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  1. 0:00कुछ समय पहले अभी मेरे पास कई सारे बच्चे
  2. 0:04आए अलग-अलग समय पर आए कुछ लड़के कुछ
  3. 0:08लड़कियां और उनकी एक कॉमन प्रॉब्लम थी कि
  4. 0:11मैम हमें एडल्ट कंटेंट देखने की एडिक्शन
  5. 0:14हो गई है और अब हमें समझ नहीं आ रहा हम
  6. 0:16क्या
  7. 0:17करें और तब मुझे रियलाइज हुआ कि यह यंग
  8. 0:21जनरेशन के अंदर हो सकता है बड़ों को भी यह
  9. 0:25प्रॉब्लम एक फेस करनी पड़ती हो नाउ वी हैव
  10. 0:29टू अंडर अंडरस्टैंड कि आखिर यह एडल्ट
  11. 0:32कंटेंट देखने की हमारे छोटे बच्चों को,
  12. 0:35हमारे पढ़ने वाले बच्चों को और बाकी सबको
  13. 0:38भी क्यों क्यों आदत लग रही है? तो इसकी
  14. 0:40थोड़ी साइंस समझेंगे तो शायद हम इसे बेहतर
  15. 0:42डिकोड कर पाए। क्योंकि इसका असर सिर्फ
  16. 0:46हमारे इंडिविजुअल हेल्थ पर नहीं पड़ता।
  17. 0:49हमारी फैमिली लाइफ पर पड़ता है। देश पर
  18. 0:52पड़ता है और एक इंटरनेशनलली ह्यूमैनिटी पे
  19. 0:54भी पड़ता है। जैसे सबसे पहले यह एडल्ट
  20. 0:58कंटेंट क्या करता है हमारे दिमाग में
  21. 1:00जाके? क्योंकि आजकल फोन हर बच्चे के पास
  22. 1:03है, हाथ में है और जैसे ही उसके हाथ में
  23. 1:06फोन या इंटरनेट आ जाता है, वह उसके लिए सब
  24. 1:10पूरी दुनिया खुल जाती है। चाहे वो दुनिया
  25. 1:13उसके लिए फायदे की हो या नुकसान की। रोक
  26. 1:16नहीं सकते क्योंकि इंटरनेट से आप कुछ भी
  27. 1:18सर्च करोगे आ जाता है। कहीं ना कहीं से
  28. 1:22एड्स, एडवरटाइजमेंट्स के थ्रू भी ऐसी
  29. 1:24चीजें आ जाती हैं। तो, हमें यह समझना
  30. 1:26पड़ेगा कि आखिर यह इतना एडिक्टिव क्यों
  31. 1:29है? क्यों बच्चे उस तरफ देख रहे हैं? जबकि
  32. 1:33उन्हें खुद भी पता है कि यह गलत है।
  33. 1:35उन्हें खुद भी ये रियलाइज हो रहा है कि ये
  34. 1:37उन्हें हार्म कर रहा है। तो क्यों देख रहे
  35. 1:39हैं? सबसे
  36. 1:41पहले हमारा दिमाग बहुत
  37. 1:45सारे हॉर्मोंस न्यूरो ट्रांसमिटर्स के ऊपर
  38. 1:49काम करता है। जैसे कि डोपामिन, सेरेटोनिन
  39. 1:52और अलग-अलग तरीके के हमारे बहुत
  40. 1:55सारे मेंटल हॉर्मोंस होते हैं। मेंटल दीज़
  41. 1:59रिसेप्टर्स होते हैं। न्यूरो रिसेप्टर्स
  42. 2:01होते हैं। न्यूरोट ट्रांसमिटर्स होते हैं।
  43. 2:04डोपामिन मतलब जो हमें खुशी दे। है ना?
  44. 2:08यानी कि हम जैसे हमारा एववोल्यूशन हुआ उस
  45. 2:11एवोल्यूशन में हमारे दिमाग की वायरिंग ऐसी
  46. 2:15हो गई कि जो भी चीज हमें सेटिस्फेक्शन
  47. 2:17देती है जो भी चीज हमें खुशी देती है हम
  48. 2:20उसको बार-बार करना चाहते हैं। और वो जनरली
  49. 2:24किससे होती थी? जब हम मेहनत करके सक्सेस
  50. 2:27पाते थे। लेकिन आजकल यह जो डोपामिन है यह
  51. 2:33अलग तरीके से काम कर रहा है। जैसे कि एक
  52. 2:36व्यक्ति ने एक बच्चे ने कोई वीडियो देखी।
  53. 2:38तो तुरंत उसके दिमाग में यह डोपामिन रिलीज
  54. 2:41हुआ और न्यूरोट ट्रांसमिटर्स ने ऐसा एक
  55. 2:44चैनल बनाया कि अब उसको थोड़े दिनों बाद
  56. 2:47थोड़े समय बाद दोबारा से उसको वही डोपामिन
  57. 2:50रश चाहिए। लेकिन ऐसा क्या हुआ? प्रॉब्लम
  58. 2:53कहां पे है? ठीक है? अगर प्लेजर मिल रहा
  59. 2:55है, अगर खुशी मिल रही है तो क्या प्रॉब्लम
  60. 2:56है? किसी को क्या प्रॉब्लम होनी चाहिए?
