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Fall- 2026 | Gosple | Class #15 & 16 — Transcript

by Mumbai Bible College & Seminary · 9,523 words · 1,208 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:20समय करेंगे
  2. 0:24प्रार्थना करते हैं।
  3. 0:27प्रभु यीशु मसीह हम आपका धन्यवाद करते
  4. 0:28हैं। पिता आज के इस दिन के लिए इस समय के
  5. 0:31लिए प्रभु
  6. 0:33धन्यवाद करते हैं परमेश्वर पिता इस स्थान
  7. 0:36के लिए प्रभु यहां पर लेकर आए। प्रभु हम
  8. 0:39प्रार्थना करते हैं आज के क्लास को प्रभु
  9. 0:41हम आपके हाथों में समर्पित करते हैं।
  10. 0:44परमेश्वर पिता
  11. 0:46आज के क्लास के द्वारा परमेश्वर पिता आप
  12. 0:48हमें आशीषित करना। हमें बुद्धिमता देना
  13. 0:51परमेश्वर पिता समझ देना प्रभु हम अच्छे से
  14. 0:54परमेश्वर पिता आपके वचनों को सीख सके
  15. 0:57और परमेश्वर पिता इस क्लास के द्वारा
  16. 1:01प्रभु आप हमसे बात करना प्रभु हम धन्यवाद
  17. 1:03करते हैं भाई विशाल को भी प्रभु हम आपके
  18. 1:06हाथों में समर्पित करते हैं प्रभु उन्हें
  19. 1:09सिखाने के लिए परमेश्वर पिता आप अपनी
  20. 1:11अगुवाई देना और परमेश्वर पिता आपके पवित्र
  21. 1:15आत्मा के द्वारा परमेश्वर पिता आप उन्हें
  22. 1:17लीड करना प्रभु हम धन्यवाद करते हैं आगे
  23. 1:19के समय को पिता हम आपके हाथों में समर्पित
  24. 1:21करते हैं। प्रार्थना प्रभु यीशु मसीह के
  25. 1:23नाम से मांगते हैं। आमीन।
  26. 1:26ओके। ठीक है? सभी को जय मसीह की। सो आज
  27. 1:30हमारा पहला एक क्लास रहेगा। उसके बाद में
  28. 1:32एक छोटा सा मतलब टेस्ट जैसा रहेगा। तो आप
  29. 1:34लोग उसे भी कर सकते हैं। तो पिछले क्लास
  30. 1:36में हमने क्या सीखा था? कुछ रिव्यू पिछले
  31. 1:38क्लासेस से।
  32. 1:44पिछली क्लास के रिव्यूज किस विषय में थे?
  33. 1:50यस कॉलिंग के बारे में था। कॉलिंग क्या है
  34. 1:53हमारी? क्या परमेश्वर जब हमको बुलाता है
  35. 1:56तो अपनी बुलाहट में चलने के बाद हमसे वापस
  36. 1:59लेता है क्या कुछ? नहीं। कहां पे लिखा था
  37. 2:01ये? रोमंस 11 वर्स 29 में इरिवोकेबल। कि
  38. 2:05परमेश्वर ने हमको जो दिया है अपनी बुलाहट
  39. 2:07में वो क्या है? विश्वास योग्य है। जब
  40. 2:09परमेश्वर हमें कुछ देता है तो हम अविश्वास
  41. 2:12हो सकते हैं। प्रभु ने मुझे गिफ्ट दिया है
  42. 2:14कि मैं जाके मिनिस्ट्री करूं। इवेंजलिज्म
  43. 2:17का काम करूं। मैं प्रीचिंग करूं, टीचिंग
  44. 2:19करूं, लोगों के साथ फेलोशिप करूं। लेकिन
  45. 2:20क्या हो सकता है कि मैं उस बुलाहट में खुद
  46. 2:23को रोक सकता हूं। लेकिन परमेश्वर क्या
  47. 2:25करेगा? कभी भी अपने दिए हुए बुलाहट को
  48. 2:28पीछे नहीं करेगा। ठीक है? तो ये क्या है?
  49. 2:31और हमारी बुलाहट कैसी है? होली कॉलिंग है।
  50. 2:33परमेश्वर ने क्या बुलाया? हमको पवित्र
  51. 2:35जीवन जीने के लिए बुलाया था। दूसरा क्या
  52. 2:38था कि क्या एक विश्वासी को वाकई में शराब
  53. 2:40पीना चाहिए बाइन का उपयोग करना चाहिए
  54. 2:42बाइबल में क्या लिखा है कि जब पहला
  55. 2:44मरेकल्स देखा तो पहला चमत्कार यीशु मसीह
  56. 2:46ने क्यों किया क्योंकि पहला चमत्कार करने
  57. 2:48के पहले यीशु के साथ कौन सी घटना घटी थी
  58. 2:51यीशु मसीह की परीक्षा हुई तो परीक्षा में
  59. 2:53क्या हुआ था शैतान ने बोला था तुमको
  60. 2:55चमत्कार करने के लिए तो उन्होंने क्या
  61. 2:56बोला वहां पर उसको मना कर दिया लेकिन अगले
  62. 2:59पल में क्या हुआ यीशु मसीह जब जाते हैं और
  63. 3:01जॉन चैप्टर 2 में क्या करते हैं पहला
  64. 3:02चमत्कार करते हैं कई बार क्या होता है कि
  65. 3:05हमको विश्वासी होने के नाते से शैतान को
  66. 3:07साबित करने की जरूरत नहीं होती है कि हम
  67. 3:09कौन है। हमारी आइडेंटिटी क्या है? हमको
  68. 3:12मालूम है। शैतान क्या है कि उसकी
  69. 3:14आइडेंटिटी नहीं मालूम है। उसको क्या है?
  70. 3:16उसका फ्यूचर नहीं मालूम है। लेकिन क्या
  71. 3:17करता है? कई बार वो हमारी आइडेंटिटी के
  72. 3:19ऊपर सवाल उठाता है। उसने क्या बोला? कि
  73. 3:21यदि तू परमेश्वर का पुत्र है तो क्या
  74. 3:24बोला? जब यीशु मसीह का बपतिस्मा हो रहा
  75. 3:26था, तो क्या परमेश्वर ने आवाज दिया था?
  76. 3:30कि तू मेरा प्रिय पुत्र है। परमेश्वर ने
  77. 3:32पब्लिक पब्लिकली घोषणा कर दिया कि यह मेरा
  78. 3:35प्रिय पुत्र है। लेकिन शैतान क्या कर रहा
  79. 3:37है? वापस आके वो सवाल कर रहा है कि यदि तू
  80. 3:40परमेश्वर का पुत्र है। यानी यदि का मतलब
  81. 3:44क्या हुआ कि वहां पर संदेह है कि तू है या
  82. 3:46फिर नहीं है। लेकिन परमेश्वर ने क्या
  83. 3:48किया? बोला है। इसी प्रकार से परमेश्वर ने
  84. 3:50सेम हमको भी क्या है? उसकी अपनी संतान
  85. 3:53ठहराया है। लेकिन कई बार क्या होता है?
  86. 3:55शैतान हमारी आइडेंटिटी के ऊपर भी सवाल
  87. 3:57करता है कि यदि तुम सच में परमेश्वर के
  88. 4:00पुत्र हो तो तुम ऐसा करो। सच में अगर
  89. 4:02तुम्हें परमेश्वर ने बुलाया है तो तुम ऐसा
  90. 4:04करो। लेकिन हां क्या यीशु मसीह ने खुद को
  91. 4:06साबित करने के लिए शैतान के द्वारा कहे गए
  92. 4:08कार्यों को किया? नहीं। शैतान ने क्या
  93. 4:10बोला कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र है तो
  94. 4:12कह दे पत्थर रोटियां बन जाए। तो यीशु मसीह
  95. 4:14ने क्या बोला? वचन के द्वारा उसका जवाब
  96. 4:17दिया। कई बार हमारी जिंदगी में भी ऐसे
  97. 4:19टेंप्टेशन आते हैं, हमारी परीक्षाएं होती
  98. 4:21हैं। तो हमने सीखा था ना कि हाउ टू हैंडल
  99. 4:23टेंप्टेशन ना हम [गला साफ़ करने की आवाज़]
  100. 4:25जो परीक्षाएं होती हैं उन्हें कैसे हम
  101. 4:27हैंडल कर सकते हैं। कैसे उनसे बच सकते
  102. 4:29हैं? तो क्या है कि परमेश्वर का वचन ही
  103. 4:32हमारी सबसे बड़ी मददगार हो सकता है।
  104. 4:34पवित्र आत्मा हमारा मददगार हो सकता है। जब
  105. 4:36हमारी जिंदगी में हमारी आइडेंटिटी के ऊपर
  106. 4:38सवाल होते हैं। जब हमारे ऊपर लोग सवाल
  107. 4:40करते हैं तो कौन हमारा सहायक है? पवित्र
  108. 4:43आत्मा हमारा सहायक है। परमेश्वर का वचन
  109. 4:45हमारा सहायक है। सबसे बड़ा हथियार क्या है
  110. 4:47हमारी लड़ाई का परमेश्वर का वचन है।
  111. 4:50इफिसियों के छह अध्याय में क्या लिखा है
  112. 4:51कि हमारे लड़ाई के जो हथियार है वो क्या
  113. 4:54शारीरिक नहीं हो सकते हैं। हमें आत्मिक
  114. 4:56हथियारों की जरूरत है। और आत्मिक हथियार
  115. 4:58क्या हो सकते हैं? परमेश्वर का वचन हमारा
  116. 5:00आत्मिक हथियार हो सकता है। जिंदगी में ऐसे
  117. 5:02बहुत सारे मोमेंट आएंगे कि जहां पर शैतान
  118. 5:04हमारी जिंदगी में हमारे ऊपर टेंप्टेशन
  119. 5:06लेके आएगा। जहां पर शैतान हमारी आइडेंटिटी
  120. 5:09के ऊपर सवाल उठाएगा। लेकिन मुझे खुद को
  121. 5:11शैतान के सामने जाकर खुद को साबित करने की
  122. 5:14जरूरत नहीं है। यीशु मसीह ने क्या किया
  123. 5:16वहां पर साबित नहीं किया। लेकिन अगले पल
  124. 5:17क्या हुआ यीशु मसीह जाते हैं और क्या करते
  125. 5:20हैं? एक चमत्कार को करके दिखाते हैं। कई
  126. 5:23बार लोग सवाल यह भी करते कि अगर सच में
  127. 5:25तुम्हारा परमेश्वर सच्चा है।
  128. 5:28ज्ञानी है। दुनिया को बनाने वाला है तो
  129. 5:31चमत्कार दिखाओ। जब पानी को दास में बदला
  130. 5:36तो चमत्कार को किसने देखा?
  131. 5:40किसने देखा था?
  132. 5:43सेवकों ने लिखा। वहां पर क्या लिखा कि पर
  133. 5:46सेवकों को जो सर्वेंट थे उनको मालूम था कि
  134. 5:49पानी से दास कैसे बना। तो कहने का मतलब
  135. 5:53क्या है कि जो परमेश्वर के नजदीक अपनी
  136. 5:55जिंदगी जीता है। उसे पता होता है कि
  137. 5:58परमेश्वर कैसे चमत्कार करता है। जब हम
  138. 6:00परमेश्वर के ज्यादा नजदीक जिंदगी जिएंगे
  139. 6:03तो परमेश्वर ने मेरी जिंदगी में कौन सी
  140. 6:05ब्लेसिंग दिया। वो हमको मालूम चलेगा।
  141. 6:07संसार को क्या है ये चीजें कभी मालूम नहीं
  142. 6:10चलेंगी। जो ज्यादा परमेश्वर के करीब जिएगा
  143. 6:13जो परमेश्वर के साथ निरंतर जुड़ के रहेगा
  144. 6:15उसे पता होगा कि परमेश्वर ने उसकी जिंदगी
  145. 6:18में क्या किया है? संसार इन बातों को नहीं
  146. 6:20समझ सकता है। आज अगर एक विश्वासी से पूछा
  147. 6:23जाए कि तुम्हारे लिए सबसे बड़ी ब्लेसिंग
  148. 6:25क्या है? तो क्या होगी? संसार के लिए
  149. 6:27ब्लेसिंग क्या होगी? अगर आप संसार के पास
  150. 6:29जाओगे उससे पूछोगे तुम्हारे लिए सबसे बड़ी
  151. 6:31आशीष क्या है? तो क्या बोलेगा?
