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Ghar Aur Khandaan Tootne Ke 10 Asbaab By Shaikh Kifayatullah Sanabili | IIC Mumbai — Transcript

by iic Mumbai - Islamic Information Centre Mumbai · 13,450 words · 1,658 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:06अल्हम्दुलिल्लाह रब आलमीन
  2. 0:09व सलातो सलाम रसूल अमीन वला वही अजमाई
  3. 0:15अम्माबाद मोहतरम हाजरीन
  4. 0:18सामन सामियात
  5. 0:21जिस मौजू पर मुझे कुछ बातें रखनी है वो है
  6. 0:28घरों के टूटने के असबाब
  7. 0:33यानी आज हमारे घरों में जो इ्तलाफो इंतशार
  8. 0:36है और आपस में
  9. 0:40चाहे भाई भाई हो बाप बेटे हो मियां बीवी
  10. 0:46हो आए दिन उनके बीच अनबन
  11. 0:51और इख्तलाफ की बातें रुनुमा होती रहती है
  12. 0:54और कभी-कभी इख्तलाफ इतना शदीद बढ़ जाता है
  13. 0:59कि आदमी अपने ही भाई से या अपने ही बाप से
  14. 1:02या अपने ही औलाद से जिंदगी भर के लिए
  15. 1:06बातचीत करना बंद कर देता है। मियां बीवी
  16. 1:09का मसला है तो मामला तलाक या खुला तक
  17. 1:12पहुंच जाता है। ये सारे झगड़े घरों में
  18. 1:15क्यों होते हैं? उसके बहुत सारे असबाब
  19. 1:17हैं।
  20. 1:19मैं इंशा्लाह
  21. 1:21कोशिश करूंगा कि उनमें से
  22. 1:2510 जो आम असबाब है वो आपके सामने पेश कर
  23. 1:28सकूं। एक घंटे का वक्त है मेरे पास।
  24. 1:30इंशाल्लाह मैं कोशिश करूंगा कि उसके अंदर
  25. 1:32बात खत्म हो जाए। सबसे पहले ये ज़हन नशीन
  26. 1:35कर लीजिए कि अल्लाह रब्बुल आलमीन ने हम
  27. 1:37सबको खानदान में जोड़ा है। उसके पीछे मकसद
  28. 1:42यह है कि आपस में मोहब्बत रहे।
  29. 1:45वरना अल्लाह रब्बुल आलमीन
  30. 1:47आदम अली सलाम की तरह सबको
  31. 1:52एक साथ एक ही हुक्म से अलग-अलग पैदा कर
  32. 1:54सकता है। आदम अली सलाम को अल्लाह ताला ने
  33. 1:57ना किसी बाप से पैदा किया ना किसी मां से।
  34. 2:01अल्लाह कादिर है इस बात पर। अल्लाह ताला
  35. 2:03ने हर तरह पैदा करके बता दिया। बगैर
  36. 2:06मां-बाप के आदम अल सलाम। सिर्फ मर्द से
  37. 2:09हवा अल सलाम। सिर्फ औरत से ईसालाम और मर्द
  38. 2:14औरत दोनों से हम सब है तो हर तरह अल्लाह
  39. 2:17ताला पैदा कर सकता है। लेकिन इस रिश्तों
  40. 2:19में क्यों जोड़ा?
  41. 2:22इंसानी अफराद के तनासुल उसके नस्ल की
  42. 2:26अफजाइश के लिए अल्लाह रब्बुल आलमीन ने ये
  43. 2:28रिश्ते क्यों बनाए? ताकि आपस में मोहब्बत
  44. 2:32रहे। एक दूसरे से मिलकर सुकून हासिल हो।
  45. 2:36अल्लाह ने खुद कुरान में कहा अल्लाह
  46. 2:38फरमाता है रूम में
  47. 2:44ये अल्लाह ताला की निशानी है। अल्लाह ताला
  48. 2:45की बहुत बड़ी कुदरत है कि अल्लाह ताला ने
  49. 2:47तुम्हारा जोड़ा बनाया तस इहा ताकि तुम्हें
  50. 2:51सुकून मिले वक मदा व रहमा और अल्लाह ने
  51. 2:56तुम्हारे बीच में मोहब्बत और रहमत डाल दी।
  52. 3:01तो यह जो रिश्तों में अल्लाह ताला ने हम
  53. 3:02सबको जोड़ा है, हमारी पैदाइश के लिए
  54. 3:06अल्लाह ने जो यह रिश्ते वाला तरीका
  55. 3:09इख्तियार किया है, मकसद उसके पीछे यह है
  56. 3:11कि हम एक दूसरे का सपोर्ट करें। एक दूसरे
  57. 3:13का साथ दें। आज इसी रिश्तों का नतीजा है
  58. 3:17कि एक आदमी अगर अस्पताल में एडमिट हो जाए
  59. 3:19तो उसको देखने वालों की लाइन लग जाती है।
  60. 3:21कोई उसका चाचा है, मामा है, कोई भाई है,
  61. 3:23कोई बेटा है, कोई फला है। रिश्तों की वजह
  62. 3:26से लोग उसका ख्याल रखते हैं। अगर ये
  63. 3:29रिश्ते ना हो तो आप देख लें कि कोई
  64. 3:31लावारिस लाश होती है, कोई लावारिस शख्स
  65. 3:34होता है, कोई पुरसाने हाल नहीं है।
  66. 3:36क्योंकि उसका रिश्ता लोगों से नहीं जुड़ा
  67. 3:38हुआ। कोई पूछने के लिए तैयार नहीं है। तो
  68. 3:40ये रिश्तों की बहुत बड़ी जो है अहमियत है।
  69. 3:44लेकिन ये रिश्ता अगर हमारे दरमियान इन
  70. 3:48रिश्तों में दारड़ हो ना इत्तेफाकी हो तो
  71. 3:52इसका मकसूद हासिल नहीं होता। तो आइए हम
  72. 3:54देखते हैं कि वह क्या असबाब है जो
  73. 3:59बाहम रिश्तों में जुड़े होने के बावजूद भी
  74. 4:02हमारे बीच मोहब्बत नहीं होती है। हमारे
  75. 4:05बीच आपस में समझौता नहीं होता है।
  76. 4:07इ्तलाफों इंतशार होता है। वो क्या असबाब
  77. 4:09है? मैंने 10 अज़ाब नोट किए हैं। मैं आपके
  78. 4:12सामने पेश करूंगा। सबसे पहली चीज क्या है?
  79. 4:15ईमान और अकीदे में कमजोरी।
  80. 4:19रिश्तों की अहमियत को अगर कोई नहीं
  81. 4:21पहचानता है तो उसके पीछे एक वजह यह है कि
  82. 4:24उसका ईमान कमजोर है। इसलिए सही बुखारी की
  83. 4:26हदीस है जहां अल्लाह ताला ने रिश्तों को
  84. 4:28निभाने का हुक्म दिया तो उस हुक्म से पहले
  85. 4:31ईमान का हवाला दिया। सही बुखारी की हदीस
  86. 4:34अबू हुरैरा र हदीस के कहते हैं कि अल्लाह
  87. 4:36के रसूल सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया
  88. 4:39मन का बिल्लाह व यम आखिर फल यसिल रह रही
  89. 4:47अबू हुरैरा र्लाहु ताला फरमाते हैं कि
  90. 4:50अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
  91. 4:52फरमाया कि जो अल्लाह पर ईमान रखता है और
  92. 4:56आखिरत के दिन पर ईमान रखता है तो उसके इस
  93. 5:00ईमान का तकाजा है कि अपने रिश्तों का
  94. 5:02ख्याल रखें। रखें। अपने रिश्तों को जोड़
  95. 5:04के रखें। हकीकत में ईमान की ताकत आती है
  96. 5:08तो ईमान हमारे अंदर पहचान पैदा करता है कि
  97. 5:11कौन रिश्ता हमारे नजर में कितना अहम है।
  98. 5:14ईमान और अकीदा ना हो तो एक बदतीन हमारी
  99. 5:17नजर में बड़ा अहम नजर आएगा। ईमान और अकीदा
  100. 5:19ना हो तो हमारे वालदेन हमें दुश्मन नजर
  101. 5:22आएंगे। आज देखिए बहुत सारी लड़कियां अपने
  102. 5:26वालदेन से बगावत करके किसी नॉन मुस्लिम का
  103. 5:29हाथ पकड़ के निकल जाती है। ईमान नहीं है
  104. 5:32उनके पास। ईमान हो तो मंजर क्या होगा?
  105. 5:35अल्लाह रब्बुल आलमीन ने कुरान मजीद में
  106. 5:36सूर तहरीम में फरमाया फिरौन की बीवी की
  107. 5:40मिसाल दी और तमाम मोमिनों के लिए बतरे
  108. 5:43उसवा पेश किया। अल्लाह फरमाता है गरब
  109. 5:45मसलना आमनु कि अल्लाह ताला मोमिनों के लिए
  110. 5:48एक मिसाल बयान करता है। किसकी मिसाल? एक
  111. 5:52औरत की इमरत फिरौन फिरौन की बीवी की फिरौन
  112. 5:55कौन है? दुनिया का अपने वक्त में दुनिया
  113. 5:59का सबसे ताकतवर बादशाह है। सुपर पावर
  114. 6:02किंग।
  115. 6:04ये फिरौन की बीवी वो बीवी आसिया रदी
  116. 6:08अल्लाह। जिनका शौहर दुनिया का सबसे
  117. 6:12पावरफुल है अपने जमाने में।
  118. 6:15और
  119. 6:16इस औरत को इनको रानी बना के रखने वाला है।
  120. 6:20सबसे बेहतरीन आलीशान महल में रखने वाला
  121. 6:23है। इतना सब कुछ होने के बावजूद भीकि उसके
  122. 6:26अंदर ईमान नहीं है तो अल्लाह से क्या दुआ
  123. 6:28कर रही हैं? कह रहे हैं कि रब्ब इन
  124. 6:33जन ऐ अल्लाह ताला मुझे जन्नत में घर बना
  125. 6:36दे मेरे लिए। वजनी फिरौन अमली मुझे फिरौन
  126. 6:42और उसके काम से निजात दे। मुझे ना ये आदमी
  127. 6:44पसंद है ना इसका कारोबार पसंद है।
  128. 6:47जबकि वो दुनिया का सबसे ताकतवर आदमी है।
  129. 6:52सबसे ज्यादा सहूलत आसानी दे सकता है।
  130. 6:54लेकिन ईमान ईमान नहीं है तो ये आदमी हमारे
  131. 6:57लायक नहीं है।
  132. 7:00लेकिन आज हमारा मामला क्या है मेरे
  133. 7:02भाइयों? क्योंकि हम अपने बच्चों को ईमानी
  134. 7:04दौलत से लैस नहीं करते। ईमान मजबूत नहीं
  135. 7:07करते तो नतीजा है कि उन्हें खरे-खोटे की
  136. 7:09पहचान नहीं है। कौन अच्छा है कौन बुरा
  137. 7:11नहीं मालूम। हमारी औलाद को मां-बाप दुश्मन
  138. 7:14मालूम होते हैं। उनको यह आज के मगरबी
  139. 7:18तहजीब उनको यह सिखा रही है कि तुम्हारे
  140. 7:20भाई लोग दुश्मन है। तुम्हारे मां-बाप
  141. 7:22दुश्मन है। तुम्हें घर में कैद करके रखना
  142. 7:24चाहते हैं। ये जो परिवार ये जो घराना है
  143. 7:28जो उनका सबसे बड़ा मुहाफिज है। सबसे बड़ा
  144. 7:31निगरा सबसे बड़ा खैरखा है। उसी को दुश्मन
  145. 7:33बना के पेश कर रहे हैं। ये ईमान की कमी
  146. 7:36है। तो सबसे पहली वजह जो है कि हमारे घरों
  147. 7:40में हमारे रिश्तों में जो मोहब्बत नहीं है
  148. 7:43उसकी वजह है कि हमारे
  149. 7:46खानदान के अफराद में ईमान की कमजोरी है।
  150. 7:48हम अपना ईमान मजबूत करें। अल्लाह ताला से
  151. 7:50ताल्लुक मजबूत करें। अपने अंदर तकवा पैदा
  152. 7:53करें। तो उसका नतीजा ये देखने को मिलेगा
  153. 7:55कि आपस में मोहब्बत और भाईचारेगी पैदा
  154. 7:58होगी। उस ईमान की दौलत से। तो पहली वजह
  155. 8:01क्या है? ईमान की कमजोरी है। आगे बढ़ते
  156. 8:05हैं। दूसरी वजह क्या है? दूसरी वजह दीनी
  157. 8:09इल्म की कमी है।
  158. 8:11शेख हलवानी ने हदीस को सही करार दिया सही
  159. 8:14जामे में। अल्फाज़ हैं तलब इल्म फरीद कुल
  160. 8:18मुस्लिम।
  161. 8:19दीन का इल्म यह हर मुसलमान पर फर्ज है।
  162. 8:24हर मुसलमान पर जरूरी है। जिंदगी गुजारने
  163. 8:28के लिए अल्लाह ने जो गाइडलाइन दी है उसका
  164. 8:32जानना हर मुसलमान के लिए जरूरी है। लेकिन
  165. 8:35चूंकि हम नहीं जानते।
  166. 8:38इस्लामी तालीमात से आरास्ता नहीं है। तो
  167. 8:41खानदान में एक दूसरे की लिमिट क्या है? एक
  168. 8:44दूसरे का हक क्या है? एक दूसरे की हद क्या
  169. 8:48है? हमें पता ही नहीं।
  170. 8:50और जब अपनी लिमिट से ज्यादा, अपने हक़ से
  171. 8:54ज्यादा किसी से क्लेम करोगे, मांगोगे तो
  172. 8:56फिक्र बात है। मामला बिगड़ेगा। हमें अंदाजा
  173. 9:00ही नहीं है। बेटे को नहीं अंदाजा है कि
  174. 9:02बाप से मुझे क्या-क्या मिल सकता है। बाप
  175. 9:03को नहीं अंदाजा है कि बेटे से क्या-क्या
  176. 9:05खिदमत लेनी है। बीवी को नहीं मालूम कि
  177. 9:08शौहर की क्या-क्या हुकूक है। शौहर को नहीं
  178. 9:10पता मैं बीवी से क्या-क्या ले सकता हूं।
  179. 9:13तो अपने मन से, अपनी मर्जी से जो चाहता है
  180. 9:17जिससे तवकात वाबस्ता करके रखा हुआ है। जब
  181. 9:19उसकी तवकात पूरी नहीं होती है तो झगड़ा
  182. 9:21होता है, फसाद होता है। उसे पता ही नहीं
  183. 9:23है कि हमारी लिमिट क्या है? एक दूसरे के
  184. 9:26हुकूक क्या है? हम दूसरे से सामने वाले से
  185. 9:28कितनी उम्मीद रख सकते हैं? कितना मुतालबा
  186. 9:30कर सकते हैं? पता ही नहीं। मिसाल के तौर
  187. 9:32पर
  188. 9:34आप देखें। वालिद का मसला।
  189. 9:38बहुत सारे वालदेन समझते हैं कि जो हमारे
  190. 9:40बच्चे हैं यह बालग होने के बाद आखरी सांस
  191. 9:44तक इनका सारा इनका सारा कमाया हुआ इनका सब
  192. 9:49कुछ हमारा है। बल्कि कुछ लोग तो हदीस भी
  193. 9:51पढ़ देंगे। अमाबी
  194. 9:55अगर बाप के ज़हन में ये फिक्र आ गई है कि
  195. 9:58बेटे का सब कुछ मेरा है।
  196. 10:02जो कि गैर फितरी है। हरगिज़ ऐसा नहीं।
  197. 10:05इस्लाम ने जो कानूनी विरासत दिया है,
  198. 10:06दोनों का हिस्सा अलग-अलग रखा है। दोनों की
  199. 10:08हदें अलग-अलग रखी हैं। लेकिन, अगर यह बाप
  200. 10:11समझता है कि इसका सब कुछ मेरा है, तो
  201. 10:13बताइए यह फितरत के खिलाफ है। बेटा इसको
  202. 10:15बर्दाश्त नहीं कर सकता। मामला क्या होगा?
