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GEET GOVIND Ne Jo Sikhaya... Uska Uttar Mujhe RADHA KUND Mai Mila — Transcript

by RADHIKA TENORIA · 3,003 words · 351 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00[संगीत]
  2. 0:04आज से छ महीने पहले ना मैंने खुद से बोला
  3. 0:06था कि मैं रोज गीत गोविंद पढूंगी। बस कुछ
  4. 0:10साबित नहीं करना था ना कुछ देखना था ना ये
  5. 0:13टेस्ट करना था कि गीत गोविंद पढ़ने से वो
  6. 0:15चेंजेस आते हैं नहीं आते क्या होता है
  7. 0:18कैसा महसूस होता है। ऑनेस्टली ऐसा कुछ भी
  8. 0:20नहीं था। बस अपनी लाइफ में ना कुछ चेंजेस
  9. 0:24लाने थे। अपनी लाइफ के रूटीन को ना कुछ
  10. 0:26उसमें पॉजिटिव ऐड करना था। क्या पता रोज
  11. 0:29गीत गोविंद पढ़ने से मेरी लाइफ का जो
  12. 0:32एक्सपीरियंसेस है ना मुझे कुछ अलग-अलग
  13. 0:34एक्सपीरियसेस हो। कोई ऐसा रीजन नहीं था कि
  14. 0:36मुझे कोई प्रेशर है या फिर लाइफ में कोई
  15. 0:39बहुत ज्यादा सैडनेस है या फिर मैं कोई
  16. 0:41बहुत ज्यादा चेंज मांग रही हूं या फिर मैं
  17. 0:43कोई ट्रांसफॉर्मेशन देख रही हूं। कोई
  18. 0:45चैलेंज कर रही हूं। नहीं बस अपनी लाइफ में
  19. 0:47अपनी रोजाना डेली हैबिट्स में कुछ चेंजेस
  20. 0:50लाना चाहती थी। अपनी रूटीन में कुछ ऐड ऑन
  21. 0:53करना चाहती थी। कुछ ऐसा ऐड ऑन जिससे मैं
  22. 0:55शायद राधा कृष्ण जी के और पास जा सकूं।
  23. 0:58इसलिए मैंने सोचा कि गीत गोविंद का एक
  24. 1:00छोटा सा हिस्सा मैं रोज पढूंगी। इन छ
  25. 1:03महीनों में ना मेरा जो एक्सपीरियंस रहा
  26. 1:06इसके साथ कुछ फील हुआ कुछ फील नहीं हुआ।
  27. 1:09अगर आपको याद हो तो मैंने कुछ महीनों पहले
  28. 1:11राधा कृपा कटाक्ष एक वीडियो शेयर करी थी।
  29. 1:14उसके साथ जो मेरे पर्सनल एक्सपीरियंसेस है
  30. 1:16वो शेयर करे थे। तो उस टाइम पर ना मैंने
  31. 1:20उस टाइम से भी कुछ महीने पहले से मैं गीत
  32. 1:22गोविंद रोजाना पढ़ रही थी। सो हियर आई एम
  33. 1:25बैक विद दिस वीडियो राइट नाउ। आपको पता है
  34. 1:28गीत गोविंद क्या है? मतलब गीत गोविंद को
  35. 1:31किसने लिखा था? क्यों लिखा था? गीत गोविंद
  36. 1:34का मतलब क्या है? अगर आप जान जाएंगे ना
  37. 1:36अगर आप गीत गोविंद पढ़ेंगे और गीत गोविंद
  38. 1:40पढ़ने के साथ-साथ अगर आप यह समझेंगे ना कि
  39. 1:42उस एक-एक पंक्ति का उस पंक्ति के क्या
  40. 1:45मतलब है तो सच में आपकी आंखों से ना आंसू
  41. 1:48आ जाएंगे। गीत गोविंद जयदेव जी ने लिखा