  152. 6:34पैसा पैसा बोलेगा और
  153. 6:37नौकरी बड़ी जॉब बोलेगा, बड़ी गाड़ी
  154. 6:39बोलेगा, बड़ा घर बोलेगा। उसके लिए क्या
  155. 6:42है? भौतिक चीज है। उसके लिए ब्लेसिंग है।
  156. 6:44लेकिन आज एक विश्वासी के लिए सबसे बड़ी
  157. 6:46ब्लेसिंग यह है कि उसे परमेश्वर के पुत्र
  158. 6:48यानी हमें संतान बनने का एक मौका मिला।
  159. 6:51इससे बड़ी ब्लेसिंग इस दुनिया में नहीं हो
  160. 6:53सकती कि हमारा नाम जीवन की पुस्तक में
  161. 6:55लिखा है। जिसके पास घर है, गाड़ियां है,
  162. 6:57बंगले हैं, नौकर चाकर है, सब कुछ है।
  163. 7:00लेकिन उसके पास क्या है? जीवन की पुस्तक
  164. 7:02में नाम नहीं है। किसी लेखक ने कहा कि
  165. 7:03दुनिया की तुम हर चीज पा लो। लेकिन अगर
  166. 7:06तुम्हारा नाम स्वर्ग में नहीं है तो
  167. 7:07तुम्हारे लिए क्या है सब कुछ व्यर्थ है।
  168. 7:09संसार की सोच क्या है कि अगर हमारे पास
  169. 7:11भौतिक वस्तुएं हैं तो सबसे बड़ी मेरे लिए
  170. 7:13वो आशीष है। लेकिन विश्वासी क्या कहता है
  171. 7:15कि भौतिक वस्तुएं क्या हैं? सिर्फ क्षण भर
  172. 7:17की है। कुछ पल भर की हैं। लेकिन हमारा जो
  173. 7:20नाम लिखा है जीवन की पुस्तक में वो क्या
  174. 7:22है? मेरे लिए सबसे बड़ी ब्लेसिंग है।
  175. 7:24परमेश्वर ने हमें संतान होने का अधिकार
  176. 7:26दिया है। कि जो उसे विश्वास करते हैं वो
  177. 7:28क्या है? संतान है। प्रभु यीशु मसीह ने हर
  178. 7:30किसी के लिए अपना जान दिया। लेकिन संतान
  179. 7:33कौन ठहरा? जिसने उसके ऊपर विश्वास किया
  180. 7:36ओके जॉन चैप्टर टू में क्या था यीशु मसीह
  181. 7:39ने क्या किया था पानी को दास में बदला तो
  182. 7:43इंग्लिश वर्ड क्या है वायन तो वायन क्या
  183. 7:45विश्वासी को वायन पीना चाहिए
  184. 7:48नहीं क्यों नहीं पीना चाहिए
  185. 7:52क्या लिखा है कि शराब से तुम मतवाले मत
  186. 7:55बनो हमने क्या देखा था प्रोव्स की किताब
  187. 7:57में कि शराब से कोई भी चीज अच्छी नहीं हो
  188. 8:02सकती है लेकिन क्या होता है कि आज की
  189. 8:03मसीहत में भी कुछ लोग क्या करते हैं? शराब
  190. 8:05को लीगल मानते हैं। कहते हैं कि नहीं जब
  191. 8:07यीशु मसीह ने चमत्कार किया। अगर वो चाहते
  192. 8:10नहीं थे कि हम अल्कोहल का सेवन करें तो
  193. 8:13उन्होंने चमत्कार क्यों किया? लेकिन हमने
  194. 8:15क्या देखा कि थ्री टाइप्स ऑफ बाइन। तीन
  195. 8:18प्रकार का शराब बाइबल में जिक्र है। पहला
  196. 8:21क्या था?
  197. 8:24जूस। मतलब शरबत की तरह इस्तेमाल करते थे।
  198. 8:26क्या क्वांटिटी था? 20 लीटर में 1 लीटर
  199. 8:29दास। ताकि क्या हो सकता था कि पानी को साफ
  200. 8:32किया जा सके। लोग जाते थे, ट्रैवलिंग करते
  201. 8:34थे, ट्रैवल कर रहे हैं तो रास्ते में कुआं
  202. 8:36मिला। तो उन्होंने क्या किया? पानी
  203. 8:38निकाला। पानी के पास कोई फिल्टर नहीं है।
  204. 8:40उनके पास कोई आग ही नहीं है। आग नहीं है।
  205. 8:42तो कैसे करेंगे पानी को साफ? तो क्या किया
  206. 8:44उन्होंने? 20 लीटर एक ड्रम लिया। 1 लीटर
  207. 8:46दाखस डाला। पानी साफ हुआ। पी लिया। जूस की
  208. 8:48तरह इस्तेमाल किया। शादी विवाहों में
  209. 8:50अक्सर क्या होता था? शरबत की तरह इस्तेमाल
  210. 8:52किया जाता था। आज भी होता है ना हमारे
  211. 8:54यहां पे शरबत की तरह लोग इस्तेमाल करते
  212. 8:56हैं। मतलब अह रुआजा डालते हैं, बर्फ डालते
  213. 8:59हैं, नींबू डालते हैं। ये सब क्या है?
  214. 9:00शरबत की तरह इस्तेमाल किया जाना। तो 20
  215. 9:02लीटर में 1 लीटर दाखल दाखल से तो क्या है?
  216. 9:04शराब नहीं है। दूसरा क्या था कि जहां पर
  217. 9:06पौलुस ने लिखा कि तू अपने पेट की समस्या
  218. 9:09के कारण कभी-कभी पी लिया कर। तो लोगों ने
  219. 9:11क्या बोला कि हमें तो लीगल मिल गया। पर
  220. 9:13लीगल क्या है कि तीन 1/3 यानी तीन लीटर
  221. 9:16पानी में 1 लीटर वाइन डाल सकते हो। तो वो
  222. 9:19क्या है कि तुम्हारी दवा के रूप में काम
  223. 9:21करेगा। लेकिन उसमें भी क्या था कि दवा के
  224. 9:24रूप में इस्तेमाल क्यों करेगा कि अगर कोई
  225. 9:26व्यक्ति बहुत सीरियस है तो उसको पेन ना
  226. 9:28हो। उसको तकलीफ ना हो। उसकी कोशिकाएं
  227. 9:30बराबर काम करें। लेकिन क्या है कि जब हम
  228. 9:32आज हम भी कोई पीते हैं ना सिरप होता है ना
  229. 9:34सिरप मतलब कोई टॉनिक मिलता है ना डॉक्टर
  230. 9:36देते हैं फ्रूट्स के तो उसमें क्या होता
  231. 9:38है किसी बच्चे को आप पिला दो या कोई
  232. 9:39एडल्ट्स को आप पिलाओ एक ढक्कन ना तो क्या
  233. 9:42होता है उससे नींद ज्यादा आती है तो नींद
  234. 9:44क्यों आती है क्योंकि उसमें क्या होता है
  235. 9:45कि फ्रूट्स का ज्यादा इस्तेमाल होता है तो
  236. 9:47वो भी क्या है एक शराब की तरह इस्तेमाल
  237. 9:49करने वाली चीज है लेकिन क्या है ये भी
  238. 9:50क्या है हमारे लिए लीगल नहीं है तीसरा
  239. 9:52क्या था प्रॉपर वाइन जो क्या थी पूर्ण रूप
  240. 9:55से शुद्ध थी तो हमने दो फोटोज दिखाई थी तो
  241. 9:57दो फोटोज में क्या था कि जो यीशु मसीह ने
  242. 10:00चमत्कार किया वो क्या था? बड़े-बड़े मटके
  243. 10:03थे, ड्रम थे। लेकिन जो शराब रखने का जो
  244. 10:06होता था ना बर्तन वो क्या था? किले, अलग
  245. 10:09प्रकार का बर्तन था। तो वहां पे जो यीशु
  246. 10:11मसीह ने बनाया था दास को पानी को दास में
  247. 10:15वो क्या था? शराब नहीं बल्कि एक जूस की
  248. 10:18तरह इस्तेमाल करने वाला था। तो ये चीजें
  249. 10:20क्या है कि हम विश्वासियों को याद रखना
  250. 10:22चाहिए। कल जब हमसे कोई सवाल करता है इस
  251. 10:24प्रकार की चीजों पर सवाल उठाता है तो हम
  252. 10:26कह सकते हैं कि यीशु मसीह या परमेश्वर ने
  253. 10:28कभी भी क्या किया? शराब को लेकर यह हमको
  254. 10:31अनुमति नहीं दी कि तुम इस्तेमाल कर सकते
  255. 10:33हो। पुराने नियम में पता है नूह ने शराब
  256. 10:34पिया या दूसरे लोगों ने जिन्होंने शराब
  257. 10:37पिया क्या हुआ? शराब के द्वारा कुछ भी
  258. 10:39अच्छा नहीं हुआ। ठीक? दूसरा क्या था? वहां
  259. 10:43पे मरियम के बारे में भी ना। मरियम ने
  260. 10:46क्या बोला कि जैसा वो तुमसे कहता है वैसा
  261. 10:48तुम करो। और उसने क्या बोला पहले कि हमको
  262. 10:50भी उद्धार की जरूरत है। मेरा उद्धार करता
  263. 10:52है। तो आज भी लोग क्या करते हैं कि
  264. 10:56यीशु मसीह को भी मानते हैं पर माता मरियम
  265. 10:58को भी मानते हैं। तो उनके लिए क्या है कि
  266. 11:00मां भी एक परमेश्वर के समान है। लेकिन मां
  267. 11:01क्या कहती है कि मैं तो उसकी दासी हूं। वो
  268. 11:04दासी शब्द का इस्तेमाल करती है। तो जब भी
  269. 11:07हम प्रार्थना करने के लिए जाते हैं तो
  270. 11:08किसके पास जाते हैं? परमेश्वर के पास जाएं
  271. 11:10या दासी के पास जाएं?
  272. 11:13परमेश्वर के पास जाना चाहिए। उसने खुद ये
  273. 11:16बात बोली कि मैं तो उसकी दासी हूं। ओके?
  274. 11:18सो आज हम मतलब हमने देखा था कि मत्ती के
  275. 11:21पांच अध्याय से सात अध्याय तक में कुछ
  276. 11:24चीजें हैं मतलब सरमन ऑन द माउंट यीशु मसीह
  277. 11:27ने पहाड़ पर प्रचार करना शुरू किया तो
  278. 11:30मत्ती पांच अध्याय से लेकर सात अध्याय तक
  279. 11:33क्या है ये एक मैसेज है मत्त फाइव टू सेवन
  280. 11:39चैप्टर तक मैथ्यू चैप्टर फाइव वर्स से तक
  281. 11:43ओके
  282. 11:45अगर आज के समय में यीशु मसीह से बोला बोला
  283. 11:48जाए कि यीशु मसीह आते हैं अपने चर्च में
  284. 11:50और उनसे कहते हैं कि यीशु मसीह आप प्रचार
  285. 11:53करो तो यीशु मसीह कौन सा प्रचार करना
  286. 11:55चाहेंगे? बहुत सारे स्कॉलर्स या लोगों का
  287. 11:57मानना है कि यीशु मसीह ने जो माउंटेन यानी
  288. 12:01पर्वत पे प्रचार किया था वही प्रचार वो
  289. 12:03करना चाहेंगे हमारे बीच में। उनके बेस्ट
  290. 12:06प्रचारकों में से कौन सा प्रचार बेहतर है?
  291. 12:09जो उन्होंने सबसे ज्यादा पर्वत पे प्रचार
  292. 12:12किया। मत्ती की किताब में इसका जिक्र किया
  293. 12:14गया है। तो एक्चुअली क्या होता था कि इसके
  294. 12:17जब आप पढ़ोगे मत्ती पांच से लेकर सात तक
  295. 12:20बहुत सारे अलग-अलग टॉपिक के विषय में
  296. 12:22उन्होंने कवर किया। तो वहां पे क्या होता
  297. 12:24है कि मत्ती किसको लिखी गई किताब?
  298. 12:28यहूदियों को तो यहूदी लोगों को क्या होता
  299. 12:30था कि अक्सर लंबे मैसेज सुनने के आदि हुआ
  300. 12:33करते थे। बड़े-बड़े उनको मैसेज सुनने के
  301. 12:35पसंद थे। तो यीशु मसीह क्या कर रहे हैं?
