YouTube2Text

भिखारी हसबैंड | Episode 31–50 | Kahvanihindi — Transcript

by Kahvani Hindi · 44,242 words · 5,351 segments · language en · Watch on YouTube

Full transcript

  1. 0:00नमस्कार दोस्तों राम राम दोस्तों स्वागत
  2. 0:02है आपका हमारे YouTube चैनल में आज हम
  3. 0:06लेकर आए हैं वेगर हस्बैंड का नया वीडियो
  4. 0:08जिसमें एपिसोड 31 से 50 तक है तो जल्दी से
  5. 0:11जल्दी इस वीडियो को देखो और बताओ कि कोई
  6. 0:13मिस्टेक तो नहीं है अगर आपको ऐसी ही ऑडियो
  7. 0:16स्टोरीज पसंद है तो हां वीडियो को लाइक
  8. 0:19करें हमारे दूसरे चैनल को भी सब्सक्राइब
  9. 0:21करें जो कि इससे ज्यादा मोनेटाइज है और
  10. 0:26उस पे अच्छी-अच्छी सीरीज आती हैं और इससे
  11. 0:28भी चैनल को सब्सक्राइब कर लें। तो बिना
  12. 0:31किसी देरी के आइए शुरू करते हैं रोमांचक
  13. 0:33एपिसोड डिस्क्लेमर। यह कहानी केवल मनोरंजन
  14. 0:36के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। इस
  15. 0:39कहानी के सभी पात्र घटनाएं, संवाद एवं
  16. 0:41परिस्थिति काल्पनिक हैं। किसी भी वास्तविक
  17. 0:45व्यक्ति, संस्था, स्थान या घटना से किसी
  18. 0:48भी प्रकार की समानता मात्र संयोग मानी
  19. 0:51जाएगी। तो आइए शुरू करते हैं वेगर हस्बैंड
  20. 0:55की दिलचस्प और रहस्यमय कहानी जिसमें
  21. 0:58एपिसोड
  22. 1:0031 से 50 तक हैं और डिस्क्रिप्शन में
  23. 1:04हमारा दूसरा चैनल है जो कि कुछ दिन बाद उस
  24. 1:08पर स्टोरीज आना शुरू हो जाएंगी तो उस चैनल
  25. 1:11को भी सब्सक्राइब कर लें। तो लेट्स
  26. 1:14स्टार्ट दिस वीडियो।
  27. 1:15कांता प्रसाद के साथ शौर्य होटल पहुंचा।
  28. 1:17होटल राजकमल विशालगढ़ के टॉप होटलों में
  29. 1:20शुमार है। उसकी भव्यता देखते ही बनती है।
  30. 1:23शौर्य होटल की लॉबी से गुजरते हुए उसकी
  31. 1:25भव्यता देखकर प्रभावित था। कांता प्रसाद
  32. 1:28जी को देखकर होटल का स्टाफ अदब से नमस्कार
  33. 1:31कर रहा था। कांता प्रसाद जी के साथ शौर्य
  34. 1:33मैनेजर के रूम में पहुंचा तो उसने देखा कि
  35. 1:36अंदर 25-26 साल की एक खूबसूरत लड़की
  36. 1:38मैनेजर की चेयर पर बैठी हुई थी। शौर्य उस
  37. 1:41लड़की की खूबसूरती देखकर प्रभावित हुए
  38. 1:44बिना रह ना सका। वो लड़की कांता प्रसाद को
  39. 1:47देखकर खड़ी हो गई और बोली नमस्ते अंकल आप
  40. 1:51यहां अचानक कोई खास बात है क्या?
  41. 1:54क्यों? क्या मैं किसी खास काम के बिना
  42. 1:56यहां नहीं आ सकता? कांता प्रसाद जी
  43. 1:58मुस्कुराते हुए बोले। इस पर वो लड़की
  44. 2:01शौर्य और विक्रम को सरसरी तौर पर देखती
  45. 2:03हुई [संगीत] बोली, आ तो सकते हैं पर आते
  46. 2:06नहीं हैं। आज पहली बार देख रही हूं कि आप
  47. 2:09राजा साहब के बिना होटल आए हैं। खैर पहले
  48. 2:12बैठिए फिर बातें करते हैं। कांता प्रसाद
  49. 2:15जी उस लड़की के सामने वाली चेयर पर बैठ
  50. 2:17गए। विक्रम और शौर्य भी साथ की चेयर पर
  51. 2:20बैठ गए। होटल की मैनेजर उस लड़की ने टेबल
  52. 2:22पर रखी बेल बजाई तो झट से एक बेल बॉय कमरे
  53. 2:25में दाखिल हुआ। चार कॉफी भिजवाना। मैनेजर
  54. 2:29ने हुक्म दिया और बेल बॉय ओके मैम बोलकर
  55. 2:32तुरंत वापस चला गया। इसके बाद कांता
  56. 2:35प्रसाद शौर्य की तरफ देखकर बोले इनसे
  57. 2:38मिलो। यह मेनका [संगीत] है इस होटल की
  58. 2:40मैनेजर। और यह है शौर्य राठौड़। कांता
  59. 2:44प्रसाद ने दोनों का परिचय कराया। अपने नाम
  60. 2:47की ही तरह मेनका किसी अप्सरा से कम नहीं
  61. 2:49थी। उसने कांता प्रसाद के मुंह से राठौड़
  62. 2:52शब्द सुनकर ध्यान से शौर्य की तरफ देखा।
  63. 2:55उसने पहले कभी इस नाम को नहीं सुना था।
  64. 2:57तभी शौर्य ने मेनका का अभिवादन करते हुए
  65. 3:00कहा आपसे मिलकर खुशी हुई। मिस मेनका
  66. 3:04मुझे भी। मेनका ने औपचारिक सा जवाब दिया।
  67. 3:08उसे अभी भी समझ नहीं आया था कि कांता
  68. 3:10प्रसाद जी शौर्य को यहां सिर्फ उससे
  69. 3:12मिलाने लाए हैं या कोई और बात है। तभी
  70. 3:15कांता प्रसाद ने कहा अब मुद्दे की बात यह
  71. 3:18है मिस मेनका कि शौर्य आज से इस होटल का
  72. 3:21मालिक है। [संगीत]
  73. 3:23अब से तुम्हें इसे ही रिपोर्ट करना है। यह
  74. 3:26सुनकर मेनका को झटका सा लगा।
  75. 3:29क्या हुआ? तुम्हें देखकर लगता नहीं कि
  76. 3:32तुम्हें इस खबर से कोई खुशी हुई है। कांता
  77. 3:35प्रसाद ने मेनका से पूछा तो उसने मुश्किल
  78. 3:37से जवाब दिया। नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं
  79. 3:41है। हां ऐसा कुछ होने की उम्मीद नहीं थी।
  80. 3:44शायद इसीलिए समझ नहीं आया कि कैसे रिएक्ट
  81. 3:47करूं। और वैसे भी चंद्रभान अंकल ने कभी
  82. 3:50बताया नहीं कि वो यह होटल किसी और को
  83. 3:52सौंपने का सोच रहे हैं। हां, सही बात है।
  84. 3:55पर यह कोई और नहीं राजा साहब के ग्रैंड सन
  85. 3:58हैं। कांता प्रसाद ने अब जाकर शौर्य का
  86. 4:01पूरा परिचय दिया। [संगीत] राठौड़ सरनेम
  87. 4:04सुनकर मेनका को शक तो हुआ था पर वह राजा
  88. 4:07साहब के परिवार में सबको पहले से ही जानती
  89. 4:09थी और उसने आज से पहले शौर्य के बारे में
  90. 4:12कभी नहीं सुना था। लेकिन उनके दोनों
  91. 4:15ग्रैंड सनंस को तो मैं अच्छी तरह से जानती
  92. 4:18हूं। यह कौन से ग्रैंडसन हैं? मेनका की
  93. 4:21बात से लग रहा था कि उसे कांता प्रसाद की
  94. 4:23बात पर भरोसा नहीं हो रहा है। शौर्य को
  95. 4:26मेनका के बात करने के ढंग से लग रहा था कि
  96. 4:29वह जरूर दादा जी के करीब होगी जो इतनी
  97. 4:31फिक्र कर रही है। अरे तुम सूर्यभान जी के
  98. 4:34बारे में जानती हो ना? कांता प्रसाद ने
  99. 4:37मुस्कुरा कर कहा तो मेनका बोली वही ना
  100. 4:40उनके बेटे जिन्हें सालों पहले चंद्रभान
  101. 4:43अंकल ने घर से निकाल दिया था।
  102. 4:46हां वही शौर्य सूर्यभान राठौड़ का बेटा
  103. 4:49है। कांता प्रसाद ने सहजता से कहा अब जाकर
  104. 4:52मेनका को समझ आया कि शौर्य उनका ग्रैंडसन
  105. 4:55कैसे हुआ। दरअसल मेनका को यह नहीं पता था
  106. 4:58कि सूर्यभान राठौड़ का कोई परिवार भी है।
  107. 5:01शौर्य के पहनावे को देखकर मेनका ने यही
  108. 5:03अंदाजा लगाया कि सूर्यभान राठौड़ की
  109. 5:06वित्तीय स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं होगी और
  110. 5:08सोचा कि शायद सूर्यभान राठौड़ की हिम्मत
  111. 5:11नहीं हुई होगी कि राजा साहब के पास आकर
  112. 5:13कुछ सहायता मांगे। इसीलिए उन्होंने अपने
  113. 5:16[संगीत] बेटे को भेज दिया होगा। राजा साहब
  114. 5:19को अपने पोते पर दया आ गई होगी। इसीलिए
  115. 5:21उन्होंने होटल इन्हें दे दिया। एक ही पल
  116. 5:24में मेनका ने अपने मन [संगीत] में अजीब सी
  117. 5:26कहानी बना ली। तभी वेटर कॉफी की ट्रे लिए
  118. 5:29रूम के अंदर आया। मेनका ने सबको कॉफी सर्व
  119. 5:32करते हुए विक्रम की तरफ देखकर पूछा। और
  120. 5:36[संगीत] इनकी तारीफ
  121. 5:38इसे मेरा दोस्त कह लो, पर्सनल असिस्टेंट
  122. 5:40या बॉडीगार्ड कह लो। [संगीत] यह मेरा सब
  123. 5:42कुछ है। कांता प्रसाद कुछ बोलते उससे पहले
  124. 5:46शौर्य ने खुद विक्रम का परिचय दिया और
  125. 5:49इसका नाम विक्रम है। शौर्य का अंदाज देखकर
  126. 5:52मेनका ने मन ही मन सोचा होटल का मालिक बना
  127. 5:55नहीं कि पहले ही पर्सनल असिस्टेंट भी रख
  128. 5:58लिया। कुछ ज्यादा ही तेज चल रहा है यह। पर
  129. 6:01अंकल मैंने तो सुना था कि यह होटल तो
  130. 6:03प्रतीक को मिलने वाला था। उसने कई बार
  131. 6:06मुझसे इस बारे में बात भी की थी। मेनका के
  132. 6:08मन में बहुत देर से बात चल रही थी। इसीलिए
  133. 6:11उसने कांता प्रसाद से पूछ ही लिया। मुझे
  134. 6:13नहीं पता तुमने किससे क्या सुन रखा है। पर
  135. 6:16मैं तुम्हें बता दूं कि आज से और अभी इसी
  136. 6:19वक्त से इस होटल का मालिकाना हक शौर्य को
  137. 6:22मिलता है। और जहां तक ट्रांसफर पेपर्स की
  138. 6:25बात है तो वो फॉर्मेलिटी भी एक-द दिन में
  139. 6:28पूरी हो जाएगी। इतना बोलकर कांता प्रसाद
  140. 6:31ने अपनी बात समाप्त की। तभी शौर्य बोला और
  141. 6:34हां मिसमेन का। मैं आपको बता दूं कि
  142. 6:36विक्रम इसी होटल के रूम नंबर 305 में ठहरा
  143. 6:40हुआ है। तो आप किसी वेटर से कह दीजिएगा कि
  144. 6:42इसका खास ख्याल रखें। वैसे शौर्य को यह
  145. 6:46बात कहने की जरूरत नहीं थी। पर वो मेनका
  146. 6:48को यह जताने के लिए बोला था कि उसे पता चल
  147. 6:51जाए कि अब वो इस होटल का मालिक है। जितनी
  148. 6:54जल्दी वो इस बात को स्वीकार कर ले उसके
  149. 6:57लिए उतना अच्छा है। मेनका चंद्रभान राठौड़
  150. 7:00जी के मित्र रत्नाकर शेट्टी की बेटी थी।
  151. 7:02रत्नाकर शेट्टी की अपनी लॉ फर्म थी।
  152. 7:05चंद्रभान जी का जो भी लीगल मामला होता था
  153. 7:08उसे शेट्टी लॉ फर्म ही देखती आई है। मेनका
  154. 7:11जब होटल मैनेजमेंट कंप्लीट करके आई थी तो
  155. 7:13चंद्रभान जी ने उसे अपने होटल में ही
  156. 7:16मैनेजर बना दिया था। मेनका खूबसूरत है।
  157. 7:19साथ ही उसका कस्टमर रिलेशन भी बढ़िया था।
  158. 7:22उसने जल्दी ही एक मैनेजर के रूप में अपनी
  159. 7:24पहचान बना ली। राठौड़ फैमिली की हर पार्टी
  160. 7:27फंक्शन में मेनका का आना-जाना होता रहता
  161. 7:30था और बचपन से ही वह चंद्रभान जी से मिलती
  162. 7:33आई थी। इसीलिए वह उन्हें अंकल कहकर बुलाती
  163. 7:36थी। इतना ही नहीं मेनका की चंद्रभान जी के
  164. 7:39परिवार के लोगों से भी अच्छी जान पहचान
  165. 7:41थी। [संगीत] वीरभद्र राठौड़ का बड़ा लड़का
  166. 7:43प्रतीक अक्सर मेनका को इंप्रेस करने की
  167. 7:46कोशिश करता रहता था। बॉक्सर अपनी हवा
  168. 7:48बनाने के लिए मेनका के सामने शेखी बघारता
  169. 7:51रहता था कि एक दिन वही इस होटल को कंट्रोल
  170. 7:54करने वाला है। मेनका भी इस बात को सच मान
  171. 7:57बैठी थी। इसीलिए उसने एक तरह से प्रतीक को
  172. 8:00ही होटल का भविष्य मालिक मान रखा था। पर
  173. 8:02आज उसका भ्रम टूट गया। मेनका प्रतीक के
  174. 8:05रहन-सहन और उसके शो ऑफ से प्रभावित थी। पर
  175. 8:09यहां तो उसने शौर्य के कपड़ों को देखकर ही
  176. 8:11उसके बारे में एक अलग धारणा बना ली थी।
  177. 8:14उसे शौर्य से ज्यादा तो उसका असिस्टेंट
  178. 8:16विक्रम स्टाइलिश लगा था। नो डाउट शौर्य
  179. 8:19देखने में किसी हीरो जैसा हैंडसम है। पर
  180. 8:22सिर्फ दिखने से ही तो बात नहीं बनती। हां,
  181. 8:25अब हो सकता है कि जब वो इस होटल का मालिक
  182. 8:27बन गया है तो उसका रहन-सहन बदल जाए। जब
  183. 8:30शौर्य ने हुक्म देते हुए कहा था कि वह
  184. 8:32किसी वेटर से कह दे कि विक्रम का खास
  185. 8:34ध्यान रखे तो मेनका को अच्छा नहीं लगा था।
  186. 8:37पर वह कांता प्रसाद के सामने कुछ बोल भी
  187. 8:39नहीं सकती थी। तभी कांता प्रसाद ने मेनका
  188. 8:42से कहा
  189. 8:44मेनका तुम शौर्य बाबा को भी उनका कमरा
  190. 8:46दिखा दो। इनका कमरा मेनका यह सोच कर हिल
  191. 8:51गई कि क्या अब यह यहीं रहेगा? फिर वो अपने
  192. 8:53आप को थोड़ा शांत करते हुए बोली आप ही
  193. 8:56बताइए कि इनके लिए कौन सा कमरा तैयार करवा
  194. 8:59दें?
  195. 9:00कौन सा का क्या मतलब? वही राजा साहब वाला
  196. 9:02प्रेसिडेंशियल रूम तैयार करवा दूं। कांता
  197. 9:05प्रसाद मेनका को लगभग हुक्म देते हुए बोले
  198. 9:08वो भी महसूस कर रहे थे कि मेनका को शौर्य
  199. 9:10का मालिक बनना कुछ खास पसंद नहीं आया है।
  200. 9:13तभी मेनका प्रतिरोध करती हुई बोली पर
  201. 9:16उसमें तो राजा साहब खुद रहते हैं जब वे
  202. 9:18यहां आते हैं। उनकी चिंता तुम मत करो। अब
  203. 9:22वे शायद ही यहां आएंगे और अगर आएंगे भी तो
  204. 9:25वह शौर्य के साथ रह सकते हैं या फिर तब की
  205. 9:28तब देखेंगे कि क्या करना है। अभी के लिए
  206. 9:31तुम्हें शौर्य बाबा के ऑर्डर्स फॉलो करने
  207. 9:33हैं। इतना बोलकर कांता प्रसाद ने अपनी बात
  208. 9:36खत्म कर दी। एक तरह से मेनका के लिए अब यह
  209. 9:39साफ संदेश था कि इफ और बट का अब कोई मतलब
  210. 9:42नहीं है। फैसला हो चुका है कि शौर्य ही अब
  211. 9:45इस होटल का नया मालिक है। फिर तो कहने के
  212. 9:48लिए कुछ बचा ही नहीं। मेनका खड़ी होती हुई
  213. 9:51बोली, "चलिए सर, मैं आपको आपका रूम दिखा
  214. 9:54दूं।" शौर्य को मेनका के मुंह से सर सुनकर
  215. 9:57थोड़ा अजीब लगा। इतनी देर की बातचीत से
  216. 9:59शौर्य को इतना तो समझ में आ गया था कि
  217. 10:01मेनका उसके दादाजी के किसी करीबी व्यक्ति
  218. 10:03के परिवार से होगी। तभी वह उसके दादाजी को
  219. 10:06अंकल कह रही थी। इतना ही नहीं वो कांता
  220. 10:09प्रसाद को भी अंकल बोल रही थी। शौर्य खड़ा
  221. 10:12होते हुए बोला, मिसमेन का मुझे नहीं लगता
  222. 10:16कि आपकी और हमारी उम्र में ज्यादा अंतर
  223. 10:18है। इसलिए आप मुझे शौर्य कह कर ही बुला
  224. 10:21सकती हैं। इस तरह सर बोलकर मुझे शर्मिंदा
  225. 10:24मत कीजिए। मेनका सोच रही थी कि शौर्य
  226. 10:27ज्यादा पोलाइट होकर उस पर अपना इंप्रेशन
  227. 10:29जमाना चाह रहा है। यही सोचते हुए वो मन ही
  228. 10:32मन बोली। हां पर ठीक भी है। मैं भी क्यों
  229. 10:35इसे सर बोलूं। उसे यह बात बर्दाश्त ही
  230. 10:38नहीं हो रही थी कि कल का एक छोकरा आकर
  231. 10:41उसका बॉस बन गया है। वो भी बिना किसी
  232. 10:43क्वालिटी के। मेनका के साथ कांता प्रसाद,
  233. 10:46शौर्य और विक्रम उस होटल के प्रेसिडेंशियल
  234. 10:49रूम में आ गए जिसमें आज से पहले चंद्रभान
  235. 10:52राठौड़ खुद रहते थे। शौर्य खुद उस रूम को
  236. 10:55देखकर प्रभावित था। उस रूम में मौजूद
  237. 10:58एक-एक [संगीत] चीज बहुत ही कीमती थी। अब
  238. 11:01से यह जगह शौर्य का नया ठिकाना होने वाली
  239. 11:03है। कहां वो अभी तक उस मंदिर के छोटे से
  240. 11:06कमरे में जमीन पर सो रहा था और वहां से
  241. 11:09बाहर निकला भी तो राय साहब के बंगले के
  242. 11:11सर्वेंट क्वार्टर में ठहरा। शौर्य कमरे से
  243. 11:14होते हुए बालकनी में पहुंचा। वहां का
  244. 11:17नजारा देखकर वो मंत्रमुग्ध रह गया। यह
  245. 11:20कमरा होटल के टॉप फ्लोर पर मौजूद था।
  246. 11:22[संगीत] बालकनी से पूरे शहर का खूबसूरत
  247. 11:25नजारा दिखता था।
  248. 11:27पसंद आया कमरा। कांता प्रसाद ने शौर्य से
  249. 11:30पूछा तो वह मुस्कुराते हुए बोला कोई
  250. 11:33बेवकूफ ही होगा जिसे इतना शानदार सूट पसंद
  251. 11:36ना आए। मेनका को समझ नहीं आ रहा था कि
  252. 11:39अचानक राजा साहब ने होटल शौर्य को सौंपने
  253. 11:42का क्यों सोचा। शौर्य को लेकर जो धारणा
  254. 11:44उसके दिल में घर कर गई थी, वह अब जाने का
  255. 11:46नाम ही नहीं ले रही थी। होटल के कमरे को
  256. 11:49देखने के बाद शौर्य और विक्रम कांता
  257. 11:52प्रसाद के साथ नीचे आए। कांता [संगीत]
  258. 11:54प्रसाद शौर्य से विदा लेकर चले गए। शौर्य
  259. 11:57भी वापस जाने की सोच रहा था। वो मेनका की
  260. 11:59तरफ मुड़ा और बोला आपसे मिलकर अच्छा लगा
  261. 12:02मिस [संगीत] मेनका अभी के लिए मुझे भी
  262. 12:05जाना पड़ेगा।
  263. 12:07जाना पड़ेगा इसका क्या मतलब? आप यहां
  264. 12:10ठहरेंगे नहीं। मेनका के मन में सवाल उठ
  265. 12:13खड़ा हुआ। नहीं अभी मेरा यहां रहने का कोई
  266. 12:16प्लान नहीं है। पर हो सकता है जल्दी ही
  267. 12:18यहां आकर रहने लगूं। शौर्य ने शांत स्वर
  268. 12:20में कहा। मिस मेनका आप जाकर अपना काम
  269. 12:23देखिए। मैं विक्रम से थोड़ी बात करके चला
  270. 12:26जाऊंगा। मेनका शौर्य का इशारा समझ गई कि
  271. 12:29वो उसे जाने को कह रहा है। वो खुद भी उसके
  272. 12:31साथ रुकना नहीं चाहती थी। इसीलिए वो वहां
  273. 12:34से चली गई। अब वहां सिर्फ शौर्य और विक्रम
  274. 12:36रह गए। इस समय दोनों होटल की लॉबी में
  275. 12:39खड़े थे। तभी विक्रम शौर्य से बोला, "चलिए
  276. 12:42मैं आपको हिल टॉप हेवन छोड़ आता हूं। उसकी
  277. 12:45कोई जरूरत नहीं है। तुम्हें मुझे छोड़कर
  278. 12:47फिर यहीं वापस आना है। उससे तो अच्छा है
  279. 12:49कि मैं टैक्सी करके चला जाऊं। शौर्य ने
  280. 12:53विक्रम को मना करते हुए कहा, विक्रम समझ
  281. 12:55गया कि जिद करने का कोई फायदा नहीं है
  282. 12:57क्योंकि शौर्य [संगीत] उसकी बात नहीं
  283. 12:59मानेगा। उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
  284. 13:01तो ठीक है। चलिए बाहर तक तो छोड़ ही देता
  285. 13:04हूं। शौर्य विक्रम के साथ होटल से बाहर
  286. 13:07जाने के लिए गेट की तरफ बढ़ा ही था कि तभी
  287. 13:09उसकी नजर होटल के अंदर आते एक आदमी पर
  288. 13:11पड़ी। वो आदमी उसके सामने से उसे अनदेखा
  289. 13:14करते हुए सीधा भीतर की तरफ बढ़ गया। एक पल
  290. 13:17के लिए शौर्य के कदम ठिठक गए। उसके चेहरे
  291. 13:20पर सख्ती आ गई। क्या उसने उस व्यक्ति को
  292. 13:23पहचान लिया था? या फिर यह सिर्फ उसका वहम
  293. 13:26है। शौर्य को उम्मीद नहीं थी कि बलवंत राय
  294. 13:29उसे यहां होटल में नजर आएंगे। बलवंत राय
  295. 13:32के पीछे-पीछे बृजभूषण भी चल रहे थे। एक पल
  296. 13:35के लिए बलवंत राय की नजर शौर्य पर पड़ी।
  297. 13:37लेकिन वो उसे पहचान नहीं सके। दाढ़ी साफ
  298. 13:40करवा लेने के कारण शौर्य को पहचानना बेहद
  299. 13:42मुश्किल था। शौर्य बलवंत राय और बृजभूषण
  300. 13:45को अंदर जाते हुए देखता रह गया। अभी-अभी
  301. 13:48वो होटल से बाहर निकलने के लिए मुड़ा था।
  302. 13:50लेकिन अब अचानक वो वापस पलट गया। विक्रम
  303. 13:54ने उसे फिर से अंदर आते देखा तो पूछ बैठा
  304. 13:56क्या हुआ? कुछ भूल गए क्या? नहीं कुछ नहीं
  305. 14:00भूला हूं। अभी-अभी बलवंत राय अपने बेटे
  306. 14:03बृजभूषण के साथ यहां आए हैं। उनके यहां
  307. 14:06आने का कोई ना कोई कारण तो जरूर होगा।
  308. 14:09जानना पड़ेगा। शौर्य ने धीमे स्वर में
  309. 14:12जवाब दिया तो विक्रम ने पूछा यह बलवंत राय
  310. 14:15कौन है? शिप्रा के दादाजी शौर्य बोला अब
  311. 14:20जाकर बात विक्रम की समझ में आई वो भी
  312. 14:22शौर्य के साथ वापस होटल की लॉबी में आ
  313. 14:24गया। शौर्य अभी बलवंत राय के पीछे जाने की
  314. 14:27सोच ही रहा था कि तभी उसने किसी और को
  315. 14:29देखा और उसकी आंखें सिकुड़ गई। मुख्तार
  316. 14:32अहमद यहां शौर्य ने मुख्तार को भी होटल की
  317. 14:36लॉबी में प्रवेश करते देखा। मुख्तार के
  318. 14:38साथ उसके दो गुगे भी थे।
  319. 14:41जरूर बलवंत राय और मुख्तार के बीच कोई
  320. 14:43मीटिंग फिक्स हुई है। अब शौर्य को सारा
  321. 14:46मामला समझ आ रहा था। शौर्य ने धैर्य से
  322. 14:48मुख्तार के अंदर जाने का इंतजार किया। फिर
  323. 14:51वो उसके पीछे-पीछे चलता हुआ एक प्राइवेट
  324. 14:53कैबिन के बाहर तक पहुंच गया। जब उसने देखा
  325. 14:56कि मुख्तार उस कैबिन के अंदर चला गया है
  326. 14:58तो उसे बाहर ही रुकना पड़ा। अंदर क्या बात
  327. 15:01हो रही होगी वो कैसे पता करें। शौर्य भी
  328. 15:05सोच ही रहा था कि तभी उसे उस कैबिन से एक
  329. 15:07वेटर बाहर आता दिखाई दिया। शौर्य को अभी
  330. 15:10यह भी नहीं पता था कि बलवंत राय और
  331. 15:12बृजभूषण राय भी उसी कैबिन में है या किसी
  332. 15:14और में। शौर्य ने उस वेटर को रोका। सुनो
  333. 15:18वेटर रुक गया। वो हल्की असमंजस की स्थिति
  334. 15:21में शौर्य की तरफ देखने लगा। जी कहिए। इस
  335. 15:25कैबिन में अभी जो शख्स गया है उसके अलावा
  336. 15:27भी कोई और मौजूद है क्या? शौर्य कैबिन की
  337. 15:30तरफ इशारा करते हुए बोला कि इस पर वेटर शक
  338. 15:33भरी नजरों से शौर्य की तरफ देखने लगा।
  339. 15:36उसके चेहरे पर नाखुशी के भाव थे। आप कौन
  340. 15:40हैं और आप यह क्यों जानना चाहते हैं कि इस
  341. 15:42कैबिन में कौन-कौन है? आप जो कोई भी हैं,
  342. 15:45आपके लिए मेरा यही सुझाव है कि आप अभी इस
  343. 15:47होटल से बाहर चले जाएं। नहीं तो मुझे आपकी
  344. 15:49शिकायत मैनेजर से करनी पड़ेगी। शौर्य समझ
  345. 15:52गया कि यह वेटर इतनी आसानी से उसके चंगुल
  346. 15:55में नहीं आने वाला। उसने अपने रुतबे का
  347. 15:57फायदा उठाने का सोचा। यह बात दिमाग में
  348. 16:00आते ही वो सीधा वेटर की आंखों में देखते
  349. 16:01हुए बोला, तो ठीक है, पहले मैनेजर के पास
  350. 16:05ही चलते हैं और देखते हैं कि मैनेजर क्या
  351. 16:07बोलती है। वेटर ने जब शौर्य को मैनेजर के
  352. 16:10पास जाने को तैयार देखा, तो उसके चेहरे पर
  353. 16:12असमंजस के भाव आ गए। उसने उम्मीद नहीं की
  354. 16:15थी कि शौर्य खुद मैनेजर के पास जाने को
  355. 16:17तैयार हो जाएगा। शौर्य मैनेजर के कैबिन की
  356. 16:20तरफ बढ़ गया तो वेटर भी ना चाहते हुए उसके
  357. 16:22पीछे हो लिया। पर शौर्य के एक्शन से उसे
  358. 16:25यह तो समझ आ ही गया कि हो ना हो यह बंदा
  359. 16:28मैनेजर को जानता होगा। शौर्य ज्यादा समय
  360. 16:31नहीं खराब कर सकता था। इसीलिए वह जल्दी से
  361. 16:33मेनका के ऑफिस में पहुंचा। वेटर भी शौर्य
  362. 16:35के पीछे-पीछे ऑफिस के अंदर आ गया। मेनका
  363. 16:38इस समय किसी से फोन पर बात कर रही थी।
  364. 16:41शौर्य को वापस आता देखकर उसने जल्दी से
  365. 16:43फोन काट दिया और शौर्य से पूछा। क्या बात
  366. 16:46है? आप बड़ी जल्दी वापस आ गए। हां, कुछ
  367. 16:50काम आ गया था इसलिए अभी गया ही नहीं। इतना
  368. 16:53बोलकर शौर्य वेटर की तरफ देखता हुआ बोला
  369. 16:56यह वेटर आपसे मेरे बारे में कुछ कहना
  370. 16:58चाहता है। आप एक बार इसे मेरा परिचय करवा
  371. 17:00दो ताकि आगे से किसी गलतफहमी का शिकार ना
  372. 17:03रहे। उस वेटर ने जब शौर्य को मेनका से इस
  373. 17:05तरह बात करते देखा तो उसे समझ नहीं आया कि
  374. 17:08आखिर शख्स कौन है जिससे मेनका मैम भी बहुत
  375. 17:11ही आदर के साथ बात कर रही हैं। मेनका उस
  376. 17:14वेटर की तरफ देखकर बोली क्या बात है राम
  377. 17:17सिंह यह साहब क्या कह रहे हैं? वेटर राम
  378. 17:20सिंह के चेहरे पर थोड़ी हैरानी के भाव थे।
  379. 17:22उसने आज से पहले मेनका को किसी शख्स को
  380. 17:25इतनी इज्जत देते नहीं देखा था। वो यह तो
  381. 17:27समझ गया कि सामने वाला जो भी है उसकी
  382. 17:30शख्सियत कुछ खास है। इसीलिए अब उसे शौर्य
  383. 17:33की शिकायत नहीं करनी चाहिए। नहीं तो उसके
  384. 17:35साथ कुछ गलत हो सकता है। ये सोचकर उसने
  385. 17:38कहा कुछ खास नहीं मैडम। मैं सर को जानता
  386. 17:41नहीं था इसीलिए मैंने सर की बात को कुछ
  387. 17:43खास तवज्जो नहीं दी थी। एक्चुअली मेरी ही
  388. 17:46गलती थी।
  389. 17:48इतना बोलकर राम सिंह शौर्य की तरफ पलटा और
  390. 17:51अदब से बोला सॉरी सर मैं आपको पहचान नहीं
  391. 17:53पाया इसलिए आपकी बात पर ध्यान नहीं दे
  392. 17:55पाया। शौर्य राम सिंह की समझदारी का कायल
  393. 17:59हो गया। उसने बड़ी जल्दी स्थिति को भांप
  394. 18:01लिया था। हालांकि वो अब भी शौर्य के बारे
  395. 18:03में कुछ नहीं जानता था। पर मेनका की बातों
  396. 18:06से उसने अंदाजा लगा लिया था कि शौर्य की
  397. 18:08हैसियत तो कुछ खास है। वहीं मेनका अभी तक
  398. 18:11स्थिति को समझ नहीं पाई थी। पर जब उसने
  399. 18:13राम सिंह को शौर्य से माफी मांगते देखा तो
  400. 18:16उसने कहा राम सिंह ये मिस्टर शौर्य राठौड़
  401. 18:20हैं। इस होटल के नए मालिक। मेनका ने दिल
  402. 18:23पर पत्थर रखकर शौर्य को होटल का मालिक
  403. 18:25बताया था। उसने अपनी खूबसूरत मुस्कान के
  404. 18:28साथ अपने जज्बातों को अच्छे से छुपा लिया।
  405. 18:31उधर जब राम सिंह को यह पता चला कि शौर्य
  406. 18:33इस होटल का नया मालिक है तो उसने ऊपर वाले
  407. 18:35का धन्यवाद किया कि उसने सही समय पर शौर्य
  408. 18:38से माफी मांग ली। इसी बीच मेनका के फोन की
  409. 18:41घंटी बजने लगी। मेनका ने अपने फोन की तरफ
  410. 18:44देखा और फिर वेटर से बोली राम सिंह इन
  411. 18:47साहब का खास ख्याल रखना। इनको शिकायत का
  412. 18:50मौका मत देना। मैं कुछ काम से बाहर जा रही
  413. 18:52हूं लेकिन तुम इनका ध्यान रखना। ठीक है।
  414. 18:56इसके बाद मेनका वहां से बाहर निकल गई।
  415. 18:58शौर्य ने उस ऑफिस को ध्यान से देखा तो उसे
  416. 19:01सामने वॉल पर एक बड़ा टीवी स्क्रीन नजर
  417. 19:03आया। जिस पर होटल के सीसीटीवी की लाइव
  418. 19:06कवरेज आ रही थी। उसने गौर से टीवी स्क्रीन
  419. 19:08की तरफ देखा तो एक स्क्रीन पर उसे
  420. 19:10मुख्तार, बृजभूषण और बलवंत राय एक कैबिन
  421. 19:13में नजर आए। शौर्य उस स्क्रीन के द्वारा
  422. 19:16उन तीनों को देख तो सकता था पर उनकी आवाज
  423. 19:18नहीं सुन सकता था। उसने राम सिंह की तरफ
  424. 19:21देखा। राम सिंह जैसे शौर्य का उसकी तरफ
  425. 19:24देखने का इंतजार ही कर रहा था। वो जल्दी
  426. 19:26से बोला। मुझे माफ कीजिएगा साहब। मैं आपको
  427. 19:30पहचानता नहीं था इसीलिए आपसे गुस्ताखी कर
  428. 19:32बैठा। आप कहिए मेरे लिए क्या हुक्म है?
  429. 19:35शौर्य राम सिंह की समझदारी पर मुस्कुराते
  430. 19:37हुए बोला, राम सिंह मुझे तुमसे कोई शिकायत
  431. 19:40नहीं है। तुम अपनी जगह सही थे। इसीलिए
  432. 19:42तुम्हें मुझसे माफी मांगने की जरूरत नहीं
  433. 19:44है। यह सुनकर राम सिंह के चेहरे पर राहत
  434. 19:47का भाव आया। राम सिंह मुझे तुमसे काम है।
  435. 19:51क्या तुम मेरे लिए वो कर पाओगे? शौर्य अब
  436. 19:53अपने मतलब की बात पर आता हुआ बोला। अब
  437. 19:56जबकि मुझे पता है कि आप इस होटल के मालिक
  438. 19:59हैं तो आपके लिए तो कुछ भी कर सकता हूं
  439. 20:01सर। राम सिंह अदब से बोला। इस पर शौर्य ने
  440. 20:04स्क्रीन की तरफ इशारा करते हुए कहा, राम
  441. 20:07सिंह मुझे उस कैबिन में जो लोग बैठे हैं,
  442. 20:10उनके बीच हो रही बातचीत को सुनना है। क्या
  443. 20:12तुम उसका कोई तरीका ढूंढ सकते हो? [संगीत]
  444. 20:15राम सिंह कुछ पल सोचता रहा। फिर बोला,
  445. 20:18"सर, अभी मैं उनका आर्डर लेकर उस कैबिन
  446. 20:20में दोबारा जाऊंगा।" आप मेरे फोन पर कॉल
  447. 20:23लगा लीजिए। मैं कैबिन में अपना फोन छोड़
  448. 20:26आऊंगा। इस तरह आप उनकी बात सुन सकते हैं।
  449. 20:29राम सिंह की समझदारी पर शौर्य मुस्कुराया
  450. 20:31और बोला, ठीक है राम सिंह तो फिर जल्दी से
  451. 20:34तुम उस कैबिन में जाओ। उससे पहले अपना
  452. 20:37मोबाइल नंबर बताओ। राम सिंह ने शौर्य को
  453. 20:39अपना मोबाइल नंबर बताया। शौर्य ने अपने
  454. 20:42मोबाइल को राम सिंह के मोबाइल से कनेक्ट
  455. 20:44किया। उसके बाद राम सिंह मुख्तार का आर्डर
  456. 20:46लेकर कैबिन की तरफ बढ़ गया। इधर कैबिन के
  457. 20:49अंदर बलवंत राय, बृजभूषण और मुख्तार
  458. 20:52[संगीत] तीनों आमने-सामने बैठे थे।
  459. 20:54मुख्तार के साथ आए हुए उसके दोनों आदमी
  460. 20:57उसके पीछे खड़े थे। थोड़ी देर की खामोशी
  461. 20:59के बाद बलवंत राय ने मुख्तार से पूछा।
  462. 21:03हां मुख्तार भाई बताइए आपने हमें यहां
  463. 21:06मिलने को किस लिए बुलाया?
  464. 21:09अरे बलवंत राय जी जब आए हैं तो बातें तो
  465. 21:14होती ही रहेंगी। पहले पानी वाणी पीजिए।
  466. 21:19इतने बड़े होटल में आए हैं तो यहां के
  467. 21:22व्यंजन का आनंद लें और एक खुशनुमा माहौल
  468. 21:26बनाएं।
  469. 21:28मुख्तार पानी की बोतल खोलकर बलवंत राय और
  470. 21:30बृजभूषण राय के सामने के गिलास में पानी
  471. 21:33डालता हुआ बोला बिल्कुल आप सही कह रहे
  472. 21:36हैं। हम एक ही शहर में रहते हैं। फिर आपस
  473. 21:38में यूं कड़वाहट रखना हम दोनों परिवारों
  474. 21:40के लिए सही नहीं है। बृजभूषण राय हंसने की
  475. 21:44कोशिश करते हुए बोले इस पर मुख्तार भाई
  476. 21:46बृजभूषण राय की बात का समर्थन करते हुए
  477. 21:49बोला आपने एकदम सही कहा बृजभूषण।
  478. 21:53हमें आपस के जो यह छोटे-मोटे गिले शिकवे
  479. 21:56हैं उन्हें खत्म कर लेना चाहिए। और यह
  480. 22:01होगा कैसे? बलवंत राय ने दांत पीसते हुए
  481. 22:04पूछा। मुख्तार ने एक पल बलवंत राय के
  482. 22:07गुस्से से तमतमाए चेहरे की तरफ देखा और
  483. 22:09अपने चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान लाते हुए
  484. 22:12बोला, "ज आमने-सामने बैठे हैं, तो कोई बीच
  485. 22:17का रास्ता निकाल ही लेंगे।"
  486. 22:19बस सही नियत से बात करने की जरूरत है।
  487. 22:25तो फिर क्या रास्ता सोचा है आपने? बलवंत
  488. 22:29राय खुद पर कंट्रोल करने की कोशिश करते
  489. 22:31हुए बोले तो मुख्तार बलवंत राय को धैर्य
  490. 22:33बांधते हुए बोला
  491. 22:36मैं आपकी जल्दीबाजी को समझता हूं। बलवंत
  492. 22:39जी आप बस काम की बात करना चाहते हैं। आपको
  493. 22:45समय खराब करने में कोई इंटरेस्ट नहीं है।
  494. 22:49पर विश्वास कीजिए मुझे भी खाली पीली वक्त
  495. 22:54बर्बाद करने का कोई शौक नहीं है। पर हमारा
  496. 22:58जो यह मामला है, यह इतना उलझा हुआ है कि
  497. 23:02इसे सुलझाने के लिए थोड़ा समय तो खर्च
  498. 23:05करना पड़ेगा। तभी बृजभूषण राय बातचीत की
  499. 23:09कमान अपने हाथ में लेते हुए बोले आप
  500. 23:12पिताजी की बात का बुरा मत मानना मुख्तार
  501. 23:14भाई पिताजी को बस पॉइंट टू पॉइंट बात करना
  502. 23:17पसंद है और इस पर अभी जो हालात हैं उसके
  503. 23:20कारण यह जल्दी से मामला निपटाना चाहते
  504. 23:22हैं। बलवंत राय ने नाखुशी से बृजभूषण राय
  505. 23:26की तरफ देखा पर कुछ बोले नहीं। मुख्तार भी
  506. 23:29बलवंत राय के चेहरे के एक्सप्रेशन को
  507. 23:31अच्छे से समझ रहा था। कोई और समय होता तो
  508. 23:34मुख्तार बलवंत राय को कुछ अलग ही अंदाज
  509. 23:36में समझाता। पर इस समय वो बात को और
  510. 23:39बिगाड़ना नहीं चाहता था। इसीलिए वो खुद को
  511. 23:42संयमित दिखाने की कोशिश करते हुए बोला मैं
  512. 23:45समझता हूं इस समय आपके पारिवारिक रिश्तों
  513. 23:50का भी इम्तिहान चल रहा होगा और मैं यह भी
  514. 23:54मानता हूं कि मैंने शिप्रा पर कुछ ज्यादा
  515. 23:57ही ज्यादती कर दी है। मुझे उसकी शादी एक
  516. 24:00भिखारी से नहीं करवानी चाहिए थी। पर अब जो
  517. 24:04हो चुका है उसे बदल तो नहीं सकते। लेकिन
  518. 24:09हां, मैं इस सबको सुधारने की एक कोशिश
  519. 24:12जरूर करना चाहता हूं।
  520. 24:16अब जब आपने हालात इतने बिगाड़ दिए हैं तो
  521. 24:19उसे सुलझाएंगे कैसे? बोलते हुए बलवंत राय
  522. 24:23की भौए सिकुड़ गई। वो समझ गए थे कि
  523. 24:25मुख्तार भाई अभी फंसा हुआ है। रजत को जेल
  524. 24:28से बाहर लाने का कोई रास्ता नहीं नजर आ
  525. 24:30रहा होगा। इसीलिए वो आपसी समझौते की बात
  526. 24:33करने आया है।
  527. 24:37देखिए मुझे अच्छा नहीं लग रहा है जो मैंने
  528. 24:40शिप्रा के साथ कर दिया है। मैं नहीं चाहता
  529. 24:44उसकी जिंदगी खराब हो जाए। इसीलिए मैंने जो
  530. 24:48ज्यादती कर दी है उसे सुधारना चाहता हूं।
  531. 24:54मुख्तार भाई धीरे-धीरे अपने मतलब की बात
  532. 24:56पर आते हुए बोला। बलवंत राय यह जानने की
  533. 24:59कोशिश कर रहे थे कि आखिर मुख्तार के दिमाग
  534. 25:01में चल क्या रहा है। वो बोले क्या मैं जान
  535. 25:05सकता हूं कि आप कैसे शिप्रा के साथ हुई
  536. 25:07ज्यादती को सुधार सकते हैं। मुख्तार भाई
  537. 25:11अभी कुछ आगे बोलने ही जा रहे थे कि तभी
  538. 25:13कैबिन का दरवाजा खुला और राम सिंह अपने
  539. 25:15हाथ में एक बड़ा सा प्लेट लेकर अंदर आया।
  540. 25:18वो सबके सामने ऑर्डर की हुई डिश सर्व करने
  541. 25:21लगा। राम सिंह का मोबाइल उसके प्लेट के
  542. 25:25नीचे हाथ की तलहटी के बीच दबा हुआ था। डिश
  543. 25:28सर्व करने के बाद कैबिन से बाहर जाते हुए
  544. 25:31राम सिंह ने अपने हाथ में दबे मोबाइल को
  545. 25:33कैबिन के दरवाजे के पास मौजूद एक
  546. 25:35आर्टिफिशियल गुलदान में डाल दिया और कैबिन
  547. 25:38से बाहर चला गया। राम सिंह ने यह काम इतनी
  548. 25:41सफाई से किया कि किसी का भी ध्यान उसकी
  549. 25:44तरफ नहीं गया। इस वक्त मैनेजर के कमरे में
  550. 25:47शौर्य टकटकी लगाए स्क्रीन को ही देख रहा
  551. 25:49था। जिसमें मुख्तार बलवंत राय के साथ बैठा
  552. 25:52हुआ था। शौर्य ने देखा कि राम सिंह ने
  553. 25:54कितनी सफाई से अपना मोबाइल आर्टिफिशियल
  554. 25:57फूलों के गमले में डाल दिया था। शौर्य ने
  555. 26:00अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन किया। उसे उस
  556. 26:02कमरे की आवाज साफ-साफ सुनाई पड़ रही थी।
  557. 26:06हां, आवाज थोड़ी धीमी थी पर स्पष्ट थी।
  558. 26:09तभी मुख्तार की आवाज सुनाई दी। देखिए राय
  559. 26:12साहब जो बीत चुका है उसे तो मैं बदल नहीं
  560. 26:16सकता। पर अगर आप चाहेंगे तो मैं उस भिखारी
  561. 26:20से शिप्रा का तलाक करवाकर रजत से उसकी
  562. 26:24शादी करवा सकता हूं। इससे हमारे बीच की जो
  563. 26:29दुश्मनी है वो भी खत्म हो जाएगी।
  564. 26:34अरे वाह यह तो आपने बहुत अच्छा सोचा
  565. 26:36मुख्तार भाई। मुझे लगता है यही सबके लिए
  566. 26:39ठीक होगा। बृजभूषण राय उत्साहित होते हुए
  567. 26:42बोला मुख्तार भाई के प्रपोजल पर इतनी
  568. 26:45जल्दी प्रतिक्रिया देने के कारण बलवंत राय
  569. 26:48अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए बोले माफ करना
  570. 26:51मुख्तार यह बृजभूषण बड़ा तो हो गया है पर
  571. 26:54कब क्या बोलना चाहिए यह इसे अभी समझ नहीं
  572. 26:57आया। बलवंत राय की बात सुनकर बृजभूषण का
  573. 27:00चेहरा लटक गया। हैरानी मुख्तार भाई के
  574. 27:03चेहरे पर भी नजर आने लगी। पर कोई कुछ
  575. 27:05रिएक्ट करता उससे पहले ही बलवंत राय ने
  576. 27:07अपनी बात को कंटिन्यू किया।
  577. 27:09[संगीत]
  578. 27:10वैसे मैं जान सकता हूं कि आपके इस प्रपोजल
  579. 27:12का कारण क्या है? अचानक आपके इस हृदय
  580. 27:15परिवर्तन की क्या वजह है? यह बात मुख्तार
  581. 27:19भाई को किसी कांटे की तरह चुभ। पर वो अपने
  582. 27:22चेहरे पर खिसियानी हंसी लाते हुए बोला
  583. 27:24[संगीत]
  584. 27:25बच्चों की खुशी के लिए बहुत कुछ करना
  585. 27:29पड़ता है राय साहब अगर आप कारण ही जानना
  586. 27:32चाहते हैं तो सबसे बड़ा कारण यह है कि
  587. 27:36हमारा रजत आपकी पोती से बेइंतहा मोहब्बत
  588. 27:40करता है। इसीलिए बच्चों की खुशी के लिए
  589. 27:44बड़े बुजुर्गों को कई बार अपने कदम पीछे
  590. 27:48लेने पड़ते हैं।
  591. 27:50या कहीं यह कारण तो नहीं है कि आपका भाई
  592. 27:52दोबारा जेल चला गया है और अब उसका इतनी
  593. 27:56जल्दी जेल से बाहर आना मुमकिन नहीं है।
  594. 27:58इसीलिए आप इस समझौते के लिए मजबूर हो गए
  595. 28:01हैं।
  596. 28:02बलवंत राय सरकास्टिक वे में बोले। बात
  597. 28:05कड़वी थी पर सच थी। मुख्तार भाई को उम्मीद
  598. 28:08नहीं थी कि बलवंत राय उसकी मंशा को इतनी
  599. 28:10जल्दी भांप जाएगा और सिर्फ भांपेगा ही
  600. 28:13नहीं बल्कि उसके मुंह पर बोल भी देगा। बात
  601. 28:16किसी नस्तर की तरह मुख्तार भाई को चुभ। पर
  602. 28:19उन्होंने इसे अपने चेहरे पर आने नहीं
  603. 28:22दिया।
  604. 28:23बल्कि वो दोबारा संयद स्वर में बोले।
  605. 28:27मैंने कहा ना हमें कई फैसले अपने बच्चों
  606. 28:32को ध्यान में रखकर लेने पड़ते हैं। अभी की
  607. 28:35जो स्थिति है उसमें आप ऐसा सोच सकते हैं।
  608. 28:40पर मैंने जो प्रपोजल आपके सामने रखा है वो
  609. 28:44मेरे ही नहीं आपकी फैमिली के भी हक में
  610. 28:47है।
  611. 28:49आपके तो हक में है। पर यह हमारी फैमिली के
  612. 28:52हक में कैसे हुआ? बलवंत राय मुख्तार की
  613. 28:55आंखों में झांकते हुए बोले, "मेरा भाई जेल
  614. 28:58में रहेगा, तो क्या आपको लगता है कि आपकी
  615. 29:02फैमिली सेफ रह पाएगी?"
  616. 29:05बोलते हुए मुख्तार भाई का तेवर चेंज हो
  617. 29:07गया। उनके जबड़े की मसल्स कस गई थी।
  618. 29:10मुख्तार भाई के बदलते तेवर को देखकर
  619. 29:13बृजभूषण राय के शरीर में एक बार तो
  620. 29:15झुरझुरी दौड़ गई। पर बलवंत राय के चेहरे
  621. 29:18पर कोई परिवर्तन नहीं आया। शायद उन्हें
  622. 29:21पहले से उम्मीद थी कि मुख्तार भाई का यह
  623. 29:23रूप उन्हें यहां देखने को जरूर मिलेगा।
  624. 29:26बलवंत राय मुख्तार भाई की आंखों में देखते
  625. 29:29हुए बोले
  626. 29:31आखिर आपने अपनी असलियत दिखा ही दी। आप
  627. 29:33शिप्रा का विवाह रजत से इसलिए नहीं कराना
  628. 29:36चाहते कि आपको शिप्रा से हमदर्दी है।
  629. 29:38बल्कि इसीलिए ताकि रजत पर लगे सारे केस
  630. 29:41वापस हो जाएं और आपका भाई जेल से छूट जाए।
  631. 29:46बलवंत राय की बात सुनकर मुख्तार भाई
  632. 29:48मुस्कुराए और बोले मैं समझता हूं आपसे
  633. 29:52मेरा इरादा छिप नहीं सकता। [संगीत] आपने
  634. 29:54जो कहा वो बिल्कुल सच है। पर यह भी सच है
  635. 29:58कि इसमें सिर्फ मेरा ही फायदा नहीं आपका
  636. 30:02भी है। एक तो यह कि शिप्रा पर भिखारी से
  637. 30:06शादी का जो दाग लगा है वो धुल जाएगा। और
  638. 30:11दूसरा आप माने या ना माने हमारे साथ
  639. 30:15रिश्ता जोड़ने के बाद आपकी फैमिली का
  640. 30:18रुतबा और भी बढ़ जाएगा और यह भी सच है कि
  641. 30:23मेरा भाई आपकी पोती को बहुत पसंद करता है।
  642. 30:27आप शायद विश्वास नहीं करेंगे लेकिन जब उसे
  643. 30:31पता चला कि मैंने शिप्रा की शादी एक
  644. 30:34भिखारी से करवा दी तो वो मुझ पर तक भड़क
  645. 30:37उठा था। भरोसा रखिए। वो आपकी पोती को कभी
  646. 30:42किसी चीज की तकलीफ नहीं होने देगा।
  647. 30:46इतना कहकर मुख्तार भाई थोड़ी देर रुके फिर
  648. 30:49बोले
  649. 30:51और अगर आप मेरे ऑफर को रिजेक्ट करते हैं
  650. 30:54तो मैं अपने भाई को आज नहीं तो कल किसी ना
  651. 30:58किसी तरह छुड़ा ही लूंगा। लेकिन तब आपके
  652. 31:01परिवार को हमारी दुश्मनी झेलनी पड़ेगी। अब
  653. 31:05मैं इतना शरीफ तो नहीं हूं कि अपने भाई को
  654. 31:09जेल भिजवाने वालों को यूं ही छोड़ दूं।
  655. 31:12अगर मैंने कुछ नहीं किया तो इतने सालों
  656. 31:15में जो मैंने अपना नाम बनाया है उसकी क्या
  657. 31:19वैल्यू रह जाएगी? सारा शहर मुझ पर हंसेगा।
  658. 31:24आप क्यों मुझसे दुश्मनी मोल लेना चाहते
  659. 31:27हैं? मेरी बात मानिए और मिलकर एक नए
  660. 31:31रिश्ते की शुरुआत कीजिए। इसमें आप भी खुश
  661. 31:35रहेंगे और मैं भी। बलवंत राय समझ रहे थे
  662. 31:39कि यह साफ धमकी है। या तो ऑफर स्वीकार करो
  663. 31:42या दुश्मनी के लिए तैयार रहो। लेकिन वो
  664. 31:45इतनी आसानी से झुकने वाले नहीं थे। दूसरी
  665. 31:48तरफ बृजभूषण राय ऑफर मानने को तैयार बैठे
  666. 31:51थे। पर बलवंत राय के सामने बोल नहीं पा
  667. 31:53रहे थे। तो आपने हमें यहां धमकाने के लिए
  668. 31:57बुलाया है। और वैसे भी हमारा परिवार तो
  669. 32:00पहले से ही आपकी दुश्मनी झेल रहा है। अब
  670. 32:02क्या नया होगा? जितना बुरा करना था वो तो
  671. 32:05आप कर ही चुके। जब इतना झेल लिया तो आगे
  672. 32:09भी झेल लेंगे। कहते हुए बलवंत राय के
  673. 32:12चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। बलवंत राय
  674. 32:14की बात सुनकर मुख्तार ने महसूस किया कि ये
  675. 32:17बूढ़ा कहीं उसके अच्छे खासे प्लान पर पानी
  676. 32:19ना फेर दे। इसीलिए वो बेहद विनम्रता के
  677. 32:22साथ बोला। राय साहब आप मेरी बातों को गलत
  678. 32:27मत समझिए। मैं आपके परिवार से दुश्मनी
  679. 32:31करना नहीं चाहता। मैं दिल से चाहता हूं कि
  680. 32:34हमारे संबंध अच्छे हो जाए। आप बड़े हैं
  681. 32:38इसलिए आपसे समझदारी की उम्मीद करता हूं और
  682. 32:42चाहता हूं कि आप इस रिश्ते के लिए सहमत हो
  683. 32:45जाइए।
  684. 32:47मुख्तार का यह बदला हुआ रूप देखकर बलवंत
  685. 32:49राय को थोड़ी तसल्ली हुई। उनके अहम को भी
  686. 32:52कुछ सुकून मिला। बृजभूषण को भी आश्चर्य
  687. 32:55हुआ कि मुख्तार भाई बलवंत राय के सामने
  688. 32:58इतना कैसे झुक गया?
  689. 33:00ठीक है मुख्तार भाई जब आप इतना जोर देकर
  690. 33:03कह रहे हैं तो मैं इस बारे में अपने
  691. 33:05परिवार के बीच विचार करूंगा और आपको अवगत
  692. 33:08कराऊंगा। [संगीत]
  693. 33:09इतना बड़ा फैसला खड़े-खड़े नहीं लिया
  694. 33:11जाता। एक बार शिप्रा के सामने भी आपके दिए
  695. 33:14हुए प्रस्ताव को रखूंगा क्योंकि यह उसकी
  696. 33:18जिंदगी का फैसला है। इसीलिए उसके विचार
  697. 33:20जानना भी जरूरी है। बलवंत राय ने बात
  698. 33:23समाप्त करने की नियत से कहा। अब उन्हें भी
  699. 33:26इस प्रस्ताव में कोई बुराई नजर नहीं आ रही
  700. 33:28थी। उन्हें लगने लगा था कि अगर सच में रजत
  701. 33:31शिप्रा को इतना चाहता है तो शिप्रा के लिए
  702. 33:33एक भिखारी से बेहतर तो रजत ही रहेगा।
  703. 33:36बलवंत राय की बात सुनकर मुख्तार की उम्मीद
  704. 33:39बंधी। उसे लगता था कि इस रिश्ते में सबसे
  705. 33:42अडियल रवैया बलवंत राय का ही होगा। उसके
  706. 33:46बेटे तो मुख्तार के खौफ से ही मान जाएंगे।
  707. 33:49धन्यवाद राय साहब। आपने इतना आश्वासन
  708. 33:53दिया। यही हमारे लिए काफी है। आपके जवाब
  709. 33:58की प्रतीक्षा रहेगी। मुख्तार भाई ने पूरा
  710. 34:01सम्मान देते हुए कहा। वो समझ गया था कि इस
  711. 34:04बूढ़े पर उसकी धमकी का असर नहीं होगा।
  712. 34:06इसीलिए उसने दूसरा रास्ता चुना। दूसरी ओर
  713. 34:10शौर्य ध्यान से सारी बातें सुन रहा था। और
  714. 34:13विक्रम भी तब तक वहां आ गया था। उससे रहा
  715. 34:15नहीं गया तो उसने पूछा। यह क्या चक्कर है
  716. 34:18बॉस? शौर्य ने जवाब दिया। कुछ नहीं बस ये
  717. 34:22गुंडा अपने भाई को जेल से छुड़ाना चाहता
  718. 34:24है। इसी वजह से यह सारी पतरेबाजी है। उसके
  719. 34:28भाई के खिलाफ बहुत ही मजबूत केस है। जब
  720. 34:30उसे कोई और रास्ता नहीं दिखा तो उसने यह
  721. 34:32तरीका अपनाया। लेकिन मेरे हिसाब से एक बार
  722. 34:35उसका भाई छूट गया तो फिर वो जो चाहेगा
  723. 34:38करेगा। स्क्रीन की ओर देखते हुए शौर्य ने
  724. 34:41बलवंत राय और बृजभूषण को कमरे से बाहर
  725. 34:43जाते देखा। उनके जाते ही मुख्तार के पीछे
  726. 34:46खड़े दोनों आदमियों में से कल्ला आगे आया
  727. 34:49और बोला। क्या बॉस आपने उस बलवंत ताई को
  728. 34:53कुछ ज्यादा ही भाव नहीं दे दिया?
