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Fall- 2026 | GOSPEL | Class # 7/8 — Transcript

by Mumbai Bible College & Seminary · 11,477 words · 1,458 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:00के लिए आपने हमें यहां इस समय उपस्थित
  2. 0:03किया है। आपका वचन सुनने के लिए, आपका वचन
  3. 0:05सीखने के लिए। इस बात के लिए हम आपको
  4. 0:07धन्यवाद देते हैं।
  5. 0:10सर अभी पढ़ाने वाले हैं तो हमारा जो भी
  6. 0:13ध्यान है वचन में और सर के पास होना ऐसे
  7. 0:18ऐसे हम आपको प्रार्थना करते हैं और वचन
  8. 0:20सीखने के लिए हम एक उत्साह हमें हमारे
  9. 0:22जीवन में उत्पन्न करना और जब सर पढ़ाते
  10. 0:25हैं उनको भी मदद करना सहाय देना पवित्र
  11. 0:28आत्मा उनका सहाय सहायक बनना जो भी भाई आ
  12. 0:31रहे होंगे मार्गों पर होंगे उनका ही यहां
  13. 0:35पर सुरक्षित लाना और आने वाला आने वाले
  14. 0:38समय में अह एक अच्छा संदेश और अच्छा वचन
  15. 0:42हमें सीखने को मिलने पाए ऐसा ऐसी हम
  16. 0:44प्रार्थना करते हैं। आने वाले समय में आने
  17. 0:47वाला समय और ये सारी चीजों को आपके हाथों
  18. 0:49में समर्पित करते हैं। ये प्रार्थना प्रभु
  19. 0:51यीशु मसीह के नाम से मांगते हैं। आमीन।
  20. 0:56ओके। सो क्लास स्टार्ट करेंगे। सो पिछले
  21. 0:59क्लास में क्लास नंबर चार है आज मतलब सात
  22. 1:02और आठ। सो पिछले क्लास में हमने क्या सीखा
  23. 1:04था? कोई रिव्यू [गला साफ़ करने की आवाज़]
  24. 1:05करेंगे। थोड़ा थोड़ा सा रिव्यू और फिर हम
  25. 1:08अपनी आज की क्लास में जाएंगे।
  26. 1:10[गला साफ़ करने की आवाज़]
  27. 1:13हां, पिछली क्लास में क्या था कि हमने
  28. 1:15कैनन और अपुकफा के बारे में सीखा था। तो
  29. 1:18कैनन क्या है? जो कैनन है कि वो परमेश्वर
  30. 1:21से पूर्ण रूप से जो इंस्पायर्ड है पूरा
  31. 1:24किताब जो है वो क्या है? कैनन कि जिसमें
  32. 1:27परमेश्वर के द्वारा बिल्कुल त्रुटिपूर्ण
  33. 1:29गलतियां नहीं है। उसमें उसे बोलते कैनन।
  34. 1:31अपोक्राइफा क्या था? कि अपोराइफा जो लिखा
  35. 1:35गया है वह साइलेंट ईयर के बीच में लिखा
  36. 1:37गया था और उसमें क्या है कि वो इंस्पायर्ड
  37. 1:39नहीं है। उसमें अपनी-अपनी खुद की कहानी
  38. 1:42लिखी हुई है। ठीक और क्या था पिछले क्लास
  39. 1:44में?
  40. 1:46शैतान के चरित्र के बारे में
  41. 1:48हां बोलिए शैतान के चरित्र के बारे में
  42. 1:50क्या-क्या था?
  43. 1:55यस।
  44. 1:57हमने कुछ पॉइंट्स के बारे में देखा। जैसे
  45. 1:59हो गया जो पुराने
  46. 2:01ओके हां तो गोस्पल्स में क्या थे कि बहुत
  47. 2:04सारे [गला साफ़ करने की आवाज़] नाम हैं
  48. 2:06फरीसी शास्त्री सदुकीस मतलब जो भी नाम है
  49. 2:10उनके उनके ऑफिसिसेस हैं उनके काम क्या है
  50. 2:13तो वो कहां से आए कैसे स्टार्ट हुए क्या
  51. 2:15है अभी तो वो हमने दिखाया था लेकिन एक चीज
  52. 2:17था मला गलातियों के चार-चार में क्या था
  53. 2:21कि जब समय पूरा हुआ तो समय होने के कितने
  54. 2:23थे पॉइंट चार या पांच पॉइंट हमने उसमें
  55. 2:26लिखे थे कि समय पूरा होने का मतलब क्या है
  56. 2:28कि कि रोमन साम्राज्य फैल चुका था। पूरी
  57. 2:31दुनिया में ग्रीक भाषा जा रही थी। तो
  58. 2:33गोस्पल्स क्या हो रहा था? धीरे-धीरे बढ़
  59. 2:35सकता था। और उसके पहले क्या हुआ था?
  60. 2:37अनुवाद हो चुका था। तो ये चीजें क्या है
  61. 2:40कि समय पूरा होने का मतलब वही था। तो
  62. 2:42सड़कें बन चुकी थी तो क्या था कि लोग
  63. 2:45आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पर जा सकते
  64. 2:47थे। ठीक? सो आज हम दो घटनाओं को कवर
  65. 2:50करेंगे। तो हम जो एक क्लास करेंगे तो
  66. 2:52गोस्पल्स में कैसा है कि बहुत डिटेल्स है।
  67. 2:55तो हम थोड़ा कम सीखेंगे धीरे-धीरे सीखेंगे
  68. 2:58लेकिन क्या कर सकते हैं कि हम स्लोली
  69. 3:00स्लोली सीखें। हम जल्दी दौड़ेंगे तेजी से
  70. 3:03पढ़ेंगे तो क्या होगा कि हम बहुत सारी
  71. 3:04चीजों को स्किप कर देंगे। लेकिन हम थोड़ा
  72. 3:06सा कम चीजों को सीखें लेकिन क्या है कि
  73. 3:08अच्छे से सीख पाए उनको। ठीक? तो आज हम दो
  74. 3:11चीजों के बारे में पढ़ेंगे।
  75. 3:13हेलो चेक चला गया आवाज। हेलो चेक आ रहा
  76. 3:18है? हां। इधर तो नहीं आ रहा अभी अभी आया
  77. 3:20हां ओके सो लुका की किताब एक अध्याय
  78. 3:25वचन नंबर एक से लेकर चार तक पढ़िए
  79. 3:34उन बातों का जो हमारे बीच में इतिहास
  80. 3:38लिखने में हाथ लगाया है जैसे कि उन्होंने
  81. 3:40जो पहले से बातों के लिखने वाले और वचन के
  82. 3:43सेवक थे हम तक पहुंचाया इसलिए श्रीमान
  83. 3:48मुझे भी यह उचित मालूम हुआ कि उन सब बातों
  84. 3:52का संपूर्ण
  85. 3:54जान
  86. 4:02ओके तो यहां पर जब लोका लिखना शुरू करता
  87. 4:05है तो वो एक पहले एक वर्ड के बारे में
  88. 4:07लिखता है तो वर्ड क्या करता है लिखता है
  89. 4:10आरंभ से ठीक तो आरंभ से का मतलब क्या होता
  90. 4:14है कि स्टार्टिंग विद जॉन द बेप्टिस्ट कि
  91. 4:18उसने जो गोस्पल्स को लिखना शुरू किया नए
  92. 4:21नियम में तो कहां से शुरू हुआ? जॉन द
  93. 4:23बेप्टिस्ट की जो कहानी है यह बपतिस्मा
  94. 4:25दादा की उसने वहां से गोस्पल्स को तैयार
  95. 4:28किया। तो अगर कोई आपसे यह सवाल करता है कि
  96. 4:31400 साल जो साइलेंट ईयर थे शांति के समय
  97. 4:34थे तो सबसे पहली बार परमेश्वर ने स्वर्ग
  98. 4:40से कोई संदेश कब आया? पहली बार
  99. 4:44सबसे पहला संदेश 400 साल तक गॉड ने बात
  100. 4:46नहीं किया। उसके बाद में जब पहला संदेश
  101. 4:49स्वर्ग से आया तो वह संदेश कौन सा था?
  102. 4:52योना बपतिस्मा के जन्म के बारे में पहला
  103. 4:55संदेश 400 साल बाद लोगों को मिला। तो वो
  104. 4:58यह कहता है कि आरंभ से यानी स्टार्टिंग जो
  105. 5:00कर रहा है, वह कहां से कर रहा है? जॉन द
  106. 5:02बेप्टिस्ट के जीवन से कर रहा है क्योंकि
  107. 5:04पुराने नियम में भविष्यवाणी की गई थी कि
  108. 5:06क्या होगा कि प्रभु के मार्ग को तैयार
  109. 5:08करने के लिए पहले एक नबी आएगा तो वो कौन
  110. 5:11था यूनान्ना था तो जॉन द बेप्टिस्ट था तो
  111. 5:15जॉन द बेप्टिस्ट क्या हो रहा है कि लूका
  112. 5:16उसके बारे में यहां पर मेंशंस कर रहा है
  113. 5:19तो दूसरा वो लिखता है वचन नंबर तीन और चार
  114. 5:22में तो वचन तीन और चार में एक व्यक्ति के
  115. 5:24बारे में लिखता है थियोपुलस कि थियोपुलुस
  116. 5:27मुझे भी यह उचित मालूम हुआ कि उन बातों का
  117. 5:29संपूर्ण हाल आरंभ से ठीकठीक जांच करके
  118. 5:33उनके लिए क्रमान अनुसार लिखूं। तो लूका जो
  119. 5:36लिख रहा है वो थियोपुलस करके एक व्यक्ति
  120. 5:38है। तो इसके बारे में बहुत सारे सिद्धांत
  121. 5:40है कि थियोपुलस है कौन? ठीक? तो थियोपुलस
  122. 5:43जो है उसके नाम का मतलब होता है कि लवर ऑफ
  123. 5:46गॉड परमेश्वर का प्रिय है। तो लोगों का
  124. 5:49मानना है इतिहासकार में कि जो थियोपुलस था
  125. 5:53वो रोमन सोल्जर्स के एक उच्च पद पर रहने
  126. 5:56वाला व्यक्ति था। तो यह क्या कर रहा था कि
  127. 5:59इसने शुरू शुरू में यीशु मसीह पर विश्वास
  128. 6:02किया था और धीरे-धीरे अपने विश्वास में यह
  129. 6:05व्यक्ति मजबूत हो रहा था। तो यहां पर जब
  130. 6:08इंग्लिश में आप एक वर्ड देखोगे कि यहां पे
  131. 6:10लिखा है कि इंस्ट्रक्टेड एक के चार में
  132. 6:12लिखा है इंग्लिश में इंस्ट्रक्टेड तो उसे
  133. 6:14ग्रीक में वर्ड होता है कैटेक्यूमेन।
  134. 6:17कैटेमन जिसका मतलब है कि वह व्यक्ति
  135. 6:22जिसे मसीह धर्म की बुनियादी शिक्षाएं
  136. 6:25अभी-अभी दी जा रही हैं। तो कहने का मतलब
  137. 6:28क्या है कि थियोपुलस जो है वो एक रोमन से
  138. 6:30सोल्जर्स के पद पर उच्च पद पर तैनात है।
  139. 6:33तो उसे क्या कर रहा है कि लूका लिख रहा है
  140. 6:36ताकि क्या हो सके? वह विश्वास में मजबूत
  141. 6:38हो सके। तो इसके नाम का मतलब क्या है?
  142. 6:40थपुस का परमेश्वर का प्रिय है। ओके वचन
  143. 6:44नंबर
  144. 6:48पांच से स्टार्ट करेंगे। कुछ पंक्तियां
  145. 6:50देखेंगे। ओके। यहूदियों के राजा हेरोदिस
  146. 6:53के समय अब्या के दल में जकराया नामक का एक
  147. 6:57याजक था और उसकी पत्नी हारून के वंश की थी
  148. 7:01जिसका नाम एलिसबा था। ओके। तो यहां पर
  149. 7:04आपको तीन लोगों के नाम देखने को मिलेंगे।
  150. 7:07ओके? तीन नाम है। कौन-कौन है?
  151. 7:12पहला जकराया
  152. 7:18दूसरा एलिसिबा
  153. 7:22और तीसरा जॉन द बेप्टिस्ट
  154. 7:25यहना बपतिस्मा वाला ओके
  155. 7:30ओके इन तीनों के नाम का मतलब क्या है?
  156. 7:34जकरिया के नाम का मतलब होता है परमेश्वर
  157. 7:37याद रखता है।
  158. 7:59ओके इन तीनों के नाम का जो मतलब है जकरिया
  159. 8:04के नाम का मतलब होता है परमेश्वर याद रखता
  160. 8:07है और जो एलिसवा है वह क्या है? उसकी
  161. 8:11पत्नी है। तो एलिसिवा के नाम का मतलब होता
  162. 8:14है उसका वायदा।
  163. 8:17उसका वायदा और जो जॉन द बेप्टिस्ट है उसके
  164. 8:20नाम का मतलब है अनुग्रह की भेंट।
  165. 8:25तो अगर आप इन तीनों नामों को एक साथ
  166. 8:28जोड़ेंगे तो क्या बन रहा है?
  167. 8:32परमेश्वर याद रखता है अपने अनुग्रह की
  168. 8:36भेंट को। यह परमेश्वर क्या कह रहा है? इन
  169. 8:38तीनों के नाम का एक मतलब बन रहा है कि
  170. 8:41परमेश्वर याद रखता है अपने अनुग्रह की
  171. 8:44भेंट को।
  172. 8:46ठीक? वचन नंबर छह में जब जाएंगे तो वहां
  173. 8:49पर वो कहता है कि और वे दोनों परमेश्वर के
  174. 8:53सामने धर्मी थे और प्रभु की सारी आज्ञाओं
  175. 8:56और विधियों पर निर्दोष चलने वाले थे। ओके।
  176. 8:59तो यहां पर पहला सेंटेंस क्या लिखा? कि वो
  177. 9:02किसकी नजर में धर्मी थे?
