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भिखारी हसबैंड | Episode 66–80 | Kahvanihindi — Transcript

by Kahvani Hindi · 33,527 words · 4,095 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00तो हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मुझे
  2. 0:02आशा है कि आप लोग ठीक ही होंगे और मजे से
  3. 0:04इस चैनल पर जो भी सीरीज आ रही है उसको सुन
  4. 0:06रहे होंगे। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो
  5. 0:08बेकर हस्बैंड का नया वीडियो आ चुका है
  6. 0:11जिसमें एपिसोड 66 से 80 तक है। तो जल्दी
  7. 0:14से जल्दी से वीडियो को देखो और बताओ कि
  8. 0:16कोई मिस्टेक तो नहीं हुई है। और वीडियो को
  9. 0:19शुरू करने से पहले वीडियो को लाइक करें,
  10. 0:21चैनल को सब्सक्राइब करें जिससे कि आपसे
  11. 0:24आने वाला वीडियो कोई भी मिस ना हो। तो
  12. 0:26करते हैं लेट्स स्टार्ट दिस वीडियो। मेनका
  13. 0:29के भेजे गिफ्ट्स ने राय परिवार को दो
  14. 0:32हिस्सों में बांट दिया था। एक तरफ थे
  15. 0:34शौर्य और शिप्रा और दूसरी तरफ पार्टी में
  16. 0:37मौजूद बाकी सब फैमिली मेंबर्स। राधिका का
  17. 0:40गिफ्ट बॉक्स खुल चुका था और उससे निकले 3
  18. 0:43लाख के खूबसूरत नेकलेस ने सबके दिलों को
  19. 0:45लूट लिया था। वहीं शौर्य मन ही मन सोच रहा
  20. 0:48था। कैसी दुनिया है यह? यहां रिश्तों की
  21. 0:52असली कीमत दिल से नहीं गिफ्ट के बिल से तय
  22. 0:54होती [संगीत] है। शिप्रा के गिफ्ट बॉक्स
  23. 0:57में क्या है? यह राज सिर्फ मेनका को ही
  24. 0:59मालूम था और उस राज का खुलासा करने का
  25. 1:02दबाव अब शिप्रा पर था क्योंकि गिफ्ट बॉक्स
  26. 1:05उसके हाथ में था। बलवंत राय ने जैसे ही
  27. 1:07शिप्रा से गिफ्ट खोलकर सबको दिखाने की बात
  28. 1:10कही नैना राय और युविका का चेहरा खिल गया।
  29. 1:13बलवंत राय की बात सुनकर शिप्रा शौर्य की
  30. 1:16तरफ देखने लगी। जैसे कि वह उससे पूछ रही
  31. 1:19हो कि अब क्या किया जाए। शिप्रा को अपने
  32. 1:21दादाजी की बात पसंद नहीं आई। वो नहीं
  33. 1:24चाहती थी कि किसी और के फंक्शन में उसके
  34. 1:26और श्रवण के बीच इस तरह का कार्यक्रम किया
  35. 1:28जाए। यही सोचकर उसने अपने दादा जी से कहा
  36. 1:33दादा जी जहां तक इस गिफ्ट को देखने की बात
  37. 1:35है तो मैं यह अभी आपको दिखा सकती हूं। पर
  38. 1:38आपने जो कहा कि इस गिफ्ट को अभी सबके
  39. 1:40सामने श्रवण मुझे पहनाएं। यह मुझे मंजूर
  40. 1:42नहीं है। यह राधिका की बर्थडे पार्टी है।
  41. 1:45उसके बीच में हम अपने पर्सनल मोमेंट शेयर
  42. 1:48नहीं कर सकते। शौर्य को भी शिप्रा का यह
  43. 1:51दो टूक जवाब पसंद आया क्योंकि वो नैना राय
  44. 1:54और युविका की मंशा समझ रहा था। वो चाहती
  45. 1:57थी कि अगर शिप्रा का गिफ्ट राधिका को दिए
  46. 1:59गिफ्ट से सस्ता हुआ तो शिप्रा के मन में
  47. 2:02शौर्य के लिए कड़वाहट आ जाएगी। शौर्य को
  48. 2:05खुद भी यह डर था कि अगर सच में गिफ्ट
  49. 2:06सस्ता हुआ तो शिप्रा क्या सोचेगी? पर अब
  50. 2:09शौर्य के हाथ में कुछ नहीं था। दूसरी तरफ
  51. 2:13जब नैना बुआ ने शिप्रा की बात सुनी तो वो
  52. 2:15बोली
  53. 2:17कोई बात नहीं अगर तुम ऐसा चाहती हो तो ठीक
  54. 2:20है हम इससे ही संतुष्ट हो जाएंगे कि
  55. 2:23तुम्हारे लिए श्रवण जो गिफ्ट लाया है वो
  56. 2:25तुम्हारे लायक है या नहीं। नैना राय के
  57. 2:28शब्द मीठे थे। लेकिन इरादा बेहद कड़वा।
  58. 2:32अपनी हर चाल में मात खाने के बाद भी नैना
  59. 2:35राय के मन में शौर्य को नीचा दिखाने की
  60. 2:38कसक बाकी थी। शिप्रा ने जब देख लिया कि अब
  61. 2:41कोई चारा नहीं है तो उसने कांपते हाथों से
  62. 2:44बॉक्स को खोल दिया। बॉक्स खोलते ही उसकी
  63. 2:47नजर अंदर रखे बिल पर पड़ी। उसने बिल
  64. 2:49निकाला और धीरे से खोला। जैसे ही शिप्रा
  65. 2:52की नजर बिल की कीमत पर पड़ी, शिप्रा की
  66. 2:55सांसे थम गई। 5 लाख कीमत पड़ते ही उसके
  67. 2:59दिमाग में सवालों का तूफान उमड़ पड़ा। ये
  68. 3:03ये कैसे मुमकिन है? क्या श्रवण सच में
  69. 3:06मेरे लिए इतना महंगा गिफ्ट लाया है? पर
  70. 3:09कैसे? शिप्रा ने माहौल को देखते हुए तुरंत
  71. 3:12ही खुद को संभाला और सोचा कि वो इस बारे
  72. 3:15में श्रवण से बाद में बात करेगी। उसने
  73. 3:17चुपचाप बिल को मोड़कर वापस बॉक्स में रख
  74. 3:20दिया और उसमें से डिब्बी को बाहर निकाल
  75. 3:22लिया। शिप्रा वो डिब्बी नैना राय की तरफ
  76. 3:25बढ़ाते हुए बोली। बुआ आप ही क्यों नहीं यह
  77. 3:28गिफ्ट सबको दिखा देती? नैना बुआ पहले तो
  78. 3:32शिप्रा की बात सुनकर हड़बड़ा गई। पर फिर
  79. 3:34खुद को नियंत्रित करके बोली हां क्यों
  80. 3:37नहीं? लाओ, मैं ही दिखाती हूं सबको।
  81. 3:42नैना बुआ ने हल्के कांपते हाथों से डिब्बी
  82. 3:45खोली और जैसे ही अंदर का गिफ्ट निकला, उसे
  83. 3:48देखते ही हॉल में मौजूद सबकी आंखें फटी रह
  84. 3:51गई। बॉक्स में था येलो, वाइट और रोज गोल्ड
  85. 3:54के कॉम्बिनेशन से बना एक [संगीत] लाजवाब
  86. 3:57डायमंड नेकलेस। जिसकी चमक ऐसी थी जो आंखों
  87. 4:00को बांध ले। शिप्रा ने भी जब उस डायमंड
  88. 4:03सेट को देखा तो उसकी आंखें [संगीत] भी उस
  89. 4:05सेट पर जमकर रह गई। उस सेट को देखने के
  90. 4:08बाद उसने शौर्य की तरफ देखा तो उसे उसके
  91. 4:11चेहरे पर भी संतुष्टि के भाव नजर आए। वो
  92. 4:14सोचने को मजबूर हो गई थी कि क्या शौर्य को
  93. 4:16भी नहीं पता था कि इस बॉक्स में क्या है
  94. 4:19क्योंकि थोड़ी देर पहले जब उसने शौर्य की
  95. 4:22तरफ देखा था तो उसे शौर्य के चेहरे पर
  96. 4:24चिंता की झलक दिखाई दी थी। पर अब उस
  97. 4:26नेकलेस को देखने के बाद वह संतुष्ट नजर आ
  98. 4:29रहा था।
  99. 4:31शिप्रा यह सोच ही रही थी कि तभी कुलवंत की
  100. 4:34वाइफ टीना की आवाज सुनाई दी।
  101. 4:37अरे यह तो वही नेकलेस है जो हमने यहां आने
  102. 4:40पर इस होटल के ज्वेलरी आउटलेट में देखा
  103. 4:42था। यह तो 5 लाख का था।
  104. 4:46टीना की बात सुनकर राधिका का मुंह खुला का
  105. 4:48खुला रह गया जो थोड़ी देर पहले तक यह सोच
  106. 4:51कर खुश थी कि उसका गिफ्ट 3 लाख का है। पर
  107. 4:54जैसे ही उसने सुना कि शिप्रा का गिफ्ट 5
  108. 4:56लाख का है तो उसकी खुशी तुरंत गम में बदल
  109. 4:59गई। दूसरी तरफ रजत के दिल पर भी छुरियां
  110. 5:03चल रही थी। सामने का नजारा देख वो मन ही
  111. 5:06मन बोला आखिर इस भिखारी ने ये मुमकिन कैसे
  112. 5:09किया? कल तक जो भीख मांगकर अपना गुजर बसर
  113. 5:12कर रहा था आज लाखों के गिफ्ट देने की हालत
  114. 5:14में कैसे आ गया? क्या कोई है जो इस भिखारी
  115. 5:17की मदद कर रहा है? तभी बलवंत राय की आवाज
  116. 5:21गूंजी। वाह, बहुत खूब। मानना पड़ेगा। यह
  117. 5:26गिफ्ट वाकई बहुत खूबसूरत है। मुझे नहीं
  118. 5:28पता श्रवण कि तुमने यह गिफ्ट कैसे अरेंज
  119. 5:31किया है। पर जैसे भी किया है यह दिखाता है
  120. 5:34कि तुम मेरी पोती के लिए कुछ भी कर सकते
  121. 5:37हो। बलवंत राय शौर्य के सामने जाकर उसकी
  122. 5:40तारीफ करते हुए बोला मुख्तार भाई को बलवंत
  123. 5:43राय का शौर्य की तारीफ करना बर्दाश्त नहीं
  124. 5:46हुआ। इसीलिए वह चिढ़कर बोले यह बात आप कह
  125. 5:51रहे हैं राय साहब। यह जानते हुए कि इसके
  126. 5:54लिए इसने पता नहीं किसकी तिजोरी में सेंध
  127. 5:57लगाई होगी। किसके घर चोरी की होगी। शौर्य
  128. 6:02मुख्तार भाई की बात सुनते ही तंज कसते हुए
  129. 6:05बोला जिसने अपनी सारी संपत्ति ही दो नंबर
  130. 6:09के कामों से कमाई हो। वो आज दूसरों को
  131. 6:11आईना दिखाने की कोशिश कर रहा है। मुख्तार
  132. 6:14भाई को शौर्य की बात सुई की तरह चुभी। वो
  133. 6:17और बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। इसीलिए वो
  134. 6:20गुस्से में बोले ए लड़के तुम आज कुछ
  135. 6:23ज्यादा ही ऊंचा उड़ने की कोशिश कर रहे हो।
  136. 6:26मुझे नहीं पता तुम्हें यह हिम्मत कहां से
  137. 6:29मिल रही है। पर तुम खुद अपनी ही कब्र खोद
  138. 6:32रहे हो।
  139. 6:33जैसी बेइज्जती मुख्तार भाई की आज इस
  140. 6:36पार्टी में हुई ऐसी शायद ही कभी पहले कहीं
  141. 6:38हुई होगी। और सबसे बड़ी बात शौर्य का वो
  142. 6:41कुछ कर नहीं पाए। कोई और जगह होती तो शायद
  143. 6:45उनका रवैया अलग होता।
  144. 6:46[संगीत]
  145. 6:46पर वह जानते थे कि यह होटल राजा साहब का
  146. 6:49है। अगर वह इस होटल में कोई हंगामा करने
  147. 6:52की कोशिश करते तो यह सीधे राजा साहब से
  148. 6:55पंगे लेने वाली बात हो जाती।
  149. 6:58और विशालगढ़ में रहकर राजा साहब से
  150. 7:00दुश्मनी वो बर्दाश्त नहीं कर सकते थे।
  151. 7:03बलवंत राय भी इस बात को अच्छे से समझ रहे
  152. 7:05थे कि जब तक शौर्य होटल राजकमल में है तब
  153. 7:09तक तो मुख्तार भाई शौर्य के खिलाफ कोई
  154. 7:11एक्शन नहीं ले सकते। लेकिन मुख्तार भाई
  155. 7:14शौर्य के द्वारा की गई बेइज्जती को इतनी
  156. 7:17आसानी से भूलने वाले भी नहीं हैं। इसीलिए
  157. 7:19उन्हें अब शौर्य के लिए चिंता भी होने लगी
  158. 7:22थी। वहीं दूसरी तरफ शिप्रा भी शौर्य के
  159. 7:25लिए चिंतित थी। पर शौर्य इन सब बातों से
  160. 7:28बेपरवाह मुख्तार भाई से बोला।
  161. 7:31आपको पता होना चाहिए कि जब आप किसी पर
  162. 7:34उंगली उठाते हैं [संगीत] तो बाकी चार
  163. 7:36उंगलियां खुद की तरफ भी रहती हैं। आइंदा
  164. 7:39जब किसी को कुछ बोले तो उससे जवाब सुनने
  165. 7:41को भी तैयार रहिएगा।
  166. 7:44तभी मुख्तार भाई अपने शब्दों को चबाते हुए
  167. 7:46बोले शुक्र मनाओ कि तुम अभी होटल राजकमल
  168. 7:50में हो। नहीं तो तुम्हारी इस हरकत पर
  169. 7:53तुम्हारे साथ क्या हो जाता तुम सोच भी
  170. 7:56नहीं पाते।
  171. 7:58मुख्तार की बात सुनकर शौर्य एक तंज भरी
  172. 8:00हंसी-हंसता हुआ बोला, आप जैसे लोगों से और
  173. 8:04उम्मीद भी क्या की जा सकती है? अपनी पहचान
  174. 8:07तो दिखाओगे ही।
  175. 8:09श्रवण तुम क्यों मुख्तार भाई से बहस किए
  176. 8:11जा रहे हो? राजकुमार टंडन शौर्य को टोकते
  177. 8:15हुए बोले, उन्हें डर था कि हालात ज्यादा
  178. 8:17ना बिगड़ जाए। बड़ी मुश्किल से तो मुख्तार
  179. 8:20भाई के साथ हालात पटरी पर आए थे। फिर
  180. 8:23राजकुमार टंडन मुख्तार भाई के पास गए और
  181. 8:26उन्हें मक्खन लगाते हुए बोले आप क्यों इस
  182. 8:29लड़के के मुंह लग रहे हैं? इसकी अपनी तो
  183. 8:31कोई इज्जत है नहीं तो दूसरों की क्या ही
  184. 8:33करेगा। मुख्तार भाई के ईगो को राजकुमार
  185. 8:37टंडन की बात सुनकर थोड़ी तसल्ली मिली।
  186. 8:39शौर्य ने भी राजकुमार टंडन की बात को सुना
  187. 8:42पर वो उनके हालात को समझता था। यह उनकी
  188. 8:45बेटी की बर्थडे पार्टी है। इसीलिए वो
  189. 8:47इसमें ज्यादा परेशानी नहीं चाहते थे। और
  190. 8:49रही बात मुख्तार भाई की तो वो यह कैसे चाह
  191. 8:52सकते थे कि मुख्तार भाई का मूड खराब हो।
  192. 8:55इसीलिए शौर्य ने भी आगे मुख्तार भाई को
  193. 8:57कुछ कहना उचित नहीं समझा। और फिर वो
  194. 9:00शिप्रा के लिए भी ऑकवर्ड स्थिति पैदा करना
  195. 9:02नहीं चाहता था। शिप्रा को यह समझ नहीं आ
  196. 9:05रहा था कि शौर्य के सामने तो उसने पहले ही
  197. 9:08अपना और उसका रिश्ता क्लियर कर दिया था।
  198. 9:11फिर उसे उसके लिए गिफ्ट लेने की क्या
  199. 9:13जरूरत थी। वैसे शिप्रा को वो गिफ्ट पसंद
  200. 9:16आया था। पर वो शौर्य से इतना महंगा गिफ्ट
  201. 9:19नहीं ले सकती थी। उसने सोच लिया था कि घर
  202. 9:22जाकर वो गिफ्ट शौर्य को वापस कर देगी। वो
  203. 9:25शौर्य को किसी गलतफहमी में नहीं डालना
  204. 9:28चाहती थी। उसे यह भी डर था कि अगर उसने
  205. 9:30शौर्य से इतना महंगा गिफ्ट ले लिया तो
  206. 9:33कहीं शौर्य उसके बारे में कुछ गलत ना
  207. 9:35सोचने लगे। शिप्रा के दिमाग में एक और
  208. 9:38सवाल भी था और वो यह था कि शौर्य के पास
  209. 9:41इतने पैसे आए कहां से? जब कुछ समझ नहीं
  210. 9:45आया तो उसने सोचा बाद में वो शौर्य से इस
  211. 9:47बारे में बात कर लेगी। शिप्रा ने शौर्य का
  212. 9:50दिया हुआ गिफ्ट अपने पर्स में डाल लिया।
  213. 9:53राधिका भी अब अपने दोस्तों के साथ बिजी हो
  214. 9:55गई। वो शौर्य को अब और उकसाना नहीं चाहती
  215. 9:58थी। जब सब अपने में बिजी हो गए तो शौर्य
  216. 10:01अकेला पड़ गया। तभी रागिनी अपने हाथ में
  217. 10:03एक ड्रिंक का ग्लास लेकर शौर्य के पास
  218. 10:06पहुंची। उसने ग्लास शौर्य की तरफ बढ़ाते
  219. 10:09हुए कहा, "आज तो आप छा गए जीजू। आपसे तो
  220. 10:13कोई यह उम्मीद भी नहीं कर सकता था। अच्छा
  221. 10:16ऐसा है क्या? पर मैंने ऐसा कुछ खास तो
  222. 10:18किया नहीं। शौर्य रागिनी के हाथ से ड्रिंक
  223. 10:21का ग्लास लेते हुए बोला। तभी रागिनी अपना
  224. 10:24लॉजिक देते हुए बोली आपने क्या किया वो तो
  225. 10:27आप यहां सबकी आंखों में देख ही सकते हो और
  226. 10:30मुझे नहीं लगता कि आप इतने भी सीधे हैं कि
  227. 10:32आपको यह बात समझ में भी ना आए। शौर्य ने
  228. 10:35रागिनी की बात सुनी और फिर मुख्तार भाई की
  229. 10:38ओर आंखें घुमाते हुए कहा। सच कहूं तो मुझे
  230. 10:41नहीं लगा कि मैंने ऐसा कुछ किया। हां, एक
  231. 10:44दो लोगों को आईना दिखाने का काम जरूर किया
  232. 10:46है बस। तभी रागिनी सवालिया नजरों से शौर्य
  233. 10:50की तरफ देखती हुई बोली, [संगीत]
  234. 10:52कुछ तो ऐसी बात है आप में जीजू जो आपको
  235. 10:55कुछ खास बनाती है और आप में सबको चौंकाने
  236. 10:58की एक अलग ही खूबी है। वैसे एक बात पूछूं?
  237. 11:02हां, क्या पूछना चाहती हो? शौर्य शिप्रा
  238. 11:05की तरफ देखता हुआ बोला इतने अच्छे भले
  239. 11:09चेहरे को आप पहले दाढ़ी में क्यों छुपाए
  240. 11:10हुए थे? अगर मैं आप सबकी बातें नहीं सुनती
  241. 11:13तो मैं तो पहचान ही नहीं पाती कि आप ही
  242. 11:16शिप्रा दी के पति हो। रागिनी की बातों में
  243. 11:18अपने लिए तारीफ का भाव शौर्य स्पष्ट महसूस
  244. 11:21कर सकता था। वैसे तारीफ के लिए शुक्रिया।
  245. 11:25लेकिन क्या मैं दाढ़ी के बिना इतना अलग
  246. 11:27लगता हूं? शौर्य मुस्कुराता हुआ बोला तो
  247. 11:30रागिनी शौर्य के करीब आई और अपनी आंखें
  248. 11:32बड़ी करती हुई बोली। जीजू [संगीत] सच कहूं
  249. 11:36आपको देखकर अब मुझे शिप्रा दी से ईर्ष्या
  250. 11:38होने लगी है। तभी राहुल सबके बीच से निकल
  251. 11:42कर शौर्य के पास आ गया। वो शायद अभी-अभी
  252. 11:45ही आया था। अभी जो कुछ भी हुआ था उसके
  253. 11:48बारे में पता चला तो वो सीधा शौर्य के पास
  254. 11:51ही आकर मुस्कुराता हुआ बोला।
  255. 11:53क्या जीजू आपने ऐसा क्या कर दिया कि सबके
  256. 11:56बीच आपकी ही चर्चा हो रही है। मैंने तो
  257. 11:59कुछ खास किया नहीं पर पता नहीं क्यों सब
  258. 12:02मेरी ही चर्चा कर रहे हैं। शौर्य ने सफाई
  259. 12:05दी तभी राहुल हल्के से मुख्तार भाई की तरफ
  260. 12:08देखता हुआ बोला।
  261. 12:10आपको डर नहीं लगता जीजू जो आप मुख्तार भाई
  262. 12:13से भी उलझ गए थे। देखना अब वो जरूर आपके
  263. 12:16पीछे पड़ जाएंगे। शौर्य के आज के दमदार
  264. 12:19अवतार को देखकर राय परिवार के हर सदस्य के
  265. 12:22दिमाग में एक ही सवाल हथौड़े मार रहा था।
  266. 12:25क्या यह वही भिखारी है? यकीन किसी को नहीं
  267. 12:28हो रहा था लेकिन इस सवाल का जवाब भी किसी
  268. 12:31के पास नहीं था। क्योंकि पार्टी में जो
  269. 12:33सभी ने अपनी आंखों से देखा वो कोई सपना
  270. 12:36नहीं हकीकत थी। सबके पास इस हकीकत को एक
  271. 12:39बुरा सपना समझकर भुला देने का एक ही
  272. 12:42रास्ता बचा था। बर्थडे पार्टी। इसीलिए सब
  273. 12:45गिफ्ट को छोड़कर धीरे-धीरे म्यूजिक, डांस,
  274. 12:48ड्रिंक और डिशेस को एंजॉय करने लगे। माहौल
  275. 12:51एकदम से बदल गया। कुछ ही देर बाद पार्टी
  276. 12:54अपने शबाब पर थी। शौर्य रागिनी और राहुल
  277. 12:57के साथ अलग ही रहा। ना ही मुख्तार भाई फिर
  278. 13:00से शौर्य के पास आया और ना ही कोई अप्रिय
  279. 13:02घटना घटी। हां, यह जरूर था कि शौर्य अभी
  280. 13:05भी रजत की आंखों में खटक रहा था। शौर्य
  281. 13:08शिप्रा के बारे में सोच रहा था। पता नहीं
  282. 13:11क्यों शौर्य को यह एहसास हो रहा था कि
  283. 13:13शिप्रा ने गिफ्ट तो ले लिया है पर क्या वो
  284. 13:16इसे एक्सेप्ट करेगी। फिर उसने मेनका के
  285. 13:18बारे में सोचा और मन ही मन बोला। पता नहीं
  286. 13:22मेनका के दिमाग में क्या आया जो उसने
  287. 13:24शिप्रा के लिए भी गिफ्ट भेज दिया। शौर्य
  288. 13:27ने सोचा एक बार उसे जाकर मेनका से मिलना
  289. 13:30चाहिए। वैसे भी अब यह पार्टी उसके लिए
  290. 13:32बेमतलब सी हो गई थी और किसी को अब यहां
  291. 13:35उसकी परवाह भी नहीं थी। बहुत से लोग तो
  292. 13:38उससे इसलिए भी दूर थे क्योंकि उसने
  293. 13:40मुख्तार भाई से जबरदस्ती का पंगा ले लिया
  294. 13:42था और वहां पर ज्यादातर लोग ऐसे थे जो
  295. 13:45मुख्तार भाई की आंखों में ना खटक जाए
  296. 13:47इसीलिए शौर्य से दूर ही थे। शौर्य रागिनी
  297. 13:50से हटकर शिप्रा के पास गया और बोला
  298. 13:54मैं भी जा रहा हूं बाद में मिलता हूं।
  299. 13:57क्या हुआ? [संगीत] इतनी जल्दी क्यों जा
  300. 13:59रहे हो? अभी तो खाना भी नहीं खाया। शिप्रा
  301. 14:02हैरानी से बोली। शौर्य को यह अच्छा लगा कि
  302. 14:05शिप्रा को उसकी फिक्र है। तभी तो उसे पता
  303. 14:08था कि उसने खाना नहीं खाया। पर शौर्य तो
  304. 14:11यहां आने से पहले ही मोहित और प्रिया के
  305. 14:13साथ खाना खा चुका था। उसे भूख भी नहीं थी।
  306. 14:16इसीलिए उसने शिप्रा से कहा मुझे भूख नहीं
  307. 14:19है। शिप्रा को लग रहा था कि जो कुछ हुआ
  308. 14:23उसी के कारण वो यहां से जल्दी जाना चाहता
  309. 14:26है। इसीलिए उसने शौर्य को फिर से रोकने की
  310. 14:28कोशिश की। पर इतनी जल्दी क्या है जाने की?
  311. 14:32घर ही तो जाना है। हमारे साथ ही चलना।
  312. 14:36पर शौर्य के दिमाग में शायद कुछ और ही चल
  313. 14:38रहा था। इसीलिए शौर्य शिप्रा को टालते हुए
  314. 14:41बोला, "इसकी कोई जरूरत नहीं है। मैं आ
  315. 14:44जाऊंगा।" वैसे भी तुम सबके साथ आई हो तो
  316. 14:47सबके साथ ही जाना सही रहेगा। शिप्रा यह भी
  317. 14:51सोच रही थी कि शौर्य होटल राजकमल का खाना
  318. 14:53छोड़कर जा रहा है। क्या कभी उसने ऐसा खाना
  319. 14:56खाया भी होगा? क्या पता फिर कभी उसे ऐसी
  320. 14:59जगह पर खाने का मौका शायद ना मिले। इसीलिए
  321. 15:02शिप्रा एक और कोशिश करते हुए बोली, क्या
  322. 15:06तुम्हारा अभी जाना इतना जरूरी है? नहीं,
  323. 15:09जरूरी तो नहीं है पर मेरा भी यहां पर कोई
  324. 15:11खास काम नहीं है। तो सोचा जो थोड़ा सा काम
  325. 15:14बचा है उसे निपटा लूं। शौर्य बहाना बनाते
  326. 15:18हुए बोला तो शिप्रा बोली, वैसे मैं भी अब
  327. 15:21ज्यादा देर यहां नहीं रुकूंगी। थोड़ी देर
  328. 15:23रुकोगे तो साथ ही चलेंगे।
  329. 15:26शिप्रा की आंखों की बेचैनी देखकर शौर्य
  330. 15:29समझ गया था कि उसका ऐसे बीच पार्टी से
  331. 15:31जाना शिप्रा को अच्छा नहीं लग रहा है।
  332. 15:33इसीलिए वो शिप्रा को आश्वस्त करते हुए
  333. 15:36बोला अगर ऐसा है तो मैं अभी होटल के पास
  334. 15:39ही हूं। जब तुम्हें जाना हो तो 5 मिनट
  335. 15:42पहले बता देना मैं आ जाऊंगा।
  336. 15:45ठीक है तो फिर तुम जाओ। मैं जिस समय यहां
  337. 15:47से जाऊंगी तुम्हें फोन कर लूंगी। शिप्रा
  338. 15:51हारी सी आवाज में शौर्य से बोली। शौर्य
  339. 15:53वहां से निकल गया और सीधा मेनका के ऑफिस
  340. 15:56में पहुंचा। मेनका अकेले ही बैठी थी।
  341. 15:58शौर्य को ऑफिस में देखकर उसे आश्चर्य नहीं
  342. 16:01हुआ। इसका मतलब था कि वह शौर्य पर ही नजर
  343. 16:04रखे हुए थी। शौर्य आकर सीधा उसके सामने
  344. 16:07वाली चेयर पर बैठ गया।
  345. 16:10क्या बात है? लगता है वह पार्टी तुम्हें
  346. 16:12कुछ ज्यादा रास नहीं आई। इसीलिए इतनी
  347. 16:15जल्दी वहां से चले आए। मेनका मुस्कुराती
  348. 16:18हुई बोली। तो शौर्य ने मेनका के चेहरे को
  349. 16:21गौर से देखते हुए कहा, "इसका मतलब तुम मुझ
  350. 16:24पर नजर रखे हुए थी।" तभी तो तुम ऐसे बोल
  351. 16:27रही हो। हां, ऐसा था तो सही। मैं जानना
  352. 16:30चाहती थी कि तुम्हें वो गिफ्ट पसंद आया या
  353. 16:32नहीं।" मेनका मुस्कुराती हुई बोली तो
  354. 16:35शौर्य बोला, पसंद तो आया था पर तुम्हें वो
  355. 16:38दूसरा गिफ्ट लेने की क्या जरूरत थी।"
  356. 16:40शौर्य का सवाल सुनकर मेनका ने तुरंत ही
  357. 16:43शिकायती लहजे में बोल दिया। अरे कमाल है।
  358. 16:46जिस चीज के लिए तुम्हें मुझे थैंक्स बोलना
  359. 16:48चाहिए उल्टा उसके लिए ही शिकायत कर रहे
  360. 16:50हो। अरे शिकायत नहीं कर रहा पर तुम्हें
  361. 16:53पता नहीं है। हम दोनों का रिलेशन कैसा है?
  362. 16:56अगर पता होता तो तुम ऐसा नहीं करती। शौर्य
  363. 17:00ने मेनका को समझाने की कोशिश की। तो मेनका
  364. 17:02के चेहरे पर सवालिया सा भाव उभर आया और वो
  365. 17:06बोली
  366. 17:07तुम दोनों पति-पत्नी हो। इसमें पता नहीं
  367. 17:10होने वाली कौन सी बात है? एक पत्नी के लिए
  368. 17:13इससे ज्यादा खुशी की बात क्या होगी कि
  369. 17:15उसका पति उसके लिए इतना सुंदर गिफ्ट लाए।
  370. 17:18इस पर शौर्य अपनी बात को स्पष्ट करते हुए
  371. 17:20बोला देवी जी यह सही है कि हम पति-पत्नी
  372. 17:24हैं। पर बाय चॉइस नहीं है। यह एक मजबूरी
  373. 17:27के कारण है। और दूसरी बात शिप्रा की नजर
  374. 17:30में मेरा स्टेटस एक भिखारी का है। अब इतना
  375. 17:33तो तुम [संगीत] समझ ही सकती हो कि एक
  376. 17:35भिखारी के स्टेटस वाला शख्स जब अपनी पत्नी
  377. 17:37को इतना महंगा गिफ्ट देगा तो वह क्या
  378. 17:40सोचेगी?
  379. 17:41तो वो खेद भरे स्वर में बोली ओह सॉरी यह
  380. 17:46बात मुझे पता नहीं थी अब क्या करोगे तुम
  381. 17:49बोलते हुए मेनका के दिमाग में कोई बात आई
  382. 17:52तो वो आगे बोली एक मिनट तुम उसे अपनी
  383. 17:55असलियत क्यों नहीं बता देते
  384. 17:58जी मेरी जो उससे शादी हुई है यह उसकी पसंद
  385. 18:01से नहीं है बल्कि यह उसकी मजबूरी की शादी
  386. 18:04है जैसे ही हालात ठीक होंगे वो [संगीत]
  387. 18:06मुझसे तलाक ले लेगी मैं नहीं चाहता कि मैं
  388. 18:09उसे अपनी असलियत बताकर उसे किसी उलझन में
  389. 18:12उलझाऊं। और दूसरी बात यह है कि मैं नहीं
  390. 18:15चाहता कि अभी दुनिया के सामने मेरी हकीकत
  391. 18:18जाहिर हो। इसीलिए मैंने तुम्हें भी कहा था
  392. 18:20कि मेरी हकीकत किसी के सामने जाहिर मत
  393. 18:23करना। अगर मेरे बारे में किसी को जानना हो
  394. 18:26तो तुम विक्रम को ही इस होटल के नए मालिक
  395. 18:28के रूप में प्रस्तुत करोगी। मेरा नाम तो
  396. 18:32पता ही होगा। श्रवण अगर किसी के सामने
  397. 18:35मेरा नाम लेना पड़े तो मुझे श्रवण के नाम
  398. 18:38से ही संबोधित [संगीत] करना। इतना बोलकर
  399. 18:40शौर्य रुका और अंत में अपनी बात को खत्म
  400. 18:43करता हुआ बोला तुम मेरी बात समझ गई ना यह
  401. 18:46कुछ और है जो तुम्हें समझने की जरूरत है
  402. 18:50वो सब तो ठीक है पर तुम्हें क्या जरूरत है
  403. 18:52कि तुम शिप्रा के साथ बंधे हो वो तलाक ले
  404. 18:55उससे पहले तुम भी तो उससे तलाक ले सकते हो
  405. 18:58या कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हें उससे
  406. 19:00प्यार हो गया है
  407. 19:03मेनका ने एक गहरा सवाल शौर्य से किया तो
  408. 19:05मेनका के सवाल से शौर्य सोच में पड़ गया
  409. 19:08कि उसे क्या जवाब दे। तभी कुछ [संगीत]
  410. 19:10सोचकर उसने कहा, "इसका कारण यह है कि अभी
  411. 19:13मुझे भी एक आइडेंटिटी की जरूरत है और यह
  412. 19:17पहचान मुझे अपनी असली पहचान छुपाने में
  413. 19:19मददगार साबित हो रही है।" मेनका गौर से
  414. 19:22शौर्य की आंखों में देखती [संगीत] रही और
  415. 19:24यह जानने की कोशिश करती रही कि क्या यह सच
  416. 19:27बोल रहा है या यह सिर्फ बातें बना रहा है।
  417. 19:30पर उसकी आंखों से मेनका कुछ खास पता नहीं
  418. 19:33कर पाई। फिर एक लंबी सांस लेकर वो बोली
  419. 19:38अब तो गिफ्ट तुमने शिप्रा को दे दिया है
  420. 19:40और उसने एक्सेप्ट भी कर लिया है तो फिर
  421. 19:42तुम क्यों इस बात से चिंतित हो और जहां तक
  422. 19:45मुझे लग रहा है उसने अभी तक तुमसे कोई
  423. 19:47सवाल भी नहीं किया है नहीं किया है तो
  424. 19:50इसका मतलब यह नहीं है कि आगे करेगी भी
  425. 19:53नहीं जैसे ही उसे मैं अकेला मिलूंगा वह
  426. 19:56सबसे पहले यही सवाल करेगी और सिर्फ सवाल
  427. 19:59ही नहीं करेगी मुझे लगता है वह गिफ्ट भी
  428. 20:01मुझे वापस कर देगी
  429. 20:04शौर्य ने फिर मेनका को अपनी बात समझाते
  430. 20:06हुए बोला तो मेनका ने तुरंत ही इंकार में
  431. 20:08सिर हिलाते हुए कहा असंभव मैं एक बार को
  432. 20:12तो यह मान सकती हूं कि वो तुमसे सवाल
  433. 20:14करेगी पर वो गिफ्ट वापस कर देगी यह नहीं
  434. 20:18मान सकती तुम अभी शिप्रा को जानती नहीं हो
  435. 20:21वो कुछ भी कर सकती है शौर्य मुस्कुराते
  436. 20:24हुए बोला लेकिन मेनका अभी भी अपनी बात को
  437. 20:27सही साबित करने के लिए बोली तुम अभी
  438. 20:30लड़कियों की फितरत को नहीं जानते जैसी वो
  439. 20:32जताती आती है वैसी वह होती नहीं है। कोई
  440. 20:36बात नहीं ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा।
  441. 20:39कल ही पता चल जाएगा। शौर्य विश्वास भरे
  442. 20:42स्वर में बोला तो मेनका भी मुस्कुरा दी और
  443. 20:44बोली ठीक [संगीत] है मैं भी देखती हूं कि
  444. 20:47तुम उसे कितना समझते हो। अभी शौर्य और
  445. 20:50मेनका की बात चल ही रही थी। [संगीत] तभी
  446. 20:52अचानक एक शख्स धड़ाते हुए गार्ड को पीछे
  447. 20:55धकेल कर अंदर आ गया। शौर्य उस शख्स को
  448. 20:58यहां देखकर हैरान रह गया। उस शख्स के
  449. 21:01चेहरे पर भी शौर्य को यहां देखकर हैरानी
  450. 21:03थी। जो शख्स मेनका केबिन के अंदर आया था
  451. 21:07वो कोई और नहीं राजकुमार टंडन था। दरअसल
  452. 21:11राजकुमार टंडन मेनका से मिलने ही जा रहा
  453. 21:13था। उसी समय उसने देखा कि शौर्य बिना किसी
  454. 21:16इजाजत के मेनका के कमरे में चला गया था।
  455. 21:20दरवाजे के बाहर खड़े गार्ड ने उसे रोकने
  456. 21:22की कोशिश भी नहीं की। उल्टा उसने शौर्य का
  457. 21:25अभिवादन सिर झुका कर किया था। जबकि वह खुद
  458. 21:29जब भी मेनका से मिलने आता है, गार्ड की
  459. 21:31अनुमति के बाद ही उसे अंदर जाने दिया गया।
  460. 21:34राजकुमार टंडन को यह बात हजम नहीं हो रही
  461. 21:37थी कि शौर्य बिना किसी इजाजत के मेनका
  462. 21:40केबिन में चला गया था। आखिर दोनों में
  463. 21:42रिश्ता क्या है? यही सोच-सच कर राजकुमार
  464. 21:45टंडन परेशान हो रहा था। जब उससे बर्दाश्त
  465. 21:48नहीं हुआ तो वह यह जानने के लिए कि दोनों
  466. 21:51के बीच कोई गलत संबंध तो नहीं है। बिना
  467. 21:54गार्ड के बाहर आने का इंतजार किए वह अंदर
  468. 21:56चला गया। वो उम्मीद कर रहा था कि वह दोनों
  469. 21:59को किसी आपत्तिजनक स्थिति में देखेगा। पर
  470. 22:02उसने अंदर शौर्य को मेनका के सामने बैठे
  471. 22:04देखा। उसकी इच्छा अधूरी रह गई। पर उसने यह
  472. 22:08दिखावा करने की कोशिश की कि जैसे उसे पता
  473. 22:10ही नहीं था कि शौर्य पहले से ही यहां
  474. 22:12उपस्थित था। राजकुमार टंडन ने हैरान स्वर
  475. 22:16में शौर्य से कहा। तुम तुम यहां क्या कर
  476. 22:20रहे हो? शौर्य अभी यह उम्मीद नहीं कर रहा
  477. 22:23था कि राजकुमार टंडन अचानक यू मेनका केबिन
  478. 22:26में आ जाएगा। वो सोच ही रहा था कि वो क्या
  479. 22:29जवाब दे कि इसी बीच मेनका ने राजकुमार
  480. 22:32टंडन से पूछा। मिस्टर टंडन यह क्या
  481. 22:35बदतमीजी है? आप यूं बिना पूछे मेरे केबिन
  482. 22:38के अंदर कैसे आ गए? राजकुमार टंडन मेनका
  483. 22:42की बात सुनकर हड़बड़ा गया और खुद को
  484. 22:44संतुलित करते हुए बोला, "मिस मेनका, मैंने
  485. 22:47सोचा आप अकेली हैं और मुझे थोड़ी जल्दी
  486. 22:49थी। इसीलिए मैं बाहर इंतजार नहीं कर पाया।
  487. 22:52पर मुझे उम्मीद नहीं थी कि आप किसी के साथ
  488. 22:54होंगी। मैं श्रवण को जानता हूं पर यह नहीं
  489. 22:57समझ पा रहा हूं कि यह यहां क्या कर रहा
  490. 22:59है।
  491. 23:01यह आपको जानने की जरूरत नहीं है कि श्रवण
  492. 23:04यहां क्या कर रहा है। आप तो बस यह बताइए
  493. 23:07कि आप यहां क्या करने आए हैं। मेनका रूखे
  494. 23:10स्वर में बोली। राजकुमार टंडन को यह
  495. 23:13उम्मीद नहीं थी कि मेनका श्रवण के सामने
  496. 23:15उससे इतने तीखे अंदाज में बात करेगी। पर
  497. 23:18वो खुद को नॉर्मल दिखाने की कोशिश करते
  498. 23:20हुए बोला, मिस मेनका, मैं तो यहां पर आपका
  499. 23:23जो बैलेंस अमाउंट है उसका चेक देने के लिए
  500. 23:26आया था। पर मुझे यह नहीं पता था कि श्रवण
  501. 23:29आपके साथ यहां बैठा होगा। मिस्टर टंडन मैं
  502. 23:32श्रवण की बात नहीं कर रही। मैं बस आपसे यह
  503. 23:35कह रही हूं कि इतनी करसी तो आपके अंदर
  504. 23:37होनी चाहिए कि आपको मेरे कमरे में आने से
  505. 23:40पहले इजाजत लेनी चाहिए थी। आप श्रवण को
  506. 23:43जानते हैं या नहीं जानते हैं इससे मेरा
  507. 23:46कोई वास्ता नहीं है। उम्मीद करती हूं कि
  508. 23:49आपको मेरी बात समझ आ रही होगी। इस बार
  509. 23:52मेनका का स्वर और भी सख्त हो गया था। सॉरी
  510. 23:55मिस मेनका आइंदा मैं यह ध्यान रखूंगा।
  511. 23:59राजकुमार टंडन को ऐसा लग रहा था जैसे किसी
  512. 24:01ने भरे चौराहे पर उसे नंगा कर दिया हो।
  513. 24:04बेइज्जती का घूंट पीते हुए राजकुमार टंडन
  514. 24:07अंदर ही अंदर बोले
  515. 24:09कुछ तो गड़बड़ है। आखिर यह भिखारी मेनका
  516. 24:12को कैसे जानता है? राजकुमार टंडन मेनका के
  517. 24:15कमरे में बैलेंस पेमेंट का चेक देने गए
  518. 24:17थे। लेकिन उनका असल मकसद मेनका और शौर्य
  519. 24:20के आपसी संबंधों को चेक करना था। जिस
  520. 24:23आपत्तिजनक दृश्य की कल्पना राजकुमार टंडन
  521. 24:25ने की थी, [संगीत] वह तो उन्हें कमरे में
  522. 24:27देखने को नहीं मिला। लेकिन जिस आपत्तिजनक
  523. 24:30व्यवहार की उन्होंने उम्मीद नहीं की थी,
  524. 24:32वह मेनका के कड़वे शब्दों में सुनने को
  525. 24:34मिल गया। शौर्य सामने बैठे-बैठे मेनका के
  526. 24:38कड़े रुख को गौर से देख रहा था। जब उसने
  527. 24:41देखा कि मेनका राजकुमार टंडन से कुछ
  528. 24:43ज्यादा ही रूढ़ हो रही है तो उसने आंखों
  529. 24:45के इशारे से उसे शांत रहने को कहा। वैसे
  530. 24:48उसे अच्छा भी लगा जिस तरह से मेनका ने
  531. 24:51राजकुमार टंडन की अकड़ को शांत किया था।
  532. 24:54लेकिन राजकुमार टंडन को यह बात ज्यादा ही
  533. 24:57चुभ रही थी कि मेनका ने शौर्य के सामने
  534. 24:59उसे झाड़ा था। शौर्य के इशारे के बाद अपने
  535. 25:03आप पर काबू करते हुए मेनका ने राजकुमार
  536. 25:05टंडन की तरफ हाथ बढ़ाया और बोली ठीक है
  537. 25:08मिस्टर टंडन चेक दीजिए। फिर मेनका ने
  538. 25:12शौर्य की तरफ देखा और बोली
  539. 25:15तुम इन्हें कैसे जानते हो श्रवण?