  203. 10:17बाप बेटे में झगड़ा होगा। अब बाप को पता
  204. 10:20होना चाहिए कि हम बेटे से किस उम्र में
  205. 10:22क्या उम्मीद रख सकते हैं? अगर वो बच्चा है
  206. 10:25तो हम उससे क्या उम्मीद रखेंगे? जवान हो
  207. 10:26गया तो क्या उम्मीद रखेंगे? और बड़ा हो
  208. 10:28गया, बाल बच्चों वाला हो गया तो हम उससे
  209. 10:30क्या उम्मीद रख सकते हैं? हमारे पास अभी
  210. 10:32वक्त नहीं है कि मैं आप तफसीलात पे जाऊं।
  211. 10:34मैं सिर्फ इशारे आपके सामने रख रहा हूं कि
  212. 10:37अगर बाप को मालूम हो कि बेटे से हमें
  213. 10:39क्या-क्या लेना है। दीनी इल्म से आरास्ता
  214. 10:42हो तो अपनी लिमिट में अपनी हद में रह के
  215. 10:44बेटे से मुतालबा करेगा बेटा पूरा करेगा।
  216. 10:47बेटे का भी यही मसला है। बेटे को भी नहीं
  217. 10:50मालूम। कि बाप से हमको क्या-क्या मिल सकता
  218. 10:54है। एक बाप जिंदा है और कितने सारे बेटे
  219. 10:56खड़े हो के कहते हैं कि अब्बा बैठ के
  220. 10:59हमारा हिस्सा अलग करो। हमें तुम्हारे साथ
  221. 11:01नहीं रहना। अब इस बेटे को कौन बताए कि जब
  222. 11:03तक तुम्हारा बाप जिंदा है उसके माल में
  223. 11:05तुम्हारा कोई हक़ नहीं बनता।
  224. 11:09बाप के माल में कोई हक़ नहीं बनता। जब छोटे
  225. 11:11थे बाप ने पालपस के बड़ा किया अभी बड़े हो
  226. 11:13गए। अभी तुम्हारे हाथ पैर कमाओ खाओ। बाप
  227. 11:16जिम्मेदार नहीं है तुम्हारा। बाप के पास
  228. 11:19कितनी भी प्रॉपर्टी हो वो एक चवन्नी भी
  229. 11:22आपको ना दे वो गलत नहीं है। लेकिन बेटा
  230. 11:24क्या समझ के रखा है कि अगर बाप ने मेरा
  231. 11:26हिस्सा नहीं दिया तो मुझ पर जुल्म कर रहा
  232. 11:28है।
  233. 11:30जाहिर से झगड़ा होगा। मुंबई में एक फैमिली
  234. 11:33में एक बेटे ने क्या कहा बाप से? उसके पास
  235. 11:35एक ही फ्लैट है। तो कह रहा अब्बा ये फ्लैट
  236. 11:38बेच के मेरा हिस्सा दो।
  237. 11:41बाप कहता है बेटा तुझको बेच के हिस्सा दे
  238. 11:43दिया तो मैं कहां रहूंगा? तो कहा ये
  239. 11:44तुम्हारा मसला कहां रहो? अब मैं क्या
  240. 11:45करूं? मुझे इसका हिस्सा चाहिए। इस फैमिली
  241. 11:49में बेटा बाप दोनों दिन से जाहिल है। ना
  242. 11:52बाप को पता है कि मेरी लिमिट क्या ने बेटे
  243. 11:54को पता है और झगड़ा हो रहा है। अगर इन
  244. 11:56दोनों को मालूम होता या दोनों में से किसी
  245. 11:59एक को पता होता, बेटे को बताओ तो मुतालबा
  246. 12:01नहीं करता। बाप को पता होता जैसे मुतालबा
  247. 12:03करा उसका मुंह बंद कर देता। कि किस हक से
  248. 12:07तू मांग रहा है? कहां कैसा हक़ तेरा? लेकिन
  249. 12:09नहीं पता नहीं मालूमत। इसलिए झगड़े खड़े हो
  250. 12:12रहे हैं। मुतालबे हो रहे हैं। ऐसे ही
  251. 12:16भाई-बहन का मसला है। एक भाई पर भाई का हक़
  252. 12:20क्या है?
  253. 12:22नहीं पता लोगों को। कभी-कभी हमारे यहां एक
  254. 12:25जुमले में बोल जाता है कि भाई के माल में
  255. 12:27भाई का कोई हक नहीं है। बहुत बड़ा फ्रॉड
  256. 12:29है। ये बहुत बड़ा धोखा है। ये बहुत बड़ा
  257. 12:32पाप है। बहुत बड़ा जुल्म है। ऐसे बेशुमार
  258. 12:35मसाइल है जहां भाई के माल में भाई का
  259. 12:38लाजमी हक़ होता है।
  260. 12:41लेकिन आज हमने सबको सिखा दिया। नहीं भाई
  261. 12:43के माल में भाई का कोई हक़ नहीं होता। भाई
  262. 12:44एक भाई बगैर शादीशुदा मर जाए करोड़पति है
  263. 12:47तो उसकी प्रॉपर्टी उसके भाई को मिलेगी।
  264. 12:49शादी भी हो चुकी है, बीवी है, औलाद भी तो
  265. 12:52भी भाई का हिस्सा है।
  266. 12:55औलाद भी हो चुकी है, लेकिन बेटी है, बेटा
  267. 12:57नहीं है तो भी भाई का हिस्सा है। ये
  268. 12:58कंपलसरी है, वाजिबी है, लाजमी है। अगर बाप
  269. 13:02नहीं है, बेटा नहीं है तो फिर भाई के
  270. 13:04हिस्से में भाई का हक बनता है विरासत में।
  271. 13:08बेटियां भी हैं और बेटा और बाप नहीं है तो
  272. 13:11भी भाइयों का हक बनता है। बहुत सारे ऐसे
  273. 13:13मसाइल है जहां भाइयों का हक बनता है।
  274. 13:14बल्कि विरासत से हटकर [हंसी] दुनिया में
  275. 13:17नफके में भी भाई के माल में भाई का हक
  276. 13:19बनता है। वाजिबी
  277. 13:21एक भाई है छोटा।
  278. 13:24अभी बच्चा है। बाप मर गया यतीम हो गया। और
  279. 13:29उसकी अभी शादी वगैरह नहीं हुई है। यह बड़ा
  280. 13:32भाई अगर उसका खर्चा संभालता है तो यह
  281. 13:34एहसान नहीं है। उसका फर्ज है।
  282. 13:38कुरान ने बहुत वाज़ तौर पर कहा वसी मिस
  283. 13:42जालिक कि विरासत का कनेक्शन जहां होगा
  284. 13:46वहां खर्चा भी लग जाएगा। ये छोटा बच्चा
  285. 13:48अगर ये मर जाए इसके नाम कोई प्रॉपर्टी है
  286. 13:50तो बड़े भाई को मिलेगा क्योंकि इसकी शादी
  287. 13:52नहीं हुई अभी इसके बच्चे नहीं है। तो यहां
  288. 13:56विरासत से लिंक है बड़े भाई का। ये छोटा
  289. 13:59भाई अगर इसके साथ कोई प्रॉपर्टी अटैच है।
  290. 14:02ये मर जाता है। यह प्रॉपर्टी इसके बड़े भाई
  291. 14:04को मिलेगी अगर मर गया तो।
  292. 14:07यह प्रॉपर्टी का यहां लिंक है। यहां ऐसे
  293. 14:09केसेस में अगर इसको कुछ होता है, इस पर
  294. 14:12कोई मसला आता है तो उसकी देखने की
  295. 14:14जिम्मेदारी बड़े भाई की है। इसके पास कोई
  296. 14:16प्रॉपर्टी नहीं है। कंगाल है तो उसको
  297. 14:19पढ़ाने लिखाने सब जिम्मेदारी उसके बड़े
  298. 14:21भाई की है। ये एहसान नहीं ये फर्ज है।
  299. 14:24हां, बाप जिंदा है तब बड़े भाई का फर्ज
  300. 14:27नहीं है। या ये बड़ा हो गया, इसकी औलाद
  301. 14:30है, तो फिर भाई का फर्ज नहीं है। तो
  302. 14:32अलग-अलग केसेस है ना? यह जानने की जरूरत
  303. 14:35है कि कहां भाई के माल में भाई का हिस्सा
  304. 14:37है, कहां नहीं है। कहां विरासत में हिस्सा
  305. 14:39है, कहां नफके में जिम्मेदारी है। लेकिन
  306. 14:41यह हमें पता नहीं है तो फसाद होता।
  307. 14:44भाई-बहन का भी मसला है। एक भाई का बहन से
  308. 14:48कितना रिश्ता है। बहन के क्या हुकूक हैं?
  309. 14:51ये भी हमें नहीं मालूम है। और उसकी वजह से
  310. 14:54बहुत सारे मसले खड़े होते हैं। बल्कि
  311. 14:56शरीयत के बहुत सारे मसले हजम नहीं होते।
  312. 15:00मुंबई में हमने विरासत पे एक कॉन्फ्रेंस
  313. 15:03की थी। उसमें मैंने एक मसला बयान किया था
  314. 15:06कि अगर एक आदमी बे औलाद मर गया
  315. 15:114 करोड़ छोड़ के उसकी एक बीवी है और एक
  316. 15:14बहन है तो इस 4 करोड़ में से उसकी बीवी को
  317. 15:18सिर्फ एक करोड़ मिलेगा उसकी बहन को तीन
  318. 15:20करोड़ मिलेगा। ये मसला हजम नहीं होता
  319. 15:23लोगों को। वो बीवी कभी नहीं हजम कर सकती
  320. 15:26कि मेरा मियां मर गया 4 करोड़ छोड़ के ये
  321. 15:29चार में से तीन मैं उसकी बहन को अपनी ननंद
  322. 15:32को दे दूं। यह कैसे हो सकता है? वो एक भी
  323. 15:35देने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन इस्लाम
  324. 15:36का कानून है कि उसे तीन मिलेगा। बीवी को
  325. 15:38सिर्फ एक मिलेगा। अब हमारे पास टाइम नहीं
  326. 15:40है कि इसको डिटेल में जा के समझाऊं। लेकिन
  327. 15:42ये सारे मसाइल नहीं पता है। कि किसका
  328. 15:45कितना हक़ बनता है। तो आदमी जो चाहता है
  329. 15:48मुतालबा करता है। खुद मियां बीवी का मसला
  330. 15:50है। एक औरत है शादी हो गई। उसका बाप मरा।
  331. 15:55भाई लोग कहते हैं हिस्सा चाहिए। बहन बोलती
  332. 15:57है नहीं भैया रख लो हमको नहीं चाहिए। और
  333. 15:59इधर शौहर यह जो कुछ कमा रहा है यह कहती
  334. 16:02इसका पूरा मेरा है। उल्टी गंगा बह रही
  335. 16:05जहां उसकी प्रॉपर्टी वहां क्लेम नहीं कर
  336. 16:07रही है। कहती भैया रख लो हमको नहीं चाहिए।
  337. 16:10और शौहर जिसके माल में सिवाय नफके के कोई
  338. 16:13हक नहीं है। और मरने के बाद हक बनेगा वो
  339. 16:16भी औलाद के होते हुए 1/8 जो सबसे छोटा
  340. 16:19अमाउंट है। विरासत में सबसे छोटा अमाउंट
  341. 16:23सुमन है। आठवां इससे कम हिस्सा नहीं है।
  342. 16:25सबसे छोटा हिस्सा है। ये किसका है? बीवी
  343. 16:27का। और वह सबसे बड़ा हिस्सा लेना चाहती है
  344. 16:30अपने शौहर से। आप सोचें क्योंकि पता नहीं
  345. 16:33है हमारी लिमिट क्या है? पता नहीं मालूम
  346. 16:35नहीं है। शौहर के माल में बीवी का कोई हक
  347. 16:38नहीं है। हां नफका है। जब तक साथ में रह
  348. 16:41रहे हैं। खाना कपड़ा रहने के लिए मकान
  349. 16:44इलाज वगैरह ये सारी चीजें हैं। लेकिन ये
  350. 16:47कहो कि उसके पास करोड़ों की प्रॉपर्टी है
  351. 16:48तो आधा इसका हो जाए। नहीं नहीं नहीं।
  352. 16:50हरगिज़ नहीं। बिल्कुल नहीं। शौहर का जो
  353. 16:53कुछ है, उसका है। ऐसे ही बीवी का जो कुछ
  354. 16:56है उसका है। शौहर का कोई हक़ नहीं बल्कि नफ़
  355. 16:59भी नहीं है बीवी का। कितने सारे लोग हैं।
  356. 17:01अगर कमजोरी आई, इत्तेसादी बोहरान के शिकार
  357. 17:06हुए, मासी बोहरान के शिकार हुए, तो बीवी
  358. 17:09का ज़ेवर बेच देंगे। बीवी की प्रॉपर्टी है
  359. 17:12तो उसको अपना समझेंगे, अपनी तरह इस्तेमाल
  360. 17:14करेंगे। नहीं भाई ये तुम्हारा नहीं है।
  361. 17:17बीवी के पास चाहे करोड़ों हो वो दे दे तो
  362. 17:19उसका एहसान है। लेकिन शौहर ये नहीं बोल
  363. 17:21सकता कि इसका जो कुछ है मेरा है। भाई
  364. 17:24रमजान में जकात देती है औरतें अपने जेवरात
  365. 17:27की तो वो शौहर से दिलवाती है। तुम जाके
  366. 17:30ज़कात दो। भाई प्रॉपर्टी उनकी है, सोना
  367. 17:32उनका है। जकात उन्हें अपने पैसे से देना
  368. 17:34है। शौहर की जिम्मेदारी नहीं तुम्हारी
  369. 17:36ज़कात दे। लेकिन नहीं मालूम है। तो ऐसी
  370. 17:39बेशुमार मिसाले हैं कि हमारे खानदान में
  371. 17:43जो एक दूसरे के साथ रिश्ते हैं, औलाद और
  372. 17:46वालदैन का मसला, शौहर बीवी का मसला इनमें
  373. 17:51और भाई-भाई का मसला, भाई-बहन का मसला
  374. 17:54इनमें मालूम नहीं है कि किस पर क्या हक
  375. 17:56बनता है। तो मालूमात नहीं है तो अपनी
  376. 17:58मनमानी जो चाहता है क्लेम करता है। और जब
  377. 18:00नहीं मिलता है तो फिर फसाद होता है। इस सब
  378. 18:02का
  379. 18:04हल यह है कि जो रिश्तों के हुकूक है उसके
  380. 18:08ताल्लुक से इस्लामी मालूमात हासिल की जाए।
  381. 18:11इल्म हासिल किया जाए। उसके बाद आप क्लेम
  382. 18:13करें कि इस पर कितना हक़ है। लेकिन आदमी
  383. 18:16मालूमात हासिल नहीं करना चाहता। अपनी
  384. 18:18मनमानी जहां देखेगा कि हिंदू लॉ में मेरा
  385. 18:21फायदा हो रहा है। वो कहेगा हमारे समाज में
  386. 18:23ऐसे चलता है। हमको ऐसे मिलना चाहिए। जहां
  387. 18:25देखेगा इस्लामी कानून से हमको फायदा मिल
  388. 18:27रहा है तो मुफ्ती को पकड़ के ले आएगा। ये
  389. 18:29हमारा हिस्सा है। समझ रहे?