  729. 34:56तुम नहीं समझोगे कल्ला। बकरे को हलाल करने
  730. 35:00से पहले उसकी थोड़ी खातिरदारी की जाती है।
  731. 35:04बस वही किया है। एक बार रजत जेल से छूट
  732. 35:08जाए पर इस बूढ़े की हेकड़ी नहीं निकाली तो
  733. 35:11मेरा नाम भी मुख्तार नहीं। मुख्तार ने कहा
  734. 35:15बोलते समय उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान
  735. 35:18फैल गई। स्क्रीन पर यह देखकर शौर्य ने
  736. 35:20विक्रम से कहा,
  737. 35:23देखा सियार ने अपना असली रंग दिखा दिया
  738. 35:26ना? अब आप क्या करेंगे बॉस? विक्रम ने
  739. 35:29पूछा तो शौर्य स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए
  740. 35:31बोला, करना क्या है? इसे इसके मकसद में
  741. 35:35कामयाब नहीं होने दूंगा। उसने देखा राम
  742. 35:38सिंह बिल लेकर कैबिन में दाखिल हुआ।
  743. 35:40मुख्तार भाई ने बिल चुकाया और कैबिन से
  744. 35:42बाहर चला गया। मुख्तार के जाते ही राम
  745. 35:44सिंह ने अपना मोबाइल उठाया, कॉल
  746. 35:46डिस्कनेक्ट की और फोन जेब में रख लिया।
  747. 35:49शौर्य विक्रम की ओर मुड़कर बोला, चलो अब
  748. 35:51यहां से चलते हैं। अब यहां कुछ नहीं रखा।
  749. 35:54एक बात साफ हो गई है। जब तक बलवंत राय की
  750. 35:57तरफ से कोई जवाब नहीं आता तब तक मुख्तार
  751. 36:00शिप्रा को नुकसान पहुंचाने की नहीं
  752. 36:01सोचेगा। दोनों होटल राजकमल से बाहर निकले।
  753. 36:04शौर्य ने विक्रम को वहीं छोड़ा और टैक्सी
  754. 36:07लेकर शिप्रा के ऑफिस पहुंच गया। उसके मन
  755. 36:10में ख्याल आया कि कहीं शिप्रा घर ना चली
  756. 36:12गई हो। इसीलिए वो पहले पार्किंग में गया।
  757. 36:15वहां शिप्रा की कार खड़ी देख उसने राहत की
  758. 36:17सांस ली और कैंटीन की ओर बढ़ गया। शौर्य
  759. 36:20ने वहीं कैंटीन में शिप्रा का इंतजार करने
  760. 36:22का फैसला किया। उसने कॉफी ऑर्डर की और
  761. 36:25धीरे-धीरे घूंट भरने लगा। साथ ही उसकी
  762. 36:28आंखों में सामने दिन भर की घटनाएं घूम रही
  763. 36:30थी। शायद उसे डर सताने लगा था कि कहीं
  764. 36:33अपने परिवार के दबाव में आकर शिप्रा रजत
  765. 36:35से शादी के लिए तैयार ना हो जाए। शौर्य के
  766. 36:38दिल में शिप्रा के लिए गहरी जगह बन चुकी
  767. 36:41थी और हो भी क्यों ना शिप्रा में वो सारी
  768. 36:44खूबियां थी जो वह अपनी जीवन संगिनी में
  769. 36:47चाहता था। अब वो शिप्रा से अलग होने की
  770. 36:49कल्पना भी नहीं करना चाहता था। खैर शौर्य
  771. 36:53ने ख्यालों से निकलकर कैंटीन में इधर-उधर
  772. 36:55नजर दौड़ाई लेकिन कोई जान पहचान का चेहरा
  773. 36:58दिखाई नहीं दिया। उसे पता था कि गिरधर
  774. 37:00काका भी बलवंत राय के साथ ही होंगे। तभी
  775. 37:03उसे ख्याल आया। मुझे शिप्रा को बता देना
  776. 37:06चाहिए कि मैं लौट आया हूं और कैंटीन में
  777. 37:09उसका इंतजार कर रहा हूं। कहीं ऐसा ना हो
  778. 37:11कि मैं यहां इंतजार करता रह जाऊं और
  779. 37:13शिप्रा गाड़ी लेकर घर चली जाए। शौर्य ने
  780. 37:16मोबाइल निकाला और शिप्रा को कॉल लगाया। दो
  781. 37:18रिंग के बाद ही फोन उठा लिया गया। वो समझ
  782. 37:21नहीं पा रहा था कि शिप्रा को कैसे संबोधित
  783. 37:23करें। तभी दूसरी ओर से आवाज आई।
  784. 37:26हेलो हेलो श्रवण
  785. 37:30मैम मैं ऑफिस आ गया हूं। आप नीचे आइएगा तो
  786. 37:34बता दीजिएगा। मैं कैंटीन में ही बैठा हूं।
  787. 37:37शौर्य हकलाते हुए बोला
  788. 37:39अच्छा हुआ तुमने फोन कर लिया। मैं नीचे ही
  789. 37:41आ रही हूं। तुम पार्किंग में इंतजार करना।
  790. 37:44शौर्य की बात पर शिप्रा ने जल्दी से कहा।
  791. 37:47ओके मैम। इतना कहकर शौर्य ने फोन काट दिया
  792. 37:50और एक लंबी सांस ली। वो सोचने लगा कि आखिर
  793. 37:53उसे क्या हो गया है? शिप्रा से बात करते
  794. 37:55हुए वो इतना नर्वस क्यों हो गया? क्या यह
  795. 37:58उसके दिल में बदलती भावनाओं का असर है?
  796. 38:01इन्हीं ख्यालों में डूबा वो कैंटीन से
  797. 38:03बाहर निकला। बाहर निकलते समय उसकी नजर
  798. 38:06वहां लगे शीशे पर पड़ी। उसने खुद को गौर
  799. 38:09से देखा और मन ही मन सोचा क्या शिप्रा उसे
  800. 38:12बिना दाढ़ी के पहचान पाएगी? कैंटीन से
  801. 38:14निकलकर शौर्य पार्किंग में पहुंचा।
  802. 38:16[संगीत] वहां उसे गणेश मिल गया। उसने
  803. 38:18शौर्य को देखते ही खुशी से कहा अरे श्रवण
  804. 38:21भाई आप आ गए? हां आ तो गया। शौर्य [संगीत]
  805. 38:26ने संक्षिप्त सा जवाब दिया तो गणेश उसके
  806. 38:28पास आते हुए बोला वो कैसे हैं जिनको आप
  807. 38:31देखने गए थे कौन कैसे हैं शौर्य को समझ
  808. 38:34नहीं आया कि गणेश किसके बारे में पूछ रहा
  809. 38:36है इस पर गणेश ने याद दिलाया अरे मैं उनकी
  810. 38:40बात कर रहा हूं जिनको देखने आप हॉस्पिटल
  811. 38:42गए थे आपके कोई रिश्तेदार थे ना शौर्य को
  812. 38:46यह समझ आया तो उसने जल्दी से कहा अच्छा
  813. 38:49हां हां वो ठीक है यह तो अच्छी बात है
  814. 38:52गणेश ने सहमति में सिर हिलाया तभी करीब
  815. 38:5525-26 साल की एक खूबसूरत लड़की पार्किंग
  816. 38:58में आई और बोली, "क्या हुआ गणेश? गाड़ी
  817. 39:01निकालने में इतना टाइम क्यों लग रहा है?
  818. 39:04बस अभी निकालता हूं मैडम। बोलकर गणेश
  819. 39:07शौर्य की ओर मुड़ा। चलता हूं श्रवण भाई,
  820. 39:09कल मिलते हैं। इतने में वो लड़की भी उनके
  821. 39:12पास आ गई। वो नैना बुआ की बेटी राधिका है।
  822. 39:15उसका ऑफिस भी इसी बिल्डिंग में है। राधिका
  823. 39:18के लिए शौर्य का क्लीन शेवन चेहरा नया था।
  824. 39:22उसने गणेश से पूछा, "यह कौन है? पहले तो
  825. 39:25कभी इसे यहां नहीं देखा।" इस पर गणेश ने
  826. 39:28जवाब दिया, "मैम, यह शिप्रा मैम का
  827. 39:30ड्राइवर है।" "अच्छा, शिप्रा ने भी
  828. 39:33ड्राइवर रख लिया और वो भी इतना स्मार्ट।"
  829. 39:36हम राधिका ने तारीफ भरे अंदाज में शौर्य
  830. 39:39को देखते हुए कहा। फिर मुस्कुरा कर बोली,
  831. 39:42"क्यों हीरो, नाम क्या है तुम्हारा?"
  832. 39:45राधिका की अकड़ शौर्य को पसंद नहीं आई।
  833. 39:48लेकिन उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
  834. 39:51तारीफ के लिए शुक्रिया। मेरा नाम श्रवण
  835. 39:53है। नॉट बैड। मानना पड़ेगा। शिप्रा की
  836. 39:57चॉइस अच्छी है। कब से कर रहे हो यह काम?
  837. 40:01जी ज्यादा समय नहीं हुआ है। अभी कुछ दिनों
  838. 40:03से ही शिप्रा मैम के साथ हूं। शौर्य ने
  839. 40:06जवाब दिया। अब तक गणेश राधिका की कार
  840. 40:08निकालने जा चुका था। और तभी शिप्रा भी
  841. 40:11पार्किंग में पहुंची। उसने शौर्य को
  842. 40:13ढूंढने के लिए इधर-उधर नजर दौड़ाई। लेकिन
  843. 40:16वो कहीं दिखाई नहीं दिया। दूर से ही उसकी
  844. 40:18नजर राधिका पर पड़ चुकी थी। इसीलिए वो
  845. 40:21उसके पास नहीं गई। शिप्रा और राधिका के
  846. 40:24संबंध कुछ खास अच्छे नहीं थे। वहीं राधिका
  847. 40:27ने भी शिप्रा को देख लिया और वो खुद ही
  848. 40:29उसके पास पहुंच गई। कैसी हो माय डियर
  849. 40:32सिस्टर? कितनी अजीब बात है कि एक ही
  850. 40:35बिल्डिंग में ऑफिस है। फिर भी मिलना नहीं
  851. 40:37हो पाता।
  852. 40:39मेरी तरह तुम्हारे पास काम की कमी तो है
  853. 40:41नहीं। फिर मिलना कैसे होगा? [संगीत]
  854. 40:44शिप्रा ने व्यंग भरे अंदाज में कहा। इस पर
  855. 40:46राधिका बोली लगता है मैं तुम्हारी शादी
  856. 40:49में नहीं आ पाई इसीलिए नाराज हो क्या करूं
  857. 40:52मैं शहर में थी ही नहीं जब वापस आई तो पता
  858. 40:55चला तुम्हारे साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था
  859. 40:58मुझे बहुत बुरा लगा राधिका के शब्द
  860. 41:00सहानुभूति से भरे थे लेकिन उसके हावभाव उन
  861. 41:03शब्दों के साथ मेल नहीं खा रहे थे शिप्रा
  862. 41:06ने भावहीन चेहरे के साथ कहा थैंक्स फॉर
  863. 41:09योर काइंड वर्ड्स लेकिन मुझे इसकी जरूरत
  864. 41:11नहीं है इस बीच शिप्रा की नजर शौर्य पर भी
  865. 41:14पड़ी मगर वो उसे पहच पहचान नहीं पाई। वो
  866. 41:17अब भी उसे ढूंढती हुई इधर-उधर देख रही थी।
  867. 41:19शौर्य ने भी शिप्रा को देख लिया था। पर वो
  868. 41:22पास नहीं आया क्योंकि वो राधिका से बात कर
  869. 41:25रही थी। राधिका ने कटाक्ष किया। सुना है
  870. 41:28तुम्हारा पति अब तुम्हारे साथ ही रहता है।
  871. 41:31कभी मिलवाओ भी तो अपने पति से। आखिर एक
  872. 41:34बार मिलना तो बनता है। जरूर क्यों नहीं?
  873. 41:37लेकिन उसके लिए तुम्हारे पास समय भी तो
  874. 41:39होना चाहिए। शिप्रा ने उसी अंदाज में जवाब
  875. 41:42दिया जिस अंदाज में राधिका ने सवाल किया
  876. 41:44था। राधिका की बात शिप्रा को अच्छी तो
  877. 41:47नहीं लगी लेकिन वो यह सोचकर हैरान हुई कि
  878. 41:49वो श्रवण से कम मिली और वो उसे स्मार्ट
  879. 41:52कैसे लगा? जब उसने राधिका को शौर्य की तरफ
  880. 41:55देखते पाया तो उसके मन में ख्याल आया।
  881. 41:58क्या राधिका सामने खड़े शख्स को मेरा
  882. 42:00ड्राइवर समझ रही है? वो समझ ही नहीं पाई
  883. 42:03कि ऐसा कैसे हो सकता है। कहां श्रवण और
  884. 42:06कहां यह शख्स दोनों में तो कोई मेल ही
  885. 42:09नहीं। उसने तो आज से पहले इस आदमी को देखा
  886. 42:12भी नहीं था। फिर राधिका उसे उसका ड्राइवर
  887. 42:14क्यों समझ रही है?
  888. 42:17देखो तो सच में बिल्कुल हीरो लग रहा है।
  889. 42:20मुझे तो तुमसे जलन हो रही है। कहते हुए
  890. 42:22राधिका शौर्य को ही देख रही थी। शिप्रा के
  891. 42:25मन में संशय गहराने लगा। कहीं श्रवण ने
  892. 42:28अपनी जगह किसी और को तो नहीं भेज दिया।
  893. 42:30उधर शौर्य ने जब राधिका को अपनी ओर देखते
  894. 42:33पाया और शिप्रा के चेहरे पर उलझन देखी तो
  895. 42:35उसे लगा कि शायद शिप्रा उसे पहचान नहीं
  896. 42:38पाई। वो दोनों से इतनी दूरी पर था कि उनकी
  897. 42:40बातें सुन नहीं सकता था। इसीलिए वो आगे
  898. 42:43बढ़ा और हाथ बढ़ाते हुए बोला मैम गाड़ी की
  899. 42:46चाबी दे दीजिए मैं निकाल लाता हूं। जैसे
  900. 42:49ही शिप्रा ने उसकी आवाज सुनी, एक पल में
  901. 42:52उसके सारे संशय दूर हो गए। वो हक्की बक्की
  902. 42:54सी उसे देखती रह गई। उसने कभी नहीं सोचा
  903. 42:57था कि शौर्य बिना दाढ़ी के ऐसा लगेगा।
  904. 43:00शुक्र था कि उस समय राधिका की नजर शौर्य
  905. 43:03पर थी। इसीलिए वो शिप्रा के चेहरे के भाव
  906. 43:05नहीं देख पाई। शिप्रा ने खुद को संभालते
  907. 43:08हुए पर्स से कार की चाबी निकाली और शौर्य
  908. 43:11की ओर बढ़ा दी। शौर्य चाबी लेकर वहां से
  909. 43:13चला गया। शिप्रा अब भी उसे जाते हुए देखती
  910. 43:16रही। कहां से ढूंढ कर लाई ऐसे ड्राइवर को?
  911. 43:19कमबख्त से नजर ही नहीं हटती। राधिका की
  912. 43:23आवाज से शिप्रा की तंद्रा टूटी। शायद पहली
  913. 43:25बार उसे राधिका की आवाज सुनकर थोड़ा सुकून
  914. 43:28मिला। तो बताओ अपने पति से कब मिलवा रही
  915. 43:31हो? राधिका ने फिर पूछा। उसी वक्त गाड़ी
  916. 43:34का हॉर्न बजा। गणेश राधिका की कार उसके
  917. 43:37सामने लेकर खड़ी कर चुका था और ध्यान
  918. 43:39खींचने के लिए हॉर्न दे रहा था। तुम्हारे
  919. 43:42ड्राइवर को जल्दी है शायद। नहीं तो तुम जब
  920. 43:44चाहो तब मैं तुम्हें अपने पति से मिलवा
  921. 43:46सकती हूं। शिप्रा तंज भरे स्वर में बोली।
  922. 43:49शौर्य का यह रूप देखकर अब उसे भी थोड़ा
  923. 43:52कॉन्फिडेंस आ गया था। जब भी उसके पति की
  924. 43:54बात होती थी तो एक भिखारी के रूप को लेकर
  925. 43:56ही सब उस पर तंज कसते थे। पर अब कोई एक
  926. 43:59बार शौर्य को देख लेगा तो भिखारी तो नहीं
  927. 44:01ही बोलेगा। तभी उसने देखा शौर्य ने उसके
  928. 44:04सामने लाकर कार खड़ी कर दी थी। शिप्रा
  929. 44:07बिना कुछ बोले पीछे जाकर बैठ गई। रह-रह कर
  930. 44:10उसकी नजर शौर्य के चेहरे की तरफ चली जा
  931. 44:12रही थी। शौर्य ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। कुछ
  932. 44:16देर बाद शिप्रा ने ही उस खामोशी को भंग
  933. 44:18किया।
  934. 44:20जिसको तुम हॉस्पिटल देखने गए थे वो अब
  935. 44:22कैसे हैं? चिंता की कोई बात नहीं है। वो
  936. 44:25ठीक है। शौर्य ने जवाब दिया। तभी शिप्रा
  937. 44:29ने उत्सुकता वश पूछ लिया। वैसे तुमने
  938. 44:31बताया नहीं कि वो कौन है तुम्हारे।
  939. 44:34शौर्य कुछ पल सोचता रहा कि उसे क्या बताना
  940. 44:37चाहिए। फिर कुछ निश्चय करके वह बोला वो
  941. 44:40मेरे दादाजी हैं। शिप्रा को सुखद आश्चर्य
  942. 44:43हुआ कि शौर्य के दादाजी जीवित हैं। उसने
  943. 44:46चिंता व्यक्त करते हुए कहा तुमने पहले
  944. 44:48क्यों नहीं बताया कि तुम्हारे दादाजी
  945. 44:50हॉस्पिटल में भर्ती हैं। तुम्हें उनके लिए
  946. 44:52कुछ लेकर जाना चाहिए था ना? नहीं नहीं सब
  947. 44:56ठीक है। आप बताइए आपका दिन कैसा रहा?
  948. 44:59शौर्य सुनिश्चित करना चाहता था कि शिप्रा
  949. 45:01को कोई परेशानी तो नहीं हो रही है। कुछ
  950. 45:04खास नहीं शायद यह समय ही थोड़ा खराब चल
  951. 45:07रहा है। अब देखते हैं हवा कब बदलती है।
  952. 45:10शिप्रा खिड़की से बाहर देखते हुए बोली
  953. 45:12क्या रौनित जनेजा या बलराज खन्ना ने कुछ
  954. 45:15किया है। शौर्य को शक था कि दोनों चुप
  955. 45:18बैठने वाले नहीं हैं। वो शिप्रा को नुकसान
  956. 45:20पहुंचाने के लिए कुछ ना कुछ तो जरूर
  957. 45:22करेंगे। हां, दोनों कोशिश कर रहे हैं कि
  958. 45:25किसी तरह बाकी के दूसरे बड़े स्टोर्स को
  959. 45:27भी कन्विंस कर लें कि वो हमारे प्रोडक्ट
  960. 45:29का बॉयकॉट कर दें। शिप्रा की बातों में
  961. 45:32उसकी परेशानी झलक रही थी। तो शौर्य मुद्दे
  962. 45:35पर आते हुए बोला अगर आप बुरा ना माने तो
  963. 45:38क्यों ना आप एक बार बिग बुल के यहां के
  964. 45:40मैनेजर से मिल लें। पर क्या तुम्हें लगता
  965. 45:43है कि वो मुझसे मिलना पसंद करेंगे? वो तो
  966. 45:45ज्यादातर इंटरनेशनल ब्रांड को ही प्रमोट
  967. 45:47करते हैं। शिप्रा ने अपनी शंका जाहिर की
  968. 45:50तो शौर्य तपाक से बोला नहीं ऐसा नहीं है।
  969. 45:54वो नए ब्रांड को भी चांस देते हैं। बस
  970. 45:56उन्हें संभावना दिखनी चाहिए। मैंने अपने
  971. 45:59दोस्त से बात की थी। उसने अपने मैनेजर से
  972. 46:02पूछा तो वह आपसे मिलने को तैयार हैं। मैं
  973. 46:05कहता हूं एक बार मिल लीजिए। शायद कुछ बात
  974. 46:07बन जाए। वैसे भी इसमें कोई नुकसान तो है
  975. 46:10नहीं। शिप्रा को सुखद आश्चर्य हुआ कि
  976. 46:13श्रवण उसके लिए इतना सोच रहा है। तुमने
  977. 46:16बिग बुल के मैनेजर से हमारी मीटिंग भी
  978. 46:18फिक्स कर दी। शिप्रा हैरान होकर बोली उसके
  979. 46:21लिए बिग बुल के मैनेजर से मीटिंग कर पाना
  980. 46:23कम बड़ी बात नहीं थी। ज्यादा मुश्किल नहीं
  981. 46:26था। मैंने बस अपने दोस्त से बात की थी।
  982. 46:29उसने आसानी से मीटिंग फिक्स कर दी। शौर्य
  983. 46:32ने ऐसे कहा जैसे बहुत छोटी बात हो। शिप्रा
  984. 46:34को यकीन नहीं हो रहा था। वो बोली क्या
  985. 46:37इतनी आसानी से बिगबुल के मैनेजर से मीटिंग
  986. 46:39फिक्स हो सकती है? क्या ये इतना आसान होता
  987. 46:42है? तुम्हारा दोस्त बिगबुल में क्या करता
  988. 46:44है? शौर्य फंस गया। उसे समझ नहीं आया कि
  989. 46:48क्या जवाब दे? वो कुछ सोच कर बोला। वो बिग
  990. 46:51बबुल में सेल्समैन है। शिप्रा के लिए
  991. 46:54शौर्य एक पहेली बन चुका था। कहां तो उसकी
  992. 46:56स्थिति एक भिखारी जैसी थी। लेकिन उसके
  993. 46:59अंदर हिम्मत कूट-कूट कर भरी थी। जब वो
  994. 47:01उसके यहां रहने आया था तब उसने देखा कि वो
  995. 47:04टेनिस खेलने में मास्टर है। वहीं उसे पता
  996. 47:06चला कि वह कॉलेज गया हुआ है। यानी वह पढ़ा
  997. 47:09लिखा भी है। जब रौनी जुनेजा के स्टोर में
  998. 47:11वो फंसी थी तो उसके पीछे एक चट्टान की तरह
  999. 47:13खड़ा रहा। अब जब उसका नया रूप उसके सामने
  1000. 47:16आया है तो देखकर कोई कह नहीं सकता कि यह
  1001. 47:18कोई भिखारी हो सकता है। भिखारी तो छोड़ो।
  1002. 47:21अगर जवान लड़कियां उसे देख लें तो उसकी
  1003. 47:24तरफ खुद को आकर्षित होने से रोक नहीं
  1004. 47:26पाएंगी। और अब तो उसके प्रयास से बिगbul
  1005. 47:29जैसी बड़ी कंपनी के मैनेजर से उसकी मीटिंग
  1006. 47:31फिक्स होने जा रही है। क्या यह संभव है?
  1007. 47:35शिप्रा को विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसा
  1008. 47:37संभव हो सकता है। लेकिन शौर्य का दिल रखने
  1009. 47:40के लिए उसने उससे कहा क्या तुम अपने दोस्त
  1010. 47:43से बात करके यह पता लगा सकते हो कि मीटिंग
  1011. 47:45कब हो सकती है? इस पर शौर्य बड़े आराम से
  1012. 47:48बोला। मैं अभी बिग बॉल के मैनेजर का नंबर
  1013. 47:51आपको फॉरवर्ड करता हूं। आप खुद बात करके
  1014. 47:53टाइम फिक्स कर लीजिए। [संगीत]
  1015. 47:55उसे शिप्रा की स्थिति का आभास हो रहा था
  1016. 47:57कि उसके लिए यह विश्वास करना मुश्किल है
  1017. 47:59कि शौर्य के पास बिगबुल के मैनेजर का नंबर
  1018. 48:02हो सकता है। क्या तुम्हारे पास बिग बुल के
  1019. 48:05मैनेजर का नंबर भी है? शिप्रा ने आश्चर्य
  1020. 48:08से पूछा हां मेरे दोस्त ने ही दिया था। जब
  1021. 48:11आपसे मीटिंग की बात फिक्स हो गई थी तो
  1022. 48:13उसने कहा था कि मैनेजर से बात करके मिलने
  1023. 48:16का टाइम निर्धारित कर लेना। इतना बोलकर
  1024. 48:19शौर्य ने अपने मोबाइल से एक कांटेक्ट
  1025. 48:21इंफॉर्मेशन शिप्रा के मोबाइल पर भेज दी।
  1026. 48:24शिप्रा ने जब नंबर देखा तो वह चौंक गई। वो
  1027. 48:27सचमुच मोहित रैना का ही नंबर था। शिप्रा
  1028. 48:30जानती थी कि इंडिया में बिग बुल का सारा
  1029. 48:32काम मोहित रैना ही देखते हैं। [संगीत]
  1030. 48:34शिप्रा ने सोचा एक बार कॉल लगाने में क्या
  1031. 48:37ही हर्ज है। और उसने कॉल लगा दिया।
  1032. 48:40हेलो कौन बोल रहा है? दूसरी तरफ से एक
  1033. 48:43प्रभावशाली आवाज सुनाई दी।
  1034. 48:46मैं मैं शिप्रा सक्सेना बोल रही हूं जिंक
  1035. 48:48कलेक्शन से। क्या आप मोहित रैना बोल रहे
  1036. 48:51हैं? शिप्रा अटकते हुए बोली। तो मोहित
  1037. 48:54रैना ने पोलाइटली कहा, ओ हां मिस शिप्रा
  1038. 48:57मैं मोहित ही बोल रहा हूं। आपके बारे में
  1039. 48:59मेरे एक स्टाफ से बात हुई थी। अगर आपके
  1040. 49:02पास समय है तो आप कल आकर एक बार मुझसे मिल
  1041. 49:04लीजिए। शिप्रा को विश्वास नहीं हो रहा था
  1042. 49:07कि मोहित रैना खुद सामने से उसे मिलने के
  1043. 49:10लिए कह रहे हैं। वो खुद को नियंत्रित करते
  1044. 49:12हुए बोली हां मिस्टर मोहित आप मिलने का
  1045. 49:15समय बता दीजिए। मैं वक्त पर पहुंच जाऊंगी।
  1046. 49:18मोहित ने कुछ सोच कर कहा ऐसा करते हैं आप
  1047. 49:2112:00 बजे बिग बॉल के स्टोर में ही आ
  1048. 49:22जाइए। जो भी बातें होनी होंगी यहीं हो
  1049. 49:25जाएंगी। यस मिस्टर मोहित मैं कल 12:00 बजे
  1050. 49:28आपसे मिलती हूं। इतना बोलकर शिप्रा ने फोन
  1051. 49:31काट दिया। फिर वो शौर्य से बोली ये तो सच
  1052. 49:35में मोहित रैना का ही नंबर था। तुमने तो
  1053. 49:37कमाल कर दिया श्रवण। शौर्य सामने रोड की
  1054. 49:40तरफ देखते हुए बोला इसमें कमाल करने जैसा
  1055. 49:43कुछ भी नहीं था। यह तो संयोग है कि मेरा
  1056. 49:45दोस्त वहां काम करता है जिसके सहयोग से यह
  1057. 49:48पॉसिबल हो पाया। तुम अपने उस दोस्त को
  1058. 49:51मेरी तरफ से थैंक्स जरूर बोलना। उसने मेरी
  1059. 49:54बहुत बड़ी मदद की है। अगर यह डील हो जाती
  1060. 49:56है तो मेरी कंपनी की वैल्यू रातोंरात बढ़
  1061. 49:59जाएगी। शिप्रा खुश होते हुए बोली जरूर।
  1062. 50:03शौर्य के चेहरे पर एक मंद सी मुस्कान उभर
  1063. 50:05आई। इस समय शौर्य की कार सिटी हॉस्पिटल के
  1064. 50:08सामने से गुजर रही थी। तभी शिप्रा को
  1065. 50:10आइसक्रीम पार्लर दिखाई दिया। वो शौर्य से
  1066. 50:13गाड़ी खड़ी करने को बोली। शौर्य ने
  1067. 50:15सवालिया नजर से उसकी तरफ देखा तो शिप्रा
  1068. 50:17ने दोबारा कहा। पहले गाड़ी तो खड़ी करो।
  1069. 50:21शौर्य ने साइड में गाड़ी खड़ी कर दी। फिर
  1070. 50:23शिप्रा कार का दरवाजा खोलते हुए बोली। चलो
  1071. 50:26आइसक्रीम खाते हैं। तुमने मेरा काम इतना
  1072. 50:28आसान कर दिया है तो मुंह मीठा करना तो
  1073. 50:30बनता है। शौर्य ने उसे स्थिति से अवगत
  1074. 50:33कराते हुए कहा। पर यहां अगर किसी ने आपको
  1075. 50:36मेरे साथ देख लिया तो फालतू बातें
  1076. 50:38बनाएंगे। तुम उसकी चिंता मत करो। पिछले
  1077. 50:41कुछ दिनों में मेरे बारे में इतनी बातें
  1078. 50:43बन चुकी हैं कि अब किसी [संगीत] भी बात का
  1079. 50:45मुझ पर असर होना बंद हो गया है। वैसे भी
  1080. 50:48मेरा नाम पहले से ही तुमसे जुड़ा हुआ है।
  1081. 50:50तो अब इससे ज्यादा क्या ही बातें बनेंगी।
  1082. 50:53[संगीत]
  1083. 50:53शिप्रा की इस बात से ही शौर्य समझ गया कि
  1084. 50:55वो कितना दर्द अपने अंदर समेटे हुए हैं।
  1085. 50:58वो जानता था कि इन कुछ दिनों में शिप्रा
  1086. 51:00के साथ जो कुछ भी हुआ उसमें उसकी कोई गलती
  1087. 51:03ना होने के बावजूद सबकी [संगीत] उंगलियां
  1088. 51:05उसी की तरफ उठी थी। आसमानी सूट की सादगी
  1089. 51:08में भी शिप्रा बहुत प्यारी लग रही थी।
  1090. 51:11शौर्य उसके पीछे-पीछे आइसक्रीम [संगीत]
  1091. 51:13पार्लर तक पहुंचा। हॉस्पिटल के सामने होने
  1092. 51:16के कारण वहां कई यंग ट्रेनी डॉक्टर
  1093. 51:18[संगीत] भी आइसक्रीम खाने आए हुए थे।
  1094. 51:21शौर्य को डर था कि कहीं हॉस्पिटल से
  1095. 51:23निकलकर अगर कांता प्रसाद जी उनसे टकरा गए
  1096. 51:25तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाएगा।
  1097. 51:28शिप्रा ने अपनी पसंद की दो आइसक्रीम ली और
  1098. 51:31एक शौर्य की तरफ बढ़ा दी। शौर्य ने उसके
  1099. 51:34हाथ से आइसक्रीम ली और चुपचाप खाने लगा।
  1100. 51:37शिप्रा उसे देखते हुए बोली। [संगीत]
  1101. 51:40इतने अच्छे भले चेहरे को तुमने दाढ़ी के
  1102. 51:42पीछे क्यों छुपा रखा था? इस पर शौर्य अपने
  1103. 51:45गाल पर हाथ फेरते हुए बोला। बस हालात ही
  1104. 51:48ऐसे बन गए थे कि दुनिया की नजरों में छुपा
  1105. 51:51रहना ही बेहतर था। आज भी इसीलिए दाढ़ी साफ
  1106. 51:54कर ली क्योंकि आज पहली बार मैं अपने
  1107. 51:56दादाजी से मिलने जा रहा था। [संगीत] अगर
  1108. 51:59उनसे देवदास जैसी शक्ल बनाकर मिलता तो
  1109. 52:01अच्छा नहीं लगता। इसीलिए [संगीत] आज शेव
  1110. 52:04कर ली। क्या बात करते हो? आज तुम पहली बार
  1111. 52:08अपने दादा जी से मिले। यह कैसे संभव है?
  1112. 52:10[संगीत]
  1113. 52:11शिप्रा को समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हो
  1114. 52:13सकता है? बात ही कुछ ऐसी है।
  1115. 52:17जब मेरे पिताजी ने अपनी पसंद की लड़की से
  1116. 52:19शादी कर ली थी तो मेरे दादाजी ने उन्हें
  1117. 52:21घर से निकाल दिया था। [संगीत] बरसों बाद
  1118. 52:24जब उन्हें पता चला कि उनके घर से निकाले
  1119. 52:26गए बेटे का भी एक जवान बेटा है तो शायद
  1120. 52:29अपने पोते के लिए उनका सोया हुआ प्यार जाग
  1121. 52:32गया। इसीलिए उनकी इच्छा पूरी करने के लिए
  1122. 52:34[संगीत] मैं उनसे मिलने चला गया था। शौर्य
  1123. 52:37ने सच तो बताया लेकिन वह अपनी पूरी हकीकत
  1124. 52:40नहीं बता सकता था। शिप्रा के मन में शौर्य
  1125. 52:43के लिए सहानुभूति जाग उठी। दुनिया में
  1126. 52:46सबके अपने-अपने दुख होते हैं। यह कहना
  1127. 52:48मुश्किल है कि किसका [संगीत] दुख ज्यादा
  1128. 52:50बड़ा है। शौर्य और शिप्रा दोनों किसी
  1129. 52:53कॉलेज के जोड़े की तरह प्रतीत हो रहे थे।
  1130. 52:56दोनों ने अपनी-अपनी आइसक्रीम खत्म की।
  1131. 52:58शौर्य शिप्रा के साथ अपनी गाड़ी की तरफ
  1132. 53:01बढ़ने ही वाला था कि तभी एक लड़की का शरीर
  1133. 53:04शौर्य से टकरा गया। टक्कर इतनी अचानक थी
  1134. 53:07कि शौर्य आगे की ओर लड़खड़ा गया और जो
  1135. 53:10लड़की उससे टकराई थी वो जमीन पर गिर पड़ी
  1136. 53:13और साथ ही उसके [संगीत] मुंह से एक तेज
  1137. 53:15चीख भी निकल गई। शौर्य ने स्थिति का जायजा
  1138. 53:19लेने के लिए आसपास नजर दौड़ाई तो उसे
  1139. 53:21[संगीत] दो लड़के उस लड़की के सामने खड़े
  1140. 53:23दिखाई दिए। शौर्य तुरंत समझ गया कि उन्हीं
  1141. 53:26दोनों में से किसी ने उसे धक्का दिया है।
  1142. 53:29इस घटना से शिप्रा भी घबरा गई। वो शौर्य
  1143. 53:32के पास आकर बोली तुम्हें चोट तो नहीं आई?
  1144. 53:37मैं तो ठीक हूं पर लगता है उस लड़की को
  1145. 53:39[संगीत] जरूर चोट आई होगी। शौर्य ने उस
  1146. 53:42लड़की की तरफ देखते हुए बोला तो शिप्रा ने
  1147. 53:44वहां के बिगड़ते माहौल को देखकर कहा
  1148. 53:47चलो यहां से चलते हैं। हां चलते हैं पर
  1149. 53:51पहले मामला तो समझ लें कि आखिर हो क्या
  1150. 53:53रहा है यहां। शौर्य अब भी उस लड़की की तरफ
  1151. 53:56देख रहा था। लड़की की पीठ उसकी तरफ
  1152. 53:59[संगीत] थी इसीलिए वो उसका चेहरा नहीं देख
  1153. 54:01पाया था। वो लड़की उठने की कोशिश में जैसे
  1154. 54:04ही शौर्य की तरफ पलटी शौर्य ने उसका चेहरा
  1155. 54:07देखा और हैरानी से उसकी आंखें खुली की
  1156. 54:09खुली रह गई। उसके होठों पर अपने आप उस
  1157. 54:12लड़की का नाम आ गया। मेघा तुम शिप्रा ने
  1158. 54:17भी शौर्य [संगीत] के मुंह से निकला नाम
  1159. 54:19सुन लिया। वो उसकी तरफ देखने लगी। उसके मन
  1160. 54:22में सवाल उठा। क्या श्रवण इस लड़की को
  1161. 54:25जानता है? जब शौर्य ने मेघा को इस हालत
  1162. 54:28में देखा तो वो तुरंत उसके पास गया और
  1163. 54:30सहारा [संगीत] देकर उसे जमीन से खड़ा
  1164. 54:32किया। तभी सामने खड़े दो लड़कों में से एक
  1165. 54:34ने कहा, ओ भाई कौन हो तुम? क्यों हमारे
  1166. 54:38पचड़े में पड़ रहे हो? इसे इसके हाल पर
  1167. 54:41छोड़ो और अपना रास्ता नापो। शौर्य ने उसकी
  1168. 54:44बात को अनसुना कर दिया और मेघा को ऊपर से
  1169. 54:46नीचे [संगीत] तक देखने लगा कि कहीं उसे
  1170. 54:48ज्यादा चोट तो नहीं आई। इतनी भीड़ में एक
  1171. 54:51अनजान आदमी को अपनी मदद करते देख मेघा
  1172. 54:54[संगीत] विनती करते हुए बोली भैया इन
  1173. 54:57बदमाशों से मुझे बचा लो। [संगीत] तुम
  1174. 54:59घबराओ मत यह बताओ कौन है ये? शौर्य गंभीर
  1175. 55:03स्वर में बोला। मेघा ने जैसे ही ये आवाज
  1176. 55:06सुनी वो हैरानी से शौर्य के चेहरे की तरफ
  1177. 55:08[संगीत] देखने लगी। यह चेहरा उसके लिए
  1178. 55:10अनजान था पर आवाज जानी पहचानी। वो दिमाग
  1179. 55:14पर जोर [संगीत] डालने लगी कि आखिर यह कौन
  1180. 55:16है? ऐसा क्यों लग रहा है कि यह आवाज उसने
  1181. 55:19पहले भी सुनी है। लेकिन फिर पहचान क्यों
  1182. 55:21नहीं पा रही? कौन है आप? मेघा असमंजस में
  1183. 55:25बोली तो शौर्य ने मुस्कुराते हुए कहा अरे
  1184. 55:28पगली पहचाना नहीं। मैं तुम्हारा श्रवण
  1185. 55:31भैया हूं। जैसे ही मेघा ने श्रवण का नाम
  1186. 55:34सुना वो उससे लिपट कर रोने लगी और बोली
  1187. 55:37श्रवण भैया आप बचा लीजिए मुझे इन बदमाशों
  1188. 55:40से। उधर शिप्रा ने जब शौर्य के मुंह से
  1189. 55:43मेघा का नाम सुना तो वह भी सोच में पड़
  1190. 55:45गई।
  1191. 55:46आखिर कौन है यह लड़की? श्रवण इसे कैसे
  1192. 55:49जानता है और यह उसकी क्या लगती है? जब
  1193. 55:52उसने मेघा के मुंह से भैया शब्द सुना तो
  1194. 55:54उसके मन में सवाल उठा क्या यह श्रवण की
  1195. 55:56बहन है? ओ भाई अगर ये भाई-बहन का प्रेम
  1196. 56:00मिलन हो गया हो तो अब क्या तुम अपना
  1197. 56:02रास्ता लोगे? पहला बदमाश फिर से बोला।
  1198. 56:05शौर्य ने उसकी बात को एक बार फिर अनसुना
  1199. 56:08कर दिया और मेघा से पूछा। कौन है यह जो
  1200. 56:11तुम्हारे पीछे पड़े हैं? इस पर मेघा डरते
  1201. 56:14हुए उन बदमाशों की तरफ देखते हुए बोली,
  1202. 56:17"मैं इन दोनों को नहीं जानती, पर मुझे
  1203. 56:19लगता है [संगीत] कि विक्की ने ही इन्हें
  1204. 56:21मेरे पीछे भेजा होगा।" यह विक्की कौन है
  1205. 56:24और उसने तुम्हारे पीछे गुंडे क्यों भेजे
  1206. 56:26हैं? शौर्य जानना चाहता था कि आखिर यह सब
  1207. 56:29क्यों हो रहा है। विक्की भी हमारी तरह इसी
  1208. 56:32हॉस्पिटल में इंटर्न है। वो काफी समय से
  1209. 56:35मेरे साथ बदतमीजी कर रहा था। कल मैंने डीन
  1210. 56:38के पास जाकर उसकी शिकायत कर दी थी और आज
  1211. 56:40ये गुंडे मेरे पीछे पड़ गए। मेघा ने सारा
  1212. 56:44हाल शौर्य के सामने बयां कर दिया। अबे यार
  1213. 56:47अब तो बहुत हो गया। पहला बदमाश अपने साथी
  1214. 56:50से बोला फिर शौर्य की तरफ मुखातिब होकर
  1215. 56:52गिर जा। ए हीरो अगर तुम्हारी राम कहानी
  1216. 56:56पूरी हो गई हो तो यहां से चलते बनो। नहीं
  1217. 56:58तो इस छमिया के साथ तुम्हारे साथ वाली
  1218. 57:01छमिया को भी उठाकर ले जाना पड़ेगा। अब तक
  1219. 57:04वहां भीड़ लग चुकी थी। हॉस्पिटल के कई
  1220. 57:06इंटर्न जो शाम के समय घूमने फिरने बाहर आए
  1221. 57:09थे तमाशा देखने के लिए जमा हो गए थे।
  1222. 57:12उनमें से बहुत से मेघा को जानते थे लेकिन
  1223. 57:14उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया। उसी भीड़
  1224. 57:17में से किसी की आवाज आई।
  1225. 57:20अरे [संगीत] यह तो इस इलाके के सबसे बदमाश
  1226. 57:23गुंडे छगन मगन है। शिप्रा भी भीड़ की
  1227. 57:26बातें सुन रही थी। उसने जब छगन मगन का नाम
  1228. 57:29सुना तो उसके मन में शौर्य के लिए चिंता
  1229. 57:31बढ़ गई। लेकिन अब वो यह भी तो नहीं कह
  1230. 57:34सकती थी कि मेघा को छोड़कर यहां से निकलते
  1231. 57:36हैं। तभी शौर्य [संगीत] मेघा को लेकर
  1232. 57:39शिप्रा के पास आया और बोला
  1233. 57:42अब थोड़ी देर से संभालेंगी। मैं अभी इन
  1234. 57:44दोनों को समझाकर आपके पास आता हूं। शिप्रा
  1235. 57:47को समझ नहीं आया कि वो क्या कहे। लेकिन
  1236. 57:50उसने चुपचाप मेघा का हाथ थाम लिया। शौर्य
  1237. 57:53पलटा और छगन मगन के सामने जाकर खड़ा हो
  1238. 57:56गया और उनकी आंखों में आंखें डालकर बोला
  1239. 57:59हां तुम कुछ कह रहे थे। अब बोलो [संगीत]
  1240. 58:02क्या कहना है? शौर्य को पूरे साहस के साथ
  1241. 58:05अपने सामने खड़ा देखकर छगन [संगीत] ने एक
  1242. 58:07बार मगन की तरफ देखा और फिर शौर्य को
  1243. 58:10घूरते हुए बोला लगता है इस एरिया में
  1244. 58:13नए-नए आए हो। इसीलिए मेरे [संगीत] सामने
  1245. 58:15खड़े होकर इतना बोलने की हिम्मत कर पा रहे
  1246. 58:18हो। शौर्य शांत लेकिन सख्त स्वर में बोला।
  1247. 58:22सही कहा। मैं इस एरिया में नया ही हूं। और
  1248. 58:25मैं जानना भी नहीं चाहता कि तुम कौन हो।
  1249. 58:27तुमने सुना होगा उस लड़की ने मुझे भैया
  1250. 58:29कहा। इसका मतलब समझते हो ना? शौर्य की
  1251. 58:34आंखें अब भी छगन पर ही टिकी हुई थी। वो
  1252. 58:36[संगीत] आंखें सिकोड़ कर गुस्से में बोला
  1253. 58:39अगर एक भाई की सटक गई तो अंजाम [संगीत]
  1254. 58:42बहुत बुरा होगा। इसीलिए अब तुम यहां से
  1255. 58:44चले जाओ। नहीं तो फिर इस एरिया में किसी
  1256. 58:47को मुंह दिखाने [संगीत] लायक नहीं रहोगे।
  1257. 58:49छगन ने शौर्य की आंखों के बदलते रंग को
  1258. 58:51देखा तो एक पल के लिए उसके भीतर भी खौफ
  1259. 58:54उतर गया। जिस आत्मविश्वास के साथ शौर्य ने
  1260. 58:57बिना किसी भय के उससे बात की थी। उसने शगन
  1261. 59:00के विश्वास को हिला दिया। [संगीत] लेकिन
  1262. 59:02अगर वो यूं ही खाली हाथ लौट जाता तो उसकी
  1263. 59:05इज्जत मिट्टी में मिल जाती। वो अभी मौके
  1264. 59:08की नजाकत भांपने की कोशिश कर ही रहा था कि
  1265. 59:10उसके साथ खड़ा मगन शौर्य की बात से ताव खा
  1266. 59:13गया और बिना किसी चेतावनी के उस पर छलांग
  1267. 59:16लगा दी। शौर्य ने तुरंत कदम पीछे लिया और
  1268. 59:20जैसे ही मगन उसके करीब पहुंचा, शौर्य ने
  1269. 59:22पूरी ताकत के साथ खुले हाथ से मगन के गाल
  1270. 59:25पर एक थप्पड़ [संगीत] रसीद कर दिया। और
  1271. 59:28अगले ही क्षण मगन हवा में उछलता हुआ पीछे
  1272. 59:31की ओर हवा में उछल गया। उसका शरीर पलटा
  1273. 59:34खाकर जमीन से जा टकराया। वो इस तरह धराशाई
  1274. 59:37हुआ कि दोबारा उठ ही नहीं पाया। छगन समझ
  1275. 59:40ही नहीं पाया कि एक पल में क्या हो गया।
  1276. 59:42शौर्य के एक ही वार से उसे एहसास हो गया
  1277. 59:45कि उसका पाला किसी गीदड़ से नहीं बल्कि
  1278. 59:48बब्बर शेर से पड़ा है। वो मन ही मन शुक्र
  1279. 59:51मना रहा था कि उसने खुद जल्दीबाजी में
  1280. 59:53हमला नहीं किया। नहीं तो मगन की जगह वो
  1281. 59:56जमीन पर पड़ा होता। अचानक भीड़ में
  1282. 59:59सन्नाटा छा गया। शिप्रा आंखें फाड़े शौर्य
  1283. 1:00:02को देख रही थी। उसे यकीन ही नहीं हो रहा
  1284. 1:00:04था कि सचमुच एक ही थप्पड़ में उसने उस
  1285. 1:00:07गुंडे को जमीन पर ला दिया। अभी तक जो मेघा
  1286. 1:00:10डरी सहमी खड़ी थी, उस गुंडे की हालत देखकर
  1287. 1:00:14उसके भीतर भी हिम्मत लौट आई। धीरे-धीरे
  1288. 1:00:16भीड़ में खुसुर-फुसर शुरू हो गई। वहां
  1289. 1:00:19मौजूद लोगों की आंखों में अब शौर्य के लिए
  1290. 1:00:21सम्मान झलकने लगा था। तभी शौर्य फिर से
  1291. 1:00:25छगन के सामने आकर खड़ा हो गया और शांत
  1292. 1:00:27स्वर में बोला तुम्हारा साथी जरा ज्यादा
  1293. 1:00:31ही जल्दी में था लेकिन मुझे लगता है कि
  1294. 1:00:34बात अब तुम्हारी समझ में आ गई होगी अगर
  1295. 1:00:37कोई डाउट हो तो मैं उसे भी दूर कर सकता
  1296. 1:00:39हूं। नहीं नहीं उस्ताद मुझे कोई डाउट नहीं
  1297. 1:00:42है। मैं अभी जाता हूं यहां से। छगन झट से
  1298. 1:00:45बोला। उसे डर था कि अगर वो एक पल और रुका
  1299. 1:00:48तो उसका हाल भी मगन जैसा हो सकता है। तभी
  1300. 1:00:51शौर्य ने उसे रोकते हुए कहा अरे हां जाने
  1301. 1:00:55से पहले यह तो बता दो क्या तुम्हें सच में
  1302. 1:00:57विक्की ने ही भेजा था या तुम किसी और के
  1303. 1:01:00कहने पर मेघा के पीछे आए थे। शौर्य छगन
  1304. 1:01:03मगन के जाने से पहले सच्चाई जान लेना
  1305. 1:01:06चाहता था। इस पर छगन बोला क्या उस्ताद आप
  1306. 1:01:09तो समझदार हैं? अब हर बात आपको पूछनी
  1307. 1:01:12जरूरी थोड़ी ही है। उसने साफ हां या ना
  1308. 1:01:14में जवाब तो नहीं दिया लेकिन उसकी [संगीत]
  1309. 1:01:16बातों से इतना समझ आ गया कि इसके पीछे
  1310. 1:01:19विक्की का ही हाथ है।
  1311. 1:01:22ठीक है तुम जा सकते हो। शौर्य ने कहा
  1312. 1:01:25उस्ताद आपकी इजाजत हो तो मगन को ले जा
  1313. 1:01:28सकता हूं। छगन सहमेश्वर में बोला तो शौर्य
  1314. 1:01:31ने सर्द आवाज में कहा। ले जाओ इसे यहां
  1315. 1:01:35से। और हां दोबारा अगर मैंने सुन भी लिया
  1316. 1:01:38कि तुम मेघा [संगीत] के आसपास भी नजर आए
  1317. 1:01:40तो तुम किसी भी बिल में क्यों ना छुपे हो।
  1318. 1:01:43मैं तुम्हें वहां से भी निकाल लाऊंगा और
  1319. 1:01:45उसके बाद जो तुम्हारा हाल होगा वो तुम सोच
  1320. 1:01:47भी नहीं सकते। शौर्य के बदलते भाव देखकर
  1321. 1:01:51छगन के शरीर में सेन दौड़ गई। वो गंभीरता
  1322. 1:01:54से बोला नहीं उस्ताद मैंने आपको उस्ताद
  1323. 1:01:57बोल दिया तो समझो आज से वो मेरी भी बहन हो
  1324. 1:01:59गई। अगर मैंने कभी किसी और को गलत इरादे
  1325. 1:02:02से उसके आसपास देखा तो मैं खुद अपनी इस
  1326. 1:02:04बहन को बचाने आ जाऊंगा। अब गुंडों की
  1327. 1:02:08बातों का क्या भरोसा? लेकिन जब [संगीत]
  1328. 1:02:09शौर्य ने गौर से उसकी आंखों में देखा तो
  1329. 1:02:12उसकी आंखों में कहीं ना कहीं सच्चाई झलक
  1330. 1:02:14रही थी। [संगीत]
  1331. 1:02:15शौर्य ने शांत स्वर में कहा। अगर ऐसा हुआ
  1332. 1:02:18तो मैं तुम्हारा एहसानमंद रहूंगा। शिप्रा
  1333. 1:02:22बड़े गौर से शौर्य की हर गतिविधि को देख
  1334. 1:02:24रही थी। जिस प्रभावशाली ढंग से वो अपनी
  1335. 1:02:27बात रख रहा था वो किसी का भी विश्वास हिला
  1336. 1:02:30देने के लिए काफी था। शिप्रा सोचने को
  1337. 1:02:32मजबूर थी कि इसकी शख्सियत में ऐसी क्या
  1338. 1:02:34बात है जो इसे इतना खास बनाती है। शिप्रा
  1339. 1:02:38को विश्वास नहीं हो रहा था कि क्या यह वही
  1340. 1:02:41दीनहीन भिखारी है जो कुछ दिनों पहले तक
  1341. 1:02:44दूसरों के दिए टुकड़ों पर जीवन बिता रहा
  1342. 1:02:46था और आज उसकी बातों में अचानक ऐसा ओझ है
  1343. 1:02:49कि कुछ ही पलों में एक गुंडा उसे अपना
  1344. 1:02:52उस्ताद मानने लगा। शिप्रा सोचने को मजबूर
  1345. 1:02:55थी कि इसकी शख्सियत में कुछ तो ऐसी बात है
  1346. 1:02:58जो इसे खास बनाती है। [संगीत] जब शौर्य
  1347. 1:03:00पलटा तो उसने शिप्रा को अपनी तरफ देखते
  1348. 1:03:03पाया। वो उसकी नजरों का सामना नहीं कर सका
  1349. 1:03:06और मेघा की ओर देखने लगा। वो समझ गया कि
  1350. 1:03:09आज उससे बहुत सारे सवाल जवाब होने वाले
  1351. 1:03:11हैं। वो खुद को तैयार करने लगा। लेकिन
  1352. 1:03:13उससे पहले उसे मेघा का मामला निपटाना था।
  1353. 1:03:16छगन अपने साथी मगन को लेकर वहां से चला
  1354. 1:03:19गया। मगन की हालत काफी खराब थी। लेकिन छगन
  1355. 1:03:22के थोड़े से प्रयास से वो होश में आ गया।
  1356. 1:03:25हालत भाप कर उससे ज्यादा चू चपड़ नहीं की
  1357. 1:03:28और चुपचाप वहां से निकल गया। शौर्य मेघा
  1358. 1:03:31के पास पहुंचा। [संगीत] छगन मगन के जाते
  1359. 1:03:33ही एक लड़की भी भागती हुई मेघा के पास आई।
  1360. 1:03:36वो मेघा की रूम पार्टनर है। उसका नाम जीनत
  1361. 1:03:40है। मेघा उसी के साथ हॉस्टल से बाहर आई थी
  1362. 1:03:42जब छगन और मगन उसके पीछे पड़ गए थे। शौर्य
  1363. 1:03:46के पास पहुंचते ही मेघा बोली थैंक्स भैया।
  1364. 1:03:49आज आपने सही समय पर बचा लिया। भैया भी
  1365. 1:03:52कहती है और थैंक्स भी बोलती हो। शौर्य ने
  1366. 1:03:55उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा।
  1367. 1:03:58फिर वो सीधे मुद्दे पर आया। कौन है यह
  1368. 1:04:00विक्की जिसने तुम्हें परेशान कर रखा है?
  1369. 1:04:04लेकिन मेघा ने कोई जवाब नहीं दिया। उसे डर
  1370. 1:04:06था क्या शौर्य का विक्की से उलझना ठीक
  1371. 1:04:08होगा? पहले ही वो उसके लिए इतना कर चुका
  1372. 1:04:11है। कहीं उसके कारण शौर्य की विक्की से
  1373. 1:04:13दुश्मनी ना हो जाए। विक्की बड़े घर का
  1374. 1:04:16बिगड़ा हुआ लड़का है। उसका कुछ हो ना हो
  1375. 1:04:18पर कहीं शौर्य ही मुश्किल में ना पड़ जाए।
  1376. 1:04:21उसने सिर्फ शिकायत की थी और विक्की ने
  1377. 1:04:23उसके पीछे गुंडे लगा दिए। अगर उसे पता चला
  1378. 1:04:26कि कोई उसके समर्थन में खड़ा हो गया है तो
  1379. 1:04:28वह कहीं श्रवण के लिए और बड़ी मुसीबत ना
  1380. 1:04:31खड़ी कर दे। यह सोचकर मेघा चुप रही। शौर्य
  1381. 1:04:35मेघा के हावभाव से ही उसकी मनस्थिति समझ
  1382. 1:04:38गया। जब मेघा ने कुछ नहीं कहा तो जीनत की
  1383. 1:04:41तरफ मुड़ा और पूछा।
  1384. 1:04:43तुम मेघा के रूम पार्टनर हो ना? जीनत ने
  1385. 1:04:46सहमति में सिर हिला दिया। [संगीत] तुम्हें
  1386. 1:04:48पता है यह विक्की कौन है? शौर्य का सवाल
  1387. 1:04:51सुनकर जीनत असमंजस में पड़ गई। क्या उसे
  1388. 1:04:54विक्की के बारे में बताना चाहिए या नहीं?