  61. 2:58प्रॉब्लम यह है कि हमारा दिमाग उस टाइप के
  62. 3:01रश के लिए बना ही नहीं है और उसके अंदर
  63. 3:06टॉलरेंस पावर बढ़ जाती है। जैसे कि ड्रग
  64. 3:08एडिक्शन होती है। आपने सुना होगा कि कोई
  65. 3:10व्यक्ति अगर शराबी है, कोई अल्कोहल लेता
  66. 3:12है तो थोड़े अल्कोहल के बाद उसको शांति
  67. 3:16नहीं मिलती। अगर वो बहुत लंबे समय से
  68. 3:18अल्कोहल पी रहा है तो
  69. 3:21पहले एक गिलास पीता होगा। है ना? थोड़े
  70. 3:24दिनों बाद वो दो गिलास पे आ जाएगा।
  71. 3:26क्योंकि उसको उतनी संतुष्टि अब सिर्फ दो
  72. 3:28ग्लास से मिल रही है और थोड़े समय और
  73. 3:30पिएगा तो टॉलरेंस आ जाएगी। उसे उस दो
  74. 3:32ग्लास में भी नशा नहीं होगा। फिर उसे तीन
  75. 3:34ग्लास अल्कोहल चाहिए। उसी तरह सिगरेट पीने
  76. 3:37वालों के साथ कोई भी ड्रग एडिक्शन इसी तरह
  77. 3:40से
  78. 3:41है। इसी कारण से जो यह एडल्ट कंटेंट की
  79. 3:46वीडियोस, कंटेंट, लिटरेचर यह सारा क्या
  80. 3:50करता है? यह भी हमारे दिमाग में तुरंत
  81. 3:53डोपामिन रश देता है और इसकी भी टॉलरेंस
  82. 3:57बढ़ जाती है। अब उतने कंटेंट से उस तरीके
  83. 3:59के कंटेंट से इंसान को संतुष्टि नहीं
  84. 4:02मिलती तो वो और
  85. 4:04ज्यादा एग्रेसिव कंटेंट एक्सट्रीम कंटेंट
  86. 4:08देखने की कोशिश करता है। अब ऐसे में जब वह
  87. 4:12इस तरीके के कंटेंट देख रहा है, उसके
  88. 4:15दिमाग के अंदर जब यह वाली सारी चीजें हो
  89. 4:18रही हैं, तो जब ये कंटेंट दिमाग में जाता
  90. 4:21है, एक तो नशे की तरह लत लग रही है। है
  91. 4:24ना? उसको कंटेंट देखने की लत लग रही है।
  92. 4:27पहला अब जो कंटेंट की लत है, वह भी
  93. 4:30टॉलरेंस के कारण और एक्सट्रीम और अग्रेसिव
  94. 4:32होती जा रही है। क्यों? क्योंकि अब उसको
  95. 4:34उतने लेवल पर संतुष्टि नहीं आ रही। अब
  96. 4:36उसको और खतरनाक कंटेंट देखना है और ज्यादा
  97. 4:40एग्रेसिव कंटेंट देखना है।
  98. 4:43तीसरा जैसे ही हमारे दिमाग में यह अब्रप्ट
  99. 4:49डोपामिन रश होने लगता है तो हमारे दिमाग
  100. 4:52का फ्रंटल लोब साइंस है ये। मैं नहीं बता
  101. 4:56रही हूं। ये साइंटिस्ट ने रिसर्चरर्स ने
  102. 4:57बताया है कि हमारा फ्रंटल लोब श्रिंक कर
  103. 5:01जाता है। धीरे-धीरे उसके सेल्स मरने लगते
  104. 5:04हैं और वो श्रिंक करने लगता है। फ्रंटल
  105. 5:07लोब हमारे दिमाग में रैशनलिटी लेकर आता
  106. 5:10है। यानी कि डिसीजन मेकिंग। हम लॉजिक से
  107. 5:14सोच समझ के डिसीजंस लेते हैं। तो जब यह
  108. 5:17फ्रंटल लोब श्रिंक हो गया तो यानी कि आपकी
  109. 5:21रैशनली सोचने समझने की शक्ति सही डिसीजंस
  110. 5:25लेने की शक्ति धीरे-धीरे कम होती जाती है।
  111. 5:28और इसी साइकिल से जैसे ही आपकी शक्ति कम
  112. 5:31हुई रैशनली सोचने की तो आप कैसे सोच रहे
  113. 5:33हो? जानवर इंपल्स से सोचते हैं। इंसान जो
  114. 5:37इवॉल्व स्पीशीज है वह रैशनली सोचती है। वह
  115. 5:41चीजों को सही गलत का आकलन करती है और उसके
  116. 5:44बाद डिसीजन लेती है कि यह काम करना है या
  117. 5:47नहीं करना। यह देखना चाहिए या नहीं देखना
  118. 5:50चाहिए या यह रिश्ता मेरे लिए
  119. 5:54किस मर्यादा का
  120. 5:56है। तो यह काम सारा काम हमारे रैशन ब्रेन
  121. 6:01का है ह्यूमंस का। लेकिन अगर यह नेशनल
  122. 6:04ब्रेन श्रिंक हो जाए तो हम नियरली डी
  123. 6:07इवॉल्व हो रहे हैं। डी इवॉल्व मतलब हमने
