YouTube2Text

Faecal Sludge Treatment Plant (FSTP) Explained | Step‑by‑Step Treatment Process Odisha | SHGs works — Transcript

by Dagger Journey · 3,422 words · 443 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे घर के
  2. 0:02सेफ्टिक टैंक में जो गंदगी जमा होती है
  3. 0:05उसे जब मशीन से निकाला जाता है तो वह आखिर
  4. 0:08जाती कहां है? अगर इस गंदगी को सीधे कहीं
  5. 0:11भी फेंक दिया जाए तो यह नदियां, जमीन या
  6. 0:15फिर बाहर के एनवायरमेंट को प्रदूषित कर
  7. 0:17सकती है। और इसी समस्या का समाधान है
  8. 0:20एफएसटीबी। यानी कि फीकल स्लज ट्रीटमेंट
  9. 0:23प्लांट। यानी कि एक ऐसा प्लांट जहां
  10. 0:26सेप्टिक टैंक से निकाले गए स्लज को
  11. 0:29वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जाता है
  12. 0:32ताकि वह पर्यावरण के लिए सुरक्षित बन सके।
  13. 0:35आज हम इसी पूरे प्लांट के अंदर जाकर
  14. 0:38समझेंगे कि यह प्रक्रिया आखिर कैसे काम
  15. 0:40करती है।
  16. 0:42तो इसके लिए हम लोग आए हैं उड़ीसा के
  17. 0:45एफएसटीपी प्लांट में और उड़ीसा में ऐसे कई
  18. 0:48एफएसटीपी प्लांट है और इस प्लांट को ऑपरेट
  19. 0:52करते हैं एसएसजी यानी कि सेल्फ हेल्प
  20. 0:54ग्रुप और कहीं पर महिला एसएसजी है तो कहीं
  21. 0:57ट्रांसजेंडर एसएसजी इस पूरे प्लांट की
  22. 1:00जिम्मेदारी संभालते हैं। जब भी सेसफुल
  23. 1:03व्हीकल या डिस्लेजिंग व्हीकल सेप्टिक टैंक
  24. 1:05को स्लज लेकर यहां आते हैं उसी समय से
  25. 1:08एसएसजी टीम का काम शुरू हो जाता है और
  26. 1:11प्लांट की सफाई से लेके मशीन ऑपरेशन तक
  27. 1:14पूरा सिस्टम पूरे प्लांट वही संभालते हैं।
  28. 1:17वैसे तो इस एफएसटी प्लांट में बहुत सारे
  29. 1:19कोर और नॉन कोर कंपोनेंट है। जैसे कि रैंप
  30. 1:23हो गया, रिसीविंग चेंबर, सेटलिंग कम
  31. 1:25थिकनिंग टैंक, एबीआर एंड एएफ चेंबर,
  32. 1:29पीजीएफ, पॉलिशिंग पोंड, स्लश ड्राइंग बेड,
  33. 1:32स्टोरेज सेट, लैबोरेटरी और इस सब चीजों के
  34. 1:36हम लोग बारे में एक-एक करके डिटेल से
  35. 1:38जानते हैं और उसका वर्किंग प्रोसेस भी
  36. 1:40समझते हैं। तो सबसे पहले बात करते हैं
  37. 1:43रैंप। हम जब डिस्लाइजिंग व्हीकल या वाहन
  38. 1:47प्लांट में प्रवेश करते हैं तो इसी रैंप
  39. 1:49पर चढ़कर अपना स्लज डिस्चार्ज करते हैं और
  40. 1:52यहीं से पूरे ट्रीटमेंट प्रोसेस की शुरुआत
  41. 1:54होती है।
  42. 1:57रैंप रैंप इज द फर्स्ट कंपोनेंट ऑफ द
  43. 2:01एफएसटीपी प्लांट।
  44. 2:03रैंप एक प्लेटफार्म को बोलते हैं जो कि
  45. 2:05कॉनंक्रीट का बना होता है। जहां पर
  46. 2:08सेक्सफुल व्हीकल ट्रेवल करते हैं एंड
  47. 2:10मैकेनिकली सेप्टेज को डिस्पोज करते हैं
  48. 2:13स्लज रिसीविंग चेंबर के अंदर में।
  49. 2:17यह रैंप को इसलिए बनाते हैं क्योंकि इजी
  50. 2:19एसएस हो ग्रेविटी में के लिए और जो स्लज
  51. 2:22हो इज़ली डिस्चार्ज कर सके रिसीविंग चेंबर
  52. 2:25में।
  53. 2:27और रैंप से ही इस ट्रीटमेंट प्रोसेस की
  54. 2:30शुरुआत होती है। रैंप के बाद अगला
  55. 2:32कंपोनेंट है रिसीविंग चेंबर की। यहां सबसे
  56. 2:35बड़े बड़े-बड़े ठोस पदार्थ जैसे सॉलिड
  57. 2:38वेस्ट हो गया, प्लास्टिक, कपड़ा या अन्य
