Episode 5 Series غور و فکر — Transcript
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- 0:00अजु बिल्लाह मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह
- 0:02रहमान रहीम कभी य नौजवान मुस्लिम तदब भी
- 0:05किया तूने वह क्या गर्दू था जिसका तू है
- 0:07एक टूटा हुआ तारा तुझे उस कौम ने पाला है
- 0:11आगोश मोहब्बत में कुचल डाला था जिसने पांव
- 0:14में ताजे
- 0:16सरदारा क्या आप जानते हैं कि गोल्डन जज ऑफ
- 0:20इस्लाम कब
- 0:21था कुरान मजीद सातवीं सदी ईसवी में हजरत
- 0:25मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम पर
- 0:28नाजिल हुआ और इसके बाद दुनिया में इल्म और
- 0:31तहकीक का एक सिलसिला शुरू हो गया आठवीं
- 0:34सदी से 14वीं सदी तक दुनिया के इल्मी उफक
- 0:37पर मुसलमान साइंस दानों मुह कीन और
- 0:39मुफक्कीर का राज था यही वह गोल्डन एज ऑफ
- 0:42इस्लाम था जब इल्म तहकीक और इजात की रोशनी
- 0:45हर सिम फैल रही यूरोप तारीखी में डूबा हुआ
- 0:48था और मुस्लिम दुनिया साइंस तिब फलक
- 0:51रियाजी और इंजीनियरिंग में हैरत अंगेज
- 0:54तरक्की कर रही थी 11वीं सदी में यानी आज
- 0:56से कोई हजार साल पहले इब्ने सीना ने
- 0:59अलशिफा में लिखा के तमाम अशय अपनी असल की
- 1:01तरफ खींचती है यानी ग्रेविटी यह वो तसव्वर
- 1:03था जिसे न्यूटन ने 600 साल बाद 17वीं सदी
- 1:06में लाफ ग्रेविटेशन के नाम से पेश किया
- 1:0912वीं सदी में अल खाज ने बैलेंस ऑफ विजडम
- 1:11के जरिए मास और ग्रेविटी के ताल्लुक को
- 1:13नापने के उसूल दिए जिसे बाद में आइंस्टाइन
- 1:16ने इस्तेमाल किया और 13वीं सदी में
- 1:18नसीरुद्दीन तूसी ने तूसी कपल के जरिए
- 1:21एलिप्टिकल मोशन ऑफ प्लेनेट को वाज किया
- 1:23जिसने बाद में 15वीं और 16वीं सदी में
- 1:27कॉपरनिकस और केप्लर के नजरिया की बुनिया
- 1:30याद रखी यही नहीं आज का कंप्यूटर और
- 1:32आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस बुनियाद पर
- 1:35खड़े हैं वह नवीं सदी में अल खवा के
- 1:38अलजेब्रा के बगैर मुमकिन ना था मोबाइल
- 1:40कैमरे से तस्वीर खींचते हुए शायद ही आपने
- 1:43कभी सोचा हो कि 11वीं सदी में इब्ने है शम
- 1:45ने रिफ्लेक्शन और रिफलेक्शन के कवानी
- 1:47दरयाफ्त किए जो आज कैमरा लेजर्स और फाइबर
- 1:50ऑप्टिक्स का बुनियादी उसूल बनी 12वी सदी
- 1:54में अल जजारी ने रोबोटिक मशीनरी और
- 1:56ऑटोमेटिक क्लॉक्स ईजाद किए जो आज की
- 2:00मॉडर्न इंजीनियरिंग की बुनियाद
- 2:02बनी 11वीं सदी में अलबेरूनी ने जमीन के
- 2:06सरकम फ्रेंस का दुरुस्त हिसाब लगाया जबकि
- 2:08नवीं सदी में अब्बास इब्ने फरनाज ने परवास
- 2:11का ख्वाब देखा और तजुर्बा किए जो बाद में
- 2:13हवाई जहाज की ईजाद का पेश कीना बनी नवीं