  124. 6:09आगे बढ़ने की जगह वो व्यक्ति पीछे जाने
  125. 6:12लगता है। उसके अंदर जानवरों वाले इंपल्सिव
  126. 6:15बिहेवियर इंपल्सिव एक्शंस आने लगते हैं।
  127. 6:18क्योंकि दिमाग का वो एरिया जहां रैशन थॉट
  128. 6:20था वो श्रिंक हो
  129. 6:21गया। और अब वो व्यक्ति उस तरीके से
  130. 6:26लॉजिकली नहीं सोच पाता। और कंपल्सिवली
  131. 6:29कंपल्शन के थ्रू उसको ऐसी कंपल्शन होती है
  132. 6:32जैसे अगर एक शराबी को शराब ना मिले तो वह
  133. 6:36परेशान सा हो जाता है। उसे उसे किसी चीज
  134. 6:38की कमी महसूस होती है। उसी तरीके से ऐसी
  135. 6:41कंटेंट को देखने वालों को विड्रॉल
  136. 6:44सिम्टम्स होते हैं। उन्हें लगता है कि
  137. 6:46हमें ऐसा कंटेंट देखना
  138. 6:49है। और कंपल्सिव इंपल्सिव बिहेवियर के
  139. 6:52अंदर उनके अपने बिहेवियरल स्ट्रक्चर के
  140. 6:56अंदर अंतर आना चालू हो जाता है। जिससे जो
  141. 7:00काम उनको असली में सक्सेस देता जो सही
  142. 7:05तरीके से सही अमाउंट में डोपामिन देता
  143. 7:07प्लेजर देता हैप्पीनेस देता पीस देता वो
  144. 7:10सब खत्म हो जाता है। और साइंटिस्ट का कहना
  145. 7:14है, फिजियोलॉजिस्ट का कहना है,
  146. 7:16न्यूरोसाइंटिस्ट का कहना है कि बिकॉज़ ऑफ
  147. 7:20दिस श्रिंकेज ऑफ फ्रंटल लोब, कंपल्सिव
  148. 7:24बिहेवियर एंड डोपामिन
  149. 7:26रश जो ऐसे लोग होते हैं वो धीरे-धीरे
  150. 7:31एडीएचडी, अटेंशन, डेफिसिट, हाइपर, एक्टिव
  151. 7:34डिसऑर्डर, ए्जायटी, पैनिक, डिप्रेशन इनके
  152. 7:39शिकार होने लगते हैं। क्योंकि डोपामिन रश
  153. 7:43बहुत तेज हो रहा है। उतना दिमाग हैंडल कर
  154. 7:45नहीं सकता। रैशन ब्रेन श्रिंक हो गया।
  155. 7:48इंपल्सिव बिहेवियर हो गया। अब इन लोगों के
  156. 7:52अंदर मेंटल इशूज़ स्टार्ट हो जाते हैं।
  157. 7:54धीरे-धीरे पता भी नहीं चलता। और इंसान
  158. 7:57सोचता है शायद मैं किसी अपने अ काम के
  159. 8:01स्ट्रेस के कारण यह सब हो रहा है। लेकिन
  160. 8:04बहुत बार यह सारा स्ट्रेस सारा बिहेवियरल
  161. 8:07पैटर्न आपके इस एडिक्शन से भी जुड़ा हो
  162. 8:10सकता है।
  163. 8:13प्लस जब आप यह सारी चीजों में इंडल्ज हो
  164. 8:16जाते हैं तो आप जो आपको आपकी अचीवमेंट
  165. 8:20करनी थी लाइफ में जो आपका गोल था वो कहीं
  166. 8:23ना कहीं दूर हो जाता है आपसे चाहे वह
  167. 8:25पढ़ाई करना हो चाहे वो आपको बिजनेस करना
  168. 8:29हो अपनी जॉब करना हो उसमें ग्रोथ करना हो
  169. 8:32क्योंकि रैशन ब्रेन एक बार श्रिंक हुआ तो
  170. 8:35वह किसी एक काम के लिए तो नहीं होगा वो
  171. 8:37सभी कामों के लिए होगा और अगर समय इन सब
  172. 8:40चीजों में चला जाए। इस घटिया कंटेंट में
  173. 8:43चला जाए तो किसका नुकसान है? हमारा ही
  174. 8:46नुकसान है। चाइनीस फिलॉसोफर्स ने और बहुत
  175. 8:49सारी इंडियन फिलॉसफीस ने एक बात कही है कि
  176. 8:53हमारा दिमाग एक गार्डन की तरह है। गार्डन
  177. 8:57होता है ना उसकी तरह है। वहां हम अगर
  178. 9:02अच्छे फूल उगाएं, कुछ हर्ब्स उगाएं, कुछ
  179. 9:05खाने पीने की चीजें उगाएं तो कितना अच्छा
  180. 9:08लगता है ना? सुंदर लगता है। खुशबू आती है।
  181. 9:11लेकिन अगर उसी जगह पर उसी गार्डन में अगर
  182. 9:14हम उसका ख्याल ना रखें जो उग रहा है गुने
  183. 9:17दिन जो कंटेंट हमें इंटरनेट दिखाना चाहता
  184. 9:20है देखने लगे तो क्या होगा वो जो गार्डन
  185. 9:24उसमें घास उगाएगी और घास में भी वीड्स
  186. 9:27उगाएंगी और अगर उसका ख्याल नहीं रखा उसमें