  390. 18:32तो यह दूसरी वजह है इल्म का ना होना। इसकी
  391. 18:35वजह से भी खानदान में इलाफात होती है।
  392. 18:37किसी भी खानदान में देखिए जो लोग
  393. 18:38काउंसलिंग के लिए जाते हैं अगर वो खानदान
  394. 18:40पढ़ा लिखा हो या उसमें दो तीन पढ़े लिखे
  395. 18:42हो दी तालीम से आरास्ता हो तो उनको समझाना
  396. 18:45बड़ा आसान होता है।
  397. 18:47प्रॉब्लम को सॉल्व करना बड़ा आसान होता
  398. 18:49है। लेकिन अगर कोई दीन से वाबस्ता नहीं
  399. 18:51है, पढ़ा लिखा नहीं है, बहुत मुश्किल है
  400. 18:53उसे समझाना। झगड़े को खत्म करना बहुत
  401. 18:56मुश्किल है। आगे बढ़ते हैं। तीसरी वजह
  402. 19:00घरों में बिगाड़ की इलाफ की घर टूटने की
  403. 19:03जो तीसरी वजह है वो है
  404. 19:07घर के अफराद का गलत लोगों के साथ उठना
  405. 19:09बैठना।
  406. 19:11गलत सोबत का असर।
  407. 19:15खास तौर से बीवी का मसला है।
  408. 19:19वो अगर गलत औरतों के साथ उसका उठना बैठना
  409. 19:23है तो उसकी सहेलियां उसके कान उसके शौहर
  410. 19:27के खिलाफ ऐसा भर देंगी कि वो औरत समझेगी
  411. 19:30कि दुनिया की सबसे मजलूम औरत मैं हूं।
  412. 19:34जबकि कभी-कभी ऐसा होता है कि सबसे खुशहाल
  413. 19:36औरत होती है।
  414. 19:38बाकायदा अल्लाह की हदीस तालुक से सुन दाऊद
  415. 19:41की अबू हुरैरा रदी अल्लाह हदीस के रावी
  416. 19:44है। कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्ला
  417. 19:46वसल्लम फरमाया कि लस मन खबा इमरतन अला ज़हा
  418. 19:51अल्लाह ने फरमाते हैं कि वो शख्स हम में
  419. 19:53से नहीं है। जो किसी की बीवी को उसके शौहर
  420. 19:56के खिलाफ भड़का दे।
  421. 19:59कहा कि वह हम में से नहीं है जो किसी की
  422. 20:02बीवी को उसके शौहर के खिलाफ भड़काए।
  423. 20:06और हमारे यहां औरतें ये बड़े शौक से काम
  424. 20:08करती है। भड़काने वाला काम। मुंबई का एक
  425. 20:10वाक्य है। कुछ औरतों ने
  426. 20:13एक औरत को उसकी सहेलियों ने इतना उकसाया
  427. 20:16शौहर के खिलाफ कि उसने खुला ले लिया। हम
  428. 20:19उस तफसील में नहीं जाएंगे। वो झूठी अपने
  429. 20:23शौहरों की झूठी शान बयान कर रही है। मेरे
  430. 20:25मियां तो यह लाके देता है। वो यह करता है।
  431. 20:27उसके अंदर यह खूबी है। यह ताकत है। यह
  432. 20:29पावर है। ये दुनिया भर का कुछ भी नहीं।
  433. 20:32वो औरत सुन सुन के परेशान हो गई। जाके
  434. 20:34उसने खुला ले लिया। खुला लेने के बाद
  435. 20:37दूसरी जगह शादी किया। वो पहले से भी बदतर।
  436. 20:40उसको भी छोड़ दिया। अब पहले के पास वापस आ
  437. 20:43रही है। कि तुम्हारे साथ ही मामला मेरा
  438. 20:46ठीक था। उसने भगा दिया था। नहीं अब तो
  439. 20:48तुझे नहीं रखूंगा। पूरा बच्चों के साथ कई
  440. 20:51बच्चों की मां पूरी जिंदगी उसकी बर्बाद हो
  441. 20:54गई उसकी सहेलियों की वजह से। क्योंकि
  442. 20:56सहेलियों ने उसको उसके शौहर के खिलाफ
  443. 20:58उकसाया।
  444. 20:59तो खानदान के बिखरने की एक वजह ये भी होती
  445. 21:02है कि औरतों को उकसाती है सहेलियां। बस
  446. 21:05सहेलियां जाने दे भाई। कभी-कभी उसकी मां
  447. 21:07भी उकसा देती है। उसके शौहर के खिलाफ।
  448. 21:10उसके ससुराल के खिलाफ। उसके अपने रिश्ते
  449. 21:13उकसा देते हैं उसको। और वक्त तौर पर
  450. 21:16जज्बात होते हैं। भड़का देते हैं। रिश्ता
  451. 21:18टूट जाता है। घर पर आकर बैठती है। एक
  452. 21:20महीने के बाद उसे समझ में आता है कि मेरी
  453. 21:22औकात क्या है यहां पे। एक महीने के बाद
  454. 21:24पछतावा होता है कि हमने शौहर को छोड़
  455. 21:27दिया। ने कितनी बड़ी गलती की। तो ये बहुत
  456. 21:29बड़ी बेवकूफी है उन खवातीन की जो अपने घर
  457. 21:33से बाहर दूसरों के दूसरों की सुनती है। वो
  458. 21:37लोग इनके कान भरते हैं और आ के घर में बॉल
  459. 21:39खड़ा कर देती है। इसलिए दूसरों को सुनने
  460. 21:42के बजाय जो मैंने अब इससे पहले कहा इस्लाम
  461. 21:44को सुनिए। कुरान और हदीस को सुनिए कि
  462. 21:46तुम्हें हुकूक मिल रहे हैं कि नहीं मिले।
  463. 21:48इस्लाम तय करेगा। तुम्हारी सहेलियां नहीं
  464. 21:50तय करेंगी। तुम्हारी मां नहीं तय करेगी कि
  465. 21:52तुम जालिमों की मजलूम हो।
  466. 21:55यह कुरानो हदीस से तय होगा कि तुम्हारा
  467. 21:57स्टेटस क्या है? इस घर में तुम कितना सुखी
  468. 21:59हो, कितना दुखी हो। यह कुरान हदीस से तय
  469. 22:02होगा। तुम्हारी मां तय नहीं करेगी।
  470. 22:03तुम्हारे बाप नहीं तय करेंगे। तुम्हारे
  471. 22:05भाई नहीं तय करेंगे। तुम्हारी सहेलियां
  472. 22:07नहीं तय करेंगी। और ये सिर्फ
  473. 22:10बीवी के लिए नहीं है। शौहर के लिए भी है।
  474. 22:13बेटे के लिए भी है। बाप के लिए भी है।
  475. 22:16किसी को भी अगर कोई उकसाता है। बाप को कोई
  476. 22:18उकसाए उसके बेटे के खिलाफ। बेटे को उकसाए
  477. 22:21बाप के खिलाफ। भाई को उकसाए भाई के खिलाफ।
  478. 22:23दुनिया की नहीं सुनना है, कुरानो हदीस की
  479. 22:25सुनना है। अगर कोई भी आपके कान में भरता
  480. 22:28है आपके परिवार के खिलाफ, आप कुरान और
  481. 22:30हदीस किसी आलिम से मिलो और वेरीफाई करो कि
  482. 22:32ये बंदा जो कह रहा है क्या सही है? भाई
  483. 22:35लोग बहुत सारे लोग आपको खुश नहीं देखना
  484. 22:38चाहते। आपके परिवार की तरक्की नहीं चाहते।
  485. 22:41लड़ाना चाहते हैं। चाहते हैं कि तुम बिखर
  486. 22:43जाओ, चाहते बर्बाद हो जाओ, चाहते तुम्हारा
  487. 22:46घर टूट जाए। और यह सिर्फ इंसान नहीं शैतान
  488. 22:48भी इसी में लगा हुआ है। सही मुस्लिम की
  489. 22:49हदीस है कि इब्लीस अपना तख्त सजाता है और
  490. 22:53शाम को अपने सारे चेलों को इकट्ठा करके
  491. 22:55रिपोर्ट लेता है। तुमने क्या किया? तुमने
  492. 22:57क्या किया? तुमने क्या किया? सब अपनी-अपनी
  493. 22:58वहां बताते हैं। एक बंदा आ के बोलता है कि
  494. 23:00मैंने तो इतना बड़ा काम किया कि एक घर को
  495. 23:02तोड़ दिया। मियां बीवी को एक दूसरे के
  496. 23:04खिलाफ इतना उसाया कि रिश्ता टूट गया। वो
  497. 23:07इब्लीस उसको गले लगा देता। तूने सबसे बड़ा
  498. 23:09काम किया। तूने घर तोड़ा सबसे बड़ा काम तूने
  499. 23:12किया। तो ये इंसान और ये शैतान सब लगे हुए
  500. 23:16हैं घरों को तोड़ने में। इसलिए कुरानो हदीस
  501. 23:19से फैसला करो कि घर में हमारे साथ जो हो
  502. 23:21रहा है, हमारे मां-बाप जो हमारे साथ कर
  503. 23:23रहे हैं या हमारी औलाद हमारे साथ जो कर
  504. 23:25रही है वो ठीक है कि नहीं। ये कुरानो और
  505. 23:26हदीस से तय होगा। ये समाज नहीं तय करेगा।
  506. 23:32आगे बढ़ते हैं। चौथी चीज घरों के टूटने की
  507. 23:38वो है मेरे भाइयों
  508. 23:40गलत जगह
  509. 23:42रिश्ता कर देना, गलत जगह शादी कर देना।
  510. 23:45गलत लोगों से रिश्ता जोड़ लेना। आज बहुत
  511. 23:49सारे लोग सिर्फ माल की बुनियाद पर माल भी
  512. 23:51जरूरी है उससे इंकार नहीं है। लेकिन सिर्फ
  513. 23:53माल बाकी कुछ भी नहीं देखना उसका अकीदा
  514. 23:56क्या है? ईमान क्या है? बैकग्राउंड क्या
  515. 23:57है? खानदान क्या है? उसका रहन-सहन कहना है
  516. 24:00कुछ भी नहीं देखना। सिर्फ प्रॉपर्टी देखने
  517. 24:02रिश्ता कैसे कर देंगे? कितने दिन रिश्ता
  518. 24:03चलेगा? हम लोग बॉम्बे में रहते हैं। शाम
  519. 24:05को शादी होती है, सुबह तलाक हो रही है।
  520. 24:08ऐसे-ऐसे केसेस हैं बताइए। आप हैरान रह
  521. 24:09जाएंगे। और बड़े-बड़े घरानों में इतने
  522. 24:12धूमधाम से शादीयां हो रही हैं। एक रात भी
  523. 24:14रिश्ता नहीं चलता बताइए। शादी करना कमाल
  524. 24:17नहीं है। शादी का टिकना कमाल है। कभी भी
  525. 24:20रिश्ता करो तो यह मत सोचो कि ये सामने
  526. 24:22वाला राजी छोड़ो रिश्ता कर। देखो ये गाड़ी
  527. 24:24आगे चल पाएगी कि नहीं चल पाएगी?
  528. 24:27ये दोनों एक दूसरे के साथ रह पाएंगे कि
  529. 24:29नहीं रह पाएंगे? यह खानदान एक दूसरे को
  530. 24:32बर्दाश्त कर पाएगा कि नहीं कर पाएगा? ये
  531. 24:34सारी चीजें देखना चाहिए। उसके बाद शादी
  532. 24:36होनी चाहिए। अल्लाह के नबी ससल्लम भी ऐसे
  533. 24:39रिश्तों को रिजेक्ट कर दिया करते थे जिससे
  534. 24:41ये अंदाजा होता था कि रिश्ता नहीं चलने
  535. 24:43वाला। सही मुस्लिम की रिवायत है ना कि
  536. 24:45फातिमा बिनते कैस रदी्लाहु अन्हा को तलाक
  537. 24:49हुई तो दो रिश्ता आया। एक मुआविया रदी
  538. 24:51अल्लाह ताला अनो का और एक दूसरे साबी थे।
  539. 24:53अल्लाह के नबी ने दोनों को रिजेक्ट कर
  540. 24:55दिया। कहा एक तो मारने वाला है। एक के पास
  541. 24:56पैसा नहीं है। मतलब आगे यह रिश्ता नहीं
  542. 24:58चलने वाला है।
  543. 25:00एक तो यहां तलाक हुई है। यह अगला घर भी
  544. 25:02टूट जाएगा। दूसरा रिश्ता भी नहीं चल
  545. 25:04पाएगा। इसलिए उन्होंने एक तीसरी जगह
  546. 25:07सजेस्ट किया औरत कहती है कि अल्लाह के नबी
  547. 25:09ने जो सजेस्ट किया रिश्ता वो मुझे पसंद
  548. 25:11नहीं आया। लेकिन आगे चलकर उस रिश्ते में
  549. 25:14इतनी बरकत आई कि कहती है कि दूसरी औरतें
  550. 25:17रश करती थी हमारी इस रिश्ते पर जो अल्लाह
  551. 25:19के नबी ने सजेस्ट किया था। हालांकि औरत को
  552. 25:20नहीं समझ में आ रहा था। लेकिन नबी ने
  553. 25:23सजेस्ट किया। बरव नहीं समझ में आ रहा था।
  554. 25:25आगे चलके जब उस रिश्ते में मोहब्बत आई, उस
  555. 25:29रिश्ते में खुशहाली आई, तो दूसरी ख़वातीन
  556. 25:32रश करती थी कितना प्यारा रिश्ता है ये। तो
  557. 25:35रिश्ता सही जगह करना चाहिए ठोक बजा के
  558. 25:38ताकि आगे कोई इख़्तलाफ ना हो, कोई इंतशार
  559. 25:41ना हो, कोई मसला ना हो। और रिश्ता होने के
  560. 25:44बाद
  561. 25:45घरों में बिगाड़ की एक वजह और भी है। मैं
  562. 25:48यहां कहना चाहूंगा। हालांकि इतनी बड़ी
  563. 25:49मजलिस में ये सब कहते हुए अच्छा नहीं
  564. 25:51लगता। ये सब प्राइवेट में बातें होनी
  565. 25:52चाहिए। लेकिन फिर भी मौजू के तहत ये बातें
  566. 25:56आ रही है। तो मैं वाज़ करना चाहता हूं।
  567. 25:58मियां बीवी जिस घर में रहते हैं। अरे घर
  568. 26:02असल क्या है? असल मियां बीवी है। उसके साथ
  569. 26:05औलाद है, मां-बाप भी यही असल घर है।
  570. 26:08यही असल घर है।
  571. 26:11कि एक आदमी की बीवी, उसकी वालिदैन, उसके
  572. 26:14बच्चे यही असल परिवार है। ये बढ़ता है तो
  573. 26:17और फैलता चला जाता है। लेकिन असल परिवार
  574. 26:19यही है। ये पूरा परिवार कभी-कभी बुखर जाता
  575. 26:22है। सिर्फ एक अल्लाह के नबी की एक हदीस पे
  576. 26:24अमल ना करने की वजह से वो ये कि शौहर अगर
  577. 26:26अपनी बीवी को हमबिस्तरी के लिए बुलाए, तो
  578. 26:28उसको इंकार नहीं करना चाहिए। इतनी ताकीद
  579. 26:30आपको मिलेगी, आप हैरान रह जाएंगे। सही
  580. 26:33बुखारी की हदीस है। अगर कोई शौहर अपनी
  581. 26:35बीवी को बुला रहा है हमबिस्तरी के लिए
  582. 26:36अपनी जरूरत के तहत और वह नहीं आती है, रात
  583. 26:39भर फ़रिश्ते लानत करते हैं उस औरत पर।
  584. 26:43एक और हदीस है सुन तिरमिजी की। अल्लाह के
  585. 26:47नबी सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम फरमाते हैं कि
  586. 26:50इदाजत
  587. 26:53ही जब आदमी अपनी बीवी को अपनी जरूरत के
  588. 26:56तहत बुलाए यानी हम मिस्त्री
  589. 27:00फलतात तू वहां जाए उसकी बात मान ले तनूर
  590. 27:04चाहे वो तन्नूर पर बैठी हो उस जमाने का
  591. 27:07चूल्हा
  592. 27:09गैस का चूल्हा नहीं है आप बटन दबाओ चालू
  593. 27:11हो जाए बड़ी मुश्किल से आग जलती थी अगर वो
  594. 27:15चूल्हा छोड़ के औरत आ जाए तो आग बुझ जाएगी
  595. 27:17दोबारा उसको जलाना बहुत बड़ा मसला है इसलिए
  596. 27:20अल्लाह के ने उसकी मिसाल दी कि वहां पे
  597. 27:23बैठी हो भी तो आ जाए इस तरह की बहुत सारी
  598. 27:25हदीस वजह क्या है समझते हैं क्योंकि अगर
  599. 27:27शौहर की ये जरूरत पूरी पूरी नहीं हुई तो
  600. 27:29डिस्टर्ब हो जाएगा। उसके बाद ना वो अपनी
  601. 27:32बीवी से सीधे मुंह बात करेगा, ना बाप से
  602. 27:34बात करेगा, ना बेटे से बात करेगा। सबसे
  603. 27:36उसका झगड़ा होगा। कहीं ऑफिस में काम कर
  604. 27:38रहा है, वहां भी उसकी जॉब जा सकती है।
  605. 27:40पूरा दिन उसका डिस्टर्ब रहेगा। ना जाने
  606. 27:43कहां-कहां उसका झगड़ा हो सकता है। बहुत
  607. 27:45सारे मसाइल आपको मिलेंगे ना
  608. 27:48कि छोटी-छोटी वजह से शौहर ने तलाक दे दिया
  609. 27:51बीवी को। पंचायत बैठती है। क्यों तलाक
  610. 27:54दिया भाई? बीवी कहती है कि भाई खाने में
  611. 27:56नमक ज्यादा हो गया था तलाक दे दिया तो आप
  612. 27:58लगेंगे सब उसको डांटने यह वजह होती है
  613. 28:00तलाक देने की नमक ज्यादा हो गया इसकी वजह
  614. 28:03से तुम तलाक दे दिया तुमने वो बेचारा मारे
  615. 28:05शर्म के बता नहीं सकता कि मैंने क्यों
  616. 28:06तलाक दिया हकीकत में नमक ज्यादा हो गया
  617. 28:09तलाक दे दिया लेकिन नमक वजह नहीं है नमक
  618. 28:11के पीछे बिहाइंड द सीन वजह कुछ और है ये
  619. 28:14एक बहाना बना हुआ है उसने उसकी जरूरत को
  620. 28:18पूरी नहीं किया उसके दिमाग में घूम रहा है
  621. 28:19बस इसने छोटा सा सहारा पाया वजह पाया और
  622. 28:22फटफड़ा हुआ मामला तलाक तक पहुंचेगा। लेकिन
  623. 28:25तलाक की जो वजह है वो छुपी हुई है। उसे उस
  624. 28:29पंचायत में शौहर मेंशन ही नहीं करता है।
  625. 28:33और पंचायत सबसे बड़ा जालिम दरिंदा समझती
  626. 28:36है कि इस बंदे ने इसकी इतनी सी बात पे
  627. 28:38तलाक दे दिया। हमारे साथ शेख इम्तियाज़
  628. 28:40बैठे हुए हैं। हमारे ऑफिस में भी एक
  629. 28:41मर्तबा ऐसे केस आया। मियां बीवी जैसे बात
  630. 28:43कर रहे थे। समझ में नहीं आ रहा कि इतनी
  631. 28:45छोटी सी वजह से तुमने तलाक दे दिया।
  632. 28:48मैंने पंचायत हटाया। शौहर को लेके अकेले
  633. 28:51बैठा। मैंने कहा सही से बताओ बात क्या है?
  634. 28:53तो उसने आखिर में यह खुलकर बताया कि यह
  635. 28:55औरत मुझे अपनी जरूरत पूरी नहीं करने देती।
  636. 28:59हफ्तों 151 दिन कहती मेरे पास मत आओ। ये
  637. 29:02उसने बहुत ज्यादा पूछने पर बताया। जबकि वो
  638. 29:05कोई और छोटी-मोटी चीजें बता रहा था। तो ये
  639. 29:07बहुत बड़ी वजह है खानदान की बिखरने की। कि
  640. 29:11बीवी शौहर का हक अदा ना करे। वो छोटा सा
  641. 29:13लम्हा होता है। लेकिन अगर उसमें शौहर की
  642. 29:16जरूरत पूरी नहीं हुई तो वो आतंक मचा देता
  643. 29:18है। और उसको मेंशन भी नहीं करता। लोग उसको
  644. 29:19पागल समझते हैं। साइको हो गया। क्या हो
  645. 29:21गया?