- 2:16सदी में फातिमा अल फहरी ने दुनिया की पहली
- 2:19यूनिवर्सिटी कायम
- 2:22की यह सब गोल्डन एज ऑफ इस्लाम में तभी
- 2:27इराक सिर्फ एक मुल्क नहीं था बल्कि इल्म
- 2:29का एक जहान था आठवीं से 13वीं सदी तक
- 2:31बगदाद का बैतुल हिकमत हाउस ऑफ विजडम
- 2:34दुनिया भर के साइंस दनो फलसफे और तलबा का
- 2:37मरकज था यहां यूनानी फारसी हिंदी और सरयान
- 2:40जुबान की हजारों किताबें अरबी में तर्जुमा
- 2:43हुई जिनमें अरस्तू के फलसफे से लेकर हिंस
- 2:45के हुसूल शामिल थे और आज हम कहां हैं तुझे
- 2:49आबा से अपनी कोई निस्बत हो नहीं सकती कि
- 2:53तू गुफ्तार वो किरदार तू साबित वो सैयारा
- 2:57गवा दी हमने जो अलाफिया रास पाई थी सुरैया
- 3:01से जमी पर आसमा ने हमको दे मारा मगर क्यों
- 3:05इतनी पस्ती पर हम क्यों आए वही मुस्लिम
- 3:08दुनिया जो इल्म की रोशनी बांट रही थी
- 3:10रफ्ता रफ्ता इंटेलेक्चुअल पैरालिसिस का
- 3:12शिकार क्यों हुई 14वीं सदी के बाद ऐसा
- 3:16क्या हुआ हम क्यों जनत और तहकीक छोड़कर
- 3:19इमोशनल एक्सट्रीमिस्ट बन गए हम क्यों
- 3:22मुख्तलिफ ग्रहो में बट गए और हमारी बहस तू
- 3:25काफिर और वो काफिर तक महदूद हो गई तू इधर
- 3:29उधर की ना बात कर यह बता कि काफला क्यों
- 3:31लुटा मुझे रह जनों से गिला नहीं तेरी
- 3:35रहबरी का सवाल है मैं चाहता हूं कि आप
- 3:38मुझे कमेंट्स में जवाब दें कि 14वीं सदी
- 3:40के बाद ब हैसियत मुसलमान हमारे लिए क्या
- 3:43गलत हुआ लेकिन मेरा आज का मौजू यह नहीं है
- 3:47मेरा आज का सवाल यह है कि इस्लाम के आने
- 3:49के बाद इल्म और तहकीक के इस सिलसिले को
- 3:52किस चीज ने जन्म दिया कुरान शरीफ में ऐसी
- 3:54कौन सी खास बात थी जिसने मुसलमानों को
- 3:57इल्म और तहकीक की तरफ जाने पर मजबूर किया
- 4:01जिसे आज का मुसलमान यकसर फरामोश कर चुका
- 4:03है बिल्कुल भुला चुका है पिछले साथ में
- 4:06हमने सीखा कि प्रोफेसर डॉक्टर जेफरी लंग
- 4:08ने सूर बकरा की आयत नंबर 30 से 33 की
- 4:11बुनियाद पर यह नतीजा अखज किया कि इंसान एक
- 4:13जहीन मखलूक है जो सीखने और तहकीक के लिए
- 4:17पैदा किया गया है लेकिन क्या कुरान शरीफ
- 4:19में और मकामा पर भी बिल्कुल ऐसा ही जिक्र
- 4:21है और अकल की इतनी ही अहमियत है सीखने की
- 4:25कुरान शरीफ का पहला नाजिल शुदा लफ्ज कौन
- 4:28सा है इकरा यह कुरान की वह सदा थी जो पहली
- 4:32वही के साथ गूंजी इकरा पढ़ो सीखो यह वह
- 4:36लम्हा था जब इल्म इबादत बना जब तहकीक ईमान
- 4:39की तकल का जरिया बनी जब इंसान सोचने समझने
- 4:42जांचने और परखने पर मजबूर हुआ कुरान ने
- 4:45बार-बार दावत दी क्या तुम गौर और फिक्र
- 4:47नहीं करते अफला ताकून अफला यत अलाय
- 4:51दून कुरान में 70 से जायद बार गौर फिक्र
- 4:54तदब और अकल के इस्तेमाल की ताकीद की गई है