  187. 9:31हमने खराब टाइप के पेड़ लगा दिए कांटों
  188. 9:34वाले पेड़ लगा दिए तो वो भी उगने लग
  189. 9:37जाएंगे क्योंकि उसकी प्रवृत्ति है उसकी
  190. 9:39नेचर है उगना। उसी तरह हमारे विचारों का,
  191. 9:43हमारे दिमाग की नेचर है कि हम जिस विचार
  192. 9:47के ऊपर फोकस डालेंगे वो बढ़ने लगेगा हमारी
  193. 9:50लाइफ में। हमें उसी को उसी में अच्छा
  194. 9:53अच्छाई महसूस होने लगेगी, मजा आने लगेगा।
  195. 9:57तो जब ऐसे कंटेंट पर लोग जाते हैं, वह
  196. 9:59अपने दिमाग के इस उपवन को इस गार्डन को
  197. 10:02कहीं ना कहीं या तो ध्यान नहीं दे रहे हैं
  198. 10:05या उसमें जंगली पेड़ पौधे उगा और अंत में
  199. 10:09ये किसका नुकसान है? व्यक्ति के खुद का।
  200. 10:12यह तो हुई व्यक्ति की बात कि हां हेल्थ पर
  201. 10:16असर पड़ता है, फिजिकल हेल्थ पर पड़ता है,
  202. 10:18मेंटल हेल्थ पर पड़ता है, स्पिरिचुअल
  203. 10:20हेल्थ पर पड़ता है, बिहेवल पे पड़ता है।
  204. 10:22यह तो ठीक है। व्यक्ति को तो बहुत नुकसान
  205. 10:24होते ही होते हैं। यह हमने साइंस से समझ
  206. 10:27लिया। लेकिन क्या इसका असर फैमिली पे भी
  207. 10:30पड़ता है? बिल्कुल। क्योंकि जिस तरीके का
  208. 10:33कंटेंट कई बार दिखाया जाता है, उससे आपके
  209. 10:37फैमिली लाइफ, आपके रिलेशंस इन सबके अंदर
  210. 10:40एक
  211. 10:42एक खिंचाव महसूस हो होता है। यानी आपकी
  212. 10:46अगर आप ऐसी कोई चीज देख रहे हैं जिसके
  213. 10:49अंदर ऐसे दो रिश्तों की बात हो रही है
  214. 10:52जिन्हें जिनके बारे में इस कॉन्टेक्स्ट पे
  215. 10:54बात नहीं होनी चाहिए। सेक्सुअल तरीके से
  216. 10:56बात नहीं होनी चाहिए। सेंसुअल तरीके से
  217. 10:58बात नहीं होनी चाहिए। अगर आप उस कंटेंट को
  218. 11:00कहीं पर पढ़ते हैं, कहीं पर देखते
  219. 11:04हैं तो वह जो कंटेंट है कहीं ना कहीं आपके
  220. 11:07पर्सपेक्टिव, आपके नजरिए में एक अंतर डाल
  221. 11:10देता है। आप जिस प्योरिटी, जिस लव केयर के
  222. 11:15साथ हमें अपने रिश्तों को देखना चाहिए वो
  223. 11:18शायद वह व्यक्ति ना देख पाए। उसको वहां पर
  224. 11:23एक अलग तरीके का सेक्सुअल रिलेशनशिप नजर
  225. 11:27आए। जो कि इन पोरिटी ऑफ फैमिली लाइफ को
  226. 11:29खत्म करता है। पोरिटी ऑफ रिलेशंस को खत्म
  227. 11:32करता है। और हम सबकी कोर वैल्यूस कोर पीस
  228. 11:39शांति सबसे पहले सबसे ज्यादा तब होती है
  229. 11:41जब हमारे कोर वैल्यूस कोर फैमिली वैल्यूस
  230. 11:43सही रहते हैं। डिस्टर्बड डिस्टोर्टेड
  231. 11:46फैमिली वैल्यूस में फैमिली स्ट्रक्चर में
  232. 11:49हमेशा केस होता है। तो पहला तो
  233. 11:54दूसरा रियलिटी और रील का अंतर ब्लर हो
  234. 11:58जाता है। एक होता है रियलिटी। रियलिटी
  235. 12:01जैसा नेचर ने इन सारी एक्टिविटीज को इन
  236. 12:05सारी बातों को जिस तरीके से स्ट्रक्चर
  237. 12:08किया है बनाया है प्रकृति ने जैसा दिया
  238. 12:10है। दूसरा होता है कैमरे के लिए एडिक्शन
  239. 12:16क्रिएट करने के लिए मॉनिटरी बेनिफिट
  240. 12:19क्रिएट करने के लिए कुछ लोगों द्वारा जैसे
  241. 12:22फिल्म बनाई जाती है। वीएफएक्स क्रिएट किया
  242. 12:25जाता है। है ना? है ना बीएफएक्स में हम
  243. 12:27देखते हैं डायनासोर आया असलियत में थोड़ी
  244. 12:30ना होता है वो क्रिएट किया जाता है ना ऐसे
  245. 12:33हरा पर्दा लगा के उसके ऊपर कई सारे इफेक्ट
  246. 12:36डाल के उसे क्रिएट किया जाता है एक दानव
