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Episode 6 Series غور و فکر — Transcript

by Dr Sufyan Quran Daily Dose · 938 words · 115 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00अ उजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह
  2. 0:02रहमान रहीम यह हजरत ईसा अल सलाम की बसत से
  3. 0:05400 साल कबल यूनान के शहर एथनस की एक शाम
  4. 0:08थी जब सुकरा जिसे फादर ऑफ फिलॉसफी कहा
  5. 0:11जाता है को जहर का प्याला पीने का हुक्म
  6. 0:14दिया गया लेकिन उसका जुर्म क्या था उसका
  7. 0:17जुर्म यह था कि वह नौजवानों को सवाल करना
  8. 0:19और सोचना सिखाता था वह कहता था सच्चाई वह
  9. 0:22नहीं जो दूसरों ने सिखाई है सच्चाई वह है
  10. 0:25जो तुम खुद दरयाफ्त करो जब जज ने फैसला
  11. 0:29सुनाया तो दो ने सुकरात से कहा माफी मांग
  12. 0:32लो झुक जाओ मगर सुकरात मुस्कुरा कर बोला
  13. 0:35मैं मर तो जाऊंगा मगर सच्चाई जिंदा रहेगी
  14. 0:38क्योंकि सच्चाई वह होती है जो सवालात का
  15. 0:40सामना कर सके यह कहकर उसने जहर का प्याला
  16. 0:44पिया और तारीख में हमेशा हमेशा के लिए अमर
  17. 0:47हो गया जो लोग हकीकत पर होते हैं वह आपको
  18. 0:50सवाल करने से नहीं रोकते बल्कि आपको सवाल
  19. 0:53करने पर उक साते हैं वो आपको गौर और फिक्र
  20. 0:56पर मजबूर करते हैं और यही उलूबारी का है
  21. 0:58जो बार-बार
  22. 1:00कहता है क्या तुम गौर फिक्र नहीं करते
  23. 1:02कुरान शरीफ फरमाता है कि जो लोग अकल
  24. 1:04इस्तेमाल नहीं करते वह बदतर जानवर है जैसे
  25. 1:07हमने पहली पिछली किस्त में इसके बारे में
  26. 1:09बात की और बताता है कि खैर कसीर अकल रखने
  27. 1:12वालों के लिए है साथ ही जहन्नुम में जाने
  28. 1:14की एक बड़ी वजह गर फिकर से गुरेज और अकल
  29. 1:17का इस्तेमाल ना करना है लेकिन हमारा आज का
  30. 1:19सवाल यह है कि हमें अपनी अकल कहां
  31. 1:22इस्तेमाल करनी चाहिए गनी खान बाबा पश्तो
  32. 1:24के एक मशहूर शायर है वह कहते हैं रबा रबा
  33. 1:27जमा रबा लेव शम
  34. 1:31स कम कयामत और हिसाब
  35. 1:36सनम आसमान मका देला कयाम रवान प जोर के
  36. 1:41तवाफ कादला यानी तुम आदतन या मजबूरन जो
  37. 1:45सजदा करते हो अगर तुम्ह आसमान और जमीन के
  38. 1:48राजों का इदराक हो जाए तो तुम बे तियार
  39. 1:51सजद में गिर पड़ोगे अल्लामा इकबाल की
  40. 1:53किताब बाले जिब्रील में एक नजम जो इस लमहे
  41. 1:56को बयान करती है जब रूह इंसानी पहली बार
  42. 1:59जमीन पर ती है वह अपनी आंखें खोलती है और
  43. 2:02जमीन उसका इस्तकबाल करते हुए कहती है खोल
  44. 2:05आंख जमी देख फलक देख फिजा देख मशरिक से
  45. 2:09उभरते हुए सूरज को जला जरा देख इस जलवाए
  46. 2:13बेपर्दा को पर्दे में छुपा देख है तेरे
  47. 2:17तसरफती यह घटाएं ये गुंबद अफलाक ये खामोश
  48. 2:21फिजाएं यहां जमीन एक उस्ताद बनकर इंसान को
  49. 2:24दावत फिक्र दे रही है वह कहती है यह जमीन
  50. 2:26यह आसमान यह पहाड़ यह समंदर यह बहती हवा
  51. 2:30ये घूमते बादिल यह निजाम शमसी यह कहकशा है
  52. 2:33क्या यह सब यूं ही है क्या इनके पीछे कोई
  53. 2:35राज नहीं कुरान कर कुराने करीम हमें सिर्फ
  54. 2:38सोचने की दावत नहीं देता बल्कि यह भी
