Full Stock Market Fundamental course in hindi 6 hours [2020-2025 videos compilation] — Transcript
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- 0:00जब 10 साल के बच्चों ने शेयर्स पिक किए और
- 0:02उनके मुकाबले में थे चार्टर्ड
- 0:04अकाउंटेंट्स। उन्होंने भी शेयर्स पिक किए।
- 0:06तो 10 साल के बच्चों ने ज्यादा बेटर
- 0:09स्टॉक्स पिक किए। ज्यादा पैसा कमाया। कैसे
- 0:11किया ये 10 साल के बच्चों ने जानेंगे इस
- 0:14वीडियो में। नमस्कार दोस्तों, मैं हूं
- 0:16प्रांजलल कामरा। आज फिनोलॉजी में हम
- 0:18क्लियर करेंगे स्टॉक मार्केट के सारे
- 0:20बेसिक्स। बिगिनर्स को शेयर बाज़ार का नाम
- 0:23सुन के ही डर लगता है। फिल्मों में देखा
- 0:25है कि शेयर बाजार से सब कुछ बर्बाद हो
- 0:28जाता है। लेकिन दोस्त हैं जो क्लेम करते
- 0:30हैं कि वो बहुत पैसा कमा रहे हैं। फिर भी
- 0:32आपके परिवार वाले हैं जो बोलते हैं इससे
- 0:35दूर रहो। ऊपर से स्कूल और कॉलेज में अगर
- 0:38आपने कॉमर्स की पढ़ाई की है तो भी शेयर
- 0:40बाजार के बारे में ठीक से समझाया ही नहीं
- 0:42गया। ऐसे में कंफ्यूजन होना, नर्वसनेस
- 0:45होना बहुत लाजमी है। सबसे पहले एक फन
- 0:48फैक्ट जान के आपका इंटरेस्ट जगा देते हैं।
- 0:51अगर आपने 40 साल पहले विp्रो में पता है
- 0:54हो सकता है आप तब पैदा भी ना हुए हो। आपकी
- 0:56फैमिली में किसी ने अगर विp्रो के शेयर
- 0:58में ₹10,000 लगाए होते तो आज 40 साल बाद
- 1:01वो ₹700 करोड़ होते। मुझे पता है आपके मन
- 1:05में सवाल आएगा तब 10,000 किसके पास होते
- 1:07थे? 1,000 लगाए होते तो भी वो 70 करोड़
- 1:10होते। ₹100 तो थे वो भी लगाए होते तो आज
- 1:13₹7 करोड़ थे। तो ये पोटेंशियल है स्टॉक
- 1:16मार्केट का। अब इस एग्जांपल से ये मत
- 1:18सोचिएगा कि मैं बस हर कीमत पे चाहता हूं
- 1:20कि आप इस मार्केट में एंटर हो ही जाइए।
- 1:22डेफिनेटली मार्केट में रिस्क भी है। जिस
- 1:25तरह ऐसा फायदा होता है उसी तरह नुकसान भी
- 1:27होता है। बहुत सारे इनफैक्ट ऐसे स्टॉक्स
- 1:30भी हैं जिसमें आपने ₹700 करोड़ लगाए होते
- 1:32तो शायद वो आज ₹10,000 हो जाते। तो जितना
- 1:35ज्यादा फायदा यह मार्केट करा सकता है उतना
- 1:37ही नुकसान भी करा सकता है। लेकिन नुकसान
- 1:40आपका कम से कम हो, फायदा ज्यादा से ज्यादा
- 1:43हो, उसी के लिए तो मैं हूं ना। तो पहला
- 1:45सवाल क्या शेयर बाजार रिस्की है? अब मैं
- 1:48यह आपसे पूछता हूं एक बेसिक एग्जांपल के
- 1:51जरिए। बेसिकली जब आप कोई शेयर खरीद रहे
- 1:54हैं तो आप उस कंपनी में एक छोटी सी ही सही
- 1:57हिस्सेदारी खरीद रहे हैं। इसीलिए उसका नाम
- 1:59शेयर है कि आप उस कंपनी के को-ओनर बन रहे
- 2:02हैं। तो अब आप मुझे बताइए अगर आप अपने
- 2:04किसी दोस्त के बिजनेस में पैसा लगाते हैं,
- 2:07किसी रिलेटिव के बिजनेस में पैसा लगाते
- 2:09हैं तो वो बिजनेस अच्छा नहीं चला तो आपका
- 2:11पैसा डूबेगा। यह रिस्क तो है। तो उसी तरह
- 2:14आप शेयर बाजार में भी बड़ी कंपनियों में
- 2:17निवेश कर रहे हैं। किसी T की कंपनी में,
- 2:18Reliance की कंपनी में, godderज की कंपनी
- 2:20में। अब अगर वो कंपनी डूब गई तो आपका पैसा
- 2:23डूब जाएगा। अगर वो कंपनी ने बहुत अच्छी
- 2:25ग्रोथ दिखाई तो आपका पैसा भी बहुत अच्छे
- 2:28से ग्रो करेगा। ये बिल्कुल ऐसे ही है जैसे
- 2:30आप किसी फैमिली मेंबर या दोस्त के बिजनेस
- 2:33में पैसा लगाते हैं इस भरोसे पे कि अगर
- 2:35बिजनेस बढ़ा तो मेरे को मुनाफे का एक
- 2:37हिस्सा मिलेगा। अगर लॉस हुआ तो ठीक है मैं
- 2:39लॉस सहन करूंगा। आपको ब्याज नहीं मिलेगा।
- 2:41शेयर बाजार में भी ब्याज नहीं मिलता
- 2:43क्योंकि यह लोन नहीं है। तो बहुत सारी ऐसी
- 2:46कंपनियां हैं जो डूबती रहती हैं। बिल्कुल
- 2:48उसमें लॉस होता है। लेकिन ESH Motors देख
- 2:51लीजिए। पिछले 7 आठ सालों में उन्होंने
- 2:53Bullet बाइक्स की सेल कई गुना बढ़ा दी और
- 2:55इसीलिए कई गुना शेयर्स भी ग्रो कर गए।
- 2:58यानी ₹1 आपका 10 गुना 20 गुना बढ़ गया।
- 3:01ऐसे बहुत सारे शेयर्स हैं। मैंने आपको
- 3:03विp्रो का एग्जांपल दिया। TVS ऐसा एक
- 3:05एग्जांपल है जो पिछले 10 सालों में 10
- 3:07गुना बढ़ा है। एमआरएफ ऐसा एक एग्जांपल है।
- 3:09बहुत सारे ऐसे शेयर्स हैं जो 5 6 साल में
- 3:12आपको 10 गुना रिटर्न दे देते हैं। तो
- 3:14डेफिनेटली ये रिस्की है लेकिन इसीलिए तो
- 3:17रिटर्न्स भी ज्यादा हैं। और रिस्क
- 3:19मिटिगेशन के तरीके रिस्क को कम करने के
- 3:21तरीके तो हम इस वीडियो में डिस्कस करने ही
- 3:23वाले हैं। अब आता है दूसरा सवाल कि मुझे
- 3:26रिटर्न कितना मिलेगा? और फिर से एग्जांपल
- 3:28वही है। अगर आप किसी दोस्त के बिजनेस में
- 3:31पैसा लगाते हैं तो क्या पता आपने अगर ₹100
- 3:34लगाए तो अगले साल आपको 10% का मुनाफा हो
- 3:37कि 20% का मुनाफा हो कि 30% का मुनाफा हो।
- 3:40ये बहुत ज्यादा डिफर करता है और इसका कोई
- 3:42फिक्स्ड क्राइटेरिया नहीं हो सकता। इसीलिए
- 3:45कई शेयर्स इस बाजार में ऐसे होते हैं जो
- 3:47कई-कई साल तक ₹1 नहीं बढ़ते उल्टा गिरते
- 3:50हैं और कई ऐसे हैं जो एक साल में ही चारप
- 3:53गुना बढ़ जाते हैं। लेकिन ये तो एक शेयर
- 3:55की बात है और जब आप निवेश करेंगे तो केवल
- 3:58एक या दो शेयर्स में नहीं आप एक
- 4:00पोर्टफोलियो ऑफ स्टॉक्स यानी कम से कम 810
- 4:02कंपनियों में निवेश करेंगे क्योंकि अगर
- 4:04कोई एक या दो कंपनी बुरी भी हो जाए डूब भी
- 4:07जाए तो भी आपका ओवरऑल सारा पैसा ना डूब
- 4:10जाए। इसीलिए शेयर बाजार में हम कम से कम
- 4:12810 कंपनियों में निवेश करते हैं। तो जब
- 4:14एक बास्केट ऑफ स्टॉक्स होता है तो आप ये
- 4:16उम्मीद कर सकते हैं कि अगर आपने ढंग से
- 4:18निवेश किया है तो 18 से 20% का रिटर्न
- 4:22भारत जैसी हाई ग्रोथ इकॉनमी में इन द
- 4:24लॉन्ग रन यानी कम से कम 5 साल अगर आप
- 4:27इन्वेस्टेड हैं और अगर आप अच्छे स्टॉक्स
- 4:29पिक कर रहे हैं तो 18 से 20% के आसपास का
- 4:32रिटर्न आपको बिल्कुल मिल सकता है। यानी ये
- 4:35एफडी से आजकल जो एफडी की दर चल रही है
- 4:37उससे तीन गुना ज्यादा है और गोल्ड या
- 4:39रियलस्टेट से लगभग दुगना है। इनफैक्ट
- 4:42दुनिया में कई सारे ऐसे सक्सेसफुल
- 4:44इन्वेस्टर्स हैं जो भारत से भी लो ग्रोथ
- 4:46इकॉनमीज़ में जहां बाजार और कंपनियां
- 4:49धीरे-धीरे ग्रो कर रही थी वहां भी
- 4:50उन्होंने ऐसे स्टॉक्स पिक कर लिए कि उनको
- 4:52कई सालों तक 30% के आसपास का रिटर्न मिला।
- 4:55तो भारत में अगर आप 20% का रिटर्न
- 4:58एक्सपेक्ट कर रहे हैं तो ये गलत नहीं है।
- 5:00लेकिन उसके लिए स्टॉक पिकिंग अच्छी होनी
- 5:02चाहिए। कैसे ऐसे शेयर्स ढूंढे जो सच में
- 5:05ग्रो कर सकते हैं और आपके पैसे को भी
- 5:07ग्रोथ दिला सकते हैं। इस चीज को जानने के
- 5:10लिए आप इस वीडियो को जरूर देख लीजिएगा।
- 5:12इसका लिंक ऊपर कार्ड पे और इस वीडियो के
- 5:15डिस्क्रिप्शन में है। अब बहुत इंटरेस्टिंग
- 5:17सवाल कितने रुपए से शुरू करना काफी है।
- 5:20देखिए स्टॉक मार्केट में आप कितनी पूंजी
- 5:23लगा रहे हैं उससे बहुत ज्यादा जरूरी है कि
- 5:25आप कैसे शेयर्स में निवेश कर रहे हैं जो
- 5:28कितना कंसिस्टेंट रिटर्न देते हैं। एक
- 5:30एग्जांपल मैं आपको देता हूं। अगर आप केवल
- 5:33₹1000 महीने से शुरू करें जो मुझे लगता है
- 5:35कि हम में से काफी लोग शुरुआत के समय
- 5:37अफोर्ड कर सकते हैं कि महीने के ₹1000
- 5:40हमको शेयर्स में लगाने हैं और इस ₹1000 को
- 5:43आप हर साल 15% से बढ़ाइए। यानी पहले साल आप
- 5:48हर महीने ₹1000 निवेश करिए। साल के
- 5:50₹12,000 अगले साल से आप 15% बढ़ा दीजिए।
- 5:55यानी आप ₹1150 हर महीने निवेश करिए। और
- 5:58ऐसे हर साल जैसे-जैसे आपकी इनकम बढ़े, आप
- 6:01स्टूडेंट लाइफ से हटके अर्निंग मेंबर बने
- 6:04या आपका जॉब में प्रमोशन होगा तो सैलरी
- 6:06बढ़े तो अगर आप ऐसा करते हैं ₹1000 से
- 6:08शुरुआत और हर साल 15% का इंक्रीमेंट और
- 6:12आपको आपके इन्वेस्टमेंट पे केवल 15% का ही
- 6:15रिटर्न मिलता है। 18 या 20 भी नहीं तो भी
- 6:18₹1000 से शुरू करके 25 साल बाद आपके पास
- 6:22₹1 करोड़ होंगे। इसमें की क्या है? आपको 25
- 6:25सालों तक निवेश करते रहना है। दूसरा आपको
- 6:2815% अमाउंट बढ़ाते रहना है। तीसरा आपको
- 6:3115% का रिटर्न आना चाहिए। ये तीन चीजें
- 6:34हुई 25 साल बाद 1000 से शुरू करके आपके
- 6:37पास ₹1 करोड़ होंगे। तो ये मैंने कैसे
- 6:40कैलकुलेट किया? एसआईपी कैलकुलेटर के जरिए।
- 6:42इस कैलकुलेटर का लिंक आपको इस वीडियो के
- 6:44डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा जिससे आप खुद
- 6:46फिगर आउट कर सकें कि अगर आप ₹2000 से शुरू
- 6:49करते हैं या ₹3000 से शुरू करते हैं तो
- 6:52आपके इतने साल बाद कितना अमाउंट होगा यह
- 6:54आप खुद जान सकते हैं। कैलकुलेटर वीडियो के
- 6:56डिस्क्रिप्शन में है। चौथा सवाल कि इसे
- 6:59शुरू करना कितना आसान या मुश्किल है? अगर
- 7:01मुझे निवेश करना है तो क्या प्रोसेस है?
- 7:03प्रोसेस बहुत सिंपल है। आपको बस तीन
- 7:06डॉक्यूमेंट्स चाहिए। आधार कार्ड होना
- 7:08चाहिए, पैन कार्ड होना चाहिए और बैंक
- 7:10अकाउंट होना चाहिए। नहीं है तो खुलवा
- 7:11लीजिए। उसके बाद आजकल सारा प्रोसेस ऑनलाइन
- 7:14होता है। बहुत सारे ऑनलाइन डिस्काउंट
- 7:17ब्रोकर्स हैं। डिस्काउंट ब्रोकर्स इसलिए
- 7:19कि यह ब्रोकरेज लगभग ज़ीरो लेते हैं। तो
- 7:22आपको करना कुछ नहीं है। Zerodha जैसे बहुत
- 7:24सारे ऑनलाइन डिस्काउंट ब्रोकर्स हैं।
- 7:26पर्सनली मैं Zerodha को यूज़ करता हूं। आप
- 7:28भी Zerodha में अपना अकाउंट खुलवा सकते
- 7:30हैं। उसका लिंक आपको इस वीडियो के
- 7:32डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। तीन-चार दिन
- 7:34में बिना किसी फिजिकल पेपर वर्क के ऑनलाइन
- 7:37आपका अकाउंट ओपन हो जाएगा। आप ट्रेडिंग
- 7:39शुरू कर सकते हैं। ₹300 में अकाउंट ओपन
- 7:42होता है और ब्रोकरेज या कमीशन ना के बराबर
- 7:46लेता है अगर आप इन्वेस्ट कर रहे हैं तो।
- 7:48यानी आप अगर शेयर्स खरीद के उसे रख रहे
- 7:50हैं। फिर दो-तीन दिन या उसके बाद बेच रहे
- 7:53हैं तो आपको लगभग कोई कमीशन देना नहीं। यह
- 7:56लगभग फ्री है। कुछ बिल्कुल जरा से
- 7:58गवर्नमेंट टैक्सेस लगते हैं जो पता भी
- 7:59नहीं चलेंगे क्योंकि वो 0.1% से भी कम
- 8:03होते हैं। तो मैं पर्सनली Zerodha यूज़
- 8:04करता हूं क्योंकि ये बहुत सिंपल टू यूज़ है
- 8:06और बिगिनर्स के लिए बहुत इजी है। पांचवा
- 8:09सवाल अगर सब कुछ इतना अच्छा है तो शेयर
- 8:12बाजार का नाम इतना क्यों खराब है? क्यों
- 8:14लोग इससे डरते हैं? एक सिंपल रीज़न बताऊं
- 8:17आपको। ये ना माइंडसेट का प्रॉब्लम है। जब
- 8:19हम प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो कोई भी ऐसा
- 8:21सोचता है कि 4 महीने में दाम डबल हो जाए।
- 8:234 महीने में मैं बेच के निकल जाऊंगा। कोई
- 8:26गोल्ड लेता है तो पुश्तों को पास ऑन करते
- 8:28हैं लेकिन सोना बेचते नहीं। कोई ऐसा नहीं
- 8:30सोचता कि आज ले लेता हूं। एक महीने बाद जब
- 8:32सोना बढ़ जाएगा तो बेच दूंगा। तो हम
- 8:35प्रॉपर्टी को बढ़ने का टाइम देते हैं।
- 8:37गोल्ड को बढ़ने का टाइम देते हैं। लेकिन
- 8:40आपको भी अगर आपके दोस्त बोलेंगे ना कि
- 8:42शेयर बाजार में आजा तो वो साथ में ये चीज
- 8:44जरूर बोलेंगे कि इसमें ना एक दिन में
- 8:46मैंने ₹400 कमा लिए। 2 महीने में मेरा
- 8:49पैसा डबल हो गया। यानी उनकी उम्मीदें ही
- 8:51गलत रहती हैं। वो ये सोच के आते हैं जो नए
- 8:54लोग आते हैं कि बस मुझे अब रातोंरात शेयर
- 8:57बाजार से अमीर बनना है। अब रातोंरात अमीर
- 8:59तो लॉटरी से बना जा सकता है या कहीं जुआ
- 9:02खेल के अगर आपकी किस्मत अच्छी हो तो बना
- 9:05जा सकता है। तो अगर आप शेयर बाजार को जुआ
- 9:08जैसे खेलेंगे कि कंपनी के बारे में जिसमें
- 9:10आप ओनर बनने जा रहे हैं। जिसका शेयर आप
- 9:12खरीदने जा रहे हैं उसके बारे में उसका
- 9:15मैनेजर कौन है? कंपनी का बिजनेस मॉडल क्या
- 9:17है? ये सब पता किया नहीं। लेकिन बस कोई
- 9:19चार्ट देख लिया या किसी से सुन लिया और
- 9:22शेयर ले लिया तो ऐसे में तो नुकसान होगा
- 9:24ही। तो इसी तरह लोग जल्दी पैसा कमाने के
- 9:27चक्कर में कोई ₹1 ₹2 वाला पेनी स्टॉक ले
- 9:30लेते हैं। जिस कंपनी का कोई आगे पीछे कुछ
- 9:32नहीं है। यह सोच के कि ये एक का दो भी हो
- 9:34गया ना तो मेरा पैसा डबल। लेकिन वो एक का
- 9:37दो होता ही नहीं क्योंकि वो कंपनी उस लायक
- 9:39ही नहीं। तो सबसे जरूरी है कि जब आप इस
- 9:41बाजार में आ रहे हैं ना तो यह बिल्कुल मत
- 9:43सोचिए कि आपको रातोंरात ये बाजार अमीर बना
- 9:46देगा। जैसा मैंने कहा 18 से 20% का रिटर्न
- 9:49ही आपको एक्सपेक्ट करना चाहिए। उससे
- 9:51ज्यादा मिला तो बोनस है। यानी 18 से 20%
- 9:54अगर आपको रिटर्न मिलेगा ना तो हर 4 साल
- 9:56में आपका पैसा डबल होगा। इससे ज्यादा लालच
- 9:59करना नहीं प्लीज। अब आपने पढ़ी है
- 10:02इंजीनियरिंग या आपने पढ़ लिया आर्ट्स,
- 10:04कॉमर्स आपने पढ़ा ही नहीं। तो भी क्या आप
- 10:07शेयर बाजार में निवेश कर सकते हैं? गुड
- 10:09न्यूज़ दूं? कर सकते हैं। कौन सा आपका
- 10:11स्ट्रीम है, कौन सा एजुकेशन बैकग्राउंड
- 10:14है, वो ज्यादा मैटर नहीं करता। इनफैक्ट
- 10:16मैं आपको दो एग्जांपल्स देता हूं। जैसा
- 10:18मैंने वीडियो के शुरू में भी बताया था कि
- 10:20एक बार यूएस में एक सर्वे हुआ जिसमें कुछ
- 10:2410 साल के फिफ्थ क्लास के बच्चों को
- 10:26शेयर्स पिक करके एक बास्केट बनाने के लिए
- 10:28बोला गया 8-10 शेयर्स का। और साथ ही उसी
- 10:30समय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भी बोला गया
- 10:32कि आप भी 8-10 शेयर्स का एक बास्केट बनाओ।
- 10:35अब चार्टर्ड अकाउंटेंट फाइनेंस में सबसे
- 10:37पढ़े लिखे लोग और कहां 10 साल के बच्चे
- 10:40लेकिन 5 साल बाद जब देखा गया कि किसके
- 10:43शेयर्स ने ज्यादा रिटर्न दिया है तो
- 10:45बच्चों ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को
- 10:47आउटपरफॉर्म किया था। अब बच्चों ने क्या
- 10:49इंजीनियरिंग, क्या कॉमर्स और क्या आर्ट्स
- 10:51फिफ्थ तक की मैथ्स, हिंदी, इंग्लिश और
- 10:53साइंस पढ़ा था। उतना तो आपने भी पढ़ा है।
- 10:56तो आप भी चार्टर्ड अकाउंटेंट से मुकाबला
- 10:58करने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। अब ऐसा वो
- 11:01क्यों कर पाए? समझिएगा इस बात को। बच्चे
- 11:04थे। कौन सी कंपनियां चुनी होंगी उन्होंने?
- 11:06Cadbury, d्नी, barb इस तरह की कंपनियां
- 11:09जो उनको इंटरेस्ट दिलाती हैं और वो उन
- 11:12प्रोडक्ट्स के कस्टमर्स हैं। तो किसी
- 11:14प्रोडक्ट को कस्टमर से अच्छा कौन जानेगा?
- 11:17तो क्योंकि बच्चों ने उस कंपनी के
- 11:18प्रोडक्ट्स खुद यूज़ किए थे। उन्हीं
- 11:20कंपनियों को पिक किया यानी वो कंपनियां
- 11:23अपने कस्टमर्स को सेटिस्फाई कर रही थी। तो
- 11:25वो कंपनी ने अच्छा करना ही था। ज्यादातर
- 11:27चांसेस यही होती हैं। इसीलिए उन बच्चों ने
- 11:29आउटपरफॉर्म किया। वहीं चार्टर्ड
- 11:31अकाउंटेंट्स ने लंबी-लंबी बैलेंस शीट्स
- 11:33पढ़ी। पता नहीं क्या-क्या फाइनशियल
- 11:34कॉम्प्लिकेटेड कैलकुलेशंस की। लेकिन
- 11:37ग्राउंड रियलिटी नहीं देखी। अगर आप
- 11:39इंजीनियर हैं तो रियलस्टेट, इलेक्ट्रिकल
- 11:42मशीनंस इस तरह के प्रोडक्ट्स बनाने वाली
- 11:44कंपनियां चुनिए। तो वो कंपनियां चुनिए
- 11:46जिनको आप जज कर सकते हैं। एंड यू विल डू
- 11:49प्रिटी वेल। एक और एग्जांपल इन जनरल यह
- 11:52माना गया है कि फीमेल डॉक्टर्स जो हैं वो
- 11:55सबसे अच्छी इन्वेस्टर्स होती हैं। क्यों?
- 11:57डॉक्टर्स हैं। उनको तो फाइनेंस की नॉलेज
- 11:59नहीं है। लेकिन वो इसलिए कि वो अपनी
- 12:01लाइफ्स में बहुत बिजी रहती हैं। प्रोफेशनल
- 12:03लाइफ, पर्सनल लाइफ, घर आके भी काम और इस
- 12:05तरह के काम में। तो उनको बहुत ज्यादा नंबर
- 12:08क्रंचिंग का, बहुत ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड
- 12:10फाइनशियल एनालिसिस करने का टाइम नहीं
- 12:12मिलता। वो जनरल नॉलेज से कि मुझे क्या
- 12:15प्रोडक्ट पसंद है और दूसरा क्योंकि टाइम
- 12:17नहीं है तो इन्वेस्ट करके भूल जाती है।
- 12:20कुछ भी इन्वेस्ट किया 510 साल तक चेक ही
- 12:22नहीं किया जिसके कारण ट्रांजैक्शन कॉस्ट
- 12:25कम होती है और कंपाउंडिंग जो मैंने उस
- 12:27एसआईपी कैलकुलेटर में आपको बताया वो अपना
- 12:29पूरा असर दिखा पाती है। तो अगर आपको
- 12:31कॉमर्स नहीं भी आता कोई प्रॉब्लम नहीं है।
- 12:34स्टॉक मार्केट में आपका स्वागत है। और अब
- 12:37मैं इस वीडियो के दो सबसे इंटरेस्टिंग
- 12:39पार्ट्स डिस्कस करने वाला हूं कि शेयर का
- 12:41दाम ऊपर या नीचे रोज क्यों होता है और
- 12:43कैसे प्रिडिक्ट किया जाए कि कब दाम बढ़ेगा
- 12:46कब गिरेगा और क्यों कंपनियां शेयर बाजार
- 12:49में लिस्ट होती है और दूसरा मैं आपको
- 12:51बताने वाला हूं मेरी फेवरेट बुक्स मेरी
- 12:53फेवरेट वेबसाइट्स इन्वेस्टिंग सीखने के
- 12:56लिए मैंने कैसे इन्वेस्टिंग सीखी और अगर
- 12:58आपको इसमें करियर बनाना है तो आप कैसे बना
- 13:00सकते हैं लेकिन ये दो टॉपिक्स डिस्कस करने
- 13:03के पहले एक लाइक इस वीडियो पे बनता है और
- 13:06अरे आपने अभी तक इस चैनल को सब्सक्राइब
- 13:08नहीं किया है तो दबा दीजिए सब्सक्राइब बटन
- 13:10को और बेल आइकन को ताकि आपकी नॉलेज यहीं
- 13:14खत्म ना हो। अगले वीडियोस भी आप तक मिलते
- 13:16रहें और आप हर हफ्ते और ज्यादा
- 13:18इन्वेस्टिंग सीखते रहें। तो चलिए अब जानते
- 13:21हैं कि ये शेयर बाजार का आखिर कांसेप्ट
- 13:24क्या है और क्यों प्राइसेस ऊपर नीचे होते
- 13:26हैं। तो देखिए अगर आपको कोई बिजनेस शुरू
- 13:28करना है तो आपको अगर थोड़े बहुत पैसे
- 13:30चाहिए तो घर वाले दे देंगे, रिलेटिव्स दे
- 13:33देंगे, फ्रेंड्स दे देंगे। अगर थोड़े और
- 13:35पैसे चाहिए तो बैंक दे देगा। लेकिन आपको
- 13:38चाहिए 20,000 करोड़। अब ना तो वो बैंक
- 13:41देगा ना आपके फ्रेंड्स या रिलेटिव्स
- 13:43देंगे। अनलेस ऑफ कोर्स आप अंबानी के
- 13:45खानदान से हो। लेकिन हम में से ज्यादातर
- 13:47लोग तो हैं नहीं। तो ऐसे में आपको इतना
- 13:50सारा पैसा कौन देगा? आपको यह पैसा देगा
- 13:52पब्लिक जनता। यानी आप लोगों को अपना
- 13:56बिजनेस मॉडल समझाओ कि मेरा यह प्लान है।
- 13:58मैं ऐसा-सा करने वाला हूं। यह फैक्ट्री
- 14:00डालने वाला हूं। मैं कार बनाऊंगा। लग्जरी
- 14:03कार, बिजली से चलने वाली, पानी से चलने
- 14:05वाली। लेकिन मुझे पैसों की जरूरत है। अब
- 14:07जिन लोगों को आप पर भरोसा है, वो आपको
- 14:10पैसे दे देंगे। बदले में आप उनको अपनी
- 14:12कंपनी में हिस्सेदारी दोगे क्योंकि
- 14:14उन्होंने पैसा लगाया है तो आप अपनी कंपनी
- 14:16में हिस्सेदारी दोगे। उस हिस्सेदारी को
- 14:18बोलेंगे शेयर्स। आपने पैसा लिया और लोगों
- 14:21को जिन्होंने आपको पैसा दिया उनको शेयर्स
- 14:23दे दिए। अब यह तो हुआ कि कंपनी ने आपसे
- 14:26पैसा लिया और आपको शेयर्स दे दिया। अब ऐसा
- 14:28भी तो हो सकता है कि आपको यह शेयर आज
- 14:30मिला। अब 2 दिन बाद आपको पैसों की जरूरत आ
- 14:32गई और अब आपको वो शेयर बेचना है तो कंपनी
- 14:35तो आपसे शेयर वापस खरीदेगी नहीं क्योंकि
- 14:36उसे तो पैसों की जरूरत थी और वो पैसा लेके
- 14:39उसने कार का कारखाना लगाना चालू कर दिया
- 14:42तो उसके पास आपको देने के लिए पैसे नहीं
- 14:43है तो ऐसे में एक बाजार होना चाहिए जहां
- 14:46आप उस कंपनी का शेयर किसी और को बेच सकें
- 14:49और इसी बाजार को हम कहते हैं शेयर बाजार
- 14:52जहां आप 4000 से ज्यादा कंपनियों का शेयर
- 14:55जब चाहे ले सकते हैं जब चाहे दे सकते हैं
- 14:58अगर आपको लगता है कि colgate अच्छा अच्छा
- 15:00करने वाली है। उसके टूथ ब्रश टूथपेस्ट
- 15:02आजकल ज्यादा बिक रहे हैं। तो आप कभी भी
- 15:04किसी और से उसके शेयर्स ले सकते हैं शेयर
- 15:06बाजार के जरिए। और अगर किसी को लगता है कि
- 15:09Colgate बुरा करने वाली है, पतंजलि ज्यादा
- 15:11कंपटीशन दे रही है तो वो शेयर्स बेच सकता
- 15:13है। तो क्योंकि करोड़ों लोग शेयर बाजार
- 15:15में हर रोज कोई ना कोई शेयर खरीदते हैं,
- 15:17बेचते हैं। इसीलिए आपको हमेशा कोई ना कोई
- 15:21बयर या कोई ना कोई सेलर आपके शेयर्स के
- 15:23लिए ज्यादातर ऐसा होता है कि मिल ही जाता
- 15:25है। और यहीेंस है शेयर बाजार की। सोचिए
- 15:28जरा। आप चाहें तो रतन टाटा के बिजनेस में
- 15:31हिस्सेदार बन जाए। एक क्लिक में शेयर्स
- 15:34खरीद के। आप चाहें तो आदि गोदरेज के
- 15:36गोदरेज एंपायर के शेयर्स खरीद लें। आप
- 15:38चाहें तो Jio के हिस्सेदार बन जाए एक
- 15:41क्लिक में शेयर खरीद के। चाहे तो एक ही
- 15:42शेयर खरीदें। ₹1500 में आप थोड़े से ही
- 15:45सही Jio के हिस्सेदार तो बन गए। और आप
- 15:48गर्व से बोल सकते हैं कि Jio मेरा है। और
- 15:50अब हम डिस्कस करते हैं लास्ट पार्ट कि कौन
- 15:53से ऐसे बुक्स या सोर्सेज हैं जिससे आप
- 15:56इन्वेस्टिंग को घर बैठे सीख सकते हैं।
- 15:58बहुत सारी बुक्स भी हैं। एक बुक है
- 16:01इन्वेस्टोनॉमी और इस बुक में वो सब कुछ जो
- 16:03मैंने पिछले 6 सालों में सीखा है वो मैंने
- 16:06डाल दिया है। इस बुक को आप Flipkart,
- 16:08Amazon कहीं से भी खरीद सकते हैं। इसके
- 16:10अलावा मेरी फेवरेट बुक्स कौन सी है? रिच
- 16:12डाइट, पुअर डाइट। बिल्कुल शुरुआत करने के
- 16:14लिए बहुत अच्छी किताब है। इसके बाद है
- 16:17लर्न टू अर्न बाय पीटर लिंच स्टॉक मार्केट
- 16:20के बेसिक्स। इस किताब से अच्छा और कोई
- 16:22नहीं समझा सकता। इसके बाद थोड़े एडवांस
- 16:25लेवल की लेकिन बहुत बहुत क्वालिटी इनेशन
- 16:28वाली बुक है द एजुकेशन ऑफ अ वैल्यू
- 16:30इन्वेस्टर बाय गायस पियर। तो ये चारों ही
- 16:32बुक्स का लिंक भी आपको इस वीडियो के
- 16:34डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। आज हम डिस्कस
- 16:37करने वाले हैं अम्यूजमेंट पार्क इंडस्ट्री
- 16:39के बारे में। इंडिया में कुछ लार्ज साइज
- 16:41पार्क्स हैं। इमैजिका है जो इंडिया में
- 16:43सबसे बड़ा है। वंडरला है। ये सबसे बड़ा
- 16:46चेन है क्योंकि इसके तीन पार्कक्स हैं।
- 16:47कोची, हैदराबाद, बैंगलोर में एसएल वर्ल्ड
- 16:50है। इसके अलावा कोलकाता हो, चेन्नई हो,
- 16:52एनसीआर हो यहां पे कई मिड साइज्ड पार्कक्स
- 16:54भी हैं। तो काफी इंटरेस्टिंग लगता है।
- 16:56दुनिया भर में यूनिवर्सल स्टूडियोज हो,
- 16:58d्नीलैंड हो ये करोड़ों का बिनेस इन
- 17:01पार्क्स को चला के करते हैं। तो
- 17:02इंटरेस्टिंग इंडस्ट्री है। इंडिया में इस
- 17:04इंडस्ट्री की ग्रोथ मुझे लगती है। तो चलिए
- 17:06आज इस इंडस्ट्री को एनालाइज करते हैं और
- 17:08जानते हैं कि इंडिया का जो ड्रीम पोस्टर
- 17:11बॉय था इस इंडस्ट्री का इमैजिक जिसे
- 17:13इंडिया का डिज्नी लैंड समझा जा रहा था।
- 17:14आखिर ऐसा क्या हुआ कि चालू होने के कुछ
- 17:17साल बाद ही आज लगभग वो बैंककरप्ट होने की
- 17:20कगार पे है और उसके ऑोजिट वंडरला जिसकी
- 17:23ज्यादा हाइप नहीं थी जिसको ज्यादा लोग
- 17:24नॉर्थ इंडिया में शायद जानते भी नहीं है
- 17:26वो एक के बाद एक तीन पार्क खोल चुका है और
- 17:28आज भी एक हेल्दी बैलेंस शीट लगभग डेप्ट
- 17:31फ्री है के साथ तीन पार्कक्स खोल के चौथा
- 17:33पार्क बन रहा है एक सक्सेसफुल बिजनेस
- 17:36फ्रेंचाइज बन के खड़ा है। क्या फर्क आया
- 17:38दोनों में और कैसे आपको इस इंडस्ट्रीज में
- 17:41कंपनी को एनालाइज करना है जानेंगे इस
- 17:43वीडियो में। शुरू करने से पहले एक
- 17:45डिस्क्लेमर कि आज जो कुछ भी मैं डिस्कस कर
- 17:47रहा हूं वो एजुकेशनल पर्पस के लिए है ताकि
- 17:49आप खुद इस तरह की कंपनीज़ को एनालाइज कर
- 17:51सकें और क्योंकि इस इंडस्ट्री को अगर आप
- 17:53एनालाइज करना सीखेंगे तो बहुत हद तक आप
- 17:55मल्टीप्लेक्स इंडस्ट्री को एनालाइज करना
- 17:57भी सीख जाएंगे। डायनामिक्स काफी सारे
- 17:59सिमिलर हैं। तो ये सब कुछ एजुकेशनल पर्पस
- 18:01के लिए है। मैं बाय या सेल रिकमेंडेशन
- 18:04बिल्कुल नहीं दे रहा हूं। और जैसे इमैजिका
- 18:07के बारे में हम डिस्कस करेंगे। कई सारी
- 18:08प्रॉब्लम्स आई तो ऐसा भी नहीं है कि उस पे
- 18:11सब ने उम्मीदें छोड़ दी हैं। हो सकता है
- 18:13कोई स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टर अगर उस कंपनी
- 18:14में आ जाए जो उसका डेप्ट पे ऑफ कर दे तो
- 18:17उस कंपनी के दिन भी फिर सकते हैं। उसके
- 18:18शेयर प्राइस के दिन भी फिर सकते हैं। होने
- 18:20को कुछ भी हो सकता है। तो बाय सेल
- 18:22रिकमेंडेशन नहीं है। एजुकेशनल वीडियो है
- 18:24आपको इंडिपेंडेंट बनाने के लिए। तो चलिए
- 18:26जैसा मैंने आपको बताया था कि तीन बड़े
- 18:28पार्कक्स हैं इस इंडस्ट्री में। एसएल
- 18:30वर्ल्ड हो, इमेजिका हो और वंडरला के तीन
- 18:33पार्कक्स हो। ये मेजर प्लेयर्स हैं। कुछ
- 18:35स्मॉलर प्लेयर्स एनसीआर में, कोलकाता में
- 18:38यहां पे हैं। लेकिन जो ये बड़े प्लेयर्स
- 18:41हैं, इनके पार्क की कैपेसिटी है 10,000
- 18:44लोगों को इंटेक करने की पर डे। यानी एक
- 18:46दिन में ये पार्क 10,000 लोगों को एंटरटेन
- 18:49कर सकते हैं। इमेजिका हो या एसएल वर्ल्ड
- 18:51हो। तो यहां पे यह मल्टीप्लेक्स से काफी
- 18:53सिमिलर है। एयरलाइन से काफी सिमिलर है।
- 18:55क्योंकि इनकी प्रॉफिटेबिलिटी इसी बात पर
- 18:57डिपेंड करती है कि इनके पार्क कितने फुल
- 18:59चल रहे हैं। जैसे एयरलाइन अगर आधी खाली
- 19:02चलेगी तो वो लॉस पे चलेगी। मल्टीप्लेक्स
- 19:04अगर बहुत ज्यादा खाली चल रहे हैं तो वो
- 19:06लॉस में चल रहे हैं। उसी तरह ये पार्कक्स
- 19:07भी अगर खाली चल रहे हैं तो लॉस में चल रहे
- 19:10हैं। यानी पहला इंपॉर्टेंट पैरामीटर आता
- 19:12है ऑक्यूुपेंसी रेट। 10,000 की कैपेसिटी
- 19:14है। लेकिन ऑन एन एवरेज एक दिन में कितने
- 19:17लोग आते हैं? अब यहां आप यह भी समझिए कि
- 19:20किन फैक्टर्स से इन पार्क का ऑक्यूुपेंसी
- 19:23रेट कम होता है या बढ़ता है। पहली चीज अगर
- 19:26एग्जाम्स चल रहे हैं तो क्योंकि बच्चे
- 19:27यंगस्टर्स इस पार्क में ज्यादा जाते हैं
- 19:29तो अगर एग्जाम चल रहा है, एग्जाम सीजन है
- 19:31तो ऑक्यूुपेंसी रेट गिर जाता है। वीकेंड्स
- 19:33पे ऑक्यूुपेंसी रेट बढ़ता है वीक डेज पे
- 19:36कम हो जाता है। अगर बहुत ज्यादा रेनी सीजन
- 19:38है तो अम्यूजमेंट पार्क में लोग नहीं आते।
- 19:41अगर बहुत ठंडिया है, विंटर सीजन है तो
- 19:43वाटर पार्क में लोग नहीं आते। तो इन बहुत
- 19:46सारे कारणों से इनका ऑक्यूुपेंसी रेट
- 19:48गिरता है और एग्जाम फ्री वीकेंड्स जो होते
- 19:51हैं ब्राइट सनी डेज उनमें इनका
- 19:53ऑक्यूुपेंसी रेट सबसे ज्यादा होता है।
- 19:55हालांकि ये कई सारे मेजर्स करते हैं। जैसे
- 19:57वीक डेज में स्कूल पिकनिक्स, कॉलेज
- 19:59पिकनिक्स अरेंज कराना ताकि जो खाली वीक डे
- 20:02पड़ा है उस पे डिस्काउंट में स्कूल्स को
- 20:04टिकट दे दो। तो कुछ लोग तो आए। लेकिन फिर
- 20:06भी ऑन एन एवरेज वीकेंड्स पे ही भीड़
- 20:08ज्यादा रहती है। तो इन बहुत सारे वेदर और
- 20:10एग्जाम और बहुत सारे कारणों के कारण
- 20:12ग्लोबली ये पार्क्स में ऑक्यूुपेंसी रेट
- 20:1435 40% 35 40% के आसपास रहती है। यानी अगर
- 20:1810,000 की कैपेसिटी है तो साल भर का एवरेज
- 20:21ये होता है कि पर डे 3.5000 टू 4000 लोग
- 20:25इन पार्क्स में आते हैं। इंडिया में वो
- 20:26एवरेज 3000 के आसपास है। यानी 30% के
- 20:29आसपास है। 10,000 की कैपेसिटी है। तो ऑन
- 20:31एन एवरेज 3,000 लोग इस पार्क में आते हैं।
- 20:34ऑक्यूुपेंसी लेवल काफी लो रहता है इन
- 20:36पार्कक्स का बट ग्लोबली यही हाल है। अब
- 20:39सेकंड चीज आती है कि पर यूजर रेवेन्यू ये
- 20:43पार्क कितना कमा सकता है? एक यूजर से
- 20:45कितना पैसा यह पार्क वसूल सकते हैं? तो ऑन
- 20:48एन एवरेज वीक डे में टिकट प्राइस ₹800
- 20:51₹700 के आसपास रहता है। वीक एंड में यह
- 20:54₹1500 ₹1600 के आसपास हो जाता है। अगर हम
- 20:56ओवरऑल एवरेज देखें पार्क्स टू पार्क
- 20:59डिपेंड करता है। वंडरला थोड़ा सस्ता है।
- 21:01मैजिका थोड़ा प्रीमियम है। लेकिन ऑन एन
- 21:03एवरेज अगर हम देखें तो यह 12 ₹1300 पर
- 21:06यूजर का इनका रेवेन्यू रहता है। प्लस ₹300
- 21:09के आसपास फूड एंड बीवरेज रेवेन्यू या
- 21:12कॉस्ट्यूम अगर वाटर पार्क है तो लॉकर रेंट
- 21:14और इस तरह का रेवेन्यू होता है। ₹200 ₹300
- 21:17के आसपास ये दोनों को जोड़ लिया जाए तो पर
- 21:19यूजर रेवेन्यू ऑन एन एवरेज ₹1500 के आसपास
- 21:23रहता है ₹1500 तो अब देखते हैं कि एक दिन
- 21:25का रेवेन्यू कितना हुआ। रफली लोग आए 3000
- 21:29लोग नहीं मैं कहता हूं ये भी आज नहीं तो
- 21:31कल ग्लोबल एवरेज के हिसाब से 40%
- 21:33ऑक्यूुपेंसी पे ही चलेंगे। तो हम मान लेते
- 21:36हैं कि 4000 लोग रोज इन पार्कक्स में आते
- 21:39हैं और एक इंसान से यह पार्क्स ₹1.5000
- 21:43कमाते हैं। यानी इनका एक दिन का रेवेन्यू
- 21:46हुआ 4000 * 1.5000 व्हिच इज ₹ लाख। तो एक
- 21:50दिन का रेवेन्यू हुआ ₹ लाख। अब तो इयरली
- 21:54रेवेन्यू कितना हुआ? तो हमको ₹ लैक्स *
- 21:56365 करना है व्हिच इज़ इक्वल टू रफली ₹20
- 21:59करोड़। यानी इमैजिका जैसा एक पार्क एक साल
- 22:03में ₹20 करोड़ रेवेन्यू कमाता है। ध्यान
- 22:07रखिए यह रेवेन्यू है। यह प्रॉफिट नहीं है।
- 22:10ये तो टोटल पैसा जो यूजर से मिला। अब हम
- 22:12बात करते हैं एक्सपेंसेस की। लेकिन उसके
- 22:15पहले जान लेते हैं कि क्या-क्या चीजें इस
- 22:17वीडियो में हम देखने वाले हैं। तो हम
- 22:19देखने वाले हैं कि इन पार्क्स को वैल्यू
- 22:21कैसे किया जाता है? वैल्यू्यूएशन मोड्स
- 22:24यानी क्या एडवांटेज, क्या डिसएडवांटेज हैं
- 22:26इस इंडस्ट्री को। कॉम्पिटिट एनालिसिस करने
- 22:28वाले हैं और अल्टीमेटली शेयर का फेयर
- 22:31प्राइस कैसे निकालना है, इन्वेस्ट किस
- 22:32प्राइस पे करना है, किस प्राइस पे नहीं वो
- 22:35हम देखने वाले हैं। तो चलिए मूविंग बैक टू
- 22:37एक्सपेंसेस। हमने माना कि इमेजिका का साल
- 22:39भर का रेवेन्यू है ₹220 करोड़। क्या हमारा
- 22:42ये जो कैलकुलेशन है, ये जो अजमशन है, यह
- 22:45सही है? क्या सच में 40% ऑक्यूुपेंसी होती
- 22:48है? क्या सच में ₹100 पर यूजर आता है? ये
- 22:51सब कैसे पता चलेगा? तो ये सब आप जाके देख
- 22:53सकते हैं tiker.inology.in
- 22:55पे और चलिए यहां चल के मैं आपको दिखाता
- 22:57हूं कि एक्चुअली में इमेजिका का इयरली
- 22:59रेवेन्यू कितना है। तो हमने जैसा आप देख
- 23:02रहे हैं इमेजिका टाइप किया सेलेक्ट किया
- 23:04और अब मैं ऊपर इस बार से पीएंडएल
- 23:07स्टेटमेंट सेलेक्ट कर रहा हूं। और जैसे ही
- 23:08पीएंडएल स्टेटमेंट आया मैंने देखा कि
- 23:10फाइनेंसियल ईयर 19 का इनका इयरली रेवेन्यू
- 23:14है ₹240 करोड़। हमने अस्यूम किया था 220
- 23:17ये है 240 तो हम इसके आसपास ही थे। लेकिन
- 23:20चलिए अगर 240 है तो 240 ही अस्यूम करते
- 23:23हैं। और अब देखिए कि ये तो रेवेन्यू है।
- 23:26इसके बाद पार्क में बहुत सारे पार्क वालों
- 23:27के भी तो खर्चे होते हैं। स्टाफ की सैलरी
- 23:30देना, बिजली का खर्चा, राइड्स की
- 23:31मेंटेनेंस करना और बहुत सारे इससे साफ
- 23:34सफाई का खर्चा बहुत इससे जुड़े हुए खर्चे
- 23:36पानी फिल्टर करना होता है वाटर पार्क है।
- 23:38तो बहुत सारे खर्चे होते हैं। तो ये सारे
- 23:40खर्चे को हम कहेंगे ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस।
- 23:43तो अब जैसा कि आप सेकंड लाइन पर देख पा
- 23:45रहे हैं कि ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस इस पार्क
- 23:48के हैं ₹190 करोड़। यानी ₹240 करोड़ जो यह
- 23:52लोगों से लेते हैं उसमें से ₹10 करोड़ तो
- 23:55पार्क का यह सब रेगुलर खर्चे में निकल
- 23:57जाता है। यानी बचता है केवल ₹50 करोड़।
- 24:01लेकिन इस ₹10 करोड़ को भूल जाते हैं। मान
- 24:03लेते हैं कि कुछ भी करके इमेजिका अपने
- 24:05खर्चे कम कर लेगा। चाहे ज्यादा टिकट्स
- 24:07बेचेगा, चाहे सैलरीज कम करेगा, कुछ भी और
- 24:09हम केवल यह मानते हैं कि जितना इमेजिका का
- 24:12रेवेन्यू है उससे 50% ही उसके ऑपरेटिंग
- 24:16एक्सपेंसेस होंगे। अभी 75% है लेकिन हम
- 24:18ऑप्टिमिस्टिक हो रहे हैं। हमको इमेजिका से
- 24:20प्यार है मान लीजिए तो हम ऑप्टिमिस्टिक हो
- 24:23के मानते हैं कि नहीं इमेजिका के
- 24:24एक्सपेंसेस 50% ही होंगे। यानी ₹10 करोड़
- 24:27ही होंगे। और बाकी जो ₹10 करोड़ बचा वो
- 24:31हुआ उसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट। अब हमको तो
- 24:33इमेजिका से प्यार है तो हम और
- 24:35ऑप्टिमिस्टिक होते हैं। हम मानते हैं कि
- 24:37गवर्नमेंट कोई इनकम टैक्स भी नहीं लेगा।
- 24:39इसने कोई डेप्ट भी नहीं लिया था तो कोई
- 24:41इंटरेस्ट पेमेंट भी नहीं करना। हम सब कुछ
- 24:43अच्छा अच्छा मान लेते हैं और मान लेते हैं
- 24:44कि वो 120 करोड़ ऑफ ऑपरेटिंग प्रॉफिट ही
- 24:47मेरा कैश प्रॉफिट है जो मेरी जेब पे आ रहा
- 24:50है। तो मेरे को साल में अगर सब कुछ बहुत
- 24:53अच्छा है तो ₹120 करोड़ ₹120 करोड़ का नेट
- 24:56प्रॉफिट हुआ। तो अब यह ₹10 करोड़ साल का
- 25:00मुझे स्पार्क से आ रहा है। अच्छा है कि
- 25:01नहीं? अगर आप इस पार्क के ओनर हैं तो खुद
- 25:04से पूछिए इस चीज से आप खुश होंगे कि नहीं
- 25:07कि ₹120 करोड़ आपको साल के आ रहे हैं। अब
- 25:10जो थोड़ा बहुत भी बिजनेस करता है वो जानता
- 25:12है कि सबसे पहला सवाल यह उठेगा कि इस
- 25:14पार्क को बनाने में खर्चा कितना आया?
- 25:16क्योंकि अगर मान लीजिए यह पार्क बन गया
- 25:18₹50 करोड़ में और मुझे साल के ₹10 करोड़ आ
- 25:22रहे हैं तब तो यह बहुत अच्छा है। लेकिन
- 25:23अगर इस पार्क को बनाने में खर्च हो गए ₹1
- 25:26लाख करोड़ और ₹10 करोड़ आ रहे हैं तब यह
- 25:29बहुत बुरा है। तो खर्चा कितना हुआ इस
- 25:31पार्क को बनाने में? अब इस पार्क को बनाने
- 25:34में खर्चा हुआ ₹100 टू 1700 करोड़ के
- 25:38आसपास। यानी यह एक ऐसा बिजनेस है जो आपने
- 25:42ऐसा मान लीजिए कि ₹10 में शुरू किया और अब
- 25:46हर साल आपको ₹12 का प्रॉफिट हो रहा है।
- 25:49यानी आपको अपना इन्वेस्टमेंट वसूल करने
- 25:52में जो पैसा आपने लगाया था वो पैसा आपको
- 25:55वापस मिले सिर्फ आपका प्रिंसिपल वो आपको
- 25:58वापस लेने में ही 13 टू 14 इयर्स लग
- 26:01जाएंगे। इसे कहते हैं पेबैक पीरियड। यह एक
- 26:04बहुत अच्छा वैल्यू्यूएशन मेथड है एसेट
- 26:07हैवी इंडस्ट्रीज के लिए जिनमें अप्रट
- 26:09कैपिटल कॉस्ट बहुत होती है। जिस बिनेस को
- 26:11शुरू करने में बहुत ज्यादा पैसा लगता है
- 26:13उन बिनेसेस को वैल्यू करने का ये बहुत
- 26:16अच्छा तरीका है जिसे कहते हैं पेबैक
- 26:17पीरियड जो यह देखता है कि बिज़नेस शुरू
- 26:20करने में कितना पैसा लगा और वो पैसा आप
- 26:22अपना इन्वेस्टमेंट निकालने में आपको कितना
- 26:25टाइम लग रहा है। तो ₹1700 करोड़ से यह
- 26:28बिज़नेस शुरू हुआ और हर साल आप केवल ₹10
- 26:31करोड़ निकाल पा रहे हैं। आपको 14 इयर्स
- 26:33लगेंगे सिर्फ अपना इन्वेस्टमेंट निकालने
- 26:35में। एंड व्हाई इज इट अ बैड बिज़नेस?
- 26:37क्योंकि अगर आप उस 1700 करोड़ को एफडी भी
- 26:40करा देते तो 14 इयर्स में आपका वो पैसा
- 26:44थ्री टाइम्स हो जाता। ₹5000 करोड़ ₹5000
- 26:46करोड़ तो वो वैसे ही हो जाता। इस पार्क को
- 26:49आपने खोला, इतनी मेहनत की ना जाने
- 26:51क्या-क्या किया तो भी आपको 14 इयर्स में
- 26:54अगर सब अच्छा रहा यह हमने अभी अच्छी-अच्छी
- 26:56चीजें मानी है कि ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस कम
- 26:58रहेंगे। गवर्नमेंट टैक्स नहीं लेगी। कि ना
- 27:00जाने क्या-क्या तो भी 14 इयर्स लगेंगे।
- 27:02रियलिटी में तो और ज्यादा लगेंगे। तो ऐसे
- 27:05में ये सवाल उठता है ना कि फिर ओनर ने
- 27:07क्या सोच के इस बिनेस को शुरू किया? क्यों
- 27:09किया? कोई कॉमन मैन भी इतना सा कैलकुलेशन
- 27:12करके मान जाएगा कि यह बिज़नेस नहीं करना
- 27:15चाहिए। तो इसका जवाब मिलेगा जब हम दूसरी
- 27:17कंपनी एनालाइज करेंगे जो है वंडरला। इस
- 27:20कंपनी की सारी डिटेल्स भी आपको Ter पे मिल
- 27:23जाएंगी। जितनी भी भारत में लिस्टेड कंपनीज़
- 27:25हैं सबका फंडामेंटल एनालिसिस आप tiker पे
- 27:27जाके कर सकते हैं। tfinology.in
- 27:30तो आप जानते हैं दोनों में क्या डिफरेंस
- 27:32है और वंडर ने क्या अलग किया तो हम ये तो
- 27:34समझ ही चुके हैं कि इमेजिका के बिनेस को
- 27:36शुरू करने का ज्यादा सेंस नहीं बन रहा है।
- 27:39तो वंडर ने कैसे शुरू किया और कैसे
- 27:41एक्सपैंड कर पाया? देखिए वंडरला एक पार्क
- 27:45शुरू करता है। हैदराबाद पार्क जो है
- 27:47वंडरला का वो इमेजिका के बाद में शुरू
- 27:49हुआ। इमेजिका के पार्क खोलने की कॉस्ट थी
- 27:52161700 करोड़। वंडरला ने हैदराबाद पार्क
- 27:55खोला ₹350 करोड़ में। यानी 1/4 कॉस्ट में
- 28:0025% कॉस्ट में वंडरला पार्क खुल गया।
- 28:02कैसे? उन्होंने इतने सस्ते में पार्क कैसे
- 28:05खोला? तो दो फर्क हैं। इमेजिका जो है वो
- 28:08इंडिया का डिज्नी लैंड बनना चाहता था।
- 28:10यानी बड़े-बड़े वाटरफॉल्स, वाटर बॉडीज,
- 28:14झरने, तालाब, ग्रीनरी, बड़ी-बड़ी थीम्स,
- 28:17कार्टून कैरेक्टर्स, एनिमेटेड स्क्रीन्स,
- 28:20इंडोर राइड्स सारी वो चीजें जिसमें बहुत
- 28:23ज्यादा पैसा खर्चा हो रहा है। वहीं वंडरला
- 28:25थीम पार्क नहीं एक अम्यूजमेंट पार्क
- 28:28कांसेप्ट पे आया। वंडरला का यह मानना था
- 28:30कि लोग अम्यूजमेंट पार्क क्यों आते हैं?
- 28:32झूला झूलने। तो कम से कम लैंड में ज्यादा
- 28:35से ज्यादा झूले भर दो। बिल्कुल वैसे ही
- 28:37जैसे छोटे शहरों में वो जो मीना बाजार या
- 28:40डिज्नी लैंड फेयर लगते हैं टेंपरेरी एक
- 28:42फुटबॉल मैदान जितना मैदान लो और वहां 20
- 28:45झूले लगा दो क्योंकि लोग तो झूला झूलने आ
- 28:47रहे हैं। तो वंडरला उसी एस्पेक्ट पे काम
- 28:50किया कि छोटी जगह पे ज्यादा से ज्यादा
- 28:52झूले भर दो जिससे क्या होगा? लैंड कॉस्ट
- 28:55कम हो गई। लेकिन इमेजिका ने बड़े-बड़े
- 28:57वाटरफॉल्स, वाटर बॉडीज, कार्टून
- 28:59कैरेक्टर्स, इंडोर राइड्स, बड़ी-बड़ी
- 29:02बिल्डिंग्स, लाइटिंग, साउंड सिस्टम्स ये
- 29:05सब में खर्चा किया। यह बाहर पर चलता है।
- 29:08दुनिया भर के डेवलप्ड नेशंस में चलता है
- 29:10क्योंकि वहां पे कैपेसिटी ज्यादा है। तो
- 29:13अगर बाहर किसी डेवलप्ड देश में कोई 1700
- 29:16करोड़ का इन्वेस्टमेंट करता है तो उसे वो
- 29:19वसूल भी सकता है क्योंकि वहां टिकट्स का
- 29:21ऑन एन एवरेज प्राइस 5000 6000 5 टू 6000
- 29:25होता है इन बड़े अम्यूजमेंट पार्कक्स का।
- 29:27लेकिन इंडिया में इमेजिका चाह के भी 1500
- 29:302000 के ऊपर ले नहीं पा रहा है। अगर
- 29:32इमैजिका भी 5 6000 ले पा रहा होता तो उसका
- 29:36जो 14 इयर्स का पेबैक पीरियड है वो कम हो
- 29:38के थ्री फोर इयर्स का हो जाता और फिर यह
- 29:40बिज़नेस वायबल होता। लेकिन सोचिए अगर
- 29:43इमेजिका आपने टिकट प्राइस 5000 कर दे और
- 29:46चार लोगों की फैमिली को एक दिन के लिए
- 29:47जाना है तो 20000 का खर्चा इंडिया में
- 29:50कितने मिडिल क्लास लोग अफोर्ड कर सकते हैं
- 29:52एक दिन के लिए नहीं कर सकते। इसीलिए टिकट
- 29:55आप 1000 1.5000 से ज्यादा रख नहीं सकते
- 29:59क्योंकि एक फैमिली एक दिन पे 56000 भी
- 30:02बड़ी मुश्किल से खर्च कर पाती है। तो
- 30:04प्रॉब्लम यह हुआ कि इमेजिका ने सोचा कि वो
- 30:07इंडिया में d्नीलैंड खोल लेगा। d्नीलैंड
- 30:09जैसा प्राइस ले लेगा और उसका बिजनेस वायबल
- 30:12हो जाएगा। लेकिन खुलते ही एक-द साल में
- 30:14रियलाइज़ हुआ कि यहां पे d्नीलैंड वाले
- 30:16प्राइसेस लेना पॉसिबल नहीं है। यहां तो
- 30:19₹1000 ₹2000 ही ले पाएंगे। जिसके कारण
- 30:22उनका पेबैक पीरियड तीन गुना बढ़ गया और
- 30:24बिजनेस अनवायबल हो गया। वहीं वंडर लाने
- 30:27क्योंकि उनका इन्वेस्टमेंट ही 1/4 था।
- 30:29उनका इन्वेस्टमेंट केवल ₹350 करोड़ था तो
- 30:32उनके लिए अगर ₹1000 पर यूजर भी मिल रहा है
- 30:35तो उनका पेबैक पीरियड 5 साल का हो गया।
- 30:38उनको 15 साल रुकना नहीं है। तो क्योंकि
- 30:41उन्होंने अपना इन्वेस्टमेंट ही कम कर लिया
- 30:43इसलिए उनको इन्वेस्टमेंट अपना वसूल करने
- 30:46में कम टाइम पीरियड लगा और उनका बिजनेस
- 30:48वायबल हो गया। ये एक कारण है। आगे हम और
- 30:51टेक्निकिलिटीज डिस्कस करेंगे। लेकिन दो
- 30:52मेजर कारणों को और डिस्कस कर लेते हैं। एक
- 30:54कारण और ये कि वंडरला ने क्या किया? एक
- 30:57कंबाइंड टिकट रखा वाटर पार्क का और
- 31:00अम्यूजमेंट पार्क का। एक ही टिकट। आपको
- 31:02जाना है तो वाटर पार्क जाओ, जाना है
- 31:04अम्यूजमेंट पार्क जाओ, चाहो तो दोनों जगह
- 31:06जाओ। इमेजिका ने इसे अलग-अलग रखा। तो,
- 31:08क्या होता है? रिसोर्सेज का ऑप्टिमम
- 31:10यूटिलाइजेशन नहीं हो पाया। जैसे वंडरला ने
- 31:1250 एंप्लाइजज़ का स्टाफ रखा और उसे दिखा कि
- 31:16ये 2 घंटे वाटर पार्क में भीड़ ज्यादा हो
- 31:18रही है। तो ज्यादा रिसोर्सेज वहां लग गए।
- 31:20अगर रेनी सीजन है, अम्यूजमेंट पार्क में
- 31:23भीड़ नहीं है तो वाटर पार्क में ज्यादा
- 31:24रिसोर्सेज लग गए। सर्दियां हैं उस तरफ भीड़
- 31:27नहीं है। अम्यूज़मेंट पार्क में ज्यादा
- 31:28रिसोर्सेज लग गए। रिसोर्सेज की शेयरिंग
- 31:31ज्यादा अच्छे से हो पाई। लेकिन क्योंकि
- 31:33इमेजिका के केस में एक्वाजिका इमेजिका
- 31:36अलग-अलग पार्कक्स हैं तो रिसोर्स शेयरिंग
- 31:38इकोनॉमीस ऑफ स्केल उतना अच्छा नहीं आ
- 31:41पाया। इसके अलावा तीसरी चीज वंडरला खुद की
- 31:44राइड्स भी इन हाउस बनाता है। काफी हद तक
- 31:47काफी राइड्स इन हाउस बनाता है। और झूलों
- 31:49पे अगर आपको राइड्स इंपोर्ट करनी है,
- 31:51विदेश से मंगानी है तो उस पे गवर्नमेंट
- 31:54बहुत ज्यादा टैक्स लगाती है। जिसके कारण
- 31:56झूले महंगे हो जाते हैं और पार्क की कॉस्ट
- 31:58बढ़ जाती है। लेकिन क्योंकि वंडरला बनाती
- 32:00भी खुद है। कुछ हद तक कुछ झूले तो उसको वो
- 32:03टैक्स गवर्नमेंट को नहीं देना पड़ता
- 32:05क्योंकि वो इनह हाउस मैन्युफैक्चरिंग करके
- 32:07अपने ही पार्क में उसको लगा देती है।
- 32:09ट्रेडिंग या खरीदने बेचने का काम ही नहीं।
- 32:11तो अगर खरीदना बेचना नहीं हो रहा है तो
- 32:13टैक्स देना ही नहीं पड़ रहा। अब हम कुछ
- 32:15क्वालिटेटिव डिफरेंसेस की बात करते हैं
- 32:17जिसके कारण भी बहुत फर्क आया और जिसके
- 32:19कारण ये इंडस्ट्री मुझे बहुत ज्यादा पसंद
- 32:21है। इस इंडस्ट्री के एडवांटेजेस और
- 32:23डिसएडवांटेजेस को डिस्कस करते हैं। अगर इस
- 32:25इंडस्ट्री में कोई डोमिनेंट प्लेयर है जो
- 32:27आज वंडर लॉ है तो उसके क्या मोड्स और
- 32:30एडवांटेजेस हैं। पहला मोट तो ये कि जिस
- 32:33शहर में आप घुस गए जिस शहर में वंडर लला
- 32:35घुस गया उस शहर में कोई और बड़ा कॉम्पिटिट
- 32:38आने का सोचेगा नहीं। क्योंकि जैसा हमने
- 32:40देखा है पार्क की वायबिलिटी तभी है ये
- 32:43पार्क आपको पैसा कमा के तभी देगा अगर
- 32:45ऑक्यूुपेंसी ज्यादा हो। तो जहां ऑलरेडी
- 32:47वंडर लॉ है और वो खुद ही 30 40%
- 32:49ऑक्यूुपेंसी पे चल रहा है। कोई और फिर 400
- 32:52500 करोड़ लगा के एक पार्क क्यों खोलेगा
- 32:55जब उसको पता है ट्रैफिक बट जाना है। तो
- 32:57अगर आधा-आधा ट्रैफिक 4000 के बदले दोनों
- 33:00पार्क में अगर 2000 2000 लोग जाएंगे तो जो
- 33:02नया पार्क है जिसने फ्रेश इन्वेस्टमेंट
- 33:04किया है उसको अपना पैसा रिकवर करने में ना
- 33:07जाने कितने साल लग जाएंगे। इसीलिए जो नए
- 33:10प्लेयर्स हैं वो वंडरला से कमपीट नहीं
- 33:12करना चाहते और वंडरला एक-एक करके अभी उनका
- 33:14चेन्नई पार्क बन रहा है। एक-एक करके नई-नई
- 33:17सिटीज कैप्चर करता जाता है और कोई और
- 33:20कमपीट नहीं करना चाहता। तो यह जो अप्रट
- 33:22कैपिटल है कि बहुत ज्यादा पैसा लगता है और
- 33:24पेबैक पीरियड लंबा है इसके कारण एंट्री
- 33:26बैरियर है। यह एक इंपॉर्टेंट मोड है
- 33:28एंट्री बैरियर जिसके कारण कोई और एंटर
- 33:30नहीं होता और वंडरला एक-एक करके सिटीज
- 33:32कैप्चर करता जा रहा है। इसके अलावा आप यह
- 33:34भी देखिए कि जैसे-जैसे वंडरला के पार्कक्स
- 33:37बढ़ते जा रहे हैं, उसका कैश फ्लो बढ़ता जा
- 33:39रहा है और उसका पेबैक पीरियड कम होता जा
- 33:42रहा है। इसको एक एग्जांपल से समझते हैं।
- 33:432000 में वंडरला ने पहला पार्क शुरू किया
- 33:46कोच्ची में। तो जो वंडरला का कैलकुलेशन है
- 33:48हम उसी को आसानी के लिए मान लेते हैं। यह
- 33:50सही नहीं है लेकिन आसान रहे इसलिए मान
- 33:52लेते हैं कि वह कोच्ची पार्क भी मान लीजिए
- 33:54₹10 करोड़ हर साल रिकवर करता है। मान
- 33:58लीजिए उस समय कोची पार्क को बनाने का
- 34:00खर्चा आया था ₹500 करोड़ एडजस्टेड टू
- 34:02इनफ्लेशन आज के हिसाब से। यानी चारप साल
- 34:05वंडरला को लगे उस पार्क की कॉस्ट रिकवर
- 34:08करने में। तो एक बार उस पार्क की कॉस्ट
- 34:10रिकवर हो गई। फिर भी वो पार्क तो हर साल
- 34:13प्रॉफिट कमा ही रहा है। तो मैंने क्या
- 34:15किया? 5 साल में अपने ₹120 करोड़ निकाल
- 34:18लिए। अगले 5 साल 120 पर ईयर पर ईयर करके
- 34:21मैंने ₹00 करोड़ और इकट्ठा किए और उससे
- 34:252009 2010 में मैंने सेकंड पार्क खोला। अब
- 34:28मेरे पास दो पार्क्स हैं। अब दो पार्क से
- 34:31मुझे 120 + 120 ₹240 करोड़ आ रहे हैं। ऐसे
- 34:35में अगर मान लीजिए सेकंड पार्क को मेरे
- 34:37बनाने की कॉस्ट ₹500 करोड़ भी थी तो 240
- 34:40240 पहले साल आया। दोनों पार्क से मिला के
- 34:42240 240 अगले साल आया। तो 2 साल में ही
- 34:45मेरे सेकंड पार्क की कॉस्ट रिकवर हो गई।
- 34:48मैंने 2 साल और लगाए। ₹500 करोड़ का कैश
- 34:51और दोनों पार्क से कलेक्ट किया और ₹500
- 34:54करोड़ से तीसरा पार्क हैदराबाद में खोल
- 34:56दिया। अब मुझे तीन पार्कक्स से पैसा आ रहा
- 35:00है। ₹10 करोड़ ईच। यानी ₹350 करोड़ मुझे
- 35:03हर साल अब तीन पार्कक्स से आ रहा है। तो
- 35:06ऐसे में जैसे-जैसे मेरे पार्क्स बढ़ते जा
- 35:08रहे हैं, मेरे पास कैश फ्लो बढ़ता जा रहा
- 35:10है और मेरा पेबैक पीरियड कम होता जा रहा
- 35:12है हर नए पार्क के लिए। क्योंकि अब मैं
- 35:15मल्टीपल सोर्सेस से उस पार्क का पेबैक
- 35:18कैलकुलेट कर रहा हूं। और जैसे-जैसे मेरे
- 35:20पार्क्स बढ़ेंगे, मेरे लिए कमपीट करना, नई
- 35:23सिटीज में घुसते जाना, कुछ इसी तरह की चीज
- 35:26dमar ने भी की। शुरू में उनके स्टोर्स
- 35:29धीरे-धीरे एक्सपैंड हो रहे थे। एक स्टोर
- 35:31से पैसा आ रहा था। जमा करके दूसरा स्टोर
- 35:33खोला। जमा करके तीसरा। अब जब 100 स्टोर्स
- 35:36हो गए तो 100 स्टोर से पैसा आ रहा है तो
- 35:37मैं हर महीने एक नया स्टोर खोल सकता हूं।
- 35:39तो ये एक बहुत इंपॉर्टेंट फैक्टर है कि ये
- 35:42बिजनेस तभी वायबल है अगर आप इसको स्केल
- 35:45करते रहें और आप मल्टीपल अपने सोर्सेस
- 35:48बनाते रहें कैश फ्लो के लिए। एक पार्क ही
- 35:50आप खोल के बैठ जाएंगे और उस पे इतना पैसा
- 35:53लगा देंगे कि वो पैसा रिकवर करने में ही
- 35:5515 साल लग जाए तो आप एक्सपैंड कब करेंगे।
- 35:58जिस कारण भी इमेजिका पीछे रह गया। अगेन
- 36:00मैं आपसे कहना चाहूंगा यह बाय सेल
- 36:02रिकमेंडेशन नहीं है। यह इंडस्ट्री मैंने
- 36:05इसलिए चुनी है क्योंकि इससे आप
- 36:06मल्टीप्लेक्स इंडस्ट्री एनालाइज कर सकते
- 36:08हैं। कुछ हद तक आप इससे रिटेल इंडस्ट्री
- 36:11भी जैसा मैंने डीमार्ट का एग्जांपल दिया
- 36:13उसको भी एनालाइज कर सकते हैं। तो ये लॉजिक
- 36:15जो है पेबैक पीरियड का ये मल्टीपल
- 36:17इंडस्ट्रीज में जा सकता है और कैसे कैश
- 36:19फ्लो के सोर्सेस एक्सपैंड होते जाते हैं।
- 36:21ये मल्टीपल इंडस्ट्रीज में जा सकता है।
- 36:23इसलिए इसे समझाना जरूरी था। लेकिन यह बाय
- 36:26सेल रिकमेंडेशन नहीं है। एक डिस्क्लोज़र
- 36:28मैं और दे दूं कि पर्सनली मैं वंडरला में
- 36:30बहुत सालों से इन्वेस्टेड हूं। आप में से
- 36:32अक्सर कई लोग चाहते थे कि मैं प्रैक्टिकली
- 36:35स्क्रीन में करके आपको फंडामेंटल एनालिसिस
- 36:38सिखाऊं और आज इसलिए मैं बहुत एक्साइटेड
- 36:40हूं क्योंकि आज मैं प्रैक्टिकली आपको
- 36:42स्क्रीन रिकॉर्डिंग के जरिए सिखाऊंगा कि
- 36:44मैं फंडामेंटल एनालिसिस कैसे करता हूं और
- 36:46कैसे आप भी tikerfinology.in
- 36:49पे जाके मेरी तरह स्टॉक्स को एनालाइज कर
- 36:52सकते हैं। तो हम एक सिंपल कंपनी के साथ
- 36:54शुरू करेंगे जिसके प्रोडक्ट्स शायद आप भी
- 36:56हर रोज अपनी लाइफ में यूज़ करते ही होंगे।
- 36:59hindstan unilivered। अब मैं आपको आज काफी
- 37:03सिंपल टर्म्स बताऊंगा कि कैसे किसी
- 37:05एफएमसीजी कंपनी को एफएमसीजी यानी फास्ट
- 37:08मूविंग कंज्यूमर गुड्स। यह वो कंपनियां
- 37:11होती हैं जो रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें
- 37:13बनाती हैं। साबुन हो, शैंपू हो, डिटर्जेंट
- 37:15हो इस तरह की चीजें और हिंदुस्तान unilver
- 37:18भारत में एफएमसीजी में सबसे बड़ी कंपनी
- 37:21है। अब आज पहला दिन है तो मैं बिल्कुल
- 37:23बेसिक्स के साथ शुरू करूंगा ताकि कोई भी
- 37:26चाहे उसे बिल्कुल भी इन्वेस्टिंग ना आती
- 37:28हो तो भी वो इन वीडियो सीरीज के जरिए
- 37:30इन्वेस्टिंग सीख सके। तो हम शुरू करेंगे
- 37:32उसी ऑर्डर में जिस ऑर्डर में डेटा दिया
- 37:35हुआ है। सबसे पहले बात करते हैं मार्केट
- 37:37कैप की कि ये मार्केट कैप क्या होता है?
- 37:40देखिए बहुत सिंपल है। अगर आप कोई कंपनी
- 37:44पूरी खरीदना चाहें यानी 100% किसी कंपनी
- 37:47के आप ओनर बनना चाहें तो आपको कितने पैसे
- 37:50देने पड़ेंगे यह हमें बताता है मार्केट
- 37:53कैप। Hindstan Unilever के केस में लगभग
- 37:57आपको ₹.5 लाख करोड़ यानी 5 लाख करोड़ से
- 38:01कुछ कम रुपए आपको देने पड़ेंगे हिंदुस्तान
- 38:05को पूरा खरीदने के लिए। ₹5 लाख करोड़ ये
- 38:08हिंदुस्तान की सबसे बड़ी कंपनियों में से
- 38:10एक है। तो ये होता है मार्केट कैप। अब
- 38:14मार्केट कैप कैसे निकलता है? मार्केट
- 38:16कैपिटलाइजेशन निकालना बहुत सिंपल है। आपको
- 38:19करना है बस एक चीज। आपको लेना है कि शेयर
- 38:22का दाम कितना है? जैसे अभी इस वीडियो को
- 38:24रिकॉर्ड करते समय इस शेयर का दाम दिखा रहा
- 38:27है ₹2190
- 38:29तो आपको यह लेना है और आपको उसे
- 38:31मल्टीप्लाई कर देना है नंबर ऑफ शेयर्स के
- 38:33साथ तो आज हिंदुस्तान unilver के टोटल
- 38:36शेयर्स हैं 216 करोड़ शेयर्स तो 216 करोड़
- 38:40शेयर्स को अगर आप 2190 से मल्टीप्लाई
- 38:44करेंगे तो लगभगल लगभग ये अमाउंट आपको मिल
- 38:47जाएगा। तो मार्केट कैप सिंपली है एक शेयर
- 38:50का दाम इनू नंबर ऑफ शेयर्स। तो अगर आप
- 38:53सारे शेयर्स किसी कंपनी के खरीदेंगे तो
- 38:55आपको कितने पैसे देने पड़ेंगे यह हमें
- 38:57बताता है मार्केट कैप। तो इससे हमें किसी
- 39:01कंपनी के साइज का कि वो कितनी बड़ी है
- 39:03उसका अंदाजा लगता है। और मार्केट कैप एक
- 39:06और बहुत इंटरेस्टिंग कंपैरिजन के काम आता
- 39:09है। बहुत काम आता है मेरे ये स्टॉक्स को
- 39:12सेलेक्ट करने में। कैसे वो मैं आपको इस
- 39:14वीडियो के एंड में बताऊंगा। वो थोड़ा सा
- 39:16एडवांस्ड है। अब आज आपको एक बात का ध्यान
- 39:18रखना है कि ये जो 20 क्लासेस हैं ये थोड़ी
- 39:21मैथमेटिक्स क्लासेस की जैसी है। यानी हर
- 39:23बार आपको कुछ नया सीखने मिलेगा जो पिछले
- 39:26वीडियो में सिखाई गई चीज से कनेक्टेड
- 39:28रहेगा। इसीलिए ये जरूरी है कि आप इन
- 39:31वीडियोस को लाइन से देखें और सारे वीडियोस
- 39:33को देखें। क्योंकि कौन सी चीज इंपॉर्टेंट
- 39:36है, कौन से रेश्यो पे आपको ध्यान देना है,
- 39:38किस हेडिंग पे आपको ध्यान देना है, ये
- 39:40कंपनी क्या बिजनेस करती है? उस पे भी
- 39:42डिपेंड करता है। तो वो समझना भी बहुत
- 39:44जरूरी है। अब हम नेक्स्ट रेश्यो की तरफ
- 39:46आते हैं जो है पीई रेश्यो। पीई रेशो यानी
- 39:50प्राइस टू अर्निंग रेश्यो। अब ये क्या
- 39:52होता है? इसे समझने के लिए पहले हमें कुछ
- 39:54और चीजें समझनी पड़ेंगी। जैसा मैंने कहा
- 39:57फाइनेंस में इन्वेस्टिंग में हर चीज आपस
- 39:59में कनेक्टेड है। तो पीई रेश्यो क्या होता
- 40:02है? यह समझने के लिए हमें पहले अर्निंग पर
- 40:05शेयर क्या होता है? यह समझना पड़ेगा।
- 40:08अर्निंग पर शेयर को मैं आपको एक सिंपल
- 40:10एग्जांपल से समझाता हूं। मान लीजिए एक
- 40:13दुकान है जो साल का ₹100 कमाती है। अब उस
- 40:17दुकान के चार पार्टनर्स हैं और सबका
- 40:20हिस्सा 1/4 1/4 1/4 1/4 है। यानी हर कोई
- 40:24उस दुकान में 25% का पार्टनर है। तो अब
- 40:26अगर चार शेयर हैं उस दुकान के और एक-एक
- 40:28शेयर चारों के पास है और वो दुकान टोटल
- 40:31कमाती है ₹100। यानी उस दुकान का नेट
- 40:34प्रॉफिट है ₹100। और टोटल शेयर्स कितने
- 40:38हैं उस दुकान के? जैसा नंबर ऑफ शेयर्स हम
- 40:40यहां देख रहे हैं। उस दुकान में नंबर ऑफ
- 40:42शेयर्स हैं चार। टोटल प्रॉफिट है 100।
- 40:46नंबर ऑफ शेयर्स हैं चार। तो पर शेयर कितना
- 40:49प्रॉफिट हुआ? एक इंसान को कितना प्रॉफिट
- 40:51मिला? ₹25। तो वही है अर्निंग पर शेयर। तो
- 40:56इस केस में Hindstan Unilever के केस में
- 40:59अर्निंग पर शेयर लगभग ₹28 में है। मैं
- 41:02उम्मीद करता हूं अर्निंग पर शेयर आपको
- 41:03क्लियर होगा कि कंपनी का टोटल मुनाफा
- 41:06कितना हो रहा है। उसको आप डिवाइड कर दीजिए
- 41:09कि कंपनी के टोटल शेयर्स कितने हैं। यानी
- 41:12नेट प्रॉफिट को मैं डिवाइड कर दूंगा नंबर
- 41:14ऑफ शेयर्स से तो आ जाएगा अर्निंग पर शेयर।
- 41:17अब इसे और समझिए। मुझे अगर Hind Unilever
- 41:20का शेयर खरीदना है तो मुझे मिल रहा है वह
- 41:23लगभग ₹2200 के आसपास और वह एक शेयर के
- 41:26पीछे मुझे साल भर में कमाई होगी ₹28 के
- 41:30आसपास। तो पीई का क्या मतलब है? पीई का एक
- 41:34सिंपल सा मतलब है कि किसी शेयर को खरीदने
- 41:36के लिए आप उसकी एक साल की कमाई का कितना
- 41:40गुना पैसा दे रहे हैं? यानी अगर Hindstan
- 41:43Unilever 1 साल में ₹28 कमाता है तो अगर
- 41:47Hindustan Unilever का शेयर भी ₹28 में
- 41:50मिल रहा होता तो मतलब आप उसको एक का पीई
- 41:53दे रहे होते यानी उसकी एक साल की कमाई के
- 41:56बराबर दाम पे आप उस शेयर को खरीद रहे
- 41:59होते। लेकिन Hindustan Unilever का शेयर
- 42:02है ₹2190 पे। तो अगर आप ₹2190 जो कि इसका
- 42:07प्राइस है इस कंपनी का PE है उसको डिवाइड
- 42:10करोगे ईपीएस से 28 जो कि E है तो Pेड बाय
- 42:16E आ जाएगा 70 यानी आप Hindustan Unilever
- 42:20को खरीदने के लिए आज जो उसकी एक साल की
- 42:23कमाई है पर शेयर कमाई उसका 70 गुना पैसा
- 42:27दे रहे हो तो अब ये 70 का पीस ज्यादा है
- 42:31कि कम है आपको ये शेयर लेना चाहिए कि नहीं
- 42:34इसको आप खुद से पूछिए। क्या आप कोई ऐसी
- 42:37दुकान खरीदेंगे ₹70 में जो साल का आपको ₹1
- 42:42का मुनाफा दे? अगर मैं आपको बोलूं कि यह
- 42:45लीजिए एक ऐसी दुकान जिससे आप साल का ₹1
- 42:47कमाएंगे और यह मैं आपको ₹70 में बेचूंगा।
- 42:50तो क्या आप उस दुकान को खरीदेंगे? यह हुई
- 42:53एक बात। दूसरी बात यह है कि HL जैसी कंपनी
- 42:58ने सालों साल पता नहीं पिछले 30 40 50
- 43:00सालों में लगभग हर साल अपना मुनाफा बढ़ाया
- 43:04है। किस रफ्तार से बढ़ाया है? चलिए यह
- 43:07देखते हैं।
- 43:09प्रॉफिट ग्रोथ का यह चार्ट देखिए। पिछले 1
- 43:12साल में 15% मुनाफा बढ़ा है एचयूएल का।
- 43:15पिछले 3 साल में हर साल ऑन एन एवरेज 13%
- 43:18की दर से बढ़ा है। पिछले 5 सालों में 10%
- 43:22की दर से ऑन एन एवरेज एचयूएल अपना मुनाफा
- 43:25बढ़ाता है। लेकिन उसके पहले एक तरीका एक
- 43:28सिंपल तरीका और है जिससे हम जान सकते हैं
- 43:30कि एचयूएल महंगा है कि नहीं। तो अभी हमने
- 43:33देखा कि पीई है 70 का। अब देखते हैं
- 43:36क्योंकि ये पीई तो रोज बदलता है क्योंकि
- 43:38ये प्राइस पे डिपेंडेंट है। इसका पीई यह
- 43:41प्राइस है। तो अगर प्राइस गिर जाए तो यह
- 43:43पीई कम हो जाएगा। बढ़ जाए तो पीई ज्यादा
- 43:45हो जाएगा। तो यह शेयर रोज कम ज्यादा महंगा
- 43:48सस्ता होता रहता है। तो अब यह देखते हैं
- 43:50कि यूजुअली एचयूएल का शेयर किस पीई पे
- 43:53चलता है। यूजुअली मार्केट इसको 1 साल के
- 43:56अर्निंग के बदले कितना भाव देता है। जैसे
- 43:58आज 70 गुना भाव दे रहा है। जरा हिस्ट्री
- 44:00देखते हैं। तो आपको जरा सा स्क्रॉल करना
- 44:02है। आपको ये 6 महीने, साल भर, 3 साल से
- 44:06ज्यादा और 5 साल से ज्यादा वाला डाटा
- 44:08मिलेगा। जैसे 5 साल से ज्यादा वाले में
- 44:10लगभग 8 साल का डाटा आपको मिल रहा है और ये
- 44:12आपको बता रहा है कि एचयूएल यूजुअली कितने
- 44:14पीई पे चलता है। तो जैसे 2013 में 27 के
- 44:18पीई के आसपास था। 15 में ये 40 के पीई पे
- 44:21आया। 17 में भी 40 के पीई पे था। 2018 से
- 44:25ये बढ़ने लगा और पिछले आठ सालों में अभी
- 44:28एचयूएल जितना महंगा है उतना महंगा या उतने
- 44:31ज्यादा पीई पे ये कभी नहीं रहा। तो एक ये
- 44:35प्राइमरी अंदाजा लग सकता है कि अभी एचयूएल
- 44:38महंगा चल रहा है। अब ऐसे मान लेना कि
- 44:41क्योंकि पिछले 5 साल के पीई से अभी पीई
- 44:43ज्यादा है इसलिए ये शेयर महंगा है। ऐसा
- 44:45सही नहीं है। पीई मार्केट ज्यादा दे सकता
- 44:48है या पीई बढ़ सकता है। अगर कंपनी ज्यादा
- 44:51ग्रोथ दिखाने लगे। हो सकता है पिछले 5
- 44:54सालों में कंपनी की ग्रोथ स्लो थी और
- 44:56पिछले एकद सालों में ग्रोथ तेज हुई है।
- 44:58यानी तेजी से कंपनी अब मुनाफा कमाने लगी
- 45:01है। तो अगर कंपनी मुनाफा तेजी से कमाएगी
- 45:04तो मार्केट जो उसको भाव देता है वो भी बढ़
- 45:06जाएगा। तो पहली झलक में लगता है कि एचयूएल
- 45:09महंगा है क्योंकि यह 40-50 के पीई पे होता
- 45:11था और आजकल 70 के पीई पे है। लेकिन अब
- 45:14देखते हैं कि क्या एचयूएल अपना मुनाफा
- 45:16पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ा रहा
- 45:19है। चलिए
- 45:21तो ये है सेल्स ग्रोथ और प्रॉफिट ग्रोथ का
- 45:23चार्ट। अब आप देखिए पिछले 1 साल में
- 45:25एचयूएल ने अपना मुनाफा 15% बढ़ाया है।
- 45:28पिछले 3 साल में वो 13% हर साल बढ़ाता था।
- 45:32वहीं पिछले 5 साल में वो 9% के हिसाब से
- 45:35हर साल अपना मुनाफा बढ़ाता था। तो पिछले 3
- 45:37साल में उसका परफॉर्मेंस इंप्रूव हुआ।
- 45:40पिछले एक साल में और ज्यादा इंप्रूव हुआ।
- 45:42तो ये भी एक कारण है कि मार्केट अब उसको
- 45:46ज्यादा पीई दे रहा है। जितना पहले देता था
- 45:48उससे ज्यादा अब दे रहा है। तो माना कि
- 45:50थोड़ा मुनाफा बढ़ा है। लेकिन उसके कारण
- 45:53क्या पीई का 50 से 70 हो जाना जस्टिफाइड
- 45:56है। क्या आपको 70 के पीई पे ये शेयर लेना
- 45:58चाहिए? इसका कैलकुलेशन थोड़ा
- 46:00कॉम्प्लिकेटेड है। हम कल सीखेंगे। लेकिन
- 46:02आज एक चीज सीख लेना जरूरी है। आपने जाना
- 46:06कि आपको आज के पीई को हिस्टोरिकल पीई से
- 46:10पिछले तीन या पांच साल के पीई से कंपेयर
- 46:12करना चाहिए और फिर हिस्टोरिकल पीई को उसकी
- 46:16प्रॉफिट ग्रोथ हिस्ट्री से कंपेयर करना
- 46:19चाहिए। यहां तक तो हमने सीख लिया। तो अब
- 46:21इमेजिन करिए कोई ऐसी कंपनी हो जिसका पिछले
- 46:255 साल में प्रॉफिट तेजी से बढ़ा हो। 3 साल
- 46:28में तेज़ बढ़ा हो, 1 साल में और अच्छा बढ़ा
- 46:31हो। यानी पिछले 5 साल में हर साल उस कंपनी
- 46:34का प्रॉफ़िट इंप्रूव हुआ हो, परफॉर्मेंस
- 46:36इंप्रूव हुआ हो, और उसके बावजूद उसका
- 46:39वैल्यू्यूएशन चार्ट यह दिखा रहा हो कि
- 46:42उसका पीई कम होता जा रहा है। यानी कोई
- 46:46कंपनी पहले तो 50 के पीई पे चलती थी और
- 46:48पहले वो 10% का प्रॉफिट ग्रोथ लाती थी। अब
- 46:51वह 20% का प्रॉफिट ग्रोथ ला रही है। लेकिन
- 46:53पहले वह 50 के पीई पे होती थी और अब वह
- 46:5530-40 के पीई पे हो गई है। ऐसे में तो हम
- 46:58बता सकते हैं कि सिर्फ अगर पीई रेशियो को
- 47:00देखा जाए तो वो कंपनी एक अच्छी कंपनी
- 47:02होगी। ध्यान रखिए सिर्फ पीई रेशियो देख के
- 47:05और आज जो मैंने सिखाया उसे देख के आंख बंद
- 47:08करके शेयर्स में इन्वेस्ट नहीं करना है।
- 47:10आप शेयर्स में इन्वेस्ट तभी करिएगा खुद की
- 47:12रिसर्च पे जब पूरे 20 दिन का कोर्स
- 47:15कंप्लीट हो जाए। आज यह सिर्फ सिंपलिस्टिक
- 47:17एग्जांपल्स हैं। तो चलिए मैंने एक ऐसी
- 47:20कंपनी आपके लिए ढूंढ के रखी है। यह मैं
- 47:23आपको इसलिए दिखा रहा हूं ताकि आपको पीई
- 47:25रेशियो का यूज़ और उसको कैसे कंपेयर करना
- 47:28है वो आसान हो जाए। Colgate इसे भी बहुत
- 47:30जानीमानी कंपनी है। हम सब जानते हैं। पीई
- 47:33रेशियो इसका लगभग 39 के आसपास है आजकल। अब
- 47:36देखते हैं कि इसका हिस्टोरिकल पीई क्या
- 47:38रहा है। इसका हिस्टोरिकल पीई यहां पे 40
- 47:41कुछ कम हुआ फिर 40, यहां पर 45
- 47:4650 के आसपास यहां भी 50 तो यह यूजुअली 40
- 47:50और 50 के बीच में रहा है और अभी है 39
- 47:53यानी ये अपने हिस्टोरिकल पीई के आसपास या
- 47:56थोड़ा सस्ता मिल रहा है। ऐसा क्यों?
