YouTube2Text

भिखारी हसबैंड | Episode 51–65 | Kahvanihindi — Transcript

by Kahvani Hindi · 32,350 words · 3,886 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:04तो हेलो दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मुझे
  2. 0:06आशा है कि आप लोग ठीक ही होंगे और मजे से
  3. 0:08इस चैनल पर जो भी सीरीज आ रही है उसको सुन
  4. 0:11रहे होंगे। तो माय बैगर हस्बैंड का नया
  5. 0:14वीडियो आ चुका है जिसमें एपिसोड 51 से 65
  6. 0:17तक है जिसमें मान लो 15 एपिसोड हैं। तो
  7. 0:20जल्दी से जल्दी इस वीडियो को सुनो और
  8. 0:23देखो। आपको कोई मिस्टेक तो नहीं हुई है और
  9. 0:26वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब
  10. 0:28करें और बेल आइकॉन जरूर दबाएं जिससे कि
  11. 0:31आपसे कोई भी वीडियो मिस ना हो। तो करते
  12. 0:33हैं लेट स्टार्ट दिस वीडियो। शिप्रा ने
  13. 0:36कार के अंदर बैठकर जिस तरह धड़ाम से
  14. 0:38दरवाजा बंद किया, शौर्य ने आंखों को
  15. 0:40झपकाते हुए अंदाजा लगा लिया कि मैडम ने
  16. 0:42गुस्से में अपनी भड़ास दरवाजे पर निकाली
  17. 0:45है। शिप्रा के चेहरे के भाव भी यही संदेश
  18. 0:48दे रहे थे कि खन्ना की घिनौनी हरकत से
  19. 0:50उसका दिल सदमे में है। उसका दिमाग अभी भी
  20. 0:53पिछले आधे घंटे की घटना से बाहर नहीं
  21. 0:56निकला था। उसकी जुबान खामोश थी, लेकिन मन
  22. 0:58ही मन वो बोल रही थी। अगर दोनों गुंडे
  23. 1:01मुझे पकड़ लेते और मुझ पर तेजाब फेंक देते
  24. 1:04तो शिप्रा के पूरे बदन में एक डरावनी
  25. 1:07सेहरन सी दौड़ गई। वो मन ही मन शौर्य से
  26. 1:09भी सवाल करने लगी। ये जनाब पता नहीं आज
  27. 1:13इनको क्या हो गया। अपनी सीट से हिले ही
  28. 1:15नहीं। शौर्य को शिप्रा की आंखों से उसकी
  29. 1:18घबराहट का एहसास हो रहा था। वो सोच ही रहा
  30. 1:21था कि माहौल को हल्का कैसे किया जाए। तभी
  31. 1:23शिप्रा ने एक पल के लिए शौर्य की तरफ देखा
  32. 1:26तो शौर्य ने तुरंत ही शिप्रा की तरफ देखते
  33. 1:28हुए हल्की मुस्कान के साथ कहा, वाकई आपने
  34. 1:32तो अकेले ही सब कुछ कंट्रोल कर लिया। वैसे
  35. 1:35आपने उन दोनों से ऐसा क्या कहा कि वे बिना
  36. 1:38कोई बवाल किए ही वहां से चले गए। यह सुनकर
  37. 1:41शिप्रा की भौए सिकुड़ गई। वो अपनी नाराजगी
  38. 1:44को कंट्रोल नहीं कर पाई और शिकायती लहजे
  39. 1:46में शौर्य से बोली। जब तुम्हें बाहर आना
  40. 1:49चाहिए था तब तो तुम आए नहीं और अब पूछ रहे
  41. 1:51हो कि वह दोनों कैसे चले गए? शौर्य ने
  42. 1:54बड़ी ही मासूमियत से कंधे उचकाते हुए कहा,
  43. 1:57"कमाल करती हैं आप।" अरे आपने ही तो कहा
  44. 1:59था कि कार से बाहर नहीं निकलना। और अब आप
  45. 2:02ही शिकायत कर रही हैं कि मैं बाहर नहीं
  46. 2:04आया। वेरी स्मार्ट। मैंने वो तब कहा था जब
  47. 2:07मुझे लगा कि खन्ना अकेला है। लेकिन जब वो
  48. 2:09दोनों गुंडे आ गए थे तब तो तुम्हें बाहर
  49. 2:12आना चाहिए था।
  50. 2:13शिप्रा की शिकायत कम नहीं हो रही थी
  51. 2:15क्योंकि शिप्रा का गुस्सा अभी शांत नहीं
  52. 2:17हुआ था। शिप्रा शौर्य से नाराज थी लेकिन
  53. 2:20कुछ ज्यादा भी नहीं क्योंकि उसे इस बात का
  54. 2:23भी एहसास था कि आज अगर उसकी जान बची है तो
  55. 2:26वो शौर्य के नाम के कारण ही उसके जानबूझकर
  56. 2:29नाराजगी जताने का कारण यह भी था कि वह इस
  57. 2:31बात से श्योर होना चाहती थी कि कहीं शौर्य
  58. 2:33के कार से बाहर निकलने की वजह उसके द्वारा
  59. 2:36जिंदगी साथ बिताने वाला प्रपोजल रिजेक्ट
  60. 2:38करना तो नहीं था। कार के अंदर के माहौल
  61. 2:41में एक अलग ही खुशनुमा खिंचाव था। शिप्रा
  62. 2:43और शौर्य दोनों की जुबान खामोश थी, लेकिन
  63. 2:46कान एक दूसरे की आवाज सुनने को बेताब हो
  64. 2:48रहे थे। धीरे-धीरे वो घर की ओर बढ़ रहे
  65. 2:51थे। शौर्य और शिप्रा की नजरें बार-बार एक
  66. 2:54दूसरे से टकरा रही थी। उधर दूसरी तरफ
  67. 2:56शिप्रा के घर में भी पारिवारिक माहौल कुछ
  68. 2:59टकराहट वाला ही था। हॉल में बलवंत राय,
  69. 3:02राजदीप राय और बीना जी बैठे थे। तीनों के
  70. 3:05चेहरे गंभीर थे। कुछ पल की चुप्पी के बाद
  71. 3:07बलवंत राय ने गहरी आवाज में कहा
  72. 3:11देखो तुम दोनों एक बार शिप्रा से उसकी
  73. 3:13अंतिम राय जरूर जान लो भावनाओं में बहकर
  74. 3:16कोई फैसला नहीं लिया जाता
  75. 3:18अपनी बात को आगे समझाते हुए बलवंत राय
  76. 3:20बोले अगर वो श्रवण से तलाक के लिए तैयार
  77. 3:23नहीं है तो फिर उसे सर्वेंट क्वार्टर में
  78. 3:25रखने का क्या मतलब उसे घर में ही बुला लो
  79. 3:28क्योंकि यह बात ज्यादा समय तक दुनिया से
  80. 3:30छुपी नहीं रहेगी कमरे का माहौल और भारी हो
  81. 3:34गया राजदीप राय और बीना जी बेबसी से एक
  82. 3:36दूसरे की ओर देखने लगे। तभी बलवंत राय ने
  83. 3:39एक और बात जोड़ी। वैसे भी अब श्रवण का
  84. 3:42कायाकल्प हो चुका है। अगर कोई उसे पहले से
  85. 3:45नहीं जानता हो तो कोई भी उसे भिखारी नहीं
  86. 3:48कहेगा। फिर उन्होंने सीधे दोनों की तरफ
  87. 3:50देखा और तुम्हें भी तो यह तय करना होगा कि
  88. 3:53क्या तुम उसे अपने दामाद के रूप में
  89. 3:55स्वीकार कर सकते हो या नहीं। बलवंत राय के
  90. 3:59ऐसा बोलते ही कमरे में फिर से सन्नाटा छा
  91. 4:01गया। अब फैसला सिर्फ शिप्रा का नहीं पूरे
  92. 4:04परिवार का होने वाला था। राजदीप जी और
  93. 4:07बीना जी दोनों अंदर ही अंदर सन्न रह गए
  94. 4:10थे। बात अब उनके हाथ से निकलती जा रही थी।
  95. 4:13वे शौर्य को दामाद के रूप में कभी स्वीकार
  96. 4:15नहीं करना चाहते थे। लेकिन शिप्रा पर उनका
  97. 4:18जोर भी नहीं चल रहा था। उन्होंने तो आज
  98. 4:21ठान लिया था कि किसी भी तरह शिप्रा को
  99. 4:23दबाव में लाकर तलाक के लिए मना लें। और
  100. 4:25इसी के लिए उन्होंने बलवंत राय जी का
  101. 4:27सहारा लिया था।
  102. 4:29पिताजी आप ही शिप्रा को समझाइए। हमारी तो
  103. 4:32वह सुनती ही नहीं। राजदीप जी को जब कुछ
  104. 4:35जवाब नहीं सूझा तो उन्होंने अपने पिताजी
  105. 4:37से उम्मीद भरे स्वर में कहा। तभी बलवंत
  106. 4:39राय ने धीमे लेकिन साफ लहजे में जवाब
  107. 4:42दिया।
  108. 4:43अरे भाई मैंने भी तो कोशिश की थी। मैं तो
  109. 4:46रजत के साथ उसकी शादी के लिए भी तैयार था।
  110. 4:49लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी है कि श्रवण से
  111. 4:50तलाक नहीं लेगी। अब बताओ मैं भी उसे कितना
  112. 4:53दबाव में ला सकता हूं। उनकी बात में बेबसी
  113. 4:56कम और स्थिति को स्वीकार करने का संकेत
  114. 4:59ज्यादा था। वहीं दूसरी तरफ कार के अंदर
  115. 5:02शिप्रा और शौर्य के बीच की गहरी खामोशी
  116. 5:04अभी भी टूटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
  117. 5:06शिप्रा और शौर्य दोनों अपने-अपने ख्यालों
  118. 5:09में डूबे हुए थे। तभी शौर्य ने पहल की और
  119. 5:12उस सन्नाटे को तोड़ा। मैं सोच रहा था
  120. 5:15मैंने अपने लिए एक घर देख लिया है। शायद
  121. 5:17कल शाम तक मैं वहां शिफ्ट भी हो जाऊं।
  122. 5:20अचानक शौर्य के मुंह से कुछ अलग और
  123. 5:22सरप्राइजिंग सुनकर शिप्रा चौंक गई। यह
  124. 5:24उसके लिए बिल्कुल नई बात थी। एक दिन पहले
  125. 5:27उसने नई नौकरी ज्वाइन करने की बात की थी
  126. 5:29और अब अचानक घर बदलने की बात से शिप्रा के
  127. 5:32मन में कई सवाल एक साथ उठ खड़े हुए थे।
  128. 5:35अचानक श्रवण ऐसी बात क्यों कर रहा है?
  129. 5:37क्या उसे कुछ बुरा लगा या फिर वो जानबूझकर
  130. 5:40दूर जाना चाहता है। उसकी सोच में थोड़ी
  131. 5:43घबराहट आ गई। शिप्रा को लगने लगा अगर
  132. 5:45शौर्य सच में अलग रहने चला गया तो उसके
  133. 5:48सारे प्लान बिखर सकते हैं। उसने तुरंत
  134. 5:50उसकी तरफ देखते हुए पूछा। तुम्हारी नौकरी
  135. 5:53की बात तो समझ में आती है लेकिन यहां
  136. 5:55अचानक घर छोड़ने का क्या मतलब है? शौर्य
  137. 5:58ने एक पल के लिए उसकी तरफ देखा। फिर नजर
  138. 6:01वापस सड़क पर टिका दी। आप क्या चाहती हैं
  139. 6:03कि मैं जहां हूं वहीं रहूं? असल में ये घर
  140. 6:06मुझे उसी कंपनी की तरफ से मिल रहा है जहां
  141. 6:09मैं काम करने वाला हूं। शौर्य ने समझाते
  142. 6:12हुए कहा तो शिप्रा कुछ पल के लिए सोच में
  143. 6:14पड़ गई। आखिर ऐसी भी कौन सी बड़ी कंपनी
  144. 6:17में काम मिल गया? जब उससे रहा नहीं गया तो
  145. 6:20उसने पूछ ही लिया। अच्छा बताओ ऐसा क्या
  146. 6:22काम मिला है तुम्हें जो कंपनी ने रहने के
  147. 6:25लिए घर भी दे दिया? शौर्य ने थोड़ा सोचते
  148. 6:27हुए जवाब दिया। अभी तो काम का पूरा अंदाजा
  149. 6:30नहीं है लेकिन शायद किसी कंपनी को
  150. 6:32इंटरनेशनल लेवल पर बूस्ट करना है। उसके
  151. 6:35लिए एक पूरी टीम बनाई जा रही है। लगता है
  152. 6:37जिसने हमें हायर किया है, उसने किसी बड़ी
  153. 6:40कंपनी के साथ कोलैबोरेशन किया है। बोलते
  154. 6:43हुए वह धीरे-धीरे नई कहानी गढ़ रहा था।
  155. 6:46शौर्य की बात सुनकर शिप्रा के मन में शक
  156. 6:49पैदा हुआ। कहीं वो उसी की कंपनी के बारे
  157. 6:52में तो बात नहीं कर रहा जिसकी बात मोहित
  158. 6:54कर रहा था। कहीं मोहित रैना ने ही इसे
  159. 6:57हायर तो नहीं किया। लेकिन फिर उसके मन में
  160. 6:59एक और सवाल उठा। क्या श्रवण इतना काबिल है
  161. 7:02कि किसी कंपनी को इंटरनेशनल लेवल पर बूस्ट
  162. 7:04कर सके? आखिर शिप्रा ने सीधे पूछ लिया।
  163. 7:08तुम्हें हायर किसने किया है? अब शौर्य को
  164. 7:11बहुत सोच समझ कर जवाब देना था। कुछ पल चुप
  165. 7:14रहने के बाद उसने कहा उसका नाम विक्रम
  166. 7:17राणावत है। शौर्य जानता था कि शिप्रा इस
  167. 7:20नाम से वाकिफ नहीं होगी। इसीलिए वो ज्यादा
  168. 7:22सवाल नहीं करेगी। शिप्रा ने दिमाग पर जोर
  169. 7:25डाला लेकिन विक्रम राणावत नाम उसके लिए
  170. 7:27बिल्कुल अनजान था। जितना वो सोचती उसकी
  171. 7:30उतनी ही उलझन बढ़ती जा रही थी। कौन है
  172. 7:34विक्रम? और अचानक कहां से आ गया? हमने
  173. 7:36इसके बारे में पहले कभी सुना क्यों नहीं?
  174. 7:39आखिरकार शिप्रा ने अपनी बेचैनी जाहिर कर
  175. 7:41ही दी। शौर्य ने हल्की सी सांस ली और
  176. 7:44संभलकर जवाब दिया। अब यह तो मुझे नहीं पता
  177. 7:47कि आपने उसके बारे में क्यों नहीं सुना।
  178. 7:49लेकिन मैंने जो सुना है वो यह कि उसे
  179. 7:51इंडिया आए ज्यादा समय नहीं हुआ है। उसका
  180. 7:54मेन बिजनेस यूके में ही सेटल है और शायद
  181. 7:56अब वो यहां अपने पैर जमाने की सोच रहा है।
  182. 8:00शिप्रा को यह बात हजम नहीं हो रही थी।
  183. 8:02उसके दिमाग में फिर सवाल गूंजा। यूके से
  184. 8:05आया हुआ कोई बड़ा बिजनेसमैन श्रवण जैसे
  185. 8:08इंसान को हायर करके इतना बड़ा रिस्क ले
  186. 8:10रहा है? शिप्रा के मन में एक और सवाल उठा।
  187. 8:13कहीं मैं श्रवण को ही अंडरएस्टिमेट तो
  188. 8:15नहीं कर रही या फिर इस पूरे खेल में कुछ
  189. 8:18ऐसा है जो मुझे दिखाई नहीं दे रहा। फिर
  190. 8:21उसने सीधे मुद्दे पर आते हुए शौर्य से
  191. 8:23कहा, ठीक है, यह तो अच्छी बात है कि
  192. 8:25तुम्हें जॉब मिल गई, लेकिन तुम्हें यहां
  193. 8:27से जाने की इतनी जल्दी क्यों है? शौर्य ने
  194. 8:30शांत अंदाज में कहा। इसमें जल्दी वाली तो
  195. 8:33कोई बात नहीं है। जब मेरे रहने की
  196. 8:35व्यवस्था हो गई है तो कोई कारण नहीं कि
  197. 8:37मैं आपके यहां और ठहरूं। शिप्रा ने उसकी
  198. 8:40बात ध्यान से सुनी। फिर गंभीरता से बोली
  199. 8:43हां मैं समझती हूं लेकिन यह मैं तुम्हारे
  200. 8:46लिए नहीं अपने लिए कह रही हूं। अगर तुम
  201. 8:48हमारे घर से चले गए तो तुम्हें भी पता है
  202. 8:51कि मेरे घर वाले मेरे साथ क्या करेंगे।
  203. 8:54उसकी बात में छुपा डर साफ था। यह सिर्फ
  204. 8:57रहने का मामला नहीं था बल्कि उसके ऊपर आने
  205. 8:59वाले दबाव का भी था। शौर्य ने उसे समझाने
  206. 9:02की कोशिश की। वैसे अगर मैं सच कहूं तो
  207. 9:05आपको अपने घर वालों की बात मान लेनी
  208. 9:08चाहिए। वो जो भी कर रहे हैं आपकी भलाई के
  209. 9:11लिए ही कर रहे हैं। शौर्य खुद जानता था कि
  210. 9:14वो जो कह रहा है वो शिप्रा को मंजूर नहीं
  211. 9:17होगा। फिर भी वो यह बातें जानबूझकर कर रहा
  212. 9:19था। फिर थोड़ा रुक कर उसने सीधा सवाल
  213. 9:22किया। पता नहीं लेकिन मुझे यह समझ नहीं
  214. 9:25आता। आप यह सब खेल कब तक खेलती रहेंगी?
  215. 9:28आखिर कब तक इस तरह एक मुखौटा पहन कर जी
  216. 9:30पाएंगी?
  217. 9:33इस पर शिप्रा ने बिना हिचक के जवाब दिया।
  218. 9:35तब तक जब तक मेरे घर वालों को यह समझ ना आ
  219. 9:38जाए कि मेरे पीछे पड़ने का कोई फायदा नहीं
  220. 9:41है। और अगर वह कभी नहीं माने तो। शौर्य ने
  221. 9:45फिर पूछ डाला तो शिप्रा ने पूरे
  222. 9:46आत्मविश्वास के साथ कहा। ऐसा हो ही नहीं
  223. 9:49सकता। हर चीज की एक सीमा होती है। देर
  224. 9:52सवेेर उन्हें मेरी बात समझ आ ही जाएगी।
  225. 9:55रेयर व्यू मिरर में शौर्य कुछ पल शििप्रा
  226. 9:57को देखता रहा जैसे उसके आत्मविश्वास को
  227. 10:00परख रहा हो। फिर हल्की सी मुस्कान के साथ
  228. 10:02बोला ठीक है। अब जब आप इतनी कॉन्फिडेंटली
  229. 10:06कह रही हैं तो मैं कुछ दिन और आपके यहां
  230. 10:09रुक जाता हूं। शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा
  231. 10:11ने राहत की सांस ली। लेकिन वो नहीं जानती
  232. 10:14थी कि शौर्य के मन में क्या चल रहा है।
  233. 10:16शौर्य सब समझ रहा था। शिप्रा की मजबूरी,
  234. 10:19उसका डर, उसका यह मुखौटा लेकिन फिर भी वो
  235. 10:23जानबूझकर इस खेल का हिस्सा बना हुआ था।
  236. 10:25क्योंकि उसके दिल के कोने में शिप्रा ने
  237. 10:27अपनी जगह बना ली थी। शौर्य उसे दूर जाने
  238. 10:30की सोच भी नहीं सकता था। वो चाहता था कि
  239. 10:33एक दिन शिप्रा खुद अपने दिल की बात माने
  240. 10:35और कहे कि उसे भी उससे प्यार है। वो उसकी
  241. 10:37जरूरत नहीं उसकी चाहत बनना चाहता है।
  242. 10:40शौर्य का जवाब सुनकर अंदर से खुश शिप्रा
  243. 10:43से रहा नहीं गया और वो बोली शुक्रिया
  244. 10:45श्रवण तुम्हारे घर से जाने की बात सुनकर
  245. 10:48तो मेरी धड़कन ही थम गई थी। हां मेरी भी
  246. 10:51थम गई थी। शौर्य के इन शब्दों को सुनकर
  247. 10:54शिप्रा की आंखों में हैरानी उतर आई। वहीं
  248. 10:57दूसरी तरफ फटने को तैयार तो शिप्रा के
  249. 10:59परिवार के सदस्य भी हैं। उन्हें शिप्रा का
  250. 11:02ही इंतजार है। शिप्रा घर की दहलीज पर कदम
  251. 11:05रख चुकी है। उसकी नजर हॉल में बैठे
  252. 11:07दादाजी, पापा और मम्मी पर जाती है। शिप्रा
  253. 11:10अपने कमरे में ना जाकर सीधा उन सबके सामने
  254. 11:13जाकर खड़ी हो जाती है। तकदीर ने बना दी
  255. 11:16शौर्य और शिप्रा की जोड़ी और अब इनके इस
  256. 11:18रिश्ते की वजह से जो घटनाएं घट रही हैं वो
  257. 11:20किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। इनके
  258. 11:23जीवन में हर रोज एक नया ट्विस्ट आ जाता
  259. 11:25है। जहां एक तरफ इन दोनों की सोच थोड़ी
  260. 11:27जिद्दी है, वहीं दूसरी तरफ दोनों के ही मन
  261. 11:30में एक दूसरे के प्रति सम्मान और स्वयं के
  262. 11:33प्रति स्वाभिमान भी कूट-कूट कर भरा है।
  263. 11:35शायद इसीलिए दोनों अपने दिल की बात जुबान
  264. 11:38तक लाने में थोड़ा समय ले रहे हैं। फिलहाल
  265. 11:41दोनों के कमरे अलग हैं। लेकिन घर एक है।
  266. 11:44और इस वक्त का सबसे बड़ा सवाल यह है कि
  267. 11:46क्या दोनों के दिल कभी एक दूसरे के लिए
  268. 11:48धड़क पाएंगे? क्या शौर्य और शिप्रा एक हो
  269. 11:52पाएंगे?
  270. 11:53अरे भाई शिप्रा है कहां? बेहतर यही रहेगा
  271. 11:56कि सच्चाई शिप्रा ही बताए। आखिर उसके मन
  272. 11:59में क्या चल रहा है? दादा बलवंत राय ने
  273. 12:02जैसे ही यह शब्द बोले तो राजदीप राय ने भी
  274. 12:04सहमति जताते हुए कहा हां हमें शिप्रा से
  275. 12:08साफ-साफ पूछ लेना चाहिए।
  276. 12:11मैं तो कहूंगी बात कयामत तक पहुंच जाए।
  277. 12:13उससे पहले ही हमें पूछना नहीं। शिप्रा को
  278. 12:16बताने देना चाहिए कि हम श्रवण को अपने
  279. 12:18दामाद के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते।
  280. 12:21बीना जी थोड़ा सख्त रवैया दिखाते हुए
  281. 12:23बोली। तभी सबने देखा कि सामने के बड़े
  282. 12:26वाले दरवाजे से शिप्रा अंदर आ रही है।
  283. 12:28शिप्रा को देखते ही दादाजी, पिता राजदीप
  284. 12:31और मां बीना जी तीनों अचानक चुप हो गए।
  285. 12:34शिप्रा तुरंत समझ गई कि बात उसी के बारे
  286. 12:36में हो रही है। आमतौर पर वो सीधे अपने
  287. 12:39कमरे में चली जाती है। लेकिन आज वो वहीं
  288. 12:41रुक गई। सबकी तरफ देखते हुए उसने शांत
  289. 12:44लेकिन सीधे लहजे में पूछा। ऐसा लग रहा है
  290. 12:47शायद आप लोग मुझसे कुछ बात करना चाहते
  291. 12:49हैं।
  292. 12:51सही सोचा तुमने लेकिन बेटी थकी सी लग रही
  293. 12:54हो। पहले आराम से बैठ जाओ। बलवंत राय ने
  294. 12:57गंभीर स्वर में कहा। शिप्रा उनके सामने
  295. 13:00रखे सिंगल सोफे पर बैठ गई और बोली
  296. 13:03नहीं मैं बिल्कुल ठीक हूं दादा जी। कहिए
  297. 13:06आप लोगों को मुझसे क्या बात करनी है?
  298. 13:08बलवंत राय ने गहरी सांस ली और धीमे लेकिन
  299. 13:11ठहराव भरे स्वर में बोले। सबसे पहले यह
  300. 13:14समझ लो कि हम सब तुम्हारे दुश्मन नहीं
  301. 13:16हैं। हम जो कुछ भी कहेंगे तुम्हारी भलाई
  302. 13:19के लिए ही कहेंगे। बस हमारी बातों को
  303. 13:22समझने की कोशिश करना। कमरे में एक अजीब सी
  304. 13:25खामोशी फैल गई। शिप्रा सामने बैठे पापा और
  305. 13:28मम्मी की आंखों में देखने लगी। जैसे आने
  306. 13:31वाले सवालों के लिए खुद को तैयार कर रही
  307. 13:33हो। पहेलियां बुझाने से अच्छा है दादा जी
  308. 13:36कि आप सीधे मुद्दे पर आ जाएं। वही ज्यादा
  309. 13:39बेहतर रहेगा। और जहां तक दुश्मन ना समझने
  310. 13:41की बात है तो मैं अच्छी तरह जानती हूं कि
  311. 13:44आप सब कभी मेरा बुरा नहीं सोच सकते।
  312. 13:46इसीलिए यह कहने की जरूरत नहीं है कि आप
  313. 13:49मेरे दुश्मन नहीं हैं। शिप्रा ने अपनी बात
  314. 13:51रखते हुए कहा उसकी बात सुनकर बलवंत राय ने
  315. 13:55हल्का सा सिर हिलाया और बोले ठीक है तो
  316. 13:58साफ-साफ सुन लो। तुम्हारे इस फैसले से हम
  317. 14:00में से कोई भी खुश नहीं है। ना तुम्हारे
  318. 14:03पापाम और [संगीत] ना ही मैं। देखो कुछ
  319. 14:06फैसले भावनाओं में बहकर नहीं लिए जाते।
  320. 14:08अभी भले तुम्हें सब सही लग रहा हो लेकिन
  321. 14:11यह तुम्हारे भविष्य के लिए ठीक नहीं है।
  322. 14:14उन्होंने गंभीर और प्रभावशाली लहजे में
  323. 14:16कहा। शिप्रा ने उनकी आंखों में देखते हुए
  324. 14:18पूछा। आप आखिर किस फैसले की बात कर रहे
  325. 14:22हैं? उसकी आवाज में अब हल्की बेचैनी और
  326. 14:25उलझन झलक रही थी जैसे वो समझने की कोशिश
  327. 14:28कर रही हो कि आखिर यह सब चल क्या रहा है।
  328. 14:32देखो शिप्रा सब कुछ जानते-बूझते भी अनजान
  329. 14:35बनने की कोशिश मत करो। तुम यह कहकर क्या
  330. 14:38साबित करना चाहती हो कि तुम्हें नहीं पता
  331. 14:40हम किस मुद्दे में बात कर रहे हैं। बीना
  332. 14:43जी ने गुस्से में कहा हम तुम्हारे श्रवण
  333. 14:46से तलाक ना लेने की बात कर रहे हैं। मैं
  334. 14:48अपनी बेटी की जिंदगी की कल्पना किसी
  335. 14:50भिखारी के साथ नहीं कर सकती। तुम जिससे
  336. 14:52कहोगी हम तुम्हारी शादी के लिए हर जगह बात
  337. 14:55करेंगे। लेकिन पहले तुम श्रवण से तलाक ले
  338. 14:58लो। उनकी आवाज में गुस्सा तो था। लेकिन
  339. 15:01असली दर्द समाज के तानों का था। बीना जी
  340. 15:04की बातों ने उस दर्द को और गहरा कर दिया
  341. 15:06था जो अक्सर मौका मिलते ही शिप्रा पर तंज
  342. 15:09कसती रहती थी। शिप्रा ने बिना घबराए सीधा
  343. 15:12अपनी मां की आंखों में देखते हुए कहा।
  344. 15:14क्या आप मुझे यह बताएंगी कि आप लोग क्यों
  345. 15:17चाहते हैं कि मैं श्रवण से तलाक ले लूं?
  346. 15:19अगर उसके गरीब होने के अलावा कोई और भी
  347. 15:22तार्किक कारण है तो आप जरूर बताइए। मैं उस
  348. 15:25बारे में सोचने के लिए तैयार हूं। बताइए
  349. 15:28कोई है क्या? उसका सवाल सुनकर कमरे में
  350. 15:31सन्नाटा छा गया। सबकी जुबान मानो थम गई।
  351. 15:34किसी के पास तुरंत कोई जवाब नहीं था। तभी
  352. 15:37राजदीप राय ने गंभीरता से कहा जिस कारण को
  353. 15:41तुम नजरअंदाज कर रही हो असल में वही सबसे
  354. 15:44बड़ा कारण है। तुम यह अच्छी तरह जानती हो
  355. 15:46कि तुम्हारा और श्रवण का कोई मेल नहीं है।
  356. 15:49हम एक सामाजिक ढांचे में रहते हैं। जहां
  357. 15:52सिर्फ दो लोगों का नहीं बल्कि पूरे परिवार
  358. 15:54का स्तर और रिश्ते देखे जाते हैं। हमारी
  359. 15:57इज्जत, हमारी पहचान, हमारा रुतबा यह सब
  360. 16:00हमारी रिश्तेदारियों से ही तो तय होता है।
  361. 16:04फिर उन्होंने थोड़ी देर रुक कर आगे कहा और
  362. 16:06सच यही है शिप्रा कि जिस सामाजिक ढांचे
  363. 16:09में हम रहते हैं उस ढांचे में उस सोसाइटी
  364. 16:11में श्रवण कहीं फिट नहीं बैठता।
  365. 16:15शिप्रा के पिता राजदीप राय की बातों में
  366. 16:17तर्क तो था लेकिन उसके पीछे छुपा हुआ
  367. 16:20दिखावटी सामाजिक दबाव साफ झलक रहा था।
  368. 16:23शिप्रा अब तक शांत बैठी थी। मुश्किल
  369. 16:25परिस्थितियों और तीखे सवालों का सामना
  370. 16:28करना तो अब उसकी आदत सी बन गई थी। उसकी
  371. 16:30आंखों में एक दृढ़ता उभरने लगी थी। वो अब
  372. 16:33सिर्फ सुनने के लिए नहीं मजबूती से जवाब
  373. 16:35देने के लिए तैयार हो रही थी। आप किस
  374. 16:38रुतबे की बात कर रहे हैं पापा? जब भरी
  375. 16:40महफिल में मुख्तार ने मेरी जबरदस्ती शादी
  376. 16:43श्रवण से करवा दी थी, तब कहां गया था आपका
  377. 16:45रुतबा? उस वक्त कोई समाज का ठेकेदार आगे
  378. 16:48क्यों नहीं आया? मुख्तार को देख सब एक-एक
  379. 16:51करके दुम दबाकर भाग रहे थे। ऐसे खतरनाक
  380. 16:55माहौल में अगर कोई मेरे साथ खड़ा था, तो
  381. 16:57वह सिर्फ और सिर्फ श्रवण ही था। उसने तो
  382. 17:00किसी की परवाह नहीं की।
  383. 17:02शिप्रा पूरी तरह से भरी हुई थी। वो रुकी
  384. 17:05नहीं। वो बोलती ही गई। आपको तो यह भी नहीं
  385. 17:08पता कि कुछ दिन पहले रजत के भेजे हुए
  386. 17:10गुंडे मेरे चेहरे पर तेजाब डालने आए थे।
  387. 17:13अगर उस दिन श्रवण वहां नहीं होता तो आज
  388. 17:15आपकी बेटी का चेहरा किसी को दिखाने लायक
  389. 17:17नहीं रहता। उसने अपनी जान की परवाह किए
  390. 17:20बिना मुझे बचाया।
  391. 17:22शिप्रा की आवाज भररा गई थी। लेकिन उसकी
  392. 17:25बात किसी तमाचे की तरह पूरे कमरे में गूंज
  393. 17:28गई। वो रुकने को तैयार नहीं थी। इस बार
  394. 17:30उसने अपने पापा राजदीप की ओर देखा और बोली
  395. 17:34और आपने आपने क्या किया जिस इंसान ने मेरी
  396. 17:37जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की उसी से
  397. 17:40समझौता करके उसे जेल से बाहर निकलवा दिया
  398. 17:43इतना ही नहीं वो हमारे ऑफिस तक आ गया और
  399. 17:46हद तो यह है कि आप लोग उसी से मेरी शादी
  400. 17:48करवाना चाहते थे या शायद अभी भी चाहते
  401. 17:51हैं। बीना जी, राजदीप और बलवंत राय तीनों
  402. 17:54के पास शिप्रा की बातों का कोई जवाब
  403. 17:56[संगीत] नहीं था। कुछ पल की खामोशी के बाद
  404. 17:59बीना जी खुद को रोक नहीं पाई और तुरंत बोल
  405. 18:01पड़ी। अरे बेटी हम श्रवण के किए हुए एहसान
  406. 18:04को नकार नहीं रहे। उन्होंने थोड़ा नरम
  407. 18:07लेकिन जिद भरे स्वर में कहा लेकिन उसके
  408. 18:10लिए उसे अपना पति बनाए रखना यह समझदारी
  409. 18:12नहीं है। उसने जो किया उसके बदले हम उसे
  410. 18:15पैसे देकर उसका भविष्य सुरक्षित कर सकते
  411. 18:18हैं। शिप्रा के होठों पर एक कड़वी हंसी आ
  412. 18:21गई और उसने तंज कसते हुए कहा। वाह कितने
  413. 18:25एहसान फरामोश हैं आप लोग। किसी के किए हुए
  414. 18:28त्याग और साहस को आप पैसों में तोलना
  415. 18:31चाहते हैं। बीना जी चुप हो गई। उनके पास
  416. 18:34अब कहने को कुछ नहीं था। बलवंत राय के
  417. 18:37चेहरे पर अब सख्ती साफ नजर आ रही थी। रजत
  418. 18:40की घिनौनी करतूत का सच जो अभी उन्होंने
  419. 18:42शिप्रा के मुंह से सुना। उसने उन्हें अंदर
  420. 18:45तक झकझोर दिया था। मन ही मन उन्हें अपने
  421. 18:48पिछले कुछ फैसलों पर अफसोस होने लगा। उनकी
  422. 18:50आंखों में एक ठोस फैसला उभर आया। फिर कुछ
  423. 18:54देर सोचकर उन्होंने गहरी आवाज में कहा ठीक
  424. 18:57है बीती बातों को यहीं छोड़ देते हैं इसके
  425. 19:01बाद उन्होंने सीधे शिप्रा की ओर देखा और
  426. 19:04बोले मैं तुम्हारी बात मानने को तैयार हूं
  427. 19:08अब तुम बताओ तुम चाहती क्या हो
  428. 19:12राजदीप राय हैरानी से बलवंत राय की ओर
  429. 19:14देखने लगे शिप्रा भी उनकी बात सुनकर
  430. 19:16अचंभित रह गई उसे समझ नहीं आ रहा था कि
  431. 19:19क्या जवाब दे कहीं उसका जवाब उसके ही गले
  432. 19:22की फांस ना बन है। यही सोचकर उसने बहुत
  433. 19:24संभलकर कहा, मैं दूसरी शादी नहीं करना
  434. 19:28चाहती।
  435. 19:30मतलब तुम श्रवण के साथ ही शादीशुदा रिश्ते
  436. 19:33में रहना चाहती हो। बलवंत राय ने सीधा
  437. 19:36सवाल किया। अब यह सवाल शिप्रा के लिए
  438. 19:39सचमुच धर्म संकट बन गया था। कुछ पल सोचने
  439. 19:42के बाद उसने अपने शब्दों को तोलते हुए
  440. 19:44कहा। मैं श्रवण से तलाक नहीं लेना चाहती।
  441. 19:48उसके जवाब से बलवंत राय के चेहरे पर गहरी
  442. 19:51सोच उभर आई। उन्होंने गौर किया कि शिप्रा
  443. 19:54ने यह नहीं कहा कि वह श्रवण के साथ रहना
  444. 19:56चाहती है बल्कि सिर्फ इतना कहा कि वो उससे
  445. 19:59तलाक नहीं चाहती। कुछ पल बाद उन्होंने
  446. 20:02पूछा जब तुम श्रवण से तलाक नहीं लेना
  447. 20:05चाहती तो फिर उसके साथ रहती क्यों नहीं
  448. 20:08हो? वो अब भी सर्वेंट क्वार्टर में क्यों
  449. 20:10रह रहा है? यह सवाल सीधा था और इस बार
  450. 20:13शिप्रा के पास बचने का कोई आसान रास्ता
  451. 20:16नहीं था।
  452. 20:17थोड़ा संभलते हुए शिप्रा ने जवाब दिया,
  453. 20:20श्रवण को सर्वेंट क्वार्टर में रखने का
  454. 20:22फैसला तो आप लोगों का ही था। बलवंत राय
  455. 20:25हल्के से मुस्कुराए और बोले, ठीक है, तो
  456. 20:28फिर कल से श्रवण को घर के अंदर रहने को
  457. 20:30कहो और अब समय आ गया है कि तुम लोग भी यह
  458. 20:33स्वीकार करो कि श्रवण ही तुम्हारा दामाद
  459. 20:35है। इस बार दादा बलवंत राय ने अपने फैसले
  460. 20:39में कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी थी। राजदीप
  461. 20:42राय और बीना जी के चेहरे पर एक पल के लिए
  462. 20:44मायूसी उभरी। लेकिन हालात को समझते हुए
  463. 20:47राजदीप ने धीमे स्वर में कहा,
  464. 20:50ठीक है पिताजी कल से श्रवण हमारे साथ ही
  465. 20:53रहेगा। मैं आज ही उसके रहने का पूरा
  466. 20:55इंतजाम कर देता हूं। यह सुनते ही जैसे
  467. 20:58शिप्रा के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे
  468. 21:00बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उसके पापा इतनी
  469. 21:02जल्दी और इतनी आसानी से श्रवण को अपना
  470. 21:05दामाद मान लेंगे। अब उसके पास मना करने का
  471. 21:08कोई रास्ता नहीं बचा था। एक तरह से वह
  472. 21:10अपने ही बुने हुए जाल में फंस चुकी थी। वो
  473. 21:14चुपचाप बैठी रही लेकिन उसके मन में सवालों
  474. 21:16का तूफान उठ रहा था। अब क्या होगा? कैसे
  475. 21:20निभेगा यह सब? और सबसे बड़ी बात वो श्रवण
  476. 21:23को यह सब कैसे समझाएगी? शिप्रा ने गहरी
  477. 21:26सांस ली। उसने मन ही मन तय किया कि वो
  478. 21:29श्रवण के साथ मिलकर इस स्थिति को संभालने
  479. 21:31की कोशिश करेगी। लेकिन अंदर ही अंदर उसके
  480. 21:34मन में कहीं एक डर अब भी था। क्या यह सच
  481. 21:37में इतना आसान होगा? बलवंत राय के फैसले
  482. 21:40के बाद सब अपने-अपने कमरों में लौट गए।
  483. 21:42शिप्रा भी अपने रूम में आ चुकी थी और
  484. 21:44दीवार पर लगे बड़े से शीशे के सामने खड़ी
  485. 21:46होकर वो खुद से ही सवाल कर रही थी। याद
  486. 21:50करो शिप्रा जब से तुम्हारी लाइफ में श्रवण
  487. 21:52आया है। तुम्हारे ऊपर आई हर मुश्किल से
  488. 21:55तुम्हें उसी ने बाहर निकाला है। लेकिन अब
  489. 21:57जो मुश्किल खड़ी हो गई है उसका कारण तो
  490. 22:00खुद श्रवण ही है। और इस मुश्किल से बाहर
  491. 22:02तभी निकला जा सकता है जब श्रवण ही लाइफ से
  492. 22:05बाहर निकल जाए। [संगीत] लेकिन क्या तुम
  493. 22:08ऐसा चाहोगी? संतों के झाड़ू पोछे में
  494. 22:10जितनी सफाई थी, उतनी ही सफाई उसके दिल में
  495. 22:13[संगीत] भी थी। उसका सीधा सच्चा खरा
  496. 22:15स्वभाव अपने दिल की किसी भी बात को बिना
  497. 22:18किसी मिलावट और भय के बेबाक तरीके से बाहर
  498. 22:21ले आता था। वो जरूर राय फैमिली के महल की
  499. 22:24काम वाली थी। लेकिन उसके चेहरे की
  500. 22:26मासूमियत और खूबसूरती महल की किसी भी
  501. 22:29लड़की से कम नहीं थी। वैसे तो अभी उसके
  502. 22:32सपनों में कोई राजकुमार नहीं था। लेकिन जब
  503. 22:34से शौर्य सर्वेंट क्वार्टर में रहने आया
  504. 22:36था और जब से उसने अपना भिखारी वाला अवतार
  505. 22:39त्यागा था वो उसके चेहरे और पर्सनालिटी को
  506. 22:42पसंद करने लगी थी। वो शौर्य के बारे में
  507. 22:45सिर्फ इतना ही जानती थी कि वो शिप्रा का
  508. 22:47ड्राइवर है। इसीलिए उसके कमरे की सफाई
  509. 22:50करते-करते उसने अपने दिल की बात बड़े
  510. 22:52बिंदास तरीके से शौर्य को बता भी दी थी।
  511. 22:55और आज वो अपने झाड़ू पोछे के साथ अपनी
  512. 22:58प्रेम कहानी की स्क्रिप्ट दिल में लिए
  513. 23:00अपनी प्रिय शिप्रा दीदी के कमरे का दरवाजा
  514. 23:02[संगीत] खटखटा रही थी। शिप्रा दीदी क्या
  515. 23:06मैं अंदर आ जाऊं? शिप्रा अभी-अभी नींद से
  516. 23:08उठी ही थी। शतो हमेशा की तरह झाड़ू पोछा
  517. 23:11लेकर कमरे की सफाई में लग जाती है। पिछली
  518. 23:14रात वैसे ही शिप्रा के लिए बहुत भारी रही
  519. 23:17थी। उसके दिमाग में बस एक ही बात घूम रही
  520. 23:20थी। उसे शौर्य को सर्वेंट क्वार्टर से
  521. 23:22अपने घर में लाना था। यही बात उसे लगातार
  522. 23:25परेशान किए जा रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा
  523. 23:28था कि वह शौर्य के सामने अपनी स्थिति कैसे
  524. 23:31स्पष्ट करें। ऊपर से अब उसे शौर्य को घर
  525. 23:34में रहने के लिए मनाना भी था। कल तक तो
  526. 23:36शौर्य खुद यहां से जाने की बात कर रहा था
  527. 23:39और आज हालात ऐसे थे कि शिप्रा को ही उसे
  528. 23:41रोकने के लिए समझाना पड़ रहा था। एक दिन
  529. 23:45पहले ही शिप्रा ने शौर्य का लव प्रपोजल
  530. 23:48रिजेक्ट कर उसे उसकी औकात दिखा दी थी। और
  531. 23:51आज शिप्रा को उसी से अपने साथ रहने की
  532. 23:54गुजारिश करनी थी।
  533. 23:57उसने मन ही मन सोचा और उसे इस सिचुएशन पर
  534. 24:00हंसी आ गई। वाह री किस्मत वो जल्दी से
  535. 24:04फ्रेश होकर आई और शीशे के सामने खड़ी होकर
  536. 24:06बाल बनाने लगी। उधर शंतो सफाई तो कर रही
  537. 24:10थी लेकिन हर दो मिनट में चोरी-चोरी शिप्रा
  538. 24:12को देख रही थी जैसे टीवी का कोई सीरियल चल
  539. 24:15रहा हो और उसका परफेक्ट सीन मिस ना हो
  540. 24:18जाए। शिप्रा ने आईने में ही उसकी हरकत
  541. 24:20पकड़ ली। क्या बात है संतो? आज तुम्हारा
  542. 24:24मन काम करने का नहीं कर रहा क्या? उसने
  543. 24:27पीछे देखे बिना ही पूछा। नहीं नहीं दीदी
  544. 24:29ऐसा कुछ नहीं है। संतो घबरा गई जैसेंगे
  545. 24:33हाथों पकड़ी गई हो। शिपरा अब उसकी तरफ
  546. 24:35पलटी। कोई तो बात है। बोलना क्या चाहती
  547. 24:38हो? बताओ क्या बात है? संतो ने झाड़ू को
  548. 24:42ऐसे पकड़ लिया जैसे वो उसका सहारा हो। फिर
  549. 24:44धीरे से बोली।
  550. 24:46बात तो है दीदी पर पहले आप प्रॉमिस करो कि
  551. 24:49आप गुस्सा नहीं करोगी। शिप्रा ने भोएं
  552. 24:52उठाई। अरे बाप रे इतनी बड़ी बात है क्या?