  58. 2:40कचरा अलग किया जाता है। इसका उद्देश्य है
  59. 2:43कि आगे की ट्रीटमेंट प्रक्रिया में कोई
  60. 2:45रुकावट ना आए।
  61. 2:48रिसीविंग चेंबर यह एक टाइप के स्क्वायर
  62. 2:51बॉक्स स्ट्रक्चर है। जहां पर सेफ्टीज जो
  63. 2:54है रिसीव होता है। यह फर्स्ट यूनिट
  64. 2:57सेप्टेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट का फर्स्ट कोर
  65. 2:59कंपोनेंट बोल सकते हैं और इसका मेन
  66. 3:02ऑब्जेक्टिव है कि सेपरेट करता है सॉलिड
  67. 3:05वेस्ट को स्लश से और इसका जो इनलेट चेंबर
  68. 3:09है वो रैंप के जस्ट ऊपर में प्रोवाइड किया
  69. 3:12जाता है जहां से सेफ्टेज जो डिस्चार्ज
  70. 3:15होता है सेक्सुअल व्हीकल के थ्रू रिसीविंग
  71. 3:19चेंबर में एक बास्केट भी होता है जिसे हम
  72. 3:22लोग यूज़ करते हैं रिटेन करने के लिए जितने
  73. 3:24भी कोर्स मटेरियल आते हैं, प्लास्टिक आते
  74. 3:26हैं, गार्बेज आते हैं सेप्टेज के साथ में।
  75. 3:30इन सबको आगे सेटलिंग टैंक में जाने से
  76. 3:32रोकता है और आगे इन सब इनऑर्गेनिक वेस्ट
  77. 3:37के कारण कहीं ब्लॉकेज भी ना हो उसे सेव
  78. 3:39करता है। यह एक तरह से फर्स्ट फिल्टर है
  79. 3:43और यह स्क्रीन बास्केट में जो होल है इसका
  80. 3:46साइज बेसिकली 10 टू 12 एमm होता है। इसके
  81. 3:50बाद स्लज स्क्रीन चैनल के थ्रू होते हुए
  82. 3:53फ्लो करता है। यहां पर हमें वर्टिकल
  83. 3:56स्क्रीन मिलता है। इसका भी काम यही होता
  84. 3:59है कि जो रिटेन करता है कोर्स मटेरियल को
  85. 4:02और यह जो दो वर्टिकल बार है इसके बीच का
  86. 4:05ओपनिंग है वह 3 सेंटीमीटर तक का होता है।
  87. 4:09स्क्रीन बास्केट एंड स्क्रीन चैनल के थ्रू
  88. 4:12इकट्ठा हुए जितने भी ट्रैश है इन ऑर्गेनिक
  89. 4:15सॉलिड है उसको हम लोग एक ट्रे में कलेक्ट
  90. 4:18करते हैं और यह मैनुअली ही कलेक्ट करेंगे।
  91. 4:21उसके बाद आसपास में जो भी आपका मनसिपल
  92. 4:24सॉलिड वेस्ट कलेक्शन फैसिलिटी है वहां पर
  93. 4:27जाके हम लोग डिस्पोज कर देंगे। अब बात
  94. 4:30करते हैं स्लज रिसीमिंग चेंबर के कुछ
  95. 4:32मेंटेनेंस पे। स्टेनलेस स्टील जो इसमें
  96. 4:36यूज होता है वो आपको सिक्स मंथ में एक बार
  97. 4:38इसे हमें चेंज करना चाहिए।
  98. 4:41रिसीविंग चेंबर है वो सप्ताह में एक बार
  99. 4:45अच्छी तरीके से इसे क्लीन करना चाहिए। सो
  100. 4:47दैट कि जितने नीचे डिपॉजिट स्लज है उसे
  101. 4:50साफ किया जा सके और कहीं इधर-उधर
  102. 4:53इनऑर्गेनिक वेस्ट है उसको भी अच्छे से
  103. 4:55क्लीन किया जा सके।
  104. 4:58एनुअली इसको पेंटिंग होना चाहिए इनर
  105. 5:01पोर्शन पे थ्रू इपॉक्सी पेंटिंग के थ्रू
  106. 5:04और यह जो आउटसाइड पोर्शन है वहां पे हमें
  107. 5:07वेदर कोड के थ्रू पेंटिंग करना चाहिए।
  108. 5:10और पूरी स्ट्रक्चर में जब भी आपको कहीं
  109. 5:13ऐसा क्रैक दिखे या कहीं प्लास्टर जो है
  110. 5:16निकल गया है तो आपको उसको प्लास्टरिंग को
  111. 5:19रिपेयर करना चाहिए ऑन ए रिक्वायरमेंट
  112. 5:21बेसिस।
  113. 5:22यहां ध्यान देने की बात है कि जब भी
  114. 5:25डिसलजिंग ऑपरेटर जो है डिसलज कर रहे हो तो
  115. 5:28ग्लव्स, मास्क एंड बूट का यूज करके ही