  1389. 1:04:56[गला साफ़ करने की आवाज़]
  1390. 1:04:56लेकिन अभी-अभी उसने शौर्य का साहस और ताकत
  1391. 1:04:59देखी थी। उसे लगा अगर विक्की को कोई सबक
  1392. 1:05:02सिखा सकता है तो वह सिर्फ शौर्य ही है।
  1393. 1:05:05विशालगढ़ के रसूखदार परिवार से होने के
  1394. 1:05:07कारण कॉलेज के डीन ने भी उसके खिलाफ कोई
  1395. 1:05:10कार्यवाही नहीं की थी। अब जीनत को उम्मीद
  1396. 1:05:13थी शायद शौर्य ही उसकी अकड़ ढीली कर सके।
  1397. 1:05:16इसीलिए उसने बोलना शुरू किया। वो विशालगढ़
  1398. 1:05:19के बहुत ही रसूखदार परिवार से संबंध रखता
  1399. 1:05:21है। इसीलिए कॉलेज प्रशासन भी उसके ऊपर कोई
  1400. 1:05:24कार्यवाही करने से बचता है। शौर्य ने सोचा
  1401. 1:05:27विशालगढ़ में उसके दादाजी से ज्यादा
  1402. 1:05:29रसूखदार कौन हो सकता है। उसने मन ही मन इस
  1403. 1:05:33विक्की को सबक सिखाने का निश्चय किया।
  1404. 1:05:35लेकिन अभी वो शिप्रा के सामने ज्यादा कुछ
  1405. 1:05:37बोल नहीं सकता था। वो सोच ही रहा था कि अब
  1406. 1:05:40उसे क्या करना चाहिए कि तभी जीनत शौर्य से
  1407. 1:05:43पूछ बैठी आप मेघा के वही श्रवण भैया हैं
  1408. 1:05:47ना जिन्होंने कुछ दिन पहले उसकी कॉलेज फीस
  1409. 1:05:49के ₹ लाख भरे थे। मेघा आपके बारे में बहुत
  1410. 1:05:53बात करती है। जीनत शौर्य से इतनी ज्यादा
  1411. 1:05:56इंप्रेस थी कि वो चुप नहीं रह पाई और वो
  1412. 1:05:58सवाल पूछ बैठी जिसका जवाब शौर्य किसी भी
  1413. 1:06:01हाल में शिप्रा के सामने नहीं देना चाहता
  1414. 1:06:03था। लेकिन तीर कमान से छूट चुका था।
  1415. 1:06:07शिप्रा ने यह सुना तो वह बड़ी-बड़ी आंखों
  1416. 1:06:09से शौर्य को देखने लगी। उसे समझ नहीं आया
  1417. 1:06:12कि शौर्य की असलियत क्या है। जो खुद भीख
  1418. 1:06:15से अपना गुजारा कर रहा था वो ₹ लाख किसी
  1419. 1:06:18को कहां से दे सकता है। शौर्य को तो समझ
  1420. 1:06:21ही नहीं आ रहा था कि उसे अपनी किस्मत पर
  1421. 1:06:23खुश होना चाहिए या कोसना चाहिए। जिन
  1422. 1:06:26सवालों से वह बचना चाहता था वही सवाल उसके
  1423. 1:06:29सामने आ रहे थे। उसने शिप्रा को अपनी तरफ
  1424. 1:06:32देखते पाया तो उसने जल्दी से कहा।
  1425. 1:06:35क्या कहा? ₹6 लाख और मैं तो सपने में भी
  1426. 1:06:3910-50 से ऊपर नहीं देखता। तुम्हें कोई
  1427. 1:06:42गलतफहमी हुई है। वो मैं नहीं हूं। इस बारे
  1428. 1:06:46में तुम्हें मेघा ही बता सकती है। मेघा
  1429. 1:06:49शौर्य की स्थिति समझ रही थी। उसे याद था
  1430. 1:06:52जब शौर्य ने उसकी फीस के लिए पैसे दिए थे,
  1431. 1:06:54तब वह अपनी असली पहचान दुनिया से छुपाना
  1432. 1:06:56चाहता था। अगर वह जीनत के सामने मान लेती
  1433. 1:06:59कि यही उसके श्रवण भैया हैं, तो शायद उनकी
  1434. 1:07:02हकीकत उजागर हो जाती। और हो सकता है श्रवण
  1435. 1:07:05भैया अभी नहीं चाहते कि सच्चाई सामने आए।
  1436. 1:07:08तभी तो जीनत की बात से इंकार कर रहे हैं।
  1437. 1:07:11यह विचार आते ही मेघा तुरंत बोली क्या यार
  1438. 1:07:14तुम कुछ भी बोलने लगती हो। यह वो नहीं है।
  1439. 1:07:19पर तुमने ही तो कहा था कि तुम्हारे श्रवण
  1440. 1:07:21भैया ने मदद की थी। जीनत अपनी बात पर अड़ी
  1441. 1:07:24रही। तो मेघा ने जोर देकर कहा अरे बाबा
  1442. 1:07:27मैंने यह कहा था कि मेरे एक भाई ने मदद की
  1443. 1:07:30थी। पर यह वो नहीं है। जीनत को समझ नहीं
  1444. 1:07:33आया कि मेघा अपनी ही बात से क्यों मुकर
  1445. 1:07:35रही है। लेकिन उसने अभी इस पर बहस करना
  1446. 1:07:38ठीक नहीं समझा। उसने मन ही मन तय किया कि
  1447. 1:07:41वो इस बारे में मेघा से अकेले में बात
  1448. 1:07:43करेगी। उधर शौर्य सोच रहा था इस समय
  1449. 1:07:46शिप्रा को घर कैसे भेजें? वो मेघा के
  1450. 1:07:48हॉस्पिटल जाकर उसके डीन से बात करना चाहता
  1451. 1:07:51था और विक्की को भी सबक सिखाने का इरादा
  1452. 1:07:53रखता था। वो शिप्रा के पास गया और बोला
  1453. 1:07:57मैम क्या आप खुद घर चली जाएंगी? मैं सोच
  1454. 1:07:59रहा हूं एक बार मेघा के हॉस्पिटल जाकर
  1455. 1:08:02उसके डीन से मिलूं। तुम अकेले क्यों
  1456. 1:08:04जाओगे? चलो मैं भी साथ चलती हूं। मेरे
  1457. 1:08:08जानने वाले भी इस हॉस्पिटल में हैं। कहो
  1458. 1:08:10तो उनसे भी बात कर सकती हूं। शिप्रा ने
  1459. 1:08:13दृढ़ स्वर में कहा। वो इस मुश्किल घड़ी
  1460. 1:08:15में शौर्य को अकेला छोड़ने के लिए तैयार
  1461. 1:08:18नहीं थी। लेकिन यही तो शौर्य नहीं चाहता
  1462. 1:08:20था। शिप्रा उसके साथ रहती तो वो खुलकर कुछ
  1463. 1:08:23भी नहीं कर पाता। ऊपर से सबसे बड़ी चिंता
  1464. 1:08:26यह थी कि उसके दादाजी भी उसी हॉस्पिटल में
  1465. 1:08:29थे। अगर कांता प्रसाद जी ने उसे वहां देख
  1466. 1:08:31लिया तो शिप्रा के सामने उसका राज खुलना
  1467. 1:08:34तय था। वो भी यह सोच ही रहा था कि मेघा
  1468. 1:08:36बोल पड़ी। अरे नहीं भैया आप रहने दीजिए।
  1469. 1:08:39मैं जीनत के साथ चली जाऊंगी। सामने ही तो
  1470. 1:08:42हॉस्पिटल है और डीन से मिलना होगा तो आप
  1471. 1:08:44किसी और दिन आ जाइएगा। अभी वह आपसे
  1472. 1:08:47मिलेंगे भी नहीं। शौर्य को उसकी बात ठीक
  1473. 1:08:50लगी। टकराव टालना ही समझदारी होगी। वो
  1474. 1:08:53बोला ठीक है तुम जाओ मैं फिर कभी मिल
  1475. 1:08:57लूंगा। फिर वो शिप्रा की तरफ मुड़ा और
  1476. 1:08:59बोला चलिए मैम हम भी घर चलते हैं। दोनों
  1477. 1:09:03कार में जाकर बैठ गए। तभी पीछे से एक
  1478. 1:09:06दूसरी कार आकर रुकी। उसके अंदर बैठा कोई
  1479. 1:09:08व्यक्ति बड़े गौर से शौर्य को देख रहा था।
  1480. 1:09:11कार के शीशे के पीछे छिपी वो निगाहें जैसे
  1481. 1:09:14उसे पहचानती हो। जैसे वो इंतजार कर रही हो
  1482. 1:09:17सही वक्त का। शौर्य को भी हल्की सी बेचैनी
  1483. 1:09:21महसूस हुई। पर जब तक वो पलट कर देखता कार
  1484. 1:09:24आगे बढ़ चुकी थी। खैर शौर्य और शिप्रा
  1485. 1:09:27गाड़ी में बैठे और चले गए। उनके जाने के
  1486. 1:09:30बाद जीनत मेघा से शिकायती लहजे में बोली
  1487. 1:09:34तुमने मुझसे झूठ क्यों बोला था कि
  1488. 1:09:35तुम्हारे श्रवण भैया ने ही तुम्हारी फीस
  1489. 1:09:37भरी थी। हां, मैंने तुम्हें बताया पर
  1490. 1:09:40तुम्हें उनसे पूछने की क्या जरूरत थी?
  1491. 1:09:43मेघा ने उल्टा जीनत से ही प्रश्न कर दिया।
  1492. 1:09:45अरे पूछ लिया तो इतनी बड़ी क्या बात हो
  1493. 1:09:47गई? जीनत उलझन भरे स्वर में बोली। तो मेघा
  1494. 1:09:50ने जीनत को समझाने की कोशिश की।
  1495. 1:09:54उनके लिए यह बड़ी बात है। वो नहीं चाहते
  1496. 1:09:56कि उनकी असलियत बाहर आए और तुमने सबके
  1497. 1:09:58सामने उनसे पूछ लिया तो उन्हें इंकार करना
  1498. 1:10:00ही पड़ा। अरे यार पर इसमें छुपाने की क्या
  1499. 1:10:04बात है? यह तो गर्व की बात है कि उन्होंने
  1500. 1:10:06तुम्हारी इतनी बड़ी मदद की। इसमें छुपाने
  1501. 1:10:09जैसा तो कुछ है ही नहीं। अभी भी जीनत अपनी
  1502. 1:10:11बात पर अड़ी हुई थी। तो मेघा ने जीनत को
  1503. 1:10:14समझाने की कोशिश की। देखो हमारे श्रवण
  1504. 1:10:17भैया इस तरह के आदमी नहीं हैं कि किसी की
  1505. 1:10:20मदद करके ढिंढोरा पीटते रहे कि देखो हमने
  1506. 1:10:22कितना बड़ा काम कर दिया। उनकी जिंदगी में
  1507. 1:10:25कुछ बातें ऐसी हैं जो मुझे भी समझ नहीं
  1508. 1:10:27आती। उन्हें पैसों की कोई दिक्कत नहीं थी।
  1509. 1:10:30[संगीत] फिर भी मंदिर में अगर कोई खाने को
  1510. 1:10:32दे देता था तो वो उसी से गुजारा करते थे।
  1511. 1:10:35कुछ दिनों पहले तक तो वो बोलते भी नहीं
  1512. 1:10:37थे। सभी उन्हें गूंगा समझते थे। मैंने खुद
  1513. 1:10:40जब उन्हें बोलते सुना तो हैरान रह गई थी।
  1514. 1:10:42शायद उनकी जिंदगी से जुड़ा कोई ऐसा राज है
  1515. 1:10:45जिसे वह लोगों के सामने नहीं लाना चाहते।
  1516. 1:10:48जीनत ने शिप्रा के बारे में पूछा। और वो
  1517. 1:10:52लड़की कौन थी जो उनके साथ थी? इस पर मेघा
  1518. 1:10:55कुछ सोचते हुए बोली निश्चित रूप से तो
  1519. 1:10:58नहीं कह सकती पर शायद वही लड़की है जिससे
  1520. 1:11:00उनकी शादी हुई है। जीनत ने अपना जासूसी
  1521. 1:11:03दिमाग लगाया और बोली तुम तो कह रही थी कि
  1522. 1:11:07वो भिखारी की जिंदगी जी रहे थे। फिर किस
  1523. 1:11:09लड़की ने उनसे शादी कर ली? वही तो मैं खुद
  1524. 1:11:13उन्हें पहचान नहीं पाई। पहले उनकी दाढ़ी
  1525. 1:11:15इतनी बड़ी और बेतरतीब थी कि मैं कल्पना भी
  1526. 1:11:18नहीं कर सकती थी कि दाढ़ी हटने के बाद वो
  1527. 1:11:20इतने हैंडसम नजर आएंगे। मेघा अभी भी शौर्य
  1528. 1:11:23के इस कायापलट से हैरान थी। फिर उसने आगे
  1529. 1:11:26कहा और जहां तक शादी की बात है उस लड़की
  1530. 1:11:29ने उनसे शादी अपनी मर्जी से नहीं की थी
  1531. 1:11:31बल्कि एक बदमाश ने जबरदस्ती शादी करवाई
  1532. 1:11:34थी। जीना जैसे ही यह सुनती है, हैरानी से
  1533. 1:11:38बोल उठती है। तो इसका मतलब यह वही भिखारी
  1534. 1:11:41है जिसकी शादी की चर्चा पूरे विशालगढ़ में
  1535. 1:11:44वायरल है। यानी वो लड़की शिप्रा राय थी।
  1536. 1:11:47उसकी खूबसूरती की चर्चा भी तो खूब वायरल
  1537. 1:11:50हो रही है। यह मेघा के लिए नई बात थी
  1538. 1:11:53क्योंकि उसे शौर्य से जुड़ी किसी खबर की
  1539. 1:11:55जानकारी नहीं थी। उसने उत्सुकता से पूछा।
  1540. 1:11:59ये तुम किस शादी की बात कर रही हो जो पूरे
  1541. 1:12:02विशालगढ़ में वायरल है? अरे यार तुम तो हो
  1542. 1:12:05ही कुएं की मेंढक। बाहरी दुनिया में क्या
  1543. 1:12:08चल रहा है तुम्हें कुछ पता ही नहीं। पूरे
  1544. 1:12:10विशालगढ़ में खबर वायरल है कि एक बेहद
  1545. 1:12:13खूबसूरत लड़की की शादी एक भिखारी से हुई
  1546. 1:12:15है। जीनत की बात सुनकर मेघा हैरान रह गई।
  1547. 1:12:19लेकिन इस वक्त सिर्फ मेघा ही नहीं दो और
  1548. 1:12:21आंखें भी हैरान थी जो पास खड़ी कार के
  1549. 1:12:24अंदर से उनकी हर बात ध्यान से सुन रही थी।
  1550. 1:12:27कार का एक शीशा थोड़ा सा नीचे था। वो शख्स
  1551. 1:12:30कोई और नहीं कांता प्रसाद थे। कांता
  1552. 1:12:33प्रसाद भी शौर्य के साथ शिप्रा को देखकर
  1553. 1:12:36चौंक गए थे। इस वायरल खबर के बारे में
  1554. 1:12:39उन्हें भी पता था जिसकी चर्चा यह दोनों
  1555. 1:12:41लड़कियां कर रही थी। लेकिन उन्हें यह नहीं
  1556. 1:12:44मालूम था कि उस खबर में जिस लड़के का
  1557. 1:12:46जिक्र हुआ है वो शौर्य ही है। जैसे ही
  1558. 1:12:49उन्हें यह सच्चाई समझ आई, उनके मन में
  1559. 1:12:51हलचल मच गई। उन्होंने मन ही मन सोचा। यह
  1560. 1:12:55बात राजा साहब तक पहुंचानी ही चाहिए। इधर
  1561. 1:12:58अब तक मेघा के साथ कुछ और इंटर्न डॉक्टर
  1562. 1:13:00भी वहां आ चुके थे। मेघा उनके साथ हॉस्टल
  1563. 1:13:03की ओर जाने ही वाली थी कि तभी पीछे से
  1564. 1:13:06आवाज आई। सुनो लड़की मेघा ने पलट कर देखा।
  1565. 1:13:10कार के अंदर से कांता प्रसाद उसे इशारे से
  1566. 1:13:13बुला रहे थे। जी मेघा ने हल्के सहमे स्वर
  1567. 1:13:17में कहा। जरा एक मिनट इधर आना। कांता
  1568. 1:13:20प्रसाद की आवाज में एक अजीब सी गंभीरता
  1569. 1:13:23थी। मेघा कांता प्रसाद के बारे में जानती
  1570. 1:13:26थी। इसीलिए वह मना नहीं कर सकी। वो
  1571. 1:13:28डरते-डरते उनके पास गई। उसके मन में डर था
  1572. 1:13:31कहीं विक्की ने अपने सोर्स का फायदा उठाकर
  1573. 1:13:34उसकी शिकायत तो नहीं कर दी। वो भी तो
  1574. 1:13:36विशालगढ़ के रईस परिवार से आता है। उसके
  1575. 1:13:39लिए [संगीत] क्या ही मुश्किल होगा। मेघा
  1576. 1:13:41के बाकी दोस्त थोड़ी दूरी पर ही खड़े रहे
  1577. 1:13:44क्योंकि उनमें से ज्यादातर लोग कांता
  1578. 1:13:46प्रसाद के स्वभाव के बारे में जानते थे।
  1579. 1:13:48मेघा उनके पास पहुंचकर सहमे स्वर में
  1580. 1:13:50बोली। जी सर कहिए। कांता प्रसाद ने उसके
  1581. 1:13:54डरे हुए चेहरे को गौर से देखा और शांत
  1582. 1:13:57स्वर में बोले।
  1583. 1:13:59डरो मत बेटी। मुझे बस यह बताओ कि तुम
  1584. 1:14:02शौर्य को कैसे जानती हो? मेघा को कुछ समझ
  1585. 1:14:05नहीं आया। वो बोली, "आप किसके बारे में
  1586. 1:14:08पूछ रहे हैं? मैं किसी शौर्य को नहीं
  1587. 1:14:10जानती।" "अरे वही लड़का जो अभी थोड़ी देर
  1588. 1:14:14पहले यहां से गया है। जिसके साथ एक
  1589. 1:14:16खूबसूरत लड़की भी थी। कांता प्रसाद ने
  1590. 1:14:19स्पष्ट किया। तो मेघा ने तुरंत जवाब दिया।
  1591. 1:14:23उनका नाम श्रवण है। अच्छा तो उनका नाम
  1592. 1:14:27श्रवण है। कांता प्रसाद ने धीमे स्वर में
  1593. 1:14:30दोहराया जैसे मन ही मन कोई बात जोड़ रहे
  1594. 1:14:32हो। [संगीत] श्रवण को तुम कैसे जानती हो?
  1595. 1:14:35अब मेघा सचमुच घबरा गई कि कहीं यह अंकल
  1596. 1:14:38श्रवण भैया को कोई नुकसान तो नहीं
  1597. 1:14:40पहुंचाना चाहते। वो लगभग विनती करते हुए
  1598. 1:14:42बोली देखिए [संगीत] सर आप श्रवण भैया को
  1599. 1:14:46कुछ मत कीजिएगा। उनकी कोई गलती नहीं है।
  1600. 1:14:48उन्होंने जो भी किया सिर्फ मुझे बचाने के
  1601. 1:14:51लिए किया। नहीं नहीं मैं उसे कोई नुकसान
  1602. 1:14:54नहीं पहुंचाने वाला। उन्होंने गहरी नजर से
  1603. 1:14:57मेघा को देखते हुए कहा, "मैं तो उसके बारे
  1604. 1:15:00में सिर्फ जानना चाहता हूं।" कांता प्रसाद
  1605. 1:15:03की आवाज शांत थी, पर उस शांति के पीछे
  1606. 1:15:06छिपी गंभीरता मेघा के डर को बढ़ा रही थी।
  1607. 1:15:09मेघा ने कांता प्रसाद जी को श्रवण के बारे
  1608. 1:15:11में सब कुछ बताया। उन्हें यह जानकर बेहद
  1609. 1:15:14हैरानी हुई कि शौर्य इतने समय से एक
  1610. 1:15:17भिखारी की जिंदगी जी रहा था। इसके बाद
  1611. 1:15:19उन्होंने मेघा से पूछा,
  1612. 1:15:22क्या हुआ था अभी यहां? दरअसल कांता प्रसाद
  1613. 1:15:25बिल्कुल आखिर में यहां आए थे। इसीलिए
  1614. 1:15:27उन्हें पता नहीं था कि यहां क्या हुआ था।
  1615. 1:15:30मेघा ने उन्हें पूरी घटना के बारे में
  1616. 1:15:32विस्तार से बताया। सब कुछ सुनने के बाद
  1617. 1:15:35कांता प्रसाद ने कहा तुम यह कह रही हो कि
  1618. 1:15:38इस सबके पीछे विक्की का हाथ है। हां। मेघा
  1619. 1:15:43ने सहमति में सिर हिलाया। इस पर कांता
  1620. 1:15:45प्रसाद बोले तुमने डीन से शिकायत की है?
  1621. 1:15:49हां की [संगीत] थी। उसके बाद ही तो उसने
  1622. 1:15:52मेरे पीछे गुंडे भेज दिए। मेघा दबी आवाज
  1623. 1:15:55में बोली। कांता प्रसाद ने मेघा के सहमे
  1624. 1:15:57हुए चेहरे को देखकर कहा, "अगर आज के बाद
  1625. 1:16:01कोई भी तुम्हें परेशान करे, तो तुम मुझे
  1626. 1:16:03इस नंबर पर कॉल करना।" कहते हुए कांता
  1627. 1:16:06प्रसाद ने अपना कार्ड निकालकर मेघा की तरफ
  1628. 1:16:08बढ़ा दिया। मेघा को हैरानी हुई कि कांता
  1629. 1:16:11प्रसाद को उसकी चिंता है। अचानक ही उसके
  1630. 1:16:14दिल में श्रवण को लेकर जो जिज्ञासा थी, वह
  1631. 1:16:16और भी ज्यादा बढ़ गई। वहीं दूसरी तरफ
  1632. 1:16:19गाड़ी के [संगीत] अंदर शौर्य और शिप्रा के
  1633. 1:16:21बीच गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था। शिप्रा
  1634. 1:16:24गाड़ी में बैठी तो थी लेकिन उसका दिमाग
  1635. 1:16:27अभी भी थोड़ी देर पहले हुई घटना में ही
  1636. 1:16:29उलझा हुआ था। वो बार-बार मेघा के बारे में
  1637. 1:16:32सोच रही थी। उसने शौर्य को भैया कहा था।
  1638. 1:16:36तो क्या वो सच में उसकी सगी बहन है?
  1639. 1:16:38आखिरकार अपने मन में उठ रहे सवालों का
  1640. 1:16:41जवाब पाने के लिए शिप्रा ने शौर्य से पूछ
  1641. 1:16:43ही लिया। वो लड़की कौन थी? कौन लड़की?
  1642. 1:16:48शौर्य समझ तो गया था कि शिप्रा क्या पूछ
  1643. 1:16:51रही है, लेकिन वो अनजान बना। [संगीत] इस
  1644. 1:16:53पर शिप्रा ने बात साफ करते हुए कहा, "मैं
  1645. 1:16:56उसी लड़की की बात कर रही हूं जिसे बचाने
  1646. 1:16:58के लिए तुम उन गुंडों से लड़ पड़े जो
  1647. 1:17:01तुम्हें भैया कह रही थी। अच्छा वो। शौर्य
  1648. 1:17:05ऐसे बोला जैसे अब जाकर उसे समझ आया हो कि
  1649. 1:17:08शिप्रा क्या पूछ रही है। शिप्रा को शक हुआ
  1650. 1:17:11कि कहीं शौर्य जानबूझकर उसके सामने अनजान
  1651. 1:17:14तो नहीं बन रहा है। यह ख्याल आते ही उसने
  1652. 1:17:17सीधे पूछ लिया। क्या तुम वाकई इतने भोले
  1653. 1:17:20हो या मेरे सामने ऐसा जताने की कोशिश कर
  1654. 1:17:23रहे हो कि तुम्हें मेरी बात का मतलब समझ
  1655. 1:17:25नहीं आ रहा है। शौर्य थोड़ा हड़बड़ा गया।
  1656. 1:17:28उसे उम्मीद नहीं थी कि शिप्रा उससे इतनी
  1657. 1:17:31सीधी बात कर देगी। वो समझ गया कि शिप्रा
  1658. 1:17:34के सामने ज्यादा होशियारी दिखाना उसे ही
  1659. 1:17:36भारी पड़ सकता है। इसीलिए वह खुद को
  1660. 1:17:39संभालते हुए बोला नहीं ऐसा कुछ नहीं है।
  1661. 1:17:41वो लड़की पुजारी बाबा की पोती है। जब भी
  1662. 1:17:44वो उनसे मिलने आती थी तो मुझसे भी उसकी
  1663. 1:17:47मुलाकात हो जाती थी। तुमने पैसों से भी
  1664. 1:17:50उसकी मदद की है। शिप्रा ने शौर्य के चेहरे
  1665. 1:17:53को गौर से देखते हुए पूछा।
  1666. 1:17:56शौर्य इस बात को टालना चाहता था। वो हंसते
  1667. 1:17:59हुए बोला क्या मैंने पैसों से उसकी मदद
  1668. 1:18:03अगर मेरे पास पैसे होते तो क्या मैं ऐसी
  1669. 1:18:06जिंदगी जी रहा होता? तुम कुछ भी कहो लेकिन
  1670. 1:18:09मुझे उस लड़की जीनत की बात सही लग रही थी।
  1671. 1:18:11[संगीत] शिप्रा ने कहा उसे अभी भी शौर्य
  1672. 1:18:14की बात पर पूरा भरोसा नहीं हो रहा था। पर
  1673. 1:18:18तुमने खुद सुना था। मेघा ने जीनत को साफ
  1674. 1:18:21बताया था कि उसकी फीस किसी और ने भरी थी।
  1675. 1:18:24शौर्य अब भी यह मानने को तैयार नहीं था कि
  1676. 1:18:27उसने मेघा की पैसों से कोई मदद की थी।
  1677. 1:18:30हां, मैंने सुना था, लेकिन मेघा मुझे झूठ
  1678. 1:18:32बोलती हुई लगी। मुझे लगा वो सिर्फ
  1679. 1:18:34तुम्हारी इज्जत रखने के लिए जीनत के सामने
  1680. 1:18:36झूठ बोल रही थी। शिप्रा ने दिल की बात
  1681. 1:18:39साफ-साफ कह दी। इस पर शौर्य ने शिप्रा के
  1682. 1:18:42सवालों से बचने के इरादे से कहा। पता नहीं
  1683. 1:18:45आप ऐसा क्यों सोच [संगीत] रही हैं और सबसे
  1684. 1:18:47बड़ी बात आप इन सबके पीछे क्यों पड़ी हैं।
  1685. 1:18:50ऐसा कुछ भी नहीं है। मेरे पास इतने पैसे
  1686. 1:18:52नहीं है कि मैं किसी की मदद कर सकूं।
  1687. 1:18:56शिप्रा ने आगे कोई सवाल तो नहीं किया
  1688. 1:18:58लेकिन उसे अब भी शौर्य की बात पर पूरा
  1689. 1:19:01भरोसा नहीं था। जो शौर्य उसे एक दिन पहले
  1690. 1:19:04तक दीनहीन लग रहा था वो अचानक उसे
  1691. 1:19:07स्ट्रांग और अलग सा नजर आने लगा था। वहीं
  1692. 1:19:11दूसरी तरफ हॉस्पिटल में कांता प्रसाद
  1693. 1:19:13चंद्रभान राठौड़ के पास बैठा हुआ था। तुम
  1694. 1:19:17यह कह रहे हो कि तुमने शौर्य के साथ एक
  1695. 1:19:20लड़की को देखा जो उसकी पत्नी है। चंद्रभान
  1696. 1:19:24राठौड़ ने गंभीर स्वर में पूछा। जी राजा
  1697. 1:19:28साहब यह सच है। कांता प्रसाद ने उतनी ही
  1698. 1:19:31गंभीरता से जवाब दिया। फिर अपनी बात आगे
  1699. 1:19:34बढ़ाते हुए बोला।
  1700. 1:19:36और दूसरी बात यह है कि उनकी पहचान एक
  1701. 1:19:38भिखारी के रूप में है। मैंने कुछ दिन पहले
  1702. 1:19:42यह खबर सुनी थी कि विशालगढ़ की एक लड़की
  1703. 1:19:44की शादी जबरदस्ती एक भिखारी से कर दी गई
  1704. 1:19:48थी। लेकिन उस वक्त हमें यह नहीं पता था कि
  1705. 1:19:51वह भिखारी कोई और नहीं हमारे शौर्य बाबा
  1706. 1:19:54ही हैं। कांता प्रसाद आखिर तुम कहना क्या
  1707. 1:19:58चाहते हो? अपनी बात साफ-साफ बताओ। हमारा
  1708. 1:20:02शौर्य भिखारी कैसे हो सकता है? चंद्रभान
  1709. 1:20:06जी को कुछ समझ नहीं आ रहा था।
  1710. 1:20:09तो ठीक है। पूरी बात शुरू से सुनिए। कांता
  1711. 1:20:13प्रसाद ने कहा हुआ यूं कि शौर्य बाबा के
  1712. 1:20:16एक्सीडेंट के बाद वो एक मंदिर में रह रहे
  1713. 1:20:19थे। उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि कोई पहचान
  1714. 1:20:22ही नहीं सकता था। बढ़ी हुई दाढ़ी बिल्कुल
  1715. 1:20:25भिखारी जैसा रूप। कांता प्रसाद जी थोड़ा
  1716. 1:20:29रुक कर बोले।
  1717. 1:20:31इसी बीच कुछ दिन पहले बलवंत राय की पोती
  1718. 1:20:34की शादी विहान रायजादा से तय हुई थी।
  1719. 1:20:37लेकिन मुख्तार ने उनकी पोती की शादी
  1720. 1:20:39जबरदस्ती भिखारी से करवा दी। और वह भिखारी
  1721. 1:20:43कोई और नहीं हमारे शौर्य बाबा ही थे।
  1722. 1:20:46कांता प्रसाद ने एक सांस में पूरी बात
  1723. 1:20:48बताते हुए आगे कहा। दरअसल शौर्य बाबा
  1724. 1:20:52मंदिर में भिखारी जैसी हालत में रह रहे थे
  1725. 1:20:54और मुख्तार ने उन्हें सच में भिखारी समझ
  1726. 1:20:57लिया। उसी गलतफहमी में उसने उनकी शादी
  1727. 1:21:00शिप्रा से करवा दी और आजकल शौर्य बाबा
  1728. 1:21:03शिप्रा राय के ड्राइवर बने हुए हैं। अब
  1729. 1:21:06जाकर चंद्रभान राठौड़ को बात समझ में आई।
  1730. 1:21:10लेकिन उनके मन में एक सवाल अभी भी था।
  1731. 1:21:13शौर्य आखिर अपनी सच्चाई सबसे छुपा क्यों
  1732. 1:21:15रहा है? वो सबके सामने सच क्यों नहीं बता
  1733. 1:21:18रहा? अपनी उत्सुकता जाहिर करते हुए
  1734. 1:21:21चंद्रभान राठौड़ बोले लेकिन शौर्य ऐसा
  1735. 1:21:25क्यों कर रहा है?
  1736. 1:21:27यह तो शौर्य बाबा ही बेहतर बता सकते हैं।
  1737. 1:21:30कांता प्रसाद ने जवाब दिया हम चंद्रभान
  1738. 1:21:34राठौड़ सोच में डूबते हुए [संगीत] बोले
  1739. 1:21:37इस मुख्तार को तो सबक सिखाना पड़ेगा लेकिन
  1740. 1:21:41उससे पहले शौर्य से मिलकर यह जानना जरूरी
  1741. 1:21:44है कि वो अपनी सच्चाई क्यों छुपा रहा है।
  1742. 1:21:48इस पर कांता प्रसाद ने कहा, एक बात और है
  1743. 1:21:52मेघा नाम की एक लड़की है जो इसी हॉस्पिटल
  1744. 1:21:55में इंटर्न है। [संगीत] शौर्य बाबा उसे
  1745. 1:21:58अपनी बहन मानते हैं। आज हॉस्पिटल के बाहर
  1746. 1:22:01कुछ गुंडे उसके पीछे पड़ गए थे लेकिन
  1747. 1:22:03शौर्य ने उन्हें पीट कर भगा दिया। उन
  1748. 1:22:06गुंडों को उस लड़की के पीछे भेजने वाला
  1749. 1:22:08विक्की नारंग था। इसके बाद कांता प्रसाद
  1750. 1:22:12ने हॉस्पिटल के बाहर जो कुछ भी हुआ था, वह
  1751. 1:22:15पूरा किस्सा चंद्रभान राठौड़ को विस्तार
  1752. 1:22:17से बता दिया।
  1753. 1:22:20क्या करें इस नारंग का? जैसा बाप वैसा
  1754. 1:22:24बेटा। अपनी बेटी के कारण मैं इनके खिलाफ
  1755. 1:22:27कुछ कर भी नहीं पाता। चंद्रभान राठौर ने
  1756. 1:22:31बेबसी जताते हुए कहा इस पर कांता प्रसाद
  1757. 1:22:34बोले आप कुछ करें या ना करें लेकिन मुझे
  1758. 1:22:37लगता है कि शौर्य बाबा विक्की के खिलाफ
  1759. 1:22:40कुछ ना कुछ जरूर करेंगे।
  1760. 1:22:43पर क्या वो अकेला विक्की का सामना कर
  1761. 1:22:45पाएगा? चंद्रभान जी ने शौर्य के लिए चिंता
  1762. 1:22:48जाहिर की। तो कांता प्रसाद ने कहा [संगीत]
  1763. 1:22:52राजा साहब आप अपने पोते को अंडरएस्टीमेट
  1764. 1:22:55कर रहे हैं। जैसा मैंने आज लोगों से उनके
  1765. 1:22:58बारे में सुना है उससे तो कुछ और ही कहानी
  1766. 1:23:00समझ आती है। ऐसा क्या सुन लिया तुमने?
  1767. 1:23:04चंद्रभान जी अपनी जिज्ञासा रोक नहीं पाए।
  1768. 1:23:07वो जानते थे कि कांता प्रसाद को जरा बातें
  1769. 1:23:10गोल-गोल घुमाने की आदत है। इस इलाके में
  1770. 1:23:13दो गुंडों की जोड़ी है। छगन और मगन। यह
  1771. 1:23:16दोनों मेघा को उठाने आए थे। लेकिन शौर्य
  1772. 1:23:19बाबा ने एक ही थप्पड़ में मगन को जमीन पर
  1773. 1:23:21गिरा दिया और वह फिर उठ ही नहीं पाया।
  1774. 1:23:24कांता प्रसाद ने तारीफ भरे अंदाज में
  1775. 1:23:26बताया। अच्छा चंद्रभान जी की आंखें फैल
  1776. 1:23:30गई। उनके चेहरे पर अपने पोते के लिए गर्व
  1777. 1:23:33साफ झलक रहा था। उन्होंने लगभग आदेश देते
  1778. 1:23:36हुए कांता प्रसाद से कहा। ऐसा करो कल एक
  1779. 1:23:40बार फिर शौर्य को यहां बुलाओ। मैं उससे
  1780. 1:23:44मिलना चाहता हूं। जी साहब कांता प्रसाद ने
  1781. 1:23:48आदरपूक कहा। वहीं [संगीत] दूसरी तरफ बलवंत
  1782. 1:23:52राय जी की हवेली में आज पूरे परिवार की
  1783. 1:23:54मीटिंग थी। दरअसल मुख्तार के प्रपोजल पर
  1784. 1:23:57बलवंत राय पूरे परिवार का मत जानना चाहते
  1785. 1:24:00थे। तो सब कुछ तुम सबके सामने है। अब बताओ
  1786. 1:24:04तुम लोगों की क्या राय है? बलवंत राय ने
  1787. 1:24:07पूरे कमरे पर नजर दौड़ाते हुए पूछा। इस पर
  1788. 1:24:10बृजभूषण राय तुरंत बोले इसमें सोचने वाली
  1789. 1:24:14क्या बात है पापा? मुख्तार से दुश्मनी
  1790. 1:24:16खत्म करने का यह एक अच्छा मौका है। देखा
  1791. 1:24:18जाए तो शिप्रा के लिए भी यह सही फैसला है।
  1792. 1:24:21हम लोग तो पहले ही इस चिंता में थे कि
  1793. 1:24:23उसका भविष्य क्या होगा। लेकिन अब तो
  1794. 1:24:25किस्मत खुद उसके दरवाजे पर दस्तक दे रही
  1795. 1:24:28है। एक भिखारी से तो रजत लाख गुना अच्छा
  1796. 1:24:31है। इसीलिए मेरी राय में हमें शिप्रा की
  1797. 1:24:34शादी रजत के साथ कर देनी चाहिए। और नहीं
  1798. 1:24:38तो क्या? बड़ी बहू सरला भी कहां पीछे रहने
  1799. 1:24:41वाली थी? वो बोली अगर हम लाख कोशिश भी
  1800. 1:24:45करते तब भी शिप्रा के लिए इससे अच्छा
  1801. 1:24:47लड़का नहीं मिल पाता। एक भिखारी की
  1802. 1:24:49ब्याहता से भला कौन शादी करने को तैयार
  1803. 1:24:52होता। सरला की बात सुनकर राजदीप राय चिढ़े
  1804. 1:24:55हुए स्वर में बोले। आप सब समझ रहे हैं कि
  1805. 1:24:58मुख्तार भाई अपने भाई की शादी शिप्रा से
  1806. 1:25:00क्यों कराना चाहता है। वो शिप्रा को अपनी
  1807. 1:25:03बहू नहीं बनाना चाहता। वो सिर्फ अपने भाई
  1808. 1:25:06को बचाना चाहता है। इसीलिए उसने यह
  1809. 1:25:08प्रस्ताव रखा है। तभी कुलवंत बीच में बोल
  1810. 1:25:11पड़ा। मैं मानता हूं अंकल कि मुख्तार भाई
  1811. 1:25:15का इरादा सिर्फ अपने भाई को बचाने का है।
  1812. 1:25:18लेकिन यह भी तो सोचिए कि यह फैसला शिप्रा
  1813. 1:25:20के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। अब क्या
  1814. 1:25:23चाहते हैं? वो भिखारी हमेशा इस घर का
  1815. 1:25:25दामाद बना रहे। कुलवंत की बात सुनकर एक पल
  1816. 1:25:28के लिए राजदीप राय भी चुप हो गए। दामाद के
  1817. 1:25:31रूप में वह भी शौर्य को अपना नहीं पा रहे
  1818. 1:25:33थे। शिप्रा चुपचाप बैठी सबकी बातें सुन
  1819. 1:25:36रही थी। अपने पिता को यूं खामोश देखकर उसे
  1820. 1:25:39बुरा तो लगा लेकिन उसने कुछ कहा नहीं। वो
  1821. 1:25:42बस यह देखना चाहती थी कि बाकी लोगों की
  1822. 1:25:45उसके मामले पर क्या सोच है। वैसे भाई साहब
  1823. 1:25:48देखा जाए तो कुलवंत गलत भी नहीं कह रहा।
  1824. 1:25:51जगताप राय ने उसका समर्थन करते हुए कहा।
  1825. 1:25:54हमें शिप्रा के बारे में भी तो सोचना
  1826. 1:25:56चाहिए। हम उसकी जिंदगी एक भिखारी के साथ
  1827. 1:25:59तो नहीं जोड़ सकते। मेरी राय भी यही है कि
  1828. 1:26:02हमें मुख्तार भाई का प्रस्ताव मान लेना
  1829. 1:26:04चाहिए।
  1830. 1:26:06इस पर दामाद राजकुमार टंडन ने अपना विचार
  1831. 1:26:09रखा। मैं भी जगताप भैया से सहमत हूं। आप
  1832. 1:26:12माने या ना माने मुख्तार भाई के परिवार से
  1833. 1:26:15रिश्ता होने से विशालगढ़ में आपके परिवार
  1834. 1:26:17का रुतबा भी बढ़ जाएगा।
  1835. 1:26:20शिप्रा ने मुंह बिचकाते हुए सोचा कैसी सोच
  1836. 1:26:23है इनकी? आखिर एक गुंडे बदमाश के घर
  1837. 1:26:26रिश्ता जोड़कर कौन सा रुतबा बढ़ेगा?
  1838. 1:26:29लेकिन वो फिर भी चुप रही।
  1839. 1:26:31[संगीत] हां पिताजी हमें शिप्रा के बारे
  1840. 1:26:33में भी सोचना चाहिए। हमें उस भिखारी से
  1841. 1:26:35पीछा छुड़ाने का मौका मिल रहा है। नहीं तो
  1842. 1:26:37तलाक के बाद भी कौन सा अच्छा परिवार
  1843. 1:26:40शिप्रा से शादी करने को तैयार होता। नैना
  1844. 1:26:43राय ने अपने पति की बात का समर्थन करते
  1845. 1:26:45हुए कहा। वहीं सरला राय फिर से तंज कसने
  1846. 1:26:48से खुद को रोक नहीं पाई। और नहीं तो क्या
  1847. 1:26:52उस भिखारी की वजह से वैसे ही पूरे
  1848. 1:26:54विशालगढ़ में हमारे परिवार की बदनामी हो
  1849. 1:26:56रही है। सरला राय की बात सुनकर बीना जी के
  1850. 1:27:00तन मन में आग सी लग गई लेकिन उन्होंने कुछ
  1851. 1:27:03नहीं कहा। वो भी शौर्य से शिप्रा का पीछा
  1852. 1:27:06छुड़ाना चाहती थी। इसके लिए वो शिप्रा की
  1853. 1:27:09शादी रजत से करवाने को तैयार थी। यहां तक
  1854. 1:27:11कि रजत की पुरानी गलतियों को भी नजरअंदाज
  1855. 1:27:14करने को तैयार हो गई थी। बलवंत राय ने
  1856. 1:27:17महसूस किया कि लगभग सभी घर वाले शिप्रा की
  1857. 1:27:20शादी रजत से करवाने के पक्ष में थे। आखिर
  1858. 1:27:23में उन्होंने शिप्रा की तरफ देखा। उन्हें
  1859. 1:27:26खुद भी लग रहा था कि शिप्रा के भविष्य के
  1860. 1:27:28लिए रजत से शादी करना ही बेहतर होगा। इससे
  1861. 1:27:31उनके परिवार पर लगे भिखारी दामाद का दाग
  1862. 1:27:34भी मिट जाएगा। उन्होंने शिप्रा की राय
  1863. 1:27:37जानने के लिए कहा।
  1864. 1:27:39शिप्रा बेटी मुख्तार के प्रपोजल पर सब
  1865. 1:27:42क्या सोचते हैं? यह तो तुमने सुन लिया है।
  1866. 1:27:46मुझे भी यही लगता है कि तुम्हारे भविष्य
  1867. 1:27:48के लिए यही सही रहेगा। लेकिन आखिर में
  1868. 1:27:51तुम्हारी राय जानना भी जरूरी है। तो
  1869. 1:27:54[संगीत] बोलो। क्या चाहती हो तुम? चलिए
  1870. 1:27:56शुक्र है कि आपको मेरा ख्याल तो आया कि
  1871. 1:27:59मेरी राय भी जान लेनी चाहिए। शिप्रा ने
  1872. 1:28:01कड़वे स्वर में कहा। नहीं तो मुझे लगा था
  1873. 1:28:04कि सबके विचार सुनकर आप सीधे मुझे उस
  1874. 1:28:06घटिया आदमी के गले बांधने का फैसला सुना
  1875. 1:28:08देंगे। शिप्रा ने एक बार सबकी तरफ देखा और
  1876. 1:28:11साफ शब्दों में कहा। आप सब अपने उस
  1877. 1:28:14मुख्तार भाई के साथ जैसे भी संबंध रखना
  1878. 1:28:16चाहते हैं, रखिए। लेकिन मैं साफ बता देती
  1879. 1:28:19हूं। मैं किसी भी हालत में उस रजत से शादी
  1880. 1:28:22नहीं करूंगी। शिप्रा की यह बात सुनकर कमरे
  1881. 1:28:25में मौजूद किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि
  1882. 1:28:27वो बलवंत राय के सामने इतनी बेबाकी से
  1883. 1:28:30अपना फैसला सुना देगी। तभी सरला ने तंज
  1884. 1:28:33कसते हुए कहा देखो तो कैसे बाबूजी के
  1885. 1:28:36सामने जुबान चला रही है। इस लंबी जुबान की
  1886. 1:28:38वजह से ही तो इसकी शादी जबरदस्ती भिखारी
  1887. 1:28:41से करनी पड़ी। और देखिए अकड़ अभी भी कम
  1888. 1:28:44नहीं हुई। तभी बलवंत राय शांत स्वर में
  1889. 1:28:47बोले शिप्रा बेटा हम जो भी करेंगे
  1890. 1:28:50तुम्हारी भलाई को ध्यान में रखकर ही
  1891. 1:28:52करेंगे। मेरा मानना है कि तुम इस रिश्ते
  1892. 1:28:54के लिए तैयार हो जाओ। इसी में तुम्हारी और
  1893. 1:28:57इस परिवार की भलाई है। उनकी बातों से साफ
  1894. 1:29:00था कि उन्होंने शिप्रा की बात का बुरा
  1895. 1:29:02नहीं माना था। शिप्रा ने विनती भरे स्वर
  1896. 1:29:05में कहा दादा जी आपको ऐसा क्यों लगता है
  1897. 1:29:08कि रजत से शादी करके मेरी जिंदगी ठीक हो
  1898. 1:29:10जाएगी? जबकि आप खुद समझते हैं कि मुख्तार
  1899. 1:29:13अपने भाई की शादी मुझसे क्यों कराना चाहता
  1900. 1:29:15है? क्या आपको लगता है कि अगर उसका भाई
  1901. 1:29:18जेल में नहीं होता, क्या वो तब भी यह
  1902. 1:29:20रिश्ता लाता? शिप्रा की बात सुनकर बलवंत
  1903. 1:29:23राय भी सोच में पड़ गए।
  1904. 1:29:26ठीक है अगर तुम रजत से शादी नहीं करना
  1905. 1:29:28चाहती तो मैं मुख्तार को इस शादी के लिए
  1906. 1:29:31मना कर दूंगा। बलवंत राय ने अपना फैसला
  1907. 1:29:34सुना दिया सुनकर परिवार के बाकी लोग हैरान
  1908. 1:29:37रह गए। उन्हें इतनी जल्दी इस तरह के
  1909. 1:29:39निर्णय की उम्मीद नहीं थी। तभी बृजभूषण
  1910. 1:29:42खुद को रोक नहीं पाए और बोले पिताजी क्या
  1911. 1:29:45यह सही होगा? हमें मुख्तार से दुश्मनी
  1912. 1:29:48खत्म करने का एक मौका मिला था। लेकिन इस
  1913. 1:29:50फैसले के बाद तो वो और बढ़ जाएगी।
  1914. 1:29:54पिताजी शिप्रा भी नादान है। उसे अपने भले
  1915. 1:29:56बुरे की समझ नहीं है। तभी तो वो एक भिखारी
  1916. 1:29:59और एक रुतबे वाले इंसान में फर्क नहीं कर
  1917. 1:30:02पा रही। आप इस बारे में एक बार फिर से
  1918. 1:30:04सोचिए। नैना बुआ ने भी शिप्रा की बात से
  1919. 1:30:07असहमति जताते हुए कहा। इस पर शिप्रा ने
  1920. 1:30:10दृढ़ता से जवाब दिया। बुआ वही भिखारी था
  1921. 1:30:13जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर मुझे
  1922. 1:30:16बचाया। उसी की वजह से मैं आज सुरक्षित
  1923. 1:30:18हूं। नहीं तो रजत ने मुझे बर्बाद करने में
  1924. 1:30:21कोई कसर नहीं छोड़ी थी। शिप्रा की बात
  1925. 1:30:24सुनकर नैना राय चुप हो गई। शिप्रा ने किसी
  1926. 1:30:27को कुछ कहने लायक ही नहीं छोड़ा था। तो
  1927. 1:30:30क्या फिर मुख्तार से हमारी दुश्मनी ऐसे ही
  1928. 1:30:32चलती रहेगी। बृजभूषण राय ने चिंतित स्वर
  1929. 1:30:35में कहा। तभी राजकुमार टंडन बीच में बोल
  1930. 1:30:38पड़े। एक काम हो सकता है जिससे मुख्तार से
  1931. 1:30:41इस परिवार की दुश्मनी खत्म हो सकती है। यह
  1932. 1:30:44सुनकर बृजभूषण की आंखों में उम्मीद की एक
  1933. 1:30:47किरण चमकी। वो उत्साहित होकर बोले शादी के
  1934. 1:30:50अलावा ऐसा क्या हो सकता है जिससे मुख्तार
  1935. 1:30:53भाई से दुश्मनी खत्म हो जाए। यह सुनकर
  1936. 1:30:56वहां मौजूद सभी लोगों के कान खड़े हो गए।
  1937. 1:30:58सबकी निगाहें नैना बुआ के पति राजकुमार
  1938. 1:31:01टंडन की तरफ ही टिकी हुई थी। हर कोई
  1939. 1:31:03बेसब्री से सुनना चाहता था कि आखिर उनके
  1940. 1:31:05पास ऐसा कौन सा उपाय है जिससे पुरानी
  1941. 1:31:08दुश्मनी खत्म हो सकती है। राजकुमार टंडन
  1942. 1:31:11के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान उभर आई।
  1943. 1:31:14उन्होंने गर्व से सीना चौड़ा करते हुए
  1944. 1:31:16कहा। देखिए [संगीत] मुख्तार भाई का असली
  1945. 1:31:19मकसद क्या है? अपने भाई को जेल से
  1946. 1:31:21छुड़ाना। अगर हम उन्हें भरोसा दिला दें कि
  1947. 1:31:24हम केस वापस लेने को तैयार हैं तो उनका
  1948. 1:31:27[संगीत] मकसद अपने आप पूरा हो जाएगा। ऐसे
  1949. 1:31:29में हो सकता है कि वे हमारे परिवार के साथ
  1950. 1:31:32चली आ रही दुश्मनी को भी भुला दें।
  1951. 1:31:34बृजभूषण राय ने सिर हिलाते हुए हामी भरी
  1952. 1:31:37और बोले। मुझे भी यही सही लगता है। अगर इस
  1953. 1:31:41कदम से मामला शांत हो सकता है और रिश्तों
  1954. 1:31:43में कड़वाहट खत्म हो सकती है तो हमें आगे
  1955. 1:31:45बढ़कर यह कोशिश करनी चाहिए। आखिर हमारा
  1956. 1:31:48मकसद भी तो यही है कि मुख्तार भाई से
  1957. 1:31:50दुश्मनी हमेशा के लिए खत्म हो जाए।
  1958. 1:31:53धीरे-धीरे घर के लगभग सभी सदस्य इस विचार
  1959. 1:31:56के पक्ष में हो गए। यहां तक कि राजदीप राय
  1960. 1:31:58ने भी इस बात का खुलकर विरोध नहीं किया।
  1961. 1:32:01शायद उन्हें अपनी बेटी की चिंता सताने लगी
  1962. 1:32:03थी। इसीलिए वह भी हालात के आगे झुकते हुए
  1963. 1:32:06दिखाई दे रहे थे। यह सब देखकर शिप्रा के
  1964. 1:32:09चेहरे पर हल्की सी मुस्कान उभरी। वो अपनी
  1965. 1:32:11जगह से खड़ी हुई और सबकी ओर देखते हुए
  1966. 1:32:14बोली, "आज आप लोग एक गुंडे के डर से उसके
  1967. 1:32:18खिलाफ दर्ज केस वापस लेने [संगीत] की बात
  1968. 1:32:19कर रहे हैं। लेकिन क्या कोई यह यकीन दिला
  1969. 1:32:22सकता है कि जेल से बाहर आने के बाद वो
  1970. 1:32:24दोबारा कोई गलत हरकत नहीं करेगा?" शिप्रा
  1971. 1:32:27को इस तरह सबके सामने बोलते देख राजदीप
  1972. 1:32:30राय उठ खड़े हुए। उन्होंने थोड़े शांत
  1973. 1:32:32लेकिन दबे हुए स्वर में कहा। बेटी हम लोग
  1974. 1:32:36सभ्य समाज से आते हैं। उन गुंडों और
  1975. 1:32:38मवालियों से हमारा क्या मुकाबला? कभी-कभी
  1976. 1:32:41हालात को समझकर फैसले लेने पड़ते हैं।
  1977. 1:32:44अपने पिता को इस तरह लाचार देख शिप्रा कुछ
  1978. 1:32:47पल के लिए चुप रह गई। उसे बिल्कुल उम्मीद
  1979. 1:32:49नहीं थी कि उसके पिता भी एक अपराधी के
  1980. 1:32:51सामने यूं हार मान लेंगे। तभी बृजभूषण ने
  1981. 1:32:54तंज कसते हुए कहा। तुम्हारी इसी जिद का
  1982. 1:32:57नतीजा है कि आज तुम एक भिखारी की पत्नी
  1983. 1:32:59बनकर रह गई हो। अभी भी वक्त है। उससे अपना
  1984. 1:33:02रिश्ता खत्म कर लो। अगर रजत से शादी कर
  1985. 1:33:05लोगी तो जिंदगी ऐशो आराम से कटेगी। किसी
  1986. 1:33:08चीज की कमी नहीं रहेगी। शिप्रा ने उनकी
  1987. 1:33:10बात सुनकर सीधे उनकी आंखों में देखा और
  1988. 1:33:13ठंडे लेकिन दृढ़ स्वर में जवाब दिया। माफ
  1989. 1:33:16कीजिएगा बड़े पापा। मुझे ऐशो आराम या राज
  1990. 1:33:18करने का कोई शौक नहीं है। मैं जिस हालात
  1991. 1:33:21में हूं उसी में खुश हूं। और जहां तक शादी
  1992. 1:33:23का सवाल है तो रजत जैसे इंसान के साथ नाम
  1993. 1:33:26और दौलत वाली जिंदगी से कहीं बेहतर मैं
  1994. 1:33:28अपनी पूरी उम्र उस इंसान के साथ सुकून से
  1995. 1:33:31बिताना पसंद करूंगी जिसे आप भिखारी कह रहे
  1996. 1:33:33हैं। सुन रहे हैं ना पिताजी? इस लड़की का
  1997. 1:33:35तो दिमाग ही खराब हो गया है। इसे अब अच्छे
  1998. 1:33:37बुरे की समझ भी नहीं रही। हम सब यहां इसकी
  1999. 1:33:40भलाई के लिए इतना कुछ सोच रहे हैं लेकिन
  2000. 1:33:42इसे तो हमारी कोशिशों की कोई कदर ही नहीं
  2001. 1:33:44है। नैना गुस्से में बोली लेकिन शिप्रा भी
  2002. 1:33:47पीछे हटने वाली नहीं थी। उसने तुरंत जवाब
  2003. 1:33:50दिया, एक गुंडे से मेरी शादी करवाकर आप
  2004. 1:33:53लोग मेरी कौन सी भलाई कर रहे हैं? बस
  2005. 1:33:55[संगीत] करो। अब और बहस की कोई जरूरत नहीं
  2006. 1:33:58है। बलवंत राय ने माहौल बिगड़ते देख बीच
  2007. 1:34:01में ही सख्ती से कहकर दोनों को चुप करवाने
  2008. 1:34:03की कोशिश करी। कमरे में थोड़ी देर के लिए
  2009. 1:34:06सन्नाटा छा गया। जब सब शांत हो गए तो
  2010. 1:34:09बलवंत राय ने फिर से समझाने के अंदाज में
  2011. 1:34:11बात शुरू की। देखो शिप्रा बेटा हम
  2012. 1:34:14तुम्हारे दुश्मन नहीं हैं। तुम्हें क्या
  2013. 1:34:16लगता है? जब पूरे इलाके में हमारे परिवार
  2014. 1:34:19को लेकर इस तरह की चर्चा होती है तो हमें
  2015. 1:34:22अच्छा लगता है। सोचो उस बाप पर क्या
  2016. 1:34:24गुजरती होगी जब लोग कहते हैं देखो इसी की
  2017. 1:34:26बेटी की शादी एक भिखारी से हुई है।
  2018. 1:34:29[संगीत] हम सब यही कोशिश कर रहे हैं कि
  2019. 1:34:31किसी तरह तुम्हारी जिंदगी फिर से सही
  2020. 1:34:33रास्ते पर आ जाए। मैं मानता हूं कि रजत
  2021. 1:34:36थोड़ा बिगड़ा हुआ लड़का है। लेकिन यह
  2022. 1:34:37जरूरी तो नहीं कि वो हमेशा ऐसा ही रहे।
  2023. 1:34:40अगर तुम उससे शादी कर लेती हो तो यह जो
  2024. 1:34:42भिखारी वाली बात हर जगह हो रही है वो भी
  2025. 1:34:45धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। थोड़ा चुप रहकर
  2026. 1:34:47बलवंत राय जी ने शिप्रा की आंखों में
  2027. 1:34:49झांकते हुए फिर से कहा इसीलिए मेरी बात
  2028. 1:34:52मानो बेटा एक बार ठंडे दिमाग से इस बारे
  2029. 1:34:54में सोचो। क्या तुम्हें सच में लगता है कि
  2030. 1:34:57तुम उस लड़के को कभी अपना पति मान पाओगी
  2031. 1:35:00जिसके परिवार का ना कोई ठिकाना है और जो
  2032. 1:35:02खुद का भी ठीक से ख्याल नहीं रख पाता। और
  2033. 1:35:04सिर्फ अपने बारे में ही नहीं अपने परिवार
  2034. 1:35:07के बारे में भी सोचो। हम कोई गुंडे मवाली
  2035. 1:35:09नहीं है कि हथियार उठाकर सड़क पर उतर जाएं
  2036. 1:35:12या मुख्तार जैसे लोगों के स्तर पर जाकर
  2037. 1:35:14लड़ाई करें। हम तो बस इतना चाहते हैं कि
  2038. 1:35:16कोई ऐसा रास्ता निकल आए जिससे रोज-रोज़ का
  2039. 1:35:19तनाव खत्म हो और हम सब चैन से जी सकें।
  2040. 1:35:23बलवंत राय की बात सुनकर शिप्रा कुछ पल के
  2041. 1:35:25लिए खामोश हो गई। उसके चेहरे पर गहरी सोच
  2042. 1:35:28झलक रही थी। अब वह समझ चुकी थी कि यह
  2043. 1:35:30फैसला जिद के कारण नहीं बल्कि डर के कारण
  2044. 1:35:33लिया जा रहा है और डरे हुए लोगों के सामने
  2045. 1:35:36कोई तर्क काम नहीं करता। उनकी बेबसी ही
  2046. 1:35:39उनकी तकदीर लिखती है। कुछ क्षण बाद उसने
  2047. 1:35:42जैसे मन ही मन कोई ठोस फैसला लिया और धीमे
  2048. 1:35:44लेकिन दृढ़ स्वर में बोली
  2049. 1:35:48दादा जी आप जो भी फैसला लेंगे मैं उस पर
  2050. 1:35:51कोई सवाल नहीं उठाऊंगी। लेकिन प्लीज मुझ
  2051. 1:35:54पर रजत से शादी करने का दबाव मत डालिए। सच
  2052. 1:35:57कहूं तो अभी मुझे खुद नहीं पता कि मैं
  2053. 1:35:59श्रवण को पूरी तरह अपने पति के रूप में
  2054. 1:36:01स्वीकार कर पाऊंगी या नहीं। लेकिन सच यही
  2055. 1:36:04है कि इस समय [संगीत] वही मेरा पति है।
  2056. 1:36:07शिप्रा ने गहरी सांस लेते हुए एक बार फिर
  2057. 1:36:09से सबकी ओर देखा। उसकी नजर अपने पिता और
  2058. 1:36:12दादाजी पर टिक गई। उसने आगे फिर कहना शुरू
  2059. 1:36:15किया। और हां, अगर कल को मैं उससे अलग भी
  2060. 1:36:18हो गई तब भी मैं दोबारा शादी नहीं करूंगी।
  2061. 1:36:21मैं अपने दम पर जी सकती हूं। मुझे किसी
  2062. 1:36:23सहारे की जरूरत नहीं है। और इसके लिए मैं
  2063. 1:36:26अपने परिवार को भी दोष नहीं दूंगी। शायद
  2064. 1:36:28मेरी किस्मत में यही लिखा था। शिप्रा
  2065. 1:36:32दादाजी के पास गई और उनके हाथों पर अपना
  2066. 1:36:34हाथ रखते हुए बोली और एक बात श्रवण इतना
  2067. 1:36:38भी बेकार इंसान नहीं है जितना आप सब उसे
  2068. 1:36:40समझ रहे हैं। उसके हालात चाहे जैसे भी हो
  2069. 1:36:43लेकिन उसकी नियत साफ है। हो सकता है वो
  2070. 1:36:46मुझे महल या गाड़ी ना दे सके लेकिन मेरी
  2071. 1:36:49सुरक्षा के लिए वो किसी भी खतरे से भिड़ने
  2072. 1:36:51में पीछे नहीं हटेगा। इस बात का मुझे पूरा
  2073. 1:36:54भरोसा है। और यह भी जरूरी तो नहीं कि हर
  2074. 1:36:58बार पति ही पत्नी को सहारा दे। अगर जरूरत
  2075. 1:37:00पड़ी तो एक पत्नी भी अपने पति का साथ निभा
  2076. 1:37:03सकती है। उसे संभाल सकती है। अगर आपकी नजर
  2077. 1:37:07में शादीशुदा होना ही सबसे जरूरी है तो
  2078. 1:37:10मेरे लिए श्रवण ही मेरा पति है और मैं उसे
  2079. 1:37:13स्वीकार करती हूं।
  2080. 1:37:16शिप्रा की बात सुनकर बलवंत राय हैरान रह
  2081. 1:37:18गए। वो यह सोचकर हैरान थे कि शिप्रा ने
  2082. 1:37:20अपनी जिंदगी का फैसला ले लिया है। उसे वह
  2083. 1:37:23भिखारी कबूल है पर वो रजत से शादी नहीं कर
  2084. 1:37:25सकती। वो मन ही मन उस पल को याद करने लगे
  2085. 1:37:28जब मंदिर में रजत जबरदस्ती शिप्रा को ले
  2086. 1:37:31जाने आया था और श्रवण ने अकेले ही उसका
  2087. 1:37:33सामना किया था। जिस साहस के साथ उसने खड़े
  2088. 1:37:36होकर मुकाबला किया था वैसी हिम्मत तो उनके
  2089. 1:37:39अपने घर के लोग भी नहीं दिखा पाए थे।
  2090. 1:37:41बलवंत राय के मन में एक बात साफ होने लगी।
  2091. 1:37:44एक लड़की को अपने पति में आखिर क्या चाहिए
  2092. 1:37:46होता है? दौलत, नाम, रुतबा या फिर वो
  2093. 1:37:50भरोसा जो मुश्किल वक्त में उसके साथ
  2094. 1:37:52चट्टान की तरह खड़ा रहे। शायद शिप्रा के
  2095. 1:37:55लिए जवाब साफ था। उसके लिए पैसे से ज्यादा
  2096. 1:37:58मायने उस इंसान का साथ है जो हर हाल में
  2097. 1:38:01उसका हाथ थामे रखे। बलवंत राय ने गहरी
  2098. 1:38:05सांस ली। फिर कमरे में मौजूद सभी लोगों पर
  2099. 1:38:07एक नजर डाली और आखिर में शिप्रा की तरफ
  2100. 1:38:10देखते हुए बोले अगर तुमने अपने लिए यह
  2101. 1:38:13फैसला कर लिया है तो मैं तुम्हारे साथ
  2102. 1:38:15हूं। लेकिन याद रखना आगे चलकर इस फैसले के
  2103. 1:38:19लिए कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए।
  2104. 1:38:22दादाजी के मुंह से यह शब्द सुनकर शिप्रा
  2105. 1:38:24को कुछ पल के लिए यकीन नहीं हुआ। उसने
  2106. 1:38:26सोचा था कि लंबी बहस होगी, समझाया जाएगा,
  2107. 1:38:29परिवार की इज्जत का हवाला दिया जाएगा।
  2108. 1:38:32लेकिन यहां तो सब कुछ इतनी सहजता से खत्म
  2109. 1:38:34हो गया। उसी वक्त बृजभूषण राय बेचैन होकर
  2110. 1:38:37बीच में बोल पड़े। लेकिन पिताजी आप समझ
  2111. 1:38:40रहे हैं इसका हमारे परिवार पर क्या असर
  2112. 1:38:42पड़ेगा? लोगों के बीच हमारी क्या इज्जत रह
  2113. 1:38:44जाएगी? कौन-कौन सी बातें नहीं होंगी हमारे
  2114. 1:38:46बारे में। कमरे का माहौल एक बार फिर बदलने
  2115. 1:38:49लगा था। अब सवाल सिर्फ शिप्रा के फैसले का
  2116. 1:38:52नहीं पूरे परिवार की प्रतिष्ठा का बन चुका
  2117. 1:38:54था। अरे भाई अब मैं अपने परिवार की चिंता
  2118. 1:38:57करूं या लोगों की? बलवंत राय ने बृजभूषण
  2119. 1:39:00राय को चुप कराते हुए कड़े स्वर में कहा।
  2120. 1:39:02फिर आवाज में थोड़ी नरमी लाते हुए आगे
  2121. 1:39:04बोले। और ये क्यों भूल रहे हो कि सच्चाई
  2122. 1:39:08बदल नहीं सकती। शिप्रा की शादी श्रवण से
  2123. 1:39:10हो चुकी है। अब अगर हम इसकी शादी किसी और
  2124. 1:39:13से कराने की सोचेंगे भी तो पहले तलाक
  2125. 1:39:15करवाना पड़ेगा। उससे हमारी इज्जत बढ़ने
  2126. 1:39:18वाली नहीं है बल्कि उल्टा लोग और बातें
  2127. 1:39:20बनाएंगे। इसके बजाय अगर यह संदेश जाए कि
  2128. 1:39:23जबरदस्ती हुई शादी के बाद भी हमारे परिवार
  2129. 1:39:26की बेटी ने अपने पति को स्वीकार किया तो
  2130. 1:39:28बात कुछ और ही होगी क्योंकि अगर यह चाहती
  2131. 1:39:31तो तलाक लेकर अलग रास्ता चुन सकती थी।
  2132. 1:39:34शिप्रा ने जब अपने दादाजी की ये बातें
  2133. 1:39:36सुनी तो उसे पहली बार लगा कि किसी ने सच
  2134. 1:39:38में उसकी स्थिति को समझा है। इतने समय में
  2135. 1:39:41उसके दिल पर जो बोझ था अब वो हल्का होता
  2136. 1:39:44महसूस हो रहा था। अब शिप्रा खुद को आजाद
  2137. 1:39:46महसूस करने लगी थी। शिप्रा ने जब अपने
  2138. 1:39:49दादाजी की बात सुनी तो [संगीत] उसके मन
  2139. 1:39:51में उनके लिए सम्मान और भी बढ़ गया। उसे
  2140. 1:39:54लगा कि किसी ने सच में उसकी स्थिति को
  2141. 1:39:56समझा है। इतने समय से उसके दिल पर जो बोझ
  2142. 1:39:59था वो पल भर में हल्का हो गया। अब वो खुद
  2143. 1:40:02को आजाद महसूस करने लगी थी। तभी बलवंत राय
  2144. 1:40:05ने शिप्रा से कहा मैंने तुम्हारी बात मान
  2145. 1:40:08ली। अब तुम्हें भी हमारी एक बात माननी
  2146. 1:40:10पड़ेगी। शिप्रा ने सिर हिलाया और बोली
  2147. 1:40:13आपने मेरा साथ दिया है तो अब आप जो भी
  2148. 1:40:16कहेंगे मैं इंकार नहीं करूंगी। बलवंत राय
  2149. 1:40:19परिवार के सभी लोगों की तरफ इशारा करते
  2150. 1:40:21हुए गंभीरता [संगीत] से बोले देखो इन सबका
  2151. 1:40:25डर भी अपनी जगह सही है। इसीलिए रजत के
  2152. 1:40:28खिलाफ हम अपनी कंप्लेंट वापस ले लेंगे और
  2153. 1:40:30साथ ही हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि आगे
  2154. 1:40:33से मुख्तार या उसका भाई हमारे खिलाफ कोई
  2155. 1:40:35गलत कदम ना उठा पाए। शिप्रा कुछ पल सोच
  2156. 1:40:38में डूब गई। फिर शांत स्वर में बोली ठीक
  2157. 1:40:41है अगर आप सबको यही सही लगता है तो मुझे
  2158. 1:40:44कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद बलवंत राय
  2159. 1:40:47ने परिवार के बाकी लोगों की तरफ नजर घुमाई
  2160. 1:40:50और [संगीत] पूछा किसी को इस फैसले पर कुछ
  2161. 1:40:52और कहना है बृजभूषण ने राहत की सांस लेते
  2162. 1:40:56हुए कहा नहीं पिताजी अब ठीक है। जब शिप्रा
  2163. 1:41:00खुद ही उस आदमी के साथ रहना चाहती है तो
  2164. 1:41:02हम क्या कर सकते हैं? हम तो बस इसके भले
  2165. 1:41:05के लिए ही सोच [संगीत] रहे थे। इस पर
  2166. 1:41:07बलवंत राय ने सिर हिलाया और बोले ठीक है
  2167. 1:41:10तो फिर मैं मुख्तार को फोन करता हूं। इतना
  2168. 1:41:13कहकर उन्होंने मुख्तार को कॉल लगाया और
  2169. 1:41:16तुरंत ही कॉल रिसीव कर लिया गया जिससे राय
  2170. 1:41:19साहब को मुख्तार की बेसब्री समझ आ रही थी।
  2171. 1:41:23नमस्कार राय साहब। मैं आपके कॉल का ही
  2172. 1:41:27इंतजार कर रहा था। मुख्तार धीमी लेकिन सदी
  2173. 1:41:30हुई आवाज में बोला तो बलवंत राय ने भी
  2174. 1:41:33औपचारिक लहजे में हेलो कहा। मुख्तार सीधे
  2175. 1:41:36मुद्दे पर आते हुए बोला
  2176. 1:41:38तो बताइए आपने मेरे प्रपोजल पर क्या सोचा?