- 47:58क्याate का परफॉर्मेंस बुरा हुआ है? चलिए
- 48:01देखते हैं। 1 साल में प्रॉफिट ग्रोथ 15% 3
- 48:05साल में 10% 5 साल में 7% यानी इसने भी 5
- 48:10साल के मुकाबले पिछले 3 साल में बेटर और
- 48:12पिछले साल और बेटर परफॉर्मेंस दिखाया है।
- 48:15तो कोई अगर सिर्फ इतना सा हम डाटा देखें
- 48:18तो कोई कारण नहीं है कि 4550 के पीई के
- 48:21मुकाबले इसे 39 का पीई मिले। तो इस केस
- 48:24में मेरा इंटरेस्ट जागेगा। मैं इन्वेस्ट
- 48:27नहीं कर दूंगा लेकिन मेरा इंटरेस्ट जागेगा
- 48:29कि हां ये कंपनी ठीक लग रही है। इसे और
- 48:32देखा जा सकता है क्योंकि ये अपने
- 48:34हिस्टोरिकल वैल्यू्यूएशन से सस्ता है और
- 48:36हिस्टोरिकल परफॉर्मेंस के मुकाबले इसका
- 48:38परफॉर्मेंस बेटर हो रहा है। तो इस तरीके
- 48:41से पीई रेशियो को यूज़ करके हम ये कंपनीज़
- 48:45फिल्टर कर सकते हैं कि कौन सी कंपनी फर्दर
- 48:48रिसर्च के लायक है या किस पे मैं और ध्यान
- 48:51दूंगा और अपना समय लगाऊंगा। तो आज जो हमने
- 48:54सीखा इससे सिर्फ आप कंपनीज़ फिल्टर कर
- 48:56पाएंगे कि किस पे और ध्यान देना है, किस
- 48:59पे नहीं देना है। ये इन्वेस्टिंग
- 49:01रिकमेंडेशन बिल्कुल नहीं। अब ध्यान रखिए
- 49:03मैंने आपको वीडियो के स्टार्टिंग में
- 49:05बताया था कि मार्केट कैप मैंने आपको समझा
- 49:07तो दिया क्या होता है। लेकिन कैसे सिर्फ
- 49:10मार्केट कैप देख के भी एक हल्का सा आईडिया
- 49:13लगता है कि मैं किस कंपनी में इन्वेस्ट
- 49:15करना चाहता हूं, किस में नहीं। देखिए हर
- 49:18इंसान के पास पैसा लिमिटेड है। तो अगर मैं
- 49:20आपसे कहूं कि आपके पास ₹5 लाख करोड़ हैं
- 49:23तो ₹5 लाख करोड़ों से आप क्या खरीदना
- 49:26चाहेंगे? क्या आप उन ₹5 लाखों से HL को
- 49:29खरीदना चाहेंगे जो लगभग ₹55 लाख करोड़ की
- 49:33है या फिर आप Infosys जिसको भी हम सब
- 49:36जानते हैं उसका मार्केट कैप देखते हैं।
- 49:39Infosys का मार्केट कैप लगभग ₹5 लाख करोड़
- 49:41से थोड़ा ऊपर है। तो अगर आप चाहें तो आप
- 49:44Infosys खरीद सकते हैं और फिर भी और फिर
- 49:47भी आपके पास ₹300 करोड़ बचेंगे। तो आप
- 49:50अपने ₹ लाख करोड़ों को कैसे यूज़ करना
- 49:53चाहते हैं? क्या आप HDFC बैंक खरीदना
- 49:56चाहते हैं? HDFC बैंक भी लगभग HL के बराबर
- 50:00मार्केट कैप में है। तो अगर आपके पास ₹5
- 50:03लाख करोड़ हैं तो आप पूरा HL खरीदेंगे या
- 50:06पूरा HDFC खरीदेंगे। क्या आप साबुन, केचप,
- 50:10नूडल्स बनाने वाली कंपनी खरीदना पसंद
- 50:12करेंगे या आप देश का सबसे बड़ा सबसे वेल
- 50:15मैनेज्ड बैंक खरीदना पसंद करेंगे। तो इस
- 50:18तरीके से जब आप इंडस्ट्री बाय इंडस्ट्री
- 50:20कंपनी बाय कंपनी ऐसे सोचेंगे कि मेरे पास
- 50:23इतने रुपए हैं। इस रुपए में मैं क्या-क्या
- 50:25खरीद सकता हूं। जैसे जब हम खाने जाते थे,
- 50:28स्कूल में बच्चे थे, हमको घर वाले 50 या
- 50:30₹100 पॉकेट मनी देकर भेजते थे। तो और बहुत
- 50:33सारे बाहर चाट पकड़ी कई तरह के स्टॉल होते
- 50:36थे। तो हम सोचते थे कि हमारे ₹10 से हम
- 50:39चिप्स खाएं या चॉकलेट खाएं। भेल खाएं या
- 50:41कुछ और खाएं। उसी तरह आपको सोचना है
- 50:44मार्केट कैप को लेके कि इन रुपयों से मैं
- 50:47HL खरीदूं या मैं एयरलाइन कंपनी खरीदूं या
- 50:50मैं आईटी कंपनी खरीदूं या मैं बैंक खरीदूं
- 50:53तो उससे भी आपका इंट्यूशन आपको आईडिया
- 50:56देगा कि कहां आपको अपने कीमती रुपयों को
- 50:59लगाना चाहिए क्योंकि आपके रुपए हमेशा
- 51:01लिमिटेड है और उसका बेस्ट यूज़ आपको
- 51:04इंट्यूटिवली आ जाएगा अगर आप मार्केट कैप
- 51:06को इस तरीके से अक्रॉस इंडस्ट्रीज कंपेयर
- 51:09करेंगे। आज हम डिस्कस करते हैं मार्केट
- 51:12कैप से रिलेटेड लेकिन मार्केट कैप से
- 51:14ज्यादा इंपॉर्टेंट कांसेप्ट को जो है
- 51:16एंटप्राइज वैल्यू और ये एंटप्राइज वैल्यू
- 51:19अब क्या होता है ये जान लीजिए कि ये
- 51:21मार्केट कैप से डिराइव होता है लेकिन उससे
- 51:24बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है। अब
- 51:27कल हमने ये जाना कि मार्केट कैप क्या है?
- 51:30मार्केट कैप एक सिंपल सी चीज है कि प्राइस
- 51:32ऑफ वन शेयर इन नंबर ऑफ शेयर्स। ये मार्केट
- 51:35कैप है। यानी अगर आपको कोई कंपनी पूरी
- 51:38खरीदनी है तो वो आपको कितने रुपए दे के
- 51:40मिल रही है? ये आपको मार्केट कैप बताता
- 51:42है। अब एंटरप्राइज वैल्यू क्या है? इसे एक
- 51:46दुकान के एग्जांपल से समझते हैं। अगर मैं
- 51:48आपको बोलूं कि एक दुकान है जिसे आप ₹100
- 51:51में खरीद सकते हैं। तो आपने मुझे ₹100 दिए
- 51:55वो हो गया उस दुकान का मार्केट कैप।
- 51:58एंटरप्राइज वैल्यू में फर्क क्या है कि
- 52:00मैंने आपको बोला कि आप इस दुकान को ₹100
- 52:02में खरीद सकते हैं। लेकिन उस दुकान के
- 52:06अंदर तिजोरी में उस दुकान की ₹20 रखे हुए
- 52:09हैं। वो रुपए भी आपके हुए। यानी कि
- 52:12बेसिकली आपको यह दुकान कितने की पड़ी?
- 52:14आपको यह दुकान पड़ी ₹80 की। क्योंकि ₹100
- 52:17आपने दिए और ₹20 दुकान के अंदर थे जो आपके
- 52:20हो गए। तो आपको वो दुकान पड़ी ₹80 की। अब
- 52:23मैं बोलता हूं लेकिन उस ₹20 में से जो
- 52:26तिजोरी में ₹20 रखे हुए हैं उसमें से ₹10
- 52:29एक दोस्त को मुझे देने थे तो आप ₹10 वो
- 52:32दोस्त लेने आएगा उसको दे देना। तो अब
- 52:35मैंने ₹100 में दुकान खरीदी। उस दुकान के
- 52:38अंदर ₹20 तिजोरी में थे वो मुझे मिले।
- 52:40यानी मेरे को ₹80 की दुकान पड़ी। लेकिन अब
- 52:43मुझे ₹10 एक जो दुकान का मालिक था उसके
- 52:46दोस्त को देने भी हैं। मुझे वो दुकान पड़ी
- 52:4980 + 10 यानी कि ₹90 की। तो यह ₹90 हुआ
- 52:54एंटरप्राइज वैल्यू। एंटरप्राइज वैल्यू यह
- 52:56बताता है कि जो कंपनी आप खरीद रहे हैं वो
- 52:59सच में आपको कितने की पड़ी या असली में उस
- 53:03कंपनी की कीमत दिख कितनी रही है जो
- 53:05मार्केट कैप बताता है और है कितनी यह
- 53:07एंटरप्राइज वैल्यू बताता है। तो इसका
- 53:10फार्मूला एकदम सिंपल है। मार्केट कैप जो
- 53:13₹100 था उसमें से आपने जो दुकान के अंदर
- 53:16₹20 हैं उसको माइनस कर दिया। यानी दुकान
- 53:19के अंदर जो कैश रखा था उसको माइनस कर दिया
- 53:22और जो आपको किसी को पैसे लौटाने थे यानी
- 53:25जो कर्जा था उसको प्लस कर दिया तो मार्केट
- 53:29कैप माइनस कैश प्लस डेप्ट या लोन ये हो
- 53:34गया एंटरप्राइज वैल्यू और अब आप ये सोच
- 53:37रहे होंगे ये इतना जरूरी क्यों है या इतना
- 53:39टाइम देके मैं इसे क्यों समझा रहा हूं। अब
- 53:41मैं आपको बताता हूं कि मार्केट कैप और
- 53:43एंटरप्राइज़ वैल्यू में कितना डिफरेंस हो
- 53:45सकता है और एंटरप्राइज़ वैल्यू कैसे आपको
- 53:48बहुत बड़ी-बड़ी गलतियां करने से बचा सकता
- 53:50है। चलिए एक कंपनी का एग्जांपल लेते हैं।
- 53:52एडलैब्स एंटरटेनमेंट अगर आप जानते होंगे
- 53:55तो एडलैब्स एंटरटेनमेंट वो कंपनी है जो
- 53:57इमैजिका पार्क चलाती है मुंबई पुणे हाईवे
- 54:00के बीच काफी पॉपुलर है। आप लोगों ने काफी
- 54:02नाम भी सुना होगा इस कंपनी का। अब जरा
- 54:04देखिए इस कंपनी का मार्केट कैप कितना है।
- 54:06यानी आप इस पूरी कंपनी को कितने रुपयों
- 54:09में खरीद सकते हैं। तो मार्केट कैप दिख
- 54:12रहा है ₹22 करोड़ का। यानी आप चाहें तो
- 54:15पूरा एडल लैब्स एंटरटेनमेंट बशर्ते जो
- 54:18जिनके पास अभी शेयर्स हैं, जो ओनर्स हैं
- 54:19वो बेचना चाहें तो लगभग 22-23 करोड़ में
- 54:23आपको पूरा का पूरा एड लैप्स पार्क जो
- 54:25मुंबई पुणे हाईवे जैसे अच्छे एरिया में है
- 54:27और पता नहीं कितने एकड़ में फैला हुआ है।
- 54:30वह पार्क आपको ₹22 करोड़ में मिल जाएगा।
- 54:32झूलों के साथ, सब कुछ के साथ। तो यह कितना
- 54:34सस्ता लगता है और यह देख के हम ललचा सकते
- 54:38हैं। लेकिन अब इसमें एक दूसरा फैक्टर
- 54:41देखिए कि इसकी एंटरप्राइज वैल्यू कितनी
- 54:43है? एंटरप्राइज वैल्यू है लगभग 1000 करोड़
- 54:471100 करोड़ के आसपास। यानी 22 करोड़ में
- 54:51आपको यह पूरी कंपनी मिल तो जाएगी लेकिन
- 54:53उसके बाद यह जो 1000 करोड़ से ज्यादा का
- 54:57डेप्ट है जो 1000 करोड़ से ज्यादा का
- 54:58कर्जा है अगर आपने 22 करोड़ देके कंपनी
- 55:01खरीद ली तो यह कर्जा भी फिर आपको ही पटाना
- 55:04पड़ेगा। इसीलिए एंटरप्राइज वैल्यू हमेशा
- 55:08ज्यादा काम आती है क्योंकि यह आपको सच में
- 55:10बताती है कि आपको कितना पैसा ओवर द इयर्स
- 55:13देना पड़ेगा। ना सिर्फ इक्विटी के फॉर्म
- 55:16में बल्कि कर्जा जो उस कंपनी के लेनदार
- 55:19हैं उनको लौटाने के लिए भी। तो अल्टीमेटली
- 55:21ऐड लैब्स आपको 1100 करोड़ का पड़ेगा
- 55:24क्योंकि 1000 करोड़ से ज्यादा का तो आपको
- 55:26कर्जा चुकाना है। इस तरीके से एंटप्राइज
- 55:29वैल्यू आपको ब्लंडर्स करने से बचाती है और
- 55:31इसी तरीके से एंटरप्राइज वैल्यू कई बार
- 55:34आपको बहुत अच्छी कंपनियां भी दिलवाएगी।
- 55:38लेकिन जो भी स्टॉक्स मैं आपको रिसर्च करके
- 55:40दिखा रहा हूं वो सिर्फ एजुकेशनल पर्पस के
- 55:42लिए है। वो रिकमेंडेशन डायरेक्ट या
- 55:44इनडायरेक्ट बिल्कुल नहीं है। अब मैं आपको
- 55:47बताता हूं कि कई बार ऐसा मेरे को पहले भी
- 55:49एक बार एक कंपनी मिली थी और उसने काफी
- 55:51अच्छा मुझे रिटर्न दिया था और वो सिर्फ और
- 55:53सिर्फ मुझे एंटरप्राइज वैल्यू के कारण
- 55:55मिली थी। यहां पे देखिए मार्केट कैप दिख
- 55:58रहा है लगभग 2800 करोड़ का। लेकिन
- 56:01एंटरप्राइज़ वैल्यू नेगेटिव दिख रही है।
- 56:04नेगेटिव ऐसा क्यों? अब इसे एक ऐसे
- 56:07एग्जांपल से समझिए कि वो जो ₹100 वाली
- 56:10दुकान है, मैं आपको बोल रहा हूं कि आप
- 56:12मेरी पूरी दुकान ₹100 में खरीद सकते हैं।
- 56:14लेकिन उस दुकान की तिजोरी में ₹120 रखे
- 56:18हुए हैं। वो ₹120 भी आपके और कोई लोन-वोन
- 56:22भी नहीं है उस दुकान पे। आपको किसी को कोई
- 56:24पैसा नहीं देना। तो ₹100 में आपने दुकान
- 56:26खरीदी और उस दुकान की तिजोरी में ₹120
- 56:29हैं। तो आपको वह दुकान कितने की पड़ी?
- 56:31आपको वह दुकान -20 की पड़ी। ने आपको ₹20
- 56:36उल्टा मिल ही गए। खर्चा कुछ नहीं हुआ।
- 56:37दुकान तो फ्री में मिल गई। कुछ वैसा ही हो
- 56:40रहा है आज इस कंपनी के साथ। देखिए 2800
- 56:44करोड़ का मार्केट कैप है। यानी 2800 करोड़
- 56:46में आप पूरी कंपनी खरीद सकते हैं। लेकिन
- 56:48इस कंपनी के पास कैश बैंक में और हाथ में
- 56:51कैश ही ₹5000 करोड़ का है। और कर्जा कुछ
- 56:55है नहीं। यानी आप ₹2800 करोड़ देके ₹5000
- 56:59करोड़ के मालिक बन सकते हैं। और
- 57:01एंटरप्राइज वैल्यू हुई नेगेटिव। तो
- 57:04यूजुअली ऐसे ब्लाइंडली किसी शेयर की
- 57:07क्योंकि एंटरप्राइज वैल्यू कम है, जीरो है
- 57:09या नेगेटिव है तो ब्लाइंडली किसी कंपनी
- 57:11में इन्वेस्ट नहीं कर लेना है। ना ही मैं
- 57:12बोल रहा हूं कि एनबीcसी में इन्वेस्ट
- 57:14करिए। आपको ये देखना है कि ऐसा क्यों है?
- 57:17क्या कारण है कि इसकी एंटरप्राइज वैल्यू
- 57:19नेगेटिव है। बहुत सारे अदर फैक्टर्स आपको
- 57:22एनालाइज करने हैं जो अगले 19 दिनों में हम
- 57:24सीखेंगे। उसके बाद हम ये डिसाइड कर सकते
- 57:27हैं कि लेना है कि नहीं। लेकिन हां अगर
- 57:29कोई सरकारी कंपनी हो जो कि एफबीसीसी है
- 57:32उसकी एंटरप्राइज वैल्यू ऐसी नेगेटिव है
- 57:34कैश बैलेंस अच्छा है तो पहली झलक में ये
- 57:37कंपनी फर्दर रिसर्च के लायक है। मुझे ऐसी
- 57:40कंपनी में इंटरेस्ट जरूर आ जाएगा। तो
- 57:42एंटरप्राइज वैल्यू ब्लंडर्स से बचाता है
- 57:45और कई बारगेन बायस ढूंढने में मदद करता
- 57:48है। अब एक और जो बहुत जरूरी कांसेप्ट मुझे
- 57:51आपसे डिस्कस करना है वो है स्टैंड अलोन और
- 57:54कंसोलिडेटेड का। देखिए, अभी आपको
- 57:56एंटरप्राइज़ वैल्यू दिख रही है -2000 करोड़।
- 57:58पीई दिख रहा है 21 का। अब यहां पे एक बटन
- 58:01है जो अभी कंसोलिडेटेड पे है। मैं इसे टच
- 58:04करता हूं और अब यह स्टैंड अलोन पे चला
- 58:06जाएगा। पेज रिफ्रेश होगा और अब एंटरप्राइज
- 58:08वैल्यू पॉजिटिव 1200 करोड़ और पीई 21 के
- 58:12बदले 15 का दिख रहा है। तो इसमें क्या
- 58:14फर्क है? ये स्टैंड अलोन और कंसोलिडेटेड
- 58:16क्या होता है? देखिए स्टैंड अलोन मतलब मान
- 58:19लीजिए आपने कोई बिजनेस चालू किया और
- 58:21दो-तीन साल आपने खूब अच्छा बिजनेस किया और
- 58:24पैसा कमाया तो जो आप खुद मेहनत करके सेल्स
- 58:27लाते हैं पैसा कमाते हैं जो भी आपकी
- 58:30फाइनेंसियल हालत है आपके खुद के किए हुए
- 58:33काम से जो आप रोजमर्रा की सेल्स करते हैं
- 58:36मुनाफा कमाते हैं वो सब कुछ जो आता है उसे
- 58:38हम कहते हैं स्टैंड अलोन अब मान लीजिए कि
- 58:41आपने दो-ती साल खूब पैसा कमाया आपके पास
- 58:43प्रॉफिट्स जमा हो गए थे और उस प्रॉफिट से
- 58:46आपने अपने दोस्त के बिजनेस में थोड़ा
- 58:49इन्वेस्टमेंट किया और बदले में उससे
- 58:50हिस्सेदारी ले ली और यह कहा कि यह ले ₹1
- 58:53करोड़ मैं दे रहा हूं। बदले में 20%
- 58:56हिस्सा मेरा तो जो भी महीने भर में कमाई
- 58:58होगी उसका 20% मुझे देते जाना। तो अब जो
- 59:02आप अपने बिजनेस से कमा रहे हैं वो हुआ
- 59:05स्टैंड अलोन। प्लस जो आपका दोस्त उसके
- 59:08बिजनेस का 20% आपको हर महीने पैसा दे रहा
- 59:11है वो उसको अगर आप जोड़ दो वो हो गया
- 59:14कंसोलिडेटेड। यानी आपका बिजनेस प्लस आपके
- 59:18इन्वेस्टमेंट जो आपने अदर बिनेसेस में किए
- 59:20हुए हैं जो अदर आपके इन्वेस्टमेंट से आपको
- 59:22पैसा मिल रहा है वो होता है कंसोलिडेटेड
- 59:25स्टेटमेंट। तो कई सारी ऐसी कंपनियां होती
- 59:28हैं जो खुद तो कुछ ना कुछ काम करती ही हैं
- 59:30लेकिन किसी और कंपनी को भी या तो खरीद
- 59:32लेती हैं, एक्वायर कर लेती हैं या उसमें
- 59:34इन्वेस्टमेंट कर देती हैं और वहां से भी
- 59:36उन्हें पैसा आने लगता है या रेवेन्यू आने
- 59:38लगता है। उसे कहा जाता है कंसोलिडेटेड। अब
- 59:41मैं आपको बताता हूं कि इससे कितना ज्यादा
- 59:44फर्क पड़ सकता है। ये है Tata Motors के
- 59:46फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स। अब हम Tata
- 59:48Motors की स्टैंड अलोन सेल्स देखते हैं।
- 59:50तो स्टैंड अलोन सेल्स Tata Motors की साल
- 59:53की है लगभग 70000 करोड़। अब देखते हैं कि
- 59:57JLR Land Rover और Jaguar जो Tata ने कुछ
- 1:00:00साल पहले खरीदी थी उसको मिला लें तो 70000
- 1:00:03करोड़ की सेल कितनी हो जाती है।
- 1:00:06अब आप देखिए टोटल सेल उसको मिला के हो रही
- 1:00:09है 3 लाख करोड़ यानी 70000 करोड़ से बढ़
- 1:00:13के 3 लाख करोड़ चार गुना से भी ज्यादा सेल
- 1:00:16हो गई। तो ऐसे में अगर आप स्टैंड अलोन
- 1:00:18स्टेटमेंट से Tata मोटर्स को जज करेंगे तो
- 1:00:20हमेशा आपको गलत पिक्चर मिलेगी और आपको
- 1:00:23लगेगा कि ये कंपनी इतनी महंगी क्यों है?
- 1:00:25तो जरूरी है कि हम ज्यादातर समय
- 1:00:26कंसोलिडेटेड स्टेटमेंट्स देखें। तभी हमें
- 1:00:29किसी कंपनी की सही जानकारी मिलेगी। अब बात
- 1:00:32करते हैं अगले इंपॉर्टेंट रेश्यो पीबी
- 1:00:34रेशियो की यानी प्राइस टू बुक वैल्यू
- 1:00:36रेशो। अब इसे समझने के लिए पीई रेश्यो की
- 1:00:39तरह ही पी का मतलब तो शेयर प्राइस है। बी
- 1:00:41का मतलब क्या है? बी का मतलब है बुक
- 1:00:44वैल्यू। बुक वैल्यू का मतलब बिल्कुल ही
- 1:00:47आसान है। इसे भी हम उस दुकान के एग्जांपल
- 1:00:50से लेते हैं कि मान लीजिए एक दुकान है
- 1:00:52जिसमें टोटल जिसकी टोटल वैल्यू ₹100 है।
- 1:00:55यानी उस दुकान को अगर आप बेचेंगे वो खाली
- 1:00:57दुकान है। लेकिन उस दुकान की आज सरकारी
- 1:01:00कीमत ₹100 है। वो ₹100 में बिक जाएगी। अब
- 1:01:02उस दुकान के दो शेयर होल्डर हैं आधे-आधे।
- 1:01:05एक आप और एक आपका दोस्त। तो अगर वह दुकान
- 1:01:08कल को बिकती है तो आपका शेयर कितने रुपए
- 1:01:11का होगा या कितना रुपया आपको मिलेगा? आपको
- 1:01:14मिलेगा ₹50 तो उस दुकान की बुक वैल्यू पर
- 1:01:18शेयर हुई क्योंकि दो ही शेयर हैं तो 100
- 1:01:21बाय 2 उस दुकान की बुक वैल्यू हुई ₹50 इसी
- 1:01:26तरह Tata Steel की बुक वैल्यू यहां दिख
- 1:01:28रही है ₹593 इसका क्या मतलब है कि एक शेयर
- 1:01:32के पीछे ₹593
- 1:01:35के एसेट या ₹593 बैंक में पड़े हुए हैं।
- 1:01:39यानी अगर आज Tata Steel बिक जाए
- 1:01:41थ्योरेटिकली ₹553 हर शेयर होल्डर को
- 1:01:45मिलेंगे। अब एक शेयर है ₹277 का तो अगर आज
- 1:01:50Tata Steel डिसाइड कर ले कि सब बेच देते
- 1:01:52हैं तो आपको ₹277 के एक शेयर के बदले ₹593
- 1:01:57मिलेंगे। प्रैक्टिकल वर्ल्ड में ऐसा होता
- 1:02:00नहीं है। क्योंकि जब कोई कंपनी अपने
- 1:02:02एसेट्स जो कि प्लांट एंड मशीनरी हो सकता
- 1:02:04है, कारें हो सकती हैं, वह बेचने जाती है
- 1:02:06तो दाम उतना मिलता नहीं है और समय बहुत
- 1:02:08ज्यादा लग जाता है। तो प्रैक्टिकली ऐसा
- 1:02:10नहीं होता है। लेकिन आप समझने के लिए यह
- 1:02:12समझ सकते हैं कि ₹270 के शेयर के पीछे
- 1:02:16₹593 का कैश बैलेंस या एसेट कंपनी के पास
- 1:02:20है। तो बस यही है पीबी रेशियो जिसमें
- 1:02:22प्राइस हो गया 277 / 593। तो जो आ रहा है
- 1:02:270 47 अब ये देख के लगेगा कि अरे 277 के
- 1:02:31पीछे 593 के एसेट्स ये शेयर तो सस्ता है।
- 1:02:34तो यहां पे दो चीजें हैं कि पीबी रेशियो
- 1:02:38जो है या बुक वैल्यू जो है वो कुछ ही
- 1:02:40इंडस्ट्रीज में काम की है। हर इंडस्ट्री
- 1:02:42में काम की नहीं है। तो जब कौन सी
- 1:02:45इंडस्ट्रीज में काम की है? हैवी
- 1:02:46इंडस्ट्रीज, कैपिटल इंटेंसिव इंडस्ट्रीज,
- 1:02:49सीमेंट हो गया, पावर हो गया, इंफ्रा हो
- 1:02:51गया। इस तरीके की इंडस्ट्रीज जहां कैपिटल
- 1:02:53हार्ड एसेट्स में लगता है प्लांट बनाने
- 1:02:55में, जमीन खरीदने में वहां बुक वैल्यू काम
- 1:02:58आती है। बाकियों में काम क्यों नहीं आती?
- 1:03:01चलिए मैं समझाता हूं info एज के एग्जांपल
- 1:03:04लेके। infoh अगर आपको नहीं पता तो
- 1:03:06ncry.com जो वेबसाइट है वो infoh की है।
- 1:03:0899 एक्स है। जीवन साथी है। Zomato में भी
- 1:03:11इनका इन्वेस्टमेंट है। अब यहां पे पीबी
- 1:03:14दिख रहा है 10 का। शेयर प्राइस है 2000।
- 1:03:16बुक वैल्यू है 200। यानी ₹2000 के शेयर्स
- 1:03:20के पीछे केवल ₹200 के एसेट्स रखे हुए हैं
- 1:03:23कंपनी के पास। तो यह तो बहुत महंगा है।
- 1:03:25₹200 के जब एसेट्स हैं तो मैं 2000 में
- 1:03:27शेयर क्यों लूं? ऐसा लगता है। अब जैसा
- 1:03:29मैंने बताया बुक वैल्यू में क्या आता है?
- 1:03:31कार, मशीनरी, प्लांट, फैक्ट्री, फर्नीचर
- 1:03:34इस तरह की चीजें जिन्हें आप टच एंड फील कर
- 1:03:37सकें। लेकिन इंफो एज के बारे में देखिए।
- 1:03:40ये 10 टाइम्स प्राइस टू बुक वैल्यू में
- 1:03:42है। देखने में महंगी लग रही है ना? लेकिन
- 1:03:44यहां पे प्राइस टू बुक वैल्यू रेशो सही
- 1:03:46मापदंड नहीं है इसे जज करने का कि ये
- 1:03:48महंगी है या सस्ती। क्यों? एक सिंपल सा
- 1:03:51रीज़न है। इंफोज जो काम करता है जैसे इंफोज
- 1:03:54का क्या काम है? वो एक ऑफिस में 5000
- 1:03:57लोगों को बिठाता है वेब डेवलपर्स को और
- 1:03:59वेब डेवलपर्स उनके लिए वेबसाइट बनाते हैं
- 1:04:01और सेल्स वाले उनके लिए सेल करते हैं। तो
- 1:04:03इससे ये पता चल रहा है कि इंफोच के हार्ड
- 1:04:06कोर एसेट्स टजिबल एसेट्स बहुत ज्यादा नहीं
- 1:04:08है। इनका बिजनेस मॉडल ऐसा है कि इनको
- 1:04:10बड़ी-बड़ी फैक्ट्रीज नहीं खरीदनी,
- 1:04:12बड़े-बड़े प्लांट नहीं डालने, बहुत ज्यादा
- 1:04:14एसेट जमीन नहीं चाहिए। ऐसे में इनकी बुक
- 1:04:18वैल्यू जो है वो तो कम ही रहेगी क्योंकि
- 1:04:20इनके पास एसेट्स तो ज्यादा आए ही नहीं।
- 1:04:22इनको क्या ज्यादा चाहिए? एंप्लाइजज़ बहुत
- 1:04:25ज़्यादा चाहिए। तो एंप्लाइजज़ जो हैं उन्हें
- 1:04:27अकाउंटिंग के हिसाब से एसेट नहीं माना
- 1:04:30जाता। एंप्लाइजज़ को एक्सपेंस माना जाता
- 1:04:32है। एंप्लाइजज़ को सैलरी दी जाती है और
- 1:04:35सैलरी एक एक्सपेंस होता है। तो इस कारण
- 1:04:38क्योंकि एंप्लाइजज़ को अकाउंटिंग टर्म में
- 1:04:40एसेट माना ही नहीं जाता। इसलिए इस कंपनी
- 1:04:43की बुक वैल्यू और सारी आईटी कंपनीज़ की बुक
- 1:04:45वैल्यू कम दिखती है। सेकंडली आप Apple को
- 1:04:48ले लीजिए। अगर आप एप्पल को ऐसे तोलने
- 1:04:50जाएंगे कि इनके पास जमीन कितनी है? इनके
- 1:04:53पास प्लांट कितना है? इनके पास फैक्ट्री
- 1:04:54कितना है? इनके पास कितना फर्नीचर है? तो
- 1:04:57क्या वो एप्पल को मापने का सही तरीका है?
- 1:05:00क्योंकि Apple की वैल्यू उसके ब्रांड से
- 1:05:02आती है। अगेन ब्रांड को बुक वैल्यू में
- 1:05:05इंक्लूड नहीं किया जाता। केवल टच एंड फील
- 1:05:08वाले एसेट्स को किया जाता है। तो ऐसी
- 1:05:10कंपनीज़ जिनके ब्रांड बहुत स्ट्रांग है और
- 1:05:12जो ब्रांड के भरोसे बिकती है आईपी
- 1:05:14इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी वाली कंपनीज़ उनको
- 1:05:17बुक वैल्यू और प्राइस टू बुक वैल्यू से जज
- 1:05:20नहीं करना है। आईटी कंपनीज़ को प्राइस टू
- 1:05:22बुक वैल्यू से जज नहीं करना है। बैंक्स को
- 1:05:25बिल्कुल कर सकते हैं। बैंक्स में प्राइस
- 1:05:28टू बुक वैल्यू अच्छा काम आता है क्योंकि
- 1:05:30बैंक्स के पास फाइनेंशियल एसेट है। वह
- 1:05:32डिपॉज़िट्स लेते हैं और लोन देते हैं तो
- 1:05:34उसको बुक वैल्यू पूरी तरीके से सही-सही
- 1:05:37कैप्चर करती है। इसलिए बैंक्स के लिए यह
- 1:05:39एक अच्छा रेश्यो है। स्टील प्लांट, पावर
- 1:05:42कंपनीज़ ऐसी कंपनीज़ जो कि ब्रांडेड
- 1:05:44प्रोडक्ट्स बहुत ज्यादा नहीं बेचती।
- 1:05:46कमोडिटी बेचती है। जैसे सीमेंट। सीमेंट
- 1:05:48ऐसा नहीं है कि एक कंपनी का ₹300 होगा, एक
- 1:05:51का 600 होगा। मतलब सीमेंट में ब्रांड का
- 1:05:54इन्वॉल्वमेंट कम है। जैसे फ़स में चाइनीज़
- 1:05:57कंपनी का फोन 10 2000 का होगा। Apple का
- 1:05:59फोन लाख का होगा। मतलब ₹80,000 ब्रांड कमा
- 1:06:02के दे रहा है। लेकिन सीमेंट में ₹10
- 1:06:05इधर-उधर बोरी का फर्क होता है। सारा
- 1:06:06सीमेंट एक दाम पे होता है। तो सीमेंट में
- 1:06:09ब्रांड कमा के नहीं दे रहा है। प्लांट एंड
- 1:06:12मशीनरी कमा के दे रहा है। उस केस में
- 1:06:14प्राइस टू बुक वैल्यू बिल्कुल सही है। तो
- 1:06:17अब मैं उम्मीद करता हूं कि आप समझे होंगे
- 1:06:19कि प्राइस टू बुक वैल्यू कैसे यूज़ करना
- 1:06:21है। इसका मैं एक एग्जांपल आपको और देता
- 1:06:23हूं। ये है HDFC बैंक देश के बेस्ट बैंक्स
- 1:06:27में से एक। इसको जरा कंपेयर करते हैं पीबी
- 1:06:30रेशियो में इसके पीियर्स के साथ। तो अगर
- 1:06:32टकर में आप पियर्स पे क्लिक करेंगे तो
- 1:06:34एकदम से यह आपको कंपैरिजन पे ले जाएगा। पर
- 1:06:37देखिए HDFC Bank बुक वैल्यू से चार गुना
- 1:06:40प्राइस पे ट्रेड कर रहा है। Kotak
- 1:06:43Mahindra Bank छ गुना ICICI दो गुना Axis
- 1:06:46लगभग तीन गुना इस तरीके से अलग-अलग बैंक
- 1:06:49अलग-अलग प्राइस टू बुक वैल्यू पे ट्रेड
- 1:06:51करते हैं। तो इससे आपको अंदाजा लग सकता है
- 1:06:53कि कौन सा बैंक सस्ता है कौन सा महंगा है।
- 1:06:56लेकिन इसके बेसिस पे जो सस्ता दिखे उसे
- 1:06:58खरीद लेना है ऐसा नहीं है। एक और डाउट
- 1:07:00लोगों को था पिछले वीडियो से रिलेटेड कि
- 1:07:03अगर पीई ज़ीरो है मतलब क्या? प्राइस टू
- 1:07:05अर्निंग रेशियो ज़ीरो है। मतलब क्या? इसका
- 1:07:07सीधा सा मतलब है कि वो कंपनी लॉस में है।
- 1:07:10उसकी अर्निंग है ही नहीं। इसलिए पीई ज़ीरो
- 1:07:12दिख रहा है। आज हम कुछ ऐसे टॉपिक्स डिस्कस
- 1:07:15करने वाले हैं जो देखने में तो बहुत सिंपल
- 1:07:17लगते हैं और आपको भी लगता होगा कि ये तो
- 1:07:20मुझे आता है लेकिन असल में वो काफी
- 1:07:22कॉम्प्लिकेटेड है और आज आप भी जानकर हैरान
- 1:07:25होंगे कि कुछ ऐसी चीजें जो आपको लगता था
- 1:07:28कि आपको आती हैं वो असल में इन डेप्थ आप
- 1:07:31आज सीखेंगे। आज हम बात करेंगे डिविडेंड
- 1:07:34ईल्ड के बारे में कि कैसे यह आपको गुमराह
- 1:07:37कर सकती है। आज हम बात करेंगे प्रमोटर
- 1:07:39होल्डिंग के बारे में कि कैसे जो दिखता है
- 1:07:42वो होता नहीं है और हम बात करेंगे कुछ और
- 1:07:45ऐसी जरूरी चीजों के बारे में। चलिए शुरू
- 1:07:48करते हैं डिविडेंड ईल्ड के साथ। अब जब भी
- 1:07:50हम डिविडेंड की बात कर रहे हैं तो सबसे
- 1:07:52पहले यह जरूरी है कि हम डिविडेंड पॉलिसी
- 1:07:55किसी कंपनी की कैसे डिसाइड होती है उसे
- 1:07:57समझें। कैसे पता चलता है कि कौन सी कंपनी
- 1:07:59कितना डिविडेंड देगी? तो देखिए सबसे पहले
- 1:08:02तो डिविडेंड क्या है? डिविडेंड बेसिकली जो
- 1:08:05कंपनी साल भर मुनाफा कमाती है उसका एक
- 1:08:08हिस्सा वो कंपनी डिसाइड करती है कि अपने
- 1:08:10शेयर होल्डर्स में बांटा जाए। क्योंकि
- 1:08:12शेयरहोल्डर्स ने भरोसा करके उस कंपनी में
- 1:08:15निवेश किया है। तो साल भर जो कंपनी ने
- 1:08:17कमाया उसका एक हिस्सा क्यों ना शेयर
- 1:08:19होल्डर्स को बांटा जाए। ये होता है
- 1:08:21डिविडेंड। अब डिविडेंड पॉलिसी मतलब कितना
- 1:08:24डिविडेंड देना है ये कैसे डिसाइड होता है?
- 1:08:26चलिए एक कोल इंडिया जैसी कंपनी का
- 1:08:28एग्जांपल लेते हैं जो कोल माइनिंग में है।
- 1:08:30तो कोल इंडिया को एग्रेसिवली ग्रो नहीं
- 1:08:32करना है। नए प्रोडक्ट ल्चेस नहीं करने
- 1:08:34हैं। शहर-शहर जाके मार्केटिंग, ब्रांडिंग,
- 1:08:36एडवरटाइजिंग नहीं करना है। तो कोल इंडिया
- 1:08:39के खर्चे अगले दो-चार सालों में बहुत
- 1:08:41ज्यादा बढ़ जाएंगे। ऐसा बिल्कुल नहीं है।
- 1:08:43तो कोल इंडिया को पता है कि माइनिंग में
- 1:08:45हमारी एक तरह से मोनोपोली है। ऐसा नहीं है
- 1:08:47कि कल को बहुत ज्यादा कंपटीशन आ जाएगा।
- 1:08:49माइंस हमसे छीन जाएंगे। ऐसा कुछ भी नहीं
- 1:08:51है। ना ही हमारे सेल्स अगले साल 10 गुना
- 1:08:54होने वाले हैं या प्रॉफिट 10 गुना ना ही
- 1:08:56हमको बहुत सारा नए शहरों में जाना है। तो
- 1:08:58ऐसे में हम जो भी मुनाफा कमाते हैं उसको
- 1:09:00हमको एडवरटाइजिंग या मार्केटिंग या ग्रोथ
- 1:09:03में खर्च करना है ऐसा नहीं है। हम मुनाफा
- 1:09:05अगर शेयर होल्डर्स में बांटेंगे नहीं तो
- 1:09:07हमारे यहां वो ऐसे ही पड़ा रहेगा। इससे
- 1:09:10अच्छा क्यों ना बांट दिया जाए ताकि लोगों
- 1:09:12के हाथों में पैसा चले जाए। हमारे शेयर
- 1:09:14होल्डर्स को थोड़ा पैसा वापस मिले और वो
- 1:09:16खुश हो क्योंकि कंपनी के पास तो वैसे भी
- 1:09:18उस कैश का कोई खास यूज़ है नहीं। तो इस
- 1:09:21केस में जो ऐसी स्टेबल कंपनियां हैं या
- 1:09:23जिनको पता है कि अगले कुछ साल हमको बहुत
- 1:09:26ज्यादा खर्चा किसी चीज पे नहीं करना है।
- 1:09:28नए प्रोडक्ट्स लॉन्च नहीं करने हैं। वो
- 1:09:30कंपनियां प्रेफर करती हैं हायर डिविडेंड
- 1:09:32ईल्ड देना कि पैसा शेयर होल्डर्स को ही
- 1:09:34लौटा देते हैं। तो चलिए अब एग्जांपल लेते
- 1:09:36हैं एक फास्ट ग्रोइंग कंपनी का जिसको आगे
- 1:09:38पैसों की जरूरत पड़ेगी। जैसे infoh जहां
- 1:09:42कोल इंडिया 5% से ज्यादा का डिविडेंड ईल्ड
- 1:09:44था infoh हार्डली कुछ डिविडेंड देती है।
- 1:09:480.3%
- 1:09:49इसकी डिविडेंड ईल्ड है। हालांकि ये कंपनी
- 1:09:52भी प्रॉफिट अच्छा खासा कमाती है लेकिन उसे
- 1:09:55डिविडेंड के रूप में देती नहीं। उसका एक
- 1:09:57सिंपल सा कारण है infoh ncry.com जीवन
- 1:10:00साथी 99 एक्स जैसी वेबसाइट चलाती है
- 1:10:03जिसमें कंपटीशन बहुत है। तो अगर कंपटीशन
- 1:10:06बहुत है तो इंफो को एडवरटाइजिंग
- 1:10:09मार्केटिंग रीजनल ऑफिसिसेस, सेल्स ऑफिसेस
- 1:10:11खोलने में बहुत सारा कैपिटल लगता है। बहुत
- 1:10:14पैसा लगाना पड़ता है। तो ऐसे में इंफो
- 1:10:17प्रेफर करता है कि वो जो भी पैसा कमा रहा
- 1:10:19है उसको अपने बिजनेसेस के ग्रोथ में लगाए
- 1:10:22ना कि शेयरहोल्डर्स में बांट दे। जैसे
- 1:10:24इंफोएच ने कुछ साल पहले Zomato में
- 1:10:26इन्वेस्ट किया, पॉलिसी बाजार में इन्वेस्ट
- 1:10:28किया तो ये इन्वेस्टमेंट के लिए भी पैसे
- 1:10:30कहां से आएंगे? अगर डिविडेंड के रूप में
- 1:10:32वो सारा पैसा बांट देंगे तो इंफो के पास
- 1:10:34खुद के बिनेसेस को ग्रो करने के लिए
- 1:10:36इन्वेस्टमेंट्स के लिए पैसा नहीं बचेगा।
- 1:10:39तो यूजुअली आप यह मान सकते हैं कि अगर कोई
- 1:10:42कंपनी बहुत ज्यादा डिविडेंड दे रही है तो
- 1:10:44शायद उस कंपनी को ऐसा लगता है कि उसके पास
- 1:10:46ग्रोथ के ज्यादा अपॉर्चुनिटीज नहीं है और
- 1:10:49कोई कंपनी अगर डिविडेंड नहीं दे रही है
- 1:10:51खूब सारा प्रॉफिट कमा रही है तो भी
- 1:10:53डिविडेंड नहीं दे रही है तो एक ये इशारा
- 1:10:55है कि कंपनी को आगे काफी ग्रोथ दिखती है।
- 1:10:58अब इस रूल के कुछ एक्सेप्शनंस हैं। अगर आप
- 1:11:01बिजनेस करते हैं तो आप जानते होंगे कि
- 1:11:03मुनाफे को अगर बढ़ाना है, व्यापार को अगर
- 1:11:05बढ़ाना है तो पैसा भी और फंसाना पड़ता है।
- 1:11:07पैसा भी और लगाना पड़ता है। लेकिन कुछ
- 1:11:10बिनेसेस ऐसे होते हैं जो ग्रो करते रहते
- 1:11:13हैं। लेकिन उस ग्रोथ के लिए उन्हें और
- 1:11:15पैसा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ
- 1:11:17बिजनेस बिना इंक्रीमेंटल कैपिटल के भी
- 1:11:20ग्रो करते हैं। ऐसे बिनेसेस होते हैं
- 1:11:23जिनमें सेल्स भी खूब दिख रही है। प्रॉफिट
- 1:11:25भी खूब दिख रहा है। यानी वो ग्रो कर रहे
- 1:11:27हैं। उसके बावजूद वो हाई डिविडेंड दे रहे
- 1:11:29हैं। क्योंकि उनकी ग्रोथ वो जो एक्स्ट्रा
- 1:11:31पैसा आ रहा है उसको बिजनेस में लगाने पे
- 1:11:34डिपेंड नहीं करती। वो चाहे तो डिविडेंड
- 1:11:36बांट दें। सारा पैसा फिर भी वह ग्रो करते
- 1:11:38रहेंगे। तो अगर आपको कोई ऐसा बिजनेस मिल
- 1:11:41जाता है जो हाई ग्रोथ भी है कंसिस्टेंटली
- 1:11:43पिछले 5 सालों से और फिर भी वो हाई
- 1:11:46डिविडेंड दे रहा है तब डेफिनेटली हम यह
- 1:11:48मान सकते हैं डिपेंडिंग ऑन कि बाकी सारे
- 1:11:50फैक्टर्स ठीक हो कि वो एक अच्छी कंपनी है
- 1:11:52और आपको अच्छा रिटर्न दे सकती है। लेकिन
- 1:11:54ज्यादातर कंपनियों में हमेशा यह दुविधा
- 1:11:57रहती है कि डिविडेंड बांट दें या अपनी
- 1:11:59ग्रोथ के लिए पैसा रख लें। इनफैक्ट
- 1:12:01BKSharथवे जो वारेन बफे की इन्वेस्टमेंट
- 1:12:03कंपनी है उसने पिछले 40 सालों में केवल एक
- 1:12:06बार डिविडेंड दिया है। इतनी पुरानी
- 1:12:08मैच्योर और दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों
- 1:12:11में से एक होने के बावजूद वारेन बफे कहते
- 1:12:13हैं कि उनके पास इतना पैसा लगा के और पैसा
- 1:12:16कमाने की अपॉर्चुनिटीज हैं कि वो डिविडेंड
- 1:12:18देके उस पैसे को बर्बाद क्यों करें? और
- 1:12:20इसमें एक इंपॉर्टेंट फैक्टर और होता है कि
- 1:12:23मान लीजिए कंपनी कोई ऐसे प्रोजेक्ट के
- 1:12:25बारे में सोच रही है कि जिसमें अगर वो
- 1:12:27अपना सारा मुनाफा निवेश कर दे। जैसे मान
- 1:12:30लीजिए इस साल मैंने ₹100 कमाए। अब मेरे को
- 1:12:32कोई ऐसा बिजनेस दिख रहा है कि इस ₹100 को
- 1:12:35अगर मैं निवेश कर दूं तो अगले साल मेरे को
- 1:12:3720% का रिटर्न मिलेगा। यानी ₹100 मेरे
- 1:12:40₹120 हो जाएंगे। तो मेरे लिए यही समझदारी
- 1:12:43है कि मैं उस ₹100 को उस नए बिजनेस में
- 1:12:45लगा दूं। लेकिन ऑप्शन बी की तरफ आइए। अगर
- 1:12:48मेरे पास कोई ऐसा बिजनेस है जिससे मैंने
- 1:12:50₹100 तो कमाए लेकिन अब अगले साल के लिए
- 1:12:53मेरे पास कोई आईडिया नहीं है। मुझे पता
- 1:12:55नहीं है कि क्या करना है। या तो मैं उस
- 1:12:56पैसे को एफडी में रख दूं तो ₹100 के वो
- 1:12:59106 हो जाएंगे। तो ऐसे में मैं क्या
- 1:13:01करूंगा कि ठीक है मेरे पास कोई आईडिया तो
- 1:13:03है नहीं अब बिनेस करने का। या तो मैं एफडी
- 1:13:05में रखूं तो 100 का 106 होगा। क्यों ना इस
- 1:13:08₹100 को मैं शेयर होल्डर्स में ही बांट
- 1:13:10दूं। वह अपने आप जाने कि उनको क्या करना
- 1:13:12है। क्योंकि अगर ऐसी कंपनी जिसके पास
- 1:13:15ग्रोथ अपॉर्चुनिटीज़ नहीं है, वह ₹100
- 1:13:18शेयरहोल्डर्स को बांट देती है, तो शेयर
- 1:13:20होल्डर उस पैसे को किसी और कंपनी में लगा
- 1:13:22सकता है, म्यूच्यूल फंड में लगा सकता है
- 1:13:24या फिर वो खुद ही एफडी कर सकता है, तो
- 1:13:26उसको 6% से ज्यादा का रिटर्न मिल जाएगा।
- 1:13:28तो अगर कंपनी के पास कोई ऐसे बिजनेस प्लान
- 1:13:31है जिससे कंपनी उम्मीद कर रही है कि
- 1:13:3312-15% से ज्यादा का रिटर्न वह ले आएगी तब
- 1:13:36वह डिविडेंड नहीं देगी। अगर उसे लगता है
- 1:13:38कि उसके पास कोई ऐसे प्लान नहीं है और इस
- 1:13:41मुनाफे का वो क्या करेगी उसे नहीं पता और
- 1:13:44वो 10-12% से ज्यादा का रिटर्न नहीं ला
- 1:13:46पाएगी तब वो उस मुनाफे को शेयरहोल्डर्स
- 1:13:49में बांट देगी। इस बेसिस पे डिसाइड होता
- 1:13:52है कि डिविडेंड कितना देना है देना है कि
- 1:13:54नहीं देना है? और अब सबसे जरूरी सवाल क्या
- 1:13:57डिविडेंड ईल्ड देख के आपको किसी स्टॉक में
- 1:14:00निवेश करना चाहिए? तो देखो फाइनेंस में
- 1:14:02कोई भी आंसर क्लियरली हां या क्लियरली ना
- 1:14:05नहीं होता। ब्लैक एंड वाइट कुछ भी नहीं
- 1:14:07होता। लेकिन मोस्टली सिर्फ डिविडेंड ईल्ड
- 1:14:10देख के आपको स्टॉक्स में निवेश नहीं करना
- 1:14:12है। क्योंकि जैसा मैंने बताया ज्यादा
- 1:14:14डिविडेंड ईल्ड मतलब यूजुअली वो कंपनी लो
- 1:14:17ग्रोथ वाली कंपनी है। तो आपको डिविडेंड तो
- 1:14:19ठीक मिलेगा लेकिन शेयर का प्राइस तेजी से
- 1:14:22नहीं बढ़ेगा। कैपिटल एप्रिसिएशन ज्यादा
- 1:14:24नहीं होगा। चलिए देखते हैं ऐसा कोल इंडिया
- 1:14:26में हुआ क्या? इसका 5 साल का अपन प्राइस
- 1:14:28चार्ट देखते हैं। तो देखिए पिछले 5 सालों
- 1:14:31में प्राइस बढ़ा तो दूर की बात काफी गिर
- 1:14:34गया है। तो जिन्होंने इसको डिविडेंड ईल्ड
- 1:14:37देख के लिया होगा वो पिछले 5 सालों में
- 1:14:39स्टॉक से निराश हुए हैं। और ज्यादातर हाई
- 1:14:41डिविडेंड ईल्ड स्टॉक्स पे ऐसे ही होता है।
- 1:14:44एक्सेप्ट इसका एक एक्सेप्शन है। जैसा
- 1:14:47मैंने बताया कि कुछ ऐसी कंपनीज़ जिनको कैश
- 1:14:50की जरूरत ही नहीं है ग्रो करने के लिए जो
- 1:14:51हाई डिविडेंड ईल्ड भी देती रहती हैं लेकिन
- 1:14:54फिर भी ग्रो करती रहती हैं। और सेकंड कि
- 1:14:57आप कोल इंडिया जैसी कोल इंडिया तो नहीं
- 1:14:59लेकिन कोल इंडिया जैसी बहुत सारी सरकारी
- 1:15:02कंपनियां हैं जिनको पैनिकिक के समय पर ले
- 1:15:05सकते हैं। स्पेशली अगर उनके पास कैश बहुत
- 1:15:07ज्यादा है। अगर बहुत ज्यादा कैश है तो आप
- 1:15:10उम्मीद कर सकते हैं कि वो डिविडेंड भी
- 1:15:11ज्यादा देंगे। जैसे कोल इंडिया के पास
- 1:15:13बहुत ज्यादा कैश नहीं है। 250 करोड़ का
- 1:15:16कैश है और कंपनी 81000 करोड़ के मार्केट
- 1:15:19कैप वाली है। तो कैश ज्यादा नहीं है। तो
- 1:15:21ऐसे में कोल इंडिया नहीं लेकिन पैनिकिक
- 1:15:23टाइम पे जब सारी कंपनियां खूब गिरी हुई
- 1:15:26हैं तो आप ऐसी सरकारी कंपनियां ले सकते
- 1:15:28हैं जिनके सारे फंडामेंटल स्ट्रांग हैं और
- 1:15:31जिनके पास अच्छी कैश पोजीशन है ताकि वो
- 1:15:34आपको डिविडेंड भी दें और साथ ही क्योंकि
- 1:15:36अभी पैनिकिक है और प्राइसेस गिरे हुए हैं
- 1:15:38तो आपको थोड़ा बहुत कैपिटल एप्रिसिएशन भी
- 1:15:41मिल जाए। तो ऐसी पीएसयूस आप ढूंढ लीजिए
- 1:15:44जिसका एंटरप्राइज वैल्यू जीरो हो या
- 1:15:46नेगेटिव हो। एक एग्जांपल मैंने पिछले
- 1:15:48वीडियो में दिखाया है जिसमें एंटरप्राइज
- 1:15:50वैल्यू जीरो था क्योंकि उसके पास कैश बहुत
- 1:15:52है लेकिन वो भी सिर्फ एक रेफरेंस के लिए
- 1:15:54है। उस तरह की बहुत सारी कंपनीज़ आजकल
- 1:15:56पैनिकिक में आपको मिल जाएंगी। उस केस में
- 1:15:58अगर पीएसयू कंपनी है, सरकारी कंपनी है और
- 1:16:01हाई डिविडेंड ईल्ड है और हाई कैश बैलेंस
- 1:16:04है और प्राइस अभी मल्टी ईयर लो पे चल रहा
- 1:16:06है तो वो एक अच्छा इन्वेस्टमेंट ऑप्शन हो
- 1:16:09सकता है सब्जेक्ट टू फर्दर रिसर्च। अब बात
- 1:16:12करते हैं इस फेस वैल्यू की कि ये फेस
- 1:16:14वैल्यू क्या होता है और इसका क्या
- 1:16:16सिग्निफिकेंस है। तो देखिए आज से पहले कई
- 1:16:18साल पहले जब डीममेट नहीं था और शेयर्स
- 1:16:21फिजिकल होते थे तो जिस तरीके से नोट में
- 1:16:23आज लिखा रहता है कि ये ₹10 का है 20 का है
- 1:16:26या 50 का है उसी तरह शेयर्स के सर्टिफिकेट
- 1:16:29होते थे फिजिकल और उसमें लिखा रहता था कि
- 1:16:31इसकी फेस वैल्यू कितनी है? उस पे कितना
- 1:16:34अमाउंट लिखा हुआ है उसे फेस वैल्यू कहते
- 1:16:36थे। अब इन्वेस्टिंग में आपको यह जानना
- 1:16:38जरूरी है कि फेस वैल्यू से आपके डिसीजन
- 1:16:41मेकिंग पर कोई फर्क नहीं आना चाहिए।
- 1:16:43क्योंकि कई लोगों को मैं जानता हूं जो
- 1:16:45देखते हैं फेस वैल्यू कितनी है और फिर
- 1:16:47देखते हैं कि कितने रुपए में शेयर मिल रहा
- 1:16:48है और उससे डिसाइड करते हैं कि सस्ता है
- 1:16:50कि महंगा है। अब देखिए एमआरएफ के केस में
- 1:16:53₹10 का फेस वैल्यू है लेकिन शेयर है
- 1:16:56₹56,000 तो कुछ लोग सोच लेंगे कि यह बहुत
- 1:16:58महंगा है। यही आपको जानना है कि आज के
- 1:17:01जमाने में आपको शेयर लेना है कि नहीं लेना
- 1:17:04है। उससे फेस वैल्यू का कोई लेना देना
- 1:17:07नहीं। एमआरएफ ₹10 का फेस वैल्यू वाला
- 1:17:09₹56,000 पे है। यह इस साल 73,000 तक गया
- 1:17:12था। अब एक और एग्जांपल लेते हैं ऐड लैब्स
- 1:17:16का। इसकी भी फेस वैल्यू ₹10 है। लेकिन यह
- 1:17:19मिल रहा है ₹2.5 पे। तो कई लोग ललचा
- 1:17:22जाएंगे कि ₹10 तो फेस वैल्यू है और ढाई पे
- 1:17:25मिल रहा है। तो, इसे ले लिया जाए। यहीं
- 1:17:27आपको ध्यान रखना है कि इसके बेसिस पे कोई
- 1:17:30भी इन्वेस्टमेंट ना करें। फेस वैल्यू से
- 1:17:33मार्केट कैप का कंपैरिजन एक सही वैल्यू
- 1:17:35करने का तरीका नहीं है। अब मैं आपको इसको
- 1:17:37एक एग्जांपल के जरिए बताता हूं कि आप फेस
- 1:17:40वैल्यू को समझ लीजिए कि ये ग्राम है 10
- 1:17:42ग्राम। अब 10 ग्राम लोहा ₹1 का मिल जाएगा।
- 1:17:4610 ग्राम चांदी उससे काफी महंगी मिलेगी।
- 1:17:4910 ग्राम सोना आपको ₹400 का मिलेगा। तो ₹1
- 1:17:52से लेकर के ₹400 तक आपको चीज मिल रही है।
- 1:17:56लेकिन चीज है ही 10 ग्राम। तो क्या आप बोल
- 1:17:58सकते हैं कि मैं तो लोहा ही लोहा लूंगा।
- 1:18:00लोहा भी 10 ग्राम है। ₹1 में मिल रहा है।
- 1:18:02चांदी तो बहुत महंगी है। चांदी नहीं
- 1:18:04लूंगा। हम ऐसे कंपैरिजन नहीं कर सकते
- 1:18:06क्योंकि लोहे की वैल्यू अलग है, चांदी की
- 1:18:09और सोने की वैल्यू अलग है। उसी तरह ₹10 की
- 1:18:12फेस वैल्यू का शेयर ₹56,000 पे मिल रहा
- 1:18:15है, महंगा है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। ₹10
- 1:18:17की फेस वैल्यू का शेयर ₹2.5 में मिल रहा
- 1:18:19है। सस्ता है। ऐसा भी बिल्कुल नहीं है।
- 1:18:21फेस वैल्यू केवल यह बताता है कि किसी
- 1:18:24कंपनी के कितने टुकड़े हुए हैं। जैसे मेरी
- 1:18:27कंपनी फिनोलॉजी हमने इस कंपनी को शुरू
- 1:18:29किया ₹1 लाख से यानी ₹1 लाख के शेयर्स इशू
- 1:18:33किए। तो हमने ₹10 की फेस वैल्यू वाले
- 1:18:3610,000 शेयर्स इशू किए। अब मैं चाहता तो
- 1:18:39₹1 की फेस वैल्यू वाले ₹1 लाख शेयर्स या
- 1:18:42₹100 की फेस वैल्यू वाले 1000 शेयर्स भी
- 1:18:45निकाल सकता था। अल्टीमेटली वो होते ₹1 लाख
- 1:18:47ही। आपको ₹1 लाख को कितने शेयर्स में
- 1:18:50डिवाइड करना है? 100 शेयर, 1000 शेयर, लाख
- 1:18:53शेयर, 10,000 शेयर वो डिवीजन कितने करने
- 1:18:56हैं? उसके लिए फेस वैल्यू डिसाइड की जाती
- 1:18:59है। तो जैसे मेरी कंपनी में मैंने डिसाइड
- 1:19:00किया कि 10,000 शेयर्स निकालने हैं और ₹1
- 1:19:03लाख मैं लगा रहा हूं। तो ₹1 लाख के बदले
- 1:19:05अगर 10,000 शेयर्स निकालने हैं तो फेस
- 1:19:07वैल्यू अपने आप ₹10 हो गई। उसका कोई बहुत
- 1:19:09ज्यादा सिग्निफिकेंस नहीं है। अब बात करते
- 1:19:11हैं एक और इंपॉर्टेंट कांसेप्ट प्रमोटर
- 1:19:13होल्डिंग की। और इस नंबर को देख के अक्सर
- 1:19:16कई लोग धोखा खा लेते हैं और गलत डिसीजन ले
- 1:19:19लेते हैं। देखिए प्रमोटर मतलब कंपनी का
- 1:19:21ओनर। तो ओनर कितना परसेंट कंपनी में
- 1:19:24शेयर्स होल्ड करता है। इससे पता चलता है
- 1:19:26कि प्रमोटर को अपने बिजनेस में कितना
- 1:19:28भरोसा है। जैसे इस केस में प्रमोटर
- 1:19:31होल्डिंग Zeear कंपनी के केस में 57% है।
- 1:19:34यानी Zeear के जितने शेयर्स हैं उसमें से
- 1:19:3757% शेयर्स Zeear के ओनर्स के पास हैं। तो
- 1:19:41ये एक अच्छा साइन है। यूजुअली आपको यह
- 1:19:43देखना है कि जिस भी कंपनी में आप निवेश कर
- 1:19:45रहे हो उसमें प्रमोटर होल्डिंग 35-40% के
- 1:19:49ऊपर हो। यह पहला थंब रूल है। लेकिन इसके
- 1:19:51कुछ एक्सेप्शनंस हैं। जैसे आईटीc हो जो कि
- 1:19:54एक प्रोफेशनली मैनेज्ड कंपनी है। यानी उसे
- 1:19:57कई सारी कंपनियों ने मिलके बनाया है। तो
- 1:19:59उसमें किसी की प्रमोटर होल्डिंग ज्यादा
- 1:20:01नहीं है। लेकिन ये एक एक्सेप्शन है और
- 1:20:02दूसरे एक्सेप्शनंस हैं बैंक्स। क्योंकि
- 1:20:04आरबीआई रिस्ट्रिक्शन लगाता है कि बैंक में
- 1:20:07एक प्रमोटर कितने परसेंट शेयर्स होल्ड कर
- 1:20:10सकता है ताकि एक इंसान के पास किसी बैंक
- 1:20:13को चलाने की या बर्बाद करने की ताकत ना
- 1:20:16हो। इसीलिए बैंक्स में ओनर की शेयर
- 1:20:18होल्डिंग बहुत ज्यादा नहीं हो सकती। 20%
- 1:20:2125% 30% अलग-अलग स्लैब्स हैं। उससे ज्यादा
- 1:20:24शेयर होल्डिंग बैंक्स में प्रमोटर की नहीं
- 1:20:26अलाउड है। तो बैंक्स को छोड़ के और कुछ
- 1:20:29प्रोफेशनली मैनेज्ड कंपनीज़ को छोड़ के
- 1:20:31आपको यूजुअली ये चाहिए कि प्रमोटर
- 1:20:33होल्डिंग अच्छी हो। लेकिन सिर्फ इतना देख
- 1:20:37लेना काफी नहीं है। अब देखिए प्रमोटर
- 1:20:39होल्डिंग दिख रही है 57। लेकिन अब थोड़ा
- 1:20:42नीचे आते हैं शेयर होल्डिंग पे क्लिक
- 1:20:44करके। अब प्रमोटर होल्डिंग तो है 57% और
- 1:20:48यही लोगों के साथ धोखा होता है। लेकिन इस
- 1:20:5057% में से 82% यानी अगर 57 शेयर्स हैं तो
- 1:20:57उसमें से लगभग 50 शेयर्स तो बैंकों के पास
- 1:21:00या किसी ना किसी के पास गिरवी हैं। वो
- 1:21:02शेयर असल में प्रमोटर के पास हैं ही नहीं।
- 1:21:05वो सारे गिरवी रखे हुए हैं क्योंकि
- 1:21:06प्रमोटर को पैसों की किल्लत हो गई थी। तो
- 1:21:09ऐसे में हालांकि शेयर होल्डिंग बहुत है
- 1:21:12लेकिन लगभग पूरी की पूरी शेयर होल्डिंग
- 1:21:14गिरवी रखी हुई है और इस केस में ये अच्छा
- 1:21:17साइन नहीं है तो आपको ना सिर्फ यह देखना
- 1:21:20है कि प्रमोटर होल्डिंग अच्छी हो यह भी
- 1:21:22देखना है कि कुछ प्लेज ना हो और इसीलिए
- 1:21:24इसमें आपकी टिकर मदद करता है कंपनी की
- 1:21:27अच्छाइयां स्ट्रेंथ्स और लिमिटेशंस
- 1:21:29बुराइयां बता के और अगर आप इस सिर्फ इस
- 1:21:32सेक्शन को ये हर कंपनी के लिए है उसमें
- 1:21:34देख लेंगे तो कई सारी गलतियां या बुरी
- 1:21:36चीजें आपको कंपनी के बारे में पता चल मिल
- 1:21:38जाएंगी। जैसे यहां पे ये चीज हाईलाइट हुई
- 1:21:41है। ज्यादातर प्रमोटर होल्डिंग प्लेज्ड
- 1:21:43है। ताकि अगर आप पूरा एक-एक रेश्यो पे
- 1:21:45ध्यान ना भी दे पाए तो आप बस इस सेक्शन को
- 1:21:48जरूर हर कंपनी का देखिएगा और आपको
- 1:21:50अच्छाइयां और बुराइयां दोनों उस कंपनी की
- 1:21:53मिल जाएंगी। अब ये तो हुई एक बात। इसमें
- 1:21:55एक और चीज आपको ध्यान देने की जरूरत है कि
- 1:21:58मान लीजिए प्रमोटर होल्डिंग है 50%। अब
- 1:22:00मैंने तो इस वीडियो में कहा है कि 40% के
- 1:22:02ऊपर प्रमोटर होल्डिंग को अच्छा मान सकते
- 1:22:04हैं। लेकिन आपको यह भी देखना है कि ट्रेंड
- 1:22:06कहां जा रहा है? क्या प्रमोटर्स अपनी शेयर
- 1:22:08होल्डिंग बढ़ा रहे हैं? मतलब बाजार से और
- 1:22:11शेयर खरीद रहे हैं या फिर बेच रहे हैं।
- 1:22:13जैसे इस केस में देखिए एक और चीज। दिसंबर
- 1:22:172018 में 57.15%
- 1:22:21शेयर होल्डिंग थी प्रमोटर की जो अगले तीन
- 1:22:24महीनों में कम हो के 57.18 हो गई। फिर वो
- 1:22:28और थोड़ी सी कम हुई और 57.17 हो गई। यानी
- 1:22:31पिछले एक साल में ना सिर्फ प्रमोटर
- 1:22:33प्लेजिंग बहुत ज्यादा है बल्कि प्रमोटर्स
- 1:22:36ने अपनी शेयर्स बेचे भी हैं। तो उन्हें
- 1:22:39खुद या तो अपनी कंपनी पर भरोसा नहीं है और
- 1:22:41वो शेयर्स बेच रहे हैं या फिर उनके पास
- 1:22:44पैसे नहीं है और मजबूरी में उन्हें बेचना
- 1:22:46पड़ रहा है। तो ये दोनों ही साइन अच्छे
- 1:22:48नहीं हैं। तो ज्यादातर कंपनियों में आपको
- 1:22:50प्लेजिंग भी देखनी है और यह भी देखना है
- 1:22:53कि ट्रेंड कहां जा रहा है। क्या कंपनी में
- 1:22:55होल्डिंग बढ़ रही है या कम हो रही है
- 1:22:57प्रमोटर्स की। ये एक बहुत इंपॉर्टेंट
- 1:22:59क्राइटेरिया है। इसके अलावा जैसा मैंने
- 1:23:01बताया कि कुछ कंपनियों में प्रमोटर
- 1:23:03होल्डिंग जीरो होती है क्योंकि वो
- 1:23:05प्रोफेशनली मैनेज्ड कंपनीज़ होती हैं। जैसे
- 1:23:07एग्जांपल ये प्रोफेशनली मैनेज्ड कंपनीज़
- 1:23:09क्या होती हैं? Yes Bank अभी Yes Bank का
- 1:23:12ओनर कौन है? कोई भी नहीं बेचा क्योंकि जो
- 1:23:14ओनर्स थे वो तो बेच के निकल गए। अब SBI ने
- 1:23:17शेयर्स लिए, HDFC ने लिए, Axis Bank ने
- 1:23:19लिए। लगभग सारे बड़े बैंकों ने मिलके उस
- 1:23:23बैंक को फिर से खड़ा किया। तो अब 810
- 1:23:26ओनर्स मिलके उस बैंक को चला रहे हैं। तो
- 1:23:28कोई भी एक उसका ओनर या प्रमोटर नहीं है।
- 1:23:31तो Yes बैंक भी जब ये शेयर होल्डिंग का
- 1:23:33नया डाटा आएगा तो प्रोफेशनली मैनेज्ड बैंक
- 1:23:36माना जाएगा। और जैसा आप इस केस में देख
- 1:23:38रहे हैं आईटीसी के केस में कि प्रमोटर
- 1:23:40होल्डिंग जीरो है। ये बहुत एक्सेप्शनल केस
- 1:23:42है। जब एक प्रोफेशनली मैनेज्ड कंपनी है
- 1:23:45इसलिए प्रमोटर होल्डिंग नहीं है। आप
- 1:23:46प्रोफेशनली मैनेज्ड कंपनीज़ में भी पता कर
- 1:23:48सकते हैं कि आपको होल्डिंग वाइज़ यह कंपनी
- 1:23:51ठीक लग रही है कि नहीं। जैसे इसका चार्ट
- 1:23:54देखिए। 42% शेयर होल्डिंग इसमें डोमेस्टिक
- 1:23:58इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के पास है।
- 1:24:00यानी म्यूच्यूल फंड्स, इंश्योरेंस कंपनीज़
- 1:24:02यानी इस तरह के एक्सपीरियंस्ड और
- 1:24:04प्रोफेशनल इंस्टीटशंस। तो अगर उन्होंने
- 1:24:0742% होल्डिंग ली हुई है तो मतलब म्यूच्यूल
- 1:24:10फंड्स और इंश्योरेंस और इस तरह की
- 1:24:12कंपनियों ने कुछ सोच समझ के इन्वेस्ट किया
- 1:24:14होगा। वहीं फॉरेन इंस्टीट्यूशनल
- 1:24:16इन्वेस्टर्स की भी 15% होल्डिंग इस कंपनी
- 1:24:19में है। यानी लगभग 60% के आसपास इसमें
- 1:24:23इंडियन इंस्टीटशंस ने और 16% के आसपास
- 1:24:26फॉरेन इंस्टीटशंस ने इन्वेस्ट किया है। तो
- 1:24:29हालांकि प्रमोटर होल्डिंग जीरो है लेकिन
- 1:24:32इन दोनों की हाई होल्डिंग से हम ये समझ
- 1:24:34सकते हैं कि इसमें प्रमोटर ना सही लेकिन
- 1:24:36रेप्यूटेड इंस्टीटशंस ने इन्वेस्ट किया
- 1:24:39हुआ है। बहुत सारे यंग इन्वेस्टर्स आते
- 1:24:41हैं और ना हमको ये डिविडेंड का कांसेप्ट
- 1:24:44बहुत अच्छा लगता है कि हर साल शेयर का जो
- 1:24:46दाम बढ़ेगा वो तो बढ़ेगा ही लेकिन उसके
- 1:24:48साथ ही मुझे एक फिक्स्ड अमाउंट भी साल में
- 1:24:51एक बार या दो बार मिलेगा तो ये बहुत अच्छा
- 1:24:53लगता है और उस कारण ना कई बार हम डिविडेंड
- 1:24:56ओरिएंटेड स्टॉक्स को लेते हैं या वो
- 1:24:58स्टॉक्स जो अच्छा खासा डिविडेंड देते हैं।
- 1:25:01हमारे मन में ये आता है कि शेयर का दाम ना
- 1:25:03भी बढ़े ना तो 10% तो ये मेरे को साल का
- 1:25:05डिविडेंड ही दे रहा है। वही एफडी से दुगना
- 1:25:07है। मैं तो उसी से कमा लूंगा। तो यह शेयर
- 1:25:09बहुत अच्छा है। तो आज इस सीरीज की शुरुआत
- 1:25:12में जो पहला वीडियो है, यह यूज़ली सबसे
- 1:25:14जरूरी होता है, सबसे इंपॉर्टेंट होता है।
- 1:25:16इसके लिए ना मैंने टॉपिक चुना है
- 1:25:17डिविडेंड्स का। और इसकी अच्छी चीज यह है
- 1:25:19कि सिर्फ डिविडेंड से ना आप कंपनी की पूरी
- 1:25:22फितरत, उसके मैनेजमेंट के इंटेंशन, उसका
- 1:25:25नेचर कितने ऑनेस्ट हैं ये सब कुछ पता कर
- 1:25:28सकते हैं। डिविडेंड दिखता बहुत सिंपल है।
- 1:25:31लेकिन डिविडेंड को अगर आपने सच में पढ़ना
- 1:25:34सीख लिया, डिविडेंड को समझ गए ना, तो
- 1:25:36कंपनी के बारे में सब कुछ आप बहुत आसानी
- 1:25:39से समझ जाएंगे। सिर्फ वो कैसे डिविडेंड
- 1:25:41देती है, उसका पास्ट डिविडेंड ट्रैक
- 1:25:43रिकॉर्ड क्या है? इतनी सी चीज देख के।
- 1:25:45लेकिन मैं आपसे प्लीज रिक्वेस्ट करता हूं
- 1:25:47कि वीडियो को पूरा देखिएगा क्योंकि एंड तक
- 1:25:50डिविडेंड के बारे में कुछ ऐसी चीजें आपको
- 1:25:52बताऊंगा जो आपने शायद कभी नहीं सुनी होंगी
- 1:25:54और जो आपका नजरिया बदल देंगी। तो इस
- 1:25:57वीडियो को अगर मैंने चुना है ये टॉपिक जो
- 1:25:59दिखता सिंपल है कॉम्प्लेक्स तो बहुत सोच
- 1:26:02समझ के चुना है। प्लीज इसे जरूर पूरा
- 1:26:04देखिएगा और वीडियो के एंड तक अगर आपको यह
- 1:26:07पसंद आए तो इसे सबके साथ शेयर करिएगा।
- 1:26:10इंडिया में ना हमको ज्यादा से ज्यादा
- 1:26:12लोगों को इन्वेस्टिंग सिखा ही देनी है। तो
- 1:26:14प्लीज इसमें मेरी हेल्प करिएगा। तो आज ना
- 1:26:17इस डिविडेंड की मैं आपको सच्चाई बताने
- 1:26:19वाला हूं और आपको पता चलेगा कि यह
- 1:26:21डिविडेंड है या धोखा और फिर आप बेटर तरीके
- 1:26:25से डिसीजंस ले सकेंगे।
- 1:26:29तो चलिए सबसे पहले तो कुछ अच्छे डिविडेंड
- 1:26:33वाले स्टॉक्स को ढूंढते हैं। तो अब जाते
- 1:26:35हैं हम स्क्रीनर सेक्शन पे टिक कर के। अब
- 1:26:38यहां पर आप चाह तो खुद भी स्क्रीन कर सकते
- 1:26:41हैं या डिविडेंड के लिए तो हमने एक
- 1:26:43रेडीमेड स्क्रीन बनाया हुआ है। तो चलिए रन
- 1:26:46स्क्रीन करते हैं। अब यहां पे वो कंपनीज़
- 1:26:49हैं इस स्क्रीन के अंदर जिनकी डिविडेंड
- 1:26:51ईल्ड पिछले 12 महीनों में 10% से ज्यादा
- 1:26:54की है। तो अब देखते हैं ऐसी कितनी कंपनीज़
- 1:26:57हैं। ऐसी कुछ 15 कंपनीज़ हैं। अब इन 15
- 1:27:00कंपनीज़ में हम चूज़ करते हैं एक सरकारी
- 1:27:02ट्रस्टेड कंपनी को। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन
- 1:27:05को। हम में से शायद हर कोई इस कंपनी को
- 1:27:07जानता है। इनके पेट्रोल पंप्स पे हम जाते
- 1:27:08हैं और देखते हैं ये कितना डिविडेंड देती
- 1:27:11है। तो ये कंपनी डिविडेंड देती है 10% से
- 1:27:15ज्यादा का। अब
- 1:27:20सबसे पहले तो हम समझते हैं कि ये डिविडेंड
- 1:27:22ईल्ड होता क्या है? ये डिविडेंड ईल्ड का
- 1:27:25मतलब है कि शेयर प्राइस पे कितना परसेंट
- 1:27:28डिविडेंड मिल रहा है। यानी अगर शेयर
- 1:27:31प्राइस है 116 और डिविडेंड ईल्ड है 10%
- 1:27:35यानी अगर आप इस शेयर को आज खरीदेंगे तो
- 1:27:39पिछले हिस्ट्री के हिसाब से यू कैन
- 1:27:42एक्सपेक्ट कि क्लोज टू 10% डिविडेंड आपको
- 1:27:44मिलेगा। यह पिछली हिस्ट्री के हिसाब से
- 1:27:47है। आगे कंपनी दे ना दे ये उनके ऊपर है।
- 1:27:49यानी कुछ ₹16 के आसपास आपको डिविडेंड
- 1:27:53मिलेगा या पिछले साल कंपनी ने दिया है। तो
- 1:27:55एक जो चीज हमको जाननी है वो ये कि सबसे
- 1:27:58पहले अगर आप डिविडेंड के लिए स्टॉक्स ले
- 1:28:00भी रहे हैं तो कितना परसेंट डिविडेंड
- 1:28:03मिलता है इस पे मत जाइए। क्योंकि डिविडेंड
- 1:28:06ना फेस वैल्यू पे मिलता है। यानी अगर
- 1:28:09इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ₹10 का डिविडेंड
- 1:28:12देगी और अगर आप यह देखेंगे कि इसने कितना
- 1:28:14परसेंट डिविडेंड दिया तो न्यूज़ चैनल्स
- 1:28:16में अनाउंसमेंट आएगा 100% डिविडेंड दिया।
- 1:28:20क्यों? क्योंकि वो जो 100% है वो फेस
- 1:28:23वैल्यू पे कैलकुलेट होता है। अब फेस
- 1:28:24वैल्यू है ₹10 और ₹10 अगर डिविडेंड किसी
- 1:28:28ने दे दिया तो न्यूज़ चैनल्स में हर तरफ
- 1:28:30फ्लैश होने लगेगा 100% डिविडेंड। इसलिए
- 1:28:33कितना परसेंट डिविडेंड मिला? दैट्स
- 1:28:36यूज़लेस। आपको देखना है डिविडेंड यील्ड
- 1:28:39कितना है। इसीलिए यहां पे अगर आप देखेंगे
- 1:28:42ना तो डिविडेंड परसेंट हमने मेंशन नहीं
- 1:28:44किया है क्योंकि वो तो यूज़लेस है ना। काम
- 1:28:46का है डिविडेंड यील्ड। डिविडेंड यील्ड
- 1:28:49आपको बताता है कि आप जिस प्राइस पे शेयर
- 1:28:52ले रहे हैं उसके कंपैरिजन में कंपनी ऑन एन
- 1:28:55एवरेज पास्ट में कितना डिविडेंड देती है।
- 1:28:58अब आप शेयर ₹10 में तो ले नहीं रहे। तो
- 1:29:00फेस वैल्यू के हिसाब से कितना परसेंट
- 1:29:03डिविडेंड मिल रहा है ये जान के आपको क्या
- 1:29:04करना? आप शेयर तो उस भाव पे लेंगे ना जिस
- 1:29:07भाव पे शेयर मार्केट में है जो ₹16 पे है।
- 1:29:10तो ₹116 पे अगर आप लेंगे तो रफली आपका
- 1:29:13डिविडेंड यील्ड ईयरली कितना होगा बेस्ड ऑन
- 1:29:16पास्ट ट्रैक रिकॉर्ड्स वो ये बता रहा है
- 1:29:1810% के आसपास। तो अब इसको ना हम वेरीफाई
- 1:29:21करते हैं कॉर्पोरेट एक्शंस पे जाके। तो आप
- 1:29:24कॉर्पोरेट एक्शन पे क्लिक करेंगे तो इस
- 1:29:26कंपनी ने कब कितना डिविडेंड दिया है वो
- 1:29:28दिख जाएगा।
- 1:29:32अगर आप किसी भी एकेडमिक डेफिनेशन किताब
- 1:29:34में पढ़ेंगे ना तो आपको समझ में आएगा कि
- 1:29:36डिविडेंड वो हिस्सा है जो कंपनी के ओनर्स
- 1:29:39को मिलता है कंपनी के मुनाफे में से। तो
- 1:29:42अगर कंपनी ने बहुत सारा प्रॉफिट कमाया है
- 1:29:44और अगर आप शेयर होल्डर हो यानी आप कंपनी
- 1:29:46के पार्ट ओनर हो तो उस प्रॉफिट में से
- 1:29:48कंपनी अगर चाहे तो आपको थोड़ा सा हिस्सा
- 1:29:51देती है मुनाफे का क्योंकि आप भी ओनर हो
- 1:29:54तो मुनाफे में आपको भी हिस्सा मिलना
- 1:29:55चाहिए। तो मुनाफे का हिस्सा जो कंपनी
- 1:29:58डिसाइड करती है कि अपने ओनर्स में बांटना
- 1:30:00है उसको हम डिविडेंड कहते हैं। अब अगर
- 1:30:04मुनाफे का हिस्सा मुझे मिल रहा है तो पहली
- 1:30:06चीज तो मुझे यह देखनी है कि कंपनी को
- 1:30:09सफिशिएंट मुनाफा हुआ है कि नहीं। जैसे
- 1:30:11मेरे हिसाब से तो मुनाफा वो है जो मेरे
- 1:30:14पास बचा मेरा कर्जा चुकाने के बाद। अगर
- 1:30:17मेरे पास हजारों करोड़ों का कर्जा है और
- 1:30:20फिर भी मैं लोगों को डिविडेंड बांट रहा
- 1:30:22हूं तो यह तो मुनाफा है ही नहीं ना। और
- 1:30:24मुनाफा है ही नहीं। तो मैं किस चीज का
- 1:30:26हिस्सा बांट रहा हूं? एक तरफ तो लाखों
- 1:30:28करोड़ों का लोन है। दूसरी तरफ मैं जो
- 1:30:30मुनाफा कमा रहा हूं उससे लोन चुकाने के
- 1:30:33बदले मैं लोगों को डिविडेंड बांट रहा हूं।
- 1:30:35तो मुझे तो ये बड़ा खतरनाक लगता है। अब
- 1:30:37इसको एक एग्जांपल से समझते हैं। इंडियन
- 1:30:40ऑयल पे कितना डेप्ट है जरा देखिए। 1 लाख
- 1:30:44करोड़ से ऊपर का डेप्ट है। 1 लाख 16000
- 1:30:48करोड़ का डेप्ट है इंडियन ऑयल पे। इतना
- 1:30:51लोन है इस कंपनी पे। अब जरा देखते हैं कि
- 1:30:55सिर्फ पिछले साल इसने कितना डिविडेंड
- 1:30:57बांटा।
- 1:30:59टोटल इंडियन ऑयल के शेयर्स हैं 940 करोड़
- 1:31:03शेयर्स। 940 करोड़ शेयर्स हैं इंडियन ऑयल
- 1:31:06के। एक शेयर के पीछे रफली 10% का डिविडेंड
- 1:31:12बांटा। 10% ऑफ मार्केट प्राइस। यानी लगभग
- 1:31:17लगभग ₹15 का डिविडेंड बांटा। एक शेयर के
- 1:31:20पीछे 10% डिविडेंड ईल्ड है। एक शेयर के
- 1:31:24पीछे ₹15 का डिविडेंड 941 करोड़ शेयर्स
- 1:31:29हैं। यानी कितना डिविडेंड बांटा पता है
- 1:31:31आपको? लगभग 14,000 करोड़। 14,000 करोड़ का
- 1:31:37डिविडेंड बांट दिया इस कंपनी ने। वो
- 1:31:4014,000 करोड़ से क्या वो कंपनी अपना डेप्ट
- 1:31:44कम नहीं कर सकती थी? अगर यह कंपनी अपना
- 1:31:46डेप्ट कम करती तो इसको इंटरेस्ट पेमेंट्स
- 1:31:50नहीं करनी पड़ती। जो बैंक से लोन लिया,
- 1:31:52लोन पे जो इंटरेस्ट देना पड़ रहा है, वह
- 1:31:55यह कंपनी बचा सकती थी। जरा देखते हैं कि
- 1:31:58यह कितना इंटरेस्ट देती है। प्रॉफिट एंड
- 1:32:00लॉस स्टेटमेंट पे आए। अब इनके इंटरेस्ट
- 1:32:04एक्सपेंस को देखिए। यह कंपनी लगभग 6000
- 1:32:08करोड़ का इंटरेस्ट एक्सपेंस देती है। तो
- 1:32:11अब जरा सोचिए यह कहां की समझदारी है कि
- 1:32:146000 करोड़ मैं हर साल सिर्फ ब्याज पटा
- 1:32:18रहा हूं और मेरे पे ₹1 लाख करोड़ से ऊपर
- 1:32:21का कर्जा है और मैं 15-15000 करोड़ के
- 1:32:25डिविडेंड्स बांट रहा हूं। वो ₹15000 करोड़
- 1:32:28से मैं अपना यह जो डेप्ट है इसको कम कर
- 1:32:31लेता। डेप्ट बचता ₹1 लाख करोड़ यानी मेरा
- 1:32:35700800 करोड़ का तो इंटरेस्ट एक्सपेंस कम
- 1:32:37हो जाता। अगले साल से 700800 करोड़ का
- 1:32:40यानी मेरा प्रॉफिट बढ़ जाता। लेकिन यह सब
- 1:32:44ना करते हुए मैं डिविडेंड्स बांट रहा हूं।
- 1:32:47यानी एक तरीके से क्या हो रहा है पता है?