  42. 1:50था। आप जानते हैं गीत गोविंद जयदेव जी ने
  43. 1:53लिखा तो था लेकिन उनको लिखने वाले वो नहीं
  44. 1:56थे। लिखवाने वाले स्वयं मेरे कान्हा थे।
  45. 2:00अगर आप गीत गोविंद का मतलब समझेंगे ना
  46. 2:02आपको समझ में आएगा कि गीत गोविंद तो राधा
  47. 2:04कृष्ण जी की प्रेम को दर्शाता है। उनका
  48. 2:07इतना प्योर रिश्ता बताता है जो जो शायद
  49. 2:11कोई कभी ना कर पाता ना एक शब्दों में उनके
  50. 2:14रिश्तों को बयां करना वो गीत गोविंद ने
  51. 2:17किया है। आपको पता है जब मैंने गीत गोविंद
  52. 2:19के साथ शुरू किया था तो ऑनेस्टली
  53. 2:21स्टार्टिंग स्टार्टिंग में तो मुझे कुछ
  54. 2:23ज्यादा फील नहीं हुआ ना ही मुझे कुछ समझ
  55. 2:26में आया। पढ़ते टाइम उसकी प्रोनंसिएशन में
  56. 2:28भी दिक्कत आती थी। लेकिन मैंने ना उसको
  57. 2:30बंद नहीं किया। मैंने कंटिन्यू रखा। फोन
  58. 2:33में निकाला गीत गोविंद लिरिक्स निकाली
  59. 2:35उसको गाती थी लेकिन प्रॉपर नहीं गा पाती
  60. 2:38थी। क्योंकि पहली बारी में अगर उनको वो
  61. 2:40लैंग्वेज नहीं आती हो तो वो नहीं गा
  62. 2:42पाएंगे। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है ना कि
  63. 2:45बीच में छोड़ना नहीं है। उसको कंटिन्यू
  64. 2:47रखना है। शायद कुछ आपको समझ में भी ना आए।
  65. 2:51आप वो सब कुछ वो जो भी कह रहे हैं ना गीत
  66. 2:53गोविंद में वह सब कुछ आपके सिर के ऊपर से
  67. 2:55निकलेगा। आप शायद एक-एक वर्ड पढ़ने में आप
  68. 2:58थोड़ा-थोड़ा टाइम ले लेकिन समय के साथ-साथ
  69. 3:01ना आप गीत गोविंद में इतने ज्यादा फ्लुएंट
  70. 3:03हो जाएंगे जैसे आप मानो उसको बिना देखे आप
  71. 3:06उसको गा रहे हो और धीरे-धीरे ना आपको उसका
  72. 3:09मतलब समझ में आने लगेगा। मेरे साथ
  73. 3:10स्टार्टिंग में क्या हुआ कि मुझे कुछ भी
  74. 3:12समझ में नहीं आता था। तो सेम मैंने भी यही
  75. 3:15सोचा कि मैं इसको कंटिन्यू रखती हूं
  76. 3:17क्योंकि मुझे पता था कि अगर कुछ फीलिंग
  77. 3:19आएगी भी अगर मुझे इसको पढ़ के कुछ
  78. 3:21एक्सपीरियंसेस जनरेट होंगे भी तो उसमें
  79. 3:24टाइम लगेगा। काफी हफ्ते ऐसे भी बीते जब
  80. 3:27मैंने बस ये गोविंद पूरा एक एक रूटीन की
  81. 3:29तरह पढ़ा। उसको पढ़ने के पीछे कोई
  82. 3:31फीलिंग्स नहीं थी। कुछ फील नहीं हो रहा
  83. 3:33था। बस वर्ड टू वर्ड पढ़े जा रही थी। ऐसे
  84. 3:36मानो जैसे जैसे एक रूटीन हो। जैसे कि बस
  85. 3:38सुबह-सुबह जैसे हम जाते थे ना स्कूल और
  86. 3:40हमें सुबह-सुबह प्रेयर करनी होती क्योंकि