  2177. 1:41:43उम्मीद है अब तक आपने कोई ठोस फैसला ले
  2178. 1:41:47लिया होगा। उसकी आवाज में ऐसा भरोसा झलक
  2179. 1:41:51रहा था जैसे उसे पहले से यकीन हो कि जवाब
  2180. 1:41:53उसके पक्ष में ही आएगा। बलवंत राय ने एक
  2181. 1:41:56पल के लिए ठहर कर अपने शब्दों को संयत
  2182. 1:41:59किया। फिर बोले हां हमने आपके प्रस्ताव पर
  2183. 1:42:02गंभीरता से विचार किया है और एक निर्णय तक
  2184. 1:42:05भी पहुंचे हैं। वो मन ही मन सोच रहे थे कि
  2185. 1:42:08अपनी बात किस तरह साफ और संतुलित तरीके से
  2186. 1:42:11सामने रखें ताकि टकराव की गुंजाइश ना हो
  2187. 1:42:14और मुख्तार उनकी बात मान भी जाए। उधर
  2188. 1:42:17मुख्तार ने कुछ सोचते हुए पूछा। अच्छा।
  2189. 1:42:21तो क्या तय किया आपने? इस बार उसकी आवाज
  2190. 1:42:25में हल्का सा संदेह भी घुल गया था। मानो
  2191. 1:42:28वो अगले जवाब को लेकर पूरी तरह आश्वस्त
  2192. 1:42:30नहीं रहा हो। मुख्तार भाई, मैं आपसे एक
  2193. 1:42:34बात साफ-साफ जानना चाहता हूं। क्या आप यह
  2194. 1:42:36सब सिर्फ अपने भाई को जेल से छुड़ाने के
  2195. 1:42:39लिए कर रहे हैं? बलवंत राय ने हल्की झिझक
  2196. 1:42:42के साथ अपनी बात रखी, तो कुछ पल के लिए
  2197. 1:42:44दूसरी तरफ खामोशी छा गई। मुख्तार सोच में
  2198. 1:42:47पड़ गया कि इस सवाल का जवाब किस तरह दिया
  2199. 1:42:50जाए। वो अच्छी तरह समझता था कि बलवंत राय
  2200. 1:42:53कोई साधारण इंसान नहीं है जो उसकी बातों
  2201. 1:42:55में आसानी से आ जाए। अगर वह सीधे-सीधे यह
  2202. 1:42:58कह देता कि उसे शिप्रा से हमदर्दी है और
  2203. 1:43:01वह दिल से उसे अपनी बहू बनाना चाहता है तो
  2204. 1:43:03शायद बात उतनी असरदार नहीं रहती। उसने सच
  2205. 1:43:06को झूठ की चाशनी में लपेट कर अपनी बात
  2206. 1:43:09कहने का निश्चय किया और आवाज में गंभीरता
  2207. 1:43:12लाते हुए कहा राय साहब अगर मैं ऐसा कहूं
  2208. 1:43:16कि मुझे शिप्रा पर दया आ गई इसीलिए मैं उन
  2209. 1:43:20दोनों की शादी करवाना चाहता हूं तो यह झूठ
  2210. 1:43:24होगा। यह सच है कि मैं अपने भाई को जेल से
  2211. 1:43:29छुड़ाना चाहता हूं। पर इसके साथ यह भी सच
  2212. 1:43:33है कि मेरा भाई आपकी पोती को बहुत पसंद
  2213. 1:43:36करता है और मेरे कारण उसकी शादी एक भिखारी
  2214. 1:43:40से हो गई। इसका मुझे अफसोस है। उस लड़की
  2215. 1:43:45की जिंदगी खराब ना हो इसीलिए मैं उसे अपने
  2216. 1:43:48घर की बहू बनाना चाहता हूं।
  2217. 1:43:52मुख्तार भाई की बात सुनकर बलवंत राय कुछ
  2218. 1:43:54पल के लिए गहरी सोच में पड़ गए। जिस ठहराव
  2219. 1:43:57और विश्वास के साथ मुख्तार ने अपनी बात
  2220. 1:43:59रखी थी, उसने उन्हें भी एक पल के लिए
  2221. 1:44:02असमंजस में डाल दिया। क्योंकि फोन स्पीकर
  2222. 1:44:05पर था, इसीलिए वहां मौजूद हर व्यक्ति ने
  2223. 1:44:07उसकी बात सुनी और ज्यादातर लोगों को उसकी
  2224. 1:44:10बातें सच्ची ही लगी। फिर थोड़ा संभलकर
  2225. 1:44:13बलवंत राय ने कहा, "मुख्तार भाई, बात यह
  2226. 1:44:16है कि शिप्रा भी तुरंत किसी और रिश्ते में
  2227. 1:44:19बंधने के लिए तैयार नहीं है।" यह सुनते ही
  2228. 1:44:22मुख्तार को जैसे हल्का सा झटका लगा। उसे
  2229. 1:44:24बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि बात इस मोड़ पर
  2230. 1:44:26आकर रुक जाएगी। खासकर तब जब उसे पूरा
  2231. 1:44:30भरोसा था कि फैसला उसके पक्ष में ही होगा।
  2232. 1:44:33अभी वो अपना असली रूप दिखाने की सोच ही
  2233. 1:44:35रहा था कि तभी बलवंत राय की आवाज फिर से
  2234. 1:44:38सुनाई दी।
  2235. 1:44:40लेकिन एक और रास्ता है जिससे मामला सुलझ
  2236. 1:44:43सकता है। मुख्तार भाई कुछ कड़वा बोलते
  2237. 1:44:46बोलते रुक गया। उसने खुद को संभाला और
  2238. 1:44:49सैयद स्वर में कहा आप आखिर कहना क्या
  2239. 1:44:53चाहते हैं राय साहब?
  2240. 1:44:56बलवंत राय ने सीधे मुद्दे पर आते हुए जवाब
  2241. 1:44:58दिया। देखिए भले ही शिपरा अभी दोबारा शादी
  2242. 1:45:02के लिए तैयार नहीं है, लेकिन हम रजत के
  2243. 1:45:04खिलाफ चल रहा केस वापस लेने को तैयार हैं।
  2244. 1:45:07इससे रजत को जेल से बाहर आने का रास्ता
  2245. 1:45:10मिल जाएगा। यह सुनकर मुख्तार भाई को जैसे
  2246. 1:45:13मनचाही मुराद मिल गई। लेकिन उसने अपनी
  2247. 1:45:16खुशी छुपाते हुए गंभीर लहजे में कहा आपकी
  2248. 1:45:20बात ठीक है राय साहब इस तरह रजत तो बाहर आ
  2249. 1:45:24जाएगा लेकिन शिबरा बिटिया की जिंदगी फिर
  2250. 1:45:28भी वहीं की वहीं रह जाएगी। मेरा तो मकसद
  2251. 1:45:31यह था कि उसे उस भिखारी से छुटकारा मिले।
  2252. 1:45:35एक तरह से मैं अपनी गलती का प्रायश्चित
  2253. 1:45:39करना चाहता था। उसकी जिंदगी सवार कर।
  2254. 1:45:43बलवंत राय ने शांत लेकिन स्पष्ट स्वर में
  2255. 1:45:46जवाब दिया। मैं आपकी भावना समझता हूं
  2256. 1:45:49मुख्तार भाई। लेकिन इस समय शिप्रा उस
  2257. 1:45:51स्थिति में नहीं है कि कोई बड़ा फैसला ले
  2258. 1:45:53सके। इसीलिए बेहतर यही होगा कि हम यहीं पर
  2259. 1:45:56इस दुश्मनी को खत्म करें और आगे बढ़े।
  2260. 1:45:59मुख्तार भाई ने बड़ी शालीनता से अपनी बात
  2261. 1:46:02रखी। राय साहब दुश्मनी की बात तो मैं कब
  2262. 1:46:06का भूल चुका हूं। मेरा इरादा तो बस एक नए
  2263. 1:46:09रिश्ते की शुरुआत करने का था। खैर कोई बात
  2264. 1:46:14नहीं अगर कभी शिपरा बिटिया का मन बदल जाए
  2265. 1:46:18तो आप मुझे जरूर बताइएगा। शायद तब हम आगे
  2266. 1:46:22की बात फिर से शुरू कर सकें। मुख्तार की
  2267. 1:46:25यह बात सुनकर बलवंत राय के मन में उसके
  2268. 1:46:27प्रति धारणा काफी बदल [संगीत] गई। उन्हें
  2269. 1:46:29अब वो पहले जैसा आदमी नहीं लग रहा था।
  2270. 1:46:32उन्होंने गंभीर स्वर में कहा मुख्तार
  2271. 1:46:35[संगीत] भाई मैं कल ही सबसे पहले रजत के
  2272. 1:46:37खिलाफ चल रहा केस वापस लेने की प्रक्रिया
  2273. 1:46:39शुरू करवा दूंगा और आपसे भी यही उम्मीद है
  2274. 1:46:42कि अब हमारे बीच किसी तरह की कड़वाहट नहीं
  2275. 1:46:45रहेगी। मुख्तार भाई ने बड़प्पन दिखाते हुए
  2276. 1:46:48कहा अरे राय साहब आप कैसी बातें कर रहे
  2277. 1:46:52हैं। सच कहें तो गलती मेरे भाई की ही थी।
  2278. 1:46:56आपने उसे माफ करके बड़ा दिल दिखाया है। अब
  2279. 1:47:00ऐसे में दुश्मनी रखने का कोई सवाल ही नहीं
  2280. 1:47:03उठता। मेरी तरफ से तो यह मामला यहीं खत्म
  2281. 1:47:06समझिए।
  2282. 1:47:08तो ठीक है मुख्तार भाई अभी के लिए फोन
  2283. 1:47:11रखता हूं। इतना कहकर बलवंत राय ने कॉल काट
  2284. 1:47:14दिया। फोन रखते ही उन्होंने वहां मौजूद
  2285. 1:47:17सभी लोगों के चेहरों पर नजर दौड़ाई। लगभग
  2286. 1:47:20हर चेहरे पर राहत झलक रही थी। [संगीत]
  2287. 1:47:22राजकुमार टंडन के चेहरे पर तो खासतौर पर
  2288. 1:47:25एक बड़ी स्माइल थी। वो थोड़ा आगे बढ़ते
  2289. 1:47:27हुए क्रेडिट लेता हुआ बोला। देखा आपने
  2290. 1:47:30आखिर मेरा तरीका काम आ ही गया। बृजभूषण
  2291. 1:47:34राय ने भी राहत की सांस लेते हुए हामी
  2292. 1:47:36भरी। [संगीत] सच में टंडन जी आपने सही
  2293. 1:47:39वक्त पर दिमाग लगाया। ऐसा लग रहा है जैसे
  2294. 1:47:42सिर से बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो। [संगीत]
  2295. 1:47:45हालांकि शिप्रा के मन में यह सब देखकर
  2296. 1:47:47हल्की सी कसक जरूर थी। उसे अच्छा नहीं लगा
  2297. 1:47:49कि उसके परिवार को एक बदमाश के आगे झुकना
  2298. 1:47:52पड़ा। लेकिन साथ ही उसे इस बात की राहत भी
  2299. 1:47:56थी कि अब घर वाले उसकी दूसरी शादी के लिए
  2300. 1:47:59दबाव नहीं बनाएंगे। तभी उसके दादाजी की
  2301. 1:48:02आवाज फिर से उसके कानों में पड़ी। शिप्रा
  2302. 1:48:05बेटी मैं एक बार फिर कहूंगा अपने फैसले पर
  2303. 1:48:09दोबारा सोच लो। जिंदगी हर किसी को दूसरा
  2304. 1:48:12मौका नहीं देती लेकिन तुम्हें मिल रहा है।
  2305. 1:48:15इसीलिए मेरी सलाह है कि इसे हल्के में मत
  2306. 1:48:18लो। शिप्रा ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में
  2307. 1:48:22जवाब दिया। दादा जी मैंने बहुत सोच समझ कर
  2308. 1:48:25ही यह फैसला लिया है। आप ऐसा कहकर मेरी
  2309. 1:48:28सोच बदलने की कोशिश मत कीजिए प्लीज।
  2310. 1:48:31ठीक है। अगर यही तुम्हारा अंतिम फैसला है
  2311. 1:48:34तो मैं आगे से इस बारे में तुम्हें कुछ
  2312. 1:48:36नहीं कहूंगा। [संगीत]
  2313. 1:48:38बलवंत राय ने शांत स्वर में कहा। वे समझ
  2314. 1:48:40चुके थे कि अब शिप्रा को ज्यादा समझाने का
  2315. 1:48:43कोई फायदा नहीं है। [संगीत] कुछ पल सोचने
  2316. 1:48:45के बाद उन्होंने आगे कहा लेकिन अगर तुम
  2317. 1:48:48श्रवण को अपना पति मान ही चुकी हो तो एक
  2318. 1:48:51काम करना उसे एक बार मुझसे मिलवाना मैं भी
  2319. 1:48:55देखूं कि उसके लिए क्या किया जा सकता है।
  2320. 1:48:58इस पर शिपणी ने सिर हिलाया। ठीक है दादा
  2321. 1:49:01जी। उधर दूसरी तरफ मुख्तार भाई एक कमरे
  2322. 1:49:04में कल्ला और अपने वकील के साथ बैठा था।
  2323. 1:49:06उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान खेल रही
  2324. 1:49:09थी। वकील ने उत्साहित होकर कहा, वाह
  2325. 1:49:12मुख्तार भाई क्या चाल चली है आपने। सांप
  2326. 1:49:15भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी। मुख्तार
  2327. 1:49:18हल्का सा हंसते हुए बोला। जिसे खत्म होना
  2328. 1:49:22था उसका अंत तो तय था। बस थोड़ा वक्त लग
  2329. 1:49:27गया। लेकिन कहते हैं ना देर से ही सही काम
  2330. 1:49:32सही होना चाहिए। कल्ला ने उत्सुकता से
  2331. 1:49:35पूछा तो बॉस अब शिप्रा का क्या होगा? क्या
  2332. 1:49:38उसे ऐसे ही छोड़ देंगे? इस पर मुख्तार ने
  2333. 1:49:41धीमे स्वर में जवाब दिया। उसके साथ क्या
  2334. 1:49:45होना है यह वक्त तय करेगा। फिलहाल हमारा
  2335. 1:49:49असली मकसद रजत को जेल से बाहर निकालना है।
  2336. 1:49:53तभी वकील मुस्कुराते हुए बोला। तो फिर
  2337. 1:49:57समझिए वो काम तो हो ही गया। अब तो बस
  2338. 1:49:59मिठाई खिलाने की तैयारी कीजिए।
  2339. 1:50:02यह सुनकर मुख्तार के चेहरे पर विजय
  2340. 1:50:04मुस्कान उभर आई। अगले दिन सुबह के 7:00
  2341. 1:50:07बजे थे। हल्की धूप खिड़की से छनकर कमरे
  2342. 1:50:10में फैल रही थी। शौर्य नींद से उठा
  2343. 1:50:13जल्दी-जल्दी फ्रेश हुआ और गिरधर काका के
  2344. 1:50:15पास जाने की सोचने [संगीत] लगा। उसने आदत
  2345. 1:50:17के अनुसार अपने कमरे को सलीके से ठीक
  2346. 1:50:20किया। वो दरवाजे की ओर बढ़ा ही था कि
  2347. 1:50:22अचानक दरवाजा बिना दस्तक के खुला और अगले
  2348. 1:50:24ही पल [संगीत] सब कुछ जैसे थम सा गया।
  2349. 1:50:27शंतो हाथ में झाड़ू लिए तेजी से अंदर
  2350. 1:50:30दाखिल हुई। लेकिन सामने खड़े शौर्य को देख
  2351. 1:50:32नहीं पाई। दोनों की टक्कर इतनी अचानक और
  2352. 1:50:35जोरदार थी कि संतों का संतुलन बिगड़ गया।
  2353. 1:50:38उसका पांव फिसला, झाड़ू हवा में लहराई और
  2354. 1:50:40अगले ही क्षण वो शौर्य पर आ गिरी। [संगीत]
  2355. 1:50:43धीमी सी एक धबधब की आवाज हुई। शौर्य नीचे
  2356. 1:50:45जमीन पर था और संतो उसके ऊपर। एक [संगीत]
  2357. 1:50:48पल के लिए दोनों जैसे जड़ हो गए। संतों के
  2358. 1:50:51खुले बाल हल्के से शौर्य के चेहरे पर बिखर
  2359. 1:50:54गए। [संगीत] उसकी सांसे तेज थीं और उसकी
  2360. 1:50:56आंखों में अचानक हुई इस घटना की हैरानी
  2361. 1:50:58साफ झलक रही थी। फिर जैसे ही उसे होश आया
  2362. 1:51:02वो झटके से उठ खड़ी हुई।
  2363. 1:51:04चेहरे पर झेप और गुस्से का मिलाजुला भाव
  2364. 1:51:07लिए उसने अपने कपड़े संभाले। झाड़ू को
  2365. 1:51:09कसकर पकड़ा और शौर्य की तरफ घूरते हुए
  2366. 1:51:12बोली
  2367. 1:51:13कौन हो तुम? और यहां क्या कर रहे हो?
  2368. 1:51:16शौर्य हल्की मुस्कान के साथ जमीन से उठा।
  2369. 1:51:19कपड़ों पर लगी धूल झाड़ी और संतों की ओर
  2370. 1:51:21देखते हुए शरारती अंदाज में बोला। अरे कल
  2371. 1:51:25ही तो मिली [संगीत] थी तुम और आज पहचान भी
  2372. 1:51:27नहीं रही हो। एक ही दिन में भूल गई क्या?
  2373. 1:51:30संतो ने जैसे ही उसकी आवाज सुनी उसने गौर
  2374. 1:51:32से शौर्य को देखा और फिर होठों पर हल्की
  2375. 1:51:35सी मुस्कान आ गई। ओ तो यह तुम हो। वो उसे
  2376. 1:51:40सिर से पांव तक देखने लगी जिसे पहली बार
  2377. 1:51:42सच में उसे नोटिस कर रही हो। फिर ठुडी
  2378. 1:51:45हल्की ऊपर उठाकर अपने खास अंदाज में चहकती
  2379. 1:51:47[संगीत] हुई बोली। देखा मैंने कहा था ना
  2380. 1:51:51अपने चेहरे का यह जंगल साफ [संगीत] कर लो
  2381. 1:51:53तो अच्छे लगोगे। अब देखो क्या लग रहे हो।
  2382. 1:51:57शौर्य उसकी बात सुनकर हल्का सा हंसा। वो
  2383. 1:51:59थोड़ा उसकी तरफ झुका जैसे [संगीत] उसकी
  2384. 1:52:01बात को खास अहमियत दे रहा हो और नरम आवाज
  2385. 1:52:04में बोला, हां, यह तो मानना पड़ेगा।
  2386. 1:52:06इसीलिए तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद जो
  2387. 1:52:09तुमने इतनी कीमती सलाह दी। संतो की नजरें
  2388. 1:52:12अब भी शौर्य के चेहरे पर टिकी थी। जैसे
  2389. 1:52:15कुछ और जानने की कोशिश कर रही [संगीत] हो।
  2390. 1:52:17फिर उसने अचानक सीधे उसकी आंखों में देखते
  2391. 1:52:19हुए पूछा। तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है
  2392. 1:52:22क्या? संतो का सीधा सवाल सुनकर शौर्य एक
  2393. 1:52:25पल के लिए सचमुच चौंक गया। उसे उम्मीद
  2394. 1:52:28नहीं थी कि [संगीत] वो इतनी बेबाकी से
  2395. 1:52:30बिना किसी झिझक के ऐसा कुछ पूछ लेगी। संतो
  2396. 1:52:33का सवाल सुनकर वो थोड़ा नर्वस भी हो गया
  2397. 1:52:35था। शौर्य जानता था कि शंतो उसकी असली
  2398. 1:52:37पहचान से अनजान है। शायद यही वजह थी कि वो
  2399. 1:52:40इतनी सहजता से उससे ऐसे सवाल कर पा रही
  2400. 1:52:43थी। संतो की यही सादगी उसे अच्छी भी लगी।
  2401. 1:52:46उसके दिल में जो आता है बिना घुमाए फिराए
  2402. 1:52:49सीधे कह देती है। यह बात उसे बाकी सबसे
  2403. 1:52:52अलग बनाती है। शौर्य कुछ क्षण चुप रहा
  2404. 1:52:55जैसे शब्द तलाश रहा हो। उसकी चुप्पी देखकर
  2405. 1:52:58संतो ने भोएं हल्की सी चढ़ाई और फिर उसी
  2406. 1:53:01बेपरवाह अंदाज में बोली। क्या हुआ? किस
  2407. 1:53:04सोच में पड़ गए? मैंने ऐसा कोई मुश्किल
  2408. 1:53:06सवाल तो नहीं पूछ लिया जो तुम इतना सोचने
  2409. 1:53:09लगे? उसकी बात में हल्की शरारत भी थी और
  2410. 1:53:12एक मासूम जिज्ञासा भी। शौर्य ने एक गहरी
  2411. 1:53:15सांस ली। खुद को संभाला और हल्की मुस्कान
  2412. 1:53:18के साथ बोला, नहीं अभी तो कोई गर्लफ्रेंड
  2413. 1:53:20नहीं है। इस पर संतो ने बिना किसी लाग
  2414. 1:53:22लपेट के सीधे शौर्य की आंखों में देखते
  2415. 1:53:25हुए कहा, "देखो, मैं तुम्हें साफ-साफ
  2416. 1:53:27[संगीत] बता देती हूं। मुझ पर बहुत लड़कों
  2417. 1:53:29ने ट्राई किया है। मुझे पटाने की कोशिश की
  2418. 1:53:32है। लेकिन मैंने कभी किसी को घास नहीं
  2419. 1:53:34डाली। पर कहते हुए वो एक पल को रुकी। फिर
  2420. 1:53:38हल्की सी मुस्कान के साथ बोली, पर तुम
  2421. 1:53:41मुझे अच्छे लगे हो। तो मैं तुम्हारे बारे
  2422. 1:53:43में सोच सकती हूं। उसके इस बेबाक इजहार ने
  2423. 1:53:47माहौल को अचानक ही बदल दिया। यह किसी
  2424. 1:53:49फिल्मी सीन की तरह था। सीधा, सच्चा और
  2425. 1:53:53बिल्कुल अनएक्सेक्टेड लव प्रपोजल। शौर्य
  2426. 1:53:55हक्का-बक्का रह गया। लेकिन अगले ही पल
  2427. 1:53:58उसकी आंखों में शरारत चमकी। उसने अपने
  2428. 1:54:00चेहरे पर हल्की सी घबराहट ओढ़ ली। जैसे सच
  2429. 1:54:03में किसी मुश्किल में फंस गया हो। देखो
  2430. 1:54:06तुम अच्छी हो। उसने थोड़ा हिचकिचाते हुए
  2431. 1:54:09कहा। पर मुझे अपनी नौकरी की भी फिक्र है।
  2432. 1:54:12अगर शिप्रा मैम को पता चल गया तो कहीं वो
  2433. 1:54:14मुझे नौकरी से ही ना निकाल दें। शंतों ने
  2434. 1:54:18तुरंत भोएं चढ़ाई और तुनक कर बोली वो
  2435. 1:54:21तुम्हें क्यों नौकरी से निकालेंगी भला?
  2436. 1:54:23शौर्य ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कंधे
  2437. 1:54:25उचकाए। अरे अभी मुझे जुम्मा जुम्मा कुछ ही
  2438. 1:54:28दिन हुए हैं नौकरी पकड़े हुए और मैं यहां
  2439. 1:54:30आते ही आशिकी शुरू कर दूं तो क्या पता वो
  2440. 1:54:32नाराज हो जाएं। शौर्य भोलेपन से बोला
  2441. 1:54:35[संगीत] संतो ने तुरंत फैसला सुना दिया।
  2442. 1:54:38अगर ऐसी बात है ना तो मैं पहले ही शिप्रा
  2443. 1:54:40दीदी से बात कर लूंगी। वो मुझे कभी मना
  2444. 1:54:42नहीं करेंगी। बहुत अच्छी हैं वो। नहीं तो
  2445. 1:54:45यहां बाकी जो दीदियां हैं पता नहीं किस
  2446. 1:54:47दुनिया में रहती हैं। शौर्य ने भी धीमे से
  2447. 1:54:50मुस्कुराते हुए हामी भरी। हां वो तो है।
  2448. 1:54:53संतो के चेहरे का भाव अचानक बदल गया। उसकी
  2449. 1:54:56आवाज में अब पहली वाली चंचलता की जगह एक
  2450. 1:54:59हल्का सा अफसोस उतर आया।
  2451. 1:55:01पर बेचारी के साथ बहुत गलत हुआ है। शौर्य
  2452. 1:55:05ने अनजान बनने का नाटक करते हुए भय हल्की
  2453. 1:55:07उठाई। अच्छा ऐसा क्या हुआ? शंतू थोड़ा और
  2454. 1:55:11पास आई जैसे कोई राज बताने वाली हो। उसने
  2455. 1:55:14इधर-उधर देखा और फिर धीमी आवाज में
  2456. 1:55:17फुसफुसाई।
  2457. 1:55:18तुम्हें नहीं पता। एक बदमाश ने जबरदस्ती
  2458. 1:55:21उनकी शादी एक भिखारी से करवा दी। शौर्य ने
  2459. 1:55:25भी उसी अंदाज में जवाब दिया। हां, यह तो
  2460. 1:55:27पता है मुझे। फिर उसने संतो के चेहरे के
  2461. 1:55:30भाव पढ़ने की कोशिश करते हुए थोड़ा ठहर कर
  2462. 1:55:33कहा। पर इसमें जबरदस्ती कैसी? वो चाहे तो
  2463. 1:55:36उस भिखारी से तलाक भी ले सकती हैं ना।
  2464. 1:55:38संतो ने तुरंत सर हिलाया जैसे उसे पहले से
  2465. 1:55:41ही सवाल का जवाब मालूम हो। हां ले तो सकती
  2466. 1:55:44हैं लेकिन वो तलाक लेना ही नहीं चाहती। और
  2467. 1:55:47वो क्यों भला? शौर्य [संगीत] ने थोड़ा और
  2468. 1:55:50कुरेदते हुए पूछा। वो उस भिखारी से तलाक
  2469. 1:55:52क्यों नहीं लेना चाहती? इस पर संतो ने
  2470. 1:55:55समझदारी से जवाब दिया क्योंकि उन्हें पता
  2471. 1:55:58है एक बार अगर उन्होंने तलाक ले लिया तो
  2472. 1:56:00उनके घर वाले तुरंत उनकी दूसरी शादी के
  2473. 1:56:02पीछे पड़ जाएंगे और शिप्रा दी अब दूसरी
  2474. 1:56:05शादी करना ही नहीं चाहती। शौर्य ने हल्का
  2475. 1:56:08सा आश्चर्य जताते हुए बोहें उठाई। तो इसका
  2476. 1:56:11मतलब वो पूरी जिंदगी उसी भिखारी की पत्नी
  2477. 1:56:14बनकर रहेंगी। संतो ने गहरी सांस ली। हां,
  2478. 1:56:18वो इसके लिए भी तैयार हैं। तुम्हें पता है
  2479. 1:56:20कल शाम पूरे परिवार की मीटिंग हुई थी। वो
  2480. 1:56:24थोड़ा और करीब आई। उसकी आवाज फिर धीमी हो
  2481. 1:56:26गई। जैसे कोई अहम बात बताने जा रही हो। सब
  2482. 1:56:30लोग चाहते थे कि शिप्रा दी उस बदमाश के
  2483. 1:56:32भाई से शादी कर लें। उसी से जिसने उनकी
  2484. 1:56:35जबरदस्ती शादी करवाई थी। लेकिन उन्होंने
  2485. 1:56:38साफ मना कर दिया। उन्होंने सबके सामने कह
  2486. 1:56:41दिया कि वो पूरी जिंदगी उस भिखारी की
  2487. 1:56:43पत्नी बनकर रहना कबूल करेंगी, लेकिन उस
  2488. 1:56:46बदमाश के भाई से कभी शादी नहीं करेंगी।
  2489. 1:56:50शौर्य के चेहरे पर भले ही संयम था लेकिन
  2490. 1:56:52अंदर ही अंदर वो वो बात जान चुका था जिसका
  2491. 1:56:55उसे इंतजार था। बलवंत राय और मुख्तार भाई
  2492. 1:56:58की मीटिंग के बाद से ही उसके मन में यही
  2493. 1:57:00सवाल घूम रहा था। आखिर फैसला क्या हुआ? और
  2494. 1:57:03अब जवाब उसके सामने था। फिर भी उसने अपनी
  2495. 1:57:07उत्सुकता छिपाते हुए पूछा। तो क्या शिप्रा
  2496. 1:57:10मैम के घर वाले उनकी बात मान गए? सब तो
  2497. 1:57:13नहीं माने। संतो ने कहा लेकिन उनके दादाजी
  2498. 1:57:17मान गए और उनके आगे फिर कोई कुछ नहीं बोल
  2499. 1:57:20पाया। हां यह जरूर तय हुआ कि उस बदमाश के
  2500. 1:57:22भाई के खिलाफ जो केस है उसे वापस ले लेंगे
  2501. 1:57:25[संगीत] ताकि दुश्मनी खत्म हो जाए। शौर्य
  2502. 1:57:28ने मन ही मन सोचा अच्छा तो यह फैसला हुआ
  2503. 1:57:32है। अब तक उसके मन में जो उथल-पुथल चल रही
  2504. 1:57:35थी, वह शांत हो गई। शिप्रा के फैसले से
  2505. 1:57:38उसे संतोष हुआ। कहीं ना कहीं उसे खुशी हुई
  2506. 1:57:41कि उसने अपने आत्मसम्मान के साथ [संगीत]
  2507. 1:57:43समझौता नहीं किया। साथ ही मुख्तार को लेकर
  2508. 1:57:46भी वह थोड़ा निश्चिंत हुआ। कम से कम अभी
  2509. 1:57:48के लिए तो ऐसा नहीं लग रहा था कि वो
  2510. 1:57:50शिप्रा के खिलाफ कोई कदम उठाएगा। जिस बात
  2511. 1:57:53के लिए वो गिरधर के पास जाने वाला था उसका
  2512. 1:57:56जवाब उसे शंतों की मासूमियत के कारण यहीं
  2513. 1:57:58मिल चुका था। [संगीत] शौर्य को अचानक
  2514. 1:58:01ध्यान आया तो उसने मुस्कुरा कर पूछा। अरे
  2515. 1:58:04बातों में तो मैं यह भूल ही गया। तुम यहां
  2516. 1:58:06आई क्यों थी? संतो ने झाड़ू संभालते हुए
  2517. 1:58:09कमरे पर नजर दौड़ाई। [संगीत] तुम्हारा
  2518. 1:58:11कमरा साफ करने आई हूं। गिरधर काका ने कहा
  2519. 1:58:14है जब तक तुम ठीक से सेटल नहीं हो जाते
  2520. 1:58:16मैं सफाई कर दिया करूं। ठीक है। शौर्य ने
  2521. 1:58:20सिर हिलाया। तुम सफाई देख लो। मैं तब तक
  2522. 1:58:23गिरधर काका से मिलकर आता हूं। यह कहकर वो
  2523. 1:58:26कमरे से बाहर निकल गया। चलते-चलते उसके
  2524. 1:58:28दिमाग में दिनभर की भागदौड़ घूमने लगी।
  2525. 1:58:32मेघा के हॉस्पिटल जाना है। शिप्रा के साथ
  2526. 1:58:34बिग बुल ऑफिस में मीटिंग अरेंज करवानी है।
  2527. 1:58:37सब कुछ कैसे मैनेज होगा? यही सोचते हुए वो
  2528. 1:58:40गिरधर काका के कमरे तक पहुंचा। अंदर
  2529. 1:58:42पहुंचते ही उसने देखा गिरधर काका नाश्ता
  2530. 1:58:45तैयार कर चुके थे। उसे देखते ही उन्होंने
  2531. 1:58:47एक और प्लेट लगा दी। [संगीत] अरे काका
  2532. 1:58:50क्यों तकलीफ कर रहे हो? मैं कैंटीन में
  2533. 1:58:52नाश्ता कर लूंगा। शौर्य ने कहा तो गिरधर
  2534. 1:58:54काका मुस्कुराए। कैसी बात करते हो? अपने
  2535. 1:58:58लिए बनाता ही हूं। दो रोटी और सही। तुम
  2536. 1:59:01ज्यादा मत सोचो। शौर्य समझ गया उन्हें
  2537. 1:59:03रोकना बेकार है। वो चुपचाप बैठ गया। तभी
  2538. 1:59:06उसके दिमाग में एक आईडिया आया। उसने सोचा
  2539. 1:59:09अगर मोहित रैना से मीटिंग शाम 4:00 बजे के
  2540. 1:59:12बाद फिक्स करवा दें तो वो मेघा का मैटर
  2541. 1:59:14आराम से निपटा सकता है। यह सोचकर वो फोन
  2542. 1:59:17लगाते हुए बाहर आया।
  2543. 1:59:19गुड मॉर्निंग सर।
  2544. 1:59:21दूसरी तरफ से आवाज आई। गुड मॉर्निंग।
  2545. 1:59:24शौर्य ने संक्षेप में जवाब दिया। मोहित
  2546. 1:59:27तुम शिप्रा को फोन करके 4:00 बजे के बाद
  2547. 1:59:29का टाइम मीटिंग के लिए फिक्स कर लो। इतना
  2548. 1:59:31कहकर उसने बिना जवाब सुने ही कॉल काट दिया
  2549. 1:59:34क्योंकि उसी वक्त उसकी नजर सामने से आती
  2550. 1:59:36शिप्रा पर पड़ी। शिप्रा उसके पास आकर रुकी
  2551. 1:59:39ही थी कि तभी उसका फोन बज उठा। उसने
  2552. 1:59:42स्क्रीन पर नजर डाली और हल्के आश्चर्य से
  2553. 1:59:44बोली।
  2554. 1:59:45मोहित रैना
  2555. 1:59:48शिप्रा ने फोन उठाया और उलझन भरे स्वर में
  2556. 1:59:50बोली। [संगीत] हां मिस्टर मोहित कहिए।
  2557. 1:59:52कैसे कॉल किया? उसे इतने सवेरे मोहित रैना
  2558. 1:59:55के कॉल की अपेक्षा नहीं थी।
  2559. 1:59:57दरअसल शिप्रा [संगीत] जी मैं दोपहर में
  2560. 1:59:59थोड़ा बिजी हूं। इसीलिए आप 4:00 बजे के
  2561. 2:00:01बाद मीटिंग के लिए आइएगा।
  2562. 2:00:03मोहित रैना ने पोलाइटली कहा। जवाब में
  2563. 2:00:05शिप्रा बोली ठीक है जैसा आप कहें। आपका
  2564. 2:00:09धन्यवाद जो आपने समय रहते इन्फॉर्म कर
  2565. 2:00:11दिया। वो उम्मीद नहीं कर रही थी कि मोहित
  2566. 2:00:13रैना उसके साथ इतना जेनरसली बिहेव करेगा।
  2567. 2:00:17अगर वो शिप्रा को फोन नहीं भी करता तो उसे
  2568. 2:00:19कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था क्योंकि उसे
  2569. 2:00:21बिग बॉल की जरूरत थी। ना कि बिग बॉल को
  2570. 2:00:23उसकी। उसने फोन कट किया और शौर्य से बोली,
  2571. 2:00:27"यह मोहित रैना तो बड़ा अच्छा बंदा है।
  2572. 2:00:30उसने खुद मीटिंग शिफ्ट होने की बात बताई।
  2573. 2:00:32इस पर शौर्य ने सम्मानपूक कहा। बड़े लोगों
  2574. 2:00:36की यही तो खासियत होती है कि वह समय की
  2575. 2:00:38बहुत कद्र करते हैं। ना सिर्फ अपनी बल्कि
  2576. 2:00:40दूसरों के समय की भी। वो सोच रहा था कि
  2577. 2:00:43शिप्रा इतनी जल्दी उसके पास क्या करने आई
  2578. 2:00:46है? अभी तो उसके ऑफिस के लिए निकलने में
  2579. 2:00:48काफी समय है। वहीं शिप्रा [संगीत] ने
  2580. 2:00:50शौर्य को तैयार देखा तो पूछ लिया कहीं
  2581. 2:00:54जाने वाले हो क्या? नहीं तो बस जल्दी उठ
  2582. 2:00:57गया था इसलिए तैयार हो गया। कुछ काम तो था
  2583. 2:01:00नहीं। वैसे आपको कुछ काम है क्या जो आप
  2584. 2:01:03सवेरे सवेरे यहां पर हैं? शौर्य ने सीधा
  2585. 2:01:05सा जवाब दिया। इस पर शिप्रा शौर्य को
  2586. 2:01:08देखते हुए बोली एक्चुअली दादाजी तुमसे
  2587. 2:01:11मिलना चाहते हैं मुझसे। क्या कुछ खास वजह
  2588. 2:01:14है? शौर्य के चेहरे पर हैरानी थी। लेकिन
  2589. 2:01:17शिप्रा ने गोलमोल सा जवाब दिया। हो सकता
  2590. 2:01:21है। इस पर शौर्य संकेत भरे स्वर में बोला।
  2591. 2:01:24[संगीत] आपको तो पता होगा कि वो मुझसे
  2592. 2:01:26क्यों मिलना चाहते हैं। मिलोगे तो तुम्हें
  2593. 2:01:28खुद पता चल जाएगा। शिप्रा ने अभी भी
  2594. 2:01:31स्पष्ट नहीं किया। वैसे शौर्य को आभास तो
  2595. 2:01:33था ही कि बलवंत राय उससे क्यों मिलना
  2596. 2:01:36चाहते हैं। शौर्य शिप्रा के साथ बलवंत राय
  2597. 2:01:38के कमरे में पहुंचा। बलवंत राय और उनके
  2598. 2:01:41साथ बैठे राजदीप राय समझ नहीं पाए कि
  2599. 2:01:44शिप्रा के साथ यह कौन है? बलवंत राय
  2600. 2:01:46[संगीत] ने शिप्रा से पूछ ही लिया। यह कौन
  2601. 2:01:49है? शिप्रा को अपनी गलती का एहसास हुआ।
  2602. 2:01:52उसे ध्यान आया कि उसके पिताजी और दादाजी
  2603. 2:01:55तो श्रवण के नए चेहरे से वाकिफ ही नहीं
  2604. 2:01:57है। पिछली रात श्रवण के साथ घर आते वो लेट
  2605. 2:02:00[संगीत] हो गई थी। इसीलिए गिरधर के अलावा
  2606. 2:02:02किसी ने भी श्रवण का नया रूप नहीं देखा
  2607. 2:02:04था। शिप्रा को थोड़ी खुशी हुई कि श्रवण के
  2608. 2:02:07इस नए अवतार का उन दोनों पर थोड़ा पॉजिटिव
  2609. 2:02:09असर होगा। वो शौर्य की तरफ इशारा करते हुए
  2610. 2:02:12बोली यही तो श्रवण है। [संगीत] क्या?
  2611. 2:02:17बलवंत राय के साथ-साथ राजदीप राय को भी
  2612. 2:02:19जैसे 440 वोल्ट का झटका लगा। कहां वो घनी
  2613. 2:02:23लंबी दाढ़ी से भरा भिखारी वाला चेहरा और
  2614. 2:02:25कहां यह चिकना सा हीरो जैसा व्यक्तित्व।
  2615. 2:02:27दोनों चेहरों में कोई मेल ही नहीं था। इस
  2616. 2:02:30बार राजदीप राय थोड़े गुस्से में बोले,
  2617. 2:02:33बेटी तुम क्या मजाक कर रही हो? क्या पापा
  2618. 2:02:36यह कोई मजाक का समय है जो मैं आपसे मजाक
  2619. 2:02:38करूंगी। यह श्रवण ही है। शिप्रा भी रूखे
  2620. 2:02:41स्वर में बोली। बलवंत राय की पैनी नजरें
  2621. 2:02:44शौर्य के चेहरे का मुआयना करने लगी।
  2622. 2:02:46[संगीत] उन दोनों के पास शिप्रा की बात ना
  2623. 2:02:48मानने का कोई कारण नहीं था। तुम तो अच्छे
  2624. 2:02:51भले दिखते हो। फिर वो भिखारियों जैसी
  2625. 2:02:53स्थिति क्यों बना रखी थी? बलवंत राय ने
  2626. 2:02:56शौर्य से सवाल किया तो उसने शांत स्वर में
  2627. 2:02:59जवाब दिया।
  2628. 2:02:59[संगीत]
  2629. 2:03:00बस हालात कुछ ठीक नहीं थे इसलिए वह स्थिति
  2630. 2:03:02थी। राजदीप राय को जब यकीन हो गया कि यही
  2631. 2:03:05श्रवण है तो उन्हें भी थोड़ी तसल्ली हुई
  2632. 2:03:08कि लुक [संगीत] के मामले में श्रवण से
  2633. 2:03:10किसी का मुकाबला नहीं हो सकता। अगर कोई
  2634. 2:03:12उसे देख ले तो वह राजदीप राय का मजाक नहीं
  2635. 2:03:14उड़ा पाएगा कि उनका दामाद कैसा लग रहा है।
  2636. 2:03:17तभी बलवंत राय शिप्रा से बोले अच्छा बेटा
  2637. 2:03:21तुम जाओ मुझे श्रवण से कुछ बात करनी है।
  2638. 2:03:23शिप्रा जाना नहीं चाहती थी लेकिन मजबूरी
  2639. 2:03:26में बाहर आ गई। वो दरवाजे के पास ही खड़ी
  2640. 2:03:29होकर उनकी बातें सुनने लगी। शिप्रा के
  2641. 2:03:32जाते ही बलवंत राय ने पूछा तुम्हें पता है
  2642. 2:03:35हमने तुम्हें यहां क्यों बुलाया है? नहीं।
  2643. 2:03:38शौर्य ने संक्षेप में कहा इस पर बलवंत राय
  2644. 2:03:42बोले तुम समझते हो कि यह शादी सामान्य
  2645. 2:03:45हालात में नहीं हुई। शिप्रा भी मानसिक रूप
  2646. 2:03:48से कमजोर है। लेकिन देर सवेेर तुम्हें
  2647. 2:03:50तलाक लेना ही होगा। जवाब में शौर्य शांत
  2648. 2:03:53स्वर में बोला। मुझे कोई गलतफहमी नहीं है।
  2649. 2:03:57मैं जानता हूं कि मेरी जगह यहां नहीं है।
  2650. 2:03:59आप जब कहें जहां कहें मैं साइन कर दूंगा।
  2651. 2:04:02अभी भी कर सकता हूं। बलवंत राय ने सिर
  2652. 2:04:05हिलाया।
  2653. 2:04:07तुम्हारी साफ गोई अच्छी लगी। तुमने अब तक
  2654. 2:04:09हमारे परिवार की मदद की है। उम्मीद है आगे
  2655. 2:04:12भी करोगे। [संगीत]
  2656. 2:04:14जहां तक होगा मैं मदद करूंगा। मेरे कारण
  2657. 2:04:17कोई परेशानी नहीं आएगी। शौर्य ने जवाब
  2658. 2:04:20दिया। बाहर खड़ी शिप्रा यह सब सुनकर उलझ
  2659. 2:04:23गई। उसे समझ नहीं आया कि दादाजी अब भी ऐसी
  2660. 2:04:26बातें क्यों कर रहे हैं। उसे गुस्सा आया
  2661. 2:04:28पर उसने तय किया कि वह अपने फैसले पर अडिग
  2662. 2:04:31रहेगी। बलवंत राय ने आगे कहा अब तुम हमारे
  2663. 2:04:35दामाद हो इसीलिए तुम्हें अब अपने रहन-सहन
  2664. 2:04:38का ध्यान रखना होगा। मैं कोशिश करूंगा।
  2665. 2:04:42शौर्य बोला तभी राजदीप राय बोले
  2666. 2:04:46ड्राइवर का काम तुम्हारे लिए ठीक नहीं है।
  2667. 2:04:49लोगों को सच पता चला तो शिप्रा की इज्जत
  2668. 2:04:51पर असर पड़ेगा। शौर्य ने सीधा पूछा तो आप
  2669. 2:04:55चाहते क्या हैं? बलवंत राय बोले अगर हम
  2670. 2:04:58तुम्हें ऑफिस का काम दें तो कर लोगे।
  2671. 2:05:02शौर्य ने हल्का सा तंज किया इससे भी तो
  2672. 2:05:05वही खतरा रहेगा कि लोग पहचान जाएंगे।
  2673. 2:05:08बलवंत राय चढ़कर बोले और तुम कर भी क्या
  2674. 2:05:12सकते हो? अब शौर्य का धैर्य टूटने लगा।
  2675. 2:05:16मैंने आपसे कुछ नहीं मांगा। अगर परेशानी
  2676. 2:05:19है तो शिप्रा से कहिए तलाक दे दे सब खत्म
  2677. 2:05:22हो जाएगा। राजदीप राय गुस्से में बोले
  2678. 2:05:25तुम्हारे मुंह से ऐसी बातें शोभा नहीं
  2679. 2:05:27देती। क्यों? मैंने किसका क्या बिगाड़
  2680. 2:05:30लिया जो इस तरह की बातें नहीं कर सकता।
  2681. 2:05:32मैंने आपका एक पैसा लिया तो है नहीं जो
  2682. 2:05:34आपकी सुनूंगा। मंदिर में जो लोग मुझे दो
  2683. 2:05:37वक्त का खाना देते हैं वो भी श्रद्धा से
  2684. 2:05:39देते थे। तिरस्कार भरी नजरों से नहीं
  2685. 2:05:41देखते थे। और आप आप तो काम में भी छोटा
  2686. 2:05:44बड़ा देखने लगे। शौर्य [संगीत] ने आज पहली
  2687. 2:05:46बार राय परिवार को आईना दिखाया। उसकी
  2688. 2:05:49बातें सुनकर बलवंत राय और राजदीप के मुंह
  2689. 2:05:51खुले रह गए। शिप्रा जो बाहर खड़ी होकर सब
  2690. 2:05:54कुछ सुन रही थी, उसे शौर्य की बात सुनकर
  2691. 2:05:57अच्छा लग रहा था। जिस तरह शौर्य ने महसूस
  2692. 2:06:00किया कि बलवंत राय और राजदीप राय उसे नीचा
  2693. 2:06:02दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उसने उन्हें
  2694. 2:06:05[संगीत] उन्हीं की भाषा में जवाब दिया।
  2695. 2:06:08क्या काम करोगे तुम? बलवंत राय जानना
  2696. 2:06:11चाहते थे कि श्रवण किस काम की बात कर रहा
  2697. 2:06:13है। चिंता मत कीजिए। जब आपके यहां से अलग
  2698. 2:06:17कोई भी काम करूंगा तो उससे आपकी प्रतिष्ठा
  2699. 2:06:19पर कोई आंच नहीं आएगी। इतना कहने के बाद
  2700. 2:06:23शौर्य ने जब महसूस किया कि अब उसके पास
  2701. 2:06:25कहने के लिए कुछ नहीं बचा तो वह बोला अगर
  2702. 2:06:29आपके सवाल खत्म हो गए हो तो क्या मैं जा
  2703. 2:06:31सकता हूं?