  553. 24:56शंतू थोड़ी हड़बड़ा गई पर तुरंत ही सिर
  554. 24:58हिलाते हुए बोली नहीं मतलब है भी और नहीं
  555. 25:02भी। मतलब थोड़ा सा बस हल्काफुल्का वाला
  556. 25:04गुस्सा भी नहीं करना। अरे मैं भला तुम पर
  557. 25:07क्यों गुस्सा करूंगी? बोलो ना क्या बात
  558. 25:10है? शिपरा मुस्कुराते हुए बोली। नहीं दीदी
  559. 25:13पहले आप प्रॉमिस करो गुस्सा बिल्कुल नहीं
  560. 25:15करोगी। संतो जिद भरे लेकिन मासूम स्वर में
  561. 25:18बोली इस पर शिप्रा हंसते हुए उसके पास आ
  562. 25:21गई। अरे बाबा नहीं करूंगी गुस्सा अब बताओ
  563. 25:25भी इतना सस्पेंस क्यों बना रही हो? संतो
  564. 25:28ने गहरी सांस ली जैसे किसी बहुत बड़ी बात
  565. 25:30का ऐलान करने जा रही हो। फिर धीरे-धीरे
  566. 25:33बोली दीदी [संगीत] आपका जो ड्राइवर है ना
  567. 25:37श्रवण वो आपसे बहुत डरता है। शिप्रा एक पल
  568. 25:41के लिए चौकी फिर बोए सिकोड़ कर बोली बस
  569. 25:46यही बात कहने में तुम इतना डर रही थी।
  570. 25:49शंतू जल्दी से बोली नहीं दीदी वो तो दूसरी
  571. 25:53बात थी। असल बात तो अभी बाकी है। शिप्रा
  572. 25:56ने हाथ बांधते हुए कहा तो फिर जल्दी से
  573. 25:59असल बात भी बता दो। संतो ने आंखें बंद की
  574. 26:03जैसे हिम्मत इकट्ठा कर रही हो और एक ही
  575. 26:05सांस में बोल गई दीदी मुझे श्रवण बहुत
  576. 26:08पसंद है और शायद वो भी मुझे पसंद करता है
  577. 26:11लेकिन आपके डर से वो मेरे सामने कुछ बोलता
  578. 26:13ही नहीं। इतना कहकर उसने धीरे से एक आंख
  579. 26:16खोली और मासूमियत से पूछा।
  580. 26:19अब आपको गुस्सा तो नहीं आ रहा ना? शिपौस
  581. 26:23की बात सुनकर सन्न्य रह गई। उसे लगा यह
  582. 26:25लड़की क्या बोल रही है? शंतो उसी से उसके
  583. 26:28पति के बारे में कह रही है कि वह उसे पसंद
  584. 26:30करती है और साथ में यह भी कि श्रवण भी उसे
  585. 26:33पसंद करता है। शिप्रा के शरीर में ऊपर से
  586. 26:36नीचे तक झनझनाहट सी होने लगी। शिप्रा को
  587. 26:39समझ नहीं आया कि वो इस पर गुस्सा करे या
  588. 26:41अपनी किस्मत पर हंसे। उसका पति उसकी ही
  589. 26:44नौकरानी को पसंद करता है। एकदम से उसने
  590. 26:46खुद को नॉर्मल किया और सोचने लगी। वैसे
  591. 26:50इसमें गलत भी क्या है? उस बेचारे ने अपनी
  592. 26:52औकात के हिसाब से ही लड़की पसंद की है। और
  593. 26:55सच तो यह भी है कि संतो कोई कम सुंदर नहीं
  594. 26:58थी। उसका मासूम चेहरा किसी का भी ध्यान
  595. 27:01खींच सकता था। शिप्रा को संतो के मुंह से
  596. 27:03श्रवण के लिए ऐसी बात सुनने की उम्मीद
  597. 27:05नहीं थी। पर इसमें संतो की गलती भी क्या
  598. 27:08थी? उसे तो पता ही नहीं था कि श्रवण
  599. 27:10शिप्रा का पति है। शिप्रा ने संभलते हुए
  600. 27:13पूछा। अच्छा एक बात बताओ तुमने श्रवण को
  601. 27:17अपने दिल की बात बताई थी? संतो ने
  602. 27:20मासूमियत से कहा हां बताई थी ना दीदी पर
  603. 27:23वो आपसे डरता है इसलिए उसने कोई जवाब ही
  604. 27:26नहीं दिया अच्छा तो क्या कहा था उसने
  605. 27:30शिप्रा ने थोड़ा कुरदते हुए पूछा उसे डर
  606. 27:33था कि अगर आपको पता चल गया कि वो मुझे
  607. 27:35पसंद करता है तो आप उसे नौकरी से निकाल
  608. 27:37दोगी इसी डर से वह कुछ बोल ही नहीं पाया।
  609. 27:41संतो ने वही बताया जो श्रवण ने उससे कहा
  610. 27:43था। यह सुनकर शिप्रा सोच में पड़ गई। क्या
  611. 27:47सच में ऐसा हो सकता है कि श्रवण संतो को
  612. 27:49पसंद करने लगा हो? उसके मन में हल्की सी
  613. 27:52जलन भी उभर आई। उसने सोचा शंतो कहीं
  614. 27:55ज्यादा ही इमोशनली ना जुड़ जाए। उससे पहले
  615. 27:58ही उसे सच्चाई पता होनी चाहिए। वैसे भी
  616. 28:01अगर श्रवण घर में रहने आएगा तो यह बात
  617. 28:03ज्यादा दिन छिप नहीं पाएगी। यही सोचकर
  618. 28:05शिप्रा ने उससे पूछा। अच्छा संतो एक बात
  619. 28:08बताओ क्या तुम मेरे पति से मिली हो? आपने
  620. 28:12कभी मिलवाया ही नहीं दीदी। फिर संतो ने
  621. 28:14सहानुभूति जताते हुए कहा आपके साथ जो हुआ
  622. 28:18था उसके बाद हां यह तो है लेकिन क्या
  623. 28:22तुम्हारा कभी मन नहीं किया उन्हें देखने
  624. 28:23का शिप्रा ने बात आगे बढ़ाते हुए पूछा एक
  625. 28:27बार देखने का तो बड़ा मन किया था दीदी पर
  626. 28:29मैं आपको दुख नहीं देना चाहती थी संतो
  627. 28:33धीमे स्वर में बोली शिप्रा ने एक पल उसे
  628. 28:36देखा फिर सीधे कहा मैं नहीं चाहती कि
  629. 28:39तुम्हें बाद में ज्यादा दुख हो इसीलिए अभी
  630. 28:42बता रही हूं श्रवण ही वो है जिससे मेरी
  631. 28:45शादी हुई है। क्या संतो का मुंह खुला का
  632. 28:49खुला रह गया?
  633. 28:51उसे यकीन ही नहीं हुआ जिसे वह पसंद करने
  634. 28:53लगी थी वही शिप्रा दीदी का पति है। उसे
  635. 28:56अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एकदम चुप सी
  636. 28:59हो गई। उसे लगने लगा यह कैसी बात कह दी
  637. 29:01उसने। पर साथ ही उसे राहत भी हुई कि समय
  638. 29:04रहते सच पता चल गया। मुझे माफ कर दीजिए
  639. 29:08दीदी। मुझे नहीं पता था कि श्रवण आपका पति
  640. 29:10है इसीलिए मैं आपसे इतना सब बोल गई। संतो
  641. 29:13शर्मिंदा होते हुए बोली इस पर शिप्रा ने
  642. 29:16हल्के स्वर में कहा अरे नहीं इसमें
  643. 29:19शर्मिंदा होने की क्या बात है? तुमने कुछ
  644. 29:21भी जानबूझकर नहीं किया। अब संतो को याद
  645. 29:24आया। शायद इसी वजह से श्रवण ने उससे कहा
  646. 29:27था कि वह इस बारे में शिप्रा से बात कर
  647. 29:29ले। उसके चेहरे पर ग्लानी साफ झलक रही थी।
  648. 29:33शिप्रा ने उसे फिर समझाया। तुम्हें
  649. 29:36शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है। संतो
  650. 29:38तुमने कुछ गलत नहीं किया। कोई और समय होता
  651. 29:41तो शायद मैं खुद तुम दोनों को मिलवाती।
  652. 29:44लेकिन अभी दादा जी ने साफ कह दिया है कि
  653. 29:46आज से श्रवण इसी घर में रहेगा। इसीलिए जब
  654. 29:49तक वो यहां है मैं कुछ नहीं कर सकती। खैर
  655. 29:52शंतो फटाफट शिप्रा के कमरे की सफाई करके
  656. 29:54चली गई थी। पर शिप्रा के दिमाग में अभी भी
  657. 29:57शंतों के द्वारा कही गई बातें ही घूम रही
  658. 29:59थी। वह सोचने पर मजबूर थी कि क्या सच में
  659. 30:02श्रवण शंतों को पसंद करता होगा।
  660. 30:05वैसे शिप्रा को इसमें कुछ गलत भी नहीं लग
  661. 30:07रहा था। अगर उसकी मजबूरी नहीं होती तो वह
  662. 30:10खुद दोनों को मिलाने की कोशिश करती। लेकिन
  663. 30:12अभी के हालात ऐसे थे कि अगर इन दोनों के
  664. 30:15बीच कुछ होने वाला भी होता तो शिप्रा नहीं
  665. 30:17चाहती थी कि संतो के मन में कोई उम्मीद
  666. 30:19[संगीत] जागे। यही वजह थी कि उसने शंतों
  667. 30:22को सच्चाई बता दी। ताकि वो श्रवण से
  668. 30:24ज्यादा इमोशनली अटैच ना हो जाए और बाद में
  669. 30:27उसे दूर होने में तकलीफ ना हो। अब संतो
  670. 30:31शिप्रा और श्रवण की सच्चाई जानकर खुद ही
  671. 30:33उससे दूर हो जाएगी। यह सोचकर शिप्रा को
  672. 30:36श्रवण के लिए बुरा लग रहा था। क्योंकि
  673. 30:39उसकी वजह से ही उसे संतो से दूर होना
  674. 30:41पड़ेगा। अगर उसके दादाजी ने श्रवण को उसके
  675. 30:44साथ रहने की शर्त ना रखी होती [संगीत] तो
  676. 30:46वह कभी भी उन्हें अलग करने की कोशिश नहीं
  677. 30:49करती।
  678. 30:50अब वह सोचने लगी कि वो श्रवण को कैसे मनाए
  679. 30:53कि वह यहीं रुके। क्या वह उसे अपने पति के
  680. 30:56रूप में स्वीकार कर पाएगी? इस बारे में
  681. 30:58सोचकर उसे लगा कि वो ऐसा नहीं कर पाएगी।
  682. 31:02लेकिन परिवार के सामने उसे यह ड्रामा तो
  683. 31:04करना ही पड़ेगा कि उसने श्रवण को अपने पति
  684. 31:06के रूप में स्वीकार कर लिया है। अगर श्रवण
  685. 31:10की अपनी कोई मजबूरी ना होती तो वो उसे डमी
  686. 31:12पति के रूप में हमेशा के लिए स्वीकार कर
  687. 31:15लेती। शिप्रा ने अपनी घड़ी में समय देखा
  688. 31:18तो घड़ी में 9:00 बजने वाले थे। उसने सोचा
  689. 31:21कि श्रवण के जाने से पहले उसे उससे बात कर
  690. 31:24लेनी चाहिए। यही सोचकर वो अपने कमरे से
  691. 31:26बाहर निकली और सर्वेंट क्वार्टर की ओर बढ़
  692. 31:29गई। जब शिप्रा श्रवण के कमरे के पास
  693. 31:31पहुंची तो उसे अंदर से दो लोगों की आवाजें
  694. 31:34सुनाई दी। वो खिड़की के पास गई और महसूस
  695. 31:37किया कि कमरे में श्रवण के साथ शंतो भी
  696. 31:40है। यह जानकर कि शंतो उसके साथ कमरे में
  697. 31:43अकेली है। वो धीरे से खिड़की के पास खड़ी
  698. 31:45हो गई और उनकी बातें सुनने लगी। तभी उसे
  699. 31:48संतो की आवाज सुनाई दी। तुमने मेरे साथ
  700. 31:52गलत किया। तुम्हें पहले ही बता देना चाहिए
  701. 31:54था कि शिप्रा दीदी की शादी तुमसे हुई है।
  702. 31:57अगर मुझे पहले पता होता तो मैं ऐसी
  703. 31:59बेवकूफी कभी नहीं करती।
  704. 32:01ओह हेलो मेरी उनसे जबरदस्ती शादी हुई है।
  705. 32:04इस तरह शादी होने से मैं उनका पति नहीं हो
  706. 32:07जाता। तुम्हें लगता है मेरे जैसी हैसियत
  707. 32:09वाले इंसान को वो अपना पति मानेंगी। शौर्य
  708. 32:13का चिढ़ा हुआ स्वर सुनाई दिया। बात उनके
  709. 32:16मानने या ना मानने की नहीं है। अगर मुझे
  710. 32:18पता होता तो मैं कभी तुमसे ऐसा बोलने की
  711. 32:20हिम्मत नहीं करती। तुम्हें पता है मैं
  712. 32:22कितनी बेवकूफ लग रही थी जब उन्होंने मुझे
  713. 32:25बताया कि तुम उनके पति हो। संतोष पल को
  714. 32:28याद करके आहत लग रही थी। इस पर शौर्य ने
  715. 32:31उसकी ओर देखते हुए कहा तो क्या अब तुम
  716. 32:33मुझसे प्यार नहीं करती? क्या कहा? तुम अब
  717. 32:37भी ऐसा सोचते हो। तुम शिप्रा दीदी के पति
  718. 32:40हो। मैं अब तुम्हारे लिए ऐसा सोच भी नहीं
  719. 32:42सकती। संतो ने साफ शब्दों में जवाब दिया।
  720. 32:45इस पर शौर्य उसे समझाने की कोशिश करता हुआ
  721. 32:48बोला। अरे वो तो मैं सिर्फ नाम का पति
  722. 32:51हूं। हकीकत में थोड़ी ही उनका पति बन
  723. 32:53जाऊंगा। इस पर संतोष शौर्य को समझाने की
  724. 32:56कोशिश करती हुई बोली तुमने तो सपना दिखाकर
  725. 32:59मेरा सपना ही तोड़ दिया। रहने दो ज्यादा
  726. 33:01नौटंकी मत करो। आज से यही समझो कि मैं
  727. 33:04तुम्हारी साली हूं क्योंकि शिप्रा दीदी
  728. 33:07मेरी बड़ी बहन के जैसी ही है। तुम्हें
  729. 33:09नहीं पता वो बहुत अच्छी हैं। संतो की बात
  730. 33:12सुनकर शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
  731. 33:14ठीक है। तुम्हारी यही इच्छा है तो यही
  732. 33:17सही। मैं अपने दिल पर पत्थर रख लूंगा।
  733. 33:20शिप्रा जो खिड़की के पास से दोनों की
  734. 33:22बातें सुन रही थी, उसे शौर्य का यह ड्रामा
  735. 33:25लगा। ठीक है, अब मैं यहां से जाती हूं।
  736. 33:28इतना बोलकर शंतो वहां से बाहर चली गई।
  737. 33:31शंतो को कमरे से बाहर निकलते देखकर शिप्रा
  738. 33:34खिड़की से साइड होकर एक दीवार की ओट में आ
  739. 33:36गई। शंतो वहां से निकल कर सीधा विला की ओर
  740. 33:40चली गई। शंतों के लौटते कदमों में शिप्रा
  741. 33:43पहली बार सुस्ती देख रही थी। उसके कदम
  742. 33:46हमेशा जोश और एनर्जी से ही भरे नजर आते
  743. 33:49थे। शिप्रा कुछ देर वहीं खड़ी रही। उसकी
  744. 33:52जिंदगी हर पल उसके इम्तिहान ले रही थी।
  745. 33:54शायद यही वजह थी कि वो आजकल लोगों से कम
  746. 33:57अपने आप से ज्यादा सवाल जवाब कर रही थी।
  747. 34:01श्रवण और संतो की जो बातें सुनाई दे रही
  748. 34:03थी, क्या मुझे उन पर यकीन करना चाहिए?
  749. 34:06क्या श्रवण भी उन मर्दों जैसा है जो
  750. 34:08खूबसूरत लड़की देखते ही फिसल जाते हैं?
  751. 34:11नहीं। ऐसा नहीं हो सकता मेरा श्रवण।
  752. 34:15शिप्रा एकदम से बोलते बोलते रुक गई। उसके
  753. 34:18चेहरे पर हल्की सी हंसी खिल आई। शायद उसके
  754. 34:21मुंह से निकले मेरा श्रवण शब्द ने दिन रात
  755. 34:24हालातों से जूझ रहे उसके दिल को
  756. 34:27रेगिस्तानी धरती पर गिरी पानी की बूंद
  757. 34:29जैसी ठंडक पहुंचाई थी। शिप्रा के नसीब में
  758. 34:32शायद अभी खुशी के सिर्फ दो-चार पल ही थे।
  759. 34:35चुनौतियों से अब उसकी दोस्ती सी हो गई थी।
  760. 34:38ख्यालों की दुनिया से शिप्रा अब जमीन पर
  761. 34:40लौट चुकी थी। संतों के जाने के करीब 5
  762. 34:43मिनट बाद शिप्रा शौर्य के कमरे के दरवाजे
  763. 34:45पर पहुंची। शौर्य अंदर कपड़े बदलते हुए
  764. 34:48फिल्मी गाना गुनगुना रहा था। संभल के दिल
  765. 34:52जरा फिर मोहब्बत कर रहा है तू। बोल किसके
  766. 34:56लिए धड़क रहा है तू। तभी शिप्रा दरवाजा
  767. 34:59खटखटाती है तो गाने की आवाज बंद हो जाती
  768. 35:02है। शिप्रा अंदर झांकती है। वो देखती है
  769. 35:05शौर्य शर्ट पहन रहा है। उसके बटन आधे खुले
  770. 35:08हैं। जैसे ही शौर्य की नजर शिप्रा पर
  771. 35:10पड़ती है वो झट से दरवाजा बंद कर देता है।
  772. 35:13शिप्रा उसकी इस हरकत पर मुस्कुरा देती है।
  773. 35:16करीब 30 सेकंड बाद दरवाजा फिर खुलता है।
  774. 35:19अब शौर्य ने शर्ट के सारे बटन बंद कर लिए
  775. 35:21थे। वो झिझकते हुए बोला। मुझे पता नहीं था
  776. 35:25कि बाहर आप खड़ी हैं। मैंने समझा था गिरधर
  777. 35:27काका हैं। शिप्रा उसकी घबराहट देख रही थी।
  778. 35:30अभी वह नहाकर आया था। उसके बालों से पानी
  779. 35:33की बूंदे टपक रही थी। उसका दमकता चेहरा
  780. 35:36देखकर शिप्रा सोचने लगी। कौन कह सकता है
  781. 35:39कि यह वही इंसान है जो कुछ दिन पहले
  782. 35:42भिखारी की जिंदगी जी रहा था। तभी शौर्य ने
  783. 35:45पूछा आप यहां अचानक कुछ काम था क्या? इस
  784. 35:49पर शिप्रा बोली क्या मैं अंदर आ सकती हूं?
  785. 35:52मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। शौर्य एक तरफ
  786. 35:55हट गया और बोला, आइए।
  787. 35:59शिप्रा अंदर आई और कमरे को देखा। कमरा था
  788. 36:01तो साफ पर थोड़ा अस्त-व्यस्त। बेड पर
  789. 36:04कपड़े बिखरे थे। शौर्य ने तुरंत कपड़े
  790. 36:07हटाए। बिस्तर ठीक किया और बोला, बैठिए।
  791. 36:11शिप्रा बेड पर बैठ गई। तुम भी बैठ जाओ।
  792. 36:15शौर्य कुर्सी पर बैठ गया और उसके बोलने का
  793. 36:17इंतजार करने लगा। कुछ पल सोचकर शिप्रा
  794. 36:20बोली देखो श्रवण मैं जानती हूं तुम्हारे
  795. 36:24अपने प्लान है लेकिन अभी मैं मुश्किल में
  796. 36:26हूं [संगीत] और मुझे तुम्हारी मदद चाहिए।
  797. 36:29शौर्य ने थोड़ा हैरान होकर पूछा कैसी मदद
  798. 36:33और मैं आपकी मदद कैसे कर सकता हूं? देखो
  799. 36:36आज मेरी मेरे परिवार वालों के साथ लंबी
  800. 36:39बहस हुई और उसका नतीजा यह रहा कि तुम्हें
  801. 36:42अब हमारे साथ हमारे घर में रहना होगा।
  802. 36:45दादाजी की यही शर्त है। [संगीत]
  803. 36:47शिप्रा ने बेचैनी भरे स्वर में कहा तो
  804. 36:49शौर्य उसकी बात समझने की कोशिश करते हुए
  805. 36:52बोला, लेकिन इस तरह की बेतुकी शर्त का
  806. 36:55क्या मतलब?
  807. 36:57इस पर शिप्रा ने गहरी सांस ली और कहा,
  808. 37:00"तुम्हें तो मालूम ही है मेरे परिवार वाले
  809. 37:03मेरी दूसरी शादी कराना चाहते हैं।" उससे
  810. 37:06बचने का यही एक तरीका है कि तुम मेरे साथ
  811. 37:08मेरे घर में शिफ्ट हो जाओ। वो जैसे अपने
  812. 37:11दिल की बात साफ-साफ उसके सामने रख रही थी।
  813. 37:14शौर्य अंदर ही अंदर खुश था कि उसे शिपरा
  814. 37:16के साथ रहने का मौका मिल रहा है। [संगीत]
  815. 37:19लेकिन उसने अपने चेहरे पर यह भाव जाहिर
  816. 37:21नहीं होने दिया। क्यों ना तुम अभी मेरे
  817. 37:24साथ चलो। तुम्हारी शिफ्टिंग हो जाएगी तो
  818. 37:27घर वालों के सिर पर सवार मेरी दूसरी शादी
  819. 37:29का भूत भी उतर जाएगा और मैं फाइनली बिजनेस
  820. 37:32में पूरा ध्यान लगा पाऊंगी।
  821. 37:37शिप्रा ने खुद को मन ही मन तैयार कर लिया
  822. 37:39था कि अब उसे शौर्य के साथ रहना ही होगा।
  823. 37:42शौर्य ने शिप्रा के वहां जाने से पहले कहा
  824. 37:45पर मैंने तो अपने रहने के लिए घर भी देख
  825. 37:47लिया है। आज ही शिफ्ट होना था। क्या शिपरा
  826. 37:51हैरानी से बोली इतनी जल्दी क्या थी
  827. 37:54तुम्हें घर देखने की? शौर्य ने कंधे
  828. 37:56उचकाते हुए कहा इतना सोचने का समय कहां
  829. 37:59था? जब यहां से [संगीत] जाना ही था तो
  830. 38:01जल्दी क्या और देर क्या? एक्चुअली मैं भी
  831. 38:04यही सोच रहा था कि अगर यहां से फ्री हो
  832. 38:06जाऊंगा तो अपनी नौकरी में पूरा ध्यान
  833. 38:09लगाऊंगा। वो जानबूझकर ऐसे बोल रहा था। वो
  834. 38:12देखना चाहता था कि उसकी बातों का शिप्रा
  835. 38:14पर क्या असर होता है। शिप्रा बेचैन सी
  836. 38:17दिखी। कुछ पल चुप रही। [संगीत] फिर धीरे
  837. 38:19से बोली मैं समझती हूं कि मुझे कहने का हक
  838. 38:23नहीं है कि तुम कहां रहो और कैसे रहो।
  839. 38:26लेकिन अगर तुम यहां से चले गए तो मेरे लिए
  840. 38:28बहुत मुश्किल हो जाएगी। तुम तो [संगीत]
  841. 38:30जानते हो अभी मेरे पास तुम्हें अपने साथ
  842. 38:32घर में रखने के अलावा कोई सलूशन नहीं है।
  843. 38:35कहते हुए शिप्रा ने एक गहरी सांस ली और
  844. 38:37आगे कहा। मेरे घर वाले तो पहले से ही
  845. 38:40चाहते हैं कि मेरा तुमसे तलाक हो जाए और
  846. 38:43मेरी शादी किसी और से कर दें। इसीलिए मैं
  847. 38:45तुमसे रिक्वेस्ट कर रही हूं कुछ दिन मेरे
  848. 38:47घर में रह लो। हो सकता है तब तक उनका यह
  849. 38:50ख्याल भी बदल जाए। उसकी आवाज में पहली बार
  850. 38:53साफ झलक रहा था कि वो हालातों से बहुत
  851. 38:56हताश है और सच में मदद मांग रही है। शौर्य
  852. 38:59ने उसकी तरफ देखा। फिर धीरे से [संगीत]
  853. 39:01बोला। लेकिन मेरे आपके घर में रहने से
  854. 39:05बदनामी तो आपकी ही होगी। लोग तो आपके बारे
  855. 39:08में ही उल्टी सीधी बातें करेंगे। शौर्य की
  856. 39:11बात में चिंता थी। लेकिन कहीं ना कहीं वो
  857. 39:13यह भी देख रहा था कि शिप्रा उसके लिए
  858. 39:16कितनी दूर तक जाने को तैयार है। तुम्हें
  859. 39:19क्या लगता है मुझे इसकी कोई परवाह है कि
  860. 39:21लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे और वैसे भी
  861. 39:24लोग मेरे बारे में इतना कुछ कह चुके हैं
  862. 39:26कि अब उनके पास कहने को क्या ही बचा होगा।
  863. 39:29शिप्रा ने साफ शब्दों में कहा। मैं तो बस
  864. 39:32अपने परिवार के उस दबाव से बचना चाहती हूं
  865. 39:34जो तुम्हारे यहां से जाने के बाद मुझ पर
  866. 39:37दूसरी शादी के लिए डाला जाएगा। उनकी सोच
  867. 39:40उफ तुम सुनोगे तो हैरान हो जाओगे। वो लोग
  868. 39:44तो रजत से ही मेरी शादी कराने को तैयार
  869. 39:46बैठे हैं।
  870. 39:49शिप्रा के मुंह से रजत का जिक्र सुनकर
  871. 39:51शौर्य ने अपनी आंखों को ऐसे बंद किया मानो
  872. 39:53वो अपने गुस्से को अंदर ही अंदर पी गया
  873. 39:55हो। उसने गंभीर नजर से शिप्रा की ओर देखा
  874. 39:58और कहा आप कब तक अपने घर वालों को यूं ही
  875. 40:01धोखा देती रहेंगी? जब तक उनके दिमाग से
  876. 40:05मेरी दूसरी शादी कराने का फितूर नहीं उतर
  877. 40:07जाता तब तक। शिप्रा ने बिना झिझक जवाब
  878. 40:10दिया। वैसे भी तुम्हारे यहां रहने से
  879. 40:13तुम्हारे काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। तुम
  880. 40:15यहां से भी ऑफिस आ जा सकते हो। और मेरी
  881. 40:18तरफ से तुम पर कोई रोक-टोक नहीं होगी। तुम
  882. 40:20कहां जाते हो? किससे मिलते हो? मुझे कोई
  883. 40:23ऐतराज नहीं। वो उसे मनाने की पूरी कोशिश
  884. 40:26कर रही थी। शौर्य ने कुछ पल सोचा। शिप्रा
  885. 40:29की फिक्रमंद आंखों को देखा और फिर अपना
  886. 40:31सिर हिलाते हुए कहा, ठीक है। अगर आप चाहती
  887. 40:35हैं कि मैं यहां रहूं तो मुझे कोई [संगीत]
  888. 40:38दिक्कत नहीं है। मैं तो बस आपके बारे में
  889. 40:40सोच कर मना कर रहा था। यह सुनते ही जैसे
  890. 40:43शिप्रा के सिर से बड़ा बोझ उतर गया। उसके
  891. 40:46चेहरे की टेंशन एकदम से गायब हो गई। वो
  892. 40:48तुरंत उठते हुए बोली तो फिर चलो अपना
  893. 40:51सामान पैक करो और मेरे साथ चलो। शौर्य को
  894. 40:55उम्मीद नहीं थी कि वो [संगीत] उसे तुरंत
  895. 40:57साथ ले जाने को कहेगी। वैसे भी उसके पास
  896. 40:59ज्यादा सामान नहीं था। बस एक छोटा सा बैग
  897. 41:02जिसमें कुछ कपड़े थे। वो बैग उठाकर शिप्रा
  898. 41:05के साथ उसके बंगले में पहुंच गया। फिर
  899. 41:08जैसे ही उसने अंदर कदम रखा सामने राजदीप
  900. 41:11राय और बीना जी बैठे हुए थे। शौर्य को
  901. 41:14वहां देखकर राजदीप राय का चेहरा तो भावहीन
  902. 41:16रहा लेकिन बीना जी के चेहरे पर साफ नाखुशी
  903. 41:20झलक रही थी। शौर्य ने दोनों को झुककर
  904. 41:22नमस्ते किया। राजदीप राय ने हल्के से सिर
  905. 41:25हिलाकर जवाब दे दिया लेकिन बीना जी का
  906. 41:28चेहरा वैसा ही बना रहा। हालांकि भीतर ही
  907. 41:31भीतर वो थोड़ी हैरान जरूर थी। उन्होंने
  908. 41:33शौर्य को पहले से इंप्रेसिव रूप में कभी
  909. 41:36नहीं देखा था। बिना दाढ़ी सलीके से तैयार
  910. 41:40उसका व्यक्तित्व पहले से बिल्कुल अलग और
  911. 41:42प्रभावशाली लग रहा था। एक पल को तो उन्हें
  912. 41:45यकीन ही नहीं हुआ कि यही वो इंसान है जिसे
  913. 41:48वह अब तक भिखारी समझती आई थी। कुछ ऐसा ही
  914. 41:51हाल राजदीप राय का भी था। शौर्य के इस
  915. 41:54बदले हुए रूप को देखकर उनके मन में जो खटक
  916. 41:57थी, वह काफी हद तक कम हो गई। अब उसे देखकर
  917. 42:00कोई भी उसे भिखारी नहीं कह सकता था। बस एक
  918. 42:03बात अब भी बाकी थी। उसके सामाजिक रुतबे की
  919. 42:06कमी और शायद यही बात इस घर में उसके लिए
  920. 42:09सबसे बड़ी कसौटी बनने वाली थी। बीना जी को
  921. 42:13अब भी यकीन नहीं हो रहा था। उन्होंने
  922. 42:15ध्यान से शौर्य को देखा। फिर शिप्रा से
  923. 42:18पूछ ही लिया। बेटा क्या यह वही है जिससे
  924. 42:22तुम्हारी शादी हुई है? मां का सवाल सुनकर
  925. 42:26शिप्रा एक पल को चौकी। फिर उसे अपनी ही
  926. 42:28गलती का एहसास हुआ। मां पापा ने उसे इस
  927. 42:31रूप में कभी देखा ही नहीं था। मां पापा के
  928. 42:34चेहरे में थोड़ी संतुष्टि देखकर वो हल्का
  929. 42:36मुस्कुराते हुए उत्साह से बोली, हां मां
  930. 42:40यह श्रवण ही है। बीना जी के चेहरे के भाव
  931. 42:43धीरे-धीरे बदलने लगे। जिस दामाद की
  932. 42:45उन्होंने कल्पना की थी, शौर्य उससे कहीं
  933. 42:48बेहतर निकला। उनके मन की सबसे बड़ी चिंता
  934. 42:51थी बेटी और दामाद का बेमेल रूप। लेकिन वो
  935. 42:54चिंता अब एक ही पल में खत्म हो गई। अब
  936. 42:56उनकी नजरें बार-बार शौर्य के चेहरे पर टिक
  937. 42:59रही थी। अब कोई इसका मजाक नहीं उड़ा सकता
  938. 43:02और जहां तक पैसों का सवाल था वो तो आ ही
  939. 43:05जाते हैं कभी ना कभी। शिप्रा मां के बदलते
  940. 43:08भाव पड़ चुकी थी। अचानक उसमें कुछ नई
  941. 43:10एनर्जी सी आ गई थी। वो शौर्य के साथ
  942. 43:13सीढ़ियों की ओर बढ़ते हुए बोली मां मैं
  943. 43:15श्रवण को उसका कमरा दिखाकर आती हूं। इसके
  944. 43:18बाद दोनों [संगीत] ऊपर चले गए और नीचे
  945. 43:20डाइनिंग एरिया में राजदीप जी और बीना जी
  946. 43:23एक दूसरे को देखने लगे।
  947. 43:26आपने इसे पहले कभी इस रूप में देखा था?
  948. 43:29बीना जी ने धीमे से पूछा। नहीं राजदीप ने
  949. 43:34सिर हिलाया।
  950. 43:35मैं खुद हैरान हूं। मैंने सोचा भी नहीं था
  951. 43:38कि दाढ़ी हटाने के बाद यह ऐसा लगेगा। बीना
  952. 43:42जी ने राहत की सांस ली। सच कहूं तो मेरे
  953. 43:45सिर से बहुत बड़ा बोझ उतर गया। मैं तो
  954. 43:47इसके रूप को लेकर ही परेशान थी। लेकिन अब
  955. 43:50कम से कम कोई इसका मजाक तो नहीं बनाएगा।
  956. 43:53राजदीप जी ने भी हामी भरी। तुम ठीक कहती
  957. 43:56हो। और जहां तक इसकी स्थिति की बात है अगर
  958. 44:00हम साथ देंगे तो वह भी बदल जाएगी। उधर
  959. 44:03शिप्रा शौर्य को उसके कमरे में लेकर आई।
  960. 44:05वो कमरा उसके अपने कमरे के पास ही था। अब
  961. 44:09से यह तुम्हारा कमरा है। शिप्रा ने कहा
  962. 44:12अगर कुछ बदलवाना हो तो बता देना। शौर्य ने
  963. 44:16चारों तरफ देखा। फिर हल्की मुस्कान के साथ
  964. 44:18बोला। नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है। यह
  965. 44:21मेरी उम्मीद से भी बेहतर है। वो पहले से
  966. 44:24तैयार था। इसीलिए उसने तुरंत पूछा
  967. 44:28आपको ऑफिस नहीं जाना है क्या?
  968. 44:32हम जाना तो है लेकिन सोचा पहले तुम्हें
  969. 44:35यहां सेट कर दूं। शिप्रा ने जवाब दिया।
  970. 44:37[संगीत] इस पर शौर्य ने दरवाजे की ओर
  971. 44:39इशारा किया। तो चलिए मैं आपको ऑफिस छोड़
  972. 44:42देता हूं। और तुम तुम्हें भी तो कहीं जाना
  973. 44:45था। शिप्रा ने उसकी आंखों में देखते हुए
  974. 44:48पूछा। मैं आपको छोड़कर चला जाऊंगा। उसने
  975. 44:51सहजता से जवाब दिया। दोनों नीचे आए।
  976. 44:54राजदीप जी और बीना जी अब भी वहीं बैठे थे।
  977. 44:57मां मैं ऑफिस जा रही हूं। श्रवण मुझे छोड़
  978. 45:00देगा। शिप्रा ने कहा। राजदीप ने तुरंत
  979. 45:03पूछा। अच्छा और फिर यह कहां जाएगा?
  980. 45:07पापा श्रवण आज से एक नया ऑफिस ज्वाइन कर
  981. 45:09रहा है। मुझे छोड़कर वहीं चला जाएगा।
  982. 45:12राजदीप जी कुछ पल चुप रहे और सोचने लगे।
  983. 45:17नया ऑफिस उन्हें समझ नहीं आया कि इसकी
  984. 45:20जरूरत क्या है। लेकिन उन्होंने अभी कुछ
  985. 45:22कहना सही नहीं समझा। शौर्य शिप्रा को लेकर
  986. 45:25कार में ऑफिस की तरफ निकल गया। वो आधे
  987. 45:28रास्ते ही पहुंचे थे कि शौर्य का फोन बज
  988. 45:30उठा। उसने जेब से फोन निकाला। स्क्रीन पर
  989. 45:33नजर पड़ते ही उसके चेहरे का भाव हल्का सा
  990. 45:36बदल गया और बिना कुछ कहे उसने फोन का
  991. 45:39स्क्रीन शिप्रा की तरफ से घुमा लिया। जैसे
  992. 45:42वो नहीं चाहता था कि शिप्रा देखे कौन कॉल
  993. 45:45कर रहा है। बलवंत राय, राजदीप और बीना जी
  994. 45:49के दिमाग में आज काफी हल्कापन था। ऐसा लग
  995. 45:52रहा था मानो तीनों के ही दिमाग में भिखारी
  996. 45:55का भूत चढ़ा हुआ था। भूत ने सभी को भयभीत
  997. 45:58कर रखा था। लेकिन अब अपने दामाद शौर्य के
  998. 46:01नए अवतार को देखकर सभी का भूत उतर सा गया
  999. 46:04है। अचानक शौर्य को लेकर सभी की सोच में
  1000. 46:07परिवर्तन की लहर उठ रही है। शौर्य अब
  1001. 46:10सर्वेंट क्वार्टर छोड़ शिप्रा के साथ उसके
  1002. 46:12घर में ही रहने लगा है। शायद यही उसके दिल
  1003. 46:15के अंदर की चाहत थी और शिप्रा के लिए सबसे
  1004. 46:18बड़ी राहत थी। शिप्रा अपने मकसद में
  1005. 46:20कामयाब हो गई थी। लेकिन शौर्य का मकसद आज
  1006. 46:23कुछ और ही था। कार की रफ्तार आज थोड़ी
  1007. 46:26धीमी ही रखनी पड़ रही थी। रास्ते में आज
  1008. 46:29ट्रैफिक कुछ ज्यादा ही था। एक तरफ कार का
  1009. 46:31हॉर्न बज रहा था तो दूसरी ओर शौर्य का
  1010. 46:34फोन। जब शौर्य का फोन लगातार बजता रहा तो
  1011. 46:37उसने आखिरकार फोन उठा लिया। दूसरी तरफ
  1012. 46:40मोहित रहना था। अभिवादन के बाद उसने कहा,
  1013. 46:44सर क्या आप 1 घंटे में हमारे पास आ सकते
  1014. 46:46हैं?