  87. 3:42वो हमारा रूटीन होता था। कई बार ऐसा भी
  88. 3:44लगा कि बस मैं पढ़ रही हूं क्योंकि पढ़ना
  89. 3:47है क्योंकि अब ये रूटीन का पार्ट बन चुका
  90. 3:49है। कई बार ऐसे लगा कि गातेगाते मानो कुछ
  91. 3:52महसूस होने लगा हो। गातेगाते मानो ऐसे
  92. 3:55लगने लगा हो कि पहुंच चुके हैं वहां पे
  93. 3:57वापस वो उसी ब्रिज की गलियों में 5000 साल
  94. 4:00पहले जब राधा कृष्ण हुआ करते थे। अलग-अलग
  95. 4:03टाइम अलग-अलग एक्सपीरियंसेस फील हो रहे
  96. 4:05हैं। जरूरी नहीं है कि आप रोज गीत गोविंद
  97. 4:08पढ़ोगे और रोज आपको कुछ ना कुछ नया
  98. 4:10एक्सपीरियंस आपको महसूस होगा। आपको देखने
  99. 4:12को मिलेगा। नहीं कभी कुछ अच्छा
  100. 4:15एक्सपीरियंस मिलेगा। कभी शायद आपको कुछ भी
  101. 4:17फील नहीं होगा। कभी शायद नॉर्मल डेज
  102. 4:20जाएंगे। हो सकता है आप एकद दिन भूल भी
  103. 4:23जाए। आप एकद दिन ना पढ़ पाए। एंड दैट्स
  104. 4:25अब्सोलुटली नॉर्मल। आपकी हर एक चीज में
  105. 4:28पता है। आप जब भी अपने लाइफ में आप एक कोई
  106. 4:32नया रूटीन ऐड ऑन करते हो ना तो आप सोचते
  107. 4:35हो कि यार मैं इसको पूरा 100% दूंगी। आप
  108. 4:38अपनी तरफ से देते भी हो। आपने उस चीज को
  109. 4:41दो दिन किया, तीन दिन किया, एक हफ्ता किया
  110. 4:43और फिर वो चीज दो दिन आपसे रह गई। किसी भी
  111. 4:46वजह से वो चीज रह गई। आपको लगता है कि यार
  112. 4:49मैं तो नहीं कर पाई। और इस चक्कर में ना
  113. 4:52आप उस चीज को फिर हमेशा के लिए छोड़ देते
  114. 4:54हो। वो चीज दो दिन के लिए आपसे क्या रही
  115. 4:56या फिर उसको कंटिन्यू ही नहीं रखते।
  116. 4:59क्यों? क्योंकि आप उसके साथ कंसिस्टेंट
  117. 5:01नहीं रहते। देखो कंसिस्टेंसी का मतलब ना
  118. 5:04ये नहीं है कि आप वो चीज हर रोज करो। उसी
  119. 5:06टाइम करो। उसी टाइम ड्यूरेशन पे नहीं। हो
  120. 5:10सकता है कि आपने स्टार्टिंग में सोचा हो
  121. 5:12कि मैं रोज पढूंगा पढूंगी। लेकिन आप उसको
  122. 5:15सिर्फ हफ्ते में तीन या चार दिन पढ़ पाए।
  123. 5:18बट द कैच इज कि आपने उसको कभी पढ़ना नहीं
  124. 5:21छोड़ा। आपको 1 साल हो गया। आपको 2 साल हो
  125. 5:24गया। हो सकता है बीच में एक आध दिन आपसे
  126. 5:26छूट जाता हो लेकिन वो प्रैक्टिस आपकी बनती
  127. 5:29गई। आपने उसको छोड़ा ही नहीं। इस तरह बनती
  128. 5:31है कंसिस्टेंसी। और इस तरह जनरेट होते हैं
  129. 5:34आपके एक्सपीरियंसेस। पता है कई बार यह
  130. 5:36वाली फीलिंग भी आई कि यार छोड़ देते हैं