  540. 25:18यह मेरी पत्नी की बुआ के हस्बैंड हैं।
  541. 25:21यानी यह मेरे ससुर जी हुए। शौर्य शराफत से
  542. 25:25बोला क्या बात करते हो अगर ऐसा था तो
  543. 25:28तुम्हें मुझे पहले बताना चाहिए था मेनका
  544. 25:31पूरी तरह से एक्टिंग करती हुई बोली शौर्य
  545. 25:34भी उसकी एक्टिंग देखकर मन में उसे दाद
  546. 25:37देने से खुद को रोक नहीं सका मेनका फिर
  547. 25:40राजकुमार टंडन की तरफ होकर बोली माफ
  548. 25:42कीजिएगा मिस्टर टंडन मुझे नहीं पता था कि
  549. 25:45आप श्रवण के ससुर जी हैं। कोई बात नहीं
  550. 25:48ऐसे हो जाता है। राजकुमार टंडन खिसियानी
  551. 25:51हंसी हंसते हुए बोला उम्मीद करती हूं कि
  552. 25:54पार्टी में किसी चीज की कमी नहीं रही
  553. 25:56होगी। कोई खास डिमांड हो तो बता दीजिए।
  554. 25:59मैं आपके लिए वह अरेंज करवा सकती हूं और
  555. 26:01इसका कोई चार्ज नहीं लगेगा। आफ्टर ऑल आप
  556. 26:04श्रवण के ससुर जी हैं। मेनका अपनी
  557. 26:07दरियादिली दिखाते हुए बोली। नहीं नहीं सब
  558. 26:10अरेंजमेंट बहुत बढ़िया है। अब किसी और चीज
  559. 26:12की जरूरत भी नहीं है। मैं तो बस आपको
  560. 26:14बैलेंस अमाउंट पे करने आया था। ठीक है। अब
  561. 26:17मैं चलता हूं। आप दोनों एंजॉय करो।
  562. 26:20इतना बोलकर राजकुमार टंडन वहां से निकल
  563. 26:22गया। लेकिन जाते-जाते भी कई सारे सवाल
  564. 26:25उनके दिमाग में घूम रहे थे। उनके लिए तो
  565. 26:28सबसे बड़े आश्चर्य की बात यही थी कि श्रवण
  566. 26:31होटल राजकमल के मैनेजर को कैसे जानता था
  567. 26:34और ना सिर्फ जानता था बल्कि दोनों को
  568. 26:36देखकर लगता था कि दोनों में अच्छी खासी
  569. 26:39घनिष्ठता भी थी। आखिर कैसे एक भिखारी की
  570. 26:42इतने बड़े लोगों से जान पहचान हो सकती है?
  571. 26:45अगर उन्हें पहले पता होता तो जब उन्होंने
  572. 26:48होटल को बुक किया था उस समय श्रवण के
  573. 26:50द्वारा होटल बुक करते तो उन्हें कुछ छूट
  574. 26:52भी मिल जाती। पर अब यह सोचने का क्या
  575. 26:54फायदा? दूसरी तरफ राजकुमार टंडन के जाने
  576. 26:58के बाद मेनका ने शौर्य से पूछा। मैंने
  577. 27:01टंडन साहब के साथ कुछ ज्यादा तो नहीं कर
  578. 27:03दिया। अरे नहीं तुमने तो बढ़िया डील किया।
  579. 27:07वो इसी लायक थे। मुझे लगता है उन्होंने
  580. 27:09मुझे यहां आते देख लिया होगा। इसी कारण वह
  581. 27:12बिना इजाजत अंदर चले आए। उनके मन में जरूर
  582. 27:15कोई और खिचड़ी पकने लगी होगी। [संगीत]
  583. 27:17शौर्य ने अपना अंदाजा बताया। मेनका को जब
  584. 27:21एहसास हुआ कि शौर्य क्या कहना चाहता है तो
  585. 27:23अचानक उसके चेहरे पर गुस्से की एक लहर
  586. 27:26दौड़ गई और वह बोली। अगर यह बात थी तो
  587. 27:29तुमने मुझे उसी समय हिंट क्यों नहीं दिया।
  588. 27:31अगर मुझे जरा भी आभास होता तो मैं उसे
  589. 27:34इतनी आसानी से नहीं छोड़ती।
  590. 27:37अरे छोड़ो अपना मूड मत खराब करो। वैसे भी
  591. 27:41तुमने उनकी हेकड़ी निकालने में कोई कसर
  592. 27:43छोड़ी भी नहीं। शौर्य हल्की मुस्कान के
  593. 27:46साथ बोला। अभी मेनका आगे कुछ बोलने ही
  594. 27:49वाली थी कि तभी शौर्य का मोबाइल रिंग करने
  595. 27:52लगा। उसने नंबर की तरफ देखा तो वो शिप्रा
  596. 27:54का कॉल था। उसने कॉल उठाया और कहा हेलो
  597. 27:59आ जाओ। अब मैं घर के लिए निकलने वाली हूं।
  598. 28:03शिप्रा ने बिना किसी औपचारिकता के शौर्य
  599. 28:05को आने के लिए बोल दिया। ठीक है मैं 5
  600. 28:07मिनट में आता हूं। इतना बोलकर शौर्य ने
  601. 28:10फोन काट दिया। मेनका का ध्यान शौर्य की
  602. 28:13बातों की तरफ ही था। उसने कहा तुम जा रहे
  603. 28:17हो? मैंने सोचा तुम रात होटल में ही
  604. 28:19बिताओगे। नहीं फिर कभी अभी तो जाना
  605. 28:23पड़ेगा। इतना बोलकर शौर्य अपनी जगह से उठ
  606. 28:26खड़ा हुआ। दूसरी तरफ राजकुमार टंडन को चैन
  607. 28:29नहीं था। उन्हें यह बात परेशान किए हुए थी
  608. 28:32कि श्रवण मेनका को कैसे जानता है। जब
  609. 28:35उन्हें कुछ समझ नहीं आया तो उन्होंने सोचा
  610. 28:37शायद शिप्रा को पता होगा क्यों ना उसी से
  611. 28:40पूछ लिया जाए। यह सोचकर वो शिप्रा को
  612. 28:43ढूंढते हुए उसके पास पहुंचे। शिप्रा इस
  613. 28:46समय अपने पापा के साथ खड़ी थी। राजकुमार
  614. 28:48टंडन ने बड़े प्यार से शिप्रा से पूछा।
  615. 28:51शिप्रा बेटी मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी।
  616. 28:55शिप्रा को हैरानी हुई कि उसके फूफा भला
  617. 28:57उससे क्या पूछना चाहते हैं? उसने आशंकित
  618. 29:00स्वर में कहा क्या जानना चाहते हैं फूफा
  619. 29:03जी टंडन साहब शिप्रा के चेहरे को ध्यान से
  620. 29:06देखते हुए बोले बेटे यह अपना श्रवण मिस
  621. 29:10मेनका को कैसे जानता है शिप्रा को समझ
  622. 29:13नहीं आया कि वो किस मेनका की बात कर रहे
  623. 29:15हैं सवालिया नजरों से उसने पूछा यह मेनका
  624. 29:19कौन है फूफा जी अरे मिस मेनका होटल राजकमल
  625. 29:23की मैनेजर है श्रवण उसको कैसे जानता है
  626. 29:26टंडन साहब अपनी बात को स्पष्ट करते हुए
  627. 29:29बोले खुले। टंडन साहब की बात सुनकर शिप्रा
  628. 29:32को एक झटका सा लगा। उसने सोचा यह कैसे हो
  629. 29:35सकता है? कहा श्रवण और कहा मिस मेनका इन
  630. 29:38दोनों का क्या मेल? भला श्रवण मिस मेनका
  631. 29:41को कैसे जानेगा? इसीलिए उसने कहा आप कैसी
  632. 29:44बातें कर रहे हैं फूफा जी। भला श्रवण मिस
  633. 29:47मेनका को कैसे जानेगा? शिप्रा के चेहरे के
  634. 29:50भाव को देखकर राजकुमार टंडन समझ गए कि इस
  635. 29:53बारे में शिप्रा को भी कुछ नहीं पता है।
  636. 29:55यह सोचकर उनके दिमाग में सोई पड़ी खुराफात
  637. 29:58अचानक से जाग गई और वह बोले तुम बहुत भोली
  638. 30:02हो शिप्रा बेटी। श्रवण ना सिर्फ मिस मेनका
  639. 30:05को जानता है बल्कि दोनों के बीच घनिष्ठता
  640. 30:08भी है। शिप्रा को राजकुमार टंडन की बात पर
  641. 30:11विश्वास ही नहीं हो रहा था। वो कैसे यह
  642. 30:14बात मान सकती थी कि श्रवण मिस मेनका को
  643. 30:16पहले से जानता हो। ना ही इस बारे में उसने
  644. 30:19शिप्रा से कुछ कहा था। लेकिन वो अपने फूफा
  645. 30:22जी की बात को भी तो झुठला नहीं सकती थी।
  646. 30:25फिर भी यह जानने के लिए कि उसके फूफा जी
  647. 30:27को कैसे पता चला कि श्रवण मेनका को कैसे
  648. 30:29जानता है? उसने उनसे पूछा।
  649. 30:32फूफा जी आप इतने विश्वास के साथ कैसे कह
  650. 30:35सकते हैं कि श्रवण मिस मेनका को पहले से
  651. 30:38जानता है? शिप्रा की बात सुनकर राजकुमार
  652. 30:41टंडन जोर से हंसे और बोले तुम्हें क्या
  653. 30:44लगता है कि मैं तुमसे मजाक कर रहा हूं।
  654. 30:46अरे मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है। अभी
  655. 30:49जब मैं मिस मेनका को पेमेंट करने गया था
  656. 30:51तो श्रवण पहले से ही उनके केबिन में बैठा
  657. 30:54हुआ था। मिस मेनका ने तो यहां तक कहा कि
  658. 30:56अगर आपको कुछ और चाहिए तो मैं वो भी अरेंज
  659. 30:59करवा सकती हूं और उसका कोई चार्ज भी नहीं
  660. 31:02लगेगा। इसका मतलब तुम समझती हो ना कि
  661. 31:05दोनों कितने क्लोज हैं।
  662. 31:07जिस तरह से राजकुमार टंडन शिप्रा को शौर्य
  663. 31:10के बारे में बता रहे थे, उससे शिप्रा इतना
  664. 31:12समझ रही थी कि उनके कहने का मकसद सिर्फ
  665. 31:15पहचान बताना नहीं बल्कि यह जताना भी था कि
  666. 31:18दोनों के बीच दोस्ती से बढ़कर रिश्ता है।
  667. 31:20अगर ऐसा होता भी तो शिप्रा को इससे कोई
  668. 31:23खास फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह पहले ही
  669. 31:25अपने और शौर्य के रिश्ते को स्पष्ट कर
  670. 31:27चुकी थी। इसीलिए शौर्य किसके साथ क्या
  671. 31:30रिश्ता रखता है यह उसके लिए मायने नहीं
  672. 31:32रखता था। लेकिन उसके लिए यह मानना मुश्किल
  673. 31:35था कि शौर्य मिस मेनका को इतनी अच्छी तरह
  674. 31:38जानता है कि किसी को उनके बीच खास रिश्ता
  675. 31:40होने का शक हो सकता है। शिप्रा को समझ
  676. 31:44नहीं आया कि वो अपने फूफा जी को क्या जवाब
  677. 31:46दे। इसीलिए उसने बात टालते हुए कहा
  678. 31:49एक्चुअली मुझे भी इस बारे में कुछ पता
  679. 31:51नहीं। श्रवण आएगा तो मैं उससे पूछ लूंगी
  680. 31:54कि वो मिस मेनका को कैसे जानता है। हां
  681. 31:57जरूर पूछना। पता नहीं अचानक ही उसका
  682. 31:59व्यक्तित्व कुछ रहस्यमय होता जा रहा है।
  683. 32:02राजकुमार टंडन संदेह भरे स्वर में बोले।
  684. 32:06शिप्रा अपने फूफा जी के इरादे को समझ रही
  685. 32:08थी। लेकिन उसने उनकी बातों पर ध्यान नहीं
  686. 32:10दिया। खैर उसे ज्यादा इंतजार नहीं करना
  687. 32:13पड़ा। अगले कुछ ही पलों में उसे श्रवण
  688. 32:15सामने से आता दिखाई दिया। शिप्रा ने उसे
  689. 32:18ध्यान से देखा। उसका व्यक्तित्व अब पहले
  690. 32:21से कहीं ज्यादा प्रभावशाली लग रहा था। वो
  691. 32:23समझ नहीं पा रही थी कि इन कुछ दिनों में
  692. 32:25ऐसा क्या बदल गया जो श्रवण इतना अलग नजर
  693. 32:28आने लगा है। उसकी स्मार्टनेस ऐसी थी कि
  694. 32:31पूरी पार्टी में वह सबसे अलग दिख रहा था।
  695. 32:33ऐसा व्यक्तित्व जिस पर किसी की भी नजर टिक
  696. 32:36जाए। शिप्रा ने आज से पहले कभी शौर्य को
  697. 32:39इतने ध्यान से नहीं देखा था। उसमें कुछ तो
  698. 32:42ऐसा था जो उसे दूसरों से अलग बनाता था।
  699. 32:45फिर उसने सोचा क्या सच में ऐसा हो सकता है
  700. 32:49कि मिस मेनका श्रवण को पसंद करती हो पर
  701. 32:52कैसे कहां मिस मेनका इतनी बड़ी हस्ती और
  702. 32:55कहां श्रवण दोनों में कोई मेल ही नहीं फिर
  703. 32:58यह कैसे संभव है राजकुमार टंडन अभी भी
  704. 33:01शिप्रा के साथ ही खड़े थे वह भी जानना
  705. 33:04चाहते थे कि श्रवण मिस मेनका को कैसे
  706. 33:06जानता है वो सोच रहे थे कि अगर वह यहां से
  707. 33:09चले गए तो फिर पता नहीं श्रवण से बात करने
  708. 33:11का मौका मिलेगा या नहीं यही सोच सोचकर वह
  709. 33:15खुद ही श्रवण से बात करना चाहते थे। जब
  710. 33:18श्रवण शिप्रा के पास आ गया और उसने
  711. 33:20राजकुमार टंडन को शिप्रा के साथ खड़ा देखा
  712. 33:23तो वह समझ गया कि जरूर फूफा जी ने शिप्रा
  713. 33:25को सारी कहानी बता दी होगी। यही सोचकर वो
  714. 33:29अपने दिमाग में एक स्क्रिप्ट तैयार करने
  715. 33:31लगा कि उसे शिप्रा को कैसे और क्या जवाब
  716. 33:33देना है। जब शौर्य राजकुमार टंडन के पास
  717. 33:37पहुंचा तो वो मुस्कुराते हुए बोले अरे
  718. 33:40श्रवण बेटा तुमने पहले बताया नहीं कि तुम
  719. 33:43मिस मेनका को इतनी अच्छी तरह जानते हो।
  720. 33:47इसी समय राधिका जिसने शौर्य को बाहर से
  721. 33:49आते देख लिया था वहां आ गई। उसने देखा कि
  722. 33:52उसके पापा भी उसके पास खड़े हैं तो वह भी
  723. 33:55वहीं आकर खड़ी हो गई। जब उसने अपने पापा
  724. 33:57की बात सुनी तो वो आश्चर्य से बोली ये आप
  725. 34:01क्या कह रहे हैं पापा श्रवण मिस मेनका को
  726. 34:04जानता है? यह कैसे हो सकता है?
  727. 34:07तुम चुप रहो। तुम्हें क्या लगता है कि मैं
  728. 34:10मजाक कर रहा हूं? मैंने अपनी आंखों से
  729. 34:12दोनों को साथ में बैठे देखा है। राजकुमार
  730. 34:15टंडन राधिका को झपट कर बोला।
  731. 34:18क्या फूफा जी सच कह रहे हैं श्रवण? तुम
  732. 34:21मिस मेनका को पहले से जानते हो? शिप्रा ने
  733. 34:24भी अपने फूफा जी की बात की पुष्टि करने के
  734. 34:26लिए श्रवण से पूछ लिया। वैसे वह सबके
  735. 34:29सामने उससे पूछना नहीं चाहती थी। हां बेटे
  736. 34:32तुम्हें बताना चाहिए था। जानते हो मिस
  737. 34:35मेनका इस शहर की कितनी बड़ी हस्ती हैं।
  738. 34:37राजा साहब भी इन्हें कितना पसंद करते हैं
  739. 34:40और तुम दोनों को साथ में देखकर मुझे लगा
  740. 34:42कि तुम दोनों की अच्छी जमती है। राजकुमार
  741. 34:46टंडन दिखाने को तो शौर्य की तारीफ कर रहे
  742. 34:48थे। पर कहने का तरीका ऐसा था जैसे वो यह
  743. 34:51दिखाना चाहते हो कि उसके और मिस मेनका के
  744. 34:53बीच कुछ चल रहा है। शौर्य उनके कहने का
  745. 34:57भाव समझ गया था। पर उसने इसे गलत ढंग से
  746. 34:59नहीं लिया और हंसते हुए बोला हां अंकल हम
  747. 35:02दोनों की पुरानी पहचान है। किसी काम के
  748. 35:05सिलसिले में आज अचानक ही मिलना हो गया।
  749. 35:08पुरानी पहचान पर तुमने कभी बताया नहीं कि
  750. 35:11तुम मिस मेनका जैसी हस्ती को पहले से
  751. 35:13जानते हो। यहां तक कि तुमने शिप्रा को भी
  752. 35:16अपनी इस पहचान के बारे में नहीं बताया।
  753. 35:19राजकुमार टंडन श्रवण पर सवाल खड़े करते
  754. 35:21हुए बोले मैं मिस मेनका के अलावा भी और कई
  755. 35:25हस्तियों को जानता हूं और मैंने किसी के
  756. 35:27भी बारे में किसी को कुछ नहीं बताया है।
  757. 35:30कभी जरूरत ही नहीं पड़ी और बताने का कोई
  758. 35:33कारण भी तो हो। शौर्य व्यंग्ञात्मक अंदाज
  759. 35:36में बोला। शौर्य का जवाब सुनकर राजकुमार
  760. 35:39टंडन आगे कुछ नहीं बोल पाए। शिप्रा सिर्फ
  761. 35:41दोनों की बात सुनती रही। [संगीत] वो कुछ
  762. 35:43बोली नहीं। राधिका जो अब तक शौर्य को कुछ
  763. 35:46समझ नहीं रही थी, अचानक उसे शौर्य का
  764. 35:49व्यक्तित्व प्रभावशाली नजर आने लगा। वो इस
  765. 35:52बात से हैरान थी कि इतना शानदार
  766. 35:54व्यक्तित्व होने के बाद भी वो भिखारी का
  767. 35:56जीवन क्यों जी रहा था। राधिका तारीफ भरे
  768. 36:00अंदाज में अपनी आंखें बड़ी करती हुई बोली।
  769. 36:02तुम तो बड़े छुपे रुस्तम हो श्रवण। पता
  770. 36:05नहीं अभी और कितने रूप तुम्हारे देखने
  771. 36:07पड़ेंगे। शौर्य ने महसूस किया कि जो
  772. 36:10राधिका अब तक उसे जीजू और आप कहकर बुला
  773. 36:12रही थी, अचानक उसे उसके नाम से बुलाने
  774. 36:14लगी।
  775. 36:16क्या बात है राधिका? तुम अपने जीजू को
  776. 36:19सीधे नाम से पुकारने लगी हो। शिप्रा तंज
  777. 36:22भरे स्वर में बोली तो राधिका तुरंत ही
  778. 36:24सफाई देते हुए बोली, वो तो श्रवण को ही
  779. 36:27मेरा जीजू बोलना पसंद नहीं। इसलिए मैं नाम
  780. 36:29से ही बुला रही हूं। राधिका के श्रवण के
  781. 36:32लिए मीठे बोल और मेनका के साथ श्रवण की
  782. 36:34पहचान के ताजा समाचारों ने शिप्रा के
  783. 36:37दिमाग में हलचल मचाना शुरू कर दिया था।
  784. 36:40होटल राजकमल में शौर्य और मेनका को साथ
  785. 36:42देखने के बाद राजकुमार टंडन को ऐसा लग रहा
  786. 36:45था मानो उनके हाथ में शिप्रा और शौर्य की
  787. 36:47ऐसी कमजोरनेस आ गई है जिसे दबाने से ना
  788. 36:50केवल दर्द होगा बल्कि दोनों के रिश्तों
  789. 36:53में दरार भी पड़ जाएगी। इसीलिए यह
  790. 36:56ब्रेकिंग न्यूज़ शिप्रा को सुनाने के बाद
  791. 36:58टंडन साहब यह उम्मीद लिए बैठे थे कि वह
  792. 37:00अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे और मेनका
  793. 37:03के रूम में हुई उनकी बेइज्जती का घाव भी
  794. 37:05भर जाएगा। खैर घाव तो होटल राजकमल की
  795. 37:09पार्टी ने कईयों को दिए। राजकुमार टंडन
  796. 37:12अकेले नहीं थे जो जख्मी थे। मुख्तार भाई,
  797. 37:15रजत, नैना देवी और इन सबके साथ खुद बर्थडे
  798. 37:19गर्ल राधिका भी थी जो शौर्य का नया अवतार
  799. 37:21और शिप्रा को शौर्य का दिया महंगा गिफ्ट
  800. 37:23देखकर जल चुकी थी और अपनी गिरगिटी स्वभाव
  801. 37:27के अनुरूप बदल भी चुकी थी। जैसे ही राजकमल
  802. 37:30होटल के बाहर शौर्य से राधिका का सामना
  803. 37:32हुआ। वो शौर्य के साथ बातचीत में जीजू से
  804. 37:36श्रवण और आपसे तुम में उतर गई। लेकिन साथ
  805. 37:39खड़ी शिप्रा को राधिका की यह बात पसंद
  806. 37:41नहीं आई।
  807. 37:44लोग कितनी जल्दी बदल जाते हैं और बहाना
  808. 37:46ऐसा बनाते हैं जिसका कोई मतलब नहीं।
  809. 37:49शिप्रा सामान्य भाव में बोली पर उसका
  810. 37:52इशारा शौर्य से तू तड़ाक करके बात कर रही
  811. 37:54राधिका की तरफ ही था। फिर वो राजकुमार
  812. 37:58टंडन की तरफ पलट कर बोली।
  813. 38:01अब हम निकलते हैं फूफा जी। इतना कहकर उसने
  814. 38:04तुरंत ही शौर्य की ओर देखा और बोली, चलें।
  815. 38:08शौर्य ने सहमति जताई और वह शिप्रा के साथ
  816. 38:10बाहर की तरफ बढ़ गया। अभी वे दोनों कुछ
  817. 38:13कदम ही बड़े थे कि पार्टी का एक और घायल
  818. 38:15किरदार रजत उनके सामने आकर खड़ा हो गया और
  819. 38:18बोला
  820. 38:20नमस्कार
  821. 38:22ये क्या बदतमीजी है तुम मेरे सामने क्या
  822. 38:25करने आए हो मेरा रास्ता छोड़ो शिप्रा रजत
  823. 38:28को घूरते हुए तीखे अंदाज में बोली ऐसी भी
  824. 38:31क्या नाराजगी मिस शिप्रा हमने तो आपके लिए
  825. 38:34अपनी दुश्मनी भी भुला दी और आप हैं कि अभी
  826. 38:37भी हमसे रूठी हुई है। रजत मुस्कुराने का
  827. 38:40भरसक प्रयास करता हुआ बोला तो शिप्रा ने
  828. 38:43मखौल उड़ाने वाले भाव में कहा नाराजगी
  829. 38:46उनसे होती है जिन्हें हम अपना मानते हैं
  830. 38:49पर माफ कीजिएगा आप तो हमारी उस लिस्ट में
  831. 38:51ही नहीं है। शौर्य ने एक बार मुट्ठियां
  832. 38:55जरूर कसी लेकिन फिर उसने तुरंत ही खुद को
  833. 38:57काबू कर लिया। अभी वो उन दोनों की तकरार
  834. 39:00भरी बातों को सिर्फ सुन रहा था। उसने बीच
  835. 39:02में दखल देने की कोई कोशिश नहीं की। यह तो
  836. 39:06हमारे ऊपर बड़ी ज्यादती है। हमने तो यह
  837. 39:08सोचकर सुलह करने की कोशिश की थी कि शायद
  838. 39:11इसके बाद आप हमारी नूर नजर होंगी। पर आप
  839. 39:14तो लगातार हमारा दिल तोड़ रही हैं। रजत
  840. 39:17शायराना अंदाज में बोला लेकिन शिप्रा भी
  841. 39:20चुपचाप सुनने वाली कहां? वो बोली फिर तो
  842. 39:23आदत डाल ही लीजिए। ऐसे अगर शीशे का दिल
  843. 39:25लेकर घूमेंगे तो यह ऐसे ही बार-बार टूटता
  844. 39:28रहेगा। रजत का चेहरा शिप्रा का जवाब सुनकर
  845. 39:32लाल हो गया। वो शौर्य की तरफ देखते हुए
  846. 39:34बोला, "ल लगता है इस भिखारी की संगत कुछ
  847. 39:37ज्यादा ही राज आ रही है। तभी तो महल और
  848. 39:40झोपड़े का फर्क नजर नहीं आ रहा। वो फर्क
  849. 39:44तो अभी थोड़ी देर पहले पार्टी में सब ने
  850. 39:45देख ही लिया कि महल में रहने वाले के
  851. 39:48गिफ्ट और झोपड़े में रहने वाले के गिफ्ट
  852. 39:50में क्या अंतर था। शिप्रा थोड़ी देर पहले
  853. 39:53शौर्य द्वारा दिए गए गिफ्ट की तरफ रजत का
  854. 39:56ध्यान दिलाते हुए बोली,
  855. 39:58"मैं देख रहा हूं कुछ ज्यादा ही जुबान तेज
  856. 40:01हो गई है तुम्हारी। ध्यान रखना कहीं इसके
  857. 40:04कारण बड़ा खामियाजा नहीं भुगतना पड़ जाए।
  858. 40:07रजत जब बातों से नहीं जीता तो अप्रत्यक्ष
  859. 40:10रूप से धमकाते हुए बोला तुम मेरी चिंता
  860. 40:13छोड़कर अपनी चिंता कर लो। वो तुम्हारे लिए
  861. 40:16ज्यादा बेहतर होगा। अब अगर तुम्हारी बकवास
  862. 40:18खत्म हो गई हो तो मेरा रास्ता छोड़ो। इतना
  863. 40:22बोलकर शिप्रा शौर्य के साथ रजत के साइड से
  864. 40:25निकल कर आगे बढ़ गई। रजत के साथ शिप्रा के
  865. 40:28तकरार के वक्त अगर शौर्य चाहता तो बीच में
  866. 40:31पड़ सकता था। पर उसने जानबूझकर कुछ नहीं
  867. 40:33बोला था। वो देख रहा था कि शिप्रा स्वयं
  868. 40:36रजत को अच्छे से हैंडल कर पा रही थी।
  869. 40:39शौर्य को यह देखकर भी अच्छा लग रहा था कि
  870. 40:42शिप्रा ने रजत को जवाब देने में कोई कसर
  871. 40:44नहीं छोड़ी। होटल से निकलकर शौर्य शिप्रा
  872. 40:47के साथ उसके घर की तरफ बढ़ गया। राजदीप
  873. 40:50राय और बीना जी राहुल के साथ पहले ही वहां
  874. 40:53से निकल गए थे। शिप्रा कार में थी लेकिन
  875. 40:56उसके दिमाग में मेनका वाली बात ही चल रही
  876. 40:58थी। अभी क्योंकि शौर्य शिप्रा के साथ
  877. 41:01गाड़ी में अकेला था तो शिप्रा ने सोचा यही
  878. 41:04सही मौका है और उसने पूछ ही लिया तुम मिस
  879. 41:07मेनका को कैसे जानते हो? दरअसल मैंने वहां
  880. 41:11सबके सामने तुमसे सवाल करना सही नहीं
  881. 41:13समझा। लेकिन अब यहां कोई नहीं है। इसलिए
  882. 41:16अगर तुम चाहो तो मुझे बता सकते हो। यह मत
  883. 41:19समझना कि तुम्हें मेरे सवाल का जवाब देना
  884. 41:21ही होगा। पर यह बात मेरे मन को लगातार
  885. 41:23परेशान कर रही है। इसीलिए जिज्ञासा वश मैं
  886. 41:26तुमसे यह जानना चाहती हूं। शौर्य को पहले
  887. 41:30से ही यह उम्मीद थी कि यह सवाल उसके सामने
  888. 41:32आने वाला है। इसीलिए उसने कहा
  889. 41:35एक्चुअली यह सब मेरे जॉब से रिलेटेड है।
  890. 41:39अपने जॉब के सिलसिले में ही मेरा मिस
  891. 41:41मेनका से कई बार मिलना हुआ था और हम दोनों
  892. 41:43की अच्छी जमने लगी। बस इतनी सी बात है।
  893. 41:47बोलते बोलते शौर्य यह सोच भी रहा था कि
  894. 41:49मिस मेनका को वो अपनी जॉब से कैसे रिलेट
  895. 41:51करें। मैं समझी नहीं मिस मेनका भला
  896. 41:55तुम्हारे जॉब के बीच में कहां से आ गई।
  897. 41:58शिप्रा शक भरे अंदाज में बोली। तभी शौर्य
  898. 42:01ने कहा ऐसा है कि मेरे बॉस ने अपना ऑफिस
  899. 42:05होटल राजकमल के ही पास लिया है और मुझे जो
  900. 42:08सबसे पहला काम मिला है वो एक कंपनी की
  901. 42:10ब्रांडिंग करना है। उसके लिए एक ऐड बनाना
  902. 42:13है और हर माध्यम से उसे एडवरटाइज करना है
  903. 42:16ताकि जल्दी से जल्दी वो ब्रांड पॉपुलर हो
  904. 42:18जाए। एक्चुअली इसी सिलसिले में मुझे एक
  905. 42:22पॉपुलर मॉडल की तलाश थी। अभी की जो सबसे
  906. 42:25पॉपुलर मॉडल नताशा है वो मिस मेनका की
  907. 42:28दोस्त है। मिस मेनका के जरिए ही मैं मिस
  908. 42:31नताशा से बात कर पाया और वो मुझसे मिलने
  909. 42:33के लिए भी तैयार हो गई। कहते हुए शौर्य एक
  910. 42:36कड़ी को दूसरी कड़ी से जोड़ने की कोशिश कर
  911. 42:39रहा था ताकि शिप्रा को उस पर शक ना हो।
  912. 42:42कहीं तुम उस फेमस मॉडल नताशा की बात तो
  913. 42:45नहीं कर रहे? वो तो बहुत पॉपुलर है और जिस
  914. 42:48भी ब्रांड का उसने कैंपेन किया है वो बहुत
  915. 42:50सक्सेस हुआ है। शिप्रा नताशा का नाम सुनकर
  916. 42:54बीच में बोल पड़ी लेकिन फिर कुछ सोचकर
  917. 42:56उसने कहा पर तुम मेनका से कैसे मिले? मिस
  918. 43:00मेनका से मुझे मेरे बॉस ने मिलाया था और
  919. 43:03एक दो बार मिलने से हमारी जान पहचान हो गई
  920. 43:05या ऐसा कह सकते हैं कि दोस्ती हो गई।
  921. 43:08क्योंकि हमारे बॉस ने कहा था कि आगे भी
  922. 43:11अगर मुझे कहीं मिस मेनका की हेल्प की
  923. 43:12जरूरत होगी तो मैं उनसे ले सकता हूं।
  924. 43:16शौर्य संतुष्ट भाव से बोला। उसने मन ही मन
  925. 43:19सोचा कि उसने एक ठीक-ठाक कहानी बना ली है।
  926. 43:22तभी शिप्रा ने अगला सवाल किया। कौन है
  927. 43:25तुम्हारा बॉस?
  928. 43:27इस पर शौर्य एक पल को सोचकर बोला, विक्रम।
  929. 43:31विक्रम चौहान। शिप्रा ने विक्रम चौहान का
  930. 43:34नाम सुनकर एक पल को सोचा कि क्या वो इस
  931. 43:37नाम के किसी व्यक्ति से परिचित है? पर उसे
  932. 43:39याद नहीं आया। फिर उसने अगला सवाल दाग
  933. 43:42दिया। तुम जो यह ऐड बनाने वाले हो वो किस
  934. 43:46कंपनी के लिए है?
  935. 43:48शौर्य ने एक पल सोचा कि एक ही साथ सारे
  936. 43:51पत्ते खोलना ठीक नहीं है। इसीलिए उसने कहा
  937. 43:54एक्चुअली अभी तो मुझे उस कंपनी का नाम पता
  938. 43:56नहीं है। पर शायद एक-द दिनों में इस संबंध
  939. 44:00में हमारी मीटिंग होगी। तब जाकर पता चलेगा
  940. 44:03कि हमें यह ऐड किस कंपनी के लिए बनाना है।
  941. 44:06अभी तो बॉस ने हमें सिर्फ मिस नताशा को
  942. 44:08फाइनल करने के लिए और साथ में शूटिंग की
  943. 44:10सारी तैयारी कर लेने के लिए कहा था। तो
  944. 44:13अभी हमारी यही प्रक्रिया चल रही है। तभी
  945. 44:16शिप्रा कुछ याद करते हुए बोली पता है कभी
  946. 44:20मैंने भी सोचा था कि मिस नताशा से ही मैं
  947. 44:22अपने ब्रांड का एंडोर्समेंट करवाऊंगी। पर
  948. 44:25बजट ने इसकी परमिशन नहीं दी। शायद भविष्य
  949. 44:28में मैं ऐसा कर पाऊं। अच्छा यह तो बढ़िया
  950. 44:32आईडिया है। अगर तुम कहो तो मैं इस बारे
  951. 44:34में मिस नताशा से बात करूं। शौर्य शिप्रा
  952. 44:38के मन की इच्छा को टटोलते हुए बोला तो
  953. 44:40शिप्रा ने मना करते हुए कहा नहीं नहीं अभी
  954. 44:43इसकी कोई जरूरत नहीं है। अभी हमारी बातें
  955. 44:46बिगबुल के साथ हुई हैं। बिग बबुल के भी
  956. 44:48कुछ प्लान है। फिर देखते हैं। ठीक है जैसी
  957. 44:52तुम्हारी इच्छा। शौर्य ने सहमति जताई।
  958. 44:56शौर्य की यह सब बातें सुनकर शिप्रा ने
  959. 44:58सोचा। श्रवण ने इतनी जल्दी अपने लिए इतना
  960. 45:01अच्छा जॉब कैसे ढूंढ लिया? क्या उसे समझने
  961. 45:04में मुझसे कोई गलती हुई है? क्या वो यह सब
  962. 45:07संभाल पाएगा? क्या सच में वो इतना
  963. 45:10एजुकेटेड है कि इतना कुछ खुद ही मैनेज कर
  964. 45:12ले? शिप्रा को उसकी बातें सुनकर उसके
  965. 45:15कैलिबर पर आश्चर्य हो रहा था। इस जॉब के
  966. 45:18लिए उसे कितने ही लोगों से मिलना पड़ेगा।
  967. 45:21उनसे बात करनी पड़ेगी और उन सबको हैंडल
  968. 45:24करना आसान नहीं होगा। वहीं शिप्रा ने तो
  969. 45:26उसे एक भिखारी समझकर उससे कोई खास उम्मीद
  970. 45:29ही नहीं की थी।
  971. 45:31शौर्य का जॉब प्रोफाइल जानकर उसे एक सुखद
  972. 45:34अनुभूति हुई। वो खुश होकर बोली मुझे बहुत
  973. 45:38खुशी है कि तुम्हें इतना अच्छा जॉब मिला
  974. 45:40है। मैं चाहकर भी तुम्हारे लिए ऐसा कुछ
  975. 45:43नहीं कर सकती थी। मेरे दादाजी ने भी जो
  976. 45:46तुम्हारे लिए सोचा था वो एक ड्राइवर के
  977. 45:48जॉब तक ही सीमित था। पर तुम तो सबकी
  978. 45:51उम्मीद से बेहतर निकले। शौर्य को शिप्रा
  979. 45:54से अपने लिए तारीफ भरी बातें सुनकर अच्छा
  980. 45:56लगा। इस समय आधी रात हो रही थी। शौर्य
  981. 46:00गाड़ी ड्राइव कर रहा था और शिप्रा उसके
  982. 46:02बगल वाली सीट पर बैठी थी। सड़क बिल्कुल
  983. 46:04सुनसान थी। इक्कादुक्का गाड़ियां ही आसपास
  984. 46:07से गुजर रही थी। शौर्य ने गाड़ी का शीशा
  985. 46:10खोल दिया। खिड़की से आती हल्की-ठंडी हवा
  986. 46:13सुकून देने वाली थी। शिप्रा की लटें हवा
  987. 46:16में अटखेलियां करने लगी। उसे इतना अच्छा
  988. 46:19लगा कि उसने अपना सिर थोड़ा सा खिड़की के
  989. 46:21बाहर निकालकर खिड़की की हुड पर अपनी ठोड़ी
  990. 46:24टिकाई और आंखें बंद करके हवा को अपने
  991. 46:26चेहरे पर महसूस करने लगी। शौर्य ने जब
  992. 46:29शिप्रा की तरफ देखा तो उसकी नजर उसके
  993. 46:31चेहरे पर ठहर सी गई। कितना सुकून था उस
  994. 46:34चेहरे में। शौर्य को लगा अगर वक्त यहीं
  995. 46:37ठहर जाए तो कितना अच्छा हो। वो यूं ही
  996. 46:40घंटों शिप्रा को देखता रह सकता है। वो इस
  997. 46:42हसीन [संगीत] पल को अपनी यादों में समेट
  998. 46:44लेना चाहता था। उसने मन ही मन कहा। शिप्रा
  999. 46:49मुझे यही सुकून तुम्हारे चेहरे पर चाहिए।
  1000. 46:52और यह मेरा वादा है कि मैं इस चेहरे को
  1001. 46:54कभी किसी परेशानी को छूने नहीं दूंगा। पर
  1002. 46:58कहते हैं ना कि अच्छा वक्त किसी को ज्यादा
  1003. 47:01वक्त नहीं देता। खैर जल्दी ही शिप्रा का
  1004. 47:04घर आ गया। शौर्य ने गाड़ी खड़ी कर दी पर
  1005. 47:07शिप्रा अभी भी उसी अवस्था में कहीं खोई
  1006. 47:09थी। शौर्य कुछ बोला नहीं। बस वहीं बैठा
  1007. 47:12खामोशी से शिप्रा के चेहरे की तरफ देखता
  1008. 47:15रहा। ऐसे ही कुछ पल और बीत गए। फिर अचानक
  1009. 47:18शिप्रा को एहसास हुआ कि गाड़ी तो चल ही
  1010. 47:20नहीं रही है। उसने आंख खोलकर अपने आसपास
  1011. 47:24देखा तो पाया कि वह अपने घर पहुंच चुकी
  1012. 47:26थी। उसने शौर्य की तरफ देखते हुए पूछा।
  1013. 47:30अरे हम कब पहुंचे? ज्यादा समय नहीं हुआ
  1014. 47:34है। बस अभी कुछ देर पहले ही पहुंचे हैं।
  1015. 47:37तो तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं? शौर्य का
  1016. 47:40जवाब सुनकर शिप्रा हैरानी से बोली। तभी
  1017. 47:43शौर्य ने मासूमियत से कहा। आप गहरी नींद
  1018. 47:46में लग रही थी इसीलिए उठाया नहीं। यह क्या
  1019. 47:50बात हुई? ऐसे तो मैं जाने कब तक सोती
  1020. 47:52रहती। शिप्रा अपनी आंखें बड़ी करके बोली
  1021. 47:55तो शौर्य ने सीधा सपाट जवाब दिया। मुझे
  1022. 47:59कौन सा अभी ऑफिस जाना था? जब तक आप सोती
  1023. 48:02रहती, मैं भी अपनी सीट पर ही आराम करता
  1024. 48:04रहता। शौर्य की बात सुनकर शिप्रा जैसे
  1025. 48:07सन्न रह गई। पर उसे उसकी यह बातें पसंद ही
  1026. 48:10आ रही थी। शिप्रा ने गाड़ी का गेट खोला और
  1027. 48:13नीचे उतर कर बोली, ठीक है, गाड़ी पार्क
  1028. 48:17करके आ जाओ। मैं यहीं तुम्हारा इंतजार
  1029. 48:19करती हूं। शौर्य गाड़ी पार्किंग में खड़ी
  1030. 48:21करके वापस आ गया। वो और शिप्रा धीरे-धीरे
  1031. 48:24कदम बढ़ाते हुए घर की तरफ बढ़ गए। शौर्य
  1032. 48:28की जिंदगी में आज कुछ नया होने जा रहा था
  1033. 48:31क्योंकि आज से उसका आशियाना बदल चुका था।
  1034. 48:33वो मन ही मन सोच रहा था। जिंदगी में ऐसी
  1035. 48:37रात भी आएगी कल्पना भी नहीं की थी। शिप्रा
  1036. 48:41के साथ उसके घर में रहना यह सोचकर ही
  1037. 48:43शौर्य रोमांचित हो रहा था। राय विला की
  1038. 48:46ऊंची और भव्य दीवारों के पीछे रात का
  1039. 48:48सन्नाटा अब अपने चरम पर था। घर के भीतर
  1040. 48:51अंधेरा और खामोशी का राज था। इसी खामोशी
  1041. 48:55के बीच शौर्य शिप्रा [संगीत] के पीछे-पीछे
  1042. 48:57उसके घर की तरफ कदम बढ़ा रहा था। शिप्रा
  1043. 49:00के चलने की गति में एक तरह की सावधानी थी।
  1044. 49:03जैसे वह जमीन पर अपने पैरों की आहट भी
  1045. 49:05नहीं होने देना चाहती थी। रात बहुत हो
  1046. 49:08चुकी थी। घर के सभी सदस्य गहरी नींद में
  1047. 49:11थे। शिप्रा मुख्य द्वार के पास पहुंची और
  1048. 49:13एक पल के लिए ठिटक गई। उसके मन में विचार
  1049. 49:16आया कि वह बैल बजाए ताकि कोई अंदर से आकर
  1050. 49:19दरवाजा खोल दे। पर अगले ही पल उसने अपनी
  1051. 49:22कलाई पर बंधी घड़ी देखी। इतनी रात [संगीत]
  1052. 49:24गए किसी को भी नींद से जगाना और परेशान
  1053. 49:27करना उसे ठीक नहीं लगा। उसने अपना इरादा
  1054. 49:30तुरंत बदल लिया। उसने अपने कीमती लेदर के
  1055. 49:33पर्स को खोला और उसमें हाथ डालकर चाबियों
  1056. 49:35[संगीत] का एक गुच्छा निकाला। ताले में
  1057. 49:38चाबी के घूमने की हल्की सी क्लिक की आवाज
  1058. 49:40हुई जो सन्नाटे में किसी धमाके जैसी महसूस
  1059. 49:43हुई। शिप्रा ने धीरे से पल्ला धकेला और घर
  1060. 49:46के अंदर कदम रखा।
  1061. 49:48[संगीत]
  1062. 49:48शौर्य भी एक साई की तरह उसके ठीक
  1063. 49:50पीछे-पीछे अंदर आ गया। यह शौर्य के लिए एक
  1064. 49:53बिल्कुल नया अनुभव था। वो पहली बार शिप्रा
  1065. 49:56के घर के आलीशान माहौल को अंदर से देख रहा
  1066. 49:59था। फर्श पर बिछी महंगी टाइलें और दीवारों
  1067. 50:03पर टंगी पेंटिंग्स [संगीत] रात की हल्की
  1068. 50:05रोशनी में भी अपनी भव्यता का एहसास करा
  1069. 50:07रही थी। शिप्रा ने बिना पीछे मुड़े बस
  1070. 50:10अपने हाथ के इशारे से शौर्य को अपने पीछे
  1071. 50:13आने का संकेत दिया। वो बहुत ही दबे पांव
  1072. 50:16लकड़ी की बनी शानदार सीढ़ियों की तरफ बढ़ी
  1073. 50:18और फर्स्ट फ्लोर की ओर जाने लगी। शौर्य के
  1074. 50:21मन में कई सवाल थे पर उसने खामोश रहना ही
  1075. 50:24बेहतर समझा और शिप्रा का अनुसरण करता रहा।
  1076. 50:28ऊपर पहुंचकर शिप्रा एक बड़े और नक्काशीदार
  1077. 50:30दरवाजे वाले कमरे के पास रुकी। उसने शौर्य
  1078. 50:33की आंखों में देखते हुए उसे वहीं गलियारे
  1079. 50:35में खड़े रहने का इशारा किया। इसके बाद वो
  1080. 50:39खुद उस कमरे के अंदर चली गई। कुछ ही पल
  1081. 50:41बीते थे कि वो वापस बाहर आ गई। उसने अपना
  1082. 50:44पर्स अंदर रख दिया और अब वो पूरी तरह तनाव
  1083. 50:47मुक्त दिख रही [संगीत] थी। फिर उसने शौर्य
  1084. 50:50को साथ आने का इशारा किया और उस कमरे से
  1085. 50:52बिल्कुल सटे हुए दूसरे कमरे की ओर बढ़ गई।
  1086. 50:55उसने कमरे का दरवाजा खोला और शौर्य को
  1087. 50:58अंदर आने का संकेत दिया। कमरे के अंदर कदम
  1088. 51:01रखते ही शिप्रा ने स्विच बोर्ड की तरफ हाथ
  1089. 51:03बढ़ाकर लाइट ऑन कर दी। जैसे ही बल्ब की
  1090. 51:06रोशनी कमरे [संगीत] में फैली, शौर्य की
  1091. 51:08आंखें चौंधिया गई। कमरा बेहद व्यवस्थित,
  1092. 51:11साफ सुथरा और सुरुचिपूर्ण फर्नीचर से सजा
  1093. 51:13हुआ था। दीवारों का रंग आंखों को सुकून
  1094. 51:16देने वाला था। उसने अनचाहे ही अपने मन में
  1095. 51:19उस पुराने सीलन भरे सर्वेंट क्वार्टर की
  1096. 51:22तुलना इस कमरे से की और पाया कि यह उससे
  1097. 51:24लाख गुना बेहतर है। शिप्रा ने कमरे के
  1098. 51:27वातावरण को सामान्य बनाने के लहजे में
  1099. 51:29कहा। आज से यही तुम्हारा कमरा है। उम्मीद
  1100. 51:33करती हूं कि यह तुम्हें पसंद आया होगा।
  1101. 51:36शौर्य [संगीत] ने कमरे के आरामदायक बिस्तर
  1102. 51:38और सोफे को देखते हुए बड़े ही संतुष्ट भाव
  1103. 51:40से जवाब दिया। नहीं यह बढ़िया है और मुझे
  1104. 51:43पसंद भी आया है। शिप्रा ने कमरे के कोने
  1105. 51:47में रखी विशाल वार्ड्रोब की तरफ इशारा
  1106. 51:49किया और आगे कहा चलो यह अच्छी बात है कि
  1107. 51:52तुम्हें कमरा पसंद आया। मैंने राहुल से
  1108. 51:55बोलकर तुम्हारे हिसाब से कुछ कपड़े भी
  1109. 51:57मंगवा दिए हैं जो इस कमरे के वार्ड्रोब
  1110. 51:59में रखे हुए हैं। तुम सोने से पहले चेंज
  1111. 52:01कर लेना। शौर्य ने अपनी सहमति जताते हुए
  1112. 52:04संक्षिप्त में उत्तर [संगीत] दिया, ठीक है
  1113. 52:07मैं देख लूंगा। शिप्रा को शायद अब थकान
  1114. 52:10महसूस हो रही थी। उसने कमरे से बाहर
  1115. 52:12निकलने के लिए कदम बढ़ाए। पर दरवाजे के
  1116. 52:15पास पहुंचकर एक बार फिर पीछे मुड़ी और कहा
  1117. 52:19तो फिर ठीक है मैं चलती हूं। अब सुबह
  1118. 52:22मिलेंगे। अगर तुम्हें किसी चीज की जरूरत
  1119. 52:24हो तो मुझे बता देना। इसके साथ वाला कमरा
  1120. 52:27मेरा ही है। शिप्रा के जाते ही शौर्य ने
  1121. 52:31एक गहरी और लंबी अंगड़ाई ली। उसने अपने
  1122. 52:34होठों में ही बहुत धीरे से बुदबुदाया।
  1123. 52:37अपने घर में जगह भी दी तो कमरा अलग कर
  1124. 52:39दिया। कोई बात नहीं शिपरा राय एक दिन तुम
  1125. 52:43खुद ही मुझे अपने कमरे में भी [संगीत]
  1126. 52:44बुलाओगी। शौर्य फुर्ती से वार्ड्रोब के
  1127. 52:47पास गया और उसने एक नाइट ड्रेस निकाली।
  1128. 52:50अपने कपड़े बदले और फिर गद्देदार बिस्तर
  1129. 52:52पर लेट गया। काफी समय बाद उसे आज आरामदायक
  1130. 52:55नींद आने वाली थी। अगली सुबह उसे ऐसा लगा
  1131. 52:59जैसे कोई उसे धीरे-धीरे हिलाकर जगाने की
  1132. 53:01कोशिश कर रहा है। उसने भारी आंखों से अपनी
  1133. 53:04पलकें झपकाई और सामने देखा तो राहुल उसके
  1134. 53:07बिस्तर के पास खड़ा उसे उठा रहा था। शौर्य
  1135. 53:10ने अपनी आवाज को थोड़ा साफ करते हुए राहुल
  1136. 53:12से पूछा।
  1137. 53:14क्या बात है?
