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Epsiode 7 Series غور و فکر — Transcript

by Dr Sufyan Quran Daily Dose · 1,153 words · 139 segments · language en · Watch on YouTube

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  1. 0:02बिस्मिल्लाह रहमान रहीम तसवर करें आपकी
  2. 0:05आंख खुलती है और आप खुद को एक घने पुसर
  3. 0:08जंगल में पाती मगर आप नहीं जानते कि यहां
  4. 0:11कैसे आए ना ही यह मालूम है कि वापसी का
  5. 0:13रास्ता कहां है फिर अचानक आपको अपने करीब
  6. 0:17एक किताब मिलती है इसके सफात पर निशाना
  7. 0:19दर्ज है ऐसे निशाना जो आपको सीधा आपके असल
  8. 0:23मकाम तक पहुंचा सकते हैं इस मकाम पर आपके
  9. 0:26पास दो रास्ते हैं या तो आप इन निशानियां
  10. 0:29पर गौर करके सफर शुरू करें हर कदम के साथ
  11. 0:32अपने घर की तरफ बढ़े या फिर जंगल के शहर
  12. 0:36में खोकर इसे ही अपना नया ठिकाना बना ले
  13. 0:39शायद आप सोचेंगे कि वापसी का इंतखाब सब
  14. 0:42करेंगे मगर हकीकत इसके बिल्कुल बरक्स है
  15. 0:44हम में से ज्यादातर लोग इसी जंगल में गुम
  16. 0:47हो चुके हैं इन निशानियां को नजरअंदाज कर
  17. 0:50चुके हैं और भूल बैठे हैं कि हम कहां से
  18. 0:53आए थे और हमें कहां जाना है हमने इस सीरीज
  19. 0:56गौर फिक्र का आगाज इसी जुस्तजू में किया
  20. 0:59ताकि हम जान सके कि हम हैं कौन हमारा असल
  21. 1:02मकसद है क्या कुरान शरीफ को समझने पर
  22. 1:05मालूम हुआ कि इंसान सिर्फ जीने के लिए
  23. 1:07नहीं सीखने के लिए पैदा हुआ है इसका मकसद
  24. 1:10गौर और फिक्र करना है और सूर बकरा की आयत
  25. 1:12164 के मुताबिक जमीनो आसमान और इनके
  26. 1:14दरमियान की हर चीज में निशानियां है मगर
  27. 1:18सिर्फ कौम याकून के लिए लेकिन ऐसा क्यों
  28. 1:21अगर अकल हर इंसान के पास है तो फिर मख सूस
  29. 1:24कोम कोम आ कलून ही क्यों कुरान हमें कह
  30. 1:28सकता था कि यह निशानिया तमाम इनों के लिए
  31. 1:31या तमाम मुसलमानों के लिए लेकिन अल्लाह ने
  32. 1:34कहा कि यह निशानियां एक मख सूस कौम के लिए
  33. 1:36है कौम आकल इसका राज इस आयत में इस्तेमाल
  34. 1:42होने वाले अरबी लफ्ज अकल में पोशीदा है
  35. 1:44लेकिन इसके मानी समझने से पहले हमें एक और
  36. 1:47अहम तसवर को समझना होगा माइंडफुल क्या आप
  37. 1:50जानते हैं माइंडफुल स क्या है यह तसवर आज
  38. 1:53से 2500 साल पहले बुध पद में आया लेकिन आज
  39. 1:56के दौर में ऐसे यूनिवर्सिटी ऑफ
  40. 1:58मैसाचुसेट्स के प्रोफेसर का बाद जिन ने
  41. 2:00मकबूल बनाया इसका मतलब है मौजूदा लमहे में
  42. 2:04मुकम्मल तवज्जो देना बगैर किसी जजमेंट और
  43. 2:08बायनेस के आसान अल्फाज में जो कुछ अभी हो