  646. 29:22लेकिन वजह कुछ और होती है। इसलिए हदीसों
  647. 29:25में आपको इतनी ताकीद मिलेगी। इतनी सख्त
  648. 29:28ताकीद मिलेगी। बिना वजह नहीं है। तो ये भी
  649. 29:31बहुत बड़ी वजह है। इसके साथ एक और चीज है
  650. 29:35बीवी का
  651. 29:37जबान पे कंट्रोल। जबान भी बहुत बड़ी
  652. 29:40मुसीबत है। कभी-कभी छोटे-छोटे जुमले की
  653. 29:43वजह से आदमी जिंदगी भर जाके जेल में बंद
  654. 29:45हो जाता है। उम्र कैद हो जाती है। झगड़ा
  655. 29:48शुरू करना बड़ा आसान होता है मेरे भाई।
  656. 29:50लेकिन खत्म करना आसान नहीं होता है।
  657. 29:53झगड़ा शुरू करना बहुत आसान है। किसी के
  658. 29:55साथ भिड़ जाओ। लेकिन वो लड़ाई आगे कहां तक
  659. 29:58जाएगी अंदाजा नहीं हमको।
  660. 30:01इसीलिए कंट्रोल करना चाहिए अपने जुबान पे
  661. 30:03अपने हाथ पे। बात बजाहिर छोटी सी रहेगी।
  662. 30:06आप जाके जेल में कैदियों का इंटरव्यू लो।
  663. 30:08आपको पता चलेगा कि कितने कैदी छोटी सी बात
  664. 30:11पे उलझ गए और मामला उनकी पूरी लाइफ बर्बाद
  665. 30:13हो गई। छोटी सी बात पे। उसको इग्नोर किया
  666. 30:16जा सकता था। उसको नजरअंदाज किया जा सकता
  667. 30:19था। लेकिन गुस्से में आदमी उस छोटी सी बात
  668. 30:21को लेके बैठ गया और नतीजा कितना भयानक
  669. 30:24निकला। तो ऐसे ही औरत अगर जुबान पे औरत को
  670. 30:28कंट्रोल हासिल नहीं है या शौहर को भी जबान
  671. 30:30पे कंट्रोल नहीं है तो फिर घर का रिश्ता
  672. 30:32नहीं चलने वाला। इसलिए घर के तमाम अफराद,
  673. 30:35शौहर, बीवी, बच्चे, वालिद सबको जबान पे
  674. 30:39कंट्रोल होना चाहिए। बल्कि दो में से अगर
  675. 30:41किसी एक को भी कंट्रोल है तो भी मामला
  676. 30:43सुलझ जाता है। लेकिन दोनों बेकाबू हो।
  677. 30:46किसी को अपनी जुबान पे कंट्रोल नहीं है।
  678. 30:48तो रिश्ता नहीं चलने वाला। वो घर नहीं
  679. 30:51टिकने वाला। टूटना है उस घर को। जिस घर
  680. 30:54में किसी को अपनी जुबान पर कंट्रोल नहीं
  681. 30:56है वो घर नहीं रह सकता। उसको टूटना है।
  682. 30:59इसीलिए अल्लाह के नबी ने फरमाया था सही
  683. 31:01बुखारी की हदीस है। ईद उल फितर के खुदबे
  684. 31:05में कहा कि ऐ खवातीन मैंने जहन्नुम में
  685. 31:07तुम्हारी तादाद बहुत ज्यादा देखी है।
  686. 31:10खवातीन चीख पड़ी है। बीमा या रसूल अल्लाह।
  687. 31:12क्यों अल्लाह के रसूल? तो अल्लाह के नबी
  688. 31:14ने फरमाया सल्ला वसल्लम कहा
  689. 31:19तकरा
  690. 31:21वजह ये है कि लानतान बहुत ज्यादा करती हो
  691. 31:24तुम लोग और शौहरों की नाफरमानी करते हो
  692. 31:27इसकी वजह से जहन्नुम में तुम्हारी तादाद
  693. 31:29ज्यादा है। सिर्फ घर नहीं टूट रहा है। घर
  694. 31:32नहीं तबाह हो रहा है। ये अमल जहन्नम में
  695. 31:34भी पहुंचा रहा है। इसलिए जुबान पे कंट्रोल
  696. 31:36होना चाहिए। ये चौथी चीज है। आगे बढ़ते
  697. 31:39हैं। घरों के टूटने
  698. 31:44कि पांचवी जो वजह है वो माली नाइंसाफी है।
  699. 31:49माल मान लीजिए बाप है घर का अगवा है वो
  700. 31:52अगर लोगों को तोहफे देता है कुछ भी देता
  701. 31:55है माल देता है तो उसे इंसाफ करना चाहिए।
  702. 31:59अगर औलाद में इंसाफ नहीं करेगा तो फिर ये
  703. 32:01घर टूट जाएगा। जिसके साथ जुल्म हुआ है
  704. 32:05जिसके साथ नाइंसाफी हुई है वो उस खानदान
  705. 32:08में रहना पसंद नहीं करेगा।
  706. 32:11इसलिए इंसाफ करना चाहिए। सही बुखारी की
  707. 32:13हदीस है। नोमान बिन बशी रदी अल्लाह ताला
  708. 32:17जब छोटे थे तो इनकी वालिदा ने इनके अब्बा
  709. 32:21से कहा कि मेरे बेटे को कोई प्रॉपर्टी दे
  710. 32:23दो। कोई माल दे दो। उन्होंने कहा ठीक है
  711. 32:27दे देते हैं। दे दिया। कहा नहीं नहीं। जाओ
  712. 32:31अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
  713. 32:33को गवाह बना लो। वो गए अल्लाह के रसूल के
  714. 32:36पास।
  715. 32:37कहा अल्लाह के रसूल मैंने अपने बेटे को यह
  716. 32:39दिया है। आप गवाह बन जाइए। तो अल्लाह के
  717. 32:41नबी सल्लम ने पूछा कहा
  718. 32:44विकास
  719. 32:46कि इस बेटा को तुम जो दे रहे हो यही चीज
  720. 32:51इतना ही मिसहाजा बिल्कुल इतना ही तुमने
  721. 32:54अपने सारे बच्चों को दिया है। गलत का लफज़
  722. 32:56है। इसके माने लड़का लड़की दोनों होता है।
  723. 32:58अरे तुम्हारे जितने भी लड़का लड़की हैं सबको
  724. 33:00तुमने दिया है। कहा नहीं सिर्फ इसको दे
  725. 33:02रहा हूं। तो अल्लाह के रसूल सल् फरमाया कि
  726. 33:06यह तो जुल्म है। मैं जुल्म पर गवाह नहीं
  727. 33:09बन सकता। और कहा कि फु्लाह अल्लाह से डरो।
  728. 33:13वना औलाद अपनी औलाद में अद करो। तबवी की
  729. 33:18रवायत में सऊ बस यहां अल से मुराद मसावात
  730. 33:21है।
  731. 33:23कि औलाद में अगर कोई अतिया दे रहे हो, कोई
  732. 33:26तोहफा दे रहे हो तो बराबरी करो। एक को दे
  733. 33:29रहे हो तो सबको दो।
  734. 33:32यह हदीस बताती है कि अगर अपने बच्चों को
  735. 33:35आप कुछ दे रहे हैं, किसी एक को दे रहे हैं
  736. 33:37तो सबको दो। ऐसा नहीं करेंगे तो खानदान
  737. 33:39बिखर जाएगा। खानदान टूट जाएगा। आज होता है
  738. 33:42कि एक आदमी अपने बड़े बेटे को अपने सर पे
  739. 33:44बिठा लेता है। अपने कारोबार में शरीक कर
  740. 33:46लिया। हर जगह उसको खड़ा कर लिया अपने साथ।
  741. 33:48बाद में वह बेटा सब कुछ कब्जा करके बैठ
  742. 33:50जाता है। बड़ा बेटा कभी-कभी अपना सब कुछ
  743. 33:53गवाता है। इससे इंकार नहीं है। बाप के बाद
  744. 33:56वही बाप की ड्यूटी निभाता है। अक्सर बड़े
  745. 33:59भाई अपनी कुर्बानी ही देते हैं। इससे
  746. 34:01इंकार नहीं है। लेकिन कहीं-कहीं बड़े भाई
  747. 34:04अपने बाप की शफकत का गलत फायदा उठाते हैं।
  748. 34:07और बहुत कुछ ऐठ लेते हैं अपने बाप से जो
  749. 34:10दूसरे भाई बहनों को नहीं मिल पाता है। और
  750. 34:12इसकी वजह से रिश्ता टूट जाता है। जिंदगी
  751. 34:14भर बात नहीं होती। जब बंटवारे की बात आती
  752. 34:16है, छोटा क्लेम करता है कि आप जितना ले
  753. 34:19रहे हो, आपके हक से ज्यादा है। उसी पर
  754. 34:21फैसला हो जाता है। जिंदगी भर बातचीत नहीं
  755. 34:23होती है। एक दूसरे से मुंह फेर के घूमते
  756. 34:27हैं। वजह ये है कि बाप ने मामला उलझा
  757. 34:29दिया। इसलिए हमेशा औलाद में इंसाफ करो।
  758. 34:33अल्लाह के नबी ने तो यहां तक कहा कि भ अगर
  759. 34:35एक आदमी अपनी बच्ची को बेटे को बोसा दे
  760. 34:38रहा है तो उसमें भी इंसाफ करो। दो बेटे
  761. 34:40हैं तो दोनों को बोसा देते हैं। और ये
  762. 34:42विरासत के बारे में मसला ये है कि भई एक
  763. 34:44आदमी मर जाता है उसका माल जब बढ़ता है ना
  764. 34:46तो बेटा और बेटी में वन डबल के हिसाब से
  765. 34:48बढ़ता है। बेटी को जो मिलता है वो आधा
  766. 34:51होता है बनिस्बत बेटे को मिले हुए माल से।
  767. 34:53लेकिन जिंदगी में अगर कोई बाप माल बांटता
  768. 34:56है तो उसे बराबर देना पड़ेगा। बेटा बेटी
  769. 35:00में कम नहीं कर सकता। एक तो सबको देना
  770. 35:02पड़ेगा और दूसरा सबको बराबर देना पड़ेगा।
  771. 35:05किसी का हिस्सा कम नहीं कर सकता। किसी का
  772. 35:06तोहफा और ऐसा नहीं कर सकता तो किसी को मत
  773. 35:09दे। अगर ऐसा नहीं कर सकता तो बाप किसी को
  774. 35:11भी मत दे। यही वजह है कि इस हदीस में
  775. 35:14नोमान बिन बशीर रदी अल्लाह ताला की इस
  776. 35:16हदीस में जब अल्लाह के नबी ने कहा कि सबको
  777. 35:18देना पड़ेगा तो उन्होंने क्या किया?
  778. 35:19रिवायत के अल्फ़ाज़ हैं। फज फियत
  779. 35:22वो घर आए और जो दिया था उसको विथड्रॉ कर
  780. 35:25लिया। क्योंकि सबको नहीं दे सकते थे। तो
  781. 35:28सबको नहीं दे सकते थे। तो जो एक को दिया
  782. 35:30था वो भी वापस ले लिया। नहीं वापस नहीं।
  783. 35:33विथड्रॉ कर लिया उसको। तो यही होना चाहिए।
  784. 35:36देना है तो सबको दें या किसी को भी मत
  785. 35:38दें। वरना ये खानदान बिखरेगा और एक दूसरे
  786. 35:43का दुश्मन बनेगा। हमारे यहां हाल ये है कि
  787. 35:46विरासत जिसके बारे में अल्लाह ने बाप को
  788. 35:51दखल अंदाजी देने से रोक दिया। बल्कि
  789. 35:54परिवार में किसी को भी हक़ नहीं है कि
  790. 35:56जरासा भी इधर-उधर करे। सब कुछ कुरान में
  791. 35:57बयान कर दिया। लेकिन बाप क्या कहेगा? मेरे
  792. 35:59मरने के बाद यह घर ये बेटा ले लेगा। यह घर
  793. 36:02फला ले लेगा। ये खेत फलां ले लेगा। यह
  794. 36:04दुकान फला लेगा। तुम कौन होते बोलने वाले
  795. 36:05भाई? हैं? यह हक़ किसने दिया आपको? भाई,
  796. 36:09आपकी वफात के बाद इस्लामी कवानीन तय
  797. 36:11करेंगे कि कौन किसके हिस्से में आएगा। बाप
  798. 36:14नहीं फैसला कर सकता है।
  799. 36:16बहुत ही वाज़ हदीस है सुन सही कि ला
  800. 36:18वसीयतले वारिस। बाप अपने वारिसीन के लिए
  801. 36:22वसीयत नहीं कर सकता। वारिसीन को क्या
  802. 36:24मिलना अल्लाह ने तय किया। हां, जो वारसीन
  803. 36:26से बाहर है उनके लिए 1/3 बोल सकता है। कोई
  804. 36:29पड़ोसी है, कोई दोस्त है, मस्जिद है, मदरसा
  805. 36:31बोल सकता है कि इतना पैसा मस्जिद में दे
  806. 36:33देना, मदरसे में दे देना। जो फैमिली से
  807. 36:35बाहर के लोग हैं, उनके लिए बोल सकता है।
  808. 36:371/3 ज्यादा ज्यादा। लेकिन जो फैमिली के
  809. 36:40लोग हैं, जो वारसीन हैं उनके लिए बाप कुछ
  810. 36:42नहीं बोल सकता। सब कुछ अल्लाह ने बोल दिया
  811. 36:44है। लेकिन जब बाप बोलेगा तो नाइंसाफी
  812. 36:47होगी। नाइंसाफी होगी तो खानदान में बिखरा
  813. 36:49होगा, खानदान टूटेगा। और इसीलिए देखिए कि
  814. 36:53यह मामला
  815. 36:54बहुत सारे घरों में प्रॉपर्टी को लेकर यह
  816. 36:57मामला आता है। अच्छा एक और वजह भी है
  817. 36:59खानदान टूटने का कि हम विरासत की तकसीम
  818. 37:03बरव नहीं करते जिसकी वजह से बहुत सारे
  819. 37:06झगड़े होते हैं। विरासत की तकसीम कब होनी
  820. 37:08चाहिए? आदमी का इंतकाल हुआ तजी तकन हो गई।
  821. 37:12उसके फौरन बाद जितना जल्द हो सके विरासत
  822. 37:15तकसीम हो जानी चाहिए।
  823. 37:18लेकिन लोग इसको डिले करते बल्कि अभी मैं
  824. 37:20किसी साहब की तकरीर सुन रहा था। कह रहे थे
  825. 37:22कि अभी मई की कब्र नहीं सूखी है और
  826. 37:25बंटवारे की बात लोग कर जाते हैं। अरे करना
  827. 37:28चाहिए। उसी दिन करना चाहिए।
  828. 37:30हमारे मुंबई में दुख्तुद हाफिज्लाह उनके
  829. 37:33वालिद साहब का इंतकाल हुआ तो उसी दिन
  830. 37:35उन्होंने प्रॉपर्टी बांट दिया। उसी दिन
  831. 37:37वालिद साहब को कब्र में दफन करके आए। शाम
  832. 37:39को घर पे सबको उठा के बांट दिया। उसी दिन
  833. 37:42सेम डे में उनकी वालिदा की वफात हुई। रात
  834. 37:46में वफात हुई तो दूसरे दिन उन्होंने
  835. 37:47प्रॉपर्टी बांट दिया। यह होना चाहिए ताकि
  836. 37:50झगड़े खत्म हो जाए। बाद में आप डिले करोगे
  837. 37:53प्रॉपर्टी तकसीम में। कौन सी जमीन किसकी
  838. 37:55है, कौन सा गवाह है, कौन सा सबूत है सब
  839. 37:57भूल जाते लोग। और झगड़ा होता और ऐसा झगड़ा
  840. 38:00होता कि उसको दुनिया की कोई अदालत हल नहीं
  841. 38:02कर सकती। कोई अदालत हल नहीं कर सकती।
  842. 38:06सही बुखारी की रिवायत है। मुस्लिम में ऐसा
  843. 38:08ही विरासत का केस अल्लाह के नबी के पास
  844. 38:10आया। अल्लाह के नबी भी उसको हल नहीं कर
  845. 38:12सकते।
  846. 38:14और अल्लाह के ने वार्निंग दिया
  847. 38:18कि तुम लोग अपने झगड़े मेरे पास लेकर आते
  848. 38:19हो यह झगड़ा क्या था विरासत का था मुस्त
  849. 38:22में इजाफा है फी मवारी ये विरासत का मसला
  850. 38:24था जो दोनों लेकर आए थे भाई ये कहता था
  851. 38:27मेरा ये कहता था मेरा था और लसामा
  852. 38:30बना कोई दलील नहीं थी कोई सबूत नहीं कोई
  853. 38:33एविडेंस नहीं है कैसे फैसला करेगा कोई
  854. 38:35अल्लाह के नबी ने कहा कि सिर्फ चार जवानी
  855. 38:37है पता नहीं किसकी बात सुन के मैं क्या
  856. 38:39फैसला दे दूं हो सकता है गलत फैसला हो जाए
  857. 38:41अगर मुझसे गलत फैसला हो हो जाए तो अल्लाह
  858. 38:43के यहां तुमको भरपाई करनी पड़ेगी। ये
  859. 38:46फैसला नहीं हो रहा। ये आग का टुकड़ा मैं
  860. 38:48तुमको दे रहा हूं। जब अल्लाह के रसूल ने
  861. 38:50डराया उनको तो दोनों भाई क्या कहने लगे?