  2704. 2:06:33हां जा तो सकते हो पर यह तो बता दो कि तुम
  2705. 2:06:36काम क्या करोगे। बलवंत राय ने फिर से अपना
  2706. 2:06:38सवाल दोहरा दिया। तो शौर्य ने गंभीर स्वर
  2707. 2:06:41में कहा मेरी जरूरतें बहुत कम है। उन्हें
  2708. 2:06:45पूरा करने के [संगीत] लिए मुझे बहुत
  2709. 2:06:46ज्यादा हाथ पैर मारने की जरूरत नहीं है।
  2710. 2:06:49यह सुनकर राजदीप राय से रहा नहीं गया और
  2711. 2:06:52वह बोले लेकिन काम ऐसा हो जो तुम्हारी
  2712. 2:06:55प्रतिष्ठा पर चार चांद लगा दे ना कि उसे
  2713. 2:06:58और धूमिल कर दे। मेरे लिए तो काम बस काम
  2714. 2:07:01होता है। प्रतिष्ठा का विषय तो आप जैसे
  2715. 2:07:04बड़े लोगों के लिए है। शौर्य भी अब जवाब
  2716. 2:07:07देने से चूक नहीं रहा था। बलवंत राय
  2717. 2:07:10स्थिति को संभालते हुए बोले देखो तुम्हें
  2718. 2:07:13काम के लिए भटकने की कोई जरूरत नहीं है।
  2719. 2:07:15मैं देखता हूं अपने ऑफिस में ही तुम्हें
  2720. 2:07:17कोई ढंग का काम दे दूंगा। इस पर शौर्य ने
  2721. 2:07:20हाथ जोड़ लिए और बोला लगता है आप मेरी बात
  2722. 2:07:23को समझे नहीं। [संगीत] मुझे आपके ऑफिस में
  2723. 2:07:26काम करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं
  2724. 2:07:28अपने लिए बाहर काम तलाश [संगीत] कर लूंगा।
  2725. 2:07:31इतना कहकर शौर्य कमरे से बाहर निकल गया।
  2726. 2:07:34शिप्रा ने जैसे ही शौर्य को कमरे से बाहर
  2727. 2:07:36आते देखा, वो जल्दी से दरवाजे के पास से
  2728. 2:07:39हटकर बीच में खड़ी हो गई ताकि शौर्य को यह
  2729. 2:07:42ना लगे कि वह छुपकर उसकी बातें सुन रही
  2730. 2:07:44थी। शौर्य ने जब शिप्रा को वहां खड़े देखा
  2731. 2:07:47तो वह रुका और बोला
  2732. 2:07:50उन्हें जो बात करनी थी उन्होंने कर ली। अब
  2733. 2:07:53मैं जा सकता हूं। शौर्य ने अपनी बात को
  2734. 2:07:56पोलाइटली रखने की कोशिश की। वो नहीं चाहता
  2735. 2:07:58था कि शिप्रा को पता चले कि उसके और बलवंत
  2736. 2:08:01राय के बीच क्या बात हुई थी।
  2737. 2:08:03लेकिन उसे क्या पता था कि शिप्रा पहले ही
  2738. 2:08:05उन सबकी बातें सुन चुकी थी। अंदर क्या बात
  2739. 2:08:09हुई? शिप्रा ने पूछा वो शौर्य के मुंह से
  2740. 2:08:13सुनना चाहती थी। इस पर शौर्य बोला कुछ खास
  2741. 2:08:17नहीं। आपके दादाजी चाहते हैं कि मैं उनकी
  2742. 2:08:19कंपनी में ही जॉब करूं। पर मैंने इंकार कर
  2743. 2:08:22दिया। पर क्यों? उनकी कंपनी में काम करने
  2744. 2:08:26में तुम्हें क्या दिक्कत है? शिप्रा शौर्य
  2745. 2:08:30के मन की बात जानना चाहती थी। शौर्य ने
  2746. 2:08:32शांत स्वर में कहा कोई दिक्कत नहीं है पर
  2747. 2:08:36मुझे लगता है कि बाहर काम करना मेरे लिए
  2748. 2:08:38ज्यादा बेहतर होगा। इस पर शिप्रा बोली ठीक
  2749. 2:08:42है फिर जैसी तुम्हारी मर्जी अगर तुम्हें
  2750. 2:08:44लगता है कि बाहर काम करना तुम्हारे लिए
  2751. 2:08:46ज्यादा फायदेमंद है तो तुम्हें रोकना गलत
  2752. 2:08:49होगा। मैं थोड़ी देर में तैयार होकर आती
  2753. 2:08:51हूं। तब तक तुम अपने रूम में रेस्ट करो।
  2754. 2:08:54शौर्य ने सहमति में सर हिलाया और वहां से
  2755. 2:08:57निकल गया। शिप्रा वापस मुड़ी और दादा जी
  2756. 2:08:59के कमरे में जाकर बोली
  2757. 2:09:02क्या हुआ? आपकी बात श्रवण से हो गई? इस पर
  2758. 2:09:05बलवंत राय बोले, हां, हो तो गई। तुम बताओ
  2759. 2:09:08तुम यहां दोबारा क्या करने आई हो? मैं बस
  2760. 2:09:11जानने आई थी कि श्रवण से आपकी बात कैसी
  2761. 2:09:13रही? शिप्रा ने सच्चाई छुपाते हुए कहा,
  2762. 2:09:16"इस बलवंत राय" बोले, "कैसा रहा? क्या
  2763. 2:09:19मतलब? ठीक रहा।" मुझे लगता है वह बेहद
  2764. 2:09:22खुददार आदमी है। उसने कहा कि वह खुद अपने
  2765. 2:09:24लिए काम ढूंढ लेगा। आपने उसे अपने पास काम
  2766. 2:09:28करने के लिए मनाने की कोशिश नहीं की क्या?
  2767. 2:09:30शिप्रा जानना चाहती थी कि उसके दादाजी ने
  2768. 2:09:33ऐसा क्यों नहीं किया? बलवंत राय ने जवाब
  2769. 2:09:36दिया, नहीं बेटी क्योंकि मैं देखना चाहता
  2770. 2:09:39हूं कि क्या सच में वो अपने लिए एक ढंग की
  2771. 2:09:41नौकरी तलाश सकता है या [संगीत] नहीं। कहते
  2772. 2:09:44हुए दादा बलवंत राय गहरी सोच में डूब गए।
  2773. 2:09:47वहीं दूसरी तरफ शौर्य गिरधर के कमरे में
  2774. 2:09:50पहुंचा। वह बीच में ही खाना छोड़कर गया
  2775. 2:09:52था। गिरधर ने जैसे ही शौर्य को वापस आते
  2776. 2:09:55देखा, उसने दोबारा उसकी प्लेट सामने रख
  2777. 2:09:57दी। शौर्य ने खाना खाया और शिप्रा का
  2778. 2:10:00इंतजार करने लगा। 15 मिनट बाद शिप्रा भी
  2779. 2:10:03तैयार होकर आ गई। शौर्य गाड़ी ले आया और
  2780. 2:10:06शिप्रा को उसके ऑफिस पहुंचाया। इस दौरान
  2781. 2:10:08शौर्य ने शिप्रा से ज्यादा बातें नहीं की।
  2782. 2:10:12शिप्रा को उसके ऑफिस छोड़कर शौर्य टैक्सी
  2783. 2:10:14लेकर सिटी हॉस्पिटल पहुंचा। वो सीधे
  2784. 2:10:16हॉस्पिटल के अंदर गया और मेघा को कॉल
  2785. 2:10:18लगाया। उसने मेघा को हॉस्पिटल की लॉबी में
  2786. 2:10:21बुलाया। मेघा जीनत के साथ उसके पास
  2787. 2:10:25पहुंची। मेघा को उम्मीद नहीं थी कि शौर्य
  2788. 2:10:27सच में हॉस्पिटल आ जाएगा। वहीं ज़ीनत शौर्य
  2789. 2:10:30के आने से खुश थी। विक्की ने उसके साथ भी
  2790. 2:10:33कई बार बदतमीजी की थी। इसीलिए वो [संगीत]
  2791. 2:10:36भी विक्की को सबक सिखाना चाहती थी। लेकिन
  2792. 2:10:38यहां तो सभी उससे खौफ खाते थे। हॉस्पिटल
  2793. 2:10:42का डीन भी उस पर हाथ डालने से घबराता था।
  2794. 2:10:45जहां जीनज शौर्य के आने से खुश
  2795. 2:10:46[संगीत]
  2796. 2:10:47थी, वहीं मेघा थोड़ी घबराई हुई थी।
  2797. 2:10:51डीन का ऑफिस कहां है? शौर्य ने मेघा से
  2798. 2:10:54सवाल किया तो मेघा के चेहरे पर थोड़ी
  2799. 2:10:56घबराहट आ गई। हॉस्पिटल के डीन का नाम
  2800. 2:10:58विपिन बत्रा है। मेघा डरते-डरते शौर्य को
  2801. 2:11:02लेकर डीन के ऑफिस पहुंची। तुम बाहर खड़ी
  2802. 2:11:05रहो। मैं थोड़ी देर में आता हूं। ऐसा
  2803. 2:11:07बोलकर शौर्य अंदर ऑफिस में चला गया। विपिन
  2804. 2:11:11बत्रा ने शौर्य को ऊपर से नीचे तक देखा और
  2805. 2:11:14पूछा।
  2806. 2:11:16कहिए कैसे आना हुआ? अभी आपने ऑफिस के बाहर
  2807. 2:11:19मेरे साथ एक लड़की मेघा को देखा होगा। वो
  2808. 2:11:22मेरी बहन है। कुछ दिन पहले उसने आपके पास
  2809. 2:11:25एक कंप्लेंट की थी। मैं जानना चाहता हूं
  2810. 2:11:27कि आपने उस कंप्लेंट के अगेंस्ट क्या
  2811. 2:11:29एक्शन लिया। शौर्य ने अदब के साथ सवाल
  2812. 2:11:32किया। विपिन बत्रा कुछ पल सोचता रहा। फिर
  2813. 2:11:35बोला देखिए हमने उस घटना के बारे में जांच
  2814. 2:11:38की थी पर हमें कोई खास गड़बड़ नजर नहीं
  2815. 2:11:41आई। मतलब आपने विक्की के खिलाफ कुछ नहीं
  2816. 2:11:44किया। शौर्य ने सपाट स्वर में पूछा। जवाब
  2817. 2:11:48में विपिन बत्रा गंदी सी शक्ल बनाकर बोला
  2818. 2:11:50अरे भाई बोला ना हमने उसके खिलाफ जांच
  2819. 2:11:53[संगीत] की थी। अब अगर कुछ मिलता तभी तो
  2820. 2:11:55हम उसके खिलाफ कोई कदम उठाते ना। ऐसा लगा
  2821. 2:11:58मानो शौर्य एक नजर में सारा मामला समझ
  2822. 2:12:01चुका था। उसने सर्द आवाज में कहा क्या एक
  2823. 2:12:04बार मैं विक्की से मिल सकता हूं? [संगीत]
  2824. 2:12:07आप उससे मिलकर क्या करोगे? विपिन बत्रा ने
  2825. 2:12:10हैरानी से पूछा। तो शौर्य ने उसकी आंखों
  2826. 2:12:13में देखते हुए कहा, मैं उससे पूछूंगा कि
  2827. 2:12:16उसने मेरी बहन के साथ बदतमीजी क्यों की?
  2828. 2:12:19नहीं, तुम ऐसा कुछ भी नहीं कर सकते। कोई
  2829. 2:12:21बाहर का आदमी आकर हमारे हॉस्पिटल में उधम
  2830. 2:12:24नहीं मचा सकता। विपिन मामले को रफादफा
  2831. 2:12:27करना चाहता था। शौर्य समझ गया कि डीन
  2832. 2:12:29विक्की के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेने
  2833. 2:12:31वाला। इसीलिए वो उसे चेतावनी देते हुए
  2834. 2:12:34बोला। अगर आप विक्की को यहां नहीं बुलाओगे
  2835. 2:12:37तो मजबूर होकर मुझे पुलिस को बुलाना
  2836. 2:12:39पड़ेगा।
  2837. 2:12:41क्या कहा पुलिस को? आपको पता है कि यह
  2838. 2:12:44हॉस्पिटल किसका है? विपिन बत्रा ने शौर्य
  2839. 2:12:46को घूरते हुए पूछा। शौर्य ने भी उसे घूरते
  2840. 2:12:49हुए जवाब दिया। क्या यह पता होने से कि यह
  2841. 2:12:52हॉस्पिटल किसका है? विक्की का गुनाह कम हो
  2842. 2:12:55जाएगा।
  2843. 2:12:56यह हॉस्पिटल राजा साहब का है। उनके खिलाफ
  2844. 2:12:59जाने का मतलब समझते हो? विपिन बत्रा ने
  2845. 2:13:02राजा साहब का नाम लेकर उसे डराने की कोशिश
  2846. 2:13:05की। लेकिन शौर्य अपनी बात पर अड़ा रहा।
  2847. 2:13:08राजा साहब का हॉस्पिटल होने से यहां पढ़ने
  2848. 2:13:10वाली बच्चियां उनकी दासी बन जाती हैं क्या
  2849. 2:13:13कि किसी भी मनचले को उन्हें छेड़ने की
  2850. 2:13:15इजाजत मिल जाए। डीन लाजवाब हो चुका था तो
  2851. 2:13:19शौर्य ने जोर देकर कहा मैंने आपको कहा आप
  2852. 2:13:22यहीं पर मुझे विक्की से मिलवाइए नहीं तो
  2853. 2:13:25मैं इस हॉस्पिटल में पुलिस बुलवाऊंगा।
  2854. 2:13:26[संगीत]
  2855. 2:13:28शौर्य की इस बात पर विपिन बत्रा उपहास
  2856. 2:13:30करते हुए बोला अगर विक्की यहां पर आ भी
  2857. 2:13:33गया तो तुम क्या करोगे? मैं तो बस इतना
  2858. 2:13:36चाहता हूं कि वो यहां आकर मेरी बहन से
  2859. 2:13:38माफी मांगे। शौर्य ने शांत स्वर में कहा।
  2860. 2:13:42तभी विपिन बत्रा के दिमाग में कुछ चलने
  2861. 2:13:44लगा। उसने सोचा एक बार विक्की को बुलाकर
  2862. 2:13:48इस बहन के भाई की हेकड़ी निकालता हूं। यही
  2863. 2:13:52सोचकर उसने विक्की को कॉल लगाया और फोन
  2864. 2:13:55उठते ही विपिन बत्रा बोला।
  2865. 2:13:58विक्की क्या तुम इस समय मेरे ऑफिस में आ
  2866. 2:14:00सकते हो?
  2867. 2:14:02क्या बात है सर? कोई काम है क्या?
  2868. 2:14:05दूसरी तरफ से विक्की की आवाज आई तो विपिन
  2869. 2:14:07बत्रा ने कहा, हां कोई है जो तुमसे मिलना
  2870. 2:14:10चाहता है?
  2871. 2:14:11ठीक है सर मैं अभी आता हूं।
  2872. 2:14:13विक्की ने इतना बोलकर फोन काट दिया। वो
  2873. 2:14:16अभी 5 मिनट में यहां आ जाएगा। ऐसा करना
  2874. 2:14:19तुम उससे अपनी बहन से यहीं पर माफी मंगवा
  2875. 2:14:22लेना। डीन की बात सुनते ही शौर्य ने मेघा
  2876. 2:14:26और जीनत को भी अंदर डीन के कमरे में ही
  2877. 2:14:28बुला लिया और विक्की का इंतजार करने लगा।
  2878. 2:14:31लगभग आधे घंटे बाद विक्की अपने एक दोस्त
  2879. 2:14:34के साथ डीन के कमरे में आया और बोला हां
  2880. 2:14:37सर बताइए आपने हमें क्यों याद किया? विपिन
  2881. 2:14:40बत्रा शौर्य की तरफ इशारा करते हुए बोला
  2882. 2:14:44यह मेघा के भैया हैं। इनका कहना है कि
  2883. 2:14:46तुमने मेघा के साथ बदतमीजी की है। इसीलिए
  2884. 2:14:49यह चाहते हैं कि तुम सबके सामने मेघा से
  2885. 2:14:52माफी मांगो। विक्की ने शौर्य को ऊपर से
  2886. 2:14:54नीचे तक देखा। फिर मेघा के पास गया और
  2887. 2:14:57उसके कान के पास अपना मुंह लाकर बोला क्या
  2888. 2:15:01मेघा रानी तुम तो खामखा अपने आशिक को
  2889. 2:15:03बदनाम करने पर तुली हो। तभी शौर्य विपिन
  2890. 2:15:07बत्रा की तरफ देखते हुए बोला क्यों मिस्टर
  2891. 2:15:10बत्रा? आपको अभी भी कुछ दिखाई नहीं दे
  2892. 2:15:12रहा।
  2893. 2:15:14देख तो रहा हूं। बढ़िया है ना? दोनों आपस
  2894. 2:15:17में मामले को निपटाने की कोशिश कर रहे
  2895. 2:15:18हैं। विपिन बत्रा वही देख रहा था जो वो
  2896. 2:15:22देखना चाहता था। या यूं कहें कि वो जानकर
  2897. 2:15:24भी अनजान बन रहा था। विक्की ने जब शौर्य
  2898. 2:15:27को डीन से शिकायत करते देखा तो वह दोबारा
  2899. 2:15:29मेघा के करीब जाकर बोला मेघा रानी यह
  2900. 2:15:33तुम्हारा भाई कब पैदा हो गया जो मुझसे
  2901. 2:15:36माफी मंगवाने यहां तक आ गया। मेघा के
  2902. 2:15:39चेहरे का रंग उड़ चुका था। उसे लग रहा था
  2903. 2:15:42कि शौर्य ने यहां आकर गलती की है। पता
  2904. 2:15:45नहीं यह विक्की अब और क्या हरकत करेगा।
  2905. 2:15:48विपिन बत्रा भी विक्की के सामने कुछ बोल
  2906. 2:15:50नहीं पा रहा था। इसका मतलब साफ था कि
  2907. 2:15:53विक्की किसी बड़े परिवार से ताल्लुक रखता
  2908. 2:15:55है। तभी शौर्य ने रूखे स्वर में कहा
  2909. 2:15:59मिस्टर बत्रा मुझे आपको देखकर कहना पड़ेगा
  2910. 2:16:02कि आप इस हॉस्पिटल के डीन होने लायक नहीं
  2911. 2:16:04है। यह विक्की आपके सामने ही बदतमीजी किए
  2912. 2:16:07जा रहा है और आप इसकी गलतियों को नजरअंदाज
  2913. 2:16:10कर रहे हैं। विपिन बत्रा फिर से विक्की का
  2914. 2:16:13बचाव करते हुए बोला। मिस्टर जो भी आपका
  2915. 2:16:16नाम है आप जानते भी हैं विक्की किस परिवार
  2916. 2:16:19से संबंध रखता है। किसी भी परिवार से
  2917. 2:16:22संबंध रखता हो उससे इसे किसी को छेड़ने का
  2918. 2:16:25अधिकार नहीं मिल जाता। शौर्य का गुस्सा
  2919. 2:16:28धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था। तभी विक्की
  2920. 2:16:30मेघा से दूर हुआ और शौर्य के सामने आकर
  2921. 2:16:33खड़ा हो गया और बोला
  2922. 2:16:37तुम कुछ ज्यादा ही नहीं बोल रहे हो। अगर
  2923. 2:16:39मेरे बारे में नहीं जानते थे तो थोड़ी सी
  2924. 2:16:41रिसर्च ही कर लेते। फिर तुम्हें समझ आ
  2925. 2:16:44जाता कि कहां बोलना चाहिए और कहां नहीं
  2926. 2:16:48तो ठीक है। फिर तुम ही बता दो कि तुम किस
  2927. 2:16:51बम के पलीते हो। शौर्य ने विक्की का मजाक
  2928. 2:16:54उड़ाते हुए कहा। तुम्हारी जुबान कुछ
  2929. 2:16:57ज्यादा ही चल रही है। कहते हुए विक्की ने
  2930. 2:16:59शौर्य का कॉलर पकड़ लिया और यही विक्की की
  2931. 2:17:02सबसे बड़ी गलती थी। जैसे ही विक्की ने
  2932. 2:17:05शौर्य के कॉलर को हाथ लगाया, शौर्य ने एक
  2933. 2:17:07जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया।
  2934. 2:17:10विक्की लड़खड़ा कर चार कदम पीछे चला गया।
  2935. 2:17:13शौर्य का यह थप्पड़ विक्की के लिए बिल्कुल
  2936. 2:17:15अनएक्सेक्टेड था। पहले तो उसे समझ ही नहीं
  2937. 2:17:18आया कि अचानक से क्या हो गया। जब उसे समझ
  2938. 2:17:21आया तो विक्की के साथ आया लड़का शौर्य पर
  2939. 2:17:23झपटा। शौर्य ने अपने पैर से उसे एक जोरदार
  2940. 2:17:26किक मारी जो सीधा उसके पेट पर लगी। वो उछल
  2941. 2:17:29कर दरवाजे के पास जा गिरा। अब तक विक्की
  2942. 2:17:32भी खुद को संभालकर शौर्य पर झपटा। लेकिन
  2943. 2:17:34उसका भी हाल उसके दोस्त जैसा ही हुआ।
  2944. 2:17:37शौर्य की किक उसके सीने पर लगी और वह अपने
  2945. 2:17:40दोस्त के ऊपर जाकर गिर पड़ा। मेघ और जीनत
  2946. 2:17:43आंखें फाड़े यह सब देख रही थी। उन्होंने
  2947. 2:17:45उम्मीद नहीं की थी कि शौर्य एक मिनट में
  2948. 2:17:47ही बाजी पलट देगा। विपिन बत्रा भी हैरानी
  2949. 2:17:50से कभी शौर्य को तो कभी विक्की को देख रहा
  2950. 2:17:53था। विक्की का ऐसा कोई हश्र करेगा यह उसने
  2951. 2:17:56कभी सोचा भी नहीं था। अब उसकी आंखों में
  2952. 2:17:59खौफ नजर आ रहा था। वो शौर्य से बोला यह
  2953. 2:18:02क्या किया तुमने? तुम्हें पता है तुमने
  2954. 2:18:05किस पर हाथ उठाया है? मुझे नहीं पता पर
  2955. 2:18:08आपको तो पता है ना। अभी तो मैंने कुछ खास
  2956. 2:18:10किया ही नहीं है। अगर इसने मेघा के सामने
  2957. 2:18:13झुक कर [संगीत] माफी नहीं मांगी तो आज
  2958. 2:18:15अपने पैरों पर यहां से बाहर नहीं जा
  2959. 2:18:17पाएगा। शौर्य ने विपिन बत्रा को चेतावनी
  2960. 2:18:20देते हुए कहा। तभी विक्की धीरे-धीरे शौर्य
  2961. 2:18:22की तरफ बढ़ता हुआ बोला, "तू, तूने मुझ पर
  2962. 2:18:26हाथ उठाया है। विक्की नारंग पर हाथ उठाया
  2963. 2:18:29है। अब तुझे कोई नहीं बचा सकता।"
  2964. 2:18:32तभी विपिन बत्रा ने जल्दी से किसी को फोन
  2965. 2:18:35लगाया और बोला सर आप मेरे कमरे में जल्दी
  2966. 2:18:38से आ जाइए। कोई है जो मेरे कमरे में आकर
  2967. 2:18:41गुंडागर्दी कर रहा है? जिसको बुलाना है
  2968. 2:18:43बुला लो। इसका मैं जो करूंगा वो तो करूंगा
  2969. 2:18:46ही। पर तुम्हें भी इस हॉस्पिटल के बाहर
  2970. 2:18:49नहीं किया तो मैं मेघा का भाई कहलाने के
  2971. 2:18:52लायक नहीं।
  2972. 2:18:53[संगीत]
  2973. 2:18:53कहते हुए शौर्य विपिन बत्रा के करीब
  2974. 2:18:56पहुंचा और उसका कॉलर पकड़ते हुए बोला अभी
  2975. 2:18:59से इस जगह से अपना बोरिया बिस्तर समेटना
  2976. 2:19:02शुरू कर दो। [संगीत] इतने में विक्की फिर
  2977. 2:19:04से शौर्य पर हमला करने ही वाला था कि
  2978. 2:19:07दरवाजे से तेज आवाज सुनाई दी। ठहर [संगीत]
  2979. 2:19:10जाओ। यह आवाज सुनते ही विक्की जहां का
  2980. 2:19:12तहां ठिटक गया और हैरानी से दरवाजे की तरफ
  2981. 2:19:15देखने लगा। दरवाजे पर खड़े शख्स को देखकर
  2982. 2:19:19विपिन [संगीत] बत्रा के चेहरे पर भी राहत
  2983. 2:19:20दिखाई दी। विपिन बत्रा उस अंदर आए शख्स के
  2984. 2:19:24पास पहुंचा और शिकायती लहजे में बोला सर
  2985. 2:19:27जी आप एकदम सही समय पर आए हैं। देखिए इस
  2986. 2:19:30शख्स ने यहां उत्पात मचा रखा है। यह सर जी
  2987. 2:19:34कोई और नहीं कांता प्रसाद है। मेघा और
  2988. 2:19:36जीनत भी कांता प्रसाद को जानती थी।
  2989. 2:19:38उन्होंने बीते कल ही तो मेघा को अपना
  2990. 2:19:40विजिटिंग कार्ड दिया था और यह भी कहा
  2991. 2:19:42[संगीत] था कि अगर उसे विक्की दोबारा
  2992. 2:19:44परेशान करें तो वह उन्हें फोन करें। लेकिन
  2993. 2:19:47क्या हॉस्पिटल के डीन के सामने कांता
  2994. 2:19:49प्रसाद उसकी बात मानेंगे?
  2995. 2:19:52मेघा कांता प्रसाद के रुतबे से भली-भांति
  2996. 2:19:55परिचित थी। हॉस्पिटल की बागडोर एक तरह से
  2997. 2:19:58कांता प्रसाद जी के हाथों में ही थी। राजा
  2998. 2:20:01साहब चंद्रभान राठौड़ पूरी तरह से उन्हीं
  2999. 2:20:03पर निर्भर रहते थे। शौर्य भी हैरान था कि
  3000. 2:20:06कांता प्रसाद अचानक यहां कैसे आ गए। कांता
  3001. 2:20:09प्रसाद ने शौर्य को एक नजर देखा। उसके बाद
  3002. 2:20:12वो विपिन बत्रा से बोले।
  3003. 2:20:14एग्जैक्टली [संगीत] क्या हुआ है यहां पर?
  3004. 2:20:17विपिन बत्रा कुछ बोलते उससे पहले विक्की
  3005. 2:20:20आगे आया और बोला सर जी इस बदमाश ने मुझ पर
  3006. 2:20:24हाथ उठाया और मुझे जान से मारने की धमकी
  3007. 2:20:26भी दी। सिर्फ मुझे ही नहीं इसने डॉक्टर
  3008. 2:20:29बत्रा को भी हॉस्पिटल से निकलवाने की धमकी
  3009. 2:20:32दी है। अब इस गुंडे का इलाज आप ही कीजिए।
  3010. 2:20:36मैंने आपसे नहीं पूछा। जिससे पूछा है उसके
  3011. 2:20:39मुंह में भी जुबान है। कांता प्रसाद
  3012. 2:20:42बेरुखी से बोले। विक्की को कांता प्रसाद
  3013. 2:20:45से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी। वो हैरानी
  3014. 2:20:47से उनकी ओर देखने लगा। हैरानी तो डॉक्टर
  3015. 2:20:50बत्रा के चेहरे पर भी थी। बत्रा ने विक्की
  3016. 2:20:52की बात का समर्थन करते हुए कहा। विक्की
  3017. 2:20:56एकदम सही कह रहा है सर जी। इस गुंडे को
  3018. 2:20:58सबक सिखाना पड़ेगा। नहीं तो लोग आकर डीन
  3019. 2:21:00के सामने भी ऐसी हरकत करेंगे। मेघा ने जब
  3020. 2:21:04बत्रा को शौर्य पर इल्जाम लगाते देखा तो
  3021. 2:21:06वो आगे आकर बोली यह दोनों झूठ बोल रहे
  3022. 2:21:09हैं। उल्टा इस [संगीत] विक्की ने ही पहले
  3023. 2:21:11श्रवण भैया पर हमला किया था। भैया ने तो
  3024. 2:21:13बस उसके हमले का जवाब दिया। कांता प्रसाद
  3025. 2:21:17ने मेघा की बात को ध्यान से सुना। फिर
  3026. 2:21:19उससे पूछा तुम्हारे साथ ही विक्की ने
  3027. 2:21:22बदतमीजी की थी। जी सर इसने तो कल मुझे
  3028. 2:21:26उठाने के लिए गुंडे भी भेजे थे। मेघा
  3029. 2:21:29जल्दी से बोली तो कांता प्रसाद ने तुरंत
  3030. 2:21:31अगला सवाल किया।
  3031. 2:21:33तुमने डॉक्टर बत्रा से इसकी शिकायत की थी?
  3032. 2:21:36की थी सर लेकिन इन्होंने उल्टा मुझे ही
  3033. 2:21:38दोषी ठहरा दिया। अब मेघा की भी हिम्मत बढ़
  3034. 2:21:42चुकी थी। इसीलिए वो खुलकर बोल रही थी।
  3035. 2:21:45विपिन बत्रा ने जब देखा कि कांता प्रसाद
  3036. 2:21:47मेघा की बातों पर भरोसा कर रहे हैं तो
  3037. 2:21:49उनके चेहरे की रंगत उड़ गई। वो जल्दी से
  3038. 2:21:52बीच में आते हुए बोले। यह लड़की झूठ बोल
  3039. 2:21:55रही है। इसकी बातों पर भरोसा मत कीजिए।
  3040. 2:21:58कांता प्रसाद ने सीधा सवाल दागा। क्या
  3041. 2:22:01इसने आपसे विक्की की शिकायत की थी? जी जी
  3042. 2:22:04की थी लेकिन वो झूठी शिकायत थी। विपिन
  3043. 2:22:07हकलाते हुए बोला कांता प्रसाद की नजरें अब
  3044. 2:22:10और सख्त हो गई।
  3045. 2:22:13आपको कैसे पता चला कि मिस मेघा की शिकायत
  3046. 2:22:15झूठी थी? तभी विपिन सकपकाते हुए बोला जी
  3047. 2:22:20मैंने पता लगवाया था उसमें कोई सच्चाई
  3048. 2:22:22नहीं मिली। तभी विक्की तुरंत बोला। विपिन
  3049. 2:22:26सही कह रहे हैं सर जी। यह लड़की मुझ पर
  3050. 2:22:28झूठा इल्जाम लगा रही है। आपको मुझ पर
  3051. 2:22:30भरोसा नहीं है? कांता प्रसाद की आवाज ठंडी
  3052. 2:22:34लेकिन खतरनाक हो गई। मुझे पता है कौन सच
  3053. 2:22:37बोल रहा है और कौन झूठ। और उम्मीद करता
  3054. 2:22:39हूं कि आप छगन-मगन को भूले नहीं होंगे।
  3055. 2:22:42अगर उन्होंने गवाही दे दी तो आप किसी को
  3056. 2:22:45मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेंगे। यह
  3057. 2:22:48सुनते ही कमरे में सन्नाटा छा गया। कांता
  3058. 2:22:51प्रसाद ने फिर डीन की ओर मुड़कर कहा।
  3059. 2:22:54क्या अब भी आपका जवाब वही है कि विक्की ने
  3060. 2:22:57मिस मेघा के साथ कोई बदतमीजी नहीं की? डीन
  3061. 2:23:01के चेहरे का रंग उतर गया। छगन मगन का नाम
  3062. 2:23:03सुनते ही उनकी हालत खराब हो चुकी थी। तभी
  3063. 2:23:06विक्की ने माहौल संभालने की कोशिश करते
  3064. 2:23:09हुए कहा सर जी आप मुझ पर इल्जाम लगा रहे
  3065. 2:23:11हैं। यह आप ठीक नहीं कर रहे। आंटी को पता
  3066. 2:23:14चलेगा तो आप समझते हैं ना क्या हो सकता
  3067. 2:23:16है। दरअसल विक्की का पूरा नाम विक्की
  3068. 2:23:19नारंग है। उसके पिता बलदेव नारंग विशालगढ़
  3069. 2:23:22के बड़े बिजनेसमैन है और सबसे बड़ी बात
  3070. 2:23:25उसके चाचा पशुपति नारंग की शादी स्वर्णलता
  3071. 2:23:28नारंग से हुई थी जो चंद्रभान राठौड़ की
  3072. 2:23:30बेटी है। यही वजह थी कि विक्की इस
  3073. 2:23:33हॉस्पिटल को अपनी जागीर समझता था। लेकिन
  3074. 2:23:36आज उसकी धमकियों का कांता प्रसाद पर जरा
  3075. 2:23:38भी असर नहीं पड़ रहा था। वो बोले आप मुझे
  3076. 2:23:42धमकाने की कोशिश ना करें तो बेहतर होगा।
  3077. 2:23:45कांता प्रसाद की आवाज सख्त हो गई। आप सब
  3078. 2:23:48अभी राजा साहब के पास चलिए। वो यहीं
  3079. 2:23:50हॉस्पिटल में है। अब वही फैसला करेंगे कि
  3080. 2:23:52क्या करना है। इतना कहकर उन्होंने गेंद
  3081. 2:23:55सीधा चंद्रभन राठौड़ के पाले में डाल दी।
  3082. 2:23:58विक्की ने झुंझुलाकर अपना मोबाइल निकाला
  3083. 2:24:01तो कांता प्रसाद उसे बीच में ही रोकते हुए
  3084. 2:24:03बोले। अभी आप किसी को कॉल नहीं लगाएंगे।
  3085. 2:24:06पहले आप सब राजा साहब के पास चलेंगे। उसके
  3086. 2:24:09बाद वही तय करेंगे कि क्या करना है।
  3087. 2:24:12विक्की मन में सोच कर रह गया। लेकिन अब
  3088. 2:24:14डॉक्टर बत्रा के चेहरे पर डर दिखाई देने
  3089. 2:24:17लगा था। उसे लगा था कि विक्की उसे बचा
  3090. 2:24:19लेगा पर यहां तो वो खुद ही बेबस खड़ा था।
  3091. 2:24:22अचानक उसे शौर्य की वो बात याद आ गई।
  3092. 2:24:25तुम्हें इस हॉस्पिटल से बाहर कर दूंगा।
  3093. 2:24:28उसने धीरे से नजर उठाकर शौर्य को देखा पर
  3094. 2:24:31उसके चेहरे पर डर नहीं बल्कि एक अजीब सा
  3095. 2:24:34सुकून था। जैसे उसे पहले से पता हो कि आगे
  3096. 2:24:37क्या होने वाला है। कुछ ही देर में सब लोग
  3097. 2:24:39उस कमरे से निकल कर राजा साहब के कक्ष में
  3098. 2:24:42पहुंच गए। मेघा और जीनक की धड़कनें तेज
  3099. 2:24:45थी। उन्होंने राजा [संगीत] साहब को हमेशा
  3100. 2:24:47दूर से ही देखा था और आज पहली बार वो उनके
  3101. 2:24:50सामने खड़ी थी। वहीं कांता प्रसाद अब तक
  3102. 2:24:52शौर्य से कुछ नहीं बोले थे। वो सोच रहे थे
  3103. 2:24:55कि क्या सबके सामने शौर्य की असली पहचान
  3104. 2:24:58उजागर करना सही होगा? आखिर उन्होंने यह
  3105. 2:25:01फैसला राजा साहब पर ही छोड़ दिया। कमरे
  3106. 2:25:04में सन्नाटा छाया हुआ था। राजा साहब
  3107. 2:25:07चंद्रभान राठौड़ ने एक-एक कर सब पर नजर
  3108. 2:25:10डाली और आखिर में उनकी नजर आकर शौर्य पर
  3109. 2:25:13ठहर गई। शौर्य ने भी बिना कुछ कहे सिर्फ
  3110. 2:25:16नजरों से ही उनका अभिवादन किया। कमरे में
  3111. 2:25:19मौजूद हर शख्स बस राजा साहब के शब्दों का
  3112. 2:25:21इंतजार कर रहा था। मामला तो उन्हें पहले
  3113. 2:25:24से ही पता था। राजा साहब ने मेघा की ओर
  3114. 2:25:26देखा। फिर कांता प्रसाद से धीमे लेकिन
  3115. 2:25:29भारी स्वर में पूछा।
  3116. 2:25:31यही मेघा है।
  3117. 2:25:33इसी के साथ विक्की ने बदतमीजी की थी।
  3118. 2:25:38चंद्रभान जी के सवाल से कमरे की हवा जैसे
  3119. 2:25:41थम सी गई उसी पल विक्की समझ गया उसकी पोल
  3120. 2:25:44पहले ही खुल चुकी है। डॉक्टर बत्रा के
  3121. 2:25:47चेहरे पर जो हवाइयां पहले से ही उड़ रही
  3122. 2:25:49थी अब वो डर में बदल चुकी थी। उन्हें समझ
  3123. 2:25:52ही नहीं आया राजा साहब को पहले से सब कैसे
  3124. 2:25:54पता है। विक्की भी समझ चुका था अब उसका
  3125. 2:25:57झूठ ज्यादा देर तक नहीं टिकने वाला। राजा
  3126. 2:26:00साहब ने उसकी ओर देखते हुए ठंडे स्वर में
  3127. 2:26:03पूछा
  3128. 2:26:04तुम्हें अपनी सफाई में कुछ कहना है? उस एक
  3129. 2:26:09सवाल में ही इतना दबाव था कि विक्की की
  3130. 2:26:11हिम्मत जवाब दे गई। वो समझ गया सच अब
  3131. 2:26:14छुपने वाला नहीं है। शायद छगन मगन ने सब
  3132. 2:26:17उगल दिया था। अब और झूठ बोलकर खुद को
  3133. 2:26:20फंसाने से बेहतर उसने अपनी गलती मान लेना
  3134. 2:26:23सही समझा। अगले ही पल वो सीधा राजा साहब
  3135. 2:26:26के पैरों के पास जा गिरा।
  3136. 2:26:29मुझे माफ कर दीजिए नाना जी। मुझसे गलती हो
  3137. 2:26:32गई। मैं बहक गया था। आइंदा कभी ऐसी गलती
  3138. 2:26:35नहीं होगी।
  3139. 2:26:36नाना जी यह शब्द सुनकर शौर्यसन रह गया।
  3140. 2:26:40उसे समझ ही नहीं आया कि विक्की राजा साहब
  3141. 2:26:42को नाना जी क्यों कह रहा है। आखिर उसका इस
  3142. 2:26:45परिवार से क्या रिश्ता है। मेघा और जीनत
  3143. 2:26:48भी उतनी ही हैरान थी। लेकिन हैरानी से
  3144. 2:26:51ज्यादा उनके दिल में राजा साहब के लिए
  3145. 2:26:53इज्जत बढ़ गई थी। क्योंकि रिशेदारी होने
  3146. 2:26:56के बावजूद उन्होंने विक्की को कोई रियायत
  3147. 2:26:59नहीं दी। चंद्रभान राठौड़ ने विक्की को
  3148. 2:27:01झड़कते हुए कहा
  3149. 2:27:04तुम्हें माफ करने वाला मैं कौन होता हूं।
  3150. 2:27:08कमरे में सन्नाटा और गहरा हो गया।
  3151. 2:27:10उन्होंने आगे कहा तुम्हें इस लड़की से
  3152. 2:27:14माफी मांगनी पड़ेगी। अगर इसने तुम्हें माफ
  3153. 2:27:17कर दिया तो ठीक है। वरना जो सजा यह लड़की
  3154. 2:27:22तय करेगी वही तुम्हें भुगतनी होगी।
  3155. 2:27:26अब विक्की के पास कोई रास्ता नहीं बचा था।
  3156. 2:27:28ना चाहते हुए भी उसे झुकना पड़ा। वो
  3157. 2:27:31धीरे-धीरे मेघा के सामने गया। उसकी नजरें
  3158. 2:27:34झुकी हुई थी और आवाज कांप रही थी। मुझे
  3159. 2:27:38माफ कर दो मेघा। मुझसे गलती हो गई। आइंदा
  3160. 2:27:41कभी भी मैं तुम्हारे सामने सिर उठाने की
  3161. 2:27:43हिम्मत नहीं करूंगा। मेघा ने जब विक्की का
  3162. 2:27:46झुका हुआ सिर देखा तो उसके दिल को एक अजीब
  3163. 2:27:48सी तसल्ली मिली। यही तो वह चाहती थी।
  3164. 2:27:51विक्की का घमंड आज उसके पैरों में था।
  3165. 2:27:54लेकिन अब वो खुद दुविधा में थी कि वो क्या
  3166. 2:27:56कहे क्या फैसला ले। उसकी नजरें अनायास ही
  3167. 2:28:00शौर्य की तरफ उठ गई। जैसे खामोशी से उससे
  3168. 2:28:03रास्ता पूछ रही हो। शौर्य उसकी इस दुविधा
  3169. 2:28:06को समझ गया। वो आगे बढ़ा और शांत लेकिन
  3170. 2:28:09[संगीत] मजबूत आवाज में बोला। इसने
  3171. 2:28:11तुम्हारे साथ बदतमीजी की है। इसीलिए तुम
  3172. 2:28:14इसे जो भी सजा दोगी वो इसे जरूर मिलेगी।
  3173. 2:28:18मेघा अपनी भावनाओं के सैलाब को रोकते हुए
  3174. 2:28:20बोली बस हो गया भैया। मुझे किसी से बदला
  3175. 2:28:24नहीं लेना। कमरे में सबकी नजरें उस पर टिक
  3176. 2:28:27गई। वो बोली मैं तो बस यह चाहती हूं कि
  3177. 2:28:30जिस तरह यह अपने घर में अपनी मां-ब की
  3178. 2:28:33इज्जत करता है, वैसे ही यहां पढ़ने वाली
  3179. 2:28:35हर लड़की की भी इज्जत करे।
  3180. 2:28:38उसकी आवाज में दर्द भी था और एक साफ
  3181. 2:28:40सच्चाई भी। वो बोली, "इससे ज्यादा मुझे
  3182. 2:28:44इससे कुछ नहीं चाहिए।" चंद्रभान राठौड़ ने
  3183. 2:28:47गहरी नजरों से विक्की को देखा और बोले,
  3184. 2:28:51देखा तुमने [संगीत]
  3185. 2:28:52जिसके साथ तुमने बदतमीजी की, उसने तुम्हें
  3186. 2:28:56यूं ही माफ कर दिया।
  3187. 2:28:58यह है इस लड़की की दरियादिली।
  3188. 2:29:01एक पल का ठहराव और फिर उनकी आवाज कठोर हो
  3189. 2:29:04गई। लेकिन मैं तुम्हें ऐसे ही नहीं छोड़
  3190. 2:29:08सकता। कमरे का माहौल एकदम भारी हो गया।
  3191. 2:29:11फिर चंद्रभान राठौड़ बोले तुम्हें इस
  3192. 2:29:15हॉस्पिटल से निकाला जाता है। वो फिर बोले
  3193. 2:29:20कांता यह सुनिश्चित करना तुम्हारी
  3194. 2:29:24जिम्मेदारी है कि आज के बाद यह यहां नजर
  3195. 2:29:27नहीं आना चाहिए। इसके बाद उनकी नजर डीन पर
  3196. 2:29:31गई और तुम्हारे साथ क्या किया जाए? बत्रा
  3197. 2:29:36के पैरों तले जमीन खिसक गई। वो तुरंत हाथ
  3198. 2:29:39जोड़कर गिड़गिड़ाने लगा। मुझे माफ कर
  3199. 2:29:43दीजिए राजा साहब। मैं विक्की को आपका
  3200. 2:29:45रिश्तेदार जानकर कोई कार्यवाही नहीं कर
  3201. 2:29:47सका। लेकिन मैं मानता हूं यह मेरी गलती
  3202. 2:29:50है। चंद्रभान जी की आवाज और ठंडी हो गई।
  3203. 2:29:53वो बोले
  3204. 2:29:55एक जिम्मेदार पद पर होते हुए तुमसे ऐसी
  3205. 2:29:59उम्मीद नहीं की जा सकती। तुम इस पद के
  3206. 2:30:03लायक नहीं हो। मुझे माफ कर दीजिए। आगे से
  3207. 2:30:06मैं कभी आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा।
  3208. 2:30:09बोलते हुए बत्रा लगभग रो पड़ा। चंद्रभान
  3209. 2:30:11जी की नजरों में अब घृणा साफ दिखाई दे रही
  3210. 2:30:14थी। अब तुम इस लायक ही नहीं रहोगे कि किसी
  3211. 2:30:19के साथ कुछ गलत कर सको। यह सुनते ही बत्रा
  3212. 2:30:23सीधे उनके पैरों में गिर पड़ा। रहम कीजिए
  3213. 2:30:25राजा साहब। मैं बर्बाद हो जाऊंगा। मैं
  3214. 2:30:27विक्की का दबाव नहीं सह पाया इसलिए गलती
  3215. 2:30:30कर बैठा। चंद्रभान जी की आवाज गूंज उठी।
  3216. 2:30:33तुम्हारे कारण यह लड़की किस मेंटल प्रेशर
  3217. 2:30:36से गुजरी होगी? इसका जरा भी एहसास है
  3218. 2:30:40तुम्हें? यह सुनते ही डॉक्टर बत्रा तुरंत
  3219. 2:30:43मेघा के पास पहुंचे और हाथ जोड़कर
  3220. 2:30:45गिड़गिड़ाने लगे। [संगीत]
  3221. 2:30:47मेघा बेटी मैं तुम्हारे बाप की उम्र का
  3222. 2:30:50हूं। मुझे माफ कर दो। तुम कहोगी तो राजा
  3223. 2:30:52साहब मुझे माफ कर देंगे। मेघा घबरा गई। एक
  3224. 2:30:55कदम पीछे हटते हुए बोली, "यह आप क्या कर
  3225. 2:30:59रहे हैं? प्लीज मेरे सामने आप हाथ मत
  3226. 2:31:01जोड़िए। इसमें मैं क्या कर सकती हूं।"
  3227. 2:31:03डॉक्टर बत्रा लगभग टूट चुका था। तुम
  3228. 2:31:06चाहोगी तो सब हो सकता है। बस एक बार राजा
  3229. 2:31:09साहब से कह दो। बत्रा को पता नहीं यह
  3230. 2:31:11क्यों यकीन हो गया कि अगर मेघा उसे माफ कर
  3231. 2:31:14देगी तो राजा साहब शायद उसे कम से कम
  3232. 2:31:16हॉस्पिटल से बाहर नहीं निकालेंगे। मेघा की
  3233. 2:31:19नजरें फिर शौर्य को खोजने लगी। उसे अब भी
  3234. 2:31:22उसी का सहारा चाहिए था। शौर्य उसकी उलझन
  3235. 2:31:25समझ गया। वो धीरे-धीरे बत्रा के पास गया
  3236. 2:31:27और शांत लेकिन मजबूत स्वर में बोला।
  3237. 2:31:31डॉक्टर साहब मैं नहीं चाहता कि आपकी एक
  3238. 2:31:33[संगीत] गलती के कारण यह हॉस्पिटल एक
  3239. 2:31:36अच्छा डॉक्टर खो दे। कमरे में हलचल सी हुई
  3240. 2:31:39और अगले ही पल शौर्य फिर बोला लेकिन गलती
  3241. 2:31:43तो आपने की है। इसीलिए मैं राजा साहब से
  3242. 2:31:46विनती करूंगा कि आपको हॉस्पिटल से ना
  3243. 2:31:48निकाला जाए। डॉक्टर बत्रा की आंखों में
  3244. 2:31:51उम्मीद चमक उठी। लेकिन शौर्य फिर से बोला
  3245. 2:31:55पर आप इस हॉस्पिटल के डीन बनने के लायक
  3246. 2:31:57नहीं है। आपको इस पद से हटाकर सिर्फ एक
  3247. 2:32:00डॉक्टर के रूप में काम करने का मौका दिया
  3248. 2:32:02जाए। चंद्रभान राठौड़ हल्की मुस्कान के
  3249. 2:32:06साथ शौर्य की ओर देखने लगे। उन्हें शौर्य
  3250. 2:32:08का इंसाफ पसंद आया। यह फैसला सजा भी है और
  3251. 2:32:12सुधार का मौका भी। उन्होंने गंभीर स्वर
  3252. 2:32:15में कहा,
  3253. 2:32:17बात सही है डॉक्टर बत्रा। तुम आज ही अपने
  3254. 2:32:20डीन पद से इस्तीफा दोगे। अगर यहां रहना है
  3255. 2:32:25तो सिर्फ एक डॉक्टर बनकर रह सकते हो। अब
  3256. 2:32:28फैसला तुम्हारा है। डॉक्टर बत्रा को तो
  3257. 2:32:32जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल गया था।
  3258. 2:32:35वो झट से बोल पड़ा। मंजूर है राजा साहब
  3259. 2:32:38मुझे मंजूर है। राजा साहब के इशारे के साथ
  3260. 2:32:41ही वो तुरंत वहां से निकल गया। जैसे डर हो
  3261. 2:32:43कि कहीं फैसला बदल ना जाए। अब कमरे में
  3262. 2:32:46सिर्फ एक झुका हुआ सिर बाकी था और वो है
  3263. 2:32:49विक्की का। उसने हिम्मत जुटाई और बोला
  3264. 2:32:53नाना जी प्लीज मुझे हॉस्पिटल से मत
  3265. 2:32:55निकालिए। नाना जी प्लीज आप मुझे हॉस्पिटल
  3266. 2:32:58से मत निकालिए। विक्की गिड़गिड़ा के बोला
  3267. 2:33:01लेकिन राजा साहब की आवाज पत्थर जैसी सख्त
  3268. 2:33:04रही। मैं यह बिल्कुल नहीं कर सकता। जो
  3269. 2:33:09लड़कियों की इज्जत नहीं करता उसे मैं
  3270. 2:33:11हरगिज़ माफ नहीं कर सकता। मेरे हॉस्पिटल
  3271. 2:33:15में ऐसे डॉक्टर के लिए कोई जगह नहीं है।
  3272. 2:33:19अब तुम जा सकते हो।
  3273. 2:33:23बस एक फैसला और विक्की की दुनिया खत्म हो
  3274. 2:33:26गई। वो समझ गया अब यहां कुछ नहीं हो सकता।
  3275. 2:33:29वो हार का कड़वा घूंट लेकर रह गया। लेकिन
  3276. 2:33:32साथ ही उसकी आंखों में बदले की चिंगारी जल
  3277. 2:33:34उठी। उसने घूर कर शौर्य को देखा और वहां
  3278. 2:33:38से निकल गया। कमरे में अब भी सन्नाटा था
  3279. 2:33:41जिसे तोड़ते हुए शौर्य ने कहा। ठीक है तो
  3280. 2:33:44फिर अब मैं भी चलता हूं। और मुड़कर वहां
  3281. 2:33:47से जाने को हुआ। खबरदार अगर यहां से हिले
  3282. 2:33:51भी तो पैर तोड़ दूंगा। चंद्रभान जी की
  3283. 2:33:55गूंजती हुई आवाज ने सबको चौंका दिया। मेघा
  3284. 2:33:58भी घबरा गई। वो तुरंत आगे आई और बोली
  3285. 2:34:02सर इन सब में मेरे श्रवण भैया की कोई गलती
  3286. 2:34:04नहीं है। इन्होंने तो बस मुझे बचाने के
  3287. 2:34:07लिए मेघा की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि
  3288. 2:34:09अचानक चंद्रभान जी ने हल्की मुस्कान दबाते
  3289. 2:34:12हुए कहा
  3290. 2:34:14अच्छा अब तुम मुझे सिखाओगी।
  3291. 2:34:18यह सुनते ही मेघा का चेहरा उतर गया। तभी
  3292. 2:34:20शौर्य मुस्कुराते हुए बोला, "क्या दादा
  3293. 2:34:24जी, आप मेरी बहन को डरा रहे हैं।" यह
  3294. 2:34:27सुनकर मेघा जैसे जम सी गई। उसकी नजर शौर्य
  3295. 2:34:30और राजा साहब के बीच घूमने लगी। राजा साहब
  3296. 2:34:33के चेहरे पर मुस्कान थी और शौर्य के चेहरे
  3297. 2:34:36पर भी। क्या मुझे अपने पोते को डांटने के
  3298. 2:34:40लिए तुमसे इजाजत लेनी पड़ेगी?
  3299. 2:34:43चंद्रभान जी हंसते हुए बोले मेघा के लिए
  3300. 2:34:46यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। तभी शौर्य
  3301. 2:34:49ने मुस्कुराते हुए कहा इतना हैरान मत हो
  3302. 2:34:53यह मेरे दादाजी हैं। मेघा बात को समझते
  3303. 2:34:55हुए बोली
  3304. 2:34:58तो आपका नाम शौर्य है श्रवण नहीं। इस पर
  3305. 2:35:01शौर्य ने हैरानी से पूछा। अरे तुम्हें
  3306. 2:35:04कैसे पता?
  3307. 2:35:06अगले ही पल मेघा ने कांता प्रसाद जी की ओर
  3308. 2:35:08इशारा किया और बोली कल इन्होंने आपका नाम
  3309. 2:35:11शौर्य लेकर पूछा था। यह सुनकर कांता
  3310. 2:35:14प्रसाद ने मुस्कुराते हुए कहा अच्छा तो
  3311. 2:35:18तुम्हें वो बात याद है मेघा हैरान थी कि
  3312. 2:35:20शौर्य इतने बड़े परिवार से होने के बावजूद
  3313. 2:35:23भिखारियों वाली जिंदगी क्यों जी रहा था।
  3314. 2:35:26वो सब कुछ जानना चाहती थी। पर इस वक्त
  3315. 2:35:29यहां सबके सामने वो कुछ नहीं पूछ सकती थी।
  3316. 2:35:31इसीलिए उसे लगा कि अभी चुप रहना ही बेहतर
  3317. 2:35:34होगा। इधर चंद्रभान जी भी शौर्य से बहुत
  3318. 2:35:37कुछ पूछना चाहते थे। पर वह सब मेघा के
  3319. 2:35:40सामने नहीं पूछ सकते थे। इसीलिए उन्होंने
  3320. 2:35:42मेघा से कहा तुम्हें आगे से कोई परेशानी
  3321. 2:35:46हो या कोई भी जरूरत हो तो सीधा कांता
  3322. 2:35:50प्रसाद को फोन करना। तुम्हें शौर्य ने
  3323. 2:35:54अपनी बहन माना है तो आज से तुम मेरी भी
  3324. 2:35:57पोती हुई।
  3325. 2:36:00राजा साहब की बात सुनकर मेघा की आंखों में
  3326. 2:36:02आंसू आ गए। यह खुशी के आंसू थे। कहां तो
  3327. 2:36:06उसका एक पुजारी बाबा के अलावा कोई
  3328. 2:36:08रिश्तेदार नहीं था और आज उसे एक भाई के
  3329. 2:36:10साथ-साथ दादा भी मिल गए थे। शौर्य ने जब
  3330. 2:36:14उसकी आंखों में आंसू देखे तो वो उसके पास
  3331. 2:36:16जाकर बोला यह मोती किस खुशी में बहा रही
  3332. 2:36:19हो मेघा? इस पर मेघा अपने आंसू पोंछते हुए
  3333. 2:36:22बोली कुछ नहीं भैया। मैंने कभी सपने में
  3334. 2:36:26भी नहीं सोचा था कि ऊपर वाला मुझ पर इतना
  3335. 2:36:29मेहरबान हो जाएगा कि एक साथ मुझे इतनी
  3336. 2:36:31खुशियां दे देगा। इस पर शौर्य मेघा के सिर
  3337. 2:36:34को थपथपाते हुए बोला बस कर अब मुझे भी
  3338. 2:36:38रुलाएगी क्या अब कोई रोना धोना नहीं मेघा
  3339. 2:36:41मुस्कुराते हुए बोली जी भैया चंद्रभान जी
  3340. 2:36:45भी मेघा का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते
  3341. 2:36:48हुए बोले और हां अभी मैं दो-चार दिन इसी
  3342. 2:36:53हॉस्पिटल में हूं इसीलिए मुझसे मिलने आते
  3343. 2:36:56रहना
  3344. 2:36:58जी सर मेघा भी आदरपूक उनसे बोली
  3345. 2:37:02सर नहीं दादा जी इतनी जल्दी भूल गई अभी
  3346. 2:37:07मैंने क्या कहा था अब से तुम भी मेरी पोती
  3347. 2:37:11हो चंद्रभान जी की बात सुनकर मेघा के
  3348. 2:37:14चेहरे पर बड़ी सी स्माइल आ गई जी दादा जी
  3349. 2:37:19चलो अब तुम जाओ मुझे [संगीत] इसकी कुछ खबर
  3350. 2:37:23लेनी है इसीलिए यह थोड़ी देर बाद यहां से
  3351. 2:37:26जाएगा कहते हुए चंद्रभान जी शौर्य को
  3352. 2:37:30घूरने लगे वो शौर्य से जो बात करना चाहते
  3353. 2:37:32थे वो मेघा के सामने नहीं हो सकती थी।
  3354. 2:37:35मेघा राजा साहब का इशारा समझ गई। इसीलिए
  3355. 2:37:37वह उन्हें प्रणाम करके जीनत के साथ वार्ड
  3356. 2:37:40से बाहर चली गई। जब शौर्य वहां अकेला रह
  3357. 2:37:43गया तो कांता प्रसाद ने कमरे का दरवाजा
  3358. 2:37:45बंद कर दिया। शौर्य समझ गया कि उसके
  3359. 2:37:48दादाजी जरूर कोई सीरियस बात करने वाले
  3360. 2:37:50हैं।
  3361. 2:37:51तुमने शादी कर ली और मुझे बताया भी नहीं।
  3362. 2:37:56चंद्रभान जी ने बिना किसी भूमिका के शौर्य
  3363. 2:37:58से सीधा सवाल किया। इस पर शौर्य अचानक
  3364. 2:38:01हैरान होकर बोला यह आपको कैसे पता चला?