  116. 5:31करना होना चाहिए। और जो भी स्वीपर हैं वह
  117. 5:34ग्लव्स, मास्क, बूट एंड एप्रन का यूज करने
  118. 5:37के बाद ही काम करें। तो यह है स्लज
  119. 5:39रिसीविंग चेंबर जिसे हम फर्स्ट ट्रीटमेंट
  120. 5:43यूनिट भी बोलते हैं या फर्स्ट कोर
  121. 5:45कंपोनेंट ऑफ द एफएसटीपी प्लांट भी कह सकते
  122. 5:47हैं। जिसके अंदर दो और कंपोनेंट आते हैं।
  123. 5:51एक स्क्रीन बास्केट और दूसरा स्क्रीन
  124. 5:54चैनल।
  125. 5:57अब हम लोग बात करते हैं सेटलिंग कम
  126. 5:59थिकनिंग टैंक के बारे में।
  127. 6:01यह एक रेक्टेंगुलर सेडेंटेशन टैंक है जो
  128. 6:05कि यूज किया जाता है सॉलिड एंड लिक्विड को
  129. 6:08सेपरेट करने के लिए थ्रू द डाइजेशन
  130. 6:10प्रोसेस और इस टैंक में दो कंपार्टमेंट
  131. 6:13होते हैं जो कि अल्टरनेटिव यूज किए जाते
  132. 6:15हैं और किस टैंक में कब वाटर जाएगा इसे
  133. 6:19कंट्रोल करने के लिए दो बटरफ्लाई वाल्व्स
  134. 6:22होते हैं जो कि इसके इनलेट के जस्ट ऊपर
  135. 6:25में बना हुआ होता है। स्लज पार्ट जो है वह
  136. 6:28सेटल हो जाता है और नीचे बॉटम में जमा हो
  137. 6:31जाता है। एक स्लोपिंग फ्लोर होता है और
  138. 6:34उसके बाद एक स्लज बिट होता है जहां पर जमा
  139. 6:37हुआ स्लज जो होता है जिसे हम लोग पंप करके
  140. 6:39बाद में स्लाइंग स्लज ड्राइंग ब्रेड में
  141. 6:41डालते हैं। और इस सेटलिंग टैंक में बैफल
  142. 6:44वार भी होता है जो कि एंट्रेंस और एंड में
  143. 6:47प्रोवाइड किया जाता है। इसे हम प्रोवाइड
  144. 6:50करते हैं स्कम्स को वहां पर रिटेन करने के
  145. 6:53लिए और कोई भी टर्बुलेंस हो उसे बचाने के
  146. 6:56लिए। यदि प्लांट में 100% यूटिलाइजेशन है
  147. 6:59देन दोनों टैंक को अल्टरनेटिव यूज़ किया जा
  148. 7:03सकता है विथ ए लोडिंग पीरियड ऑफ़ सेवन डेज
  149. 7:05एंड द सेटलिंग पीरियड ऑफ़ टू डज़। और यदि
  150. 7:08लिक्विड पार्ट का बात करें तो सेटलिंग कम
  151. 7:11थिकनिंग टैंक के थ्रू होते हुए एनरोबिक
  152. 7:14बैफल रिएक्टर तक पहुंच जाता है। लेकिन
  153. 7:16सेटलिंग पीरियड के टाइम में लिक्विड पार्ट
  154. 7:19फ्लो नहीं करता है और स्लज पार्ट उस टाइम
  155. 7:22वह पूरी तरह से नीचे सेटल होने लगता है और
  156. 7:25धीरे-धीरे स्लज का नीचे बॉटम में एक लेयर
  157. 7:29बनना शुरू हो जाता है और यह प्रोसेस
  158. 7:32कंटिन्यू रहता है जब तक सेटलिंग पीरियड का
  159. 7:34टाइम रहता है और इस टाइम सेटलिंग पीरियड
  160. 7:37में उस टैंक में कोई भी फ्लो नहीं आता है
  161. 7:40स्लज नहीं आता है और सेटलिंग पीरियड खत्म
  162. 7:43होने के बाद हम लोग जो नीचे जमा हुआ स्लज
  163. 7:46है उसे पंप आउट कर देते हैं आउट ऑफ द
  164. 7:49सेटलिंग कम थिकनिंग टैंक। अब इसे हम लोग
  165. 7:51बाहर स्लज को कैसे निकालते हैं टैंक से।
  166. 7:55जैसे कि मैंने स्टार्टिंग में बताया था कि
  167. 7:57टैंक के नीचे में बॉटम लेवल में एक स्लज
  168. 8:00पिट बना हुआ है। वो कनेक्टेड होता है स्लज
  169. 8:03वेटवेल से एक पाइप के थ्रू जिसे कंट्रोल
  170. 8:07किया जाता है बीच में एक बल्ब चेंबर होता
  171. 8:09है। और इस बल्ब चेंबर में एक गेट वाल्व
  172. 8:12होता है जो कि जैसे ही गेट वाल्व्स हम लोग