- 1:32:49ये तो सरकारी कंपनी है जो बची हुई है। कोई
- 1:32:52प्राइवेट कंपनी ये कर रही होती ना तो उसे
- 1:32:54फ्रॉड, स्कैम ये सब का धब्बा लग जाता। यह
- 1:32:57बेसिकली कंपनी क्या कर रही है? यह बैंक से
- 1:33:00लोन या कहीं से भी लोन उठा रही है।
- 1:33:02गवर्नमेंट से लोन जैसे भी लोन मिल रहा है।
- 1:33:04यह लोन उठा रही है। उस लोन को यह डिविडेंड
- 1:33:08के रूप में बांट रही है। तो ये कितनी
- 1:33:11खतरनाक चीज है एज अ शेयर होल्डर। अगर मैं
- 1:33:14इस कंपनी का ओनर हूं और मैं उस कंपनी को
- 1:33:17ऐसे करते हुए देखूं कि वो बैंक से लोन लिए
- 1:33:19जा रही है और बजाय कि उस लोन से वो बिजनेस
- 1:33:23को बेटर करे। वो उस लोन का पैसा यूज कर
- 1:33:25रही है डिविडेंड बांटने में। ऐसे में तो
- 1:33:28कंपनी डूबती चली जाएगी। उसका डेप्ट हमेशा
- 1:33:30बढ़ता चला जाएगा। तो यह बहुत बहुत डेंजरस
- 1:33:33चीज है। मैंने आपको यह एग्जांपल दिखाया एक
- 1:33:36सरकारी कंपनी का कि चलो ये तो भागेगी
- 1:33:37नहीं, डूबेगी नहीं। सरकार इसको संभाल के
- 1:33:39रखेगी। लेकिन ये चीज अगर आप किसी प्राइवेट
- 1:33:42कंपनी में देखें ना तो तुरंत उस कंपनी से
- 1:33:45भाग जाइए। यह बहुत ही रिस्की चीज है। इसके
- 1:33:47अलावा एक और कारण यह है कि जब आप डिविडेंड
- 1:33:50बांटते हैं ना, एक तो डिविडेंड ना आप नेट
- 1:33:54प्रॉफिट से देते हैं। यानी आप डिविडेंड उस
- 1:33:56अमाउंट से देते हैं जिस पे आपने इनकम
- 1:33:59टैक्स सरकार को ऑलरेडी पे कर चुका है। तो
- 1:34:01आपने प्रॉफिट कमाया उस पे 25% के आसपास का
- 1:34:04इनकम टैक्स दिया। उसके बाद जो नेट प्रॉफिट
- 1:34:07बचा वो आपने डिविडेंड के रूप में बांटा।
- 1:34:10लेकिन जब आप डिविडेंड बांटते हैं तो आपको
- 1:34:13जिसको डिविडेंड मिल रहा है उसको भी उस
- 1:34:15डिविडेंड पर टैक्स देना होता है। अब
- 1:34:17डिविडेंड के फेवर में ना एक आर्गुमेंट ये
- 1:34:19हो सकता है कि हमको क्या करना है कि वो
- 1:34:21डिविडेंड कैसे दे रही है? आप क्यों बोल
- 1:34:23रहे हो कि वो बैंक से लेके लोन लेके
- 1:34:24डिविडेंड दे रही है तो वो गलत है। हमको तो
- 1:34:27पैसा मिल रहा है ना। हमको तो 10% हमारे
- 1:34:29शेयर प्राइस का हर साल डिविडेंड के रूप
- 1:34:31में मिल रहा है। 10 साल में हमारा शेयर
- 1:34:34फ्री हो जाएगा। अब वो लोन लेके ले कि
- 1:34:36कर्जे में डूबे हमको क्या? हमको तो हर साल
- 1:34:3910% की रिकवरी हो रही है। हम तो इससे खुश
- 1:34:42हैं। तो अब इसका काउंटर आर्गुमेंट यह है
- 1:34:45और यह हम लोग सोचते नहीं है कि जो
- 1:34:47डिविडेंड है ना वो हवा से तो आ नहीं रहा।
- 1:34:49जब भी कंपनी डिविडेंड बांटती है तो कंपनी
- 1:34:53की खुद की वैल्यू कम हो जाती है और कंपनी
- 1:34:55का शेयर प्राइस गिर जाता है। सुनने में
- 1:34:57अजीब लग रहा है। एग्जांपल लेते हैं। मान
- 1:34:59लीजिए कि मेरी नेटवर्थ ₹1 करोड़ है। उस ₹1
- 1:35:03करोड़ में से मैं यह सोचता हूं कि मेरे
- 1:35:05बैंक अकाउंट में ₹1 करोड़ हैं। मेरे घर
- 1:35:07वालों को जिनको मैं मानता हूं कि मेरे
- 1:35:09शेयर होल्डर्स हैं। मेरे फैमिली मेंबर्स
- 1:35:11हैं तो मुझ में उनका हिस्सा है। वो मेरे
- 1:35:13शेयर होल्डर्स हैं। उनको मैं 5-5 लाख चार
- 1:35:17लोग मेरे घर में हैं। ₹-5 लाख डिविडेंड
- 1:35:19बांट देता हूं। तो अब मेरी नेटवर्थ क्या
- 1:35:22हो जाएगी? अगर मैं एक शेयर होता तो मेरी
- 1:35:25नेटवर्थ 1 करोड़ से कम हो के ₹0 लाख हो
- 1:35:28जाती और मेरे घर वालों की नेटवर्थ 5-प लाख
- 1:35:31बढ़ जाती। क्योंकि मेरे से हट के वो पैसा
- 1:35:34उनके पास चला गया। मैंने उनको डिविडेंड दे
- 1:35:36दिया। तो मेरी नेटवर्थ कम हो गई। ऐसा नहीं
- 1:35:40होगा कि अगर मेरी नेटवर्थ ₹1 करोड़ है और
- 1:35:42मैंने 5-5 लाख चार अपने घर वालों को दे
- 1:35:45दिए। मेरे पास 80 लाख बचे तो ऐसा नहीं
- 1:35:47होगा कि मैंने डिविडेंड दिया तो मेरी
- 1:35:50नेटवर्थ 1 करोड़ प्लस 20% डिविडेंड ईल्ड हो
- 1:35:53गई। नहीं पहले मेरी नेटवर्थ 1 करोड़ थी और
- 1:35:57अब मेरी नेटवर्थ गिर के 80 लाख हो गई।
- 1:36:00प्लस मैं डिविडेंड देता हूं यह दिखने लगा।
- 1:36:04तो जब भी कोई कंपनी डिविडेंड देती है तो
- 1:36:07उसकी खुद की वैल्यू कम हो जाती है जिसके
- 1:36:10कारण उसके शेयर का दाम गिर जाता है। यह है
- 1:36:13इसका प्राइस चार्ट पिछले 5 सालों का। तो 5
- 1:36:16साल पहले यह शेयर 103 104 के आसपास था।
- 1:36:20फिर यह 200 के आसपास भी था और अभी फिर से
- 1:36:24यह 115 के आसपास ही है। यानी 5 साल में यह
- 1:36:27शेयर कहीं गया ही नहीं। जाएगा कैसे? कंपनी
- 1:36:30तो सारा मुनाफा बांट देती है। उल्टा लोन
- 1:36:33ले भी लोगों को पैसा बांट देती है। तो इस
- 1:36:35कंपनी की नेटवर्थ बढ़ ही नहीं रही। इस
- 1:36:38कंपनी के रिजर्व्स तो बढ़ ही नहीं रहे। तो
- 1:36:40ये एप्रोच क्यों और ज्यादा बुरा है?
- 1:36:42क्योंकि डिविडेंड पे तो टैक्स भी ज्यादा
- 1:36:44लगता है। अगर यही कंपनी डिविडेंड ना देके
- 1:36:47अपने पास रखती तो जो 10% इसने डिविडेंड
- 1:36:50नहीं दिया होता पिछले साल तो इसके शेयर का
- 1:36:52दाम 10% ज्यादा होता। ₹130 के आसपास होता।
- 1:36:56उस पे अगर आप इस शेयर को एक साल रख के
- 1:36:58बेचते तो आप पर 10% कैपिटल गेन टैक्स ही
- 1:37:01लगता। टैक्स भी कम लगता। डिविडेंड के कारण
- 1:37:03तो टैक्स भी ज्यादा लग रहा है। अगली बार
- 1:37:05जब भी ये कंपनी डिविडेंड देगी तो एक्स
- 1:37:08डिविडेंड डेट जो है उसके बाद ना जितने
- 1:37:10रुपए का डिविडेंड है मान लीजिए ₹6 का
- 1:37:12डिविडेंड है तो रफली ₹6 से ये शेयर प्राइस
- 1:37:15गिर जाएगा। तो डिविडेंड निकलता ये शेयर के
- 1:37:18प्राइस से ही है। तो इसलिए खुश होने की तो
- 1:37:20कोई बात ही नहीं है।
- 1:37:24अब ना हम एक और बहुत जरूरी कांसेप्ट
- 1:37:27डिस्कस करने वाले हैं डिविडेंड के अराउंड।
- 1:37:28लेकिन उसके पहले मैं आपको बता देता हूं कि
- 1:37:30इस तरह की कोई भी कंपनीज़ का ग्रुप आपको
- 1:37:33ढूंढना कैसे है। तो आपको tiker.in
- 1:37:36पे आके स्क्रीनर पे क्लिक करना है। गो टू
- 1:37:38स्क्रीनर पे जाइए। लेकिन उसके पहले यहां
- 1:37:40इंस्ट्रक्शंस हैं कि इसको कैसे यूज करना
- 1:37:43है। यहां भी इंस्ट्रक्शंस हैं कि स्क्रीनर
- 1:37:45को कैसे यूज़ करना है। घबराइएगा मत। बहुत
- 1:37:48ही सिंपल है। चलिए तो अब स्क्रीनर पे जाते
- 1:37:51हैं। तीसरी बार यहां भी इंस्ट्रक्शंस हैं
- 1:37:54कि इसको कैसे यूज़ करना है। तो पहली बार
- 1:37:56में थोड़ी घबराहट हो सकती है लेकिन ये
- 1:37:59बहुत आसान है। जैसे अगर मुझे चाहिए कि कौन
- 1:38:02सी ऐसी कंपनीज़ हैं जिन्होंने पिछले
- 1:38:04फाइनशियल ईयर में 5% से ज्यादा का
- 1:38:07डिविडेंड दिया है। डिविडेंड ईल्ड तो मैं
- 1:38:09यील्ड टाइप करूंगा और मैं स्क्रॉल करके
- 1:38:13पिछला साल मुझे चाहिए तो y वन ईयर वन वन
- 1:38:17मतलब लेटेस्ट टू मतलब उससे पुराना थ्री
- 1:38:19मतलब उससे पुराना और टीटीएम यानी पिछले 12
- 1:38:23महीने तो फाइनेंसियल ईयर वाइज नहीं पिछले
- 1:38:2512 महीने जून टू जून दिसंबर टू दिसंबर
- 1:38:28जबकि ये ईयर वन ईयर टू ये फाइनेंसियल ईयर
- 1:38:30है अप्रैल टू मार्च तो मान लीजिए मुझे
- 1:38:33फाइनेंसियल ईयर के हिसाब से देखना है वो
- 1:38:35कंपनीज़ जिन्होंने 5% से ज्यादा का
- 1:38:38डिविडेंड दिया है। तो मैंने ईयर चूज़ किया।
- 1:38:41अब मुझे ज्यादा वाला सिंबल चाहिए। यह है
- 1:38:44लेस दैन, यह है ग्रेटर दैन। तो मैंने ये
- 1:38:46चूज़ किया और 5% तो मैंने पांच टाइप किया।
- 1:38:50अब इस स्क्रीनर को रन करके देखते हैं कि
- 1:38:51ऐसी कितनी कंपनीज़ हैं। तो ऐसी 156 कंपनीज़
- 1:38:55हैं जिन्होंने 5% से ज्यादा का डिविडेंड
- 1:38:57दिया। अब यहां मैंने परसेंटेज क्यों नहीं
- 1:38:59लगाया? क्योंकि डिविडेंड ईल्ड हमेशा
- 1:39:00परसेंटेज में ही होता है। तो इस तरीके से
- 1:39:03ये तो सिर्फ एक एग्जांपल था। आप जिस तरह
- 1:39:06की कंपनीज चाहें उस तरह की कंपनीज़ ढूंढ
- 1:39:08सकते हैं। जैसे मान लीजिए आपको पीई रेशियो
- 1:39:10वाली कंपनीज़ चाहिए कि किसी कंपनी का पीई
- 1:39:13रेशियो इतने से ज्यादा हो। मान लीजिए 20
- 1:39:16से ज्यादा हो तो आप स्क्रीनर रन करके देख
- 1:39:18सकते हैं और सारी वो कंपनीज़ आपको एक झटके
- 1:39:21पे मिल जाएंगी। तो ऐसी आप बहुत सारी चीजें
- 1:39:23कर सकते हैं। कॉम्बिनेशंस भी यूज़ कर सकते
- 1:39:25हैं जो हम आगे सीखेंगे। लेकिन आज क्योंकि
- 1:39:27हम डिविडेंड की बात कर रहे हैं। तो चलिए
- 1:39:28वापस डिविडेंड की तरफ ही चलते हैं। तो
- 1:39:31चलिए अब मैं वापस उसी रेडीमेड स्क्रीनर की
- 1:39:33तरफ आ गया हूं। जो हमने डिविडेंड ईल्ड
- 1:39:36ट्रेलिंग 12 मंथ्स का बनाया हुआ है और
- 1:39:37यहां पर 15 ऐसी कंपनीज़ हैं जिन्होंने 12
- 1:39:39महीने में 10% से ज्यादा का डिविडेंड दिया
- 1:39:42है। तो ऐसी बहुत सारी कंपनीज़ हैं। अब इनसे
- 1:39:45ना एक और मेजर प्रॉब्लम है। कई लोगों को
- 1:39:48ये लग सकता है कि कुछ लोग जो डिविडेंड
- 1:39:51ईल्ड पे ही जीते हैं, सीनियर सिटीजन हो,
- 1:39:54रिटायर्ड लोग हो, उनके लिए तो ऐसी कंपनीज़
- 1:39:56अच्छी है ना। तो आपको क्या प्रॉब्लम है?
- 1:39:58आप इसके अगेंस्ट क्यों बोल रहे हो? अब
- 1:40:01इसका जवाब यह है कि ठीक है कुछ लोग जरूर
- 1:40:04ऐसे होते होंगे जो डिविडेंड ईल्ड पर जीते
- 1:40:06होंगे और इसके कारण हो सकता है यह सरकारी
- 1:40:09कंपनीज़ डिविडेंड मेंटेन करती हैं ताकि वो
- 1:40:12लोग जी सकके उनकी मंथली इनकम ईयरली इनकम
- 1:40:14उनको मिलती रहे लेकिन यहां पे आप देखेंगे
- 1:40:17कि प्राइवेट कंपनीज़ भी हैं। अब एज
- 1:40:20प्राइवेट कंपनीज़ अगर मैं प्राइवेट कंपनी
- 1:40:22का ओनर हूं तो मेरी जिम्मेदारी क्या है?
- 1:40:25एज अ प्राइवेट कंपनी का ओनर या मैनेजर
- 1:40:29मेरी जिम्मेदारी यह नहीं है कि मेरे जो 5%
- 1:40:31या 10% रिटायर्ड शेयर होल्डर्स हैं उनको
- 1:40:35डिविडेंड मिलता रहे। भले ही फिर ये कंपनी
- 1:40:37के लिए खराब हो, टैक्स वाइज इनफिशिएंट हो,
- 1:40:40बाकी शेयर होल्डर्स के लिए गलत हो। मैं
- 1:40:42ऐसा नैरो पर्सपेक्टिव नहीं ले सकता। एज अ
- 1:40:45मैनेजर ऑफ अ कंपनी, मेरा एक काम है कि
- 1:40:49मेरी कंपनी की इंट्रिंसिक वैल्यू या मेरी
- 1:40:51कंपनी की वैल्यू हर साल बढ़ती रहे। अब अगर
- 1:40:54हर साल मैं खूब सारा डिविडेंड दे दे के उस
- 1:40:58पैसे को बहाता रहूंगा तो मेरी कंपनी की
- 1:41:00इंट्रिंसिक वैल्यू कभी नहीं बढ़ेगी। यानी
- 1:41:02मेरे कंपनी का शेयर कभी नहीं बढ़ेगा। तो
- 1:41:05उन 4 5% लोगों को जिनको मैं डिविडेंड देना
- 1:41:08चाहता हूं उनके साथ भी मैं गलत ही कर रहा
- 1:41:10हूं क्योंकि शेयर का दाम कभी नहीं बढ़ रहा
- 1:41:13और वो इस आस में बैठे हैं कि शेयर का दाम
- 1:41:15बढ़ेगा वो बढ़ नहीं रहा। बाकी 95% लोगों
- 1:41:18के साथ तो मैं गलत कर ही रहा हूं क्योंकि
- 1:41:21मेरा प्राइमरी एम है कंपनी की शेयर्स की
- 1:41:24इंट्रेंसिक वैल्यू को बढ़ाना। मैंने
- 1:41:27डिविडेंड देने के लिए कंपनी नहीं खोली है।
- 1:41:29शेयर का दाम बढ़ाने के लिए कंपनी खोली है।
- 1:41:32उसी से ज्यादातर लोगों का फायदा होगा
- 1:41:34क्योंकि वो टैक्स एफिशिएंट भी है। दूसरा
- 1:41:37अगर आप सच में यह चाहते हो कि कुछ लोगों
- 1:41:40को रिकरिंग इनकम मिलती रहे तो डिविडेंड के
- 1:41:42बजाय आप अपने शेयर्स का बायबैक कर लो।
- 1:41:45यानी अपने शेयर्स को खुद खरीद लो बाजार से
- 1:41:48ऊंचे भाव में। अगर आपके पास एक्स्ट्रा कैश
- 1:41:50है जो आप अपने शेयर होल्डर्स को लौटाना
- 1:41:52चाहते हो तो आप शेयर्स का बायबैक कर लो।
- 1:41:55₹100 का शेयर आप ₹120 में खरीद लो। तभी भी
- 1:41:59आपके फंड्स ही जा रहे हैं। डिविडेंड में
- 1:42:01भी आपके फंड्स ही जा रहे हैं। आप शेयर का
- 1:42:03बायबैक कर लो। जिसको पैसों की जरूरत उस
- 1:42:05समय होगी वो कंपनी के शेयर्स बेच देगा
- 1:42:08आपको बाजार से ऊपर भाव में। और जिसे पैसों
- 1:42:10की जरूरत नहीं होगी वो नहीं बेचेगा।
- 1:42:13डिविडेंड में तो क्या होता है? चॉइस नहीं
- 1:42:15होती। कंपनी ने डिविडेंड अनाउंस किया।
- 1:42:16आपको चाहिए या नहीं चाहिए आपको लेना ही
- 1:42:19पड़ेगा। उस पे आपको टैक्स पे करना ही
- 1:42:21पड़ेगा। लेकिन अगर कंपनी बायबैक कर रही है
- 1:42:24तो एटलीस्ट लोगों को चॉइस मिल रहा है ना
- 1:42:26जिनको पैसों की जरूरत है वो शेयर देके
- 1:42:28बाजार से ऊंचे भाव में शेयर देके पैसे ले
- 1:42:30लेंगे। जिनको नहीं जरूरत है वो शेयर लेके
- 1:42:32एंजॉय करते रहेंगे। तो लोगों को चॉइस देना
- 1:42:35एक बेटर तरीका होगा। इसके अलावा एक और
- 1:42:38जरूरी चीज सोचिए। मैंने अगर किसी कंपनी को
- 1:42:41अपने पैसे दिए हैं, उसके शेयर में पैसे
- 1:42:43डाले हैं, तो क्यों डाले हैं? क्योंकि
- 1:42:45मेरे को उस कंपनी के मैनेजर से उम्मीद है
- 1:42:48कि वो मेरे ₹100 को कल को 200 करेगा, 500
- 1:42:51करेगा। इसलिए मैंने उसे पैसे दिए हैं। अब
- 1:42:54अगर उस कंपनी को लगता है कि वो मेरे पैसे
- 1:42:56को नहीं बढ़ा सकता। तो वो बायबैक ले आए।
- 1:42:59वो बोले हम आपके 100 को 200 नहीं कर सकते।
- 1:43:02₹120 हम आपको दे रहे हैं। आप हमको शेयर
- 1:43:06वापस कर दीजिए क्योंकि हम शेयर का दाम
- 1:43:07बढ़ा नहीं सकते। तो आपके ₹100 आप वापस ले
- 1:43:10लीजिए। कंपनी बायबैक ले आके हमको पैसे
- 1:43:12वापस दे देती है। यह समझ में आता है।
- 1:43:16लेकिन मैंने तो कंपनी को पैसे बढ़ाने के
- 1:43:18लिए दिए ना। या तो वो बढ़ाए उस शेयर का
- 1:43:20दाम या बायबैक करके वापस कर दे। हर साल
- 1:43:23अगर वो ₹1 ₹1 डिविडेंड दे रही है तो मैंने
- 1:43:26कंपनी को पैसे दिए ही क्यों? मैंने कंपनी
- 1:43:28को पैसे इसलिए नहीं दिए कि वो मेरे से आज
- 1:43:31₹100 ले ले और हर साल उसमें से ₹10 ₹1
- 1:43:34मुझे लौटाते रहे। इसलिए तो मैंने उस कंपनी
- 1:43:36को पैसे नहीं दिए ना। मैंने सिर्फ एक कारण
- 1:43:38से पैसे दिए कि मेरे शेयर का दाम बढ़ा के
- 1:43:41दे। मेरे पैसे डबल करके दे। इसलिए नहीं कि
- 1:43:44मेरे से ₹100 ले ले। उसी ₹100 में से हर
- 1:43:46साल ₹1 ₹1 लौटाते रहे। जिस पे उस ₹10 पे
- 1:43:49फिर मैं दो-दो ₹3-3 हर साल टैक्स भी देता
- 1:43:51रहूं। मैंने कंपनी को पैसे इसलिए नहीं
- 1:43:53दिए। तो इसलिए जब भी आप डिविडेंड के बारे
- 1:43:56में सोें तो ये सारी चीजों को सोचें। आज
- 1:44:00हम कुछ यूनिक चीजें डिस्कस करेंगे और इससे
- 1:44:02बहुत कुछ जो आप पहले से अस्यूम करते थे वो
- 1:44:05एजम्पशनंस भी आपके गलत साबित होंगे। हो
- 1:44:07सकता है आपको काफी हैरानी भी हो आज के
- 1:44:09लेसन में। सबसे पहले हम डिस्कस करेंगे नेट
- 1:44:12मार्जिन या पैट मार्जिन की। पैट माने
- 1:44:15प्रॉफिट आफ्टर टैक्स या इसे आप नेट
- 1:44:17मार्जिन भी समझ सकते हैं। और आज हम डिस्कस
- 1:44:19करेंगे आरओई के बारे में। रिटर्न ऑन
- 1:44:22इक्विटी के बारे में। साथ ही हम डिस्कस
- 1:44:24करेंगे आज डेप्ट या लोन और डेप्ट इक्विटी
- 1:44:28रेश्यो के बारे में। तो ये तीन बहुत
- 1:44:30ज्यादा जरूरी चीजें आज हम डिस्कस करने
- 1:44:33वाले हैं। तो चलिए हम शुरुआत करते हैं पैट
- 1:44:36या नेट मार्जिन से। तो अब ये पैट मार्जिन
- 1:44:38क्या होता है? इसको बिल्कुल आसान एग्जांपल
- 1:44:41से समझते हैं। एक मान लीजिए पेंसिल आपने
- 1:44:43बेची ₹15 में जिसको आपने खरीदा था ₹10 पे।
- 1:44:48तो यानी ₹15 का सामान आपने बेचा और उसमें
- 1:44:51₹5 कमाए। यानी 1/3 आपका प्रॉफिट मार्जिन
- 1:44:54था। 33% आपका प्रॉफिट मार्जिन था। और अगर
- 1:44:58आपने पेंसिल बेची 20 जिस पेंसिल को आपने
- 1:45:0110 में खरीदा था तो यहां पर आपका मार्जिन
- 1:45:04हो गया 50% का। तो सेलिंग प्राइस माइनस
- 1:45:07कॉस्ट प्राइस और साथ में उसके जो भी
- 1:45:09एक्सपेंसेस आपके बेचने के आए वो सब माइनस
- 1:45:12करने के बाद जो मुनाफा बचा वो होता है फैट
- 1:45:16मार्जिन या नेट मार्जिन परसेंटेज के
- 1:45:18टर्म्स में। और यहां एक और डिफरेंस समझना
- 1:45:21जरूरी है कि मार्कअप और मार्जिन में क्या
- 1:45:23डिफरेंस है। जैसे अगर मैंने कोई पेंसिल
- 1:45:26₹10 में खरीदी और उसे ₹15 में बेचा तो
- 1:45:29मेरा मार्कअप परसेंटेज हो गया 50% कि मैं
- 1:45:3310 की चीज को 50% उसका दाम बढ़ा रहा हूं।
- 1:45:3610 की चीज को 15 अगर दे रहा हूं और फिर
- 1:45:39बेच रहा हूं। लेकिन प्रॉफिट मार्जिन हमेशा
- 1:45:43सेलिंग प्राइस पे निकलता है। प्रॉफिट
- 1:45:45मार्जिन कभी भी कॉस्ट प्राइस पे नहीं
- 1:45:47निकलता। तो प्रॉफिट मार्जिन आपको सेलिंग
- 1:45:50प्राइस लेना है जो ₹15 है उसमें से देखना
- 1:45:53है कि इसका कितना परसेंट मेरे एक्सपेंसेस
- 1:45:56थे। तो ₹15 पे ₹10 मेरे एक्सपेंसेस थे।
- 1:45:59यानी 66.7%
- 1:46:01मेरे एक्सपेंसेस थे और इसीलिए 33.3%
- 1:46:05मेरा प्रॉफिट मार्जिन हुआ। तो हमेशा
- 1:46:07प्रॉफिट मार्जिन सेलिंग प्राइस से निकलता
- 1:46:10है। हमेशा जो मार्कअप है वो कॉस्ट प्राइस
- 1:46:13पर निकलता है कि कॉस्ट प्राइस पर आपने कोई
- 1:46:15चीज खरीदी फिर उसको कितना मार्क अप किया
- 1:46:18यानी उसका कितना दाम बढ़ाया वो है मार्क
- 1:46:22अप। ज्यादा इंपॉर्टेंट कांसेप्ट फाइनेंस
- 1:46:24में ज्यादातर यूज़ होता है प्रॉफिट
- 1:46:26मार्जिन जो सेलिंग प्राइस से निकलता है।
- 1:46:28अब आपने मार्जिनस तो समझ लिए। अब बात करते
- 1:46:31हैं आरओई क्या होता है? देखिए कोई भी
- 1:46:34बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको पैसे
- 1:46:37चाहिए। ज्यादातर बिनेसेस ऐसे हैं कि बिना
- 1:46:39पैसों के शुरू नहीं हो सकते। अब पैसे कहां
- 1:46:41से आएंगे? या तो इक्विटी यानी कि आप अपना
- 1:46:45खुद पैसा लगा रहे हैं या दोस्तों से पैसा
- 1:46:47लगा के डाल रहे हैं और उनको उस बिनेस में
- 1:46:49शेयर दे रहे हैं। तो जब भी आप खुद पैसा
- 1:46:51लगा रहे हैं या लोगों से दोस्तों से पैसा
- 1:46:54लेके लगा रहे हैं और बदले में स्टेक दे
- 1:46:55रहे हैं तो वह हुआ इक्विटी। डेप्ट क्या
- 1:46:58हुआ? जब भी आप लोन ले रहे हैं लोगों को आप
- 1:47:01यह बोल रहे हैं कि मुझे पैसा दे दो साल 2
- 1:47:03साल में मैं इस ब्याज के साथ आपको लौटा
- 1:47:06दूंगा तो वो हुआ डेप्ट या बैंक से ले रहे
- 1:47:08हैं तो वो हुआ डेप्ट। अब मैं बताता हूं कि
- 1:47:11रिटर्न ऑन इक्विटी जो शायद फाइनेंसियल
- 1:47:13स्टेटमेंट्स के सबसे इंपॉर्टेंट रेशियोज़
- 1:47:15में से एक है वो क्या होता है? मान लीजिए
- 1:47:18आपने ₹100 इकट्ठे किए लोगों से। ₹20 आपने
- 1:47:21खुद के लगाए, ₹20 दोस्तों से लिए, ₹60
- 1:47:24कहीं और परिवार से, फादर से, कहीं से भी
- 1:47:27लिए और ₹100 आपने बिजनेस में इन्वेस्ट किए
- 1:47:30और ₹100 के शेयर्स आपने लोगों को बांट
- 1:47:33दिए। यहां आपने लोन नहीं लिया। या तो खुद
- 1:47:36का पैसा लगाया और खुद को शेयर्स दिए या
- 1:47:38दूसरों का पैसा लगाया और उनको शेयर्स दिए।
- 1:47:40तो ₹100 आपने टोटल निवेश किया और साल भर
- 1:47:44बिजनेस करने के बाद आपको पता चला कि आपके
- 1:47:47पास ₹20 मुनाफे के रूप में बच गए। यानी
- 1:47:50आपने बिजनेस में लगाए थे ₹100 और साल भर
- 1:47:53के बाद आपके पास हो गए ₹120। जो पैसा आपने
- 1:47:57लगाया उस पर आपने साल भर के बाद ₹20
- 1:47:59कमाया। यह है रिटर्न ऑन इक्विटी। अब इससे
- 1:48:02हमें नेट मार्जिन और रिटर्न ऑन इक्विटी का
- 1:48:05फर्क समझना बहुत जरूरी है। नेट मार्जिन यह
- 1:48:08बताता है कि जब आप कोई सामान बेच रहे हैं
- 1:48:11तो उसको आपने खरीदा कितने पे था? उसको
- 1:48:13बेचने में खर्चे कितना आया? और उसके बाद
- 1:48:16आपने उस सामान को कितने मुनाफे में बेचा।
- 1:48:19साल भर आप जितनी बार सामान बेचेंगे जो कुछ
- 1:48:22करेंगे वो सब करने के बाद आपने साल की
- 1:48:26शुरुआत में उस बिजनेस में कितना पैसा
- 1:48:28लगाया था और साल भर के बाद उस पैसे पे
- 1:48:31आपने कितना पैसा बनाया ये आरओई बताता है।
- 1:48:35थोड़ा हो सकता है कंफ्यूजिंग लगे। चलिए
- 1:48:37इसे एक एग्जांपल से समझते हैं। मान लीजिए
- 1:48:40एक आदमी था राम। उसके पास ₹100 थे और उसने
- 1:48:43आज बिजनेस शुरू करने की सोची तो उसने ₹10
- 1:48:46₹1 की 10 पेंसिल्स खरीदी। उस ₹100 से और
- 1:48:49दिन की शुरुआत में वह एक बाजार में चला
- 1:48:51गया और पेंसिल बेचने की कोशिश करने लगा।
- 1:48:54दिन के अंत तक उसने 10ों पेंसिल्स को बेच
- 1:48:57दिया। एक पेंसिल जो उसने ₹10 में खरीदी थी
- 1:49:00वो उसने ₹20 में बेची। यानी उसका मार्जिन
- 1:49:03कितना हुआ? ₹20 में उसने चीज बेची। उसका
- 1:49:05सेलिंग प्राइस था 20 और कॉस्ट प्राइस था
- 1:49:0810। यानी 50% का मार्जिन था। तो 50% के
- 1:49:12मार्जिन में राम ने पेंसिल्स बेची और ₹100
- 1:49:16की उसने पेंसिल्स खरीदी थी। दिन के अंत
- 1:49:18में उसने क्योंकि एक पेंसिल दुगने दाम पे
- 1:49:21बेची तो ₹100 उसके हो गए ₹200 तो उसका
- 1:49:25रिटर्न ऑन इक्विटी कितना आया? 100%
- 1:49:28प्रॉफिट मार्जिन था 50% रिटर्न ऑन इक्विटी
- 1:49:32आया 100%। अब एक दूसरा आदमी था श्याम।
- 1:49:35उसके पास भी ₹100 थे। उसने भी 10 पेंसिल्स
- 1:49:39खरीदी। लेकिन उसने एक पेंसिल को बेचा ₹15
- 1:49:42में। तो अब उसका मार्जिन कितना आया?
- 1:49:45सेलिंग प्राइस माइनस कॉस्ट प्राइस का
- 1:49:48परसेंटेज यानी 33%। उसने ₹15 में बेची जो
- 1:49:52चीज उसने ₹10 में खरीदी थी। तो उसका
- 1:49:55प्रॉफिट मार्जिन राम से कम है। राम का 50%
- 1:49:58प्रॉफिट मार्जिन था। श्याम का 33% प्रॉफिट
- 1:50:01मार्जिन है। तो अब बताइए आपको किसका
- 1:50:03बिज़नेस बेटर लग रहा है? जिसका प्रॉफिट
- 1:50:05मार्जिन ज्यादा शायद उसका बिनेस बेटर।
- 1:50:08यहां पे एक सेकंड एस्पेक्ट आता है और यह
- 1:50:10बहुत ज्यादा जरूरी है क्योंकि श्याम सस्ती
- 1:50:14पेंसिल्स बेच रहा था। ₹15 में बेच रहा था
- 1:50:16और राम ₹20 में बेच रहा था और क्वालिटी
- 1:50:18दोनों की पेंसिल्स की सेम थी। इसीलिए
- 1:50:21श्याम ने ज्यादा पेंसिल्स बेच दी। जहां
- 1:50:23राम दिन भर में 10 पेंसिल्स बेच पाया।
- 1:50:25श्याम ने 30 पेंसिल्स बेचीं। अब आप
- 1:50:28पूछेंगे कैसे? तो देखिए उसने ₹100 की
- 1:50:30पेंसिल्स खरीदी। 2 घंटे में ही उसकी 10ों
- 1:50:33पेंसिल बिक गई। तो अब उसके पास ₹150 आ गए
- 1:50:36क्योंकि वह ₹15 की एक पेंसिल बेच रहा था।
- 1:50:38वह ₹150 से उसने 15 पेंसिल्स और खरीद ली।
- 1:50:41फिर वह 2 घंटे में बेच दी। इस तरीके से
- 1:50:43उसने दिन भर में मान लीजिए कि 30 पेंसिल्स
- 1:50:45बेचीं। यानी अब वो ₹15 की एक पेंसिल बेच
- 1:50:48रहा था और ₹10 में खरीद रहा था। तो एक
- 1:50:51पेंसिल पे वो कमा रहा था ₹5 और उसने कितनी
- 1:50:54पेंसिल्स बेच दी? 30 यानी उसने टोटल कमा
- 1:50:57लिए ₹150। 30 पेंसिल बेची और ₹5 एक पे कमा
- 1:51:00रहा था। ₹150 उसने कमा लिए। तो दिन के अंत
- 1:51:03में राम के पास है ₹100, श्याम के पास हैं
- 1:51:05₹250। दोनों ने दिन की शुरुआत की थी ₹100
- 1:51:09से। तो जहां राम का रिटर्न ऑन इक्विटी हुआ
- 1:51:12100% वहीं श्याम का रिटर्न ऑन इक्विटी हो
- 1:51:16गया 150%। दोनों ने सेम पैसे लिए थे।
- 1:51:19लेकिन श्याम ने उस पैसे पे ज्यादा पैसे
- 1:51:21कमा लिए। तो ये फर्क है मार्जिनस और आरओई
- 1:51:25पे। बहुत सारी ऐसी कंपनियां हैं जिनका
- 1:51:28मार्जिन बहुत कम होता है। जैसे इनफैक्ट
- 1:51:30Walmart जो दुनिया के सबसे बड़े फिजिकल
- 1:51:33स्टोर चेन है वो मार्जिन 1% के आसपास रखती
- 1:51:36है कई प्रोडक्ट कैटेगरीज में। लेकिन इतनी
- 1:51:38बार वो प्रोडक्ट को रोल कर करके वो 1% कमा
- 1:51:41लेती है कि उसका रिटर्न ऑन इक्विटी अच्छा
- 1:51:44हो जाता है। और इसीलिए मैंने आपको एक
- 1:51:46एग्जांपल यहां पे दिया है। ये है Ash
- 1:51:48Motors का। इनका पैट मार्जिन है 20% और
- 1:51:52रिटर्न ऑन इक्विटी है 24%। Ash Motors
- 1:51:56बहुत अच्छी कंपनी है। बहुत अच्छे
- 1:51:57फंडामेंटल्स भी हैं। मार्जिन भी बहुत
- 1:51:58अच्छा है। रिटर्न ऑन इक्विटी भी बहुत है।
- 1:52:00अब देखते हैं पेज इंडस्ट्रीज जो जॉकी के
- 1:52:02नाम से गारमेंट्स बनाती है। उनका क्या हाल
- 1:52:04है? इनका प्रॉफ़िट मार्जिन है 13% यानी पर
- 1:52:07प्रोडक्ट पेज Industries कम कमाती है।
- 1:52:10लेकिन उस चक्कर में क्योंकि यह मार्जिन कम
- 1:52:12रखती है तो ज्यादा प्रोडक्ट्स बिकते हैं
- 1:52:14और आरओई कितने पैसे पे पैसा बना ये इसका
- 1:52:19Ash Motors से दुगना है। मार्जिन भले ही
- 1:52:21बहुत कम हो लेकिन पैसे पे कितना पैसा बना
- 1:52:24यह बहुत बेटर है पेज Industries का। तो
- 1:52:27मैं बहुत सारे लोगों को देखता हूं जो
- 1:52:29मार्जिनस को लेके ऑब्सेस्ड रहते हैं। उनके
- 1:52:31हिसाब से सबसे जरूरी यही है। लेकिन आप एक
- 1:52:34सिंपल चीज ध्यान रखिए कि किसी भी बिजनेस
- 1:52:36का पर्पस है चीज को महंगे से महंगे में
- 1:52:39बेचना यह पर्पस नहीं है। किसी भी बिजनेस
- 1:52:42का पर्पस है कि थोड़ा पैसा लगा के ज्यादा
- 1:52:44से ज्यादा पैसा बनाना। अब उसको करने के दो
- 1:52:47मेन तरीके हैं। या तो आप ज्यादा सामान बेच
- 1:52:49लो या आप ज्यादा महंगे में बेच लो। लेकिन
- 1:52:53ज्यादा महंगे में बेचने से हमेशा बेटर
- 1:52:56ऑप्शन रहता है कि ज्यादा सामान बेच लो।
- 1:52:58भले ही सस्ता बेच लो ताकि कस्टमर ज्यादा
- 1:53:00खरीदें और बार-बार खरीदें। तो अगर कोई
- 1:53:03कंपनी सस्ता माल बेचेगी लेकिन ज्यादा
- 1:53:05बेचेगी तो उसका मार्जिन हो सकता है कम
- 1:53:08दिखे। लेकिन आरओई बहुत अच्छा दिखेगा और यह
- 1:53:12कुछ सबसे जरूरी फिगर्स में से है जब भी आप
- 1:53:14किसी कंपनी को एनालाइज कर रहे हैं। अब इसी
- 1:53:17से जुड़ता है डेप्ट का सवाल कि कर्जा
- 1:53:20कितना है? क्योंकि आरओई को डेप्ट लेके
- 1:53:23कर्जा लेके भी बढ़ाया जा सकता है। चलिए
- 1:53:25समझते हैं कैसे। इस एग्जांपल को लेते हैं।
- 1:53:28पहले केस में कंपनी को ₹100ों की जरूरत थी
- 1:53:31और उसने पूरे ₹100 शेयर्स इशू करके इकट्ठे
- 1:53:34किए। उसने कर्जा कुछ भी नहीं लिया।
- 1:53:36प्रॉफिट आया ₹20 यानी ₹100 पे उसने ₹20
- 1:53:40कमा लिए। तो अब आरओई हो गया 20% का। अब
- 1:53:43सेकंड केस देखते हैं। यहां भी कंपनी को
- 1:53:46₹100 की जरूरत थी। लेकिन ₹50 के उसने
- 1:53:48शेयर्स इशू किए और ₹50 का उसने कर्जा ले
- 1:53:51लिया और वह कर्जा उसने लिया 12% इंटरेस्ट
- 1:53:55के हिसाब से। यानी उस ₹50 पे जो उसने
- 1:53:58कर्जा लिया उस पे उसको अब ₹6 इंटरेस्ट
- 1:54:00देना था जो कि 12% होता है। तो वो देने के
- 1:54:04बाद प्रॉफिट बचा ₹14। पहले केस में
- 1:54:07क्योंकि इंटरेस्ट नहीं देना था तो प्रॉफिट
- 1:54:09बचा ₹20 लेकिन दूसरे केस में क्योंकि
- 1:54:12इंटरेस्ट देना पड़ा तो प्रॉफिट हो गया
- 1:54:15₹14। तो यहां पर अब लग रहा है कि यह केस
- 1:54:18बेटर है। यहां पर ₹20 का प्रॉफिट मिला।
- 1:54:21यहां पे ₹14 का प्रॉफिट मिला। लेकिन अब
- 1:54:24हमको यह भी ध्यान देना है कि इस केस पे
- 1:54:26₹100 के शेयर्स इशू हुए थे। तो ₹100 के
- 1:54:30शेयर्स जो इशू हुए तो उन ₹100 के पीछे
- 1:54:33कंपनी ने ₹20 कमाए। लेकिन इस केस में
- 1:54:36कंपनी ने केवल ₹50 के शेयर्स इशू किए।
- 1:54:39बाकी 50 जो कर्जे से उठाया उसको तो ₹6
- 1:54:42इंटरेस्ट दे दिया और वो चला गया। तो जो
- 1:54:45बाकी ₹50 शेयर्स के थ्रू पैसा आया उस ₹50
- 1:54:49के पीछे कंपनी को ₹14 की कमाई हुई। यहां
- 1:54:52₹100 के पीछे ₹20 की कमाई हुई और यहां ₹50
- 1:54:56के पीछे ₹14 की कमाई हुई। यानी आरओई बढ़
- 1:55:00गया 28%। तो इस एग्जांपल से हम समझ रहे
- 1:55:04हैं कि कैसे कर्जा लेके आरओई को बढ़ाया जा
- 1:55:07सकता है जो बहुत सारी कंपनियां करती भी
- 1:55:10है। इनफैक्ट इसीलिए आप लोगों में से जिन
- 1:55:12लोगों ने कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएशन की
- 1:55:14पढ़ाई की है उनको बोला जाता है कि आइडियल
- 1:55:16डेप्ट इक्विटी रेशियो 2:1 होता है। यानी
- 1:55:20अगर ₹50 आपने शेयर्स के थ्रू उठाए हैं तो
- 1:55:23₹100 का आप कर्जा ले लीजिए। इक्विटी से
- 1:55:25दुगना कर्जा ले लीजिए। जिससे शेयर
- 1:55:28होल्डर्स का यह रिटर्न बढ़ जाएगा। लेकिन
- 1:55:30यहां मैं आपको कहना चाहता हूं कि नहीं एज
- 1:55:33एन इन्वेस्टर आइडियल डेप्ट इक्विटी रेशियो
- 1:55:36होता है जीरो। कंपनी में डेप्ट होना ही
- 1:55:38नहीं चाहिए। इसलिए आप जब अच्छी कंपनियां
- 1:55:41देखेंगे तो उनमें लगभग इक्विटी के मुकाबले
- 1:55:44कुछ भी डेप्ट नहीं होता। यहां पे 0.02%
- 1:55:47डेप्ट इक्विटी रेशियो है। पेज इंडस्ट्रीज
- 1:55:49में 01 डे इक्विटी रेशियो है। तो लगभग
- 1:55:52जीरो डेप्ट ये कंपनियां चल रही हैं। और ये
- 1:55:55दोनों कंपनियों ने बहुत अच्छा किया हुआ
- 1:55:56है। बहुत वेल्थ क्रिएट किया हुआ है और वो
- 1:55:58भी जीरो डे रह के। क्योंकि आपको यह भी
- 1:56:01देखना है कि जब कमाई अच्छी नहीं हो रही
- 1:56:04होती। यहां पे तो दोनों केसेस में अच्छा
- 1:56:06खासा प्रॉफिट हो रहा था। लेकिन मान लीजिए
- 1:56:09इंडस्ट्री में स्लोडाउन आ गया या किसी भी
- 1:56:11कारण से माल नहीं बिका। तो क्योंकि
- 1:56:14प्रॉफिट नहीं हुआ तो शेयरहोल्डर्स को कुछ
- 1:56:16नहीं मिलेगा और वो चलता है। लेकिन अगर आप
- 1:56:19कर्जा ले रहे हैं तो ये ₹6 जो इंटरेस्ट है
- 1:56:22ये तो पटाना ही पटाना है। चाहे प्रॉफिट हो
- 1:56:25चाहे लॉस हो। इक्विटी होल्डर्स को शेयर
- 1:56:27होल्डर्स को तो डिविडेंड या प्रॉफिट तभी
- 1:56:29मिलेगा अगर प्रॉफिट होगा। लेकिन डेप्ट का
- 1:56:31नुकसान यह है कि प्रॉफिट हो या ना हो।
- 1:56:34इंटरेस्ट तो पटाना ही है और ऐसे में अगर
- 1:56:37कंपनी दो-ती साल लॉस में रहे और इंटरेस्ट
- 1:56:40पटाने के पैसे ही ना बचे तो कंपनियां डूब
- 1:56:42जाती है। तो बहुत सारी अच्छी कंपनियां
- 1:56:45इसलिए बर्बाद हो गई क्योंकि उन्होंने
- 1:56:47कर्जा बहुत ज्यादा ले लिया था। तो
- 1:56:49ज्यादातर कंपनीज़ में आपको यह देखना है कि
- 1:56:52डेप्ट इक्विटी रेशो कम से कम हो। जीरो हो
- 1:56:55तो बहुत अच्छा है। अगेन ये चीज बैंक्स में
- 1:56:58बिल्कुल अप्लाई नहीं होगी। कोई भी बैंक
- 1:57:00में आप कभी भी डे इक्विटी रेशियो नहीं
- 1:57:03देखेंगे और यही फिनोलॉजी टिक की खासियत भी
- 1:57:06है कि हमने हर कंपनी के अकॉर्डिंग वही
- 1:57:10डाटा कंपनी एसेंशियल्स में दिखाया है जो
- 1:57:12डाटा जरूरी है। जैसे बैंक्स में आपको डे
- 1:57:15इक्विटी रेशो को नहीं देखना है। तो यहां
- 1:57:17से हमने डे इक्विटी रेशियो को हटा दिया।
- 1:57:19कासा ला दिया, कॉस्ट टू इनकम ला दिया, नेट
- 1:57:21इंटरेस्ट इनकम ला दिया जो आपको पिछली
- 1:57:23कंपनीज़ में या यहां पे नहीं दिख रही हैं।
- 1:57:26और बैंक्स में आपको अलग फ़िगर्स दिख रही
- 1:57:28हैं। क्योंकि ये बैंक्स में इंपॉर्टेंट
- 1:57:29है। डेप्ट क्यों इंपॉर्टेंट नहीं है?
- 1:57:31क्योंकि बैंक का तो बिजनेस ही है। लोगों
- 1:57:34से पैसा लेना, करंट अकाउंट के रूप में,
- 1:57:36एफडी के रूप में, सेविंग्स के रूप में। तो
- 1:57:38बेसिकली लोगों से पैसा उधार लेना और उसको
- 1:57:42आगे उधार पे दे देना। तो इसमें हम डे
- 1:57:45इक्विटी रेशियो नहीं देखेंगे क्योंकि
- 1:57:48बैंक्स का तो वही काम है। तो कभी भी डे
- 1:57:50इक्विटी रेशियो किसी भी लेंडिंग, फाइनेंस
- 1:57:53कंपनी, एनबीएफसी, बैंक्स में हमको नहीं
- 1:57:55देखना है। उसके लिए बहुत सारे अलग रेशियोज़
- 1:57:58हैं जिनको डेफिनेटली जब हम आगे के वीडियोस
- 1:58:00में इंडस्ट्री बाय इंडस्ट्री एनालिसिस
- 1:58:02सीखेंगे तब मैं डिस्कस करूंगा। लेकिन आज
- 1:58:05के लिए आप इतना जान लीजिए कि डेप्ट
- 1:58:07इक्विटी रेशियो जितना कम हो या डेप्ट फ्री
- 1:58:09हो उतना अच्छा है। तो आज हमने कुछ जरूरी
- 1:58:12चीजें देखी कि प्रॉफिट मार्जिन से ज्यादा
- 1:58:14जरूरी है कि आप आरओई देखें और उससे भी
- 1:58:16जरूरी है कि आप अच्छा आरओई देख के खुश मत
- 1:58:19हो जाइए। यह देखिए कि कहीं यह आरओई इसलिए
- 1:58:22तो नहीं है कि कंपनी में डेप्ट बहुत
- 1:58:24ज्यादा है। क्योंकि अच्छे टाइम पर ज्यादा
- 1:58:26डेप्ट लेके जैसा हमने देखा कोई भी अपना
- 1:58:29आरओई इंप्रूव कर सकता है। तो अच्छी कंपनी
- 1:58:32वही है जो बिना डेप्ट लिए या कम से कम
- 1:58:34डेप्ट लेके भी बहुत अच्छा आरओई ला सके। अब
- 1:58:38अच्छा आरओई क्या होता है? ये बहुत
- 1:58:40इंडस्ट्री टू इंडस्ट्री डिपेंड करता है कि
- 1:58:42उस इंडस्ट्री में आरओई कितना चल रहा है।
- 1:58:45यूजुअली कंपनीज़ कितना आरओई निकाल पाती
- 1:58:47हैं। जैसे यहां हम देखें कि इस टेक्सटाइल
- 1:58:50इंडस्ट्री में कंपनीज़ का एवरेज आरओई 20 के
- 1:58:53आसपास है। 20, 22, 14 तो ऐसे में 48 का
- 1:58:56आरओई बहुत अच्छा है। इन जनरल आप मान सकते
- 1:58:59हैं कि 20 से ऊपर का आरओई अच्छा है। लेकिन
- 1:59:02आपको इंडस्ट्री में यहां टिककर पे आप
- 1:59:04पीियर्स पे क्लिक करेंगे तो यह सेक्शन आ
- 1:59:06जाएगा और आप चाहें तो सारे पीियर्स की
- 1:59:08लिस्ट भी इस बटन पे क्लिक करके ला सकते
- 1:59:10हैं और आरओई कंपेयर कर सकते हैं। जितना
- 1:59:12ज्यादा आरओई उतना ये कंपनी के लिए पॉजिटिव
- 1:59:15है। 20 से ऊपर ज्यादातर इंडस्ट्रीज में
- 1:59:18होना चाहिए। ये बहुत अच्छी फिगर है।
- 1:59:20बैंक्स में कुछ हैवी इंडस्ट्रीज में ये
- 1:59:22लाना मुश्किल होता है। लेकिन ज्यादातर
- 1:59:24इंडस्ट्रीज में इतना आरओई आपको एक्सपेक्ट
- 1:59:26करना चाहिए। तो आज के वीडियो में मैं दो
- 1:59:29सबसे जरूरी रेशियोज़ डिस्कस करने वाला हूं।
- 1:59:31मेनली आरओसीई और थोड़ा बहुत मैंने पहले
- 1:59:34आरओई डिस्कस किया था। लेकिन आज हम इन
- 1:59:36डेप्थ जानेंगे कि आरओसीई और आरओई में क्या
- 1:59:38फर्क होता है। तो इस एक वीडियो को जरूर
- 1:59:42पूरा-पूरा देखिएगा। ये सबसे इंपॉर्टेंट
- 1:59:44वीडियोस में से एक है। और आज मैं डिस्कस
- 1:59:46करूंगा एक बहुत इंपॉर्टेंट रेश्यो जो है
- 1:59:49रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड। साथ ही हम
- 1:59:51इसको कंपेयर करेंगे रिटर्न ऑन इक्विटी से
- 1:59:54जो हमने एक पिछले वीडियो में डिस्कस किया
- 1:59:56था। इन दोनों रेशोज़ को डिटेल में आज मैं
- 1:59:58समझाऊंगा और बताऊंगा कि कैसे दोनों को
- 2:00:01कंपेयर करना है। कौन सा रेश्यो ज्यादा
- 2:00:03इंपॉर्टेंट है। कब आपको कौन सा रेश्यो
- 2:00:05देखना है। जानेंगे आज इन डेप्थ इन रेशियोज़
- 2:00:08के बारे में। और तब तक अगर आपको ये सीरीज
- 2:00:11पसंद आ रही हो तो प्लीज इस वीडियो को लाइक
- 2:00:13कर दीजिएगा। और मैंने एक प्लेलिस्ट भी
- 2:00:15बनाई है जो अब आपके स्क्रीन पे है जिससे
- 2:00:18आप स्टार्टिंग से इस सीरीज के सारे
- 2:00:20वीडियोस देख सकते हैं। और अगर मुझसे कुछ
- 2:00:23रेशोज़ छूट गए हैं या आप कोई टॉपिक चाहते
- 2:00:25हैं कि मैं कवर करूं तो उसे कमेंट में
- 2:00:27जरूर लिख दीजिएगा। हमारी टीम कमेंट्स को
- 2:00:29लगातार पढ़ती रहती है। तो अब जानते हैं कि
- 2:00:32रिटर्न ऑन कैपिटल होता क्या है? कैपिटल
- 2:00:35यानी वो पैसा जो किसी बिजनेस में लगा हुआ
- 2:00:37है जिससे बिजनेस का डेली का कामकाज चल रहा
- 2:00:40है। तो जैसा आप जानते हैं लगभग सारे
- 2:00:42बिजनेसेस में पैसों की जरूरत है। आपको
- 2:00:44दुकान खोलनी हो, ट्रेडिंग करनी हो, ऑनलाइन
- 2:00:46कुछ करना हो कम या ज्यादा लेकिन पैसे तो
- 2:00:49चाहिए ही। अब पैसे हासिल करने के दो मेजर
- 2:00:52तरीके होते हैं। पहला ऐसा पैसा जिस पे
- 2:00:55आपको ब्याज नहीं देना है और वो पैसा आपने
- 2:00:57लिया है। बदले में अपने दोस्त को या किसी
- 2:01:00को बिजनेस में हिस्सेदारी दे दी है। या
- 2:01:02फिर अगर खुद पैसा लगाया है परिवार का पैसा
- 2:01:04लगाया है तो खुद को हिस्सेदारी दे दी कि
- 2:01:06मैंने ये ₹1 लाख बिनेस में लगाए। अब
- 2:01:09बिजनेस का 100% ओनर मैं हूं। तो भी इसको
- 2:01:12मान लिया जाता है कि आपने बिजनेस में पैसा
- 2:01:14लगाया और बिजनेस में हिस्सेदारी खरीदी। तो
- 2:01:17अगर दोस्तों को, परिवार वालों को या खुद
- 2:01:19को ही आपने बिजनेस में हिस्सेदारी दी है
- 2:01:22और उसके बदले खुद को या दोस्तों को
- 2:01:24पार्टनर बनाया है तो उसे हम इक्विटी
- 2:01:26कहेंगे। दूसरा तरीका होता है कि आप ब्याज
- 2:01:30पे पैसे ले लें। चाहे दोस्तों से लें, घर
- 2:01:32वालों से लें, बैंक से लें, किसी से भी
- 2:01:34लें लेकिन उन्हें बिजनेस में आप
- 2:01:35हिस्सेदारी नहीं दे रहे। उन्हें बोल रहे
- 2:01:37हैं कि इस पैसे के बदले मैं इतनाइतना
- 2:01:39ब्याज महीने का साल का देता रहूंगा। तो
- 2:01:42दूसरा तरीका होता है कि आप ब्याज पे पैसे
- 2:01:43ले लें। तो यानी ये दोनों मिलके बनता है
- 2:01:46बिजनेस का कैपिटल यानी वो पैसा जिससे अब
- 2:01:48बिजनेस चलेगा। तो कैपिटल के दो पार्ट्स
- 2:01:51होते हैं। या तो शेयर होल्डिंग जिसे हम
- 2:01:53इक्विटी कहते हैं या डेप्ट। तो ये जो
- 2:01:55दोनों तरीके से आपने पैसा जुगाड़ कर लिया।
- 2:01:58मान लीजिए ₹100 आपने खुद के लगा लिए। ₹100
- 2:02:01किसी दोस्त से ब्याज पे लेके लगा लिए। तो
- 2:02:03आपके बिजनेस में अब टोटल कैपिटल एंप्लॉयड
- 2:02:07यानी यह सीई हो गया ₹200। ₹100 दोस्त के
- 2:02:12जिस पर ब्याज देना है तो डेप्ट यानी कर्जा
- 2:02:15है। ₹100 आपके खुद के जिसके बदले आपने खुद
- 2:02:17को हिस्सेदारी दी। ये है कैपिटल एंप्लॉयड।
- 2:02:20तो अब रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड क्या
- 2:02:22होगा? हम सीई तो समझ गए ये आर ओ क्या
- 2:02:25होगा? बहुत सिंपल है। आर ओ से आप ये फिगर
- 2:02:29आउट कर रहे हैं कि इस ₹200 पे आपने कितना
- 2:02:33पैसा बनाया। जैसे अगर यह ₹200 आपने बिजनेस
- 2:02:37में लगाए और इस ₹200 से आपने साल भर में
- 2:02:41₹100 और कमा लिए तो आपका रिटर्न ऑन कैपिटल
- 2:02:45हो गया 50% ₹200 पर आपने ₹100 कमा लिए।
- 2:02:48अगर आपने ₹200 लगा के ₹200 और कमा लिए और
- 2:02:51साल भर के बाद आपके पास अब ₹400 हैं। ₹100
- 2:02:54जो दोस्त से ब्याज पे लिए, ₹100 जो खुद के
- 2:02:56लगाए, ₹200 मुनाफा। तो आपका रिटर्न ऑन
- 2:02:59कैपिटल हो गया 100% का। ये इतना सिंपल सा
- 2:03:03टर्म है और इसी के साथ यह समझना जरूरी है
- 2:03:06कि अब क्यों आरओसीई और आरओई को इतना जरूरी
- 2:03:09समझा जाता है। दो शायद सबसे जरूरी रेशियोज़
- 2:03:12जो किसी कंपनी को पिक करने से पहले देखने
- 2:03:14हैं क्योंकि अल्टीमेटली अगर आप एज अ शेयर
- 2:03:17होल्डर किसी बिज़नेस में पैसा लगा रहे हैं
- 2:03:19तो आपको यह देखना है कि आपके पैसे पे ये
- 2:03:22कंपनी कितना पैसा बना के देगी। क्योंकि इस
- 2:03:25बात को ध्यान से समझिए। आपके पास पैसा
- 2:03:27लिमिटेड है। आप चाहें तो एफडी में आपको 7%
- 2:03:30इंटरेस्ट मिल जाएगा। म्यूच्यूल फंड में
- 2:03:31लगाएंगे तो 12 13% का इंटरेस्ट मिल जाएगा।
- 2:03:34तो अगर आप एफडी ना करके म्यूच्यूल फंड ना
- 2:03:36करके किसी कंपनी में पैसा लगा रहे हैं तो
- 2:03:39आपको यह अनुमान होना चाहिए कि मेरे पैसे
- 2:03:42का ये कंपनी कैसा यूज करेगी और कितना
- 2:03:45रिटर्न लाएगी अपने बिजनेस में। अगर मैं
- 2:03:47अपना पैसा इस कंपनी को दूं तो कहीं ये इस
- 2:03:50पैसे को बर्बाद तो नहीं करेगी। सही रिटर्न
- 2:03:52लाएगी कि नहीं? तो जैसे HL इंडिया की सबसे
- 2:03:56बेहतरीन कंपनियों में से एक यह रिकमेंडेशन
- 2:03:58नहीं है क्योंकि एक अच्छी कंपनी एक अच्छा
- 2:04:00स्टॉक हो यह वैल्यू्यूएशन पर डिपेंड करता
- 2:04:02है। कंपनी बहुत अच्छी है HL नो डाउट
- 2:04:05वैल्यू्यूएशन ठीक है कि नहीं इसका
- 2:04:07एनालिसिस अपन बाद में करेंगे। तो एचयूएल
- 2:04:10जो इंडिया की सबसे अच्छी कंपनियों में से
- 2:04:12एक है वो रिटर्न ऑन कैपिटल 116% का लाती
- 2:04:17है। यानी ₹100 पे वो ₹116 और कमा लेती है।
- 2:04:21ये HL की खासियत है जिसके कारण मार्केट को
- 2:04:24यह इतना पसंद है और काफी प्रीमियम में ये
- 2:04:26स्टॉक चलता है क्योंकि यह पैसे पे बहुत
- 2:04:29ज्यादा पैसा बनाता है। हर साल आप सोच
- 2:04:31लीजिए कि अपने कैपिटल से यह उतना ही पैसा
- 2:04:34और कमा लेता है। आप अगर खुद बिज़नेस करते
- 2:04:36हैं तो सोचिए कि ₹100 अगर आपने किसी दुकान
- 2:04:39खोलने में लगाया और हर साल आप उस ₹100 का
- 2:04:42200, अगले साल 200 का 400 ऐसा करते जाएं
- 2:04:45तो कुछ ही सालों में आप शहर के सबसे अमीर
- 2:04:48लोगों में से होंगे। तो ये खासियत है
- 2:04:50एचयूएल की। लेकिन अभी कुछ बातों का ध्यान
- 2:04:52और देना है कि आरओसी और आरओई में क्या
- 2:04:56फर्क होता है। आरओसी में जैसा मैंने आपको
- 2:04:58बताया कि किसी भी तरीके से पैसा आया हो
- 2:05:01चाहे कर्जा लेके आया हो चाहे इक्विटी शेयर
- 2:05:04बांट के आया हो जो भी बस पैसा आया चाहे
- 2:05:07कैसे भी आया वो सब कंसीडर होता है। आरओई
- 2:05:10में एक फर्क है। आरओई का ये कांसेप्ट है
- 2:05:13कि आप तो एक शेयर होल्डर हो। आप कंपनी को
- 2:05:16एनालाइज कर रहे हो एज अ शेयर होल्डर। तो
- 2:05:18ऐसे में आपको यह देखना है कि शेयर होल्डर
- 2:05:21के पैसे पर कितना पैसा बना। जैसे एक कंपनी
- 2:05:24शुरू करने के लिए ₹100 मैंने इक्विटी
- 2:05:27लगाई। खुद के पैसे लगाए बदले में शेयर्स
- 2:05:29इशू कर लिए। ₹100 मैंने दोस्त से ले लिए।
- 2:05:32तो सीई कैपिटल एंप्लॉयड हो गया ₹200। 100
- 2:05:36खुद के 100 दोस्त के। लेकिन ई इक्विटी
- 2:05:39दोस्त से तो मैंने कर्जा लिया है। वो तो
- 2:05:41डेप्ट हो गया। इक्विटी सिर्फ वो हुआ जो
- 2:05:43मैंने खुद लगाया है। तो इक्विटी हो गया
- 2:05:45₹100। तो रिटर्न ऑन इक्विटी ये बोलता है
- 2:05:48कि आप यह देखो कि आपके ₹100 पे जो शेयर
- 2:05:52होल्डर ने लगाए हैं उस पे कितने पैसे बने।
- 2:05:55आरओसीई बोलता है कि टोटल देखो कि कंपनी ने
- 2:05:58जितना पैसा इकट्ठा किया था उस पे कितने
- 2:06:01पैसे बने। तो अब जानते हैं कि आपको क्या
- 2:06:03देखना चाहिए? क्या आपको आरओसीई देख के
- 2:06:05डिसाइड करना चाहिए कि इन्वेस्ट करना है कि
- 2:06:07नहीं या आरओई देख के। ये इस वीडियो का
- 2:06:10सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट है। प्लीज ध्यान से
- 2:06:12सुनिएगा। बहुत बार कंपनियां आपको धोखा
- 2:06:15देने की कोशिश करेंगी। लेकिन अगर आपने यह
- 2:06:16पार्ट इस वीडियो का ध्यान से देख लिया तो
- 2:06:18आप उससे बच जाएंगे। देखिए पहला एग्जांपल
- 2:06:22लेते हैं कि आपने दोस्त से ₹100 लिए और
- 2:06:24आपने खुद के ₹100 लगाए और खुद को शेयर
- 2:06:26होल्डिंग दे दी। अब आरओसीई में मैंने आपको
- 2:06:29बताया कि हम कर्जा भी जोड़ते हैं और खुद
- 2:06:32जो इन्वेस्ट किया शेयर होल्डिंग के बदले
- 2:06:34वो भी जोड़ते हैं। तो आरओसीई में आप
- 2:06:36देखोगे कि ₹100 दोस्त के भी आपके भी 100
- 2:06:39यानी टोटल कैपिटल एंप्लॉयड ₹200 हुआ। उस
- 2:06:42पे अगर आपने ₹200 कमा लिए 200 का 400 कर
- 2:06:45लिया तो आरओसीई दिख जाएगा 100% आपने पैसा
- 2:06:48डबल कर लिया। अब बात करते हैं आरओई की। आर
- 2:06:51ओई में हम उस पैसे को नहीं देखते जो आपने
- 2:06:54कर्जे के रूप में लिया। उस पैसे को हम
- 2:06:56इग्नोर कर देते हैं। हम सिर्फ वो पैसा
- 2:06:58देखते हैं जो इक्विटी के रूप में शेयर
- 2:07:01होल्डिंग के रूप में आया। तो अब फिर से
- 2:07:03वही एग्जांपल ₹100 आपने खुद के लगाए थे।
- 2:07:06₹100 आपने दोस्त से लिए और क्योंकि वह
- 2:07:09आपका दोस्त था तो मान लीजिए कि उसने आपसे
- 2:07:11कोई ब्याज नहीं लिया। वो बोल दिया कि ठीक
- 2:07:13है मेरे को ब्याज नहीं चाहिए। जब हो तो
- 2:07:14मेरे ₹100 लौटा देना। अब उस ₹200 पे आपने
- 2:07:18₹400 कर लिए। अब देखिए क्या होगा। आपने
- 2:07:21कमाए ₹400 और अब इक्विटी कितनी की थी?
- 2:07:24इक्विटी थी केवल ₹100 और रिटर्न ऑन
- 2:07:27इक्विटी तो यही देखता है कि इक्विटी के
- 2:07:29रूप में कितने पैसे आए और उस पे कितना
- 2:07:31रिटर्न आया। यानी यहां पे आपने ₹100 पे
- 2:07:35₹300 कमाए। इस केस में आप ₹200 पे ₹200
- 2:07:39कमा रहे थे तो परसेंटेज कम आ रहा था।
- 2:07:41लेकिन आरओई के केस में आपने ₹100 क्योंकि
- 2:07:44इक्विटी तो 100 ही थी और आपने 400 कमा लिए
- 2:07:47यानी 100 लगा के आपने उस पे ₹300 और कमा
- 2:07:50लिए। तो आपको लगेगा कि इस कंपनी का आरओई
- 2:07:53तो बहुत अच्छा है। तो कभी भी ऐसा ना हो।
- 2:07:56यह धोखा आपके साथ ना हो। उसके लिए जरूरी
- 2:07:58है कि जिस भी कंपनी में कर्जा नहीं है
- 2:08:01जैसे एचयूएल के केस में कर्जा नहीं है तो
- 2:08:03ये धोखे वाली बात उठ ही नहीं सकती कि
- 2:08:05कर्जा भी तो लिया था उसने इसने तो कर्जा
- 2:08:07लिया ही नहीं है तो ऐसे केस में आपको आरओई
- 2:08:10देखना चाहिए मैं बताऊंगा क्यों लेकिन जब
- 2:08:13भी जीरो डेप्ट है तो आरओई देखिए और जब भी
- 2:08:16कंपनी में कर्जा है तो जैसा मैंने आपको
- 2:08:18एग्जांपल में बताया कि कर्जे के कारण
- 2:08:21क्योंकि कर्जा आरओई में तो दिखता ही नहीं
- 2:08:24है और लगता है कि पैसा बिजनेस में कम लगा
- 2:08:26हुआ है और रिटर्न रिटर्न ज्यादा दिखते
- 2:08:28हैं। इसलिए कर्जे वाली कंपनी में आरओई मत
- 2:08:30देखिए। वो गलत पिक्चर दिखाएगा। कर्जे वाली
- 2:08:33कंपनी में आरओसीई देखिए। बिना कर्जे वाली
- 2:08:37कंपनी में कभी भी आरओसीई मत देखिए। आरओई
- 2:08:40देखिए। ये भी मैं बताता हूं क्यों। ये
- 2:08:42देखिए कैडला हेल्थ केयर के एग्जांपल में
- 2:08:44इस कंपनी के पास कर्जा है और कर्जा होने
- 2:08:47के कारण आरओई ज्यादा दिख रहा है। क्योंकि
- 2:08:50ये जो फिगर है ये तो रिटर्न के कैलकुलेशन
- 2:08:53में इंक्लूड हुई ही नहीं। आरओसी में दोनों
- 2:08:56फिगर इंक्लूड हुई। जितना पैसा इसने शेयर
- 2:08:59होल्डर से उठाया। चलिए वो भी देखते हैं कि
- 2:09:01कितना पैसा इसने शेयर होल्डर से उठाया। तो
- 2:09:04यह देखिए इसने ₹8,854
- 2:09:07करोड़ और ₹12 करोड़। ये जो दो हेड्स हैं
- 2:09:11इससे आपको पता चलता है कि कितना पैसा इसने
- 2:09:13शेयर होल्डर्स से उठाया। तो लगभग ₹9000
- 2:09:16करोड़ इसने इक्विटी के रूप में उठाए और
- 2:09:203000 करोड़ इसने कर्जे के रूप में उठाए।
- 2:09:22तो रिटर्न ऑन इक्विटी जो है वो देख रहा है
- 2:09:25कि ₹9000 पे कितना प्रॉफिट कमाया और
- 2:09:28आरओसीई जो है वो देख रहा है कि ₹9000 प्लस
- 2:09:31इस 3000 पे कितना प्रॉफिट कमाया। तो जब भी
- 2:09:34डेप्ट है इसे देखिए। जब भी डेप्ट नहीं है,
- 2:09:36कर्जा नहीं है तो आप इसे देखिए। अब ऐसा
- 2:09:40मैं क्यों बोल रहा हूं कि जब ज़ीरो कर्जा
- 2:09:42है तो इसको देखिए। क्योंकि अगर कर्जा है
- 2:09:43ही नहीं तब तो ये और ये बराबर आने चाहिए।
- 2:09:46आफ्टर ऑल अभी तक जो मैंने बताया उसके
- 2:09:48हिसाब से और इसमें और इसमें फर्क ये है कि
- 2:09:50इसमें कर्जे के पैसे को भी इंक्लूड किया
- 2:09:52जाता है और इक्विटी तो किया ही जाता है।
- 2:09:55इसमें सिर्फ इक्विटी किया जाता है। तो अगर
- 2:09:57कर्जा जीरो हो गया तो ये दोनों भी तो सेम
- 2:09:59होने चाहिए। तो चलिए देखते हैं दोनों सेम
- 2:10:01है कि नहीं। फिर से हिंदुस्तान unilver की
- 2:10:04बैलेंस शीट ही खोलते हैं। तो जब कर्जा
- 2:10:06ज़ीरो है फिर भी इन दोनों में फर्क क्यों आ
- 2:10:08रहा है? ऐसा तो नहीं होना चाहिए था। फिर
- 2:10:10ये क्यों हो रहा है? चलिए मैं आपको बताता
- 2:10:12हूं। जब भी हम आरओई कैलकुलेट करते हैं तो
- 2:10:16हम देखते हैं कि इक्विटी कितनी लगी हुई है
- 2:10:18कंपनी की। चलिए देखते हैं कितनी इक्विटी
- 2:10:21है एचयूएल में। 216 करोड़ प्लस 7440
- 2:10:26करोड़। ये टोटल इक्विटी है। ये ए और ये बी
- 2:10:29216 और 7400। इसको अगर हम मिला दें तो यह
- 2:10:33एचयूएल की टोटल इक्विटी है। इस पे अब
- 2:10:36कंपनी ने कितना प्रॉफिट कमाया? नेट
- 2:10:39प्रॉफिट कंपनी ने कमाया 6000 करोड़ के
- 2:10:42आसपास। तो अगर आप न्यूमैरेटर में 636
- 2:10:46करोड़ रखेंगे और डिनोमिनेटर में 216 +
- 2:10:497400 करोड़ कुछ करेंगे और अगर इसे आप
- 2:10:52डिवाइड करके इसे परसेंटेज में कन्वर्ट
- 2:10:54करेंगे तो आएगा रिटर्न ऑन इक्विटी रफली
- 2:10:5782% के आसपास। तो हमने क्या किया? फिर से
- 2:11:00देख लीजिए आरओई निकालते समय कि हमने नेट
- 2:11:03प्रॉफिट को न्यूमैरेटर में ऊपर रखा। उसे
- 2:11:06डिवाइड किया शेयर कैपिटल प्लस टोटल रिजर्व
- 2:11:09से क्योंकि यही है इक्विटी। शेयर कैपिटल
- 2:11:12और टोटल रिजर्व्स ये मिलके इक्विटी बनती
- 2:11:14है। अब हमने आरओसीई कैलकुलेट करते समय
- 2:11:18क्या किया? देखिए आरओसीई में एक फर्क है
- 2:11:21कि जो आप लोन लेंगे जो डेप्ट लेंगे उस पे
- 2:11:24आपको इंटरेस्ट पे करना है। अब जरा एक ऐसी
- 2:11:27कंपनी लेते हैं जिसके पास अच्छा खासा
- 2:11:29कर्जा हो और देखते हैं उसने कितना
- 2:11:31इंटरेस्ट पे किया। कैडला फिर से कैडला
- 2:11:34इसमें 3000 करोड़ का डेप्ट है। अब देखते
- 2:11:37हैं इस डेप्ट पे इसने कितना इंटरेस्ट पे
- 2:11:39किया। तो कैडला ने इंटरेस्ट पे किया लगभग
- 2:11:42₹8 करोड़ का। तो कैडला को इस डे पे
- 2:11:47इंटरेस्ट पे करना पड़ रहा है। और इसी कारण
- 2:11:49पूरा-पूरा कैलकुलेशन बदल जाता है। क्योंकि
- 2:11:51जब हम आरओई ले रहे थे तो हम नेट प्रॉफिट
- 2:11:54ले रहे थे और इसको हम डिवाइड कर रहे थे
- 2:11:57शेयर कैपिटल और टोटल रिजर्व्स से। लेकिन
- 2:11:59यहां पर हमने इंटरेस्ट एक्सपेंस ऑलरेडी
- 2:12:02माइनस कर दिया है। यानी हमने डेप्ट के
- 2:12:05खर्चे को ऑलरेडी माइनस कर दिया है। तो ऐसे
- 2:12:08में अगर हम नेट प्रॉफिट लेंगे तो
- 2:12:10कैलकुलेशन सही नहीं आएगा। इसीलिए जब आप
- 2:12:13आरओसीई कैलकुलेट करते हैं तो नेट प्रॉफिट
- 2:12:16को इससे डिवाइड नहीं करते। हम ऑपरेटिंग
- 2:12:19प्रॉफिट को जो यहां पर 2300 करोड़ के
- 2:12:22आसपास है। हम इसे डिवाइड करते हैं शेयर
- 2:12:26कैपिटल प्लस टोटल रिजर्व्स प्लस बोरोइंग्स
- 2:12:29जो कर्जा है उसके साथ। यानी हम इंटरेस्ट
- 2:12:33एक्सपेंस को इंक्लूड नहीं करते। तो आप जब
- 2:12:36आरओसीई निकाल रहे हैं तो आप ऑपरेटिंग
- 2:12:39प्रॉफिट लेंगे न्यूमैरेटर में और
- 2:12:41डिनोमिनेटर में आप लेंगे शेयर कैपिटल आरओई
- 2:12:44की तरह ही टोटल रिजर्व्स आरओई की तरह ही
- 2:12:46प्लस डेप्ट यानी बोरोइंग्स आप लेंगे यह
- 2:12:50वाला। तो यह जो फर्क आता है इसके कारण
- 2:12:53जीरो डेप्ट कंपनीज में भी आरओई और आरओसीई
- 2:12:56अलग हो जाता है। जैसा कि हिंदुस्तान
- 2:12:59unilver के केस में हुआ। जहां जीरो डेप्ट
- 2:13:01होने के बावजूद आरओसीई और आरओई में फर्क आ
- 2:13:04रहा है। क्यों आ रहा है वो फर्क? क्योंकि
- 2:13:06जब हम आरओई निकाल रहे हैं तो हम नेट
- 2:13:09प्रॉफिट ले रहे हैं और इसे डिवाइड कर रहे
- 2:13:11हैं इन दोनों से। लेकिन जब हम आरओसीई ले
- 2:13:14रहे हैं तो हम ऑपरेटिंग प्रॉफिट ले रहे
- 2:13:16हैं। यहां पे नेट प्रॉफिट कम है। 6000
- 2:13:19करोड़ के आसपास है। वहीं ऑपरेटिंग प्रॉफिट
- 2:13:219000 करोड़ के आसपास है। तो अगर मैं 9000
- 2:13:24करोड़ को डिवाइड करूं कुछ 7500 करोड़ से
- 2:13:27तो वो 100% से ज्यादा आएगा। वहीं आपको यह
- 2:13:31दिख रहा है 116 करोड़। लेकिन अगर कोई
- 2:13:33कंपनी जीरो डेप्ट है तो इसीलिए आपको आरओई
- 2:13:38लेना है। आपको इंटरेस्ट एक्सपेंस, टैक्सेस
- 2:13:41ये सब के लिए एडजस्ट नहीं करना है कंपनी
- 2:13:43को। इसका सिंपल रीज़न ये है कि आरओई में हम
- 2:13:46नेट प्रॉफिट ले रहे हैं और इसमें हम
- 2:13:48ऑपरेटिंग प्रॉफिट ले रहे हैं। क्योंकि
- 2:13:49आरओसीई क्या देखता है? आरओसीई ये देखता है
- 2:13:52कि कितना पैसा आया। उस पे मैंने कितना
- 2:13:55पैसा बनाया। इंटरेस्ट एक्सपेंस देना है वो
- 2:13:58देंगे। टैक्स जो देना है वो देंगे। अभी तो
- 2:14:00सिर्फ मुझे यह देखना है कि कितना पैसा आया
- 2:14:03और कितना बनाया। तो अगर उस पे मैं ब्याज
- 2:14:06को माइनस कर दूं तो मुझे सही चीज पता नहीं
- 2:14:08चलेगी कि मैंने कितना पैसा पहले कमाया।
- 2:14:10पहले कमा तो लूं फिर जो ब्याज देना है वो
- 2:14:13देता रहूंगा। इसीलिए इसमें ऑपरेटिंग
- 2:14:16प्रॉफिट देखते हैं। क्योंकि नेट प्रॉफिट
- 2:14:18अगर मैं देखूंगा तो उसमें ब्याज का
- 2:14:20एक्सपेंस काउंटेड रहेगा जो मुझे काउंट
- 2:14:22नहीं करना है। समरी के लिए मैं आपको ये
- 2:14:25बताना चाहूंगा जीरो डे कंपनी है। आरओई के
- 2:14:28साथ जाइए। हाई डेप्ट कंपनी है जिसमें बहुत
- 2:14:30सारा कर्जा है। आरओसीई के साथ जाइए। इसमें
- 2:14:33एक चीज का और ध्यान रखिए। हाई आरओई हाई
- 2:14:37आरओसीई देख के खुश नहीं होना है। इसका एक
- 2:14:40और रीज़न मैं आपको बताता हूं। चलिए बैलेंस
- 2:14:42शीट की तरफ। अब जैसा हमने देखा कि बैलेंस
- 2:14:45शीट में हम इक्विटी को कैसे काउंट करते
- 2:14:48हैं? शेयर कैपिटल प्लस रिजर्व्स। अब ये
- 2:14:50रिज़र्व्स क्या होते हैं? रिजर्व्स आप
- 2:14:52सिंपलीसिटी के लिए ये समझ लीजिए कि मान
- 2:14:54लीजिए मैंने ₹100 से बिज़नेस चालू किया।
- 2:14:56अगले साल मैंने उस पर ₹100 कमाए। तो अब
- 2:14:59मेरे पास टोटल ₹200 आ गए। जिसे मैंने खर्च
- 2:15:01नहीं किया जिसे मैंने बिजनेस में ही रखा।
- 2:15:04तो ₹100 के तो मैंने शेयर्स इशू किए थे और
- 2:15:07कंपनी को ₹100 दिए थे। मेरे को शेयर मिल
- 2:15:09गए। अब जो ₹100 मैंने मुनाफा कमाया जो
- 2:15:12मैंने बिजनेस से निकाला नहीं। बिजनेस में
- 2:15:14ही रहने दिया वो हो गया रिजर्व। तो अब
- 2:15:16मेरी टोटल इक्विटी हो गई। ₹100 जो मैंने
- 2:15:19इशू किए थे और ₹100 जो मैंने मुनाफा कमा
- 2:15:22लिया। तो मुनाफा वाला पार्ट जो कंपनी ने
- 2:15:24बचा के रखा वो आ जाता है रिजर्व्स में।
- 2:15:27इन्हीं रिजर्व्स में से डिविडेंड दिया
- 2:15:29जाता है। तो अब इसको ऐसा एग्जांपल लेते
- 2:15:32हैं कि पहले केस में मैंने ₹100 कंपनी को
- 2:15:35दिए और बदले में मैंने शेयर्स लिए। उस
- 2:15:37₹100 पे मैंने ₹100 कमा लिए। तो मेरा
- 2:15:40मुनाफा हो गया ₹200 का। अब सिनेरियो ए
- 2:15:43लेते हैं। मैंने डिसाइड किया कि उस ₹200
- 2:15:46में से ₹100 तो मेरा मुनाफा है। तो मैं
- 2:15:49उसको डिविडेंड के रूप में खुद ले लेता
- 2:15:52हूं। यानी मेरे पास रिजर्व्स में कुछ आया
- 2:15:54ही नहीं। यह वो ₹100 हैं जिसके मैंने
- 2:15:57शेयर्स इशू किए थे और ₹100 जो मैंने कमाए
- 2:16:00वो रिजर्व्स में नहीं डाले। वो मैंने पूरे
- 2:16:03के पूरे डिविडेंड के रूप में ले लिए। तो
- 2:16:05अब यह हो गया 100 और यह हो गया ज़ीरो। यानी
- 2:16:09टोटल इक्विटी मेरा ₹100 ही हुआ क्योंकि
- 2:16:12रिजर्व्स कुछ बढ़े ही नहीं। तो ऐसे में अगर
- 2:16:16मैंने ₹200 कमाए तो यह होगा कि ₹1 पे
- 2:16:20मैंने ₹2 कमा लिए। ₹100 पे मैंने ₹200 कमा
- 2:16:22लिए। यह मुझे आरओई में दिखेगा। अब सेकंड
- 2:16:26केस लेते हैं कि मैंने जो ₹100 कमाए वो
- 2:16:29मैंने निकाले नहीं। मैंने डिविडेंड कुछ
- 2:16:31नहीं लिया। वो मैंने कंपनी में ही रहने
- 2:16:33दिया। तो अब क्या होगा? ₹100 यहां दिखेगा
- 2:16:36इक्विटी और ₹100 यहां दिखेगा रिजर्व्स।
- 2:16:40यानी अब टोटल इक्विटी ₹200 की हो गई। और
- 2:16:43उस पे अगर मैं कंपेयर करूं कि अब टोटल
- 2:16:45इक्विटी पिछले केस में ₹100 हो गई थी। इस
- 2:16:48केस में 200 ही है। तो ₹200 पे मैंने ₹200
- 2:16:51कमाए। तो अब ₹1 पे मैंने ₹1 कमाया। आरओई
- 2:16:55ऐसा दिख रहा है। 100% दिख रहा है। पिछले
- 2:16:57केस में दिख रहा है कि मैंने ₹1 पे ₹2
- 2:17:00कमाया। इस केस में दिख रहा है मैंने ₹1 पे
- 2:17:02₹1 कमाया। यानी आपको ये देखना है कि कई
- 2:17:05कंपनियां ज्यादा डिविडेंड दे दे के आरओई
- 2:17:09को बढ़ा लेती हैं। क्योंकि उनको पता है कि
- 2:17:11आरओई देख के इन्वेस्टर्स इन्वेस्ट करते
- 2:17:13हैं। तो अपने रिजर्व्स को बढ़ने ही मत दो।
- 2:17:16रिजर्व्स इतने छोटे रखो कि आरओई अच्छा
- 2:17:18दिखता रहे। ये एक रीज़न है। ये पैसिमिस्टिक
- 2:17:20रीज़न है। एक रीज़न सच में ये भी है जो
- 2:17:22मैंने पहले डिस्कस किया था कि कंपनी को उस
- 2:17:24पैसे का कोई यूज़ नहीं है। उस रिजर्व्स का
- 2:17:26कोई यूज़ नहीं है। तो वो खुद रख के क्या
- 2:17:28करेगी? तो वो बांट देना चाहती है। ये
- 2:17:30लेजिटमेट रीज़न है। लेकिन जो भी हो आपको यह
- 2:17:32देखना है कि डिविडेंड ईल्ड कहीं 8 10% का
- 2:17:36डिविडेंड मिल रहा है। इसलिए तो आरओई बहुत
- 2:17:38ज्यादा नहीं दिख रहा। जैसे एचयूएल के केस
- 2:17:40में ऐसा नहीं है। 1 1ढ़% बिल्कुल एवरेज
- 2:17:43डिविडेंड है जो लगभग हर प्रॉफिटेबल कंपनी
- 2:17:45देती है और उसके बावजूद HL इतना अच्छा
- 2:17:48आरओई लेके आ रही है। तो ये बहुत अच्छी बात
- 2:17:51है। लेकिन इस बात का ध्यान रखिएगा कि हाई
- 2:17:53डिविडेंड के कारण कहीं हाई आरओई दिख तो
- 2:17:56नहीं रहा क्योंकि इक्विटी बेस ही छोटा हो
- 2:17:58गया। तो उम्मीद करता हूं कि आरओई और
- 2:18:01आरओसीई ये दोनों आपको बिल्कुल क्लियर हो
- 2:18:03पाए होंगे। आप समझ पाए होंगे कि कब कौन से
- 2:18:06रेश्यो को ध्यान देना है और क्यों ये
- 2:18:08रेशियोज़ इंपॉर्टेंट हैं। ये सबसे
- 2:18:10इंपॉर्टेंट रेशियोज़ में से एक है। आज इस
- 2:18:12स्टॉक मार्केट एनालिसिस की सीरीज में हम
- 2:18:15जानेंगे एक स्पेशल एडवांस्ड लेवल टेक्निक
- 2:18:18किसी भी स्टॉक को एनालाइज करने की। और हां
- 2:18:21ये एक एडवांस्ड लेवल टेक्निक है जो हम टकर
- 2:18:24के जरिए सीखेंगे। क्योंकि जब हम टकर इस
- 2:18:27स्टॉक एनालिसिस प्लेटफार्म को बना रहे थे
- 2:18:29तो ऐ यही था। मुझे भी पता है कि बहुत सारे
- 2:18:31इस तरह के प्लेटफॉर्म्स अवेलेबल हैं। तो
- 2:18:33हम कैसे डिफरेंट होने वाले हैं? तो हमने
- 2:18:35इसीलिए टकर में आप देखते हैं डीसीएफ
- 2:18:38कैलकुलेटर है, ईपीएस ग्रोथ कैलकुलेटर है।
- 2:18:41और इसी तरीके से एक और हमने एडवांस्ड
- 2:18:43एंटरप्राइज लेवल या कंपनीज़ में
- 2:18:46कॉर्पोरेट्स में जिस तरह की टूल्स यूज़
- 2:18:47करके रिसर्च होती है, वैसा एक टूल ऐड किया
- 2:18:50है। और वो टूल आज मैं आपको यूज़ करना
- 2:18:53सिखाने वाला हूं। जिससे सच में आप
- 2:18:56एडवांस्ड एक्सपर्ट लेवल का एनालिसिस कर
- 2:18:58सकेंगे। तो मैंने इस सीरीज में आपको आरओई
- 2:19:01या रिटर्न ऑन इक्विटी के बारे में बताया
- 2:19:03है और जिस तरह पीई में मैंने बताया था कि
- 2:19:06हाई पीई अगर किसी कंपनी का है तो जरूरी
- 2:19:09नहीं वो कंपनी महंगी हो उसी तरह आरओई भी
- 2:19:12अच्छा दिख रहा है तो जरूरी नहीं है कि आप
- 2:19:15उस कंपनी को ले लें क्योंकि अच्छा आरओई भी
- 2:19:17कई बार आंखों का छलावा हो सकता है। हो
- 2:19:20सकता है आरओई दिख तो बहुत अच्छा रहा है
- 2:19:22लेकिन असल में जब आप उसे इन डेप्थ एनालाइज
- 2:19:25करेंगे तो आपको पता चलेगा कि वो जो आरओई
- 2:19:28अच्छा दिख रहा है वो गलत आपको जानकारी दे
- 2:19:31रहा है असली में वो आरओई अच्छा है नहीं तो
- 2:19:33आरओई को आज हम ब्रेकाउन करके एनालाइज करना
- 2:19:37सीखेंगे कि कब किसी आरओई को अच्छा माने हो
- 2:19:41सकता है दो कंपनियां हो दोनों में आरओई 25
- 2:19:43का दिख रहा हो लेकिन जब आप उसे ब्रेकडाउन
- 2:19:45करेंगे और आप एनालाइज करेंगे तो आपको पता
- 2:19:48चलेगा कि एक का आरओई अच्छा अच्छा है दूसरे
- 2:19:50का नहीं है। तो आज हम यही सीखेंगे कि इस
- 2:19:52तरह के एनालिसिस को कैसे करना है। लेकिन
- 2:19:55जैसा मैंने बताया यह एक एडवांस लेवल का
- 2:19:57वीडियो है। इसीलिए अगर आपने मेरा आरओई
- 2:20:00वाला वीडियो नहीं देखा है या बेटर ये है
- 2:20:02कि आप अपनी नॉलेज को रिफ्रेश कर लें तो
- 2:20:04मेरे रिटर्न ऑन इक्विटी वाले वीडियो को
- 2:20:06जरूर देख लीजिए इस वीडियो को देखने से
- 2:20:08पहले ताकि यह वीडियो आपको ज्यादा अच्छे से
- 2:20:11समझ में आए। तो आरओई वाले वीडियो का लिंक
- 2:20:13ऊपर कार्ड पे और आपको इस वीडियो के
- 2:20:15डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। आज हम
- 2:20:17सीखेंगे आरओई को ब्रेकडाउन करना डपोंड
- 2:20:21एनालिसिस के जरिए। अब यह डपॉट एनालिसिस
- 2:20:23क्या होता है? यह हम समझते हैं और आई एम
- 2:20:26श्योर आपकी भी ये टूल बहुत मदद करने वाला
- 2:20:28है। अभी के लिए जरा यह सोचिए कि कोई कंपनी
- 2:20:31अपना आरओई कैसे बढ़ा सकती है। आरओई यानी
- 2:20:35एक बार जान लेते हैं कि पैसे पे आपने
- 2:20:37कितना पैसा बनाया। अगर आप अपनी कंपनी को
- 2:20:40शुरू किए ₹100 लगा के यानी आपने कैपिटल
- 2:20:44लगाया इक्विटी के रूप में क्योंकि आप अपनी
- 2:20:46कंपनी को लोन नहीं दे रहे हैं। आप अपनी
- 2:20:48कंपनी में पैसा निवेश कर रहे हैं। उसके
- 2:20:50बदले कंपनी में आपको हिस्सेदारी मिली तो
- 2:20:51यह इक्विटी है। तो अगर आपने किसी कंपनी
- 2:20:53में ₹100 लगाए और उसके बदले हिस्सेदारी ले
- 2:20:56ली तो इक्विटी हो गई ₹100। अब रिटर्न ऑन
- 2:20:59इक्विटी क्या है? कि साल भर बिजनेस करने
- 2:21:01के बाद वो ₹100 पे आपने कितने रुपए कमाए?