  1138. 53:16[गला साफ़ करने की आवाज़] इतनी सुबह-सुबह
  1139. 53:17क्यों उठाने आ गए?
  1140. 53:20राहुल जो पहले से ही स्पोर्ट्स गियर में
  1141. 53:22तैयार और उत्साहित दिख रहा था मुस्कुरा कर
  1142. 53:24बोला अब और कितना सोगे जीजू चलो बाहर चलकर
  1143. 53:29टेनिस खेलते हैं रागिनी भी आ चुकी है उसने
  1144. 53:32खास करके मुझे बोला कि मैं आपको बुला लूं
  1145. 53:35शौर्य को राहुल की बात सुनकर थोड़ा अचरज
  1146. 53:38हुआ उसने अंगड़ाई लेते हुए सवाल किया क्या
  1147. 53:42टेनिस इतनी सुबह क्या तुम लोग रोज खेलते
  1148. 53:46हो राहुल ने अपने हाथ में पकड़े रैकेट को
  1149. 53:48हवा हवा में लहराते हुए बड़े गर्व से कहा,
  1150. 53:51हां जीजू, असल में कुछ ही दिनों में हमारा
  1151. 53:54स्टेट लेवल का ट्रायल होने वाला है।
  1152. 53:56जिसमें मैं और रागिनी दोनों पार्टिसिपेट
  1153. 53:58करने वाले हैं। इसीलिए रोज सुबह-सुबह हम
  1154. 54:01लोग यहां कोर्ट पर जमकर प्रैक्टिस करते
  1155. 54:03हैं। शौर्य अब बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया
  1156. 54:06था। उसने खिड़की के बाहर फैले टेनिस कोर्ट
  1157. 54:09की ओर देखा और पूछा।
  1158. 54:11और कौन-कौन खेलते हैं? राहुल ने तुरंत
  1159. 54:15जवाब दिया, हमारे साथ कुलवंत भैया और मयूर
  1160. 54:18भी होते हैं। [संगीत] आपको पता है कुलवंत
  1161. 54:20भैया स्टेट लेवल के खिलाड़ी रह चुके हैं
  1162. 54:22और जब से आपने उन्हें हराया है, तब से वह
  1163. 54:25और भी ज्यादा प्रैक्टिस करने लगे हैं।
  1164. 54:27राहुल की यह बात सुनकर शौर्य समझ गया कि
  1165. 54:30कुलवंत के मन में उस हार की कसक अभी भी
  1166. 54:33ताजी है। वो बेड से उतरते हुए आत्मविश्वास
  1167. 54:36के साथ बोला।
  1168. 54:38ठीक है। चलो चल कर देखते हैं तुम लोगों का
  1169. 54:41खेल। कुछ ही देर में शौर्य राहुल के साथ
  1170. 54:44टेनिस कोर्ट पहुंचा। वहां उसने देखा कि
  1171. 54:46कोर्ट पर कुलवंत और मयूर के बीच एक
  1172. 54:48आक्रामक मैच चल रहा था। रागिनी कोर्ट के
  1173. 54:51किनारे नेट के पास खड़ी होकर बहुत ध्यान
  1174. 54:54से उनके खेल की बारीकियों को देख रही थी।
  1175. 54:57शौर्य ने अपनी नजर चारों ओर घुमाई। उसने
  1176. 55:00राहुल के करीब जाकर धीरे से पूछा।
  1177. 55:02तुम्हारी वो बहन क्या नाम था उसका? हां
  1178. 55:05युविका। वो नजर नहीं आ रही। इस पर राहुल
  1179. 55:09ने एक शरारती मुस्कान के साथ जवाब दिया।
  1180. 55:12आप चिंता मत करो वो भी आ जाएगी। तभी अचानक
  1181. 55:16पीछे से एक तीखी और व्यंग्यात्मक आवाज
  1182. 55:18कोर्ट पर गूंजी। अरे देखो तो आज कौन आया
  1183. 55:21है। आज तो फिर से हमारे बीच मिस्टर श्रवण
  1184. 55:24पधार चुके हैं। यह आवाज किसी और की नहीं
  1185. 55:27बल्कि युविका की ही थी। शौर्य ने शांत भाव
  1186. 55:30से पीछे पलट कर उसे देखा और बोला। मैं
  1187. 55:33राहुल से अभी आपके बारे में ही पूछ रहा
  1188. 55:35था। बस यहां आपकी ही कमी नजर आ रही थी।
  1189. 55:38[संगीत] आप आ गई हैं तो अब वो भी पूरी हो
  1190. 55:40गई है। अब तक रागिनी भी शौर्य की मौजूदगी
  1191. 55:43को भांप चुकी थी। वो दौड़कर उनके पास आ
  1192. 55:46गई। उसने विनम्रता से पूछा। आप कैसे हैं
  1193. 55:49जीजू? मैं कब से दोबारा आपका खेल देखना
  1194. 55:52चाहती थी। अब जाकर मौका मिला है। उम्मीद
  1195. 55:55करती हूं कि मुझे आपसे कुछ सीखने को
  1196. 55:57मिलेगा।
  1197. 55:58युविका को रागिनी की यह प्रशंसा बिल्कुल
  1198. 56:00रास नहीं आई। उसने तुरंत अपनी कड़वी जुबान
  1199. 56:03से तंज कसते हुए कहा। रागिनी तुम कुछ
  1200. 56:06ज्यादा ही श्रवण से उम्मीद कर रही हो। उस
  1201. 56:08दिन यह गलती से जीत क्या गया? पता नहीं
  1202. 56:11तुमने इसे क्या समझ लिया है। ऐसी बेवकूफी
  1203. 56:14करने का कोई मतलब नहीं है। तुम्हारे पास
  1204. 56:16जब कुलवंत भैया जैसे सीनियर खिलाड़ी हैं
  1205. 56:18तो तुम्हें किसी और से कुछ सीखने की जरूरत
  1206. 56:21क्या है? शौर्य ने युविका की कड़वाहट का
  1207. 56:24जवाब बहुत ही शालीनता से दिया। आपकी दीदी
  1208. 56:27[संगीत] सही कह रही है रागिनी। आप वैसे भी
  1209. 56:30अच्छा खेलती हैं और आपको सिखाने के लिए
  1210. 56:32आपके भैया हैं ही। तो मुझे नहीं लगता कि
  1211. 56:35मैं आपकी कोई मदद कर पाऊंगा।
  1212. 56:38रागिनी शौर्य की इस विनम्रता से और भी
  1213. 56:40प्रभावित हुई। उसने दृढ़ता के साथ शौर्य
  1214. 56:43की आंखों में देखते हुए कहा।
  1215. 56:46मेरे लिए क्या अच्छा है? यह मुझे अच्छे से
  1216. 56:48पता है जीजू और मैंने यह तो कभी कहा ही
  1217. 56:51नहीं [संगीत] कि मेरे कुलवंत भैया अच्छा
  1218. 56:52नहीं खेलते। मैं उनसे भी अभी तक सीखती ही
  1219. 56:55रही हूं। लेकिन अब जब मुझे आपसे भी कुछ
  1220. 56:57सीखने का मौका मिल रहा है तो मैं उसे अपने
  1221. 56:59हाथ से क्यों जाने दूं। तभी कोर्ट पर चल
  1222. 57:02रहा मुकाबला एक तेज शॉट के साथ समाप्त
  1223. 57:04हुआ। मैच खत्म करने के बाद कुलवंत पसीने
  1224. 57:07में नहाया हुआ कोर्ट के किनारे आया और
  1225. 57:10शौर्य को सीधे चुनौती देते हुए बोला श्रवण
  1226. 57:14आ जाओ मैदान में। क्यों ना एक गेम हमारे
  1227. 57:16बीच भी हो जाए। शौर्य कुलवंत के लहजे में
  1228. 57:20छिपी उस टीस को बखूबी महसूस कर सकता था जो
  1229. 57:22उसे अपनी पिछली हार से मिली थी। उसने बहुत
  1230. 57:25ही सहज भाव से मैच को टालना चाहा और कहा।
  1231. 57:29इसकी कोई जरूरत नहीं है भैया। मैं तो बस
  1232. 57:31रागिनी और राहुल का खेल देखने के लिए आया
  1233. 57:33था। आप खेलो मैं यहीं ठीक हूं। इसी समय घर
  1234. 57:38के भीतर शिप्रा की भी नींद खुल चुकी थी।
  1235. 57:40इसीलिए वो सीधे किचन में गई और अपने लिए
  1236. 57:43चाय बनाने लगी। तभी उसे शौर्य का ख्याल
  1237. 57:46आया। वो चाय का कप लेकर शौर्य के कमरे की
  1238. 57:49ओर बढ़ी। पर वहां का मंजर देखकर वो ठिटक
  1239. 57:52गई। कमरा पूरी तरह खाली था। वो चाय का कप
  1240. 57:55हाथ में लिए घर के बाहर लॉन की तरफ आई।
  1241. 57:58उसे शौर्य भी वहां नजर आ गया। शिप्रा को
  1242. 58:02देखते ही युविका ने पासा फेंका। ये लो अब
  1243. 58:05तो शिप्रा भी आ गई। अब शायद शिप्रा कहेगी
  1244. 58:08तो श्रवण कुलवंत भैया के साथ एक सोलो मैच
  1245. 58:10खेलने के लिए तैयार हो जाएगा। शिप्रा ने
  1246. 58:14हैरानी से राहुल से पूछा तो उसने कहा
  1247. 58:18कुलवंत भैया जीजू के साथ एक सोलो मैच
  1248. 58:20खेलना चाहते हैं। पर जीजू इसके लिए तैयार
  1249. 58:22नहीं है।
  1250. 58:25शिप्रा समझ गई कि कुलवंत अपनी हार का बदला
  1251. 58:27लेना चाहता है। मयूर ने भी दबाव डाला। हां
  1252. 58:31शिप्रा तुम बोलो श्रवण को। शायद तुम्हारी
  1253. 58:33बात मानकर यह कुलवंत भैया के साथ एक मैच
  1254. 58:36खेलने को तैयार हो जाए। शिप्रा ने शौर्य
  1255. 58:39का पक्ष लेते हुए कहा इसकी क्या जरूरत है?
  1256. 58:43तुम लोग आपस में खेलो। श्रवण को क्यों
  1257. 58:45इसमें शामिल कर रहे हो? युविका ने फिर से
  1258. 58:48उकसाया। लो लगता है कि शिप्रा डर गई है कि
  1259. 58:52कहीं श्रवण [संगीत] कुलवंत भैया से बुरी
  1260. 58:54तरह हार ना जाए। इसीलिए वो नहीं चाहती कि
  1261. 58:57श्रवण उनका मुकाबला करें। शिप्रा ने शांत
  1262. 59:00स्वर में जवाब दिया। अगर तुम्हें यही
  1263. 59:03समझना है तो यही सही। कुलवंत ने बहुत ही
  1264. 59:07चतुराई से कहा, क्या शिप्रा? तुम भी
  1265. 59:09छोटी-छोटी बातों को दिल पर ले लेती हो। यह
  1266. 59:12एक फ्रेंडली मैच है। मैं जानता हूं कि
  1267. 59:14श्रवण अच्छा खेलता है। इसीलिए मैं उसके
  1268. 59:16साथ खेलना चाहता हूं।
  1269. 59:18शिप्रा ने अब बात शौर्य पर डाल दी। यह
  1270. 59:21फैसला तो श्रवण का होगा कि उसे मैच खेलना
  1271. 59:24है या नहीं। मैं बीच में कोई नहीं हूं जो
  1272. 59:26यह कहे कि उसे मैच खेलना चाहिए या नहीं।
  1273. 59:29राहुल और रागिनी ने भी मिन्नतें की। खेल
  1274. 59:32लो ना जीजू। कौन सा यहां जमीन जायदाद किसी
  1275. 59:34के नाम करनी है। या तो हार होगी या जीत।
  1276. 59:37हां, इससे कुलवंत भैया की इच्छा जरूर पूरी
  1277. 59:40हो जाएगी।
  1278. 59:42शौर्य ने सबकी ज़िद और कुलवंत की आंखों में
  1279. 59:44छिपे उस घमंड को देखा। तभी रागिनी ने भी
  1280. 59:47अनुरोध किया बस एक मैच की बात है जीजू खेल
  1281. 59:51लो ना। आखिरकार शौर्य ने गहरी सांस लेते
  1282. 59:54हुए कहा अगर सबकी यही इच्छा है तो फिर ठीक
  1283. 59:57है। मैं कुलवंत भैया के साथ एक मैच खेलने
  1284. 1:00:00के लिए तैयार हूं। शौर्य के इस फैसले ने
  1285. 1:00:03शिप्रा को चौंका दिया। वो शौर्य के चेहरे
  1286. 1:00:06पर कोई तनाव ना देखकर हैरान थी। युविका ने
  1287. 1:00:10शोर मचाते हुए कहा ठीक है तो फिर देर किस
  1288. 1:00:13बात की? मैच शुरू करो भैया। श्रवण तुम
  1289. 1:00:16तैयार तो हो? शौर्य ने मुस्कुरा कर जवाब
  1290. 1:00:19दिया, "हां मैं तैयार हूं। अब मैच शुरू कर
  1291. 1:00:22सकते हैं।"
  1292. 1:00:24राहुल ने अपना रैकेट शौर्य को थमाया।
  1293. 1:00:27शौर्य कोर्ट में कुलवंत के आमने-सामने
  1294. 1:00:29खड़ा हो गया। कुलवंत ने पूछा।
  1295. 1:00:32तुम तैयार हो तो मैच शुरू करें? शौर्य ने
  1296. 1:00:36बहुत ही शांत तरीके से कहा। हां जरूर आप
  1297. 1:00:39ही सर्विस कीजिए। खेल की शुरुआत में
  1298. 1:00:41कुलवंत की सर्विस पर शौर्य थोड़ा
  1299. 1:00:43लड़खड़ाया क्योंकि उसने वार्म अप नहीं
  1300. 1:00:46किया था। युविका ने मयूर की तरफ देखा।
  1301. 1:00:48मयूर ने भी चुटकी लेते हुए धीरे से कहा।
  1302. 1:00:52लगता है आज किस्मत श्रवण का साथ नहीं दे
  1303. 1:00:54रही।
  1304. 1:00:56लेकिन जैसे ही खेल का दूसरा सेट शुरू हुआ,
  1305. 1:00:58शौर्य की चाल बदल गई। शौर्य ने एक ऐसा
  1306. 1:01:01क्रॉस कोड शॉट मारा कि कुलवंत गेंद तक
  1307. 1:01:04पहुंच भी नहीं पाया। रागिनी और राहुल जोश
  1308. 1:01:07में आकर चिल्लाने लगे। कुलवंत तब बौखला
  1309. 1:01:09गया था। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक तेज
  1310. 1:01:13स्मैश मारा। लेकिन शौर्य ने उसे बड़ी
  1311. 1:01:15आसानी से ना केवल डिफेंड किया बल्कि उसे
  1312. 1:01:18ड्रॉप शॉट में बदल दिया। गेंद नेट के
  1313. 1:01:21बिल्कुल करीब गिर कर रुक गई। जैसे ही
  1314. 1:01:23अंतिम पॉइंट के साथ शौर्य ने मैच जीता,
  1315. 1:01:26युविका का चेहरा उतर गया। कुलवंत अपना
  1316. 1:01:29रैकेट जमीन पर टिकाए हाफ रहा था। शौर्य ने
  1317. 1:01:32शांत कदमों से नेट के पास जाकर कुलवंत की
  1318. 1:01:35ओर हाथ बढ़ाया। लेकिन कुलवंत ने शौर्य से
  1319. 1:01:38हाथ नहीं मिलाया। कुलवंत को यकीन नहीं हो
  1320. 1:01:41रहा था कि आज वो फिर से शौर्य से हार गया।
  1321. 1:01:43वहीं युविका जो थोड़ी देर पहले तक चहक रही
  1322. 1:01:46थी अचानक चुप हो गई। वो खुद भी इस नतीजे
  1323. 1:01:49से हैरान थी। अब तक कुलवंत उन सबके बीच एक
  1324. 1:01:52हीरो की तरह था। लेकिन आज शौर्य ने उसका
  1325. 1:01:54स्टारडम धूमिल कर दिया था। जब कुलवंत को
  1326. 1:01:57समझ आ गया कि अब कोई बहाना काम नहीं आएगा,
  1327. 1:02:00तो वह शौर्य के पास आया और बोला, मानना
  1328. 1:02:03पड़ेगा। मैंने तुम्हें अंडरएस्टिमेट किया
  1329. 1:02:05था। लेकिन अब मैं मानता हूं कि तुम सच में
  1330. 1:02:08मुझसे बेहतर हो। ऐसा कुछ नहीं है भैया। आज
  1331. 1:02:12मेरा दिन अच्छा था इसीलिए मैं जीत पाया।
  1332. 1:02:14शौर्य ने विनम्रता से कहा। आप तो कमाल हो
  1333. 1:02:18जीजू आपका तो कोई जवाब ही नहीं। मैंने
  1334. 1:02:20आपसे बेहतर टेनिस पैर नहीं देखा। अब आइए
  1335. 1:02:23एक-एक हाथ मेरे साथ भी हो जाए। जीतने का
  1336. 1:02:26तो पता नहीं लेकिन मैं आपको टक्कर देने की
  1337. 1:02:29पूरी कोशिश करूंगी। रागिनी उत्साहित होकर
  1338. 1:02:31बोली जहां रागिनी शौर्य के खेल से खुश थी
  1339. 1:02:34वहीं युविका का चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे
  1340. 1:02:37किसी ने उसके सपनों का महल तोड़ दिया हो।
  1341. 1:02:40शिप्रा भी शौर्य की जीत से बेहद खुश थी
  1342. 1:02:42लेकिन उसे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की थी
  1343. 1:02:44कि शौर्य की जीत ने युविका के चेहरे की
  1344. 1:02:47चमक छीन [संगीत] ली थी। इसके बाद शौर्य ने
  1345. 1:02:50युविका और राहुल के साथ भी एक-एक मैच
  1346. 1:02:52खेला। यह तो तय था कि दोनों मैच शौर्य ने
  1347. 1:02:55ही जीते। लेकिन इससे रागिनी और राहुल की
  1348. 1:02:57अच्छी प्रैक्टिस हो गई। मैच खत्म होने के
  1349. 1:03:00बाद शौर्य शिप्रा के साथ घर जाने के लिए
  1350. 1:03:02मुड़ा। तभी रागिनी सामने आकर बोली, "जीजू,
  1351. 1:03:06परसों मेरा ट्रायल है। अगर आप मेरे साथ
  1352. 1:03:08चलोगे, मुझे अच्छा लगेगा।"
  1353. 1:03:11रागिनी की बात सुनकर शौर्य ने एक बार
  1354. 1:03:13शिप्रा की तरफ देखा। पर शिप्रा ने कुछ
  1355. 1:03:16नहीं कहा। यह देखकर रागिनी शिप्रा से
  1356. 1:03:18बोली, दी, आप कहो ना जीजू से। यह आपकी बात
  1357. 1:03:22नहीं टालेंगे। रागिनी की बात सुनकर शिप्रा
  1358. 1:03:25ना चाहते हुए भी शौर्य से बोली, अगर
  1359. 1:03:29तुम्हारा कोई जरूरी काम ना हो तो [संगीत]
  1360. 1:03:30देख लो। तुम्हारे साथ होने से इन्हें
  1361. 1:03:33थोड़ी हिम्मत मिलेगी। शौर्य बोला मैं वादा
  1362. 1:03:37तो नहीं करता लेकिन कोशिश करूंगा। शौर्य
  1363. 1:03:41की बात सुनकर रागिनी खुश हो गई। उसने
  1364. 1:03:43धन्यवाद देते हुए कहा आपने इतना कह दिया
  1365. 1:03:46तो मैं मान लेती हूं कि आप मेरे साथ जरूर
  1366. 1:03:48चलोगे। रागिनी की बात से युविका चिढ़ रही
  1367. 1:03:52थी। उसे रागिनी द्वारा शौर्य को इतना
  1368. 1:03:54सम्मान देना पसंद नहीं आ रहा था। लेकिन वो
  1369. 1:03:57कुछ कह नहीं पाई। कुलवंत पहले ही शौर्य से
  1370. 1:03:59हारने के बाद ऑफिस जाने की बात कहकर वहां
  1371. 1:04:02से जा चुका था। इसके बाद सभी अपने-अपने घर
  1372. 1:04:05चले गए। शौर्य भी राहुल और शिप्रा के साथ
  1373. 1:04:07शिप्रा के घर आ गया। उसने देखा कि राजदीप
  1374. 1:04:10राय और बीना जी सेंटर टेबल पर बैठे चाय पी
  1375. 1:04:13रहे थे। राजदीप जी ने जब शौर्य, राहुल और
  1376. 1:04:17शिप्रा को घर में आते देखा तो उन्होंने
  1377. 1:04:19शंतों को आवाज देते हुए कहा, "शंतो जरा
  1378. 1:04:24तीन कप चाय और बना देना। फिर उन्होंने
  1379. 1:04:27तीनों से कहा आओ बैठो। तीनों आकर सेंटर
  1380. 1:04:32टेबल पर बैठ गए। राजदीप जी ने शौर्य से
  1381. 1:04:35कहा श्रवण तुम तो बहुत अच्छा टेनिस खेलते
  1382. 1:04:38हो। मैंने छत से देखा जब तुम कुलवंत को
  1383. 1:04:41हरा रहे थे। कुलवंत बहुत अच्छा खिलाड़ी
  1384. 1:04:44है। अगर तुमने उसे हरा दिया है तो मतलब
  1385. 1:04:47तुम भी बेहतरीन खिलाड़ी हो। राजदीप जी की
  1386. 1:04:50बात सुनकर शौर्य हल्की मुस्कान के साथ
  1387. 1:04:52बोला। जी ऐसा कुछ नहीं है। बस आज मेरा
  1388. 1:04:56नसीब अच्छा था। तभी राहुल ने तारीफ करते
  1389. 1:04:59हुए कहा क्या जीजू अब इतना भी हम्ल होने
  1390. 1:05:03की जरूरत नहीं है। आप कुलवंत भैया से
  1391. 1:05:05अच्छे खिलाड़ी हो। जब आप सर्विस करते हो
  1392. 1:05:08तो देखने लायक होता है। आपके शरीर की जो
  1393. 1:05:11फ्लेक्सिबिलिटी है वो तो कमाल है। मैं तो
  1394. 1:05:14चाहता हूं ऐसी फ्लेक्सिबिलिटी मुझ में भी
  1395. 1:05:16आ जाए। इस पर शौर्य मुस्कुराते हुए बोला,
  1396. 1:05:20ज्यादा मुश्किल नहीं है। अगर तुम योग के
  1397. 1:05:22कुछ आसन करो तो जल्दी ही तुम्हें अपने
  1398. 1:05:25शरीर में बदलाव नजर आने लगेगा। अगर ऐसी
  1399. 1:05:28बात है तो आप मुझे सिखा देना जीजू मैं
  1400. 1:05:31जरूर फॉलो करूंगा। राहुल एक आज्ञाकारी
  1401. 1:05:34शिष्य की तरह बोला। अब तक संतो सबके सामने
  1402. 1:05:37चाय रखकर [संगीत] जा चुकी थी। शौर्य ने
  1403. 1:05:39जल्दी-जल्दी अपनी चाय खत्म की और उठते हुए
  1404. 1:05:42बोला, "एक जरूरी काम के लिए आज मुझे
  1405. 1:05:45निकलना पड़ेगा। शाम को मिलता हूं। इतना
  1406. 1:05:48कहकर वो अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। शिप्रा
  1407. 1:05:51जो अब तक कुछ बोल नहीं रही थी, सिर्फ
  1408. 1:05:53शौर्य की हर एक्टिविटी को ध्यान से देख
  1409. 1:05:55रही थी। जब शौर्य ने राहुल को योग के
  1410. 1:05:58आसनों के बारे में बताया, तो उसे आश्चर्य
  1411. 1:06:01हुआ कि शौर्य को योग की भी इतनी अच्छी
  1412. 1:06:03जानकारी थी। किसी भिखारी का ऐसा कायाकल्प
  1413. 1:06:06शिप्रा ने कभी नहीं सोचा था। शौर्य के
  1414. 1:06:10जाने के बाद राजदीप राय ने शिप्रा से कहा।
  1415. 1:06:13अब तो कोई श्रवण को देखकर यह सोच भी नहीं
  1416. 1:06:15सकता कि यह कभी भिखारी रहा होगा। जरूर
  1417. 1:06:19इसके अतीत में कुछ ऐसा है जिसकी वजह से
  1418. 1:06:21इसे वो जीवन जीना पड़ा था। फिर उन्होंने
  1419. 1:06:25[संगीत] शिप्रा की तरफ देखते हुए पूछा।
  1420. 1:06:27बेटा तुम्हें इसके अतीत के बारे में कुछ
  1421. 1:06:30पता है? अपने पिता का सवाल सुनकर शिप्रा
  1422. 1:06:33बोली। बस इतना पता है कि पुश्तैनी संपत्ति
  1423. 1:06:36के [संगीत] लिए इसके परिवार वाले ही इसकी
  1424. 1:06:39जान लेना चाहते थे। एक हादसे के बाद कुछ
  1425. 1:06:42मछुआरों ने इसकी जान बचाई [संगीत] और उसके
  1426. 1:06:44बाद इसने मंदिर में शरण ली। अपने लोगों से
  1427. 1:06:48धोखा खाकर शायद इसे ऐसी विरक्ति हो गई कि
  1428. 1:06:51इसने कभी भी वापस जाने की कोशिश ही नहीं
  1429. 1:06:53की।
  1430. 1:06:55अच्छा तो ऐसी बात है। यानी यह शुरू से
  1431. 1:06:58भिखारी नहीं था। हालात ने इसे वो दौर
  1432. 1:07:01दिखाया था। राजदीप प्राय सोचते हुए बोले।
  1433. 1:07:04फिर उन्होंने पूछा इसकी [संगीत] पढ़ाई
  1434. 1:07:07लिखाई के बारे में कुछ पता है तुम्हें?
  1435. 1:07:10नहीं पापा इस बारे में मैंने कभी उससे कुछ
  1436. 1:07:13नहीं पूछा लेकिन देखकर [संगीत] लगता है कि
  1437. 1:07:15यह पढ़ा लिखा है। आफ्टर ऑल जिस तरह का जॉब
  1438. 1:07:18इसे मिला है उसे मैनेज करना आसान नहीं
  1439. 1:07:20होता। शिप्रा ने जवाब दिया अच्छा क्या जॉब
  1440. 1:07:25मिला है? राजदीप राय ने उत्सुकता से पूछा
  1441. 1:07:28तो शिप्रा बोली इसे एक कंपनी का ब्रांड
  1442. 1:07:30एंडोर्समेंट संभालने का काम मिला है। ऐड
  1443. 1:07:33कैंपेन के लिए मिस नताशा को हायर करने की
  1444. 1:07:36बात चल रही है और पूरी [संगीत] शूटिंग की
  1445. 1:07:38जिम्मेदारी भी इसी की है। ऐसा काम हर किसी
  1446. 1:07:41के बस की बात नहीं होती। यह तो बड़ी बात
  1447. 1:07:45है। लेकिन इसे यह जॉब मिला कैसे? राजदीप
  1448. 1:07:48राय ने फिर पूछा तो शिप्रा ने कहा यह तो
  1449. 1:07:51मुझे नहीं पता और मैंने पूछा भी नहीं।
  1450. 1:07:54लेकिन हो सकता है इसके कुछ पुराने कनेक्शन
  1451. 1:07:56हो क्योंकि उसी की वजह से हमारी बिग बुल
  1452. 1:07:59के साथ पार्टनरशिप भी हो पाई है। शिप्रा
  1453. 1:08:03की बात सुनकर राजदीप राय संतुष्ट नजर आए।
  1454. 1:08:06अब उन्हें यह चिंता नहीं रही कि श्रवण कोई
  1455. 1:08:08नाकारा इंसान है। उसका प्रभावशाली
  1456. 1:08:10व्यक्तित्व वाकई काबिले तारीफ था। ऐसा कि
  1457. 1:08:14कोई भी उससे प्रभावित हो जाए। तभी
  1458. 1:08:16उन्होंने देखा कि शौर्य सीढ़ियों से नीचे
  1459. 1:08:19आ रहा था। वह पूरी तरह तैयार होकर आया था।
  1460. 1:08:22नीचे आकर उसने शिप्रा से कहा, "मैं निकल
  1461. 1:08:25रहा हूं। मुझे आज जल्दी ऑफिस पहुंचना है।"
  1462. 1:08:29शिप्रा ने उसे रोकते हुए कहा, "अरे जाने
  1463. 1:08:32से पहले नाश्ता तो कर लो।" मैं ऑफिस में
  1464. 1:08:34कर लूंगा। अभी मुझे निकलना है। इतना कहकर
  1465. 1:08:38शौर्य बाहर चला गया। शिप्रा उसे जाते हुए
  1466. 1:08:41देखती रही। दरअसल, आज उसे वहीं पास में
  1467. 1:08:44अपना एक ऑफिस देखना था। साथ ही उसे मिस
  1468. 1:08:47नताशा से मिलकर ऐड के लिए एग्रीमेंट भी
  1469. 1:08:49करना था। उसने शिप्रा से जो कुछ भी कहा था
  1470. 1:08:52अब उसे सच में पूरा करना था। शिप्रा के घर
  1471. 1:08:56से निकलकर शौर्य सीधे होटल राजकमल पहुंचा।
  1472. 1:08:59वहां पहुंचकर उसने मेनका के बारे में पूछा
  1473. 1:09:02तो पता चला कि वो अभी तक आई नहीं है। इसके
  1474. 1:09:05बाद वो विक्रम के रूम में चला गया। विक्रम
  1475. 1:09:08अपने कमरे में नाश्ता कर रहा था। जैसे ही
  1476. 1:09:10उसने शौर्य को देखा वो बोला अरे बॉस आप
  1477. 1:09:14सुबह-सुबह वो भी होटल में? सब ठीक तो है?
  1478. 1:09:18शौर्य ने उसे झड़कते हुए कहा, क्या मतलब
  1479. 1:09:21है तुम्हारा? क्या मैं सुबह-सुबह यहां
  1480. 1:09:23नहीं आ सकता? अरे नहीं बॉस, ऐसी बात नहीं
  1481. 1:09:26है। बस मुझे आपकी इतनी सुबह यहां आने की
  1482. 1:09:28उम्मीद नहीं थी। इसीलिए पूछ लिया। विक्रम
  1483. 1:09:32ने सफाई दी। तो फिर क्या उम्मीद थी
  1484. 1:09:35तुम्हें? शौर्य ने हल्की नाराजगी से पूछा।
  1485. 1:09:38अरे बॉस आप तो नाराज हो गए। अच्छा छोड़िए
  1486. 1:09:41यह सब। यह बताइए कि आपने नाश्ता किया या
  1487. 1:09:44नहीं? विक्रम ने बात बदलते हुए कहा। शौर्य
  1488. 1:09:48ने उसकी प्लेट की तरफ देखते हुए कहा, नहीं
  1489. 1:09:51अभी कुछ नहीं खाया। जल्दी से मेरे लिए भी
  1490. 1:09:53कुछ मंगा दो। मेरे पेट में भी चूहे कूद
  1491. 1:09:55रहे हैं। ठीक है बॉस, अभी मंगवाता हूं।
  1492. 1:09:59विक्रम ने तुरंत फोन उठाया और शौर्य की
  1493. 1:10:01पसंद के हिसाब से नाश्ते का आर्डर दे
  1494. 1:10:03दिया। थोड़ी ही देर में एक वेटर ट्रॉली पर
  1495. 1:10:06नाश्ता लेकर कमरे में आया और शौर्य के
  1496. 1:10:09सामने प्लेट सजा दी। शौर्य ने भी विक्रम
  1497. 1:10:12के साथ बैठकर नाश्ता खत्म किया। इसके बाद
  1498. 1:10:14दोनों मेनका से मिलने के लिए कमरे से बाहर
  1499. 1:10:17निकल गए। शौर्य ने सोचा अब तक शायद मेनका
  1500. 1:10:20आ गई होगी। यही सोचकर वो सीधे उसके केबिन
  1501. 1:10:23में पहुंचा। संयोग से इस समय मेनका अपने
  1502. 1:10:26केबिन में मौजूद थी। शौर्य को देखकर वो
  1503. 1:10:29हैरानी से बोली। क्या बात है? आज तो तुम
  1504. 1:10:33बहुत सुबह यहां आ गए हो। हां, आज कुछ खास
  1505. 1:10:36काम था तुमसे। इसीलिए जल्दी आ गया। मुझे
  1506. 1:10:40तुम्हारी मदद चाहिए। शौर्य सामने की
  1507. 1:10:43कुर्सी पर बैठते हुए बोला तो मेनका ने
  1508. 1:10:46उत्सुकता से पूछा अच्छा ऐसा क्या काम पड़
  1509. 1:10:49गया जो तुम इतनी सवेरे मुझसे मिलने आ गए
  1510. 1:10:53हां कुछ ऐसा काम है जो सिर्फ तुम ही कर
  1511. 1:10:55सकती हो इस शहर में ज्यादा लोगों को नहीं
  1512. 1:10:58जानता जिनसे मदद मांग सकूं शौर्य ने साफ
  1513. 1:11:02शब्दों में कहा तो मैं इनका हल्का
  1514. 1:11:04मुस्कुराते हुए बोली अब पहेलियां मत बुझाओ
  1515. 1:11:07सीधे-सीधे बताओ कि तुम्हें कैसी मदद चाहिए
  1516. 1:11:11शौर्य थोड़ा आगे आगे झुक कर बोला ठीक है
  1517. 1:11:14मुझे इसी एरिया में एक ऑफिस चाहिए ऐसी जगह
  1518. 1:11:17जो रेडी टू मूव हो मेरे पास इतना समय नहीं
  1519. 1:11:20है कि मैं नई जगह पर पूरा सेटअप तैयार
  1520. 1:11:23करूं और मुझे लगता है कि इस काम में तुम
  1521. 1:11:25ही मेरी मदद कर सकती हो क्योंकि तुम्हें
  1522. 1:11:28इस इलाके की पूरी जानकारी है। शौर्य की
  1523. 1:11:32बात सुनकर मेनका कुछ पल सोचती रही। फिर
  1524. 1:11:34अचानक उसे कुछ ध्यान आया तो वह मुस्कुराते
  1525. 1:11:36हुए शौर्य की तरफ देखने लगी। शौर्य ने जब
  1526. 1:11:39मेनका को स्माइल करते हुए देखा तो वह अधीर
  1527. 1:11:42होकर बोला अब मैं तुम्हारी इस मुस्कुराहट
  1528. 1:11:45का क्या मतलब समझूं? अरे मेरे मुस्कुराने
  1529. 1:11:48का एक और कारण है। दरअसल मेरी एक फ्रेंड
  1530. 1:11:51है जिसका ऑफिस यहीं पास की एक बिल्डिंग
  1531. 1:11:53में है और संयोग से उसने मुझसे कहा था कि
  1532. 1:11:57वो अपना ऑफिस बेचना चाहती है। तो मुझे
  1533. 1:11:59लगता है यह तुम्हारे लिए अच्छा ऑप्शन हो
  1534. 1:12:01सकता है। मेनका बोली उसकी बात सुनकर शौर्य
  1535. 1:12:05खुश हो गया और बोला यह तो बहुत अच्छी बात
  1536. 1:12:08है। तो क्यों ना अभी चलकर उस ऑफिस को देख
  1537. 1:12:10लिया जाए। मेरे पास समय कम है और मैं जल्द
  1538. 1:12:13से जल्द अपना ऑफिस सेटअप करना चाहता हूं।
  1539. 1:12:16शौर्य की जल्दीबाजी देखकर मेनका बोली, ठीक
  1540. 1:12:20है, मैं अभी अपनी उस दोस्त को चाबी के साथ
  1541. 1:12:23ऑफिस बुला लेती हूं। यह कहकर उसने अपना
  1542. 1:12:26मोबाइल निकाला और कॉल मिलाया। कुछ ही पल
  1543. 1:12:28बाद फोन उठते ही मेनका सीधे मुद्दे पर आ
  1544. 1:12:31गई। अरे रुचि, तुम्हारे ऑफिस के लिए मेरे
  1545. 1:12:35पास एक कस्टमर है। अगर तुम इंटरेस्टेड हो
  1546. 1:12:37तो अभी चाबी लेकर ऑफिस पहुंच जाओ। दूसरी
  1547. 1:12:40तरफ से रुचि ने जवाब दिया,
  1548. 1:12:43ठीक है, मैं 15-20 मिनट में पहुंच रही
  1549. 1:12:45हूं।
  1550. 1:12:46शौर्य ने यह सुनकर कहा, तो चलो जल्दी चलते
  1551. 1:12:49हैं। मैं यह मौका हाथ से नहीं जाने देना
  1552. 1:12:52चाहता। मेनका उसकी जल्दीबाजी देखकर हल्के
  1553. 1:12:55आश्चर्य में बोली, [संगीत] घबराओ मत वहां
  1554. 1:12:58पहुंचने में हमें ज्यादा से ज्यादा 10
  1555. 1:13:00मिनट लगेंगे। अभी यहीं थोड़ा इंतजार कर
  1556. 1:13:02लेते हैं। फिर निकलेंगे। शौर्य ने सहमति
  1557. 1:13:06में सिर हिला दिया। अब उसके पास थोड़ा समय
  1558. 1:13:09था। तो उसने मेनका से कहा। मुझे एक और काम
  1559. 1:13:12है। शायद [संगीत] उसका भी कोई सशन
  1560. 1:13:14तुम्हारे पास हो। मेनका उत्सुकता से बोली
  1561. 1:13:18तो फिर इंतजार किस बात का? बताओ क्या काम
  1562. 1:13:21है? शौर्य ने कहा दरअसल [संगीत] मुझे फेमस
  1563. 1:13:25मॉडल मिस नताशा से मिलना है। एक ब्रांड
  1564. 1:13:28एंडोर्समेंट के लिए मुझे उनकी जरूरत है।
  1565. 1:13:31क्या तुम्हारे पास कोई लिंक है जिससे मैं
  1566. 1:13:34उनसे मिल सकूं। मेनका एक पल के लिए सोच
  1567. 1:13:37में पड़ गई। इसे मिस नताशा क्यों चाहिए?