  3365. 2:38:05विशालगढ़ के लोग मुझे राजा [संगीत] साहब
  3366. 2:38:08कहते हैं तो मुझसे यह बात कैसे छुप सकती
  3367. 2:38:12है? राजा साहब सीना तान के बोले तो शौर्य
  3368. 2:38:15ने भी चुटकी लेते हुए कहा। अच्छा फिर तो
  3369. 2:38:18आपको यह भी पता होगा कि मेरी शादी कैसे
  3370. 2:38:20[संगीत] हुई है। हां। चंद्रभान जी ने
  3371. 2:38:24सहमति में सिर हिलाया। अब आप बताइए कि आप
  3372. 2:38:27कैसे राजा हैं जिसके पोते की शादी
  3373. 2:38:29जबरदस्ती हो गई और राजा साहब कुछ कर नहीं
  3374. 2:38:32पाए। शौर्य भी अब मजाक के मूड में आ गया
  3375. 2:38:35था। चंद्रभान [संगीत] जी बड़प्पन के साथ
  3376. 2:38:38बोले
  3377. 2:38:40तुमने बताया नहीं होगा कि तुम मेरे पोते
  3378. 2:38:43हो। एक बार उनके सामने बता देते कि तुम
  3379. 2:38:47कौन हो तो किसी की मजाल नहीं होती तुमसे
  3380. 2:38:51जबरदस्ती करने की।
  3381. 2:38:54पता नहीं दादा जी आप कौन से युग में जी
  3382. 2:38:56रहे हैं। राजशाही चली गई है आपकी और आप
  3383. 2:38:59अभी भी खुद को राजा समझ बैठे हैं। शौर्य
  3384. 2:39:02विनोद भरे स्वर में बोला तो चंद्रभान जी
  3385. 2:39:05हंस पड़े। कांता प्रसाद दोनों बाबा पोते
  3386. 2:39:08की बात सुन रहे थे और उनकी बातों को एंजॉय
  3387. 2:39:10कर रहे थे। उन्होंने [संगीत] बहुत दिनों
  3388. 2:39:12बाद राजा साहब को इतना खुश देखा था। राजा
  3389. 2:39:15साहब बात को बदलते हुए बोले। अच्छा छोड़ो
  3390. 2:39:19इन बातों को। उसे मुझसे मिलाने कब ला रहे
  3391. 2:39:23हो? क्या क्या कहा आपने? [संगीत] आपसे
  3392. 2:39:26मिलवाने। वो मुझे भिखारी समझती है। मैं
  3393. 2:39:30क्या बोलकर आपसे मिलवाने लाऊंगा? शौर्य
  3394. 2:39:33हैरानी से बोला। तो तुमने उसे बताया क्यों
  3395. 2:39:37नहीं कि तुम कौन हो? चंद्रभान सिंह संशय
  3396. 2:39:41में थे कि शौर्य ने अपनी पत्नी को अपनी
  3397. 2:39:43हकीकत क्यों नहीं बताई? इस पर शौर्य गंभीर
  3398. 2:39:46स्वर में बोला। नहीं बता सकता दादा जी।
  3399. 2:39:50मैं चाहता हूं कि वह मुझे पसंद करें। बिना
  3400. 2:39:52यह जाने कि मैं कौन हूं और क्या हूं। अगर
  3401. 2:39:55उसे या उसके परिवार को मेरी हकीकत पता चल
  3402. 2:39:58जाएगी तो फिर तो वो मुझे मेरी हैसियत
  3403. 2:40:00देखकर अपना ही लेंगे। पर वो मेरे पैसों के
  3404. 2:40:03कारण होगा ना कि मेरे खुद के व्यक्तित्व
  3405. 2:40:06को देखकर। और मैं ऐसा नहीं चाहता।
  3406. 2:40:09शौर्य ने दादा जी को पूरी बात समझाई।
  3407. 2:40:12चंद्रभान जी को शौर्य की सोच पर गर्व हुआ।
  3408. 2:40:15उन्हें एहसास हुआ कि शौर्य उस लड़की को
  3409. 2:40:17पसंद करने लगा है। वो बोले अच्छा तो
  3410. 2:40:21तुम्हें वह लड़की इतनी पसंद है कि तुम्हें
  3411. 2:40:24उसके लिए भिखारी बने रहना कुबूल है।
  3412. 2:40:28इस पर शौर्य ने अपने दिल की बात अपने
  3413. 2:40:31दादाजी को बता दी। सच कहूं दादाजी तो
  3414. 2:40:34शिप्रा में वो सारी खूबियां हैं जो मुझे
  3415. 2:40:36अपनी पत्नी में चाहिए थी। इसीलिए मैं उसे
  3416. 2:40:38खोना नहीं चाहता। पर मैं यह भी चाहता हूं
  3417. 2:40:41कि वो मुझे पसंद करें। बिना यह जाने कि
  3418. 2:40:44मेरी हैसियत क्या है। तभी चंद्रभान जी
  3419. 2:40:47शौर्य को वॉर्न करते हुए बोले
  3420. 2:40:50हां हां वो सब तो ठीक है। पर मैं अपनी बहू
  3421. 2:40:54से मिले बिना नहीं रह सकता। अब ये तुम्हें
  3422. 2:40:58सोचना है कि तुम मेरी बहू को मुझसे कैसे
  3423. 2:41:01मिलवाते हो। शौर्य चंद्रभान जी के जिद भरे
  3424. 2:41:05स्वर को सुनकर बोला। आप क्यों मेरा घर
  3425. 2:41:08बसने से पहले ही उजाड़ देना चाहते हैं?
  3426. 2:41:11अगर तुम खुद मुझे मेरी बहू से नहीं
  3427. 2:41:13मिलवाते हो तो मैं खुद ही उससे मिलाऊंगा।
  3428. 2:41:17चंद्रभान जी ने शौर्य को एक बार फिर वर्न
  3429. 2:41:19किया तो शौर्य ने तुरंत उन्हें समझाने की
  3430. 2:41:22कोशिश की। आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे। मैं
  3431. 2:41:25कोशिश करूंगा कि किसी तरह आपको उससे मिलवा
  3432. 2:41:28दूं। पर थोड़े समय के लिए आप धैर्य रखिए।
  3433. 2:41:31शौर्य की बात सुनकर चंद्रभांजी बोले। ठीक
  3434. 2:41:34है। अगर तुम कहते हो तो मैं कुछ समय के
  3435. 2:41:38लिए तुम्हारी बात मान जाता हूं। पर सोच
  3436. 2:41:41लेना ज्यादा समय तक मैं तुम्हारे झांसे
  3437. 2:41:44में नहीं रहूंगा। इस पर शौर्य थोड़ा रुका
  3438. 2:41:48और फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला
  3439. 2:41:51ठीक [संगीत] है मैं कोई जुगाड़ करूंगा। पर
  3440. 2:41:53कह रहा हूं यह ठीक बात नहीं है। आप अपने
  3441. 2:41:56पोते को ब्लैकमेल कर रहे हैं। शौर्य
  3442. 2:41:58कसमसाते हुए बोला तो राजा साहब ने
  3443. 2:42:00मुस्कुराते हुए अपना फरमान सुना दिया।
  3444. 2:42:04अब तुम्हें जो समझना है समझो। [संगीत] पर
  3445. 2:42:07मैंने तुम्हें जो कह दिया सो कह दिया।
  3446. 2:42:11शौर्य चंद्रभान जी से विदा लेकर मेघा के
  3447. 2:42:13हॉस्पिटल पहुंचा और उसे समझाया कि फिलहाल
  3448. 2:42:15वो शौर्य की हकीकत किसी को नहीं बताएगी।
  3449. 2:42:18मेघा उसकी स्थिति समझ गई और शौर्य की बात
  3450. 2:42:21मान गई। मेघा से विदा लेकर शौर्य शिप्रा
  3451. 2:42:24के ऑफिस के लिए निकल गया। आज उसे शिप्रा
  3452. 2:42:26के साथ बिग बुल के ऑफिस उसकी मीटिंग के
  3453. 2:42:29लिए भी जाना था। शौर्य शिप्रा के ऑफिस
  3454. 2:42:31पहुंचा। अभी 3:00 बजे थे। इसीलिए उसके पास
  3455. 2:42:34काफी समय था। वो अभी शिप्रा को फोन करके
  3456. 2:42:36बताने वाला था कि वो ऑफिस पहुंच गया है।
  3457. 2:42:39पर उससे पहले ही उसके पास शिप्रा का कॉल आ
  3458. 2:42:41गया। शौर्य ने कॉल उठाया। दूसरी तरफ से
  3459. 2:42:44शिप्रा ने पूछा।
  3460. 2:42:46हेलो श्रवण तुम कब तक आओगे? पता है ना आज
  3461. 2:42:50बिग बुल के ऑफिस मीटिंग के लिए भी जाना
  3462. 2:42:52है।
  3463. 2:42:53मैं आ गया हूं। यहीं ऑफिस की कैंटीन में
  3464. 2:42:55हूं। शौर्य ने जवाब दिया।
  3465. 2:42:57अच्छा तो फिर ठीक है। हम आधे घंटे में बिग
  3466. 2:43:00बबुल के लिए निकलेंगे। इतना बोलकर शिप्रा
  3467. 2:43:03ने कॉल काट दिया। शौर्य कैंटीन के काउंटर
  3468. 2:43:05पर पहुंचा और अपने लिए एक प्लेट पास्ता
  3469. 2:43:07ऑर्डर कर दिया और अपनी प्लेट लेकर वो
  3470. 2:43:09खिड़की के पास वाले टेबल पर बैठकर खाने
  3471. 2:43:12लगा।
  3472. 2:43:13तभी उसने देखा एक चमचमाती हुई कार ऑफिस के
  3473. 2:43:16गेट से अंदर आई। गेट खुला और जो शख्स बाहर
  3474. 2:43:19निकला उसे देखकर शौर्य हैरान रह गया। यह
  3475. 2:43:22कोई और नहीं मुख्तार भाई था। उसके पीछे ही
  3476. 2:43:25रजत भी कार से बाहर आ गया था। दोनों
  3477. 2:43:28भाइयों को साथ देखकर शौर्य के कान खड़े हो
  3478. 2:43:30गए। रजत के पीछे कार से कल्ला भी बाहर
  3479. 2:43:33आया। शौर्य ने जल्दी से अपना खाना समाप्त
  3480. 2:43:36किया और कैंटीन से बाहर आ गया। जैसे ही वह
  3481. 2:43:39बाहर आया उसे गिरधर काका वहीं नजर आ गए।
  3482. 2:43:42शौर्य उनके पास पहुंचा और उसने पूछा
  3483. 2:43:46यह मुख्तार यहां क्या करने आया है? साहब
  3484. 2:43:49ने इसके खिलाफ जो केस किया था वो वापस ले
  3485. 2:43:52लिया है जिसके कारण इसका भाई जेल से छूट
  3486. 2:43:55गया है। हो सकता है धन्यवाद करने आया हो।
  3487. 2:43:58साहब का मेरे पास फोन आया था कि उनको लेकर
  3488. 2:44:01उनके ऑफिस में पहुंचूं। गिरधर ने कारण
  3489. 2:44:04बताया। जैसे ही शौर्य ने यह सुना। उसने
  3490. 2:44:07कहा काका मैं आपके मोबाइल पर कॉल लगाता
  3491. 2:44:10हूं। आप कॉल उठाकर मोबाइल अपनी जेब में रख
  3492. 2:44:12लीजिएगा। मैं इनकी बात सुनना चाहता हूं कि
  3493. 2:44:14यह राय साहब से क्या बात करते हैं। इन
  3494. 2:44:17बदमाशों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
  3495. 2:44:20गिरधर समझता था कि मुख्तार के कारण ही आज
  3496. 2:44:22शौर्य यहां है। ना वो जबरदस्ती शिप्रा से
  3497. 2:44:25शौर्य की शादी कराता ना ही शौर्य यहां
  3498. 2:44:27होता। शौर्य ने जल्दी से गिरधर के फोन पर
  3499. 2:44:30कॉल लगाया। गिरधर ने कॉल उठाकर मोबाइल
  3500. 2:44:33अपनी शर्ट की जेब में रख लिया। अब तक
  3501. 2:44:35मुख्तार भाई भी गिरधर के पास आ गया था।
  3502. 2:44:38गिरधर ने मुख्तार को सलाम किया और बोला
  3503. 2:44:41राय साहब अपने ऑफिस में आपका इंतजार कर
  3504. 2:44:44रहे हैं। आप मेरे साथ चलिए। मुख्तार अपने
  3505. 2:44:47भाई रजब के साथ गिरधर के पीछे हो लिया।
  3506. 2:44:49गिरधर उन दोनों को लेकर बलवंत राय के ऑफिस
  3507. 2:44:52में पहुंचा। बलवंत राय का ऑफिस बहुत बड़ा
  3508. 2:44:55था। जिसमें एक साइड में सोफे के साथ टेबल
  3509. 2:44:57भी लगा हुआ था। बलवंत राय पहले से ही
  3510. 2:45:00सिंगल सीट वाले सोफे पर बैठे हुए थे।
  3511. 2:45:03जब कोई कमीना शरीफ बनने का ढोंग करे तो
  3512. 2:45:06उसके हावभाव देखने लायक होते हैं। मुख्तार
  3513. 2:45:09भाई नकली सी हंसी-हंसते हुए बलवंत राय के
  3514. 2:45:12सामने वाले सोफे पर जाकर बैठ गया। रजत ने
  3515. 2:45:15भी भला मानस बनने के चलते बलवंत राय के
  3516. 2:45:18पैर छूकर प्रणाम किया। बलवंत राय मना करते
  3517. 2:45:21रहे पर वो माना नहीं। प्रणाम करने के बाद
  3518. 2:45:24रजत जाकर मुख्तार भाई के पास बैठ गया। रजत
  3519. 2:45:27के खिलाफ केस वापस करवाकर मुख्तार ने जीत
  3520. 2:45:30हासिल तो कर ली थी। लेकिन यह एक अधूरी जीत
  3521. 2:45:33थी क्योंकि सिर्फ उनकी साजिश कामयाब हुई
  3522. 2:45:35थी लेकिन ख्वाहिश अभी भी हार रही थी।
  3523. 2:45:38शिप्रा को हासिल करने की ख्वाहिश जिसने एक
  3524. 2:45:41खतरनाक डॉन और उसके लफंगे भाई को बलवंत
  3525. 2:45:44राय के पैर छूने पर मजबूर कर दिया था।
  3526. 2:45:46चाशनी में डुबोए मुस्कुराते चेहरे लिए
  3527. 2:45:49मुख्तार और रजत बलवंत राय के सामने उनके
  3528. 2:45:51ऑफिस में बैठे हुए थे। मुख्तार भाई का
  3529. 2:45:54बदला रूप देखकर कड़क बलवंत राय का रुख भी
  3530. 2:45:57उसके लिए थोड़ा नरम हो गया। राय साहब ने
  3531. 2:46:00गिरधर को इशारा किया तो गिरधर ने किसी को
  3532. 2:46:02चाय नाश्ता ऑफिस में भेजने को कहा और तभी
  3533. 2:46:05मुख्तार भाई ने बात की शुरुआत की।
  3534. 2:46:08आपका बहुत धन्यवाद राय साहब जो आपने हमारी
  3535. 2:46:13बात मान ली रजत भी अपने किए पर बहुत
  3536. 2:46:17शर्मिंदा है। वो आपसे माफी मांगना चाहता
  3537. 2:46:21है। इसीलिए मैं इसे अपने साथ ले आया। रजत
  3538. 2:46:26जेल से छूट गया था लेकिन वो अभी भी शिप्रा
  3539. 2:46:28की दीवानगी में कैद था। इसीलिए मुख्तार को
  3540. 2:46:31यह फिक्र लगातार सताई जा रही थी कि कहीं
  3541. 2:46:33रजत फिर से कोई ऐसी हरकत ना कर बैठे जिससे
  3542. 2:46:36उसे कानून के शिकंजे से बाहर निकालना
  3543. 2:46:39नामुमकिन हो जाए। इसीलिए वो बलवंत राय से
  3544. 2:46:42शिप्रा और रजत के रिश्ते की बात करके रजत
  3545. 2:46:45के दिल में एक उम्मीद जगाए रखना चाहता था।
  3546. 2:46:48हां अंकल आप मुझे माफ कर दीजिए। मैंने जो
  3547. 2:46:52भी किया मैं उसके लिए दिल से सॉरी बोलता
  3548. 2:46:54हूं। हाथ जोड़कर रजत बहुत हमंब्ल बनने की
  3549. 2:46:58कोशिश कर रहा था। हां राय साहब यह सच में
  3550. 2:47:02बहुत शर्मिंदा है। मैं तो चाहता था कि
  3551. 2:47:05शिप्रा बिटिया को अपने घर की बहू बनाकर
  3552. 2:47:09अपने किए को ठीक कर पाऊं। पर शायद किस्मत
  3553. 2:47:13को यह मंजूर नहीं था। इसीलिए शिप्रा इस
  3554. 2:47:16रिश्ते के लिए तैयार नहीं हुई। मुख्तार
  3555. 2:47:20अफसोस जाहिर करते हुए बोला तो बलवंत राय
  3556. 2:47:23ने मुख्तार को तसल्ली देने के भाव से कहा
  3557. 2:47:26आजकल के बच्चों के दिमाग का पता नहीं क्या
  3558. 2:47:29चलता रहता है। मैं फिर से शिप्रा को
  3559. 2:47:31समझाने की कोशिश करूंगा। मैं भी समझता हूं
  3560. 2:47:33कि उस भिखारी के साथ उसकी कोई जिंदगी नहीं
  3561. 2:47:36है। सही बात है राय साहब। आजकल के बच्चों
  3562. 2:47:41के दिमाग में अलग ही फितूर रहता है। और
  3563. 2:47:44फिर रजत ने उसके साथ गलत भी तो किया था।
  3564. 2:47:48देखा जाए तो उसका गुस्सा होना लाजमी है।
  3565. 2:47:52इसीलिए हम शिपरा बिटिया को भी दोष नहीं दे
  3566. 2:47:55सकते। बस हम अब यही कोशिश कर सकते हैं कि
  3567. 2:47:58चीजें थोड़ी बेहतर हो जाए। मुख्तार अपने
  3568. 2:48:02भाई की गलती बताकर कहीं ना कहीं यह दिखाना
  3569. 2:48:05चाहता था कि जो भी हुआ है उसके लिए उसका
  3570. 2:48:07भाई जिम्मेदार है। पर अब उसे अपनी गलती का
  3571. 2:48:10एहसास है। राय साहब को भी मुख्तार भाई सच
  3572. 2:48:14बोलता प्रतीत हो रहा था। अब कहीं ना कहीं
  3573. 2:48:16राय साहब की नजर में मुख्तार उतना गलत
  3574. 2:48:19नहीं लग रहा था।
  3575. 2:48:21अरे वाह यह मुख्तार भाई डॉन कैसे बन गए?
  3576. 2:48:25इन्हें तो संत महात्मा होना चाहिए था।
  3577. 2:48:27क्या प्रवचन दे रहे हैं? बुड्ढा तो एकदम
  3578. 2:48:30सेट हो गया है। काश अब मेरी बुलबुल भी सेट
  3579. 2:48:33हो जाए तो मजा आ जाएगा। रजत अपने भाई के
  3580. 2:48:36ढोंग को देखकर मन ही मन बुदबुदा रहा था।
  3581. 2:48:39उसी समय कमरे का दरवाजा खुला और राधिका ने
  3582. 2:48:41धड़ाते हुए कमरे में प्रवेश किया। राधिका
  3583. 2:48:44को पता नहीं था कि कमरे में उसके नाना जी
  3584. 2:48:47के अलावा भी कोई और मौजूद है। जब उसने
  3585. 2:48:50मुख्तार भाई को वहां बैठे देखा तो सकपका
  3586. 2:48:52गई। वो जल्दी में कमरे में आ तो गई पर
  3587. 2:48:55मुख्तार को देखकर वहीं ठिठक गई। बलवंत राय
  3588. 2:48:58ने जब राधिका को देखा तो बोले अब जब आ ही
  3589. 2:49:02गई हो तो रुक क्यों गई? आ जाओ और बताओ
  3590. 2:49:04क्या बात है? राधिका आकर बलवंत राय के पास
  3591. 2:49:07बैठ गई। बलवंत राय ने मुख्तार से उसका
  3592. 2:49:10परिचय कराया। यह राधिका है मेरी नातिन।
  3593. 2:49:14फिर राधिका से बोले
  3594. 2:49:16बेटे इन्हें नमस्ते करो। यह मुख्तार भाई
  3595. 2:49:19हैं और ये इनके भाई रजत। राधिका ने
  3596. 2:49:22मुख्तार को नमस्ते किया। अब बताओ कैसे आना
  3597. 2:49:25हुआ? बलवंत राय ने राधिका को देखते हुए
  3598. 2:49:27पूछा। नाना जी कल शाम के लिए मम्मी ने कहा
  3599. 2:49:31था कि राजकमल होटल के मेन स्वीट को बुक कर
  3600. 2:49:34देंगी। पर उन्होंने अभी तक किया नहीं है।
  3601. 2:49:36मैंने अपने सभी दोस्तों को वहां इनवाइट कर
  3602. 2:49:38दिया है। अब अगर वो स्वीट बुक नहीं हुआ तो
  3603. 2:49:41सब गड़बड़ हो जाएगी। राधिका शिकायती लहजे
  3604. 2:49:44में बोली अच्छा तो इसीलिए नाराज हो। चिंता
  3605. 2:49:47मत करो मैं देख लेता हूं। बलवंत राय
  3606. 2:49:50मुस्कुराते हुए बोले। फिर कुछ ध्यान में
  3607. 2:49:52आते ही उन्होंने मुख्तार भाई से कहा।
  3608. 2:49:55मुख्तार भाई आप कल शाम को मेरी नातिन के
  3609. 2:49:57बर्थडे में आमंत्रित हैं। आप आएंगे तो
  3610. 2:49:59मुझे खुशी होगी। अरे क्यों नहीं राय साहब
  3611. 2:50:03मैं जरूर आऊंगा। मुख्तार भाई मुस्कुराते
  3612. 2:50:06हुए बोला
  3613. 2:50:08और हां आपको भी आना है। राधिका रजत को
  3614. 2:50:11देखते हुए बोली। इस पर रजत ने राधिका को
  3615. 2:50:13गौर से देखते हुए कहा। जरूर जब आप कह रही
  3616. 2:50:17हैं तो मैं जरूर आऊंगा। इसके बाद राधिका
  3617. 2:50:20कमरे से बाहर चली गई। मुख्तार भाई भी अपनी
  3618. 2:50:22जगह से उठे और राय साहब से इजाजत मांगते
  3619. 2:50:24हुए कहा। आपसे मिलकर अच्छा लगा राय साहब।
  3620. 2:50:29अब मैं चलता हूं। आपसे रिक्वेस्ट है कि
  3621. 2:50:32अगर आपके दिल में अभी भी कोई गिला शिकवा
  3622. 2:50:35हो तो मुझे माफ कीजिएगा।
  3623. 2:50:38क्या बात करते हैं? अब बिसारिए पुरानी
  3624. 2:50:41बातों को और हां कल शाम को होटल राजकमल
  3625. 2:50:43में आना मत भूलिएगा। बलवंत राय फिर से
  3626. 2:50:46मुख्तार को याद दिलाते हुए बोले। इसके बाद
  3627. 2:50:49मुख्तार अपने भाई रजत के साथ कमरे से बाहर
  3628. 2:50:51आ गया। मुख्तार रजत के साथ लिफ्ट के पास
  3629. 2:50:54आया और लिफ्ट में सवार हुआ। जैसे ही रजत
  3630. 2:50:57की आंखें लिफ्ट में पहले से मौजूद शख्स पर
  3631. 2:50:59पड़ी तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।
  3632. 2:51:03शिप्रा अपने सामने रजत को देखकर हैरान रह
  3633. 2:51:05गई थी। उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि
  3634. 2:51:08वो रजत को यहां अपने ऑफिस में देखेगी। रजत
  3635. 2:51:11ने लिफ्ट में जिसे देखा था वो कोई और नहीं
  3636. 2:51:14शिप्रा ही थी।
  3637. 2:51:16और कैसी हो शिप्रा बेटी? मुख्तार
  3638. 2:51:20मुस्कुराने की कोशिश करता हुआ बोला।
  3639. 2:51:22शिप्रा ने मुख्तार को कोई रिप्लाई नहीं
  3640. 2:51:24किया बल्कि उसने अपनी नजर फेर ली। यह
  3641. 2:51:27देखकर रजत ने कहा, "मैं जानता हूं तुम
  3642. 2:51:30मुझसे नाराज हो। पर वो बात अब बीत गई। अब
  3643. 2:51:33हम एक नई शुरुआत करते हैं। मैं तुमसे अपने
  3644. 2:51:35किए की माफी मांगता हूं। रजत शिप्रा के
  3645. 2:51:38सामने शरीफ बनने की कोशिश करता हुआ बोला।
  3646. 2:51:42ठीक है। अब इसकी कोई जरूरत नहीं है। बस यह
  3647. 2:51:45उम्मीद करती हूं कि आगे से तुम मुझसे कोई
  3648. 2:51:47वास्ता रखने की कोशिश नहीं करोगे।"
  3649. 2:51:50शिप्रा एक टूक जवाब देते हुए बोली, "रजत
  3650. 2:51:53को उम्मीद नहीं थी कि अभी भी शिप्रा की
  3651. 2:51:54अकड़ गई नहीं होगी। एक भिखारी से शादी
  3652. 2:51:57होने के बावजूद उसकी अकड़ में कोई कमी
  3653. 2:51:59नहीं आई थी। उसने तो ऐसे बिहेव किया जैसे
  3654. 2:52:02उसके साथ कोई बड़ी घटना हुई ही नहीं है।
  3655. 2:52:05रजत मुख्तार की तरफ देखने लगा। जैसे उससे
  3656. 2:52:07कह रहा हो कि क्या फायदा हुआ शिप्रा की
  3657. 2:52:10शादी एक भिखारी से कराने का। इसकी अकड़ तो
  3658. 2:52:13अभी भी पहले जैसी ही है। अभी रजत शिप्रा
  3659. 2:52:16से कुछ और भी कहने वाला था कि तभी ग्राउंड
  3660. 2:52:18फ्लोर आ गया और लिफ्ट का दरवाजा खुल गया।
  3661. 2:52:21शिप्रा जल्दी से लिफ्ट से बाहर आ गई। वो
  3662. 2:52:24रजत [संगीत] के सामने और नहीं रहना चाहती
  3663. 2:52:26थी। रजत भी लिफ्ट से बाहर आया और पीछे से
  3664. 2:52:29पुकारते हुए बोला अरे शिप्रा सुनो तो। मैं
  3665. 2:52:32समझता हूं कि मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत
  3666. 2:52:34किया है। लेकिन उसका कारण है कि मैं
  3667. 2:52:36तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। इतना बोलते
  3668. 2:52:39हुए रजत शिप्रा के सामने आकर खड़ा हो गया
  3669. 2:52:42और बोला देखो मैं जानता हूं कि मेरे ही
  3670. 2:52:45कारण भैया ने जबरदस्ती तुम्हारी शादी
  3671. 2:52:47भिखारी से करवा दी। उसके बावजूद मैं तुमसे
  3672. 2:52:50शादी करने को तैयार हूं। रजत की बात खत्म
  3673. 2:52:53होते ही शिप्रा ने रजत के सामने अपना व्यू
  3674. 2:52:56स्पष्ट कर दिया। रजत मेरा रास्ता छोड़ो।
  3675. 2:53:00मैंने पहले ही क्लियर कर दिया था कि मैं
  3676. 2:53:02तुम्हारे खिलाफ केस वापस ले सकती हूं। पर
  3677. 2:53:04तुमसे शादी नहीं कर सकती। और दूसरी बात अब
  3678. 2:53:07मुझे कोई और शादी करनी ही नहीं है। तभी
  3679. 2:53:10मुख्तार ने भी शिप्रा को समझाने की कोशिश
  3680. 2:53:13करते हुए कहा देखो शिप्रा तुम्हारी शादी
  3681. 2:53:17में सबसे बड़ी गलती मेरी थी और मैं अपनी
  3682. 2:53:21उस गलती का प्रायश्चित करना चाहता हूं।
  3683. 2:53:24देखिए आपको शायद कोई गलतफहमी हो गई है।
  3684. 2:53:27मेरी लाइफ जैसी भी है मैं उससे खुश हूं और
  3685. 2:53:30मैं अपने पति से भी खुश हूं। इसीलिए दूसरी
  3686. 2:53:33शादी नहीं करना चाहती। शिप्रा मुख्तार भाई
  3687. 2:53:36को जवाब देती हुई बोली। मुख्तार भाई को
  3688. 2:53:38विश्वास नहीं हो रहा था कि शिप्रा जो कह
  3689. 2:53:40रही थी उसके कोई मायने भी हैं। कोई कैसे
  3690. 2:53:43किसी भिखारी से शादी होने के बाद खुश रह
  3691. 2:53:46सकता है। देखो अभी भी रजत तुमसे शादी करने
  3692. 2:53:50को तैयार है। अपनी जिद छोड़ो और रजत के
  3693. 2:53:54साथ अपना घर बसा लो। मुख्तार भाई अभी भी
  3694. 2:53:57हार मानने को तैयार नहीं थे। उसे भी समझ
  3695. 2:54:00नहीं आ रहा था कि आखिर शिप्रा की अकड़ अभी
  3696. 2:54:02भी जस की तस कैसे है। शिप्रा की जगह कोई
  3697. 2:54:05और लड़की होती तो अब तक चकनाचूर हो चुकी
  3698. 2:54:08होती। पर एक भिखारी से शादी होने के बाद
  3699. 2:54:10भी शिप्रा के स्वभाव में कोई परिवर्तन
  3700. 2:54:13नहीं आया था। शौर्य भी उसी राहदारी में
  3701. 2:54:16खड़ा था जिस लिफ्ट से शिप्रा बाहर आई थी।
  3702. 2:54:19वो उसके पास यह सोच कर आ गया था कि शायद
  3703. 2:54:21उसकी जरूरत पड़े। शिप्रा की निगाह भी
  3704. 2:54:24शौर्य पर पड़ गई थी। मुख्तार भाई और रजत
  3705. 2:54:27पर उसे गुस्सा भी आ रहा था जो उसके पीछे
  3706. 2:54:29ही पड़े थे। उसने सोचा आज अगर वह चुप रह
  3707. 2:54:32गई तो आगे भी यह दोनों भाई उसके पीछे पड़े
  3708. 2:54:35रहेंगे। इसीलिए जवाब तो उसे देना पड़ेगा।
  3709. 2:54:38जिससे आगे से वो उससे शादी की बात करना
  3710. 2:54:40भूल ही जाएं। यह सोचकर उसने कहा आपसे
  3711. 2:54:44किसने कहा कि मुझे दोबारा शादी करनी है जो
  3712. 2:54:47आप मेरे पीछे पड़े हैं। मैं आपको बता दूं
  3713. 2:54:49मैं अपनी जिंदगी में बहुत खुश हूं और आपको
  3714. 2:54:52यह भी बता दूं कि मैं अपने पति से भी बहुत
  3715. 2:54:54खुश हूं। इसीलिए भी मुझे किसी और शादी की
  3716. 2:54:56जरूरत नहीं है। मुख्तार भाई का दिमाग चकरा
  3717. 2:54:59गया। उसे विश्वास नहीं हुआ तो वो
  3718. 2:55:01मुस्कुराते हुए बोला
  3719. 2:55:04तुम मजाक अच्छा कर लेती हो। कोई अपने
  3720. 2:55:08भिखारी पति से कैसे खुश हो सकता है?
  3721. 2:55:12दूसरों का पता नहीं पर मैं अपने पति से
  3722. 2:55:14खुश हूं। अगर आपको विश्वास नहीं है तो मैं
  3723. 2:55:17अभी आपको उससे मिलवा भी सकती हूं। शिप्रा
  3724. 2:55:20मुख्तार को जलाने की नियत से बोली तो जवाब
  3725. 2:55:22में मुख्तार भी तंज कसते हुए बोला हां अब
  3726. 2:55:26तो मुझे उससे मिलना ही पड़ेगा। मैं भी तो
  3727. 2:55:30मिलूं तुम्हारे उस भोलेभाले पति से। देखूं
  3728. 2:55:34तो सही इतने दिनों में ऐसा क्या बदल गया
  3729. 2:55:37उस भिखारी में जो तुम्हें वो पसंद आ गया
  3730. 2:55:40है। ठीक है। जब आप उससे मिलना चाहते हैं
  3731. 2:55:43तो मैं अभी आपको अपने पति से मिलवा देती
  3732. 2:55:46हूं। शिप्रा की बात सुनकर मुख्तार चारों
  3733. 2:55:48ओर देखने लगा। पर उसे वो भिखारी नजर नहीं
  3734. 2:55:51आया। वो दोबारा शिप्रा की तरफ घूमा और
  3735. 2:55:54बोला कहां है तुम्हारा पति? सामने तो लाओ।
  3736. 2:55:59यह तो शुक्र था कि अभी राहदारी में ज्यादा
  3737. 2:56:02लोग नहीं थे। शिप्रा मुख्तार भाई के साइड
  3738. 2:56:04से निकल कर शौर्य के पास पहुंची और उसकी
  3739. 2:56:06बाह पकड़ कर उसे मुख्तार भाई के सामने
  3740. 2:56:09लाकर खड़ा करते हुए बोली,
  3741. 2:56:12"आपको बहुत शौक है ना मेरे पति से मिलने
  3742. 2:56:14का? तो मिलिए। मेरे पति से यह रहा आपके
  3743. 2:56:17सामने। मुख्तार भाई का तो दिमाग हिल गया।
  3744. 2:56:21उसने तो शिप्रा की शादी एक भिखारी से कराई
  3745. 2:56:24थी। पर यह तो किसी फिल्मी हीरो की तरह
  3746. 2:56:27स्मार्ट है।
  3747. 2:56:28यह कैसे संभव हो सकता है? सिर्फ मुख्तार
  3748. 2:56:31ही नहीं रजत भी शौर्य को देखकर
  3749. 2:56:33आश्चर्यचकित था। दूसरी तरफ शौर्य बड़ा खुश
  3750. 2:56:37था। शिप्रा का उसे अपने पति के रूप में
  3751. 2:56:39मुख्तार के सामने खड़ा करना उसे बहुत ही
  3752. 2:56:42रोमांचित कर रहा था। शौर्य एक कदम और आगे
  3753. 2:56:45बढ़कर बोला, "आप नाह की शिप्रा का रास्ता
  3754. 2:56:48रोक कर उसे परेशान कर रहे हैं। आपसे विनती
  3755. 2:56:51है कि आप शिप्रा का रास्ता छोड़ दें। इस
  3756. 2:56:53पर मुख्तार शौर्य को झड़कता हुआ बोला ए
  3757. 2:56:56हीरो ये जो तुम शिप्रा का पति बनकर खुश हो
  3758. 2:57:00यह सब मेरे कारण ही संभव हुआ है।
  3759. 2:57:04आप मेरी बात ना ही करें तो अच्छा है। आपने
  3760. 2:57:06मेरी शादी शिप्रा से कराकर हम पर कोई
  3761. 2:57:09एहसान नहीं किया है। उल्टा आपने तो यह सब
  3762. 2:57:11शिप्रा से बदला लेने के लिए किया था। है
  3763. 2:57:14ना? शौर्य मुख्तार भाई को देखते हुए बोला।
  3764. 2:57:17इस पर मुख्तार ने शक भरी नजरों से शौर्य
  3765. 2:57:20की तरफ देखते हुए कहा, पर मैंने जिससे
  3766. 2:57:22शिप्रा की शादी करवाई थी, वह तुम नहीं थे।
  3767. 2:57:26उसकी तो बड़ी-बड़ी दाढ़ी थी। अरे अब दाढ़ी
  3768. 2:57:30ऐसी चीज तो है नहीं जिसे हम साफ भी ना कर
  3769. 2:57:32सकें। और अब जब हम अपने स्वरूप में आपके
  3770. 2:57:34सामने खड़े हैं तो मानना ना मानना आपका
  3771. 2:57:37काम है। और प्लीज आप मेरी वाइफ का रास्ता
  3772. 2:57:40मत रोकिए। उसे अभी बहुत काम है। इसीलिए अब
  3773. 2:57:43अगर आपकी इजाजत हो तो हम यहां से जाएं।
  3774. 2:57:46इतना बोलकर शौर्य शिप्रा के साथ वहां से
  3775. 2:57:49बाहर की तरफ निकल गया। मुख्तार भाई किसी
  3776. 2:57:51स्टैचू की तरह अपनी जगह खड़े ही रह गया।
  3777. 2:57:54रजत को अपने भाई पर गुस्सा आ रहा था कि
  3778. 2:57:56उसने तो कहा था कि शिप्रा की शादी एक
  3779. 2:57:59भिखारी से करवाई है। पर शिप्रा का जो पति
  3780. 2:58:01है वो तो किसी भी एंगल से भिखारी नहीं लग
  3781. 2:58:03रहा। इतने हैंडसम लड़के से शादी होने के
  3782. 2:58:06बाद शिप्रा क्यों उससे तलाक लेना चाहेगी?
  3783. 2:58:09उसके अंदर जो एक [संगीत] उम्मीद थी कि देर
  3784. 2:58:11सवेर शिप्रा उससे शादी के लिए तैयार हो
  3785. 2:58:13जाएगी। अब वो टूटने लगी थी। शिप्रा की
  3786. 2:58:17शादी एक भिखारी से करवाने की चाल अब बनती
  3787. 2:58:20जा रही थी मुख्तार के जी का जंजाल। शौर्य
  3788. 2:58:23के रियल अवतार को देखकर मुख्तार पगला सा
  3789. 2:58:25गया था। रजत यह वो भिखारी नहीं हो सकता।
  3790. 2:58:30लगता है बुड्ढा बलवंत डबल गेम खेल रहा है।
  3791. 2:58:34खानदान की इज्जत बचाने के लिए भिखारी को
  3792. 2:58:37गायब करवा दिया और एक नए चिकने को शिप्रा
  3793. 2:58:41का कसम बना दिया और शायद इसीलिए उस लड़की
  3794. 2:58:45ने इतनी आसानी से केस वापस ले लिया।
  3795. 2:58:50मुख्तार रजत को बार-बार यकीन दिलाने की
  3796. 2:58:52कोशिश कर रहा था क्योंकि शिप्रा के तेवर
  3797. 2:58:55देखकर अंदर ही अंदर मुख्तार का खून खौल
  3798. 2:58:57रहा था। उसे खुद यकीन नहीं हो रहा था कि
  3799. 2:59:00यह जो अभी शिप्रा के साथ यहां से निकला है
  3800. 2:59:03वो शिप्रा का पति है। कहां वो भिखारी और
  3801. 2:59:05कहां यह?
  3802. 2:59:07मुख्तार दूर तक दोनों को जाते हुए देख रहा
  3803. 2:59:10था। जबकि रजत की गुस्सैल नजर मुख्तार पर
  3804. 2:59:13ही थी। उसके अंदर एक वैक्यूम सा बन रहा
  3805. 2:59:17था। शिप्रा के जाने के बाद मुख्तार भी
  3806. 2:59:20बिल्डिंग से बाहर चल दिया और रजत भी अपने
  3807. 2:59:22पैर पटकता हुआ मुख्तार के पीछे हो लिया।
  3808. 2:59:25बिल्डिंग से बाहर आते ही कल्ला मुख्तार की
  3809. 2:59:28कार ले आया। मुख्तार के बाद रजत भी कार
  3810. 2:59:30में बैठा और गुस्से में जोर से दरवाजा बंद
  3811. 2:59:33किया। तभी कल्ला ने कार को आगे बढ़ा दिया।
  3812. 2:59:36जैसे ही कार मेन रोड पर आई रजत फट पड़ा।
  3813. 2:59:39क्या भैया आप मेरी साइड हो या शिप्रा की?
  3814. 2:59:43जिससे आपने शिप्रा की शादी करवाई है। किस
  3815. 2:59:45एंगल से वो आपको भिखारी नजर आ रहा था?
  3816. 2:59:48आपने सोचा एक भिखारी से शादी के बाद
  3817. 2:59:50शिप्रा टूट जाएगी। लेकिन यह तो उल्टा हो
  3818. 2:59:53गया। आप ही बताइए ऐसा हैंडसम पति पाने के
  3819. 2:59:56बाद क्या शिप्रा किसी और से शादी करेगी?
  3820. 2:59:58नहीं करेगी।
  3821. 3:00:00इतना हाइपर होने की जरूरत नहीं है। उसे
  3822. 3:00:04देखकर मैं खुद हैरान हूं। मेरी मानो वो
  3823. 3:00:07भिखारी नहीं कोई और है। अरे इतने कम दिनों
  3824. 3:00:12में एक भिखारी में इतना चेंज कैसे आ सकता
  3825. 3:00:15है? मुख्तार को अब खुद पर डाउट होने लगा
  3826. 3:00:18था। क्या सच में उसने उस दिन उस भिखारी पर
  3827. 3:00:21ध्यान नहीं दिया था या शाम का समय होने के
  3828. 3:00:23कारण उसे कुछ समझ ही नहीं आया था? मुख्तार
  3829. 3:00:26ने अपनी बात की पुष्टि करने के लिए कल्ला
  3830. 3:00:28से पूछा क्यों कल्ला तुम भी तो उस दिन
  3831. 3:00:32हमारे साथ थे। तुमने उस भिखारी को बड़े
  3832. 3:00:35करीब से देखा था। तो बताओ क्या उस दिन
  3833. 3:00:38वाले भिखारी में और आज वाले लड़के में कोई
  3834. 3:00:41मेल है? भाई मैं खुद हैरान हूं। कहां उस
  3835. 3:00:45दिन वाला भिखारी और कहां आज का है चिकना।
  3836. 3:00:48या तो वो जानबूझकर उस दिन भिखारी बना हुआ
  3837. 3:00:50था या फिर शिप्रा ने उसे पूरी तरह बदल
  3838. 3:00:53दिया है। कल्ला के शक जताने पर मुख्तार
  3839. 3:00:56तुरंत बोल पड़ा। शिप्रा ने उसका रूप बदल
  3840. 3:01:00दिया है या अपना खसम ही बदल दिया है। अरे
  3841. 3:01:03कोई कितना चेंज हो गया भैया। शक की सूरत
  3842. 3:01:06पहनावा इन चीजों में चेंज लाया जा सकता
  3843. 3:01:08है। पर बातचीत और व्यवहार को बदलना इतना
  3844. 3:01:10आसान नहीं होता। रजत मानने को तैयार नहीं
  3845. 3:01:14था कि मुख्तार से गलती नहीं हुई है। वो तो
  3846. 3:01:16अब सारी ही गलती मुख्तार पर डाल रहा था।
  3847. 3:01:19तभी मुख्तार को कुछ ध्यान आया और वो बोला
  3848. 3:01:22जब तुम शिप्रा को उठाने मंदिर गए थे तब
  3849. 3:01:26तुम भी तो मिले थे उस भिखारी से। उसी ने
  3850. 3:01:29तो तुम्हें पुलिस के हवाले किया था ना।
  3851. 3:01:32तो अब तुम खुद बताओ क्या उस भिखारी की
  3852. 3:01:35तुलना तुम आज वाले लड़के से कर सकते हो?
  3853. 3:01:39रजत एकदम से जैसे फ्लैशबैक में चला गया।
  3854. 3:01:42वो उस दिन का वाक्या याद करने लगा जब वो
  3855. 3:01:44मंदिर में शौर्य से उलझा था। जब उसने
  3856. 3:01:47मंदिर वाले भिखारी के हुलिए को याद किया
  3857. 3:01:49तो उसे मुख्तार भाई की बात सही लगने लगी।
  3858. 3:01:52उस दिन कहीं से भी वो उसे पढ़ा लिखा और
  3859. 3:01:55शालीन नजर नहीं आया था। तभी कल्ला को कुछ
  3860. 3:01:57याद आया। वो बोला भाई आपने एक और बात पर
  3861. 3:02:01गौर नहीं की? क्या मुख्तार और रजत दोनों
  3862. 3:02:06ने एक साथ पूछा तो कल्ला बोला जब हम
  3863. 3:02:09भिखारी को उठाकर शादी के लिए ले जा रहे थे
  3864. 3:02:11तो उसके बारे में यह पता चला था कि वो बोल
  3865. 3:02:14नहीं सकता। यहां तक कि हमने उसकी धुलाई भी
  3866. 3:02:17की थी। फिर भी उसके मुंह से उफ तक नहीं
  3867. 3:02:20निकली थी। कल्ला ने मुख्तार को उस रात की
  3868. 3:02:23बात याद दिलाई और आगे कहा। पर आज आपने
  3869. 3:02:26देखा वो कितनी अच्छी तरह से बात कर रहा
  3870. 3:02:28था।
  3871. 3:02:30मुख्तार सोचने को मजबूर हो गया।
  3872. 3:02:33कुछ तो गड़बड़ है जो एक गूंगे भिखारी ने
  3873. 3:02:36आज हमारी जुबान पर ताला लगा दिया। इस काया
  3874. 3:02:41पलट के पीछे जरूर कोई राज है।
  3875. 3:02:45चाहे कुछ भी हो भैया अब शिप्रा का पति
  3876. 3:02:47ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रहेगा। शिप्रा
  3877. 3:02:50को मुझसे ही शादी करनी पड़ेगी। पति से
  3878. 3:02:52तलाक लेने के बाद या मेरे हाथों खलास होने
  3879. 3:02:55के बाद। रजत अपने दांत पीसते हुए बोला। इस
  3880. 3:02:59पर मुख्तार ने रजत को चेताते हुए कहा अब
  3881. 3:03:03जो कुछ भी करना बहुत सोच समझ करना। ध्यान
  3882. 3:03:07रखो अब अगर तुम अपने खिलाफ सरेआम सबूत
  3883. 3:03:11छोड़कर फिर से जेल गए तो मैं तुम्हें
  3884. 3:03:14छुड़ाने की कोशिश नहीं करूंगा।
  3885. 3:03:17इतने में रजत गुस्से में भड़क उठा। मुझे
  3886. 3:03:20तो लगता है भैया आप इस राय फैमिली से डर
  3887. 3:03:22गए हो। इसीलिए तो जो काम आज तक नहीं किए
  3888. 3:03:25वो सब किए जा रहे हो।
  3889. 3:03:27यहां तक कि आज आपने मुझसे भी माफी मंगवा
  3890. 3:03:30दी। बेवकूफ, यह सब तुम्हारे कारण ही करना
  3891. 3:03:33पड़ रहा है। नहीं तो मुझे क्या जरूरत थी
  3892. 3:03:36उससे माफी मांगने की? पड़े रहते तुम जेल
  3893. 3:03:39में। ऊपर से यह जिद अलग किए बैठे हो कि
  3894. 3:03:42तुम्हें उस शिप्रा से शादी भी करनी है।
  3895. 3:03:44अगर तुम्हारी यह जिद ना होती, तो आज क्या
  3896. 3:03:47जरूरत थी हमें यहां आने की? तुम तो जेल से
  3897. 3:03:50छूट ही गए थे। मौका देखकर उस शिप्रा को भी
  3898. 3:03:54ठिकाने लगा देता। पर नहीं सिर्फ तुम्हारे
  3899. 3:03:57कारण मुझे यह सब ड्रामा करना पड़ रहा है।
  3900. 3:04:01मुख्तार भाई ने भी अपने दिल की भड़ास
  3901. 3:04:03निकाल दी। मुख्तार की बात सुनकर रजत एक पल
  3902. 3:04:06के लिए ठिटक गया। फिर कसमसाते हुए उसने भी
  3903. 3:04:09अपने दिल का गुबार बाहर किया। तो आप क्या
  3904. 3:04:11चाहते हैं कि मैं ऐसे ही शिप्रा को जाने
  3905. 3:04:13दूं। मैंने ऐसा तो नहीं कहा। पर हर चीज का
  3906. 3:04:17एक तरीका होता है। खुद को फंसा कर अगर
  3907. 3:04:19तुमने उसका नुकसान कर भी दिया तो क्या
  3908. 3:04:22फायदा? मजा तो तब है जब तुम्हारा बाल भी
  3909. 3:04:26बांका ना हो और सामने वाला बर्बाद हो जाए।
  3910. 3:04:30मुख्तार ने रजत को समझाया लेकिन उसकी बात
  3911. 3:04:33रजत के पल्ले पड़ी या नहीं यह कोई नहीं
  3912. 3:04:35जानता। दूसरी तरफ शिप्रा गुस्से में वहां
  3913. 3:04:39से निकल गई थी। शौर्य उसके पीछे-छे ही था।
  3914. 3:04:42शिप्रा को यह सोचकर गुस्सा आ रहा था कि
  3915. 3:04:44दादाजी ने रजत के खिलाफ केस वापस लिया तो
  3916. 3:04:46लिया पर उसे यहां ऑफिस बुलाने की क्या
  3917. 3:04:48जरूरत थी। शिप्रा पार्किंग एरिया में आकर
  3918. 3:04:51रुक गई। शौर्य ने उसे गुस्से में देखा तो
  3919. 3:04:54उसे नॉर्मल करने के लिए बोला।
  3920. 3:04:57आप क्यों डिस्टर्ब हो रही हैं? तुम्हें
  3921. 3:04:59नहीं पता मैं क्यों डिस्टर्ब हूं? देखा
  3922. 3:05:01नहीं तुमने उस गुंडे की हिम्मत। यह सब
  3923. 3:05:04मेरे परिवार वालों के कारण ही है। उन्हें
  3924. 3:05:06क्या जरूरत थी एक गुंडे के साथ समझौता
  3925. 3:05:08करने की? शिप्रा ने यह बोल तो दिया पर फिर
  3926. 3:05:12उसे ध्यान आया कि इस बारे में श्रवण को
  3927. 3:05:14क्या पता होगा। इसीलिए वो उसे हकीकत से
  3928. 3:05:16वाकिफ कराने के लिए बोली। शायद तुम्हें
  3929. 3:05:19नहीं पता। मेरे परिवार वाले चाहते थे कि
  3930. 3:05:21मैं उस रजत से शादी कर लूं। वे सभी इस
  3931. 3:05:24गुंडे से डरे हुए थे। मैंने शादी के लिए
  3932. 3:05:26मना किया तो सिर्फ इस शर्त पर उन्होंने
  3933. 3:05:28मेरी बात मानी कि मैं रजत के खिलाफ अपना
  3934. 3:05:30केस वापस ले लूं। और देखो आज ही केस वापस
  3935. 3:05:34लिया और दोनों भाई फिर से हमारे ऑफिस तक
  3936. 3:05:36पहुंच गए। अब तुम ही बताओ कैसे डिस्टर्ब
  3937. 3:05:39ना हो हूं।
  3938. 3:05:40आपका परिवार एक बिजनेस करने वाला परिवार
  3939. 3:05:43है। ये लोग फालतू के पंगों में नहीं पड़ना
  3940. 3:05:45चाहते। इसीलिए वो चाहते हैं कि कोई बीच का
  3941. 3:05:47रास्ता निकल आए। जिसमें ना काहू से दोस्ती
  3942. 3:05:51ना काहू से बैर वाली सिचुएशन हो। वो
  3943. 3:05:54गुंडों पर भरोसा करने की भूल कर रहे हैं
  3944. 3:05:56और समझ नहीं रहे कि यह स्थिति उनके खुद के
  3945. 3:05:59लिए आफत बन सकती है। शौर्य शिप्रा को
  3946. 3:06:02समझाने की कोशिश करता हुआ बोला। शिप्रा
  3947. 3:06:04अपने परिवार की स्थिति समझ रही थी कि वे
  3948. 3:06:06लोग भी मजबूर हैं। पर उसे यह भी लग रहा था
  3949. 3:06:09कि भला इतना डर कर भी क्या जीना। उसने
  3950. 3:06:11हिम्मत की थी। इसीलिए तो रजत को जेल जाना
  3951. 3:06:14पड़ा था। और आज जब उसने समझौता किया तो
  3952. 3:06:17वही रजत फिर से उसके सिर पर आकर नाचने लगा
  3953. 3:06:19था। शौर्य शिप्रा के चेहरे के बदलते हुए
  3954. 3:06:22भाव को देख रहा था। अचानक उसके दिमाग में
  3955. 3:06:25कुछ आया तो उसने सोचा ट्राई करने में क्या
  3956. 3:06:27जाता है? यही सोचकर उसने शिप्रा से पूछा।
  3957. 3:06:31वैसे एक बात पूछ सकता हूं। शिप्रा ने घूर
  3958. 3:06:34कर शौर्य को देखा पर कुछ बोली नहीं। शौर्य
  3959. 3:06:37कुछ पल इंतजार करता रहा। पर जब शिप्रा ने
  3960. 3:06:39कुछ नहीं कहा तो उसने पूछ ही लिया। जहां
  3961. 3:06:43तक मैं समझता हूं रजत [संगीत] अच्छे खासे
  3962. 3:06:45परिवार से आता है। मेरे ख्याल से वो लोग
  3963. 3:06:48विशालगढ़ के कुछ एक रईस परिवारों में से
  3964. 3:06:50हैं और वो आपको पसंद भी करता है तो फिर
  3965. 3:06:53उससे शादी करने में क्या दिक्कत है?
  3966. 3:06:56शिप्रा उम्मीद नहीं कर रही थी कि शौर्य
  3967. 3:06:58उससे इस तरह का सवाल कर सकता है। वो महसूस
  3968. 3:07:01कर रही थी कि शौर्य उससे अब कुछ ज्यादा ही
  3969. 3:07:03निजी सवाल करने लगा है। उसने जवाब दिया।
  3970. 3:07:07मेरे लिए यह मायने नहीं रखता कि कौन कितना
  3971. 3:07:10पैसे वाला या पावरफुल है। मेरे लिए इंसान
  3972. 3:07:13मायने रखता है। रजत का जिस तरह का
  3973. 3:07:15कैरेक्टर है वो कभी भी मेरी पसंद नहीं बन
  3974. 3:07:18सकता। उसने या उसके परिवार ने जो पैसे और
  3975. 3:07:21पावर सोसाइटी में बना रखी है वो गलत काम
  3976. 3:07:24से बनाई है।
  3977. 3:07:26शिप्रा की इस बात पर शौर्य एक फीकी
  3978. 3:07:28हंसी-हंसते हुए बोला।
  3979. 3:07:30दूध का धुला कौन है इस दुनिया में? जिसको
  3980. 3:07:33जहां मौका मिलता है, हर कोई सिस्टम का
  3981. 3:07:35फायदा उठाने की कोशिश करता है। आज के समय
  3982. 3:07:38में जो कामयाब है, वही इज्जतदार है। यह
  3983. 3:07:41बात आपके परिवार वाले भी समझते हैं और
  3984. 3:07:43इसीलिए आज वो लोग आपके ऑफिस तक आ पहुंचे।
  3985. 3:07:47शौर्य ने जो कहा वो बात तो कड़वी थी, पर
  3986. 3:07:50सच थी। लेकिन शिप्रा ने इस बात का जवाब
  3987. 3:07:52देते हुए कहा, "मेरे परिवार के लोग या
  3988. 3:07:55दुनिया कैसे सोचती है, मुझे इससे कोई फर्क
  3989. 3:07:57नहीं पड़ता। मेरे लिए सबसे पहले आदमी का
  3990. 3:08:00कैरेक्टर मायने रखता है। उसके बाद उसके
  3991. 3:08:02पास कितना पैसा है या वो कितना पावरफुल है
  3992. 3:08:05यह नहीं। [संगीत]
  3993. 3:08:07यह बातें सिर्फ कहने में ही अच्छी लगती
  3994. 3:08:08हैं। पर हकीकत से इसका दूर-दूर तक कोई
  3995. 3:08:12रिश्ता नहीं होता। शौर्य ने यह बात शिप्रा
  3996. 3:08:15को उकसाने की नियत से ही कही थी। जिसका
  3997. 3:08:17रिप्लाई भी उसे तुरंत मिला। तुम कहना क्या
  3998. 3:08:20चाहते हो? मैं जो बातें कह रही हूं हकीकत
  3999. 3:08:23में उस पर अमल नहीं करती। शिप्रा थोड़ी
  4000. 3:08:26नाखुशी से बोली। इस पर शौर्य ने जवाब
  4001. 3:08:28दिया, मैं यह बातें आपके लिए नहीं कह रहा
  4002. 3:08:31हूं। आमतौर पर जो होता है, मैं वही बयां
  4003. 3:08:34कर रहा हूं। यह हो सकता है कि कोई शख्स ही
  4004. 3:08:36पसंद ना हो तो दूसरी बात है। नहीं तो
  4005. 3:08:39स्टेटस तो सभी देखते हैं कि जिससे उसकी
  4006. 3:08:41शादी होने वाली है, उसका स्टेटस कैसा है?
  4007. 3:08:44सभी चाहते हैं कि जिससे उसकी शादी हो,
  4008. 3:08:46उसका परिवार, उसके खुद के परिवार से बेहतर
  4009. 3:08:48स्थिति में ही हो। शिप्रा हैरान थी कि
  4010. 3:08:51शौर्य आज उससे इस तरह की बातें आखिर क्यों
  4011. 3:08:53कर रहा है। उसे शौर्य की बातें पसंद तो
  4012. 3:08:56नहीं आ रही थी पर वो जवाब देते हुए बोली
  4013. 3:08:59शायद तुम सही कह रहे होंगे पर मैं उन
  4014. 3:09:02लड़कियों की तरह नहीं सोचती तो इसका मतलब
  4015. 3:09:04अगर मैं आपसे पूछूं कि क्या आप मेरे साथ
  4016. 3:09:06अपनी पूरी जिंदगी बिताएंगी तो आपका जवाब
  4017. 3:09:09क्या होगा? बातों ही बातों में शौर्य ने
  4018. 3:09:13हिम्मत करके वो बात कह दी जिसकी शायद
  4019. 3:09:15शिप्रा को उम्मीद ही नहीं थी। शिप्रा की
  4020. 3:09:17आंखें फैल गई। वो हैरान होकर शौर्य की ओर
  4021. 3:09:20देख रही थी। उसने तो कभी सपने में भी नहीं
  4022. 3:09:23सोचा था कि श्रवण उससे ऐसी बात कर सकता
  4023. 3:09:25है। जिसे वो भिखारी समझ रही थी। वही उसके
  4024. 3:09:29साथ अपनी जिंदगी बिताने की सोच रहा था।
  4025. 3:09:31उसने उसे अपनी एक उंगली क्या पकड़ाई? वो
  4026. 3:09:34तो उसका पूरा हाथ ही थामना चाहता था। वो
  4027. 3:09:37गुस्से में बोली। तुम्हारी हिम्मत कैसे
  4028. 3:09:39हुई यह बात कहने की? क्यों क्या हुआ?
  4029. 3:09:42मैंने ऐसा क्या बोल दिया जो आप बुरा मान
  4030. 3:09:44गई? आप खुद भी तो मुझसे तलाक नहीं चाहती।
  4031. 3:09:47जब इस बंधन में रहना आपको पसंद है तो मेरे
  4032. 3:09:50साथ जिंदगी बिताने में क्या दिक्कत है?