- 2:21:05तो अब एक बिजनेस कैसा अपना आरओई बढ़ा सकता
- 2:21:07है? दो-तीन तरीके हैं। शुरू के दो तरीके
- 2:21:09बहुत सिंपल हैं। पहले ज्यादा मुनाफे पे
- 2:21:12माल बेच के कि मैंने ₹100 का कोई सामान
- 2:21:14खरीदा उसे 150 पे बेचा। ये एक तरीका है।
- 2:21:17दूसरा तरीका है कि मुनाफा मैं कम ही रखूं।
- 2:21:20₹100 का खरीदूं 110 में बेचूं लेकिन 10
- 2:21:22पीस बेच दूं। तो पहला तरीका है ज्यादा
- 2:21:26मार्जिन ज्यादा प्रॉफिट पर यूनिट करके और
- 2:21:29दूसरा तरीका है कि ज्यादा वॉल्यूम में
- 2:21:31सामान बेच के। ये दो तरीकों से आरओई बढ़ता
- 2:21:34है। अब यहां पर देखिए एक तीसरा तरीका भी
- 2:21:38है और इसे हम एक एग्जांपल से समझते हैं।
- 2:21:40मान लीजिए आपको खुद का बिजनेस शुरू करना
- 2:21:43था। आपने उसमें ₹100 की इक्विटी लगाई। तो
- 2:21:46अब आपकी इक्विटी है ₹100 की और आपने अपने
- 2:21:49दोस्त से भी ₹100 ले लिए कर्जे के रूप
- 2:21:52में। अब वो आपका दोस्त है तो आपसे वह
- 2:21:54ब्याज नहीं ले रहा लेकिन साल भर के बाद
- 2:21:56आपको उसे पैसा लौटाना है तो अब आपके पास
- 2:21:59₹100 खुद के हैं जो इक्विटी है और ₹100
- 2:22:01अपने दोस्त के भी हैं जो डेप्ट या कर्जा
- 2:22:04है। तो टोटल पैसे आपके पास इस साल थे ₹200
- 2:22:08तो ₹200 का आपने माल खरीदा और उसे आपने
- 2:22:11₹220 में बेच दिया। यानी आपको ₹20 का
- 2:22:14मुनाफा हुआ। अब रिटर्न ऑन इक्विटी किस बात
- 2:22:17को जज करता है कि इक्विटी पे आपने कितना
- 2:22:20रिटर्न कमाया। कर्जे पे कितना रिटर्न
- 2:22:22कमाया यह आरओसीई से पता चलेगा। इक्विटी
- 2:22:25प्लस कर्जा। लेकिन रिटर्न ऑन इक्विटी से
- 2:22:27तो सिर्फ इक्विटी पे कितना रिटर्न आया। अब
- 2:22:31आपने ₹20 कमाए टोटल। अब आपने ₹200 लगाए
- 2:22:35₹220 कमाए। लेकिन वो 200 में से ₹100 तो
- 2:22:38कर्जा था जो इक्विटी का पार्ट ही नहीं है।
- 2:22:41इक्विटी का पार्ट केवल वो ₹100 है जो आपने
- 2:22:43लगाया। तो जब आप आरओई देखेंगे तो वह आपको
- 2:22:46बताएगा कि आपने ₹100 लगाए और आपने ₹20 कमा
- 2:22:50लिए यानी 20% का रिटर्न जो देख के अच्छा
- 2:22:53लगेगा लेकिन सच्चाई यह थी कि उसमें ₹100
- 2:22:56कर्जे के भी थे। तो इमेजिन करिए आपका
- 2:22:58दोस्त आपको ₹100 देता ही नहीं और आपके पास
- 2:23:01200 नहीं टोटल ₹100 ही रुपए होते। तो ₹200
- 2:23:04का माल खरीद के आपने 220 में बेचा। हम
- 2:23:07इमेजिन कर लेते हैं कि ₹100 का आप माल
- 2:23:09खरीदते तो उसे 110 पे बेच पाते। तो आपका
- 2:23:12आरओई केवल 10% का रहता। वो 10% से बढ़ के
- 2:23:1620 इसलिए हो गया क्योंकि आपने इक्विटी के
- 2:23:19बराबर-बराबर कर्जा भी ले लिया था। तो
- 2:23:21कर्जे से आपका आरओई बढ़ा हुआ दिख गया जो
- 2:23:25कि सही नहीं है क्योंकि कर्जे से कंपनी का
- 2:23:27रिस्क बढ़ता है। तो बेसिकली डप आपको यही
- 2:23:30बताता है कि किसी कंपनी का अगर आरओई बहुत
- 2:23:33अच्छा दिख रहा है। जैसे sf का आरओई 5 साल
- 2:23:36पहले था 44%
- 2:23:3841 हुआ 45 हुआ 34 और 15 तो पिछले कुछ
- 2:23:42सालों में इसका आरओई बहुत ही अच्छा था।
- 2:23:45लेकिन हम ये देख सकते हैं कि इस कंपनी का
- 2:23:48आरओई चढ़ रहा किस कारण से है? क्या वो
- 2:23:51कारण है जिस कारण आरओई बढ़ रहा है या गिर
- 2:23:54रहा है? जैसे कई बार अगर आरओई एकदम से
- 2:23:56बढ़े तो सबसे पहले आपको यह चेक करना है कि
- 2:23:58कहीं इस कंपनी में कर्जा तो नहीं बढ़ गया
- 2:24:00और कर्जे के पैसे से धंधा करके कंपनी अपना
- 2:24:03आरओई बढ़ा रही है। तो वैसे में आरओई
- 2:24:05बढ़ाना रिस्की है या फिर कंपनी के
- 2:24:07मार्जिनस बढ़े हैं या कंपनी का ज्यादा माल
- 2:24:10बिक रहा है उस कारण आरओई बढ़ा है। तो आरओई
- 2:24:13क्यों बढ़ा है या क्यों गिरा है यह देखना
- 2:24:15बहुत जरूरी है और इसमें हमारी मदद करता है
- 2:24:18डप एनालिसिस। तो चलिए अब मैं आपको हेड बाय
- 2:24:20हेड इस कंपनी के एग्जांपल के जरिए इसे
- 2:24:22समझाता हूं। देखिए आरओई दिख रहा है कि इस
- 2:24:26साल एकदम से कम हो गया। क्यों हो गया एकदम
- 2:24:29से कम? क्या कारण है? पहला नेट मार्जिन।
- 2:24:32तो पिछले कुछ सालों में नेट मार्जिन 25%
- 2:24:3529% 26% था। पिछले साल ये मार्जिन कम हो
- 2:24:39के 19% हो गया। तो एक कारण तो हमको यह समझ
- 2:24:43में आ रहा है कि आरओई 34 से 15 हो गया
- 2:24:45क्योंकि मार्जिन इतना गिर गया। लेकिन
- 2:24:48मार्जिन गिरा 26 से 19 और आरओई आधे से भी
- 2:24:52कम हो गया। तो ये अपने आप में पूरा कारण
- 2:24:54नहीं है। कुछ ना कुछ कारण और होगा। तो
- 2:24:56चलिए और कारण देखते हैं। देखिए जो चीजें
- 2:24:58हमने बोल्ड की हुई है। नेट मार्जिन हो,
- 2:25:00एसेट टर्नओवर हो या लीवरेज मल्टीप्लायर हो
- 2:25:02ये सबसे जरूरी फैक्टर्स हैं। ये तीन
- 2:25:05फैक्टर्स सबसे जरूरी है। और इसलिए इन तीन
- 2:25:07फैक्टर्स को आज मैं आपको एक्सप्लेन करने
- 2:25:09वाला हूं। अगला कारण हो सकता है एसेट
- 2:25:11टर्नओवर का। क्या यह कम हुआ? बिल्कुल।
- 2:25:15एसेट टर्नओवर भी काफी कम हो गया। 2015 के
- 2:25:18मुकाबले तो यह आधा हो गया। तो एसेट
- 2:25:22टर्नओवर कम होना ही मेजर फैक्टर है जिस
- 2:25:25कारण इस कंपनी का आरओई गिरा। अब एसेट
- 2:25:28टर्नओवर क्या होता है? एसेट टर्नओवर को हम
- 2:25:31सिंपल भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि
- 2:25:33अगर आपके पास ₹1 के एसेट्स हैं। एसेट यानी
- 2:25:36प्लांट, मशीनरी, कंप्यूटर, जमीन जो भी वो
- 2:25:40चीज जिससे आप बिजनेस का माल बनाने में
- 2:25:42आपको मदद मिलती है। तो अगर आपके पास ₹1 का
- 2:25:45एसेट है उसके पीछे आप कितने रुपए का माल
- 2:25:49बेचते हैं? यानी SFनी के पास अगर ₹1 का
- 2:25:53एसेट था 2017 में, तो वो ₹1.30 का माल बेच
- 2:25:57पा रहा था। और इस बार ₹1 के एसेट के पीछे
- 2:26:01वह केवल 67 पैसे का माल बेच पा रहा है।
- 2:26:04यानी वह अपने एसेट्स को अच्छे से यूटिलाइज़
- 2:26:07नहीं कर रहा। अब इसको जरा समझते हैं कि
- 2:26:09इसका बेसिकली मतलब क्या हुआ? अब आप इसे
- 2:26:11जरा सोचिए। अगर पहले कोई कंपनी के पास
- 2:26:14₹100 के एसेट थे और वो ₹130 का माल बेच
- 2:26:18रही थी और इस साल वो केवल 70 पैसे का
- 2:26:21सामान बेच रही है तो ऐसा क्यों हो रहा है?
- 2:26:23इसका क्लियर मतलब यह है कि पहला या तो
- 2:26:27कंपनी को अब ज्यादा माल बेचने में दिक्कत
- 2:26:29आ रही है। यानी वॉल्यूम जनरेट करने में
- 2:26:31दिक्कत आ रही है या सेकंड कंपनी ने एकदम
- 2:26:34से बहुत सारे एसेट्स बढ़ा लिए हैं और अभी
- 2:26:37सेल्स उसके हिसाब से बढ़ी नहीं है। ये
- 2:26:39दोनों कारण हो सकते हैं। तो अगर मुझे ऐसा
- 2:26:42दिखेगा कि एकदम से सेल्स कम हुई मार्च
- 2:26:452019 वाले ईयर में तो मैं सिर्फ ये नहीं
- 2:26:47मान के बैठ जाऊंगा कि मतलब सिमfनी के कूलर
- 2:26:50तो अब बिकते ही नहीं। ये मान लेना गलत
- 2:26:52होगा। मैं यह भी देखूंगा कि क्या ऐसा हो
- 2:26:54सकता है कि पहले उस कंपनी के पास ₹100 के
- 2:26:56ही एसेट थे और अब उसने एक नया प्लांट खोल
- 2:26:58लिया है तो अब उसके पास ₹150 के एसेट हैं
- 2:27:01और इस कारण ज्यादा एसेट्स हो गए हैं
- 2:27:03क्योंकि नया प्लांट खड़ा हो गया तो एकदम
- 2:27:05से सेल्स होने लगेगी ऐसा तो होगा नहीं
- 2:27:07इसलिए हो सकता है कि केवल एक साल ऐसा हो
- 2:27:09रहा है कि सेल्स कम दिख रही है और फिर से
- 2:27:11यह इंप्रूव हो जाएगी। तो दोनों कारण हो
- 2:27:14सकते हैं। या तो कंपनी ने एक बड़ा एसेट
- 2:27:17नया तैयार कर लिया है जिसके कारण एसेट बेस
- 2:27:19बड़ा हो गया है और उसके मुकाबले सेल्स कम
- 2:27:21दिख रही है या फिर सच में कंपनी माल नहीं
- 2:27:24बेच पा रही। तो देखो जो दो मैंने फैक्टर्स
- 2:27:27आपको बताए थे कि कंपनी क्या ज्यादा मुनाफे
- 2:27:29पे बेच पा रही है? नहीं कंपनी अब कम
- 2:27:32मुनाफे पे माल को बेच पा रही है। पहले 30%
- 2:27:35के आसपास के मुनाफे पे बेचती थी। अब केवल
- 2:27:3819% के मुनाफे में बेच रही है। तो जो दो
- 2:27:41मेजर तरीके हैं कि या तो आप ज्यादा
- 2:27:43प्रॉफिट पे चीज को बेचो या आप ज्यादा
- 2:27:46क्वांटिटी में चीज को बेचो। सिमफनी में
- 2:27:49दोनों ही उसका उल्टा हो रहा है। वो अब कम
- 2:27:51मुनाफे पे बेच रही है और अब कम माल भी बेच
- 2:27:54रही है। तो ये दो मेजर इतने बड़े कारण हो
- 2:27:57गए जिसके कारण आरओई एकदम ड्रास्टिकली गिर
- 2:28:00गया। और ये वो तीसरा फैक्टर है लीवरेज
- 2:28:03मल्टीप्लायर। यह आपको बताएगा कि क्या
- 2:28:06कंपनी में डेप्ट के कारण आरओई बढ़ रहा है
- 2:28:09या घट रहा है। तो अगर आपको किसी कंपनी में
- 2:28:12दिखे कि नेट मार्जिन तो लगभग उतना ही है।
- 2:28:15एसेट टर्नओवर भी लगभग उतना ही है। आरओई
- 2:28:17बढ़ गया और फिर आपको दिखे कि लीवरेज
- 2:28:20मल्टीप्लायर एकदम से बढ़ गया है। मतलब समझ
- 2:28:22लीजिएगा कि कंपनी ज्यादा डेप्ट ले रही है।
- 2:28:24ज्यादा कर्जा ले रही है और उस कारण उसका
- 2:28:27आरओई बढ़ रहा है और उस केस में मैं इस
- 2:28:30बढ़ते आरओई को लेके बिल्कुल खुश नहीं
- 2:28:33होऊंगा। उस केस में मैं ये मान लूंगा कि
- 2:28:35कंपनी का आरओई अच्छा नहीं है। तो ध्यान
- 2:28:39रखिए अच्छा आरओई अच्छा वाकई में तभी है
- 2:28:42अगर वो नेट प्रॉफिट मार्जिन के कारण बढ़े
- 2:28:45या वो एसेट टर्नओवर के कारण बढ़े ना कि
- 2:28:47लीवरेज मल्टीप्लायर के कारण बढ़े। तो अब
- 2:28:50हम एक और चीज इस कंपनी में देखते हैं।
- 2:28:52अभी-अभी मैंने यह बोला कि एसेट टर्नओवर
- 2:28:55गिर रहा है। यानी कि हो सकता है कि कंपनी
- 2:28:58को अपनी सेल्स बढ़ाने में दिक्कत आ रही
- 2:29:00है। कंपनी की सेल्स नहीं बढ़ रही। और अब
- 2:29:02एक और बहुत जरूरी चीज़ मैंने आपको बताया कि
- 2:29:05एसेट टर्नओवर गिरने के दो कारण हो सकते
- 2:29:07हैं। या तो माल कम बिक रहा है या फिर कोई
- 2:29:11नया एसेट खड़ा हो गया है। कोई नया प्लांट
- 2:29:13कोई नई मशीनरी अभी-अभी खरीदी है। तो इसको
- 2:29:16हम एक और तरीके से वेरीफाई कर सकते हैं
- 2:29:19पिछले साल का सेल्स देख के कि पिछले साल
- 2:29:21सेल्स गिरी या बढ़ी। तो ये देखने के लिए
- 2:29:24आप रेशियोज़ सेक्शन में जा सकते हैं। और
- 2:29:26यहां पे सेल्स ग्रोथ में वन ईयर में देखिए
- 2:29:30सेल्स हो गई -23%।
- 2:29:33यानी इसी चीज से मुझे ये क्लियर हो गया कि
- 2:29:36सिमfनी के केस में जो ये एसेट टर्नओवर
- 2:29:39गिरा है ये नया एसेट खरीदने के कारण नहीं
- 2:29:42हुआ। उस केस में तो चलो अच्छा रहता कि आगे
- 2:29:44जाके सेल्स भी बढ़ जाएगी। प्रॉब्लम ये हुई
- 2:29:46कि सच में इस कंपनी की सेल्स ही कम हो गई।
- 2:29:49जिस कारण एसेट टर्नओवर कम हुआ है। तो इस
- 2:29:51तरीके से हर वो टूल जो आपको एक कंपनी को
- 2:29:54एनालाइज करने के लिए चाहिए वो हमने टकर
- 2:29:57में दिया हुआ है। जैसे एसेट टर्नओवर कैश
- 2:30:00साइकिल क्या होता है। इसके अलावा आज हम
- 2:30:02जानेंगे कि कैसे बोनस इशू में कुछ भी बोनस
- 2:30:04नहीं है। राइट्स इशू कैसे आपको एक तरह से
- 2:30:07मजबूर करता है जरूरत से ज्यादा पैसा लगाने
- 2:30:10के लिए और कैसे स्प्लिट से भी बिल्कुल खुश
- 2:30:13होने की बात नहीं है। जानेंगे हम
- 2:30:15कॉर्पोरेट एक्शंस का सारा सच। कैश साइकिल
- 2:30:18कितना जरूरी है और एसेट टर्नओवर कैसे आरओई
- 2:30:20को इंपैक्ट करता है। यह सब कुछ और बहुत
- 2:30:23कुछ आज के इस वीडियो में स्टॉक मार्केट
- 2:30:25क्लासेस वि प्रांजल में। तो शुरू करते हैं
- 2:30:27एसेट टर्नओवर के साथ कि एसेट टर्नओवर क्या
- 2:30:30होता है? एसेट टर्नओवर आपको बेसिकली यह
- 2:30:33बताता है कि अगर कंपनी ने एक मशीन खरीदी
- 2:30:36है मान लीजिए ₹100 की तो उस ₹100 की मशीन
- 2:30:39से वो कितने रुपए का सामान बना पाती है और
- 2:30:42बेच पाती है। जैसे हो सकता है दो लोगों ने
- 2:30:44बिजनेस चालू किया। दोनों ने ₹100 की मशीन
- 2:30:47खरीदी। एक ने उस ₹100 की मशीन से ₹500 का
- 2:30:50माल बना के बेच दिया। एक ने उस ₹100 की
- 2:30:52मशीन से ₹100 ही का सामान बनाया। तो कौन
- 2:30:54सी कंपनी बेटर हुई? वो कंपनी जो कम से कम
- 2:30:57लागत में ज्यादा से ज्यादा सामान बना सके
- 2:31:00और बेच सके वो बेहतर कंपनी हुई। और इसीलिए
- 2:31:03जितना ज्यादा किसी कंपनी का एसेट टर्नओवर
- 2:31:06हो ये उतनी अच्छी बात है। इसको एक और
- 2:31:08सिंपल एग्जांपल से समझते हैं। Uber या Ola
- 2:31:11का एग्जांपल ले लीजिए। आपने एक कार खरीद
- 2:31:13ली उसको एज अ टैक्सी चलाने का आपका प्लान
- 2:31:15है। अब आपके पास एसेट जो कि गाड़ी है वो
- 2:31:19पहले से है। अब जितना आप उस एसेट को यूज
- 2:31:22करेंगे उस एसेट्स पे जितनी ज्यादा
- 2:31:25सवारियां आप गाड़ियों में ला पाते हो,
- 2:31:27जितनी ज्यादा टूर रोज कर पाते हो उस
- 2:31:29टैक्सी में, उतना अच्छा हो गया आपका एसेट
- 2:31:32टर्नओवर। आप उस गाड़ी का उतना अच्छा यूज़
- 2:31:34कर रहे हो सेल्स करने के लिए। तो ये जो
- 2:31:37टैक्सी ओनर्स में आप भीड़ देखते हैं Ola
- 2:31:40और Uber के साथ जुड़ने के लिए वो क्यों
- 2:31:42इतने आतुर रहते हैं Ola Uber से जुड़ने के
- 2:31:44लिए? क्योंकि Ola और Uber उनको कस्टमर्स
- 2:31:48लाके देते हैं। पहले जहां टैक्सी ओनर्स
- 2:31:50ढूंढ-ढूंढ के कहीं से कस्टमर लाते थे फोंस
- 2:31:52के जरिए और अपने रेफरेंसेस के जरिए। अब
- 2:31:55Ola Uber से एक ऐप में बटन दबाया और उनको
- 2:31:58कस्टमर मिलना चालू हो जाते हैं। तो उनकी
- 2:32:00गाड़ी की ग्राहकी बढ़ जाती है। यानी उनका
- 2:32:03एसेट टर्नओवर बढ़ जाता है। तो Ola और Uber
- 2:32:06दुनिया भर के टैक्सी ओनर्स को यही वादा
- 2:32:09करते हैं कि हम आपका एसेट टर्नओवर बढ़ा
- 2:32:11देंगे। बढ़ाते हैं कि नहीं वो अलग बात है।
- 2:32:13लेकिन ये इतना जरूरी रेश्यो है। अब आप समझ
- 2:32:16सकते हैं कि पूरा-पूरा बिजनेस लगभग इसी पे
- 2:32:19डिपेंड करता है कि आप अपने एसेट्स को
- 2:32:21कितने अच्छे से रोटेट या उसका टर्नओवर
- 2:32:23करते हैं। तो उम्मीद करता हूं कि एसेट
- 2:32:25टर्नओवर रेशो अब काफी हद तक आपको क्लियर
- 2:32:27हुआ होगा। अब जानते हैं कि ये कैश साइकिल
- 2:32:30या जिसे कैश कन्वर्शन रेशो भी कहते हैं।
- 2:32:33ये क्या होता है। एक एग्जांपल लेते हैं कि
- 2:32:35मान लीजिए आपको रेडीमेड टीशर्ट्स का
- 2:32:37बिजनेस करना है तो पहली तारीख को आपने
- 2:32:40बिना सिलावा कपड़े का थान किसी से खरीदा
- 2:32:43और एक तारीख को उसको पैसे दिए बदले में
- 2:32:45उससे वो थान ले लिया। अब उस थान से आपने
- 2:32:48कपड़े बनाए। ये करने में आपको 10 दिन लग
- 2:32:51गए। 10 दिन बाद आपके पास रेडीमेड टीशर्ट्स
- 2:32:53आ गई जो आपने बनाई। अब उनको बेचने में
- 2:32:56आपको 20 दिन और लग गए। 30 तारीख तक आपकी
- 2:32:59सारी टीशर्ट्स बिक गई और आपके पास पैसा
- 2:33:01वापस आ गया। तो अब आपने पैसा लगाया और
- 2:33:05पैसा वापस आने में। इसमें टोटल 30 दिन लग
- 2:33:08गए। आपने एक तारीख को कपड़ा खरीदा पैसा
- 2:33:10देके 10 दिन में उसको सिया और अगले 20
- 2:33:13दिनों में उसे बेचा। तो 30 दिन का आपका एक
- 2:33:16कैश के रोटेशन का साइकिल हो गया। इसे कहते
- 2:33:19हैं कैश साइकिल या कैश कन्वर्शन रेशो। तो
- 2:33:22अब अच्छी कंपनियों में यूजुअली ये बहुत कम
- 2:33:26होता है। इनफैक्ट Hull Hindstan Uniliver
- 2:33:29के केस में ये नेगेटिव है। ये तो बहुत ही
- 2:33:32अच्छी बात हो गई। तो नेगेटिव कैश साइकिल
- 2:33:34का क्या मतलब है? इसका सिंपल सा मतलब ये
- 2:33:37है कि जिसको एचएल को पैसे देने हैं, जब
- 2:33:40एचएल को पेमेंट करना होता है तो वो पेमेंट
- 2:33:43बहुत बाद में करता है और जब माल बेचना
- 2:33:46होता है तो वो पैसे एडवांस में ले लेता
- 2:33:48है। यानी इसको उसी कपड़े वाले एग्जांपल से
- 2:33:50देखते हैं कि मान लीजिए एचयूएल को
- 2:33:53टीशर्ट्स बनानी है। तो एचएल एक बड़ा
- 2:33:55ब्रांड है। उसने बल्क ऑर्डर दिया कि मुझे
- 2:33:57इतने हजार टन कपड़ा चाहिए और इस तरीके का।
- 2:34:00तो ऐसे में जो सप्लायर है वो एचयूएल जितना
- 2:34:03बड़ा ग्राहक खोना नहीं चाहेगा। तो एनसीएल
- 2:34:05उस पर एक शर्त लगाएगा कि लूंगा कपड़ा मैं
- 2:34:08आज एक तारीख को पैसे दूंगा मैं 40 दिन
- 2:34:11बाद। अब क्योंकि इतना बड़ा ऑर्डर है 40
- 2:34:13दिन बाद ही सही लेकिन इतने करोड़ों रुपए
- 2:34:16आएंगे तो कौन सप्लायर मना करेगा? तो
- 2:34:18सप्लायर हां बोल देता है। तो एचएल को
- 2:34:20कपड़े आज मिल गए एक तारीख को लेकिन उसको
- 2:34:22पैसा देना है 40 दिन बाद। अब एक्चुअल के
- 2:34:25पास बड़े-बड़े प्लांट, मशीनरी सब कुछ होगी
- 2:34:27तो वो कपड़े बना भी 2 दिन में देगी और फिर
- 2:34:30उनका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क इतना
- 2:34:32स्ट्रांग है कि उसे बेच भी चार-प दिन में
- 2:34:35देगी। यानी 1 तारीख को उसको कपड़ा मिला। 7
- 2:34:38तारीख तक उसने सब बेच दिया और उसको पैसा
- 2:34:42देना है 40वें दिन। लेकिन पैसा उसके पास
- 2:34:45तो सातवें ही दिन आ गया। तो ऐसे में उसका
- 2:34:47कैश कन्वर्शन साइकिल हो गया -33। यानी
- 2:34:50पूरा एडवांस में ही एचएल का काम हो जाता
- 2:34:52है। किसी को एक्चुअल में पेमेंट करना ही
- 2:34:54नहीं पड़ता। क्योंकि ऐसा भी सोचिए कि
- 2:34:56एचयूएल जो डिस्ट्रीब्यूटर्स होलसेलर्स को
- 2:34:59माल देता होगा उनसे भी एडवांस लेता है। तो
- 2:35:02जिससे माल खरीदा जिसको पेमेंट करना है
- 2:35:05उसको करता है 40 दिन बाद और जिसको
- 2:35:07प्रोडक्ट दिया जिससे पैसा लेना है उससे
- 2:35:10पैसा ले लेता है एडवांस। तो यानी पहले केस
- 2:35:12में जहां हमने जो पैसा लगाया वो पैसा
- 2:35:14निकालने में 30 दिन लग गए। एचयूएल के पास
- 2:35:17तो दोनों तरफ से एडवांस आ गया। ऐसा होना
- 2:35:19तो बहुत ही अच्छी कंडीशन है और यह दिखाता
- 2:35:22है कि कंपनी की रेपुटेशन कितनी अच्छी है।
- 2:35:24जो एचएल के केस में हम -52 डेज देख रहे
- 2:35:27हैं। यानी 52 दिन पहले ही इसे एक तरीके से
- 2:35:29पैसा मिल जाता है। अब जानते हैं एक बुरी
- 2:35:31कंपनी के साथ क्या होता है। यह एक पेनी
- 2:35:33स्टॉक है। तो पहले एसेट टर्नओवर को देखिए।
- 2:35:36जहां HL ₹100 के एसेट पे ₹220 का माल बेच
- 2:35:40देता था। वहीं यह ₹100 के एसेट हैं तो
- 2:35:44केवल ₹7 का माल बेच पाता है। तो एसेट
- 2:35:47टर्नओवर भी बहुत बुरा है और कैश साइकिल
- 2:35:50देखिए इसे जो पैसे से इसने माल खरीदा उसका
- 2:35:53फिनिश प्रोडक्ट बनाने में
- 2:35:55डिस्ट्रीब्यूटर्स को देके फिर उनसा पैसा
- 2:35:57वसूल करने में लगभग साल भर लग जाता है।
- 2:36:00साल भर से भी ज्यादा लग जाता है। तो साल
- 2:36:03भर तक इस कंपनी का पैसा बाजार में फंसा
- 2:36:06रहता है। और आप में से जो लोग बिजनेस में
- 2:36:08हैं वह जानते हैं कि साल भर पैसा फंसे
- 2:36:11रहने का मतलब क्या है? वह बिजनेस तो चौपट
- 2:36:13होना ही है। तो हमेशा यह खास करके आपको
- 2:36:17बता देगा कि बिजनेस की हालत कितनी अच्छी
- 2:36:20है। क्या इसके कस्टमर से यह पैसा ले भी
- 2:36:22पाता है टाइम से या नहीं और अपने एसेट्स
- 2:36:24से यह सच में माल बना भी पाता है या नहीं।
- 2:36:27यह दो इंपॉर्टेंट क्राइटेरिया किसी भी
- 2:36:29बिजनेस को एनालाइज करते समय ध्यान रखिएगा।
- 2:36:32अगेन बैंक्स और फाइनेंसियल कंपनीज़ बिल्कुल
- 2:36:35अलग तरीके से काम करती हैं। उनके रेशियोज़
- 2:36:37हम अलग से डिस्कस करेंगे। लेकिन ज्यादातर
- 2:36:39कंपनियों में ये बहुत इंपॉर्टेंट रेशियोज़
- 2:36:42हैं। तो चलिए अब हम जानते हैं कि ये बोनस
- 2:36:44इशू, राइट इशू या स्प्लिट क्या होता है?
- 2:36:47ये इंपॉर्टेंट कॉर्पोरेट एक्शंस हैं जो
- 2:36:49आपको जान लेने चाहिए। सबसे पहले बात करते
- 2:36:51हैं स्प्लिट की कि ये स्प्लिट क्या होता
- 2:36:53है? अब जैसे TCS Tata कंसलटेंसी सर्विज ने
- 2:36:572004 में स्प्लिट किया था। जब ₹10 की फेस
- 2:37:00वैल्यू वाला शेयर ₹1 का हो गया था। अब जरा
- 2:37:03हम देखते हैं अभी फेस वैल्यू कितनी है इस
- 2:37:05कंपनी की ₹1 तो पहले ₹10 का फेस वैल्यू
- 2:37:08वाला एक शेयर था जिसे स्प्लिट करके ₹1 के
- 2:37:11फेस वैल्यू वाले 10 शेयर्स बना दिए गए। अब
- 2:37:14देखते हैं कि इससे फर्क क्या पड़ता है।
- 2:37:16जैसे मान लीजिए एक कंपनी ने डिसाइड किया
- 2:37:19कि वो एक अपने शेयर को दो पार्ट में
- 2:37:21स्प्लिट करना चाहता है। अब उस कंपनी के
- 2:37:24फेस वैल्यू है एक शेयर की ₹10। उसने उसे
- 2:37:26स्प्लिट करके पांच कर दिया। तो इससे फर्क
- 2:37:29क्या पड़ा? नंबर ऑफ शेयर्स डबल हो गए। फेस
- 2:37:32वैल्यू आधी हो गई। और अब नंबर ऑफ शेयर्स
- 2:37:35डबल हो गए। यानी जिसके पास एक शेयर था अगर
- 2:37:391:2 स्प्लिट होता है। अगर आपने किसी कंपनी
- 2:37:41के 100 शेयर लिए हुए हैं और 1:2 स्प्लिट
- 2:37:44हो रहा है तो अब आपके पास 200 शेयर हो
- 2:37:46जाएंगे। तो शेयर्स डबल हो गए। क्या इससे
- 2:37:48आपको खुश होना चाहिए? बिल्कुल भी नहीं।
- 2:37:51क्योंकि कंपनी का मुनाफा डबल नहीं हुआ।
- 2:37:54आपका शेयर ऊपर या नीचे तब जाएगा अगर कंपनी
- 2:37:57का मुनाफा बढ़ेगा। यहां तो क्या हुआ कि
- 2:37:59नंबर ऑफ शेयर्स बढ़ गए। मुनाफा उतना ही
- 2:38:01है। तो इमेजिन करिए कि आपकी कोई कंपनी है।
- 2:38:04उस कंपनी में आपको ₹50 चाहिए। तो आपने
- 2:38:08क्या किया? आपने ₹10 ₹1 के पांच शेयर्स
- 2:38:11इशू कर दिए पांच लोगों को। अब ₹10 ₹1 के
- 2:38:14पांच शेयर्स इशू हुए। फिर आपने डिसाइड
- 2:38:16किया कि चलो शेयर्स को स्प्लिट कर देते
- 2:38:17हैं। छोटे कर देते हैं शेयर्स को ताकि
- 2:38:19ट्रेडिंग में आसानी हो। तो आपने डिसाइड
- 2:38:21किया कि ये जो ₹1 ₹1 के पांच शेयर थे ये
- 2:38:24अब हम एक शेयर को दो टुकड़े कर देंगे।
- 2:38:27यानी अब ₹10 का जो एक शेयर है वो ₹-5 के
- 2:38:31दो शेयर्स में बदल गया। ध्यान से सुनिए।
- 2:38:33अगर पांच शेयर्स थे और ₹50 टोटल कंपनी की
- 2:38:37वैल्यू थी तो एक शेयर के पीछे आपको कंपनी
- 2:38:40की 20% ओनरशिप मिल रही थी। क्योंकि पांच
- 2:38:43ही शेयर्स हैं। तो पर शेयर ओनरशिप आपको
- 2:38:4520% मिल रही थी। अब शेयर्स बढ़ के 10 हो
- 2:38:48गए। तो पर शेयर आपको कंपनी में हिस्सेदारी
- 2:38:52अब 10 ही% मिल रही है। तो शेयर्स डबल हो
- 2:38:55गए लेकिन हिस्सेदारी आधी हो गई। इसीलिए
- 2:38:58बात बराबर है। कुछ भी फर्क नहीं पड़ा। तो
- 2:39:00फिर लोग स्प्लिट क्यों करते हैं? स्प्लिट
- 2:39:02किया जाता है ताकि नंबर ऑफ शेयर्स बढ़
- 2:39:04जाए। अब ये ₹50 वाले एग्जांपल में ही
- 2:39:06देखिए। मान लीजिए आपके पास एक शेयर है ₹10
- 2:39:09का और आपको ₹2ों की जरूरत है। आपके पास
- 2:39:11पैसे नहीं है। तो अगर यह ₹10 का एक शेयर
- 2:39:14ही है तो आपको वो पूरा-पूरा शेयर किसी को
- 2:39:17बेचना पड़ेगा और आपको ₹10 मिलेंगे जबकि
- 2:39:19आपको जरूरत ₹2 ही रुपयों की थी। तो अगर
- 2:39:22कंपनी ऐसा करे कि ₹10 के एक शेयर के बदले
- 2:39:25वो ₹1 के शेयर निकाले। तो ऐसे में अगर
- 2:39:27आपको ₹2 की जरूरत है तो आप दो शेयर्स बेच
- 2:39:30सकते हैं और आपके पास ₹2 आ जाएंगे और बाकी
- 2:39:33आठ शेयर आपके पास अभी भी रहे तो आपकी
- 2:39:35कंपनी में हिस्सेदारी भी बची रही। तो ये
- 2:39:37लिक्विडिटी या फ्लेक्सिबिलिटी इनक्रीस
- 2:39:39करता है इसका और कोई मतलब नहीं है। अब हम
- 2:39:42बात करते हैं कि बोनस क्या होता है? और
- 2:39:45चलिए देखते हैं क्या TCS ने कभी बोनस इशू
- 2:39:47किया है? जी हां, 2018 में, नौ में, छ में
- 2:39:50बोनस इशू हुआ। अब ये बोनस नाम सुनने में
- 2:39:53तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन सच में क्या
- 2:39:56ये बोनस है? चलिए इसे भी समझते हैं। ये एक
- 2:39:59कंपनी है जिसमें शेयर्स की फेस वैल्यू ₹10
- 2:40:01है और नंबर ऑफ शेयर्स हैं 100। उसने 1:1
- 2:40:05का बोनस इशू किया। यानी जिसके पास एक शेयर
- 2:40:07है उसको एक बोनस शेयर मिलेगा। तो अब नंबर
- 2:40:11ऑफ शेयर्स हो गए 200। तो अब क्या होगा? इस
- 2:40:15केस में भी बिल्कुल वही होगा जो पहले हुआ।
- 2:40:18यह सिर्फ नाम का बोनस है। इससे कुछ भी ऐसा
- 2:40:21नहीं होना कि अब आपके पास ज्यादा शेयर्स
- 2:40:23हो गए हैं तो आपको फायदा होगा। क्यों? फिर
- 2:40:26से उसी एग्जांपल से समझते हैं। मान लीजिए
- 2:40:28₹10 ₹1 के पांच शेयर्स हैं और कंपनी में
- 2:40:31टोटल इन्वेस्टमेंट ₹50 का है। अब आपने
- 2:40:34डिसाइड किया कि नहीं एक शेयर पे एक शेयर
- 2:40:37और हम बोनस देंगे। तो अब क्योंकि ये बोनस
- 2:40:40शेयर तो फ्री में मिल रहा है। इसके बदले
- 2:40:42कंपनी को कोई पैसा नहीं मिल रहा। तो कंपनी
- 2:40:44के पास पहले भी ₹50 थे। आज भी ₹50 ही रुपए
- 2:40:47हैं। लेकिन शेयर्स तो अब दुगने करने हैं।
- 2:40:50तो अगर ₹1 ₹1 के पांच शेयर थे उन्हीं को
- 2:40:52दुगना कर दिया जाए। ₹1 ₹1 के 10 शेयर तो
- 2:40:55अब ₹100 कहां से आएंगे? कंपनी के पास तो
- 2:40:5750 ही है। तो अपने आप जैसे ही बोनस इशू
- 2:41:01होगा जितने शेयर्स बढ़े जैसे इस केस में
- 2:41:04पांच शेयर के बदले 10 हो गए तो शेयर्स का
- 2:41:07दाम आधा हो जाएगा। एक शेयर का दाम आधा हो
- 2:41:10जाएगा। अब फिर से जिस तरह स्प्लिट में हुआ
- 2:41:12था। स्प्लिट में ये हुआ था कि फेस वैल्यू
- 2:41:15डिवाइड हो गई थी। फेस वैल्यू को तोड़ दिया
- 2:41:17गया था। बोनस भी लगभग वैसे ही है। बोनस
- 2:41:20में फर्क ये है कि इसमें फेस वैल्यू उतनी
- 2:41:23ही होती है। लेकिन पर शेयर के पीछे जो फंड
- 2:41:26रखा हुआ है। जैसे यहां नंबर ऑफ शेयर्स थे
- 2:41:30100 और टोटल शेयर होल्डर्स का फंड था
- 2:41:333000। यानी एक शेयर के पीछे ₹30 रखे हुए
- 2:41:37थे। अब यहां पे नंबर ऑफ शेयर्स हो गए 200।
- 2:41:40फंड अभी भी 3000 ही है। यानी एक शेयर के
- 2:41:44पीछे अब फंड हो गया ₹15। यहां पे था ₹30,
- 2:41:48यहां हो गया ₹15। यानी शेयर की जो बुक
- 2:41:51वैल्यू है, हमने डिस्कस किया है कि बुक
- 2:41:53वैल्यू क्या होती है? बुक वैल्यू मतलब एक
- 2:41:55शेयर के पीछे कंपनी के पास कितने एसेट्स
- 2:41:58या फंड रखे हुए हैं। तो जैसे ही बोनस इशू
- 2:42:01आएगा ये फेस वैल्यू तो उतनी की उतनी ही
- 2:42:03रहेगी। लेकिन ये बुक वैल्यू कम हो जाएगी।
- 2:42:06एक शेयर के पीछे जितने एसेट्स हैं वो
- 2:42:08जितना रेश्यो में बोनस आया उस रेश्यो में
- 2:42:11यह कम हो जाएगा। तो आपके एक शेयर की
- 2:42:13वैल्यू फिर से कम हो गई। तो इसमें भी कोई
- 2:42:16फर्क नहीं पड़ा। बोनस से भी खुश होने की
- 2:42:18बात बिल्कुल नहीं है। तो फिर बोनस इशू
- 2:42:21क्यों किया जाता है? अब देखिए मिनिमम आपको
- 2:42:24₹1 की फेस वैल्यू तो रखनी पड़ेगी। अब
- 2:42:26देखिए जिन कंपनियों की फेस वैल्यू ऑलरेडी
- 2:42:28₹1 है वो और कम तो नहीं कर सकती फेस
- 2:42:30वैल्यू। इसे ₹1 तो होना ही है। तो क्योंकि
- 2:42:32वो इसे और कम नहीं कर सकती तो वो इसे कम
- 2:42:35कर कर के बुक वैल्यू को हाफ कर दिया।
- 2:42:37शेयर्स डबल कर दिए। इसे कम करते जाते हैं
- 2:42:40और बोनस लाते जाते हैं ताकि अगेन
- 2:42:42लिक्विडिटी बढ़े लोगों को खरीदने में,
- 2:42:45निकलने में, पार्शियली बेचने में आसानी
- 2:42:47हो। अब देखिए एक एग्जांपल मैं आपको देता
- 2:42:50हूं एमआरएफ का। एमआरएफ के एक शेयर की आज
- 2:42:53दाम है 57,000 और कुछ समय पहले ये 73,000
- 2:42:56भी थी। तो हम में से कितने सारे ऐसे लोग
- 2:42:58हैं जो एमआरएफ का एक शेयर भी खरीद ही नहीं
- 2:43:01पाएंगे क्योंकि हमारे पास इतने पैसे ही
- 2:43:02नहीं है। तो एमआरf अगर कल को बोनस ले आए
- 2:43:06और बोले कि एक शेयर के पीछे 10 शेयर अब
- 2:43:09मिलेंगे बोनस तो इस शेयर का दाम गिर के
- 2:43:11₹500 हो जाएगा। तो हम में से कितने सारे
- 2:43:14लोग जो एमआरएफ में निवेश करना चाहते हैं
- 2:43:16बट इस महंगे प्राइस के कारण नहीं कर पा
- 2:43:18रहे हैं वो कर सकेंगे। या फिर वो बोले कि
- 2:43:21₹10 की फेस वैल्यू को तोड़ के अब हम ₹1 कर
- 2:43:24देते हैं तो भी इस शेयर का दाम 110 हो
- 2:43:26जाएगा। ये ₹500 का हो जाएगा। तो हम शेयर्स
- 2:43:29को अफोर्ड कर पाएंगे। इसमें ट्रेडिंग हाई
- 2:43:32वॉल्यूम में हो पाएगी। सिर्फ यही कारण है
- 2:43:34कि लोग ऐसा करते हैं। तो एमआरएफ आज एक
- 2:43:37शेयर के प्राइस के हिसाब से सबसे महंगा
- 2:43:40है। लेकिन वो इसलिए नहीं है कि एमआरएफ
- 2:43:42ओवरवैल्यूड है या फिर एमआरf इंडिया की
- 2:43:44बेस्ट कंपनी है। एमआरएफ इसीलिए सबसे महंगा
- 2:43:46दिखता है क्योंकि उसने कभी भी स्प्लिट या
- 2:43:50बोनस लाया नहीं। चलिए देखते हैं क्या
- 2:43:52एमआरएफ ने कभी स्प्लिट या बोनस नहीं लाया?
- 2:43:56कोई स्प्लिट नहीं, कोई बोनस नहीं। इस कारण
- 2:43:59इसका दाम इतना ज़्यादा है। तो, यह
- 2:44:01ओवरवैल्यूड है। ऐसा नहीं है। क्योंकि अगर
- 2:44:03आप इसे पीई वाइज़ देखें, पीबी वाइज़ देखें
- 2:44:06और इसके पीियर्स से भी कंपेयर करें, तो
- 2:44:08बाकी कंपनियों के मुकाबले ही इसके
- 2:44:10वैल्यू्यूएशन रेशियोज़ हैं। क्योंकि अगर हम
- 2:44:12कुछ बेसिक वैल्यू्यूएशन रेशियोज़ ही ले लें
- 2:44:14जैसे पीबी या पीई। तो बाला Indstries से
- 2:44:17पीईबी में सस्ता ही है। पीई भी कोई बहुत
- 2:44:19ज्यादा नहीं है। तो ऐसा नहीं है कि एमआरएफ
- 2:44:21बहुत महंगा शेयर है। लेकिन क्योंकि
- 2:44:23स्प्लिट या बोनस नहीं हुआ इसलिए महंगा
- 2:44:25दिखता है। और इसका मतलब ये भी नहीं है कि
- 2:44:28आप पीबी या पीई देख के टायर कंपनीज़ को ले
- 2:44:30लें आंख बंद करके। हम इंडस्ट्री वाइज
- 2:44:32वैल्यू्यूएशन आगे के चैप्टर्स में जरूर
- 2:44:34सीखेंगे। इसके अलावा राइट्स इशू जो थोड़ा
- 2:44:37और कॉम्प्लिकेटेड है उसे हम डिस्कस करेंगे
- 2:44:39अगले वीडियो में। और अभी मत जाइए। आज का
- 2:44:42आपका होमवर्क बाकी है। अब से हम करेंगे
- 2:44:44होमवर्क भी। तो आपको आज करना है कि marco,
- 2:44:48godderज कंस्यूमर और Hindustan Unilever।
- 2:44:51Merco, God कंस्यूumer, Hindstan Unilever
- 2:44:54ये तीन कंपनियों की इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन
- 2:44:57जो आपको किसी भी कंपनी के पेज में
- 2:45:00डॉक्यूमेंट्स पे क्लिक करते ही यहां इस
- 2:45:03सेक्शन में मिल जाएगी। तो आपको इन तीनों
- 2:45:05कंपनी की प्रेजेंटेशन देखनी है और आपको
- 2:45:07देखना है कि इन कंपनियों के पास कौन से
- 2:45:09ब्रांड्स हैं। इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन एक
- 2:45:11वो ऐसी चीज है जिससे आपको कंपनी के बारे
- 2:45:14में काफी सारी जरूरी इनफेशन जैसे कंपनी के
- 2:45:16क्या प्लांस हैं? पास्ट ट्रैक रिकॉर्ड
- 2:45:18कैसा रहा? साल दर साल या क्वार्टर दर
- 2:45:20क्वार्टर कैसे कंपनी का परफॉर्मेंस अच्छा
- 2:45:22हुआ या बुरा हुआ? उसके क्या रीज़ंस हैं?
- 2:45:25किन देशों में कंपनी एक्सपैंड कर रही है।
- 2:45:27ऐसी सारी जरूरी चीजें वो आपको इन्वेस्टर
- 2:45:29प्रेजेंटेशन में मिल जाती है। एनुअल
- 2:45:31रिपोर्ट में भी कई बार ये चीजें मिलती
- 2:45:32हैं। लेकिन एनुअल रिपोर्ट 200 पेजेस की
- 2:45:35होती है जिसमें बहुत सारे रेगुलेटरी
- 2:45:36सेक्शंस होते हैं। बहुत सारे एक्सेस
- 2:45:38सेक्शंस होते हैं। जिसको आपको पढ़ के शायद
- 2:45:40मजा ना आए। तो एज अ बिगिनर एनुअल रिपोर्ट
- 2:45:43नहीं तो कम से कम इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन
- 2:45:45पढ़ने की आदत डाल लीजिए। ये इजी टू रीड
- 2:45:47होती है। शॉर्ट होती है और क्रिस्प में
- 2:45:49आपको सारी इनफेशन मिल जाएगी। तो इन तीन
- 2:45:52कंपनियों की आपको इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन
- 2:45:53पढ़नी है। उसके बाद इस वीडियो में कमेंट
- 2:45:56करके मुझे बताइएगा कि इन तीनों में से
- 2:45:58आपको सबसे अच्छे ब्रांड्स किस कंपनी के
- 2:46:01लगे और आपको क्या लगा कि बेस्ड ऑन द
- 2:46:03ब्रांड्स जो इन कंपनियों के पास हैं कौन
- 2:46:05सी कंपनी का फ्यूचर सबसे अच्छा होने वाला
- 2:46:07है। कुछ साल पहले जब मैंने इन्वेस्टिंग
- 2:46:09शुरू की थी ना तो जिन भी कंपनीज़ को
- 2:46:11ब्रांड्स को मैं जानता था उनमें से
- 2:46:14ज्यादातर लिस्टेड होती ही नहीं थी। जैसे
- 2:46:16मुझे याद है मैं चाहता था कि Parle
- 2:46:17लिस्टेड हो, bिसleरी लिस्टेड हो, h
- 2:46:20लिस्टेड हो, Amul लिस्टेड हो, Flipkart
- 2:46:22लिस्टेड हो। ये सारी की सारी कंपनियां
- 2:46:25लिस्टेड होती ही नहीं थी। पिछले एकद साल
- 2:46:27में ना ये चीजें बदल रही हैं। आजकल
- 2:46:30स्टार्टअप्स हैं जो स्टॉक मार्केट में
- 2:46:31लिस्टेड या तो हो गए हैं या होने का सोच
- 2:46:33रहे हैं। इंटरनेट कंपनीज़ काफी सारी लिस्ट
- 2:46:36होना चाहती हैं। तो आजकल ये जो यंग कंपनीज़
- 2:46:39हैं जिनको हम और आप जानते हैं जिनके
- 2:46:41प्रोडक्ट्स यूज़ करते हैं वो लिस्ट होने
- 2:46:43वाली है। Barbeक्यू nेशन अभी लिस्ट हुआ।
- 2:46:46Indamar अभी लिस्ट हुआ। आगे जाके Zomato
- 2:46:49PC Bazaar, NYकाA और ऐसे कई सारी कंपनियां
- 2:46:52Paytm हो गया। ये सब लिस्ट होने वाली है।
- 2:46:54तो ज्यादातर वो ब्रांड्स एप्स जिनको हम
- 2:46:57जानते हैं, यूज करते हैं वो अब लिस्ट होने
- 2:47:00वाली है। तो ये बहुत एक्साइटिंग है। मेरे
- 2:47:02लिए भी बहुत एक्साइटिंग है। मुझे याद है
- 2:47:04जब सीडीएसएल आया था आईपीओ मैं बहुत
- 2:47:06एक्साइट हुआ था। बीएसई जब आया था तब वो
- 2:47:08बहुत एक्साइटिंग था। लेकिन अब बहुत
- 2:47:10एक्साइटिंग आईपीओस आ रहे हैं। तो ये तो
- 2:47:12अच्छी बात है। बुरी बात क्या है? ये जो
- 2:47:15डिजिटल कंपनियां हैं, इंटरनेट कंपनियां है
- 2:47:17ना इनका फंडामेंटल एनालिसिस करने का तरीका
- 2:47:20पूरा अलग है। जिस तरीके से हम आज तक
- 2:47:23Reliance को, HDFC को, Asian Paints को
- 2:47:26एनालाइज करते थे। ये न्यू एज कंपनीज़ को इस
- 2:47:29तरीके से एनालाइज नहीं कर सकते। ये
- 2:47:31बिनेसेस अलग हैं। और इनमें क्या देखना है,
- 2:47:34कैसे देखना है कि ये अच्छी है या बुरी है?
- 2:47:36इसका तरीका पूरा-पूरा अलग है। और इंडिया
- 2:47:39में ना किताबों में, वीडियोस में इसके
- 2:47:41बारे में ज्यादा कुछ मिलेगा नहीं। क्योंकि
- 2:47:43इस तरह के बिज़नेसेस तो लिस्ट होते ही नहीं
- 2:47:45थे। वह तो होना ही अब शुरू हुए हैं। तो
- 2:47:47इसलिए ज्यादा आपको गाइडेंस भी नहीं मिलेगा
- 2:47:49कि इन कंपनीज़ को एनालाइज़ कैसे किया जाता
- 2:47:51है। तो आज इस वीडियो में हम सीखने वाले
- 2:47:55हैं कि न्यू एज डिजिटल और इंटरनेट फर्स्ट
- 2:47:57कंपनीज़ को एनालाइज कैसे किया जाए? उनमें
- 2:48:00क्या देखना है, क्या नहीं देखना है? ताकि
- 2:48:02आप आने वाले बहुत सारे अच्छे आईपीओस जो
- 2:48:06ऑलरेडी लिस्टेड कंपनीज़ हैं उनको अच्छे से
- 2:48:09देख सकें और इन्हीं कंपनीज़ का फ्यूचर है
- 2:48:12तो आप एज एन इन्वेस्टर फ्यूचर रेडी हो
- 2:48:14सकें। तो चलिए अब जानते हैं कि इस वीडियो
- 2:48:17को बनाने की जरूरत क्यों पड़ी इसलिए कि
- 2:48:20ट्रेडिशनल बिनेसेस और डिजिटल फर्स्ट
- 2:48:22बिनेसेस में ना बहुत बड़ा फर्क है। एक
- 2:48:26फंडामेंटली बहुत बड़ा फर्क है। वो फर्क
- 2:48:29क्या है? अब समझते हैं ज्यादातर बिनेसेस
- 2:48:31की वैल्यू किस बात पे होती थी कि वो कितना
- 2:48:35सामान बेच रहे हैं। वो कितनी सेल्स कर रहे
- 2:48:38हैं या उनके पास कितनी प्लांट एंड मशीनरी
- 2:48:41है। जैसे अगर आप कोई मेटल माइनिंग या
- 2:48:44रियलस्टेट कंपनी को वैल्यू करने जाएंगे ना
- 2:48:46तो हमेशा ये देखा जाता है कि उनके पास
- 2:48:48कितना लैंड है, कितनी सारी माइंस है या
- 2:48:51कितना बड़ा स्टील प्लांट है, कितना बड़ा
- 2:48:53सीमेंट प्लांट है। वो हर साल कितना सीमेंट
- 2:48:55या स्टील बना सकता है। यानी कि ये जो
- 2:48:58ट्रेडिशनल बिजनेसेस है ना इनकी जो वैल्यू
- 2:49:01है वो अकाउंटिंग स्टेटमेंट्स में अच्छे से
- 2:49:04कैप्चर होती थी। एसेट्स में आ गया कि इतने
- 2:49:07की प्लांट मशीनरी है, लायबिलिटी में आ गया
- 2:49:09कि इतने का लोन है। तो जो हमारी अकाउंटिंग
- 2:49:12है ना प्रॉफिट एंड लॉस, बैलेंस शीट, कैश
- 2:49:14फ्लो वो सब बनी है इस तरह के बिनेसेस को
- 2:49:18वैल्यू करने के लिए। क्योंकि इसी तरह के
- 2:49:20बिनेसेस होते थे तो जो उसकी अकाउंटिंग है
- 2:49:23वो भी उसी हिसाब से डिजाइन हुई कि
- 2:49:25ट्रेडिंग बिजनेस, मैन्युफैक्चरिंग बिनेस
- 2:49:28इस तरह के बिनेसेस के लिए। लेकिन आजकल के
- 2:49:31जो बिनेसेस हैं Amazon ले लीजिए, Paytm ले
- 2:49:34लीजिए, Uber, Ola ले लीजिए। Uber में
- 2:49:37इंडिया के कुछ चंद लोग एकद ऑफिसेस में
- 2:49:40बैठते हैं और वहां से देश के सारे बड़े
- 2:49:43शहरों में हर शहर में हजारों टैक्सीज चल
- 2:49:46रही हैं। Uber के खुद के एंप्लाइजस कितने
- 2:49:48होंगे? 100 भी नहीं होंगे और कुछ दो चार
- 2:49:51ऑफिसिसेस होंगे। यानी Uber को अगर मैं इस
- 2:49:54हिसाब से वैल्यू करने जाऊं कि Uber के पास
- 2:49:57कितने ऑफिसिसेस हैं। उनका स्टाफ का साइज
- 2:50:00कितना बड़ा है। वो कितना रुपए प्रॉफिट
- 2:50:02कमाते हैं? तो मैं Uber को कभी ठीक से
- 2:50:04वैल्यू ही नहीं कर पाऊंगा। क्योंकि Uber
- 2:50:06तो अभी ज्यादा प्रॉफिट भी नहीं कमाती
- 2:50:07बल्कि लॉस में ही होगी। और यही बात सच है
- 2:50:09Zomato के लिए, Paytm के लिए, Amazon के
- 2:50:12लिए, Flipkart के लिए, बहुत सारी डिजिटल
- 2:50:15फर्स्ट कंपनीज़ के लिए। यानी Uber वाले
- 2:50:18एग्जांपल से हम क्या समझे? हम इनको
- 2:50:20प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट में कितना
- 2:50:22प्रॉफिट हो रहा है उससे जज नहीं कर सकते।
- 2:50:24क्योंकि ज्यादातर ये कंपनीज़ तो प्रॉफिट
- 2:50:25कमा ही नहीं रही। अभी तो लॉस वाले स्टेज
- 2:50:27में है। इनके पास कितनी प्लांट मशीनरी है
- 2:50:30इससे भी जज नहीं कर सकती क्योंकि वो तो
- 2:50:32इनके पास ज्यादा है ही नहीं। कितने
- 2:50:34एंप्लाइज हैं, कितने लोगों का वर्क फोर्स
- 2:50:36है उससे भी नहीं कर सकते क्योंकि ज्यादा
- 2:50:38लोगों को ये हायर करते ही नहीं। तो जितने
- 2:50:40भी ट्रेडिशनल पैराटर्स होते थे ना इन
- 2:50:42बिनेसेस को वैल्यू करने के लिए वो वैलिड
- 2:50:45है ही नहीं नई कंपनीज़ के लिए। तो ऐसे में
- 2:50:48तरीका भी नया होना चाहिए। अगर हम उसी
- 2:50:51पुराने तरीके से बैलेंस शीट जीरो, डेप्ट
- 2:50:53हो, एसेट्स इतने हो, प्रॉफिट एंड लॉस में
- 2:50:5610% सेल्स ग्रोथ हो, 15% प्रॉफिट ग्रोथ
- 2:50:59हो, आरओई इतना हो, आरओसी इतना हो। ये सब
- 2:51:01कुछ भी एप्लीकेबल नहीं है इन नई कंपनीज़
- 2:51:04को। इनफैक्ट प्रमोटर शेयर होल्डिंग की बात
- 2:51:07कर लेते हैं। हम चाहते हैं कि प्रमोटर
- 2:51:09शेयर होल्डिंग ज्यादा से ज्यादा हो। लेकिन
- 2:51:11ये जो स्टार्टअप बिनेसेस है ना ये कई
- 2:51:13स्टेज पे फंडिंग रेज करते हुए आते हैं।
- 2:51:15सीड राउंड हो गया, एंजल फंड हो गया, वेंचर
- 2:51:18कैपिटल के पास चले गए। सीरीज ए, सीरीज भी
- 2:51:21कई लेवल्स पे ये लोग फंडिंग रेज करते हैं।
- 2:51:23अब अगर फंडिंग रेज करते हैं तो इक्विटी
- 2:51:26देनी पड़ती है। इस कारण इन स्टार्टअप्स
- 2:51:29में ना प्रमोटर का शेयर होल्डिंग तो बचता
- 2:51:31ही नहीं है। 10% 20% बहुत हो गया तो 40%
- 2:51:34उससे ऊपर तो होता ही नहीं है। 10 20% ही
- 2:51:37बचता है। अब जितने इंडिया के बड़े
- 2:51:38स्टार्टअप्स हैं उसमें उठा के देख लीजिए
- 2:51:41कि फाउंडर का स्टेक कितना है। ज्यादा नहीं
- 2:51:42है। तो ये मैट्रिक भी काम नहीं करता। तो
- 2:51:45हमको अब नए तरीकों की जरूरत है। तो अब
- 2:51:48डिस्कस करते हैं वो नए तरीके।
- 2:51:53आपको पता है Amazon ना जब बनी तो शुरू के
- 2:51:5620 21 साल उसने किसी भी साल प्रॉफिट कमाया
- 2:51:59ही नहीं। 20 सालों तक वो कंपनी लॉस में
- 2:52:02थी। अब कोई ऐसी कंपनी अगर पहले होती ना कि
- 2:52:0620 साल तक पैसा कमाया ही नहीं तो वो
- 2:52:08कौड़ियों के भाव में बिकती। लेकिन Amazon
- 2:52:10का हर साल वैल्यू्यूएशन तेजी से बढ़ता जा
- 2:52:13रहा था। क्यों? क्योंकि वह एक इंटरनेट
- 2:52:16बिजनेस है और मार्केट यह समझता है कि
- 2:52:19इंटरनेट बिजनेस अलग तरीके का है। वह भले
- 2:52:22ही पैसा ना कमा रहा हो लेकिन वो वैल्यू
- 2:52:24कमा रहा है। वो अपनी कंपनी की वैल्यू बढ़ा
- 2:52:27रहा है। अब इसको थोड़ा डिस्कस करते हैं।
- 2:52:29देखिए पहले जो ट्रेडिशनल बिज़नेसेस होते थे
- 2:52:32ना वो कैसे होते थे कि आपने अपनी कोई शॉप
- 2:52:34खोल ली। मान लीजिए कोई मिठाई की दुकान खोल
- 2:52:37ली और पहले दिन से अगर आपकी मिठाई बिक रही
- 2:52:39है। आपकी लागत है ₹400 किलो। आप बेच रहे
- 2:52:42हो ₹600 ₹700 किलो में और आप ₹200 किलो
- 2:52:45कमा रहे हो तो आप अपने शहर में दो चार
- 2:52:48सालों में एक अच्छी इस्टैब्लिश्ड मिठाई
- 2:52:50दुकान बन जाते अगर आपका टेस्ट अच्छा है
- 2:52:52लोगों को प्रोडक्ट क्वालिटी पसंद आ रही है
- 2:52:54तो और आप हमेशा कंपटीशन से बचे रहते
- 2:52:57क्योंकि मार्केट जो है ना वो
- 2:52:59ज्योग्राफिकली डिवाइडेड था। मैं छत्तीसगढ़
- 2:53:02के मार्केट में स्ट्रांग हूं। कोई और
- 2:53:03महाराष्ट्र के मार्केट में स्ट्रांग है।
- 2:53:05कोई यूपी के मार्केट में स्ट्रांग है।
- 2:53:07मार्केट डिवाइडेड था ज्योग्राफी के कारण।
- 2:53:10क्योंकि आप अगर अपने शहर में मिठाई दुकान
- 2:53:12खोले हुए हो तो आपके लिए आसान नहीं था कि
- 2:53:15आप छत्तीसगढ़ से बैठ के दिल्ली में सामान
- 2:53:17बेच सको, महाराष्ट्र में सामान बेच सको तो
- 2:53:19आप लिमिटेड थे। आपके जैसे हर कोई लिमिटेड
- 2:53:22था क्योंकि सामान इधर से उधर भेजना आसान
- 2:53:26नहीं था। इंटरनेट के कारण ना अब ये कोई
- 2:53:29रिस्ट्रिक्शन नहीं है। आप इन वीडियोस को
- 2:53:31देख लीजिए। अब मेरे चैनल को इंडिया में
- 2:53:33जिसको भी देखना है वो देख सकता है। जिसको
- 2:53:35भी हिंदी समझ में आती है, फाइनेंस में
- 2:53:37इंटरेस्ट है वो देख सकता है। ऐसा नहीं है
- 2:53:39कि मेरे को राजस्थान के लोगों को दिखाने
- 2:53:41के लिए एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ रही है।
- 2:53:42यूपी वालों को दिखाने के लिए कुछ और करना
- 2:53:44पड़ रहा है। देश भर का मार्केट मेरे लिए
- 2:53:47अवेलेबल है। तो उस कारण जैसे ही डिजिटल
- 2:53:50बिजनेस में कोई बिजनेसमैन उतरता है तो
- 2:53:53उसका कंपटीशन पूरे देश की डिजिटल कंपनियों
- 2:53:56से होता है और वो एक साथ पूरे देश को सर्व
- 2:53:59कर सकता है। अगर आप कोई ऑफलाइन बिजनेस कर
- 2:54:02रहे हैं तो आपका कंपटीशन अपने शहर के
- 2:54:04लोगों से है जो वह बिजनेस कर रहे हैं।
- 2:54:06लेकिन अगर आप ऑनलाइन बिजनेस कर रहे हैं तो
- 2:54:08पूरा देश पूरी दुनिया में आपके जैसा
- 2:54:11बिजनेस अगर कोई और कर रहा है तो वो आपका
- 2:54:13कॉम्पिटिट है। तो आपको पूरे देश के लोगों
- 2:54:16से कम्पीट करना है। अब अगर ऐसा है तो आपको
- 2:54:20कई सालों तक सामान को सस्ता बेचना पड़ेगा।
- 2:54:24लोगों को उस प्रोडक्ट की आदत डलवानी
- 2:54:25पड़ेगी। जिस कारण टाइम लगता है पैसा कमाने
- 2:54:29में। और यह वेंचर कैपिटल वाले लोग समझते
- 2:54:32हैं। तो वह यह नहीं चाहते कि तुरंत आप
- 2:54:34पैसा कमाने लगो। वो सिर्फ एक चीज चाहते
- 2:54:36हैं मार्केट कैप्चर करो। कॉम्पिटिटर्स को
- 2:54:39खत्म करो। तो आपने Jio को देखा बहुत सस्ते
- 2:54:42में फोन कॉल्स ले आया तो 8-10 टेलीकॉम
- 2:54:45कंपनियां बंद हो गई। Zomato और Sविg के
- 2:54:48कारण फूड पांडा बंद हो गया। Uber ईड्स बंद
- 2:54:50हो गया। तो सबसे ज्यादा इनका फोकस ये रहता
- 2:54:53है कि पूरा देश हमारा मार्केट है। तो पूरे
- 2:54:56देश से कंपटीशन को हटाना है। वो कैसे
- 2:54:59हटेगा? जब आप चीज तो अच्छी दोगे ही और
- 2:55:01बहुत सस्ती भी दोगे। अब बहुत सस्ती देने
- 2:55:04के लिए आपको पैसा चाहिए क्योंकि आप तो
- 2:55:07नुकसान में बेचोगे। अगर आप प्रॉफिट में
- 2:55:09बेचोगे कोई चीज ₹10 की चीज 12 में बेचोगे
- 2:55:12तो बहुत सारे और लोग आ जाएंगे आपसे कमपीट
- 2:55:14करने में। आप तो तभी टिक पाओगे जब 10 की
- 2:55:18चीज आप आठ में बेचोगे। तब 100 और लोगों की
- 2:55:20हिम्मत नहीं होगी कि नहीं बाबा 10 की चीज
- 2:55:23मैं कैसे आठ में बेचूंगा। मेरे को नहीं
- 2:55:24करना यह धंधा। तो आपको 10 की चीज आठ में
- 2:55:27ही बेचनी है ऑनलाइन। उसके लिए आपको पैसा
- 2:55:30जलाना है। तो पैसा जलाने के लिए आपको पैसा
- 2:55:33चाहिए। उसके लिए आपको वेंचर कैपिटल फंड्स
- 2:55:37के पास जाना है। जो आपको पैसा देंगे लेकिन
- 2:55:39बदले में आपको इक्विटी देनी है। अब आप
- 2:55:42क्योंकि लागत से कम में बेच रहे हो तो लॉस
- 2:55:44में बेचोगे। वेंचर कैपिटल को अगर आप स्टेक
- 2:55:47दे रहे हो तो आपका स्टेक कम होगा। तो इस
- 2:55:49कारण ना जो सारे ट्रेडिशनल पैराटर्स हैं
- 2:55:52वो काम नहीं करते। और एक और चीज ऑनलाइन
- 2:55:56में ना हर कैटेगरी में दो प्लेयर या
- 2:55:59ज्यादा से ज्यादा तीन प्लेयर के लिए जगह
- 2:56:01होती है। ऑनलाइन में बहुत सारे प्लेयर्स
- 2:56:03को एक्जिस्ट नहीं कर पाते। ऑफलाइन में एक
- 2:56:05साथ शहर में 20 मिठाई दुकान, 20 कपड़ों की
- 2:56:08दुकान चलेगी। लेकिन ऑनलाइन में mntra ही
- 2:56:11चलेगा और साथ में एक दो कोई और चलेंगे।
- 2:56:13ऑनलाइन में 20 कपड़ों की वेबसाइट एक साथ
- 2:56:16प्रॉफिटेबली नहीं चल पाएगी। क्योंकि हर
- 2:56:18कोई एक दूसरे से कमट कर रहा है। Zomato और
- 2:56:20swiggi ही चलेंगे। तीसरा नहीं चल पाएगा।
- 2:56:23Ola और Uber ही चलेंगे। तीसरा नहीं चल
- 2:56:25पाएगा। तो ऑनलाइन में दो या ज्यादा से
- 2:56:28ज्यादा तीन प्लेयर के लिए जगह होती है। तो
- 2:56:30इसलिए भी ये वेंचर कैपिटलिस्ट खूब सारा
- 2:56:32पैसा एक कंपनी के पीछे लगाने को रेडी रहते
- 2:56:35हैं कि उनको पता है कि अगर हम आखिरी दो
- 2:56:38में बचे ना तो पूरे देश पे हम राज करेंगे
- 2:56:40इस बिनेस सेगमेंट पे। तो चलिए अब ना मैं
- 2:56:43आपको तीन इंपॉर्टेंट तरीके बताने वाला हूं
- 2:56:45इन कंपनीज़ को एनालाइज करने के। पहला
- 2:56:48फोकसिंग ऑन द राइट मैट्रिक। सबसे पहले तो
- 2:56:51ना आपको इनके मैनेजमेंट की कमेंट्री
- 2:56:54इन्वेस्टर प्रेजेंटेशंस एनुअल रिपोर्ट्स
- 2:56:56अगर ये लिस्टेड हैं तो लिस्ट होने वाली है
- 2:56:59तो इनका जो प्रोस्पेक्टस फाइल होता है
- 2:57:00इनके डॉक्यूमेंट्स को पढ़ना है और उसमें
- 2:57:03ना एक खास चीज देखनी है कि मैनेजमेंट की
- 2:57:06प्रेजेंटेशन या मैनेजमेंट का जो लेटर है,
- 2:57:08आर्टिकल है उस पे ये कंपनी को किस चीज पे
- 2:57:12फोकस कराना चाहते हैं। एक एग्जांपल देता
- 2:57:14हूं Zomato। अब Zomato के फाउंडर्स तीन
- 2:57:17चीजों पर फोकस कर सकते हैं। एक कि ज्यादा
- 2:57:20से ज्यादा ऑर्डर्स हो। इसका मतलब है कि
- 2:57:23ज्यादा यूज़र्स ऑनबोर्ड करें या एक यूजर को
- 2:57:26ज्यादा ऑर्डर करवाएं। तो एक हो सकता है कि
- 2:57:29ज्यादा ऑर्डर्स पे फोकस हो। दूसरा हो सकता
- 2:57:32है कि ज्यादा रेवेन्यू पे फोकस हो। पर
- 2:57:35ऑर्डर मैं ज्यादा कमाऊं। तीसरा हो सकता है
- 2:57:38कि ज्यादा रेस्टोरेंट्स को मैं पार्टनर
- 2:57:41बनाऊं और ज्यादा रेस्टोरेंट्स को। तो ये
- 2:57:43तीन फोकस एरिया हो सकते हैं। अब इसमें
- 2:57:46मुझे सबसे अच्छा फोकस एरिया क्या लगता है
- 2:57:48कि आप ज्यादा से ज्यादा ऑर्डर्स को बढ़ाने
- 2:57:51पर फोकस करो। अगर मान लो उनका फोकस हुआ कि
- 2:57:54ज्यादा रेस्टोरेंट्स ऐड करना है। वो मुझे
- 2:57:57ज्यादा यूज़फुल नहीं लगेगा। क्यों?