  1568. 1:13:41और किस कंपनी के लिए? जब उसे कुछ समझ नहीं
  1569. 1:13:43आया तो उसने पूछा किस कंपनी के लिए ब्रांड
  1570. 1:13:47एंडोर्समेंट करना है? शौर्य ने सहजता से
  1571. 1:13:50जवाब दिया। एक कंपनी है। तुम बस यह बताओ
  1572. 1:13:54कि क्या तुम्हारे पास कोई ऐसा तरीका है
  1573. 1:13:56जिससे मैं मिस नताशा तक पहुंच सकूं। मेनका
  1574. 1:13:59मुस्कुराई और बोली यह काम भी हो जाएगा।
  1575. 1:14:03लेकिन पहले हम चलकर रुचि से मिलते हैं और
  1576. 1:14:05उसका ऑफिस देखते हैं। ठीक है। पहले वही कर
  1577. 1:14:10लेते हैं। शौर्य ने हामी भरते हुए कहा।
  1578. 1:14:13इसके बाद दोनों होटल से बाहर निकल गए।
  1579. 1:14:15शौर्य ने देखा कि मेनका पैदल ही आगे बढ़
  1580. 1:14:18रही है। तो उसने पूछा क्या हम पैदल हट
  1581. 1:14:22चलकर उस ऑफिस तक जाएंगे? शौर्य की बात
  1582. 1:14:25सुनकर मेनका बोली हां वो ऑफिस ज्यादा दूर
  1583. 1:14:28नहीं है। हम चलकर ही पहुंच जाएंगे। इस तरह
  1584. 1:14:31तुम यहां के मार्केट को भी देख लोगे।
  1585. 1:14:34शौर्य को मेनका का यह सुझाव पसंद आया तो
  1586. 1:14:36वह पैदल ही मेनका के साथ आगे बढ़ गया।
  1587. 1:14:39चलते-चलते शौर्य ने मेनका से पूछा वैसे यह
  1588. 1:14:43ऑफिस था [संगीत] किस चीज के लिए? तो जवाब
  1589. 1:14:46में मेनका ने कहा, एक्चुअली रुचि पहले
  1590. 1:14:49यहां कॉल सेंटर चलाती थी। लेकिन अब उसने
  1591. 1:14:51अपना ऑफिस यहां से शिफ्ट कर लिया है
  1592. 1:14:53क्योंकि इस तरह के जितने भी कॉल सेंटर थे
  1593. 1:14:55वो सब अब शहर के बाहर वाले हिस्से में चले
  1594. 1:14:58गए हैं। इसीलिए अब यह ऑफिस रुचि के लिए
  1595. 1:15:00किसी काम का नहीं रहा और जो दूसरा ऑफिस वो
  1596. 1:15:03शहर के बाहर ले रही है उसके लिए उसे कुछ
  1597. 1:15:05पैसों की जरूरत है। इसीलिए वो इस ऑफिस को
  1598. 1:15:08बेचना चाहती है। शौर्य को मेनकाक की बात
  1599. 1:15:11समझ में आ गई। फिर लगभग 10 मिनट में वो
  1600. 1:15:14लोग एक बिल्डिंग तक पहुंचे। उस बिल्डिंग
  1601. 1:15:16का नाम है न्यू सिटी टावर। लगभग 10 मिनट
  1602. 1:15:20में या उससे थोड़ा पहले मेनका और विक्रम
  1603. 1:15:22के साथ शौर्य उस बिल्डिंग तक पहुंच गया।
  1604. 1:15:24उस बिल्डिंग का नाम न्यू सिटी टावर था।
  1605. 1:15:28शौर्य ने यहां तक का सफर पैदल ही तय किया
  1606. 1:15:30था। उसे ये जगह बहुत पसंद आई। [संगीत] यह
  1607. 1:15:33पूरी तरह एक कमर्शियल बिल्डिंग थी। शौर्य
  1608. 1:15:35ने मन ही मन सोचा। हां, मुझे ऐसी ही जगह
  1609. 1:15:39चाहिए थी। अभी कुछ ही पल बीते थे कि तभी
  1610. 1:15:42एक कार आकर उनके पास रुकी। कार से एक
  1611. 1:15:44खूबसूरत लड़की बाहर आई। उसे देखते ही
  1612. 1:15:47मेनका जल्दी से उसके पास गई और उससे गले
  1613. 1:15:49मिली। मेनका से अलग होकर वो लड़की बोली
  1614. 1:15:53हां तो अब बताओ किसे लेना है यह स्पेस?
  1615. 1:15:56उसकी जल्दीबाजी देखकर मेनका [संगीत] बोली
  1616. 1:15:59अरे पहले सांस तो ले लो। इस पर लड़की
  1617. 1:16:02मुस्कुराते हुए बोली ले तो ली सांस। अब
  1618. 1:16:05बताओ कौन है? अच्छा बाबा मुझे पता है
  1619. 1:16:08तुम्हारा टाइम बहुत कीमती है। इनसे मिलो।
  1620. 1:16:10मेनका ने परिचय कराते हुए कहा, "यह है
  1621. 1:16:13श्रवण और यह है विक्रम। यह तुम्हारे ऑफिस
  1622. 1:16:17स्पेस में इंटरेस्टेड है।
  1623. 1:16:19शौर्य आगे बढ़ा और हाथ मिलाया। यह है
  1624. 1:16:23रुचि। वो करीब 24-25 साल की बेहद खूबसूरत
  1625. 1:16:26लड़की है। एक पल के लिए [संगीत] शौर्य
  1626. 1:16:28उसकी खूबसूरती में खो गया। लेकिन जल्दी ही
  1627. 1:16:30संभल भी गया। रुचि शौर्य की स्थिति देखकर
  1628. 1:16:33हल्का मुस्कुरा दी। वो समझ गई थी कि लोग
  1629. 1:16:36अक्सर उसे देखकर कुछ पल के लिए खो जाते
  1630. 1:16:39हैं। उसने हाथ मिलाते हुए कहा
  1631. 1:16:43हेलो मैं रुचि मल्होत्रा और आप शौर्य बोला
  1632. 1:16:47श्रवण लोग मुझे श्रवण ही कहते हैं और यह
  1633. 1:16:50मेरा दोस्त विक्रम है। रुचि ने दोनों का
  1634. 1:16:53अभिवादन किया और टावर की ओर बढ़ते हुए
  1635. 1:16:56बोली चलिए पहले ऑफिस देख लेते हैं। लिफ्ट
  1636. 1:17:00की तरफ बढ़ते हुए रुचि ने मेनका से पूछा।
  1637. 1:17:04वैसे ऑफिस लेना किसे है? इससे पहले कि
  1638. 1:17:08मेनका कुछ कहती शौर्य ने जवाब दिया यह
  1639. 1:17:11ऑफिस मिस्टर विक्रम को लेना है। यहां का
  1640. 1:17:14काम मैं देखूंगा इसीलिए मैं इनके साथ हूं।
  1641. 1:17:18रुचि ने सहमति में सिर हिला दिया। विक्रम
  1642. 1:17:20भी चुप रहा क्योंकि वो शौर्य की योजना समझ
  1643. 1:17:23रहा था। चारों लोग लिफ्ट में सातवें फ्लोर
  1644. 1:17:26पर पहुंचे और रुचि के पीछे-पीछे उसके ऑफिस
  1645. 1:17:29की ओर बढ़े। लेकिन जैसे ही रुचि अपने ऑफिस
  1646. 1:17:32के पास पहुंची [संगीत]
  1647. 1:17:33उसने देखा कि दरवाजा पहले से खुला हुआ है।
  1648. 1:17:36वो हैरान रह गई और बोली मैं तो यह गेट बंद
  1649. 1:17:40करके गई थी। फिर यह खुला कैसे? मेनका ने
  1650. 1:17:43भी चौंकते हुए कहा इसका मतलब अंदर कोई है
  1651. 1:17:47क्या? चलो देखते हैं। रुचि ने ग्लास डोर
  1652. 1:17:52को धक्का दिया और अंदर चली गई। उसके पीछे
  1653. 1:17:54शौर्य, विक्रम और मेनका भी अंदर आ गए।
  1654. 1:17:57अंदर आते ही उन्होंने देखा कि सभी लाइट्स
  1655. 1:18:00जल रही थी। जैसे ही वह आगे बढ़े अंदर से
  1656. 1:18:03कुछ आवाजें सुनाई देने लगी। रुचि तेजी से
  1657. 1:18:06अंदर गई और उसने वहां जो देखा उससे वह
  1658. 1:18:09चौंक गई। ऑफिस के मेन एरिया में कुछ लोग
  1659. 1:18:12बैठे थे और उन्हीं में उसके पापा देवव्रत
  1660. 1:18:15मल्होत्रा भी मौजूद थे। वो तुरंत उनके पास
  1661. 1:18:18जाकर बोली
  1662. 1:18:20पापा आप यहां अगर आना ही था मुझे बता तो
  1663. 1:18:24देते। देवव्रत मल्होत्रा भी उसे देखकर
  1664. 1:18:27हैरान थे। उन्होंने कहा
  1665. 1:18:30दरअसल विहान का फोन आया था। यह आज ही डील
  1666. 1:18:34फाइनल करना चाहता था इसीलिए मैं आ गया।
  1667. 1:18:37रुचि ने सामने खड़े विहान रायजादा को देखा
  1668. 1:18:40और सख्त आवाज में बोली पापा हमारी बात तो
  1669. 1:18:44पहले ही हो चुकी है ना। इनकी डील हमें
  1670. 1:18:47मंजूर नहीं है। फिर यह सब क्यों? उधर
  1671. 1:18:50विहान रायजादा को देखकर शौर्य के दिमाग
  1672. 1:18:53में एक झटका सा लगा। उसे याद आया यह वही
  1673. 1:18:56शख्स है जिसने शादी के मंडप में शिप्रा को
  1674. 1:18:59छोड़ दिया था। या यूं कहें कि मुख्तार के
  1675. 1:19:02डर से वो भाग गया था। खैर जो हुआ वो अतीत
  1676. 1:19:05की बात है। कहीं ना कहीं वो हादसा शौर्य
  1677. 1:19:08के लिए अच्छा ही साबित हुआ। क्योंकि उसी
  1678. 1:19:10की वजह से आज वो खुद शिप्रा का पति है।
  1679. 1:19:14उसने देखा कि विहान के साथ उसके दो बाउंसर
  1680. 1:19:16और एक व्यक्ति हैं जो उसका वकील लग रहा
  1681. 1:19:19था। शौर्य को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि इस
  1682. 1:19:22प्रॉपर्टी में विहान रायजादा भी दिलचस्पी
  1683. 1:19:24रखता है। लेकिन शौर्य को भी यह जगह बहुत
  1684. 1:19:26पसंद आ चुकी थी। वो किसी भी हाल में इस
  1685. 1:19:29ऑफिस को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता
  1686. 1:19:32था। फिलहाल वो स्थिति को समझना चाहता था
  1687. 1:19:35कि विहान की डील कहां तक पहुंची है।
  1688. 1:19:38इसीलिए वह चुपचाप रुचि और उसके पापा की
  1689. 1:19:40बातचीत सुनने लगा। रुचि ने अपने पापा से
  1690. 1:19:43पूछा तो अब ये क्या डील दे रहा है पापा?
  1691. 1:19:48रुचि की बात सुनकर देवव्रत मल्होत्रा बोले
  1692. 1:19:52यह अभी भी 45 करोड़ पर अटके हैं। लेकिन
  1693. 1:19:55मेरा फाइनल ऑफर 51 करोड़ है। अपने पापा की
  1694. 1:20:00बात सुनकर रुचि ने विहान की तरफ देखते हुए
  1695. 1:20:02कहा। तो मिस्टर विहान क्या आपकी यही फाइनल
  1696. 1:20:06डील है या आप 51 करोड़ में फाइनल करने के
  1697. 1:20:09लिए तैयार हैं?
  1698. 1:20:12विहान ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया।
  1699. 1:20:15मिस रुचि मार्केट के हिसाब से मैं जो
  1700. 1:20:17प्राइस ऑफर कर रहा हूं वह पहले ही ज्यादा
  1701. 1:20:20है। इसीलिए मेरा सुझाव है कि आप लालच ना
  1702. 1:20:23करें और 45 करोड़ की इस डील को स्वीकार कर
  1703. 1:20:26लें। विहान की बात सुनकर रुचि ने एक नजर
  1704. 1:20:29मेनका विक्रम और शौर्य की तरफ डाली और
  1705. 1:20:32बोली आपने देख ही लिया कि यहां क्या चल
  1706. 1:20:35रहा है। अब मैं आपसे जानना चाहती हूं कि
  1707. 1:20:38आप क्या कहते हैं। शौर्य ने रुचि की बात
  1708. 1:20:41सुनी और तुरंत मन ही मन पूरी सिचुएशन को
  1709. 1:20:44एनालाइज करने लगा। उसने गौर किया कि
  1710. 1:20:47लोकेशन के हिसाब से यह ऑफिस बेहद प्रीमियम
  1711. 1:20:50है। शायद उसे दोबारा इतनी अच्छी जगह ना
  1712. 1:20:53मिले। साथ ही यहां पहले से ही सेटअप तैयार
  1713. 1:20:56था। फर्नीचर, कंप्यूटर और बाकी सुविधाएं।
  1714. 1:21:00अगर वह यह ऑफिस लेता है तो वह अगले ही दिन
  1715. 1:21:03से काम शुरू कर सकता है। जबकि नई जगह लेने
  1716. 1:21:06पर उसे सेटअप तैयार करने में काफी समय लग
  1717. 1:21:09जाता। इन सब बातों को सोचकर शौर्य ने
  1718. 1:21:12फैसला ले लिया। वो आगे बढ़ा और
  1719. 1:21:14आत्मविश्वास से बोला हम आपकी शर्त के
  1720. 1:21:18अनुसार इस ऑफिस के लिए 51 करोड़ देने को
  1721. 1:21:21तैयार हैं। लेकिन मेरी एक शर्त है।
  1722. 1:21:26सभी की नजर एक साथ शौर्य पर टिक गई। शौर्य
  1723. 1:21:30ने आगे कहा
  1724. 1:21:32यहां जो भी फर्नीचर, कंप्यूटर और बाकी
  1725. 1:21:35सेटअप पहले से मौजूद है, उसे उसी स्थिति
  1726. 1:21:38में यहीं रहने दिया जाए। अगर उसके लिए अलग
  1727. 1:21:41से भुगतान करना पड़े तो मैं उसके लिए भी
  1728. 1:21:43तैयार हूं। शौर्य की बात सुनकर रुचि गौर
  1729. 1:21:47से उसे देखने लगी। ये क्या? इस आदमी ने
  1730. 1:21:50अकेले ही फैसला कर लिया। जबकि अभी तक तो
  1731. 1:21:53यही कहा जा रहा था कि असली ओनर विक्रम
  1732. 1:21:56होगा और शौर्य सिर्फ देखने आया है। फिर
  1733. 1:21:59इसने खुद ही इतना बड़ा फैसला कैसे ले
  1734. 1:22:01लिया? उसके मन में सवाल उठा और सबसे
  1735. 1:22:04हैरानी की बात विक्रम ने भी उसे रोका
  1736. 1:22:06नहीं। शौर्य ने एक बार भी विक्रम की राय
  1737. 1:22:09जानने की कोशिश नहीं की और सीधे 51 करोड़
  1738. 1:22:12का ऑफर स्वीकार कर लिया। असल हैरानी तो इस
  1739. 1:22:16बात की थी कि बिना किसी नेगोशिएशन के कोई
  1740. 1:22:19इतनी बड़ी डील कैसे मान सकता है। दूसरी
  1741. 1:22:22तरफ देवव्रत मल्होत्रा भी शौर्य की बात
  1742. 1:22:24सुनकर हैरान थे।
  1743. 1:22:27वो इतने दिनों से विहान रायजादा से कीमत
  1744. 1:22:30बढ़वाने की कोशिश कर रहे थे। अगर विहान 2
  1745. 1:22:32करोड़ भी और बढ़ा देता तो वह उसी के साथ
  1746. 1:22:35डील फाइनल कर देते। लेकिन यहां तो बिना
  1747. 1:22:38किसी बहस के ही पूरी कीमत मान ली गई थी।
  1748. 1:22:41उधर शौर्य की बात सुनकर विहान के चेहरे पर
  1749. 1:22:44साफ नाराजगी दिखाई देने लगी। वो शौर्य को
  1750. 1:22:46घूरते हुए सोचने लगे। यह कौन है जो बीच
  1751. 1:22:51में आकर मेरी डील बिगाड़ रहा है? उसने
  1752. 1:22:53तुरंत स्थिति संभालने की कोशिश की और
  1753. 1:22:56देवव्रत मल्होत्रा से बोला। मिस्टर
  1754. 1:22:58मल्होत्रा मैं कई दिनों से इस डील पर काम
  1755. 1:23:00कर रहा हूं। 40 से बढ़ाकर 45 करोड़ तक आ
  1756. 1:23:04गया हूं। लेकिन अचानक आपकी बेटी किसी और
  1757. 1:23:06को बीच में ले आई है। अगर आपको ज्यादा
  1758. 1:23:09कीमत चाहिए तो ठीक है। मैं आपकी खुशी के
  1759. 1:23:11लिए 2 करोड़ और बढ़ा देता हूं। अब मैं इस
  1760. 1:23:14ऑफिस के लिए 47 करोड़ ऑफर करता हूं। आइए
  1761. 1:23:18इस डील को यहीं फाइनल कर लेते हैं। विहान
  1762. 1:23:23की बात खत्म होते ही रुचि आगे बढ़ी और
  1763. 1:23:25सख्त स्वर में बोली। लगता है आपको ठीक से
  1764. 1:23:29सुनाई नहीं देता मिस्टर रायजादा। मिस्टर
  1765. 1:23:31श्रवण ने अभी-अभी इस ऑफिस के लिए हमारी 51
  1766. 1:23:34करोड़ की डील स्वीकार कर ली है। अभी ऑफिस
  1767. 1:23:37मिस्टर विक्रम का होने जा रहा है। आपने
  1768. 1:23:39नेगोशिएशन में बहुत समय लगा दिया। इसीलिए
  1769. 1:23:43अब हम आपके साथ यह डील नहीं कर सकते। इस
  1770. 1:23:46पर विहान झुंझुला कर बोला।
  1771. 1:23:49यह आप कैसी बात कर रही हैं मिस रुचि? हम
  1772. 1:23:51इतने दिनों से इस पर काम कर रहे हैं और अब
  1773. 1:23:54आप मना कर रही हैं। यह ठीक नहीं है। इस पर
  1774. 1:23:58रुचि हल्की मुस्कान के साथ बोली, यही तो
  1775. 1:24:01आपकी गलती है मिस्टर रायजादा। आप इतने
  1776. 1:24:04दिनों से सिर्फ नेगोशिएशन ही करते रहे।
  1777. 1:24:07जबकि जिसे सच में खरीदना होता है वो एक पल
  1778. 1:24:10में फैसला कर लेता है। जैसा कि अभी मिस्टर
  1779. 1:24:12श्रवण ने किया। यह अभी-अभी यहां आए हैं और
  1780. 1:24:16बिना समय बर्बाद किए अपना निर्णय दे दिया।
  1781. 1:24:19तो हम इन्हें कैसे मना कर सकते हैं?
  1782. 1:24:21इसीलिए आप हमें माफ करें और अपने लिए कोई
  1783. 1:24:24दूसरा ऑफिस देख लें जो आपके बजट में हो।
  1784. 1:24:27रुचि की बात सुनकर विहान का चेहरा गुस्से
  1785. 1:24:30से लाल हो गया। उसने दांत भीचते हुए कहा,
  1786. 1:24:34"ल लगता है आप समझ नहीं रही हैं कि आप
  1787. 1:24:36क्या कर रही हैं। हमें यह ऑफिस हर हाल में
  1788. 1:24:39चाहिए और अगर नहीं मिला, तो इसके गंभीर
  1789. 1:24:42परिणाम भी हो सकते हैं। इसीलिए बेहतर होगा
  1790. 1:24:46कि आप मेरा ऑफर स्वीकार कर लें और यह डील
  1791. 1:24:49मेरे साथ फाइनल करें।
  1792. 1:24:52विहान की इस खुली धमकी के बाद माहौल अचानक
  1793. 1:24:55भारी हो गया। तभी मेनका आगे बढ़ी और ठंडी
  1794. 1:24:58लेकिन तीखी आवाज में बोली मिस्टर रायजादा
  1795. 1:25:03क्या आप कुछ ज्यादा ही बड़े बोल नहीं बोल
  1796. 1:25:05रहे हैं आपको अंदाजा भी है कि आप किसके
  1797. 1:25:09सामने मिस रुचि को धमकाने की कोशिश कर रहे
  1798. 1:25:11हैं मेनका को बीच में आते देखकर विहान
  1799. 1:25:15रायजादा ने उसकी तरफ देखा और एक ही नजर
  1800. 1:25:17में पहचान लिया और अपनी आवाज को थोड़ा नरम
  1801. 1:25:20करते हुए बोला
  1802. 1:25:22तो मिस मेनका आप भी यहां आई हुई हैं क्या
  1803. 1:25:25आप भी इस ऑफिस को में इंटरेस्टेड है। इस
  1804. 1:25:28पर मेनका ने रूखे और सख्त स्वर में कहा,
  1805. 1:25:31नहीं मैं तो नहीं पर मेरे दोस्त यह ऑफिस
  1806. 1:25:33लेना चाहते हैं। और उन्होंने मिस्टर
  1807. 1:25:35मल्होत्रा का ऑफिसर स्वीकार कर लिया है।
  1808. 1:25:38इसलिए अब आपको मिस रुचि को धमकाने की कोई
  1809. 1:25:40जरूरत नहीं है। अगर आपने पहले ही इनका ऑफर
  1810. 1:25:44मान लिया होता तो शायद यह ऑफिस आपका होता।
  1811. 1:25:47लेकिन अब इसे अपने हाथ से निकलते देखकर
  1812. 1:25:49मिस रुचि को धमकाना यह बिल्कुल सही नहीं
  1813. 1:25:52है।
  1814. 1:25:54विहान मेनका की बात सुनकर सकपका गया।
  1815. 1:25:57लेकिन अगले ही पल खुद को संभालते हुए बोला
  1816. 1:26:00मिस मेनका मेरा आपसे कोई लेना देना नहीं
  1817. 1:26:03है और ना ही मैं आपके किसी काम में दखल दे
  1818. 1:26:06रहा हूं। यह मेरे और देवव्रत मल्होत्रा के
  1819. 1:26:08बीच की बात है। हम इस डील को फाइनल करने
  1820. 1:26:11के बेहद करीब थे और आप बीच में आकर इसे
  1821. 1:26:14बिगाड़ रही हैं।
  1822. 1:26:17मेनका ने तुरंत पलट कर जवाब दिया, अगर ऐसा
  1823. 1:26:21था तो आपने अपनी डील पहले ही फाइनल क्यों
  1824. 1:26:24नहीं कर ली? आज तक इंतजार किस बात का था?
  1825. 1:26:27और दूसरी बात कोई अपनी संपत्ति किसे बेचना
  1826. 1:26:30चाहता है यह उसका अधिकार है। इसीलिए किसी
  1827. 1:26:33को धमका कर अपना काम निकालने की कोशिश तो
  1828. 1:26:35आप भूल ही जाइए। विहान के चेहरे पर एक
  1829. 1:26:38चिढ़ साफ दिखाई देने लगी। वो बोला
  1830. 1:26:42मुझे आपसे यह सीखने की जरूरत नहीं है कि
  1831. 1:26:45मैं अपना काम कैसे करता हूं। मैं पहले इस
  1832. 1:26:48डील को फाइनल करने के करीब था। आप आखिरी
  1833. 1:26:51वक्त में आकर मेरा काम खराब करने की कोशिश
  1834. 1:26:53मत कीजिए।
  1835. 1:26:55इतना कहकर वो देवव्रत मल्होत्रा की तरफ
  1836. 1:26:57मुड़ा और बोला मिस्टर मल्होत्रा आप मेरी
  1837. 1:27:01बात समझ सकते हैं। हमारे पुराने संबंध
  1838. 1:27:03हैं। इसलिए उम्मीद है कि आप फैसला लेते
  1839. 1:27:06वक्त उसे ध्यान में रखेंगे।
  1840. 1:27:09देवव्रत मल्होत्रा विहान की बातों में
  1841. 1:27:11छिपी धमकी को अच्छी तरह समझ रहे थे। लेकिन
  1842. 1:27:14शौर्य का ऑफर सुनने के बाद वो 4 करोड़ का
  1843. 1:27:17नुकसान उठाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं
  1844. 1:27:19थे। तभी शौर्य आगे बढ़ा और बोला मिस रुचि
  1845. 1:27:23क्या आप मुझे अपना अकाउंट नंबर देंगी?
  1846. 1:27:27शौर्य की बात सुनते ही देवव्रत मल्होत्रा
  1847. 1:27:29खुद आगे आए और अपने मोबाइल में अकाउंट
  1848. 1:27:31नंबर दिखा दिया। शौर्य ने एक नजर उस नंबर
  1849. 1:27:35पर डाली और फिर विक्रम की तरफ देखा।
  1850. 1:27:37विक्रम तुरंत समझ गया कि शौर्य क्या चाहता
  1851. 1:27:40है। वो आगे बढ़ा, मल्होत्रा जी का मोबाइल
  1852. 1:27:42लिया, अपना फोन निकाला और कुछ ही सेकंड
  1853. 1:27:45में ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर दिया। कमरे
  1854. 1:27:48में हल्की खामोशी छा गई और तभी बीप की
  1855. 1:27:51आवाज के साथ देवव्रत मल्होत्रा के मोबाइल
  1856. 1:27:54पर मैसेज आया। उन्होंने स्क्रीन देखी और
  1857. 1:27:57उनकी आंखें फैल गई। कुछ पल तक मानो उन्हें
  1858. 1:28:00यकीन ही नहीं हुआ। फिर वो रुचि के पास गए
  1859. 1:28:03और धीमे स्वर में बोले
  1860. 1:28:07पैसे आ गए क्या? रुचि के चेहरे पर भी
  1861. 1:28:10हैरानी साफ थी। बिना किसी एग्रीमेंट के
  1862. 1:28:14इतनी बड़ी रकम सीधे अकाउंट में ट्रांसफर
  1863. 1:28:18वो अब तक इस डर में थी कि कहीं विहान को
  1864. 1:28:21मना करने के बाद शौर्य भी पीछे ना हट जाए।
  1865. 1:28:24लेकिन अब सब कुछ साफ था। उसने जल्दी से
  1866. 1:28:26पूछा कितने पैसे आए हैं? देवव्रत
  1867. 1:28:30मल्होत्रा ने कहा पूरे 51 करोड़।
  1868. 1:28:35रुचि ने फिर एक बार शौर्य की तरफ देखा। इस
  1869. 1:28:38बार उसकी नजर में सिर्फ हैरानी नहीं
  1870. 1:28:40सम्मान भी था। उसने कहा था कि वो सिर्फ
  1871. 1:28:43काम संभालेगा। लेकिन जिस तरह से उसने पूरी
  1872. 1:28:46डील अपने हाथ में लेकर खत्म कर दी। यह कुछ
  1873. 1:28:49और ही कहानी बता रहा था। रुचि विहान की
  1874. 1:28:51तरफ मुड़ी और ठंडे लेकिन स्पष्ट स्वर में
  1875. 1:28:54बोली।
  1876. 1:28:56अब आपके कुछ भी कहने से कोई फर्क नहीं
  1877. 1:28:58पड़ेगा। मिस्टर रायजादा हम पेमेंट रिसीव
  1878. 1:29:01कर चुके हैं। इसलिए आज से यह ऑफिस मिस्टर
  1879. 1:29:04विक्रम का है। बाकी पेपर वर्क एक-द दिन
  1880. 1:29:07में पूरा कर लिया जाएगा। विहान रायजादा
  1881. 1:29:10स्तब्ध खड़ा था। उसने आज तक इतनी तेजी से
  1882. 1:29:14किसी डील को फाइनल होते नहीं देखा था।
  1883. 1:29:17उसका चेहरा गुस्से से लाल था और मन में
  1884. 1:29:20सिर्फ एक ही सवाल था। आखिर यह श्रवण है
  1885. 1:29:24कौन? विहान रायजादा ने सोचा नहीं था कि
  1886. 1:29:27कोई इतनी जल्दी किसी डील को फाइनल कर सकता
  1887. 1:29:30है। वो भी बिना किसी पेपर वर्क के एक साथ
  1888. 1:29:33पूरे पैसे देकर। यह कोई छोटी बात नहीं थी।
  1889. 1:29:37यानी उस व्यक्ति को खुद पर कितना भरोसा था
  1890. 1:29:39कि उसके साथ कुछ गलत नहीं हो सकता। आखिर
  1891. 1:29:43कौन था यह व्यक्ति? विहान रायजादा ने आज
  1892. 1:29:46से पहले ना तो विक्रम के बारे में सुना था
  1893. 1:29:48और ना ही शौर्य के बारे में। हां, वो मिस
  1894. 1:29:51मेनका को होटल राजकमल की मैनेजर के रूप
  1895. 1:29:54में जानता था क्योंकि उसके ऊपर राजा साहब
  1896. 1:29:56का हाथ था। इसीलिए कोई भी मेनका के साथ
  1897. 1:29:59बदतमीजी करने की हिम्मत नहीं कर सकता था।
  1898. 1:30:02हर जगह उसकी इज्जत होती थी। पर जैसा कि
  1899. 1:30:05मेनका ने खुद कहा था कि शौर्य और विक्रम
  1900. 1:30:08उसके जानने वाले हैं। यानी उसका कोई
  1901. 1:30:10डायरेक्ट रिश्ता उन दोनों के साथ नहीं था।
  1902. 1:30:13विहान रायजादा को यह बात भी परेशान कर रही
  1903. 1:30:16थी कि उसके सामने यह डील हो गई और वह कुछ
  1904. 1:30:19भी नहीं कर पाया। एक तरह से यह उसकी
  1905. 1:30:22बेइज्जती ही थी। जो चीज वो चाहता था उसके
  1906. 1:30:25सामने किसी और ने उसे हासिल कर लिया। इतनी
  1907. 1:30:28आसानी से वो इस ऑफिस को अपने हाथ से जाने
  1908. 1:30:31नहीं दे सकता था। एक तरह से यह उसके ईगो
  1909. 1:30:34को भी चोट दे रहा था। उसने एक बार फिर
  1910. 1:30:37देवव्रत मल्होत्रा से कहा। मिस्टर
  1911. 1:30:40मल्होत्रा अगर आपकी यही जिद है कि आप इस
  1912. 1:30:43ऑफिस को 51 करोड़ से कम में नहीं बेचेंगे
  1913. 1:30:46तो ठीक है। मैं आपको 51 करोड़ देने के लिए
  1914. 1:30:49तैयार हूं। पर यह ऑफिस मुझे ही चाहिए।
  1915. 1:30:54अब हैरान होने की बारी मिस्टर देवव्रत
  1916. 1:30:56मल्होत्रा की थी। वो आश्चर्य से विहान
  1917. 1:30:59रायजादा की तरफ देखने लगे। उन्हें समझ
  1918. 1:31:01नहीं आया कि जो विहान अभी तक 45 करोड़ से
  1919. 1:31:04थोड़ा भी ऊपर बढ़ने को तैयार नहीं था वो
  1920. 1:31:07अचानक 51 करोड़ देने को कैसे राजी हो गया।
  1921. 1:31:11पर अब वो क्या कर सकते थे? पैसे तो उन्हें
  1922. 1:31:13पहले ही मिल चुके थे। उन्होंने खुद को
  1923. 1:31:16संभालते हुए कहा
  1924. 1:31:19मिस्टर रायजादा
  1925. 1:31:21मेरी बेटी ने कहा ना कि अब कुछ नहीं हो
  1926. 1:31:23सकता। मिस्टर विक्रम हमें पेमेंट कर चुके
  1927. 1:31:26हैं। इसलिए अब हमारे हाथ में कुछ नहीं है।
  1928. 1:31:30अगर आप थोड़ी देर पहले तैयार हो गए होते
  1929. 1:31:32तो शायद यह ऑफिस आपका होता।
  1930. 1:31:36विहान रायजादा ने तुरंत कहा अभी इन्होंने
  1931. 1:31:39सिर्फ पैसे ट्रांसफर किए हैं। मिस्टर
  1932. 1:31:40मल्होत्रा आपने अभी प्रॉपर्टी इनके नाम
  1933. 1:31:43नहीं की है। इसलिए मालिकाना हक अभी भी
  1934. 1:31:46आपका ही है। आप इनके पैसे वापस कीजिए और
  1935. 1:31:49मेरे एग्रीमेंट पेपर पर साइन कीजिए। अब
  1936. 1:31:52मैं आपकी मांगी हुई कीमत देने को तैयार
  1937. 1:31:54हूं। तो बहाने मत बनाइए और प्रक्रिया शुरू
  1938. 1:31:57कीजिए।
  1939. 1:31:59विहान की ये धमकी भरी बात रुचि मल्होत्रा
  1940. 1:32:01को बिल्कुल पसंद नहीं आई। वो उसके सामने
  1941. 1:32:03आकर बोली मिस्टर विहान यह आपका ऑफिस नहीं
  1942. 1:32:08है कि आप हमें यहां धमका रहे हैं। ऐसी
  1943. 1:32:11बातें अपने ऑफिस या घर में कीजिए। यह सब
  1944. 1:32:14यहां नहीं चलेगा। हमने इस ऑफिस का पेमेंट
  1945. 1:32:17रिसीव कर लिया है। इसलिए अब यह ऑफिस मेरी
  1946. 1:32:20तरफ से मिस्टर विक्रम को ही जाएगा। वो आगे
  1947. 1:32:23बोली उन्होंने बिना किसी नेगोशिएशन के
  1948. 1:32:26हमारी बताई हुई कीमत पर सीधा पेमेंट
  1949. 1:32:28ट्रांसफर कर दिया है। इसलिए हम लीगली
  1950. 1:32:31उन्हें ही यह प्रॉपर्टी देने के लिए बाध्य
  1951. 1:32:33हैं। अब इस प्रॉपर्टी से जुड़ी कोई भी बात
  1952. 1:32:36करनी है तो आप मिस्टर शौर्य या मिस्टर
  1953. 1:32:39विक्रम से करें क्योंकि अब यह प्रॉपर्टी
  1954. 1:32:41पर मालिकाना हक उन्हीं का है। क्या बकवास
  1955. 1:32:44है यह? इतने दिनों तक जो मैं यहां चक्कर
  1956. 1:32:47लगा कर जूते घिस रहा हूं। क्या वो यह
  1957. 1:32:50देखने के लिए कि कोई नया बंदा इस शहर में
  1958. 1:32:52आए और मेरे किए किराए पर पानी फेर कर चला
  1959. 1:32:55जाए? यह कहते हुए विहान रायजादा के नथुने
  1960. 1:32:58फूलने लगे। विहान रायजादा को गुस्से में
  1961. 1:33:02देखकर उसके दोनों बाउंसर उसके सामने आकर
  1962. 1:33:05खड़े हो गए थे। जैसे वे इसी इंतजार में हो
  1963. 1:33:08कि कब विहान रायजादा आदेश दे और वे यहां
  1964. 1:33:11मौजूद लोगों की अकड़ ढीली कर दें। शौर्य
  1965. 1:33:14अब स्थिति को और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर
  1966. 1:33:17सकता था। वो आगे बढ़कर विहान रायजादा के
  1967. 1:33:20सामने आया और बोला मिस्टर रायजादा
  1968. 1:33:24अगर आपको अपना खून जलाना है तो कहीं और
  1969. 1:33:27जाकर जलाइए। यहां उसका कोई फायदा नहीं
  1970. 1:33:30होने वाला। आपकी जानकारी के लिए बता दूं
  1971. 1:33:33कि हमने इस प्रॉपर्टी का फुल और फाइनल
  1972. 1:33:35पेमेंट कर दिया है। इसलिए अब यह प्रॉपर्टी
  1973. 1:33:39हमारे अधिकार क्षेत्र में आती है। इससे
  1974. 1:33:41जुड़ी कोई भी बात करनी है तो मुझसे कीजिए।
  1975. 1:33:45मिस्टर देवव्रत मल्होत्रा या रुचि
  1976. 1:33:47मल्होत्रा का इसमें अब कोई हस्तक्षेप नहीं
  1977. 1:33:50होगा।
  1978. 1:33:51शौर्य की बात सुनकर विहान रायजादा का सिर
  1979. 1:33:54गुस्से से फट पड़ा। वो अपने शब्दों पर
  1980. 1:33:57कंट्रोल नहीं रख सका। वो मिस मेनका का
  1981. 1:33:59लिहाज भी भूल गया और शौर्य से बोला
  1982. 1:34:03तुम हो कौन? जो मुझसे इस तरह बात करने की
  1983. 1:34:06हिम्मत कर रहे हो। तुम मुझे जानते नहीं
  1984. 1:34:08हो। तुम सोच भी नहीं सकते कि मैं तुम्हारा
  1985. 1:34:11क्या हाल कर सकता हूं। इस पर शौर्य हंसते
  1986. 1:34:14हुए बोला [हंसी]
  1987. 1:34:17तुम्हें कौन नहीं जानता मिस्टर विहान
  1988. 1:34:19रायजादा
  1989. 1:34:21सारा शहर जानता है कि तुम एक भगोड़े हो जो
  1990. 1:34:24अपनी शादी के दिन एक गुंडे के डर से अपनी
  1991. 1:34:27होने वाली पत्नी को [संगीत] अकेला छोड़कर
  1992. 1:34:29भाग गया था। सच कहूं तो तुमसे ज्यादा कायर
  1993. 1:34:33इंसान मैंने आज तक नहीं देखा। और तुम मुझे
  1994. 1:34:36धमकी दे रहे हो।
  1995. 1:34:38शौर्य के दिल में जो गुस्सा था वो उसकी
  1996. 1:34:41बातों में साफ झलक रहा था। उसकी बात सुनकर
  1997. 1:34:44ऐसा लगा जैसे किसी ने विहान रायजादा की
  1998. 1:34:47दुखती नस पर हाथ रख दिया हो। वो और ज्यादा
  1999. 1:34:50तिलमिला उठा। अब वो खुद पर बिल्कुल भी
  2000. 1:34:53काबू नहीं रख सका और गरज कर अपने बाउंसरों
  2001. 1:34:55से बोला। तुम दोनों मेरा मुंह क्या देख
  2002. 1:34:58रहे हो? इस आदमी को इतना मारो कि इसकी एक
  2003. 1:35:00भी हड्डी सलामत नहीं रहनी चाहिए। जैसे ही
  2004. 1:35:04आदेश मिला दोनों बाउंसर शौर्य पर झपट
  2005. 1:35:06पड़े। लेकिन शौर्य पहले से तैयार था। जैसे
  2006. 1:35:10ही वे उसके करीब पहुंचे, वो फुर्ती से दो
  2007. 1:35:12कदम पीछे हट गया। बाउंसरों का वार खाली
  2008. 1:35:15गया और वो दोनों लड़खड़ा गए। हालांकि अगले
  2009. 1:35:18ही पल उन्होंने खुद को संभाल लिया और जलती
  2010. 1:35:21निगाहों से शौर्य को घूरने लगे। मेनका यह
  2011. 1:35:24सब देखती ही रह गई। उसे उम्मीद नहीं थी कि
  2012. 1:35:26उसके सामने होते हुए भी विहान रायजादा इस
  2013. 1:35:29हद तक चला जाएगा। वो तुरंत आगे बढ़ी और
  2014. 1:35:32सख्त आवाज में बोली मिस्टर विहान आप समझ
  2015. 1:35:35भी रहे हैं कि आप क्या करने जा रहे हैं।
  2016. 1:35:38इसका परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है। लेकिन
  2017. 1:35:42विहान रायजादा ने उसकी बातों को नजरअंदाज
  2018. 1:35:45करते हुए कहा मिस मेनका मैं आपसे उलझना
  2019. 1:35:48नहीं चाहता। लेकिन इस आदमी को मैं नहीं
  2020. 1:35:50छोडूंगा। चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों
  2021. 1:35:52ना झेलना पड़े।
  2022. 1:35:55मेनका को यकीन नहीं हुआ कि उसकी बात को
  2023. 1:35:57इतनी आसानी से नजरअंदाज कर दिया गया। उसने
  2024. 1:36:00विक्रम की तरफ देखा जिसे कह रही हो तुम
  2025. 1:36:03खड़े-खड़े क्या देख रहे हो? आगे बढ़ो।
  2026. 1:36:06लेकिन विक्रम के चेहरे पर जरा भी चिंता
  2027. 1:36:08नहीं थी। उल्टा वो इस पूरे सीन को एंजॉय
  2028. 1:36:11करता हुआ नजर आ रहा था। विक्रम के चेहरे
  2029. 1:36:14की मुस्कान को देखकर मेनका को एक पल के
  2030. 1:36:16लिए शक हुआ। क्या यह सच में शौर्य का
  2031. 1:36:19पर्सनल असिस्टेंट या बॉडीगार्ड है? जब उसे
  2032. 1:36:22वहां से भी कोई उम्मीद नहीं मिली तो उसने
  2033. 1:36:24फिर से शौर्य की तरफ देखा। शौर्य के चेहरे
  2034. 1:36:27पर भी जरा सा डर नहीं था बल्कि उसके होठों
  2035. 1:36:30पर एक हल्की आत्मविश्वास से भरी मुस्कान
  2036. 1:36:33खेल रही थी और यह देखकर वो और भी ज्यादा
  2037. 1:36:36हैरान रह गई। यह हाल सिर्फ मेनका का ही
  2038. 1:36:39नहीं था। कमोबेश यही स्थिति देवव्रत
  2039. 1:36:42मल्होत्रा और रुचि मल्होत्रा की भी थी।
  2040. 1:36:45उनकी आंखों में भी शौर्य के लिए चिंता साफ
  2041. 1:36:47नजर आ रही थी। लेकिन शौर्य इन सबसे
  2042. 1:36:50बेपरवाह था। वो अब विहान रायजादा के
  2043. 1:36:53बाउंसरों को सबक सिखाने के मूड में आ चुका
  2044. 1:36:56था। एक बार फिर दोनों बाउंसर ने उसे आगे
  2045. 1:36:59पीछे से घेर लिया और एक साथ उस पर झपट
  2046. 1:37:01पड़े। लेकिन इस बार भी शौर्य ने कमाल कर
  2047. 1:37:04दिया। उसने एक ऊंची छलांग लगाई और उनके
  2048. 1:37:07बीच से निकलकर सीधा विहान रायजादा के
  2049. 1:37:10सामने आकर लैंड किया। पीछे दोनों बाउंसर
  2050. 1:37:13आपस में ही टकरा गए। शौर्य ने बिना एक पल
  2051. 1:37:16गवाए हाथ घुमाया।
  2052. 1:37:19और एक जोरदार थप्पड़ विहान रायजादा के गाल
  2053. 1:37:22पर जा पड़ा। पूरा हॉल सन रह गया। विहान
  2054. 1:37:26रायजादा अविश्वास से शौर्य को घूर रहा था।
  2055. 1:37:30उसे उम्मीद ही नहीं थी कि कोई उस पर हाथ
  2056. 1:37:32उठाने की हिम्मत करेगा। उसका एक हाथ अपने
  2057. 1:37:35गाल पर था और आंखें फटी रह गई थी। तभी
  2058. 1:37:39उसके दोनों बाउंसर संभल चुके थे। जैसे ही
  2059. 1:37:42उन्होंने देखा कि उनके बॉस पर हाथ उठाया
  2060. 1:37:44गया है। वे गुस्से से शौर्य की तरफ बढ़े।
  2061. 1:37:48लेकिन शौर्य ने विहान को उसी हालत में
  2062. 1:37:50छोड़ दिया और बाउंसरों का इंतजार करने
  2063. 1:37:52लगा। इस बार उसका इरादा साफ था। पहले
  2064. 1:37:56इन्हें धूल चटानी है फिर विहान की अकड़
  2065. 1:37:58तोड़नी है। जब उसे लगा कि वे धीरे-धीरे
  2066. 1:38:01बढ़ रहे हैं तो उसने खुद ही हमला कर दिया।
  2067. 1:38:04वो बिजली की रफ्तार से दौड़ा। एक ऊंची
  2068. 1:38:06छलांग लगाई और हवा में ही दोनों पैरों से
  2069. 1:38:09एक साथ किक मारी।
  2070. 1:38:13दोनों बाउंसर 5-प फीट पीछे जाकर गिरे।
  2071. 1:38:16उनके चेहरे से खून रिसने लगा और शौर्य वो
  2072. 1:38:20उसी जगह खड़ा था जहां कुछ पल पहले वे
  2073. 1:38:23दोनों खड़े थे। अब बाउंसर उसे किसी इंसान
  2074. 1:38:26की तरह नहीं बल्कि किसी अजूबे की तरह देख
  2075. 1:38:28रहे थे। लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में
  2076. 1:38:32नहीं था। उन्होंने खून पोंछा, दांत भी और
  2077. 1:38:35फिर से उसकी तरफ बढ़े। इस बार वे सर्क थे।
  2078. 1:38:39दोनों के बीच थोड़ा फासला था। अचानक एक
  2079. 1:38:42बाउंसर ने छलांग लगाई और सीधा शौर्य के
  2080. 1:38:45चेहरे पर किक मारने की कोशिश की। लेकिन
  2081. 1:38:47शौर्य झुका और उस बाउंसर का वार खाली गया।
  2082. 1:38:50उसी पल वो फर्श पर पलटी खाकर दूसरे बाउंसर
  2083. 1:38:54के पास पहुंच गया और अपने हाथों पर घूमते
  2084. 1:38:56हुए अपने पैर से चकरी जैसी घुमावदार किक
  2085. 1:38:59उसके पैर पर दे मारी।
  2086. 1:39:02दूसरा बाउंसर वहीं गिर पड़ा। उसका पैर
  2087. 1:39:05बुरी तरह मुड़ चुका था। अब वह चाहकर भी
  2088. 1:39:08खड़ा नहीं हो सकता था। शौर्य धीरे से उठकर
  2089. 1:39:11खड़ा हुआ और फिर पलट कर पहले बाउंसर की
  2090. 1:39:13तरफ देखा। पहला बाउंसर फिर से खड़ा हो
  2091. 1:39:16चुका था। लेकिन जैसे ही उसने अपने साथी की
  2092. 1:39:19हालत देखी, उसके चेहरे का रंग उड़ गया। अब
  2093. 1:39:22उसके अंदर डर साफ नजर आ रहा था। शौर्य
  2094. 1:39:26धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। हर कदम के
  2095. 1:39:28साथ उसका आत्मविश्वास और सामने वाले का डर
  2096. 1:39:32बढ़ता जा रहा था। और फिर बाउंसर अचानक आगे
  2097. 1:39:35बढ़ा। लेकिन हमला करने के लिए नहीं। वो
  2098. 1:39:38सीधे घुटनों के बल बैठ गया और हाथ जोड़ते
  2099. 1:39:41हुए बोला मैं हार मानता हूं बड़े भाई। मैं
  2100. 1:39:44आपसे जीत नहीं सकता। उसकी बात सुनकर शौर्य
  2101. 1:39:48बोला अगर हार ही माननी थी तो पहले मान
  2102. 1:39:52लेते। इससे तुम्हारे साथी का पैर तो बच
  2103. 1:39:55जाता।
  2104. 1:39:57शौर्य की यह बात सुनकर भी पहला बाउंसर चुप
  2105. 1:40:00ही रहा। वो उसी तरह सिर झुकाए खड़ा रहा।
  2106. 1:40:03शौर्य उसे छोड़कर विहान रायजादा की तरफ
  2107. 1:40:06बढ़ा। उसके करीब पहुंचकर वो ठंडी आवाज में
  2108. 1:40:09बोला,
  2109. 1:40:11हां जी, अब क्या बोलते हो? तुम्हारे दोनों
  2110. 1:40:14बाउंसर तो ढेर हो गए। अब तुम्हें कौन
  2111. 1:40:17बचाने आएगा? शौर्य की बात सुनकर विहान
  2112. 1:40:20रायजादा के शरीर में झुरझुरी से दौड़ गई।
  2113. 1:40:23फिर भी उसने खुद को संभालते हुए कहा, "यह
  2114. 1:40:27तुमने अच्छा नहीं किया। मैं इस बात को
  2115. 1:40:30भूलने वाला नहीं हूं। ऐसा बदला लूंगा कि
  2116. 1:40:34तुम्हारी रूह तक कांप जाएगी। शौर्य जोर से
  2117. 1:40:38हंसा और बोला [हंसी]
  2118. 1:40:41अभी भी धमकी दे रहे हो। बदला तो तुम बाद
  2119. 1:40:44में लोगे लेकिन अभी तुम्हें मुझसे कौन
  2120. 1:40:47बचाएगा? इतना कहते ही उसने एक और जोरदार
  2121. 1:40:51थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया।
  2122. 1:40:55इस बार थप्पड़ इतना भारी था कि विहान
  2123. 1:40:58रायजादा का जबड़ा हिल गया। अब उसके चेहरे
  2124. 1:41:01पर साफ डर नजर आने लगा। कांपती आवाज में
  2125. 1:41:04उसने पूछा क्या चाहते हो तुम मुझसे? अब आए
  2126. 1:41:08ना तुम औकात पर।
  2127. 1:41:10शौर्य मुस्कुराते हुए बोला। फिर उसने ठंडे
  2128. 1:41:13लेकिन खतरनाक लहजे में कहा। अपने घुटनों
  2129. 1:41:17पर आओ। और जैसे तुम्हारे बाउंसर ने कहा कि
  2130. 1:41:20वो अपनी हार मानता है। [संगीत] वैसे ही
  2131. 1:41:23तुम भी कहो कि तुम हार मानते हो। और
  2132. 1:41:26दोबारा मेरे रास्ते में आने की कोशिश नहीं
  2133. 1:41:29करोगे। वरना जो हाल तुम्हारे दूसरे बाउंसर
  2134. 1:41:33का हुआ है वही हाल तुम्हारा भी करूंगा।
  2135. 1:41:37शौर्य की बात सुनकर अनायास ही विहान की
  2136. 1:41:40नजर अपने घायल बाउंसर पर गई। वो फर्श पर
  2137. 1:41:43पड़ा था। अपने टेढ़े पैर को सीधा करने की
  2138. 1:41:46कोशिश कर रहा था। उसकी हालत देखकर ही
  2139. 1:41:49विहान के शरीर में सेहरन दौड़ गई और बिना
  2140. 1:41:52कुछ सोचे वो धीरे-धीरे घुटनों पर आ गया।
  2141. 1:41:55उसकी आवाज में अब अहंकार नहीं सिर्फ बेबसी
  2142. 1:41:58थी। वो बोला मैं अपनी हार मानता हूं और
  2143. 1:42:03दोबारा तुम्हारे सामने आने की कोशिश नहीं
  2144. 1:42:06करूंगा।
  2145. 1:42:08यह कहते ही वो तुरंत उठा और बिना किसी की
  2146. 1:42:10तरफ देखे तेज कदमों से बाहर निकल गया।
  2147. 1:42:13उसके पीछे-पीछे उसका वो तीसरा आदमी जो
  2148. 1:42:16शायद वकील था वो भी वहां से चला गया। उनके
  2149. 1:42:19जाने के बाद पहला बाउंसर उठा। अपने घायल
  2150. 1:42:22साथी को सहारा दिया और धीरे-धीरे उसे लेकर
  2151. 1:42:25[संगीत] बाहर निकल गया। कुछ ही पलों में
  2152. 1:42:28पूरा हॉल खाली हो गया। और वहां छा गई एक
  2153. 1:42:31गहरी सन्न कर देने वाली खामोशी। क्योंकि
  2154. 1:42:36वहां मौजूद किसी भी व्यक्ति को [संगीत]
  2155. 1:42:38समझ नहीं आ रहा था कि कुछ ही मिनटों में
  2156. 1:42:41यहां क्या से क्या हो गया। शौर्य अब सबके
  2157. 1:42:44लिए एक पहेली बन गया था। सबके दिमाग में
  2158. 1:42:47उसे देखकर यही सवाल गूंजने लगा था कि आखिर
  2159. 1:42:50वो है क्या चीज? जो लोग उसे अंडरएस्टीमेट
  2160. 1:42:53कर रहे थे, वो उसके किसी भी डील को तुरंत
  2161. 1:42:56एस्टीमेट करके हाथों-हाथ पेमेंट करने के
  2162. 1:42:58तरीके से चौंक गए थे। रुचि से कुछ ही
  2163. 1:43:01मिनटों में 51 करोड़ में खरीदे नए ऑफिस के
  2164. 1:43:04आलीशान कमरे में मेनकायक कोने में खड़ी
  2165. 1:43:07होकर अभी भी उस दृश्य को अपनी आंखों के
  2166. 1:43:10सामने दोहरा रही थी। जो अभी-अभी घटित हुआ
  2167. 1:43:14था। उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा
  2168. 1:43:17था कि शौर्य ने विहान रायजादा जैसे
  2169. 1:43:20रसूखदार आदमी का बुरा हाल कर दिया था।
  2170. 1:43:23शुरुआत में मेनका को लगा था कि शौर्य
  2171. 1:43:25विहान के खूंखार बाउंसरों का मुकाबला नहीं
  2172. 1:43:28कर पाएगा। पर शौर्य ने जिस सहजता से
  2173. 1:43:31उन्हें धूल चटाई उसे देखकर मेनका के मन
  2174. 1:43:34में शौर्य की छवि [संगीत] पूरी तरह बदल गई
  2175. 1:43:37थी।
  2176. 1:43:38मेनका खुद को कोस रही थी कि उसने शौर्य को
  2177. 1:43:42कितना अंडरएस्टीमेट किया था। वो इस उलझन
  2178. 1:43:44में भी थी कि शौर्य के पास इतनी अपार धन
  2179. 1:43:47दौलत आई कहां से। पर जब उसे कुछ भी समझ
  2180. 1:43:50नहीं आया तो उसने खुद को तसल्ली दी कि वह
  2181. 1:43:53होटल में पहुंचते ही शौर्य से इस बारे में
  2182. 1:43:55सवाल करेगी। दूसरी तरफ रुचि मल्होत्रा भी
  2183. 1:43:59शौर्य से पूरी तरह प्रभावित थी। रुचि धीरे
  2184. 1:44:02से शौर्य के करीब आई और आभार प्रकट करते
  2185. 1:44:05हुए बोली आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मिस्टर
  2186. 1:44:09श्रवण आपने आज विहान रायजादा को अच्छा सबक
  2187. 1:44:12सिखाया
  2188. 1:44:14शौर्य ने शिष्टाचार निभाते हुए जवाब दिया
  2189. 1:44:17इसकी कोई जरूरत नहीं है मिस रुचि वो इसी
  2190. 1:44:20काबिल था रुचि के चेहरे पर चमक थी वो आगे
  2191. 1:44:23बोली
  2192. 1:44:25मैं आपके तुरंत फैसले लेने की काबिलियत से
  2193. 1:44:27काफी इंप्रेस हूं आपने बिना किसी
  2194. 1:44:30एग्रीमेंट के सारा पेमेंट भी एक साथ कर
  2195. 1:44:33दिया। यह बहुत ही साहसिक फैसला है। मुझे
  2196. 1:44:37अभी पैसे की जरूरत थी। आपके कारण मेरा काम
  2197. 1:44:41समय से हो जाएगा।
  2198. 1:44:43शौर्य ने एक सरसरी निगाह पूरे ऑफिस में
  2199. 1:44:45दौड़ाई और बोला, "ऐसा बोलने की आपको कोई
  2200. 1:44:48जरूरत नहीं है। मिश्रूचि। [संगीत] मेरे
  2201. 1:44:50लिए सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे एक तैयार
  2202. 1:44:53ऑफिस मिल गया है। अब मुझे यहां ज्यादा कुछ
  2203. 1:44:56करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मैं चाहूं तो
  2204. 1:44:59कल से ही अपना काम शुरू कर सकता हूं।
  2205. 1:45:02बातचीत के बीच [संगीत] रुचि मल्होत्रा के
  2206. 1:45:04दिमाग में कुछ संशय ने भी जन्म लिया।
  2207. 1:45:07शौर्य ने उसके दिमाग में भी यही सवाल पैदा
  2208. 1:45:09करवा दिया था कि आखिर शौर्य है क्या चीज?