  247. 12:38बनाया जाता है कोई देवता बनाया जाता है तो
  248. 12:40वो सब वीएफएक्स वो सब एक कैमरे की कारीगरी
  249. 12:44होती है कंप्यूटर की कारीगरी होती है उसी
  250. 12:48तरीके से ऐसा बहुत सारा कंटेंट जो बनाया
  251. 12:50जाता है उसमें कैमरे की कारीगरी होती है
  252. 12:54लेकिन जब छोटे छोटे बच्चे, यंग बच्चे,
  253. 12:59टीनएजर्स और बहुत सारे ऐसे लोग जो शायद कई
  254. 13:02बार इसको नहीं समझ पाते, उतने रैशन नहीं
  255. 13:05होते। तो जब वो ऐसा कंटेंट देखते हैं वो
  256. 13:08रियल और रियल के अंतर को ब्लर कर देते
  257. 13:11हैं। उन्हें समझ नहीं आता। है वो वही उसी
  258. 13:13को रियल मानने लगते हैं जिसके
  259. 13:17कारण हमारे अंदर बिहेवियर में वैसी
  260. 13:20प्रवृत्तियां आने लगती है जो कि नहीं आनी
  261. 13:22चाहिए जो समाज के लिए परिवार के लिए सही
  262. 13:25नहीं है। रिलेशनशिप्स खराब होने लगते हैं
  263. 13:28हस्बैंड वाइफ के बाकी सारे परिवार के भी।
  264. 13:31तो हमें वी हैव टू बी वेरी अंडरस्टैंडिंग
  265. 13:35कि कि जो
  266. 13:37हमारा पर्सपेक्टिव है खासकर कि इस टाइप के
  267. 13:42कंटेंट को लेके उसे हम समझें कि यह किस
  268. 13:44लिए बनाया जा रहा है। यह इसलिए बनाया जा
  269. 13:48रहा है ताकि आप एडिक्ट हो। इसके इस तरीके
  270. 13:51से डिजाइन किया जाता है। तो क्या आप इतने
  271. 13:54बेवकूफ हैं? क्या आप इतने गलेबल है कि
  272. 13:57उसका शिकार हो जाएंगे। उसको उस उन लोगों
  273. 14:00के मंसूबों को पूरा होने देंगे? तो ये तो
  274. 14:03परिवार की बात है। समाज हमने देखा कि
  275. 14:09जुबिनाइल क्राइम्स बढ़ते हैं। क्यों बढ़ते
  276. 14:11हैं? क्योंकि इस तरीके का कंटेंट रेडली
  277. 14:14अवेलेबल हो गया है। यंग बच्चे समझ ही नहीं
  278. 14:17पाते। रील और रील का अंतर है ना? और फिर
  279. 14:20क्राइम्स हो जाते हैं। समाज के अंदर
  280. 14:24ऑब्जेक्टिफिकेशन होने से और भी बहुत तरीके
  281. 14:28की परेशानियां आती
  282. 14:29है।
  283. 14:32जैसे आपने सुना होगा ह्यूमन ट्रैफिकिंग।
  284. 14:35आपने सुना होगा कि यंग बच्चों को, लड़के
  285. 14:38लड़कियों को दोनों को ही किडनैप कर लिया
  286. 14:40जाता है। इधर-उधर ले जाया जाता है।
  287. 14:42जिन्हें बाद में इसी तरीके के एडल्ट
  288. 14:44कंटेंट को बनाने में यूज़ किया जाता है।
  289. 14:47यानी कि आप तो एक वीडियो ही देख रहे थे।
  290. 14:52कोई आपने आपने कुछ नहीं किया। आपने तो
  291. 14:54सिर्फ एक वीडियो देख ली ना या आपने तो एक
  292. 14:57कंटेंट पढ़ा
  293. 14:59लेकिन उससे कनेक्टेड डॉट्स बहुत सारे हैं।
  294. 15:04उस उससे कनेक्टेड डॉट्स हैं क्योंकि वो
  295. 15:06वीडियो देखी जा रही है। इसीलिए उस तरीके
  296. 15:10का कंटेंट और बनेगा। कौन बनाएगा? उसके लिए
  297. 15:14ऐसे विक्टिम्स को ढूंढा जाए जिन्हें कि
  298. 15:17पकड़ के जबरदस्ती
  299. 15:19टॉर्चर करके परेशान करके उनकी डिग्निटी को
  300. 15:23ट्रेंपल करके उनसे यह वीडियोस बनवाई
  301. 15:27जाए। यानी कि आपने तो बड़ा इनोसेंट सा एक
  302. 15:30एक्ट किया कि मुझे देखने का मन था। देख
  303. 15:34लिया मैंने क्या किया? लेकिन आपको नहीं
  304. 15:36पता।
  305. 15:38इसके चैन, इसकी तारें कहां तक जुड़ी हुई
  306. 15:41हैं? क्या आप उस तरीके की किसी एक्टिविटी
  307. 15:43के अंदर अपना छोटा सा ही सही तिनके भर भी
  308. 15:47क्या आप अपना कंट्रीब्यूशन देना चाहेंगे?