  55. 2:40बताता है कि किन चीजों पर गौर करना चाहिए
  56. 2:42कुरान शरीफ की एक इंतिहा खूबसूरत आयत है
  57. 2:45और मैं चाहूंगा कि आप यह आयत कारी मि शारी
  58. 2:47राशिद अला फासी की आवाज में सुने जब भी
  59. 2:51मैं उसे सुनता हूं मेरी कैफियत बदल जाती
  60. 2:54है जैसे मेरे अंदर कुछ था एक तिष्णगी एक
  61. 2:57प्यास एक इस्तरा जो बरसों से बेक
  62. 3:00और य आयत सुनक जैसे मुझे कोई रास्ता मिल
  63. 3:03गया हो यह व कैफियत है जिसे शायद अल्फाज
  64. 3:05में मुकम्मल तौर पर बयान ना किया जा सके
  65. 3:08मैं चाहता हूं कि आप भी वही महसूस करें जो
  66. 3:11मैं आयत को सुनकर महसूस कर सक शायद अल्फाज
  67. 3:13आपके अंदर भी कोई नया दर खोल देमा
  68. 3:23[संगीत]
  69. 3:29[संगीत]
  70. 3:38[संगीत]
  71. 3:41माया ब अ बाद
  72. 3:45महाया ब अ बा महा व बहा म कु रिया
  73. 3:54[संगीत]
  74. 4:11इस आयत का तर्जुमा है बेशक आसमान और जमीन
  75. 4:13की पैदाइश में यानी क्रिएशन ऑफ यूनिवर्स
  76. 4:15में और रात और दिन के बदलने में यानी सोलर
  77. 4:19सिस्टम में और वह कितियां जो आपके फायदे
  78. 4:20के लिए समंदर में चलती है और वह पानी जो
  79. 4:22हमने आसमान से नाजिल किया और उससे मुर्दा
  80. 4:25जमीन को जिंदा किया और वह तमाम चरन परिन
  81. 4:28जो इस जमीन पर है और यह हवाएं और यह बादल
  82. 4:31इसमें निशानियां हैं किनके लिए लाया कोमी
  83. 4:37याकून उन लोगों के लिए जो अकल से काम लेते
  84. 4:40हैं यानी इन तमाम चीजों पर आपने अपनी अकल
  85. 4:44इस्तेमाल करनी है अपने गौर और फिक्र करना
  86. 4:46है यह निशानियां उनके लिए हैं जो सोचने का
  87. 4:49हुनर रखते हैं जो देखकर भी अंधे नहीं बनते
  88. 4:52जो सुनकर भी बहरे नहीं रहते यह वह राज है
  89. 4:55जिन्हें अगर समझ लिया जाए तो सजदा आदत
  90. 4:58नहीं रहेगा बल्कि बयार बेखुदी में इश्क
  91. 5:01में पेशानी खाक पर झुक जाएगी क्या आपने
  92. 5:04कभी गौर किया इन चीजों पर क्या आपने कभी
  93. 5:08उन सवालात पर गौर किया जो कुरान शरीफ ने
  94. 5:10हमसे सूर िया में पूछे अला
  95. 5:14यर व
  96. 5:17समात ल जि बाली कनस बत ल अ सुत क्या व
  97. 5:23नहीं देखते कि न को कैसे पैदा किया गया है
  98. 5:25और आसमान को कैसे बुलंद किया गया है और ये
  99. 5:30पहाड़ जमीन में कैसे गाड़े गए हैं और जमीन
  100. 5:32को कैसे बिछा दिया गया
  101. 5:34है अगर तुम आसमान और जमीन के राज जान लो
  102. 5:37तो तुम्हें आदतन सजदा करने की जरूरत नहीं
  103. 5:40रहेगी तुम बे इख्तियार सजदे में गिर
  104. 5:43पड़ोगे यह राज क्या है क्या वाकई कायनात
  105. 5:45का जर्रा जर्रा हमें किसी तरह बड़े पैगाम
  106. 5:48की तरफ बुला रहा है अगर आप भी इन राजों की
  107. 5:51तलाश में है तो हमारे साथ इस सफर का
  108. 5:53हिस्सा बने ये हमारी सीरीज गौर और फिक्र
  109. 5:55की छठी किस्त थी अगली किस्त में हम इन्हीं
  110. 5:58राजों पर बात करेंगे
  111. 6:00तब तक के लिए आपसे एक ही सवाल है य आसमान
  112. 6:05और जमीन की पैदाइश कैसे हुई और यह हमें
  113. 6:08अल्लाह के करीब कैसे ले जाएगी मिलते हैं
  114. 6:11अगली किस्म में आप सबकी सि मातो का
  115. 6:13बहुत-बहुत शुक्रिया अल्लाह हाफिज

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