  2209. 1:45:12रुचि भी यह सोच कर हैरान थी कि मेनका ने
  2210. 1:45:15तो कहा था कि मिस्टर विक्रम इस जगह के ओनर
  2211. 1:45:17होने वाले हैं और शौर्य सिर्फ देखरेख
  2212. 1:45:20करेगा। पर यहां सारे फैसले शौर्य ले रहा
  2213. 1:45:23था। रुचि ने फिर शौर्य से पूछा। मिस्टर
  2214. 1:45:26श्रवण इस प्रॉपर्टी से रिलेटेड पेपर तैयार
  2215. 1:45:30करने के लिए अगर आपके कोई लोग हो तो आप
  2216. 1:45:32बता दीजिए। शौर्य ने मेनका की तरफ देखा तो
  2217. 1:45:36मेनका ने कुछ सोचकर कहा रुचि तुम रहने दो
  2218. 1:45:40जो हमारा प्रॉपर्टी से रिलेटेड काम देखता
  2219. 1:45:42है उससे बोलकर मैं यह पेपर तैयार करवा
  2220. 1:45:44लूंगी। पेपर तैयार होने के बाद जब
  2221. 1:45:46रजिस्ट्रेशन की डेट निश्चित होगी तो मैं
  2222. 1:45:49तुम्हें बता दूंगी।
  2223. 1:45:51रुचि ने जवाब दिया ठीक है यही अच्छा रहेगा
  2224. 1:45:55जब तुम्हारी कागजी कार्यवाही पूरी हो जाए
  2225. 1:45:57तो तुम मुझे बता देना मैं समय पर
  2226. 1:45:59रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंच जाऊंगी
  2227. 1:46:02रुचि और मेनका पुराने दोस्त थे लेकिन रुचि
  2228. 1:46:05इस बात से हैरान थी कि उसने आज से पहले
  2229. 1:46:08मेनका से शौर्य और विक्रम के बारे में कुछ
  2230. 1:46:10नहीं सुना था वो आगे भी शौर्य के टच में
  2231. 1:46:13रहना चाहती थी इसीलिए उसने सीधा शौर्य से
  2232. 1:46:16ही पूछा मिस्टर श्रवण अगर आप बुरा ना माने
  2233. 1:46:20तो क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकती हूं? शौर्य
  2234. 1:46:23को रुचि के बदलते भाव देखकर अंदाजा हो गया
  2235. 1:46:26था कि वो क्या जानना चाहती है। उसने कहा
  2236. 1:46:29पूछिए क्या जानना चाहती हैं आप? रुचि ने
  2237. 1:46:33संकोच छोड़कर अपनी जिज्ञासा व्यक्त की।
  2238. 1:46:35मिस्टर श्रवण मैं इसी शहर की हूं और यहां
  2239. 1:46:38की एलट क्लास फैमिलीज के बारे में जानकारी
  2240. 1:46:41रखती हूं। पर आप और विक्रम सर ऐसे शख्स
  2241. 1:46:44हैं जिनके बारे में मैं कुछ भी नहीं
  2242. 1:46:46जानती। आपने इतना बड़ा अमाउंट एक बार में
  2243. 1:46:49ही पे कर दिया है तो मैं समझ सकती हूं कि
  2244. 1:46:52आप किसी बहुत बड़े परिवार से संबंध रखते
  2245. 1:46:54हैं। तो इतना तो मैं यकीन के साथ कह सकती
  2246. 1:46:57हूं कि आप इस शहर से नहीं हैं और जिस तरह
  2247. 1:47:00आपने विहान रायजादा को सबक सिखाया है।
  2248. 1:47:03इससे यह भी पता चलता है कि आपको यहां की
  2249. 1:47:05हस्तियों का डर नहीं है। बस मैं आपके
  2250. 1:47:08बैकग्राउंड के बारे में जानना चाह रही थी।
  2251. 1:47:12शौर्य जानता था कि रुचि को शक होना
  2252. 1:47:14स्वाभाविक है। इसीलिए उसने तुरंत एक कहानी
  2253. 1:47:17बनाई। आपने सही कहा मिस रुचि। मैं और
  2254. 1:47:21विक्रम बहुत अच्छे दोस्त हैं। निर्णय उसका
  2255. 1:47:24हो या मेरा हम कभी एक दूसरे के निर्णय पर
  2256. 1:47:27सवाल नहीं उठाते। विक्रम अभी-अभी यूके से
  2257. 1:47:30यहां आया है। मेरे दिमाग में कुछ बिजनेस
  2258. 1:47:33प्रपोजल थे जिसे उसने अपनी सहमति दे दी
  2259. 1:47:35है। तो आप यह समझ सकती हैं कि इस सबके
  2260. 1:47:38पीछे पैसा उसका और दिमाग मेरा है।
  2261. 1:47:41मेनका बगल में खड़ी शौर्य के दिमाग की दाद
  2262. 1:47:44दिए बिना रह नहीं सकी। उसने सोचा कितना
  2263. 1:47:47शातिर है यह आदमी। पल भर में इसने क्या
  2264. 1:47:50कहानी बना ली। तभी रुचि ने ऑफिस की
  2265. 1:47:53चाबियां शौर्य की तरफ बढ़ाते हुए कहा।
  2266. 1:47:56मिस्टर श्रवण पेपर वर्क तो अपने समय से
  2267. 1:47:58होता रहेगा। पर अभी से यह ऑफिस आपका हुआ।
  2268. 1:48:02यह रही इस ऑफिस की चाबियां। अब आप संभालिए
  2269. 1:48:05इसे। शौर्य ने चाबियां ली और मेनका की ओर
  2270. 1:48:08देखकर बोला तुम मिस मेनका यहां का काम तो
  2271. 1:48:12पूरा हुआ अब चलें शौर्य विक्रम मेनका
  2272. 1:48:17तीनों होटल की ओर चल पड़े मेनका शौर्य का
  2273. 1:48:20नया रूप देखकर शॉक्ड थी उसके दिमाग में
  2274. 1:48:23सवालों का उफान बेकाबू हो रहा था फिर कुछ
  2275. 1:48:27देर बाद होटल राजकमल के केबिन में मेनका
  2276. 1:48:30अपनी कुर्सी पर बैठी थी पर उसकी नजरें
  2277. 1:48:32लगातार शौर्य पर टिकी थी जैसे आज वो उसे
  2278. 1:48:36पूरी तरह पढ़ लेना चाहती हो। लेकिन शौर्य
  2279. 1:48:38शायद उसके चेहरे के हाफ भावों को पहले ही
  2280. 1:48:41पढ़ चुका था। उसे मालूम था कि अब सामने से
  2281. 1:48:44सीधे दिल और दिमाग को चीरते हुए सवाल
  2282. 1:48:46आएंगे।
  2283. 1:48:48वो आराम से कुर्सी पर टिक गया। जैसे वो तय
  2284. 1:48:51कर चुका हो। अब कुछ भी छुपाना नहीं है।
  2285. 1:48:54कुछ पल की खामोशी के बाद मेनका ने सीधे
  2286. 1:48:57वार किया। क्या मैं तुमसे कुछ सवाल पूछ
  2287. 1:49:00सकती हूं? शौर्य ने बिना घबराए उसकी आंखों
  2288. 1:49:03में देखा और मुस्कुराया। चलो अब पूछ भी लो
  2289. 1:49:07इतना हाइप क्रिएट क्यों कर रही हो? मेनका
  2290. 1:49:10ने गहरी सांस ली और पहला सवाल दागा। सबसे
  2291. 1:49:14पहले यह बताओ अब से पहले तुम कहां थे?
  2292. 1:49:18शौर्य ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया। यह तो
  2293. 1:49:21मैं तुम्हें बता चुका हूं। मैं पिछले 6
  2294. 1:49:23महीने से इसी शहर में भिखारी की जिंदगी जी
  2295. 1:49:26रहा था। मैं इनका अगला सवाल सोच पाती।
  2296. 1:49:29उससे पहले ही शौर्य ने खुद ही आगे बढ़ते
  2297. 1:49:32हुए कहा, "मैं तुम्हें शुरू से पूरी कहानी
  2298. 1:49:35बता देता हूं। [संगीत] शायद उसके बाद
  2299. 1:49:37तुम्हें कुछ पूछने की जरूरत ही ना पड़े।
  2300. 1:49:40इससे पहले कि मेनका कुछ कहती [संगीत]
  2301. 1:49:42शौर्य ने एक स्टोरी टेलर की तरह बोलना
  2302. 1:49:45शुरू किया।
  2303. 1:49:47मेरे पापा ने अपनी मर्जी से शादी कर ली
  2304. 1:49:49थी। जिससे मेरे दादाजी नाराज हो गए और
  2305. 1:49:52उन्होंने उन्हें घर से निकाल दिया। घर से
  2306. 1:49:55निकाले जाने के बाद मेरे पापा को लगा कि
  2307. 1:49:57इस शहर में वे कुछ खास कर नहीं पाएंगे।
  2308. 1:50:00इसीलिए उन्होंने मेरी मां के साथ भारत
  2309. 1:50:03छोड़ दिया और यूके में शिफ्ट हो गए। कुछ
  2310. 1:50:06समय तक उन्होंने वहां अलग-अलग जगह काम
  2311. 1:50:08किया। फिर अपना बिजनेस शुरू किया। उन्हें
  2312. 1:50:11जल्दी ही सफलता मिल गई और हमारा परिवार
  2313. 1:50:14यूके में अच्छे से सेटल हो गया। मैंने भी
  2314. 1:50:16वहीं रहते हुए अपना बिजनेस शुरू किया और
  2315. 1:50:19धीरे-धीरे उसे स्थापित कर लिया। मेनका
  2316. 1:50:23बड़े गौर से पूरी बात सुन रही थी। शौर्य
  2317. 1:50:26ने कहना जारी रखा। इधर इंडिया जब मेरे
  2318. 1:50:29दादा जी को पता चला कि उनका एक पोता भी है
  2319. 1:50:32तो उनके दिल में मुझे देखने की इच्छा जाग
  2320. 1:50:34उठी। इसी वजह से मैं उनसे मिलने भारत आ
  2321. 1:50:37गया। शौर्य हल्का मुस्कुराया और बोला
  2322. 1:50:42लेकिन शायद किसी को मेरा भारत आना रास
  2323. 1:50:44नहीं आया। इसीलिए उसने मुझे जान से मारने
  2324. 1:50:47की कोशिश की। अब इसे मेरा नसीब कहो या
  2325. 1:50:50मेरे दुश्मन की बदनसीबी। उस एक्सीडेंट में
  2326. 1:50:53मैं बच गया। और जब मुझे पता चला कि किसी
  2327. 1:50:56ने मुझे मारने की कोशिश की है तो मैंने
  2328. 1:50:59दुनिया के सामने खुद को जीवित दिखाना ठीक
  2329. 1:51:02नहीं समझा। और मैं एक भिखारी की जिंदगी
  2330. 1:51:05जीता रहा। अभी जब मेरे दादाजी को हार्ट
  2331. 1:51:08अटैक आया तब मुझे उनके सामने आना पड़ा।
  2332. 1:51:11लेकिन मैं सीधे उनके महल में नहीं जा सकता
  2333. 1:51:13था। क्योंकि जब तक मुझे यह पता नहीं चल
  2334. 1:51:15जाता कि मुझे मारने की कोशिश किसने की तब
  2335. 1:51:18तक मैं खुद को सबके सामने जाहिर नहीं करना
  2336. 1:51:21चाहता था। मेनका एक टक शौर्य को देख रही
  2337. 1:51:25थी। तभी शौर्य ने टेबल पर हल्का सा हाथ
  2338. 1:51:28मारकर कहा बस यही है मेरी कहानी। इतना
  2339. 1:51:33कहकर शौर्य चुप हो गया। लेकिन मेनका के
  2340. 1:51:36कुछ सवाल शायद अभी भी [संगीत] बाकी थे।
  2341. 1:51:38उसने शौर्य से पूछा। क्या मैं जान सकती
  2342. 1:51:41हूं कि तुमने कौन सा बिजनेस एस्टैब्लिश कर
  2343. 1:51:43रखा है? शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा,
  2344. 1:51:48वैसे तो मेरे पापा ने यूके में अपने कई
  2345. 1:51:50बिजनेस फैला रखे हैं लेकिन मैंने जो अपने
  2346. 1:51:53दम पर एस्टैब्लिश किया है वो है बिगबुल।
  2347. 1:51:55[संगीत]
  2348. 1:51:56तुमने शायद इसका नाम सुना होगा। यूके में
  2349. 1:51:58तो इसकी कई ब्रांचेस पहले से ही अच्छे से
  2350. 1:52:01रन कर रही हैं और अब इंडिया में भी हाल
  2351. 1:52:04फिलहाल कुछ ब्रांचेस शुरू हो चुकी हैं।
  2352. 1:52:07मेनका ने जैसे ही शौर्य के मुंह से बिग
  2353. 1:52:09बबुल का नाम सुना वो आश्चर्य से बोली क्या
  2354. 1:52:13कहा तुमने? बिग बुल तुम्हारी कंपनी है और
  2355. 1:52:17इसे तुमने अपने दम पर खड़ा किया है। यह तो
  2356. 1:52:20बहुत बड़ी कंपनी है। मेरे ख्याल से
  2357. 1:52:23ज्यादातर बड़े-बड़े इंटरनेशनल ब्रांड्स का
  2358. 1:52:25कोलैबोरेशन बिग बबुल के साथ है। मेनका ये
  2359. 1:52:29जानकर हैरान थी कि इतनी कम उम्र में शौर्य
  2360. 1:52:32ने इतना बड़ा ब्रांड खड़ा कर लिया था।
  2361. 1:52:34उसने अपनी हैरानी को कंट्रोल किया और
  2362. 1:52:36बोली। तो अब तुम्हारा आगे का क्या इरादा
  2363. 1:52:39है? मेनका की बात सुनकर शौर्य वर्तमान में
  2364. 1:52:42लौट आया। उसने कहा
  2365. 1:52:45जहां तक मेरे मेन फोकस की बात है वो
  2366. 1:52:49ब्रांड एंडोर्समेंट है। इसके लिए मुझे मिस
  2367. 1:52:51नताशा से मिलना है। मैं उन्हें अपनी कंपनी
  2368. 1:52:54का ब्रांड एंबेसडर बनाना चाहता हूं। क्या
  2369. 1:52:57तुम्हारे पास कोई ऐसा लिंक है जिससे मैं
  2370. 1:52:59मिस नताशा के साथ मीटिंग सेट कर सकूं।
  2371. 1:53:03मेनका ने धैर्य से शौर्य की बात को सुना
  2372. 1:53:05और बोली, "यह कोई मुश्किल काम नहीं है। एक
  2373. 1:53:09डायरेक्टर है रत्नाकर शेट्टी। उसने नताशा
  2374. 1:53:12के साथ कई ऐड फिल्में बनाई हैं। उससे बात
  2375. 1:53:14करने पर वो नताशा के साथ तुम्हारी मीटिंग
  2376. 1:53:17अरेंज कर सकते हैं। मेनका की बात सुनकर
  2377. 1:53:20शौर्य खुश होते हुए बोला अरे वाह यह तो
  2378. 1:53:23बहुत आसान हो गया। तुम अभी उनसे बात करके
  2379. 1:53:26हमारी मीटिंग फिक्स कर दो।
  2380. 1:53:29मेनका शौर्य की बात सुनकर बोली इतनी भी
  2381. 1:53:32क्या जल्दी है? डोंट वरी हो जाएगा यह काम।
  2382. 1:53:35अरे हो जाएगा तो फिर करो ना। शौर्य ने
  2383. 1:53:38मुस्कुराते हुए कहा। मेनका समझ गई कि
  2384. 1:53:41शौर्य मानने वाला नहीं है। उसने अपना
  2385. 1:53:43मोबाइल निकाला। उसमें रत्नाकर शेट्टी का
  2386. 1:53:46नंबर ढूंढा और कॉल लगा दिया। दो-तीन रिंग
  2387. 1:53:49के बाद दूसरी तरफ से फोन उठाया गया। हेलो
  2388. 1:53:52रत्नाकर जी। मैं मेनका बोल रही हूं होटल
  2389. 1:53:55राजकमल से। पहचाना मुझे
  2390. 1:53:58अरे आप कैसी बात कर रही है मिस मेनका। आप
  2391. 1:54:02हुक्म कीजिए। आपने इस नाचीज को कैसे याद
  2392. 1:54:05किया?
  2393. 1:54:06रत्नाकर शेट्टी ने मुस्कुरा कर कहा। ऐसा
  2394. 1:54:09है रत्नाकर जी मेरे एक मित्र हैं जिन्हें
  2395. 1:54:12अपने प्रोजेक्ट के लिए एक डायरेक्टर और एक
  2396. 1:54:15फेमस मॉडल की जरूरत है। इसी सिलसिले में
  2397. 1:54:18आपसे मीटिंग करनी थी तो आप बताइए कि आप कब
  2398. 1:54:21मिल सकते हैं? मेनका ने अपनी बात साफ-साफ
  2399. 1:54:25रख दी। मेनका की बात सुनकर रत्नाकर शेट्टी
  2400. 1:54:28खुश होकर बोले
  2401. 1:54:29आप जब भी कहे मिस मेनका [संगीत] मैं मिलने
  2402. 1:54:32के लिए समय निकाल सकता हूं। लेकिन क्या
  2403. 1:54:35पहले मैं जान सकता हूं कि आपके वो मित्र
  2404. 1:54:38किस मॉडल के साथ काम करना चाहते हैं।
  2405. 1:54:41रत्नाकर शेट्टी की बात सुनकर मेनका बोली
  2406. 1:54:44अरे ये तो मैं आपको बताना ही भूल गई। मॉडल
  2407. 1:54:47के रूप में मेरे फ्रेंड को मिस नताशा ही
  2408. 1:54:50चाहिए।
  2409. 1:54:50अरे वाह। आपने तो बहुत ही सही समय पर फोन
  2410. 1:54:54किया है। एक्चुअली अभी मैं मिस नताशा के
  2411. 1:54:58साथ ही एक शूटिंग पर आया हुआ हूं।
  2412. 1:55:00कृष्णापुरम की पहाड़ी पर जो कॉटेज है वहीं
  2413. 1:55:03पर हमारा कल और परसों का शूटिंग शेड्यूल
  2414. 1:55:05है। क्यों ना आप अपने मित्र को वहीं भेज
  2415. 1:55:07दें ताकि हमें मीटिंग के लिए ज्यादा
  2416. 1:55:10इंतजार ना करना पड़े। रत्नाकर शेट्टी ने
  2417. 1:55:13अपना सुझाव दिया। रत्नाकर शेट्टी की बात
  2418. 1:55:16सुनकर मेनका ने शौर्य की तरफ देखा क्योंकि
  2419. 1:55:19उसका मोबाइल लाउडस्पीकर पर था। जैसे ही
  2420. 1:55:21मेनका ने उसकी तरफ देखा शौर्य ने हल्का सा
  2421. 1:55:24सिर हिलाकर अपनी सहमति दे दी। शौर्य की
  2422. 1:55:27सहमति मिलने के बाद मेनका ने कहा, ठीक है
  2423. 1:55:31रत्नाकर जी यह बढ़िया रहेगा। कल मेरा
  2424. 1:55:34फ्रेंड कृष्णापुरम के कॉटेज में आकर आपसे
  2425. 1:55:36मिल लेगा।
  2426. 1:55:38जी यह सही रहेगा।
  2427. 1:55:40रत्नाकर शेट्टी ने सहमति जताई। इसके बाद
  2428. 1:55:43मेनका ने फोन काट दिया और शौर्य की तरफ
  2429. 1:55:46देखते हुए बोली, [संगीत] लो तुम्हारा यह
  2430. 1:55:49काम भी हो गया। अब तो खुश हो। इस पर शौर्य
  2431. 1:55:53मुस्कुराते हुए बोला बहुत बहुत ज्यादा पता
  2432. 1:55:56नहीं तुम नहीं होती तो मेरा क्या होता। बस
  2433. 1:55:59बस अब ज्यादा ड्रामा करने की जरूरत नहीं
  2434. 1:56:02है। अभी मेनका बोल ही रही थी कि अचानक
  2435. 1:56:05उसके फोन पर घंटी बज उठी। उसने स्क्रीन की
  2436. 1:56:08तरफ देखा और नंबर देखते ही उसकी आंखें
  2437. 1:56:10सिकुड़ गई। वो मन ही मन बोली।
  2438. 1:56:14आखिर इस वक्त इनका फोन आने का क्या मतलब
  2439. 1:56:18हो सकता है?
  2440. 1:56:20एक फोन की घंटी ने मेनका के चेहरे का रंग
  2441. 1:56:22बदल दिया था। शौर्य का सच जानकर [संगीत]
  2442. 1:56:25मेनका के दिल ने अभी राहत की सांस भी नहीं
  2443. 1:56:27ली थी कि एक नई आफत उसके फोन पर [संगीत]
  2444. 1:56:30ब्लिंक करने लगी। फोन की घंटी लगातार बज
  2445. 1:56:34रही थी और स्क्रीन पर आया नाम देखकर
  2446. 1:56:36[संगीत]
  2447. 1:56:36मेनका की आंखें कुछ प्रश्न चिन्ह सा संकेत
  2448. 1:56:39दे रही थी। मेनका के मस्तक पर उभर रही
  2449. 1:56:42[संगीत] लकीरें देखकर शौर्य ने मेनका से
  2450. 1:56:45पूछा।
  2451. 1:56:47क्या हुआ? कोई प्रॉब्लम? किसका फोन है?
  2452. 1:56:51मेनका ने तुरंत ही सिर उठाकर शौर्य की तरफ
  2453. 1:56:54देखा और बोली,
  2454. 1:56:57"यह [संगीत] तो देवव्रत मल्होत्रा का फोन
  2455. 1:56:59है।" अभी तो उनके पास से आए हैं। अब वो
  2456. 1:57:02इतनी [संगीत] जल्दी किस लिए फोन कर रहे
  2457. 1:57:04हैं? अरे तुम फोन तो उठाओ। शौर्य के बोलते
  2458. 1:57:07ही मेनका ने बिना कुछ कहे फोन उठाया। उसे
  2459. 1:57:10स्पीकर पर डाला और बोली नमस्ते अंकल। क्या
  2460. 1:57:14बात हो गई? मेनका की आवाज सुनते ही दूसरी
  2461. 1:57:18तरफ से देवव्रत मल्होत्रा की टूटी हुई
  2462. 1:57:20घबराई हुई आवाज आई।
  2463. 1:57:23बेटे विहान रायजादा के आदमियों ने रुचि को
  2464. 1:57:26अगवा कर लिया है। अभी मुझे फोन करके बोले
  2465. 1:57:29हैं कि मैं तुरंत उनके पास जाकर उस ऑफिस
  2466. 1:57:32को उनके नाम कर दूं नहीं तो वो मेरी बेटी
  2467. 1:57:34को किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं
  2468. 1:57:36छोड़ेंगे।
  2469. 1:57:37मेनका थोड़ी घबराई लेकिन फिर तुरंत संभल
  2470. 1:57:40कर बोली अंकल आप घबराइए मत। आप शुरू से
  2471. 1:57:43बताइए आखिर यह हुआ कैसे?
  2472. 1:57:46अब मैं तुम्हें क्या बताऊं बेटी? हम अभी
  2473. 1:57:49न्यू सिटी टावर से निकले ही थे कि एक कार
  2474. 1:57:51हमारी कार के सामने आकर खड़ी हो गई।
  2475. 1:57:54मजबूरन हमें अपनी गाड़ी रोकनी पड़ी। सामने
  2476. 1:57:57वाली गाड़ी से इस शहर के दो मशहूर गुंडे
  2477. 1:58:00छगन और मगन उतरे और जबरदस्ती रुचि को
  2478. 1:58:03हमारी कार से खींच कर अपनी कार में ले गए।
  2479. 1:58:06जाने से पहले उन्होंने कहा कि एक घंटे के
  2480. 1:58:09अंदर मैं उस ऑफिस के पेपर और चाबी लेकर
  2481. 1:58:12जहां वो बताएंगे वहां पहुंच जाऊं। नहीं तो
  2482. 1:58:15वो रुचि को किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं
  2483. 1:58:17छोड़ेंगे।
  2484. 1:58:18देवव्रत मल्होत्रा भयभीत आवाज में बोले।
  2485. 1:58:21देवव्रत की हालत सुनकर शौर्य ने फौरन
  2486. 1:58:23मेनका के हाथ से मोबाइल लिया और बोला अंकल
  2487. 1:58:27घबराइए मत। दिमाग को ठंडा रखिए। मेरा
  2488. 1:58:31विश्वास कीजिए रुचि को कुछ नहीं होगा।
  2489. 1:58:34क्या उन्होंने आपको यह बताया कि आपको कहां
  2490. 1:58:37आना है?
  2491. 1:58:38नहीं, बस इतना कहा है कि मैं सब कुछ तैयार
  2492. 1:58:42रखूं। फिर दोबारा उनका फोन आएगा और मुझे
  2493. 1:58:45उनके इंस्ट्रक्शन फॉलो करने होंगे।
  2494. 1:58:49देवव्रत मल्होत्रा ने बताया। इस पर शौर्य
  2495. 1:58:52बोला, ठीक है, अगर ऐसी बात है तो जल्दी से
  2496. 1:58:56आप होटल राजकमल आ जाइए और यहां से चाबी ले
  2497. 1:58:59जाइए। पैसे की चिंता करने की आपको कोई
  2498. 1:59:02जरूरत नहीं है। अभी जैसा वो कह रहे हैं आप
  2499. 1:59:06वैसा ही कीजिए। देवव्रत मल्होत्रा को यकीन
  2500. 1:59:09नहीं हुआ कि शौर्य इतनी आसानी से मान
  2501. 1:59:11जाएगा। वो भरी हुई आवाज में बोले
  2502. 1:59:14"धन्यवाद बेटे। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं
  2503. 1:59:17थी कि तुम मेरी मजबूरी को इतनी आसानी से
  2504. 1:59:20समझोगे।"
  2505. 1:59:21शौर्य ने फिर शांत स्वर में कहा। अंकल आप
  2506. 1:59:24मेरी चिंता मत कीजिए। सबसे पहला काम रुचि
  2507. 1:59:28को सुरक्षित करना है।
  2508. 1:59:30ठीक है बेटे। मैं अभी होटल राजकमल आ रहा
  2509. 1:59:33हूं।
  2510. 1:59:34इतना कहकर देवव्रत मल्होत्रा ने फोन काट
  2511. 1:59:36दिया। फोन कटते ही मेनका ने शौर्य की तरफ
  2512. 1:59:39देखते हुए पूछा। क्या तुम सचमुच चाबी वापस
  2513. 1:59:42करने की सोच रहे हो? क्या तुम्हें वो ऑफिस
  2514. 1:59:45नहीं चाहिए? इस पर शौर्य हल्की मगर
  2515. 1:59:48रहस्यमई मुस्कान के साथ बोला। किसने कहा
  2516. 1:59:51कि मुझे वो ऑफिस नहीं चाहिए। अब तो पक्का
  2517. 1:59:54वो मुझे ही चाहिए। मेनका को कुछ समझ नहीं
  2518. 1:59:58आया। उसने हैरानी से पूछा। अगर वो ऑफिस
  2519. 2:00:01तुम्हें चाहिए तो फिर तुम इतनी आसानी से
  2520. 2:00:04चाबी वापस करने के लिए तैयार क्यों हो गए?
  2521. 2:00:07मेनका की बात सुनकर शौर्य मुस्कुरा कर
  2522. 2:00:09बोला, "मैं नहीं चाहता कि देवव्रत
  2523. 2:00:12मल्होत्रा किसी परेशानी में पड़े या रुचि
  2524. 2:00:14का कुछ बुरा हो।" यह कदम उठाकर विहान
  2525. 2:00:17रायजादा ने अपने लिए मुसीबत मोल ले ली है।
  2526. 2:00:21मेनका को कुछ समझ नहीं आया तो उसने शौर्य
  2527. 2:00:24को गौर से देखा और पूछा। अब तुम क्या करने
  2528. 2:00:27वाले हो? जो भी करूंगा तुम्हारे सामने ही
  2529. 2:00:31करूंगा। आज का दिन विहान रायजादा अपनी
  2530. 2:00:34जिंदगी में कभी नहीं भूल पाएगा। उसने अपनी
  2531. 2:00:38औकात से बाहर जाकर काम किया है। कहते हुए
  2532. 2:00:42शौर्य का जबड़ा भी गया। फिर कुछ सोचकर वो
  2533. 2:00:45मेनका की तरफ देखकर बोला। क्या तुम इस
  2534. 2:00:48एरिया के किसी छोटे-मोटे गुंडे को जानती
  2535. 2:00:50हो? मेनका को समझ नहीं आया कि शौर्य ऐसा
  2536. 2:00:53क्यों पूछ रहा है। लेकिन थोड़ा सोच कर
  2537. 2:00:56उसने कहा अगर कुछ तुरंत करना है तो हमारे
  2538. 2:01:00यहां एक सिक्योरिटी गार्ड है जो पहले इस
  2539. 2:01:02एरिया का छोटा-मोटा बदमाश हुआ करता था।
  2540. 2:01:05क्या उससे तुम्हारा काम चल जाएगा? मेनका
  2541. 2:01:08की बात सुनकर शौर्य की आंखें चमक उठी।
  2542. 2:01:11उसने तुरंत कहा। हां उसे जल्दी से यहां
  2543. 2:01:15बुलाओ।
  2544. 2:01:16मेनका ने टेबल पर रखी बेल बजाई तो एक
  2545. 2:01:19गार्ड अंदर आया। जाओ मेन गेट पर जाकर
  2546. 2:01:23मनसुख मारवा को यहां बुलाओ। मेनका ने आदेश
  2547. 2:01:26दिया। मनसुख हट्टाकट्टा आदमी था। शौर्य ने
  2548. 2:01:30उसे ऊपर से नीचे तक देखा। फिर पूछा,
  2549. 2:01:34क्या तुम छगन मगन को जानते हो? मुझे छगन
  2550. 2:01:38का नंबर चाहिए। क्या तुम्हारे पास है?
  2551. 2:01:42किसी परेशानी में पड़ने से बचने के लिए
  2552. 2:01:44उसने कहा।
  2553. 2:01:46मैं इस नाम के किसी आदमी को नहीं जानता।
  2554. 2:01:50मनसुख का जवाब सुनकर शौर्य मुस्कान के साथ
  2555. 2:01:53बोला।
  2556. 2:01:54मैं जानता हूं कि तुम उन्हें अच्छे से
  2557. 2:01:56जानते हो। मनसुका असमंजस में खड़ा रहा।
  2558. 2:01:59उसे समझ नहीं आ रहा था कि सच बोले या चुप
  2559. 2:02:02रहे। यह देखकर शौर्य ने ठंडे लेकिन सख्त
  2560. 2:02:06स्वर में मेनका से कहा। यह आदमी यहां काम
  2561. 2:02:09करने के लायक नहीं है। इसके अंदर कंपनी के
  2562. 2:02:12लिए कोई वफादारी नहीं है। इसे अभी के अभी
  2563. 2:02:16यहां से फायर कर दो। जैसे ही मनसुख ने
  2564. 2:02:19शौर्य की यह बात सुनी वो जल्दी से बोला
  2565. 2:02:22नहीं साहब मुझे नौकरी से मत निकालिए मैं
  2566. 2:02:24बताता हूं उसका नंबर इसके बाद मनसुख ने
  2567. 2:02:28अपना मोबाइल निकाला और उसमें से छगन का
  2568. 2:02:30नंबर ढूंढकर शौर्य को नोट करा दिया तभी
  2569. 2:02:34शौर्य ने कहा अब तुम जा सकते हो मनसुख के
  2570. 2:02:39जाते ही मेनका ने शौर्य से पूछा अब तुम इस
  2571. 2:02:42नंबर का क्या करोगे? शौर्य हल्की मुस्कान
  2572. 2:02:45के साथ बोला, "तुम में जरा भी सब्र नहीं
  2573. 2:02:48है। मैंने अभी तुमसे कहा था कि जो भी होगा
  2574. 2:02:52तुम्हारे सामने होगा।"
  2575. 2:02:54शौर्य की बात सुनकर मेनका चुप हो गई। तभी
  2576. 2:02:58शौर्य ने मोबाइल उठाया। उसकी उंगलियां,
  2577. 2:03:01नंबर डायल कर रही थी और उसके चेहरे पर एक
  2578. 2:03:04अजीब सी शांति थी। अब शुरू होता है असली
  2579. 2:03:08खेल। फोन कनेक्ट होते ही दो रिंग के बाद
  2580. 2:03:11सामने [संगीत] से एक भारी सी आवाज गूंजी।
  2581. 2:03:14कौन बोल रहे हो?
  2582. 2:03:15शौर्य की आंखों में चमक आ गई। [संगीत] वो
  2583. 2:03:18तुरंत ही बोला, "क्या मैं छगन से बात कर
  2584. 2:03:21रहा हूं?" कुछ सेकंड की खामोशी के बाद उस
  2585. 2:03:24भारी आवाज में जवाब आया,
  2586. 2:03:26कौन है तू?
  2587. 2:03:27शौर्य हल्का सा हंसा और बोला, "वही जिसकी
  2588. 2:03:32वजह से आज तेरा दिन खराब होने वाला है।"
  2589. 2:03:35शौर्य के जवाब से फोन में खामोशी छा गई।
  2590. 2:03:38मेनका ने पहली बार महसूस किया शौर्य सिर्फ
  2591. 2:03:41[संगीत] बिजनेसमैन नहीं है। वह एक तूफान
  2592. 2:03:44है। मेनका को यकीन हो गया कि विहान
  2593. 2:03:47रायजादा की जिंदगी में शौर्य नाम का तूफान
  2594. 2:03:50तबाही [संगीत] मचाने वाला है। अब चकि
  2595. 2:03:52शौर्य ने फोन पर अभी अपनी पहचान उजागर
  2596. 2:03:55नहीं की थी। इसीलिए छगन कोई नया नंबर समझ
  2597. 2:03:58कर बोला।
  2598. 2:03:59ओह हेलो। तुम बोल कौन रहे हो?