  4033. 3:09:52शौर्य भी थोड़े तीखे स्वर में बोला।
  4034. 3:09:54शिप्रा को यकीन नहीं हो रहा था कि यह वही
  4035. 3:09:57श्रवण है जिसे वो अपने लिए डमी हस्बैंड के
  4036. 3:09:59रूप में इस्तेमाल करना चाहती थी। क्योंकि
  4037. 3:10:02वो शादी तो करना नहीं चाहती थी। आज इसने
  4038. 3:10:04भी इतनी हिम्मत कर दी कि सीधा-सीधा उसे
  4039. 3:10:07अपने साथ जिंदगी बिताने के लिए कह दिया।
  4040. 3:10:09उसे गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर उसने अपने
  4041. 3:10:12गुस्से को दबाकर कहा। आखिर तुमने भी अपनी
  4042. 3:10:15औकात दिखा ही दी। मैं तुम्हें शरीफ आदमी
  4043. 3:10:18समझती थी पर तुम्हें भी पहचानने में धोखा
  4044. 3:10:21खा गई। शिप्रा की जिंदगी ने जो उसके साथ
  4045. 3:10:24खिलवाड़ किया था उससे शिप्रा की सोच ऊपरी
  4046. 3:10:26तौर पर तो जरूर बदली थी। लेकिन गहराई में
  4047. 3:10:29शायद अभी भी कहीं ना कहीं अमीरी [संगीत]
  4048. 3:10:31के तेवर एक्टिव थे। इसीलिए उसे शौर्य की
  4049. 3:10:34औकात तक पहुंचने में चंद सेकंड भी नहीं
  4050. 3:10:36लगे और उसने पल भर [संगीत] में ही शौर्य
  4051. 3:10:39की शराफत पर तमाचा भी जड़ दिया।
  4052. 3:10:42भला मैंने ऐसा क्या कह दिया जो अचानक में
  4053. 3:10:44शरीफ आदमी से बदमाश बन गया? [संगीत] सिर्फ
  4054. 3:10:47अपने दिल के जज्बात ही तो बयान किए थे और
  4055. 3:10:50आपने मेरी औकात पर ही सवाल दाग दिया।
  4056. 3:10:52शौर्य सफाई देते हुए बोला, तभी शिप्रा ने
  4057. 3:10:55अपने मन के भाव शौर्य के सामने उड़ेल दिए।
  4058. 3:10:58मेरे साथ जिंदगी बिताने का सपना देखने से
  4059. 3:11:01पहले मेरे और अपने बीच का अंतर तो देख
  4060. 3:11:03लेते। याद करो। पहली बातचीत में ही मैंने
  4061. 3:11:07तुम्हें बता दिया था कि तुम दुनिया की नजर
  4062. 3:11:09में मेरे पति रहोगे। पर हमारे बीच वैसा
  4063. 3:11:12कोई संबंध नहीं रहेगा। तुम अपनी जिंदगी
  4064. 3:11:14अपने हिसाब से जी सकते हो। पर मुझसे कोई
  4065. 3:11:17उम्मीद मत रखना। कहा था ना मैंने? पर जब
  4066. 3:11:20तुमने देखा कि कोई मेरी कमजोरी का फायदा
  4067. 3:11:22उठाकर मुझ पर अपने साथ शादी करने का दबाव
  4068. 3:11:25डाल रहा है तो लगे हाथ तुमने भी अपने लिए
  4069. 3:11:27वही कोशिश शुरू कर दी।
  4070. 3:11:30शिप्रा की टर्म्स एंड कंडीशंस और मौके का
  4071. 3:11:32फायदा उठाने का आरोप सुनकर शौर्य के चेहरे
  4072. 3:11:35पर थोड़ी उलझन के भाव आए। पर अगले ही पल
  4073. 3:11:38एक हल्की मुस्कान के साथ उसने कहा, "मैं
  4074. 3:11:40शब्दों के लिए माफी चाहता हूं। पर आप अभी
  4075. 3:11:43थोड़ी देर पहले बड़ी-बड़ी बातें कर रही
  4076. 3:11:45थी। मैं सिर्फ उसे गलत साबित करना चाहता
  4077. 3:11:48था। शिप्रा उलझन भरे स्वर में बोली, तुम
  4078. 3:11:51कहना क्या चाहते हो? इस पर शौर्य तुरंत
  4079. 3:11:54बोल पड़ा। आपने कहा कि आपके लिए इंसान का
  4080. 3:11:57कैरेक्टर मायने रखता है। ना कि उसका रुतबा
  4081. 3:12:00हैसियत और अमीरी। पर जैसे ही मैंने आपसे
  4082. 3:12:02अपने साथ पूरी जिंदगी बिताने की बात की,
  4083. 3:12:05आपने सबसे पहले मुझे मेरी औकात से ही जज
  4084. 3:12:08किया। मैंने तो आपसे कहा भी था कि पसंद
  4085. 3:12:10नापसंद अपनी जगह [संगीत] हो सकती है। पर
  4086. 3:12:13हर कोई चाहता है कि उसकी शादी उसके परिवार
  4087. 3:12:16से बेहतर परिवार में ही हो। और आपने कहा
  4088. 3:12:18कि दूसरों का पता नहीं पर आप वैसी नहीं
  4089. 3:12:21हैं। पर जैसे ही मैंने आपको प्रपोज किया,
  4090. 3:12:24आपने सिर्फ मेरा स्टेटस देखा। क्योंकि मैं
  4091. 3:12:27आपके स्टेटस को मैच नहीं करता इसीलिए मैं
  4092. 3:12:29शरीफ भी नहीं रहा। आपने तो यह भी कह दिया
  4093. 3:12:32कि आप मुझे पहचानने में धोखा खा गई। शौर्य
  4094. 3:12:36की बात सुनकर शिप्रा को ऐसा महसूस हुआ
  4095. 3:12:38जैसे एक ही पल में उसकी [संगीत] सोच की
  4096. 3:12:40सारी परतें हट गई हो और उसकी असलियत सामने
  4097. 3:12:43आ गई हो। उसके चेहरे का नकाब जैसे किसी ने
  4098. 3:12:46नोच दिया हो। उसे एक-एक करके अपनी कही हुई
  4099. 3:12:49बातें याद आने लगी। कितना सही कहा शौर्य
  4100. 3:12:53ने। वो खुद को सोच की [संगीत] धनी और
  4101. 3:12:55सामाजिक कुरीतियों से ऊपर समझती थी। पर जब
  4102. 3:12:57खुद पर बात आई तो वह भी बाकी लोगों की तरह
  4103. 3:13:00ही निकली। झुकी सी नजर के साथ शिप्रा खुद
  4104. 3:13:03को ही कोसने लगी।
  4105. 3:13:05सच है कितना आसान है बड़ी-बड़ी बातें
  4106. 3:13:08करना। पर जब खुद उस पर अमल करने की बात
  4107. 3:13:10आती है तो सारी बातें पीछे रह जाती हैं।
  4108. 3:13:13शिप्रा के लिए अब शौर्य से नजर मिलाना
  4109. 3:13:15मुश्किल हो गया था। एक ही पल में शौर्य ने
  4110. 3:13:18उसे आईना दिखा दिया था। वो सोचने लगी क्या
  4111. 3:13:21अंतर है उसमें और रजत में? रजत जैसा है
  4112. 3:13:24वैसा ही दिखता भी है। पर वो खुद डबल
  4113. 3:13:27कैरेक्टर है। रियल शिप्रा और फेक शिप्रा।
  4114. 3:13:30शौर्य समझ गया कि शिप्रा अब खुद के
  4115. 3:13:32अंतर्द्वंद में उलझ गई है। इसीलिए वो खुद
  4116. 3:13:34को नॉर्मल दिखाने की कोशिश करता हुआ बोला।
  4117. 3:13:37आप किस सोच में गुम हो गई। माफी चाहता
  4118. 3:13:40[संगीत] हूं। मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी
  4119. 3:13:42कि आपकी भावनाओं को चोट पहुंचाऊं। हम
  4120. 3:13:45दोनों के बीच का अंतर पता है मुझे। मैं
  4121. 3:13:47कभी उसे लांघने की कोशिश नहीं करूंगा।
  4122. 3:13:49[संगीत]
  4123. 3:13:50मैं जानता हूं कि मखमल में टाट का पैबंद
  4124. 3:13:53नहीं लगता और अपनी औकात की लिमिट भी मालूम
  4125. 3:13:55[संगीत] है मुझे। उससे बाहर जाने की सोच
  4126. 3:13:58भी नहीं सकता। इसीलिए प्लीज मेरी बातों
  4127. 3:14:01[संगीत] को अपने दिल पर ना लें।
  4128. 3:14:04शिप्रा को लग रहा था मानो उसने अपनी सोचने
  4129. 3:14:06समझने की शक्ति ही खो दी है। उसे खुद पर
  4130. 3:14:09और अपनी सोच पर बड़ा गर्व था। पर आज शौर्य
  4131. 3:14:12ने एक पल में ही उसे छोटा कर दिया। अभी वह
  4132. 3:14:15इस उलझन से निकल भी नहीं पाई थी कि तभी
  4133. 3:14:17उसका फोन रिंग करने लगा। फोन लगातार बज
  4134. 3:14:20रहा था। पर वो अपनी ही उलझन में खोई
  4135. 3:14:22[संगीत] हुई थी। आखिर शौर्य को कहना ही
  4136. 3:14:24पड़ा। मैम आपके मोबाइल पर कॉल आ रहा है।
  4137. 3:14:28शिप्रा जैसे होश में आई। उसने मोबाइल देखा
  4138. 3:14:31तो मोहित रैना का कॉल आ रहा था। फोन उठाते
  4139. 3:14:33ही बातचीत शुरू हो गई।
  4140. 3:14:36हेलो मिस्ट शिप्रा मोहित साइड। आप कब तक आ
  4141. 3:14:38[संगीत] रही हैं?
  4142. 3:14:39मैं आधे घंटे में आपके पास पहुंच जाऊंगी।
  4143. 3:14:42ठीक है। मैं आपका इंतजार करता हूं।
  4144. 3:14:44फ़ कट हो गया। शिप्रा उलझन में थी कि क्या
  4145. 3:14:47उसे शौर्य को अपने साथ ले जाना चाहिए। अभी
  4146. 3:14:50जो कुछ हुआ था उसके कारण वो शौर्य के साथ
  4147. 3:14:52अनइजी महसूस कर रही थी। शौर्य समझ गया
  4148. 3:14:55[संगीत] कि शिप्रा खुद के अपराध बोध में
  4149. 3:14:57उलझी हुई है। उसे स्थिति से निकालने के
  4150. 3:15:00लिए शौर्य बोला रिलैक्स हो जाइए। अभी
  4151. 3:15:03मैंने आपसे जो कुछ भी पूछा [संगीत] था
  4152. 3:15:04आपकी जगह कोई और भी होता तो उसका भी यही
  4153. 3:15:07जवाब होता। इसमें बुरा फील करने वाली कोई
  4154. 3:15:10बात नहीं है। शिप्रा को शौर्य से इतनी
  4155. 3:15:12समझदारी भरी बात की उम्मीद नहीं थी। उसे
  4156. 3:15:15खुद पर गुस्सा आ रहा था कि अगर शौर्य ने
  4157. 3:15:17उससे ऐसा सवाल पूछ भी लिया था तो वह इतना
  4158. 3:15:19रूढ़ जवाब कैसे दे सकती है? अगर उसे मना
  4159. 3:15:22ही करना था तो उसे उसकी औकात दिखाने की
  4160. 3:15:24क्या जरूरत थी? ना जाने उसने उसे
  4161. 3:15:27क्या-क्या कह दिया। शिप्रा के बारे में
  4162. 3:15:30शौर्य की धारणा सही साबित हो चुकी थी।
  4163. 3:15:32इसलिए शिप्रा को कपकपी सी होने लगी थी।
  4164. 3:15:35[संगीत] वो मन ही मन बुदबुदा रही थी। कहीं
  4165. 3:15:38श्रवण मुझसे नाराज होकर चला गया तो मेरी
  4166. 3:15:41धड़कन बढ़ क्यों रही है? डर सा क्यों लग
  4167. 3:15:43रहा है? कुछ बोलो श्रवण बोलो। तभी शौर्य
  4168. 3:15:48चुटकी बजाकर बोला, अरे मैम किस सोच में खो
  4169. 3:15:50गई हैं आप? आपको बिग बुल के ऑफिस नहीं
  4170. 3:15:52जाना है क्या? शौर्य की आवाज सुनते ही
  4171. 3:15:55शिप्रा ने खुद को कंट्रोल किया और खुद को
  4172. 3:15:57नॉर्मल दिखाने की कोशिश करते हुए बोली,
  4173. 3:16:00"गाड़ी ले आओ, चलते हैं। शिप्रा ने बोल तो
  4174. 3:16:03दिया पर वो अपने अंदर ही कॉन्फिडेंस की
  4175. 3:16:05कमी महसूस कर रही थी। शौर्य जल्दी से
  4176. 3:16:07गाड़ी ले आया और वो चल दिए। गाड़ी में छाई
  4177. 3:16:10खामोशी शिप्रा को परेशान कर रही थी। जब
  4178. 3:16:13उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने मासूमियत
  4179. 3:16:15से बोला सॉरी
  4180. 3:16:18शौर्य ने यह सुना तो हैरानी से मुड़कर
  4181. 3:16:20शिप्रा की आंखों में देखा यह किस लिए अब
  4182. 3:16:25ऐसे अनजान बनने की कोशिश मत करो मुझे पता
  4183. 3:16:27है कि तुम समझ सकते हो कि मैंने सॉरी
  4184. 3:16:30क्यों कहा शिप्रा नाराजगी प्रदर्शित करते
  4185. 3:16:32हुए बोली तो जवाब देते हुए शौर्य बोला
  4186. 3:16:36समझता हूं इसीलिए तो पूछा यह किस लिए आप
  4187. 3:16:39अपनी जगह गलत कहां थी जो आप सॉरी कह रही
  4188. 3:16:42हैं उल्टा अगर आप ऐसा नहीं कहती तो मुझे
  4189. 3:16:44जरूर आश्चर्य होता क्योंकि दुनिया ऐसे ही
  4190. 3:16:47चलती है। सबके लिए एक सामाजिक दायरा बना
  4191. 3:16:50हुआ है।
  4192. 3:16:52शौर्य के इतना कहते ही शिप्रा उसे आंखें
  4193. 3:16:54फाड़े देख रही थी। [संगीत] वहीं शौर्य ने
  4194. 3:16:56अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा राजा और
  4195. 3:16:59रंक दोनों समाज की व्यवस्था का हिस्सा
  4196. 3:17:01हैं। जब भी दो परिवारों में संबंध बनता है
  4197. 3:17:04तो वह सामाजिक दायरे के हिसाब से ही होता
  4198. 3:17:06है। कभी आपने देखा है कि एक राजा की लड़की
  4199. 3:17:09की शादी किसी गरीब घर के लड़के से हुई हो?
  4200. 3:17:12इसीलिए जब ऐसी कोई कोशिश होती है तो वह इस
  4201. 3:17:14सामाजिक ताने-बाने को तोड़ती है और ऐसी
  4202. 3:17:17बातें सिर्फ अपवादों में ही मिलती हैं। और
  4203. 3:17:20क्या शिप्रा ने तपाक से पूछा शौर्य ने एक
  4204. 3:17:24पल शिप्रा की ओर देखा और बोला और इसका
  4205. 3:17:27अंजाम भी अक्सर सुखद नहीं होता। आपने लैला
  4206. 3:17:30मजनू श्री फरहाद इन सब की कहानियां तो
  4207. 3:17:33सुनी ही होंगी और इन सबका अंत भी आपको पता
  4208. 3:17:36होगा। उन्होंने इस सामाजिक ताने-बाने को
  4209. 3:17:38तोड़ने की कोशिश की थी। शौर्य ने सहजता से
  4210. 3:17:41तर्क के साथ अपनी बात रख दी। तभी इसका
  4211. 3:17:44जवाब देते हुए शिप्रा बोली, मैं समझ सकती
  4212. 3:17:47हूं अपनी बात को साबित करने में तुम्हारा
  4213. 3:17:49कोई मुकाबला नहीं है। तुम्हारे पास बहुत
  4214. 3:17:52तर्क होते हैं, पर मैं तुम्हें यह बता दूं
  4215. 3:17:54कि तुमने [संगीत] जो सामाजिक ताने-बाने का
  4216. 3:17:56स्वरूप दिखाया है, मैं उस पर विश्वास नहीं
  4217. 3:17:58करती। शौर्य आगे कुछ बोलता। उससे पहले ही
  4218. 3:18:02शिप्रा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,
  4219. 3:18:04"इसके बावजूद मैंने तुम्हें जो जवाब दिया,
  4220. 3:18:07उसे मैं किसी भी तरह सही नहीं ठहरा सकती।
  4221. 3:18:10बिलीव मी, मैं ऐसी नहीं हूं। पर जैसा
  4222. 3:18:13तुमने मेरे बारे में सोचा था, मैंने खुद
  4223. 3:18:15अपने जवाब से उसे सही साबित कर दिया।
  4224. 3:18:18शिप्रा समझ चुकी थी कि उसने अपनी बात जिस
  4225. 3:18:20तरह से रखी थी, वो तरीका गलत था। इसीलिए
  4226. 3:18:23वो फिर बोली, "मुझे खुद पर अफसोस हो रहा
  4227. 3:18:25है कि मैंने तुमसे तुम्हारी औकात की बात
  4228. 3:18:27कैसे कह दी। अब मैं चाहकर भी खुद को सही
  4229. 3:18:30साबित नहीं कर सकती। पर मेरा बोला हुआ
  4230. 3:18:32सॉरी शायद मुझे थोड़ा सुकून दे देगा।
  4231. 3:18:34इसीलिए अब बिना किसी ना नुकुर के मेरी
  4232. 3:18:37सॉरी एक्सेप्ट कर लो ताकि मेरे दिल को
  4233. 3:18:39थोड़ी राहत मिले। शिप्रा ने इस बार पूरी
  4234. 3:18:42स्पष्टता के साथ अपनी बात रखी।
  4235. 3:18:45अगर ऐसी बात है तो फिर आपका दिल रखने के
  4236. 3:18:48लिए मैं आपकी सॉरी स्वीकार करता हूं। यह
  4237. 3:18:50कहते हुए शौर्य के चेहरे पर एक मुस्कान आ
  4238. 3:18:52गई। लेकिन शिप्रा का चेहरा अभी भी गंभीर
  4239. 3:18:55था। वो बोली अब मैं तुम्हें एक बात और
  4240. 3:18:58क्लियर कर दूं कि अभी जो मेरी लाइफ है और
  4241. 3:19:00सोच है उसमें मैं तुम्हारे साथ जिंदगी
  4242. 3:19:03बिताने की सोच भी नहीं सकती थी। ऑनेस्टली
  4243. 3:19:06तुम मेरी पसंद नहीं हो। मैं तुम्हें एक
  4244. 3:19:08ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही हूं। वो
  4245. 3:19:10भी तब तक जब तक मेरे घर वाले मेरी दूसरी
  4246. 3:19:12शादी करने की जिद नहीं छोड़ देते। और मेरे
  4247. 3:19:15ना कहने के पीछे जो दूसरी बात है वह यह कि
  4248. 3:19:18अब मैं अपनी पूरी जिंदगी अकेले ही बिताने
  4249. 3:19:20का निर्णय कर चुकी हूं। इसीलिए मुझे किसी
  4250. 3:19:23के साथ की जरूरत नहीं है।
  4251. 3:19:25शिप्रा शौर्य के सामने अपनी सोच को जाहिर
  4252. 3:19:28करने के बाद अब संतुष्ट नजर आ रही थी। उसे
  4253. 3:19:30अब लग रहा था कि उसके सिर पर जो एक बोझ
  4254. 3:19:32पड़ा था, अपनी बात को शौर्य के सामने
  4255. 3:19:35स्पष्ट करने के बाद वो उतर गया था। शौर्य
  4256. 3:19:38ने भी यह बात नोटिस की थी। इसीलिए उसने
  4257. 3:19:40कहा, शुक्र है अब आप सही नजर आ रही हैं।
  4258. 3:19:44यह क्या बात हुई? क्या पहले मैं सही नजर
  4259. 3:19:46नहीं आ रही थी? शिप्रा ने भोएं चढ़ाते हुए
  4260. 3:19:49बोला। नहीं पहले तो ऐसे लग रहा था कि आप
  4261. 3:19:51अपने मन पर मानो बोझ लिए हुए बैठी हैं। पर
  4262. 3:19:54अब आप रिलैक्स नजर आ रही हैं। शौर्य ने जो
  4263. 3:19:57महसूस किया वो बोल दिया। शिप्रा को भी
  4264. 3:20:00महसूस हुआ कि शौर्य सही कह रहा है। जब वो
  4265. 3:20:03कार के अंदर बैठी थी तो वह अपराध बोध से
  4266. 3:20:05दबी हुई थी। पर अब शौर्य से बात होने के
  4267. 3:20:07बाद वो उससे मुक्त हो गई थी। उसे इस लड़के
  4268. 3:20:10की किसी को ऑब्जर्व करने की क्षमता पर
  4269. 3:20:13आश्चर्य हुआ। वो शौर्य की तरफ देखते हुए
  4270. 3:20:16बोली
  4271. 3:20:17क्या हम दोस्त हो सकते हैं? शिप्रा को लगा
  4272. 3:20:21कि इससे शौर्य को थोड़ी तसल्ली होगी
  4273. 3:20:23क्योंकि जिस तरह से उसने उसके प्रपोजल को
  4274. 3:20:25ठुकराया था उससे उसके दिल में कहीं ना
  4275. 3:20:27कहीं एक गांठ बन गई होगी। तो अगर वो उसकी
  4276. 3:20:30दोस्त बन जाएगी तो शायद वो गांठ खत्म हो
  4277. 3:20:32जाए। जी नहीं। बिल्कुल नहीं। [संगीत]
  4278. 3:20:36शौर्य एक फीकी मुस्कान के साथ बोला। यह
  4279. 3:20:38सुनकर शिप्रा को जोर का धक्का लगा। शौर्य
  4280. 3:20:41ने उसकी दोस्ती के लिए सीधा इंकार कर
  4281. 3:20:43दिया। वो हड़बड़ा गई और उसकी जुबान
  4282. 3:20:46लड़खड़ाने लगी। पर क्यों? मैं मैं कारण
  4283. 3:20:49जान सकती हूं। अब शिप्रा के मन में फिर से
  4284. 3:20:52खलबली सी होने लगी और तभी शौर्य ने गाड़ी
  4285. 3:20:55रोक दी। शिप्रा ने पूछा गाड़ी क्यों रोक
  4286. 3:20:58[संगीत] दी? अरे आप गाड़ी से बाहर तो
  4287. 3:21:00देखिए। शौर्य मुस्कुराते हुए बोला, शिप्रा
  4288. 3:21:04ने बाहर की तरफ देखा तो उसने पाया कि उसकी
  4289. 3:21:06कार बिग बुल के ऑफिस के बाहर ही खड़ी थी।
  4290. 3:21:10ओह हम पहुंच [संगीत] गए। शिप्रा बाहर
  4291. 3:21:12देखते हुए बोली। तभी अचानक उसकी निगाह
  4292. 3:21:15बिगबुल के गेट के अंदर जाते हुए एक शख्स
  4293. 3:21:17पर पड़ी। उसकी आंखें फैल गई और उसके मुंह
  4294. 3:21:19से निकल पड़ा। ये यहां क्या कर रहा है? आज
  4295. 3:21:23का दिन शिप्रा के लिए हैरानी से भरा था।
  4296. 3:21:26जो कुछ भी उसके साथ हो रहा था उसे हैरान
  4297. 3:21:28कर रहा था। ऑफिस में रजत से सामना, शौर्य
  4298. 3:21:31का जिंदगी साथ बिताने के लिए प्रपोज करना,
  4299. 3:21:34शौर्य का सिर्फ दोस्त बनने से साफ इंकार
  4300. 3:21:36करना और अब बिग बुल में मीटिंग से पहले उस
  4301. 3:21:39शख्स का वहां दिखना जिसे वो दुश्मन
  4302. 3:21:41कंपिटिट कहती थी। वो शख्स कोई और नहीं
  4303. 3:21:44बल्कि बलराज खन्ना था। लेवेस ब्लू का
  4304. 3:21:47मालिक। विशालगढ़ में बलराज खन्ना शिप्रा
  4305. 3:21:50का मेन कंपिटिट था। शिप्रा के चेहरे में
  4306. 3:21:52कुछ परेशानी सी झलकने लगी। उसके मुंह से
  4307. 3:21:55निकला। यह कहां से टपक पड़ा यहां? कहीं
  4308. 3:21:59इसे पता तो नहीं चल गया कि आज हमारी
  4309. 3:22:00मीटिंग मोहित रैना के साथ है। नहीं नहीं
  4310. 3:22:04उसे कैसे पता चलेगा? यह महज संयोग होगा कि
  4311. 3:22:07वो भी आज यहां आया है। शौर्य ने शिप्रा की
  4312. 3:22:10परेशानी दूर करने की कोशिश की। वैसे भी आप
  4313. 3:22:13तो मीटिंग के लिए आई हैं। उसके यहां होने
  4314. 3:22:16या ना होने से क्या फर्क पड़ेगा। शिप्रा
  4315. 3:22:19को यह डर सता रहा था कि कहीं बलराज खन्ना
  4316. 3:22:21की वजह [संगीत] से मोहित रैना के साथ उसकी
  4317. 3:22:23मीटिंग खराब ना हो जाए। फिर भी क्यों ना
  4318. 3:22:26हम थोड़ा इंतजार कर लें। शायद 510 [संगीत]
  4319. 3:22:28मिनट में वो यहां से चला जाए। तभी शौर्य
  4320. 3:22:32ने शिप्रा को हिम्मत देते हुए कहा ऐसे डर
  4321. 3:22:35कर बिजनेस नहीं होता। उसे आपको देखकर डरना
  4322. 3:22:38चाहिए ना कि आपको उससे। शौर्य की बात
  4323. 3:22:42सुनकर शिप्रा को थोड़ा बुरा लगा कि वो उसे
  4324. 3:22:44बिजनेस करना सिखा रहा है। जिसने अपने दम
  4325. 3:22:46पर जिंक कलेक्शन को एक पहचान दी थी। पर वो
  4326. 3:22:49कुछ नहीं बोली। फिर [संगीत] अचानक शिप्रा
  4327. 3:22:51को कुछ याद आया और उसने शौर्य से कहा
  4328. 3:22:54तुम्हारा कोई दोस्त यहां जॉब करता है ना?
  4329. 3:22:57उससे पता कर सकते हो कि यह बलराज खन्ना
  4330. 3:22:59यहां क्यों आया है? शिप्रा की बात सुनकर
  4331. 3:23:02शौर्य के मन में सवाल उठने लगे। अंदर जाकर
  4332. 3:23:05शिप्रा ने अगर उससे उसके उस दोस्त से
  4333. 3:23:07मिलवाने की जिद की जिसके कारण बिग बुल में
  4334. 3:23:09उसकी मीटिंग फिक्स हो सकी है तो वो क्या
  4335. 3:23:11जवाब देगा? ऐसी सिचुएशन में वो शिप्रा को
  4336. 3:23:15किससे मिलवाएगा? अचानक उसके दिमाग में
  4337. 3:23:17प्रिया का ख्याल आया। उसने सोचा कि वो
  4338. 3:23:20प्रिया को अपना दोस्त बताकर शिप्रा से
  4339. 3:23:22मिलवा सकता है। फिर उसे ख्याल आया कि
  4340. 3:23:25प्रिया उसे पहचानेगी कैसे? क्योंकि उसने
  4341. 3:23:27तो शौर्य को इस रूप में देखा ही नहीं है।
  4342. 3:23:30कुछ सोचकर शौर्य ने शिप्रा से कहा, आप 5
  4343. 3:23:33मिनट गाड़ी में ही इंतजार करें। मैं अपने
  4344. 3:23:35दोस्त से अभी पता लगा कर आता हूं कि यह
  4345. 3:23:37बलराज खन्ना यहां आया क्यों है। शिप्रा ने
  4346. 3:23:41शौर्य की बात मान ली और कहा, ठीक है जाओ
  4347. 3:23:44पर जल्दी आना। शौर्य गाड़ी से बाहर आया और
  4348. 3:23:47बिग बुल के अंदर चला गया। वो सीधे ज्वेलरी
  4349. 3:23:49[संगीत] डिपार्टमेंट में पहुंचा।
  4350. 3:23:51चलते-चलते उसने मोहित रैना को कॉल लगाया।
  4351. 3:23:54फोन उठाते ही उसने पूछा यह बलराज खन्ना
  4352. 3:23:57यहां क्यों आया है? मोहित रैना को आश्चर्य
  4353. 3:24:00हुआ कि शौर्य को बलराज खन्ना के आने की
  4354. 3:24:02खबर है। उसने कहा, "विगर कलेक्शन के शेयर
  4355. 3:24:05से रिलेटेड जब मैं राघव बजाज से मिला था
  4356. 3:24:08तो ये बलराज खन्ना भी वहीं मिल गया था।
  4357. 3:24:10उसके बाद से वो मेरे पीछे पड़ा है कि उसकी
  4358. 3:24:12ब्रांड लेविस ब्लू को भी अपने स्टोर में
  4359. 3:24:14डिस्प्ले करूं।
  4360. 3:24:15तो तुमने क्या कहा उससे? शौर्य ने सीधा
  4361. 3:24:18सवाल किया।
  4362. 3:24:20मैंने तो मना कर दिया। पर जब भी मौका
  4363. 3:24:22मिलता है वो स्टोर में मिलने चला आता है
  4364. 3:24:24इस उम्मीद में कि शायद कभी मेरा दिल पिघल
  4365. 3:24:26जाए और मैं उसके ब्रांड को अपने आउटलेट
  4366. 3:24:29में जगह दे दूं।
  4367. 3:24:30मोहित रैना ने सच्चाई बताई। तभी [संगीत]
  4368. 3:24:32शौर्य ने मोहित रैना को जरूरी निर्देश
  4369. 3:24:34दिए।
  4370. 3:24:36ठीक है। अभी फिलहाल तो उसे यहां से चलता
  4371. 3:24:38करो। शिप्रा यहां पहुंच गई है। उससे उसका
  4372. 3:24:41सामना ना हो वही अच्छा है। और हां हो सकता
  4373. 3:24:44है कि मैं उसके साथ नजर [संगीत] आऊं तो
  4374. 3:24:46मुझे पहचानने की जरूरत नहीं है। उसकी नजर
  4375. 3:24:48में मैं एक मामूली इंसान हूं। इसीलिए अगर
  4376. 3:24:51मुझे उसके साथ देखो भी तो ऐसे ट्रीट करना
  4377. 3:24:53जैसे मैं कोई हूं ही नहीं।
  4378. 3:24:55जी बॉस ऐसा ही होगा।
  4379. 3:24:57मोहित रैना ने शौर्य को आश्वस्त किया। बात
  4380. 3:25:00खत्म होते ही शौर्य की नजर प्रिया पर पड़ी
  4381. 3:25:03जो एक कस्टमर से डील कर रही थी। शौर्य
  4382. 3:25:05उसके पास पहुंचा और उसके पीछे खड़ा हो
  4383. 3:25:07गया। अभी-अभी प्रिया ने एक डायमंड सेट की
  4384. 3:25:10डील क्लोज की थी। कस्टमर को विदा करने के
  4385. 3:25:12बाद जैसे ही वह पीछे मुड़ी, उसकी नजर
  4386. 3:25:15शौर्य पर पड़ी। शौर्य को अपने इतने पास
  4387. 3:25:18देखकर वो हड़बड़ा गई और दो कदम पीछे हट
  4388. 3:25:20गई। शौर्य ने तुरंत ही खेद प्रकट करते हुए
  4389. 3:25:23कहा, "सॉरी, लगता है मैंने आपको डरा
  4390. 3:25:25दिया।" प्रिया ने जब यह आवाज सुनी, तो उसे
  4391. 3:25:27आवाज जानी पहचानी लगी, लेकिन चेहरा
  4392. 3:25:30बिल्कुल अनजान था। उसे समझ नहीं आया कि
  4393. 3:25:32उसने यह आवाज कब और कहां सुनी थी। वो
  4394. 3:25:35असमंजस में खुद को संभालते हुए बोली,
  4395. 3:25:38कोई बात नहीं, आपने जानबूझकर तो नहीं ही
  4396. 3:25:41किया होगा। बोलते हुए उसके चेहरे पर एक
  4397. 3:25:43व्यवहार कुशल मुस्कान आ गई। पहचाना मुझे?
  4398. 3:25:47शौर्य ने मुस्कुराते हुए पूछा। प्रिया को
  4399. 3:25:50फिर से वही एहसास हुआ कि इस आवाज को तो
  4400. 3:25:52उसने पहले कहीं सुना है। पर जब उसे कुछ
  4401. 3:25:54याद नहीं आया तो वह खेद प्रकट करते हुए
  4402. 3:25:56बोली सॉरी सर मुझे याद नहीं आ रहा कि मैं
  4403. 3:25:59आपसे कब और कहां मिली। आपकी आवाज तो जानी
  4404. 3:26:02पहचानी लग रही है लेकिन आपका चेहरा लगता
  4405. 3:26:04है आज पहली बार ही देखा है। प्रिया के
  4406. 3:26:08इतना कहते ही शौर्य तपाक से बोला कमाल है।
  4407. 3:26:11आपकी याददाश्त तो बहुत कमजोर है। अभी कुछ
  4408. 3:26:14दिन पहले ही तो यहीं मिला था जब आपकी
  4409. 3:26:16फ्रेंड क्या नाम था उसका? हां श्वेता ने
  4410. 3:26:19मेरे साथ गलत बिहेव किया था और तभी मोहित
  4411. 3:26:22यहां आ गया था। इतना सुनते ही प्रिया को
  4412. 3:26:25सब याद आ गया। उस दिन उसने शौर्य को दाढ़ी
  4413. 3:26:28में देखा था। लेकिन आवाज वही थी। अब जब वो
  4414. 3:26:31शौर्य को पहचान गई तो वो तन कर खड़ी हो गई
  4415. 3:26:33और बोली
  4416. 3:26:35सर आप सॉरी सर मैं आपको पहचान नहीं पाई।
  4417. 3:26:38अरे ऐसा मत करो आराम से मेरे साथ नॉर्मल
  4418. 3:26:41बिहेव करो। ऐसा समझो कि मैं तुम्हारा
  4419. 3:26:43दोस्त हूं। शौर्य ने प्रिया को नॉर्मल
  4420. 3:26:46करने की कोशिश की। तभी प्रिया सफाई देते
  4421. 3:26:48हुए बोली, "सर, यह कैसे हो सकता है? मैं
  4422. 3:26:51भला आपकी दोस्त कैसे हो सकती हूं?" शौर्य
  4423. 3:26:54इधर-उधर देखते हुए बोला,
  4424. 3:26:57"क्या कैसे हो सकता है, इसमें मत पड़ो। बस
  4425. 3:26:59जैसा कहा है, वैसा ही बिहेव करो। मैं
  4426. 3:27:02तुम्हारा दोस्त हूं तो समझो दोस्त हूं।
  4427. 3:27:04अभी तुम्हें सब कुछ समझाने का समय नहीं है
  4428. 3:27:06मेरे पास। यहां के बाकी स्टाफ को भी मेरे
  4429. 3:27:09बारे में कुछ नहीं पता है। अगर कोई सवाल
  4430. 3:27:12जवाब करे तो उसके सामने मुझे अपना दोस्त
  4431. 3:27:14बनाकर ही प्रेजेंट करना।
  4432. 3:27:17प्रिया को तो यह समझ नहीं आया कि उसका बॉस
  4433. 3:27:19उससे ऐसा क्यों चाहता है। पर अब उसने भी
  4434. 3:27:21सोच लिया था कि शौर्य उसे जैसा करने को कह
  4435. 3:27:24रहा है वो उसी तरह बिहेव करेगी। फिर कुछ
  4436. 3:27:27दिमाग में आते ही वो बोली पर मैं आपको किस
  4437. 3:27:30नाम से बुलाऊंगी?
  4438. 3:27:32श्रवण शौर्य ने उसे अपना दूसरा नाम बताया।
  4439. 3:27:36उसी समय श्वेता ने दूर से उसे शौर्य से
  4440. 3:27:38बात करते देखा तो वो उनके पास आ गई और
  4441. 3:27:41बोली क्या बात है? कौन है ये जिससे इतना
  4442. 3:27:44घुल मिलकर बात कर रही हो?
  4443. 3:27:47दोस्त है मेरा। प्रिया अचानक से बोल पड़ी।
  4444. 3:27:50श्वेता शौर्य को ऊपर से नीचे तक देखते हुए
  4445. 3:27:52बोली दोस्त है या उससे कुछ ज्यादा पहले तो
  4446. 3:27:55नहीं देखा कभी। वैसे मानना पड़ेगा। बड़ा
  4447. 3:27:59स्मार्ट दोस्त है तुम्हारा। बस भी करो कुछ
  4448. 3:28:01भी बोलती हो। प्रिया श्वेता को झड़कते हुए
  4449. 3:28:04बोली। प्रिया को लग रहा था कि शौर्य उसे
  4450. 3:28:07कुछ और समझाना चाहता था। लेकिन बीच में
  4451. 3:28:09[संगीत] ही श्वेता आ गई। इसीलिए वह श्वेता
  4452. 3:28:12से बोली। तुम थोड़ी देर के लिए हमें अकेला
  4453. 3:28:14छोड़ोगी। श्वेता शक भरी नजरों से प्रिया
  4454. 3:28:17को घूर रही थी। शौर्य समझ गया कि श्वेता
  4455. 3:28:20थोड़ी ढीठ टाइप की लड़की है। वो खुद को
  4456. 3:28:22नॉर्मल दिखाने की कोशिश करता हुआ बोला,
  4457. 3:28:25रहने दो। ऐसी भी कोई खास बात नहीं करनी
  4458. 3:28:27हमें। अभी मैं चलता हूं। मेरी बॉस आने
  4459. 3:28:30वाली हैं। हो सकता है यहां भी आए। देख
  4460. 3:28:33लेना अगर आती हैं तो ठीक से बात कर लेना।
  4461. 3:28:36शौर्य ने एक तरह से प्रिया को इशारा कर
  4462. 3:28:37दिया था कि उसके [संगीत] साथ कोई लड़की आ
  4463. 3:28:39सकती है तो उससे अच्छे से पेश आए। शौर्य
  4464. 3:28:43भी बिग बॉल के आउटलेट से बाहर जाने की सोच
  4465. 3:28:45ही रहा था कि तभी उसकी नजर गेट से अंदर
  4466. 3:28:47आते चेहरे पर पड़ी। शौर्य जहां का तहां
  4467. 3:28:50ठिठक गया। वहीं अब क्योंकि शिप्रा को
  4468. 3:28:54इंतजार करते-करते लगभग 5 मिनट हो गए थे।
  4469. 3:28:57इसीलिए शौर्य को समय लगते देखकर वो कार से
  4470. 3:28:59बाहर आ गई और स्टोर की तरफ बढ़ गई। बिग
  4471. 3:29:02बुल की भव्यता देखकर उसे समझ आया कि क्यों
  4472. 3:29:05यह इंटरनेशनलली इतना फेमस है। स्टोर के
  4473. 3:29:07अंदर उसने चारों ओर नजर दौड़ाई। तभी उसकी
  4474. 3:29:10नजर शौर्य पर पड़ी जो एक लड़की से बात कर
  4475. 3:29:13रहा था। यह देखते ही शिप्रा मन ही मन
  4476. 3:29:15बुदबुदाने लगी। क्या श्रवण की वो दोस्त जो
  4477. 3:29:19यहां काम करती है, एक लड़की है। तभी शौर्य
  4478. 3:29:23से उसकी नजरें मिली और शिप्रा उसकी तरफ
  4479. 3:29:25बढ़ गई। शौर्य के पास पहुंचकर उसने प्रिया
  4480. 3:29:28की तरफ देखा। प्रिया खूबसूरत थी जिसे
  4481. 3:29:30देखकर शिप्रा के दिल में हल्की सी जलन भी
  4482. 3:29:33उठी। तभी शिप्रा ने शौर्य से [संगीत]
  4483. 3:29:35पूछा,
  4484. 3:29:37क्या यही तुम्हारी वो दोस्त है जो यहां
  4485. 3:29:39काम करती है? इस पर शौर्य ने हां में सिर
  4486. 3:29:42हिला दिया। प्रिया को समझ नहीं आया कि
  4487. 3:29:44दोनों किस बारे में बात कर रहे हैं। लेकिन
  4488. 3:29:46शौर्य ने उसे पहले ही कह दिया था कि वह
  4489. 3:29:49उसका दोस्त है। इसलिए वह भी इस खेल का
  4490. 3:29:51हिस्सा बन गई थी। क्या इसी ने हमारी
  4491. 3:29:54मीटिंग मोहित सर के साथ फिक्स कराई थी?
  4492. 3:29:56शिप्रा ने अगला सवाल किया। हां, शौर्य ने
  4493. 3:30:00संक्षिप्त में जवाब दिया। प्रिया को समझ
  4494. 3:30:03नहीं आया कि उसने कब इनकी मीटिंग मोहित सर
  4495. 3:30:06के साथ फिक्स की और फिर जब शौर्य खुद ही
  4496. 3:30:08बिग बुल का मालिक है तो किसी और की औकात
  4497. 3:30:11ही क्या है उसके सामने। प्रिया समझ गई कि
  4498. 3:30:14इन दोनों [संगीत] के बीच कुछ अलग ही खेल
  4499. 3:30:16चल रहा है। शौर्य ने प्रिया से शिप्रा का
  4500. 3:30:18परिचय कराते हुए कहा। प्रिया ये है शिप्रा
  4501. 3:30:21राय जिंक कलेक्शन की ओनर जिनकी मीटिंग
  4502. 3:30:24तुमने मोहित सर के साथ फिक्स कराई थी।
  4503. 3:30:28ओ तो ये ही है वो प्रिया एक व्यवहार कुशल
  4504. 3:30:31मुस्कान के साथ हाथ जोड़कर बोली आपसे
  4505. 3:30:34मिलकर बहुत खुशी हुई। शौर्य को लगा था कि
  4506. 3:30:37अचानक परिचय कराने पर प्रिया थोड़ी नर्वस
  4507. 3:30:39होगी। लेकिन उसने जिस तरह से शिप्रा का
  4508. 3:30:42स्वागत किया वो यह साबित करने के लिए काफी
  4509. 3:30:44था कि प्रिया एक समझदार लड़की है। उसने
  4510. 3:30:47स्थिति को तुरंत भांप लिया और उसी के
  4511. 3:30:49अनुरूप खुद को शिप्रा के सामने प्रस्तुत
  4512. 3:30:51किया। शिप्रा ने प्रिया को आभार प्रकट
  4513. 3:30:54करते हुए कहा,
  4514. 3:30:56"आका बहुत धन्यवाद जो आपने मेरे काम को
  4515. 3:30:58आसान बना दिया।" आप कैसी बातें करती हैं?
  4516. 3:31:02श्रवण ने कहा था तो मैं मना कर ही नहीं
  4517. 3:31:04सकती थी। प्रिया शौर्य की तरफ देखते हुए
  4518. 3:31:06बोली। उसे डर था कि कहीं वह कुछ गलत ना
  4519. 3:31:09बोल दे। अगर ऐसा कुछ होता तो शौर्य आंखों
  4520. 3:31:12के इशारे से उसे समझा देता कि क्या और
  4521. 3:31:14कितना बोलना है। [संगीत]
  4522. 3:31:16जब प्रिया ने कहा कि श्रवण ने कहा था तो
  4523. 3:31:18मैं मना नहीं कर सकती थी। यह शब्द सुनकर
  4524. 3:31:21शिप्रा को थोड़ा अजीब लगा और [संगीत] उसके
  4525. 3:31:23दिमाग में कुछ सवाल गूंजने लगे। क्या
  4526. 3:31:26श्रवण प्रिया के लिए इतना खास है? क्या ये
  4527. 3:31:28दोनों सच में सिर्फ दोस्त हैं या उससे भी
  4528. 3:31:30बढ़कर कुछ? शिप्रा ने अपनी घड़ी पर नजर
  4529. 3:31:33डाली और पूछा क्या मिस्टर मोहित अभी ऑफिस
  4530. 3:31:36में ही है? जी हां, चलिए मैं आपको उनके
  4531. 3:31:39ऑफिस तक ले चलती हूं। प्रिया, शिप्रा को
  4532. 3:31:42लेकर लिफ्ट की ओर बढ़ गई। [संगीत] मोहित,
  4533. 3:31:43रैना का ऑफिस तीसरे फ्लोर पर था। शिप्रा,
  4534. 3:31:46शौर्य और प्रिया तीनों लिफ्ट के सामने
  4535. 3:31:48खड़े होकर इंतजार कर रहे थे। तभी लिफ्ट का
  4536. 3:31:51दरवाजा खुला और उसमें से जो शख्स बाहर
  4537. 3:31:53निकला वो था बलराज खन्ना। सफलता या तरक्की
  4538. 3:31:57का रास्ता डर के डगमगाते पुल से गुजरता है
  4539. 3:32:00और इस पुल को वही पार कर पाता है जो साहस
  4540. 3:32:03और दृढ़ निश्चय को साथ लेकर इस पर चलता
  4541. 3:32:05है। दौड़ती सफलता के साथ छेड़छाड़ करने
  4542. 3:32:08में डर को बड़ा मजा आता है और इसी मकसद से
  4543. 3:32:11डर आज बिग बबुल के शोरूम में भी पहुंच
  4544. 3:32:13चुका है। शिप्रा के दिमाग में चल रहा है
  4545. 3:32:16कि आज की मीटिंग अगर सफल हो जाती है तो वह
  4546. 3:32:19बिग बबुल स्टोर के साथ अपनी जिंक कलेक्शन
  4547. 3:32:21की पार्टनरशिप की एक और सफल कहानी लिखेगी।
  4548. 3:32:24लेकिन उसे नहीं मालूम कि विलेन का रोल
  4549. 3:32:26प्ले करने के लिए डर बिग बुल ऑफिस में
  4550. 3:32:28पहले ही मौजूद है और उस डर का नाम है
  4551. 3:32:31बलराज खन्ना जो अब लिफ्ट से निकल कर लिफ्ट
  4552. 3:32:34का इंतजार कर रही शिप्रा के ठीक सामने
  4553. 3:32:36खड़ा है। जैसे ही उसकी नजर शिप्रा पर
  4554. 3:32:39पड़ती है उसकी आंखें सिकुड़ जाती हैं।
  4555. 3:32:42शिप्रा को जिसका डर था वही हो गया। बलराज
  4556. 3:32:45खन्ना को सामने देखकर गुस्से से उसकी
  4557. 3:32:47धड़कन तेज होने लगी। अरे
  4558. 3:32:50[गला साफ़ करने की आवाज़]
  4559. 3:32:50मिस शिप्रा ओ सॉरी। मिसेज शिप्रा आप यहां
  4560. 3:32:56सब खैरियत तो है बलराज खन्ना ने उपहास
  4561. 3:32:59करते हुए कहा शिप्रा भी उसी अंदाज में
  4562. 3:33:02बोली मिस्टर खन्ना मेरी खैरियत को छोड़िए
  4563. 3:33:06आप अपनी फिक्र कीजिए तभी बलराज खन्ना
  4564. 3:33:09कुटिल मुस्कान के साथ बोला मैंने सुना है
  4565. 3:33:13वीगर कलेक्शन के बाद कई स्टोर्स ने आपके
  4566. 3:33:16प्रोडक्ट डिस्प्ले करना बंद कर दिया है।
  4567. 3:33:19शिप्रा भी मानो जैसे तैयार ही बैठी थी और
  4568. 3:33:22उसने तुरंत ही तंज कस दिया। लगता है आजकल
  4569. 3:33:25आपका काम सही नहीं चल रहा इसीलिए आपने
  4570. 3:33:28दूसरों के घरों में झांकने का काम शुरू कर
  4571. 3:33:31दिया है। शिप्रा की बात सुनकर बलराज खन्ना
  4572. 3:33:34तिलमिला गया और बोला लगता है हर जगह से
  4573. 3:33:37ठोकर खाने के बाद आप यहां आई हैं। आपको
  4574. 3:33:40क्या लगता है? यहां आपका काम बन जाएगा।
  4575. 3:33:43सपने देखने से सपने पूरे नहीं होते। मिस
  4576. 3:33:46सॉरी मिसेज शिप्रा।
  4577. 3:33:50एकदम कुत्ते की दुम हो तुम। कितना भी समय
  4578. 3:33:52नली में बिता लो पर रहोगे टेढ़े के टेढ़े।
  4579. 3:33:56शिप्रा गुस्से में बोली और बलराज खन्ना के
  4580. 3:33:59बगल से निकलकर लिफ्ट के अंदर चली गई।
  4581. 3:34:01बलराज खन्ना भी आगे बढ़ा। लेकिन तभी शौर्य
  4582. 3:34:05को शरारत सूझी। जैसे ही बलराज उसके पास से
  4583. 3:34:07गुजरा, शौर्य ने चुपके से अपना पैर उसके
  4584. 3:34:10पैरों के बीच फंसा दिया। अगले ही पल
  4585. 3:34:13धड़ाम। बलराज खन्ना जमीन पर गिर पड़ा। यही
  4586. 3:34:17वो पल था जब लिफ्ट के अंदर जाते ही शिप्रा
  4587. 3:34:19पीछे मुड़ी और उसने शौर्य की हरकत देख ली।
  4588. 3:34:22बलराज खन्ना को जमीन पर गिरा देखकर शिप्रा
  4589. 3:34:25के दिल को एक अजीब सा सुकून मिला। प्रिया
  4590. 3:34:27ने भी शौर्य की इस हरकत को नोटिस कर लिया
  4591. 3:34:29था। अब उसे पूरा [संगीत] यकीन हो गया था
  4592. 3:34:32कि शिप्रा और बलराज खन्ना के बीच पुरानी
  4593. 3:34:34दुश्मनी है। तभी शौर्य तुरंत बलराज खन्ना
  4594. 3:34:37के पास गया और हाथ बढ़ाते हुए बोला। लगता
  4595. 3:34:40है खन्ना साहब उम्र के साथ आपकी आंखें भी
  4596. 3:34:43कमजोर पड़ गई हैं। शौर्य ने यह सब इतनी
  4597. 3:34:46तेजी से किया था कि बलराज खन्ना समझ ही
  4598. 3:34:48नहीं पाया कि वह गिरा कैसे लेकिन उसे इतना
  4599. 3:34:51जरूर समझ आ गया था कि इस सबके पीछे कहीं
  4600. 3:34:53ना कहीं शौर्य का ही [संगीत] हाथ है।
  4601. 3:34:56बलराज खन्ना ने शौर्य का हाथ झटकते हुए
  4602. 3:34:58कहा रहने दीजिए। इस पर शौर्य ने तुरंत हाथ
  4603. 3:35:02पीछे खींचते हुए कहा, "मैं तो आपकी मदद
  4604. 3:35:04करना चाहता था। पर जब आपकी मदद लेने की
  4605. 3:35:07इच्छा ही नहीं है तो कोई क्या कर सकता है?
  4606. 3:35:10शौर्य तुरंत मुड़ा और दौड़कर प्रिया के
  4607. 3:35:12साथ लिफ्ट में घुस गया। एक तरफ बलराज
  4608. 3:35:15खन्ना जमीन पर गिर चुका था। दूसरी ओर
  4609. 3:35:17शिप्रा एक नई डील करने के लिए लिफ्ट से
  4610. 3:35:20ऊपर की ओर जा रही थी। शौर्य, शिप्रा और
  4611. 3:35:22प्रिया तीनों की ही नजरें बार-बार एक
  4612. 3:35:25दूसरे से टकरा रही थी। शिप्रा, शौर्य और
  4613. 3:35:27प्रिया के साथ तीसरे फ्लोर पर पहुंची।
  4614. 3:35:30प्रिया, शिप्रा को लेकर मोहित रैना के
  4615. 3:35:32ऑफिस के पास पहुंची। मोहित के ऑफिस के
  4616. 3:35:34बाहर ऑफिस बॉय बैठा हुआ था। प्रिया ने
  4617. 3:35:37उससे कहा, "बॉस के साथ मैडम का अपॉइंटमेंट
  4618. 3:35:40है। बॉस को इन्फॉर्म कर दो। मिस शिप्रा आई
  4619. 3:35:42हुई है।" अरे मैं तो मैडम का ही इंतजार कर
  4620. 3:35:45रहा हूं। बॉस ने कहा था जब आप आएंगी तो
  4621. 3:35:48आपको अंदर भेज देना। जैसे ही ऑफिस बॉय ने
  4622. 3:35:51जवाब दिया, शौर्य ने शिप्रा से कहा,
  4623. 3:35:54मीटिंग खत्म होने तक मैं नीचे रिसेप्शन पर
  4624. 3:35:56आपका इंतजार करता हूं। शिप्रा मोहित रैना
  4625. 3:36:00के ऑफिस के अंदर चली गई। शौर्य प्रिया के
  4626. 3:36:02साथ बाहर ही रुक गया। उसने तुरंत मोहित
  4627. 3:36:04रैना को कॉल लगाया। मोहित ने कॉल उठाया।
  4628. 3:36:07वो कुछ [संगीत] बोलता उससे पहले ही शौर्य
  4629. 3:36:09बोला तुम्हें कुछ बोलने की जरूरत नहीं है।
  4630. 3:36:12मोबाइल को ऐसे ही टेबल पर रख दो जिससे
  4631. 3:36:15[संगीत] उसकी आवाज मुझे सुनाई देती रहे।
  4632. 3:36:17तब तक शिप्रा मोहित रैना के पास पहुंच
  4633. 3:36:19चुकी थी। जैसे ही शिप्रा सामने पहुंची,
  4634. 3:36:22मोहित रैना ने बिना कॉल काटे अपना मोबाइल
  4635. 3:36:24टेबल पर रख दिया और उसे बैठने का इशारा
  4636. 3:36:27किया। शिप्रा सामने वाली कुर्सी पर बैठ
  4637. 3:36:29गई। मोहित ने बेल बजाई तो ऑफिस बॉय अंदर
  4638. 3:36:32आया। मोहित ने आर्डर दिया दो कॉफी ले आओ।
  4639. 3:36:36ऑफिस बॉय के बाहर जाते ही मोहित रैना ने
  4640. 3:36:39शिप्रा से पूछा बताइए आप मुझसे क्या चाहती
  4641. 3:36:42हैं? शिप्रा मोहित के सीधे मुद्दे पर आने
  4642. 3:36:45से थोड़ी इंप्रेस होते हुए बोली
  4643. 3:36:48जिंक कलेक्शन नाम से मेरा एक क्लोथिंग
  4644. 3:36:50ब्रांड है। [संगीत] मैं चाहती हूं कि उसे
  4645. 3:36:53बिग बुल के साथ काम करने का मौका मिले।
  4646. 3:36:55शिप्रा ने साफ शब्दों में अपना मकसद बता
  4647. 3:36:57[संगीत] दिया। इस पर मोहित रैना ने शिप्रा
  4648. 3:36:59की आंखों में देखते हुए कहा, "आपको पता है
  4649. 3:37:02बिगbul किस तरह के ब्रांड्स के साथ काम
  4650. 3:37:04करता है?" मुझे पता है आपकी कंपनी हमेशा
  4651. 3:37:08उस ब्रांड के साथ काम करती है जो
  4652. 3:37:10इंटरनेशनलली फेमस हो? शिप्रा ने हिचकिचाते
  4653. 3:37:13हुए जवाब दिया। इस पर मोहित रैना ने
  4654. 3:37:15शिप्रा के सामने अगला सवाल दाग दिया। तो
  4655. 3:37:18क्या आपको लगता है कि आपका ब्रांड इस लायक
  4656. 3:37:20है कि बिगbul आपके ब्रांड को अपने यहां
  4657. 3:37:23डिस्प्ले कर सके? इसी समय दो कॉफी लेकर
  4658. 3:37:26ऑफिस बॉय रूम में आया। उसने एक कप शिप्रा
  4659. 3:37:29के सामने और एक कप मोहित रैना के सामने रख
  4660. 3:37:31दिया। उसके बाद वो बाहर चला गया। ऑफिस बॉय
  4661. 3:37:35के जाते ही शिप्रा ने आत्मविश्वास से कहा,
  4662. 3:37:38"मैं जानती हूं कि अभी मेरा ब्रांड
  4663. 3:37:39इंटरनेशनलली फेमस नहीं है। लेकिन मुझे
  4664. 3:37:42लगता है इंटरनेशनलली फेमस होने के लिए बिग
  4665. 3:37:44बुल से जुड़ना ही सबसे इफेक्टिव स्ट्रेटजी
  4666. 3:37:46हो सकती है। इसीलिए अगर आपके साथ जुड़ने
  4667. 3:37:49का मौका मिला तो जिंक कलेक्शन को
  4668. 3:37:51इंटरनेशनलली फेमस होने में ज्यादा टाइम
  4669. 3:37:54नहीं लगेगा। शिप्रा की बात सुनकर मोहित
  4670. 3:37:57रैना के होठों पर मुस्कान आ गई। यानी आप
  4671. 3:38:00हमारे भरोसे अपनी नैया पार करना चाहती
  4672. 3:38:02हैं। ऐसी बात नहीं है मिस्टर मोहित। अभी
  4673. 3:38:05आप कह सकते हैं कि जिंक कलेक्शन इंटरनेशनल
  4674. 3:38:07ब्रांड नहीं है। बट इतना शोर है कि एक दिन
  4675. 3:38:10यह ब्रांड इंटरनेशनलली पॉपुलर होगा
  4676. 3:38:12क्योंकि मैं इसे आधे रास्ते ऐसे ही तो
  4677. 3:38:14नहीं छोड़ने वाली। शिप्रा ने पूरे
  4678. 3:38:17कॉन्फिडेंस के साथ जवाब दिया। [संगीत] इस
  4679. 3:38:19पर मोहित बोला देखिए मिस शिप्रा मैं जानता
  4680. 3:38:22हूं कि बहुत कम समय में आपने मार्केट में
  4681. 3:38:25अपने ब्रांड को एक पहचान दिला दी है जो
  4682. 3:38:26काबिले तारीफ है। लेकिन आप जिस रिसोर्स पर
  4683. 3:38:29काम कर रही हैं उसमें मुझे संभव नहीं
  4684. 3:38:32लगता। इसके लिए जिस बड़े स्केल पर रिसोर्स
  4685. 3:38:35और पैसे चाहिए वो आपके पास नहीं है और जिस
  4686. 3:38:38स्तर पर आप काम कर रही हैं [संगीत] उस
  4687. 3:38:40स्तर से टॉप तक पहुंचने में आपको वर्षों
  4688. 3:38:42लग जाएंगे। चाहे आप कितनी भी मेहनत क्यों
  4689. 3:38:44ना कर लें। मोहित रैना ने शिप्रा के सामने
  4690. 3:38:47सारी सच्चाई साफ-साफ रख दी। शिप्रा समझ गई
  4691. 3:38:51कि मोहित रैना ने उसकी कंपनी के बारे में
  4692. 3:38:53पूरी जानकारी जुटा रखी है। अब उसे उम्मीद
  4693. 3:38:56कम ही लग रही थी कि बिग बबुल के साथ उसकी
  4694. 3:38:58डील हो पाएगी। उसके चेहरे पर मायूसी साफ
  4695. 3:39:01झलकने लगी। उसी समय मोहित ने कहा, अपसेट
  4696. 3:39:05मत होइए। आपके लिए मेरे पास एक गुड न्यूज़
  4697. 3:39:08भी है। मोहित की बात सुनकर शिप्रा के
  4698. 3:39:10मायूस मूड ने तुरंत ही करवट ली और उसके
  4699. 3:39:13मुंह से निकल पड़ा। गुड न्यूज़। मोहित
  4700. 3:39:16हल्के से मुस्कुराया और शिप्रा की ओर
  4701. 3:39:18देखते हुए बोला, एक्चुअली हमारी कंपनी
  4702. 3:39:21किसी क्लोथिंग ब्रांड में इन्वेस्ट करना
  4703. 3:39:22चाहती है और हमारी नजर में ऐसी दो
  4704. 3:39:25कंपनियां आई हैं जो इन्वेस्टमेंट के लिए
  4705. 3:39:27परफेक्ट लगती हैं। एक लेविस ब्लू और दूसरी
  4706. 3:39:30आपकी कंपनी जिंक कलेक्शन। अब हमें इनमें
  4707. 3:39:33से किसी एक के साथ काम करना है। मोहित
  4708. 3:39:36रैना की बात सुनकर शिप्रा की आंखों में
  4709. 3:39:38उम्मीद की किरण चमकने लगी। मोहित आगे
  4710. 3:39:41बोला, आप यह समझ सकती हैं कि जिस भी कंपनी
  4711. 3:39:44में हम इन्वेस्ट करेंगे, उसके साथ एक
  4712. 3:39:47पार्टनरशिप लीड साइन होगी। किसका कितना
  4713. 3:39:49शेयर रहेगा, इस पर हम बाद में डिस्कशन कर
  4714. 3:39:51सकते हैं। लेकिन पहले यह देखना होगा कि
  4715. 3:39:54क्या आप इस शर्त के लिए तैयार हैं। मोहित
  4716. 3:39:57रैना ने उसके सामने साफ-साफ प्रस्ताव रख
  4717. 3:40:00दिया। शिप्रा के तो जैसे दोनों हाथों में
  4718. 3:40:02लड्डू आ गए। पहला फायदा तो उसे यह होगा कि
  4719. 3:40:05अगर वह बिगbul के साथ पार्टनरशिप कर लेती
  4720. 3:40:08है तो उसके ब्रांड को इंटरनेशनलली हिट
  4721. 3:40:10होने से कोई नहीं रोक सकता और दूसरा उसको
  4722. 3:40:13इंटरनेशनल लेवल तक अपने ब्रांड और कंपनी
  4723. 3:40:15को एक्सपेंड करने के लिए इतना बड़ा
  4724. 3:40:18फाइनेंसियल सपोर्ट मिल जाएगा जो उसके लिए
  4725. 3:40:20अपने स्तर पर मैनेज करना नामुमकिन था। वो
  4726. 3:40:23समझ गई कि शायद इसी वजह से बलराज खन्ना भी
  4727. 3:40:26यहां आया होगा। वो अपने सबसे बड़े कंपिटिट
  4728. 3:40:29से हारना नहीं चाहती थी। शिप्रा ने मोहित
  4729. 3:40:31रैना के ऑफर को लगभग स्वीकार करते हुए
  4730. 3:40:34पूछा इसके लिए हमें क्या करना पड़ेगा? बस
  4731. 3:40:37कुछ खास नहीं। आपको सबसे पहले तो अपना मन
  4732. 3:40:40बनाना पड़ेगा कि आप हमारे साथ काम करने के
  4733. 3:40:43लिए तैयार हैं या नहीं। बाकी बातें उसके
  4734. 3:40:46बाद होंगी। मोहित रैना ने कॉफी का एक घूंट
  4735. 3:40:49लेते हुए कहा। फिर शिप्रा की तरफ इशारा
  4736. 3:40:51करते हुए बोला। आप भी कॉफी पीजिए नहीं तो
  4737. 3:40:54ठंडी हो जाएगी। लेकिन शिप्रा के मन में तो
  4738. 3:40:57उथल-पुथल मची हुई थी। उसने शक भरी नजरों
  4739. 3:41:00से मोहित रैना को देखते हुए कहा अभी तो
  4740. 3:41:03आपने कहा था कि आप इसके लिए दो कंपनियों
  4741. 3:41:06के बारे में सोच रहे थे। मेरे अलावा लेविस
  4742. 3:41:09ब्लू भी तो फिर मेरे हां कहते ही आप कैसे
  4743. 3:41:12तैयार हो जाते? शिप्रा ने अपनी शंका
  4744. 3:41:14साफ-साफ जाहिर कर दी। इस पर मोहित रैना ने
  4745. 3:41:18अपना पक्ष स्पष्ट किया। मैंने कहा ना
  4746. 3:41:21मैंने रिसर्च में भी थोड़ा समय लगाया है।
  4747. 3:41:24मार्केट में बलराज खन्ना की रेपुटेशन कुछ
  4748. 3:41:26खास अच्छी नहीं है। इसीलिए हम ऐसे लोगों
  4749. 3:41:28से डायरेक्ट पार्टनरशिप नहीं कर सकते।
  4750. 3:41:31उसकी तुलना में आपकी कंपनी ने बुरे दौर
  4751. 3:41:33जरूर देखे हैं, लेकिन आपने अपने उसूलों से
  4752. 3:41:36समझौता नहीं किया। यह बात मुझे आपकी अच्छी
  4753. 3:41:39लगी। इसीलिए हमने पहली प्राथमिकता आपकी
  4754. 3:41:42कंपनी को दी है। अगर आप तैयार नहीं होती
  4755. 3:41:45तो फिर हम सोचेंगे कि आगे क्या करना है।
  4756. 3:41:48अब शिप्रा के पास इस डील को ठुकराने का
  4757. 3:41:50कोई कारण नहीं था। बिग बुल के साथ जुड़कर
  4758. 3:41:53उसकी कंपनी को एक बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट
  4759. 3:41:55मिल सकता [संगीत] है। तभी मोहित रैना आगे
  4760. 3:41:57बोला और हां मैं आपको एक बात और स्पष्ट कर
  4761. 3:42:01दूं। आपकी कंपनी के साथ जो नई डील होगी
  4762. 3:42:04उसका बिग बुल से सीधा कोई कनेक्शन नहीं
  4763. 3:42:07होगा। यह हमारा बिल्कुल नया वेंचर होगा।
  4764. 3:42:10इसके लिए हमने एक नई ब्रांच स्थापित की है
  4765. 3:42:12और उसके लिए स्टाफ की हायरिंग भी शुरू हो
  4766. 3:42:14चुकी है। इतना कहने के बाद मोहित रैना दो
  4767. 3:42:18पल रुका और फिर बोला अगर आपकी कंपनी के
  4768. 3:42:20साथ डील होती है तो उसे वही टीम संभालेगी।
  4769. 3:42:243 महीने के अंदर आपकी कंपनी को कैसे ग्रो
  4770. 3:42:26करना है यह भी वही तय करेंगे। और मैं आपको
  4771. 3:42:29विश्वास दिलाता हूं अगर आप हमारे साथ काम
  4772. 3:42:31करती हैं तो 6 महीने के अंदर जिंक कलेक्शन
  4773. 3:42:34एक इंटरनेशनल ब्रांड बन जाएगा। उसके बाद
  4774. 3:42:37अगर आप चाहें तो हम इसे शेयर मार्केट में
  4775. 3:42:39भी लिस्ट करवा सकते हैं। तो अब आप बताइए
  4776. 3:42:42आपका क्या फैसला है? शिप्रा तो पहले ही
  4777. 3:42:45अपना मन बना चुकी थी इसलिए उसने बिना देर
  4778. 3:42:48किए कहा। मैं आपके साथ मिलकर काम करने के
  4779. 3:42:51लिए तैयार हूं। इस पर मोहित रैना
  4780. 3:42:53मुस्कुराते हुए बोला, बधाई हो। मुझे आपसे
  4781. 3:42:56यही उम्मीद थी। आपका यह डिसीजन आपके
  4782. 3:42:59ब्रांड के लिए एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक
  4783. 3:43:00साबित होगा। अब देखिएगा कुछ ही दिनों में
  4784. 3:43:03जिस पौधे को आपने सींचा है वो एक बड़ा
  4785. 3:43:06विशाल पेड़ बन जाएगा। यह सुनकर शिप्रा भी
  4786. 3:43:09मुस्कुरा दी। दूसरी तरफ शौर्य ये सारी
  4787. 3:43:12बातें फोन पर सुन रहा था और प्रिया उसे
  4788. 3:43:15अचंभे से देख रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा
  4789. 3:43:18था कि श्रवण शिप्रा से अपनी असली पहचान
  4790. 3:43:20क्यों छुपा रहा है?