- 2:57:59क्योंकि रेस्टोरेंट्स तभी आपके पास
- 2:58:01ऑनबोर्डेड रहेंगे। आप उनको ऑनबोर्ड कर तो
- 2:58:03दोगे लेकिन वह ऑनबोर्डेड रहेंगे तब अगर
- 2:58:06उनको बार-बार बहुत सारे ऑर्डर्स Zomato से
- 2:58:09मिल रहे हैं। यानी आपको फोकस ऑर्डर्स पे
- 2:58:11करना है। अगर Zomato इस चीज पे फोकस करे
- 2:58:14कि मैं एक यूजर से ज्यादा से ज्यादा कमाऊं
- 2:58:17तो अगर वो यूजर के वॉलेट को हर्ट होने
- 2:58:20लगेगा तो या तो वो Zomato यूज़ करने से
- 2:58:22कतराएगा या वो SGI पे शिफ्ट हो जाएगा अगर
- 2:58:25वो ज्यादा सस्ता है तो। तो मुझे यूजर को
- 2:58:27यह फील कराना है कि ज्यादा से ज्यादा बार
- 2:58:29आओ और यहां हर चीज बहुत सस्ते में मिलती
- 2:58:32है। आपके बजट को हर्ट नहीं होगा। तो आपको
- 2:58:34ऐसे सोचना है कि क्या ये कंपनी सही जगह पे
- 2:58:37फोकस कर रही है या नहीं? क्या ये बहुत
- 2:58:39जल्दी प्रॉफिट कमाने का तो नहीं सोच रही।
- 2:58:41क्या ये बहुत जल्दी यूज़र्स से ज्यादा से
- 2:58:43ज्यादा रेवेन्यू लेने का तो नहीं सोच रही
- 2:58:45या कुछ गलत ही चीज की तरफ तो नहीं जा रही
- 2:58:48या कोई नया विंग तो चालू नहीं कर रही।
- 2:58:50जैसे यह लॉकडाउन के समय sविggi zomato लकर
- 2:58:53डिलीवरी ग्रोसरी डिलीवरी और ये सब की तरफ
- 2:58:56आने लगे थे जो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं
- 2:58:58लगा था। तो आपको यह देखना है कि फोकस सही
- 2:59:00जगह हो और उसका जो मैट्रिक है ना वो भी
- 2:59:03सही हो। सेकंड जैसा कि हम जानते हैं कि
- 2:59:05ज्यादातर स्टार्टअप्स अभी यूजर एक्विजिशन
- 2:59:08स्टेज पे हैं। उनको ज्यादा से ज्यादा
- 2:59:10यूज़र्स को अपने ऐप या प्रोडक्ट पे लाना
- 2:59:12है। यानी कि हमको ये देखना है कि पर यूजर
- 2:59:16को लाने की उनकी कॉस्ट कितनी है? जिसको हम
- 2:59:19कहते हैं यूजर एक्विजिशन कॉस्ट। मैं आपको
- 2:59:21एक एग्जांपल देता हूं। USTox वर्सेस ज़ीरो
- 2:59:24धाका। ये सिर्फ एग्जांपल है। कौन सही कर
- 2:59:26रहा है, कौन गलत कर रहा है उस पे मैं जाना
- 2:59:28नहीं चाहता। लेकिन अगर आप कई बार अपstox
- 2:59:31को देखेंगे तो उसमें अकाउंट ओपनिंग फी
- 2:59:33नहीं होती। इसके अलावा कई बार वो आपको कुछ
- 2:59:36बोनस देता है अकाउंट ओपनिंग पे। तो इससे
- 2:59:39क्लियर कट समझ में आता है कि अपstox की
- 2:59:42यूजर एक्विजिशन कॉस्ट ज्यादा है क्योंकि
- 2:59:44उसको अकाउंट ओपनिंग पे कुछ नहीं मिल रहा
- 2:59:46और कई बार इनफैक्ट वो आपको कोई रिवॉर्ड दे
- 2:59:49रहा है अकाउंट ओपनिंग पे तो उसकी यूजर
- 2:59:51एक्विजिशन कॉस्ट ज्यादा है एज अ कस्टमर
- 2:59:54मुझे पसंद आएगा एज एन इन्वेस्टर शायद मुझे
- 2:59:57थोड़ी प्रॉब्लम हो। तीसरा आपको सोचना है
- 2:59:59रिप्लेसमेंट कॉस्ट के हिसाब से कि अगर
- 3:00:01आपको दिख रहा है आजकल यह न्यूज़ में बहुत
- 3:00:03आता है कि इस स्टार्टअप की कॉस्ट इतनी यह
- 3:00:06स्टार्टअप यूनिकॉर्न हो गया 7500 करोड़ का
- 3:00:08स्टार्टअप है ये वो तो थोड़ा ना बस शांति
- 3:00:11से बैठिए और खुद सोचिए कि अगर आपके पास
- 3:00:13₹7500 करोड़ हो तो क्या आप वैसा ऐप बना
- 3:00:18सकते हैं और उससे ज्यादा उसको पॉपुलर कर
- 3:00:20सकते हैं उसकी मार्केटिंग करके यह अंदाजा
- 3:00:22ना हमको खुद मेंटली ही लग जाता है तो ऐसे
- 3:00:25सोच के देखिए कि अगर किसी स्टार्टअप की
- 3:00:27वैल्यू वैल्यू है 300 करोड़ कोई लिस्ट या
- 3:00:30फिर कोई लिस्ट होने वाली कंपनी भी हो सकती
- 3:00:32है वो उसकी वैल्यू है 300 करोड़ तो ऐसे
- 3:00:34सोचिए कि अगर मेरे पास 300 करोड़ हो तो
- 3:00:36क्या मैं इससे बड़ी कंपनी इससे बेटर कंपनी
- 3:00:39इसी की फील्ड में बना सकता हूं अगर हां तो
- 3:00:41वो कंपनी ओवरवैल्यूड है उसको मत लीजिए तो
- 3:00:44ये तीन तरीके हैं। रिप्लेसमेंट कॉस्ट
- 3:00:46देखिए, यूजर एक्विजिशन कॉस्ट देखिए कि
- 3:00:48किसकी कम है। Zomato की कम है या sविg की
- 3:00:51कम है। और यह देखिए कि वह सही मैट्रिक पे
- 3:00:54फोकस कर रहे हैं कि नहीं। ये सब आप कैसे
- 3:00:56देखेंगे? अगर वो कंपनी ऑलरेडी लिस्टेड है
- 3:00:58तो टकर पे डॉक्यूमेंट सेक्शन पे आपको
- 3:01:01क्वार्टरली रिपोर्ट्स, कॉन कॉल्स, एनुअल
- 3:01:04रिपोर्ट, थर्ड पार्टी रिसर्च रिपोर्ट किसी
- 3:01:06ब्रोकर ने भी उस पे रिसर्च की है तो वो
- 3:01:08क्रेडिट रेटिंग रिपोर्ट्स ये सब कुछ आपको
- 3:01:11टकर पे फ्री ऑफ कॉस्ट मिल जाएगा। तो जरूर
- 3:01:14जी भर के रिसर्च करिए। तो आज हम एक जरूरी
- 3:01:17इवैल्यूएशन रेशो डिस्कस करने वाले हैं जो
- 3:01:19सबसे सिंपल वैल्यू्यूएशन रेशोज़ में से भी
- 3:01:22एक है। तो आपको ये ध्यान रखना है कि ये
- 3:01:24थोड़ा ओवर सिंपलीफाइड है। तो इस पे
- 3:01:26ब्लाइंडली ट्रस्ट नहीं करना है। लेकिन ये
- 3:01:28वन ऑफ द मेथड्स हैं। ध्यान रखिए
- 3:01:30वैल्यू्यूएशन कभी भी सिर्फ इकलौते तरीके
- 3:01:32से आंख बंद करके नहीं होता। वैल्यू्यूएशन
- 3:01:35दो तीन चार अलग-अलग तरीकों से हो सकता है
- 3:01:37और सबका मिला के आपको एक रिजल्ट निकालना
- 3:01:41है और देखना है कि आप वो शेयर ले सकते हैं
- 3:01:42कि नहीं। तो पहला रेशो जो आज हम फिनोलॉजी
- 3:01:46टिकर में देखेंगे वैल्यू्यूएशन वाला वो है
- 3:01:48पेग रेशो। तो चलिए जानते हैं कि यह पेग
- 3:01:51रेशियो क्या है और यह कैसे आपको किसी शेयर
- 3:01:53को पिक करने में या वैल्यू करने में मदद
- 3:01:56कर सकता है। तो देखिए मैंने पहले आपको पीई
- 3:01:58रेशियो के बारे में डिस्कस किया है। पहले
- 3:02:00हम पीई रेशियो की बात कर लेते हैं क्योंकि
- 3:02:02पीई भी एक तरह का वैल्यू्यूएशन रेश्यो है
- 3:02:04और उसके बाद हम पैग पे पहुंचेंगे और अब हम
- 3:02:07जानते हैं कि अगर गोदरेज कंज्यूमर में दिख
- 3:02:10रहा है कि पीई 33 है तो इसका मतलब क्या
- 3:02:13है? इसका एक सिंपल सा मतलब है कि कंपनी की
- 3:02:16अर्निंग जो है अर्निंग यानी ईपीएस अर्निंग
- 3:02:20पर शेयर वो ₹18 यहां पे दिख रही है। तो एक
- 3:02:24साल में कंपनी ₹18 कमाती है और शेयर इसका
- 3:02:27अभी है 597 यानी ये ध्यान रखिएगा कि ये
- 3:02:30एप्रोक्समेट फिगर्स हैं और क्योंकि
- 3:02:32मार्केट अभी चालू है तो ये फिगर्स बदलती
- 3:02:34रहती हैं। लेकिन एप्रोक्समेटली आप ये जान
- 3:02:36लीजिए कि एक साल में ये कंपनी ₹18 कमाती
- 3:02:39है और अगर 597 का शेयर है तो आपको 597 जो
- 3:02:43कि इसका प्राइस है इस कंपनी का इस प्राइस
- 3:02:47को इसकी अर्निंग्स से डिवाइड करना है तो
- 3:02:50ईपीएस आ जाएगा जो अभी लगभग 33 है और इसका
- 3:02:52मतलब यह है कि आप इस शेयर को उसकी साल भर
- 3:02:56की कमाई का 33 गुना पैसा देकर खरीद रहे
- 3:03:00हैं। यानी गोदरेज कंस्यूमर आज की स्थिति
- 3:03:02में एक ऐसा दुकान है जो साल का ₹100 कमाती
- 3:03:06है और उस दुकान को आप ₹300 में खरीद रहे
- 3:03:10हैं। 33 गुना ज्यादा में खरीद रहे हैं।
- 3:03:12आपको 33 गुना में गोदरेज को खरीदना चाहिए
- 3:03:15कि नहीं। यह क्लियर नहीं हुआ। समझ नहीं
- 3:03:17आया कि यह पीई काफी है या नहीं है। तो ये
- 3:03:20आपको अंदाजा देने के लिए पेग रेशो आपकी
- 3:03:23मदद करता है। अब जानते हैं कि पेग रेशो
- 3:03:26क्या बोलता है? उसको हम जानेंगे इन
- 3:03:28रेशियोज़ की मदद से। यहां पे आप देखिए कि
- 3:03:32God की प्रॉफिट ग्रोथ दिख रही है। अब यहां
- 3:03:34देखिए God ने 1 साल में अपना मुनाफा 75%
- 3:03:38से बढ़ाया है। 3 साल में 34% और 5 साल में
- 3:03:4125%। तो अब पेग रेशियो यह बोलता है कि
- 3:03:44कंपनी का जो पीई है वो उसके प्रॉफिट ग्रोथ
- 3:03:48रेट से ज्यादा नहीं होना चाहिए। और जब हम
- 3:03:51ये प्रॉफिट ग्रोथ रेट कंपेयर करते हैं तो
- 3:03:53आइडियली तीन या पांच साल का आपको लेना
- 3:03:56चाहिए। पेग रेशियो इसका नाम क्यों है? हम
- 3:03:58ये समझते हैं। पेग यानी पीई जी। तो पीई
- 3:04:02स्टैंड करता है इस पीई रेशियो के लिए। अब
- 3:04:04पेग रेशो में आप इस पीई को डिवाइड करते
- 3:04:08हैं प्रॉफिट ग्रोथ से। तो जी आ रहा है इस
- 3:04:11ग्रोथ से यानी आप न्यूमैरेटर में रखेंगे
- 3:04:14PE जो है 33 और डिनोमिनेटर में रखेंगे
- 3:04:18ग्रोथ जो अगर हम 3 साल का लें तो 34% के
- 3:04:21आसपास है और पेग रेशियो ये बोलता है कि
- 3:04:24न्यूमैरेटर अपॉन डिनोमिनेटर जब आप डिवाइड
- 3:04:26करें तो ये वन से ज्यादा नहीं या वन के
- 3:04:29आसपास होना चाहिए। यानी अगर मैं गोदरेज को
- 3:04:33पेग रेशियो से वैल्यू करूं तो पीई इसका है
- 3:04:3633 और इसका 3 साल का जी है प्रॉफिट ग्रोथ
- 3:04:40है 34 तो अगर मैं 33 बाय 34 करूं तो ये एक
- 3:04:44से थोड़ा कम रहेगा यानी पेग रेशियो के
- 3:04:48हिसाब से ये स्टॉक फेयरली वैल्यूड या
- 3:04:50स्लाइटली अंडरवैल्यूड है पेग रेशियो के
- 3:04:53हिसाब से मैं अगेन आपको यह कहूंगा कि इसका
- 3:04:55मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप इस शेयर को
- 3:04:58आंख बंद करके खरीद लें। ये बस एक
- 3:05:00वैल्यू्यूएशन मेथड है और हम आगे और
- 3:05:02वैल्यू्यूएशन मेथड सीखेंगे और एक बात का
- 3:05:04ध्यान और रखिए कि 3 साल से हमने ये किया
- 3:05:07तो आ रहा है कि ये शेयर स्लाइटली
- 3:05:09अंडरवैल्यूड है या फेयरली वैल्यूड है।
- 3:05:11लेकिन अगर हम 5 साल से करें तो पीई अभी भी
- 3:05:1433 रहेगा और नीचे इसको डिवाइड हम 25 से
- 3:05:17करेंगे। यानी अब रिजल्ट आएगा कि पेग
- 3:05:19रेशियो 1.3 के आसपास है। तो अगर हम 5 साल
- 3:05:23का एवरेज लें तो यह मान सकते हैं कि कंपनी
- 3:05:25स्लाइटली ओवरवैल्यूड है। बहुत ज्यादा नहीं
- 3:05:28लेकिन वन के आसपास रहना इज फेयर। तो हम
- 3:05:31दोनों ही केसेस में मान सकते हैं कि वन और
- 3:05:321.2 1.3 में भी ज्यादा फर्क नहीं है। तो
- 3:05:35हम ये मान सकते हैं कि दोनों ही केसेस में
- 3:05:37आ रहा है कि कंपनी अंडरवैल्यूड तो नहीं
- 3:05:39लेकिन कम से कम फेयरली वैल्यूड है पेग
- 3:05:42रेशो के हिसाब से। और यह रेशो आप यूजुअली
- 3:05:44ऐसी ही कंपनी में यूज करेंगे जिसमें कि
- 3:05:47अर्निंग्स स्टेबल हो। जैसे कि एफएमसीजी
- 3:05:49कंपनीज़, कई बार फार्मा कंपनीज़ इनफैक्ट कुछ
- 3:05:52आईटी कंपनीज़ में भी अर्निंग्स रेगुलरली
- 3:05:54ग्रो करती रहती हैं। तो जिनमें अर्निंग्स
- 3:05:56बहुत स्टेबल हो उन्हीं कंपनीज़ को आप पेग
- 3:05:59रेशो से वैल्यू करेंगे। तो चलिए एक और
- 3:06:02कंज्यूमर कंपनी को हम पेग रेशो से वैल्यू
- 3:06:04करके देखते हैं कि वो अंडरवैल्यूड है या
- 3:06:06ओवरवैल्यूड। तो ये है Bajaj कंस्यूमर। 9
- 3:06:09के पीई पे चल रहा है। अब देखते हैं कि
- 3:06:11इसकी प्रॉफिट ग्रोथ कितनी रही है। प्रॉफिट
- 3:06:14ग्रोथ भी इसके पिछले 3 साल में 4% और 5
- 3:06:17साल में 8% रही है। तो यानी अगर मैं 3 साल
- 3:06:20के हिसाब से इसे फिर से करूं तो पीई है 9
- 3:06:24का अपॉन जी जो है लगभग 4 1/2 का। तो अगर
- 3:06:28मैं नौ को 4 1/2 से डिवाइड करूं तो पेग
- 3:06:30रेशियो आएगा दो का जो कि महंगा है। तो अगर
- 3:06:33मैं 3 साल के प्रॉफिट ग्रोथ से पैग रेशियो
- 3:06:36से वैल्यू करूं Bajaj कंस्यूमर को तो
- 3:06:38स्टॉक महंगा लगेगा। अगर मैं 5 साल के
- 3:06:41ग्रोथ के हिसाब से करूं तो ये स्टॉक
- 3:06:44फेयरली वैल्यूड लगेगा। तो जब इस तरह का
- 3:06:47कुछ कंफ्यूजन रहे तो आप यह भी देखिए कि
- 3:06:49लेटेस्ट ट्रेंड क्या है? तो पिछले साल भी
- 3:06:52केवल 4.5% की ही प्रॉफिट ग्रोथ आई। ऐसे
- 3:06:55में मैं यह मान सकता हूं कि पिछले 3 साल
- 3:06:57वाले को मुझे ज्यादा वेटेज देना है
- 3:06:59क्योंकि पिछले 3 साल में कंसिस्टेंटली
- 3:07:02चाहे 3 साल का एवरेज हो या पिछला साल हो
- 3:07:04इस कंपनी की प्रॉफिट ग्रोथ कम हो रही है।
- 3:07:06मुझे पर्सनली अगर इस कंपनी को पेग से
- 3:07:08वैल्यू करना होगा तो मैं 3 साल को ही
- 3:07:11ज्यादा वेटेज दूंगा। 5 साल को ज्यादा
- 3:07:13वेटेज नहीं दूंगा। वहीं पिछले केस में मैं
- 3:07:16किसे ज्यादा वेटेज दूंगा यह देखते हैं। 5
- 3:07:18साल में 25% का एवरेज था। 3 साल में 34%
- 3:07:22का एवरेज था और पिछले साल 75% का एवरेज
- 3:07:25था। तो इस कंपनी की प्रॉफिट ग्रोथ लगातार
- 3:07:27तेज होती जा रही है। तो इसीलिए ट्रेंड यह
- 3:07:30बता रहा है कि क्योंकि प्रॉफिट ग्रोथ ते
- 3:07:32हो रही है तो इस कंपनी में भी मैं 5 साल
- 3:07:35को कम वेटेज देके 3 साल को ज्यादा वेटेज
- 3:07:37दूंगा क्योंकि वो और रीसेंट ट्रेंड दिखा
- 3:07:40रहा है। हां, अगर यह होता कि पिछले साल भी
- 3:07:43यह प्रॉफिट ग्रोथ 25% की हो जाती तो मैं
- 3:07:46फिर से 5 साल वाले को ज्यादा वेटेज देता
- 3:07:48क्योंकि एकदम लेटेस्ट ट्रेंड ने भी यह
- 3:07:50दिखाया कि 5 साल वाली ग्रोथ रेट ही
- 3:07:53मेंटेंड हो रही है। तो रीसेंट वन ईयर वाला
- 3:07:56जो डाटा है वो आपको डिसाइड करने में मदद
- 3:07:58करता है कि आपको थ्री ईयर पे ज्यादा फोकस
- 3:08:00करना है या फाइव इयर्स पे ज्यादा फोकस
- 3:08:02करना है। और कुछ इसी तरह का इन डेप्थ हमने
- 3:08:06मेहनत की है और बहुत मेहनत से साल भर की
- 3:08:09मेहनत से इस स्टीकर को बनाया है ताकि
- 3:08:11एक-एक डेटा पॉइंट से आपको डिसीजन लेने में
- 3:08:14मदद मिल सके। आगे अगला जब वैल्यू्यूएशन
- 3:08:17वीडियो आएगा उस पे हम थोड़े और
- 3:08:18कॉम्प्लिकेटेड और थोड़े और रिलायबल
- 3:08:21वैल्यू्यूएशन रेशियोज़ डिस्कस करेंगे। जैसे
- 3:08:23डीसीएफ, अर्निंग्स ग्रोथ और कुछ रेशियोज़।
- 3:08:25अब हम सेकंड रेशो डिस्कस करते हैं जो काफी
- 3:08:28हद तक पीई से मिलताजुलता है। फर्क ये है
- 3:08:30कि उसमें हम प्राइस को कंपेयर करते हैं
- 3:08:32अर्निंग पर शेयर से और दूसरा है प्राइस टू
- 3:08:35कैश फ्लो। जहां हम प्राइस को कंपेयर करते
- 3:08:38हैं ऑपरेटिंग कैश फ्लो पर शेयर से। यानी
- 3:08:42हम यह देखते हैं कि एक शेयर के पीछे कंपनी
- 3:08:45कितना कैश कमा रही है। एक्चुअल में कितना
- 3:08:48पैसा कैश के रूप में कंपनी के पास आ रहा
- 3:08:51है। क्योंकि अर्निंग्स में जैसा मैंने
- 3:08:53डिस्कस किया था। कई बार ऐसा होता है कि
- 3:08:55आपने किसी को माल बेचा और ये बता दिया कि
- 3:08:58सेल हुई और मुनाफा हुआ प्रॉफिट एंड लॉस
- 3:09:00स्टेटमेंट में और आपने अपनी अर्निंग मान
- 3:09:02ली। लेकिन वो सामने वाला बंदा बैंककरप्ट
- 3:09:05हो गया या वो धोखेबाज निकला। उसने आपको
- 3:09:07पैसा दिया ही नहीं। तो वो कैश तो आपके पास
- 3:09:09आएगा ही नहीं। तो इसीलिए यह जरूरी है कि
- 3:09:12आप कैश फ्लो पर खूब फोकस करें और उसी में
- 3:09:15मदद करता है प्राइस टू कैश फ्लो वाला
- 3:09:18रेशियो। तो देखिए कैसे फर्क भी आया पीई और
- 3:09:21प्राइस टू कैश फ्लो में। जहां पीई आपको यह
- 3:09:24बता रहा है कि आप एक साल की अर्निंग्स का
- 3:09:27कितना गुना पैसा दे रहे हैं किसी शेयर को
- 3:09:29खरीदने में। यानी इस कंपनी का पीई 9 के
- 3:09:32आसपास है। तो 1 साल की अर्निंग का क्योंकि
- 3:09:35इसका ईपीएस 15 है और प्राइस है 138 यानी
- 3:09:39आप 15 * 9 जो 135 होता है उसके आसपास नौ
- 3:09:43गुना आप पैसा दे रहे हैं। इसलिए प्राइस टू
- 3:09:46अर्निंग नौ आ रहा है। वहीं ध्यान से देखिए
- 3:09:48कि प्राइस टू कैश फ्लो जो है वो 11 है।
- 3:09:51यानी एक शेयर के पीछे जो कैश फ्लो है वो
- 3:09:55कम मिलता है इस कंपनी को। अगर मैं 138 को
- 3:09:5811 से डिवाइड कर दूं तो मुझे यह पता चल
- 3:10:01रहा है कि इस कंपनी का कैश फ्लो पर शेयर
- 3:10:04जो है वो ₹12.5 के आसपास है। यानी ईपीएस
- 3:10:08यह कंपनी कमाती है ₹15। लेकिन इस ₹15 में
- 3:10:12से ₹12.5 ही ऐसे हैं जो सच में कैश के रूप
- 3:10:15में आते हैं। तो इसीलिए यह जरूरी है कि
- 3:10:18मैं कंपनी को उस पैरामीटर से वैल्यू करूं
- 3:10:21जो सच में उसके पास आता है। और यही आपकी
- 3:10:24हेल्प करेगा प्राइस टू कैश फ्लो जो इस केस
- 3:10:27में 11 है। यानी ₹1 अगर कंपनी साल में एक
- 3:10:31शेयर के पीछे कमाती है यानी उसका 11 गुना
- 3:10:34पैसा आप दे रहे हैं इस शेयर को खरीदने के
- 3:10:36लिए। तो आप इस प्राइस टू कैश फ्लो रेशियो
- 3:10:38से कैसे जज करेंगे कि कितना प्राइस टू कैश
- 3:10:41फ्लो आपको देना चाहिए। इसका बेस्ट तरीका
- 3:10:43है कि आप कंपेयर करिए ब्रांड्स को कि वो
- 3:10:46कंपनी का क्या बिनेस है। जैसे Bajaj
- 3:10:48कंस्यूमर के पास ब्रांड्स हैं नो मार्क्स
- 3:10:50या Bajaj Amband ड्रॉप्स इस तरीके के। और
- 3:10:52ये कंपनी आपको मिल रही है 11 टाइम्स कैश
- 3:10:55फ्लो के प्राइस पे यानी प्राइस टू कैश
- 3:10:57फ्लो है 11 का। अब इसे कंपेयर करते हैं
- 3:11:00कुछ और एफएमसीजी कंपनीज़ के साथ जैसे
- 3:11:03ज्योति लेबोरेटरीज जो कि उजाला, HCको,
- 3:11:05Maxo इस तरह के ब्रांड्स बनाती है। अब
- 3:11:08देखते हैं कि ये कितने प्राइस टू कैश फ्लो
- 3:11:10रेशियो पे है। तो ये कंपनी आपको मिल रही
- 3:11:12है 12 के प्राइस टू कैश फ्लो रेशियो पे।
- 3:11:14तो अब आपको ऐसे इमेजिन करना है कि 11 गुना
- 3:11:18कैश फ्लो का पैसा देके आपको Bajaj आलमंड
- 3:11:21ड्रॉप्स लेना है और आपको नो मार्क्स लेना
- 3:11:23है या फिर आपको 12 गुना पैसा थोड़ा सा
- 3:11:26ज्यादा देके उजाला मेक्सoco
- 3:11:29xo इस तरह के ब्रांड्स लेने हैं और इसमें
- 3:11:31आपकी और मदद करेगी कंपनी को जानने के बारे
- 3:11:34में अगर आप डॉक्यूमेंट सेक्शन में क्लिक
- 3:11:36करेंगे और इस इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन को
- 3:11:39क्लिक करेंगे तो आपको इन कंपनीज़ के सारे
- 3:11:41ब्रांड्स पता चल जाएंगे। एक बार ब्रांड्स
- 3:11:44पता चल गए तो आपको इस तरह का कंपैरेटिव
- 3:11:46एनालिसिस करने में आसानी होगी। जैसे यहां
- 3:11:49अगर हम इनके ब्रांड्स देखें तो margo है,
- 3:11:51Maxo है, प्रिल है, XO है, Henco है,
- 3:11:54उजाला है। चलिए अब जरा हम Bajaj
- 3:11:57कंस्यूumer के ब्रांड्स देखते हैं और साथ
- 3:11:58ही आप मुझे यह बताइएगा कि दोनों में से
- 3:12:01आपको किसके ब्रांड्स ज्यादा अच्छे लग रहे
- 3:12:04हैं और आप अगर मेरी जगह होंगे तो आप कैश
- 3:12:06फ्लो पर शेयर का 11 गुना पैसा देके Bajaj
- 3:12:09Corrp लेंगे या 12 गुना पैसा देके Jyoti
- 3:12:12LS लेंगे। तो चलिए अब देखते हैं कि Bajaj
- 3:12:14कंज्यूमर के पास कौन से ब्रांड्स हैं।
- 3:12:16जरूरी नहीं है कि पहले दूसरे पेज में वो
- 3:12:18क्लियरली अपने सारे ब्रांड्स बता दें। तो
- 3:12:21हो सकता है आपको इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन
- 3:12:22में ढूंढना पड़े। जैसे इस केस में ढूंढना
- 3:12:25पड़ रहा है। तो देखिए एक तो इन्होंने
- 3:12:26बताया है कि Bajaj आलमंड ड्रॉप्स का
- 3:12:29वॉल्यूम स्टेडी है यानी सेल्स मेंटेंड है।
- 3:12:31दूसरा इन्होंने नो मार्क्स क्रीम के बारे
- 3:12:33में बताया है। तो अगर इन्होंने जिक्र नहीं
- 3:12:35किया है किसी और इनके प्रोडक्ट का। मतलब
- 3:12:37मान लीजिए कि यही दो मेन ब्रांड्स हैं।
- 3:12:39अगर कोई और अच्छा ब्रांड होता इनके पास
- 3:12:41जिससे इनकी सेल आ रही होती तो उसको भी ये
- 3:12:44मेंशन जरूर करते। तो अब ये आपको देखना है
- 3:12:47कि आपको उजाला Maxo XO PR नीम Margo ये
- 3:12:53ब्रांड्स वाली कंपनी 12 टाइम्स कैश फ्लो
- 3:12:55में चाहिए या 11 टाइम्स कैश फ्लो में आपको
- 3:12:57नो मार्क्स और Bajaj Amdon ड्रॉप्स अच्छा
- 3:12:59लगता है। तो इस तरीके से भी प्राइस टू कैश
- 3:13:02फ्लो आपकी मदद कर सकता है। चलिए, आज हम
- 3:13:04कुछ ऐसे ट्रेड्स, कुछ ऐसे
- 3:13:06कैरेक्टरिस्टिक्स, कुछ ऐसे रेशियोज़ डिस्कस
- 3:13:08करेंगे जो आपको यह बताएगा कि कौन सी कंपनी
- 3:13:12फाइनेंसियली स्टेबल है और कौन सी कंपनी के
- 3:13:14पास ऐसा खतरा है कि वो कंपनी आज से कुछ
- 3:13:17महीनों बाद, कुछ साल बाद या तो डूब सकती
- 3:13:19है या उसमें डूबने का खतरा है और कैसे आप
- 3:13:21उन कंपनियों को पहचानेंगे जिन कंपनियों से
- 3:13:24आपको दूर रहना है जो अपना फाइनशियल बर्डन
- 3:13:27सहन नहीं कर पाएंगी। तो चलिए पहला जो
- 3:13:30कैरेक्टरिस्टिक है ये मैंने हल्का सा
- 3:13:32पिछले वीडियो में भी डिस्कस किया है लेकिन
- 3:13:34आज क्योंकि ये टॉपिक ही ये है कि हम कैसे
- 3:13:37पहचाने ऐसी कंपनीज़ जो बैंककरप्ट होने वाली
- 3:13:39हैं या हो सकती हैं तो ये टॉपिक डिस्कस
- 3:13:42करना भी जरूरी है। शेयर होल्डिंग पैटर्न
- 3:13:45बहुत बड़ा क्लू देता है। पहली चीज आपको ये
- 3:13:47ध्यान रखनी है कि शेयर होल्डिंग पैटर्न
- 3:13:49में जो प्रमोटर की शेयर होल्डिंग है वो
- 3:13:52अच्छी हो। यूजुअली ये 40 50% के ऊपर हो तो
- 3:13:55अच्छी बात है। लेकिन बहुत बड़ी कंपनी में
- 3:13:57जो लाखों करोड़ों की कंपनियां है कुछ 20
- 3:13:5940 50 हजार करोड़ की कंपनी है उनमें इतनी
- 3:14:02ज्यादा होल्डिंग हो नहीं पाती है। तो ऐसे
- 3:14:05में भी आपको एक नेगेटिव या पॉजिटिव साइन
- 3:14:09ऐसे देखना है कि प्रमोटर होल्डिंग बढ़ रही
- 3:14:11है कि नहीं। जैसे सेप्टेंबर में T
- 3:14:14केमिकल्स में T ग्रुप की होल्डिंग 30.6%
- 3:14:18थी जो बढ़ के दिसंबर में 31% से ऊपर हो गई
- 3:14:22है। और अभी पिछले कुछ दिनों से भी न्यूज़ आ
- 3:14:23रही है कि Tata ने अपनी होल्डिंग और बढ़ाई
- 3:14:25है इस कंपनी में तो जब मार्च क्वार्टर के
- 3:14:28नतीजे आएंगे तो मेरी ऐसी उम्मीद है कि
- 3:14:30यहां पे मार्च वाला जब कॉलम आएगा तो उसमें
- 3:14:32होल्डिंग और बढ़ी हुई दिखेगी। तो बढ़ती हुई
- 3:14:35प्रमोटर होल्डिंग बहुत पॉजिटिव है कि
- 3:14:37प्रमोटर को अपने बिजनेस में भरोसा है।
- 3:14:40गिरती हुई प्रमोटर होल्डिंग बहुत नेगेटिव
- 3:14:42है। इसके अलावा जैसे बैंक्स हो गए,
- 3:14:45बड़ी-बड़ी कंपनियां हो गई जिसमें प्रमोटर
- 3:14:47होल्डिंग या तो ज्यादा अलाउड ही नहीं है
- 3:14:49या हो नहीं पाती। तो आपको ये देखना है कि
- 3:14:52डीआईआई यानी डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल
- 3:14:54इन्वेस्टर्स, म्यूच्यूल फंड, इंश्योरेंस
- 3:14:56कंपनी इस तरह के इंस्टीटशंस की होल्डिंग
- 3:14:58अच्छी खासी हो। जैसे कि टाटा केमिकल्स के
- 3:15:00केस में है और एफआईआई फॉरेन इंस्टीट्यूशनल
- 3:15:03इन्वेस्टर्स की होल्डिंग भी हो जो कि भी
- 3:15:06टाटा केमिकल्स के केस में है। तो ओवरऑल
- 3:15:09इसका स्ट्रक्चर मुझे बताता है कि इसकी
- 3:15:11होल्डिंग अच्छी है। लेकिन यहां तक तो
- 3:15:14मैंने पहले भी डिस्कस किया था। इसके आगे
- 3:15:17अब हम बढ़ते हैं कि कौन सी और ऐसी चीजें
- 3:15:20हैं जो आइडेंटिफाई करने में मदद करेंगी।
- 3:15:22तो आप ऐसे भी जान सकते हैं कि जैसे
- 3:15:24प्रमोटर होल्डिंग बढ़ रही है कि नहीं उसका
- 3:15:26चार्ट हमने यहीं दिया है। आप ये भी देख
- 3:15:28सकते हैं कि डीआईआई म्यूच्यूल फंड
- 3:15:30इंश्योरेंस कंपनीज़ जो एक्सपर्ट माने जाते
- 3:15:33हैं वो लोग अपनी होल्डिंग इस कंपनी में
- 3:15:35बढ़ा रहे हैं कि घटा रहे हैं या एफआईआई
- 3:15:37अपनी इस कंपनी में होल्डिंग बढ़ा रहे हैं
- 3:15:39या घटा रहे हैं? पर ये आपको कैसे दिखेगा?
- 3:15:42उसके लिए एक सिंपल तरीका है। आपको इस
- 3:15:44स्टॉक को वॉच लिस्ट में ऐड कर देना है।
- 3:15:47जैसे ही आप ऐड टू वॉच लिस्ट करेंगे और
- 3:15:50उसके बाद जब आप यहां अकाउंट पे क्लिक करके
- 3:15:52अपनी वॉच लिस्ट पे जाएंगे तो जब भी इस
- 3:15:56कंपनी की शेयर होल्डिंग में कुछ चेंज आएगा
- 3:15:58या जब भी प्रमोटर खरीदेंगे या बेचेंगे,
- 3:16:01म्यूच्यूल फंड्स खरीदेंगे या बेचेंगे। कुछ
- 3:16:03भी इस तरह की डील होगी या शेयर होल्डिंग
- 3:16:06पैटर्न में चेंज आएगा तो वॉच लिस्ट में
- 3:16:08आपको अलर्ट मिल जाएगा कि आपकी इस कंपनी
- 3:16:10में ऐसा-ऐसा हुआ है। तो इस तरीके से आप
- 3:16:13शेयर होल्डिंग को ट्रैक कर सकते हैं। अगर
- 3:16:16आपकी चूज़ की हुई कंपनी में प्रमोटर की
- 3:16:18शेयर होल्डिंग बढ़ रही है तो पॉजिटिव है।
- 3:16:20एफआईआई की बढ़ रही है तो पॉजिटिव है।
- 3:16:22डीआईआई की बढ़ रही है तो पॉजिटिव है। और
- 3:16:24उल्टा अगर ये तीनों घट रहे हैं तो नेगेटिव
- 3:16:27है। तो यह एक बहुत अच्छा तरीका है
- 3:16:30आइडेंटिफाई करने का कि कौन सी ऐसी कंपनीज़
- 3:16:32हैं जिसमें ओनर्स को खुद को और मार्केट के
- 3:16:35जो एक्सपर्ट्स हैं उनको भरोसा है। इसी तरह
- 3:16:38एक और इंपॉर्टेंट रेशो है इंटरेस्ट कवरेज
- 3:16:40रेशो। ये बाय डिफॉल्ट जब आप खोलेंगे कंपनी
- 3:16:43एसेंशियल्स का पेज आपको नहीं दिखेगा तो
- 3:16:45इसे आप इस ड्रॉपडाउन के जरिए आप टाइप कर
- 3:16:47सकते हैं और फिर ऐड कर सकते हैं तो आपको
- 3:16:49ये रेशियो दिखने लगेगा। इंटरेस्ट कवरेज
- 3:16:52रेशो क्या बताता है और ये क्यों जरूरी है?
- 3:16:54देखिए हमने डेप्ट टू इक्विटी रेशो डिस्कस
- 3:16:56किया है और मैंने आपको बताया है कि डेप्ट
- 3:16:58इक्विटी रेशियो वन से कम होना चाहिए या
- 3:17:00ज़ीरो रहे तो और अच्छा है। लेकिन कई बार
- 3:17:03डेप्ट इक्विटी रेशो वन से कम है तो देख के
- 3:17:06लगता है कि अरे ये तो मैंने ऐसा जाना था
- 3:17:08कि वन से कम होता है तो सेफ है। इस कंपनी
- 3:17:10में कम है मतलब ये सेफ है। लेकिन हो सकता
- 3:17:12है वो कंपनी प्रॉफिट ही ना कमा रही हो या
- 3:17:15बहुत कम प्रॉफिट कमा पा रही हो। तो अगर वो
- 3:17:18कंपनी ऑपरेटिंग प्रॉफिट नहीं कमाएगी तो
- 3:17:20ब्याज लौटाएगी कैसे? अगर आपको आपके धंधे
- 3:17:22में लॉस हो रहा है तो आप बैंक का लोन वापस
- 3:17:25कैसे करेंगे? तो यहां काम आता है इंटरेस्ट
- 3:17:28कवरेज रेश्यो। इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो
- 3:17:31बेसिकली आपको यह बताता है कि अगर ₹100
- 3:17:34इंटरेस्ट आपको देना है, ₹100 ब्याज देना
- 3:17:37है तो प्रॉफिट उसका कितना गुना हो रहा है
- 3:17:40कंपनी को? यानी अगर यहां पर इंटरेस्ट
- 3:17:43कवरेज रेशियो 12 के आसपास है तो ये रेशियो
- 3:17:46हमें ये बोल रहा है कि जितना ब्याज कंपनी
- 3:17:48को देना है कंपनी उससे 12 गुना ज्यादा
- 3:17:52प्रॉफिट कमा रही है। तो अगर कंपनी को ₹100
- 3:17:54साल का ब्याज देना है तो कंपनी ₹1200 साल
- 3:17:58का प्रॉफिट कमा रही है। ऐसा ये रेशियो
- 3:18:00बोलता है। चलिए देखते हैं क्या ऐसा हो रहा
- 3:18:02है। ये है प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट।
- 3:18:04इसमें हमें दिख रहा है कि जो इंटरेस्ट है
- 3:18:06वो टाटा केमिकल्स को इस साल 100 करोड़ के
- 3:18:09आसपास देना पड़ा। तो ऑपरेटिंग प्रॉफिट था
- 3:18:121400 करोड़ के आसपास और इसे ब्याज देना था
- 3:18:15108 करोड़ के आसपास। यानी अगर हम इसे
- 3:18:18देखें तो लगभग 12 गुना से कुछ ज्यादा
- 3:18:20प्रॉफिट ये कंपनी कमा रही है। ऑपरेटिंग
- 3:18:22प्रॉफिट। अब आपको पूछना चाहिए कि ऑपरेटिंग
- 3:18:25प्रॉफिट हम क्यों ले रहे हैं? वो इसलिए
- 3:18:27क्योंकि नेट प्रॉफिट जो है उसमें तो नेट
- 3:18:30प्रॉफिट आता ही है ब्याज ऑलरेडी पे करके।
- 3:18:33लेकिन हमको तो यह देखना है कि ब्याज देने
- 3:18:36से पहले कंपनी कितना प्रॉफिट कमा रही है।
- 3:18:39क्या वो ब्याज देने के लायक है कि नहीं।
- 3:18:41तो ऐसे में हम वो प्रॉफिट देखेंगे जो
- 3:18:44ब्याज देने के पहले कंपनी ने कमाया और वो
- 3:18:47है यहां पे ऑपरेटिंग प्रॉफिट। इसीलिए आप
- 3:18:49ऑपरेटिंग प्रॉफिट देखेंगे और देखेंगे कि
- 3:18:52इन दोनों में कितना फर्क है। तो जैसा हम
- 3:18:54यहां देख सकते हैं काफी फर्क है। यानी ऐसा
- 3:18:57नहीं होने वाला कि कंपनी कभी अपना ब्याज
- 3:19:00ना दे पाए और बैंकर्स कंपनी पे कब्जा करके
- 3:19:03इसे नीलाम कर दें। ऐसा नहीं होने वाला है।
- 3:19:06तो यही चीज आपको इंटरेस्ट कवरेज रेशियो एक
- 3:19:09झलक में बता देता है। यह जितना ज्यादा रहे
- 3:19:11उतना अच्छा है। लेकिन कम से कम इंटरेस्ट
- 3:19:14कवरेज रेशियो चार पांच का तो होना ही
- 3:19:16चाहिए कंफर्टेबल रहने के लिए। अब इंटरेस्ट
- 3:19:19कवरेज ने तो हमको बता दिया कि पीएंडएल के
- 3:19:21हिसाब से प्रॉफिट सफिशिएंट था कि नहीं और
- 3:19:24इंटरेस्ट को कवर करने के लिए वो काफी है
- 3:19:26कि नहीं। लेकिन पीएंडएल साल में एक बार
- 3:19:29आता है। तो जैसे यहां आप देख रहे हैं
- 3:19:31मार्च 2019 अभी चल रहा है मार्च 2020। तो
- 3:19:35साल भर में हो सकता है कंपनी ने बहुत
- 3:19:37शॉर्ट टर्म लोन लिया हो, वर्किंग कैपिटल
- 3:19:39लोन लिया हो। तो इस साल भर में शॉर्ट टर्म
- 3:19:42लायबिलिटीज के अराउंड कंपनी की हालत कैसी
- 3:19:45है? ये आपको बताता है क्विक रेश्यो ताकि
- 3:19:48आपको इस साल की शॉर्ट टर्म ऑब्लिगेशंस की
- 3:19:50डिटेल भी पता चल जाए। तो क्विक रेशियो यह
- 3:19:53बताता है कि कंपनी ने अगर कोई शॉर्ट टर्म
- 3:19:56लायबिलिटीज ली हुई है शॉर्ट टर्म लोन,
- 3:19:57वर्किंग कैपिटल लोन इस तरीके का तो उसे
- 3:20:00अगर उसे एकदम से पटाना पड़ जाए, कोई
- 3:20:02इमरजेंसी आ जाए तो कंपनी के पास कैश या
- 3:20:05कैश जैसे जैसे लिक्विड फंड्स हो सकते हैं।
- 3:20:07तो लिक्विड इन्वेस्टमेंट्स और कैश ये मिला
- 3:20:11के इतना पैसा है कि नहीं कि वो अपने 2
- 3:20:13महीने बाद के लोन को पटा सके या 4 महीने
- 3:20:15बाद के लोन को पटा सके। ऐसा तो नहीं कि
- 3:20:18अभी कंपनी का सारा पैसा फंसा हुआ है और वो
- 3:20:204 महीने बाद उसे जो लोन पटाना है उसे
- 3:20:23पटाने के लिए कंपनी के पास पैसे ही नहीं
- 3:20:25है। ये हालत तो नहीं है। ये देखने के लिए
- 3:20:28क्विक रेशो काम आता है। तो क्विक रेशो कम
- 3:20:31से कम एक से ऊपर होना चाहिए। जैसे इस
- 3:20:34कंपनी में आपको ये दो दिख रहा है। यानी
- 3:20:36कंपनी के पास लिक्विड एसेट्स उसके शॉर्ट
- 3:20:39टर्म लायबिलिटीज से दुगने हैं। तो दो बार
- 3:20:42वो अपनी लायबिलिटीज शॉर्ट टर्म पे कर सकती
- 3:20:44है। इतने लिक्विड एसेट्स इस कंपनी के पास
- 3:20:46हैं। तो ये रेश्यो भी एक से ऊपर होना
- 3:20:49चाहिए इस श्योरिटी के लिए कि कंपनी
- 3:20:52फाइनशियली साउंड है। तो सिर्फ डेप्ट
- 3:20:54इक्विटी रेशो नहीं वो मैं बता चुका हूं कि
- 3:20:57ज़ीरो हो तो बेस्ट नहीं तो वन से कम तो
- 3:20:59होना ही चाहिए। इंटरेस्ट कवरेज रेशो,
- 3:21:01क्विक रेशो ये सब मिला के आपको पता चलता
- 3:21:04है कि कंपनी कहीं बैंककरप्ट होने की कगार
- 3:21:07पर तो नहीं है। तो एक मैं अभी तक जो इतने
- 3:21:09वीडियोस में मैंने समझाया है उसकी एक छोटी
- 3:21:11सी समरी देना चाहता हूं कि जो बेसिक
- 3:21:13मिनिमम चेकक्स आपको करने हैं ताकि आप बुरी
- 3:21:16कंपनी को अवॉइड कर सकें। तो सबसे पहले तो
- 3:21:19आपको ये चेक करना है कि कंपनी प्रॉफिटेबल
- 3:21:21हो। जैसे पिछले एक साल में इस कंपनी का
- 3:21:23प्रॉफिट कम हुआ है। ग्रोथ प्रॉफिट की
- 3:21:26नेगेटिव थी लेकिन प्रॉफिटेबल रही है। चलिए
- 3:21:28इसे वेरीफाई कर लेते हैं पीएंडएल
- 3:21:30स्टेटमेंट से। हर साल जैसा आप देख सकते
- 3:21:32हैं कि ये कंपनी प्रॉफिटेबल रही है। दूसरी
- 3:21:35चीज जो आपको देखनी है जो आपको रेशियोज़ में
- 3:21:37मिल जाएगी कि सीएफओ अप पैट एक से ज्यादा
- 3:21:41हो या कम से कम एक के आसपास हो। 0.8 से
- 3:21:44ज्यादा तो सीएफओ अप पैट होना चाहिए। ये
- 3:21:47चीज आपको देखनी है ताकि इससे यह पता चलता
- 3:21:49है कंपनी जो मुनाफा कमा रही है वो उसको सच
- 3:21:52में कैश के रूप में मिल रहा है कि नहीं।
- 3:21:54चलिए एक बार ये सारे पैराटर्स किसी और
- 3:21:56कंपनी के साथ भी देख लेते हैं ताकि हमें
- 3:21:58दूसरी कंपनी के एग्जांपल से भी ये चीजें
- 3:22:00समझ में आ जाए। जैसे goरेज कंस्यूमर। चलिए
- 3:22:03यही चीज़ चेक करते हैं। इंटरेस्ट कवरेज
- 3:22:05बहुत अच्छा है। क्विक रेशियो थोड़ा कम है
- 3:22:08लेकिन अगेन एक के आसपास है। यह8 से ऊपर
- 3:22:11रहना जरूरी है। उसके आसपास है। लेकिन हां
- 3:22:13ये थोड़ा सा नेगेटिव है लेकिन बेयर मिनिमम
- 3:22:15है। इससे कम नहीं होना चाहिए। इतना तक
- 3:22:17होना है। इतना तक है। खास करके कंपनी अगर
- 3:22:20ज़ीरो डेप्ट है, इंटरेस्ट कवरेज भी ठीक है।
- 3:22:22और 0.8 से ऊपर है, क्विक रेशियो एक के
- 3:22:24आसपास है तो ठीक है। बाकी रेशियोज़ भी हम
- 3:22:27देख लेते हैं। सीएफओ अप पैट एक के आसपास
- 3:22:30है। डेप्ट नहीं है। हम देख चुके हैं।
- 3:22:32प्रॉफिट ग्रोथ है। हर साल प्रॉफिट बढ़ रहा
- 3:22:34है। सेल्स ग्रोथ साथ में सेल्स ग्रोथ भी
- 3:22:37है। ये भी एक इंपॉर्टेंट पैरामीटर है।
- 3:22:39आरओई इस कंपनी का अच्छा है। आरओसीई अच्छा
- 3:22:42है। और आरओई आरओसीई अच्छा मतलब क्या?
- 3:22:45बेसिकली रिटर्न ऑन इक्विटी बताता है कि एक
- 3:22:47शेयर होल्डर के पैसे पर कितना पैसा बन रहा
- 3:22:49है। तो यह आप पर डिपेंड करता है कि आप अगर
- 3:22:52कहीं पैसा लगाते हैं तो आपकी उम्मीद कितनी
- 3:22:55है कि उस पैसे पे साल भर पे कितना पैसा
- 3:22:57बनना चाहिए। जैसे मेरी उम्मीद होती है कि
- 3:23:00ये कम से कम 1820% हो तभी मैं अपने पैसे
- 3:23:03को उस बिजनेस में लगाऊंगा। तो मेरे लिए
- 3:23:06इसलिए एक अच्छा आरओई 18 के ऊपर है। बट ये
- 3:23:09आपके लिए डिफर कर सकता है। किसी के लिए 15
- 3:23:10भी हो सकता है, किसी के लिए 12 भी हो सकता
- 3:23:12है। उससे कम आरओई जस्टिफाइड नहीं है
- 3:23:15क्योंकि वो तो आपको फिर इंडेक्स फंड में
- 3:23:17भी मिल जाएगा और और 6.5 7 का तो आपको एफडी
- 3:23:20में भी रिटर्न मिल जाएगा। तो बेयर मिनिमम
- 3:23:22अगर आप स्टॉक्स में इन्वेस्ट कर रहे हैं
- 3:23:24मुझसे पूछिए तो 15 होना चाहिए। मेरे लिए
- 3:23:27वो 18 है। तो आपको ये आठों रेशियोज़ तो
- 3:23:30जरूर देखने हैं। बहुत काम के हैं किसी भी
- 3:23:33कंपनी में। इसके अलावा इंटरेस्ट कवरेज
- 3:23:36रेशो भी देखिए, क्विक रेशो भी देखिए,
- 3:23:38एंटरप्राइज वैल्यू भी देखिए। पीई मैंने
- 3:23:41आपको बताया कि कैसे देखना है। उसे भी जरूर
- 3:23:43देखिए। तो अभी तक जो इतने वीडियोस कंप्लीट
- 3:23:46हुए हैं उसमें हमने ज्यादातर इन रेशियोज़
- 3:23:49की बात की और हमने जाना कि उन रेशियोज़ का
- 3:23:51मतलब क्या है और उन रेशियोज़ को कितना होना
- 3:23:53चाहिए? वो क्या सिग्निफाई करते हैं। हाई
- 3:23:55मार्जिनस, अच्छा मार्जिन किसी भी बिज़नेस
- 3:23:58में। यह हम सबके लिए ना कोई भी अच्छे
- 3:24:00बिजनेस की डेफिनेशन होती है। हम जब भी
- 3:24:03किसी से किसी के बिजनेस के बारे में पूछते
- 3:24:04हैं तो हमेशा यह पूछते हैं अच्छा ये सामान
- 3:24:07बेचते हो? कितने का बेचते हो? ₹100 का
- 3:24:09खरीदते कितने के हो? अगर उसने बोल दिया ना
- 3:24:12कि ₹20 का खरीद के 100 में बेचता हूं। तो
- 3:24:14बस हमारे और हमारे घर वालों के लिए उससे
- 3:24:16स्मार्ट इंसान कोई नहीं। यार ₹20 की चीज
- 3:24:18को ₹100 में बेचता है। मैं क्या ₹10 की
- 3:24:21चीज को ₹12 में बेचता हूं। असली बिज़नेस तो
- 3:24:23वो करता है। और हम हमेशा काउंट करते हैं
- 3:24:25दिमाग में कि वो कितना पैसा कमा रहा होगा।
- 3:24:28तो आज ना मैं ये पूरा कांसेप्ट बदल डालने
- 3:24:30वाला हूं। आज आपको पता चलेगा कि ये हाई
- 3:24:33मार्जिन बिनेस जो हमको बहुत अच्छे लगते
- 3:24:35हैं वो असल में कितने रिस्की कितने खतरनाक
- 3:24:39हो सकते हैं। लेकिन ये बिनेसेस आपका बहुत
- 3:24:43सारा नुकसान कर सकते हैं। चाहे शेयर
- 3:24:44मार्केट में आप हाई मार्जिन बिनेसेस के
- 3:24:46पीछे भागे या आप अपने दोस्त और फ्रेंड्स
- 3:24:49को बोले कि मुझे भी पार्टनर बना ले यार
- 3:24:51तेरा हाई मार्जिन बिज़नेस है। अगर आप ऐसा
- 3:24:54कर रहे हैं ना तो ये हाई मार्जिन बिज़नेसेस
- 3:24:56आपका बहुत सारा नुकसान करा सकते हैं। तो
- 3:24:58आपको बस tiker.inology.in
- 3:25:01पे आना है और इसके स्क्रीनर सेक्शन पे आप
- 3:25:03क्लिक करिए। उसके बाद चलिए मैं आपको अब
- 3:25:06कुछ हाई मार्जिन बिज़नेसेस पहले तो ढूंढ के
- 3:25:09बताता हूं। तो हाई मार्जिन यानी अब मेरे
- 3:25:11को नेट प्रॉफिट से मतलब है। तो मैं यहां
- 3:25:13ढूंढूंगा नेट प्रॉफिट मार्जिन वाली
- 3:25:15बिज़नेस। ऐसे बिज़नेस जिनका पिछले साल नेट
- 3:25:18प्रॉफिट मार्जिन। अ चल मानते हैं 40% से
- 3:25:22ऊपर हो। नेट प्रॉफिट है ये यानी टैक्सेस
- 3:25:24सारे खर्चों के बाद। तो 40% नेट मार्जिन
- 3:25:27ये बहुत अच्छा होता है। चलिए देखते हैं
- 3:25:30ऐसे कितने बिनेसेस हैं। तो अभी 210 ऐसे
- 3:25:33बिनेसेस हैं क्योंकि ये 40% का नेट
- 3:25:36मार्जिन लाना बहुत मुश्किल है। इसलिए 5000
- 3:25:38में से 200 कंपनीज़ ही ऐसी हैं जो ऐसा कर
- 3:25:41पाती है। अब एक झलक में लगता है कि इससे
- 3:25:43अच्छा क्या? इतना ये मुनाफा कमा रही हैं।
- 3:25:46ये तो बहुत अच्छी कंपनीज़ हैं। अब ना एक
- 3:25:50चीज मैं आपको पहले दिखा देता हूं। फिर
- 3:25:51एक्सप्लेन करता हूं। ये बहुत इंटरेस्टिंग
- 3:25:53है। तो जरूर देखिएगा। अब इनमें से ऐसी
- 3:25:56कंपनीज़ देखते हैं जिनका रिटर्न ऑन कैपिटल
- 3:25:59यानी पैसे पे इस कंपनी ने कितना पैसा
- 3:26:02कमाया वो 10% से कम का है। जरा देखते हैं
- 3:26:06इसमें से कितनी ऐसी कंपनीज़ हैं। वाह! तो
- 3:26:09210 में से 133 कंपनीज़ ऐसी हैं जिनका
- 3:26:13आरओसी पिछले साल 10% से भी कम का है। अब
- 3:26:17ये थोड़ा टेक्निकल हो रहा है लेकिन डरिए
- 3:26:18मत। मैं यहां चीजों को सिंपलीफाई करने ही
- 3:26:20तो हूं ना। तो चलिए मेरा नॉट सो अच्छा सा
- 3:26:23चेहरा फिर से देखते हैं और चीजों को
- 3:26:25सिंपलीफाई करते हैं। तो चलिए अब मैं आपको
- 3:26:27बताता हूं कि मैंने वो स्क्रीन करके आपको
- 3:26:29क्यों दिखाया उसका क्या मतलब था। मैं आपको
- 3:26:31दो सिनेरियोस देता हूं और आप चूज़ करिएगा
- 3:26:33आपको कौन सा बेटर लग रहा है। पहले
- 3:26:34सिनेरियो मैं आपको यह बोलता हूं कि एक
- 3:26:36₹100 की ना आप मुझे नोटबुक खरीद के दे
- 3:26:38दीजिए। वो नोटबुक को मैं शाम तक ₹200 में
- 3:26:42बेच दूंगा और जो ₹100 मुनाफा है वो आपको
- 3:26:45दे दूंगा। पूरा मुनाफा आपका। यह है
- 3:26:47सिनेरियो वन। दूसरा मैं आपको यह बोलता हूं
- 3:26:50कि आप ₹100 मुझे दे दीजिए। ₹100 की नोटबुक
- 3:26:53खरीद के मत दीजिए। ₹100 मुझे दे दीजिए।
- 3:26:56दिन के अंत तक मैं आपको वो 500 करके दे
- 3:26:58दूंगा। कैसे करूंगा, क्या करूंगा वो
- 3:27:01छोड़िए। लीगल ही होगा। कुछ भी इललीगल नहीं
- 3:27:03होगा। कुछ भी ऐसा नहीं होगा जिसमें आप
- 3:27:04फसो। लीगल होगा। लेकिन मैं आपको दिन के
- 3:27:07अंत तक ₹500 दे दूंगा। अब आप बताइए आप
- 3:27:10सिनेरियो ए चूज़ करेंगे या सिनेरियो बी?
- 3:27:12ज्यादातर लोग डेफिनेटली सिनेरियो बी चूज़
- 3:27:15करेंगे। उसमें ₹100 पे आपको दिन के अंदर
- 3:27:17₹400 बन के मिल रहे हैं। अब इसी चीज को
- 3:27:20समझिए। जब हम हाई मार्जिन के पीछे भाग रहे
- 3:27:23हैं ना तो हम सिनेरियो ए चूज़ कर रहे हैं।
- 3:27:25हम ये बोल रहे हैं कि हमको तो हाई मार्जिन
- 3:27:28चाहिए। आप एक नोटबुक लो और चाहे एक ही
- 3:27:31नोटबुक बेचो लेकिन 100% मुनाफे पे बेचो।
- 3:27:34जबकि असल में लॉजिकली हमको यह मतलब नहीं
- 3:27:37है कि कोई चीज कितने मार्जिन में बिक रही
- 3:27:40है। हमको इस बात से मतलब है कि हमारे पैसे
- 3:27:42पे कितना पैसा बन रहा है। अब जैसे मानते
- 3:27:45हैं सारियो बी में ये हो रहा होता कि मैं
- 3:27:48ले नोटबुक ही रहा था लेकिन मैं उस नोटबुक
- 3:27:51को ₹100 में ले रहा था और ₹15 में बेच रहा
- 3:27:54था। और क्योंकि मैं इतना सस्ता बेच रहा था
- 3:27:57तो दिन में मैंने 100 नोटबुक्स बेच दी। अब
- 3:27:59100 नोटबुक बेची एक नोटबुक पे ₹5 कमा रहा
- 3:28:02था। मैंने ₹500 कमा लिए जिसमें से ₹400
- 3:28:04आपको दे दिए। तो यहां सिनेरियो बी में मैं
- 3:28:08एक नोटबुक पे मेरा मार्जिन 5% का ही था।
- 3:28:11सिनेरियो ए में एक नोटबुक पे मेरा मार्जिन
- 3:28:13100% था। लेकिन इसलिए वो बिक ही नहीं रहा
- 3:28:16था। दूसरे केस में मार्जिन तो कम था लेकिन
- 3:28:18बिक खूब रहा था। तो हम सिनेरियो बी चूज़
- 3:28:21करेंगे ना। जब स्टॉक मार्केट की बात आती
- 3:28:24है तो हम सिनेरियो ए चूज़ करते हैं। रियल
- 3:28:26लाइफ में हम सिनेरियो बी चूज़ करते हैं।
- 3:28:28पता नहीं क्यों जब हम बिनेसेस को एनालाइज
- 3:28:30करते हैं तो हम मार्जिनस को लेके ना बहुत
- 3:28:33ऑब्सेस्ड हो जाते हैं। और यहीं हम बहुत
- 3:28:35सारी गलतियां करते हैं। क्योंकि हाई
- 3:28:38मार्जिनस का एक तो मैंने ये आपको बताया कि
- 3:28:39वो ज्यादा रेलेवेंट है नहीं। कितना पैसे
- 3:28:41पे पैसा बन रहा है ये ज्यादा जरूरी है। जब
- 3:28:44आप कोई चीज ज्यादा दाम पे बेचते हैं ना तो
- 3:28:46वो कम बिकती है। अब कम बिकेगी तो पैसे पे
- 3:28:49पैसा कम बिकेगा। ये तो आप समझ गए। लेकिन
- 3:28:53एक बहुत जरूरी चीज और भी है। लेकिन उसके
- 3:28:55पहले इन्वेस्टोनॉमी को आप सब चाहते थे ना
- 3:28:58कि हिंदी में आ जाए तो मुझे ये बताते हुए
- 3:29:00बहुत खुशी हो रही है कि इन्वेस्टोनमी
- 3:29:01हिंदी में आ गई है। Amazon पे अवेलेबल है।
- 3:29:04इसका लिंक आपको इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन
- 3:29:05में मिल जाएगा। अब मैं वापस आता हूं उस
- 3:29:07इंपॉर्टेंट पॉइंट की ओर। जब आप कोई चीज
- 3:29:09ज्यादा मार्जिन पे बेचते हैं ना तो आप
- 3:29:12कॉम्पिटिटर्स से खुद को एक्सपोज भी करते
- 3:29:14हैं। Jio का एग्जांपल ले लीजिए। Jio सिर्फ
- 3:29:16इसलिए सक्सेसफुल नहीं हुआ क्योंकि Jio की
- 3:29:18बिज़नेस स्ट्रेटजी अच्छी थी। Jio इसलिए भी
- 3:29:20सक्सेसफुल हुआ क्योंकि बाकी टेलीकॉम
- 3:29:23कंपनीज ने मार्जिनस इतने हाई रखे थे कि
- 3:29:26Jio के पास यह मौका था कि वो सस्ता देके
- 3:29:28मार्केट में घुस जाए। डाटा बहुत महंगा
- 3:29:32₹500 ₹1000 का GB का एक डाटा मिलता था।
- 3:29:34कॉल्स लिमिटेड होते थे। हर कॉल पे एसडी
- 3:29:37कॉल पे ज्यादा रोमिंग का पैसा लगता था।
- 3:29:39बहुत सारे लफड़े थे। Jio ने ये सब कुछ खत्म
- 3:29:42कर दिया। तो जब भी कोई बिजनेस बहुत हाई
- 3:29:44मार्जिन पर काम करता है वो अपने
- 3:29:46कॉम्पिटिटर्स को ये मौका देता है कि वो उस
- 3:29:48बिजनेस में कस्टमर्स को सस्ते में वही चीज
- 3:29:51ऑफर करके कमा ले मार्केट शेयर ले ले और
- 3:29:54ज्यादा वॉल्यूम पे खेल सके तो इसलिए भी
- 3:29:56हाई मार्जिन बिनेसेस बहुत रिस्की होते हैं
- 3:29:59और आपको इनके पीछे ये देख के नहीं जाना
- 3:30:01चाहिए कि बहुत हाई मार्जिन है। ये कई बार
- 3:30:04रिस्की हो सकते हैं। अब ना जरा उल्टा
- 3:30:06देखते हैं। क्या लो मार्जिन बिनेसेस खूब
- 3:30:10पैसे पे पैसा बना सकते हैं? मैंने
- 3:30:11एग्जांपल में तो आपको दिखा दिया लेकिन
- 3:30:13एग्जांपल की थोड़ी मानेंगे। हमको तो प्रूफ
- 3:30:15चाहिए ना। चलिए प्रूफ देखते हैं कि क्या
- 3:30:17लो मार्जिन बिज़नेसेस खूब सारा पैसे पे
- 3:30:20पैसा बना सकते हैं। चलिए देखते हैं। तो
- 3:30:23चलिए अब हम कुछ लो मार्जिन बिज़नेसेस
- 3:30:26ढूंढते हैं। तो अगर मुझे लो मार्जिन
- 3:30:28बिज़नेस चाहिए तो मैं अब बोलता हूं ऐसे
- 3:30:30बिज़नेसेस जिनका मार्जिन 10% से कम रहा हो
- 3:30:33पिछले साल। और उसके साथ ही ऐसे बिजनेसेस
- 3:30:36जिनका आरओसीई यानी कितने पैसे पर पैसा बना
- 3:30:40यह 20% से ज्यादा रहा हो। अब देखते हैं
- 3:30:43ऐसी कितनी कंपनियां हैं। तो ऐसी 170
- 3:30:46कंपनीज़ हैं। अब कंपनीज़ के नाम भी देखिएगा।
- 3:30:49Aven्यू Supermars, Titan, HDFC, Indigo,
- 3:30:53HVS, यूनाइटेड स्पिरिट्स, जुबिलियंट ये
- 3:30:56बहुत टॉप क्वालिटी कंपनीज़ हैं। थोड़ा
- 3:30:58फॉर्मेटिंग पे मत जाइएगा। मैं एक्चुअली
- 3:31:00टैबलेट यूज़ कर रहा हूं और टिककर अभी
- 3:31:01मोबाइल और लैपटॉप्स के लिए ऑप्टिमाइज्ड
- 3:31:03है। कुछ ही दिनों में ये टैबलेट्स के लिए
- 3:31:05भी ऑप्टिमाइज्ड होगा। लेकिन आप इस चीज पे
- 3:31:07फोकस करिए कि कितनी हाई क्वालिटी कंपनीज़
- 3:31:10हैं और 170 ऐसी कंपनीज़ हैं जो भले ही
- 3:31:14मार्जिन ज्यादा नहीं कमाती। जैसे Aveen
- 3:31:16Suer Mars का ही एग्जांपल ले लेते हैं। ये
- 3:31:18क्यों चलती है? क्योंकि ये चीजों को सस्ते
- 3:31:21पे देती है। तो Aveen Suer अगर चीजों को
- 3:31:24हाई मार्जिन पे देने लगे। अगर ये dमar पे
- 3:31:27आपको चीजें महंगी मिलने लगे, डिस्काउंट्स
- 3:31:29ना मिले तो dमar तो चलना ही बंद हो जाएगा।
- 3:31:31तो dमar तो चलता ही इसलिए है कि चीजें
- 3:31:34बहुत सस्ती मिल रही हैं। यानी लो मार्जिन
- 3:31:37इस बिजनेस के लिए प्रॉब्लम नहीं है। इस
- 3:31:39बिजनेस के लिए बहुत अच्छा है। और उसी कारण
- 3:31:43ये बिनेस 20% से ऊपर पैसे पे पैसा बनाता
- 3:31:47है हर साल। तो लो मार्जिनस बहुत
- 3:31:49एडवांटेजेस भी हो सकता है। इनफैक्ट यही
- 3:31:51कारण है कि dमar के कॉम्पिटिटर्स dमar के
- 3:31:54अगेंस्ट अच्छे से खड़े नहीं हो पाते। तो
- 3:31:57चलिए आज सीखते हैं बैंकिंग स्टॉक्स पिक
- 3:31:59करना और यहां हमारा tiker.inology.in
- 3:32:02जो वेबसाइट है यह बाकियों से काफी अलग भी
- 3:32:04है क्योंकि अनलाइक बाकी वेबसाइट्स जो आपको
- 3:32:06बैंकिंग स्टॉक्स भी उसी तरह दिखाते हैं
- 3:32:08जैसे वो बाकी स्टॉक्स को दिखा रहे हैं।
- 3:32:11टकर में हमने बैंकिंग स्टॉक्स में क्या
- 3:32:14देखना इंपॉर्टेंट है उसके हिसाब से कंपनी
- 3:32:17एसेंशियल्स के सेक्शन को चेंज किया है।
- 3:32:19जैसे आप यहां कॉस्ट टू इनकम रेशियो देख
- 3:32:21रहे हैं। सीएआर परसेंटेज देख रहे हैं।
- 3:32:23कासा देख रहे हैं। साथ ही अगर आप इन
- 3:32:26हाईलाइट्स वाले सेक्शन पे जाएंगे तो आप
- 3:32:28देखेंगे कि हमने सारे वो रेश्योज़ रखे हैं
- 3:32:30जो बैंकिंग स्टॉक्स एनालाइज करने में
- 3:32:32इंपॉर्टेंट हैं। चलिए आज हम शुरू करते हैं
- 3:32:36कासा रेश्यो से। अब ये कासा रेशो क्या
- 3:32:38होता है? करंट अकाउंट्स प्लस सेविंग्स
- 3:32:41अकाउंट कितने हैं किसी बैंक के पास। जैसे
- 3:32:45अगर किसी बैंक के पास टोटल डिपॉजिट्स एफडी
- 3:32:47मिलाके करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट इंटर
- 3:32:50बैंक डिपॉजिट्स हर तरह की फंडिंग जो बैंक
- 3:32:53ने ली हुई है जिससे बैंक ने डिपॉजिट्स
- 3:32:55इकट्ठे किए हैं उन डिपॉजिट्स में से करंट
- 3:32:58अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट का परसेंटेज
- 3:33:00कितना है? जैसे अगर एक बैंक के पास टोटल
- 3:33:03₹100 हैं तो वो ₹100 में से कितने रुपए
- 3:33:06बैंक को करंट अकाउंट कस्टमर्स और सेविंग्स
- 3:33:08अकाउंट कस्टमर्स से मिले हैं यह बताता है
- 3:33:11कासा परसेंटेज। अब इसकी क्याेंस है? यह
- 3:33:14इंपॉर्टेंट इसलिए है क्योंकि ज्यादातर
- 3:33:16करंट अकाउंट्स में 0% इंटरेस्ट मिलता है
- 3:33:19और ज्यादातर सेविंग्स अकाउंट में 4% 3.5%
- 3:33:22के आसपास का इंटरेस्ट मिलता है। यानी यह
- 3:33:24ऐसा पैसा है जो बैंक को बहुत सस्ते में
- 3:33:27मिल जाता है और इसीलिए आप देखते हैं कि
- 3:33:30नए-नए बैंक्स आजकल IDFC Bank वो सेविंग्स
- 3:33:33अकाउंट में 7% का इंटरेस्ट दे रहा है।
- 3:33:35Kotak Bank 6 देता था आजकल 5.5 कर दिया
- 3:33:38है। ज्यादा से ज्यादा बैंक्स सेविंग्स
- 3:33:40अकाउंट चाहते हैं कि उनको मिल जाए। करंट
- 3:33:42अकाउंट उनको मिल जाए क्योंकि उस पे
- 3:33:44इंटरेस्ट कम देना पड़ता है। जो नए बैंक्स
- 3:33:46हैं IDFC फर्स्ट जैसे बैंक हो या कुछ साल
- 3:33:48पहले तक Kotak हो वो 6.5 7% भी दे देते
- 3:33:52हैं क्योंकि यह भी बाकी डिपॉजिट से सस्ता
- 3:33:54पड़ता है। और जरा सोचिए एक बार आपने
- 3:33:57सेविंग्स अकाउंट खुलवा लिया ज्यादा
- 3:33:59इंटरेस्ट के लालच में तो उसके बाद जैसे
- 3:34:01Kotak ने किया छ से चालू किया था अब उसने
- 3:34:045% कर दिया है। जैसे-जैसे बैंक एस्टैब्लिश
- 3:34:07होता जाता है वो अपने इंटरेस्ट रेट्स कम
- 3:34:09करता जाता है। जैसे इंडिया का सबसे
- 3:34:10एस्टैब्लिश्ड बैंक है SBI तो उसने 3% कर
- 3:34:13दिया। बाकी जो बड़े बैंक्स हैं ICICI हो,
- 3:34:16HDFC हो ये 3.5% देते हैं। और जो ग्रोइंग
- 3:34:19बैंक्स हैं इमर्जिंग बैंक्स हैं Kotak 5%
- 3:34:22IDFC 6.5 7% वैसे-वैसे इंटरेस्ट रेट बढ़ता
- 3:34:26जाता है। क्योंकि हर बैंक चाहता है उसे
- 3:34:28ज्यादा से ज्यादा करंट अकाउंट और सेविंग्स
- 3:34:30अकाउंट मिले। तो यह एक इंपॉर्टेंट
- 3:34:32क्राइटेरिया है देखने का कि बैंक के पास
- 3:34:35कितना पैसा उसको ऐसा मिल रहा है जिस पर
- 3:34:37उसको ज्यादा इंटरेस्ट नहीं देना। क्योंकि
- 3:34:40सोचिए अगर किसी बैंक के पास एफडीस ज्यादा
- 3:34:42है तो उस पर उसको 7% का इंटरेस्ट देना है।
- 3:34:45फिर वो अगर उसे 11-1% पर लोन में दे भी दे
- 3:34:48तो भी वो 4 ही% कमा रहा है। लेकिन अगर
- 3:34:50किसी बैंक के पास 4% में सेविंग्स अकाउंट
- 3:34:53का पैसा है और फिर वो उसे 12% के लोन पे
- 3:34:56दे रहा है तो उसके पास 8% पैसा बच रहा है।
- 3:34:59यानी वो ज्यादा कमा रहा है। इसलिए जो बैंक
- 3:35:02के पास कासा परसेंटेज ज्यादा हो वो एक
- 3:35:05बहुत अच्छा क्राइटेरिया है बैंक्स को पिक
- 3:35:08करने का। इकलौता नहीं हम आगे के
- 3:35:09क्राइटेरिया भी सीखेंगे लेकिन कासा एक
- 3:35:12बहुत जरूरी रेशो है। चलिए कुछ और बैंक्स
- 3:35:15का हम कासा रेशियो देखते हैं जिससे पता
- 3:35:17चले कि कौन से बैंक का रेशियो कितना है।
- 3:35:20Axis Bank का HDFC से भी कुछ ज्यादा है।
- 3:35:2344% अब देखते हैं Kotak ने हायर इंटरेस्ट
- 3:35:26दे दे के काफी सेविंग्स अकाउंट इकट्ठे किए
- 3:35:29थे। तो उनका देखते हैं। देखिए Kotak ने
- 3:35:32क्योंकि 6% के खूब एड्स किए थे। इसलिए
- 3:35:35Kotak का कासा रेशियो 52% है। हालांकि
- 3:35:39इनको इंटरेस्ट ज्यादा देना पड़ता है। इनको
- 3:35:415.5% इंटरेस्ट देना पड़ता है। लेकिन फिर
- 3:35:43भी यह पैसा इन्होंने इकट्ठा तो कर लिया और
- 3:35:46अब इनके पास खासा आ गया है। तो ये
- 3:35:48इंटरेस्ट रेट घटाते जा रहे हैं। अब देखते
- 3:35:50हैं कि IDFC फर्स्ट बैंक आखिर इतना
- 3:35:52इंटरेस्ट क्यों दे रहा है? क्या रीज़न है
- 3:35:54कि वो इतना इंटरेस्ट दे रहा है? ये रीजन
- 3:35:56है IDFC फर्स्ट बैंक का रेश्यो काफी कम है
- 3:36:00और उसको सेविंग्स अकाउंट करंट अकाउंट की
- 3:36:02जरूरत है। इसीलिए वो बार-बार ज्यादा
- 3:36:05इंटरेस्ट देके उस पैसे को इकट्ठा करने की
- 3:36:07कोशिश कर रहा है। चलिए इसके साथ अब हम आगे
- 3:36:10बढ़ते हैं सेकंड इंपॉर्टेंट रेश्यो की तरफ
- 3:36:12और वो है नेट एनपीए। अब ये एनपीए क्या
- 3:36:16होता है? एनपीए यानी कि नॉन परफॉर्मिंग
- 3:36:19एसेट। मतलब अगर किसी बैंक ने ₹100 बाजार
- 3:36:22में लोन के रूप में बांटे हैं तो उसमें से
- 3:36:25कितना परसेंट ऐसा पैसा है जो वापस नहीं आ
- 3:36:27रहा। जैसे HDFC का पिछले साल 2019 की
- 3:36:30एनुअल रिपोर्ट के हिसाब से एनपीए है लगभग
- 3:36:330.4%
- 3:36:35यानी अगर HDFC बैंक ₹100 देता है तो उसमें
- 3:36:38से 40 पैसा वापस नहीं आता। अब देखते हैं
- 3:36:41कि कौन सा ऐसा बैंक है जिसका ये बहुत
- 3:36:43ज्यादा है। सेंट्रल बैंक ये एक बड़े
- 3:36:46सरकारी बैंक्स में से एक है। देखते हैं
- 3:36:48इसका एनपीए कितना है। इसका एनपीए पिछले
- 3:36:51साल था लगभग पौ/
- 3:36:54यानी अगर वह ₹100 देता है बाजार में तो
- 3:36:56उसमें से लगभग ₹8 वापस ही नहीं आता। कहां
- 3:37:00₹8 और कहां HDFC के केस में वो 40 पैसे से
- 3:37:04भी कम। और यही रीजन है कि HDFC को इंडिया
- 3:37:08ही नहीं दुनिया के सबसे अच्छी बैंकिंग
- 3:37:10फ्रेंचाइजीज में से एक माना जाता है। यह
- 3:37:13रेश्यो बताता है कि एक बैंक कितना सक्षम
- 3:37:15है आइडेंटिफाई करने में कि कहां से मुझे
- 3:37:18पैसा वापस मिलेगा और किसको लोन दूंगा तो
- 3:37:21पैसा वापस नहीं मिलेगा। और क्योंकि
- 3:37:23बैंकिंग बिजनेस है ही लोन देने का बिजनेस
- 3:37:26तो जो बैंक यह पहचानने में अच्छा है कि
- 3:37:29किसको दूंगा तो पैसा वापस मिलेगा। किसको
- 3:37:31दूंगा तो नहीं मिलेगा। वो बैंक ऑटोमेटिकली
- 3:37:34सबसे अच्छा बैंक हुआ। इसीलिए इसे सबसे
- 3:37:37जरूरी रेशियोज़ में से एक माना जाता है।
- 3:37:40ध्यान रखिए कि ये मैं नेट एनपीए परसेंटेज
- 3:37:43की बात कर रहा हूं और ज्यादातर समय आपको
- 3:37:45यही रेशो पे सबसे ज्यादा गौर करना है। अब
- 3:37:48बात करते हैं एक और इंपॉर्टेंट रेशो की
- 3:37:50जिसका नाम है कॉस्ट ऑफ फंड्स या फिर कॉस्ट
- 3:37:53ऑफ लायबिलिटीज। यह रेशो आपको यही बताता है
- 3:37:56कि रफली करंट अकाउंट मिलाके, सेविंग्स
- 3:37:58अकाउंट मिलाके, एफडी मिलाके हर तरीके से
- 3:38:01जैसे बैंक्स ने डिपॉजिट इकट्ठे किए हैं,
- 3:38:03पैसा इकट्ठा किया है वो सब मिला दिया जाए
- 3:38:05तो एवरेज जो उसने पैसा इकट्ठा किया है उस
- 3:38:08पे उसको कितना परसेंट इंटरेस्ट देना पड़ता
- 3:38:10है जिनसे उसने डिपॉजिट लिया है। तो करंट
- 3:38:13अकाउंट में ज़ीरो होगा, एफडी में 6.5 होगा,
- 3:38:16सेविंग्स में तीन होगा। ये सब कुछ मिला के
- 3:38:18और बहुत सारे तरीके होते हैं डिपॉजिट्स
- 3:38:20के। ये सब कुछ मिला के HDFC को अपने पैसों
- 3:38:24पे ऑन एन एवरेज अपने डिपॉजिट्स पे 4.88%
- 3:38:27का इंटरेस्ट देना पड़ता है। तो जैसा मैंने
- 3:38:30बताया कि हालांकि कासा एक अच्छा रेश्यो है
- 3:38:33लेकिन कई बैंक्स कासा बढ़ा लेते हैं ज्यादा
- 3:38:35इंटरेस्ट देके। तो ऐसे में कासा से भी
- 3:38:38इंपॉर्टेंट रेश्यो हो जाता है कि ठीक है
- 3:38:40कासा भले ही थोड़ा कम हो लेकिन एवरेज कॉस्ट
- 3:38:42ऑफ फंड्स जितना कासा है कहीं उस पे आपको
- 3:38:45ज्यादा इंटरेस्ट तो नहीं देना पड़ रहा। एक
- 3:38:47बैंक हो सकता है जिसका 80% कासा हो लेकिन
- 3:38:49पता चला वो सेविंग्स में 8-आ% इंटरेस्ट
- 3:38:51देके उसने सेविंग्स का बैलेंस बढ़ा लिया
- 3:38:53है और इसलिए कासा बढ़ा हुआ दिख रहा है।
- 3:38:55जैसा चलिए अपन Kotak के केस में देखते
- 3:38:57हैं। HDFC कासा देख लीजिए 42% है और हमने
- 3:39:01Kotak का देखा था जो HDFC से भी ज्यादा
- 3:39:04था। इस केस में Kotak का है 52%। तो अगर
- 3:39:08हम सिर्फ कासा देखें तो लगेगा कि Kotak इज़
- 3:39:11अ बेटर बैंक। अब देखते हैं Kotak की कॉस्ट
- 3:39:14ऑफ फंड्स। देखिए हालांकि HDFC के पास 42%
- 3:39:17कासा था। Kotak के पास 52 है। लेकिन फिर
- 3:39:20भी कॉस्ट ऑफ फंड्स में HDFC जरा सा ही सही
- 3:39:24लेकिन Kotak से कम ही है। तो जैसा हमें
- 3:39:26देख के एकदम से इंप्रेसिव लग रहा था कि
- 3:39:28वाह Kotak कासा तो HDFC से बहुत ज्यादा है
- 3:39:32लेकिन उसका कोई खास फर्क नहीं पड़ता
- 3:39:34क्योंकि उस कासा को लेने के बदले Kotak को
- 3:39:37इंटरेस्ट भी ज्यादा पे करना पड़ रहा है।
- 3:39:39और इसीलिए जब भी आप कासा को देखें तो उसके
- 3:39:42साथ कॉस्ट ऑफ फंड्स को भी जरूर देखें। तभी
- 3:39:45आपको एक कंप्लीट पिक्चर मिल पाएगी। अब हम
- 3:39:47बात करते हैं कि कोई बैंक कितनी तेजी से
- 3:39:50ग्रो कर रहा है यह कैसे पता चलेगा? यह पता
- 3:39:53चलेगा एडवांसेस ग्रोथ के साथ या लोन ग्रोथ
- 3:39:56के साथ। यह हमें यह बताता है कि पिछले साल
- 3:39:58के मुकाबले इस साल बैंक ने कितने ज्यादा
- 3:40:01लोन बांटे। जैसे पिछले साल अगर किसी बैंक
- 3:40:04ने ₹100 के लोन बांटे थे और बाजार में
- 3:40:06₹100 बैंक का लगा हुआ था तो इस साल Kotak
- 3:40:10ने 21% की ग्रोथ दिखाई। यानी इस साल मान
- 3:40:13लीजिए पिछले साल ₹100 थे तो अब ₹121 Kotak
- 3:40:16के बाजार में लोन के रूप में गए हुए हैं।
- 3:40:19और क्योंकि बैंक जब लोन देता है तो उस पे
- 3:40:21इंटरेस्ट कमाता है। इसीलिए अगर आपको कोई
- 3:40:24ऐसा बैंक देखना है जो तेजी से ग्रो करे तो
- 3:40:27ये हिस्टोरिकल फिगर दिखाता है कि कितनी
- 3:40:30तेजी से ये बैंक ने हिस्टोरिकली ग्रो किया
- 3:40:32है। अब लेकिन यह ग्रोथ लाना चैलेंज नहीं
- 3:40:35है। हिंदुस्तान में पैसे की जरूरत लोन की
- 3:40:38जरूरत सबको है। तो लोन तो कोई भी बैंक
- 3:40:41चाहे तो कितना भी दे सकता है लेकिन उसे दो
- 3:40:43बातों का ध्यान रखना पड़ता है कि लोन ऐसे
- 3:40:46लोगों को दे कि एनपीए ना हो और दूसरा लोन
- 3:40:49देने के लिए पैसे होने चाहिए। तो पैसे
- 3:40:52यानी कैपिटल बताता है कैपिटल एडिक्वसी
- 3:40:55रेश्यो कि कितना पैसा बैंक के पास ऑलरेडी
- 3:40:58है। जितना हायर परसेंटेज ये होगा जो यहां
- 3:41:01पे आपको ये 17 दिख रहा है ये जितना ज्यादा
- 3:41:03होगा आप समझ लीजिए कि बैंक चाहे तो उतनी
- 3:41:06तेजी से ये एडवांसेस ग्रोथ को ला सकता है।
- 3:41:0917% एक बहुत अच्छा रेश्यो है। तो ये जितना
- 3:41:12हाई होगा उतना आप उम्मीद कर सकते हैं कि
- 3:41:15एडवांसेस ग्रोथ फास्ट रहेंगी। इसे बढ़ाना
- 3:41:18चैलेंज होता है क्योंकि बैंक्स बहुत सारे
- 3:41:20हैं। आप आज डिपॉजिट करना चाहें तो
- 3:41:22सेविंग्स अकाउंट करंट अकाउंट खोलने के लिए
- 3:41:24आपके पास 30-40 बैंकों का ऑप्शन है। तो हर
- 3:41:27बैंक को लड़ना पड़ता है। कुछ यूनिक ऑफर
- 3:41:30करना पड़ता है कि वो अपना पास कैपिटल ला
- 3:41:32सके। कुछ ऐसा कर सके कि आप अपना अकाउंट
- 3:41:35अपना डिपॉजिट उस बैंक में खोलें। चलिए
- 3:41:38Kotak का यह 17% है। अब देखते हैं किसी और
- 3:41:41बैंक का यह कितना है। जैसे ICICI का देखते
- 3:41:43हैं। यह भी एक बड़े बैंक्स में से है।
- 3:41:45इसका कैपिटल एडिक्वसी थोड़ा कम है। अब हम
- 3:41:48देखते हैं किसी छोटे बैंक में जैसे डीसीबी
- 3:41:51बैंक में कितना है। डीसीबी बैंक में भी
- 3:41:5316% है। तो ये सारे बैंक्स काफी अच्छी
- 3:41:55पोजीशन में है। ये इस हालत में है कि अपने
- 3:41:57एडवांसेस को तेजी से ग्रो कर सकें। अब
- 3:42:00देखते हैं एक ऐसा बैंक जो शायद उतनी अच्छी
- 3:42:03कैपिटल एडिक्वसी की हालत में ना हो। चलिए
- 3:42:06देखते हैं। तो यहां फेडरल बैंक की हालत
- 3:42:09थोड़ी बाकी बैंक्स के मुकाबले कैपिटल
- 3:42:11एडिक्वसी यानी उसके पास कितना पैसा ऐसा है
- 3:42:13जो वो आगे लोन दे सकता है इस मामले में वो
- 3:42:16बाकी बैंक्स से थोड़ा पीछे है जो अभी तक
- 3:42:19हमने देखा एक और छोटे बैंक को ट्राई करते
- 3:42:21हैं। साउथ इंडियन बैंक अब इसकी हालत तो और
- 3:42:24खराब है। अगर कैपिटल एडिक्वसी रेशियो 12%
- 3:42:27के आसपास है या उससे नीचे है तो ये एक
- 3:42:29डेंजरस साइन है। आप इसे मान सकते हैं। तो
- 3:42:32साउथ इंडियन बैंक की स्थिति कैपिटल
- 3:42:34एडिक्वसी रेशियो में बहुत अच्छी नहीं है
- 3:42:35और इसीलिए आप देखेंगे कि बाकी बैंक्स के
- 3:42:38मुकाबले इसके एडवांसेस में ग्रोथ भी कम आई
- 3:42:40है। यह अपने लोोंस को कम रफ्तार से बढ़ा
- 3:42:43सका है। अब देखते हैं जो सबसे अच्छे
- 3:42:46बैंक्स में से एक है HDFC की इस पैरामीटर
- 3:42:48पे क्या हालत है। क्या ये सबसे अच्छा है
- 3:42:51बाकियों के मुकाबले?
- 3:42:53यह और कोटक लगभग आसपास हैं। और इसीलिए
- 3:42:56देखिए 17% से ऊपर की कैपिटल एडिक्वसी रेशो
- 3:42:59तो एडवांसेस ग्रोथ भी कितनी अच्छी है।
- 3:43:02जितना अच्छा ये रेश्यो होगा यूजुअली उतना
- 3:43:05अच्छा ये रेश्यो होगा। और इसीलिए यह जरूरी
- 3:43:08है कि आप कैपिटल एडिक्वसी रेशियो पे भी
- 3:43:10पूरा-पूरा ध्यान लगाएं। यह भी ध्यान रखिए
- 3:43:12कि अगर बहुत ज्यादा एनपीए होगा, अगर ऐसा
- 3:43:15पैसा जो आपने किसी को लोन के रूप में दिया
- 3:43:17है, वह डूब गया, तो भी आपका कैपिटल ही डूब
- 3:43:20रहा है। यानी आपका कैपिटल एडिक्वसी रेशियो
- 3:43:23कम हो रहा है। तो दो तरीके हैं अपने
- 3:43:25कैपिटल एडिक्वसी रेशियो को अच्छा रखने के।
- 3:43:27एक एनपीए को कम से कम रखा जाए। दूसरा
- 3:43:30डिपॉजिट्स को ज्यादा से ज्यादा लाया जाए।
- 3:43:32और HDFC और Kotak ये दोनों बैंक्स ऐसे हैं
- 3:43:35जिनका एनपीए पे अच्छा कंट्रोल है और जिनका
- 3:43:37तासा रेशियो बहुत अच्छा है। यानी ये दोनों
- 3:43:40फैक्टर्स मिलके ये एश्योर कर रहे हैं कि
- 3:43:42इनका सीएआर अच्छा रहे और अगर कैपिटल खूब
- 3:43:45रहेगा बैंक के पास तो एडवांसेस ग्रोथ भी आ
- 3:43:47ही जाएगी। तो एनपीए कंट्रोल करें, कासा
- 3:43:50लाएं, कैपिटल एडिक्यूसी बढ़ाएं जिससे लोन
- 3:43:53ग्रोथ बढ़ेगी जिससे आरओई, आरओए और ईपीएस
- 3:43:56बढ़ेगा। यह है पूरा का पूरा बैंकिंग
- 3:43:59बिजनेस। इस तरीके से होता है बैंकिंग
- 3:44:01बिजनेस। तो चलिए शुरू करते हैं HDFC बैंक
- 3:44:05के साथ ही और जानते हैं कुछ और इंपॉर्टेंट
- 3:44:07पैरामीटर्स किसी भी बैंक को डिस्कस करने
- 3:44:09के। तो अब हम आ जाते हैं रेश्योज़ की तरफ
- 3:44:13जहां एक बार में आपको सारे हाईलाइटेड
- 3:44:15रेश्योज़ दिख जाएंगे। इसमें हमने पिछली बार
- 3:44:18एनआईएम डिस्कस नहीं किया था। तो ये एनआईएम
- 3:44:21क्या होता है? एनआईएम यानी नेट इंटरेस्ट
- 3:44:23मार्जिन। अब इसे एक सिंपल एग्जांपल से
- 3:44:26समझते हैं कि मान लीजिए बैंक के पास ₹100
- 3:44:29हैं जिस पे वो 5% का इंटरेस्ट देती है।
- 3:44:32यानी उस ₹100 पे बैंक को ₹5 जिससे उसने
- 3:44:35डिपॉजिट लिया जिस भी ग्राहक से उसको देने
- 3:44:37पड़े और फिर उस ₹100 को बैंक 12% ब्याज पे
- 3:44:41आगे लोन दे देती है। यानी ₹15 उसको देने
- 3:44:45पड़े और उसको मिले ₹112 क्योंकि ₹100 पे
- 3:44:49₹12 का ब्याज मिला। तो अब ₹5 उसने
- 3:44:52इंटरेस्ट दिया और ₹12 लिया यानी उसको
- 3:44:56इंटरेस्ट का टोटल बेनिफिट कितना हुआ? ₹7
- 3:44:59का। इस ₹7 को कहते हैं स्प्रेड। स्प्रेड
- 3:45:02यानी फर्क। कितना इंटरेस्ट दिया और कितना
- 3:45:05इंटरेस्ट मिला उसमें जो फर्क है उसको
- 3:45:07स्प्रेड बोलते हैं। लेकिन अभी यह एनआईएम
- 3:45:10नहीं है। अब सेकंड एग्जांपल मान लीजिए ऐसे
- 3:45:14पांच लोग थे जिससे बैंक ने ₹100 लिए और उन
- 3:45:18सबको ₹-5 का ब्याज दिया। लेकिन लोन बांटते
- 3:45:22समय जरूरी नहीं है कि सारे के सारे जो
- 3:45:25₹500 थे ₹100 जो पांच लोगों से आए वो आगे
- 3:45:28लोन के रूप में चला जाए और कुछ उस ₹500
- 3:45:31में से बैंक को आरबीआई के पास जमा भी रखना
- 3:45:34पड़ता है। बैंक जितने पैसे ग्राहकों से
- 3:45:36लेता है वो पूरे के पूरे आगे बढ़ा नहीं
- 3:45:38सकता। तो कुछ उसको सेफ्टी के लिए भी रखना
- 3:45:41होता है। और दूसरा उसके पास ₹500 थे तो
- 3:45:43पूरे चले नहीं जाएंगे। तो एनआईएम आपको यह
- 3:45:47बताता है कि टोटल बैंक ने कितना इंटरेस्ट
- 3:45:50दिया। जैसे इस केस में मान लेते हैं कि
- 3:45:53₹500 आए और उस पे 5% का ब्याज था। यानी
- 3:45:57₹25 टोटल इंटरेस्ट बैंक ने अपने
- 3:46:00डिपॉजिटर्स को दिया और उस ₹500 में से
- 3:46:02बैंक केवल ₹400 ही लोन के रूप में दे
- 3:46:05पाया। ₹100 या तो उसके गए नहीं या उसने
- 3:46:07आरबीआई के पास रिजर्व रखे तो अब अगर ₹400
- 3:46:10को वह 12% ब्याज के हिसाब से देगा यानी
- 3:46:14उसे ₹48 ₹48 इंटरेस्ट मिला। तो अब नेट
- 3:46:19इंटरेस्ट मार्जिन कैसे निकलेगा? ₹25 जो
- 3:46:22उसने टोटल इंटरेस्ट लोगों को दिया इसको आप
- 3:46:25माइनस करेंगे ₹48 में से जो उसको टोटल
- 3:46:29इंटरेस्ट मिला। यानी बैंक की नेट इंटरेस्ट
- 3:46:32इनकम हुई ₹23 के आसपास और नेट इंटरेस्ट
- 3:46:36मार्जिन यही बताता है कि कितना परसेंट
- 3:46:40सारा इंटरेस्ट पे कर देने के बाद बैंक के
- 3:46:42पास कितना मार्जिन बचता है यानी वो
- 3:46:45इंटरेस्ट के रूप में कितना परसेंट पैसा
- 3:46:48बचा पाता है तो HDFC के केस में 4% HDFC
- 3:46:52एक्स्ट्रा बचा पाता है जितने डिपॉजिटर्स
- 3:46:55हैं उन सबको पैसा लौटा देने के बाद और जो
- 3:46:58लोन आगे नहीं गया वो सब इंक्लूड कर देने
- 3:47:00के बाद भी 4% HDFC का नेट इंटरेस्ट
- 3:47:04मार्जिन है। इन जनरल हर ₹100 पे वो ₹4
- 3:47:08कमाता है जो उसके पास डिपॉजिट के रूप में
- 3:47:10है। अब बात करते हैं आरओए यानी कि रिटर्न
- 3:47:12ऑन एसेट्स की। रिटर्न ऑन एसेट जानने से
- 3:47:16पहले यह जानना जरूरी है कि एक बैंक के लिए
- 3:47:18एसेट क्या होता है? और लायबिलिटी क्या
- 3:47:21होता है? तो बैंक के लिए एसेट क्या है? जो
- 3:47:23वो लोनस आगे देता है, जो उसने लोनस दिए
- 3:47:26हुए हैं, जो उसने पैसा बाजार में दिया हुआ
- 3:47:29है, वो उसके लिए एसेट है। क्योंकि उस पे
- 3:47:31उसकी कमाई होती है। और जो डिपॉजिट्स उसने
- 3:47:35लोगों से लिए हुए हैं, आपसे जो उसने करंट
- 3:47:37अकाउंट, सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड
- 3:47:38डिपॉजिट्स लिया हुआ है, वो बैंक के लिए
- 3:47:40डिपॉजिट है। क्योंकि वो उसे लोगों को वापस
- 3:47:43लौटाना है। वो उसने लोगों से उधार लिया
- 3:47:45हुआ है। तो डिपॉजिट्स लायबिलिटीज़ हैं और
- 3:47:48जो एसेट है वो बैंक ने जो लोनस दिए हुए
- 3:47:50हैं वो उसका एसेट है। तो अब कितना रिटर्न
- 3:47:53ऑन एसेट अच्छा है? अगर बैंक ने ₹100 बाजार
- 3:47:58में दिए हुए हैं तो उस पे कितना रिटर्न
- 3:48:00अच्छा है? ऐसा माना जाता है कि मिनिमम 1%
- 3:48:02तो बेंचमार्क है। उतना तो होना ही चाहिए।
- 3:48:05अगर 1% से कम आरओए है तो बैंक चलाने का ही
- 3:48:08क्या मतलब? और अगर कोई 2% के आसपास टच कर
- 3:48:12पाए जैसे HDFC जो 1.83 के आसपास है इसका
- 3:48:16आरओए बहुत ज्यादा अच्छा है। 2% के आसपास
- 3:48:20अगर कोई बैंक पहुंच पाए तो उसे बहुत अच्छा
- 3:48:22माना जाता है। ये एक इंपॉर्टेंट
- 3:48:23क्राइटेरिया है किसी भी बैंक को सेलेक्ट
- 3:48:26करने का। Kotak का देखते हैं 1.69%
- 3:48:29तो जो भी बैंक 2% के आसपास का आरओए ला पा
- 3:48:32रहा है आप उसे बहुत अच्छा मान सकते हैं।
- 3:48:35तो Bन Bank का आरओए 3% से भी ज्यादा दिख
- 3:48:38रहा है। लगभग 4% के आसपास ये बहुत अच्छा
- 3:48:41दिख रहा है। लेकिन BD बैंक का बिजनेस बाकी
- 3:48:44बैंक्स के मुकाबले थोड़ा अलग है। इसे हम
- 3:48:46बाद में डिस्कस करेंगे। इसे आप एक
- 3:48:48एक्सेप्शन मान लीजिए। लेकिन इन जनरल किसी
- 3:48:50भी बैंक का अगर आरओए 2% के आसपास है तो आप
- 3:48:54उसे बहुत अच्छा मान सकते हैं। इसके अलावा
- 3:48:57अब डिस्कस करते हैं कुछ क्वालिटेटिव
- 3:48:59फैक्टर्स भी इन नंबर्स के अलावा क्योंकि
- 3:49:01नंबर्स आपको सब कुछ नहीं बताएंगे। अगर
- 3:49:03नंबर्स से इन्वेस्टिंग करी जा सकती थी तो
- 3:49:05मशीनंस और सॉफ्टवेयर्स सबसे अच्छे
- 3:49:07इन्वेस्टर्स होते। तो कुछ आपको
- 3:49:09क्वालिटेटिव फैक्टर्स भी देखने हैं। जैसे
- 3:49:11एक आपको देखना है कि बैंक की जो लायबिलिटी
- 3:49:14साइड है यानी डिपॉजिट्स जो हैं वो ग्रनुलर
- 3:49:17हो और वेल डवर्सिफाइड हो। इसका मतलब यह है
- 3:49:19कि अगर बैंक के पास ₹1000 हैं तो ऐसा ना
- 3:49:22हो कि केवल दो उसके डिपॉजिटर्स हैं
- 3:49:24जिन्होंने ₹500 ₹500 जमा कर दिए। ऐसा होना
- 3:49:27चाहिए कि अगर ₹1000 हैं तो बैंक के पास
- 3:49:29100 क्लाइंट्स हो जिन्होंने ₹10 ₹1 जमा
- 3:49:31किए हैं ताकि अगर कोई एक दो क्लाइंट
- 3:49:34विथड्रॉ भी करें तो बैंक की स्टेबिलिटी को
- 3:49:36फर्क ना पड़े। इसलिए अच्छी लायबिलिटी साइड
- 3:49:39वो होती है जो ग्रैंडलर और वेल डवर्सिफाइड
- 3:49:42हो। यानी बहुत सारे डिपॉजिटर्स से मिलके
- 3:49:44किसी बैंक की डिपॉजिट बेस बना हो।
- 3:49:47सिमिलरली बैंक ने जो लोन दिया है वो भी
- 3:49:50वेल डवर्सिफाइड अक्रॉस सेगमेंट्स होना
- 3:49:53चाहिए। यानी ऐसा ना हो कि सारा लोन एग्री
- 3:49:55ही एग्री को दे दिया। सारे किसानों को ही
- 3:49:57लोन दे दिया और बारिश अच्छी नहीं हुई तो
- 3:49:59बैंक के एनपीए बढ़ गए। या फिर ऐसा ना हो
- 3:50:01कि सारा ऑटो लोन ही दे दिया। तो ऑटो
- 3:50:03सेक्टर में स्लोडाउन आया तो बैंक को लोन
- 3:50:05बांटने में प्रॉब्लम आ गई। एक बैंक का जो
- 3:50:07लोन बुक है उसमें रिटेल, स्मॉल लोनस,
- 3:50:10हाउसिंग लोनस, ऑटो लोंस, एग्री लोोंस,
- 3:50:12कॉर्पोरेट लोंस हर तरह के लोनस होने
- 3:50:15चाहिए। जिससे किसी एक सेगमेंट में या एक
- 3:50:18सेक्टर में प्रॉब्लम आए तो बैंक की लोन
- 3:50:20बुक बहुत ज्यादा खराब ना हो जाए। तो, यह
- 3:50:22डाटा कि बैंक की लायबिलिटी फ्रेंचाइजी
- 3:50:25कैसी है और लोन फ्रेंचाइजी कैसी है? यह
- 3:50:27आपको कहां मिलेगा? यह आपको मिलेगा यहां
- 3:50:30डॉक्यूमेंट सेक्शन में। यहां पर जब आप
- 3:50:32कंपनी प्रेजेंटेशन ओपन करेंगे तो तो बहुत
- 3:50:35सारे बैंक्स इस तरह की डिटेल अपनी
- 3:50:37इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में देते हैं। जैसे
- 3:50:40देखते हैं HDFC ने अपनी इन्वेस्टर
- 3:50:41प्रेजेंटेशन में क्या-क्या दिया हुआ है।
- 3:50:43यहां इन्होंने पूरा ये क्या प्रोडक्ट्स
- 3:50:45ऑफर करते हैं एज अ बैंक उसकी डिटेल दी हुई
- 3:50:48है। अब ये है उनका बिजनेस मिक्स जिसमें ये
- 3:50:51बता रहे हैं कि टोटल डिपॉजिट्स में से
- 3:50:53कितने रिटेल या बहुत छोटे डिपॉजिट्स हैं
- 3:50:56और कितने होलसेल या फिर बड़े डिपॉजिट्स
- 3:50:59हैं। तो आप देख सकते हैं कि ज्यादातर
- 3:51:00इसमें जो डिपॉजिट्स हैं वो छोटे रिटेल
- 3:51:02डिपॉजिट्स हैं। यानी ग्रैंडलर और वेल
- 3:51:04डायवर्सिफाइड डिपॉजिट्स हैं। एडवांसेस भी
- 3:51:07देखिए 50-50 मार्केट शेयर है। रिटेल लोनस
- 3:51:10भी उतने ही दिए हुए हैं जितने होलसेल लोनस
- 3:51:12दिए हुए हैं। तो ये एक बहुत अच्छी चीज है।
- 3:51:15और एक और दोनों ही सेगमेंट से लगभग बराबर
- 3:51:18प्रॉफिट कमा रहा है HDFC। तो ऐसा नहीं है
- 3:51:20कि एक सेगमेंट को लोन तो बांट रहा है
- 3:51:22लेकिन वहां से प्रॉफिट नहीं आ रहा।
- 3:51:23प्रॉफिट भी दोनों सेगमेंट से आ रहा है इस
- 3:51:26बैंक को। अब इस पेज में यह बैंक बता रहा
- 3:51:28है कि डिपॉजिट्स किस तरह के हैं? टाइम
- 3:51:30डिपॉजिट्स यानी एफडी कितनी है? सेविंग्स
- 3:51:32अकाउंट कितने हैं? और करंट अकाउंट कितने
- 3:51:34हैं? कासा रेशो क्या इंप्रूव हुआ है या
- 3:51:37बुरा हुआ है? उसमें कासा में भी करंट और
- 3:51:40बेटर होता है। इस पे आपको 0% इंटरेस्ट
- 3:51:42देना है। तो वो कितना है और सेविंग्स
- 3:51:44कितना है? एवरेज सेविंग बैलेंस पर अकाउंट
- 3:51:47क्योंकि अकाउंट तो कई बैंक खोल देते हैं।
- 3:51:49लेकिन एवरेज बैलेंस उस अकाउंट में कितना
- 3:51:51होता है? इस मामले में HDFC वन ऑफ द बेस्ट
- 3:51:53बैंक्स है। लगभग 7075,000 का एवरेज बैलेंस
- 3:51:56पर अकाउंट का फिगर आ रहा है जो बहुत अच्छा
- 3:51:59है। यहां पे कॉस्ट ऑफ डिपॉजिट्स आप देखिए
- 3:52:02कि कैसे बैंक जो इंटरेस्ट अपने कस्टमर्स
- 3:52:05को देता है वो कम हुआ है 2017 के मुकाबले।
- 3:52:08जब उनको 5.3% का एवरेज इंटरेस्ट देना
- 3:52:11पड़ता था जो अब 5% के आसपास है। और नेट
- 3:52:15इंटरेस्ट मार्जिन मेंटेन हुआ है। जरा सा
- 3:52:17कम हुआ है लेकिन कुछ खास नहीं। तो बैंक
- 3:52:19अच्छे मार्जिनस भी कमा रहा है। तो वो सारी
- 3:52:22इंफॉर्मेशन जो बैंक की क्वालिटी के बारे
- 3:52:24में आपको जानने के लिए जरूरी है वो यहां
- 3:52:27आपको मिल जाती है। इसके अलावा एक और
- 3:52:29इंपॉर्टेंट फैक्टर किसी बैंक को जज करने
- 3:52:31का वो ये है कि डिपॉजिट से अनरिलेटेड इनकम
- 3:52:35या नॉन इंटरेस्ट इनकम बैंक कितना कमाता
- 3:52:38है? जैसे लॉकर फी से वो कितना कमा रहा है?