  173. 8:15ओपन करते हैं, यह ग्रेविटी के थ्रू फ्लो
  174. 8:17होते हुए स्लज बटल में पहुंच जाता है।
  175. 8:20उसके बाद समर्सिबल स्लज पंप की हेल्प से
  176. 8:23हम उसे स्लज ड्राइंग बेड में पंप कर देते
  177. 8:26हैं।
  178. 8:27और यदि बात करें सेटलिंग टैंक के
  179. 8:30मेंटेनेंस का तो अपर लेयर में जो
  180. 8:33एक्यूमुलेटेड स्कम है उसे हमें रेगुलरली
  181. 8:36क्लीन करना चाहिए। डिपेंडिंग अपॉन द लोड
  182. 8:39एंड द कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ इनकमिंग स्लज
  183. 8:42कैसा रहा उसके बेसिस पे हम इसे वीक में एक
  184. 8:44बार या फिर वीक में दो बार इसे यूजिंग द
  185. 8:48फिशनेट शिव के थ्रू हम इसे रिमूव कर सकते
  186. 8:51हैं। और पूरे टैंक को मंथ में एक बार हमें
  187. 8:55हमेशा क्लीन करना चाहिए। सो दैट कि नीचे
  188. 8:58जितने भी जमा स्लज है उसे अच्छे से पानी
  189. 9:01और झाड़ू से हमें साफ कर देना चाहिए। और
  190. 9:05इसका क्लीनिंग भी जो है दोनों टैंक का
  191. 9:07अल्टरनेटिव करना चाहिए। जब एक टैंक का यूज़
  192. 9:10हो रहा है तो हम लोग दूसरे टैंक का
  193. 9:12क्लीनिंग कर सकते हैं। और इसका एनुअल
  194. 9:14पेंटिंग भी जो है वो भी हमें मेंटेन करना
  195. 9:17चाहिए। जो इनर पोर्शन है उसे इपॉक्सी
  196. 9:19पेंटिंग के थ्रू करना चाहिए। और आउटर
  197. 9:22पोर्शन है वह वेदर कोड के थ्रू हमें साल
  198. 9:24में ईयर में एक टाइम्स कम से कम जरूर करना
  199. 9:27चाहिए। और यदि बात करें प्लास्टिक रिपेयर,
  200. 9:31स्लज पंप और पाइपिंग वर्क का तो वो
  201. 9:33रिक्वायरमेंट बेसिस के आधार पर हमें उसे
  202. 9:36सर्विस या रिपेयर करते रहना चाहिए। तो यह
  203. 9:40था सेटलिंग कम थिकनिंग टैंक जिसे हम लोग
  204. 9:43सॉलिड एंड लिक्विड सेपरेशन के लिए जानते
  205. 9:46हैं। अब हम लोग बात करेंगे अगले कंपोनेंट
  206. 9:48के बारे में। ड्राइंग बेड जिसे हम लोग
  207. 9:52एसडीबी के नाम से भी जानते हैं। यह एक
  208. 9:55मशीनरी टैंक है जो कि फील्ड होता है सैंड
  209. 9:58एंड ग्रेवल से और साथ ही में नीचे बॉटम
  210. 10:02लेयर में ड्रेन भी बना होता है टू कलेक्ट
  211. 10:05द लीचेड वाटर। द मेन ट्रीटमेंट ऑब्जेक्टिव
  212. 10:09ऑफ स्लश ड्राइंग बेड इज सॉलिड लिक्विड
  213. 10:12सेपरेशन। इस ट्रीटमेंट यूनिट के ऊपर में
  214. 10:15एक मूवेबल रूफ भी होता है जो कि पूरे बेड
  215. 10:19सरफेस के हाफ एरिया को कवर करता है। स्लज
  216. 10:23वेटेल में एक्यूमुलेट हुए हुए स्लज को
  217. 10:26समर्सिबल स्लज पंप के थ्रू हम लोग पंप आउट
  218. 10:29कर सकते हैं स्लज ड्राइंग बेड में। और ईच
  219. 10:32बेड के लिए डिफरेंट पाइप एलोकेट किया गया
  220. 10:36है। जिस बेड में हमें स्लज की
  221. 10:38रिक्वायरमेंट होगा हम वहां से की ओपन कर
  222. 10:41देंगे और उस बेड में स्लच जो है पहुंच
  223. 10:44जाएगा।
  224. 10:46उसके बाद स्लाइड ड्राइंग बेड में प्रेजेंट
  225. 10:48जो फिल्टर मीडिया है सैंड एंड ग्रेवल उसके
  226. 10:52ऊपर में सॉलिड पार्ट जो है वह फिल्टर आउट
  227. 10:54हो जाएगा। और जो लिक्विड पार्ट है वह नीचे
  228. 10:57ड्रेन के थ्रू लीचेट हो होते हुए लीचेड सम
  229. 11:00वेल में पहुंच जाएगा। जहां से हम लोग