  862. 38:51अल्लाह के नबी ये उसको दे दो। वो बोला
  863. 38:54नहीं इसको दे दो। तो अल्लाह के रस ने कैसे
  864. 38:57मसला हल किया? फैसला नहीं हो पाया। सुलह
  865. 39:00किया इबासि
  866. 39:03समस्त कि ऐसा है कि तुम लोग जाओ और इस
  867. 39:06प्रॉपर्टी के दो टुकड़े कर लो। आधा तुम ले
  868. 39:08लो और आधा तुम ले लो। और कैसे ले लो
  869. 39:12समस्तही बोटी डाल के ले लो कभी-कभी एक
  870. 39:14प्रॉपर्टी के दो टुकड़े हो गए तो इसको भी
  871. 39:16ले झगड़ा होता मैं इधर का लूंगा या इधर
  872. 39:18लूंगा तो अल्लाह फरमाया कि दो टुकड़े कर
  873. 39:21लो फिर कुरान अंदाजी कर लो इसकी किस्मत
  874. 39:24में जो आए और दोनों एक दूसरे को माफ कर दो
  875. 39:27क्योंकि ये फैसला नहीं हो रहा है। पता
  876. 39:30नहीं किसका क्या हक है। ये तो सुलह हो रही
  877. 39:32है। इसको सुलह कहते हैं। फैसला नहीं कहते
  878. 39:34कजा नहीं है। सुलह है ये। अल्लाह के रसूल
  879. 39:38से बड़ा कोई जज नहीं हो सकता। विरासत के
  880. 39:40केस में फैसला नहीं दे सकते। सुलह करना
  881. 39:43पड़ रहा है। वजह यह है कि विरासत की तकसीम
  882. 39:45में ताखर हुई। कोई एविडेंस नहीं है। कोई
  883. 39:47गवाह नहीं है। कोई सबूत नहीं है। आज
  884. 39:49हिंदुस्तान की अदालतें जो इंगेज हैं। कहा
  885. 39:52जाता है कि इतने सारे केसेस पेंडिंग है।
  886. 39:54फैसला नहीं हो पाता। उसकी एक बहुत बड़ी
  887. 39:55वजह है कि विरासत प्रॉपर्टी के केसेस भरे
  888. 39:58पड़े हैं अदालतों में। जज लोग उनको सॉल्व
  889. 40:01करने में परेशान है। अब जाके किसी भी वकील
  890. 40:04से मालूम कर लें। बड़ी तादाद में जो केसेस
  891. 40:06हैं अदालतों में वो शायद दूसरे नंबर पर
  892. 40:10प्रॉपर्टी के केसेस हैं। इतना ज्यादा
  893. 40:13मशरूफ करे ये नौबत ही नहीं आएगी अगर बरव
  894. 40:16हम बांट ले तो। बरव तकसीम हो जाए तो नौबत
  895. 40:18नहीं आएगी। तो मामला सिर्फ ये नहीं होता
  896. 40:20है कि तकसीम नहीं हो पाती है सही से बल्कि
  897. 40:23खानदान बिखर जाता है। एक दूसरे के बंटवारे
  898. 40:26के बाद देखिए आप घर में बंटवारे के बाद
  899. 40:28फिर भाइयों में वो प्यार नहीं रहता।
  900. 40:31बंटवारे के बाद एक दूसरे के दुश्मन एक
  901. 40:33दूसरे का मुंह नहीं देख रहे क्योंकि
  902. 40:34बंटवारा सही तरीके से हुआ इस पर कोई सहमत
  903. 40:36नहीं है। किसी को इत्मीनान नहीं है। वजह
  904. 40:38यह है कि आपने तो आखिर किया। इसलिए मेरे
  905. 40:40भाइयों बरव बांटना चाहिए। अच्छा आज के
  906. 40:42ज़माने में अगर हम ये कहें कि बरव बांट लो
  907. 40:45तो कुछ लोग जज्बाती बातें करते हैं। क्या
  908. 40:47कहते हैं? कहते हैं कि एक हवेली बाप बना
  909. 40:50के गया। अपना खून पसीना बहा के एक घर
  910. 40:53बनाया और आज मर गया तुम उसको तोड़ रहे हो।
  911. 40:55बाप की निशानी है। उसको बांटने के लिए
  912. 40:58बेचना पड़ेगा, तोड़ना पड़ेगा। इसको मत तोड़ो।
  913. 41:01परिवार रोएगा।
  914. 41:03परिवार आंसू बहाएगा। अम्मा रोएगी।
  915. 41:07समझ रहे हो? ये बातें होती है ना? मेरे
  916. 41:09भाइयों आज तो सिर्फ अम्मा रोएगी। आज तो
  917. 41:13परिवार सिर्फ आंसू बहाएगा। लेकिन अगर आज
  918. 41:16तुमने तकसीम नहीं किया तो कल इसी परिवार
  919. 41:19में खून बहेगा।
  920. 41:21जो लोग आंसू नहीं बहाते हैं आगे चलकर उनकी
  921. 41:24कीमत खून से चुकानी पड़ती है। झगड़े होते
  922. 41:26हैं। खून खराबा होता है। लड़ाईयां होती
  923. 41:29है। कोर्ट कचहरी तक मामला जाता है। पूरा
  924. 41:30खानदान जलील होता है। अगर टाइम पे थोड़ा
  925. 41:34सा रो लिए होते और बढ़ जाने दिया होता तो
  926. 41:36ये नौबत नहीं आती। लेकिन इन चंद आंसुओं को
  927. 41:39बचाने की खातिर उनको रोकने की खातिर कितनी
  928. 41:42बड़ी कुर्बानी परिवार देता है। खानदान
  929. 41:44बिखर जाता है। भाई भाई का दुश्मन हो जाता
  930. 41:47है। मर्डर तक हो जाता है। ये सब कुछ आदमी
  931. 41:49बर्दाश्त करता है। लेकिन बरव तसीम करके
  932. 41:51रोना बर्दाश्त नहीं।
  933. 41:53कितनी अजीब बात है। तो ये चीजें भी खानदान
  934. 41:57को बिखेरती हैं। खानदान में इलाफ पैदा
  935. 42:00करती हैं। इसलिए माली एतबार से कोई
  936. 42:04नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए परिवार में।
  937. 42:06जिसका जिंदगी में बाप को देना सबको दे।
  938. 42:09वफात के बाद फ़ौरन वो पैसा बट जाना चाहिए।
  939. 42:12उसमें ज़रा सी भी ताखी नहीं करना चाहिए।
  940. 42:14वरना खानदान टूटेगा।
  941. 42:16समझ रहे? अगर प्यार मोहब्बत से नहीं बटेगा
  942. 42:18तो कल लड़ाई झगड़ा होगा। उसके बाद बांटना
  943. 42:21पड़ेगा। वो भी सही से कोई दुनिया की कोई
  944. 42:23अदालत नहीं बांट पाएगी। जब ज्यादा लेट हो
  945. 42:25जाएगा तो सुलह ही करना पड़ेगा। आगे बढ़ते
  946. 42:28हैं। छठी चीज क्या है? छठी चीज है जो घरों
  947. 42:33को तोड़ती है वो ताकत का तसादुम है।
  948. 42:38यानी घर का हर आदमी मालिक बना हुआ है। एक
  949. 42:41दूसरे से लड़ रहा है।
  950. 42:43भाई बाप चाहता है मेरी चले, बीवी चाहती है
  951. 42:45मेरी चले। तो ऐसा घर टूट-फूट के शिकार हो
  952. 42:48जाएगा। कुरान में अल्लाह ताला ने कहा
  953. 42:52निसा कि जो आदमी है यह अवाम है क्योंकि
  954. 42:56अल्लाह ताला ने उसको इजाफी फज़ल अता किया
  955. 43:00है। उसको फज़लत बरतरी दी है और पूरा घर का
  956. 43:03खर्च भी चलाता है वो। इसलिए कौवा मर्द है।
  957. 43:06घर का मालिक मर्द है। जिस घर में मर्द की
  958. 43:12जगह औरत हुकूमत करे वो घर कभी भी ठीक नहीं
  959. 43:16हो सकता। उस घर में हमेशा लड़ाई झगड़ा ही
  960. 43:19होता रहेगा। अगर आपको अपने रिश्ता करना है
  961. 43:23ना तो सबसे पहले यह पता कर लो इस घर में
  962. 43:25किसका राज चलता है। औरतों का चलता है या
  963. 43:27मर्दों का चलता है। अगर औरतों से चलता है
  964. 43:28बहुत दूर भागो। ऐसे घर के करीब मत जाओ।
  965. 43:31वरना बेटा हो या बेटा जिसका रिश्ता करोगे
  966. 43:33तबाह हो जाओगे।
  967. 43:35खुद सही बुखारी की रिवायत है। अल्लाह
  968. 43:37फरमाते हैं वो कौम कभी भी कामयाब नहीं हो
  969. 43:39सकती जो किसी औरत को हुक्मरानी सौंप दे।
  970. 43:42तो घरों की भी हुक्मरानी घरों की भी कयादत
  971. 43:45आदमी के हाथ में होनी चाहिए। औरत के हाथ
  972. 43:47में नहीं होनी चाहिए।
  973. 43:48ऐसे घरों में कभी रिश्ता मत करना जिस घर
  974. 43:51में औरत राज करती है। कभी नहीं करना। सबसे
  975. 43:54पहले यह पता करो इसमें हुकूमत किसकी चलती
  976. 43:56है? इसमें बातें किसकी सुनी जाती है? अगर
  977. 44:00औरत घर चला रही है। अरे भाई एक घर है बाप
  978. 44:02मर गया। कोई आगे पीछे नहीं है। औरत कमा खा
  979. 44:05रही है। अलग बात है। लेकिन बाप जिंदा है।
  980. 44:07घर का अगवा जिंदा है। उसके होते हुए उसको
  981. 44:10बिल्कुल स्लीपिंग मोड पे डाल दिया है। और
  982. 44:12सारे फैसले बीवी कर रही है। ऐसा घर सही घर
  983. 44:15नहीं है। ऐसे घर में बरकतें नहीं आएंगी।
  984. 44:17सिर्फ झगड़े फसाद होंगे।
  985. 44:20इसलिए ताकत का तवाज़ होना चाहिए। तसादुम
  986. 44:23नहीं होना चाहिए।
  987. 44:25फैसले का हक़ जो है शोहर को होना चाहिए।
  988. 44:28बीवी को नहीं होना चाहिए। बच्चों को नहीं
  989. 44:29होना चाहिए। बाप को होना चाहिए। इसको पूरे
  990. 44:32परिवार को तस्लीम करना चाहिए कि यह हमारा
  991. 44:34अगवा है। यह हमारा कायद है। यह हमारा घर
  992. 44:36का रहनुमा है। इसके अंडर में इसकी मातती
  993. 44:38में हमको रहना है।
  994. 44:40ये खानदान भी एक इदारा है और इदारे का एक
  995. 44:43सरबराह होना चाहिए। बगैर सरबराह के ये
  996. 44:46इदारा ये खानदान नहीं चल सकता है। टूट-फूट
  997. 44:49का शिकार हो जाएगा। ये लड़ाई झगड़ा कभी
  998. 44:50खत्म नहीं होगा। अगर आपने किसी एक को
  999. 44:52कयादत नहीं सौंपी तो। और वो भी मर्द को,
  1000. 44:55बच्चों के बाप को, बीवी के शौहर को। ये
  1001. 44:58बहुत जरूरी है मेरे भाइयों। अगर ऐसा नहीं
  1002. 45:01रहा तो घर टूट फूट का शिकार हो जाएगा। यह
  1003. 45:03छठी वजह हमारे घरों के टूटने की कि उसमें
  1004. 45:06हुकूमत औरतें कर रही हैं या बच्चे कर रहे
  1005. 45:08हैं। छोटे लोग फैसले कर रहे हैं। नहीं
  1006. 45:10फैसले बड़ों के होने चाहिए। फैसले बाप के
  1007. 45:13होने चाहिए। बेटे कमाने लगे एक साथ रह रहे
  1008. 45:15हैं। कितने भी बड़े हो जाए लेकिन बाप
  1009. 45:16जिंदा है। उसका एहतराम होना चाहिए। उससे
  1010. 45:19पूछकर उसी के राय मशवरे से फैसले होने
  1011. 45:21चाहिए। बेटा माली ऐतबार से मजबूत हो गया।
  1012. 45:24इसका मतलब नहीं कि बाप से बड़ा हो गया है।
  1013. 45:27बहुत बड़ा चालाक हो गया है। अब वो फैसले
  1014. 45:28करने लगे। अब बाप के बिलकुल रिटायर कर दे
  1015. 45:31कि तुम रिटायर हो गए घर पे बैठो। अरे ठीक
  1016. 45:33है। काम से रिटायर हो गया। लेकिन फैसले से
  1017. 45:34तो रिटायर नहीं होगा ना कर सकते ना उसको।
  1018. 45:36घर के मामलात में दखल अंदाजी करेगा। उसके
  1019. 45:38फैसले चलेंगे। उसकी हुक्मरानी रहेगी। उसकी
  1020. 45:42कयादत रहेगी जब तक बाप जिंदा है। बाप के
  1021. 45:44मरने के बाद बेटों का नंबर आता है। बेटे
  1022. 45:46कितने बड़े हो जाएं लेकिन बाप को टेकओवर
  1023. 45:49नहीं कर सकते। लेकिन आज हाल ये है कि एक
  1024. 45:51बाप जो उगली पकड़ के एक बेटे को चलना
  1025. 45:53सिखाता है। इतना बड़ा बनाता है। सिर्फ
  1026. 45:55दुनिया में बाप ही एक ऐसा वाहिद आदमी है
  1027. 45:57जो ये चाहता है कि किसी के बारे में कि
  1028. 46:00मुझसे बड़ा बन जाए। वो अपने बेटे को मुझसे
  1029. 46:02बाकी कोई किसी को अपने से बड़ा बनता हुआ
  1030. 46:04नहीं देखना चाहता ना। सिर्फ बाप है। जो ये
  1031. 46:07चाहता है कि मेरा बेटा मुझसे बड़ा बन जाए।
  1032. 46:10आपका दोस्त है। आप उससे बड़े बन जाए। उसको
  1033. 46:12तकलीफ हो जाती है। लेकिन बाप से बेटा बड़ा
  1034. 46:15बन जाए। बाप का सीना चढ़ा जाता है। बाप
  1035. 46:18खुश हो जाता है कि मेरा बेटा मुझसे बड़ा
  1036. 46:20बन गया। लेकिन ये बेटा क्या करता है? ये
  1037. 46:22बड़ा बनने के बाद बाप को छोटा कर देता है।
  1038. 46:24उसको घर में बिठा देता है। अब बाप रिटायर
  1039. 46:26हो गए। आपका कोई काम नहीं है। औलाद कभी भी
  1040. 46:28अपने मां-बाप का पूरा हक अदा नहीं कर
  1041. 46:31सकती। याद रखें आप। बचपन में कभी भी औलाद
  1042. 46:34को नहीं भूलना चाहिए कि मां-बाप ने बचपन
  1043. 46:36में जिस तरह से हमको पालपस के बड़ा किया
  1044. 46:38है, वो आप लौटा नहीं सकते हो। छोटे बच्चे
  1045. 46:41होते हैं ना मां-बाप क्या करते हैं?
  1046. 46:44भाई छोटे बच्चा अगर खाना नहीं खाता है
  1047. 46:46देखिए मां-बाप कितने टेंशन में आते हैं।
  1048. 46:48और मुसीबत यह है कि बाप की अहमियत क्या
  1049. 46:51है? बेटे को तब समझ में आता है जब वो खुद
  1050. 46:53बाप बनता है और जब उसको ये बात समझ में
  1051. 46:55आती है तब उसका बाप जिंदा नहीं रहता है।
  1052. 46:58कि उसके साथ कुछ अच्छा कर सके। वो दुनिया
  1053. 47:00से जा चुका होता है। बहुत देर में ये बात
  1054. 47:02समझ में आती है कि बाप क्या होता है। जब
  1055. 47:04तक खुद आदमी बाप नहीं बनता है और बाप के
  1056. 47:07मसाइल से जूझता नहीं है। उसे समझ में नहीं
  1057. 47:08आता कि बाप का टेंशन क्या होता है। बाप
  1058. 47:11क्या होता है? किस चीज का नाम है?