  1015. 46:47शौर्य ने संक्षेप में जवाब दिया। ठीक है
  1016. 46:50मैं एक घंटे में पहुंचता हूं। इतना कहकर
  1017. 46:52उसने फोन काट दिया। शिप्रा की नजर शौर्य
  1018. 46:55पर ही थी और उसे यह बात भी परेशान कर रही
  1019. 46:58थी कि आखिर शौर्य उससे फोन छुपा क्यों रहा
  1020. 47:01है? उत्सुकता में उसने पूछ ही लिया। किसका
  1021. 47:04फोन [संगीत] था? शौर्य ने बड़ी ही सहजता
  1022. 47:07से कहा। एक दोस्त का। पूछ रहा था कि मैं
  1023. 47:10कब तक पहुंचूंगा।
  1024. 47:11शिप्रा को उसकी बात पर पूरा भरोसा तो नहीं
  1025. 47:14हुआ लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। थोड़ी देर
  1026. 47:17बाद शौर्य शिप्रा को ऑफिस छोड़कर पार्किंग
  1027. 47:19में गाड़ी खड़ी करने के बाद चाबी देते हुए
  1028. 47:22बोला, ठीक है, मैं चलता हूं। अगर शाम को
  1029. 47:25समय मिला तो आपको फोन करूंगा। इसके बाद वो
  1030. 47:28सीधे बिग बुल के ऑफिस पहुंच गया। उसे
  1031. 47:31अंदाजा नहीं था कि मोहित रैना ने उसे
  1032. 47:33क्यों बुलाया है। लेकिन उसे यकीन था कि
  1033. 47:36बात जरूर कुछ बहुत इंपॉर्टेंट ही होगी। वो
  1034. 47:38सीधे मोहित रैना के केबिन में गया। जहां
  1035. 47:41विक्रम पहले से मौजूद था। उनके साथ एक और
  1036. 47:43व्यक्ति भी बैठा था जिसे शौर्य नहीं जानता
  1037. 47:46था। शौर्य को देखते ही मोहित रैना और
  1038. 47:49विक्रम खड़े हो गए। उनके साथ वो तीसरा
  1039. 47:51व्यक्ति भी सम्मान में उठ खड़ा हुआ। मोहित
  1040. 47:54रैना ने अपनी कुर्सी शौर्य को ऑफर की और
  1041. 47:56शौर्य जाकर उस पर बैठ गया। मोहित रैना
  1042. 47:59विक्रम के पास बैठते हुए बोले।
  1043. 48:02सर यह है मिस्टर राघव जिनके बारे में मैं
  1044. 48:04आपको बता रहा था। शौर्य ने राघव का
  1045. 48:07अभिवादन किया और कहा
  1046. 48:09तो आप है राघव बजाज। मैंने सुना है कि
  1047. 48:12आपके पास बिग कलेक्शन के 30% शेयर हैं।
  1048. 48:16क्या यह सच है? राघव बजाज ने हल्का गला
  1049. 48:19साफ करते हुए कहा,
  1050. 48:21[गला साफ़ करने की आवाज़] "जी हां, यह सच
  1051. 48:22है। मेरे पास 30% शेयर हैं और मैं उन्हें
  1052. 48:26आपको देने के लिए तैयार हूं।" शौर्य ने
  1053. 48:28थोड़ा राहत भरे रवैया से सिर हिलाया। बहुत
  1054. 48:31बढ़िया। मुझे आपसे यही उम्मीद थी। लेकिन
  1055. 48:3430% शेयर से मेरा काम नहीं चलेगा। मुझे
  1056. 48:37लगभग 60% चाहिए। क्या आप मेरी यह उम्मीद
  1057. 48:40भी पूरी करवा सकते हैं? राघव बजाज
  1058. 48:43मुस्कुराते हुए बोला,
  1059. 48:45"सर, पहले आप यह डील तो कीजिए, भरोसा
  1060. 48:48रखिए। बाकी का 30% शेयर भी मैं आपके नाम
  1061. 48:51करवा दूंगा।" दरअसल, सच तो यह है कि मेरा
  1062. 48:54बड़ा भाई भी रौनित को पसंद नहीं करता। वो
  1063. 48:57सिर्फ पिताजी के दबाव में चुप है। अगर आप
  1064. 49:00उसे थोड़ा लालच देंगे, तो वह भी अपना शहर
  1065. 49:02आपको देने के लिए तैयार हो जाएगा।
  1066. 49:05शौर्य ने दिमाग में कुछ सोचते हुए सिर
  1067. 49:07हिलाया और फिर आगे बोला अच्छा तो यह बात
  1068. 49:10है। ठीक है लेकिन मैं देर नहीं करना
  1069. 49:14चाहता। जितनी जल्दी हो सके मैं सारे शहर
  1070. 49:16अपने नाम करवाना चाहता हूं। तो बताइए कब
  1071. 49:20मिलवा रहे हैं अपने बड़े भाई से। शौर्य की
  1072. 49:23बात सुनकर मोहित रैना बोला सर पुनीत बजाज
  1073. 49:26से भी हमारी बात हो चुकी है। वो 1 घंटे
  1074. 49:28में यहां पहुंचने वाले हैं। उम्मीद है
  1075. 49:30उनसे भी आज ही डील फाइनल हो जाएगी। वाह
  1076. 49:34बहुत बढ़िया। अगर ऐसा है तो पहले क्यों
  1077. 49:36नहीं बताया? मैं तो बेकार में परेशान हो
  1078. 49:39रहा था। शौर्य हल्का सा मुस्कुराया। ठीक
  1079. 49:42है। राघव के साथ सारी फॉर्मेलिटी पूरी
  1080. 49:45करके डील फाइनल कीजिए और पुनीत वाली डील
  1081. 49:48भी जल्द से जल्द क्लोज [संगीत] करिए। मैं
  1082. 49:50रौनित जनेजा को अब ज्यादा देर तक बिगर
  1083. 49:52कलेक्शन का डायरेक्टर नहीं देख सकता।
  1084. 49:54[संगीत] जैसे ही शौर्य की बात खत्म हुई,
  1085. 49:57मोहित रैना ने एक डॉक्यूमेंट आगे बढ़ाते
  1086. 49:59हुए कहा,
  1087. 50:01"सर, राघव के पेपर तैयार हैं। बस आपके
  1088. 50:03साइन की देर है और उनका 30% शेयर आपका हो
  1089. 50:06जाएगा। पुनीत के पेपर भी तैयार हैं। जैसे
  1090. 50:09ही वह आएंगे, उनकी डील भी फाइनल हो जाएगी।
  1091. 50:12उसके बाद बगैर कलेक्शन के 60% शेयर आपके
  1092. 50:15पास होंगे। और फिर आप रौनित जनेजा के साथ
  1093. 50:18जो चाहे कर सकते हैं। तभी विक्रम ने आगे
  1094. 50:21बढ़कर कहा, बॉस राघव को पेमेंट ट्रांसफर
  1095. 50:24हो चुका है और उनके साइन भी हो गए हैं। अब
  1096. 50:27बस आपके साइन बाकी हैं और डील पूरी।
  1097. 50:29[संगीत]
  1098. 50:30ओके। लेकिन जब सब तैयार था तो पुनीत क्यों
  1099. 50:33रह गया? शौर्य ने मोहित की ओर देखते हुए
  1100. 50:36पूछा। मोहित ने जवाब दिया। अरे बॉस आप
  1101. 50:39चिंता मत कीजिए। उसका भी फाइनल ही समझिए।
  1102. 50:42बस उसके आने की देर है। दोनों भाई रौनित
  1103. 50:44से परेशान हैं और उसे डायरेक्टर के रूप
  1104. 50:46में नहीं देखना चाहते। लेकिन अपने पिता
  1105. 50:49रत्नाकर बजाज की वजह से वो दोनों कुछ कर
  1106. 50:51नहीं पा रहे थे। शौर्य ने बिना देर किए
  1107. 50:54डॉक्यूमेंट पर साइन कर दिए। यह देखकर राघव
  1108. 50:57बजाज खड़ा हो गया और बोला सर आपके साथ
  1109. 51:01बिजनेस करके अच्छा लगा। मैं काफी समय से
  1110. 51:03अपने शेयर बेचना चाहता था, लेकिन कोई सही
  1111. 51:05कीमत देने को तैयार नहीं था। आपने बिना
  1112. 51:08मोलभाव के मेरी बात मान ली। इसके लिए मैं
  1113. 51:11आपका आभारी हूं। भविष्य में भी अगर आपको
  1114. 51:14मदद की जरूरत हो तो निसंकोच याद कीजिएगा।
  1115. 51:17इतना कहकर राघव वहां से निकल गया। वो
  1116. 51:20जल्दी में था क्योंकि थोड़ी देर में उसका
  1117. 51:22भाई पुनीत आने वाला था और वह उससे सामना
  1118. 51:24नहीं करना चाहता था। बजाज भाइयों की आपसी
  1119. 51:28खींचतान से शौर्य का काम आसान हो गया था।
  1120. 51:31राघव बजाज के वहां से जाने के बाद शौर्य
  1121. 51:34ने मोहित रैना को बधाई देते हुए कहा, बहुत
  1122. 51:37बढ़िया मोहित। तुमने मेरी उम्मीद से बढ़कर
  1123. 51:39काम किया। मैं खुश हूं कि तुमने अपने काम
  1124. 51:42में कोई कोताही नहीं बरती। मैं चाहता हूं
  1125. 51:45कि देर सवेेर राघव की बहन और उसके पिता भी
  1126. 51:47अपने शहर हमारे नाम कर दें। शौर्य की बात
  1127. 51:51सुनकर मोहित ने कहा सर एक्चुअली यह इतना
  1128. 51:53आसान नहीं होने वाला क्योंकि राघव की बहन
  1129. 51:56पल्लवी इतनी जल्दी हमारी बात नहीं मानने
  1130. 51:58वाली और ना ही रत्नाकर बजाज। मोहित की बात
  1131. 52:02सुनकर शौर्य ने एक माहिर बिजनेसमैन की तरह
  1132. 52:04बोलते हुए कहा कोई बात नहीं। अगर वह हमारी
  1133. 52:07बात नहीं मानते तो कंपनी के शेयर को इतना
  1134. 52:10नीचे गिरा दो कि उनके पास अपने शेयर को
  1135. 52:12बेचने के अलावा और कोई रास्ता ही ना बचे।
  1136. 52:16शौर्य की बात सुनकर मोहित ने कहा पर सर
  1137. 52:19इससे तो हमारा ही नुकसान होगा क्योंकि इस
  1138. 52:21शेयर डील के बाद बिग कलेक्शन के मेन शेयर
  1139. 52:24होल्डर तो हम ही होंगे। मोहित की बात
  1140. 52:26सुनकर शौर्य मुस्कुराया और बोला तुम इसकी
  1141. 52:29फिक्र मत करो मोहित गिरावट तात्कालिक
  1142. 52:32होगी। जैसे ही बाप बेटा इससे बाहर होंगे
  1143. 52:34हम इस कंपनी में एक मोटा इन्वेस्टमेंट
  1144. 52:37करेंगे और जल्दी ही बगैर कलेक्शन को
  1145. 52:39दोबारा मार्केट में एस्टैब्लिश कर देंगे।
  1146. 52:42शौर्य की बात सुनकर मोहित की आंखें फैल
  1147. 52:44गई। उसने मन ही मन सोचा आखिर इनके पास
  1148. 52:47कितना पैसा है? इन्होंने एक बार भी नहीं
  1149. 52:50[संगीत] सोचा कि शेयर के दाम गिरने पर
  1150. 52:52नुकसान इन्हीं का होगा। लेकिन अंदर ही
  1151. 52:55अंदर उसने शौर्य के दिमाग को भी सलूट
  1152. 52:57किया। जिसने कैसे एक ही झटके में बगैर
  1153. 53:00कलेक्शन को अपने कब्जे में लेने का प्लान
  1154. 53:01बना लिया। विक्रम मुस्कुराते हुए बोला।
  1155. 53:04बॉस मानना पड़ेगा। आप जब किसी के पीछे
  1156. 53:07पड़ते हैं तो उसे कहीं का नहीं छोड़ते। अब
  1157. 53:10इस रौनने जनेजा का तो भगवान ही मालिक है।
  1158. 53:13तभी मोहित ने भी पूछा सर आपका आगे का क्या
  1159. 53:16प्लान है? शौर्य हल्का सा मुस्कुराया और
  1160. 53:19बोला
  1161. 53:21पहले पुनीत बजाज को आने दो। उसके शेयर भी
  1162. 53:24हमारे नाम हो जाए फिर सीधे बगैर कलेक्शन
  1163. 53:26चलेंगे। सबसे पहले रोने जनेजा को वहां से
  1164. 53:29निकालना है। आगे बाद में देखेंगे। फिर
  1165. 53:32उसने मोहित से कहा एक बार पुनीत को फोन
  1166. 53:35लगाकर पूछो वो कहां पहुंचा? मोहित फोन
  1167. 53:39मिलाने ही वाला था कि तभी एक गार्ड अंदर
  1168. 53:41आया और बोला सर पुनीत [संगीत] बजाज आए
  1169. 53:44हैं। क्या उन्हें अंदर भेज दूं? मोहित ने
  1170. 53:47कहा हां भेज दो। कुछ ही पल में पुनीत बजाज
  1171. 53:50कमरे में आया। वो सिर्फ मोहित को जानता
  1172. 53:53था। इसीलिए उसने पहले उसे अभिवादन किया।
  1173. 53:56फिर शौर्य और विक्रम की ओर देखा। मोहित ने
  1174. 53:59शौर्य से उसका परिचय करवाया। शौर्य के
  1175. 54:01बारे में सुनकर पुनीत की आंखें भी फैल गई।
  1176. 54:04इतनी कम उम्र में इतना बड़ा बिजनेस। शौर्य
  1177. 54:07ने बिना वक्त गवाए सीधे मुद्दे पर आते हुए
  1178. 54:10कहा, "मिस्टर पुनीत, आपको तो पता ही होगा
  1179. 54:13कि आप यहां क्यों आए हैं।" हां, पता है।
  1180. 54:17पुनीत ने जवाब दिया। फिर थोड़ा ठहर कर
  1181. 54:19कहा, लेकिन मैं चाहता हूं कि आप अपना ऑफर
  1182. 54:22थोड़ा और बढ़ाएं ताकि मुझे फैसला लेने में
  1183. 54:25आसानी हो। शौर्य समझ गया कि पुनीत लालच
  1184. 54:28में आ चुका है। लेकिन उसने इस पर कोई
  1185. 54:30प्रतिक्रिया नहीं दी। वो शांत स्वर में
  1186. 54:33बोला, ठीक है तो आप ही बताइए आपको क्या
  1187. 54:36चाहिए? शौर्य का कॉन्फिडेंस देखकर पुनीत
  1188. 54:39बजाज दुविधा में पड़ गया। उसे समझ नहीं आ
  1189. 54:42रहा था कि शौर्य के सामने क्या कीमत रखें।
  1190. 54:44उसके शेयर की असली कीमत करीब 45 करोड़ थी।
  1191. 54:48लेकिन उसे लगा कि शौर्य इस डील के लिए कुछ
  1192. 54:50ज्यादा ही उत्सुक है। इसीलिए उसने थोड़ा
  1193. 54:52सोचकर 50 करोड़ की मांग रख दी। पुनीत की
  1194. 54:56बात सुनकर शौर्य ने मोहित की ओर देखा।
  1195. 54:59मोहित तुरंत समझ गया कि यह सीधा लालच है।
  1196. 55:01इसीलिए वो बीच में पड़ते हुए बोला,
  1197. 55:05पुनीत साहब, लगता है कि आप अपने शेयर
  1198. 55:07बेचना ही नहीं चाहते। आपको भी पता है कि
  1199. 55:0930% शेयर के 50 करोड़ कोई नहीं देगा। अगर
  1200. 55:13आपने थोड़ा बहुत बढ़ाया होता तो हम मान भी
  1201. 55:15जाते। लेकिन सॉरी इस कीमत पर डील मुश्किल
  1202. 55:18है। मोहित की बात सुनकर पुनीत को झटका
  1203. 55:21लगा। उसे उम्मीद नहीं थी डील इतनी जल्दी
  1204. 55:24मना हो जाएगी। सौदा हाथ से निकलता देख
  1205. 55:27पुनीत तुरंत संभलते हुए बोला, ठीक है
  1206. 55:30मोहित जी शायद मैंने ज्यादा कीमत बोल दी।
  1207. 55:33आप ही कोई उचित मूल्य बताइए जिसे मैं मना
  1208. 55:35ना कर सकूं। शौर्य ने पुनीत के मन का लालच
  1209. 55:38भांप लिया। वो शांत स्वर में बोला मिस्टर
  1210. 55:41पुनीत आपके शेयर की असली कीमत 45 करोड़
  1211. 55:44है। मैं आपको अधिकतम 46 करोड़ दे सकता
  1212. 55:47हूं। अगर यह कीमत मंजूर है तो सामने पेपर
  1213. 55:50रखा है। साइन कीजिए और डील फाइनल कीजिए।
  1214. 55:53वरना आप जा सकते हैं। हमें आपके शहर में
  1215. 55:56कोई दिलचस्पी नहीं है। शौर्य के सख्त लहजे
  1216. 55:59को देखकर पुनीत समझ गया कि अब मूल भाव का
  1217. 56:01कोई फायदा नहीं है। उसने सोचा 1 करोड़ का
  1218. 56:04फायदा भी कम नहीं होता। अगर शौर्य 45 पर
  1219. 56:07अड़ा रहता तब भी वह मान जाता। इसीलिए उसने
  1220. 56:10तुरंत फैसला किया। ठीक है मिस्टर शौर्य
  1221. 56:12मुझे आपकी डील मंजूर है। लेकिन मुझे
  1222. 56:15पेमेंट कैश में चाहिए। यह सुनकर शौर्य
  1223. 56:18थोड़ा हैरान हुआ। उसने साफ शब्दों में
  1224. 56:20कहा। इतनी बड़ी रकम कैश में कौन देता है?
  1225. 56:24अगर डील करनी है तो अधिकतम 10 करोड़ कैश
  1226. 56:27मिल सकता है। बाकी पेमेंट ऑनलाइन ही होगी।
  1227. 56:29अगर यह मंजूर है तो साइन कीजिए। मजबूरी
  1228. 56:33में पुनीत बजाज को शौर्य की शर्त माननी
  1229. 56:35पड़ी। शौर्य के इशारे पर विक्रम ने उसका
  1230. 56:38अकाउंट लेकर ₹36 करोड़ ट्रांसफर कर दिए और
  1231. 56:41बाकी 10 करोड़ के लिए मोहित रैना बोला।
  1232. 56:45मिस्टर पुनीत यह रकम आपको एक साथ नहीं
  1233. 56:47मिलेगी। एक हफ्ते में धीरे-धीरे पूरी कर
  1234. 56:50दी जाएगी। अभी आपको 2 करोड़ कैश मिलेंगे।
  1235. 56:53बाकी रोज 2-2 करोड़ लेकर जाना होगा। थोड़ा
  1236. 56:56ना के बाद पुनीत को यह भी मानना पड़ा।
  1237. 56:58मोहित उसे 2 करोड़ कैश देने के लिए साथ
  1238. 57:01लेकर बाहर चला गया। अब कमरे में सिर्फ
  1239. 57:03शौर्य और विक्रम रह गए थे। शौर्य ने पुनीत
  1240. 57:06के साइन किए हुए पेपर पर अपने साइन भी कर
  1241. 57:09दिए। [संगीत] अब वो बगैर कलेक्शन के 60%
  1242. 57:12शेयर का मालिक बन चुका था। डील पूरी होने
  1243. 57:15के बाद विक्रम ने पूछा। बॉस अब आगे क्या
  1244. 57:19इरादा है? शौर्य मुस्कुराया। चलो अब रौनी
  1245. 57:23जुनेजा से मिलते हैं। विक्रम हैरान था कि
  1246. 57:26शौर्य इतनी जल्दी में क्यों है? लेकिन
  1247. 57:28उसने कुछ नहीं कहा और उसके साथ चल पड़ा।
  1248. 57:31दोनों लिफ्ट से नीचे आए। वो दोनों बाहर
  1249. 57:33निकलने ही वाले थे कि अचानक शौर्य के
  1250. 57:35दिमाग में कुछ और आया और वो मुड़कर बिग
  1251. 57:38बुल के ज्वेलरी डिपार्टमेंट की ओर बढ़
  1252. 57:40गया। वो किसी को ढूंढता हुआ इधर-उधर देखने
  1253. 57:43लगा। तभी उसकी नजर एक जगह जाकर ठहर गई।
  1254. 57:46शौर्य की नजर जिस चेहरे पर आकर ठहर गई थी,
  1255. 57:49वह चेहरा प्रिया का था। शौर्य का दौड़ता
  1256. 57:52दिमाग उसे देखकर कुछ पल के लिए क्यों रुक
  1257. 57:54गया? इसका जवाब सिर्फ शौर्य ही जानता था।
  1258. 57:58प्रिया की समझदारी और किसी भी स्थिति को
  1259. 58:00स्मार्टली संभाल लेने की काबिलियत का
  1260. 58:02अंदाजा शौर्य को भली-भांति हो चुका था।
  1261. 58:05इसीलिए उसने अपने अगले प्लान में उसे एक
  1262. 58:08लीड रोल देने का फैसला लिया। और इसी के
  1263. 58:10चलते वो रौनित के पास जाते-जाते अचानक
  1264. 58:13यूटर्न लेकर प्रिया के सामने पहुंच गया।
  1265. 58:16प्रिया ने जैसे ही शौर्य को देखा वो तुरंत
  1266. 58:19सीधे खड़ी हो गई। अरे सर आप यहां शौर्य
  1267. 58:23हल्के अंदाज में बोला क्यों? क्या मैं
  1268. 58:25यहां नहीं हो सकता? ऐसी बात नहीं है सर।
  1269. 58:28आप तो यहां के ओनर हैं। आप कहीं भी हो
  1270. 58:30सकते हैं। प्रिया ने जल्दी से कहा। शौर्य
  1271. 58:33मुस्कुराया।
  1272. 58:35क्या बात है? तुम्हारे हाजिर जवाबी के इसी
  1273. 58:38हुनर से मैं इंप्रेस हूं। यह सुनकर प्रिया
  1274. 58:40थोड़ी घबरा गई। उसे लगा कहीं शौर्य को
  1275. 58:43बुरा तो नहीं लग गया। उसके चेहरे पर हल्की
  1276. 58:45परेशानी झलकने लगी। शौर्य ने तुरंत कहा,
  1277. 58:48"घबराओ मत, मुझे तुमसे एक काम है।" प्रिया
  1278. 58:51ने खुद को संभाला और बोली, "क्या बात कर
  1279. 58:54रहे हैं सर? आपको मुझसे काम है। मैं तो
  1280. 58:57यहां आपके काम के लिए ही हूं। बताइए, मैं
  1281. 59:00क्या कर सकती हूं? उसके चेहरे पर हल्की
  1282. 59:02हैरानी के साथ उत्सुकता भी झलक रही थी।
  1283. 59:05जैसे वो अभी भी यकीन करने की कोशिश कर रही
  1284. 59:07हो। शौर्य ने प्रिया के एकदम सीधे खड़े
  1285. 59:10रहकर बात करने के अंदाज को गौर से देखा और
  1286. 59:13हल्की मुस्कान के साथ कहा। सबसे पहले तो
  1287. 59:17इस अटेंशन वाली मुद्रा से बाहर आओ और
  1288. 59:19थोड़ा नॉर्मल हो जाओ। मैं कोई बाघ नहीं
  1289. 59:22हूं जो तुम्हें खा जाऊंगा। मैंने पहले भी
  1290. 59:25कहा था मेरे सामने ऐसे खड़े मत हुआ करो।
  1291. 59:27अब जो काम मैं बता रहा हूं उसे ध्यान से
  1292. 59:30सुनो। उसकी आवाज में सख्ती कम और अपनापन
  1293. 59:33ज्यादा था। जिससे माहौल थोड़ा हल्का हो
  1294. 59:35गया। प्रिया शौर्य की बात सुनकर धीरे-धीरे
  1295. 59:38सहज हुई। वो हल्का सा मुस्कुरा कर बोली,
  1296. 59:41ठीक है सर, अब बताइए क्या काम है? उसकी
  1297. 59:44आवाज में अब पहले जैसी घबराहट नहीं थी
  1298. 59:46बल्कि एक हल्की सी सहजता आ गई थी। शौर्य
  1299. 59:49ने बात को बिना ज्यादा घुमाए सीधे कहा।
  1300. 59:52तुम तैयार हो जाओ। तुम्हें भी मेरे साथ
  1301. 59:54चलना है। कहां जाना है सर? प्रिया एक पल
  1302. 59:57के लिए चौंक गई और उसने तुरंत पूछा तो
  1303. 59:59शौर्य ने बस उसकी ओर देखते हुए कहा। साथ
  1304. 1:00:02चलोगी तो खुद ही पता चल जाएगा। प्रिया ने
  1305. 1:00:05एक पल सोचा। फिर सिर हिलाकर बोली, ठीक है
  1306. 1:00:08सर, चलती हूं। उसके मन में हल्की जिज्ञासा
  1307. 1:00:11के साथ एक अनहा उत्साह भी जाग गया था। तभी
  1308. 1:00:14शौर्य ने उसके ड्रेस पर नजर डाली और कहा,
  1309. 1:00:18लेकिन इस ड्रेस में नहीं, पहले जाकर चेंज
  1310. 1:00:20कर लो फिर [संगीत] चलते हैं। अब प्रिया को
  1311. 1:00:22समझ आ गया कि उसे कहीं बाहर ले जाया जाने
  1312. 1:00:24वाला है। एक पल के लिए उसके मन में हल्की
  1313. 1:00:27सी शंका भी उठी। लेकिन अगले ही पल उसे
  1314. 1:00:29शिप्रा के साथ वाली पिछली मुलाकात याद आ
  1315. 1:00:32गई जिसने उसके मन का संदेह पूरी तरह मिटा
  1316. 1:00:35दिया। वो जल्दी से वहां से गई और कुछ ही
  1317. 1:00:37मिनटों में कपड़े बदलकर वापस आ गई। आसमानी
  1318. 1:00:40सूट सलवार में वो बेहद खूबसूरत लग रही थी।
  1319. 1:00:43एक पल को उसे बदले रूप में देखकर शौर्य की
  1320. 1:00:46नजर में थोड़ी हलचल सी हुई लेकिन उसने
  1321. 1:00:48तुरंत खुद को संभाल लिया। उसी वक्त मोहित
  1322. 1:00:51रैना भी वहां पहुंच गया। उसने शौर्य को
  1323. 1:00:54देखते ही कहा, "सर, मैं आपको ही ढूंढ रहा
  1324. 1:00:56था। मैंने अभी पुनीत बजाज को 2 करोड़ कैश
  1325. 1:00:59दे दिया है। बाकी भी जल्द ही दे दूंगा।
  1326. 1:01:01इतनी बड़ी रकम की बात सुनकर तो प्रिया की
  1327. 1:01:04सांसे ही अटकने को हो रही थी। पर प्रिया
  1328. 1:01:06ने अपनी हैरानी को अंदर ही दबा लिया और
  1329. 1:01:08चुपचाप उन सबकी बात सुनती रही। खैर शौर्य
  1330. 1:01:12का आज का टारगेट सिर्फ एक ही था। रौनित
  1331. 1:01:15जनेजा को बिग कलेक्शन से हटाना। वैसे तो
  1332. 1:01:17शौर्य का प्लान खुद ही बिग कलेक्शन के
  1333. 1:01:19ऑफिस में जाने का था। पर अचानक मोहित रैना
  1334. 1:01:22को देखने के बाद उसका विचार बदल गया। उसने
  1335. 1:01:25मोहित रैना से कहा सुनो मोहित तुम्हें
  1336. 1:01:28प्रिया के साथ बगैर कलेक्शन के ऑफिस जाना
  1337. 1:01:30है और आगे की कार्यवाही संभालनी है। मैं
  1338. 1:01:33चाहता हूं कि आज के आज ही रौनी जनेजा बिगर
  1339. 1:01:36कलेक्शन के डायरेक्टर के पद से हट जाए और
  1340. 1:01:39आज के बाद बिग कलेक्शन का कार्यभार प्रिया
  1341. 1:01:42संभाले।
  1342. 1:01:43शौर्य यहीं नहीं रुका। उसने प्लान की
  1343. 1:01:45स्क्रिप्ट को कंटिन्यू करते हुए आगे कहा।
  1344. 1:01:48तुम्हारे साथ विक्रम भी जाएगा। मैं भी
  1345. 1:01:50अपनी पहचान सामने नहीं लाना चाहता। इसलिए
  1346. 1:01:53विक्रम फ्रंट पर रहेगा। आज के बाद लोग उसी
  1347. 1:01:56को बगैर कलेक्शन का नया शेयर होल्डर
  1348. 1:01:58जानेंगे। [संगीत] नो प्रॉब्लम बॉस। मैं
  1349. 1:02:00अभी विक्रम सर के साथ ऑफिस जाता हूं और
  1350. 1:02:02जैसा आपने कहा है मैं वैसा ही करूंगा।
  1351. 1:02:05मोहित ने तुरंत जवाब दिया। इस पर शौर्य ने
  1352. 1:02:08कहा, बहुत बढ़िया। काम खत्म होने के बाद
  1353. 1:02:12तुम सब सीधे होटल राजकमल आ जाना। वहां मैं
  1354. 1:02:14तुम सबको शानदार ट्रीट दूंगा। इतना बोलकर
  1355. 1:02:18शौर्य ने विक्रम से उसकी गाड़ी की चाबी
  1356. 1:02:20देने के लिए कहा। फिर आगे बोला,
  1357. 1:02:23ठीक है तो अब मैं चलता हूं और मैं तुम
  1358. 1:02:25लोगों का इंतजार वहीं करूंगा। गुड न्यूज़
  1359. 1:02:28जल्दी देना। विक्रम ने उसे चाबी दे दी और
  1360. 1:02:31तीनों वहां से निकल गए। अब शौर्य के पास
  1361. 1:02:33कोई खास काम नहीं था। इसीलिए वह विक्रम की
  1362. 1:02:36कार लेकर सीधे होटल राजकमल पहुंच गया।
  1363. 1:02:40रिसेप्शन से होते हुए वो सीधा मेनका के
  1364. 1:02:42ऑफिस में गया। मेनका मैनेजर की कुर्सी पर
  1365. 1:02:45बैठी थी। शौर्य को अचानक देखकर वो थोड़ा
  1366. 1:02:48हैरान हुई और बोली अरे मिस्टर शौर्य आप
  1367. 1:02:51यहां अचानक आपने खबर भी नहीं की। इस पर
  1368. 1:02:55शौर्य हल्की मुस्कान के साथ बोला। आने का
  1369. 1:02:58कोई खास प्लान नहीं था। बस अचानक मन किया
  1370. 1:03:00और चला आया। मुझे अपने रूम की चाबी दे
  1371. 1:03:03दीजिए। थोड़ा आराम करना है। शौर्य की बात
  1372. 1:03:06सुनकर मेनका ने दराज खोला और एक कार्ड
  1373. 1:03:08निकाल कर उसकी ओर बढ़ा दिया। कार्ड
  1374. 1:03:10[संगीत] लेते हुए शौर्य ने कुछ महसूस किया
  1375. 1:03:12और बोला। लगता है मुझे देखकर आपको खास
  1376. 1:03:15खुशी नहीं हुई। मेनका हल्का मुस्कुरा कर
  1377. 1:03:18बोली नहीं ऐसी बात नहीं है बस आपके आने की
  1378. 1:03:22उम्मीद नहीं थी और सच कहूं तो यह एक्सेप्ट
  1379. 1:03:24करने में थोड़ा समय लगेगा कि अब आप इस
  1380. 1:03:26होटल के मालिक हैं। शौर्य मुस्कुराया कोई
  1381. 1:03:30बात नहीं धीरे-धीरे सब नॉर्मल हो जाएगा।
  1382. 1:03:33वैसे भी मैं यहां बॉस बनकर नहीं आया हूं।
  1383. 1:03:35आप मुझे एक दोस्त की तरह ट्रीट कर सकती
  1384. 1:03:37हैं। उसकी सादगी देखकर मेनका थोड़ा असमंजस
  1385. 1:03:41में पड़ गई। फिर बोली आप चाहे तो मैं किसी
  1386. 1:03:44को आपके कमरे तक छोड़ने भेज दूं। शौर्य
  1387. 1:03:46तुरंत बोला हां यह बेहतर रहेगा और हां
  1388. 1:03:49थोड़ी देर में मेरे दोस्त आएंगे। मैं
  1389. 1:03:52उन्हीं के साथ लंच करूंगा। अभी मैं थोड़ा
  1390. 1:03:54आराम करना चाहता हूं। इतना कहकर वो
  1391. 1:03:56रिसेप्शन से बाहर निकल गया। वेटर उसे कमरे
  1392. 1:03:59तक ले गया। उसने दरवाजा खोलकर लाइट ऑन की
  1393. 1:04:02और कार्ड होल्डर में लगाकर चुपचाप चला
  1394. 1:04:04गया। लंबे समय बाद उसे सामने आरामदायक
  1395. 1:04:07बिस्तर दिखा तो वो सीधा जाकर उसमें गिर
  1396. 1:04:10गया। भिखारी वाली जिंदगी जीने के बाद आज
  1397. 1:04:12पहली बार उसे लगा कि जिंदगी फिर से पटरी
  1398. 1:04:15पर लौट रही [संगीत] है। लेकिन यह राहत
  1399. 1:04:17सिर्फ कुछ पलों की थी। उसके थक चुके दिमाग
  1400. 1:04:20में अभी भी कई सवाल घूम रहे थे। किसने
  1401. 1:04:23उसकी जान लेने की कोशिश की थी और क्यों?
  1402. 1:04:26साथ ही शिप्रा के साथ उसका रिश्ता भी एक
  1403. 1:04:28अधूरी कहानी की तरह था। जिसे उसे किसी
  1404. 1:04:31अंजाम तक पहुंचाना था। इन्हीं उलझनों और
  1405. 1:04:34ख्यालों के बीच कब उसकी आंख लग गई उसे पता
  1406. 1:04:37ही नहीं चला। लगभग 1 घंटे बाद जब उसकी
  1407. 1:04:40नींद खुली तो उसने घड़ी की ओर देखा तो
  1408. 1:04:424:00 बजने वाले थे। उसने मन ही मन सोचा अब
  1409. 1:04:46तक तो मोहित ने बगैर कलेक्शन का मामला
  1410. 1:04:48निपटा लिया होगा। रौनित जनेजा को उसकी
  1411. 1:04:50औकात दिखा ही दी होगी। लेकिन अगले ही पल
  1412. 1:04:53उसके मन में हल्की सी शंका उठी। लेकिन
  1413. 1:04:56उसका कॉल क्यों नहीं आया? कहीं कुछ गड़बड़
  1414. 1:04:58तो नहीं हो गई। शौर्य ने तुरंत मोबाइल
  1415. 1:05:01उठाया। कुछ सेकंड स्क्रीन को देखा। फिर
  1416. 1:05:03बिना देर किए मोहित को कॉल लगा दिया।
  1417. 1:05:06मोहित ने एक ही रिंग में कॉल उठा लिया।
  1418. 1:05:08तभी शौर्य ने पूछा हेलो मोहित क्या हुआ?
  1419. 1:05:11सब मामला निपट गया? मोहित बोला
  1420. 1:05:15हां निपट तो गया सर लेकिन इतनी आसानी से
  1421. 1:05:17नहीं।
  1422. 1:05:18इस पर शौर्य ने चिंता जताते हुए पूछा
  1423. 1:05:20क्यों क्या हुआ? कोई प्रॉब्लम आई थी क्या?
  1424. 1:05:24प्रॉब्लम आई थी सर लेकिन अब सब संभल गया।
  1425. 1:05:26मोहित ने शौर्य को आश्वस्त किया। आखिर हुआ
  1426. 1:05:29क्या वहां? शौर्य की जिज्ञासा बढ़ गई। तो
  1427. 1:05:32मोहित बोला
  1428. 1:05:33मैं अभी आपके पास ही आ रहा हूं सर। वहीं
  1429. 1:05:35आकर सब बताता हूं।
  1430. 1:05:37ठीक है, जल्दी आओ। यहीं बात करते हैं।
  1431. 1:05:39शौर्य ने इतना कहा और फोन काट दिया। शौर्य
  1432. 1:05:43ने तुरंत आलस झटक कर बिस्तर छोड़ा। वो अब
  1433. 1:05:46भी उन्हीं कपड़ों में था जिनमें यहां आया
  1434. 1:05:48था। उसे ख्याल आया कि यहां के लिए कुछ नए
  1435. 1:05:51कपड़े ले लेना बेहतर रहेगा ताकि जब
  1436. 1:05:53[संगीत] भी वो यहां आए तो बदलने के लिए
  1437. 1:05:55कपड़े यहीं पर हो। वो कमरे से बाहर निकला
  1438. 1:05:58और सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा। उसने तय
  1439. 1:06:01किया कि पास की किसी दुकान से ही जल्दी से
  1440. 1:06:03खरीदारी कर लेगा। तभी चलते-चलते उसके मन
  1441. 1:06:06में ख्याल आया। क्यों ना किसी को साथ ले
  1442. 1:06:09लिया जाए। आखिर नई जगह है। किसी की सलाह
  1443. 1:06:11काम आ सकती है। यही सोचकर उसके दिमाग में
  1444. 1:06:14मेनका का नाम आया। वो लॉबी से गुजरता हुआ
  1445. 1:06:17सीधे मेनका के कमरे की ओर बढ़ गया। जब वो
  1446. 1:06:20कमरे में पहुंचा तो उसने देखा कि मेनका
  1447. 1:06:22अपनी सीट पर अकेली बैठी हुई है। शौर्य
  1448. 1:06:24बिना नॉक किए ही कमरे के अंदर चला गया था।
  1449. 1:06:27मेनका ने नाखुशी भरी नजर से उसकी ओर देखा
  1450. 1:06:30और तीखे स्वर में बोली क्या आप में जरा भी
  1451. 1:06:33तमीज नहीं है किसी के कमरे में आने से
  1452. 1:06:36पहले दरवाजा खटखटाना नहीं सिखाया गया आपको
  1453. 1:06:40शौर्य को अपनी गलती का एहसास हुआ उसने
  1454. 1:06:42तुरंत सॉरी कहा फिर इजाजत लेते हुए बोला
  1455. 1:06:46क्या मैं यहां बैठ सकता हूं मेनका ने
  1456. 1:06:48आश्चर्य से उसकी तरफ देखा और बोली क्या
  1457. 1:06:51बात है आपको कुछ चाहिए क्या शौर्य ने
  1458. 1:06:55थोड़ी झिझक के साथ मानो कैजुअल होने की
  1459. 1:06:57कोशिश करते हुए कहा यार सबसे पहले तो तुम
  1460. 1:07:00मुझे आप कहना बंद करो क्योंकि मेरी और
  1461. 1:07:03तुम्हारी उम्र में ज्यादा फर्क नहीं है
  1462. 1:07:05इसलिए तुम मुझे मेरे नाम से बुला सकती हो
  1463. 1:07:08और जहां तक मुझे पता है तुम मेरे दादाजी
  1464. 1:07:10के किसी दोस्त की बेटी हो इसीलिए मुझे
  1465. 1:07:13तुम्हारा आप कहकर बुलाना अच्छा नहीं लगता
  1466. 1:07:16उम्मीद है तुम मेरी बात समझ गई होगी ओके
  1467. 1:07:21जैसी तुम्हारी मर्जी मुझे कोई प्रॉब्लम
  1468. 1:07:23नहीं है [संगीत] मेनका ने बिना देर किए
  1469. 1:07:25उसकी बात मान ली। यह देखकर शौर्य को थोड़ा
  1470. 1:07:28आश्चर्य हुआ। उसे लगा जैसे मेनका उसके यह
  1471. 1:07:31कहने का इंतजार ही कर रही थी। ठीक है फिर
  1472. 1:07:35बताओ कैसे आना हुआ? [संगीत] अब तुम्हें
  1473. 1:07:37क्या चाहिए? मेनका अनमने ढंग से बोली।
  1474. 1:07:40शौर्य ने उसकी बात सुनकर कहा मुझे
  1475. 1:07:42तुम्हारी [संगीत] मदद की जरूरत है। मेनका
  1476. 1:07:45भए सिकोड़ते हुए बोली, किस तरह की मदद?
  1477. 1:07:48असल में मुझे थोड़ी खरीदारी करनी है। उसी
  1478. 1:07:51के लिए मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। शौर्य ने
  1479. 1:07:54अपनी बेबसी जताते हुए कहा। इस पर मेनका
  1480. 1:07:56लापरवाही से बोली, तुम्हें खरीदारी करनी
  1481. 1:07:59है तो उसमें मैं तुम्हारी क्या मदद कर
  1482. 1:08:01सकती हूं? भला। शौर्य ने मुस्कुराते हुए
  1483. 1:08:03कहा, "यार, शॉपिंग करना मेरे बस की बात
  1484. 1:08:06नहीं है। मैंने कभी अपने लिए खुद कोई
  1485. 1:08:08खरीदारी नहीं की। इसीलिए मुझे तुम्हारी
  1486. 1:08:10मदद चाहिए और लड़कियों से ज्यादा शॉपिंग
  1487. 1:08:13का एक्सपीरियंस किसे होता है?"
  1488. 1:08:16शौर्य की बात सुनकर एक पल को मेनका को
  1489. 1:08:18लगा, क्या यह मुझ पर लाइन मार रहा है?