  2599. 2:04:03शौर्य ने शांत लेकिन खतरनाक अंदाज में
  2600. 2:04:05कहा। यह तीसरी बार है जब तुमने मेरा
  2601. 2:04:08रास्ता काटा है। पहली बार सिटी [संगीत]
  2602. 2:04:11हॉस्पिटल के बाहर जब तुमने विक्की के कहने
  2603. 2:04:14पर मेरी बहन को उठाने की कोशिश की थी।
  2604. 2:04:17दूसरी बार बलराज खन्ना के लिए तुमने मेरी
  2605. 2:04:21वाइफ के साथ [संगीत] बदतमीजी करने की
  2606. 2:04:23कोशिश की थी। और आज तीसरी बार तुमने मेरी
  2607. 2:04:27एक दोस्त को अगवा कर लिया है। अब बताओ
  2608. 2:04:31मुझे तुम्हारे साथ क्या करना चाहिए?
  2609. 2:04:36एक पल के लिए [संगीत] सन्नाटा छा गया। छगन
  2610. 2:04:39को एक झटका सा लगा। अब वो पहचान चुका था
  2611. 2:04:42कि फोन के उस [संगीत] पार कौन है। उसने
  2612. 2:04:45तुरंत अपना लहजा बदला और बोला
  2613. 2:04:48उस्ताद आप मुझे नहीं पता था कि ये लड़की
  2614. 2:04:51आपकी दोस्त है।
  2615. 2:04:52शौर्य ने ठंडे स्वर में कहा। अब तो पता चल
  2616. 2:04:56गया है कि वो हमारी दोस्त है। तो बताओ तुम
  2617. 2:05:00हमारे लिए क्या कर सकते हो? शौर्य की बात
  2618. 2:05:03सुनते ही छगन मजबूरी भरे स्वर में बोला
  2619. 2:05:07माफ कीजिए उस्ताद अगर आपका फोन कुछ देर
  2620. 2:05:10पहले आया होता तो शायद मैं आपकी बात मान
  2621. 2:05:12भी जाता लेकिन अब मैं चाहकर भी कुछ नहीं
  2622. 2:05:15कर सकता।
  2623. 2:05:17शौर्य को लगा जरूर कोई गड़बड़ हो चुकी है।
  2624. 2:05:20उसने तुरंत ही गंभीर होकर पूछा। क्यों? अब
  2625. 2:05:24ऐसा क्या हो गया कि तुम कुछ नहीं कर सकते?
  2626. 2:05:27छगन ने धीरे-धीरे कहा।
  2627. 2:05:29असल में अभी थोड़ी देर पहले ही मैंने रुचि
  2628. 2:05:32मल्होत्रा को उनके हवाले किया है। हमारी
  2629. 2:05:35डील सिर्फ अगवा करने तक थी।
  2630. 2:05:38शौर्य की आंखों में गुस्से की आग भड़क
  2631. 2:05:41उठी। उसने दांत भीचते हुए कहा, विहान
  2632. 2:05:44रायजादा
  2633. 2:05:46तूने अपनी औकात से बढ़कर काम किया है। मैं
  2634. 2:05:50तुझे छोडूंगा नहीं। शौर्य की बात सुनकर
  2635. 2:05:53छगन बोला, उस्ताद यह सब कुछ विहान रायजादा
  2636. 2:05:57अकेले नहीं कर रहा है। कोई और भी उसके साथ
  2637. 2:06:00है।
  2638. 2:06:01छगन की बात सुनकर शौर्य का माथा ठनका।
  2639. 2:06:04शौर्य ने तुरंत पूछा कौन है वो जो विहान
  2640. 2:06:08रायजादा की ताकत बना हुआ है? छगन ने धीमे
  2641. 2:06:11स्वर में कहा
  2642. 2:06:12उस्ताद आप किसी को मत बताइएगा। विहान
  2643. 2:06:16रायजादा की ताकत बना है गजराज सोलंकी।
  2644. 2:06:20शौर्य ने तुरंत ही पूछा। कहां मिलेगा ये?
  2645. 2:06:24अभी रुचि कहां है? छगन कुछ पल चुप रहा।
  2646. 2:06:28फिर बोला
  2647. 2:06:29उस्ताद विशालगढ़ से जो बहादुरगढ़ को जाने
  2648. 2:06:32वाला हाईवे है उसी पर लगभग 5 कि.मी. आगे
  2649. 2:06:36सोलंकी फार्म हाउस है। अभी रुचि वहीं है।
  2650. 2:06:40जैसे ही छगन को लगा कि शौर्य फोन काटने
  2651. 2:06:43वाला है। उसने जल्दी [संगीत] से कहा
  2652. 2:06:45उस्ताद आप वहां भूल कर भी मत आइएगा। वहां
  2653. 2:06:49सोलंकी के 10-15 बाउंसर पहले से मौजूद है।
  2654. 2:06:53मैं खुद देख लूंगा। शौर्य ने ठंडे स्वर
  2655. 2:06:56में जवाब दिया और फोन काट दिया। फोन
  2656. 2:06:59स्पीकर पर था। इसीलिए मेनका और विक्रम
  2657. 2:07:02दोनों ने पूरी बातचीत सुन ली थी। मेनका ने
  2658. 2:07:05कभी सोचा भी नहीं था कि शौर्य का छगन जैसे
  2659. 2:07:08लोगों के साथ इतना गहरा कनेक्शन है कि वो
  2660. 2:07:11उसे उस्ताद कह रहा है। फोन कटने के बाद
  2661. 2:07:15मेनका ने शौर्य से पूछा। अब तुम क्या
  2662. 2:07:18करोगे? क्या पुलिस को फोन कर दें? मेनका
  2663. 2:07:21की बात सुनकर शौर्य हल्का सा मुस्कुराया
  2664. 2:07:24और बोला नहीं जो भी करना है हमें खुद ही
  2665. 2:07:29करना होगा। मेनका चिंतित स्वर में बोली पर
  2666. 2:07:32हम क्या कर पाएंगे? तुमने सुना नहीं कि
  2667. 2:07:35छगन क्या कह रहा था। वहां सोलंकी के 10-15
  2668. 2:07:39बाउंसर हैं। शौर्य ने उसकी तरफ देखते हुए
  2669. 2:07:42कहा, तुम्हें यह सोचने की जरूरत नहीं है।
  2670. 2:07:45तुम बस हमारा इंतजार करो। मैं और [संगीत]
  2671. 2:07:47विक्रम सोलंकी फार्म हाउस के लिए निकलते
  2672. 2:07:49हैं। शौर्य की बात सुनकर विक्रम भी खड़ा
  2673. 2:07:52हो गया। मेनका ने देखा कि शौर्य की बात
  2674. 2:07:55सुनकर विक्रम के चेहरे पर कोई शिकन नहीं
  2675. 2:07:58थी। जब उसने दोनों को उठते देखा तो वह
  2676. 2:08:01बोली तो फिर ठीक है मैं भी तुम्हारे साथ
  2677. 2:08:04चलूंगी। शौर्य ने आश्चर्य से उसकी तरफ
  2678. 2:08:06देखा। इसकी कोई जरूरत नहीं है। तुम यहीं
  2679. 2:08:09होटल में इंतजार करो। मैं जल्दी ही रुचि
  2680. 2:08:12को वहां से छुड़ाकर वापस आ जाऊंगा। शौर्य
  2681. 2:08:15का कॉन्फिडेंस देखकर मेनका बोली। यह यूके
  2682. 2:08:19नहीं इंडिया है। मैं गजराज सोलंकी के नाम
  2683. 2:08:22से वाकिफ हूं। वो कोई अच्छा आदमी नहीं है।
  2684. 2:08:25उसका कनेक्शन अंडरवर से भी है। शौर्य ने
  2685. 2:08:29बेपरवाही से कहा, तुम मेरी चिंता मत करो।
  2686. 2:08:33मैं जितना अच्छों के लिए अच्छा हूं,
  2687. 2:08:34[संगीत] उतना ही बुरों के लिए बुरा हूं।
  2688. 2:08:37आज के बाद यह गजराज सोलंकी भी याद रखेगा
  2689. 2:08:41कि उसका पाला किससे पड़ा है।
  2690. 2:08:44मेनका ने उसे चुनौती देते हुए कहा, "अगर
  2691. 2:08:47तुम्हें खुद पर इतना ही कॉन्फिडेंस है तो
  2692. 2:08:49हमें साथ ले जाने से क्यों डर रहे हो?"
  2693. 2:08:51तभी शौर्य ने हाथ जोड़ते हुए कहा, "अरे
  2694. 2:08:55ठीक है मेरी मां, तुम साथ चलो।" पर प्लीज
  2695. 2:08:57हमारे लिए मुसीबत मत बनना। मेनका के चेहरे
  2696. 2:09:00पर मुस्कान आ गई। वो तुरंत खड़ी [संगीत]
  2697. 2:09:03हुई और बोली, चलो। कुछ ही देर में तीनों
  2698. 2:09:06होटल से बाहर आ गए। विक्रम ने कार निकाली
  2699. 2:09:09और तीनों उसमें बैठ गए। शौर्य ने मोबाइल
  2700. 2:09:12में सोलंकी फार्म हाउस लोकेशन डाली। करीब
  2701. 2:09:15आधे घंटे बाद वे फार्म हाउस के पास पहुंच
  2702. 2:09:18गए। विक्रम ने लगभग 500 मीटर पहले ही कार
  2703. 2:09:21रोक दी। सामने सोलंकी फार्म हाउस का बोर्ड
  2704. 2:09:24साफ नजर आ रहा था जो चारों तरफ से ऊंची
  2705. 2:09:28दीवारों से घेरा हुआ था। विक्रम ने शौर्य
  2706. 2:09:30की तरफ देखा जैसे आगे के निर्देश का
  2707. 2:09:33इंतजार कर रहा हो। शौर्य बोला यहीं साइड
  2708. 2:09:36में गाड़ी खड़ी कर लो। गाड़ी रुकने के बाद
  2709. 2:09:39शौर्य मेनका की तरफ मुड़ा। तुम यहीं कार
  2710. 2:09:42में रहोगी। मैं और विक्रम अंदर जाएंगे।
  2711. 2:09:45अगर आधे घंटे में हम वापस नहीं आए या
  2712. 2:09:47तुम्हें कोई खबर नहीं मिली तो उसके बाद
  2713. 2:09:50तुम जो चाहो कर सकती हो। यह सुनकर मेनका
  2714. 2:09:53के चेहरे पर चिंता की लहर दौड़ गई। लेकिन
  2715. 2:09:56उसने चुपचाप सिर हिला दिया। शौर्य और
  2716. 2:09:59विक्रम कार से उतर गए। शौर्य ने मेनका से
  2717. 2:10:03कहा, "तुम ड्राइविंग सीट पर आ जाओ और
  2718. 2:10:05गाड़ी को थोड़ा आगे पीछे करती रहना ताकि
  2719. 2:10:08किसी को शक ना हो। मेनका ड्राइविंग सीट पर
  2720. 2:10:11बैठ गई। जाते-जाते उसने धीमे स्वर में
  2721. 2:10:14कहा। अपना ध्यान रखना। शौर्य ने मुस्कुरा
  2722. 2:10:19कर जवाब दिया। कुछ नहीं होगा मुझे। मैं
  2723. 2:10:21आता हूं। इसके बाद दोनों फार्म हाउस की
  2724. 2:10:24तरफ बढ़ गए। करीब 100 मीटर पहले ही विक्रम
  2725. 2:10:28ने रास्ता बदल लिया और एक पगडंडी पकड़ ली।
  2726. 2:10:31अब शौर्य अकेला ही मुख्य गेट की तरफ बढ़ा।
  2727. 2:10:34फार्म हाउस का बड़ा स्टील गेट अंदर से बंद
  2728. 2:10:36था। बाहर कोई नजर नहीं आ रहा था। उसने गेट
  2729. 2:10:40में लगी भारी लोहे की साकिल को पकड़ा और
  2730. 2:10:43उसे जोर से पीटा। कुछ देर इंतजार किया
  2731. 2:10:46लेकिन शौर्य को दरवाजे पर कोई हलचल नजर
  2732. 2:10:49नहीं आई। शौर्य एक बार चिंता में पड़ गया।
  2733. 2:10:52कहीं उनको मेरे आने की खबर तो नहीं हो गई।
  2734. 2:10:56कहीं वह रुचि को लेकर यहां से निकल तो
  2735. 2:10:59नहीं गए। शौर्य के कॉन्फिडेंस का लेवल
  2736. 2:11:01इतना ऊंचा था कि सोलंकी फार्म हाउस की
  2737. 2:11:03दीवारें उसके आगे छोटी लग रही थी। शौर्य
  2738. 2:11:06के इरादे फार्म हाउस के भारी-भरकम मुख्य
  2739. 2:11:09गेट के लोहे की मजबूती को भी चुनौती देने
  2740. 2:11:11को तैयार थे। हवा में एक अजीब सा भारीपन
  2741. 2:11:14था जैसे कुदरत को भी पता हो कि आज यहां
  2742. 2:11:17कुछ बड़ा होने वाला है। शौर्य फार्म हाउस
  2743. 2:11:20के विशाल लोहे के गेट के बाहर आकर रुका।
  2744. 2:11:23उसकी आंखों में जलती आग उस ठंडी ढलती शाम
  2745. 2:11:26को भी मात दे रही थी। उसने अपने दोनों
  2746. 2:11:29हाथों की मुट्ठियों को भी। यह जानते हुए
  2747. 2:11:32कि वह मौत के जबड़े में कदम रखने जा रहा
  2748. 2:11:35है। फिर भी डर उसके करीब भी नहीं भटक रहा
  2749. 2:11:38था। उसने लोहे के उस भारी गेट की साल को
  2750. 2:11:41हाथ में लेकर जोर से बजाया। लोहे से लोहे
  2751. 2:11:44के टकराने की वो आवाज पूरे सन्नाटे को
  2752. 2:11:47चीरते हुए अंदर तक गई। लेकिन अंदर से कोई
  2753. 2:11:50जवाब नहीं आया। शौर्य के सब्र का बांध
  2754. 2:11:52टूटने लगा। उसने दोबारा और भी तेज आवाज
  2755. 2:11:56में साल को पीटा। इस बार उसकी चोट में
  2756. 2:11:59गुस्सा था। एक चेतावनी थी। फिर कुछ पलों
  2757. 2:12:02बाद सन्नाटा टूटा। गेट के दूसरी तरफ से
  2758. 2:12:06भारी जूतों की आहट सुनाई दी। उस बड़े से
  2759. 2:12:09गेट में ही मौजूद छोटा गेट एक चरमराहट के
  2760. 2:12:11साथ खुला। एक हट्टाकट्टा चौड़ी छाती वाला
  2761. 2:12:14आदमी बाहर आया। उसकी गर्दन किसी सांड की
  2762. 2:12:17तरह मोटी थी और हाथों पर बने निशान गवाही
  2763. 2:12:20दे रहे थे कि वो गजराज सोलंकी का सबसे
  2764. 2:12:23वफादार और खूंखार पालतू है। उसने शौर्य को
  2765. 2:12:27ऊपर से नीचे तक घूरते हुए पूछा। कौन हो
  2766. 2:12:30तुम? और यहां क्या करने आए हो? शौर्य के
  2767. 2:12:34चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान आई जो अक्सर
  2768. 2:12:36शिकार को डरा देती है। उसने शांति से कहा
  2769. 2:12:40मेरा नाम श्रवण है और मैं गजराज सोलंकी से
  2770. 2:12:43मिलने आया हूं। तुम जो कोई भी हो चले जाओ
  2771. 2:12:47यहां से। अभी सर किसी से भी मिलने के मूड
  2772. 2:12:50में नहीं है। वो आदमी इतना बोलकर वापस
  2773. 2:12:53पलटने ही वाला था कि शौर्य उसे रोकते हुए
  2774. 2:12:56बोला। मुझे वापस भेजने से पहले एक बार
  2775. 2:12:59अपने बॉस को मेरा नाम बताकर पूछ तो लो कि
  2776. 2:13:02वो मुझसे मिलना चाहते हैं कि नहीं। मैंने
  2777. 2:13:05कहा ना चले जाओ यहां से। अभी बॉस किसी
  2778. 2:13:09जरूरी काम में [संगीत] व्यस्त हैं। इसलिए
  2779. 2:13:11तुम उनसे बाद में मिल लेना। वो आदमी शौर्य
  2780. 2:13:14को गुस्से से घूरते हुए बोला। कहीं
  2781. 2:13:16तुम्हारे बॉस रुचि मल्होत्रा और विहान
  2782. 2:13:18रायजादा के साथ तो बिजी नहीं है। अगर ऐसा
  2783. 2:13:21है तो अपने बॉस से बोलो। श्रवण आपसे मिलना
  2784. 2:13:24चाहता है। वो खुद ही मुझे बुलाएंगे। शौर्य
  2785. 2:13:27मुस्कुराते हुए बोला। शौर्य की बात सुनकर
  2786. 2:13:30उसने उसे तिरछी नजर से घूरा। वापस
  2787. 2:13:33जाते-जाते वो अचानक रुक गया क्योंकि उसने
  2788. 2:13:36उसके मुंह से रुचि मल्होत्रा और विहान
  2789. 2:13:38रायजादा का नाम सुना था। इसीलिए उसने अपना
  2790. 2:13:41मोबाइल निकाला और गजराज सोलंकी को फोन लगा
  2791. 2:13:44दिया। एक पल बाद ही दूसरी तरफ से फोन
  2792. 2:13:47उठाया गया। तो इस पहलवान ने कहा सर श्रवण
  2793. 2:13:50नाम का कोई शख्स आया है। वो आपसे मिलना
  2794. 2:13:53चाहता है। दूसरी तरफ से गजराज सोलंकी ने
  2795. 2:13:56पूछा
  2796. 2:13:57कौन है श्रवण?
  2797. 2:13:58सर इसे रुचि मल्होत्रा और विहान रायजादा
  2798. 2:14:01के बारे में पता है। पहलवान गजराज के सवाल
  2799. 2:14:04पर बोला। तभी शौर्य पीछे से चिल्ला उठा।
  2800. 2:14:07अपने बॉस से कहो कि अगर मेरे बारे में
  2801. 2:14:09जानना है तो वह विहान रायजादा से पूछ ले।
  2802. 2:14:12शौर्य इतना जोर से बोला कि दूसरी तरफ
  2803. 2:14:15मौजूद गजराज को भी फोन पर उसकी आवाज सुनाई
  2804. 2:14:17दे गई। उसने कहा,
  2805. 2:14:20ठीक है, तुम उसे अंदर ले आओ।
  2806. 2:14:22पहलवान ने फोन काटा और शौर्य से कड़े स्वर
  2807. 2:14:25में बोला, "चलो मेरे साथ।" शाम का धुंधलका
  2808. 2:14:29पूरी तरह अंधेरे में बदल चुका था। शौर्य
  2809. 2:14:31से अलग होने के बाद विक्रम एक पगडंडी पकड़
  2810. 2:14:34कर खेतों के रास्ते उस फार्म हाउस के
  2811. 2:14:36पिछले हिस्से में पहुंच गया था। फार्म
  2812. 2:14:38हाउस की चार दीवारी किसी किले की तरह ऊंची
  2813. 2:14:41थी। जिसके ऊपर कटीले तार लगे थे। विक्रम
  2814. 2:14:44साय की तरह दीवार के साथ-साथ चलता रहा।
  2815. 2:14:48उसने देखा कि एक जगह कई सारे पेड़ चार
  2816. 2:14:51दीवारी के काफी करीब हैं। यह हिस्सा अंदर
  2817. 2:14:54जाने के लिए सबसे सही था। विक्रम ने एक
  2818. 2:14:57बार चारों तरफ नजर दौड़ाई। चारों तरफ गहरा
  2819. 2:15:00सन्नाटा पसरा था। वो मुड़ा और बिजली जैसी
  2820. 2:15:03फुर्ती के साथ एक जंप लिया। अगले ही पल वो
  2821. 2:15:06दीवार के ऊपर था। उसने अंदर झांका। वहां
  2822. 2:15:09एक तालाब था और उसके आगे एक आलीशान कोठी।
  2823. 2:15:13वो कोठी ही उसका लक्ष्य थी। दीवार से उतर
  2824. 2:15:15कर विक्रम पेड़ों की ओट लेते हुए आगे
  2825. 2:15:18बढ़ा। तभी उसे दो पहलवान जैसे आदमी बेंच
  2826. 2:15:21पर बैठे बातें करते दिखाई दिए। विक्रम
  2827. 2:15:24पीछे से घूमते हुए अचानक उनके सामने आ
  2828. 2:15:27खड़ा हुआ। उन दोनों की सिट्टी-पिट्टी गुम
  2829. 2:15:29हो गई। उन दोनों में से एक ने पूछा, "तुम
  2830. 2:15:32कौन हो?" विक्रम ने उसका सवाल सुना और
  2831. 2:15:35बोला, "वैसे मुझे विक्रम कहते हैं। मैं
  2832. 2:15:37यहां तुम दोनों से कुछ जानने के लिए आया
  2833. 2:15:39हूं।" अभी कुछ समय पहले एक लड़की यहां लाई
  2834. 2:15:42गई थी। मैं यह जानना चाहता हूं कि वो अभी
  2835. 2:15:45कहां पर है। विक्रम के मुंह से लड़की के
  2836. 2:15:47बारे में सुनकर दोनों पहलवान चौकन्ने हो
  2837. 2:15:50गए और तेजी से अपनी जगह पर खड़े हो गए।
  2838. 2:15:53दोनों में से एक विक्रम के सामने आकर
  2839. 2:15:55बोला, "तुम हो कौन? और तुम यहां तक आ कैसे
  2840. 2:15:58गए?" विक्रम फिर से उसी मुस्कान के साथ
  2841. 2:16:00बोला, "मैं कौन हूं? यह तो मैंने पहले ही
  2842. 2:16:04बता दिया। और रहा सवाल कि मैं यहां आया
  2843. 2:16:06कैसे? तो मैं पीछे की चार दीवारी फान कर
  2844. 2:16:09आया हूं। अब अगर मैंने तुम्हारे सवाल का
  2845. 2:16:12जवाब दे दिया है तो अब तुम मेरे सवाल का
  2846. 2:16:14जवाब दो कि वो लड़की अभी कहां पर है?"
  2847. 2:16:17विक्रम की बात सुनकर दोनों पहलवानों के
  2848. 2:16:20तेवर बदलने लगे थे। दोनों ने विक्रम को
  2849. 2:16:22आगे पीछे से घेर लिया और उनमें से एक बोला
  2850. 2:16:25तुम यहां आ तो गए हो अपने पैरों पर यहां
  2851. 2:16:28से वापस अपने पैरों से नहीं जा पाओगे। भाई
  2852. 2:16:31मेरे मैं यहां चलकर आया हूं। तो मैं चाहता
  2853. 2:16:34भी नहीं कि यहां से जाते समय भी दोबारा
  2854. 2:16:37चलकर ही जाऊं। [संगीत] यहां से जाऊंगा तो
  2855. 2:16:39किसी गाड़ी में बैठकर जाऊंगा। बस तुम
  2856. 2:16:42जल्दी से मुझे यह बता दो कि वो लड़की अभी
  2857. 2:16:44कहां पर है? विक्रम उसकी बात का मजाक
  2858. 2:16:46उड़ाते हुए बोला। विक्रम का जवाब सुनकर वह
  2859. 2:16:49पहलवान गुस्से में बोला यहां क्या कोई
  2860. 2:16:51कॉमेडी शो चल रहा है जो तुम यहां आए और
  2861. 2:16:54हमारा मजाक उड़ाकर यूं ही चले जाओगे? इतना
  2862. 2:16:57बोलकर वो पहलवान विक्रम पर झपटा। पर
  2863. 2:16:59विक्रम पहले से ही इसके लिए तैयार था।
  2864. 2:17:01जैसे ही वह विक्रम के पास पहुंचा, विक्रम
  2865. 2:17:04ने सीधा पंच उसकी छाती और गर्दन के बीच
  2866. 2:17:06में जड़ दिया। वो पहलवान जिस तेजी से
  2867. 2:17:09विक्रम पर झपटा था, उसी तेजी से पीछे जाकर
  2868. 2:17:12धड़ाम से जमीन पर गिरा और ऐसा गिरा कि
  2869. 2:17:15दोबारा उठ नहीं पाया। विक्रम ने उसे ऐसी
  2870. 2:17:18जगह पर पंच किया था कि उसका बेहोश होना तय
  2871. 2:17:20था। विक्रम के पीछे खड़े दूसरे पहलवान ने
  2872. 2:17:24जब अपने साथी का यह हाल देखा तो उसकी
  2873. 2:17:26आंखों में डर झलकने लगा। अगर तुम अपने
  2874. 2:17:29साथी जैसी हालत नहीं करवाना चाहते तो
  2875. 2:17:32जल्दी से मुझे बता दो कि वो लड़की कहां पर
  2876. 2:17:34है। विक्रम उसे घूरते हुए बोला। पर उसने
  2877. 2:17:37विक्रम की बातों पर ध्यान नहीं दिया और
  2878. 2:17:40तेजी से अपना घूंसा विक्रम पर चला दिया।
  2879. 2:17:42विक्रम ने अपने हाथ से उसकी कलाई पकड़ ली
  2880. 2:17:45और ऐसा झटका दिया कि उस पहलवान की कलाई
  2881. 2:17:47पलट कर उसकी पीठ पर आ गई। वो दर्ज से
  2882. 2:17:50करहाते हुए बोला छोड़ दो मुझे। मैंने कहा
  2883. 2:17:54छोड़ दो मुझे। विक्रम ने कहा अगर तुम
  2884. 2:17:57चाहते हो कि मैं तुम्हें छोड़ दूं तो आराम
  2885. 2:17:59से बता दो कि वो लड़की कहां है जिसे अभी
  2886. 2:18:02थोड़ी देर पहले यहां लाया गया था। उस
  2887. 2:18:05पहलवान से दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
  2888. 2:18:08उसने करहाते हुए कहा, वो लड़की उस सामने
  2889. 2:18:10वाली कोठी में ही है और अभी उसे कहीं ले
  2890. 2:18:13जाने का कोई प्लान भी नहीं है। बढ़िया।
  2891. 2:18:17अब तुम मेरे एक और सवाल का जवाब दे दो।
  2892. 2:18:20यहां पर तुम्हारे जैसे और कितने लोग हैं?
  2893. 2:18:22विक्रम उसके हाथ पर अपनी पकड़ मजबूत करता
  2894. 2:18:25हुआ बोला तो दर्द से तड़पता हुआ पहलवान
  2895. 2:18:27बोला, यहां पर मेरे जैसे और भी 10-12 लोग
  2896. 2:18:31हैं। मैं तुम्हें बता दूं कि तुम यहां से
  2897. 2:18:34बचकर जा नहीं पाओगे। उस पहलवान का हाल
  2898. 2:18:37देखने के बाद विक्रम को लगा कि अब यह उसके
  2899. 2:18:39किसी काम का नहीं है। तो एक झटके से उसे
  2900. 2:18:42जमीन पर पटक दिया और अगला कदम सोचने लगा।
  2901. 2:18:45दूसरी तरफ शौर्य उस पहलवान के साथ गजराज
  2902. 2:18:48सोलंकी की कोठी में पहुंचा। इस कोठी के
  2903. 2:18:51अंदर आते हुए शौर्य [संगीत] ने नोटिस किया
  2904. 2:18:53कि गजराज सोलंकी ने अपनी सुरक्षा को ध्यान
  2905. 2:18:56में रखकर कोई खास इंतजाम नहीं किया था।
  2906. 2:18:59क्योंकि गजराज सोलंकी इस भरोसे में था कि
  2907. 2:19:01इस शहर में कोई उसके खिलाफ जाने की हिम्मत
  2908. 2:19:04नहीं कर सकता।
  2909. 2:19:05[संगीत]
  2910. 2:19:06अंदर पहुंचते ही उसने देखा कि गजराज
  2911. 2:19:08सोलंकी किसी से फोन पर बात कर रहा था।
  2912. 2:19:11उसके पीछे दो पहलवान टाइप के आदमी खड़े
  2913. 2:19:14थे। विहान रायजादा उसके साथ वाले सोफे पर
  2914. 2:19:17बैठा हुआ था। विहान के ऑोजिट जो सोफा था
  2915. 2:19:20उस पर छगन और मगन बैठे हुए थे। और उन
  2916. 2:19:23दोनों के पीछे रुचि मल्होत्रा एक कुर्सी
  2917. 2:19:26पर डरी सहमी सी बैठी हुई थी। फोन रखने के
  2918. 2:19:29बाद गजराज सोलंकी शौर्य की तरफ पलटा। उसके
  2919. 2:19:33साथ ही विहान रायजादा भी शौर्य की तरफ
  2920. 2:19:35बढ़ता हुआ बोला तुम्हारी हिम्मत की दाद
  2921. 2:19:38देनी पड़ेगी कि तुमने यहां आने की जुर्रत
  2922. 2:19:41कर दी। अभी तुम्हें पता ही कहां है
  2923. 2:19:43रायजादा कि मैं और क्या-क्या कर सकता हूं।
  2924. 2:19:47शौर्य बिना किसी डर के बोला तो तुम ही
  2925. 2:19:49श्रवण हो जिसने विहान को थप्पड़ मारने की
  2926. 2:19:52हिम्मत की और उसके बाद यहां मेरी मांध में
  2927. 2:19:56भी आ गए। वाकई मानना पड़ेगा। तुम में
  2928. 2:19:59हिम्मत तो है लड़के। गजराज सोलंकी शौर्य
  2929. 2:20:02को ऊपर से नीचे तक देखते हुए अचानक ही
  2930. 2:20:05बोला, पर तुम्हें इस जगह का पता कैसे चला?
  2931. 2:20:08सामने बैठे छगन ने गजराज सोलंकी की यह बात
  2932. 2:20:11सुनी तो उसके कान खड़े हो गए। दिल में
  2933. 2:20:14सच्ची चाह हो तो लोग भगवान तक को ढूंढ
  2934. 2:20:17लेते हैं। फिर आप कौन सी बड़ी चीज हो?
  2935. 2:20:19शौर्य उपहास करने वाले भाव में बोला। रुचि
  2936. 2:20:22मल्होत्रा ने जब शौर्य को देखा तो उसके
  2937. 2:20:25डरे हुए चेहरे पर एक उम्मीद की किरण दिखाई
  2938. 2:20:27दी। वो आश्चर्य से शौर्य को देख रही थी और
  2939. 2:20:30सोच रही थी कि क्या शौर्य उसके लिए यहां
  2940. 2:20:33आया है। दूसरी तरफ जब मगन ने शौर्य को
  2941. 2:20:36यहां देखा तो उसके चेहरे पर आग सी दिखाई
  2942. 2:20:38देने लगी। वो अपनी जगह से खड़ा हुआ और
  2943. 2:20:41शौर्य के करीब जाकर बोला कहते हैं कि जब
  2944. 2:20:44गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की तरफ
  2945. 2:20:47भागता है। लगता है तुम्हारी मौत आई है
  2946. 2:20:50इसीलिए तुम यहां आ गए हो। शौर्य ने मगन की
  2947. 2:20:54बात सुनकर जोर से हंसते हुए कहा, कमाल है।
  2948. 2:20:57मैंने सोचा नहीं था कि तुम मुझे यहां
  2949. 2:20:59मिलोगे। लगता है मुझसे अपनी पहली मुलाकात
  2950. 2:21:03को भूल गए हो। उसे कैसे भूल जाऊंगा। उसी
  2951. 2:21:07को याद करके ही तो रोज ऊपर वाले से दुआ
  2952. 2:21:10मांगता हूं कि मुझे तुमसे बदला लेने का
  2953. 2:21:12मौका दे। तभी तो मैं अपने दोस्त की आंखों
  2954. 2:21:15पर पड़ी पट्टी को उतार सकूंगा जो पता नहीं
  2955. 2:21:18तुम्हें क्या समझने लगा है। अच्छा पर तुम
  2956. 2:21:22वो करोगे कैसे? शौर्य मगन की आंखों में
  2957. 2:21:25देखते हुए बोला तो मगन घमंड से बोला शेर
  2958. 2:21:28की गुफा में आ गए हो और कहते हो कि मैं
  2959. 2:21:31तुमसे बदला कैसे लूंगा? अब यहां तुम्हें
  2960. 2:21:34बचाने कौन आएगा? तभी छगन मगन के सामने आकर
  2961. 2:21:37बोला, "मगन, तुम यह क्या कर रहे हो? हमारा
  2962. 2:21:41काम खत्म हो गया है। चलो घर चलते हैं।
  2963. 2:21:43[संगीत] इसका क्या करना है वो सोलंकी साहब
  2964. 2:21:46देख लेंगे। क्यों भाई? आखिर ये चल क्या
  2965. 2:21:48रहा है? किन-किन लोगों से तुमने दुश्मनी
  2966. 2:21:51मोल ले रखी है? गजराज सोलंकी शौर्य के पास
  2967. 2:21:54जाकर बोला तो शौर्य मुस्कुराते हुए बोला,
  2968. 2:21:57"क्या करें? ऊपर वाला कुछ ज्यादा ही
  2969. 2:22:00मेहरबान है मुझ पर।" आपने देखा ठाकुर साहब
  2970. 2:22:03यह कुछ ज्यादा बड़बोला नहीं बन रहा है।
  2971. 2:22:05विहान रायजादा ने गजराज सोलंकी से कहा
  2972. 2:22:08गजराज सोलंकी अभी भी शौर्य को ही ऑब्जर्व
  2973. 2:22:11कर रहे थे। उनके ठिकाने में आकर भी शौर्य
  2974. 2:22:14के चेहरे पर कोई भय नहीं था। इस बात से वह
  2975. 2:22:17हैरान थे। वो इस बात से भी परेशान थे कि
  2976. 2:22:20शौर्य ने यह कैसे पता लगाया कि [संगीत]
  2977. 2:22:22रुचि उनके फार्म हाउस में है। जब तक
  2978. 2:22:24उन्हें इस बात का जवाब नहीं मिल जाता वो
  2979. 2:22:27शौर्य के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले सकते
  2980. 2:22:29थे। पता नहीं वह अपने पीछे क्या तैयारी
  2981. 2:22:32करके आया हो। यही बात उन्हें परेशान कर
  2982. 2:22:34रही थी। वहीं मगन जाने से पहले शौर्य से
  2983. 2:22:38अपनी मार का बदला लेना चाहता था। छगन की
  2984. 2:22:41समस्या यह थी कि वो इन सबके बीच ज्यादा
  2985. 2:22:43कुछ बोल भी नहीं सकता था। नहीं तो यह राज
  2986. 2:22:46खुल जाता कि उसी ने शौर्य को यहां के बारे
  2987. 2:22:49में बताया है। मगर ने छगन से अपना हाथ
  2988. 2:22:51छुड़ाकर गजराज सोलंकी से पूछा। ठाकुर साहब
  2989. 2:22:55आपको इसके साथ जो करना है वह तो आप करेंगे
  2990. 2:22:57ही पर जाने से पहले इसका कुछ उधार है मुझ
  2991. 2:23:00पर। मैं उसे करके जाना चाहता हूं।
  2992. 2:23:04मगन के इतना बोलने के बाद भी जब गजराज को
  2993. 2:23:06शौर्य के चेहरे पर कोई शिकन दिखाई नहीं दी
  2994. 2:23:09तो उन्होंने सोचा कि मगन को थोड़ा फ्री
  2995. 2:23:11हैंड देकर देखा जाए। यही सोचकर वे बोले
  2996. 2:23:14अगर सच में तुम्हें अपना उधार चुकता करना
  2997. 2:23:17है तो तुम उसे चुका सकते हो। गजराज सोलंकी
  2998. 2:23:20से ग्रीन सिग्नल मिलते ही मगन बड़ी तेजी
  2999. 2:23:22से शौर्य की तरफ बढ़ा और तभी पूरे हॉल में
  3000. 2:23:26एक जोरदार थप्पड़ की आवाज गूंज उठी। गजराज
  3001. 2:23:29सोलंकी के दरबार में थप्पड़ की गूंज इतनी
  3002. 2:23:32जबरदस्त थी कि वहां मौजूद जितने भी तीस
  3003. 2:23:34मार खान थे उनकी आंखें फटी की फटी रह गई।
  3004. 2:23:38अपने सामने का नजारा देखकर सभी हैरान थे।
  3005. 2:23:41शौर्य का चेहरा गुस्से में लाल हो रहा था
  3006. 2:23:44और थप्पड़ खाकर मगन का गाल लाल था। एक पल
  3007. 2:23:48के लिए मगन को सब कुछ घूमता सा दिख रहा था
  3008. 2:23:51और उसके पैर जमीन पर ठहर से गए थे। पिछले
  3009. 2:23:55कुछ सेकंड्स में जो भी घटित हुआ वो गजराज
  3010. 2:23:58गैंग की सोच के बिल्कुल उल्टा था। कुछ पल
  3011. 2:24:02के लिए वहां सन्नाटा सा पसर गया। मगन अपने
  3012. 2:24:05गाल पकड़े भौचक्का सा शौर्य की तरफ देख
  3013. 2:24:08रहा था। वो समझ नहीं पाया कि शौर्य ने उसे
  3014. 2:24:11कब थप्पड़ जड़ दिया था। वो शौर्य के हाथों
  3015. 2:24:15एक बार फिर अपनी हार बर्दाश्त नहीं कर सका
  3016. 2:24:18और हुर्राया
  3017. 2:24:20मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं तुमने फिर से
  3018. 2:24:24मेरे ऊपर हाथ उठाया
  3019. 2:24:26मगन की बात सुनकर शौर्य मुस्कुरा कर बोला
  3020. 2:24:30शुक्र मनाओ कि अभी तक अपने पैरों पर खड़े
  3021. 2:24:33हो नहीं तो अगर [संगीत] मैं अपनी ताकत से
  3022. 2:24:35मारता तो भी जमीन की धूल चाट रहे होते।
  3023. 2:24:40गैंग वालों के सामने सरेआम हो रही
  3024. 2:24:43बेइज्जती से मगन के बदन में आग लग गई और
  3025. 2:24:46वह फिर शौर्य की ओर घूंसा लेकर दौड़ा।
  3026. 2:24:49शौर्य ने खड़े-खड़े अपने शरीर को एक दिशा
  3027. 2:24:52में झुकाया और खुद को उसके घूंसे [संगीत]
  3028. 2:24:54से बचा लिया और फिर से मगन के गाल पर एक
  3029. 2:24:57जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। इस बार मगन खड़ा
  3030. 2:25:00नहीं रह पाया और सीधा जमीन पर गिरा। छगन
  3031. 2:25:04दौड़ कर मगन के पास आया। उसने मगन को
  3032. 2:25:07सहारा दिया। छगन को उम्मीद नहीं थी कि
  3033. 2:25:10शौर्य इतने लोगों के बीच भी मगन का यह हाल
  3034. 2:25:13करेगा। वो समझ गया कि उसे गजराज सोलंकी का
  3035. 2:25:17भी खौफ नहीं है। इसीलिए अभी यहां से चले
  3036. 2:25:21जाना [संगीत] ही ठीक है।
  3037. 2:25:24छगन ने सोलंकी साहब से कहा
  3038. 2:25:28ठाकुर साहब अभी मैं इसको लेकर जा रहा हूं।
  3039. 2:25:31आपसे बाद में मिलता हूं।
  3040. 2:25:34लो सोलंकी साहब इसका हिसाब तो हो
  3041. 2:25:37गया। अब अपनी बात कर लें।
  3042. 2:25:40शौर्य ने यह बात गजराज से कही थी। पर उसकी
  3043. 2:25:43नजर सामने बैठी रुचि की ओर थी। शौर्य ने
  3044. 2:25:46अपना हाथ उठाकर रुचि को कहा, हाय रुचि
  3045. 2:25:50कैसी हो तुम? मैं आ गया हूं। इन्होंने
  3046. 2:25:54तुम्हें कोई तकलीफ तो नहीं दी। अगर दी है
  3047. 2:25:57तो उसका हिसाब इनको करना पड़ेगा।
  3048. 2:26:01रुचि को कुछ समझ नहीं आया। उसने जवाब में
  3049. 2:26:04सिर्फ गर्दन हिला दी। रुचि इतने खूंखार
  3050. 2:26:07लोगों के बीच शौर्य को इतने आराम से बात
  3051. 2:26:10करते देख हैरान थी। तभी शौर्य विहान
  3052. 2:26:13रायजादा के करीब गया और बोला
  3053. 2:26:17मैंने तुम्हें कहा था कि तुम हमारे बीच
  3054. 2:26:20में मत आना पर तुम्हें शायद मेरी बात समझ
  3055. 2:26:23में नहीं आई। कोई बात नहीं। आज के बाद तुम
  3056. 2:26:28यह समझने के लायक ही नहीं रहोगे।
  3057. 2:26:32विहान रायजादा को गजराज सोलंकी पर कुछ
  3058. 2:26:34ज्यादा ही भरोसा था। इसीलिए वह घमंड भरी
  3059. 2:26:37टोन [संगीत] में बोला,
  3060. 2:26:40[हंसी]
  3061. 2:26:40मानना पड़ेगा। तुम में हिम्मत तो बहुत है।
  3062. 2:26:44तुम हमारी जगह पर आकर हमें ही धमका रहे
  3063. 2:26:47हो। यह न्यू सिटी टावर नहीं है। यह सोलंकी
  3064. 2:26:51फार्म है। यहां पर लोग अपनी मर्जी से आ तो
  3065. 2:26:55जाते हैं। पर यहां से जाने के लिए उन्हें
  3066. 2:26:58हमारी दया पर निर्भर रहना पड़ता है।
  3067. 2:27:01बहुत खूब। मुझे देखकर अच्छा लगा कि गीदड़
  3068. 2:27:05भी भौंकना जानता है। जब मैं यहां से
  3069. 2:27:08जाऊंगा तब तुम्हें भी पता चल जाएगा कि
  3070. 2:27:11[संगीत] मैं आता भी अपनी मर्जी से हूं और
  3071. 2:27:13जाता भी अपनी मर्जी से ही हूं। शौर्य
  3072. 2:27:17विहान रायजादा के कंधे को थपथपाते [संगीत]
  3073. 2:27:19हुए बोला।
  3074. 2:27:21गजराज सोलंकी जो अभी तक शौर्य की एक-एक
  3075. 2:27:24एक्टिविटी को नोटिस करता जा रहा था। वो
  3076. 2:27:27शौर्य से बोला।
  3077. 2:27:29कुछ तो बात तुम में है। तुम पहले लड़के हो
  3078. 2:27:33जो मेरे सामने आकर मुझे चैलेंज करने की
  3079. 2:27:35हिम्मत कर रहा है। वैसे तुम हो कौन? मैंने
  3080. 2:27:40आज से पहले कभी तुम्हारे बारे में इस शहर
  3081. 2:27:43में सुना नहीं। मैं कुछ भी नहीं हूं
  3082. 2:27:45मिस्टर सोलंकी। बस मैं तो अपनी एक दोस्त
  3083. 2:27:48को लेने आया हूं। जिसे आपने आज जबरदस्ती
  3084. 2:27:52बंधक बना लिया है। बस आपसे यही विनती है
  3085. 2:27:55कि आप उसे मेरे साथ यहां से जाने दें। तो
  3086. 2:27:58मैं दोबारा कभी आपके सामने नहीं आऊंगा।
  3087. 2:28:02शौर्य ने यह सब पोलाइट वे में ही बोला था।
  3088. 2:28:04लेकिन गजराज गुस्से में आ गया। लड़के
  3089. 2:28:08तुम्हें लगता है कि तुम मेरे सामने
  3090. 2:28:11शर्तबाजी कर सकते हो। तुमसे दो प्यार भरी
  3091. 2:28:14बातें क्या कर ली। तुम तो अपने आप को खुदा
  3092. 2:28:17समझने लगे। शायद तुम्हें पता नहीं गजराज
  3093. 2:28:20सोलंकी से नजर मिलाकर बात करने की हिम्मत
  3094. 2:28:23करने वाले का क्या हश्र होता है। इस पर
  3095. 2:28:26शौर्य थोड़ा सा मुस्कुराया और प्यार से ही
  3096. 2:28:29बोला। कहते हैं कुत्ते को घी हजम नहीं
  3097. 2:28:32होता। उसी तरह कमजोर को अगर आप किसी चीज
  3098. 2:28:35के लिए रिक्वेस्ट करते हैं तो वो इसको उस
  3099. 2:28:39व्यक्ति की कमजोरी समझ लेता है और अपने आप
  3100. 2:28:42को तुर्रम खान समझने लगता है। इसीलिए यह
  3101. 2:28:45कहावत आप पर एकदम फिट बैठती है। बहुत
  3102. 2:28:49जुबान चलती है तुम्हारी। पर ज्यादा देर
  3103. 2:28:52नहीं चलेगी। गजराज सोलंकी ने इतना बोला ही
  3104. 2:28:55था कि तभी कुछ कदमों [संगीत] की आहट उस
  3105. 2:28:58हॉल के अंदर सुनाई दी।
  3106. 2:29:00शौर्य ने देखा पहलवान देवव्रत मल्होत्रा
  3107. 2:29:03को पकड़ कर लाया है। देवव्रत ने हैरानी से
  3108. 2:29:06शौर्य की तरफ देखा और उसके पास जाकर बोले
  3109. 2:29:10अरे श्रवण बेटे तुम यहां क्यों आ गए?