  1059. 47:13इसलिए मेरे भाइयों मां-बाप का कदर करना
  1060. 47:15चाहिए। बचपन में उन्होंने जिस तरह से
  1061. 47:16पालपस के बड़ा किया बुढ़ापे में तुम मुझे
  1062. 47:18कभी नहीं लौटा सकते। बचपन में क्या होता
  1063. 47:20है? एक बच्चा पेशाब कर दे मां उस पे सो
  1064. 47:24जाती है। बल्कि अगर बच्चा पैखाना ना करे
  1065. 47:28ना तो मां-बाप को टेंशन हो जाता। उसको
  1066. 47:30डॉक्टर के पास ले जाएंगे। कि भाई ये तो
  1067. 47:32पैखाना नहीं कर रहा है। आप सोचिए टेंशन
  1068. 47:36में आ जाएगा। लेकिन यही मां-बाप बूढ़े हो
  1069. 47:38जाए और बिस्तर पर लेट जाए।
  1070. 47:42और वही पेशाब पैखाना करने की नौबत आ जाए
  1071. 47:44तो अगर दो दिन पैखाना ना करें तो बच्चों
  1072. 47:46को कोई टेंशन नहीं है। और हो सकता है कि
  1073. 47:50बेटे भी मां-बाप का पेशाब पैखाना साफ कर
  1074. 47:52दे बुढ़ापे में। करते भी है उससे इंकार
  1075. 47:54नहीं है। लेकिन उस प्यार से नहीं कर सकते
  1076. 47:56जिस प्यार से मां-बाप ने बचपन में इनका
  1077. 47:58पेशाब पैखाना साफ किया। मां जब बच्चे का
  1078. 48:01पेशाब पैखाना साफ करती है तो खिलाती रहती
  1079. 48:02है उसको। हंसाती रहती है। उसको फील नहीं
  1080. 48:05होता। आप सोचिए किसी मां को देखा आपने
  1081. 48:08अपने बच्चे का पेशाब खाना साफ करते हुए
  1082. 48:10उसको गोद में ले खिला के दुलार करके
  1083. 48:13लेकिन यही बेटा कल अपनी मां का पेशाब
  1084. 48:16पखाना साफ करने की नौबत आए तो इस प्यार से
  1085. 48:18नहीं कर सकता वो कर सकता है लेकिन ये
  1086. 48:20प्यार नहीं लौटा सकता तो कभी भी औलाद अपने
  1087. 48:23मां-बाप का एहसान नहीं चुका सकती इसलिए
  1088. 48:26उनको अपनी लिमिट में रहना चाहिए अपनी हद
  1089. 48:28में रहना चाहिए मां-बाप को कभी टेक ओवर
  1090. 48:29नहीं करना चाहिए कभी अगर लगे भी कुछ हमारे
  1091. 48:33साथ मां-बाप गलत कर रहे हैं तो शरीयत की
  1092. 48:35तरफ जाना चाहिए अपने मन से कोई फैसला नहीं
  1093. 48:38करना चाहिए। करते हैं कभी मां-बाप से भी
  1094. 48:39ज्यादती होती है। लेकिन उसका फैसला कुरान
  1095. 48:41हदीस से होगा। तुम्हारे अपने तजुर्बे से
  1096. 48:43नहीं होगा। तुम्हारे टैलेंट से नहीं होगा।
  1097. 48:45कुरान हदीस से होगा।
  1098. 48:48कहने का मतलब ये है कि घर तभी सलामत रहेगा
  1099. 48:51जब घर में बड़ों का राज होगा। बड़े राज
  1100. 48:54करेंगे। उनकी हुकूमत होगी। उनकी क़यादत
  1101. 48:56होगी तब घर सलामत रहेगा। आगे बढ़ते हैं
  1102. 48:59सातवीं चीज। बस इसके बाद तीन चीजें और रह
  1103. 49:02गई। सातवां सबब जो घर को तोड़ता है हमारे
  1104. 49:05यहां वो है एक दूसरे के मिजाज को ना
  1105. 49:09समझना।
  1106. 49:10उसके मुताबिक उसके साथ तामल ना करना। हर
  1107. 49:14आदमी का मिजाज अलग-अलग होता है। एक जैसे
  1108. 49:16एक सांचे में सब ढल के नहीं आए। घर तभी चल
  1109. 49:18सकता है जब दूसरे के मिजाज का ख्याल रखा
  1110. 49:21जाए। आप देखें अबू बकर सिद्दीक रदी अल्लाह
  1111. 49:25ताला ने अपनी एक बेटी अल्लाह के रसूल को
  1112. 49:27दी और एक दूसरी बेटी जुबैर इब अवाम रदी
  1113. 49:30अल्लाह ताला को दी शादी हो गई सही बुखारी
  1114. 49:33की रिवायत है अस्मा कहती हैं कि जब जुबैर
  1115. 49:37ने मुझसे शादी की तो उनके पास नौकर चाकर
  1116. 49:41कुछ भी नहीं था। कोई माल दौलत नहीं थी।
  1117. 49:43कुछ भी नहीं था। खाली हथ फकीर आदमी थे।
  1118. 49:46लेकिन सबसे बड़े आदमी ने अपनी बेटी उनको
  1119. 49:48दे दिया। क्योंकि आगे चलके वो जन्नती
  1120. 49:50साहबी बने थे। अशरे मुबशरा में आते हो। जब
  1121. 49:53शादी हुई थी तब जन्नती सबी डिक्लेअ नहीं
  1122. 49:55किया गया था थे। लेकिन अबू बकर सिद्दीक की
  1123. 49:57जो जो तजुर्बा था शख्सियतों को पहचानने का
  1124. 50:01जो मलका था कि उन्होंने जिसजिस को भी अपनी
  1125. 50:04बेटी दी वो आगे चलके बहुत बड़े आदमी बने।
  1126. 50:06जबकि शादी के वक्त बड़े नहीं थे। तो जुबैर
  1127. 50:08रदी अल्लाह ताला अनो के पास कुछ नहीं था।
  1128. 50:11अस्मा रदी अल्लाह ताला ने अपने घर पे कभी
  1129. 50:13खाना नहीं बनाया था। वो नौकरानियां
  1130. 50:15बांधियां खाना बनाती थी। शादी होने के बाद
  1131. 50:17पहली बार खाना बनाना पड़ रहा है। पड़ोस की
  1132. 50:19लड़कियों को बुला के खाना बनाना सीखा। सही
  1133. 50:21बुखारी की रिवायत है। और खाना बना के अपने
  1134. 50:23शौहर को खिला रही है। अपने शौहर का जो
  1135. 50:25घोड़ा था उसको भी खाना दे रही हैं। घर में
  1136. 50:27पानी भरने का काम भी खुद ही कर रही हैं।
  1137. 50:29कोई नौकर जा कर रही है। पानी भरना आज के
  1138. 50:31ज़माने में नहीं खोल दिया आपने। भाई
  1139. 50:32जा के किसी कुएं से भर के पानी ला के घर
  1140. 50:35में स्टोर करना। और जा के दूर दराज से
  1141. 50:38लकड़ियां भी ढो के सर पे लात के ला रही थी।
  1142. 50:40इतना काम जैसे कोई बांधी नौकरानी जो काम
  1143. 50:43करती है ना वैसी लाइफ स्टाइल थी।
  1144. 50:46लेकिन इसके बावजूद भी शौहर के साथ वफादारी
  1145. 50:48देखिए आप कि एक मर्तबा रास्ते में सर पे
  1146. 50:53जो है लकड़ियों का गट्ठर लाद के ला रही थी
  1147. 50:55अस्मा रदी अल्लाह ताला रास्ते में अल्लाह
  1148. 50:58के रसूल सल्लस से मुलाकात हो गई क्या कहती
  1149. 51:02है कहती है कि अल्लाह के नबी ने जब मुझको
  1150. 51:04देखा तो खरबा आपने अपनी सवारी बिठाई ताकि
  1151. 51:08मुझे सवार कर ले क्योंकि रिश्ता में साली
  1152. 51:11लगती थी
  1153. 51:13और
  1154. 51:16अल्लाह के को तरस आया कि भाई बेचारी लकड़ी
  1155. 51:18लाद के जा रही है घर पे छोड़ देता हूं।
  1156. 51:21अल्लाह के नबी अकेले भी नहीं थे। नफरबी
  1157. 51:23अल्लाह के नबी के साथ आपके सबा थे। एक
  1158. 51:25पूरी टीम थी।
  1159. 51:27तो अस्मा क्या कहती है? देखिए सही बुखारी
  1160. 51:30की रिवायत है। अस्मा के अल्फाज़ क्या है?
  1161. 51:32अल्लाह के नबी ने सवारी बिठाया ताकि अस्मा
  1162. 51:35को सवार करके इनके घर तक ड्रॉप कर दे।
  1163. 51:37बेचारी थकी है। लाद के गट्ठा लेके जा रही
  1164. 51:40है। अस्मा क्या कहती है? ये बुखारी की
  1165. 51:41अल्फाज़ है फस्त अनसीरा रिजाल मुझे शर्म आई
  1166. 51:46कि मैं मर्दों के साथ चलूं। मैं अकेली चल
  1167. 51:49रही थी वही ठीक था। कहती है वकर तू जुबैर
  1168. 51:52गैरतू मुझे अपने शौहर जुबैर की गैरत याद आ
  1169. 51:56गई कि ये उनको अच्छा नहीं लगेगा।
  1170. 51:59आप सोचिए शौहर के मिजाज का कितना ख्याल
  1171. 52:02रखने वाली। शौहर को अच्छा नहीं लगेगा।
  1172. 52:06उसकी वजह से अल्लाह के रसूल की पेशकश को
  1173. 52:09रद्द कर दिया। नहीं बैठी है। अल्लाह के
  1174. 52:12नबी खड़े होकर आगे चले गए। आप बताइए
  1175. 52:14अल्लाह के रसूल हैं। आपके साथ सहाबा हैं।
  1176. 52:17सिर्फ इस वजह से नहीं बैठ रही कि मेरे
  1177. 52:18शौहर को तकलीफ हो जाएगी। और आज
  1178. 52:22के घर की बीवियां या बेटियां कोई भी घर
  1179. 52:25में आ गया उसको खाना पानी देना उससे बात
  1180. 52:27करना। कोई बोल दे कहते तुम्हारा दिल कितना
  1181. 52:29गंदा है। तुम्हारी सोच कितनी गंदी है।
  1182. 52:32यानी उसकी गैरत का कोई ख्याल नहीं है। बाप
  1183. 52:34की गैरत का, शौहर की गैरत का। आप जिससे
  1184. 52:37चाहो बात करो। जिसको जो चाहो जिसके साथ
  1185. 52:40पेश आओ तो यह देखिए एक शौहर एक बीवी को
  1186. 52:44चाहिए कि अपने शौहर के मिजाज को समझे ताकि
  1187. 52:47घर में इख्तलाफ की नौबत ना आए। एक और
  1188. 52:50वाक्या देखिए सही मुस्लिम से सही बुखारी
  1189. 52:52का वाक्या है। सही मुस्लिम का वाकया है कि
  1190. 52:55असमा रदी अल्लाह ताला का जो घर था का जो
  1191. 52:59घर था ना बड़ा घर था और सामने जगह खाली थी
  1192. 53:02और शायद वहां पेड़ या कोई दीवार थी जिसका
  1193. 53:04साया था तो एक फकीर आदमी आता है घर पे और
  1194. 53:07क्या कहता है कहता है या उम्म अब्दुल्लाह
  1195. 53:12इन रजुल फकीर
  1196. 53:15के ऐ उम्मे अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह उनके
  1197. 53:16बेटे का नाम अब्दुल्ला बिन ज़बेर अस्मा से
  1198. 53:19कहता है फकीर आदमी कि ऐ उे अब्दुल्लाह मैं
  1199. 53:22फकीर आदमी आदमी हूं। अर अनबिया फी ज़िलदार
  1200. 53:26का ये जो आपके घर के सामने जो साया है ये
  1201. 53:29जो छावनी है मैं चाहता हूं कि यहां अपना
  1202. 53:31धंधा लगाऊं। कुछ चीज़ बेचना चाहता हूं।
  1203. 53:33जैसे कोई ठेले वाले ना कहीं भी खड़े होकर
  1204. 53:34के बेचते हैं। तो उस आदमी ने कहा कि आप
  1205. 53:36परमिशन दे दो। मैं आपके घर के सामने अच्छी
  1206. 53:38सी जगह है। मैं यहां ठेला लगाऊंगा। थोड़ा
  1207. 53:40सा कुछ बेचूंगा। तो असमा क्या कहती है?
  1208. 53:44कहती मुझे कोई मसला नहीं है। लेकिन अगर
  1209. 53:48मैंने इजाज़त दे भी दिया तो मेरे शौहर
  1210. 53:50जुबैर आएंगे ना मुझे भगा देंगे। खदेड़
  1211. 53:52देंगे यहां से। कहा मुझे तो कोई प्रॉब्लम
  1212. 53:55नहीं है। लेकिन अगर मेरे शौहर आएंगे उसके
  1213. 53:58अल्फ़ाज़ क्या है? वो कहती है इन रख का अब
  1214. 54:03जुबैर
  1215. 54:05अगर मैंने अलव कर भी दिया तो जुबैर आएंगे
  1216. 54:07भगा देंगे तुमको। तुमको यहां खड़े नहीं
  1217. 54:10होने देंगे क्योंकि गैरतमंद आदमी थे।
  1218. 54:12लेकिन इनको तरस आता है। अस्मा को तरस आता
  1219. 54:14है कि बेचारा फकीर इसकी मदद करनी चाहिए।
  1220. 54:17थोड़ा ठेला लगा लेगा, बेच लेगा तो क्या
  1221. 54:19इसका बिगड़ जाएगा? तो कहती है ऐसा ऐसा करो
  1222. 54:21कि जब मेरे शौहर आ जाएंगे तो शाम को आना
  1223. 54:24और मेरे शौहर के सामने बोलना कि यहां मैं
  1224. 54:26अपना धंधा लगाना चाहता हूं। कारोबार करना
  1225. 54:29चाहता हूं। वो फकीर शाम को आया और जुबैर
  1226. 54:33रदी बड़े बारो शख्सियत थे। बड़े बहादुर
  1227. 54:35थे। सबा में शायद इतना बहादुर कोई नहीं
  1228. 54:37था। मैदान जंग में जब ये उतरते थे तो
  1229. 54:40लाशें गिरा देते थे। बड़े बहादुर थे।
  1230. 54:42जुबैर रदी अल्लाह। अल्लाह के उनके
  1231. 54:44रिश्तेदार भी थे।
  1232. 54:46तो दोबारा फकीर आया और हिम्मत नहीं है
  1233. 54:49जुबैर से बात करने की वो मुखातब कर रहा है
  1234. 54:50उनकी बीवी को असमा
  1235. 54:53और क्या कह रहा है कह रहा है कि इन रज
  1236. 54:57फकीर
  1237. 54:59का फिर वही बात कहता है कि मैं फकीर आदमी
  1238. 55:01हूं आपके घर के सामने जो साया है यहां मैं
  1239. 55:03कुछ बेचना चाहता हूं बकालत मालका
  1240. 55:07मदीनादारी तो असमा र ने क्या कहा डांटा
  1241. 55:10कहा पूरे मदीना में तुझे मेरा ही घर मिला
  1242. 55:13है बहुत तेजी कैसे डांटा? कहा पूरा मदीना
  1243. 55:18में तुझे मेरा घर मिला। निकल यहां से तुझे
  1244. 55:19नहीं धंधा लगाने देंगे यहां पे। उनके जो
  1245. 55:22शौहर थे वो थोड़ा मुतवजे हुए। और उन्होंने
  1246. 55:25क्या कहा?
  1247. 55:27जुबैर। तो उनके शौहर जुबैर ने कहा माल
  1248. 55:31अम रजुलन फकीरन यबी। कहा तुम्हें क्या
  1249. 55:36फर्क पड़ता है? फकीर आदमी बेचारा कुछ कमाना
  1250. 55:39चाहता है। बैठने दो। क्या बिगड़ जाएगा?