  178. 9:05परमेश्वर की नजर में धर्मी थे। हमें किसकी
  179. 9:08नजर में धर्मी बनना चाहिए? इंसान की नजर
  180. 9:10में या परमेश्वर की नजर में? परमेश्वर की
  181. 9:13नजर में। कई बार क्या होता है कि हम इंसान
  182. 9:16की नजर में धर्मी बनने का प्रयास करते
  183. 9:18हैं। लेकिन यहां पर जकराया और एलिसिबा
  184. 9:20क्या है? परमेश्वर की नजर में धर्मी है।
  185. 9:23हमारे लिए बहुत बड़ा लेसन है कि हम इंसान
  186. 9:25की नजर में धर्मी ना बने बल्कि किसकी नजर
  187. 9:27में बने? परमेश्वर की नजर में हम धर्मी
  188. 9:30बने। ओके? सो यहां पर जो धर्मी वर्ड लिखा
  189. 9:33है राइचस उसका मतलब है कि
  190. 9:37इजराइल देश में 400 साल का अंधकार था।
  191. 9:40अंधकार का मतलब ब्लैक डेज थे। कोई बात
  192. 9:43नहीं हो रही थी और चारों तरफ पाप फैला हुआ
  193. 9:45था। बुराइयां चल रही थी और कोई भी अच्छा
  194. 9:48जीवन नहीं जी रहा था वहां पर। तो वहां पर
  195. 9:50क्या होता है कि उसके बावजूद भी ये लोग
  196. 9:53क्या कर रहे थे? पति पत्नी दोनों व्यक्ति
  197. 9:56धार्मिकता का जीवन जी रहे थे। ये कैसे
  198. 9:59संभव था कि पाप से भरी हुई दुनिया में ये
  199. 10:02लोग अपने आप को धर्मी बना के रखा था। तो
  200. 10:05बाइबल में दो वर्ड होते हैं। एक सिनलेस
  201. 10:08मतलब पाप रहित और एक राइचस। तो ये कौन सी
  202. 10:12श्रेणी में आते हैं धर्मी लोग?
  203. 10:18पाप रहित हैं या धर्मी? पाप रहित कौन होता
  204. 10:21है? कि जिसने कोई पाप ही नहीं किया।
  205. 10:23सिनलेस मतलब वो सिर्फ कौन है? यीशु मसीह
  206. 10:25है। लेकिन राजस मैन कौन होता है? धर्मी।
  207. 10:28मतलब कि जो बुराई से दूर रहने के लिए
  208. 10:31प्रयास करता है। याकूब की किताब चार
  209. 10:34अध्याय वचन नंबर चार पढ़ेंगे तो वहां पर
  210. 10:36एक वर्ड मिलता है। याकूब की किताब जेम्स
  211. 10:39चैप्टर फोर वर्स फोर
  212. 10:56साम्स
  213. 11:06चैप्टर 44
  214. 11:11क्या तुम
  215. 11:15ओके यहां पर एक वर्ड है प्रोग्रेशन दुनिया
  216. 11:20में चाहे दिन कितने भी बुरे हो लेकिन हमें
  217. 11:24क्या करना चाहिए परमेश्वर की आज्ञा के
  218. 11:26अनुसार अपने जीवन जीना चाहिए हम क्या
  219. 11:29देखते कई बार कि संसार गलत कर रहा है तो
  220. 11:31मैं भी क्या करूं उसके साथ में गलत करने
  221. 11:34लगूं लेकिन याकूब की किताब क्या कहती है
  222. 11:35चार चार में एक प्रोग्रेशन है कि मुझे
  223. 11:38क्या करना है? संसार से खुद को अलग करके
  224. 11:41रखना है। तो यहां पर जो है सिनलेस और
  225. 11:43ब्लेमलेस हम सिनलेस नहीं हो सकते हैं। हम
  226. 11:46पाप रहित नहीं हो सकते। वो कौन है? सिर्फ
  227. 11:48यीशु मसीह है। लेकिन हम क्या हो सकते हैं?
  228. 11:50परमेश्वर की नजर में ब्लेमलेस हो सकते
  229. 11:52हैं। यानी हमारे ऊपर क्या हो सकता है कि
  230. 11:55दोष रहित हमें अपना विश्वासी जीवन इस
  231. 11:58प्रकार से जीना चाहिए कि हमारे ऊपर क्या
  232. 11:59कर सके? कोई दोष ना लगा सके। जकरिया और
  233. 12:02एलिसिबा के समय पर क्या था? 400 साल से
  234. 12:04परमेश्वर ने बात नहीं किया है। बहुत
  235. 12:06तकलीफें हैं, बुराइयां हैं। हर प्रकार के
  236. 12:08पाप हो रहे लेकिन वो क्या कर रहे? फिर भी
  237. 12:11परमेश्वर की नजर में अपने चाल चलन को
  238. 12:13अच्छा बना के रखा है। पुराने नियम में अगर
  239. 12:16आप देखते हो जेनेसिस किताब में सात अध्याय
  240. 12:18वचन नंबर एक में क्या लिखा कि परमेश्वर की
  241. 12:20नजर में नूह धर्मी था। अयूब की एक एक में
  242. 12:23क्या लिखा है कि अयूब क्या था? परमेश्वर
  243. 12:25की नजर में खरा व्यक्ति था। समय चाहे
  244. 12:28कितना भी बुरा हो, बुराइयां चाहे कितनी भी
  245. 12:30हो लेकिन अगर मैं परमेश्वर की आज्ञाकारिता
  246. 12:33में जीवन जीना चाहता हूं तो क्या है कि
  247. 12:35मैं दोष रहित अपना जीवन जिऊंगा। तो जकरिया
  248. 12:38और एलिसिबा क्या कर रहे हैं यहां पर वही
  249. 12:40काम कर रहे हैं। तो दोष
  250. 12:41[नाक से की जाने वाली आवाज़] रहित का मतलब
  251. 12:42क्या हो सकता है? होता है कि कोई भी हमारे
  252. 12:45ऊपर खुलेआम कोई दोष ना लगा सके। हमें अपना
  253. 12:49जीवन ऐसे जीना है कि लोग हमारे ऊपर दोष ना
  254. 12:52लगा सके ताकि हमारी सेवकाई और हमारी चर्च
  255. 12:55के ऊपर कोई सवाल खड़ा ना कर सके अगर आप एक
  256. 12:58विश्वासी हो तो हमें अपना जीवन इस प्रकार
  257. 13:00से जीना अगर मैं कोई बुराई करता हूं तो
  258. 13:01क्या होगा हमारे ऊपर लोग उंगली उठाएंगे
  259. 13:04हमारी चर्च के लोग ऊपर उंगली उठाएंगे हम
  260. 13:06क्या है विश्वासी हैं तो हमें क्या करना
  261. 13:08चाहिए दूसरों के लिए रोल मॉडल बनना है तो
  262. 13:11जकरिया और एलिसिबा क्या कर रहे हैं यहां
  263. 13:13पर अपनी परमेश्वर की नजर में धार्मिकता का
  264. 13:16जीवन जी रहे हैं ओके तो हमें इंसान की नजर
  265. 13:21में नहीं बल्कि परमेश्वर की नजर में धर्मी
  266. 13:23बनना है। वचन नंबर सात में वो कहता है
  267. 13:27क्योंकि एलिसबा बांझ थी और वे दोनों बूढ़े
  268. 13:31थे। ओके वचन नंबर छह में एक चीज और लिखी
  269. 13:34है और वे दोनों परमेश्वर के सामने धर्मी
  270. 13:38थे। यहां पर एक व्यक्ति धर्मी है या
  271. 13:40दोनों?
  272. 13:43दोनों
  273. 13:45पति पत्नी दोनों क्या है? परमेश्वर की नजर
  274. 13:48में धर्मी हैं। ओके? सो दे वर बोथ
  275. 13:51राइचसनेस इनाइड ऑफ गॉड। ओके? यह एक
  276. 13:55एप्लीकेशन है बाइबल में कि पति और पत्नी
  277. 13:58को क्या होना चाहिए? ब्लेमलेस जीवन जीना
  278. 14:00चाहिए। वैवाहिक जीवन के दो पिलर होते हैं।
  279. 14:04वैवाहिक जीवन में दो पिलर्स हैं। एक ऐसा
  280. 14:08कहते हैं थियोलॉजी में मतलब सिखाते हैं कि
  281. 14:10अगर आपकी पत्नी है यहां पर क्या है?
  282. 14:12एलिसिबा और जकराया दोनों लोग क्या है?
  283. 14:14परमेश्वर की नजर में धार्मिकता का जीवन जी
  284. 14:17रहे हैं। तो पति पत्नी क्या होना चाहिए?
  285. 14:19संसार के लिए एक रोल मॉडल होना चाहिए कि
  286. 14:21आप लोग अपना जीवन किस प्रकार से ब्लेमलेस
  287. 14:24जी रहे हो। तो वैवाहिक जीवन के दो पिलर्स
  288. 14:27हैं। पहला है कि पति पत्नी का परमेश्वर के
  289. 14:31लिए प्रेम और पति पत्नी का आपस में एक
  290. 14:34दूसरे के लिए प्रेम। अगर
  291. 14:37दोनों प्रेम में से एक में भी कमी आएगी तो
  292. 14:39क्या होगा? उनका वैवाहिक जीवन ठीक नहीं चल
  293. 14:42पाएगा। अगर वह दोनों आपस में प्रेम नहीं
  294. 14:44करेंगे तो प्रभु से प्रेम नहीं कर पाएंगे।
  295. 14:46अगर वह दोनों परमेश्वर से प्रेम नहीं
  296. 14:48करेंगे तो क्या होगा? आपस में एक दूसरे
  297. 14:50प्रेम नहीं कर पाएंगे। तो कहने का मतलब
  298. 14:52क्या है कि दोनों व्यक्ति जब धार्मिकता का
  299. 14:56जीवन जी रहे हैं तो लोगों के लिए क्या है?
  300. 14:57वो रोल मॉडल है। तो अगर आपके पास परिवार
  301. 15:00है, वैवाहिक जीवन है तो आपको क्या करना
  302. 15:02है? ब्लेमलेस जीवन जीना है ताकि क्या कर
  303. 15:04सकें। लोग आपको आदर्श के रूप में मान
  304. 15:06सकें। ओके।
  305. 15:10वचन नंबर सात में वह कहता है क्योंकि
  306. 15:12एलिसवा बांझ थी और वे दोनों बूढ़े थे। जब
  307. 15:16वह अपने दल की पारी परमेश्वर के सामने
  308. 15:19याजक का काम करता था तो याजकों की रीति के
  309. 15:22अनुसार उसके नाम पर चिट्ठी निकली कि मंदिर
  310. 15:25में धूप में जाकर धूप जलाए। ओके? सो उनके
  311. 15:29पास क्या था? दोनों बूढ़े थे। उनके पास
  312. 15:32कोई संतान नहीं थी। मानते हैं कि लगभग में
  313. 15:35उनकी उम्र 50 60 साल के आसपास में थी।
  314. 15:38ठीक? तो यहां पे क्या होता है कि
  315. 15:44याजक जो थे याचकों का एक बड़ा दल हुआ करता
  316. 15:46था। ठीक? तो उनकी उम्र हो चुकी थी। लेकिन
  317. 15:49यह लोग क्या कर रहे थे? कई लंबे समय से
  318. 15:52बच्चे के लिए प्रार्थना कर रहे थे। ओके?
  319. 15:54सो यहां पर क्या कहता है कि संसार में अगर
  320. 15:58आप अपना धार्मिकता का जीवन जी रहे हो
  321. 16:00लेकिन संसार में लोग जीने वाले जो हैं
  322. 16:02उनके पास क्या है? पर एक आशीष है। यानी
  323. 16:05उनके पास एक विरासत मिली हुई है। बच्चे
  324. 16:08संतान होने की। लेकिन जो व्यक्ति परमेश्वर
  325. 16:10की नजर में धार्मिकता का जीवन जी रहा है।
  326. 16:13उसके पास क्या है? वो संतान हीन है। तो
  327. 16:16कितना बुरा लगेगा कि परमेश्वर मैं तो आपकी
  328. 16:18नजर में ब्लेमलेस जीवन जी रहा हूं। लेकिन
  329. 16:21संसार के लोगों के पास क्या है? उस बच्चे
  330. 16:24भरे पड़े हैं। भजन संहिता 17 के चार में
  331. 16:26लिखा है कि लेखक वहां पर यह कहता है कि
  332. 16:30संसार के लोगों के पास में संतान रूपी सुख
  333. 16:34है। क्योंकि यहूदी लोग ये चीज मानते थे कि
  334. 16:36अगर आपके पास में आपकी कोई संतान नहीं है
  335. 16:39तो क्या है? एक करसेट मानते थे। यानी अगर
  336. 16:42तुम्हारे पास कोई बच्चा नहीं है तो क्या
  337. 16:44हो? तुम श्रापित हो। लेकिन जब लूका ये
  338. 16:47लिखना प्रारंभ करता है कि वो परमेश्वर की
  339. 16:50नजर में धर्मी थे तो वो इस चीज को फोकस कर
  340. 16:52रहा है कि वो श्रापित नहीं है बल्कि क्या
  341. 16:55है? परमेश्वर की नजर में धर्मी व्यक्ति
  342. 16:58हैं। कई बार संसार इस आशीष से भरा होता
  343. 17:01है। लेकिन क्या होता है? कई बार विश्वासी
  344. 17:04इस आशीष को नहीं पाता है। लेकिन परमेश्वर
  345. 17:07इनके जीवन से कुछ हमें सिखाना चाहता है।
  346. 17:10ठीक? कुछ ऐसे लोगों के नाम कि जिन
  347. 17:14जिन्होंने प्रार्थना किया और उनको लंबे
  348. 17:16समय के बाद बच्चा मिला। पुराने नियम से
  349. 17:18कौन-कौन है?
  350. 17:21अब्राहम
  351. 17:24अन्ना बाइबल में कई ऐसे महान लोग हुए
  352. 17:28जिनका जीवन ऐसा था। ठीक? तो अब्राहम का
  353. 17:31क्या थी? कोई संतान नहीं थी। सारा ने
  354. 17:33प्रार्थना किया तो क्या हुआ? उनको एक
  355. 17:35याकूब बेटा मिला। ठीक। यूसुफ का जीवन उस
  356. 17:38प्रकार का था। सैमसन का जीवन उस प्रकार का
  357. 17:40था। जॉन द बेप्टिस्ट का जीवन भी क्या है?
  358. 17:42उस प्रकार का है। परमेश्वर हमें यह लेसंस
  359. 17:44दिखाना पड़ दिखाना चाहता है कि कई बार
  360. 17:47परमेश्वर अपनी आशीष को देने के लिए हमको
  361. 17:51लंबा इंतजार कराता है और जब वो हमको लंबा
  362. 17:54इंतजार कराता है तो क्या करता है? उसका
  363. 17:56आशीष भी हमको दोगना देता है। और यहां पर
  364. 18:00क्या हो रहा है कि जब हमने जिनके बारे में
  365. 18:02पढ़ा कि जिन्होंने बच्चे को देर में मिला
  366. 18:04उनको संतान देरी से हुई तो क्या हुआ
  367. 18:06यूनान्ना के बारे में क्या बोला यीशु मसीह
  368. 18:08ने कि वो सबसे बड़ा है। उसके बारे में
  369. 18:11वर्ड यूज़ किया गया। लेकिन सोचो कि जब हम
  370. 18:15कई बार क्या होते हैं? अपनी प्रार्थनाएं
  371. 18:16करते-करते थक जाते हैं और निराश हो जाते
  372. 18:18हैं। लेकिन प्रभु हमें अपने जीवन में यह
  373. 18:20लेसंस दिखाता है कि परमेश्वर कभी-कभी जिस
  374. 18:23चीज के लिए हमें इंतजार कराता है तो उसके
  375. 18:26बाद में वो हमको आशीष भी क्या करता है?