  3110. 2:29:14देवव्रत मल्होत्रा का सवाल सुनकर शौर्य
  3111. 2:29:16[संगीत] बोला अंकल मैं आपको चाबी वापस
  3112. 2:29:19नहीं कर पाया था तो सोचा इनके पास आकर
  3113. 2:29:22इन्हें खुद ही चाबी थमा दूं। गजराज सोलंकी
  3114. 2:29:26को पेपर लेने की जल्दी थी। इसीलिए वो
  3115. 2:29:28देवव्रत मल्होत्रा से बोला बंद करो यह
  3116. 2:29:31नौटंकी लाओ ऑफिस के पेपर दो। इस पर
  3117. 2:29:35देवव्रत मल्होत्रा ने बैग में से फाइल
  3118. 2:29:37निकालकर गजराज सोलंकी की तरफ बढ़ाते हुए
  3119. 2:29:40कहा ये ये लीजिए। अब तो मेरी बेटी को छोड़
  3120. 2:29:44दीजिए। आप चिंता क्यों करते हो देवव्रत
  3121. 2:29:47जी? जब आपने अपनी बात पूरी की तो मैं भी
  3122. 2:29:51अपनी बात पूरी करने से पीछे नहीं हटूंगा।
  3123. 2:29:54गजराज सोलंकी पेपर्स को एक सरसरी नजर से
  3124. 2:29:57देखते हुए बोला अंकल जब पेपर दे दिए हैं
  3125. 2:30:00तो पैसे भी तो ट्रांसफर करवा लो। कहीं ऐसा
  3126. 2:30:03तो नहीं इनका पैसे देने का कोई इरादा ही
  3127. 2:30:06ना हो। शौर्य गजराज सोलंकी का मन भांपना
  3128. 2:30:09चाहता था कि वो इस प्रॉपर्टी के बदले में
  3129. 2:30:12पैसे देने का ख्याल रखता है या नहीं। तभी
  3130. 2:30:15गजराज सोलंकी [संगीत]
  3131. 2:30:16शौर्य को घूरता हुआ बोला, "बच्चे, अगर यह
  3132. 2:30:20डील न्यू सिटी टावर के ऑफिस में हो जाती,
  3133. 2:30:22तो इसके पैसे मिल भी जाते। पर जब मैं
  3134. 2:30:25इसमें इनवॉल्व हो गया, तो फिर पैसे की बात
  3135. 2:30:28तो भूल ही जाओ। यह तो फिर दादागिरी हुई।
  3136. 2:30:32शौर्य गजराज सोलंकी के पास पहुंचते हुए
  3137. 2:30:34बोला, तो गजराज सोलंकी ने अपनी आंखों से
  3138. 2:30:37चिंगारी बरसाते हुए कहा, लड़के शहर में नए
  3139. 2:30:41हो? इसीलिए तुम्हें मेरे बारे में कुछ पता
  3140. 2:30:44नहीं है। नहीं तो तुम ऐसी बात करने की
  3141. 2:30:47हिम्मत नहीं करते। शौर्य आगे बढ़ा और एक
  3142. 2:30:50झटके से गजराज सोलंकी के हाथों से वो फाइल
  3143. 2:30:53छीन ली और बोला अगर यह बात है तो फिर आप
  3144. 2:30:57इस ऑफिस को भूल जाइए क्योंकि मैंने पहले
  3145. 2:30:59ही इसके पूरे पैसे मिस्टर देवत मल्होत्रा
  3146. 2:31:02को दे रखे हैं। इसीलिए अब से यह प्रॉपर्टी
  3147. 2:31:05मेरी है और अगर आपको यह प्रॉपर्टी चाहिए
  3148. 2:31:08[संगीत] तो आपको मुझसे डील करनी पड़ेगी।
  3149. 2:31:10गजराज सोलंकी को उम्मीद नहीं थी कि शौर्य
  3150. 2:31:13उसके हाथ से पेपर छीन लेगा। वो गुर्राते
  3151. 2:31:17हुए बोला तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुमने
  3152. 2:31:20मेरे हाथ से यह फाइल छीनने की जुर्रत की।
  3153. 2:31:23अब तुम्हें मेरे कहर से कोई नहीं बचा
  3154. 2:31:26सकता। विहान रायजादा जो पास में ही था वो
  3155. 2:31:29तेजी से शौर्य पर झपटा। पर शौर्य अब पूरी
  3156. 2:31:32तरह से एक्शन के मूड में था। जैसे ही
  3157. 2:31:34विहान रायजादा उसके पास पहुंचा, उसने अपनी
  3158. 2:31:37जगह पर खड़े-खड़े जोरदार केक उसके सीने पर
  3159. 2:31:40मारी। वो उछल कर 5 फीट दूर जा गिरा। वो
  3160. 2:31:43अपना सीना पकड़ कर उसी जगह फर्श पर ढेर हो
  3161. 2:31:46गया था। तभी गजराज सोलंकी ने अपने पीछे
  3162. 2:31:49खड़े दोनों पहलवानों को चिल्ला कर कहा।
  3163. 2:31:52तुम लोग खड़े-खड़े तमाशा क्या देख रहे हो?
  3164. 2:31:55इसकी एक भी हड्डी सलामत नहीं रहनी चाहिए।
  3165. 2:31:58जैसे ही दोनों पहलवान शौर्य की तरफ बढ़े,
  3166. 2:32:01शौर्य चिल्लाकर बोला, रुक जाओ। शौर्य की
  3167. 2:32:05गरज सुनकर [संगीत] दोनों पहलवान अपनी जगह
  3168. 2:32:07पर ही जड़ हो गए। शौर्य ने गजराज सोलंकी
  3169. 2:32:10को चेतावनी देते हुए कहा, मिस्टर सोलंकी
  3170. 2:32:14आखिरी मौका दे रहा हूं। अपने पहलवानों को
  3171. 2:32:17रोक लीजिए। अगर इन्होंने मुझ पर हमला कर
  3172. 2:32:20दिया तो मां कसम मैं आपको किसी को मुंह
  3173. 2:32:23दिखाने [संगीत] लायक नहीं छोडूंगा। शौर्य
  3174. 2:32:26की ललकार सुनकर एक बार को तो गजराज सोलंकी
  3175. 2:32:29भी हिल गए और तुरंत ही जो पहलवान देवव्रत
  3176. 2:32:32मल्होत्रा को लेकर आया था उससे बोले तुम
  3177. 2:32:36बाहर जाकर यहां जितने भी आदमी हैं सबको
  3178. 2:32:39बुला लाओ। आदेश मिलते [संगीत] ही वो शख्स
  3179. 2:32:41तेजी से बाहर की तरफ चला गया। इधर दो
  3180. 2:32:44पहलवान पहले ही शौर्य के सामने खड़े थे।
  3181. 2:32:47उन्हीं में से एक मतवाले हाथी की तरह
  3182. 2:32:49शौर्य की तरफ बढ़ा। उसका शरीर [संगीत]
  3183. 2:32:52किसी दैत्य की तरह ही नजर आ रहा था। शौर्य
  3184. 2:32:55उसकी शारीरिक ताकत का अंदाजा लगाना चाहता
  3185. 2:32:57था क्योंकि उसे महसूस हो गया था कि वह
  3186. 2:33:00इतनी आसानी से सामने [संगीत] वाले राक्षस
  3187. 2:33:03को हरा नहीं पाएगा। शौर्य अपनी जगह से
  3188. 2:33:05उछला और उसके दोनों पैर एक साथ उस पहलवान
  3189. 2:33:08के सीने पर जाकर लगे। और वैसे ही फिर
  3190. 2:33:11[संगीत] बैक फ्लिप मारकर शौर्य दोबारा
  3191. 2:33:13अपनी जगह पर वापस भी आ गया। पर शौर्य की
  3192. 2:33:15इस किक का उस पहलवान पर कोई [संगीत] असर
  3193. 2:33:18नहीं हुआ। वो हल्का सा लड़खड़ाया जरूर, पर
  3194. 2:33:20तुरंत संभल भी गया। तुम मुझे मगन समझने की
  3195. 2:33:23भूल मत [संगीत] करना। एक बार तुम मेरे हाथ
  3196. 2:33:26आ जाओ तो मैं तुम्हें चींटी की तरह मसल
  3197. 2:33:29दूंगा। पहलवान भद्दी हंसी-हंसते हुए बोला
  3198. 2:33:32और यहीं पर [संगीत] शौर्य चूक कर गया। इस
  3199. 2:33:35समय उसका सारा ध्यान सामने वाले पहलवान पर
  3200. 2:33:38था। इसी मौके का फायदा उठाकर उसके पीछे
  3201. 2:33:41वाले पहलवान ने शौर्य को पीछे से अपनी
  3202. 2:33:43बाहों में जकड़ लिया। शौर्य ने पूरा जोर
  3203. 2:33:46लगाया पर वह छूट नहीं पाया। शौर्य के माथे
  3204. 2:33:49पर पसीने की बूंदे झिलमिलाने लगी। शौर्य
  3205. 2:33:52को दूसरे पहलवान के हाथों में मछली की तरह
  3206. 2:33:55छटपटाते देखकर सामने वाला पहलवान तेजी से
  3207. 2:33:58शौर्य की तरफ बढ़ा। उसके करीब पहुंचकर वो
  3208. 2:34:02शौर्य के दोनों पैरों के बीच वाले हिस्से
  3209. 2:34:04की तरफ देखने लगा। शौर्य समझ गया कि सामने
  3210. 2:34:07वाले पहलवान के दिमाग में क्या चल रहा है।
  3211. 2:34:10इसी समय सामने वाले पहलवान ने अपना पैर
  3212. 2:34:13शौर्य की जांघों के बीच में मारने के लिए
  3213. 2:34:16चलाया। और यही वो समय था जब शौर्य ने अपने
  3214. 2:34:19दोनों पैर उठाकर अपने सिर के ऊपर कर लिए।
  3215. 2:34:22उसका शरीर 180 डिग्री के कोण पर मुड़ गया
  3216. 2:34:25था। उसके सीने से नीचे का हिस्सा मुड़कर
  3217. 2:34:28उसके सिर के ऊपर पहुंच रहा था। जबकि उसका
  3218. 2:34:31सीना अभी भी उसके पीछे वाले पहलवान की
  3219. 2:34:34बाहों में ही कैद था। नियमित योग करने का
  3220. 2:34:37यही फायदा था कि शौर्य का शरीर बहुत ही
  3221. 2:34:40लचीला था। शौर्य के शरीर का निचला हिस्सा
  3222. 2:34:43ऊपर उठते ही सामने वाले पहलवान का पैर
  3223. 2:34:46सीधे जाकर पीछे वाले पहलवान की जांघों के
  3224. 2:34:49बीच वाले हिस्से पर जाकर लगा। और अगले ही
  3225. 2:34:52पल पीछे वाले पहलवान की पकड़ शौर्य पर से
  3226. 2:34:55ढीली हुई और शौर्य आजाद हो गया। पर दूसरा
  3227. 2:34:58पहलवान अपने हाथों से अपनी जांघों के बीच
  3228. 2:35:01वाले हिस्से को पकड़ कर वही जमीन पर चित
  3229. 2:35:03हो गया। शौर्य समझ गया कि वार इतना तेज था
  3230. 2:35:07कि यह दूसरा पहलवान अब चाहकर भी खड़ा नहीं
  3231. 2:35:10हो पाएगा। इश अगर यह किक मुझे लग गई होती
  3232. 2:35:13तो यह सोचकर ही शौर्य के शरीर में सेहरन
  3233. 2:35:16दौड़ गई। दूसरे पहलवान का हश्र देखकर
  3234. 2:35:19शौर्य गजराज सोलंकी से बोला ये लो सोलंकी
  3235. 2:35:22साहब। आपके खिलाड़ी [संगीत] ने अपने ही
  3236. 2:35:24पाले में गोल कर लिया। शौर्य की बात सुनकर
  3237. 2:35:27गजराज सोलंकी के चेहरे पर गुस्सा नजर आया।
  3238. 2:35:30वो दरवाजे से बाहर की तरफ देखते हुए
  3239. 2:35:32चिल्लाया। बाकी सब आदमी कहां मर गए? अभी
  3240. 2:35:35तक आए क्यों नहीं? पर सोलंकी साहब के सवाल
  3241. 2:35:38का कोई जवाब नहीं मिला। वो अभी भी इसी
  3242. 2:35:41उम्मीद में दरवाजे की तरफ देख रहे थे कि
  3243. 2:35:44उनके आदमी बस आने ही वाले हैं। पर किसी को
  3244. 2:35:47भी आता ना देखकर शौर्य समझ गया कि विक्रम
  3245. 2:35:50ने अपना काम अच्छे से किया है। वहीं शौर्य
  3246. 2:35:53के सामने अभी [संगीत] भी दूसरा पहलवान
  3247. 2:35:56अपने दैत्य जैसे शरीर के साथ खड़ा था। वो
  3248. 2:35:59जलती आंखों से शौर्य को घूरते हुए बोला,
  3249. 2:36:02तुम्हारे कारण मैंने अपने ही साथी को घायल
  3250. 2:36:05कर दिया। तुम्हें इसका हिसाब करना
  3251. 2:36:07पड़ेगा। पहले तो शायद मैं तुम्हें जिंदा
  3252. 2:36:10भी छोड़ देता पर अब तुम्हारी जान लेने के
  3253. 2:36:13बाद ही मुझे चैन आएगा। गैंडे सपने देखने
  3254. 2:36:18में कुछ नहीं जाता। तुम भी सपने देखो।
  3255. 2:36:21इससे शायद तुम्हारे दिल को थोड़ा चैन मिल
  3256. 2:36:23जाए। शौर्य उस पहलवान की हंसी उड़ाते हुए
  3257. 2:36:26बोला। शौर्य की बात सुनकर पहलवान और भड़क
  3258. 2:36:29गया। वो अंधाधुंध शौर्य पर टूट पड़ा। पर
  3259. 2:36:32शौर्य उसके हाथ नहीं आ रहा था। शौर्य सोच
  3260. 2:36:35रहा था कि इस गैंडे को कैसे काबू में किया
  3261. 2:36:37जाए। तभी अचानक उसके दिमाग में कुछ ख्याल
  3262. 2:36:40आया। उसे ज्यादा से ज्यादा फोर्स [संगीत]
  3263. 2:36:42जनरेट करना था। उसने हॉल का मुआयना किया
  3264. 2:36:46तो पाया कि हॉल में मौजूद पिलर के साथ ऊपर
  3265. 2:36:49वाले फ्लोर का छज्जा निकला हुआ था। शौर्य
  3266. 2:36:52पीछे होते-होते [संगीत] पिलर के पास आ
  3267. 2:36:54गया। जब उसने महसूस किया कि वह पहलवान अब
  3268. 2:36:57उसकी रेंज में आ गया है तो वह फुर्ती से
  3269. 2:36:59उस पिलर की तरफ भागा। पिलर के सहारे जंप
  3270. 2:37:02लेकर वो छज्जे पर पहुंचा और वहां से एक
  3271. 2:37:05लंबा जंप लेकर सीधा उस पहलवान के ऊपर
  3272. 2:37:07कूदा। इतने ऊपर से कूदने के कारण उसके
  3273. 2:37:10शरीर का फोर्स बहुत बढ़ गया और जब शौर्य
  3274. 2:37:13की किक पहलवान [संगीत] की छाती से टकराई
  3275. 2:37:15तो वो उछल कर पीछे जाकर गिरा। यह वार इतना
  3276. 2:37:18तेज था कि पहलवान [संगीत] के मुंह से खून
  3277. 2:37:21निकल आया। तभी बाहर से भागते हुए कदमों की
  3278. 2:37:24आवाज सुनाई दी। जैसे-जैसे रात काली होती
  3279. 2:37:27जा रही थी, फार्म हाउस में गजराज सोलंकी
  3280. 2:37:30और विहान रायजादा की काली करतूतें भी अपने
  3281. 2:37:32अंजाम की ओर बढ़ रही थी। एक तरफ गजराज
  3282. 2:37:36गैंग की बेचैनी उफान पर थी। लेकिन दूसरी
  3283. 2:37:39तरफ शौर्य शांत खड़ा था। जैसा तूफान थमने
  3284. 2:37:42के बाद होता है। उसके सामने वो विशाल
  3285. 2:37:45पहलवान जमीन पर पड़ा आंखें फाड़े शौर्य को
  3286. 2:37:48ही देख रहा था। उसे लगा जरूर उसके सीने की
  3287. 2:37:52कोई हड्डी टूट चुकी है। जब उसे दर्द
  3288. 2:37:55बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह धड़ाम से जमीन पर
  3289. 2:37:58गिर गया था। वहीं गजराज की नजर एक टक
  3290. 2:38:01दरवाजे पर टिकी थी। उसे इंतजार था अपने
  3291. 2:38:04मुष्टंडों के [संगीत] आने का। तभी कदमों
  3292. 2:38:07की आहट सुनाई दी। अगले ही पल दरवाजे से
  3293. 2:38:10बदहवास हालत में वही शख्स अंदर आता दिखाई
  3294. 2:38:13दिया जिसे गजराज सोलंकी ने आदमियों को
  3295. 2:38:16इकट्ठा करके लाने के लिए भेजा था। उसे
  3296. 2:38:19अकेले अंदर आते देख गजराज सोलंकी चिल्ला
  3297. 2:38:22कर बोला विट्ठल तुम अकेले बाकी आदमी कहां
  3298. 2:38:27है? विट्ठल ने गजराज के सामने सिर झुका
  3299. 2:38:30दिया और बोला सर बाहर कोई भी आदमी होश में
  3300. 2:38:34नहीं है। किसी ने पहले ही उन्हें बेहोश कर
  3301. 2:38:37दिया है। यह सुनकर गजराज सोलंकी के चेहरे
  3302. 2:38:40पर हवाइयां उड़ने लगी। जबकि शौर्य अपनी
  3303. 2:38:43जगह पर खड़ा मुस्कुरा रहा था। जब गजराज
  3304. 2:38:46सोलंकी ने शौर्य को मुस्कुराते देखा तो वह
  3305. 2:38:50समझ गया कि इसके पीछे शौर्य का ही हाथ है।
  3306. 2:38:53गजराज बौखला गया लेकिन उसने हार नहीं
  3307. 2:38:56मानी। उसने विहान रायजादा की तरफ देखा और
  3308. 2:39:00उसे आंखों से इशारा किया। विहान समझ गया।
  3309. 2:39:04उसने मेज पर रखा फलों वाला चाकू उठाया और
  3310. 2:39:07अपने पीछे खड़ी रुचि की गर्दन से सटाकर
  3311. 2:39:10चिल्लाया। खबरदार
  3312. 2:39:12[संगीत] जो एक भी कदम बढ़ाया तो तभी गजराज
  3313. 2:39:16सोलंकी रुचि को चाकू की नोक पर देखकर खुश
  3314. 2:39:18होता हुआ बोला शाबाश विहान अगर इनमें से
  3315. 2:39:23कोई भी हमारी तरफ एक भी कदम बढ़ाता है तो
  3316. 2:39:26तुम निसंकोच इस लड़की का गला रेत देना
  3317. 2:39:30शौर्य की आंखों में गुस्सा उबलने लगा उसने
  3318. 2:39:33गजराज की ओर देखकर कहा आखिर अपनी औकात
  3319. 2:39:36दिखा ही दी तुमने तुम्हें क्या लगता है इस
  3320. 2:39:40तरह तुम हमें कितनी देर तक रोक [संगीत]
  3321. 2:39:42पाओगे? और हां, अगर रुचि को एक भी खरोच आई
  3322. 2:39:46तो फिर तुम्हारा क्या होगा? तुमने यह सोचा
  3323. 2:39:50है? शौर्य को अब सिर्फ विक्रम से ही
  3324. 2:39:52उम्मीद थी। पोसी के बारे में सोच रहा था।
  3325. 2:39:55तभी उसे बाहर से बाहरी कदमों की आवाज
  3326. 2:39:57सुनाई देने लगी। उसने देखा कि दरवाजे से
  3327. 2:40:01810 पुलिस वालों के साथ मेनका हॉल में
  3328. 2:40:03प्रवेश कर रही है। शौर्य ने अपनी घड़ी पर
  3329. 2:40:06नजर दौड़ाई तो उसने गौर किया कि उसे यहां
  3330. 2:40:09आए हुए 1 घंटे से ऊपर का समय हो गया है और
  3331. 2:40:12उसने मेनका को आधे घंटे का ही समय दिया
  3332. 2:40:15था। मेनका ने जब शौर्य को सही सलामत अपने
  3333. 2:40:18सामने देखा तो उसे राहत महसूस हुई। फिर
  3334. 2:40:21उसकी निगाह सबसे होती हुई रुचि पर गई
  3335. 2:40:24जिसके गले पर विहान रायजादा चाकू रखे हुए
  3336. 2:40:27था।
  3337. 2:40:29पुलिस को देखकर विहान रायजादा उलझन में
  3338. 2:40:31पड़ गया। एक तरह से वो हाथों पुलिस की नजर
  3339. 2:40:35में आ गया था जो उसके जैसे बिजनेसमैन के
  3340. 2:40:38लिए अच्छा नहीं था। दूसरी तरफ गजराज
  3341. 2:40:42सोलंकी फार्म हाउस में पुलिस को देखकर समझ
  3342. 2:40:44गया कि शौर्य अच्छे से तैयारी करके उसके
  3343. 2:40:47खिलाफ व्यू रचना कर चुका था। अब पुलिस से
  3344. 2:40:51बचने का उसके पास कोई चारा नहीं था।
  3345. 2:40:54इसीलिए उसने पुलिस वालों को धमकाते हुए
  3346. 2:40:56कहा खबरदार जो मेरी तरफ बढ़े तो अगर तुम
  3347. 2:41:00सब यहां से बाहर नहीं गए तो इस लड़की को
  3348. 2:41:03अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।
  3349. 2:41:06विहान ने जब यह सुना तो उसका हाथ [संगीत]
  3350. 2:41:08कांप गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो
  3351. 2:41:11क्या करें। वो गजराज सोलंकी की बात माने
  3352. 2:41:14या अपने आप को पुलिस के हवाले कर दे। तभी
  3353. 2:41:18अचानक उसके पीछे से एक हाथ आया और उसकी
  3354. 2:41:21कलाई जिसमें चाकू था उसको पकड़ कर उमेटते
  3355. 2:41:24हुए उसकी पीठ पर सटा दिया। विहान रायजादा
  3356. 2:41:28के गले से चीख निकल गई। विहान के पीछे
  3357. 2:41:31जाकर उसका हाथ पकड़ने वाला कोई और नहीं
  3358. 2:41:35विक्रम ही था जो कि अभी तक मौके की फिराक
  3359. 2:41:38में था। जैसे ही विहान के हाथ से चाकू
  3360. 2:41:41छूटा, दो पुलिस वाले दौड़ कर गए और विहान
  3361. 2:41:44रायजादा को अपने कब्जे में ले लिया। अब
  3362. 2:41:47पासा पूरी तरह से पलट चुका था। दो पुलिस
  3363. 2:41:50वालों ने आगे बढ़कर गजराज सोलंकी और विहान
  3364. 2:41:53को हिरासत में ले लिया था। शौर्य आराम
  3365. 2:41:56[संगीत] से चलकर गजराज सोलंकी और विहान
  3366. 2:41:58रायजादा के पास पहुंचा और बोला आज
  3367. 2:42:02तुम्हारा दिन अच्छा था कि पुलिस यहां आ
  3368. 2:42:04गई। नहीं तो मैं तुम दोनों का वो हश्र
  3369. 2:42:07करने वाला था कि फिर जिंदगी में कभी
  3370. 2:42:10दोबारा तुम भूलकर भी मेरा सामना करने की
  3371. 2:42:13हिम्मत नहीं करते। शौर्य की बात सुनकर
  3372. 2:42:16विहान रायजादा ने अपना सिर नीचे कर लिया।
  3373. 2:42:19पुलिस गजराज सोलंकी और विहान रायजादा के
  3374. 2:42:21साथ बाकी पहलवानों को भी गिरफ्तार करके
  3375. 2:42:24थाने लेकर चली गई। शौर्य भी सबके साथ
  3376. 2:42:27पुलिस गाड़ी के पीछे-पीछे थाने पहुंच गया
  3377. 2:42:30और देवव्रत मल्होत्रा ने गजराज सोलंकी और
  3378. 2:42:33विहान रायजादा के खिलाफ अपनी कंप्लेंट
  3379. 2:42:35दर्ज कराई। उसके बाद सभी वहां से होटल
  3380. 2:42:39राजकमल आ गए। मेनका ने होटल राजकमल में
  3381. 2:42:42ऑफिस की रजिस्ट्री से संबंधित सारी
  3382. 2:42:44कार्यवाही पूरी की। सब कुछ कंप्लीट होने
  3383. 2:42:47के बाद रुचि शौर्य के पास आई और उसका
  3384. 2:42:50धन्यवाद करते हुए बोली तुम्हारा बहुत-बहुत
  3385. 2:42:53धन्यवाद श्रवण। अगर आज तुम नहीं होते तो
  3386. 2:42:56शायद पता नहीं हमारे साथ क्या-क्या
  3387. 2:42:58[संगीत] हो सकता था। अरे कुछ भी नहीं
  3388. 2:43:00होता। अच्छे लोगों का साथ ऊपर वाला भी
  3389. 2:43:03देता है। शौर्य मीठी मुस्कान के साथ बोला।
  3390. 2:43:07मेनका जो उन दोनों से कुछ अलग खड़ी थी।
  3391. 2:43:09[संगीत] जब उसने रुचि को शौर्य से इतने
  3392. 2:43:11प्यार से बातें करते देखा तो उसे रुचि से
  3393. 2:43:14जलन सी हुई। [संगीत]
  3394. 2:43:15वो स्पष्ट नोट कर सकती थी कि रुचि के दिल
  3395. 2:43:18में कहीं ना कहीं शौर्य के लिए एक सॉफ्ट
  3396. 2:43:20कॉर्नर विकसित हो गया था। वहां से रवाना
  3397. 2:43:23होने से पहले रुचि एक बार फिर से शौर्य के
  3398. 2:43:26पास गई और उससे उसका नंबर मांगा। तो शौर्य
  3399. 2:43:29हैरानी से बोला [संगीत] मेरा नंबर। हां,
  3400. 2:43:33कुछ दिनों बाद मेरा बर्थडे है और तुम्हें
  3401. 2:43:35बुलाना [संगीत] है तो तुम्हारा नंबर तो
  3402. 2:43:37होना चाहिए ना मेरे पास। रुचि प्यार भरी
  3403. 2:43:40नजरों से शौर्य की तरफ देखते हुए बोली।
  3404. 2:43:43शौर्य ने रुचि [संगीत] को अपनी तरफ ऐसे
  3405. 2:43:45प्यार से देखते पाया तो वो नर्वस फील करने
  3406. 2:43:48लगा। रुचि खूबसूरत [संगीत] थी और उसका
  3407. 2:43:50आकर्षण भी कम नहीं था। खैर, शौर्य ने अपनी
  3408. 2:43:54भावनाओं पर कंट्रोल किया और रुचि से अपना
  3409. 2:43:57नंबर एक्सचेंज किया। रुचि के वहां से जाने
  3410. 2:43:59के बाद शौर्य मेनका के पास पहुंचा तो
  3411. 2:44:02मेनका ने उसे तंग करते हुए कहा क्या बात
  3412. 2:44:06है सब ठीक तो है बहुत नंबर [संगीत] शंबर
  3413. 2:44:09एक्सचेंज हो रहे हैं शौर्य मेनका के कहने
  3414. 2:44:12का भाव समझ गया था तो उसने झेपते हुए कहा
  3415. 2:44:15अब इसमें मैं क्या कर सकता हूं उसने नंबर
  3416. 2:44:17मांगा इसीलिए मुझे उसे अपना नंबर देना
  3417. 2:44:19पड़ा बस इतनी सी बात ही है ना मेनका अपनी
  3418. 2:44:24पलकें झपकाते हुए बोली अरे यार तुम
  3419. 2:44:27[संगीत] भी हद करती और क्या बात हो सकती
  3420. 2:44:29है? शौर्य टालने वाले भाव में बोला। इतना
  3421. 2:44:33बोलने [संगीत] के बाद शौर्य ने अपनी घड़ी
  3422. 2:44:35की तरफ देखा तो रात के 9:00 बजने वाले थे।
  3423. 2:44:38वो हड़बड़ी दिखाते हुए बोला। रात बहुत हो
  3424. 2:44:41गई है। अब मुझे जाना पड़ेगा। मेनका जानती
  3425. 2:44:44थी कि शौर्य के पास अपनी कोई गाड़ी नहीं
  3426. 2:44:46है। तो उसने पूछा
  3427. 2:44:49पर जाओगे कैसे? [संगीत] तुम्हारे पास कोई
  3428. 2:44:51गाड़ी तो है नहीं। वैसे होटल की अपनी बहुत
  3429. 2:44:54सी कारें हैं। तुम चाहो तो उनमें से कोई
  3430. 2:44:56भी ले जा सकते हो। आफ्टर ऑल अब तुम ही
  3431. 2:44:59उसके मालिक हो।
  3432. 2:45:01शौर्य ने मेनका की बात सुनी। उसने सोचा यह
  3433. 2:45:05हो तो सकता है पर उसे लगा इतनी जल्दी कार
  3434. 2:45:08को मेंटेन करना उसके लिए ठीक नहीं होगा।
  3435. 2:45:11इससे शिप्रा को उसके ऊपर शक करने का मौका
  3436. 2:45:14मिलेगा। इसीलिए वो बोला नहीं अभी रहने दो।
  3437. 2:45:18अभी इसकी कोई जरूरत नहीं है। जब मुझे
  3438. 2:45:21लगेगा कि अब [संगीत] मैं कार अफोर्ड कर
  3439. 2:45:23सकता हूं तो मैं खुद ही ले लूंगा।
  3440. 2:45:26क्या कहा तुमने कि तुम कार अफोर्ड नहीं कर
  3441. 2:45:29सकते? मेनका शौर्य पर तंज कसती हुई बोली
  3442. 2:45:33अरे मेरा कहने का मतलब यह है कि जब मैं
  3443. 2:45:36शिप्रा की नजरों में यह साबित कर दूंगा कि
  3444. 2:45:39अब मैं कार अफोर्ड कर सकता हूं तब [संगीत]
  3445. 2:45:41मैं कार भी ले लूंगा। शौर्य सफाई देता हुआ
  3446. 2:45:45बोला तो मेनका ने बेबसी से कहा ठीक है फिर
  3447. 2:45:49अब मैं इससे ज्यादा तुम्हारे लिए और कुछ
  3448. 2:45:51नहीं कर सकती जब तुम्हें खुद ही कैब में
  3449. 2:45:53धक्के खाने का मन कर रहा है तो खाओ धक्के
  3450. 2:45:57खैर इसके बाद शौर्य ने अपने मोबाइल से कैब
  3451. 2:46:00बुक की 5 मिनट के अंदर ही कैब वहां आ गई
  3452. 2:46:03थी शौर्य कैब में बैठकर शिप्रा के घर के
  3453. 2:46:06लिए निकल गया लगभग 20 मिनट के बाद वो राय
  3454. 2:46:09हाउस में पहुंच गया था वो अभी शिप्रा के
  3455. 2:46:12घर के दरवाजे जे पर पहुंचा ही था कि
  3456. 2:46:14[संगीत] तभी उसका फोन बजा। उसने नंबर देखा
  3457. 2:46:17तो ये शिप्रा का ही था। उसने फोन उठाया तो
  3458. 2:46:20दूसरी तरफ से शिप्रा की आवाज आई।
  3459. 2:46:22हेलो
  3460. 2:46:24कहां रह गए तुम? अभी तक आए [संगीत] नहीं।
  3461. 2:46:27[हंसी]
  3462. 2:46:28शौर्य ने कहा, बस दरवाजे के बाहर ही खड़ा
  3463. 2:46:31हूं। आप दरवाजा तो खोलिए।
  3464. 2:46:34शिप्रा डाइनिंग एरिया में बैठी। शौर्य का
  3465. 2:46:36ही इंतजार कर रही थी। घर के बाकी लोग शायद
  3466. 2:46:39सो गए थे। शिप्रा ने घर का दरवाजा खोला तो
  3467. 2:46:43शौर्य अंदर आ गया। जब दोनों डाइनिंग एरिया
  3468. 2:46:46में पहुंचे तो शिप्रा शौर्य से बोली ऐसा
  3469. 2:46:49करो तुम हाथ मुंह धोकर नीचे आ जाओ। मैं
  3470. 2:46:52तुम्हारे लिए खाना लगा देती हूं। शौर्य ने
  3471. 2:46:55शिप्रा के मुंह से यह सुना तो उसने
  3472. 2:46:56आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। अब उसे एहसास
  3473. 2:47:00हुआ कि शिप्रा उसी के इंतजार में अभी तक
  3474. 2:47:02बैठी हुई थी और क्योंकि उसे लगा होगा कि
  3475. 2:47:05उसने खाना नहीं खाया है तो [संगीत] इसीलिए
  3476. 2:47:07वो उसे खाने के बारे में कह रही है। शौर्य
  3477. 2:47:11के दिल में यह देखकर [संगीत] हलचल सी हुई।
  3478. 2:47:14उसके अंदर एक फीलिंग जागी जैसे कोई बीवी
  3479. 2:47:17अपने पति का इंतजार करती है और खाने के
  3480. 2:47:19लिए पूछती है। वो भी इसी सोच में डूबा हुआ
  3481. 2:47:23था तो शिप्रा ने दोबारा पूछा क्या हुआ?
  3482. 2:47:27तुम क्या सोच कर विचार करने लगे? खाना तो
  3483. 2:47:30खाना है ना?
  3484. 2:47:32शौर्य झेपते हुए बोला, नहीं [संगीत] आप
  3485. 2:47:35रहने दीजिए। मैं खाना खाकर आया हूं।
  3486. 2:47:38शिप्रा को अब शौर्य से खुद के लिए आप
  3487. 2:47:40सुनकर इरिटेशन होने लगी थी। उसने सोचा वो
  3488. 2:47:44शौर्य से इस बारे में बात करेगी। लेकिन
  3489. 2:47:47पहले उसने उसके खाने को लेकर कहा। अगर तुम
  3490. 2:47:50खाना खाकर आने वाले थे तो तुम्हें यहां घर
  3491. 2:47:53पर बता देना चाहिए था। संतो को तुम्हारे
  3492. 2:47:55लिए खाना तो नहीं बनाना पड़ता। तभी शौर्य
  3493. 2:47:58सफाई देता हुआ बोला, "मुझे नहीं पता था कि
  3494. 2:48:02यहां मेरा खाना भी बनना था। इसीलिए मैं
  3495. 2:48:04इन्फॉर्म नहीं कर पाया। आगे से मैं इस बात
  3496. 2:48:07का ध्यान रखूंगा।
  3497. 2:48:09शौर्य की बात सुनकर शिप्रा को शौर्य पर
  3498. 2:48:12तरस आया। उसे लगा यह उसकी ही गलती है।
  3499. 2:48:15उसने शौर्य [संगीत] को इस बारे में तो कुछ
  3500. 2:48:17कहा ही नहीं था। पर फिर उसने खुद ही सोचा
  3501. 2:48:20कि इतना तो समझदार उसे होना चाहिए कि जब
  3502. 2:48:23वो यहां इस घर में रहने लगा है तो उसका
  3503. 2:48:25खाना तो यहां बनेगा ही ना। शिप्रा समझाने
  3504. 2:48:29वाले भाव में बोली देखो श्रवण अब तुम इस
  3505. 2:48:32घर में रहते हो तो यहां अगर खाना बनेगा तो
  3506. 2:48:35सबके लिए बनेगा ना। इतना तो तुम्हें खुद
  3507. 2:48:38भी समझना चाहिए।
  3508. 2:48:40शिप्रा की बात सुनने [संगीत] के बाद शौर्य
  3509. 2:48:42ने सोचा उसे कुछ डोज़ शिप्रा को भी देना
  3510. 2:48:45चाहिए। इसीलिए उसने कहा देखिए आप जहां हैं
  3511. 2:48:50उस जगह से आपके लिए यह कहना आसान है। पर
  3512. 2:48:53मैं समझता [संगीत] हूं कि मैं यहां हूं तो
  3513. 2:48:55सिर्फ आपकी मजबूरी के कारण नहीं तो मेरी
  3514. 2:48:58यहां कोई जरूरत नहीं है। मैं यहां जो आपके
  3515. 2:49:01घर में रह रहा हूं वही मेरे लिए बहुत है।
  3516. 2:49:04उसके ऊपर अगर मैं यह भी उम्मीद करूं कि आप
  3517. 2:49:07मेरे लिए खाना [संगीत] पीना, मेरे कपड़े
  3518. 2:49:09और भी जो जरूरत की चीजें हैं वो देखें तो
  3519. 2:49:13मैं इसे कैसे एक्सेप्ट कर पाऊंगा। [संगीत]
  3520. 2:49:16इतना बोलकर शौर्य दो मिनट के लिए चुप हो
  3521. 2:49:18गया। फिर कुछ सोच कर बोला, "मेरी भी अपनी
  3522. 2:49:21एक ईगो है। मुझे उसको भी संतुष्ट रखना
  3523. 2:49:24पड़ता है। मैं जब भिखारी की जिंदगी भी जी
  3524. 2:49:27रहा था, तो उस समय भी [संगीत] मैंने कभी
  3525. 2:49:29किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। जो खुद ही
  3526. 2:49:32मुझे कुछ देकर चले जाते थे, मैं उसे ग्रहण
  3527. 2:49:35कर लेता था। मंदिर के जो पुजारी बाबा थे,
  3528. 2:49:38[संगीत] वो मेरी स्थिति भली-भांति समझते
  3529. 2:49:41थे। इसीलिए ज्यादातर समय ऐसा होता था कि
  3530. 2:49:45वह खुद मेरे लिए खाना उपलब्ध करा देते थे
  3531. 2:49:47और उनका स्नेह मेरे लिए एक बेटे के जैसा
  3532. 2:49:50था। इसीलिए उनकी दी हुई चीजें मेरे
  3533. 2:49:53अंतर्मन को कभी कचोटती नहीं थी और मुझसे
  3534. 2:49:56जितना बन पड़ता था मैं उनके लिए करता भी
  3535. 2:49:59था। तो वो मुझे अपने जैसे लगते थे। पर
  3536. 2:50:02यहां
  3537. 2:50:04एक पल उसने शिप्रा की आंखों में देखा और
  3538. 2:50:06अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला इस घर
  3539. 2:50:10में सभी मुझे अपना दामाद अपना जीजा या जो
  3540. 2:50:13भी एक रिश्ता जो आपने उन्हें दिखाने
  3541. 2:50:16[संगीत] के लिए बना दिया है। सभी मुझे
  3542. 2:50:18वैसे ही ट्रीट करते हैं। लेकिन मुझे हकीकत
  3543. 2:50:21पता है कि मैं यहां सिर्फ एक रोल प्ले कर
  3544. 2:50:24रहा हूं। शायद यहां सभी हकीकत में जी रहे
  3545. 2:50:27होते हैं। पर मैं हमेशा एक एक्टिंग ही कर
  3546. 2:50:29रहा होता हूं। क्योंकि उनके लिए जो सच है
  3547. 2:50:32मेरे लिए वो एक रोल प्ले है। आप समझ सकती
  3548. 2:50:35हैं कितना मुश्किल होता है हर समय [संगीत]
  3549. 2:50:37एक्टिंग मोड में रहना। शौर्य ने एक ही
  3550. 2:50:40सांस में अपने दिल का गुबार जाहिर कर
  3551. 2:50:42दिया। शिप्रा सन्यासी उसे देख रही थी। तभी
  3552. 2:50:45[संगीत] शिप्रा के प्रति थोड़ी सिंपैथी
  3553. 2:50:47दिखाते हुए शौर्य ने कहा, मैं समझता हूं
  3554. 2:50:51कि यह आपके लिए भी उतना ही मुश्किल है। पर
  3555. 2:50:53आपको सिर्फ मेरे सामने एक्टिंग करनी होती
  3556. 2:50:56[संगीत] है। लेकिन मुझे मुझे तो हर पल
  3557. 2:50:59सबके सामने आपके पति होने का वो ढोंग करना
  3558. 2:51:02पड़ता है। जिसकी [संगीत] सच्चाई जगजाहिर
  3559. 2:51:05है। शौर्य की इन बातों ने शिप्रा को अंदर
  3560. 2:51:08से हिला दिया। शौर्य की बातों से शिप्रा
  3561. 2:51:11की सांसे थमसी गई थी। शौर्य के शब्द उसके
  3562. 2:51:14कानों में किसी धमाके की तरह गूंज रहे थे।
  3563. 2:51:17उसने आज तक शौर्य को सिर्फ एक जरूरत या एक
  3564. 2:51:20मोहरे की तरह देखा था। [संगीत] लेकिन आज
  3565. 2:51:22पहली बार उसे उस मोहरे के पीछे छिपा घायल
  3566. 2:51:25स्वाभिमान दिखाई दिया। शौर्य की आंखों में
  3567. 2:51:29जो दर्द और विद्रोह था, उसने शिप्रा की
  3568. 2:51:31आत्मा को झकझोर [संगीत] कर रख दिया था।
  3569. 2:51:34शिप्रा ने मन ही मन सोचा कितना कुछ इसके
  3570. 2:51:37दिल में दबा हुआ है। आज इसके जज्बात जहर
  3571. 2:51:41बनकर बाहर निकल रहे हैं। क्या मैं वाकई
  3572. 2:51:44इतनी पत्थर दिल हो गई थी? यह कड़वा सच था
  3573. 2:51:47कि शिप्रा अब तक सिर्फ अपने लिए सोच रही
  3574. 2:51:50थी। वो अपनी सहूलियत के हिसाब से शौर्य को
  3575. 2:51:53नचा रही थी। उसे कभी एहसानों के नीचे
  3576. 2:51:56दबाती तो कभी रिश्तों के नाम पर मजबूर
  3577. 2:51:58करती। शौर्य की कड़वाहट [संगीत] जायज थी।
  3578. 2:52:02अगर दादा बलवंत राय ने शौर्य को घर में
  3579. 2:52:04रखने की जिद नहीं की होती तो वह आज भी उसी
  3580. 2:52:07अंधेरे सर्वेंट क्वार्टर की धूल फांक रहा
  3581. 2:52:10होता। शिप्रा को पहली बार महसूस हुआ कि
  3582. 2:52:13उसकी दी हुई हर सुख सुविधा शौर्य के लिए
  3583. 2:52:15तोहफा नहीं बल्कि एक घाव थी। उसका शौर्य
  3584. 2:52:19के लिए महंगे कपड़े लेना, उसके खाने-पीने
  3585. 2:52:22का शाही इंतजाम करना या उसे जेब खर्च के
  3586. 2:52:24लिए पैसे देना यह सब बातें शौर्य को अंदर
  3587. 2:52:28ही अंदर काट रही थी। क्योंकि उसे यह सब
  3588. 2:52:30पति होने के नाते नहीं बल्कि एक बेचारे पर
  3589. 2:52:33की गई दया के रूप में मिला था। शिप्रा ने
  3590. 2:52:36अपनी मुट्ठियां भी। उसे एहसास हुआ कि अब
  3591. 2:52:39और दिखावा मुमकिन नहीं है। उसे कुछ चीजें
  3592. 2:52:43शौर्य के सामने अब स्पष्ट रूप से रख देनी
  3593. 2:52:45चाहिए। ताकि दोबारा किसी बात को लेकर
  3594. 2:52:48शौर्य [संगीत] का ईगो हर्ट ना हो। ड्राइंग
  3595. 2:52:51हॉल की खामोशी उसे काटने लगी थी। उसे डर
  3596. 2:52:54था कि कहीं घर का कोई सदस्य उनकी इस
  3597. 2:52:57तनातनी को देख ना ले। इसीलिए शिप्रा ने
  3598. 2:53:00शौर्य से कहा, "ऐसा करो, तुम अपने कमरे
  3599. 2:53:03में चलकर अपने कपड़े चेंज कर लो। मैं वहीं
  3600. 2:53:06आकर तुमसे बात करती हूं। ठीक है। इतना
  3601. 2:53:10कहकर शौर्य अपने कमरे में चला आया। उसने
  3602. 2:53:13बाथरूम में जाकर मुंह हाथ धोए और नाइट
  3603. 2:53:15ड्रेस में आ गया। वो तैयार होकर शिप्रा का
  3604. 2:53:18इंतजार करने लगा और सोचने भी लगा। पता
  3605. 2:53:21नहीं मेरी बातों का शिप्रा पर क्या असर
  3606. 2:53:23हुआ होगा। कहीं उल्टा असर हुआ तो पता चला
  3607. 2:53:26कि अगले ही दिन मुझे इस घर से रुखसत ही कर
  3608. 2:53:30दिया। यह सोचकर वो अपनी ही सोच से घबरा
  3609. 2:53:33गया। फिर उसने ही खुद को [संगीत] तसल्ली
  3610. 2:53:36दी। नहीं वो ऐसा नहीं कर सकती। अभी उसे
  3611. 2:53:41मेरी जरूरत है। तभी शौर्य ने दरवाजे पर
  3612. 2:53:44आहट महसूस की। उसने देखा शिप्रा उसके कमरे
  3613. 2:53:47के अंदर आ रही थी। शिप्रा ने भी इतने
  3614. 2:53:49[संगीत] समय में अपने कपड़े बदल लिए थे।
  3615. 2:53:52पिंक कलर की नाइटी में उसका गोरा चेहरा
  3616. 2:53:55किसी आसमान से उतरी परी के जैसा लग रहा
  3617. 2:53:57था। उसके खुले हुए बाल जो उसके कंधों पर
  3618. 2:54:00लहरा रहे थे शौर्य को अपनी तरफ खींच रहे
  3619. 2:54:03थे। इसी समय एक हवा का झोंका बालकनी के
  3620. 2:54:07दरवाजे से होकर कमरे में आया और शिप्रा के
  3621. 2:54:10चेहरे से टकराया तो उसके बाल पीछे की तरफ
  3622. 2:54:13लहरा गए। शौर्य ने यह देखा तो उसका दिल
  3623. 2:54:16मुंह को आ गया। उसे लगा अगर वह कुछ पल और
  3624. 2:54:19शिप्रा की तरफ देखता रहा तो अपनी भावनाओं
  3625. 2:54:22पर कंट्रोल नहीं कर पाएगा। [संगीत] इसीलिए
  3626. 2:54:24उसने अपनी नजर शिप्रा से फेर ली। वो
  3627. 2:54:27बालकनी के दरवाजे को बंद करने के लिए आगे
  3628. 2:54:30बढ़ा तो शिप्रा [संगीत] ने कहा उसे खुला
  3629. 2:54:32ही रहने दो। शिप्रा की बात सुनकर शौर्य
  3630. 2:54:36ठटक गया। शिप्रा दरवाजे से होती हुई
  3631. 2:54:39बालकनी में आ गई। [संगीत] मजबूरन शौर्य को
  3632. 2:54:42भी उसके पीछे-पीछे बालकनी में आना पड़ा।
  3633. 2:54:46रात के इस वक्त हल्की ठंडी हवा शरीर को
  3634. 2:54:49सुकून दे रही थी। बालकनी के सामने बड़ा सा
  3635. 2:54:52लॉन और उसमें बीच-बीच में टिमटिमाती
  3636. 2:54:54[संगीत] लाइटें उसकी खूबसूरती बढ़ा रही
  3637. 2:54:57थी। शिप्रा बालकनी की रेलिंग के सहारे
  3638. 2:55:00शौर्य की [संगीत] तरफ पलट कर खड़ी हो गई।
  3639. 2:55:03शौर्य भी बालकनी की रेलिंग पकड़े हुए लॉन
  3640. 2:55:05की तरफ मुंह करके खड़ा हो गया। दोनों की
  3641. 2:55:08आंखों ने तो एक दूसरे को अपने राज बता दिए
  3642. 2:55:11थे। [संगीत] लेकिन दिल की हकीकत को अभी भी
  3643. 2:55:13जुबान तक पहुंचने का रास्ता तय करना बाकी
  3644. 2:55:16था। शायद शिप्रा की ज़िद शौर्य की उम्मीदों
  3645. 2:55:20पर अभी भारी पड़ रही थी। शौर्य को डर सा
  3646. 2:55:23लग रहा था कि खामोशी टूटते ही कहीं
  3647. 2:55:25[संगीत] सब कुछ खत्म ना हो जाए। तभी
  3648. 2:55:28शिप्रा शौर्य की तरफ देखते हुए बोली। मुझे
  3649. 2:55:31नहीं पता था कि मेरे द्वारा की गई कुछ
  3650. 2:55:33[संगीत] चीजें तुम्हारी ईगो को हर्ट कर
  3651. 2:55:36रही थी। दरअसल मैंने इतना सोचा ही नहीं।
  3652. 2:55:40पर अब सोचती हूं [संगीत] तो लगता है कि
  3653. 2:55:41तुम सही कह रहे थे। मैं हमेशा अपनी
  3654. 2:55:43प्रॉब्लम्स के बारे में ही सोचती रही। कभी
  3655. 2:55:46तुम्हारे बारे में सोचा ही नहीं क्योंकि
  3656. 2:55:48कभी यह एहसास ही नहीं हुआ कि मेरी कोई बात
  3657. 2:55:51तुम्हारी ईगो को हर्ट कर सकती है। इतना
  3658. 2:55:54[संगीत] कहकर शिप्रा 2 मिनट के लिए रुकी
  3659. 2:55:57और फिर बोली मैंने तो यही सोचा कि आभावों
  3660. 2:56:01के बीच रहे तुम। अगर मैं तुम्हारे लिए कुछ
  3661. 2:56:04करूंगी तो तुम्हें अच्छा ही लगेगा।
  3662. 2:56:07रही दूसरी बात कि तुम्हें जो मेरे कारण
  3663. 2:56:09मेरे परिवार के सामने हमेशा एक्टिंग करनी
  3664. 2:56:12पड़ती है। अगर तुम चाहो तो वो एक्टिंग
  3665. 2:56:14[संगीत] ना रहकर सच भी हो सकती है। शौर्य
  3666. 2:56:18ने जैसे ही शिप्रा की यह बात सुनी, उसका
  3667. 2:56:20दिल उछल कर खुशी में भंगड़ा करने लगा।
  3668. 2:56:23उसके दिमाग में सबसे पहला ख्याल यही आया
  3669. 2:56:26कि क्या शिप्रा ने उसे अपना पति स्वीकार
  3670. 2:56:29कर लिया? पर समय से पहले वो उत्साहित होकर
  3671. 2:56:32बाद में बेवकूफ नहीं बनना चाहता था।
  3672. 2:56:35इसीलिए उसने खुद की भावनाओं पर कंट्रोल
  3673. 2:56:38करके कहा मैं आपके कहने का मतलब नहीं
  3674. 2:56:41समझा। देखो अगर तुम चाहो तो मैं कभी तुमसे
  3675. 2:56:45तलाक नहीं लूंगी। तुम्हें ध्यान होगा जब
  3676. 2:56:48तुम यहां रहने आए थे तो मैंने तुमसे इसी
  3677. 2:56:51बारे में कुछ बात कही थी। शिप्रा की यह
  3678. 2:56:54बात सुनकर शौर्य को ध्यान आया। जब शिप्रा
  3679. 2:56:57ने यहीं सामने नजर आ रहे लॉन में उससे कहा
  3680. 2:57:00था कि वह उसकी पत्नी बनकर रह सकती है
  3681. 2:57:02[संगीत] पर कभी पत्नी का सुख नहीं देगी।
  3682. 2:57:06शौर्य ने कहा हां तुम्हारी कही एक-एक बात
  3683. 2:57:10मुझे याद है। तो क्या तुम्हें मंजूर होगा
  3684. 2:57:13मेरा पति बनकर रहना? यह जानते हुए कि मैं
  3685. 2:57:16तुम्हें कभी पत्नी का सुख नहीं दूंगी।
  3686. 2:57:19शिप्रा शौर्य की आंखों में देखती हुई
  3687. 2:57:21[संगीत] बोली। शौर्य को तुरंत कोई जवाब
  3688. 2:57:24देते नहीं बना। उसके दिल में जो अभी थोड़ी
  3689. 2:57:26देर पहले एक उम्मीद की लहर दौड़ी थी वो
  3690. 2:57:29हवा हो गई। [संगीत]
  3691. 2:57:31शिप्रा ने उसके चेहरे के बिगड़े हुए भाव
  3692. 2:57:33को देखा तो वो उसकी भावनाओं को समझ गई।
  3693. 2:57:36इसीलिए वो शौर्य को दोबारा समझाते हुए
  3694. 2:57:39बोली देखो मैं समझती हूं कि हर किसी के
  3695. 2:57:42शरीर की अपनी जरूरत होती है। इसीलिए अगर
  3696. 2:57:45तुम्हारा किसी के साथ अफेयर भी होता है या
  3697. 2:57:48तुम [संगीत] किसी और के साथ अपनी नीड को
  3698. 2:57:50पूरा करते हो तो भी मुझे उसमें कोई आपत्ति
  3699. 2:57:53नहीं है। क्या इसके बाद तुम मेरे पति बनकर
  3700. 2:57:55[संगीत] हमेशा रहने के लिए तैयार हो?