  4791. 3:43:23तो क्या होगा आगे? क्या शिप्रा का जिंक
  4792. 3:43:26कलेक्शन को इंटरनेशनल ब्रांड बनाने का
  4793. 3:43:28सपना पूरा हो पाएगा? शौर्य और शिप्रा के
  4794. 3:43:31बीच यह आंख मचोली का खेल आखिर कब तक
  4795. 3:43:33चलेगा? कहते हैं किस्मत जब मेहरबान होती
  4796. 3:43:36है तो आप मिट्टी में हाथ रख दो तो वह भी
  4797. 3:43:38सोना बन जाती है। सड़क पर पड़ा एक भिखारी
  4798. 3:43:41भी आपके सपनों को सच करने वाला देवदूत बन
  4799. 3:43:44जाता है। जैसे ही शिप्रा की लाइफ में
  4800. 3:43:46शौर्य आया उसका बिग बुल से जुड़ने का सपना
  4801. 3:43:49हकीकत बन गया। देवदूत की कृपा से शिप्रा
  4802. 3:43:52मोहित के साथ मीटिंग के अनएक्सेक्टेड
  4803. 3:43:54रिजल्ट से अंदर ही अंदर बहुत खुश थी। सारी
  4804. 3:43:57बातें तय हो जाने के बाद मोहित रैना बोला
  4805. 3:44:00तो ठीक है मिस शिप्रा जैसे ही सारा पेपर
  4806. 3:44:02वर्क पूरा हो जाएगा मैं उसकी एक कॉपी आपको
  4807. 3:44:04भिजवा दूंगा। आप उसे ध्यान से पढ़ लीजिएगा
  4808. 3:44:07और उसके बाद साइन कर दीजिएगा। फिर मैं
  4809. 3:44:10आपको अपनी उस टीम से मिलवाऊंगा जो आपके
  4810. 3:44:12साथ मिलकर आपके इस ब्रांड को नई ऊंचाइयों
  4811. 3:44:14तक ले जाएगी और पूरी दुनिया घुमाएगी।
  4812. 3:44:18शिपम मोहित रैना की बातों से संतुष्ट नजर
  4813. 3:44:20आ रही थी। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि
  4814. 3:44:23कोई उसकी कंपनी में इतना बड़ा निवेश करने
  4815. 3:44:25को तैयार होगा जो महज [संगीत] 6 महीने में
  4816. 3:44:28उसे एक इंटरनेशनल ब्रांड बना दे। यह सब
  4817. 3:44:31उसे किसी सपने जैसा लग रहा था। उसे मोहित
  4818. 3:44:34रैना से इतनी बड़ी उम्मीद नहीं थी। वो तो
  4819. 3:44:36सिर्फ इस इरादे से बिग बॉल आई थी कि उसके
  4820. 3:44:38प्रोडक्ट को वहां डिस्प्ले करने का मौका
  4821. 3:44:40मिल जाए। लेकिन यहां तो उसे अच्छा खासा
  4822. 3:44:43निवेश मिलने वाला है। उसने मोहित रैना से
  4823. 3:44:46पूछा। यह पेपर वर्क कब तक पूरा हो जाएगा?
  4824. 3:44:49इस सप्ताह के अंत तक एग्रीमेंट की कॉपी
  4825. 3:44:52आपके हाथों में होगी। मोहित रैना ने जवाब
  4826. 3:44:54दिया। जब शिप्रा को लगा कि पूछने के लिए
  4827. 3:44:57कुछ बाकी नहीं है तो उसने कहा तो ठीक है
  4828. 3:45:00मिस्टर मोहित अब मैं चलती हूं। एग्रीमेंट
  4829. 3:45:02पेपर तैयार हो जाए तो प्लीज मुझे इन्फॉर्म
  4830. 3:45:04कर दीजिएगा। ठीक है। मोहित रैना ने जवाब
  4831. 3:45:08दिया। दूसरी तरफ शौर्य को अंदाजा हो गया
  4832. 3:45:11था कि शिप्रा किसी भी पल मोहित रैना के
  4833. 3:45:13ऑफिस से बाहर आने वाली है। वो चाहता था कि
  4834. 3:45:16शिप्रा के बाहर आने से पहले ही वो प्रिया
  4835. 3:45:18के साथ नीचे पहुंच जाए। इसीलिए बिना समय
  4836. 3:45:21गवाए वो प्रिया के साथ तेजी से लिफ्ट की
  4837. 3:45:23ओर बढ़ गया। लिफ्ट में खड़ी प्रिया के
  4838. 3:45:26दिमाग में सवालों का तूफान चल रहा था।
  4839. 3:45:29[संगीत] शौर्य हर कदम शिप्रा के लिए आसान
  4840. 3:45:31बना रहा था और सारा क्रेडिट प्रिया को दे
  4841. 3:45:33रहा था। प्रिया के मन में बार-बार यही
  4842. 3:45:36सवाल गूंज रहा था। आखिर ये इंसान अपनी
  4843. 3:45:38असलियत क्यों छुपा रहा है? आखिरकार प्रिया
  4844. 3:45:41ने हिम्मत जुटाकर शौर्य से पूछ ही लिया।
  4845. 3:45:44सर आपने मुझे अपना दोस्त कहा है तो उस हग
  4846. 3:45:47से क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकती हूं? शौर्य
  4847. 3:45:51ने प्रिया के चेहरे को पढ़ लिया था। कुछ
  4848. 3:45:53पल के [संगीत] लिए वो चुप रहा।
  4849. 3:45:55उसे एहसास था कि आगे आने वाले समय में उसे
  4850. 3:45:58प्रिया की जरूरत पड़ सकती है। अगर उसे
  4851. 3:46:00सच्चाई का पता नहीं होगा तो अनजाने में ही
  4852. 3:46:03उसका राज खुल सकता है। यही सोचकर शौर्य ने
  4853. 3:46:06एक हल्की सांस ली और शांत स्वर में कहा।
  4854. 3:46:09ठीक है पूछो क्या जानना चाहती हो? सर मुझे
  4855. 3:46:12कुछ समझ नहीं आ रहा है। आप इतने बड़े आदमी
  4856. 3:46:14होकर शिप्रा मैम के सामने खुद को इतना
  4857. 3:46:17छोटा क्यों दिखा रहे हैं? आप उनकी मदद
  4858. 3:46:19करके भी जता नहीं रहे। आखिर इसके पीछे की
  4859. 3:46:22कहानी क्या है? एक ही सांस में प्रिया ने
  4860. 3:46:25अपनी सारी उलझन शौर्य के सामने रख दी। इस
  4861. 3:46:27पर शौर्य कुछ पल के लिए खामोश हो गया। वो
  4862. 3:46:30सोच रहा था कि अपनी कहानी कहां से शुरू
  4863. 3:46:32करें और कितना बताएं। उसकी आंखों में एक
  4864. 3:46:35अजीब सी गंभीरता उतर आई। फिर उसने धीमे
  4865. 3:46:38स्वर में कहना शुरू किया। [संगीत]
  4866. 3:46:40तुम यूं समझो एक हादसे की वजह से शिप्रा
  4867. 3:46:42को मुझसे शादी करनी पड़ी। उसकी नजर में
  4868. 3:46:45उसके परिवार और पूरी दुनिया की नजर में
  4869. 3:46:47मैं बस एक भिखारी हूं। यानी कि एक अमीर
  4870. 3:46:50लड़की की शादी एक भिखारी से
  4871. 3:46:53जैसे ही प्रिया ने यह सुना तो उसे एक झटका
  4872. 3:46:56सा लगा। तो उसकी आंखें हैरानी से फैल गई
  4873. 3:46:59और वो लगभग हकलाते हुए बोली ये ये शिप्रा
  4874. 3:47:02राय है। बलवंत राय की पोती। अरे इनके
  4875. 3:47:06किस्से तो पूरे विशालगढ़ में वायरल है और
  4876. 3:47:08उनके भिखारी पति आप हैं। ओह माय गॉड। उसने
  4877. 3:47:12अपने सिर पर हाथ मारा और कुछ पल तक शौर्य
  4878. 3:47:14को अविश्वास भरी नजर से देखती रही। जैसे
  4879. 3:47:17उसकी बातों पर यकीन करना मुश्किल हो रहा
  4880. 3:47:19हो। फिर थोड़ा संभलते हुए उसने फिर सवाल
  4881. 3:47:22किया।
  4882. 3:47:23लेकिन मुझे यह समझ नहीं आ रहा शिप्रा मैम
  4883. 3:47:25और उनका परिवार आपको भिखारी क्यों समझता
  4884. 3:47:28है। क्योंकि जब मेरी शादी शिप्रा से हुई
  4885. 3:47:30थी तब मैं सच में एक भिखारी की जिंदगी जी
  4886. 3:47:32रहा था। इसीलिए सब मुझे वही समझते हैं।
  4887. 3:47:36शौर्य ने शांत स्वर में प्रिया को समझाया।
  4888. 3:47:39लेकिन यह कैसे मुमकिन है कि आप भिखारियों
  4889. 3:47:41जैसी जिंदगी जी रहे थे? प्रिया के सवाल
  4890. 3:47:44जैसे खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
  4891. 3:47:46शौर्य ने एक गहरी सांस ली और फिर
  4892. 3:47:48धीरे-धीरे अपने साथ बीती हर बात उसे बताने
  4893. 3:47:51लगा। कैसे जिंदगी ने करवट ली, हालात बदले
  4894. 3:47:54और कैसे वो उस मुकाम पर पहुंचा जहां से सब
  4895. 3:47:57कुछ बदल गया। जैसे ही प्रिया [संगीत] ने
  4896. 3:47:59प्लेन क्रैश के बारे में सुना उसके दिमाग
  4897. 3:48:01में मानो एक और धमाका हुआ। वो हैरान होकर
  4898. 3:48:04शौर्य को देखने लगी। इसका मतलब आप शौर्य
  4899. 3:48:08राठौड़ हैं। चंद्रभान राठौड़ के पोते। फिर
  4900. 3:48:11थोड़ा रुक कर उसने पूछा मान लिया कि आपकी
  4901. 3:48:14शादी जबरदस्ती करवाई गई थी। पर उसके बाद
  4902. 3:48:17तो आप उन्हें अपने बारे में सच बता सकते
  4903. 3:48:19थे। है ना? [संगीत]
  4904. 3:48:20शौर्य ने गहरी सांस ली और फिर शांत होकर
  4905. 3:48:23बोला बताने को तो मैं सब कुछ बता सकता था।
  4906. 3:48:26लेकिन मैं चाहता हूं कि वो मुझे उसी रूप
  4907. 3:48:28में पसंद करे जैसा मैं हूं। ना कि इस वजह
  4908. 3:48:30से कि मैं कितना अमीर हूं या किस परिवार
  4909. 3:48:33से ताल्लुक रखता हूं। प्रिया ने शौर्य की
  4910. 3:48:35आंखों में झांकते हुए हल्की मुस्कान के
  4911. 3:48:37[संगीत] साथ पूछा। तो इसका क्या मतलब? आप
  4912. 3:48:40शिपरा मैम को पसंद करने लगे हैं। इस पर
  4913. 3:48:43शौर्य ने मुस्कुराते हुए हल्के से सिर
  4914. 3:48:45हिलाया।
  4915. 3:48:46हां, तुम ऐसा कह सकती हो। तभी प्रिया ने
  4916. 3:48:50बिना देर किए अगला सवाल दाग दिया। और
  4917. 3:48:52शिप्रा मैम क्या वो भी आपको पसंद करने लगी
  4918. 3:48:55हैं? नहीं अभी नहीं। अभी उसे मुझसे बस
  4919. 3:48:58सहानुभूति है। वो मुझे एक डमी पति की तरह
  4920. 3:49:01इस्तेमाल करना चाहती है [संगीत] ताकि उसके
  4921. 3:49:03परिवार वाले उस पर दूसरी शादी का दबाव ना
  4922. 3:49:05डालें।
  4923. 3:49:07उसने साफ-साफ प्रिया के सामने अपनी और
  4924. 3:49:09शिप्रा के रिश्ते की सच्चाई रख दी।
  4925. 3:49:12लेकिन वो ऐसा क्यों कर रही हैं? प्रिया ने
  4926. 3:49:15भोएं सिकोड़ते हुए पूछा तो शौर्य ने हल्की
  4927. 3:49:17सांस लेकर जवाब दिया।
  4928. 3:49:20दरअसल अब वो दोबारा शादी के झंझट में
  4929. 3:49:22पड़ना ही नहीं चाहती। उसका मानना है कि
  4930. 3:49:25उसे किसी की जरूरत नहीं है। वो पूरी
  4931. 3:49:27जिंदगी अकेले ही जी सकती है।
  4932. 3:49:30प्रिया हल्की मुस्कान के साथ मजाकिया
  4933. 3:49:32अंदाज में बोली। तो आपको शिप्रा मैम का
  4934. 3:49:34डमी पति बनकर आखिर कब तक रहना है? शौर्य
  4935. 3:49:38ने भी एक फीकी सी मुस्कान दी लेकिन उसकी
  4936. 3:49:40आंखों में छिपी चाहत साफ झलक रही थी।
  4937. 3:49:42[संगीत] मैं तो पूरी जिंदगी उसका पति बनकर
  4938. 3:49:44रहना चाहता हूं। बस तू मुझे एक मौका तो
  4939. 3:49:47दे। अब प्रिया पहले से काफी सहज हो चुकी
  4940. 3:49:50थी। शौर्य भी यही चाहता था क्योंकि उसे एक
  4941. 3:49:53ऐसे साथी की जरूरत थी [संगीत] जिस पर वो
  4942. 3:49:55भरोसा कर सके और बेझिझक जिम्मेदारियां
  4943. 3:49:57सौंप सके। ग्राहकों के साथ [संगीत] प्रिय
  4944. 3:50:00का व्यवहार बेहद अच्छा था और उसने आज की
  4945. 3:50:02सिचुएशन को भी सही तरीके से संभाला था।
  4946. 3:50:05इसीलिए शौर्य मन ही मन सोच रहा था कि आगे
  4947. 3:50:07चलकर वो उसे इससे भी बड़ी जिम्मेदारी दे
  4948. 3:50:10सकता है। बातोंबातों में शौर्य की नजर
  4949. 3:50:12सामने पड़ी। उसने देखा शिप्रा उनकी तरफ ही
  4950. 3:50:15आ रही थी। शौर्य और प्रिया को साथ देखकर
  4951. 3:50:18शिप्रा के दिल में हल्की सी चुभन जरूर
  4952. 3:50:20हुई। पर क्यों? इसका जवाब वो खुद भी नहीं
  4953. 3:50:23जानती थी। शौर्य ने उसे पास आते देखा तो
  4954. 3:50:25मुस्कुराते हुए पूछा। कैसी रही मीटिंग?
  4955. 3:50:29शिप्रा के चेहरे पर खुशी साफ झलक [संगीत]
  4956. 3:50:31रही थी। वो बोली, बहुत बढ़िया उम्मीद से
  4957. 3:50:34भी कहीं बेहतर। फिर वो प्रिया की ओर मुड़ी
  4958. 3:50:37और बोली, थैंक यू प्रिया। तुम्हारी वजह से
  4959. 3:50:40ही यह मीटिंग संभव हो पाई। प्रिया ने
  4960. 3:50:42विनम्रता से मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
  4961. 3:50:45अरे आप कैसी बातें कर रही हैं? मैं तो बस
  4962. 3:50:47एक जरिया बनी हूं। अगर आपके बीच कोई
  4963. 3:50:49बिजनेस रिलेशन बनता है तो वो आपके अपने
  4964. 3:50:52प्रयासों की वजह से ही होगा। और फिर मैं
  4965. 3:50:54और श्रवण अच्छे दोस्त हैं और आप उनकी बॉस
  4966. 3:50:57तो आपके लिए इतना तो कर ही सकती हूं। इससे
  4967. 3:51:00पहले कि शिप्रा प्रिया से कुछ कहती उसे
  4968. 3:51:02महसूस हुआ जैसे कोई उसे छिप कर देख रहा
  4969. 3:51:05है। उसने तुरंत नजर घुमाई लेकिन वो शख्स
  4970. 3:51:08अचानक गायब हो गया। उसने इधर-उधर घूम कर
  4971. 3:51:10देखा। लेकिन वो शख्स दोबारा कहीं नजर नहीं
  4972. 3:51:13आया। हार कर उसने शौर्य की तरफ देखा और
  4973. 3:51:16बोली।
  4974. 3:51:18अब चलें।
  4975. 3:51:20ठीक है चलते हैं। शौर्य ने सहजता से कहा।
  4976. 3:51:23फिर वो प्रिया की ओर मुड़ा और हल्की
  4977. 3:51:25मुस्कान के साथ बोला, बाय प्रिया। फिर
  4978. 3:51:28मिलते हैं। कुछ ही पलों में शौर्य ने कार
  4979. 3:51:30बिगबुल के गेट पर लाकर खड़ी कर दी। शिप्रा
  4980. 3:51:33चुपचाप कार में बैठ गई। उसका ध्यान अब भी
  4981. 3:51:35उसी अनजाने चेहरे पर अटका था। कार आगे बढ़
  4982. 3:51:38रही थी। मीटिंग की सक्सेस की खुशी अब
  4983. 3:51:40प्रिया के लिए छुपाना मुश्किल हो रहा था।
  4984. 3:51:43अचानक ही वो बोल पड़ी। अगर सब कुछ सही रहा
  4985. 3:51:46तो मुझे लगता है कि यह मीटिंग [संगीत]
  4986. 3:51:48हमारी कंपनी के लिए सफलता का एक नया
  4987. 3:51:50दरवाजा खोल देगी। उसकी आवाज में उत्साह
  4988. 3:51:53साफ झलक रहा था। शौर्य ने उसकी बात सुनी
  4989. 3:51:56तो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
  4990. 3:51:58वो चुपचाप गाड़ी चलाता रहा लेकिन उसकी नजर
  4991. 3:52:00बार-बार रेयर व्यू मिरर पर जा रही थी। कुछ
  4992. 3:52:03पल बाद उसकी भौए हल्की सिकुड़ गई। मुझे लग
  4993. 3:52:07रहा है हमारा पीछा किया जा रहा है। शिप्रा
  4994. 3:52:10ने शौर्य की बात सुनी तो हल्की गंभीरता के
  4995. 3:52:12साथ बोली बिगबुल में मुझे भी ऐसा लगा था
  4996. 3:52:15जैसे कोई मुझ पर नजर रख रहा हो। लेकिन फिर
  4997. 3:52:17वो शख्स अचानक गायब हो गया और मुझे यह भी
  4998. 3:52:20याद नहीं आ रहा था कि मैंने उसे पहले कहां
  4999. 3:52:22देखा है। इतना कहकर वो पलट कर पीछे देखने
  5000. 3:52:25लगी। जैसे ही उसकी नजर पीछे आ रही लाल रंग
  5001. 3:52:28की गाड़ी पर पड़ी, उसके चेहरे का रंग बदल
  5002. 3:52:31गया। ये यह तो बलराज खन्ना की कार है।
  5003. 3:52:35शौर्य ने यह सुना तो उसके मन में जैसे सब
  5004. 3:52:37कुछ साफ हो गया और वह थोड़ा गंभीर होकर
  5005. 3:52:40बोला तो बात यहां तक पहुंच चुकी है। शौर्य
  5006. 3:52:44बिना घबराए उसी स्पीड में गाड़ी चलाता
  5007. 3:52:46रहा। कुछ ही देर में उनकी कार भीड़भाड़
  5008. 3:52:48वाले इलाके से निकल कर एक सुनसान रास्ते
  5009. 3:52:51पर आ गई। अचानक पीछे से आती वो लाल गाड़ी
  5010. 3:52:54तेजी से आगे बढ़ी और उनकी कार के सामने
  5011. 3:52:56आकर तिरछी खड़ी हो गई। शौर्य चाहता तो
  5012. 3:52:59आसानी से कार मोड़कर वहां से निकल सकता
  5013. 3:53:01था। लेकिन उसने जानबूझकर ब्रेक लगा दी। वो
  5014. 3:53:04जानना चाहता था कि बलराज खन्ना के मन में
  5015. 3:53:06आखिर क्या है। तभी उसे एहसास हुआ कि पीछे
  5016. 3:53:09से भी एक और कार आकर रुक चुकी है। अब उनकी
  5017. 3:53:12कार पूरी तरह से घिर चुकी थी। तभी बलराज
  5018. 3:53:15खन्ना अपनी कार से बाहर निकला। वो सीधे
  5019. 3:53:17शिप्रा की तरफ आया और खिड़की के शीशे पर
  5020. 3:53:20अपनी उंगलियों से हल्की सी ठक-ठक की। तुम
  5021. 3:53:23कार में ही रहो। मैं देखती हूं इसे।
  5022. 3:53:26शिप्रा ने शांत आवाज में शौर्य से कहा।
  5023. 3:53:28उसे लगा कि शायद बलराज खन्ना सिर्फ बात
  5024. 3:53:30करना चाहता है। वो उसे कोई खतरनाक इंसान
  5025. 3:53:33नहीं मानती थी। उसके मन में साफ था कि अगर
  5026. 3:53:35बात बढ़ी तो एक सॉरी कहकर मामला खत्म कर
  5027. 3:53:38देगी। बेवजह दुश्मनी मोल लेने का कोई
  5028. 3:53:40फायदा नहीं। वहीं शौर्य भी चुप ही रहा। वो
  5029. 3:53:43जानना चाहता था कि बलराज खन्ना आखिर किस
  5030. 3:53:46हद तक जा सकता है। शिप्रा कार से बाहर
  5031. 3:53:48निकली और बलराज खन्ना के सामने खड़ी हो
  5032. 3:53:51गई। उसकी नजरों में झिझक नहीं सीधा सवाल
  5033. 3:53:54था। खन्ना साहब आपकी इस हरकत को मैं क्या
  5034. 3:53:57समझूं? बीच सड़क पर इस तरह मेरी कार के
  5035. 3:53:59सामने अपनी कार खड़ी करने का क्या मतलब
  5036. 3:54:02है? बलराज खन्ना का चेहरा गुस्से में
  5037. 3:54:04तमतमा उठा। वो एक कदम आगे बढ़ा और तीखे
  5038. 3:54:07स्वर में बोला खन्ना सब कुछ भूल सकता है
  5039. 3:54:11लेकिन अपनी बेइज्जती नहीं। अब तक तुमने दो
  5040. 3:54:13बार मुझे बेइज्जत किया है। पहले उस दिन
  5041. 3:54:16बगैर कलेक्शन में और आज बिग बॉल के ऑफिस
  5042. 3:54:19में। उसकी आवाज में बदले की आग की तपन साफ
  5043. 3:54:22दिख रही थी। इसीलिए शिपरा का लहजा भी तीखा
  5044. 3:54:25हो उठा। मिस्टर खन्ना आप खुद मेरे रास्ते
  5045. 3:54:28में रुकावटें डालते आए हैं और मुझसे शराफत
  5046. 3:54:31की उम्मीद कर रहे हैं। यह तो बेवकूफी हुई
  5047. 3:54:33ना? शिप्रा के शब्द सुनकर बलराज के होठों
  5048. 3:54:37पर एक खतरनाक सी मुस्कान उभरी।
  5049. 3:54:39तो फिर मेरी एक और बेवकूफी के लिए तैयार
  5050. 3:54:42हो जाओ। खन्ना जहरीले स्वर में बोला। सुना
  5051. 3:54:45है तुम्हें अपनी खूबसूरती पर बड़ा नाज है।
  5052. 3:54:48आज के बाद तुम अपना यही चेहरा दुनिया से
  5053. 3:54:51छुपाती फिरोगी। उसी क्षण शिपरा को अपने
  5054. 3:54:54पीछे हलचल महसूस हुई। वो तुरंत पलटी। उसके
  5055. 3:54:57पीछे दो आदमी खड़े थे और उनमें से एक
  5056. 3:54:59चेहरा वही था जो उसे बिग बबुल के ऑफिस में
  5057. 3:55:02नजर आया था। वो चाहकर भी याद नहीं कर पा
  5058. 3:55:05रही थी कि उसने उसे पहले कहां देखा था।
  5059. 3:55:07लगभग वैसा ही भाव उस आदमी के साथ खड़े
  5060. 3:55:10दूसरे शख्स के चेहरे पर भी उभर आया था।
  5061. 3:55:13जैसे वो भी अपने दिमाग पर जोर डाल रहा हो।
  5062. 3:55:16आखिर शिप्रा को उसने पहले कहां देखा है?
  5063. 3:55:18तभी बलराज खन्ना ने शिप्रा की तरफ इशारा
  5064. 3:55:21करते हुए दोनों से कहा,
  5065. 3:55:23यही लड़की है। मैं नहीं जानता तुम इसके
  5066. 3:55:26साथ क्या करोगे। लेकिन कुछ ऐसा करो कि आज
  5067. 3:55:29के बाद ये किसी को मुंह दिखाने लायक ना
  5068. 3:55:31रहे। खन्ना के इतना कहते ही एक धमकी भरी
  5069. 3:55:34आवाज वहां गूंजी। ए लड़की कार के शीशे में
  5070. 3:55:38आखिरी बार अपना यह चेहरा देख ले। [हंसी]
  5071. 3:55:44इतना बोलकर वो दोनों गुंडे हंसने लगे।
  5072. 3:55:46इंसान को पढ़ना बहुत मुश्किल होता है।
  5073. 3:55:49कभी-कभी जिसे हम बुरा समझते हैं, वह सोच
  5074. 3:55:51से बिल्कुल परे निकलता है। और जिसे हम भला
  5075. 3:55:53मान बैठते हैं, वो उम्मीद से भी ज्यादा
  5076. 3:55:56घटिया निकलता है। जैसे बलराज खन्ना जो
  5077. 3:55:59दिखने में तो एक इज्जतदार बिजनेसमैन नजर
  5078. 3:56:00आता है, लेकिन वो इस हद तक गिर चुका था कि
  5079. 3:56:03वो दो खौफनाक दरिंदों को बोलकर एक लड़की
  5080. 3:56:05की जिंदगी बर्बाद करने का घिनौना खेल खेल
  5081. 3:56:08रहा था। उन गुंडों को निर्देश देते हुए
  5082. 3:56:10ऐसा लगा जैसे खन्ना की जुबान से जहर टपक
  5083. 3:56:13रहा हो। जैसे ही खन्ना का इशारा मिला उसके
  5084. 3:56:16बुलाए गुंडों में से एक हल्की मुस्कान के
  5085. 3:56:17साथ आगे बढ़ा और बोला
  5086. 3:56:20आपकी इच्छा जरूर पूरी होगी खन्ना साहब
  5087. 3:56:23वैसे एक बात माननी पड़ेगी मैंने अपनी
  5088. 3:56:26जिंदगी में इतनी खूबसूरत लड़की शायद ही
  5089. 3:56:28देखी होगी उसकी नजरें शिप्रा पर इस तरह
  5090. 3:56:31टिकी थी जैसे कोई शिकारी अपने शिकार पर
  5091. 3:56:33नजर गड़ाए हो
  5092. 3:56:36मन तो कर रहा है इसे अपने घर की मालकिन
  5093. 3:56:38बना लूं। उसके शब्दों में छिपी गंदगी साफ
  5094. 3:56:41महसूस हो रही थी। वहीं कार में बैठा शौर्य
  5095. 3:56:44यह सब देख रहा था। वो होठों को टेढ़ा करते
  5096. 3:56:47हुए हल्के से मुस्कुराया और खुद से
  5097. 3:56:49बुदबुदाया।
  5098. 3:56:51इसीलिए कहते हैं दुनिया गोल है। घूम फिर
  5099. 3:56:54कर आखिर वहीं आ जाती है। दरअसल ये दोनों
  5100. 3:56:57गुंडे और कोई नहीं छगन मगन है। यार मगन
  5101. 3:57:01मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि इस लड़की को
  5102. 3:57:04हमने कहीं हाल ही में देखा है। छगन ने
  5103. 3:57:07आंखें सिकोड़ते हुए कहा तो मगन भी सिर
  5104. 3:57:09हिलाते हुए बोला। हां भाई लग तो रहा है।
  5105. 3:57:13तभी छगन आगे बढ़ा और शिप्रा के बेहद करीब
  5106. 3:57:16आकर खड़ा हो गया और फिर बनावटी मुस्कान के
  5107. 3:57:19साथ बोला कहिए मेम साहब आप बता सकती हैं
  5108. 3:57:22कि हम पहले कब और कहां मिले थे। आपका
  5109. 3:57:26चेहरा बड़ा जाना पहचाना सा लग रहा है।
  5110. 3:57:28शिप्रा का दिमाग तेजी से दौड़ने लगा। वो
  5111. 3:57:31उस चेहरे को याद करने की कोशिश कर ही रही
  5112. 3:57:33थी कि अचानक सब कुछ साफ हो गया। कुछ दिन
  5113. 3:57:36पहले यह दोनों मेघा को उठाने आए थे और उसी
  5114. 3:57:39दिन शौर्य ने इनमें से एक को एक ही थप्पड़
  5115. 3:57:42में जमीन पर गिरा दिया था। यह याद आते ही
  5116. 3:57:45शिप्रा के भीतर जैसे हिम्मत की एक लहर
  5117. 3:57:47दौड़ गई। वो जानती थी कि शौर्य कार में
  5118. 3:57:50बैठा सब देख रहा होगा। लेकिन अगले ही पल
  5119. 3:57:53उसके मन में एक और ख्याल कौन।
  5120. 3:57:56जब वो सब कुछ देख रहा है तो कार से बाहर
  5121. 3:57:58क्यों नहीं आ रहा है? मुझे गुंडों के बीच
  5122. 3:58:01फंसा देख अब तक तो उसे बाहर आ जाना चाहिए
  5123. 3:58:03था।
  5124. 3:58:05फिर अचानक एक चुबता हुआ शक उसके मन में
  5125. 3:58:08उठा। कहीं ऐसा तो नहीं आज मैंने उसका
  5126. 3:58:10प्रपोजल ठुकरा दिया। इसलिए वो मेरे लिए
  5127. 3:58:13किसी खतरे में पड़ना नहीं चाहता। इस ख्याल
  5128. 3:58:16से ही शिप्रा का शरीर सिहर उठा। लेकिन
  5129. 3:58:18उसने तुरंत खुद को संभाला। नहीं नहीं।
  5130. 3:58:21श्रवण इतना निर्दय नहीं हो सकता कि मुसीबत
  5131. 3:58:23में देखकर मुंह मोड़ ले। फिर भी सवाल वही
  5132. 3:58:26था। तो वो अब तक बाहर क्यों नहीं आया?
  5133. 3:58:29कहीं वो यह तो नहीं सोच रहा कि मैं उसे
  5134. 3:58:31मदद के लिए बुलाऊं। तभी वो आए। शिप्रा के
  5135. 3:58:34होठ हल्के से भिच गए। घमंडी इंसान इधर
  5136. 3:58:38शिप्रा श्रवण की सोच में डूबी थी और उधर
  5137. 3:58:40बलराज खन्ना उतावला हो चुका था। तुम दोनों
  5138. 3:58:43वक्त क्यों बर्बाद कर रहे हो? जो करना है
  5139. 3:58:46जल्दी करो।
  5140. 3:58:48मगन ने हल्की हंसी के साथ छगन की ओर देखा।
  5141. 3:58:51यार छगन निकाल अपनी शीशी। खन्ना साहब को
  5142. 3:58:55बहुत जल्दी है। इनकी मुराद पूरी कर दो।
  5143. 3:58:58उसके शब्द सुनते ही शिप्रा के पूरे शरीर
  5144. 3:59:00में सिहरन दौड़ गई। शीशी उसका दिल तेजी से
  5145. 3:59:04धड़कने लगा। क्या ये तेजाब की बात कर रहे
  5146. 3:59:07हैं? क्या खन्ना सच में उसका चेहरा जलाना
  5147. 3:59:09चाहता है? एक पल के लिए उसके कदम डगमगा
  5148. 3:59:12गए। लेकिन अगले ही क्षण उसे वो दिन याद
  5149. 3:59:14आया जब शौर्य ने इसी मगन को एक थप्पड़ में
  5150. 3:59:17बेहोश कर दिया था। उस याद में उसके भीतर
  5151. 3:59:20फिर से हिम्मत भर दी। उसने एक नजर अपनी
  5152. 3:59:23[संगीत] कार की तरफ डाली। अब भी कोई हरकत
  5153. 3:59:25नहीं थी। अपने डर को दबाते हुए उसने सीधे
  5154. 3:59:28मगन की आंखों में देखा और कहा।
  5155. 3:59:30लगता है उस दिन की मार भूल गए हो जो फिर
  5156. 3:59:33से मेरे रास्ते में आ खड़े हुए हो। उसकी
  5157. 3:59:35आवाज में अब डर के बावजूद चुनौती दी। यह
  5158. 3:59:38सुनकर मगन सिर खुजाते हुए छगन की ओर मुड़ा
  5159. 3:59:41और धीमे स्वर में बोला यार छगन यह किस दिन
  5160. 3:59:45की बात कर रही है? क्या हम इसे पहले से
  5161. 3:59:49जानते हैं?
  5162. 3:59:51मोहतरमा जरा आप सीधे-सीधे कहेंगे कि आप
  5163. 3:59:53किस दिन की बात कर रही हैं? छगन मगन के
  5164. 3:59:56मुकाबले ज्यादा समझदार था। वहीं मगन बिना
  5165. 3:59:59सोचे समझे काम कर बैठता था और उसकी कीमत
  5166. 4:00:03भी चुकाता था। शिप्रा एक कदम आगे बढ़ी और
  5167. 4:00:05सीधे छगन की ओर देखकर बोली लगता है तुम
  5168. 4:00:08दोनों सिटी हॉस्पिटल के बाहर वाली घटना
  5169. 4:00:10भूल गए हो जब तुम मेरे पति के हाथों पिटे
  5170. 4:00:13थे। फिर वो मगन की ओर देखते हुए बोली
  5171. 4:00:17और ये क्या नाम था इसका? यह तो मेरे पति
  5172. 4:00:20का एक थप्पड़ भी नहीं सह पाया था। उसकी
  5173. 4:00:22आवाज अब और सख्त हो गई थी। उस दिन तो तुम
  5174. 4:00:25लोग माफी मांग रहे थे और आज फिर मेरे
  5175. 4:00:27सामने आने की हिम्मत कर ली। शिप्रा अब
  5176. 4:00:29सीधे चेतावनी देते हुए बोली उस दिन तुमने
  5177. 4:00:32उनकी मुंह बोली बहन को उठाने की कोशिश की
  5178. 4:00:34थी और आज उनकी पत्नी पर हाथ डालने की
  5179. 4:00:37हिम्मत कर रहे हो। शिप्रा की बात सुनते ही
  5180. 4:00:40छगन की आंखों के सामने वो घटना किसी फिल्म
  5181. 4:00:42की तरह घूमने लगी। सब कुछ उसे साफ-साफ याद
  5182. 4:00:45आने लगा और उसी के साथ शिप्रा का चेहरा
  5183. 4:00:48भी। तभी बलराज खन्ना झुंझुलाते हुए
  5184. 4:00:50चिल्लाया। तुम लोग इसकी बातों में क्यों आ
  5185. 4:00:53रहे हो? वैसे भी इसका पति एक भिखारी है।
  5186. 4:00:55उससे डरने की कोई जरूरत नहीं। लेकिन इस
  5187. 4:00:59बार बात अलग थी। मगन के कानों में जैसे ही
  5188. 4:01:02सिटी हॉस्पिटल और थप्पड़ वाली बात गूंजी,
  5189. 4:01:04उसके अंदर दबी हुई बेइज्जती अचानक भड़क
  5190. 4:01:07उठी। उसकी आंखों में गुस्सा उतर आया और वो
  5191. 4:01:10तिलमिला कर बोला। अच्छा हुआ तुमने खुद ही
  5192. 4:01:13बता दिया कि तुम उसी की पत्नी हो। तो उस
  5193. 4:01:17दिन का हिसाब आज बराबर करना तो बनता है।
  5194. 4:01:20उसके लहजे में अब बदले की आग साफ झलक रही
  5195. 4:01:22थी। लेकिन छगन ने तुरंत मगन के कंधे पर
  5196. 4:01:24हाथ रखते हुए कहा नहीं मगन यह सही नहीं
  5197. 4:01:27है। वो आगे बढ़ा सीधे शिप्रा के सामने आकर
  5198. 4:01:31खड़ा हो गया और सम्मान से बोला हमसे गलती
  5199. 4:01:34हो गई जो हम आपको पहचान नहीं पाए। उस दिन
  5200. 4:01:37मैंने उन्हें उस्ताद मान लिया था और अगर
  5201. 4:01:40आज उनकी पत्नी के साथ हमने कुछ गलत किया
  5202. 4:01:43तो हमारी अपनी जुबान की कोई वैल्यू नहीं
  5203. 4:01:45रहेगी। उसके शब्दों में सच्चाई थी और डर
  5204. 4:01:48भी। हमें माफ कर दीजिए। हमने आपका रास्ता
  5205. 4:01:51रोक कर गलती करी। यह सुनकर बलराज खन्ना की
  5206. 4:01:54बौखलाहट और बढ़ गई। वो गुस्से से तमतमाता
  5207. 4:01:57हुआ चिल्लाया। छगन ये तुम क्या कर रहे हो?
  5208. 4:02:01तुमने इस काम के पैसे लिए हैं। तुम्हें
  5209. 4:02:03इसे सबक सिखाना ही होगा।
  5210. 4:02:06पैसे लिए हैं लेकिन मैंने खुद को बेचा
  5211. 4:02:08नहीं है। छगन ने खन्ना की आंखों में आंखें
  5212. 4:02:10डालते हुए कहा, जरूरत पड़ी तो पैसे वापस
  5213. 4:02:13कर दूंगा। ज्यादा बकवास मत करो। उसके तेवर
  5214. 4:02:16बदल चुके थे। मगन को यह सब बिल्कुल पसंद
  5215. 4:02:19नहीं आया। वो झुंझुला कर [संगीत] बोला छगन
  5216. 4:02:22ये क्या कर रहे हो? आई हुई लक्ष्मी भी कोई
  5217. 4:02:25वापस करता है क्या? और तुम किसे अपना
  5218. 4:02:28उस्ताद बोल रहे हो? उसी को जिसने मुझे
  5219. 4:02:30थप्पड़ मार कर बेहोश कर दिया था। उसकी
  5220. 4:02:33आंखों में अब जलन और बदले की आग साफ दिख
  5221. 4:02:36रही थी। आज मौका मिला है तो मैं उससे अपना
  5222. 4:02:39हिसाब बराबर करके ही रहूंगा।
  5223. 4:02:42तभी छगन ने गहरी सांस ली और खुद को शांत
  5224. 4:02:44रखते हुए बोला मगन कैसी बातें कर रहे हो
  5225. 4:02:48तुम्हें अपने भाई की जुबान की भी कोई कदर
  5226. 4:02:50नहीं है मगन ने तुरंत पलट कर कहा किसके
  5227. 4:02:55लिए जुबान दे दी तुमने सुना नहीं खन्ना
  5228. 4:02:57साहब ने क्या कहा इसका पति भिखारी है वो
  5229. 4:03:00छगन को मनाने की कोशिश कर रहा था लेकिन
  5230. 4:03:02छगन अब अपनी जगह अडिग था
  5231. 4:03:05खन्ना कुछ भी कहे लेकिन मैं यह मानने को
  5232. 4:03:08तैयार नहीं हूं कि वह आदमी सिर्फ एक
  5233. 4:03:09भिखारी हो सकता है
  5234. 4:03:13जिस बाघ को पूरा विशालगढ़ जानता है, तुम
  5235. 4:03:16उसे मानने को तैयार नहीं हो। बलराज खन्ना
  5236. 4:03:19ने चिढ़ते हुए कहा, देखा नहीं? कुछ दिन
  5237. 4:03:22पहले सोशल मीडिया पर हर जगह इसकी शादी की
  5238. 4:03:24खबरें वायरल थी। एक भिखारी की शादी एक
  5239. 4:03:27खूबसूरत लड़की से जबरदस्ती कर दी गई। मगन
  5240. 4:03:30ने भी मौका देखकर छगन को भड़काने की कोशिश
  5241. 4:03:33करी। यार, तू बहुत भोला है। उस दिन मैं
  5242. 4:03:36गलती से बेहोश क्या हो गया। पता नहीं तूने
  5243. 4:03:38उसे क्या समझ लिया। उसने मेरे बेहोश होने
  5244. 4:03:41का फायदा उठाया और तुझ पर अपना असर जमा
  5245. 4:03:44लिया और तूने उसे अपना उस्ताद मान लिया।
  5246. 4:03:47लेकिन छगन को अभी भी यकीन नहीं था कि
  5247. 4:03:49खन्ना शौर्य के बारे में जो कह रहा है
  5248. 4:03:51उसमें थोड़ी भी सच्चाई हो सकती है। उसने
  5249. 4:03:54धीरे से सर हिलाया और कहा
  5250. 4:03:57मुझे फर्क नहीं पड़ता। वो भिखारी है या
  5251. 4:04:00कुछ और। लेकिन उस दिन मैंने उन्हें अपना
  5252. 4:04:02उस्ताद मान लिया था और अपनी जुबान की कीमत
  5253. 4:04:05मुझे अच्छी तरह पता है। छगन ने तुरंत ही
  5254. 4:04:07अपना फैसला सुना दिया। माफ करो खन्ना साहब
  5255. 4:04:11आज आपको खाली हाथ ही जाना पड़ेगा। मुझे
  5256. 4:04:13अफसोस है मैं आपका यह काम नहीं कर सकता।
  5257. 4:04:17यह तुम गलत कर रहे हो छगन। तुम क्या समझते
  5258. 4:04:20हो कि तुम ही अकेले हो जो मेरा काम कर
  5259. 4:04:22सकते हो? तुम नहीं तो कोई और करेगा। खन्ना
  5260. 4:04:25ने उसे उकसाते हुए कहा। इस पर छगन ने
  5261. 4:04:28हल्की सी फीकी मुस्कान के साथ जवाब दिया।
  5262. 4:04:31जरूर करेगा खन्ना साहब। लेकिन वो आज का
  5263. 4:04:33दिन नहीं होगा। आपको जिससे भी काम कराना
  5264. 4:04:36हो करा लो। तभी मगन बेचैन होकर बीच में
  5265. 4:04:39बोला यार छगन ये तुम क्या कर रहे हो?
  5266. 4:04:42क्यों आई हुई लक्ष्मी को लात मार रहे हो?
  5267. 4:04:45छगन ने मगन को समझाते हुए कहा यार रहने दो
  5268. 4:04:48हर समय पैसा नहीं देखा जाता। हम गुंडे सही
  5269. 4:04:51पर अपनी भी जुबान की एक कीमत होती है। मगन
  5270. 4:04:54ने दांत भीते हुए गहरी सांस ली। फिर बोला,
  5271. 4:04:56ठीक है। सिर्फ तुम्हारी जिद की वजह से आज
  5272. 4:04:59मैं इसे छोड़ रहा हूं। लेकिन याद रखना आज
  5273. 4:05:02के बाद तुम मुझे नहीं रोकोगे। इतना कहकर
  5274. 4:05:05वो शिप्रा की तरफ मुड़ा। उसकी आंखों में
  5275. 4:05:07अब भी गुस्से की चिंगारी थी। आज तुम्हारा
  5276. 4:05:10दिन अच्छा है। तुम छगन मगन के हाथों से
  5277. 4:05:13सही सलामत बचकर जा रही हो। लेकिन मुझसे
  5278. 4:05:15बचकर रहना। यह दिन तुम्हें दोबारा नसीब
  5279. 4:05:18नहीं होगा। मगन ने डराने वाले लहजे में
  5280. 4:05:21अपनी बात खत्म की। इस वक्त शाम का धुंधलका
  5281. 4:05:25छाया हुआ था। इसीलिए छगन और मगन को
  5282. 4:05:27ड्राइविंग सीट पर बैठा शौर्य नजर ही नहीं
  5283. 4:05:29आया। शौर्य चुपचाप गाड़ी के अंदर बैठा
  5284. 4:05:32बाहर हो रही गतिविधि को ध्यान से देख रहा
  5285. 4:05:34था। स्थिति फिलहाल काबू में लग रही थी।
  5286. 4:05:37इसीलिए उसने बाहर निकलना जरूरी नहीं समझा।
  5287. 4:05:40उसने गाड़ी का शीशा हल्का सा खोल रखा था।
  5288. 4:05:42जिससे बाहर की हर आवाज साफ सुनाई दे रही
  5289. 4:05:45थी। इसीलिए जब उसने शिप्रा के मुंह से
  5290. 4:05:48अपने लिए पति शब्द सुना उसके चेहरे पर एक
  5291. 4:05:50हल्की सी मुस्कान आ गई। मजबूरी में ही सही
  5292. 4:05:54पर शिप्रा ने उसका नाम लेकर खुद को
  5293. 4:05:56सुरक्षित किया था। और यह बात उसे भीतर तक
  5294. 4:05:59छू गई। उधर शिप्रा भी मन ही मन शुक्र मना
  5295. 4:06:02रही थी कि हालात बिगड़े नहीं। मगन के तेवर
  5296. 4:06:04देखकर उसे डर था कि कहीं छगन भी उसके दबाव
  5297. 4:06:07में ना आ जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिप्रा
  5298. 4:06:10का गुस्सा अब बाहर निकलने को बेताब था।
  5299. 4:06:12उसने मुड़ते हुए मगन की ओर देखा और वो
  5300. 4:06:14तीखे स्वर में बोली एक बात तो मैं समझ गई
  5301. 4:06:17कि तुम बेवकूफ हो और तुम्हारा भाई समझदार
  5302. 4:06:20है। शुक्र मनाओ कि आज तुम बच गए। आगे से
  5303. 4:06:23मेरे रास्ते में मत आना। अगर मेरे पति को
  5304. 4:06:26पता चल गया कि तुमने मेरे साथ क्या करने
  5305. 4:06:28की जुर्रत की थी तो फिर तुम्हारा भगवान ही
  5306. 4:06:30मालिक होगा। मगन तिल मिलाकर पैर पटकते हुए
  5307. 4:06:33बोला भौक लो जितना भौकना है। आज तुम्हें
  5308. 4:06:37अभयदान मिला हुआ है। फिर उसने छगन की ओर
  5309. 4:06:41देखा और झुंझुलाकर कहा
  5310. 4:06:44देख रहे हो तुम्हारी वजह से यह मुझे ही
  5311. 4:06:46धमका रही है। इस पर छगन ने थके हुए अंदाज
  5312. 4:06:50में सिर हिलाया। यार रहने दे चल यहां से
  5313. 4:06:53चलते हैं। वो मुड़कर आगे बढ़ गया और मगन
  5314. 4:06:56को भी इशारा किया। जाते-जाते मगन ने बलराज
  5315. 4:06:58खन्ना की तरफ देखा और कहा खन्ना साहब आज
  5316. 4:07:02के लिए माफ करना। काम छोड़ा नहीं है
  5317. 4:07:05मैंने। बस आज भाई की बात मानकर इसे छोड़
  5318. 4:07:08रहा हूं। लेकिन अगली बार किसी की नहीं
  5319. 4:07:10सुनूंगा। इसके बाद छगन मगन को लगभग खींचते
  5320. 4:07:14हुए वहां से ले गया। अब सड़क पर सिर्फ दो
  5321. 4:07:17लोग बचे थे। शिप्रा और बलराज खन्ना।
  5322. 4:07:20शिप्रा बिना डरे उसके पास गई और बोली,
  5323. 4:07:23तुम्हें अपनी बेइज्जती करवाने का बहुत शौक
  5324. 4:07:25है। तभी बार-बार मेरे आसपास नजर आते रहते
  5325. 4:07:28हो और आज तो तुमने हद ही कर दी। मेरे लिए
  5326. 4:07:31गुंडे तक हायर कर लिए। खन्ना के चेहरे पर
  5327. 4:07:34एक अजीब सी कड़वी मुस्कान उभरी। वो धीमे
  5328. 4:07:36जहरीले लहजे में बोला। शुक्र मनाओ
  5329. 4:07:40तुम्हारा नसीब बहुत अच्छा है।
  5330. 4:07:42वरना आज के बाद तुम अपना चेहरा दुनिया से
  5331. 4:07:45छुपाती फिरती। खन्ना ने एक पल रुककर
  5332. 4:07:48शिप्रा की आंखों में देखा और बोला ज्यादा
  5333. 4:07:51खुश मत हो। मैं अपनी बेइज्जती [संगीत]
  5334. 4:07:54इतनी आसानी से भूलने वाला नहीं हूं। इतना
  5335. 4:07:57कहकर वो तेजी से मुड़ा और अपनी कार में
  5336. 4:08:00जाकर बैठ गया। कुछ ही सेकंड में उसकी कार
  5337. 4:08:02वहां से निकल गई। शिप्रा वहीं खड़ी उसे
  5338. 4:08:05जाते हुए देखती रही। उसकी आंखों में अब भी
  5339. 4:08:08गुस्सा था। फिर वो धीरे-धीरे अपनी कार की
  5340. 4:08:11तरफ बढ़ी। उधर शौर्य ने जैसे ही उसे वापस
  5341. 4:08:14आते देखा उसने तुरंत खिड़की का शीशा जो अब
  5342. 4:08:17तक थोड़ा खुला था पूरी तरह बंद कर लिया
  5343. 4:08:20जैसे कुछ हुआ ही ना हो। शिप्रा ने पीछे का
  5344. 4:08:22दरवाजा खोला और कार में बैठ गई। एक पल के
  5345. 4:08:26लिए उसने शौर्य की तरफ देखा और अपनी आंखें
  5346. 4:08:29बंद कर ली। तो क्या होगा आगे? क्या बलराज
  5347. 4:08:32खन्ना अपनी बेइज्जती का बदला फिर लेगा?
  5348. 4:08:35आखिर शौर्य क्यों कार से बाहर नहीं निकला
  5349. 4:08:37था? क्या शिपरा शौर्य से अपनी नाराजगी
  5350. 4:08:40जाहिर करेगी? जानने के लिए सुनते रहिए
  5351. 4:08:42बेगर हस्बैंड

About this transcript

This page contains the full transcript of भिखारी हसबैंड | Episode 31–50 | Kahvanihindi by Kahvani Hindi, generated from the public captions YouTube serves with the video. The transcript has 44,242 words across 5,351 segments, with the original timestamps preserved so you can click any line to jump to that moment in the embedded player.

What you can do with it

Use the transcript to take notes, quote the speaker, build a study guide, generate a summary with ChatGPT or Claude via the YouTube Summary tool, or export it as a timed subtitle file with YouTube to SRT. You can also re-open it in the transcriber to translate the transcript into 100+ languages.

Free YouTube transcript tool

YouTube2Text is a free YouTube transcript generator — no signup, no daily limit. Paste any YouTube link and get the full transcript instantly, with timestamps, click-to-jump, translation to 100+ languages, AI prompts for ChatGPT, Claude, and Gemini, and exports to TXT, SRT, VTT, or Markdown.