  309. 15:49नहीं ना? बिकॉज़ इफ यू आर ह्यूमन यू
  310. 15:52अंडरस्टैंड दैट पेन ऑफ एनी अदर ह्यूमन
  311. 15:56बीइंग इज एज रेलेवेंट एज इज़ इट इज़ योर
  312. 16:01पेन।
  313. 16:02बिकॉज़ जिन लोगों को वो ले जाते हैं, जिन
  314. 16:05बच्चों को वो ले जाते हैं, जिन बच्चों को
  315. 16:08इसकी विशेस साइकिल में वो लोग खींच लेते
  316. 16:10हैं, वो किसी की बहन है, किसी की बेटी है,
  317. 16:14किसी का भाई है, छोटे लड़के भी हैं उसमें
  318. 16:17जिन्हें ऐसे किडनैप किया जाता है। वो किसी
  319. 16:20के बच्चे हैं और जस्ट बिकॉज कि उस वक्त पर
  320. 16:24उनका परिवार उन्हें प्रोटेक्ट नहीं कर
  321. 16:26पाया। समाज सरकार उसे प्रोटेक्ट नहीं कर
  322. 16:29पाई। वह बच्चे उस
  323. 16:32गरीबी के कारण या कोर्जन के कारण,
  324. 16:35किडनैपिंग के कारण उस साइकिल में फंस जाते
  325. 16:38हैं। तो क्या आप चाहोगे कि आपके किसी छोटे
  326. 16:41से एक्ट से भी ऐसा कुछ हो? लेकिन आप तो
  327. 16:44सिर्फ वीडियो देख रहे थे। प्रॉब्लम यह है
  328. 16:46कि आप वो वीडियो देखोगे तो ऐसी वीडियोस
  329. 16:51बनेंगी। क्यों बन रही है यह वीडियोस? आपको
  330. 16:53पता है? क्योंकि अगर आप इंटरनेट पे जाके
  331. 16:57सर्च करोगे इंडिया के अंदर सबसे ज्यादा
  332. 17:01सर्च किया जाने वाला कंटेंट इस वक्त एडल्ट
  333. 17:05कंटेंट है। और इंडियंस जितना कंटेंट सर्च
  334. 17:10कर रहे हैं। वर्ल्ड ओवर जितने लोग कंटेंट
  335. 17:11सर्च कर रहे हैं उसमें दूसरे तीसरे नंबर
  336. 17:14पर इंडियंस आते
  337. 17:16हैं जो इस टाइप का कंटेंट सबसे ज्यादा
  338. 17:19सर्च कर रहे
  339. 17:21हैं। सबसे ज्यादा सर्च कर रहे हैं। यानी
  340. 17:25कि हमारा भारत का बच्चा भारत के लोग अगर
  341. 17:29इस टाइप का कंटेंट सर्च कर रहे हैं तो
  342. 17:32क्या हम सब जो समाज के लोग हैं क्या वो ही
  343. 17:36उस ट्रेजडीज जो होती है वही जो ह्यूमन
  344. 17:40ट्रैफिकिंग जो होती है क्या उसके
  345. 17:43जिम्मेदार नहीं हो रहे हैं? आपने एक छोटी
  346. 17:46सी वीडियो देखी और उसके कारण एक बच्चे को
  347. 17:48उठा लिया गया। इजंट इट?