  302. 12:37एक लंबा मैसेज मती ने लिख के तैयार किया।
  303. 12:39लेकिन मरकुस की किताब में आप लंबे मैसेज
  304. 12:41नहीं देखोगे। यीशु मसीह ने जो प्रचार किया
  305. 12:43वो लंबे मैसेजेस नहीं थे। वहां पे क्या है
  306. 12:45कि यहां पर प्रचार के बारे में बात होता
  307. 12:48है लेकिन वहां पर उनके काम के बारे में
  308. 12:50बात होता है। [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  309. 12:51ठीक? तो जब यीशु मसीह यहां पे मति पांच
  310. 12:54अध्याय वचन नंबर पांच से लेकर सात तक यहां
  311. 12:57पे दो चीजें होती हैं कि आप दो चीजें कर
  312. 12:59सकते हो कि जब यीशु मसीह कभी भी प्रीचिंग
  313. 13:02करते हैं। प्रीचिंग और टीचिंग
  314. 13:15ओके। प्रचार करना और शिक्षा देना।
  315. 13:18प्रीचिंग में क्या है? मतलब प्रचार करना।
  316. 13:20और टीचिंग क्या है? मतलब शिक्षा देना। तो
  317. 13:23जब भी बाइबल में अगर यीशु मसीह प्रीचिंग
  318. 13:26कर रहे हैं तो वो किसको कर रहे हैं?
  319. 13:28ऑडियंस को यानी क्राउड्स को वो प्रचार कर
  320. 13:31रहे हैं। जहां पर भी उन्होंने मतलब सर्वंस
  321. 13:33दिए। उन्होंने मैसेजेस जहां पर भी दिए अगर
  322. 13:35वो प्रीचिंग कर रहे हैं तो किसके लिए
  323. 13:37होगा? वो ऑडियंस के लिए होगा। यानी जो
  324. 13:39क्राउड है क्राउड के लिए होगा। लेकिन जब
  325. 13:42वो टीचिंग कर रहे हैं तो टीचिंग किसके लिए
  326. 13:44होगा? डिसाइपल्स के लिए। ये चीज क्या है?
  327. 13:47हमें याद रखनी पड़ेगी। तो यहां पर जो है
  328. 13:50यीशु मसीह पांच अध्याय से लेकर सात अध्याय
  329. 13:52तक क्या कर रहे हैं? टीचिंग कर रहे हैं।
  330. 13:54तो इसके बारे में कुछ झूठ भी है। कलीसिया
  331. 13:57क्या सिखाती है? अक्सर अन्य प्रकार से कि
  332. 14:00जो मत्त के पांच अध्याय में उन्होंने धन्य
  333. 14:02वचन कहे हैं वो क्या है कि अगर मत्ती का
  334. 14:05पांच अध्याय से लेकर हम सात अध्याय तक जो
  335. 14:08वचन लिखे हैं वो किसके बारे में लिखे हैं
  336. 14:10सेल्वेशन के बारे में कि अगर आप इन वचनों
  337. 14:14को फॉलो करोगे तो आप उद्धार पाओगे तो ये
  338. 14:17चीज क्या है रॉन्ग रॉन्ग टीचिंग ये कहती
  339. 14:20है कि ये जो वचन है अगर आप इनको फॉलो
  340. 14:22करोगे मत्ती पांच से सात तक तो क्या कर
  341. 14:25सकते हो आप उद्धार पा सकते हो या कुछ लोग
  342. 14:28ये कहते कि यह जो प्रचार हो रहा है वो
  343. 14:30सिर्फ यहूदियों के लिए है केवल। वो भी चीज
  344. 14:32क्या है? पूरा बाइबल क्या है? आज हम उसको
  345. 14:35इस्तेमाल कर सकते हैं। तो यहां पे क्या
  346. 14:37होता है
  347. 14:40ओके मत्ति पांच एक से लेकर एक दो तीन
  348. 14:43पढ़ो। मैथ्यू चैप्टर फाइव वर्स वन टू
  349. 14:46थ्री।
  350. 14:49आपको चाहिए।
  351. 14:53वह इस भीड़ को देखकर पहाड़ पर चढ़ गया और
  352. 14:56जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए और
  353. 14:59वह अपना मुंह खोलकर उन्हें यह उपदेश देने
  354. 15:01लगा। धन्य है वे जो मन के दीन है क्योंकि
  355. 15:05स्वर्ग का राज उन्हीं का है।
  356. 15:06फिर से पढ़ना एक बार वन और टू। एक और दो।
  357. 15:11वह इस भीड़ को देखकर पहाड़ पर चढ़ गया और
  358. 15:14जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए और
  359. 15:18वह अपना मुंह खोलकर उन्हें यह उपदेश देने
  360. 15:20लगा। ओके तो यहां पे क्या है कि यीशु मसीह
  361. 15:23अभी अपनी उन्होंने मिनिस्ट्री स्टार्ट
  362. 15:24किया मैथ्यु फोर में तो यहां पे क्या हुआ
  363. 15:26कि एक बड़ी भीड़ यीशु मसीह के पीछे चल रही
  364. 15:30थी वहां पर। तो यहां पे दोनों वर्ड लिखे
  365. 15:32हैं। क्या लिखा है कि एक बड़ी भीड़ को
  366. 15:33देखकर पहाड़ पे वो चढ़ गए और जब बैठ गए तो
  367. 15:36उसके चेले उसके पास आए। तो ये पहाड़ क्या
  368. 15:39था? छोटा सा स्थान है यहां पे तो यीशु
  369. 15:41मसीह क्या किया यहां पे बैठे तो उनके जो
  370. 15:43डिसाइपल्स हैं उनके चारों तरफ बैठकर यीशु
  371. 15:45मसीह से क्या कर रहे हैं शिक्षा ले रहे
  372. 15:48हैं लेकिन जो क्राउड है ऑडियंस है वो भी
  373. 15:50क्या कर रहा है वहां पे सुन रहा है उनके
  374. 15:52लिए तो क्या है कि आप सुन सकते हो लेकिन
  375. 15:56यीशु मसीह जो प्रचार कर रहे हैं वो किसके
  376. 15:58लिए कर रहे हैं अपने डिसाइपल्स को सिखा
  377. 16:00रहे हैं तो मत्ती पांच से जो धन वर्ड है
  378. 16:04ब्लेसिंग वर्ड है उसमें एक चीज बताई गई है
  379. 16:07वो किसके लिए डिसाइपल्स के अगर आज हम यीशु
  380. 16:09मसीह के डिसाइपल्स हैं तो यीशु मसीह वहां
  381. 16:12पर क्या सिखा रहे हैं कि इन फ्यूचर में जो
  382. 16:16मेरे असली डिसाइपल्स होंगे उनको क्या फल
  383. 16:20मिलेगा और उनके गुण कैसे होंगे? जो यीशु
  384. 16:24मसीह के सच्चे शिष्य होंगे उनके गुण कैसे
  385. 16:27होंगे? अगर आप किसी व्यक्ति को आज देखते
  386. 16:30हो कि वो कहता है कि मैं यीशु मसीह के
  387. 16:31पीछे चलने वाला हूं। उसका मैं फॉलोवरर्स
  388. 16:33हूं। हमने क्या देखा था पहले डिसाइपल्स
  389. 16:35में दो चीजें थी। एक होता है सिर्फ सुनता
  390. 16:38है। एक होता है जो फॉलो करता है। एक होता
  391. 16:40है स्टूडेंट। स्टूडेंट क्या करता है? अपने
  392. 16:42गुरु की बात को सिर्फ सुनता है। लेकिन जो
  393. 16:45रियल स्टूडेंट होता है वो क्या कहता है कि
  394. 16:47मैं अपने गुरु की बात को सुनता भी हूं और
  395. 16:49मैं उसको फॉलो भी फॉलो भी करता हूं। तो
  396. 16:51यहां पर यीशु मसीह ये सिखा रहे हैं कि तुम
  397. 16:54जब फ्यूचर में मेरे डिसाइपल्स लोगों को
  398. 16:56देखोगे जो मुझसे कहेंगे कि मैं यीशु मसीह
  399. 16:58का सच्चा चेला हूं। मैं उनके पीछे चलने
  400. 17:00वाला हूं तो उनके अंदर कौन-कौन से गुण
  401. 17:03होंगे। और उनके अंदर कौन-कौन से गुण होंगे
  402. 17:06और उनको फ्यूचर में क्या फल मिलेगा। तो
  403. 17:09इसलिए उन्होंने क्या किया? यहां से
  404. 17:11ब्लेसिंग वर्ड शुरू किया। तो जब ये मत्त
  405. 17:14पांच से लेकर सात तक वो प्रचार करते
  406. 17:17रहेंगे। अपने चेयरों को सिखाते रहेंगे।
  407. 17:19लेकिन इन कंक्लूजन जब वो आखिरी में
  408. 17:22पहुंचेंगे तो क्या करेंगे? एक वार्निंग के
  409. 17:24तौर पर कुछ पंक्तियों को देंगे। वह क्या
  410. 17:26होंगी? हमारी चेतावनी और हमारी इनकरेजमेंट
  411. 17:28के लिए होगी। तो मैथ्यू चैप्टर से वर्स 24
  412. 17:31टू 26
  413. 17:36इसलिए जो कोई मेरी यह बातें सुनकर उन्हें
  414. 17:38मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य के समान
  415. 17:41ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया और
  416. 17:44में बरसा और बाड़े आई और आंधियां चली और
  417. 17:48घर से टकराई फिर भी वह नहीं गिरा क्योंकि
  418. 17:50उसकी नींव चट्टान पर डाली गई थी। ओके यहां
  419. 17:53पे क्या है? टू टाइप्स ऑफ मैन दो प्रकार
  420. 17:55के व्यक्तियों के बारे में दिया गया है।
  421. 17:57यीशु मसीह ने पूरा प्रीचिंग कर दिया। सबको
  422. 17:59सिखा दिया। लेकिन उन्होंने क्या बोला कि
  423. 18:01दो प्रकार के मनुष्य होंगे। कौन होगा? एक
  424. 18:03बाय मैन होगा, एक पुलिस मैन होगा। तो
  425. 18:06पुलिस मैन क्या होगा कि जो परमेश्वर के
  426. 18:09वचन को जो यहां पर बैठे हुए लोग हैं वो
  427. 18:11क्या करेंगे? वचन को सुनेंगे, समझेंगे,
  428. 18:14पढ़ेंगे। बाइबल क्लास में भी आएंगे, संगति
  429. 18:16भी करेंगे। लेकिन क्या करेंगे? सुनकर वो
  430. 18:19लोग उस चीज को फॉलो नहीं करेंगे। ठीक? तो
  431. 18:21ये क्या हो गया? एक ऑडियंस की तरह पर। हम
  432. 18:23डिसाइपल को तो कह सकते हैं लेकिन जो मैंने
  433. 18:26पढ़ा, समझा, सीखा उसको क्या किया? मैंने
  434. 18:28फॉलो नहीं किया। तो, वह कौन होगा? पुलिस
  435. 18:31मैन की तरह होगा। जिसने क्या किया? अपना
  436. 18:32घर का फाउंडेशन रेत के ऊपर डाला। इन
  437. 18:35पंक्तियों को जब आप पढ़ोगे तो उसमें कहीं
  438. 18:37पर ये नहीं लिखा कि यदि तूफान आया तो। पर
  439. 18:41उसमें क्या लिखा है कि जब तूफान आएगा यानी
  440. 18:44विश्वासी की जिंदगी में तकलीफें,
  441. 18:46परेशानियां आएंगी। ये 100 चीज है। लेकिन
  442. 18:49क्या हुआ कि मैंने अपना फाउंडेशन कहां पर
  443. 18:51डाला? मैंने वचन सुना, समझा, पढ़ा लेकिन
  444. 18:54क्या किया उस चीज को मैंने फॉलो नहीं
  445. 18:56किया। तो कौन व्यक्ति कहलाएगा वो पुलिस
  446. 18:59मैन कहलाएगा। लेकिन वो क्या कहता है कि
  447. 19:01वाइस मैन कौन होगा कि जो आएगा, पढ़ेगा,
  448. 19:04समझेगा, मेरी बातों के अनुसार चलेगा भी।
  449. 19:07तो वो क्या होगा कि जब मेरी जिंदगी में
  450. 19:09तकलीफें आएंगी, तो मेरा फाउंडेशन क्या
  451. 19:11होगा? मैंने अपना घर चट्टान पे बनाया है।
  452. 19:14तो यहां पे क्या है कि ऑडियंस आकर सुन
  453. 19:17सकती है, समझ सकती है। लेकिन क्या कर रही
  454. 19:19है? कुछ लोग वहां पे फॉलो नहीं कर रहे
  455. 19:22हैं। पर क्या होंगे? कुछ लोग उसको फॉलो
  456. 19:24करेंगे। अभी हम देखेंगे आगे डिसाइपल्स के
  457. 19:26बारे में भी कि क्या करते हैं। सो
  458. 19:30चार प्रकार के डिसाइपल्स होते हैं। फोर
  459. 19:32टाइप्स ऑफ डिसाइपल।
  460. 19:37चार प्रकार के सिस हो सकते हैं आज। तो
  461. 19:39मैंने मतलब इंग्लिश में लिखा है यहां पे।
  462. 19:41लेकिन इंग्लिश में इसलिए यहां पे लिखता
  463. 19:43हूं कि जो वीडियो क्लास के लोग हैं उसमें
  464. 19:44से कुछ लोग इंग्लिश के नोट्स भी लेते हैं।
  465. 19:46तो उनके लिए है पर मैं हिंदी में बताता
  466. 19:48हूं। तो चार प्रकार के डिसाइपल्स हो सकते
  467. 19:50हैं। मतलब ऐसे इनके गुण क्वालिटीज तो पहला
  468. 19:52कहता है क्विक टू ग्रास्प क्विक टू फॉरगेट
  469. 19:55यानी जल्दी समझेंगे जल्दी भूलेंगे। एक
  470. 20:00डिसाइपल्स होता है कि जो जल्दी समझता है
  471. 20:04लेकिन जल्दी भूल भी जाता है।
  472. 20:12जल्दी समझे आप और जल्दी भूल गए तो परिणाम
  473. 20:15क्या होगा? रिजल्ट क्या होगा?