  1251. 55:41उन्होंने परमिशन दे दिया। अगर आसमा ने
  1252. 55:44परमिशन दिया होता तो उसको भागना पड़ता।
  1253. 55:47अस्मा र अपने शौहर का मिजाज समझती थी। वो
  1254. 55:51चाहती इस फकीर की मदद हो लेकिन वो जानती
  1255. 55:54थी अगर मैंने इसको अलव किया तो मेरा शौहर
  1256. 55:56इसको खदेड़ देगा। इसलिए जब वो बंदा जब आया
  1257. 55:59तो पहले डांटा उसको अंदर से नहीं डांटा।
  1258. 56:02वो अपने शौहर को मनवाने के लिए डांटा कि
  1259. 56:04मैं अगर इसको भगाऊंगी तो मेरा शौहर बिठा
  1260. 56:06देगा और मैंने अगर बोल दिया कि बैठो यहां
  1261. 56:08पे तो शौहर भगा देगा।
  1262. 56:10यह सही मुस्लिम रिवायत है कि देखिए मिजाज
  1263. 56:13को कैसे समझना चाहिए, कैसे हैंडल करना
  1264. 56:16चाहिए। एक शौहर के मिजाज के साथ कैसे
  1265. 56:18बर्ताव करना चाहिए सीखो। इतनी ये प्रॉब्लम
  1266. 56:21बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो सकती थी। उन्होंने
  1267. 56:24अलव किया होता, शौहर ने भगाया होता, इसको
  1268. 56:26लेके झगड़ा होता, पता नहीं मामला कहां तक
  1269. 56:28जाता। लेकिन कितनी खूबसूरती के साथ
  1270. 56:29उन्होंने हल किया मसले को। शौहर की
  1271. 56:31मोहब्बत भी बरकरार है, गैरत भी बरकरार है,
  1272. 56:34गरीब की मदद भी हो रही है। सब कुछ सारा
  1273. 56:35मामला चल रहा है। तो इस तरह से एक दूसरे
  1274. 56:38के मिजाज का ख्याल रखना चाहिए। कि मिजाज
  1275. 56:42क्या है? औरत हो या शौहर हो एक दूसरे के
  1276. 56:46मिजाज का ख्याल रखना चाहिए। हम मिजाज का
  1277. 56:48ख्याल नहीं रखते। अपने मिजाज के हिसाब से
  1278. 56:50चलना चाहेंगे। ये मुमकिन नहीं है। एक आदमी
  1279. 56:53से आपका रिश्ता हुआ पूरी तरह से उसकी
  1280. 56:55फ़िक्र, उसकी सोच, आपकी सोच से हम अहंग
  1281. 56:58नहीं हो सकती। मुमकिन नहीं है। एडजस्ट
  1282. 57:00करना पड़ेगा। वो करना चाहिए। ऐसे ही रिश्ते
  1283. 57:03चलते हैं वरना रिश्ता टूट जाता है। अगर आप
  1284. 57:06कहीं भी समझौता नहीं करोगे, कहीं भी एक
  1285. 57:08दूसरे की गैरत का, उसकी इज्ज़त का ख्याल
  1286. 57:11नहीं करोगे तो रिश्ता नहीं चल पाएगा।
  1287. 57:15आगे बढ़ते हैं। आठवीं चीज क्या है? घरों के
  1288. 57:17टूटने की वजह औलाद की गलत तरबियत।
  1289. 57:21मां-बाप को चाहिए कि अपनी औलाद की सही
  1290. 57:25तरबियत करें।
  1291. 57:27सही तरबियत नहीं करेंगे तो कल यह औलाद
  1292. 57:29बड़ी होके मनमानी करेगी और सही तरबियत
  1293. 57:32करेंगे कितना बड़ा बेनिफिट है सही मुस्लिम
  1294. 57:33की रिवायत है कि आदमी मर जाता है तो मरने
  1295. 57:36के बाद भी तीन चीजों का सवाब मिलता रहता
  1296. 57:37है उसमें एक क्या है अव साल यदू कि नेक
  1297. 57:42लड़का जो बाप के मरने के बाद भी दुआ करता
  1298. 57:45रहता है जब औलाद नेक होती है तो ना सिर्फ
  1299. 57:49जिंदगी में घर बसा रहता है बाप मर भी जाता
  1300. 57:51है तो भी ताल्लुक नहीं टूटता बेटे का
  1301. 57:54तो भी बेटे का ताल्लुक बना रहता है लेकिन
  1302. 57:57अगर औलाद नेक ना हो तो मरना मौत तो दूर की
  1303. 57:59बात जिंदगी में भी ताल्लुक नहीं बनता।
  1304. 58:02बेटा जैसे बड़ा होता है बाप अपने बेटे को
  1305. 58:04दीन की तालीम नहीं देगा। डॉक्टर इंजीनियर
  1306. 58:06पता नहीं क्या-क्या बनाएगा। और बनने के
  1307. 58:08बाद सबसे पहला धक्का क्या लगता है? घर
  1308. 58:11वीरान हो जाता है। ये पंछी उड़ जाते हैं।
  1309. 58:15कोई अमेरिका में जॉब कर रहा है। कोई वहां
  1310. 58:16ये बेचारा तरस रहा है किसी से बात करने के
  1311. 58:18लिए। और पढ़ा लिखा के इतना बड़ा किया था
  1312. 58:20बच्चों को ताकि मेरा बेटा कामयाब हो।
  1313. 58:23कामयाब हुआ तो बाप को पहचान नहीं रहा।
  1314. 58:26इसलिए क्योंकि दीन की तालीम नहीं दिया। हम
  1315. 58:27नहीं कहते डॉक्टर मत बनाओ। सब कुछ बनाओ
  1316. 58:29लेकिन साथ में दीन की तालीम भी दो ताकि
  1317. 58:31तुम्हारी इज्जत करे। तुम्हारा एतराम करे।
  1318. 58:33आप हम लोग नेट पे कैसी-कसी वीडियो देखते
  1319. 58:35हैं कि बाप मर गया और बेटा वकील को ला
  1320. 58:37गया। अंगूठा लगा रहा है पेपर कागजात में।
  1321. 58:39लाश पड़ी हुई है अंगूठा लगा रहा है।
  1322. 58:42अल्लाहू अकबर। हमारे बहुत सारे ऐसे ऐसे
  1323. 58:45केसेस हमने देखे हैं कि बाप को
  1324. 58:48पोस्टमार्टम से बचाने के लिए कितना लॉस
  1325. 58:51कितना नुकसान बर्दाश्त कर लेते हैं और
  1326. 58:53पोस्टमार्टम भी वैसे कई मसाइल हल हो सकते
  1327. 58:55हैं। प्रॉपर्टी के कुछ मसाइल लेते हैं।
  1328. 58:57बहुत सारे मसाइल होते हैं। मैं उस तफसील
  1329. 58:58में नहीं जा सकता। लेकिन बेटा कहता है कि
  1330. 59:00मेरे वालदेन का पोस्टमार्टम नहीं होगा।
  1331. 59:01भले ही मेरा नुकसान हो जाए। लेकिन ये पढ़ी
  1332. 59:04लिखी औलाद ये काट-पीट के बराबर कर देंगे।
  1333. 59:07हम नहीं कहते कर सकते हैं पोस्टमार्टम
  1334. 59:09उसकी जरूरत हो उससे इंकार नहीं है लेकिन
  1335. 59:11औलाद जो है अगर दीनदार है तो मां-बाप का
  1336. 59:14जिंदगी में भी मरने के बाद भी उसका एतराम
  1337. 59:16करती है और दीनदार नहीं है तो मरने के बाद
  1338. 59:19दूर की बात है जिंदगी में कोई एतराम नहीं
  1339. 59:21बल्कि वो ओल्ड एज होम में ले जा के शिफ्ट
  1340. 59:23कर देते हैं घर में रखते भी नहीं कहते
  1341. 59:25बुड्ढे घर का शो खराब करते भाई खुद भी
  1342. 59:28बिगड़ा है और बिगड़ी हुई औरत लेकर आएगा और
  1343. 59:30ये दोनों तय करेंगे कि ये बुड्ढा घर में
  1344. 59:32नहीं रहेगा उसको ले जा के ओल्ड लेज होम
  1345. 59:34में डाल देंगे कितना बड़ा पाप आप कितना
  1346. 59:36बड़ा जुल्म है बताइए? अल्लाह के फज़ोकरम से
  1347. 59:39मुसलमानों के यहां मामला बहुत कम है।
  1348. 59:41लेकिन ये बढ़ते जा रहा है। अगर ये तालीम
  1349. 59:44हमने रोक दिया, बच्चों की तरबियत रोक दिया
  1350. 59:45तो ये मामला और बढ़ेगा। लेकिन अगर बच्चा
  1351. 59:48तालीम याफ्ता हो कभी भी अपने मां-बाप को
  1352. 59:50बेसहारा नहीं छोड़ सकता। मां-बाप को कितनी
  1353. 59:53बड़ी बीमारी हो जाए, कुछ भी हो जाए और भीख
  1354. 59:55मांग के एक एक रुपया इकट्ठा करके इलाज
  1355. 59:57कराएगा। लेकिन वो किसी और घर में शिफ्ट
  1356. 59:59नहीं करेगा मां-बाप को। घर नहीं टूटने
  1357. 1:00:02देगा वो। इसलिए दीन की तालीम। दीन की
  1358. 1:00:04तालीम नहीं दोगे, तो यह बेटा भी तुम्हें
  1359. 1:00:06उठाके बाहर फेंक देगा। और यह बेटी भी बड़ी
  1360. 1:00:08होके
  1361. 1:00:10मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी का नारा लगाएगी।
  1362. 1:00:12मां-बाप को कुछ नहीं समझेगा। जहां चाहेगी
  1363. 1:00:15भाग निकल जाएगी। और फिर उस बाप के दिल से
  1364. 1:00:17पूछो बड़ा होके 15 16 साल जिस औलाद को
  1365. 1:00:20पाल-पोछ के बड़ा किया और उसके सामने कुराते
  1366. 1:00:22हुए किसी का हाथ पकड़ के निकल जाए। क्या
  1367. 1:00:24बीती होगी उसके बाप पर? कसूर किसका? इस
  1368. 1:00:27बाप का कसूर है। उसको ये तरबियत दिया कि
  1369. 1:00:29किसी का हाथ पकड़ के वो भाग जाए। घर टूट
  1370. 1:00:32जाए। पूरे गांव में उसकी जिल्लत हो जाए।
  1371. 1:00:35ये सब कुछ इसलिए होता है क्योंकि हमने
  1372. 1:00:37औलाद को दीनी तरबियत नहीं दी है। आप जो
  1373. 1:00:39चाहे उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर सब कोई
  1374. 1:00:41बनाओ। लेकिन, दीन से भी जोड़े रखो, मस्जिद
  1375. 1:00:43से जोड़े रखो, ओलमा से जोड़े रखो ताकि उनका
  1376. 1:00:46जहन दीनदाराना रहे। और वह अपने वालदेन के
  1377. 1:00:48साथ, अपने परिवार के साथ वो सुलूक ना करे
  1378. 1:00:51जो हमें देखने सुनने को मिलता है। आगे
  1379. 1:00:54बढ़ते हैं नौवीं चीज़, खानदान बिखरने का या
  1380. 1:00:58घर टूटने का एक नौवां जो सबब है, वह यह है
  1381. 1:01:02कि हमारे घर के बाज़ अफ़राद, एक ही अमल
  1382. 1:01:06देखकर पूरा फैसला कर देते हैं उसी पे।
  1383. 1:01:08किसी दिन कोई अच्छा काम किया। अब वो उसकी
  1384. 1:01:10हजारों गलतियों पर पर्दा डाल देते हैं। या
  1385. 1:01:13कोई एक गलती देखी तो हजारों खूबियों से
  1386. 1:01:16आंखें बंद कर देते। बीवी है कभी उससे गलती
  1387. 1:01:20हो गई। गुस्सा आ गया आता है गुस्सा आने
  1388. 1:01:23दो। लेकिन आप फ़ौरन कंपेयर करो कि आज इसने
  1389. 1:01:25गलती की है। लेकिन इससे पहले जो इसने
  1390. 1:01:28अच्छाइयां की हैं वो ज्यादा है या ये गलती
  1391. 1:01:30ज्यादा है। अगर वो गलती बड़ी है तो बेशक
  1392. 1:01:33सजा के मुस्तहक है। लेकिन अगर वो गलती
  1393. 1:01:35छोटी है अच्छाइयां उसकी ज्यादा है तो
  1394. 1:01:37इग्नोर करो। अल्लाह के हदीस है सही
  1395. 1:01:40मुस्लिम की। अबू हुरैरा रदी अल्लाह ताला
  1396. 1:01:43हदीस के राबी हैं। बड़ा प्यारा उसूल बयान
  1397. 1:01:45किया अल्लाह के नबी। ने ये उसूल सिर्फ
  1398. 1:01:46फैमिली पर नहीं कंपनियों में, इदारों में,
  1399. 1:01:49ऑफिसों में हर जगह अप्लाई करना चाहिए।
  1400. 1:01:52अल्लाह के नबी क्या फरमाते हैं? लाफिन
  1401. 1:01:56कोई आदमी किसी औरत से दुश्मनी ना पाले
  1402. 1:02:00बुगज़ ना रखे इन खुल रिया
  1403. 1:02:05आख अगर उसकी कोई एक बात नापसंद लग रही है
  1404. 1:02:09तो दूसरी बात अच्छी भी तो लग रही है।
  1405. 1:02:12तो एक बात ना पसंद आई उसकी बुनियाद पर
  1406. 1:02:15आपने पूरा घर तोड़ दिया। घर को तोड़ दिया
  1407. 1:02:18आपने। लेकिन आप ये आपने ये नहीं देखा कि
  1408. 1:02:20दूसरी अच्छाइयां भी है। आप किसी ऑफिस में
  1409. 1:02:23काम कर रहे हैं। बॉस ने आपको बुरा भला बोल
  1410. 1:02:25दिया। आपने इस्तीफा दे दिया। रिजाइन दे
  1411. 1:02:28दिया। आपको देखना चाहिए कि आज इसने गलत
  1412. 1:02:31बोला है तो आज से पहले अच्छा कितना बोला
  1413. 1:02:33है। आप कहीं भी किसी भी लोगों की, किसी भी
  1414. 1:02:37जमात में हो अगर किसी ने कुछ कह दिया फौरन
  1415. 1:02:39ही कंपेयर करो कि इसने आज गलत किया। लेकिन
  1416. 1:02:41क्या सिर्फ इसने गलत ही किया है? रोजाना
  1417. 1:02:43गलत ही करता है। इसने अच्छा भी किया। अगर
  1418. 1:02:45इसकी अच्छाइयां ज्यादा है तो इग्नोर करो।
  1419. 1:02:47माफ़ कर दो।
  1420. 1:02:49इससे क्या है? घर टूटने से बच जाएगा।
  1421. 1:02:52लेकिन अगर एक-एक बात लेके आप डिसीजन लोगे
  1422. 1:02:54तो घर टूट जाएगा। तो अल्लाह के नबी ने
  1423. 1:02:56बड़ा प्यारा उसूल दिया है। एक बात गलत लग
  1424. 1:02:58रही है तो देखो दूसरी बात अच्छी भी लग
  1425. 1:03:00सकती है। एक बात बुरी लग रही है दूसरी
  1426. 1:03:02बातें अच्छी भी लग सकती है। तो ये नवी चीज
  1427. 1:03:05है। आगे बढ़ते हैं। दसवीं और आखरी चीज
  1428. 1:03:07हमारे घर को तोड़ने के लिए इस वक्त हमारे
  1429. 1:03:12समाज में हमारे हिंदुस्तान के पूरी दुनिया
  1430. 1:03:14के लिहाज से नहीं हिंदुस्तान के लिहाज से
  1431. 1:03:16हमारे यहां जो जॉइंट सिस्टम का जो रिवाज
  1432. 1:03:19है जॉइंट फैमिली का मुस्तका खानदान का यह
  1433. 1:03:22भी फसाद की बहुत बड़ी वजह है।
  1434. 1:03:25हमारे असलाफ में बल्कि आज भी सऊदी अरब
  1435. 1:03:27वगैरह में ऐसा नहीं है जो सिस्टम यहां चल
  1436. 1:03:29रहा है कि खानदान कितना भी बड़ा हो गया और
  1437. 1:03:33वो साथ में लदा हुआ है। भाई मैंने शुरू
  1438. 1:03:35में कहा था कि घर का मतलब क्या है? बाप
  1439. 1:03:39है। उसकी औलाद है, उसकी बीवी है, उसके
  1440. 1:03:41मां-बाप है। ये छोटा सा घर चल जाएगा।
  1441. 1:03:44लेकिन अब वो औलाद और बढ़ी और पोते परपोते
  1442. 1:03:47सब होते गए। भाई चाचा सबकी शादी और सब एक
  1443. 1:03:50साथ लदे दिए। एक जगह खाना बनना है, कोई
  1444. 1:03:53प्राइवेसी नहीं है। ऐसे घर का सत्यानाश हो
  1445. 1:03:56जाता है। इसमें हमेशा झगड़ा, चुगली, गीबत
  1446. 1:03:59पता नहीं क्या-क्या होता है। बहुत सारी
  1447. 1:04:01इस्लाम की मुखालफ़त होती है। हमारे पास
  1448. 1:04:03वक्त नहीं है कि मैं आपके सामने तफसील से
  1449. 1:04:06बात रखूं। इसका इलाज क्या है मेरे भाइयों?
