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Episode # 4 Series غور و فکر — Transcript

by Dr Sufyan Quran Daily Dose · 1,184 words · 150 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00अजु बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह
  2. 0:03रहमान रहीम क्या आप जानते हैं कि शैतानी
  3. 0:05इस्ते दलाल या डेविल आर्गुमेंट क्या है यह
  4. 0:09इला मौलाना रूमी ने अपनी मशहूर किताब
  5. 0:11मसनवी मानवी में इब्लीस के बारे में एक
  6. 0:14नजम से मुतालिक इस्तेमाल की है जो इब्लीस
  7. 0:17के साथ एक ख्याली बहस को जाहिर करने वाली
  8. 0:20नजम है मौलाना रूमी की इस नजम में जब
  9. 0:23शैतान से सवाल किया गया कि तुमने अल्लाह
  10. 0:26के हुकम की खिलाफ वर्जी क्यों की इंसान को
  11. 0:29सजदा क्यों नहीं किया तो इब्लीस ने अपने
  12. 0:32मख सूस गुरूर में लिपटे हुए अंदाज में एक
  13. 0:36चालाक जवाब दिया इब्लीस ने कहा भला मैं
  14. 0:39क्या कर सकता था मैं तो मजबूर था मेरे हाथ
  15. 0:42में वह चाल थी जो अल्लाह ने पहले ही लिख
  16. 0:45दी थी मैंने वही किया जो मेरी तकदीर में
  17. 0:49था अल्लामा इकबाल ने भी अपनी एक नजम में
  18. 0:52अल्लाह ताला और इब्लीस के दरमियान मुकाल
  19. 0:55मेंे की तस्वीर कशी की है इब्लीस इस नजम
  20. 0:58में कहता है
  21. 1:01ऐ खुदाय कुन फका मुझको ना था आदम से
  22. 1:05बैर ऐ खुदाय कुन फका मुझको ना था आदम से
  23. 1:09बैर आह वो जंदा ने नजदीक को दूर और देर
  24. 1:13जूत हरफे इस्तक बार तेरे सामने मुमकिन ना
  25. 1:16था हां मगर तेरी मशी में ना था मेरा सुजूद
  26. 1:21यानी शैतान ने अल्लाह से कहा कि सजदा ना
  27. 1:24करना उसकी तकदीर में था और यह अल्लाह की
  28. 1:27मर्जी थी ना कि उसकी खुद की मर्जी और इस
  29. 1:30तरह वह खुद को अपने गुनाह की जिम्मेदारी
  30. 1:33से आजाद करता है जो इसने अपनी फ्री विल से
  31. 1:37किया था इसी को डेविल आर्गुमेंट या शैतानी
  32. 1:41इस्ते दलाल कहते हैं वह जुमला जिसे तारीख
  33. 1:44के हर गुमराह जहन ने अपना सहारा बनाया वह
  34. 1:47फलसफा जिसके जरिए हर नफ्स परस्त शख्स ने
  35. 1:51अपनी गलतियों का बोझ किसी और के कंधों पर
  36. 1:54डाल दिया यह वह इस्ते दलाल यह वह दलील है
  37. 1:57जिसमें हम अपनी कोताही हों गुनाहों और
  38. 1:59कमजोर
  39. 2:00को अपनी गलती नहीं बल्कि तकदीर की नागजी
  40. 2:03लकीरें समझकर अपने जमीर को सुला देते हैं
  41. 2:06जरा गौर कीजिए अगर इंसान के पास बुराई
  42. 2:10करने का इख्तियार नहीं तो इसका मतलब यह भी
  43. 2:13होगा कि इसके पास अच्छाई करने का इख्तियार
  44. 2:16भी नहीं फिर तो ना इसकी नेकी का कोई सिला
  45. 2:19होना चाहिए ना ही इसकी बदी पर कोई सजा फिर
  46. 2:22नेकी नेकी नहीं रहती जैसे गनी खान बाबा ने