  376. 18:28दोगना देता है। और यहां पर क्या हुआ?
  377. 18:31जकराया एलिसवा के जीवन में जब परमेश्वर ने
  378. 18:34उनकी प्रार्थना को सुना तो क्या हुआ? उनको
  379. 18:37डबल आशीष दिया। जिसके बारे में यीशु मसीह
  380. 18:39ने क्या किया? तारीफ किया कि वो क्या है?
  381. 18:42सबसे बड़ा है। ठीक। मैथ्यू 111 पढ़ेंगे कोई
  382. 18:52मत्त किताब 11 का 11
  383. 18:58मैं तुमसे सच कहता हूं कि जो स्त्रियों से
  384. 19:01जन्म है उनमें से यह देने वाले से कोई
  385. 19:04बड़ा नहीं हुआ जो स्वर्ग के छोटे से छोटा
  386. 19:08है वह उससे बड़ा
  387. 19:10ओके यहां पर क्या है कि वही वर्ड यीशु
  388. 19:12मसीह ने जॉन द बेप्टिस्ट के बारे में लिखा
  389. 19:14देखा तो कई बार क्या करता है परमेश्वर
  390. 19:17हमें दोगुनी आशीष देने के लिए हमको लंबा
  391. 19:20इंतजार भी कराता है लेकिन क्या सिर्फ हम
  392. 19:23जकराया और एलिसवा की जिंदगी में ये चीज
  393. 19:25देखें कई बार उनकी जगह पर हम भी हो सकते
  394. 19:28हैं कि हम प्रार्थना कर रहे होते हैं किसी
  395. 19:30चीज के लिए एक बार दो बार 10 बार करते हैं
  396. 19:32पांच महीने 10 महीने करते हैं लेकिन क्या
  397. 19:35होता है आखिरी में हम हर थक कर उस
  398. 19:38प्रार्थना को हम करना बंद कर देते हैं और
  399. 19:39कहते कि शायद यह परमेश्वर की इच्छा नहीं
  400. 19:42है। यहां पर क्या था? उनकी प्रार्थनाओं के
  401. 19:44बारे में जिक्र नहीं है। लेकिन उन्होंने
  402. 19:45क्या किया? सबसे पहला फोकस जब स्वर्गदूत
  403. 19:48आता है तो क्या कहता है? मेरी पत्नी तो
  404. 19:49बूढ़ी है। अब्राहम ने भी क्या किया था?
  405. 19:51वही वर्ड को इस्तेमाल किया था। लेकिन
  406. 19:53परमेश्वर हमारे विश्वास को परखना चाहता है
  407. 19:56कि तुम कितने समय तक उन प्रार्थनाओं को
  408. 19:59मेरे सम्मुख रख सकते हो। जब हम इन
  409. 20:01पंक्तियों में आगे पढ़ेंगे। वचन नंबर 10
  410. 20:03और 11 में तो परमेश्वर बताता है कि हमारी
  411. 20:05प्रार्थनाएं किस प्रकार से परमेश्वर के
  412. 20:08सम्मुख प्रकट की जाती है। वचन नंबर नौ और
  413. 20:1310 10 में और धूप जलाने के समय लोगों की
  414. 20:17सारी मंडली बाहर प्रार्थना कर रही थी कि
  415. 20:20प्रभु का एक स्वर्ग दूत धूप की बेदी की
  416. 20:23दाहिने ओर खड़ा हुआ। उसको दिखाई दिया और
  417. 20:26जकराया देखकर घबराया और उस पर बड़ा भय छा
  418. 20:29गया। तो यहां पर कुछ वर्ड है कि जब जकराया
  419. 20:32अंदर जाता है धूप की वेदी को जलाने के लिए
  420. 20:35तो क्या होता है? बाहर लोग प्रार्थना कर
  421. 20:38रहे थे। जैसे ही धूप का धुआं ऊपर उड़ के
  422. 20:41जाएगा वैसे लोग क्या कर रहे हैं? बाहर
  423. 20:43प्रार्थना कर रहे हैं। ओके रेबुलेशन की
  424. 20:45किताब में
  425. 20:47आठ अध्याय वचन नंबर तीन में पढ़ेंगे कि
  426. 20:50उसके धूप जब ऊपर जाता है तो लोग बाहर
  427. 20:53प्रार्थना क्यों कर रहे थे?
  428. 21:08ए चैप्टर थ्री
  429. 21:14एक और स्वर्ग सोने का आया और के निकट खड़ा
  430. 21:18हुआ और उसको बहुत दुख दिया गया कि सब
  431. 21:22पवित्र प्रभु की प्रार्थनाओं के साथ सोने
  432. 21:24की उसकी पर जो सिंहासन के सामने चढ़ाया।
  433. 21:28ओके। स्वर्ग दूतों के हाथ में क्या है? एक
  434. 21:31सोने का धूप दान है और उसमें क्या हो रही
  435. 21:33है? लोगों की प्रार्थनाएं इकट्ठी हो रही
  436. 21:35हैं और परमेश्वर के सम्मुख वो पहुंच रही
  437. 21:38हैं। यह चीज क्या है? मंदिर के अंदर एक
  438. 21:41हमारे लिए प्रतीक था कि जब वो अंदर गया तो
  439. 21:44क्या हो रहा है? बाहर लोग प्रार्थना कर
  440. 21:46रहे हैं। तो यहां पर जो था कि जब जकराया
  441. 21:48अंदर जाता है तो यहूदियों के अनुसार में
  442. 21:52टोटल जो याजक थे वो लगभग में 24,000 याजक
  443. 21:55थे। 24000 थे तो उनके अलग-अलग गुट हुआ
  444. 21:58करते थे। तो लाइफ में जीवन में या साल में
  445. 22:02उनको एक बार मंदिर में अंदर जाने का मौका
  446. 22:05मिलेगा धूप की बेदी जलाने के लिए। तो
  447. 22:08जकराया जब अंदर जाता है तो क्या होता है
  448. 22:10कि एक एंज्स जो होता है वह प्रकट होता है।
  449. 22:13और क्या होता है जकराया डर जाता है एकदम
  450. 22:15से। तो क्यों डरता है जकराया एकदम?
  451. 22:24क्यों डर गया अचानक से?
  452. 22:37यस ओके अगर मैं अपने जीवन में कोई
  453. 22:41प्रार्थना को लंबे समय से कर रहा हूं और
  454. 22:44परमेश्वर उसका उत्तर नहीं दे रहा है तो
  455. 22:46क्या कारण हो सकते हैं उसके तीन कारण हो
  456. 22:49सकते हैं पहला कारण हो सकता है कि शायद
  457. 22:52मैं परमेश्वर के अनुसार नहीं मांग रहा
  458. 22:55हूं। ठीक? जो मैं मांग रहा हूं उसमें
  459. 22:58परमेश्वर की इच्छा नहीं है।
  460. 23:01दूसरा कारण हो सकता है कि मैं जो मांग रहा
  461. 23:04हूं वह समय से पहले मांग रहा हूं।
  462. 23:10परमेश्वर की इच्छा के अनुसार नहीं मांग
  463. 23:12रहा हूं। समय से पहले मांग रहा हूं। तीसरा
  464. 23:16कारण हो सकता है कि मैं ऐसे कोई पाप में
  465. 23:20जीवन जी रहा हूं जिसके कारण मेरी
  466. 23:22प्रार्थना परमेश्वर के सम्मुख नहीं पहुंच
  467. 23:25पा रही है।
  468. 23:33ठीक? मेरी प्रार्थना अगर गॉड आंसर्स नहीं
  469. 23:36कर रहा है तो शायद उसके तीन कारण हो सकते
  470. 23:38हैं कि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार हम
  471. 23:40अपना जीवन नहीं जी रहे। मतलब परमेश्वर की
  472. 23:42इच्छा के अनुसार नहीं मांग रहे हैं। समय
  473. 23:45से पहले मांग रहे हैं या फिर मैं ऐसे कोई
  474. 23:48पाप में जीवन जी रहा हूं जिसके कारण मेरी
  475. 23:51प्रार्थना परमेश्वर के सम्मुख नहीं पहुंच
  476. 23:54रही है। यशाया 59 के दो में लिखा है इसके
  477. 23:57बारे में।
  478. 23:59यया
  479. 24:0159 वर्स टू
  480. 24:05वहां पर यह तीसरा पॉइंट जो है उसके बारे
  481. 24:08में लिखा है
  482. 24:10कि मैं ऐसे कोई पाप में जी रहा हूं जिसके
  483. 24:12कारण क्या है परमेश्वर के सम्मुख मेरी
  484. 24:14प्रार्थनाएं नहीं पहुंच पा रही हैं।
  485. 24:24परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुमको
  486. 24:27तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है और
  487. 24:30तुम्हारे पापों के कारण उसका मुंह तुमसे
  488. 24:33ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता
  489. 24:37वह नहीं सुनता क्यों नहीं सुनता क्योंकि
  490. 24:40मैं ऐसे कोई पाप में जीवन जी रहा हूं
  491. 24:42जिसके कारण मेरी प्रार्थनाएं परमेश्वर के
  492. 24:44सम्मुख नहीं पहुंच पा रही हैं। लेकिन यहां
  493. 24:47पर एक एप्लीकेशन परमेश्वर हमको और सिखाना
  494. 24:49चाहता है। जकराया की जिंदगी से जकराया
  495. 24:52क्या करने के लिए गया अंदर?
  496. 24:54धूप की वेदी को जलाने के लिए गया। यानी
  497. 24:56कुछ वह काम करने के लिए गया। जब हम अपनी
  498. 24:59जिंदगी में व्यस्त होते हैं तब परमेश्वर
  499. 25:02की बुलाहट हमारे जीवन में आती है। यानी
  500. 25:05अगर मैं बिजी पर्सन हूं तो क्या करेगा?
  501. 25:08परमेश्वर हमें अपने काम के लिए हमको
  502. 25:11बुलावा देगा। मत मरकुज की किताब एक अध्याय
  503. 25:15वचन नंबर 16 से 20 तक पढ़ेंगे तो वहां पर
  504. 25:17हमें दिखाई पड़ता है।
  505. 25:20कि व्यस्त जीवन के बारे में कोई पड़ेगा।
  506. 25:22मति मार्क की मरकुस की किताब एक अध्याय
  507. 25:25वचन नंबर 16 से 20
  508. 25:36गरीब की झील के किनारे किनारे जाते हुए
  509. 25:39उसने उसने शो और उसके भाई को झील में जाल
  510. 25:43डालते देखा क्योंकि वे मछुए थे यीशु ने
  511. 25:46उनसे कहा मेरे पीछे आओ मैं तुमको मछुए
  512. 25:50बनाऊंगा
  513. 25:51ओके
  514. 25:52कौन कौन-कौन व्यस्त था? जब परमेश्वर ने
  515. 25:54उनको बुलाया।
  516. 25:57कोई मछलियां पकड़ने में व्यस्त था। कोई
  517. 26:00जाल सुधारने में व्यस्त था। मूसा भेड़
  518. 26:02बकरियां चराने में व्यस्त था। दाऊद भेड़
  519. 26:04बकरियां चरा रहा था। गिदोन क्या कर रहा
  520. 26:07था? गेहूं को झाड़ रहा था। कहने का मतलब
  521. 26:09क्या है? कि जब हम अपनी जिंदगी में व्यस्त
  522. 26:12होते हैं, बिजी होते हैं, तब परमेश्वर
  523. 26:14क्या करता है? अपनी बुलाहट को हमारे पास
  524. 26:16में भेजता है। और जकरिया क्या कर रहा है?
  525. 26:19धूप जलाने में व्यस्त है। तभी उसे
  526. 26:22परमेश्वर का दर्शन आता है। अगर मैं मेरी
  527. 26:24जिंदगी में व्यस्त रहूंगा तो क्या होगा?
  528. 26:26परमेश्वर मुझे अपने काम के लिए बुलाता है।
  529. 26:28पत्रस, अंदर्यास और उनके चेले क्या कर रहे
  530. 26:30थे? कहीं पर नदियों पर जाल संभाल रहे थे,
  531. 26:34मछलियां पकड़ रहे थे। लेकिन प्रभु ने क्या
  532. 26:36बोला? फॉलो मी और मेरे पीछे हो लो। अगर
  533. 26:39मैं अपनी जिंदगी में फ्री बैठा हूं तो
  534. 26:40शायद परमेश्वर मुझे नहीं बुलाएगा। लेकिन
  535. 26:42हम क्या करते? कई बार बहाना बनाते हैं कि
  536. 26:44परमेश्वर मैं बहुत व्यस्त हूं। लेकिन
  537. 26:46प्रभु कहता है कि तुम्हारे व्यस्त
  538. 26:48व्यस्तता के जीवन में जब तुम बिजी लाइफ
  539. 26:51में जी रहे हो तभी मैं तुम्हें क्या
  540. 26:52करूंगा? अपने काम के लिए बुलाऊंगा। ओके?
  541. 26:55सो वचन नंबर इसके आगे क्या होता है कि जब
  542. 26:59वो अंदर जाता है स्वरदूत के अंदर तो वहां
  543. 27:01पर स्वरदूत को देखता है तो डर जाता है। तो
  544. 27:04वेदी जो होती थी वेदी में राइट हैंड होता
  545. 27:06था। मतलब एक राइट एक लेफ्ट होता था। ठीक?
  546. 27:10मतलब हर एक जगह का राइट और लेफ्ट है।
  547. 27:13अकॉर्डिंग टू जस अगर लेफ्ट हैंड पर कोई
  548. 27:16खड़ा है तो कौन होगा? वो एंज्स होगा।
  549. 27:19स्वर्गदूत दिखाई देगा। और अगर राइट हैंड
  550. 27:22पर है तो वह गॉड का प्लेस है। वेदी के
  551. 27:28लेकिन यहां पर उसने कौन सी तरफ देखा?
  552. 27:31वचन नंबर
  553. 27:3411 में। वचन नंबर 11 में उसने एंज्स को
  554. 27:38किस तरफ देखा?