  131. 5:38ना ये क्या मैंने एक नया रूटीन ऐड ऑन कर
  132. 5:40लिया अपनी लाइफ में। मेरे को इसमें
  133. 5:42एक्स्ट्रा टाइम देना पड़ता है। एक्स्ट्रा
  134. 5:44एफर्ट्स देने पड़ते हैं। कई बार ऐसी
  135. 5:45फीलिंग आई। लेकिन पता है जबजब ऐसी फीलिंग
  136. 5:49आती थी ना तब-तब कुछ ना कुछ तो हो जाता
  137. 5:51था। लाइक या तो मुझे कोई पंक्ति का मतलब
  138. 5:54समझ में आ जाता था या फिर मुझे एकदम से
  139. 5:57कुछ ऐसा एक्सपीरियंस होता था, ऐसा लगता था
  140. 5:59कि जैसे मानो राधे कृष्ण मेरे पास है,
  141. 6:01मेरे साथ हैं। आपको पता है कुछ ना कुछ ऐसा
  142. 6:04होता गया कि मैंने गीत गोविंद पढ़ना मैंने
  143. 6:06छोड़ा ही नहीं और वो मेरी लाइफ का रूटीन
  144. 6:08बन गया। और ऑनेस्टली मैं आपको बता रही
  145. 6:10हूं। मैं बिल्कुल मजाक नहीं कर रही। आपको
  146. 6:12पता है मेरे साथ भी ऐसा हुआ।
  147. 6:15पता है क्या होता है कि कोई भी आके हमें
  148. 6:18कुछ भी बोल जाता है और ना उसकी बात हमें
  149. 6:21इतनी ज्यादा चुप जाती है कि हम पूरे दिन
  150. 6:23बस उसी के बारे में सोचते रहते हैं या फिर
  151. 6:27हमारी किसी से छोटी सी नोजक क्या हो जाती
  152. 6:30है हम पूरा दिन उसी के बारे में सोचते
  153. 6:32रहते हैं कि यार उसने मुझे ऐसे बोला मैंने
  154. 6:35उसको ऐसे बोला मैं उसको इस तरह भी बोल
  155. 6:37सकती थी मैं इस तरह बोलती ना तो मेरा
  156. 6:39रिस्पांस ज्यादा अच्छा जाता और फिर उसने
  157. 6:41मुझे ऐसे बोल कैसे दिया यार वो मेरे दोस्त
  158. 6:44है वो मुझ पे यकीन क्यों नहीं कर रही?
  159. 6:46व्हाई इजंट शी ट्रस्टिंग मी? आपको पता है
  160. 6:49हम ऐसी छोटी-छोटी छोटी-छोटी चीजें हमारे
  161. 6:51दिमाग में चलती रहती है। हमारी किसी से एक
  162. 6:54मिनट की कन्वर्सेशन होती है। वो हमें कुछ
  163. 6:56भी बोल के चला जाता है और हम बस उसी के
  164. 6:59बारे में सोचते रहते हैं। आपको पता है
  165. 7:01मैंने एक चीज शुरू नहीं करी थी। तो मैंने
  166. 7:03मल्टीपल चीजें शुरू करी। तो हो सकता है कि
  167. 7:06उन सारी मल्टीपल चीजों का रिजल्ट यह निकल
  168. 7:09के आया। लेकिन क्योंकि उन मल्टीपल चीजों
  169. 7:12में गीत गोविंद एक हिस्सा था। तो इसीलिए
  170. 7:15मैं आपको यह एक्सपीरियंस इसके अंदर भी
  171. 7:17शेयर कर रही हूं। उन मल्टीपल चीजों में
  172. 7:19मेरा राधा कृपा कटाक्ष आता है, गीत गोविंद
  173. 7:22आता है, नाम जप आता है, मेडिटेशन आता है।
  174. 7:25तो ये सारी जब कॉम्बिनेशन ऑफ़ चीजें मैंने