  1450. 1:04:09इसका इलाज ये है कि आदमी जो है फौरन जैसे
  1451. 1:04:13एक फैमिली अलग हो रही है। मिसाल तौर आपने
  1452. 1:04:15एक बेटे की शादी किया। उसके उसको बीवी के
  1453. 1:04:17साथ अलग उसको शिफ्ट करें। उसको प्राइवेसी
  1454. 1:04:19दें। उसका चूल्हा अलग करें। उसका
  1455. 1:04:21रहना-सोना अलग करें। आपको अल्लाह ने पैसा
  1456. 1:04:22दिया। उसका बाथरूम अलग करें। सब कुछ अलग।
  1457. 1:04:24उसको प्राइवेसी दें आप। फिर आपस में टकराव
  1458. 1:04:27नहीं होगा। जितनी फैमिली उतना घर होना
  1459. 1:04:29चाहिए। अलग-अलग सबका सेटअप होना चाहिए।
  1460. 1:04:32लेकिन जो हमारे यहां जॉइंट ये असल में
  1461. 1:04:34हमने हिंदुओं से अडॉप्ट किया हुआ है। ये
  1462. 1:04:36हमारा इस्लामी कल्चर नहीं है ये। ये यहां
  1463. 1:04:38का इस मुल्क का कल्चर है ये। इस्लाम से
  1464. 1:04:40इसका कोई लेना देना नहीं है। इसलिए इस चीज
  1465. 1:04:43को भी खत्म करना चाहिए। और इसकी वजह से एक
  1466. 1:04:45बड़ी प्रॉब्लम जो शुरू में मैं जिक्र कर
  1467. 1:04:47रहा था विरासत का मसला आता है कि विरासत
  1468. 1:04:49में बंटवारा नहीं होने देते क्योंकि जॉइंट
  1469. 1:04:51फैमिली सिस्टम को लेकर चलना है। ये सिस्टम
  1470. 1:04:53हमें विरासत नहीं बांटने देता है। विरासत
  1471. 1:04:56की तकसीम को डिले कर रहा है। ये बाद में
  1472. 1:04:58मसला है और जैसा कि शेख कह रहे थे कि आप
  1473. 1:05:01अलग होने के बाद भी एक दूसरे से ताल्लुक
  1474. 1:05:03बनाए रख सकते हैं। यानी अलग-अलग घर लेने
  1475. 1:05:06के बावजूद भी बहुत सारे मामलों को इश्तरा
  1476. 1:05:09के साथ आप निभा सकते हैं। कोई बिजनेस चल
  1477. 1:05:11रहा है। ठीक है? मुस्तका पार्टनर बन के आप
  1478. 1:05:13बिज़नेस चलाओ। क्या दिक्कत है? ऐसे बहुत
  1479. 1:05:15सारे मामलात हैं। कोई कारोबार है। आप एक
  1480. 1:05:17साथ करो कोई मसला नहीं है। लेकिन ये
  1481. 1:05:19रिहाइश एक साथ रहें। ये मामला अलग-अलग
  1482. 1:05:21करो। चूल्हा अलग करो। सबकी अपनी-अपनी
  1483. 1:05:24प्राइवेसी है। सबको अपना हक़ दो। उसके बाद
  1484. 1:05:26जो काम हो सकता है एक साथ वो करो जिसको
  1485. 1:05:29करते हुए आप इस्लामी तालीमात पे भी अमल कर
  1486. 1:05:31सकते हैं। बिज़नेस एक साथ करो। कारोबार एक
  1487. 1:05:34साथ करो। आपका खेत खलियान उसे भी एक साथ
  1488. 1:05:36रखो। कोई दिक्कत नहीं। लेकिन जो चीजें
  1489. 1:05:39मसले खड़ा करती है उनको फौरन अलग करो। और
  1490. 1:05:41विरासत आप फौरन तकसीम करो। उसमें तस्सीम
  1491. 1:05:44करने के बाद आप आपसी समझौते के साथ एक
  1492. 1:05:47दूसरे के साथ कारोबार कर सकते हो। जब आपका
  1493. 1:05:49मन नहीं कि आप अलग कर सकते हो क्योंकि
  1494. 1:05:51बंटवारा हो चुका है लेकिन उसको डिले मत
  1495. 1:05:53करो। उसको डिले नहीं करना चाहिए। और एक
  1496. 1:05:56बात और है कि मैं बात उसी पे खत्म करूंगा
  1497. 1:05:59कि बंटवारे का जॉइंट फैमिली सिस्टम से
  1498. 1:06:01हटने का ये मतलब नहीं है कि आप रिश्तों को
  1499. 1:06:04भूल जाओ। बांटने का मतलब थोड़ी होता है कि
  1500. 1:06:07आपकी रिशेदारी खत्म हो रही है। भाई सहाबा
  1501. 1:06:10का हम देखते हैं एक घर का तो अलग बात है।
  1502. 1:06:13अपनी बेटियों की शादी करते थे। शादी करने
  1503. 1:06:15के बाद भी नहीं बोलते थे। हमारा हाल क्या
  1504. 1:06:17है? अजीब मामला है। यानी जॉइंट फैमिली को
  1505. 1:06:21हम ऐसा सोचते हैं कि ये टूटना नहीं चाहिए।
  1506. 1:06:23लेके चलना चाहिए। और जब बेटियों की शादी
  1507. 1:06:25करते हैं तो ये सोच के करते हैं कि इसका
  1508. 1:06:27असल घर वो है। उसको इस घर से निकाल के
  1509. 1:06:29बाहर कर देते हैं। हालांकि हर लड़की का
  1510. 1:06:32परमानेंट घर उसके बाप का घर होता है। उसके
  1511. 1:06:35ससुराल का क्या ठिकाना? कल को तलाक दिया,
  1512. 1:06:36कहां जाएगी वह? उसका परमानेंट किसी भी
  1513. 1:06:39लड़की का परमानेंट घर उसके बाप का घर होता
  1514. 1:06:41है। उसके शौहर का घर नहीं होता है। हां,
  1515. 1:06:43उसका बेटा बड़ा हो गया। वो अपने पांव पे
  1516. 1:06:45खड़ा हो गया तो ठीक है वो भी। मां भी वहां
  1517. 1:06:47रहेगी। लेकिन जब तक उसके बेटे अपने पांव
  1518. 1:06:49पे खड़े नहीं है। उसके बाप के घर का कोई
  1519. 1:06:52भरोसा नहीं है। उसके शौहर के घर का कोई
  1520. 1:06:53भरोसा नहीं है। कल तलाक हो जाए कहां जाएगी
  1521. 1:06:55वो? बाप के पास ही आना उसको। इसलिए हर औरत
  1522. 1:06:59का परमानेंट घर उसके बाप का घर होता है।
  1523. 1:07:01लेकिन हमारा यह जालिम मुआशरा यह कहता है
  1524. 1:07:04कि हम लोग बांटेंगे नहीं और बेटियों को
  1525. 1:07:06उठा उठा के दूसरे घर शिफ्ट कर रहा है।
  1526. 1:07:08यहां प्रॉपर्टी में उनका हिस्सा खत्म कर
  1527. 1:07:10रहा है। क्यों? ये कौन सा जॉइंट फैमिली
  1528. 1:07:12सिस्टम है भाई? कि अपनी औलाद का जहां यहां
  1529. 1:07:15हिस्सा हिस्सा आपने खत्म कर दिया। क्यों
  1530. 1:07:17खत्म कर दिया आपने? तो हमारे असलाफ जो थे
  1531. 1:07:19सहाबा थे वो बेटियों की शादी करने के बाद
  1532. 1:07:23भी प्रॉपर्टी में हिस्सा देते थे। आप
  1533. 1:07:25देखिए बंटवारा एक साथ नहीं रहते थे। जॉइंट
  1534. 1:07:27फैमिली सिस्टम नहीं था। लेकिन ये प्यार
  1535. 1:07:29मोहब्बत कि सबको उनके हुकूक मिलते थे।
  1536. 1:07:31हत्ता कि शादी होने के बाद यानी विरासत से
  1537. 1:07:34हटके भी अभी मैं वाकया सुनाया कि असमा रदी
  1538. 1:07:37अल्लाह ताला जा के इतना सारा काम करती थी।
  1539. 1:07:39जुबेर से शादी हो गई थी। शादी के बाद
  1540. 1:07:41उन्होंने अपने अब्बा से शिकायत नहीं की
  1541. 1:07:43अबू बकर सिद्दीक से कि अब्बा मुझे किस घर
  1542. 1:07:44में डाल दिया इतना काम करना पड़ता है।
  1543. 1:07:46लेकिन जो वाक्य पेश आया था जो मैंने
  1544. 1:07:48सुनाया। उस वाक्य की खबर जब अबू बकर
  1545. 1:07:50सिद्दीक को पता चली। तो वो फौरन एक गुलाम
  1546. 1:07:52लेकर आए अपनी बेटी के पास। और कहा बेटा आज
  1547. 1:07:54से तुम्हारा काम यह करेगा। तुम बहुत थक
  1548. 1:07:56जाती हो। मुझे पता चला। तो अस्मा क्या
  1549. 1:07:58कहती है? बुखारी का अल्फाज़ क्या है? अस्मा
  1550. 1:08:00कहती है फमा अतनी अब्बा ने जब गुलाम गिफ्ट
  1551. 1:08:04दिया तो मुझे ऐसा फील हुआ कि आज अब्बा ने
  1552. 1:08:06मुझे आजाद किया है। अबू बकर सिद्दीक तो
  1553. 1:08:09बहुत सारे गुलामों को आजाद करते थे। बिलाल
  1554. 1:08:11को आजाद किया, फला को आजाद किया, फला को
  1555. 1:08:13आजाद किया। बेटी क्या कहती है कि जब अब्बा
  1556. 1:08:15ने एक गुलाम गिफ्ट किया तो मुझे फील हुआ
  1557. 1:08:17आज अब्बा ने मुझे भी आजाद किया। यानी इससे
  1558. 1:08:19पहले मेरी में भी गुलामों जैसी बन गई थी।
  1559. 1:08:22लेकिन बेटे ने जाके हेल्प किया ना मदद
  1560. 1:08:23किया। आप देखिए अलग-अलग रह रहे हैं। जॉइंट
  1561. 1:08:26फैमिली सिस्टम नहीं है। लेकिन शादी के बाद
  1562. 1:08:28भी कोई प्रॉब्लम है। शौहर को फोन नहीं
  1563. 1:08:30किया। अपने दामाद को जुबेर को फोन नहीं
  1564. 1:08:32किया। डिस्टर्ब नहीं किया। जा के प्रॉब्लम
  1565. 1:08:33सॉल्व किया अबू बकर सिद्दीक ने। और हमारा
  1566. 1:08:35हाल क्या है? यहां जॉइंट फैमिली सिस्टम
  1567. 1:08:37लेके करेगा और शादी के बाद बेटी मर रही
  1568. 1:08:39है, हंस रही है। क्या हो रहा है? कोई
  1569. 1:08:41परवाह नहीं हमको। ये कौन सा जॉइंट फैमिली
  1570. 1:08:43सिस्टम है भाई? ये कौन सा रिश्तेदारी
  1571. 1:08:45निभानी है। ये जॉइंट फैमिली सिस्टम कोई
  1572. 1:08:47चीज नहीं। असल है रिश्ता। आप अलग-अलग करो
  1573. 1:08:49घर। रैश अलग-अलग करो। लेकिन रिश्ते निभाओ।
  1574. 1:08:52रिश्तों के हुकूक अदा करो। ऐसी बहुत सारी
  1575. 1:08:54मिसाल है। वक्त नहीं है। तो सही बुखारी की
  1576. 1:08:57रिवायत है। उनकी बहन उन्होंने अपने बाप के
  1577. 1:08:59मरने के बाद अपनी बहन की शादी अपने खर्चे
  1578. 1:09:01से की। शौहर ने तलाक दे दिया। उठा के अपने
  1579. 1:09:03घर पे बिठा लिया। फ़ौरन लाके अपने घर पे
  1580. 1:09:05बिठा लिया। वो शौहर आता है कुछ दिन के
  1581. 1:09:07बाद। माफी मांगता है कि भैया फिर से शादी
  1582. 1:09:10करा दो। एक ही तलाक दिया था। शादी हो सकती
  1583. 1:09:12थी। भाई ने भगा दिया। मैंने अपनी बहन की
  1584. 1:09:15शादी की थी। तूने बदतमीजी की। मेरी बहन को
  1585. 1:09:17परेशान किया। अब दोबारा शादी करूंगा। नहीं
  1586. 1:09:19निकल यहां से। कुरान की आयत नाजिल हुई कि
  1587. 1:09:22अगर दोनों शादी करना चाहते हैं तो भाई
  1588. 1:09:23क्यों रोक रहा है? तो अल्लाह के नबी ने
  1589. 1:09:25उनको हुकुम दिया यह शादी तुम रोक नहीं
  1590. 1:09:28सकते। तब भाई ने कहा माक ने कहा ठीक है
  1591. 1:09:30अलान या रसूल अल्लाह अल्लाह रसूल अब मैं
  1592. 1:09:32बीच में नहीं आऊंगा शादी हो जाने दो ये आप
  1593. 1:09:35देखिए जॉइंट फैमिली सिस्टम नहीं है लेकिन
  1594. 1:09:37मोहब्बत कितनी है आज अगर बहन को तलाक हो
  1595. 1:09:39जाए हमारे घर पर आए हम क्या हाल करेंगे
  1596. 1:09:41उसका पता है लेकिन ये सबा ने क्या हाल
  1597. 1:09:43किया जाबिर बिन अब्दुल्ला रदी अल्लाह ताला
  1598. 1:09:45जॉइंट फैमिली सिस्टम में ये लोग नहीं रहते
  1599. 1:09:47थे लेकिन बाप ने नौ बेटियों को छोड़ के
  1600. 1:09:49शहादत हासिल की इन नौ बेटियों को पालपस के
  1601. 1:09:52एक भाई ने अकेले बड़ा किया
  1602. 1:09:54तो बंटवारे का यह मतलब नहीं होता है कि आप
  1603. 1:09:57जो है बिल्कुल अलग कर दो। बल्कि मैं बात
  1604. 1:10:00खत्म करता हूं। ये जुबैर रदी अल्लाह ताला
  1605. 1:10:02जिनकी मिसाल मैंने पेश किया। इन्होंने एक
  1606. 1:10:05स्पेशल घर बनवा के रखा था बैकअप के तौर
  1607. 1:10:08पे। क्या कि अगर मेरी किसी बेटी को तलाक
  1608. 1:10:10हो गया है तो बेटी यहां आके रहेगी। आप
  1609. 1:10:12सोचिए इतना ख्याल रिश्तों का। आप क्या
  1610. 1:10:14समझते हो ये जालिमाना निजाम है इस्लाम का?
  1611. 1:10:16जो कहता है जॉइंट फैमिली सिस्टम में रहने
  1612. 1:10:18से दिक्कतें आती हैं। तो इसका मतलब नहीं
  1613. 1:10:20कि रिश्तों का मुखालिफ है। आज हमारे यहां
  1614. 1:10:22शायद ही कोई ऐसी मिसाल मिले कि किसी बाप
  1615. 1:10:24ने अपनी बेटी का कोई बैकअप तैयार किया हो
  1616. 1:10:26कि कल को तलाक हो जाए कहां जाएगी मेरे
  1617. 1:10:28मरने के बाद। लेकिन जुबैर रज़ अल्लाह ताला
  1618. 1:10:30ने बैकअप में घर बना के रखे थे कि अगर
  1619. 1:10:32किसी भी मेरी बेटी को तलाक होती है या
  1620. 1:10:35बेवा होती है, बेसहारा होती है तो इस घर
  1621. 1:10:37में आके रहेगी मेरी बेटी।
  1622. 1:10:39ये ये साहब इराम थे। तो कहने का मतलब है
  1623. 1:10:42कि बंटवारे का ये मतलब नहीं कि रिश्ते
  1624. 1:10:43खत्म कर दो। हर अलग-अलग करो ताकि यह
  1625. 1:10:46रिश्ते बाकी रहे। खानदान टूटना इसको नहीं
  1626. 1:10:49कहते हैं बंटवारा। खानदान टूटना क्या होता
  1627. 1:10:51है? जो हमारा टॉपिक है खानदान टूटना।
  1628. 1:10:53खानदान टूटने का मतलब बंटवारा नहीं है।
  1629. 1:10:55खानदान टूटने का मतलब रिश्ते को खत्म करना
  1630. 1:10:57है। बातचीत को खत्म करना है। बोलचाल को
  1631. 1:10:59बंद करना है। भाई-भाई को सलाम नहीं कर रहा
  1632. 1:11:01है। ये घर टूटना है। ये घर टूटना नहीं है
  1633. 1:11:03कि बड़ा सा घरता दो हिस्से में बंट गया। ये
  1634. 1:11:06घर टूटना नहीं है। घर आबाद हो रहा है। घर
  1635. 1:11:08टूटेगा तब जब भाई भाई से बात नहीं करेगा।
  1636. 1:11:10जब बेटा बाप से बात नहीं करेगा। बाप बेटे
  1637. 1:11:12से बात नहीं करेगा। बल्कि बाद लोगों ने
  1638. 1:11:14कहा कि कभी-कभी बेटा इतना नाराज होता है
  1639. 1:11:16कहता है मैं अपने बाप की मयत पे नहीं
  1640. 1:11:17जाऊंगा। उसका जनाजा नहीं पढूंगा। उसने
  1641. 1:11:19मेरे साथ ये अत्याचार किया। इसको बोलते है
  1642. 1:11:21घर टूटना। एक साथ जहां रह रहे हैं उस घर
  1643. 1:11:24को तोड़ के बांटना विरासत तकसीम करना
  1644. 1:11:26अलग-अलग रहना। ये घर तोड़ना नहीं। घर
  1645. 1:11:28तोड़ना रिश्तों को तोड़ना। तो ये चंद
  1646. 1:11:30बातें थी। इस ताल्लुक से जो मैं आपके
  1647. 1:11:32सामने पेश कर सका कि घर टूटने के असबाब
  1648. 1:11:34क्या होते हैं। अल्लाह ताला से दुआ है।
  1649. 1:11:36अल्लाह ताला हम सबको किताब सुन्नत की
  1650. 1:11:37रोशनी में अपना हर मसला हल करने की तौफीक
  1651. 1:11:39अता फरमाए। किताब सुन्नत पर जब तक हम
  1652. 1:11:41जिंदा है चलाए। आमीन रबीन
  1653. 1:11:43ऐसे ही फायदेमंद इस्लामिक वीडियोस देखने
  1654. 1:11:46और मनहज सलफ पर किताब सुन्नत की तालीमात
  1655. 1:11:49को आम करने में हमारा ताुन करें ताकि आपके
  1656. 1:11:52लिए जरिया नजात जन्नत के हुसूल का सबब साथ
  1657. 1:11:55ही माल में बरकत व इजाफे का जरिया भी बने
  1658. 1:11:59आमीन जजाक अल्लाह खैरन

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This page contains the full transcript of Ghar Aur Khandaan Tootne Ke 10 Asbaab By Shaikh Kifayatullah Sanabili | IIC Mumbai by iic Mumbai - Islamic Information Centre Mumbai, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 13,450 words across 1,658 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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