- 3:52:41क्रेडिट कार्ड की फी से कितना कमा रहा है?
- 3:52:43अदर जो बैंकिंग चार्जेस होते हैं कोई और
- 3:52:45प्रोडक्ट किसी का इंश्योरेंस बेच के
- 3:52:47म्यूच्यूल फंड बेच के लाइफ इंश्योरेंस ऑटो
- 3:52:50लोन बेच के ये सारे अदर प्रोडक्ट्स जो
- 3:52:52बैंक बेचता है उसको बेच के बैंक कितना
- 3:52:56पैसा कमा रहा है तो जैसे HDFC की टोटल
- 3:52:59रेवेन्यू में से डिपॉजिट से अनरिलेटेड
- 3:53:02इनकम या नॉन फंड रेवेन्यू है 27% जो बैंक
- 3:53:05का कोर काम है लोन बांटना डिपॉजिट लेना
- 3:53:08उसको छोड़ के 27% पैसा वो इन सब चीजों से
- 3:53:12कमा रहा जिसमें से ज्यादातर है फी एंड
- 3:53:15कमीशन। कुछ डेरिवेटिव्स इन अदर जिसमें से
- 3:53:1878% फी और कमीशन है वेरियस प्रोडक्ट्स को
- 3:53:21बेचने की या इशू करने की। उसके बाद यहां
- 3:53:24आपको दिखेगा कि बैंक के एनपीएस कैसे कम या
- 3:53:26ज्यादा हुए हैं। तो पिछले 3 साल में HDFC
- 3:53:29ने अपने एनपीएस मेंटेन करके रखे हैं। हां
- 3:53:32ग्रॉस एनपीएस थोड़े से बढ़े हैं। तो इस
- 3:53:34तरह की सारी जरूरी डिटेल्स जो आपको एक
- 3:53:37बैंक को अच्छे से जानने के लिए चाहिए वो
- 3:53:40आपको इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में मिल जाएगी
- 3:53:42और हर बैंक की आपको इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन
- 3:53:45tiker.inology.in
- 3:53:47पर मिल जाएगी। जैसे यहां पे ये बता रहे
- 3:53:49हैं कि कितने क्रेडिट कार्ड और कितने
- 3:53:51डेबिट कार्ड इशू हुए हैं और यहां से हमको
- 3:53:53ये भी पता चल रहा है कि क्रेडिट कार्ड में
- 3:53:55HDFC मार्केट लीडर है। इस तरह की बहुत
- 3:53:58सारी जरूरी इंफॉर्मेशन आपको इन्वेस्टर
- 3:54:00प्रेजेंटेशन में मिल जाएगी। तो अब जानते
- 3:54:03हैं कि एक बैंक को आपको वैल्यू कैसे करना
- 3:54:05है और यही आपका होमवर्क भी है। आई एम
- 3:54:07श्योर आपको बहुत मजा आएगा। 810 बड़े
- 3:54:09प्राइवेट बैंक्स की आप लिस्ट बनाइए एक
- 3:54:11एक्सेल शीट में। उसके बाद आप ये सारे
- 3:54:14कॉलम्स बनाइए। पहला कॉलम आप बनाइए पीबी
- 3:54:18रेशो का सेकंड कॉलम कासा का तीसरा आरओई का
- 3:54:22चौथा आप बनाइए आरओए का फिफ्थ एनपीए का
- 3:54:26सिक्स्थ एनआईएम का सेवंथ कैपिटल एडिक्वसी
- 3:54:30का एट्थ एडवांसेस ग्रोथ का तो एक के नीचे
- 3:54:33एक आपने 8-10 बैंक लिख लिए उसके बाद इन
- 3:54:36सबके लिए आप ये आठ कॉलम्स बनाइए फिर आप इन
- 3:54:39आठों कॉलम्स में डालिए जो उस बैंक की फिगर
- 3:54:42है जैसे HDFC का एनपीए दिख रहा है मुझे
- 3:54:450.39% ये HDFC के बाजू में लिखिए। एनपीए
- 3:54:48के कॉलम में एनआईएम लिखिए। ये सारी आठों
- 3:54:51फिगर्स उन 810 बैंक्स के लिए लिखिए। उसके
- 3:54:55बाद आपको अपने आप समझ में आ जाएगा कि कौन
- 3:54:58से ऐसे दो-तीन बैंक्स हैं जो ज्यादातर
- 3:55:01पैराटर्स में जिनका आरओई भी सबसे अच्छा
- 3:55:03है, एनपीए भी सबसे अच्छा है, एनआईएम भी
- 3:55:05सबसे अच्छा है। ऐसे तीनचार बैंक्स आपको
- 3:55:08अपने आप मिल जाएंगे। उसके बाद जब आपको यह
- 3:55:11तीनचार बैंक्स मिल गए जो लगभग हर पैरामीटर
- 3:55:14में जिसमें ग्रोथ एडवांसेस ग्रोथ भी अच्छी
- 3:55:16है, कैपिटल एडिक्वसी भी अच्छी है। ऐसे मिल
- 3:55:18जाए तो उन तीनचार बैंक्स के आप
- 3:55:21वैल्यू्यूएशन को कंपेयर करिए। यानी इसको
- 3:55:25प्राइस टू बुक वैल्यू को आप कंपेयर करिए
- 3:55:27और कंपेयर करिए उनका आरओई और आरओए। आप
- 3:55:32देखिए कि क्या कोई ऐसा बैंक है जो हर
- 3:55:34पैरामीटर में बहुत अच्छा है। लेकिन फिर भी
- 3:55:37उसका प्राइस टू बुक रेशियो बाकी बैंक्स से
- 3:55:39कम है। उसका आरओई बाकियों से ज्यादा है।
- 3:55:42उसका आरओए बाकियों से ज्यादा है और बाकी
- 3:55:44सारे पैराटर्स में भी वो बाकियों से
- 3:55:46ज्यादा है। लेकिन उसका पीबी रेशियो
- 3:55:49बाकियों से कम है। अगर आपको कोई ऐसा बैंक
- 3:55:52मिलता है तो ज्यादातर चांसेस ये हैं कि
- 3:55:54आपने एक अंडरवैल्यूड बैंक को ढूंढ लिया
- 3:55:56है। लेकिन यहां एक बात का ध्यान रखिए
- 3:55:58इन्वेस्टिंग इतनी आसान नहीं है। अगर आपको
- 3:56:01कोई बैंक बहुत ही अंडरवैल्यूड दिख रहा है
- 3:56:03तो दो-तीन चीजें हो सकती हैं। आप उस बैंक
- 3:56:06के बारे में न्यूज़ में सर्च करिए। Google
- 3:56:09सर्च करिए कि HDFC Bank अगर आपको लग रहा
- 3:56:12है कि अंडरवैल्यूड है तो जानने की कोशिश
- 3:56:14करिए कि कहीं आप कुछ मिस तो नहीं कर रहे
- 3:56:16तो देखिए HDFC Bank एनपीए प्रॉब्लम्स HDFC
- 3:56:20Bank प्रोविज़ंस ऐसे करके सर्च करिए
- 3:56:22नेगेटिव चीजें HDFC बैंक के बारे में
- 3:56:24जिससे हो सकता है आपको कोई ऐसी चीज पता चल
- 3:56:27जाए जो आपको इन नंबर्स में नहीं दिख रही
- 3:56:29लेकिन वो एक नेगेटिव फैक्टर है जिसके कारण
- 3:56:32उस बैंक को अंडरवैल्यूड माना जा रहा है।
- 3:56:34आल्सो आपको यह भी देखना है टकर हो या कोई
- 3:56:36भी और वेबसाइट हो उसमें ज़्यादातर डाटा जो
- 3:56:39आपको दिख रहा है वह 2019 की बैलेंस शीट जो
- 3:56:42जुलाई अगस्त में आई होगी उस डाटा का दिख
- 3:56:45रहा है और हो सकता है पिछले 6 आठ महीनों
- 3:56:48में जो आपको डाटा दिख रहा है उसमें बहुत
- 3:56:50चेंज आ गया हो या वो बैंक अब काफी बदल गया
- 3:56:53हो जिस कारण काफी गिर गया हो जैसा हमने
- 3:56:55Yes बैंक में देखा कि साल भर में उस बैंक
- 3:56:57में सब कुछ ही बदल गया जैसा हमने Indusind
- 3:56:59बैंक में देखा कि वो 1/4 हो गया है लगभग
- 3:57:027075% % गिर चुका है क्योंकि काफी एसेट
- 3:57:05प्रॉब्लम्स आई है उस बैंक में। तो एक बार
- 3:57:08जब आप इस कैलकुलेशन को जो मैंने बताया उसे
- 3:57:11देख लें और आपको कोई लगे कि कोई बैंक
- 3:57:13अंडरवैल्यूड है तो फिर न्यूज़ देखिए पिछले
- 3:57:16तीन महीने पिछले चार छ महीनों में क्या
- 3:57:18हुआ है उस बैंक में? क्या कुछ बहुत ज्यादा
- 3:57:20नेगेटिव हुआ है? अगर आपको फिर भी लगता है
- 3:57:23कि कुछ भी नेगेटिव नहीं हुआ है तो मतलब आप
- 3:57:26अच्छी रिसर्च करना सीख रहे हैं। उसके बाद
- 3:57:29काम यहां भी खत्म नहीं होता है। आपको
- 3:57:31देखना है कि कोई मैनेजमेंट में चेंजेस तो
- 3:57:33नहीं आए हैं। बैंक का चेयरमैन तो नहीं बदल
- 3:57:35गया। शेयर होल्डिंग तो नहीं बदल गई। कुछ
- 3:57:37ऐसा नेगेटिव जो आप मिस कर रहे हो। कहीं
- 3:57:40ऐसा तो कुछ नहीं हुआ है। तो इस तरीके से
- 3:57:43पिक किया जाता है बैंक्स को। अभी भी यह
- 3:57:46पूरी तरह से थरो वीडियो नहीं है। हम जब
- 3:57:48बैलेंस शीट को इन डिटेल्ड एनालाइज़ करना
- 3:57:50सीखेंगे और कुछ और एस्पेक्ट्स बचे हैं
- 3:57:53जिन्हें हम इन डिटेल्ड आगे के वीडियोस में
- 3:57:55सीखेंगे। उसके बाद आप मान सकेंगे कि आपने
- 3:57:58बैंक को एनालाइज करना पूरी तरीके से सीख
- 3:58:00लिया है। लेकिन आज आपने इतना जरूर सीख
- 3:58:02लिया है कि आप अपनी रिसर्च को शुरू कर
- 3:58:04सकें। तो आज हम डिस्कस करेंगे कि कैसे आप
- 3:58:07सही बैंक स्टॉक को सेलेक्ट कर सकते हैं।
- 3:58:09बैंकिंग स्टॉक्स को कैसे ढूंढना है। हम
- 3:58:11में से अक्सर लोग कंफ्यूज होते हैं ना कि
- 3:58:14कौन से सेक्टर की कौन सी कंपनी को लिया
- 3:58:16जाए। जैसे अगर आपने सोच लिया है कि आईटी
- 3:58:18सेक्टर में निवेश करना है तो ये बहुत बड़ा
- 3:58:20कंफ्यूजन होता है कि Infosys में करें,
- 3:58:22TCS में करें, HCL में करें या किसी और
- 3:58:25में करें। अगर आपने फार्मा कंपनी लेने का
- 3:58:27सोचा है तो Sun Farma लें, CDL लें,
- 3:58:29Glenmark लें, कौन सी कंपनी लें, लूपिन
- 3:58:32लें? तो आज इस वीडियो के जरिए मैं आपको यह
- 3:58:35बताऊंगा कि कैसे आप जो सेक्टर चाहे चुने
- 3:58:39और इस तरीके से जो मैं इस वीडियो में
- 3:58:41डिस्कस करने वाला हूं उससे आप बहुत आसानी
- 3:58:43से उस सेक्टर की द बेस्ट कंपनी आइडेंटिफाई
- 3:58:47कर पाएंगे। उसमें निवेश कर पाएंगे।
- 3:58:49बैंकिंग सेक्टर के एग्जांपल से समझाता हूं
- 3:58:51कि कैसे आप किसी भी सेक्टर में कंपनीज़ को
- 3:58:55आइडेंटिफाई, एनालाइज, डिफरेंशिएट कर सकते
- 3:58:57हैं और बेस्ट पिक अपने लिए डिसाइड कर सकते
- 3:59:00हैं। मैं बैंकिंग सेक्टर का एग्जांपल ले
- 3:59:02रहा हूं लेकिन tiker.inology.in
- 3:59:05को आप यूज़ करके किसी भी सेक्टर में इस
- 3:59:07तरीके को अपना सकते हैं। तो चलिए हम शुरू
- 3:59:10कर रहे हैं HDFC बैंक से। लेकिन शुरू करने
- 3:59:12के पहले एक बात का ध्यान रखिए कि आज जो
- 3:59:14मैं फीचर्स बताने वाला हूं वो आप भी यूज़
- 3:59:16करें। इसके लिए जरूरी है कि आप Tiker P को
- 3:59:19सब्सक्राइब कर लें या उसका ट्रायल ले लें
- 3:59:21जिससे आपको वो फीचर्स मिल जाएंगे जो मैं
- 3:59:24आज यूज करने वाला हूं। तो Ter P का ट्रायल
- 3:59:27या सब्सक्राइब इसे कर लीजिएगा। ये टूल्स
- 3:59:29अवेलेबल रहेंगे। अब चलते हैं प्रॉफिट एंड
- 3:59:31लॉस स्टेटमेंट पे। अब एक सिंपल चीज समझिए
- 3:59:35कि कोई कंपनी है जो ₹100 का माल बेचती है।
- 3:59:38कोई कंपनी है जो ₹500 की सेल्स करती है।
- 3:59:41कोई है जो ₹2000 की सेल्स करती है। तो
- 3:59:43अलग-अलग साइजेस की कंपनी होती है। HDFC
- 3:59:46बैंक देश का सबसे बड़े बैंक्स में से एक
- 3:59:48है। IDFC फर्स्ट बैंक अभी छोटा है, नया
- 3:59:50है। तो अलग-अलग साइज की कंपनीज़ हैं।
- 3:59:53इसीलिए इनका प्रॉफ़िट एंड लॉस स्टेटमेंट भी
- 3:59:55अगर हम देखें तो HDFC बैंक क्योंकि बड़ा
- 3:59:58बैंक है तो यह ₹600 60000 करोड़ इंटरेस्ट
- 4:00:02कमा रहा था 2016 में जो अब बढ़ के ₹1 लाख
- 4:00:06करोड़ से भी ज्यादा का हो गया है इंटरेस्ट
- 4:00:08कमाना वहीं अगर हम IDFC को देखें नया बैंक
- 4:00:12है छोटा बैंक है तो यह 3000 करोड़ से
- 4:00:14ज्यादा का इंटरेस्ट कमा रहा था जो अब
- 4:00:16बढ़के 15000 करोड़ हो गया है तो यानी काफी
- 4:00:19छोटा बैंक है तो अगर इनका हम प्रॉफिट िट
- 4:00:22कंपेयर करेंगे तो उसमें भी बहुत फर्क होगा
- 4:00:25क्योंकि साइज डिफरेंट है। इसीलिए यह जरूरी
- 4:00:28होता है कि हम एक इंडस्ट्रीज की कंपनी को
- 4:00:31एक पैरामीटर पे जज करें। यानी यह मान लें
- 4:00:34कि अगर सारी कंपनियां साल की ₹100 का
- 4:00:37सेल्स कर रही हैं। ₹100 पे वो कितना
- 4:00:40मुनाफा कमाती है। ₹100 पे वो कितना खर्चा
- 4:00:44करती है अपने एक्सपेंसेस स्टाफ पे ऑफिस
- 4:00:46पे? ₹100 पे वो कितना डेप्रिसिएशन लगाती
- 4:00:50है? ₹100 पे वो कितने टैक्सेस देती है।
- 4:00:52यानी हर कंपनी को हम यह मान लें कि वो
- 4:00:56₹100 की सेल करती है। उस ₹100 पे वो कितना
- 4:00:59मुनाफा कमाती है। इसका हम एनालिसिस करें
- 4:01:02ताकि हम साइज डिफरेंस को हटा दें और यह
- 4:01:05मान लें कि हर कंपनी बराबर है। हर कंपनी
- 4:01:08₹100 की सेल्स करती है। लेकिन ज्यादा बड़ा
- 4:01:11मुद्दा यहां पे यह है कि वो ₹100 की सेल्स
- 4:01:13के पैसे जो उसको मिलते हैं उस ₹100 को वो
- 4:01:17कैसे यूज करती है। हमको ये नहीं देखना है
- 4:01:20एक एनालिसिस के समय कि वो कितने रुपए का
- 4:01:22माल बेचती है। हमको ये देखना है कि जो
- 4:01:24पैसे माल बेच के उसके पास आते हैं उसको वो
- 4:01:27कितने अच्छे से यूज करती है। क्योंकि जो
- 4:01:30आज छोटा है अगर वो ₹100 की सेल्स से आए
- 4:01:33हुए पैसे को अच्छे से यूटिलाइज करेगा तो
- 4:01:35कल को बड़ा हो जाएगा। तो हमको कल के
- 4:01:38विनर्स को ढूंढना है। कल के विनर्स आज हम
- 4:01:40पता लगा सकते हैं अगर हम देखें कि वो अपने
- 4:01:43रिसोर्सेज कितने एफिशिएंटली यूज कर रहे
- 4:01:45हैं। इसी के लिए होता है कॉमन साइज
- 4:01:48स्टेटमेंट। तो चलिए अब समझते हैं। ये है
- 4:01:50HDFC का प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट। और ये
- 4:01:53जो पर्पल बॉक्स में आप पर्पल कलर से
- 4:01:56परसेंटेज में फिगर्स देख रहे हैं, यही है
- 4:01:58कॉमन साइज स्टेटमेंट। जैसा मैंने बताया कि
- 4:02:01हम मानते हैं कि टोटल सेल्स ₹100 की हुई।
- 4:02:05तो हमेशा कॉमन साइज स्टेटमेंट को परसेंटेज
- 4:02:08में डिनोट किया जाता है। यहां पर 100%
- 4:02:10इंटरेस्ट अर्नड है। अब इंटरेस्ट अर्न क्या
- 4:02:13है? आराम से समझिएगा। बहुत धीरे-धीरे
- 4:02:15बेसिक्स से मैं समझाऊंगा और मुझे विश्वास
- 4:02:17है कि इस वीडियो के एंड तक कॉमन साइज
- 4:02:19स्टेटमेंट का यूज़ यूटिलिटी एनालिसिस आपको
- 4:02:22क्लियर हो जाएगा। पहले जान लेते हैं
- 4:02:24इंटरेस्ट अर्नड क्या होता है? तो इंटरेस्ट
- 4:02:26अर्नड यानी बैंक ने जो लोनस बांटे, जो
- 4:02:30क्रेडिट कार्ड्स बांटे यानी हर तरीके से
- 4:02:32जहां से भी बैंक ने इंटरेस्ट कमाया उसे
- 4:02:35कहते हैं इंटरेस्ट अर्नड। अब क्योंकि
- 4:02:38इंटरेस्ट पे पैसा देना बैंक की कोर
- 4:02:41एक्टिविटी है। इसीलिए हमने उसे बेस लिया
- 4:02:44है। जो 100% सबसे ऊपर फिगर रहती है। आप यह
- 4:02:48मान सकते हैं कि वो बेस है। अब बैंक का
- 4:02:51क्योंकि कोर ऑपरेशन लोनस बांटना है। उस पे
- 4:02:54इंटरेस्ट कमाना है। तो इस तो बैंक्स पे
- 4:02:56हमने बेस इंटरेस्ट अर्न लिया है। अलग-अलग
- 4:02:59सेक्टर में आप प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट
- 4:03:02में हम देखेंगे कि हमने बेस अलग-अलग लिया
- 4:03:04है। डिपेंडिंग उस इंडस्ट्री में क्या ठीक
- 4:03:06है। अब हम जानते हैं अदर इनकम क्या है?
- 4:03:10यह वो इनकम है जो बैंक इंटरेस्ट के अलावा
- 4:03:14बाकी तरीकों से कमाता है। जैसे लॉकर की
- 4:03:16फीस हो गया, कोई और तरह का फीस हो गया,
- 4:03:18म्यूच्यूल फंड इंश्योरेंस बेचने पे कोई
- 4:03:20कमीशन आ गया तो वो अदर इनकम है। अब हम
- 4:03:24यहां पे यह देख रहे हैं कि यह 17% था जो
- 4:03:27इस साल बढ़ के 20% के आसपास हो गया है। या
- 4:03:30नहीं इससे हमको क्या पता चल रहा है कि अगर
- 4:03:33HDFC बैंक ₹100 इंटरेस्ट के कमाता है तो
- 4:03:38लगभग ₹20 वो दूसरे तरीकों से नॉन कोर
- 4:03:42एक्टिविटीज से कमाता है। यानी वो फीस लेके
- 4:03:45कमीशन लेके कमाता है। तो HDFC बैंक को
- 4:03:48पैसे कैसे मिलते हैं? लगभग ₹100 उसको
- 4:03:51मिलते हैं इंटरेस्ट से और लगभग ₹20 मिलते
- 4:03:54हैं उसको फीस चार्ज करके या कमीशन चार्ज
- 4:03:58करके। अब ये तो हमने देखा कि HDFC बैंक
- 4:04:01कमाता कैसे है। अब खर्चा इंटरेस्ट
- 4:04:04एक्सपेंडेड यानी इंटरेस्ट वो कितना देता
- 4:04:07है? किसको इंटरेस्ट देगा? एफडी पे
- 4:04:09इंटरेस्ट, सेविंग्स अकाउंट पे इंटरेस्ट,
- 4:04:11करंट अकाउंट में अगर ऑटो स्वीप है तो उस
- 4:04:13पे इंटरेस्ट। तो और यह कितना होता है? यह
- 4:04:16एक अंदाजा अब आपको देगा कि ₹100 अगर HDFC
- 4:04:18बैंक को मिलते हैं अपने कस्टमर से
- 4:04:20इंटरेस्ट के रूप में जिसको HDFC ने लोन
- 4:04:23दिया है। अगर लोन से वो ₹100 कमा रहा है
- 4:04:26तो डिपॉजिटर्स को उसको लगभग उसका आधा देना
- 4:04:29पड़ रहा है। यानी आप यह समझ सकते हैं रफली
- 4:04:33कि HDFC बैंक अगर आप HDFC बैंक के पास
- 4:04:35जाके पैसा जमा करते हैं तो आपको 3% का
- 4:04:38इंटरेस्ट मिलता है और उस पे HDFC बैंक आगे
- 4:04:42जो लोन बांटता है उस पे पैसे कमाता है और
- 4:04:46काफी ज्यादा कमाता है क्योंकि अगर ₹100
- 4:04:50बैंक इंटरेस्ट इनकम कमा रहा है तो केवल
- 4:04:52₹50 उसको देने पड़ रहे हैं जिससे उसने
- 4:04:56पैसे लिए थे। तो जरा सोचिए इससे हम
- 4:04:58बैंकिंग बिजनेस भी समझ पा रहे हैं कि HDFC
- 4:05:01लोगों के पैसे पर कमा रहा है लेकिन लोगों
- 4:05:03को उसको केवल देने पड़े 58000 करोड़ और उस
- 4:05:0758000 करोड़ पे उसने इंटरेस्ट कमाया
- 4:05:11144000
- 4:05:12करोड़ तो HDFC बैंक लोगों के पैसे पे
- 4:05:16कितने अच्छे से इंटरेस्ट कमा रहा है और
- 4:05:18उसको केवल आधा पैसा अपने डिपॉजिटर्स को
- 4:05:21देना पड़ रहा है। इसके बाद हम बात करते
- 4:05:24हैं ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस की। यह क्या है?
- 4:05:26ऑफिस चलाने का खर्चा, ब्रांच का रेंट,
- 4:05:29लोगों की सैलरी, बिजली का बिल, हर वह चीज़
- 4:05:32जो एक बिजनेस चलाने में खर्चा आता है, वह
- 4:05:34है ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस। इसकी आप डेफिनेशन
- 4:05:37यहां देख भी सकते हैं। यह HDFC बैंक जो
- 4:05:40अपने कोर ऑपरेशन से कमाता है अगर ₹100
- 4:05:42कमाता है तो लगभग ₹26 उसके इन खर्चों में
- 4:05:46चले जाते हैं। अब देखिए ₹100 वो कमाया लोन
- 4:05:50से जिसमें से ₹51 तो उसको देने पड़ गए
- 4:05:53जिससे उसने डिपॉजिट लिया था और लगभग बाकी
- 4:05:56₹26 उसे खर्च करने पड़ गए सेल्स में,
- 4:05:59सैलरी में, रेंट में ये सब खर्चा हो गया
- 4:06:02उसका। अब इसके बाद आती है प्रोविजंस।
- 4:06:06प्रोविजंस यानी यह वो लोन है जो बैंक को
- 4:06:09डाउटफुल लगता है कि यह वापस आएगा कि नहीं।
- 4:06:11मैंने किसी को ₹10 लोन दिया। अब मेरे को
- 4:06:14डाउट है कि यह पैसा वापस आएगा कि नहीं तो
- 4:06:17उसके लिए मैं यहां प्रोविजंस बना दूंगा।
- 4:06:19तो अगर ₹100 मैं लोन बांटता हूं तो लगभग
- 4:06:2310 तो अगर ₹100 मेरे को इंटरेस्ट इनकम
- 4:06:28मिलती है उसमें से वो इनकम में से लगभग
- 4:06:31उसका 10% के मेरे को प्रोविजंस बना देने
- 4:06:34पड़ते हैं। यह जितना ज्यादा होगा उससे यह
- 4:06:37पता चलता है कि बैंक की लेंडिंग हैबिट्स
- 4:06:40या बैंक लोन देने में उतना बुरा है। तो
- 4:06:43अभी हमने HDFC बैंक का देखा कि ये 10% है
- 4:06:45ऑफ इंटरेस्ट इनकम। इसके बाद आता है
- 4:06:48प्रॉफिट बिफोर टैक्स। तो यह लगभग इंटरेस्ट
- 4:06:52कितना मिलता है उसके मुकाबले 31% है। उसके
- 4:06:56बाद आता है प्रॉफिट बिफोर टैक्स। तो लगभग
- 4:06:58अगर ₹100 मैं इंटरेस्ट कमाता हूं तो ₹31
- 4:07:02के आसपास मेरा प्रॉफिट होता है टैक्स के
- 4:07:04पहले। लेकिन उसमें से ₹9 मुझे लगभग टैक्स
- 4:07:07देना पड़ता है और अल्टीमेटली मेरा नेट
- 4:07:10प्रॉफिट बचता है 22 23% के आसपास और यह
- 4:07:13इंप्रूव हुआ है। पहले ये 20.4 था। अब यह
- 4:07:17लगभग 23 के पास होने वाला है। तो अब सोचिए
- 4:07:20₹100 मैं इंटरेस्ट से कमाता हूं। ₹20 मैं
- 4:07:24फीस कमीशन से कमाता हूं। यह हुआ 120 और
- 4:07:27उसमें से बचते हैं केवल ₹22 मेरे पास एज
- 4:07:31प्रॉफिट। यह था HDFC बैंक का प्रॉफिट एंड
- 4:07:34लॉस का कॉमन साइज एनालिसिस। बैलेंस शीट
- 4:07:37एनालिसिस भी है। लेकिन पहले हम एक दूसरा
- 4:07:39बड़ा बैंक देखते हैं जो Axis बैंक है।
- 4:07:43इनके पीएनएल स्टेटमेंट में जाते हैं। अब
- 4:07:45यहां पहला फर्क देखिए कि Axis बैंक की अदर
- 4:07:48इनकम उनके इंटरेस्ट के मुकाबले लगभग 25%
- 4:07:52है। HDFC के केस में वो 20% थी। यानी Axis
- 4:07:56Bank अच्छा है लोगों से फीस वसूलने में।
- 4:07:59चाहे वो इंश्योरेंस बेचना हो तो कमीशन मिल
- 4:08:01रहा है। म्यूच्यूल फंड बेचना हो, लॉकर फीस
- 4:08:03हो, अदर चार्जेस हो। इस चीज में Axis Bank
- 4:08:07अच्छा है। नॉन कोर एक्टिविटीज से वह
- 4:08:09ज्यादा पैसा निकाल पाता है HDFC के
- 4:08:12मुकाबले। अब अगर ₹100 उसको इंटरेस्ट आता
- 4:08:16है तो उसमें से ₹60 उसको अपने डिपॉजिटर्स
- 4:08:19को देना पड़ता है। यानी डिपॉजिटर्स को
- 4:08:22Axis बैंक अट्रैक्ट करने के लिए ज्यादा
- 4:08:25इंटरेस्ट देता है। HDFC का यह खर्चा अगर
- 4:08:28वह ₹100 कमा रहा है तो उसमें से केवल ₹51
- 4:08:31₹51 उसे डिपॉज़िटर्स को देना रहता था।
- 4:08:34लेकिन Axis को ₹60 देना पड़ रहा है। यानी
- 4:08:37कोर बैंकिंग में HDFC बेटर है। नॉन कोर
- 4:08:41बैंकिंग में Axis बैंक बेटर है। ऑपरेटिंग
- 4:08:44एक्सपेंसेस स्टाफ का खर्चा ऑफिस का खर्चा
- 4:08:46लगभग सेम है। इनका 27% है 27 HDFC का 26।
- 4:08:50ये यूजुअली सिमिलर ही रहता है क्योंकि
- 4:08:52रेंटल सिमिलर रहेंगे। स्टाफ के खर्चे
- 4:08:54सिमिलर रहेंगे। अब हम आते हैं प्रोविज़ंस
- 4:08:57पे। यहां यह सबसे बड़ा डिफरेंशिएटिंग
- 4:09:00फैक्टर है। HDFC को अगर उनकी इंटरेस्ट
- 4:09:03इनकम ₹100 है तो प्रोविजंस उसके मुकाबले
- 4:09:07केवल ₹10 10% होता था। लेकिन Axis बैंक को
- 4:09:11अपनी इंटरेस्ट इनकम के कंपैरिजन में उसका
- 4:09:1430% एज प्रोविजंस बनाना पड़ता है। यानी
- 4:09:18Axis बैंक की लेंडिंग हैबिट्स HDFC जितनी
- 4:09:21अच्छी नहीं है। बड़ा हिस्सा जो वो
- 4:09:24इंटरेस्ट से कमाते हैं उसके मुकाबले उनको
- 4:09:26प्रोविजंस में रखना पड़ता है। जिस कारण
- 4:09:30इनका नेट प्रॉफिट केवल 2.5% के आसपास रहा
- 4:09:33और ये 2018 में भी कम हुआ था। 2016 में ये
- 4:09:37अच्छा था। लेकिन पिछले 4 साल यह अच्छा
- 4:09:40नहीं रहा है। अब हम देखते हैं एक नए बैंक
- 4:09:43की क्या हालत है। IDFC फर्स्ट बैंक अगर
- 4:09:47इनको ₹100 का इंटरेस्ट मिलता है तो उसके
- 4:09:49मुकाबले यह फी इनकम काफी कम ले पाते हैं।
- 4:09:52सिर्फ 10% के आसपास क्योंकि IDFC फर्स्ट
- 4:09:55बैंक के पास एक तो खुद के प्रोडक्ट्स नहीं
- 4:09:57है। बहुत ज्यादा वो खुद का म्यूच्यूल फंड,
- 4:09:59इंश्योरेंस, खुद का क्रेडिट कार्ड यह नहीं
- 4:10:01बेच पाते। उस कारण अदर इनकम मार खाती है।
- 4:10:04इसके अलावा इनको डिपॉजिटर्स को अट्रैक्ट
- 4:10:08करने के लिए ज्यादा इंटरेस्ट भी देना
- 4:10:09पड़ता है। हम यह देखते हैं कि IDFC के
- 4:10:11काफी ऐड वेड चलते हैं। जिस कारण जो ₹100
- 4:10:14आते हैं उसमें से ₹65 के आसपास तो इनको
- 4:10:17डिपॉजिटर्स को देने पड़ जाते हैं। यह पहले
- 4:10:19और ज्यादा था। 76 76 79
- 4:10:24धीरे-धीरे यह थोड़ा ठीक हुआ है। लेकिन
- 4:10:26पहले ₹100 अगर यह कमाते थे तो ₹80
- 4:10:29डिपॉजिटर्स को दे देते थे। तो बहुत कम
- 4:10:31इनके लिए बचता था। इसके बाद इनके ऑपरेटिंग
- 4:10:35एक्सपेंसेस भी ज्यादा हैं। हालांकि
- 4:10:37क्योंकि ये एक्सपैंड कर रहे हैं। इनकी
- 4:10:39ब्रांचेस नई है और कई सारे नए खर्चे होते
- 4:10:42हैं ब्रांच को सेटअप करने में। मार्केटिंग
- 4:10:43एग्रेसिवली करनी पड़ती है। तो उस कारण हो
- 4:10:46सकता है ये प्रोविजन ज्यादा हो। हालांकि
- 4:10:48उसे कैपिटलाइज करके बैलेंस शीट में डाला
- 4:10:50जाता होगा लेकिन फिर भी कुछ एक्सपेंसेस
- 4:10:52होते हैं जो ज्यादा होते हैं। तो इसे
- 4:10:54क्योंकि ये नया एक्सपेंडिंग बैंक है तो हम
- 4:10:56इसे इग्नोर कर सकते हैं। इसके लिए इन्हें
- 4:10:58माफ कर सकते हैं। अब प्रोविजंस की बात तो
- 4:11:01देखिए प्रोविजंस इनके भी हालांकि एक्सेस
- 4:11:04से कम है इस साल लेकिन HDFC से काफी
- 4:11:06ज्यादा है। यानी इनकी लेंडिंग हैबिट्स भी
- 4:11:09HDFC जितनी अच्छी नहीं है। और इस कारण से
- 4:11:12क्योंकि इनको डिपॉज़िटर्स को खूब सारा पैसा
- 4:11:15देना पड़ता है। इनके ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस
- 4:11:16ज्यादा हैं। उस कारण ये बैंक अभी लॉसेस
- 4:11:20में है। तो अभी तक हम यह एनालाइज कर पाए
- 4:11:23कि इंटरेस्ट अगर कोर बैंकिंग की बात है तो
- 4:11:26HDFC को पैसा काफी सस्ते पर मिलता है। लोग
- 4:11:29कम इंटरेस्ट में भी वहां पैसा डिपॉजिट कर
- 4:11:31देना चाहते हैं। जिस कारण इनको लोगों को
- 4:11:34इंटरेस्ट देने का खर्चा कम है। वहीं यह
- 4:11:38लोग लोनस देते भी बहुत अच्छा है। इनका
- 4:11:40पैसा डूबता नहीं है। जिस कारण इनको
- 4:11:42प्रोविजंस कम बनाने पड़ते हैं। Axis Bank
- 4:11:44एक चीज में अच्छा है। नॉन बैंकिंग इनकम
- 4:11:47में यानी कि यह कस्टमर्स को कमीशन में
- 4:11:49प्रोडक्ट्स अच्छे से बेच पाते हैं। उनसे
- 4:11:50बहुत सारे तरह की फीस ले पाते हैं। लेकिन
- 4:11:53कोर बैंकिंग में अच्छा नहीं है। इनको काफी
- 4:11:56सारे प्रोविज़ंस बनाने पड़ते हैं। तो इससे
- 4:11:58आपको काफी कुछ ये क्लियर हो पाया कि कौन
- 4:12:02सा बैंक किस मामले में बेटर है, किस मामले
- 4:12:04में बुरा है। अब चलते हैं अगले कंसेप्ट की
- 4:12:07ओर। कॉमन साइज बैलेंस शीट को कैसे एनालाइज
- 4:12:09करना है? इसमें आपको एक जो अच्छी चीज का
- 4:12:12ध्यान देना है वो यह कि बैंक को किस तरीके
- 4:12:16से पैसे मिलते हैं। बैंक अपने लिए पैसे
- 4:12:18कैसे जुटाता है? या तो वो शेयर होल्डर्स
- 4:12:21से पैसे मांग सकता है। वो इक्विटी इशू
- 4:12:24करके लोगों को शेयर्स इशू करके पैसा
- 4:12:26इकट्ठा कर सकता है। जिसे हम शेयर कैपिटल
- 4:12:28कहते हैं। या वो रिजर्व्स के जरिए यानी
- 4:12:32अगर पिछले साल बैंक ने प्रॉफिट कमाया तो
- 4:12:34लोगों को डिविडेंड ना देके उसे अपने पास
- 4:12:36ही रख लिया तो वो रिजर्व्स बना सकता है।
- 4:12:39वो लोगों से एफडी करंट अकाउंट सेविंग्स
- 4:12:42अकाउंट खुलवा सकता है। वो डिपॉजिट्स हो गए
- 4:12:45या वो खुद कहीं और से पैसा ले सकता है।
- 4:12:48चाहे आरबीआई से ले, चाहे दूसरे बैंक से
- 4:12:51इंटर बैंक डिपॉजिट्स ले। तो यह चार मेजर
- 4:12:54तरीके हैं जहां से वह पैसा ले सकता है। अब
- 4:12:57देखते हैं कि कौन सा बैंक कैसे पैसे
- 4:13:00इकट्ठे करता है। जैसे HDFC की बात करें तो
- 4:13:03सबसे ज्यादा उसके पास डिपॉजिट्स है। लगभग
- 4:13:0775% जो उसके पास पूरा पैसा है वो डिपॉजिट
- 4:13:10से आया हुआ है। इससे मुझे एक चीज पता चलती
- 4:13:13है कि HDFC के लिए खातेदारों को इनवाइट
- 4:13:16करना नए डिपॉजिटर्स को अपने बैंक में
- 4:13:19बुलाना बहुत आसान है उसके ब्रांड के कारण।
- 4:13:22अब देखते हैं Axis Bank की बैलेंस शीट
- 4:13:24हमें क्या बताती है। कितना पैसा वह कहां
- 4:13:26से लाता है। Axis Bank लगभग 70% पैसा
- 4:13:30डिपॉजिटर्स से लाता है। वहीं HDFC
- 4:13:33उससे ज्यादा 75% के आसपास अपना डिपॉजिटर्स
- 4:13:37से पैसा ला पा रहा है। अब डिपॉजिटर्स से
- 4:13:38पैसा आए तो अच्छी बात क्या है? अच्छी बात
- 4:13:40ये है कि इसकी कॉस्ट कम रहती है। करंट
- 4:13:43अकाउंट में ज्यादातर बैंक्स 0% देते हैं।
- 4:13:45सेविंग्स में आजकल 3% 2.5% 3.5% के आसपास
- 4:13:49दे रहे हैं। तो इतना सस्ता जो पैसा मिलता
- 4:13:52है वो बैंक के लिए बहुत अट्रैक्टिव रहता
- 4:13:54है। बाकी अगर वो इंटर बैंक डिपॉजिट आरबीआई
- 4:13:57से लें या शेयर कैपिटल इशू करें तो उसकी
- 4:13:59कॉस्ट ज्यादा आती है। डिपॉजिटर्स से पैसा
- 4:14:02मिल जाए तो यह सबसे अच्छी बात होती है। अब
- 4:14:05नया बैंक IDFC फर्स्ट बैंक यह अपना कितना
- 4:14:08पैसा डिपॉज़िटर्स से लेता है यह देखना
- 4:14:11इंटरेस्टिंग होगा। केवल 43% पैसा
- 4:14:14डिपॉज़िटर्स से और उसमें भी देखिए पहले ये
- 4:14:179% था 35 38 42 तो काफी तेजी से बढ़ा है
- 4:14:21लेकिन अभी भी बहुत कम है। और सोचिए ये एक
- 4:14:26नए बैंक की प्रॉब्लम होती है कि उसके पास
- 4:14:28डिपॉजिटर्स जाना नहीं चाहते। तो उसको
- 4:14:31बोरोइंग्स या दूसरे बैंक से आरबीआई से लोन
- 4:14:34ज्यादा लेने पड़ते हैं। उस पर इंटरेस्ट
- 4:14:36ज्यादा पे करना पड़ता है। यह एक प्रॉब्लम
- 4:14:39और हमने देखा कि इस बैंक ने तेजी से बढ़ाए
- 4:14:42हैं डिपॉजिट्स। वो क्यों बढ़ाए? ये हमको
- 4:14:45प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट में देखने को
- 4:14:46मिला था। और ऐसे ये दोनों चीजें कनेक्ट
- 4:14:49होती हैं। प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट में
- 4:14:51हमने देखा कि बैंक के इंटरेस्ट
- 4:14:53एक्सपेंडिचर 65% है। यानी ये बैंक ज्यादा
- 4:14:58इंटरेस्ट दे रहा है बाकियों से। ये
- 4:14:59सेविंग्स में 6% दे रहा है। जहां बाकी
- 4:15:01बैंक 3% देते हैं ताकि लोग अट्रैक्ट हो और
- 4:15:05इसका यह जो सोर्स है कि इसको पैसे कहां से
- 4:15:07मिलते हैं उसमें डिपॉजिटर्स का हिस्सा
- 4:15:10बढ़े और हमने देखा कि क्योंकि इनका यह
- 4:15:13खर्चा ज्यादा है तो डिपॉजिटर्स अट्रैक्ट
- 4:15:16हो रहे हैं और इसका परसेंटेज बढ़ रहा है।
- 4:15:20तो जहां इनका इंटरेस्ट एक्सपेंस 65% है
- 4:15:23HDFC का वो केवल 50% के आसपास है। 51% है।
- 4:15:28तो IDFC बैंक को ज्यादा इंटरेस्ट देना पड़
- 4:15:31रहा है डिपॉजिटर्स बुलाने के लिए। उसके
- 4:15:32बावजूद केवल 43% वहीं बाकी बैंक के लिए
- 4:15:36Axis के लिए 70% HDFC के लिए 75% और यह एक
- 4:15:40ह्यूज एडवांटेज है किसी भी बैंक के लिए कि
- 4:15:44उनके पास डिपॉजिटर्स से पैसा ज्यादा से
- 4:15:46ज्यादा आए। तो उम्मीद करता हूं कि आप कॉमन
- 4:15:49साइज बैलेंस शीट और कॉमन साइज प्रॉफिट एंड
- 4:15:51लॉस स्टेटमेंट एनालाइज करना सीख पाए
- 4:15:53होंगे। मैंने बैंकिंग कंपनीज़ का एग्जांपल
- 4:15:55लिया। लेकिन ये हर सेक्टर के लिए रेलेवेंट
- 4:15:58है और हर सेक्टर के लिए आपको ये कॉमन साइज
- 4:16:01स्टेटमेंट्स अलग-अलग तरीके से दिखेंगे।
- 4:16:03इन्वेस्टिंग शुरू करने के कई सालों बाद तक
- 4:16:05ना मैं कंफ्यूज रहता था कि आखिर ये
- 4:16:07एनबीएफसीस कमाते कैसे हैं? बैंक्स से ये
- 4:16:11कमट करते कैसे हैं? हम में से ज्यादातर
- 4:16:13लोगों को ना यह पता होता है कि एनबीएफसीस
- 4:16:16उनको लोन देते हैं जिनको बैंक्स लोन नहीं
- 4:16:18देते। लेकिन ये सच नहीं है। अगर ऐसा होता
- 4:16:21तो एनबीएफसीस के एनपीएस ज्यादा होते। तो
- 4:16:24ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये एनबीएफसीस का
- 4:16:26बिजनेस मॉडल जरूरी नहीं है कि हो। कुछ
- 4:16:28एनबीएफसीस का हो सकता है। आज ना मैं आपको
- 4:16:31एनबीएफसीस का असली बिजनेस मॉडल बताने वाला
- 4:16:34हूं। और कैसे वो बैंक से कमपीट करते हैं
- 4:16:37ये बताने वाला हूं। लेकिन इंट्रो में अगर
- 4:16:39मैं आपको इंटरेस्टिंग तरीके से बताना
- 4:16:41चाहूं ना बैंक्स और एनबीएफसीस का फर्क तो
- 4:16:44वो ये है कि आपके शहर में जो लोकल थोक या
- 4:16:47होलसेल सब्जी बाजार है ना वो है बैंक। और
- 4:16:50जो घर-घर आकर ठेले में लोन बांटता है ना
- 4:16:53वो है एनबीएफसी। तो बस आप सब्जी को लोन से
- 4:16:57रिप्लेस कर दीजिए और यह थोक बाजार और
- 4:17:00घर-घर सब्जी बेचने वाले के डिफरेंस से आप
- 4:17:03आसानी से समझ जाएंगे कि एनबीएफसी क्या है।
- 4:17:06तो आज के इस वीडियो के बाद ना आप खुद
- 4:17:08हमेशा एनबीएफसीस को कॉन्फिडेंटली एनालाइज
- 4:17:12कर सकेंगे। बैंक्स और एनबीएफसी स्टॉक्स को
- 4:17:15पिक करना, सेलेक्ट करना कौन सा अच्छा है,
- 4:17:18कौन सा बुरा है यह आइडेंटिफाई करना सीख
- 4:17:20सकेंगे। आज हम जानेंगे एनबीएफसीस क्या
- 4:17:23हैं? ये बैंक से कैसे कमट करते हैं? क्या
- 4:17:26एनबीएफसीस का फ्यूचर अच्छा है? और कैसे आप
- 4:17:29इन स्टॉक्स को अच्छे से पिक कर सकते हैं।
- 4:17:31तो सबसे पहले तो हम एक फंडामेंटल डिफरेंस
- 4:17:33डिस्कस करने वाले हैं बैंक्स और एनबीएफसीस
- 4:17:36का बेसिक डिफरेंस और उससे एनबीएफसीस को
- 4:17:39क्या एडवांटेज है और क्या डिसएडवांटेज है।
- 4:17:41उसके बाद हम कुछ इंटरेस्टिंग कॉम्प्लेक्स
- 4:17:44चीजों की तरफ बढ़ेंगे। तो बेसिक डिफरेंस
- 4:17:47ये है कि बैंक ना करंट अकाउंट खोल सकते
- 4:17:50हैं और सेविंग्स अकाउंट खोल सकते हैं। अब
- 4:17:52इसका बेनिफिट क्या है? करंट अकाउंट में 0%
- 4:17:55इंटरेस्ट बैंक को अपने कस्टमर्स को देना
- 4:17:57होता है। सेविंग्स अकाउंट में 2.5 3% देना
- 4:18:00होता है। यानी कि ढाई 3% में बैंक को
- 4:18:05दुनिया का पैसा मिल जाता है। ऐसा और कोई
- 4:18:07बिजनेस नहीं है। आप कोई भी बिजनेस ऐसा
- 4:18:10सोचिए जहां दुनिया भर का पैसा आपको पूरे
- 4:18:13देशवासी दुनिया वाले जहां-जहां आपके बैंक
- 4:18:15हैं वहां लोग आ के आपको फ्री में अपना
- 4:18:19पैसा दे रहे हैं या दो 2.5% में अपना पैसा
- 4:18:21दे रहे हैं। तो बैंक की खासियत यह है कि
- 4:18:25आपको 2 2.5% में 4% में ज्यादा से ज्यादा
- 4:18:29पैसा मिल जाता है। यह और किसी बिजनेस में
- 4:18:31नहीं मिलता। ये बेस्ट एडवांटेज है बैंक
- 4:18:34का। एनबीएफसीस जो है वो करंट अकाउंट
- 4:18:38सेविंग्स अकाउंट नहीं खोल सकती। फिक्स्ड
- 4:18:40डिपॉजिट्स खोल सकती हैं। लेकिन फिक्स्ड
- 4:18:42डिपॉजिट में आपको 6 7% इंटरेस्ट देना
- 4:18:45पड़ता है। 5.5% इंटरेस्ट देना पड़ता है।
- 4:18:48यानी ये सेविंग्स अकाउंट और करंट अकाउंट
- 4:18:51खोलने जितना सस्ता नहीं है। तो बैंक्स को
- 4:18:54एक क्लियर एडवांटेज है। जो पैसा एनबीएफसीस
- 4:18:57को 6 7% पे मिल रहा है वही पैसा बैंक को
- 4:19:002.5% पे मिल जाता है। तो यहां 3.5% का
- 4:19:04एडवांटेज बैंक्स के पास है। लेकिन यही ना
- 4:19:08जो अभी एनबीएफसीस के लिए डिसएडवांटेज है
- 4:19:10इसी से एक एडवांटेज भी निकल के आता है।
- 4:19:13एनबीएफसीस पे रेगुलेशंस रूल्स आरबीआई के
- 4:19:17उतने स्ट्रिक्टली अप्लाई नहीं होते।
- 4:19:19ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी होती है एनबीएफसीस
- 4:19:21के पास। ऐसा क्यों? क्योंकि एनबीएफसी
- 4:19:23सेविंग अकाउंट और करंट अकाउंट नहीं खोल
- 4:19:26रही हैं। सेविंग्स अकाउंट और करंट अकाउंट
- 4:19:28से क्या होता है? रोज पैसा आता है, रोज
- 4:19:30पैसा जाता है तो ना बैंक, ना आरबीआई, ना
- 4:19:33एनबीएफसी कोई भी अगर वो सेविंग्स अकाउंट
- 4:19:35या करंट अकाउंट उसके पास है तो वो ये
- 4:19:37अंदाजा नहीं लगा सकता कि उसके पास किसी
- 4:19:39दिन कितना पैसा रहेगा। किसी दिन कोई बड़ी
- 4:19:42कंपनी अपने करंट अकाउंट से ₹100 करोड़ भी
- 4:19:44निकाल सकती है। तो बैंक पे लिक्विडिटी
- 4:19:46क्रंच आ जाएगा। लेकिन क्योंकि एनबीएफसीस
- 4:19:49सेविंग्स अकाउंट और करंट अकाउंट ले ही
- 4:19:51नहीं सकती। और फिक्स्ड डिपॉजिट में
- 4:19:53क्योंकि टर्म फिक्स्ड होता है प्रीमेच्योर
- 4:19:55या तो निकाल ही नहीं सकते या निकलने पर
- 4:19:57पेनल्टी लगती है। इसलिए एनबीएफसी के लिए
- 4:20:00अंदाजा लगाना आसान होता है कि किसी भी दिन
- 4:20:02हमारे पास कितना पैसा रहेगा। जिस कारण
- 4:20:05आरबीआई उस पे इतनी स्ट्रिक्ट नहीं होती कि
- 4:20:08इतना पैसा आपको रिजर्व रखना है। इतना पैसा
- 4:20:10आपको यहां लेंड करना है। इस पैसे को ऐसे
- 4:20:13यूज करना है। तो क्योंकि एनबीएफसी पे
- 4:20:15रिस्ट्रिक्शंस कम है तो वो ज्यादा
- 4:20:17क्रिएटिव ज्यादा इनोवेटिव हो सकती है और
- 4:20:19भले ही उसको पैसा 6% पे मिला है लेकिन वो
- 4:20:23उससे ज्यादा कमा सकती है क्योंकि उसको
- 4:20:25पैसा आइडल कम रखना है। रिजर्व्स में कम
- 4:20:27रखना है। तो यह जो डिसएडवांटेज है ना
- 4:20:30एनबीएफसीस का यही एक तरीके से एडवांटेज भी
- 4:20:32है। और इसीलिए ये सोचना कि बैंक को तो
- 4:20:35पैसा सस्ते में मिलता है। एनबीएफसी को
- 4:20:37महंगे में मिलता है। तो बैंक से एनबीएफसीस
- 4:20:39कैसे कमपीट कर पाएंगे ये सही नहीं है। अब
- 4:20:42इसके आगे ना मैं आपको एनबीएफसी की कुछ
- 4:20:44बहुत इंटरेस्टिंग चीजें बताने वाला हूं जो
- 4:20:47शायद आपको किसी ने नहीं बताया होगा। तो अब
- 4:20:49चलते हैं कुछ एडवांस्ड इंटरेस्टिंग
- 4:20:51टॉपिक्स की तरफ। पहला बैंक्स कंसीडर
- 4:20:54एनबीएफसीस एस पार्टनर्स नॉट कंपटीशन। इसको
- 4:20:58समझते हैं। देखिए बैंक्स के पास पैसा तो
- 4:21:00आसानी से आ जाता है। सेविंग्स अकाउंट,
- 4:21:02करंट अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट। तो किसी भी
- 4:21:04बैंक के पास बहुत सारा पैसा है। अब लोनस
- 4:21:07उसको बांटने हैं तभी तो वो कमाएगी उस पे।
- 4:21:10तो लोनस कई तरह के होते हैं। ऑटो लोन हो
- 4:21:12गया, एजुकेशन लोन हो गया, पर्सनल लोन,
- 4:21:14बिजनेस लोन, होम लोन, दुनिया भर के लोन।
- 4:21:18अब हर तरह के लोन के लिए सही समय पे
- 4:21:20कस्टमर्स मिले। क्योंकि क्या होता है? कोई
- 4:21:22अचानक से कंपनी है। जिस बैंक के पास उसका
- 4:21:24करंट अकाउंट है। उस कंपनी ने 100 करोड़
- 4:21:27डिपॉजिट कर दिए करंट अकाउंट में। अब बैंक
- 4:21:30के पास तो ₹100 करोड़ आ गए। उसको तो उसको
- 4:21:32यूज़ करना है। लेकिन अचानक से वो ₹100
- 4:21:34करोड़ के लोन वाले ग्राहक कहां से ढूंढे?
- 4:21:37तो इस कारण वो क्या करता है? वो यह सारा
- 4:21:40पैसा उठा के किसी ऑटो लोन वाली एनबीएफसी
- 4:21:43को दे देगा। और एनबीएफसी को बोलेगा ये लोन
- 4:21:46हमको 7% दो। आपको यह जिस प्राइस पर देना
- 4:21:49है आप जानो। तो बैंक को जहां घर-घर जाकर
- 4:21:53ग्राहक ढूंढने पड़ते पता नहीं कितना टाइम
- 4:21:55लगता वो 100 करोड़ के लोन बांटने में एक
- 4:21:58झटके में क्योंकि उसके पास एनबीएफसी
- 4:22:00पार्टनर्स थे तो ऑटो लोन अगर उसको बेचना
- 4:22:03है तो वो ऑटो लोन वाली एनबीएफसी को दे
- 4:22:05दिया। तो बैंक्स के लिए एनबीएफसीस
- 4:22:08पार्टनर्स हैं। इसका एक और एक्सटेंशन यह
- 4:22:11है लोन डायवर्सिफिकेशन। आरबीआई ये कहता है
- 4:22:14कि रिस्क मिटिगेट करने के लिए आपको लोन
- 4:22:16डवर्सिफाइड रखना चाहिए। कुछ एग्री लोन,
- 4:22:19कुछ कॉर्पोरेट लोन, कुछ पर्सनल लोन, कुछ
- 4:22:21होम लोन हर तरह के लोनस होने चाहिए। एक ही
- 4:22:24तरह के लोनस हो और उस सेक्टर में अगर
- 4:22:26रिसेशन आ जाए तो उस चक्कर में बैंक डूब
- 4:22:29जाएगा। अब बैंक के पास अगर ₹100 हैं तो
- 4:22:32उसको यह पता है अगर उसको रिस्क मेंटेन
- 4:22:34करना है, रिस्क को कम करना है तो ₹20
- 4:22:36किसान को लोन देना है, ₹20 किसी एजुकेशन
- 4:22:40में देना है, ₹20 होम लोन, ₹20 ऑटो लोन,
- 4:22:43₹20 बिजनेस लोन। तो उसके लिए हर तरह के
- 4:22:46कस्टमर्स उसको लाने हैं और उनमें बैलेंस
- 4:22:48बैठा के रखना है। पता चला यह डिसाइड हुआ
- 4:22:50था कि ₹20 ही एजुकेशन लोन में देना है और
- 4:22:53₹19 वो बांट चुका है। अब ₹2 लेने के लिए
- 4:22:56कोई नया ग्राहक आया लेकिन मैं तो दे ही
- 4:22:58नहीं सकता। तो बहुत सारी प्रॉब्लम होती है
- 4:23:00और इतने अलग-अलग कस्टमर्स को जा के ढूंढो
- 4:23:02कहां से? तो बैंक क्या कर सकता है? ₹20 एक
- 4:23:06एजुकेशन वाली एनबीएफसी को दे देगा। ₹20
- 4:23:08बिजनेस लोन वाली, ₹20 होम लोन वाली, ₹20
- 4:23:11एग्री या ऑटोमोबाइल लोन वाली और अपने आप
- 4:23:14उसका यह जो डायवर्सिफिकेशन है, यह हो गया।
- 4:23:17पांच एनबीएफसी को उसने ₹20-20 दे दिए और
- 4:23:20उसका डवर्सिफिकेशन एकदम से हो गया। तो,
- 4:23:23बैंक को जो लोगों को ढूंढ-ढूंढ के लोन
- 4:23:25बांटना पड़ता, उसमें बैंक का भी खर्चा
- 4:23:27बहुत होता। बैंक ने सारा अपना खर्चा बचा
- 4:23:30लिया और ₹-20 एनबीएफसीस को दे दिए। तो
- 4:23:32बैंक के लिए भी एनबीएफसीस बहुत जरूरी हैं।
- 4:23:36यह उनकी कॉस्ट को कंट्रोल करने में हेल्प
- 4:23:39करते हैं। तीसरा एक्सपर्टीज। एक बैंक ना
- 4:23:42हर तरह के लोन में एक्सपर्ट नहीं हो सकता।
- 4:23:44क्योंकि जो एनबीएफसी है जो सिर्फ ऑटो लोंस
- 4:23:47देती है वो रोज इतने सारे ऑटोमोबाइल लोंस
- 4:23:50बांट रही है कि उसके पास कस्टमर्स का डेटा
- 4:23:52बेटर है। उनके पास प्रोसेससेस बेटर है।
- 4:23:55उनको पता है कस्टमर्स को ढूंढना कैसे है।
- 4:23:57उनके शोरूम्स में टाई अप हैं। तो उनके लिए
- 4:24:00ना एक तो उनकी एक्सपर्टीज ज्यादा है। यानी
- 4:24:02वो लोंस को बेटर तरीके से बांटेंगे। कम
- 4:24:04कॉस्ट में बांटेंगे। मार्केटिंग कॉस्ट कम
- 4:24:06लगेगी। की सर्विसिंग कॉस्ट कम लगेगी और
- 4:24:09एनबीएफसीस को क्योंकि उस बिनेस का ज्यादा
- 4:24:11एक्सपीरियंस है तो वो एनपीएस को भी
- 4:24:13कंट्रोल में रख पाएगी। बैंक अगर वो बिज़नेस
- 4:24:15खुद करना चाहेगा उसकी कॉस्ट ज्यादा लगेगी।
- 4:24:18एनपीएस भी ज्यादा होंगे। तो बैंक्स के लिए
- 4:24:21एनबीएफसीस जरूरी हैं। नेक्स्ट पॉइंट इज़
- 4:24:24बिनेस मॉडल की वायबिलिटी। ज्यादातर
- 4:24:26एनबीएफसीस जो है ना अगर हम हाउसिंग
- 4:24:28एनबीएफसीस को छोड़ दें। इनफैक्ट उसमें भी
- 4:24:30एनबीएफसीस यूजुअली स्मॉलर टिकट साइज के
- 4:24:33लोंस करती हैं। 1 लाख का लोन, 25,000 का
- 4:24:36लोन, 5 लाख का लोन, ज्यादा से ज्यादा 10,
- 4:24:3820 लाख का लोन उससे ऊपर के लोंस यूजुअली
- 4:24:40एनबीएफसीस नहीं करती। तो क्योंकि टिकट
- 4:24:43साइज छोटा है। लोन का अमाउंट छोटा है। तो
- 4:24:46ड्यू डेलिजेंस या जो प्रोसेससेस हैं वो भी
- 4:24:48ज्यादा फास्ट होते हैं। ज्यादा फिजिकल
- 4:24:50ड्यू डेलिजेंस नहीं होता। टेक्नोलॉजी
- 4:24:52डिजिटल लेंडिंग की तरफ इनका फोकस रहता है।
- 4:24:55कॉस्ट को कम रखने में फोकस होता है।
- 4:24:57क्योंकि 1 लाख के लोन में अगर वो साल भर
- 4:25:00के लिए भी है तो आपने कमाना है 10 12
- 4:25:02₹15000 उस पे अगर आप चेक करने में वेरीफाई
- 4:25:06करने में ज्यादा कॉस्ट लगा दोगे तो आप कुछ
- 4:25:08कमाओगे नहीं। और क्योंकि टिकट साइज छोटा
- 4:25:11है तो कस्टमर भी डिफॉल्ट नहीं करता। कोई
- 4:25:13भी छोटे टिकट साइज के लिए अपनी क्रेडिट
- 4:25:15रेटिंग खराब नहीं करना चाहेगा। और अगर
- 4:25:17खराब हो भी जाता है तो एनबीएफसी को बड़ा
- 4:25:20लॉस नहीं होगा। वहीं बैंक्स जो हैं 50
- 4:25:23लाख, 50 करोड़, 500 करोड़ के लोोंस करते
- 4:25:26हैं। तो उनके जो सारे प्रोसेससेस हैं ना
- 4:25:28वो उसके हिसाब से डिज़ होते हैं। बहुत सारे
- 4:25:31चेकक्स, स्लो पेपर वर्क, मल्टीपल लेवल ऑफ
- 4:25:33चेकक्स, फिजिकल वेरिफिकेशन और इस तरह की
- 4:25:36चीजें। तो बैंक्स का सारा प्रोसेस हैवी
- 4:25:40ड्यू डेलिजेंस करके बड़े लोनस बांटने की
- 4:25:43तरफ होता है। ऐसे में अगर वो उस
- 4:25:45वेरिफिकेशन उस सिस्टम उस प्रोसेस के साथ
- 4:25:48छोटे-मोटे लोन बांटने लगे ना तो बैंक्स की
- 4:25:50तो कॉस्ट ही रिकवर नहीं होगी। तो क्योंकि
- 4:25:52बैंक्स को मेन उनका बिजनेस है बड़े लोनस
- 4:25:56करने का। वो अच्छा उसमें कमाते हैं। उनको
- 4:25:58मजा उसमें आता है। तो उनके प्रोसेससेस उस
- 4:26:00हिसाब से डिफाइंड है। अब अगर वो छोटे लोन
- 4:26:02करने लग जाए तो या तो उनको प्रोसेससेस
- 4:26:04चेंज करने पड़ेंगे जिससे बड़े लोोंस में
- 4:26:07लॉस होने का खतरा है। या एक कंप्लीट अलग
- 4:26:10डिवीजन बनाना पड़ेगा जिसको सेटअप करने का
- 4:26:12भी कॉस्ट बहुत है। तो बैंक्स प्रेफर करते
- 4:26:14हैं कि हटाओ ये सब छोटे लोनस के लिए
- 4:26:17एनबीएफसी को होलसेल लोन दे दो। बाकी वह
- 4:26:20जाने। तो इसलिए भी बैंक्स और एनबीएफसीस
- 4:26:23कॉम्पिटिटर्स नहीं पार्टनर्स हैं। अब मैं
- 4:26:26तो हर रोज इस तरह के वीडियोस बना ही रहा
- 4:26:28हूं। लेकिन कुछ आपको भी तो होमवर्क करना
- 4:26:31चाहिए ना। मुझे ये वीडियो बनाने के लिए
- 4:26:32बहुत होमवर्क लगता है। तो थोड़ा होमवर्क
- 4:26:35आप भी करिए क्योंकि तभी ये आर्ट है ना
- 4:26:37इन्वेस्टिंग तो थोड़ा-थोड़ा आप रोज करेंगे
- 4:26:39तो आप बेटर होंगे। कुछ एनबीएफसीस को
- 4:26:42देखिए। टकर पे आके डॉक्यूमेंट सेक्शन पे
- 4:26:44उनकी इन्वेस्टर प्रेजेंटेशंस वगैरह पढ़िए।
- 4:26:46डाटा एनालाइज करिए और आप आपके हिसाब से
- 4:26:49बेस्ट एनबीएफसी कौन सी है? अगर किसी एक
- 4:26:51एनबीएफसी में आपको पैसा लगाना होता तो कौन
- 4:26:54सा वो स्टॉक होता ये मुझे कमेंट करके
- 4:26:57बताइएगा अच्छे से रिसर्च करके तो मुझे भी
- 4:26:59लगेगा कि ये वीडियो बनाना सफल हो रहा है।
- 4:27:02हम सीखने वाले हैं एनुअल रिपोर्ट को
- 4:27:04पढ़ना। इसे आप बैलेंस शीट से कंफ्यूज मत
- 4:27:07करिएगा। उसे हम आगे के चैप्टर्स में
- 4:27:08सीखेंगे। फाइनशियल स्टेटमेंट्स आगे आएंगे।
- 4:27:11आज हम जानने वाले हैं जनरल एनुअल रिपोर्ट
- 4:27:13में कौन-कौन से सेक्शंस आपको देखने हैं।
- 4:27:16क्योंकि एनुअल रिपोर्ट एक ऐसी चीज है
- 4:27:18जिससे आप कंपनी को इनसाइड आउट समझ सकते
- 4:27:21हैं। आप समझ सकते हैं कि कंपनी के कौन से
- 4:27:23प्रोडक्ट से कितना रेवेन्यू आता है। उसका
- 4:27:25फैक्ट्रीज या प्लांट्स कौन-कौन से स्टेट
- 4:27:27में है। उसको कौन मैनेज कर रहा है? उसके
- 4:27:30बोर्ड में कौन-कौन है। ऐसी बहुत सारी
- 4:27:32चीजें जैसे कंपनी ने लोन किसको दिया है?
- 4:27:35कितना टैक्स उसको गवर्नमेंट को देना बाकी
- 4:27:37है। उस पे कौन-कौन से केसेस चल रहे हैं?
- 4:27:39हर तरह की वो इंफॉर्मेशन जो आपके लिए
- 4:27:42इंपॉर्टेंट हो सकती है यह डिसाइड करने में
- 4:27:44कि आपको इन्वेस्ट करना है या नहीं वो
- 4:27:46एनुअल रिपोर्ट में आपको मिल सकती है। तो
- 4:27:48चलिए आज हम डिस्कस करेंगे Zाइडस वेलनेस
- 4:27:51नाम की एक कंपनी को और जानेंगे कि उसकी
- 4:27:53एनुअल रिपोर्ट में क्या है। तो आप जिस
- 4:27:56कंपनी की चाहें उस कंपनी की एनुअल रिपोर्ट
- 4:27:58निकाल सकते हैं। आपको बस एक सिंपल सी चीज
- 4:28:00करनी है। उस कंपनी का नाम टाइप करके एंटर
- 4:28:03करना है और उसके बाद जैसे ही कंपनी का पेज
- 4:28:06खुले आपको बस डॉक्स सेक्शन पे क्लिक करना
- 4:28:08है और यहां आपको एनुअल रिपोर्ट्स मिल
- 4:28:10जाएंगी। जैसे ही आपने क्लिक किया एनुअल
- 4:28:12रिपोर्ट ओपन। अब ये एनुअल रिपोर्ट्स काफी
- 4:28:15लंबी हो सकती हैं। 200 250 पेजेस की भी।
- 4:28:17तो यह बहुत जरूरी है कि आप ध्यान से देखें
- 4:28:20कि कौन से सेक्शंस आपको पढ़ने हैं। कौन से
- 4:28:23सेक्शंस आपको नहीं पढ़ने। पहला पेज
- 4:28:26यूजुअली एजीएम नोटिस होता है। यह किसी काम
- 4:28:28का नहीं। इसके बाद अगले एक दो पेज में
- 4:28:30कंपनी अपना मिशन विज़ बताएगी जिसमें भी कुछ
- 4:28:34खास जरूरी चीजें नहीं होती है। अब आता है
- 4:28:36कंटेंट या इंडेक्स। ये आपको बता देगा कि
- 4:28:39कौन से पेज में क्या मिलेगा। तो अगर आपको
- 4:28:41सीधा जंप करके कोई पर्टिकुलर सेक्शन पढ़ना
- 4:28:43है तो यह पेज आपके काम आ सकता है। इसके
- 4:28:46बाद फिर वही विज़न अचीवमेंट्स इस तरह की
- 4:28:49ज्यादातर एनुअल रिपोर्ट्स ऐसे ही होती
- 4:28:50हैं। शुरू के कुछ चार पांच पेज में वो
- 4:28:53अपने अचीवमेंट्स वो अपना क्या उसने इस साल
- 4:28:55पाया इस तरह की बातें करती है। हां यहां
- 4:28:57पे एक इंटरेस्टिंग ग्राफ दिख रहा है कि
- 4:29:00कौन सा प्रोडक्ट इस कंपनी का उसका मार्केट
- 4:29:03में रैंक कितना है। तो जैसे Zाइडस के ये
- 4:29:06सारे प्रोडक्ट्स हैं शुगर फ्री वो मार्केट
- 4:29:08में नंबर वन है। न्यूट्रलाइट नंबर वन है।
- 4:29:10एवरयूथ का पील ऑफ नंबर वन है। स्क्रब नंबर
- 4:29:13वन है। नाइसेल अपनी कैटेगरी में नंबर वन
- 4:29:15है। ग्लूकॉन डी नंबर वन है। बस कॉम्प्लान
- 4:29:17जो है वो अपनी कैटेगरी में नंबर फिफ्थ है।
- 4:29:20तो ये एक इंपॉर्टेंट ग्राफ से मुझे पता चल
- 4:29:22रहा है कि कंपनी के प्रोडक्ट्स मार्केट
- 4:29:24में अपनी-अपनी कैटेगरी में कैसे करते हैं।
- 4:29:26ये एक बहुत इंपॉर्टेंट इनेशन है। इसके
- 4:29:29अलावा यहां एक इंपॉर्टेंट इनफेशन मुझे ये
- 4:29:31दिख रही है कि इस कंपनी में प्रमोटर शेयर
- 4:29:33होल्डिंग बहुत अच्छी है। 67% प्रमोटर शेयर
- 4:29:37होल्डिंग है जो कि काफी अच्छी है। 75% से
- 4:29:40ज्यादा तो अलाउड ही नहीं है। तो प्रमोटर
- 4:29:42की बैकिंग इस कंपनी के पास काफी अच्छी है।
- 4:29:44इसके बाद ये जो कंपनी हिस्ट्री वाला पेज
- 4:29:46है ये आपको एक ग्लांस में कंपनी की आज तक
- 4:29:49की पूरी जर्नी के बारे में बता देगा और यह
- 4:29:51काफी इंटरेस्टिंग होता है। जैसे 1988 में
- 4:29:54ये कंपनी लॉन्च हुई अपने पहले प्रोडक्ट के
- 4:29:56साथ। 1991 में इन्होंने एवरथ स्किन केयर
- 4:29:59रेंज ल्च की। 2005 में शुगर फ्री का एक
- 4:30:02नया वेरिएंट आया और इस तरीके से पूरी अपनी
- 4:30:04हिस्ट्री ये कंपनी बता रही है। 2006 में
- 4:30:07इन्होंने न्यूट्रलाइट को खरीदा और 2019
- 4:30:09में हंस को खरीदा। ये जो कंपनी अपने
- 4:30:12फाइनेंसियल हाईलाइट्स दिखाती है लगभग हर
- 4:30:14बैलेंस शीट में आपको मिलेगा। इस पेज पे
- 4:30:16बहुत ज्यादा फोकस मत करिएगा क्योंकि ये
- 4:30:19कंपनी वही चीजें हाईलाइट करती है जो इस
- 4:30:21साल उसके लिए अच्छी रही। तो इस पे आंख बंद
- 4:30:24करके भरोसा मत करिएगा। अब ये एक
- 4:30:26इंपॉर्टेंट पेज है चेयरमैनस लेटर या
- 4:30:28चेयरमैनस मैसेज। यहां जो कंपनी को लीड कर
- 4:30:31रहे हैं जो उसके मैनेजमेंट में हैं वो
- 4:30:33बताते हैं कि कंपनी के पास्ट डिसीजंस का
- 4:30:35कारण क्या था? उन्होंने जो भी डिसीजन लिए
- 4:30:37वो क्यों लिए और आगे उनका प्लान क्या है?
- 4:30:40जैसे यहां मुझे एक इंटरेस्टिंग पैराग्राफ
- 4:30:42मिला जिसमें ये बता रहे हैं कि इन्होंने
- 4:30:45जो हंस को एक्वायर किया उसको क्यों किया?
