी
- 34:19जाता है। हल्दी जाता है, लाल मिर्च जाता
- 34:22है। यह सब मिला के हमारा ऑमलेट ही आखरी
- 34:25बनता है।
- 34:28ऑमलेट के इजाद की कहानी एक विवादात्मक
- 34:31मुद्दा है। जिसकी तारीख और स्थान निश्चित
- 34:34रूप से नहीं बताया जा सकता।
- 34:37मगर हिंदुस्तान में बनने वाला मसाला ऑमलेट
- 34:40अपनी जड़े पारसी कुकिंग में ही पाता है।
- 34:44साथ ही अंडे की भुर्जी भी पारसी डिश अकुरी
- 34:48का ही एक अलग रूप है।
- 34:51[संगीत]
- 34:54केवल 75,000 की आबादी वाला गुजरात से गोवा
- 34:58तक फैला यह पारसियों का समुदाय अपने
- 35:02पुराने रेस्टोरेंट्स और बेकरीज से आज भी
- 35:06अपना स्वाद घोल रहा है हिंदुस्तानी क्वज़न
- 35:09के सागर में।
- 35:11[संगीत]
- 35:23गुजरात के खाने की एक कड़ी जुड़ती है जैन
- 35:26धर्म की अहिंसा और शाकाहारी विचारधारा से
- 35:29और दूसरी कड़ी पे मिलता है राज पिपला जैसी
- 35:33रियासतों का खाना और मिस्रॉड जैसे ठिकानों
- 35:36की दावतें
- 35:38जहां मांस खाने की कोई मनाही नहीं थी और
- 35:42आजादी से पहले जब शिकार कानूनी था तो यहां
- 35:46पर कई कई नायाब डिशेस बनती थी
- 35:51वो उस जमाने में जो शिकार के लिए जाते थे
- 35:55तो फॉर एंटरटेनमेंट
- 35:57दे यूज्ड टू हैव कुक आउट्स मतलब सब मिलते
- 36:01थे और सिगड़ियां होती थी चारकोल के
- 36:05सिगड़ियां और खाना पकाते थे या पिकनिक पे
- 36:09जाते थे खाना पकाते थे खाते थे तो उस टाइम
- 36:12महाराजा भूपेंद्र सिंह पटियाला के अचानक
- 36:16पहुंच गए और
- 36:19एकदम हलचल होने लगी। अभी क्या बना है तो
- 36:22सबको पता था उनको तो खास मैरो
- 36:26अपना बकरी का खास पसंद था। तो फटाफट बाहर
- 36:31आ के पता नहीं कितने बकरी को ले आके झटका
- 36:36करके वो अंदर का मैरो निकाल के एक मोटा
- 36:40बड़ा सा वाट की
- 36:42उनको पेशी किया गया।
- 36:47सुनने में थोड़ा अजीब लगे पर कई लोग मोर
- 36:50का भी सेवन किया करते थे और आज से 2500
- 36:54साल पहले आयुर्वेद के सुश्रुत और चरक जैसे
- 36:58पंडितों ने भी मोर के मीट को सराहा है।
- 37:02यहां तक कि अंग्रेजों के शासन में क्रिसमस
- 37:06के रोज हिंदुस्तान में भुना हुआ मोर भी कई
- 37:09जगह बनता था। मगर आजादी के बाद मोर को
- 37:13राष्ट्रीय पक्षी का खिताब मिला और इसके
- 37:16शिकार और सेवन को गैरकानूनी माना गया और
- 37:19सिर्फ मोर ही नहीं चिड़िया का मीट भी
- 37:23आजादी से पहले कई राज परिवारों में परोसा
- 37:26जाता था।
- 37:28[संगीत]
- 37:31चिड़िया का हलवा जब मेरे शोर ने बनाया वो
- 37:35उस टाइम बंबई में थे और महाराजा प्रताप
- 37:38सिंह के साथ तो उनको कहते थे शमशेर कुछ आज
- 37:41बनाओ कुछ अलग सा तो कहा चिड़िया का हलवा
- 37:45बनाऊंगा चिड़िया स्परोस तो क्रॉफन मार्केट
- 37:49जाके मेरे ख्याल पता नहीं कितने डजन
- 37:52चिड़िया लेके आए और उसके पंख उतारने में
- 37:55इतना टाइम हो लग गया पर फिर भी लगातार वो
- 38:00पकाते रहे और पकाते रहे तो चाकना तो पड़ता
- 38:04है। तो वो चाकते गए और जब चिड़िया हलवा बन
- 38:10गया तो कर्नल साहब तो उनको आग लग गई
- 38:14क्योंकि इतनी गर्मी चीज होती है तो
- 38:17उन्होंने अपना बैरर को बोला कि चलो टब में
- 38:22बर्फ भर दो पूरा टब में बर्फ भर दो और
- 38:25उसमें फिर वो लेट गए ठंडक के लिए।
- 38:31शायद यही वजह रही होगी चिड़िया के मीट पर
- 38:35पाबंदी लगाने की।
- 38:37[संगीत]
- 38:41कुछ लोग हालांकि क्षत्रिय परिवार में उनका
- 38:45जन्म हुआ है लेकिन कुछ धर्म के कारण
- 38:49उन्होंने वेजिटेरियन होना पसंद किया है।
- 38:52तो उन लोगों को वैसे तो नॉनवेज धर्म के
- 38:56लिए प्रतिबंध है। लेकिन फिर भी अगर उन्हें
- 39:00नॉनवेज का एक्सपीरियंस लेना है तो ऐसी
- 39:04डिशेस बनाके और उन्हें ऐसा एक अनुभव
- 39:07दिलाया जा सकता है जो उनको नॉनवेज खाने की
- 39:11याद दिला सके।
- 39:13कटहल यानी जैकफूट