  474. 20:19ज्ञान मिला लेकिन वह टिका नहीं
  475. 20:22जल्दी पढ़े जल्दी समझे। हम में से भी ऐसे
  476. 20:25लोग हो सकते हैं कि हम जल्दी पढ़ते हैं
  477. 20:27जल्दी समझे लेकिन जल्दी क्या हुए भूल भी
  478. 20:30गए तो क्या इसका मतलब हुआ रिजल्ट क्या
  479. 20:32मिलेगा कि ज्ञान तो हमको मिला जल्दी लेकिन
  480. 20:34क्या हुआ वो टिका नहीं तो उससे कोई महत्व
  481. 20:36नहीं हुआ। दूसरा कहता है कि दूसरे जो
  482. 20:39डिसाइपल्स होंगे स्लो टू ग्रास्प स्लो टू
  483. 20:42फॉरगेट देर से समझेंगे लेकिन देर से
  484. 20:46भूलेंगे
  485. 20:59देर से समझे और देर से बोले यानी समय
  486. 21:03समझने में समय लगता है और वही व्यक्ति
  487. 21:05क्या होता है बोलने में भी समय लगता तो
  488. 21:07परिणाम क्या होगा इस डिसाइपल्स के लिए
  489. 21:11धीरे-धीरे सीखता है लेकिन जो सीखना होता
  490. 21:14है वह क्या होता है परमानेंट होता है
  491. 21:16स्थाई होता है
  492. 21:18यानी उसका रिजल्ट होगा जो
  493. 21:22हां धीरे सीखता है लेकिन सीखना जो होता है
  494. 21:25वो स्थाई होता है
  495. 21:28क्योंकि देर से बोल रहा है ना तीसरा वो
  496. 21:31कहते हैं कि मेरे पीछे चलने वाले लोग क्या
  497. 21:33होंगे क्विक टू ग्रास स्लो टू फॉरगेट
  498. 21:37जल्दी समझेंगे लेकिन देर से भूलेंगे।
  499. 21:41देर से भूलेंगे।
  500. 21:44जल्दी समझा आपको किसी व्यक्ति ने बहुत
  501. 21:46अपनी बात समझाई और तुरंत समझ गए और उसी
  502. 21:49बात को भूलने में क्या हुआ? आपको बहुत
  503. 21:51ज्यादा समय लगा।
  504. 21:54तो यह कौन होगा? यीशु मसीह ने बोला कि यह
  505. 21:56बुद्धिमान शिष्य होगा।
  506. 22:02इसका जो रिजल्ट होगा एस सेग यानी
  507. 22:04बुद्धिमान डिसाइपल्स यह कहलाएगा। जल्दी
  508. 22:08समझेगा लेकिन देर से भूलेगा। चौथा कहता है
  509. 22:12स्लो टू ग्रास क्विक टू फॉरगेट। देर से
  510. 22:16समझता है लेकिन जल्दी भूल जाता है।
  511. 22:20समझने में उसको महीना भर जाएगा भूलने में।
  512. 22:22वो एक दिन बाद भूल जाएगा तुरंत।
  513. 22:34इसका रिजल्ट क्या होगा?
  514. 22:38इस व्यक्ति के लिए सीखना थोड़ा कठिन होता
  515. 22:41है क्योंकि उसको सीखने में टाइम जाता है
  516. 22:43और तुरंत ये भूल जाता है। तो यीशु मसीह
  517. 22:46क्या कह रहे हैं कि जो मेरे पीछे चलेंगे
  518. 22:48इन फ्यूचर में तो वो शायद इन कैटेगरी के
  519. 22:50होंगे। मेरे पीछे चलेंगे लेकिन क्या होगा?
  520. 22:53उनको सीखने में समझने में बहुत टाइम
  521. 22:55जाएगा। ठीक? लेकिन क्या है कि हमें ऑडियंस
  522. 22:59में से हम क्या है? क्राउड का एक हिस्सा
  523. 23:01हो सकते हैं। भीड़ का एक हिस्सा हो सकते
  524. 23:03हैं। लेकिन यीशु कह रहे हैं कि अगर तुम
  525. 23:05भीड़ का एक हिस्सा हो उसके बावजूद भी क्या
  526. 23:08कर सकते हो कि तुम मेरे डिसाइपल्स बन सकते
  527. 23:11हो। कई बार हम क्या थे? इस संसार में
  528. 23:13ऑडियंस की तरह थे केवल। हमने कहीं ना कहीं
  529. 23:15प्रभु के वचन को सुना और उस वचन के द्वारा
  530. 23:17क्या हुआ कि मेरे हृदय में परिवर्तन हुआ।
  531. 23:19उसके बाद हमने अपनी जिंदगी में यह डिसाइड
  532. 23:22किया कि मुझे क्या करना है कि मैं सिर्फ
  533. 23:24परमेश्वर के वचन को सुनूंगा ही नहीं बल्कि
  534. 23:26क्या करूंगा? मैं उस वचन को फॉलो भी
  535. 23:28करूंगा। तो
  536. 23:32यीशु मसीह ने लूका के 14 अध्याय में तीन
  537. 23:36प्रकार की कंडीशंस दिया है। कंडीशंस ऑफ
  538. 23:37डिसाइपल्स। एक अगर यीशु मसीह का सच्चा
  539. 23:40डिसाइपल्स होगा तो उसके जीवन में ये तीन
  540. 23:43चीजें तुम्हें जरूर दिखेंगी।
  541. 23:47अगर आप यीशु मसीह का सच्चा डिसाइपल्स कहते
  542. 23:50हो खुद को तो ये तीन चीजें आपको उसकी
  543. 23:53जिंदगी में दिखेंगी। यानी कंडीशंस ऑफ
  544. 23:55डिसाइपल्स। ठीक। लक 14 वर्स 25 से पढ़ेंगे।
  545. 24:04यहां पर भी क्या है? देखो एक बड़ी भीड़। अभी
  546. 24:07हमने बड़ी भीड़ के बारे में सुना था। अब
  547. 24:09यहां पर भी क्या है? एक बड़ी भीड़।
  548. 24:14जब बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी तो उसने
  549. 24:16पीछे मुड़कर उनसे कहा
  550. 24:20यदि कोई मेरे पास आए और अपने पिता और माता
  551. 24:24और अपनी पत्नी और बच्चों और भाइयों और
  552. 24:27बहनों वरन अपने प्राण को भी अप्रिय ना
  553. 24:31जाने तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता। और जो
  554. 24:34कोई अपना क्रूस ना उठाए और मेरे पीछे ना
  555. 24:37आए वह भी मेरा चेला नहीं हो सकता। तुम में
  556. 24:41से कौन है जो गढ़ बनाना चाहता हो और पहले
  557. 24:44बैठकर खर्च ना जोड़े कि पूरा करने की
  558. 24:47सामर्थ मेरे पास है कि नहीं। ओके यहां पे
  559. 24:50पहला चीज क्या है? यीशु मसीह ने यहां पे
  560. 24:52तीन कंडीशंस दिया एक डिसाइपल्स के लिए।
  561. 24:55आपको पता है कि यीशु मसीह के पीछे कितने
  562. 24:58लोग चलते थे?
  563. 25:00कहीं देखा आपने बाइबल में जिक्र किया हुआ
  564. 25:035000 10 जो खाना खाते थे वो कौन थे?
  565. 25:08क्राउड ना पीछे चलने वाले लोग थे क्या
  566. 25:10करते थे आज 4000 लोग हैं इन्होंने कुछ
  567. 25:12खाना खाया नहीं है 5000 लोग हैं इन्होंने
  568. 25:14कुछ खाना नहीं खाया अभी तक और यह क्या कर
  569. 25:16रहे हैं सुबह से मेरे साथ में पीछे पीछे
  570. 25:17सुन रहे हैं 5000 10000 लोगों की भीड़
  571. 25:21जहां पर लिखा ना 5000 लोग थे वहां बच्चे
  572. 25:24दूसरे लोग काउंट नहीं हुए तो लोग मानते
  573. 25:26हैं अमूमन वहां पर 10 12 हजार लोग थे 101
  574. 25:28हजार लोगों में से यीशु मसीह के पीछे
  575. 25:30कितने लोग आए
  576. 25:3311 लोग केवल आज क्या होता है कि ऐसे बहुत
  577. 25:37सारे सारे डिसाइपल्स होंगे चुने ऐसे बहुत
  578. 25:39सारे लोग कहेंगे कि जो मैं यीशु को मानता
  579. 25:41हूं जानता हूं समझता हूं 10,000 5000 लोग
  580. 25:44क्या थे खाना खाया और निकल गए तो क्या
  581. 25:47संसार में 5000 10000 लोगों में से हमको
  582. 25:50ऐसे डिसाइपल्स की जरूरत है कि जो सुनते
  583. 25:53हैं पर फॉलो नहीं करते यीशु मसीह ने क्या
  584. 25:56बोला कि 5000 और 10,000 लोग भीड़ मेरे
  585. 25:58पीछे चलती थी लेकिन उसमें से विश्वास योग
  586. 26:00डिसाइपल्स कितने निकले सिर्फ 11 डिसाइपल्स
  587. 26:03उनके पीछे चले आज हम क्या कह सकते हैं कि
  588. 26:05हमको
  589. 26:07क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी चाहिए।
  590. 26:10क्वांटिटी क्या होती है? संख्या में बताओ।
  591. 26:12कितने डिसाइपल्स हैं मेरे पास? 5000,
  592. 26:1410,000 की भीड़ है, ऑडियंस है, मेरे पास
  593. 26:16बड़ा क्राउड है। पर कितने डिसाइपल्स हैं?