  3701. 2:57:58शौर्य का मन किया कि वो अपना सिर पीट ले।
  3702. 2:58:01उसने सोचा कैसी लड़की है यार? क्या सिर्फ
  3703. 2:58:05मर्दों के शरीर को ही एक साथी की नीड होती
  3704. 2:58:08है? औरतों की ऐसी कोई जरूरत नहीं होती?
  3705. 2:58:12इसके बाद उसके दिल में यह ख्याल भी आया कि
  3706. 2:58:15क्या सच में अगर उसका किसी के साथ कोई
  3707. 2:58:17अफेयर होगा तो शिप्रा को कोई फर्क नहीं
  3708. 2:58:19पड़ेगा। उसने अपनी जिज्ञासा शांत करने के
  3709. 2:58:22लिए कहा। क्या सिर्फ मर्दों के शरीर की ही
  3710. 2:58:25अपनी नीड होती है? औरतों के शरीर की अपनी
  3711. 2:58:28कोई नीड नहीं होती? और दूसरी बात क्या सच
  3712. 2:58:32में ऐसा होगा कि मेरा अगर किसी के साथ
  3713. 2:58:34अफेयर होगा या मैं किसी लड़की के साथ अपना
  3714. 2:58:37समय बिताऊंगा तो आपको कोई फर्क नहीं
  3715. 2:58:40पड़ेगा। शौर्य का सवाल सुनकर शिप्रा पूरे
  3716. 2:58:43कॉन्फिडेंस के साथ बोली तुम मेरी चिंता मत
  3717. 2:58:47करो। मुझे पता है कि मेरी क्या नीड है।
  3718. 2:58:49[संगीत] अपनी देखो। तुम कहां किसके साथ
  3719. 2:58:52क्या करते हो या किसके साथ अपना समय
  3720. 2:58:54बिताते हो उससे मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
  3721. 2:58:57बस एक चीज चाहूंगी कि तुम दूसरी शादी नहीं
  3722. 2:59:00करोगे। शौर्य को अपने ऊपर तरस आने लगा। वो
  3723. 2:59:04सोचने को मजबूर हो गया कि क्या उसका
  3724. 2:59:06व्यक्तित्व इतना साधारण है कि शिप्रा को
  3725. 2:59:10उसके होने या ना होने से कोई फर्क ही नहीं
  3726. 2:59:12पड़ेगा। फालतू [संगीत] में ही वह खुद को
  3727. 2:59:15बड़ा स्मार्ट समझता था। या जो लड़कियां
  3728. 2:59:17उसे स्पेशल फील कराती थी वो सिर्फ पैसे के
  3729. 2:59:20लिए ही उसकी दीवानी होने का दिखावा करती
  3730. 2:59:23थी। तो क्या आज जो उसने रुचि की आंखों में
  3731. 2:59:26अपने लिए एक लगाव महसूस किया [संगीत] था
  3732. 2:59:28क्या वो सब एक दिखावा था या वो उसके एहसान
  3733. 2:59:31के कारण उससे इंप्रेस थी। फिर शौर्य के
  3734. 2:59:34दिमाग में एक दूसरा ख्याल आया। उसने कहा
  3735. 2:59:38चलो एक बार को मैं आपकी बात को मान भी
  3736. 2:59:41लेता हूं। मैं [संगीत] हमेशा के लिए आपका
  3737. 2:59:43पति बनकर रहने को तैयार भी हो जाता हूं।
  3738. 2:59:46पर इसके अलावा भी कुछ ऐसी चाहतें होती हैं
  3739. 2:59:49जिन्हें [संगीत] इंसान अपने दिल से निकाल
  3740. 2:59:51नहीं सकता। उनको कैसे पूरा करेंगे? सभी
  3741. 2:59:55चाहते हैं कि उसका परिवार हो, बच्चे
  3742. 2:59:57[संगीत] हो। इस तरह तो ना आप कभी मां बन
  3743. 3:00:00सकेंगी और ना ही मैं बाप। शौर्य की बात
  3744. 3:00:03सुनकर शिप्रा कुछ पल सोचती [संगीत] रही।
  3745. 3:00:06फिर बोली अगर तुम फादर बनना चाहते हो तो
  3746. 3:00:09उसका भी रास्ता है। ऐसा नहीं है कि मुझे
  3747. 3:00:13मां बनने की ख्वाहिश नहीं है। इसके लिए
  3748. 3:00:16कुछ समय बाद हम सरोगेसी के द्वारा मां-बाप
  3749. 3:00:19बन सकते हैं। शौर्य ने सोचा [संगीत] कि
  3750. 3:00:22क्या यह सब कुछ उसने पहले से ही सोच रखा
  3751. 3:00:25है?
  3752. 3:00:26फिर भी अपनी शंका के निवारण [संगीत] के
  3753. 3:00:28लिए उसने पूछा। अगर आप सरोगेसी के द्वारा
  3754. 3:00:32बच्चा पैदा [संगीत] करेंगी तो क्या आपके
  3755. 3:00:35मां-बाप आपसे सवाल नहीं करेंगे? आप जब खुद
  3756. 3:00:38बच्चे को जन्म दे सकती हैं तो सरोगेसी का
  3757. 3:00:41रास्ता क्यों अपना [संगीत] रही हैं? शौर्य
  3758. 3:00:44का यह सवाल सुनकर शिप्रा कुछ सोच कर बोली।
  3759. 3:00:48इसके लिए हम एक दूसरा रास्ता [संगीत] भी
  3760. 3:00:50अपना सकते हैं। हम आईवीएफ के द्वारा भी
  3761. 3:00:53बच्चे को जन्म दे सकते हैं। इस [संगीत]
  3762. 3:00:56तरह किसी को सवाल करने की जरूरत ही नहीं
  3763. 3:00:59होगी।
  3764. 3:01:00शौर्य का दिमाग चकरा गया। उसने सोचा इसे
  3765. 3:01:04मर्दों से ऐसी क्या ही चिढ़ हो गई है कि
  3766. 3:01:06बच्चे भी पैदा करने को तैयार हो गई है। पर
  3767. 3:01:09नेचुरल तरीके से नहीं आईवीएफ के द्वारा।
  3768. 3:01:12यह लड़की सब कुछ के लिए तैयार है। पर जो
  3769. 3:01:15एक पति के लिए सबसे जरूरी चीज है, उसके
  3770. 3:01:18लिए ही तैयार नहीं है। फिर एक बार शौर्य
  3771. 3:01:21को शक हुआ कि क्या शिप्रा जो बोल रही है,
  3772. 3:01:24सच में वह ऐसा कर पाएगी?
  3773. 3:01:26क्या सच में वो उसे किसी और लड़की के साथ
  3774. 3:01:29देख पाएगी? फिर शौर्य ने सोचा अगर वो ऐसे
  3775. 3:01:33रह सकती है तो फिर वो क्यों नहीं उसके
  3776. 3:01:35बिना रह सकता? यह बात दिमाग में आते ही
  3777. 3:01:38शौर्य बोला अगर ऐसी बात है तो मुझे मंजूर
  3778. 3:01:42है। मैं पूरी जिंदगी आपका पति बनकर रहने
  3779. 3:01:45के लिए तैयार हूं। बिना आपसे कोई अपेक्षा
  3780. 3:01:48किए। पर मेरी भी यही शर्त है कि अगर मैं
  3781. 3:01:51अपनी शारीरिक जरूरत के लिए किसी के साथ
  3782. 3:01:53होता हूं [संगीत] तो आप कोई आपत्ति नहीं
  3783. 3:01:55करेंगी और क्योंकि मुझे भविष्य में बच्चे
  3784. 3:01:58चाहिए तो उसके लिए किसी और की कोख नहीं
  3785. 3:02:01चाहिए। वो बच्चा आपके द्वारा ही होगा। भले
  3786. 3:02:05ही वह आईवीएफ के द्वारा ही हो। अगर आपको
  3787. 3:02:07यह मंजूर है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
  3788. 3:02:11शिप्रा शौर्य को अपनी कही गई शर्त मानते
  3789. 3:02:14देखकर बोली तो फिर ठीक है मैं कभी तुमसे
  3790. 3:02:17तलाक लेने की कोशिश नहीं करूंगी। [संगीत]
  3791. 3:02:20अब तुम्हें भी अपने मन पर यह बोझ रखने की
  3792. 3:02:22जरूरत नहीं है कि तुम्हें हर समय मेरा पति
  3793. 3:02:25होने का ड्रामा करना पड़ता है। जब दोनों
  3794. 3:02:28की आपसी सहमति से एक डिसीजन [संगीत] हो
  3795. 3:02:30गया तो शौर्य बोला इसका यह मतलब भी नहीं
  3796. 3:02:34होगा कि मैं हमेशा इसी घर में रहूंगा।
  3797. 3:02:37मेरा जब मन करेगा मैं अपने अलग घर में रह
  3798. 3:02:39सकता हूं। आपके मम्मी पापा जब भी चाहे
  3799. 3:02:42[संगीत] आकर देख सकते हैं कि मैं कहां और
  3800. 3:02:45कैसे रहता हूं। क्योंकि मर्द की रिस्पेक्ट
  3801. 3:02:48तभी तक [संगीत] होती है जब तक वह अपने घर
  3802. 3:02:50में होता है। ससुराल में होने पर उसकी
  3803. 3:02:53इज्जत नहीं रहती। मेरी तो वैसे ही नहीं
  3804. 3:02:56है। तो मुझे वो अपनी मेहनत से कमानी
  3805. 3:02:58[संगीत] है। शिप्रा शौर्य की इस बात के
  3806. 3:03:01लिए भी तुरंत तैयार हो गई। हां, मुझे इससे
  3807. 3:03:04कोई दिक्कत नहीं है। बल्कि यह तो अच्छा ही
  3808. 3:03:07होगा। जब एक बार हमारे परिवार की नजर में
  3809. 3:03:10यह पक्का हो गया कि हम पति-पत्नी हैं, तो
  3810. 3:03:13तुम उसके [संगीत] बाद यहां रहो या अपने घर
  3811. 3:03:15में। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। फिर सारी
  3812. 3:03:19बातें होने के बाद शिप्रा ने एक बॉक्स
  3813. 3:03:21शौर्य की तरफ बढ़ाया। शिप्रा और शौर्य का
  3814. 3:03:24रिश्ता एक अनसुलझी पहेली बन गया था। दोनों
  3815. 3:03:27ही एक दूसरे को पकड़े रखना चाहते थे।
  3816. 3:03:30शौर्य ने तो शिप्रा को अपने सपनों में भी
  3817. 3:03:32एंट्री दे दी थी। लेकिन उसे क्या पता था
  3818. 3:03:35कि शिप्रा उसके सपनों [संगीत] को समझौते
  3819. 3:03:37में बदल देगी। बालकनी में एक दूसरे की
  3820. 3:03:40शर्तों पर सहमति जताने के बाद समझौता
  3821. 3:03:43वार्ता जैसे ही खत्म हुई तो शिप्रा ने
  3822. 3:03:46शौर्य की तरफ एक बॉक्स बढ़ा दिया। शौर्य
  3823. 3:03:49एक पल को रुक गया। तभी उसे याद आया यह वही
  3824. 3:03:53ज्वेलरी बॉक्स है जो उसने राधिका की
  3825. 3:03:55बर्थडे पार्टी में शिप्रा को दिया था। तभी
  3826. 3:03:58शिप्रा बोली यह वही गिफ्ट है जो तुमने
  3827. 3:04:01मुझे दिया था। तो [संगीत]
  3828. 3:04:04वापस क्यों कर रही हो? शौर्य ने कहा तो
  3829. 3:04:07शिप्रा की आवाज सख्त हो गई। वो बोली मैं
  3830. 3:04:10इतना महंगा गिफ्ट नहीं ले सकती। इसे वापस
  3831. 3:04:13कर दो। शौर्य ने शिप्रा को समझाने की
  3832. 3:04:16कोशिश की। मैंने यह आपके लिए दिल से
  3833. 3:04:19[संगीत] लिया था। लेकिन शिप्रा की सख्ती
  3834. 3:04:21नहीं टूटी। वो बोली हम दुनिया के लिए
  3835. 3:04:24पतिपत्नी होंगे लेकिन असल में नहीं। और
  3836. 3:04:28तुम इस रिश्ते को सच बनाने की कोशिश कर
  3837. 3:04:31रहे हो। इस पर शौर्य ने हल्की मुस्कान के
  3838. 3:04:34साथ कहा। ऐसी कोई शर्त नहीं थी। हमने
  3839. 3:04:37सिर्फ यह तय किया था कि हमारे बीच वो
  3840. 3:04:40नजदीकी नहीं होगी। पर इसका मतलब यह नहीं
  3841. 3:04:43कि हम एक दूसरे के लिए कुछ कर ही नहीं
  3842. 3:04:45सकते। शिप्रा ने उसकी आंखों में देखते हुए
  3843. 3:04:48कहा यहीं से सब शुरू होता है। पहले चीजों
  3844. 3:04:52का आदानप्रदान, फिर आदत, फिर [संगीत] चाहत
  3845. 3:04:56और एक दिन हक। और मैं उस शुरुआत तक नहीं
  3846. 3:05:00जाना चाहती। यह सुनकर शौर्य की आवाज में
  3847. 3:05:03खींच उतर आई। तो फिर इस रिश्ते का मतलब ही
  3848. 3:05:07क्या है? जब कुछ करना ही नहीं है तो बेहतर
  3849. 3:05:10है हम अजनबी ही रहें। शिप्रा चुप हो गई।
  3850. 3:05:14उसे महसूस हुआ कि बना हुआ समझौता बिखर ना
  3851. 3:05:17जाए। लेकिन वो यह रिश्ता छोड़ भी नहीं
  3852. 3:05:20सकती थी क्योंकि उसे पता था शौर्य जैसा
  3853. 3:05:23दमदार आदमी उसे फिर नहीं मिलेगा। उधर
  3854. 3:05:26शौर्य शिप्रा की बातों से थोड़ा परेशान
  3855. 3:05:29हुआ। लेकिन उसने खुद [संगीत] को संभालते
  3856. 3:05:31हुए कहा, "आप कुछ ज्यादा सोच रही हैं। हर
  3857. 3:05:34चीज का मतलब जिस्मानी रिश्ते से नहीं
  3858. 3:05:36होता। कुछ चीजें सिर्फ खुशी देती हैं।
  3859. 3:05:39इसीलिए की जाती हैं। जैसे आपने मुझे
  3860. 3:05:42मोबाइल दिया तो मुझे अच्छा लगा था। फिर
  3861. 3:05:46उसने धीरे [संगीत] से कहा। खैर, अगर आपको
  3862. 3:05:49पसंद नहीं है तो कोई बात नहीं।"
  3863. 3:05:52शिप्रा का लहजा थोड़ा नरम पड़ा और वो बोली
  3864. 3:05:56मेरी बात का गलत मतलब मत निकालो छोटा
  3865. 3:05:59गिफ्ट [संगीत] ले लेती लेकिन इतना महंगा
  3866. 3:06:01नहीं ले सकती शौर्य के होठों पर हल्की
  3867. 3:06:04मुस्कान आ गई उसने बिना कुछ कहे बॉक्स
  3868. 3:06:07अपने पास रख लिया जैसे उसने [संगीत] मन ही
  3869. 3:06:10मन कोई फैसला कर लिया हो फिर उसने शांत
  3870. 3:06:13स्वर में कहा क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता
  3871. 3:06:16हूं क्या शिपरा ने तुरंत लेकिन सपाट लहजे
  3872. 3:06:20ने पूछा। शौर्य ने नजरें लॉन की तरफ घुमा
  3873. 3:06:24ली और [संगीत] बोला
  3874. 3:06:26आपको कितना समय चाहिए जिसके बाद अगर आप
  3875. 3:06:29मुझसे अलग भी हो जाएं तो आपके घर वाले
  3876. 3:06:32आपको दोबारा शादी के लिए मजबूर ना करें।
  3877. 3:06:35यह वही सवाल था जिससे शिप्रा डर रही थी।
  3878. 3:06:39फिर भी उसने खुद को संभाल कर कहा। तुम यह
  3879. 3:06:42क्यों पूछ रहे हो? शौर्य ने बात को बिना
  3880. 3:06:45घुमाए [संगीत] सीधा जवाब दिया। क्योंकि
  3881. 3:06:48मैं यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं निभा
  3882. 3:06:50पाऊंगा। ज्यादा से ज्यादा एक [संगीत] साल
  3883. 3:06:53या डेढ़ साल। शिप्रा ने थोड़ा सोचा फिर
  3884. 3:06:57धीमे से कहा। हां, इतना वक्त काफी होगा।
  3885. 3:07:02ठीक है फिर। अब आप अपने कमरे में जाइए।
  3886. 3:07:05रात बहुत हो चुकी है। शौर्य ने अब बात को
  3887. 3:07:08समाप्त करते हुए कहा। फिर दोनों बालकनी से
  3888. 3:07:11कमरे [संगीत] में आ गए। शिप्रा ने
  3889. 3:07:13जाते-जाते शौर्य से कहा, अब तो मुझे आप
  3890. 3:07:17कहकर मत बुलाया करो वरना लोगों को हमारे
  3891. 3:07:20रिश्ते पर शक हो सकता है। शौर्य थोड़ा
  3892. 3:07:23हिचकिचाया और बोला नहीं मुझसे नहीं होगा।
  3893. 3:07:27शिप्रा ने हल्की सी भोएं चढ़ाई और बोली
  3894. 3:07:30इतना भी मुश्किल नहीं है। मैं तो तुम्हें
  3895. 3:07:33तुम ही कहती हूं। फिर तुम्हें क्या दिक्कत
  3896. 3:07:35है? शौर्य ने शिप्रा से अपनी नजरें चुरा
  3897. 3:07:38ली। फिर बोला
  3898. 3:07:40मैं कोशिश करूंगा।
  3899. 3:07:44शिप्रा ने एक पल उसे देखा। फिर बिना कुछ
  3900. 3:07:46कहे वहां से चली गई। शौर्य बस उसे जाते
  3901. 3:07:50हुए देखता रह गया। [संगीत] एक पल को उसके
  3902. 3:07:52मन में ख्याल आया। क्या अपनी हकीकत बता
  3903. 3:07:55दूं? लेकिन अगले ही पल उसने खुद को रोक
  3904. 3:07:58[संगीत] लिया। अगर मुझे उसे पाने के लिए
  3905. 3:08:01अपनी सच्चाई बतानी पड़े तो ऐसा प्यार मुझे
  3906. 3:08:05नहीं चाहिए। वो थका हुआ [संगीत] सा बिस्तर
  3907. 3:08:08पर गिर पड़ा और शिप्रा के ख्यालों में
  3908. 3:08:10खोते-खोते उसे नींद आ गई। अगली सुबह
  3909. 3:08:14दरवाजे की आवाज से उसकी नींद टूटी। वो
  3910. 3:08:17उठकर दरवाजा खोलता है। सामने शंतो चाय की
  3911. 3:08:20ट्रे लिए खड़ी थी। संतोष शायद जल्दी में
  3912. 3:08:23थी। उसने टेबल पर चाय रखी और चली गई। कमरे
  3913. 3:08:27में सन्नाटा छा गया। शौर्य सोच में डूबा
  3914. 3:08:30बालकनी में आकर चाय पीने लगा। तभी अचानक
  3915. 3:08:34उसका फोन बज उठा। मेनका का नाम फ्लैश
  3916. 3:08:37[संगीत] होते दिखा तो उसने फोन उठाते हुए
  3917. 3:08:39बोला क्या बात है इतनी ही सुबह-सुबह सब
  3918. 3:08:43ठीक तो है शौर्य की बात सुनकर मेनका बोली
  3919. 3:08:47तुम भूल गए क्या तुम्हें आज नताशा से
  3920. 3:08:50मिलने कृष्णापुरम जाना था
  3921. 3:08:53अरे हां यार मुझे तो ध्यान ही नहीं रहा
  3922. 3:08:57क्या रत्नाकर शेट्टी से तुम्हारी बात हुई
  3923. 3:08:59है शौर्य ने अपना आलस दूर करते हुए पूछा
  3924. 3:09:03तो मेनका [संगीत] बोली
  3925. 3:09:04उसी का फोन आया था। जितनी जल्दी हो सके
  3926. 3:09:07पहुंच जाओ क्योंकि डेढ़ दो घंटे के बाद एक
  3927. 3:09:10बार [संगीत] शूट शुरू हो गया तो फिर वो
  3928. 3:09:12तुम्हें ज्यादा टाइम नहीं दे पाएगा।
  3929. 3:09:14चलो ठीक [संगीत] है। मैं अभी जल्दी से
  3930. 3:09:16निकलता हूं। तुम रत्नाकर शेट्टी का नंबर
  3931. 3:09:18मुझे भेज दो। इतना कहकर शौर्य ने फोन काट
  3932. 3:09:21दिया। शौर्य आनन-फानन में तैयार होकर नीचे
  3933. 3:09:24उतरा। ड्राइंग रूम में शिपरा नाश्ते की
  3934. 3:09:27टेबल [संगीत] पर थी। आ जाओ नाश्ता कर लो।
  3935. 3:09:31शौर्य ने बिना उसकी तरफ देखे बोला, "मुझे
  3936. 3:09:34थोड़ी जल्दी है। मैंने किसी को टाइम दे
  3937. 3:09:36रखा था। मैं [संगीत] नाश्ता बाहर कर
  3938. 3:09:38लूंगा। तभी शिप्रा फिर बोली, "अरे नाश्ता
  3939. 3:09:41तैयार है। 2 मिनट ही तो लगेंगे।"
  3940. 3:09:45वहां संतो भी बीच में बोल पड़ी। अरे आ
  3941. 3:09:48जाइए जीजा जी। हमारी दीदी इतने प्यार से
  3942. 3:09:50कह रही हैं और आप भाव खा रहे हैं। अब
  3943. 3:09:54शौर्य के लिए मना करना मुश्किल हो रहा था।
  3944. 3:09:56इसीलिए वह बैठ गया। तभी राहुल भी वहां आ
  3945. 3:09:59गया और बोला, क्या बात है जीजू इतनी
  3946. 3:10:02सुबह-सुबह आप तैयार होकर कहां जा रहे हो?
  3947. 3:10:05मीटिंग किसी लड़की से तो नहीं है?
  3948. 3:10:09शौर्य ने थोड़ी आें भरी और बोला, है तो
  3949. 3:10:12लड़की ही और बेहद खूबसूरत भी है। मैं
  3950. 3:10:15नताशा कपूर से मिलने जा रहा हूं। नताशा
  3951. 3:10:18कपूर का नाम सुनते ही शिप्रा ने सिर उठाकर
  3952. 3:10:21शौर्य को देखा। शौर्य ने जानबूझकर उसकी
  3953. 3:10:24तरफ [संगीत] ध्यान नहीं दिया। तभी राहुल
  3954. 3:10:26उछल पड़ा। क्या फेमस मॉडल नताशा कपूर जीजू
  3955. 3:10:31वो तो मेरी फेवरेट है। क्या मैं आपके साथ
  3956. 3:10:34चल सकता हूं? चल तो सकते हो पर मेरे पास
  3957. 3:10:37कार नहीं है। मैं [संगीत] टैक्सी से
  3958. 3:10:39जाऊंगा। शौर्य का जवाब सुनकर राहुल बोला
  3959. 3:10:42जीजू आप नताशा कपूर से मिलने टैक्सी से
  3960. 3:10:44जाओगे। आपके पास तो कोई पावरफुल कार होनी
  3961. 3:10:46[संगीत] चाहिए ताकि अच्छा इंप्रेशन पड़े।
  3962. 3:10:49तभी शिप्रा बोल पड़ी। अगर तुम चाहो तो
  3963. 3:10:52मेरी कार ले जा सकते हो। शौर्य इग्नोर
  3964. 3:10:55करते हुए बोला, नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं
  3965. 3:10:58है। मैं [संगीत] मैनेज कर लूंगा। शिप्रा
  3966. 3:11:01को शौर्य का यह रूखापन अजीब लगा। उसने फिर
  3967. 3:11:04ऑफर किया लेकिन शौर्य अपनी बात पर अड़ा
  3968. 3:11:06रहा। उसने मेनका को चुपके से एक मैसेज
  3969. 3:11:09किया। लेकिन शिप्रा ने फिर अपनी कार ऑफर
  3970. 3:11:12कर दी। अरे अब और कितना इंतजार करोगे? ले
  3971. 3:11:15जाओ मेरी कार। तभी शौर्य थोड़ा सख्त होकर
  3972. 3:11:19बोला। मैंने कहा ना मेरी फिक्र ना करें।
  3973. 3:11:23बस कुछ समय की बात है। शौर्य बोल ही रहा
  3974. 3:11:26था। तभी बाहर कार के ब्रेक लगने की आवाज
  3975. 3:11:29आई और सिक्योरिटी गार्ड कार [संगीत] की
  3976. 3:11:31चाबी लेकर अंदर आया।
  3977. 3:11:33मैम एक आदमी श्रवण जी के लिए कार छोड़कर
  3978. 3:11:36गया है। शौर्य मुस्कुराया। गार्ड के हाथ
  3979. 3:11:39से चाबी ली और राहुल की तरफ देखकर बोला
  3980. 3:11:42चलें। राहुल ने सहमति में अपना सिर हिलाया
  3981. 3:11:45और दोनों बाहर की तरफ चल दिए। शिप्रा भी
  3982. 3:11:48उसके साथ ही घर से बाहर [संगीत] निकली।
  3983. 3:11:51शौर्य राहुल के साथ मेन गेट पर पहुंचा तो
  3984. 3:11:53उसने देखा कि गेट के बाहर साइड में एक
  3985. 3:11:56लंबी लग्जरी कार खड़ी थी। राहुल ने उस
  3986. 3:11:59गाड़ी को देखा तो शौर्य की तारीफ करता हुआ
  3987. 3:12:01बोला अरे वाह जीजू आपने तो सच में कमाल की
  3988. 3:12:06गाड़ी मंगवा ली। यह हुई ना बात। राहुल की
  3989. 3:12:10बात सुनकर शौर्य कुछ बोला नहीं। बस
  3990. 3:12:12मुस्कुरा कर रह गया। वो जाकर ड्राइविंग
  3991. 3:12:15सीट पर बैठ गया और राहुल उसके बगल वाली
  3992. 3:12:18सीट [संगीत] पर जाकर बैठ गया। अभी शौर्य
  3993. 3:12:21कार आगे बढ़ाता उसी समय उसके पास से
  3994. 3:12:23शिप्रा की कार गुजरी। शिप्रा की निगाह भी
  3995. 3:12:26उस लंबी गाड़ी पर पड़ी तो वो सोचने को
  3996. 3:12:28मजबूर हो गई कि शौर्य ने इतनी जल्दी इस
  3997. 3:12:31[संगीत] कार की व्यवस्था कैसे कर ली। पर
  3998. 3:12:34उसने अपने दिमाग पर इस बारे में सोचने में
  3999. 3:12:37ज्यादा जोर नहीं लगाया और वहां से गुजर
  4000. 3:12:39गई। [संगीत] शौर्य ने भी कार स्टार्ट की
  4001. 3:12:42और आगे बढ़ा दी। कार को चलाते-चलाते ही
  4002. 3:12:45उसने मोबाइल के मैप पर मेनका द्वारा भेजी
  4003. 3:12:48गई लोकेशन सेट की और कार को उसी दिशा में
  4004. 3:12:51आगे बढ़ा दिया। मेनका ने शौर्य को रत्नाकर
  4005. 3:12:54शेट्टी के नंबर के साथ उनके द्वारा भेजी
  4006. 3:12:57गई करंट लोकेशन भी भेज दी थी। शौर्य को
  4007. 3:13:00यहां से निकलते-निकलते 10:00 बज गए थे।
  4008. 3:13:02लगभग 45 मिनट के बाद शौर्य इस लोकेशन पर
  4009. 3:13:06पहुंचा। उसने देखा कि एक पहाड़ी एरिया था
  4010. 3:13:09जहां पहाड़ी के साथ-साथ एक नदी गुजर रही
  4011. 3:13:12थी। नदी के किनारे पर एक रेस्टोरेंट था
  4012. 3:13:15जिसका एक प्लेटफार्म नदी के अंदर तक गया
  4013. 3:13:17हुआ था। वो प्लेटफार्म नदी से लगभग 15 फुट
  4014. 3:13:21ऊंचा था। उस प्लेटफार्म के नीचे कुछ दूरी
  4015. 3:13:24पर एक छोटी नाव थी। जिस पर दो-तीन
  4016. 3:13:26लड़कियां खड़ी थी। नदी के किनारे पर कुछ
  4017. 3:13:29जवान लड़के लड़कियां नहा रहे थे। किनारे
  4018. 3:13:32पर एक कन खड़ी थी जिसके टॉप पर एक
  4019. 3:13:34कैमरामैन अपने असिस्टेंट के साथ कैमरा लिए
  4020. 3:13:37खड़ा था। राहुल [संगीत] ने जब यह दृश्य
  4021. 3:13:39देखा तो वो उत्साहित होकर बोला जीजू यहां
  4022. 3:13:43तो शूटिंग चल रही है। शौर्य राहुल की बात
  4023. 3:13:46सुनकर मुस्कुराया। उसने अपना मोबाइल
  4024. 3:13:48निकाला और रत्नाकर शेट्टी को कॉल लगाया।
  4025. 3:13:51दो रिंग के बाद ही फोन उठा लिया गया और
  4026. 3:13:54दूसरी तरफ से रत्नाकर शेट्टी की आवाज आई।
  4027. 3:13:57हेलो मिस्टर श्रवण आप आ गए? श्रवण ने जब
  4028. 3:14:00रत्नाकर शेट्टी के मुंह से अपना नाम सुना
  4029. 3:14:02तो समझ गया कि मेनका ने रत्नाकर शेट्टी के
  4030. 3:14:05पास उसका नंबर भेज दिया होगा। इसीलिए उसने
  4031. 3:14:09उसे उसके नाम से पुकारा। वो बोला हां मैं
  4032. 3:14:14रेस्टोर के बाहर खड़ा हूं। तभी उसने देखा
  4033. 3:14:17[संगीत]
  4034. 3:14:17रेस्टोर का जो प्लेटफार्म नदी के अंदर जा
  4035. 3:14:19रहा था उसी पर एक मोटा सा आदमी खड़ा हुआ
  4036. 3:14:22और शौर्य की तरफ देखते हुए [संगीत] हाथ
  4037. 3:14:24हिलाने लगा। शौर्य समझ गया कि यही रत्नाकर
  4038. 3:14:27शेट्टी है। तभी उसके कान में दोबारा
  4039. 3:14:30रत्नाकर शेट्टी [संगीत] की आवाज आई।
  4040. 3:14:32मिस्टर श्रवण आप यहीं इस प्लेटफार्म पर आ
  4041. 3:14:35जाइए।
  4042. 3:14:36इसके बाद शौर्य ने फोन काटा और राहुल
  4043. 3:14:38[संगीत] के साथ उस प्लेटफार्म की तरफ बढ़
  4044. 3:14:40गया। जल्दी ही वो उस प्लेटफार्म पर पहुंच
  4045. 3:14:43गया। रत्नाकर शेट्टी ने अपने असिस्टेंट से
  4046. 3:14:46बोलकर दो कुर्सियां मंगवाई। रत्नाकर
  4047. 3:14:48शेट्टी के बगल में ही एक स्पॉटबॉय [संगीत]
  4048. 3:14:51एक प्लेट में सेब काट रहा था। जिसमें से
  4049. 3:14:53रत्नाकर शेट्टी सेब के टुकड़े उठाकर अपने
  4050. 3:14:56मुंह में डालता जा रहा था। रत्नाकर शेट्टी
  4051. 3:14:59के सामने एक मॉनिटर लगा हुआ था। जिस पर
  4052. 3:15:01नाव पर मौजूद लड़कियों की तस्वीरें दिखाई
  4053. 3:15:04दे रही थी। शौर्य को यूं तो नाव पर मौजूद
  4054. 3:15:07लड़कियों का चेहरा नजर नहीं आ रहा था, पर
  4055. 3:15:09उस मॉनिटर स्क्रीन पर नताशा कपूर का चेहरा
  4056. 3:15:12स्पष्ट नजर आ रहा था। रत्नाकर शेट्टी ने
  4057. 3:15:15शौर्य से कहा, श्रवण जी, यह टेक पूरा हो
  4058. 3:15:19जाता है। उसके बाद नताशा जी के साथ बैठकर
  4059. 3:15:22बात करते हैं। कोई बात [संगीत] नहीं, आप
  4060. 3:15:24आराम से अपना काम पूरा कीजिए। मुझे कोई
  4061. 3:15:27जल्दी नहीं है। शौर्य रत्नाकर शेट्टी की
  4062. 3:15:30बात सुनकर बोला। उसी समय रत्नाकर शेट्टी
  4063. 3:15:33ने कैमरामैन से कैमरा रोल का इशारा मिलने
  4064. 3:15:35के बाद एक्शन कहा। उसके बाद शौर्यन ने
  4065. 3:15:38देखा एक आर्टिफिशियल शार्क जो एकदम
  4066. 3:15:41[संगीत] असली प्रतीत हो रही थी वो नताशा
  4067. 3:15:43की नाव की तरफ बढ़ी और एक टक्कर उस नाव को
  4068. 3:15:46दे मारी। शार्क की टक्कर से नाव पलट गई।
  4069. 3:15:49नाव के पलटते ही नताशा नाव से नीचे गिर गई
  4070. 3:15:52और वो पानी में डूबने लगी। तभी एक मोटर
  4071. 3:15:55बोट तेजी से नताशा के करीब आती है और उस
  4072. 3:15:58पर से एक लड़का कूदता है। उसके हाथ में एक
  4073. 3:16:01ड्रिंक की बोतल है जो बोट से कूदते हुए भी
  4074. 3:16:03उसके हाथ में है। वो हवा में उड़ते हुए उस
  4075. 3:16:06कैन से दो घूंट लेता है और उसे हवा में
  4076. 3:16:09उछालकर पानी में कूदता है। जैसे ही वह
  4077. 3:16:12नताशा के पास पहुंचता है तो नताशा उसे
  4078. 3:16:15कसकर पकड़ लेती है। लड़का नताशा को खींचने
  4079. 3:16:18की कोशिश करता है तो महसूस करता है कि वो
  4080. 3:16:20नताशा को खींच नहीं पा रहा। उल्टा वो
  4081. 3:16:23[संगीत] भी उसके साथ पानी के नीचे जाने
  4082. 3:16:25लगता है। जैसे तैसे वो लड़का खुद को नताशा
  4083. 3:16:28से छुड़ाता है और उससे दूर हो जाता है।
  4084. 3:16:31वहां मौजूद सभी लोग हैरान हो जाते हैं कि
  4085. 3:16:34यह क्या हो गया? नताशा डूब कैसे रही है?
  4086. 3:16:37कैमरामैन जब नताशा पर कैमरा क्लोज में
  4087. 3:16:39फोकस करता है तो उसे दिखता है कि नताशा के
  4088. 3:16:42पैरों में एक रस्सी उलझी हुई है जो उसे
  4089. 3:16:45नीचे की तरफ खींच रही थी। तो क्या होगा
  4090. 3:16:48आगे? क्या नताशा शौर्य से मिलने से पहले
  4091. 3:16:51ही नदी में डूब जाएगी या फिर शौर्य उसे
  4092. 3:16:54बचाने की कोशिश करेगा? [संगीत]
  4093. 3:16:56क्या शौर्य के दिल में शिप्रा की जगह कोई
  4094. 3:16:58और लेने वाला है? जानने के लिए सुनते रहिए
  4095. 3:17:01बेगर हस्बैंड।

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