  348. 17:51डिसहार्टनिंग तो जब भी आप क्लिक करने वाले
  349. 17:54हो उस कंटेंट पर एक बार दोबारा सोचना है।
  350. 17:57अच्छा देश की भी बात है इसमें पता है आपको
  351. 18:01और सिर्फ समाज ही नहीं देश के लिए भी बहुत
  352. 18:05खतरनाक है। क्योंकि यह बात सिर्फ हमें तो
  353. 18:07नहीं पता कि इंडियंस ऐसा कंटेंट ढूंढ रहे
  354. 18:09हैं। हमारा यूथ इस टाइप का कंटेंट ढूंढ
  355. 18:11रहा है। यह तो सबको पता है। तो यानी हमारे
  356. 18:14दुश्मन को भी पता है। और अगर साइबर
  357. 18:17वॉरफेयर हुआ आपको क्या लगता है कि किस
  358. 18:20कंटेंट पे सबसे
  359. 18:22ज्यादा वॉरफेयर किया जाएगा? कहां सबसे
  360. 18:26ज्यादा वायरस छोड़े जाएंगे के इंफॉर्मेशन
  361. 18:31ले ली जाए। वीडियोस फोटो जो आपकी पर्सनल
  362. 18:34हैं, पर्सनल जो आपके फोन पे हैं, लैपटॉप्स
  363. 18:36पे हैं, उन्हें ले लिया जाए और मिसयूज
  364. 18:39किया जाए। कहां से आपको लगता है वह
  365. 18:41वायरसेस सबसे ज्यादा आएंगे? इस टाइप के
  366. 18:44अनप्रोटेक्टेड कंटेंट
  367. 18:46से तो इट्स अ नेशनल सिक्योरिटी
  368. 18:50थ्रेट। आपको पता है कि सरकार ने कुछ
  369. 18:55वेबसाइट्स वगैरह को बंद करने के लिए भी
  370. 18:57कोशिश करी है। क्योंकि दे आर सो हार्मफुल
  371. 19:01टू द साइकी ऑफ़ द
  372. 19:04यूथ। दैट इट कैन क्रिएट केओस।
  373. 19:09तो नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट है। जैसे ही
  374. 19:12कोई टेरर अटैक होता है या कोई सिचुएशन आती
  375. 19:14है, हम एकदम तुरंत देशभक्त बन जाते हैं।
  376. 19:18लेकिन क्या जब आप एक ऐसे किसी कंटेंट पर
  377. 19:21क्लिक कर रहे हो और आप एक थ्रेट क्रिएट कर
  378. 19:25रहे हैं। अपने लिए अपने को वनरेबल बना रहे
  379. 19:27हैं इस टाइप
  380. 19:29के नेशनल सिक्योरिटी के प्रॉब्लम से साइबर
  381. 19:32प्रॉब्लम से रिलेटेड तो तब तब आपको महसूस
  382. 19:35नहीं हो रहा कि यह गलत कर रहे हैं आप अपने
  383. 19:37देश के साथ तो डोंट क्लिक दैट कंटेंट इट्स
  384. 19:41अ नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट एंड इन अ लार्जर
  385. 19:45व्यू वी हैव टू
  386. 19:47अंडरस्टैंड दैट वी आर एन इवॉल्वड स्पीशीज।
  387. 19:50हम एक इवॉल्वड स्पीशीज हैं। हम ह्यूमंस
  388. 19:53हैं। एंड इफ बिकॉज ऑफ सम टेक्नोलॉजिकल
  389. 19:59इनोवेशन वी गो बैक। हमें वापस तो नहीं
  390. 20:02जाना चाहिए ना। अब तो और एववोल्यूशन की
  391. 20:04तरफ जाना चाहिए। तो क्यों हम अपने रैशन
  392. 20:07ब्रेन को बंद करके इंपल्सिव
  393. 20:11यू नो एनिमलिस्टिक ब्रेन को एक्टिवेट करना
  394. 20:15चाहे।
  395. 20:16सो वी हैव टू अंडरस्टैंड कि यह एक एडिक्शन
  396. 20:20है
  397. 20:21जिसका पूरा का पूरा जो साइकिल है वह हमारी
  398. 20:25न्यूरोसाइन को जज करके क्रिएट किया जाता
  399. 20:28है। न्यूरोसाइन के कारण ऐसा हो रहा है।
  400. 20:31उसमें आपकी गलती नहीं है। क्योंकि उन
  401. 20:33बच्चों से बात करके मुझे यह भी महसूस हुआ
  402. 20:36कि ज्यादातर बच्चे गिल्ट फील कर रहे थे।
  403. 20:39दे वर फीलिंग वेरी बैड अबाउट इट। उन्हें
  404. 20:42बुरा लग रहा था। उन्होंने वह कंटेंट देखा
  405. 20:44और उसके बाद उन्हें बुरा लगा। तभी तो वह
  406. 20:47आके मेरे सामने रोए मेरे से बात करी। नहीं
  407. 20:49तो क्यों
  408. 20:52करते? यानी कि गिल्ट फीलिंग इसलिए आ रही
  409. 20:55है क्योंकि आपको भी पता है गलत है लेकिन
  410. 20:56वो कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। जस्ट लाइक
  411. 21:00एन अल्कोहलिक और अ ड्रग एडिक्ट। नाउ वी
  412. 21:03हैव टू अंडरस्टैंड कि जैसे वहां पर
  413. 21:06विड्रॉल सिम्टम्स आते हैं, वैसे ही जब कोई
  414. 21:09व्यक्ति यह कंटेंट देखना बंद करेगा, तो
  415. 21:14धीरे-धीरे उसको भी विड्र सिम्टम्स आएंगे।
  416. 21:16उसको भी परेशानी होगी क्योंकि उसको आदत है
  417. 21:20ऐसा टाइप का कंटेंट देखने की तो उसको
  418. 21:22बार-बार मन करेगा। लेकिन अगर उस समय पे जो
  419. 21:26व्यक्ति ऐसा कंटेंट देख रहे हैं वो अपने
  420. 21:28को कंट्रोल कर ले तो धीरे-धीरे हमारे
  421. 21:32दिमाग के अंदर एक और बहुत बढ़िया
  422. 21:33कैपेबिलिटी है। कैपेबिलिटी टू फॉरगेट।
  423. 21:38जैसे अगर हम अपनी मसल्स को यूज करते रहते
  424. 21:42हैं तो मसल स्ट्रांग होती रहती है। लेकिन
  425. 21:45अगर यूज करना बंद कर दें तो क्या होता है?