  594. 26:18रियल डिसाइपल्स कितने हैं? तो मैथानो वर्ड
  595. 26:20क्या कह रहा था डिसाइपल्स के लिए? कि जो
  596. 26:23व्यक्ति यीशु की बात को सुनता है और उनकी
  597. 26:26बातों को फॉलो भी करता है। ये 11 व्यक्ति
  598. 26:28क्या थे? जो सुन रहे थे, यीशु के पीछे चल
  599. 26:31भी रहे थे। बाकी लोग क्या थे? खाने पीने
  600. 26:34के लिए, चंगाई चमत्कार के लिए थे। खाना
  601. 26:35पीना खाया पेट भरा चंगाई चमत्कार हुई
  602. 26:38बीमारी हुई और क्या हुए निकल लिए कितने
  603. 26:40लोग निकल केवल आए 5000 10000 की भीड़ में
  604. 26:43से सिर्फ 11 व्यक्ति हैं जो यीशु मसीह के
  605. 26:45साथ में चल रहे हैं ऐसे लोग क्या चाहिए
  606. 26:48हमको आज डिसाइपल्स के तौर पर चाहिए जो
  607. 26:50प्रभु यीशु मसीह के लिए क्या करें पूर्ण
  608. 26:52रूप से समर्पित जीवन जिए तो यहां पे पहली
  609. 26:55चीज क्या कहता है एक वर्ड लिखा है 26 में
  610. 26:58इंग्लिश में पढ़ेंगे
  611. 27:0126 में क्या लिखा है
  612. 27:04हिंदी में लिखा है, कहां गया? यह लिखा ना
  613. 27:07कि अप्रिय अप्रिय ना जाने। पर इंग्लिश में
  614. 27:11वर्ड लिखा है हेट।
  615. 27:16ओके। हेट का मतलब क्या होता है? नफरत करना
  616. 27:21यानी अप्रिय। यीशु मसीह इस सेंटेंस को जब
  617. 27:23वो बोल रहे। किसने बोला? यीशु मसीह ने जब
  618. 27:25बोला तो वो इस वर्ड को ये भी बोल सकते हैं
  619. 27:27ना सिंपल से कि देखो तुम लोग मेरे डिसाइपल
  620. 27:29बनना चाहते हो तो तुम लोग थोड़ा अपने
  621. 27:31माता-पिता से प्यार थोड़ा कम करना। लेकिन
  622. 27:34उन्होंने क्या बोला स्ट्रिक्टली एक हेट
  623. 27:36वर्ड डाल दिया नफरत भरा वर्ड डाल दिया कि
  624. 27:38जो मेरे पीछे चलना चाहता है वो क्या करें
  625. 27:41माता पिता पत्नी बच्चों को क्या करे
  626. 27:44अप्रिय यानी नफरत के तरीके से देखे क्या
  627. 27:47वाकई में परमेश्वर चाहता है कि मैं अपने
  628. 27:48परिवार से नफरत करूं
  629. 27:51नहीं क्यों नहीं चाहता दूसरी जगहों पे
  630. 27:54क्या कहता है यीशु मसीह कि तुम अपने
  631. 27:56माता-पिता का ऑनर करना दूसरी जगह पे क्या
  632. 27:58कहता है अपनी पत्नी से प्यार करो जैसे
  633. 28:00कलीसिया जैसे कि चर्च परमेश्वर ने अपनी
  634. 28:03कलीसिया से प्रेम किया। यहां पे क्या कह
  635. 28:06रहा है? कि तुम अपने माता-पिता और बच्चों
  636. 28:10को पत्नी से नफरत करो। ऐसा कैसे संभव हो
  637. 28:13सकता है कि वही परमेश्वर हमसे कह रहा है
  638. 28:15कि तुम अपने माता-पिता का आदर करो, उनकी
  639. 28:17बात को समझो, उनकी बात को सुनो, वही कह
  640. 28:19रहा है कि तुम उनसे नफरत करो। हेट?
  641. 28:24कैसे पॉसिबल है ये? संभव कैसे है?
  642. 28:28यस। हां, बोलो आप लोग। यस।
  643. 28:32ये परमेश्वर का परमिशन है मतलब इस तरह से
  644. 28:36उसका ना एक अलग ही कोटशन है इंग्लिश वर्ड
  645. 28:40है अलग मतलब जैसे रेगुलेशन में है यू
  646. 28:43फॉरगॉट फर्स्ट लव इट इज लाइक
  647. 28:47यू पुट मी फर्स्ट एंड देन पुट योर फादर
  648. 28:51मदर ब्रदर सिस्टर व्हाटवर
  649. 28:53मेरे
  650. 28:55विचार अनुसार आप उनका आपका संबंध भी उनसे
  651. 28:59उस हिसाब से रिलेटेड होना चाहिए। फर्स्ट
  652. 29:02मी माय वर्ड्स माय वे एंड उस हिसाब से
  653. 29:06आपका नेक्स्ट जो भी आपके हस्बैंड वाइफ
  654. 29:10ब्रदर सिस्टर
  655. 29:12नो उन विचारों अनुसार आपका संबंध होना
  656. 29:16चाहिए।
  657. 29:18यस
  658. 29:19यस। एक पास्ट बहुत बार हमको ऐसे सिखाते थे
  659. 29:22जब मैं क्लास में था उनके तो वो हमें एक
  660. 29:24क्रॉस दिखाते थे। तो ये क्रॉस में क्या है
  661. 29:26कि दो रेखाएं दिखाते थे। एक ऐसी रेखा
  662. 29:29बताते थे। एक ऐसा लाइन है, एक ऐसा लाइन
  663. 29:31है। तो वो हमेशा कहते थे कि जब तक ये ऐसा
  664. 29:34वाला जो है ना लाइन क्रॉस का ये क्या है
  665. 29:37कि मेरा और गॉड का रिश्ता है। कि जब तक
  666. 29:40मेरा गॉड के साथ रिश्ता अच्छा नहीं होगा
  667. 29:43प्रेम वाला तो मेरा जो है ना ये ऐसा वाला
  668. 29:46लाइन तो मेरा और आपका भी रिश्ता अच्छा
  669. 29:48नहीं होगा। तो अगर मेरी ये वाली रेखा सही
  670. 29:51है ना ये वाली प्रेम की रेखा सही है तो
  671. 29:53मेरी ये वाली प्रेम की भी रेखा सही रहेगी।
  672. 29:55तो इसका मतलब एक्चुअली क्या है ये वचन का
  673. 29:57कि यीशु मसीह ये कह रहे हैं एक एक मतलब
  674. 30:00प्रचारक ने ऐसे इसको एक्सप्लेन किया कि
  675. 30:02परमेश्वर कभी नहीं चाहता कि तुम अपने
  676. 30:04परिवार से नफरत करो क्योंकि वो तो चाहता
  677. 30:06ही है कि तुम अपने माता-पिता का सम्मान
  678. 30:09करो आदर करो उनकी बात को सुनो तुम अपनी
  679. 30:10पत्नी से ऐसे प्रेम करो जैसे कलीसिया को
  680. 30:13परमेश्वर ने प्रेम किया है अपने बच्चों को
  681. 30:15अच्छी शिक्षा दो पर यहां पर वो कहता है
  682. 30:17हेट करो पर वो ये कह रहा है लेखक ये कहता
  683. 30:19है कि जब आप रात के अंधेरे में निकलते हो
  684. 30:21तो आप क्या देखते हो आ तारे चमकते आकाश
  685. 30:25में ना तो आपने क्या देखा कि उनमें प्रकाश
  686. 30:28है, उजाला है। लेकिन जब सूर्य निकलता है
  687. 30:32तो स्टार कहां जाते हैं?
  688. 30:36क्या स्टार का अस्तित्व खत्म हो जाता है?
  689. 30:39नहीं। स्टार अपनी जगह पर रहते हैं लेकिन
  690. 30:42जो सूर्य का प्रकाश होता है, सन की जो
  691. 30:44रोशनी होती है वो क्या होती है? स्टार से
  692. 30:46ज्यादा होती है। तो वो लेखक क्या कहना
  693. 30:48चाहता है कि जब परमेश्वर का प्रेम मेरी
  694. 30:52जिंदगी में बड़ा होता है तो उसका जो प्रेम
  695. 30:54होता है वो क्या करता है? दूसरी चीजों को
  696. 30:57ढक लेता है। जब मेरी जिंदगी में परमेश्वर
  697. 30:59का प्रेम ज्यादा होगा तो क्या होगा कि वो
  698. 31:02प्रेम जो होगा वो मेरे परिवार के प्रेम को
  699. 31:04क्या करेगा? ढक लेगा। कैसे कि सूर्य जो
  700. 31:07रात में था उसपे कोई जो स्टार थे रात में
  701. 31:10थे चमक रहे थे। लेकिन जब सूर्य आया मसीह
  702. 31:12का प्रेम मेरी जिंदगी में आया तो क्या हुआ
  703. 31:17क्या उनका अस्तित्व खत्म हुआ नहीं हुआ पर
  704. 31:20क्या हुआ कि वो प्रेम ने जो प्रकाश था
  705. 31:22उसने क्या किया उसको ढक लिया केवल तो वही
  706. 31:25है कि जब मसीह का प्रेम मेरी जिंदगी में
  707. 31:28आता है तो क्या होता है कि मुझे उनसे नफरत
  708. 31:30नहीं करनी होती है बल्कि क्या होता है कि
  709. 31:33मैं उनसे प्रेम करता हूं लेकिन परमेश्वर
  710. 31:35यह चाहता है कि तुम्हारी जिंदगी में पहला
  711. 31:38प्रेम जो होना चाहिए वो मेरे लिए होना
  712. 31:40चाहिए मेरे मेरे सिवा मतलब परमेश्वर कोई
  713. 31:42स्वार्थी परमेश्वर नहीं है। वो चाहता है
  714. 31:44कि जो ऑर्डर है प्रेम का उस ऑर्डर को तुम
  715. 31:47मत बिगाड़ो। ओके? सो पहला कंडीशन क्या
  716. 31:50रखता है? पहली चीज वो ये कहता है कि अगर
  717. 31:52तुम मेरे डिसाइपल्स होगे तो तुम्हारी
  718. 31:53जिंदगी में ये चीज होगी। दूसरी चीज क्या
  719. 31:56कहता है?
  720. 31:59ओके। दूसरी चीज क्या है अगले वचन में?
  721. 32:06और जो कोई अपना क्रूस ना उठाए और मेरे
  722. 32:10पीछे ना आए वह भी मेरा चेला नहीं हो सकता।
  723. 32:12ओके क्रूस उठाना क्या हमको क्रूस सिर्फ
  724. 32:16संडे उठाना है या सिर्फ बाइबल कॉलेज में
  725. 32:19उठाना है बस आज क्लास है तो चलो नोट्स पढ़
  726. 32:22लेता हूं। संडे चर्च है तो बाइबल लेकर चला
  727. 32:24जाता हूं। क्या हमें सिर्फ आज के दिन
  728. 32:26उठाना है क्रूस? क्या बोला? डेली लाइफ में
  729. 32:28हमको क्रूस उठाना है। एक बिजनेसमैन जब
  730. 32:31सोके उठता है तो क्या सोचता है वह दिन में
  731. 32:33कि आज मेरे बिजनेस में कितनी तरक्की हो
  732. 32:35गई। आज कितने एंप्लाइजस को बाहर निकालना
  733. 32:36है? कितने एम्प्लाइजस को अंदर लेके आना
  734. 32:38है। कितने मुझे लोगों के साथ डील करना है।
  735. 32:40जब वो उठता है सुबह। पर जब मसीह का
  736. 32:42व्यक्ति सच्चा डिसाइपल्स उठता है तो वो
  737. 32:44क्या सोचता है कि आज मुझे कितने लोगों के
  738. 32:46पास में जाकर गोस्पल्स देना पड़ेगा। आज
  739. 32:48मैं कितने लोगों की जिंदगी में परमेश्वर
  740. 32:50के वचन को निवेश कर सकता हूं। यानी क्रूस
  741. 32:52हमारी जिंदगी में हमारी मौत तक लेकर जा
  742. 32:55सकता है। यानी हमें क्या करना है? अपनी
  743. 32:57जिंदगी में डेली क्रूस चढ़ाना है और वो
  744. 32:59क्रूस क्या हो सकता है कि हमको मौत तक भी
  745. 33:01लेकर जा सकता है। तो यीशु कह रहे हैं कि
  746. 33:03शायद वो व्यक्ति क्या करें कि हमें अपनी
  747. 33:06जान भी देकर क्या कर सकते हैं? कभी पीछे
  748. 33:10नहीं हटेंगे।
  749. 33:13ठीक? तीसरी चीज कहते हैं कि बहुत सारे
  750. 33:15डिसाइपल्स होंगे जो मेरे पीछे आएंगे। पर
  751. 33:18उनकी जिंदगी में क्या होगा? भौतिक। यानी
  752. 33:20जो शरीर की जरूरतें संसार की जरूरतें
  753. 33:22संपत्ति प्रॉपर्टी वो क्या होगी? उनकी
  754. 33:25प्राथमिकता होगी। मत्ति के 19 अध्याय में
  755. 33:27एक नौजवान व्यक्ति आता है। तो पता है
  756. 33:29स्टोरी क्या है उसमें क्या लिखा है कि
  757. 33:31नौजवान व्यक्ति आता है यीशु मसीह क्या
  758. 33:32कहता है कि मैं अनंत जीवन पाना चाहता हूं
  759. 33:35प्रभु तो मैं क्या करूं? तो यीशु मसीह ने
  760. 33:38क्या बोला कि तुम अपने माता-पिता का आदर
  761. 33:40करो झूठ मत बोलो चोरी मत करो। बेचार हत्या
  762. 33:42मतलब ये सब तमाम बाते उन्होंने बोली। तो
  763. 33:44उसने क्या बोला नौजवान ने? अरे ये तो मैं
  764. 33:47डेली फॉलो करता हूं। तो यशु ने क्या बोला
  765. 33:49कि पर तुम में एक चीज की कमी है और क्या
  766. 33:51कमी है कि तुम्हारे पास जो संपत्ति है वो
  767. 33:54क्या करो तुम बेचकर गरीबों में बांट दो तो
  768. 33:56क्या हुआ उसकी जिंदगी में वो निराश हो के
  769. 33:58चला गया कई बार हम प्रभु यीशु मसीह के
  770. 34:01डिसाइपल बनना चाहते हैं हम सीखना चाहते
  771. 34:04हैं उनके पीछे चलना चाहते हैं लेकिन क्या
  772. 34:06होती है कि हमारी संपत्ति हमारी प्रॉपर्टी
  773. 34:08हमारी गाड़ी हमारा घर क्या होता है उस
  774. 34:11बुलाहट में बाधा बन जाती है तो यीशु क्या
  775. 34:13कह रहे हैं कि जो हमारा सच्चा डिसाइपल्स
  776. 34:16होगा वो क्या होगा कि भौतिक आवश्यकताएं जो
  777. 34:19हमारी मतलब संसार की सुख सुख सुख सुविधाएं
  778. 34:21हैं वह क्या होंगी कभी भी हमें परमेश्वर
  779. 34:23के पीछे चलने से रोक नहीं सकती है। तो ये
  780. 34:26तीन चीजें हमारी जिंदगी में होंगी। पहला
  781. 34:27चीज क्या होगा सच्चे डिसाइपल्स का कि पहला
  782. 34:29प्रेम जो हमारा परमेश्वर के लिए होगा। ठीक
  783. 34:32दूसरा चीज क्या होगा कि हम अपनी डेली लाइफ
  784. 34:35में क्रॉस को उठाएंगे। और तीसरा चीज क्या
  785. 34:38होगा कि संपत्ति प्रॉपर्टी यानी फिजिकल
  786. 34:40नीड्स जो हमारी सर्व शरीर की आवश्यकताएं
  787. 34:42हैं वो भी क्या होंगी? पीछे रख दी जाएंगी।
  788. 34:45तो ये तीन चीजें क्या है? एक डिसाइपल्स के
  789. 34:47अंदर होंगे लुका 14 के अनुसार में। ओके?