  175. 7:27ट्राई करी हैं। तो अल्टीमेटली ऑनेस्टली
  176. 7:31मैं ऐसी नहीं थी। मुझे कोई भी अगर कोई बोल
  177. 7:33के जाता था ना कुछ भी अगर वो मुझे बात
  178. 7:36बहुत ज्यादा बुरी लगी ना मेरे उसी टाइम
  179. 7:38आंखों से आंसू आ जाते थे। वि टाइम ना लाइफ
  180. 7:40में कितनी भी मुश्किलें क्यों ना आई हो
  181. 7:43लाइक ऑनेस्टली
  182. 7:45लाइफ में कुछ ऊपर नीचे हो गया हो कोई कोई
  183. 7:48चीजें है जो मेरी इस तरीके से नहीं सेट
  184. 7:50बैठ रही जैसा मैंने सोचा था वैसा नहीं हो
  185. 7:52रही है जो कि 90% ऑफ़ द टाइम नहीं होता कोई
  186. 7:55बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट चीज है और वो और
  187. 7:57वो मेरी बन के ही नहीं दे रही मेरे काम
  188. 7:59नहीं बन रहे बट फिर भी मन के अंदर शांति
  189. 8:02है आपको ऐसा लगता है मन में 100 चीजें चल
  190. 8:05रही है इतना ज्यादा स्ट्रेस है इतनी
  191. 8:07ज्यादा प्रॉब्लम है कि बस कुछ काम ही नहीं
  192. 8:10हो रहा। वो चीज पता नहीं कैसी फीलिंग होती
  193. 8:13है दूर-दूर तक। अब मुझे याद ही नहीं है।
  194. 8:16और मेरा जो ये वाला वर्जन है ना आई जस्ट
  195. 8:18लव्ड इट। अब मैं इसका रीज़न क्या समझूं?
  196. 8:21क्यों हुआ होगा ये सब? देखो मैंने अपनी
  197. 8:24लाइफ में जो चेंजेस करे हैं ऑब्वियसली
  198. 8:26उसकी वजह से तो ये सब चेंजेस आए होंगे ना।
  199. 8:29ऐसे थोड़ी ना है कि अपने आप ही ऐज बढ़ रही
  200. 8:31है तो फिर आप मैच्योर हो रहे हैं।
  201. 8:32ऑब्वियसली इट डजंट वर्क लाइक दैट। तो जो
  202. 8:35मैंने अपनी लाइफ में चेंजेस करे हैं उसी
  203. 8:37की वजह से तो यह सारे चेंजेस आ रहे होंगे।
  204. 8:39पता है जब मेरे साथ धीरे-धीरे ऐसा होने
  205. 8:41लगा ना तब मुझे रियलाइज हुआ कि बदलाव आ
  206. 8:44रहे हैं। राधिका तेरे अंदर चेंजेस आ रहे
  207. 8:47हैं। तेरे अंदर कुछ ऐसे चेंजेस आ रहे हैं
  208. 8:50जो शायद पहले तेरी पर्सनालिटी का पार्ट
  209. 8:52कभी थे ही नहीं। आपको पता है इसमें एक
  210. 8:56श्लोक यह भी आता है जिसका मतलब यह होता है
  211. 8:58कि पता है आपके अंदर अंदर की जो भक्ति
  212. 9:00होती है ना वो दिखाने के लिए नहीं होती।
  213. 9:03भक्ति होती है अपने लिए अपने अंदर की
  214. 9:06शांति के लिए और पता है आप जब यह अपने
  215. 9:11माइंड में बिठा लोगे ना तो आपके अंदर से
  216. 9:13ना जो प्रेशर होता है वो निकल जाएगा और
  217. 9:16इससे मुझे एक चीज याद आई कि मैं अभी
  218. 9:18रिसेंटली गोवर्धन गई थी तो वहां पे ना