  426. 21:47कुछ समय
  427. 21:49बाद मसल वेस्ट होने लगती है। ये
  428. 21:52कैपेबिलिटी है हमारी बॉडी कि जो चीज हम
  429. 21:54यूज़ करेंगे वो बढ़ेगी। जो चीज यूज़ नहीं
  430. 21:56करेंगे वो धीरे-धीरे घटती जाएगी। तो उसी
  431. 21:58तरीके से अगर बार-बार ऐसा कंटेंट देखेंगे
  432. 22:02तो वो न्यूरल पाथवेज स्ट्रांग होते जाएंगे
  433. 22:05और ज्यादा एडिक्शन क्रिएट होता जाएगा।
  434. 22:07लेकिन अगर कुछ समय इसे रोक दिया जाए तो
  435. 22:10धीरे-धीरे धीरे-धीरे वो जो न्यूरल
  436. 22:12कनेक्शंस बने थे आपके दिमाग में वो अपने
  437. 22:16आप ढीले पड़ जाएंगे और गायब हो जाएंगे। सो
  438. 22:20गिव योरसेल्फ टाइम एंड
  439. 22:23अंडरस्टैंड दैट इट मे हैव सम विड्र
  440. 22:26सिम्टम्स बट इफ यू कीप अप विद योर रिजॉल्व
  441. 22:28नॉट टू वॉच सच अ कंटेंट वो अपने आप डी
  442. 22:33एडिक्ट हो जाएंगे आप इस सारे कंटेंट
  443. 22:35के और भी तरीके हैं इसे सॉल्व करने के
  444. 22:39जैसे आप किसी अच्छे कंटेंट की तरफ दिमाग
  445. 22:42लगा सकते हैं। कोई मूवीस देख सकते हैं जो
  446. 22:45एंगेजिंग होती है। आप कोई एक्टिविटी हमेशा
  447. 22:48से करना चाहते हो। आप उस एक्टिविटी की तरफ
  448. 22:50दिमाग लगा सकते हैं
  449. 22:53क्योंकि हमारा
  450. 22:55दिमाग जहां लगेगा वहीं से हमें धीरे-धीरे
  451. 22:59बेनिफिट्स मिलने चालू हो जाएंगे। जैसे
  452. 23:01पढ़ाई पे लगने लगेगा। पढ़ाई करने के भी
  453. 23:03बहुत तरीके हैं। सिर्फ किताब पढ़ना एक
  454. 23:05तरीका नहीं है। अच्छी वीडियोस देखना,
  455. 23:08अच्छा कंटेंट देखना भी एक तरीका है। उसी
  456. 23:11तरीके से क्वेश्चंस करना भी एक तरीका है।
  457. 23:14तो आप समझ
  458. 23:15रहे मेक योर एक्टिविटीज मोर एंगेजिंग। जो
  459. 23:19एडिक्शन आपको वहां से मिल रहा था, आप उससे
  460. 23:21ज्यादा एंगेजिंग चीज के अंदर लग जाए। तो
  461. 23:24अपने आप वहां से आपका ध्यान हटेगा और
  462. 23:27धीरे-धीरे वो न्यूरल नेटवर्क्स कमजोर होकर
  463. 23:30आपकी एडिक्शन खत्म हो जाएगी।
  464. 23:32सो आई
  465. 23:34होप अगर कोई बच्चे हैं जिन्हें इस तरीके
  466. 23:37की प्रॉब्लम आ रही है वो अब यह रिजॉल्व
  467. 23:42लें कि इस तरीके का कंटेंट नहीं देखें
  468. 23:45क्योंकि साइंस अब वह समझ चुके हैं। थैंक
  469. 23:48यू।

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