  555. 27:40लेफ्ट देखा। ओके। पढ़ो फिर से।
  556. 28:00कहां पे खड़ा है? दाहिने मतलब राइट हैंड
  557. 28:03पर। वो जगह किसकी है? गॉड की है। तो
  558. 28:06जकरिया क्यों डर गया अचानक से? क्योंकि
  559. 28:08मूसा ने क्या मूसा को क्या बोला था गॉड ने
  560. 28:10कि जो मुझे देखेगा वह क्या होगा मर जाएगा
  561. 28:14लेकिन उसने बाद में कंफर्म किया कि मैं
  562. 28:16क्या हूं एंजि्स हूं लेकिन मैं एंजि्स हूं
  563. 28:19और प्रभु ने क्या किया है अपनी ओर से मुझे
  564. 28:23तुमको कुछ बताने के लिए भेजा है एक कारण
  565. 28:26इसलिए डर गया दूसरा क्या था कि अगर कोई
  566. 28:28व्यक्ति पाप में जीवन जी रहा है और वह अगर
  567. 28:31वेदी के पास में गया तो क्या होगा उसके
  568. 28:33पाप के कारण वो मर जाएगा तो जकरिया सोच
  569. 28:36रहा है अपने मन में कि शायद मैं ऐसा कोई
  570. 28:38पाप तो नहीं किया कि जिसके कारण मैं अंदर
  571. 28:40आया हूं। अभी क्या होगा? मेरा मौत हो
  572. 28:42जाएगा। तो इसलिए वो देखता है कि राइट हैंड
  573. 28:45पर गॉड का जगह है और परमेश्वर को जो
  574. 28:47देखेगा वो क्या होगा? जीवित नहीं बचेगा।
  575. 28:50इसलिए क्या होता है? वह बहुत जल्दी अपने
  576. 28:52आप को डर में महसूस करने लगता है। ठीक? तो
  577. 28:54यहां पर कौन सा आता है? एंज्स
  578. 28:58एंज्स का नाम क्या था यहां पर? आने वाला
  579. 29:01जिब्राइल। तो बाइबल के अंदर कितने प्रकार
  580. 29:03के एंज्स हैं?
  581. 29:08ओके लका की लुका ने अपनी किताब में 23
  582. 29:12टाइम्स एंजि्स का मतलब वो किया है जिक्र
  583. 29:16किया है। 23 टाइम्स एंजि्स का जिक्र किया।
  584. 29:25ओके? तो कुछ टाइप्स के हैं एंजिल्स जिनके
  585. 29:27बारे में हम देख लेते हैं। पहला जो है
  586. 29:29उसको बोलते हैं
  587. 29:32मिखाइल।
  588. 29:34इसको बोलते हैं प्रधान सर्वदूत मिखाइल।
  589. 29:41इसका काम क्या था?
  590. 29:46युद्ध करना और
  591. 29:50इसका काम था युद्ध करना और परमेश्वर के
  592. 29:54लोगों की रक्षा करना।
  593. 30:02युद्ध करना और परमेश्वर की तरफ से लोगों
  594. 30:04की रक्षा करना। यह मीकायल का काम था। जिसे
  595. 30:08बोलते हैं प्रधान स्वर्गदूत।
  596. 30:13दूसरा जो स्वरदूत है उसे बोलते हैं करूब।
  597. 30:25ओके।
  598. 30:27करू है। इसका काम क्या होता था?
  599. 30:31परमेश्वर की पवित्रता की रक्षा करना।
  600. 30:37बाचा के संदूक के ऊपर कौन रहता था? करूब
  601. 30:41के चित्र होते थे। तो ये क्या करते हैं?
  602. 30:43परमेश्वर की पवित्रता की रक्षा करते हैं।
  603. 30:48तीसरा जो होता है एंजि्स वह किस प्रकार का
  604. 30:51होता है? सेराफिम।
  605. 30:58एस ई आर ए पी एच आई एम सैराफम
  606. 31:10इनका काम था आराधना करना पवित्रता की
  607. 31:14घोषणा करना यह लोग हमेशा पवित्र पवित्र
  608. 31:18पवित्र करके पुकारते थे इनका काम यह था
  609. 31:22परमेश्वर के पास खड़े रहेंगे पवित्र
  610. 31:24पवित्र पवित्र करके यह बोलते रहेंगे।
  611. 31:42ओके। अगला जो है वो उसे बोलते थे दूत यानी
  612. 31:46एंजि्स या मैसेंजर्स।
  613. 31:58इसका काम क्या होता था कि इनको सेवक के
  614. 32:02रूप में देखा जाता था।
  615. 32:05तो जिब्राइल जो है वह किस श्रेणी में आता
  616. 32:07है? इसी दूत वाली श्रेणी में आता है।
  617. 32:10एंज्स या मैसेंजर्स के रूप में। तो इनका
  618. 32:12काम क्या होता था? पहला काम होता था
  619. 32:15मनुष्यों तक परमेश्वर के संदेश को
  620. 32:17पहुंचाना।
  621. 32:25और इनका दूसरा काम होता था विश्वासियों की
  622. 32:29मदद करना।
  623. 32:33जब यीशु मसीह परीक्षा में थे तो क्या हो
  624. 32:37गए? वह बाद में चल फिर भी नहीं पा रहे थे।
  625. 32:38कमजोर हो गए। तो कौन आया उनके पास में?
  626. 32:40स्वरदूत उनके पास में आए थे। तो क्या करते
  627. 32:43यह विश्वासियों की मदद भी करते हैं और
  628. 32:45विश्वासियों के पास में जाकर परमेश्वर के
  629. 32:48संदेश को भी देते हैं। ठीक?
  630. 32:56और फिर आगे वह लोग कहते हैं जब एंजेल्स की
  631. 32:58मुलाकात होती है जकराया जकरया के पास में
  632. 33:01तो वचन नंबर 15 में वो कुछ घोषणा करते हैं
  633. 33:04और वह प्रभु के सामने महान होगा और दाखरस
  634. 33:08और मदिरा कभी ना पिएगा और अपनी माता के
  635. 33:11गर्भ से ही पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो
  636. 33:14जाएगा। यह किसके बारे में बताया जा रहा
  637. 33:16है? जॉन द बेप्टिस्ट के बारे में वह लोग
  638. 33:18क्या कर रहे हैं? कुछ घोषणा कर रहे हैं।
  639. 33:20तो यह जॉन द बेप्टिस्ट कौन था?
  640. 33:26कौन था?
  641. 33:32यस नाजीर सुना नाजिर
  642. 33:35परमेश्वर का चुनाव हुआ कोई खास व्यक्ति
  643. 33:37उसको बोलते थे नाजरीन तो इसके लिए क्या
  644. 33:39किया? उन लोगों ने कुछ क्वालिटीज लिख दिए।
  645. 33:41बाइबल में कौन-कौन हुआ? जो अगर कोई नाज़री
  646. 33:45नाज़र कहलाया जाएगा उसके लिए तीन चीजें थी।
  647. 33:48वो क्या कर सकता है? पहला चीज वह कभी भी
  648. 33:50शराब को वाइन को हाथ नहीं लगाएगा। दूसरा
  649. 33:54था कि वह कभी भी शादी नहीं करेगा। तीसरा
  650. 33:57था कि वह कभी भी किसी मृत व्यक्ति की बॉडी
  651. 34:01को टच नहीं करेगा। तो यह बपतिस्मा वाला
  652. 34:04कहां रहता था? और क्या खाता था? जंगलों
  653. 34:07में रहता था और दाग मतलब
  654. 34:10शराब से दूर रहता था। तो बाइबल में
  655. 34:12कौन-कौन हुआ ना? इस प्रकार से तो दो
  656. 34:15प्रकार के नाजीर होते थे। एक जो होते थे
  657. 34:18जैसे सैमसन था वो क्या था परमेश्वर के लिए
  658. 34:21पूर्ण रूप से था सम्य था वो क्या था
  659. 34:23परमेश्वर के लिए पूर्ण रूप से था लेकिन
  660. 34:25कुछ टेंपरेरी भी नाजिर हुआ करते थे यानी
  661. 34:27कुछ समय के लिए तुम क्या कह सकते हो खुद
  662. 34:30को नाजिर बना सकते हो पौलुस भी उस श्रेणी
  663. 34:32में आता था कि कुछ समय के लिए तुम मन्नत
  664. 34:34मांग सकते हो कि परमेश्वर मुझे इतने समय
  665. 34:37के लिए आपके लिए क्या करना है नाजिर बन के
  666. 34:39रहना है तो योना क्या है वचन नंबर 15 के
  667. 34:43अनुसार में कि वो क्या होगा एक नाजिर
  668. 34:46कहलाएगा परमेश्वर ेश्वर का चुना हुआ विशेष
  669. 34:49व्यक्ति।
  670. 34:50ठीक? [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  671. 34:52वचन नंबर 13 में वापस जाएंगे और वहां पर
  672. 34:55एक वर्ड लिखा है। परंतु स्वरदूत ने उससे
  673. 34:58कहा हे जकराया भयभीत ना हो क्योंकि तेरी
  674. 35:02प्रार्थना सुन ली गई है। ओके? तेरी
  675. 35:05प्रार्थना सुन ली गई है। इसका ग्रीक में
  676. 35:07मतलब है न्यू टेस्टामेंट में यह वर्ड
  677. 35:10सिर्फ पांच बार इस्तेमाल हुआ है कि तेरी
  678. 35:13प्रार्थना सुन ली गई है। मतलब जो ग्रीक
  679. 35:15में है उसका सिर्फ पांच बार इस्तेमाल हुआ
  680. 35:17है और वह कहता है कि जिस दिन तूने
  681. 35:20प्रार्थना की थी उसी दिन तेरी प्रार्थना
  682. 35:23सुन ली गई थी। लेकिन उसका फल जो है वह आज
  683. 35:27तुझे दिया जा रहा है। कई बार क्या होता है
  684. 35:30कि हम जब परमेश्वर के पास प्रार्थनाएं
  685. 35:32करते हैं तो परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं
  686. 35:34को सुन लेता है। लेकिन जिस दिन हम उसको
  687. 35:37महिमा देते हैं उस दिन क्या करता है? वह
  688. 35:39हमको उसका फल देता है। तो यहां पर
  689. 35:42परमेश्वर ने वही वर्ड इस्तेमाल किया कि तू
  690. 35:44जब पिछले समय में तूने आज के 20 साल 30
  691. 35:47साल पहले प्रार्थना की थी। उसी समय पर
  692. 35:49मैंने तेरी प्रार्थना को सुन लिया था।
  693. 35:51लेकिन आज तूने मुझे महिमा दिया तो क्या
  694. 35:54हुआ? उसका तुझे फल दिया गया। ठीक? वचन
  695. 35:58नंबर 18 से लेकर 24 तक एक अविश्वास के
  696. 36:01बारे में कोई पढ़ेगा? वर्स 18 टू 24
  697. 36:08हां।
  698. 36:10ने स्वर्ग से पूछा मैं कैसे जान? क्योंकि
  699. 36:13मैं तो बुरा हूं और मेरी पत्नी भी पूरी हो
  700. 36:16गई। पर उसको उत्तर दिया इब्राहिम तुम
  701. 36:19परमेश्वर के सामने खड़ा रहता हूं और मैं
  702. 36:22तुझसे बातें करने और तुझे कुछ बात सुनाने
  703. 36:25को भेजा गया जिस दिन तक बात ये बाते पूरी
  704. 36:29ना हो उस दिन तक तू मौन रहेगा और बोल ना
  705. 36:32सकेगा इसलिए कि तूने मेरी बातों की जो
  706. 36:35अपने समय पर पूरी
  707. 36:39ओके यहां पे जकरिया क्या कर रहा है
  708. 36:42परमेश्वर से एक चिन्ह मांग रहा है और
  709. 36:45चिन्ह क्या है कि अगर ऐसा होगा तो मुझे
  710. 36:48कोई चिन्ह दो। कई बार क्या होता है कि हम
  711. 36:50अपनी प्रार्थनाओं में भी परमेश्वर से
  712. 36:52चिन्ह मांगते हैं। लेकिन क्या होता है?
  713. 36:55फेथ इज ब्लेस्ड बट अनबिलीफ इज जज। विश्वास
  714. 36:59जो है वह आशीष लाता है। लेकिन अविश्वास का
  715. 37:02क्या होता है? न्याय होता है। तो यहां पर
  716. 37:04इसने क्या मांगा? एक चिन्ह मांगा कि मुझे
  717. 37:06चिन्ह दो। तो क्या दिया परमेश्वर ने उस
  718. 37:08चिन्ह उसको? कि जब तक तेरा बेड़ा पैदा
  719. 37:11नहीं होगा जब तक क्या होगा? तू गूंगा हो
  720. 37:13जाएगा। तो विश्वास क्या करता है? हमको
  721. 37:16आशीष देता है। अविश्वास क्या करता है?
  722. 37:18हमारा न्याय करता है। जिस व्यक्ति ने
  723. 37:21सामने से एंज्स को देखा, स्वर्ग दूत को
  724. 37:24देखा, वो क्या कर रहा है? चिन्ह को मांग
  725. 37:27रहा है। तो कई बार क्या करते? हम भी
  726. 37:29परमेश्वर से जब प्रार्थना करते हैं तो
  727. 37:31चिन्हों की मांग करते हैं कि परमेश्वर अगर
  728. 37:33ऐसा होगा तो मुझे कोई चिन्ह दिखाओ। लेकिन
  729. 37:35परमेश्वर क्या कहते हैं कि विश्वास तुमको
  730. 37:38आशीष देगा। और अविश्वास क्या करेगा?
  731. 37:41तुम्हारा न्याय करेगा। तो जकर क्या हुआ?
  732. 37:43यहां पर एक न्याय हुआ कि वो क्या हो गया?
  733. 37:45गूंगा हो गया। ठीक? इफिशियंस 320 में लिखा
  734. 37:49है कि परमेश्वर तुम्हारी सोच से ज्यादा
  735. 37:52तुमको देगा। जितना हम मांगते हैं परमेश्वर
  736. 37:55क्या करेगा? हमारी सोच से कई ज्यादा देगा।
  737. 37:58जकरिया और एलिसिबा ने कई साल पहले इसके
  738. 38:01लिए प्रार्थना किया था। लेकिन प्रभु ने
  739. 38:02क्या दिया? उसको एक प्रॉफिट दिया और जिसके
  740. 38:05बारे में यीशु मसीह ने खुद तारीफ किया। तो
  741. 38:08क्या करता है? परमेश्वर हमारी सोच से
  742. 38:11ज्यादा हमको देता है 320 के अनुसार में
  743. 38:15ठीक अगला जो यह घटना एक है
  744. 38:19ओके यह पहली घटना थी यहना के बारे में
  745. 38:25अभी दूसरी घटना देखते हैं बाइबल में
  746. 38:28यीशु के जन्म के बारे में
  747. 38:43ओके स्वर दूतों ने यीशु के जन्म की
  748. 38:45भविष्यवाणी की।
  749. 38:50ओके। लूका का एक अध्याय
  750. 38:55और मत्त का एक अध्याय।
  751. 39:07यीशु मसीह की वंशावली में
  752. 39:10कितनी स्त्रियों के नाम है?
  753. 39:15अगर आपने पढ़ा है आज
  754. 39:26यस
  755. 39:36ओके। चार स्त्रियों के नाम यीशु मसीह की
  756. 39:39वंशावली में है। तो चारों कौन-कौन सी हैं?