  47. 2:26कहा वस्त्र बदन सब
  48. 2:30तो शराब
  49. 2:32शराब
  50. 2:36ब बदवी
  51. 2:39नाकाम जब आप मजबूरी से आपके पास इयार ही
  52. 2:43नहीं और अच्छाई कर रहे उस अच्छाई का फायदा
  53. 2:45क्या लेकिन क्या वाक ऐसा है कि इंसान के
  54. 2:48पास फ्रीविल है इसका जवाब देने के लिए
  55. 2:51हमें एक बार फिर रिवी नॉलेज की तरफ देखना
  56. 2:53होगा कुरान शरीफ इस बारे में क्या कहता है
  57. 2:56यहां प्रोफेसर डॉक्टर जेफरी लंग की बात
  58. 2:59इंतहा अहम हो जाती है जो कहते हैं कि
  59. 3:01इंसान एक इरादी मखलूक है और इसी इख्तियार
  60. 3:04के साथ आजमाइश में डाला गया है लेकिन इसने
  61. 3:07ऐसा क्यों कहा इसकी ताई के लिए इसके पास
  62. 3:10कुरान शरीफ से क्या कोई दलील
  63. 3:13है आप जब कुरान शरीफ को समझेंगे तो आप यह
  64. 3:17जानकर हैरान रह जाएंगे कि जहान की आयात जो
  65. 3:20हमने पिछली किस में पढ़ी थी उसके फौरन बाद
  66. 3:23अल्लाह ताला ने फ्री विल की आयात का जिक्र
  67. 3:26किया है गोया अल्लाह ताला चाहते हैं कि हम
  68. 3:28इन दोनों चीजों को एक साथ
  69. 3:31समझे में अल्ला ताला फरमाते हैं
  70. 3:33बिस्मिल्लाह रहमान रहीम नाल
  71. 3:36मला आदमा फ इला इलीस
  72. 3:40अबतरा कान मिनल
  73. 3:44काफ और याद करो जब हमने कहा फरिश्तो से कि
  74. 3:48सजदा करो आदम को तो सब सजदे में गिर पड़े
  75. 3:53सिवाय इब्लीस के उसने इंकार किया और
  76. 3:56तकब्बल
  77. 3:59यहां उसी इब्लीस की बात हो रही है जिसके
  78. 4:02डेवल आर्गुमेंट की हमने बात की वो इब्लीस
  79. 4:05फरिश्ता नहीं था बल्कि जिन्नात में से था
  80. 4:07और यह अहम क्यों है क्योंकि दो मखलूक ऐसी
  81. 4:10है जिन्हें फ्री विल दी गई इंसान और
  82. 4:12जिन्नात शैतान ने इंकार करके अपनी फ्रीविल
  83. 4:16का इस्तेमाल किया तकब्बल किया और यूं
  84. 4:18गुमराही का पहला रास्ता खुला अगली आयत
  85. 4:21इंसानों में फ्रीविल की वजाहत करती है
  86. 4:23अल्लाह ताला ने हजरत आदम और बीबी हवा से
  87. 4:25फरमाया अज बिल्लाह मिन शैतान रम
  88. 4:27बिस्मिल्लाह रहमान रहीम वो कुलना या आदम
  89. 4:31अता जनता
  90. 4:34लान
  91. 4:37लाक म और हमने कहा आदम रहो तुम और
  92. 4:42तुम्हारी बीवी जन्नत में और खाओ इसमें से
  93. 4:46बा फरात जहां से चाहो मगर इस दरख के करीब
  94. 4:50मत जाना वरना तुम जालिमों में से हो जाओगे
  95. 4:53अल्लाह की तरफ से वाज हिदायत थी इस रखत के
  96. 4:57करीब मत जाना अब अगर इंसानों के पास
  97. 4:59फ्रीविल ना होती तो हजरत आदम अल सलाम
  98. 5:02अल्लाह ताला के हुक्म के मुताबिक अमल करते
  99. 5:04लेकिन हकीकत में क्या हुआ शैतान ने वसवसे
  100. 5:07डाला और हजरत आदम अल सलाम उस वसवसे में
  101. 5:11आकर अल्लाह के मना करने के बावजूद उस