  230. 11:04एनरोबिक बैफल रिएक्टर यानी कि एबीआर में
  231. 11:07हम लोग उस लीचेड को पंप आउट कर सकते हैं।
  232. 11:11ध्यान रहे कि ईच बेड में स्लज का मैक्सिमम
  233. 11:15डेप्थ जो है 20 सेंटीमीटर ही हमें मेंटेन
  234. 11:18करना होता है। और ड्राइंग पीरियड के
  235. 11:22फर्स्ट टू डेज में ही 50% से ज्यादा वाटर
  236. 11:26ड्रेंड आउट हो जाता है थ्रू द लीचेड सम।
  237. 11:29बट स्लज को पूरी तरह से ड्राई होने में
  238. 11:33एप्रोक्समेटली एवरेज 15 डेज का टाइम लगता
  239. 11:36है। डिपेंड अपॉन द वेदर कैसा है? कभी आपका
  240. 11:40समर सीजन रहा तो 10 टू 15 डेज में ड्राई
  241. 11:43हो जाता है। बट इन विंटर डेज इट विल टेक
  242. 11:4620 डेज। और रेनी सीजन में कुछ और टाइमिंग
  243. 11:50ज्यादा लेता है। स्लज ड्राइंग बेड में
  244. 11:53स्लज को ड्राई करने के लिए हम लोग ओपन
  245. 11:56सनलाइट का यूज करते हैं। एंड बेड के टॉप
  246. 11:59में मूवेबल शेड है जो कि साइड में खुला
  247. 12:03रहता है और टॉप में प्रोवाइड किया हुआ जो
  248. 12:06कवर है वह हमें प्रेसिपिटेशन से बचाता है
  249. 12:10और साथ ही साथ में टेंपरेचर भी कंट्रोल
  250. 12:12करने में हेल्प करता है। ड्राइंग पीरियड
  251. 12:15खत्म होने के बाद जो ड्राइड स्लज है उसे
  252. 12:18हम लोग स्लज स्टोरेज शेड में स्टोर कर
  253. 12:21देते हैं। जिसे बाद में हम लोग को
  254. 12:23कंपोस्टिंग या किसी दूसरे पर्पस के लिए
  255. 12:26यूज कर सकते हैं। और यदि हम लोग बात करें
  256. 12:29ऑपरेशन ऑफ द स्लज डाइंग बेड के बारे में
  257. 12:32तो इसके लिए सबसे पहले हमें पैनल रूम में
  258. 12:35जाके पंप स्टार्ट कर देना है। उसके बाद जो
  259. 12:38है बल्ब को ओपन कर देना है। बाय द
  260. 12:41रोटेटिंग द हैंडल या जो भी व्हील है उसको
  261. 12:44रोटेट करके उसके बाद एक बार जब हमारा जो
  262. 12:4820 सेंमी का मार्क है स्लश ड्राइंग बेड
  263. 12:50में वो पहुंच गया उसके बाद हम लोग जो है
  264. 12:54बल्ब को वापस जो है क्लॉकवाइज डायरेक्शन
  265. 12:56में मूव करके उसे वापस क्लोज कर देना है
  266. 12:59और फिर हमें पैनल रूम में जाना है और जाकर
  267. 13:02वहां पर फिर स्विच जो है ऑफ करके पंप को
  268. 13:05बंद कर देना है। अब हम लोग बात करते हैं
  269. 13:07मेंटेनेंस के बारे में।
  270. 13:10तो वीकली या फिर जब भी हमें जरूरत लगे
  271. 13:13पूरे स्ट्रक्चर का क्लीनिंग और ग्रीसिंग
  272. 13:16करते रहना चाहिए। और बेड में प्रेजेंट
  273. 13:19सैंड है उसको लेबलिंग को हमेशा चेक करते
  274. 13:22रहना है। जब भी आपको लगे सैंड लॉस हुआ है
  275. 13:25तो फिर से उस प्लेस पे आप सैंड फिल अप कर
  276. 13:28सकते हैं। स्लज ड्राइंग बेड में प्रेजेंट
  277. 13:31आयरन स्ट्रक्चर और जो सिविल स्ट्रक्चर है
  278. 13:34उन्हें साल में एक बार कम से कम पेंटिंग
  279. 13:37वर्क जरूर करना चाहिए।
  280. 13:39और पूरे बेड को क्लीन करना वह भी साल में
  281. 13:42एक बार होना चाहिए। प्लास्टर रिपेयर और
  282. 13:46आयरन स्ट्रक्चर रिपेयर जब भी आपको जरूरत
  283. 13:49लगे ऑन ए रेगुलर बेसिस पे इसे करते रहना
  284. 13:53चाहिए।
  285. 13:55तो, यह था हमारा स्लज ड्राइंग बेड जो कि
  286. 13:58सॉलिड एंड लिक्विड सेपरेशन में एक