  757. 39:41तामार है। और वो तामार क्या थी? एक
  758. 39:44प्रोस्टट्यूट यानी वैश्या का रूप उसने
  759. 39:46धारण किया था यहूदा के साथ में अपने वंश
  760. 39:49को बढ़ाने के लिए। दूसरा जो स्त्री थी वो
  761. 39:52राहब थी। यह एक विदेशी प्रोस्टट्यूट थी।
  762. 39:56मतलब राहब जो थी इसने क्या किया था? जब
  763. 39:58भेद भेद लेने के लिए आए थे तो उसने अपने
  764. 40:00घर में लोगों को छिपाया था। ठीक? तो प्रभु
  765. 40:03क्या कर रहा है? इनसे हमें कुछ सिखाना
  766. 40:05चाहता है। रूथ क्या थी? अन्य जाति की
  767. 40:08महिला थी। और चौथी महिला कौन थी? बैत सभा
  768. 40:11जिसके साथ में क्या हुआ था? दाऊद ने दाऊद
  769. 40:14के साथ में व्यभचार किया था। उससे सुलेमान
  770. 40:16पैदा हुआ।
  771. 40:19ओके।
  772. 40:22यीशु मसीह के वंशा बलिया में इन चार
  773. 40:24स्त्रियों के नाम है। ठीक। तीन क्या है?
  774. 40:27इस प्रकार की है मतलब जिनसे कोई प्यार
  775. 40:28नहीं करता नफरत करते हैं लोग एक क्या है
  776. 40:31अन्य जाति है परमेश्वर हमें इससे क्या
  777. 40:33सिखाना चाहता है इनके जीवन इनको अपनी
  778. 40:36वंशावलियों में क्या क्यों लिया यीशु मसीह
  779. 40:38ने सोचो कि इनकी जगह पर कितने अच्छे-अच्छे
  780. 40:41बड़े-बड़े लोग होते तो कितना अच्छा लगता
  781. 40:43कि अरे वाह यीशु मसीह तो उस वंश से आए
  782. 40:45लेकिन अगर कोई पढ़ेगा तो क्या सोचेगा कि
  783. 40:48यह इस प्रकार की महिलाओं के वंशज से चले
  784. 40:50हुए आए तो प्रभु हमें क्या सिखाना चाहता
  785. 40:52है इसमें
  786. 40:56जो व्यक्ति
  787. 40:57विश्वास के साथ जीवन जीता है। परमेश्वर
  788. 41:00उसके अतीत को नहीं देखता है। यह जो
  789. 41:02स्त्रियां थी यह क्या कर रही थी? अपना
  790. 41:05जीवन विश्वास के साथ जी रही थी। तो
  791. 41:07परमेश्वर ने जब इनका न्याय किया तो इनके
  792. 41:10अतीत को देख के नहीं किया कि तुमने अपने
  793. 41:12पास्ट में क्या किया? अगर परमेश्वर मुझे
  794. 41:15चुनना चाहता है अपने काम के लिए तो
  795. 41:18परमेश्वर क्या करेगा? मेरे अतीत को कभी
  796. 41:20नहीं देखेगा कि मैंने पास्ट में क्या किया
  797. 41:22था। शैतान क्या करता है? हमारे पास्ट को
  798. 41:24देखता है कि मैंने पिछले जीवन में क्या
  799. 41:26किया। लेकिन परमेश्वर क्या देखता है?
  800. 41:28हमारे वर्तमान को देखता है कि वर्तमान में
  801. 41:30मैं किस प्रकार से अपना जीवन जी रहा हूं।
  802. 41:33तो वैद सभा थी, राह थी, रूत थी। ये क्या
  803. 41:36थे? वर्तमान में परमेश्वर के साथ चलने
  804. 41:39वाले थे। तो प्रभु यह सिखाना चाहता है कि
  805. 41:41जो व्यक्ति विश्वास से अपना जीवन जीता है,
  806. 41:44परमेश्वर उसके अतीत को नहीं देखता है। अगर
  807. 41:48मैं इनके जीवन को देखूंगा तो क्या करूंगा?
  808. 41:50हम इंसान होने के नाते से घृणा करूंगा कि
  809. 41:52परमेश्वर मुझे ऐसे लोगों के साथ रहना भी
  810. 41:53नहीं है, बैठना भी नहीं है। लेकिन प्रभु
  811. 41:55क्या करता है? ऐसे लोगों को अपनी वंशज
  812. 41:58यानी अपनी श्रेणियों में लेकर आया। तो
  813. 42:00कहना क्या चाहता है प्रभु कि जो व्यक्ति
  814. 42:03विश्वास से चलेगा परमेश्वर उसके अतीत को
  815. 42:05लेकर जजमेंट नहीं करेगा। तो यहां पर क्या
  816. 42:08है कि इन चार स्त्रियों के बारे में
  817. 42:09परमेश्वर वही हमको सिखाना चाहता है। और जब
  818. 42:12भी मैं सोचूं कि परमेश्वर मैं तो बहुत
  819. 42:15बुरा हूं। मैंने अपने अतीत में ऐसे ऐसे
  820. 42:17काम किए तो प्रभु क्या कहेगा क्या तुम
  821. 42:19इनसे ज्यादा बुरे तो नहीं हो सकते हो।
  822. 42:21परमेश्वर जब इन लोगों को अपने काम के लिए
  823. 42:24इस्तेमाल कर सकता है तो क्या हमें
  824. 42:26इस्तेमाल नहीं कर सकता है वो? कई बार क्या
  825. 42:28होता है कि हम अपने ऊपर भरोसा नहीं रखते
  826. 42:31कि प्रभु मैं तो छोटा हूं। बोलने में
  827. 42:33अच्छा नहीं हूं। मेरा अतीत ऐसा था। मैंने
  828. 42:36कुछ पढ़ाई नहीं किया था। तमाम चीजें क्या
  829. 42:38करते? अपने अतीत के बारे में बात करते
  830. 42:40हैं। लेकिन प्रभु क्या कहता है? कि अगर
  831. 42:41मैं इन लोगों को इस्तेमाल कर सकता हूं तो
  832. 42:44मैं तुमको भी इस्तेमाल कर सकता हूं। ओके
  833. 42:47ठीक ब्रेक लेंगे और फिर देखें
  834. 57:26सो लुका का एक अध्याय और मत्त के एक
  835. 57:29अध्याय में हम यीशु मसीह के जन्म के बारे
  836. 57:32में देखेंगे। ठीक? मत्त का एक अध्याय वचन
  837. 57:36नंबर 18 से लेकर हम पढ़ेंगे।
  838. 57:39अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हुआ कि
  839. 57:43जब उसकी माता मरियम की मंगनी
  840. 57:46यूसुफ के साथ हो गई तो उनके इकट्ठे होने
  841. 57:49से पहले वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती
  842. 57:52पाई गई। सो उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था
  843. 57:56उसे बदनाम करना नहीं चाहता था। उसे चुपके
  844. 57:59से त्याग देने की मंशा की। जब वह इन बातों
  845. 58:02के बारे में सोच ही रहा था तो प्रभु का
  846. 58:04स्वर्गदूत उसे सपने में दिखाई देकर कहने
  847. 58:07लगा हे यूसुफ दाऊद की संतान तू अपनी पत्नी
  848. 58:11मरियम को अपने यहां ले आने से मत डर
  849. 58:13क्योंकि जो उसके गर्भ में है वह पवित्र
  850. 58:16आत्मा की ओर से है। वह पुत्र जनेगी और
  851. 58:20उसका नाम यीशु रखना क्योंकि वह अपने लोगों
  852. 58:23का उनके पापों से उद्धार करेगा। यह सब कुछ
  853. 58:27इसलिए हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यवक्ता
  854. 58:30के द्वारा कहा था वह पूरा हुआ कि देखो एक
  855. 58:34कुंवारी गर्भवती होगी एक पुत्र जनेगी उसका
  856. 58:37नाम इम्युएल रखना जिसका अर्थ है परमेश्वर
  857. 58:40हमारे साथ है। ठीक? तो यह जो पंक्तियां है
  858. 58:43वह यीशु मसीह के जन्म के बारे में बताती
  859. 58:45हैं। लेकिन कुछ सवाल हमारे पास रहेंगे इन
  860. 58:48पंक्तियों से लेकर कि जब वो कहता है कि
  861. 58:52मैं अपनी पत्नी को चुपके से त्यागने का
  862. 58:55विचार करता है तो कहता है कि उसे मत
  863. 58:57त्यागो। तो वह पत्नी उसको क्यों बोलता है
  864. 58:59कि जब उनकी शादी नहीं हुई है तो वो पति
  865. 59:02पत्नी कैसे कहला रहे हैं? अकॉर्डिंग टू जस
  866. 59:05यहूदियों के अनुसार में क्या होता था कि
  867. 59:07एक बार अगर किसी की मंगनी हो गई ना
  868. 59:10इंगेजमेंट उनकी हो गई तो फिर वो क्या है
  869. 59:12कि पति पत्नी के तौर पर एक दूसरे को बुला
  870. 59:16सकते थे उनका रिश्ता वैसा हो सकता था
  871. 59:19लेकिन अगर वह कह रहा है कि मैं उसको चुपके
  872. 59:21से त्याग दूंगा जब वह पति पत्नी नहीं है
  873. 59:24तो त्यागना क्यों पड़ेगा क्योंकि उनको
  874. 59:25सिर्फ यह कहना था एक डिवोर्स की तरह पर
  875. 59:28लिखना था कि अब हम क्या हैं पति पत्नी
  876. 59:30नहीं है तो वह अलग रह सकते थे। तो यह क्या
  877. 59:33था? यहूदियों के अनुसार था। तो कई लोग
  878. 59:36क्या करते हैं? सवाल उठाते हैं कि वो पतिप
  879. 59:38थे लेकिन पतिप नहीं थे। वो क्या थे? सिर्फ
  880. 59:40उनकी मंगनी हुई थी। इंगेजमेंट हुई थी।
  881. 59:43लेकिन वो पतिप्नी नहीं हुए थे। तो यहां पे
  882. 59:45क्या होता था कि जब मंगनी होती थी
  883. 59:47यहूदियों में तो जब लड़की के यहां पर
  884. 59:49मंगनी हुई उस मंगनी का मतलब इंगेजमेंट हुआ
  885. 59:52तो क्या होता था कि एक हफ्ते तक बहुत दम
  886. 59:55जश्न चलता था। तो जसन में क्या होता था?
  887. 59:57खूब अच्छी तरीके से सब कुछ हुआ होता था।
  888. 59:59तो जब मंगनी करके जो दूल्हा है वो क्या
  889. 1:00:02करेगा अपने घर वापस चला जाएगा और क्या
  890. 1:00:05करेगा कि लड़की के लिए अपने पिता के घर
  891. 1:00:08में मतलब जहां पे उसका घर है उसके लिए
  892. 1:00:10सारा सामान लेके आएगा सब कुछ व्यवस्थित
  893. 1:00:13करेगा और फिर वो क्या करेगा कि एक दिन
  894. 1:00:16चुपके से जाएगा अपनी पत्नी को लेने के लिए
  895. 1:00:18तो पत्नी का रोल क्या होता था कि पत्नी जो
  896. 1:00:21है उसको हमेशा रेडी रहना पड़ता था तो वो
  897. 1:00:24लोग क्या करते थे अपने घर में जैसे किसी
  898. 1:00:26की मंगनी हुई तो मंगनी के बाद क्या करते
  899. 1:00:28थे कि घर के बाहर बाहर बच्चों को छोड़
  900. 1:00:30देते थे मतलब रखते थे कि बच्चे क्या
  901. 1:00:32करेंगे मतलब बाहर से अगर कोई लड़का आता है
  902. 1:00:34तो बता सकता कि वो तुमको दूल्हा लेने के
  903. 1:00:36लिए आ रहा है तो ये क्या था उनका एक मतलब
  904. 1:00:39यहूदियों के मतलब उनकी शिक्षा के अनुसार
  905. 1:00:42था तो यहां पर एक लेसंस क्या है
  906. 1:00:46कलीसिया क्या है
  907. 1:00:49यीशु मसीह की दुल्हन है यीशु मसीह कौन है
  908. 1:00:51दूल्हा है तो यहां पर क्या सिखाना चाहता
  909. 1:00:53है कि यीशु मसीह ने क्या बोला कि मैं अपने
  910. 1:00:56पिता के घर में जा रहा हूं क्या करने के
  911. 1:00:58लिए तुम्हारे लिए जगह को तैयार करने के
  912. 1:01:00लिए जा रहा हूं। और यीशु मसीह क्या होंगे?
  913. 1:01:02एक दिन चुपके से आएंगे। हमको वह चीज पता
  914. 1:01:05नहीं होगी। तो यह चीज क्या है? बाइबल के
  915. 1:01:07अकॉर्डिंग बिल्कुल सच है। जिस प्रकार से
  916. 1:01:09दूल्हा अपनी पत्नी को मंगेतर अपनी
  917. 1:01:12मंगेतरनी को मतलब उसकी मंगनी जिसके साथ
  918. 1:01:14होती थी उसको बताता नहीं था कि मैं कब
  919. 1:01:16आऊंगा वापस लौट के। सरप्राइजिंग होता था
  920. 1:01:18उनके लिए लेकिन दुल्हन को क्या करना पड़ता
  921. 1:01:20था कि वो हमेशा तैयार रहे कि उसका दूल्हा
  922. 1:01:23कभी भी आ सकता है। तो आज क्या होना चाहिए?
  923. 1:01:26कलीसिया को भी तैयार होना चाहिए कि क्या
  924. 1:01:28हो सकता है? दूल्हा कभी भी हमको लेने के
  925. 1:01:30लिए आ सकता है। तो यीशु मसीह ने क्या बोला
  926. 1:01:32जाते समय यही बोला कि मैं तुम्हारे लिए
  927. 1:01:34क्या कर रहा हूं? जगह को तैयार करने के
  928. 1:01:36लिए अपने पिता घर में जा रहा हूं। और यीशु
  929. 1:01:38मसीह क्या हो सकते हैं? कभी भी आ सकते
  930. 1:01:40हैं। तो यहां पर जो है वो पति पत्नी नहीं
  931. 1:01:42थे। वो क्या थे? सिर्फ एक उनकी सिर्फ सगाई
  932. 1:01:44हुई थी। ठीक? पहली चीज। दूसरी चीज वो कहता
  933. 1:01:48है लूका के एक अध्याय वचन नंबर 35 में।
  934. 1:01:52लुका का एक अध्याय वचन नंबर 35
  935. 1:01:57[नाक से की जाने वाली आवाज़]
  936. 1:01:59स्वर्ग दूत ने उसको उत्तर ओके 34 से पढ़ते
  937. 1:02:04मरियम ने स्वर्ग दूत से कहा यह क्यों होगा
  938. 1:02:07मैं तो किसी पुरुष को जानती ही नहीं
  939. 1:02:09स्वर्ग दूत ने उसको उत्तर दिया कि पवित्र
  940. 1:02:12आत्मा तुझ पर उतरेगा और परम प्रधान की
  941. 1:02:15सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिए वह पवित्र
  942. 1:02:19जो उत्पन्न होने वाला है परमेश्वर का
  943. 1:02:22पुत्र कहलाएगा। तो यहां पर जो वर्ड लिखा
  944. 1:02:25है छाया उसका मतलब होता है शैडो। ठीक? तो
  945. 1:02:28हम सवाल यह करेंगे यहां पर
  946. 1:02:34माता-पिता के मिलन से जो बच्चे पैदा हुए
  947. 1:02:38वो क्या है? पापी कहलाएंगे। ठीक। लेकिन
  948. 1:02:41अगर जो मरियम से पैदा हुआ अकेला तो क्या
  949. 1:02:44वह पापी नहीं कहलाएगा?