  1490. 1:08:20लेकिन उसने जाहिर नहीं होने दिया। आखिर
  1491. 1:08:23इसके मन में चल क्या रहा है? यही जानने की
  1492. 1:08:25सोच कर वह बोली ठीक है मैं चलती हूं
  1493. 1:08:28तुम्हारे साथ। यहां सामने ही एक मॉल है
  1494. 1:08:30वहीं चलते हैं। मेनका की बात पर शौर्य ने
  1495. 1:08:33भी सहमति जताई और उसके साथ होटल से बाहर
  1496. 1:08:36जाने के लिए चल पड़ा। कुछ ही देर में
  1497. 1:08:38दोनों होटल से बाहर आ गए। मेनका शौर्य के
  1498. 1:08:41साथ पैदल ही होटल के सामने बने एक बड़े से
  1499. 1:08:43मॉल में चली गई। आज पहली बार मेनका ने
  1500. 1:08:46शौर्य को ध्यान से देखा था। अब उसे शौर्य
  1501. 1:08:49उतना भी बुरा नहीं लग रहा था जितना पहली
  1502. 1:08:51नजर में लगा था। वो देख रही थी कि मॉल में
  1503. 1:08:54एंट्री करते ही कई लोगों की निगाहें उसकी
  1504. 1:08:57ओर घूम गई थी। वो सोचने लगी क्या ये शौर्य
  1505. 1:09:00की वजह से है? कुछ भी हो शौर्य की
  1506. 1:09:03पर्सनैलिटी तो लाजवाब थी। लेकिन उसके शरीर
  1507. 1:09:06पर पहने कपड़े साधारण और सस्ते लग रहे थे।
  1508. 1:09:09मेनका सोचने पर मजबूर हो गई। लगता है
  1509. 1:09:12शौर्य की आर्थिक स्थिति पहले इतनी अच्छी
  1510. 1:09:14नहीं थी। इसीलिए उसके पास ढंग के कपड़े
  1511. 1:09:17नहीं है। लेकिन अब तो वो इस होटल का मालिक
  1512. 1:09:19बन चुका है। तो आगे चलकर तो पैसों की कोई
  1513. 1:09:22कमी नहीं रहने वाली है। चलते-चलते मेनका
  1514. 1:09:25ने शौर्य से पूछ ही लिया। वैसे बुरा ना
  1515. 1:09:27मानो तो क्या मैं तुमसे एक सवाल कर सकती
  1516. 1:09:29हूं? शौर्य ने उसकी तरफ देखा और हल्की
  1517. 1:09:32मुस्कान के साथ बोला हां पूछो। मेनका ने
  1518. 1:09:36उसकी आंखों में झांकते हुए सवाल किया।
  1519. 1:09:38[संगीत] मैं यह जानना चाहती हूं कि इससे
  1520. 1:09:40पहले तुम क्या करते थे? मैं यह जानना
  1521. 1:09:43चाहती हूं कि इससे पहले तुम क्या करते थे।
  1522. 1:09:46मेनका के सवाल पर शौर्य ने गहरी सांस ली
  1523. 1:09:49जैसे अपने दिमाग में किसी पुरानी किताब के
  1524. 1:09:51पन्नों को पलट रहा हो। फिर अपने चेहरे पर
  1525. 1:09:54थोड़ी बेबसी लाते हुए बोला। अच्छा तो
  1526. 1:09:57सुनो। इससे पहले मैं एक भिखारी की जिंदगी
  1527. 1:10:00जी रहा था। ना रहने का ठिकाना, ना खाने का
  1528. 1:10:03कोई भरोसा। जो मिल गया वही खा लिया और इसी
  1529. 1:10:06तरह दिन कटते गए। करीब 6 महीने तक मैं ऐसी
  1530. 1:10:09ही जिंदगी जीता रहा। यह सुनकर मेनका की
  1531. 1:10:12चाल धीमी हो गई। उसकी आंखों में अब
  1532. 1:10:14उत्सुकता थी और ध्यान पूरी तरह शौर्य पर
  1533. 1:10:17टिक गया था। शौर्य आगे बोला और फिर एक दिन
  1534. 1:10:21अचानक सब कुछ बदल गया। एक बदमाश ने
  1535. 1:10:24जबरदस्ती मेरी शादी शिपरा राय से करवा दी।
  1536. 1:10:27उसी दिन से मेरी किस्मत ने करवट ले ली।
  1537. 1:10:30मेरे दादाजी ने मुझे अपना लिया और देखते
  1538. 1:10:33ही देखते यह होटल भी मेरे नाम कर दिया।
  1539. 1:10:36उसने मुस्कुराते हुए हल्का सा सिर झुकाया
  1540. 1:10:38और बोला तो अब कहो हूं ना मैं किस्मत का
  1541. 1:10:42धनी। शौर्य ने सच और कहानी के बीच छुपी
  1542. 1:10:45हुई अपनी दास्तान मेनका को सुना दी। मेनका
  1543. 1:10:48कुछ पल तक उसे देखती रही। वो समझ नहीं पा
  1544. 1:10:50रही थी कि यह सच है, मजाक है या फिर कोई
  1545. 1:10:53अधूरी कहानी है जिसे शौर्य जानबूझकर गढ़
  1546. 1:10:56रहा है। मेनका को सच में शौर्य की बात पर
  1547. 1:10:59विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब उसने यह सुना
  1548. 1:11:01कि किसी ने जबरदस्ती उसकी शादी शिप्रा राय
  1549. 1:11:04के साथ करवा दी थी। तो यह नाम उसे कुछ
  1550. 1:11:06जाना पहचाना सा लगा। उसे याद आया। अरे यह
  1551. 1:11:10तो वही खबर थी जो सोशल मीडिया पर वायरल
  1552. 1:11:12हुई थी। जिसमें बताया गया था कि मुख्तार
  1553. 1:11:15अहमद ने जबरदस्ती भिखारी से शिप्रा राय की
  1554. 1:11:18शादी करवा दी थी। क्या सच में शौर्य ही वो
  1555. 1:11:21भिखारी था? वो भी अविश्वास भरी नजरों से
  1556. 1:11:24शौर्य को देख रही थी। आखिर उससे रहा नहीं
  1557. 1:11:27गया तो उसने पूछ ही लिया।
  1558. 1:11:30कहीं तुम उसी शिपरा राय की बात तो नहीं कर
  1559. 1:11:32रहे जिसकी शादी की न्यूज़ सोशल मीडिया पर
  1560. 1:11:35वायरल हुई थी। शौर्य को यह सुनकर थोड़ा
  1561. 1:11:38आश्चर्य हुआ कि मेनका को भी उसकी शादी की
  1562. 1:11:41खबर पता थी। वो मन ही मन सोचने लगा। आखिर
  1563. 1:11:44मुख्तार भाई ने इस बात को कितना फैलाया
  1564. 1:11:46होगा कि हर किसी को इसके बारे में मालूम
  1565. 1:11:49है। शिप्रा और उसकी फैमिली की इज्जत
  1566. 1:11:52दाखदार करने में मुख्तार भाई ने कोई कसर
  1567. 1:11:54नहीं छोड़ी। उसने हल्की बेचारगी के साथ
  1568. 1:11:57मेनका की तरफ देखा और बोला हां मैं ही वो
  1569. 1:12:01भिखारी हूं जिससे शिपरा राय की शादी हुई
  1570. 1:12:04है। यह क्या बकवास है? मेनका लगभग
  1571. 1:12:07भन-भनाते हुए बोली तुम और भिखारी क्या
  1572. 1:12:10मुख्तार भाई की आंखें फूट गई थी जो उसने
  1573. 1:12:13तुम्हें भिखारी समझकर तुम्हारी शादी
  1574. 1:12:15शिप्रा राय से कर दी। शौर्य के चेहरे पर
  1575. 1:12:18हल्की सी मुस्कान आ गई। वो शांत स्वर में
  1576. 1:12:20बोला। मैंने पहले ही कहा था कि तुम मेरी
  1577. 1:12:23बात पर विश्वास नहीं करोगी। देखा सच में
  1578. 1:12:26तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं हुआ ना?
  1579. 1:12:29मेनका चुप हो गई लेकिन उसके मन में सवालों
  1580. 1:12:32का तूफान उठ रहा था। पहले उसने सोचा था
  1581. 1:12:35क्या किस्मत है इस लड़के की। दादाजी ने
  1582. 1:12:38अपना लिया और इतना बड़ा होटल तक दे दिया।
  1583. 1:12:41लेकिन अब सच जानने के बाद उसका नजरिया बदल
  1584. 1:12:44चुका था। जो खुशी उसे पहले हुई थी वो अब
  1585. 1:12:46कहीं गायब हो गई थी। उसकी जगह एक अजीब सी
  1586. 1:12:49संवेदना ने ले ली। शायद शौर्य की जिंदगी
  1587. 1:12:52कभी उससे भी ज्यादा मुश्किल रही होगी।
  1588. 1:12:55उसने गहरी सांस ली। अपने ख्यालों को झटक
  1589. 1:12:58दिया और सामान्य स्वर में बोली। अच्छा
  1590. 1:13:01छोड़ो यह सब बताओ तुम्हें क्या लेना है?
  1591. 1:13:05शौर्य ने कहा कुछ खास नहीं बस रोजमर्रा की
  1592. 1:13:08कुछ चीजें हैं जो मैं चाहता हूं कि होटल
  1593. 1:13:10में मौजूद रहें। ताकि जब भी जरूरत पड़े
  1594. 1:13:13मैं उन्हें इस्तेमाल कर [संगीत] सकूं। वो
  1595. 1:13:16अपनी बात पूरी ही कर रहा था कि अचानक उसे
  1596. 1:13:18हल्का सा झटका लगा। उसने तुरंत पलट कर
  1597. 1:13:21देखा तो एक लड़की फर्श पर गिरी हुई थी और
  1598. 1:13:23उसके हाथों से सामान छिटक कर चारों तरफ
  1599. 1:13:26बिखर गया था। शौर्य ने उस लड़की की तरफ
  1600. 1:13:29देखा। वो हैरान था कि वो लड़की उससे कैसे
  1601. 1:13:32टकरा गई। वो तो ज्यादा तेजी से जा भी नहीं
  1602. 1:13:35रहा था। फिर भी उसने उस लड़की का सामान
  1603. 1:13:37समेटने में उसकी मदद की। लेकिन वो लड़की
  1604. 1:13:40किसी और ही मूड में थी। उसने गुस्से में
  1605. 1:13:43शौर्य की तरफ देखा और बोली, "अंधे हो
  1606. 1:13:46क्या? दिखाई नहीं दे रहा या जानबूझकर
  1607. 1:13:48टकराए हो?" शौर्य ने आराम से उस लड़की की
  1608. 1:13:51तरफ देखा और बोला, माफ कीजिएगा मैंने सच
  1609. 1:13:54में आपको नहीं देखा। पर क्या आपको भी
  1610. 1:13:56दिखाई नहीं दे रहा था जो आप मुझसे टकरा
  1611. 1:13:59गई?
  1612. 1:14:01मैं तो इनसे बात करते हुए धीरे-धीरे चल
  1613. 1:14:03रहा था। आप ही सामने से आकर मुझसे टकराई
  1614. 1:14:05और अब मुझे ही सुना रही हैं। शौर्य मेनका
  1615. 1:14:08की तरफ इशारा करते हुए बोला अच्छा मैं
  1616. 1:14:11तुमसे टकराऊंगी वो भी जानबूझकर। शक्ल देखी
  1617. 1:14:14है अपनी पर टीचर जैसी हालत लग रही है और
  1618. 1:14:16मुझ पर इल्जाम लगा रहे हो। तुम जैसे लोग
  1619. 1:14:20ऐसी जगह पर आते ही इसलिए हैं ताकि खूबसूरत
  1620. 1:14:22लड़कियों से छेड़खानी कर सकें। वो लड़की
  1621. 1:14:25अपना सारा सामान छोड़कर शौर्य को सुनाने
  1622. 1:14:28में लगी हुई थी। शौर्य को समझ नहीं आया कि
  1623. 1:14:31यह लड़की इतनी छोटी सी बात का बतंगड़
  1624. 1:14:33क्यों बना रही है। उस लड़की की बात सुनकर
  1625. 1:14:35शौर्य भी थोड़े कड़े स्वर में बोला, ओ
  1626. 1:14:38मैडम, आप जो लड़कियों की बात कर रही हैं
  1627. 1:14:40ना, तो आपको पता होना चाहिए कि आपसे
  1628. 1:14:42ज्यादा खूबसूरत लड़की मेरे साथ चल रही है।
  1629. 1:14:45फिर मुझे क्या जरूरत पड़ी है आप जैसी नक
  1630. 1:14:47चढ़ी लड़की से टकराने की। शौर्य के मुंह
  1631. 1:14:50से अपने लिए खूबसूरत लड़की सुनकर मेनका को
  1632. 1:14:53खुशी हुई। वो भी नहीं समझ पा रही थी कि यह
  1633. 1:14:56लड़की क्यों इतनी छोटी सी बात को तूल दे
  1634. 1:14:58रही है। वो बीच में पड़ने ही वाली थी।
  1635. 1:15:00लेकिन फिर उसने सोचा देखते हैं शौर्य इस
  1636. 1:15:03मामले को कैसे हैंडल करता है। जबकि वहीं
  1637. 1:15:06वो लड़की शौर्य के मुंह से अपने लिए नक
  1638. 1:15:08चढ़ी शब्द सुनकर और आग बबूला हो गई। वो
  1639. 1:15:11गुस्से में भड़कते हुए बोली तुम्हारी यह
  1640. 1:15:14मजाल कि तुम मुझसे ऐसे बात कर रहे हो। अब
  1641. 1:15:16देखो मैं तुम्हारा क्या हश्र करवाती हूं।
  1642. 1:15:20उसी समय एक लड़का तेजी से चलकर उस लड़की
  1643. 1:15:22के पास पहुंचा और बोला क्या हुआ बेबी? यह
  1644. 1:15:26तुम्हारा सामान क्यों बिखरा हुआ है?
  1645. 1:15:29इस पर वो लड़की उसे देखकर बोली, "देखो ना
  1646. 1:15:31रैंबो, इस लड़के ने पहले तो मुझे टक्कर
  1647. 1:15:34मारी, मेरे सारे सामान को बिखरा दिया और
  1648. 1:15:36अब मुझसे बदतमीजी कर रहा है। अब तुम ही
  1649. 1:15:38इसे सबक सिखाओ। रैंबो ने उस लड़की की बात
  1650. 1:15:41सुनकर गुस्से से शौर्य की तरफ देखा और
  1651. 1:15:44बोला, "क्यों बे मजनू की औलाद? यह क्या कह
  1652. 1:15:47रही है मेरी बेबी? तुम्हारी हिम्मत कैसे
  1653. 1:15:49हुई इसे टक्कर मारने की?" और टक्कर मारी
  1654. 1:15:51सो मारी। उसके बाद तुम इसे अकड़ भी दिखा
  1655. 1:15:54रहे हो। चलो जल्दी से अपने घुटनों पर बैठो
  1656. 1:15:57और वृंदा से माफी मांगो। रैंबो करीब 25-26
  1657. 1:16:00साल का लड़का था। पूरा बॉडी बिल्डर। उसने
  1658. 1:16:03इस समय टाइट जींस और टी-शर्ट पहन रखी थी।
  1659. 1:16:06उसे देखकर कोई भी समझ सकता था कि उसका
  1660. 1:16:08ज्यादातर समय जिम में ही बीतता होगा।
  1661. 1:16:11मिनका ने जब इस झमेले में रैंबो की एंट्री
  1662. 1:16:14देखी तो उसने सोचा कि मामला कहीं ज्यादा
  1663. 1:16:16ना बढ़ जाए। इसीलिए उसे बीच-बचाव करना
  1664. 1:16:19चाहिए। यह सोचकर वो आगे आई और रैंबो से
  1665. 1:16:22बोली देखिए। मिस्टर इसमें सारी गलती आपकी
  1666. 1:16:25दोस्त की है। शौर्य ने तो उसे देखा भी
  1667. 1:16:28नहीं था। वो खुद इससे टकराई है। इसीलिए इस
  1668. 1:16:30मामले को ज्यादा तूल ना दें तो अच्छा
  1669. 1:16:33रहेगा।
  1670. 1:16:34तुम्हारी यह हिम्मत कि तुमने मेरी दोस्त
  1671. 1:16:36को झूठा कहा। अगर अपने दोस्त की सलामती
  1672. 1:16:39चाहती हो तो इससे कहो कि अभी घुटनों के बल
  1673. 1:16:41बैठकर वृंदा से माफी मांगे। नहीं तो यह
  1674. 1:16:44अपने पैरों पर चलकर यहां से जा नहीं
  1675. 1:16:46पाएगा। रैमबो मेनका को धमकाते हुए बोला।
  1676. 1:16:49लेकिन मेनका भी पीछे हटने वालों में से
  1677. 1:16:51नहीं थी। उसने तुरंत जवाब दिया।
  1678. 1:16:54देखो मिस्टर अभी कुछ ज्यादा ही हो रहा है।
  1679. 1:16:57अगर तुमने यूं ही हंगामा करना जारी रखा तो
  1680. 1:16:59मुझे पुलिस बुलानी पड़ेगी। [हंसी]
  1681. 1:17:02तुम मुझे पुलिस की धमकी दे रही हो। रमबो
  1682. 1:17:04को पुलिस की धमकी। तुम्हें शायद पता नहीं
  1683. 1:17:07पुलिस वाले मुझे जहां देख लेते हैं तो
  1684. 1:17:09अपना रास्ता बदल लेते हैं। क्यों तुम अपनी
  1685. 1:17:11ऐसी तैसी कराना चाहती हो? मेरी बात मानो
  1686. 1:17:14और अपने दोस्त से कहो कि यह आ जाए घुटनों
  1687. 1:17:16पर। नहीं तो इसकी तो बेइज्जती होगी ही।
  1688. 1:17:19साथ में तुम भी कहीं मुंह दिखाने के लायक
  1689. 1:17:20नहीं रहोगी। रमबो मेनका का उपहास उड़ाते
  1690. 1:17:23हुए बोला। रमबो की बात सुनकर मेनका के
  1691. 1:17:27चेहरे पर हल्की घबराहट के निशान उभर आए।
  1692. 1:17:29शौर्य जो यह सब देख रहा था समझने की कोशिश
  1693. 1:17:32कर रहा था कि आखिर यह सब क्यों हो रहा है।
  1694. 1:17:35उसे लगा अब उसे खुद सामने आना चाहिए। उसने
  1695. 1:17:38मेनका से कहा रुको रुको। तुम साइड में हो
  1696. 1:17:41जाओ। मैं इन महाशय से बात करता हूं।
  1697. 1:17:44मेनका अनच्छा से उसके सामने से हट गई। उसे
  1698. 1:17:48डर था कि यह रैंबो कहीं शौर्य को नुकसान
  1699. 1:17:50ना पहुंचा दे। क्योंकि कद काठी में वो
  1700. 1:17:52शौर्य से काफी बड़ा था। शौर्य का शरीर भी
  1701. 1:17:55ठीक-ठाक है। लेकिन रमबो का शरीर किसी
  1702. 1:17:57राक्षस जैसा लग रहा था। यही सोचकर मेनका
  1703. 1:18:00के मन में एक स्वाभाविक डर बैठ गया था।
  1704. 1:18:03उसी समय जब यह सब हो रहा था, कोई और भी था
  1705. 1:18:06जो मॉल के फर्स्ट फ्लोर से यह सब देख रहा
  1706. 1:18:08था। उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी।
  1707. 1:18:11वो भीड़ से दूर खड़ा था, लेकिन उसे देखकर
  1708. 1:18:13लग रहा था कि जो कुछ भी हो रहा है उसके
  1709. 1:18:16पीछे उसी का हाथ है। इन सब बातों से अनजान
  1710. 1:18:19शौर्य रैंबो के सामने जाकर खड़ा हो गया और
  1711. 1:18:22बोला हां महोदय आप कुछ कह रहे थे। कहिए
  1712. 1:18:26मैं आपकी सेवा कैसे कर सकता हूं। इस पर
  1713. 1:18:28रैमो शौर्य के और पास आकर बोला। बहरे रहे
  1714. 1:18:31हो क्या? अभी दो बार इतना साफ-साफ
  1715. 1:18:34तुम्हारे दोस्त के सामने मैंने जो कहा वो
  1716. 1:18:36तुम्हें समझ नहीं आया। मैं तुम्हें लास्ट
  1717. 1:18:38वार्निंग दे रहा हूं। अगर तुरंत तुमने
  1718. 1:18:40अपने घुटनों पर आकर वृंदा से माफी नहीं
  1719. 1:18:43मांगी तो तुम्हारे शरीर की सारी हड्डियां
  1720. 1:18:46ताता थैया करने लगेंगी। मेनका शौर्य की
  1721. 1:18:49हिम्मत देखकर हैरान थी कि वो आखिर कहां से
  1722. 1:18:51रैंबो के सामने खड़े [संगीत] होने की
  1723. 1:18:53हिम्मत ला रहा है। वो तो देखने में ही
  1724. 1:18:56राक्षस लग रहा था। मेनका के मन में
  1725. 1:18:58बार-बार यही ख्याल आ रहा था कि कहीं शौर्य
  1726. 1:19:01को इस बेवकूफी की वजह से कोई नुकसान ना हो
  1727. 1:19:04जाए। इसी सोच में वो पुलिस को फोन लगाने
  1728. 1:19:07ही वाली थी कि तभी उसका फोन बजने लगा।
  1729. 1:19:09उसने कॉल उठाया तो दूसरी तरफ से आवाज आई।
  1730. 1:19:13कुछ मत करो बस देखती रहो। बाकी मैं
  1731. 1:19:16तुम्हें बाद में समझाता हूं।
  1732. 1:19:18इतना कहकर फोन कट गया। मेनका हैरानी से
  1733. 1:19:21अपने फोन की तरफ देखने लगी। जब उसे होश
  1734. 1:19:24आया कि उसने अभी क्या सुना है तो उसने
  1735. 1:19:26चारों ओर नजर घुमाई लेकिन उसे कोई भी जाना
  1736. 1:19:29पहचाना चेहरा नजर नहीं आया। उसने पुलिस को
  1737. 1:19:32फोन करने का इरादा त्याग दिया और वहां जो
  1738. 1:19:34कुछ हो रहा था उसे देखने लगी। वो समझ रही
  1739. 1:19:38थी कि जो हो रहा है वो सही नहीं है। पर
  1740. 1:19:40फिलहाल वो कुछ करने की स्थिति में नहीं
  1741. 1:19:42थी। दूसरी तरफ शौर्य रैंबो के सामने खड़ा
  1742. 1:19:45होकर उसे चिढ़ाते हुए बोला।
  1743. 1:19:48हां भाई रैंबो अगर मैं आपकी बात नहीं
  1744. 1:19:51मानूं तो आप मेरी हड्डियों से ताता थैया
  1745. 1:19:54करवाने वाले हैं। भैया मैंने आज तक अपनी
  1746. 1:19:57हड्डियों को ताता थैया करते नहीं देखा। तो
  1747. 1:20:00मैं चाहता हूं कि आप एक बार मुझे यह नजारा
  1748. 1:20:03जरूर दिखाएं। शौर्य की बात सुनकर मेनका का
  1749. 1:20:06दिमाग खराब हो गया। वो मन ही मन बोली ये
  1750. 1:20:09लड़का पागल है क्या जो आफत को खुद ही
  1751. 1:20:11न्योता दे रहा है। पर फिर उसने खुद को रोक
  1752. 1:20:15लिया। अब जब यह खुद ही इस पहलवान को उकसा
  1753. 1:20:18रहा है तो उसके नतीजों के लिए भी यह खुद
  1754. 1:20:20ही जिम्मेदार होगा। शौर्य की बात सुनकर
  1755. 1:20:23रमबो भी हैरान था। उसे समझ नहीं आ रहा था
  1756. 1:20:25कि उसके सामने खड़ा यह लड़का आखिर किस बात
  1757. 1:20:28का घमंड रखता है। आमतौर पर लोग उसके सामने
  1758. 1:20:31अपनी सलामती के लिए गिड़गिड़ाने लगते थे।
  1759. 1:20:34लेकिन शौर्य तो उसे और भड़का रहा था। रमबो
  1760. 1:20:37के साथ खड़ी वृंदा भी भड़क उठी। उसने कहा
  1761. 1:20:41देख क्या रहे हो? यह ऐसे समझने वाला नहीं
  1762. 1:20:43है। जब तक इसकी दो-चार हड्डियों का चूरमा
  1763. 1:20:46नहीं बनाओगे यह भौकता ही रहेगा। लड़के
  1764. 1:20:50तुमने अपने लिए आफत मोल ले ली है। जो भी
  1765. 1:20:52तुम्हारे साथ होगा उसके लिए तुम खुद ही
  1766. 1:20:54जिम्मेदार होगे। मैंने तुम्हें मौका दिया
  1767. 1:20:56था पर तुमने उसे गवा दिया। इतना कहकर रमबो
  1768. 1:21:01शौर्य की तरफ बढ़ा। रैंबो की बात सुनकर
  1769. 1:21:03शौर्य सिर्फ मुस्कुरा रहा था। उसे लग रहा
  1770. 1:21:06था कि रमबो उसे मारना नहीं चाहता बल्कि बस
  1771. 1:21:08यह चाहता है कि वो अपने घुटनों पर गिरकर
  1772. 1:21:10उससे माफी मांगे। शौर्य भली-भांति रैंबो
  1773. 1:21:13का इरादा समझ गया था। लेकिन झुकना तो दूर
  1774. 1:21:16उसने खुद रमबो को सबक सिखाने का फैसला कर
  1775. 1:21:18लिया था। लेकिन वो पहले देखना चाहता था कि
  1776. 1:21:21रमबो किस हद तक जा सकता है। दूसरी तरफ
  1777. 1:21:24मेनका शौर्य को कोस रही थी। उसे लग रहा था
  1778. 1:21:27कि वह खुद ही मुसीबत मोल ले रहा है। उसे
  1779. 1:21:29सॉरी बोल देना चाहिए था। उसने कोशिश करके
  1780. 1:21:32देख लिया था पर शौर्य उसकी बात मानने वाला
  1781. 1:21:34नहीं था। इसी बीच मेनका उस रहस्यमय कॉल के
  1782. 1:21:37बारे में भी सोच रही थी। दरअसल उसे फोन
  1783. 1:21:40करने वाला कोई और नहीं बल्कि राजा साहब का
  1784. 1:21:43पहला ग्रैंडसन प्रतीक राठौड़ था। दरअसल
  1785. 1:21:46रैंबो को भी प्रतीक राठौड़ ने ही भेजा था।
  1786. 1:21:48रैंबो के जरिए प्रतीक शौर्य का मनोबल
  1787. 1:21:51तोड़ना चाहता था। उसका प्लान यह था कि
  1788. 1:21:53बिना किसी पिटाई के ही शौर्य मॉल में सबके
  1789. 1:21:56सामने घुटनों पर बैठकर गिड़गिड़ाए ताकि
  1790. 1:21:58उसकी इज्जत धूल में मिल जाए और वह फिर
  1791. 1:22:00किसी का सामना करने लायक ना रहे। प्रतीक
  1792. 1:22:03का मुख्य मकसद शौर्य के आत्मविश्वास को
  1793. 1:22:05तोड़ना था। बाकी सब अपने आप हो जाता।
  1794. 1:22:09इसीलिए वो मॉल में छिप कर यह सब देख रहा
  1795. 1:22:11था। दूसरी तरफ शौर्य को मुस्कुराता देखकर
  1796. 1:22:14रमबो के खून में और उबाल आ गया। उसने ठान
  1797. 1:22:17लिया कि वो शौर्य को इतनी आसानी से नहीं
  1798. 1:22:20छोड़ेगा। यह सोचकर उसने शौर्य पर वार करने
  1799. 1:22:23का फैसला किया। उसने अपना घूंसा शौर्य के
  1800. 1:22:26चेहरे की तरफ चलाया। लेकिन शौर्य पहले से
  1801. 1:22:28ही तैयार था। उसने अपनी गर्दन हल्की सी
  1802. 1:22:30घुमाई और रैंबो का घूंसा उसके कान के पास
  1803. 1:22:33से निकल गया। अब शौर्य की बारी थी। उसने
  1804. 1:22:37अपने हाथ की दो उंगलियों से रैंबो के सिर
  1805. 1:22:39पर हल्का सा टैप किया। जिससे रैंबो
  1806. 1:22:41लड़खड़ाते हुए दो कदम पीछे हो गया। वो
  1807. 1:22:44हैरान था कि शौर्य ने उस पर वार कर दिया।
  1808. 1:22:46उसने तो सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था।
  1809. 1:22:49रैंबो के साथ खड़ी वृंदा भी हैरान थी कि
  1810. 1:22:51शौर्य ने रैंबो पर हमला करने की हिम्मत कर
  1811. 1:22:54दी। अब रैंबो का गुस्सा और बढ़ गया था। वो
  1812. 1:22:57झपटते हुए शौर्य की तरफ बढ़ा। लेकिन शौर्य
  1813. 1:22:59ने खुद को बचाते हुए फुर्ती से उसके पीछे
  1814. 1:23:02पोजीशन ले ली। रैंबो शौर्य की तेजी देखकर
  1815. 1:23:06हैरान था। अपने हमलों को बार-बार नाकाम
  1816. 1:23:08होता देखकर उसने दोनों बाहें फैलाकर शौर्य
  1817. 1:23:11को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन शौर्य उसके
  1818. 1:23:14हाथ ही नहीं आ रहा था। मॉल में मौजूद लोग
  1819. 1:23:17जो उनके चारों तरफ खड़े होकर तमाशा देख
  1820. 1:23:19रहे थे वो भी शौर्य की हिम्मत और फुर्ती
  1821. 1:23:22को देखकर दंग रह गए। एक तरफ दैत्य जैसा
  1822. 1:23:25विशाल रैमो और दूसरी तरफ फिट और संतुलित
  1823. 1:23:28शौर्य। दोनों का कोई मुकाबला नहीं लग रहा
  1824. 1:23:30था। रम्बो ताकत में बहुत आगे था, लेकिन कई
  1825. 1:23:33कोशिशों के बाद भी वो शौर्य का कुछ नहीं
  1826. 1:23:36बिगाड़ पा रहा था। वो बार-बार उसे अपने
  1827. 1:23:38फंदे में फंसाने की कोशिश कर रहा था।
  1828. 1:23:41लेकिन शौर्य उसे एक भी मौका नहीं दे रहा
  1829. 1:23:43था। जब इस तरह खेलते हुए कुछ पल बीत गए,
  1830. 1:23:46तो शौर्य ने इस खेल को जल्दी खत्म करने का
  1831. 1:23:49फैसला किया। इस बार जैसे ही रैंबो ने
  1832. 1:23:52झपट्टा मारकर उसे दबोचने की कोशिश की,
  1833. 1:23:55शौर्य अपने स्थान से हिला नहीं। और फिर
  1834. 1:23:57जैसे ही रैंबो उसके करीब आया, शौर्य का एक
  1835. 1:23:59जबरदस्त पंच उसकी छाती से जा टकराया।
  1836. 1:24:02जिससे रैंबो लगभग 10 कदम पीछे जाकर जमीन
  1837. 1:24:05पर गिर पड़ा। वो शौर्य से ऐसे हमले की
  1838. 1:24:07कल्पना भी नहीं कर सकता था। लेकिन सच्चाई
  1839. 1:24:10यही थी कि शौर्य के एक ही घूसे ने उसे
  1840. 1:24:12जमीन पर ला पटका था। रैंबो ही नहीं वहां
  1841. 1:24:16मौजूद लोग भी इस पर यकीन नहीं कर पा रहे
  1842. 1:24:18थे कि एक ही वार में इतना विशाल आदमी कैसे
  1843. 1:24:21गिर सकता है। मेनका भी फटी आंखों से शौर्य
  1844. 1:24:25को देख रही थी। उसे दूर-दूर तक शौर्य की
  1845. 1:24:28आंखों में कहीं भी भय नजर नहीं आ रहा था।
  1846. 1:24:30उल्टा वो ऐसे मुस्कुरा रहा था जैसे रमबो
  1847. 1:24:33की उसके सामने कोई औकात ही ना हो। वो तो
  1848. 1:24:36उससे बच्चों की तरह खेल रहा था। एक ही पल
  1849. 1:24:39में मेनका का शौर्य को देखने का नजरिया
  1850. 1:24:41बदल गया। जो अभी तक उसे फुद्दू लग रहा था,
  1851. 1:24:44वही अब उसे बब्बर शेर नजर आने लगा। शौर्य
  1852. 1:24:48धीरे-धीरे चलते हुए रैंबो के पास पहुंचा।
  1853. 1:24:50रैंबो दांत पीसते हुए उठा और गाली देते
  1854. 1:24:53हुए बोला कुत्ते तेरी यह हिम्मत कि तू मुझ
  1855. 1:24:57पर हमला करेगा।
  1856. 1:24:59जैसे ही रैंबो के मुंह से गाली निकली वैसे
  1857. 1:25:01ही चटा की तेज आवाज पर पूरे माहौल में
  1858. 1:25:05गूंज उठी। सब ने देखा शौर्य ने रैंबो के
  1859. 1:25:08गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया था।
  1860. 1:25:12मैं तुझे छोडूंगा नहीं। तूने बहुत
  1861. 1:25:15मस्ती कर ली। अब अगर तू गिड़गिड़ाएगा भी
  1862. 1:25:18तो भी मैं तुझे नहीं छोडूंगा। रैंबो फिर
  1863. 1:25:21से उठते हुए बोला, वो हर हाल में शौर्य को
  1864. 1:25:23सबक सिखाना चाहता था। लेकिन इस बार भी
  1865. 1:25:26उसकी कोशिश नाकाम रही। उसने पूरी ताकत से
  1866. 1:25:29शौर्य पर किक से हमला किया लेकिन शौर्य ने
  1867. 1:25:32तुरंत अपनी लात से उसके वार को रोक दिया।
  1868. 1:25:35टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि रैंबो का पैर
  1869. 1:25:38बुरी तरह झूल गया। वो टूट चुका था। रैमो
  1870. 1:25:41दर्द से करहाते हुए जमीन पर गिर पड़ा और
  1871. 1:25:43अपने पैर को पकड़ कर सीधा करने की कोशिश
  1872. 1:25:46करने लगा। अब वो कुछ भी करने की हालत में
  1873. 1:25:49नहीं था। रमबो की गर्लफ्रेंड [संगीत]
  1874. 1:25:51वृंदा भी स्तब्ध खड़ी थी। उसे समझ ही नहीं
  1875. 1:25:54आ रहा था कि यह सब कैसे हो गया। शौर्य
  1876. 1:25:57रैंबबो के सामने फर्श पर बैठते हुए
  1877. 1:25:59मुस्कुरा कर बोला।
  1878. 1:26:01अब बताओ कोई और भी हसरत है तो अभी पूरी कर
  1879. 1:26:05दूं। तभी वृंदा शौर्य को धमकाते हुए बोली,
  1880. 1:26:08"यह तुमने क्या किया? तुमने रैंबो का पैर
  1881. 1:26:11तोड़ दिया। अब तुम्हें इसकी बहुत ही
  1882. 1:26:13खतरनाक सजा मिलने वाली है। मेरी सजा को
  1883. 1:26:16छोड़ो। अभी तुम दोनों यह सोचो कि तुम यहां
  1884. 1:26:18से बचकर कैसे जाओगे। शौर्य रैंबो का मजाक
  1885. 1:26:22उड़ाते हुए बोला। अब पूरी तरह से यहां का
  1886. 1:26:24पासा पलट चुका था। रैंबो के चेहरे पर
  1887. 1:26:27पछतावा साफ नजर आ रहा था और यही हाल वृंदा
  1888. 1:26:30का भी था। आखिर यह सब शुरू ही वृंदा ने
  1889. 1:26:33किया था तो सजा तो मिलनी ही थी। दूसरी तरफ
  1890. 1:26:36यह सीन पलटता देख मेनका सोचने को मजबूर थी
  1891. 1:26:39कि अब प्रतीक क्या करेगा। उसने तो शौर्य
  1892. 1:26:42पर हमला भी करवा दिया लेकिन उसका कुछ
  1893. 1:26:44बिगाड़ नहीं पाया। तभी शौर्य वृंदा की तरफ
  1894. 1:26:47देखते हुए बोला क्या हुआ? अब मुझसे माफी
  1895. 1:26:50नहीं मंगवाओगी। मुझ पर हमला नहीं करोगी।
  1896. 1:26:54तुम तो मुझे सबक सिखाना चाहती थी ना।
  1897. 1:26:57लेकिन अब कैसे करोगी? इसका तो खड़ा होना
  1898. 1:26:59भी मुश्किल हो रहा है। अब वृंदा के मुंह
  1899. 1:27:02पर जैसे ताला लग गया था। उसे समझ नहीं आ
  1900. 1:27:04रहा था कि वो क्या करें। उसकी नजरें किसी
  1901. 1:27:07को ढूंढते हुए इधर-उधर घूमने लगी। उधर जब
  1902. 1:27:10प्रतीक ने वृंदा को इस तरह इधर-उधर देखते
  1903. 1:27:12पाया तो वह समझ गया कि वो उसी को ढूंढ रही
  1904. 1:27:15है। यह समझते ही वो अपनी जगह पर छिप गया।
  1905. 1:27:18वहीं मेनका ने सोचा भी नहीं था कि शौर्य
  1906. 1:27:21इतना स्ट्रांग निकलेगा। शौर्य ने रैंबो को
  1907. 1:27:23हराने में ज्यादा प्रयास भी नहीं किया था।
  1908. 1:27:26जबकि उसकी एक ही किक ने रैंबो को जमीन पर
  1909. 1:27:28ला दिया था। वैसे तो रैंबो का शरीर शौर्य
  1910. 1:27:32से डेढ़ गुना बड़ा था। अभी तक जो किसी
  1911. 1:27:34राक्षस जैसा नजर आ रहा था वो अब जमीन पर
  1912. 1:27:37पड़ा हुआ था। वो अविश्वास भरी नजरों से
  1913. 1:27:40शौर्य को देख रहा था। उसने शौर्य को बहुत
  1914. 1:27:42कमजोर समझा था। लेकिन अब उसे अपनी सोच पर
  1915. 1:27:45अफसोस हो रहा था। दूसरी तरफ जिस वृंदा की
  1916. 1:27:48जुबान चाकू की तरह चल रही थी, अब उसकी
  1917. 1:27:51बोलती बंद हो चुकी थी।
  1918. 1:27:54हां जी बहन जी। यह बंदा तो अब किसी लायक
  1919. 1:27:57रहा नहीं। कोई और आपका हिमायती है जो आकर
  1920. 1:28:00आपके लिए खड़ा हो सके। शौर्य रैंबबो को
  1921. 1:28:03छोड़कर वृंदा के पास जाकर बोला। लेकिन
  1922. 1:28:06वृंदा कुछ नहीं बोली। वो खामोशी से सिर्फ
  1923. 1:28:08शौर्य को देखती रह गई। तभी शौर्य ने व्यंग
  1924. 1:28:12करते हुए कहा, क्या बात है? अब आपने मुझे
  1925. 1:28:15अपनी निगाहों से ही मारने का इरादा कर
  1926. 1:28:17लिया है क्या? तुम रैंबो को हराकर खुद को
  1927. 1:28:21बड़ा तीस मारखा खान समझते हो लेकिन देर
  1928. 1:28:23सवेर मैं तुमसे अपनी बेइज्जती का बदला
  1929. 1:28:25जरूर लूंगी। वृंदा जख्मी नागिन की तरह
  1930. 1:28:28फुफकारते हुए बोली,
  1931. 1:28:31रस्सी जल गई पर बल नहीं गया। वैसे मैं अभी
  1932. 1:28:33कुछ देर यहीं हूं। कोई और आपका हितचिंतक
  1933. 1:28:37हो तो उसे भी बुला लो। शायद वह आपकी मुराद
  1934. 1:28:40पूरी कर दे। शौर्य ने उपहास भरे अंदाज में
  1935. 1:28:42कहा तो वृंदा दांत भीचते हुए बोली अभी
  1936. 1:28:46जितनी शेखी बगारनी है बघार लो लेकिन मैं
  1937. 1:28:49तुम्हें भूलूंगी नहीं। वैसे मैं भूलने की
  1938. 1:28:53चीज भी नहीं हूं। मैं उस पल का इंतजार
  1939. 1:28:55करूंगा जब आप अपने मन की मुराद पूरी कर
  1940. 1:28:58सको। तब तक के लिए बाय। और हां अपने इस
  1941. 1:29:01दोस्त को जल्दी किसी अस्पताल ले जाओ। शायद
  1942. 1:29:04इसका पैर बच जाए। शौर्य ने रैंबो की तरफ
  1943. 1:29:07देखते हुए कहा, रैंबो का सिर शर्मिंदगीगी
  1944. 1:29:10से झुका हुआ था। उसके लिए यह स्वीकार करना
  1945. 1:29:13मुश्किल था कि वो शौर्य से हार गया है।
  1946. 1:29:15शौर्य मेनका के पास पहुंचा और बोला अब
  1947. 1:29:19चलें जिस काम के लिए आए थे उसे पूरा करते
  1948. 1:29:22हैं। मेनका हैरानी से शौर्य को देख रही
  1949. 1:29:25थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस
  1950. 1:29:27स्थिति से वो अभी गुजरा है उसके बाद भी
  1951. 1:29:30कोई इतना सामान्य रह सकता है और तो और
  1952. 1:29:33उसके चेहरे पर वही हल्की प्यारी मुस्कान
  1953. 1:29:36थी। वो सोचने पर मजबूर हो गई कि क्या उसने
  1954. 1:29:39शौर्य के बारे में जो राय बनाई थी वो सच
  1955. 1:29:41में सही थी। मेनका ने अपने चेहरे के भाव
  1956. 1:29:44सामान्य किए और बोली ठीक है चलते हैं।
  1957. 1:29:48उसके बाद दोनों मेन सेक्शन में गए और
  1958. 1:29:50शौर्य ने अपनी जरूरत का सामान लिया। फिर
  1959. 1:29:53दोनों वहां से होटल वापस आ गए। मेनका इस
  1960. 1:29:56दौरान शौर्य के साथ तो थी लेकिन उसके
  1961. 1:29:58दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। उसे
  1962. 1:30:01बार-बार प्रतीक की बातें याद आ रही थी। वो
  1963. 1:30:04समझ नहीं पा रही थी कि प्रतीक को यह
  1964. 1:30:06ड्रामा करने की क्या जरूरत थी और अगर वह
  1965. 1:30:08ऐसा करने वाला था तो उसने उसे पहले क्यों
  1966. 1:30:11नहीं बताया। क्या उसने शौर्य के बारे में
  1967. 1:30:14प्रतीक को बताकर कोई गलती कर दी है?
  1968. 1:30:17शौर्य के साथ जो कुछ हुआ, उसके लिए वो खुद
  1969. 1:30:20को जिम्मेदार मान रही थी। अगर शौर्य के
  1970. 1:30:22साथ कुछ अनहोनी हो जाती तो वह खुद को कभी
  1971. 1:30:25माफ नहीं कर पाती। यह सच था कि वह शौर्य
  1972. 1:30:28को पसंद नहीं करती थी लेकिन वो यह भी नहीं
  1973. 1:30:30चाहती थी कि उसकी वजह से शौर्य के साथ कुछ
  1974. 1:30:33बुरा हो। उसने मन ही मन तय किया कि वो इस
  1975. 1:30:36बारे में प्रतीक से बात करेगी। खैर होटल
  1976. 1:30:39पहुंचने के बाद जब शौर्य अपना सामान रखने
  1977. 1:30:42के लिए अपने कमरे में चला गया तो मेनका
  1978. 1:30:44कुछ देर तक उसी सोच में डूबी रही कि आखिर
  1979. 1:30:47प्रतीक ने ऐसा क्यों किया। कहीं वो इस
  1980. 1:30:49संपत्ति के लिए शौर्य को अपने रास्ते से
  1981. 1:30:51हटाने की कोशिश तो नहीं कर रहा। क्या एक
  1982. 1:30:54होटल के लिए वो इतना गिर सकता है कि शौर्य
  1983. 1:30:57को नुकसान पहुंचाने जैसा कदम उठा ले। यही
  1984. 1:31:00सब सोचकर उसने प्रतीक को फोन लगाया। कुछ
  1985. 1:31:03रिंग के बाद प्रतीक ने फोन उठा लिया। यह
  1986. 1:31:06सब क्या था प्रतीक? मैंने कभी सोचा भी
  1987. 1:31:08नहीं था कि तुम इतनी घटिया हरकत करोगे।
  1988. 1:31:11मेनका बिना उसे कुछ कहने का मौका दिए ही
  1989. 1:31:13फट पड़ी।
  1990. 1:31:15अरे शांत शांत पहले मुझे कुछ बोलने का
  1991. 1:31:17मौका तो दो।
  1992. 1:31:19प्रतीक ने उसे समझाने की कोशिश करते हुए
  1993. 1:31:21कहा लेकिन मेनका का गुस्सा जरा भी कम नहीं
  1994. 1:31:24हुआ।
  1995. 1:31:26तुम्हें लगता है कि अब भी तुम्हारे पास
  1996. 1:31:28अपनी सफाई में कुछ कहने को है?