  219. 9:21मैंने मैंने दो लोगों को देखा इनफैक्ट दो
  220. 9:24भक्तों को देखा राधाकुंड में जहां पे मैं
  221. 9:27बैठी हुई थी वहां पे एक छोटी सी बच्ची थी
  222. 9:30अब मान लीजिए 13 14 साल की वो बच्ची होगी
  223. 9:33और वो राधा कुंड के अंदर जोरजोर से बस
  224. 9:36राधा राधा राधा बस ऐसे राधा जी को वो
  225. 9:40पुकारे जा रही थी। दूसरी ओर जो दूसरा भक्त
  226. 9:43था वो वो भी राधा कुंड के अंदर था। उसके
  227. 9:47हाथ में माला थी और राधा कृपा कटाक्ष का
  228. 9:50एक पेपर जिसमें पूरा राधा कृपा कटाक्ष
  229. 9:53लिखा हुआ था और वो 108 बार राधा कृपा
  230. 9:56कटाक्ष राधा कुंड के अंदर पढ़ रहा था। तो
  231. 9:59यहां पे दो चीजें थी। एक इंसान था जो जो
  232. 10:02चुपचाप एकदम साइड में अपने में बस राधा
  233. 10:06कृपा कटाक्ष मन में पड़ी जा रहा था और और
  234. 10:09अपना काम कर रहा था। दूसरी ओर जो दूसरी
  235. 10:11लड़की थी वो जोरजोर से बोल के राधा जी को
  236. 10:15पुकार रही थी। तो इसका मतलब यह नहीं है कि
  237. 10:19आप उस वाली को जोर-जोर से बोल रही है आप
  238. 10:22उसको ऐसे बोलो कि यार ये ढोंगी है। बस ऐसे
  239. 10:25सबकी नींद खराब कर रही है। ऐसे थोड़ी ना
  240. 10:27होती है भक्ति। नहीं वो उसका वे ऑफ स्टाइल
  241. 10:30है। उसका स्टाइल वैसा है। अब उसको नहीं आ
  242. 10:33रही शर्म तो भाई तुम्हें क्या दिक्कत है?
  243. 10:36दूसरी तरफ अगर कोई दूसरा इंसान है वो मुंह
  244. 10:38बंद करके अपने मन में कुछ पढ़ रहा है तो
  245. 10:41वो उसका तरीका है भक्ति दिखाने का। हम ऐसे
  246. 10:44नहीं बोल सकते ना कि यार ये इसकी भक्ति
  247. 10:47सच्ची है और इसकी भक्ति सच्ची नहीं है। हु
  248. 10:50आर यू टू कंपेयर? यह पॉइंट मैं इधर इसलिए
  249. 10:54रेज किया क्योंकि वहां पर काफी लोग थे जो
  250. 10:58जो छोटी बच्ची थी जो राधा जी को जोर-जोर
  251. 11:00से पुकार रही थी उसको बोल रहे थे कि यार
  252. 11:03सबकी नींद खराब करती है। देखना चाहिए ना
  253. 11:05रात को सब सो रहे होंगे और ऐसे जोर-जोर से
  254. 11:08राधा नाम पुकार रही है।
  255. 11:13आई डू नॉट अंडरस्टैंड द पॉइंट। तुमने कैसे
  256. 11:17जज किया कि उसकी भक्ति फेक है और तुम्हारी
  257. 11:20भक्ति सच्ची है? मतलब तुम्हें पता है
  258. 11:23उन्होंने क्या बोला? वो बोलते हैं कि राधा
  259. 11:26जी को तो सिर्फ प्यार की भूखी है। उनको
  260. 11:27थोड़ा ऐसा दिखावा चाहिए। तो अल्टीमेटली
  261. 11:31भाई साहब वो लड़की कर ही क्या रही है?