  790. 34:51एक स्टोरी आपने पढ़ी होगी। मतलब आप लोगों
  791. 34:53ने सुनी कि नहीं सुनी? एक डिसाइपल्स के
  792. 34:55बारे में और मुझे बहुत मतलब मुझे बहुत
  793. 34:57प्रोत्साहन करती है और दूसरे लोगों को भी
  794. 34:58बहुत प्रोत्साहन करती है कि एक बिल बोर्डन
  795. 35:01करके एक मिशनरीज थे। मतलब बहुत युवा थे।
  796. 35:03पर उन्होंने क्या बोला कि मुझे बहुत अमीर
  797. 35:06व्यक्ति थे। अमेरिका के रहने वाले थे और
  798. 35:08एक नौजवान लड़का। तो उन्होंने क्या बोला
  799. 35:10कि वो कई बार बाहर निकले मिशंस पे। तो
  800. 35:12उन्होंने देखा कि लोगों के बारे में ना
  801. 35:14तकलीफें देखी, समस्याएं देखी। उनके पिता
  802. 35:16बहुत बड़े बिजनेसमैन थे। तो उन्होंने बोला
  803. 35:18कि मैं अपनी जिंदगी में आगे चलकर एक
  804. 35:21मिशनरी बनना चाहूंगा और मैं लोगों के पास
  805. 35:23जाकर गोस्पल देना चाहूंगा। तो उनके
  806. 35:26माता-पिता ने उनके इस फैसले का स्वागत
  807. 35:28किया। तो उनको एक यूनिवर्सिटी में एडमिशन
  808. 35:30कराया। तो वहां पे क्या हुआ कि उन्होंने
  809. 35:32प्रार्थना करना शुरू किया। अकेले
  810. 35:33प्रार्थना करना शुरू किया। धीरे-धीरे दो
  811. 35:35लोग आए, तीन लोग आए। जब तक तीन-चार साल
  812. 35:38खत्म हुए तो क्या हुआ कि कैंपस के सारे
  813. 35:41लोग उनकी प्रार्थना के समूह में जुड़ने
  814. 35:43लगे। तो उन्होंने बोला कि हमारे पास इतना
  815. 35:45बड़ा प्रार्थना का समूह हो गया तो अब मुझे
  816. 35:47क्या करना पड़ेगा? बाहर जाकर दूसरी दूसरी
  817. 35:49जगहों पर लोगों के पास में गोस्पल्स देना
  818. 35:51पड़ेगा जाके मिशनंस के लिए। हमें बाहर
  819. 35:53निकलना पड़ेगा और सब यंग लोग, नौजवान लोग,
  820. 35:55सब मतलब कॉलेज के पढ़ने वाले, विद्यालय
  821. 35:57में पढ़ने वाले सब लोग। तो वहां पे क्या
  822. 35:59हुआ? उन्होंने बोला कि हम तमाम जगह पे
  823. 36:02जाएंगे। तो उन्होंने अपने मिस अपने माइंड
  824. 36:04में प्रार्थना किया और अपने मन में एक
  825. 36:05विचार बनाया कि मुझे चाइना जाना है और
  826. 36:07चाइना में कुछ मुस्लिम समुदाय लोग हैं।
  827. 36:09मैं उनको गोस्पेल देना चाहता हूं। तो वहां
  828. 36:11पे क्या होता है कि उनको मुस्लिम की एक
  829. 36:13लैंग्वेज सीखनी थी तो वो मिस्र गए इजिप्ट
  830. 36:15में। तो इजिप्ट में क्या हुआ कि उनकी
  831. 36:1725-26 साल पे उनकी मौत हो गई। ठीक? तो
  832. 36:1925-26 साल पे जब मौत हो गई तो उनके पिता
  833. 36:21जो थे बहुत बड़े मतलब बिजनेसमैन थे। तो
  834. 36:23अगले दिन जब न्यूज़ पेपर निकल के आया तो
  835. 36:25जो मतलब बुलेटिन निकल के आया तो उसमें एक
  836. 36:27बड़ी हेडलाइन लिख के आई ना कि एक
  837. 36:29मूर्खतापूर्ण लिया गया डिसीजंस कि जो
  838. 36:32व्यक्ति अपने पिता की प्रॉपर्टी संपत्ति
  839. 36:34अपने बिजनेस को आगे चला सकता था उसने क्या
  840. 36:36किया एक ऐसे काम को चुना कि जो क्या था
  841. 36:39बिल्कुल निरर्थक था कोई मतलब नहीं था उसका
  842. 36:41तो मूर्ख मूर्खता पूर्ण डिसीजन बता दिया
  843. 36:44जब आपने अपने जीवन में प्रभु के पीछे चलने
  844. 36:46का फैसला लिया होगा तो आपके कई रिलेटिव्स
  845. 36:49दोस्त पड़ोस में रहने वाले लोगों ने यही
  846. 36:51किया होगा कि क्या अरे कल तुम पास्टर
  847. 36:52बनोगे जाके इतनी दुनिया में इतनी
  848. 36:54अच्छे-अच्छे ओपोरर्चुनिटीज़ हैं, नौकरीज़
  849. 36:56हैं, पैसा है, संपत्ति है और तुम ये काम
  850. 36:58करोगे जाके। ये क्या है? संसार की सोच है
  851. 37:00हमारी जिंदगी में। लेकिन एक रियल
  852. 37:02डिसाइपल्स क्या करता है? इन चीजों को पीछे
  853. 37:03छोड़कर प्रभु के आगे चलना चाहता है। तो कई
  854. 37:06सालों बाद क्या हुआ? उनके एक बाइबल उनके
  855. 37:09एक दोस्त को मिली। तो
  856. 37:10[नाक से की जाने वाली आवाज़] एक जब उनके
  857. 37:11बाइबल दोस्त को मिली, तो उनके पहले पेज को
  858. 37:13जब खोला, तो उस पे तीन वर्ड लिखे थे। वो
  859. 37:16तीन वर्ड थे। नो रिजर्व, नो रिट्रीट, नो
  860. 37:19रिग्रेट। तो उसमें था कि नो रिजर्व का
  861. 37:21मतलब था कि [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  862. 37:22मैंने अपने लिए कुछ भी सेव करके नहीं रखा।
  863. 37:25मैंने अपने लिए कुछ बचाया नहीं है। नो
  864. 37:27रिजर्व।
  865. 37:30कई बार क्या होता है कि हम इकट्ठा करते।
  866. 37:32रिजर्व करते बहुत कुछ ना अपने फ्यूचर के
  867. 37:34लिए, सेफ्टी के लिए। उसमें कोई रिजर्व
  868. 37:35नहीं था। कुछ भी मैंने नो रिजर्व। दूसरा
  869. 37:37उन्होंने बोला कि नो रिट्रीट। नो रिट्रीट
  870. 37:40का मतलब है कि मैं अपनी जिंदगी में पीछे
  871. 37:42नहीं हटूंगा। कुछ भी डिसीजन हो मैं अपनी
  872. 37:45जिंदगी में हमेशा आगे बढ़ता रहूंगा। चाहे
  873. 37:47मेरे पिता का बिज़नेस कितना बढ़े, कितना घटे
  874. 37:49कोई मैटर नहीं करता है। तीसरा वर्ड उनके
  875. 37:51पे क्या मिला? नो रिग्रेट। मुझे कोई भी
  876. 37:54पश्चाताप नहीं है इस बुलाहट में। कई बार
  877. 37:57क्या होता है कि जब हम अपनी जिंदगी में
  878. 37:58देखते हैं पीछे मुड़ के तो क्या लगता है
  879. 37:59कि शायद मेरे पास अच्छे अपॉर्चुनिटीज़ थे।
  880. 38:02अच्छा फ्यूचर बनाने का एक सपना था। लेकिन
  881. 38:04मैंने क्या किया? उनको त्याग दिया। मैं
  882. 38:06बहुत रिग्रेट करता हूं उस चीज पे। लेकिन
  883. 38:08उन्होंने क्या बोला कि मुझे आज अपने लिए
  884. 38:10गए इस डिसीजन पे कोई भी रिग्रेट नहीं है।
  885. 38:13उसके बाद क्या हुआ जब उनकी मौत हो गई। एक
  886. 38:15नौजवान व्यक्ति की जिसके पास इतना
  887. 38:17परमेश्वर के वचन के लिए भूख था। उसके बाद
  888. 38:19क्या हुआ? तकरीबन 100 से 200 मिशनरीज उसकी
  889. 38:22कहानी को पढ़ के अलग-अलग जगहों पे निकल
  890. 38:24गए। क्या हुआ कि जो व्यक्ति वो नहीं कर
  891. 38:26सका परमेश्वर ने उसके द्वारा उसकी जीवन के
  892. 38:28द्वारा क्या किया? अन्य लोगों को प्रेरित
  893. 38:30किया। एक डिसाइपल्स का यही पहचान होता है।
  894. 38:33क्या होता है कि हमारी जिंदगी में हमको
  895. 38:34कोई पश्चाताप नहीं होता है। हमारे लिए कुछ
  896. 38:36भी इकट्ठा करने के लिए नहीं है। क्योंकि
  897. 38:38परमेश्वर ने क्या बोला? जब भी तुम बाहर
  898. 38:39जाते हो तो क्या करो? तुम एक झोला ले लो,
  899. 38:41लाठी ले लो, तुम निकल जाओ। यानी हमारी जो
  900. 38:43सुख सुविधाएं हैं, हमारे संसाधन हैं, वह
  901. 38:46कौन करेगा? परमेश्वर पूरा करेगा। तो अगर
  902. 38:49हम सच में यीशु मसीह के डिसाइपल बनना
  903. 38:50चाहते हैं तो क्या करना पड़ेगा हमको इन
  904. 38:53चीजों को याद रखना पड़ेगा। ओके? सो अगली
  905. 38:56चीज हम देखेंगे। मत्ती का पांच अध्याय।
  906. 39:03हां। तो यहां पर तीन से लेकर आई थिंक
  907. 39:06पड़ेंगे। नौ, 10 तक 11 तक। धन वचन
  908. 39:09ब्लेसिंग। ओके। पहला चीज है कि जो ब्लेसिड
  909. 39:13वर्ड है यह ग्रीक का नया नियम ग्रीक में
  910. 39:18है। तो इसका मतलब है कि ब्लेसिड का मतलब
  911. 39:20होता है हैप्पी यानी खुश। अब इस वचन को जब
  912. 39:23हम पढ़ेंगे तो जहां पर भी धन्य लिखा है ना
  913. 39:26धन्य की जगह पर हम पढ़ेंगे खुश। मतलब
  914. 39:29प्रसन्न खुशी पढ़ेंगे।
  915. 39:35धन्य जो एक बार पढ़ो इसे खुश। खुशी पढ़ो।
  916. 39:39मतलब जो हिंदी में लिखा गया उसका मतलब ये
  917. 39:41है पर उसका रियल मीनिंग क्या है? ब्लेसिड