  950. 1:02:47कैसे?
  951. 1:02:51क्योंकि मरियम के अंदर तो ब्लड है ना
  952. 1:02:54मरियम मरियम के माता-पिता से जो पैदा हुआ
  953. 1:02:57आदम ने पाप किया आदम से क्या है जनरेशन
  954. 1:03:00बाय जनरेशन चलता चला आ रहा है लेकिन
  955. 1:03:04यूसुफ उसमें भले ही इनवॉल्व नहीं है लेकिन
  956. 1:03:07मरियम तो इनवॉल्व है ना उसकी कोख से तो
  957. 1:03:09पैदा ले रहा है ना बच्चा जन्म तो मरियम के
  958. 1:03:12अंदर तो पापी स्वभाव है ना मरियम तो
  959. 1:03:15पवित्र नहीं है मरियम के अंदर पापी स्वभाव
  960. 1:03:17है तो वो यीशु के अंदर क्यों कैरी नहीं
  961. 1:03:19किया। सवाल यह है
  962. 1:03:25क्या बोलते हो आप लोग? अरे
  963. 1:03:31ओके। तो वर्ड जो है वो क्या लिखा उन्होंने
  964. 1:03:33कि पवित्र आत्मा क्या करेगा? उसको ढक के
  965. 1:03:36रखेगा। तो ग्रीक में उसका मतलब है
  966. 1:03:38एपिसियाजो। जो ग्रीक वर्ड है उसका मतलब है
  967. 1:03:42एपिसियाजो। जिसको इंग्लिश में इसका मतलब
  968. 1:03:44होता है ढकना। पूर्ण रूप से कवर करना। तो
  969. 1:03:49जब मरियम के अंदर यीशु मसीह उनके गर्भ में
  970. 1:03:52थे, कोख में थे तो क्या हो रहा था? पवित्र
  971. 1:03:56आत्मा उनको ढक के रखा था पूरा। ढकने का
  972. 1:04:00मतलब क्या होता है? इसको एक दूसरे वर्ड भी
  973. 1:04:02बोलते हैं। मास्किंग करना। मास्किंग का
  974. 1:04:06मतलब क्या होता है? कि कोई व्यक्ति बीमार
  975. 1:04:08है तो क्या करता है? मास्क लगा लेता है।
  976. 1:04:09तो उससे क्या होता है? अंदर की चीज बाहर
  977. 1:04:11नहीं जाएगी। बाहर की चीज अंदर नहीं आएगी।
  978. 1:04:14तो लूका इस चीज को मेंशन कर रहा है। लू
  979. 1:04:16क्या था? लुआ का काम क्या था? डॉक्टर था।
  980. 1:04:19तो डॉक्टर को क्या है? सब मालूम है। वो
  981. 1:04:21वैध था। तो इसलिए क्या कर रहा है? मत्ती
  982. 1:04:23इस चीज का जिक्र नहीं कर रहा है। लेकिन
  983. 1:04:25लूहा क्या कर रहा है? इस चीज का जिक्र कर
  984. 1:04:27रहा है कि छाया कौन करेगा? उसके ऊपर शैडो
  985. 1:04:30पवित्र आत्मा उसके ऊपर क्या करेगा? छाया
  986. 1:04:32करेगा। लेकिन सवाल यह बनता है कि जब
  987. 1:04:34पवित्र आत्मा ने ढक के रखा। मां की कोख को
  988. 1:04:38तो क्या हो रहा? कोई भी चीज अंदर नहीं जा
  989. 1:04:39पा रही। लेकिन बच्चा जो ब्लड है ना वो
  990. 1:04:42कैसे खाना पीना खाएगी मां बच्चे के अंदर
  991. 1:04:46कुछ तो जाता है ना कहते है ना कि माता
  992. 1:04:47पिता के कुछ गुण आते हैं तो उस चीज से
  993. 1:04:49यीशु मसीह कैसे बच पाए
  994. 1:04:59ओके तो बच्चे के अंदर जो ब्लड सेल्स होते
  995. 1:05:02हैं ना वो क्या कहती है साइंस कहती है कि
  996. 1:05:05बच्चा ब्लड सेल्स अपने स्वयं बनाता है
  997. 1:05:08क्यों बनाता है उसका क्या एग्जांपल है। हम
  998. 1:05:10सब यहां पर हैं और हम सबके क्या है? ब्लड
  999. 1:05:13ग्रुप अलग-अलग हैं। ठीक? अगर मां का ग्रुप
  1000. 1:05:16बच्चे के अंदर आएगा तो मां का और बच्चे का
  1001. 1:05:19क्या होना चाहिए? ग्रुप का जो होता है ना
  1002. 1:05:21ए बी सी मतलब जो ग्रुप होता है वो क्या
  1003. 1:05:24होना चाहिए? सेम ग्रुप होना चाहिए। लेकिन
  1004. 1:05:26हमारी मां का ग्रुप क्या होता है? कई बार
  1005. 1:05:28मां का ग्रुप अलग है। लेकिन बच्चे का
  1006. 1:05:30ग्रुप अलग है। क्यों अलग होता है? क्योंकि
  1007. 1:05:33अगर मां का ब्लड बच्चे के अंदर जाएगा तो
  1008. 1:05:37तो सेम होना चाहिए। ए ग्रुप, बी ग्रुप, सी
  1009. 1:05:39ग्रुप, डी ग्रुप ना। लेकिन क्या होता है?
  1010. 1:05:41हम लोगों के कई बार क्या होते हैं?
  1011. 1:05:42माता-पिता से हमारे ब्लड के जो ग्रुप होते
  1012. 1:05:45हैं ना सेल्स वो क्या होते हैं? अलग होते
  1013. 1:05:47हैं। इसलिए क्या हुआ? पवित्र आत्मा ने
  1014. 1:05:50उसको ढक के रखा तो उनका कोई भी स्वभाव मां
  1015. 1:05:53का बच्चे के अंदर नहीं गया। लेकिन बच्चे
  1016. 1:05:56ने क्या किया? अपना जो सेल्स था मतलब जो
  1017. 1:05:59रक्त कोशिकाएं थी वो क्या हुई? अपने आप
  1018. 1:06:02बढ़ी। तो इसलिए क्या हुआ कि मां का और
  1019. 1:06:04बच्चे का क्या होता है? कई बार ब्लड ग्रुप
  1020. 1:06:07अलग होता है। तो इसलिए हम कहते हैं कि
  1021. 1:06:09यीशु मसीह क्या थे? बिल्कुल पाप रहित थे।
  1022. 1:06:12तो वहां पर जो ग्रीक वर्ड है शैडो उसका
  1023. 1:06:14मतलब है कि पूर्ण रूप से ढकना यानी बाहर
  1024. 1:06:17की कोई चीज क्या है अंदर नहीं आ सकती।
  1025. 1:06:19उसको बोलते हैं मास्किंग करना
  1026. 1:06:21एपिसियाजोमिस। तो ये समझ में आया कि यीशु
  1027. 1:06:24मसीह बिल्कुल सिनलेस क्यों थे? क्योंकि
  1028. 1:06:25पवित्र आत्मा से ढके हुए थे। कोई भी चीज
  1029. 1:06:28मां का अंदर नहीं आए। लेकिन यीशु मसीह
  1030. 1:06:29मतलब मरियम तो पापी थी। ठीक? लेकिन मरियम
  1031. 1:06:32का भी क्यों नहीं पहुंचा? क्योंकि बच्चा
  1032. 1:06:34क्या करता है? अपने ब्लड सेल्स को स्वयं
  1033. 1:06:36बनाता है। इसलिए क्या होता है कि मां का
  1034. 1:06:38ब्लड ग्रुप और बच्चे ब्लड ग्रुप क्या होता
  1035. 1:06:40है? कई बार अलग-अलग होता है। सेम नहीं
  1036. 1:06:43होता है। अगर मां का ब्लड पूर्ण रूप से
  1037. 1:06:45बच्चे के अंदर जाएगा तो क्या होगा? फिर तो
  1038. 1:06:47एक ही ब्लड ग्रुप होना चाहिए सबका। तो
  1039. 1:06:49यीशु मसीह के अंदर क्या था? बच्चे ने अपने
  1040. 1:06:51आप से रक्त रक्त कोशिकाएं जो थी वह क्या
  1041. 1:06:54थी? स्वयं डेवलप की। ठीक?
  1042. 1:06:58अगला चीज है मत्ती के एक अध्याय में वापस
  1043. 1:07:01जाएंगे। वहां पर फिर कुछ चीज है अलग।
  1044. 1:07:07मत्ती का एक अध्याय वचन नंबर 21 और 22
  1045. 1:07:10पढ़ेंगे। [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  1046. 1:07:12वह पुत्र जनेगी उसका नाम यीशु रखना। ठीक?
  1047. 1:07:16अब यहां पर क्या नाम आया? एक यीशु। अगली
  1048. 1:07:20पंक्ति में क्या कहता है वह?
  1049. 1:07:23देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी। उसके बच्चे
  1050. 1:07:26का नाम क्या रखना? इमैनुअल रखना। ठीक? दो
  1051. 1:07:30अलग-अलग नाम
  1052. 1:07:32यीशु और इमानुएल तो दोनों के अलग-अलग मतलब
  1053. 1:07:35होंगे। बाइबल में सबसे ज्यादा नाम किसका
  1054. 1:07:38जिक्र किया गया?
  1055. 1:07:40यीशु मसीह का लेकिन यहां पर क्या लिखा
  1056. 1:07:42उन्होंने कि उसका नाम इमैनुएल रखा जाएगा।
  1057. 1:07:45लेकिन आगे की पंक्तियों को जब हम देखते
  1058. 1:07:47हैं बाइबल में तो यीशु मसीह को इमैनुएल
  1059. 1:07:49नाम से कहीं पुकारा नहीं गया। ऐसा क्यों
  1060. 1:07:52हुआ? कि जब एक व्यक्ति के दो नाम रखे गए
  1061. 1:07:55तो दोनों का मतलब होना चाहिए ना। तो यीशु
  1062. 1:07:57मसीह के नाम का मतलब क्या होता है? यीशु
  1063. 1:07:59मसीह के नाम का मतलब है यीशु का मतलब होता
  1064. 1:08:02है द लॉर्ड इस सेल्वेशन यानी प्रभु उद्धार
  1065. 1:08:05है और मसीहा का मतलब होता है एनइंटेड यानी
  1066. 1:08:09अभिषिक्त
  1067. 1:08:12यीशु के नाम का मतलब है प्रभु उद्धार है द
  1068. 1:08:16लॉर्ड इज सेल्वेशन मसीह के नाम का मतलब है
  1069. 1:08:20अभिषिक्त यानी एनइंटेड
  1070. 1:08:23लेकिन जब वो अगला नाम लेता है कि उसका नाम
  1071. 1:08:26क्या होगा इमानुएल रखा जाएगा जाएगा तो
  1072. 1:08:29इम्युअल का तो हम जिक्र पाते ही नहीं कहीं
  1073. 1:08:31पर भी आगे बाइबल में तो ऐसा क्यों हुआ
  1074. 1:08:33पुराने नियम की जो प्रोफेसी हुई थी
  1075. 1:08:36भविष्यवाणी हुई थी कि उसका नाम इम्युएल
  1076. 1:08:38रखोगे लेकिन बाइबल में हमें यहां पर सिर्फ
  1077. 1:08:41इमानुएल लिखते लेकिन आगे पंक्तियों में
  1078. 1:08:43देखा हमने इमानुएल नहीं कहीं पर यीशु आना
  1079. 1:08:46चाहिए था कहीं पर इमानुएल आना चाहिए था तो
  1080. 1:08:48इमानुएल का मतलब क्या होता है कि परमेश्वर
  1081. 1:08:50हमारे साथ है यानी
  1082. 1:08:54गॉड वि अस
  1083. 1:08:56लेकिन
  1084. 1:09:07यीशु मसीह का जो नाम इमानुएल है वो क्या
  1085. 1:09:11है वो उनके गुणों को डिस्क्राइब करने के
  1086. 1:09:14लिए बोला गया है यानी गुणों को बताने के
  1087. 1:09:18लिए डिस्क्राइब क्या किया उन्होंने वर्णन
  1088. 1:09:20किया उसके चरित्र के बारे में कि परमेश्वर
  1089. 1:09:22क्या है हमेशा हमारे साथ है तो ये क्या है
  1090. 1:09:26उनका प्रॉपर नाम नहीं है। यह सिर्फ क्या
  1091. 1:09:28किया? उनके गुणों को डिस्क्राइब यानी
  1092. 1:09:31वर्णन करने के लिए उनके चरित्र के बारे
  1093. 1:09:33में यह नाम उनको दिया गया है इमानुएल।
  1094. 1:09:36ठीक? तो इसमें
  1095. 1:09:39एक चीज है कि परमेश्वर स्वर्ग को छोड़कर
  1096. 1:09:43आएंगे और हमारे बीच में क्या करेंगे? वो
  1097. 1:09:46निवास करेंगे। तो यह क्या है? उनका एक गुण
  1098. 1:09:48है। तो आज भी क्या है? परमेश्वर हमारे साथ
  1099. 1:09:50में है। तो उसके एक गुण का क्या कर रहा
  1100. 1:09:52है? वो नाम वर्णन कर रहा है कि परमेश्वर
  1101. 1:09:55स्वर्ग छोड़कर हमारे बीच में रहने के लिए
  1102. 1:09:57आया। लेकिन अगर हम दोनों नामों के मतलब को
  1103. 1:10:00मिलाएंगे तो एक ही निकलेगा। ओके? यीशु के
  1104. 1:10:03नाम का मतलब क्या है? सिंपल पापों से
  1105. 1:10:06बचाने वाला। इमैनुअल के नाम का मतलब क्या
  1106. 1:10:09है? हमारे संग है। ठीक? आज के समय में
  1107. 1:10:13दोनों नाम क्या है? हमारे लिए बिल्कुल सही
  1108. 1:10:16है। चाहे हम यीशु बुलाएं, चाहे हम इमानुअल
  1109. 1:10:19बुलाएं। क्यों? क्योंकि अगर दोनों नामों
  1110. 1:10:20को आप बुलाओगे तो उसका मतलब है परमेश्वर
  1111. 1:10:23हमारे संग है पापों से छुटकारा दिलाने के
  1112. 1:10:27लिए। यीशु का नाम क्या था? छुटकारा दिलाने
  1113. 1:10:30वाला। इमैनुअल का मतलब था परमेश्वर हमारे
  1114. 1:10:33संग है। तो अगर पूरा आप इसको जोड़ दोगे तो
  1115. 1:10:35उसका मतलब क्या बन जाएगा? परमेश्वर हमारे
  1116. 1:10:37संग है हमारे पापों से छुड़ाने के लिए।
  1117. 1:10:41ठीक? ओके।
  1118. 1:10:45अगर कोई भी हमारे साथ ना हो लेकिन
  1119. 1:10:47परमेश्वर क्या है? गॉड प्रेजेंस विद अस।
  1120. 1:10:51परमेश्वर की उपस्थिति हमेशा हमारे साथ में
  1121. 1:10:55है। ओके। कई बार हम लोग क्या करते हैं?