  44. 2:12रहा है इसी पर ध्यान देना आइए इसे एक आसान
  45. 2:16मिसाल से समझते हैं फर्ज करें आपके हाथ
  46. 2:19में एक कप चाय है आमतौर पर आप चाय पीते
  47. 2:22हुए मोबाइल देख रहे होते हैं माजी या
  48. 2:25मुस्तकबिल के बारे में सोच रहे होते हैं
  49. 2:28या बस जल्दी में घूंड रहे होते हैं आप इस
  50. 2:31लमहे को मुकम्मल तौर पर महसूस नहीं कर रहे
  51. 2:34होते लेकिन माइंडफुल में आप सिर्फ इसी
  52. 2:36लमहे में मौजूद होते हैं आप चाय की खुशबू
  53. 2:39को पूरी तरह महसूस करते हैं जैसे ही कप
  54. 2:42होठों से लगता है इसकी गर्मी का एहसास
  55. 2:45करते हैं चाय के हर गंड के जायके को महसूस
  56. 2:49करते हैं बगैर किसी डिस्ट्रक्शन के यही
  57. 2:52माइंडफुल
  58. 2:54है माइंड फुलनेस रिसर्च और गौर और फिक्र
  59. 2:57के लिए इंतिहा अहम है क्योंकि यह फोकस
  60. 3:00क्रिटिकल एनालिसिस और क्रिएटिविटी को
  61. 3:02बढ़ाती है लेकिन सवाल यह है क्या मैं और
  62. 3:05आप भी माइंडफुल हैं हरगिज नहीं हम घर में
  63. 3:10होते हैं मगर दिमाग ऑफिस में हम ऑफिस में
  64. 3:13होते हैं मगर ख्यालात कहीं और हम दोस्तों
  65. 3:16के साथ होते हैं मगर दिमाग मोबाइल में गुम
  66. 3:19हम नमाज में होते हैं मगर दिल कहीं और भटक
  67. 3:22रहा होता है यानी हमारा जिस्म एक जगह और
  68. 3:24दिमाग किसी और
  69. 3:26जगह नव इश्क में रही गर्मियां ना वो हुस
  70. 3:30में रही शोकिया ना वो गजनबी में तड़प रही
  71. 3:33ना वो खम है जुल्फे अयाज में मैं जो सर ब
  72. 3:36सजदा हुआ कभी तो जमी से आने लगी सदा तेरा
  73. 3:40दिल तो है सनमा शना तुझे क्या मिलेगा नमाज
  74. 3:44में अब जब आप माइंड फुलनेस समझ गए हैं तो
  75. 3:47अब आते हैं अकल के हकीकी मायनी पर अरबी
  76. 3:49में अकल का मतलब है बांधना जब किसी जानवर
  77. 3:53को रस्सी से बांध दिया जाता है पर यह तो
  78. 3:55बड़ी अजीब बात है अकल से बांधने का क्या
  79. 3:57ताल्लुक
  80. 4:00जब आप अपनी
  81. 4:01ख्वाहिश नफरत लालच हसद और दुनियाई उलझनों
  82. 4:05को बांधते हैं तभी आपकी अकल खुल जाती है
  83. 4:08बिल्कुल माइंडफुल की तरह इसलिए कुरान ने
  84. 4:10अकल के लिए बांधने का लफ्ज इस्तेमाल किया
  85. 4:13सुभान अल्लाह अल्फाज का ऐसा बेहतरीन
  86. 4:17इंतखाब बिल्कुल माइंडफुल के कांसेप्ट की
  87. 4:20तरह जब कुरान शरीफ कहता है कि लून तो इसका
  88. 4:24मतलब हकीकी माइंडफुल यानी गौर और फिक्र और
  89. 4:26खुले दिल और दिमाग से हकीकत को समझना है
  90. 4:29यह बोल लोग होते हैं जो बगैर किसी तासु
  91. 4:31जिद खवा शत की गुलामी या जाती मफा दत के
  92. 4:35हकीकत पर गौर करते हैं वह कुदरत की