- 4:30:47तो ये बता रहे हैं द एक्विजिशन कैन
- 4:30:49पोटेंशियली जनरेट सुपीरियर इकोनॉमीज़ ऑफ़
- 4:30:51स्केल। डिस्ट्रीब्यूशन में भी ये कंपनी को
- 4:30:53हेल्प कर सकता है। यानी हंस के एक्वज़िशन
- 4:30:56से इनकी डिस्ट्रीब्यूशन रीच बढ़ी। अब इनके
- 4:30:59प्रोडक्ट्स ज्यादा दुकानों में अवेलेबल
- 4:31:01होंगे। तो ज्यादा अवेलेबल होंगे तो हो
- 4:31:03सकता है बिकें भी ज्यादा। तो ये एक
- 4:31:04प्राइमरी रीज़न है एक्विजिशन का। तो इस तरह
- 4:31:07की इंपॉर्टेंट इनेशन कि कंपनी ने जो किया
- 4:31:09वो क्यों किया वो आपको चेयरमैन लेटर वाले
- 4:31:12सेक्शन में मिल जाएगा। इसके अलावा यहां आप
- 4:31:15देख रहे हैं कंपनी के सारे प्रोडक्ट्स। तो
- 4:31:17कॉम्प्लान हो, ग्लूकॉन डी हो, niceल हो,
- 4:31:20शुगर फ्री एवरथ न्यूट्रलाइट ये कंपनी का
- 4:31:23प्रोडक्ट बास्केट है। तो इससे आपको अंदाजा
- 4:31:25लगाने में हेल्प मिलती है कि यह कंपनी में
- 4:31:27आपको इन्वेस्ट करना है या नहीं। आपको
- 4:31:29प्रोडक्ट्स पसंद आ रहे हैं या नहीं। अगेन
- 4:31:32यहां पे वो रीजनिंग दे रहे हैं कि
- 4:31:33एक्विजिशन से क्या-क्या फायदे हो रहे हैं।
- 4:31:35अच्छे ब्रांड्स हैं, मार्जिन इंप्रूव
- 4:31:37होंगे, टैलेंट बेटर होगा। इस तरह के बहुत
- 4:31:39सारे रीज़ंस इन्होंने दिए हैं कि क्यों
- 4:31:41हमने कंपनी को एक्वायर किया और एक ऐसी
- 4:31:44कंपनी को जो हमसे बड़ी थी। ZDS से बड़ी
- 4:31:46कंपनी थी hइ जिसके पास ग्लूक डी nice और
- 4:31:50कॉम्प्लन जैसे ब्रांड्स थे और उससे छोटी
- 4:31:52कंपनी ने एक बड़ी कंपनी को एक्वायर कर
- 4:31:54लिया। तो इसीलिए इस साल की एनुअल रिपोर्ट
- 4:31:57में इतना सारा जस्टिफिकेशंस या रीज़ंस हैं
- 4:31:59कि क्यों इन्होंने ऐसा किया? ये सेक्शन से
- 4:32:02आप Zाइडस वेलनेस के बारे में सब कुछ जान
- 4:32:04सकते हैं कि इनका मिशन क्या है? कैसे
- 4:32:06इन्होंने प्रोडक्ट्स को लॉन्च किया? कैसे
- 4:32:08इन्होंने अपनी सेल्स बढ़ाई? सेल्स एंड
- 4:32:10डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रेटजी क्या है? आगे यह
- 4:32:12फ्यूचर के बारे में कंपनी के बारे में
- 4:32:14क्या सोच रहे हैं? बहुत सारी ऐसी चीजें आप
- 4:32:17एनुअल रिपोर्ट पढ़ के जान सकते हैं। यहां
- 4:32:19यह बता रहे हैं कि पिछले साल कौन से नए
- 4:32:21प्रोडक्ट्स ल्च हुए। तो उससे भी आप देख
- 4:32:23सकते हैं कि क्या आपके हिसाब से जो नए
- 4:32:26प्रोडक्ट्स ल्च हुए हैं वो ऐसे हैं जिससे
- 4:32:28कंपनी की सेल्स बहुत बढ़ने वाली है। अगर
- 4:32:30हां अगर आपका जजमेंट आपको लगता है कि हां
- 4:32:32अच्छे प्रोडक्ट्स ल्च हुए हैं तो देन यू
- 4:32:34कैन मेक अ डिसीजन कि आपको इस कंपनी को
- 4:32:37लेना है या नहीं। अगेन ये बता रहे हैं कि
- 4:32:40मार्केट शेयर कितने प्रोडक्ट का क्या है।
- 4:32:42जैसे शुरू में हमने देखा ग्राफ वाइज कि
- 4:32:44नंबर वन है, नंबर टू है। ये तो बता दिया
- 4:32:46लेकिन एग्जैक्ट मार्केट शेयर कितना है? अब
- 4:32:48आपको यह पता चल रहा है। तो जैसे शुगर फ्री
- 4:32:51जितने भी शुगर सब्स्टट्यूट्स मार्केट में
- 4:32:53हैं सब 6% बिकते हैं और 94% अकेला शुगर
- 4:32:58फ्री बिकता है। यह है इस कंपनी का
- 4:33:00फ्लैकशिप प्रोडक्ट और सबसे ज्यादा
- 4:33:02डोमिनेटिंग प्रोडक्ट। एवरथ स्क्रब 32% पील
- 4:33:06ऑफ मास्क में अगेन 85% मार्केट शेयर
- 4:33:08ग्लूकॉन डी ग्लूकोस ड्रिंक में अगेन 60%
- 4:33:11मार्केट शेयर तो एक कॉम्प्लान को छोड़ दें
- 4:33:13तो ज्यादातर प्रोडक्ट्स ऐसे हैं जिनका
- 4:33:16मार्केट शेयर अपनी कैटेगरी में डोमिनेटिंग
- 4:33:18है। तो इससे भी आप डिसाइड कर सकते हैं कि
- 4:33:21इस कंपनी में आपको इन्वेस्ट करना है या
- 4:33:23नहीं। यह फिर से एक बहुत इंपॉर्टेंट
- 4:33:25सेक्शन है जहां यह बता रहे हैं कि हम अपनी
- 4:33:28इंडस्ट्री के बारे में क्या सोचते हैं।
- 4:33:30जैसे यह बोल रहे हैं कि लोगों की
- 4:33:31डिस्पोजेबल इनकम बढ़ रही है। इनकम बढ़ रही
- 4:33:33है तो हमारे प्रोडक्ट्स ऐसे हैं कि लोग
- 4:33:35उसे ज्यादा खरीदेंगे। भारत की पपुलेशन बढ़
- 4:33:37रही है। जीएसटी से फायदा मिला जो रेट कट्स
- 4:33:40हुए, कंजमशन बढ़ रहा है, ई-कॉमर्स बढ़ रहा
- 4:33:43है। तो, बहुत सारे ऐसे रीज़ंस बता रहे हैं
- 4:33:45जिससे इनको लगता है कि इनके प्रोडक्ट्स
- 4:33:47बढ़ेंगे, उनकी डिमांड बढ़ेगी। अब इस पेज
- 4:33:50में यह अपने ब्रांड्स के बारे में डिटेल
- 4:33:52बता रहे हैं। जैसे अगर आपको जानना है कि
- 4:33:54कौन सा ब्रांड प्रीमियम है, कौन सा मास
- 4:33:56है, कितना परसेंट मार्केट शेयर है, क्या
- 4:33:59यूएसपी है उस ब्रांड की तो एक-एक ब्रांड
- 4:34:01के बारे में कौन से फ्लेवर्स में है। यहां
- 4:34:03पे ब्रांड वाइज डिटेल है ताकि आप कंपनी को
- 4:34:06निवेश करने से पहले इनसाइड आउट पूरी तरीके
- 4:34:08से समझ लें। कब वो ल्च हुआ था हर वो डिटेल
- 4:34:12जो आपके लिए जरूरी है वो आपको एनुअल
- 4:34:14रिपोर्ट में मिलेगी। मैनेजमेंट डिस्कशन
- 4:34:17एंड एनालिसिस ये एक सबसे जरूरी सेशंस में
- 4:34:20से एक है। दो कारणों से यूजुअली जिस
- 4:34:23इंडस्ट्री में काम करती है वो कंपनी उस
- 4:34:25इंडस्ट्री के बारे में मैनेजमेंट क्या
- 4:34:27सोचता है आपको इस सेक्शन में मिलेगा। जैसे
- 4:34:30ये कंपनी एफएमसीजी सेक्टर में है तो ये
- 4:34:32मैनेजमेंट आपको बताएगा कि एफएमसीजी सेक्टर
- 4:34:35में पास्ट में कितनी ग्रोथ आई है। आगे
- 4:34:37क्या ग्रोथ एक्सपेक्टेड है। तो ये सेक्शन
- 4:34:39पढ़ के आपको ना सिर्फ इस कंपनी को जानने
- 4:34:42में मदद मिलेगी बल्कि ये भी जानने में मदद
- 4:34:44मिलेगी कि एंटायर सेक्टर कैसा करने वाला
- 4:34:46है ताकि आप उस बेसिस पे डिसाइड कर सकें कि
- 4:34:49ये नहीं तो कोई और कंपनी में ही निवेश कर
- 4:34:51लेते हैं। तो अगर आपने सेम इंडस्ट्री की
- 4:34:53तीनचार एनुअल रिपोर्ट पढ़ ली जैसे अगर
- 4:34:56ziddस एफएमसीजी में है तो आप godderज मैरी
- 4:34:58कोर dabबरer भी पढ़ लीजिए तो इस सेक्टर के
- 4:35:01आप एक तरीके से एक्सपर्ट बन जाएंगे आपको
- 4:35:03पता रहेगा कि अगले एक दो साल इस सेक्टर
- 4:35:05में कितनी ग्रोथ आने वाली है तो बहुत
- 4:35:07जरूरी सेक्शन है ये उसका एक कारण इसका एक
- 4:35:10दूसरा कारण भी है कि क्यों ये सेक्शन बहुत
- 4:35:13ज्यादा जरूरी है और वो कारण है रिस्क यहां
- 4:35:16पे आपको कंपनी ये बताती है अभी तक आपने
- 4:35:18एनुअल रिपोर्ट में देखा कि कंपनी अपनी
- 4:35:21तारीफ कर रही होती है या अपने अचीवमेंट्स
- 4:35:23बता रही होती है। यहां यह आपको बताती है
- 4:35:25कि क्या ऐसी चीजें हैं जिससे कंपनी के
- 4:35:28बिजनेस को रिस्क है। जैसे एक रिस्क है कि
- 4:35:30रॉ मटेरियल जिससे कंपनी अपने प्रोडक्ट्स
- 4:35:32बनाती है। अगर उनका प्राइस बढ़ जाए तो अगर
- 4:35:35कंपटीशन बढ़ जाए तो यहां पे यह भी आपको
- 4:35:38बताएगी कि किस कंपनी ने नया कंपटीशन ल्च
- 4:35:40किया है, नया प्रोडक्ट ल्च किया है। तो
- 4:35:42आपको कंपटीशन के बारे में भी जानने को
- 4:35:45मिलेगा। लिटिगेशन यहां यह आपको बताएंगे कि
- 4:35:47इन पे कोई कोर्ट केसेस या इस तरह की कोई
- 4:35:49चीज चल रही है क्या? क्या इकोनमी में
- 4:35:51स्लोडाउन आ सकता है? ऐसे हर तरह के वो
- 4:35:54रिस्क जिससे कंपनी का बिजनेस अफेक्ट हो
- 4:35:56सकता है वो आपको जानने में मदद मिलेगी इस
- 4:35:59सेक्शन से और यह पता चलेगा कि किन
- 4:36:01फैक्टर्स पे कंपनी बहुत ज्यादा डिपेंडेंट
- 4:36:03है। तो ये एक बहुत बहुत ज्यादा जरूरी
- 4:36:06सेक्शन है। इसके बाद एक और जरूरी सेक्शन
- 4:36:09आता है शेयर होल्डिंग पैटर्न। इसमें आपको
- 4:36:11यह पता चलेगा कि प्रमोटर्स या कंपनी के
- 4:36:13ओनर्स के पास कितनी होल्डिंग है।
- 4:36:15म्यूच्यूल फंड्स, इंस्टीटशंस और जनरल
- 4:36:17पब्लिक के पास कितनी होल्डिंग है। अब ये
- 4:36:20अगर आपने ध्यान से देखा हो तो हमारे टिककर
- 4:36:22में ज्यादा आसान तरीके से अवेलेबल है।
- 4:36:25लेकिन अगर आपको इसको और डिटेल में जानना
- 4:36:28है। जैसे डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल
- 4:36:30इन्वेस्टर्स में एग्जैक्टली कौन? एफआईआई
- 4:36:32में एग्जैक्टली कौन? सबका एकदम ग्रैंडल
- 4:36:35जानना है कि कितना LIC ने लगाया है, कितना
- 4:36:37किसी म्यूच्यूल फंड ने लगाया है। तो आपको
- 4:36:39एनुअल रिपोर्ट में आना पड़ेगा। अब यहां हम
- 4:36:42देखते हैं डिटेल्स कि किसने कितना पैसा
- 4:36:44लगाया है। जैसे अब हम इस सेक्शन पे पहुंचे
- 4:36:47कि टॉप 10 शेयर होल्डर्स इस कंपनी में कौन
- 4:36:49है? प्रमोटर्स के अलावा तो थप्स मैथ्यूस
- 4:36:53इंडिया फंड LIC का काफी स्टेक है इस कंपनी
- 4:36:56का। Reliance स्माल कैप फंड ने इसमें
- 4:36:58लगाया हुआ है। तो ऐसे आपको यह पता चलेगा
- 4:37:01कि एग्जैक्टली पीपीएफएस म्यूच्यूल फंड
- 4:37:03जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन की एग्जैक्टली
- 4:37:06किन इन्वेस्टर्स ने इस कंपनी में इन्वेस्ट
- 4:37:08किया है। उसकी डिटेल आपको पता चलेगी। इसके
- 4:37:11अलावा यहां आपको पता चल रहा है कि इस
- 4:37:14कंपनी ने कितना लोन लिया हुआ है। लिया है
- 4:37:16तो वो अनसिक्यर्ड है कि सिक्यर्ड है या
- 4:37:19किसी से डिपॉजिट लिया है। तो जैसे इस
- 4:37:20कंपनी ने पब्लिक से कुछ भी डिपॉजिट नहीं
- 4:37:23लिया है। और इस साल इस कंपनी ने लोन लिया।
- 4:37:26क्यों लिया? क्योंकि इसको हंस को एक्वायर
- 4:37:28करना था। उसके लिए पैसे चाहिए थे। तो
- 4:37:30पिछले साल के मुकाबले इस साल कर्जा कंपनी
- 4:37:33पे बढ़ गया है। यहां पे आपको पता चलता है
- 4:37:36कि कंपनी को जो लोग मैनेज कर रहे हैं
- 4:37:39डायरेक्टर्स, एमडी, चेयरमैन जैसे इस केस
- 4:37:42में सीईओ वो कितनी सैलरी लेते हैं। तो यह
- 4:37:45लेते हैं लगभग ₹ करोड़। तो सीईओ जो कंपनी
- 4:37:48के हैं वह सैलरी लेते हैं ₹.5 करोड़ के
- 4:37:51आसपास। और यह जो सवा5 करोड़ है इसको ध्यान
- 4:37:54रखिएगा कि गवर्नमेंट ने एक सीलिंग डिसाइड
- 4:37:57की हुई है कि कोई भी कंपनी अपने नेट
- 4:37:59प्रॉफिट का 10% से ज्यादा किसी सीईओ या की
- 4:38:03मैनेजेरियल पर्सन को नहीं दे सकती। तो उस
- 4:38:05केस में यहां पे सीलिंग है ₹.5 करोड़ के
- 4:38:09आसपास। लेकिन उसमें से ₹5 करोड़ ही सीईओ
- 4:38:12ने लिए हैं। यानी सीलिंग से कुछ हद तक कम।
- 4:38:14सीलिंग है 10% की। इन्होंने 7% के आसपास
- 4:38:18सैलरी ली है जो कि हायर है। इतनी नहीं
- 4:38:20होनी चाहिए। यूजुअली 4 5% के आसपास या
- 4:38:24उससे कम हो तो बेटर है। यहां बताया जा रहा
- 4:38:26है कि बोर्ड को मीटिंग्स के लिए कितनी फी
- 4:38:28दी गई। तो आप यह भी चेक करिएगा कि ये
- 4:38:30रीज़नेबल है ना? ऐसा तो नहीं कि एक बोर्ड
- 4:38:32मीटिंग में आने के लिए किसी को ₹1 एक
- 4:38:34करोड़ दिए जा रहे हैं। अगली जरूरी
- 4:38:36इंफॉर्मेशन है कि इस कंपनी की सब्सिडरीज
- 4:38:38कौन-कौन है? इन चीजों को अगर आप लैपटॉप
- 4:38:41यूज़ कर रहे हैं तो कंट्रोल एफ करके आप
- 4:38:42सीधा सब्सिडरी सर्च भी कर सकते हैं। जैसे
- 4:38:45इस कंपनी की ये सारी सब्सिडरी है। hins
- 4:38:47इंडिया पिछले साल ही इसकी सब्सिडरी बनी और
- 4:38:50ये बता रहे हैं कि इन्होंने hइ इंडिया को
- 4:38:53zाइडस न्यूट्रिशंस के साथ यानी इस कंपनी
- 4:38:55के साथ मर्ज कर दिया है। तो ये कंपनी की
- 4:38:58और कौन-कौन सी कंपनियों में इन्वेस्टमेंट
- 4:39:00है? है, शेयर होल्डिंग है। ये सारी
- 4:39:02जानकारी भी आपको डेफिनेटली देख लेनी
- 4:39:04चाहिए। इसके अलावा एक और जरूरी चीज होती
- 4:39:07है कंटिंजेंट लायबिलिटीज। किसी ने मुझसे
- 4:39:09वीडियो में कमेंट करके भी पूछा था कि
- 4:39:11कंटिंजेंट लायबिलिटीज क्या होती हैं?
- 4:39:13कंटिंजेंट लायबिलिटीज का एक एग्जांपल आप
- 4:39:16यह समझ लीजिए कि ऐसा पैसा जो शायद आपको
- 4:39:19किसी को देना पड़ सकता है या कोई ऐसा होने
- 4:39:21वाला नुकसान जो कंफर्म नहीं है लेकिन हो
- 4:39:24भी सकता है। मान लीजिए कोई कोर्ट केस चल
- 4:39:26रहा है। अगर वो कोर्ट केस आप हार गए तो
- 4:39:29आपको किसी को ₹ करोड़ देने पड़ेंगे। तो ये
- 4:39:31आपके लिए कंटिंजेंट लायबिलिटी हुई। जैसे
- 4:39:34इस केस में देखिए ये एक बड़ी कंटिंजेंट
- 4:39:37लायबिलिटी है लगभग ₹6 करोड़ की इन
- 4:39:39रिस्पेक्ट ऑफ सेल्स टैक्स मैटर यानी कंपनी
- 4:39:42का इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ कोई केस
- 4:39:44चल रहा है ₹65 करोड़ के सेल्स टैक्स के
- 4:39:47मैटर के रिगार्डिंग तो अगर कोर्ट में ये
- 4:39:50मैटर इनके खिलाफ आता है तो ₹6 करोड़ इनको
- 4:39:52पटाने पड़ेंगे तो ऐसे होने वाला नुकसान जो
- 4:39:55कंफर्म नहीं है लेकिन हो भी सकता है वो
- 4:39:58मिलता है आपको कंटेंजेंट लायबिलिटी वाले
- 4:40:00सेक्शन में तो इस सेक्शन को भी जरूर देख
- 4:40:03लीजिएगा और चिंता मत करिए। यह कोई बोरिंग
- 4:40:05सी अकाउंटिंग क्लास नहीं है। इसलिए हम
- 4:40:07उन्हीं फैक्टर्स पे फोकस करेंगे जो आपको
- 4:40:10इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने में मदद करें।
- 4:40:12तो चलिए शुरू करते हैं आज प्रॉफिट एंड लॉस
- 4:40:15स्टेटमेंट एनालाइज करना सीखना। तो कंपनी
- 4:40:17पेज पर आप डायरेक्टली इस पीएंडएल को क्लिक
- 4:40:20करके पीएंडएल सेक्शन में या प्रॉफिट एंड
- 4:40:21लॉस सेक्शन में जंप कर सकते हैं। अब एक
- 4:40:24बात का ध्यान रखिएगा कि प्रॉफिट एंड लॉस
- 4:40:26स्टेटमेंट जब आप देख रहे हैं तो अगर वो
- 4:40:28कंपनी में कंसोलिडेटेड स्टेटमेंट्स
- 4:40:30अवेलेबल हैं तो ज्यादातर समय कंसोलिडेटेड
- 4:40:33स्टेटमेंट्स ही देखें या दोनों स्टैंड
- 4:40:35अलोन कंसोलिडेटेड देखेंगे तो और बेहतर है।
- 4:40:37एक और चीज प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट
- 4:40:39हमेशा एक साल का होता है। यानी यह जो आप
- 4:40:42स्टेटमेंट देख रहे हैं 2015 तो यह कंपनी
- 4:40:45ने अप्रैल 1 से लेके 31 मार्च 2015 तक
- 4:40:48कैसा परफॉर्मेंस किया उसका लेखाजोखा है और
- 4:40:51उसके मुकाबले बैलेंस शीट होती है अब तक की
- 4:40:54यानी 2015 की जो आपको बैलेंस शीट दिख रही
- 4:40:57है ये आपको पिक्चर दिखा रही है इस कंपनी
- 4:40:59के बारे में कि जब से कंपनी शुरू हुई थी
- 4:41:02तब से लेके 2015 होते-होते इस कंपनी की
- 4:41:05क्या हालत है। तो इसे आप ऐसे भी समझ सकते
- 4:41:08हैं कि कई सालों का पीएंडएल मिलके बैलेंस
- 4:41:12शीट को शक्ल देता है। तो बैलेंस शीट कंपनी
- 4:41:14की ओवरऑल पिक्चर दिखाती है। पीएंडएल इस
- 4:41:17साल के पिक्चर दिखाती है। तो चलिए अब हम
- 4:41:19शुरू करते हैं हेड बाय हेड समझना कि
- 4:41:21प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट का किस चीज का
- 4:41:24क्या मतलब है? तो पहले है नेट सेल्स। अब
- 4:41:27नेट सेल्स को आप बेसिकली समझ सकते हैं कि
- 4:41:29कंपनी ने कितना माल बेचा, कितने रुपए का
- 4:41:32माल बेचा। उसने उस पे कितना कमाया, कुछ
- 4:41:34कमाया या लॉस में बेचा ये सब से उसको कोई
- 4:41:37लेना देना नहीं है। सिर्फ ये बता रहा है
- 4:41:39कि आपकी अगर दुकान है तो दुकान से आपने
- 4:41:41कितने रुपए का माल बेचा इस साल। अब अदर
- 4:41:44इनकम क्या होता है? अदर इनकम ये बताता है
- 4:41:46कि आप एग्जांपल लीजिए कि जैसे आप बिजनेस
- 4:41:49करते हैं। तो बिजनेस में जब आप इनकम टैक्स
- 4:41:51फाइल करेंगे तो आप एक हेड दिखाएंगे कि ये
- 4:41:54बिजनेस इनकम है। उसके अलावा आपकी किसी ना
- 4:41:56किसी और हेड से भी इनकम आ रही होगी। जैसे
- 4:41:59किसी से रेंट लिया या ब्याज पर पैसा दिया
- 4:42:01था तो इंटरेस्ट आ रहा है या फिर आपने कोई
- 4:42:03म्यूच्यूल फंड में इन्वेस्टमेंट किए थे
- 4:42:04बैंक में पैसा रखा था उसका इंटरेस्ट आ रहा
- 4:42:07है तो जो आपका मेन बिजनेस है जिससे आप
- 4:42:09अपना घर चलाते हैं उसको छोड़ के भी कम से
- 4:42:12कम हमारा बैंक में तो पैसा होता ही है
- 4:42:14जहां से इंटरेस्ट आता है थोड़ा बहुत
- 4:42:15म्यूच्यूल फंड में लगा ही होता है तो कुछ
- 4:42:18और सोर्सर्सेस भी सबके ऐसे होते हैं जहां
- 4:42:20से थोड़ा बहुत पैसा आ रहा होता है तो जो
- 4:42:22मेन बिजनेस है वो आ जाता है नेट सेल्स में
- 4:42:25और उसके अलावा हो सकता है कंपनी के पास
- 4:42:27बैंक बैंक इंटरेस्ट आ रहा हो, म्यूच्यूल
- 4:42:29फंड में इन्वेस्टमेंट हो या कहीं से रेंट
- 4:42:30ले रही हो तो ये उसकी होती है अदर इनकम।
- 4:42:33अब टोटल एक्सपेंडिचर ये वो एक्सपेंडिचर है
- 4:42:36जो कंपनी को ये दोनों चीजें लाने में चाहे
- 4:42:39सेल करने में चाहे अदर इनकम लाने में जो
- 4:42:42इसका खर्चा हुआ ये टोटल मिला के होता है
- 4:42:45अदर एक्सपेंडिचर। जैसे अगर आप माल बेच रहे
- 4:42:47हैं एक दुकान में तो आपको दुकान का रेंट
- 4:42:50देना है, बिजली का खर्चा देना है, अपने
- 4:42:52स्टाफ को सैलरी देनी है। ये सारा
- 4:42:54एक्सपेंडिचर आ जाता है टोटल एक्सपेंस में।
- 4:42:57इसके अलावा मान लीजिए अगर आपने सेविंग्स
- 4:42:59अकाउंट खुलवाया और वहां आपने पैसे डाले तो
- 4:43:02सेविंग्स अकाउंट में आपको इंटरेस्ट मिल
- 4:43:03रहा है वो अदर इनकम है लेकिन सेविंग्स
- 4:43:05अकाउंट में कुछ चार्जेस भी लग सकते हैं
- 4:43:07डेबिट कार्ड के चार्ज अकाउंट ओपनिंग चार्ज
- 4:43:09कुछ भी। तो वो अदर इनकम से रिलेटेड
- 4:43:11एक्सपेंडिचर है वो भी इस टोटल एक्सपेंडिचर
- 4:43:14में आ जाएगा। यानी हर तरीके के खर्चे जो
- 4:43:16नेट सेल्स या अदर इनकम लाने में लगे वो
- 4:43:19होता है टोटल एक्सपेंडिचर। अब बात करते
- 4:43:21हैं ऑपरेटिंग प्रॉफिट की। तो जब भी
- 4:43:23ऑपरेटिंग शब्द आता है तो आप यह समझ
- 4:43:25लीजिएगा कि यह कोर बिज़नेस की बात हो रही
- 4:43:28है। यानी माल बेच के कितना पैसा आया या
- 4:43:31कितना मुनाफा आया। तो जहां हम नेट सेल्स
- 4:43:34में बात कर रहे थे कि ये बताता है कि आपने
- 4:43:36कितने रुपए का सामान बेचा। ऑपरेटिंग
- 4:43:39प्रॉफिट ये बताता है कि अदर इनकम को हटा
- 4:43:42दिया जाए और इंटरेस्ट एक्सपेंस बाकी हर
- 4:43:45तरह के एक्सपेंस को हटा दिया जाए। बस ये
- 4:43:47देखा जाए कि आपको जिस दुकान से आपने सामान
- 4:43:50बेचा उस दुकान को चलाने में कच्चा माल
- 4:43:53खरीदने में, सैलरी देने में, बिजली देने
- 4:43:55में, दुकान से रिलेटेड खर्चों में आपका
- 4:43:58कितना खर्चा हुआ तो कितने का माल बेचा और
- 4:44:01डायरेक्ट एक्सपेंस कितना था। जैसे वो
- 4:44:03दुकान भले ही आपने लोन पे ली हो और वो लोन
- 4:44:05का आप ईएमआई पटा रहे हो। लेकिन वो इस चीज
- 4:44:08पे काउंट नहीं होगा। यह अस्यूम कर लिया
- 4:44:10जाएगा कि अगर आपकी दुकान खुद की होती और
- 4:44:13आपको इंटरेस्ट इनकम नहीं देना पड़ता तो आप
- 4:44:16इस दुकान पर कितना कमाते। कहीं सिर्फ
- 4:44:18इंटरेस्ट के कारण आपको बिजनेस लॉस तो नहीं
- 4:44:20हो रहा। अगर इंटरेस्ट नहीं होता तो क्या
- 4:44:22आप कोर बिनेस को प्रॉफिटेबली चला सकते थे?
- 4:44:25तो उसको कंपेयर करने के लिए कोर बिजनेस से
- 4:44:27कितना मुनाफा आया सारी सेल्स में से
- 4:44:30खर्चों को हटाने के बाद। सिर्फ बिजनेस
- 4:44:32रिलेटेड डायरेक्ट बिजनेस रिलेटेड खर्चों
- 4:44:34को हटाने के बाद। तो यह होता है ऑपरेटिंग
- 4:44:37प्रॉफिट। यह हमें बताता है कि कैपिटल
- 4:44:40स्ट्रक्चर चाहे जो भी हो चाहे बिजनेस ने
- 4:44:42पैसा इक्विटी के जरिए लाया हो या फिर
- 4:44:44बिजनेस ने पैसा डे के जरिए लाया हो जिस
- 4:44:46केस में ये इंटरेस्ट एक्सपेंस होगा। इन
- 4:44:48दोनों को अगर नजरअंदाज कर दिया जाए तो
- 4:44:51बिजनेस कैसा कर रहा है? इसके बाद आता है
- 4:44:53इंटरेस्ट। ये बेसिकली वो अमाउंट है जो
- 4:44:55आपने किसी से बोरो किया है, उधार पे लिया
- 4:44:58है और आपको उसको ब्याज देना है। तो ये
- 4:45:00ब्याज का अमाउंट है इंटरेस्ट। अब
- 4:45:03डेप्रिसिएशन। डेप्रिसिएशन एक बहुत
- 4:45:05इंटरेस्टिंग लेकिन सिंपल कांसेप्ट है।
- 4:45:07देखिए अगर आपको बिजनेस करने के लिए एक
- 4:45:09लैपटॉप की जरूरत है। आपको लैपटॉप खरीदते
- 4:45:12हैं ₹00 में और आपको उम्मीद है कि यह
- 4:45:15लैपटॉप 3 साल चलेगा। तो आप ऐसा सोचिए कि
- 4:45:18आपने इस साल लाख का माल बेचा और उस माल को
- 4:45:21आपने ₹50,000 में खरीदा था और फिर उसको
- 4:45:24अपनी दुकान से लाख में बेचा। तो अब आपका
- 4:45:26मुनाफा हो रहा है। मान लेते हैं कोई और
- 4:45:28खर्चा नहीं है तो ₹00 लेकिन आपने वो दुकान
- 4:45:32जब शुरू की तो साथ में एक लैपटॉप भी
- 4:45:34खरीदा। वो लैपटॉप था ₹00 का। अब अगर उस
- 4:45:38₹00 को भी इस टोटल एक्सपेंडिचर में मान
- 4:45:41लिया जाए तो ₹00 का माल जो आपने खरीदा और
- 4:45:44₹00 का लैपटॉप यानी ₹80,000 का आपका खर्चा
- 4:45:47हुआ और आपने लाख का माल बेचा। यानी आपने
- 4:45:50कमाया ₹00 लेकिन यह सही नहीं होगा क्योंकि
- 4:45:54जो लैपटॉप आपने लिया तो लैपटॉप एक साल
- 4:45:57नहीं चलता 3 साल लगभग के आसपास चल जाता है
- 4:46:00तो ऐसे में आप पूरा ₹00 खर्चा लैपटॉप का
- 4:46:04इसी साल का है ऐसा क्यों मान ले रहे हैं
- 4:46:06वो लैपटॉप से आप 3 साल काम करने वाले हैं
- 4:46:09तो उस लैपटॉप का खर्चा भी आपको 3 साल में
- 4:46:12डिवाइड करना चाहिए तो बेसिकली अकाउंटिंग
- 4:46:15पॉलिसी के हिसाब से आप ऐसा करेंगे कि आप
- 4:46:18₹10 ₹100 इस साल खर्चा दिखाएंगे लैपटॉप का
- 4:46:2110,000 अगले साल और 10,000 उसके अगले साल।
- 4:46:24ऐसे में क्या होगा कि आपने ₹00 का माल
- 4:46:27खरीदा। ₹100 आपका लैपटॉप का खर्चा हुआ। यह
- 4:46:30हो गया ₹0000 और लाख का आपने माल बेचा था
- 4:46:33तो आप ₹400 कमाए। तो वो खर्चा जो आप इस
- 4:46:37साल का मानेंगे कि लैपटॉप पे हुआ वो इस
- 4:46:40साल के डेप्रिसिएशन पे आएगा। यानी अगर 3
- 4:46:43साल चलने वाला है लैपटॉप और आपने ₹00 का
- 4:46:45लिया तो इस साल डेप्रिसिएशन आएगा ₹10,000
- 4:46:49का। इसके बाद आता है एक्सेप्शनल आइटम्स।
- 4:46:51ये बेसिकली आप समझ लीजिए कि बिजनेस को या
- 4:46:54तो भूकंप आ गया और इंश्योरेंस नहीं था और
- 4:46:56कुछ ऐसा लॉस हो गया जो जनरली नहीं होना
- 4:46:58चाहिए था या फिर बिजनेस की कोई लॉटरी निकल
- 4:47:01गई। तो कुछ ऐसा एक्सेप्शनल आइटम जो
- 4:47:04यूजुअली होगा नहीं। उसके कारण कहीं इस साल
- 4:47:07का मुनाफा कम या ज्यादा तो नहीं दिख रहा।
- 4:47:09क्योंकि अगर ऐसा होगा कि मान लीजिए बिजनेस
- 4:47:11की कोई लॉटरी निकल गई और ₹100 कमाता था इस
- 4:47:14साल ₹1000 कमा लिया तो हम यह सोच के खुश
- 4:47:17ना हो जाए कि चलो प्रॉफिट 10 गुना बढ़
- 4:47:19गया। ये कंपनी खूब तेजी से प्रॉफिट कमा
- 4:47:21रही है। तो अगर प्रॉफिट एक्सेप्शनल आइटम्स
- 4:47:23के कारण बढ़ा है तो मतलब ये कोई खास अच्छी
- 4:47:26बात नहीं है। इसे आप इग्नोर कर दीजिए।
- 4:47:28जैसे गोदरेज के केस में इसका टोटल प्रॉफिट
- 4:47:31है लगभग 2340 करोड़ जिसमें से 250 करोड़
- 4:47:35या 10% प्रॉफिट ही एक्सेप्शनल आइटम्स के
- 4:47:38कारण आया है। तो ये बहुत ज्यादा नहीं है।
- 4:47:40इसके बाद आता है प्रॉफिट बिफोर टैक्स और
- 4:47:42ये तो नाम से क्लियर है कि टैक्स लगने के
- 4:47:44पहले अगर कंपनी पे कोई टैक्स नहीं लगता तो
- 4:47:47उसको कितना मुनाफा होता है। ये इसलिए
- 4:47:50जरूरी है कि अलग-अलग कंपनियों पे हर साल
- 4:47:52टैक्स लायबिलिटी गिरती कम होती रहती है।
- 4:47:55हो सकता है किसी कंपनी को स्पेशल
- 4:47:56एक्सेंपशन मिला हो। किसी ने स्पेशल
- 4:47:58इकोनॉमिक ज़ोन में शुरुआत की हो तो कुछ साल
- 4:48:00का टैक्स ब्रेक मिला हो। तो यह देखने के
- 4:48:02लिए कि अगर टैक्स नहीं लगता, तो यह कंपनी
- 4:48:05कितना प्रॉफिट कमाती उसके लिए यह कॉलम
- 4:48:07होता है। इसके बाद आता है टैक्स। ये सरकार
- 4:48:10को कितना टैक्स पे किया किसी कंपनी ने वो
- 4:48:12दिखाता है और उसके बाद ये सब हट के आता है
- 4:48:16कि कंपनी ने कितना वाकई में नेट प्रॉफिट
- 4:48:19कमाया। इंटरेस्ट को कंसीडर करके,
- 4:48:22डेप्रिसिएशन हटा के, एक्सेप्शनल आइटम्स को
- 4:48:24एडजस्ट करके, टैक्स पे करके सब कुछ करके
- 4:48:27कितना सच में शुद्ध मुनाफा कंपनी ने कमाया
- 4:48:31वो नेट प्रॉफिट होता है। इसके बाद आता है
- 4:48:33एडजस्टेड ईपीएस। अब ये आपको सिंपल बताता
- 4:48:36है कि नेट प्रॉफिट है मान लीजिए ₹50 और
- 4:48:39टोटल शेयर्स थे 10। तो पर शेयर प्रॉफिट या
- 4:48:43अर्निंग पर शेयर कितना हुआ? तो अगर ₹50
- 4:48:46प्रॉफिट है और टोटल शेयर्स हैं 10 तो मैं
- 4:48:4950 को 10 से डिवाइड करूंगा तो अर्निंग पर
- 4:48:51शेयर हुआ ₹5। एक शेयर अगर मेरे पास है तो
- 4:48:55मैंने उसके बदले ₹5 का मुनाफा कमाया। ये
- 4:48:57मुझे ईपीएस बताता है। तो इस तरीके से ये
- 4:49:00सारे मेन हेड्स हैं प्रॉफिट एंड लॉस
- 4:49:02स्टेटमेंट में। इसमें हम अगले कुछ ही
- 4:49:04हफ्तों में कुछ और कॉलम्स डाल रहे हैं
- 4:49:05ताकि आपको और क्लियर हो सके और और डिटेल
- 4:49:08में हम प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट देख
- 4:49:10सकें। हां इसमें एक जरूरी चीज जैसे अगर
- 4:49:12आपको देखना है कि अदर इनकम में कहां से आई
- 4:49:14इनकम या एक्सेप्शनल आइटम्स तो ये क्या
- 4:49:17एक्सेप्शनल हुआ कि गोदरेज ने ₹250 करोड़
- 4:49:19कमा लिए तो उसके लिए जरूरी है कि आप
- 4:49:22डॉक्यूमेंट सेक्शन पे जाएं एनुअल रिपोर्ट
- 4:49:24डाउनलोड करें और उसमें कंट्रोल फाइंड करके
- 4:49:26प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट के नोट्स में
- 4:49:28चले जाएं और वहां आपको यह डिटेल मिल जाएगी
- 4:49:31कि अदर इनकम एग्जैक्टली क्या थी?
- 4:49:33एक्सेप्शनल आइटम एग्जैक्टली क्या था? या
- 4:49:35जो भी आप जानना चाहते हैं वो आपको
- 4:49:37डॉक्यूमेंट सेक्शन में एनुअल रिपोर्ट
- 4:49:39डाउनलोड करके मिल जाएगा।
- 4:49:40बाय हियरिंग द टर्म कैश फ्लो स्टेटमेंट यू
- 4:49:42मस्ट हैव अंडरस्टुड दिस स्टेटमेंट शोज़ द
- 4:49:44कैश इनफ्लो एंड आउटफ्लो ऑफ़ अ बिज़नेस एंड द
- 4:49:47कैश फ्लो स्टेटमेंट वन ऑफ़ द मोस्टेंट
- 4:49:49एस्पेक्ट्स ऑफ़ एनालाइजिंग एनी कंपनी
- 4:49:53नाउ द कन्फ्यूजन अराइज़ द प्रॉफिट एंड लॉस
- 4:49:56स्टेटमेंट आल्सो टेल्स यू हाउ मच प्रॉफिट
- 4:49:58एंड लॉस कंपनी हैज़।
- 4:50:02हाउएवर द डिफरेंस बिटवीन द टू द कैश फ्लो
- 4:50:05स्टेटमेंट हाउ मच कैश कंपनी एक्चुअली
- 4:50:09पीएल अकाउंट नॉट
- 4:50:14दिस कंपनी प्रॉफिट
- 4:50:17टू रिसीवमेंट इन
- 4:50:21दिस कैश फ्लो स्टेटमेंट
- 4:50:24लेट्स अंडरस्टैंड दिस
- 4:50:27सपोज आई हैव पेंट शॉप आई सेल 200 पेंट
- 4:50:31डेली द कॉस्ट ऑफ़ ईच कैन इज ₹100
- 4:50:35माय टोटल डेली सेल्स आरपी
- 4:50:39इफ आई अपडेट माय पीएनएल टू टुडे डेट माय
- 4:50:42रेवेन्यू विल बी ₹2000
- 4:50:44नाउ वी हैव कंसीडर्ड कॉस्ट एनीथिंग एल्स
- 4:50:49नाउ सपोज आई सेल ओनली 150
- 4:50:54रिमेनिंग क्रेडिट
- 4:50:56रिमेनिंग ₹000 आफ्टर सम टाइम
- 4:51:00सो हाउ मच कैश कंपनी ओनली ₹1000
- 4:51:05पीएल अकाउंट दिस बिकॉज़ इट ओनली टोटल
- 4:51:08रेवेन्यू व्हिच इज
- 4:51:13वेल इट लुक्स गुड द कंपनी हैज़ एक्चुअली
- 4:51:16रियलाइज़ मच रेवेन्यू
- 4:51:20एंड इट्स आल्सो पॉसिबल दैट द कंपनी मे
- 4:51:22नेवर रिसीव द रिमेनिंग ₹5000 इन द फ्यूचर
- 4:51:26सो द पीएनएल स्टेटमेंट डजंट गिव यू द फुल
- 4:51:29पिक्चर ऑफ़ द कंपनी। मी
- 4:51:33द पिक्चर रिम्स माय फ्रेंड
- 4:51:40एंड मोस्ट इन्वेस्टर्स एंड ट्रेडर्स फोकस
- 4:51:42प्राइमली ऑन द पीएनएल स्टेटमेंट कंपनी आर
- 4:51:45ऑफ़ दिस
- 4:51:48देम
- 4:51:52एंड देन व्हेन पेमेंट टाइम कम्स कैंसिलिंग
- 4:51:55द बिल बैक द गुड्स
- 4:51:58इन दिस केस वी सी इनक्रीस सेल्स लेट्स
- 4:52:02अंडरस्टैंड द थ्री हेडिंग्स कैश फ्लो
- 4:52:04स्टेटमेंट ऑपरेटिंग इन्वेस्टिंग एंड
- 4:52:07फाइनेंसिंग
- 4:52:08फर्स्ट लेट्स अंडरस्टैंड व्हाट फाइनेंसिंग
- 4:52:10इज फाइनेंसिंग एक्टिविटी टेल यू द कंपनी
- 4:52:14कैपिटल स्ट्रक्चर
- 4:52:17दिस एक्टिविटी इंक्लूड्स ऑल फाइनशियल
- 4:52:19ट्रांजक्शन सच एस पेइंग डिविडेंड लोन इशू
- 4:52:23शेयर्स और बंड्स और टेकिंग अ न्यू लोन
- 4:52:28अ पॉजिटिव कैश फ्लो फ्रॉम फाइनेंसिंग
- 4:52:30एक्टिविटी द कंपनी हैज़ रे एडिशनल फंड्स
- 4:52:33थ्रू लोन इक्विटी
- 4:52:37अ नेगेटिव कैश फ्लो इंडिकेट्स दैट द कंपनी
- 4:52:40हैज़ रीपेड अ लोन और बोट बैक शेयर्स
- 4:52:42रिजल्टिंग इन अ कैश आउटफ्लो
- 4:52:46नेगेटिव कैश फ्लो डजंट हैव अ सिग्निफिकेंट
- 4:52:49इंपैक्ट नाउ लेट्स अंडरस्टैंड द सेकंड
- 4:52:52एक्टिविटी व्हिच इज़ इन्वेस्टिंग एक्टिविटी
- 4:52:55अ कंपनीज़ फिक्स्ड एसेट्स आर आल्सो
- 4:52:57कंसीडर्ड इन्वेस्टमेंट्स
- 4:53:00इफ इन्वेस्टिंग एक्टिविटी नेगेटिव इट
- 4:53:02मीन्स द कंपनी है परचेस एसेट्स
- 4:53:06दिस बी लैंड फॉर अ न्यू प्रोजेक्ट
- 4:53:08इन्वेस्टमेंट
- 4:53:11मीन वाइल इफ कैश फ्लो इज पॉजिटिव इट मीन्स
- 4:53:14द कंपनी हैज़ सोल्ड समथिंग सच फिक्स्ड
- 4:53:16एसेट्स व्हिच हैज़ जनरेटेड कैश
- 4:53:20इफ द कंपनीज़ एक्सपीरियंसिंग अ
- 4:53:22सिग्निफिकेंट कैश इनफ्लो इट्स सरप्राइजिंग
- 4:53:26इट्स पॉसिबल द कंपनी
- 4:53:33एक्टिविटीवर
- 4:53:37द मोस्टेंट एक्टिविटी ऑपरेटिंग कैश फ्लो
- 4:53:40एस इट्स यू अबाउट द कंपनी इनकम जनरेशन कोर
- 4:53:43बिनेस
- 4:53:46ऑपरेटिंग एक्टिविटी एक्टिविटी इन डे टू डे
- 4:53:50बिनेस ऑपरेशंस
- 4:53:52मैन्युफैक्चरिंग सेल्स मार्केटिंग एंड
- 4:53:55हायरिंग एक्सपेंसेस व्हेन डस अ कंपनी
- 4:53:58कैशोकर
- 4:54:05गुड्स ऑन क्रेडिट
- 4:54:08इफ वीसीव
- 4:54:11कंपनी कैश एस पार्ट बिनेस ऑपरेशन कंपनी
- 4:54:15कैश आउटफ्लो
- 4:54:18बेसिकली द कंपनी एक्सपेंसे इंक्लूड ऑल
- 4:54:21टाइप्स ऑफ़ कैश एक्सपेंसेस डायरेक्टली
- 4:54:23रिलेटेड टू बिनेस ऑपरेशंस
- 4:54:26इट्स पॉस पॉसिबल द कंपनी परचेस गुड्स ऑन
- 4:54:29क्रेडिट नाउ इट्स क्रेडिटर्स
- 4:54:34एक्टिविटी हाउ मच कैश कमिंग इन द कंपनी
- 4:54:37बिनेस ऑपरेशन
- 4:54:41एनी प्रॉफिट मेकिंग कंपनी
- 4:54:44टाइमली मैनर एंड इट्स कैश फ्लो ऑपरेटिंग
- 4:54:47पॉजिटिव
- 4:54:50दिस इफ कंपनी से एंड प्रॉफिट्स आर
- 4:54:53इनक्रीसिंग द कैश फ्लो इज इनक्रीसिंग
- 4:54:56प्रोपोशननेटली
- 4:54:57्सो
- 4:55:02मीन कंपनी
- 4:55:04क्विकली इट्स बुकिंग फेक सेल्स
- 4:55:09हाउवर दिस डिफरेंट टाइप्स कंपनी
- 4:55:14सीनी स्कॉपुलर
- 4:55:18वाम इन्ह दैनपुलेटेड
- 4:55:22फेक से रेवेन्यू शोवर
- 4:55:25दे नो एक्चुअल कैश इनफ्लो
- 4:55:28हाउ वी अबाउट थिंग्स
- 4:55:32द
- 4:55:34सीएफओ पीटी रेशियो
- 4:55:37दिस रेशियो टेल्स अस हाउ मच ऑफ़ द नेट
- 4:55:39प्रॉफिट इज़ बीइंग कन्वर्टेड इनू कैश
- 4:55:43अ रेशियो ग्रेटर देन वन इज़ कंसीडर्ड गुड अ
- 4:55:47रेशियो लेस देन वन इज़ अ नेगेटिव साइन फॉर
- 4:55:49एनी कंपनी
- 4:55:51सो लेट्स अंडरस्टैंड दिस विथ सम कंपनी
- 4:55:53एक्स
- 4:55:55यू कैन यूज़ टकर फॉर दिस
- 4:55:58इफ वी गो टू टकर एंड सर्च हिंदुस्तानवर इन
- 4:56:03द रेशियो सेक्शन सी द कार्बन मोनो
- 4:56:05हाइपोफ्लोराइड टू पैड रेशियो 1.05 व्हिच
- 4:56:09इज अ वेरी गुड साइन
- 4:56:13जनरली कंपनी रिक्वेस्ट मनी एडवांस
- 4:56:17रिलेशनशिप्स
- 4:56:19पेमेंट्स क्विकली
- 4:56:23नाउ लेट्स टेकदर एक्स इंडस्ट्री
- 4:56:27सीन देके
- 4:56:30दिस एबी टू सी कंपनी इफ यू लुक इट सेल्स
- 4:56:34सीक
- 4:56:36अट्रैक्टिव इफ यू लुक इट्स प्रॉफिट इट्स
- 4:56:39आल्सो इनक्रीसिंग
- 4:56:41व्हिच इज अगेन गुड साइन
- 4:56:44बट नाउ लेट सी कन्वर्ट इट्स प्रॉफिट्स कैश
- 4:56:49नाउ इफ यू लुक इट्स कैश फ्लो ऑपरेटिंग
- 4:56:52इट्स फ्लक्चुएटिंग
- 4:56:54दिस दिस मीन्स इट्स कैश फ्लो इज
- 4:56:56इनक्रीसिंग इन द सेम प्रोपशन एस इट्स नेट
- 4:56:58प्रॉफिट
- 4:57:01इफ यू लुक एट इट्स सीएफओ पर एनम इट्स नॉट
- 4:57:04अवेलेबल बिकॉज़ इट्स सीएफओ परम नेगेटिव
- 4:57:09लुक इट्स कंपनी वीआईपी
- 4:57:19नेगेटिव
- 4:57:24इफ यू लुक इट्स रेशियो दे ग्रेटर देन वन
- 4:57:27इन द सेम इंडस्ट्री सीन टू सिनेरियो
- 4:57:31इट्स पॉसिबल इंडस्ट्री मैनेजिंग इट्स कैश
- 4:57:34एंड वर्किंग कैपिटल
- 4:57:38लुकिंग एट द फाइव ईयर सीएफओ परम टू
- 4:57:40अंडरस्टैंड द कंपनी ट्रेंड
- 4:57:44इफ यू लुक एट जस्ट वन ईयर इट्स पॉसिबल कैश
- 4:57:47फ्लो हैज़ कम इन टू समरी रीज़
- 4:57:50द कोविड 19 डिस्ट्रीब्यूशन चैनल हैज़
- 4:57:54पेमेंट्स आर बी
- 4:57:57इफ यू लुक सिंगल गेट रोंग पिक्चर
- 4:58:01देयर
- 4:58:03टू अंडरस्टैंड द ट्रेंड दिस कास्टेंट फॉर
- 4:58:07द कंपनी इशू
- 4:58:10लेट्स कंसीडर एन नेचर ऑफ़ द बिनेस इट
- 4:58:16लेट्स कंसीडर एन इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी
- 4:58:18एलएटी
- 4:58:20इफ यू लुक एट इट्स नेट प्रॉफिट इट्स बीन
- 4:58:22ग्रोइंग कंसिस्टेंटली
- 4:58:30सीओस
- 4:58:33कंपनी
- 4:58:36हाउ दिस कंपनीनेस लुअर
- 4:58:46सीएफओने
- 4:58:51दे अदर सेक्टर्स कैश फ्लोच
- 4:58:55बक्स एनबीएफसी
- 4:58:58इंफ्रास्ट्रक्चर
- 4:59:00देन कंडक्टिंग क्वांटिटेटिव एनालिसिस
- 4:59:03स्टॉक लुकिंग रेशियो इट्स क्रूशियल टू
- 4:59:06कंसीडर द नेचर ऑफ़ द बिनेस इंडस्ट्री
- 4:59:11सिंपल वेयर द कंपनी एनालाइजिंग इट्स
- 4:59:16दिस विल गिव यू एन आईडिया वेदर दिस कंपनी
- 4:59:18फॉलोइंग अ सिमिलर ट्रेंड वेदर द एंटायर
- 4:59:20इंडस्ट्री इज फॉलोइंग द सेम ट्रेंड
- 4:59:24कैश फ्लो स्टेटमेंट्स आर आल्सो क्रूशियल
- 4:59:26एस देपुलेटेड
- 4:59:30कंपनी मे इनफ्लेट सेल्स दे कैन नॉट
- 4:59:32इनफ्लेट कैश
- 4:59:34आज के इस वीडियो में हम एक बहुत जरूरी
- 4:59:36शायद सबसे जरूरी कांसेप्ट डिस्कस करने
- 4:59:38वाले हैं। कांसेप्ट एक ही है लेकिन थोड़ा
- 4:59:41कॉम्प्लिकेटेड है। मैं बहुत सारे
- 4:59:42एग्जांपल्स यूज़ करूंगा। अगर आपको समझ में
- 4:59:45ना आ रहा हो ऐसा लगे तो भी पेशेंस बना के
- 4:59:48रखिएगा और इस वीडियो को पूरा देखिएगा और
- 4:59:50तरह-तरह के एग्जांपल्स के बाद आई एम श्योर
- 4:59:53कि आपको ये कांसेप्ट समझ में आ जाएगा। तो
- 4:59:55आज हम डिस्कस करने वाले हैं कि फ्री कैश
- 4:59:58फ्लो क्या होता है? ये एक बहुत इंपॉर्टेंट
- 5:00:00कांसेप्ट है जिससे आगे आपको बहुत मदद
- 5:00:02मिलेगी। तो चलिए आज एक सिंपल एग्जांपल से
- 5:00:05हम समझेंगे कि फ्री कैश फ्लो क्या होता
- 5:00:08है? जैसे कि आप एचयूएल के केस में देख रहे
- 5:00:11हैं फ्री कैश फ्लो पर शेयर। इस शेयर को आप
- 5:00:13इस ड्रॉपडाउन को यूज़ करके आप यहां पे जो
- 5:00:16टाइप करेंगे वो आ जाएगा। तो आप ड्रॉपडाउन
- 5:00:19को यूज़ करके इस पैरामीटर को डाल सकते हैं।
- 5:00:21तो अब पहले हम ये समझते हैं कि फ्री कैश
- 5:00:24फ्लो पर शेयर क्या होता है? देखिए उसके
- 5:00:26लिए हमको एक बार ये रिवाइज करने की जरूरत
- 5:00:29है कि क्यों ज्यादातर कैश फ्लो ज्यादा
- 5:00:31जरूरी और रिलायबल होता है प्रॉफिट एंड लॉस
- 5:00:34से। तो हमने ये पहले भी डिस्कस किया है कि
- 5:00:37जितना प्रॉफिट होता है जरूरी नहीं है वो
- 5:00:39कंपनी को सारा का सारा प्रॉफिट सच में
- 5:00:41मिले। जैसे आपने किसी को माल बेचा और आपने
- 5:00:45अपनी खाते में डाल दिया कि मैंने इसको माल
- 5:00:48₹100 में बेचा। मेरी कॉस्ट 80 थी तो मुझे
- 5:00:50₹20 का प्रॉफिट हुआ और वो आपको चेक दे
- 5:00:53देता है उसके बदले। अब हो सकता है वो चेक
- 5:00:55बाउंस हो जाए। सिग्नेचर मिसमैच हो उसके
- 5:00:57खाते में पैसा ही ना हो और वो पैसा आपको
- 5:00:59मिले ही ना। तो इसीलिए कैश फ्लो ज्यादा
- 5:01:02रिलायबल होता है। वो सच में पता चलता है
- 5:01:05कि जो प्रॉफिट आपने कमाया है उसके बदले
- 5:01:07पैसा सच में आपको मिला कि नहीं मिला। और
- 5:01:10अब देखते हैं कि कैसे कैश और प्रॉफिट में
- 5:01:13फर्क होता है। देखिए Hindstan Unilever का
- 5:01:15ईपीएस हमें दिख रहा है 27.94 यानी अर्निंग
- 5:01:19पर शेयर यानी पर शेयर के पीछे मुनाफा दिख
- 5:01:23रहा है 27.94
- 5:01:25वहीं हर शेयर के पीछे कैश फ्लो पर शेयर
- 5:01:28यानी एक शेयर के पीछे कितना कैश सच में
- 5:01:32आया कंपनी को बिजनेस करके वो है 26.46
- 5:01:37यानी प्रॉफिट पर शेयर ₹1.5 ज्यादा आया
- 5:01:41लेकिन वो प्रॉफिट कैश के रूप में कंपनी के
- 5:01:44पास आया ही नहीं। ऐसा केवल इस साल हुआ है।
- 5:01:46तो हो सकता है ये कैश डिले हुआ हो और अगले
- 5:01:49महीने अगले 2 महीने बाद ये कैश आ जाए और
- 5:01:51ये डिफरेंस कम हो जाए। लेकिन पिछले साल की
- 5:01:54स्थिति ये थी कि जितना प्रॉफिट दिखा पर
- 5:01:57शेयर उतना कैश नहीं आया। तो कई कंपनियां
- 5:02:00आपको ऐसे मिलेंगी जो प्रॉफिट तो खूब दिखा
- 5:02:02रही हैं। जिनका ईपीएस काफी दिख रहा है
- 5:02:04लेकिन कैश आया ही नहीं। और अगर पैसा नहीं
- 5:02:06आएगा तो इस कागजी प्रॉफिट का मैं क्या
- 5:02:09करूंगा? मुझे तो सच में पैसा चाहिए। तो
- 5:02:11इसीलिए हम कैश फ्लो को ज्यादा रिलायबल
- 5:02:15पैरामीटर मानते हैं। अब हम डिस्कस करते
- 5:02:18हैं कि फ्री कैश फ्लो क्या होता है? इसके
- 5:02:20लिए एक बहुत सिंपल एग्जांपल लेते हैं।
- 5:02:23आपके पास ₹20 थे। आपने ₹10 ₹1 की दो
- 5:02:26पेंसिल्स खरीदी और उन दोनों पेंसिल्स को
- 5:02:29आपने ₹1-15 में बेच दिया। अब दिन के अंत
- 5:02:32में आपके पास ₹30 हैं। ₹20 से आपने खरीदा
- 5:02:35था। आपके पास अब ₹30 हैं। यानी दिन में
- 5:02:38आपने ₹10 कमाए। आपका प्रॉफिट अब दिख रहा
- 5:02:40है ₹10 और अब वो आपको ₹30 मिले भी। कस्टमर
- 5:02:44ने आपको ₹1-15 दे दिए। तो अब इस एग्जांपल
- 5:02:47में क्या हुआ कि आपने ₹20 की चीज खरीदी थी
- 5:02:50और ₹30 में बेच दिया। आपको ₹10 का प्रॉफिट
- 5:02:53हुआ और उस कस्टमर ने आपको पैसे दे भी दिए।
- 5:02:56तो ₹10 का कैश फ्लो भी आ गया क्योंकि वो
- 5:02:58प्रॉफिट जो ₹10 का था वो कैश के रूप में
- 5:03:01आपको मिल भी गया। तो अभी ईपीएस और कैश
- 5:03:04फ्लो दोनों ₹10 ₹10 है। तो अब जानते हैं
- 5:03:07कि फ्री कैश फ्लो कितना हुआ। देखिए ऐसा तो
- 5:03:10नहीं है कि मेरे को एक ही दिन बिजनेस करना
- 5:03:12है। ज्यादातर बिजनेसेस तो गोइंग कंसर्न
- 5:03:14होते हैं। यानी हम यह मान के चलते हैं कि
- 5:03:16ये बिजनेस रोज चलेंगे। रोज व्यापार होगा
- 5:03:20और ये बिनेसेस ग्रो करना भी चाहते हैं। तो
- 5:03:22अब अगर कल को मेरा यह प्लान है कि चलो ठीक
- 5:03:25है। आज मैंने दो पेंसिल बेची और मुझे ₹30
- 5:03:28मिल गए। और अब कल जरूरी है कि मैं 30
- 5:03:31पेंसिल खरीदूं क्योंकि रोज ऐसे दो पेंसिल
- 5:03:33खरीद के ₹10 कमाने से तो घर चलेगा नहीं।
- 5:03:35मुझे धीरे-धीरे इस बिज़नेस को बढ़ाना है
- 5:03:37ताकि मैं घर चला सकूं और यह बिज़नेस
- 5:03:39सस्टेनेबल हो सके। तो पहले दिन मैंने दो
- 5:03:42पेंसिल से ₹10 कमा लिए। अब मेरे पास ₹30
- 5:03:44हैं। अब मैं तीन पेंसिल खरीद सकता हूं और
- 5:03:47ये मुझे घर चलाने के लिए अपना धंधा चलाने
- 5:03:50के लिए जरूरी है कि मैं हर रोज ज्यादा माल
- 5:03:52खरीदूं और ज्यादा बेचूं। तो ऐसे में फ्री
- 5:03:55कैश फ्लो हो जाएगा ज़ीरो। क्योंकि वह जो
- 5:03:59₹10 का कैश फ्लो एडिशनल आया भी उससे भी यह
- 5:04:02जरूरी है कि आप पेंसिल खरीदें और अपने
- 5:04:05व्यापार को बढ़ाएं और अगले दिन आप ₹45 की
- 5:04:08सेल करें और ₹15 कमाएं। नहीं तो ₹10 रोज
- 5:04:12की कमाई से तो घर चलेगा नहीं। तो वो जो
- 5:04:15₹10 कैश आया वो कैश ऐसा नहीं है कि आप उसे
- 5:04:18उड़ा सकते हैं। आप उसे किसी को गिफ्ट कर
- 5:04:20सकते हैं। वो कैश आपकी मजबूरी है कि आप उस
- 5:04:23₹10 से भी पेंसिल खरीदें और अगले दिन तीन
- 5:04:26पेंसिल बेचे। ये आपके बिजनेस की मजबूरी
- 5:04:28है। यानी वो जो ₹10 का कैश आया वो फ्री
- 5:04:32कैश नहीं था। उससे आप जो चाहे वो नहीं कर
- 5:04:35सकते। उससे आपको पेंसिल ही खरीदनी है। तो
- 5:04:38देखिए अब इसको हम रियल वर्ल्ड में समझते
- 5:04:40हैं कि एक कंपनी है सीमेंट बनाने वाली।
- 5:04:43उसने सीमेंट बनाया और अच्छे से बेचा और
- 5:04:45खूब मुनाफा कमाया और उसका कैश भी आ गया।
- 5:04:48लेकिन साल भर सीमेंट बनाने के बाद उसने
- 5:04:51देखा कि उसकी प्लांट और जो मशीनरी थी वो
- 5:04:54काफी खराब हो गई है और शायद उसे नई मशीनंस
- 5:04:56खरीदनी पड़ेंगी। तो अब उसको अपने प्रॉफिट
- 5:04:59में से उसको अपने कैश फ्लो में से एक बड़ा
- 5:05:02हिस्सा प्लांट को रिपेयर करने में और नई
- 5:05:04मशीन लगाने में इन्वेस्ट करना पड़ेगा। तो
- 5:05:07वो हिस्सा जिससे उसको प्लांट की मरम्मत
- 5:05:10करनी है कैश फ्लो में से उस हिस्से को
- 5:05:13माइनस कर दिया जाएगा और उसके बाद जो ऐसा
- 5:05:16पैसा बचेगा जो सच में सरप्लस है जिससे वो
- 5:05:19सीमेंट कंपनी चाहे तो डिविडेंड बांट दे
- 5:05:21चाहे तो अपने पास रिजर्व्स पड़े रहने दे
- 5:05:23चाहे तो म्यूच्यूल फंड में लगा दे उस पैसे
- 5:05:25से उसकी बिजनेस की कंटिन्यूटी डिपेंड नहीं
- 5:05:28करती प्रॉपर बोनस मनी जिससे उसको प्लांट
- 5:05:31की मरम्मत या बिजनेस चलाने के खर्चे नहीं
- 5:05:34उठाने हैं वो होता है फ्री कैश फ्लो लो
- 5:05:37यानी एक्चुअल सरप्लस मनी। तो यह प्रॉफिट
- 5:05:40भी नहीं होता क्योंकि प्रॉफिट तो बस सेल
- 5:05:42दिखाया और प्रॉफिट बुक कर लिया। वो कैश भी
- 5:05:44नहीं होता क्योंकि सारा कैश ऐसा नहीं है
- 5:05:47कि आपके लिए बोनस है। जो कैश आया उससे
- 5:05:49आपको कुछ ना कुछ इन्वेस्ट करना है ताकि
- 5:05:52बिजनेस चलता रहे। तो वो सारे खर्चे करने
- 5:05:55के बाद बिजनेस की कंटिन्यूटी एनश्योर करने
- 5:05:58के बाद जो पैसा बचा वो है फ्री कैश फ्लो।
- 5:06:01जैसे इसे और क्लियर करने के लिए अपन फिर
- 5:06:03से वो पेंसिल वाले एग्जांपल की तरफ जाते
- 5:06:05हैं। मान लीजिए कि अब आप रोज 1000
- 5:06:07पेंसिल्स बेच रहे हैं। तो आपने ₹10,000 की
- 5:06:11हजार पेंसिल्स खरीदी और ₹15 के हिसाब से
- 5:06:14एक ही दिन में आपने वो सारी पेंसिल्स बेच
- 5:06:17दी। अब आपके पास दिन के शुरुआत में
- 5:06:20₹10,000 थे और दिन के अंत में आपके पास
- 5:06:23₹15,000 हैं। और अब आपको ऐसा लगता है कि
- 5:06:25मैं रोज के ₹5,000 कमा लूं। यह बहुत है।
- 5:06:28मेरे को इससे ज्यादा नहीं कमाना और रोज
- 5:06:31इसीलिए मैं 1000 पेंसिल खरीदूंगा ₹10,000
- 5:06:34में और ₹15,000 में उन्हें बेच दूंगा। तो
- 5:06:36अब आपके पास टोटल पैसे आज दिन के अंत में
- 5:06:39है ₹15,000 और आपके हिसाब से बिजनेस चलाने
- 5:06:42के लिए 1000 पेंसिल बेचना काफी है रोज की
- 5:06:45जो ₹10,000 में आ जाएगी। यानी अगले दिन
- 5:06:49आपको बिजनेस करने के लिए अब चाहिए ₹10,000
- 5:06:52और आपके पास है कितने? ₹15,000 तो अब जो
- 5:06:56₹5,000 आपके पास एक्स्ट्रा है जो आपको
- 5:06:59बिजनेस में लगाना जरूरी हो ऐसा नहीं है उस
- 5:07:02₹5,000 अगर आप जला भी दें तो भी आपके
- 5:07:04बिजनेस को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तो यह
- 5:07:07₹5,000 आपके लिए हो गया फ्री कैश फ्लो। इस
- 5:07:11पैसे से कंपनी कुछ एक्विजिशन कर सकती है,
- 5:07:13कंपनी कुछ डिविडेंड बांट सकती है। तो यह
- 5:07:16वो पैसा है जो सच में कंपनी के लिए फ्री
- 5:07:19है। और इसीलिए इसे कहा जाता है फ्री कैश
- 5:07:22फ्लो। और अब बात करते हैं कॉक्सिन किंग्स
- 5:07:24की। इस कंपनी में कुछ समय पहले काफी
- 5:07:26प्रॉब्लम्स आई और इसने लोन लिया हुआ था
- 5:07:28जिसे यह चुका नहीं सकी तो बहुत सारी
- 5:07:30प्रॉब्लम्स आई। इसको देखते हैं और इससे
- 5:07:32आपको पता चलेगा कि कैसे कैश फ्लो पर शेयर
- 5:07:34और फ्री कैश फ्लो पर शेयर आपको गलती करने
- 5:07:37से बचा सकता है। अगर हम ईपीएस देखें तो ये
- 5:07:40पॉजिटिव है। ₹10 पर शेयर और वही हमको
- 5:07:42पीएंडएल में भी दिखेगा कि कंपनी ने हर साल
- 5:07:462018 तक मुनाफा कमाया। तो अगर हम जो बोलते
- 5:07:48हैं ना कि कंपनी मुनाफे वाली होनी चाहिए।
- 5:07:50लॉस वाली कंपनियों से बचें। तो ये कंपनी
- 5:07:52भी मुनाफे में थी। खूब मुनाफा कमा रही थी।
- 5:07:55देखिए हर साल अच्छा खासा मुनाफा ये कंपनी
- 5:07:57कमा रही थी। लेकिन इस कंपनी में प्रॉब्लम
- 5:07:59कहां था? कैश फ्लो का। ऑपरेटिंग कैश फ्लो।
- 5:08:02ये वो कैश फ्लो है जो कंपनी रोजमर्रा के
- 5:08:05व्यापार से जनरेट करती है। तो ऑपरेटिंग
- 5:08:08कैश फ्लो अगर आप देखिए तो पांच में से चार
- 5:08:11साल ये नेगेटिव है। यानी कंपनी मुनाफा तो
- 5:08:14कमा रही थी लेकिन ऑपरेशंस से कंपनी के
- 5:08:16बिजनेस से कैश जनरेट ही नहीं हो रहा था और
- 5:08:20इसीलिए फ्री कैश फ्लो भी नेगेटिव था।
- 5:08:23हालांकि मुनाफा हो रहा है लेकिन फ्री कैश
- 5:08:26फ्लो नेगेटिव है। तो फिर से हम उस पेंसिल
- 5:08:28वाले एग्जांपल की तरफ जाते हैं कि 1000
- 5:08:30पेंसिल उसने ₹10,000 में खरीदी ₹10 पर
- 5:08:33पेंसिल के हिसाब से और उसने वो ₹15,000
- 5:08:37में बेच दी ₹15 पर पेंसिल के हिसाब से और
- 5:08:40मान लीजिए कि वो जो उसका कस्टमर था
- 5:08:42क्योंकि पहचान का था तो वह बोलता है कि
- 5:08:44अभी पैसे नहीं है 2 महीने बाद ले लेना। तो
- 5:08:46अब 2 महीने तक कंपनी का खाता कैसा दिखेगा।
- 5:08:49कंपनी में यह दिखेगा कि ₹10,000 की पेंसिल
- 5:08:52हमने ₹15,000 में बेच दी। बदले में हमने
- 5:08:54चेक ले लिया जो 2 महीने बाद लगाना है। तो
- 5:08:57अब प्रॉफिट तो दिखेगा ₹5,000 का लेकिन कैश
- 5:09:01फ्लो अभी नहीं दिखेगा और फ्री कैश फ्लो तो
- 5:09:04बिल्कुल ही नहीं दिखेगा। यानी अगर हम
- 5:09:06प्रॉफिट पे रिलाई करते तो प्रॉफिट तो उस
- 5:09:09कंपनी में दिख रहा है। लेकिन 2 महीने बाद
- 5:09:11अगर उस कस्टमर का चेक बाउंस हो जाता है तब
- 5:09:14हमें पता चलेगा कि कैश फ्लो तो नेगेटिव हो
- 5:09:16गया। ₹5,000 के मुनाफा आना था उल्टा
- 5:09:19₹10,000 खुद की लागत का पैसा चला गया। कैश
- 5:09:22फ्लो तो नेगेटिव हो गया। तो कॉक्सन किंग्स
- 5:09:25में भी इसी तरह की चीज हुई। प्रॉफिट तो
- 5:09:28दिख रहा है लेकिन या तो प्रॉफिट केवल
- 5:09:30कागजी प्रॉफिट था या फिर सच में सेल्स हुई
- 5:09:33लेकिन पैसा कभी आया ही नहीं। जो इसके
- 5:09:35कस्टमर्स थे उन्होंने इसे पैसा दिया ही
- 5:09:37नहीं। और अब हम समझते हैं कि फ्री कैश
- 5:09:39फ्लो ही क्यों जरूरी है? ये इसलिए जरूरी
- 5:09:42है क्योंकि कई बार ऐसा होता है कंपनी
- 5:09:43मुनाफा भी कमा रही है, कैश भी कमा रही है।
- 5:09:46लेकिन ये हो सकता है कि उसका बिजनेस मॉडल
- 5:09:49ऐसा है कि उसे बार-बार बिजनेस को मेंटेन
- 5:09:52करने के लिए पैसा रीइन्वेस्ट करते चले
- 5:09:54जाना पड़ता है। इसका मैं आपको एक बहुत
- 5:09:56अच्छा एग्जांपल देता हूं जिससे आपको यह
- 5:09:58काफी क्लियर हो जाएगा। अब हम बात करते हैं
- 5:10:00Airtel की। तो Airtel को हम सब जानते हैं।
- 5:10:03देखते हैं Airtel में क्या हुआ? अब क्या
- 5:10:05Airtel ऐसा बिजनेस है जो फ्री कैश फ्लो
- 5:10:07जनरेट कर पाता है? कैश फ्लो तो Airtel में
- 5:10:09आ रहा है। ईपीएस नहीं है। कंपनी नुकसान
- 5:10:11में है लेकिन कैश जनरेट हो रहा है। लेकिन
- 5:10:14फ्री कैश फ्लो कुछ नहीं है। हमने सीखा है
- 5:10:17कि कैश फ्लो पर शेयर होना चाहिए। वह हो
- 5:10:19रहा है। लेकिन अब आप Airtel के बिजनेस को
- 5:10:22समझिए कि इन्हें हर बार कहीं कोई टावर में
- 5:10:25खराबी आ जाती है। कभी ब्रॉडबैंड की कोई
- 5:10:27तार खराब हो जाती है। तो अपने नेटवर्क को
- 5:10:29जिस नेटवर्क के दम पे इनका बिजनेस चलता है
- 5:10:32उसको मेंटेन करने के लिए हर बार जो भी ये
- 5:10:35कैश इनके पास आता है उसे इन्वेस्ट करना
- 5:10:38पड़ता है अपने नेटवर्क को मेंटेन करने
- 5:10:40में। दिन रात मेंटेनेंस का काम चलता है।
- 5:10:43सड़कें खोदते हैं, टावर्स रिपेयर करते
- 5:10:45हैं। तो इतना कैश आने के बावजूद इस कंपनी
- 5:10:48का मेंटेनेंस का खर्चा इतना है कि इस
- 5:10:51कंपनी के पास फ्री कैश फ्लो कुछ नहीं है।
- 5:10:53हर बार जितना कैश आता है वो सारा का सारा
- 5:10:56इसे इन्वेस्ट कर देना पड़ता है। इनफैक्ट
- 5:10:58उससे ज्यादा का खर्चा इसे कर देना पड़ता
- 5:11:00है। जिस कारण फ्री कैश फ्लो नेगेटिव है और
- 5:11:03बिजनेस को चलाते रहने के लिए Airtel को
- 5:11:06बहुत ज्यादा कर्जा लेना पड़ा है। 83,000
- 5:11:09करोड़ का कर्जा इस कंपनी पे है। वो क्यों?
- 5:11:12क्योंकि जितना कैश फ्लो आ रहा है उतना
- 5:11:15काफी नहीं है नेटवर्क्स को मेंटेन करने के
- 5:11:17लिए। जिस कारण कंपनी का पीएंडएल अकाउंट भी
- 5:11:20नेगेटिव दिख रहा है। और यह कैश कंपनी को
- 5:11:23फाइनेंस कराना पड़ रहा है, कर्जा लेना पड़
- 5:11:25रहा है। तो कैश दिख रहा है क्योंकि कर्जा
- 5:11:27लिया है तो कैश तो है लेकिन फ्री कैश कुछ
- 5:11:30नहीं है। और इसीलिए जरूरी है कि हम हमेशा
- 5:11:33बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट वेटेज दें फ्री
- 5:11:36कैश फ्लो को। तो आज हम एक इतना जरूरी
- 5:11:39रेश्यो डिस्कस करने वाले हैं जो बहुत
- 5:11:41सिंपल है समझना कंपेयर करना और अगर आपने
- 5:11:45ये सीख लिया तो आप ज्यादातर समय फ्रॉड
- 5:11:47कंपनियों में बुरी कंपनियों में जो अपने
- 5:11:49नंबर्स को फज करती हैं स्कैम करती हैं ऐसी
- 5:11:52कंपनीज़ में निवेश करने से बहुत बार आपको
- 5:11:56ये एक सिंपल सा रेश्यो जो आज हम सीखेंगे
- 5:11:58वो बचा लेगा। इसके अलावा आज हम सीखेंगे
- 5:12:01पिछले वीडियो में जो रह गया था कॉर्पोरेट
- 5:12:03एकशंस में राइट्स इशू से आपको कैसे फर्क
- 5:12:06पड़ता है और क्यों मुझे वो कंपनियां नहीं
- 5:12:08पसंद जो बार-बार राइट्स इशू लाती हैं। ये
- 5:12:11दो इंपॉर्टेंट चीजें हम डिस्कस करेंगे।
- 5:12:13साथ ही हम डिस्कस करेंगे कि नेट प्रॉफिट
- 5:12:16में और कैश फ्लो में क्या फर्क है और
- 5:12:19दोनों में से कौन सा ज्यादा जरूरी है और
- 5:12:21क्यों। तो इस सीरीज को आपने जो प्यार दिया
- 5:12:24है उसे बनाए रखिएगा और यह सीरीज अगर आपको
- 5:12:26पसंद आ रही है तो प्लीज इस वीडियो को लाइक
- 5:12:29करिएगा। अपने दोस्तों के साथ, फ्रेंड्स के
- 5:12:31साथ शेयर करिएगा क्योंकि यह एक ऐसा वीडियो
- 5:12:33है जो उन्हें भी गलतियां करने से, बुरे,
- 5:12:36फ्रॉड, स्कैम कंपनीज़ में इन्वेस्ट करने से
- 5:12:39बचा लेगा। तो चलिए अब शुरू करते हैं कि
- 5:12:42प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट और कैश फ्लो जो
- 5:12:44दो बहुत इंपॉर्टेंट स्टेटमेंट्स हैं किसी
- 5:12:46भी कंपनी के लिए उसमें क्या फर्क है और
- 5:12:49किस पे आपको ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा।
- 5:12:51देखिए प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट आपको
- 5:12:53बेसिकली क्या बताता है? ये बताता है कि
- 5:12:56कंपनी ने कितने रुपए की सेल्स की, कितने
- 5:12:58रुपए का माल बेचा। ऐसी इनकम जो डायरेक्ट
- 5:13:01बिजनेस से रिलेटेड नहीं है लेकिन
- 5:13:02इन्वेस्टमेंट से आ गई, रेंट से आ गई। इस
- 5:13:04तरह की इनकम कंपनी ने खर्चा कितना किया?