  918. 39:43का मतलब हैप्पी। आप पढ़ो एक बार।
  919. 39:45खुश है वो जो मन के दीन है। क्योंकि सोचो
  920. 39:49कितना अच्छा है ना? खुश यानी प्रसन्न है
  921. 39:52वो व्यक्ति जो मन का दीन है। इस दुनिया
  922. 39:55में कौन है जो खुश नहीं रहना चाहता है।
  923. 40:00कौन व्यक्ति है जो खुश नहीं रहना चाहता
  924. 40:03है। हैप्पी नहीं रहना चाहता है। कोई नहीं
  925. 40:05है ऐसा कि जो ना रहना चाहता हो। हर कोई
  926. 40:07क्या है? खुशी रहना चाहता है। लेकिन सच्ची
  927. 40:09खुशी कहां से मिलती है? पहली चीज हमारी यह
  928. 40:12है।
  929. 40:14एक अभिनेत्री यानी एक एक्ट्रेस से पूछा
  930. 40:16गया जानी पहचानी एक्ट्रेस ना। उससे पूछा
  931. 40:19गया कि क्या तुम्हारे पास सच में कोई खुशी
  932. 40:22है? उसने बोला कि देखो मेरे पास पैसा है,
  933. 40:25पहचान है, मेरे पास सुंदरता है। मैं बहुत
  934. 40:28सुंदर हूं। मेरे पास लाखों करोड़ों
  935. 40:30फॉलोवरर्स हैं लेकिन मेरे पास में खुशी
  936. 40:34नहीं है। क्या उसकी सुंदरता उसका फॉलोअर्स
  937. 40:37उसके मॉडलिंग टाइप के ड्रेस कपड़े उसको
  938. 40:40खुशी दे पाए नहीं दे पाए। हम क्या सोचते
  939. 40:42हैं अरे उनकी जिंदगी कितनी अच्छी चल रही
  940. 40:44होगी ना। वाह क्या उनको लाखों लोग जानते
  941. 40:46करोड़ों लोग उनके पीछे दौड़ते हैं। क्या
  942. 40:47वो खुश हैं? नहीं। एक बिजनेसमैन से पूछा
  943. 40:50गया एक बिजनेसमैन के करोड़ों अरबों रुपए
  944. 40:53की संपत्ति थी। उससे पूछा क्या तुम अपनी
  945. 40:55जिंदगी में खुश हो? तो उसने क्या बोला कि
  946. 40:58मैं अपनी जिंदगी में खुश नहीं हूं बल्कि
  947. 41:00मैं जब उठता हूं तो एक डर के साथ उठता हूं
  948. 41:02कि पता नहीं मेरी कंपनी में कौन सा मुझे
  949. 41:04न्यूज़ मिल जाए कि मेरी कौन सी कंपनी डूब
  950. 41:06गई आज। मुझे कितना घाटा पड़ गया। मैं हर
  951. 41:08दिन सो जब सोता हूं तो मैं इस डर के साथ
  952. 41:09सोता हूं और जब मैं उठता हूं तो एक डर के
  953. 41:12साथ उठता हूं। एक राजनेता से पूछा गया
  954. 41:14पॉलिटिकल लीडर से प्राइम मिनिस्टर से या
  955. 41:17तुम प्रेसिडेंट से पूछा गया कि तुम अपनी
  956. 41:19जिंदगी में खुश हो क्या? तो उसने क्या
  957. 41:22बोला कि मैं अपनी जिंदगी में खुश नहीं हूं
  958. 41:24बल्कि मैं एक डर के साथ जीता हूं। पता
  959. 41:25नहीं कल को जाके कौन मेरी गोली मार दे।
  960. 41:27पता नहीं कहां पे कल मेरी हत्या हो जाए।
  961. 41:29यानी क्या है कि जिनको हम देखते हैं ना
  962. 41:31बाहर से अरे वो तो प्रधानमंत्री हैं। वो
  963. 41:33बढ़िया-बढ़िया स्टार हैं। वो लोग क्या है
  964. 41:35उनके पास सच में वाकई में खुशी होगी।
  965. 41:36लेकिन क्या है कि सच में वो भी अपनी
  966. 41:38जिंदगी एक डर और अप्रसता यानी अनहैपी के
  967. 41:42साथ जी रहे हैं। लेकिन यीशु मसीह क्या कर
  968. 41:43रहे हैं? यहां पर हमको कह रहे हैं कि जो
  969. 41:46मेरे डिसाइपल्स होंगे ना इन फ्यूचर में तो
  970. 41:49उनके अंदर कौन-कौन से गुण होंगे और उनको
  971. 41:51क्या फ्रूट होंगे। तो वह पहली चीज क्या
  972. 41:53कहते हैं?
  973. 41:56धन्य है जो मन के दीन है क्योंकि स्वर्ग
  974. 41:58का राज उन्हीं का है। ओके मन के दीन होना
  975. 42:02फिलिप्स चैप्टर फोर वर्स 11 टू 12 में
  976. 42:06पौलुस ने कुछ लिखा
  977. 42:1311 12 चैप्टर 4 11 12
  978. 42:18यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता
  979. 42:20हूं क्योंकि मैं क्योंकि मैं ने यह सीखा
  980. 42:23है
  981. 42:24कि जिस दशा में मैं हूं उसी में संतोष
  982. 42:28करूं। मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना
  983. 42:31भी जानता हूं। हर एक बात और सब दशाओं में
  984. 42:34मैंने तृप्त होना और भूखा रहना और घटना
  985. 42:37बढ़ना सीखा है। क्या लिखा है कि मैंने सीख
  986. 42:41लिया है। परिस्थिति हमारी जिंदगी में चाहे
  987. 42:44जैसी भी रहे चाहे सुखी का पल हो, चाहे
  988. 42:47दुखी का पल हो, चाहे मैं अच्छे में रहूं,
  989. 42:50चाहे मैं बुरे में रहूं। क्यों? क्योंकि
  990. 42:52संसार की जो खुशी है वो इस चीज पर निर्भर
  991. 42:56करती है कि मेरे पास क्या है। लेकिन जो
  992. 42:59स्वर्ग की खुशी है वो किस चीज पर निर्भर
  993. 43:02करती है? वो सच्ची खुशी परमेश्वर के वचन
  994. 43:04के ऊपर निर्भर करती है। संसार में क्या है
  995. 43:07कि अगर मुझे कुछ मिल गया तो क्या है? मैं
  996. 43:09खुश हो जाऊंगा। लेकिन पौलुस क्या लिख रहा
  997. 43:12है कि मैंने अब सीख लिया है। परिस्थिति
  998. 43:14चाहे जैसी भी हो मैं हमेशा प्रसन्न
  999. 43:17रहूंगा। विश्वासी के लिए यही एक लेसन है
  1000. 43:19कि हमारी खुशी क्या होगी? हमारी खुशी कोई
  1001. 43:22वस्तु के ऊपर नहीं होगी। कोई संसाधन के
  1002. 43:24ऊपर नहीं होगी कि मुझे यह वस्तु मिली,
  1003. 43:26मुझे यह संसाधन मिल गया तो मैं खुश हो
  1004. 43:28जाऊंगा। बच्चे को आप कोई खिलौना दे तो खुश
  1005. 43:30हो जाएगा। बच्चे से छीन लो तो क्या हो
  1006. 43:31जाएगा? वो दुखी हो जाएगा। तो क्या
  1007. 43:33परमेश्वर हमको ऐसा डिसाइपल बनाना चाहता है
  1008. 43:35कि संसाधन के ऊपर मैं खुश रहूं? नहीं।
  1009. 43:38प्रभु क्या कह रहा है कि जो स्वर्ग की
  1010. 43:40खुशी है वो क्या है? संसार की खुशी से अलग
  1011. 43:44है। ओके। सो पहले चीज वो क्या कहता है?
  1012. 43:46पहला डिसाइपल्स को बताते हैं कि जो मेरे
  1013. 43:48फ्यूचर में डिसाइपल्स होंगे, जो डिसाइपल्स
  1014. 43:50हैं और जो मेरे असली चेले बनेंगे वो क्या
  1015. 43:52होंगे? मन के दीन होंगे।
  1016. 44:00ओके। मन के दीन का मतलब क्या होता है? मन
  1017. 44:03में दीन होना।
  1018. 44:08ट्राई करो।
  1019. 44:15क्या बोलते जय
  1020. 44:19मन में दीन होना मतलब यानी मन में टूटापन
  1021. 44:23होना इसका मतलब है कि जब मेरा कोई
  1022. 44:26डिसाइपल्स होगा अगर उसने कोई पाप किया तो
  1023. 44:29क्या करेगा वो उस चीज का पश्चाताप करेगा
  1024. 44:32यानी टूटापन लेके आएगा और जो व्यक्ति मन
  1025. 44:35में टूटा होगा वो क्या करेगा अपनी गलती को
  1026. 44:38स्वीकार करेगा टूटापन क्या होता है हमें
  1027. 44:41जब हम टूटते ते हैं मन में तो क्या होते
  1028. 44:42हैं? हम अपनी गलतियों को एक्सेप्ट करते
  1029. 44:45हैं।
  1030. 44:47और टूटापन क्या होता है? टूटा हुआ व्यक्ति
  1031. 44:49क्या करता है? परमेश्वर के वचन को स्वीकार
  1032. 44:52करता है। जो टूटापन नहीं होगा उसके अंदर
  1033. 44:55क्या होगा? परमेश्वर के वचन को स्वीकार
  1034. 44:56करने की क्षमता नहीं होगी। हम अमीर हो,
  1035. 44:59गरीब हो, अनपढ़ हो, पढ़े लिखे हो, हम छोटे
  1036. 45:01हो, बड़े हो पर क्या हो सकता है? हमारे मन
  1037. 45:04में टूटापन हो सकता है। जब मैं गलती
  1038. 45:06करूंगा तो मेरा मन टूटेगा, मैं पाप करूंगा
  1039. 45:08तो उसके बाद बावजूद भी क्या करूंगा? मैं
  1040. 45:10परमेश्वर के वचन को स्वीकार करूंगा। तो यह
  1041. 45:12क्या होगा? एक डिसाइपल्स का पहचान होगा कि
  1042. 45:15वह मन के अधीन होंगे। दूसरी चीज क्या कहते
  1043. 45:17हैं वो?
  1044. 45:23दूसरा वचन
  1045. 45:38मैथ्यू फाइव पांच का आई थिंक चार
  1046. 45:45धन्य जो शोक करते हैं क्योंकि वे शांति
  1047. 45:47पाएंगे।
  1048. 45:48ओके शोक करना यानी शांति पाएंगे। हम लोग
  1049. 45:51शोक कब करते हैं?