  1122. 1:10:59अकेलेपन को महसूस करते हैं। ठीक। अकेलापन
  1123. 1:11:02क्या होता है? अकेलापन और एकांत दोनों में
  1124. 1:11:05क्या फर्क है?
  1125. 1:11:10बाइबल में पढ़ा यीशु मसीह एकांत में गए।
  1126. 1:11:13ठीक। तो अकेलापन और एकांत में क्या फर्क
  1127. 1:11:16है?
  1128. 1:11:18अकेलेपन का मतलब होता है तीन चीजें। हमें
  1129. 1:11:21हम सब सोचते हैं कि पहला है कि अकेलापन
  1130. 1:11:24उसे लगता है जिसे लगता है कि उसे कोई
  1131. 1:11:25चाहता नहीं है। उसे कोई प्यार नहीं करता।
  1132. 1:11:29उसकी कोई चिंता नहीं करता। तो जब व्यक्ति
  1133. 1:11:32यह चीजें सोचता है तो क्या होता है? उसके
  1134. 1:11:34अंदर अकेलापन आता है। वह महसूस करता है कि
  1135. 1:11:37मुझे कोई प्यार करने वाला नहीं है। मेरी
  1136. 1:11:39कोई चिंता नहीं करता है। यह सब क्या है?
  1137. 1:11:41अकेलेपन के गुण है। लेकिन एकांत का समय
  1138. 1:11:44क्या था? यीशु मसीह ने अपने चेलों से
  1139. 1:11:47थोड़ा दूरी बनाया और क्या किया उन्होंने
  1140. 1:11:49एकांत में चले गए यानी मनन करने के लिए एक
  1141. 1:11:52अलग गए तो हमें किस चीज को चुनना चाहिए
  1142. 1:11:55अकेलापन या एकांत
  1143. 1:11:57एकांत ताकि मैं क्या कर सकूं परमेश्वर के
  1144. 1:12:00साथ में समय व्यतीत कर सकूं ओके
  1145. 1:12:06एक सवाल जैसे हम करते हैं इसको ऐसे बोलते
  1146. 1:12:08हैं कि हम कौन हैं कि परमेश्वर हमारे पास
  1147. 1:12:12आए
  1148. 1:12:13हम कौन हैं कि परमेश्वर हमारे साथ में आए।
  1149. 1:12:17क्योंकि इमैनुअल का मतलब क्या है? कि
  1150. 1:12:19परमेश्वर हमारे संग है। लेकिन हम सवाल यह
  1151. 1:12:21करते कि हम कौन है कि परमेश्वर हमारे संग
  1152. 1:12:24में आए। हम में तो कोई धर्मी नहीं है। हम
  1153. 1:12:26सब तो पापी हैं। लेकिन उसके बावजूद भी
  1154. 1:12:29क्यों करता है कि परमेश्वर क्या करता है?
  1155. 1:12:31अपने स्वर्ग के सिंहासन को छोड़कर हमारे
  1156. 1:12:33बीच में आता है। ठीक? हम में से कोई भी
  1157. 1:12:36धर्मी नहीं है और इस लायक नहीं है कि
  1158. 1:12:38परमेश्वर क्या कर सके? हमारे बीच में
  1159. 1:12:40हमारे साथ रह सके आके। लेकिन प्रभु ने
  1160. 1:12:43क्या किया? अपने स्वर्ग के सिंहासन को
  1161. 1:12:45छोड़ा और हमारे बीच में सिर्फ रहने ही
  1162. 1:12:48नहीं आए बल्कि क्या किया? हमको हमारे
  1163. 1:12:50पापों से भी बचाने के लिए आए। एक इंसान की
  1164. 1:12:54तीन जरूरतें होती हैं। एक इंसान की तीन
  1165. 1:12:57जरूरतें हैं। पहली जरूरत होती है कि कोई
  1166. 1:13:00मुझे प्यार करे।
  1167. 1:13:03अकेलेपन को दूर करने के लिए एक इंसान की
  1168. 1:13:06तीन जरूरतें होती हैं। वह कहता है कि कोई
  1169. 1:13:09मुझे प्यार करे।
  1170. 1:13:11दूसरा कहता है कि कोई मुझे समझे।
  1171. 1:13:16तीसरा कहता है कि कोई मुझसे कहे कि मुझे
  1172. 1:13:19तुम्हारी जरूरत है। आई नीड यू। कोई मुझसे
  1173. 1:13:23प्यार करे, कोई मुझे समझे और कोई मुझे यह
  1174. 1:13:27कहे कि मुझे तुम्हारी जरूरत है।
  1175. 1:13:32जब यह तीनों चीजें पूरी नहीं होती तो क्या
  1176. 1:13:34होता है? इंसान को अकेलापन लगता है। तो
  1177. 1:13:36क्या सोचता है कि कोई मुझसे प्यार भी नहीं
  1178. 1:13:38करता है। कोई मुझसे यह भी नहीं कहता कि
  1179. 1:13:41मुझे तुम्हारी जरूरत है। और क्या है कि
  1180. 1:13:43कोई मुझे समझता नहीं है। लेकिन प्रभु ने
  1181. 1:13:46क्या बोला कि परमेश्वर हमारे संग तब भी है
  1182. 1:13:49कि जब हमसे कोई प्यार नहीं करता है। ओके।
  1183. 1:13:54लुका के चार अध्याय में यीशु मसीह ने एक
  1184. 1:13:57संदेश दिया।
  1185. 1:13:59और वह संदेश क्या था?
  1186. 1:14:02[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1187. 1:14:04जब लका यीशु मसीह लका के चार अध्याय में
  1188. 1:14:08एक संदेश दे रहे थे व्यवस्था के बारे में
  1189. 1:14:11सिखाना शुरू किया उन्होंने पढ़ाना शुरू
  1190. 1:14:13किया तो लोगों ने क्या किया कि यीशु मसीह
  1191. 1:14:15को एक चोटी पर ले गए और वहां से क्या किया
  1192. 1:14:17उनको फेंकने का प्रयास किया तो उसमें क्या
  1193. 1:14:20था कि परमेश हम इस योग्य नहीं थे हम इस
  1194. 1:14:23लायक नहीं थे कि परमेश्वर हमारे साथ रहने
  1195. 1:14:26के लिए आए लेकिन जब परमेश्वर हमारे साथ
  1196. 1:14:29रहने के लिए आया उसके बावजूद हमने क्या
  1197. 1:14:30किया परमेश्वर को उसकी जगह से उसको
  1198. 1:14:33निकालने के लिए प्रयास किया। तो उसके लिए
  1199. 1:14:35एक वर्ड हुआ वहां पर सीख यानी खोजना।
  1200. 1:14:42इसका ग्रीक में जो वर्ड है उसका मतलब है
  1201. 1:14:45जेड ई टी ई ओ
  1202. 1:14:52कि यीशु मसीह सिर्फ हमको बचाने नहीं हमको
  1203. 1:14:55सिर्फ खोजने बचाने नहीं आए लेकिन हमें
  1204. 1:14:57क्या करने के लिए आए वह खोजने के लिए भी
  1205. 1:14:59आए हैं। लुका के 19 अध्याय वचन नंबर 10 के
  1206. 1:15:02अनुसार कि हम खो चुके थे और यीशु मसीह
  1207. 1:15:04क्या किया हमको खोजने के लिए आए तो जेड ई
  1208. 1:15:07टी ई ओ है जेडी ओय का मतलब होता है कि
  1209. 1:15:09पूरी जोश लगन इच्छा के साथ खोजना
  1210. 1:15:15पूरी जोश लगन और पूरी इच्छा के साथ में
  1211. 1:15:18खोजना
  1212. 1:15:22ओके
  1213. 1:15:24लुका के चार अध्याय में जब वर्ड आएगा सीख
  1214. 1:15:26तो सीख में क्या है
  1215. 1:15:29जब आदम और हब्बा ने पाप पाप किया तो क्या
  1216. 1:15:32परमेश्वर उनको खोजने के लिए आया?
  1217. 1:15:36जब आदम हव्वा ने पाप किया तो क्या किया?
  1218. 1:15:39उन्होंने पेड़ों के बीच में जाकर छिप गए।
  1219. 1:15:41लेकिन प्रभु ने क्या किया? ठंडी हवा में
  1220. 1:15:43चलते हुए आए और उनको क्या किया? खोजना
  1221. 1:15:46प्रारंभ किया। जब अब्राहम ने हाजरा से
  1222. 1:15:49इस्माइल को पैदा किया। उसके बाद 13 साल तक
  1223. 1:15:53अब्राहम ने परमेश्वर से बात नहीं किया।
  1224. 1:15:55उसके बाद क्या होता है? परमेश्वर 13 साल
  1225. 1:15:58के बाद में आकर उससे बात करता है। तो
  1226. 1:16:00बाइबल में कई एक ऐसे उदाहरण है लूका के 15
  1227. 1:16:04अध्याय में क्या लिखा है कि 100 भेड़े
  1228. 1:16:06जिसके पास होती हैं उसकी अगर एक भेड़ खो
  1229. 1:16:08जाए तो क्या करेगा वो? 99 को छोड़कर उस एक
  1230. 1:16:12भेड़ के पीछे जाएगा उसे खोजने के लिए। तो
  1231. 1:16:16खोजना जो है वो क्या कहता है कि मैं
  1232. 1:16:19[गला साफ़ करने की आवाज़] पूरी लगन और
  1233. 1:16:21इच्छा के साथ में वो खोजना चाहता है।
  1234. 1:16:23प्रभु क्या कर रहा है? आज हमको भी खोज रहा
  1235. 1:16:25है। कई बार जब हम पाप करते हैं तो क्या
  1236. 1:16:28करते हैं? हम आदम और हब्बा की तरह छिप
  1237. 1:16:30जाते हैं। लेकिन क्या होना चाहिए कि जब
  1238. 1:16:32मैं पाप करता हूं तो प्रभु मुझे खोजता है
  1239. 1:16:35और मुझे अपने आप से परमेश्वर के सामने आना
  1240. 1:16:38चाहिए और मुझे एक्सेप्ट करना चाहिए कि
  1241. 1:16:40परमेश्वर मैं क्या हूं? पापी हूं। अब्राहम
  1242. 1:16:42से क्या किया? परमेश्वर ने एक बड़ा वायदा
  1243. 1:16:44किया 13 साल बाद कि मैं क्या करूंगा? तुझे
  1244. 1:16:46जातियों का मूल पिता बनाऊंगा। तो परमेश्वर
  1245. 1:16:50क्या करता है? हमको वो खोजता है।
  1246. 1:16:54दूसरा चीज है कि
  1247. 1:16:58यीशु उन लोगों को ढूंढते हैं जो अपनी
  1248. 1:17:00बुलाहट से भटक गए हैं।
  1249. 1:17:04जीसस लुकिंग फॉर दोस हु एट दैट मोमेंट वर
  1250. 1:17:08लॉस्ट ऑफ देयर कॉलिंग। यीशु उनको ढूंढ रहे
  1251. 1:17:12हैं जो अपनी बुलाहट से भटक गए हैं।
  1252. 1:17:20ओके।
  1253. 1:17:27यीशु मसीह क्रूस पर जाते हैं। उनका डेथ
  1254. 1:17:30होता है। कब्र में जाते हैं और जीवित हो
  1255. 1:17:32जाते हैं। उसके बाद में यीशु मसीह के चेले
  1256. 1:17:34क्या कर रहे थे?
  1257. 1:17:39वापस क्या कर रहे थे? अपने बिजनेस में चले
  1258. 1:17:41गए व्यापार पे मछलियां पकड़ने के लिए।
  1259. 1:17:44परमेश्वर उन लोगों को ढूंढता है जो अपनी
  1260. 1:17:47बुलाहट से भटक जाते हैं। कहने का मतलब
  1261. 1:17:49क्या है कि एक स्टोरी है कि जब पतरस और
  1262. 1:17:52यीशु मसीह की बातचीत होती है तो वहां पर
  1263. 1:17:54क्या होता है? पत्रस क्या कहता है कि
  1264. 1:17:56परमेश्वर मैं तुम्हें कभी नकारूंगा नहीं।
  1265. 1:17:58मैं क्या करूंगा? तुम्हारे लिए अपनी जान
  1266. 1:18:00को भी दे दूंगा। लेकिन क्या होता है? जब
  1267. 1:18:02यीशु मसीह को लोग पकड़ के ले जाते हैं और
  1268. 1:18:04उसके बाद क्या होता है? पत्रस यीशु मसीह
  1269. 1:18:06को देखता है तो वहां पर क्या होता है?
  1270. 1:18:08क्या कहता है कि मैं इसको नहीं जानता हूं।
  1271. 1:18:11मैं इसको नहीं जानता हूं। लेकिन क्या होता
  1272. 1:18:13है वहां पर वो रोने लगता है वापस लेकिन रो
  1273. 1:18:17के क्या होता है वापस जाकर वो अपने जाल को
  1274. 1:18:19डालता है और क्या करता है वहां पर वो सारे
  1275. 1:18:22डिसाइपल्स अपने क्या कर रहे हैं अपने अपने
  1276. 1:18:24कामों पर लग गए यानी परमेश्वर उन लोगों को
  1277. 1:18:26भी खोजता है जो अपनी बुलाहट में भटक चुके
  1278. 1:18:30हैं कई बार क्या होता है कि जिस प्रकार से
  1279. 1:18:32यीशु मसीह के चेले अपनी बुलाहट में भटक गए
  1280. 1:18:35थे उस बार कई बार क्या होता है कि हम भी
  1281. 1:18:37अपनी बुलाहट में भटक जाते हैं जब यीशु
  1282. 1:18:40मसीह उनके पास में जाते हैं तो पतरस से
  1283. 1:18:42क्या करते हैं? बात करते हैं और क्या होता
  1284. 1:18:44है? वापस सारे डिसाइपल्स उनके पास में आते
  1285. 1:18:47हैं। अगर मैं भटक गया हूं अपनी बुलाहट से
  1286. 1:18:50तो परमेश्वर क्या करेगा? हमको खोजते हुए
  1287. 1:18:52आएगा। लुका 15 में क्या होता है कि पहला
  1288. 1:18:55स्टेप किसने लिया वापस जाने के लिए। बेटे
  1289. 1:18:58ने सिर्फ सोचा लेकिन पिता ने क्या किया?