  1997. 1:31:30अरे तुम्हें इतना हाइपर होने की क्या
  1998. 1:31:32जरूरत है? अगर मैं कुछ करता हूं तो उसके
  1999. 1:31:35लिए तुम थोड़ी ही जिम्मेदार हो।
  2000. 1:31:36प्रतिज्ञ ने लापरवाही से कहा, जैसे उसके
  2001. 1:31:39लिए यह कोई बड़ी बात ही ना हो। क्यों? मैं
  2002. 1:31:42कैसे जिम्मेदार नहीं हूं? मैंने ही
  2003. 1:31:44तुम्हें शौर्य के बारे में बताया था और आज
  2004. 1:31:46तुम उसके मेनका आगे कुछ और कह पाती उससे
  2005. 1:31:49पहले ही दरवाजा खुला और शौर्य उसके सामने
  2006. 1:31:52आ गया। मेनका के आगे के शब्द उसके होठों
  2007. 1:31:55पर ही अटक गए। उधर जब प्रतीक ने महसूस
  2008. 1:31:57किया कि मेनका अचानक चुप हो गई है तो उसने
  2009. 1:32:00पूछा
  2010. 1:32:01क्या हुआ? तुम चुप क्यों हो गई?
  2011. 1:32:04ठीक है। मैं तुमसे फिर बात करती हूं। इतना
  2012. 1:32:06कहकर मेनका ने बिना प्रतीक के जवाब का
  2013. 1:32:09इंतजार किए ही फोन काट दिया। शौर्य ने
  2014. 1:32:11महसूस किया कि मेनका ने उसके कारण ही फोन
  2015. 1:32:14काटा है। लेकिन उसने इस बारे में उससे कुछ
  2016. 1:32:16नहीं कहा।
  2017. 1:32:18तुम फिर से आ गए। अब कुछ और रह गया क्या?
  2018. 1:32:21मेनका अपनी घबराहट छुपाते हुए बोली, अरे
  2019. 1:32:24नहीं ऐसा कुछ नहीं है। मैं तो तुम्हें बस
  2020. 1:32:27थैंक यू कहना भूल गया था। वही कहने आया
  2021. 1:32:29हूं। तुमने जो खरीदारी में मेरी मदद की,
  2022. 1:32:32उसके लिए तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद।
  2023. 1:32:34शौर्य ने चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लाते
  2024. 1:32:36हुए कहा, "यह कोई इतनी बड़ी बात नहीं थी
  2025. 1:32:39जिसके लिए तुम्हें मुझे धन्यवाद कहना
  2026. 1:32:41पड़े। मेनका थोड़ा सहज बनने की कोशिश करते
  2027. 1:32:44हुए बोली, एक बात और है जो मुझे तुमसे
  2028. 1:32:48करनी है। शौर्य ने रहस्यमई अंदाज में कहा।
  2029. 1:32:52एक बात और है जो मुझे तुमसे करनी है।
  2030. 1:32:54शौर्य ने रहस्यमई अंदाज में कहा। उसके भाव
  2031. 1:32:57देखकर मेनका का दिल धड़क उठा। उसे लगा
  2032. 1:33:00कहीं शौर्य को उसके और प्रतीक के बीच हुई
  2033. 1:33:02बातचीत का अंदाजा तो नहीं हो गया। वो
  2034. 1:33:04थोड़ी घबराहट के साथ बोली बोलो और क्या
  2035. 1:33:08बात करनी है? शौर्य कुर्सी खींचकर उसके
  2036. 1:33:10पास बैठते हुए बोला देखो मैं चाहता हूं कि
  2037. 1:33:13तुम किसी को भी मेरी सच्चाई मत बताना कि
  2038. 1:33:16अब इस होटल का मालिक मैं हूं या फिर यह कि
  2039. 1:33:18मैं राजा साहब का ग्रैंडसन हूं जिसे यह
  2040. 1:33:21होटल गिफ्ट में मिला है। शौर्य की बात
  2041. 1:33:23सुनकर मेनका का दिल जोर से धड़क उठा। उसने
  2042. 1:33:26तो पहले ही शौर्य के बारे में प्रतीक को
  2043. 1:33:28बता दिया था। फिर भी उसने अपने चेहरे पर
  2044. 1:33:31कोई भाव नहीं आने दिया और बोली पर इसमें
  2045. 1:33:34छुपाने वाली क्या बात है? एक ना एक दिन तो
  2046. 1:33:36सबको पता चल ही जाएगा। मैं समझता हूं कि
  2047. 1:33:40देर सवेेर यह बात सामने आनी ही है। लेकिन
  2048. 1:33:42तब तक मुझे थोड़ा समय मिल जाएगा और हो
  2049. 1:33:45सकता है तब तक मेरा मकसद भी पूरा हो जाए।
  2050. 1:33:49शौर्य ने गहरे स्वर में कहा, पर मुझे समझ
  2051. 1:33:52नहीं आ रहा कि इसकी जरूरत क्या है। अगर
  2052. 1:33:54कोई मुझसे पूछेगा तो मैं क्या जवाब दूंगी।
  2053. 1:33:57मेनका ने हल्का विरोध जताया। इस पर शौर्य
  2054. 1:34:00ने सहजता से कहा। देखो अगर कभी बताना
  2055. 1:34:03जरूरी ही हो जाए तो तुम मेरी जगह विक्रम
  2056. 1:34:05को राजा साहब का पोता बता सकती हो। फिर वो
  2057. 1:34:09अपनी बात पर जोर देते हुए बोला हां तुम
  2058. 1:34:12ऐसा ही करना। दूसरों के सामने विक्रम को
  2059. 1:34:15ही शौर्य के रूप में प्रस्तुत करना। इससे
  2060. 1:34:18तुम्हारे अलावा किसी को मेरी असली पहचान
  2061. 1:34:20पता नहीं चलेगी क्योंकि यहां कोई भी मेरे
  2062. 1:34:22चेहरे से परिचित नहीं है और जहां तक मेरी
  2063. 1:34:25बात है आज से मेरा नाम तुम्हारे लिए श्रवण
  2064. 1:34:28है जो शौर्य का पिए बनकर रहेगा। मेनका का
  2065. 1:34:32सिर जैसे चक्कर खाने लगा। उसे समझ नहीं आ
  2066. 1:34:34रहा था कि जो गलती वो पहले ही कर चुकी है
  2067. 1:34:37उसे अब कैसे संभालेगी। उसने तो प्रतीक को
  2068. 1:34:40पहले ही दिन बता दिया था कि राजा साहब ने
  2069. 1:34:42यह होटल शौर्य को गिफ्ट कर दिया है और
  2070. 1:34:45शायद इसी वजह से प्रतीक इस हद तक उतर आया।
  2071. 1:34:48अब वो अपने ही फैलाए जाल को कैसे सुलझाए।
  2072. 1:34:50तभी अचानक बिजली की तरह उसके दिमाग में एक
  2073. 1:34:53विचार कौंधा और उसके चेहरे पर छाई घबराहट
  2074. 1:34:56पल भर में गायब हो गई। शौर्य के वहां से
  2075. 1:34:58जाते ही मेनका ने तुरंत प्रतीक को फोन
  2076. 1:35:01मिला दिया। एक ही रिंग में उधर से कॉल उठ
  2077. 1:35:03गया। हेलो अब क्या हुआ? प्रतीक की आवाज आई
  2078. 1:35:08तो मेनका ने खुद को संयत रखते हुए कहा हुआ
  2079. 1:35:11कुछ नहीं बस यह जानना है कि अगर तुम्हें
  2080. 1:35:13कुछ करना ही था तो मुझे पहले बता देते
  2081. 1:35:16बताता पर मौका ही नहीं मिला प्रतीक ने
  2082. 1:35:19सफाई दी मेनका हल्का सा मुस्कुराई बात
  2083. 1:35:23मौका मिलने की नहीं है बात यह है कि जिसके
  2084. 1:35:25खिलाफ तुम प्लान बना रहे हो पहले उससे ठीक
  2085. 1:35:28से जान तो लेते उसकी बात सुनकर प्रतीक
  2086. 1:35:31चौंक गया मतलब तुम्हारे साथ और कौन था यही
  2087. 1:35:36यही होता है जल्दीबाजी में। मेनका ने धीमे
  2088. 1:35:39लेकिन लहजे में कहा। मैंने कहा ना
  2089. 1:35:41पहले मुझसे बात कर लेते तो ये गलती नहीं
  2090. 1:35:44होती। अब प्रतीक के मन में घबराहट घर करने
  2091. 1:35:48लगी थी। सीधे-सीधे बोलोगी भी आखिर कहना
  2092. 1:35:51क्या चाहती हो? मेनका ने एक पल चुप रहकर
  2093. 1:35:54उसकी बेचैनी बढ़ाई। फिर बोली,
  2094. 1:35:58जानना चाहते हो तो सुनो। जिसे तुम फंसाने
  2095. 1:36:00निकले थे वो तो वो था ही नहीं। उसके होठों
  2096. 1:36:04पर हल्की मुस्कान आ गई। अब उसे प्रतीक के
  2097. 1:36:06साथ ही खेल खेलने में मजा आने लगा था।
  2098. 1:36:09वैसे भी वो प्रतीक पर गुस्सा थी क्योंकि
  2099. 1:36:11उसने बिना बताए शौर्य को नीचा दिखाने की
  2100. 1:36:13जो कोशिश की थी उसका हिसाब तो बनता था। तो
  2101. 1:36:17फिर वो कौन था जो तुम्हारे साथ मॉल में
  2102. 1:36:19गया था? प्रतीक ने उलझन भरे स्वर में
  2103. 1:36:21पूछा। वो श्रवण था। शौर्य का असिस्टेंट।
  2104. 1:36:25मेनका ने बिल्कुल सहजता से जवाब दिया
  2105. 1:36:27क्या? प्रतीक का मुंह खुला का खुला रह
  2106. 1:36:30गया। पर तुमने तो कहा था कि तुम्हारे साथ
  2107. 1:36:32शौर्य है। मेनका हल्का सा हंस दी। लेकिन
  2108. 1:36:36मैंने यह कब कहा कि शॉपिंग के लिए भी वही
  2109. 1:36:38आ रहा है। उसने तो अपने असिस्टेंट को भेज
  2110. 1:36:40दिया था मेरे साथ। उसके चेहरे पर अब एक
  2111. 1:36:43अलग ही सुकून था। उसे महसूस हो रहा था कि
  2112. 1:36:46प्रतीक को बेवकूफ बनाना कितना आसान है।
  2113. 1:36:49अगर ऐसा था तो तुमने मुझे पहले क्यों नहीं
  2114. 1:36:51बताया? प्रतीक ने शिकायत भरे लहजे में
  2115. 1:36:54कहा। तो मेनका ने तुरंत पलटवार किया। मुझे
  2116. 1:36:57क्या सपना आया था कि तुमने शौर्य के लिए
  2117. 1:36:59कोई प्लान बना रखा है और अगर ऐसी कोई
  2118. 1:37:01प्लानिंग थी तो तुम्हें पहले मुझे विश्वास
  2119. 1:37:03में लेना चाहिए था। शिकायत तो मुझे तुमसे
  2120. 1:37:06होनी चाहिए। तुम्हें मुझसे नहीं। प्रतीक
  2121. 1:37:09एकदम चुप हो गया। उसकी बोलती जैसे बंद हो
  2122. 1:37:11गई थी। फिर थोड़ा संभल कर उसने पूछा। अगर
  2123. 1:37:14तुम्हारे साथ असिस्टेंट था तो शौर्य कहां
  2124. 1:37:17था? वो वो तो होटल में ही था। अपने कमरे
  2125. 1:37:21में आराम कर रहा था। मेनका ने बिना रुके
  2126. 1:37:24जवाब दिया। कुछ पल की खामोशी के बाद
  2127. 1:37:26प्रतीक ने कहा शौर्य का कोई फोटो है
  2128. 1:37:29तुम्हारे पास? भेजो ना। इस पर मेनका ने
  2129. 1:37:32तुरंत मना कर दिया। मेरे पास उसके फोटो का
  2130. 1:37:35क्या काम? मेरे पास कोई फोटो नहीं है।
  2131. 1:37:38लेकिन उसके चेहरे पर अब भी हल्की सी
  2132. 1:37:40मुस्कान थी क्योंकि वह जानबूझकर प्रतीक को
  2133. 1:37:42उलझा रही थी और सच कहें तो उसे इसमें मजा
  2134. 1:37:45आ रहा था। प्रतीक से इतनी बातें करने के
  2135. 1:37:48बाद मेनका के सिर से जैसे एक बड़ा बोझ उतर
  2136. 1:37:51गया। उसे उम्मीद नहीं थी कि प्रतीक उसकी
  2137. 1:37:53दी हुई जानकारी का इस तरह इस्तेमाल करेगा
  2138. 1:37:56कि लोगों के बीच उसका तमाशा बन जाए। अब तक
  2139. 1:37:59प्रतीक की जो अच्छी छवि उसके मन में थी वो
  2140. 1:38:01मॉल वाली घटना के बाद पूरी तरह टूट चुकी
  2141. 1:38:04थी। उधर प्रतीक भी समझ गया था कि मेनका
  2142. 1:38:07उससे नाराज है। शायद यही वजह थी कि मेनका
  2143. 1:38:10ने उसे शौर्य का फोटो देने का कोई वादा
  2144. 1:38:12नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ शौर्य होटल के
  2145. 1:38:15रेस्टोर एरिया में पहुंच गया। वहां
  2146. 1:38:17विक्रम, मोहित और प्रिया एक टेबल पर बैठे
  2147. 1:38:20थे। टेबल दीवार से सटी हुई थी। लेकिन
  2148. 1:38:23दीवार की जगह पूरा हिस्सा रंगीन शीशे का
  2149. 1:38:25बना था। जिससे बाहर की सड़क साफ दिखाई
  2150. 1:38:28देती थी। जबकि बाहर से अंदर का नजारा नहीं
  2151. 1:38:31दिखता था। शौर्य उनके पास जाकर बैठ गया।
  2152. 1:38:34तीनों ने उसका अभिवादन किया। प्रिया के
  2153. 1:38:36चेहरे से साफ लग रहा था कि वह पहली बार
  2154. 1:38:39इतने बड़े होटल में आई है। चारों तरफ का
  2155. 1:38:41माहौल और साज सज्जा सब कुछ उसके लिए नया
  2156. 1:38:44था। शौर्य ने मेनू उठाकर उसकी तरफ बढ़ाया।
  2157. 1:38:48जो तुम्हें पसंद हो आर्डर कर दो। प्रिया
  2158. 1:38:51ने धीरे से मेनू खोला। लेकिन जैसे ही उसकी
  2159. 1:38:54नजर कीमतों पर पड़ी तो इतनी महंगी चीजें
  2160. 1:38:56देखकर कुछ ऑर्डर करने की उसकी हिम्मत ही
  2161. 1:38:59नहीं हुई। उसकी झिझक शौर्य से छुपी नहीं
  2162. 1:39:01रही। उसने बिना कुछ कहे वेटर को बुलाया और
  2163. 1:39:04सहज स्वर में कहा।
  2164. 1:39:07यहां का जो बेस्ट है वो सबके लिए ले आइए।
  2165. 1:39:11वेटर शौर्य की बात सुनकर मुस्कुराया और यस
  2166. 1:39:14सर कहकर वहां से चला गया। शौर्य ने मोहित
  2167. 1:39:17की ओर देखते हुए कहा हां अब बताओ क्या हुआ
  2168. 1:39:21बिगर कलेक्शन में इस पर मोहित ने बताया
  2169. 1:39:25सब ठीक से निपट गया सर रौनित जनेजा ने
  2170. 1:39:27थोड़ी नौटंकी जरूर की कुछ गुंडे भी बुला
  2171. 1:39:30लिए थे उसे पहले से पता चल गया था कि राघव
  2172. 1:39:33ने अपने शहर बेच दिए हैं लेकिन दूसरे साले
  2173. 1:39:36के शहर के बारे में उसे जानकारी नहीं थी
  2174. 1:39:38उसने हमें धमकाने की कोशिश भी की पर
  2175. 1:39:41विक्रम सर ने उसे ऐसा सबक सिखाया कि उसकी
  2176. 1:39:43सारी अकड़ निकल गई अब वह दोबारा सामने
  2177. 1:39:45सामने आने की हिम्मत नहीं करेगा। शौर्य को
  2178. 1:39:49भरोसा था कि विक्रम ऐसी परिस्थितियों को
  2179. 1:39:51संभाल सकता है। तभी तो उसने उसे साथ भेजा
  2180. 1:39:53था। अच्छा है। उसे सबक भी मिल गया। शौर्य
  2181. 1:39:57ने संतोष भरे स्वर में कहा। फिर प्रिया की
  2182. 1:40:00ओर मुड़ते हुए पूछा। और प्रिया तुम्हें
  2183. 1:40:04वहां का काम समझा दिया गया है ना? तभी
  2184. 1:40:07वेटर खाना लेकर आ गया और सबके सामने
  2185. 1:40:09प्लेटें सजाने लगा। खाने की खुशबू से ही
  2186. 1:40:12प्रिया की भूख और बढ़ गई। मोहित ने जवाब
  2187. 1:40:15दिया, मैंने इसे बेसिक समझा दिए हैं। बाकी
  2188. 1:40:18यह खुद बताएगी कि संभाल पाएगी या नहीं।
  2189. 1:40:20शौर्य ने सीधे प्रिया से पूछा, तो क्या
  2190. 1:40:23कहती हो? संभाल लोगी या मैं किसी और को
  2191. 1:40:26जिम्मेदारी दूं। प्रिया [संगीत] एकदम घबरा
  2192. 1:40:28गई। उसने तुरंत कहा, नहीं सर मैं संभाल
  2193. 1:40:31लूंगी। अगर कहीं दिक्कत आई तो मोहित सर है
  2194. 1:40:34ही। इनसे मदद ले लूंगी। उसे डर था कि अगर
  2195. 1:40:37उसने जरा भी देर की तो इतना अच्छा मौका
  2196. 1:40:39उसके हाथ से निकल जाएगा। उसकी घबराहट
  2197. 1:40:42देखकर सबके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ
  2198. 1:40:44गई। इसके बाद सब खाने में लग गए। खाते हुए
  2199. 1:40:48शौर्य की नजर होटल के गेट के पास लगे एक
  2200. 1:40:50बोर्ड पर पड़ी। दरअसल होटल के गेट पर कई
  2201. 1:40:54डिस्प्ले बोर्ड लगे हुए थे। [संगीत] जिन
  2202. 1:40:55पर उस दिन के रिजर्व हॉल की जानकारी रहती
  2203. 1:40:58है ताकि आने वाले गेस्ट आसानी से समझ सकें
  2204. 1:41:01कि उन्हें किस हॉल नंबर में जाना है। ऐसे
  2205. 1:41:03ही एक डिस्प्ले बोर्ड पर राधिका टंडन
  2206. 1:41:05बर्थडे सेलिब्रेशन हॉल नंबर पांच लिखा नजर
  2207. 1:41:08आ रहा था। किसी डिस्प्ले बोर्ड पर शौर्य
  2208. 1:41:11की नजर ठहर गई। उसे यह नाम जाना पहचाना
  2209. 1:41:15लगा। उसे ध्यान आया कि यह नाम शिप्रा की
  2210. 1:41:17बुआ की बेटी का है। जिससे एक-द दिन पहले
  2211. 1:41:20ही शौर्य उसके ऑफिस की पार्किंग में मिला
  2212. 1:41:22था। यानी आज उसका बर्थडे था और सेलिब्रेशन
  2213. 1:41:25राजकमल होटल में ही था। शौर्य को लगा कि
  2214. 1:41:28शायद शिप्रा भी आज उसके बर्थडे सेलिब्रेशन
  2215. 1:41:30में यहां आएगी। शौर्य सेलिब्रेशन में
  2216. 1:41:33इनवाइटेड नहीं था। शायद अभी उसने सक्सेना
  2217. 1:41:36फैमिली में वह हैसियत हासिल नहीं की थी कि
  2218. 1:41:38उसे किसी फैमिली फंक्शन में इनवाइट किया
  2219. 1:41:41जा सके। शौर्य को कई जाने-पचाने चेहरे
  2220. 1:41:44होटल में आते दिखाई दिए। लेकिन जिस चेहरे
  2221. 1:41:46को वो देखना चाह रहा था वो अभी तक नजर
  2222. 1:41:49नहीं आया था। शौर्य ध्यान से हर आने जाने
  2223. 1:41:52वाले को देखने लगा। तभी शौर्य को वो चेहरा
  2224. 1:41:55दिखाई दिया जिसके लिए वह दरवाजे के सामने
  2225. 1:41:57अपनी नजरें गड़ाए हुए था। उसने देखा
  2226. 1:42:00शिप्रा अपने पिता, मां और भाई के साथ होटल
  2227. 1:42:04के अंदर प्रवेश कर रही थी। इस समय शिप्रा
  2228. 1:42:07पिंक कलर के सूट में किसी अप्सरा जैसी लग
  2229. 1:42:09रही थी। शौर्य की निगाह तो उसके चेहरे पर
  2230. 1:42:11अटक ही गई थी जब तक कि वो होटल के अंदर
  2231. 1:42:14प्रवेश नहीं कर गई। इसके बाद शौर्य ने
  2232. 1:42:16वहां से अपनी नजर हटाई और अपने साथ बैठे
  2233. 1:42:19लोगों की तरफ ध्यान दिया। वो मन ही मन
  2234. 1:42:21बुदबुदाया।
  2235. 1:42:23हॉल नंबर पांच। वो वहां जा तो नहीं सकता
  2236. 1:42:26था पर वह चाहता था कि वहां जो भी हो रहा
  2237. 1:42:28है उसे देख सके। अब तक सभी अपना खाना खा
  2238. 1:42:32चुके थे। शौर्य ने एक बार सबकी तरफ देखा
  2239. 1:42:34और पूछा किसी को कुछ और भी चाहिए? सब ने
  2240. 1:42:38मना कर दिया। शौर्य भी यही तो चाहता था।
  2241. 1:42:41उसने वेटर से बोलकर बिल मंगवाया। क्योंकि
  2242. 1:42:44यहां स्टाफ के लोग उसके बारे में नहीं
  2243. 1:42:45जानते थे। इसीलिए शौर्य उन्हें यह नहीं
  2244. 1:42:48बता सकता था कि वह इस होटल का मालिक है।
  2245. 1:42:50इसीलिए उसने बिल पे करना ही उचित समझा।
  2246. 1:42:53शौर्य ने बिल पे करने के लिए अपना कार्ड
  2247. 1:42:55वेटर की तरफ बढ़ाया तो वेटर ने कहा नो सर
  2248. 1:42:59मैम ने कहा था कि आपको बिल पे करने की कोई
  2249. 1:43:02जरूरत नहीं है। शौर्य को भी समझ नहीं आया
  2250. 1:43:05कि मेनका को कैसे पता चला कि वो यहां लंच
  2251. 1:43:07कर रहा है। फिर उसने सोचा हो सकता है उसने
  2252. 1:43:10सीसीटीवी पर उसे लंच करते देख लिया हो।
  2253. 1:43:13इसीलिए उसने खासतौर पर वेटर को यह
  2254. 1:43:15इंस्ट्रक्शन दिया होगा। शौर्य ने फिर वेटर
  2255. 1:43:18को कार्ड देने की कोशिश नहीं की। वहीं
  2256. 1:43:20मोहित और प्रिया हैरान थे कि होटल वालों
  2257. 1:43:22ने शौर्य से बिल पे करने के लिए मना क्यों
  2258. 1:43:25किया। उन्होंने अपना बहुत दिमाग लगाया पर
  2259. 1:43:27उन्हें कुछ समझ नहीं आया। खैर शौर्य अपनी
  2260. 1:43:30सीट से उठते हुए बोला तो फिर ठीक है। मैं
  2261. 1:43:34चलता हूं अभी। मुझे कुछ काम आ गया है। मैं
  2262. 1:43:37फिर मिलता हूं तुम सबसे।
  2263. 1:43:39ठीक है सर हम भी निकलते हैं। मोहित भी
  2264. 1:43:42प्रिया के साथ खड़े होते हुए बोला। इसके
  2265. 1:43:44बाद शौर्य विक्रम के साथ वहां से निकल
  2266. 1:43:47गया। चलते हुए विक्रम ने पूछा क्या हुआ?
  2267. 1:43:50अचानक ऐसा क्या काम आ गया जो आप जल्दीबाजी
  2268. 1:43:53में यहां से निकल लिए? इस पर शौर्य
  2269. 1:43:55मुस्कुराते हुए बोला, अभी-अभी मुझे पता
  2270. 1:43:58चला है कि राधिका टंडन का बर्थडे
  2271. 1:44:00सेलिब्रेशन इसी होटल में हो रहा है और
  2272. 1:44:03सक्सेना फैमिली के लगभग सभी लोग यहां
  2273. 1:44:05मौजूद हैं। मैं वहां इनवाइटेड तो नहीं हूं
  2274. 1:44:08पर मैं उस पार्टी का नजारा देखना चाहता
  2275. 1:44:10हूं। इसीलिए यहां से निकल गया। चलो मैनेजर
  2276. 1:44:14के रूम से सीसीटीवी पर लाइव कवरेज देखते
  2277. 1:44:16हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि आप क्यों
  2278. 1:44:19यह चूहे बिल्ली का खेल खेल रहे हैं। अरे
  2279. 1:44:22आप अपने बारे में उन्हें बताइए। आपके बारे
  2280. 1:44:25में जानते ही सभी आपके आगे पीछे घूमने
  2281. 1:44:27लगेंगे। विक्रम बेपरवाही से बोला तो शौर्य
  2282. 1:44:30मुस्कुराया और बोला मैंने तुम्हें पहले भी
  2283. 1:44:34कहा था कि यह बताना आसान नहीं है जितना
  2284. 1:44:36तुम सोच रहे हो। मुझे शिप्रा को अपने पीछे
  2285. 1:44:39नहीं घुमाना है बल्कि उसके दिल में जगह
  2286. 1:44:41बनानी है। मैं नहीं चाहता कि वो मेरी दौलत
  2287. 1:44:44और रुतबा देखकर अपना डिसीजन ले। मुझे
  2288. 1:44:47सुकून तब होगा अगर वो मेरी सच्चाई जाने
  2289. 1:44:49बिना मुझे अपनाएगी। यह सुनकर विक्रम अपना
  2290. 1:44:52सिर झटकते हुए बोला। आपकी बातें मुझे कभी
  2291. 1:44:55समझ नहीं आएंगी। तो फिर तुम कोशिश ही
  2292. 1:44:58क्यों करते हो? कहते हुए शौर्य मंदमंद
  2293. 1:45:00मुस्कुराने लगा। इस पर विक्रम ने लंबी
  2294. 1:45:03सांस छोड़ते हुए कहा। ठीक है। फिर मैं बस
  2295. 1:45:06देखता हूं कि कब तक आप ऐसे ही अपने आप को
  2296. 1:45:09तड़पाते रहते हैं। शौर्य और विक्रम मेनका
  2297. 1:45:11के कमरे तक पहुंचे। उस समय मेनका वहां
  2298. 1:45:14नहीं थी। दरवाजे पर गार्ड मौजूद था लेकिन
  2299. 1:45:16शौर्य को पहचानता था। इसलिए बिना कुछ कहे
  2300. 1:45:19अंदर जाने दिया। शौर्य ने एक चेयर खींच कर
  2301. 1:45:22बैठते हुए रिमोट उठाया और सीसीटीवी ऑन कर
  2302. 1:45:24दिया। चैनल बदलते-बलते अचानक स्क्रीन पर
  2303. 1:45:28हॉल नंबर पांच का लाइव नजारा उभर आया।
  2304. 1:45:30विक्रम ने तिरछी नजर से उसे देखा जैसे समझ
  2305. 1:45:33गया हो कि शौर्य क्या देखना चाहता है। उधर
  2306. 1:45:36हॉल नंबर पांच में राधिका नैना राय के साथ
  2307. 1:45:39स्टेज पर [संगीत] खड़ी थी। पूरा हॉल बेहद
  2308. 1:45:41खूबसूरती से सजाया गया था। रंग बिरंगी
  2309. 1:45:44लाइट्स, फूलों की सजावट और चारों तरफ रौनक
  2310. 1:45:47थी। सब कुछ किसी बड़े आयोजन की गवाही दे
  2311. 1:45:50रहा था। गेस्ट धीरे-धीरे आ रहे थे और वेटर
  2312. 1:45:53रिंग्स और स्टार्टर्स सर्व करने में लगे
  2313. 1:45:55थे। वाइट गाउन में राधिका सचमुच किसी परी
  2314. 1:45:58जैसी लग रही थी। तभी बलराज सक्सेना उसके
  2315. 1:46:00पास आए और अपने हाथ में पकड़ा गिफ्ट उसे
  2316. 1:46:03थमा दिया। राधिका ने झुककर उनके पैर छुए
  2317. 1:46:06तो बलराज सक्सेना ने उसके सिर पर हाथ रखकर
  2318. 1:46:08आशीर्वाद दिया। राधिका ने उत्साहित होकर
  2319. 1:46:11गिफ्ट को देखते हुए पूछा। इसमें क्या है
  2320. 1:46:14नाना जी? क्या मैं इसे अभी खोल कर देख
  2321. 1:46:16लूं? बलराज सक्सेना मुस्कुराए। अरे इतनी
  2322. 1:46:20भी क्या जल्दी है? यह तुम्हारे लिए ही है।
  2323. 1:46:23कहीं भागा तो नहीं जा रहा। अभी तो तुम्हें
  2324. 1:46:26और भी बहुत सारे गिफ्ट मिलने हैं। पहले उन
  2325. 1:46:29पर ध्यान दो। धीरे-धीरे गेस्ट की संख्या
  2326. 1:46:33बढ़ने लगी और राधिका के सामने गिफ्ट्स का
  2327. 1:46:35ढेर लग गया। इसी बीच राधिका की नजर दरवाजे
  2328. 1:46:39की तरफ गई। वहां मुख्तार भाई और रजत अंदर
  2329. 1:46:42आते दिखाई दिए। रजत के हाथ में भी एक
  2330. 1:46:45गिफ्ट था। वो मुख्तार भाई के साथ सीधे
  2331. 1:46:47स्टेज की ओर बढ़ा और राधिका के पास
  2332. 1:46:49पहुंचकर मुस्कुराते हुए बोला। हैप्पी
  2333. 1:46:52बर्थडे डियर राधिका। मैं दुआ करता हूं कि
  2334. 1:46:55आपकी जिंदगी हमेशा खुशियों से भरी रहे।
  2335. 1:46:58राधिका ने रजत की ओर देखा और हल्की सी
  2336. 1:47:00मुस्कान के साथ उसके हाथ से गिफ्ट लिया।
  2337. 1:47:03उसने प्यार भरी आवाज से कहा थैंक यू। रजत
  2338. 1:47:07ने भी मुस्कुराने की कोशिश की लेकिन उसकी
  2339. 1:47:09नजरें राधिका पर टिक नहीं पाई। जैसे ही
  2340. 1:47:11उसने सिर उठाया, उसकी आंखें पूरे हॉल में
  2341. 1:47:14किसी को खोजने लगी। उसकी बेचैनी साफ झलक
  2342. 1:47:17रही थी। खैर, उसे ज्यादा इंतजार नहीं करना
  2343. 1:47:20पड़ा। कुछ ही पलों में हॉल के मुख्य
  2344. 1:47:22दरवाजे पर हलचल हुई। शिप्रा अपने पूरे
  2345. 1:47:24परिवार के साथ अंदर प्रवेश कर रही थी।
  2346. 1:47:27जैसे ही शिप्रा की झलक रजत की आंखों में
  2347. 1:47:30पड़ी, उसकी तलाश खत्म हो गई। उसकी निगाहें
  2348. 1:47:33वहीं ठहर गई जैसे वक्त कुछ पल के लिए थम
  2349. 1:47:36गया हो। दूसरी ओर शौर्य अपने कमरे में
  2350. 1:47:39बैठा सीसीटीवी स्क्रीन पर पार्टी का हर
  2351. 1:47:42नजारा देख रहा था। जैसे ही उसकी नजर हॉल
  2352. 1:47:45में मौजूद चेहरों पर गई, वो अचानक चौकन्ना
  2353. 1:47:48हो गया। मुख्तार और रजत उसकी आंखें सिकुड़
  2354. 1:47:51गई। माथे पर लकीरें उभर आई। उसे समझ नहीं
  2355. 1:47:54आया कि राधिका के बर्थडे पार्टी में इन
  2356. 1:47:56दोनों का क्या काम।
  2357. 1:47:59क्या सक्सेना फैमिली मुख्तार भाई के आगे
  2358. 1:48:02झुक गई है? यह ख्याल उसके मन में बिजली की
  2359. 1:48:04तरह कौंधा। वो स्क्रीन पर नजरें गड़ाए
  2360. 1:48:07रहा। जैसे किसी बड़े राज का इंतजार कर रहा
  2361. 1:48:10हो। तभी हॉल के दरवाजे से शिप्रा का
  2362. 1:48:12प्रवेश हुआ। शौर्य की नजर तुरंत रजत पर गई
  2363. 1:48:15और उसने साफ देखा कि रजत की निगाहें
  2364. 1:48:18शिप्रा पर आकर ठहर गई थी। हॉल में प्रवेश
  2365. 1:48:21करते ही शिप्रा की नजर जैसे ही रजत पर
  2366. 1:48:23पड़ी, उसके चेहरे पर सख्ती तैर गई जैसे
  2367. 1:48:26किसी पुराने जख्म को कोरेदा गया हो। लेकिन
  2368. 1:48:29अगले ही क्षण उसने अपनी भावनाओं को अपने
  2369. 1:48:31चेहरे से मिटा दिया। सदी हुई चाल से वह
  2370. 1:48:34रजत को पूरी तरह नजरअंदाज करती हुई अपने
  2371. 1:48:36पापा के साथ राधिका की ओर बढ़ गई। राधिका
  2372. 1:48:40के सामने रुक कर उसने हल्की मुस्कान के
  2373. 1:48:42साथ कहा,
  2374. 1:48:44मेनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे स्वीट हार्ट
  2375. 1:48:46हैप्पी बर्थडे
  2376. 1:48:48राधिका मुस्कुराई थैंक यू लेकिन उसकी
  2377. 1:48:51आंखें किसी और को तलाश रही थी शिप्रा ने
  2378. 1:48:54उसकी आंखें पढ़ ली उसने पूछा क्या हुआ
  2379. 1:48:57किसे ढूंढ रही हो राधिका के होठों पर एक
  2380. 1:49:00चालाक मुस्कान उभरी वो [संगीत] जानबूझकर
  2381. 1:49:03आवाज ऊंची कर बोली अरे अपने जीजा जी को
  2382. 1:49:06आखिर वो कहां है वो यहीं नहीं रुकी आवाज
  2383. 1:49:10में नौटंकी लाते हुए बोली इतनी तारी तारीफ
  2384. 1:49:13सुनी है उनकी। सोचा था आज मिल ही लूंगी
  2385. 1:49:16लेकिन वो तो नजर ही नहीं आ रहे। आसपास
  2386. 1:49:18खड़े लोग सारी बातें साफ-साफ सुन रहे थे।
  2387. 1:49:21माहौल में हल्की फुसफुसाहट घुलने लगी। तभी
  2388. 1:49:24नैना बुआ आगे आई और होठों पर व्यंग भरी
  2389. 1:49:27मुस्कान से बोली। हां शिप्रा तुम्हारे
  2390. 1:49:30पतिदेव कहां है? उन्हें नहीं लाई या फिर
  2391. 1:49:33वो यहां इतनी बड़ी पार्टी में आने से कतरा
  2392. 1:49:35रहे थे। सबकी नजरें अब शिप्रा पर टिक गई।
  2393. 1:49:38सबको तमाशे का इंतजार था। लेकिन शिप्रा वो
  2394. 1:49:42जरा भी नहीं डगमगाई। उसने सदी और साफ आवाज
  2395. 1:49:45में कहा
  2396. 1:49:46किसी को बुलाना हो तो पहले निमंत्रण दिया
  2397. 1:49:49जाता है ना नैना बुआ। फिर वो राधिका की ओर
  2398. 1:49:51देखते हुए बोली बिन बुलाए सिर्फ बेगैरत
  2399. 1:49:55लोग ही आते हैं। अगली बार अगर सच में उनसे
  2400. 1:49:58मिलना हो तो इज्जत से बुलाना। नैना बुआ ने
  2401. 1:50:01भए चढ़ाते हुए शिप्रा के करीब आकर कहा,
  2402. 1:50:04"तुम कैसी बातें कर रही हो शिप्रा? अपने
  2403. 1:50:07ही परिवार में क्या किसी को अलग-अलग
  2404. 1:50:08इनवाइट किया जाता है? जब वह इस घर में रह
  2405. 1:50:11रहा है तो कायदे से फैमिली फंक्शन में
  2406. 1:50:14अपने आप ही उसे आना चाहिए था। शिप्रा ने
  2407. 1:50:16नैना बुआ की तरफ देखा और फिर होठों पर
  2408. 1:50:19हल्की सी कड़वी मुस्कान आई। कायदे की बात
  2409. 1:50:22कर रही हो ना बुआ? एक कदम आगे बढ़ते हुए
  2410. 1:50:25वो बिना आवाज ऊंचे किए बोली। कायदे से तो
  2411. 1:50:28मुझे भी नहीं आना चाहिए था। लेकिन पापा
  2412. 1:50:31मुझे जबरदस्ती ले आए। और जहां तक श्रवण की
  2413. 1:50:34बात है उसे कोई सपना तो आया नहीं था कि आज
  2414. 1:50:36राधिका का बर्थडे है और उसे यहां हाजिरी
  2415. 1:50:38लगानी चाहिए। उसके शब्दों में रूखापन था
  2416. 1:50:42लेकिन उसका मकसद किसी का अपमान करना नहीं
  2417. 1:50:44था। तभी राजदीप राय आगे आए। उनका चेहरा
  2418. 1:50:47सख्त था।
  2419. 1:50:49हां नैना अगर तुम चाहती थी कि श्रवण भी
  2420. 1:50:52यहां आए तो सीधे बोलना चाहिए था। उन्होंने
  2421. 1:50:56हल्की सी नजर चारों तरफ घुमाई।
  2422. 1:50:58अधूरी बातों से सिर्फ गलतफहमियां पैदा
  2423. 1:51:01होती हैं। रिश्ते नहीं। अब माहौल थोड़ा
  2424. 1:51:04बदलने लगा था। राधिका ने तुरंत बीच में
  2425. 1:51:06आकर बात संभालने की कोशिश की। क्या मम्मी
  2426. 1:51:10आप एक काम भी ठीक से नहीं कर सकती? गेस्ट
  2427. 1:51:13लिस्ट आपकी जिम्मेदारी थी और आपने हमारे
  2428. 1:51:15प्यारे जीजाजी को ही इनवाइट नहीं किया।
  2429. 1:51:18उसने प्यारे शब्द पर हल्का जोर दिया जैसे
  2430. 1:51:20जानबूझकर चुभाना चाहती हो। फिर वो पलट कर
  2431. 1:51:23शिप्रा की तरफ मुड़ी और जबरदस्ती चेहरे पर
  2432. 1:51:26मीठी मुस्कान लाती हुई बोली। [संगीत] कोई
  2433. 1:51:28बात नहीं शिप्रा तुम मुझे उनका नंबर दे
  2434. 1:51:30दो। मैं अभी कॉल करके उन्हें इनवाइट कर
  2435. 1:51:33लेती हूं। शिप्रा ने उसकी आंखों में सीधा
  2436. 1:51:35देखा। राधिका की मुस्कान देखकर कोई भी कह
  2437. 1:51:38सकता था कि यह मासूमियत नहीं एक चाल
  2438. 1:51:40[संगीत] थी। शिप्रा ने धीरे से सिर हिलाकर
  2439. 1:51:43कहा रहने दो राधिका अब इसकी कोई जरूरत
  2440. 1:51:46नहीं है। राधिका कुछ बोलती उससे पहले ही
  2441. 1:51:50शिप्रा ने बात पूरी कर दी। वैसे भी पता
  2442. 1:51:53नहीं श्रवण अभी कहां होगा। किसी काम से
  2443. 1:51:55बाहर गया था और अभी तक लौटा नहीं। नहीं
  2444. 1:51:58नहीं ऐसा कैसे हो सकता है? राधिका ने जिद
  2445. 1:52:01भरे स्वर में कहा जब परिवार के सारे मेंबर
  2446. 1:52:04यहां मौजूद हैं तो हमारे जीजा जी कैसे
  2447. 1:52:06नहीं होंगे? उन्हें तो आना ही पड़ेगा। वो
  2448. 1:52:09शिप्रा का हाथ पकड़ कर बोली तुम बस मुझे
  2449. 1:52:12उनका नंबर दे दो। मैं खुद उन्हें बुला
  2450. 1:52:14लूंगी। राधिका के चेहरे पर भले ही मीठी
  2451. 1:52:17मुस्कान थी लेकिन उसके मन में कुछ और ही
  2452. 1:52:19चल रहा था। वो पूरी तरह आश्वस्त थी कि एक
  2453. 1:52:22बार बस शिप्रा का पति यहां आ जाए। फिर
  2454. 1:52:25देखती हूं उसका सारा घमंड कैसे चूर होता
  2455. 1:52:27है। जो एक भिखारी था उसकी हैसियत भला
  2456. 1:52:30कितनी बदल गई होगी। उसके मन में एक
  2457. 1:52:33तिरस्कार भरी हंसी उठी। सिर्फ कपड़े बदल
  2458. 1:52:36लेने से या थोड़ा बहुत साज सज्जा कर लेने
  2459. 1:52:38से कोई अपनी औकात नहीं बदल सकता। आज उसे
  2460. 1:52:42शिप्रा को सबके सामने नीचा दिखाने का
  2461. 1:52:44अच्छा मौका मिला था। राधिका ऐसे मौके को
  2462. 1:52:47यूं ही जाने देने वालों में से नहीं थी।
  2463. 1:52:50तभी राजदीप राय बीच में आ गए और समझाने के
  2464. 1:52:53ढंग से बोले रहने दो राधिका। क्यों जिद कर
  2465. 1:52:56रही हो? उन्होंने हल्की सी नजर शिप्रा पर
  2466. 1:52:59डाली और अपनी बात पूरी की। पता नहीं अभी
  2467. 1:53:02कहां होगा श्रवण। बाद में मिल लेना उससे।
  2468. 1:53:06लेकिन राधिका अब रुकने वाली नहीं थी। वो
  2469. 1:53:08सीधा बलराज सक्सेना के पास पहुंची और
  2470. 1:53:11चेहरे पर बनावटी मासूमियत लेकर बोली। नाना
  2471. 1:53:14जी आप ही शिप्रा को बोलिए ना कि वो मुझे
  2472. 1:53:16श्रवण जीजू का नंबर दे दें। उसने हल्का सा
  2473. 1:53:20मुंह बनाया।
  2474. 1:53:22मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मेरी बर्थडे
  2475. 1:53:24पार्टी में मेरे जीजाजी ना हो। बलराज
  2476. 1:53:27सक्सेना ने एक नजर राधिका पर डाली। फिर
  2477. 1:53:30शिप्रा की ओर मुड़कर बोले, शिप्रा बेटा दे
  2478. 1:53:33दो नंबर। बाकी यह खुद बात कर लेगी। आना
  2479. 1:53:37होगा तो श्रवण आ जाएगा।
  2480. 1:53:39अब शिप्रा के पास मना करने का कोई सीधा
  2481. 1:53:42रास्ता नहीं बचा था। बिना कुछ कहे उसने
  2482. 1:53:44अपना मोबाइल निकाला और श्रवण का नंबर
  2483. 1:53:47राधिका को नोट करा दिया। राधिका के होठों
  2484. 1:53:50पर जीत की हल्की मुस्कान आ गई। उसने तुरंत
  2485. 1:53:53नंबर डायल किया। वहीं दूसरी तरफ श्रवण
  2486. 1:53:56सीसीटीवी स्क्रीन पर पूरे हॉल का नजारा
  2487. 1:53:58देख रहा था। लोगों की हलचल दिख रही थी।
  2488. 1:54:01चेहरे दिख रहे थे लेकिन वो आवाजें नहीं
  2489. 1:54:04सुन सकता था। वो ध्यान से देख रहा था कि
  2490. 1:54:06शिप्रा कुछ कह रही थी और राधिका अपने
  2491. 1:54:09मोबाइल में कुछ नोट कर रही थी। उसकी भोई
  2492. 1:54:12सिकुड़ गई।
  2493. 1:54:15क्या? चल क्या रहा है वहां?