  1050. 45:55ओके हां शोक का मतलब है यहां पर लिखा है
  1051. 45:58कि जीवन में कोई ऐसी चीज है जिसके कारण
  1052. 46:02मैं यीशु की तरह नहीं बन पा रहा हूं। मेरी
  1053. 46:06जिंदगी में ऐसी कोई चीज है जिसके कारण मैं
  1054. 46:10यीशु की तरह नहीं बन पा रहा हूं तो मैं
  1055. 46:13क्या करूंगा शोक करूंगा कि मैं यीशु की
  1056. 46:16तरह क्यों नहीं बन पा रहा हूं
  1057. 46:23तो डिसाइपल्स क्या कहेगा कि मैं ऐसी कोई
  1058. 46:26भी चीज नहीं करूंगा कि जो मुझे यीशु की
  1059. 46:28तरह बनने से रोके हमारा सपना कैसा है कि
  1060. 46:31हम यीशु की तरह बने ना सब यीशु की तरह
  1061. 46:33जैसा उन्होंने लोगों से प्रेम किया क्षमा
  1062. 46:35किया उस प्रकार से हम भी बने तो हम शोक कब
  1063. 46:37करेंगे
  1064. 46:39कि हमारे जीवन में कोई ऐसी चीज ना हो
  1065. 46:41जिसके कारण मैं यीशु की तरह नहीं बन पा
  1066. 46:43रहा हूं तो हम शोक करते हैं खुद में तीसरा
  1067. 46:45चीज क्या कहता है तीसरा वचन मतलब ये सब
  1068. 46:49मैं आपको छोटा-छोटा रिव्यु दे रहा हूं
  1069. 46:50क्योंकि टाइम नहीं है हां
  1070. 46:52धन्य जो नम्र है क्योंकि वे पृथ्वी के
  1071. 46:55अधिकारी होंगे
  1072. 46:56ओके नम्र कौन होता है
  1073. 46:59नम्र वह व्यक्ति होता है जो वचन सीखने के
  1074. 47:03लिए तैयार रहता है
  1075. 47:06क्योंकि नम्र व्यक्ति कभी किसी के ऊपर दोष
  1076. 47:09नहीं लगाएगा। तो यीशु मसीह कह रहे हैं कि
  1077. 47:11तुम जब फ्यूचर में कि मेरे डिसाइपल्स को
  1078. 47:13देखोगे ना तो उनके अंदर एक नम्रता का भी
  1079. 47:15गुण होगा कि वो नम्र होगा और वो क्या
  1080. 47:17करेगा? हमेशा वचन सीखने के लिए तैयार
  1081. 47:19रहेगा। कई बार क्या होता है कि हम लोगों
  1082. 47:21के ऊपर दोष लगाते हैं ना। अरे तुम तुम तुम
  1083. 47:23पर अगर हम नम्र होंगे तो क्या होंगे? कभी
  1084. 47:25किसी के ऊपर ब्लेम नहीं करेंगे। क्या यीशु
  1085. 47:27मसीह ने कभी किसी को ब्लेम किया? नहीं
  1086. 47:30किया। ठीक। अगला चीज क्या है?
  1087. 47:34अगली चीज इसको खत्म करते हैं इन नौ वचनों
  1088. 47:37को उसके बाद धन्य जो धार्मिकता के भूखे
  1089. 47:40हैं और प्यासे क्योंकि वे तृप्त किए
  1090. 47:42जाएंगे
  1091. 47:43ओके धर्म के लिए भूखे प्यासे हैं मतलब
  1092. 47:45क्या हुआ इसका जब हम अपनी जिंदगी में नम्र
  1093. 47:49बनेंगे तभी क्या होंगे हम धार्मिकता के
  1094. 47:52लिए भूखे होंगे यानी परमेश्वर के अनुसार
  1095. 47:55अपना जीवन जिएंगे
  1096. 48:00यीशु मसीह कह रहे हैं जब तुम देखोगे तो
  1097. 48:01धार्मिकता के भूखे होंगे
  1098. 48:05जब हम नम्र बनेंगे तब हम धार्मिकता के लिए
  1099. 48:08भूखे होंगे और धार्मिकता क्या होती है कि
  1100. 48:11परमेश्वर की तरह जीवन जीना है हमको ना
  1101. 48:13उनकी तरह जैसे वो राइचस मैन थे ना हमें भी
  1102. 48:15वैसे ही जिंदगी जीना है अगली चीज क्या
  1103. 48:18कहते हैं वो
  1104. 48:21धन्य है वे जो दयावंत है क्योंकि उन पर
  1105. 48:23दया की जाएगी
  1106. 48:25ओके ये क्या है दयावंत तो यह क्या होंगे
  1107. 48:27यह कह रहे हैं कि जो भी मेरे डिसाइपल्स
  1108. 48:29होंगे वो अपनी जिंदगी नकारात्मक तरीके से
  1109. 48:32नहीं जिएंगे। यह क्या करेंगे? दूसरों के
  1110. 48:35प्रति दया और स्वभाव का
  1111. 48:38वो रखेंगे, प्रेम रखेंगे। जब तुम फ्यूचर
  1112. 48:41में देखोगे मेरे डिसाइपल्स को तो वो क्या
  1113. 48:43करेंगे? लोगों के ऊपर दयाबंद यानी लोगों
  1114. 48:45के ऊपर दया करेंगे। उनको क्षमा करेंगे।
  1115. 48:50तो अगर हमें सच में डिसाइल बनना है तो
  1116. 48:52क्या करना पड़ेगा? हमें लोगों के ऊपर दया
  1117. 48:54करनी पड़ेगी। मैं डिसाइपल डिसाइपल चलाता
  1118. 48:56हूं। मैं यीशु का सबसे बड़ा डिसाइपल हूं।
  1119. 48:57पर मेरे अंदर क्या है? दया ही नहीं है,
  1120. 48:59नम्रता ही नहीं है। हम धार्मिकता के भूखे
  1121. 49:02नहीं है ना अगली चीज क्या कहता है?
  1122. 49:05धन्य वे हैं जिनके मन शुद्ध है क्योंकि वह
  1123. 49:08परमेश्वर को देखेंगे।
  1124. 49:09ओके
  1125. 49:11जिनके मन शुद्ध हैं। हम शुद्ध क्यों हैं?
  1126. 49:14यीशु मसीह के कारण हम शुद्ध हैं। यानी
  1127. 49:18इसका मतलब हुआ कि हम सच्चे मन से यीशु
  1128. 49:20मसीह के पीछे चलेंगे।
  1129. 49:26सच्चे मन से हम यीशु मसीह के पीछे चलेंगे।
  1130. 49:38ओके तो यीशु क्या कह रहे हैं कि जब तुम मन
  1131. 49:41में शुद्ध रहोगे तो हम हमारे डिसाइपल्स को
  1132. 49:43तुम देखोगे। अगली चीज क्या कहते हैं वो?
  1133. 49:47धन्य वे हैं जो मेल कराने वाले हैं
  1134. 49:49क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।
  1135. 49:51ओके। तो क्या बोल रहे हैं यीशु मसीह? जब
  1136. 49:52तुम मेरे डिसाइपल्स को देखोगे तो क्या
  1137. 49:54होगा कि वो दो लोगों के बीच में मेल मिलाप
  1138. 49:57कराने वाले होंगे ना कि झगड़ा कराने वाले
  1139. 49:59होंगे। क्या होता है कई बार पास्टर के पास
  1140. 50:01लोग काउंसलिंग के लिए आते हैं ना कहते हैं
  1141. 50:02पास्टर मेरी जिंदगी में ये चीज चल रही है।
  1142. 50:04तो पास्टर क्या करते हैं? दो लोगों को
  1143. 50:05बिठाते हैं और मेल मिलाप कराने का काम
  1144. 50:07करते हैं। यानी दो लोगों को मिलाने वाला
  1145. 50:09काम करेंगे ना कि झगड़ा लगाने का काम
  1146. 50:11करेंगे। अगली चीज क्या कहते हैं?
  1147. 50:15धन्य वे जो धार्मिकता के कारण सताए जाते
  1148. 50:18हैं क्योंकि स्वर्ग का राज उन्हीं का है।
  1149. 50:20ओके। ये क्या है? इंपॉर्टेंट है। हम सब
  1150. 50:22क्या करते हैं? सताव से बहुत डरते हैं। पर
  1151. 50:24क्या है? यीशु ने क्या बोला कि धन्य है वे
  1152. 50:27जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं। आपने
  1153. 50:30अपने ऑफिस में गए, स्कूल में गए, आपने
  1154. 50:32किसी को यीशु मसीह के बारे में बताया और
  1155. 50:34उसने क्या किया? आपकी निंदा किया। अरे तू
  1156. 50:35तो बेकार है। तो हमें क्या करना है?
  1157. 50:37आनंदित होना है कि यीशु मसीह के नाम के
  1158. 50:40कारण मुझे सताया गया है। ये चीज क्या है?
  1159. 50:43मेरे लिए बहुत अच्छी बात है।
  1160. 50:45ठीक? तो हम हम डिसाइपल्स के गुण है। ठीक?
  1161. 50:48तो कभी घबराना नहीं है। आखिरी चीज क्या
  1162. 50:50है?
  1163. 50:53धन्य हो तुम जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी
  1164. 50:55निंदा करें और सताए और झूठ बोल बोलकर
  1165. 50:58तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी
  1166. 51:00बातें कहे
  1167. 51:02तब आनंदित और मग्न होना क्योंकि तुम्हारे
  1168. 51:05लिए स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिए कि
  1169. 51:07उन्होंने उन भव्यक्ताओं को जो तुमसे पहले
  1170. 51:09थे इसी रीति से सताया दास
  1171. 51:11एक और वचन अगला
  1172. 51:13तुम पृथ्वी के नमक हो परंतु यदि नमक का
  1173. 51:16स्वाद बिगड़ जाए तो वह फिर किस वस्तु से
  1174. 51:18नमकीन किया जाएगा
  1175. 51:19ओके क्या लिखा है कि तुम पृथ्वी के नमक
  1176. 51:21हो। विश्वासी पृथ्वी पर हैं। इसीलिए
  1177. 51:25पृथ्वी की इतनी अच्छी दशा है अभी। जब
  1178. 51:27विश्वासी को रैप्चर हो जाएगा तो क्या
  1179. 51:28होगा? मार्कल इस टाइम पे एकदम
  1180. 51:31जैसे कहते हैं ना कि कोई जो सब्जी है कुछ
  1181. 51:34बनाया हुआ है। उसमें नमक नहीं है तो क्या
  1182. 51:36है? टेस्टलेस होगा। विश्वासी है। इसलिए
  1183. 51:39पृथ्वी पर अभी थोड़ा स्वाद भी है। जब
  1184. 51:42विश्वासी नहीं रहेंगे पृथ्वी पे तो क्या
  1185. 51:44होगा? इसमें सिर्फ आग और गंधरस की सिर्फ
  1186. 51:47आगे बरसेंगी। मौतें होंगी। कुछ भी नहीं
  1187. 51:49होगा। तो इसमें से क्या कह रहा है कि तुम
  1188. 51:50पृथ्वी के नमक हो इसलिए क्या है यहां पर
  1189. 51:52कुछ चीजें अच्छी भी हैं। ओके? सो अभी
  1190. 51:55हमारा क्या है कि एग्जाम रहेगा तो छोटा सा
  1191. 51:57एग्जाम है। ओके? सो कोई सवाल अभी तक क्लास
  1192. 51:59से संबंधित?
  1193. 52:01आप लोग पूछ सकते हो क्लास से संबंधित कोई
  1194. 52:03सवाल है। तो यहां पे 15 क्वेश्चंस रहेंगे।
  1195. 52:05तो 15 में से एटलीस्ट आपको 12 का आंसर
  1196. 52:08करना है। ठीक? तो जहां पर भी आप अपनी
  1197. 52:10बाइबल अपने पास में रख सकते हो। ओपन बाइबल
  1198. 52:12के साथ एग्जाम होगा आपका। ओके? प्रार्थना
  1199. 52:14करते हैं। प्रभु यीशु मसीह धन्यवाद करते
  1200. 52:16हैं सुंदर समय के लिए। प्रभु आप हमको मदद
  1201. 52:18करना कि हम आपके पीछे सच्चे डिसाइपल्स की
  1202. 52:20तरह कैसे जैसे चल सकते हैं। परमेश्वर
  1203. 52:22प्रभु हम प्रसन्न रहना चाहते हैं जिंदगी
  1204. 52:25में। प्रभु हमारी मदद कीजिए। सहायता
  1205. 52:26कीजिए। आगे का समय आपके हाथों में सौंपते
  1206. 52:28हैं। प्रार्थना यीशु के नाम से मांगते
  1207. 52:30हैं। आमीन।
  1208. 53:08तो

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This page contains the full transcript of Fall- 2026 | Gosple | Class #15 & 16 by Mumbai Bible College & Seminary, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 9,523 words across 1,208 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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