  102. 5:14दरख्त के करीब गए यह एक लम्हा था एक फैसला
  103. 5:19था एक चुनाव था हजरत आदम अल सलाम ने यह
  104. 5:23इंतखाब अपनी फ्रीविल से किया और कुरान
  105. 5:26शरीफ की यह आयत हमें यही सिखाना चाहती है
  106. 5:29कि इन के पास फ्रीविल है फिर अल्लाह ताला
  107. 5:32से उन्होंने माफी मांगी और अल्लाह ताला ने
  108. 5:34उन्हें माफ कर दिया अगर हम ब हैसियत
  109. 5:37मुस्लिम मुशरा इस एक आयत को समझ ले तो यह
  110. 5:40हमें शैतान की दलील या डेविल आर्गुमेंट से
  111. 5:43आजाद कर देता है और हम तकदीर और शैतान पर
  112. 5:46अपने दानिता माल का इल्जाम लगाना छोड़
  113. 5:49देते हैं यही वह बुनियादी सबक है जो कुरान
  114. 5:52शरीफ हमें बार बार सिखाता है इंसान जहीन
  115. 5:56मखलूक है मगर इससे भी बड़ी बात यह कि वह
  116. 5:59इंतखाब कर सकता है अल्लाह का हुक्म मानने
  117. 6:02या ना मानने का इंतखाब अच्छाई और बुराई का
  118. 6:05इंतिखाब खैर और शर का इंतिखाब और इसी
  119. 6:08इंतिखाब पर इसका हिसाब होगा यही वो लम्हा
  120. 6:11था जिसने प्रोफेसर डॉक्टर जेफ्री लंग को
  121. 6:13यह हकीकत समझाई कि इंसान को इख्तियार दिया
  122. 6:16गया है वह चाहे तो अल्लाह की बंदगी करे और
  123. 6:19चाहे तो इंकार कर
  124. 6:21दे हां कुछ चीजें ऐसी भी हैं जिस पर हमारा
  125. 6:25कोई इख्तियार नहीं जैसे कि हम कहां पैदा
  126. 6:27हुए हमारे वालदैन कौन हैं हमें कौन सी
  127. 6:30जींस मिली और इस तरह की बहुत सी चीजें
  128. 6:32लेकिन याद रखिएगा कि हम उन चीजों के बारे
  129. 6:35में बात कर रहे हैं जिन पर हमारा इख्तियार
  130. 6:37है हमारा कंट्रोल है उम्मीद है कि अब आप
  131. 6:42फ्री विल का
  132. 6:43तसव्वुर थोड़ा बहुत समझ चुके होंगे अब
  133. 6:47सवाल यह है कि हम कैसे जानेंगे कि क्या
  134. 6:50सही है और क्या गलत क्या अच्छा है और क्या
  135. 6:53बुरा खैर क्या है और शर क्या है बहुत सारे
  136. 6:57सवालात हैं और हमने अभी तक अपने पिछले
  137. 6:59सवालों में से एक का जवाब नहीं दिया कि
  138. 7:01क्या जनत वाकई इतनी अहम है और अगर जहान
  139. 7:04इतनी ही अहम है तो हम अपनी जहान को कैसे
  140. 7:08और कहां इस्तेमाल
  141. 7:09करें यह हमारी सीरीज गौर फिक्र की चौथ
  142. 7:13किस्त थी और अगली किस्त में इन बाकी
  143. 7:16सवालात के जवाब मिलेंगे यह बहस अभी
  144. 7:19मुकम्मल नहीं यह सवाल अभी खत्म नहीं मिलते
  145. 7:23हैं अगली किसने तब तक सोचिए समझिए और खुद
  146. 7:28को पहचा चाहिए बराय करम इस पैगाम को अपने
  147. 7:33सोशल मीडिया पेजेस और अपने दोस्तों और एले
  148. 7:35खाना के साथ शेयर करें और अपना किरदार अदा
  149. 7:38करें आप सबकी समा तों का बहुत-बहुत
  150. 7:40शुक्रिया अल्लाह हाफिज

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