  287. 14:00इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है एफएसटीपी
  288. 14:03प्लांट का। एंड द लास्ट कंपोनेंट ऑफ द
  289. 14:06सॉलिड ट्रीटमेंट इज स्लज। स्टोरेज शेड
  290. 14:10जहां स्लज धीरे-धीरे सूख जाता है और उसमें
  291. 14:13जो मॉइस्चर होता है वो भी पूरी तरह से
  292. 14:15निकल जाता है। इसके बाद सूखे स्लज को
  293. 14:18सुरक्षित कहीं शेड में या फिर आगे उसको
  294. 14:21रीयूज कंपोस्ट के लिए भेज दिया जाता है।
  295. 14:23अभी तक हम लोग देख रहे थे कि सॉलिड
  296. 14:26ट्रीटमेंट के वर्किंग प्रोसेस के बारे
  297. 14:28में। अब हम लोग देखेंगे कि लिक्विड कैसे
  298. 14:31ट्रीट किया जाता है और उसका क्या प्रोसेस
  299. 14:34है एंड किस कंपोनेंट के थ्रू यह वाटर
  300. 14:37ट्रीट होता है। सॉलिड पार्ट स्लश वेटवेल
  301. 14:40के थ्रू स्लश ड्राइंग बेड में पहुंच जाता
  302. 14:43है और लिक्विड पार्ट जो है वह आपको
  303. 14:46नेक्स्ट एबीआर एंड एएफ चेंबर यानी कि
  304. 14:49एनरोबिक बैफल रिएक्टर और एफ यानी कि
  305. 14:52एनरोबिक फिल्टर में पहुंचता है। एनरोबिक
  306. 14:55बैफल रिएक्टर में बिना ऑक्सीजन के रहने
  307. 14:57वाले बैक्टीरिया और ऑर्गेनिक गंदगी को जो
  308. 15:00भी उसके अंदर वेस्ट प्रोडक्ट है उनको
  309. 15:02तोड़ते हैं। यह प्रक्रिया पानी में मौजूद
  310. 15:05प्रदूषण को काफी हद तक कम कर देती है।
  311. 15:08इसके बाद पानी एनरोबिक फिल्टर में जाता
  312. 15:11है। जहां विशेष मीडिया पर मौजूद
  313. 15:13बैक्टीरिया बची हुई गंदगी को और कम कर
  314. 15:15देते हैं।
  315. 15:17एनरोबिक फिल्टर के लास्ट चेंबर में फिल्टर
  316. 15:20मीडिया जैसे कि सिंडर का यूज किया जाता
  317. 15:23है। जिसके लिए बचे हुए कुछ उसके साथ
  318. 15:25सॉलुबल सॉलिड होता है। उसको सेपरेट करने
  319. 15:28में यह हेल्प करता है। इसके बाद नेक्स्ट
  320. 15:31जो है वाटर पहुंचता है पीजीएफ यानी कि
  321. 15:34प्लांटेड ग्रावर फिल्टर में। अब हम लोग
  322. 15:37बात करते हैं प्लांटेड ग्रावर फिल्टर का।
  323. 15:40एफएसटीपी प्लांट में पीजीएफ एक बेहद ही
  324. 15:43महत्वपूर्ण यूनिट है जो एबीआर और एएफ के
  325. 15:46बाद आने वाले पानी को और बेहतर तरीके से
  326. 15:49साफ करता है। पीजीएफ एक सब सरफेस
  327. 15:52हॉरिजॉन्टल फ्लो सिस्टम है जिसमें पानी
  328. 15:54सतह के ऊपर नहीं बल्कि ग्रेवल जो होता है
  329. 15:58जो भी फिल्टर मीडिया है उसके अंदर में
  330. 16:00उसके अंदर दिशा में बहता है। इसमें कना
  331. 16:03इंडिका प्लांट जैसे पौधे लगाए जाते हैं जो
  332. 16:06ट्रीटमेंट प्रोसेस को और ज्यादा प्रभावी
  333. 16:08बनाते हैं। इसका बेहद काम इंपॉर्टेंट होता
  334. 16:11है। जैसे कि बीओडी, सीओडी को और कम करना,
  335. 16:14सस्पेंडेड सॉलिड हटाना, न्यूट्रिएंट जैसे
  336. 16:17कि नाइट्रोजन, फास्फोरस रिड्यूस करना और
  337. 16:20पैथोजन कम करना। एबीआर और एएफ से आने वाले
  338. 16:24पानी जो होते हैं परफोलेटेड पाइप या
  339. 16:26परफोलेटेड होल से पीजीएफ में प्रवेश करते
  340. 16:28हैं। जिससे छोटे-छोटे छेद पानी को पूरे
  341. 16:31बेड में समान रूप से फैलाते हैं। अगर पानी
  342. 16:35सही से डिस्ट्रीब्यूट नहीं होगा तो