  93. 4:37निशानियां को देखकर जिंदगी के तजुर्बा से
  94. 4:40सीखकर और अपने जज्बात पर काबू रखकर सच्चाई
  95. 4:43को पहचानने की कोशिश करते हैं यही वह अकल
  96. 4:46है जिसकी कुरान दावत देता है यह वही लोग
  97. 4:49हैं जिसके लिए पूरी कायनात में निशानियां
  98. 4:52बिकरी हुई हैं लेकिन सवाल यह है कि हम
  99. 4:55माइंडफुल कैसे बने इस जहनी केत से कैसे
  100. 4:58निकले मुख्तलिफ मुश माइंडफुल के लिए
  101. 5:01मुख्तलिफ तरीके इस्तेमाल करते हैं जैसे
  102. 5:03हिंदुस्तान में योगा चीन
  103. 5:06में की गंग और जापान में ताय हाव लेकिन
  104. 5:10हमारे पास माइंडफुल और कोम याकून में
  105. 5:13शामिल होने के लिए अब तक का बेहतरीन जरिया
  106. 5:15है नमाज अगर आप कभी मुशाहिद करेंगे तो
  107. 5:18आपको मालूम होगा कि जैसे ही आप नमाज के
  108. 5:20लिए खड़े होते हैं आपका जहन भटकने लगता है
  109. 5:23दिन भर के मसाइल परेशानियां माजी की यादें
  110. 5:26मुस्तकबिल के ख्यालात सब आप पर हमला और
  111. 5:28होने लगते हैं लेकिन अगर आप यह जंग नमाज
  112. 5:32में लड़ना शुरू कर दें अगर आप हर रकात में
  113. 5:35हर सजदे में खुद को वापस लाने की कोशिश
  114. 5:37करें और सिर्फ नमाज पर तवज्जो
  115. 5:41और कौम आकलन बनने के सफर का आगाज होगा यह
  116. 5:46मुश्किल होगा लेकिन जिस दिन आप यह जंग
  117. 5:48जीतेंगे इसकी खुशी और इसकी लज्जत को बयान
  118. 5:50करना अल्फाज से बाहर है यही वजह है कि
  119. 5:53कुरान शरीफ में 700 से ज्यादा बार नमाज का
  120. 5:56जिक्र आया है मर कहीं नमाज पढ़ो नहीं कहा
  121. 5:59गया बल्कि कि नमाज कायम करो कहा गया है
  122. 6:02यानी पूरी तवज्जो के साथ बगैर किसी जहनी
  123. 6:05खलल के क्योंकि नमाज एक अमल नहीं है एक
  124. 6:07मश्क एक एक्सरसाइज है यह हमें माइंडफुल
  125. 6:10बनाती है और जब हम डिस्ट्रक्शंस को बांधते
  126. 6:12हैं और माइंडफुल हो जाते हैं तो कायनात की
  127. 6:15हर चीज में निशानियां दिखाई देने लगती हैं
  128. 6:18नीले आसमान में बहते पानी में सरसब्ज
  129. 6:21दरख्तों में सूरज की रोशनी में चाहे के एक
  130. 6:25घूंट में भी यह हमारी सीरीज गौर और फिक्र
  131. 6:28की सातवी थी आपसे गुजारिश है कि इस जहनी
  132. 6:32कैद से निकले खुद को जगाएं और कोमे या
  133. 6:35कलून की सफ में शामिल हो अब रास्ता वाज है
  134. 6:38जैसे ही आप इस सफर पर कदम रखेंगे तो अगली
  135. 6:41किस्त में कायनात के उन राजों से पर्दा
  136. 6:43उठेगा जो आपकी जिंदगी का रुख बदल सकते हैं
  137. 6:46तैयार र एक नई दुनिया आपकी मुंतज है मिलते
  138. 6:50हैं अगली किस्म में तब तक के लिए अल्लाह
  139. 6:52हाफिज

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