  2494. 1:54:18वो समझने की कोशिश ही कर रहा था कि तभी
  2495. 1:54:20उसका मोबाइल बज उठा। उसने स्क्रीन पर नजर
  2496. 1:54:23डाली। अननोन नंबर। लेकिन अगले ही पल उसकी
  2497. 1:54:27नजर सीसीटीवी पर गई। राधिका फोन कान से
  2498. 1:54:30लगाए खड़ी थी। एक हल्की सी मुस्कान उसके
  2499. 1:54:32होठों पर आ गई। ओ तो खेल यहां तक पहुंच
  2500. 1:54:36गया। उसने कॉल रिसीव किया। हेलो।
  2501. 1:54:41दूसरी तरफ से एक मीठी लेकिन बनावटी आवाज
  2502. 1:54:44आई।
  2503. 1:54:45हेलो।
  2504. 1:54:46श्रवण शांत और सतर्क आवाज में बोला, "जी
  2505. 1:54:50कौन बोल रही हैं?"
  2506. 1:54:51हेलो जीजा जी।
  2507. 1:54:53राधिका आवाज में मिठास घोल कर बोली,
  2508. 1:54:55मैं आपकी साली राधिका टंडन बोल रही हूं।
  2509. 1:54:59बस इतना सुनते ही श्रवण का शक यकीन में
  2510. 1:55:01बदल गया। अब उसे पूरी कहानी समझ आ चुकी
  2511. 1:55:04थी। वो कुर्सी पर थोड़ा पीछे टिक गया और
  2512. 1:55:06आवाज में हल्का सा उत्साह लाते हुए बोला।
  2513. 1:55:09ओह राधिका जी कहिए राधिका जी आज अचानक
  2514. 1:55:12हमें कैसे याद कर लिया? जीजा जी पहले तो
  2515. 1:55:15आप यह बताइए कि अभी आप हैं कहां? उसके बाद
  2516. 1:55:18ही मैं आपको अपने फोन करने की वजह
  2517. 1:55:20बताऊंगी।
  2518. 1:55:21राधिका ने इसरार करते हुए कहा शौर्य एक पल
  2519. 1:55:24को चुप रहा। उसकी नजर अब भी सीसीटीवी
  2520. 1:55:27स्क्रीन पर टिकी थी। जहां राधिका फोन
  2521. 1:55:29पकड़े खड़ी थी। उसने थोड़ा सोचा फिर
  2522. 1:55:32नॉर्मली बोला। अभी मैं गुलमोहर मार्केट
  2523. 1:55:35में हूं। कुछ काम से आया था यहां। आप
  2524. 1:55:37बताइए क्या काम है? शौर्य ने जानबूझकर
  2525. 1:55:40होटल का नाम नहीं लिया। लेकिन गुलमोहर
  2526. 1:55:42मार्केट सुनते ही राधिका के चेहरे पर खुशी
  2527. 1:55:45चमक उठी। शिकार खुद जाल के पास है। उसने
  2528. 1:55:49तुरंत उत्साहित होकर कहा
  2529. 1:55:50अरे वाह ये तो बहुत अच्छी बात है जीजा जी।
  2530. 1:55:53तो ध्यान से सुनिए। आज मेरा बर्थडे है और
  2531. 1:55:55मैंने अपनी पार्टी होटल राजकमल के हॉल
  2532. 1:55:58नंबर पांच में रखी है।
  2533. 1:56:00थोड़ा रुक कर उसने बात को मोड़ा।
  2534. 1:56:02शायद किसी गलतफहमी की वजह से मम्मी आपको
  2535. 1:56:05पहले इनवाइट नहीं कर पाई।
  2536. 1:56:07फिर सीधा दबाव डालते हुए बोली। लेकिन अब
  2537. 1:56:09आपको हर हाल में आना है। सब कुछ छोड़िए और
  2538. 1:56:13प्लीज अभी होटल राजकमल आ जाइए। हम सब आपका
  2539. 1:56:15इंतजार कर रहे हैं।
  2540. 1:56:17शौर्य ने पूरी बात सुनी। उसके होठों पर
  2541. 1:56:20हल्की मुस्कान आई। अच्छा तो यह खेल है।
  2542. 1:56:24लेकिन वो इतनी आसानी से मोहरा बनने वाला
  2543. 1:56:27नहीं था। उसने सोचकर बहुत सधे हुए स्वर
  2544. 1:56:30में कहा। माफ कीजिए मिस राधिका मुझे इस
  2545. 1:56:32बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं है और
  2546. 1:56:35ना ही शिप्रा ने मुझे इसके बारे में कुछ
  2547. 1:56:37बताया है तो मैं बिना शिप्रा की जानकारी
  2548. 1:56:40के वहां नहीं आ सकता। जब शौर्य ने कहा था
  2549. 1:56:44कि वह गुलमोहर मार्केट में है तो राधिका
  2550. 1:56:46ने तुरंत फोन का स्पीकर ऑन कर दिया था।
  2551. 1:56:48हॉल में मौजूद हर व्यक्ति उसकी आवाज
  2552. 1:56:51साफ-साफ सुन रहा था। शिप्रा ने जब यह
  2553. 1:56:53सुना, तो उसे राहत महसूस हुई। कम से कम वह
  2554. 1:56:56तुरंत झुक नहीं गया। लेकिन राधिका के लिए
  2555. 1:56:59यह सीधा झटका था। उसने सोचा था कि होटल
  2556. 1:57:02राजकमल का नाम सुनते ही वो भागा चला आएगा।
  2557. 1:57:05पर यहां तो बात उल्टी पड़ गई थी। एक पल को
  2558. 1:57:08उसका चेहरा सख्त हुआ। पर अगले ही पल उसने
  2559. 1:57:10खुद को संभाल लिया और फिर खिसियानी हंसी
  2560. 1:57:13के साथ बोली।
  2561. 1:57:14अरे जीजा जी आप भी कैसी बातें कर रहे हैं?
  2562. 1:57:17क्या मैं आपसे झूठ बोलूंगी?
  2563. 1:57:20फिर उसने तुरुप का पत्ता फेका।
  2564. 1:57:22शिप्रा भी यहीं है और आपकी आवाज सुन रही
  2565. 1:57:25है।
  2566. 1:57:26उसने तुरंत फोन शिप्रा की ओर बढ़ा दिया।
  2567. 1:57:28लो शिप्रा तुम ही अपने पतिदेव से कह दो कि
  2568. 1:57:31वो यहां आ जाए।
  2569. 1:57:33सबकी नजर शिप्रा पर टिक गई। अब उसके पास
  2570. 1:57:36मना करने की कोई गुंजाइश नहीं थी। कम से
  2571. 1:57:39कम इस माहौल में तो बिल्कुल नहीं। उसने
  2572. 1:57:41फोन लिया। कुछ पल चुप रही। फिर धीमे से
  2573. 1:57:44बोली
  2574. 1:57:46अगर तुम पास में ही हो तो आ जाओ।
  2575. 1:57:49थोड़ा रुक कर वो बोली
  2576. 1:57:51पूरी फैमिली यहीं है।
  2577. 1:57:53शौर्य समझ रहा था कि उसकी आवाज में ना
  2578. 1:57:55उत्साह था ना आग्रह। एक मजबूरी जरूर थी
  2579. 1:57:59लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान
  2580. 1:58:01उभरी। अब खेल दिलचस्प हो चुका था। उसने
  2581. 1:58:04शांत स्वर में कहा। ठीक है। मैं आता हूं
  2582. 1:58:08थोड़ी देर में। और बिना कुछ और बोले उसने
  2583. 1:58:11कॉल काट दिया। हॉल में एक अजीब सी हलचल
  2584. 1:58:13फैल गई। राधिका के चेहरे पर फिर से वही
  2585. 1:58:16आत्मविश्वास लौट आया। अब आएगा मजा। उसने
  2586. 1:58:21मन ही मन सोचा। राय परिवार की बेटी शिप्रा
  2587. 1:58:24की शादी एक भिखारी के साथ होने की वायरल
  2588. 1:58:26स्टोरी ने जितना लोगों को हैरान किया था,
  2589. 1:58:29उससे भी चौगुनी हैरानियत अब लोगों को
  2590. 1:58:31शौर्य के बदले अवतार को देखकर हो रही थी।
  2591. 1:58:34शौर्य को देखते ही लोगों की आंखें जिस गति
  2592. 1:58:37से फैलकर बड़ी हो रही थी, उन्हें वापस से
  2593. 1:58:39कुड़ने में वक्त लग रहा था। आज शौर्य की
  2594. 1:58:42पर्सनालिटी में और भी चार चांद लगने वाले
  2595. 1:58:45हैं। कई दिलों की जलन और धड़कनें बढ़ने
  2596. 1:58:47वाली हैं क्योंकि शौर्य ने अब अपने पुराने
  2597. 1:58:50सस्ते कपड़े भी बदल लिए हैं। कुछ ही देर
  2598. 1:58:53पहले वो मेनका के साथ शॉपिंग करके लौटा था
  2599. 1:58:56और उन्हीं कपड़ों में से एक उसने पहन भी
  2600. 1:58:58लिया था। उसका व्यक्तित्व अब और भी डैशिंग
  2601. 1:59:01और शाही लग रहा है। आज जहां उसे जाना है
  2602. 1:59:04वहां मामला सिर्फ जाने का नहीं है। कैसे
  2603. 1:59:06और [संगीत] कब जाना है यह ज्यादा अहम है।
  2604. 1:59:09उसने घड़ी पर नजर डाली और सोचा इतनी जल्दी
  2605. 1:59:13पहुंचने पर तो खेल बिगड़ जाएगा। वो सोच ही
  2606. 1:59:16रहा था कि क्या उसे कुछ और तैयारी करनी
  2607. 1:59:19चाहिए। तभी कमरे का दरवाजा खुला। मेनका
  2608. 1:59:22अंदर आई और शौर्य को वहां देखकर [संगीत]
  2609. 1:59:24ठिठक गई। तुम यहां क्या कर रहे हो? उसकी
  2610. 1:59:28आवाज में हैरानी थी। लेकिन शौर्य [संगीत]
  2611. 1:59:30ने सहज नजरों से उसकी ओर देखा और कहा मैं
  2612. 1:59:34आया तो तुमसे ही मिलने था।
  2613. 1:59:37और फिर हल्का सा सिर टीवी स्क्रीन की तरफ
  2614. 1:59:39घुमाया। लेकिन तुम [संगीत] थी नहीं तो
  2615. 1:59:41सोचा हॉल नंबर पांच में क्या चल रहा है
  2616. 1:59:44वही देख लूं। मेनका की नजर दीवार पर लगे
  2617. 1:59:47स्क्रीन पर गई। स्क्रीन पर चल रही बर्थडे
  2618. 1:59:49पार्टी चमकती रोशनी के बीच हंसते
  2619. 1:59:52मुस्कुराते चेहरे। लेकिन जैसे ही उसकी नजर
  2620. 1:59:54कुछ चेहरों पर टिकने लगी। उसकी आंखें
  2621. 1:59:57हल्की सी सिकुड़ गई। उसे शौर्य की वह बात
  2622. 2:00:00याद आ गई। मेरी शादी जबरदस्ती शिप्रा राय
  2623. 2:00:03से कर दी गई थी। मेनका को मालूम था आज
  2624. 2:00:06पूरी राय फैमिली इसी होटल में मौजूद है।
  2625. 2:00:08मेनका के मन की उथल-पुथल बढ़ चुकी थी।
  2626. 2:00:11उसकी नजर स्क्रीन पर दौड़ने लगी। वो हर एक
  2627. 2:00:14लड़की के चेहरे पर ठहरती तुलना [संगीत]
  2628. 2:00:16करती। शायद वो किसी खास चेहरे को पहचानने
  2629. 2:00:19की कोशिश कर रही थी।
  2630. 2:00:22इनमें से शिप्रा कौन है? वहां मौजूद
  2631. 2:00:26खूबसूरत चेहरों की भीड़ में उसे पहचान
  2632. 2:00:28पाना आसान नहीं था। इसीलिए उसने शौर्य से
  2633. 2:00:30पूछ लिया। लेकिन तभी उसके दिमाग में कुछ
  2634. 2:00:33क्लिक हुआ। वो धीरे से मुड़ी और शौर्य की
  2635. 2:00:36आंखों में देखते हुए बोली। एक बात बताओ
  2636. 2:00:39तुम खुद पार्टी में क्यों नहीं जा रहे?
  2637. 2:00:41क्या तुम किसी से बच रहे हो? शौर्य ने
  2638. 2:00:45फीकी सी मुस्कान के साथ कंधे उचकाए और
  2639. 2:00:47हल्के से व्यंग करते हुए कहा। राय फैमिली
  2640. 2:00:50की नजर में मेरी अभी वह हैसियत नहीं है कि
  2641. 2:00:53मुझे पहले से इनवाइट किया जाए। हां,
  2642. 2:00:55अभी-अभी मिस राधिका का फोन आया था। बड़ी
  2643. 2:00:58मेहरबानी से बुलाया है और मुझे पूरा यकीन
  2644. 2:01:00है इसके पीछे भी उसकी कोई खास मंशा ही
  2645. 2:01:03होगी। मेनका ने गौर से उसे देखते हुए कहा,
  2646. 2:01:07तो क्या करोगे तुम? जाओगे? शौर्य ने गहरी
  2647. 2:01:10सांस ली। जैसे खुद को तैयार करते हुए
  2648. 2:01:12बोला, जाना तो पड़ेगा। फिर हल्का सा
  2649. 2:01:15मुस्कुराया। आखिर देखना तो पड़ेगा ना मुझे
  2650. 2:01:19आखिरी वक्त पर बुलाने के पीछे असली खेल
  2651. 2:01:22क्या है? मेनका ने स्क्रीन की ओर देखा
  2652. 2:01:25जहां पार्टी पूरे शबाब पर थी। तो फिर
  2653. 2:01:28इंतजार किस बात का है? पार्टी तो शुरू हो
  2654. 2:01:31चुकी है। शौर्य ने घड़ी की तरफ देखा और
  2655. 2:01:33शांत स्वर में बोला जाऊंगा लेकिन तुरंत
  2656. 2:01:36नहीं। उसने मेनका की तरफ देखते हुए
  2657. 2:01:39समझाया। मैंने राधिका से कहा है कि मैं
  2658. 2:01:42अभी गुलमोहर मार्केट में हूं। तो वहां से
  2659. 2:01:45यहां आने में थोड़ा वक्त तो लगेगा ही। फिर
  2660. 2:01:48होठों पर हल्की सी चालाकी से मुस्कुराते
  2661. 2:01:50हुए बोला, थोड़ा इंतजार इंपैक्ट बढ़ा देता
  2662. 2:01:54है। यह सुनकर मेनका ने हंसते हुए कहा, "बह
  2663. 2:01:57बहुत बढ़िया। मतलब एंट्री भी पूरी प्लंड
  2664. 2:01:59होगी। वैसे तुम्हें मेरी कोई और मदद
  2665. 2:02:02चाहिए? शौर्य कुछ पल चुप रहा। जैसे यही
  2666. 2:02:05सवाल सुनने का इंतजार कर रहा हो। अचानक
  2667. 2:02:08उसकी आंखों में एक चमक आ गई। हां, मदद
  2668. 2:02:11चाहिए और वह भी बहुत जरूरी। मेनका ने भोएं
  2669. 2:02:15हल्की सी उठाई। एक पल को उसके मन में
  2670. 2:02:17ख्याल आया। क्या यह सच में मेरे पूछने का
  2671. 2:02:20इंतजार कर रहा था? वो शौर्य के सामने आकर
  2672. 2:02:23खड़ी हो गई। ठीक है बताओ अब क्या चाहिए
  2673. 2:02:26तुम्हें? शौर्य ने थोड़ा झिझकते हुए कहा।
  2674. 2:02:29देखो मैं बर्थडे सेलिब्रेशन में जा रहा
  2675. 2:02:31हूं तो तो बर्थडे गर्ल के लिए कोई गिफ्ट
  2676. 2:02:34तो चाहिए होगा। और मेरे पास अभी कुछ है
  2677. 2:02:36नहीं। कहते हुए उसने हल्की सी मासूमियत के
  2678. 2:02:39साथ मेनका की ओर देखा। तो क्या तुम मेरे
  2679. 2:02:42लिए एक गिफ्ट का इंतजाम कर सकती हो? उसका
  2680. 2:02:44अंदाज इतना सीधा था कि मेनका का मन सच में
  2681. 2:02:47हंसने का हुआ। लेकिन उसने खुद को संभालते
  2682. 2:02:50हुए कहा,
  2683. 2:02:52ठीक है मैं देखती हूं क्या कर सकती हूं।
  2684. 2:02:54शौर्य ने राहत की सांस ली। प्लीज कुछ ना
  2685. 2:02:57कुछ अरेंज कर देना। फिर मुस्कुराते हुए
  2686. 2:03:00बोला, "पता नहीं उस लड़की ने मुझे किस सोच
  2687. 2:03:03के साथ बुलाया है। अगर मैं बिना गिफ्ट के
  2688. 2:03:05पहुंचा तो उसे मुझे बेइज्जत करने का पूरा
  2689. 2:03:07मौका मिल जाएगा।"
  2690. 2:03:09मेनका ने उसे गौर से देखा। अजीब आदमी है,
  2691. 2:03:12मालिक है। चाहे तो हुक्म दे सकता है, पर
  2692. 2:03:15रिक्वेस्ट कर रहा है। मेनका के चेहरे पर
  2693. 2:03:17हल्की सी मुस्कान आई। शौर्य के प्रति उसका
  2694. 2:03:20नजरिया धीरे-धीरे बदल रहा था।
  2695. 2:03:23ठीक है। उसने सहजता से कहा, "मैं पक्का
  2696. 2:03:26कुछ करती हूं। तुम जाओ पार्टी एंजॉय करो।
  2697. 2:03:29मैं गिफ्ट वहीं भिजवा दूंगी या खुद लेकर आ
  2698. 2:03:31जाऊंगी।" शौर्य जाने के लिए मुड़ा ही था
  2699. 2:03:34कि मेनका को कुछ याद आया। 1 मिनट। उसने
  2700. 2:03:37शौर्य की तरफ देखा और बोली, जाने से पहले
  2701. 2:03:41यह तो बता दो स्क्रीन में दिख रही
  2702. 2:03:43लड़कियों में से तुम्हारी वाइफ कौन है?
  2703. 2:03:46शौर्य ने बिना झिझक स्क्रीन की ओर इशारा
  2704. 2:03:48किया। वो पिंक सूट में जो है वही शिप्रा
  2705. 2:03:51है। मेनका की नजर स्क्रीन पर गई और एक पल
  2706. 2:03:55को वो ठिटक गई। ये
  2707. 2:03:58शिप्रा की खूबसूरती सच में चौंकाने वाली
  2708. 2:04:01थी। उसकी पर्सनालिटी, उसका ग्रेस मेनका के
  2709. 2:04:04मन में एक हल्की सी चुभन उठी। इतनी
  2710. 2:04:07खूबसूरत एक पल को जलन भी हुई पर उसने उसे
  2711. 2:04:11चेहरे पर आने नहीं दिया। खैर मैं भी कम
  2712. 2:04:14नहीं हूं। उसने मन ही मन खुद को सांत्वना
  2713. 2:04:16दी और तुरंत ही एक वेटर को बुलाया। राम
  2714. 2:04:20सिंह इन्हें हॉल नंबर पांच तक छोड़ आओ।
  2715. 2:04:22जी मैडम। लिफ्ट से होते हुए फिफ्थ फ्लोर
  2716. 2:04:26और फिर हॉल नंबर पांच के दरवाजे के बाहर
  2717. 2:04:28पहुंचते ही राम सिंह रुक गया। यही है
  2718. 2:04:31साहब।
  2719. 2:04:33शौर्य ने हल्का सा सिर हिलाया और अंदर कदम
  2720. 2:04:36रखा। हॉल की भव्यता देखते ही बनती थी।
  2721. 2:04:39रोशनी, सजावट और लोगों की भीड़। शौर्य कुछ
  2722. 2:04:42पल के लिए चारों ओर देखता रह गया। फिर वो
  2723. 2:04:45भीड़ के बीच से रास्ता बनाते हुए स्टेज की
  2724. 2:04:48ओर बढ़ने लगा। उधर शिप्रा की नजर दरवाजे
  2725. 2:04:50पर ही टिकी हुई थी। मानो उसे किसी का
  2726. 2:04:53इंतजार हो। जैसे ही शौर्य अंदर आया, उसकी
  2727. 2:04:56सांस एक पल को थम गई। ब्लैक सूट, शानदार
  2728. 2:04:59पर्सनालिटी और आत्मविश्वास भरी चाल। उसकी
  2729. 2:05:02आंखें शौर्य पर ही अटक गई। सुबह वाले
  2730. 2:05:05कपड़ों को याद कर वो थोड़ी चिंतित थी कि
  2731. 2:05:07अगर वो उसी में आ गया तो लेकिन अब उसके
  2732. 2:05:11होठों पर राहत भरी मुस्कान थी। कम से कम
  2733. 2:05:14उसे खुद को संभालना तो आता है। दूसरी तरफ
  2734. 2:05:17राधिका भी बेसब्री से इंतजार कर रही थी।
  2735. 2:05:20जैसे ही उसकी नजर दरवाजे की ओर गई, वो
  2736. 2:05:23चौंक गई। ये ये तो वही है। शिप्रा के ऑफिस
  2737. 2:05:27का ड्राइवर। एक पल को उसके चेहरे पर
  2738. 2:05:29हैरानी आई। ये यहां क्या कर रहा है? लेकिन
  2739. 2:05:32अगले ही पल उसने शिप्रा की ओर देखा और
  2740. 2:05:35पाया कि शिप्रा भी उसी को देख रही थी।
  2741. 2:05:37राधिका के दिमाग में जैसे बिजली कौंधी
  2742. 2:05:40उसका दिल एक पल को तेजी से धड़क उठा। क्या
  2743. 2:05:44यही शिप्रा का पति है? उसने फिर से शौर्य
  2744. 2:05:47की ओर देखा और इस बार उसकी नजर हट ही नहीं
  2745. 2:05:50पाई। जिस इंसान को उसने अपने मन में एक
  2746. 2:05:52भिखारी के रूप में गढ़ रखा था, वो सामने
  2747. 2:05:55खड़ा था। एक ऐसी शख्सियत जिससे नजरें
  2748. 2:05:57हटाना मुश्किल हो रहा था। राधिका की धड़कन
  2749. 2:06:00अब बेकाबू हो रही थी। अपने मन में शक के
  2750. 2:06:04बुलबुलाते कीड़े को लेकर वो तुरंत अपनी
  2751. 2:06:06मां के पास जाकर श्रवण की तरफ इशारा करते
  2752. 2:06:09हुए पूछने लगी।
  2753. 2:06:11क्या यही श्रवण है? नैना राय ने श्रवण की
  2754. 2:06:14तरफ देखा और इंकार करते हुए बोली, नहीं वो
  2755. 2:06:18श्रवण कैसे हो सकता है? उसकी तो बहुत
  2756. 2:06:20बड़ी-बड़ी दाढ़ी है और यह तो एकदम क्लीन
  2757. 2:06:23शेवड है। लेकिन तभी उसने देखा कि श्रवण
  2758. 2:06:26शिप्रा के पास पहुंच गया। शिप्रा ने श्रवण
  2759. 2:06:28को अपने पास आते देखा तो तारीफ भरे स्वर
  2760. 2:06:31में बोली अच्छे लग रहे हो। चलो चलकर
  2761. 2:06:35राधिका को बर्थडे विश कर दो। शायद वो
  2762. 2:06:37तुम्हारा ही इंतजार कर रही है। शौर्य
  2763. 2:06:39शिप्रा के साथ राधिका के पास पहुंचा और
  2764. 2:06:41उसे बर्थडे विश करते हुए बोला मेनी मेनी
  2765. 2:06:44हैप्पी रिटर्न्स ऑफ द डे। मिस राधिका आपका
  2766. 2:06:47जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे। यही मेरी
  2767. 2:06:50दुआ है। जब राधिका ने श्रवण को शिप्रा के
  2768. 2:06:53साथ आकर उसे विश करते देखा तो उसे यकीन हो
  2769. 2:06:56गया कि यही श्रवण है। वो शिप्रा से बोली
  2770. 2:06:59जब हम ऑफिस की पार्किंग में मिले थे तुमने
  2771. 2:07:02उस दिन क्यों नहीं बताया कि यह तुम्हारे
  2772. 2:07:03पति श्रवण हैं। इस पर शिप्रा ने हल्की
  2773. 2:07:06मुस्कान के साथ जवाब दिया। मैं उस दिन
  2774. 2:07:09तुम्हें श्रवण से मिलवाना तो चाहती थी
  2775. 2:07:11लेकिन तुम जल्दी में थी। खैर कोई बात नहीं
  2776. 2:07:14उस दिन नहीं मिली तो आज मिल लो। यही है
  2777. 2:07:17श्रवण। श्रवण को इस तरह प्रेजेंटेबल देखकर
  2778. 2:07:20शिप्रा में अब थोड़ा कॉन्फिडेंस आ गया था।
  2779. 2:07:23लेकिन राधिका ने शिप्रा पर तंज कसते हुए
  2780. 2:07:25कहा, "मुझे नहीं पता था कि तुमने अपने पति
  2781. 2:07:29को अपना ड्राइवर बना रखा है।" यह सुनकर
  2782. 2:07:32शिप्रा एक पल के लिए चुप रह गई। उसे समझ
  2783. 2:07:34नहीं आया कि वो इसका क्या जवाब दे? तभी
  2784. 2:07:37शौर्य ने आगे बढ़कर कहा, "ल लगता है आपको
  2785. 2:07:40मेरी कुछ ज्यादा ही चिंता है। तभी आपको यह
  2786. 2:07:43बात तकलीफ दे रही है। लेकिन क्या आज आपके
  2787. 2:07:46बर्थडे से ज्यादा जरूरी यह है कि मैं क्या
  2788. 2:07:48करता हूं?" राधिका ने जिस अंदाज में शौर्य
  2789. 2:07:51पर टिप्पणी की थी, शौर्य ने उसी भाषा में
  2790. 2:07:53उसे जवाब दे दिया। वो आगे बोला, "अगर अगर
  2791. 2:07:56ऐसा है तो हम आपका बर्थडे सेलिब्रेशन
  2792. 2:07:59छोड़कर इसी बात पर चर्चा कर लेते हैं कि
  2793. 2:08:01मैं अपनी पत्नी का ड्राइवर हूं या नहीं।"
  2794. 2:08:04शौर्य का जवाब सुनकर शिप्रा के चेहरे पर
  2795. 2:08:07हल्की मुस्कान आ गई। उसे अच्छा लगा कि इस
  2796. 2:08:09बार शौर्य ने बिना झिझक उसके लिए स्टैंड
  2797. 2:08:11लिया। मानना पड़ेगा शिप्रा तुम्हारा पति
  2798. 2:08:14बहुत हाजिर जवाब है। वो अच्छे से तुम्हारा
  2799. 2:08:17बचाव कर रहा है। राधिका शौर्य को सीधे
  2800. 2:08:20जवाब ना दे पाने पर भी शिप्रा पर तंज कसते
  2801. 2:08:23हुए बोली। शिप्रा और राधिका की खींचतान के
  2802. 2:08:25बीच वहां अचानक मुख्तार भाई ने एंट्री
  2803. 2:08:28मारी। अरे तुम वही भिखारी हो ना जिसकी
  2804. 2:08:33मैंने शिप्रा से शादी करवाई थी। मानना
  2805. 2:08:37पड़ेगा। शिप्रा ने तो तुम्हारा पूरा
  2806. 2:08:40कायापलट ही कर डाला। तभी साथ में आया रजत
  2807. 2:08:44भी शौर्य का मजाक उड़ाते हुए बोल पड़ा।
  2808. 2:08:47क्या भैया, आप भी कैसी बात कर रहे हो?
  2809. 2:08:49कौवे को उजले रंग से रंग देने से वह बगुला
  2810. 2:08:52नहीं हो जाता। वो तब भी कौवा ही रहता है।
  2811. 2:08:55इसका कितना भी कायापलट कर दो रहेगा तो यह
  2812. 2:08:57भिखारी ही। वो तो मिस राधिका ने इस पर तरस
  2813. 2:09:00खाकर इसे पार्टी में बुला लिया। नहीं तो
  2814. 2:09:02इसकी इतनी औकात कहां कि यह इतने बड़े होटल
  2815. 2:09:05में कदम भी रख सके। शिप्रा यह सब देख रही
  2816. 2:09:08थी। उसे गुस्सा भी आ रहा था। लेकिन वो
  2817. 2:09:10पार्टी में कोई सीन क्रिएट नहीं करना
  2818. 2:09:12चाहती थी। इसीलिए चुप रही। शौर्य ने जब
  2819. 2:09:15देखा कि मुख्तार भाई और रजत सरेआम उसका
  2820. 2:09:18मजाक उड़ा रहे हैं तो वो उनकी तरफ मुड़कर
  2821. 2:09:20शांत लेकिन तीखे स्वर में बोला आपने सही
  2822. 2:09:24कहा मेरी औकात सच में इस होटल में आने
  2823. 2:09:26लायक नहीं है। लेकिन अफसोस की बात यह है
  2824. 2:09:29कि यह बात बोल कौन रहा है? शहर का एक जाना
  2825. 2:09:32माना गुंडा जो दूसरों को लूट कर अपनी
  2826. 2:09:35हैसियत इस लायक बनाता है कि लोग डर के
  2827. 2:09:37मारे उसे थोड़ी बहुत इज्जत दे देते हैं।
  2828. 2:09:41जवाब में रजत कुछ बोलता उससे पहले शौर्य
  2829. 2:09:43आगे बोला वरना आप तो इस लायक भी नहीं कि
  2830. 2:09:46कोई आपको इज्जत से अपने यहां बुलाए। आप
  2831. 2:09:49जैसे लोगों की जिंदगी तो जेल की चार
  2832. 2:09:51दीवारी के पीछे ही लिखी होती है और शायद
  2833. 2:09:53अभी आपका जो भाई खुली हवा में सांस ले रहा
  2834. 2:09:56है वो भी मेरी पत्नी की ही मेहरबानी है।
  2835. 2:10:00शौर्य की आवाज शांत थी लेकिन उसके शब्द
  2836. 2:10:02सीधे दिल पर वार कर रहे थे और इस बार
  2837. 2:10:05माहौल सच में बदलने वाला था। शिप्रा ने जब
  2838. 2:10:08शौर्य की बातें सुनी तो उसे यकीन ही नहीं
  2839. 2:10:11हुआ कि वह इस तरह मुख्तार भाई को जवाब दे
  2840. 2:10:13सकता है। श्रवण ने जैसे उसके दिल के
  2841. 2:10:15जज्बात सामने रख दिए थे। शिप्रा को डर भी
  2842. 2:10:18लग रहा था। पता नहीं अब मुख्तार भाई क्या
  2843. 2:10:21करेंगे। उधर राधिका भी श्रवण की बात सुनकर
  2844. 2:10:24दंग रह गई थी। उसे शौर्य से इतनी हिम्मत
  2845. 2:10:26की उम्मीद नहीं थी। शौर्य द्वारा की गई
  2846. 2:10:29बेइज्जती से मुख्तार भाई के चेहरे का रंग
  2847. 2:10:32लाल हो गया था। लेकिन इतने लोगों के बीच
  2848. 2:10:34वो कुछ कर भी तो नहीं सकता था। ऊपर से
  2849. 2:10:37होटल राजकमल था। विशालगढ़ के राजा साहब का
  2850. 2:10:40होटल। वो राजा साहब से सीधा पंगा लेने की
  2851. 2:10:43हिम्मत नहीं कर सकता था। मुख्तार भाई खून
  2852. 2:10:46का घूंट पीकर रह गया लेकिन कुछ बोला नहीं।
  2853. 2:10:49वो गुस्से से शौर्य को ऐसे घूर रहा था
  2854. 2:10:51जैसे आंखों से ही उसे भस्म कर देगा। एक
  2855. 2:10:54तरफ शौर्य का मुंह तोड़ जवाब सुनकर
  2856. 2:10:56मुख्तार का खून खल रहा था। वहीं दूसरी तरफ
  2857. 2:10:59अंदर ही अंदर वो शॉक्ड भी था कि शौर्य में
  2858. 2:11:02इतनी हिम्मत आखिर कैसे और कहां से आई?
  2859. 2:11:04क्या उसके पीछे कोई ऐसा शख्स है जिसे
  2860. 2:11:07मुख्तार का भी खौफ नहीं है? बलवंत राय भी
  2861. 2:11:10शौर्य की हिम्मत देखकर हैरान थे। उनके
  2862. 2:11:12दिमाग में सवाल दस्तक देने लगा। यह लड़का
  2863. 2:11:16वाकई निडर है या किसी के भरोसे इसने
  2864. 2:11:18मुख्तार के सामने इतनी बड़ी बात कहने का
  2865. 2:11:20साहस कर लिया है। आज पहली बार मुख्तार भाई
  2866. 2:11:24को अपने ही शहर में किसी ने भरी महफिल में
  2867. 2:11:26बेइज्जत किया था। इस समय सभी लोग मुख्तार
  2868. 2:11:29भाई के सामने आने से बच रहे थे। [संगीत]
  2869. 2:11:32कोई भी उसके खिलाफ खड़ा नहीं होना चाहता
  2870. 2:11:34था। क्योंकि कोई यह नहीं चाहता था कि बाद
  2871. 2:11:37में मुख्तार भाई यह कहे कि जब उसकी
  2872. 2:11:39बेइज्जती हो रही थी तब कोई उसके साथ नहीं
  2873. 2:11:42था। तभी राधिका ने मुख्तार का फेवर करते
  2874. 2:11:45हुए शौर्य से कहा क्या तुम्हें इतनी भी
  2875. 2:11:48समझ नहीं है कि किससे कैसे बात की जाती
  2876. 2:11:50है? आखिर तुम किस आधार पर मुख्तार भाई के
  2877. 2:11:53लिए ऐसी बातें कर सकते हो। तुम्हें पता
  2878. 2:11:55होना चाहिए कि मुख्तार भाई शहर के एक
  2879. 2:11:58प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। लेकिन शौर्य भी
  2880. 2:12:01आज कहां रुकने वाला था। उसने हाथों हाथ
  2881. 2:12:03उसी तीखे अंदाज में राधिका को जवाब दे
  2882. 2:12:06दिया। प्रतिष्ठित व्यक्ति वो आपके लिए
  2883. 2:12:08होंगे। मेरे लिए नहीं। पूरा शहर जानता है
  2884. 2:12:11कि इन्होंने सिर्फ शिप्रा से बदला लेने के
  2885. 2:12:14लिए जबरदस्ती उसकी शादी मुझसे करवाई थी।
  2886. 2:12:17तो जरा आप ही बताइए कौन सा प्रतिष्ठित
  2887. 2:12:19इंसान किसी की जबरदस्ती शादी करवाता है।
  2888. 2:12:22शौर्य अभी मुख्तार को छोड़ने के मूड में
  2889. 2:12:24नहीं था और माहौल अब पहले से ज्यादा
  2890. 2:12:27खतरनाक हो चुका था। शौर्य को अभी भी चुप
  2891. 2:12:30ना होते देखकर राधिका वहां से सरकने की
  2892. 2:12:32कोशिश करने लगी। तभी मुख्तार भाई गुर्राते
  2893. 2:12:35हुए बोले, लड़के
  2894. 2:12:38दाद देता हूं तुम्हारी हिम्मत की। मुख्तार
  2895. 2:12:41से पंगा लेने की सोच रहे हो। यह मत भूलो।
  2896. 2:12:45आज तुम इस घर [संगीत] के दामाद बने हुए हो
  2897. 2:12:47तो यह मेरी ही वजह से संभव हुआ है। नहीं
  2898. 2:12:50तो तुम अभी भी कहीं भीख मांग रहे होते।
  2899. 2:12:54तुम्हें तो मेरे पैरों को धोकर पीना
  2900. 2:12:56चाहिए। राजदीप राय यह सब सुन रहे थे।
  2901. 2:13:00उन्हें भी थोड़ा आश्चर्य हो रहा था कि
  2902. 2:13:01श्रवण आखिर इतनी हिम्मत कहां से ला रहा है
  2903. 2:13:04जो वो लगातार मुख्तार भाई से भिड़ा हुआ
  2904. 2:13:06है। शौर्य की बातें कड़वी जरूर थी लेकिन
  2905. 2:13:09राजदीप राय को कहीं ना कहीं सुकून भी दे
  2906. 2:13:12रही थी। हे तुमने इस बात को सही साबित कर
  2907. 2:13:15दिया कि अगर कीचड़ पर कंकड़ मारोगे तो वह
  2908. 2:13:18पलट कर तुम्हारे ऊपर ही आएगा। भाई साहब ने
  2909. 2:13:20जो गलती की थी [संगीत] यह उसी का नतीजा है
  2910. 2:13:22कि तुम इतना बोल पा रहे हो।
  2911. 2:13:25रजत अपने गुस्से को काबू में रखते हुए
  2912. 2:13:27बोला। लेकिन शौर्य ने रजत की बात को यह
  2913. 2:13:30कहते हुए उसी पर पलट दिया। कुछ लोग
  2914. 2:13:33पैदाइशी बेवकूफ होते हैं। इसीलिए सब कुछ
  2915. 2:13:36जानने समझने के बाद भी कीचड़ पर कंकड़
  2916. 2:13:38मारने से बाज नहीं [संगीत] आते। शौर्य चुप
  2917. 2:13:41होने का नाम ही नहीं ले रहा था। रजत को
  2918. 2:13:44समझ आ गया कि मुंह बंद रखना ही बेहतर है।
  2919. 2:13:46वरना शौर्य आखिर तक बोलता ही रहेगा। तभी
  2920. 2:13:49बलवंत राय आगे आए और बोले यह क्या आप लोग
  2921. 2:13:53फालतू में एक दूसरे पर तंज कस रहे हैं?