  343. 16:37ट्रीटमेंट भी सही से नहीं होगा। पीजीएफ
  344. 16:40में अलग-अलग साइज के ग्रेवल और फिल्टर
  345. 16:42मीडिया होते हैं। बॉटम में सबसे बड़े
  346. 16:45फिल्टर मीडिया जो होते हैं वह 20 से 40
  347. 16:47एमm, मीडियम में मध्यम में 10 से 20 एमm
  348. 16:51और छोटे-छोटे जो ग्रेवल होते हैं वो 4 से
  349. 16:5310 एमm के होते हैं। सस्पेंडेड सॉलिड जो
  350. 16:56होते हैं इन्हीं फिल्टर मीडिया में फंस
  351. 16:58जाते हैं। जिससे कि टर्बिडिटी भी कम होती
  352. 17:01है और फ्लो भी स्मूथ रहता है। पानी इनलेट
  353. 17:04से आउटलेट की तरह हॉरिजॉन्टली फ्लो करता
  354. 17:06है। यह फ्लो सरफेस के नीचे सब सरफेस में
  355. 17:10होता है। इससे यह फायदे होते हैं कि मच्छर
  356. 17:12नहीं बनते हैं। बदबू भी कम होती है और
  357. 17:15सिस्टम पूरा सुरक्षित रहता है। इस
  358. 17:18प्लांटेड ग्रेवल फिल्टर में लगे हुए यह
  359. 17:20पाइप जो आपको दिख रहे हैं, इससे हम लोग
  360. 17:23बेड के वाटर लेवल चेक कर सकते हैं। और यह
  361. 17:26जो आप प्लांट देख रहे हैं, यह कोई सजावटी
  362. 17:28प्लांट नहीं है। इसे काना इंडिका बोलते
  363. 17:31हैं। इसका काम होता है न्यूट्रिएंट
  364. 17:33अब्सॉर्ब करता है। जैसे नाइट्रोजन,
  365. 17:35फास्फोरस और जड़ों से ऑक्सीजन छोड़ता है
  366. 17:38जो माइक्रोबियल एक्टिविटी बढ़ाता है और
  367. 17:41क्लॉगिंग भी कम करता है। सिस्टम को सुंदर
  368. 17:44और बदबू फ्री बनाता है और पीजीएफ में एक
  369. 17:48आउटलेट पाइप भी होता है जो कि आप यह अभी
  370. 17:50देख रहे हैं और यह बहुत ही महत्वपूर्ण है।
  371. 17:53इसका काम है वाटर लेवल को मेंटेन करना।
  372. 17:56पाइप की हाइट एडजस्ट करके हम वाटर लेवल
  373. 17:58फिक्स किया जा सकता है। जिससे काना इंडिका
  374. 18:02प्लांट को पर्याप्त पानी मिलता है और
  375. 18:04ट्रीटमेंट भी एफिशिएंट होता है। यदि बारिश
  376. 18:08के समय में ओवरफ्लो हो जाता है तो उसे
  377. 18:10कंट्रोल करने में भी यह इंपॉर्टेंट रोल
  378. 18:13प्ले करता है। आप जब भी ओवरफ्लो हो रहा है
  379. 18:16या कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड में यह पूरा बेड
  380. 18:18में तो आप पाइप को नीचे कर देते हैं ताकि
  381. 18:21जो भी अतिरिक्त पानी है वह बाहर निकल जाता
  382. 18:24है। जिससे प्लांट डूबने से बचते हैं और
  383. 18:27बेड डैमेज भी नहीं होता है। पीजीएफ से
  384. 18:30ट्रीटेड वाटर आगे पॉलिशिंग पोंड में जाता
  385. 18:32है। पॉलिशिंग पोंड का इनलेट इस तरह डिजाइन
  386. 18:36किया जाता है कि पानी धीरे-धीरे पोंड में
  387. 18:38फैले और टर्बुलेंस कम रहे। पानी पोंड में
  388. 18:41दो से पांच दिनों तक रुकता है। इस दौरान
  389. 18:44कई प्राकृतिक नेचुरल प्रोसेस होती है।
  390. 18:47छोटे-छोटे सॉलिड जो पीजीएफ से बच जाते
  391. 18:49हैं, वह पोंड के तल में बॉटम में बैठ जाते
  392. 18:52हैं जिससे कि वाटर क्लेरिटी बढ़ती है। यह
  393. 18:55पोंड पूरा खुला रहता है। इसलिए सूर्य की
  394. 18:57किरणें सीधे पानी पर पड़ती है और यूवी रेज
  395. 19:00से पैथोजन को मारती है। बैक्टीरिया और
  396. 19:03वायरस को संख्या कम कर देती है। पॉलिशिंग
  397. 19:06पोंड में एक यह पूरा नेचुरल साइकिल चलते