- 5:13:08उसको प्रॉफिट कितना हुआ? लेकिन अगर उस पर
- 5:13:11कर्जा था तो उसको इंटरेस्ट कितना देना
- 5:13:13पड़ा? जो उसका सामान था वो पुराना हुआ,
- 5:13:16डेप्रिशिएट हुआ तो उसकी वैल्यू कितनी कम
- 5:13:18हुई? कुछ एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी साल में हो
- 5:13:20गया जो नॉर्मली नहीं होता तो वो यहां है।
- 5:13:23उसने प्रॉफिट कितना कमाया? उस पे टैक्स
- 5:13:25कितना लगा? तो नेट प्रॉफिट कितना आया? और
- 5:13:28पर शेयर प्रॉफिट कितना हुआ? जैसे मान लेते
- 5:13:31हैं कि इस कंपनी के 100 शेयर्स हैं और
- 5:13:33टोटल ₹650 का मुनाफा हुआ। तो पर शेयर
- 5:13:36मुनाफा लगभग ₹6.5 का हुआ। ये होता है
- 5:13:39एडजस्टेड ईपीएस। तो प्रॉफिट एंड लॉस
- 5:13:41स्टेटमेंट आपको यह बताता है कि कितने की
- 5:13:43सेल हुई और कितना प्रॉफिट हुआ। लेकिन इस
- 5:13:46तरह के प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट में जो
- 5:13:48सेल्स दिखाता है और मुनाफा दिखाता है और
- 5:13:50एक्सपेंसेस दिखाता है उसमें बहुत बड़ी कमी
- 5:13:53है। जिससे दूर करता है कैश फ्लो
- 5:13:55स्टेटमेंट। देखिए इमेजिन करिए कि आपने
- 5:13:58₹100 का माल बेचा और किसी क्लाइंट से
- 5:14:01कस्टमर से आपको ₹100 उस कस्टमर ने बोले कि
- 5:14:04वह महीने भर बाद आपको देगा। तो अब
- 5:14:06अकाउंटिंग में क्या होगा कि ₹100 की सेल्स
- 5:14:08दिखेगी और जो भी आपके उस प्रोडक्ट के पीछे
- 5:14:10खर्चेवर वर्चे थे वो सब हटा के मान लीजिए
- 5:14:13आपको ₹20 का मुनाफा होने वाला है। तो ₹20
- 5:14:16का मुनाफा आप अपनी अकाउंटिंग बुक्स में
- 5:14:18ऑलरेडी दिखा देंगे। क्योंकि माल तो बिक
- 5:14:20गया है और आप यह मान के बैठे हैं कि पैसा
- 5:14:22आएगा। यानी प्रॉफिट सेल के साथ ही दिखा
- 5:14:25दिया जाता है कि माल बिका मतलब प्रॉफिट
- 5:14:27हुआ। लेकिन अब हम सब जानते हैं कि हर बार
- 5:14:31पेमेंट आए कस्टमर से ऐसा होता नहीं है। कई
- 5:14:33बार पेमेंट नहीं भी आती। तो कैश फ्लो
- 5:14:35स्टेटमेंट यह दिखाता है कि कब-कब पैसा
- 5:14:37कस्टमर से आया। कब-क जो माल बिका था उसकी
- 5:14:41सच में पेमेंट आई। इसीलिए कैश फ्लो
- 5:14:44स्टेटमेंट बहुत ज्यादा जरूरी है और यह
- 5:14:46आपको बहुत सारी गड़बड़ियां पकड़ने में या
- 5:14:49उन कंपनियों से दूर रहने में मदद करेगा जो
- 5:14:52जानबूझ के तो नहीं लेकिन हो सकता है गलती
- 5:14:54से उन्होंने ऐसे लोगों को माल बेच दिया है
- 5:14:56जो उनको पेमेंट ही नहीं कर रहे या बहुत
- 5:14:58डिलेड पेमेंट कर रहे हैं जिस कारण कंपनी
- 5:15:00को नुकसान हो रहा है। ऐसी कंपनियों से
- 5:15:02आपको बचाएगा कैश फ्लो स्टेटमेंट। जानते
- 5:15:05हैं कैसे? कैश फ्लो स्टेटमेंट में आपको जो
- 5:15:07सबसे जरूरी चीज देखनी है वो है ऑपरेटिंग
- 5:15:10कैश फ्लो। और इसको आपको कंपेयर करना है।
- 5:15:13आपको करना है एक सिंपल सी चीज। आप इस 5
- 5:15:16साल के ऑपरेटिंग कैश फ्लो को ऐड करिए।
- 5:15:19782, 512, 1077, 1235, 1082 इन पांचों को
- 5:15:24आप ऐड करिए। अब ये ऐड करके लगभग 4,800
- 5:15:28करोड़ के आसपास हो रहा है। यानी पिछले 5
- 5:15:31सालों में माल जो बिका उससे God
- 5:15:35Industries को ₹4,800 करोड़ के आसपास पैसे
- 5:15:38आए। ध्यान रखिएगा आपको ऑपरेटिंग कैश फ्लो
- 5:15:41देखना है। इन्वेस्टिंग या फाइनेंसिंग कैश
- 5:15:42फ्लो नहीं ऑपरेटिंग कैश फ्लो क्योंकि यही
- 5:15:45बता रहा है कि कंपनी के ऑपरेशंस से यानी
- 5:15:47सामान बेचने से जो भी कंपनी काम करती है
- 5:15:50उस काम से उसको कितना पैसा आया। तो इसको
- 5:15:52आप ऐड करेंगे तो पाएंगे लगभग 4800 करोड़
- 5:15:55के आसपास आए। तो अब इस कैश फ्लो वाली फिगर
- 5:15:58को हमें कंपेयर करना है प्रॉफिट एंड लॉस
- 5:16:00के नेट प्रॉफिट वाली फिगर से। यानी आपको
- 5:16:03ऐड करना है इन 5 सालों में कंपनी ने नेट
- 5:16:06प्रॉफिट कितना कमाया। तो 654 को, 723 को,
- 5:16:09848 को, 1000 को और 1755 को आप ऐड करिए।
- 5:16:14और इसे जब मैंने ऐड किया तो ये हुआ लगभग
- 5:16:174,900 करोड़। और वहीं कैश फ्लो में जब
- 5:16:20हमने ऑपरेटिंग कैश फ्लो को ऐड किया था तो
- 5:16:23ये था लगभग 4,800 4750 के आसपास। यानी अगर
- 5:16:27गोदरेज ये बोल रहा है कि उसे 4,900 करोड़
- 5:16:30का प्रॉफिट हुआ। दो 4% का इधर-उधर डिफरेंस
- 5:16:33चलता है क्योंकि हो सकता है एकद महीने बाद
- 5:16:35आ जाए कुछ भी आ जाए लेकिन जनरली 4900
- 5:16:38करोड़ अगर गोदरेज ने प्रॉफिट बोला तो 4750
- 5:16:42करोड़ एक्चुअली वो प्रॉफिट कैश के रूप में
- 5:16:45गोदरेज के पास आया तो गोदरेज कंज्यूमर की
- 5:16:48हम अकाउंटिंग पॉलिसीज को ट्रस्ट कर सकते
- 5:16:50हैं। अब मैं आपको एक और एग्जांपल दिखाता
- 5:16:52हूं जिससे यह क्लियर हो जाएगा कि किन
- 5:16:54केसेस में ऐसा नहीं हो पाता है और कब आपको
- 5:16:57इन बातों का ध्यान रखना है क्योंकि बहुत
- 5:16:59बार ये बातें आपको गलत इन्वेस्टमेंट से
- 5:17:02बचाएंगी। यहां पे अगर मैं नेट प्रॉफिट को
- 5:17:06ऐड करूं तो यह हो रहा है लगभग 50 करोड़ के
- 5:17:09आसपास। अगर मैं इसे ऐड करूं तो और कैश
- 5:17:12फ्लो के पास अगर मैं जाऊं और ऑपरेटिंग कैश
- 5:17:15फ्लो को ऐड करूं तो यह हो रहा है सिर्फ 21
- 5:17:18करोड़ के आसपास। यानी इस केस में इस लवेबल
- 5:17:21नाम की कंपनी ने ₹50 करोड़ का दिखाया कि
- 5:17:24इसे प्रॉफिट आया। लेकिन उस ₹50 करोड़ में
- 5:17:27से कैश के रूप में सिर्फ और सिर्फ ₹21
- 5:17:30करोड़ ही आ पाए। यानी आधे से ज्यादा ऐसा
- 5:17:33प्रॉफिट जो कंपनी ने दिखाया था पीएंडएल
- 5:17:36स्टेटमेंट में वो कैश के रूप में कंपनी को
- 5:17:38कभी मिला ही नहीं। और यह पिछले 5 साल का
- 5:17:41एवरेज है। यह जरूरी है कि इस डाटा को आप 5
- 5:17:44साल का ऐड करके ही कंपेयर करें क्योंकि
- 5:17:46साल 2 साल में ये फिगर चेंज होती रह सकती
- 5:17:49है। लेकिन ये जो कैलकुलेशन है अभी एक साल
- 5:17:52का है। इसे हमारी टीम कुछ ही दिनों में
- 5:17:54चेंज करके फाइव इयर्स का एवरेज कर देगी।
- 5:17:56और जब ऐसा हो जाए तो आपको कैलकुलेशन खुद
- 5:17:59करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। यहां सीएफओ
- 5:18:02अपॉन पैट आपको फाइव इयर्स का दिखता रहेगा
- 5:18:04और आपको ये कैलकुलेशन की जरूरत नहीं
- 5:18:07पड़ेगी। लेकिन अभी के लिए आपको यह
- 5:18:09कैलकुलेशन करना है। अगर कैश फ्लो फ्रॉम
- 5:18:11ऑपरेशंस नेट प्रॉफिट से बहुत ज्यादा कम है
- 5:18:14तो यह एक बहुत डेंजरस साइन है। तो चलिए अब
- 5:18:17जैसा पिछले वीडियो में हमने डिस्कस किया
- 5:18:19था बोनस इशू और स्प्लिट के बारे में। अब
- 5:18:22हम डिस्कस करते हैं राइट्स इशू के बारे
- 5:18:24में कि ये राइट्स इशू क्या होता है? इस
- 5:18:26कंपनी ने कभी इशू नहीं किया है। लेकिन मैं
- 5:18:28आपको एक एक्सेल शीट में एग्जांपल के जरिए
- 5:18:31समझाता हूं कि क्यों राइट्स इशू से बच के
- 5:18:33रहने की जरूरत है। और ऐसी कंपनीज़ भी जो
- 5:18:36बार-बार राइट्स इशू लाती है क्यों वो मुझे
- 5:18:38पसंद नहीं है। थोड़ा टेक्निकल एग्जांपल है
- 5:18:41लेकिन हम स्टेप बाय स्टेप समझेंगे और मुझे
- 5:18:43पूरा यकीन है कि आपको क्लियर हो जाएगा।
- 5:18:45इमेजिन करिए एक ऐसी कंपनी जो ₹300 साल का
- 5:18:49प्रॉफिट कमाती है ₹300 अब नंबर ऑफ शेयर्स
- 5:18:53हैं 100 एक कंपनी जो ₹300 कमा रही है और
- 5:18:56100 शेयर्स हैं यानी ईपीएस हुआ ₹3 अब उस
- 5:18:59कंपनी ने डिसाइड किया कि वो राइट्स इशू
- 5:19:02लाएगी। राइट्स इशू का बेसिकली मतलब यह
- 5:19:04होता है कि जो शेयरहोल्डर्स अभी हैं,
- 5:19:07जिन-जिन के पास इस कंपनी के शेयर अभी हैं,
- 5:19:10कंपनी उनको यह राइट दे रही है या यह
- 5:19:12अधिकार दे रही है कि वो कुछ और शेयर्स
- 5:19:15खरीद लें कंपनी से डायरेक्टली डिस्काउंटेड
- 5:19:18प्राइस में। मतलब अगर आपके पास कंपनी X के
- 5:19:2110 शेयर हैं और कंपनी ऐसा राइट्स इशू लाती
- 5:19:24है कि आपको एक शेयर के बदले ये अधिकार है
- 5:19:27कि आप दो और शेयर खरीद लें। अगर आपके पास
- 5:19:2910 शेयर हैं तो आप 20 और शेयर खरीद सकते
- 5:19:31हैं। अब इसमें एक और चीज होती है कि अगर
- 5:19:34मार्केट में प्राइस चल रहा है ₹100 तो
- 5:19:37राइट्स इशू यूजुअली काफी डिस्काउंट पे आता
- 5:19:39है। तो राइट्स इशू ये कहेगा कि चलिए आपके
- 5:19:42पास 10 शेयर और हैं। आपके पास ये अधिकार
- 5:19:44है कि आप पर शेयर के हिसाब से दो और शेयर
- 5:19:46ले लें। यानी आपके पास 10 शेयर है तो आप
- 5:19:4820 और ले लें। मार्केट में प्राइस है 100।
- 5:19:50आप हमसे ले लीजिए ₹60 पे। तो आपको यह खुशी
- 5:19:53मिलती है कि अरे वाह 100 का शेयर मुझे
- 5:19:56कंपनी डायरेक्टली ₹60 में दे रही है। ₹40
- 5:19:58के डिस्काउंट में दे रही है। ये तो बहुत
- 5:19:59अच्छा हुआ। अब मैं आपको समझाता हूं कि ये
- 5:20:02क्यों अच्छा नहीं है ज्यादातर समय में। और
- 5:20:04इसके दो कारण हैं। पहला कारण अभी नंबर ऑफ
- 5:20:07शेयर्स हैं 100। राइट्स इशू के बाद अगर हर
- 5:20:10कोई अप्लाई करेगा तो अभी जो 100 शेयर हैं,
- 5:20:12एक शेयर पे आप दो और खरीद सकते हैं। तो
- 5:20:15100 शेयर होल्डर्स के पास अब बढ़ के 300
- 5:20:18शेयर्स हो जाएंगे। अगर सबने राइट्स इशू
- 5:20:20में अप्लाई कर दिया। अब कंपनी का मुनाफा
- 5:20:23तो अभी भी 300 ही है। राइट्स इशू लाने से
- 5:20:25किसी का मुनाफा तो नहीं बढ़ गया। तो पहले
- 5:20:28100 शेयर्स थे पर शेयर ₹3 का मुनाफा था।
- 5:20:31अब 300 शेयर्स हैं और 300 का मुनाफा है।
- 5:20:34यानी पर शेयर मुनाफा भी 1/3 हो गया। तो जो
- 5:20:38₹100 का शेयर था और आप सोच रहे थे यह 60
- 5:20:40में आपको मिल रहा है तो अच्छी बात है। आप
- 5:20:42यह भी सोचिए कि उस ₹100 के शेयर की अब
- 5:20:46एक्चुअल कीमत भी उसकी वैल्यू भी 1/3 हो
- 5:20:49जाएगी क्योंकि शेयर्स अब तीन गुना हो गए
- 5:20:51हैं और मुनाफा उतना ही है। यानी पर शेयर
- 5:20:54मुनाफा अब 1/3 हो गया है। तो असल में जो
- 5:20:57आपको शेयर ₹60 का मिल रहा है उसकी अब
- 5:20:59राइट्स इशू के बाद कीमत केवल ₹33 ही बची
- 5:21:02है। इसे और थोड़ा समझते हैं। अब यह राइट्स
- 5:21:05इशू है। तो, आप चाहें तो अप्लाई करें या
- 5:21:07चाहे ना करें। अब मान लीजिए कि इस कंपनी
- 5:21:09का जिसका हम एग्जांपल ले रहे हैं। इसके
- 5:21:12किसी ने 20 शेयर खरीदे हुए हैं। मार्केट
- 5:21:14से खरीदे और मार्केट में दाम चल रहा था
- 5:21:17₹150। तो अब ₹150 के खरीदे हुए किसी के
- 5:21:20पास 20 शेयर हैं। अभी राइट्स इशू के पहले
- 5:21:24ईपीएस है तीन का। उसका 20 शेयर * ईपीएस
- 5:21:27मिला के उसकी टोटल अर्निंग हो रही है ₹60
- 5:21:30की। और उसने टोटल यह खरीदा। एक शेयर 150
- 5:21:34में खरीदा तो 20 शेयर उसने खरीदे थे ₹3000
- 5:21:37में। अब राइट्स इशू आ गया और वो एक शेयर
- 5:21:40के पीछे दो और शेयर खरीद सकता है कंपनी
- 5:21:42से। तो मान लीजिए कि उसने अप्लाई कर दिया
- 5:21:45और खरीद लिए। अब उसके पास 60 शेयर्स हो
- 5:21:47गए। लेकिन मुनाफा तो उतना ही था। तो ईपीएस
- 5:21:511/3 हो गया। तो अभी भी उसकी टोटल अर्निंग
- 5:21:55₹60 ही है। पहले भी 60 थी। अभी भी 60 है
- 5:21:58क्योंकि पहले 20 शेयर पे ₹3 पर शेयर
- 5:22:00मुनाफा था। अब 60 शेयर पे एक लेकिन अब
- 5:22:03उसकी होल्डिंग वैल्यू टोटल जो उस कंपनी ने
- 5:22:06उसमें निवेश किया है पहले वो ₹3000 था। 20
- 5:22:10शेयर उसने खरीदे ₹150 के भाव पे। कंपनी
- 5:22:12कोई फ्री में तो शेयर देगी नहीं। और मान
- 5:22:14लीजिए कि राइट्स इशू आया ₹60 में कि कंपनी
- 5:22:17बोल रही है 150 अभी मार्केट प्राइस है। हम
- 5:22:1960 में दे रहे हैं। तो इसने 20 शेयर तो
- 5:22:22खरीदे थे 150 में और बाकी 40 शेयर खरीद
- 5:22:25लिए ₹60 पर शेयर के हिसाब से। ₹60 पर
- 5:22:28शेयर। तो इसका टोटल इन्वेस्टमेंट हो गया
- 5:22:30अब ₹5400
- 5:22:33का और उस ₹5400 लगा के भी उसको ईपीएस मिल
- 5:22:37रहा है ₹60 ही का। यहां पे भी उसको ईपीएस
- 5:22:39मिल रहा था ₹60 ही का यहां लेकिन उसके
- 5:22:42₹2400 एक्स्ट्रा लग गए। तो जिसने अप्लाई
- 5:22:45किया राइट्स इशू उसके लिए बुरा है। अब मान
- 5:22:48लीजिए सेकंड सिनेरियो कि राइट्स इशू के
- 5:22:50लिए कोई अप्लाई नहीं करता। तो इसके पास 20
- 5:22:53शेयर हैं। पहले एक शेयर पर ईपीएस आ रहा था
- 5:22:56तीन का और इसकी टोटल अर्निंग आ रही थी 60।
- 5:22:59लेकिन अगर इसने राइट्स इशू अप्लाई नहीं
- 5:23:02किया तो क्या हुआ? किसी और ने कर दिया तो
- 5:23:04टोटल नंबर ऑफ शेयर्स तो बढ़ गए क्योंकि
- 5:23:06शेयर होल्डर्स तो हजारों हैं। उसमें से
- 5:23:08कुछ तो अप्लाई करेंगे ही। तो ऐसे में इसने
- 5:23:11डिसाइड किया कि मैं तो नहीं करूंगा। मेरे
- 5:23:12पास पैसे नहीं है अभी और। तो बाकियों ने
- 5:23:14अप्लाई कर दिया। इसलिए ईपीएस तो कम हो ही
- 5:23:17गया। यानी अब जहां पहले ₹3000 लगा के उसको
- 5:23:21₹60 की अर्निंग मिल रही थी। अब ₹3000 लगा
- 5:23:24के उसे केवल ₹20 की अर्निंग मिल रही है।
- 5:23:26तो चाहे अप्लाई करो या ना करो राइट्स इशू
- 5:23:30मोस्ट ऑफ द केसेस में एक इन्वेस्टर के लिए
- 5:23:32बुरा ही होता है। इसीलिए राइट्स इशू से
- 5:23:35ललचाए नहीं और आंख बंद करके निवेश ना
- 5:23:38करें। अगर यह एक्सप्लेनेशन आपको टेक्निकल
- 5:23:40लगा तो कमेंट करिए और मैं इस पे
- 5:23:42क्लेरिफिकेशन वीडियो ले आऊंगा या फिर पॉज
- 5:23:45कर करके रिवाइंड कर करके मैंने जो जो यहां
- 5:23:48समझाया है उसे दो बार तीन बार देखिए और आई
- 5:23:50एम श्योर कि ये क्लियर हो जाएगा और हां
- 5:23:53tikerfinology.in
- 5:23:55पे जाना बिल्कुल मत भूलिएगा और अपनी
- 5:23:57रिसर्च चालू रखिएगा। स्टॉक खरीदने से पहले
- 5:24:00हम क्या-क्या नहीं देखते। चार्ट्स हो,
- 5:24:02प्राइस मूवमेंट्स हो, कंपनी की हिस्ट्री
- 5:24:04हो, बहुत सारी चीजें देखते हैं। लेकिन इसे
- 5:24:07आयरनी समझिए या खराब किस्मत? एक वो चीज जो
- 5:24:10शायद सबसे जरूरी है किसी भी शेयर को
- 5:24:13खरीदने से पहले जिसे देखना वो हम देखते ही
- 5:24:16नहीं। क्या है वो एक ऐसी चीज जो किसी भी
- 5:24:18शेयर को खरीदने से पहले आपको जरूर 10 बार
- 5:24:22चेक करनी है और उसके बाद ही किसी शेयर में
- 5:24:24निवेश करना है। आज हम जानेंगे उस एक चीज
- 5:24:27के बारे में। नमस्कार दोस्तों, मैं हूं
- 5:24:29प्रांजलल कांबरा। शुरू करते हैं। आज जो हम
- 5:24:31ये क्वालिटी डिस्कस करने वाले हैं, इसकी
- 5:24:34जरूरत आप इस बात से समझ लीजिए और यह क्यों
- 5:24:36इतनी इंपॉर्टेंट है कि Jio हो, TCS हो,
- 5:24:38HDFC हो इन सारी कंपनीज़ में जो आज देश की
- 5:24:41सबसे बड़ी कंपनियां हैं, उनमें एक यह
- 5:24:44क्वालिटी है और आज जो छोटी कंपनियां हैं
- 5:24:47लेकिन आगे जाके बड़ी होंगी उनमें भी यह एक
- 5:24:50क्वालिटी है जो मैं आज इस वीडियो में
- 5:24:52डिस्कस करने वाला हूं। तो इसलिए कोई और
- 5:24:54शेयर बाजार का वीडियो आप मेरा देखो ना
- 5:24:56देखो इस वीडियो को पूरा जरूर देखिएगा।
- 5:24:59Koda के कैमरे कभी खूब चला करते थे। वो
- 5:25:02कंपनी बैंककरप्ट हो गई। Nokia के फोंस हम
- 5:25:05में से हर कोई यूज करता था। कंपनी लगभग
- 5:25:07खत्म हो गई। उसके बाद उसे एक अलग कंपनी ने
- 5:25:09खरीदा। वीडियोक के टीवी, फ्रिज, एसी,
- 5:25:12वाशिंग मशीनंस आज से कुछ साल पहले लगभग
- 5:25:14सबके घरों में होते थे। आज वो खत्म हो गए।
- 5:25:17तो यह इतनी बड़ी इस्टैब्लिश्ड कंपनियां
- 5:25:19किंगफिशर एयरलाइंस हो, सहारा एयरलाइंस हो,
- 5:25:21कितनी सारी ऐसी बड़ी कंपनियां हैं जिन्हें
- 5:25:24हम सोचते थे कि यह तो खत्म हो ही नहीं
- 5:25:26सकती और वो अचानक से देखते ही देखते कुछ
- 5:25:29सालों में खत्म हो जाती है। इनफैक्ट 25
- 5:25:31साल पहले जो कंपनियां सेंसेक्स का हिस्सा
- 5:25:34थी यानी देश की 30 सबसे बड़ी कंपनियां जो
- 5:25:3725 साल पहले सेंसेक्स का हिस्सा थी आज
- 5:25:40उनमें से 70 75 80% कंपनियां सेंसेक्स का
- 5:25:44हिस्सा नहीं है। यानी बड़ी से बड़ी देश की
- 5:25:46कंपनियां भी जो देश की शान थी उसमें से भी
- 5:25:5075 80% कंपनियां आज उस ऊंचाई पर नहीं है।
- 5:25:53खत्म हो गई। तो आप कितनी भी वेल नोन कंपनी
- 5:25:56ले लीजिए आज हमें लगेगा कि इससे सेफ कंपनी
- 5:25:59कौन सी हो सकती है। लेकिन हो सकता है कुछ
- 5:26:01सालों बाद वो कंपनी बैंककरप्ट हो जाए।
- 5:26:03खत्म हो जाए। तो आपके साथ ऐसा ना हो। उसके
- 5:26:07लिए आपको ध्यान रखना है कि आप अपने शेयर
- 5:26:10की कॉम्पिटिटिव स्ट्रेंथ आइडेंटिफाई करें
- 5:26:12या मोट आइडेंटिफाई करें। देखिए एक
- 5:26:15कैपिटलिस्ट इकॉनमी में यानी जिस देश में
- 5:26:17बाजार खुला है कोई भी आकर कमपीट कर सकता
- 5:26:19है। वहां क्या होता है? है। वहां अक्सर
- 5:26:21ऐसा कुछ होता है जो Jio ने बाकी टेलीकॉम
- 5:26:24कंपनीज़ के साथ किया कि जिस कंपनी के पास
- 5:26:27ज्यादा पैसा है वो एकदम से बाजार में
- 5:26:29घुसता है और सारे छोटे प्लेयर्स को या तो
- 5:26:32प्राइस अंडर कट करके सस्ते में माल देके
- 5:26:34मार्केट शेयर खा जाता है या उसके सारे
- 5:26:37कॉम्पिटिटर्स को खरीद के एक स्ट्रांगर
- 5:26:40ऑोजिशन बन जाता है। तो यूजुअली कैपिटलिस्ट
- 5:26:43मार्केट में यह होता है। आप सीमेंट
- 5:26:44इंडस्ट्री में देख लीजिए, टेलीकॉम
- 5:26:46इंडस्ट्री में देख लीजिए। एफएमसीजी में
- 5:26:47देख लीजिए कि एचयूएल कैसे तेजी से
- 5:26:50छोटी-छोटी एफएमसीजी कंपनीज़ खरीद के एक
- 5:26:52स्ट्रांग पोर्टफोलियो बनाता रहता है। तो
- 5:26:54जो बिगेस्ट प्लेयर है वो दूसरों को खाता
- 5:26:57चला जाता है। अब कोई प्लेयर बिगेस्ट बनता
- 5:27:00कैसे है और अगर वो बनता है तो उसको मेंटेन
- 5:27:03कैसे करता है? इसी को हम कहते हैं मोट या
- 5:27:06कॉम्पिटिटिव एडवांटेज। और इसी इंपॉर्टेंट
- 5:27:08क्वालिटी को आज हम डिस्कस करने वाले हैं
- 5:27:10क्योंकि हो सकता है कंपनी सबसे बड़ी ना हो
- 5:27:13छोटी हो लेकिन उसके पास कोई ऐसा स्ट्रेंथ
- 5:27:15है या ऐसा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज है जिससे
- 5:27:17उसके कॉम्पिटिटर्स उस कंपनी को खा नहीं
- 5:27:20सकते। भले ही कॉम्पिटिटर्स उससे बड़े हैं
- 5:27:22लेकिन ये जो छोटी सी कंपनी है उसने अपने
- 5:27:24आसपास इतनी मजबूत एक दीवार खड़ी की हुई
- 5:27:27है। अपने आसपास इतना मजबूत किला बनाया हुआ
- 5:27:29है कि इसे भेद पाना आसान नहीं है। तो उस
- 5:27:32किले को आइडेंटिफाई करना उस ढाल को
- 5:27:34आइडेंटिफाई करने को ही हम कहते हैं मोट या
- 5:27:38कॉम्पिटिटिव एडवांटेज। तो आज हम कुछ
- 5:27:40एग्जांपल्स के साथ इस वीडियो में सीखेंगे
- 5:27:42कि मोट या कॉम्पिटिटिव एडवांटेज होता क्या
- 5:27:45है? दूसरा इसे आइडेंटिफाई कैसे करें? कैसे
- 5:27:47पता करें कि आपकी कंपनी में मोट है या
- 5:27:50नहीं और तीसरा इसे वेरीफाई कैसे करें कि
- 5:27:52जो आपको मोट लग रहा है वो सच में मोट है
- 5:27:56भी या नहीं तो आज जो मैं इस वीडियो में
- 5:27:58आपको स्टेप्स बताने जा रहा हूं उसे प्लीज
- 5:28:00जरूर फॉलो करिएगा और ज्यादातर गलतियों से
- 5:28:03आप बच जाएंगे। तो अब मैं आपको कितने तरह
- 5:28:06के मोट होते हैं वो बताना शुरू करता हूं
- 5:28:08एग्जांपल्स के साथ और अपने आप आपको सारे
- 5:28:11कांसेप्ट्स क्लियर होते जाएंगे। तो पहला
- 5:28:13मोट होता है गवर्नमेंट प्रोटेक्शन का।
- 5:28:16यानी कोई ऐसी कंपनी है जिसको कंपटीशन से
- 5:28:19सरकार ने बचा के रखा हो। देखिए अगर मान
- 5:28:22लीजिए आप कोई किराना दुकान खोलते हैं तो
- 5:28:24आपके सामने एक और किराना दुकान खुल जाए यह
- 5:28:27बिल्कुल मुमकिन है। सरकार इसमें आपको कोई
- 5:28:28प्रोटेक्शन नहीं देगी। लेकिन अगर आप कोई
- 5:28:31क्रेडिट रेटिंग एजेंसी चलाते हैं केयर
- 5:28:33क्रिस्टल इरा जैसी तो कल को उठकर कोई और
- 5:28:36क्रेडिट रेटिंग एजेंसी खोल नहीं सकता
- 5:28:38क्योंकि सरकार ने केवल छह सात एजेंसीज को
- 5:28:41ही ये लाइसेंस दिया है पिछले कई सालों में
- 5:28:43और इसका नया लाइसेंस मिलना लगभग नामुमकिन
- 5:28:46रहता है। जैसे इंडिया में केवल तीन या चार
- 5:28:48सिविल एक्सप्लोसिव यानी इंडस्ट्रीज में,
- 5:28:50माइंस में, पहाड़ों में ये सब जगहों में
- 5:28:52यूज़ होने वाला एक्सप्लोसिव बनाने का
- 5:28:54लाइसेंस दिया है बम बनाने का। तो अब कल को
- 5:28:56कोई भी इस तरह के बम बनाने की फैक्ट्री
- 5:28:59शुरू नहीं कर सकता। इसका लाइसेंस मिलना
- 5:29:00बहुत मुश्किल है। तो यानी गवर्नमेंट ने इन
- 5:29:03कंपनियों को कंपटीशन से बचा के रखा है। अब
- 5:29:06अगर एक ऐसा बिजनेस है जिसमें माल मैं
- 5:29:09बनाता हूं। मेरे माल की डिमांड भी खूब है।
- 5:29:11तो मैं मुनाफा कमाऊंगा कि नहीं ये इस बात
- 5:29:14पे डिपेंड करेगा कि कितने नए लोग उस
- 5:29:16बिजनेस में घुस रहे हैं। जैसे बहुत सारे
- 5:29:18सक्सेसफुल बिज़नेस होते हैं। शुरू के कुछ
- 5:29:20दिन अच्छा करते हैं। एग्जांपल ले लीजिए
- 5:29:22Micromax का। इंडिया की पहली ऐसी मोबाइल
- 5:29:24कंपनी थी जो एग्रेसिवली इनोवेटिव मोबाइल
- 5:29:27फोंस ल्च करती थी। लेकिन उसको देखादेखी
- 5:29:30intक्स, लावा, कार्बन और ना जाने कितनी
- 5:29:32इंडियन कंपनीज़ और कुछ चाइनीस कंपनीज़ भी आ
- 5:29:35गई। तो Micromax के लिए खुद को सस्टेन
- 5:29:37करना और प्रॉफिटेबल बने रहना यह नामुमकिन
- 5:29:40हो गया क्योंकि बहुत सारे कॉम्पिटिटर्स
- 5:29:42आके पहले फोन जो 10,000 में बिकते थे उसको
- 5:29:457,000 में देने लगे। फिर कोई और आके उसको
- 5:29:47₹6,500 में देने लगा, 6,000 में देने लगा।
- 5:29:49तो ऐसे में सबकी प्रॉफिटेबिलिटी खत्म हो
- 5:29:52गई। लेकिन इमेजिन करिए अगर Micromax फोन
- 5:29:54बना रहा है फोंस की डिमांड भी खूब है
- 5:29:56लेकिन गवर्नमेंट ने मना किया हुआ है कि अब
- 5:29:58कोई और फोन नहीं बना सकता Micromax ही
- 5:30:00बनाएगा तो वो कितना कमाता तो इन क्रेडिट
- 5:30:03रेटिंग एजेंसीज के पास एक्सप्लोसिव
- 5:30:05इंडस्ट्रीज के पास कुछ बैंक्स के पास यह
- 5:30:07एडवांटेज है कि कंपटीशन बहुत ज्यादा
- 5:30:10रिस्ट्रिक्टेड है। तो जिस शेयर को आप खरीद
- 5:30:12रहे हैं खुद से पूछिए कि क्या आपकी कंपनी
- 5:30:15के पास यह एडवांटेज है? अगर है तो यह बहुत
- 5:30:18बहुत एडवांटेजियस है। अब यह एक तरह का मोट
- 5:30:21हुआ। जरूरी नहीं सारी कंपनियों में यह हो।
- 5:30:23तो अब हम दूसरी तरह का डिस्कस करते हैं।
- 5:30:25छह सात तरीके के मैं मोड आज आपको बताने
- 5:30:27वाला हूं। तो अब सेकंड मोड डिस्कस करते
- 5:30:29हैं। वो है लो कॉस्ट का। अब ये लो कॉस्ट
- 5:30:32मोड क्या होता है? इसे एक सिंपल एग्जांपल
- 5:30:34से समझते हैं कि मान लीजिए आप अपना सीमेंट
- 5:30:36प्लांट खोलना चाहते हैं खुद का। अब सीमेंट
- 5:30:38में मेन रॉ मटेरियल होता है लाइम स्टोन।
- 5:30:40बहुत इंपॉर्टेंट होता है और आपके पास पहले
- 5:30:43से लाइमस्टोन की खुद की खदान है। तो ऐसे
- 5:30:46में आपके लिए सीमेंट बनाना आपके
- 5:30:48कॉम्पिटिटर्स के मुकाबले सस्ता हो जाएगा।
- 5:30:51जहां बाकी लोग ₹200 में अगर सीमेंट बना पा
- 5:30:54रहे हैं तो आप शायद ₹180 में बना पाएंगे
- 5:30:56एक बोरी और अगर आप बना सस्ता पा रहे हैं
- 5:30:58तो आप बेच भी सस्ता पाएंगे और ग्राहक आपकी
- 5:31:01सीमेंट की तरफ ज्यादा आकर्षित हो जाएंगे
- 5:31:03क्योंकि आप ₹20 सस्ता बेच रहे हैं। तो
- 5:31:05क्या आपकी कंपनी के पास कोई ऐसा एडवांटेज
- 5:31:08है जिससे या तो उसकी मार्केटिंग कॉस्ट कम
- 5:31:11हो जाती है कि जहां बाकियों को खूब
- 5:31:13एडवर्टाइजमेंट करना पड़ रहा है। खूब सेल्स
- 5:31:15फोर्स लगानी पड़ रही है अपना सामान बेचने
- 5:31:17के लिए। कि आपकी कंपनी के पास कोई ऐसा
- 5:31:19एडवांटेज है कि माल अपने आप बिकता है या
- 5:31:22उसका एडवरटाइजमेंट कॉस्ट कम है। तो क्या
- 5:31:24आपकी कंपनी के पास मार्केटिंग कॉस्ट का
- 5:31:26कोई एडवांटेज है? रॉ मटेरियल कॉस्ट का कोई
- 5:31:28एडवांटेज है? डिस्ट्रीब्यूशन का कोई
- 5:31:30एडवांटेज है? क्या कोई ऐसा एडवांटेज है
- 5:31:33जिससे आप अपना माल अपने कॉम्पिटिटर्स के
- 5:31:35मुकाबले ज्यादा सस्ता दे पाते हैं। तो जो
- 5:31:38भी शेयर आप लेने का सोचें, यह ढूंढे कि
- 5:31:40क्या उसके पास ऐसा कोई एडवांटेज है? जैसे
- 5:31:43एक और एग्जांपल लेते हैं और यह एक और तरह
- 5:31:44का मोट भी है डिस्ट्रीब्यूशन रीच। एचयूएल
- 5:31:48का डिस्ट्रीब्यूशन की एग्जांपल लेते हैं
- 5:31:49अपन कि एचयूएल के पास इतना बड़ा प्रोडक्ट
- 5:31:52बास्केट है कि वो कुछ सामान अपना पान
- 5:31:54दुकानों में रखवाता है। कुछ सामान जनरल
- 5:31:56स्टोर में कुछ सामान मेडिकल स्टोर्स में
- 5:31:58भी रखवाता है। तो हर दुकान तक एचयूएल की
- 5:32:01पहुंच है। ऐसे में अगर एचयूएल ऑलरेडी एक
- 5:32:04किराना दुकान में 100 सामान रखवा रहा है।
- 5:32:07उनका स्टाफ सप्लाई चेन देश की हर दुकान तक
- 5:32:10जा रही है और वहां 10 20 या 100
- 5:32:12प्रोडक्ट्स रखवा रही है। अब आपने मान
- 5:32:15लीजिए एक नया हैंड सैनिटाइजर लांच कर दिया
- 5:32:17और आपको उसे देश भर तक पहुंचाना है तो देश
- 5:32:21की गली-गली में आपका हैंड सैनिटाइजर चाहे
- 5:32:23सबसे अच्छा हो चाहे सबसे सस्ता हो उसे देश
- 5:32:26की गली-गली तक पहुंचाना यह कितना मुश्किल
- 5:32:28काम है। वहीं आप सोचिए कि एचयूएल ने एक
- 5:32:31हैंड सैनिटाइजर ल्च कर दिया। तो एचयूएल के
- 5:32:34लिए जहां उसके 100 प्रोडक्ट्स ऑलरेडी जा
- 5:32:36रहे हैं। देश की गली-गली तक उनकी सप्लाई
- 5:32:38लाइन ऑलरेडी है। अपने उस न्यूली लॉन्च्ड
- 5:32:41हैंड सैनिटाइजर को एचयूएल चाहे तो अगले
- 5:32:43हफ्ते ही देश के सारे स्टोर्स में पहुंचा
- 5:32:46देगा। तो आप अगर किसी कंपनी को खरीद रहे
- 5:32:49हैं तो यह आइडेंटिफाई करने की कोशिश करिए
- 5:32:52कि क्या कंपटीशन के मुकाबले इस कंपनी के
- 5:32:55पास डिस्ट्रीब्यूशन रीच बेटर है? तो यह भी
- 5:32:58एक बहुत स्ट्रांग मोड है और इससे हर
- 5:33:00प्रोडक्ट को बाजार तक पहुंचाने की कॉस्ट
- 5:33:02भी काफी कम हो जाती है। तो यह था दूसरा और
- 5:33:05तीसरा मोड लो कॉस्ट या फिर डिस्ट्रीब्यूशन
- 5:33:08रीच। तो अब बात करते हैं चौथे मोड की और
- 5:33:10यह सबसे सिंपल भी है। ये है ब्रांड का।
- 5:33:13देखिए आपने देखा होगा कि nstle का अगर हम
- 5:33:15एग्जांपल लें तो मैगी पहले सिर्फ नूडल्स
- 5:33:18थे। फिर उन्होंने धीरे-धीरे उसमें पास्ता
- 5:33:20ल्च कर दिया। उसमें केचअप ल्च कर दिया।
- 5:33:23बहुत सारे प्रोडक्ट्स nसle अब मैगी ब्रांड
- 5:33:26के अंदर ही ल्च कर देता है। क्यों?
- 5:33:27क्योंकि उससे एकदम से क्रेडिबिलिटी आ जाती
- 5:33:30है। जहां यपी को कई सारे टीवी एड्स करने
- 5:33:33पड़े। कितना ज्यादा मार्केटिंग
- 5:33:34एक्सपेंडिचर करना पड़ा। फिर भी वो आज मैगी
- 5:33:37जितना स्ट्रांग ब्रांड नहीं बन पाया है।
- 5:33:39merco ने भी ऐसा किया। Safola पहले सिर्फ
- 5:33:42ऑयल था। अब उसमें ओट्स आ गए। अब काफी सारे
- 5:33:45और प्रोडक्ट्स merco safa ब्रांड में ही
- 5:33:48ला रहा है। फ्रूट जूसेस, वेजिटेबल जूसेस,
- 5:33:50कुछ मिल्कशेक्स और इस तरह के बहुत सारे
- 5:33:52प्रोडक्ट्स सफोला ब्रांड के अंदर ही आ रहे
- 5:33:55हैं। तो अगर आपके पास एक स्ट्रांग ब्रांड
- 5:33:56हो तो पहला तो कस्टमर में ट्रस्ट बिल्ड
- 5:33:59करने की एक्सरसाइज काफी कम हो जाती है।
- 5:34:01ट्रस्ट बिल्ड करने का खर्चा कम हो जाता
- 5:34:03है। और दूसरा नए प्रोडक्ट्स आप उसमें
- 5:34:06बढ़ाते चले जा सकते हैं। डेटोल हो। पहले
- 5:34:08सिर्फ एंटीसेप्टिक लिक्विड था, हैंड वाश
- 5:34:10आया, सैनिटाइजर आया, साबुन आया। पता नहीं
- 5:34:13क्या-क्या प्रोडक्ट्स वो डेटोल एक ही
- 5:34:15ब्रांड के अंदर ल्च करते चले जाते हैं। और
- 5:34:18हम एज अ ग्राहक जब दुकान में देखते हैं
- 5:34:20अच्छा डेटोल का है दे दो। वहीं अगर वो कोई
- 5:34:22न्यू ब्रांड होता तो सालों की मेहनत लग
- 5:34:25जाती। आईटीc के साथ हम ये देखते भी हैं।
- 5:34:27बहुत एग्रेसिवली हिपी की मार्केटिंग करनी
- 5:34:29पड़ती है। bिंगo man angles sfast ये बहुत
- 5:34:33सारे ऐसे ब्रांड्स हैं जिस पे आईटीc ने
- 5:34:35हजारों करोड़ रुपए उसे जलाने पड़े हैं इन
- 5:34:38ब्रांड्स को बिल्ड करने में। वहीं लाइफ
- 5:34:40बॉय Safola, DOL, Maggi ये कुछ ऐसे
- 5:34:43ब्रांड्स हैं कि बस इनके नाम पर कुछ भी
- 5:34:45नया प्रोडक्ट ल्च कर दो और उसमें से
- 5:34:47ज्यादातर प्रोडक्ट्स सिर्फ उस नाम के कारण
- 5:34:49हिट हो जाते हैं। तो क्या आप जिस कंपनी का
- 5:34:52शेयर खरीदने का सोच रहे हैं उसके पास एक
- 5:34:54ऐसा स्ट्रांग ब्रांड नेम है कि कल को वो
- 5:34:57दो और चीजें ल्च करना चाहे, डवर्सिफाई भी
- 5:34:59करना चाहे तो उस ब्रांड के कारण उसकी
- 5:35:02मार्केटिंग कॉस्ट और फेलियर के चांसेस
- 5:35:04दोनों कम हो जाएंगे। अगर ऐसा ब्रांड है तो
- 5:35:07कंपनी बहुत एडवांटेजियस पोजीशन में है। अब
- 5:35:10बात करते हैं फिफ्थ तरह के मोड की जो है
- 5:35:12पेटेंट। अब ये पेटेंट खास करके आईटी
- 5:35:15कंपनीज़ हो, कोई भी टेक्नोलॉजी कंपनी हो या
- 5:35:17फार्मा कंपनीज़ हो, एमएसी फार्मा कंपनीज़ का
- 5:35:20तो बिजनेस मॉडल ही पेटेंट्स के अराउंड
- 5:35:22रिवॉल्व करता है कि कोई नए ड्रग की
- 5:35:25डिस्कवरी किया। उसको पेटेंट करा लिया। अब
- 5:35:27अगले 15-20 सालों तक कोई कॉम्पिटिट चाह के
- 5:35:30भी उससे कमपीट नहीं कर सकता क्योंकि उसको
- 5:35:33सरकारी प्रोटेक्शन प्राप्त है कि इसके
- 5:35:36अलावा कोई और कंपनी इस प्रोडक्ट को बना ही
- 5:35:38नहीं सकती। इनफैक्ट एक इंटरेस्टिंग
- 5:35:40ट्रिविया इस पे ये भी है कि आपने एंड्राइड
- 5:35:42फोंस को देखा होगा कि कितना भी वो बजललेस
- 5:35:46हो। यानी कितना ही वो कोशिश कर लें कि
- 5:35:48उनमें सिर्फ स्क्रीन ही स्क्रीन दिखे।
- 5:35:50सामने की तरफ कोई भी बॉर्डर थिक ना हो।
- 5:35:52सिर्फ स्क्रीन ही स्क्रीन हो। नीचे की तरफ
- 5:35:55सारे एंड्राइड फोंस में थोड़ा सा बज़ल
- 5:35:58होता ही है। थोड़ी सी बॉर्डर होती ही
- 5:36:00Android फोंस में नीचे की तरफ। ऐसा क्यों?
- 5:36:03क्योंकि नीचे की तरफ बॉर्डर ना हो। इसके
- 5:36:06लिए जो टेक्नोलॉजी है कि ग्लास कर्व हो
- 5:36:09जाए वो Apple ने iPhone 10 के समय पेटेंट
- 5:36:12करा लिया था। और इसीलिए कर्व देके सारी
- 5:36:15वायर्स को नीचे से ऐसे मोड़ दिया जाए और
- 5:36:18नीचे कुछ भी बॉर्डर ना दिखे। यह बाकी
- 5:36:21Android फोंस बनाने वाली कंपनियां चाह के
- 5:36:23भी कर नहीं सकती क्योंकि इसका पेटेंट
- 5:36:26Apple के पास है। सिक्स्थ मोड है नेटवर्क
- 5:36:28इफेक्ट का। यह मैंने पहले भी डिस्कस किया
- 5:36:31है लेकिन यह बहुत जरूरी है और मैं चाहता
- 5:36:33हूं कि आप फिर से जान लें। इस मोड पे
- 5:36:35इनफैक्ट मैंने एक वीडियो भी बनाया है
- 5:36:36जिसमें मैंने ncry.com के एग्जांपल के
- 5:36:38थ्रू इस मोड की बात की थी। तो यह वीडियो
- 5:36:41आपको ऊपर कार्ड पे और डिस्क्रिप्शन में
- 5:36:43मिल जाएगा जिसमें डिटेल में यह मोड डिस्कस
- 5:36:45हुआ है। लेकिन मैं आपको एक शॉर्ट सिंपल
- 5:36:47एग्जांपल से समझा देता हूं कि क्या
- 5:36:49WhatsApp हम सब यूज क्यों करते हैं? क्या
- 5:36:52WhatsApp दुनिया का बेस्ट मैसेजिंग एप है?
- 5:36:54उससे अच्छा कोई है ही नहीं। ऐसा जरूरी
- 5:36:56नहीं है। WhatsApp को हम इसलिए यूज़ कर
- 5:36:58रहे हैं क्योंकि हर कोई WhatsApp यूज़ कर
- 5:37:00रहा है। तो आपको पता है कि अगर आप
- 5:37:01WhatsApp के बदले Telegram या VCAT या
- 5:37:03लाइन H यूज़ करो तो आपके सारे दोस्त या
- 5:37:06परिवार वाले उस ऐप पे आपको मिलेंगे ही
- 5:37:08नहीं। तो WhatsApp सबसे सस्ता है? नहीं
- 5:37:10सारे एप्स ही फ्री है। सबसे बेहतर है शायद
- 5:37:13नहीं। लेकिन फिर भी WhatsApp नंबर वन है
- 5:37:15क्योंकि उसे हर कोई यूज कर रहा है। तो
- 5:37:17Facebook इसी कारण इतना चलता है।
- 5:37:19Instagram इसी कारण इतना चलता है। Google
- 5:37:21P कुछ साल पहले ल्च हुआ था Facebook को
- 5:37:23राइवल करने के लिए। लेकिन किसी ने Google
- 5:37:25P यूज़ नहीं किया। क्यों नहीं किया?
- 5:37:27क्योंकि आप अगर यूज़ करना चाहो भी तो आपके
- 5:37:29दोस्त वहां है ही नहीं। और अगर आपके लोग
- 5:37:32आपके आसपास वाले उस ऐप में नहीं है तो वो
- 5:37:34ऐप आपके लिए यूज़लेस है। तो ये है नेटवर्क
- 5:37:36इफेक्ट। यानी वो कंपनी इसलिए मजबूत है
- 5:37:40क्योंकि सब लोग उसी को यूज करते हैं। तो
- 5:37:42ncry.com भी इसीलिए मजबूत है कि सारे जॉब
- 5:37:45सीकर्स उसी को यूज करते हैं। तो जिनको जॉब
- 5:37:47देना है उनको जॉब पोस्टिंग भी वहीं करनी
- 5:37:49पड़ती है। ऐसे बहुत सारे बिनेसेस हैं।
- 5:37:51इनफैक्ट पहले टेलीकॉम कंपनीज़ भी ये करने
- 5:37:54की कोशिश करती थी। आजकल तो सारे कॉल्स ही
- 5:37:56फ्री हैं। लेकिन Jio के पहले अक्सर ऐसा
- 5:37:58ऑफर्स कंपनियां निकालती थी कि Airtel टू
- 5:38:00Airtel कॉल्स फ्री, Idea टू Idea कॉल्स
- 5:38:03फ्री। ऐसा क्यों? ताकि वो नेटवर्क इफेक्ट
- 5:38:05बना पाए ताकि आप अगर Airtel यूज़ कर रहे हो
- 5:38:08तो आप अपने परिवार वालों अपने दोस्तों को
- 5:38:10भी बोलो कि यार Airtel यूज़ कर ले ना अपने
- 5:38:12बीच कॉल्स फ्री हो जाएंगे। तो टेलीकॉम
- 5:38:14कंपनियों ने भी यह करने की कोशिश की लेकिन
- 5:38:16Jio ने आके उसे बर्बाद कर दिया। सारे
- 5:38:19कॉल्स ही फ्री कर गए तो ये जो नेटवर्क
- 5:38:21बनाने की कोशिश थी वो बन नहीं सका। तो कोई
- 5:38:24भी कंपनी में अगर यह नेटवर्क इफेक्ट है कि
- 5:38:26लोग इसे इसलिए यूज कर रहे हैं क्योंकि
- 5:38:28बाकी सब यूज कर रहे हैं तो यह सबसे
- 5:38:31स्ट्रांग मोड्स में से एक है। अगर आपने ये
- 5:38:33मोड वाली कंपनी को ही पहचान ली तो
- 5:38:35डेफिनेटली ज्यादातर चांसेस हैं कि आप बहुत
- 5:38:37पैसा कमाने वाले हैं। और अब बात करते हैं
- 5:38:39सातवें मोड की जो है स्विचिंग कॉस्ट। इसको
- 5:38:42एक बहुत सिंपल एग्जांपल से समझते हैं कि
- 5:38:44आप अपने बैंक में अगर आपका SBI में अकाउंट
- 5:38:46है, HDFC में अकाउंट है तो SBI या HDFC
- 5:38:49सबसे ज्यादा इंटरेस्ट नहीं देता। आजकल
- 5:38:51सबसे ज्यादा इंटरेस्ट कौन सा बैंक दे रहा
- 5:38:52पहले Kotak देता था 2 साल पहले तक। आजकल
- 5:38:55IDFC फर्स्ट बैंक दे रहा है। लेकिन अगर
- 5:38:57Kotak ने ज्यादा इंटरेस्ट दिया तो हम सब
- 5:38:59छोड़छाड़ के अपना बैंक अकाउंट बंद करके पे
- 5:39:02शिफ्ट नहीं हो गए। वहीं आज हर कोई IDFC
- 5:39:04फर्स्ट बैंक में शिफ्ट नहीं हो रहा।
- 5:39:05क्योंकि बैंक अकाउंट चेंज करना बहुत ही
- 5:39:08झंझट वाला काम है। हमको लगता है यार थोड़े
- 5:39:09ज्यादा इंटरेस्ट के लिए कौन अपना अकाउंट
- 5:39:11बदले। इतनी जगह से वो लिंक है। ईएमआई कटती
- 5:39:14है। पता नहीं क्या-क्या अकाउंट से लिंक्ड
- 5:39:15है। सब फिर से शुरू करो। मुझे नहीं चाहिए
- 5:39:17थोड़ा ज्यादा इंटरेस्ट। मैं म्यूच्यूल फंड
- 5:39:19में डाल लूंगा। तो यानी बैंक में एक बार
- 5:39:21कोई ग्राहक आ जाए तो वो जल्दी से शिफ्ट
- 5:39:23नहीं होता। पहले ऐसा था मोबाइल्स में भी
- 5:39:26जब मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी नहीं थी कि
- 5:39:28आपने Airtel का नंबर ले लिया दो-चार साल
- 5:39:30यूज कर लिया सारे दोस्तों को बांट लिया।
- 5:39:32अब अगर Airtel बुरी सर्विस भी देगा तो आप
- 5:39:35शिफ्ट नहीं हो सकते क्योंकि पोर्टेबिलिटी
- 5:39:36है नहीं और वो नंबर बटा हुआ है। तो उस
- 5:39:39कारण तब यह मोबाइल कंपनियां खूब पैसा
- 5:39:41कमाती थी। लेकिन जब से मोबाइल नंबर
- 5:39:43पोर्टेबिलिटी आई स्विचिंग कॉस्ट नेटवर्क्स
- 5:39:45में बहुत आसान हो गई। उस कारण कंपनीज़ को
- 5:39:48धड़ल्ले से अपना नेटवर्क इंप्रूव करने की
- 5:39:51मेहनत करनी पड़ी। तेज़ से पैसा इन्वेस्ट
- 5:39:53करना पड़ा नए टावर्स बनाने के लिए ताकि
- 5:39:55यूज़र्स शिफ्ट ना हो। जिन यूज़र्स को पहले
- 5:39:58वो फॉर ग्रांटेड ले लेते थे कि एक बार फंस
- 5:40:00गए तो जाएंगे कहां वो खत्म हो गया। इस
- 5:40:02कारण भी इतनी सारी टेलीकॉम कंपनियां हम
- 5:40:05देखते हैं कि खत्म हो गई। क्योंकि
- 5:40:06पोर्टेबिलिटी के कारण स्विचिंग कॉस्ट का
- 5:40:08जो मोड था वो खत्म हो गया। बहुत सारी आईटी
- 5:40:11कंपनीज़ भी ऐसी हैं जिनके पास यह स्विचिंग
- 5:40:13कॉस्ट वाला मोड है। आईटी कंपनी से अगर
- 5:40:16आपने करोड़ों रुपए देके एक अच्छा सॉफ्टवेयर
- 5:40:18बनवाया है। आपकी पूरी टीम को ट्रेन किया
- 5:40:20है तो आप अब आप हर साल उस सॉफ्टवेयर को
- 5:40:23छोड़ के किसी नए सॉफ्टवेयर पे शिफ्ट नहीं
- 5:40:25हो सकते। इसी कारण यूरोपियन अमेरिकन
- 5:40:28क्लाइंट्स से TCS, Infosys जैसी कंपनियां
- 5:40:30सालों साल रिन्यूल या एनुअल मेंटेनेंस फी
- 5:40:33लेती रहती हैं और तगड़ा मुनाफा कमाती रहती
- 5:40:36हैं। तो यह भी एक बहुत स्ट्रांग मोड है।
- 5:40:38नेटवर्क इफेक्ट और स्विचिंग कॉस्ट। यह दो
- 5:40:40बहुत स्ट्रांग मोड्स हैं और अगर आप यह
- 5:40:42मोड्स वाली कंपनियां आइडेंटिफाई कर पाएं
- 5:40:45तो डेफिनेटली आप बहुत अच्छी इन्वेस्टिंग
- 5:40:47करेंगे। तो अब आप लोगों ने ये वीडियो
- 5:40:49देखा। मुझे आपसे चाहिए कि आप मुझे कुछ
- 5:40:52एग्जांपल्स बताएं इन मोड्स के। चाहे वो
- 5:40:54ब्रांड हो, नेटवर्क इफेक्ट हो, स्विचिंग
- 5:40:56कॉस्ट हो, गवर्नमेंट रेगुलेशन हो। जितने
- 5:40:57भी मोड्स मैंने डिस्कस किए, आप मुझे कमेंट
- 5:41:00करके बताइए। खास करके मुझे चाहिए कि आप
- 5:41:02मुझे बताइए कि नेटवर्क इफेक्ट वाली
- 5:41:05कंपनियां कौन सी हैं? स्विचिंग कॉस्ट वाली
- 5:41:07कंपनियां कौन सी हैं? लो कॉस्ट जिन कंपनीज़
- 5:41:09के पास एडवांटेज है, वह कंपनियां कौन सी
- 5:41:11हैं? गवर्नमेंट रेगुलेशन से प्रोटेक्टेड
- 5:41:13कंपनियां कौन सी हैं? ये चार मोड्स के मैं
- 5:41:16चाहता हूं कि आप एग्जांपल्स इस कमेंट
- 5:41:18सेक्शन में दीजिए ताकि एक अच्छी कम्युनिटी
- 5:41:20बन सके। हम सब इस तरह के स्टॉक्स को
- 5:41:22डिस्कस कर सकें, आइडेंटिफाई कर सकें और
- 5:41:24सबको इसका फायदा मिले और अगर आपने आज इस
- 5:41:27वीडियो से कुछ नया सीखा हो तो इसे लाइक
- 5:41:30जरूर कर दीजिएगा और इसे अपने दोस्तों के
- 5:41:33साथ जरूर शेयर करिए क्योंकि हर वो तरीका
- 5:41:3552 वीक हाई लो, डेप्ट देखना, प्रमोटर्स
- 5:41:38ईमानदार हैं कि नहीं, प्राइस का ट्रेंड
- 5:41:40कैसा है? यह सबसे ज्यादा जरूरी है कि हम
- 5:41:42मोड्स को आइडेंटिफाई करना सीखें। आज हम एक
- 5:41:45बहुत इंटरेस्टिंग चीज डिस्कस करेंगे। आपने
- 5:41:47अक्सर देखा होगा कि क्वार्टरली रिजल्ट्स
- 5:41:50जब भी कंपनियों के आते हैं तो बहुत सारे
- 5:41:52फाइनेंसियल न्यूज़ पोर्टल्स में वो छपते
- 5:41:54हैं और स्टॉक प्राइस में बहुत ज्यादा
- 5:41:56मूवमेंट होता है। तो क्वार्टरली प्राइसेस
- 5:41:58के बेसिस पे काफी प्राइस में ऊपर नीचे
- 5:42:01होता है। तो ऐसे में क्या क्वार्टरली
- 5:42:02रिजल्ट्स जो आते हैं उसको आपको अच्छे से
- 5:42:05एनालाइज करना चाहिए और क्या उसके बेसिस पे
- 5:42:08आपको शेयर्स को खरीदना या बेचना चाहिए?
- 5:42:11कितना जरूरी है क्वार्टरली रिजल्ट्स? और
- 5:42:13आपको कैसे उसे एनालाइज करना है? क्या
- 5:42:16देखना है? क्या नहीं देखना है जानेंगे यह
- 5:42:18सब कुछ और बहुत कुछ इस वीडियो में। तो
- 5:42:21चलिए शुरू करते हैं आज की क्लासेस एक
- 5:42:24इंटरेस्टिंग कंपनी के साथ वंडरला हॉलिडेज़।
- 5:42:26तो मैंने अपने पिछले वीडियोस में भी इस
- 5:42:28कंपनी के बारे में बीच-बीच में बात की है।
- 5:42:30यह बेसिकली यह कंपनी अम्यूजमेंट पार्कक्स
- 5:42:33चलाती है। अगर आपने इमेजिका या एसएल
- 5:42:35वर्ल्ड का नाम सुना होगा तो उस तरह के
- 5:42:37पार्कक्स ये हैदराबाद, कोच्ची और बेंगलुरु
- 5:42:39में चलाती है। तो अब पहले मैं बताऊंगा कि
- 5:42:42क्या फायदे हैं और क्यों कई बार जरूरी है
- 5:42:45और फिर मैं आपको बताऊंगा कि क्या-क्या
- 5:42:47आपको सावधानियां रखनी है क्वार्टरली
- 5:42:49रिजल्ट्स के बारे में। तो चलिए पहले देखते
- 5:42:51हैं क्वार्टरली रिजल्ट्स का फायदा। अब
- 5:42:53देखिए जैसा मैंने आपको बताया कि ये
- 5:42:55अम्यूजमेंट पार्क वाली कंपनी है। तो ये
- 5:42:57आउटडोर पार्क्स होते हैं। तो अब आप जरा
- 5:43:00सोचिए कि लोग इस तरह के पार्क्स में कब
- 5:43:03जाना ज्यादा पसंद करेंगे और कब जाना पसंद
- 5:43:06नहीं करेंगे। जैसे लोकल अगर आपके शहर में
- 5:43:08मीना बाजार लगता है या एसएल वर्ल्ड
- 5:43:10इमेजिका आप कब नहीं जाते? एक एग्जाम्स के
- 5:43:13सीज़ंस में जाना पसंद नहीं करते क्योंकि
- 5:43:15बच्चों के एग्जाम्स हैं, स्टूडेंट के
- 5:43:16एग्जाम है तो इन पार्क्स की सेल्स नीचे
- 5:43:19रहती है। और सेकंड जब बरसात हो रही हो,
- 5:43:21बरसात में झूला झूलने कौन जाएगा। तो ये जो
- 5:43:23सीजनैलिटी है किसी बिजनेस की ये हमको
- 5:43:26प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट से पता नहीं
- 5:43:28चलती। क्योंकि वह तो सीधा दिखा देता है कि
- 5:43:30इस साल कितनी सेल हुई और कितना प्रॉफिट
- 5:43:32हुआ। लेकिन ऐसा हो सकता है कि सेल्स किसी
- 5:43:35साल एकदम से घट गई हो और आपको देखना हो कि
- 5:43:38ऐसा क्यों हुआ तो प्रॉफिट एंड लॉस
- 5:43:40स्टेटमेंट में तो आपको पता नहीं चलेगा कि
- 5:43:42क्यों घटी या कब घटी क्योंकि इसमें तो ईयर
- 5:43:45एंड के फिगर्स हैं। ऐसे में ऐसे में
- 5:43:47क्वार्टरली रिजल्ट्स हमारी मदद कर सकते
- 5:43:48हैं ये जानने में कि किस क्वार्टर बिजनेस
- 5:43:51ने खराब किया और फिर हम वेदर कंडीशंस या
- 5:43:54हो सकता है भूकंप आया हो या फ्लड आया हो
- 5:43:56या ऐसे कुछ से हम समझ सकते हैं कि वो
- 5:43:59क्वार्टर जो खराब हुआ वो वन ऑफ था एक बार
- 5:44:02हो गया किसी नेचुरल डिजास्टर के कारण या
- 5:44:05फिर कंपनी का बिजनेस फंडामेंटली खराब हो
- 5:44:07रहा है। तो साल भर की परफॉर्मेंस चाहे
- 5:44:10अच्छी हो चाहे बुरी हो वो क्यों अच्छी या
- 5:44:13बुरी हुई इसका बहुत अच्छा एनालिसिस अपन कर
- 5:44:16सकते हैं क्वार्टरली रिजल्ट्स के साथ और
- 5:44:18जैसा मैंने आपको बताया कि मुझे लगता है कि
- 5:44:20बरसातों में और एग्जाम सीजन में इन
- 5:44:23पार्कक्स में लोग कम जाते होंगे तो चलिए
- 5:44:25देखते हैं ऐसा होता है क्या अब बरसातें कब
- 5:44:28होती है जून जुलाई अगस्त सेप्टेंबर यानी
- 5:44:32ज्यादातर सितेंंबर क्वार्टर जिसमें जुलाई
- 5:44:34अगस्त सेप्टेंबर आता है और आप देखिए
- 5:44:37दिसंबर 2018 में 76 करोड़ की सेल मार्च
- 5:44:41में 60 करोड़ जून में 117 करोड़ फिर
- 5:44:44सेप्टेंबर जो बरसात वाला क्वार्टर है और
- 5:44:46एक चीज ध्यान रखिए कि इनका एक पार्क केरला
- 5:44:49में है जहां बहुत ज्यादा बारिश होती है
- 5:44:51बेंगलुरु में है जहां ज्यादा बारिश होती
- 5:44:53है तो इनका परफॉर्मेंस सेप्टेंबर क्वार्टर
- 5:44:56में एकदम से गिर जाता है। इनफैक्ट देखिए
- 5:44:58कहां तो यह दिसंबर में 14 करोड़ का
- 5:45:01प्रॉफिट कमा रही थी और इस दिसंबर में तो
- 5:45:0221 करोड़ का प्रॉफिट कमाया लेकिन
- 5:45:04सेप्टेंबर में केवल 16 लाख का प्रॉफिट
- 5:45:07कमाया क्योंकि लोग आना एकदम से बंद कर
- 5:45:09देते हैं। उसी तरह एग्जाम सीजन यानी फेब
- 5:45:13मार्च अप्रैल तो ज्यादा इंपैक्ट आएगा फब
- 5:45:15और मार्च में दो महीने जो इस क्वार्टर में
- 5:45:18आते हैं और इसीलिए दिसंबर और जून के
- 5:45:20मुकाबले मार्च में भी सेल्स काफी कम है।
- 5:45:23अब जून क्वार्टर में हम देख रहे हैं कि
- 5:45:24सेल्स बहुत ज्यादा है। लगभग डबल। क्यों?
- 5:45:27क्योंकि बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां
- 5:45:29होती हैं। यह वो समय है जब पेरेंट्स अपने
- 5:45:31बच्चों को इन पार्क्स में ले जाते हैं। तो
- 5:45:33अप्रैल, मई, जून ये तीन महीने छुट्टियों
- 5:45:36के होते हैं और इस कारण इसकी सेल्स एकदम
- 5:45:39से बढ़ गई है। इसमें एक और कारण है कि ये
- 5:45:41सेल्स इतनी क्यों बढ़ गई? क्योंकि वंडरला
- 5:45:43अपने पार्क में अम्यूजमेंट पार्क और वाटर
- 5:45:46पार्क दोनों चलाता है। तो गर्मियों में
- 5:45:48भले ही लोग धूप के कारण झूले झूलने ना
- 5:45:50जाएं, लेकिन वह वंडरला जाते हैं वाटर
- 5:45:52पार्क में एंजॉय करने के लिए। तो वाटर
- 5:45:54पार्क के कारण भी इसकी जून की सेल एकदम से
- 5:45:57बढ़ गई। तो इस तरह के ग्रनुलर एनालिसिस
- 5:46:00करने में मदद करता है क्वार्टरली
- 5:46:02रिजल्ट्स। इसके अलावा क्वार्टरली रिजल्ट्स
- 5:46:04एक चीज में और बहुत मदद करते हैं वो ये कि
- 5:46:07बिजनेस को समझने में कि हम उस बिजनेस को
- 5:46:09अच्छे से समझ सकें। सेक्टर वो जो एंटायर
- 5:46:11इंडस्ट्री है उसका अच्छा टाइम कब होता है?
- 5:46:14बुरा टाइम कब होता है? इसे अच्छे से समझ
- 5:46:16सकें। पूरी इंडस्ट्री का बिजनेस मैकेनिज्म
- 5:46:18समझने में क्वार्टरली रिजल्ट्स मदद करते
- 5:46:20हैं। जैसे हम सबको यह लगता है कि दिवाली
- 5:46:23के आसपास धनतेरस के आसपास लोग अपने घरों
- 5:46:26को पेंट ज्यादा कराते हैं। वाइट वॉश
- 5:46:27ज्यादा होता है। तो ऐसे में दिवाली के
- 5:46:29आसपास पेंट कंपनियों की सेल्स बढ़ती होगी।
- 5:46:32तो क्या ऐसा सच में होता है? दिवाली
- 5:46:34यूजुअली अक्टूबर या नवंबर आती है।
- 5:46:36अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर ये तीनों महीने
- 5:46:38दिसंबर क्वार्टर में आते हैं। तो दिसंबर
- 5:46:41क्वार्टर में कंपनी की सेल बढ़नी चाहिए।
- 5:46:43चलिए देखते हैं क्या Asian Paints में ऐसा
- 5:46:46हुआ। हम इसके क्वार्टरली रिजल्ट में जाते
- 5:46:48हैं और जरा दिसंबर रिजल्ट्स देखते हैं।
- 5:46:50देखिए दिसंबर 2018 को 4500 करोड़ की सेल
- 5:46:53हुई। मार्च में कुछ कम हुई। जून में कुछ
- 5:46:56कम हुई। सेप्टेंबर में थोड़ी और कम हुई
- 5:46:59लेकिन दिसंबर में फिर से थोड़ी बढ़ गई। तो
- 5:47:01बहुत ज्यादा फर्क नहीं आ रहा है लेकिन 7
- 5:47:048% का फर्क आ रहा है। तो जैसा हम सोचते
- 5:47:07हैं वह कुछ हद तक सही है। लेकिन मैंने
- 5:47:09पर्सनली जितनी ज्यादा उम्मीद की थी उतना
- 5:47:12फर्क नहीं आ रहा है। तो इससे हमें यह समझ
- 5:47:14में आ रहा है कि हां 7 8% का फर्क आता है
- 5:47:17लेकिन बहुत सारे लोग दिवाली का इंतजार
- 5:47:18करते हैं घर को वाइट वाश कराने के लिए।
- 5:47:20ऐसा नहीं है। इसके अलावा एक और चीज में
- 5:47:23हमें ऐसा लगता है और वो है गाड़ियों में
- 5:47:25कि धनतेरस के आसपास लोग गाड़ियां खास करके
- 5:47:28टू व्हीलर बहुत ज्यादा खरीदते होंगे। चलिए
- 5:47:30इसे अब हम क्वार्टरली रिजल्ट्स में देखते
- 5:47:32हैं। क्या सच में ऐसा है? तो इसमें भी
- 5:47:34क्या दिसंबर क्वार्टर में सेल्स बढ़ती है?
- 5:47:36इस 2019 वाले क्वार्टर को हम भूल जाते हैं
- 5:47:39क्योंकि पिछले छ महीनों से ऑटो सेक्टर में
- 5:47:41सच में स्लो डाउन है। तो आप इस क्वार्टर
- 5:47:43को मत देखिए। इन चारों को हम कंपेयर करते
- 5:47:46हैं। 2018, दिसंबर और मार्च, जून,
- 5:47:48सितेंंबर 19। तो दिसंबर में था 7864
- 5:47:52करोड़। मार्च में था 7884 करोड़ और जून
- 5:47:56में यह 8000 करोड़ हो गया। फिर सप्टेंबर
- 5:47:58में कम हुआ। यानी दिसंबर से थोड़ा ज्यादा
- 5:48:01था मार्च में, मार्च से और ज्यादा था जून
- 5:48:03में। तो ऐसा भी बिल्कुल नहीं है कि लोग
- 5:48:05गाड़ियां खरीदने के लिए भी धनतेरस या
- 5:48:08दिवाली का इंतजार करते। इसे वेरीफाई कर
- 5:48:10लेते हैं। एक और ऑटोमोबाइल कंपनी का स्टॉक
- 5:48:12देख के TVS Motors इसके दिसंबर में था
- 5:48:154600। मार्च में थोड़ा कम हुआ 4300।
- 5:48:19जून में हुआ 4400। तो इसमें कुछ हद तक ऐसा
- 5:48:23दिख रहा है कि दिसंबर क्वार्टर ज्यादा
- 5:48:26बेटर रहा। चलिए एक कंपनी हम और देख लेते
- 5:48:28हैं ताकि और क्लेरिटी आ जाए और यह तीनों
- 5:48:30ही टू व्हीलर कंपनीज़ हैं। तो इससे और
- 5:48:32आसानी होगी हमको इस डिसीजन में पहुंचने
- 5:48:34में। 7400 7395
- 5:48:387700
- 5:48:39सेप्टेंबर में भी 7700 तो अगेन इस कंपनी
- 5:48:42में भी बिल्कुल ऐसा नहीं है कि लोग तो
- 5:48:45अगेन इस कंपनी से भी हमको यही दिख रहा है
- 5:48:48कि ऐसा नहीं है कि दिवाली में सेल्स बढ़ती
- 5:48:50है। केवल TVS Motors में थोड़ा सा ऐसा लगा
- 5:48:53क्योंकि TVS खास करके रूरल इकॉनमी पे
- 5:48:56डिपेंडेंट है। उनकी जो मोपेड है वो रूरल
- 5:48:58इकॉनमी में काफी चलती है और वहां शायद
- 5:49:00थोड़ा फर्क पड़ता हो। Bajaj ज्यादा अर्बन
- 5:49:03है इसलिए इसके में बिल्कुल फर्क नहीं दिख
- 5:49:05रहा। तो शायद यह भी फर्क हो सकता है लेकिन
- 5:49:07ओवरऑल ज्यादा फर्क नहीं दिख रहा। जैसे
- 5:49:09मल्टीप्लेक्सेस से भी हम यह देख सकते हैं
- 5:49:11कि लोग कब फिल्में देखने जाना पसंद करते
- 5:49:14हैं। ऐसे बहुत सारी इंडस्ट्रीज हैं।
- 5:49:16कपड़ों में, फुटवेयर में सब में हम देख
- 5:49:18सकते हैं कि लोग खरीदारी कब करते हैं। तो
- 5:49:20क्वार्टरली रिजल्ट हमें बिजनेस समझने में
- 5:49:23काफी मदद करते हैं। इसके अलावा क्वार्टरली
- 5:49:25रिजल्ट्स एक और काम करते हैं। लेकिन उसके
- 5:49:27लिए आपको ऐसी कंपनी देखनी होगी जिस पे
- 5:49:30आपको उम्मीद है कि सीजन के अनुसार उसकी
- 5:49:32सेल्स में बहुत ज्यादा फर्क नहीं आता
- 5:49:34होगा। तो ऐसी एक कंपनी मुझे हिंदुस्तान
- 5:49:36unilver लगती है। साबुन शैंपू डिटर्जेंट
- 5:49:38सीजन वाइज सेल्स में बहुत फर्क नहीं आना
- 5:49:40चाहिए। चलिए देखते हैं फर्क आता है कि
- 5:49:42नहीं। 9500 9900 10000 सेप्टेंबर क्वार्टर
- 5:49:47में कुछ कम और दिसंबर में थोड़ा और कम। तो
- 5:49:49बेस्ट क्वार्टर था इसका 10,000 करोड़ वाला
- 5:49:52जून में। यानी गर्मियों के आसपास थोड़ा
- 5:49:55फायदा होता है। लेकिन ओवरऑल बहुत ज्यादा
- 5:49:57फर्क नहीं है। 5 7% का फर्क है। 9000 900
- 5:50:01800 10 के आसपास ही सारे रिजल्ट्स हैं। तो
- 5:50:04ऐसी कंपनी जिसकी सेल्स में ज्यादा फर्क
- 5:50:06नहीं आता उसमें आप एक और चीज कंपेयर कर
- 5:50:09सकते हैं। लेटेस्ट क्वार्टर को पिछले साल
- 5:50:13के वही 3 महीने वाले क्वार्टर से कंपेयर
- 5:50:16करके। हमने यहां पांच क्वार्टर्स इसीलिए
- 5:50:18दिए हैं ताकि आप लेटेस्ट क्वार्टर को
- 5:50:20पिछले साल के उसी क्वार्टर से कंपेयर कर
- 5:50:22सकें। जैसे दिसंबर 2019 क्वार्टर में
- 5:50:25एचयूएल ने 9800 करोड़ का सामान बेचा। वहीं
- 5:50:28दिसंबर 2018 में 9500 करोड़ का सामान बेचा
- 5:50:32और यहीं पे आपकी पीएंडएल स्टेटमेंट देखने
- 5:50:35के बाद क्वार्टरली रिजल्ट्स मदद करते हैं।
- 5:50:36जैसे यहां दिख रहा है कि 4000 करोड़ के
- 5:50:39आसपास सेल्स बढ़ी। लेकिन ऐसा भी हो सकता
- 5:50:42है कि यह 4000 करोड़ की सेल किसी एक
- 5:50:45क्वार्टर में कोई नया प्रोडक्ट ल्च हुआ
- 5:50:47था। उसकी खूब ज्यादा पब्लिसिटी हुई तो वो
- 5:50:49प्रोडक्ट खूब बिका 3-4 महीने और उसके बाद
- 5:50:52दोबारा सेल्स गिर गई। ऐसा भी हो सकता है।
- 5:50:55तो ऐसा हुआ है कि नहीं ये देखने के लिए
- 5:50:58हमें ये क्वार्टरली रिजल्ट्स मदद करते
- 5:51:00हैं। और यहां मैं यह देख सकता हूं कि नहीं
- 5:51:02सेल्स रेगुलर है। ऐसा नहीं है कि किसी एक
- 5:51:04क्वार्टर में नया लॉन्च हुआ। खूब सारा
- 5:51:06सामान बिक गया और उसके बाद बैक टू नॉर्मल
- 5:51:08जैसे ऑटोमोबाइल कंपनीज में ऐसा अक्सर होता
- 5:51:11है कि जब कोई कार लॉन्च होती है तो एकद
- 5:51:14महीने प्री बुकिंग और लॉन्च होने के बाद
- 5:51:16एकद महीने वो खूब बिकती है फिर सेल्स कम
- 5:51:18हो जाती है और उस चक्कर में एक साल के लिए
- 5:51:21तो पीएंडएल अच्छा दिखने लगता है लेकिन
- 5:51:23हमें पता रहता है कि ऐसा कंसिस्टेंट नहीं
- 5:51:25होगा तो जब आप पिछले साल के उस क्वार्टर
- 5:51:28को इस साल के सेम क्वार्टर से कंपेयर
- 5:51:30करेंगे और इस साल का वो क्वार्टर बेटर
- 5:51:32परफॉर्म करेगा तो हम यह मान सकते हैं कि
- 5:51:34ये कंपनी सस्टेन ने बबल है और एक बार गलती
- 5:51:37से सेल्स या मुनाफा तुक्के से बढ़ गया है
- 5:51:40ऐसा बिल्कुल नहीं है। तो हमेशा जब आप
- 5:51:42क्वार्टरली रिजल्ट्स देखें चाहे वह ऐसी
- 5:51:44कंपनी हो जिसकी सेल्स को बहुत फर्क पड़ता
- 5:51:46है मौसम से जैसे वंडर हो गई या फिर जैसे
- 5:51:49वंडरला हो गई या मल्टीप्लेक्सेस हो गए
- 5:51:51उनमें भी आप ईयर ऑन ईयर कंपैरिजन जरूर
- 5:51:54करें और जिसमें रेगुलर सेल्स चलनी चाहिए
- 5:51:57ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए उसमें भी आप
- 5:52:00ईयर ऑन ईयर क्वार्टर का कंपैरिजन जरूर
- 5:52:02करें और तभी आपको पता चलेगा कि सीजन के
- 5:52:05हिसाब से कंपनी ने सही परफॉर्म किया है कि
- 5:52:07नहीं और कहीं कोई नया प्रोडक्ट ल्च आ गया
- 5:52:10उसके लिए एक आध क्वार्टर सेल बढ़ गई थी और
- 5:52:12फिर से सब बैक टू नॉर्मल हो गया। ऐसा तो
- 5:52:14नहीं है या सेल्स कंटीन्यूअसली ग्रो कर
- 5:52:16रही है या नहीं। तो सही तरीका क्वार्टरली
- 5:52:18रिजल्ट्स को देखने का है सेम क्वार्टर को
- 5:52:20अलग-अलग सालों में कंपेयर करना। तो अभी तक
- 5:52:23आपको मैंने बताया कि क्वार्टरली रिजल्ट से
- 5:52:25आपको कहां-कहां क्या-क्या मदद मिल सकती है
- 5:52:27और क्यों क्वार्टरली रिजल्ट्स को देखना
- 5:52:29इंपॉर्टेंट है। लेकिन यही चीज कंपनी के
- 5:52:32ओनर्स को भी पता है कि क्वार्टरली
- 5:52:34रिजल्ट्स लोग देखते हैं। इसीलिए उन पे
- 5:52:37सोचिए कितना प्रेशर भी होता है कि हर बार
- 5:52:39जब क्वार्टरली रिजल्ट आता है तो शेयर का
- 5:52:42दाम ऊपर या नीचे होता है। तो कंपनी पर
- 5:52:44इमेजिन करिए कितना प्रेशर रहता है कि
- 5:52:46क्वार्टरली अपने प्रॉफिट्स, अपनी सेल्स को
- 5:52:49मेंटेंड रखें और हर क्वार्टर कुछ ना कुछ
- 5:52:51ग्रोथ भी दिखाएं ताकि उनके शेयर प्राइस को
- 5:52:54नुकसान ना हो। एक भी क्वार्टर अगर सेल्स
- 5:52:57गिरे नॉर्मल से ज्यादा या प्रॉफिट गिर जाए
- 5:52:59तो शेयर काफी क्रैश होता है। तो इससे बचने
- 5:53:02के लिए काफी स्ट्रेस में रहता है सारा
- 5:53:05मैनेजमेंट और कई बार कई कंपनियां
- 5:53:08क्वार्टरली रिजल्ट्स को इसलिए फज भी करती
- 5:53:10हैं। यानी कुछ ऐसी अकाउंटिंग प्रैक्टिसेस
- 5:53:13लाती हैं जिससे प्रॉफिट असल में हुआ कम
- 5:53:16होता है लेकिन दिखता ज्यादा है। इसका मैं
- 5:53:18आपको एक एग्जांपल देता हूं कि मान लीजिए
- 5:53:2131 दिसंबर को क्वार्टर खत्म होना है। आज
- 5:53:2430 दिसंबर है और मेरे को मेरी सेल्स
- 5:53:28ज्यादा दिखानी है। पिछले साल दिसंबर के
- 5:53:30मुकाबले इस साल मेरी सेल्स थोड़ी कम दिख
- 5:53:33रही है। तो अगर मैं आज या कल 30 या 31
- 5:53:36दिसंबर को 2 करोड़ का और माल नहीं बेचूंगा
- 5:53:39तो मेरे इस बार का क्वार्टरली रिजल्ट खराब
- 5:53:41दिखेगा। तो ऐसे में मैं क्या कर सकता हूं?
- 5:53:44मैं अपने किसी ऐसे कस्टमर कोई मेरा
- 5:53:47डिस्ट्रीब्यूटर है जिससे बड़े पुराने
- 5:53:48रिलेशन है। मैं उसको आज यह बोल सकता हूं
- 5:53:51कि यह 2 करोड़ का बिल मैं तेरे नाम पर
- 5:53:54फाड़ रहा हूं। सेल्स दिखा रहा हूं। 1
- 5:53:56तारीख को जैसे ही 1 जनवरी होगी नया
- 5:53:58क्वार्टर आएगा तो तुम मुझे इस सामान को
- 5:54:01वापस कर देना और 1 तारीख को मैं सेल्स
- 5:54:03रिटर्न दिखा दूंगा। तो 1 तारीख को भले ही
- 5:54:05वो सामान वापस आ गया लेकिन जो 31 दिसंबर
- 5:54:08तक का रिजल्ट दिखना था वो रिजल्ट में तो 2
- 5:54:11करोड़ की सेल्स दिख गई। तो जब जनवरी में
- 5:54:1431 दिसंबर वाले क्वार्टर का रिजल्ट आएगा
- 5:54:16तो दिखेगा कि सेल्स बहुत अच्छी हुई और उस
- 5:54:19चक्कर में शेयर का दाम बढ़ जाएगा और जैसे
- 5:54:22ही शेयर का दाम बढ़ेगा तो कंपनी के ओनर्स
- 5:54:25को तो पता है कि उन्होंने क्या किया है तो
- 5:54:27वो अपने कुछ शेयर्स बेच के मुनाफा कमा के
- 5:54:30निकल जाएंगे और अब उन्हें पता है कि अगले
- 5:54:33क्वार्टर यह 2 करोड़ का सेल्स रिटर्न
- 5:54:35दिखने वाला है। यानी अगले क्वार्टर का
- 5:54:37रिजल्ट अच्छा नहीं आएगा। तो जब उस
- 5:54:39क्वार्टर का रिजल्ट आएगा तो शेयर का दाम
- 5:54:41गिरेगा तो तब वो वापस सस्ते में शेयर खरीद
- 5:54:44लेंगे और जितनी होल्डिंग थी उतनी होल्डिंग
- 5:54:47उनकी वापस आ जाएगी। यह बहुत सिंपलिस्टिक
- 5:54:49एग्जांपल है। मैंने इसे बहुत आसानी से
- 5:54:51आसान करने के लिए आप लोगों को समझाया है
- 5:54:53कि किस तरीके से क्वार्टरली रिजल्ट्स को
- 5:54:55कई बार फज किया जाता है और उनमें गड़बड़ी
- 5:54:57की जाती है। ये इतना आसान नहीं है। कई
- 5:55:00सारे सेबी रेगुलेशंस भी हैं इनसाइडर
- 5:55:01ट्रेडिंग को लेके डिस्क्लोज़र रेगुलेशंस भी
- 5:55:04हैं। लेकिन एक एग्जांपल के जरिए आप समझिए
- 5:55:06कि इस तरह की बहुत सारी चीजें पॉसिबल है।
- 5:55:09तो इससे बचा जाता है कैश फ्लो स्टेटमेंट
- 5:55:13के जरिए। कई बार मार्केट जब क्रैश होता है
- 5:55:15या करेक्ट होता है ना तो उसके जिम्मेदार
- 5:55:18आईपीओस भी हो सकते हैं। हम सुनने में
- 5:55:20हैरान करने वाला लगता है ना लेकिन ये सच
- 5:55:23है। जानते हैं कैसे? नमस्कार दोस्तों, मैं
- 5:55:25हूं प्रांजलल कामरा। शुरू करते हैं
- 5:55:27फिनोलॉजी और जानते हैं कैसे? आईपीओस के
- 5:55:30कारण कई बार मार्केट करेक्ट हो जाता है।
- 5:55:32सबसे पहले तो समझते हैं कि ज्यादातर
- 5:55:34आईपीओस कब आते हैं। अब ज्यादातर आईपीओस तब
- 5:55:37आते हैं जब मार्केट बहुत अच्छा कर रहा है।
- 5:55:39जब मार्केट में बुल रन है। जैसा कि पिछले
- 5:55:41एक साल में हमने देखा है। इसलिए पिछले एक
- 5:55:43साल में बहुत सारे आईपीओस आए हैं और उससे
- 5:55:46भी ज्यादा आईपीओस आने को हैं। तो ये तो
- 5:55:48क्लियर है। इनफैक्ट इसको आप Google भी कर
- 5:55:50सकते हैं। ये डाटा आपको मिल जाएगा कि हर
- 5:55:52साल कितने-कितने आईपीओस आए और जिस-जिस साल
- 5:55:55मार्केट ने बहुत अच्छा किया। आईपीओस चार
- 5:55:57गुना पांच गुना ज्यादा आते हैं। क्योंकि
- 5:55:59सबको लगता है कि इस महंगे मार्केट में
- 5:56:01शेयर्स को महंगे में बेच के कंपनी या
- 5:56:03प्रमोटर्स ज्यादा फंड्स को कलेक्ट कर ले।
- 5:56:05तो महंगे मार्केट में ज्यादा आईपीओस आते
- 5:56:08हैं। अब इसका रिलेशन मार्केट करेक्शन से
- 5:56:10कैसे है? इसको चलिए एक सिंपल से एग्जांपल
- 5:56:13से समझते हैं। अस्यूम करते हैं कि आपकी
- 5:56:15फैमिली इनकम ₹00 महीना है। आप अभी अर्न
- 5:56:18नहीं करते। आप अभी स्टूडेंट हैं तो फैमिली
- 5:56:20की इनकम ₹00 महीना और दो बच्चे हैं। दोनों
- 5:56:23को फैमिली ₹1 ₹100 देती है और ₹00 घर खर्च
- 5:56:27में लग जाते हैं। अब इस महीने ना अचानक से
- 5:56:30आपकी कॉलेज इंस्टॉलमेंट है या कुछ ऐसा
- 5:56:32खर्चा आ गया कि आपको ₹00 चाहिए। अब ऐसे
- 5:56:35में कैसे होगा? आपकी फैमिली की इनकम तो
- 5:56:37एकदम से बढ़ेगी नहीं और सेविंग्स भी नहीं
- 5:56:39है। तो आपकी फैमिली क्या करेगी? दूसरे
- 5:56:41बच्चे को बोलेगी कि इस महीने तू पैसे मत
- 5:56:43ले। तेरे भाई को जरूरत है उसे हम ₹00 दे
- 5:56:46रहे हैं। अब क्या किया आपकी फैमिली ने? एक
- 5:56:49जगह से पैसे निकाल के उसी दूसरी जगह लगा
- 5:56:51दिए जो उनको लगा कि इस महीने ज्यादा जरूरी
- 5:56:53है। तो पैसे को रिअरेंज किया, रिअलोकेट
- 5:56:57किया। अब जानते हैं आईपीओस में क्या होता
- 5:56:59है। तो जैसा आजकल हम न्यूज़ में देख रहे
- 5:57:01हैं ना कि बहुत सारे बड़े-बड़े आईपीओस आने
- 5:57:03वाले हैं। पॉलिसी बा हो, nकाa हो, एनएससी
- 5:57:06हो, LIC हो बहुत सारे बड़े-बड़े आईपीओस आ
- 5:57:10रहे हैं। तो जैसा मैं कह रहा था कि बहुत
- 5:57:11सारे आईपीओस आने वाले हैं। Paytm का ही
- 5:57:13एग्जांपल ले लेते हैं। ये कहा जा रहा है
- 5:57:15कि 11,120,000 करोड़ का आईपीओ आ रहा है वो
- 5:57:18और अचानक से अब Paytm में यानी मार्केट के
- 5:57:2211-12,000 करोड़ लगेंगे। अस्यूमिंग कि वो
- 5:57:24पूरा सब्सक्राइब होगा जो हम सबको पता है
- 5:57:26कि मोस्ट प्रोबेबबली होगा ही। यानी
- 5:57:29मार्केट के ये पैसे Paytm में लगने वाले
- 5:57:31हैं। अब अचानक से ये 11-12 करोड़ आएंगे
- 5:57:35कहां से? आपकी और मेरी इनकम तो इस
- 5:57:37पेंडेमिक के समय में बढ़ी नहीं। हम तो
- 5:57:39वैसे के वैसे ही हैं। लेकिन Paytm बोल रहा
- 5:57:41है मार्केट से कि ₹11,000 करोड़ मुझे दे
- 5:57:44दो। अब मार्केट किससे बनता है? हमसे बनता
- 5:57:47है ना? हम डायरेक्टली स्टॉक्स में पैसा
- 5:57:49लगाते हैं। इनडायरेक्टली भी हम बैंक्स को
- 5:57:51पैसा देते हैं। जिसमें से कुछ डायरेक्टली
- 5:57:53इनडायरेक्टली वो लोग म्यूचल फंड्स में
- 5:57:56लगाते हैं या स्टॉक्स में डायरेक्टली
- 5:57:57लगाते हैं। हम म्यूच्यूल फंड को पैसा देते
- 5:57:59हैं। तो वो हमारा ही पैसा म्यूच्यूल फंड
- 5:58:01लगा रहे हैं। हम यूलिप प्लान खरीदते हैं।
- 5:58:04हमारा ही पैसा इंश्योरेंस कंपनीज़ लगा रही
- 5:58:06हैं। यानी इनडायरेक्टली या डायरेक्टली हम
- 5:58:09लोगों का पैसा मार्केट में लगता है। अब
- 5:58:12हमारी इनकम तो बढ़ ही नहीं रही इस
- 5:58:14पेंडेमिक के समय में। लेकिन Paytm बोलता
- 5:58:16है मुझे ₹11,000 करोड़ दे दो। तो हम कहां
- 5:58:19से देंगे? हम भी हमारी फैमिली की तरह
- 5:58:21मजबूर होके एक जगह से पैसा निकालेंगे और
- 5:58:24दूसरी जगह डाल देंगे। और ये तो सिर्फ
- 5:58:26Paytm की बात हुई ना? मैंने तो आपको बहुत
- 5:58:28सारे नाम बताए। एनएससी, पॉलिसी बा, LIC,
- 5:58:31NYका और कितने सारे ऐसे जिनका नाम मुझे
- 5:58:33नहीं पता। ये सब मिला के हो सकता है 1 लाख
- 5:58:36करोड़ के आईपीओस आ जाए। अब ये 1 लाख करोड़
- 5:58:40हमारी इनकम तो बढ़ नहीं रही। तो हम क्या
- 5:58:42करेंगे जो आपकी फैमिली ने किया। एक शेयर
- 5:58:44से पैसा निकालेंगे दूसरे शेयर में लगा
- 5:58:46देंगे। वैसे भी हमको पता है कि आईपीओस की
- 5:58:48पीआर कर कर के कितनी हाइप बनाई जाती है।
- 5:58:51तो जो पैसे हम शायद Reliance में लगाते
- 5:58:54अगले महीने की सैलरी का कुछ हिस्सा HDFC
- 5:58:56में लगाते जो कि इंडेक्स स्टॉक्स हैं
- 5:58:58जिससे ससेक्स और निफ्टी की वैल्यू बढ़ती
- 5:59:01जिससे ओवरऑल ये होता कि मार्केट बढ़ रहा
- 5:59:03है। वहां हम पैसा ना लगा के हम इन नई
- 5:59:05कंपनीज़ में लगाएंगे। ये हमको ज्यादा
- 5:59:07एक्साइटिंग लगेंगे। इसकी ज्यादा हाइप
- 5:59:09बनेगी और एकिस्टिंग स्टॉक से पैसे
- 5:59:12निकलेंगे भी और इनमें लगेंगे भी। जब ओवरऑल
- 5:59:15देश के ज्यादातर इन्वेस्टर्स एक
- 5:59:17सिंक्रोनाइज्ड टाइम पर एक समय में यह
- 5:59:19एक्शन कर रहे हैं कि एकिस्टिंग शेयर से
- 5:59:22पैसे निकाल के इन बड़े-बड़े नए आईपीओस में
- 5:59:24पैसा लगाए जा रहे हैं तो मार्केट से
- 5:59:27लिक्विडिटी हट जाती है। ये बहुत सिंपल चीज
- 5:59:29है और ये सिर्फ स्टॉक मार्केट में नहीं
- 5:59:31इकोनमी के हर एस्पेक्ट पे ये वैलिड है।
- 5:59:34इसको सिर्फ ऐसे सोच लीजिए ना मार्केट में
- 5:59:36आज जैसे अगर हम टोटल कंपनीज़ का काउंट करें
- 5:59:38कि जितनी भी बीएसई में लिस्टेड कंपनीज़ हैं
- 5:59:41उनका टोटल मार्केट कैप कितना है? यानी
- 5:59:43उनमें जो पैसा लगा हुआ है उसकी टोटल
- 5:59:45वैल्यू कितनी है? तो वह कुछ 200 लाख करोड़
- 5:59:48के आसपास है। अगर मैं सारी कंपनीज के
- 5:59:51वैल्यू्यूएशन को ऐड कर दूं मार्केट प्राइस
- 5:59:53को तो 200 लाख करोड़ के आसपास है। यानी
- 5:59:56मार्केट में अभी 200 लाख करोड़ लगे हुए
- 5:59:59हैं। और यह लगे हुए हैं कुछ 4000 कंपनीज़
- 6:00:02में जो ट्रेड होती है। अब मान लीजिए इस
- 6:00:04साल 100 कंपनीज़ के आईपीओ आते हैं। तो अब
- 6:00:07वही ₹200 लाख करोड़ों को 4100 कंपनीज़ में
- 6:00:11पटना है। यानी हर कंपनी से थोड़ा-थोड़ा
- 6:00:15पैसा निकलेगा और उन 100 नई कंपनियों में
- 6:00:17लगेगा। यानी हर कंपनी का शेयर प्राइस
- 6:00:21थोड़ा-थोड़ा गिरेगा यानी मार्केट थोड़ा सा
- 6:00:24करेक्ट हो जाएगा। हां, अब दिस इज
- 6:00:26अस्यूमिंग कि जैसे ₹1 लाख करोड़ के आईपीओस
- 6:00:29मान लीजिए इस साल आ रहे हैं। तो दिस इज
- 6:00:31अस्यूमिंग कि ₹1 लाख करोड़ का न्यू
- 6:00:34इन्वेस्टमेंट इस साल मार्केट में नहीं हो
- 6:00:36पाएगा। लेकिन जैसा हम देख रहे हैं कि
- 6:00:38पिछले एक डेढ़ साल के परफॉर्मेंस के बाद
- 6:00:40बहुत सारे नए लोग इस मार्केट में आ रहे
- 6:00:42हैं और बहुत सारा न्यू मनी जो शायद कभी
- 6:00:45डायरेक्टली इनडायरेक्टली स्टॉक मार्केट
- 6:00:46में लगता ही नहीं वो भी लग रहा है। तो
- 6:00:48इनफ्लोस भी बढ़े हैं। लेकिन अगर मैं यह भी
- 6:00:52मान लूं कि जो नए आईपीओस आ रहे हैं वो ₹1
- 6:00:54लाख करोड़ के हैं और नया पैसा भी जो आ रहा
- 6:00:57है, नए इन्वेस्टर्स भी जो आ रहे हैं वह भी
- 6:00:59₹1 लाख करोड़ ले आएंगे तो भी आईपीओस
- 6:01:02मार्केट में एक इंपैक्ट तो डालते हैं। यह
- 6:01:05जो नए इन्वेस्टर्स होते हैं ना यह जो
- 6:01:07पिछला ट्रैक रिकॉर्ड देख के आ रहे हैं, यह
- 6:01:09इस उम्मीद में आ रहे हैं कि पिछले एक साल
- 6:01:11वाला परफॉर्मेंस अगले एक साल भी रिपीट
- 6:01:13होगा। यानी ये बहुत ही वीक हैंड्स है। ये
- 6:01:16स्ट्रांग हैंड्स नहीं है कि मार्केट दो
- 6:01:18साल गिरा भी रहे तो मैं तो लॉन्ग टर्म
- 6:01:20इन्वेस्टर हूं। मैं तो अच्छी कंपनीज़ में
- 6:01:22इन्वेस्ट करने आया हूं। उसमें से ज्यादातर
- 6:01:24पैसा वीक हैंड्स है। यानी अगर दो चार
- 6:01:26महीने मार्केट ने जैसा पिछले साल
- 6:01:28परफॉर्मेंस दिखाया वैसा ना दिखाए तो यह
- 6:01:31पैसा निकल भी सकता है। तो सोचिए ये जो ₹1
- 6:01:34लाख करोड़ हैं इसमें से शायद 50600 करोड़
- 6:01:37तो आते ही मार्केट में चाहे नया आईपीओ आ
- 6:01:40रहा है या नहीं आ रहा और वो 50600 करोड़
- 6:01:44एग्जिस्टिंग स्टॉक्स में लगते जिसके कारण
- 6:01:46एकिस्टिंग स्टॉक्स के बढ़ने का मोमेंटम
- 6:01:49चलता रहता और मार्केट बढ़ता रहता। हां,
- 6:01:51कुछ पैसा जरूर इसलिए आ रहा है क्योंकि
- 6:01:53Paytm लिस्ट हो रहा है। उनको सिर्फ Paytm
- 6:01:55खरीदना है। Zomato लिस्ट हो रहा है। उनको
- 6:01:56सिर्फ Zomato खरीदना है। तो कुछ एडिशनल
- 6:01:59पैसा आईपीओ के कारण आता है। लेकिन कुछ ऐसा
- 6:02:02पैसा है जो मार्केट में आता ही और वो कारण
- 6:02:05बनता एकिस्टिंग स्टॉक्स के बढ़ते रहने का।
- 6:02:08लेकिन अब क्योंकि ज्यादा स्टॉक्स आ गए हैं
- 6:02:10तो वो पैसा जो शायद HDFC बैंक में लगता वो
- 6:02:13अब Paytm में लगेगा। और अगर उनको उस तरह
- 6:02:16का मोमेंटम ना दिखे, उस तरह की प्राइस
- 6:02:18ग्रोथ ना दिखे तो क्योंकि ये नए
- 6:02:20इन्वेस्टर्स हैं। इनको तेज ग्रोथ चाहिए।
- 6:02:23ये वो पैसा मार्केट से फिर से निकाल भी
- 6:02:25लेंगे। तो आज ऐसा जरूर लगता है कि मार्केट
- 6:02:27में बहुत लिक्विडिटी है। कितने भी आईपीओ आ
- 6:02:30जाए, नया पैसा इतना आ रहा है, इतने नए
- 6:02:32इन्वेस्टर्स आ रहे हैं कि सब जायज है।
- 6:02:35लेकिन हर बुल मार्केट में ना यही सोचा
- 6:02:37जाता है और इस कारण खूब सारे आईपीओस आ
- 6:02:40जाते हैं और गड़बड़ हो जाती है। हम खेती
- 6:02:42किसानी की बात कर लेते हैं। किसी भी फसल
- 6:02:45का अगर दाम खूब किसी साल बढ़के मिल जाए तो
- 6:02:48अगले साल किसान यही सोचते हैं कि वह फसल
- 6:02:50उगाते हैं और अगले साल खूब ज्यादा वही फसल
- 6:02:53उगाई जाती है जिसके कारण एकदम से आउटपुट
- 6:02:56ज्यादा हो जाता है और आपको आपकी फसल का
- 6:02:59सही दाम नहीं मिलता। सेम वही रिपीट हो रहा
- 6:03:02है। स्टॉक मार्केट में भी हर बुल रन में
- 6:03:04होता है कि लोगों को दिख रहा है आईपीओ में
- 6:03:06खूब पैसा कमा रही है कंपनीज़। हम भी आईपीओ
- 6:03:08ले आते हैं। हम भी आईपीओ ले आते हैं और
- 6:03:10एकदम से सब खत्म। लिक्विडिटी खत्म और एकदम
- 6:03:14से जिस उम्मीद से आईपीओ को लाया गया था वह
- 6:03:16होना बंद हो जाता है। मार्केट करेक्ट हो
- 6:03:19जाता है। तो इससे सीख क्या है? इस पे आप
- 6:03:21क्या एक्शन ले सकते हैं या कैसे केयरफुल
- 6:03:23रह सकते हैं? मेरे लिए तो ये एक सिग्नल
- 6:03:26होता है कि जितने ज्यादा आईपीओ आ रहे हैं
- 6:03:28और जितने बड़े-बड़े आईपीओ आ रहे हैं क्रैश
- 6:03:30होना हो कोई नहीं जानता। लेकिन करेक्शन
- 6:03:33थोड़ा ओवरवैल्यू से फेयर वैल्यू तक
- 6:03:35मार्केट आने की चांसेस बढ़ती जा रही है।
- 6:03:38तो मैं उतना ज्यादा केयरफुल रहूंगा। मैं
- 6:03:40मोमेंटम स्टॉक्स में या सिर्फ इस भरोसे कि
- 6:03:43पिछले कुछ महीनों में ये शेयर ने अच्छा
- 6:03:45किया है तो आगे भी अच्छा करेगा। ऐसे
- 6:03:47शेयर्स में पैसे नहीं लगाऊंगा। मैं उन्हीं
- 6:03:49कंपनियों में पैसे अपने लगा के रखूंगा कि
- 6:03:51जो 50% करेक्ट हो जाए जिसका शेयर 50% गिर
- 6:03:54जाए तो भी कोई दिक्कत नहीं है। मैं नर्वस
- 6:03:56नहीं होऊंगा। मेरे को उस कंपनी पे पूरा
- 6:03:58भरोसा है। मैं अपने पैसे को ऐसी सेफ
- 6:04:01सुरक्षित जगहों पे ही रखूंगा। यह सीख मुझे
- 6:04:04इन बढ़ते आईपीओस से मिलेगी और इससे मुझे
- 6:04:07यह क्लू मिलेगा कि मुझे और सेफ्टी की तरफ
- 6:04:09जाते जाना है। अगर आपके कोई भी डाउट्स हो
- 6:04:12जो मैंने इस वीडियो में डिस्कस किया उसके
- 6:04:13रिगार्डिंग आपको कोई भी क्लेरिफिकेशन
- 6:04:15चाहिए हो तो आप बिंदास जितने चाहें उतने
- 6:04:18कमेंट्स करिए और मेरी टीम यह एनश्योर
- 6:04:20करेगी कि आपके डाउट्स इस वीडियो में जितने
- 6:04:22भी आपने कमेंट्स किए हैं उसमें सारे
- 6:04:24डाउट्स आपके क्लियर हो जाएं। हैं।
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