- 4:57क्या आप जानते हैं कि अल्लाह ताला ने सबसे
- 4:59बड़ी सबसे बड़ी खैर खैर कसीर किस चीज को
- 5:03करार दिया है कुरान शरीफ में बिस्मिल्लाह
- 5:06रहमान रहीम
- 5:09यमता फकत
- 5:12ररा सर बकरा आयत नंबर 269 वह जिसको चाहता
- 5:17है हिकमत अता करता है और जिसे वह हिकमत
- 5:21अता कर दे उसे तो खैर कसीर अता हो गई बहुत
- 5:24बड़ी खैर अता हो गई अल्लाह ताला हिकमत को
- 5:27विजडम को बहुत बड़ी खैर कह र
- 5:30और क्या आप यह जानते हैं कि अल्लाह ताला
- 5:32ने कुरान शरीफ में बदतर जानवर किसको कहा
- 5:35कोई बहुत बड़ा गुनाहगार होगा जिसे अल्लाह
- 5:37ताला बतरी जानवर कह रहे हैं इ दवाला
- 5:43सुलाया यकीनन तमाम जानवरों में अल्लाह के
- 5:46नजदीक बदतर जानवर वह गूंगे बहरे इंसान हैं
- 5:51जो अकल से काम नहीं
- 5:53लेते और क्या आप जानते हैं कि अहले
- 5:56जहन्नुम क्या कहेंगे जब उनसे पूछा जाएगा
- 5:59किस वजह से वह जहन्नुम में है तमाम आयत
- 6:02कुरान शरीफ की है लो कुना नसम और ना किलो
- 6:08मा कुना फब सर व कहेंगे अगर हम सुनते और
- 6:12अकल से काम लेते तो हम ना होते जहन्नम
- 6:15वालों में से जवाब में कहा जाएगा
- 6:20फ अभी आपने अपने असली गुनाह का इकरार किया
- 6:23है
- 6:26फस तो अल्लाह ताला
- 6:30जो है वह कुरान शरीफ में बार-बार अकल की
- 6:33विजडम की इतनी अहमियत बयान कर रहा है क्या
- 6:38आप सुन रहे हैं कोलू के बैल की तरह अपनी
- 6:40जिंदगी गुजारने वालो जो पैसा पैसा घर घर
- 6:44एक दायरे में घूमते हुए अपनी सारी जिंदगी
- 6:46गुजार देते हैं जो अंदी तकलीद करते हैं
- 6:48आपने सुना अकल की सोचने की कितनी अत
- 6:54है यह हमारी सीरीज गौर फिक्र की पांचवी गस
- 6:58थी इस सीरीज के जरिए हम अपनी सोई हुई कौम
- 7:01को जगाना चाहते हैं और उन्हें उनके असल
- 7:03मकसद से आगाह करना चाहते हैं बराय कर्म
- 7:07हमारे दोस्त बन इसमें हमारी मदद करें इस
- 7:09वीडियो को शेयर करें अपने सोशल मीडिया
- 7:12पेजेस में और अपने सोशल सर्कल में यह बहस
- 7:14शुरू करें और अपने आपको को और अपने
- 7:16प्यारों को बचाएं अगली किस में जब हम
- 7:18मिलेंगे तो हम इस पर बहस करेंगे कि कुरान
- 7:22शरीफ क्या चाहता है कि हम इस गौर फिक्र को
- 7:24कहां इस्तेमाल करें अकल को कहां इस्तेमाल
- 7:26करें मिलते हैं अगली किस्म में आपकी समा
- 7:28तों का बहुत-बहुत शुक्रिया अल्लाह हाफिज
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This page contains the full transcript of Episode 5 Series غور و فکر by Dr Sufyan Quran Daily Dose, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 1,203 words across 151 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.
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