  398. 19:09रहता है। जहां पे ऑक्सीजन रिलीज़ भी होते
  399. 19:12हैं और ऑर्गेनिक मैटर को डिग्रेड करते हैं
  400. 19:15और उसके साथ-साथ एक्सेस न्यूट्रिएंट रिमूव
  401. 19:18भी करता है। यदि बात करें इसके बाद जो
  402. 19:21आउटलेट वाटर है उसका इरीगेशन में
  403. 19:24गार्डनिंग में या सेफ डिस्चार्ज में आप
  404. 19:26अलग-अलग जगह में इसका यूज़ कर सकते हैं।
  405. 19:29वैसे पानी यहां पे यदि हम उड़ीसा में बात
  406. 19:31करें तो इसके बाद हम लोग कंस्ट्रक्शन लाइन
  407. 19:34में या फिर रेलवे में भी यूज करते हैं।
  408. 19:37यहां एक लैब भी है। इस प्लांट में नियमित
  409. 19:41रूप से डेली सैंपल की जांच की जाती है। यह
  410. 19:45काम करने वाले यहां पे टीआरपी यानी कि
  411. 19:47टेक्निकल रिसोर्स पर्सन ये सैंपल की
  412. 19:50टेस्टिंग करते हैं। जैसे कि बीओडी, सीओडी,
  413. 19:53पीएच, टीएसएस इस तरह के कुछ टेस्ट या
  414. 19:56पैरामीटर सुनिश्चित की जाती है। जिससे कि
  415. 19:59प्लांट सही तरीके से काम कर सके।
  416. 20:03इस प्लांट की पूरी तरह से जिम्मेदारी जैसे
  417. 20:06कि मैंने स्टार्टिंग में बताया एसएसजी को
  418. 20:07दी जाती है। एसएसजी के सदस्य जो होते हैं
  419. 20:11वो प्लांट की सफाई, वाहन एंट्री
  420. 20:13मैनेजमेंट, मशीन ऑपरेशन पूरे सिस्टम की
  421. 20:16देखरेख सब कुछ संभालते हैं। इससे ना केवल
  422. 20:20सैनिटेशन सिस्टम को मजबूत होता है बल्कि
  423. 20:22स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता है। तो
  424. 20:25दोस्तों आज हमने देखा उड़ीसा के एफएसटीपी
  425. 20:28प्लांट के अंदर क्या होता है। जो हमारी
  426. 20:31गंदगी घरों से सेफ्टिंग टैंक में जमा होती
  427. 20:34है वो यहां आकर साइंटिफिक और नेचुरल
  428. 20:36प्रक्रिया से ट्रीट होती है ताकि
  429. 20:38एनवायरमेंट को नुकसान ना पहुंचे और इस
  430. 20:41पूरे मिशन में एसएजी समूहों की भूमिका
  431. 20:45बेहद महत्वपूर्ण होती है। तो दोस्तों, यह
  432. 20:48था एफएसटीपी प्लांट यानी कि फिकल स्लश
  433. 20:51ट्रीटमेंट प्लांट। जहां पे हमारे घरों से
  434. 20:54आए हुए सेफ्टी टैंक से फिकल स्लश ट्रीट
  435. 20:56होते हैं। जहां हमने एक-एक कंपोनेंट के
  436. 21:00विषय में डिटेल से जाना। उसका वर्किंग
  437. 21:02प्रोसेस के बारे में कि किस तरीके से
  438. 21:04सॉलिड एंड लिक्विड यहां पर ट्रीट किए जाते
  439. 21:07हैं और उसका एंड ट्रीटमेंट जो है एंड
  440. 21:09प्रोडक्ट है उसका क्या रीयूज होता है। तो
  441. 21:12आप इस तरह के ही वीडियो देखने के लिए
  442. 21:14जानने के लिए हमारे चैनल के साथ बने रहिए।
  443. 21:17धन्यवाद।

About this transcript

This page contains the full transcript of Faecal Sludge Treatment Plant (FSTP) Explained | Step‑by‑Step Treatment Process Odisha | SHGs works by Dagger Journey, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 3,422 words across 443 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

What you can do with it

Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.

Free YouTube transcript tool

YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.