  262. 11:33प्यार ही तो दे रही है। अपनी भक्ति तो दे
  263. 11:35रही है। अपने आप को समर्पित ही तो कर रही
  264. 11:37है। और अगर वह ऐसे जोरजोर से बोल भी रही
  265. 11:41है तो सो व्हाट वो उसका तरीका है। उसको
  266. 11:44नहीं है शर्म। उसको पड़ी नहीं है दुनिया
  267. 11:47वालों की। भाई उसको नहीं पड़ी कि कौन मुझे
  268. 11:49क्या बोल रहा है, कौन मुझे देख रहा है।
  269. 11:51नहीं वो तो अपने में खोई हुई है बुरी। सो
  270. 11:55हु आर यू टू जज कि किसकी भक्ति असली है और
  271. 11:57किसकी भक्ति असली नहीं है। आप जब पता है
  272. 12:00यह सारी चीजें पढ़ने लग जाते हो ना आप जब
  273. 12:02नाम जप करते हो, मेडिटेशन करते हो, राधा
  274. 12:04कृपा कटाक्ष करते हो, गीत गोवन करते हो या
  275. 12:06फिर कुछ भी ऐसा जो आपको भगवान के और
  276. 12:08ज्यादा करीब ले जाता है। आप आप भक्तों की
  277. 12:10कहानियां सुनते हो। आपको अल्टीमेटली ना
  278. 12:14आपको जो भी दिखाई देगा ना आसपास सपोज आपको
  279. 12:17कोई दिख गया जिसने टीका लगा रखा है वैष्णव
  280. 12:20का तो आप कुछ नहीं देखोगे। आप बस ये देखो
  281. 12:22कि ये तो भगवान का भक्त है। आपको कोई दिख
  282. 12:25जाए जो आपकी गली से जा रहा हो राधा राधा
  283. 12:27जपते जपते आप कुछ देखोगे। आपके मन में ये
  284. 12:30नहीं आता कि ये ढोंग कर रहा है या फिर ये
  285. 12:32असली है। नहीं बस ये आता है अरे ये तो
  286. 12:34भगवान का नाम ले रहा है। ये तो भगवान का
  287. 12:36भक्त है। आपको पता है जो असली भक्ति करते
  288. 12:39हैं ना उनका माइंड इतना ज्यादा इनोसेंट से
  289. 12:42भर जाता है कि उनको उनको कुछ खराब दिखाई
  290. 12:45नहीं देता। उनको हर जगह ना बस बस कृष्ण
  291. 12:48भक्त, राधा भक्त बस भगवान के लोग दिखाई
  292. 12:51देते हैं। पता है जो असली भक्त होते हैं
  293. 12:52ना उनको ये सारी चतुराई, दुनियादारी उनको
  294. 12:55नहीं आता ये सब करना। वो ना अपने में मगन
  295. 12:58होते हैं। अब जैसे कि आपने देखा होगा श्री
  296. 13:00राम व्यास जी, हरिदास जी या फिर जो भी
  297. 13:04हमारे संत हुए हैं क्या करते थे? हरिदास
  298. 13:07जी क्या करते थे? वो जाते थे निधिवन आराम
  299. 13:10से उधर बैठते थे और बस संगीत गाते थे राधा
  300. 13:13कृष्ण जी के लिए। कोई भी अगर उधर से आरा
  301. 13:16जा रहा होता था उनको कोई पड़ी नहीं होती
  302. 13:18थी क्योंकि वह देखते ही नहीं थे उनको उनको
  303. 13:21कोई फर्क ही नहीं पड़ता था कि बाकी लोग
  304. 13:23उनको देख रहे हैं उनको देख के क्या बोल
  305. 13:25रहे हैं नहीं उनके दिमाग में कुछ ऐसा आता
  306. 13:28ही नहीं था और अगर गलती से उनके दिमाग में
  307. 13:30ये आ जाए ना कि यार मेरी वजह से इन लोगों
  308. 13:32को दिक्कत हो रही है तो फिर वो शायद वो
  309. 13:35बंद ही कर दे अपना वो काम करना वो शायद