- 39:16एक ऐसी डिश है जो अपनी तासीर और स्वाद में
- 39:19गोश्त से काफी मिलती जुलती है।
- 39:24और यह कटहल भारत का अपना ही है।
- 39:29जिसका विकास मध्य या दक्षिण भारत में हुआ
- 39:32कई हजार साल पहले।
- 39:36[संगीत]
- 39:39चाहे वो लखनऊ के नवाब हो, जोधपुर के राठौर
- 39:43या राज पिपला का शाही वंश। खाने-पीने से
- 39:47जुड़े कई दिलचस्प और अटपटे किस्से हर जगह
- 39:51मिलते हैं इतिहास की किताबों में।
- 39:55[संगीत]
- 40:01गुजरात के खाने की कहानी का आखिरी अध्याय
- 40:04एक ऐसा फूड प्रोग्राम है जिसने देश के
- 40:08दूध, घी और मक्खन के उत्पाद में एक विकास
- 40:11की क्रांति ला दी।
- 40:15[संगीत]
- 40:17जब ब्रिटिशर्स यहां थे और बॉम्बे में दूध
- 40:20की दिक्कत रहती थी तो ब्रिटिशर्स ने एक
- 40:23प्राइवेट डेयरी एंटरप्रेन्योर जो कि पोलसन
- 40:26है उसको मोनोपोली दे रखी थी कि वो आनंद जो
- 40:29उस वक्त कैररा डिस्ट्रिक्ट के नाम से जाना
- 40:31जाता था यहां से मोनोपोली थी कि आप वो ही
- 40:34किसानों से दूध खरीद सकता है। तो किसानों
- 40:37से पोलसर ने दूध कलेक्ट करना शुरू किया और
- 40:40ठंडा करके बॉम्बे भेजना शुरू किया। पर
- 40:43प्रॉब्लम वहां से शुरू हुई क्योंकि उसमें
- 40:46किसानों को जो भाव होता था प्राइस होती थी
- 40:49वो सही नहीं देता था तो फार्मर्स वर
- 40:51फुल्ली एक्सप्लइटेड
- 40:53तो वो सब लोग उस वक्त सरदार वल्लभ भाई
- 40:56पटेल जो हमारे उस वक्त के फ्रीडम फाइटर थे
- 40:59जो कि यहीं से आनंद से ही थे करमसत थे पास
- 41:03में से उनके पास गए और उनको अपनी कहानी
- 41:06सुनाई अंडर द लीडरशिप ऑफ त्रिभुव दास पटेल
- 41:09जो फाउंडर चेयरमैन थे अमूल के तो सरदार
- 41:13वल्लभ भाई पटेल ने कहा कि अगर आप किसानों
- 41:16को अपने दूध का सही मूल्य चाहिए तो आपको
- 41:19सिर्फ प्रोडक्शन ही नहीं करना। आपको अपने
- 41:22दूध का प्रोसेसिंग भी करना है और
- 41:24मार्केटिंग भी करना है। और यह सब करने के
- 41:27लिए आपको अपनी एक कोऑपरेटिव सोसाइटी बनानी
- 41:30पड़ेगी। तो उस वक्त सब किसान यहां पे
- 41:34स्ट्राइक पे चले गए। उन्होंने पोलसन को
- 41:36दूध देने से मना कर दिया और अपना पूरा दूध
- 41:39खेतों में बहा दिया। तो इस तरह से अमोल का
- 41:43जन्म हुआ 1946 में।
- 41:48इस घटना के 3 साल बाद डॉक्टर वर्गीज़
- 41:52कुरियन आनंद आए और अमूल द्वारा देश में
- 41:56ऐसा वाइट रेवोल्यूशन आया कि हर गली और
- 42:00कस्बे में दूध की नदियां बहने लगी।
- 42:04और सन 1998 में भारत विश्व में दूध का
- 42:08सबसे बड़ा उत्पादक बना।
- 42:13आज भी आनंद गांव गौशाला है सारे देश की।
- 42:19कृष्ण और महावीर की धर्मभूमि गुजरात ने
- 42:23अहिंसा और सर्व जंतु सम्मान के उपदेश को
- 42:27अपने खाने में शामिल कर जन्म दिया
- 42:30शाकाहारी जीवन शैली को।
- 42:34कृष्ण के नामों की ही तरह बेसन का एक रंग
- 42:39मगर अनेक रूप देखने को मिलते हैं यहां।
- 42:44कच्छ की धरती पर भले ही खेती असंभव हो मगर
- 42:49यहां के खाने और लोगों के दिलों में
- 42:52खुशहाली पनपती है।
- 42:57ईरान से आए पारसी
- 43:00गुजरात की संस्कृति में ऐसे घुले जैसे दूध
- 43:03में शक्कर।
- 43:07और यहां के राजवंश एक पुरानी तस्वीर की
- 43:11तरह याद दिलाते हैं। वक्त के साथ बीते
- 43:15किस्सों की
- 43:17यह थी कहानी गुजरात के खाने की।
- 43:22[संगीत]
- 43:42[प्रशंसा]
- 43:43[संगीत]
- 43:47[प्रशंसा]
- 43:49[संगीत]
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This page contains the full transcript of Gujarat's Food Journey | Dabeli, Dhokla, Amul | Raja Rasoi Aur Anya Kahaniyaan Ep 11 | Epic TV by EPIC TV, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 5,759 words across 794 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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