  2922. 2:13:55शायद आप लोग भूल रहे हो हम सब यहां राधिका
  2923. 2:13:58के बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए आए हैं। तो
  2924. 2:14:00प्लीज पार्टी को एंजॉय करें। रजत को कुछ
  2925. 2:14:04और नहीं सूझा तो वो राधिका की तरफ मुड़कर
  2926. 2:14:06बोला मिस राधिका आपने मेरा गिफ्ट देखा
  2927. 2:14:10क्या? वैसे इस भिखारी ने आपको कोई गिफ्ट
  2928. 2:14:12दिया भी है या नहीं? रजत की बात से शिप्रा
  2929. 2:14:16को थोड़ी चिड़ हुई तो वह बोल पड़ी।
  2930. 2:14:19मिस्टर रजत मुझे लगता है आपको खुद से
  2931. 2:14:22ज्यादा दूसरों की पड़ी है। किसने राधिका
  2932. 2:14:25को क्या गिफ्ट दिया यह सोचने से ज्यादा
  2933. 2:14:27बेहतर होगा कि आप अपने काम से मतलब रखें।
  2934. 2:14:30आज पहली बार शिप्रा को भी अपने दिल का
  2935. 2:14:32गुबार निकालने का मौका मिल रहा था। राधिका
  2936. 2:14:36ने शिप्रा और शौर्य को नीचा दिखाने का खेल
  2937. 2:14:38खेलकर अपनी खुद की बर्थडे पार्टी में ही
  2938. 2:14:40नफरत, जलन और बदले को इनवाइट कर लिया था।
  2939. 2:14:45पार्टी में सेलिब्रेशन से ज्यादा टेंशन
  2940. 2:14:47नजर आ रहा था। अभी जो कुछ भी इस पार्टी
  2941. 2:14:49हॉल में हो रहा था वो शिप्रा के लिए पूरी
  2942. 2:14:52तरह अनएक्सेक्टेड था। उसने सोचा नहीं था
  2943. 2:14:54कि श्रवण इस तरह सबका सामना करेगा। शिप्रा
  2944. 2:14:58श्रवण को इस पार्टी में इसीलिए बुलाना
  2945. 2:15:00नहीं चाहती थी क्योंकि उसे लगता था कि
  2946. 2:15:02यहां सभी उसे नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे
  2947. 2:15:05या श्रवण पर कटाक्ष करेंगे। लेकिन यहां तो
  2948. 2:15:08उल्टा ही हो रहा था। श्रवण किसी को भी
  2949. 2:15:10जवाब देने से पीछे नहीं हट रहा था। श्रवण
  2950. 2:15:13का यह रूप देखकर शिप्रा में भी कॉन्फिडेंस
  2951. 2:15:15आ गया था। अब वो तैयार थी कि श्रवण जैसे
  2952. 2:15:18भी हालात का सामना करेगा वो उसके साथ खड़ी
  2953. 2:15:21रहेगी। शिप्रा ने श्रवण में यह बात पहले
  2954. 2:15:24भी नोटिस की थी कि वो किसी भी गलत बात को
  2955. 2:15:26बर्दाश्त नहीं करता। उसने पहले भी उसका यह
  2956. 2:15:29रूप देखा था। इसीलिए वह समझ गई थी कि
  2957. 2:15:32श्रवण चुपचाप सहने वालों में से नहीं है।
  2958. 2:15:34वो सामने वाले को उसी की भाषा में जवाब
  2959. 2:15:37देना बखूबी जानता है। वहीं शौर्य को अब यह
  2960. 2:15:40समझ में आ चुका था कि उसे इस पार्टी में
  2961. 2:15:42बुलाने का असली मकसद क्या था। इसीलिए वो
  2962. 2:15:45किसी को भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना
  2963. 2:15:48चाहता था। वो समझ रहा था कि वहां मौजूद
  2964. 2:15:51ज्यादातर लोग उसके सहारे शिप्रा को नीचा
  2965. 2:15:53दिखाने की कोशिश करेंगे। इसीलिए वो हर बात
  2966. 2:15:56का जवाब देने में पीछे नहीं हट रहा था। जब
  2967. 2:16:00राधिका ने देखा कि उसके सारे वार बेअसर हो
  2968. 2:16:02रहे हैं तो वो मुस्कुराते हुए शिप्रा से
  2969. 2:16:05बोली
  2970. 2:16:06मैं समझती हूं कि तुम्हें रजत पसंद नहीं
  2971. 2:16:08है। लेकिन बात तो उसने सही ही कही। यार जब
  2972. 2:16:12जीजाजी यहां आए हैं तो अपनी साली के लिए
  2973. 2:16:14कुछ ना कुछ गिफ्ट तो लाए ही होंगे। मैं भी
  2974. 2:16:17देखना चाहती हूं कि वो मेरे लिए क्या लाए
  2975. 2:16:19हैं। शिप्रा राधिका के इरादे को अच्छे से
  2976. 2:16:22समझ रही थी। उसने राधिका की ओर देखा और
  2977. 2:16:25थोड़े कड़े शब्दों में बोली क्यों? मैंने
  2978. 2:16:28जो दिया वो कम पड़ गया क्या? जब तुम्हें
  2979. 2:16:31मेरे पति से भी गिफ्ट चाहिए। अरे यार तुम
  2980. 2:16:34क्यों मेरे और मेरे प्यारे जीजू के बीच
  2981. 2:16:36में पड़ रही हो? यह साली और जीजू के बीच
  2982. 2:16:38की बात है। इतना हक तो बनता है मेरा उन
  2983. 2:16:40पर। क्यों जीजू? मैं सही कह रही हूं ना।
  2984. 2:16:44राधिका शिप्रा से हटकर शौर्य के पास जाकर
  2985. 2:16:46बोली तो शौर्य उसकी बात सुनकर बस मुस्कुरा
  2986. 2:16:49दिया। जब शौर्य ने कुछ नहीं कहा तो राधिका
  2987. 2:16:52फिर बोली क्या हुआ जीजू? मैंने कोई गलत
  2988. 2:16:55बात कह दी क्या? इसी समय बलवंत राय भी
  2989. 2:16:59वहां आ गए। उन्होंने राधिका से पूछा। क्या
  2990. 2:17:02हुआ? कौन सी गलत बात कह दी? तभी राधिका ने
  2991. 2:17:07अपने नाना जी को देखते ही कहा, नाना जी
  2992. 2:17:10मैंने तो बस इतना कहा कि आज श्रवण जीजू
  2993. 2:17:13पहली बार मेरे बर्थडे पर आए हैं तो कुछ ना
  2994. 2:17:15कुछ गिफ्ट तो लाए ही होंगे। क्या मेरा ऐसा
  2995. 2:17:17सोचना गलत है?
  2996. 2:17:20नहीं नहीं इसमें गलत क्या है? आखिर श्रवण
  2997. 2:17:23अब तुम्हारा जीजा है तो उसका अपनी साली के
  2998. 2:17:25लिए गिफ्ट लाना तो बनता है। बलवंत राय
  2999. 2:17:28राधिका से सहमति जताते हुए बोले वही तो
  3000. 2:17:32नाना जी मैं शिप्रा को यही कह रही हूं। पर
  3001. 2:17:34यह तो कह रही है कि जब वो गिफ्ट लाई है तो
  3002. 2:17:37फिर श्रवण को गिफ्ट देने की क्या जरूरत
  3003. 2:17:39है? राधिका शिप्रा को टारगेट करते हुए
  3004. 2:17:41बोली। [संगीत] राधिका की इस बात पर शौर्य
  3005. 2:17:44मुस्कुराते हुए बोला तुम चिंता मत करो।
  3006. 2:17:47मैं जल्दीबाजी में आया इसीलिए तुम्हारा
  3007. 2:17:49गिफ्ट साथ में नहीं ला पाया। लेकिन मैंने
  3008. 2:17:52किसी को बोल रखा है। वो थोड़ी देर में
  3009. 2:17:54तुम्हारा गिफ्ट यहां पहुंचा देगा।
  3010. 2:17:57देखा मैंने तुम्हें कहा था ना मेरे जीजा
  3011. 2:18:00जी मेरे लिए जरूर गिफ्ट लाएंगे। हां अभी
  3012. 2:18:03नहीं है तो क्या हुआ लेकिन जब उन्होंने
  3013. 2:18:05कहा है तो गिफ्ट जरूर आएगा। राधिका ने
  3014. 2:18:08शिप्रा की तरफ शरारती मुस्कान के साथ
  3015. 2:18:10देखते हुए कहा। शिप्रा मन ही मन सोचने
  3016. 2:18:13लगी। क्या सचमुच श्रवण ने राधिका के लिए
  3017. 2:18:16गिफ्ट मंगवाया है? शिप्रा समझ गई थी कि
  3018. 2:18:19जैसे ही गिफ्ट आएगा राधिका उसे सस्ता
  3019. 2:18:21बताकर उसका मजाक बनाएगी। तभी रजत ने हीरो
  3020. 2:18:24स्टाइल में सीना चौड़ा करते हुए कहा। मिस
  3021. 2:18:27राधिका श्रवण का गिफ्ट जब आएगा तब आएगा।
  3022. 2:18:30अभी तो आप मेरा गिफ्ट खोल कर देखिए। क्या
  3023. 2:18:33आपको लगता है कि श्रवण आपके लिए वैसा
  3024. 2:18:35गिफ्ट ला सकता है जैसा मैं लाया हूं।
  3025. 2:18:39अच्छा अगर ऐसी बात है तो सबसे पहले मैं
  3026. 2:18:42आपका गिफ्ट ही खोल कर देखती हूं। मिस्टर
  3027. 2:18:44रजत इतना कहकर राधिका उसका गिफ्ट खोलने
  3028. 2:18:47लगी। जैसे ही बॉक्स खुला अंदर एक बेहद
  3029. 2:18:50खूबसूरत बटरफ्लाई शेप पेंडेंट था। गोल्ड
  3030. 2:18:53पर छोटे-छोटे डायमंड जड़े हुए थे और दोनों
  3031. 2:18:56पंखों की जगह नीले स्टोन लगे थे जो उसकी
  3032. 2:18:58खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। पेंडेंट
  3033. 2:19:01देखते ही राधिका का चेहरा खुशी से चमक
  3034. 2:19:04उठा। वाओ यह तो बहुत खूबसूरत है। अरे आपकी
  3035. 2:19:09खूबसूरती के सामने तो यह कुछ भी नहीं है।
  3036. 2:19:12रजत ने तारीफ करते हुए कहा। थैंक यू
  3037. 2:19:14मिस्टर रजत। आपने सचमुच एक लाजवाब गिफ्ट
  3038. 2:19:17दिया है? राधिका ने उत्साह में रजत के हाथ
  3039. 2:19:20पर अपना हाथ रख दिया और बोली अब तो बस
  3040. 2:19:23मुझे अपने जीजू के गिफ्ट का इंतजार है।
  3041. 2:19:25पता नहीं वो कब आएगा।
  3042. 2:19:28शौर्य राधिका के सरकाजम को समझ रहा था पर
  3043. 2:19:31उसने कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ शिप्रा रजत
  3044. 2:19:34और राधिका की बातों से टेंशन में आ चुकी
  3045. 2:19:37थी। वैसे शिप्रा को भी रजत का दिया हुआ
  3046. 2:19:39गिफ्ट बहुत पसंद आया था। उसने अंदाजा
  3047. 2:19:41लगाया कि उसकी कीमत कम से कम 1.5 लाख के
  3048. 2:19:44आसपास तो होगी ही। अब वो श्रवण के गिफ्ट
  3049. 2:19:46के बारे में सोचने लगी। ना जाने उसने क्या
  3050. 2:19:49मंगवाया होगा। उसके पास पैसे भी कहां
  3051. 2:19:51होंगे और अगर उसने कुछ मंगवाया भी है तो
  3052. 2:19:54वो ज्यादा से ज्यादा 500 तक का ही होगा।
  3053. 2:19:57उसे श्रवण पर तरस आने लगा और वो खुद को
  3054. 2:20:00कोसने लगी। मेरी ही वजह से आज शौर्य इस
  3055. 2:20:03मुसीबत में फंसा है। वो सोचने लगी काश
  3056. 2:20:06पहले ही उसे बता दिया जाता कि श्रवण को
  3057. 2:20:08साथ लाना है तो वो उसके लिए एक अच्छा सा
  3058. 2:20:11गिफ्ट दिलवा देती। अब उसे साफ लग रहा था
  3059. 2:20:13कि राधिका और उसकी बुआ ने जानबूझकर ऐसा
  3060. 2:20:16किया है। तभी एक तीखी आवाज उसे वापस
  3061. 2:20:19ख्यालों से पार्टी में ले आई।
  3062. 2:20:22क्यों बे भिखारी? और कितना टाइम लगेगा
  3063. 2:20:25तुम्हारे गिफ्ट आने में? कुछ मंगाया भी है
  3064. 2:20:27या बस झूठ बोलकर टाइम पास कर रहा है? रजत
  3065. 2:20:30ने शौर्य पर तंज कसते हुए कहा, रजत की बात
  3066. 2:20:34सुनकर बलवंत राय सामने आए और बोले, मिस्टर
  3067. 2:20:36रजत अगर आप श्रवण को तमीज से पुकारे तो
  3068. 2:20:39बेहतर रहेगा। आपको पता होना चाहिए जैसा भी
  3069. 2:20:43है। वो अब हमारे घर का दामाद है। बलवंत
  3070. 2:20:46राय की बात सुनकर शौर्य को अच्छा लगा।
  3071. 2:20:48उसने सोचा चलो कहीं से तो उसे स्वीकृति
  3072. 2:20:51मिलनी शुरू हुई। क्या राय साहब आपने भी इस
  3073. 2:20:56भिखारी को अपना दामाद स्वीकार कर लिया?
  3074. 2:20:59मुख्तार भाई जो बलवंत राय के साथ ही खड़ा
  3075. 2:21:01था तंज कसते हुए बोला। तभी बलवंत राय ने
  3076. 2:21:05अपने एक जवाबी तीर से दो निशाने लगा दिए।
  3077. 2:21:08वे शांत स्वर में बोले अब जो भी है मानना
  3078. 2:21:12तो पड़ेगा। जब शिप्रा ने ही उसे अपना पति
  3079. 2:21:15मान लिया है तो मेरे मानने या ना मानने का
  3080. 2:21:17सवाल ही कहां रह जाता है। इस एक वाक्य से
  3081. 2:21:21उन्होंने साफ कर दिया कि अगर कोई अब भी
  3082. 2:21:23शिप्रा और रजत की शादी के बारे में सोच
  3083. 2:21:26रहा है तो वह भूल जाए। बलवंत राय की बात
  3084. 2:21:29सुनकर रजत के चेहरे पर गुस्से की लहर दौड़
  3085. 2:21:31गई। अब तक जो उम्मीद उसे थी कि शायद उसकी
  3086. 2:21:34शादी शिप्रा से हो सकती है वो टूटती नजर
  3087. 2:21:37[संगीत] आई। तब उसके अंदर शौर्य के लिए
  3088. 2:21:39नफरत और बढ़ गई। वो गुस्से से शौर्य को
  3089. 2:21:42घूरने लगा। लेकिन शौर्य पर उसका कोई असर
  3090. 2:21:45नहीं हुआ। बल्कि शौर्य तो यही चाहता था कि
  3091. 2:21:48रजत अपना आपा खो दे और कुछ ऐसा कर बैठे
  3092. 2:21:51जिससे उसकी असलियत सबके सामने आ जाए।
  3093. 2:21:54लेकिन रजत ने पहली बार वक्त रहते खुद पर
  3094. 2:21:56काबू पा लिया। राधिका ने जब देखा कि माहौल
  3095. 2:21:59बदलने लगा है तो उसने फिर सबका ध्यान अपनी
  3096. 2:22:02तरफ खींचते हुए कहा जीजू और कितना समय
  3097. 2:22:06लगेगा आपका गिफ्ट आने में? अब मुझसे
  3098. 2:22:08इंतजार नहीं हो रहा। आखिर किससे मंगवाया
  3099. 2:22:11है आपने मेरा गिफ्ट? शौर्य भी एक पल के
  3100. 2:22:13लिए सोच में पड़ गया। कहीं मेनका गिफ्ट के
  3101. 2:22:16बारे में भूल तो नहीं गई।
  3102. 2:22:19अगर ऐसा हुआ तो आज उसकी बेइज्जती होना तय
  3103. 2:22:21है। लेकिन अगले ही पल उसने खुद को संभाला।
  3104. 2:22:25नहीं ऐसा नहीं हो सकता। मेनका इतनी
  3105. 2:22:28लापरवाह नहीं हो सकती। वो राधिका को जवाब
  3106. 2:22:31देने ही वाला था कि तभी हॉल के मेन गेट से
  3107. 2:22:33एक वेट्रेस अंदर आती दिखाई दी। शौर्य के
  3108. 2:22:37गिफ्ट का इंतजार पार्टी में मौजूद हर
  3109. 2:22:39व्यक्ति कर रहा था और अब वो घड़ी आ गई थी
  3110. 2:22:42जब शौर्य का गिफ्ट पार्टी हॉल में एंटर कर
  3111. 2:22:44चुका था। सबकी निगाहें पार्टी गर्ल राधिका
  3112. 2:22:47से हटकर अब उस वेट्रेस पर टिकी थी जिसके
  3113. 2:22:49हाथ में गिफ्ट के दो बॉक्स थे। जिसने
  3114. 2:22:52अभी-अभी हॉल में एंट्री मारी थी। शौर्य इस
  3115. 2:22:55वेट्रेस को देखकर सोच में डूब गया। उसे
  3116. 2:22:57समझ नहीं आया कि मेनका ने दो गिफ्ट क्यों
  3117. 2:23:00भिजवा दिए। फिर उसने सोचा इस बारे में बाद
  3118. 2:23:03में सोचूंगा। पहले देख तो लूं कि वो क्या
  3119. 2:23:06लेकर आई है। अब तक राधिका और रजत की नजर
  3120. 2:23:09भी उस वेट्रेस पर पड़ चुकी थी। राधिका भी
  3121. 2:23:12उसके हाथ में दो गिफ्ट बॉक्स देखकर हैरान
  3122. 2:23:15थी। उसके दिमाग में भी यही सवाल उठ रहा था
  3123. 2:23:18कि श्रवण ने एक गिफ्ट तो उसके लिए मंगवाया
  3124. 2:23:20होगा लेकिन दूसरा बॉक्स किसके लिए है? वो
  3125. 2:23:24भी इंतजार करने लगी। अब सामने आ ही जाएगा।
  3126. 2:23:27उसे पूरा भरोसा था कि गिफ्ट ज्यादा महंगा
  3127. 2:23:29नहीं होगा और अब सबके सामने श्रवण का मजाक
  3128. 2:23:32उड़ाने का मौका ज्यादा दूर नहीं था। कुछ
  3129. 2:23:35ही पलों में वेट्रेस शौर्य के पास आकर रुक
  3130. 2:23:37गई। उसने गौर से उसका चेहरा देखा जैसे
  3131. 2:23:40पहचानने की कोशिश कर रही हो। जब उसे
  3132. 2:23:42तसल्ली हो गई कि वो वही इंसान है तो वो
  3133. 2:23:45बॉक्स उसकी तरफ बढ़ाते हुए बोली सर यह
  3134. 2:23:48बॉक्स आपकी वाइफ के लिए है और यह दूसरा
  3135. 2:23:50बॉक्स बर्थडे गर्ल के लिए। वेट्रेस की बात
  3136. 2:23:54सुनकर शौर्य के चेहरे पर हैरानी झलक गई।
  3137. 2:23:56उसने तो सिर्फ एक गिफ्ट राधिका के लिए
  3138. 2:23:58मंगवाया था। लेकिन मेनका ने अपनी तरफ से
  3139. 2:24:01उसकी वाइफ के लिए भी गिफ्ट भिजवा दिया था।
  3140. 2:24:04उसे मेनका की समझदारी पर गर्व हुआ। उसने
  3141. 2:24:07खुद तो शिप्रा के लिए गिफ्ट लेने के बारे
  3142. 2:24:08में सोचा भी नहीं था। लेकिन मेनका ने यह
  3143. 2:24:11बात समझ ली थी। दूसरी तरफ शिप्रा लगातार
  3144. 2:24:14शौर्य के चेहरे के भाव पड़ रही थी और उसने
  3145. 2:24:17उसकी हैरानी को नोटिस कर लिया था। उसे लगा
  3146. 2:24:20जैसे शौर्य को खुद नहीं पता कि वेट्रेस
  3147. 2:24:22क्या लेकर आई है। उलझन में पड़ गई। आखिर
  3148. 2:24:25मामला क्या है? हालांकि उसने वेट्रेस की
  3149. 2:24:28बात साफ-साफ सुनी थी। एक गिफ्ट उसकी वाइफ
  3150. 2:24:30के लिए है और दूसरा बर्थडे गर्ल के लिए।
  3151. 2:24:34यानी श्रवण ने उसके लिए भी गिफ्ट मंगवाया
  3152. 2:24:36है। यह सोचकर उसके दिल में हल्की सी हलचल
  3153. 2:24:39हुई। पर उसने ज्यादा दिमाग नहीं लगाया।
  3154. 2:24:42सोचा जो भी है थोड़ी देर में खुद ही सामने
  3155. 2:24:45आ जाएगा। उधर राधिका जैसे ही देखती है कि
  3156. 2:24:48वेट्रेस गिफ्ट देकर जा चुकी है। वो तुरंत
  3157. 2:24:51शौर्य के पास आकर बोली। आपने सही कहा था
  3158. 2:24:54जीजू कि आपने यहीं गिफ्ट मंगवाया हुआ है।
  3159. 2:24:57अब तो गिफ्ट आ गया है। प्लीज जल्दी से
  3160. 2:24:59दीजिए। मैं भी देखूं, आपने मेरे लिए क्या
  3161. 2:25:01मंगवाया है। जैसे ही शिप्रा ने राधिका को
  3162. 2:25:04शौर्य के पास जाते देखा, वह भी तुरंत आगे
  3163. 2:25:07बढ़ी और बोली,
  3164. 2:25:09वो तो ठीक है लेकिन पहले तुम वो गिफ्ट तो
  3165. 2:25:11मुझे वापस करो जो मैंने तुम्हें दिया था।
  3166. 2:25:14वो हल्के तंज भरे अंदाज में बोली, "हम
  3167. 2:25:17दोनों पति-पत्नी में से कोई एक ही गिफ्ट
  3168. 2:25:19देगा।" कोई ऐसा रिवाज तो है नहीं कि दोनों
  3169. 2:25:22[संगीत] अलग-अलग गिफ्ट दें। तुम्हें अपने
  3170. 2:25:24जीजू का गिफ्ट चाहिए था, तो लो, उन्होंने
  3171. 2:25:26खुद ही मंगवा दिया। तब जो मैंने पहले दिया
  3172. 2:25:29था वो तो वापस कर दो। शिप्रा की बात सुनकर
  3173. 2:25:32माहौल में एक नया मोड़ आ गया। अब देखने
  3174. 2:25:35वाली बात यह थी कि राधिका क्या करती है।
  3175. 2:25:37राजदीप राय जो अब तक वहां खड़े सब कुछ देख
  3176. 2:25:40रहे थे बोले हां भाई बात तो सही है शिप्रा
  3177. 2:25:44की। अब तुम्हें कायदे से शिप्रा का दिया
  3178. 2:25:47हुआ गिफ्ट उसे वापस कर देना चाहिए। राधिका
  3179. 2:25:50के दिमाग का तो मानो फ्यूज ही उड़ गया। वो
  3180. 2:25:53तो होशियारी दिखाकर श्रवण को नीचा दिखाना
  3181. 2:25:56चाहती थी। लेकिन अब उसी चक्कर में उसे
  3182. 2:25:58शिप्रा का दिया हुआ गिफ्ट लौटाना पड़ रहा
  3183. 2:26:00था। उसे पूरा यकीन था कि शिप्रा का गिफ्ट
  3184. 2:26:03श्रवण के गिफ्ट से कहीं बेहतर होगा। लेकिन
  3185. 2:26:06अब शिप्रा को नीचा दिखाने के खेल में उसे
  3186. 2:26:08एक अच्छा खासा गिफ्ट गवाना पड़ सकता है।
  3187. 2:26:11उसने उम्मीद भरी नजरों से अपने नाना बलवंत
  3188. 2:26:13राय की तरफ देखा। लेकिन बलवंत राय ने जैसे
  3189. 2:26:16ही उसकी नजरों का मतलब समझा, उन्होंने हाथ
  3190. 2:26:18उठाते हुए साफ कहा। इसमें मैं तुम्हारी
  3191. 2:26:22कोई मदद नहीं कर सकता। शिप्रा की बात अपनी
  3192. 2:26:25जगह बिल्कुल सही है। अब शिप्रा ने मौका
  3193. 2:26:28भांपते हुए दोबारा वार किया।
  3194. 2:26:31अभी भी तुम्हारे पास मौका है। सोच लो
  3195. 2:26:33तुम्हें कौन सा गिफ्ट चाहिए। शिप्रा का यह
  3196. 2:26:36मास्टर स्ट्रोक देखकर शौर्य भी मन ही मन
  3197. 2:26:39उसकी तारीफ किए बिना रह नहीं सका। राधिका
  3198. 2:26:42अब असली धर्म संकट में फंस गई थी। उसने
  3199. 2:26:44सोचा भी नहीं था कि शिप्रा इतनी चालाकी से
  3200. 2:26:47खेल पलट देगी। यह तो वही बात हो गई कि
  3201. 2:26:50चौबे जी छब्बे बनने गए थे और दुबे बनकर
  3202. 2:26:53लौट आए। राधिका पीछे नहीं हट सकती थी।
  3203. 2:26:56इसीलिए उसने ठान लिया चाहे उसे कीमती
  3204. 2:26:59गिफ्ट छोड़ना पड़े लेकिन श्रवण को नीचा
  3205. 2:27:01दिखाने का मौका वो नहीं छोड़ेगी। वो गिफ्ट
  3206. 2:27:04के ढेर के पास गई। शिप्रा का दिया हुआ
  3207. 2:27:06गिफ्ट निकाला और वापस उसके हाथ में थमा
  3208. 2:27:08दिया। शिप्रा ने भी बिना कुछ कहे अपना
  3209. 2:27:11गिफ्ट वापस ले लिया। अब तो मैं तुम्हारे
  3210. 2:27:14पतिदेव का गिफ्ट ले सकती हूं। राधिका ने
  3211. 2:27:17हल्की मुस्कान के साथ कहा लेकिन शिप्रा
  3212. 2:27:19कुछ नहीं बोली। वो बस राधिका के चेहरे को
  3213. 2:27:22देखती रही। उसे साफ दिख रहा था कि राधिका
  3214. 2:27:25कितनी शिद्दत से उसे सबके सामने नीचा
  3215. 2:27:27दिखाना चाहती है। शिप्रा अब बस उस पल का
  3216. 2:27:30इंतजार कर रही थी जब राधिका गिफ्ट खोलेगी
  3217. 2:27:32और फिर उस पर अपना तीखा कमेंट करेगी। तभी
  3218. 2:27:35रजत ने उपहास भरे स्वर में कहा, "अब अपना
  3219. 2:27:38गिफ्ट राधिका को दे भी दो।" अब और सस्पेंस
  3220. 2:27:41बर्दाश्त नहीं हो रहा कि तुमने उसे गिफ्ट
  3221. 2:27:43में कौन सा जवाहरात दिया है। इस पर शौर्य
  3222. 2:27:46शांत भाव से बोला। मेरे लिए गिफ्ट की कीमत
  3223. 2:27:48मायने नहीं रखती बल्कि वो भावना मायने
  3224. 2:27:51रखती है जिससे सामने वाले को गिफ्ट दिया
  3225. 2:27:54जाता है। लो इसने तो पहले ही कह दिया कि
  3226. 2:27:57कीमत मायने नहीं रखती। अब खुद ही समझ लो
  3227. 2:28:00राधिका इसने तुम्हें गिफ्ट में क्या कबाड़
  3228. 2:28:02लाकर दिया होगा। [हंसी]
  3229. 2:28:05कहते हुए रजत जोर से हंस पड़ा। मुझे लग
  3230. 2:28:08रहा है इस गिफ्ट में राधिका से ज्यादा
  3231. 2:28:10तुम्हें इंटरेस्ट है। कहो तो एक गिफ्ट
  3232. 2:28:12तुम्हारे बर्थडे के लिए एडवांस में
  3233. 2:28:14तुम्हें भी दे दूं। शिप्रा रजत की बात
  3234. 2:28:17सुनकर गुस्से में बोली। तभी रजत शिप्रा के
  3235. 2:28:19पास जाकर बेशर्मी से हंसते हुए बोला। अरे
  3236. 2:28:23तुम तो मुझे जहर भी लाकर दोगी तो वो भी
  3237. 2:28:25मैं तुम्हारे हाथ से हंसते-हंसते ले
  3238. 2:28:27लूंगा। तुम लाकर दो तो सही। अरे वाह!
  3239. 2:28:31इसमें कौन सी बड़ी बात है? मैं अभी यहीं
  3240. 2:28:33जहर भी मंगवा देता हूं। शिप्रा तुम अपने
  3241. 2:28:35हाथ से अपने इस दोस्त को गिफ्ट कर देना।
  3242. 2:28:38उम्मीद करता हूं मिस्टर रजत अपनी बात से
  3243. 2:28:41मुकरेंगे नहीं। रजत के घटिया डायलॉग का
  3244. 2:28:44जवाब जब शौर्य ने मुस्कुराते हुए दिया तो
  3245. 2:28:46शिप्रा का चेहरा भी खिल उठा। उसने तुरंत
  3246. 2:28:49बात संभालते हुए कहा, "प्लीज श्रवण, एक
  3247. 2:28:52जहर की पुड़िया मंगवा ही दो। मैं नहीं
  3248. 2:28:54चाहती कि मेरे इस दोस्त को कोई रंज रह जाए
  3249. 2:28:56कि मैंने उसकी मन की मुराद पूरी नहीं की।"
  3250. 2:28:59शौर्य और शिप्रा की बातें सुनकर रजत का
  3251. 2:29:02चेहरा गुस्से से लाल हो गया। शायद ही उसने
  3252. 2:29:04पहले कभी इतनी बेइज्जती महसूस की होगी।
  3253. 2:29:07मुख्तार भाई ने रजत का लाल चेहरा देखा तो
  3254. 2:29:09उनकी भी मुट्ठियां कस गई। उन्होंने इशारे
  3255. 2:29:12से उसे शांत रहने को कहा। शौर्य ने रजत के
  3256. 2:29:16चेहरे की तरफ देखा और शिप्रा से बोला,
  3257. 2:29:20रहने दो शिप्रा। लगता है तुम्हारे इस
  3258. 2:29:22दोस्त ने अपना इरादा बदल दिया है। इसका
  3259. 2:29:24लाल चेहरा बता रहा है कि अगर इसका कोई
  3260. 2:29:27इरादा था भी तो अब वह बदल गया है। मुख्तार
  3261. 2:29:31भाई को लग रहा था कि श्रवण जानबूझकर रजत
  3262. 2:29:33को उकसा रहा है ताकि वो अपना आपा खो दे और
  3263. 2:29:36जो रिश्ता उन्होंने मुश्किल से संभाला है
  3264. 2:29:39वो फिर बिगड़ जाए। लेकिन अब यह सब उनकी
  3265. 2:29:41सहनशक्ति से बाहर होने लगा था। वो शौर्य
  3266. 2:29:44के सामने आकर बोले ए लड़के मैं देख रहा
  3267. 2:29:48हूं कि तुम कुछ ज्यादा ही ऊंची उड़ान भरने
  3268. 2:29:51की कोशिश कर रहे हो। अभी तुम्हें पता नहीं
  3269. 2:29:54है कि तुम किस बिल में हाथ डाल रहे हो।
  3270. 2:29:58मैंने तुम्हें पंख दिए हैं तो मैं उन्हें
  3271. 2:30:01कतरना भी जानता हूं। शौर्य ने बिना डरे
  3272. 2:30:04जवाब दिया। एक कहावत है कायदे में रहोगे
  3273. 2:30:09तो फायदे में रहोगे। ऐसी कुछ सीख अपने भाई
  3274. 2:30:12को भी दे दीजिए। अगर वह लिमिट में रहेगा
  3275. 2:30:15तो यूं चेहरा लाल नहीं करना पड़ेगा। अब
  3276. 2:30:18उपहास उड़ाने की बारी शौर्य की थी। शिप्रा
  3277. 2:30:21यह सब सुनकर हैरान थी। अब उसे सच में
  3278. 2:30:24शौर्य की चिंता होने लगी थी। वो समझ नहीं
  3279. 2:30:26पा रही थी कि वो क्यों जानबूझकर मुख्तार
  3280. 2:30:29भाई से उलझ रहा है। कुछ ऐसा ही हाल राजदीप
  3281. 2:30:32राय का भी था। उन्हें भी शौर्य से इतनी
  3282. 2:30:34हिम्मत की उम्मीद नहीं थी। मुख्तार भाई
  3283. 2:30:37खुद को काबू में रखते हुए बोले कभी-कभी
  3284. 2:30:41ज्यादा बहादुरी दिखाना नुकसानदेह हो जाता
  3285. 2:30:44है। शायद यह बात तुमने सुनी नहीं है। शायद
  3286. 2:30:48तुम मुझे अच्छे से जानते नहीं हो। नहीं तो
  3287. 2:30:51मेरे सामने इतना बोलने की हिम्मत नहीं
  3288. 2:30:54करते।
  3289. 2:30:56शौर्य उनके बिल्कुल पास जाकर धीमे स्वर
  3290. 2:30:58में बोला।
  3291. 2:31:00मैं आपको अच्छे से जानता हूं। पर आप मुझे
  3292. 2:31:03नहीं जानते। आपके पास खोने को बहुत कुछ है
  3293. 2:31:06[संगीत] लेकिन मेरे पास कुछ भी नहीं तो आप
  3294. 2:31:09मेरा क्या बिगाड़ लेंगे? वो आगे और
  3295. 2:31:12संजीदगी से बोला और हां जहां तक मेरी बात
  3296. 2:31:15है अगर मेरी सटक गई तो आपका क्या होगा यह
  3297. 2:31:19आप सोच भी नहीं सकते इसीलिए मेरी एक सलाह
  3298. 2:31:22है। मुझसे उलझने की कोशिश मत कीजिए
  3299. 2:31:25क्योंकि मैं ऐसा भवरा हूं अगर मैंने डंक
  3300. 2:31:28मार दिया तो उसकी दवा पूरी दुनिया में
  3301. 2:31:30नहीं मिलेगी। शौर्य की आवाज इतनी धीमी थी
  3302. 2:31:34कि शायद ही [संगीत] किसी और ने सुनी हो।
  3303. 2:31:36लेकिन मुख्तार भाई के चेहरे के बदलते रंग
  3304. 2:31:38ने सब कुछ बयां कर दिया। एक पल के लिए
  3305. 2:31:41जैसे उनके शरीर में भी झुरझुरी दौड़ गई।
  3306. 2:31:44तभी राधिका के पिता राजकुमार टंडन जो अब
  3307. 2:31:47तक चुपचाप सब देख रहे थे आगे आए और माहौल
  3308. 2:31:50संभालने की कोशिश करते हुए बोले, "अरे
  3309. 2:31:53मुख्तार भाई, आप कहां इस बच्चे के मुंह लग
  3310. 2:31:55रहे हैं। आजकल के बच्चों को तहजीब कहां
  3311. 2:31:58पता?"
  3312. 2:31:59उन्होंने पास खड़े वेटर से एक ड्रिंक उठाई
  3313. 2:32:01और मुख्तार भाई की तरफ बढ़ाते हुए कहा,
  3314. 2:32:04लीजिए यह ड्रिंक लीजिए आपको पसंद आएगी।
  3315. 2:32:07मुख्तार भाई की भाई गिरी को आज पहली बार
  3316. 2:32:09किसी ने सरेआम बेइज्जत किया था। आज से
  3317. 2:32:12पहले कभी किसी ने उनके सामने इतना बोलने
  3318. 2:32:15की हिम्मत नहीं की थी। पर आज ये लड़का ना
  3319. 2:32:18सिर्फ उनके सामने खड़े होने की हिम्मत कर
  3320. 2:32:20रहा था, बल्कि उनसे आंख में आंख मिलाकर
  3321. 2:32:22धमका भी रहा था। शौर्य से निपटने के लिए
  3322. 2:32:26ना तो यह जगह सही थी ना [संगीत] ही समय।
  3323. 2:32:28इसीलिए मुख्तार भाई ने मन में निश्चय कर
  3324. 2:32:31लिया कि वे शौर्य को बाद में सबक जरूर
  3325. 2:32:33सिखाएंगे और ऐसा सिखाएंगे कि वो जिंदगी भर
  3326. 2:32:36कभी भूल नहीं पाएगा। वहीं राजकुमार टंडन
  3327. 2:32:39समझ रहे थे कि मुख्तार भाई को कंट्रोल
  3328. 2:32:42करना जरूरी है। नहीं तो स्थिति हाथ से
  3329. 2:32:44निकल सकती है। इसीलिए वह बीच में आकर
  3330. 2:32:47मुख्तार भाई को अलग ले गए। दूसरी तरफ जब
  3331. 2:32:50राधिका ने यह महसूस किया कि कुछ और नया
  3332. 2:32:52बखेड़ा ना शुरू हो जाए। इसीलिए वह जल्दी
  3333. 2:32:55से शौर्य के पास पहुंची और बोली अब तो
  3334. 2:32:58आपका गिफ्ट आ गया जीजू अब तो मैं देख सकती
  3335. 2:33:00हूं। देखिए ना मैंने आपके दिए गिफ्ट के
  3336. 2:33:04लिए शिप्रा का दिया गिफ्ट भी वापस कर
  3337. 2:33:06दिया। अब और ज्यादा सस्पेंस क्रिएट किए
  3338. 2:33:08बिना सबको दिखा दीजिए कि आपने मेरे लिए
  3339. 2:33:10क्या गिफ्ट पसंद किया है। शौर्य राधिका की
  3340. 2:33:14जल्दीबाजी देखकर मुस्कुराते हुए बोला,
  3341. 2:33:16"हां जरूर। यह मैंने तुम्हारे लिए ही
  3342. 2:33:19मंगाया है। तो अब तुम देख सकती हो।" इतना
  3343. 2:33:22बोलकर शौर्य ने गिफ्ट का एक बॉक्स राधिका
  3344. 2:33:24की तरफ बढ़ा दिया। राधिका ने जल्दी से वो
  3345. 2:33:27गिफ्ट अपने हाथ में लिया और बॉक्स में से
  3346. 2:33:29एक छोटी सी डिब्बी निकालकर सबके सामने
  3347. 2:33:32लहराई। राधिका को खुद यकीन नहीं था कि
  3348. 2:33:35उसमें कोई बहुत बढ़िया गिफ्ट होगा। पर वो
  3349. 2:33:37देखना चाहती थी कि आखिर इस कंगले ने उसके
  3350. 2:33:40लिए क्या मंगवाया है। अभी वो उस डब्बी को
  3351. 2:33:43खोलने वाली थी कि तभी उसे रजत की आवाज
  3352. 2:33:45सुनाई दी। देखना राधिका कहीं इस गिफ्ट को
  3353. 2:33:48देखकर तुम्हारा दिल तुम्हारे शरीर से बाहर
  3354. 2:33:51ना आ जाए। इस पर राधिका कुछ बोली तो नहीं
  3355. 2:33:54पर वो मुस्कुरा कर रजत की तरफ देखी जैसे
  3356. 2:33:56वो उससे कह रही हो कि तुम चिंता मत करो।
  3357. 2:33:59देखो अभी मैं इस भिखारी की कैसे धज्जियां
  3358. 2:34:01उड़ाती हूं। दूसरी तरफ शिप्रा भी टकटकी
  3359. 2:34:04लगाए राधिका की ओर ही देख रही थी। वो भी
  3360. 2:34:07जानने को उत्सुक थी कि आखिर शौर्य ने
  3361. 2:34:09राधिका के लिए क्या गिफ्ट मंगाया है। वो
  3362. 2:34:12जानती थी कि राधिका इतना ज्यादा हाइप
  3363. 2:34:14इसीलिए क्रिएट कर रही है कि उसे गिफ्ट
  3364. 2:34:16खोलने के बाद यह भी दिखाना था कि खोदा
  3365. 2:34:19पहाड़ और निकली चुहिया। वहां पर सिर्फ
  3366. 2:34:22राधिका ही ऐसी नहीं थी जो [संगीत] शौर्य
  3367. 2:34:24का मजाक बनाना चाहती थी। उसके अलावा भी
  3368. 2:34:27नैना राय, बृजभूषण राय, सरला राय और इन
  3369. 2:34:30सबके अलावा मुख्तार भाई और रजत तो थे ही
  3370. 2:34:33जो शौर्य का मजाक बनते देखना चाहते थे। अब
  3371. 2:34:37और कितना सस्पेंस क्रिएट करोगी राधिका। अब
  3372. 2:34:39दिखा भी दो कि हमारे प्यारे जीजू ने क्या
  3373. 2:34:42गिफ्ट दिया है तुम्हें। युविका अब और
  3374. 2:34:44ज्यादा इंतजार नहीं कर पा रही थी। तभी
  3375. 2:34:47राधिका सबको सुनाते हुए बोली। तो फिर ठीक
  3376. 2:34:50है। मैं अब इस बॉक्स को खोलने जा रही हूं।
  3377. 2:34:53इतना बोलकर राधिका ने उस बॉक्स को खोल
  3378. 2:34:57दिया। शौर्य को पार्टी में इनवाइट करने का
  3379. 2:34:59राधिका का प्लान। अब राय परिवार की शिप्रा
  3380. 2:35:02विरोधी महिलाओं की एक सोची समझी साजिश नजर
  3381. 2:35:05आ रही थी। होटल राजकमल के पार्टी हॉल के
  3382. 2:35:08माहौल को देखकर ऐसा लग रहा था मानो राधिका
  3383. 2:35:11ने पार्टी बर्थडे सेलिब्रेट करने के लिए
  3384. 2:35:13नहीं बल्कि शिप्रा और शौर्य को नीचा
  3385. 2:35:15दिखाकर सबके सामने उनका मजाक उड़ाने के
  3386. 2:35:18उद्देश्य से दी है। राधिका यह भी भूल गई
  3387. 2:35:21थी कि उसे केक काटना था। वो तो रजत युविका
  3388. 2:35:24नैना जी के साथ मिलकर शिप्रा और शौर्य को
  3389. 2:35:27काटने में लगी थी। पार्टी हॉल में कहीं
  3390. 2:35:29निगाहों में बेताबी [संगीत] थी तो कहीं
  3391. 2:35:31धड़कनों में तूफान क्योंकि कुछ ही पलों
  3392. 2:35:34में शौर्य के गिफ्ट बॉक्स का रहस्य उजागर
  3393. 2:35:36होने वाला था। हॉल में सबको दिखाते हुए
  3394. 2:35:39राधिका ने शौर्य का गिफ्ट बॉक्स खोल दिया।
  3395. 2:35:41और जैसे ही बॉक्स खुला राधिका की निगाह
  3396. 2:35:44उसमें रखी आइटम पर ही जमी रह गई। कुछ पलों
  3397. 2:35:47के लिए हॉल में सन्नाटा सा छा गया। तभी एक
  3398. 2:35:50आवाज ने सन्नाटे को तोड़ा।
  3399. 2:35:54क्या हुआ? ऐसा क्या देख लिया कि तुम तो
  3400. 2:35:56बुद्धी बन गई। जरा हमें भी तो दीदार कराओ।
  3401. 2:36:00युविका की यह हल्की सी मुस्कुराहट भरी
  3402. 2:36:02आवाज जैसे पूरे माहौल को चीरती हुई निकल
  3403. 2:36:04[संगीत] गई। उसकी आंखों में शरारत थी। उसे
  3404. 2:36:08लगा था कि बॉक्स में जरूर कुछ ऐसा होगा
  3405. 2:36:10जिसे दिखाने में भी राधिका को शर्म आ रही
  3406. 2:36:13होगी। शिप्रा की भी धड़कन बेकाबू हो रही
  3407. 2:36:16थी। यह सोच कर [संगीत] कि ऐसा क्या देख
  3408. 2:36:18लिया राधिका ने कि वह बुद्धी बन गई है।
  3409. 2:36:21राधिका की हालत भी वैसी नहीं थी जैसे किसी
  3410. 2:36:24लड़की की तब होती है जब उसे कोई खूबसूरत
  3411. 2:36:26गिफ्ट मिलता है। उसकी आंखें पूरी तरह फैल
  3412. 2:36:29चुकी थी। होंठ हल्के खुले हुए और हाथ जैसे
  3413. 2:36:33किसी अनमोल चीज को थामे कांप रहे हो। उसकी
  3414. 2:36:35उंगलियों में एक पर्ल नेकलेस था और वो भी
  3415. 2:36:38कोई साधारण नेकलेस नहीं। फ्लेयर्ड ब्लू
  3416. 2:36:40बटरफ्लाई नेकलेस। जिसके बीचोंबीच जड़ा हुआ
  3417. 2:36:44था एक चमकता हुआ खूबसूरत डायमंड। उसकी चमक
  3418. 2:36:47इतनी तेज थी कि जैसे आसपास की रोशनी भी
  3419. 2:36:50उसके आगे फीकी पड़ गई हो। यह नेकलेस
  3420. 2:36:52राधिका को बुध बनाने के लिए काफी था। पूरा
  3421. 2:36:55हॉल एक पल के लिए जैसे थम गया। राधिका ने
  3422. 2:36:59कुछ नहीं कहा। बस धीरे से अपनी उंगली से
  3423. 2:37:01नेकलेस का एक सिरा पकड़ा और उसे हवा में
  3424. 2:37:04उठा दिया। हॉल में कुछ पल के लिए खामोशी
  3425. 2:37:07पसर गई। जो भी वहां मौजूद था सबकी आंखें
  3426. 2:37:10उसी नेकलेस पर टिक गई। युविका के चेहरे से
  3427. 2:37:13मुस्कान गायब हो गई। वो तेजी से आगे बढ़ी
  3428. 2:37:16और बिना कुछ कहे राधिका के हाथ से नेकलेस
  3429. 2:37:19ले लिया। ये क्या यह सच है? उसकी आवाज
  3430. 2:37:24कांप रही थी। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा
  3431. 2:37:26था कि श्रवण इतना महंगा गिफ्ट दे सकता है।
  3432. 2:37:29शिप्रा भी चुप थी। पर उसके मन में तूफान
  3433. 2:37:32चल रहा था। हैरानी, राहत और कहीं ना कहीं
  3434. 2:37:35एक हल्की सी ईर्ष्या इतना खूबसूरत नेकलेस
  3435. 2:37:39राधिका के लिए। अचानक उसे याद आया वेट्रेस
  3436. 2:37:43ने दो बॉक्स दिए थे और उसने साफ कहा था एक
  3437. 2:37:46आपकी वाइफ के लिए है। शिप्रा का दिल अचानक
  3438. 2:37:49तेज धड़कने लगा।
  3439. 2:37:52तो क्या श्रवण मेरे लिए भी? उसका मन बॉक्स
  3440. 2:37:55को देखने के लिए बेचैन हो उठा। पर वो
  3441. 2:37:57शौर्य को बोल भी नहीं सकती थी कि उसने
  3442. 2:37:59उसके लिए जो गिफ्ट मंगाया है उसे दिखा दे।
  3443. 2:38:02वह सोच में ही थी। तभी किसी ने उसकी बाह
  3444. 2:38:05पकड़ कर झंझोड़ दिया। शिप्रा अचानक उसने
  3445. 2:38:09मुड़कर देखा तो बीना जी उसके पास खड़ी थी।
  3446. 2:38:11उनकी आवाज फुसफुसाहट में थी लेकिन उसमें
  3447. 2:38:14घबराहट साफ झलक रही थी। यह क्या है? श्रवण
  3448. 2:38:18इतना महंगा नेकलेस खरीदने के लिए पैसे
  3449. 2:38:21कहां से लाया? शिप्रा ने धीरे से सिर
  3450. 2:38:23हिलाया। मां मुझे भी कुछ नहीं पता। उधर
  3451. 2:38:28भीड़ में फुसफुसाहट शुरू हो चुकी थी और
  3452. 2:38:30बीच में खड़ा शौर्य बस मुस्कुरा रहा था।
  3453. 2:38:33लेकिन हर कोई चुप रहने वाला नहीं था। रजत
  3454. 2:38:36जो अभी तक बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था। अब
  3455. 2:38:38कुछ सेकंड के लिए खामोश जरूर हुआ। पर फिर
  3456. 2:38:41उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई।
  3457. 2:38:43वो आगे बढ़ा और राधिका के हाथ से नेकलेस
  3458. 2:38:46लेकर बोला बहुत बढ़िया। अच्छा बेवकूफ
  3459. 2:38:49बनाया है इस कंगले ने सबको। रजत की बात
  3460. 2:38:52सुनकर राधिका चौकी। क्या मतलब? रजत हंसा।
  3461. 2:38:56ऐसी हंसी जिसमें तंज था। तुम भी नहीं
  3462. 2:38:59समझी। अरे यह नकली है। रजत के दावे से एक
  3463. 2:39:03बार फिर हॉल में सन्नाटा छा गया। वो फिर
  3464. 2:39:06रुक कर बोला। यह कोई असली नेकलेस नहीं है।
  3465. 2:39:09रेडी पटरी पर मिल जाता है 500 600 में।
  3466. 2:39:13राधिका की भौए सिकुड़ गई और वो बोली पर
  3467. 2:39:16देखकर तो नहीं लगता। इस पर रजत ने कंधे
  3468. 2:39:19उचकाए। अगर इतनी आसानी से फर्क समझ में आ
  3469. 2:39:22जाए तो बनाने वालों का धंधा कैसे चलेगा?