  310. 13:37कहीं और जाके चले जाएं अपना वो काम अपना
  311. 13:40भजन कहीं और करें क्योंकि उनको किसी और को
  312. 13:42तकलीफ पहुंचाना उनको अच्छा ही नहीं लगता
  313. 13:44वो भगवान के भक्त हैं यार उनसे ज्यादा
  314. 13:46इनोसेंट आउट कोई नहीं होता। हम वृंदावन जा
  315. 13:50रहे हैं ब्रिज की भूमि में। ब्रिज की भूमि
  316. 13:52में अगर कोई राधा नाम नहीं पुकारेगा तो और
  317. 13:55क्या करेगा यार? देखो मैं कुछ ऐसा नहीं
  318. 13:57बोलूंगी कि ये सब अभी करने से मेरी लाइफ
  319. 14:00एकदम बदल सी गई है। बहुत ही ज्यादा मेजर
  320. 14:03चेंजेस आ गए हैं। लेकिन हां
  321. 14:06एक शांति एक एक हैप्पीनेस एक संतुष्टि वो
  322. 14:11क्या होता है ना वो फीलिंग क्या होती है?
  323. 14:13वो जरूर मैं आपको बता सकती हूं क्योंकि वो
  324. 14:15वो मुझे फील होती है और डेफिनेटली यह सब
  325. 14:19करने से ना मैं यह नहीं बोल सकती कि आपकी
  326. 14:21जो सारी प्रॉब्लम्स है वो सॉल्व हो
  327. 14:23जाएंगी। आपका कोई फाइनशियल इशू है या फिर
  328. 14:26कोई भी कोई भी आपकी दिक्कतें चल रही है ना
  329. 14:29देखो अल्टीमेटली तो वो सॉल्व हो ही
  330. 14:30जाएंगी। लेकिन कितनी देर में होंगी, कितना
  331. 14:33टाइम लगेगा मैं कुछ नहीं कह सकती। लेकिन
  332. 14:35मैं इस चीज की जरूर गारंटी दे सकती हूं कि
  333. 14:38ये सब चीजें करने से आपको इतनी ज्यादा
  334. 14:42शांति महसूस होगी। आपको इतना ज्यादा
  335. 14:44सेटिस्फेक्शन महसूस होगा। मतलब आपको ऐसा
  336. 14:48लगेगा कि यार लाइफ जैसी भी है ना एकदम सही
  337. 14:50चल रही है। आपको लाइफ में प्रॉब्लम्स
  338. 14:53होंगी डेफिनेटली होंगी। लेकिन वो
  339. 14:55प्रॉब्लम्स ना आपको बड़ी लगेंगी ही नहीं।
  340. 14:57आई डोंट नो ऐसे कैसे होता है। पर यह
  341. 14:59फीलिंग आ जाती है। और जब ये फीलिंग आती है
  342. 15:01ना तो ट्रस्ट मी जीने में बहुत मजा आता
  343. 15:04है। तो अगर आप भी सोच रहे थे गीत गोविंद
  344. 15:07पढ़ने का, गीत गोविंद को अपनी लाइफ में
  345. 15:09इंट्रोड्यूस करने का, उसको अपनी लाइफ का
  346. 15:11रूटीन बनाने का तो इसको स्टार्ट जरूर
  347. 15:13कीजिएगा। और आपके जो एक्सपीरियंसेस है
  348. 15:15मुझे इस वीडियो के नीचे कमेंट सेक्शन में
  349. 15:17आके जरूर बताना। तो मिलते हैं ऐसी और
  350. 15:20वीडियोस के साथ। तब तक के लिए बाय बाय।
  351. 15:22राधे राधे

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This page contains the full transcript of GEET GOVIND Ne Jo Sikhaya... Uska Uttar Mujhe RADHA KUND Mai Mila by RADHIKA TENORIA, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,003 words across 351 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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