  1290. 1:19:01जब वो बेटे को दूर देखा तो उसने जाकर उसको
  1291. 1:19:04गले लगा लिया। परमेश्वर पहला कदम हमारी
  1292. 1:19:06तरफ बढ़ाता है। लेकिन अगर मैं क्या करता
  1293. 1:19:08हूं? अपने मन में सिर्फ सोचता हूं कि
  1294. 1:19:11परमेश्वर क्या कर रहा है? अपनी बुलाहट में
  1295. 1:19:12जो लोग चल रहे थे वो लोग जो भटक गए
  1296. 1:19:15परमेश्वर उनको भी आज खोज रहा है और पतरस
  1297. 1:19:18को क्या करता है आखिरी में प्रेरित बनता
  1298. 1:19:20है प्रेरित मतलब अपने भाइयों की वो अगुवाई
  1299. 1:19:22करता है तो जो लोग विश्वास से भटके हुए
  1300. 1:19:24हैं परमेश्वर की प्यार भरी नजर क्या है
  1301. 1:19:27उनके ऊपर भी बनी रहती है इसलिए क्या कहते
  1302. 1:19:30हैं कि इमएल जो है वो क्या है गॉड विद अस
  1303. 1:19:32यानी परमेश्वर क्या है कि जब मैं अपने पाप
  1304. 1:19:35में जीवन जी रहा था तभी भी क्या था
  1305. 1:19:38परमेश्वर ने मुझे खोजा जैसे आदम ने पाप
  1306. 1:19:40किया छिप गया। प्रभु ने क्या किया? उसको
  1307. 1:19:42वापस खोजा जाके। अब्राहम क्या किया? संगति
  1308. 1:19:45से दूर चला गया। उसके बाद भी क्या है?
  1309. 1:19:47परमेश्वर की प्यार भरी नजर ने उसको खोजा।
  1310. 1:19:50जब पतरस ने उसका इंकार कर दिया। पीछे चलने
  1311. 1:19:53से मना कर दिया। उनके डिसाइपल्स ने
  1312. 1:19:55अपने-अपने कामों पर चले गए। उसके बाद भी
  1313. 1:19:57क्या है? परमेश्वर की उपस्थिति हमारे साथ
  1314. 1:20:00में है। तो इम्युएल का मतलब क्या है? कि
  1315. 1:20:02वही है कि परमेश्वर क्या है? उसकी
  1316. 1:20:04उपस्थिति हमारे साथ में है। ठीक? और एक
  1317. 1:20:08चीज
  1318. 1:20:11एक व्यक्ति अकेलापन महसूस क्यों करता है?
  1319. 1:20:14अगर परमेश्वर की उपस्थिति हमारे साथ में
  1320. 1:20:18है। हम विश्वासी हैं। उसके बाद भी क्या
  1321. 1:20:20होता है? कई बार हम अकेलेपन को महसूस करते
  1322. 1:20:22हैं। ऐसा क्या कारण है कि हम अकेलेपन को
  1323. 1:20:24महसूस कर रहे हैं। हम बाहर जाते हैं
  1324. 1:20:26आउटरीच में लोगों से मिलते हैं। हम कहते
  1325. 1:20:28हैं प्रभु आपके साथ है। प्रभु हमारे साथ
  1326. 1:20:30है। लेकिन क्या होता है? विश्वासी होने के
  1327. 1:20:32बावजूद भी कई बार हम उस अकेलेपन को महसूस
  1328. 1:20:35करते हैं। ऐसा क्यों होता है? क्या
  1329. 1:20:38परमेश्वर का प्रेजेंस जो है वह हमारे साथ
  1330. 1:20:41नहीं है? इमएल नाम के अकॉर्डिंग तो होना
  1331. 1:20:43चाहिए कि परमेश्वर हमारे साथ है। चाहे
  1332. 1:20:46हमारे दिन कैसे भी हो, चाहे हम अमीरी में
  1333. 1:20:47हो, गरीबी में हो, पाप में हो, कैसे भी
  1334. 1:20:49जिंदगी में हो। लेकिन प्रभु क्या कर रहा
  1335. 1:20:51है? हमेशा हमारी उसकी उपस्थिति हमारे साथ
  1336. 1:20:53में है। लेकिन उसके बावजूद भी हम अकेलेपन
  1337. 1:20:56को क्यों महसूस करते हैं?
  1338. 1:20:59कभी किया अकेलेपन को महसूस?
  1339. 1:21:02पीयूष हां। क्यों? क्या कारण है मनोज?
  1340. 1:21:12ओके परमेश्वर की उपस्थित उपस्थिति से बाहर
  1341. 1:21:14हो जाते हैं पाप के कारण और क्या हो सकता
  1342. 1:21:17है बाइबल में कोई ऐसा एग्जांपल है
  1343. 1:21:24साल ओके
  1344. 1:21:28ओके जेनेसिस 44 पढ़ेंगे वहां पर इसका आंसर
  1345. 1:21:32है [नाक से की जाने वाली आवाज़]
  1346. 1:21:40[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1347. 1:21:41इंसान दो चीजों के कारण अकेलापन महसूस
  1348. 1:21:44करता है। ठीक विश्वासी होने के बावजूद भी
  1349. 1:21:47पहला वो महसूस करता है कि वो
  1350. 1:21:51पाप कर रहा है। पाप में जीवन जी रहा है।
  1351. 1:21:54ठीक?
  1352. 1:21:56जेनेसिस 4:14
  1353. 1:22:03पढ़ो।
  1354. 1:22:04वहां पर क्या लिखा है
  1355. 1:22:08देख
  1356. 1:22:09तूने आज के दिन मुझे भूमि पर से निकाला है
  1357. 1:22:12और मैं तेरी दृष्टि के आड़ में रहूंगा और
  1358. 1:22:14पृथ्वी पर भटकने और रहूंगा और जो कोई मुझे
  1359. 1:22:18पाएगा
  1360. 1:22:19ओके यहां पर कौन है कैन और हाबेल का
  1361. 1:22:22स्टोरी चल रहा है कैन ने क्या किया अपने
  1362. 1:22:24भाई को मार दिया वो क्या कह रहा है कि
  1363. 1:22:25सबको पता चल गया कि मैंने क्या किया अपने
  1364. 1:22:27भाई को मार दिया अब मैं क्या हूं भगोड़ा
  1365. 1:22:30कहलाऊंगा भागने वाला यानी जो पाप था जो
  1366. 1:22:32पहले छिपा हुआ था वह क्या हो गया अब खुल
  1367. 1:22:36गया तो अब क्या है कि इंसान पाप की वजह से
  1368. 1:22:39अपने आप को अकेलापन महसूस करता है दूसरा
  1369. 1:22:42कारण क्या है सेल्फिश स्वार्थीपन के कारण
  1370. 1:22:45इंसान अपने आप को अकेला महसूस करता है
  1371. 1:22:51सेल्फिश होता है जो व्यक्ति वो क्या कहता
  1372. 1:22:53है मुझे सिर्फ मेरे बारे में सोचना है मैं
  1373. 1:22:56सिर्फ अपने अपने बारे में मतलब रखता हूं
  1374. 1:22:58दुनिया क्या कहती है मुझे मैटर नहीं करता
  1375. 1:23:00है कोई चीज नहीं मतलब दूसरे के साथ क्या
  1376. 1:23:01हो रहा है कोई फर्क नहीं पड़ता है यानी
  1377. 1:23:03सेल्फिश। कई बार जो इंसान स्वयं में
  1378. 1:23:06स्वार्थीपन होता है, वह क्या करता है?
  1379. 1:23:08अकेलेपन को महसूस करता है। ठीक? सो, एक
  1380. 1:23:12व्यक्ति की तीन सोच हो सकती हैं। तीन
  1381. 1:23:14प्रकार की सोचे हो सकती है अलग-अलग। यह
  1382. 1:23:16आखिरी है।
  1383. 1:23:18तीन सोचें।
  1384. 1:23:25तीन सोच हो सकती हैं। एक स्वार्थी व्यक्ति
  1385. 1:23:29की।
  1386. 1:23:32अगर कोई मेरे साथ अच्छा करता है तो मैं
  1387. 1:23:36उसके साथ अच्छा करूंगा। एक व्यक्ति की सोच
  1388. 1:23:39यह होती है।
  1389. 1:23:42अगर कोई मेरे साथ अच्छा करेगा तो मैं उसके
  1390. 1:23:45साथ अच्छा करूंगा। दूसरा सोच का व्यक्ति
  1391. 1:23:49है वो यह कहता है मतलब जो शैतानी सोच है।
  1392. 1:23:52कि अगर कोई मेरे साथ अच्छा करेगा उसके
  1393. 1:23:56बावजूद भी मैं उसके साथ में बुरा करूंगा।
  1394. 1:23:59ये क्या है? दूसरी टाइप की सोच है। पहली
  1395. 1:24:01सोच क्या है? लेनदेन वाली। अगर आपने अच्छा
  1396. 1:24:04किया तो मैं अच्छा करूंगा। दूसरी सोच क्या
  1397. 1:24:06कहती है? जो शैतान से प्रेरित है कि अगर
  1398. 1:24:09कोई मेरे साथ अच्छा करेगा उसके बावजूद भी
  1399. 1:24:11मैं उसके साथ में बुरा करूंगा।
  1400. 1:24:14तीसरी सोच जो है वो क्या है? एक विश्वासी
  1401. 1:24:16की सोच है। वो क्या कहता है कि अगर कोई
  1402. 1:24:19मेरे साथ बुरा करेगा उसके बावजूद भी मैं
  1403. 1:24:22उसके साथ में अच्छा करूंगा। तो हमें तीनों
  1404. 1:24:26में से किस चीज को फॉलो करना है कि अगर
  1405. 1:24:28कोई हमारे साथ बुरा करता है उसके बावजूद
  1406. 1:24:30भी क्या करते हैं? हम उसके साथ में अच्छा
  1407. 1:24:32करते हैं। तो यह जो अकेलापन महसूस होता है
  1408. 1:24:35वो क्यों? क्योंकि या तो मैं अपने जीवन
  1409. 1:24:36में ऐसा कोई पाप कर रहा हूं। उस पाप की
  1410. 1:24:39वजह से मैं संगति परमेश्वर के साथ में
  1411. 1:24:41नहीं कर पा रहा हूं। जैसे कैन ने क्या
  1412. 1:24:43किया? वो परमेश्वर की उपस्थिति से उसको
  1413. 1:24:44बाहर निकलना पड़ा। दूसरा कारण क्या है?
  1414. 1:24:47स्वार्थीपन के कारण। हम अपने आप को महसूस
  1415. 1:24:49करते हैं। क्योंकि हमारे अंदर क्या है? वह
  1416. 1:24:51क्वालिटीज हैं कि कोई मेरे साथ अच्छा
  1417. 1:24:53करेगा। उसके बावजूद भी मैं उसके साथ में
  1418. 1:24:55बुरा करूंगा। कोई अच्छा करने आएगा तो मैं
  1419. 1:24:57उसके साथ अच्छा करूंगा जाके। लेकिन बाइबल
  1420. 1:24:59क्या सिखाती है कि अगर कोई मेरे साथ में
  1421. 1:25:02बुरा करता है उसके बावजूद भी क्या करना
  1422. 1:25:04चाहिए? हमको उसके साथ में अच्छा करना
  1423. 1:25:06चाहिए। तो ये चीजें हैं। तो इमानुअल नाम
  1424. 1:25:08का मतलब क्या है? कि परमेश्वर हमारे संग
  1425. 1:25:10है। ओके?
  1426. 1:25:12सो अगले क्लास में हम क्या कवर करेंगे?
  1427. 1:25:15कुछ चीजों को क्योंकि अभी थोड़ा डिटेल्स
  1428. 1:25:17हो जाएगा कि जब वो जो अभी अगले क्लास में
  1429. 1:25:21हम इन्हीं चैप्टर के ऊपर बात करेंगे कि जो
  1430. 1:25:24ज्योतिष लोग आते हैं उनके बारे में बात
  1431. 1:25:26करेंगे कि जो ज्योतिष थे वो कहां से आए
  1432. 1:25:29थे। वो लोग कौन थे और उनको यीशु मसीह के
  1433. 1:25:33जन्म के बारे में एग्जैक्ट जानकारी कहां
  1434. 1:25:35से मिली थी। ठीक? क्योंकि वो लोग तो
  1435. 1:25:38पर्शियंस यानी फारसी लोग थे। बेबिलोन से
  1436. 1:25:41आए हुए थे। तो उनको यीशु मसीह के जन्म के
  1437. 1:25:44बारे में जानकारी कैसे मिली? क्योंकि वहां
  1438. 1:25:46पर लिखा है ना राजा हेरर्ड को पता चला तो
  1439. 1:25:49शास्त्री और फरसी लोग उधर ही थे यीशु मसीह
  1440. 1:25:52के जन्म के आसपास में लेकिन वो लोग क्या
  1441. 1:25:54करते हैं वहां पर नहीं पहुंच पाते हैं
  1442. 1:25:56लेकिन जो ज्योतिष लोग थे वो क्या थे 1000
  1443. 1:25:59800 1200 किलोमीटर दूर से पहुंच गए थे
  1444. 1:26:02यीशु मसीह के पास में तो हम देखेंगे कि
  1445. 1:26:04उनको कैसे पता चला कि यीशु मसीह का जन्म
  1446. 1:26:06कब हुआ कहां हुआ क्या एग्जैक्ट वो चीजें
  1447. 1:26:09मतलब कवर करती करती तो आप लोग पढ़ सकते
  1448. 1:26:12दानियल का नौ अध्याय पढ़ के आ सकते और
  1449. 1:26:15लुका का एक और दो में मतलब वो चीजें हैं
  1450. 1:26:18क्योंकि हमें पता चलना चाहिए। दूसरा हम
  1451. 1:26:20कवर करेंगे कि जो यीशु मसीह जब स्वर्गदूत
  1452. 1:26:23आए तो क्या हुआ? सबसे पहले मुलाकात किससे
  1453. 1:26:25की उन्होंने? शेपर्ड यानी चरवाहों से
  1454. 1:26:28किया। जबकि किससे करना चाहिए था? इंसानों
  1455. 1:26:31से करना चाहिए था। तो स्वर्ग दूतों ने
  1456. 1:26:33सबसे पहला संदेश शेपर्ड्स लोगों को क्यों
  1457. 1:26:35दिया ना? तो हम उन सब चीजों के बारे में
  1458. 1:26:37अगले क्लास में डिस्कस करेंगे। ठीक? आमीन।

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This page contains the full transcript of Fall- 2026 | GOSPEL | Class # 7/8 by Mumbai Bible College & Seminary, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 11,477 words across 1,458 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

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