  3470. 2:39:25उसकी बात धीरे-धीरे असर करने लगी। राधिका
  3471. 2:39:28की आंखों में अब शक उतर आया था। वो पलटी
  3472. 2:39:32और सीधा शौर्य की तरफ देखा और बोली क्यों
  3473. 2:39:35जीजू बेवकूफ बनाने के लिए मैं ही मिली थी?
  3474. 2:39:38शौर्य उसकी बात सुनकर मुस्कुराया और बोला
  3475. 2:39:41आपने यह कैसे पक्का कर लिया कि मैंने जो
  3476. 2:39:44गिफ्ट आपको दिया वो नकली है। तो आपको क्या
  3477. 2:39:47लगता है कि रजत मुझसे झूठ बोलेगा? राधिका
  3478. 2:39:51रजत की तरफ देखती हुई बोली। तभी शौर्य रजत
  3479. 2:39:54का मजाक उड़ाने वाले भाव में बोला।
  3480. 2:39:56क्या यह कहीं का जहरी है जो इसने देखकर
  3481. 2:39:59अंदाजा लगा लिया कि यह नेकलेस नकली है? बस
  3482. 2:40:03यहीं रजत भड़क गया। ओए भिखारी तुझे पता भी
  3483. 2:40:07है असली पर्ल नेकलेस की कीमत क्या होती
  3484. 2:40:09है? कभी देखे भी हैं इतने पैसे? शौर्य
  3485. 2:40:12हल्के से मुस्कुराया और बोला, हाथ कंगन को
  3486. 2:40:15आरसी क्या और पढ़े लिखे को फारसी क्या?
  3487. 2:40:18मिस राधिका, ज्वेलरी का बॉक्स आपके हाथ
  3488. 2:40:21में है। उसमें इसके बिल के साथ गारंटी
  3489. 2:40:24कार्ड भी होगा। क्यों ना आप वहीं से
  3490. 2:40:26कंफर्म कर लें कि यह नेकलेस नकली है या
  3491. 2:40:28असली। शौर्य के चेहरे का कॉन्फिडेंस देखकर
  3492. 2:40:31राधिका समझ गई थी कि यह नेकलेस नकली नहीं
  3493. 2:40:34हो सकता। फिर भी उसने जल्दी से बॉक्स के
  3494. 2:40:37अंदर से बिल की कॉपी निकाली। सबसे पहले
  3495. 2:40:39उसका ध्यान प्राइस पर गया। प्राइस था ₹3
  3496. 2:40:43लाख। यह प्राइस देखकर राधिका की आंखें और
  3497. 2:40:46चौड़ी हो गई। मन ही मन उसने सोचा क्या
  3498. 2:40:49श्रवण की इतनी औकात है कि वो किसी को ₹3
  3499. 2:40:52लाख का गिफ्ट दे सके। फिर उसने बिल पर
  3500. 2:40:54सेलर का नाम देखा तो उसके सारे अरमान
  3501. 2:40:57ध्वस्त हो गए। अविश्वास की अब कोई गुंजाइश
  3502. 2:40:59ही नहीं बची थी क्योंकि बिल पर जिस सेलर
  3503. 2:41:02का नाम था उस पर राधिका डाउट कर ही नहीं
  3504. 2:41:04सकती थी क्योंकि वह समझ सकती थी कि श्रवण
  3505. 2:41:07कुछ भी कर ले पर इतना बड़ा गैंबल नहीं कर
  3506. 2:41:10सकता था। अगर वह ऐसा करता तो उसकी चोरी
  3507. 2:41:12हाथों हाथ पकड़ी जाती। अब राधिका को खुद
  3508. 2:41:15पर अफसोस हो रहा था कि उसने इतनी आसानी से
  3509. 2:41:18रजत की बातों पर भरोसा क्यों कर लिया। जब
  3510. 2:41:21रजत ने राधिका को खामोश देखा तो उसने पूछा
  3511. 2:41:24तुम चुप क्यों हो? आखिर ऐसा क्या देख लिया
  3512. 2:41:27तुमने उस बिल में? कहीं यह भी ज्वेलरी की
  3513. 2:41:30तरह नकली तो नहीं है? राधिका ने उसकी बात
  3514. 2:41:33सुनकर गंभीर स्वर में कहा।
  3515. 2:41:36यह कैसे हो सकता है? यह पेंडेंट तो होटल
  3516. 2:41:38राजकमल के ज्वेलरी आउटलेट से खरीदा गया
  3517. 2:41:40है। अगर यह नकली हुआ तो तुरंत पता चल
  3518. 2:41:43जाएगा क्योंकि हम अभी उसी होटल में हैं।
  3519. 2:41:46राधिका की बात सुनकर रजत को जोर का झटका
  3520. 2:41:49लगा। उसे यकीन ही नहीं हुआ कि शौर्य ने
  3521. 2:41:52इतनी महंगी ज्वेलरी यहीं से खरीदी है।
  3522. 2:41:54दरअसल होटल राजकमल के रिसेप्शन एरिया में
  3523. 2:41:57एक छोटा सा ज्वेलरी आउटलेट था। जहां
  3524. 2:42:00डिजाइनर और एंटीिक ज्वेलरी रखी जाती थी।
  3525. 2:42:02होटल में आने वाले मेहमान अक्सर वहीं से
  3526. 2:42:05खरीदारी करते थे। राजकमल के नाम की मोहर
  3527. 2:42:08के बाद उस ज्वेलरी की ऑथेंटिसिटी पर कोई
  3528. 2:42:10सवाल नहीं उठ सकता। अब रजत के पास बोलने
  3529. 2:42:14के लिए कुछ बचा ही नहीं था। शौर्य ने जब
  3530. 2:42:16देखा कि रजत की बोलती बंद हो गई है तो वह
  3531. 2:42:19हल्की मुस्कान के साथ बोला क्या हुआ अब
  3532. 2:42:23चुप क्यों हो गए अभी तो कह रहे थे कि
  3533. 2:42:25पेंडेंट नकली है चलो ज्यादा दूर जाने की
  3534. 2:42:28जरूरत भी नहीं है यहीं पर चेक कर लो असली
  3535. 2:42:31है या नकली रजत गुस्से में शौर्य को घूरता
  3536. 2:42:34रहा लेकिन उसके पास कोई जवाब नहीं था तभी
  3537. 2:42:37मुख्तार भाई से ये सब बर्दाश्त नहीं हुआ
  3538. 2:42:39वो आगे बढ़े और बोले सोचने वाली बात यह है
  3539. 2:42:44कि इस भिखारी [संगीत] के पास पास इतना
  3540. 2:42:46पैसा आया कहां से? जरूर इसने कोई गलत
  3541. 2:42:49तरीका अपनाया होगा। बताओ इतना महंगा
  3542. 2:42:53नेकलेस खरीदने के लिए तुम्हारे पास
  3543. 2:42:55[संगीत] पैसे कहां से आए? उनकी बात सुनकर
  3544. 2:42:59राधिका को भी मौका मिल गया। वो तुरंत बोली
  3545. 2:43:02हां श्रवण तुम्हें यह बताना ही पड़ेगा कि
  3546. 2:43:05इतने पैसे तुमने कैसे जुटाए। शौर्य ने गौर
  3547. 2:43:08किया कि जो राधिका अभी तक उसे [संगीत]
  3548. 2:43:09जीजू कह रही थी अब सीधे नाम से पुकार रही
  3549. 2:43:12है। शौर्य मुस्कुराते हुए सबके बदलते
  3550. 2:43:15चेहरे को देखता रहा। युविका भी कहां पीछे
  3551. 2:43:17रहने वाली थी? वो भी आगे आती हुई बोली हां
  3552. 2:43:20श्रवण अब तुम्हें जवाब देना ही पड़ेगा।
  3553. 2:43:23आखिर इतना महंगा नेकलेस तुमने कैसे खरीदा?
  3554. 2:43:26लोगों के तेवर बदलते देख शिप्रा भी मन ही
  3555. 2:43:29मन सोचने लगी। कैसे लोग हैं ये? इनकी सोच
  3556. 2:43:32को बदलने में एक पल भी नहीं लगता।
  3557. 2:43:35जहां वह सोच रही थी कि श्रवण के सस्ते
  3558. 2:43:37गिफ्ट को देखकर राधिका उसका मजाक बनाएगी,
  3559. 2:43:40वहीं अब उल्टा हो रहा था। सब लोग उसके
  3560. 2:43:43महंगे गिफ्ट को देखकर उसी पर सवाल उठा रहे
  3561. 2:43:45थे। हालांकि यह सवाल उसे भी परेशान कर रहा
  3562. 2:43:48था कि आखिर श्रवण इतने पैसे लाया कहां से?
  3563. 2:43:52लेकिन वो इस बात के लिए उसे सबके सामने
  3564. 2:43:54घेरने वालों में से नहीं थी। हां, बाद में
  3565. 2:43:57वो जरूर जानना चाहेगी कि उसने यह सब कैसे
  3566. 2:43:59किया। पर जो बात उसे सबसे ज्यादा चौंका
  3567. 2:44:02रही थी वो थी श्रवण का बदला हुआ रूप। कुछ
  3568. 2:44:05दिनों पहले का श्रवण और आज का श्रवण।
  3569. 2:44:08दोनों में जमीन आसमान का फर्क था। आज वो
  3570. 2:44:11आत्मविश्वास से भरा हुआ था। वो ऐसे सबका
  3571. 2:44:14सामना कर रहा था जैसे वहां मौजूद कोई भी
  3572. 2:44:16उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। आखिर कहां से
  3573. 2:44:19आया श्रवण के अंदर इतना कॉन्फिडेंस? जिस
  3574. 2:44:22मुख्तार भाई के सामने लोग बोलने से कतराते
  3575. 2:44:24थे। उसी को वो ऐसे जवाब दे रहा था जैसे
  3576. 2:44:27उसकी कोई औकात ही ना हो। और सबसे खास बात
  3577. 2:44:31उसके हर जवाब में ऐसा वजन था कि सामने
  3578. 2:44:34वाले की बोलती खुद ब खुद बंद हो जाती थी।
  3579. 2:44:37अब शिप्रा बस यह देखना चाहती थी कि इस
  3580. 2:44:39बदली हुई स्थिति में श्रवण [संगीत] क्या
  3581. 2:44:41करेगा। इसी बीच जब शौर्य ने देखा कि वहां
  3582. 2:44:44मौजूद हर इंसान की नजर उसी पर टिकी हुई है
  3583. 2:44:47तो वह हल्की मुस्कान के साथ बोला।
  3584. 2:44:51कितने दोगले इंसान हैं आप सब। शौर्य की यह
  3585. 2:44:55बात सुनते ही बलवंत राय ने उसे टोक दिया।
  3586. 2:44:58श्रवण यह क्या बदतमीजी है? तुम क्या बोल
  3587. 2:45:02रहे हो? तुम्हें समझ में आ रहा है? शिप्रा
  3588. 2:45:05भी उसकी बात सुनकर चौंक गई। लेकिन शौर्य
  3589. 2:45:08बिना रुके उसी जहरीली मुस्कान के साथ
  3590. 2:45:10बोला,
  3591. 2:45:11हां, मुझे बहुत अच्छे से समझ आ रहा है।
  3592. 2:45:14मैंने कुछ गलत भी नहीं कहा। फिर उसने सबकी
  3593. 2:45:17तरफ देखते हुए अपनी बात आगे बढ़ाई। मिस
  3594. 2:45:20राधिका यहां जितने भी गिफ्ट्स का ढेर लगा
  3595. 2:45:23हुआ है उनमें से कितने लोगों से आपने यह
  3596. 2:45:26पूछा कि उन्होंने यह गिफ्ट कैसे खरीदा या
  3597. 2:45:29उनके पास पैसे कहां से आए? वो एक पल के
  3598. 2:45:33लिए रुका। फिर उसकी नजर सीधे राधिका की
  3599. 2:45:35आंखों में जाकर टिक गई [संगीत] और वो फिर
  3600. 2:45:37बोला जब आपने किसी और से सवाल नहीं किया
  3601. 2:45:41तो मुझसे क्यों? शौर्य का जवाब सुनकर
  3602. 2:45:44राधिका बगले झांकने लगी। उसकी हिम्मत नहीं
  3603. 2:45:47हुई कि वो शौर्य से नजर भी मिला सके। पर
  3604. 2:45:50शौर्य यहीं नहीं रुका। वो आगे बोला चलो
  3605. 2:45:53मैं कहता हूं कि मैंने यह पैसे चोरी करके
  3606. 2:45:55कमाए हैं और उसी से ये गिफ्ट खरीदा है। तो
  3607. 2:45:58उससे क्या बदल जाएगा? क्या इस गिफ्ट की
  3608. 2:46:01वैल्यू कम हो जाएगी? और दूसरी बात अभी
  3609. 2:46:04थोड़ी देर पहले आप मुझे जीजू-जीजू बोलते
  3610. 2:46:07हुए एक बार भी हिचकिचा नहीं रही थी। और अब
  3611. 2:46:09अचानक मैं आपके जीजू से श्रवण हो गया। फिर
  3612. 2:46:13शौर्य थोड़ी देर रुक कर बोला। चलिए अगर
  3613. 2:46:17आपको कोई भी गिफ्ट लेने से पहले यह जानने
  3614. 2:46:19का शौक है कि वो कैसे खरीदा गया और यह
  3615. 2:46:22जाने बिना आप वो गिफ्ट नहीं लेती तो
  3616. 2:46:25मेहरबानी करके आप मुझे मेरा दिया हुआ
  3617. 2:46:27गिफ्ट वापस कर दीजिए क्योंकि मैं आपको कोई
  3618. 2:46:31गिफ्ट दे सकूं इतनी औकात मेरी नहीं है।
  3619. 2:46:34इतना बोलकर शौर्य ने राधिका की तरफ अपना
  3620. 2:46:37हाथ बढ़ाया ताकि वह उससे अपना गिफ्ट वापस
  3621. 2:46:40ले सके। अचानक इस बदली हुई स्थिति में
  3622. 2:46:42राधिका को समझ नहीं आया कि क्या उसे सचमुच
  3623. 2:46:45श्रवण को उसका गिफ्ट वापस करना पड़ेगा।
  3624. 2:46:48उसे श्रवण का दिया हुआ गिफ्ट बहुत पसंद
  3625. 2:46:51आया था। वो इसे अपने हाथ से आसानी से जाने
  3626. 2:46:54नहीं देना चाहती थी। उसे खुद पर अफसोस
  3627. 2:46:56होने लगा कि शिप्रा को नीचा दिखाने के
  3628. 2:46:59चक्कर में अब वो शौर्य के दिए गिफ्ट से भी
  3629. 2:47:01हाथ धोने वाली थी। उसे इस बात का भी अफसोस
  3630. 2:47:04होने लगा कि वह बिना सोचे समझे सिर्फ
  3631. 2:47:07शौर्य को नीचा दिखाने के चक्कर में रजत की
  3632. 2:47:10बातों में आकर श्रवण को कुछ भी सुनाई जा
  3633. 2:47:12रही थी। शौर्य का हाथ अब भी आगे बढ़ा हुआ
  3634. 2:47:16था और उसकी आंखों में एक ऐसी शांति थी जो
  3635. 2:47:19तूफान से पहले होती है। होटल राजकमल के
  3636. 2:47:22पार्टी हॉल में अब एक तरफ सीना तान कर
  3637. 2:47:25खड़ा था शौर्य का सच। तो दूसरी ओर था
  3638. 2:47:27नेकलेस के मुंह में मचलता राधिका का मौका
  3639. 2:47:30परस्त लालच। शौर्य के आज के जवाबी हमलों
  3640. 2:47:33ने ना केवल शिप्रा को नीचा दिखाने की
  3641. 2:47:36राधिका गैंग की साजिश को नाकाम कर दिया था
  3642. 2:47:38बल्कि सवाल करने वाले हर एक शख्स को आईना
  3643. 2:47:41भी दिखा दिया था। शौर्य के तर्क और शब्दों
  3644. 2:47:44के तीर इतने सटीक थे कि उनके उत्तर किसी
  3645. 2:47:46के पास नहीं थे। वहीं मौजूद बलवंत राय को
  3646. 2:47:49भी शौर्य का जवाब सुनकर लगा कि वह भी
  3647. 2:47:52पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर शौर्य के साथ
  3648. 2:47:54गलत व्यवहार कर रहे थे। उसने कुछ भी तो
  3649. 2:47:57गलत नहीं कहा था। जो उसने महसूस किया वही
  3650. 2:47:59तो कहा। सच में सब उसके साथ सौतेला
  3651. 2:48:03व्यवहार ही तो कर रहे थे। दूसरी तरफ
  3652. 2:48:05शिप्रा भी शौर्य का जवाब सुनकर यह सोचने
  3653. 2:48:07को मजबूर हो गई थी कि क्या सच में शौर्य
  3654. 2:48:10वही है जो उसे दिखाई दे रहा है या इसकी
  3655. 2:48:12असलियत कुछ और है पर जिस तरह से शौर्य ने
  3656. 2:48:15राधिका को जवाब दिया था उस बात से वह खुश
  3657. 2:48:18थी। अगर कोई खुश नहीं था तो वह थी नैना
  3658. 2:48:21बुआ। राधिका को दिया हुआ गिफ्ट आसानी से
  3659. 2:48:24शौर्य को वापस हो जाए यह बात उन्हें हजम
  3660. 2:48:27नहीं हो रही थी। जब उन्होंने देखा कि
  3661. 2:48:29शौर्य राधिका से अपना दिया हुआ गिफ्ट लेने
  3662. 2:48:31वाला है तो वह बीच में आकर बोली अरे श्रवण
  3663. 2:48:35बेटे कोई अपना दिया हुआ गिफ्ट भला वापस
  3664. 2:48:38लेता है क्या वैसे भी राधिका का वो मतलब
  3665. 2:48:40नहीं था जो तुम समझ रहे हो उसने तो किसी
  3666. 2:48:43और की बातों में आकर तुम्हें कुछ बोल दिया
  3667. 2:48:46बच्ची है यह उसकी ना समझी थी पर वो
  3668. 2:48:49तुम्हें हर्ट नहीं करना चाहती थी जब
  3669. 2:48:52राधिका ने देखा कि उसकी मां उसके सपोर्ट
  3670. 2:48:54में सामने आ गई है तो उसे तुरंत ही पलटी
  3671. 2:48:56मारी और शौर्य के सामने ने मासूम बनते हुए
  3672. 2:48:58बोली, हां जीजू, मां सही कह रही है। मेरा
  3673. 2:49:02आपका दिल दुखाने का कोई इरादा नहीं था। वो
  3674. 2:49:05तो मैं औरों की बातों में आकर आपकी बात पर
  3675. 2:49:07यकीन नहीं कर पाई। पर अब मैं शर्मिंदा
  3676. 2:49:09हूं। शिप्रा ने जब राधिका की बात सुनी तो
  3677. 2:49:12मन ही मन गुस्से में बोली, कितनी बेशर्म
  3678. 2:49:16है यह। इसने कितनी जल्दी अपना रंग बदल
  3679. 2:49:18लिया। इसे [संगीत] देखकर तो गिरगिट भी
  3680. 2:49:20शर्मा जाए। राधिका की बात सुनकर शौर्य को
  3681. 2:49:23भी आश्चर्य हुआ कि कितनी जल्दी वह अपनी
  3682. 2:49:25बात से पलट गई। एक तंज भरी मुस्कान शौर्य
  3683. 2:49:28के चेहरे पर नजर आने लगी। पर उसे अब
  3684. 2:49:31राधिका के मुंह से जीजू सुनकर अच्छा नहीं
  3685. 2:49:33लग रहा था। इसीलिए वो राधिका से बोला, मिस
  3686. 2:49:36राधिका, आप [संगीत] मुझे यह जीजू कहना बंद
  3687. 2:49:39कर दीजिए। अभी आप जैसे मुझे श्रवण कह कर
  3688. 2:49:42बुला रही थी, वही सही था। यह दिखावा मुझे
  3689. 2:49:44पसंद नहीं है।
  3690. 2:49:47आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं जीजू? मैंने
  3691. 2:49:49सॉरी तो कहा। आप मेरी नादानी समझकर उन
  3692. 2:49:52बातों को भूल जाइए। शौर्य का व्यवहार
  3693. 2:49:55देखकर राधिका समझ गई कि शौर्य अब उससे
  3694. 2:49:57नेकलेस वापस करने की बात नहीं करने वाला।
  3695. 2:50:00दूसरी तरफ नैना बुआ जिन्होंने महसूस किया
  3696. 2:50:02कि अब शौर्य राधिका से गिफ्ट वापस करने की
  3697. 2:50:05बात छोड़ चुका है। वो शौर्य के करीब जाकर
  3698. 2:50:07उससे बोली। श्रवण बेटे मैंने देखा उस
  3699. 2:50:10वेट्रेस ने तुम्हारे हाथ में दो गिफ्ट के
  3700. 2:50:13बॉक्स दिए थे। एक तो मैं समझती हूं कि
  3701. 2:50:15राधिका के लिए था। पर वो दूसरा बॉक्स
  3702. 2:50:18किसके लिए है?
  3703. 2:50:20तभी युविका शौर्य के हाथ में थमे उस बॉक्स
  3704. 2:50:22की तरफ देखते हुए बोली क्या बुआ आपने उस
  3705. 2:50:26वेट्रेस की बात नहीं सुनी थी क्या जब उसने
  3706. 2:50:28कहा था कि यह वाला गिफ्ट उसकी वाइफ के लिए
  3707. 2:50:30है यानी कि हमारी शिप्रा के लिए युविका के
  3708. 2:50:34दिमाग में अभी भी शरारत चल रही थी वो सोच
  3709. 2:50:36रही थी कि श्रवण ने पहले ही राधिका के
  3710. 2:50:39गिफ्ट पर ₹3 लाख खर्च कर दिए हैं तो जरूर
  3711. 2:50:42शिप्रा के लिए जो गिफ्ट उसने लिया है वो
  3712. 2:50:44उतना महंगा नहीं होगा और अगर वह इस गिफ्ट
  3713. 2:50:47को यहीं खुलवाने में कामयाब रही तो जरूर
  3714. 2:50:49शिप्रा के मन में जलन आ जाएगी और हो सकता
  3715. 2:50:52है उसे बेइज्जती भी फील हो और वह पार्टी
  3716. 2:50:55से चली जाए।
  3717. 2:50:57युविका की बात सुनकर नैना बुआ भी शरारत से
  3718. 2:50:59बाज नहीं आई और बनावटी अंदाज में बोली
  3719. 2:51:03क्या सच में ऐसा है? यह तो अच्छी बात है
  3720. 2:51:06कि श्रवण ने हमारी शिप्रा के लिए भी कोई
  3721. 2:51:08गिफ्ट लिया है। तो फिर उसे बॉक्स में पैक
  3722. 2:51:11रखने का क्या मतलब? आखिर हम भी तो देखें
  3723. 2:51:14कि श्रवण ने हमारी शिप्रा के लिए क्या
  3724. 2:51:16गिफ्ट मंगवाया है। शौर्य नहीं चाहता था कि
  3725. 2:51:19अभी वह गिफ्ट शिप्रा को दे क्योंकि उसे
  3726. 2:51:22नहीं पता था कि मेनका ने शिप्रा के लिए
  3727. 2:51:24कौन सा गिफ्ट लिया है। अगर वह गिफ्ट
  3728. 2:51:26राधिका को दिए गिफ्ट से सस्ता होगा तो
  3729. 2:51:28यहां पर लोगों को उसका मजाक बनाने का मौका
  3730. 2:51:30मिल जाएगा। लोग तुरंत दोनों गिफ्ट की
  3731. 2:51:33तुलना करने लगेंगे। इसीलिए वो चाहता था कि
  3732. 2:51:35पार्टी के बाद ही वो गिफ्ट शिप्रा को दे।
  3733. 2:51:38पर नैना राय ने इस समय शौर्य को शिप्रा को
  3734. 2:51:41एक गिफ्ट देने के लिए बोलकर उसके लिए धर्म
  3735. 2:51:43संकट की स्थिति पैदा कर दी। दूसरी तरफ
  3736. 2:51:46शिप्रा जो यह सब देख सुन रही थी जब उसने
  3737. 2:51:49देखा कि उसकी बुआ ने शौर्य को अभी उसे
  3738. 2:51:51गिफ्ट देने के लिए बोला है तो वह भी
  3739. 2:51:53अनकंफर्टेबल महसूस करने लगी। वो नहीं
  3740. 2:51:56चाहती [संगीत] थी कि शौर्य यहां सबके
  3741. 2:51:57सामने उसे वह गिफ्ट दे। उसे पता था कि अगर
  3742. 2:52:01शौर्य यहां पर उसको कोई गिफ्ट देता है तो
  3743. 2:52:03लोग उसके गिफ्ट की तुलना राधिका को दिए
  3744. 2:52:05गिफ्ट से करने लगेंगे। हालांकि उसके दिल
  3745. 2:52:08में गिफ्ट को लेकर हलचल भी थी और वह यह
  3746. 2:52:10जानना भी चाहती थी कि आखिर शौर्य उसके लिए
  3747. 2:52:12क्या गिफ्ट लाया है। पर माहौल को देखकर
  3748. 2:52:15उसने खुद को संभाला और बोली नहीं बुआ इसकी
  3749. 2:52:19कोई जरूरत नहीं है। अगर श्रवण मेरे लिए
  3750. 2:52:21कोई गिफ्ट लाया है तो मैं उससे बाद में ले
  3751. 2:52:24लूंगी पर अभी नहीं। पर नैना बुआ को यह बात
  3752. 2:52:27बर्दाश्त होने वाली कहां थी? अब तो वह हर
  3753. 2:52:30हाल में उस गिफ्ट को देखना चाहती थी जो
  3754. 2:52:32श्रवण शिप्रा के लिए लाया था। इसीलिए वो
  3755. 2:52:35शिप्रा को दोष देते हुए बोली इसका मतलब
  3756. 2:52:38तुम नहीं चाहती हो कि हम उस गिफ्ट को
  3757. 2:52:40देखें जो श्रवण तुम्हारे लिए लाया है। अरे
  3758. 2:52:43हम उसको तुमसे छीन थोड़ी ना लेंगे। हमें
  3759. 2:52:46तो यह देखकर अच्छा लगेगा कि श्रवण ने
  3760. 2:52:48तुम्हें कोई गिफ्ट दिया है। शौर्य को भी
  3761. 2:52:51नैना बुआ का यूं जिद करना अच्छा नहीं लग
  3762. 2:52:53रहा था। पर वो इसके लिए ज्यादा कुछ बोल
  3763. 2:52:55नहीं सकता था। वो समझ रहा था कि यह स्थिति
  3764. 2:52:58शिप्रा के लिए भी असहज होने वाली थी।
  3765. 2:53:00इसीलिए वह अभी गिफ्ट लेने से मना कर रही
  3766. 2:53:03थी और सही भी यही था क्योंकि यह राधिका की
  3767. 2:53:06बर्थडे पार्टी थी। इस भरी पार्टी में
  3768. 2:53:09शिप्रा को उसका गिफ्ट देना सही नहीं था।
  3769. 2:53:11जब राजदीप राय ने नैना को श्रवण से जिद
  3770. 2:53:13करते देखा तो वह सामने आते हुए बोले अरे
  3771. 2:53:17नैना तुम क्यों यह ज़िद पकड़े हुए हो कि
  3772. 2:53:19श्रवण अभी ही शिप्रा को गिफ्ट दे। हो सकता
  3773. 2:53:22है उसका कुछ अपना प्लान हो। इसलिए
  3774. 2:53:24तुम्हारा यह जिद करना सही नहीं है। जब
  3775. 2:53:27श्रवण को लगेगा कि यह शिप्रा को गिफ्ट
  3776. 2:53:29देने का सही समय है तो वह खुद ही दे देगा।
  3777. 2:53:32वैसे भी यह पार्टी राधिका की है ना कि
  3778. 2:53:34शिप्रा की। अपने पापा की बात सुनकर शिप्रा
  3779. 2:53:38ने राहत की सांस ली। पर नैना को राजदीप का
  3780. 2:53:40यूं बीच में आना अच्छा नहीं लगा। लेकिन वो
  3781. 2:53:43कुछ बोल नहीं सकती थी। उधर युविका को भी
  3782. 2:53:45लग रहा था कि अरमानों पर पानी फिर गया।
  3783. 2:53:49क्योंकि वह यह उम्मीद कर रही [संगीत] थी
  3784. 2:53:50कि उसकी बुआ की ज़िद के कारण श्रवण को उसका
  3785. 2:53:53गिफ्ट अभी ही शिप्रा को देना पड़ेगा। पर
  3786. 2:53:56युविका इतनी आसानी से हार नहीं मान सकती
  3787. 2:53:58थी। वो राजदीप राय के सामने आकर बोली क्या
  3788. 2:54:01चाचा जी आप भी कैसी बात कर रहे हैं? इससे
  3789. 2:54:04बढ़िया मौका और भला क्या होगा? जब हमारा
  3790. 2:54:07सारा परिवार यहां पर इकट्ठा है। हम सब भी
  3791. 2:54:09तो शिप्रा की खुशी में शामिल होना चाहते
  3792. 2:54:11हैं। आखिर हम भी तो देखें कि शिप्रा के
  3793. 2:54:14पति ने उसे पहला गिफ्ट क्या दिया है।
  3794. 2:54:18शौर्य सोचने लगा कि मेनका ने भी उसे कैसी
  3795. 2:54:21अजीब मुसीबत में डाल दिया है। क्या जरूरत
  3796. 2:54:24थी उसे शिप्रा के लिए भी गिफ्ट भेजने की?
  3797. 2:54:27पर अगले ही पल उसके दिमाग में आया कि
  3798. 2:54:29इसमें मेनका की क्या गलती है? उसने अपनी
  3799. 2:54:32तरफ से तो सब सही ही किया था। यह तो यहां
  3800. 2:54:35मौजूद युविका और नैना बुआ जैसे लोग हैं जो
  3801. 2:54:37जानबूझकर उसके लिए ऑकवर्ड स्थिति पैदा कर
  3802. 2:54:40रहे हैं। वो सोचने लगा कि स्थिति [संगीत]
  3803. 2:54:42से कैसे निपटा जाए। हालांकि राधिका का
  3804. 2:54:45गिफ्ट देखकर शौर्य को यकीन हो गया था कि
  3805. 2:54:47मेनका इतनी बेवकूफ नहीं हो सकती कि वह
  3806. 2:54:50शिप्रा के लिए राधिका से कम कीमत का गिफ्ट
  3807. 2:54:53सेलेक्ट करेगी। लेकिन एक अजीब सा डर उसे
  3808. 2:54:56सबके सामने गिफ्ट खोलने और शिप्रा को देने
  3809. 2:54:58से रोक रहा था। उसके दिमाग में [संगीत] एक
  3810. 2:55:01ही सवाल गूंज रहा था। अगर गलती से भी कोई
  3811. 2:55:04चूक हो गई तो यह सामने खड़ी घटिया
  3812. 2:55:06मानसिकता वाली महिलाएं शिप्रा को नीचा
  3813. 2:55:09दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी। और जो
  3814. 2:55:11मकसद लेकर वह पार्टी में आई हैं, वह आसानी
  3815. 2:55:14से पूरा हो जाएगा और वे बर्थडे से भी
  3816. 2:55:16ज्यादा बड़ा जश्न शिप्रा की हार का
  3817. 2:55:18मनाएंगी। दूसरी तरफ शिप्रा की दिली हालत
  3818. 2:55:21भी कुछ ऐसी ही थी। पर वो शौर्य की स्थिति
  3819. 2:55:24को समझ रही थी। जब उसे भी इससे निपटने का
  3820. 2:55:27कोई तरीका नजर नहीं आया तो वो शौर्य के
  3821. 2:55:29पास गई और बोली क्या यह जो तुम्हारे हाथ
  3822. 2:55:33में गिफ्ट है यह मेरे लिए है। शौर्य ने
  3823. 2:55:36हां में सिर हिलाकर अपनी सहमति जताई।
  3824. 2:55:38शौर्य [संगीत] की सहमति देखकर शिप्रा ने
  3825. 2:55:41कहा, तो फिर ठीक है, तुम यह गिफ्ट मुझे दे
  3826. 2:55:44दो। मैं घर जाकर इसे देख लूंगी। शिप्रा की
  3827. 2:55:47बात सुनकर शौर्य ने राहत की सांस ली और
  3828. 2:55:49गिफ्ट शिप्रा की तरफ बढ़ा दिया। पर यह बात
  3829. 2:55:52नैना और युविका को गवारा नहीं हुई। नैना
  3830. 2:55:55बुआ शिप्रा के सामने आकर बोली, "यह क्या
  3831. 2:55:58बात हुई शिप्रा? अगर श्रवण तुम्हें कोई
  3832. 2:56:00गिफ्ट दे रहा है तो हमारे पूरे परिवार को
  3833. 2:56:03भी तो पता होना चाहिए कि उसने तुम्हें
  3834. 2:56:05आखिर दिया क्या है।
  3835. 2:56:08जब शिप्रा ने महसूस किया कि उसकी बुआ इतनी
  3836. 2:56:10आसानी से हार नहीं मानने वाली हैं तो वो
  3837. 2:56:12थोड़े कड़े स्वर में बोली
  3838. 2:56:15आप कैसी बात कर रही हो बुआ यह हमारे और
  3839. 2:56:18श्रवण के बीच की पर्सनल चीज है। आप क्यों
  3840. 2:56:20चाहती हैं कि मैं इसे सबके साथ शेयर करूं।
  3841. 2:56:23शिप्रा की बात नैना बुआ को बुरी तो लगी पर
  3842. 2:56:26वो खिसियानी हंसी हंसते हुए बोली। कैसी
  3843. 2:56:29बात करती हो शिप्रा बेटी? मैं समझती हूं
  3844. 2:56:31कि यह तुम दोनों का पर्सनल मामला है। पर
  3845. 2:56:34हम परिवार के लोगों की भी यह जानने की
  3846. 2:56:36इच्छा होती है कि आखिर हमारे बच्चों का
  3847. 2:56:38रिश्ता कैसा चल रहा है और फिर यह तो खुशी
  3848. 2:56:41की बात है। तो इसमें छुपाने की क्या जरूरत
  3849. 2:56:44है? इस पर शिप्रा भावहीन चेहरे के साथ
  3850. 2:56:47बोली। इसमें छुपाने जैसी कोई बात नहीं है
  3851. 2:56:50बुआ। बस मैं नहीं चाहती कि मैं अपने और
  3852. 2:56:53श्रवण के बीच की चीज को सबसे साझा करूं।
  3853. 2:56:56बस इतनी सी बात है। मुझे लगता है अब आपको
  3854. 2:56:59मेरी बात समझ में आ गई होगी। अब नैना राय
  3855. 2:57:02के सामने और जिद करने की कोई वजह नहीं
  3856. 2:57:04बची। इसीलिए वह चुप हो गई। पर बहुत देर से
  3857. 2:57:08ये सब देख रहे बलवंत राय के मन की
  3858. 2:57:09जिज्ञासा भी चरम पर पहुंच गई थी। अब तो
  3859. 2:57:12उनकी भी इच्छा हो गई कि आखिर श्रवण ने
  3860. 2:57:14शिप्रा को क्या गिफ्ट दिया है। यही सोचकर
  3861. 2:57:17वो शिप्रा से बोले। शिप्रा बेटी मैं समझता
  3862. 2:57:21हूं कि यह तुम दोनों के बीच का पर्सनल
  3863. 2:57:24मामला है। पर बच्चे हम परिवार के लोग भी
  3864. 2:57:27जानना चाहते हैं कि तुम्हारे लिए श्रवण के
  3865. 2:57:30दिल में कैसी फीलिंग है। और इसे जानने का
  3866. 2:57:33सबसे अच्छा तरीका यही है कि यह देखा जाए
  3867. 2:57:36कि वो तुम्हारी कितनी परवाह करता है। अगर
  3868. 2:57:39वह तुम्हारे लिए कुछ लाता है तो वह चीज
  3869. 2:57:42किस तरह की है। इतना कहने के बाद थोड़ा
  3870. 2:57:45रुक कर वह फिर [संगीत] बोले और हम यह भी
  3871. 2:57:48चाहते हैं कि श्रवण जो भी गिफ्ट तुम्हारे
  3872. 2:57:50लिए लाया है, वह हम सबके सामने तुम्हें
  3873. 2:57:53अपने हाथों से पहनाए। हमारी यह मांग कुछ
  3874. 2:57:56ज्यादा नहीं है। मुझे लगता है कि इसे पूरा
  3875. 2:58:00करने में तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी और
  3876. 2:58:03हमें यह जानने का भी मौका मिलेगा कि श्रवण
  3877. 2:58:05को लेकर जो तुमने फैसला लिया है, वह सही
  3878. 2:58:08है या नहीं।
  3879. 2:58:11दादा बलवंत राय की बात सुनकर शिप्रा ने
  3880. 2:58:13पहले अपने हाथ के गिफ्ट को देखा और फिर
  3881. 2:58:15शौर्य की ओर देखने लगी। तो क्या होगा आगे?
  3882. 2:58:19क्या शिप्रा बलवंत राय की बात मानेगी?
  3883. 2:58:21क्या शौर्य शिप्रा को अपने हाथों से वो
  3884. 2:58:24गिफ्ट पहनाएगा? और आखिर गिफ्ट में है
  3885. 2:58:26क्या? जानने के लिए सुनते रहिए बेगर
  3886. 2:58:29हस्बैंड

About this transcript

This page contains the full transcript of भिखारी हसबैंड | Episode 51–65 | Kahvanihindi by Kahvani Hindi, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 32,350 words across 3,886 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

What you can do with it

Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.

Free YouTube transcript tool

YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.